ISSN 2229-547X VIDEHA ‘विदेह' १४० म अंक १५ अक्टूबर २०१३ (वर्ष ६ मास ७० अंक १४०) ऐ अंकमे अछि:- बिसवासघात बेचन ठाकुर भाषापाक रचना-लेखन -[मानक मैथिली] विदेह मैथिली पोथी डाउनलोड साइट VIDEHA MAITHILI BOOKS FREE DOWNLOAD SITE विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ( ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी मे ) पी.डी.एफ. डाउनलोडक लेल नीचाँक लिंकपर उपलब्ध अछि। All the old issues of Videha e journal ( in Braille, Tirhuta and Devanagari versions ) are available for pdf download at the following link. विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक
विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक ↑ विदेह आर.एस.एस.फीड एनीमेटरकेँ अपन साइट/ ब्लॉगपर लगाऊ। ब्लॉग "लेआउट" पर "एड गाडजेट" मे "फीड" सेलेक्ट कए "फीड यू.आर.एल." मे http://www.videha.co.in/index.xml टाइप केलासँ सेहो विदेह फीड प्राप्त कए सकैत छी। गूगल रीडरमे पढ़बा लेल http://reader.google.com/ पर जा कऽ Add a Subscription बटन क्लिक करू आ खाली स्थानमे http://www.videha.co.in/index.xml पेस्ट करू आ Add बटन दबाउ। Join official Videha facebook group. 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(राम सेवक लखन आ सियारामकेँ अन्दरसँ बजा आनैत अछि।) आउ आउ भैया, बैसू। अहाँ दुआरे हमरो चाह सरा गेल। असगरे केना पीबितौं? (लखन आ सियाराम बैसै छथि।) बौआ, ई चाह नेने जाउ आ तीन कप चाह नेने आउ। (राम सेवक सरेलहा चाह लऽ कऽ अन्दर जा कऽ तीन कप चाह आनैत अछि आ सभकेँ आगू बढ़ा दइ अछि। तीनू भाँइ चाह पीबैत गप-सप्प करै छथि।) लखन- (राम किशुनसँ) एन.एचमे जे जमीन पड़लै तेकर तीनू भाँइ नामे नोटिस एलै। हम तँ मुरूख तरे गेलिअ आ तूँ सभ की केना करै जेबहक से करहक। हाकिम बजै छेलखिन जे एक सप्ताहक अन्दर अपन अपन कागत लऽ कऽ ऑपीस आबैले। सियाराम- राम किशुनबला जमीनक कागत तोरा घरमे नै छै (लखनसँ) हम काल्हि देखने छेलिऐ। अपना दुनू भाँइक कागत छै। खाता-खेसरा हम मिलौलिऐ। राम किशुन- हँ, भैया ठीके कहै छथिन। हमरा घरमे हमरे टा कागत अछि। (तीनू भाँइ चाह पीब कप रखि दइ छथि।) भैया, अहाँ सभ नीफीकीर रहू। हम छी। भैया अहाँ सभ अपन नोटिस आ कागत सभ दऽ दिअ। देखै छिऐ ऑफिसक की स्थिति छै? सियाराम- लऽ लिहऽ तोरा हाकिम-हुकुमसँ जान-पहिचान सेहो छै। पटाक्षेप। दोसर दृश्य (लखन आ हिनकर कनियाँ लक्ष्मी अपन दलानपर बैस जमीनक कागतक सम्बन्धमे गप-सप्प करै छथि।) लखन- तोरा रातिमे जे जमीनक सभटा कागत बक्सामे से निकालै लए कहलियौ से निकाललेँ? लक्ष्मी- नै निकाललौं। लखन- किए? किए नै निकाललेँ? लक्ष्मी- हम सोचलिऐ की जे पहिने दू-चारिगो काबिल लोक सभसँ बूझि लैतहक तहन दैतियनि। कागतक सम्बन्धमे हम-तूँ तँ किच्छो नै बुझै छिऐ। बुझै छहक, दर-दियाद केकराके होइ छै। लखन- तूँ बेसी बुझै छिहीन। लाल बुझक्करि छेँ। अँए गै, सभ दियाद एक्के रंग होइ छै? लक्ष्मी- से तँ नै होइ छै। मुदा सएमे नै, हजारगोमे एगो चिक्कन होइत हेतै। लखन- से बुझै छिहीन तँ सएह बुझहीन। हजारगोमे एगो हमर चिक्कन दियाद राम किशुन छै। एहेन दियाद तँ परलो पाबी। लक्ष्मी- हौ, दिन-दुनियाँ ठीक नै छै। काम लइ बेरमे गदहो के नाना कहै छै लोक। हम तँ कहै छिअ जे कागतक सम्बन्धमे पूछि लैतहक केकरो-केकरोसँ। लखन- हम केकरोसँ नै पुछबै। हमरा राम किशुनपर पूरा बिसवास अछि आ ओकरासँ बेसी बुझैबला हमरा नजरिमे कियो नै अछि। तोँ हमरा बेसी नै पढ़ा। हम बुझै छिऐ, जनानी दियाद- दियादमे आगि लगाए दइ छै। अखनि कागत निकालि कऽ नेने आ। लक्ष्मी- घरबला छह। तोहर कहल तँ कहुनाकेँ करहे पड़त। हमरा जे कहै के छेलह से कहलिअ। ऐसँ आगू तूँ बुझहक। खाइर हम कागत आनि दइ छिअ। (लक्ष्मी अन्दरसँ कागत आनै छथि।) हे लएह कागत। जे करबाक हुअ से करिहऽ। लखन- (कागत लऽ कऽ) तूँ जो, अपन काज कर। (लक्ष्मीक प्रस्थान) आब मौगीक चक्करमे नै रहलौं। अपने संगमे राखब आ जखनि राम किशुन माँगत तखने दऽ देबै। बाप रे बा, मौगी सभ जे खच्चर होइ अए। पटाक्षेप। तेसर दृश्य (राम किशुनक ऐठाम होलीक अवसरपर आयोजित पार्टीमे एस.पी. जीतेन्द्र, डी.एस.पी. मनोहर, ओकील जगन्नाथ, अपेक्षित बीरूक संग दुनू भाए लखन आ सियाराम उपस्थित भऽ मस्तीसँ दारू पी रहल छथि। पार्टीमे एक कात जीतेन्द्र, मनोहर, जगन्नाथ आ राम किशुन छथि तथा दोसर कात बीरू, लखन आ सियाराम छथि। राम किशुनक जेठ बेटा राम सेवक सबहक सेवामे तत्पर अछि।) राम किशुन- (मस्तीमे) एस.पी. साहैब, हम गरीब आदमी अपनेकेँ की सेवा करब? गरीब आदमी दबाल बरबरि होइ छै। जीतेन्द्र- नै राम किशुन बाबू, गरीब आदमीमे जे सेवाक भावना होइ छै से अमीरमे केतए? अपनेक पार्टी जश-जश भऽ गेल। मनोहर- राम किशुन बाबू, हम केतेको पार्टीमे गेलौं। मुदा एकर जोड़ा केतौ नै रहल। जगन्नाथ- साहैब, राम किशुन बाबू जे किछु करै छन्हि से दिल खोलि कऽ। बड्ड तेज आदमी छथि। बोलीमे जे मधुरता छन्हि से लागत जे मौध चुबै छन्हि। ई जेतए पहुँच जाइ छथिन उ काज भेनाइ छै चाहे जेना होइ। राम किशुन- हम तँ इनारक बेंग छी। ओना साहैबक किरपासँ पूरा ठीक छी। बीरू- (मस्तीमे) की लखन भाय, मन आनन्द छै कीने? लखन- बीरू भाय, हम केतौ नै छिअ। हौ, मुख्यमंत्रीकेँ हमहीं कहलिऐ सभ चौक-चौबटियापर दारूक भट्ठी खोलबै लए। हमर बात मानि ओ सभकेँ आनन्द करबै छथिन। अहा! ओ बड्ड नीक लोक छथि। सियाराम- (बीरूसँ) बुझै छिऐ भाय, जदी ई मुख्यमंत्री नै रहितए तँ सभटा गरीबहा दारू बेगैर मरि जैतए। जीतेन्द्र- राम किशुन बाबू, आब चलैक आज्ञा देल जाए। एगो मर्डर केसकेँ देखए जेबाक छै। मनोहर- हमरो चलैक आज्ञा देल जाए। काल्हि ननौरमे एगो पुलिसकेँ गौआँ सभ बंदूक छीन लेलकै। ओहीमे जेबाक छै। जगन्नाथ- हमहूँ एगो मोकीरकेँ आइ अखुनके समए देने छिऐ। बेचारा आबि गेल हएत। हमहूँ निकलि जाएब। राम किशुन- हम केना कहब अपने सभकेँ चलि जाइ लेल। रात्रि विश्राम एत्तै होइतै। तहन भोरे जलखै कऽ जैतिऐ। जीतेन्द्र- बहुत भेलै, बहुत भेलै राम किशुन बाबू। आब हमरा लोकनि चलि रहल छी। राम किशुन- (हाथ जोड़ि) घट्टी-कुघट्टी माफ कएल जाए साहैब सभ। जीतेन्द्र- कोनो घट्टी-कुघट्टी नै। एकदम जश-जश भऽ गेल। (जीतेन्द्र, मनोहर आ जगन्नाथक प्रस्थान।) बीरू- (राम किशुनसँ) दोस, एन.एचमे कागत पेस केलिऐ कीने? राम किशुन- कहाँ केलिऐ। अपन कऽ दैतिऐ आ दुनू भाँइकेँ नै करितियनि तँ हिनका सभकेँ बड्ड कष्ट होइतनि। सएह सोचलौं जे तीनू भाँइबला एक्के बेर पेश कऽ देबै। भैया, कागत दऽ कहने रहिऐ, से की विचार भेल? लखन- की विचार हेतै? कागत हमरा संगेमे अछि दुनू भाँइबला, लऽ लए। राम किशुन- लाउ कागत। (लखन कागत देलनि।) पटाक्षेप। चारिम दृश्य (भू-अर्जन कार्यालयमे भू-अर्जन पदाधिकारी सुशील आ हिनकर चपरासी बिन्देश्वर बैस दस्तावेजकेँ उनटा- पुनटा रहल छथि। तखने कागतक संग राम किशुनक प्रवेश।) राम किशुन- (सुशीलसँ) सर, प्रणाम। सुशील- प्रणाम प्रणाम, कहू की बात? राम किशुन- सर, अपनेक नोटिसक मोताबिक हमर जमीनक कागत इएह अछि, लेल जाउ। सुशील- (कागत लऽ कऽ) कागतमे रसीदक फोटो कॉपी कहाँ अछि? राम किशुन- सर, अगिला हाजिरीमे दऽ देब। तावत पावती रसीद देल जाउ। सुशील- रसीद- तसीद नै भेटत। एतए कोनो रसीद नै भेटै छै। राम किशुन- सर, एक मिनट समए दैतिऐ अपने। सुशील- (कुरसीसँ उठि राम किशुन लग आबि) बाजू,की बात? राम किशुन- सर, ऑफिसक हाल- चाल की केना छै? किछु बाहरियो बेवस्था छै? सुशील- की बाहरी बेवस्था, नै बुझलौं। राम किशुन- इएह जे गरीबक दुःख ऑफिस बुझै छै की नै? कोनो भाँज-भुज लगै छै की नै? सुशील- की भाँज-भुज? खोलि कऽ कहू। अहाँक बात नै बुझै छी। राम किशुन- मालपर कमाल होइ छै, की नै? सुशील- (पीनकि कऽ) चुप्पेचाप भागि जाउ। एकर नाओं नै लिअ हमरा लग। ऐ ऑफिसमे घूस आ तहूमे हमरा लग। राम किशुन- ठीक छै सर, ओइ गपकेँ छोड़ि देल जाए। चलू, चाह पी लेल जाए। सुशील- अधिकसँ अधिक ई भऽ सकैए। (दुनू गोटे चाह दोकानपर जा बैस कऽ गप-सप्प करै छथि। श्यामलाल चाह बनए बेच रहल अछि। दोकानपर गैहिकीक भीड़ छै।) राम किशुन- सर, अपनेक शुभ नाओं? सुशील- सुशील। आ अपनेक? राम किशुन- राम किशुन। यौ चाहबला बाबू, दूगो स्पेशल चाह एम्हरो बढ़ाएब। श्यामलाल- तुरंत दइ छी सर। अही घानीमे भऽ जाएत। राम किशुन- कनी जल्दी देबै। सुशील बाबूकेँ आॅफिसमे बड्ड काज छन्हि। श्यामलाल- तइले हम नाचू गऽ। आगिओ-पानि डेराइ छै। चुल्हीमे अपन मुड़ी लगाए दिऐ। राम किशुन- एना किए बाजै छी? श्यामलाल- एक बेर कहलौं जे अही घानीमे भऽ जाएत। तँ अहाँ कहै छी जल्दी देबै। अहाँ देखै नै छिऐ जे हम बैसल छी की काजे कऽ रहल छी। एगो कहबी छै जे औगताएल कुमहनि कथीदुन लऽ कऽ माटि कोराए। राम किशुन- बुझलौं, जे अहाँ बड्ड ब्यस्त लोक छी। चाह देब, की नै, से कहू। श्यामलाल- हँ यौ, देब किए नै। अहाँ हमर लक्ष्मी छी। लक्ष्मीकेँ दोकानपर सँ तँ नै घुमए देब। राम किशुन- सुशील बाबू, जदी कनी माथा लगेलासँ किछु फायदा भऽ जाए, तैमे कोन हर्जा? एना कऽ चलब जे साँपो मरि जाए लाठीओ नै टूटए। (श्यामलाल दुनूकेँ चाह बढ़ौलक। दुनू चाह पीबैत गप-सप्प करै छथि।) सुशील- अच्छा, ऐपर निचेनसँ सोचबै। राम किशुन- महगाइ आकाश छूने जा रहलए। ओइ अनुपातमे कर्मचारीक तनखा बड्ड कम छै। परिवारमे खरचा मानै नै छै। धिया-पुताक भविस सेहो देखनाइ छै। केतएसँ ओतेक खर्च पुराएब? सुशील- बात तँ विचारणीय अबस्स अछि। राम किशुन- हम अनुचित किए कहब? अनुचितसँ हम अपने अस्सी कोस दूर रहै छी। मुदा किछु हाथ-पएर कातसँ लारबै-चारबै नै, तँ जीवनक गाड़ी नीक जकाँ नै चलि सकत। सुशील- अहीं कहू, की कएल जाए? राम किशुन- एन.एच.क पाइ छै। जेतए धरि सुतराए तेतए धरि सुतारू। ऐमे पब्लिको खुश आ अहूँ खुश। सुशील- बेस, सएह करए पड़त। गुंजाइश हुअए बला नै छै। ऐमे अहूँकेँ संग दिअ पड़त। राम किशुन- सुशील बाबू, अपने लेल हम जान दइ लऽ तैयार छी। पटाक्षेप। पाँचम दृश्य (एन. एच. केर इंजीनियर उमा शंकर अपन डेरा बैस पेपर पढ़ै छथि। तखने राम किशुनक प्रवेश।) राम किशुन- सर, प्रणाम। उमा शंकर- प्रणाम प्रणाम। बैसू। (राम किशुन बैस जाइ छथि।) केम्हर-केम्हर एलौं हेन? (ऊपर-निच्चाँ निहारए लगै छथि।) राम किशुन- एन.एच.बला काज छेलै सर। उमा शंकर- मकान सम्बन्धी की? राम किशुन- जी सर। उमा शंकर- बाजू की बात? राम किशुन- सर, मकानक रेट किछु बढ़ा दैतिऐ। उमा शंकर- बाजू की बढाए दिऐ? राम किशुन- जेते धरि भऽ सकै। उमा शंकर- नोटिसपर जे रेट अछि ओकर दस गुना धरि हम बढ़ा सकै छी। मुदा पच्चीस प्रतिशत हम पहिने लऽ लेब। से विचार अछि तँ बाजू। राम किशुन- विचार तँ अछि सर। मुदा अखनि पाइ तँ नै अछि। हमरा पाइक ओरियान लए किछु समए देल जाउ। उमा शंकर- बाजू, अहाँकेँ केतेक समए चाही? राम किशुन- कम-सँ-कम एक घंटा ताकि बैंकसँ निकालल भऽ जाए। सर, नवका नोटिसक पूर्ण गाइरेन्टी रहत की ने? कोनो डर नै न? उमा शंकर- कोनो डर नै। नोटिसक पूर्ण गाइरेन्टी। काज नै भेलापर अहाँक पूरा पाइ आपस करब। राम किशुन- सर, लखनबला नोटिस अस्सी हजारक, सियारामबला नोटिस एक लाखक आ हमर नोटिस एक लाख चालीस हजारक अछि। ऐमे की केना करबै हेर-फेर? उमा शंकर- अस्सी हजारबलाकेँ आठ लाख, एक लाखबलाकेँ दस लाख, एक लाख चालीस हजारबलाकेँ चौदह लाख असानीसँ कऽ सकै छी कम्प्यूटरसँ। कुल बत्तीस लाख भेल जइमे आठ लाख हमरा चाही। राम किशुन- सर, बैंकपर सँ आबि रहल छी। उमा शंकर- बेस आउ। हे भगवान, पाइ निकासी भऽ जाइ। (राम किशुन अन्दर जा कऽ अटैचीमे आठ लाख टाका आनै छथि।) राम किशुन- लेल जाए सर। (उमा शंकर अटैचीमे पाइ गिन अटैची रखि लइ छथि।) उमा शंकर- ठीक अछि। जाउ, अहाँक काज सभसँ पहिने हएत। राम किशुन- सर, स्वेच्छासँ किछु आपस कऽ दैतिऐ। कम-सँ-कम अटैचीओक दाम। उमा शंकर- ओतेक पाइ देलिऐ आ एगो अटैची नै छोड़ल हएत खुशीसँ? राम किशुन- किए नै छोड़ल हएत सर। मुदा ऽ ऽ ऽ। उमा शंकर- मुदा-तुदा छोड़ू। खुशी- खुशी जाउ। बुझै छिऐ आइ अहाँक संजोग नीक रहए, जतरा बनल रहए जे एक्के बेरमे मन मोताबिक काज कऽ देलौं। नै तँ अही काज लए दस दिन दौगैबतौं। अँए यौ, आइ काल्हि बिना माले उचितो काज नै होइ छै तँ अनुचित काज बिना माले केना संभव भऽ सकै छै? राम किशुन- से तँ ठीके, ऐ बातकेँ कियो नै काटि सकै अए। खाइर सर, चलैक आज्ञा देल जाए। उमा शंकर- बेस जाउ। जदी एहेन मोकीर फँसए तँ चुप्पेचाप हुनका नेने चलि आएब। अहुँकेँ कमीशन भेट जेतै। राम किशुन- ठीक छै सर, तँ चलै छी। (प्रस्थान) पटाक्षेप। छअम दृश्य (भू-अर्जन कार्यालयमे पदाधिकारी सुशील आ चपरासी बिन्देश्वर बैस कागत-पत्तर देख रहल छथि। तखने राम किशुनक प्रवेश।) राम किशुन- सुशील बाबू, प्रणाम। सुशील- प्रणाम प्रणाम, आउ बैसु। (राम किशुन सुशीलक बगलमे बसि जाइ छथि।) राम किशुन- सुशील बाबू, की हाल- चाल छै? सुशील- नै बढ़ियाँ तँ ओते खराबो नै, बीचबिचौवामे छै। अपनेक की हाल-चाल? राम किशुन- ठीक छै सर। एन.एच.क इंजीनीयर उमा शंकर बाबूसँ सभ काज नोटिसबला सुधार करा आनलौं। आब अपनेक काज रहलैए। इएह अछि तीनू नोटिस। लेल जाउ। सुशील- (नोटिस लऽ कऽ देखि आश्चर्यमे पड़ि) बाप रे बा, तीन लाख बीस हजारकेँ बत्तीस लाख, दस गुना अधिक। ई बिल हमरा पास कएल नै हएत, हम फँसि जाएब। राम किशुन- सुशील बाबू, अपने बड्ड डेरबूक छिऐ। हिम्मत हारि देबै तँ कोनो काज सफल नै हएत। कनी सोचियौ, देशक स्वतंत्रतामे केतेक हिम्मतक खगौट भेल हएत। सुशील- राम किशुन बाबू, अपने जे काज हमरा कहै छिऐ से देशक स्वतंत्रतासँ बड्ड हटल अछि। तँए हमरा मजबूर नै करू। हम जत्तै छी तत्तै रहए दिअ। राम किशुन- सुशील बाबू, चाहो-पान कटाउ ने। एतेक कियो कंजूश हुअए हाकिम भऽ कऽ। सुशील- बिन्देश्वर, जा दूटा चाह नेने आबह। बिन्देश्वर- सर, दुइएटा चाह आ हमर हिस्सा नै? सुशील- अखनि पाइक अभाव छै। तोँ दोसर दिन पीब लिहऽ। राम किशुन- बिन्देश्वर, सरकेँ अखनि पाइक अभाव छन्हि। हमहीं पाइ दऽ दइ छिअ, तीनटा चाह नेने आबह। (राम किशुन बिन्देश्वरकेँ पाइ देलखिन आ उ चाह आनै लए बहराएल।) सुशील बाबू, अपने बत्तीस लाखक बिल पास कऽ हमरा चेक दऽ दिअ। अहाँकेँ खुश कके जाएब। सुशील- बड्ड जिद्द करै छी तँ बाजू, हमरा केते देब? राम किशुन- अहीं बाजू, केते लेब? सुशील- हम तँ बाप जनममे आइ धरि घूस नै लेलौं किनकोसँ। तैयो बाजह पड़ए। दस हजारसँ कम नै लेब। राम किशुन- हम देब, अबस्स देब। सुशील- अखनि लाउ। तहन काज करब। (राम किशुन सुशीलकेँ पचास हजार टाका दऽ दइ छथि। सुशील गिनै छथि।) धोखासँ बेसी आबि गेल चालीस हजार। ई चालीस हजार लेल जाउ। राम किशुन- कहने रही ने हम अहाँकेँ खुश कके जाएब। पाइ हम आपस नै लेब। अहाँ राखु। हम चालीस हजार अपनेकेँ इनाम देलौं हेन कंठी तोड़ैके। अँए यौ, जाइतो गमेलौं आ सुआदो नै पौलौं। सुशील- धन्यवाद अपनेकेँ। अपने हीरा छी हीरा। (बिन्देश्वरक चाह लऽ कऽ प्रवेश) बड्ड देरी लगलह बिन्देश्वर। बिन्देश्वर- दोकानपर आइ बड्ड भीड़ छेलै। संगे अहाँ सभकेँ किछु तरपेस्की गप सेहो करैक छेलए ने। सभटा ने सोचए पड़ै छै। सुशील- हुअ, जल्दी चाह पीअ आ फाइल नं. 21 नेने आबह। (तीनू गोटे चाह पीब रहल छथि। बिन्देश्वर चाह पीब गिलास रखि फाइल नं. 21 आनि कऽ सुशीलकेँ देलकनि। सुशील लिख-पढ़ि कऽ चेक तैयार कऽ देलनि।) बिन्देश्वर, ऐ चेकपर मोहर दहक। बिन्देश्वर- सरकेँ, मोहर दियाइ एक हजार एक टाका लगतनि। चेक बड्ड भारी छै। बाप रे बा, बत्तीस लाख। सुशील- पहिने तो मोहर दहक ने, अबस्स भेटतै। (बिन्देश्वर मोहर दऽ चेक राम किशुनकेँ देलक।) राम किशुन- बाजह बिन्देश्वर केते लेबहक? बिन्देश्वर- (हँसि कऽ) कहलौं तँ एक हजार एक। (राम किशुन पाँच हजार टाका बिन्देश्वरकेँ देलनि।) धन्य छी सरकार, धन्य छी। अपने साक्षात् महादेव छी। राम किशुन- सभ इंजीनियर साहैब आ सुशील बाबूक असीम किरपाक फल छी। बेस, आब चलैक आज्ञा देल जाए। सुशील- बेस, जय रामजी की। राम किशुन- जय रामजी की। (प्रस्थान) पटाक्षेप। सातम दृश्य (लखनक बेटा रामलाल,काका राम किशुन ऐठाम बरण्डापर बैस पेपर पढ़ि रहल अछि। अही क्रममे राम किशुन, लखन आ सियारामक पूर्ण भुगतान सम्बन्धी समाचार पढ़ि दौग कऽ गेल अपन बाप आ काका सियारामकेँ कहैले।) रामलाल- बाबू- बाबू, एगो गप बुझलिऐ। (खुशीसँ) लखन- नै, कोन गप? (आश्चर्यसँ) रामलाल- अहाँ तीनू भाँइकेँ एन.एच.बला पूरा भुगतान भऽ गेल। लखन- ठीके बौआ! के कहलकह? रामलाल- कियो नै कहलनि। पेपरमे निकलल छै। अखने पढ़लौं राम किशुन काका ऐठाम। तीन भाँइक नाओं लिखल छै। लखन- बौआ, सियारामो काकाकेँ कहि दैतहक ने। रामलाल- अपनेसे कहि दियनु। लखन- जा, बजा आनहक। हमहीं कहि देबै। (रामलाल अन्दरसँ सियारामकेँ बजा आनैए।) सियाराम- की भैया? की कहलौं? लखन- कहाँदुन अपना तीनू भाँइक पूरा भुगतान भऽ गेल छै। बुझबो केलहक? सियाराम- नै बुझलिऐ। के कहलनि? लखन- कहाँदुन पेपरमे निकलल छै। बौआ पढ़लक अपने। सियाराम- ठीके बौआ? रामलाल- ठीके नै तँ झूट्ठे। हम अपने पढ़लौं। काका, जखनि अपना सबहक भुगतान भऽ गेलै तँ राम किशुन काकाकेँ कहियनु जे अपना सबहक पाइ बाँटि दैथ। कारण अपना सभकेँ आही पाइसँ जमीन आ घरक जोगार हएत। आब एन.एच कखनो घर तोड़ि जमीन खाली कराए सकै अछि। अपन सहचेती तँ बड्ड आवश्यक अछि। सियाराम- रामलाल, राम किशुनकेँ तगेदा करैक खगता नै छै। जदी भुगतान भऽ गेल हेतै तँ ओ अपने सबहक हिस्सा पाइ बाँटि देता। हमरा हुनकापर पूरा बिसवास अछि। की भैया? लखन- एहेन भाए तँ भगवान सभकेँ देथुन। अपना सभकेँ हरबड़ाइ कऽ नै छै। अपना सबहक सभटा चिन्ता हुनका अपने हेतनि। रामलाल- बाबू, अपने जे कहियौ मानहि पड़त। मुदा हमरो कहबपर कनी धियान देबै। लखन- अखनि तो धिया-पुता छह। ऐ सभमे नै पड़ह। रामलाल- वोटर लिस्टमे हमर नाओं अछि। हमरा अधिकार अछि अहाँकेँ उचित बात कहैके। माननाइ वा नै माननाइ अहाँक काज अछि। लखन- तोँ अपन उचित बात अपने लग राखह। हमरा नै पढ़ाबह। तोँ जा, अपन काज करह। (रामलालक प्रस्थान) छौड़ा आब बेसी बुझए लगल हेन। पटाक्षेप। आठम दृश्य (राम किशुन अपन बरन्डापर बैस पेपर पढ़ि रहल छथि। तखने रामलालक प्रवेश) रामलाल- काका गोर लगै छी। (पएर छूबि प्रणाम केलक।) राम किशुन- खुश रहू। की बात बौआ? रामलाल- काका, अपना सभकेँ एन.एच.बला पूरा भुगतान भऽ गेलै की? राम किशुन- के कहलक बौआ? (गंभीर भऽ) रामलाल- काल्हि हम पेपरमे पढ़लिऐ अहीं ऐठाम। अहाँक, हमर बाबूक आ सियाराम कक्काक नाओं देल छेलै। राम किशुन- से तँ हमहूँ पढ़लौं? ओइमे लिखल छेलै जे राम किशुन, लखन आ कागत-पत्तर पूर्ण ठीक- ठाक अछि। तँए हिनका सबहक पूर्ण भुगतान जल्दी हेबाक चाही। भुगतान भऽ जेतै तँ हम अपने सभकेँ बाँटि देबनि। (लखन आ सियारामक प्रवेश) बौआ राम सेवक, राम सेवक। राम सेवक- (अन्दरसँ) इएह एलौं पापा। (राम सेवकक प्रवेश) की पापा? मम्मी कहलनि जलखै कऽ लइ लए। राम किशुन- असगरे हमहींटा करबै। काका सभ जे आएल छथि, हुनका नै करेबनि। जाउ, चारि ठाम जलखै एत्तै नेने आउ। (राम सेवक अन्दर जा कऽ पहिने चारिटा खलिया गिलास आ जगमे पानी भरि कऽ आनि टेबूलपर रखलक। फेर दू बेरमे चारि ठाम जलखै आनि टेबूलपर रखलक। सभ कियो जलखै कऽ रहल छथि।) लखन भैया, रामलालकेँ अहीं पठेने रहिऐ भिनसरे भिनसर? लखन- (मुड़ी डोला कऽ ) उँ हूँ। नै तँ। हमरा एकरा कोनो गपो नै अछि। सियाराम- पहिने जलखै कऽ लिअ तहन गप-सप्प करब। (सभ कियो जलखै कऽ पलेटमे हाथ धोलनि। राम सेवक चारूटा पलेट, गिलास आ जग अन्दर रखि आबि साफी लऽ कऽ टेबूल पोछलक।) राम किशुन- राम सेवक, बस भऽ गेलै। ऐसँ आगू किछु नै? राम सेवक- चाह बनै छेलै पापा, देखै छिऐ। राम किशुन- जल्दी देखियौ (राम सेवकक प्रस्थान फेर ट्रेमे चारिटा चाह लऽ कऽ प्रवेश) राखु बौआ, अहाँ जाउ। (राम सेवकक प्रस्थान) (सभ कियो चाह पीब रहल छथि आ गप-सप्प सेहो करै छथि।) लखन भैया, एन.एच.बला काज बड्ड झनझटिया काज छै। हाकिमो सभ बड्ड हरामी छै। गुदाइन्ते नै रहै छै। कहलौं एम्हर तँ टेरल ओम्हर। काज प्रक्रियामे छै। जदी भुगतान भऽ जेतै तँ हम अपने अहाँ दुनू भाँइक हिस्सा बजा कऽ बाँटि देब। (मुस्कीआइत) मुदा अहाँक बेटा रामलाल हमरा भिनसरे-भिनसरे तगेदा कऽ देलक। हमरा बड्ड खराप लगल। लखन- तैं हम दुनू भाँइ सहटि कऽ तोरा लग एलौं। देखलिऐ एकरा तोरा दरबज्जा दिस घुमैत। खाइर, गलती हमरेसँ भेलह। माफ कऽ दहक। छौड़ा पागल छै। ऐ पगलापर धियान नै दिहक। जखनि हम काइम छी तँ ई के? (रामलाल आँखि बाप दिस लाल-पीअर करैत प्रस्थान) सियाराम- (राम किशुनसँ) हौ, छौड़ा एतेटा भऽ गेलै आ एक्को पाइक उपति नै करैए। हरिदम नरहेर जकाँ एम्हरसँ ओम्हर बौआइत रहैत अछि। चाहो- पानक खर्चा लेल बापेकेँ सोधैए। केकरासँ कोन बात करी आ केना करी, से बुधि तँ छैहे नै आ कहैत रहत जे हमरासँ काबिल कियो नै छै दुनियाँमे। छोड़ह ओकरा गपपर धियान नै दहक। राम किशुन- अहीं सभ बाजू जे अहाँ सबहक प्रति हमर केहेन श्रद्धा आ सिनेह अछि? सियाराम- एहेन भाए साए धर दुश्मनोकेँ होइ। एते मेल-मिलापसँ दियादीमे रहनाइ आइ काल्हि साधारण गप छै की? आ तइ दियादपर उ छौड़ा पगला, दोख लगाबए? राम किशुन- छोड़ू भैया, धिया- पुता छै। अपना सभ ठीक रहूँ तँ सभ ठीके रहत। आब गप-सप्प छोड़ल जाए। हमरा कनी जेबाक अछि भू-अर्जन कार्यालय। बिलम भऽ रहल अछि। पटाक्षेप। नअम दृश्य (लखन आ सियाराम दुनू भाँइ लखनक दलानपर बैसल छथि। दुनू भाँइ जमीन आ घरक सम्बन्धमे गप-सप्प करै छथि।) सियाराम- भैया, सुनै छिऐ जे ऑफिसमे घूसपर उनक दून पाइ उठबै जाइ अए। जेकरा एक लाखक नोटिस छेलै से घूस दऽ कऽ दस लाख उठौलक। सौंसे हल्ला छै। हमरबला नोटिस एक लाखक छेलै आ तोहरबला नोटिस केते कऽ छेलह भैया? लखन- हमरबला भरिसक अस्सी हजारक छेलै। सियाराम- राम किशुन तँ बड्ड जोगारी छथि। उ तँ अपन जोगारमे पाछू नै हटल हेता। (मोँछ पीजबैत) चलह, लोटिया बुरि जेतै तँ पाँचो लाख हमरा भेटबे करत आ तोरा चारि लाखसँ कम नै। लखन- तखनि लगैए जमीन आ घर दुनू भऽ जाएत हमरा आ तोराे बढ़ियाँ जकाँ भऽ जेतह। सियाराम- एक्को लाख कट्ठे जमीन भेटतै तँ दू कट्ठा जमीन लऽ लेब आ तीन लाख मकानमे लगाए देबै। लखन- हमरा तँ ओइमे से कर्जो-बर्जो झाड़बाक छै। हम ओतेक जमीन नै लेबै। मुदा मकान बढ़ियाँ बनेबै। (मन बिधुएने राम किशुनक प्रवेश) बैसह बौआ, बैसह। राम किशुन- की बैसब भैया। मुड ऑफ अछि। सभ हाकिम हरामी अछि, चोट्टा अछि। घूसो बड्ड लऽ लेलक आ काजो नै केलक तेहेन। (बैस जाइ छथि।) एन.एच.बला पेमेन्ट तँ भेल मुदा ऽ ऽ ऽ। सियाराम- मुदा की? लखन- हरामी सभ कुकुर होइ छै। नमहर धोखा देने हेतै। राम किशुन- चोट्टा हाकिम बात केलक दस गुना बढ़ा कऽ पेमेंट करब आ ओइ लोभे घूसो बड्ड लगि गेल। मुदा पेमेंट नोटिसक आधारपर भेल। तखनिसँ अक्क-बक्क नै फुराए रहल अछि। ओतबे पाइसँ हम की करब आ अहाँ सभ की की करबै। हाथो तरसँ गेल आ लातो तरसँ चलि गेल। सियाराम- की केना भेलह? राम किशुन- (अफसोच करैत) कहल नै जाइए। तैयो नै कहब तँ बुझबै केना? लखन- नशीबमे जतबे रहतह तैसँ बेसी नै भऽ सकै छह। की केना भेलै से बाजहक। आब पछता कऽ की हेतह? राम किशुन- सभ खर्चा-बर्चा काटि कऽ लखन भैयाकेँ पचास हजार हम देबनि आ सियाराम भैयाकेँ सत्तरि हजार देबनि। सियाराम- सभटा सोचलाहा- विचारलाहा पानिमे चलि गेलह भैया। कहै छै “ आप इच्छा सर्वनाशी देव इच्छा परम बलः।” लखन- दहक जे देबहक से। कहुना विधाता पार लगेबे करथिन। (राम किशुनक आँखिसँ नोर जा रहल छै आ ओ लखन आ सियारामकेँ पाइ गिन कऽ दऽ रहल छथि।) राम किशुन- अहाँ दुनू भाँइकेँ पाइ भेट गेल ने? लखन-सियाराम- हँ, भेट गेल। राम किशुन- अहाँ सभ चिन्त नै करू। अहाँ सबहक पीठपर हम छी। जेतए धरि संभव हएत, हम अहाँ सबहक मदति तन-मन-धनसँ करैत रहब। सियाराम- तोहर ई वचन सुनि हम दुनू भाँइ गदगद छी। राम किशुन- आब जाइ छिअ भैया। लखन- बेस। (राम किशुनक प्रस्थान) सियाराम- संतोख करह भैया। की करबहक? कनियोँ- मनियोँ जमीन कीनि केहनो-मेहनो घर बना कऽ गुजर करब। कनी-मनी पाइक खगता हेतै तँ दुनू भाँइ राम किशुनेपर बजारबै की। लखन- तँ आन कोन उपए। ठीके कहलह। (रामलालक प्रवेश) रामलाल- बाबूजी, राम किशुन काका आएल छेलखिन, की बात छेलै? लखन- एन.एच.बला पाइ देमए आएल छल। रामलाल- केते-केते भेटल? लखन- अपना पचास हजार आ सियाराम काकाकेँ सत्तरि हजार। रामलाल- बस बूझि गेलौं मूस लगि गेल। मूस बड्ड जुआएल अछि। बेसी बुझैबला तीन ठाम गूँह मखै छै। कहब तँ लागत छक द। दुनियाँ केतए पहुँच गेल अछि से अहाँ जानै छिऐ पहिने? लखन- रामलाल, तोँ बेसी बुझै छहक। अपन बुझनाइ अपने लग राखह। बतहपनी छोड़ह आ जाह घुमह-फिरह। रामलाल- नीक कहै छी तँ बतहपनी बुझै छी। हमरा ऐ पेमेंटपर बिसवास नै होइए। हम आफिससँ भाँज लगबै छी। जदी पेमेंट ठीके हएत तँ कोनो बात नै। मुदा जदी गलत हएत तँ अघिकारक लेल हम अबस्स लड़ब। लखन- रामलाल, जे भेलै से भेलै। आब समून्द्र नै उपछबाक छह। रामलाल- हिस्सा लए हम लड़बे करब आ काल्हि ऑफिस जेबे करब। चाहे जे भऽ जाए। लखन- हमरा जे कहबाक छेलह से कहलिअ आ तोरा जे करबाक हेतह से करिहऽ। हम रोकिए देबह तँ तोँ थोड़हे मानबह। सियाराम- रामलाल, बाबू ठीके कहै छथुन। आब ऑफिसक चक्करमे नै पड़ह। रामलाल- हम ऑफिस जेबे करब, जेबे करब, जेबे करब। पटाक्षेप। दसम दृश्य (भू-अर्जन कार्यालयमे पदाधिकारी सुशील आ चपरासी बिन्देश्वर बैस कऽ कागत-पत्तर उनटा रहल छथि। तखने रामलालक प्रवेश।) रामलाल- (सुशीलसँ) सर, प्रणाम। सुशील- की बात छियौ? रामलाल- सर, पेमेन्टक सम्बन्धमे बुझैक छेलै। पेपरमे निकलल छेलै। सुशील- जो, काल्हि आबिहेँ। आइ फुर्सतिक अभाव छै। रामलाल- (गिड़गिड़ा कऽ) हम बड्ड गरीब छी। अबै-जाइमे बड्ड पाइ लगै छै सर। हे हे सर, अपने बड्ड दयालु छिऐ। पएर पकड़ै छी सर, दाढ़ी पकड़ै छी सर। ऐ गरीबपर कृपा करियौ सर। सुशील- ऐ ऑफिसमे पएर-दाढ़ी पकड़लासँ काज नै चलै छै। एतए पैसा फेंकु तमाशा देखु बला भाँज छै। मालपर कमाल होइ छै। पाइ छौ संगमे? रामलाल- केते सर? (कनीकाल गुम्म भऽ) सुशील- एगो हरियरका पत्ता। रामलाल- केकरा कहै छै सर? सुशील- अखनि धरि ईहो नै बुझै छीही। लगै छेँ जे दू-चारिटा धिया-पुताक बाप रएहेँ। रामलाल- नै सर, बियाहो नै भेलए। बाबू कहै छथि जे एन.एच.बला पाइ भेटतौ तँ घरो बान्हब आ बियाहो कऽ देबह। सुशील- एगो निब्स लगतौ। रामलाल- निब्स केहेन होइ छै सर? सुशील- एगो दारू बोतलके निब्स कहै छै। से छौ? रामलाल- सर, चाह-पान कराए देब। सुशील- ओइमे नै हेतौ, जो भाग। (खिसिया कऽ) रामलाल- हे सर, कृपा करियौ एगो गरीबपर। गोर लगै छी सर, पएर पकड़ै छी सर। सुशील- संगमे केते पाइ छौ? रामलाल- बीसे टाका सर। भाड़ा लेल रखने छी। सुशील- ला, बीसेटा ला। रामलाल- तहन सर, गाम केना जेबै? बड़ी दूर छै सर। सुशील- पएरे चलि जइहेँ। ऊहो तोरा गरीबीपर कृपा करै छियौ। ला बीसेटा। रामलाल- (गिड़गिड़ा कऽ) सर, लइए लेबै। सर, चाह- पानमे दसे टाका लगितै। सुशील- (बड्ड बेसी खिसिया कऽ) तखनिसँ कपार चटैए। भगलेँ की नै भाग। नै तँ बीस टाका ला आ अपन काज बूझि कऽ जो। (रामलाल सुशीलकेँ बीस टकही निकालि कऽ देलक) बिन्देश्वर, ई जे पुछै छह से बताए दहक। बिन्देश्वर- बाज, की पुछबाक छौ? रामलाल- सर, राम किशुन, लखन आ सियारामबला पेमेन्ट केते-केते भेलै? बिन्देश्वर- (फाइल उनटा कऽ देखि) आठलाख लखनक नामे, दस लाख सियारामक नामे आ चौदह लाख राम किशुनक नामे चेक राम किशुनकेँ देल गेल छन्हि। रामलाल- ओइमे राम किशुनकेँ बेसी-सँ-बसी खर्चा की भऽ गेल हेतनि? बिन्देश्वर- बड्ड बेसी तँ चालीस प्रतिशत। रामलाल- सर, हमरा बाबूकेँ आठ लाखक पेमेन्टमे राम किशुन काका पचास हजार देलखिन आ काकाकेँ दस लाखक पेमेन्टमे सत्तरि हजार देलखिन। ई उचित भेलै सर। बिन्देश्वर- ई उचित केतए अनुचितो नै, महानुचित भेलै।जो ओइ डकैतकेँ कसि कऽ पकड़। रामलाल- सर, अपने सभकेँ बहुत-बहुत धन्यवाद। अपने सभ हमरा बड्ड पैघ उपकार केलौं। (रामलालक प्रस्थान) सुशील- बिन्देश्वर, राम किशुन गप-सप्पसँ बड्ड प्रतिष्ठित बुझाइ छल। मुदा अछि ओ बड़का दलाल। कहऽ तँ ओइ गरीबहाकेँ गरदनि छोपि लेलक। जुलुम केलक। पटाक्षेप। एगारहम ट्टश्य (लखन दलानपर सियाराम बैस कऽ जमीन आ घरक सम्बन्धमे किछु गप-सप्प कऽ रहल छथि।) सियाराम- जमीनक दर एक लाखसेँ कम केतौ नै छै अपना सभकेँ। महगाइ चरम सीमापर छै। जन मजदूरक रोज बड्ड बेसी भऽ गेल छै। ओइ सत्तरि हजारमे हम की की करब, किछु नै फुराइए। जाघरि एन.एच. घर नै तोड़ि रहल अछि सएह गनिमत अछि। लखन- हमरा तँ तोरोसँ कम छह भेटल। हमरा तँ और किछु नै फुराइ छह। (रामलालक प्रवेश) रामलाल- (खिसिया कऽ) अहाँ सभकेँ कहै छेलौं तँ हमरा बताह बुझै छेलौं। मुदा जखनि अस्सल गप बुझबै तँ अहाँ सभ बताह भऽ जाएब आ दियादी सेहो छूटि जाएत। लखन- एहेन बात बजबे नै करह जइसँ खराप भऽ जाए। सियाराम- नै भैया, हदमदीसँ नीक काएए। अस्सल गप नै बुझबै तँ मनमे दुगदुग्गी रहत। बाजह रामलाल अस्सल गप की छै? रामलाल- ऑफिससँ बूझि कऽ एलौं हेन। लखनक नाओंसँ आठ लाखक, सियारामक नाओंसँ दस लाखक आ राम किशुनक नाओंसँ चौदह लाखक चेक कटल छै जे राम किशुन प्राप्त केने छथि। (ई सुनि सियाराम अचेत भऽ जाइ छथि।) लखन- (हरबड़ा कऽ) रामलाल, रामलाल, काकाकेँ की भऽ गेलह। जा दौगकऽ, पानि और बेना नेने आबह। ताबे हम गमछासँ हौंकै छियनि। (लखन गमछा हौंकि रहल छथि। तखने पानि आ बेना लऽ कऽ रामलालक प्रवेश।) रामलाल- तोँ बेना हौंकह काकाकेँ। हम आँखि मुँह पोछि दइ छियनि। (दुनू बापूत सएह केलनि। किछु काल पछाति सियारामकेँ होश एलनि।) रामलाल- आब हम बेसी नै कहब। कारण काकाकेँ मन खराप भऽ जाइ छन्हि। मुदा एगो अबस्स कहि देब जे पेमेंटक चालीस प्रतिशत राम किशुन काकाकेँ खर्च भेल हेतनि। सेहो बेसी-सँ-बेसी। कम-सँ-कम अदहो पेमेंट अपना सभकेँ पुरेता तहन तँ सम्बन्ध राखबै। नै तँ कानूनक मदतिसँ हम हुनकासँ फरिया लेबै आ अपन-अपन पाइ लऽ कऽ रहबै। लखन- फेर तोँ बताह जकाँ करए लगलह। ओ छल-बल-कलसँ परिपूर्ण छथि। हुनकासँ कोनो चीजमे नै जीतबहक। सुहरदे मुहेँ एक बेर कहक। जदी देलकै तैयो बढ़ियाँ आ नै देलकै तैयो बढ़ियाँ। मुदा झगड़ा-झंझटिबला गप नै हेबाक चाही। सियाराम, अखनि राम किशुन घरेपर हेथुन। कनी बजेने आबह। (सियाराम अन्दर जा कऽ राम किशुनकेँ बजाए आनै छथि। सभ कियो बैस कऽ गप-सप्प करै छथि।) राम किशुन- की कहलौं भैया? लखन- कहलिअ जे एन.एच.बला पाइ हमरा दुनू भाइकेँ ओतबे-ओतबे हेतै, की औरो हेतै? कहाँदुन पेमेंट बड्ड बेसी बेसी भेलैए। राम किशुन- अहाँकेँ के कहलक? (आश्चर्यसँ) लखन- हमरा रामलाल कहलक। उ अपने ऑफिससँ पता लगेलक। राम किशुन- की पता लगलै? लखन- कहक काकाकेँ, की पता लगलह? रामलाल- हमरा इएह पता लागल जे लखनक नाओंसँ आठ लाखक, सियारामक नाओंसँ दस लाखक आ राम किशुनक नाओंसँ चौदह लाखक चेक कटल छै। उ तीनू चेक अहीं प्राप्त केने छिऐ। राम किशुन- (अनठीअबैत) ई सभ झूठ छै। ऑफिस किछु कहि पार्टीकेँ टिरका दइ छै। रामलाल- नै काका, अपना आँखिसँ रजिस्टर देखलिऐ। राम किशुन- (मुस्काबैत) ई भए नै सकै छै जे ऑफिसक रजिस्टर पार्टी देखाए। तोँ फुसि बाजि हमरा भैयारीमे आगि लगबै छेँ। की भैया सभ, अहाँ दुनू भाँइकेँ बिसवास होइए जे हम एहेन गदे्दारी करब? सियाराम- से तँ बिसवास नै होइए। लखन- बिसवास तँ हमरो नै होइए। राम किशुन- अँए यौ, जै भाए लेल हम जान दइ लऽ तैयार रहै छी तेकरा संग हम गद्देदारी नै कऽ सकै छी। अहाँ सभ एकरा गपपर बिसवास करब तँ अपनामे इर्खा पेदा हएत। लोक हँसत। हमरो प्रष्ठिा चलि जाएत। लखन- हमरा ऐ बतहबापर बिसवास नै होइए। हमरा अहींपर बिसवास अछि। राम किशुन- (प्रसन्न मने) तहन अहाँ सभ निफीकीर भऽ जाउ। कोनो तरहक दिक्कत हुअए तँ हम छीहे। रामलाल- जदी हमरा अहाँ सभ बताहे बुझै छी तँ आब हम कानूनक शरण लेब। छोड़ब नै। राम किशुन- जेतए जेबाक हेतौ जइहेँ आ जे करबाक हेतौ करिहेँ। हा हा हा हाऽ ऽ ऽ...। पटाक्षेप। बारहम ट्टश्य (अपन दलानपर रामलाल बैस कऽ किछु सोचि रहल छथि।) रामलाल- हे भगवती। एहेन बाप केकरो नै देबनि जे धिया-पुता जनमा ओकरा सड़कपर फेंक दैथ आ ओकर भविसक सम्बन्धमे किछु नै सोचथि। बापक उचित हिस्सा मंगाबैले बेटाकेँ बलि पड़ि़ जाए। मुदा बाप टससँ मस नै हुअए। बाप हुए तँ एहेन। हा हा हा हा...। मुदा नै बापपर हँसनाइ उचित नै। मन होइए कनी राम किशुन ककेपर हँसितौं। हा हा हा हा...। मुदा ऐ हँसीसँ तँ सेहो काज नै बनत। (किछु सोचि कऽ) जाइ छी एगो दरखास सरपंचकेँ दइ छियनि। (सरपंच,गंगाराम,लग रामलाल जा रहल अछि। गंगाराम अपन ओकील मोहनक संग अपन कोर्टमे बैस फाइल उनटा रहल छथि। तखने रामलाल गंगाराम लग पहुँचल। चपरासी पंचू ठाढ अछि।) सरपंच साहैब प्रणाम। गंगाराम- कह बौआ, केतए एनाइ भेलै? रामलाल- अपने लग एलैं। एगो दरखास छै। गंगाराम- ला (रामलाल गंगारामकेँ दरखास देलक। गंगाराम दरखास पढि मोहनकेँ बढाए देलनि।) ओकील साहैब, एकरा कहियाके समए दइ छियनि? मोहन- केस तँ बड्ड छै सरपंच साहैब। मुदा समए तँ दिहे पड़तै। अच्छा, अगिला रविकेँ तीन बजे दिनमे अहाँ केसक सुनवाइ हाएत। (मोहन दरखास पढै छथि।) रामलाल- बेस, हम जाइ छी। प्रणाम। (रामलालक प्रस्थान) मोहन- सरपंच साहैब, एन.एच. बहुत झगड़ाकेँ फरिया नै सकल; भरिया देलक। जे चलाक छल से बनि गेल आ मुँहदुब्बर सभ उपटि गेल। बरबरि एहेन केस आबैत रहैए। गंगाराम- स्वार्थक कारणे लोकक नेत बड्ड गिर गेलैए स्वभाविक छै लोकमे टेन्सन हएत, झगड़ा हएत। ओकील साहैब, राम किशुनकेँ नोटिस कऽ दियौ। (मोहन नोटिस लिखि कऽ गंगारामकेँ देलनि। गंगाराम दसखत कऽ नोटिस मोहनकेँ बढाए देलनि।) मोहन- पंचू, पंचू। पंचू- जी सर। आज्ञा होइ सर। मोहन- ई नोटिस लए। ऐपर मोहर दऽ राम किशुन ऐठाम चलि जा। हुनका दऽ दिहक। पंचू- जे आज्ञा सर। तुरंत जाए रहल छी। (पंचू नोटिसपर मोहर दऽ राम किशुन ऐठाम जा रहल अछि।) मोहन- सरपंच साहैब, औझका कोर्ट खतम करैक समए भऽ गेल। गंगाराम- तहन अबस्स खतम कएल जाए। पटाक्षेप। तेरहम दृश्य (राम किशुन ऐठाम लखन आ सियाराम तीनू भाँइ मिलि चाह पीब कऽ गप-सप्प करै छथि।) लखन- राम किशुन, आब चलै छिअ। राम किशुन- आइ बड्ड हरबरी देखै छी। की बात छै? लखन- हँ हँ हरबरी छैहे। कनी हटिया जेबाक छै आ एक आदमीकेँ कर्जा अदए करबाक छै। राम किशुन- बेस तहन जाउ। (लखनक प्रस्थान) सियाराम- दस धूर जमीन तँ लेलौं। बाप रे बा, ऐ नवटोल एत्ते महग जमीन ऐ परोपट्टामे नै हाएत। एन.एच. लऽ कऽ जमीनबला सभ जे अगधाइए जुनि पुछू। राम किशुन- से तँ ठीके कहै छिऐ। हमरा नै कीनए पड़ल तँए न, नै तँ हमरो भोंटी चहकि जइतए। धर-दुआर कहिया बना रहल छी? सियाराम- जल्दीए हाथ लगाएब। ओना ओतबिए पाइसँ हेतै नै। तोरो मदति करए पड़तह। राम किशुन- पहिने हाथ लगौ न। घटती-बढ़तीमे हम छीहे। (पंचूक प्रवेश) पंचू- राम किशुन बाबू, प्रणाम। राम किशुन- प्रणाम, प्रणाम। की हौ पंचू, आइ केम्हर-केम्हर घुमै छह? पंचू- अहीं लग तँ एलौं। सरपंच साहैब एगो नोटिस देलनि। राम किशुन- (आश्चर्यसँ) हमरा नोटिस देलनि। कोन नोटिस छिऐ? लाबह तँ देखिऐ। (पंचूसँ नोटिस लऽ कऽ राम किशुन मने मन पढि मोरिेकऽ जेबीमे रखलथि।) पंचू- जाइ छी राम किशुन बाबू। राम किशुन- (मुसकाकऽ) धूः मरदे, तूँ कोनो सभ दिन अबै छह। चाह पीब लए; तहन जइह। बैसह। (पंचू कुरसीपर बैस गेल।) राम सेवक, राम सेवक। राम सेवकः- (अन्दरसँ) जी पप्पा इएह एलौं। राम किशुन- एक कप चाह नेने आएब। (राम सेवककेँ एगो चाह लऽ कऽ प्रवेश।) पंचू भायकेँ दियनु। (राम सेवक पंचूकेँ चाह देलक। ओ चाह पी रहल छथि) भैया, रामललबा ठीके बाति गेलैए,लगैए। सियाराम- से तोँ आइ बुझै छहक। की भेलै से? राम किशुन- उ छौड़ा तँ सरपंच साहैबकेँ पेटीशन दऽ देलक हन। आब कानूनमे आएल हन, अच्छा। पंचू- सर, आब हम जाइ छी। राम किशुन- जाउ। सरपंच साहैबकेँ कहबनि कनी घरेपर रहै लए। हम आबि रहल छी। (पंचूक प्रस्थान) भैया, अहाँ दुनू भाँइ कहि देबनि सरपंच साहैबकेँ जे हमरा सबकेँ पूरा पाइ भेट गेल। छौंरा अपने उल्लू बनि जाएत। बतहपनी छूटि जेतै। बाँकी अपना तीनू भाँइ बूझि लेब। सियाराम- सएह हेतै। भैया, अहाँ संग रहथि वा नै रहथि हम तँ छीहे। ओना ऊहो रहबे करता। राम किशुन- अहाँ दुनू भाँइसँ हमरा अशो इएह रहाए। भैया, ताबे ई पाइ रखि लिअ। अहाँकेँ आगू बड्ड काज अछि। (किछु पाइ राम किशुन सियारामकेँ देलथि आ ओ रखलथि) सियाराम- हम जाइ छिअ; कनी बाध दिस जेबाक अछि। घसबहिनी बड्ड उपद्रव करै छै। उ सभ मौसरीपर बड्ड छ करै छै। राम किशुन- तहन जल्दी जाउ। हमहूँ कनी सरपंच साहैबक ऐठामसँ आबै छी। (सियारामक प्रस्थान। राम किशुन रौह माछ लऽ कऽ गंगारामक ऐठाम जा रहला अछि। गंगाराम साधारण पोशाकमे घरपर कुरसीपर बैसल छथि। रामकिशुन गंगाराम ऐठाम पहुँचला।) प्रणाम सरपंच साहैब। गंगाराम- प्रणाम, प्रणाम, आउ बैसू। (रामकिशुन कुरसीपर बैसला।) कहू, की हाल-चाल? राम किशुन- अपनेक किरपासँ बड्ड बढ़ियाँ। अपने नोटिस पठेने रहिऐ। ओही सम्बन्धमे किछु गप-सप्प करै एलौं हेन। गंगाराम- बाजू, की कहए चाहै छी। राम किशुन- उ रमललबा जे छै से बताह भऽ गेलैए। माए-बापकेँ एको रत्ती नै गुदानै छै। बापोसँ कहाँ पटै छै। बापसँ एन.एच.बला पाइ टानि कऽ एम्हर-ओम्हर करए चाहै छै। हम रोकै छिऐ तँ हमरेपर उनटल रहैए। गंगाराम- उ छिऐ के? राम किशुन- हमरे पितियौत भाय लखनक बेटा छिऐ। एहेन उपद्रवी नै देखल। गंगाराम- पेटीशनसँ आ गप-सप्पसँ तँ बताह नै बुझाइए। राम किशुन- कियो सीखा-पढा देने हेतै। ओकर बाप ओकरा पक्षमे नै छै। आब ऐसँ बेसी की कहुँ। सरपंच साहैब, अहाँकेँ भेँट केला बहुत दिन भैयो गेल छेलए। गप-सप्पमे हम बिसरिए गेल रही। ई सनेश अपने लए आनलौं हेन। गंगाराम- (मुस्कीआइत) की आनलौं हेन? राम किशुन- ठकैएबला बुझू। एक दम छोट छीन सनेश। गंगाराम- कनी बाजि दैतिऐ तँ मनमे बड्ड संतोख होइतए। राम किशुन- कहैत तँ लाज होइए। तैयो कहि दइ छी। कनीटा रौह माछ। गंगाराम- बाप रे बाप; अहाँ केते कहै छेलौं छोट-छिन सनेश। ऐसँ पैध सनेश हमरा लेल किछु नै। केते दिनसँ आशा पेरी ताकैत रही जे कोनो मोकीर फँसए। जाउ केसमे अहाँकेँ डिगरी भऽ गेल। राम किशुन- हा हा हा हा...। हम तँ ई बुझिते रही जे सरपंच साहैब हमरा नै छोड़ता। सर, अपने ई पाइ रखि लैतिऐ तँ बड्ड नीक होइतै। (एक सए टाका निकालि कऽ बढ़बै छथि।) गंगाराम- ई कोन पाइ दइ छी हमरा; घूस-तूस यौ। रामक नाओं लिअ। हम कोनो ऐरी-गैरी आदमी छी। ऐ नवटोल पंचाइतक सरपंच छी। सरपंचक प्रतिष्ठा आ एगो जजक प्रतिष्ठा दुनू बरबरिए होइ छै। (राम किशुन चारि सए और निकालि पाँच सए टाका बढ़बै छथि।) राम किशुन- सरपंच साहैब, अपने जल्दी औगता जाइ छिऐ। हम अहाँकेँ घूस नै दऽ रहल छी। हम रौह माछक तीमन हेतु नून-तेलक दाम दऽ रहल छी। गंगाराम- हँ, ई भेल प्रतिष्ठाक बात। तहन किए नै लेब? लाउ। (पाँच सए टाका गंगाराम लेलथि।) सच्चो कहै छी। अपने हीरा आदमी छी। राम किशुन- आब चलैक आज्ञा देल जाउ सर। गंगाराम- बेस। (राम किशुनक प्रस्थान।) ऐ पंचाइतमे हमरासँ बेसी प्रतिष्ठा किनको नै भऽ सकै छन्हि। कहू तँ, एहेन के हेता जिनका सनेशमे माछ तहूमे रौह आ नून-तेल दाम भेटन्हि? पटाक्षेप। चौदहम दृश्य (सरपंचक कोर्टमे गंगाराम, मोहन, पंचू, रामलाल, लखन, सियाराम, राम किशुन आ बीरू उपस्थित छथि।) गंगाराम- रामलाल, तोँ बाज। की कष्ट छौ? पेटीशन किए देने छेलही? रामलाल- सरपंच साहैब, एन.एच.बला पेमेन्ट हमर बाबूजीक नाओंसँ ऑफिससँ आठ लाखक पास भेलै जेकर चेक काका राम किशुन प्राप्त केलनि। ऐ आठ लाखमे हमरा बाबूकेँ मात्र पचासे हजार किए देलखिन काका? मोहन- ऐ पेमेन्टक कोनो सबूत अहाँ लग अछि? रामलाल- नै, हमरा लग कोनो सबूत नै अछि। हम अपने भू-अर्जन कार्यालयसँ बूझि आएल छी आ अपना आँखिसँ फाइल देखने छी। मोहन- की, राम किशुन, रामलालक कहब केतए धरि साँच अछि? रामकिशुन- एकर कहब सोलहन्नी झूठ अछि। एकर बाबूसँ पूछल जाए जे केतेके नोटिस रहै आ हुनका केते भेटलनि? मोहन- (लखनसँ) अपने बजीऔ केतेकक नोटिस रहए आ केते पाइ भेटल? लखन- अस्सी हजारक नोटिस रहए। तैमे हमरा राम किशुन पचास हजार देलखिन। मोहन- राम किशुन, पचास हजार बला गप तँ रामलालो कहने छल। तहन अहाँ केना कहलिऐ जे एकर कहब सोलहन्नी झूठ अछि? बीरू- सर, ओत्ते धरबै तँ भेल्लै। लोक बाजै क्रममे अहिना बाजि दइ छै। मोहन- अहिना बाजि पार्टी केसो हारै छै ने?राम किशुन, अस्सी हजारमे पचास हजार देलियनि? रामकिशुन- हम अपना घरसँ दैतियनि? अस्सी हजारक 25% घूस ऑफिसेमे लगि गेल। एकर अलावे आँफिस एनाइ -जेनाइमे लागल दस हजार। हमर मेहनति तँ पानिमे जाए। लखनकेँ वा रामलालकेँ पुछियनु जे ई काज कराबैमे कहियो पाँचो नया पाइ देलखिन? मोहन- की यौ लखन? की रामलाल? लखन- नै, हम एको नवका पाइ नै देलियनि। रामलाल- हमहूँ नै देलियनि। गंगाराम- ओकील साहैब, लखनकेँ पुछियनु जे राम किशुनसँ पचास हजार टाका पाबि ओ संतुष्ट छथि की नै? मोहन- की यौ लखन? अहाँ बाजू, पचास हजारसँ संतुष्ट छी की नै? लखन- हम संतुष्ट छी। मोहन- तहन रामलालक केसमे जान नै रहलै। रामलाल- हमर बाबू मुरूख छथि। न-छ नै बुझै छथिन। सभ किछुमे हँए कहता। पुछबनि गाए बिएलौ तँ हँ आ बरद बिएलौ तँ हँ। मोहन- अहों की कहए चाहै छी, रामलाल? रामलाल- हम इएह कहए चाहै छी जे कक्काक पासबुक (बैंकबला) इन्क्वाइरी कएल जाए। ओइसँ बुझा जाएत जे केते झूठ बाजै छी। गंगाराम- नै तोहर बाबू तोरा पक्षमे छथुन आ नै तोरा लगमे कोनो सबूत छौ। तहन राम किशुनक पासबुककेँ कोन आधारपर इन्क्वाइरी करिऐ। कानूनकेँ तँ चाही सबूत। हमर अदालत ऐ निष्कर्षपर पहुँचलौं जे राम किशुनकेँ ऐ केसमे डिग्री भेलनि। पंचैती खतम भेल। (रामलाल, सियाराम, लखन, बीरू आ राम किशुनक प्रस्थान।) पटाक्षेप। पनरहम दृश्य (लखनक ऐठाम लखन,लक्ष्मी आ रामलाल आपसमे गप-सप्प करै छथि। लखन आ लक्ष्मी बैसल छथि आ रामलाल ठाढ़ छथि।) रामलाल- माए, बाबूकेँ पुछहुन जे हम हिनके अधिकार लए लड़ि रहल छी। तइले ई हमरा बताह बुझै छथि। पंचैतीमे हमरा पक्षमे नै रहला। फल ई भेल जे हम हारि गेलौं। कनी तूँ हिनकासँ पुछहीन जे एना किए करै छथिन? लक्ष्मी- बौआकेँ केतए गलती छै जे एकरा बताह बूझि संग नै दइ छिऐ? (लखन अबाक भऽ जाइ छथि।) अपने किए नै किछु बाजै छी। लखन- हम की बाजौं, केतए राजा भोज आ केतए गंगू तेली। अँए गै, पहाड़सँ टकरेबीहीन तँ के थौआ हेतै? तूँ ही बाज तँ। लक्ष्मी- ऐ के मतलब राजा भोज गंगू तेलीकेँ गामसँ उजारि कऽ भगाए देतै आ समाज देखैत रहतै। सएह ने। लखन- केकरो कियो देखैबला नै छै। सभ अपना-अपनामे लागल छै। ठनका ठनकै छै तँ सभ अपन-अपन माथपर हाथ राखै छै। लक्ष्मी- जखनि केकरो कियो नै छै तँ तूँ अपन पितीयौतपर भरोस किए करै छह? लखन- की करबै, नै मामा से कनहा मामा। लक्ष्मी- एगो गप कहिहऽ। लखन- कहिते तँ छेँ और कहैक मन छौ तँ कह। लक्ष्मी- रमललबाकेँ जे जनमौलहक तेकर पैतपाल सेहो हमरे-तोरे करैक अधिकार छै। मुँहमे ऊक ओएह देतह तहने पैत हेतह; राम किशुनसँ कोनो पैत नै। लखन- की कहऽ चाहै छेँ? खोलि कऽ कह। तोरा एते हम नै बुझै छिऐ। लक्ष्मी- बौआ, तूँ की चाहै छह, खोलि कऽ बाबूकेँ कहक। रामलाल- बाबू मानथुन थोरहे। तखनि हम अपन करतब करै छियौ। बाबूकेँ कहुन जे ओ राम किशुन कक्काक संग छोड़ि आ अपन अधिकार-कर्तव्यपर धियान दैथ। लक्ष्मी- सुनै छहक कीने? लखन- (खिसिया कऽ) कान मुँहमे घोंसिया दिऐ। बहीर छी की? रामलाल- हम एगो पेटीशन एस.डी.ओ.केँ आ दोसर कलक्टरकेँ देबै। दुनूपर बाबूकेँ दसखत करए पड़तनि आ हमरा संग दिअ पड़तनि। लखन- से तँ नै भऽ सकै छौ। एकरा पुछहीन तँ हम एकर बाप, की ई हमर बाप। रामलाल- जदी अहाँ अस्सल बाप रहितौ तँ हमरा एना अहाँक जीवैत नै परेशानी उठबए पड़ितए। लखन- तेकर माने हम नकली बाप छी। रामलाल- हँ यौ हँ। लक्ष्मी- बौआ, औगताबह नै। लखन- चोट्टा कहीं के। जो सार, तोरासे हमरा कोनो माने मतलब नै। जो हरामी एतएसँ मरि जो कटि जो। रामलाल- (खिसिया कऽ) सार कहैत कनीओ लाज नै होइए अहाँकेँ? छिः! छिः! लोक हँसत, लोक थुकत। लखन- कोन सार हँसत? कोन सार थुकत? केकरो राजमे बसल छिऐ। रामलाल- आब हमरा संग लोकोकेँ गरियाबए लगलिऐ अहाँ। कियो आबि कऽ किछु कऽ दिअए वा कहि दिअए, तँ मन केहेन हएत? लखन- ओइ सारकेँ देख लेबै, केते माए दूध पीएने छै? मुदा तूँ भाग ऐठामसँ, हमर। सोझहासँ। रामलाल- हम अहाँ कहने नै भागब। माए कहि देत तँ दुनियाँ चलि जाएब। लखन- गै लक्ष्मी, कही एकरा एतएसँ चलि जाइ लए। लक्ष्मी- हम तँ एकर कोनो गलती नै देखै छिऐ तँ केना कहबै चलि जाइ लए। हम तँ अहीं के गलती देखै छी। लखन- (खिसिया कऽ)- हमर गलती छै, हमर गलती छै। (झोंटा पकड़ि खसाए लातसँ लखन लक्ष्मीकेँ खूब मारै अछि। रामलाल पकड़ैए तँ ओकरो थोपराबए लगै अछि।) रामलाल- माए, बाप चलते गम कसने छियौ नै त ऽ ऽ ऽ। लक्ष्मी- मरि गेलौं, मरि गेलौं। ई चण्डलबा आदमी नै छी जानवर छी। लखन- (हकमैत आ मारनाइ छोड़ि कऽ हकमैत) हमर बौह आ कहैए अहींकेँ गलती। हम चण्डाल छी, जानवर छी। (फेर सनकिकऽ जा लक्ष्मीकेँे हाथ-पएरसँ ओंघरा कऽ खूब मारैए।) लक्ष्मी- (जोर-जोरसँ) माए गै, बाप रौ, मारि देलक चण्डलबा। (रामलाल ई दृश्य देख कनैत-कनैत अन्दर चलि गेल।) लखन- आइ नै छोड़बौ हरमजादी। आइ साफ कऽ देबौ। तूँही ऐ छौड़ाकेँ चढ़ा-बढ़ाकेँ तूल कऽ देने छेँ। (और बेसी मारए लगैए लखन लक्ष्मीकेँ) लक्ष्मी- बौआ रौ बौआ, रमललबा रौ रमललबा। आब नै जीअ देतौ रौ रमललबा, बौआ आबो बँचा। आह! ओह! आह! (रामलालक प्रवेश पूर्ण खिसियाएल मने) रामलाल- (माएकेँ छोड़बैत बापकेँ पटकि छातीपर बैस कऽ) हरामी बाप कहीं के। आब बाजू,कोन बाप काज देत? अखनि हम हरमपनी निकालि दी। (लखन अबाक रहैए। ओकरा सस-बस नै चलै छै।) एहेन सहनशील माएकेँ ई दुर्दशा केलिऐ। एहेन बाप मरि जाए तँ चेनसँ जीअब। हरामी कहींके। लखन- कटहर लिहेँ। सभटा घँसि देबौ राम किशुनकेँ। फरियाबैत रहिहेँ जिनगी भरि। रामलाल- अखनि निशान दिअ पड़त सौदा कागतपर। लखन- ऐ जिनगीमे तँ नै हेतौ। दोसरो जिनगीमे हेतौ की नै हेतौ। राम किशुनकेँ घँसबै-3 रामलाल- अखनि निशान दिअ पड़त। नै तँ हमर दोष नै। लखन- तोरा बुते जे कएल हेतौ से कर। हमरा नै कानूनक डर आ नै जेहलक। रामकिशुन कथीलए छै। एक्के चुटकीमे मीर कऽ नोइस बना देतौ। रामलाल- माए, तूँ अन्दर जा कऽ सौदा कागत आ कजरौटी नेने आ। (लक्ष्मी आह ओह करैत अन्दर जा कऽ सौदा कागत आ कजरौटी आनलथि।) अखनि अहाँ तुरन्त ऐपर निशान दिअ नै तँ देख लियौ अहाकेँ जान हमरा हाथमे अछि। (रत-रत करैत बड़का चक्कू रामलाल देखाबै अछि लखनकेँ।) लखन- ला कागत, कऽ दइ छियौ। ला कागत ला। रामलाल- माए, ओंठा निशान लऽ ले चारू- पाँचू कागतपर। लखन- एगो से बेसीपर नै देबौ। रामलाल- सभटापर दिअ पड़त नै तँ बतहबाक हाथे जान चलि जाएत। (गरदनिमे चक्कू सटबै अछि।) लखन- अच्छा ला, दऽ दइ छियौ। जए गोपर निशान लेबेँ तए गोपर दऽ दइ छियौ। रामलाल- पाँच टा कागतपर निशान दिअ पड़त। लखन- ले निशान ले। मुदा जानसँ नै मार। रामलाल- माए, पाँचूटा कागतपर निशान लऽ ले। आगू बड्ड काज देतौ। (लक्ष्मी पाँचूटा कागतपर निशान लेलनि।) लक्ष्मी- निशान लेल भऽ गेलह बौआ। रामलाल- माए,तूँ अन्दर चलि जो। लक्ष्मी- तूहूँ चलह। आब छोड़ि दहक हटबह। रामलाल- तोहर आज्ञा छौ तँ छोड़ि दइ छियनि। नै तँ ऽ ऽ...। बेस चल। (लक्ष्मी आ रामलालक प्रस्थान। लखन उठि कऽ ठाढ़ भऽ जाइए।) लखन- सार कटहर लेत। सभटा कागत रखले रहि जाएत। राम किशुनसँ कत्थीमे हाथ मिलेतै। पटाक्षेप। दोसर अंक पहिल दृश्य (लखन चिन्तित मुद्रामे बैस अपन भविसक सम्बन्धमे सोचि रहल छथि।) लखन- रमललबा तँ बताह ऐछे। आब ओकर हाथ छूटि गेलैए। ओकर कोन ठेकान कखनि की करत की नै। हम आब ओकरासँ जीतबो नै करब। जौं जीततौं तँ काल्हिए देखा देने रहितिऐ जे कोन बाँसकेँ दाहा होइ छै। हगा-हगा, छेड़ा- छेड़ा नै भरबितौं तँ हमर नाओं लखना नै। मुदा से नै भेल। आब हमरा अपना कोनो उपए तकबाक चाही। जौं सोसराइर भागि जाइ छी तँ ई हो-हल्ला बूझि ऊहो सभ कुभेला करत। के कहलक राति-विराति मारिए दिअए आकि मरबाइए दिअए। नै ई उपए बढ़ियाँ नै। (किछु काल गुम्म भऽ) जौं सियारामसँ सटि जाइ छी तँ उ ओत्ते बलगर नै छै। ओकरो रमललबा पटकि देतै। छौड़ा आब बड्ड बलगर भऽ गेलैए। अच्छा, अंतिम उपए राम किशुन अछि। ओकरे ऐठाम डेली- खोङी लऽ चलि जाइ छी। उ तँ छौड़ाकेँ हग्गा-हग्गा भराएत। ओकरासँ तँ कोनो चीजमे नै जीतत। ओत्तै खूब खाएब-पीएब आ मोज- मस्तीसँ रहब। (अपन आवश्यक श्रमजाम लऽ लखन राम किशुन ऐठाम जा रहल अछि। राम किशुन ऐठाम पहुँच ओकरा सामने कानए लागल।) राम किशुन, हौ राम किशुन रमललबा मारि देलक हौ राम किशुन। कहुना बाँचि कऽ भागि एलिअ हौ राम किशुन। (राम किशुनो कानए लगै छथि।) राम किशुन- की भेलह भैया? (लखन अबाक रहैए) की भेलऽ बाजह ने। गप बुझबै तहन ने कोनो उपए। लखन- की कहिअ हौ राम किशुन। बाजैत लाज होइए हौ राम किशुन। लोक सुनत तँ की कहत हौ राम किशुन। राम किशुन- बाजह, बाजह, हम छी ने। लखन- (असथीर भऽ) रमललबा कहलक पाँचटा सौदा कागतपर औंठा निशान दइ लए। हम नै देलिऐ। तइले दुनू माइ-पूत पटकि कऽ हमरा छातीपर चढ़ि चक्कू देखा कऽ निशान लइए लेलक आ मारबो केलक केते से हमरा एक महिना होश नै हएत। राम किशुन- हल्ला करबाक चाही ने? लखन- हल्ला- गुल्ला तँ भेलै। मुदा कियो आएल नै। की संजोग छेलै भगवान जानए। राम किशुन- अच्छा, घबड़ाबह नै। आब तू सही फैसला लेलह। हम केहेन पैरबीबला लोक छिऐ से बुझै छहक कीने। लखन- तैं ने तोरा लग एलिअ। राम किशुन- छौरा बड्ड उड़ह लगलह। एकरा पाँखि काटैक जोगार भऽ जैते तँ बढ़ियाँ होइतै। अच्छा, समए आबह दहक। पटाक्षेप। दोसर दृश्य (लक्ष्मी मनहुस केने दलानपर बैसल छथि। तखने रामलालक प्रवेश) रामलाल- माए, बाबू केतए छथुन से बुझलीहीन ? लक्ष्मी- हँ हँ बुझलिऐ राम किशुन बौआ ऐठाम छथुन। तँए मनहुस अछि जे की करथुन की नै। रामलाल- तोँ कोनो चिन्ता नै कर। उचित उचिते होइ छै। देरी भऽ सकैए मुदा उचित जीतबे करत। हम जाइ छियौ एगो पेटीशन एस.डी.ओ. साहैबकेँ आ एगो कलक्टर साहैबकेँ दऽ देबनि। लक्ष्मी- ठीक छै जाह। मुदा एगो कहि दइ छिअ दरखासमे एक्कोटा अनुचित गप नै लिखिअ। नै तँ उनटे फँसि जेबह। रामलाल- (माएक पएर छूबि प्रणाम कऽ) माए तूँ चलि जो। हम एस.डी.ओ. ऐठाम जा रहल छी। (लक्ष्मीक प्रस्थान। शीघ्र रामलाल दरखास लऽ एस.डी.ओ. रामभद्र लग पहुँचल। कार्यालयमे रामभद्र आ चपरासी बलदेव उपस्थित छथि।) सर, प्रणाम। (रामभद्र रामलाल दिस ताकि फेर अपन काजमे लगि जाइ छथि। रामलाल ठाढ़ रहैए। किछु काल पछाति रामभद्र रामलालकेँ पुछै छथि।) रामभद्र- की बात? रामलाल- सर, एगो दरखास देबाक अछि। रामभद्र- लाउ दरखास। (रामभद्र रामलालसँ दरखास लऽ कऽ रखि लइ छथि। रामलालक प्रस्थान। पर्दा खसैए। रामलाल दरखास लऽ कऽ कलक्टर बीजेन्द्र लग जा रहल अछि। पर्दा उठैए। रामलाल बीजेन्द्र लग पहुँच जाइ अछि। कार्यालयमे बीजेन्द्र आ हुनक चपरासी मजलूम उपस्थित छथि।) रामलाल- कलक्टर साहैब प्रणाम। बीजेन्द्र- बाजू की बात? रामलाल- एगो दरखास दइ ले चाहै छी। बीजेन्द्र- लाउ, कोन दरखास अछि। (बीजेन्द्र दरखास पढ़ि कऽ रखि लइ छथि।) जाउ अहाँ। पटाक्षेप। तेसर दृश्य (समाहरणालयक कार्यालयमे बीजेन्द्र आ मजलूम उपस्थित छथि। बीजेन्द्र अपन पैड पर किछु लिखि कऽ मजलूमकेँ देलनि।) बीजेन्द्र- मजलूम, अखनि जे किछु देलौंह, ओकरा झंझारनगरक एस.डी.ओ.केँ जल्दी दऽ अबियनु। मजलूम- जी साहैब, तुरन्त जा रहल छी। (मजलूमक प्रस्थान। पर्दा खसैए। मजलूम रामभद्र लग जाऽ रहल छथि। पर्दा उठैए। मजलूम रामभद्र लग पहुँच रहल छथि। पर्दा उठैए। मजलूम रामभद्र लग पहुँच गेल। अनुमंडल कार्यालयमे रामभद्र आ बलदेब उपस्थित छथि।) मजलूम- (रामभद्रकेँ) सर, प्रणाम। रामभद्र- की बात अछि? मजलूम- हमरा कलक्टर साहैब पठेलनि। ई पत्र लेल जाउ। (रामभद्र उत्सुकतापूर्वक पत्र लेलनि।) सर, जाइक आज्ञा देल जाए। रामभद्र- ठीक छै जाउ। (मजलूमक प्रस्थान। रामभद्र पत्र पढ़ि कऽ अपन पैडपर दोसर पत्र लिखलनि।) बलदेब, ई पत्र लऽ कऽ सोझहे थानापर चलि जाउ आ बाड़ा बाबूकेँ दऽ देबनि। जल्दी जाउ-आउ। बलदेब- जे आज्ञा साहैब। जदी बड़ा बाबू नै हेथिन तहन। रामभद्र- तहन छोटे बाबूकेँ दऽ देबनि। बलदेब- ठीक छै सर, तुरन्त जा रहल छी। (पत्र लऽ कऽ बलदेबक। पत्र लऽ कऽ। पर्दा खसैए। बलदेब थानापर जा रहल छथि। पर्दा उठैए। बलदेब थानापर पहुँचलथि। थानापर बड़ा बाबू ओम प्रकाश, छोटा बाबू पवन, हवलदार बिलट आ चौकीदार नदीम उपस्थित छथि।) बलदेब- बड़ा बाबू प्रणाम। ओम प्रकाश- का हो, का बात हइ? बलदेब- बड़ा बाबू, एस.डी.ओ. साहैब एकटा पत्र देलनि। सएह दइ लए एलौं। ओम प्रकाश- कहाँ हऽ पत्र? लाबह। (बलदेब जेबीसँ पत्र निकालि ओम प्रकाशकेँ देलखिन।) बलदेब- सर, आब हम जाइ। ओम प्रकाश- जा। (ओम प्रकाश पत्र पढ़ि डायरीमे रखलथि।) पवन- का बड़ा बाबू, कोन पत्र बा? ओम प्रकाश- राम किशुन के हियाँ इन्क्वाइरी करै कऽ हइ। एस.डी.ओ. साहैबक ऑडर हइ। बिलट- राम किशुन के हियाँ कथीक इन्क्वाइरी बा? ओम प्रकाश- दियादी विवादक इंक्वाइरी बा। चौकीदार, चौकीदार। नदीम- जी बड़ा बाबू। ओम प्रकाश- कल राम किशुनक हियाँ चलै कऽ हइ सबेरे-सबेरे। नदीम- जी बड़ा बाबू, हम चौबीसो घंटा तैयार छी। जखनि आज्ञा होइ। पटाक्षेप। चारिम दृश्य (राम किशुन अपना बरन्डापर बैस रामलालक सम्बन्धमे बीरूक संग विचार-विमर्श करै छथि।) राम किशुन- बीरू भाय, रमललबा तँ बड्ड हरमपनी करए लगलैए। बीरू- से की? राम किशुन- देखियौ, परसुखिन लखन भैयाकेँ छातीपर चढ़ि चक्कू देखा कऽ सादा कागतपर औंठा निशन लेलकै आ खूब मारबो- पीटबो केलकै। अखनि ओ भागि कऽ हमरे ऐठाम छथि। बीरू- ई तँ बड्ड अनर्थ भेलै। छौरा बड्ड चढ़ि -बढ़ि गेल अछि। ओकरा बापसँ भेँट भेनाइ जरूरी छै। (ओम प्रकाश, पवन, बिलट आ नदीमक प्रवेश। राम किशुन आ बीरू हड़बड़ा कऽ ठाढ़ भऽ जाइ छथि।) राम किशुन- प्रणाम बड़ा बाबू, प्रणाम छोटा बाबू। आउ, जाउ। पधारल जाए। (मुस्कीआइत) आइ एगो गरीबोक कुटिया तरि गेलै। आउ, आउ, पधारल जाए। (सभ कियो बैस जाइ छथि।) राम सेवक, राम सेवक। राम सेवक- (अन्दरसँ) जी पप्पा। राम किशुन- पाँच- सातटा चाह जल्दी लाउ। राम सेवक- जी पप्पा। राम किशुन- बड़ा बाबू, केम्हर-केम्हर घूमि रहल छिऐ? ओम प्रकाश- तोरे हियाँ तँ ऐनी हऽ। राम किशुन- (गंभीर भऽ मुस्काइत) की बात छिऐ बड़ा बाबू? ओम प्रकाश- रामलाल के हऽ? उ एस.डी.ओ. साहैबकेँ पास पेटीशन देने हऽ। ओकरे इन्क्वाइरी बास्ते आएल बा। (राम सेवककेँ चाह लऽ कऽ प्रवेश।) राम किशुन- पहिने अपने सभ चाह पीबयौ तहन इन्क्वाइरी हेबे करतै। (सभ कियो चाह पी रहल छथि। कनी काल पछाति सभ चाह पी कऽ कप रखि दइ छथि।) पवन- का हो, बिलट आ नदीम, तोरे सभकेँ चाय कैसन लागल बा? नदीम- छोटा बाबू, एहेन चाय तँ हम जिनगीमे कहियो नै पीने रही। मुहसँ नै छुटै छेलए। मन होइ छेलए जे कपोकेँ चाहेमे घोरि पी जाइ। बिलट- सर, चाय तँ गाए-महिंसक दूधक नै रहनि। हमरा लागल बा मनुखक दूधक चाय बा। पवन- हमरो ओएह बुझाएल बा। ओम प्रकाश- एन.एच.बला पेमेन्ट लखनकेँ पूरा मिल गेल बा की नाही? (रामकिशुनसँ) राम किशुन- बड़ा बाबू, हम की कहब लखन भैयासँ अपने पूछि लियौ। ओम प्रकाश- लखन कहाँ हऽ? बजाबह। रामकिशुन- रामसेवक बौआ, चाहक कप नेने जाउ आ लखन काकाकेँ पकड़ि कऽ असथीरे-असथीरे नेने आउ। राम सेवक- जी पप्पा। (राम सेवकक प्रस्थान आ फेर लखनक संग प्रवेश) राम किशुन- भैया बैसू। (लखन कुरसीपर बैसलथि।) ओम प्रकाश- का हो लखन, एन.एच.बला पेमेन्ट भेटल बा? लखन- हाकिम, पचास हजार भेटल। (बड़ा बाबू डायरीपर नोट करै छथि।) ओम प्रकाश- झूठ नै बोलिहऽ। पूरा पेमेन्ट पा गेल बा? लखन- हाकिम, अस्सी हजारक नोटिस छेलै। ओइमे रामकिशुन हमरा पचास हजार टाका देलक। ओम प्रकाश- रामकिशुन बाबू, और टकबा का होइल? रामकिशुन- पेमेन्टक प्रक्रिया बड्ड नमहर छेलै। ओइ कारणे पेमेन्टमे बहुत बेसी समए लगितै। जल्दी पेमेन्टक कारणे किछु फाजिल खर्च लागल आ अबै- जाइक किराया सेहो लागल। ओम प्रकाश- फाजिल खर्च कहाँ गेल बा? राम किशुन- किछु इंजीनियर आ किछु भू-अर्जन पदाधिकारीकेँ जल्दी काज कराबैमे देल गेल। ओम प्रकाश- रामलाल बा? राम किशुन- लखन भैयाक बेटा छिऐ। ओम प्रकाश- तनी रमललबाकेँ हियाँ बजाबह तँ? राम किशुन- रामसेवक, रामलालकेँे बजेने आउ। रामसेवक- जी पप्पा। (रामसेवक अन्दर जा कऽ रामलालकेँ बजा आनलक।) ओम प्रकाश- का रामलाल, एन.एच.बला पेमेन्टक बारेमे का बात हई? रामलाल- सर, एन.एच.बला पेमेन्ट भू-अर्जन कार्यालयसँ किछु भेल अछि आ हमरा बाबू जी लखनकेँ किछु भेटलनि। ओम प्रकाश- भू-अर्जन कार्यालयसे केतना पेमेन्ट भेल बा और लखनकेँ केतना मिलल बा? रामलाल- भू-अर्जन कार्यालयसँ आठ लाख पेमेन्ट भेल छै सर आ ओइमेसे मात्र पचास हजार हमरा बाबूकेँ रामकिशुन काका देलखिन। से किए? एकरे हमरा खेद अछि। राम किशुन- बड़ा बाबू, ई केतेक बुधियार लड़का अछि जे अपन बापक छातीपर चढि चक्कू देखाए आ मारि-पीट कऽ पाँचटा सादा कागतपर औठा निशान लेलक। ओम प्रकाश- तूँ ऐसन लड़का बा? (आश्चर्यसँ) अच्छा तूँ जा। कल थानापर आबह। (रामलालक प्रस्थान) ओ राम किशुन बाबू, कल थानापर भेँट करम तँ। विस्तार से गप हुएँ होई। तँ ठीक हई, तूँ लोग बैठह। हम सभ जा रहल बा। (बड़ा बाबूक समूहक प्रस्थान।) पटाक्षेप। पाँचम दृश्य (थानापर ओम प्रकाश, पवन, बिलट, आ नदीम उपस्थित छथि। ओम प्रकाश डायरी उनटा कऽ देख रहल छथि। पवन पेपर पढ़ि रहल छथि। तखने रामलालक प्रवेश।) रामलाल- प्रणाम बड़ा बाबू। ओम प्रकाश- का रामलाल, एल्लह। रामलाल- जी। ओम प्रकाश- हो रामलाल, कुछ माल खर्च करबह? रामलाल- सर, हम केतएसँ माल खर्च करबै। हम बड्ड गरीब आदमी छी सर। ओम प्रकाश- अच्छा तनी छोटा बाबू से बात करह। (रामलाल कातमे जा कऽ पवनसँ गप करै छथि।) पवन- तोरा बाबूकेँ जे पचास हजार भेटलह से का केलहू? रामलाल- सर, माए जमीनबलाकेँ देलकै। पवन- केतना बँचलह। रामलाल- किछु नै सर। पवन- संगमे केतना माल-पानी बा? रामलाल- साफे नै सर। पवन- अच्छा, बड़ा बाबूसँ बात करह। (रामलाल बड़ा बाबू लग जा चुपचाप ठाढ़ अछि।) बड़ा बाबू, ऐ लड़िकबाक पास किछु माल-पानी नै बा। ओम प्रकाश- रे हे रामलाल, किछु माल खर्चा करी की ना करी। से बता न? रामलाल- सर, हम बड्ड गरीब छी। हमरा बुत्ते नै हेतै। ओम प्रकाश- हे रे तूँ बापकेँ मार-पीट कऽ और चक्कू देखा कऽ औंठा निशान ले लेलन हऽ और घर से भगा देलन हऽ? रामलाल- सर, बाबू जी माएकेँ मारै छेलखिन। जखनि सहाज नै भेल तँ हम ओतएसँ हटि गेलिऐ। जखनि माए मरनासन अवस्थामे हल्ला केली तँ छोड़बै लए चक्कू देखेलिऐ सिरिफ और भविसमे एना नै करै लए औठा निशान लेलिऐ। सर, हम बाबूजीकेँ भगेलिऐ कहाँ, अपने भागि गेला काका ऐठाम। ओम प्रकाश- बड़ी चौसठ लड़िका बा तूँ। ठीक हउ तू जो। (रामलाल प्रस्थान प्रणाम कऽ आ कनीएकाल पछाति राम किशुन आ बीरूक प्रवेश।) राम किशुन- बड़ा बाबू, प्रणाम। ओम प्रकाश- प्रणाम -प्रणाम। का हो राम किशुन, मामला बड़ी गड़बड़ बा। तूँ भी होशियारी कइने बा। रामलाल अभीए सभ बात बतिया कऽ गेलह हऽ। तूँ ही बताबह डायरी टाइट लिखी, की लूज। राम किशुन- सर, डायरी लूजे रहए देबै। ओम प्रकाश- लूज डायरीमे बढ़ियाँ माल खर्च पड़त। राम किशुन- सर, गरीब आदमी छी। कम सममे सलटिया दियौ। ओम प्रकाश- एक पेंटी से कम ना लगी। बीरू- सर, तखनि गरीब केना जीतै। सर, एना धरीयौ जइसँ साँपो मरि जाए आ लाठीओ नै टुटए। ओम प्रकाश- अच्छा तूँ ही बाजह केतना देबह? बीरू- सर, पचास हजार लऽ लियौ। ओम प्रकाश- अच्छा लाबह। (राम किशुन पचास हजार ओम प्रकाशकेँ देलखिन।) जा तूँ सभ जा। केस हल्का कऽ देबह। (किशुन आ बीरूक प्रस्थान। ओम प्रकाश डायरी लिखि एस.डी.ओ. साहैबक नामे पत्र लिखि रहल छथि।) ओ चौकीदार, तनी एन्नऽ आबह। नदीम- जी सर। ओम प्रकाश- ई पत्र ले लऽ एस.डी.ओ. साहैबकेँ दे आबह। नदीम- जे आज्ञा सर। (ओम प्रकाशसँ पत्र लऽ एस.डी.ओ.केँ दिअए जाइए नदीम। तैबीच पर्दा खसैए। नदीम एस.डी.ओ. ऐठाम तुरन्त पहुँच जाइए। पर्दा उठैए। कार्यालयमे रामभद्र आ बलदेब उपस्थित छथि।) बलदेब भाय नमस्कार। बलदेब- नमस्कार, नमस्कार नदीम भाय। कहऽ केन्ने-केन्ने एनाइ भेलै? नदीम- थानाक बड़ा बाबूक पत्र एस.डी.ओ. साहैबकेँ देबाक छै। साहैब छथिन? बलदेब- ‘हँ हँ, अन्दरमे छथिन, जाउ। (नदीम अन्दर पैसलथि।) नदीम- साहैब, प्रणाम। रामभद्र- की बात? नदीम- थानाक बड़ा बाबूक एगो पत्र देलनि। रामभद्र- लाउ। (पत्र लेलनि।) अहाँ जाउ। (नदीमक प्रस्थान। रामभद्र पत्र पढ़लनि। फेर ओ कलक्टरक नामे एगो पत्र लिखलनि।) बलदेब, ई प़त्र तूँ अपना लग रखि लए। काल्हि कलक्टर साहैब लग जैहऽ आ हुनक दऽ दिहक। बलदेब- ठीक छै सर, सबेरे चलि जेबै। पटाक्षेप। छअम दृश्य (कलक्टर साहैबक कार्यालयमे बीजेन्द्र आ मजलूम उपस्थित छथि। मजलूम ठाढ़ छथि आ बीजेन्द्र फाइल उनटा रहल छथि। बलदेबक प्रवेश।) बलदेब- साहैब प्रणाम। बीजेन्द्र- की बात? बलदेब- झंझार नगरक एस.डी.ओ. साहैबक पत्र छन्हि। बीजेन्द्र- लाउ। (पत्र लेलनि।) ठीक छै। (बीजेन्द्र पत्र पढ़लनि। फेर ओ झंझार नगरक थानाक बड़ा बाबू नामे पत्र लिखि बलदेबक हाथे पठा रहल छथि।) ई पत्र अपने नेने जाउ, अहाँक बगलमे स्थित थानाक बड़ा बाबूकेँ दऽ देबनि। बलदेब- जे आज्ञा सर। (पत्र लऽ बलदेब प्रस्थान करै छथि। पर्दा खसैए। बलदेबकेँ थानापर पहुँचैत मातर पर्दा उठैए।) प्रणाम बड़ा बाबू, अपनेक नाओंसँ कलक्टर साहैबक एगो पत्र अछि। (थानापर ओम प्रकाश आ नदीम अपस्थित छथि।) ओम प्रकाश- लाबह पत्र। (बलदेब ओम प्रकाशकेँ पत्र देलनि आ ओ पढ़ि बड़ आश्चर्यमे पड़ि गेला।) अच्छा रौवा, जाई। (बलदेबक प्रस्थान) बाप रे बा! आब राम किशुन ना बँची। कलक्टरो साहैब ऐ केसमे सीरियस बा। नवका कलक्टर बा। तोहूमे वन-टू टेनबला। के फँसी के नै। ओ नदीम, तनी राम किशुनक हियाँ चल जा आ ओकरा बजा कऽ अभी आनह। नदीम- ठीक छै सर, तुरन्त जा रहल छी। किछु देबो करबनि। ओम प्रकाश- ना ना, कुछ ना। जल्दी बजा आनह। (नदीम अन्दर जा कऽ राम किशुनकेँ बजा आनलक।) राम किशुन- (घबड़ाएल मुद्रामे)- प्रणाम बड़ा बाबू। ओम प्रकाश- कलक्टर साहैब हमरा नामे एगो चिट्ठी भेजलन। उनकर कहब बा-राम किशुनकेँ जल्दी एन.एच.बला पेमेन्टक सभ सबूतक साथ हमरा लग उपस्थित करी। ई चिट्ठी पढ़ लऽ। का लिखल बा? (कलक्टर साहैबक चिट्ठी ओम प्रकाश राम किशुनकेँ देलनि। राम किशुन चिट्ठी पढ़ि गुम्म भऽ माथापर हाथ रखि लइ छथि। नदीम खैनी खा कऽ नीनमे मातल अछि।) रामम किशुन- (गंभीर मने) सर, आब कोन उपए हेतै? ओम प्रकाश- का, तोहर सबूत सभ मजबूत बा की नाही? राम किशुन- सर, पूरा मजगूत नै छै। ओम प्रकाश- तब काम ना बनी। कलक्टर बड़ी टाइट हऽ। राम किशुन- सर, डी.एस.पी. साहैबक पैरबीसँ काज चलतै? ओम प्रकाश- कम उम्मीद बा। राम किशुन- एस. पी साहैबसँ। ओम प्रकाश- प्रयास करह। राम किशुन- ठीक छै सर, काल्हि डी. एस.पी. साहैब आ एस.पी. साहैबसँ भेँट करै छियनि। (राम किशुनक प्रस्थान।) पटाक्षेप। सातम दृश्य (डी.एस.पी. साहैब मनोहर अपने डेरापर पेपर पढ़ि रहल छथि। तखने राम किशुनक प्रवेश।) राम किशुन- प्रणाम डी.एस.पी. साहैब। मनोहर- प्रणाम प्रणाम, आइ एते सबेरे? राम किशुन- जी बड्ड आवश्यक गप छेलै। मनोहर - की? राम किशुन- कलक्टर साहैब लग हमर भातीज एन.एच.बला पेमेन्टक सम्बन्धमे हमरापर पेटीशन दऽ देलक। कलक्टर साहैब हमरासँ पेमेन्टक सभ सबूत मांगि देलथि। हमरा लग ओत्ते सबूत छै नै। ओकरे पैरबी अपने कऽ दैतिऐ जे ममला सलटिआ जइतए। मनोहर- नवका कलक्टर छथिन। बड्ड टाइट छथिन। तैयो हम पूरा कोशिश करब। माल बड्ड खर्चा हएत। राम किशुन- अपने लग बड्ड आशासँ एलौं हेन। केते धरि सलटिआ जेतै सर? मनोहर- अहाँ अपन आदमी छी। तँए एक्को लाख तँ दिअ पड़त। ओइमे काज भऽ जाएत तँ अपनाकेँ सौभाग्यशाली बुझबै। राम किशुन- ठीक छै सर। अपनेक जे आज्ञा। (राम किशुन मनोहरकेँ एक लाख टाका अटैचीमे बन्न कऽ देलखिन।) सर, मनसँ असीरवाद देबै। मनोहर- अहाँ लए हम जान दऽ सकै छी। राम किशुन- सर, एस. पी . साहैबकेँ भेँट कएल जाए, आकि नै? मनोहर- ओ हमरासँ पैघ हाकिम छथिन। जदी हुनका भेँट करबनि तँ सोनामे सुगंध भऽ जाएत। राम किशुन- ठीक छै सर। हुनकासँ अखने भेँट कऽ लइ छियनि। (राम किशुनक प्रस्थान। पर्दा खसैए। राम किशुन एस.पी. साहैब जीतेन्द्र ओइठाम पहुँचल आकि पर्दा उठल। ओइ समए जीतेन्द्र डेरापर छथि।) साहैब प्रणाम। जीतेन्द्र- आइ की बात छिऐ यौ? ऐ समएमे देखै छी। राम किशुन- सर, की बात रहतै। बिना कारणे टिटही नै लगै छै। हमर भातीज एन.एच.बला पेमेन्टक सम्बन्धमे कलक्टर साहैब लग हमरापर पेटीशन दऽ देने छै। कलक्टर साहैब ओइ सम्बन्धमे हमरासँ पक्का सबूत मांगि रहल छथि। हमरा लग पूरा सबूतक अभव छै। हम हुनका की जवाब देबनि। ओकरे पैरबी सर, अपने कऽ दैतिऐ। जीतेन्द्र- अहाँ सुनैत हेबै जे कलक्टर साहैब बड्ड टाइट छथि। हुनका लग किनको पैरबी नै चलै छन्हि। राम किशुन- सर, अपने अपेक्षित आदमी छी। तँए बड़ी आशासँ आएल छी। अपने चाहबै तँ भऽ सकै छै। जीतेन्द्र- हमर हाथक तँ गप अछि नै। नै तँ ओत्ते नै कहए पड़िताए। खाइर मालपर कमालक कल्पना कएल जा सकैए। राम किशुन- केते धरि फरिआ जेतै सर? जीतेन्द्र- कम-सँ-कम एक लाख। ऊहोमे फरिआएत की नै कोनो गाइरेन्टी नै। ओना हम जी-जान लगाइए देब। (राम किशुन, जीतेन्द्रकेँ एक लाख टाका देलनि।) राम किशुन- अपनेपर हमरा पूरा आश अछि। जीतेन्द्र- आब ऑफिसक समए भेल जा रहल अछि। अपने जैयौ। हम तैयार होइ लए जाइ छी। राम किशुन- धन्यवाद सर। (प्रस्थान) पटाक्षेप। आठम दृश्य (कलक्टर साहैब बीजेन्द्र कार्यालयमे फाइल उनटा रहल छथि आ मजलूम ठाढ़ छथि। मनोहर अपन कार्यालयसँ आ बीजेन्द्र अपन कार्यालयसँ जीतेन्द्रसँ फोनसँ गप करता। मनोहर बीजेन्द्रकेँ फोन केलनि।) बीजेन्द्र- हेल्लो मनोहर, की बात? मनोहर- सर, एकटा पैरबी छेलै। बीजेन्द्र- किनकर पैरबी? मनोहर- राम किशुनक पैरबी। बीजेन्द्र- हुनका सबूतक लेल पैरबीक आवश्यकता भऽ गेलनि। (मुस्काइत) अच्छा, दालिमे किछु कारी लगि रहल अछि। लगि रहल अछि जे राम किशुन जुआएल दलाल अछि। ओ एन.एचकेँ बढ़ियाँ टोपी पहिरौने हएत आ केतेक मुँहदुब्बराकेँ माथा-हाथ दिएने हएत। मनोहर, अहाँ ऐ पैरबीक चक्करमे नै पड़ू। नै तँ केकर खेती केकर गाए, कोन पापी रोमए जाए।’ बला गप भऽ जाएत। मनोहर- ठीक छै सर, अपनेक जे आज्ञा। (जीतेन्द्र बीजेन्द्रकेँ फोन केलनि।) बीजेन्द्र- हेल्लो जीतेन्द्र, कहू, की हाल चाल? जीतेन्द्र- सर, बड़ नीक। बीजेन्द्र- कहू, किए फोन केलौं जीतेन्द्र? जीतेन्द्र- सर, राम किशुन अप्पन आदमी छथिन। बीजेन्द्र- बस करू, बूझि गेलौं। ओ तँ बड्ड पहुँचल फकीर छथि। दलालक सरदार छथि। जीतेन्द्र- सर, अपने केना बुझलिऐ? बीजेन्द्र- रामलालक पेटीशनसँ आ अहाँ पैरबीसँ। जीतेन्द्र एहेन आदमीकेँ पैरबीसँ अपनेक प्रतिष्ठा माटिमे मिल जाएत। तँए हमर रिक्वेस्ट, जे पदक गरिमा नष्ट नै करी। जीतेन्द्र- सर, राम किशुनकेँ हम कहने छेलियनि जे कलक्टर साहैब लग किनको पैरबी नै चलै छन्हि। बेस, अपनेक सलाहक आदर करैत हम अपन पैरबी आपस लइ छी। धन्यवाद सर। बीजेन्द्र- (माथ डोला कऽ आ मुस्कीआइत) हूँ ऽ ऽ ऽ ऽ, एन.एच.क करोड़क टाकाक घोटाला भऽ गेल। मुदा कार्यालयमे कोनो ट्रेस उपलब्ध नै अछि। बड्ड चलाकीसँ काज भेल अछि। धन्यवाद देबाक चाही भू-अजर्न कर्मचारीकेँ एन.एच.क कर्मचारीकेँ आ सम्बन्धित दलालकेँ। मुदा आब ओना असंभव। हम पूरा प्रयास करब, जे भेल से भेल आब ओना किन्नो नै हुअए। एकटा दलाल तँ पकड़ा गेल। (बीजेन्द्र ओम प्रकाशकेँ फोन करै छथि। ओम प्रकाश नेपथ्यमे रहै छथि।) बीजेन्द्र- हेल्लो ओम प्रकाश। ओम प्रकाश- हेल्लो साहैब, प्रणाम। जे आज्ञा सर। बीजेन्द्र- राम किशुनकेँ गिरफ्तार कऽ हमरा कार्यालयमे उपस्थित करू। ओकरापर एन.एच केर केतेको पाइ घोटाला करैक आरोप अछि। ओम प्रकाश- जे आज्ञा सर। हो छोटा बाबू, हवलदार और चौकीदार तनी चलह तँ राम किशुनकेँ हियाँ। पवन- जी बड़ा बाबू, चली। (ओम प्रकाश, पवन, बिलट, आ नदीमक प्रस्थान राम किशुन ऐठाम। पर्दा खसैए आ फेर ओम प्रकाश अपन समूहक संग राम किशुन ऐठाम पहुँचै छथि। राम किशुन पेपर पढ़ैत रहैए।) राम किशुन- प्रणाम बड़ा बाबू, प्रणाम छोटा बाबू। ओेम प्रकाश- का हो राम किशुन बाबू, तोरापर बड़ी नमहर घोटालाक आरोप बा तोरा गिरफ्तारक ऑडर बा। राम किशुन- ह ह ह ह, बड़ा बाबू, जखनि अहाँ छिऐ तँ हमरा कथीक डर। पहिने चाह-नश्ता कएल जाए तहन विशेष गप हेतै।राम सेवक, राम सेवक। राम सेवक- (अंदरसँ) जी पापा। इएह एलौं। राम किशुन- बड़ा बाबू एला हेन। पहिने पाँच-सात ठाम नश्ता नेने आउ। राम सेवक- तुरन्त एलौं पापा। (स्टैण्डर्ड नश्ता लऽ कऽ राम सेवकक प्रवेश। राम किशुन छोड़ि चारू थाना स्टाफ नश्ता करै छथि।) पवन- अपने राम किशुन बाबू, नश्ता करए न? राम किशुन- छोटा बाबू, अपने सभ हमर गेस्ट छिऐ। अहाँ सभकेँ स्वागत केनाइ कर्त्तव्य छै पहिने। (सभ कियो नश्ता केलथि। राम सेवक पानि आनलक। सभ हाथ धोलथि। राम सेवक नश्ता प्लेट अन्दर लऽ गेल।) बौआ, बौआ, चाह बढ़ियाँसँ मम्मीकेँ कहियनु बनाबै लए। जल्दी नेने आउ चाह। बिलट- राम किशुन बाबू, अपने ऐठामक चाह नामी होइते छै। (मसकाकऽ) की मैडम लगहरि छथि? राम किशुन- ह ह ह ह, आब की लगहरि रहती। जखनि लगहरि छेली तखनि हम अन्न कहाँ खाइ छेलौं चाहेपर रहै छेलौं। बिलट- खीरो बनबै छेलिऐ दूधमे? राम किशुन- खीर बड्ड कम बनै छेलए। मुदा छेनाक रसगुल्ला बरबरि बनै छेलए। उ तेतेक सुअदगर लागए जे हम हरिदम उहए खा कऽ रही। ओम प्रकाश- छोटा बाबू, अब मजाक बन्न करह। काजक बात होइ। (राम सेवककेँ चाह लऽ कऽ प्रवेश। सभ कियो चाह पीबै छथि आ गप-सप्प करै छथि।) राम किशुन बाबू, कलक्टर साहैबकेँ का जवाब देब? तूँ ही बताबह। राम किशुन- हम अहाँकेँ की बताएब। अहाँ लग अपने बड्ड जवाब रहैए। कोनो जवाब दऽ देबनि। ओम प्रकाश- ठीक हई, जवाब दे देबह। लेकिन माल- पानी तँ खरचा करह। राम किशुन- राम सेवक, अन्दर जाउ आ मम्मीसँ गोदरेजक ऊपरका हन्नामे राखल पाइ नेने आउ। (राम सेवक अन्दर जा कऽ पचास हजार टाका आनि पापाकेँ देलक।) बड़ा बाबू, गरीब आदमीकेँ जे संभव भेल से दऽ रहल छी। (पचास हजार टाका ओम प्रकाशकेँ देलनि।) ओम प्रकाश- (टाका गिन कऽ)- कहाँ हऽ, पचो हऽ। ऐ से काम न चली। चार आदमी आएल बा, उ भी धियान रखह। कम-से-कम पचास और दऽ। (राम किशुन अपने अंदर जा कऽ बीस हजार टाका ओम प्रकाशकेँ देलनि।) राम किशुन- (कर जोड़ि) बड़ा बाबू, क्षमा कएल जाए। ओम प्रकाश- ठीक हऽ। तूँ अपन आदमी हऽ। का कहबह? हे हो राम किशुन बाबू, कलक्टर साहैबकेँ आॅडर बा। जरा बँच कऽ रहऽ छोटा बाबू, आब अपना सभ चलह। (थाना स्टाफक प्रस्थान) पटाक्षेप। नअम दृश्य (राम किशुन बरण्डापर कुरसीपर बैस कऽ बीरूसँ रामलालक सम्बन्धमे विचार-विमर्श कए रहल छथि। राम किशुन चिन्तामग्न छथि।) बीरू- राम किशुन भाय, बड्ड चिन्तामे देखै छी। राम किशुन- अहाँकेँ की कहब। अहाँ सभटा बुझिते छी। खाली एगो गप नै बूझल हएत। बीरू- एहेन कोन गप छिऐ? राम किशुन- आइए कनी काल पहिने थानाक बड़ा बाबू सत्त्रि हजार लऽ गंेल आ तैयो बचि कऽ रहै लए कहि गेला। बीरू- की बात छेलै? राम किशुन- कलक्टरक ऑर्डर छै जे राम किशुनकेँ गिरफ्तार कऽ ऑफिसमे उपस्थित करू। तँए थाना स्टाफ आएल छल। एक लाखसँ कममे बड़ा बाबू मानिते नै छेला। एना जे जखनि-तखनि रहत, तहन तँ ठूठ भऽ जाएब। सभटा कमेलहा-खटेलहा पानिमे चलि जाएत। तहन के पूछत? एकर कोन उपए हेतै, से किछु नै फुराइए। बीरू- हेतै दोस, सभ किछुक उपए होइ छै। अबेर-सबेर भऽ सकै छै। हिम्मत नै हारू। मन छोट नै करू। छै उपए। (मुड़ी डोला कऽ) राम किशुन- कहू कोन उपए? जल्दी कहू। बीरू- जदी रमलालबाकेँ कोनो गर लगाए दैतिऐ तँ अहाँक कष्ट दूर भऽ जैतए। राम किशुन- हमरो मनमे तँ सएह छेलए। मुदा अछि तँ उ भातिज। बीरू- से अहाँक भातिज कहाँ बुझैए। ओकरो ने बुझक चाही जे उ कक्का छथि। एक्के हाथे थोपरी कहियो बाजि सकै छै? राम किशुन- से तँ ठीके। उ हमरा दुश्मन बझैए। काए लाख हमरा नाश करौलक। बीरू- बुझै छिऐ दोस, सोझ ओंगरीसँ घी नै निकलै छै। जाबे धरि रमललबाकेँ कोनो पकिया जोगार नै लगाएब ताबे धरि अहाँ चेनसँ नै रहि सकब। उ कबाबक हड्डी छी। राम किशुन- अहीं बाजू दोस, कोन पकिया जोगार छै। बीरू- मौत, ऐ दुनियाँसँ निपत्ता। राम किशुन- ई काज तँ हमरा बुते नै हएत। बीरू- अहाँ बुते नै हएत। हमरा बुते हएत ने। आ हमहूँ नै करब। दुनियाँ बड़ीटा छै। माल खर्च करबै आ घर बैसल कमाल देखबै। राम किशुन- आ जौं फँसबै तब? बीरू- अँए यौ, उक्खैरमे मुँह देबै तँ मुसराक डर करबै तँ काज बनतै। ओना हमरा ओत्ते काँच खेलाड़ी बुझै छी। केतए चलि जेतै से भगवानो बुझतै की नै, से नै कहि। तखने अहाँक कल्याण हएत। जहिना रईस जकाँ रहलौं तहिना रहब यौ। नै तँ उ छौरा भीखमंगा बना देत। राम किशुन- तँ अहीं बाजू, की केना प्लान बनतै? बीरू- जेते पाइ केस-फौदारीमे खर्च हएत, तइसँ बड्ड कम्मेमे एम्हर सभ काज भऽ जाएत जइमे जीत निश्चित। मुदा केस- फौदारीमे जीत अनिश्चित। पहिने हमरा ओइ छौड़ासँ मेल करए दिअ। बिसवास बढ़ि जाएत, तहन ने कोनो अगिला कार्यक्रम करब। पटाक्षेप। दसम दृश्य (अपन दलानपर रामलाल आ झामलाल माए लक्ष्मीक संग बैस आपसी गप-सप्प करै छथि।) रामलाल- माए तोरासँ बिन पुछने काल्हि हम मामा गाम बौआ झामलाल के आनए चलि गेल रहियौ। ई हमरासँ गलती भऽ गेलौ, माफ कऽ दे। लक्ष्मी- पूछक तँ चाही जाइसँ पहिने मुदा आबो कहि देलह तँ कोनो तेहेन गलती नै भेलै। खाइर, तूँ की सोचि कऽ गेल छेलहक? केहेन सुन्दर ओत्तै छेलै। ओतए भरि पेट भोजन तँ भेटै छेलै।ेे रामलाल- हम भरि दिन एम्हर ओम्हर रहै छेलौं। बाबू बगदले छथुन। गामपर तूँ असगरे रहै छेलेँ। से हमरा नीक नै लागै छल। झामलाल मामा गाममे बेसी काल महिंस चरबैमे लागल रहै छेलए। जै कारणे बी.ए.मे बढ़ियाँ रिजल्ट नै भेलै। लक्ष्मी- से तँ ठीके कहै छह। रामलाल- भूखल दुखल एतए आगू पढ़बो करत आ तोरा संग सेहो रहत। इएह सभ सोचि कऽ एकरा आनि लेलौं। लक्ष्मी- ठीके सोचलहक बौआ। बुधियार लोकक काज ऐहन बोइ छै। (बीरूक प्रवेश। देखतहि लक्ष्मी मुँह झाँपि प्रस्थान केली।) रामलाल- प्रणाम काका, आइ केम्हर सुरूज उगलै। बीरू- सुरूजक उगनाइ तँ निश्चित छै। मुदा अपन सबहक क्रियाकलाप अनिश्चित छै। कहियो नावपर गाड़ी आ कहियो गाड़ीएपर नाह रहै छै। की हाल-चाल छह। रामलाल- अपने सबहक किरपासँ जे छै से नीके छै। बीरू- एकरा नै चिन्हलिऐ। रामलाल- हमरे छोट भाय छी झामलाल। मामा गाममे रहै छेलए। बौआ, काकाकेँ गोर लगहुन। (झामलाल बीरूकेँे गोर लगलक।) बीरू- बड्ड सज्जन लगै छह बौआ। ई तोरा जकाँ नै हेतह। तूँ तँ बड़का नेता भऽ गेलह हेन। रामलाल- काका, छुच्छाकेँ के पूच्छा? बीरू- नै हौ, सुनै छिऐ आ देखबो करै छिऐ जे तूँ राम किशुन काकाकेँ नाकोदम कराए देने छहक। हरिदम थाना-पुलिस लगल रहै छन्हि। रामलाल- नै काका, एगो कहबी छै जे ओतबे खाइ जे मोछमे नै लागए। काका, पर हमर बाबू बिसवास केलकनि आ ओ अपन सुतारमे लगि गेलथि। की करबै, मजबूरी छल। काका, बड़ी काल गप-सप्प भेलै। हमरा ऐठाम चाहक जोगार नै छै। चलू दोकानेपर पीअल जाए। बीरू- चलह। (रामलाल आ बीरू लालूक चाहक दोकानपर जाइ छथि। पर्दा खसैए। फेर पर्दा उठैए। दुनू आदमी चाहक दोकानपर पहुँच जाइए।) राम किशुनकेँ गद्देदारी नै करबाक चाही। आखिर दुनियाँ बिसवासेपर चलै छै। रामलाल- लालू काका, दूगो चाह देब। लालू- माने जे, मानेजे दुइएगो चाह। एते दिनपर एलेँ आ माने जे दुइएगो। रामलाल- दुइए गोटे छी तँ कएगो? लालू- माने जे, मानेजे चारिगो। माने जे एक आदमी दूगो आ माने जे एक आदमी दूगो। बीरू- तूँ नै बुझै छिहीन लालू, बेसी चाह खराबी करै छै। सभकेँ नै पचै छै। दुइएटा दहीन। लालू- माने जे मजाक केलिअ। माने जे दुइएटा लेबहक। माने जे दुइएटा चाह देबह, सएह नऽ। बीरू- हँ, दुइएटा दहीन। एते कियो गप बनाबए। लालू- माने जे तोरा दुइएगो चाह चाही। माने जे दुइएगो चाह तुरन्त दइ छिअ। माने जे शांत रहए। (लालू बीरू आ रामलालकेँे चाह देलनि। दुनू गोटे चाह पीबैक संग गप-सप्प करै छथि।) बीरू- रामलाल, बाबूकेँ देखै छिअ राम किशुन काका ऐठाम बहुत दिनसँ। से किए? रामलाल- की कहब काका, चलए ने आबए तँ अँगना टेंढ़। माए परिबारक नीक अधलाक सम्बन्धमे कहलकनि जे हमरा बुझने अहींक गलती लगैए। तैपर माएकेँ मारए लगलखिन। जौं नै छोड़ैबितियनि तँ जीब नै दैथिन। तही दुआरे ओ काका ऐठाम आबि रहए लगला। लगै छै जे काका नून पढाकऽ खिया देने छथिन। लालू- माने जे चाह पीबेँ की गपे करबेँ। रामलाल- काका भऽ गेल चाह पीअल। लालू- माने जे ई धरमशाला नै छिऐ, दोकान छिऐ। रामलाल- पाइ केते भेल काका? (चाहक कप रखि।) लालू- माने जे बीसे टका। रामलाल- काका, ऐ बीचमे दाम बड्ड बढ़ा देलिऐ की? लालू- माने जे सभ चीजक रेट बढ़लै आ चाहकेँ ओहिना रहतै। माने जे हमरा जकाँ चाह के बनबै छै? माने जे ठोरमे ठोर सटि जाइ छै। माने जे हमरा लग पाइ बेसी लगबे करतौ। बीरू- (चाहक कप रखि) रामलाल, तूँ- तूँ माएं- माएं नै करह। पाइ हमहीं दऽ दइ छिऐ। रामलाल- नै काका, हमहीं दऽ दइ छियनि। अहाँ हमर गेस्ट छी। बीरू- तोँ गरीब छह, बेरोजगार छह। हमहीं दऽ देबै तँ की भऽ जेतै? रामलाल- काका, गरीब आ बेरोजगारकेँ इज्जत नै होइ छै की? बीरू- हम तोरासँ श्रेष्ठ छी। हमरा रहैत तों पाइ देबहक से नीक नै हेतै। लालू- माने जे जे पाइ देबह से दाए, ओत्ते हवा नै छोड़ह। माने जे पाइ दाए, दोकान खाली करह। (बीरू बीसगो टाका लालूकेँ देलनि आ दुनू आदमी गप-सप्प करैत दोकानसँ बहरेलथि।) बीरू- आब जाइ छिअ रामलाल। आन दिन गप-सप्प हेतै। रामलाल- ठीक छै काका प्रणाम। बीरू- खुश रहऽ। (बीरूक प्रस्थान) रामलाल- लालू काका, आब अवस्था भेलह। कनी बोलीमे लैस राखहक। लालू- माने जे तू हमरा एते नै सीखा। माने जे हमरा आगूमे जनमल छेँ। रामलाल- काका, जे कहलौं गलती केलौं। माफ करू। (हाथ जोड़ि) लालू- माने जे जो, गुलछर्रा नै मार। (रामलालक प्रस्थान) पटाक्षेप। एगारहम दृश्य (राम किशुन अपना बरण्डापर बैस पेपर पढ़ै छथि। तखने बीरूक प्रवेश।) बीरू- नमस्कार दोस। राम किशुन- नमस्कार नमस्कार। आउ बैसू। कहू, की कुशल? बीरू- बड्ड नीक अछि। रामलाल ऐठाम गेल रही। भेँट भेल आ गपो-सपो भेल। राम किशुन- की गप-सप्प भेल? बीरू- कए रंगक गप-सप्प भेल। अहूँ सम्बन्धमे गप भेल। लखन भैयाक सम्बन्धमे गप भेल। लालूक चाहक दोकानपर आबि चाह पीलौं दुनू गोटे। पाइ हमहीं देलिऐ। राम किशुन- हमरा सम्बन्धमे की गप-सप्प भेल। बीरू- ओकर भाव छेलै जे जखनि काका हमरा भातिज नै बुझथिन दुश्मन बुझथिन तँ हम हुनका की बुझबनि? बरदासक तँ सीमा होइ छै। बाबू हुनकापर बिसवास केलखिन। मुदा ओ ओकर फैदा उठौलनि। राम किशुन- आब ई सभ छोड़ू। अगिला योजना बताउ। बीरू- हमर योजना इएह अछि जे अखने राजा ऐठाम चलू। नगद नारायण जेतेमे फाइनल हएत से कऽ लेब। अपने ओ समए देता। ओइ समैपर अहाँक काज बनि जाएत। सभ परेशानीसँ मुक्त भऽ जाएब। राम किशुन- ठीक छै, कखनि जेबै। बीरू- अखने चलू। परेशानीकेँ माथपर नै रखबाक चाही। जेतेक जल्दी भऽ सकए ओकर भगबैक प्रयास करबाक चाही। राम किशुन- तहन चलू अखने। बीरू- चलू। (दुनूक प्रस्थान राजा ओइठाम। पर्दा खसैए। फेर पर्दा उठैए। राजा अपन समूहम पाँच आदमी अछि। आन चारि आदमी सलीम मोस्तकीम, बौधु आ मनोज अछि। तीन गोटे दारू पी रहल अछि। एगो नटुआ चमेली नाच-गाबि कऽ दारू पीआ रहली अछि आ अपनो पी रहली अछि। पूरा मेहफिल मस्तीमे झूमि रहल अछि। गेटपर सलीम आ बौधु पेस्तौल तनने अछि। तखने आगू आगू बीरू आ पाछू- पाछू राम किशुन प्रवेश।) बीरू- सरदार लग जेबाक अछि। सलीम- सरदार, दूटा मोकीर अपने लग जाए चाहैए। की, आज्ञा होइ छै? राजा- बाइ इज्जत नेने आउ। (सलीम आ बौधु दुनूक माथमे पेस्तौल सटा राजा लग आनैए।) ओ ऽ ऽ ऽ बीरू भाय। सलीम आ बौधु अपन ड्युटीपर जाउ। (दुनू अपन ड्यूटीपर लगि गेल।) आउ बीरू बाबू, बैसू। संगमे के छथि? बीरू- हमरे दोस छथि राम किशुन। राजा- अच्छा अच्छा, बैसै जाइ जाउ आ मेहफिलक आनन्द लिअ। (सभ कियो मेहफिलमे दारू पीब कऽ मस्त अछि।) राजा- (मस्तीमे) की बीरू भाय, केतए एलौं हेन? बीरू- हमरे दोसकेँ एगो काज छेलै। राजा- कोन काज, बाजू। बीरू- हिनके एगो भातिज छै। उ हिनका नाकोदम कऽ देने अछि। सएह ओकर कोनो पकिया जोगार लए एलौं हेन। राजा- अहाँ चाहै की छिऐ? बीरू- ऐ दुनियाँसँ निपत्ता। राजा- माल पूरा एगो लागत। बीरू- किछु कम कऽ दैतियनि। दोस छथि तँए। राजा- हम जे बाजि देलौं से पक्का। ओना और बेसी हेबाक चाही। मुदा दोस छथि तँए ओतबे। काज करेबाक अछि तँ बेना दियौ, नै तँ रस्ता नापू। बीरू- की दोस, विचार छै ने? राम किशुन- हँ हँ, विचार अछिए। बीरू- तहन दियनु एक हजार एक बेना। (राम किशुन एक हजार एक टाका बीरूकेँ देलक आ उ राजाकेँ देलक।) राजा- आ बाँकी निनानबे हजार टाका कहिया? बीरू- काज भेला के बिहान भने। राजा- मिस नै हेबाक चाही। नै तँ अहींपर बिसाएत। बीरू- नै नै, मिस नै भऽ सकै छै। राजा- ठीक छै।, काल्हि नअ बजे अहाँ अपन गामक एक गच्छा लग ओकरा लऽ कऽ आउ। हम सभ ओतए तैयार रहब। बीरू- ठीक छै। हम अपने लऽ कऽ आएब समैपर। राजा- आब अहाँ सभ जाउ। (बीरू आ राम किशुनक प्रस्थान।) की बहादुर सभ? तूँ सभ तैयार छेँ ने? चारू गोटे- जी सरदार, हम सभ तैयार छी। मोस्तकीम- सरदार, ऐ काजक लेल हम असगरे काफी छी। अहाँ सभ किए कष्ट करब? बौधु- सरदार, हमरा आज्ञा दिअ, ओकरा हम असगरे घरेसँ उठा आनै छी। मनोज- सरदार, एक बेर इशारा करियौ अपने, असगरे ओकरा सौंसे परिवारकेँ नै उठा लेलैं तँ हमरा नाओंपर कुत्ता पोसि देब। राजा- सलीम तूँ किछु नै बजलेँ। डर होइ छौ की? सलीम- डर आ हमरा, डर हमरा अहींटाकेँ होइए। और ऐ दुनियाँमे कोनो माएक लाल नै अछि जेकरासँ हम डरब। अहाँ आज्ञा दियौ, हम असगरे सौसें गामकेँ देख लेबै। राजा- ह ह ह ह ह...। हमरा चारू बहादुरपर नाज अछि। चारू बहादुर, जीबू जागू आ दुनियाँकेँ लुटू। वाह! वाह! पटाक्षेप। बारहम दृश्य (लक्ष्मी अपन दलान बहारि रहल अछि। भिनसरे-भिनसरे बीरू रामलाल ऐठाम पहुँचल। रामलाल अन्दरमे सूतल अछि। बीरूकेँ देखैत मातर लक्ष्मी घोघ तानि अन्दर गेली।), बीरू- (ठाढ़े ठाढ़) रामलाल, रामलाल। रामलाल छह हौ। लक्ष्मी- (अन्दरसँ) रामलाल सुतले छन्हि। की कहै छथिन? बीरू- कनी पठा दियनु, जरूरी गप अछि। लक्ष्मी- बौआ, बौआ, रामलाल बौआ। रामलाल- उँ। की कहै छिहीन? लक्ष्मी- दूरापर बीरू काका बड़ी कालसँ ठाढ़ छथुन। रामलाल- इएह एलौं काका। बीरू- एते कियो लोक सुतए। आबह जल्दी आबह। (रामलाल बहाराएल) रामलाल- की काका, आइ भोरे-भोरे? बैसल जाउ। बीरू- हमरा संगे तोरा एकठाम जाइक छह। (बैस कऽ) रामलाल- केतए काका? बीरू- हौ एक आदमी हमर पाइ रखने अछि। कहै छिऐ तँ आइ-काल्हि, आइ - कालि करैए। उनटे कहा- कही कऽ लइए। रामलाल- के छिऐ काका? बीरू- तूँ नै चिन्हबहक। तूँ नेता जकाँ लोक छह, कनी अपनेसँ कहितहक समझाए कऽ। रामलाल- चलू, कहबनि। बीरू- चलह, ओम्हरे चाहो पीअब। (दूनू गोटे प्रस्थान केलनि। पर्दा खसैए।) रामलाल- केते पाइ लेनेए? बीरू- लाखक लमसम बुझलहक। मोँछ तँ इएह-इएह रखने अछि। मुदा लाज कनिको नै। मोँछ छिऐ की कथीदुन छिऐ। रामलाल- चलू ने, तेहेन बात कहबै जे छक्क दऽ लगतै। ठेहुनक कफ छूटि जेतै। (पर्दा उठैए। लालूक चाह दोकान आबि गेल। दोकानपर गैंहकीक भीड़ अछि। दुनू आदमी दोकानपर बैसल) बीरू- लालू दूगो चाह दिहेँ। लालू- माने जे दुइएगो चाह लेबहक। बीरू- हँ हँ दुइएटा दिहनि। लालू- माने जे अरामसँ बैसह। माने जे दइ छिअ। रामलाल- कनी जल्दी देबै काका। लालू- माने जे बड्ड औगताएल छेँ। माने जे तूँ नै देखै छेँ जे दोकानपर भीड़ छै। माने जे बेसी औगताएल रहए तँ दोसर दोकान देखहीन। बीरू- बड्ड बजै छेँ लालू। काजो बढ़ा। लालू- माने जे आगिओ-पानि डरेतै। माने जे हम बैसल तँ नै छी। माने जे काजमे लगले छी। माने जे चाह बनि गेलह, लएह। (लालू दुनूकेँ चाह देलक। दुनू चाह पीब रहल अछि। गपो-सप्प होइए।) बीरू- रामलाल, राम किशुन काका घमलह की नै? किछु और देलकह की नै? रामलाल- किछु नै। बीरू- नीक बात नै भेलै। हुनका एना नै करबाक चाही। तहूमे अपन समांगक संग। (दुनू गोटे चाह पीब कप रखि देलनि।) पाइ ले लालू। लालू- माने जे लाबह पाइ। माने जे खुदरा दिहक। माने जे बेसी आदमी नमरीए पनसौआ दइ छै। बीरू- खुदरे छौ आइ। चिन्ता नै कर। लालू- माने जे तँू बड्ड नीक लोक छह। माने जे लाबह। (बीरू लालूकेँ पाइ देलक।) बीरू- चलह रामलाल। बड्ड देरी भऽ गेल एतए। रामलाल- हँ हँ, चलू काका। (दुनूक प्रस्थान। पर्दा खसैए। दुनू रस्तामे गप-सप्प करैत जाए रहल अछि।) बीरू- रामलाल, बाबू अपना ऐठाम एलखुन की नै। रामलाल- नै तँ। बीरू- ईहो बढ़ियाँ नै भेलै। राम किशुनकेँ चाही जे तोरा बाबूकेँ समझा-बुझा घर पठा दैतएथिन। के नै बुझै छै जे जत्तै दसटा बरतन रहै छै, ओते हरबरेबे करतै। काबिल आदमी जकाँ काज राम किशुन नै केलथि। ओना उ हमर दोसे छथि। मुदा कहै छियनि तँ कोनो काने- बात नै। रामलाल- अहाँ तँ सभटा बुझिते छिऐ। (पर्दा उठैए। राजा, मोस्तकीम आ मनोज डकैतक भेसमे ठाढ़ छथि। तखने बीरू आ रामलाल पहुचल।) बीरू- नमस्कार राजा भाय। राजा- नमस्कार, नमस्कार बीरू भाय। इएह महानुभाव छथि की? बीरू- हँ इएह छथि। राजा- मोस्तकीम आ मनोज,श्रीमान्केँ कनी सेवा कऽ दियनु। बड़ी दूरसँ एला, थाकल हेताह। (दुनू गोटे रामलालकेँ थोपराए रहल अछि। बीरू आ राजा देखि रहल अछि।) रामलाल- हम की केलौं अहाँ सभकेँ? एना किए थोपराए रहल छी? मोेेेस्तकीम- बीरू भायसँ पूछ। मनोज,कनी रूकू एकर गप सुनू। रामलाल- की बिगाड़लौं काका? एना किए करबै छी? पलोसी दऽ कऽ आनि लेलैं आ मारि खुआबै छी। नीक नै केलौं। खाइर चिह्न गेलौं अहाँकेँ, केते पानिमे छी। अहाँ सनक घटिया आदमीपर थूः थूः थूः। अहूँ सभ इएह काज करै छी। एहेन सुन्दर देह अछि। ऐ देहकेँ किए कलंकित करै छिऐ? ई देह जदी ईमनदारीसँ काज करितए तँ समाजमे नाओं होइतए। अहुँ सभपर थूः थूः थूः। मनोज- मोस्तकीम, दुनियाँमे सभ बाबाजी भऽ जेतै तँ दुनियाँक रहस्य खतम भऽ जेतै। बीरू काकाकेँ छोड़ि अपने सभकेँ पढ़ाए रहल अछि। रामलाल- पढ़ाएब की? अपने पढ़ल छी से। अहीं सभ पढ़ि-लिखि कऽ नाओं कए रहल छी। मोस्तकीम- हमरा सभसँ दुनियाँ डरैए आ तोँ लबर-लबर करै छेँ, मुँह लगबै छेँ। रामलाल- अहाँ सभपर थूः थूः थूः। राजा- मोस्तकीम आ मनोज, गप-सप्प करैक समए नै छै काम तमाम कर। किछु आदमीकेँ आबैत देखाइए। (मनोज रामलालकेँ कसि कऽ पकड़ि लेलक। मोस्तकीम चक्कू पेटमे, छातीमे, जाँघमे बाहिमे आ पीठमे भोंकि देलक। रामलाल खसि पड़ल।) रामलाल- आह! ओह! नीक नै केलौं काका। अहा! माए गै। बाप रौ! अहा! ओह! पानि, पानि। (बेहोश भऽ गेल) राजा- मनोज, ऐ काजमे बेसी समए नै लेबाक चाही। लेट भऽ रहल छै। दोसरो ठाँ जेबाक छै। जल्दी कर। चारि-पाँच आदमी आबि रहल छै। (मनोज अपन चक्कूसँ रामलालक गरदनि काटि देलक।) मनोज- सरदार काम तमाम भऽ गेल। राजा- बीरू भाय, लग जा कऽ देखियौ। अहाँक काज बनल की नै बनल? (बीरू लग जा कऽ देखलक।) बीरू- राजा भाय, काज बनि गेल। अहा! बेचारा बड्ड नीक छेलए। हमरा बड्ड माने छेलए। राजा- भागै जाइ जाउ। आबि रहल-ए पाँच आदमी। (सभ कियो कारी कपड़ासँ झाँपि भागि रहल अछि।) बीरू भाय, बाँकी रकम लाउ। बीरू- काल्हि आबै छी। (बुधन, घूरन, भूटन, पलटू आ चिनमाक प्रवेश। सभ कियो लाश देखि आश्चर्यमे पड़ल अछि।) बुधन- घूरन, खतम छै। सुगबुगेबो नै करै छै। (घूरन कनीए लाश उघारैए) घूरन- गरदनिए काटल छै तँ केना सुगबुगेतै? भूटन- पलटू भैया, ई छिऐ के? पलटू- हमरा लगैए जेना लखन भैयाक बेटा रहै। चिनमा- पलटू, के रौ, रामलाल? पलटू- हँ हँ, ठीके कहै छेँ रामलाल। बुधन- कनी औरो उघारि कऽ देखै छिऐ तँ चिह्न जेबै। घूरन- धूर मर्दे, फँसैके काज छौ। जुग-जमाना नै बुझै छीही। भूटन- केकर खेती केकर गाए। कोन पापी रोमए जाए। अखने पुलिस एतौ तँ चलि जेमे खिचड़ी खाए लए। पलटू- भाग रौ, ओएह पुलिसक गाड़ी अबै छै। चिनमा- ठीके रौ, जल्दी भागि जो। अखनि पुलिस ओत्तै छै। जल्दी निकल। मुदा एना नै करबाक चाही। जे एना केलक, ओकरा नीक नै हेतै। बुधन- कौआ सरापने बेँग मरै छै? चलै चल, जे होइ छै से नीके होइ छै। तूँ जेकरा खराप कहै छीही, तेकरा कोय नीको कहैत हेतै। घूरन- पुलिस हैअए एलै। भागै जो। (बुधन, घूरन, भूटन, पलटू आ चिनमाक प्रस्थान। आ ओम प्रकाश पवन, बिलट आ नदीमक प्रवेश।) ओम प्रकाश- नदीम, तनिएँ देखाइ हऽ लाश। पूरा उघारह तँ। (नदीम कारी कपड़ा हटा लाश पूरा उघारलक।) (गौरसँ देखि।) हमरा लागत हई, ई रमललबा हऽ। छोटा बाबू तोरा कैसन लागत हऽ? पवन- बड़ा बाबू, तनी- तनी हमरो लागत हई। मुदा रमललबा कारी तँ नै बा? बिलट- बड़ा बाबू, मुर्दाकेँ की करबै से, जल्दी करू। महँकि जाएत तँ उठा- बैसीमे दिक्कत हएत। नदीम- बड़ा बाबू, कनी- कनी महँकबो करै छै। (नाक दाबि) ओम प्रकाश- लाशके का होई, पोस्टमार्टम होई। चौकीदार लादह गड़ियामे। नदीम- हमरा असगरे हेतै सर? ओम प्रकाश- बड़ी कोढ़िया हऽ तूँ। कोशिश तँ करह। ना होई हम लोगन का करब हियाँ। (नदीम नाक दाबि कुथि- काथि कऽ मूर्दाकेँे गाड़ीमे लादलक।) देखए होई ना। कोनो काजके कोशिशमे ना चुकबाक चाही। पहिले ना ना कही, ओइसे हिम्मत कम हो जाई। पवन- बड़ा बाबू, लेट हो रहल हऽ। फेर लाश पोस्टमार्टममे भी जाई ना। (सबहक प्रस्थान) पटाक्षेप। तेरहम दृश्य (दलानपर बैस लक्ष्मी आ झामलाल आपसी गप-सप्प करै अछि। साँझक समए अछि।) लक्ष्मी- बौआ, दुपहरमे कोनो गप बुझबो केलहक? झामलाल- (आश्चर्यसँ) नै माए, केतए की भेलै? हम घरमे किछु पढ़ै छेलौं। लक्ष्मी- हमहूँ अँगनामे खेन्हरा सीऐ छेलौं। अँगनेसँ सुनलिऐ जे जुलुम भेलै, एगो छौराकेँ गरदनि काटि देलकै। डरसँ बहरेलौं नै। झामलाल- माए गै, आइ भैयाकेँ नै देखै छिऐ? लक्ष्मी- भैयाकेँ कोनो ठेकान नै। आइ एतए काल्हि ओतए। जेतइ धर तेतइ घर। झामलाल- गेलखुन केतए? लक्ष्मी- सुतिले छेलखुन तँ बीरू काका आएल छेलखिन। हुनके संगे सात-आठ बजे भिनसर निकललखुन। झामलाल- (आश्चर्यसँ) केतए सात बजे भिनसर आ केतए छह बजे साँझ? अखनि धरि किए नै एलखिन? हमरा शक होइए। लक्ष्मी- कोनो शक नै। बुझै छहक, बीरू काका केहेन नीक लोक छथिन। हुनका संगे गेलखुन तँ कोन चीजक शक। हुनके कोनो काज हेतनि। हुनके ऐठाम हेथुन। हुनके ऐठाम खेने-पीने हेथुन। झामलाल- नै गै, आइ काल्हि बापकेँ बेटापर बिसवास नै छै, पतिकेँ पत्नीपर बिसवास नै छै, गुरू के चेलापर बिसवास नै छै, केते कहबौ। आ बीरू काका तँ आन छथिन। लक्ष्मी- नै बौआ से बात होइ नै छै हरिदम। जेकरासँ मन मिलै छै आ काज होइ छै, ओएह बिसबासी होइ छै। चाहे उ आन होइ वा अप्पन। भैयाकेँ हुनकापर बिसवास भेलह, तँए गेलखुन। ऐमे चिंता आ शक करबाक कोनो बाते नै। झामलाल- तूँ तँ माए छिहीन, बुझिते हेबहीन। लक्ष्मी- की बौआ? झामलाल- केतेक गड़बर आदमी एतेक मधुर बजतौ जे लगतौ, ओकरा मुहसँ अमृत चुबै छै। लक्ष्मी- से तँ होइ छै। झामलाल- माए गै, हमरा मन होइए जे बीरू कक्काक घरपर देखतिऐ जे भैया की करै छथिन? लक्ष्मी- जा देखहक। बड़ी काल भैयो गेलै। झामलाल- जाइ छियौ माए। (झामलालक प्रस्थान। पर्दा खसैए। फेर पर्दा उठैए। झामलाल बीरू ऐठाम पहुँचल। बीरू घरेपर छथिं।) झामलाल- काका, भैया कहाँ छथिन? बीरू- (आश्चर्यसँ) हमरा ऐठाम कहाँ छथुन। उ तँ दसे बजे ऐ ठामसँ गेलखुन। झामलाल- कहाँ एलखिन घरपर। केतए गेलखिन? बीरू- हमरा लग बजै छेलखुन, कनी मामा गाम जेबै। बहुत दिन भऽ गेलै। भऽ सकैए; ओत्तै गेल हेथुन। झामलाल- ठीक छै हम जाइ छी काका। बीरू- जेबह किए । खा-पीअ आ रहऽ। साँझ भऽ गेलै। एतै रहि जा। काल्हि चलि जैहऽ। जुग-जमाना नीक नै छै। आइए ओइ पुल लग एगो छौराकेँ गरदनि काटि कऽ फेक देने छेलै दिनेमे। देखल नै जाइ छेलै। झामलाल- जाइ छी काका, माए चिन्तामे हेती। बीरू- नै मानबह तँ चलि जा जल्दी। झामलाल- प्रणाम काका जाइ छी। (प्रस्थान) (पर्दा खसैए। झामलाल अपना ऐठाम जा रहलए। पर्दा उठैए। झामलाल अपना ऐठाम पहुँच गेल। लक्ष्मी चिन्तामे बैसल अछि।) लक्ष्मी- की भेलह बौआ? झामलाल- कहाँ छथुन भैया हुनका ऐठाम। कहलखिन दसे बजे गेलह। हम पुछलियनि- “घरपर कहाँ गेलखिन।” उ कहलनि- “मामा गाम गेल हेथुन।” लक्ष्मी- (आश्चर्यसँ) मामा गाम गेल हेथुन। काल्हि भिनसरे चलि जैहऽ मामा गाम। कहियहुन- खाली मेहमानीए टा हेतै की पेटोक जोगार हेतै। झामलाल- ठीक है माए, काल्हि भोरे मामा गाम चलि जाएब। (प्यारसँ) माए गै, खर्चा-पानिमे दिक्कत होइ छौ तँ किछु विद्यार्थीकेँ टीशन पढ़ाबी। लक्ष्मी- ई तँ बड्ड सुन्दर काज छै। ई काज के कहत नै करैले। झामलाल- हमर विचार अछि जे पढ़ेबो करी, पढ़बो करी आ कनी-मनी घरोकेँ देखी। लक्ष्मी- बड्ड बढ़ियाँ विचार छह। पटाक्षेप। चौदहम दृश्य (लक्ष्मीक भाए आ झामलाल मामा लक्ष्मण अपन दलानपर कुट्टी काटि रहल छथि। तखने झामलाल प्रवेश।) झामलाल- मामा गोर लगै छी। लक्ष्मण- (प्रसन्न मने) जीबू, जागू आ खूब मलफै उड़ाउ। झामलाल- मलफै की होइ छै मामा? लक्ष्मण- नै बुझलहक भागीन, तोरे सनक छौड़ा सभ जखनि एम्हर-ओम्हर बौआइत रहैए निफीकीर भऽ कऽ तँ ओकरे मलफै उड़ेनाइ कहै छै। अच्छा, कहऽ केतए एलह आइ एते सबेर? झामलाल- मामा, एलौं जे भैया कहाँ छथिन? लक्ष्मण- (आश्चर्यसँ) भैया, भैया कहाँ एलखुन। झामलाल- बीरू काका कहलखिन- “मामा गाम गेल हेथुन।” लक्ष्मण- बीरू काका के छथिन? झामलाल- हमर राम किशुन कक्काक दोस छथिन। गौवेँ छथिन। हुनके संग काल्हि सात बजे भिनसरे निकललथि। अखनि धरि नै भेटलथि। माएकेँ बड्ड चिन्ता भऽ गेल छै। तैमे काल्हि एगो मुर्दा हमरा घरसँ कनी दूर रस्ते कातमे गरदनि काटल भेटलै। पुलिस पोस्टमार्टम लए लऽ गेल। लक्ष्मण- अच्छा भागीन, तूँ चलह हम आबै छी। माएकेँ कहि दिहक जे मामा ऐठाम भैया नै पहुँचल। (झामलाल अपन घरपर आबि रहल अछि। पर्दा खसैए। झामलाल अपन घरपर पहुँचल। लक्ष्मी चिन्तामग्न अछि। पर्दा उठैए।) लक्ष्मी- (उदास मने) छेलखुन भैया? झामलाल- कहाँ छेलखुन ओत्तौ। मामाकेँ सभ बात कहलियनि तँ ऊहो बड्ड आश्चर्यमे पड़ि कहलखिन- तूँ चलह हम आबै छी। लक्ष्मी- हमरा किछु नै फुराइए। केतए गेलै नै गेलै। केकरो दिया समादो पठा दैतए जे फलनाठाम जाइ छी, सेहो नै झामलाल- माए, हमरो आब बड्ड शक होइ छौ। (लक्ष्मणक प्रवेश) लक्ष्मी- (कानि कऽ) बौआ लक्षण, बड़का बौआ काल्हिसँ निपत्ता अछि। केतए गेलै नै गेलै; किछु नै फुराइ अछि। लक्ष्मण- चूप बहिन चूप। भगवानपर भरोस कर। जदी तोहर हेतौ तँ कोनो धरानीए आइ नै काल्हि तोरा लग एबे करतौ। चिन्ता नै कर। हमहूँ सभ प्रयास करै छिऐ। बहिन, बीरू के छथिन? लक्ष्मी- ओहए तँ सभटा केलक। (कानए लगैए) लक्ष्मण- कान नै बहिन। चूप रह। बीरू की केलकै? लक्ष्मी- कालि साते बजे भिनसर बौआकेँ संगे लऽ गेलै। काल्हिसँ अखनि धरि आएल नै। छोटका बौआके हुनक ऐठाम पठेलियनि तँ कहलखिन- “दसे बजे गेलै।” आन दिन चारिए बजे-पाँचे बजे भोरे उठि कऽ बहराइ छल। साँझ तक घर आबि जाइ छेलए। मुदा काल्हि कोन कारण छेलै? (कानए लगैए) लक्ष्मण- तूँ शांत रह, कान नै। कमजोर छेँ। मन खराप भऽ जेतौ। भागीन, चलह तँ तूँ हमरा संगे बीरू ऐठाम। झामलाल- चलू मामा। (लक्ष्मण आ झामलाल बीरू ऐठाम जा रहल अछि। पर्दा खसैए। दुनू जने बीरू ऐठाम पहुँचल। पर्दा उठैए।) बीरू काका प्रणाम। बीरू- प्रणाम प्रणाम बौआ। ई के छथि बौआ? झामलाल- हमरे मामा छथि। अपनेसँ किछु गप करता। बीरू- (हँसि कऽ) हमर सौभाग्य हएत। सार नहितन। ऐमे पुछैक कोन बात, निधोख बाजू। लक्ष्मण- हमर भागीन रामलाल, अही लगसँ गाएब छै अखनि धरि घर नै पहुँचल। एकर की कारण? बीरू- हमर संगे भोरे सात बजे काल्हिए आएल छेलए। लालू दोकानपर चाह पीलौं काका भातीजा। चाहे दोकानपर बैस कऽ किछु गप-सप्प केलौं। करीब दस बजे चाहे दोकानपर सँ उठि घरे दिस गेल। तैके बाद हमरा ओकरा कोनो भेँटो नै अछि। लक्ष्मण- अँए यौ, जे कहियो नै से लोहिएमे। की कारण छेलै से ओकरा चाह पीऐ लए लऽ गेलिऐ? बीरू- कोनो कारण नै छेलै। उ हमर गौआँ- समाज छल। लक्ष्मण- रामलाल अहाँक गौआँ-समाज छल, अछि नै। बीरू- उ ठीके छल हमर गौआँ-समाज। लक्ष्मण- तहन हम अहाँपर केस करब। बीरू- (घबड़ा कऽ) से जे करबाक हुअए से करू। उचितक विजय होइते छै। गलती नै रहतै तँ डर कत्थी के? लक्ष्मण- हम एक बेर और कहि दइ छी जे अहाँ रामलालकेँ उपलब्ध कराए दियौ। नै तँ बेकारमे लफड़ामे पड़ब। बीरू- हम केतएसँ उपलब्ध कराएब। जाउ अपने ताकियौ गऽ। हमर कएल रहत तहन ने। लक्ष्मण- ठीक छै हम सभ जाइ छी। (लक्ष्मण आ झामलालक प्रस्थान) बीरू- (चिन्तित मने) बड्ड तेज आदमी छेलए। बूझि गेल। खाइर, हमरापर कोनो आफत-आसमानी आएत तँ राम किशुन भायपर फेंकि देबनि। सम्हारि लेथिन ओ। ऐ सभमे फेरल छथिन। पटाक्षेप। पनरहम दृश्य (लक्ष्मी अपन दलानपर बैस कऽ कानि रहली अछि।) लक्ष्मी- बौआ रौ, बौआ। रामलाल रौ रामलाल। केतए चलि गेलेँ रौ बौआ। हम केतए छिछिआएब रौ बौआ। (लक्ष्मण आ झामलालक प्रवेश।) लक्ष्मण- बहिन तूँ कान नै। हम दुनू मामा भागीन जेतए भेटतै, तेतएसँ ताकि आनब। सभटा बीरूआ चक्कर चालि छियौ। बहिन, पाहुन कनीओ सुधरलखुन की नै? लक्ष्मी- उ की सुधरथुन। हुनका पेटबे की लोटबे छन्हि। हुनके दुआरे हमर बौआ केतए नै केतए चलि गेल। जा ने बौआ, पाहुन राम किशुन बौआ ऐठाम रहै छथुन। हुनको कहि दिहक आ राम किशुन बौआसँ ऐ सम्बन्धमे किछु विचार पुछियहक। चलि जा दुनू मामा- भागीने। लक्ष्मण- ठीके कहलेँ, बहिन, हुनको सभकेँ जना देनाइ जरूरी छै। कहियो कहि देता एक्को बेर पुछलौं। ठीक छै। तूँ असथीरसँ रह। हम दुनू मामा- भागीने राम किशुन पाहुन ऐठाम जाइ छियौ। (दुनूक प्रस्थान। पर्दा खसैए। दुनू राम किशुन ऐठाम पहुँचलथि। पर्दा उठैए। राम किशुन पेपर पढ़ैत रहैए।) लक्ष्मण- पाहुन प्रणाम। राम किशुन- प्रणाम प्रणाम। सार नहितन। बहुत दिनपर देखलौं? लक्ष्मण- की करबै पाहुन। सभटा ने देखए पड़ै छै। पहुलका जकाँ आब चलबै से हेतै। सभ किछुक समए होइ छै कीने। कहियौ, और सभ कुशल-मंगल छै कीने? राम किशुन- सभ आनन्द आनन्द छै। बौआ, बौआ राम सेवक। राम सेवक- (अन्दरसँ) जी पापा, इएह एलौं। राम किशुन- मामा एलनि, पानि नेने आएब। राम सेवक- जी पापा। (अन्दरेसँ) राम किशुन- आइ हमर दूरा अपनेक आगमनसँ तरि गेल। लक्ष्मण- एहेन कोनो बात नै छै। गरीब आदमी दबाल बरबरि होइ छै। (राम सेवक पानि आनलक। फेर उ अन्दर गेल।) राम किशुन- चरण पखारल जाउ। (लक्ष्मण पएर धोलनि।) लक्ष्मण- पाहुन बड्ड जरूरी काजसँ एलौं। (चाह लऽ कऽ रामसेवकक प्रवेश।) राम किशुन- चाह आबि गेल। पहिने चाह पीअल जाए। गप-सप्प हेबे करतै। लक्ष्मण- एक पंथ दुइ काज हेतै। अहाँक भातिज रामलाल गाएब भऽ गेलै। उ केना भेटतै? राम किशुन- (आश्चर्यसँ) ई बात तँ अहीं मुहेँ सुनै छिऐ। की भेलै, केना भेलै? लक्ष्मण- कालि सात बजे भिनसर बीरू संगे निकलल आ अखनि धरि नै आएल। बीरूकेँ पुछलियनि तँ उ जवाब देलनि- “दसे बजे हमरा लगसँ गेल।” हमरा ऐमे कोनो राज लगैए। हम हुनकापर केस करबनि। ऐमे अपनेक की विचार? (चाह पीब कऽ कप रखै जाइ गेलथि।) राम किशुन- अपने सबहक जे विचार हो, से कएल जाए। ऐमे हमर कोनो विचार नै। कारण ऐमे बड्ड लफड़ा होइ छै। दुनियाँ भ्रष्टाचारसँ जकड़ल अछि। जदी अपनेकेँ बेसी आर्थिक परेशानी हएत तँ हमरे कहब। तँए ऐमे हम एक्को रत्ती नै पड़ैलए चाहै छी। ओना रामलाल नेता जकाँ छौड़ा अछि, केतौ एम्हर-ओम्हर गेल हएत। ओकराे बड्ड फाइल रहै छै। लक्ष्मण- अच्छा अपनामे विचार करै छिऐ। पाहुनकेँ नै देखै छियनि। राम किशुन- अन्दरमे छथि। कनी तबियत खराप छन्हि। लक्ष्मण- कनी भेँट करितियनि। बजाउ ने हुनका। राम किशुन- राम सेवक, कनी बड़का पापाकेँ बजेने आउ। राम सेवक- जाइ छी पापा। (राम सेवक अन्दर जा कऽ लखनकेँ बजाए आनलक। खोंखी करैत लखनक प्रवेश।) लक्ष्मण- (लखनकेँ पएर छूबि प्रणाम कऽ) बड्ड तबियत खराप अछि की? लखन- (खोंखी करैत) खोंखीए नै जान छोड़ैए। कहू, कुशल छेम छै कीने? लक्ष्मण- सभ ठीक छै। खाली एक्केगो गड़बड़ छै। लखन- की? लक्ष्मण- रामलाल हेराए गेल। नै भेटैए। लखन- नीक भेल। बेसी बुधियारकेँ अहिना हेबाक चाही। हमरा चक्कू देखबै छेलए। लक्ष्मण- एना नै बजीयौ, बाप छिऐ अपने। लोक हँसता। लखन- ओकरापर लोक नै हँसल हेथिन आ हमरापर हँसथिन। लक्ष्मण- ओकरोपर लोक हँसल हेथिन। जदी नै तँ अहाँमे किछु कमी हएत। पाहुन, रामलालक सम्बन्धमे की केना सोचै छिऐ? लखन- सोचैत रहू अहीं। हमरा किछु नै सोचबाक अछि। (खिसिया कऽ प्रस्थान) लक्ष्मण- सुनलियनि पाहुन हुनकर टटाएल गप। राम किशुन- सुनलिऐ, हार्दिक कष्ट हेतनि। अहाँकेँ जे जेना विचार होइए से करू। लक्ष्मण- अपने मदति करबै कीने? राम किशुन- देखल जेतै। लक्ष्मण- ठीक छै, हम सभ जाइ छी। प्रणाम। राम किशुन- प्रणाम प्रणाम। (लक्ष्मण आ झामलालक प्रस्थान) पटाक्षेप। सोलहम दृश्य (राजा अपन दारू पार्टीमे मस्त अछि। राजाक संगमे मोस्तकीम आ मनोज अछि। सलीम आ बौधु गेटपर पेस्तौल तनने अछि। चमेली नाचि- गाबि सभकेँ मनोरंजन दऽ रहल अछि) राजा- बीरू अखनि धरि माल लऽ कऽ नै आएल। सभ धुर्तइ घोंसारि देबै। भेल बिआह मोर करबे की? चमेली- राजा साहैब, जी भरि कऽ मजा लिअ। (मस्तीमे) राजा- डार्लिंग, अहाँ बेगैर हम एक क्षण नै जी सकै छी। अहाँ हमर जान छी आ मान छी। चमेली- हमरो मन होइए हरिदम अहीं संग रही। हरिदम अहींक धियान लागल रहैए। (चमेली राजा, मोस्मकीम आ मनोजकेँ दारू पीअबैमे मस्त अछि। तखने बीरू आ राम किशुनक प्रवेश।) बीरू- राजा बाबूक जय हो। अपनेकेँ बहुत-बहुत धन्यवाद। हमर दोस राम किशुनक रस्ताक काँट साफ कऽ देलौं राम किशुन- हमहूँ अहाँकेँ हार्दिक बधाई दइ छी। कारण अहाँ हमरा शांति जीवन जीबैक बेवस्था लगा देलौं राजा- ह ह ह... हमर काजे इएह अछि जे शरणागत आएल बेक्तीकेँ जीबैक जोगार केनाइ। खाली हमरा चाही माल। जेहेन माल तेहेन कमाल। डार्लिंग दुनू गेस्टकेँ मन मस्त करू। (चमेली बीरू आ राम किशुनकेँ दारू पीआ मन बुलंद करैए।) राम किशुन- मांगू रानी, अहाँ की मंगै छी? चमेली- जदी अहाँ हमरापर बड्ड प्रसन्न छी तँ अपन गरदनिक चेन दऽ दिअ। राम किशुन- खोलि लिअ रानी। (चमेली राम किशुनक गरदनिसँ चेन खोलि लेली।) चमेली- धन्यवाद राम किशुन बाबू। राजा- राम किशुन बाबू, निनानबेर हजार टाका हमर उचित अछि। मुदा देरी केलौं, तेँ पूरा एक लाख डाउन करू। बीरू- हमरो सभसँ बेसी लऽ लेबै। कनीए देरी भेलै ने। हम तँ अहाँक पकिया गैंहकी छी आ राम किशुन बाबू हमर दोसे छथि। राजा- जे बाजि देलौं से दिहे पड़त। हम केकरो नै छिऐ। एहेन काजमे हम बापोकेँ नै छोड़बै। बीरू- तहन बस करू। राम किशुन भायकेँ एक लाख टाका दिहे पड़तनि। दियनु भाय। (राम किशुन राजाकेँ एक लाख टाका देलनि।) राजा- बीरू भाय, अपने दू हजार रखि लियौ। अहाँ जोगारीलाल छी। बीरू- अपनेक जेहेन विचार। राजा- जे बाजि देलौं से लऽ लिअ। अहाँसँ हम बड्ड कमाइ छी आ कमाएब। बारू- लाउ। (राजा बीरूकेँ दू हजार टाका देलनि।) आब चलैक आज्ञा देल जाउ। राजा- बेस, जा सकै छी। मुदा एगो बात बूझि लिअ जे हमर सबहक अता- पता किनको नै बतेबै। नै तँ ऐ दुनियाँसँ विदा लिअ पड़त। (बीरू आ राम किशुनक प्रस्थान।) डार्लिंग, ई सभ कमाइ अहीं लए भऽ रहल छै। सभटा अही लिअ। हमरा खाली मजा दिअ। (राजा सभटा पाइ चमेलीक देहपर छींट देलक। उ सभटा पाइ बीछि कऽ ब्लौजमे रखि लेली। चमेली राजाक मुँहमे प्रेमसँ दारू पीआ देलक।) धन्य छी चमेली, धन्य छी। ऐश एकरा कहै छै रानी। दुनियाँमे जे ऐश नै केलक से मनुख नै अछि धनचक्कर अछि। ओना धनो केकरो रजिस्ट्री नै होइ छै। चारि दिनक जिनगी फेर अनहरिया राति। (राजा चमेलीकेँ कोरामे बैसाए लइ छथि।) पटक्षेप। तेसर अंक पहिल दृश्य (लक्ष्मी, झामलाल, लक्ष्मण आ सियाराम बैस कऽ केसक सम्बन्धमे विचार-विमर्श कऽ रहल छथि।) लक्ष्मण- की भागीन, बीरूपर केस करबै? झामलाल- मामा, की कहू की नै, किछु नै फुराइए। लक्ष्मण- की बहिन, तोहर की विचार? लक्ष्मी- तूँहीं सभ विचार करहक। झामलाल- मामा, जदी अपना सभ उनटे फँसि जाइ। तहन की हेतै? अपना लग तँ कोनो पकिया सबूत तँ नै अछि। लक्ष्मण- से तँ ठीके। मुदा बीरूक गप-सप्पसँ लागल जे ओएह सभ करामात केलक। पाहुन, अपनो किछु विचार दियौ। चुप-चाप बैसने काज नै चलत। अहीं कहू, आइ सात दिन भऽ रहल छै। मुदा रामलाल भागीन घूमि कऽ नै आएल। बीरूए संगे गेल रहए। सियाराम- बात तँ विचारणीय जरूर छै। एना भेलै तँ भेलै किए? हमर विचार इएह अछि जे अहाँ सभ केसक चक्करमे नै जाउ, फक्कर बना देत। ओना फक्कर छेबो करी। अपने बुजुर्ग छिऐ बुझिते हेबै जे थाना पुलिस मालबलाकेँ होइ छै। ओना अपनेकेँ जे मन होइए से अबस्स करू। हम के रोकनिहार? झामलाल- मामा, काका ठीके कहै छथिन। हमर इएह विचार जे केस- फौदारीक चक्करमे नै पड़ी। जे भेलै तेकरा बिसरि जाइ। मुदा सतर्क रही। लक्ष्मण- सतर्क तँ हरिदम रही। ई बड्ड नीक बात। मुदा छलबुद्धिक सतर्कताक आगू सुबुधिक सतर्कता फाइल रहै छै। एना जे बिसरबै भागीन, तँ कहियो अहूँ पार भऽ जाएब आ कहियो हमहूँ। एतबे नै, कहियो पूरा समाजो। कारण ओकरा हिम्मत बढ़ि जेतै आ उ हरिदम मनमाना करैक पूरा प्रयास करत। झामलाल- मामा, ईहो बात काटैबला नै अछि। बड़ी दूरक बात कहलिऐ। लक्ष्मी- (कानि कऽ) हमर बेटा गेल तँ गेल। मुदा दोसरोक बेटा नै जाए तेकर जोगार अबस्स हेबाक चाही। एकर बीड़ा तँ हमरे उठबऽ पड़तै। कारण हम भुक्तभोगी छी। समाजसँ सहयोग लेबै। हमरा पूरा भरोस अछि जे ऐ बीड़ामे समाज अबस्स सहयोग करता। झामलाल- माए, तूँ कान नै। कमजोर छेँ। माए, तूँ नै बुझै छिहीन जे समाज जेम्हर खीर तेम्हर भीड़ लगबै छै। लक्ष्मी- कखनो-कखनो सेहो होइ छै। मुदा हम जौं एना सोचबै तँ समाजक मौका हूसि जेतै। मौकाक फायदा उठेबाक चाही। (लक्ष्मी आँखिसँ नोर बहैए।) लक्ष्मण- बहिन तूँ कान नै। धैर्य राख। संतोख कर। मुदा हम छोड़बै नै। केस करबेटा करबै। (अपनेआपकेँ) भारतमे विधायिका, न्यायपालिका आ कार्यपालिका तीनू भ्रष्ट छै। मुदा ओहीमे केतौ-नै-केतौ आ कनीओ-ने-कनीओ जान छै। तँए ने भारत चलि रहलए। भागीन, देखियौ तँ घरमे रामलालबला कोनो कागत-पत्तर छै कीने। जाउ, जल्दी आउ। थाना जाए पड़त। (झामलालक प्रस्थान) सियाराम- सार, नै मानबै अहाँ। खाइर अपनेकेँ जे फुड़ाए से करू। हम जाइ छी। लखन भैयाक तबियत खराप छेलनि। (सियारामक प्रस्थान। रामलालबला किछु कागत-पत्तर लऽ कऽ झामलालक प्रवेश।) झामलाल- मामा, इएह लिअ कागत-पत्तर। (लक्ष्मण कागत लऽ कऽ गौरसँ देखि रहल छथि।) लक्ष्मण- बाह! बाह! रामलाल भागीन, काज तूँ बड्ड पकिया केने छेँ। झामलाल भागीन, देखियौ थाना, एस.डी.ओ. आ कलक्टरकेँ देल गेल दरखासक टूरू कॉपी। ई सभटा कागत बड्ड काज देत। सेरिया कऽ राखू आ चलू थाना। केस कऽ दइ छिऐ बीरूपर। (लक्ष्मण आ झामलाल थानापर जा रहल अछि। पर्दा खसि पड़ल। किछु दूर गेलापर राम किशुनक प्रवेश। पर्दा उठैए।) राम किशुन- सार रूकू। (दुनू मामा- भागीन रूकि गेल।) लक्ष्मण- की यौ? की बात? राम किशुन- केतए जाइ छी, दुनू मामा- भागीने? लक्ष्मण- जाइ छिऐ थाना। बीरूपर केस कऽ दइ छियनि। कहने जे रहू। राम किशुन- हमर विचार अछि जे अहाँ सभ केसक चक्करमे नै पडू। लक्ष्मण- तखनि की करू? राम किशुन- समाजमे फरिया लिअ। लक्ष्मण- समाजमे बेसी काल मुँह देखि मुंगबाबला फैसला होइ छै। पंच भगवान जेम्हर खीर तेम्हर भीड़ लगा दइ छथिन। ई फलना बाबू छथि। हिनकर गलतीकेँ गलती केना कहबै। हिनकर प्रतिष्ठा चलि जेतनि। एहेन तरहक पंचैती बेसी काल होइ छै। जौं केतौ-केतौ उचित पंचैती भऽ गेल तँ उचित वक्ताकेँ शांत नै रहऽ दैक प्रयास कएल जाइए। राम किशुन- सार, हम छी कीने। उचिते हेतै। लक्ष्मण- हमरा पूरा बिसवास समाजपर अछि। मुदा समाजक जन प्रतिनिधि स्वार्थमे अपन करतब बिसरि जाइ छथिन। राम किशुन- अहाँकेँ कोनो तरहक दिक्कत नै हेतै। हम छी। लक्ष्मण- (किछु सोंचि कऽ) अच्छा, एगो गप कहू तँ, जदी थानेमे केस कएल जाए तँ अहाँ केते मदति करब? राम किशुन- हम किछु मदति नै करब। ऐमे हमरा बड्ड नोकशान अछि। लक्ष्मण- अहाँकेँ ऐमे की नोकशान अछि? राम किशुन- अहाँ जौं दृढ़ संकल्पित छी जे बीरूपर केस थनेमे करब तँ हमरा अपन नोकशान कहे पड़त। लक्ष्मण- बाजू ने, दालिमे किछु कारी छै की? राम किशुन- नहिए मानबै, नहिए मानबै। लक्ष्मण- नै यौ, हम ओकरा नै छौड़बै। जे हेतै से देखल जेतै। राम किशुन- तँ सुनि लिअ, जौं अहाँ बीरूपर केस करबै तँ हम फँसबै। केससँ वा कोनो जोगारसँ अहाँक भागीन घूमि कऽ नै आएत। ओना अहाँ केसो करब तँ अहाँ नै जीतब, ई गाइरेन्टी। पुलिस, एस.पी., डी.एस.पी., कलक्टर इत्यादि सभ हम्मर छी। बेकारमे अहाँ सभ लफड़ामे पड़ि जाइ जाएब। से अपन सोचि लिअ। बादमे हमरा किछु नै कहब। हम जाइ छी। (राम किशुनक प्रस्थान।) लक्ष्मण- भागीन, चलू गामपर। पहिने समाजमे विचार कऽ लेबै। समाज की राय- विचार दइ छथिन। तइ हिसाबे अगिला कारबाइ करब। झामलाल- चलू मामा, मामा यौ मामा, हम नै बुझै छेलिऐ जे राम किशुन काका एते बड़का स्वीट प्यॉयजन अछि स्वीट प्यॉयजन। बजता तँ लागत जे एते हिलसगर लोक दुनियाँमे कियो नै छथि। एकटा पूर्ण आदर्श बेक्तीकेँ जे हेबाक चाही तइसँ कनीओ कम नै बुझाइ छथि। मुदा तरे तर करतब देखियनु। लक्ष्मण- भागीन, अपन कमीकेँ नुकबै लए कोनो कला चाही ने। झामलाल- हँ मामा, तैमे परिपूर्ण छथि। मुदा एगो गप कहि दइ छी जे “मरता क्या नहीं करता” हम छोड़बनि नै, छोड़बनि नै। पटाक्षेप। दोसर दृश्य (लक्ष्मी, झामलाल आ लक्ष्मण दूरापर चिन्तित मने बैसल छथि।) लक्ष्मण- भागीन, ठीके कहलौं अहाँ। उ अस्सल स्वीट प्यॉयजन अछि। बजबै तँ कियो बिसवास नै करत। लक्ष्मी- बौआ, केकरा दऽ कहै छिहीन? लक्ष्मण- कहबौ बहिन तँ कनी- मनी नै बहुते आश्चर्य हेतौ। लक्ष्मी- कहीन ने बौआ, केकरा दऽ कहै छिहीन? लक्ष्मण- तोरे दियाद राम किशुन दऽ कहै छिऐ। लक्ष्मी- की भेलै से? लक्ष्मण- की हेतै? जे भेलै से वएह केलक। लक्ष्मी- खोलि कऽ कही ने। लक्ष्मण- की कहबौ खोलि कऽ? तोरा बुझैबला नै छै। लक्ष्मी- कहीन ने बौआ, की बात छै? नै तँ मनमे दुगदुग्गी रहत। झामलाल- माए तूँ बड्ड जिद्द करै छीहीन। एते नै करक चाही लक्ष्मी- तोहर माए छी आ बौआक बहिन छी। कियो आन छी? गप-सप्प तेहने केलेँ तूँ सभ जे बुझैक जिज्ञासा बड्ड भेल। जदी तूँ सभ कहनाइ अनुचित बुझै छेँ तँ नै कह। आब की कहबौ? लक्ष्मण- कहनाइ तँ अनुचित छैहे, मुदा बड्ड जिज्ञासा छौ तँए कहै छियौ। राम किशुनक किरपासँ रामलाल ऐ दुनियाँमे नै रहलौ। (ई बात सुनिते मातर बेहोश भऽ खसि पड़ली। लक्ष्मण लक्ष्मीकेँ सम्हारि कऽ कोरामे रखि मुँहपर गमछा हौंकै छथि। झामलालकेँ अक्क-बक्क नै फुराए रहल छन्हि। उ ठाढ़ अछि।) भागीन, ठाढ़ की छी बिअनि आ पानि नेने आउ। (झामलाल बिअनि आ पानि अन्दरसँ आनलक। लक्ष्मण पानिक छींट्टा लक्ष्मीक मुँहपर दइ छथिन। फेर मुँहो पोछै छथिन। दुनूक आँखिसँ नोर बहि रहल छन्हि।) भागीन, अहाँ खाली मुहेँपर बिअनि हौंकू। (झामलाल मुँहपर बिअनि हौंकि रहल अछि। किछुएकाल पछाति लक्ष्मीकेँ होश एलनि।) लक्ष्मी- (उठि बैस कऽ) की कहने छेलहीन बौआ? एक बेर और कहीन तँ। बिसरि गेलिऐ। लक्ष्मण- कहाँ किछु कहने छेलियौ। लक्ष्मी- कथीदुन, कथीदुन, कथीदुन नै कहने छेलहीन। मने नै पड़ैए। लक्ष्मण- समाजिक बैसार दऽ कहने हेबौ। लक्ष्मी- हँ हँ सएह। सएह कहीन। लक्ष्मण- समाजमे एहेन तरहक घटना घटि गेल। मुदा अपना सभ समाजकेँ नै कहलियनि। ओना ऐ समाजसँ हमर समाज अलग अछि। मुदा तोरा लऽ कऽ हमहूँ जूड़ल छी। हमर विचार अछि जे बैसार लेल सौंसे समाजमे ढोलहो दिआ दैतिऐ। समाज अबितथि तँ कहितियनि जे एना-एना घटना भेल। से अपने सभ की विचार दइ छिऐ। जे जेना कहै जेबै से करबै। लक्ष्मी- विचार बड्ड नीक छौ। लक्ष्मण- की भागीन, अहाँक विचार? झामलाल- ऐ विचारकेँ के काटत? लक्ष्मण- तहन जाउ चमरटोली। अपन डगर दइ बलाकेँ ढोल लऽ कऽ बजेने आउ। झामलाल- बेस मामा, हम जाइ छी। (झामलालक प्रस्थान) लक्ष्मी- बौआ, समाजकेँ सभ बात कहियहीन। बीरू दऽ कहियहीन पहिने। फेर पाहुन दऽ सेहो कहियहीन। लक्ष्मण- हँ हँ, बैसार हुअ ने दहीन, सभटा बात खोलबै। मने मन गूँड़ -चाउर फँकलासँ काज नै ने चलतै। (झामलालकेँ हरिकेशरक संग प्रवेश) हरिकेशर- (लक्ष्मणसँ) सार नहितन, बहुत दिनपर देखलियौ। कनियाँ नै छोड़ैत रहै छौ। लक्ष्मण- सार, मजाक छोड़ अखनि। जरूरी काज छै। हरिकेशर- सार, एते दिनपर भेटलेँ। केना छोड़ि देबौ। कही न, हम नै सकै छी तँए गामे-गामे बौआइ छी। लऽ चल हमरे तूँ अपन गाम। देखै छिऐ तोरा मौगीकेँ केते दम छै? लक्ष्मण- ओतए जेबेँ गऽ आ एतए दुनू आदमी छीहे। लऽ चल तूँ अपने कनियाँ लग। तूँ ढोल बजबीहेँ आ हम दुनू उठा-पटक करब। हरिकेशर- सार, बड्ड जुआएल छेँ रौ। अच्छा कह, की कहलेँ? लक्ष्मण- कहलियौ जे सौंसे गाममे ढोलहो दऽ दहीन जे लखन ऐठाम बैसार छिऐ। से अबस्स सभ कियो पहुँचबै कष्टो कऽ के। कियो पुछता तँ कहबनि जे “हुनकर बेटा रामलाल हेराए गेलै, तही दऽ विचार-विमर्श हेतै।” बहिन दुआरे किछु कम्मे कहलौं। ई कमजोर दिलक अछि। हरिकेशर- ठीक छैै। तँ हम जाइ छी। ढोलहो हम दऽ दइ छिऐ। (पर्दा खसैए। हरिकेशर ढोलहो दऽ रहल अछि) साँझमे सामुदायिक भवनपर बैसार लखनक कनियाँ करबैए। सौंसे गौआँकेँ हकार अछि। (बुधनक प्रवेश) बुधन- की हौ हरिकेशर, कथीक ढोलहो छिऐ? हरिकेशर- नै बुझलीहीन लखनक बेटा हेराए गेलै तही दऽ विचार-विमर्श हेतै। (बुधनक प्रस्थान। घूरनक प्रवेश) घूरन- की हौ ढोलबला, कथीक ढोलहो दइ छहक? हरिकेशर- जो, बुधनाकेँ पूछि लीहनि। घूरन- आ तूँ कथी लए एलहक? कटहर पकड़ै लए? हरिकेशर- (खिसिया कऽ) लखन भैयाक बेटा रामलाल हेराए गेलै, तही दऽ विचार-विमर्श हेतै समाजमे। ओकरे बैसार छिऐ सामुदायिक भवनपर। घूरन- हँ, ई भेलह, मनुखताइ। आकि हरिदम टटाएले गप। (घूरनक प्रस्थान। किछुए काल पछाति ढोलहो दैत-दैत हरिकेशरोक प्रस्थान।) पटाक्षेप। तेसर दृश्य (सामुदायिक भवनपर सियाराम, लक्ष्मण आ झामलाल उपस्थित छथि। बुधन, घूरन, भूटन, पलटू आ चिनमाक प्रवेश।) लक्ष्मण- गरीब लोकक बैसार छिऐ। साँझसँ राति हुअ जा रहल अछि। अखनि एतबे गौआँ सभ पहुचला। पंचैती हएत की नै। से नै कहि। सियाराम- हमरा अबेर भऽ रहलए। हम चलि जाएब, सार। लक्ष्मण- बैंह रूक। जै काज लए एलौं से करू। तहन जाएब। की करबै, अपन अख्तियारक गप तँ नै अछि। सौंसे गौआँ एता। सभकेँ सभ तरहक काज रहै छन्हि। सभ सम्हारिए कऽ ने एता। (हरिकेशरक प्रवेश) आ सार आ, बैस। सार, कनियाँ नै छोड़ै छेलौ। हरिकेशर- सार, कनियाँ किए नै छोड़त। हमहीं नै छोड़ै छेलिऐ। (राम किशुन, रामसेवक, लखन, जगन्नाथ आ बीरूक प्रवेश) लक्ष्मण- आउ, बैसै जाइ जाउ। (मंचपर उपस्थित सभ कियो बैस गेलथि। मुदा लक्ष्मण आ झामलाल ठाढ़ भऽ गौआँक प्रतीक्षामे छथि।) अखनि धरि सरपंच महोदय नै पहुँचा अछि। बिसरि तँ नै गेला ओ। झामलाल- बिसरल तँ नै हेता। हुनको बड्ड केस रहै छन्हि कीने। (गंगाराम, मोहन आ पंचूक प्रवेश) आउ श्रीमान आउ, पधारल जाउ। (तीनू आदमी बैसलथि।) गंगाराम- और कियो एता आकि पंचैती शुरू कएल जाए? लक्ष्मण- हँ हँ, शुरू कएल जा सकैए। कारण बड्ड बिलंब भऽ गेल। गंगाराम- बिलंबक कारण हम क्षमाप्रार्थी छी। की करबै हमहीं। बड्ड फाइल रहै छै। एते केतौ झगड़ा-झंझट हुअए। फरियबैत-फरियबैत अक्कछ रहै छी। तैयो केते ठाम ओझराएले रहैए। लक्ष्मण- सरपंच साहैब, पंचैती शुरू कएल जाए। छूटल बढ़ल जे कियो एता, हुनका स्वागत हेतनि। गंगाराम- की यौ लखन, अपने पंचैती किए बैसेलिऐ? लखन- (अकचका कऽ) हम किए बैसेलिऐ। हमरा किए पुछै छी? गंगाराम- तब किनका पुछबनि? ठोलहोमे अहींक नाओं कहै छेलए। लखन- से कहौ, मुदा हमरा किछु नै बुझलए। नै मारी माछ, नै उपछी खत्ता। गंगाराम- तहन बैसार करौनिहार के छथि? (लक्ष्मण आ झामलाल ठाढ़ भऽ जाइ छथि।) लक्ष्मण- हम सभ छी, सरपंच साहैब। गंगाराम- अहाँ के थिकौं? हमर गौआँ तँ नै लगै छी। लक्ष्मण- जी, अपनेक गौआँ हम ठीके नै छी। हम लखनक सार छी। नाओं लक्ष्मण छी। गंगाराम- अहाँकेँ ऐ पंचैतीसँ कोन माने-मतलब? लक्ष्मण- हमर पाहुन लखन अपन घरसँ बगदल छथि। हुनकर जेठ बेटा रामलालक हत्या अही गामक आदमी करबौलनि। सोगाएल-पीड़ाएल हमर बहिन जीती की नै जीती, से नै कहि। मुदा हमर पाहुन पाथर बनि राम किशुन पाहुन ऐठाम पड़ल रहला, एक्कोबेर हुलकीओ नै देलथि। लखन- सरपंच साहैब, पुछियनु तँ हमरा हत्या दइ के कहलक आ कहिया कहलक? (आँखिसँ नोर बहै छन्हि।) हँ हराइ दऽ लक्ष्मण अबस्स कहने रहथि। ओना हत्यो दऽ कहितथि तँ हम कोनो कान बात नै दैतिऐ। कारण ऊ छौड़ा हमरा चक्कू भोंकै छेलए। गंगाराम- की यौ लक्ष्मण, ठीके बात छै? लक्ष्मण- बात तँ ठीक छै। मुदा ऊ अपन माएकेँ बँचाबैले एना केने रहाए। जदी आज्ञा होइ तँ अपन बहिनकेँ एतए बजाबी। गंगाराम- बजाउ। फेर जल्दीए चलि जेती। लक्ष्मण- झामलाल, माएकेँ बजा आनहुन। झामलाल- जी मामाजी। (झामलाल अन्दर जा कऽ लक्ष्मीकेँ बजा आनलक। लक्ष्मीक आँखिसँ दहो-बहो नोर जा रहल छन्हि।) गंगाराम- (लक्ष्मीसँ) लखन जी घर किए छोड़ि देलथि? लक्ष्मी- हमर एगो बेटा रामलाल तँ दुनियाँसँ चलि गेल। (कानए लगैए) गंगाराम- कानू नै, धैर्य रखि बाजू। लक्ष्मी- आब एगो बेटा झामलाल बाँचल आ एक्केटा भाए लक्ष्मण अछि। ओइ दुनूक सप्पत खा कऽ कहै छियनि जे रामलाल नै रहितए तँ ओही दिन हमरा ओ जान लऽ नेने रहतथि। परिवारक नीक-अधला दऽ विचार देलियनि तँ ओ अनधून मारए लगलथि।। ओकरा नै देखल गेलै तँ हुनका चक्कू देखा हमरा बँचौलक। हुनके चालिसँ हमर बेटा दुनियाँसँ चलि गेल। (कानए लगैए) गंगाराम- ठीक छै अहाँ चलि जाउ। (लक्ष्मीक प्रस्थान) बुधन- यौ सरपंच साहैब, अहाँ की सँए-बौहक झगड़ामे लागल छी। एगो कहबी छै- ‘सँए-बहुक झागड़ा, पंच भेल लबड़ा।’ हमरा जाइक आज्ञा दइ छिऐ? गंगाराम- रूकू ने, जेबे करब। राति अपन छिऐ। बुधन- हमर अहाँक ने राति छै आकि महिंसोकेँ? महिंसोकेँ मारिते डिरीआइत छोड़ि आएल रही। ओकरा लऽ कऽ भरि राति बौआए पड़त। परोकेँ कोनो ठेकान रहै छै। गंगाराम- लक्ष्मण, आगू बाजू। और कोनो गप? लक्ष्मण- अस्सल गप तँ उखड़बो नै कएल। मेाहन- उखाड़बै तहन नै उखड़तै। मने मन गूड़-चाउर फँकलासँ समस्याक समाधान केना हएत? अपन समस्या बाजू। लक्ष्मण- ओकील साहैब, बीरू संगे हमर जेठ भागीन करीब जीन महिना पहिने भोरे भोरे बहराएल आ फेर घूमि कऽ ओ नै आएल। हम शकपर बीरूपर केस करए थाना जाइत रही दुनू मामा भागीन कि राम किशुन रस्तेसँ ई कहि घूमा लेलनि जे ‘अहाँ सभ केसक चक्करमे नै पड़ू। समाजेमे फरिया लिअ। बीरूपर केस करबै तँ हम फँसबै। केससँ वा कोनो जोगारसँ अहाँक भागीन घूमि कऽ नै आएत। “हुनके आदर करैत हमरा लोकनि समाजक समक्ष छी। जेना आज्ञा होइ। मोहन- की यौ बीरू, अपने ऐ सम्बन्धमे किछु कहबै? बीरू- रामलाल हमरा संगे चाह पीऐ लए ठीके गेल। मुदा चाह पीब कऽ उ अपन घर दिस गेल आ हम अपन घर दिस एलौं। मेाहन- उ अहाँकेँ संग केलक, की अहाँ ओकरा संग केलिऐ? बीरू- हमहीं ओकरा संग कके लऽ गेलिऐ। मोहन- कहियो और संग करै छेलिऐ ओकरा? बीरू- नै कहियो। मोहन- तँ ओइ दिन ओकरा संग किए केलिऐ? बीरू- कोनो खास बात नै छेलै। एक आदमीसँ हमरा अपन पाइ ओसुलबाक छल। बहुत दिनसँ उ ठकै छेलए। मेाहन- ओइ आदमीकेँ एतए अखनि हाजिर कऽ सकै छी? बीरू- नैै। मेाहन- किए? बीरू- कारण ओइ आदमीक आवासक ठेकान अनिश्चित अछि। मोहन- ओइ आदमीसँ अहाँक केहेन सम्बन्ध अछि? बीरू- कोनो खास नै। साधारण लेन- देन होइए। मोहन- सरपंच साहैब, नोट कएल जाए जे ओइ आदमीसँ लेन- देन होइए। मुदा ओकर आवासक ठेकान अनिश्चित अछि। उ आदमी एतए हाजिर नै भऽ सकैए। राम किशुन, बीरूक गप केतए धरि साँच अछि से किछु बताएल जाए। राम किशुन- हमरा जनतबे बीरूक गप नब्बे प्रतिशत साँच अछि। मोहन- दस प्रतिशत केतए कम अछि? राम किशुन- उ आदमी जे एतए हाजिर नै भऽ सकैए, गुंडाराज अछि। मोहन- अहाँ ओइ गुंडाराजकेँ केना जानै छिऐ? राम किशुन- बीरू हमर परम अपेक्षित छथि। हिनका हुनकासँ परिचए छन्हि। ई हुनकासँ हमरो परिचए करबौलनि। मोहन- अहाँक ओइ गुंडाराजसँ परिचए करबाक की प्रयोजन? राम किशुन- माथपर बड्ड टेंशन रहाए। ओहीसँ मुक्ति पाबैक लेल ई रस्ता चुनलौं। मोहन- बड्ड टेंशन की रहाए माथपर? राम किशुन- एन.एच.बला पाइक टेंशन रहाए। मोहन- की आब ओइ टेन्सनसँ मुक्त छी? राम किशुन- हँ, आब पूर्ण मुक्त छी। मोहन- केना बुझै छिऐ जे अहाँ पूर्ण मुक्त छी? राम किशुन- कारण नै उ देवी छै आ नै उ कराह छै। मोहन- माने ई जे रामलाल आ ओकर प्रयास अहाँपर आब नै रहल। राम किशुन- कहैत तँ लाज होइए मुदा कहनाइ उचित बुझाइए- जी। मोहन- सरपंच साहैब, नोट कएल जाए जे रामलाल आ ओकर प्रयास आब नै रहल। जगन्नाथ- सरपंच साहैब, हमरा जनतबे सक्षम परिवार रहने दियाद- दियादमे इर्ष्या- द्वेषक भावनासँ राम किशुनकेँ फँसाएल जा रहल अछि। राम किशुनक उन्नति हिनका दियादकेँ नै देखल गेलनि। किछु माल टानैक षडयंत्र रचल बुझाइए। गंगाराम- जगन्नाथ बाबू, अपने शांत रहियौ। मोहन बाबू, किछु और पुछबनि राम किशुनसँ। मोहन- जी, एक्केगो और। राम किशुन, अपने निधोख सभ सवालक जवाब देलौं। एकरा छिपाइओ सकै छेलौं हेन। किए ने छिपेलौं? राम किशुन- ई बैसार सामजिक अछि। सभ कियो अपने छथि। सभ कियो हमरा प्रतिष्ठित आदमी बुझै छथि। हम पैघो गलती कऽ लेबै तँ पंच हमरा गलतीकेँ छोट-छीन गलती बूझि माफ कऽ देथिन। कारण हम छल-बल-कलसँ परिपूर्ण छी। ई हम अपन दिलक गप अप्पन जानि कहि देलौं। सभठाँ थोरहे कहितिऐ। घूरन- सरपंच साहैब, आब ऊ जमाना गेलै। जौं उचित फैसला नै हएत तँ हल्ला-फसाद उठत। ऐं यौ, मुँदुब्बराहक बौह सभकेँ भौजाइए होइत रहत सभ दिन। मालपर कमाल नै कऽ देबै नै तँ बबाल भऽ जाएत। गंगाराम- औगताउ नै, शांत रहू। पहिने फैसला सुनू तहन किछु बाजब। राम किशुन- सरपंच साहैब, घुरना एकदम ठीक बाजि रहल अछि। फैसला तँ एहेन होइ जे बुझाइ सुप्रीम कोर्ट समाजेमे अछि। लक्ष्मण- सरपंच साहैब, ऐ बातक चर्च एक्को बेर नै भेल जे एन.एचमे केते पाइ उठलै आ केते राम किशुन हमरा पाहुनकेँ देलखिन तथा हमरा पाहुनकेँ ओ अपना ऐठाम किए रखने छथिन? सरपंच- अहीं बाजू, की गप छै? लक्ष्मण- झामलाल भागीन, अहीं कहियनु। माए जे कहने रहथि। झामलाल- एन.एच.क नोटिस 80 हजारक छेलै। पाइ उठलै आठ लाख आ हमरा बाबूकेँ राम किशुन काका देलखिन पचास हजार मात्र। ई गप हमर भैया भू-अर्जन कार्यालयसँ पता लगेलखिन। विवादक जड़ि इएह छी। बड़कासँ छोटका घरमे कम की बेसी झगड़ादन होइते रहै छै। जदी खिसिया कऽ हमर बाबू हिनका ऐठाम चलिए गेलखिन तँ हिनका चाही जे समझा बुझा कऽ बाबूकेँ पठा दैतथि। गंगाराम- की यौ राम किशुन, ऐ गपपर किछु कहबै अपने आकि आफिससँ पता लगाबए पड़तै? राम किशुन- अहाँकेँ आफिससँ पता करबाक हुअए तँ हम मनाही नै कऽ सकै छी। ओना झामलाल पाइक सम्बन्धमे ठीके कहलक। ऑफिसक स्थिति अपने बुझिते छिऐ जे केते भ्रष्ट छै। जेतए धरि लखन भैयाक गप छै तँ हम हुनका बाप जकाँ मानै छेलिएे आ ऊहो बेटा जकाँ मानैत रहथि। ओ हमरा ऐठाम भागि कऽ एला। हम हुनका केना बैला दैतियनि? अहीं कहू? भूटन- हौ हौ सरपंच साहैब, जल्दी फैसला दियनु। बड्ड राति भऽ गेल। घरपर कनियाँ केना हेती केना नै। जुग-जमाना केहेन भऽ गेलै से अपने बुिझते हेबै। गामपर रहै छी तहन छौंड़ा सभ हुलुक-बुलुक दैत रहैए आ नै छी तँ की करैत हएत। तहूमे बिआह केना सालो नै लागल। बालो-बच्चा नै भेल। जल्दी करियौ। गंगाराम- की यौ पंच भगवान सभ, फैसला सुनाएल जाए? बुधन- सुनेबै तँ सुनबियौ। नै तँ चलि जाएब और की। गंगाराम- तँ सुनै जाइ जौ। राम किशुनकेँ जुर्माना नै मदति रूपे लक्ष्मीकेँ पाँच लाख टाका दिअ पड़तनि आ लखनकेँ बाइइज्जत अपन घर समझा बुझा कऽ पठाबए पड़तनि। भूटन- अँए यौ सरपंच साहैब, राम किशुन लक्ष्मीकेँ मदति रूपेँ पाँच लाख टाका देथिन। कोन सपेत कऽ यौ? की उ बड़का दानी छथि? रामलालकेँ हत्या करबाकऽ उ बड़का दानी भऽ गेला। कहियौ ने पाँच लाख जुर्माना लगतनि। लगैए जे अहुँ बिका गेल छी। गंगाराम- देखियौ बुजुर्ग आदमीकेँ हरमूठ जकाँ नै कहल जाइ छै, घूमा-फिरा कऽ कहल जाइ छै। पलटू- उ बुजुर्ग आदमी छथि तँए समाजमे हत्या करबै छथिन। हँ यौ, बजैमे मुहसँ मौध चुऐत रहै छन्हि आ काज बीखबला करै छथि। हुनका सौसें समाजसँ माफी माँगए पड़तनि आ जुर्माना पाँच लाख टाका लगतनि। गंगाराम- सएह हेतै की। की यौ श्रोता समाज, फैसला पसीन भेल? सभ समाज- जी, पसीन भेल। (राम किशुन उदास भऽ गेल।) गंगाराम- की यौ राम किशुन, हुनका पाइ कहिया देबनि? (राम किशुन अबाक भऽ जाइए) किए नै बाजै छी। जल्दी बाजू। बिलम भऽ गेलनि सभकेँ। राम किशुन- जौं समाज हमर इज्जत नै केलनि आ अहूँ सभ नै केलौं तँ हम अपन मनक बात बाजि दइ छी।, मानलौं तैयो बढ़ियाँ नै मानलौं तैयो बढ़ियाँ। हम एक लाख टाका देबनि जुर्मने सही। ऐसँ बेसी हमरासँ संभव नै अछि। सभ समाज- ई नै हएत। ई नै हएत। चिनमा- तहन सभ समाज झामलालकेँ संग देबनि जइसँ हेतै तइसँ। उ अपन कोटेसँ फरिया लेतै। राम किशुन- (खिसिया कऽ) ठीक छै, तहन इएह रहए दियौ। देखबै माए केते दूध पीएने छै आ के के पीठपर रहै छै? गंगाराम- राम किशुन, अहाँ एहेन सुन्दर पंचैतीकेँ नै मानलौं, अबस्स पछताएब। अहाँ हमरो बेकूफ बनेलौं। आब हमहूँ झामलालक संग देब। राम किशुन- (क्रोधित भऽ) जाउ, जे करबाक वा करेबाक हएत से करब। अहूँकेँ चिह्नलौं। पटाक्षेप। चारिम दृश्य (झामलाल अपना ऐठाम एस.डी.ओ. लग आ कलक्टर लग धरना प्रदर्शनक योजना झामलाल आ लक्ष्मण दुनू मामा-भागीन बना रहल अछि झामललाल ऐठाम।) लक्ष्मण- भागीन, जखनि सौंसे गौआँ अपना सबहक संग अछि तँ पहिने एस.डी.ओ. लग धरना प्रदर्शन करू। तहन कलक्टर लग सेहो करब। झामलाल- अगुआ अहींकेँ रहए पड़त। लक्ष्मण- तइले कोनो बात नै। हम तैयारे छी मुदा अहाँकेँ पीठपर रहे पड़त। झामलाल- हमहूँ पूर्ण तैयार छी। कखनि चलब मामा? लक्ष्मण- अखने चलब। झामलाल- दुइए गोटेसाँ धरना प्रदर्शन हएत? लक्ष्मण- दुइए गोटे सौंसे गाम नारा लगबैत पहिने घूमि जाएब। समर्थक अपने संग दऽ देता। हमरा आशा अछि जे अपना सभ भारी संख्यामे भऽ जाएब। झामलाल- तहन चलू। लक्ष्मण- चलू भागीन। अपना सभ नारा लगाउ। झंडो पकड़ू। राम किशुनकेँ फाँसी दिअ। झामलाल- फाँसी दिअ, फाँसी दिअ। (पर्दा खसैए) लक्ष्मण- बीरूकेँ फाँसी दिअ। झामलाल- फाँसी दिअ फाँसी दिअ। (बुधन, घूरन, भूटन, पलटू आ चिनमाक प्रवेश) लक्ष्मण- रामलालक हत्यारा। हाय! हाय! सभ कियो- हाय! हाय!! हाय! हाय!! लक्ष्मण- अधिकार छिननिहारक मूर्दावाद। सभ कियो- मूर्दावाद, मूर्दावाद। लक्ष्मण- एस.डी.ओ. मूर्दावाद। (पर्दा उठैए। एस.डी.ओ. रामभद्र आ चपरासी अपन कार्यालयमे व्यस्त छथि। कार्यालयक समक्ष सभ कियो धरना प्रदर्शन करैत नारा लगाए रहल छथि।) रामभद्र- (प्रदर्शनकारी लग आबि) अपने सभकेँ की कष्ट? किए धरना परदर्शन करै छी। (सभ कियो शांत भऽ जाइए) लक्ष्मण- साहैब, रामलालक हत्यारा राम किशुनकेँ फाँसी दिआएल जाए। रामलाल अपन अधिकार माँगलक तइले ओकर हत्या करबाएल गेल। उ लड़का अपने लग एगो पेटीशनो देने रहाए जेकर ट्रू कॉपी हमरा लग विद्यमान अछि। (सियाराम आ लक्ष्मीक प्रवेश। लक्ष्मी कानए लगैए। रामभद्र- ई जनानी के छथि? लक्ष्मण- ओही लड़काक माए छथि। रामभद्र- अहाँ कानू-खीजू नै। देखै छिऐ, बुझै छिऐ की बात छिऐ। तहन ने कोनो बात? लक्ष्मी- (चूप भऽ) हाकिम हमर बेटा मरैसँ पहिने अपने लग दरखास देनेए। अपने ओइपर कोनो धियान नै देलिऐ। रामभद्र- अच्छा, आब धियान देबै। लक्ष्मी- आब धियान देलासँ हमर बेटा घूमि कऽ आएत की? रामभद्र- से तँ असंभव। से जे कही। लक्ष्मी- से की कहबनि। मनमे संतोख लेल राम किशुनकेँ उचित सजा अबस्स भेटए। रामभद्र- ठीक छै। अहाँ सभ जाउ। यौ नेताजी, ओइ दरखासक ट्रू कॉपी देने जाउ तँ। लक्ष्मण- (बेगसँ निकालि) ई लेल जाए ट्रू कॉपी आ एगो और दरखास। रामभद्र- अहाँ सभ असथीरसँ जाइ जाउ। काज हेतै। (कनी दूर असथीर भऽ कऽ सभ कियो गेल। पर्दा खसल। फेर सभ कियो नारा लगाबैए) लक्ष्मण- राम किशुनेँ फाँसी दिअ। सभ कियो- फाँसी दिअ, फाँसी दिअ। (पर्दा उठैए। कलक्टर बीजेन्द्र आ हुनक चपरासी मजलूम ऑफिसमे व्यस्त छथि।) लक्ष्मण- बीरूकेँ फाँसी दिअ। सभ कियो- फाँसी दिअ फाँसी दिअ। लक्ष्मण- रामलालक हत्यारा,हाय! हाय!! सभ कियो- हाय! हाय!! हाय! हाय!! लक्ष्मण- अधिकार छिननिहार मूर्दावाद। सभ कियो- मूर्दावाद, मूर्दावाद। लक्ष्मण- कलक्टर मूर्दावाद। सभ कियो- मूर्दावाद, मूर्दावाद। लक्ष्मण- भ्रष्टाचार बन्न करू। सभ कियो- बन्न करू, बन्न करू। लक्ष्मण- अत्याचारपर काबू पाउ। सभ कियो- काबू पाउ, काबू पाउ। बीजेन्द्र- (प्रर्दर्शनकारीक समक्ष आबि) अहाँ सभ किए डिसटर्ब करै छी,? की दिक्कत अछि? लक्ष्मण- सभ कियो शांत भऽ जाइ जाउ। साहैबसँ गप करै छी। (सभ कियो शांत भऽ गेल) साहैब, एन.एच.मे पड़ल जमीनक पाइक खातिर हमर भागीन रामलालक हत्या राम किशुन द्वारा करबा देल गेल। बीजेन्द्र- (मन पाड़ैत) अच्छा ओइ लड़काक हत्या करबा देल गेल। उ तँ एगो दरखासो देने रहाए हमरा। हमरा भेल जे समाजेमे फरिछा गेल हेतै। अच्छाऽ ऽ ऽ ऽ। लक्ष्मण- साहैब, हमरा लग ओइ दरखासक फोटो स्टेट अछि। बीजेन्द्र- लाउ तँ। (लक्ष्मण बेगसँ फोटो स्टेट निकालि बीजेन्द्रकेँ देलथि।) और कोनो कागत अछि? लक्ष्मण- एगो दरखासो छै। बीजेन्द्र- लाउ तँ जे अछि से। (लक्ष्मण दरखासो निकालि कऽ देलथि।) ठीक छै, ओइ महादलालकेँ बापसँ भेँट कराबै छी। पहिने हमरा इन्क्वाइरी करए दिअ। चोटा सभ गरीबेकेँ चुसैए। लक्ष्मण- गरीबक मसीहा, जिन्दावाद। सभ कियो- जिन्दावाद! जिन्दावाद! लक्ष्मण- कलक्टर साहैब जिन्दावाद। सभ कियो- जिन्दावाद! जिन्दावाद! बीजेन्द्र- अहाँ सभ शांत भऽ कऽ जाइ जाउ। ऐ केसकेँ गंभीर रूपें देखै छिऐ। (सभ कियो लक्ष्मणक संग प्रस्थान।) पटाक्षेप। पाँचम दृश्य (थानापर ओम प्रकाश, पवन, बिलट आ नदीम भ्रष्टाचारक सम्बन्धमे गप-सप्प करै छथि।) ओम प्रकाश- छोटा बाबू, जहाँ-तहाँ भ्रष्टाचारक हल्ला हइ। की ऊ मेटाइबला हइ की ना हइ? अपनेके स्टडी बड़ी तागड़ा बा। पवन- बड़ा बाबू, भ्रष्टाचार बड़ी भारी समस्या बा। ऐ समस्याके समाधन तुरंत असंभव बा। धीरे-धीरे होइ। ऐ बास्ते हमनीकेँ इमानदारीके महत समझैके पड़ी और अपन नेत सुधार करैके पड़ी जे बड़ी कठिन काम बा। संगे संग मनमे संतोख आननाइ जरूरी बा। (अन्दरसँ बीजेन्द्र, ओम प्रकाशकेँ फोन केलनि।) ओम प्रकाश- हेल्लो साहैब प्रणाम। जी जी जी जी जी। तीन दिनक समए देल जाए। जी जी जी जी जी। अच्छा, हम अपन समैपर राम किशुनकेँ बा बीरूकेँ बा दुनूकेँ गिरफ्तार कऽ अपने लग हाजिर कऽ देब। जी जी जी जी जी। हो छोटा बाबू, कलक्टर साहैबकेँ ऑर्डर बा। पवन- का ऑर्डर बा? ओम प्रकाश- राम किशुनकेँ बा बीरूकेँ बा दुनूकेँ तीन दिनकेँ अन्दर साहैब लग हाजिर करै के आॅर्डर बा। अभीए चलऽ, देखऽ तनी। (ओम प्रकाश, पवन, बिलट आ नदीमक प्रस्थान। पर्दा खसैए। चारू गोटे राम किशुन ऐठाम जा रहल अछि। राम किशुन ऐठाम सभ कियो पहुँचलथि। पर्दा उठैए।) राम किशुन- (मुस्कीआइत) प्रणाम बड़ा बाबू। प्रणाम छोटा बाबू। ओम प्रकाश- का हो राम किशुन बाबू, रामलालकेँ मर्डर तूँ ही करबेलऽ? आज तू ना बची। कलक्टर साहैबकेँ ऑर्डर बा, तीन दिनके अन्दर हाजिर करै के। तोहर दोस बीरू कहाँ बा? ओकरो पकड़ै के ऑर्डर बा। राम किशुन- (गंभीर मने) बड़ा बाबू, दोसके सम्बन्धमे हमरा किछु नै बुझलए। ओम प्रकाश- चलऽ राम किशुन। राम किशुन- अपनेक ऑडर हेतै आ हम नै जेबै; से भऽ सकै छै कहियो। (मुस्कीआइत) चाह- ताह पीब लिअ तहन जाएब। बिलट- हौ हौ, जे करब से जल्दी करू। हिनकर चाह नै छोड़बाक चाही। राम किशुन- राम सेवक,राम सेवक। राम सेवक- (अंदरसँ) जी पापा। राम किशुन- चारि-पाँचटा चाह नेने आउ। बड़ा बाबू एला। राम सेवक- तुरन्त एलौं पापा। (राम सेवक ट्रेमे चाह लऽ कऽ आएल। पाँचू गोटेकेँ चाह देलक। सभ चाह पी रहल छथि।) पवन- का हौ हबलदार, आज के चाय कैसन बा? आज चुपचाप पीने जा रहल बा। बिलट- छोटा बाबू, आइ तँ होइए जे कपोकेँ चाह संगे पीबी जाइ। जे चाह बनेनिहारि एते सुन्दर आ सुआदिष्ट चाह बनाबैए ओकर और सभ कला ततबे सराहनीय हएत। छोटा बाबू, सच्चे कहै छी ऐ बेर घरपर जाएब जरूर एहने कामधेनु कनियाँ कत्तै करब। समदाहीपर लोक हँसबे करत तँ हँसौ हम मुँहपर ताला लगा सकै छिएे। कियो दाता अपना कनियाँ लग एक्को राति बिताबए देत। (सभ कियो चाह पीब कप रखि दैत छथि।) ओम प्रकाश- आब चलऽ राम किशुन। राम किशुन- चलू बड़ा बाबू। राम सेवक, कप सभ लऽ जाउ। हम अबै छी, कलक्टर साहैब लगसँ। एगो गप कहू बड़ा बाबू। ओम प्रकाश- बाजऽ ने की गप हइ? राम किशुन- हमरा छोड़ि दैतौं। जे कहितिऐ से सेवा भऽ जैतै। ओम प्रकाश- केतना देबऽ? राम किशुन- मुँहमंगा। ओम प्रकाश- अब ऐसन प्रयास छोड़ दऽ। फेदा ना होई चलऽ बीरूके हीयाँ। राम किशुन- चलू,उ हएत की नै हएत घरपर। तैयो चलू देखै छिऐ। (सभ कियो जा रहल छथि बीरू ऐठाम। पर्दा खसैए। सभ बीरू ऐठाम पहुँचलथि। पर्दा उठैए।) ओम प्रकाश- राम किशुन, बीरूकेँ अपनेसे बजाबऽ तँ। राम किशुन- दोस, दोस। बीरू भाय, बीरू भाय। बीरू- (अन्दरसँ) अबै छी भाय। अबै छी। (बीरूक प्रवेश) प्रणाम बड़ा बाबू। (मुस्कीआइत) ओम प्रकाश- प्रणाम प्रणाम। आज हमरा संगे जाइके पड़ी। कलक्टर साहैबक ऑर्डर बा। बीरू- राम किशुन भायक जेहेन विचार? हमर मालिक तँ इएह छथि। जेना के राखथि हमरा। ओम प्रकाश- ठीक हइ, तँ चलऽ। लेट भऽ रहल बा। पवन- बड़ा बाबू, जल्दी करऽ। साहैब बिगड़ जाइ। ओम प्रकाश- हँ हँ जल्दी चलऽ। (सभ कियो कलक्टर साहैब लग जा रहल छथि। पर्दा खसैए। कलक्टर साहैबक ऑफिस लग गेल। पर्दा उठल।) प्रणाम साहैब। बीजेन्द्र- प्रणाम प्रणाम। एलौं ओम प्रकाश। इएह दुनू छथि। ओम प्रकाश- जी, ई बीरू छथि आ उ राम किशुन छथि। बीजेन्द्र- ओम प्रकाश, अखनि हमरा सामनेमे दुनूकेँ पहिने देह तोरू। तहन कोनो गप। (ओम प्रकाश दुनूकेँ हन्टरसँ निर्दय भऽ कऽ पीट रहल अछि। दुनू ओंघराइए आ बाप रौ माए गै चिचिआइए। आब छोड़ि दए हौ बाप, आब छोड़ि दए हौ बाप, चिचिआइए। मुदा बड़ा बाबू मारनाइ नै छोड़ै छथि। दुनू पानि पानि चिचिआइए। आम मरि जाएब, आम मरि जाएब, पानि-पानि चिचिआइए। तैयो ओम प्रकाश पीटनाइ नै छोड़ैए।) ओम प्रकाश, रूकू। (ओम प्रकाश मारनाइ बन्न केलनि।) मजलूम, दुनू बुजुर्गकेँ पानि दियनु बड्ड पियासल एला। मजलूम- जे आज्ञा सर। बुजुर्ग लोकनि बड्ड मेहनतिओ केलथि। (मजलूम दुनूकेँ पानि पीएला।) बीजेन्द्र- की राम किशुन, आब मन असथीर भेल। अच्छा कहू तँ- ई के छथि अहाँकेँ? राम किशुन- (हकमैत) हमर दोस छथि। बीजेन्द्र- लखन अहीं ऐठाम छथि की? राम किशुन- जी हमरे ऐठाम छथि। बीजेन्द्र- लखनकेँ आठ लाखक पेमेन्टमे मात्र पचास हजार देलिऐ? राम किशुन- जी, आइमे हमरा बड्ड खरचो भेल। बीजेन्द्र- एन.एच.क नोटिस अस्सी हजारक छल लखनक नामे। उ आठ लाख केना उठल? साँच-साँच बाजब। राम किशुन- एन.एच.क इंजीनियर आ भू-अर्जन कार्यालयक पदाधिकारीक किरपासँ। बीजेन्द्र- रामलाल हत्या अहीं करबौलिऐ? राम किशुन- नै, हमरा किछु नै बूझल अछि। बीजेन्द्र- तहन के? उ करबौलनि की? बीरू- आइ सम्बन्धमे हमरा किछु बूझल अछि। हम गामोपर नै रही। बीजेन्द्र- ओम प्रकाश, हिनका सभकेँ एक बेर और चिक्कन सेवा कऽ दियनु तँ। सुच्चा झूठ बाजैए। (ओम प्रकाश दुनूकेँ हंटरसँ पीटि रहल छथि। ओ सभ पहुलके जकाँ चिचिआइए।) और झूठ बाजब, और झूठ बाजब। राम किशुन- कहि दइ छी। छोड़ए दिअ। बीजेन्द्र- ओम प्रकाश, रूकू। (ओम प्रकाश मारनाइ छोड़लथि।) आब बाजू, रामलालक हत्या अहीं दुनू आदमी करबौलिऐ। दुनू- जी सर। बीजेन्द्र- और के के रहथि? फेर झूठ नै बाजब। नै तँ बूझि लिअ। बीरू- एगो राजा छेलै आ ओकर चारिटा आदमी छेलै। बीजेन्द्र- राम किशुन अहाँ बड़ा बाबू संगे चलि जाउ घर आ लखनकेँ ओकरा अपन घर पहुँचा कऽ फेर हुनके संगे आपस आउ। की? राम किशुन- जी। (ओम प्रकास अपन टीमक संग राम किशुनकेँ ओकरा घर लऽ गेला। तैबीच बीजेन्द्र आ बीरू गप-सप्प करै छथि।) बीजेन्द्र- बीरू, अहाँक दोस केहेन पार्टी अछि? बीरू- पहिने ओतेक नीक नै रहाए। मुदा अखनि बहुत बढ़ियाँ अछि। हमरा गाममे एकर जोड़ा नै अछि। बीजेन्द्र- एकाएक परिवर्तन भेलै की? बीरू- जी। एन.एच.क दलालीने बड्ड पाइ कमाएल। जेतए-तेतए बढ़ियाँ-बढ़ियाँ जमीन कीनलक आ पोखरापाटन मकान सेहो बान्हलक। (ओम प्रकाश अपन टीमक संग राम किशुनकेँ घर लऽ जा लखनकेँ अपन घर पहुँचा बीजेन्द्र लग फेर आपस एला।) बीजेन्द्र- ओम प्रकाश, दुनूकेँ अन्दर करू आ अपने सभ जाउ। ओम प्रकाश- जे आज्ञा सर। (ओम प्रकाशक टीम राम किशुन आ बीरूकेँ अन्दर लऽ गेल आ ओम्हरैसँ ओम्हरै ओ सभ अपन थानापर चलि एला।) बीजेन्द्र- मजलूम, देखियौ दुनियाँ केतए पहुँच गेल अछि। अनकर गरदनि काटि प्रतिष्ठित कहबैए लोक। दलाल सभ एन.एच.केँ कंगाल बना देलक आ अपने महराजाबला जिनगी जीबैए। भ्रष्टाचार मेटए, भ्रष्टाचार मेटए, सगरो हल्ला छै। मुदा लोकक रग-रगमे घोंसिआएल छै ई भ्रष्टाचार। ई केना मेटाएत? ई एक आदमीक प्रयाससँ मेटा सकैए! असंभव, महा असेभव। मुदा सभ जनै छी जे बूने-बूने तलाब भरैए। ओकरा देखि अमल करियौ जे पहिने तँ कियो वीर बनि भ्रष्टाचार निरोधक बीड़ा उठाएत जइमे हुनका बहुत कष्ट सहए पड़तनि। एक जूट भऽ निःस्वार्थ भावसँ अधिकसँ अधिक लोक हुनका संग देतनि तँ निश्चित भ्रष्टाचार मेटा जाएत। सभसँ पहिने मन चाही मन। तहन ओइ अनुसार करतबो चाही। ऐ विधिसँ केहनो असंभव काज संभव हेबे करत। पटाक्षेप। छअम दृश्य (समाहरणालयमे बीजेन्द्र आ मजलूम अपन कार्यालयमे छथि। बीजेन्द्र किछु फाइल उनटा रहल छथि।) बीजेन्द्र- मजलूम, अन्दरसँ राम किशुन आ बीरूकेँ बजेने आउ। मजलूम- जे आज्ञा सर। (मजलूम अन्दर जा कऽ रामकिशुन आ बीरूकेँ बजा आनलक। दुनू गोटे बीजेन्द्रक सामने ठाढ़ अछि आ मजलूम गेटपर ठाढ़ अछि।) बीजेन्द्र- राम किशुन आ बीरू, अहाँ सबहक सम्बन्ध राजासँ अछि। उ राजा के छथि आ केतए रहै छथि? राम किशुुन- हमरा किछु नै बूझल अछि। बीरू- सर, हमरो नै किछु बूझल अछि। बीजेन्द्र- की अपने सभ ओइ दिनुका शारीरिक सेवा बिसरि गेलौं आकि हमरो करए पड़त? झूठ बाजि रहल छी। जदी आबो साँचपर नै आएब तँ बूझि लिअ। हमरो पीटए अबैए। बाजै जाइ जाउ राजाक अता-पता। राम किशुन- सर, बूझल रहितए तँ कहितौं नै। बीरू- फुसि बाजि कऽ हमरा की भेटत? से तँ हमहूँ बुझै छी। मुदा जँए बूझल नै अछि तँए कहैसँ हिचकि रहल छी। बीजेन्द्र- लगि रहल अछि जे अहाँ सभ हमरा पढ़ा रहल छी। प्रेमसँ कहै छी- राजाक अता-पता कहै जाइ जाउ। नै तँ कियो बँचाएत नै। की, कहै जेबै? दुनू- बूझल रहत तहन ने? बीजेन्द्र- (आँखि लाल-पीअर कऽ) मजलूम, एगो मजगूत सटका आ डोरी नेने आउ। छठी रातिक दूध बोकरा दइ छिऐ दुनूकेँ। मजलूम- जी सर, नेने अबै छी। (मजलूम अन्दर जा कऽ एगो मजगूत सटका आनि बीजेन्द्रकेँ देलक।) बीजेन्द्र- (बहुत बेसी खिसिया कऽ)- आब अहाँ सभकेँ बँचनाइ मोसकिल अछि। नै तँ जल्दी बाजू। दुनू- हमरा सभकेँ नै बूझल अछि। बीजेन्द्र- मजलूम, दुनूक हाथ पएर बान्हू। (मजलूम दुनूक हाथ-पएर बान्हलथि।) (बीजेन्द्र राम किशुन आ बीरू दुनूकेँ पीटनाइ शुरू केलनि। दुनू ओंघराइए आ माए गै-बाप राै चिचिआइए। मुदा बीजेन्द्र सटका बरसेनाइ नै छौड़ै छथि।) बीरू- (हकमैत-हकमैत)- सर, आब छोड़ि दिअ; कहि दइ छी। बीजेन्द्र- आब हमरा नै बुझबाक अछि। अहाँ सभ ऐ दुनियाँक काल छी। आइ काज तमाम कके छोड़ब। (ओ दुनूकेँ और पीटए लगलथि।) राम किशुन- सर, मरि जाएब आब। छोड़ि दिअ; कहि दइ छी। बीजेन्द्र- दुनू थूक राखू आ चाटू। तखने छोड़ब। (दुनू अफसिआँत भऽ थूक रखि चटैए। बीजेन्द्र तत्खनात पीटनाइ छोड़ि देने छथि।) अहाँ सभ प्रतिष्ठित लोक छी। पाइ आ पैरबीबला लोक छी। बाजू की अता -पता छै राजाक? बीरू- जोगिया गामक दक्षिण-पच्छिम भागमे एगो बड़का गाछी छै। ओही गाछीक पुबरिया कोनपर एगो खोपरी छै। ओही खोपरीक नीच्चाँ एगो सुरंग बनल छै। ओही सुरंगमे दूगो बढ़ियाँ कोठरी बनौने छै। ओहीमे राजा, मोस्तकीम, मनोज, बौधु आ सलीम रहैए। गेटपर सलीम आ बौधु पेस्तौल तनने रहै छै। बीजेन्द्र- कोनो जनानीओ रहै छै? बीरू- हँ, एगो चमेली नामक जनानी मनोरंजन लए सेहो रहै छै। बीजेन्द्र- अपने केते नीक लोक छी जे एते सुन्दरसँ अता-पता बतेलौं। जदी ई पहिने बतबितौं तँ ई दशा नै होइतए। राम किशुन- सर, उ सभ कहने छेलए जे अता-पता केकरो नै बतेबिहनि नै तँ जान नै बाँचतौ। ओही डरे नै कहै छेलौं। बीजेन्द्र- अच्छा, आब ओकरा सभकेँ बापक बिआह आ पितीयाक सगाइ देखबै छिऐ। मजलूम, अहाँ दुनू आदमीकेँ डोरी खोलि अंदर लऽ जाउ। मजलूम- जे आज्ञा सर। (मजलूम, राम किशुन आ बीरूकेँ डोरी खोलि अंदर लऽ गेल। तैबीच बीजेन्द्र तीनटा पत्र लिखलनि- एगो एस.पी. साहैबक नाओंसँ, देसर भू-अर्जन कार्यालयक पदाधिकारीक नाओंसँ आ तेसर एन.एच.क इंजीनियरक नाओंसँ। मलजूमक प्रवेश।) बीजेन्द्र- एलौं मजलूम। बेस, अहाँ ई तीनू पत्र लऽ लिअ आ तीनू पदाधिकारीकेँ दऽ आबियनु। मजलूम- जे आज्ञा सर। (तीनू पत्र लऽ कऽ मजलूमक प्रस्थान।) बीजेन्द्र- हम कोनो परमोशनबला कलक्टर छी, कमपेटीशनसँ आएल छी। हमर मुख्य उदेस अछि- गुणगर भारतक निर्माण। तइले प्रत्येक बेक्तीकेँ गुणगर भेनाइ अनिवार्य छै जे असथीरे-असथीरे-असथीरे हएत आ सबहक प्रयाससँ हएत। (मजलूमक प्रवेश) मजलूम- जी सर, तीनू पत्र तीनू पदाधिकारीकेँ दऽ एलियनि। बीजेन्द्र- बड्ड नीक केलौं। अहाँ सन आज्ञाकारी लोक केतए पएब। पटाक्षेप। सातम दृश्य (बीजेन्द्र अपने कार्यालयमे मजलूमक संग बैसल छथि।) बीजेन्द्र- (प्रसन्न मने) मजलूम, अहूँ जेबै। मजलूम- केतए सर? बीजेन्द्र- जेतए हम कहब तेतए। मजलूम- तहूने कहैक काज। ई देह अपनेक सेवामे समरपित अछि। (एस.पी. जीतेन्द्रक प्रवेश) जीतेन्द्र- प्रणाम सर। बीजेन्द्र- प्रणाम प्रणाम। जरूरीए तेहने अछि जे पत्र पठाबए पड़ल। जीतेन्द्र- की जरूरी छै सर? बीजेन्द्र- एगो राजा नामक गुंडाराज छै। ओकरा ग्रुपमे पाँच-सात आदमी छै। अपना भरि बड्ड सुरक्षित ढंगसँ रहि रहल अछि। आदमीकेँ खून करैक बड़का ठीकेदार अछि। ओकरे पकिया बेवस्था लगेबाक अछि। से केना हेतै? जीतेन्द्र- तइले हम असगरे काफी छी। अपने निफीकीर भऽ जैयौ सर। खाली ऑडर दऽ दियौ। बीजेन्द्र- हम अपनेकेँ ऑडर नै देब, संग देब। ओना तँ हमहूँ असगरे काफी छी। जीतेन्द्र- तहन अखने चलू आ दुइए आदमी चलू। बीजेन्द्र- चलू। मजलूम, हम सभ आबि रहल छी। (बीजेन्द्र आ जीतेन्द्र जा रहल छथि। पर्दा खसैए। दुनू आदमी अंदर चलि गेला। पर्दा उठैए। राजा अपन ग्रुपमे दारू पीबैत चमेलीक संग मस्ती लूटि रहल अछि। तैबीच बीजेन्द्र आ जीतेन्द्रकेँ दुनू कातसँ प्रवेश। गोली चलेनाइ दुनू पक्षसँ शुरू भऽ गेल। एकाएकी राजा ग्रूपक सभ कियो मरि जाइए। मुदा बीजेन्द्र दुआरा राजा अन्तमे मरैए।) जीतेन्द्र- सर, आब ई एरिया शांत रहत। बड़ी जुआएल ग्रूप छल। आब चलल जाए सर। बीजेन्द्र- चलू। (दुनू आदमी अपन ऑफिस आबि रहल छथि। पर्दा खसैए। मजलूम अपन ऑफिसमे तैनात रहैए। पर्दा उठैए। बीजेन्द्र अपन ऑफिस गेला। जीतेन्द्र प्रणाम कऽ अन्दर गेला। बीजेन्द्र ओम प्रकाशकेँ फोन करै छथि।) हेल्लो ओम प्रकाश। ओम प्रकाश- (अंदरसँ) हेल्लो सर, प्रणाम। जी, जी, जी, जी, जी सर। जे आज्ञा सर। बीजेन्द्र- कालि जनता दरबारक दिन छिऐ। लखन आ राम किशुनक समस्याक समाधान जनते दरबारमे हेतै जे हम अपना सोझहामे करब। तँए अपने लखन, लक्ष्मण आ झामलालकेँ जनता दरबारमे पठा देब। बिसरबै नै। ओम प्रकाश- निश्चित पठा देब सर। निश्चित पठा देब। पटाक्षेप। आठम दृश्य (लखन ऐठाम लक्ष्मण पेपर पढ़ि रहल छथि। लखन चुपचाप बैसल छथि।) लक्ष्मण- पाहुन, ऐ परोपट्टाक लेल एगो बड्ड पैघ खुशखबरी पेपरमे निकललैए। लखन- की यौ? कनी हमरो कहू। लक्ष्मण- अपन बौआकेँ जे गुण्डा सभ मारि देने रहाए ओकरो मौत कलक्टर आ एस.पी. हाथे भऽ गेल। पूरा ग्रुप ऐ दुनियाँसँ चलि बसल। भागीन, भागीन। झामलाल- (अन्दरसँ) जी मामा, आबै छी। लक्ष्मण- पेपरमे एगो खुशखबरी निकलल हेन। (झामलालक प्रवेश) झामलाल- जी मामा, कहाँ? लक्ष्मण- हे ऽ ऽ ऽ हैया देखियौ। (झामलाल पेपर देखि प्रसन्न भेल।) झामलाल- मामाश्री, दुनियाँक काल मरल। ऐ दुनियाँक लेल ऐसँ खुशी और की भऽ सकैए। ओइ कलक्टर आ एस.पी.केँ बहुत-बहुत धन्यवाद। (ओम प्रकाशक प्रवेश) बड़ा बाबू प्रणाम (उठि कऽ) पधारियौ पधारियौ। (ओम प्रकाश कुरसीपर बैसला) लक्ष्मण- प्रणाम बड़ा बाबू। ओम प्रकाश- प्रणाम प्रणाम। का हाल-चाल हऽ? लक्ष्मण- सर, अपनेक किरपासँ ठीक अछि। आइ केम्हर सुरूज उगलै? आइ तँ गरीबक कुटिया तरि गेल। ओम प्रकाश- तोरे काज करए आएल बा। आज कलक्टर साहैब लग जनता दरबार हऽ। ओइमे कलक्टर साहैब लखन, तोरा आ झामलालकेँ बोलेल कऽ हऽ। अभीए चल जा। देरी ना करए। (ओम प्रकाशक प्रस्थान।) लक्ष्मण- भागीन जल्दी चलू। देरी भऽ रहल अछि। फेर ओत्ते दूर जाइओक छै कीने। पाहून अहँू चलबै। झामलाल- तहन चलिए दियौ। (लखन, लक्ष्मण आ झामलाल कलक्टरक जनता दरबारमे जा रहल छथि। पर्दा खसैए। अन्दरमे कलक्टरक जनता दरबार लागि रहलए।) मामाश्री, कलक्टर हुअए तँ एहेन जे सर्वगुणसम्पन्न छथि। (पर्दा उठैए। बीजेन्द्र अपन जनता दरबारमे उपस्थित छथि। तीनू आदमी जनता दरबार पहुँचलथि।) लक्ष्मण- साहैब प्रणाम। बीजेन्द्र- बैसू। (लक्ष्मण बैसलथि।) झामलाल- कलक्टर साहैब प्रणाम। बीजेन्द्र- अहूँ बैसू। सभ कियो बैसू। (जनता दरबारमे उमा शंकर, सुशील, राम किशुन, बीरू, लक्ष्मण, झामलाल आ लखन उपस्थित छथि।) आजूक जनता दरबार राम किशुन आ लखनक समस्याक समाधान हेतु आयोजित अछि। संजोग छै जे आइ एक्केटा इएह मामला छै। ओना ई पंचाइत भवन नै छी। मुदा जरूरी पड़लापर ई पंचाइत भवन भऽ जाइए जेना अखनि अछि। प्राप्त दरखासक अनुसार लखनक जेठ बेटा रामलालक मृत्युक कारण उमा शंकर, सुशील, राम किशुन आ बीरू छथि। सभ कियो अपन-अपन कमी अपनामे ताकियौ। हमरा जनतबे सभ कियो भ्रष्टाचारक शिकार छी। उमा शंकर- सर, हमर गलती केतए छै? बीजेन्द्र- जेतए एकके दस केने रहिऐ। गुप्त रूपसँ पता लगि गेल। (उमा शंकरक मुड़ी नीच्चाँ भऽ गेलनि।) सुशील राम किशुनसँ घूस लऽ कऽ बिल पास केलथि। (सुशीलक मुड़ी सेहो झूकि जाइए।) तथा राम किशुनमे ऊ कला छै जे अपन काज लए केहनो आदमीकेँ पटा लेत। हजारमे एगो छूटि जाएत से बेसी बुझहू। (राम किशुनक मुड़ी झूकि जाइ छन्हि।) बीरू राम किशुनक मुँहलगुआ छिऐ, लठैत छिऐ। (बीरूक मुड़ी सेहो झूकि जाइए।) लखन मूर्ख छथि। हिनक मूर्खताक फायदा पढ़ल- लिखल राम किशुन उठौलक जइमे हुनकर जेठ बेटा मुइलै। उमा शंकर, सुशील, राम किशुन आ बीरू सभ दोषी छी। जदी ई मामला कोटमे चलि जाएत तँ लड़ैत-लड़ैत नाकोदम भऽ जाइ जाएब। उऋण नै भऽ सकै छी। मुदा हम अपन निर्णए दैत अहाँ चारू गोटेकेँ सुधरैक मौका दइ छी। की, हम अपन निर्णए सुनाबी। उमा शंकर- जी, सुनाएल जाए। बीजेन्द्र- किनको कोनो आपति? चारू गोटे- कोनो आपति नै सर। बीजेन्द्र- तहन हमर निर्णए सुनू राम किशुन लखनकेँ पाँच लाख टाका देथिन। बीरू लखनकेँ एक लाख टाका देथिन। उमा शंकर लखनकेँ दू लाख टाका देथिन। सुशील लखनकेँ दू लाख टाका देथिन। आ सुनि लइ जाइ जाउ, फेर एहेन गलती कहियो नै दोहराए। नै तँ हम बदलल नै गेलौं हेन। की, निर्णए अपने सभकेँ पसीन अछि? चारू गोटे- जी, पसीन अछि। उमा शंकर- अपनेक विचारकेँ हम सहृदै आदर करै छी। बीजेन्द्र- लखनकेँ अहाँ सभ कखनि जुर्माना दइ छियनि? उमा शंकर- हम काल्हि दऽ देबनि। सुशील- हम परसु देबनि। राम किशुन- हम पाँचम दिन देबनि। बीरू- हम एक सप्ताहमे देबनि। बीजेन्द्र- ठीक छै। अगिला रबिकेँ अहाँ चारू गोटे लखन ऐठाम जा कऽ अपन-अपन जुर्माना दऽ एबनि। हमहूँ रहबे करब। एगारह बजे दिनक समए रहतै। चारू गोटे- ठीक छै सर। बीजेन्द्र- अहाँ सभ कियो जाइ जाउ। जनता दरबार एत्तै खत्म होइए। (बीजेन्द्र आ मजलूमकेँ छोड़ि सभ कियो अपन-अपन घर गेला।) मजलूम अगिला रबिकेँ अपना सभ चलब ओइ गरीब ऐठाम। देखबै चारू दलाल सभ कोनो धोखाधरी तँ नै करै छै। मजलूम- बड्ड नीक गप सर। जरूर चलब। पटाक्षेप। नअम दृश्य (लखनक दलानपर लखन, लक्ष्मण आ झामलाल जुर्मानाबला पाइक बेवहारक सम्बन्धमे गप-सप्प करै छथि। दसटा कुरसी लागल छै।) लक्ष्मण- पाहुन, उ सभ जे जुर्मानाबला पाइ देत तेकरा की करबै? लखन- रामलाल बेटा तँ ऐ दुनियाँसँ चलि गेल। आब सोचै छी तँ पछताइ छी। मुदा पछताइए कऽ की हएत? बेटा रहैत तँ एक हाथ सेवो होइतए। मुदा पाइमे तँ उ सुख नै हएत। लक्ष्मण- से तँ अपने ने केलिऐ। लखन- एना हेतै से हम कहाँ बुझै छेलिऐ। दुनियाँ सुआरथमे एते लीन अछि से आब बुझलौं। बाप रे बा, के केकरापर बिसवास करत। लक्ष्मण- पाहुन, जे बीति गेलै ओइपर पछतेनाइ बेकार। वर्तमानपर विचार करू। आब अहाँकेँ एगो बेटा रहल। हमर विचार अछि जे दस लाख टाकामे दू लाख बास-डीहमे, दू लाख मकानमे, दू लाख बाधक जमीनमे आ शेष भागीनक पढ़ाइ-लिखाइमे लगाए दैतिऐ। भागीनक जीवन तँ बनि जइतै। की भागीन, अहाँक की विचार? झामलाल- अपने सबहक विचारकेँ हम केना काटि सकै छी। लखन- लक्ष्मण हमर एगो विचार सुनब। लक्ष्मण- अबस्स सुनब। लखन- दसो लाख बौआकेँ पढ़ाइमे लगाए दैतिऐ। ई मनुख तँ बनि जइतए। कियो ठकतै तँ नै। लक्ष्मण- आ रहबै केतए? लखन- केतौ रहि जाएब। बाधेमे झोपड़ी बनाकऽ रहि लेब। लक्ष्मण- ई बढ़ियाँ नै हएत। मनुख सामाजिक प्राणि छी। ओकरा लेल समाजे बढ़ियाँ छै। कए तरहक आफद आसमानीक समाधान जेते समाजमे हेतै, ओत्ते ओतए कहियो संभव नै छै। तँए अहाँ अपन डीह समाजसँ सटल कीनि लिअ आ ओइपर कामचलाव घर बनए लिअ। ओइमे सभ परानी गुजर करू। बाधक जमीन नै हएत, तइले कोनो अमला ओछ नै हएत। मुदा भागीनक पढ़ाइपर पूरा धियान दियौ। पाहुन, दुनियाँमे पढ़ाइसँ पैघ कोनो धन नै छै। लखन- तहन सएह करब। लक्ष्मण, उ सभ ऐला कहाँ यौ? लक्ष्मण- अबिते हेता। नै एने बनतनि। बुझै छिऐ, कलक्टरक फैसला छिऐ। जिलाक मालिक होइ छथि। (बीजेन्द्र आ मजलूमक प्रवेश। तीनू गोटे उठि गेला।) प्रणाम सर। पधारल जाए। झामलाल- प्रणाम सर। लखन- प्रणाम हाकिम। बीजेन्द्र- प्रणाम प्रणाम। अखनि धरि कियो नै एला। लखन- हाकिम, बैसियौ ने गरीबो कुटियापर। (बीजेन्द्र आ मजलूमक कुरसीपर बैसलथि।) बीजेन्द्र- (घड़ी देखि कऽ) एगारहमे दू मिनट कम छै। हम समैसँ पहिने छी। मुदा लगोक कियो नै ऐला। खाइर आबिते हेता। समैओ भऽ रहल छै। (बुधन, घूरन, भूटन, पलटू आ चिनमाक प्रवेश। सभ कियो प्रणाम हाकिम, प्रणाम हाकिम कऽ बैसलथि।) एगारहसँ बेसी भऽ रहलए। किछु समाज लोकनि एलखिन हेन। अस्सल लोक सभ एबे नै केलखिन। की करता की नै। ओना गड़बड़ेबाक नै चाही। भऽ सकै छै पाइक ओरीयान करैत हेता। (राम किशुन आ बीरूक प्रवेश। दुनू आदमी प्रणाम सर, प्रणाम सर, कऽ ठाढ़ छथि।) बैसै जाइ जाउ। (दुनू कुरसीपर बैसलथि।) राम किशुन, देरी किए भेल? राम किशुन- सर, बीरूक संग करैमे देरी भेल। बीजेन्द्र- अहाँकेँ किए देरी भेल? बीरू- पाइक ओरीयानमे देरी भऽ गेल। बीजेन्द्र- ई ठीक बात नै। समैनिष्ठता जीवनमे बड्ड महतपूर्ण अछि। (उमा शंकर आ सुशीलक प्रवेश। दुनू आदमी प्रणाम सर, प्रणाम सर, कहि ठाढ़ छथि।) बैसल जाए इंजीनियर साहैब। सुशील अहूँ बैसू। (दुनू बैसलथि।) आब अपना सभ अपन काज शुरू करी। की यौ लक्ष्मण, की यौ लखन? लक्ष्मण- अपनेक जे विचार। (गंगाराम मोहन आ पंचूक प्रवेश। प्रणाम सर, प्रणाम सर, कहि ठाढ़ छथि।) बीजेन्द्र- अपने सभ स्थान ग्रहण करियौ। (तीनू गोटे कुरसीपर बैसलथि।) लक्ष्मण- सर, हिनका चिन्हलियनि। बीजेन्द्र- नै, हम नै चिन्हलियनि। के छथि? लक्ष्मण- ऐ पंचाइतक सरपंच छथि। गंगाराम हिनकर नाओं छियनि। (गंगाराम हाथ जोड़ि लइ छथि। बीजेन्द्र सेहो हाथ जोड़ि लइ छथि।) बीजेन्द्र- आब हम बेसी काल समए नै दऽ सकब। हमरो बड्ड फाइल छै। बेचारा लखनक बेटा उचितक लड़ाइमे मारल गेल। ओहीक सांतवना लेल हम आएल छी। कारण गरीबकेँ कियो देख नै चाहैए। मुदा हमरा नजरिमे गरीबे दुनियाँक पेटक आगि मुझबै छै। तँए ओकरा आदर पहिने हेबाक चाही। आब अपना सभ अपन काज दिस धियान दी। अहाँ सभ कियो अपन- अपन जुर्माना राशि लक्ष्मणकेँ दियनु। (पहिने राम किशुन, तहन बीरू, तहन सुशील आ सभसँ अन्तमे उमा शंकर लक्ष्मणकेँ जुर्माना राशि देलखिन। लक्ष्मण गिन- गिन कऽ पाइ रखलनि।) लक्ष्मण- जी सर, ठीके छै। बीजेन्द्र- चारू जुर्माना देनिहार ई हरिदम यादि राखु जे ईमानदारीमे बड़क्कैत होइ छै, आत्मबल भेटै छै, सभ ठाम प्रतिष्ठा भेटै छै। गरीब आदमी डरे गलती नै करै छै। जौ मजबूरीमे करबो करै छै तँ बहुत छोट-छीन। धनिक जकाँ गलती करैक हिम्मत ओकरा नै छै। तँए ओकर गलतीक समाधान प्रेमसँ करी। गरीब जीअत तहने हम सभ जीअब। लक्ष्मण- कलक्टर साहैब जिन्दावाद। सभ कियो- जिन्दावाद जिन्दावाद। लक्ष्मण- भ्रष्टाचारक दुश्मन जिन्दावाद। सभ कियो- जिन्दावाद जिन्दावाद। (लक्ष्मण बीजेन्द्रकेँ फूलमाला पहिरौलनि। बीजेन्द्र हाथ जोड़ि सभकेँ प्रणाम केलनि।) बीजेन्द्र- राम किशुनक अत्याचारक विरूद्ध लक्ष्मण आ झामलाल जे कदम उठौलनि से सचमूच बड्ड सराहनीय अछि। लखनजीक उदासी देखि हमरा कहए पडैए जे रामलालक भोग ऐठाम एतबे दिनक छल तँए ओ ऐ दुनियाँसँ चलि गेल। भगवान हुनक आत्माकेँ शान्ति दैथ। (बीजेन्द्र आ मजलूमक प्रस्थान) लखन- हमरा पाइ बड्ड भेटल। मुदा ओइ पाइसँ हमर बेटा घूमि आएत की? कथमपि नै। मुदा आब सोचै छी तँ बुझाइए जे हम की केलौं आ राम किशुन हमरा संगे की केलक काबिल भऽ कऽ मुर्ख भैया संगे बिसवासघात केलक, बिसवासघात केलक, बिसवासघात केलक। (कानए लगैए) हमरा जुर्माना दऽ देलक, से काफी नै भेल। बल्कि काफी ई भऽ सकैए जे ओ समाजसँ माफी माँगथु आ फेर एहेन बिसवासघात किनको संग नै करबाक सप्पत खाथु। (राम किशुनक मुड़ी निच्चाँ भऽ जाइए।) राम किशुन- (हाथ जोड़ि) हमरासँ बड्ड गलती भेल। हम माँ भगवतीक सप्पत खाइ छी जे आब कोनो गलती नै करब। क्षमा कएल जाए, क्षमा कएल जाए। पटाक्षेप। इति शुभम् ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह नूतन अंक गद्य-पद्य भारती १. मोहनदास (दीर्घकथा):लेखक: उदय प्रकाश (मूल हिन्दीसँ मैथिलीमे अनुवाद विनीत उत्पल) मोहनदास (मैथिली-देवनागरी) मोहनदास (मैथिली-मिथिलाक्षर) मोहनदास (मैथिली-ब्रेल) २.छिन्नमस्ता- प्रभा खेतानक हिन्दी उपन्यासक सुशीला झा द्वारा मैथिली अनुवाद छिन्नमस्ता ३.कनकमणि दीक्षित (मूल नेपालीसँ मैथिली अनुवाद श्रीमती रूपा धीरू आ श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षि) भगता बेङक देश-भ्रमण ४.तुकाराम रामा शेटक कोंकणी उपन्यासक मैथिली अनुवाद डॉ. शम्भु कुमार सिंह द्वारा पाखलो बालानां कृते बच्चा लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोक १.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही, आ’ ई श्लोक बजबाक चाही। कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥ करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक। २.संध्या काल दीप लेसबाक काल- दीपमूले स्थितो ब्रह्मा दीपमध्ये जनार्दनः। दीपाग्रे शङ्करः प्रोक्त्तः सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥ दीपक मूल भागमे ब्रह्मा, दीपक मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित छथि। हे संध्याज्योति! अहाँकेँ नमस्कार। ३.सुतबाक काल- रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्। शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥ जे सभ दिन सुतबासँ पहिने राम, कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ४. नहेबाक समय- गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू॥ हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी धार। एहि जलमे अपन सान्निध्य दिअ। ५.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्। वर्षं तत् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥ समुद्रक उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि। ६.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी तथा। पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशकम्॥ जे सभ दिन अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा आऽ मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ७.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरञ्जीविनः॥ अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनूमान्, विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम- ई सात टा चिरञ्जीवी कहबैत छथि। ८.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर वासिनी उग्रेन तपसा लब्धो यया पशुपतिः पतिः। सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादान्तस्य धूर्जटेः जाह्नवीफेनलेखेव यन्यूधि शशिनः कला॥ ९. बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती। अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥ १०. दूर्वाक्षत मंत्र(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र २२) आ ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः। स्वराडुत्कृतिश्छन्दः। षड्जः स्वरः॥ आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒ पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो नः॑ कल्पताम्॥२२॥ मन्त्रार्थाः सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव। ॐ दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव। हे भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आ’ सर्वज्ञ विद्यार्थी उत्पन्न होथि, आ’ शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होथि आ’ घोड़ा त्वरित रूपेँ दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आ’ युवक सभामे ओजपूर्ण भाषण देबयबला आ’ नेतृत्व देबामे सक्षम होथि। अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आ’ औषधिक-बूटी सर्वदा परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश होए आ’ मित्रक उदय होए॥ मनुष्यकें कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे कएल गेल अछि। एहिमे वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि। अन्वय- ब्रह्म॑न् - विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म रा॒ष्ट्रे - देशमे ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म विद्याक तेजसँ युक्त्त आ जा॑यतां॒- उत्पन्न होए रा॑ज॒न्यः-राजा शुरे॑ऽ–बिना डर बला इषव्यो॒- बाण चलेबामे निपुण ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ तारण दय बला म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर दोग्ध्रीं-कामना(दूध पूर्ण करए बाली) धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः धे॒नु-गौ वा वाणी र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः-त्वरित सप्तिः॒-घोड़ा पुर॑न्धि॒र्योवा॑- पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण करए बाली र्योवा॑-स्त्री जि॒ष्णू-शत्रुकेँ जीतए बला र॑थे॒ष्ठाः-रथ पर स्थिर स॒भेयो॒-उत्तम सभामे युवास्य-युवा जेहन यज॑मानस्य-राजाक राज्यमे वी॒रो-शत्रुकेँ पराजित करएबला निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त कार्यमे नः-हमर सभक प॒र्जन्यों-मेघ वर्षतु॒-वर्षा होए फल॑वत्यो-उत्तम फल बला ओष॑धयः-औषधिः पच्यन्तां- पाकए योगेक्ष॒मो-अलभ्य लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा नः॑-हमरा सभक हेतु कल्पताम्-समर्थ होए ग्रिफिथक अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला, राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय, दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य आवश्यकता पडला पर वर्षा देथि, फल देय बला गाछ पाकए, हम सभ संपत्ति अर्जित/संरक्षित करी। विदेह नूतन अंक भाषापाक रचना-लेखन इंग्लिश-मैथिली-कोष / मैथिली-इंग्लिश-कोष प्रोजेक्टकेँ आगू बढ़ाऊ, अपन सुझाव आ योगदान ई-मेल द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ। Top of Form १.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली आ २.मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम १.नेपाल आ भारतक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली
१.१. नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक उच्चारण आ लेखन शैली (भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन १.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङ, ञ, ण, न एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना- अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।) पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।) खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।) सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।) खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।) उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंक, पंच, खंड, संधि, खंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्ग, चवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंक, चंचल, अंडा, अन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओ लोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि। नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोक बेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोट सन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽ कऽ पवर्ग धरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽ कऽ ज्ञ धरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ। २.ढ आ ढ : ढक उच्चारण “र् ह”जकाँ होइत अछि। अतः जतऽ “र् ह”क उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ लिखल जाए। आन ठाम खाली ढ लिखल जएबाक चाही। जेना- ढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढङ्ग, ढेरी, ढाकनि, ढाठ आदि। ढ = पढ़ाइ, बढब, गढब, मढब, बुढबा, साँढ, गाढ, रीढ, चाँढ, सीढी, पीढी आदि। उपर्युक्त शब्द सभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ अबैत अछि। इएह नियम ड आ डक सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि। ३.व आ ब : मैथिलीमे “व”क उच्चारण ब कएल जाइत अछि, मुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथ, बिद्या, नब, देबता, बिष्णु, बंश, बन्दना आदि। एहि सभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथ, विद्या, नव, देवता, विष्णु, वंश, वन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकील, ओजह आदि। ४.य आ ज : कतहु-कतहु “य”क उच्चारण “ज”जकाँ करैत देखल जाइत अछि, मुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञ, जदि, जमुना, जुग, जाबत, जोगी, जदु, जम आदि कहल जाएबला शब्द सभकेँ क्रमशः यज्ञ, यदि, यमुना, युग, यावत, योगी, यदु, यम लिखबाक चाही। ५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि। प्राचीन वर्तनी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आदि। नवीन वर्तनी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आदि। सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहि, एना, एकर, एहन आदि। एहि शब्द सभक स्थानपर यहि, यना, यकर, यहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारू सहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे “ए”केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि। ए आ “य”क प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैल, हैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो “ए”क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि। ६.हि, हु तथा एकार, ओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हि, हु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहि, अपनहु, ओकरहु, तत्कालहि, चोट्टहि, आनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनके, अपनो, तत्काले, चोट्टे, आनो आदि। ७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खडयन्त्र), षोडशी (खोडशी), षट्कोण (खटकोण), वृषेश (वृखेश), सन्तोष (सन्तोख) आदि। ८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि: (क) क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमे सँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : पढए (पढय) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पडतौक। अपूर्ण रूप : पढ’ गेलाह, क’ लेल, उठ’ पडतौक। पढऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पडतौक। (ख) पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछ, मुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह। अपूर्ण रूप : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह। (ग) स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापद, संज्ञा, ओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि। अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल। (घ) वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : पढैत अछि, बजैत अछि, गबैत अछि। अपूर्ण रूप : पढै अछि, बजै अछि, गबै अछि। (ङ) क्रियापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप: छियौक, छियैक, छहीक, छौक, छैक, अबितैक, होइक। अपूर्ण रूप : छियौ, छियै, छही, छौ, छै, अबितै, होइ। (च) क्रियापदीय प्रत्यय न्ह, हु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : छन्हि, कहलन्हि, कहलहुँ, गेलह, नहि। अपूर्ण रूप : छनि, कहलनि, कहलौँ, गेलऽ, नइ, नञि, नै। ९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटि कऽ दोसर ठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन), पानि (पाइन), दालि ( दाइल), माटि (माइट), काछु (काउछ), मासु (माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्द सभमे ई निअम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि। १०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्द सभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषा सम्बन्धी निअम अनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरण सम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्ष सभकेँ समेटि कऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनीकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽबला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषी पर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पडि रहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषता सभ कुण्ठित नहि होइक, ताहू दिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए। -(भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) १.२. मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली
१. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-
ग्राह्य
एखन ठाम जकर, तकर तनिकर अछि
अग्राह्य अखन, अखनि, एखेन, अखनी ठिमा, ठिना, ठमा जेकर, तेकर तिनकर। (वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य) ऐछ, अहि, ए।
२. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैकल्पिकतया अपनाओल जाय: भऽ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।
३. प्राचीन मैथिलीक ‘न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ‘न’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।
४. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।
५. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत: जैह, सैह, इएह, ओऐह, लैह तथा दैह।
६. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे ‘इ’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।
७. स्वतंत्र ह्रस्व ‘ए’ वा ‘य’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ‘ए’ वा ‘य’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।
८. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ‘य’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढैआ, विआह, वा धीया, अढैया, बियाह।
९. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव ‘ञ’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।
१०. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:- हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। ’मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ‘क’ क वैकल्पिक रूप ‘केर’ राखल जा सकैत अछि।
११. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।
१२. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।
१३. अर्द्ध ‘न’ ओ अर्द्ध ‘म’ क बदला अनुसार नहि लिखल जाय, किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ‘ङ’ , ‘ञ’, तथा ‘ण’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।
१४. हलंत चिह्न निअमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।
१५. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क’ लिखल जाय, हटा क’ नहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।
१६. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रापर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं।
१७. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।
१८. समस्त पद सटा क’ लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोडि क’ , हटा क’ नहि।
१९. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।
२०. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।
२१.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा' ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।
ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा "सुमन" ११/०८/७६
२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम २.१. उच्चारण निर्देश: (बोल्ड कएल रूप ग्राह्य):- दन्त न क उच्चारणमे दाँतमे जीह सटत- जेना बाजू नाम , मुदा ण क उच्चारणमे जीह मूर्धामे सटत (नै सटैए तँ उच्चारण दोष अछि)- जेना बाजू गणेश। तालव्य शमे जीह तालुसँ , षमे मूर्धासँ आ दन्त समे दाँतसँ सटत। निशाँ, सभ आ शोषण बाजि कऽ देखू। मैथिलीमे ष केँ वैदिक संस्कृत जकाँ ख सेहो उच्चरित कएल जाइत अछि, जेना वर्षा, दोष। य अनेको स्थानपर ज जकाँ उच्चरित होइत अछि आ ण ड जकाँ (यथा संयोग आ गणेश संजोग आ गड़ेस उच्चरित होइत अछि)। मैथिलीमे व क उच्चारण ब, श क उच्चारण स आ य क उच्चारण ज सेहो होइत अछि। ओहिना ह्रस्व इ बेशीकाल मैथिलीमे पहिने बाजल जाइत अछि कारण देवनागरीमे आ मिथिलाक्षरमे ह्रस्व इ अक्षरक पहिने लिखलो जाइत आ बाजलो जएबाक चाही। कारण जे हिन्दीमे एकर दोषपूर्ण उच्चारण होइत अछि (लिखल तँ पहिने जाइत अछि मुदा बाजल बादमे जाइत अछि), से शिक्षा पद्धतिक दोषक कारण हम सभ ओकर उच्चारण दोषपूर्ण ढंगसँ कऽ रहल छी। अछि- अ इ छ ऐछ (उच्चारण) छथि- छ इ थ – छैथ (उच्चारण) पहुँचि- प हुँ इ च (उच्चारण) आब अ आ इ ई ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ऐ सभ लेल मात्रा सेहो अछि, मुदा ऐमे ई ऐ ओ औ अं अः ऋ केँ संयुक्ताक्षर रूपमे गलत रूपमे प्रयुक्त आ उच्चरित कएल जाइत अछि। जेना ऋ केँ री रूपमे उच्चरित करब। आ देखियौ- ऐ लेल देखिऔ क प्रयोग अनुचित। मुदा देखिऐ लेल देखियै अनुचित। क् सँ ह् धरि अ सम्मिलित भेलासँ क सँ ह बनैत अछि, मुदा उच्चारण काल हलन्त युक्त शब्दक अन्तक उच्चारणक प्रवृत्ति बढल अछि, मुदा हम जखन मनोजमे ज् अन्तमे बजैत छी, तखनो पुरनका लोककेँ बजैत सुनबन्हि- मनोजऽ, वास्तवमे ओ अ युक्त ज् = ज बजै छथि। फेर ज्ञ अछि ज् आ ञ क संयुक्त मुदा गलत उच्चारण होइत अछि- ग्य। ओहिना क्ष अछि क् आ ष क संयुक्त मुदा उच्चारण होइत अछि छ। फेर श् आ र क संयुक्त अछि श्र ( जेना श्रमिक) आ स् आ र क संयुक्त अछि स्र (जेना मिस्र)। त्र भेल त+र । उच्चारणक ऑडियो फाइल विदेह आर्काइव http://www.videha.co.in/ पर उपलब्ध अछि। फेर केँ / सँ / पर पूर्व अक्षरसँ सटा कऽ लिखू मुदा तँ / कऽ हटा कऽ। ऐमे सँ मे पहिल सटा कऽ लिखू आ बादबला हटा कऽ। अंकक बाद टा लिखू सटा कऽ मुदा अन्य ठाम टा लिखू हटा कऽ– जेना छहटा मुदा सभ टा। फेर ६अ म सातम लिखू- छठम सातम नै। घरबलामे बला मुदा घरवालीमे वाली प्रयुक्त करू। रहए- रहै मुदा सकैए (उच्चारण सकै-ए)। मुदा कखनो काल रहए आ रहै मे अर्थ भिन्नता सेहो, जेना से कम्मो जगहमे पार्किंग करबाक अभ्यास रहै ओकरा। पुछलापर पता लागल जे ढुनढुन नाम्ना ई ड्राइवर कनाट प्लेसक पार्किंगमे काज करैत रहए। छलै, छलए मे सेहो ऐ तरहक भेल। छलए क उच्चारण छल-ए सेहो। संयोगने- (उच्चारण संजोगने) केँ/ कऽ केर- क ( केर क प्रयोग गद्यमे नै करू , पद्यमे कऽ सकै छी। ) क (जेना रामक) –रामक आ संगे (उच्चारण राम के / राम कऽ सेहो) सँ- सऽ (उच्चारण) चन्द्रबिन्दु आ अनुस्वार- अनुस्वारमे कंठ धरिक प्रयोग होइत अछि मुदा चन्द्रबिन्दुमे नै। चन्द्रबिन्दुमे कनेक एकारक सेहो उच्चारण होइत अछि- जेना रामसँ- (उच्चारण राम सऽ) रामकेँ- (उच्चारण राम कऽ/ राम के सेहो)। केँ जेना रामकेँ भेल हिन्दीक को (राम को)- राम को= रामकेँ क जेना रामक भेल हिन्दीक का ( राम का) राम का= रामक कऽ जेना जा कऽ भेल हिन्दीक कर ( जा कर) जा कर= जा कऽ सँ भेल हिन्दीक से (राम से) राम से= रामसँ सऽ , तऽ , त , केर (गद्यमे) एे चारू शब्द सबहक प्रयोग अवांछित। के दोसर अर्थेँ प्रयुक्त भऽ सकैए- जेना, के कहलक? विभक्ति “क”क बदला एकर प्रयोग अवांछित। नञि, नहि, नै, नइ, नँइ, नइँ, नइं ऐ सभक उच्चारण आ लेखन - नै त्त्व क बदलामे त्व जेना महत्वपूर्ण (महत्त्वपूर्ण नै) जतए अर्थ बदलि जाए ओतहि मात्र तीन अक्षरक संयुक्ताक्षरक प्रयोग उचित। सम्पति- उच्चारण स म्प इ त (सम्पत्ति नै- कारण सही उच्चारण आसानीसँ सम्भव नै)। मुदा सर्वोत्तम (सर्वोतम नै)। राष्ट्रिय (राष्ट्रीय नै) सकैए/ सकै (अर्थ परिवर्तन) पोछैले/ पोछै लेल/ पोछए लेल पोछैए/ पोछए/ (अर्थ परिवर्तन) पोछए/ पोछै ओ लोकनि ( हटा कऽ, ओ मे बिकारी नै) ओइ/ ओहि ओहिले/ ओहि लेल/ ओही लऽ जएबेँ/ बैसबेँ पँचभइयाँ देखियौक/ (देखिऔक नै- तहिना अ मे ह्रस्व आ दीर्घक मात्राक प्रयोग अनुचित) जकाँ / जेकाँ तँइ/ तैँ/ होएत / हएत नञि/ नहि/ नँइ/ नइँ/ नै सौँसे/ सौंसे बड / बडी (झोराओल) गाए (गाइ नहि), मुदा गाइक दूध (गाएक दूध नै।) रहलेँ/ पहिरतैँ हमहीं/ अहीं सब - सभ सबहक - सभहक धरि - तक गप- बात बूझब - समझब बुझलौं/ समझलौं/ बुझलहुँ - समझलहुँ हमरा आर - हम सभ आकि- आ कि सकैछ/ करैछ (गद्यमे प्रयोगक आवश्यकता नै) होइन/ होनि जाइन (जानि नै, जेना देल जाइन) मुदा जानि-बूझि (अर्थ परिव्र्तन) पइठ/ जाइठ आउ/ जाउ/ आऊ/ जाऊ मे, केँ, सँ, पर (शब्दसँ सटा कऽ) तँ कऽ धऽ दऽ (शब्दसँ हटा कऽ) मुदा दूटा वा बेसी विभक्ति संग रहलापर पहिल विभक्ति टाकेँ सटाऊ। जेना ऐमे सँ । एकटा , दूटा (मुदा कए टा) बिकारीक प्रयोग शब्दक अन्तमे, बीचमे अनावश्यक रूपेँ नै। आकारान्त आ अन्तमे अ क बाद बिकारीक प्रयोग नै (जेना दिअ , आ/ दिय’ , आ’, आ नै ) अपोस्ट्रोफीक प्रयोग बिकारीक बदलामे करब अनुचित आ मात्र फॉन्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक)- ओना बिकारीक संस्कृत रूप ऽ अवग्रह कहल जाइत अछि आ वर्तनी आ उच्चारण दुनू ठाम एकर लोप रहैत अछि/ रहि सकैत अछि (उच्चारणमे लोप रहिते अछि)। मुदा अपोस्ट्रोफी सेहो अंग्रेजीमे पसेसिव केसमे होइत अछि आ फ्रेंचमे शब्दमे जतए एकर प्रयोग होइत अछि जेना raison d’etre एतए सेहो एकर उच्चारण रैजौन डेटर होइत अछि, माने अपोस्ट्रॉफी अवकाश नै दैत अछि वरन जोडैत अछि, से एकर प्रयोग बिकारीक बदला देनाइ तकनीकी रूपेँ सेहो अनुचित)। अइमे, एहिमे/ ऐमे जइमे, जाहिमे एखन/ अखन/ अइखन केँ (के नहि) मे (अनुस्वार रहित) भऽ मे दऽ तँ (तऽ, त नै) सँ ( सऽ स नै) गाछ तर गाछ लग साँझ खन जो (जो go, करै जो do) तै/तइ जेना- तै दुआरे/ तइमे/ तइले जै/जइ जेना- जै कारण/ जइसँ/ जइले ऐ/अइ जेना- ऐ कारण/ ऐसँ/ अइले/ मुदा एकर एकटा खास प्रयोग- लालति कतेक दिनसँ कहैत रहैत अइ लै/लइ जेना लैसँ/ लइले/ लै दुआरे लहँ/ लौं गेलौं/ लेलौं/ लेलँह/ गेलहुँ/ लेलहुँ/ लेलँ जइ/ जाहि/ जै जहिठाम/ जाहिठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि/ अहि/ अइ (वाक्यक अंतमे ग्राह्य) / ऐ अइछ/ अछि/ ऐछ तइ/ तहि/ तै/ ताहि ओहि/ ओइ सीखि/ सीख जीवि/ जीवी/ जीब भलेहीं/ भलहिं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि/ नै/ नइ गइ/ गै छनि/ छन्हि ... समए शब्दक संग जखन कोनो विभक्ति जुटै छै तखन समै जना समैपर इत्यादि। असगरमे हृदए आ विभक्ति जुटने हृदे जना हृदेसँ, हृदेमे इत्यादि। जइ/ जाहि/ जै जहिठाम/ जाहिठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि/ अहि/ अइ/ ऐ अइछ/ अछि/ ऐछ तइ/ तहि/ तै/ ताहि ओहि/ ओइ सीखि/ सीख जीवि/ जीवी/ जीब भले/ भलेहीं/ भलहिं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि/ नै/ नइ गइ/ गै छनि/ छन्हि चुकल अछि/ गेल गछि २.२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम नीचाँक सूचीमे देल विकल्पमेसँ लैंगुएज एडीटर द्वारा कोन रूप चुनल जेबाक चाही: बोल्ड कएल रूप ग्राह्य: १.होयबला/ होबयबला/ होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला/ होयबाक/होबएबला /होएबाक २. आ’/आऽ आ ३. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ल’/लऽ/लय/लए ४. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए गेल ५. कर’ गेलाह/करऽ गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह ६. लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’/ ७. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करैबला/क’र’ बला / करैवाली ८. बला वला (पुरूष), वाली (स्त्री) ९ . आङ्ल आंग्ल १०. प्रायः प्रायह ११. दुःख दुख १ २. चलि गेल चल गेल/चैल गेल १३. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन १४. देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह १५. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि १६. चलैत/दैत चलति/दैति १७. एखनो अखनो १८. बढ़नि बढइन बढन्हि १९. ओ’/ओऽ(सर्वनाम) ओ २० . ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ २१. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ २२. जे जे’/जेऽ २३. ना-नुकुर ना-नुकर २४. केलन्हि/केलनि/कयलन्हि २५. तखनतँ/ तखन तँ २६. जा रहल/जाय रहल/जाए रहल २७. निकलय/निकलए लागल/ लगल बहराय/ बहराए लागल/ लगल निकल’/बहरै लागल २८. ओतय/ जतय जत’/ ओत’/ जतए/ ओतए २९. की फूरल जे कि फूरल जे ३०. जे जे’/जेऽ ३१. कूदि / यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद/ यादि (मोन) ३२. इहो/ ओहो ३३. हँसए/ हँसय हँसऽ ३४. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/ नौ वा दस ३५. सासु-ससुर सास-ससुर ३६. छह/ सात छ/छः/सात ३७. की की’/ कीऽ (दीर्घीकारान्तमे ऽ वर्जित) ३८. जबाब जवाब ३९. करएताह/ करेताह करयताह ४०. दलान दिशि दलान दिश/दलान दिस ४१ . गेलाह गएलाह/गयलाह ४२. किछु आर/ किछु और/ किछ आर ४३. जाइ छल/ जाइत छल जाति छल/जैत छल ४४. पहुँचि/ भेट जाइत छल/ भेट जाइ छलए पहुँच/ भेटि जाइत छल ४५. जबान (युवा)/ जवान(फौजी) ४६. लय/ लए क’/ कऽ/ लए कए / लऽ कऽ/ लऽ कए ४७. ल’/लऽ कय/ कए ४८. एखन / एखने / अखन / अखने ४९. अहींकेँ अहीँकेँ ५०. गहींर गहीँर ५१. धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए ५२. जेकाँ जेँकाँ/ जकाँ ५३. तहिना तेहिना ५४. एकर अकर ५५. बहिनउ बहनोइ ५६. बहिन बहिनि ५७. बहिन-बहिनोइ बहिन-बहनउ ५८. नहि/ नै ५९. करबा / करबाय/ करबाए ६०. तँ/ त ऽ तय/तए ६१. भैयारी मे छोट-भाए/भै/, जेठ-भाय/भाइ, ६२. गिनतीमे दू भाइ/भाए/भाँइ ६३. ई पोथी दू भाइक/ भाँइ/ भाए/ लेल। यावत जावत ६४. माय मै / माए मुदा माइक ममता ६५. देन्हि/ दइन दनि/ दएन्हि/ दयन्हि दन्हि/ दैन्हि ६६. द’/ दऽ/ दए ६७. ओ (संयोजक) ओऽ (सर्वनाम) ६८. तका कए तकाय तकाए ६९. पैरे (on foot) पएरे कएक/ कैक ७०. ताहुमे/ ताहूमे ७१. पुत्रीक ७२. बजा कय/ कए / कऽ ७३. बननाय/बननाइ ७४. कोला ७५. दिनुका दिनका ७६. ततहिसँ ७७. गरबओलन्हि/ गरबौलनि/ गरबेलन्हि/ गरबेलनि ७८. बालु बालू ७९. चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध) ८०. जे जे’ ८१ . से/ के से’/के’ ८२. एखुनका अखनुका ८३. भुमिहार भूमिहार ८४. सुग्गर / सुगरक/ सूगर ८५. झठहाक झटहाक ८६. छूबि ८७. करइयो/ओ करैयो ने देलक /करियौ-करइयौ ८८. पुबारि पुबाइ ८९. झगड़ा-झाँटी झगड़ा-झाँटि ९०. पएरे-पएरे पैरे-पैरे ९१. खेलएबाक ९२. खेलेबाक ९३. लगा ९४. होए- हो – होअए ९५. बुझल बूझल ९६. बूझल (संबोधन अर्थमे) ९७. यैह यएह / इएह/ सैह/ सएह ९८. तातिल ९९. अयनाय- अयनाइ/ अएनाइ/ एनाइ १००. निन्न- निन्द १०१. बिनु बिन १०२. जाए जाइ १०३. जाइ (in different sense)-last word of sentence १०४. छत पर आबि जाइ १०५. ने १०६. खेलाए (play) –खेलाइ १०७. शिकाइत- शिकायत १०८. ढप- ढ़प १०९ . पढ़- पढ ११०. कनिए/ कनिये कनिञे १११. राकस- राकश ११२. होए/ होय होइ ११३. अउरदा- औरदा ११४. बुझेलन्हि (different meaning- got understand) ११५. बुझएलन्हि/बुझेलनि/ बुझयलन्हि (understood himself) ११६. चलि- चल/ चलि गेल ११७. खधाइ- खधाय ११८. मोन पाड़लखिन्ह/ मोन पाड़लखिन/ मोन पारलखिन्ह ११९. कैक- कएक- कइएक १२०. लग ल’ग १२१. जरेनाइ १२२. जरौनाइ जरओनाइ- जरएनाइ/ जरेनाइ १२३. होइत १२४. गरबेलन्हि/ गरबेलनि गरबौलन्हि/ गरबौलनि १२५. चिखैत- (to test)चिखइत १२६. करइयो (willing to do) करैयो १२७. जेकरा- जकरा १२८. तकरा- तेकरा १२९. बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे १३०. करबयलहुँ/ करबएलहुँ/ करबेलहुँ करबेलौं १३१. हारिक (उच्चारण हाइरक) १३२. ओजन वजन आफसोच/ अफसोस कागत/ कागच/ कागज १३३. आधे भाग/ आध-भागे १३४. पिचा / पिचाय/पिचाए १३५. नञ/ ने १३६. बच्चा नञ (ने) पिचा जाय १३७. तखन ने (नञ) कहैत अछि। कहै/ सुनै/ देखै छल मुदा कहैत-कहैत/ सुनैत-सुनैत/ देखैत-देखैत १३८. कतेक गोटे/ कताक गोटे १३९. कमाइ-धमाइ/ कमाई- धमाई १४० . लग ल’ग १४१. खेलाइ (for playing) १४२. छथिन्ह/ छथिन १४३. होइत होइ १४४. क्यो कियो / केओ १४५. केश (hair) १४६. केस (court-case) १४७ . बननाइ/ बननाय/ बननाए १४८. जरेनाइ १४९. कुरसी कुर्सी १५०. चरचा चर्चा १५१. कर्म करम १५२. डुबाबए/ डुबाबै/ डुमाबै डुमाबय/ डुमाबए १५३. एखुनका/ अखुनका १५४. लए/ लिअए (वाक्यक अंतिम शब्द)- लऽ १५५. कएलक/ केलक १५६. गरमी गर्मी १५७ . वरदी वर्दी १५८. सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ १५९. एनाइ-गेनाइ १६०. तेना ने घेरलन्हि/ तेना ने घेरलनि १६१. नञि / नै १६२. डरो ड’रो १६३. कतहु/ कतौ कहीं १६४. उमरिगर-उमेरगर उमरगर १६५. भरिगर १६६. धोल/धोअल धोएल १६७. गप/गप्प १६८. के के’ १६९. दरबज्जा/ दरबजा १७०. ठाम १७१. धरि तक १७२. घूरि लौटि १७३. थोरबेक १७४. बड्ड १७५. तोँ/ तूँ १७६. तोँहि( पद्यमे ग्राह्य) १७७. तोँही / तोँहि १७८. करबाइए करबाइये १७९. एकेटा १८०. करितथि /करतथि १८१. पहुँचि/ पहुँच १८२. राखलन्हि रखलन्हि/ रखलनि १८३. लगलन्हि/ लगलनि लागलन्हि १८४. सुनि (उच्चारण सुइन) १८५. अछि (उच्चारण अइछ) १८६. एलथि गेलथि १८७. बितओने/ बितौने/ बितेने १८८. करबओलन्हि/ करबौलनि/ करेलखिन्ह/ करेलखिन १८९. करएलन्हि/ करेलनि १९०. आकि/ कि १९१. पहुँचि/ पहुँच १९२. बत्ती जराय/ जराए जरा (आगि लगा) १९३. से से’ १९४. हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए) १९५. फेल फैल १९६. फइल(spacious) फैल १९७. होयतन्हि/ होएतन्हि/ होएतनि/हेतनि/ हेतन्हि १९८. हाथ मटिआएब/ हाथ मटियाबय/हाथ मटियाएब १९९. फेका फेंका २००. देखाए देखा २०१. देखाबए २०२. सत्तरि सत्तर २०३. साहेब साहब २०४.गेलैन्ह/ गेलन्हि/ गेलनि २०५. हेबाक/ होएबाक २०६.केलो/ कएलहुँ/केलौं/ केलुँ २०७. किछु न किछु/ किछु ने किछु २०८.घुमेलहुँ/ घुमओलहुँ/ घुमेलौं २०९. एलाक/ अएलाक २१०. अः/ अह २११.लय/ लए (अर्थ-परिवर्त्तन) २१२.कनीक/ कनेक २१३.सबहक/ सभक २१४.मिलाऽ/ मिला २१५.कऽ/ क २१६.जाऽ/ जा २१७.आऽ/ आ २१८.भऽ /भ’ (’ फॉन्टक कमीक द्योतक) २१९.निअम/ नियम २२० .हेक्टेअर/ हेक्टेयर २२१.पहिल अक्षर ढ/ बादक/ बीचक ढ़ २२२.तहिं/तहिँ/ तञि/ तैं २२३.कहिं/ कहीं २२४.तँइ/ तैं / तइँ २२५.नँइ/ नइँ/ नञि/ नहि/नै २२६.है/ हए / एलीहेँ/ २२७.छञि/ छै/ छैक /छइ २२८.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २२९.आ (come)/ आऽ(conjunction) २३०. आ (conjunction)/ आऽ(come) २३१.कुनो/ कोनो, कोना/केना २३२.गेलैन्ह-गेलन्हि-गेलनि २३३.हेबाक- होएबाक २३४.केलौँ- कएलौँ-कएलहुँ/केलौं २३५.किछु न किछ- किछु ने किछु २३६.केहेन- केहन २३७.आऽ (come)-आ (conjunction-and)/आ। आब'-आब' /आबह-आबह २३८. हएत-हैत २३९.घुमेलहुँ-घुमएलहुँ- घुमेलाें २४०.एलाक- अएलाक २४१.होनि- होइन/ होन्हि/ २४२.ओ-राम ओ श्यामक बीच(conjunction), ओऽ कहलक (he said)/ओ २४३.की हए/ कोसी अएली हए/ की है। की हइ २४४.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २४५ .शामिल/ सामेल २४६.तैँ / तँए/ तञि/ तहिं २४७.जौं / ज्योँ/ जँ/ २४८.सभ/ सब २४९.सभक/ सबहक २५०.कहिं/ कहीं २५१.कुनो/ कोनो/ कोनहुँ/ २५२.फारकती भऽ गेल/ भए गेल/ भय गेल २५३.कोना/ केना/ कन्ना/कना २५४.अः/ अह २५५.जनै/ जनञ २५६.गेलनि/ गेलाह (अर्थ परिवर्तन) २५७.केलन्हि/ कएलन्हि/ केलनि/ २५८.लय/ लए/ लएह (अर्थ परिवर्तन) २५९.कनीक/ कनेक/कनी-मनी २६०.पठेलन्हि पठेलनि/ पठेलइन/ पपठओलन्हि/ पठबौलनि/ २६१.निअम/ नियम २६२.हेक्टेअर/ हेक्टेयर २६३.पहिल अक्षर रहने ढ/ बीचमे रहने ढ २६४.आकारान्तमे बिकारीक प्रयोग उचित नै/ अपोस्ट्रोफीक प्रयोग फान्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक ओकर बदला अवग्रह (बिकारी) क प्रयोग उचित २६५.केर (पद्यमे ग्राह्य) / -क/ कऽ/ के २६६.छैन्हि- छन्हि २६७.लगैए/ लगैये २६८.होएत/ हएत २६९.जाएत/ जएत/ २७०.आएत/ अएत/ आओत २७१ .खाएत/ खएत/ खैत २७२.पिअएबाक/ पिएबाक/पियेबाक २७३.शुरु/ शुरुह २७४.शुरुहे/ शुरुए २७५.अएताह/अओताह/ एताह/ औताह २७६.जाहि/ जाइ/ जइ/ जै/ २७७.जाइत/ जैतए/ जइतए २७८.आएल/ अएल २७९.कैक/ कएक २८०.आयल/ अएल/ आएल २८१. जाए/ जअए/ जए (लालति जाए लगलीह।) २८२. नुकएल/ नुकाएल २८३. कठुआएल/ कठुअएल २८४. ताहि/ तै/ तइ २८५. गायब/ गाएब/ गएब २८६. सकै/ सकए/ सकय २८७.सेरा/सरा/ सराए (भात सरा गेल) २८८.कहैत रही/देखैत रही/ कहैत छलौं/ कहै छलौं- अहिना चलैत/ पढैत (पढै-पढैत अर्थ कखनो काल परिवर्तित) - आर बुझै/ बुझैत (बुझै/ बुझै छी, मुदा बुझैत-बुझैत)/ सकैत/ सकै। करैत/ करै। दै/ दैत। छैक/ छै। बचलै/ बचलैक। रखबा/ रखबाक । बिनु/ बिन। रातिक/ रातुक बुझै आ बुझैत केर अपन-अपन जगहपर प्रयोग समीचीन अछि। बुझैत-बुझैत आब बुझलिऐ। हमहूँ बुझै छी। २८९. दुआरे/ द्वारे २९०.भेटि/ भेट/ भेँट २९१. खन/ खीन/ खुना (भोर खन/ भोर खीन) २९२.तक/ धरि २९३.गऽ/ गै (meaning different-जनबै गऽ) २९४.सऽ/ सँ (मुदा दऽ, लऽ) २९५.त्त्व,(तीन अक्षरक मेल बदला पुनरुक्तिक एक आ एकटा दोसरक उपयोग) आदिक बदला त्व आदि। महत्त्व/ महत्व/ कर्ता/ कर्त्ता आदिमे त्त संयुक्तक कोनो आवश्यकता मैथिलीमे नै अछि। वक्तव्य २९६.बेसी/ बेशी २९७.बाला/वाला बला/ वला (रहैबला) २९८ .वाली/ (बदलैवाली) २९९.वार्त्ता/ वार्ता ३००. अन्तर्राष्ट्रिय/ अन्तर्राष्ट्रीय ३०१. लेमए/ लेबए ३०२.लमछुरका, नमछुरका ३०२.लागै/ लगै ( भेटैत/ भेटै) ३०३.लागल/ लगल ३०४.हबा/ हवा ३०५.राखलक/ रखलक ३०६.आ (come)/ आ (and) ३०७. पश्चाताप/ पश्चात्ताप ३०८. ऽ केर व्यवहार शब्दक अन्तमे मात्र, यथासंभव बीचमे नै। ३०९.कहैत/ कहै ३१०. रहए (छल)/ रहै (छलै) (meaning different) ३११.तागति/ ताकति ३१२.खराप/ खराब ३१३.बोइन/ बोनि/ बोइनि ३१४.जाठि/ जाइठ ३१५.कागज/ कागच/ कागत ३१६.गिरै (meaning different- swallow)/ गिरए (खसए) ३१७.राष्ट्रिय/ राष्ट्रीय DATE-LIST (year- 2013-14) (१४२१ फसली साल) Marriage Days: Nov.2013- 18, 20, 24, 25, 28, 29 Dec.2013- 1, 4, 6, 8, 12, 13 January 2014- 19, 20, 22, 23, 24, 26, 31. Feb.2014- 3, 5, 6, 9, 10, 17, 19, 24, 26, 27. March 2014- 2, 3, 5, 7, 9. April 2014- 16, 17, 18, 20, 21, 23, 24. May 2014- 1, 2, 8, 9, 11, 12, 18, 19, 21, 25, 26, 28, 29, 30. June 2014- 4, 5, 8, 9, 13, 18, 22, 25. July 2014- 2, 3, 4, 6, 7. Upanayana Days: February 2014- 2, 4, 9, 10. March 2014- 3, 5, 11, 12. April 2014- 4, 9, 10. June 2014- 2, 8, 9. Dviragaman Din: November 2013- 18, 21, 22. December 2013- 4, 6, 8, 9, 12, 13. February 2014- 16, 17, 19, 20. March 2014- 2, 3, 5, 9, 10, 12. April 2014- 16, 17, 18, 20. May 2014- 1, 2, 9, 11, 12. Mundan Din: November 2013- 20, 22. December 2013- 9, 12, 13. January 2014- 16, 17. February 2014- 6, 10, 19, 20. March 2014- 5, 12. April 2014- 16. May 2014- 12, 30. June 2014- 2, 9, 30. FESTIVALS OF MITHILA (2013-14) Mauna Panchami-27 July Madhushravani- 9 August Nag Panchami- 11 August Raksha Bandhan- 21 Aug Krishnastami- 28 August Kushi Amavasya / Somvari Vrat- 5 September Hartalika Teej- 8 September ChauthChandra-8 September Vishwakarma Pooja- 17 September Anant Caturdashi- 18 Sep Pitri Paksha begins- 20 Sep Jimootavahan Vrata/ Jitia-27 Sep Matri Navami-28 Sep Kalashsthapan- 5 October Belnauti- 10 October Patrika Pravesh- 11 October Mahastami- 12 October Maha Navami - 13 October Vijaya Dashami- 14 October Kojagara- 18 Oct Dhanteras- 1 November Diyabati, shyama pooja-3 November Annakoota/ Govardhana Pooja-4 November Bhratridwitiya/ Chitragupta Pooja- 5 November Chhathi -8 November Sama Poojaarambh- 9 November Devotthan Ekadashi- 13 November ravivratarambh- 17 November Navanna parvan- 20 November KartikPoornima- Sama Visarjan- 2 December Vivaha Panchmi- 7 December Makara/ Teela Sankranti-14 Jan Naraknivaran chaturdashi- 29 January Basant Panchami/ Saraswati Pooja- 4 February Achla Saptmi- 6 February Mahashivaratri-27 February Holikadahan-Fagua-16 March Holi- 17 March Saptadora- 17 March Varuni Trayodashi-28 March Jurishital-15 April Ram Navami- 8 April Akshaya Tritiya-2 May Janaki Navami- 8 May Ravi Brat Ant- 11 May Vat Savitri-barasait- 28 May Ganga Dashhara-8 June Harivasar Vrata- 9 July Shree Guru Poornima-12 Jul VIDEHA ARCHIVE १.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक
विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक http://sites.google.com/a/videha.com/videha/ https://sites.google.com/a/videha.com/videha-archive-part-i/ https://sites.google.com/a/videha.com/videha-archive-part-ii/ २.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download http://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi ३.मैथिली ऑडियो संकलन Maithili Audio Downloads http://sites.google.com/a/videha.com/videha-audio ४.मैथिली वीडियोक संकलन Maithili Videos http://sites.google.com/a/videha.com/videha-video ५.मिथिला चित्रकला/ आधुनिक चित्रकला आ चित्र Mithila Painting/ Modern Art and Photos http://sites.google.com/a/videha.com/videha-paintings-photos/ "विदेह"क एहि सभ सहयोगी लिंकपर सेहो एक बेर जाउ। ६.विदेह मैथिली क्विज : http://videhaquiz.blogspot.com/ ७.विदेह मैथिली जालवृत्त एग्रीगेटर : http://videha-aggregator.blogspot.com/ ८.विदेह मैथिली साहित्य अंग्रेजीमे अनूदित http://madhubani-art.blogspot.com/ ९.विदेहक पूर्व-रूप "भालसरिक गाछ" : http://gajendrathakur.blogspot.com/ १०.विदेह इंडेक्स : http://videha123.blogspot.com/ ११.विदेह फाइल : http://videha123.wordpress.com/ १२. विदेह: सदेह : पहिल तिरहुता (मिथिला़क्षर) जालवृत्त (ब्लॉग) http://videha-sadeha.blogspot.com/ १३. विदेह:ब्रेल: मैथिली ब्रेलमे: पहिल बेर विदेह द्वारा http://videha-braille.blogspot.com/ १४.VIDEHA IST MAITHILI FORTNIGHTLY EJOURNAL ARCHIVE http://videha-archive.blogspot.com/ १५. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मैथिली पोथीक आर्काइव http://videha-pothi.blogspot.com/ १६. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ऑडियो आर्काइव http://videha-audio.blogspot.com/ १७. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका वीडियो आर्काइव http://videha-video.blogspot.com/ १८. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मिथिला चित्रकला, आधुनिक कला आ चित्रकला http://videha-paintings-photos.blogspot.com/ १९. मैथिल आर मिथिला (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त) http://maithilaurmithila.blogspot.com/ २०.श्रुति प्रकाशन http://www.shruti-publication.com/ २१.http://groups.google.com/group/videha २२.http://groups.yahoo.com/group/VIDEHA/ २३.गजेन्द्र ठाकुर इडेक्स http://gajendrathakur123.blogspot.com २४. नेना भुटका http://mangan-khabas.blogspot.com/ २५.विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट http://videha123radio.wordpress.com/ २६.Videha Radio २७. Join official Videha facebook group. २८. विदेह मैथिली नाट्य उत्सव http://maithili-drama.blogspot.com/ २९.समदिया http://esamaad.blogspot.com/ ३०. मैथिली फिल्म्स http://maithilifilms.blogspot.com/ ३१.अनचिन्हार आखर http://anchinharakharkolkata.blogspot.com/ ३२. मैथिली हाइकू http://maithili-haiku.blogspot.com/ ३३. मानक मैथिली http://manak-maithili.blogspot.com/ ३४. विहनि कथा http://vihanikatha.blogspot.in/ ३५. मैथिली कविता http://maithili-kavita.blogspot.in/ ३६. मैथिली कथा http://maithili-katha.blogspot.in/ ३७.मैथिली समालोचना http://maithili-samalochna.blogspot.in/ महत्त्वपूर्ण सूचना: The Maithili pdf books are AVAILABLE FOR free PDF DOWNLOAD AT
https://sites.google.com/a/videha.com/videha/ http://videha123.wordpress.com/ http://videha123.wordpress.com/about/ विदेह:सदेह:१: २: ३: ४:५:६:७:८:९:१० "विदेह"क प्रिंट संस्करण: विदेह-ई-पत्रिका (http://www.videha.co.in/) क चुनल रचना सम्मिलित। सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Details for purchase available at publishers's (print-version) site http://www.shruti-publication.com or you may write to shruti.publication@shruti-publication.com विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)२००४-१३. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतए लेखकक नाम नहि अछि ततए संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: शिव कुमार झा, राम विलास साहु आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। भाषा-सम्पादन: नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी आ रश्मि रेखा सिन्हा। सम्पादक-शोध-अन्वेषण: डा. जया वर्मा आ डा. राजीव कुमार वर्मा। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल आ प्रियंका झा। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। ’विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका अछि आ ऐमे मैथिली, संस्कृत आ अंग्रेजीमे मिथिला आ मैथिलीसँ संबंधित रचना प्रकाशित कएल जाइत अछि। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-13 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.com पर संपर्क करू। एहि साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल। सिद्धिरस्तु 97 वि दे ह विदेह Videha বিদেহ www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ‘विदेह'१४० म अंक १५ अक्टूबर २०१३ (वर्ष ६ मास ७० अंक १४०) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA