VIDEHA — Issue 144 / अंक १४४

Publication: VIDEHA · Issue: 144
Open original PDF at Internet Archive

ISSN 2229-547X VIDEHA ‘विदेह'१४४ म अंक १५ दिसम्बर २०१३ (वर्ष ६ मास ७२ अंक १४४) ऐ अंकमे अछि:- नढ़िया भुकैए हमर घराड़ीपर ( गजल संग्रह) जगदानन्द झा ‘मनु’ श्रुति‍ प्रकाशन ஜ●▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬●ஜ समर्पण ई “ नढ़िया भुकैए हमर घराड़ीपर” सादर समर्पित अछि हुनक सबहक श्रीचरण कमलमे जे अपन माटि पानिसँ दूर होएबाक बिछोह अपन करेजमे समटने छथि। ஜ●▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬●ஜ दू आखर आदरणीय रसिकजन सादर प्रणाम। अपनेक हाथमे हमर कोनो तरहक ई पहिल पोथी अछि। हमरा हेतु ई हार्दिक हर्खक गप्प अछि। नीक बेजाए केहेन से तँ आब अपने लोकनि कहब। जेनाकी अपने सभ जनैत छी गजल मने प्रेम, प्रेम मने जीवन, आ एहिठाम हमर प्रेम अर्थात हमर जीवन मिथिलाक माटि पानिसँ अछि। एहि संग्रहमे हम मिथिलाक माटि पानिसँ सरोकार रखैत विषयबस्तु परसने छी। समाजक स्थिति देखाबैक प्रयास केने छी। कोनो रचनासँ जँ किनको मोनकेँ ठेस पहुँचनि तँ हम क्षमाप्राथी छी अन्यथा नहि लेब, ई मात्र संजोग अछि। हम गजलक ओस्ताज नहि, मात्र एकटा विद्यार्धि छी। गजल व्याकरणक वा गजल नियमाबलीक पूर्ण एवं शुद्ध ज्ञान सिखैक इच्छुक, विद्यार्धि, शोधकर्ता आ रासिकजनसँ आग्रह जे ओ सभ अनचिन्हार आखर (http://anchinharakharkolkata.blogspot.com) ब्लॉगक अध्य्यन आ मनन करथि। हम अपन अपूर्ण गजलक ज्ञान संगे अपनेक समक्ष उपस्थित छी तँए एहि संग्रहमे बहुत रास वार्णिक आ व्याकरण सम्बन्धित दोख भऽ सकैए। आशा अछि अपने सभ कोनो तरहक गलती लेल अज्ञानी जानि क्षमा करैत हमरा सूचित करब जाहिसँ हम अपन अज्ञानताकेँ दूर कए आगूसँ अपनेक सेवामे आओर शुद्ध आ नीक गजल प्रस्तुत करब। हमर साहित्यक बएस कोनो बेसी नहि भेलए। विद्यार्थी जीवनमे कविता लेखनमे रूचि छल मुदा गृहस्थ जीवनमे सभटा बिसरा गेलहुँ। अक्टूबर २०११, श्री गजेन्द्र ठाकुरजी विदेह ग्रुपसँ जोड़लनि, आ ओतएसँ हमर साहित्यक जीवन शुरू भेल। विदेहपर सभकेँ नीक-नीक लिखैत देख कए हमरो भितरक मरल साहित्यक सिनेह बाहर निकलल, दू-तीनटा कविता लिख विदेहक देबाल पर देलियै। पाठकक वाह-वाही पढ़ि नीक लागल। आगू लिखैक प्रेरणा भेटल। संगे अपन कविताकेँ विदेह ई-पत्रपर छपल देख आओर खुशी भेटल। मुदा हमर मैथिली भाषाक पक्ष बड्ड कमजोर छल, एखनो अछिए। नवम्बर २०११ मे गुरुबर आशीष अनचिन्हारजी विदेह ग्रुपकेँ आशिर्वादे भेट भेलाह आ ओहिठामसँ हुनक मार्गदर्शनमे शुरू भेल हमर गजल आ मैथिली लिखैक यात्रा। ओकर बादक सभ किछु अपने लोकनिकेँ समक्ष अछि। हमर जीवनमे साहित्यक कोनो जगह अछि तँ ओहि लेल हम आभारी छी मार्गदर्शक श्री गजेन्द्र ठाकुर जीकँ, गुरुबर श्री आशीष जीकँ, विदेह ग्रुपक मित्रमंडलीक आ समस्त पाठक लोकनिक जिनक मार्गदर्शन आ प्रेरणाक बलसँ अर्जित पूजीकेँ हम एहिठाम परसने छी। अपने सिनेहक आशमे जगदानन्द झा ’मनु’ ग्राम पोस्ट- हरिपुर डीहटोल, मधुबनी ई-मेल – jagdanandjha@gmail.com क्रम १ सँ ३६ गजल, सरल वार्णिक बहर ३७ सँ ४१ गजल, समान वर्णवृत ४२ सँ ४४ गजल, बहरे मुतकारिव ४५ गजल, बहरे मुतदारिक ४६ सँ५१ गजल, बहरे रमल ५२-५३ गजल, बहरे रजज ५४-५६ गजल, बहरे हजज ५७ गजल, बहरे मुन्सरक ५८-५९ गजल, बहरे मुशाकिल ६० सँ ६२ गजल, बहरे असम ६३ सँ ६५ गजल, बहरे खफीक ६६-६७ गजल, बहरे सलीम ६८-६९ गजल, बहरे जदीद ७०-७२ गजल, बहरे कलीब ७३ गजल, बहरे कबीर ७४ गजल, बहरे हमीद ७५ गजल, बहरे सरीअ ७६ गजल, बहरे मुजस्सम वा मुजास ७७ सँ ८७ बाल गजल ८८ सँ ९४ भक्ति गजल ९५-९६ हजल ९७ बहरे कलीब ९८ मात्रा क्रम- २१२२-२१२२-२१२२-२१२ ९९ बहरे मुतकारिब १०० ओ १०१ सरल वार्णिक बहर 1 ससिनेह संग्रह अहाँक हाथमे पसरल जे अहाँक लेल परसलहुँ मोनमे निखरल जे सिनेह हमर सभटा मिथिलाक माटि पानिसँ करेजासँ निकलि कऽ कागजपर उतरल जे नहि ज्ञान बुद्धि साहित्यक शिक्षा किछु पएलहुँ ई सभ आशीष गुरुवरकेँ अछि चतरल जे हमर अल्पज्ञानसँ परिचय अहाँ कराएब प्रिय पाठक अपने पढ़ि गलती पकड़ल जे समेटत ’मनु’ एक एक अनमोल सिनेहकेँ हमर प्रति करेजासँ अपनेक झहरल जे (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१८) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 2 भाइ आब हमहूँ लिखब अपन फूटल कपारपर जेना ई भात-दालि तीमन ओकर उपर अचारपर सोन सनक घर-आँगन स्वर्ग सन हमर परिवार छोड़ि एलहुँ देश अपन दू-चारि टकाक बेपारपर कनिको आटा नहि एगो जाँता नहि करछु कराही नहि नून-मिरचाइ आनि लेलहुँ सभटा पैंच-उधारपर चिन्हलक नै केओ नै जानलक टूअर बनि रहलहुँ गेलहुँ ई अपन माटि-पानि छोड़ि दोसरक द्वारपर हम कमेलौं घर ओ भरलक हमर खोपड़ी खालिए आब बैसल ’मनु’ कनैए बरखामे चुबैत चारपर (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-२१) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 3 नढ़िया भुकैए हमर घराड़ीपर कुकूर सुतैए हमर दुआरीपर गामक पनिगर भात छोड़ि कऽ एलौं छी पेट पोसने मासक उधारीपर जे किछु कमेलौं हाथ-पएर तोड़ि कऽ साँझे राति खर्च भेल छुच्छे ताड़ीपर बचेलौं बर्ख भरि पेट काटि-काटि कऽ गमेलौं गाम जे आबक सबारीपर छोरु आनक आशा अप्पन बसाऊ यौ घुरि आउ ’मनु’ सोनसन बाड़ीपर (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१४) 4 किस्त-किस्तमे जिनगी बिताबै लेल मजबूर छी माटि पानि छोड़ि अपन किएक एतेक दूर छी आबै जाए जाउ घुरि-घुरि अप्पन-अप्पन घर घरमे रोटी नै रखने माछ-भात भरपूर छी तिमन-तरकारी बेच-बेच करु नै गुजारा यौ घुरि आऊ अप्पन गाम एतुका अहाँ हजूर छी परदेशमे कतेक दिन रहब बनि पड़बा अप्पन घर आऊ एतएकेँ अहाँ तँ गरूर छी अपन लोकक मन-मनमे ’मनु’ अहाँ बसुयौ परक द्वारिपर बनल किएक मजदूर छी (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१८) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 5 सोना भसल जाइए जुनि काँटीकेँ पकरू छोड़ि अपन भाषा नहि खराँटीकेँ पकरू दोसर घर धेने भेटत नहि ओ सिनेह छोरि आनक बोझ अपन आँटीकेँ पकरू आदी कालसँ अपन शिक्षा लेने विश्व अछि नवीनताकेँ धारमे नहि काँटीकेँ पकरू संपन्न हमर संस्कृति मधूर भाषा अछि लात मारि टल्हाकेँ अपन खाँटीकेँ पकरू छोरि दिल्ली मुंबई घुरि आऊ अप्पन घर आब दरभंगा मधुबनी राँटीकेँ पकरू (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१६) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 6 बाबा पोखरिकेँ रौहक की कही बहुत कचोटैए गामक दही अशोक ठाढ़िसँ कूदि पोखरिमे जाइठ छुबि कोना पानिमे बही बनसी बनाबी कोना नूका कए पूल्ली बनाबै लेल काटी खरही छीन कऽ नानी हाथक मटकूरी छोट-छोट हाथसँ छाल्ही मही जखन अबैत गामक इआद कनि-कनि कऽ हम नोरेमे बही सभ सुख रहितो परदेशमे माटिक बिछोह कते हम सही मैरतो ’मनु’ सभ सुख छोरि कऽ मिथिलाक माटिपर हम रही (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१२) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 7 नहि हम कागजक आखर जनि पएलहुँ नहि केकरो करेजमे हम सनि पएलहुँ आब के पतियाएत हमर मोनकेँ कनिको हम तँ नहि केकरो अपन बनि पएलहुँ बिन पानिक गति जेना माछक होएत छैक ओहे गति हमर हम नहि कनि पएलहुँ अप्पन घर छोड़ि कऽ परदेश जा बसलहुँ सुन्नर यादि छोड़ि नहि किछु अनि पएलहुँ बरख-बरख हम रहलहुँ परदेशमे ओकरा तँ ’मनु’ अपन नहि मनि पएलहुँ (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१७) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 8 जाति पातिपर आब हम नहि लड़ब यौ हम मैथिलपुत्र मिल कऽ आगू बढ़ब यौ अपन माटि पानिपर आब जीयब हम प्राण अप्पन छोरब वचन नै तोरब यौ बाहर बहुत छैक दूध मलाइ राखल मड़ुआ रोटी नून लेल सभटा छोरब यौ खून पसीनासँ अप्पन धरती पटाएब मेहनतसँ सोना उपजा कए रहब यौ बिसरल मान सम्मान फेरसँ जगाएब दुनिआक नक्शामे ’मनु’ फेरसँ उठब यौ (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१६) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 9 बूझलक नेता ई जनता पाकल अछि आम जनता तँ सदिखन भागल अछि बचल छै गाममे बूढ़ पुरान आ बच्चा कबिलाहा सभ प्रदेशमे पागल अछि खेत बनल छै परती घर सुनशान सूतैत पिचपर सभ अभागल अछि पिया विरहमे वौराएल नब कनियाँ कनि कनि सगरो देह सुखायल अछि जागू जनता जनार्दन आबो हक जानू भगाबू ओकरा जे नेता बिकायल अछि (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१५ ) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 10 हमर कमाइ कोन कोनामे परल अछि मंत्री घरमे बैमानीक सोना गरल अछि गरीब बनि गेल आइ जब्बहकेँ बकरी चिकबा धनिकाहा गामे गाम फरल अछि डाका परै परोसमे जँ सुतलौं निचैनसँ ई निश्चय बुझू आत्मा हमर मरल अछि ढोंगी भक्तकेँ नहि निकलै रुपैया दानमे भरि थारी लेने खंड माछक तरल अछि शहर नहि ’मनु’ गाम गामकेँ चौकपर मनुक्खसँ सजि शराबखाना भरल अछि (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१६) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 11 मिथिला राज अभियानमे सर्मपित शहीद सभकेँ श्रधा सुमन - खूनसँ भिजलै धरती मिथला बनबे करतै आब जोड़ लगाबए कियो झंडा गरबे करतै सुनू बलिदानी सुनू शैनानी आब दिन दूर नै विश्वक नक्शामे मिथिला राज चमकबे करतै कतबो चलतै बम निकलै चाहे हमर दम क्रांति बढ़ल आगू आब जुनि ई रुकबे करतै बहुत सहलहुँ सभ सहबै नै आब ककरो सोनितक हिलकोरसँ दुश्मन मरबे करतै एक खूनक बूंदसँ सए बलिदानी जन्म लेतै अपन अधिकार लेबै लेल ओ लड़बे करतै (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१८) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 12 हम चान लेबैलए बढ़लौं अहाँ रोकब तैयो तारा लेबै मैथिलकेँ बढ़ल डेग नहि रुकत आब जयकारा लेबै मिथिलाराज मँगै छी हम भीखमे नहि अधिकार बूझि चम्पारणसँ दुमका नहि देब किशनगंज तँ आरा लेबै छोरलौं दिल्ली मुंबई अमृतसर सूरतकेँ बिसरै छी अपन धरतीपर आबि नहि केकरो सहारा लेबै गौरब हम जगाएब फेरसँ प्राचीन मिथिलाक शानकेँ विश्व मंचपर एकबेर फेर पूर्ण मिथिलाक नारा लेबै उठू ’’मनु’’ जयकार करू अपन भीतर सिंघनाद करू फेरसँ निश्चय कए सह सह अवतार बिषहारा लेबै (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-२२) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 13 केहन-केहन दुनियाँ केहन-केहन रंग एकर कियो हँसैए कियो कनैए कियो झूमैए संग एकर कियो मरैए दूधक द्वारे कियो भाँगमे डूबल अछि बुझि नहि पएलहुँ आइतक कनिको ढंग एकर पथैत चिपड़ी लक्ष्मी देखलौं कुबेड़ चराबथि पाड़ी गंगा-यमुना पानि भरैत की हमहूँ छी अंग एकर भोट मांगे पोहला पोहला कऽ गदहोकेँ बाप बना कऽ जितैत देखु गिरगीट जकाँ बदलैत रंग एकर ’मनु’ छल कारिझाम चिन्हार बनोलन्हि अनचिन्हार घड़ी-घड़ीमे बदलैत देखू आब तँ उमंग एकर (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-२०) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 14 भ्रष्टाचारकेँ ठेका आजुक सरकार लेने कारी रुपैयाक करमान धर्माचार लेने बोगला भगत छै बैसल घाट-घाटपर खून पिबैक लेल तैयार हथियार लेने कर्तव्य बिसरल अछि मिडिया समाजमे नीक बेजाए छोरि कमाऊ समाचार लेने प्रेमक भाषा सिमैट गेल अछि पाइ तक पाइ अछि एक दोसरसँ सरोकार लेने सुनलौं कोयला दलालीमे मुँह कारी हैछै ‘मनु’ सगरो कारी छैक मिथ्या प्रचार लेने (सरल वार्णिक बहर, वर्ण - १६) 15 नीक नीक लोकक ई केहन काज अछि बेटा बेचैत नै कनिको किए लाज अछि मायाक महिमा सगरो पसरल अछि जतए देखू आब रुपैयाक राज अछि धर्म निकलैत अछि पाखण्डमे बोड़ि कऽ नवका आइ केहन एकर शाज अछि बैमानी शैतानी बिच्चेठाम पोसाइ छैक शुद्धाक जीवनमे तँ खसल गाज अछि अपन बड़ाइमे ’मनु’ बुड़ाइ कहै छी माथक बनल केहन नव ताज अछि (सरल वार्णिक बहर, वर्ण - 15) 16 आइ काल्हि तँ राजनीतिक बाजार बहुत गर्म अछि देखू नेता सभक हाल बनल कतेक बेशर्म अछि चानन टिका लगा कए बनल बड़का-बड़का भक्त नहि पुछू एहि संसारमे केने कतेक कुकर्म अछि अछि जे कर्मयोद्धा धीर बीर ओ कतए बजैत अछि चुप्प भऽ करैत सदिखन अपन-अपन कर्म अछि भैय्यारी आ सद्भावना ई तँ सबसँ बड़का प्रेम अछि जे लडाबए एक दोसरसँ ओ नहि कोनो धर्म अछि हम छी मैथिल आन नै ’मनु’ कोनो हमर धर्म अछि सपनोमे जँ तियागी ई सभसँ बड़का अधर्म अछि (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-२०) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 17 घर-घर रावण आइ बसल अछि सौभाग्यक सीता कतए भसल अछि करेजाक सिनेहक मोल रहल नै सभक पिआर पाइमे फसल अछि कर्तव्य बोध बिसरा गेल सभतरि भ्रष्टाचारमे सभ कियो धसल अछि बैमान बैसल अछि राजगद्दीपर इमानक मीटर कते खसल अछि देश समाज ’मनु’ नहि कुशल आब जमाए बनल आतंकी असल अछि (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१४) 18 हाथीक दाँत देखाबैकेँ आर नुकाबैकेँ छै आर नेताकेँ कहैक गप्प छै आर बनाबैकेँ छै आर केलक भोज नै दालि बड्ड सुड़के ई बूझल भोज करैक बात आरो छैक देखाबैकेँ छै आर दोसरकेँ फटलमे टाँग सभ कियो अड़ाबै छै फाटल अपन सार्बजनिक कराबैकेँ छै आर सासुरकेँ मजा बहुते होइ छै सभकेँ बुझल कनियाँ सन्ग सासुरमे मजा सुनाबैकेँ छै आर भाइ धनक गौरब तँ गौरबे आन्हर रहै छै मोट रुपैया जखन बाप जे पठाबैकेँ छै आर (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१८) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 19 हम बनि गेलहुँ आन्हर कन्हा राज करैत अछि अज्ञानी बनि रहलहुँ भाग हमर जड़ैत अछि के चलबैए गोली कएकर सीना छलनी होइए कतहुँ देखू हाथ हमरे सभतरि लड़ैत अछि बिनु अन्नकेँ सभतरि जनता भूखे सुतैत अछि गोदाममे भरल अन्न एखनो खूब सड़ैत अछि सभक घरमे ई हड़ हड़ खट खट हैते छैक बेटी साउस कहियो नै पुतौह किए मरैत अछि झूठ कहब झूठ सुनब सत्यसँ सभ भागि गेलै सत्य कहक मोल ’मनु’ गदहा बनि भरैत अछि (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१९) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 20 घर घरमे चक्कू पिजाबैत देखलौं नेनाकेँ तमाकुल चूनाबैत देखलौं बेगरता निकालि कऽ आजुक घड़ीमे नीक नीककेँ ठेँगा देखाबैत देखलौं मोनक दोख मोनेमे नूका कऽ सभटा कपटसँ करेज लगाबैत देखलौं दियादक फसादमे अपने मोलमे घरमे धिया पुता नुकाबैत देखलौं पाइकेँ जमाना छै पाइकेँ हिसाबमे पानिमे मनुक्खता डूबाबैत देखलौं नै रहिगेल मोल प्रेम आ सिनेहक प्रेमकेँ डबरामे बहाबैत देखलौं ’मनु’ मन कोमल सहि नहि सकलौं किए माएकेँ नोर खसाबैत देखलौं (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१४) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 21 कान नै अपन देखब कौआ खिहारब कहू कहू कोना अहाँ मिथिला सुधारब घोघ तर कनियाँ कोठी तरहक माछ मोन होइतो कहू कियो कोना निघारब लागल आगि जीवनक मिझाएब कोना की जिनगी भरि खड़ेल खड़े पजारब कहियो तँ बसब आ ककरो बसाएब भटकैत सीथ कतेक आरो उजारब पानि केखनो ’मनु’ पियासलोकेँ पीएब की बनि बकलेल माटिपर टघारब (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१५) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 22 मनुक्खक एहि दुनियाँमे कोनो मोल नहि रहल हमरा लेल केकरो लग दूटा बोल नहि रहल बजाएब कतए ककरा सभटा साज टूटिगेल छल एकटा फूटल ओहो आब ढोल नहि रहल सभतरि घुमैत अछि मनुक्खक भेषमे हुड़ार नुकाबै लेल ओकरा लग कोनो खोल नहि रहल रातिक भोजन ओरिआनमे माएक मोन अधीर छल हमर बाड़ीमे एकटा से ओल नहि रहल हँसैत आ मुस्काइत रहए जतएकेँ सभलोक मिथिलाक गाममे ’मनु’ आब ओ टोल नहि रहल (सरल वार्णिक बहर, वर्ण - १९) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 23 सभकियो दुनियाँमे किएक आँखि चोराबै छैक माँगि नहि लिए कियो तेँ सभकिछु नुकाबै छैक गरीबी भेलैक बहुते केहन ई व्यबस्था छैक गरीबी नहि सरकार गरीबेकेँ मेटाबै छैक साउस भेली सरदार गलती नहि हुनकर जतए ततए किएक पुतोहुकेँ जड़ाबै छैक जतेक दर्द बेटामे बेटीयोमे ओतबे सभकेँ बेटा बिकाइ किएक बेटीकेँ सभ हटाबै छैक दुनियाँक रीत एहन ’मनु’केँ नै सोहाइ छैक खोपड़ीमे रहए जे सभक घर बनाबै छैक (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१८) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 24 अनकोसँ सम्बन्ध जोड़ाबै छै पाइ छोटकाकेँ बड़का बनाबै छै पाइ फूसियो बिकाइ छै मोलेमे आइ तँ सतकेँ सभतरि नुकाबै छै पाइ ज्ञानक कनिको मोल नहि रहल प्रवचन सभटा सुनाबै छै पाइ नहि माए बाबू नहि भाइ बहिन दुनियाँमे सभकेँ कनाबै छै पाइ चिन्हार नै अनचिन्हार एहिठाम ’मनु’ आइ सभकेँ हँसाबै छै पाइ (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१३) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 25 मारी माछ नहि ऊपछी खत्ता भरि समाज घोड़नकेँ छत्ता परचट्ट बनल जनता छी खाइ छी गरदनिपर कत्ता कांकोड़ बिएल केांकड़े खए भय गेल देशक लत्ता लत्ता सगरो नाँघल जाइत अछि छन छन मरीयादाकेँ हत्ता रहब भरोसे कतेक ’मनु’ भेटे एक दिन हमरो भत्ता (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-११) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 26 सुरशाक मुँह बेएने महगाइ मारलक बरख-बरखपर पाबि बधाइ मारलक छलहुँ भने बड़ नीक बिन बन्हले कतेक गोर-नार कनियाँ संगक सगाइ मारलक झूठक रंगमे डूबि जीबितहुँ कतेक दिन रंग हटैत देरी झूठक बड़ाइ मारलक सुधि बिसरि कए सभटा निसामे बहेलहुँ दिन राति पीया कए गाम गमाइ मारलक भौतिक सुखमे डूबल ’मनु’ सगरो दुनियाँ जतए ततए फरजीकेँ उघाइ मारलक (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१७) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 27 सभकेँ हम करि सम्मान सभ बुझैत अछि गदहा सभकेँ गप्प हम सुनै छी सभ कहैत अछि गदहा सभतरि मचल हाहाकार मनुक्ख खाए गेल चाड़ा भ्रष्टाचारमे डूबि आइ देश चलबैत अछि गदहा नवयुवक फँसल भमरमे साधु करए कबड्डी देखू गाँधी टोपी पहिर किछु कहबैत अछि गदहा भगवा चोला पहिर-पहिर आँखिमे झोँकै मिरचाई धर्माचार बनल बैसल धर्म बेचैत अछि गदहा जंगल बनल समाजमे सोनितसँ भिजल धरती शेर सगरो पड़ा गेलै चैनसँ सूतैत अछि गदहा (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-२०) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 28 गीत आ गजलमे अहाँ ओझराति किएक छी हुए मैथिलीक विकास अंसोहाति किएक छी परती पराँत जतए कोनो उपजा नै होइ तीन फसल ओतएसँ फरमाति किएक छी जतए सह सह बिच्छू आ साँप भरल होइ ओतए बिना नोतने अहाँ देखाति किएक छी अपन चटीएसँ नै फुरसैत भेटे अहाँकेँ सिलौटपर माथ फोरि कऽ औनाति किएक छी आँखि पथने बरखसँ अहीँक रस्ता तकै छी प्राणसँ बेसी ’मनु’ मनकेँ सोहाति किएक छी (सरल वार्णिक बहर, वर्ण- १७) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 29 किछु एहन काज करब हमहूँ नै फोटोमे टाँगल रहब हमहूँ एलहुँ जन्म लए कए दुनियाँमे एक नै एक दिन मरब हमहूँ कुक्कुर बिलाई जकाँ पेट पोसैट आब जुनि ओहेन बनब हमहूँ आगू बढ़ि नव समाज बनाएब नै पाछू आब आगू चलब हमहूँ खाख छनि ’मनु’ बहुत बौएलहुँ आब अपने घर बसब हमहूँ (सरल वार्णिक बहर, वर्ण -१३) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 30 गजल नहि लिखतौं तँ हम करितौं की गजल बिनु जिनगी अपन जीबितौं की शराबमे निसा छैक बुझलहुँ हमहूँ शराब नहि पीबितौं तँ हम पीबितौं की सभ कहलक नहि दिमाग हमरामे एहिसँ बेसी लए कए हम पबितौं की दुनियाँमे सभतरि भऽ जाइ सोने सोना तँ कहू सोनाकेँ कियो कनिको पूछितौं की मन मारने ’मनु’ बैसल छी नहि बुझू एते हल्लामे बजितौं तँ अहाँ सुनितौं की (सरल वार्णिक बहर, वर्ण - १५) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 31 हम ढोलक छी सदिखन बजिते रहलहुँ नहि सुनलक कियो बात पीबिते रहलहुँ हमर मोनक गप्प मोनेमे रहिगेल बंद कहब कोना जीवन भरि सोचिते रहलहुँ जकर छल आस ओ सभ छोरि चलि देलक अनचिन्हारसँ ससिनेह भेटिते रहलहुँ चीरो कऽ करेजा देखाएब तँ पतियाएतकेँ अपन टूटल करेजकेँ जोड़िते रहलहुँ बुझाएब कोना मोनकेँ शराबो भेल महग आँखि निहारि ’मनु’ आब तँ तकिते रहलहुँ (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१७) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 32 ओ निसाँ शराबमे कतए चाही जे पीबैक लेल बहाँना माहुरमे कतए चाही जे चीखैक लेल सगरो बहल अछि धाड़ आब शराबक देखू लाबू कतयसँ सूई-ताग ई धाड़ सीबैक लेल बचल किए आब शराबे टूटल करेज लेल बहुतो छै जीवनमे एकर बादो जीबैक लेल जँ डगमगएल डेग शराबे किएक थामलौं बाँकी अछि एकर बादो बहुत सीखैक लेल बहाँना बहुत अछि दुनियाँमे एखनो जीवैकेँ आबू ’मनु’ देखू बहुत किछु अछि पाबैक लेल (सरल वार्णिक बहर, वर्ण- १८) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 33 कहलन्हि ओ मंदीरमे नहि पीबू एतए शराब कोनठाम ओ नहि छथि कहु पीबू ततए शराब ई नहि अछि खराप बदनाम एकरा केने अछि ओ की बुझत भेटलै नहि जेकरा कतए शराब मरलाबादो हम नहि पियासल जाएब स्वर्गमे जाएब जतए सदिखन भेटए ओतए शराब मारा-मारि भऽ रहल अछि जाति पातिकेँ नामपर मेल देखक हुए तँ देखू भेटए जतए शराब सभ गोटेकेँ निमंत्रण ससिनेह ’मनु’ दैत अछि आबै जाए जाउ सभमिल पीब बहुतए शराब (सरल वार्णिक वर्ण, वर्ण-१९) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 34 बेटी नहि होइ दुनिआमे कहु बेटा लाएब कतएसँ जँ दीपमे बाती नहि तँ कहु दीप जड़ाएब कतएसँ आबै दियौ जगमे बेटीकेँ के कहे ओ प्रतिभा इन्द्रा होइ भ्रूण-हत्या करब तँ कल्पना सुनीता पाएब कतएसँ मातृ-स्नेह, वात्सलकेँ ममता बेटी छोरि के दोसर देत बिन बेटी वरकेँ कनियाँ घरमे सजाएब कतएसँ धरती बिन उपजा कतए घर बिनु कतए घराड़ी बिन बेटी सपनोमे नव संसार बसाएब कतएसँ हमर कनियाँ माए बाबी ओहो तँ किनको बेटीए छथि बिनु बेटी एहि दुनिआमे ’मनु’ कहू आएब कतएसँ (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-२१ ) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 35 छुपि-छुपि कऽ सदिखन कनै छी हम घुटि-घुटि कऽ दिन राति मरै छी हम लगन एहन है छै छल नै बुझल विरहकेँ आगिमे आब जरै छी हम पल भरिकेँ दूरी सहलो नै जाइए छन-छन जाएक दिन गनै छी हम सभ तँ बताह कहैत अछि हमरा हुनक ध्यानमे रमल रहै छी हम जाहि बाटपर चलि प्रियतम गेला ‘मनु’ ओ बाटकेँ निहारि तकै छी हम (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१४) 36 दर्द करेजक देखाएब तs अहाँ गानब की हमर बात कनी सपनोमे अहाँ मानब की अहाँ कहलौं पुरुषक प्रेम गोबर आ रुई करेज चीरो कs देखाएब तँ अहाँ कानब की दोख एकेटामे होइ छैक सभमे कत्तौ नहि सभकेँ संग हमरो अहाँ ओहिमे सानब की अहाँ कहैत छी सभठाम अन्हारे-अन्हारे छै इजोरियासँ आँखि मुनि अन्हरिया छानब की एक बेर हमरोपर भरोसा कय कs देखू प्रेम केकरा कहैत छैक 'मनु'सँ जानब की (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१७) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 37 नहि हमरा सागक तोड़न चाही नहि हमरा पातक छोड़न चाही नव मिथिला निर्माणक बल लेने शुभ मिथिला राजक जोड़न चाही सूपक भाँटा सन डोलति लोकक मोनक बदलति नै मोरन चाही बिनु जानक भय केने छोरै नहि घर घर बिषबिश्षी घोड़न चाहि हक हमरा एखन अप्पन चाही सभटा तीमन नहि फोड़न चाही (वर्ण-१३, मात्रा- नअ नअटा दीर्घ सभ पाँतिमे) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 38 टोना ओहे जे टोनै सभकेँ तारी ओहे जे तारै सभकेँ लेखक ओहे जे मानै मनकेँ रचना सभ हुनकर छूबै सभकेँ कनियाँ ओहे जे भाबै वरकेँ सासुरमे अपना बूझै सभकेँ नेता ओहे जे माने विधि नै जूता मुक्का जे खालै सभकेँ घरकेँ बेटा नै राखै मनदू आश्रम आगू ओ जीतै सभकेँ (मात्रा क्रम - नअ नअटा दीर्घ सभ पाँतिमे) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 39 जकर मोनक रावण नै मरलै राम आजुक कोना ओ बनलै डशल साँपक पइनो मंगै छै डशल मनुक्खक कनिको नै कनलै गेल आँगन घर सभ पलटै छै मोन भेटत कोना जे जड़लै हाथ रखने सभतरि भस्मासुर निकलितो साउध बाहर डड़लै छोड़ि ढेपापर चुगला ’मनु’केँ शहर दिस नेन्ना सभटा भगलै (मात्रा क्रम - २१२२-२२-२२२, सभ पाँतिमे) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 40 जेना जेना राति बीतल जाइए तेना तेना देह धीपल जाइए जुल्मी संगे संग रहितो हे सखी नहिए हुनकर मोन जीतल जाइए योवनमे पुरबा बसातक जोड़ छै साबरिया बिनु नै त' जीबल जाइए डूबल निनमे सगर दुनिया छै जखन बीया प्रेमक एत' छीटल जाइए भोरे उठिते प्रेम बोरल 'मनु' छलौं लाजे मरि मुँह आब तीतल जाइए (मात्राक्रम – २२२-२२१२-२२१२) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 41 हम हँसलौ तँ संसार ई हँसल कानलपर हमर नै कियो कनल सिदहामे बझल आइ लोक सभ आनक नै सरोकार छै बचल घुन खेने सगर घरक खामकेँ ख’र बाती निकलि डोलिते चलल खूनसँ ओरयानी सभक पटल सुनतै आब के केकरो कहल ‘मनु’ मनभौक गुड़ चौर खा कए किरदानी सभक देखते रहल (मात्रा क्रम – २२२१-२२१-२१२) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 42 जँ नाराज छी मानि जाऊ पिया प्रेम बिधि जानि जाऊ महिस भेल पारी तरे अछि घरक खीरसा छानि जाऊ मरल माछ पौरल दही अछि हिया हमर सभ गानि जाऊ करीया बड़द मुइल परसू किछो नै कनी कानि जाऊ छिटल रोपनी सम्हरत नै घरो घुरि अहाँ ठानि जाऊ (बहरे मुतकारिब, मात्रा क्रम-१२२-१२२-१२२) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 43 हकन नोर माए कनै छै तकर पुत्र मुखिया बनै छै कते आब बैमान बढ़लै गरीबक टकाकेँ गनै छै पतित बनल नेता तँ देशक दुनू हाथ ओ मल सनै छै पएलक कियो जतय मौका अपन बनि कऽ ओहे टनै छै बनल भोकना जेठरैअति मुदा ’मनु’ तँ सभटा जनै छै (बहरे मुतकारिब, मात्रा क्रम-१२२-१२२-१२२) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 44 रहब आब नै दास बनि हम अपन नीक इतिहास जनि हम जखन ठानलहुँ हम अपनपर समुद्रो लएलहुँ तँ सनि हम उठा मांथ जतएसँ तकलहुँ दएलहुँ तँ नक्षत्र गनि हम दुनीयाँक माहुर पीने चलै छी अपन मोन तनि हम जमल खून मारलक धधरा लएलहुँ विजय विश्व ठनि हम (बहरे मुतकारिब, मात्रा क्रम-१२२-१२२-१२२) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 45 ई हँसी हमर सुनलौं अहाँ दर्दकेँ नै तँ बुझलौं अहाँ दाँतकेँ बीचमे जीभ सन मोनमे अपन मुनलौं अहाँ नै हमर मोनकेँ चिन्हलौं मुँह किए देख घुमलौं अहाँ प्रेमकेँ हमर हँसि बिसरलौं मोनकेँ तोरि झुमलौं अहाँ हाथ संगे खुशीकेँ पकरि हृदय ‘मनु’ केर खुनलौं अहाँ (बहरे मुतदारिक, २१२-२१२-२१२) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 46 धाख सभटा बिसरि गेलै घोघ हुनकर उतरि गेलै झूठ कोनाकेँ नुकायत जखन सोंझा बजरि गेलै सय बचायब बचत कोना लाज सभटा ससरि गेलै ओ छलै फेसनसँ डूबल काज सयटा पसरि गेलै भेल नेता नीनमे सभ देश सगरो रगरि गेलै (बहरे रमल, मात्रा क्रम-२१२२-२१२२) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 47 सुख भरल संसार चाही दुखक नै अंबार चाही मोन सदिखन खूब हरखे बमक नै टंकार चाही भरल घर मिथलाक ज्ञानसँ अन्नकेँ भंडार चाही डोलि अम्बर फूल बरखे भक्तकेँ झंकार चाही सभ कियो ’मनु’ हँसि कऽ भेटे एहने संसार चाही (बहरे रमल, मात्रा क्रम-२१२२-२१२२) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 48 रंग देखू भरल अछि सभतरि तँ खूनसँ देश गेलै गैल बैमानीक घूनसँ साग तरकारी कते भेलै महग छै आब छी पोसैत नेना भात नूनसँ नामकेँ लत्ता गरीबक देहपर अछि लदल कबिलाहा कते छै गरम ऊनसँ छैक भिसकी रम बहै भरपूर सभतरि एखनो हम गुजर केलौं पान चूनसँ मारि गरमी देखु ’मनु’ बेबस कनै छी ओ तँ अछि पेरीसमे पोसाति जूनसँ (बहरे रमल, मात्रा क्रम-२१२२-२१२२-२१२२) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 49 तेल बिनु जेना निशठ टेमी धएने बिनु पिया जीवन बितत कोना अएने बरख बरखसँ हम तुसारी पूजने छी बुझब की सुख साँझ पाबनि बिनु कएने छै धिया सुख की बुझब कोना धिया बिनु भ्रूण हत्यारा बुझत की बिनु पएने मोल जीवनमे हमर बाबूक की अछि मोन बुझलक छन्नमे हुनका गएने रंग बदलति देखलौं सभकेँ हँसीमे देखि ’मनु’ दुनियाँक रहलौं मुँह बएने (बहरे रमल, मात्रा क्रम २१२२-२१२२-२१२२) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 50 जीवन कखन तक छैक नै बुझलक कियो कखनो करेजक गप्प नै जनलक कियो भेटल तँ जीवनमे सुखक संगी बहुत देखैत दुखमे आँखि नै तकलक कियो दुखकेँ अपन बेसी बुझै किछु लोक सभ भेलै जँ दोसरकेँ तँ नै सुनलक कियो सदिखन रहल भागैत सभ काजे अपन नै नोर आनक घुरि कए बिछलक कियो जीवन तँ अछि जीवैत ’मनु’ सभ एतए मइरो कऽ जे जीवैत नै बनलक कियो (बहरे रजज, मात्रा क्रम-२२१२ तीन-तीन बेर सभ पाँतिमे) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 51 जखन खगता सभसँ बेसी तखन ओ मुँह मोड़ि लेलनि जानि आफत छोरि हमरा सुखसँ नाता जोड़ि लेलनि देखि चकमक रंग सभतरि ओहिमे बहि ओ तँ गेली जानि खखड़ी ओ हमर हँसिते करेजा कोड़ि लेलनि बन्द केने हम मनोरथ अप्पन सदिखन चूप रहलौं पाञ्च बरखे आबि देख फेर सपना तोड़ि लेलनि दुखसँ अप्पन अधिक दोसरकेँ सुखक चिन्ता कएने आँखि जे फूटै दुनू तैँ एक अप्पन फोड़ि लेलनि चलक सप्पत संग लेलौं जीवनक जतराक पथपर मेघ दुखकेँ देखते ओ संग ‘मनु’केँ छोड़ि लेलनि (बहरे रमल, मात्राक्रम - २१२२ चारि-चारि बेर सभ पांतिमे) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 52 घोड़ा जखन कोनो भऽ नाँगड़ जाइ छै कहि ओकरा मालिक झटसँ दै बाइ छै माए बनल फसरी तँ बाबू बोझ छथि नव लोक सभकेँ लेल सभटा पाइ छै घर सेबने बैसल मरदबा छै किए चिन्हैत सभ कनियाँक नामसँ आइ छै कानूनकेँ रखने बुझू ताकपर जे बाजार भरिमे ओ कहाइत भाइ छै खाए कए मौसी हजारो मूषरी बनि बैसलै कोना कऽ बड़की दाइ छै पोसाकमे नेताक जिनगी भरि रहल जीतैत मातर देशकेँ ‘मनु’ खाइ छै (बहरे रजज, मात्रा क्रम - २२१२ तीन-तीन बेर सभ पाँतिमे) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 53 वेदरदिया नै दरदिया जानै हमर टाकासँ जुल्मी प्रेमकेँ गानै हमर सदिखन जरैए मन विरहकेँ आगिमे तैयो पिया नै किछु दरद मानै हमर साउन बितल घुरियो कs नै एला पिया नहि खीच हुनका प्रेम ल’ग आनै हमर बरखा खुबे बरिसय तँ गरजय बदरबा छतिया दगध भेलै हिया कानै हमर बसला पिया 'मनु' दूर बड़ परदेशमे झरकल हिया कनिको तँ नै मानै हमर (बहरे रजज, मात्रा क्रम - २२१२ तीन-तीन बेर सभ पाँतिमे) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 54 हमर मिथिलाक माटिसँ सोन उपजैए कऽलसँ बनि पानि अमृत धार निकलैए सगर पोखरिक छह छह पानिमे गामक रुपैया बनि मखाने माछ गमकैए घरे घर सभ छटैए बड्ड बुधियारी दलानसँ राजनीतिक जैड़ जनमैए युवाकेँ हाथ बल छै ओ बढ़त आँगा जँ लेलै ठानि छनमे चान पकरैए अपन माटिसँ भएलहुँ दूर ‘मनु’ कोना विरहमे हमर आँखिसँ नोर झहरैए (बहरे हजज, मात्रा क्रम- १२२२-१२२२-१२२२) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 55 लुटेए गाम गाबेए कियो लगनी किए लागल इना सभकेँ शहर भगनी कियो नै सोचलक परदेश ओगरलक भऽ गेलै गामपर माए किए जगनी उठेलौं बोझ हम आनेक भरि जिनगी अपन घरमे रहल सदिखन बसल खगनी बिसरलौं सुधि सगर कोना कऽ हम हुनकर बनेलौं अपन जिनका हम घरक दगनी अपन जननी जनमकेँ भूमि नहि बिसरल भरल बाँकी तँ अछि सभठाम ‘मनु’ ठगनी (बहरे हजज, मात्रा क्रम १२२२ तीन तीन बेर सभ पांतिमे) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 56 करेजामे अपन हम की बसेने छी अहाँकेँ नामटा लिख-लिख नुकेने छी बितैए राति नै कनिको कटैए दिन अहाँकेँ बाटमे पपनी सजेने छी हमर ठोरक हँसीकेँ देख नै हँसियौ अहाँ हँसि लिअ दरद तेँ हम दबेने छी हमर जीवन अहाँ बिनु नै छलै जीवन मनुक्खसँ देवता हमरा बनेने छी निसा ई गजलमे आँखिक अहीँकेँ ‘मनु’ बुझू नै हम महग ताड़ी चढ़ेने छी (बहरे हजज, मात्रा क्रम – १२२२-१२२२-१२२२) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 57 मन होइए हम मरि जाइ बस पाँच काठी परि जाइ जे झूठमे सदिखन भरल एहन तँ दुनिआ गड़ि जाइ नै घुस बिना जतए काज ओ सगर शासन जरि जाइ एक्को सड़ल पोखरिमे जँ सभ माछ ओकर सड़ि जाइ कुल जाहिमे एक्को भक्त ओ सगर कुल ’मनु’ तरि जाइ (बहरे मुन्सरक, मात्रा क्रम-२२१२-२२२१) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 58 देख मुँह मूँगबा बहुतो बटाइत छै नाम ककरो गरीबक नै सुहाइत छै अन्न जे भेट जेए भुखलकेँ साँझे एहि लोभक तरे दिन भरि खटाइत छै मीठ भाषण बरख पाँचे कते दै छै जीतकेँ बाद नेतासभ नुकाइत छै घूस खा खा कऽ बनलै भोकना पारा आन दमड़ीसँ चमड़ी बड़ चबाइत छै भ्रष्ट नेता घुमै बीएमडब्लूमे एखनो ’मनु’ गरीबक हक दबाइत छै (बहरे मुशाकिल, मात्रा क्रम २१२२-१२२२-१२२२) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 59 खाल रंगेल गीदड़ बड्ड फरि गेलै एहने आइ सभतरि ढंग परि गेलै घुरि कऽ इसकूल जे नै गेल जिनगीमे नांघिते तीनबटिया सगर तरि गेलै देखलक भरल पूरल घर जँ कनखी भरि आँखि फटलै दुनू डाहेसँ मरि गेलै सभ अपन अपनमे बहटरल कोना अछि मनुखकेँ मनुख बास्ते मोन जरि गेलै बीछतै ‘मनु’ करेजाकेँ दरद कोना जहरकेँ घूंट सगरो पी कऽ भरि गेलै (बहरे मुशाकिल, मात्रा क्रम २१२२-१२२२-१२२२) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 60 घोड़ कलियुग घड़ी केहन आबि गेलै एकटा कंस घर घरमे पाबि गेलै बनल अछि रक्षकेँ भक्षक आब सगरो बिबश जनताक हक सभटा दाबि गेलै अन्न खा थाह पेटक किछु नै पएलक मालकेँ सगर भूस्सा चुप चाबि गेलै शहर नै गाम आ घर-घर आब देखू गीत पूवक हबामे सभ गाबि गेलै डूबि नव फेशनक संगे आइ दुनियाँ एक गजमे अरज देहक पाबि गेलै (बहरे असम, मात्रा क्रम- २१२२-१२२२-२१२२) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 61 हम जँ पीलहुँ शराबी कहलक जमाना टीस नै दुख करेजक बुझलक जमाना भटकलहुँ बड्ड भेटेए नेह मोनक देख मुँह नै करेजक सुनलक जमाना लिखल कोना कहब की की अछि कपारक छल तँ बहुतो मुदा सभ छिनलक जमाना दोख नै हमर नै ककरो आर कहियौ देख हारैत हमरा हँसलक जमाना दर्द जे भेटलै नै ‘मनु’ कनी बूझब आन अनकर कखन दुख जनलक जमाना (बहरे असम, मात्रा क्रम - २१२२-१२२२-२१२२) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 62 भूतलेलौं किए एना मित बना लिअ छोड़ि सगरो बहानाकेँ प्रित लगा लिअ वचन नै देब हम नै किछु मोल एकर आउ चलि संगमे हमरो अप्पना लिअ जीवनक काँट ई कोना बिछ्ब एते संग हमरा ल’ मोनक संसय हटा लिअ जुनि बुझू आन जगमे सपनोसँ कखनो बुझि क’ अप्पन कनी छू ठोरसँ सटा लिअ रूप सुन्नर अहाँकेँ ई ओहिपर बदरा जीब कोना करेजामे "मनु" बसा लिअ (बहरे - असम, मात्रा क्रम – २१२२-१२२२-२१२२) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 63 दड़ड़िते खेसारी बखाड़ी बनेलक बीच तरहत्थीपर दही ओ जमेलक बिसरि रौदी दाही अपन कष्ट सभटा कर्म पथपर खेतिहर चलि हऽर चलेलक केखनो नहि पढ़ि रहल मड़राति सगरो राजमंत्री बनि उम्र भरि ओ कमेलक पहिर चश्मा दिन राति जे खूब पढ़लक घूस दय चपरासी किरानी कहेलक देख आगाँ इस्कूलकेँ घुरि परेए बनि कऽ ‘मनु’ शाइर गजल सभकेँ सुनेलक (बहरे खफीक, मात्रा क्रम- २१२२-२२१२-२१२२) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 64 भाइ भाइसँ बैरीन केलक रुपैया गाम छोड़ा सभकेँ भगेलक रुपैया आँखि मुँह मुनि परदेसमे जा कऽ बसलहुँ सगर बुझितो माहुर पियेलक रुपैया आइड़े आइड़ ख’र बटोरैत माए खेतमे बाबूकेँ कनेलक रुपैया गोल चश्मा मुन्सी लगा ताकए की खून चुसि चुसि सभटा दबेलक रुपैया भाइ बाबूकेँ ‘मनु’ बिसरि जाउ छनमे राज नै आब तँ घर चलेलक रुपैया (बहरे खफीक, मात्रा क्रम - २१२२-२२१२-२१२२) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 65 अछि जँ जिनगी तँ प्रेम केनाइ सिख लिअ दुख बिसरि जगमे मन लगेनाइ सिख लिअ काल्हिकेँ नै कोनो भरोसा बचल अछि आइपर हिल मिल आबि जेनाइ सिख लिअ जीवनक सुख दुख बाट दू छैक बुझलौं दूबटीयापर हँसि कऽ गेनाइ सिख लिअ अपन मनमे प्रेमक जगाबैत बाती आँखि सभकेँ सोझाँ उठेनाइ सिख लिअ के बुझेलक ‘मनु’ छै अछूतगर पापी पाप आबो संगे मिटेनाइ सिख लिअ (बहरे खफीक, मात्रा क्रम - २१२२-२२१२-२१२२) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 66 कखनो कियो हमरो प्रेम करबे करत गेलहुँ जँ नै घर ओ बाट तकबे करत भागैत अछि टोलक लोक नामसँ हमर एकदिन सभ हमरो संग चलबे करत बैसल घरे घर सभ कान मुनने अपन दोसर मुँहसँ हमरो लेल सुनबे करत के एतए अमृत पी कए आएल सभ एक नै दोसर दिन मरबे करत जे प्रेम केलक कहियो जँ मिसियो ‘मनु’सँ दू नोर मुइलापर ओ तँ कनबे करत (बहरे सलीम, मात्रा क्रम-२२१२-२२२१-२२२१) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 67 कोना अहाँकेँ घुरि कहब आबै लेल बड़ दूर गेलौं टाका कमाबै लेल नै रीत कनिको प्रीतक बुझल पहिनेसँ टूटल करेजा अछि किछु सुनाबै लेल लागल कपारक ठोकर जखन देखलहुँ नै आँखिमे नोरक बुन नुकाबै लेल बुझलौं अहाँ बैसल मोनमे छी हमर ई दूर गेलौं हमरा कनाबै लेल कोना कऽ ‘मनु’ कहतै आब अप्पन दोख घुरि आउ फेरसँ संसार बसाबै लेल (बहरे- सलीम, मात्रा क्रम-२२१२-२२२१-२२२१) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 68 आइ सगरो गाममे हाहाकार छै मचल एना ई किए अत्याचार छै आँखि मुनने बोगला बैसल भगत बनि खून पीबै लेल कोना तैयार छै देखतै के केकरा आजुक समयमे देशकेँ सिस्टम तँ अपने बेमार छै देखते मुँह पाइकेँ कोना मुँह मोरलक मांगि नै लेए खगल सभ बेकार छै भरल भिरमे एखनो धरि एसगर छी केकरो मनपर ‘मनु’क नै अधिकार छै (बहरे जदीद, मात्रा क्रम - २१२२-२१२२-२२१२) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 69 हमर जीवन भरि करेजा टुटिते रहल सभ कियो हमरासँ दूरे हटिते रहल जेकरा हम अपन तन मन सभ सोपलौं मोनकेँ ओ हमर सदिखन लुटिते रहल हमर भागक कनिक लिखलाहा देखियौ किछु जँ लिखलौं छन्नमे सभ मिटिते रहल पीठ पाछू सभ कियो रेतै कंठ छै एक दोसर केर नाता छुटिते रहल हम सिनेहक कलश ‘मनु’ कतबो जोड़लौं काँच बासन सन भहरि सभ फुटिते रहल (बहरे जदीद, मात्रा क्रम २१२२-२१२२-२२१२) 70 एखनो कोना कऽ छी नै जनेलौं हम छोरि मनकेँ आन नै धन कमेलौं हम सभक आनै लेल मुँहपर हँसी चललौं अपनकेँ नै जानि कतए हरेलौं हम हृदय खोखरलक हमर जे दुनू हाथसँ ओकरो हँसि-हँसि क’ अप्पन बनेलौं हम फूल सगरो छोरि काँटे किए बिछलौं ई करेजा जानि कोना लगेलौं हम ‘मनु’ करेजा तोरि एना अहाँ जुनि हँसु मग्न भय कहि गजल ताड़ी चढ़ेलौं हम (बहरे कलीब, मात्रा क्रम-२१२२-२१२२-१२२२) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 71 हम गजल कोना कहू भीड़मे रसगर सगर मुँह बेने मनुख भेसमे अजगर पाइ घोटाला हबालाक खाएकेँ रोग छै सबकेँ पकरने किए कसगर बहिन माए भाइ बाबू अपन कनियाँ सब तकै सम्बन्धमे दाम ली जथगर गामकेँ बेटा परेलै शहर सबटा खेत एकोटा रहल आब नै चसगर छै बिकाइ प्रेम दू-दू टका मोले रीत ‘मनु’केँ नै लगै छै कनी जसगर (बहरे कलीब, मात्रा क्रम-२१२२-२१२२-१२२२) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 72 आब चाही बस अहाँ केर मुस्कीटा नै मरब पीने बिनु प्रेम चुस्कीटा जे अहाँ बजलौं करू ओकरो पूरा की अहूँ भेलौं खली बम्म फुस्कीटा नै कटाबू नाक आबू सभक सोंझाँ की तरे-तर रहब मारैत भुस्कीटा डर लगैए भीड़मे नै निकलु बाहर देख टीभी बसि घरे करब टुस्कीटा ‘मनु’ दखेलौं सभक अपनो कनी देखू बिसरि अप्पन काज नै बनब घुस्कीटा (बहरे कलीब, मात्रा क्रम – २१२२-२१२२-१२२२) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 73 लदने नै अनेरे लाश छी कान्हपर जीवन केर सबटा आश छी कान्हपर दिन भरि जे कमेलौं ओकरे दाम अछि ढाकीमे बुझू नै घास छी कान्हपर खूजल उक जकाँ कोना फरफराइ छी नै रखने मनुक्खक भाष छी कान्हपर भैया भेल नेता आब नै हम डरब रखने हाथ सदिखन खास छी कान्हपर कुक्कुर पोसि नव-नव साहबी केर ‘मनु’ दू कट्ठा बचेने चास छी कान्हपर (बहरे कबीर, मात्रा क्रम – २२२१-२२२१-२२१२) 74 होए मोन हरखीत ढोलो सोहाइ नै बिनु कारने मीठ बोलो सोहाइ प्रियगर भेट नवकी कनियाँ गेलै जँ हाथक हुनकर नोनगर ओलो सोहाइ जेबीमे जखन भरल रुपैया होइ तहने महग सस्ताक मोलो सोहाइ सिम्बर तूरकेँ नीक गदगर मसलंग सुन्नर ओहिपर आब खोलो सोहाइ भरि सन्दूक घर जाहिमे भेटै सोन एहन घरक महकैत झोलो सोहाइ (बहरे हमीद, मात्रा क्रम -२२२१-२२१२-२२२१) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 75 उठलै करेजामे दरदिया हो राम भेलै पिया जुल्मी बहरिया हो राम कुक कोइलीकें सुनि हिया सिहरल हमर आँखिसँ बहे नोरक टघरिया हो राम साउन बितल जाए सुहावन मन सुखल एलै पियाकेँ नै कहरिया हो राम जरलै हमर जीवन बिना प्रेमक आगि लागल हमर सुखमे वदरिया हो राम जीवन ‘मनु’क बनलै बिना तेलक दीप कोना जरत मोनक बिजुरिया हो राम (बहरे सरीअ, मात्रा क्रम - २२१२-२२१२-२२२१) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 76 जनमेसँ टूगर हम प्रेमक लेल तरसैत रहलौं भेटल किरण एक आशक तकरो तँ मिझबैत रहलौं दुख एहिकेँ केखनो नै की प्रेम किछु नै पएलौं अफसोस की एहि दुनिआमे चुप्प जीबैत रहलौं चमकैत सभ बस्तुकेँ हम अनजानमे सोन बुझलौं सोना जखन हम पएलौं नै बुझि क' हरबैत रहलौं किछु नै बचल आब अपनेकेँ लूटबअमे लागि गेलौं तारी कटीयाक मेलामे होस हारैत रहलौं आँखिक बिसरि आश गेलौं अनुराग सभटा बिसरलौं गेलौं हराएब दुख ‘मनु’ छन सुखक बिसरैत रहलौं ( बहरे मुजस्सम वा मुजास, मात्रा क्रम-२२१२-२१२२/२२१२-२१२२) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 77 हेरौ कोआ खसा दे एगो आम हमरो लेल देबौ बाली माए जे देतै दाम हमरो लेल चल-चल गे बूचनी चलै आब खेलएब भऽ गेल देलकै जे माए काम हमरो लेल नहि छमकै एना लए कऽ अपन पुतूल तोरासँ सुन्नर देथीन राम हमरो लेल बहुत केलहुँ काज लगेलहुँ बड़ राज आबो तँ घुरि आउ बाबू गाम हमरो लेल सभकेँ नाम गे माए कते सुन्नर-सुन्नर किएक नहि ’मनु’ सन नाम हमरो लेल (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१६) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 78 लाल-दाईकेँ ललना लाले लाल लगैत छथि लाली अपन माएकेँ चोरा कऽ नुकाबैत छथि हिनकर आँखिमे काजरक बिजुड़ीया लोके मएयोसँ सुन्नर झिलमिल झलकैत छथि लटकल माथपर सुन्नर लट हिनकर देखियौंह चंद्रमाकेँ आब ई लजाबैत छथि सुनि-सुनि बहिना सभ हिनकर किलकाड़ी कियो खेलाबैत कियो हिनका झुलाबैत छथि रंग-रूप चालि-चलन सभटा निहाल छनि मुस्कीसँ ई तँ अपन ’मनु’केँ लुभाबैत छथि (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१७) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 79 बिनु पानिक नाउ चलाएब हम बिनु चक्काक गाड़ी बनाएब हम हमर मोनमे तँ जेँ किछु आएत बिन सोचने सभ सुनाएब हम अपन ब्याहमे हम नहि जाएब सराध दिन बजा बजाएब हम कनियाँकेँ लय ओकर नैहरसँ सासुरसँ खूब कतियाएब हम ’मनु’ मन चंचल टोनए सभकेँ केकरो हाथ नै घुरि आएब हम (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१३) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 80 हे माए नहि चरबै लए गाए जेबौ हम जेबौ आब इसकूल कोपी पेन लेबौ हम अपन भाग हम आब अपनेसँ लिखबौ कुकूर जकाँ नै माँड़े तिरपीत हेबौ हम रोगहा-रोगहा सभ कियो कहए हमरा एक दिन बनि डाक्टर रोग हरेबौ हम टूटल फूटल अपन फुसक घर तोरि सुन्नर सभसँ पैघ महल बनेबौ हम हमरा कहैत अछि ’मनु’ मुर्ख चरबाहा पढ़ि कए सभ चरबाहाकेँ पढ़ेबौ हम (सरल वार्णिक बहर, वर्ण- १६) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 81 माएगै हमर फुकना की भेल दाइ हमर झुनझूना की भेल बाबाकेँ कहबनि सभ हरेलौं सभटा हमर खेलौना की भेल दूध-भात आब हम नहि खेबौ पेटमुका हमर सन्ना की भेल हम जे बुललौं बाबा बाबी संगे रातिक हमर सपना की भेल ’मनु’ मामा परसु जे अनलन्हि हमर निकहा चुसना की भेल (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१२) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 82 चम चम चम चम तारा चमकए बौआ कए हाथक तरुआ गमकए करीया बकरी नव उज्जर महीस लाल बाछी किए दौर-दौर बमकए बौआक घोरा सय-सय टाकाकेँ देखू काकाकेँ घोरा पिद्दी कतेक कमकए बाबीकेँ सारी माएकेँ लहंगा बहए बौआकेँ घघरी तँ कतेक छमकए बौआ हमर आब गुमशुम किएक ’मनु’ संग ठुमुक-ठुमुक ठुमकए (सरल वार्णिक, वर्ण-१४) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 83 बेलगोबना नहि सुनलक गप्प ओकर माथसँ बेल खसल धप्प बरखा बुनि लऽ कऽ एलै कारी मेघ पएर तर पानि करे छप्प छप्प बोगला भेल देखू कतेक चलाक एके पएरे करे दिन भरि जप्प बुढ़िया नानीकेँ दुनू काने हरेलै चाह पीबे भरि दिनमे दस कप्प बैस ’मनु’ झोँटा छटा ले चुपचाप नै तँ काटि देतौ कान हजमा खप्प (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१३) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 84 नेना हम मएँकेँ आँखि जूराएब मिथिलाकेँ अपन सोनासँ चमकाएब मूरत सभ घरे रामे सियाकेँ देखु एहन आँन कतए मेल देखाएब गंगा बसति पावन घर घरे मिथिलाक डुबकी मारि कमला घाट नाहाएब मुठ्ठी भरि बिया भागक अपन हम रोपि अपने माटिमे हँसि हँसि कऽ गौड़ाएब ’मनु’ दे सपत घर घुरि आउ काका बाबू नेन्नाकेँ कखन तक कोँढ़ ठोड़ाएब (बहरे रजज, मात्रा क्रम-२२२१-२२२१-२२२१) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 85 चलै चुनमुन चलै गुनगुन तमासा घुमि कए आबी जिलेबी ओतए छानैत तोहर भेटतौ बाबी पढ़ैकेँ छुटल झंझट भेल इसकूलक शुरू छुट्टी दसो दिन राति मेला घुमि कए नव वस्तु सभ पाबी करीया बनरिया कुदि कुदि कए ढोलक बजाबै छै चलै चल ओकरा संगे सगर नेना कनी गाबी बनल मेनजन अछि बकरी पबति बैसल अचारे छै बरद सन बौक दिनभरि चूप्प रहए पहिरने जाबी बुझलकौ आब तोरो होसयारी ’मनु’ तँ बुढ़िया गै लगोने ध्यान वक कतएसँ सम्पति नीकगर दाबी (बहरे हजज, मात्रा क्रम-१२२२ चारि-चारि बेर सभ पाँतिमे) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 86 तिला संक्रातिकेँ खिचैर खाले रौ हमर बौआ लऽ जेतौ नै तँ कनिए कालमे ओ आबिते कौआ चलै बुच्ची सखी सभ लाइ मुरही किन कऽ आनी अपन माएसँ झटपट माँगि नेने आबि जो ढौआ बलानक घाट मेलामे कते घुमि घुमि मजा केलक किए घर अबिते मातर बुढ़ीया गेल भय थौआ कियो खुश भेल गुर तिल पाबि मुरही खुब कियो फाँकेँ ललन बाबा किए झूमैत एना पी कए पौआ सगर कमलाक धारक बाटमे बड़ रमणगर मेला सभ कियो ओतए गेलै कि भेलै ‘मनु’ कुनो हौआ (बहरे रमल, मात्रा क्रम - १२२२-१२२२-१२२२-१२२२) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 87 फेर एलै दिवाली लेबै फटक्का फोरबै मिल कए सभ मारत ठहक्का बड़ रमनगर बुसऽट नव अनलन्हि मामा देखते सभ भऽ गेलै कोना कऽ बक्का घीक लड्डू दुनू हाथे दैत भरि भरि अपन बेटाक कोजगरामे तँ कक्का दौड़ चलबैत सासुरकेँ फटफटिया हरसँ भरि थालमे सौंसे फसल चक्का आइ कुसियारक ट्रककेँ परल पाँछा संगमे ‘मनु’क गामक छौंड़ा उचक्का (बहरे असम, मात्रा क्रम- २१२२-१२२२-२१२२) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 88 अहाँ तँ सभटा बुझैत छी हे माता सुमरि अहाँकेँ कनैत छी हे माता दीन हीन हम नेना बड़ अज्ञानी आँखि किए अहाँ मुनैत छी हे माता अहाँ तँ जगत जननी छी भवानी तैयो नहि किछु सुनैत छी हे माता श्रधाभाव किछु देलौं अहीँ हमरा अर्पित ओकरे करैत छी हे माता नहि हम जानी किछु पूजा-अर्चना जप तप नहि जनैत छी हे माता जगमे आबि ओझरेलहुँ एहेन अहाँकेँ नहि सुमरैत छी हे माता छी मैया हमर हम पुत्र अहीँकेँ एतबे तँ हम बजैत छी हे माता (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१३) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 89 धूप आरती हम अनलहुँ नहि जप-तप करब सिखलहुँ नहि सदिखन कर्तव्यक बोझ उठोने अहाँक ध्यान किछु धरलहुँ नहि की होइत अछि माए पुत्रक नाता एखन तक हम बुझलहुँ नहि हम बिसरलहुँ अहाँकेँ जननी अहुँ एखन तक सुनलहुँ नहि अपन शरणमे लऽ लिअ हे माता ममता अहाँक तँ जनलहुँ नहि (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१३ ) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 90 निर्धन जानि कऽ छोरि गेलहुँ माँ कोन अपराध हम केलहुँ माँ केहनो छी तँ हम पुत्र अहींकेँ सभ सनेश अहींसँ पेलहुँ माँ दामक तराजुमे नै एना जोखू ममताकेँ पियासल भेलहुँ माँ दर-दर भटकि खाक छनै छी दर्शन अपन नै दखेलहुँ माँ ‘मनु’केँ अपन सिनेह नै देलहुँ सोंझाँसँ दूर आब भगेलहुँ माँ (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१२) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 91 हे राम बसु मनमे हमर ई प्राण धरि तनमे हमर सदिखन अहीँक ध्यानमे नै मन बसै धनमे हमर प्रभु दरसकेँ आशासँ ई भटकैट मन बनमे हमर एतेक मन चंचल किए प्रभु रहथि कण कणमे हमर हे राम ‘मनु’पर करु दया नै मन बहै छनमे हमर (बहरे रजज, मात्रा क्रम २२१२-२२१२) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 92 चलि अहाँ कतए किए गेलहुँ मुरारी एहि दुखियाकेँ हरत के कष्ट भारी तान ओ मुरलीक फेरसँ आबि टारू बिकल भेलहुँ एतए एसगर नारी द्रोपतीकेँ लाज बचबै लेल एलहुँ नित्य सय सय बहिनकेँ कोना बिसारी बनि कऽ फेरसँ सारथी भारत बचाबू सभक रक्षक हे मधुसुदन चक्रधारी वचन जे रक्षाक देलहुँ ओ निभाबू कहत कोना ‘मनु’ अहाँकेँ हे बिहारी (बहरे रमल, मात्रा क्रम - २१२२-२१२२-२१२२) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 93 माँ शारदे वरदान दिअ हमरो हृदयमे ज्ञान दिअ हरि ली सभक अन्हार हम एहन इजोतक दान दिअ सुनि दोख हम कखनो अपन दुख नै हुए ओ कान दिअ गाबी अहीँकेँ गुण सगर सुर कन्ठ एहन तान दिअ बुझि पुत्र ‘मनु’केँ माँ अपन कनिको हृदयमे स्थान दिअ (बहरे रजज, मात्रा क्रम - २२१२-२२१२) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 94 कनी हमरो बजा दिअ माँ अपन दर्शन करा दिअ माँ कते आशा लगोने छी अपन चाकर बना दिअ माँ जनम भरि बनि टुगर रहलौं सिनेहक निर चटा दिअ माँ जँ हम नेना अहाँकेँ छी अलख मनमे जगा दिअ माँ सुखेलै नोर जरि आँखिक चरण ‘मनु’केँ दखा दिअ माँ (बहरे हजज, मात्रा क्रम १२२२-१२२२) ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 95 (हजल मने हास्य गजल) लाल धोती केश राँगि समधि चुगला बनला ना बेटा बेचि आनि बरयाती ई पगला बनला ना सभ बिसरि आँखि मुनि ध्यानसँ ताकथि रुपैया भीतर कारी बाहर उज्जर बोगला बनला ना खेत खड़ीहान बेच बेच पीबथि बभना तारी आब लंगोटा खोलि खालि ई तँ हगला बनला ना तमाकुल चूनबैत पसारने दिनभरि तास घर आँगनक चिंता नहि ई खगला बनला ना जेल छोरि बाहर आबि हाथ जोरि माँगथि भोट जितैत देरी ’मनु’केँ बिसरि दोगला बनला ना (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१८) ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’ 96 गदहराज धन्य छी दिअ सदबुद्धि हमरो अहाँ उपर लदने बोझ नै आँखि देखाबी ककरो अहाँ धियान मग्न रहि मधुर तान ढेंचू-ढेंचू करै छी मन्त्र जनैत छी शास्त्रीय गायन कए सगरो अहाँ मनुक्ख पबैत सम्मान विशेष नाम अहीँक लऽ कऽ बिन आपति बर्दास्त करी नहि करी झगरो अहाँ स्वर्ग गेलौं लागले छान ई कथा जगजाहिर अछि करु पैरबी कनी हमर बियाहक जोगरो अहाँ गृहस्थक जुआ कान पर ’मनु’ खटब आब कोना दिअ गदहपन जँ बुझलौं अपन हमरो अहाँ (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१९) 97 डूबने बिनु बुझब कोना निशा की छै प्रेम बिनु केने कि जानब सजा की छै बसि क’ धारक कात हेलब सिखब कोना आउ देखी कूदि एकर मजा की छै नोकरी कय नै कियो धन कमेलक बड़ अपन मालिक बनु तँ एहिसँ भला की छै आइ अप्पन बलसँ पीएम बनतै ओ हारि झूठ्ठे ढोल पीटब हबा की छै रोडपर कोनो करेजक परल टुकड़ा ओहि छनमे ‘मनु’सँ पुछबै दया की छै (बहरे कलीब, मात्रा क्रम, २१२२-२१२२-१२२२) 98 देखलौं जखनसँ अहाँकेँ होस गेलौं बिसरि हम आगि ख’र बिनु लेसने सौँसेसँ गेलौं पजरि हम एकटा मुस्की अहाँकेँ प्राण लेलक लय हमर खा क’ मोने मोन मुँगबा चट्ट गेलौं पसरि हम अछि निसा चानक अहाँमे भ्रमित केने रातिमे मुँह अहाँकेँ मोरिते बिनु पानि गेलौं पिछरि हम स्वर्ग पेलौं बिनु अहाँ ओ स्वर्ग भेलै नर्क सन छोरि छारि स्वर्गकेँ पाछूसँ गेलौं ससरि हम खुजल आँखिक ‘मनु’क सपना प्रgगट भेलौं जगतमे देख निरमल नेह बिनु बरखाक गेलौं झहरि हम (मात्रा क्रम- २१२२-२१२२-२१२२-२१२) 99 किए तीर नजरिसँ अहाँकेँ चलैए  हँसी ई तँ घाएल हमरा करैए 

मधुर बाजि खन-खन पएरक पजनियाँ  हमर मोन रहि रहि कए डोलबैए   

छ्मकए हबामे अहाँकेँ खुजल लट  कतेको तँ  दाँतेसँ   आङुर कटैए ससरि जे जए जखन आँचर अहाँकेँ जिला भरि  करेजाक धड़कन रुकैए अहीँकेँ तँ मुँह देखि जीबैत 'मनु' अछि बिना संग नै साँस मिसियो चलैए (बहरे - मुतकारिब, मात्राक्रम -122-122-122-122) 100 टूटल करेज राखब नहि एखन हम सिखने छी किछु अपने तोड़लहुँ  किछु भागे एहन रखने छी जिनका लूटेलौं हम अपन सिनेह भरल करेज  हुनकासँ दूर होबाक माहुर अपनेसँ चीखने छी 

सोचने तँ  छलहुँ एक दिन जीवनमे होएत रंग  ओहि रंग भरल दुनियाँसँ कतेक दूर एखने छी 

दोसरसँ करू की शिकाति ‘मनु’ अपने नै बुझलक जिनका केलौं नेह करेज तोरैत हुनका देखने छी (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-२०) 101 नुका-नुका कऽ सदिखन कनै छी हम  घुटि-घुटि कऽ दिन राति मरै छी हम 

लगन एहन है छै छल नै बुझल   विरहकेँ आगिमे आब जरै छी हम 

छन भरिकेँ दूरी सहलो नै जाइए छन-छन घुटि-घुटि कऽ रहै छी हम 

सभ तँ बताह कहैत अछि हमरा  हुनक ध्यानमे रमल चलै छी हम 

जाहि बाट पर चलि प्रियतम गेला  ‘मनु’ओ बाटकेँ निहारि तकै छी हम 

(सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१४) गजल नहि लिखतौं तँ हम करितौं की गजल बिनु जिनगी अपन जीबितौं की विदेह नूतन अंक भाषापाक रचना-लेखन इंग्लिश-मैथिली-कोष / मैथिली-इंग्लिश-कोष  प्रोजेक्टकेँ आगू बढ़ाऊ, अपन सुझाव आ योगदान ई-मेल द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ। Top of Form १.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली आ २.मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम १.नेपाल आ भारतक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली

१.१. नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक  उच्चारण आ लेखन शैली (भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन १.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङ, ञ, ण, न एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना- अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।) पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।) खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।) सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।) खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।) उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंक, पंच, खंड, संधि, खंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्ग, चवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंक, चंचल, अंडा, अन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओ लोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि। नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोक बेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोट सन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽ कऽ पवर्ग धरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽ कऽ ज्ञ धरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ। २.ढ आ ढ : ढक उच्चारण “र् ह”जकाँ होइत अछि। अतः जतऽ “र् ह”क उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ लिखल जाए। आन ठाम खाली ढ लिखल जएबाक चाही। जेना- ढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढङ्ग, ढेरी, ढाकनि, ढाठ आदि। ढ = पढ़ाइ, बढब, गढब, मढब, बुढबा, साँढ, गाढ, रीढ, चाँढ, सीढी, पीढी आदि। उपर्युक्त शब्द सभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ अबैत अछि। इएह नियम ड आ डक सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि। ३.व आ ब : मैथिलीमे “व”क उच्चारण ब कएल जाइत अछि, मुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथ, बिद्या, नब, देबता, बिष्णु, बंश, बन्दना आदि। एहि सभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथ, विद्या, नव, देवता, विष्णु, वंश, वन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकील, ओजह आदि। ४.य आ ज : कतहु-कतहु “य”क उच्चारण “ज”जकाँ करैत देखल जाइत अछि, मुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञ, जदि, जमुना, जुग, जाबत, जोगी, जदु, जम आदि कहल जाएबला शब्द सभकेँ क्रमशः यज्ञ, यदि, यमुना, युग, यावत, योगी, यदु, यम लिखबाक चाही। ५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि। प्राचीन वर्तनी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आदि। नवीन वर्तनी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आदि। सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहि, एना, एकर, एहन आदि। एहि शब्द सभक स्थानपर यहि, यना, यकर, यहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारू सहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे “ए”केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि। ए आ “य”क प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैल, हैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो “ए”क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि। ६.हि, हु तथा एकार, ओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हि, हु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहि, अपनहु, ओकरहु, तत्कालहि, चोट्टहि, आनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनके, अपनो, तत्काले, चोट्टे, आनो आदि। ७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खडयन्त्र), षोडशी (खोडशी), षट्कोण (खटकोण), वृषेश (वृखेश), सन्तोष (सन्तोख) आदि। ८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि: (क) क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमे सँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : पढए (पढय) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पडतौक। अपूर्ण रूप : पढ’ गेलाह, क’ लेल, उठ’ पडतौक। पढऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पडतौक। (ख) पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछ, मुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह। अपूर्ण रूप : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह। (ग) स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापद, संज्ञा, ओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि। अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल। (घ) वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : पढैत अछि, बजैत अछि, गबैत अछि। अपूर्ण रूप : पढै अछि, बजै अछि, गबै अछि। (ङ) क्रियापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप: छियौक, छियैक, छहीक, छौक, छैक, अबितैक, होइक। अपूर्ण रूप : छियौ, छियै, छही, छौ, छै, अबितै, होइ। (च) क्रियापदीय प्रत्यय न्ह, हु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : छन्हि, कहलन्हि, कहलहुँ, गेलह, नहि। अपूर्ण रूप : छनि, कहलनि, कहलौँ, गेलऽ, नइ, नञि, नै। ९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटि कऽ दोसर ठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन), पानि (पाइन), दालि ( दाइल), माटि (माइट), काछु (काउछ), मासु (माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्द सभमे ई निअम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि। १०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्द सभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषा सम्बन्धी निअम अनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरण सम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्ष सभकेँ समेटि कऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनीकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽबला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषी पर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पडि रहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषता सभ कुण्ठित नहि होइक, ताहू दिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए। -(भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) १.२. मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली

१. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-

ग्राह्य

एखन ठाम जकर, तकर तनिकर अछि

अग्राह्य अखन, अखनि, एखेन, अखनी ठिमा, ठिना, ठमा जेकर, तेकर तिनकर। (वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य) ऐछ, अहि, ए।

२. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैकल्पिकतया अपनाओल जाय: भऽ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।

३. प्राचीन मैथिलीक ‘न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ‘न’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।

४. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।

५. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत: जैह, सैह, इएह, ओऐह, लैह तथा दैह।

६. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे ‘इ’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।

७. स्वतंत्र ह्रस्व ‘ए’ वा ‘य’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ‘ए’ वा ‘य’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।

८. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ‘य’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढैआ, विआह, वा धीया, अढैया, बियाह।

९. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव ‘ञ’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।

१०. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:- हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। ’मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ‘क’ क वैकल्पिक रूप ‘केर’ राखल जा सकैत अछि।

११. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।

१२. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।

१३. अर्द्ध ‘न’ ओ अर्द्ध ‘म’ क बदला अनुसार नहि लिखल जाय, किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ‘ङ’ , ‘ञ’, तथा ‘ण’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।

१४. हलंत चिह्न निअमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।

१५. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क’ लिखल जाय, हटा क’ नहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।

१६. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रापर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं।

१७. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।

१८. समस्त पद सटा क’ लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोडि क’ ,  हटा क’ नहि।

१९. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।

२०. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।

२१.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा' ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।

ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा "सुमन" ११/०८/७६

  २. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम २.१. उच्चारण निर्देश: (बोल्ड कएल रूप ग्राह्य):- दन्त न क उच्चारणमे दाँतमे जीह सटत- जेना बाजू नाम , मुदा ण क उच्चारणमे जीह मूर्धामे सटत (नै सटैए तँ उच्चारण दोष अछि)- जेना बाजू गणेश। तालव्य शमे जीह तालुसँ , षमे मूर्धासँ आ दन्त समे दाँतसँ सटत। निशाँ, सभ आ शोषण बाजि कऽ देखू। मैथिलीमे ष केँ वैदिक संस्कृत जकाँ ख सेहो उच्चरित कएल जाइत अछि, जेना वर्षा, दोष। य अनेको स्थानपर ज जकाँ उच्चरित होइत अछि आ ण ड जकाँ (यथा संयोग आ गणेश संजोग आ गड़ेस उच्चरित होइत अछि)। मैथिलीमे व क उच्चारण ब, श क उच्चारण स आ य क उच्चारण ज सेहो होइत अछि। ओहिना ह्रस्व इ बेशीकाल मैथिलीमे पहिने बाजल जाइत अछि कारण देवनागरीमे आ मिथिलाक्षरमे ह्रस्व इ अक्षरक पहिने लिखलो जाइत आ बाजलो जएबाक चाही। कारण जे हिन्दीमे एकर दोषपूर्ण उच्चारण होइत अछि (लिखल तँ पहिने जाइत अछि मुदा बाजल बादमे जाइत अछि), से शिक्षा पद्धतिक दोषक कारण हम सभ ओकर उच्चारण दोषपूर्ण ढंगसँ कऽ रहल छी। अछि- अ इ छ  ऐछ (उच्चारण) छथि- छ इ थ  – छैथ (उच्चारण) पहुँचि- प हुँ इ च (उच्चारण) आब अ आ इ ई ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ऐ सभ लेल मात्रा सेहो अछि, मुदा ऐमे ई ऐ ओ औ अं अः ऋ केँ संयुक्ताक्षर रूपमे गलत रूपमे प्रयुक्त आ उच्चरित कएल जाइत अछि। जेना ऋ केँ री  रूपमे उच्चरित करब। आ देखियौ- ऐ लेल देखिऔ क प्रयोग अनुचित। मुदा देखिऐ लेल देखियै अनुचित। क् सँ ह् धरि अ सम्मिलित भेलासँ क सँ ह बनैत अछि, मुदा उच्चारण काल हलन्त युक्त शब्दक अन्तक उच्चारणक प्रवृत्ति बढल अछि, मुदा हम जखन मनोजमे ज् अन्तमे बजैत छी, तखनो पुरनका लोककेँ बजैत सुनबन्हि- मनोजऽ, वास्तवमे ओ अ युक्त ज् = ज बजै छथि। फेर ज्ञ अछि ज् आ ञ क संयुक्त मुदा गलत उच्चारण होइत अछि- ग्य। ओहिना क्ष अछि क् आ ष क संयुक्त मुदा उच्चारण होइत अछि छ। फेर श् आ र क संयुक्त अछि श्र ( जेना श्रमिक) आ स् आ र क संयुक्त अछि स्र (जेना मिस्र)। त्र भेल त+र । उच्चारणक ऑडियो फाइल विदेह आर्काइव  http://www.videha.co.in/ पर उपलब्ध अछि। फेर केँ / सँ / पर पूर्व अक्षरसँ सटा कऽ लिखू मुदा तँ / कऽ हटा कऽ। ऐमे सँ मे पहिल सटा कऽ लिखू आ बादबला हटा कऽ। अंकक बाद टा लिखू सटा कऽ मुदा अन्य ठाम टा लिखू हटा कऽ– जेना छहटा मुदा सभ टा। फेर ६अ म सातम लिखू- छठम सातम नै। घरबलामे बला मुदा घरवालीमे वाली प्रयुक्त करू। रहए- रहै मुदा सकैए (उच्चारण सकै-ए)। मुदा कखनो काल रहए आ रहै मे अर्थ भिन्नता सेहो, जेना से कम्मो जगहमे पार्किंग करबाक अभ्यास रहै ओकरा। पुछलापर पता लागल जे ढुनढुन नाम्ना ई ड्राइवर कनाट प्लेसक पार्किंगमे काज करैत रहए। छलै, छलए मे सेहो ऐ तरहक भेल। छलए क उच्चारण छल-ए सेहो। संयोगने- (उच्चारण संजोगने) केँ/  कऽ केर- क ( केर क प्रयोग गद्यमे नै करू , पद्यमे कऽ सकै छी। ) क (जेना रामक) –रामक आ संगे (उच्चारण राम के /  राम कऽ सेहो) सँ- सऽ (उच्चारण) चन्द्रबिन्दु आ अनुस्वार- अनुस्वारमे कंठ धरिक प्रयोग होइत अछि मुदा चन्द्रबिन्दुमे नै। चन्द्रबिन्दुमे कनेक एकारक सेहो उच्चारण होइत अछि- जेना रामसँ- (उच्चारण राम सऽ)  रामकेँ- (उच्चारण राम कऽ/ राम के सेहो)। केँ जेना रामकेँ भेल हिन्दीक को (राम को)- राम को= रामकेँ क जेना रामक भेल हिन्दीक का ( राम का) राम का= रामक कऽ जेना जा कऽ भेल हिन्दीक कर ( जा कर) जा कर= जा कऽ सँ भेल हिन्दीक से (राम से) राम से= रामसँ सऽ , तऽ , त , केर (गद्यमे) एे चारू शब्द सबहक प्रयोग अवांछित। के दोसर अर्थेँ प्रयुक्त भऽ सकैए- जेना, के कहलक? विभक्ति “क”क बदला एकर प्रयोग अवांछित। नञि, नहि, नै, नइ, नँइ, नइँ, नइं ऐ सभक उच्चारण आ लेखन - नै त्त्व क बदलामे त्व जेना महत्वपूर्ण (महत्त्वपूर्ण नै) जतए अर्थ बदलि जाए ओतहि मात्र तीन अक्षरक संयुक्ताक्षरक प्रयोग उचित। सम्पति- उच्चारण स म्प इ त (सम्पत्ति नै- कारण सही उच्चारण आसानीसँ सम्भव नै)। मुदा सर्वोत्तम (सर्वोतम नै)। राष्ट्रिय (राष्ट्रीय नै) सकैए/ सकै (अर्थ परिवर्तन) पोछैले/ पोछै लेल/ पोछए लेल पोछैए/ पोछए/ (अर्थ परिवर्तन) पोछए/ पोछै ओ लोकनि ( हटा कऽ, ओ मे बिकारी नै) ओइ/ ओहि ओहिले/ ओहि लेल/ ओही लऽ जएबेँ/ बैसबेँ पँचभइयाँ देखियौक/ (देखिऔक नै- तहिना अ मे ह्रस्व आ दीर्घक मात्राक प्रयोग अनुचित) जकाँ / जेकाँ तँइ/ तैँ/ होएत / हएत नञि/ नहि/ नँइ/ नइँ/ नै सौँसे/ सौंसे बड / बडी (झोराओल) गाए (गाइ नहि), मुदा गाइक दूध (गाएक दूध नै।) रहलेँ/ पहिरतैँ हमहीं/ अहीं सब - सभ सबहक - सभहक धरि - तक गप- बात बूझब - समझब बुझलौं/ समझलौं/ बुझलहुँ - समझलहुँ हमरा आर - हम सभ आकि- आ कि सकैछ/ करैछ (गद्यमे प्रयोगक आवश्यकता नै) होइन/ होनि जाइन (जानि नै, जेना देल जाइन) मुदा जानि-बूझि (अर्थ परिव्र्तन) पइठ/ जाइठ आउ/ जाउ/ आऊ/ जाऊ मे, केँ, सँ, पर (शब्दसँ सटा कऽ) तँ कऽ धऽ दऽ (शब्दसँ हटा कऽ) मुदा दूटा वा बेसी विभक्ति संग रहलापर पहिल विभक्ति टाकेँ सटाऊ। जेना ऐमे सँ । एकटा , दूटा (मुदा कए टा) बिकारीक प्रयोग शब्दक अन्तमे, बीचमे अनावश्यक रूपेँ नै। आकारान्त आ अन्तमे अ क बाद बिकारीक प्रयोग नै (जेना दिअ , आ/ दिय’ , आ’, आ नै ) अपोस्ट्रोफीक प्रयोग बिकारीक बदलामे करब अनुचित आ मात्र फॉन्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक)- ओना बिकारीक संस्कृत रूप ऽ अवग्रह कहल जाइत अछि आ वर्तनी आ उच्चारण दुनू ठाम एकर लोप रहैत अछि/ रहि सकैत अछि (उच्चारणमे लोप रहिते अछि)। मुदा अपोस्ट्रोफी सेहो अंग्रेजीमे पसेसिव केसमे होइत अछि आ फ्रेंचमे शब्दमे जतए एकर प्रयोग होइत अछि जेना raison d’etre एतए सेहो एकर उच्चारण रैजौन डेटर होइत अछि, माने अपोस्ट्रॉफी अवकाश नै दैत अछि वरन जोडैत अछि, से एकर प्रयोग बिकारीक बदला देनाइ तकनीकी रूपेँ सेहो अनुचित)। अइमे, एहिमे/ ऐमे जइमे, जाहिमे एखन/ अखन/ अइखन केँ (के नहि) मे (अनुस्वार रहित) भऽ मे दऽ तँ (तऽ, त नै) सँ ( सऽ स नै) गाछ तर गाछ लग साँझ खन जो (जो go, करै जो do) तै/तइ जेना- तै दुआरे/ तइमे/ तइले जै/जइ जेना- जै कारण/ जइसँ/ जइले ऐ/अइ जेना- ऐ कारण/ ऐसँ/ अइले/ मुदा एकर एकटा खास प्रयोग- लालति‍ कतेक दि‍नसँ कहैत रहैत अइ लै/लइ जेना लैसँ/ लइले/ लै दुआरे लहँ/ लौं गेलौं/ लेलौं/ लेलँह/ गेलहुँ/ लेलहुँ/ लेलँ जइ/ जाहि‍/ जै जहि‍ठाम/ जाहि‍ठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि‍/ अहि‍/ अइ (वाक्यक अंतमे ग्राह्य) / ऐ अइछ/ अछि‍/ ऐछ तइ/ तहि‍/ तै/ ताहि‍ ओहि‍/ ओइ सीखि‍/ सीख जीवि‍/ जीवी/ जीब भलेहीं/ भलहि‍ं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि‍/ नै/ नइ गइ/ गै छनि‍/ छन्‍हि‍  ... समए शब्‍दक संग जखन कोनो वि‍भक्‍ति‍ जुटै छै तखन समै जना समैपर इत्‍यादि‍। असगरमे हृदए आ वि‍भक्‍ति‍ जुटने हृदे जना हृदेसँ, हृदेमे इत्‍यादि‍। जइ/ जाहि‍/ जै जहि‍ठाम/ जाहि‍ठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि‍/ अहि‍/ अइ/ ऐ अइछ/ अछि‍/ ऐछ तइ/ तहि‍/ तै/ ताहि‍ ओहि‍/ ओइ सीखि‍/ सीख जीवि‍/ जीवी/ जीब भले/ भलेहीं/ भलहि‍ं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि‍/ नै/ नइ गइ/ गै छनि‍/ छन्‍हि‍ चुकल अछि/ गेल गछि २.२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम नीचाँक सूचीमे देल विकल्पमेसँ लैंगुएज एडीटर द्वारा कोन रूप चुनल जेबाक चाही: बोल्ड कएल रूप ग्राह्य: १.होयबला/ होबयबला/ होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला/ होयबाक/होबएबला /होएबाक २. आ’/आऽ आ ३. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ल’/लऽ/लय/लए ४. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए गेल ५. कर’ गेलाह/करऽ गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह ६. लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’/ ७. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करैबला/क’र’ बला / करैवाली ८. बला वला (पुरूष), वाली (स्‍त्री) ९ . आङ्ल आंग्ल १०. प्रायः प्रायह ११. दुःख दुख १ २. चलि गेल चल गेल/चैल गेल १३. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन १४. देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह १५. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि १६. चलैत/दैत चलति/दैति १७. एखनो अखनो १८. बढ़नि‍ बढइन बढन्हि १९. ओ’/ओऽ(सर्वनाम) ओ २० . ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ २१. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ २२. जे जे’/जेऽ २३. ना-नुकुर ना-नुकर २४. केलन्हि/केलनि‍/कयलन्हि २५. तखनतँ/ तखन तँ २६. जा रहल/जाय रहल/जाए रहल २७. निकलय/निकलए लागल/ लगल बहराय/ बहराए लागल/ लगल निकल’/बहरै लागल २८. ओतय/ जतय जत’/ ओत’/ जतए/ ओतए २९. की फूरल जे कि फूरल जे ३०. जे जे’/जेऽ ३१. कूदि / यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद/ यादि (मोन) ३२. इहो/ ओहो ३३. हँसए/ हँसय हँसऽ ३४. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/ नौ वा दस ३५. सासु-ससुर सास-ससुर ३६. छह/ सात छ/छः/सात ३७. की  की’/ कीऽ (दीर्घीकारान्तमे ऽ वर्जित) ३८. जबाब जवाब ३९. करएताह/ करेताह करयताह ४०. दलान दिशि दलान दिश/दलान दिस ४१ . गेलाह गएलाह/गयलाह ४२. किछु आर/ किछु और/ किछ आर ४३. जाइ छल/ जाइत छल जाति छल/जैत छल ४४. पहुँचि/ भेट जाइत छल/ भेट जाइ छलए पहुँच/ भेटि‍ जाइत छल ४५. जबान (युवा)/ जवान(फौजी) ४६. लय/ लए क’/ कऽ/ लए कए / लऽ कऽ/ लऽ कए ४७. ल’/लऽ कय/ कए ४८. एखन / एखने / अखन / अखने ४९. अहींकेँ अहीँकेँ ५०. गहींर गहीँर ५१. धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए ५२. जेकाँ जेँकाँ/ जकाँ ५३. तहिना तेहिना ५४. एकर अकर ५५. बहिनउ बहनोइ ५६. बहिन बहिनि ५७. बहिन-बहिनोइ बहिन-बहनउ ५८. नहि/ नै ५९. करबा / करबाय/ करबाए ६०. तँ/ त ऽ तय/तए ६१. भैयारी मे छोट-भाए/भै/, जेठ-भाय/भाइ, ६२. गि‍नतीमे दू भाइ/भाए/भाँइ ६३. ई पोथी दू भाइक/ भाँइ/ भाए/ लेल। यावत जावत ६४. माय मै / माए मुदा माइक ममता ६५. देन्हि/ दइन दनि‍/ दएन्हि/ दयन्हि दन्हि/ दैन्हि ६६. द’/ दऽ/ दए ६७. ओ (संयोजक) ओऽ (सर्वनाम) ६८. तका कए तकाय तकाए ६९. पैरे (on foot) पएरे  कएक/ कैक ७०. ताहुमे/ ताहूमे ७१. पुत्रीक ७२. बजा कय/ कए / कऽ ७३. बननाय/बननाइ ७४. कोला ७५. दिनुका दिनका ७६. ततहिसँ ७७. गरबओलन्हि/ गरबौलनि‍/ गरबेलन्हि/ गरबेलनि‍ ७८. बालु बालू ७९. चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध) ८०. जे जे’ ८१ . से/ के से’/के’ ८२. एखुनका अखनुका ८३. भुमिहार भूमिहार ८४. सुग्गर / सुगरक/ सूगर ८५. झठहाक झटहाक ८६. छूबि ८७. करइयो/ओ करैयो ने देलक /करियौ-करइयौ ८८. पुबारि पुबाइ ८९. झगड़ा-झाँटी झगड़ा-झाँटि ९०. पएरे-पएरे पैरे-पैरे ९१. खेलएबाक ९२. खेलेबाक ९३. लगा ९४. होए- हो – होअए ९५. बुझल बूझल ९६. बूझल (संबोधन अर्थमे) ९७. यैह यएह / इएह/ सैह/ सएह ९८. तातिल ९९. अयनाय- अयनाइ/ अएनाइ/ एनाइ १००. निन्न- निन्द १०१. बिनु बिन १०२. जाए जाइ १०३. जाइ (in different sense)-last word of sentence १०४. छत पर आबि जाइ १०५. ने १०६. खेलाए (play) –खेलाइ १०७. शिकाइत- शिकायत १०८. ढप- ढ़प १०९ . पढ़- पढ ११०. कनिए/ कनिये कनिञे १११. राकस- राकश ११२. होए/ होय होइ ११३. अउरदा- औरदा ११४. बुझेलन्हि (different meaning- got understand) ११५. बुझएलन्हि/बुझेलनि‍/ बुझयलन्हि (understood himself) ११६. चलि- चल/ चलि‍ गेल ११७. खधाइ- खधाय ११८. मोन पाड़लखिन्ह/ मोन पाड़लखि‍न/ मोन पारलखिन्ह ११९. कैक- कएक- कइएक १२०. लग ल’ग १२१. जरेनाइ १२२. जरौनाइ जरओनाइ- जरएनाइ/ जरेनाइ १२३. होइत १२४. गरबेलन्हि/ गरबेलनि‍ गरबौलन्हि/ गरबौलनि‍ १२५. चिखैत- (to test)चिखइत १२६. करइयो (willing to do) करैयो १२७. जेकरा- जकरा १२८. तकरा- तेकरा १२९. बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे १३०. करबयलहुँ/ करबएलहुँ/ करबेलहुँ करबेलौं १३१. हारिक (उच्चारण हाइरक) १३२. ओजन वजन आफसोच/ अफसोस कागत/ कागच/ कागज १३३. आधे भाग/ आध-भागे १३४. पिचा / पिचाय/पिचाए १३५. नञ/ ने १३६. बच्चा नञ (ने) पिचा जाय १३७. तखन ने (नञ) कहैत अछि। कहै/ सुनै/ देखै छल मुदा कहैत-कहैत/ सुनैत-सुनैत/ देखैत-देखैत १३८. कतेक गोटे/ कताक गोटे १३९. कमाइ-धमाइ/ कमाई- धमाई १४० . लग ल’ग १४१. खेलाइ (for playing) १४२. छथिन्ह/ छथिन १४३. होइत होइ १४४. क्यो कियो / केओ १४५. केश (hair) १४६. केस (court-case) १४७ . बननाइ/ बननाय/ बननाए १४८. जरेनाइ १४९. कुरसी कुर्सी १५०. चरचा चर्चा १५१. कर्म करम १५२. डुबाबए/ डुबाबै/ डुमाबै डुमाबय/ डुमाबए १५३. एखुनका/ अखुनका १५४. लए/ लिअए (वाक्यक अंतिम शब्द)- लऽ १५५. कएलक/ केलक १५६. गरमी गर्मी १५७ . वरदी वर्दी १५८. सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ १५९. एनाइ-गेनाइ १६०. तेना ने घेरलन्हि/ तेना ने घेरलनि‍ १६१. नञि / नै १६२. डरो ड’रो १६३. कतहु/ कतौ कहीं १६४. उमरिगर-उमेरगर उमरगर १६५. भरिगर १६६. धोल/धोअल धोएल १६७. गप/गप्प १६८. के के’ १६९. दरबज्जा/ दरबजा १७०. ठाम १७१. धरि तक १७२. घूरि लौटि १७३. थोरबेक १७४. बड्ड १७५. तोँ/ तूँ १७६. तोँहि( पद्यमे ग्राह्य) १७७. तोँही / तोँहि १७८. करबाइए करबाइये १७९. एकेटा १८०. करितथि /करतथि १८१. पहुँचि/ पहुँच १८२. राखलन्हि रखलन्हि/ रखलनि‍ १८३. लगलन्हि/ लगलनि‍ लागलन्हि १८४. सुनि (उच्चारण सुइन) १८५. अछि (उच्चारण अइछ) १८६. एलथि गेलथि १८७. बितओने/ बि‍तौने/ बितेने १८८. करबओलन्हि/ करबौलनि‍/ करेलखिन्ह/ करेलखि‍न १८९. करएलन्हि/ करेलनि‍ १९०. आकि/ कि १९१. पहुँचि/ पहुँच १९२. बत्ती जराय/ जराए जरा (आगि लगा) १९३. से से’ १९४. हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए) १९५. फेल फैल १९६. फइल(spacious) फैल १९७. होयतन्हि/ होएतन्हि/ होएतनि‍/हेतनि‍/ हेतन्हि १९८. हाथ मटिआएब/ हाथ मटियाबय/हाथ मटियाएब १९९. फेका फेंका २००. देखाए देखा २०१. देखाबए २०२. सत्तरि सत्तर २०३. साहेब साहब २०४.गेलैन्ह/ गेलन्हि/ गेलनि‍ २०५. हेबाक/ होएबाक २०६.केलो/ कएलहुँ/केलौं/ केलुँ २०७. किछु न किछु/ किछु ने किछु २०८.घुमेलहुँ/ घुमओलहुँ/ घुमेलौं २०९. एलाक/ अएलाक २१०. अः/ अह २११.लय/ लए (अर्थ-परिवर्त्तन) २१२.कनीक/ कनेक २१३.सबहक/ सभक २१४.मिलाऽ/ मिला २१५.कऽ/ क २१६.जाऽ/ जा २१७.आऽ/ आ २१८.भऽ /भ’ (’ फॉन्टक कमीक द्योतक) २१९.निअम/ नियम २२० .हेक्टेअर/ हेक्टेयर २२१.पहिल अक्षर ढ/ बादक/ बीचक ढ़ २२२.तहिं/तहिँ/ तञि/ तैं २२३.कहिं/ कहीं २२४.तँइ/ तैं / तइँ २२५.नँइ/ नइँ/  नञि/ नहि/नै २२६.है/ हए / एलीहेँ/ २२७.छञि/ छै/ छैक /छइ २२८.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २२९.आ (come)/ आऽ(conjunction) २३०. आ (conjunction)/ आऽ(come) २३१.कुनो/ कोनो, कोना/केना २३२.गेलैन्ह-गेलन्हि-गेलनि‍ २३३.हेबाक- होएबाक २३४.केलौँ- कएलौँ-कएलहुँ/केलौं २३५.किछु न किछ- किछु ने किछु २३६.केहेन- केहन २३७.आऽ (come)-आ (conjunction-and)/आ। आब'-आब' /आबह-आबह २३८. हएत-हैत २३९.घुमेलहुँ-घुमएलहुँ- घुमेलाें २४०.एलाक- अएलाक २४१.होनि- होइन/ होन्हि/ २४२.ओ-राम ओ श्यामक बीच(conjunction), ओऽ कहलक (he said)/ओ २४३.की हए/ कोसी अएली हए/ की है। की हइ २४४.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २४५ .शामिल/ सामेल २४६.तैँ / तँए/ तञि/ तहिं २४७.जौं / ज्योँ/ जँ/ २४८.सभ/ सब २४९.सभक/ सबहक २५०.कहिं/ कहीं २५१.कुनो/ कोनो/ कोनहुँ/ २५२.फारकती भऽ गेल/ भए गेल/ भय गेल २५३.कोना/ केना/ कन्‍ना/कना २५४.अः/ अह २५५.जनै/ जनञ २५६.गेलनि‍/ गेलाह (अर्थ परिवर्तन) २५७.केलन्हि/ कएलन्हि/ केलनि‍/ २५८.लय/ लए/ लएह (अर्थ परिवर्तन) २५९.कनीक/ कनेक/कनी-मनी २६०.पठेलन्हि‍ पठेलनि‍/ पठेलइन/ पपठओलन्हि/ पठबौलनि‍/ २६१.निअम/ नियम २६२.हेक्टेअर/ हेक्टेयर २६३.पहिल अक्षर रहने ढ/ बीचमे रहने ढ २६४.आकारान्तमे बिकारीक प्रयोग उचित नै/ अपोस्ट्रोफीक प्रयोग फान्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक ओकर बदला अवग्रह (बिकारी) क प्रयोग उचित २६५.केर (पद्यमे ग्राह्य) / -क/ कऽ/ के २६६.छैन्हि- छन्हि २६७.लगैए/ लगैये २६८.होएत/ हएत २६९.जाएत/ जएत/ २७०.आएत/ अएत/ आओत २७१ .खाएत/ खएत/ खैत २७२.पिअएबाक/ पिएबाक/पि‍येबाक २७३.शुरु/ शुरुह २७४.शुरुहे/ शुरुए २७५.अएताह/अओताह/ एताह/ औताह २७६.जाहि/ जाइ/ जइ/ जै/ २७७.जाइत/ जैतए/ जइतए २७८.आएल/ अएल २७९.कैक/ कएक २८०.आयल/ अएल/ आएल २८१. जाए/ जअए/ जए (लालति‍ जाए लगलीह।) २८२. नुकएल/ नुकाएल २८३. कठुआएल/ कठुअएल २८४. ताहि/ तै/ तइ २८५. गायब/ गाएब/ गएब २८६. सकै/ सकए/ सकय २८७.सेरा/सरा/ सराए (भात सरा गेल) २८८.कहैत रही/देखैत रही/ कहैत छलौं/ कहै छलौं- अहिना चलैत/ पढैत (पढै-पढैत अर्थ कखनो काल परिवर्तित) - आर बुझै/ बुझैत (बुझै/ बुझै छी, मुदा बुझैत-बुझैत)/ सकैत/ सकै। करैत/ करै। दै/ दैत। छैक/ छै। बचलै/ बचलैक। रखबा/ रखबाक । बिनु/ बिन। रातिक/ रातुक बुझै आ बुझैत केर अपन-अपन जगहपर प्रयोग समीचीन अछि‍। बुझैत-बुझैत आब बुझलि‍ऐ। हमहूँ बुझै छी। २८९. दुआरे/ द्वारे २९०.भेटि/ भेट/ भेँट २९१. खन/ खीन/  खुना (भोर खन/ भोर खीन) २९२.तक/ धरि २९३.गऽ/ गै (meaning different-जनबै गऽ) २९४.सऽ/ सँ (मुदा दऽ, लऽ) २९५.त्त्व,(तीन अक्षरक मेल बदला पुनरुक्तिक एक आ एकटा दोसरक उपयोग) आदिक बदला त्व आदि। महत्त्व/ महत्व/ कर्ता/ कर्त्ता आदिमे त्त संयुक्तक कोनो आवश्यकता मैथिलीमे नै अछि। वक्तव्य २९६.बेसी/ बेशी २९७.बाला/वाला बला/ वला (रहैबला) २९८ .वाली/ (बदलैवाली) २९९.वार्त्ता/ वार्ता ३००. अन्तर्राष्ट्रिय/ अन्तर्राष्ट्रीय ३०१. लेमए/ लेबए ३०२.लमछुरका, नमछुरका ३०२.लागै/ लगै ( भेटैत/ भेटै) ३०३.लागल/ लगल ३०४.हबा/ हवा ३०५.राखलक/ रखलक ३०६.आ (come)/ आ (and) ३०७. पश्चाताप/ पश्चात्ताप ३०८. ऽ केर व्यवहार शब्दक अन्तमे मात्र, यथासंभव बीचमे नै। ३०९.कहैत/ कहै ३१०. रहए (छल)/ रहै (छलै) (meaning different) ३११.तागति/ ताकति ३१२.खराप/ खराब ३१३.बोइन/ बोनि/ बोइनि ३१४.जाठि/ जाइठ ३१५.कागज/ कागच/ कागत ३१६.गिरै (meaning different- swallow)/ गिरए (खसए) ३१७.राष्ट्रिय/ राष्ट्रीय DATE-LIST (year- 2013-14) (१४२१ फसली साल) Marriage Days: Nov.2013- 18, 20, 24, 25, 28, 29 Dec.2013- 1, 4, 6, 8, 12, 13 January 2014- 19, 20, 22, 23, 24, 26, 31. Feb.2014- 3, 5, 6, 9, 10, 17, 19, 24, 26, 27. March 2014- 2, 3, 5, 7, 9. April 2014- 16, 17, 18, 20, 21, 23, 24. May 2014- 1, 2, 8, 9, 11, 12, 18, 19, 21, 25, 26, 28, 29, 30. June 2014- 4, 5, 8, 9, 13, 18, 22, 25. July 2014- 2, 3, 4, 6, 7. Upanayana Days: February 2014- 2, 4, 9, 10. March 2014- 3, 5, 11, 12. April 2014- 4, 9, 10. June 2014- 2, 8, 9. Dviragaman Din: November 2013- 18, 21, 22. December 2013- 4, 6, 8, 9, 12, 13. February 2014- 16, 17, 19, 20. March 2014- 2, 3, 5, 9, 10, 12. April 2014- 16, 17, 18, 20. May 2014- 1, 2, 9, 11, 12. Mundan Din: November 2013- 20, 22. December 2013- 9, 12, 13. January 2014- 16, 17. February 2014- 6, 10, 19, 20. March 2014- 5, 12. April 2014- 16. May 2014- 12, 30. June 2014- 2, 9, 30. FESTIVALS OF MITHILA (2013-14) Mauna Panchami-27 July Madhushravani- 9 August Nag Panchami- 11 August Raksha Bandhan- 21 Aug Krishnastami- 28 August Kushi Amavasya / Somvari Vrat- 5 September Hartalika Teej- 8 September ChauthChandra-8 September Vishwakarma Pooja- 17 September Anant Caturdashi- 18 Sep Pitri Paksha begins- 20 Sep Jimootavahan Vrata/ Jitia-27 Sep Matri Navami-28 Sep Kalashsthapan- 5 October Belnauti- 10 October Patrika Pravesh- 11 October Mahastami- 12 October Maha Navami - 13 October Vijaya Dashami- 14 October Kojagara- 18 Oct Dhanteras- 1 November Diyabati, shyama pooja-3 November Annakoota/ Govardhana Pooja-4 November Bhratridwitiya/ Chitragupta Pooja- 5 November Chhathi -8 November Sama Poojaarambh- 9 November Devotthan Ekadashi- 13 November ravivratarambh- 17 November Navanna parvan- 20 November KartikPoornima- Sama Visarjan- 2 December Vivaha Panchmi- 7 December Makara/ Teela Sankranti-14 Jan Naraknivaran chaturdashi- 29 January Basant Panchami/ Saraswati Pooja- 4 February Achla Saptmi- 6 February Mahashivaratri-27 February Holikadahan-Fagua-16 March Holi- 17 March Saptadora- 17 March Varuni Trayodashi-28 March Jurishital-15 April Ram Navami- 8 April Akshaya Tritiya-2 May Janaki Navami- 8 May Ravi Brat Ant- 11 May Vat Savitri-barasait- 28 May Ganga Dashhara-8 June Harivasar Vrata- 9 July Shree Guru Poornima-12 Jul VIDEHA ARCHIVE १.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक

विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक  http://sites.google.com/a/videha.com/videha/ https://sites.google.com/a/videha.com/videha-archive-part-i/ https://sites.google.com/a/videha.com/videha-archive-part-ii/ २.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download http://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi ३.मैथिली ऑडियो संकलन Maithili Audio Downloads http://sites.google.com/a/videha.com/videha-audio ४.मैथिली वीडियोक संकलन Maithili Videos http://sites.google.com/a/videha.com/videha-video ५.मिथिला चित्रकला/ आधुनिक चित्रकला आ चित्र Mithila Painting/ Modern Art and Photos http://sites.google.com/a/videha.com/videha-paintings-photos/ "विदेह"क एहि सभ सहयोगी लिंकपर सेहो एक बेर जाउ। ६.विदेह मैथिली क्विज  :  http://videhaquiz.blogspot.com/ ७.विदेह मैथिली जालवृत्त एग्रीगेटर : http://videha-aggregator.blogspot.com/ ८.विदेह मैथिली साहित्य अंग्रेजीमे अनूदित http://madhubani-art.blogspot.com/ ९.विदेहक पूर्व-रूप "भालसरिक गाछ"  : http://gajendrathakur.blogspot.com/ १०.विदेह इंडेक्स  : http://videha123.blogspot.com/ ११.विदेह फाइल : http://videha123.wordpress.com/ १२. विदेह: सदेह : पहिल तिरहुता (मिथिला़क्षर) जालवृत्त (ब्लॉग) http://videha-sadeha.blogspot.com/ १३. विदेह:ब्रेल: मैथिली ब्रेलमे: पहिल बेर विदेह द्वारा http://videha-braille.blogspot.com/ १४.VIDEHA IST MAITHILI  FORTNIGHTLY EJOURNAL ARCHIVE http://videha-archive.blogspot.com/ १५. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मैथिली पोथीक आर्काइव http://videha-pothi.blogspot.com/ १६. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ऑडियो आर्काइव http://videha-audio.blogspot.com/ १७. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका वीडियो आर्काइव http://videha-video.blogspot.com/ १८. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मिथिला चित्रकला, आधुनिक कला आ चित्रकला http://videha-paintings-photos.blogspot.com/ १९. मैथिल आर मिथिला (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त) http://maithilaurmithila.blogspot.com/ २०.श्रुति प्रकाशन http://www.shruti-publication.com/ २१.http://groups.google.com/group/videha २२.http://groups.yahoo.com/group/VIDEHA/ २३.गजेन्द्र ठाकुर इ‍डेक्स http://gajendrathakur123.blogspot.com २४. नेना भुटका http://mangan-khabas.blogspot.com/ २५.विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट http://videha123radio.wordpress.com/ २६.Videha Radio २७. Join official Videha facebook group. २८. विदेह मैथिली नाट्य उत्सव http://maithili-drama.blogspot.com/ २९.समदिया http://esamaad.blogspot.com/ ३०. मैथिली फिल्म्स http://maithilifilms.blogspot.com/ ३१.अनचिन्हार आखर http://anchinharakharkolkata.blogspot.com/ ३२. मैथिली हाइकू http://maithili-haiku.blogspot.com/ ३३. मानक मैथिली http://manak-maithili.blogspot.com/ ३४. विहनि कथा http://vihanikatha.blogspot.in/ ३५. मैथिली कविता http://maithili-kavita.blogspot.in/ ३६. मैथिली कथा http://maithili-katha.blogspot.in/ ३७.मैथिली समालोचना http://maithili-samalochna.blogspot.in/ महत्त्वपूर्ण सूचना: The Maithili pdf books are AVAILABLE FOR free PDF DOWNLOAD AT

https://sites.google.com/a/videha.com/videha/ http://videha123.wordpress.com/   http://videha123.wordpress.com/about/ विदेह:सदेह:१: २: ३: ४:५:६:७:८:९:१० "विदेह"क प्रिंट संस्करण: विदेह-ई-पत्रिका (http://www.videha.co.in/) क चुनल रचना सम्मिलित। सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Details for purchase available at publishers's (print-version) site http://www.shruti-publication.com  or you may write to shruti.publication@shruti-publication.com विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)२००४-१३. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतए लेखकक नाम नहि अछि ततए संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: शिव कुमार झा, राम वि‍लास साहु आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। भाषा-सम्पादन: नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी आ रश्मि रेखा सिन्हा। सम्पादक-शोध-अन्वेषण: डा. जया वर्मा आ डा. राजीव कुमार वर्मा। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल आ प्रियंका झा। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। ’विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका अछि आ ऐमे मैथिली, संस्कृत आ अंग्रेजीमे मिथिला आ मैथिलीसँ संबंधित रचना प्रकाशित कएल जाइत अछि। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-13 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.com पर संपर्क करू। एहि साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल। सिद्धिरस्तु 1 वि दे ह विदेह Videha বিদেহ  www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ‘विदेह'१४४ म अंक १५ दिसम्बर २०१३ (वर्ष ६ मास ७२ अंक १४४) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA