ISSN 2229-547X VIDEHA ‘विदेह'१४३ म अंक ०१ दिसम्बर २०१३ (वर्ष ६ मास ७२ अंक १४३) ऐ अंकमे अछि:- मोनक बात (गजल, हजल, बाल गजल, रुबाइ आ कताक संग्रह) चंदन कुमार झा श्रुति प्रकाशन अनुक्रम अपन बात गजल (१-६६) हजल (१-२) बाल गजल (१-१५) रुबाइ (१-३३) कता (१) अपन बात १ हम साहित्यक विद्यार्थी नहि छलौं। तेँ साहित्यक बहुत रास बात, व्याकरणसँ अपरिचित छी। तखन सभदिन साहित्यसँ लगाव रहल। साहित्यिक पोथी-पत्रिका पढ़ब सदिखन रुचिगर लगैत रहल अछि। कोनो सामान्य जनमानस जकाँ हमरो मोनमे अपन आसपासक समाज, वातावरण, इत्यादिक प्रति अनेकानेक भाव उत्पन्न होइत रहैत अछि। बहुत रास भाव बितैत समयक संग-संग उड़िया जाइत अछि। तखन ओइमेसँ किछु अक्षरक रूपमे कागजपर अवतरित भऽ कखनो कविता तँ कखनो कथा, कखनो गजल तँ कखनो रुबाइ आ साहित्यक आन-आन विधाक रूप धारण करैत अछि। हम बेसी किछु नहि कहय चाहब कारण जतेक कहब ततेक गलतीक संभावना बढ़ि जाएत। बस एतबे कहब जे हमर "मोनक बात" आम जनक मोनक बातसँ मेल खाएत आ सामाजिक सरोकारसँ जुड़ल हमर चिन्तन समाजकेँ आगू लऽ जएबामे सहायक सिद्ध हएत से आशा रखैत छी। जिनकर अनुकंपासँ कहियो उॠण नहि हएब- श्री विजयकांत मिश्र (अध्यापक)-कन्हई, श्री शंभूनारायण झा-सुसारी, श्री ताराकांत झा (संपादक, मिथिला समाद), डा० धीरेन्द्र नाथ मिश्र (मैथिली विभागाध्यक्ष, सी.एम.कालेज) क संग-संग संपूर्ण विदेह परिवारसँ भेटल स्नेहसँ अभिभूत छी। श्री गजेन्द्र ठाकुर आ आशीष अनचिन्हारक लेल कोनो शब्द नहि भेटि रहल अछि जाहिसँ हुनकर धन्यवाद कही। श्रुति प्रकाशन, दिल्लीक जीवन भरि आभारी रहब। अंतमे हम अपन समस्त परिजन-पुरजन, जिनकर बिना हमर अस्तित्वक कल्पनो नहि कएल जा सकैत अछि, केर प्रति अपन कृतज्ञता व्यक्त करैत सृष्टिकर्तासँ एतबे प्रार्थना करब जे सभक स्नेहक संग-संग हुनकर कृपा एहिना भेटैत रहय। २ मैथिली गजलः- हमरा दृष्टिमे.. गजलक प्रादुर्भाव अरबी भाषामे भेल, तदुपरांत एकरा उर्दू अपनौलक आ उर्दूक शाइर सभ गजलकेँ विश्व साहित्य-जगतमे बेस चिन्हार बनौलनि । प्रारंभमे गजल माने प्रेमालापे बूझल जाइत छल मुदा, बितैत समयक संग शाइर सभ एकरा सामाजिक सरोकारसँ जोड़ैत गेलाह आ आब प्रायः सभ विषयपर गजल कहल जाइत अछि। भारतमे गजलकेँ जे ख्याति भेटल अछि ताहिमे उर्दू गजलक योगदान अन्यतम अछि । आब तऽ उर्दू-हिन्दीक अलावे आन-आन भारतीय भाषामे सेहो गजल बेस लोकप्रिय भेल जा रहल अछि। मेहदी हसन, जगजीत सिंह, गुलाम अली, पंकज उदास, हरिहरण आदि गायक अपन गजल गायकी लेल जग-प्रसिद्धि पौलनि। मैथिलीमे गजलक जन्मदाता पं. जीवन झाकेँ मानल जाइत छन्हि । सन १९०५ ईस्वीमे ओ सर्वप्रथम मैथिली गजल लिखलन्हि। एहि साल मैथिली साहित्य जगतमे एकटा आओर ऐतिहासिक काज भेल छल जे जयपुरसँ मैथिलीक प्रथम पत्रिका "मैथिल हित साधन" बहराएब प्रारंभ भेल छल। तेँ मैथिली पत्रकारिताक प्रारंभ वर्ष सेहो एहि सालकेँ मानल जाइत अछि। तखन फेर हम सभ मैथिली गजल दिस घुरि आबी। पं.जीवन झाक बाद मैथिली साहित्यमे अनेक गजलकार भेलाह। श्री गजेन्द्र ठाकुर मैथिली गजलक एहि युगकेँ "जीवन-युग" कहैत छथि (देखल जाए-"अनचिन्हार आखर"मे हुनक आलेख)। करीब १०७ बरखक इतिहासमे मैथिली गजल मैथिली साहित्य जगतमे अपन उपस्थिति बेर-बेर दर्ज करबैत रहल अछि। मुदा दुर्भाग्यवश ई कोनो ने कोनो कारणवश कतिआएले रहल अछि। मैथिली गजलकारक मध्य गजलक व्याकरणक मादेँ अनिश्चितता सेहो एकरा एकात हेबाक प्रमुख कारण रहल अछि । मैथिली साहित्य पर संस्कृतक प्रभाव ककरोसँ छपित नहि। अधिकांश मैथिलीक साहित्यकार लोकनि संस्कृतक पण्डित रहलाह अछि। एकदिस जहाँ एहिसँ साहित्यिक समृद्धि भेल ओत्तहि दोसर दिस एकटा बड़का नोकसान सेहो भेल जे मैथिल सर्वहारा वर्ग मैथिली साहित्यसँ कटैत चलि गेल। मैथिलीक अलोकप्रियताक संभवतः इहो एकटा पैघ कारण रहल अछि । मैथिली गजलक विकास-यात्राक चर्चा-क्रमकेँ आगाँ बढ़बैत आब किछु एकर व्याकरणक विषयमे चर्चा करी। बीसम शताब्दीमे मैथिलीमे अनेक गजलकार भेलाह आ हुनकर गजल सभ विभिन्न पत्र-पत्रिका आ पोथीक रूपमे प्रकाशित-प्रसारित होइत रहल। मुदा एहिमे बेसी गजल सभ गजल-व्याकरणक मानकक अनुकरण नहि करैत अछि आ कखनो काल कोनो-कोनो रचना तँ एहनो बुझना जाइत अछि जे ओकरा जबरदस्ती गजलक श्रेणीमे राखल-गानल गेल अछि । मैथिलीक एहि पुरान पीढ़ीक गजलकार सभमे बहुतोकेँ एखनो गजलक अरबी बहर आधारित व्याकरणक परिकल्पना आ ओकर अनुपालन कऽ गजल लिखबाक तर्क पचि नहि रहल छन्हि जे दुर्भाग्यपूर्ण अछि। अरबी-फारसीक गजल-विधानकेँ मैथिली भाषानुरूप निरूपण आ तकर प्रयोगसँ मैथिली साहित्यकेँ विस्तार भेटतैक, से हमर मानब अछि । मैथिलीमे छंदोबद्ध रचनाक परंपरा रहल अछि । बिंब आ भावक बिना कोनो रचनाक अस्तित्व संभव नहि मुदा छंद, अलंकार आ व्याकरणक आन-आन मानक एकटा रचनाकेँ उत्कृष्ट बनबैत अछि ताहिमे कोनो दू मत नहि हेबाक चाही । ओना हम एकटा गप्प फरिछा दी जे हमहूँ छंदमुक्त पद्य लिखैत छी मुदा प्रयास हरदम रहैत अछि जे छन्दबद्ध लिखी । छन्दविधान सिखबाक हेतु तेँ प्रयासरतो रहैत छी । गजल स्वाभाविक रुपसँ कहल जाइछ आ एहिमे गेयता सेहो हेबाक चाही तेँ बहरक (छन्दक) अनुपालन यदि एहिलेल अनिवार्य छै तँ ई नीक बात अछि । मैथिली गजलक हेतु एकटा मानक व्याकरण तैयार करबाक लेल श्री गजेन्द्र ठाकुर आ श्री आशीष अनचिन्हार जी द्वारा कएल जा रहल प्रयास स्तुत्य अछि। ई दुनू गोटे क्रमशः "विदेह-मैथिलीक प्रथम ई पाक्षिक" आ "अनचिन्हार आखर" व्लॉगक माध्यमसँ मैथिली गजल व्याकरणकेँ जन-जन तक पहुँचा रहल छथि । खास कऽ आशीषजी जाहि समर्पणसँ मैथिली गजलक विकास लेल लागल छथि आ नव-नव गजलकार केँ प्रोत्साहित करैत छथिन्ह से एकटा ऐतिहासिक प्रयास अछि। हुनकर "अनचिन्हार आखर” (गजल आ रुबाइ संग्रह) आ http://anchinharakharkolkata.blogspot.in/ ब्लॉगपर अरबी-फारसी गजल-व्याकरणकेँ जाहि तरहेँ मैथिली भाषानुरूप सुबोध आ सुव्यवस्थित बना परसल गेल अछि ओ अनुकरणीय अछि । "अनचिन्हार आखर"क प्रकाशनक बाद मैथिल गजल-जगतमे एकटा नवयुग प्रारंभ भेल जकरा फेर श्री गजेन्द्र ठाकुर "अनचिन्हार युग" कहि संबोधित कएने छथि । मैथिली गजलक ई नवयुग अनेक नव गजलकारकेँ प्रोत्साहित कएलक । अनेक रचनाकारकेँ गजल आ सेहो व्याकरणक मापदण्ड पर सोंटल गजल, रुबाइ, कता इत्यादि लिखबाक लेल प्रेरित कएलक । एहि युगक किछु गजलकारमे श्री ओमप्रकाश झा, श्री अमित मिश्र, श्रीमति शांतिलक्ष्मी चौधरी, श्री मिहिर झा, श्री जगदानंद झा "मनु", श्रीमति रुबी झा, श्री राजीव रंजन मिश्र, श्री पंकज चौधरी "नवलश्री' सन अनेको नाम अछि जे अपन प्रतिभाक बलपर गजलकारक रूपमे मैथिली साहित्य-जगतमे स्थापित भऽ चुकल छथि। हमहूँ पहिने अपन टुटल-फुटल भाषामे किछु कविता लिखैत रही मुदा विदेह परिवार आ अनचिन्हार-आखर परिवार हमरा गजलक माने बतौलक आ गजल लिखबाक लेल प्रेरित कएलक । एहि संग्रहक गजल सभ हिनके सभक सत्प्रयासक प्रतिफल अछि । आब हम अपने सभक सोझाँ, एखन धरि हम गजलक विषयमे जतबा ज्ञान "अनचिन्हार आखर" आ विदेह परिवारसँ ग्रहण कऽ सकलौं, ताहि आधार पर गजलमे प्रयुक्त होमएबला किछु प्रचलित शब्दावलीक संक्षिप्त परिचय राखए चाहबः- १. शेर वा शाइरी - दू पाँतिमे पूर्ण भावक अभिव्यक्ति थिक शेर वा शाइरी। २. मतलाक शेर वा मतला- कोनो गजलक पहिल शेरकेँ मतला कहल जाइत अछि । एकर दुनू पाँतिमे काफिया आ रदीफक रहब आवश्यक। ३. रदीफ- मतला बला शेरक अंतिम शब्द समूह जे ओइ शेरक दुनू पाँतिमे जस के तस रहैए। ओना बिनु रदीफक शेर एवं गजल सेहो होइत अछि । ४. काफिया - मतलाक शेरमे रदीफसँ पहिने जे तुकान्त वा स्वर अथवा मात्राक साम्य रहैत छै तकरा काफिया कहल जाइत अछि । बिना काफियाकेँ शेर वा गजल नहि कहल जा सकैत अछि। मतलाक शेरक अलावे गजलक प्रत्येक शेरक दोसर पाँतिमे रदीफसँ पहिने काफिया होएब आवश्यक। काफिया संबंधी विस्तृत निअम "अनचिन्हार-आखर''मे http://anchinharakharkolkata.blogspot.in/ पर देखल जा सकैत अछि। ५. मकता - मकता गजलक अंतिम शेरकेँ कहल जाइत अछि जाहिमे गजलकार अपन नाम वा उपनामक उल्लेख सेहो करैत छथि। ६. बहर - सरल भाषा मे कही तँ गजलमे प्रयुक्त छंदकेँ बहर कहल जाइत अछि। बहरक बिना गजल कहल (लिखल) नहि जा सकैत अछि। कतौ-कतौ आजाद गजलक परिकल्पना सेहो कएल गेल मुदा, ताहूमे काफिया अनिवार्य। एहन गजलक प्रचलन सेहो बहुत कम्मे अछि। मैथिलीमे बहरकेँ मुख्यतः तीन भागमे वर्गीकृत कएल गेल अछि- (क) वार्णिक बहर (ख) मात्रिक बहर (ग) अरबी बहर अरबी बहरकेँ तीन खण्डमे बाँटल गेल अछि- १. समान बहर २. अर्धसमान बहर आ ३. असमान बहर। १. समान बहर - समान बहरक अंतर्गत सात टा बहरकेँ राखल गेल अछि जे अग्रलिखित अछिः- (क.) बहरे-हजज (ख.) बहरे-रमल (ग.) बहरे-कामिल (घ) बहरे-मुतकारिब (ड.) बहरे-मुतदारिक (च.) बहरे-रजज (छ.) बहरे-वाफिर। २. अर्धसमान बहर - अर्धसमान बहरक अंतर्गत सेहो सात टा बहरकेँ राखल गेल अछि जे एना अछि- (क.) बहरे-तवील (ख.) बहरे-मदीद (ग.) बहरे-बसीत (घ.) बहरे-मुजास (ड.) बहरे मुन्सरह (च.) बहरे-मजरिअ (छ.) बहरे-मुक्तजिब। ३. असमान बहर - असमान बहरक अंतर्गत कुल तेरह गोट बहरकेँ राखल गेल अछि जकर विवरण एना अछि- (क.) बहरे-खफीफ (ख.) बहरे-जदीद (ग.) बहरे-सरीअ (घ.) बहरे-करीब (ड.) बहरे-मुशाकिल (च.) बहरे-कलीब (छ.) बहरे-असम (ज.) बहरे-कबीर (झ.) बहरे-सगीर (ञ.) बहरे-सरीम (ट.) बहरे-सलीम (ठ.) बहरे-हमीद (ड) बहरे-हमीम। आशीषजी कहैत छथि जे उपरोक्त बहरक अलावे आरो बहुत रास बहर अछि मुदा ओ सभ अरबी-उर्दूमे बहुत बेसी प्रचलित नहि अछि, लेकिन हमर ई विश्वास अछि जे आशीषजी जल्दिए ओइ बहर सभकेँ सेहो मैथिली भाषानुरुप समायोजित कऽ हमरा सभकेँ परसताह। एहिठाम एकटा बात आओर कहय चाहब जे गजलक सम्बन्धमे एतए हम जे किछु जानकारी देलौं ओइ सम्बन्धमे विस्तृत जानकारीक लेल "अनचिन्हार आखर" पढ़ी एवं http://anchinharakharkolkata.blogspot.in/ पर जाइ। एहि संग्रहमे संग्रहित हमर किछु गजल आ रुबाइ एहनो भेटत जे गजलक व्याकरणक शत-प्रतिशत अनुपालन नहि करैत हएत। तखन चुँकि ई हमर पहिल गजल-संग्रह अछि आ एहिमे सम्मिलित गजल सभ हमर प्रारंभिक रचना अछि तेँ एहि रचनासभक प्रति कने भावुक छी। संगहि आशान्वित छी जे अगिला संस्करण अबैत-अबैत हम एहि गजल सभमे उचित सुधार करबामे सफल भऽ जाएब अन्यथा सम्मिलित नहि करब। अंतमे एहि पोथीमे जे किछु अपने सभकेँ सार्थक लगए तकर श्रेयक भागी "विदेह" आ' "अनचिन्हार आखर" परिवार अछि आ जत’ कतौ कोनो त्रुटि बुझायत से हमरा माथ पर आओत। अपने सबहक सुझाव आ उत्साही प्रतिक्रियाक आशाक संग हम अपन ई रचना सभ अहाँ सभक बीच परसि रहल छी । -चंदन कुमार झा १८-०८-२०१२ (कोलकाता) गजल 1 लोक कहैए वाह-वाह की खूब लिखै छी केना कही जे कलमेसँ गुदरी सीबै छी शब्दजाल बुनै छी आ ओकरे ओझराबी सोझरबैमे ओकरे खाली दिन कटै छी रास-रंगक लोभ देखाकऽ मोन बुझाबी देह जरैए खाली खूनक सेप घोंटै छी कतऽ गेल ओ रीत पुरना से नहि जानि "चंदन" गबै छी गीत मधुघट पीबै छी वर्ण-१५ 2 हाथमे खुरपी माथे पथिया चलू करी कुकुरक बधिया आञ्गि-नूआ तऽ चेथरी-चेथरी नाकमे झूलैए तैयो नथिया पूत-कपूतो कहबैछ बौआ बुच्चीक किंतु होनि सरधिया बहु-बेटीकेँ जारि रहल छै सभकेँ चढ़लै की दुर्मतिया ? नारी जननी होइछै "चंदन" सृष्टि केर ई प्रेम-मुरतिया वर्ण-११ 3. साँझ बारल जखन बाती पिया यौ अहाँ मोन पड़लौं राति आयल जखन कारी पिया यौ अहाँ मोन पड़लौं फूलेलै जखन रात-रानी पिया यौ अहाँ मोन पड़लौं कोइली जखन बजै बाड़ी पिया यौ अहाँ मोन पड़लौं पहिरी जखन लाल साड़ी पिया यौ अहाँ मोन पड़लौं साटी जखन माथ टिकुली पिया यौ अहाँ मोन पड़लौं विरहानल जरैछ छाती पिया यौ अहाँ मोन पडलौं दहेलै काजर केर धारी पिया यौ अहाँ मोन पड़लौं सजौले सेज जखन ताकी पिया यौ अहाँ मोन पड़लौं पढ़ै छी "चंदन" केर पाँती पिया यौ अहाँ मोन पड़लौं वर्ण-२० 4 प्रेम केलौं कि केलौं कुकर्मे सएह नहि जानि रहल छी अश्रुधार भसिआयल सभटा सपना छानि रहल छी सात जन्म धरि संग रहत से सप्पत खएलक झूट्ठे फुसि छलै पिरीतक बतिआ मन-अनुमानि रहल छी धन-बैभव ऐश्वर्यक आगाँ के पुछतैक निरधनकेँ ? सत्य-नेह केर मोल ने किछुओ सभटा जानि रहल छी बीत गेलइ से बात गेलइ नहि मोन पारिकऽ कानब फेरो नहि भसियेबै "चंदन" से निश्चय ठानि रहल छी वर्ण-२१ 5 हरहोर भेलै बड़ शोर भेलै सजलै बरात मटकोर भेलै मरबा सजलै पिपही बजलै नटुआ केर नाच बेजोर भेलै जे भोग छलैक भरि पोख रहै तीमन तरुआ तिलकोर भेलै हम बैसल छी अन्हरियामे जे चान छलैक से चकोर भेलै "चंदन" हिय हर्ष उफनै छैक जँ कूदल आँखिसँ तऽ नोर भेलै वर्ण-१२ 6 जगरनेमे राति बीतल, छलै नोरे राति शीतल चनो कनलै ओस झहरल, लगै छै तेँ भोर तीतल कछमछाइत मोन-प्राणो क’रे फेरी राति बीतल बुझय चाही, नियति से रण, रहल छी हाइर कि जीतल पुछय सभ, की भेल "चंदन" कही केना अपन बीतल बहरे-मजरिअ (1222-2122) 7 एखन राति कटै छी हम कनिते-कनिते एखन दिन बीतै पहर गनिते-गनिते लगै अछि ई जीवन अकारथ अचानक बिसरायल गामो शहर तकिते-तकिते पहुँचलौं नहि जानि केना एहि चौबटिया बिसरलौं ठेकाना कखन चलिते-चलिते कहाँ कऽ सकलियै एकचारीयो एक ठाढ़ बिकायल घरारी महल बन्हिते-बन्हिते कहब कोन कथा और सुनायब की पाँति शब्दहि हेरायल गजल गढ़िते-गढ़िते नियति केर फेरामे ओझरायल ''चंदन" छिड़ियेलै सपना पलक मुनिते-मुनिते वर्ण-१६ 8 करेजक घर तँ खोलू कने सिनेहक ताग जोरू कने अहिँक हिय-बीच चाही बसय जगह बसबाक छोड़ू कने बनल बेरस हमर जीवने अहि मे नेहरस घोरू कने करय फरियाद "चंदन" सुनू सजल सम्बन्ध जोड़ू कने 1222-122-12 9 आन्हर बनल सरकार लाचार भेल जनता व्यापार पोषित नीतिसँ कहू की एतइ समता ? गाम भूखल-पेट देशक खेत उसर भेल छै बाढ़ि-रौदीक बीच उपजल छै मात्र दरिद्रता कल-करखाना शहरमे चलैछ दिन-राति, जे प्रगतिक अछि मापदण्ड एकात भेल जनता गाम जा बसि रहल शहर जीविकाक जोहमे महाजनक ब्याज-तर फुला रहलै निर्धनता ग्राम-वासिनी भारती किए गेली बसय नगर कनैत छथि आइ तेँ ई कैलनि केहन मूर्खता "चंदन" करू आह्वान स्वराजक एकबेर फेर हँसती एहीसँ देश खुशहाल बनत जनता वर्ण-१८ 10 नेहक सूत बान्हि रखलियै करेजक कोन ओकरा बिसरल नहि भेल जकरा से बिसरि गेल हमरा जिनगीक बाट जकरे आञ्गुर ध' चलब सिखेलियै बिचहि बाटमें से छोड़ि पड़ायल खसितहि हमरा कहाँ बचल छै कतहुँ मोल आब अनमोल-नेहक सौंसे छै खाली टाकाक पूछ आब लोकक पूछ ककरा ? "चंदन" टाका तऽ छियै हाथक मैल सत्-सम्बन्धक आगाँ नहि बुझैछ जे बात बनैछ तकरे जिनगी फकरा वर्ण-२० 11 घोघ हुनकर उतरि गेलइ जोत सगरो पसरि गेलइ बहल पुरबा जखन शीतल हुनक आँचर ससरि गेलइ देखि हुनकर ठोढ़-लाली आगि छाती पजरि गेलइ नैन लाजे हुनक झूकल अटकि हमरो नजरि गेलइ रूप यौवन निरखि "चंदन" मोन मधुकर मलरि गेलइ 2122-2122 12 जिनगी केर बाटपर काँट सौँसे गाड़ल छै नियति केर टाट बेढ़ सगरो दफानल छै माय-बाप भाइ-बन्धु छै झूठहि सम्बन्ध सभ मोह-जाल ओझरायल जिनगी गतानल छै कनियो जँ ढीठ बनि सुनलक कियो मोनक छूतहर घैल बनल समाजेसँ बारल छै लुटि-कुटि जीवन भरि आनल से बाँटि देल खाली हाथ आब देखि परिजन खौंझायल छै बूढ़ भेल दुरि गेल फकरा बनि बैसल छै "चंदन" गुनैछ केहन दुनिया अभागल छै ? वर्ण-१७ 13 मूरख बड़ा महान ओ जे अपनाकेँ काबिल बुझै छै अपन माथक टेटर ठिक्के ककरहु नहि सुझै छै आनक नीको अधलाह ताकब कबिलताइ कहाबै अप्पन अधलाहोकेँ जगमे सभसँ नीमन बुझै छै छओ-पाँच नहि बुझै किछुओ नहि मोने कलछप्पन ऊँच-नीचक भेद ने जानै मूढ़ सभकेँ एक बुझै छै छल-प्रपंच आ राग-द्वेष तऽ काबिलक गहना थिक बाट चलैत तेँ ओकरहि सभकेँ भिखमंगो लुझै छै पर-उपकारे लीन रहैछ जे से अछि अस्सल ज्ञानी "चंदन" असली ज्ञानी जगमे ओ जे नहि खूब बुझै छै वर्ण-२० 14 शब्द संग खेलाएब हमरा नीक लगैत अछि शब्दहि ओझराएब हमरा नीक लगैत अछि मोनक चिनबार पर छी रान्हैत जे मीठ-तीत से भावहि झोराएब हमरा नीक लगैत अछि सुखक-गीत दुखक-टीस जिनगीक कथा-ब्यथा जगभरि सुनाएब हमरा नीक लगैत अछि सुरूजक किरीण चढ़ी स्वर्ग केर विहार करी धरतीयो लोटाएब हमरा नीक लगैत अछि विहग-गीत गाबय छी कि विरहिन सुनाबै छी "चंदन" ई बौराएब हमरा नीक लगैत अछि वर्ण-१८ 15 कौआ कूचरल भोरे अँगना साँझ परैत औथिन्ह सजना छम-छम-छम-छम पायल बाजै खनकि उठल कंगना सासुक बोली लगैछ पियरगर ननदि बनलि बहिना गम-गम-गमकय तुलसीक चौरा चानन सन अँगना रचि-रचि साजल रूप मनोहर बेरि-बेरि देखल ऐना टिकुली-काजर जुट्टी-खोपा नूआ-नवका चमकैत गहना पहिलहि साँझ बारल दीप-बाती जगमग घर-अँगना उगल चान असमान हृदयमे उठल विरह वेदना सेज सजौने बाट तकैत छी घर एताह कखन सजना "चंदन" सजनी गुनधुन बैसलि की मांगब मुँह बजना वर्ण-२२ 16 हमरा आब इजोतेसँ लगैत अछि डर चुप भेल तेँ बैसल रहै छी अन्हार घर नहि मोन अछि हमरा नाम आ परिचय अपरिचित छी जगमे तेँ घुमै छी निडर ताकि लैछ लोक नाममे पहिचान लोकक गुण-शीलक ऐ समाजमे छै कहाँ मोजर सम्बन्ध नहि जकरासँ बनल से समांग तोड़लक भरोस ओ भरोसे छलौं जकर "चंदन" जगक रीति ओझराउ नै जिनगी सुनू खबरदार ! बनल रहू बेखबर !! वर्ण-१६ 17 पुनिमक रातिक चान सन चमकैत छी अहाँ अँगनाक तुलसी चौरा सन गमकैत छी अहाँ कखनो माइक ममता बनि झहरैत छी अहाँ कखनो आगिक धधरा सन धधकैत छी अहाँ कखनो संगी-बहिनपा बनि हँसबैत छी अहाँ कखनो जीवन संगिनी बनि बुझबैत छी अहाँ कखनो अबलाक रूप धरी फकरैत छी अहाँ कखनो कालीक स्वरूप धरी डरबैत छी अहाँ कखनो प्रेमक मुरति बनि सिखबैत छी अहाँ "चंदन" नारीक रूप अनेक देखबैत छी अहाँ वर्ण-१८ 18 नहि फुरैए हमरा आब प्रेम गीत अंतर नहि किछुओ हारि हो वा जीत टकटकी लगौने रहै छी रातिभरि सपनो नहि अबैछ कियो मनमीत श्मशान बनल अछि हमर करेज पैसत के ऐमे सभ कियो भयभीत जीवैत छी मुदा बैसल छी मुर्दाघर मुर्दा संग जीवन करैत छी ब्यतीत "चंदन" जीवनेसँ लगैछ आब डर मृत्युसँ हमरा अछि भऽ गेल पिरीत वर्ण-१४ 19 चलू एकबेर फेर रंगमंच सजाबी बहुरूपिया-रूप धरी आ नाच देखाबी दुनिया बरू बूझत बकलेले हमरा हमरा अछि स’ख जे दुनियाकेँ हँसाबी सुन्दर अभिनेता तऽ जगभरि भेटैछ हमर मोन जे पाठ लेबरा’क खेलाबी दुनियाक रंगमंच जे भऽ गेल निरस आउ एकरा जीवन-रस बोर डुमाबी "चंदन" ई गुमसुम बैसल जे जीवन चलू अपने पर हँसि एकरा हँसाबी वर्ण-१५ 20 कमला-कोशीक धारमे दहायल जिनगी थाल-कादो सनायल मटिआयल जिनगी निशाँ ताड़ी केर मातल बौरायल जिनगी माटि चाँगुरसँ कोरैछ भुखायल जिनगी रौद जेठ केर जारल फुलायल जिनगी एसी घर देखू बैसल घमायल जिनगी टुअर-टापर नञ्गटे टौआयल जिनगी देखू साजि-सम्हारल ओरिआयल जिनगी देखू हँसैत कनैत आ खौँझायल जिनगी "चंदन" रूप अनेकहुँ देखायल जिनगी वर्ण-१६ 21 सपना नोरक धार बहाओल जागि-जागि केर राति बिताओल साज-सिंगार सोहाइ नै किछुओ विरहा-आगि करेज जराओल नभमे चमकल जखने चन्ना हियामे प्रेमक ज्वारि उठाओल कोइली सौतिन मुँह दुसै अछि कू-कू-कुहुकि कऽ होश उड़ाओल अचके बालम ऐलाह अँगना "चंदन" सजनी मोन जुड़ाओल वर्ण-१२ 22 लगै अछि लाल अहाँ केर गाल जहिना सिनुरिया आम अहाँ केर चान सन मुखरा देखि चानो बनल गुलाम केश कारी घटा घनघोर अमावस राति सन लागय नैन काजर सजल चमकल बिजुरीक छूटल घाम जएह बोली अहाँक ठोर केर चुमि कए बहराइछ महुआ गाछ पर कोइली सएह गाबि बनल सूनाम डेग राखल जतऽ धरती माटि बनिगेल ओतऽ चानन रुनझुन पजेब-झंकारसँ अँगना बनल सुरधाम कसमस जुआनी देखिकऽ सुधिबुधि हमर हरायल पीबै लेल नेहरस ब्याकुल भमरा भऽगेल बदनाम "चंदन"पथिक प्यासल प्रेम केर बाट पर बौआइछ दियौ ने नेहरस एकरा पिआ बैसा अहाँ करेजा-धाम वर्ण-२१ 23 बेचि खेलक इमानो बजारमे लाज-धाखो सजेलक सचारमे भाइ-बापोसँ देखू लड़ैत छै प्रेम देखू फुसिक छै भजारमे आब मातो’क ममता बिकाइ छै नेह-नाता भसेलक इनारमे जे कहाबै लफंगा समाजमे से तऽ नामी बनल छै जबारमे देखि"चंदन" पड़ल छै विचारमे साधु-संतो रमल बेभिचारमे 212-212-212-12 24 हमतऽ कनिते रही आँखिक नोरे सूखा गेलइ अपने कानब पर देखू हमरा हँसा गेलइ लोक पुछलक जखन कहल ने भेल किछुओ असगरे आइ सभ बात अनेरे बजा गेलइ साओन-बदरी जे आगि उनटे धधकि उठलै आइ से आगि एकबूँद पसेनासँ पझा गेलइ बैसि अँगना भरि राति गनैत छलौं तरेगन आइ से तरेगन केयो आँचरमे सजा गेलइ कतेको सालसँ पटबैत छलौं जे गाछ "चंदन" अँगनामे रोपल से गाछ आखिर फुला गेलइ वर्ण-१८ 25 नैनक बाण चलाकऽ हम्मर अपटी खेतमे प्राण लेलौं झूठहि छल जे प्रेम-पिहानी से सभटा हम जानि गेलौं सप्पत खएने रही अहाँ जे आयब हम्मर सपनामे सपना देखब सपने रहलै निन्नो अहाँ दफानि लेलौं छल मोन जे प्रेम-रससँ भीजा गढ़ब नूतन जिनगी हम एहिमे सौरभ मिझरेलौं अहाँ नोरसँ सानि देलौं मोन छल जे मूक्त गगनमे उड़ब अहाँ आ हम संगे उड़िलौं कतऽ अहाँ जानि नहि हमरा एहिठाँ छानि गेलौं हमरा बिनु जँ जीबि सकी तऽ जीबू अहाँ सुखक जिनगी तकिते बाट अहीँक "चंदन" काटब जिनगी ठानि लेलौं वर्ण-२१ 26 उजरल गाछी जकाँ लगैछै गाम हमर चुप्पी सधने किएक कनैछै गाम हमर नवकी कनिञा जकाँ छलैजे गाम हमर विधवा नारी बनल कनैछै गाम हमर भरले-पुरले हँसै छलैजे गाम हमर टूअर-टापर भेल फिरैछै गाम हमर प्रीतक पाँती गबैत छलैजे गाम हमर उकटा-पैंची किएक करैछै गाम हमर निर्मल-निश्छल बास छलैजे गाम हमर "चंदन" किए डेरौन लगैछै गाम हमर वर्ण-१६ 27 करेजकेँ पाथर बना लिअ पिरीतकेँ आखर मिटा दिअ सपन जनम भरिकेर देखल कहूतऽ की नोरहि भसा दिअ जड़ैत छै जे आगि विरहक कहैत छी तकरा मिझा दिअ जनमक संगी बनक बदला कहैत छी नाता कटा लिअ रकटल "चंदन" मोन बेकल कियोतऽ सजनीकेँ बुझा दिअ 12-1222-122 28 मिथिला राजक खातिर मैथिल लड़बे करतै खूनसँ भिजलै धरती मिथिला बनबे करतै निज मातृभूमि उत्थानक हेतु लड़िते रहतै माइक लाजक खातिर संतति मरबे करतै मिथिला-मैथिल-मैथिलीक स्वाभिमानक रक्षार्थ निज प्राणहुक उत्सर्ग मैथिल करबे करतै कमला-गंगा-कोशी-गंडक’क सप्पत खा मैथिल अलगहि राजक सपना पूरा करबे करतै होयत नहि ब्यर्थ बलिदान कोनो बलिदानीक "चंदन" ठोस प्रतिकार मैथिल करबे करतै वर्ण-१८ 29 कहियेसँ कतिआयल कनै छथि जानकी कहियेसँ भसिआयल फिरै छथि जानकी मिथिलासँ बिधुआयल लगै छथि जानकी मैथिलसँ खिसिआयल लगै छथि जानकी घर-घरसँ बौआयल फिरै छथि जानकी घर-घरतऽ छिछिआयल फिरै छथि जानकी रामहिसँ डेरायल लगै छथि जानकी जिनगीसँ अकछायल लगै छथि जानकी अपराध की कयलनि पुछै छथि जानकी चुप्पहि जनक "चंदन" कनै छथि जानकी 2212-2212-2212 30 किछु बात एहन जे कना गेल हमरा जिनगीक नव माने सिखा गेल हमरा सपनाक दुनिया छलहुँ झूलैत झूला तखनहि उठल बिर्ड़ो जगा गेल हमरा पालन अपन पेटक करैए कुकूरो आनोक हित जीबू बुझा गेल हमरा अप्पन हरख हरखित रहैछै सभ क्यो अनको दुखसँ कानब बता गेल हमरा "चंदन"मनुज जीवन बनय नहि अकारथ जिनगीक सभ मकसदि गना गेल हमरा 2212-2212-2122 31 नैनक नीर भीजल चीर जमुना तीरमे करेजा क्षीर सींचल वीर जमुना तीरमे बैसल नीड़ कूक अधीर जमुना तीरमे लागल भीड़ मूक बहीर जमुना तीरमे आसक सीर शुष्क, नै नीर जमुना तीरमे चासक सीर गरै छै सीर जमुना तीरमे देशक वीर भेल फकीर जमुना तीरमे नेताक भीड़ गिरैछै खीर जमुना तीरमे सनले खून द्रौपदी चीर जमुना तीरमे लागल घून काया प्रवीर जमुना तीरमे वर्ण-१६ 32 मन वीणा तार झंकार भरल मैथिलजन’क हुंकार प्रबल बहुत आँखि केर नोर बहल बहुत जगक दुत्कार सहल आब उचित प्रतिकार करब शत्रुक प्रहार जँ खून बहल निज अधिकारक हेतु लड़ब सौभाग्य जँ प्राण तियागै पड़ल मिथिला-राजक तऽ माँग अटल "चंदन" मैथिल लड़िते डटल वर्ण-१२ 33 मोन एहन जे मानबे नहि करैए आगि विरहा तेँ साउनोमे जरैए नोर झहरै छै आँखि से, कंठ सुखले बुन्न भरि नेहक लेल तैयो मरैए जेठके रौदहु जकर छाहरि जुरेलौं बिनु बसाते से पात आसक झरैए डारि पर नेहक फरल सम्बन्ध छल जे पाथरे चोटायल सड़ल फर झरैए बाट 'चंदन' टकटक अहीँके तकैए मोन बहसल नै आस किन्नहु धरैए 2122-2212-2122 34 राति तरेगण गनिते कटै छी आगि विरह के जड़िते रहै छी बाट अहीँ के तकिते रहै छी रूप अहीँले सजिते रहै छी बनल बताहे हँसिते रहै छी कोनहि बैसल कनिते रहै छी गीत विरह के गबिते रहै छी तामस मोनक पिबिते रहै छी मोनहि अपने लड़िते रहै छी "चंदन"लागय जिविते मरै छी 2-1-1-2-2-1-1-2-1-2-2 वर्ण-१२ 35 मलयानिल केर मदिर गंधसँ श्वास रोग उपचार करब दुषित वायु अवरूद्ध साँस जे तकर आब प्रतिकार करब जड़वत बनल जे जीवन जगमे तकरा पुनः बना चेतन मधु-परागसँ नहाकऽ ओहिमे नवल उर्जाक संचार करब निज अवलंबन हेतु जगायब बिसरल सभ श्रम-शक्तिके कर्मेक बलपर विजय प्राप्ति हित कर्मयुद्ध हुंकार करब रहत आब नहि हारल-थाकल घर-बैसल मानव एक्कहु चलू आब कर्मक प्रकाशसँ करिखल घर उजियार करब एकप्रण एकनिष्ठ श्रद्धासँ निश्छल भावहि गाँथब श्रममाल श्रमक फल भेटब छै निश्चित "चंदन" जगत प्रचार करब वर्ण-२४ 36 आँखि खूनसँ भरल जेना काँट हिरदय गरल जेना पानि खौलय अनल जेना आगि लगए ठरल जेना नोर पोखरि भरल जेना धार खूनसँ भरल जेना गाछ छलए फड़ल जेना आब लगए झरल जेना गाम छलए सजल जेना आब "चंदन" मरल जेना 2122-2122 वर्ण-१० 37 जकरे पाइ छलौं तर-उपर सैह पूत कमौआ धेलकै घर मरचर बनलै अंगना घर ठाठ उछेहल देह नहि पर ढनढन कोठी ओ बखारी-ढक उनटल बासन भनसाघर रकटै नेना सटकल उदर बेदम उकासी दबाइ बेगर चंदन' केनाकऽ जिनगी कटत ॠण-पैचसँ की चलत गुजर ? वर्ण-१२ 38 मोन केर बात सदति लिखिते रहब चौबटिया ठाढ़ गजल कहिते रहब जिनगीक बाटमे गड़तै जँ काँट-कूश हँसिते गुलाब सन गमकिते रहब समाजो घिसिआओत कादोमे हमरा जँ कदबे कमल बनि फुलाइते रहब कतबो झाँट-बिहाड़ि आबि जाउ रस्तामे मुदा तैयो दीप आस’क लेसिते रहब 'चंदन' पाथर-समाज’क छातीए पिजा कलमक धारसँ शत्रू हनिते रहब वर्ण-१५ 39 आब सूतल लोक जागि रहलैए तेँ तऽ चोर बेछोहे भागि रहलैए देखू लागल भीड़ चौबटिया पर बेटा माँ-बापकेँ बेलागि रहलैए बजारक भीड़मे तकैत एकांत सूतय लेल लोक जागि रहलैए चैतक पछबा सुड्डाह भेल घर भादबमे धधकि आगि रहलैए तबधल धरती दहेतै फेरोसँ सुगरकोना मेघ लागि रहलैए जरलै घर दहेलै डीह "चंदन" डटले लोक क्यो नै भागि रहलैए वर्ण-१३ 40 गुप्फ अन्हार नहि हाथो-हाथ सुझैए आनक बात कोन परिजनो हुथैए जकरा ले सर्वस्व कएलहुँ अर्पण सैह हमरा मतलबी लोक बुझैए खून पसेना बहाबी मुदा छी दरिद्र भिखमंगा बौसैए धनिकहा लुझैए कत्तौ करोट फेरै लोक सड़क पर कतहु कुक्कुरो पलंग पर सुतैए केओ भूखे पेट रकटल प्राण, कानै "चंदन" पाचकक चूर्णो खाए कुथैए वर्ण-१४ 41 राति सपनमे प्रियतम एलाह कर-कौशलसँ हमरा जगेलाह काँच निन्न टुटल मन कछमछ उड़ी-बिड़ी लगा अपने नुकेलाह देहक पानि बनि बहल पसेना अधरतिये मोन प्यास लगेलाह कसमस आञ्गि नख लागि फाटल चेन्ह सगर देह न’ह गड़ेलाह हमरा संग कत खेल खेलेलाह "चंदन" तखन जा मोन जुड़ेलाह वर्ण-१३ 42 दू लबनी केर खेला देखू लागल रेलम रेला देखू फुसिए ठेलम ठेला देखू बलजोड़िक झमेला देखू मत्त गुरू संग चेला देखू नाच करै अलबेला देखू जीवन’क संध्यावेला देखू कानै अनाथ कोरैला देखू विषले लागल मेला देखू अमृत भेल करैला देखू वर्ण-१० 43 फूल नै बनलौं तऽ की काँट बनि गड़ैत तऽ छी प्रेम नै केलौं तऽ की संग हमर सहैत तऽ छी सोँझा नै हँसलौं तऽ की परोछमे कनैत तऽ छी अन्हार छै घर तऽ की दीप बनि जड़ैत तऽ छी अपना नै सकलौं तऽ की संगमे रहैत तऽ छी भऽ नै जाइ आनक संगी से सोचि मरैत तऽ छी सुख नै देलौं तऽ की संगे दुख कटैत तऽ छी मीत नै भेलौ तऽ की रूसलमे बौँसैत तऽ छी बुझि कऽ बकलेले हमरा अहाँ हँसैत तऽ छी छी अकछायल तऽ की बात तैयो सुनैत तऽ छी वर्ण-१७ 44 आखर आखर सजा लिखै छी गीत अहाँले सजनी चाँचर पाँतर हम तकै छी प्रीत अहाँले सजनी अपन कोंढ़क कोरि माटि सौरभ पुनि मिझरेलौ नेहक रसमे भीजा गढ़ै छी भीत अहाँले सजनी अहाँक रूपक आगाँ हम हारि गेलहु अपनाकेँ अप्पन हारि बिसारि लिखै छी जीत अहाँले सजनी मधुर मिलनक बेला कहियो तऽ मधुघट पीबै सोचि-सोचि घट-घट पीबै छी तीत अहाँले सजनी अँगना, घर, दलान सजा बाट तकैत छी बैसल "चंदन"नेहक बुन्न तकै छी शीत अहाँले सजनी वर्ण-१९ 45 रोटी महग महगे नून भेल छै बोटी सुलभ सस्ता खून भेल छै सौँसे शहर सहसह लोक गजगज गामक दलानो-घर सून भेल छै प्रगतिक पथ भ्रष्टाचार अड़ल छै नेता समाजक जनु घून भेल छै खेती करय जे से दीन भेल छै बइमान बेपारी दून भेल छै करनी अपन नहि देखैत लोक छै "चंदन"फुसिक खातिर खून भेल छै 2212-2221-212 46 मोनक बात मोनहिमे रखैत छी चुप्पी लाधि हम जिनगी कटैत छी चकमक जगत लागल चौन्ह लोककेँ घर अन्हार चैनक निन सुतैत छी झूठक लेल आमिल लोक छै पिने हम सत्तो जनेबा-ले कुथैत छी बेचल खेत डाबर-डीह गुजर-ले तैयो केस कित्ता दस लडैत छी जुन्ना जरल ऐंठन एखनो बचल "चंदन" बोल तै ऐंठल बजैत छी 2221-2221-212 47 ककरो तऽ जुन्ना आँत भेल छै केयो खा-खा अप्सयाँत भेल छै पिसा रहलै देशक जनता कानूने-व्यवस्था जाँत भेल छै बुड़िबके लोक नेता बनलै विकास नेनाक खाँत भेल छै समाज बुड़लै बरु खत्तामे संसद भोजक पाँत भेल छै वर्ण-११ 48 द्वेषक धाहसँ बेसी स्नेहक छाह छै शीतल नैनक नोरसँ बेसी देहक घाम छै तीतल देहक खूनसँ बेसी लोकक मोन छै धीपल अप्पन सोचसँ बेसी आनक सोच छै रीतल ककरो हाथसँ बेसी ककरो गात छै भीजल खूनक छापसँ देखू सगरो बाट छै तीतल ककरो खापसँ बेसी कत्तहु आम छै बेढ़ल ककरो सगर जिनगी बान्ह-कात छै बीतल ककरो बोल समदाउनक भास छै भरले गाबय "चंदन" उदासी जग बुझै छै गीतल वर्ण-१७ 49 हम रूकल छी लेखनी ठमकल अछि सभ कल्पना ठामे-ठाम दरकल अछि प्रगतिक पहिया आइ बिच्चे बाट पर भ्रष्टाचारक ओठ लागि अरकल अछि भोगी भूपति सभ धएने बाना योगी’क रोटी प्रजाक खाइ देखू सरकल अछि ज्ञान-शील तप-त्याग संकुचित भेल छै मुदा संकीर्ण सोच सौंसे फलकल अछि "चंदन" लोककेँ निश्चय प्रतिकार चाही कि फेर अनेरुए मेघ ढनकल अछि ? वर्ण-१५ 50 दानवी चोटसँ मानवता थकुचल जाइए चाँगुरक नोकसँ मनुक्ख बकुटल जाइए भजारि-भजारि बिचार लोक भजार तकैछ तैयो डेग-डेगपर भजार ठकल जाइए नञ्गटे नचैत लोककेँ धेयान कहाँ छैक जे नाच बढ़ल जाइए आ तेल सधल जाइए जड़ा छातीकेँ निकलैछ जे धूँआ असमानमे ओहीसँ तप्त पृथ्वी हिमालयो घमल जाइए "चंदन" रोगायल छाती कुंठित मोन लोकक बस पाथरक मकान एतऽ बढ़ल जाइए वर्ण-१७ 51 नैनक काजर पर मोहित छै सगरो जगत जड़ैत डिबिया केर मोनक मरम के बूझत ? मदान्धकेँ सरोकार नहि होइत छै ककरोसँ फेर सरकारकेँ केना दीनक लचारी सूझत ? गोर गाल कारी काजर देखि अन्हरेलै युवक तखन कनैत माइक आँखिक नोर के पोछत ? काँख तर नुकौने रहैछै लोक पानिक बोतल तखन फेर चौड़ीमे के इनार पोखरि खुनत ? गाम भऽगेलै सुन्न मुदा करै चकमक शहर "चंदन" ई बढ़ैत बिषमताकेँ सम के करत? वर्ण-१८ 52 मानवताक डेन पकड़ि मनुक्ख बनैत भगवान हेतै मुदा, पतितकेँ पशु कहब जँ पशुओ’क अपमान हेतै मूरख भूपति बनि बैसलै लुधकी लागल चाटुकार छै तखन जगतमे अहीँ कहू की विद्या केर सनमान हेतै? रामक मर्यादा तोड़िताड़ि गौतमक विचारकेँ छोड़िछाड़ि गाँधीक देखाओल पथकेँ त्यागि की मानवक कल्याण हेतै ? अंगना बीच देबाल बनल छै टुटि गेलै दलान पुरना बेढ़ल फरकी-टाट छै सगरो फेर कतऽ खरिहान हेतै ? द्वेष-देयादि मोनमे जकरा जे नै बनल समांग ककरो "चंदन" तकरा कहत दरिद्रे उँच भलेहिँ मकान हेतै वर्ण-२२ 53 नयनक काजर नोर घोरिकऽ मोसि बनेलौं भाव करेजक आखर-आखर लिखि पठेलौं बुझलहुँ अहाँ विदेशमे जाकऽ खूब कमेलौं मुदा कहू की गामहि सन नेह ओत्तहु पेलौं छै सुविधा कने कम्म गाममे शहर अपेक्षा मुदा,की कहियो सूच्चा भोजन शहरमे खेलौं हम बेकारे देखि-देखि सपना रैन गमेलौं अपन जुआनी अहीँ आसमे बेरथ गमेलौं आन बुझैत छी हमरा अहाँ कोनो बात नहि "चंदन" मुदा केनाक’ माय-बाबूकेँ बिसरेलौं वर्ण-१७ 54 जकरे देह केर घाम चानन सन गमकै छै तकरे टुटली मरैया स्वर्गक सुख बरसै छै अनकर माथ पर बज्जर जे कियो खसबै छै अपने बोलीक लुत्ती से अपने घर जरबै छै नवतुरिया छै बुड़िबक बुढ़-पुरान कहै छै ओहो छलै कहियो नौसिखुए सेनै मोन रहै छै चूबय ककरो चार केयो भासल भीत सटै छै खिड़की बुन्न निहारे कियो आनक आड़ि छँटै छै कंठी-माला चानन-टीका धोती-कुर्ता खूब सजै छै लेकिन नाञ्गट-भूखलकेँ देखिते नाक मुनै छै कन्यागत छै कानि रहल वरागत बिहुँसै छै कियो खून बेचिकऽ देलकै कियो सऽख पुरबै छै ई की भेलै जे सगरो खाली बहुरुपिया घुमै छै "चंदन"एलै कलिकाल जे खाली खूनेटा पीबै छै वर्ण-१८ 55 ओ जे बताह बैसल छै सड़कक कातमे एकोरती नहि लाज छैक ओकरा गातमे पेटकुनिया लधने जे सूतल एकातमे दुइयो दाना भातक नहि ओकरा पातमे दू लबनी पीबि बनै छैक जे नृप साँझमे तकरा भेटै ने उसनल अल्हुआ प्रातमे अपनो घरमे कनियो मोजर नै जकरा दिल्ली केर सरकार छैक तकरा लातमे जकराले सेहन्ता नवान्नो अपन खेतक "चंदन" देबै नै पएर तकरा जिरातमे वर्ण-१६ 56 आखर-आखर गानि-गानि की लिखबै हम मात्रा-बहरे फानि-फानि की लिखबै हम माइक भाषा पूज्य जानि की लिखबै हम अप्पन छाती तानि-तानि की लिखबै हम कविकोकिलकेँ मान राखि की लिखबै हम मिथिला-मैथिल युद्ध ठानि की लिखबै हम फगुआ-चैती गाबि-गाबि की लिखबै हम रौदी-दाही कानि-कानि की लिखबै हम भासल सपना छानि-छानि की लिखबै हम "चंदन" भावहि सानि-सानि की लिखबै हम 222-2212-1222-2 57 बात की भेल एकबेर बढ़िते चलि गेलै नेहक तागसँ सम्बन्ध सजिते चलि गेलै रही सचेत त' मुदा बुझलौ नहि मरम अनचिन्हार मनमीत बनिते चलि गेलै छल नहि ज्ञात हमरा कोनो रीति-प्रीतक फेर कहिया ई पिरीत बढ़िते चलि गेलै जे भेलैक जेना भेलैक बात छोड़ "चंदन" जिनगी जनु संगीत त' सजिते चलि गेलै वर्ण-१६ 58 कहू, की अहाँ अप्पन संग देबै जीवनमेँ नवल उमंग देबै ? हम भटकल बाट-बटोही छी पथ हेरब हमरा संग देबै ? राति जागय ई टुकुर-टुकुर ऐ आँखि सपन सतरंग देबै ? "चंदन" जीवन जँ काठ बनत सौरभ मिझरा अंग-अंग देबै ? वर्ण-१२ 59 जगभरिमे सब बस दोसरकेँ आँकयमे छै लागल भुजि जनताकेँ नेता भुज्जा फाँकयमे छै लागल अपना घरकेँ अठबज्जर से बचि भेलै नै जकरा से अनकर देबालक भुरकी झाँकयमे लागल छै जकरा अंगा-टोपी जुड़लै नांगट बनि नचइत छै नांगट छै से झँपबा खातिर टाँकयमे छै लागल भरले-पुरले छै से माँझे ठामहि बिष्ठा फीरय निरधन बेबस लचरल छै से ढाँकयमे छै लागल एन्नी ओन्नी दहिना बामाँ घुमबय छै जे जनता "चंदन" सगरो भरले गप्पी हाँकयमे छै लागल १४टा दीर्घ सभ पाँति मे 60 हम भाइ अहाँ छी बहिन हमर दुनू मिलि जितबै जगत सगर गाम-नगर घर डगर-सगर हमरे अहाँसँ छै छहर-महर परपंच कियो कतबो रचतैक हमरा नहिए परबाह तकर आशीष अहाँक जँ रहत बनल पुनि छेकि सकत के बाट हमर राखीक सपथ कर्तव्यक पहर "चंदन" नै ताकत बकर-बकर वर्ण-१३ 61 करेजक टीस कहबै ककरा कहबै जकरे बुझतै फकरा मकरजालमे फाँसल जिनगी जगत भरि छै भरले मकरा कबुला केलकै स'ख पुरेलकै मारल गेलै ‘बलिक बकरा’ बाँटि रहल छै बखरा-बखरा भेटल छै जैह जत्तहि जकरा "चंदन" सत्ता पर जे छै बैसल किछु नहि आब मोन छै तकरा वर्ण-१२ 62 चुप्प रहलासँ दुनिया नीक मानै छै लेकिन चुप्पाके दुनिया नै गुदानै छै हँसै छलै बाजै छलै बेटी नैहरमे सासुर बसिते देरी किएक कानै छै बेघर सूतल रहै छै बाट-घाटमे संपतिशाली जकरा पीचब जानै छै शोषित नारी मरि गेल लगा'क फाँसी शोषक, समाज ओकरे वेश्या मानै छै अजगुत लोक अद्भुत समाज छैक रहि-रहि "चंदन" एतबे ठेकानै छै वर्ण-१४ 63 हर उठौलहु, पालो टंगलहु, लदहा लाधि रहल छी गोला आ सिलेबिया बड़दक जोड़ा हाँकि रहल छी चासि-समारल, फेर तेखारल, आब चौमासि रहल छी लाल सतरिया करिया कामोर बीआ छाँटि रहल छी भुटकुनमा-माय बड़ा प्रेमसँ पनपिआइ ल आयलि बैसि पीपर तर दुहू परानी फुटहा फाँकि रहल छी जगरनाथ छै अपन हाथ गंगाजल छैक पसेना एहिसँ सिंचल हम जजाति तेँ जून्ना बाँटि रहल छी 64 बीतल फगुआ, चलू आब रब्बी काटय लेल बूट खेसारी सरिसब ओ तीसी झाड़य लेल भरल दुपहरिया केहन बहैछै पछबा हन-हन चलू कर’ लेल दओन गहुम राहडि़ झाँटय लेल बडकी काकी भास लगा, गाबथि चैतावर बैसलि माँझे आँगन तिसियओरि खोँटय लेल केहन सोहनगर लागय नवका बूटक सतुआ चलू चौबटिया बाट-बटोहीकें बाँटय लेल साँझ पड़ल पुनि पुरबा पलटल कोइली कुहके बोनिहारक श्रम-पुलकित मन कुदै नाचय लेल 65 कयल कोन पाप नहि जानि ई की भेलइ लगेलौं नेह जकरेसँ ककरो मीत बनि गेलइ करय छी प्रेम कतबा हम ओ जानि नहि सकल आ'कि जानि-बूझिक अनचिन्ह बनि गेलइ सिनेहक ताग कतय गेल सम्बन्ध की भेलइ जीनगीक राग-रभस सभटा टीस बनि गेलइ जग छैक सत्ते "झूठ" बात बूझ ने "चंदन" टुटै छै स्वप्न सहस्त्रो एकटा फेर टुटि गेलइ 66 हम बैसले छी अन्हारे छी हेलि रहल मझधारे तेजलक मीता-भजारो छोड़लक संग परिवारे जाधरि छल धनक अम्बारे खूब भेटइत छल पियारे आइ एसगरे पड़ल छी एहि भरले बिच-बजारे नहि बचल कोनो अधारे "चंदन" कर्मक मारि खिहारे हजल 1 कनिया हम्मर बड़ गुणवन्ती बुझा गेल हमरा किएक कुमारहि लोक मरैए जना गेल हमरा शांती जहिए घरमे पैसली तहिएसँ छी अशांत क्रांति घरमे मचल तेहन जे मेटा गेल हमरा सासु लगै छनि सौतिन ससुर लगनि चरबाह गारि अलौकिक हुनका मूँहक लजा गेल हमरा संग गोतनीक लड़थि भैंसुरक नहि परबाह आबतऽ देखू दुनू भाइयो बिच बझा गेल हमरा रौ दैवा नहि जनलौ किछुओ फँसलौ ब्याहक फाँस "चंदन" रूपक माया फँसरी लटका गेल हमरा 2 गुरूजी बैसलाह खोलि खटाल चेलवा बनलनि गुरू घंटाल घूर जरौलन्हि पोथी केर टाल दूध बेचिकए भेलाह नेहाल इसकुल जाऽकऽ भेलाह कंगाल माल पोसिकऽ भेलाह मालामाल पशुगणना कऽ फुटलनि भाल पशुपालन सँ रुपैयाक टाल घी-दूध पीबि भेलनि देह लाल आब अखाड़ा बिच ठोकथि ताल गुरुआनिक गजबे रंगताल ठोरक संग-संग रांगथि गाल गुरुजी बैसलाह खोलि खटाल ज्ञानक पूँजीओ गेलनि पताल बाल गजल 1 चार पर छै कौआ बैसल माँझ अँगना बौआ बैसल घुट-घुट खाथि दूध-भात माइक कोरा बौआ बैसल राजा-रानी सुनथि पिहानी मइयाँ कोरा बौआ बैसल ओ-ना-मा-सी सिखथि-पढ़थि बाबाक कोरा बौआ बैसल सुग्गा-मेना संग खेलै छथि "चंदन" अँगना बौआ बैसल 2 कुकरु-कू जखन मुरगा बाजल किरिण सुरूजक मूँहमेँ लागल कौआ डकलक कोइली बाजल आँखि मिड़ैत चुनमुन जागल नहा-सोना’क कयलनि जलखै इसकुल गेलथि घंटी बाजल दीदीजी बड्ड नीक लगैत छन्हि मास्टर जीक छड़ी लए भागल कान पकड़ि कऽ उठक-बैठक तैयो खेल पर मोन छै टाँगल "चंदन" टन-टन घंटी बजलै छुट्टी भेलइ घर दिस भागल 3 बेंग बजय छै टर-टर-टर्र बगरा उड़य फर-फर-फर्र झरना झहरे झर-झर-झर्र बाँस बजय छै कर-कर-कर्र मिल चलय छै घर-घर-घर्र साँप ससरलै सर-सर-सर्र चुनमा छाती धक-धक-धक्क डरसँ कापय थर-थर-थर्र पप्पा एलखिन भागि गेल डर बात पदाबय चर-चर-चर्र 4 बुच्ची पहिरलक सोन गहना बौआक डाँर झूले लाल फुदना साजि-राजि दुनू गेल मेला देखऽ हाथमे पाइ छलै बारह अना मुरही-कचरी आ बतासा-लड्डू रंग-विरंगक कीनल फुकना झूलल झूला आ नाच देखलक "चंदन" घुमल घर सोना-चना 5 साँझ पड़ल बैसि पिपर पर चिड़ै करैछ पंचैती सूगा-मैना ब्याह रचाओत बगुला करैछ घटकैती फुदकि-फुदकिकऽ फुद्दी नाचय फेर हेतै वनभोज कौआ पिजबैछ लोल कोइली गाबि रहल छैक चैती बगरा-परबा अपस्याँत अछि इंतजाममे लागल डकहर बैसल सोचि रहल केना हेतै कुटमैती पोरकी पिपही बजा रहल छै टिटही ढोल पीटैए मोर नचैछै ता-ता-थैया "चंदन" अद्भुत ई कुटमैती 6 नवका कुर्ती नवके सलवार पहिर कए बुच्ची भेल तैयार ललका फीताक गुहलक जुट्टी बाजे रुनझुन पायल झन्कार हाथक बाला खन-खन-खनके टम-टम चढिकऽ गेल बजार ढोलक-पिपही आ तमाशा-नाच सूनल देखल हरख अपार बाबाक हाथ पकड़ि कए बुच्ची प्रमुदित घुमय हाट-बजार 7 मस्जिद जखने पड़ल अजान कोइली ठनलक पराती गान कौआ डकलक खेत खरिहान बगुला खत्ता बिच करय स्नान गर-गर दुध दुहैछ बथान टक-टक पड़रू लगौने ध्यान बाबा छथि बाड़ी बान्हथि मचान बाबी अँगनामे लगाबथि पान टुह-टुह लाल पूब असमान 'चंदन' जलखैमे दूध मखान 8 दऽ रहल छी अपन शपथ नै कानू बौआ लेबनचूस लऽ पप्पा औताह कुचरे कौआ हम तऽ माय छी सत्ते, मुदा बेबस लाचारे कीनि खेलौना देब कतऽसँ नहि अछि ढौआ भरना लागल खेत महाजनक तगेदा फेर केनाकऽ सख पुरौताह बाप कमौआ अहीँ पुरायब सख सेहन्ता आस धेने छी अहीँ जुड़ायब छाती बनिकऽ पूत कमौआ कबुला,पाती,विनय,नेहोरा, करैछी भोला बेलपात "चंदन" चढ़ायब खूब चढ़ौआ वर्ण-१६ 9 भैयाकेँ नबका बुशर्ट आ हमरा दीदीक फेरन ओतऽ सौंसे गाम घूमै छौ हमरा अंगनोमे बेढ़न चूल्हा-चेकी,बर्तन-बासन, आगाँसँ नै करबौ हम हमरो चाही कापी-पिल्सिन, बेटाकेँ देलही जेहन बौआ छुच्छे छाल्हि खेतौ हमरा नै दूधो परपइठ जँ नै करबौ टहल तखन लगतौ मोन केहन बहुत सहलियौ आब नै चलतौ तोहर दूनेती हमरो चाही बखरा आब नै चलतौ कलछप्पन गै माय युग बदलि गेलैए बेटी नै बेटासँ कम "चंदन" गमकैत भविष्य रचबै हमहूँ अपन वर्ण-१९ 10 एकदिन हमरो हेतैक मकान एकदिन हमरो हेतैक बथान एकदिन हमहूँ कीनब समान हमरो घर बनतै पू-पकवान एकदिन हमहूँ बुलबइ चान अंतरिक्षमे हेतै हमरो दलान सभकियो अपने कियो नहि आन हमहूँ बनबै गाँधी सन महान विद्या-वैभवक लेल अनुसंधान करय जे "चंदन" बनय महान वर्ण-१३ 11 चिक्का कबड्डी खेलबइ खेत पथारमे हमर नाह चलतैक ओलती धारमे इसकुलसँ जखन घुमबइ साँझमे बाबा संगमे घुमबइ धारक पारमे आमक गाछी खोपड़ी तर मचान पर काका संगे हमहुँ बैसबै रखबारमे गीजल-गाँथल हम नहि खेबौ बाटीमे माय गै हमरो साँठिक’ दहीन थारमे मुरही कचरी झिल्ली खेतै छैक सेहन्ता "चंदन" तेँ छैक लोढ़हा लोढ़ैत नारमे वर्ण-१५ 12 माय गै हमरो कीनि दे ने चान एकटा दे ने गुड़क पूरी फोका मखान एकटा चमकै इजोरिया लागै छै कोजगरे छै बाबा हमरो दीअ’ने खिल्ली पान एकटा चकलेट-बिस्कुटो भऽ गेलै कत्ते महग पप्पा हमहूँ करबइ दोकान एकटा छोटको चच्चा केतऽ आब भऽ गेलै ब्याह गै मैंया हमरो कनिया कऽ दे जुआन एकटा चान पर घर हेतै तारा पर दलान "चंदन" हमहूँ भरबै उड़ान एकटा वर्ण-१५ 13 पकड़िकऽ दाबा चलइ छै खने ठेहुनियाँ भरइ छै मधुर सनके बोली लागै जखन माँ-पप्पा बजइ छै चढ़िकऽ छाती पर कका’क भभाकऽ लगले हँसइ छै सुगा मैना जखन बाजय सुनिकऽ थपड़ी पिटइ छै मनोरथ सभटा पुरौतै बइस के ‘चंदन’ गुनइ छै वर्ण-१० 1222-2122 14 भोर भेलै शोर भेलै काँचे निन्न खोर भेलै माघ मास शीत जल दहो-बहो नोर भेलै काँट कंठमे गड़लै भोग नहि झोर भेलै भैंस भेलै पारी तरे छाल्ही डाढ़ी घोर भेलै थारी बाटी पिटैत छै माय मोन घोर भेलै वर्ण-८ 15 ओम्हर गगन बिच मेघ जहिना उमकि रहल छै एम्हर मगन मन बाल तहिना कुदकि रहल छै धधकति छलै जे माटि कहियो अगिन-कुण्ड सन पबिते अमिय’क बुन्न मह-मह गमकि रहल छै खिलखिल दुबर लागय छलै पतझाड़ कालमे खलखल हँसय छै आब फुनगी हुलकि रहल छै दबकल छलय जे सालभरि बिल बीच बेंगबा घुच्ची भरल जल पाबि जँह-तँह कुदकि रहल छै टुक-टुक निहारय बइस "चंदन" कोर बेचनी दाबाक कगनी पानि पर जे भसकि रहल छै वर्ण-१९ -2212-2212-2212-12 रुबाइ 1 भासल सभटा सपना नोरक धारमे कण्ठ दबायल जनु हमर गृमहारमे बैसल छी एकात निज’हि परिवारमे सोंगर खोँसि रहल छी टूटल चारमे 2 लोक भूखले पेट चिकरैछ बाट पर छै ढ़करैत सरकार सूतल खाट पर निन्न टुटैछै नेताक आब केवल कोनो आम जनतासँ लागल चाट पर 3 अपन महीष कुरहरिए नाथब सुगरे गूँह सँ चिपरी पाथब छी स्वतंत्र देशक बासी तेँ की बरछी सँ माला गाँथब ? 4 बरू बिनु दबाइ चलि गेलै ओकर जान श्राद्धमे मुदा करजा लऽ भेलै गौ-दान खाय अधहे पेट कटलक जिनगी सकल मरल तऽ सौजनी मारैत छै सुरकान 5 नोरसँ सिक्त आँचर आब निचोड़ि दिऔ जँ आँगुर कियो देखबै कर तोड़ि दिऔ त्यागू भय सीता मैयाक सपथ धरू मिथिला राजक शत्रू मुण्ड मचोड़ि दिऔ 6 टूटल बान्ह बहलै गामक गाम फेर गेल दहा जिनगी कतेको ठाम फेर कागतक नाव सरकारो तत्पर छलै मुदा, बाढि भासल कतेको जान फेर 7 दू टुक कहलौ दू फाँक भेल सम्बन्ध चुप्पहि जँ रहलौ फोँका गेल सम्बन्ध पस भरल टीसैत पसीझैत घाव सन सत्यक शूल गाड़ि बहा देल सम्बन्ध 8 संध्या-वंदन,काठ सिरिखण्ड घसै छी भोर-साँझ आरती घरिघण्ट पिटै छी भाँग पीबि मस्तक तिरपुण्ड लेपै छी रुचि-रुचि रोहु मूड़ा मुरिघण्ट चभै छी 9 देखू पियक्कर बताह जमानाके सून्न मंदिर भरले ताड़ीखानाके कनैत लोक हँसी किनबाले लुटबैछ पेट काटि जोगाओल खजानाके । 10 दूधसँ बेसी स्वाद लगैए ताड़ीमे खेत बिकायल लागल हाथ घराड़ीमे एखन तऽ अमृत लगैए चिखनासंग बुझबै जखन लीवर सड़त बुढ़ारीमे 11 ताड़ी छानब छोड़ि छानू निज विचार दारू ताकब त्यागि ताकू संस्कार अप्पन घर जारि ‘भट्ठी’मे छी बैसल नजरि उठा देखू जरल केहन कपार 12 सत्ते अहाँ कखनो मोन नहि पड़ैत छी, किएकतऽ सदिखन मोनेमे रहैत छी फूल बनि सदिखन हृदयमे गमकैत छी अहीँक नेहक जोत सँ हम चमकैत छी 13 अहीँक प्रेमक छाह जीब' चाहै छी अहीँक आँचरक हवा पीब' चाहै छी अपन फाटल करेजा सीब' चाहै छी अहीँक नैनक शराब पीब' चाहै छी 14 करेजक तहमे चौपैत रखलौं जकरा खून अपन पिया पोसैत रहलौं जकरा जुआनीक मद बौरायल सैह लगैछ पड़ल एकात समाजमे बनलौं फकरा 15 सूर्यक प्रखर रश्मि सन चमकैत रहू शरदक इजोरिया सन दमकैत रहू कामिनी रातरानी सन गमकैत रहू रुन-झून पायल पहिरि छमकैत रहू 16 अहाँक केशसँ झहरैत पानिक बुन्नी अहाँक गालसँ ससरैत पानिक बुन्नी अहाँक ठोरसँ टपकैत पानिक बुन्नी हमरो देहसँ टघरैत पानिक बुन्नी 17 घोरनक छत्ता झारि पानि ढ़ारि देबौ एकहि चाटमे धरती पर पारि देबौ रै खचराहा खचरै सभ घोसारि देबौ मैथिलीक अपमान करब बिसारि देबौ 18 जँ डेनधऽ चलबे संग तऽ तारि देबौ नैतऽ कलमक मारि, गत्र ससारि देबौ मिथिलाक विरोधी, मारि खेहारि देबौ रचलाहा प्रपंच पर पानि ढ़ारि देबौ 19 महगीक आगिमे जरलै जनताक बटुआ दिन-राति एक तीमन पीबैछी झोर पटुआ सरकारके विरोधमे लगबैत छल जे नारा खसल छै सड़क पर से लोक लटुआ-लटुआ 20 छाक भरिकऽ आइ पीबय दिअ हमरा पोख भरिकऽ जिनगी जीबय दिअ हमरा खोँचाह बातसँ लागल खोँच, फाटल, गुदरी भेल जिनगी सीबय दिअ हमरा 21 सीता चरण नूपुर झनक झमकैत रहय बारी अयाची फूल सदति गमकैत रहय जनकक खेतक माटि माथ सजबैत रहय मैथिल-मिथिला कीर्ति जगत पसरैत रहय 22 धिया सिया सन घर-घरमे जनमैत रहय शंकर बनिकऽ पूत अंगनामे खेलैत रहय उगना सन केर चाकर बाँहि पुरैत रहय हरियर खेत-पथार सदति बिहुँसैत रहय 23 कल-कल कमला कोशी निर्मल बहैत रहय छल-छल गंगाक निश्छल जल छलकैत रहय बागमती गंडक धरती जी जुड़बैत रहय माछ मखानक डाला नित सजबैत रहय 24 उज्जर परती हरिया गेलै जेना दियादी झगड़ा फरिया गेलै जेना लागल भीड़ छिरिया गेलै जेना मोनक बात मरिया गेलै जेना 25 अनका कनिते देख भभाकऽ लोक हँसैए अप्पन विपतिक बेला देखू केना कनैए अनकर कान्ह कोदारि हल्लुक लगैछै जकरा अपना हाथमे बेंट धरिते से लोक कुथैए 26 नाङट गरीब, माने हकन्न कनैए फैशने चूर धनिको, नङटे नचैए देखू नङटा, नङटेके देखि हँसैए एकदोसरके देख संतोष धरैए 27 देखलौं माँझ अँगना ओगरैत सपना देखलौं चौबटिया पर लोढैत सपना देखलौं हाट ककरो मोलबैत सपना ककरो झूठक दोबर तौलबैत सपना 28 नील नैन बिच साजल काजर करिया रूप लगैए अनमन धवल इजोरिया निश्चय अहाँ जनैत छी टोना-टापर भेल बताह छै तेँ गामक नवतुरिया 29 कखनो बनि विपक्षी चित्कार करै छै सत्ता हाथ लगितहि फुफकार भरै छै नेता वोटक लेल कतबा रूप धरै छै कत्तहु अनशन कत्तहु इफ्तार करै छै 30 दरकल करेजा केना सिबै हम कहू ई नोर आँखिक केना पीबै हम कहू पियासलि हम छी पिया बसथि विदेशमे फेर साउन मास केना जीबै हम कहू ? 31 (एकटा बड़दक मुँह सँ...) जँ हाँकब चुचकारि तऽकऽ देब तेखार हाँकब जँ रेबाड़ि तऽ हैत चासो पहाड़ जँ बूझब समांग तखने बाँहि हम पुरब जँ करबै अड़पेना तऽ खायब लथार 32 जीबै कतेक दिन एना चुप्पी साधि केर तकबै कहिया दबाइ एहि बियाधि केर चलबै कतेक दिन घुसकुनिया मारि केर रहबै कतेक दिन पेटकुनिया लाधि केर 33 पावसक बूँद पाबि धरणी तृप्त भेल छै कामानल जरिते तरुणी अतृप्त भेल छै देह वस्त्र लेपटायल घामे सिक्त भेल छै पिया अंकमे पड़ले मनुआ तृप्त भेल छै कता 1 मन वीणासँ उठि रहल छैक करूण राग माटि मिथिलाक किएक कऽ रहलै विलाप सनल किएक शोणितसँ मैथिल भू-भाग सुनऽमे नहि किए अबैछ कोकिल-अलाप ? चंदन कुमार झा, पिता-श्री अरूण झा, माता-श्रीमती मीना देवी, जन्म-०५-०२-१९८५, ग्राम-सड़रा, मदनेश्वरस्थान, पोस्ट-मदना, थाना-बाबूबरही, जिला-मधुबनी। जन्म-स्थान-सिसवार (मामा गाममे) नाना- स्व. सुशील झा (राजाजी), आरंभिक शिक्षा-मामा गाममे (१०वाँ धरि), आगाँक शिक्षा- अन्तर-स्नातक (वाणिज्य) एवं स्नातक (वाणिज्य) चंद्रधारी मिथिला महाविद्यालय दरभंगासँ। वित्तीय-प्रबंधनमे डिप्लोमा (वेलिंगकर इन्सटीच्युट आफ मैनेजमेन्ट, मुम्बई)सँ। व्यवसायिक जीवन- एकटा बहुराष्ट्रीय कंपनीमे लेखा-विभागमे कार्यरत। परिवार-निम्न मध्यम वर्गीय कृषक परिवार। साहित्य लेखन-२००० ई. सँ। कएक गोट कविता, लेख इत्यादि दरभंगा रेडियो स्टेशन एवं विभिन्न पत्र-पत्रिका सभसँ प्रकाशित-प्रसारित। विदेह नूतन अंक भाषापाक रचना-लेखन इंग्लिश-मैथिली-कोष / मैथिली-इंग्लिश-कोष प्रोजेक्टकेँ आगू बढ़ाऊ, अपन सुझाव आ योगदान ई-मेल द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ। Top of Form १.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली आ २.मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम १.नेपाल आ भारतक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली
१.१. नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक उच्चारण आ लेखन शैली (भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन १.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङ, ञ, ण, न एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना- अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।) पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।) खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।) सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।) खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।) उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंक, पंच, खंड, संधि, खंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्ग, चवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंक, चंचल, अंडा, अन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओ लोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि। नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोक बेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोट सन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽ कऽ पवर्ग धरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽ कऽ ज्ञ धरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ। २.ढ आ ढ : ढक उच्चारण “र् ह”जकाँ होइत अछि। अतः जतऽ “र् ह”क उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ लिखल जाए। आन ठाम खाली ढ लिखल जएबाक चाही। जेना- ढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढङ्ग, ढेरी, ढाकनि, ढाठ आदि। ढ = पढ़ाइ, बढब, गढब, मढब, बुढबा, साँढ, गाढ, रीढ, चाँढ, सीढी, पीढी आदि। उपर्युक्त शब्द सभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ अबैत अछि। इएह नियम ड आ डक सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि। ३.व आ ब : मैथिलीमे “व”क उच्चारण ब कएल जाइत अछि, मुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथ, बिद्या, नब, देबता, बिष्णु, बंश, बन्दना आदि। एहि सभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथ, विद्या, नव, देवता, विष्णु, वंश, वन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकील, ओजह आदि। ४.य आ ज : कतहु-कतहु “य”क उच्चारण “ज”जकाँ करैत देखल जाइत अछि, मुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञ, जदि, जमुना, जुग, जाबत, जोगी, जदु, जम आदि कहल जाएबला शब्द सभकेँ क्रमशः यज्ञ, यदि, यमुना, युग, यावत, योगी, यदु, यम लिखबाक चाही। ५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि। प्राचीन वर्तनी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आदि। नवीन वर्तनी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आदि। सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहि, एना, एकर, एहन आदि। एहि शब्द सभक स्थानपर यहि, यना, यकर, यहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारू सहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे “ए”केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि। ए आ “य”क प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैल, हैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो “ए”क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि। ६.हि, हु तथा एकार, ओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हि, हु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहि, अपनहु, ओकरहु, तत्कालहि, चोट्टहि, आनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनके, अपनो, तत्काले, चोट्टे, आनो आदि। ७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खडयन्त्र), षोडशी (खोडशी), षट्कोण (खटकोण), वृषेश (वृखेश), सन्तोष (सन्तोख) आदि। ८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि: (क) क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमे सँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : पढए (पढय) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पडतौक। अपूर्ण रूप : पढ’ गेलाह, क’ लेल, उठ’ पडतौक। पढऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पडतौक। (ख) पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछ, मुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह। अपूर्ण रूप : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह। (ग) स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापद, संज्ञा, ओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि। अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल। (घ) वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : पढैत अछि, बजैत अछि, गबैत अछि। अपूर्ण रूप : पढै अछि, बजै अछि, गबै अछि। (ङ) क्रियापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप: छियौक, छियैक, छहीक, छौक, छैक, अबितैक, होइक। अपूर्ण रूप : छियौ, छियै, छही, छौ, छै, अबितै, होइ। (च) क्रियापदीय प्रत्यय न्ह, हु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : छन्हि, कहलन्हि, कहलहुँ, गेलह, नहि। अपूर्ण रूप : छनि, कहलनि, कहलौँ, गेलऽ, नइ, नञि, नै। ९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटि कऽ दोसर ठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन), पानि (पाइन), दालि ( दाइल), माटि (माइट), काछु (काउछ), मासु (माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्द सभमे ई निअम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि। १०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्द सभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषा सम्बन्धी निअम अनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरण सम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्ष सभकेँ समेटि कऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनीकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽबला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषी पर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पडि रहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषता सभ कुण्ठित नहि होइक, ताहू दिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए। -(भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) १.२. मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली
१. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-
ग्राह्य
एखन ठाम जकर, तकर तनिकर अछि
अग्राह्य अखन, अखनि, एखेन, अखनी ठिमा, ठिना, ठमा जेकर, तेकर तिनकर। (वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य) ऐछ, अहि, ए।
२. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैकल्पिकतया अपनाओल जाय: भऽ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।
३. प्राचीन मैथिलीक ‘न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ‘न’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।
४. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।
५. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत: जैह, सैह, इएह, ओऐह, लैह तथा दैह।
६. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे ‘इ’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।
७. स्वतंत्र ह्रस्व ‘ए’ वा ‘य’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ‘ए’ वा ‘य’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।
८. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ‘य’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढैआ, विआह, वा धीया, अढैया, बियाह।
९. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव ‘ञ’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।
१०. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:- हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। ’मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ‘क’ क वैकल्पिक रूप ‘केर’ राखल जा सकैत अछि।
११. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।
१२. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।
१३. अर्द्ध ‘न’ ओ अर्द्ध ‘म’ क बदला अनुसार नहि लिखल जाय, किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ‘ङ’ , ‘ञ’, तथा ‘ण’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।
१४. हलंत चिह्न निअमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।
१५. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क’ लिखल जाय, हटा क’ नहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।
१६. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रापर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं।
१७. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।
१८. समस्त पद सटा क’ लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोडि क’ , हटा क’ नहि।
१९. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।
२०. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।
२१.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा' ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।
ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा "सुमन" ११/०८/७६
२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम २.१. उच्चारण निर्देश: (बोल्ड कएल रूप ग्राह्य):- दन्त न क उच्चारणमे दाँतमे जीह सटत- जेना बाजू नाम , मुदा ण क उच्चारणमे जीह मूर्धामे सटत (नै सटैए तँ उच्चारण दोष अछि)- जेना बाजू गणेश। तालव्य शमे जीह तालुसँ , षमे मूर्धासँ आ दन्त समे दाँतसँ सटत। निशाँ, सभ आ शोषण बाजि कऽ देखू। मैथिलीमे ष केँ वैदिक संस्कृत जकाँ ख सेहो उच्चरित कएल जाइत अछि, जेना वर्षा, दोष। य अनेको स्थानपर ज जकाँ उच्चरित होइत अछि आ ण ड जकाँ (यथा संयोग आ गणेश संजोग आ गड़ेस उच्चरित होइत अछि)। मैथिलीमे व क उच्चारण ब, श क उच्चारण स आ य क उच्चारण ज सेहो होइत अछि। ओहिना ह्रस्व इ बेशीकाल मैथिलीमे पहिने बाजल जाइत अछि कारण देवनागरीमे आ मिथिलाक्षरमे ह्रस्व इ अक्षरक पहिने लिखलो जाइत आ बाजलो जएबाक चाही। कारण जे हिन्दीमे एकर दोषपूर्ण उच्चारण होइत अछि (लिखल तँ पहिने जाइत अछि मुदा बाजल बादमे जाइत अछि), से शिक्षा पद्धतिक दोषक कारण हम सभ ओकर उच्चारण दोषपूर्ण ढंगसँ कऽ रहल छी। अछि- अ इ छ ऐछ (उच्चारण) छथि- छ इ थ – छैथ (उच्चारण) पहुँचि- प हुँ इ च (उच्चारण) आब अ आ इ ई ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ऐ सभ लेल मात्रा सेहो अछि, मुदा ऐमे ई ऐ ओ औ अं अः ऋ केँ संयुक्ताक्षर रूपमे गलत रूपमे प्रयुक्त आ उच्चरित कएल जाइत अछि। जेना ऋ केँ री रूपमे उच्चरित करब। आ देखियौ- ऐ लेल देखिऔ क प्रयोग अनुचित। मुदा देखिऐ लेल देखियै अनुचित। क् सँ ह् धरि अ सम्मिलित भेलासँ क सँ ह बनैत अछि, मुदा उच्चारण काल हलन्त युक्त शब्दक अन्तक उच्चारणक प्रवृत्ति बढल अछि, मुदा हम जखन मनोजमे ज् अन्तमे बजैत छी, तखनो पुरनका लोककेँ बजैत सुनबन्हि- मनोजऽ, वास्तवमे ओ अ युक्त ज् = ज बजै छथि। फेर ज्ञ अछि ज् आ ञ क संयुक्त मुदा गलत उच्चारण होइत अछि- ग्य। ओहिना क्ष अछि क् आ ष क संयुक्त मुदा उच्चारण होइत अछि छ। फेर श् आ र क संयुक्त अछि श्र ( जेना श्रमिक) आ स् आ र क संयुक्त अछि स्र (जेना मिस्र)। त्र भेल त+र । उच्चारणक ऑडियो फाइल विदेह आर्काइव http://www.videha.co.in/ पर उपलब्ध अछि। फेर केँ / सँ / पर पूर्व अक्षरसँ सटा कऽ लिखू मुदा तँ / कऽ हटा कऽ। ऐमे सँ मे पहिल सटा कऽ लिखू आ बादबला हटा कऽ। अंकक बाद टा लिखू सटा कऽ मुदा अन्य ठाम टा लिखू हटा कऽ– जेना छहटा मुदा सभ टा। फेर ६अ म सातम लिखू- छठम सातम नै। घरबलामे बला मुदा घरवालीमे वाली प्रयुक्त करू। रहए- रहै मुदा सकैए (उच्चारण सकै-ए)। मुदा कखनो काल रहए आ रहै मे अर्थ भिन्नता सेहो, जेना से कम्मो जगहमे पार्किंग करबाक अभ्यास रहै ओकरा। पुछलापर पता लागल जे ढुनढुन नाम्ना ई ड्राइवर कनाट प्लेसक पार्किंगमे काज करैत रहए। छलै, छलए मे सेहो ऐ तरहक भेल। छलए क उच्चारण छल-ए सेहो। संयोगने- (उच्चारण संजोगने) केँ/ कऽ केर- क ( केर क प्रयोग गद्यमे नै करू , पद्यमे कऽ सकै छी। ) क (जेना रामक) –रामक आ संगे (उच्चारण राम के / राम कऽ सेहो) सँ- सऽ (उच्चारण) चन्द्रबिन्दु आ अनुस्वार- अनुस्वारमे कंठ धरिक प्रयोग होइत अछि मुदा चन्द्रबिन्दुमे नै। चन्द्रबिन्दुमे कनेक एकारक सेहो उच्चारण होइत अछि- जेना रामसँ- (उच्चारण राम सऽ) रामकेँ- (उच्चारण राम कऽ/ राम के सेहो)। केँ जेना रामकेँ भेल हिन्दीक को (राम को)- राम को= रामकेँ क जेना रामक भेल हिन्दीक का ( राम का) राम का= रामक कऽ जेना जा कऽ भेल हिन्दीक कर ( जा कर) जा कर= जा कऽ सँ भेल हिन्दीक से (राम से) राम से= रामसँ सऽ , तऽ , त , केर (गद्यमे) एे चारू शब्द सबहक प्रयोग अवांछित। के दोसर अर्थेँ प्रयुक्त भऽ सकैए- जेना, के कहलक? विभक्ति “क”क बदला एकर प्रयोग अवांछित। नञि, नहि, नै, नइ, नँइ, नइँ, नइं ऐ सभक उच्चारण आ लेखन - नै त्त्व क बदलामे त्व जेना महत्वपूर्ण (महत्त्वपूर्ण नै) जतए अर्थ बदलि जाए ओतहि मात्र तीन अक्षरक संयुक्ताक्षरक प्रयोग उचित। सम्पति- उच्चारण स म्प इ त (सम्पत्ति नै- कारण सही उच्चारण आसानीसँ सम्भव नै)। मुदा सर्वोत्तम (सर्वोतम नै)। राष्ट्रिय (राष्ट्रीय नै) सकैए/ सकै (अर्थ परिवर्तन) पोछैले/ पोछै लेल/ पोछए लेल पोछैए/ पोछए/ (अर्थ परिवर्तन) पोछए/ पोछै ओ लोकनि ( हटा कऽ, ओ मे बिकारी नै) ओइ/ ओहि ओहिले/ ओहि लेल/ ओही लऽ जएबेँ/ बैसबेँ पँचभइयाँ देखियौक/ (देखिऔक नै- तहिना अ मे ह्रस्व आ दीर्घक मात्राक प्रयोग अनुचित) जकाँ / जेकाँ तँइ/ तैँ/ होएत / हएत नञि/ नहि/ नँइ/ नइँ/ नै सौँसे/ सौंसे बड / बडी (झोराओल) गाए (गाइ नहि), मुदा गाइक दूध (गाएक दूध नै।) रहलेँ/ पहिरतैँ हमहीं/ अहीं सब - सभ सबहक - सभहक धरि - तक गप- बात बूझब - समझब बुझलौं/ समझलौं/ बुझलहुँ - समझलहुँ हमरा आर - हम सभ आकि- आ कि सकैछ/ करैछ (गद्यमे प्रयोगक आवश्यकता नै) होइन/ होनि जाइन (जानि नै, जेना देल जाइन) मुदा जानि-बूझि (अर्थ परिव्र्तन) पइठ/ जाइठ आउ/ जाउ/ आऊ/ जाऊ मे, केँ, सँ, पर (शब्दसँ सटा कऽ) तँ कऽ धऽ दऽ (शब्दसँ हटा कऽ) मुदा दूटा वा बेसी विभक्ति संग रहलापर पहिल विभक्ति टाकेँ सटाऊ। जेना ऐमे सँ । एकटा , दूटा (मुदा कए टा) बिकारीक प्रयोग शब्दक अन्तमे, बीचमे अनावश्यक रूपेँ नै। आकारान्त आ अन्तमे अ क बाद बिकारीक प्रयोग नै (जेना दिअ , आ/ दिय’ , आ’, आ नै ) अपोस्ट्रोफीक प्रयोग बिकारीक बदलामे करब अनुचित आ मात्र फॉन्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक)- ओना बिकारीक संस्कृत रूप ऽ अवग्रह कहल जाइत अछि आ वर्तनी आ उच्चारण दुनू ठाम एकर लोप रहैत अछि/ रहि सकैत अछि (उच्चारणमे लोप रहिते अछि)। मुदा अपोस्ट्रोफी सेहो अंग्रेजीमे पसेसिव केसमे होइत अछि आ फ्रेंचमे शब्दमे जतए एकर प्रयोग होइत अछि जेना raison d’etre एतए सेहो एकर उच्चारण रैजौन डेटर होइत अछि, माने अपोस्ट्रॉफी अवकाश नै दैत अछि वरन जोडैत अछि, से एकर प्रयोग बिकारीक बदला देनाइ तकनीकी रूपेँ सेहो अनुचित)। अइमे, एहिमे/ ऐमे जइमे, जाहिमे एखन/ अखन/ अइखन केँ (के नहि) मे (अनुस्वार रहित) भऽ मे दऽ तँ (तऽ, त नै) सँ ( सऽ स नै) गाछ तर गाछ लग साँझ खन जो (जो go, करै जो do) तै/तइ जेना- तै दुआरे/ तइमे/ तइले जै/जइ जेना- जै कारण/ जइसँ/ जइले ऐ/अइ जेना- ऐ कारण/ ऐसँ/ अइले/ मुदा एकर एकटा खास प्रयोग- लालति कतेक दिनसँ कहैत रहैत अइ लै/लइ जेना लैसँ/ लइले/ लै दुआरे लहँ/ लौं गेलौं/ लेलौं/ लेलँह/ गेलहुँ/ लेलहुँ/ लेलँ जइ/ जाहि/ जै जहिठाम/ जाहिठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि/ अहि/ अइ (वाक्यक अंतमे ग्राह्य) / ऐ अइछ/ अछि/ ऐछ तइ/ तहि/ तै/ ताहि ओहि/ ओइ सीखि/ सीख जीवि/ जीवी/ जीब भलेहीं/ भलहिं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि/ नै/ नइ गइ/ गै छनि/ छन्हि ... समए शब्दक संग जखन कोनो विभक्ति जुटै छै तखन समै जना समैपर इत्यादि। असगरमे हृदए आ विभक्ति जुटने हृदे जना हृदेसँ, हृदेमे इत्यादि। जइ/ जाहि/ जै जहिठाम/ जाहिठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि/ अहि/ अइ/ ऐ अइछ/ अछि/ ऐछ तइ/ तहि/ तै/ ताहि ओहि/ ओइ सीखि/ सीख जीवि/ जीवी/ जीब भले/ भलेहीं/ भलहिं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि/ नै/ नइ गइ/ गै छनि/ छन्हि चुकल अछि/ गेल गछि २.२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम नीचाँक सूचीमे देल विकल्पमेसँ लैंगुएज एडीटर द्वारा कोन रूप चुनल जेबाक चाही: बोल्ड कएल रूप ग्राह्य: १.होयबला/ होबयबला/ होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला/ होयबाक/होबएबला /होएबाक २. आ’/आऽ आ ३. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ल’/लऽ/लय/लए ४. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए गेल ५. कर’ गेलाह/करऽ गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह ६. लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’/ ७. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करैबला/क’र’ बला / करैवाली ८. बला वला (पुरूष), वाली (स्त्री) ९ . आङ्ल आंग्ल १०. प्रायः प्रायह ११. दुःख दुख १ २. चलि गेल चल गेल/चैल गेल १३. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन १४. देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह १५. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि १६. चलैत/दैत चलति/दैति १७. एखनो अखनो १८. बढ़नि बढइन बढन्हि १९. ओ’/ओऽ(सर्वनाम) ओ २० . ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ २१. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ २२. जे जे’/जेऽ २३. ना-नुकुर ना-नुकर २४. केलन्हि/केलनि/कयलन्हि २५. तखनतँ/ तखन तँ २६. जा रहल/जाय रहल/जाए रहल २७. निकलय/निकलए लागल/ लगल बहराय/ बहराए लागल/ लगल निकल’/बहरै लागल २८. ओतय/ जतय जत’/ ओत’/ जतए/ ओतए २९. की फूरल जे कि फूरल जे ३०. जे जे’/जेऽ ३१. कूदि / यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद/ यादि (मोन) ३२. इहो/ ओहो ३३. हँसए/ हँसय हँसऽ ३४. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/ नौ वा दस ३५. सासु-ससुर सास-ससुर ३६. छह/ सात छ/छः/सात ३७. की की’/ कीऽ (दीर्घीकारान्तमे ऽ वर्जित) ३८. जबाब जवाब ३९. करएताह/ करेताह करयताह ४०. दलान दिशि दलान दिश/दलान दिस ४१ . गेलाह गएलाह/गयलाह ४२. किछु आर/ किछु और/ किछ आर ४३. जाइ छल/ जाइत छल जाति छल/जैत छल ४४. पहुँचि/ भेट जाइत छल/ भेट जाइ छलए पहुँच/ भेटि जाइत छल ४५. जबान (युवा)/ जवान(फौजी) ४६. लय/ लए क’/ कऽ/ लए कए / लऽ कऽ/ लऽ कए ४७. ल’/लऽ कय/ कए ४८. एखन / एखने / अखन / अखने ४९. अहींकेँ अहीँकेँ ५०. गहींर गहीँर ५१. धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए ५२. जेकाँ जेँकाँ/ जकाँ ५३. तहिना तेहिना ५४. एकर अकर ५५. बहिनउ बहनोइ ५६. बहिन बहिनि ५७. बहिन-बहिनोइ बहिन-बहनउ ५८. नहि/ नै ५९. करबा / करबाय/ करबाए ६०. तँ/ त ऽ तय/तए ६१. भैयारी मे छोट-भाए/भै/, जेठ-भाय/भाइ, ६२. गिनतीमे दू भाइ/भाए/भाँइ ६३. ई पोथी दू भाइक/ भाँइ/ भाए/ लेल। यावत जावत ६४. माय मै / माए मुदा माइक ममता ६५. देन्हि/ दइन दनि/ दएन्हि/ दयन्हि दन्हि/ दैन्हि ६६. द’/ दऽ/ दए ६७. ओ (संयोजक) ओऽ (सर्वनाम) ६८. तका कए तकाय तकाए ६९. पैरे (on foot) पएरे कएक/ कैक ७०. ताहुमे/ ताहूमे ७१. पुत्रीक ७२. बजा कय/ कए / कऽ ७३. बननाय/बननाइ ७४. कोला ७५. दिनुका दिनका ७६. ततहिसँ ७७. गरबओलन्हि/ गरबौलनि/ गरबेलन्हि/ गरबेलनि ७८. बालु बालू ७९. चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध) ८०. जे जे’ ८१ . से/ के से’/के’ ८२. एखुनका अखनुका ८३. भुमिहार भूमिहार ८४. सुग्गर / सुगरक/ सूगर ८५. झठहाक झटहाक ८६. छूबि ८७. करइयो/ओ करैयो ने देलक /करियौ-करइयौ ८८. पुबारि पुबाइ ८९. झगड़ा-झाँटी झगड़ा-झाँटि ९०. पएरे-पएरे पैरे-पैरे ९१. खेलएबाक ९२. खेलेबाक ९३. लगा ९४. होए- हो – होअए ९५. बुझल बूझल ९६. बूझल (संबोधन अर्थमे) ९७. यैह यएह / इएह/ सैह/ सएह ९८. तातिल ९९. अयनाय- अयनाइ/ अएनाइ/ एनाइ १००. निन्न- निन्द १०१. बिनु बिन १०२. जाए जाइ १०३. जाइ (in different sense)-last word of sentence १०४. छत पर आबि जाइ १०५. ने १०६. खेलाए (play) –खेलाइ १०७. शिकाइत- शिकायत १०८. ढप- ढ़प १०९ . पढ़- पढ ११०. कनिए/ कनिये कनिञे १११. राकस- राकश ११२. होए/ होय होइ ११३. अउरदा- औरदा ११४. बुझेलन्हि (different meaning- got understand) ११५. बुझएलन्हि/बुझेलनि/ बुझयलन्हि (understood himself) ११६. चलि- चल/ चलि गेल ११७. खधाइ- खधाय ११८. मोन पाड़लखिन्ह/ मोन पाड़लखिन/ मोन पारलखिन्ह ११९. कैक- कएक- कइएक १२०. लग ल’ग १२१. जरेनाइ १२२. जरौनाइ जरओनाइ- जरएनाइ/ जरेनाइ १२३. होइत १२४. गरबेलन्हि/ गरबेलनि गरबौलन्हि/ गरबौलनि १२५. चिखैत- (to test)चिखइत १२६. करइयो (willing to do) करैयो १२७. जेकरा- जकरा १२८. तकरा- तेकरा १२९. बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे १३०. करबयलहुँ/ करबएलहुँ/ करबेलहुँ करबेलौं १३१. हारिक (उच्चारण हाइरक) १३२. ओजन वजन आफसोच/ अफसोस कागत/ कागच/ कागज १३३. आधे भाग/ आध-भागे १३४. पिचा / पिचाय/पिचाए १३५. नञ/ ने १३६. बच्चा नञ (ने) पिचा जाय १३७. तखन ने (नञ) कहैत अछि। कहै/ सुनै/ देखै छल मुदा कहैत-कहैत/ सुनैत-सुनैत/ देखैत-देखैत १३८. कतेक गोटे/ कताक गोटे १३९. कमाइ-धमाइ/ कमाई- धमाई १४० . लग ल’ग १४१. खेलाइ (for playing) १४२. छथिन्ह/ छथिन १४३. होइत होइ १४४. क्यो कियो / केओ १४५. केश (hair) १४६. केस (court-case) १४७ . बननाइ/ बननाय/ बननाए १४८. जरेनाइ १४९. कुरसी कुर्सी १५०. चरचा चर्चा १५१. कर्म करम १५२. डुबाबए/ डुबाबै/ डुमाबै डुमाबय/ डुमाबए १५३. एखुनका/ अखुनका १५४. लए/ लिअए (वाक्यक अंतिम शब्द)- लऽ १५५. कएलक/ केलक १५६. गरमी गर्मी १५७ . वरदी वर्दी १५८. सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ १५९. एनाइ-गेनाइ १६०. तेना ने घेरलन्हि/ तेना ने घेरलनि १६१. नञि / नै १६२. डरो ड’रो १६३. कतहु/ कतौ कहीं १६४. उमरिगर-उमेरगर उमरगर १६५. भरिगर १६६. धोल/धोअल धोएल १६७. गप/गप्प १६८. के के’ १६९. दरबज्जा/ दरबजा १७०. ठाम १७१. धरि तक १७२. घूरि लौटि १७३. थोरबेक १७४. बड्ड १७५. तोँ/ तूँ १७६. तोँहि( पद्यमे ग्राह्य) १७७. तोँही / तोँहि १७८. करबाइए करबाइये १७९. एकेटा १८०. करितथि /करतथि १८१. पहुँचि/ पहुँच १८२. राखलन्हि रखलन्हि/ रखलनि १८३. लगलन्हि/ लगलनि लागलन्हि १८४. सुनि (उच्चारण सुइन) १८५. अछि (उच्चारण अइछ) १८६. एलथि गेलथि १८७. बितओने/ बितौने/ बितेने १८८. करबओलन्हि/ करबौलनि/ करेलखिन्ह/ करेलखिन १८९. करएलन्हि/ करेलनि १९०. आकि/ कि १९१. पहुँचि/ पहुँच १९२. बत्ती जराय/ जराए जरा (आगि लगा) १९३. से से’ १९४. हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए) १९५. फेल फैल १९६. फइल(spacious) फैल १९७. होयतन्हि/ होएतन्हि/ होएतनि/हेतनि/ हेतन्हि १९८. हाथ मटिआएब/ हाथ मटियाबय/हाथ मटियाएब १९९. फेका फेंका २००. देखाए देखा २०१. देखाबए २०२. सत्तरि सत्तर २०३. साहेब साहब २०४.गेलैन्ह/ गेलन्हि/ गेलनि २०५. हेबाक/ होएबाक २०६.केलो/ कएलहुँ/केलौं/ केलुँ २०७. किछु न किछु/ किछु ने किछु २०८.घुमेलहुँ/ घुमओलहुँ/ घुमेलौं २०९. एलाक/ अएलाक २१०. अः/ अह २११.लय/ लए (अर्थ-परिवर्त्तन) २१२.कनीक/ कनेक २१३.सबहक/ सभक २१४.मिलाऽ/ मिला २१५.कऽ/ क २१६.जाऽ/ जा २१७.आऽ/ आ २१८.भऽ /भ’ (’ फॉन्टक कमीक द्योतक) २१९.निअम/ नियम २२० .हेक्टेअर/ हेक्टेयर २२१.पहिल अक्षर ढ/ बादक/ बीचक ढ़ २२२.तहिं/तहिँ/ तञि/ तैं २२३.कहिं/ कहीं २२४.तँइ/ तैं / तइँ २२५.नँइ/ नइँ/ नञि/ नहि/नै २२६.है/ हए / एलीहेँ/ २२७.छञि/ छै/ छैक /छइ २२८.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २२९.आ (come)/ आऽ(conjunction) २३०. आ (conjunction)/ आऽ(come) २३१.कुनो/ कोनो, कोना/केना २३२.गेलैन्ह-गेलन्हि-गेलनि २३३.हेबाक- होएबाक २३४.केलौँ- कएलौँ-कएलहुँ/केलौं २३५.किछु न किछ- किछु ने किछु २३६.केहेन- केहन २३७.आऽ (come)-आ (conjunction-and)/आ। आब'-आब' /आबह-आबह २३८. हएत-हैत २३९.घुमेलहुँ-घुमएलहुँ- घुमेलाें २४०.एलाक- अएलाक २४१.होनि- होइन/ होन्हि/ २४२.ओ-राम ओ श्यामक बीच(conjunction), ओऽ कहलक (he said)/ओ २४३.की हए/ कोसी अएली हए/ की है। की हइ २४४.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २४५ .शामिल/ सामेल २४६.तैँ / तँए/ तञि/ तहिं २४७.जौं / ज्योँ/ जँ/ २४८.सभ/ सब २४९.सभक/ सबहक २५०.कहिं/ कहीं २५१.कुनो/ कोनो/ कोनहुँ/ २५२.फारकती भऽ गेल/ भए गेल/ भय गेल २५३.कोना/ केना/ कन्ना/कना २५४.अः/ अह २५५.जनै/ जनञ २५६.गेलनि/ गेलाह (अर्थ परिवर्तन) २५७.केलन्हि/ कएलन्हि/ केलनि/ २५८.लय/ लए/ लएह (अर्थ परिवर्तन) २५९.कनीक/ कनेक/कनी-मनी २६०.पठेलन्हि पठेलनि/ पठेलइन/ पपठओलन्हि/ पठबौलनि/ २६१.निअम/ नियम २६२.हेक्टेअर/ हेक्टेयर २६३.पहिल अक्षर रहने ढ/ बीचमे रहने ढ २६४.आकारान्तमे बिकारीक प्रयोग उचित नै/ अपोस्ट्रोफीक प्रयोग फान्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक ओकर बदला अवग्रह (बिकारी) क प्रयोग उचित २६५.केर (पद्यमे ग्राह्य) / -क/ कऽ/ के २६६.छैन्हि- छन्हि २६७.लगैए/ लगैये २६८.होएत/ हएत २६९.जाएत/ जएत/ २७०.आएत/ अएत/ आओत २७१ .खाएत/ खएत/ खैत २७२.पिअएबाक/ पिएबाक/पियेबाक २७३.शुरु/ शुरुह २७४.शुरुहे/ शुरुए २७५.अएताह/अओताह/ एताह/ औताह २७६.जाहि/ जाइ/ जइ/ जै/ २७७.जाइत/ जैतए/ जइतए २७८.आएल/ अएल २७९.कैक/ कएक २८०.आयल/ अएल/ आएल २८१. जाए/ जअए/ जए (लालति जाए लगलीह।) २८२. नुकएल/ नुकाएल २८३. कठुआएल/ कठुअएल २८४. ताहि/ तै/ तइ २८५. गायब/ गाएब/ गएब २८६. सकै/ सकए/ सकय २८७.सेरा/सरा/ सराए (भात सरा गेल) २८८.कहैत रही/देखैत रही/ कहैत छलौं/ कहै छलौं- अहिना चलैत/ पढैत (पढै-पढैत अर्थ कखनो काल परिवर्तित) - आर बुझै/ बुझैत (बुझै/ बुझै छी, मुदा बुझैत-बुझैत)/ सकैत/ सकै। करैत/ करै। दै/ दैत। छैक/ छै। बचलै/ बचलैक। रखबा/ रखबाक । बिनु/ बिन। रातिक/ रातुक बुझै आ बुझैत केर अपन-अपन जगहपर प्रयोग समीचीन अछि। बुझैत-बुझैत आब बुझलिऐ। हमहूँ बुझै छी। २८९. दुआरे/ द्वारे २९०.भेटि/ भेट/ भेँट २९१. खन/ खीन/ खुना (भोर खन/ भोर खीन) २९२.तक/ धरि २९३.गऽ/ गै (meaning different-जनबै गऽ) २९४.सऽ/ सँ (मुदा दऽ, लऽ) २९५.त्त्व,(तीन अक्षरक मेल बदला पुनरुक्तिक एक आ एकटा दोसरक उपयोग) आदिक बदला त्व आदि। महत्त्व/ महत्व/ कर्ता/ कर्त्ता आदिमे त्त संयुक्तक कोनो आवश्यकता मैथिलीमे नै अछि। वक्तव्य २९६.बेसी/ बेशी २९७.बाला/वाला बला/ वला (रहैबला) २९८ .वाली/ (बदलैवाली) २९९.वार्त्ता/ वार्ता ३००. अन्तर्राष्ट्रिय/ अन्तर्राष्ट्रीय ३०१. लेमए/ लेबए ३०२.लमछुरका, नमछुरका ३०२.लागै/ लगै ( भेटैत/ भेटै) ३०३.लागल/ लगल ३०४.हबा/ हवा ३०५.राखलक/ रखलक ३०६.आ (come)/ आ (and) ३०७. पश्चाताप/ पश्चात्ताप ३०८. ऽ केर व्यवहार शब्दक अन्तमे मात्र, यथासंभव बीचमे नै। ३०९.कहैत/ कहै ३१०. रहए (छल)/ रहै (छलै) (meaning different) ३११.तागति/ ताकति ३१२.खराप/ खराब ३१३.बोइन/ बोनि/ बोइनि ३१४.जाठि/ जाइठ ३१५.कागज/ कागच/ कागत ३१६.गिरै (meaning different- swallow)/ गिरए (खसए) ३१७.राष्ट्रिय/ राष्ट्रीय DATE-LIST (year- 2013-14) (१४२१ फसली साल) Marriage Days: Nov.2013- 18, 20, 24, 25, 28, 29 Dec.2013- 1, 4, 6, 8, 12, 13 January 2014- 19, 20, 22, 23, 24, 26, 31. Feb.2014- 3, 5, 6, 9, 10, 17, 19, 24, 26, 27. March 2014- 2, 3, 5, 7, 9. April 2014- 16, 17, 18, 20, 21, 23, 24. May 2014- 1, 2, 8, 9, 11, 12, 18, 19, 21, 25, 26, 28, 29, 30. June 2014- 4, 5, 8, 9, 13, 18, 22, 25. July 2014- 2, 3, 4, 6, 7. Upanayana Days: February 2014- 2, 4, 9, 10. March 2014- 3, 5, 11, 12. April 2014- 4, 9, 10. June 2014- 2, 8, 9. Dviragaman Din: November 2013- 18, 21, 22. December 2013- 4, 6, 8, 9, 12, 13. February 2014- 16, 17, 19, 20. March 2014- 2, 3, 5, 9, 10, 12. April 2014- 16, 17, 18, 20. May 2014- 1, 2, 9, 11, 12. Mundan Din: November 2013- 20, 22. December 2013- 9, 12, 13. January 2014- 16, 17. February 2014- 6, 10, 19, 20. March 2014- 5, 12. April 2014- 16. May 2014- 12, 30. June 2014- 2, 9, 30. FESTIVALS OF MITHILA (2013-14) Mauna Panchami-27 July Madhushravani- 9 August Nag Panchami- 11 August Raksha Bandhan- 21 Aug Krishnastami- 28 August Kushi Amavasya / Somvari Vrat- 5 September Hartalika Teej- 8 September ChauthChandra-8 September Vishwakarma Pooja- 17 September Anant Caturdashi- 18 Sep Pitri Paksha begins- 20 Sep Jimootavahan Vrata/ Jitia-27 Sep Matri Navami-28 Sep Kalashsthapan- 5 October Belnauti- 10 October Patrika Pravesh- 11 October Mahastami- 12 October Maha Navami - 13 October Vijaya Dashami- 14 October Kojagara- 18 Oct Dhanteras- 1 November Diyabati, shyama pooja-3 November Annakoota/ Govardhana Pooja-4 November Bhratridwitiya/ Chitragupta Pooja- 5 November Chhathi -8 November Sama Poojaarambh- 9 November Devotthan Ekadashi- 13 November ravivratarambh- 17 November Navanna parvan- 20 November KartikPoornima- Sama Visarjan- 2 December Vivaha Panchmi- 7 December Makara/ Teela Sankranti-14 Jan Naraknivaran chaturdashi- 29 January Basant Panchami/ Saraswati Pooja- 4 February Achla Saptmi- 6 February Mahashivaratri-27 February Holikadahan-Fagua-16 March Holi- 17 March Saptadora- 17 March Varuni Trayodashi-28 March Jurishital-15 April Ram Navami- 8 April Akshaya Tritiya-2 May Janaki Navami- 8 May Ravi Brat Ant- 11 May Vat Savitri-barasait- 28 May Ganga Dashhara-8 June Harivasar Vrata- 9 July Shree Guru Poornima-12 Jul VIDEHA ARCHIVE १.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक
विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक http://sites.google.com/a/videha.com/videha/ https://sites.google.com/a/videha.com/videha-archive-part-i/ https://sites.google.com/a/videha.com/videha-archive-part-ii/ २.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download http://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi ३.मैथिली ऑडियो संकलन Maithili Audio Downloads http://sites.google.com/a/videha.com/videha-audio ४.मैथिली वीडियोक संकलन Maithili Videos http://sites.google.com/a/videha.com/videha-video ५.मिथिला चित्रकला/ आधुनिक चित्रकला आ चित्र Mithila Painting/ Modern Art and Photos http://sites.google.com/a/videha.com/videha-paintings-photos/ "विदेह"क एहि सभ सहयोगी लिंकपर सेहो एक बेर जाउ। ६.विदेह मैथिली क्विज : http://videhaquiz.blogspot.com/ ७.विदेह मैथिली जालवृत्त एग्रीगेटर : http://videha-aggregator.blogspot.com/ ८.विदेह मैथिली साहित्य अंग्रेजीमे अनूदित http://madhubani-art.blogspot.com/ ९.विदेहक पूर्व-रूप "भालसरिक गाछ" : http://gajendrathakur.blogspot.com/ १०.विदेह इंडेक्स : http://videha123.blogspot.com/ ११.विदेह फाइल : http://videha123.wordpress.com/ १२. विदेह: सदेह : पहिल तिरहुता (मिथिला़क्षर) जालवृत्त (ब्लॉग) http://videha-sadeha.blogspot.com/ १३. विदेह:ब्रेल: मैथिली ब्रेलमे: पहिल बेर विदेह द्वारा http://videha-braille.blogspot.com/ १४.VIDEHA IST MAITHILI FORTNIGHTLY EJOURNAL ARCHIVE http://videha-archive.blogspot.com/ १५. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मैथिली पोथीक आर्काइव http://videha-pothi.blogspot.com/ १६. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ऑडियो आर्काइव http://videha-audio.blogspot.com/ १७. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका वीडियो आर्काइव http://videha-video.blogspot.com/ १८. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मिथिला चित्रकला, आधुनिक कला आ चित्रकला http://videha-paintings-photos.blogspot.com/ १९. मैथिल आर मिथिला (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त) http://maithilaurmithila.blogspot.com/ २०.श्रुति प्रकाशन http://www.shruti-publication.com/ २१.http://groups.google.com/group/videha २२.http://groups.yahoo.com/group/VIDEHA/ २३.गजेन्द्र ठाकुर इडेक्स http://gajendrathakur123.blogspot.com २४. नेना भुटका http://mangan-khabas.blogspot.com/ २५.विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट http://videha123radio.wordpress.com/ २६.Videha Radio २७. Join official Videha facebook group. २८. विदेह मैथिली नाट्य उत्सव http://maithili-drama.blogspot.com/ २९.समदिया http://esamaad.blogspot.com/ ३०. मैथिली फिल्म्स http://maithilifilms.blogspot.com/ ३१.अनचिन्हार आखर http://anchinharakharkolkata.blogspot.com/ ३२. मैथिली हाइकू http://maithili-haiku.blogspot.com/ ३३. मानक मैथिली http://manak-maithili.blogspot.com/ ३४. विहनि कथा http://vihanikatha.blogspot.in/ ३५. मैथिली कविता http://maithili-kavita.blogspot.in/ ३६. मैथिली कथा http://maithili-katha.blogspot.in/ ३७.मैथिली समालोचना http://maithili-samalochna.blogspot.in/ महत्त्वपूर्ण सूचना: The Maithili pdf books are AVAILABLE FOR free PDF DOWNLOAD AT
https://sites.google.com/a/videha.com/videha/ http://videha123.wordpress.com/ http://videha123.wordpress.com/about/ विदेह:सदेह:१: २: ३: ४:५:६:७:८:९:१० "विदेह"क प्रिंट संस्करण: विदेह-ई-पत्रिका (http://www.videha.co.in/) क चुनल रचना सम्मिलित। सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Details for purchase available at publishers's (print-version) site http://www.shruti-publication.com or you may write to shruti.publication@shruti-publication.com विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)२००४-१३. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतए लेखकक नाम नहि अछि ततए संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: शिव कुमार झा, राम विलास साहु आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। भाषा-सम्पादन: नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी आ रश्मि रेखा सिन्हा। सम्पादक-शोध-अन्वेषण: डा. जया वर्मा आ डा. राजीव कुमार वर्मा। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल आ प्रियंका झा। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। ’विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका अछि आ ऐमे मैथिली, संस्कृत आ अंग्रेजीमे मिथिला आ मैथिलीसँ संबंधित रचना प्रकाशित कएल जाइत अछि। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-13 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.com पर संपर्क करू। एहि साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल। सिद्धिरस्तु वि दे ह विदेह Videha বিদেহ www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ‘विदेह'१४३ म अंक ०१ दिसम्बर २०१३ (वर्ष ६ मास ७२ अंक १४३) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA 2 70