VIDEHA — Issue 153 / अंक १५३

Publication: VIDEHA · Issue: 153
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ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' १५३ म अंक  ०१ मई २०१४ (वर्ष ७ मास ७७ अंक १५३) ऐ अंकमे अछि:- बैशाखमे दलानपर सन्दीप कुमार साफी समर्पण अपन पिता श्री सीताराम साफी आ माता श्रीमती सीता देवी केँ समर्पित। भाइजी आनन्द कुमार झा, नाटककार लेल। अनुक्रम आत्मकथा खण्ड कविता खण्ड विहनि कथा खण्ड लघुकथा खण्ड विचार बिन्दु खण्ड आत्मकथा खण्ड (मैथिलीमे दलित आत्मकथाक सर्वथा अभाव रहल अछि। सन्दीप कुमार साफीक आत्मकथा मिथिलाक साहित्य, समाज आ संस्कृतिकेँ हिलोरैत ओइ अभावक पूर्ति करैत अछि।- गजेन्द्र ठाकुर, सम्पादक, विदेह) आत्मकथा जीवन एगो संघर्ष होइत अछि, संघर्षमय होइत अछि। ऐ संघर्षमे कियो-कियो आगू निकलि जाइत अछि तँ कियो अप्पन जीवनमे बहुत पाछू छूटि जाइत अछि। ओही संघर्षमय दुनियाँमे एगो हम छी, जिनकर नाम अछि संदीप कुमार साफी माने किरण। स्कूलमे सन्दीप नामसँ चिन्हल जाइबला अओर गाममे सभ किरण नामसँ पहचानैए। ग्राम+पोस्ट मेंहथ, भाया- झंहझारपुर, जिला- मधुबनीक रहनिहार हमर जन्म निर्धन गरीब परिवारमे भेल। हम जातिक धोबी छी, हरिजन (दलित) छी। गाममे सभक कपड़ा धो कऽ माँ-बाबू हमरा सभक पालन-पोषण केने अछि। हम चारि भाइ-बहीन छी, जइमे हम सभसँ बड़का छी, तइसँ छोट हमर भाइ-बहीन सभ अछि। हमर जन्म ०७.०६.१९८४ ई. मे भेल। ओइ जमानामे सस्ता सभ किछु, तैयो हमरा सबहक भरन-पोषण झूर-झूरइतो चलए। अ-आ सँ कबीर कान तक हम सभ दुखीरामसँ पढ़लौं। किछु दिन बाद बाबूजी सरकारी स्कूलमे नाम लिखा देलक। सरकारी स्कूलमे पढ़ाइ चलै तँ ठीके-ठाक मुदा हम सभ ओतेक किछु बुझि नै पबिऐ। ओहेन गारजनो होसगर नै जे देखबितए जे की लिखलएँ, की सिखलएँ। मुदा धीरे-धीरे आगू बढ़लौं। छोटमे माए एकटा बकरी किनलक जे ओकरोसँ किछु रुपैया आमदनी हएत तँ कहुना गुजर-बसर हएत। थोड़ेक दिन बकरी सेहो चरेलौं अओर बकरी बेचि हमर माँ ओहीसँ एकटा बाछी लेलक जे ओइसँ दूधक आमदनी हएत आ ओइ पाइसँ अपन परिवार सुखीसँ गुजर करब। ई सभ काज करैत बाबूजी संगे लोकक ऐठाम कपड़ा पहुँचेनाइक सेहो काज करैत छलौं। पिछला पाँच दस सालमे जमाना बहुत आगू बढ़ि गेल। पहिले एते बोइन नै भेटैत छलै जेतेक अखुनका समएमे भेटैत अछि। पहिने एक मोटा कपड़ा धोइ छल हमर माँ-बाबू तँ गिरहस्त सभ पाँच सेर धान नै तँ दू किलो आँटा दैत छलै। कियो कपड़ा धुआइ तरे पाइयक आमदनी नै रहलासँ मजूरीमे दू-तीन किलो अल्लूए दऽ देलक। पहिने पाइ महग छलै आ अन्न-पाइन सस्ता छलै। गाममे सबहक माय-बाबू इस्कूल भेजै मुदा हम जाइ लोकक कपड़ा पहुँचाबऽ, तइयो सौँझका टेममे अंगनामे बोरा बिछा कऽ पढ़ैले बैसए हमर पिसियौत भाय राजू भैया, तखन हमहूँ पढ़ैले आबी तँ दू-कानसँ बीस कान तक सिखलौं। ओकरा बाद अप्पन गामक इस्कूलमे नाम लिखा देलक, हेडमास्टर छल पहिने कोइलखक यादवजी, हुनका कहि बाबू, जे एकरा कनी देखबै। किछु दिन अहिना समए कटल, चौथा-पचमामे बढ़ला बाद किताब पढ़ला किछु आबि गेल तँ गारजीयन कहलक जे चलि जा बौआ पीसा संगे, ओतै नेपालमे रहिहऽ। गामपर खर्चाक दिक्कत तँ हेबे करइए, से नै तँ ओतै काज-राज करिहऽ अओर ओतै रहिहऽ। पढ़ाइ-लिखाइ आब छोड़ऽ। पढ़ि-लिखि कऽ की हेतै। १९९४ ई. क समएमे हम चलि गेलौं नेपाल। ओतै दीदी संगे रही, सभ दिन कपड़ा धोइ अओर संगे पहुँचाबैले जाइ। अओर आबी तँ लकड़ी चुल्हापर भानस करी। भोरे तीन बजे उठी कपड़ा धोइले। ओइ समए हमर उमेर बुझू जे ११-१२ कऽ छलए। किछु दिन ओहू ठाम गुजारलौं। तकरा बाद हम फेर गाम एलौं। हमर बाबू कहलनि जे आब नै जा, किछु दिन पढ़ऽ। कमसँ कम मैट्रिको तक पढ़ि लेबऽ तँ कतौ ने कतौ सरकारी नोकरी भइये जेतऽ। हमरा जेतबे जुड़त ओतबेमे हम गुजर करब मुदा तूँ पढ़ऽ। तकरा बाद हम कोठिया इस्कूलमे नाम लिखेलौं। ओइ ठाम छठासँ किलास चलै छलै। फेर थोड़ेक दिन गामेमे रहि कऽ माल-जाल चरा कऽ हाइस्कूल तक गेलौं। मुदा समए एहेन आएल जे फेर हम पढ़ाइ छोड़ि पंजाब चलि गेलौं। ओइ समएमे हम छलौं नौमामे। गेलौं ओइ बास्ते जे हमरासँ छोट बहीन छल, घरक गारजन कहलक जे बौआ गाममे रहलासँ आब किछु नै हेतौ, से नै तँ चलि जा लोक सभ संगे बड़का कक्का लग चण्डीगढ़। कतौ नोकरी धरा देतऽ, कइहक हमर नाम जे बाबू कहलक यऽ। हमर कक्का बित्तन साफी जे बी.ए.क डिग्री प्राप्त केने छलए, वएह सोचि हमर बाबू हुनका लगमे पठौलनि जे ओकरा कनीक बुइध छै, कतौ नीक-नीक नोकरी पकड़ा देतै। मुदा हमरा लगमे कोनो सर्टिफिकेट नै रहए, से हमरा कतौ छोटो-मोटो काजपर नै राखए। कोनो औफिसोमे नै राखए जे ई तँ पढ़ल लिखल नै अछि, सभ दफतरमे से कहए। आखिरीमे काका एगो प्रेस आइरनक दोकान कऽ कहलक, एतै आइरन कर। नया आइरनक दोकान, कोइ ग्राहक आबै, कियो नै आबै। एक-दू महिनाक बाद काका हमरापर शक करए लागल जे ई पाइ कमाइ अइ मुदा हमरा नै दइए। हमरा मनमे बहुत दुख हुअए जे हम कतऽ आबि गेलौँ, खेनाइ खाइ लऽ जाइ तँ कहए जे दोकानक भाड़ा आब तोरे भरऽ पड़तऽ चाहे दोकान चलऽ या नै चलऽ। ई सभ सुनि मन व्याकुल भेल जे आब ऐठाम हमरा रहलासँ कोनो फाएदा नै हएत। आब एतऽसँ जाइए पड़त। ओही ठाम गामक कतेक लोक रहै छल, तेकरा कहि-सुनि हम कोठीमे काज करए लगलौं। एक महिना भेल तँ गाम जाइ कऽ भाड़ा भऽ गेल। एलौं काका लगमे जे हम गाम जा रहल छी। तँ काका कहलक, रुकि जा, हम टिकट बना दै छिअ। एक दू दिन रुकि जा। गामक लोक जाइत छै, तेकरा संगे हम गाम पठा देबऽ। तइ बिच हमरा संग एगो घटना भऽ गेल जे हमरा पएरमे आगि लागि गेल। हमरा पूरा पएरमे, पएरसँ एड़ीसँ जांघ तक झड़कि गेल। आब हम बड़का समस्यामे फँसि गेलौं। उ घाव हमरा तीन महिना तक घिघरी कटेलक। असगरे साइकिलसँ एक पएरे पाइडिल मारि कऽ ऊँच-नीच रस्तापर सँ जाइ छलौं दवाइ कराबैले चण्डीगढ़ शहरसँ दूर छै गाम धनास, ओइठाम। कम पाइमे डाक्टर दवाइ दै छलै। सप्तामे तीन बेर जाइ छलौं दवाइ कराबैले। जेहो रुपैया कोठीसँ कमा कऽ अनने छलौं सभ पाइ कक्काकेँ दऽ देलौं। एकर समाचार जखन हमर माँ आ बाबूकेँ पहुँचल तँ बहुत कानल जे कोहुना बौआ केकरोसँ पाइ लऽ कऽ तूँ गाम आबि जो। ओही ठाम छै बुधन अओर कोरैला, तेकरासँ पाइ लऽ कऽ गाम चलि आ। हम गामेपर ओकरा पाइ दऽ देबै। ओही समएमे हमर बोर्ड परीक्षाक फॉर्म भराइ छलए, यएह कातिक अगहन महिनामे हमरा केकरो द्वारा चिट्ठी समाद आएल जे जल्दी गाम आबऽ जे किछु दिन पइढ़ो लेबऽ अओर घाव से छुटि जेतऽ। हमर फॉर्म हमर संगी मनोज पासवान सभ भरि देलक। किछु बुझल ने सुझल, ने गणितक ज्ञान ने संस्कृतक ज्ञान। तैयो परीक्षा मधुबनीमे वाटसन स्कूलमे भेल सन २००० ई. मे, जखन दू महिना बाद रिजल्ट निकलल तखन मनमे जएह धुकधुकी छल सएह भेल। हम परीक्षा पास नै कऽ पेलौं। आब तँ अओर मोन दुखी भऽ गेल जे आब की कएल जाए। तकरा बाद कोइ ने कोइ कहलक जे संस्कृत बोर्ड सँ परीक्षा दहक। एक बेर बाबू तँ हमर मानलक मुदा माँ कहलक जे आब सभ पढ़ाइ-लिखाइ छोड़ऽ, चलि जा ममियौत भाए संगे बंगलोर। हम फेर बंगलोर चलि एलौं। ऐठाम काज भेटल खानाक केटरिंगमे, कुक सबहक कपड़ा धोइ कऽ काज भेटल। किछु दिन बाद गामपर सँ हमर विवाहक बातचीतक समाचार आएल जे तूँ गाम आबऽ। फरबरी-मार्चमे हम गाम गेलौं। बाबूजीकेँ कहलियनि जे विवाहमे जे दहेज देतऽ ओइ दहेजसँ अओर एक सालमे किछु रुपैया अओर लगा कऽ बहिनक कन्यादान सेहो कऽ लेब। किछु भाड़ा-बर्तन अओर ओइमे लगा देबै। ई सभ मजबूरी देख हमर विवाह २००२ मे भेल, पण्डौल गाममे, जइ गामक पड़ोसमे कनी हटि कऽ अछि भवानीपुर गाम, जइ ठाम महादेव उगना रूप धारण कऽ विद्यापतिकेँ दर्शन देने छलनि जे अखन मिथिलामे सुप्रसिद्ध अछि, कवि विद्यापति अओर उगना महादेव। हमर विवाहक पश्चात एक बेर फेर हम संस्कृत बोर्डसँ परीक्षा देलौं, अओर ओइमे हम द्वितीय श्रेणीसँ उत्तीर्ण भेलौं। हम ई परीक्षा केथाही-रामपट्टी स्कूलसँ देने छलौं २००५ मे। तेकरा बाद पुनः हम अपने गाम लगमे कॉलेज छल शिवनन्दन-नन्दकिशोर महाविद्यालय, भैरवस्थान ओइमे एडमिशन करा कऽ आइ.ए. मे, हम फेर आबि गेलौं बेंगलोर। तकरा बाद ओइ केटरिंगमे आदमी बढ़ि गेलासँ हमरा ओइठाम काज नै भेटल तँ हम फेर एतौ एकटा कोठीमे काज पकड़लौं अओर गाम आबि कऽ इण्टरमीडिएट परीक्षामे फेर शामिल भऽ गेलौं आ अहूमे सेकेण्ड डिवीजनसँ पास भेलौं, कोठीएमे समए बचए तँ पढ़बो करी, किताब गामसँ लऽ कऽ जाइ छलौं। संग-संग बहिनक कन्यादान सेहो भऽ गेल भगवतीक दयासँ। ओही विवाहमे किछु खर्चा आ कर्जा भऽ गेल बेसी। कोठीमे दू हजार रुपैया दिअए महिना, ओइमे घरक खर्चा अओर ओम्हर अपन पढ़ाइक परीक्षा फीस, पलसमे परिवारक सेहो खर्चा। फेर बी.ए. मे नाम लिखेलौं अओर फेर चलि गेलौं बंगलौर। हमर विषय छल आर्ट जे कोनो ट्यूशन बिना पढ़ि सकै छलौं। हमरा इण्टरमीडिएटमे हिन्दी विषयमे ज्यादा अंक आएल छल मुदा अपने नै रही गाममे तँ हमर संगी छल राकेश कुमार ठाकुर, लगैमे हजाम, वएह छल हमर फॉर्म भरनिहार, परीक्षा शुल्क जमा केनिहार, हुनका मैथिलीमे ज्यादा अंक एलै, ओइ वास्ते हमरो उ यएह ऑनर्स विषय रखबा देलक। गाम एलौं तँ मन किछु पछताइतो छल जे आबक जमानामे आर्टक पढ़ाइ कियो पढ़ै छै, मुदा मैथिलीक जखन नाम सुनलिऐ तखन मन गदगद भऽ गेल। हँ, मुदा किताब भेटल बहुत मेहनति कऽ कए। हर साल पाँच सएमे किताब खरीदऽ पड़ए, ओहूमे जेरोक्स पन्ना। तेकरा पढ़ि कऽ हम बी.ए. फर्स्ट क्लाससँ २०११ ई. मे पास केलौं ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटा, कामेश्वर नगर दरभंगासँ। ताऽत हमरा बालो बच्चा भेल। पढ़ाइ संग-संग एकरो सबहक देख-रेख केनाइ माय-बापक दायित्व होइ छै। तखन हम फेर गामसँ बेंगलोर आबि गेलौं। कतेक बेर पैराशुट रेजीमेंटमे बेंगलोरमे भर्तीमे बहालीमे गेलौं मुदा असफल रहलौं। ऐबेर गाममे एस.टी.ई.टी.बला परीक्षामे सेहो शामिल भेलौं मुदा उहो असफल रहल। आबि गेलौं बेंगलोर जे आब ओतेक कोनो नीक एजुकेशनो नै अछि जे कतौ नोकरी हएत, तैयो कोनो काजमे लागल छी। भगवतीक दया, आगू हुनका हाथमे छनि। हमरा दूटा बेटा अछि अओर एकटा बेटी, बड़का अछि राजकुमार साफी, छोट बेटा सागर कुमार साफी। तइसँ छोट अछि राज नन्दनी कुमारी। अखन ई सभ आंगनवाड़ी स्कूलमे पढ़ि रहल अछि। ओतेक पाइ अछि नै जे प्राइवेट स्कूलमे धीया-पुताकेँ पढ़ाएब, दिनोदिन महगाइ बढ़ले जाइत अछि। हम सभ बी.पी.एल. कोटिमे शामिल छी। धीरे-धीरे एतबो शिक्षा भेलाक बादो कोनो नोकरी नै भेटैए। लोक कहै छलए जे एतेक पढ़निहार बड़का अफसर होइत अछि मुदा हम सभ किछु नै कऽ पाबि रहल छी। हमरा संगीतसँ बेसी मिलान रहैत अछि। गीत गेनाइ हमरा बहुत नीक लगैत अछि। मैथिली होइ बा नेपाली बा हिन्दी, हम ओहू गीतकेँ गाबि सकै छी। कीर्तन-भजन केलौं अपने गामघरपर संगी-साथी संग। जीवन एगो घड़ीक सुइया होइत अछि, दिन भरि, राति भरि चलिते रहैए, कखनी बन्द भऽ जाएत किनको नै थाह अछि। हम अप्पन ऐ मैथिलीक माटि-पानिसँ जुड़ल हर एक बातक सम्मान करब। अप्पन भाषाकेँ ऊँच शिखरपर पहुँचेबाक प्रयास करब। हम मैथिल छी, मिथिलेमे रहब अओर पोरो साग तोड़ि कऽ गुजर करब। सादा छी सादा रहब। जय मिथिला, जय मिथिला धाम, प्रणाम। कविता खण्ड भकजोगनी भुकुर-भुकुर बत्ती बड़ै राइतक अन्हरियामे हाथ-हाथ नै सुझैए जेबाक अछि टोलपर कुक्कुर भुकैए झाउ-झाउ-झाउ साँझक बजैए छअ हाथमे नै अछि लाठी-ठेंगा नरहिया करैए सोर मैझला बाबा गबैए निर्गुण तमाकुलपर मारै चोट बौआ कनैए भगजोगनी लए बड़ैए चाहूँ ओर पकड़ रोउ, भुल्ला, होकवा ठहा-ठहै अन्हरियामे लुत्ती नेने माथपर नारक आँटी थरथराइ छी हम पछुआरमे रौदी भऽ गेल ओह, की पुछै छी समधि जे छल सब चौपट भऽ गेल सब गिरहस्तक खेत मुँह बाइब गेल खेतमे देखलौं दरारि फाटि गेल पानि बिन धान ओहिना सुखि गेल डोका सब कतरा घुसि गेल डकहर सब ओहिना उड़ि गेल आब ओ कहाँ धारक ओ रेती धीया-पुता ऐबेर की खेती ऐबेर तऽ नै अछि जनेरक आशा की जानि हएत की दशा अखाढ़ महिना किछु खेत सुखि जाइ कलयुगकेँ देखहीं रौ भाइ कहैछ हमरा सबहक माय जे चारि साल अहिना रौदी भऽ गेल डकही सन पोखरि सुखि गेल बड़का-बड़का पीपर सुखि गेल बेलक गाछमे बेलो नै भेल मालजाल सब पानि बिनु तरसए मेघसँ एको बेर पानि नै बरसए जटा-जटिन के गीत सब गाबए तैयो नै इन्द्र भगवान सब जागए डबरा-डबरीसँ बेङ सब भागए बौगुला सब टुकुर-टुकुर ताकए रबी-राइ मरहन्ना भेल सौंसे खेतमे केसौरक पंना भेल आबक दुलारू बेटा आबक दुलारू बेटा दूध भात नै खाए जतऽ देखए चुन-तमाकुल ओतऽ दौड़ल जाए कनी दय- दय- दय भोर-साँझ नै पढ़ए छौड़ा धऽ कऽ छिड़िआए कनियो किछु कहबै तऽ भुँइए ओंघराए माइयक बिगारू बेटा छाल्ही भात खाए इसकूल जाइ नामसँ ओकरा माथा दुखाए पहिरै लऽ चाही ओकरा जीन्स पेन्ट टीसट, दिन भरि अंगनामे एकोबेर ने टिकत उड़ल रहैए जी ओकरा टाएल-गुल्लीपर कखनो देखियौ ओइ खेत तऽ कखनो बान्हपर पढ़ैले चाही ओकरा कोपी कगजिया दुए दिनमे देत कोपी पिलसिन खिया आबक धीया-पुता बड्ड खच्चर बापक नाम पुछबै तऽ कहत मच्छड़ संस्कारक हीन भेल पाइयक चीन्ह भेल आवारा लुच्चा भीन भेल सपनामे देखलौं भाइ रौ सपनो कतौ सच भेलैए महीसक पीठपर कहूँ मंच होइए देखलियौ भरि राति नाच गोपीचन के अपने छी गुअरटोलीपर महीस चरैए धारऽ कातमे ओ कैतकी पूर्णिमाक राति छै माएनटलबला लाइट छै छअ कऽ हॉरन पीपर गाछपर बाजि रहल छै ओ जिलेबी कचरी मुरही गमछा के ओजरी बनओने छी रहि-रहि कऽ ढोल मिरदङपर मुरही के फक्का लगबै छी भोरे उठलौं महीस घरमे तऽ गोबरक चोथपर पड़ल छी कौआ कुचरैए पाहुन अबैए आइ कौआ कुचरैए हमर प्रीतम अबैए जखन हमर प्रीतम ऐता तखन तोरा हम बिस्कुट खुआएब बहुत आस लगौने छी कचक तीमन पकेने छी मन छल मारा माँछ आनितौं दुल्हाक मन हर्षित करितौं आइ अंगना नीपै छी दुआरि बहारै छी सँउसे टोल बिस्कुट चकलेटक हकार दै छी आबिहए गै लुखिया तोरो देबौ बिस्कुट आउर दालमोट पिआ लय आइ तरुआ तरब खमहरुआ अल्लू तिलकोर तरब भौजी ननदिकेँ फाउन करब हमरा लय नीक नीक साड़ी अनथिन आउर पर्स सेण्डील अनथिन पाँच दिन पहिने ई बात कहने रहथिन जूड़शीतल मिथिलाक पाबनि जूड़शीतल भोरे धीयापुताक माँथ तीतल ओम्हरसँ आबए बड़का भैया लोटामे भरने ठंढा पानि माथपर दैत जाइए काइन ओइ दिन बनबैए बड़ी पूरी आउर सतुआ पाकल बड़ी भीरीमे जाइए कठुआ भोरे सब स्नान ध्यान कऽ गोसाँइ लग गुड़ आउर चढ़ाबैए फेर बाइस पाबनि दिनसँ स्वर्गीय बाबा दादीकेँ पानिक कलसा चढ़ाबैए होली जेना सब जूड़शीतलमे मीट-माँउस सब खाइए ऐ पाबनिमे मुनिगा दाइलक आउर आमक टिकुलाक बहुत महत्व अछि अपन मिथिलामे ऐ चीजक साबिकेसँ बहुत स्नेह अछि आसकतिये गंगा दूर भोरे उठैए दातमैन करैए भांग पीबि भकुवाए रहैए अपने एको बेर खेतक आइरोपर ने जाए दिन भरि जनसँ टहल कराबए हइद घड़ी आक धुतहर पीस खाए खाली अइ दलानसँ ओइ दलान जाए सदखनि छकरी तास खेलाए ओही सबसँ, दिनभरि नहाइसँ नै फुरसति बेमाए फाटल अछि लेहू बहै अछि एगो गोली खाएब से एकोरती फुरसति नै बारीमे मुनिगा सोहरल अछि दूटा तोड़ि खाएब से टेम नै धीयापुता डेराइत रहैए काजे डरे पड़ाइत रहैए आसकतिक भरल बुढ़बा ई कतौ जाइतो नै अछि कहबै की कुछ कहबै तँ फनैक उठैए मारि करै लाए सनैक उठैए एक ठाम गेलौं बरियाती भाइ रौ एकठाम गेलौं बरियाती खा कऽ फूलि उठल हमर छाती पहिने देलकौ पेप्सी कोला पीब कऽ उठलौ पेटमे जौला चटे देलकौ बिगजी नास्ता ओइमे छेलौ बिस्कुट खस्ता तुरते एलौ तैरपातक चाह पीब कऽ मन कहलकौ बाह झट दऽ अनलक पान सुपारी जर्दा खा कऽ उड़ेलौं सब कियो गर्दा पाँच मिनट बाद बैसेलकौ भोजन पट्टी देख कऽ कुरियाए लगलौ कनपट्टी आब हम कोन पेटमे खाएब तैयो बैसलौं भोजनपर आकि अनलक अल्लू तरुआ आउर खमहाउर संगे आएल तरका पूरी पलेटमे बरहलाग कुरी आकि अनलक माँछक मूड़ा काँटक लगा देलिऐ बड़का कूरा नजरि पड़ल रसगुल्ला दिस खीच देलिऐ एक-डेढ़ सए पीस पिट्ठैपर आएल दही-नून सुरीक कऽ भेल पेट गुरुम धाँइ-धाँइ हाथ-मुँह सब धोलौं जेबीमे जनेउ सुपारी लेलौं सहटि कऽ गाड़ी सीटपर बैसलौं दिन भरि अन्न-पानि नै पीलौं हजमोलाके गोटी खेलौं बानरक माया पुँछपर जहिना बानरक माया रहैए पुँछपर तहिना माइयक माया रहैए बेटी आउर पुतपर जन्मसँ रहैए संगे-संग बियाह-दान बाद रहैए सब तंगे-तंग सबटा पीलक एके माइयऽ दूध नमहर भेला बाद बिसरि गेल दुख बेटी भेली अप्पन सासुर गेली बेटा अपनामे मारा-मारी केलक माइयक दूधमे घोरलक माँटि अपनामे लेलक घर-घरारी बाँटि अपन मइते जीअ लागल तारी दारू पीअ लागल केकरो कियो नै कहैबाल अनकरे गपे जीयैबाला माइ-बाप सब देख रहल अछि आँखिसँ ढप-ढप नोर बहै अछि बुढ़बा बुढ़ियाक सामर्थ घटि गेल बाजत की चुप्पे रहि गेल पंचनामा हँ तँ भैया आब तऽ अपना सब बुढ़ भेलौं झगरा झंझट खूब केलौं आब ने होइए मारि करी अपनामे नै सब कियो लड़ी धीयापुता सब नमहर भेल पहिनुका जुग आब नै रहि गेल सब कियो अपना-अपनापर भेल कमाइ-खटाइ सब बाहर गेल चल एक-दूटा पंचनामा बनाले पाँच गोटाकेँ आइ बैसाले घराड़ी सँ लऽ कऽ खेत तक बारीसँ लऽ कऽ डोरा तक सबहक कागज अलग बनाले जमीन सबहक रसीद कटाले अमीन आनि कऽ नपा जोखाले खेत आइरपर कतरा लगाले जे धीयापुतामे काल्हि झंझट नै होउ अपनामे सब मील कऽ रह कोनो बात छौ तऽ अपनामे कह माय-बापक बात सह मारैके मन तऽ सागमे हरदी नै गामघरमे देखल जाइए इस्त्रगनपर अत्याचार बढ़ैए काम-काजू जननी सब भेल काज करैत देख थाकि गेल दिन भरि घास-भुसा करैए सासु ननदिक बात सुनैए बच्चा सबहक नेरपन करैए तहूपर से भानस करैए अंगना घरक काज करैए मरद-पुरुख सभ कोढ़िया भेल साँझ-भोर पसीखाना गेल एक दिन कमाइले नै जाइए पाँच दिन बैस कऽ खाइए तहूपर से कानून बतियाइए नून-तेल घरमे आनि कऽ नै दय खाली नीक-निकुत खाए ने कहियो पूब-पश्चिम जाए ओ बेचारी फुट्टै कानए लोक सब मिल कऽ तना मारए मारैके मन घरवालीकेँ तऽ कहैए सागमे किए ने हरदी देलही ओ दिन बिसरि गेलही रौ भाइ रौ की हालचाल छौ ठीक-ठाक छौ ने दलानपर आइ बड़ चहल-पहल छौ देखै छियौ माहौल गरम छौउ आइ कोइ कुटुम अबै छौ की एह बाल्टीनक बाल्टीन शरबत घोराइ छौ कागजी नेबोके गमक आबै छौ भोर आइ आँखि लाल लगै छौ मुँह सेहो भभकि रहल छौ कनी टोलबैयोकेँ देखहिन हमहूँ छीयौ दोसे-महीम ओ दिन बिसरि गेलहिन रौ संगे-संग कबडी खेलेलौं खत्ता उपछि गरचुन्नी मारलौं पुआरमे पका कऽ ओकरा खाइ छेलौं अखैन बनि गेलाए बबाजी कहै छै आब नै किछ खाइ छी सौंसे भरि दिन झूठ बजै छाँए साधु भऽ कऽ ई की करै छाँए ऊपरसँ छाँए साधो तोरा मनमे लागल छौ कादो एको बेर केकरो नै पुछै छाँए तखन तोरा लय की साउन की भादो जे कियो माँछ खाए मुरा-पुँछ समेत से बैकुण्ठ जाय नाति-पुत समेत चल जे केलाए से ठीक केलाए तुलसी माला केँ धारण केलाए जँ माला तोड़लाय तऽ भगवान घरमे बारल जेमए रुसनाहैर यै गामवाली यै घुरि जाउ अहिना होइ छै अपनामे मारा-मारी झोंटा उजारी नै गै बहीन हम नै रहबौ आइ हम रेलमे कइटे मरबौ एकरा घरमे एक रत्ती चैन नै सब कहैए हमरा डाइन अइ एक तऽ हमर माए-बाप अभगलाहा जे घर बड़ भेल जरलाहा पेने मुंगरीए हमरा मारैए हम कोनो बैसल रहै छी गै माए गै, रौ बाप गतर-गतर कऽ हमरा फोड़लक घरसँ हमरा बाहर कऽ देलक हम ओकर आब बौह छिऐ जाबे नै भाएसँ पिटबेबै ताबे नै हम चाइनसँ रहबै नै तँ आइ कनैल पीस पी लेबै हे कनियाँ अहाँ एना नै कानू ई दुनियाँक रीत छिऐ से जानू झगड़ा सबकेँ ओहिना होइ छै एना कहूँ लोक जहर पिबै छै चलू-चलू गामपर छौड़ा कानैए बान्हपर की कहू हम बड़-कनियाँक झगड़ा पंच भेला लबरा घर ऊँच आ कान बुच हेयउ ओकरा ओतऽ जाएब हम कोन रस्ते जाएब ई कोन गाम छिऐ हुनकर नाम की छिऐ कियो कहबे केलक अछि ओ बड़ धनीक अछि दुआरिपर हाथी घोड़ा अछि ऊँच-ऊँच धानऽ बोरा अछि अहाँ हमरा पुछै छी तऽ सुनू कहै छी तऽ बैसू अहाँ, हम आबै छी यएह गामक नाम छी अहाँ बैसले रहि जाएब, हम अबिते रहि जाएब देखियौ ओकरा ओतऽ जे जाएब बुझियौ कुकुरेसँ कटाएब ओतऽ झबड़ी कुत्ता रहैए भरि दिन झाँउ-झाँउ भुकैत रहैए खाली नामे ओकर सुनबै अंगनामे गुरो-खुद्दी नै देखबै खाली नामेँ ऊँच आउर कान बुच हम सब बाजब की रहै छी चुप झगरा करै लय सन-सन करैए ठाढ़ हएत से जी पड़ैए ओकरासँ हम सब की लागब अपने अछि गामसँ बारल प्रतिष्ठा लय हम सब मरै छी ओकरामे अहाँ की भीरै छी जाउ जतैसँ आएल छी ओतै जाउ अपने घर नून रोटी खाउ सरलो भुन्ना तऽ रहुअक दुन्ना आबक छौरा सब बड सुकुमार भोरहरवामे ओकरा लागए गुमार काजऽ नाम सुनि लागए बोखार चोरी करै लए करय जोगार भरि दिन जीन्स पहीर छौक घुमए लेटा-लेटाकेँ चीलम चुमए अपने तऽ गेल मुदा पड़ोसियो लऽ कऽ गेल देहपर दीनक बारह बजैए फाइसनमे खाली चुर रहैए बापक बियाहमे फटफटिया देलकै बेच बिकीन कऽ ओकरो खेलकै नासेहि काल बिनासेइ बुद्धि चाउर सधलौ आब खाइए खुद्दी पोखरि दिस ओहिना नै जाएत मोटर साइकिलपर धाख जमाएत एकरे सभ सन गिरहत भेल खेतो बाड़ीसँ उबजा गेल आब ने ओहन मनुख देखाइए जे हर जोति कऽ खेती करैए हमहूँ सब उबजाबै छेलिऐ चारि-चारि कठाके तामै छेलिऐ साठि सालक हमहूँ भेलौं अखनो तक हम नै अकछेलौं रौ सरलो घुन्ना तऽ रहुअक दुन्ना हमरा जकाँ जखन हेमाँ तूँ की जानी की करमाए तूँ बाड़ीक पटुआ तीत जे कहबौ से तऽ करमाए नै फिजूल पाइ करमाए खर्चा कमाए तऽ पड़ै नै छौ हम तऽ बाप छियौ कहबे करबौ आब हम बुढ़ भेलौं ई राज पाट तोहर छियौ एखन तोहर सबहक जमाना छौ हमहूँ सब पढ़ै छेलिऐ एना नै लाट सहाएब बनलिऐ गामपर सब काज-राज सम्हारि कऽ बाबूके खेतक आइर-कोन बना कऽ टेमपर स्कूल सेहो जाइ छेलिऐ करै नै छेलिऐ एको रत्ती भूल पाएरमे चप्पल नै पीठपर बैग नै जाइ छेलिऐ कलमे-आइरे-धुरे पढ़ैले हाथमे सबटा किताब कोपी पजीयओने पानिमे भिजैत रौदमे तपैत संघर्षमय शिक्षा पाबै छेलिऐ नै छल होस्टल नै छल कोचिंग पिपरऽ गाछ लग पढ़ै छेलिऐ हमरा ओतेक तऽ पाइ नै अछि जे नीक स्कूलमे पढ़ेबौ तोरा हम सब कहाँ पढ़लिऐ पब्लिक स्कूलमे तैयो धुरझार अंग्रेजी पढ़ै छिऐ आइ-काल्हि एगो ई धंधा भऽ गेल गाँव-गाँवमे प्राइवेट इस्कूल खुइल गेल भुसकोलहो सब मास्टर बनि गेल हम तऽ एतबे कहबौ जे गामेमे पढ़ मुदा तूँ कहमय जे मधुबनीमे पढ़ हम तऽ यएह कहबौ जे बाड़ीक पटुआ तीत जतेकके बौउह नै ओतेकके लहठी समधि एकटा भैंस लेबाक अछि चलू लऽ अबै छी लोफा हाट सऽ अहाँ तऽ बुझै-सुझै छिऐ एकटा खुटापर मालोजाल रहनाइ छै जरूरी बाल बोध सब दुध लय रहैए बेल्ला भेल गोबर करसी के हएत सुविधा पाहुन पड़कलए दुध ताकऽ पड़ैए गुरा-भुसा जे अनका दै छिऐ से अपने खाएत ओहुना दुध अखुनका जमानामे महगसँ आसमान छुने जाइए कीन कऽ एतेक खाएब अहाँ तऽ भैंसक पैकार छी बहुत दिनसँ आइ-काइ करै छी जे एकटा महीस लेब बेटा-पुतौह बाहरे रहैए गामपर असगर बैसल नीक नै लागैए अहूमे तऽ लागल रहब दूध बेच कऽ मरोमशालाक तऽ पाइ हएत जरबै लय चिपरी-गोइठा तऽ हएत अछाए समधि, महिसक खोराक तऽ बुझले अछि ने एक टाल नार पुआर चाही ३ महिनामे ढक कऽ ढक भुसा खाएत आउर भोरे पोखरिमे नहाएत ओकर गोबर गोत छुबऽ पड़त दिन-राति मेहनति करऽ पड़त आ महिसक दाम चालीस हजार अछि अखन उहोमे चारि बियान महीस के बाप रे बाप ओतेक मे हम नै सकब छोड़ू नै लेब जतेक के बौउह नै ओतेक के लहठी मन लगले रहि गेल मन छल एगो जमीन किनितौं चारूकात जमीन घेरितौं ओइमे एगो फ्लैट बान्हितौं जीप मोटरकार किनितौं नोकर-चाकर दरबान रखितौं ओइमे स्वीमिंग पुल बनैतौं सभदिन ओइमे स्नान करितौं बड़का हम बिजनेस करितौं हवाइ जहाजपर से चढ़ितौं बिजनेसमे अप्पन नाम करितौं मिथिलाक आगू नाम करितौं हम मिथिलाक वासी छी मरैतखीन रसगुल्ला खाएब जवानसे बुढ़ भेलौं बिगहा-बिगहा हम किनलौं रती-रती कऽ हम जोड़लौं जौ-खुद्दी खाके खेत किनलौं मालदह कलकतिया आम रोपलौं बाँसक बिटक ई तऽ नै अछि पोखरि-झाँखड़ि ई तऽ नै अछि सब पोखरिमे रौह नेन मारा अछि दुरापर जोड़ा-बड़द टाएर अछि धान-चाउरके कमीए नै अछि तीनटा बेटा पुतौह भेल अपनामे सब भीन भऽ गेल नाति-पोता सब पढ़ै-लिखैए के देखैए बुढ़बाकेँ सुतल रहै छी, दबकल रहै छी हम असगरे दलानमे असगर खाइ छी दोसर बेर के पुछैए रातिकेँ रहै छी अनहारमे एकटा खाट आ एकटा सुजनी राति भरि मच्छर खूब कटैए एकरती डिबियामे तेल दैए कुछ देर बरि कऽ ऊहो बुताइए लालटेन लाय मन लगले यए जूता लय मन तरसैए खोंखीसँ दम फुलैए दवाइ के करबैए गोदान कालमे बेटा पुछैए बाबू की रसगुल्ला खाएब प्राण जाइए छुटि मुँहक बात मुँहे रहि गेल जय मिथिला जय मिथिलेश जय वैदेही जय मैथिल माघक शीतलहरी बाप रे बाप होइए प्राण चलि जाएत मन नै होइए ओछैनसँ उठी जवानक ई हाल तँ बूढ़क की भरि माघ पिअब सभ की पाइनो बरफ भऽ गेल दिन भरि धुइनसँ आँखि नै सुजहाइए ओछाइ-बिछाइ सभ गेल तीति सन-सन-सन-सन पछवा बहैए केरा पातसँ बुन्नी खसैए हाथ पएर सभ सुन्न भऽ गेल लोचना करए बाँझीक धधरा सुटकल रहैए दलानमे बगरा एक महिनासँ रौद नै भेल आलू गाछ सभ गलि गेल बाप रे बाप, होइए प्राण चलि जाएत रसगुल्लाक जबार नोत दै छी यौ नोत दै छी रसगुल्ला जबारक नोत दै छी हम आएल छी महरैल गामसँ समुच्चा गामकेँ नोत दै छी मुखिया जी यौ लखन काका आइ सौँझुका हम नोत दै छी पियोर छेनासँ बनल रसगुल्ला काशी भाइ यौ नोत दै छी पहिल तोरमे पहुँचब सभ गोटए सबेरे सकाल कऽ नोत दै छी पूरी तरकारी अओर देब तखन तइपर सँ देब रसगुल्ला तोपि नोत दै छी यौ नोत दै छी रसगुल्ला जबारक नोत दै छी बसंत पंचमी सरस्वती पूजा सभ साल जेना हरेक सालमे आबैए विद्यार्थी सभ हर्ष उमंगसँ माता लग शीस झुकाबैए माघ मासक शुक्ल पक्षमे ई सुन्दर पाबैन आबैए हरियर-हरियर तीसी-मौसरी सरिसौ कऽ फूल फुलाइए जोर-जोरसँ पछबा हबा धऽ कऽ गर्दा उड़ाबैए देखियौ आम आ देखियौ महुवा सभ मिल सुगन्ध सुंगहाबैए गाछमे हरियर नवका पत्ता रौदामे चमक देखाबैए नहू-नहू बहए पुरबा हाबा होलीक गीत सुनाबैए धिया-पुता सभ बैठ आइरपर गहुम गोइढ़लाक ओरहा पकाबैए बसन्त पंचमी सभ लोककेँ अपनामे मिलाबैए कातिकक पूर्णिमा जेबै देखैले मेला कमलाके सभ सालमे मेला लागए जोर नहाइले जाएब भोरे भोर हेतै ओही बाउलपर कुस्ती खाएब तोड़ि कऽ कुसियार माए बहीन सभ खेलए सामा चकेवा भसबऽ जाए ओइ किनार चुगलाकेँ चूड़ा दही खुआ कऽ लेवान दिन चूड़ा कुटाए उक्खड़िमे। जोतलाहा खेतमे भसाबए सामा चकेवाकेँ पूर्णिमा नहाइले जाइ कमलामे मेला लागैए दुनू पारमे नाच तमाशा हुअए अल्हा रूदल बिकाए झिल्ली मुरही मिथिलामे माए बहीनके भाइयक मानल जाए ई पाबनि सालमे एक बेर नाम लिअए भाइक सभ बहीन हमर भइया रहए जुड़ाएल। गामक इनार चलए मिलान सभ लोककेँ भरै छलौं एक ठाम पानि अपनामे रहै छलए बाजा भूकी रहै छलौं सभ मिलि-जुलि कऽ घर-घरमे आब भेल कल लोको सभ भेल अल कल खीचि ने पाबए इनारक रस्सी ने रहल टोलमे एकता के राखए पोखरि इनारक सेखता साविकक देनके होइए अभास कोनाकेँ बुझाएब पियास विलुप्त भऽ रहल अछि इनार कतऽ गेल घैलाक पानि ओही ठाम करै छलौं स्नान रहै छल गामक शान देवी-देवता रहै छल प्रसन्न मन रहै छल शुद्ध रखै छलौं शुद्ध-अशुद्धक मान। अप्पन गाँव अप्पन गाँव अछि साफ लग-लगमे कलम गाछ स्वच्छ हवाक सुगन्ध सुंगहाएत बाट बटोहीक मन बहलाएत हँटि-हँटि कऽ पोखरि इनार स्नान करै छी ओइ किनार महारपर सुन्दर पाखैर गाछ कौआ मएना करए किलोल भोरे देखै छी कौल्ह चलैए रस-गुड़क सुगन्ध आबैए हरियर-हरियर गहुमऽ खेत कालसँ बहैए कमला रेत गाँवसँ बनल शहर बजार खूब बनए पापड़ अचार गामक छी ई रीति-रिवाज सभक करए आदर सत्कार बैशाखमे दलानपर आउ यौ यार, खेलाइ छी तास बैस कऽ अखन करब की चलू करै छी टेम पास बेर झुकतै तँ जाएब करैले घास चण्डाल सन रौद लगैए चारि बाजऽ जा रहल अछि लगैए अखन एक बाजल अछि महींस खोलब ओइ बेरमे पोखरि लऽ जाएब नहाबैले सुतलोमे गरमसँ नीक नै लागए खाटोमे उड़ीस करैए कछर-मछरसँ नीन्द नै अबैए पुरबा हवा सेहो पेट फुलाबए घामसँ देखू गंजी भीज गेल कौआ डाढ़िपर लोल बबैए मेना जामुनपर झगड़ा करैए बगड़ा दलानपर ची-चू-ची-चू गीत सुनाबए एहन गरम नै देखलौं कहियो रातिकेँ मच्छड़ दिनकेँ माँछी तंग करैए आउ यौ यार खेलाइ छी तास सेवा मन होइए करितौं बेटाक बियाह पुतहु लेल हिक गरल अछि काज करैत काल आब देह थाकि गेल भानस करैक शक्ति नै अछि बेटी भेली, अप्पन सासुर गेली असगर अंगनामे नीक नै लगैए होइत पुतहु तँ एक हाथ सेवा करितए मुदा एगो बातक डर लगैए पुतहुक चर्चा देख टोलमे अही सेवासँ चित्त हराइए पढ़ल-लिखल कनियाँ सभ गेल आदर सत्कार सभ बिसरि गेल आठ बजेमे, सुति कऽ उठए चुल्हा अंगना सभ, अहिना पड़ल-ए के करए ससुर-भैंसुरक परदा रीत-रेवाजक उड़ाबए गरदा एकर देखसी करए, सभ कनियाँ ई नै लागए ननदि, साउसकेँ बढ़ियाँ ऐ पढ़ल लिखलसँ घास-छिलनी नीक मन होइए करितौं बेटाक बिआह पुतहु लेल हिक गरल अछि। वर बिकाय लगनमे वरक रेट नै पुछू यौ बाबू मारा माँछक जेना दाम बढ़ैए कनीको पढ़ल-लिखल रहल तँ बेटाबला अप्पन मोँछ सीटैए लड़कीबलाक खेत बिकाइए देखू जमाना ताल ठोकैए दुल्हाक डिमाण्ड अछि, पाइ सन करी जमा लिखल-पढ़लमे सभसँ तेज पँचमामे पाँच बेर अठमामे आठ बेर दसमामे दस बेर लड़का फेल एहनो लड़का लगनमे बिक गेल वरक रेट नै पुछू यौ बाबू मारा माँछ जेना दाम बढ़ैए। विहनि कथा खण्ड अन्ध विश्वास काकी गोर लगै छियनि, बैसथु। -के, उड़ीसावाली कनियाँ। -हँ काकी, निके रहै छथि। -की ठीक रहब कनियाँ, तैयो ठीक छी। बुढ़-पुरान भेलौं, हमरा सभकेँ तँ ई पुरबा हवा जान लेबऽ लगैए। सौँसे डाँर ठेहुन बातरससँ कनकनाइए। कोनो दवाइ नै काज करैए। -आबथु, बैसथु। एक तँ कतेक दिन पर भेँट भेलथि यऽ। -नै कनियाँ। आँगनमे बड्ड काज छै। आइँ यै कनियाँ, भुखनो बच्चा आएल अछि? -हँ काकी, मरनीक बाबुओ एलखिन। -कनियाँ बच्चा सभ सेहो एलनि। -नै काकी। अखैन बच्चा सभक गरमीक परीक्षा चलै छै, तइ दुआरे ओकरा सभकेँ नै अनलिऐ। आब गर्मी छुट्टीमे सभ आम लिच्ची खाइ लए अबै छन्हि। -आँइ यै कनियाँ, मरनी तँ आब बियाहैवाली भऽ गेल हएत। -हँ काकी, ओकरेले कतौ लड़का ताकै गेल छथिन। काकी माथ केहेन लागै छनि। आबथु कनी तेल दऽ दै छियनि। -नै कनियाँ। आइ जाए दिअ, आउर दोसरो दिन आएब। -माथ फहराइ छनि तेल बिनु। -से तँ ठीके कहै छी कनियाँ। हमर रुसना डिल्लीसँ हमरा लए एगो नवरतन तेल ठंढा बला, पाँचटा साबुन नहाइ बला, दू किलो सर्फ पठा देलक, जे माय लगा आ जे किछु घटतौ तँ फोन करिहिएँ। ने, अखैन कनियाँ रवि रायकेँ समय छै, भूसा गर्दा सभ माथमे भरि जाइत छै। बड्ड गपशप केलौं कनियाँ, आब कनी जाए दिअ कनियाँ। -ठीक छै काकी जाथु। हमहूँ भानस करऽ जाइ छी काकी। काकी हिनका भनसा भऽ गेलनि। -नै कनियाँ। हमहूँ जाइ छी। कनीक पछुआरमे सँ भोरे अरिकौंछ तोड़लिऐ, तकरे चक्का बना कऽ झोरेबै, कनीक आमिल दऽ कऽ। तेहन हमर पुतोहु भेल कनियाँ जे अखैन तक दालि तरकारी नून, से नून-जाउर बना दैए, कहियो अनूने। कहियो अन तीमन नीक नै बनबैए। कनियाँ अहाँकेँ नीक लगैए अरिकौंछ। -हँ काकी, हमरा सबकेँ ई कतऽ पाबी। -ठीक छै तऽ हम अपना छोटा नातिन दिया पठा देब बाटीमे। जाइ छी कनियाँ। …………………………….. -बड़की दीदी, बड्ड गप्प सरक्का चलै छलै रुसना माएसँ। की बात छै, अहूँकेँ गुण जादू सिखबाक अछि की? -नै छोटकी। तोरा सभकेँ यएह पपियाहा मन सभ दिन मन खराप राखै छौ। -नै यै दीदी। एको महिना नै भेलै, सुगौनावालीकेँ देहपर पाँचटा देवी पठौने छलै। कतेक ओझा गुणी एलै, तखन जा कऽ कनीक अन्न-पानि खाए लगलैए। सभ कहै छै हकल डाइन छै। छोटका बेटाकेँ मारि कऽ सिखलकैए। -छोड़ ई सभ बात। तूँ सभ गामघरमे रहि कऽ अहिना सबकेँ डाइन आउर जोगिन कहै छिहिन। ई सभ अन्धविश्वास छिऐ। समाजमे ईएह सभ बातसँ झगड़ा होइत रहैए आउर एक दोसरकेँ डाइन कहैए। साउस पुतोहु -कनियाँ, घरमे छी यै? -की भेलनि माए? -आँइ यै छौँकावाली, एतेक निचेनसँ सुतै किए छी यै? दुपहरक काज-राज अहिना पड़ल छै। कनी महिसोकेँ पानि देखा ने दियौ, पियासल महीस खुट्टा तोड़ि रहल छै। एतेक कहूँ मनुख सुतए। कतेक नीन आबैए अहाँकेँ यै। -तँ की करू, सुतबो नै करू। भरि दिन खटैत-खटैत हाथ-पएर कारी-झामर भऽ गेल। ओम्हर चिलका तंग करए, इम्हर भानससँ तंग। हिनका होइ छै, हम भरि दिन खटैते रही, हमरासँ नै हएत महीसकेँ पानि पिआए। हमर माथ बड़ जोर दुखाइए, डाँर-पिट्ठी सेहो तोड़ने जाइए। एखन हमरासँ किछु नै हएत कएल। -आँइ यै, एतेक कहूँ पुतोहु बानसब्बर हुअए। सुनियौ यै ढुकरीक माए। अहाँ सभ कहबै जे साउसक दोख। हम की बैसल छी। भरि दिन गोरहा पाथैत-पाथैत दुपहर भऽ गेल, एक टाएर गोबर छल हन। एखन तक पूजो नै केलौं। कखैन खाएब कोनो ठीक नै। ऐ महरानीकेँ देखियौ जे हमरेपर हाथ-पएर चमकाबैए। बड़का छोटका कऽ आइयक कनियाँ कोनो माने-मतलबे नै राखैए। अपन जएह मोन भेल वएह केलक। के खेनहारकेँ देखैए, जे ससुर भैंसुर खेलक कि नै, अपन पेट भरि गेल, दोसर आब जेना रहए। अपन भूख तँ चुल्हा फूक, दोसरक भूख तँ माथा दुख। भगवान हमरे बेटाक कपाड़मे ई नसिनियाँ बथाए छल। जाइ छी नहाइ लए, एकरासँ मुँह लगाएब तँ अपने मुँह खराब हएत। मुदा एकरा जाबे तक बेटासँ पिटबाएब नै ताबे तक हमहूँ सुख-चैनसँ नै रहब। हमहूँ ऐ कनसिनियाँकेँ देखा कऽ रहब, जँ बेटा वशमे रहत तँ ऐ जनानीकेँ केहन होइ छै। साउससँ जवाब-सवाल केनाइ सभ हम देखा देबै। महीस जेना नाथि देबै। पुतोहु- देखियौ यै मकरा काकी। हम सभ सुनि रहल छी। साउस कहूँ पुतोहुपर एतेक आगि-बाउल ढारै अइ यै। खिखरी माए, हमर साउस पहिने पुतोहु नै छलै की, जे पुतोहुकेँ एना सताबै छै। जँ ई बुढ़िया बेटासँ हमरा मारि खिया देलकै तँ घरमे यएह रहत कि हमहीं रहब। झोँटा-केस हम नै उखाड़ि लेलिऐ तँ फेर की। साउस- यै, सुनियौ यै टोल-पड़ोसक लोक सभ। ऐ भत खोखरीकेँ हम कोन आगि-बाउल ढारि देलिऐ जे ई हमर झोटा-केस उखारत। कोनो हमरा कियो देखनाहर नै अए। आइ आबऽ दही बुढ़बाकेँ, नै किछु कहलकौ तँ फेर की। पुतोहु-हाँ-हाँ, देखब ने अहाँ हमर की बिगाड़ि लेब। जँ बेसी ओम्हर-आम्हर करब तँ हम छोटका भाएकेँ फोन कऽ के नैहरे चलि जाएब। तखन अहाँ अहिना असगरे चुल्हा फुकैत रहब। कहिया मरतै ई बुढ़िया, हमरा जानपर अछि। सगुन ठकोकाका- हर्षित बाबू। एना माथपर हाथ धेलासँ काज-राज चलैबला नै अछि। किएक तँ अपन मिथिलामे भऽ एलैए जे परम्परा, तेकरा तँ निभाबैए पड़त। किएक तँ अखुनका जइ मनसूबे चलि रहल अछि, तेकरा संग हमरा लोकनिकेँ चलऽ पड़त ने। अच्छा, खएर बात अपन समाजमे गरीब होइए वा धनिक, मुदा बेटी विवाह कोनो धरानीए भइए जाइत अछि। तइ लेल घबड़ेबाक कोनो बात नै। सभ बाबा उगना ठीक कऽ देथिन। ठीक छै तँ जाइ छी हर्षित बाबू, ठीक छै। हर्षित बाबू- आ ठको काका। हाँ कहू, की कहै छी। देखियौ जे चढ़ैत शुद्धमे बेटीक कन्यादान कऽ के हम सभ दिल्ली जल्दी जाए चाहै छी। तइ दुआरे काका हम अहाँकेँ सलाह लिअ लए आएल छी। जल्दीसँ कतौ भाँज लगेबै। ठकोकाका- हर्षित बाबू। ओना हम सखबारमे एगो लड़का देखने छलिऐ, हमरा बड पसन्द आएल। लड़का बंगलोरमे इन्जीनियरिंगक तैयारी करैत अछि। बुझबामे आएल, लड़का नीक गोत्रसँ संलग्न अछि। भाव-विचार बड मधुर आ स्वभाविक सेहो छै। मुदा हर्षित बाबू, लड़का कऽ माय-बाप नै अछि, ओकरा मामा-मामी आ नाना-नानी पालने अछि। हर्षित बाबू- ठकोकाका, जँ अहाँ ओ भाँज लगबितौँ तखन तँ बुझु जे सभ ठीके-ठाक रहितै। ठकोकाका- ओ लड़का बुझु जे अहाँकेँ सेट भऽ गेल। सगुन ठीक अछि अहाँक यौ हर्षित बाबू। हर्षित बाबू- शुभ लगनमे देरी की। जे नगद लेता अओर लड़का जे लेतहिन, हम सभ देबनि दै लेल। चैनकेँ गलामे देबनि, मोटर साइकिल देबनि। मुदा ओ लड़का हमरा बड पसन्द आएल। ठकोकका, अहाँ जल्दीसँ ई चक्कर चलाउ। हमर कन्यादान भऽ जाए। जल्दीसँ सगुन लऽ कऽ जाउ, गोर लगै छी। लघुकथा खण्ड ओगरबाह बड़ दिन भऽ गेल भात खेला। मरुआ रोटी खाइके आब मन नै होइए। रोटी चिबाबैमे आब सकै नै छी। दालिमे जँ लोंगिया मेरचाइ नै दैत अछि तँ दालि रोटी खाइमे स्वादे नै अबैत अछि आ बेशी मरचाइयो खेलासँ पेटमे सुलवाइ सेहो हेमऽ लगैए। पुतोहु देख कऽ खौंझाइए जे बिना मरचाइके बुढ़बाकेँ एकोरती रोटी ससरै नइए, अखन देखियौ जे सँउसे नुए-वस्त्रे घिनओने अछि। ई सभ सुनि आउर देख कऽ हमरो नीक नै लागैए, लोक देख कऽ सेहो दुर छीया करैए, कहिया एतै अगहन मास जे खूब खइतौं खेसारी साग, भात आउर अल्लूक चटनी। मन थाकि गेल गामपर बैसल-बैसल, जवान तँ छी नै जे जाएब पंजाब-दिल्ली खटै लए। आब गामेमे रहि कऽ मालिक गिरहस्त सबहक खेत ओगैर कऽ अप्पन बाल बच्चाक गुजर करै छी। धानऽ मासमे धान ओगरलौं, गहूमऽ मासमे गहूमकेँ, रवी महीनामे रवीकेँ ओगरलौं, ओहीसँ अप्पन जीवन बितैए। ……………………… बड़का गिरहस्त सबहक खेतक देखभाल केनाइ। अखार मासमे जखन अप्पन रोपनी खतम कऽ लैत छल, तखन खेतक देख भाल केनाइ ओगरबाहक काज रहै छल। सब गिरहस्त अप्पन गामपर आबि कऽ नथुनी मरड़केँ कहि दै छल जे कनीक हमरो खेतक देखभाल करिहऽ, जे हेतऽ ओगरबाही से हम खेतेमे एगो कोन बारि कऽ दऽ देबऽ, तऽ ओगरबाह अप्पन देख-रेख करै छल, खेतमे आइरसँ पानि निकालनाइ, साँढ़-पारासँ बचेनाइ। ई सबटा काज ओगरबाह करै छल। धानक कटनी होइ समएमे सब गिरहस्त ओइ ओगरबाहकेँ साल भरिक बोइन दऽ दै छल। उहो अपन ऊँचगर जगह देखि कऽ एगो खोपड़ी बनाबैत छल, आउर ओही खोपड़ीमे रहि कऽ अपन धानक देख-रेख करै छल, आउर धानो खूब उपजबै छल। भदै, जसबा, मलीदा, जेकर भात अंगनामे बनितए तऽ दलानपर ओकर गमक जाइ छल। मुदा आब ने ओ धान रहल आने उबजा रहल। सगरौ देखै छी जे उबजाउ माँटि काटि कऽ सड़क हाइवे तैयार होइए, अइ शहरसँ ओइ दिस लेल रस्ता बनैए, कतेक उबजै छेलै कुसियार कमला कातक माँटिमे, तऽ उबजा सब दिनेसँ अछि, चाहे उ धान हुअए या गहूम या कुसियार मुदा चापी जगहमे तऽ पानि सब दिन भरले रहैए, खाली ओइमे सोउरखी, भेंट, मिरचाइ, केसाउर उबजैए, दिन प्रतिदिन लोक सब भेल जा रहल अछि सुकमार, सगरो देखै छी जे खेनहार भऽ गेल बेसी आ उबजेनहार भऽ गेल कम। खाइ लाए चाही अमीर जकाँ, से गरीब घरमे पतरके चाउर भात आउर खेतमे जखन कहबै धीयापुताकेँ जे एक छअ कोदारि पारऽ तऽ कहत हमरासँ नै हेतऽ, अप्पन जनसँ कराबऽ, हमरा हाथमे फोंका भऽ जाएत, देहमे एकोटा बच्चा माटि नै लगाबऽ चाहैए, कहबै जे बौआ कनीक बाबाक खेतमे चौकी दऽ आबहक तँ कहत हमरासँ नै हएत, हम तऽ काउलेज जाइ छी, बड़का मजीस्टेट बनऽ। पढ़ाइ तऽ जरूरीए छै, मुदा संग-संग खेनाइयो ने छै, भुखले तऽ पढ़ाइयो नै भऽ सकैए। पढ़ि लिख कऽ जखन हम रुपैय्या कमेबै आउर ओइ रुपैय्याकेँ हम खा लेबै से तऽ नै हएत, ओइ टाकासँ हम धान-गहूम, मर-मसल्ला, तेल-नून लेबै। तखने ने हम ओइ पाइक कोनो काज बुझबै, जे ओइ पाइ कऽ कोनो काज नै हेतै तऽ बैंकेमे रखलासँ कोन फाइदा। ई पाइये तऽ लोक नै खाइ छै। जखन ई अन्ने नै उबजतै तखन हमरा लोकक पढ़ै कऽ की फाइदा। हवा आउर पानि पी कऽ तऽ नै हएत जीअल, ओही दुआरे पढ़ि-लिख कऽ गिरहस्त इन्जीनियर बनबाक चाही जे किसान सबकेँ सलाह भेटतै, जे नै बुझै छै तेकरा सबकेँ खेती-बाड़ीक बारेमे सिखाएल जेतै, बुझाएल जेतै। ओना अपना मने गिरहस्त सब अलए-पलए खाद छीट कऽ अपने खेतक उर्वरक शक्ति घटा लै अछि। ओइसँ ओ फसल नाश होइते अछि आउर दोसरोक फसलपर असर पड़ैत अछि, ओहीसँ उबजा नै होइत अछि। गिरहस्त सब तबाह रहैत अइ, जे अहू साल उबजा नै भेल। अहू बेर रौदी भऽ गेल। ओही संग बजार-मार्केटपर अनाजक सेहो असर पड़ल, महगाइ बढ़ल जेकर दाम ५० रुपैय्या तेकर दाम ९० रुपैय्या भऽ गेल, लोक जिअत कोना, दिन-प्रतिदिन महगाइ आसमान छुने जाइए, दिनोदिन जनसंख्या बढ़ले जाइए, काज करऽ आब कियो चाहैए नै, यएह सभ चाहैत अछि जे अल्हुआ उपरेमे फड़ैत अछि। पहिने लोक हर-बड़दसँ खेत जोइत कऽ छोड़ि दै छेलै मुदा अखनी देखियौ जे एकेबेरे धान आउर खेरही खेतमे बुइन दैत अछि, खरे पतारमे, ने कियो खर बिछलक, आने कियो ढेपा फोड़लक खेतमे, माँटि तरखायए नहिये, आउर गीलगरे खेतमे जजाइत छीट दैत अछि, तखन कहत जे अहू बेर दालि नै भेल, आब देखियौ जे सबहक दरबज्जापर सँ धीरे-धीरे टाएर बड़द हर-फार सभ उजरि रहल अछि। सब एटोमेटिकक दुनियाँमे आबि गेल। ट्रेक्टरसँ देखियौ जे उपरे-ऊपर जोति दैए, खेतमे माँटि नै होइए, आउर ओइ लागल अन्न नै उबजैए। पहिने लोक सब हर-बड़द राखि कऽ सब सुविधा प्राप्त करै छल मुदा अखैन देखियौ जे सब गिरहस्त डेराइत रहैए, जे अइ बेर अन्न उबजत कि नै उबजत, किएक तँ गोइठा गोबर होइत छेलए, तऽ ओइसँ जरनाकेँ सेहो काज पड़ि जाइ छल, खेनाइयो बनि जाइ छल, खेनाइयक सेहो स्वाद कुछ अलगे रहै छल। आउर ओ छाउर लऽ के खेतमे फेकलासँ कम्पोस्ट खादक काज करै छल, मुदा अखन देखियौ जे घरे-घर गैस चुल्हा भऽ गेल, प्रेसर कुकर भऽ गेल, जइसँ तुरन्त खेनाइ बनि जाइत अछि, कोनो नै धुआँ-धुकुरक झंझट, कियो बुझलक, कियो नै बुझलक जे खेनाइ बनलै कि नै, जतेक नीक छै ई गैस चुल्हा, ततबए खराबो छै जँ प्रेसर कुकर ब्रास्ट भेल तऽ बुजहू जे घर संगे उड़ि जाइए लोक, बाँचइ के कोनो उपाए नै। मुदा आइ कालि लोक भऽ गेल अलकल, एकटा सलाइ नै बारऽ चाहैए। ओकरो लेल आब लाइटर चाही, गैस पजारैमे सुविधा हएत। आब के पिसैए लोरही-सिलौटपर मसल्ला, सब आब मिक्सीमे पिसैत अछि। गाम-गाममे भऽ गेल आब बिजलीक कुटैया, आब ढेकीमे धान, के खाइए ललका चाउरक भात, कहत जे एहेन फाटल-फाटल चाउर हमरा मुँहमे गरैए। के खाएत आब सीम दाइ, आ बड़ी। के भरैए आब घैलामे पानि। सबहक दुआरिपर आब चापाकल भऽ गेल, जखन चाही तुरन्त ताजा भरि कऽ कहत पिअब। सगरो देखल जाइए, तऽ ई सब चीज आब उठाइन भेल जाइए। पहिने लेवानमे देखै छेलौं जे दाय काकी माए सब अदहा राइतीए अंगनामे उखैर-समाँठसँ चूड़ा कुटि रहल अछि। काकी चुल्हापर खापड़िमे लारनिसँ धान भूजि रहल अछि, होइत भिनसर चूड़ा तैयार भऽ जाइ छेलए। मुदा अखुनका इस्त्रगन सबकेँ देखल जाए तऽ ओइ सब बेबहारमे सबसँ पाछू अछि, दिनोदिन सब चीज सब छुटल जाइत अछि। आलसमे लोक बेमुक्त भेल जा रहल अछि, जे उबजै छै ओ खेत आने लोक करैए, साँढ़-पारा खाइए खेतमे धान। एक खेतक ओगरबाह, ओ भगा कऽ दैए ओकरा खेतमे, तऽ दोसर खेतक ओगरबाह ओ भगा कऽ दैए ओकरा खेतमे, सब अपना-अपनाकेँ बचाबैए, दोसरकेँ खुआबैए। ……………………. बड़ दिन भऽ गेल भात खेला। मरुआ रोटी खाइके आब मन नै होइए। रोटी चिबाबैमे आब सकै नै छी। दालिमे जँ लोंगिया मेरचाइ नै दैत अछि तँ दालि रोटी खाइमे स्वादे नै अबैत अछि आ बेशी मरचाइयो खेलासँ पेटमे सुलवाइ सेहो हेमऽ लगैए। पसीखाना -भूखन, हौउ भूखन, अंगनामे छअ हौउ, कनी बाहर आबऽ। हम छी ट्रेक्टरबला, मेंहथसँ ऐल छी, कनीक लेबरक काज छेलए, चारि-पाँचटा माँटिकटीबला। भिनसरक आठ बाजि गेलै। सुतले छअ हौउ, कनी बान्हपर आबऽ। तखन एकटा छोटका बच्चा, गांइरखुल्ले छौँउरा, टिनही बाटीमे बसिया भात आउर मुरै साग खाइत अंगनासँ बाहर भेल कहैए- हमर बाबू सुतले छै। रातिमे माएसँ झगड़ा भऽ गेलै, भुखले सुति रहलै, अखैन तक नै उठलै। -आँइ रौ बौआ, तऽ माए कतऽ छौ? -माए गेलै गिरहत खेतमे धान काटै लाए। -ठीक छौ, तऽ जाइ छियौ हम, उठतौ बाबू तऽ कइईहैन जे ट्रेक्टरबला ऐल छलऽ। कुछे छनक बाद भुखना अंगैठी मोर करैत उठैए, आउर कहैए- कतऽ गेलाए गै गोपलखावाली, जल्दीसे हमर रौतुका माँछ भात ला। भकुवाएले भुखना घरसँ बाहर आएल, आँखि मीरते देखैए अंगनामे केकरो नै तऽ बैसि जाइए, ओसारिपर कनीक भक टुटलै तऽ अपन छोटका बेटाकेँ पुछैए- करिया छाँए रौउ, करीया। छोटका छौरा बकरी चरबैत रहैए। कनीक घरसँ हटिकऽ खेतमे ऊ अवाज दैए- की भेल्लऽऽऽऽ बाबू। तऽ कहैए- आँइ रौउ, देखही तऽ रौतुका माँछ घरमे छौ कि नै? ओकर बेटा कहैए- आँइ हौ, रातिमे तऽ माए साग-भात केने छेलै, माछ-भात कहाँ बनेलकै। तोरासँ माए दसटा रुपैय्या मांगलकऽ तऽ माएकेँ तूँ झोंटा पकड़ि कऽ अंगनामे नै मारलहक, जे हमरा लगमे एकटा अछि नहिये आउर हिनका दियैन हम तेल लय पाइ। तऽ माँछ-भात कहाँ बनलै, मुरै साग आउर भात बनल छेलै। लागैए तूँ सपनाइत उठलऽ हन, जेहो बचल छेलै भात सेहो हम दुनू भाँइ खा लेलिऐ, आब नै छै हण्डीमे। भुखनाकेँ भुखे प्राण जाइ छल, तऽ केलक की, ओसारापरसँ सीमेण्टबला छोटका बोरामे अदहा बोरा उसना धान उठेलक आउर चलि गेल। दोकानमे ओकरा बेचिकऽ करीब तीस रुपैय्या भेल, ओइ पाइसँ भुखना अढ़ाइ रुपैय्यामे एमप्रो बिस्कुट लेलक आउर चारि आनाक सलाइ आउर एक बण्डल बीड़ी लेलक, आउर एगो छलिया सुपारी ओकरा दोकानेपर फोड़ि लेलक सरोतासँ, आउर कुर्ताक जेबीमे राखि लेलक। बिस्कुट खा कऽ पानि कलपर पी लेलक आउर एक टूक सुपारी मुँहमे लऽ कऽ गुलठियाए एगो बीड़ी धरा कऽ अप्पन पी रहल अए। करीब दू के समए भऽ रहल छेलाए, ओमहरसँ चारिटा आउर पियाक आबि रहल छेलाए, उ सब भुखनाके संगीराए छेलाए। ओकरा सबकेँ भुखना देख के कहैए- की रौ दोस, कतऽ जाइ छाँए? -चल ने मुड बनाके आबै छी कोठियासे। दुवे सेरके देबै आउर सब गोटाए पान खाएब। साँझमे घुमैत-फिरैत चलि आएब। अतऽ असगरे बैसके की करमाए। -ठीक छै दोस। चल हमहूँ संगीए ताकैत छेलाउ, जे कियो भेटत तऽ जाएब, तारी पिअ, मुदा कियो भेटते नै छेलाए, चल। एमहर भुखनाक कनियाँ धान देखके सौँसे टोलमे लोकसँ पूछि कऽ गारि पढ़ि रहल अछि जे हमर ओसारपर सँ धान के लऽ गेल? धान कुटबै लाए रखने छेलौं। धीयापुतासँ पुछलौं तऽ ऊहो सब कहलक जे हम नै देखलियौ केकरो चोरबैत। ओही कालमे कियो पूछि दैए जे आँइ यै गोपलखावाली, घरबला कतऽ गेल यै, चारि-पाँच दिनसँ नै देखै छी। -कतऽ जेतै यइ बहीन। गेल हेतै कोनो पसीखाना तारी पिअ। नै कतौ देखबै तऽ ओतै भेटत साँझ-विहान, उठोउना लागल छै। देखियौ ने, डाक्टर कहने छै जे लीभर कमजोर छै आ तैयो नै ई बजरखसुवा तारी छोड़ै छै। साँझो खन अही पिऐ खातिर बजलिऐ तऽ झोंटा पकड़ि कऽ मारलक, राइतो नै खेलक। हमरा लगमे पाइ अछि जे एकरा दवाइ करा देबै? असगर धान काटै छी, धीया-पुताकेँ पालै छी, दुटा बकड़ी पोसने छी, ओकरेसँ छअ महीनामे पाँच सौ हजार टाका भऽ जाइए, मुदा ई सरधुवा तऽ एकोटा रुपैय्या हमरा हाथमे नै दैए, आउर रातिकेँ खाइ लए मांगत नीके निकुत, खाली तरले भुजले, हम कतऽ सँ पुराएब। आइयो आएल छेलै मेंहथसँ टेकटरबला, कहै लए जे काज करऽ चलऽ मुदा ई जुवन पिठा खाली पी के ओंघराएल अछि अंगनामे। कहियो यै दीदी रुख-सुख नै खाएत, सबदिन खाली चाही पीयै लए। एकटा रेडियो छेलै, सेहो बेचि कऽ पी गेल। सौंसे पियाक देखलौं मगर एहेन पियाक हम नै देखलौं जे घर परिवार के कोनो धियान फिकिर नै। एतेक लोक पैंजाब गेलै, एकरा कहै छिऐ तऽ कहैए हम एतै कमाएब आउर एतै खाएब। लोक कमा-कमा की नै केलक मुदा एकरा देखियौ जे खाली मौगी कमाइ खाइए आ भने दिन जाइए। एकटा घर नै तेकर कोनो ध्यान-फिकिर नै, खाली दिनभरि दौड़ मियाँ महजीदपर। बैसल-बैसल किछु नै फुराएल तऽ खाली पिनाइ आउर सुतनाइ। सुतल-सुतल सुस्ती पकड़ि लेलकै। घरमे एकोरत्ती मटिया तेल नै छै, हम लोकक अंगनासँ पैंच आनिकऽ डिबिया बाड़ै छी। तेल आनब से पाइ नै यए, आउर एकरा खाली चाही पाइ पियै लए, धियापुता पढ़त से हमरा एकटा रुपैय्या नै अछि जे मास्टरकेँ देबै। हम तऽ तंग आबि गेल छी। मन नै होइए एकरा घरमे रही, भागि जाइ हम बाल-बचा लऽ के नैहर। जरलाहाके जहियासँ ऐ भिखमंगाके घरमे एलौं, कहियो सुखसँ नै खाइ-पिबै छी। कि कहियो नीक कपड़ा पहिरतौं, जे नैहरामे बियाहमे देलक साड़ी माय-बाप वएह साड़ी साया ब्लाउजसँ गुजर करै छी। माए एगो पहुँची देने छेलाए, सेहो कमहरसँ नै भिखमंगा झंझारपुरमे चाटि लेलक। हमरा फुसियेँ कहलक जे दोसर रङके बनाके आनि दै छियौ। की कहू यौ गौंआ-घरुवा, ई सब देखके तरीवा हमरा गाँव नै जाइए लाजे जे एकर भाए-बाप की कहत। हमर बापकेँ एतेक मन खराब छेलाए से तऽ एतेक कहैत रहि गेलिऐ मुदा खाली कहए, साँझमे जाइ छी, पाइ लऽ लिअए आउर घुरि कऽ आबि जाए जे अनहार भऽ गेलै, ओही दुवारे नै गेलिऐ। कालि चलि जेबै। विचार-बिन्दु खण्ड राजा अओर परजा एगो समए छेलै जहिया लोक लोकपर विश्वास करै छल, अपन समाजमे कोनो तरहक बातचीत होइत छल तँ गाममे जे राजा रहै छल तिनका ऐठाम सभ निपटारा भऽ जाइ छल, अओर ओही ठाम न्याय अओर अन्यायक फैसला होइ छल, किएक तँ सभ लोक राजाकेँ सम्मान अओर आदर-सदाचारसँ नाम लैत छल, किएक तँ राज्यमे कोनो तरहक सुखार या आपदा-बिपत्ति होइत छल तँ राजा परजाक संग दैत छल, ओइ परजाक मदत-सहायता करैत छल मुदा अखन एहन समए आबि गेल जे राजा अओर परजामे कोनो अंतरे नै रहि गेल, किएक तँ आब ने ओते अन्न उपजै छै आ ने राजा परजाक मदति सहायता करै अछि। पहिने लोक सभ राजासँ अप्पन बेटीक बियाहक बातचीत लऽ कऽ जखन राजदरबारमे जाइ छल तखन ओही व्यक्तिकेँ महराज आश्वासन दैत छल जे तूँ या तोहर बेटीक खर्चाक व्यवस्था भऽ जेतऽ तखन परजो अप्पन राजामे लीन रहै छल। मुदा ने ओ सस्ता जमाना रहलै अओर ने ओ राजा रहलै, किएक तँ पहिनुकहा लोक सबहक कहब छेलै जे ओ लोक सभ जे छेलै, एगो लोहाबला व्यक्ति मानल जाइ छेलै, ओ सभ जे बाजै छेलै से करै छेलै, अप्पन नाम हँसाए नै दै छेलै, कोइ दोसर गामबला यदि नाम सुनै तँ कहै जे फलाँ गामक राजा अप्पन परजाक सुख-दुख देखै छै, कतेक नीक छै ओ गाम, चल ओही गाममे घर बनाएब , ओही राजाक राज्यमे रहब। देखही जे दुआरिपर कतेक-कतेकटा ढक छै, कतेक अन्न छै, कएगो हाथी बान्हल छै, कतेकटा हुनकर दरबज्जा छै, चल ओही राजमे रहब, कोनो चीजक दिक्कत नै हएत। सभ प्राणी ओही ठाम जीवन बिताएब। ई सभ परजा राजाक नव परजा बनैत छल। आब तँ देखल जाए तँ राजा परजाकेँ सुपै बोइले नै दइ पर तैयार होइत अछि। पहिने एक सेर मरुआ नै तँ एक सेर जऽ दैत छल। भरि दिन हर जोइत कऽ आबै छल तँ ओ मालिक अप्पन जऽनकेँ मरुआ अओर जऽ बोइन दैत छेलै। मुदा देखैत महगाइ कऽ चलैत राजाक मनमे अविकार आबि गेल जे एतेक अन्न जे ओकरा देबै से ओही अन्न बेच कऽ हमरा अओर दु कट्ठा खेत भऽ जाएत अओर अपन बढ़ैत परिवार देख कऽ सोचऽ लागल जे ई संसार अहिना रहत मुदा अप्पन सान-गुमान सभ राजा बिसरि गेल, के देखैए परजाकेँ अओर के देखैए अप्पन सान सौकत। बदलैत दुनियाँ देख परजा सभ गामसँ शहरमे काज करैक लेल प्रस्थान केलक जे आब गाममे राजा अप्पन घर-परिवारकेँ देखत आकि हमरा सभक मदति करता। सभ परजा अपन गाम छोड़ि शहरमे कमाए लागल, अओर जे राजाक हरोड़ीमे काज करैत छल से ओ जमीन जजाति सभ राजासँ लिखबा कऽ परजा अपन नाम कऽ लेलक। आब ने राजा ओइठाम कियो परजा हरोऊरी खटैत अछि। किएक तँ दोकानमे एक टका सलाइ दै छै आ राजा ओइठाम भरि दिन धान-दाउन करलापर पाँच किलो धान बोइन दै छै, से नै तँ आब गाम छोड़ि शहरेमे काज करब, बड़ बढ़ियाँ मन भेल तँ काज केलक, नै भेल तँ अप्पन चारि दिन बैठल छी, दोसर किछु करै अछि, ई सभ सोचि राजा अओर परजामे कोनो महत्व कनीक-कनीक सभ हटल जाइत अछि, लोकक मनमे आलस्यक प्रवेश भऽ गेल, केकरो नै केकरो से मतलब रहि गेल। मिथिलांचलक राजा छल राजा जनक जे अप्पन राज्यमे खेतसँ खलिहान तक परजाकेँ कखनो दुखी नै देख सकै छल। जे कोनो मनमे कल्पना करैत छल परजा तँ ओकरा सबहक राजा जनक पूरा करैत छल, केकरो कोनो तरहक असुविधा नै होइ, तेकर लेल तत्पर रहै छल। एक बेर राज्यमे भीषण सुखार भऽ गेल जे दू की पाँच साल तक बर्खा नै भेल, धरती फाटि-फाटि गेल तँ महराज जनक यज्ञ कऽ कए अपन परजाक हितक लेल भगवान इन्द्रदेवसँ प्रार्थना केलनि जे हमरा बचाउ, हमरा परजापर दया करू, हमर परजा मरि रहल अछि, आइ कतेक मास भऽ गेल हमर परजा सभकें अन्न खेला, हे भगवान, हमरा अओर हमर परजापर दया करू। अओर एतेक सभ बात सुनै छेलै, भगवान अओर भक्तमे यएह व्यवहार होइक चाही अओर यएह सत्यता अपनेबाक चाही, ओहीसँ प्रकृति सेहो गवाही दैत अछि जे मनुषमे भगवानसँ केहन भेदभाव हेबाक चाही। सभ गदगद तँ भगवान अओर संसार सुखदमय रहत मुदा अखन तँ सभ अपन अपन पेट भरि गेल तँ दोसरक पेट भरलै कि नै तेकर चिन्ता के करैत अछि। पहिने ने एतेक बी.पी.एल. छेलै, अओर ने एतेक ए.पी.एल. सबहक गुजर समान होइ छेलै, सभ जऽ अओर जनेरक खिचरी खाइत छेलै, भऽ गेल कहियो तँ केकरो एहने नीक घर रहैत छल जे भातक मुँह देखैत छल, अखन देखू जे गरीब अमीर एक समान खाइ-पिबैत अछि। दालि भात अओर तरकारी प्रेमसँ खाइत अछि। सन्दीप कुमार साफी (उर्फ किरण), जन्म ७ जून १९८४ पिता श्री सीताराम साफी, माता- श्रीमती सीता देवी, गाम- मेंहथ, भाया- झंझारपुर, जिला- मधुबनी। शिक्षा- बी.ए. (प्रतिष्ठा), मैथिली। विदेह नूतन अंक भाषापाक रचना-लेखन इंग्लिश-मैथिली-कोष / मैथिली-इंग्लिश-कोष  प्रोजेक्टकेँ आगू बढ़ाऊ, अपन सुझाव आ योगदान ई-मेल द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ। Top of Form १.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली आ २.मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम १.नेपाल आ भारतक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली

१.१. नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक  उच्चारण आ लेखन शैली (भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन १.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङ, ञ, ण, न एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना- अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।) पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।) खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।) सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।) खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।) उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंक, पंच, खंड, संधि, खंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्ग, चवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंक, चंचल, अंडा, अन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओ लोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि। नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोक बेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोट सन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽ कऽ पवर्ग धरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽ कऽ ज्ञ धरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ। २.ढ आ ढ : ढक उच्चारण “र् ह”जकाँ होइत अछि। अतः जतऽ “र् ह”क उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ लिखल जाए। आन ठाम खाली ढ लिखल जएबाक चाही। जेना- ढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढङ्ग, ढेरी, ढाकनि, ढाठ आदि। ढ = पढ़ाइ, बढब, गढब, मढब, बुढबा, साँढ, गाढ, रीढ, चाँढ, सीढी, पीढी आदि। उपर्युक्त शब्द सभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ अबैत अछि। इएह नियम ड आ डक सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि। ३.व आ ब : मैथिलीमे “व”क उच्चारण ब कएल जाइत अछि, मुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथ, बिद्या, नब, देबता, बिष्णु, बंश, बन्दना आदि। एहि सभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथ, विद्या, नव, देवता, विष्णु, वंश, वन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकील, ओजह आदि। ४.य आ ज : कतहु-कतहु “य”क उच्चारण “ज”जकाँ करैत देखल जाइत अछि, मुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञ, जदि, जमुना, जुग, जाबत, जोगी, जदु, जम आदि कहल जाएबला शब्द सभकेँ क्रमशः यज्ञ, यदि, यमुना, युग, यावत, योगी, यदु, यम लिखबाक चाही। ५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि। प्राचीन वर्तनी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आदि। नवीन वर्तनी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आदि। सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहि, एना, एकर, एहन आदि। एहि शब्द सभक स्थानपर यहि, यना, यकर, यहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारू सहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे “ए”केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि। ए आ “य”क प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैल, हैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो “ए”क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि। ६.हि, हु तथा एकार, ओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हि, हु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहि, अपनहु, ओकरहु, तत्कालहि, चोट्टहि, आनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनके, अपनो, तत्काले, चोट्टे, आनो आदि। ७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खडयन्त्र), षोडशी (खोडशी), षट्कोण (खटकोण), वृषेश (वृखेश), सन्तोष (सन्तोख) आदि। ८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि: (क) क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमे सँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : पढए (पढय) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पडतौक। अपूर्ण रूप : पढ’ गेलाह, क’ लेल, उठ’ पडतौक। पढऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पडतौक। (ख) पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछ, मुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह। अपूर्ण रूप : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह। (ग) स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापद, संज्ञा, ओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि। अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल। (घ) वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : पढैत अछि, बजैत अछि, गबैत अछि। अपूर्ण रूप : पढै अछि, बजै अछि, गबै अछि। (ङ) क्रियापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप: छियौक, छियैक, छहीक, छौक, छैक, अबितैक, होइक। अपूर्ण रूप : छियौ, छियै, छही, छौ, छै, अबितै, होइ। (च) क्रियापदीय प्रत्यय न्ह, हु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : छन्हि, कहलन्हि, कहलहुँ, गेलह, नहि। अपूर्ण रूप : छनि, कहलनि, कहलौँ, गेलऽ, नइ, नञि, नै। ९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटि कऽ दोसर ठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन), पानि (पाइन), दालि ( दाइल), माटि (माइट), काछु (काउछ), मासु (माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्द सभमे ई निअम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि। १०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्द सभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषा सम्बन्धी निअम अनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरण सम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्ष सभकेँ समेटि कऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनीकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽबला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषी पर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पडि रहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषता सभ कुण्ठित नहि होइक, ताहू दिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए। -(भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) १.२. मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली

१. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-

ग्राह्य

एखन ठाम जकर, तकर तनिकर अछि

अग्राह्य अखन, अखनि, एखेन, अखनी ठिमा, ठिना, ठमा जेकर, तेकर तिनकर। (वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य) ऐछ, अहि, ए।

२. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैकल्पिकतया अपनाओल जाय: भऽ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।

३. प्राचीन मैथिलीक ‘न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ‘न’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।

४. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।

५. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत: जैह, सैह, इएह, ओऐह, लैह तथा दैह।

६. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे ‘इ’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।

७. स्वतंत्र ह्रस्व ‘ए’ वा ‘य’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ‘ए’ वा ‘य’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।

८. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ‘य’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढैआ, विआह, वा धीया, अढैया, बियाह।

९. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव ‘ञ’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।

१०. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:- हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। ’मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ‘क’ क वैकल्पिक रूप ‘केर’ राखल जा सकैत अछि।

११. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।

१२. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।

१३. अर्द्ध ‘न’ ओ अर्द्ध ‘म’ क बदला अनुसार नहि लिखल जाय, किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ‘ङ’ , ‘ञ’, तथा ‘ण’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।

१४. हलंत चिह्न निअमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।

१५. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क’ लिखल जाय, हटा क’ नहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।

१६. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रापर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं।

१७. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।

१८. समस्त पद सटा क’ लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोडि क’ ,  हटा क’ नहि।

१९. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।

२०. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।

२१.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा' ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।

ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा "सुमन" ११/०८/७६

  २. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम २.१. उच्चारण निर्देश: (बोल्ड कएल रूप ग्राह्य):- दन्त न क उच्चारणमे दाँतमे जीह सटत- जेना बाजू नाम , मुदा ण क उच्चारणमे जीह मूर्धामे सटत (नै सटैए तँ उच्चारण दोष अछि)- जेना बाजू गणेश। तालव्य शमे जीह तालुसँ , षमे मूर्धासँ आ दन्त समे दाँतसँ सटत। निशाँ, सभ आ शोषण बाजि कऽ देखू। मैथिलीमे ष केँ वैदिक संस्कृत जकाँ ख सेहो उच्चरित कएल जाइत अछि, जेना वर्षा, दोष। य अनेको स्थानपर ज जकाँ उच्चरित होइत अछि आ ण ड जकाँ (यथा संयोग आ गणेश संजोग आ गड़ेस उच्चरित होइत अछि)। मैथिलीमे व क उच्चारण ब, श क उच्चारण स आ य क उच्चारण ज सेहो होइत अछि। ओहिना ह्रस्व इ बेशीकाल मैथिलीमे पहिने बाजल जाइत अछि कारण देवनागरीमे आ मिथिलाक्षरमे ह्रस्व इ अक्षरक पहिने लिखलो जाइत आ बाजलो जएबाक चाही। कारण जे हिन्दीमे एकर दोषपूर्ण उच्चारण होइत अछि (लिखल तँ पहिने जाइत अछि मुदा बाजल बादमे जाइत अछि), से शिक्षा पद्धतिक दोषक कारण हम सभ ओकर उच्चारण दोषपूर्ण ढंगसँ कऽ रहल छी। अछि- अ इ छ  ऐछ (उच्चारण) छथि- छ इ थ  – छैथ (उच्चारण) पहुँचि- प हुँ इ च (उच्चारण) आब अ आ इ ई ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ऐ सभ लेल मात्रा सेहो अछि, मुदा ऐमे ई ऐ ओ औ अं अः ऋ केँ संयुक्ताक्षर रूपमे गलत रूपमे प्रयुक्त आ उच्चरित कएल जाइत अछि। जेना ऋ केँ री  रूपमे उच्चरित करब। आ देखियौ- ऐ लेल देखिऔ क प्रयोग अनुचित। मुदा देखिऐ लेल देखियै अनुचित। क् सँ ह् धरि अ सम्मिलित भेलासँ क सँ ह बनैत अछि, मुदा उच्चारण काल हलन्त युक्त शब्दक अन्तक उच्चारणक प्रवृत्ति बढल अछि, मुदा हम जखन मनोजमे ज् अन्तमे बजैत छी, तखनो पुरनका लोककेँ बजैत सुनबन्हि- मनोजऽ, वास्तवमे ओ अ युक्त ज् = ज बजै छथि। फेर ज्ञ अछि ज् आ ञ क संयुक्त मुदा गलत उच्चारण होइत अछि- ग्य। ओहिना क्ष अछि क् आ ष क संयुक्त मुदा उच्चारण होइत अछि छ। फेर श् आ र क संयुक्त अछि श्र ( जेना श्रमिक) आ स् आ र क संयुक्त अछि स्र (जेना मिस्र)। त्र भेल त+र । उच्चारणक ऑडियो फाइल विदेह आर्काइव  http://www.videha.co.in/ पर उपलब्ध अछि। फेर केँ / सँ / पर पूर्व अक्षरसँ सटा कऽ लिखू मुदा तँ / कऽ हटा कऽ। ऐमे सँ मे पहिल सटा कऽ लिखू आ बादबला हटा कऽ। अंकक बाद टा लिखू सटा कऽ मुदा अन्य ठाम टा लिखू हटा कऽ– जेना छहटा मुदा सभ टा। फेर ६अ म सातम लिखू- छठम सातम नै। घरबलामे बला मुदा घरवालीमे वाली प्रयुक्त करू। रहए- रहै मुदा सकैए (उच्चारण सकै-ए)। मुदा कखनो काल रहए आ रहै मे अर्थ भिन्नता सेहो, जेना से कम्मो जगहमे पार्किंग करबाक अभ्यास रहै ओकरा। पुछलापर पता लागल जे ढुनढुन नाम्ना ई ड्राइवर कनाट प्लेसक पार्किंगमे काज करैत रहए। छलै, छलए मे सेहो ऐ तरहक भेल। छलए क उच्चारण छल-ए सेहो। संयोगने- (उच्चारण संजोगने) केँ/  कऽ केर- क ( केर क प्रयोग गद्यमे नै करू , पद्यमे कऽ सकै छी। ) क (जेना रामक) –रामक आ संगे (उच्चारण राम के /  राम कऽ सेहो) सँ- सऽ (उच्चारण) चन्द्रबिन्दु आ अनुस्वार- अनुस्वारमे कंठ धरिक प्रयोग होइत अछि मुदा चन्द्रबिन्दुमे नै। चन्द्रबिन्दुमे कनेक एकारक सेहो उच्चारण होइत अछि- जेना रामसँ- (उच्चारण राम सऽ)  रामकेँ- (उच्चारण राम कऽ/ राम के सेहो)। केँ जेना रामकेँ भेल हिन्दीक को (राम को)- राम को= रामकेँ क जेना रामक भेल हिन्दीक का ( राम का) राम का= रामक कऽ जेना जा कऽ भेल हिन्दीक कर ( जा कर) जा कर= जा कऽ सँ भेल हिन्दीक से (राम से) राम से= रामसँ सऽ , तऽ , त , केर (गद्यमे) एे चारू शब्द सबहक प्रयोग अवांछित। के दोसर अर्थेँ प्रयुक्त भऽ सकैए- जेना, के कहलक? विभक्ति “क”क बदला एकर प्रयोग अवांछित। नञि, नहि, नै, नइ, नँइ, नइँ, नइं ऐ सभक उच्चारण आ लेखन - नै त्त्व क बदलामे त्व जेना महत्वपूर्ण (महत्त्वपूर्ण नै) जतए अर्थ बदलि जाए ओतहि मात्र तीन अक्षरक संयुक्ताक्षरक प्रयोग उचित। सम्पति- उच्चारण स म्प इ त (सम्पत्ति नै- कारण सही उच्चारण आसानीसँ सम्भव नै)। मुदा सर्वोत्तम (सर्वोतम नै)। राष्ट्रिय (राष्ट्रीय नै) सकैए/ सकै (अर्थ परिवर्तन) पोछैले/ पोछै लेल/ पोछए लेल पोछैए/ पोछए/ (अर्थ परिवर्तन) पोछए/ पोछै ओ लोकनि ( हटा कऽ, ओ मे बिकारी नै) ओइ/ ओहि ओहिले/ ओहि लेल/ ओही लऽ जएबेँ/ बैसबेँ पँचभइयाँ देखियौक/ (देखिऔक नै- तहिना अ मे ह्रस्व आ दीर्घक मात्राक प्रयोग अनुचित) जकाँ / जेकाँ तँइ/ तैँ/ होएत / हएत नञि/ नहि/ नँइ/ नइँ/ नै सौँसे/ सौंसे बड / बडी (झोराओल) गाए (गाइ नहि), मुदा गाइक दूध (गाएक दूध नै।) रहलेँ/ पहिरतैँ हमहीं/ अहीं सब - सभ सबहक - सभहक धरि - तक गप- बात बूझब - समझब बुझलौं/ समझलौं/ बुझलहुँ - समझलहुँ हमरा आर - हम सभ आकि- आ कि सकैछ/ करैछ (गद्यमे प्रयोगक आवश्यकता नै) होइन/ होनि जाइन (जानि नै, जेना देल जाइन) मुदा जानि-बूझि (अर्थ परिव्र्तन) पइठ/ जाइठ आउ/ जाउ/ आऊ/ जाऊ मे, केँ, सँ, पर (शब्दसँ सटा कऽ) तँ कऽ धऽ दऽ (शब्दसँ हटा कऽ) मुदा दूटा वा बेसी विभक्ति संग रहलापर पहिल विभक्ति टाकेँ सटाऊ। जेना ऐमे सँ । एकटा , दूटा (मुदा कए टा) बिकारीक प्रयोग शब्दक अन्तमे, बीचमे अनावश्यक रूपेँ नै। आकारान्त आ अन्तमे अ क बाद बिकारीक प्रयोग नै (जेना दिअ , आ/ दिय’ , आ’, आ नै ) अपोस्ट्रोफीक प्रयोग बिकारीक बदलामे करब अनुचित आ मात्र फॉन्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक)- ओना बिकारीक संस्कृत रूप ऽ अवग्रह कहल जाइत अछि आ वर्तनी आ उच्चारण दुनू ठाम एकर लोप रहैत अछि/ रहि सकैत अछि (उच्चारणमे लोप रहिते अछि)। मुदा अपोस्ट्रोफी सेहो अंग्रेजीमे पसेसिव केसमे होइत अछि आ फ्रेंचमे शब्दमे जतए एकर प्रयोग होइत अछि जेना raison d’etre एतए सेहो एकर उच्चारण रैजौन डेटर होइत अछि, माने अपोस्ट्रॉफी अवकाश नै दैत अछि वरन जोडैत अछि, से एकर प्रयोग बिकारीक बदला देनाइ तकनीकी रूपेँ सेहो अनुचित)। अइमे, एहिमे/ ऐमे जइमे, जाहिमे एखन/ अखन/ अइखन केँ (के नहि) मे (अनुस्वार रहित) भऽ मे दऽ तँ (तऽ, त नै) सँ ( सऽ स नै) गाछ तर गाछ लग साँझ खन जो (जो go, करै जो do) तै/तइ जेना- तै दुआरे/ तइमे/ तइले जै/जइ जेना- जै कारण/ जइसँ/ जइले ऐ/अइ जेना- ऐ कारण/ ऐसँ/ अइले/ मुदा एकर एकटा खास प्रयोग- लालति‍ कतेक दि‍नसँ कहैत रहैत अइ लै/लइ जेना लैसँ/ लइले/ लै दुआरे लहँ/ लौं गेलौं/ लेलौं/ लेलँह/ गेलहुँ/ लेलहुँ/ लेलँ जइ/ जाहि‍/ जै जहि‍ठाम/ जाहि‍ठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि‍/ अहि‍/ अइ (वाक्यक अंतमे ग्राह्य) / ऐ अइछ/ अछि‍/ ऐछ तइ/ तहि‍/ तै/ ताहि‍ ओहि‍/ ओइ सीखि‍/ सीख जीवि‍/ जीवी/ जीब भलेहीं/ भलहि‍ं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि‍/ नै/ नइ गइ/ गै छनि‍/ छन्‍हि‍  ... समए शब्‍दक संग जखन कोनो वि‍भक्‍ति‍ जुटै छै तखन समै जना समैपर इत्‍यादि‍। असगरमे हृदए आ वि‍भक्‍ति‍ जुटने हृदे जना हृदेसँ, हृदेमे इत्‍यादि‍। जइ/ जाहि‍/ जै जहि‍ठाम/ जाहि‍ठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि‍/ अहि‍/ अइ/ ऐ अइछ/ अछि‍/ ऐछ तइ/ तहि‍/ तै/ ताहि‍ ओहि‍/ ओइ सीखि‍/ सीख जीवि‍/ जीवी/ जीब भले/ भलेहीं/ भलहि‍ं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि‍/ नै/ नइ गइ/ गै छनि‍/ छन्‍हि‍ चुकल अछि/ गेल गछि २.२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम नीचाँक सूचीमे देल विकल्पमेसँ लैंगुएज एडीटर द्वारा कोन रूप चुनल जेबाक चाही: बोल्ड कएल रूप ग्राह्य: १.होयबला/ होबयबला/ होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला/ होयबाक/होबएबला /होएबाक २. आ’/आऽ आ ३. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ल’/लऽ/लय/लए ४. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए गेल ५. कर’ गेलाह/करऽ गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह ६. लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’/ ७. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करैबला/क’र’ बला / करैवाली ८. बला वला (पुरूष), वाली (स्‍त्री) ९ . आङ्ल आंग्ल १०. प्रायः प्रायह ११. दुःख दुख १ २. चलि गेल चल गेल/चैल गेल १३. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन १४. देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह १५. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि १६. चलैत/दैत चलति/दैति १७. एखनो अखनो १८. बढ़नि‍ बढइन बढन्हि १९. ओ’/ओऽ(सर्वनाम) ओ २० . ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ २१. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ २२. जे जे’/जेऽ २३. ना-नुकुर ना-नुकर २४. केलन्हि/केलनि‍/कयलन्हि २५. तखनतँ/ तखन तँ २६. जा रहल/जाय रहल/जाए रहल २७. निकलय/निकलए लागल/ लगल बहराय/ बहराए लागल/ लगल निकल’/बहरै लागल २८. ओतय/ जतय जत’/ ओत’/ जतए/ ओतए २९. की फूरल जे कि फूरल जे ३०. जे जे’/जेऽ ३१. कूदि / यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद/ यादि (मोन) ३२. इहो/ ओहो ३३. हँसए/ हँसय हँसऽ ३४. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/ नौ वा दस ३५. सासु-ससुर सास-ससुर ३६. छह/ सात छ/छः/सात ३७. की  की’/ कीऽ (दीर्घीकारान्तमे ऽ वर्जित) ३८. जबाब जवाब ३९. करएताह/ करेताह करयताह ४०. दलान दिशि दलान दिश/दलान दिस ४१ . गेलाह गएलाह/गयलाह ४२. किछु आर/ किछु और/ किछ आर ४३. जाइ छल/ जाइत छल जाति छल/जैत छल ४४. पहुँचि/ भेट जाइत छल/ भेट जाइ छलए पहुँच/ भेटि‍ जाइत छल ४५. जबान (युवा)/ जवान(फौजी) ४६. लय/ लए क’/ कऽ/ लए कए / लऽ कऽ/ लऽ कए ४७. ल’/लऽ कय/ कए ४८. एखन / एखने / अखन / अखने ४९. अहींकेँ अहीँकेँ ५०. गहींर गहीँर ५१. धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए ५२. जेकाँ जेँकाँ/ जकाँ ५३. तहिना तेहिना ५४. एकर अकर ५५. बहिनउ बहनोइ ५६. बहिन बहिनि ५७. बहिन-बहिनोइ बहिन-बहनउ ५८. नहि/ नै ५९. करबा / करबाय/ करबाए ६०. तँ/ त ऽ तय/तए ६१. भैयारी मे छोट-भाए/भै/, जेठ-भाय/भाइ, ६२. गि‍नतीमे दू भाइ/भाए/भाँइ ६३. ई पोथी दू भाइक/ भाँइ/ भाए/ लेल। यावत जावत ६४. माय मै / माए मुदा माइक ममता ६५. देन्हि/ दइन दनि‍/ दएन्हि/ दयन्हि दन्हि/ दैन्हि ६६. द’/ दऽ/ दए ६७. ओ (संयोजक) ओऽ (सर्वनाम) ६८. तका कए तकाय तकाए ६९. पैरे (on foot) पएरे  कएक/ कैक ७०. ताहुमे/ ताहूमे ७१. पुत्रीक ७२. बजा कय/ कए / कऽ ७३. बननाय/बननाइ ७४. कोला ७५. दिनुका दिनका ७६. ततहिसँ ७७. गरबओलन्हि/ गरबौलनि‍/ गरबेलन्हि/ गरबेलनि‍ ७८. बालु बालू ७९. चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध) ८०. जे जे’ ८१ . से/ के से’/के’ ८२. एखुनका अखनुका ८३. भुमिहार भूमिहार ८४. सुग्गर / सुगरक/ सूगर ८५. झठहाक झटहाक ८६. छूबि ८७. करइयो/ओ करैयो ने देलक /करियौ-करइयौ ८८. पुबारि पुबाइ ८९. झगड़ा-झाँटी झगड़ा-झाँटि ९०. पएरे-पएरे पैरे-पैरे ९१. खेलएबाक ९२. खेलेबाक ९३. लगा ९४. होए- हो – होअए ९५. बुझल बूझल ९६. बूझल (संबोधन अर्थमे) ९७. यैह यएह / इएह/ सैह/ सएह ९८. तातिल ९९. अयनाय- अयनाइ/ अएनाइ/ एनाइ १००. निन्न- निन्द १०१. बिनु बिन १०२. जाए जाइ १०३. जाइ (in different sense)-last word of sentence १०४. छत पर आबि जाइ १०५. ने १०६. खेलाए (play) –खेलाइ १०७. शिकाइत- शिकायत १०८. ढप- ढ़प १०९ . पढ़- पढ ११०. कनिए/ कनिये कनिञे १११. राकस- राकश ११२. होए/ होय होइ ११३. अउरदा- औरदा ११४. बुझेलन्हि (different meaning- got understand) ११५. बुझएलन्हि/बुझेलनि‍/ बुझयलन्हि (understood himself) ११६. चलि- चल/ चलि‍ गेल ११७. खधाइ- खधाय ११८. मोन पाड़लखिन्ह/ मोन पाड़लखि‍न/ मोन पारलखिन्ह ११९. कैक- कएक- कइएक १२०. लग ल’ग १२१. जरेनाइ १२२. जरौनाइ जरओनाइ- जरएनाइ/ जरेनाइ १२३. होइत १२४. गरबेलन्हि/ गरबेलनि‍ गरबौलन्हि/ गरबौलनि‍ १२५. चिखैत- (to test)चिखइत १२६. करइयो (willing to do) करैयो १२७. जेकरा- जकरा १२८. तकरा- तेकरा १२९. बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे १३०. करबयलहुँ/ करबएलहुँ/ करबेलहुँ करबेलौं १३१. हारिक (उच्चारण हाइरक) १३२. ओजन वजन आफसोच/ अफसोस कागत/ कागच/ कागज १३३. आधे भाग/ आध-भागे १३४. पिचा / पिचाय/पिचाए १३५. नञ/ ने १३६. बच्चा नञ (ने) पिचा जाय १३७. तखन ने (नञ) कहैत अछि। कहै/ सुनै/ देखै छल मुदा कहैत-कहैत/ सुनैत-सुनैत/ देखैत-देखैत १३८. कतेक गोटे/ कताक गोटे १३९. कमाइ-धमाइ/ कमाई- धमाई १४० . लग ल’ग १४१. खेलाइ (for playing) १४२. छथिन्ह/ छथिन १४३. होइत होइ १४४. क्यो कियो / केओ १४५. केश (hair) १४६. केस (court-case) १४७ . बननाइ/ बननाय/ बननाए १४८. जरेनाइ १४९. कुरसी कुर्सी १५०. चरचा चर्चा १५१. कर्म करम १५२. डुबाबए/ डुबाबै/ डुमाबै डुमाबय/ डुमाबए १५३. एखुनका/ अखुनका १५४. लए/ लिअए (वाक्यक अंतिम शब्द)- लऽ १५५. कएलक/ केलक १५६. गरमी गर्मी १५७ . वरदी वर्दी १५८. सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ १५९. एनाइ-गेनाइ १६०. तेना ने घेरलन्हि/ तेना ने घेरलनि‍ १६१. नञि / नै १६२. डरो ड’रो १६३. कतहु/ कतौ कहीं १६४. उमरिगर-उमेरगर उमरगर १६५. भरिगर १६६. धोल/धोअल धोएल १६७. गप/गप्प १६८. के के’ १६९. दरबज्जा/ दरबजा १७०. ठाम १७१. धरि तक १७२. घूरि लौटि १७३. थोरबेक १७४. बड्ड १७५. तोँ/ तूँ १७६. तोँहि( पद्यमे ग्राह्य) १७७. तोँही / तोँहि १७८. करबाइए करबाइये १७९. एकेटा १८०. करितथि /करतथि १८१. पहुँचि/ पहुँच १८२. राखलन्हि रखलन्हि/ रखलनि‍ १८३. लगलन्हि/ लगलनि‍ लागलन्हि १८४. सुनि (उच्चारण सुइन) १८५. अछि (उच्चारण अइछ) १८६. एलथि गेलथि १८७. बितओने/ बि‍तौने/ बितेने १८८. करबओलन्हि/ करबौलनि‍/ करेलखिन्ह/ करेलखि‍न १८९. करएलन्हि/ करेलनि‍ १९०. आकि/ कि १९१. पहुँचि/ पहुँच १९२. बत्ती जराय/ जराए जरा (आगि लगा) १९३. से से’ १९४. हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए) १९५. फेल फैल १९६. फइल(spacious) फैल १९७. होयतन्हि/ होएतन्हि/ होएतनि‍/हेतनि‍/ हेतन्हि १९८. हाथ मटिआएब/ हाथ मटियाबय/हाथ मटियाएब १९९. फेका फेंका २००. देखाए देखा २०१. देखाबए २०२. सत्तरि सत्तर २०३. साहेब साहब २०४.गेलैन्ह/ गेलन्हि/ गेलनि‍ २०५. हेबाक/ होएबाक २०६.केलो/ कएलहुँ/केलौं/ केलुँ २०७. किछु न किछु/ किछु ने किछु २०८.घुमेलहुँ/ घुमओलहुँ/ घुमेलौं २०९. एलाक/ अएलाक २१०. अः/ अह २११.लय/ लए (अर्थ-परिवर्त्तन) २१२.कनीक/ कनेक २१३.सबहक/ सभक २१४.मिलाऽ/ मिला २१५.कऽ/ क २१६.जाऽ/ जा २१७.आऽ/ आ २१८.भऽ /भ’ (’ फॉन्टक कमीक द्योतक) २१९.निअम/ नियम २२० .हेक्टेअर/ हेक्टेयर २२१.पहिल अक्षर ढ/ बादक/ बीचक ढ़ २२२.तहिं/तहिँ/ तञि/ तैं २२३.कहिं/ कहीं २२४.तँइ/ तैं / तइँ २२५.नँइ/ नइँ/  नञि/ नहि/नै २२६.है/ हए / एलीहेँ/ २२७.छञि/ छै/ छैक /छइ २२८.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २२९.आ (come)/ आऽ(conjunction) २३०. आ (conjunction)/ आऽ(come) २३१.कुनो/ कोनो, कोना/केना २३२.गेलैन्ह-गेलन्हि-गेलनि‍ २३३.हेबाक- होएबाक २३४.केलौँ- कएलौँ-कएलहुँ/केलौं २३५.किछु न किछ- किछु ने किछु २३६.केहेन- केहन २३७.आऽ (come)-आ (conjunction-and)/आ। आब'-आब' /आबह-आबह २३८. हएत-हैत २३९.घुमेलहुँ-घुमएलहुँ- घुमेलाें २४०.एलाक- अएलाक २४१.होनि- होइन/ होन्हि/ २४२.ओ-राम ओ श्यामक बीच(conjunction), ओऽ कहलक (he said)/ओ २४३.की हए/ कोसी अएली हए/ की है। की हइ २४४.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २४५ .शामिल/ सामेल २४६.तैँ / तँए/ तञि/ तहिं २४७.जौं / ज्योँ/ जँ/ २४८.सभ/ सब २४९.सभक/ सबहक २५०.कहिं/ कहीं २५१.कुनो/ कोनो/ कोनहुँ/ २५२.फारकती भऽ गेल/ भए गेल/ भय गेल २५३.कोना/ केना/ कन्‍ना/कना २५४.अः/ अह २५५.जनै/ जनञ २५६.गेलनि‍/ गेलाह (अर्थ परिवर्तन) २५७.केलन्हि/ कएलन्हि/ केलनि‍/ २५८.लय/ लए/ लएह (अर्थ परिवर्तन) २५९.कनीक/ कनेक/कनी-मनी २६०.पठेलन्हि‍ पठेलनि‍/ पठेलइन/ पपठओलन्हि/ पठबौलनि‍/ २६१.निअम/ नियम २६२.हेक्टेअर/ हेक्टेयर २६३.पहिल अक्षर रहने ढ/ बीचमे रहने ढ २६४.आकारान्तमे बिकारीक प्रयोग उचित नै/ अपोस्ट्रोफीक प्रयोग फान्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक ओकर बदला अवग्रह (बिकारी) क प्रयोग उचित २६५.केर (पद्यमे ग्राह्य) / -क/ कऽ/ के २६६.छैन्हि- छन्हि २६७.लगैए/ लगैये २६८.होएत/ हएत २६९.जाएत/ जएत/ २७०.आएत/ अएत/ आओत २७१ .खाएत/ खएत/ खैत २७२.पिअएबाक/ पिएबाक/पि‍येबाक २७३.शुरु/ शुरुह २७४.शुरुहे/ शुरुए २७५.अएताह/अओताह/ एताह/ औताह २७६.जाहि/ जाइ/ जइ/ जै/ २७७.जाइत/ जैतए/ जइतए २७८.आएल/ अएल २७९.कैक/ कएक २८०.आयल/ अएल/ आएल २८१. जाए/ जअए/ जए (लालति‍ जाए लगलीह।) २८२. नुकएल/ नुकाएल २८३. कठुआएल/ कठुअएल २८४. ताहि/ तै/ तइ २८५. गायब/ गाएब/ गएब २८६. सकै/ सकए/ सकय २८७.सेरा/सरा/ सराए (भात सरा गेल) २८८.कहैत रही/देखैत रही/ कहैत छलौं/ कहै छलौं- अहिना चलैत/ पढैत (पढै-पढैत अर्थ कखनो काल परिवर्तित) - आर बुझै/ बुझैत (बुझै/ बुझै छी, मुदा बुझैत-बुझैत)/ सकैत/ सकै। करैत/ करै। दै/ दैत। छैक/ छै। बचलै/ बचलैक। रखबा/ रखबाक । बिनु/ बिन। रातिक/ रातुक बुझै आ बुझैत केर अपन-अपन जगहपर प्रयोग समीचीन अछि‍। बुझैत-बुझैत आब बुझलि‍ऐ। हमहूँ बुझै छी। २८९. दुआरे/ द्वारे २९०.भेटि/ भेट/ भेँट २९१. खन/ खीन/  खुना (भोर खन/ भोर खीन) २९२.तक/ धरि २९३.गऽ/ गै (meaning different-जनबै गऽ) २९४.सऽ/ सँ (मुदा दऽ, लऽ) २९५.त्त्व,(तीन अक्षरक मेल बदला पुनरुक्तिक एक आ एकटा दोसरक उपयोग) आदिक बदला त्व आदि। महत्त्व/ महत्व/ कर्ता/ कर्त्ता आदिमे त्त संयुक्तक कोनो आवश्यकता मैथिलीमे नै अछि। वक्तव्य २९६.बेसी/ बेशी २९७.बाला/वाला बला/ वला (रहैबला) २९८ .वाली/ (बदलैवाली) २९९.वार्त्ता/ वार्ता ३००. अन्तर्राष्ट्रिय/ अन्तर्राष्ट्रीय ३०१. लेमए/ लेबए ३०२.लमछुरका, नमछुरका ३०२.लागै/ लगै ( भेटैत/ भेटै) ३०३.लागल/ लगल ३०४.हबा/ हवा ३०५.राखलक/ रखलक ३०६.आ (come)/ आ (and) ३०७. पश्चाताप/ पश्चात्ताप ३०८. ऽ केर व्यवहार शब्दक अन्तमे मात्र, यथासंभव बीचमे नै। ३०९.कहैत/ कहै ३१०. रहए (छल)/ रहै (छलै) (meaning different) ३११.तागति/ ताकति ३१२.खराप/ खराब ३१३.बोइन/ बोनि/ बोइनि ३१४.जाठि/ जाइठ ३१५.कागज/ कागच/ कागत ३१६.गिरै (meaning different- swallow)/ गिरए (खसए) ३१७.राष्ट्रिय/ राष्ट्रीय DATE-LIST (year- 2013-14) (१४२१ फसली साल) Marriage Days: Nov.2013- 18, 20, 24, 25, 28, 29 Dec.2013- 1, 4, 6, 8, 12, 13 January 2014- 19, 20, 22, 23, 24, 26, 31. Feb.2014- 3, 5, 6, 9, 10, 17, 19, 24, 26, 27. March 2014- 2, 3, 5, 7, 9. April 2014- 16, 17, 18, 20, 21, 23, 24. May 2014- 1, 2, 8, 9, 11, 12, 18, 19, 21, 25, 26, 28, 29, 30. June 2014- 4, 5, 8, 9, 13, 18, 22, 25. July 2014- 2, 3, 4, 6, 7. Upanayana Days: February 2014- 2, 4, 9, 10. March 2014- 3, 5, 11, 12. April 2014- 4, 9, 10. June 2014- 2, 8, 9. Dviragaman Din: November 2013- 18, 21, 22. December 2013- 4, 6, 8, 9, 12, 13. February 2014- 16, 17, 19, 20. March 2014- 2, 3, 5, 9, 10, 12. April 2014- 16, 17, 18, 20. May 2014- 1, 2, 9, 11, 12. Mundan Din: November 2013- 20, 22. December 2013- 9, 12, 13. January 2014- 16, 17. February 2014- 6, 10, 19, 20. March 2014- 5, 12. April 2014- 16. May 2014- 12, 30. June 2014- 2, 9, 30. FESTIVALS OF MITHILA (2013-14) Mauna Panchami-27 July Madhushravani- 9 August Nag Panchami- 11 August Raksha Bandhan- 21 Aug Krishnastami- 28 August Kushi Amavasya / Somvari Vrat- 5 September Hartalika Teej- 8 September ChauthChandra-8 September Vishwakarma Pooja- 17 September Anant Caturdashi- 18 Sep Pitri Paksha begins- 20 Sep Jimootavahan Vrata/ Jitia-27 Sep Matri Navami-28 Sep Kalashsthapan- 5 October Belnauti- 10 October Patrika Pravesh- 11 October Mahastami- 12 October Maha Navami - 13 October Vijaya Dashami- 14 October Kojagara- 18 Oct Dhanteras- 1 November Diyabati, shyama pooja-3 November Annakoota/ Govardhana Pooja-4 November Bhratridwitiya/ Chitragupta Pooja- 5 November Chhathi -8 November Sama Poojaarambh- 9 November Devotthan Ekadashi- 13 November ravivratarambh- 17 November Navanna parvan- 20 November KartikPoornima- Sama Visarjan- 2 December Vivaha Panchmi- 7 December Makara/ Teela Sankranti-14 Jan Naraknivaran chaturdashi- 29 January Basant Panchami/ Saraswati Pooja- 4 February Achla Saptmi- 6 February Mahashivaratri-27 February Holikadahan-Fagua-16 March Holi- 17 March Saptadora- 17 March Varuni Trayodashi-28 March Jurishital-15 April Ram Navami- 8 April Akshaya Tritiya-2 May Janaki Navami- 8 May Ravi Brat Ant- 11 May Vat Savitri-barasait- 28 May Ganga Dashhara-8 June Harivasar Vrata- 9 July Shree Guru Poornima-12 Jul VIDEHA ARCHIVE १.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक

विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक  http://sites.google.com/a/videha.com/videha/ https://sites.google.com/a/videha.com/videha-archive-part-i/ https://sites.google.com/a/videha.com/videha-archive-part-ii/ २.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download http://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi ३.मैथिली ऑडियो संकलन Maithili Audio Downloads http://sites.google.com/a/videha.com/videha-audio ४.मैथिली वीडियोक संकलन Maithili Videos http://sites.google.com/a/videha.com/videha-video ५.मिथिला चित्रकला/ आधुनिक चित्रकला आ चित्र Mithila Painting/ Modern Art and Photos http://sites.google.com/a/videha.com/videha-paintings-photos/ "विदेह"क एहि सभ सहयोगी लिंकपर सेहो एक बेर जाउ। ६.विदेह मैथिली क्विज  :  http://videhaquiz.blogspot.com/ ७.विदेह मैथिली जालवृत्त एग्रीगेटर : http://videha-aggregator.blogspot.com/ ८.विदेह मैथिली साहित्य अंग्रेजीमे अनूदित http://madhubani-art.blogspot.com/ ९.विदेहक पूर्व-रूप "भालसरिक गाछ"  : http://gajendrathakur.blogspot.com/ १०.विदेह इंडेक्स  : http://videha123.blogspot.com/ ११.विदेह फाइल : http://videha123.wordpress.com/ १२. विदेह: सदेह : पहिल तिरहुता (मिथिला़क्षर) जालवृत्त (ब्लॉग) http://videha-sadeha.blogspot.com/ १३. विदेह:ब्रेल: मैथिली ब्रेलमे: पहिल बेर विदेह द्वारा http://videha-braille.blogspot.com/ १४.VIDEHA IST MAITHILI  FORTNIGHTLY EJOURNAL ARCHIVE http://videha-archive.blogspot.com/ १५. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मैथिली पोथीक आर्काइव http://videha-pothi.blogspot.com/ १६. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ऑडियो आर्काइव http://videha-audio.blogspot.com/ १७. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका वीडियो आर्काइव http://videha-video.blogspot.com/ १८. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मिथिला चित्रकला, आधुनिक कला आ चित्रकला http://videha-paintings-photos.blogspot.com/ १९. मैथिल आर मिथिला (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त) http://maithilaurmithila.blogspot.com/ २०.श्रुति प्रकाशन http://www.shruti-publication.com/ २१.http://groups.google.com/group/videha २२.http://groups.yahoo.com/group/VIDEHA/ २३.गजेन्द्र ठाकुर इ‍डेक्स http://gajendrathakur123.blogspot.com २४. नेना भुटका http://mangan-khabas.blogspot.com/ २५.विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट http://videha123radio.wordpress.com/ २६.Videha Radio २७. Join official Videha facebook group. २८. विदेह मैथिली नाट्य उत्सव http://maithili-drama.blogspot.com/ २९.समदिया http://esamaad.blogspot.com/ ३०. मैथिली फिल्म्स http://maithilifilms.blogspot.com/ ३१.अनचिन्हार आखर http://anchinharakharkolkata.blogspot.com/ ३२. मैथिली हाइकू http://maithili-haiku.blogspot.com/ ३३. मानक मैथिली http://manak-maithili.blogspot.com/ ३४. विहनि कथा http://vihanikatha.blogspot.in/ ३५. मैथिली कविता http://maithili-kavita.blogspot.in/ ३६. मैथिली कथा http://maithili-katha.blogspot.in/ ३७.मैथिली समालोचना http://maithili-samalochna.blogspot.in/ महत्त्वपूर्ण सूचना: The Maithili pdf books are AVAILABLE FOR free PDF DOWNLOAD AT

https://sites.google.com/a/videha.com/videha/ http://videha123.wordpress.com/   http://videha123.wordpress.com/about/ विदेह:सदेह:१: २: ३: ४:५:६:७:८:९:१० "विदेह"क प्रिंट संस्करण: विदेह-ई-पत्रिका (http://www.videha.co.in/) क चुनल रचना सम्मिलित। सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Details for purchase available at publishers's (print-version) site http://www.shruti-publication.com  or you may write to shruti.publication@shruti-publication.com विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)२००४-१३. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतए लेखकक नाम नहि अछि ततए संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: शिव कुमार झा, राम वि‍लास साहु आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। भाषा-सम्पादन: नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी आ रश्मि रेखा सिन्हा। सम्पादक-शोध-अन्वेषण: डा. जया वर्मा आ डा. राजीव कुमार वर्मा। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल आ प्रियंका झा। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। ’विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका अछि आ ऐमे मैथिली, संस्कृत आ अंग्रेजीमे मिथिला आ मैथिलीसँ संबंधित रचना प्रकाशित कएल जाइत अछि। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-13 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.com पर संपर्क करू। एहि साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल।५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सिद्धिरस्तु 91 वि दे ह विदेह Videha বিদেহ  www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १५३म अंक ०१ मई२०१४ (वर्ष ७ मास ७७ अंक १५३) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA