ISSN 2229-547X VIDEHA ‘विदेह'१४५ म अंक ०१ जनवरी २०१४ (वर्ष ७ मास ७३ अंक १४५) ऐ अंकमे अछि:- क्षणप्रभा शिव कुमार झा “टिल्लू” श्रुति प्रकाशन दिल्ली अपन छोटका कक्का स्व. नवलकान्त झाक चरण रजमे सादर समरपित...। आमुख “क्षणप्रभा”क अर्थ होइछ बिजरी जेकरा प्रबुद्ध जन तड़ित कहैत छथि। हम कोनो नैसर्गिक कवि नै, क्षणिक भावना कविताक रूपेँ अभिव्यक्त भेल जेकर प्रासंगिकताक िनर्णए पाठकगणपर छन्हि। हमर कहब मात्र ईएह जेे हमर ई पहिलुक प्रयास छी ऐमे काव्य लक्षणा ओ व्यंहजनाक अनुपालन भेल वा नै ऐ विषयमे हम किछु नै कहि सकै छी, मात्र ईएह कहबाक लेल नीति संगत हएत जे जइ भाषाकेँ बाल कालहिंसँ िहयामे लगा कऽ रखलौं ओइ भाषामे अपन किछु अभिव्यक्ति पाठकगण लग परसि रहल छी। हमर जनम मातृक मालीपुर मोड़तरमे भेल, हाशमीजी ओइ गामक बगलमे शिक्षक छला, मालीयेपुर गाममे रहै छला, हमर बाबूजी स्व. कालीकान्त झा ‘बूच’सँ साहित्य साधनाक क्रममे बड्ड अन्तरंगता भऽ गेल छेलनि, पारिवारिक सम्बन्ध जकाँ। हमर बाल्यकालक उपनाम "टिल्लू" हिनके राखल छियनि, जखनि हम नेना छेलौं (४-५ बर्खक) तँ ओ हमरा कहै छला- "टिल्लू मियाँ राही, पेटमे कराही, आ दौगऽ हौ सिपाही"। माए चन्द्र कला देवी सेहो मैथिलीमे किछु पद्य लिखने छेली। बालकाल मातृकमे बितल, तेकर पछाति पैतृक गाम उदयनाचार्यक भूमि करियनक माटि-पानिमे रमि आगाँ बढ़ैत गेलौं। पिताक कवित्वक कारणेँ महाकवि आरसी, चन्द्रभानु सिंह, प्रवासी, प्रो. नरेश कुमार विकल, प्रो. विद्यापति झा, प्रो. राम कृपाल चौधरी राकेशसँ परिचए भेल। तेकर परिणाम छी ई छोट-छीन कृति। धैनवादक पात्र छथि श्रुति प्रकाशनक संग-संग श्री गजेन्द्र ठाकुर आ उमेश मण्डलजी जिनकर सानिध्यमे ई झुझुआन रचना संकलन मैथिलीक पटल सोझहा आएल। संग-संग डॉ. शेफालिका वर्मा, श्री जगदीश प्रसाद मण्डल, श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरी सन प्रवीण साहित्यकार सेहो धैनवादक पात्र छथि जनिक उत्साहवर्द्धनक कारण ई पोथी अपनेक हाथमे विचार करबाक लेल उपस्थित अछि। सादर -शिव कुमार झा “टिल्लू” ऋतुराजमे विरहिनी पिया केना कऽ बिततै फागुन मास अपार औ, जीवन भेल पहाड़ औ ना......। कोइली कुहकै ठाढ़ि पात होइत मनमे अघात एकसरि डूमि रहल छी, अहीं बिनु हम मझधार औ जीवन भेल पहाड़ औ ना......। भ्रमरक गुंजन लागए तीत, केहेन निष्ठुर भेलौं मीत केना कऽ सूखि सकत ई फूटल अश्रुधार औ, जीवन भेल पहाड़ औ ना......। सखी सभ सदिखन अछि कवदाबए, बिछुरन रोदन लऽ कऽ आबए बिहुँसल यौवन पसरल मेघ आ अभिसार औ, जीवन भेल पहाड़ औ ना......। देखिते अबीर गुलालक रंग विरह बनौलक कलुष उमंग कहू केना उठत ई मृत शय्याक कहार औ, जीवन भेल पहाड़ औ ना......। कंतक आवाहन आजु मुदित मन बालारूण केर-करू मंगल गुणगान अय। जड़ उपवनमे सुमन फुलाैल यौवन महमह भान अय। श्रैंगारिक वेलामे सपनहिं प्रियतम छूलनि कपोल हमर। अर्द्ध निन्नमे चिहुँकल जहिना, सासु मरोड़लि लोल हमर। अभिनव औता आजु सुनल दुरभाषमे अपने कान अय। जड़......।
झट उठि देखल धर्म मातृ केर, आनन परिमल पुष्प बनल। पूत दर्शनक आशमे डुमलि, मंजुल मुसकी पनकि रहल, चलू रम्भा भंडार चढ़ाबू हेता भुखल अहँक पराण अय। जड़......।
असमंजसमे दुहु भैरवी, मातृक लोचन सुधा भरल। बामा हम तँ नेहक लुत्ती, तनय अनल प्रेम धधकि रहल। जननी हृदए छोहसँ आकुल स्वार्थहि हमर जहाँन अय। जड़......।
चरण छूबि नाथक माता केर, कएलौं चटपट स्नान हम। कुमकुम केसर जूही चमेली, कुलदेवी गमगम अनुपम। देवकी नन्दन बंसी बजाबथु बोरि-बोरि द्राक्षा तान अय जड़......।
संभवि अहाँ ननदि नै अनुजा, बनि कम कएलौं ताप हमर। नै तँ फँसि विरहक संतापे, पीब लेतौं कखनौं जहर। आनब उपहारेमे अहीं लेल विज्ञ, धान्यवर चान अय जड़......। मिथिला-पुत्र मिथिलाक बेटीकेँ सहए पड़लनि झमेलिया बिआहक दंश सतभैंया पोखरिसँ पंचवटी धरि िकसुन तकलौं केतौ ने भेटल सभ राकश सभ कंश नअ मास नै पैंसठि बरख धरि मयना उठबैत रहली प्रसव वेदनाक टीस तखनि जा कऽ भेल जीवन संघर्षक जीत दिवसेमे तरेगन बहकल विदेहक आँगन जनमल जगदीश मौलाइल गाछक फूल गमकल तापसमे भैंटक लावा चमकल पूर्वाग्रहक चपेटिमे जाति-पजातिक गेँठमे ओझरा कऽ मैथिली भऽ गेल छलि िनर्मूल बेदम्म गजेनक आश जागल सुखैत गुल्लरिमे फूल लागल रमकल जिनगीक जीत वैयक्तिक नै- पसिझैत गामक जिनगी मात्र मेंहथ आ बेरमा नै मौरंगसँ सिमरिया धरि चमकि उठल इंद्रधनुषी अकास केकरो नै छल बिसवास द्विजक मुरदैयाक संग-संग अछोपक सोती बहत...? स्वाभाविक छल उपहास हएब मुदा! तिरस्कारक क्षोभ नै जीवन-मरण तँ प्रकृतिस्थ लीला तखनि केकरोसँ केहेन द्वेष? अवतारवादक सेहो होइत पराभव कियो पनही देत की नै कोनो तृष्णा नै नै उत्थानक आश पतनसँ घृणा नै अकाल भेल तँ बिसाँढ़ चिबा कऽ राित-दिन समरसता दीप जड़बैत रहल अपन गीतांजलि गाबि कम्प्रोमाइज करैत रहल कोनो कलुष कम्प्रोमाइज नै गत्र-गत्रमे समन्वयवाद कलमे टासँ नै जीवन दर्शनमे सेहो चलि गेला भोगेन्द्र नै तँ उत्तर भेटि जइतए यात्री, आरसी आ फजलुरसँ सेहो कोनो तुलना नै आन इचना-पोठीक कोन गप्प लोक चानी नै टलहा कहए विज्ञ नै बुड़िबक बूझए संस्कार नै छोड़ब खाँटी किसान मजदूरक रूप ब्रह्म बेलामे कलम खियाबथि सरल धबल बेरमाक भूप एहेन साम्यवादी- फाँसीपर चढ़ि जाएब मुदा बटोहीकेँ अधला बाट नै देखाएब केकरो नै सुनलक संततिक कोन कथा अर्द्धांगिनी सेहो सहैत रहली ऐ लेलिनक सेहो देल बेथा ने केकरो तर करब ने केकरोसँ ऊपर जाएब सबहक शोणित एक्कहि रंग केलक विरोध बेवस्था बेढंग मरल गरीबक बाप मुदा की पुरहित-पात्रकेँ भरिगर चाही धूर-धूर बास बिका गेल काहि काटि लूटबैत बाहबाही लेस मात्र नै दया अग्रजकेँ सिहरि-सिहरि अश्रु-उच्छवास कहियो नै अगिला पएर पुजाबथि केतए राम धर भूत पिशाच? सभा बजौलनि धानुक टोलक अपनहि जातिमे पंडित देखू भाँज पुराएब जटिल कर्मकाण्डक माइक समान नै धरती बेचू मात्र बाटपर आनै खातिर करै छथि प्रतिक्षण सामन्त विरोध सम्यक समाज मिथिलेमे बनतै जगा रहला समभाव बोध अक्षोपसँ नै गंग छुआबथि तखनि केना कऽ हाड़ छुआइत मन: दीपसँ हीयमे तकबै मिथिला पुत्रक स्पन्दन हएत......। सधवा-विधवाक बीचक खाधि भरबाक केलक प्रयास भादवक अन्हारमे नै धारलकनि उलबा चाउरक आश बड़की बहिन राति-दिन सुखाएल पोखरिक जाइठ पकड़ि सरिताक बाट जोहैत छेली। केना स्वयंवर हएत मकोबकी उद्विग्न छथि मिथिला पुत्र रत्नाकर डकैतकेँ भकमोड़सँ सुपथ दिस आनए लेल बेकल मुदा केकरो नै सुनत अपने बजन्ता अपने बुझन्ता पंचवटीपर ठाढ़ शंभुदासकेँ तकैत राति-दिन समताक गीतांजलि गाबैत तीन जेठ एगारहम माघ बीतल एक धाप जमीनक लेल वारंट निकसल वेचारी मनसारा बेथे बेथाएल बेरमा कानि रहल अछि पितृदोखसँ विदीर्ण भऽ गेल तीनू पुत्र कानि रहल छथि रामसखी रघुवरक सहचरि सन नाओं। सीता सन उत्ताप बरदास करए पड़तनि मिथिलाक ईश मिथिलाक ईशकेँ जनम देलनि सुरक प्रभु सेहो कोइखमे उमेश तँ सद्य: छथि मुदा! जखनि जगतक ईश र्स्वे भवन्तु सुखीन:मे लगल रहत परिवारमे अभावक भाव सोभाविक हएत ई तँ हरिहर काका भऽ गेल छथि ठीकेदार साहैब दऽ देलकनि टैगोर अन्चोक्केमे...। की ऐसँ समाजक दायित्व पूर्ण भऽ गेल नै कथमपि नै जे मिसिर जीक सिनेहकेँ हीयसँ लगा लेलक अपनाकेँ साम्यवादसँ दूर भगा देलक निरंतर सतबेधसँ बाभन-सोलकनक खादिकेँ भरि रहल ओकरा टैगाेर बना कऽ नै छँटियौ ओकर मिथिला दिस तकियौ वएह शांति निकेतन वएह ओकर विश्व भारती तखने जनम लेत दोसर मिथिला पुत्र मुदा! अखनि तँ असंभवे लगैत। (श्री जगदीश प्रसाद मण्डल जीकेँ समरपित...) अतृप्त नैन आकुल पड़ल विगलित नभ दिस तकैत, छेलौं रैनि केर निर्वांणक प्रतीक्षा करैत। केना काटब ऐ संतापी जामिनीकेँ, ओ तँ छेली हमरे कटैत। झकझोड़ि देलक अन्तर्मनकेँ नैनाक पूछल अंतिम प्रश्न- अहूँ अहिना करब की?
पददलित केलक विष रहित फनकेँ। दुहू नैन नोरसँ सरावोरि, देलनि हमर आत्माकेँ मड़ोरि। निःछल करूणामयी भऽ भाव विभोर देखए लगलौं अवलाक धधकैत ज्वार सुनैत गेलौं सुनैत गेलौं। निरूत्तर हमर बेथा क्षीण भऽ गेल- मंचसँ नेपथ्य भरिगर लागल की सोचैत छेलौं? वास्तविकता......। चाननक सेजपर पड़लि अर्धांगिनी धान्य, रजत, कांचन, भरल......। मुदा! सदिखन खसैत् वेदना केर दामिनी? छल अपूर्ण यौवन अतृप्त नैन हा! तात केना कएल वरन एक गाही वयसक सुकन्या केर कंतक वयस पचपन......। गामक चुलबुली मोनालिसा कुहरि रहलि कनक गृहमे- असहाय तातक देल विपदाकेँ भोगि रहलि जोगि रहलि। केना पार करती लछिमन रेखा- अपन विंहुसल हिलोरकेँ केतए करती प्रस्फुटित हमरासँ कएली अपन पीड़ा प्रकट पाषाणी नर कऽ देलनि जीवन विकट बूढ़ कंतक डोलि गेल आसन शंकाक अजगर तोड़ि देलक प्रीति स्तंभ कठोर आदेश देलनि अपन दाराकेँ- आजुक पश्चात्पर पुरूषसँ गप्प कथमपि नै करब नै तऽ? हम अचंभित सुन्न शिथिल कलंकित चरित्र लऽ कऽ धूरि गेलौं निःतरंग अपन पुरान पथपर काॅपि रहल दुहु पग......। कोन अपराध कएलौं हम तँ छेलौं पोछैत नोर। अतृप्त नैनसँ झहरैत नोर। कुरूक्षेत्रमे राधा नवनीत अहाँ पतवार बनू ऐ करूस सरोवर जीवनकेँ, ठिठुरल कदम्ब जमुना ठहरल सखी हँसी उड़ौल अर्पणकेँ। आक्रांतित चहुँ दिस सुमन तरू, विकल जड़ चेतन नभ धरती, जल बुन्न बनल घन घनन घटा, त्रासित राधा मन अछि परती। नवनीत......। सत् असत कर्म बीचि घूमि रहल, सभ जनितो अहाँ अनजान बनल, भेटत की जन संहारेसँ, अवला चित्कार आ नोर भरल। नवनीत......। शापित करती ओ हिन्द सती, जनिक नाथ लुप्त भू आंचलसँ, संगहि करूणित वृन्दा-मथुरा, लेब पाप सभक युद्ध माॅचत जँ, नवनीत......। खोलू रण कर्मक डोरा डोरि, डुमू पीयूष राधा-रसमे, उत्ताप प्रेम तिल सुनगि रहल नै आब ई यौवन अछि वशमे नवनीत......। मधु श्रावणी मधुप विना सुन्न उपवन रे, मधुश्रावणी आएल। कंत विनय विवश केतए रे हीय ‘आरती’ हराएल।
सुनू शिव छलिया स्वांगी बनि हमरा विरहएलौं, संग महादेव नाम दियरकेँ कलंकित कएलौं मधुप......।
हम कएल केतेक अनुग्रह रे अहूँ हमरा वचन देल, मंजुल मिलन केतए गेल रे, केतए बात कलित गेल, मधुप......।
हम अभागलि मैथिली रे, अपनै देल घात, नुपूर खनकि दुःख कातर रे, तोड़ल दामिनी गात, मधुप......।
विकल मल्हार सुनि शिव, आनन हँसीसँ उमड़ाएल, जुनि हहरू सिये, अहँक लखन रघुवर संग आओल, मधुप......। बरहमासा प्रियतम आकुल कुम्हरल दारा मन, टिहुकि उठल ना।
मूक शिशिर पुचकारथि केना? दूर द्वीप सजना। जामिनी बनल कंत बिनु विजन, तरूणी माघ मनाैल क्रन्दन, सरस वसन्त क ललित रात्रिमे- हहरै कंगना। प्रियतम......।
दादुर ठहकए तृप्ति सरोवर, अश्रुधारसँ सींचित कोबर, कीर मृदुल सुनि चैतो बीतल, विह्वल नैना। प्रियतम......।
अहँसँ सिनेहक धंधा कएलौं, पौन आस बैशाख बुड़एलौं हृदैक मीन नीर बिनु व्याकुल - सुन्न पलना। प्रियतम......।
जेठक रौदी काटि रहल छल, सूखल कानन झाँटि रहल छल, उदधि अकासे जलसँ तिरपित- लवालव अँगना। प्रियतम......।
सौन-भादो मौन मनाैल, तुहिन गात तर आश्विन आएल, कातिक-अगहन बिहुँसथि - पूस मांगै छथि ललना। प्रियतम......। कोप भवनमे कनियाँ रूसलि किए सूतलि छी बनबू ने कनेक चाय अय। मिथिला हम चललौं, टाटानगरीसँ आइ अय।
अहाँ जौं एना रहब तँ हम केना जीअब, सदिखन कनिते-कनिते बेथे जहर पीअब। एना अहाँ रूसब तँ हम कऽ लेब दोसर सगाइ अय, मिथिला......।
अहाँ केर रूप देखिते कामदेवो कानैत छथि, ‘‘मृगनयनी‘‘ केँ ओ उर्वशी मानैत छथि। बिहुँसल मादक घुघना लागै लौंगिया मिरचाइ अय, मिथिला......।
छगनलाल ज्वेलरीसँ कनक हार लाएब, आजु रैन पूनमकेँ, पार्कमे घुमाएब। हहरल मनक तृष्णा, नै बनू हरजाइ अय, मिथिला......। ऊठू प्रिये, अहाँ जल्दी नहाबू, कोप भवनसँ उठि कऽ लगमे आबू। मंदहि मुस्की मारू, हम अनलौं अछि मलाइ अय, मिथिला......। प्रेयसीक विलाप लागै बरखा इन्होर, मारै बएसक जोर, मिलनक आशामे बैसलि - छी आबू ने चकोर। बाटे तँ तकिते तकिऐ, नैन सूखि गेलै, प्रेयसीक विलापपर नै- अहँक धियान एलै। ठनका गर्जय मांचल शोर, तिरपित नृत्य मोरनी मोर। मिलनक आशामे बैसलि,- छी आबू ने चकोर। बेदर्दी जुनि बनू, मोन टूटि गेलै। पावसक शीतलता - आतप्त भेलै। लुप्त भगजोगिनी दर्शय भोर, लटकल मेघ गगन घनघोर, किएक हृदए तोड़ि रहलौं। हाँ! हम्मर मन चित चोर। लंका खुरखुर भैया सूट सियौलनि, बतही काकीक हाथ रूमाल।
अध वयसि चोकटलही भौजी, बाट पसारलि प्रेमाजाल मैथिली कुहरथि पर्णकुटीमे, सूर्पनखा बनली रानी।
नेना पेट क्षीर बिनु आकुल, मोबाइल नचाबथि पटरानी। अर्द्धांगिनी नेत्रीसँ कुपित भऽ शंखनाद केलनि मामा।
हस्त ऊक लऽ मामी खेहलथिन्ह, फूजल मामा केर पैजामा। अपन पुतोहुकेँ झोंकि अन लमे, बनि गेली गामक सरपंच। धर्माचार्य देव मंदिर केर, मुदा हृदए भरल परपंच।
केतेक घरमे सान्हि काटि, शांति समिति केर आब प्रधान। रक्षक छथि चुटकीमे बैसल, केना बाँचत अवला केर मान? विद्यालयकेँ मुँह नै देखल, धएने कुरसी शिक्षा सचिव। कुटिल तंत्र केर ईह लीलामे मारल गेलनि मूक गरीब।
मुंडी इनारमे हुरहुर जनमल, कमीशन लागत दस परसेन्ट। नौकरशाह मोटरमे घूमथि, आँखि गोगल्स काँखिमे सेन्ट।
सभ काजमे दियौ भेँट, शौच करू वा लघुशंका। रामराज्यकेँ बिसरि जाऊ, आर्यावर्त आब सद्यः लंका। राजनीतिमे अज्ञ-विज्ञ केर, नै कोनो अछि वर्ग विभेद। अपने पीबथि ताड़ी दारू, मंत्री विभाग मद्य निषेद्य।
राग वसंतक गेल जमाना सुनू ब्रितानी विकट संगीत। डंकल कुरथी पाक बनल आ अप्पन वारिक पटुआ तीत। होरी हाथ अबीर काॅरव पिचकारी, भालपर गदरल चाह उमंग। पूरन भैया होरी खेलथि, नव नौतारि सारि केर संग। कखनौं डुमकी लैत अधरमे, जुट्टीमे कखनौं हिलकोर। नील, वैंजनी लाल गुलालसँ, रंगलनि चम्पा पोरे-पोर।
‘टिल्लू’ नैनपर अचरज पसरल, देखि भ्राता केर बसन्ती वुन्न। एखनौं श्रृंगारक आह भरल मुदा - आँखि अन्हार कान छन्हि सुन्न। हम पुछलयनि केना कऽ कएलौं, मधुसँ उगडुम मधुर प्रबंध। सकल तन अछि बेकार मुदा हम, ध्राण शक्तिसँ सूॅघल गंध। भौजी लऽ बाढ़नि आ खापड़ि, झाड़ि देलनि भैया केर अंग। कुरता फाटल नैन नोरायल भूतल खसल होरी के रंग। माॅडर्न जमाना नुआ धोती मिल बरहर जनमल, आएल बरमूडा मिनी स्कर्ट। मुन्ना भैया चुनरी ओढ़ू, भौजी पहिरलनि जोलही सर्ट।
काकी मरौत काढ़ने बैसलि, काका गर धरम केर वाना। कदली कनियाँक हाँथमे वीयर, आबि गेल माॅडर्न जमाना।
भरि दिवसक गणना जौं करबै, बहुआसिनक सात बेर सतमनि। भरल साँझ स्वामी आएल छथि, अॅइठार बैसलि लऽ मुँहमे दतमनि।
अस्सी दशकमे मायसँ मम्मी फेर माॅम आब भेली मम्मा। मायक भ्राता केर नाम की राखब? मामा पिघलि बनला झामा।
अपन नेनासँ बेस पियरगर, संकर झवड़ा चायनीज कुकुर। भुटका-नाथकेँ छाड़ि घरमे टाॅमी संग गेलि अंतःपुर।
चरण स्पर्श निर्वांण लेलक आब, छुट्टो कैंचाकेँ भऽ गेल वाय। भौजी एकसरि मधुशालामे भैयासँ गेलनि मोन अघाय।
नेना पच्छिमक बोली उगलै। माँ मैथिली केना बजती दैया। बात अंगरेजिया माथ घुसल नै, मुदा करै छथि याँ! याँ! याँ
तिलकोर मखान नीक नै लागए, नै सुस्वादु मकैयक लावा। पाॅपकाॅर्न चाउमीन दलिया लेल, मोँछ पिजौने बैसलनि बाबा। ऋतुराज सोहर गाबथि कोइली बहिना, कीर मधुर ध्वनि बजबथि साज। जननी वीणा वादिनी हर्षित, अवतार लेलनि सद्यः ऋृतुराज। गर्वित उपवन मधुपक गुंजन, वर्णक पुष्पक दिव्य सोहनगर। सरिता लवलव शांत उदधि छथि, महु रसालमे उमड़ल मज्जर। माघक सातम धवल इजोरिया, भेल नवल ऋृतु नृप छठिहार। चिनुआर भरल पायस पूआसँ, कुलदेवी साजल उपहार। भगजोगिनी केर पंचम सुर सुनि, आँगन महमह मुग्ध दलान। दशो दिस मलमल गेना फूलल, सरिसब बूट भरल खरिहान। रवि संग सुषमा अछिंजल उष्मा, पात-पातपर पछबा वसात। विरहिनी बैसलि कंत आशमे वयः तापसँ उपटल गात। मातु उमा मन मुदित विभूषित, सजल नुपूर चरण चमकल। शिवरात्रिक अवाहन भेलै, नाथ कुशेश्वर छथि गमकल। संवत जड़ल आ होली आएल, अबीर गुलाबी हरिअर लाल। क्षितिज धरित्री एक बनल छथि, ढोलक डुग्गी झाॅझक ताल। छोट पैघ केर भेद मिटाएल, वृद्ध जुआन संगमे बाल। छोटकी कनियाँ ठोर रंगलि आ - बरक भरल पानसँ गाल। भैया भांग सुधामे सानल, शिथिल पड़ल छथि माँझ ओसार। रंगलौं हम भौजीक चरणकेँ, विदा बसन्त ऐ लोकसँ पार। नवतुरिया होरी बाढ़िक पसाहीमे डुमल सगरो मिथिला धाम। बागमती करेहक आंतमे, ओझराएल हम्मर गाम। भदैया संग रब्बी बुड़ल, जिरातमे फाटलि गंग। बीति गेल फागुन मुदा, ऊँच जोताँस जलमग्न। नेना टोली हेरि रहल, सम्मत लेल खर पतवार। रामू बाबा सूतल खाट पर, ऊड़ल खोपरिक चार। पौत्रक नीन जहिना फूजल, झमाड़ल कुंभकरण। झट सनि ऊठू औ बाबा देखू नभ तरेगन। राम लोचन दौड़लनि गाड़ि पढ़ैत बड़ी पोखरिक मोहारि। बनि कपीश नेना भुटका देलक खोपड़ी जाड़ि। लालिमा देखि आदित्यकेँ कदबा कएल दलान। शंभू रंगलनि गोबर थालसँ छोटका पाहुनक कान। तीन फुटिया लाला पैघ खोंचाह, हाकिमपर फेकल रंग। फूदन चिनुआरक घैलमे, मिलाैल चिन्नी भंग। भरि कठौत पायस भरल, घिवही पूआ केर संग। भौजी तन बोरल गुलालसँ, उमड़ल मातृ उमंग। चैतावर टिटही तानमे, गाबथि टलहा दल। छोट छीन गुंजन-सुमन्त, घूमथि भूत बनल। सा रा रा रा गूंजि रहल लूटकुन जीक बथान। सियाराम जय गानसँ गमगम मैथिल दलान। डाक्टर भैयाक सारपर ढ़ारल कारी मोबिल। देखि नेना गण केर होरी गहुमनो घुसि गेल विल। चैतावर आएल चैत मधुर रंग पाँचम, उपवन बुलबुल गावय ना ......। सन-सन पुरबा मलय वसात, झन-झन देह झनकाबए ना......। कुहकै कुक कोइली बबुर वन, चहकै अलि पाटलि मधुवन, फड़कै मोर मोरनि लोचन, फनकै मृगी पद फन-फन, भन-भन मन भनकावय ना। सन-सन......। भाविनी खिलायलि गहवर, वहिना मुदित हीय फरफर, सखी नेह मातलि कोहवर भौजी रेह गाबथि सोहर, क्षण-क्षण तन छनकावय ना। सन-सन......। प्रियतम बेथित ई आखर, नोरक सियाही झरझर, कोमल शय्या भेल खरखर, सुखि देह वक सन पातर कण-कण पट सिहरावय ना। सन-सन......। उपटल फागुन केर रस बून, हहरल नुपूर स्वर झुन-झुन, विकल नैन भेल अधर सुन्न अछि कोन कांतामे अवगुन? घन-घन घट सनकावय ना। सन-सन......। व्रत एकान्त लूटकुन जी केर चकचक भाल, कपोल सिनुरिया बनल रसाल। टीशन चलला लऽ घटही कार, आबि रहल थिन्ह सासु आ सार। छहछह तन मन भरल उमंग, गृह घुरलनि विधि माताक संग। झटपट शांभवि चाह बनाबू, पहिने रूहे आफजा लाबू। मम्मी छथि बड़ जोड़ पियासलि भूक्खे समस्तीपूरसँ मैसूर आयलि। जलखै सेबै दलिपूड़ी क बोर, मझिनी भुजल परोर आ इचना झोर। जुनि करू अकरहरि श्रवण जमाय, अहँक सासु तँ हमरो माय। माय हमर आडम्वरि धर्मी, सनातन पालिका संग षट्कर्मी। मतिसुन्न लक्ष्मीनाथ बजार गेलनि, फुलल परोर माँछ इचना लेलनि। देखिते भरल माँछक झोरा, फुजलनि सासु वन्न मुँह बोरा। पाहुन देलखिन घर घिनाय, केना करब हम नहए खए? काल्हि हमर छी व्रत एकान्त मछैन गृह केर सगरो प्रान्त। फेकू माँछ सटल तरकारी, ग्ंागाजलसँ धोयब आँगनवाड़ी। गैस चढ़ल अन्न नै खायब, बौआसँ अंगूर सेव मंगाएब। काल्हुक लेल चाही आमक चेरा, माटिक चूल्हि आ बाँस चंगेरा। सिंगापूरी नै चिनियाँ केरा, शुद्ध सुधा गुड़ सानल पेरा। शांभवि ई मैसूर नै गाम, केतए हम ताकू जारनि आम? विकट भेल रवि व्रत एकान्त, ऐ चक्कर हमर जीवन अशान्त। लूटकुन माथमे शोणित अटकल, भाय वहिन मुँह मुस्की फटकल। हम की करब सभ दोष अहाँकेँ, पावनि मास किएक बजौलौं माँ के? ताकए चललनि कर्नाटक केर गाम, हाँथ चूल्हि माँथ गठरी आम। सोझहे आबि खाटपर खसलनि। शांभवि जोर ठहक्का हँसलनि। सुनू प्रिये तारू सूखल अछि, जल बिनु हम्मर हीय विकल अछि। एहेन बेथा नै हँसि उड़ाबू, त्रास कंठगत नीर पियाबू। अनाचार बिहुँसल विजुकल दुष्यन्तक मन तनए गड़ल अछि थालमे। न्याय-धर्म भू हिन्द घेराएल अनाचार केर जालमे। परदारा आ परक द्रव्य दिस, अधम कुलोचन हुलकि रहल। राजकोष केर बात की कहू? श्वेत वस्त्र बीचि फुदकि रहल। जनतंत्रक आंचर वसुधापर मुस्की कौरव भालमे। न्याय ......। उदयन दर्शन आब अलौकिक, भेल विदेहक कथा विलुप्त, सभजन लागल भौतिकतामे बुद्ध अयाची पुंज शुशुप्त, खर खबाससँ मालिक धरि नाचय कैंचा केर तालमे। न्याय ......। काटर लऽ कऽ गृहस्थ धर्मकेँ, पालन कऽ रहलनि मनुसंतान। जानकी माता पातरि सजाबथि, मधुशाला पैसलनि हनुमान। गर्भक कन्या भ्रूण हत्यासँ समायलि कालक गालमे। न्याय ......। जाति, पंथ, भाषा विभेद ई, प्रजातंत्रकेँ साड़ि रहल। कुटिल राजर्षिक चक्रव्यूह, अपने अपनाकेँ जाड़ि रहल देवभूमिकेँ दियौ मुक्ति फँसि गेल दलालक चालमे। न्याय ......। अभिनव मिथिला धाम ‘‘माँ मिथिले अभिनव मिथिला धाम। अहँक कोरकेँ छोड़ि आब हम, नै जाएब दोसर ठाम। माँ मिथिले......। वौरएलौं सगरो आर्य भुवनमे, केतौ ने भेटल चैन। अकबक विकल दिवस दुःख भोगलौं, तमस कटै छल रैन। माँ मिथिले......। नवटोल नववोल देखलौं नवल चालि, भाउज भावहुक नै भान। तात पूत एक्के संग बैसल, करथि सुरारस पान। माँ मिथिले......। मैथिल दीन जनेर फँकै छथि, मुदा देव पितरक मान। छोट पैघ बीच लक्षिमन रेखा, नै केकरो अपमान। माँ मिथिले ......। उदयनसँ दर्शन सीखि बाँटब, अयाचीसँ, आत्म सम्मान। भारती मंडनसँ ब्रहम ज्ञान लेब, आरसी यात्रीसँ स्वाभिमान। माँ मिथिले ......। उर्मि धिआक त्याग देखिक, कण-कण भाव विभोर, वैदेहीक सती धर्मसँ उमड़ल, कमलामे हिलकोर। माँ मिथिले ......। गोविन्द मधुपक सुनब पराती, खोलि क दुनू कान। शिव शक्तिकेँ श्रद्धासँ पूजव, सुनबैत विद्यापति गान। माँ मिथिले......। खोरा चाउर संग भाटा अदौरी, वथुआ तिलकोर मखान। आचमनि श्वेत वलानक जलसँ, गलोठि पतैलीक पान। माँ मिथिले......। आन धामसँ रास सोहनगर, कुलदेवी क गहवर। पच्छिमक त्वरित गीतसँ रूचिगर अपन वैन सोहर। माँ मिथिले......। हे तात विलखि रहल छी अन्हर जालमे, छोड़ि कत चलि गेलौं तात। कॉपि रहल छथि सूर्यमुखी आ, कुहरथि वृद्ध कनैलक पात। टोलक सभटा नेना भुटका, आश लगौने घूमथि वथान। के देत उदयन धामक पेड़ा, के देत मिठगर मगही पान। पंडित बाबा खाट पकड़लनि, ककरा मुखसँ सुनता गान। श्यामजी अश्रु इनारमे पैसलनि, आब के कहतनि पैघ अकान। आर्या माँक दुआरि सुन्न अछि, सत्संगी सभ ओलतीमे ठाढ़। भक्ति सागरक धार विलोकित, लुप्त गगनमे अहँक कहाँर। अनसोहाँत ई दैवक लीला, केना बनौलनि मर्त्य भुवन? विज्ञानक आँगनसँ बाहर, जन्म मरण जीवन दर्शन। करती केना श्रृंगार मेनका, करतनि के रूपक वर्णन। देवराज छथि कोप भवनमे जल बिनु करब केना तर्पण? मुख मलीन कहियो नै देखलौं, सुख दुखसँ अहाँ विलग विदेह। अंतिम भीख मॅगै छी बाबू, दर्शन दियौ एक बेर सदेह। आत्म उद्बोधन अहाँ अपने पड़ल छी घोंटि धथुर कैलाश औ, टुटल हम्मर आश औ ना। धरापर अएलौं प्रदोषक दिन, मातु-पितु अहँक भक्तिमे लीन, बूझल सभ जन वम वम लेलनि हमर घर वासऔ। टुटल ......। नेन कालहिंसँ छी हर भक्त, सुखाएल करम-धरममे रक्त, शारदालीन संगमे शंकरपर विश्वास औ। टुटल ......। देखिते वितल सुधामयी बर्ख, जीवनसँ दूर भागि गेल हर्ख, जननी उठलि भूमिसँ छोड़ि मोहक पाश औ। टुटल ......। चहुँ दिस कालक भेल प्रहार, करम गति फॅसल बीच मॅझधार, उदधि मरूस्थलि भेली हीयमे पसरल त्रास औ। टुटल ......। ‘आशु’ अछि मात्र अहींसँ मोह, होईछ अपन भागपर छोह, हरू दुःख वा करू हम्मर निरस जीवनक नाश औ। टुटल ......। केना कऽ अंतिम नमन करब (कन्या भ्रूण हत्यापर एक छोट रचना)
केना कऽ अंतिम नमन करब, आँचरकेँ अहाँ कलंकित कएलौं पुत्र जन्म सेहंतित सपनामे करूणाधारिणी निर्दयी भेलौं। नै देखलौं आदित्य नै शशिक शिखा, नै नभ देखलौं नै देखलौं वसुधा नै भेटल छोह नै मृदुल क्षेम, नै मोती माणिक्य रजत हेम, पाँच मास अहँक गर्भमे रहलौं जनपरिजनक तिरस्कार सहलौं अपैत बूझि कएलौं अहाँ गर्भपात भेल अपूर्ण नेनापर वज्रपात अछि कोन ओ शक्ति मनुसुतमे जे बेटीमे नै दर्शित भेल मणिकर्णिका क शंखनाद सुनिते वृद्ध कुंवरक यौवन झट धुरि गेल दुःख एक्के बातक तातप्रिया सृष्टि देलनि संततिकेँ गरल पिआ पावन आर्यभूमिक सुनयना वैदेहीकेँ देली माटि मिला भववंधनक ई केहेन दर्शन नीर क्षीर बिनु बितल जीवन तजि गेल प्राण तँ अनल अर्पण अमिय मधुसँ पुत्र कएलनि तर्पण एक बेर हमरो जौं कहितौं अहाँ जीवनमे सुधा वोरि देतौं माँ देतौं सतरंगी परिधान पुत्रसँ वढ़ि कऽ करितौं सम्मान दिअ आशीष हमर जननी फेरि वेटी बनि नै आवी अवनी नै सूखए पुनि नव किसलय दल नै जलसँ पहिने भेटए अनल। पावस लगिते आतप अनल ज्वालसँ, पसरल सगरो हाँहाँकार तरूण-वरूणक अग्निवेशसँ जीव-अजीवमे अशंातिक ज्वार मोन विरंजित हृदए सशंकित वनल सरोवर कलुष मसान सूखल किसलयक कोमल कांति धधकि रहल नव लता वितान नष्ट करब ऐ प्रलय भयंकर प्रकट भेलनि अपने देवेश घन घन घटाक संग आगमन शीतल पावस बूनक बेस नव रंग नव धुन नव मुस्कान घुरल सृष्टिमे नवल जान पुष्प खिायलि कांचन उपवन फूरल भ्रमरकेँ मधुर गान मंातलि सरोवर कलकल सरिता नूतन नीरक खहखह धारा आएल कृषकमे दिव्य चेतना भागल वेदनाक पुरा अँधियारा पंकज प्रस्फुटित भेल सरोवर वकः काक चित शांत सोहनगर भरल घटामे मोर मजूरक नाच मधुर बड़ लागए रूचिगर गोधूलिक पवन वेगमे चहकि उठल भगजोगिनी वयः तापमे उमड़ि गेलि मिलनक वियोगमे तरूणी उन्मत्त घटा संग मधुर प्रेममे नर-नारी भऽ गेल विभोर दुई मासक ई रूचिगर पावस उमड़ाैल नव सृष्टिक जोर गीत पिया निर्मोही खनकि गेल कंगना, विपुल मृगी नैना, किएक अहाँ बनलौं औ - प्रवासी सजना।
आगि भेल शीतल उधिया रहल पानि, सुवासित जीवनमे उफनि गेल ग्लानि, सुन्न प्रेयसीक सिनेह हृदए अँगना, विपुल मृगी नैना ......।
उमड़ि रहल विरह प्रखर आतप समान, मुरूझाएल शुष्क अधर मरूघटमे प्राण, धँसल बान्ह मर्यादाक सजना, विपुल मृगी नैना ......।
क्षणहिमे जीवन अभिशापित वनल, सूखि गेल नेह पुष्प नोरसँ भरल, आब कहि ने सकव हम सजना विपुल मृगी नैना......। काका औ (बाल कविता) सिबू मरसएब बड़ मरखाह छथि छक्का छोड़ौलनि काका औ दाँत कीचि दुनू भौं सिकुड़ाबथि हाँथमे नरकटिक सटक्का औ... भूगोलक पहरि संस्कृत वचै छथि क्षणे-क्षण नोंइस लऽ हाँफी छिकै छथि पंचतंत्रपर करथि टिटम्भा विष्णुशर्मासँ नमछर खम्भा बरहर गाछ तर गदहा बना कऽ पाँछासँ मारथि धक्का औ... जखनि कोनो छन्दक अर्थ पुछै छी कहै छथि कुकुरपर लेख लिखें रौ कहू तँ केना हम एक्के पहरिमे रंग-बिरंगक बयना सीखू हाँथ मचोरि पीआठपर देलनि बज्जर सन दू मुक्का औ... मुरुखे रहब आ महिस चराएब कहियो नै ओइ इसकुल जाएब एहेन राकससँ जान छोड़ाउ भरि जिनगी अहँक गुण गाएब बजै छी किछु जौं नजरि झुका कऽ खिसियाबथि कहि भूतक्का औ...। हिंसक नानी खापड़ि बेलना केर कहानी, आब नै दोहराबू अय नानी।
नाना बनल छथि सियार, भक् छथि जेना हुलुक बिलार, दंतक गणना घटि कऽ बीस हुरथि गूड़-चूड़ाकेँ पीस गाबथि दारा दरद जमानी। आब......।
वरन् केर बर्ख भेल चालीस, अर्पित अहँक चरणमे शीश, अहाँ लेल लबलब दूध गिलास, नोर पीबि अपन बुझाबथि त्रास, क्षमा करू! छोड़ू आब गुमानी। आब......।
अवकाश क बीति गेल दस साल, पेंशनसँ आनथि सेब रसाल, भरि दिन पान अहाँ केर गाल ऊपरसँ मचा रहल छी ताल, चमेलीसँ भीजल अछि चानी आब......।
केतेक दिन सुनता पितृ उगाही, संतति पूरि गेलनि दू गाही, मामा मामी क बिहुँसल ठोर, माॅ छथि, चुप्प! साधने नोर, केना बनि जेता आत्म बलिदानी आब......। चश्माक बोखार सोलहममे कएल अंतःस्थ प्रवेश, हुलसल मन गेलौं नवल देश। हीय बसथि कला धएलौं विज्ञान, राखल जननी इच्छाक मान। वैद्य अंगरेजियाँ बनि बचाबू दीनक पराण, अर्थहीन मिथिलामे बढ़त शान। धऽ धियान सुनल सृष्टिक इच्छा, गाँठि बान्हि लेलौं लऽ गुरुदीक्षा। कॉलेजमे बीतल पहिल सत्र, आओल तातक आदेश पत्र। पढ़िते आबू अहाँ अपन गाम, हैत ज्येष्ठक बिआह विद्यापति धाम तन झमकि गेल, मन गेल गुदकि भौजीकेँ देखबनि हम हुलकि। आगत रवि पहुँचल जनम ग्राम, शत अभ्यागत छथि ताम-झाम। चहुँ-दिस भऽ रहल चहल पहल, चिन्ह-अनचिन्ह सखासँ भरल महल। एक नव नौतारि बहुआयामी, पूछलसँ छथि छोटकी मामी। प्रथमहि हुनकासँ भेँट भेल, भेल दुनू गोटेमे क्षणहिं मेल। साँझे औती दीदी अनिता, आकुल माँ केर एक मात्र वनिता। देखिते देखैत आबि गेल साँझ, माँ तकिते बाट ओसार माँझ। दीदी आँगन आएल हँसिते हँसैत माँ गर लगौलनि ठोहि कनैत। हिनक नैन हेराएल रिमलेसमे, देखि मामी पड़लनि पेशोपेसमे। चश्मामे सुन्नर दाईक विभा, बढ़ि रहल हिनक नैनक शोभा। मामी! ई सऽख नै आँखिक इलाज, माँथ दर्दसँ छल बाधित सभ काज। सुनि मामी मोन भऽ गेल अलसित, हुनक बाम आँखिमे पीड़ा अतुलित। नोचिते नोचैत भेल नैन लाल, दर्द पसरि रहल सम्पूर्ण भाल। आँगन दलान पीड़ा किल्लोल, आँखि धोलनि लऽ जल डोले डोल। फूलि गेल नैन केर अधर पल, हम सेकलौं लऽ गुलाब जल। वैद्यो आएल नै कोनो असरि, कछमछ कऽ रहली-रहली कुहरि। माते केलनि बाबूजीक ध्यानाकर्षण, आँगनमे आबि ओ दऽ रहला भाषण। सभ दोष सारक नै दैत धियान, वयस तीस मुदा एखनौं अज्ञान। रक्त जमल विलोचन झिल्लीमे, सैनिक कंत पड़ल छथि दिल्लीमे। सरहोजिसँ पुछलनि पीड़ाक काल, पहिल बेरि भेल छल परूॅका साल। माँ सऽ कहलनि लाउ नव अंगा, हिनका लऽ जायब दड़िभंगा। तिरस्कार करब नै हएत उचित, कनियाँ दरदसँ अति बिहुँसित। काल्हि अछि बिआह अहाँ जुनि जाऊ, करैत छी उपाय नै घबराऊ भोरे ‘टिल्लू' जेता हिनक संग, नै बिआहमे कऽ सकलनि हुड़दंग। भातृक सासुर जेता चतुर्थीमे, मातृ आदेश लागल हम अर्थीमे। नै बात काटल शांत छेलौं सुनैत, राति बितल सुजनीमे कनिते कनैत। कोन बदला लेलक बापक सार, अपन संकट बान्हल हमरा कपार। मामीकेँ हम नै चीन्हि सकल, भीतरसँ इन्होर ऊपर शीतल। नै जा सकलौं हम वरियाती, गाबै छी हुनक दुःखक पाँती, भोरे उठि दड़िभंगा जा रहलौं, नैनक शोणितसँ नहाँ रहलौं। पहुँचल डाक्टर मिसिर केर क्लिनिक, चक्षुक चिकित्सक सभसँ नीक दुआरेपर कम्पाउन्डर नाम पुछल, मामी नुपूर कहलनि ओ कुकुर लिखल। देखएमे भलपर वज्र बहीर, उपरि मन हँसल, भीतर अधीर। वैद्य मिसिर कहल नै दृष्टि दोष दुहू आँखिए देखै छथि कोसे-कोस। नेत्रक आगाँ नै अछि अन्हार हिनका लागल चश्माक बोखार। हम लिखि दैत छी शून्य ग्लास, बुझा दियनु हिनक रिमलेशक प्यास। ताहूसँ जौं नै हेती नीक, आँखि सेकू बनि सिनेही बनि कऽ, अधरपर मुस्की आगाँ अन्हार, कानल मन सोचि बिआहक मल्हार। डाक्टर बनऽ केर तृष्णा मनसँ भागल, एहेन मरीज भेटत तँ हएब पागल। धुरि गाम माता केर करब नमन, तोड़ू जननी हमरासँ लेल वचन। चशमिश नैन मामी छथि अति गदरल, हमर योजना हिनक भभटपनमे उड़ल। आकुल जननी (बाल कविता) सूति रहू हमर लाल, अर्द्ध रैनि बीतल। अहँक अविरल नैनसँ आँचर तीतल।
घोंटि अछिंजल काटि रहलौं अछि जीवन, तात दर्शनक आश छिन्न किएल अरपन, क्षीर बिनु दुहू वक्ष शुष्क पड़ल। सूति रहू ......।
कोन सियाहीसँ लिखल विधना हमर कपार? अपने प्रवास गेलनि छोड़ि हमरा बेथा धार, चानन सन नेनाक हीय, भूखसँ कानल। सूति रहू ......।
हुनके की दोष दिअ स्नेहक ओ दिव्यमूर्ति, कायादीन विद्या विहिन करथि पंचजनक पूर्ति, अहँक अश्रु मातृ नैन शोणित भरल। सूति रहू ......।
कहबनि गौमाता आनू औता फागुनमे कामधेनुक सुधा भरब अहँक कण-कणमे अहाँ निन्न हम कल्पनामे उड़ल। सूति रहू ......। अंतिम छंद (बाल कविता) सात बरख केर जखनि वएस छल, बिहुँसल मन उजड़ल मकरन्द। एखनौं क्षण-क्षण हीयसँ उफनए, माय जे बाजलि अंतिम छंद। सुनू पूत हम छाड़ि अबनिकेँ, जा रहलौं विधना केर घर। अपन तातकेँ कोंचा पकड़ू, मानि जननि शीतल आँचर। हमर चरण धऽ लिअ अहाँ प्रण, तानए धरम केर राखब मान। कर्म डगरिपर हमर छाँह संग, बढ़ब करैत पितृक सम्मान। हंसवाहिनी चरणमे अरपित, अपन शीश दऽ सोखब ज्ञान। नीच बाटपर डेग नै राखब, जीवनमे करब नै सुरापान। केहन दृष्ट अदृश्य वियाधि ई, सभ किछु बुड़ल अहाँ भेलौं दीन। हीय नै हारू ऐ अखिल भुवनमे, छथि केतेक लाल साधन विहिन। अम्बुज अहाँकेँ हमर सप्पत छी- विलोचनसँ जुनि बहबू नोर। शिखर लक्ष्यकेँ निश्चित साधव, दैत मातृ स्मृतिक वोर। हुनक दिव्य आशीष प्रतापसँ, भेल धन, मन, जश पूरित जीवन। मुदा ‘माय’ गुंजन जौं सुनि हम, रोम-रोमसँ उपटय क्रन्दन। हुरहुर (बाल कविता) दलानक पाँजरि गमकि रहल छल, गदरल गाछ फुलल फुलवाड़ी। कात सटल कट्ठा भरि लागल, खसखस साग हरिअर तरकारी। बाबा कमाबथि सीता गुनि-गुनि, हमर हाथमे जलक गगरी। हुनक नैनसँ ओझल भऽ कऽ, खूब चिबाबी गाजर ककरी। लदल गाछ छल नेबो बरहर, अनार शरीफा मधुर लताम। बिनु आज्ञा केयो पात जौं छूबए, बाबा छीलथि ओक्कर चाम। दीर्घ पिपासित किछु गाछ कँपै छल, ढारि देलौं भरि गगरी नीर। झन्न पीठपर लागल चटकन, उमड़ल बेथा गेल देह सिहरि। खसि पड़लौं कात परतीमे, तमकैत बाबा लगलनि दुत्कारए। अछि उदण्ड दीर्घटेंटी नेना, हम्मर कोनो बात ने मानए। पुष्पहीन अफलित गाछपर, देलक सभटा जल उड़ेल। नीक अधला गप्प बूझए नै, तेसर कक्षामे चलि गेल। भनसार आबि मायसँ पूछल, लोचन डबडब नासिका सुरसुर। आड़ि मुरझाएल छी कोन झाड़ी, बाउ ओइ अनाथक नाम हुरहुर। माल जालसँ फुलवाड़ी बँचबैले, आड़िपर मालिक ओकरा रोपय। सामन्ती जिरातक उपेक्षित सेवक, खाद-पानि लेल केकरो नै टोकए। लोलुप जहाँनक अपवर्जी छी सओन जनमल बैशाखे उपटल। तीत पातमे पुष्प खिलय नै, उपहासेमे जीवन विपटल। रैन इजाेरिया गगरी भरि-भरि, जलसँ देलौं हुरहुरकेँ बोरि। भोरे-भोरे बाबाकेँ देखल, सजाबैत कियारी पासनिसँ कोरि। कर्कष हीयमे प्रीति देखि कऽ, झट दौड़ि हुनका गर लगाैल। दलित उपेक्षित जीवन बाँचल, श्रद्धासँ नोर टपकाैल। अंजलि (बाल कविता) काका ः सूति रहू अय बुच्ची ओल, पाकल परोर सन लागए लोल। उल्लू मुख भदैया खिखिरक वोल, नाम ‘अंजलि’ केतेक अनमोल।
अंजलि ः माँ टिल्लू काका बड़का शैतान, थापर मारि ठोकै छथि कान। अहाँसँ नुका कऽ चिवबथि पान, फोड़बनि माथ वा तोड़बनि टॉग।
काका ः भौजी! छोटकी फूसि बजै छथि, रीतू संग भरि दिन विन-विन करै छथि। दावि रहल छी हिनक देह हम, उत्छृंखल नेना करै छथि तम-तम।
अंजलि ः काका जुनि घोरू मिथ्याक भंग, आब नै सूतब हम अहाँक संग। माँ लग हमरासँ सिनेह देखबैत छी, एकात पावि हमर घेंटी दबैत छी।
काका ः पठा देब काल्हि अहाँकेँ हाँस्टल, नेनपन ओइठाँ भऽ जएत शीतल। ओतए भेटत नै खीरक थारी, नै रसमलाइ नै पनीरक तरकारी।
अंजलि ः काकू बनव हम बुधियारि नेना, सदिखन बाजब सुमधुर वयना। केकरो संग नै मुँह लगाएब, अहीं लग रहब हाँस्टल नै जाएब। अहँक आँचर (बाल कविता) आब विसरव केना सुनू जननी अहाँ, केतेक निर्मल सेहंतित अहँक आँचर। हीय सिहकै जखनि वहै लोचन तखनि नोर पोछलौं लपेटि हम अहँक आँचर। केना अएलौं खलक? मोन नै अछि कथा, पवित्र पटसँ सटल देह भागल बेथा। सिनेह निश्छल अनमोल प्रथम सुनलौं मातृबोल, मोह ममताक आन के करत परतर? दंत दुग्धक उगल, नीर पेटसँ बहल, देह लुत्ती भरल कंठ सरिता सूखल। जी करै छल विसविस तालु अतुल टिसटिस, मुँॅहमे लऽ चिबएलौं अहँक आँचर। नेना वयसक अवसान ताकए चललौं हम ज्ञान, कएलौं गणना अशुद्ध गुरु फोड़ि देलनि कान। सिलेट वाटपर पटकि माँक कोरमे सटकि, तीतल कमलाक धारसँ अहँक आँचर। देखि पाँचमक फल मातृदीक्षा सफल, भाल तिरपित मुदा! उर तृष्णा भरल। गेलौं केतए हे अम्बे केतए गेल आँचर, ताकि रहलौं हम आँगनसँ पिपरक तर। स्निग्ध-स्वाती झिहिर-झिहिर ना हे पिया, झिहिर-झिहिर ना! झहरए स्निग्ध स्वातीमे बदरा, झिहिर-झिहिर ना...! परम सुहावन मास विरह हीय, टपकए नेहक बुन्न ललित पवनमे ठिठुरि रहल छी, जीवन भऽ गेल सुन्न टपकए विरहक अश्रुलाप ई, झिहिर-झिहिर ना... तृप्ति-तपित सितुआक कल्पना, उपटल अर्णव तट मोती अहाँ बहएलौं निरस जीवनमे, किए अगम दु:ख सोती? मिलनक आश कानए पैजनियाँ, झुनुर-झुनुर ना.... कांति श्रवित माणिक्य बनल, मदमत्त भेल गजराज मुग्ध जहानक रम्य प्रहरमे, फफकि गेलौं हे ताज! तोड़ू वेदनाक डोरि ई, झमड़ि-झमड़ि ना.....।। घटा बसन्ती कूकू केर मादक स्वर सुनिते, िसनेहातुर मन चहकि उठल उगडुम आनन हरिअर कानन, “घटा वसन्ती” धार बहल। तितली रूनझुन नीरज रससँ केलक झंकृत सकल जहान अपन मनोरथ सिद्धि करैले प्रेयसी कएल त्रृतुराजक गान। उमड़ि रहल नव तरूणी यौबन रसस्नात भेलि चंचला-गात पुष्प सेजपर मिलन सम्मोहक चभटि गेल अछि दुनू पात। जर्जर वृद्धा आ सूखल वृद्धमे धुरि आएल पुनि कामुक जान भागि गेलनि धर्मराज देखि कऽ ऋृतुराजक ई अनुपम शान। हॅसी-खुशीसँ चल-अचल जीवन, ताकि रहल होरी केर वाट जड़-चेतनक सुरभित कांति देखि कऽ केलक गान हृदैसँ भाट। रंग-विरंगक अवीर गुलाल संग नाचि रहल उन्मादित होरी सृष्टि मनोहर चक-चक तरूवर मॉतल चह-चह चहुँदिस जोड़ी। चैतावरक आेंघाएल कलरब अग्निदेव केर जुआरि बढ़ल घटल जहानमे कलकल जीवन मादकता स्वर्गोकेँ जीतल।। साहित्यक विदूषक किए हमरा कहै छी विदूषक। की हम केलौं अहाँसँ खटपट।। शैशव अप्पन गाममे बितएलौं सभ ठाम देसिल गीत सुनेलौं मूड़न हो वा महुअक। मात्र विदेहसँ रखलौं आशा सभ दिन पढ़लौं मैथिली भाषा व्यारव्याता बनि भेलौं चकमक। श्रृंगार पहरमे कविता लिखै छी, छी गृहस्थ मुदा बैराग सिखै छी हमर जीवन दरससँ ओ भेलि भक्। कहिया धरि बाँटब जागरणक परचा केतौं नै देखलौं अप्पन चरचा दक्षिण नैन भेल फकफक। दिनचर्या लिखि कवि बनि गेला आन्हर गुरु संग बताह चेला उल्लू लग कोकिल ठकमक। केतेक दिन भरत विलाप सुनाएब फोका डबडब परिचए प्रसूनक। आउ-आउ दीर्घ सूत्री भेदमे टा दिअ हमहूँ मैथिल गर लगा लिअ बनाउ मिथिलाकेँ सम्यक। मुदा जीबै छी जीवनक डोरि फुजि उड़ल व्योममे कातर प्राण मुदा जीबै छी सड़ल वसन पजड़ल अछि आंगुर गलल ताग गुदरी सीबै छी.... केकरो वाड़ी बेली फुलाएल केकरो पोखरि भैंटक लावा हमरा घरक परथनो गिल्ल भेल आँचक बिना सुन्न अछि तावा कागत-मुद्राकेँ बीड़ी बना कऽ कोंढ़सँ नेसि-नेसि पीबै छी..... लाल रंग शोणित सन टपकए पीत कुटिल पिलहा बनि धधकए कुपित होलिका छाँह देखाबथि बड़ीपर काक-भुसुण्डी हबकए अग्नि देवक हुथ्थ डांगसँ सुधाकेँ खोड़ि-खोड़ि जड़बै छी.... कटाह वसंत कहियो नै आबथि राखथु अपने संग विधाता कुसुमित रहै सबहक आँगन घर हँसि-हँसि कौड़ी खेलथि पुनीता अपन संत्रासकेँ हियामे नुका कऽ सबहक सुखक कामना करै छी.....।। रमा साँझ पहर दिप-वाती दिन एलौं रमा नाओं रखने छलि बाबी मातृ कोरक हम पहिलुक नेना कोन-कोन जीवन गीत गाबी खढ़क मचान निलय बनि चमकल कनक-रजतसँ छनछन माता पिताक बटुआमे बैसलनि लक्ष्मी कण-कण खह-खह कएल विधाता लव-कुश बनि जननीक कोखिसँ दू-दू सारस आँगनमे खिलाएल तरूण लताकेँ स्निग्ध देखि सर समाज घूरथि औनाएल धेलकनि पाण्डु जर बाबूकेँ नोकरी छोड़ि खाटपर खसलनि खेत पथार वियाधि संग बूड़ल तैयो तेसर लोकमे पैसलनि जै ओलती छल तृप्त पपिहरा सुग्गा चुनमुनीक चहचह शोर क्षणहिंमे देवराज टपकेलनि शरद-िनशामे आगि इन्होर हाथसँ करची कलम छूटि गेल छोड़ि पड़ेलनि भामिनी- भद्रा चरण नुपूर धरा खसि टुटल आँगन वाड़ी भरल दरिद्रा काँच बएसमे सेंथुमे सिनूर गदगद भेली मातु सुनयना कहुना लाज गेल दोसर घर सुखद नोर खसबै छथि मयना कंतक आँगन सेहो कलुष भेल जखने निकसल वज्र चरण रज रैन पचीसी संग सिनेहक लहठी फोड़ि निपत्ता पंकज तुसारिक निस्तार केना कऽ करितौं उज्जर नूआ खाली हाथ सेंथुसँ सेनुर अपने पोछलौं आन्हर सासु संग पीटै छथि माथ आजुक डाइन- कहियो छेलौं लक्ष्मी छाँहसँ भागथि अहिवातिन सभ नोरक घृतसँ चिनुआर निपै छी केकरो संग नै बाँटब कलरब काक-दृष्टि धेने छथि बाहर चानन ठोप केने किछु लोक आर्य भुवनक रौ बनमानुष सभ गर्दनि दाबि पठबए परलोक नारीटा लेल निअम केहेन ई? वरन् एक तँ कहाएब सती अपन कांताकेँ छोड़ि घरमे कहिया धरि तकबेँ अबला रति? उनटा-पुनटा सबरी मायक सिनेह उनटल छन्हि, पनटि गेल छथि- तात राम तियागक मूरति सिया बदलि गेली प्रति झण बदलए आठो-याम बोतल क्षीरमे नेना उगडुम पुष्ट वक्षक लेल अंबा अंध टाॅप पहिरलनि यशोदा मैया कान्हा हेरथि आँचर गंध काका दलानपर रसमंजरि लागल पढ़ि-लिख पूत भेलनि अधिकारी घूसक टाकासँ दलानकेँ छाड़ब लालबत्ती बरू भऽ जाउ कारी अन्न-पानि बिनु बाबा मुइला भीठ बिका हेतनि वृषोत्सर्ग सभ बौराएल यशोगान लेल गजिया शीत तप्पत अपवर्ग नांगरक चार चुआठ बनल तिरपित झाकेँ भेटलनि शमियाना गोदानक संग जौं साँढ़ नै दागब लोकवेद सभ देत ताना पहिल छायामे हमरो भेटल राहरि दालि संग वासमती बाबाकेँ जौं अहिना खुआबितियनि अखनि नै जेता छल तट वागमती छोट परिवारक लेल मामी माहुर कात भेली नानी बनि अपरतीप आर्य भूमिमे मिझा गेल अछि संयुक्त परिवारक खहखह दीप सुकेश्वर रामक गाराक कंठी हाथ धएने धर्मक पतवार अपैत कुलमे जन्म की भेलनि? माथ लिखेलनि जाति चमार सुरावोरि मुर्गी टांग चिबाकऽ विविध कुलक्षणक संग राति बिताबथि पंडित वंशक कठुआएल पौरूष मास्टर साहेब ब्राह्मण कहाबथि। कविक कामना पूत बढ़बैछ वंशक मान मुदा पिपरौलिया बाबासँ मंगलनि पोतीक रूपमे सुकन्या अचा अपर्णा वा भव्या कवि बनि गेला पितामह सफल भेल कबुला-पाती भगवत कृपा देख- खुशीसँ फुललनि जीर्ण छाती जेठका जीवन झखरैत पाषाण वियाहक भेल सोलहम बरख अखनि धरि- नि:संतान दोसर निष्कपट बुड़िबक परंच पितृसेवक अविराम करची सन लकलक काया रंग धन इव श्याम घनश्याम कनियाँ कोरमे सद्य: अएली वैदेही बनि कन्या कविक उपवन भेल धन्या मुदा! साक्षीक पिताक स्थान जेठकेकेँ भेटत श्यामकेँ जौं छन्हि बाप कहेबाक सख आश वा दीर्घ पियास दोसर बेटीक लेल राखथु एकादशी उपास यएह भेल कवि गेला स्वर्ग भेटलनि मुक्ति भेलनि अपवर्ग साक्षीक माताक कोरमे फेर बेटी बनि अएली भारती विचित्र अन्हेर प्रकृतिक फेर अँगने अँगने अड़ए लागल गप्प हरबिड़रो बरसए लागल कनफुसकीक झाँट अपने हाथसँ कविजी रोपलनि बबूरक काँट बड़की काकी दिअ लगलनि तान नै छेलनि हुनका संसारक ज्ञान कबुलामे किएक मंगलनि बेटी हम जौं हुनका स्थानपर रहितियनि तँ जनमिते दाबि देतौं ऐ राक्षसनीक घेँट बेटीक लेल प्रार्थना! आश्चर्य केहन कविक कामना एकबेर आर अन्हेर भादवक अन्हरियाक फेर स्तब्ध छथि सभ कियो देख कवि कुलक दशा आँगनक बहुआसिन सभ टोलक अनन्या कपार पिटए लगलखिन छोटको पुतोहुक कोरमे जनमलि... कन्या हा भगवान महात्माक यएह मान मंगने देलियनि तीन पुष्प माल लागल फोटोमे कवि छथि मुग्ध तल्लीन जेना कहि रहल होथि के रखलक जहानक मान? के बढ़ेलक कुलक सम्मान? के बचेलक वंश सीता अहिल्या सावित्री वा रावण कौरव कंस? मुरूदा जगाउ इजोतमे तँ सभ चलै छै अन्हारमे चलि कऽ देखाउ स्वान सुनि पदचाप जागए चचरी चढ़ल मुरूदा जगाउ नृपक मीठ दर्द सुनि बौराएल पटरानी-मंत्री-सेनापति-चाकर ओइ अभागल दिस के तकलकै जे सर्व विहिन जेकर देह जर्जर भरल पेट हाफी करैत पहुँचल महाजन दुआरि जखने स्वार्थक दुग्धसँ बनल पयस भरि थारी आगाँ रखलौं तखने आँत चटचट कंठ सूखल पानि नै जे घोंटि पाबए सुक्खल अछोप मध्यम जनकेँ झाँटि ‘चंडाल’ कहि भगाबए देवध्वनिमे निपुण वाचक पंचतत्व देहे भरल छै पिरही नै कियो दैत ओकरा छुद्र कुलमे ओ जनमल छै देव धर्मकेँ पीस रहलै झपटल सोन बोरि कऽ बटोरल केहेन विकराल मृगतृष्णा ई सभ घोंटि उन्मत्त जहर घोरल अंतिम आग्रह िथक सुनू बौआ ऐ फेरमे कखनौं पड़ब नै अपना संग सभकेँ जगाएब कुमार्ग कहियो धरब नै।। अस्तित्वक प्रश्न? ककरासँ कहबै के पतिएतै अपने तरंगमे भीजल दुनियाँ बड़ अथाह स्वार्थक अर्णव ई शुभ बनि गेलै लोलुप बनियाँ शोणित बोरि-बोरि टाट बनेलौं खर खोड़ि टिटही लऽ गेलै फाटल आँॅचरसँ केना कऽ झँपबै खाली चिनुआर बेपर्द भऽ गेलै व्याल दृष्टिसँ राकस गुड़कए चिहुकि-बिचुकि कऽ कानए रनियाँ कर्मक नाहमे भेलै भोकन्नर बामे हाथे पानि उपछलौं भदवरिएमे पतवारि हेराएल दहिना हाथक लग्गा बनेलौं सभटा आङुर पानि खा गेलै, केना बजतै दर्दक हरमुनियाँ कछेरमे विषनारि उगल छै थलथल पाँक पएर धँसि गेलै अन्हार मोनिमे कछमछ कऽ रहलौं बिनु जाले टेंगड़ा फँसि गेलै केना कऽ हमरा बाहर करतै नोर चाटि हहरए सोनमनियाँ... किछु छिद्दीक तरमे दबि कऽ पंद्रह अाना अकसक कऽ रहलै भारी भेल कुकर्मक सोती ओकरे धारमे गंगा बहलै घनन दरिद्रा तांडव करतै, अस्तित्वक- प्रश्न बनल पैजनियाँ......। क्षणप्रभा सभ दिस सर्द कियो नै बेपर्द देह सिहकल रेह ठिठुरल पोखरि-इनार ठमकल पूस रमकल श्याम असर्ध शीतक बीच टक टक कएने आश कखनि भरत मोनक पियास कबदबैत चम्पा मुस्कैत पलाश सूर्यमुखीक दशा देखि ओकरासँ किए करैत छी सिनेह जे कुन्तीकेँ ठकि लेलक ओकर कौमार्य नष्ट कऽ देलक आइ आगिक ढेपपर के करत बिसवास? झाँपू मर्यादा बचाउ गेह भावक आगाँ प्राप्तिक कोन मोजर एतबेमे मेघ उड़ि गेल शीत लुप्त भेल क्षणप्रभा बनि रविक अर्चिस सूर्यमुखीक, कोमल कोंपरमे समा गेल ज्योतिपुंजकेँ आदित्यक चरण मानि- सूर्यमुखी अपन सेंथुमे भस्मीभूत कऽ लेली अखण्ड सौभाग्यवतीक आशीषक संग किरण ससरल कली फूल बनि पसरल हम तँ उभय लिंगी छी नै रहितौं तैयो करितियनि सुरूजसँ प्रेम......। सभ किए दैत छी हुनकापर दोख ने डूमैत छथि ने उगैत छथि सभ पिण्ड घूमि- हुनकापर डूमि जएबाक कलंक लगबैत अछि- जखनि अपनामे दृढ़ता नै तँ दोसरपर दोष केहेन? बिनु बजौने सभ लग अबैत छथि आठो याम जरैत छथि कुन्ती सभ जनैत किए कएली वरण- ज्योजिपुंजकेँ बान्हब ककरासँ भेल संभव? आदित्य सिनेहक तापस लगले तप्पत, लगले विद्रूप केना भेला छलिया? सिनेहक अर्थ सुधि प्रभंजन नै स्पर्श एकर नै अवसान नै उत्कर्ष......। क्षणप्रभा जेकरापर खसल ओ जरल ओ मरल मुदा! सिनेहक क्षणप्रभा वासना मात्र नै- शाश्वत स्पंदन......। जेकरामे केलक प्रवेश ओकरा रोम-रोम शेष-अशेष एकर भंगिमा वएह कहत जेकरामे संवेदना रहत......। सगर राति दीप जरए राति माने कारी पहर गत्र-गत्र शांत जीव अजीव आक्रांत रजनीक लीलासँ क्षणिक बँचबाक लेल लोक जरबैछ दीप सभ्यताक विकासक संग-संग मनुख चेतनशील होइत गेल पहिने इजोतक लेल......। खर-पुआर जारनि लत्ता नूआ फट्टा सूत छोड़ि रूइयाक बाती ढिबड़ीक बदला लेम्प बहकैत रोशनीमे गबैत पराती बुइिधक विकास भेल......। विद्युत तरंगमे गैसक उमंगमे विज्ञानक जय भऽ गेल......। सभ ठाम इजोत मुदा! वैदेहीक घर अन्हार मात्र लिखते रहब केकरोसँ नै कहब के बूझत कथाक विकास केकरो नै छल आभास दधीचि बनि सांगह नेने आबि गेलनि मैथिली कथा जगतमे प्रभास सुरुज दिन भरि अपन करेजकेँ जड़ा कऽ नै मेटा सकल ऐ वसुन्धरापरसँ विगलित मानुषक प्रवृत्ति प्रभास दीप बारि अपन करूआरि सम्हारि कथा सागरक जमल तरंगमे दिअ लगलनि हिलकोर......। समाज जागत- ई छल बिसवास मुदा नै आदि भेटलनि नै भेटलनि छोर... किनछेरिपर अपसियाँत कथाकार लऽ लेलनि िनर्वाण जागरणक आशामे कहियो तँ सुखतनि वैदेहीक झहरैत नोर......। चलि गेला अभिलाषा नेने उत्तराधिकारी सभ खेलाइत छथि अट्ठा बज्जर करिया-झुम्मरि उद्यत छथि अधिकार हरबाक लेल पाग पहिरबाक लेल सगर राति दीप जरए......। रमण रमानन्द- आनन्द विभूति गेरुआ गर लगौने छथि मलंगिया महेन्द्र मसनद पजिऔने छथि समालोचक- उद्घोषक सूतए मात्र वाचक मंच चिकरए......। कहैत छथि बूढ़ छी तखनि गोष्ठीमे आबि नाटक करबाक कोन प्रयोजन? दीप बारि दुआरि नै जराउ जे जगदीश जागल रहत ओकर गामक जिनगी के सुनत? ओ अछि समाजक कात कहियो होमए देब ओकर साहित्य साधनाक प्रभात किएक तँ ओ छी वेमात्र जइ माटिक अन्हारकेँ सुरुज नै हटा सकल ओ केना हटत माटिक दीपक बल? जौं दृष्टिकोणमे रहत छल तँ विवेक केना िनर्मल? ओइ कठकोंकारि सबहक बीच मैथिली छथि दुबकल सगर राति दीप जरए अन्हार घर संस्कार सड़ए कथासँ केना पारस िनकसए? कर्मयोगी ने भगता योगी आ ने डलबाह हरखक तरंग नै, नै विपत्तिक आह पहिलुक दर्शन कहिया भेल नै अछि मोन जहियासँ देखैत छियनि वएह गंभीर मुस्की .. केकरो उपहास नै केकरो परिहास नै, नै ठोरपर वसन्तक गान नै हिअमे ग्रीष्मक मसान नेना सभक प्रिय अध्यापक कर्मयोगी- अपकल केना भेलनि पितामह चूकि? रीतिक कालपुरुखक नाओं- कामदेव!!! कोनो नै काम भलमानुष निष्काम तेसर पहरक विझनीक बाद जगतधात्रीक नित्यक दर्शन तामझामक गाममे रहितो त्रिपुंडसँ मुक्त छुच्छेक हाथे तर्पण आब की मंगैत छथि बाबा? झबरल आँगनमे शक्ति सहचरी जाइ रवि-शशिक किरणकेँ आत्मसात करबाक लेल लोक करैत अनर्गल प्रलाप व्यर्थ कुटिचालि रचैत चोरि कऽ आडंवर करैत तनयक रूपमे ओ दुनू बाबाक आँगनक श्रवण कुमार “अचला” चंचला बनि देलनि कन्याक उपहार दु:खक सोतीमे जखनि अकुलाइत छै मनुख तखनि आस्तिककता जगैत भूख मुदा! तिरपित बाबा नै करैत छथि भगवानसँ छल, सुधामे जल मन निरमल.... समाजमे छन्हि शीतलताक आह सदेह कवि नै तखनि वैदेहीक चाह? अपने नेपथ्यमे रहि नाटकक कएलनि िनर्देशन देसिल वयनाक प्रति कर्मक गति अर्पण एकाध प्रहसन लिखि अकथ्य कविता गढ़ि केतेक आजाद भऽ गेल चिन्हार मुदा! इजोतक स्रोत तक पिरही अन्हार कोनो नै छन्हि छोह सबहक उत्कर्ष हुअए यएह आश, यएह मोह की ब्राह्मण की अछोप की धानुक की गोप सबहक बाबा...... जइ गाछक छिऐ छाहरि वएह उतुंग वएह श्रंृग सिक्कठि हुअए वा नरकट स्वीकार करैए पड़तनि समाजकेँ बाबा सन चेतनशील मनुखकेँ जे संस्कार लूटाबए सबहक कल्याणक लेल अन्तर्मनसँ सोहर गाबए......। एकटा छेली आरती एकटा छेली आरती भदेसक भारती आगाँ ‘राय’ की लागल ओ सभ बूझि गेलथि किछु आर विद्रूप वा होशियार छलनि खड़ाम देबाक आश भदेसक कांता महा भदेसमे छथि- हुनका पड़ाइन लागि गेल छन्हि आन किए जाएत केना पड़ाएत किन्नौं नै होमए देलक मुक्तक काव्यक आश पूर कियो नै गेल भागलपुर आरती रूसि गेली क्षणिक नै अन्तर-आत्मासँ हूसि गेली मुँहजोड़ भाषामे जे राखत आत्मासँ विदेह-तनुजासँ सिनेह आत्मासँ गेह सबहक हएत वएह दशा भाेगए पड़तनि उत्तराधिकारीकेँ क्लेश सभ दिनक लेल बिला देतनि जहानसँ भगा देतनि मात्र हमहीं टा नाचब हमहीं देखब के सूतल के जागल के नै बूझए जे करत प्रयास ओ भऽ जाएत अभागल ऐ माटिसँ उपटल वैदेहीकेँ आन भूमिक लोक माटिमे मिला देलनि मुदा अपन आरतीकेँ अपने सांगह खसा देलकनि......। (प्रसिद्ध लेखिका स्व. डाॅ. आरती कुमारीकेँ समरपित...) सुखार काल रहसल त्रास बहकल मधुमासे संत्रास महकल अषाढ़ कुपित इन्द्र रूसल जल बुन्न बिनु बिआ विहुसल आड़ि चहकल खेत दड़कल प्रशान्तक प्रकोपे मनसून सरकल शोषित कलकल जुआनी गरकल रोहिणी-आरदरा सुखले रमकल “ग्लोबल-वार्मिग” फनकल क्षुब्ध प्रकृति सनकल विज्ञानक चमत्कारमे उच्छावास छनकल गाछ काटि फोर लेन बनेलौं पहिने किए नै नवगछुली लगेलौं अपने गतिक स्टेयरिंग पकड़लौं मजूर किसानकेँ घर बैसेलौं कृषि प्रधान देशमे नोरक स्नात आँखिक शोणितसँ केना भीजत पात? ऐ बेर सुखार साउनो बीतल दीनक आत्मा तीतल भदैया बूड़ल रब्बीक कोन आश सुक्खल मुरदैया मरूझल कास अगिला साल औत बाढ़ि देलौं खेतिहरकेँ ताड़ि? वाह रौ विज्ञान वाह रौ धनमान बिनु हथियारे लेलेँ गरीब-गुरवाक जान जेकर भऽ सकए संलयन आ विघटन आयुर्वेदमे तइ रसायनक चर्चा विज्ञानक बाढ़िमे सगरो पोलिथिन कागत छोड़ि बाँटि रहलौं प्लास्टिकक पर्चा आजुक रसायनसँ माटिक कोखि उजड़ल ठुट्ठ डाँट किछु नै मजड़ल प्लास्टिक छोड़ि लिअ जूटक बोरा पोलिथिन नै ठोंगा-झोरा छोड़ रौ धनचक्कर एडभान्स बनबाक चक्कर पकड़ए अपन बाप-पुरुखाक देल हथियार धरे मौलिक संस्कार केमिकलसँ नहा तँ लेबेँ मुदा! की चिबेबेँ....? गजल १ कालरात्रिमे महमह दिनमान केना आएत मोनमे पाप झबरल भगवान केना आएत नै जड़ै प्राण वायु मरल सरल देह संग अधम नीचाँ खसत धर्म गगनमे बिलाएत माँझ आँगन काँटक बोन नै रोपू प्रियतम काग कोइली सन कोमल संतान केना पाएत विरह मासमे ने सोहर सोहनगर लगै छै कंठमे पित्त चभटल मधुगीत केना गाएत अपने करू रास लीला नेना दूध बिनु कानए कर्मभीरू पुरुखकेँ जयकार कहेन हएत गजल २ कहू की बात हम मानिनि कलुष भऽ गेल अछि अर्पण केना सहबै अखल कंटक दबै छै टीसतर तर्पण सोहाबै नै खुशी सरगम समाजक हास परिलक्षित धुनै छी देल कालक गति गदराबै नै विकल जीवन पतित नियति आकुल भेलै जड़ल अर्णव तरंगे छै सूतल ईश सभ पंथक एलै समभावमे विचलन बाहरसँ जे जत्ते गुमसुम हिआसँ ओ ओते बिखधर चानन बहलै उषाकाले वाह रौ जहानक संकर्षण भेटल जेकरा जेतए अवसरि हाथ धोलक हलालीसँ नीतिक मंचपर चढ़िते करै माटि नेह प्रति गर्जन हाइकू सूतल जग/ दिनकर लालिमा/ जगा देलक रविक लाली/ /ऐ सूतल जहाँकेँ/ जगा देलक बर्खाक बाद/ खहखह पाइन/ वसुधा तृप्त विदेह नूतन अंक भाषापाक रचना-लेखन इंग्लिश-मैथिली-कोष / मैथिली-इंग्लिश-कोष प्रोजेक्टकेँ आगू बढ़ाऊ, अपन सुझाव आ योगदान ई-मेल द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ। Top of Form १.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली आ २.मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम १.नेपाल आ भारतक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली
१.१. नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक उच्चारण आ लेखन शैली (भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन १.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङ, ञ, ण, न एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना- अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।) पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।) खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।) सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।) खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।) उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंक, पंच, खंड, संधि, खंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्ग, चवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंक, चंचल, अंडा, अन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओ लोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि। नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोक बेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोट सन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽ कऽ पवर्ग धरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽ कऽ ज्ञ धरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ। २.ढ आ ढ : ढक उच्चारण “र् ह”जकाँ होइत अछि। अतः जतऽ “र् ह”क उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ लिखल जाए। आन ठाम खाली ढ लिखल जएबाक चाही। जेना- ढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढङ्ग, ढेरी, ढाकनि, ढाठ आदि। ढ = पढ़ाइ, बढब, गढब, मढब, बुढबा, साँढ, गाढ, रीढ, चाँढ, सीढी, पीढी आदि। उपर्युक्त शब्द सभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ अबैत अछि। इएह नियम ड आ डक सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि। ३.व आ ब : मैथिलीमे “व”क उच्चारण ब कएल जाइत अछि, मुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथ, बिद्या, नब, देबता, बिष्णु, बंश, बन्दना आदि। एहि सभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथ, विद्या, नव, देवता, विष्णु, वंश, वन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकील, ओजह आदि। ४.य आ ज : कतहु-कतहु “य”क उच्चारण “ज”जकाँ करैत देखल जाइत अछि, मुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञ, जदि, जमुना, जुग, जाबत, जोगी, जदु, जम आदि कहल जाएबला शब्द सभकेँ क्रमशः यज्ञ, यदि, यमुना, युग, यावत, योगी, यदु, यम लिखबाक चाही। ५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि। प्राचीन वर्तनी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आदि। नवीन वर्तनी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आदि। सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहि, एना, एकर, एहन आदि। एहि शब्द सभक स्थानपर यहि, यना, यकर, यहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारू सहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे “ए”केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि। ए आ “य”क प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैल, हैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो “ए”क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि। ६.हि, हु तथा एकार, ओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हि, हु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहि, अपनहु, ओकरहु, तत्कालहि, चोट्टहि, आनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनके, अपनो, तत्काले, चोट्टे, आनो आदि। ७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खडयन्त्र), षोडशी (खोडशी), षट्कोण (खटकोण), वृषेश (वृखेश), सन्तोष (सन्तोख) आदि। ८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि: (क) क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमे सँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : पढए (पढय) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पडतौक। अपूर्ण रूप : पढ’ गेलाह, क’ लेल, उठ’ पडतौक। पढऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पडतौक। (ख) पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछ, मुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह। अपूर्ण रूप : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह। (ग) स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापद, संज्ञा, ओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि। अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल। (घ) वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : पढैत अछि, बजैत अछि, गबैत अछि। अपूर्ण रूप : पढै अछि, बजै अछि, गबै अछि। (ङ) क्रियापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप: छियौक, छियैक, छहीक, छौक, छैक, अबितैक, होइक। अपूर्ण रूप : छियौ, छियै, छही, छौ, छै, अबितै, होइ। (च) क्रियापदीय प्रत्यय न्ह, हु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : छन्हि, कहलन्हि, कहलहुँ, गेलह, नहि। अपूर्ण रूप : छनि, कहलनि, कहलौँ, गेलऽ, नइ, नञि, नै। ९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटि कऽ दोसर ठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन), पानि (पाइन), दालि ( दाइल), माटि (माइट), काछु (काउछ), मासु (माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्द सभमे ई निअम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि। १०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्द सभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषा सम्बन्धी निअम अनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरण सम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्ष सभकेँ समेटि कऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनीकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽबला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषी पर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पडि रहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषता सभ कुण्ठित नहि होइक, ताहू दिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए। -(भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) १.२. मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली
१. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-
ग्राह्य
एखन ठाम जकर, तकर तनिकर अछि
अग्राह्य अखन, अखनि, एखेन, अखनी ठिमा, ठिना, ठमा जेकर, तेकर तिनकर। (वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य) ऐछ, अहि, ए।
२. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैकल्पिकतया अपनाओल जाय: भऽ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।
३. प्राचीन मैथिलीक ‘न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ‘न’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।
४. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।
५. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत: जैह, सैह, इएह, ओऐह, लैह तथा दैह।
६. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे ‘इ’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।
७. स्वतंत्र ह्रस्व ‘ए’ वा ‘य’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ‘ए’ वा ‘य’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।
८. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ‘य’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढैआ, विआह, वा धीया, अढैया, बियाह।
९. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव ‘ञ’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।
१०. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:- हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। ’मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ‘क’ क वैकल्पिक रूप ‘केर’ राखल जा सकैत अछि।
११. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।
१२. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।
१३. अर्द्ध ‘न’ ओ अर्द्ध ‘म’ क बदला अनुसार नहि लिखल जाय, किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ‘ङ’ , ‘ञ’, तथा ‘ण’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।
१४. हलंत चिह्न निअमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।
१५. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क’ लिखल जाय, हटा क’ नहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।
१६. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रापर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं।
१७. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।
१८. समस्त पद सटा क’ लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोडि क’ , हटा क’ नहि।
१९. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।
२०. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।
२१.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा' ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।
ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा "सुमन" ११/०८/७६
२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम २.१. उच्चारण निर्देश: (बोल्ड कएल रूप ग्राह्य):- दन्त न क उच्चारणमे दाँतमे जीह सटत- जेना बाजू नाम , मुदा ण क उच्चारणमे जीह मूर्धामे सटत (नै सटैए तँ उच्चारण दोष अछि)- जेना बाजू गणेश। तालव्य शमे जीह तालुसँ , षमे मूर्धासँ आ दन्त समे दाँतसँ सटत। निशाँ, सभ आ शोषण बाजि कऽ देखू। मैथिलीमे ष केँ वैदिक संस्कृत जकाँ ख सेहो उच्चरित कएल जाइत अछि, जेना वर्षा, दोष। य अनेको स्थानपर ज जकाँ उच्चरित होइत अछि आ ण ड जकाँ (यथा संयोग आ गणेश संजोग आ गड़ेस उच्चरित होइत अछि)। मैथिलीमे व क उच्चारण ब, श क उच्चारण स आ य क उच्चारण ज सेहो होइत अछि। ओहिना ह्रस्व इ बेशीकाल मैथिलीमे पहिने बाजल जाइत अछि कारण देवनागरीमे आ मिथिलाक्षरमे ह्रस्व इ अक्षरक पहिने लिखलो जाइत आ बाजलो जएबाक चाही। कारण जे हिन्दीमे एकर दोषपूर्ण उच्चारण होइत अछि (लिखल तँ पहिने जाइत अछि मुदा बाजल बादमे जाइत अछि), से शिक्षा पद्धतिक दोषक कारण हम सभ ओकर उच्चारण दोषपूर्ण ढंगसँ कऽ रहल छी। अछि- अ इ छ ऐछ (उच्चारण) छथि- छ इ थ – छैथ (उच्चारण) पहुँचि- प हुँ इ च (उच्चारण) आब अ आ इ ई ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ऐ सभ लेल मात्रा सेहो अछि, मुदा ऐमे ई ऐ ओ औ अं अः ऋ केँ संयुक्ताक्षर रूपमे गलत रूपमे प्रयुक्त आ उच्चरित कएल जाइत अछि। जेना ऋ केँ री रूपमे उच्चरित करब। आ देखियौ- ऐ लेल देखिऔ क प्रयोग अनुचित। मुदा देखिऐ लेल देखियै अनुचित। क् सँ ह् धरि अ सम्मिलित भेलासँ क सँ ह बनैत अछि, मुदा उच्चारण काल हलन्त युक्त शब्दक अन्तक उच्चारणक प्रवृत्ति बढल अछि, मुदा हम जखन मनोजमे ज् अन्तमे बजैत छी, तखनो पुरनका लोककेँ बजैत सुनबन्हि- मनोजऽ, वास्तवमे ओ अ युक्त ज् = ज बजै छथि। फेर ज्ञ अछि ज् आ ञ क संयुक्त मुदा गलत उच्चारण होइत अछि- ग्य। ओहिना क्ष अछि क् आ ष क संयुक्त मुदा उच्चारण होइत अछि छ। फेर श् आ र क संयुक्त अछि श्र ( जेना श्रमिक) आ स् आ र क संयुक्त अछि स्र (जेना मिस्र)। त्र भेल त+र । उच्चारणक ऑडियो फाइल विदेह आर्काइव http://www.videha.co.in/ पर उपलब्ध अछि। फेर केँ / सँ / पर पूर्व अक्षरसँ सटा कऽ लिखू मुदा तँ / कऽ हटा कऽ। ऐमे सँ मे पहिल सटा कऽ लिखू आ बादबला हटा कऽ। अंकक बाद टा लिखू सटा कऽ मुदा अन्य ठाम टा लिखू हटा कऽ– जेना छहटा मुदा सभ टा। फेर ६अ म सातम लिखू- छठम सातम नै। घरबलामे बला मुदा घरवालीमे वाली प्रयुक्त करू। रहए- रहै मुदा सकैए (उच्चारण सकै-ए)। मुदा कखनो काल रहए आ रहै मे अर्थ भिन्नता सेहो, जेना से कम्मो जगहमे पार्किंग करबाक अभ्यास रहै ओकरा। पुछलापर पता लागल जे ढुनढुन नाम्ना ई ड्राइवर कनाट प्लेसक पार्किंगमे काज करैत रहए। छलै, छलए मे सेहो ऐ तरहक भेल। छलए क उच्चारण छल-ए सेहो। संयोगने- (उच्चारण संजोगने) केँ/ कऽ केर- क ( केर क प्रयोग गद्यमे नै करू , पद्यमे कऽ सकै छी। ) क (जेना रामक) –रामक आ संगे (उच्चारण राम के / राम कऽ सेहो) सँ- सऽ (उच्चारण) चन्द्रबिन्दु आ अनुस्वार- अनुस्वारमे कंठ धरिक प्रयोग होइत अछि मुदा चन्द्रबिन्दुमे नै। चन्द्रबिन्दुमे कनेक एकारक सेहो उच्चारण होइत अछि- जेना रामसँ- (उच्चारण राम सऽ) रामकेँ- (उच्चारण राम कऽ/ राम के सेहो)। केँ जेना रामकेँ भेल हिन्दीक को (राम को)- राम को= रामकेँ क जेना रामक भेल हिन्दीक का ( राम का) राम का= रामक कऽ जेना जा कऽ भेल हिन्दीक कर ( जा कर) जा कर= जा कऽ सँ भेल हिन्दीक से (राम से) राम से= रामसँ सऽ , तऽ , त , केर (गद्यमे) एे चारू शब्द सबहक प्रयोग अवांछित। के दोसर अर्थेँ प्रयुक्त भऽ सकैए- जेना, के कहलक? विभक्ति “क”क बदला एकर प्रयोग अवांछित। नञि, नहि, नै, नइ, नँइ, नइँ, नइं ऐ सभक उच्चारण आ लेखन - नै त्त्व क बदलामे त्व जेना महत्वपूर्ण (महत्त्वपूर्ण नै) जतए अर्थ बदलि जाए ओतहि मात्र तीन अक्षरक संयुक्ताक्षरक प्रयोग उचित। सम्पति- उच्चारण स म्प इ त (सम्पत्ति नै- कारण सही उच्चारण आसानीसँ सम्भव नै)। मुदा सर्वोत्तम (सर्वोतम नै)। राष्ट्रिय (राष्ट्रीय नै) सकैए/ सकै (अर्थ परिवर्तन) पोछैले/ पोछै लेल/ पोछए लेल पोछैए/ पोछए/ (अर्थ परिवर्तन) पोछए/ पोछै ओ लोकनि ( हटा कऽ, ओ मे बिकारी नै) ओइ/ ओहि ओहिले/ ओहि लेल/ ओही लऽ जएबेँ/ बैसबेँ पँचभइयाँ देखियौक/ (देखिऔक नै- तहिना अ मे ह्रस्व आ दीर्घक मात्राक प्रयोग अनुचित) जकाँ / जेकाँ तँइ/ तैँ/ होएत / हएत नञि/ नहि/ नँइ/ नइँ/ नै सौँसे/ सौंसे बड / बडी (झोराओल) गाए (गाइ नहि), मुदा गाइक दूध (गाएक दूध नै।) रहलेँ/ पहिरतैँ हमहीं/ अहीं सब - सभ सबहक - सभहक धरि - तक गप- बात बूझब - समझब बुझलौं/ समझलौं/ बुझलहुँ - समझलहुँ हमरा आर - हम सभ आकि- आ कि सकैछ/ करैछ (गद्यमे प्रयोगक आवश्यकता नै) होइन/ होनि जाइन (जानि नै, जेना देल जाइन) मुदा जानि-बूझि (अर्थ परिव्र्तन) पइठ/ जाइठ आउ/ जाउ/ आऊ/ जाऊ मे, केँ, सँ, पर (शब्दसँ सटा कऽ) तँ कऽ धऽ दऽ (शब्दसँ हटा कऽ) मुदा दूटा वा बेसी विभक्ति संग रहलापर पहिल विभक्ति टाकेँ सटाऊ। जेना ऐमे सँ । एकटा , दूटा (मुदा कए टा) बिकारीक प्रयोग शब्दक अन्तमे, बीचमे अनावश्यक रूपेँ नै। आकारान्त आ अन्तमे अ क बाद बिकारीक प्रयोग नै (जेना दिअ , आ/ दिय’ , आ’, आ नै ) अपोस्ट्रोफीक प्रयोग बिकारीक बदलामे करब अनुचित आ मात्र फॉन्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक)- ओना बिकारीक संस्कृत रूप ऽ अवग्रह कहल जाइत अछि आ वर्तनी आ उच्चारण दुनू ठाम एकर लोप रहैत अछि/ रहि सकैत अछि (उच्चारणमे लोप रहिते अछि)। मुदा अपोस्ट्रोफी सेहो अंग्रेजीमे पसेसिव केसमे होइत अछि आ फ्रेंचमे शब्दमे जतए एकर प्रयोग होइत अछि जेना raison d’etre एतए सेहो एकर उच्चारण रैजौन डेटर होइत अछि, माने अपोस्ट्रॉफी अवकाश नै दैत अछि वरन जोडैत अछि, से एकर प्रयोग बिकारीक बदला देनाइ तकनीकी रूपेँ सेहो अनुचित)। अइमे, एहिमे/ ऐमे जइमे, जाहिमे एखन/ अखन/ अइखन केँ (के नहि) मे (अनुस्वार रहित) भऽ मे दऽ तँ (तऽ, त नै) सँ ( सऽ स नै) गाछ तर गाछ लग साँझ खन जो (जो go, करै जो do) तै/तइ जेना- तै दुआरे/ तइमे/ तइले जै/जइ जेना- जै कारण/ जइसँ/ जइले ऐ/अइ जेना- ऐ कारण/ ऐसँ/ अइले/ मुदा एकर एकटा खास प्रयोग- लालति कतेक दिनसँ कहैत रहैत अइ लै/लइ जेना लैसँ/ लइले/ लै दुआरे लहँ/ लौं गेलौं/ लेलौं/ लेलँह/ गेलहुँ/ लेलहुँ/ लेलँ जइ/ जाहि/ जै जहिठाम/ जाहिठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि/ अहि/ अइ (वाक्यक अंतमे ग्राह्य) / ऐ अइछ/ अछि/ ऐछ तइ/ तहि/ तै/ ताहि ओहि/ ओइ सीखि/ सीख जीवि/ जीवी/ जीब भलेहीं/ भलहिं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि/ नै/ नइ गइ/ गै छनि/ छन्हि ... समए शब्दक संग जखन कोनो विभक्ति जुटै छै तखन समै जना समैपर इत्यादि। असगरमे हृदए आ विभक्ति जुटने हृदे जना हृदेसँ, हृदेमे इत्यादि। जइ/ जाहि/ जै जहिठाम/ जाहिठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि/ अहि/ अइ/ ऐ अइछ/ अछि/ ऐछ तइ/ तहि/ तै/ ताहि ओहि/ ओइ सीखि/ सीख जीवि/ जीवी/ जीब भले/ भलेहीं/ भलहिं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि/ नै/ नइ गइ/ गै छनि/ छन्हि चुकल अछि/ गेल गछि २.२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम नीचाँक सूचीमे देल विकल्पमेसँ लैंगुएज एडीटर द्वारा कोन रूप चुनल जेबाक चाही: बोल्ड कएल रूप ग्राह्य: १.होयबला/ होबयबला/ होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला/ होयबाक/होबएबला /होएबाक २. आ’/आऽ आ ३. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ल’/लऽ/लय/लए ४. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए गेल ५. कर’ गेलाह/करऽ गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह ६. लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’/ ७. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करैबला/क’र’ बला / करैवाली ८. बला वला (पुरूष), वाली (स्त्री) ९ . आङ्ल आंग्ल १०. प्रायः प्रायह ११. दुःख दुख १ २. चलि गेल चल गेल/चैल गेल १३. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन १४. देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह १५. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि १६. चलैत/दैत चलति/दैति १७. एखनो अखनो १८. बढ़नि बढइन बढन्हि १९. ओ’/ओऽ(सर्वनाम) ओ २० . ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ २१. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ २२. जे जे’/जेऽ २३. ना-नुकुर ना-नुकर २४. केलन्हि/केलनि/कयलन्हि २५. तखनतँ/ तखन तँ २६. जा रहल/जाय रहल/जाए रहल २७. निकलय/निकलए लागल/ लगल बहराय/ बहराए लागल/ लगल निकल’/बहरै लागल २८. ओतय/ जतय जत’/ ओत’/ जतए/ ओतए २९. की फूरल जे कि फूरल जे ३०. जे जे’/जेऽ ३१. कूदि / यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद/ यादि (मोन) ३२. इहो/ ओहो ३३. हँसए/ हँसय हँसऽ ३४. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/ नौ वा दस ३५. सासु-ससुर सास-ससुर ३६. छह/ सात छ/छः/सात ३७. की की’/ कीऽ (दीर्घीकारान्तमे ऽ वर्जित) ३८. जबाब जवाब ३९. करएताह/ करेताह करयताह ४०. दलान दिशि दलान दिश/दलान दिस ४१ . गेलाह गएलाह/गयलाह ४२. किछु आर/ किछु और/ किछ आर ४३. जाइ छल/ जाइत छल जाति छल/जैत छल ४४. पहुँचि/ भेट जाइत छल/ भेट जाइ छलए पहुँच/ भेटि जाइत छल ४५. जबान (युवा)/ जवान(फौजी) ४६. लय/ लए क’/ कऽ/ लए कए / लऽ कऽ/ लऽ कए ४७. ल’/लऽ कय/ कए ४८. एखन / एखने / अखन / अखने ४९. अहींकेँ अहीँकेँ ५०. गहींर गहीँर ५१. धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए ५२. जेकाँ जेँकाँ/ जकाँ ५३. तहिना तेहिना ५४. एकर अकर ५५. बहिनउ बहनोइ ५६. बहिन बहिनि ५७. बहिन-बहिनोइ बहिन-बहनउ ५८. नहि/ नै ५९. करबा / करबाय/ करबाए ६०. तँ/ त ऽ तय/तए ६१. भैयारी मे छोट-भाए/भै/, जेठ-भाय/भाइ, ६२. गिनतीमे दू भाइ/भाए/भाँइ ६३. ई पोथी दू भाइक/ भाँइ/ भाए/ लेल। यावत जावत ६४. माय मै / माए मुदा माइक ममता ६५. देन्हि/ दइन दनि/ दएन्हि/ दयन्हि दन्हि/ दैन्हि ६६. द’/ दऽ/ दए ६७. ओ (संयोजक) ओऽ (सर्वनाम) ६८. तका कए तकाय तकाए ६९. पैरे (on foot) पएरे कएक/ कैक ७०. ताहुमे/ ताहूमे ७१. पुत्रीक ७२. बजा कय/ कए / कऽ ७३. बननाय/बननाइ ७४. कोला ७५. दिनुका दिनका ७६. ततहिसँ ७७. गरबओलन्हि/ गरबौलनि/ गरबेलन्हि/ गरबेलनि ७८. बालु बालू ७९. चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध) ८०. जे जे’ ८१ . से/ के से’/के’ ८२. एखुनका अखनुका ८३. भुमिहार भूमिहार ८४. सुग्गर / सुगरक/ सूगर ८५. झठहाक झटहाक ८६. छूबि ८७. करइयो/ओ करैयो ने देलक /करियौ-करइयौ ८८. पुबारि पुबाइ ८९. झगड़ा-झाँटी झगड़ा-झाँटि ९०. पएरे-पएरे पैरे-पैरे ९१. खेलएबाक ९२. खेलेबाक ९३. लगा ९४. होए- हो – होअए ९५. बुझल बूझल ९६. बूझल (संबोधन अर्थमे) ९७. यैह यएह / इएह/ सैह/ सएह ९८. तातिल ९९. अयनाय- अयनाइ/ अएनाइ/ एनाइ १००. निन्न- निन्द १०१. बिनु बिन १०२. जाए जाइ १०३. जाइ (in different sense)-last word of sentence १०४. छत पर आबि जाइ १०५. ने १०६. खेलाए (play) –खेलाइ १०७. शिकाइत- शिकायत १०८. ढप- ढ़प १०९ . पढ़- पढ ११०. कनिए/ कनिये कनिञे १११. राकस- राकश ११२. होए/ होय होइ ११३. अउरदा- औरदा ११४. बुझेलन्हि (different meaning- got understand) ११५. बुझएलन्हि/बुझेलनि/ बुझयलन्हि (understood himself) ११६. चलि- चल/ चलि गेल ११७. खधाइ- खधाय ११८. मोन पाड़लखिन्ह/ मोन पाड़लखिन/ मोन पारलखिन्ह ११९. कैक- कएक- कइएक १२०. लग ल’ग १२१. जरेनाइ १२२. जरौनाइ जरओनाइ- जरएनाइ/ जरेनाइ १२३. होइत १२४. गरबेलन्हि/ गरबेलनि गरबौलन्हि/ गरबौलनि १२५. चिखैत- (to test)चिखइत १२६. करइयो (willing to do) करैयो १२७. जेकरा- जकरा १२८. तकरा- तेकरा १२९. बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे १३०. करबयलहुँ/ करबएलहुँ/ करबेलहुँ करबेलौं १३१. हारिक (उच्चारण हाइरक) १३२. ओजन वजन आफसोच/ अफसोस कागत/ कागच/ कागज १३३. आधे भाग/ आध-भागे १३४. पिचा / पिचाय/पिचाए १३५. नञ/ ने १३६. बच्चा नञ (ने) पिचा जाय १३७. तखन ने (नञ) कहैत अछि। कहै/ सुनै/ देखै छल मुदा कहैत-कहैत/ सुनैत-सुनैत/ देखैत-देखैत १३८. कतेक गोटे/ कताक गोटे १३९. कमाइ-धमाइ/ कमाई- धमाई १४० . लग ल’ग १४१. खेलाइ (for playing) १४२. छथिन्ह/ छथिन १४३. होइत होइ १४४. क्यो कियो / केओ १४५. केश (hair) १४६. केस (court-case) १४७ . बननाइ/ बननाय/ बननाए १४८. जरेनाइ १४९. कुरसी कुर्सी १५०. चरचा चर्चा १५१. कर्म करम १५२. डुबाबए/ डुबाबै/ डुमाबै डुमाबय/ डुमाबए १५३. एखुनका/ अखुनका १५४. लए/ लिअए (वाक्यक अंतिम शब्द)- लऽ १५५. कएलक/ केलक १५६. गरमी गर्मी १५७ . वरदी वर्दी १५८. सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ १५९. एनाइ-गेनाइ १६०. तेना ने घेरलन्हि/ तेना ने घेरलनि १६१. नञि / नै १६२. डरो ड’रो १६३. कतहु/ कतौ कहीं १६४. उमरिगर-उमेरगर उमरगर १६५. भरिगर १६६. धोल/धोअल धोएल १६७. गप/गप्प १६८. के के’ १६९. दरबज्जा/ दरबजा १७०. ठाम १७१. धरि तक १७२. घूरि लौटि १७३. थोरबेक १७४. बड्ड १७५. तोँ/ तूँ १७६. तोँहि( पद्यमे ग्राह्य) १७७. तोँही / तोँहि १७८. करबाइए करबाइये १७९. एकेटा १८०. करितथि /करतथि १८१. पहुँचि/ पहुँच १८२. राखलन्हि रखलन्हि/ रखलनि १८३. लगलन्हि/ लगलनि लागलन्हि १८४. सुनि (उच्चारण सुइन) १८५. अछि (उच्चारण अइछ) १८६. एलथि गेलथि १८७. बितओने/ बितौने/ बितेने १८८. करबओलन्हि/ करबौलनि/ करेलखिन्ह/ करेलखिन १८९. करएलन्हि/ करेलनि १९०. आकि/ कि १९१. पहुँचि/ पहुँच १९२. बत्ती जराय/ जराए जरा (आगि लगा) १९३. से से’ १९४. हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए) १९५. फेल फैल १९६. फइल(spacious) फैल १९७. होयतन्हि/ होएतन्हि/ होएतनि/हेतनि/ हेतन्हि १९८. हाथ मटिआएब/ हाथ मटियाबय/हाथ मटियाएब १९९. फेका फेंका २००. देखाए देखा २०१. देखाबए २०२. सत्तरि सत्तर २०३. साहेब साहब २०४.गेलैन्ह/ गेलन्हि/ गेलनि २०५. हेबाक/ होएबाक २०६.केलो/ कएलहुँ/केलौं/ केलुँ २०७. किछु न किछु/ किछु ने किछु २०८.घुमेलहुँ/ घुमओलहुँ/ घुमेलौं २०९. एलाक/ अएलाक २१०. अः/ अह २११.लय/ लए (अर्थ-परिवर्त्तन) २१२.कनीक/ कनेक २१३.सबहक/ सभक २१४.मिलाऽ/ मिला २१५.कऽ/ क २१६.जाऽ/ जा २१७.आऽ/ आ २१८.भऽ /भ’ (’ फॉन्टक कमीक द्योतक) २१९.निअम/ नियम २२० .हेक्टेअर/ हेक्टेयर २२१.पहिल अक्षर ढ/ बादक/ बीचक ढ़ २२२.तहिं/तहिँ/ तञि/ तैं २२३.कहिं/ कहीं २२४.तँइ/ तैं / तइँ २२५.नँइ/ नइँ/ नञि/ नहि/नै २२६.है/ हए / एलीहेँ/ २२७.छञि/ छै/ छैक /छइ २२८.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २२९.आ (come)/ आऽ(conjunction) २३०. आ (conjunction)/ आऽ(come) २३१.कुनो/ कोनो, कोना/केना २३२.गेलैन्ह-गेलन्हि-गेलनि २३३.हेबाक- होएबाक २३४.केलौँ- कएलौँ-कएलहुँ/केलौं २३५.किछु न किछ- किछु ने किछु २३६.केहेन- केहन २३७.आऽ (come)-आ (conjunction-and)/आ। आब'-आब' /आबह-आबह २३८. हएत-हैत २३९.घुमेलहुँ-घुमएलहुँ- घुमेलाें २४०.एलाक- अएलाक २४१.होनि- होइन/ होन्हि/ २४२.ओ-राम ओ श्यामक बीच(conjunction), ओऽ कहलक (he said)/ओ २४३.की हए/ कोसी अएली हए/ की है। की हइ २४४.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २४५ .शामिल/ सामेल २४६.तैँ / तँए/ तञि/ तहिं २४७.जौं / ज्योँ/ जँ/ २४८.सभ/ सब २४९.सभक/ सबहक २५०.कहिं/ कहीं २५१.कुनो/ कोनो/ कोनहुँ/ २५२.फारकती भऽ गेल/ भए गेल/ भय गेल २५३.कोना/ केना/ कन्ना/कना २५४.अः/ अह २५५.जनै/ जनञ २५६.गेलनि/ गेलाह (अर्थ परिवर्तन) २५७.केलन्हि/ कएलन्हि/ केलनि/ २५८.लय/ लए/ लएह (अर्थ परिवर्तन) २५९.कनीक/ कनेक/कनी-मनी २६०.पठेलन्हि पठेलनि/ पठेलइन/ पपठओलन्हि/ पठबौलनि/ २६१.निअम/ नियम २६२.हेक्टेअर/ हेक्टेयर २६३.पहिल अक्षर रहने ढ/ बीचमे रहने ढ २६४.आकारान्तमे बिकारीक प्रयोग उचित नै/ अपोस्ट्रोफीक प्रयोग फान्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक ओकर बदला अवग्रह (बिकारी) क प्रयोग उचित २६५.केर (पद्यमे ग्राह्य) / -क/ कऽ/ के २६६.छैन्हि- छन्हि २६७.लगैए/ लगैये २६८.होएत/ हएत २६९.जाएत/ जएत/ २७०.आएत/ अएत/ आओत २७१ .खाएत/ खएत/ खैत २७२.पिअएबाक/ पिएबाक/पियेबाक २७३.शुरु/ शुरुह २७४.शुरुहे/ शुरुए २७५.अएताह/अओताह/ एताह/ औताह २७६.जाहि/ जाइ/ जइ/ जै/ २७७.जाइत/ जैतए/ जइतए २७८.आएल/ अएल २७९.कैक/ कएक २८०.आयल/ अएल/ आएल २८१. जाए/ जअए/ जए (लालति जाए लगलीह।) २८२. नुकएल/ नुकाएल २८३. कठुआएल/ कठुअएल २८४. ताहि/ तै/ तइ २८५. गायब/ गाएब/ गएब २८६. सकै/ सकए/ सकय २८७.सेरा/सरा/ सराए (भात सरा गेल) २८८.कहैत रही/देखैत रही/ कहैत छलौं/ कहै छलौं- अहिना चलैत/ पढैत (पढै-पढैत अर्थ कखनो काल परिवर्तित) - आर बुझै/ बुझैत (बुझै/ बुझै छी, मुदा बुझैत-बुझैत)/ सकैत/ सकै। करैत/ करै। दै/ दैत। छैक/ छै। बचलै/ बचलैक। रखबा/ रखबाक । बिनु/ बिन। रातिक/ रातुक बुझै आ बुझैत केर अपन-अपन जगहपर प्रयोग समीचीन अछि। बुझैत-बुझैत आब बुझलिऐ। हमहूँ बुझै छी। २८९. दुआरे/ द्वारे २९०.भेटि/ भेट/ भेँट २९१. खन/ खीन/ खुना (भोर खन/ भोर खीन) २९२.तक/ धरि २९३.गऽ/ गै (meaning different-जनबै गऽ) २९४.सऽ/ सँ (मुदा दऽ, लऽ) २९५.त्त्व,(तीन अक्षरक मेल बदला पुनरुक्तिक एक आ एकटा दोसरक उपयोग) आदिक बदला त्व आदि। महत्त्व/ महत्व/ कर्ता/ कर्त्ता आदिमे त्त संयुक्तक कोनो आवश्यकता मैथिलीमे नै अछि। वक्तव्य २९६.बेसी/ बेशी २९७.बाला/वाला बला/ वला (रहैबला) २९८ .वाली/ (बदलैवाली) २९९.वार्त्ता/ वार्ता ३००. अन्तर्राष्ट्रिय/ अन्तर्राष्ट्रीय ३०१. लेमए/ लेबए ३०२.लमछुरका, नमछुरका ३०२.लागै/ लगै ( भेटैत/ भेटै) ३०३.लागल/ लगल ३०४.हबा/ हवा ३०५.राखलक/ रखलक ३०६.आ (come)/ आ (and) ३०७. पश्चाताप/ पश्चात्ताप ३०८. ऽ केर व्यवहार शब्दक अन्तमे मात्र, यथासंभव बीचमे नै। ३०९.कहैत/ कहै ३१०. रहए (छल)/ रहै (छलै) (meaning different) ३११.तागति/ ताकति ३१२.खराप/ खराब ३१३.बोइन/ बोनि/ बोइनि ३१४.जाठि/ जाइठ ३१५.कागज/ कागच/ कागत ३१६.गिरै (meaning different- swallow)/ गिरए (खसए) ३१७.राष्ट्रिय/ राष्ट्रीय DATE-LIST (year- 2013-14) (१४२१ फसली साल) Marriage Days: Nov.2013- 18, 20, 24, 25, 28, 29 Dec.2013- 1, 4, 6, 8, 12, 13 January 2014- 19, 20, 22, 23, 24, 26, 31. Feb.2014- 3, 5, 6, 9, 10, 17, 19, 24, 26, 27. March 2014- 2, 3, 5, 7, 9. April 2014- 16, 17, 18, 20, 21, 23, 24. May 2014- 1, 2, 8, 9, 11, 12, 18, 19, 21, 25, 26, 28, 29, 30. June 2014- 4, 5, 8, 9, 13, 18, 22, 25. July 2014- 2, 3, 4, 6, 7. Upanayana Days: February 2014- 2, 4, 9, 10. March 2014- 3, 5, 11, 12. April 2014- 4, 9, 10. June 2014- 2, 8, 9. Dviragaman Din: November 2013- 18, 21, 22. December 2013- 4, 6, 8, 9, 12, 13. February 2014- 16, 17, 19, 20. March 2014- 2, 3, 5, 9, 10, 12. April 2014- 16, 17, 18, 20. May 2014- 1, 2, 9, 11, 12. Mundan Din: November 2013- 20, 22. December 2013- 9, 12, 13. January 2014- 16, 17. February 2014- 6, 10, 19, 20. March 2014- 5, 12. April 2014- 16. May 2014- 12, 30. June 2014- 2, 9, 30. FESTIVALS OF MITHILA (2013-14) Mauna Panchami-27 July Madhushravani- 9 August Nag Panchami- 11 August Raksha Bandhan- 21 Aug Krishnastami- 28 August Kushi Amavasya / Somvari Vrat- 5 September Hartalika Teej- 8 September ChauthChandra-8 September Vishwakarma Pooja- 17 September Anant Caturdashi- 18 Sep Pitri Paksha begins- 20 Sep Jimootavahan Vrata/ Jitia-27 Sep Matri Navami-28 Sep Kalashsthapan- 5 October Belnauti- 10 October Patrika Pravesh- 11 October Mahastami- 12 October Maha Navami - 13 October Vijaya Dashami- 14 October Kojagara- 18 Oct Dhanteras- 1 November Diyabati, shyama pooja-3 November Annakoota/ Govardhana Pooja-4 November Bhratridwitiya/ Chitragupta Pooja- 5 November Chhathi -8 November Sama Poojaarambh- 9 November Devotthan Ekadashi- 13 November ravivratarambh- 17 November Navanna parvan- 20 November KartikPoornima- Sama Visarjan- 2 December Vivaha Panchmi- 7 December Makara/ Teela Sankranti-14 Jan Naraknivaran chaturdashi- 29 January Basant Panchami/ Saraswati Pooja- 4 February Achla Saptmi- 6 February Mahashivaratri-27 February Holikadahan-Fagua-16 March Holi- 17 March Saptadora- 17 March Varuni Trayodashi-28 March Jurishital-15 April Ram Navami- 8 April Akshaya Tritiya-2 May Janaki Navami- 8 May Ravi Brat Ant- 11 May Vat Savitri-barasait- 28 May Ganga Dashhara-8 June Harivasar Vrata- 9 July Shree Guru Poornima-12 Jul VIDEHA ARCHIVE १.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक
विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक http://sites.google.com/a/videha.com/videha/ https://sites.google.com/a/videha.com/videha-archive-part-i/ https://sites.google.com/a/videha.com/videha-archive-part-ii/ २.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download http://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi ३.मैथिली ऑडियो संकलन Maithili Audio Downloads http://sites.google.com/a/videha.com/videha-audio ४.मैथिली वीडियोक संकलन Maithili Videos http://sites.google.com/a/videha.com/videha-video ५.मिथिला चित्रकला/ आधुनिक चित्रकला आ चित्र Mithila Painting/ Modern Art and Photos http://sites.google.com/a/videha.com/videha-paintings-photos/ "विदेह"क एहि सभ सहयोगी लिंकपर सेहो एक बेर जाउ। ६.विदेह मैथिली क्विज : http://videhaquiz.blogspot.com/ ७.विदेह मैथिली जालवृत्त एग्रीगेटर : http://videha-aggregator.blogspot.com/ ८.विदेह मैथिली साहित्य अंग्रेजीमे अनूदित http://madhubani-art.blogspot.com/ ९.विदेहक पूर्व-रूप "भालसरिक गाछ" : http://gajendrathakur.blogspot.com/ १०.विदेह इंडेक्स : http://videha123.blogspot.com/ ११.विदेह फाइल : http://videha123.wordpress.com/ १२. विदेह: सदेह : पहिल तिरहुता (मिथिला़क्षर) जालवृत्त (ब्लॉग) http://videha-sadeha.blogspot.com/ १३. विदेह:ब्रेल: मैथिली ब्रेलमे: पहिल बेर विदेह द्वारा http://videha-braille.blogspot.com/ १४.VIDEHA IST MAITHILI FORTNIGHTLY EJOURNAL ARCHIVE http://videha-archive.blogspot.com/ १५. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मैथिली पोथीक आर्काइव http://videha-pothi.blogspot.com/ १६. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ऑडियो आर्काइव http://videha-audio.blogspot.com/ १७. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका वीडियो आर्काइव http://videha-video.blogspot.com/ १८. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मिथिला चित्रकला, आधुनिक कला आ चित्रकला http://videha-paintings-photos.blogspot.com/ १९. मैथिल आर मिथिला (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त) http://maithilaurmithila.blogspot.com/ २०.श्रुति प्रकाशन http://www.shruti-publication.com/ २१.http://groups.google.com/group/videha २२.http://groups.yahoo.com/group/VIDEHA/ २३.गजेन्द्र ठाकुर इडेक्स http://gajendrathakur123.blogspot.com २४. नेना भुटका http://mangan-khabas.blogspot.com/ २५.विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट http://videha123radio.wordpress.com/ २६.Videha Radio २७. Join official Videha facebook group. २८. विदेह मैथिली नाट्य उत्सव http://maithili-drama.blogspot.com/ २९.समदिया http://esamaad.blogspot.com/ ३०. मैथिली फिल्म्स http://maithilifilms.blogspot.com/ ३१.अनचिन्हार आखर http://anchinharakharkolkata.blogspot.com/ ३२. मैथिली हाइकू http://maithili-haiku.blogspot.com/ ३३. मानक मैथिली http://manak-maithili.blogspot.com/ ३४. विहनि कथा http://vihanikatha.blogspot.in/ ३५. मैथिली कविता http://maithili-kavita.blogspot.in/ ३६. मैथिली कथा http://maithili-katha.blogspot.in/ ३७.मैथिली समालोचना http://maithili-samalochna.blogspot.in/ महत्त्वपूर्ण सूचना: The Maithili pdf books are AVAILABLE FOR free PDF DOWNLOAD AT
https://sites.google.com/a/videha.com/videha/ http://videha123.wordpress.com/ http://videha123.wordpress.com/about/ विदेह:सदेह:१: २: ३: ४:५:६:७:८:९:१० "विदेह"क प्रिंट संस्करण: विदेह-ई-पत्रिका (http://www.videha.co.in/) क चुनल रचना सम्मिलित। सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Details for purchase available at publishers's (print-version) site http://www.shruti-publication.com or you may write to shruti.publication@shruti-publication.com विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)२००४-१३. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतए लेखकक नाम नहि अछि ततए संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: शिव कुमार झा, राम विलास साहु आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। भाषा-सम्पादन: नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी आ रश्मि रेखा सिन्हा। सम्पादक-शोध-अन्वेषण: डा. जया वर्मा आ डा. राजीव कुमार वर्मा। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल आ प्रियंका झा। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। ’विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका अछि आ ऐमे मैथिली, संस्कृत आ अंग्रेजीमे मिथिला आ मैथिलीसँ संबंधित रचना प्रकाशित कएल जाइत अछि। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-13 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.com पर संपर्क करू। एहि साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल। सिद्धिरस्तु 81 वि दे ह विदेह Videha বিদেহ www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका‘विदेह'१४५ म अंक ०१ जनवरी २०१४ (वर्ष ७ मास ७३ अंक १४५) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA