ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' १५४ म अंक १५ मई २०१४ (वर्ष ७ मास ७७ अंक १५४) ऐ अंकमे अछि:- सूखल मन तरसल आँखि (काव्य संग्रह) मुन्नी कामत अप्पन बात- उड़ियाइत बालुपर हरिअरी लहलहा जाएत ज्यों बदली अपन विचार हम तँ सगरे खुशी ओंघरा जाएत। ई हमर पहिल कोशिश छी जे अपन रचनाक माध्यमसँ समस्त पाठककेँ किछु कहैले चाहै छी। ऐ संग्रहमे हम अपना चारू दिस घटित घटनाकेँ काव्य रूप दऽ अहाँक हाथमे रखलौं। जइ समाजमे हम ठाढ़ छी वएह समाजक भिन्न-भिन्न परिस्थिति, अनेकानेक रूप अहाँकेँ ऐ संकलनमे भेटत। सभसँ अधिक जोर हम नारीक दशा आ दिशापर देने छी। एना बिलकुल नै अछि की जेतए ज्ञानक अभाव अछि ओतैटा नारीक स्थिति कमजोर अछि, बल्कि सच तँ ई अछि की पूर्ण ज्ञानक बाबजुदो हमरा समाजमे नारीक प्रति ज्ञानक परिपक्ताक अभाव अछि। जे ज्ञान हम अरजै छी ओकरा जीवनमे नै उतारि पबै छी, वएह कारण अछि जे आइ हमरा समाजमे दहेज, भ्रुण हत्या, दुष्कर्म आ घरेलु हिंसा दिन-प्रतिदिन छूआ-छूतक बिमारी जकाँ बढ़ि रहल अछि। की हमरामे शिक्षाक अभाव भेल जाइए? नै। हमर विचार बदलल जाइए। हम स्वाथी भेल जाइ छी। हमर इंसानियत मरल जाइए। जेना कल्पना मात्रसँ ऊँचाइ नै मिलैए तइले डेग बढ़ाबए पड़ैए। एक-एक सिढ़ी चढ़ि कऽ इंसान गगनचुंबी इमारतक चोटीपर ठाढ़ भऽ ओकर अहंकार तोड़ैए, ओहिना हम सभ मिलि अगर घर-घर एक दियारी जराबी तँ हमर समाज अंधकार मुक्त भऽ जाएत। हम अपन ऐ रचनामे एहने किछु पहलूकेँ छुलौं। समाजक सड़ल-गलल मानसिकताकेँ अहाँ सबहक समक्ष ठाढ़ करैक प्रयास केलौं। यर्थाथ, हाष्य, रौद्र, करूण आ वात्सल्य इत्यािद विभिन्न सुआदसँ सुसज्जित ई थाल आइ अहाँ सबहक समक्ष परसैत हमरा बेहद खुशी भऽ रहल अछि। कहल जाइ छै जे कोनो विषयपर नान्हिटासँ अभिरुचि रहै छै, मुदा हमरा संगे ई विचार गलत साबित भेल। समैक संगे हमर रुचि बदलैत गेल। पहिले गणित पढ़ैमे नीक लगैत रहए तँ सहपाठी सभ कहैत छल जे हम गणितक गुरु बनब। जब आठमी-नौमीमे गेलौं तँ बढ़ैक जिज्ञासा हमरा विज्ञान दिस खिंचलक। इण्टर विज्ञानसँ केलौं। किछु समए बितल। ओइ समैमे शिक्षकक नौकरीक बिहाड़ि बहैत छल तइमे हिन्दी विषयक शिक्षकक मांग बेसी छल। वएह बिहाड़िक हवा हमरो देहमे लगि गेल आ हम हिन्दीसँ ऑनर्स केलौं, निर्मली महाविद्यालय निर्मलीसँ। कथा-कहानीक सम्बन्ध हमरा संगे पूब-पछिमक छल जेकर कोनो मेल नै। एक दिन ऐ रेगिस्तानमे कविताक महिन फुहार लऽ कऽ प्रो. शिव कुमार सर किलासमे एला। हुनकर प्रथम किलाससँ हम एतेक प्रभावित भेलौं कि सहजे हमरा कलमसँ किछु तुकबंदी सादा कागतपर निखरि गेल। ओइ समैमे डाक्टर चाचा (श्री उमेश मण्डल) आ चाची (श्रीमती पुनम मण्डल) हम सभ कोइ एक्केठाम भाड़ाक मकानमे रहैत रही। पुबरिया मकानमे ओ दुनू गोटे छला आ पछबरियामे दोसर महलपर हम सभ सहेली। उमेरक लिहाजसँ आकि रिस्तासँ ओ हमर चाचा-चाची नै छथि बल्की हमरा मनमे जे हुनकर स्थान अछि, सम्मान अछि से अछि। सभसँ अधिक चाचीकेँ जिनकासँ हमरा माइक सिनेह मिलल ओइ सिनेहकेँ पाबि हम सभ जेतेक विद्यार्थी ओतए रहैत रही सभ हुनका चाची कहैत रहियनि। तखनि दादा जीक (आदरणीय श्री जगदीश प्रसाद मण्डल) अनेकानेक रचना प्रकाशित भेल रहए तब चाची हमरा दादाजीक लिखल किछु किताब पढ़ैले देलथि आ कहलथि जे लिअ पढ़ब। चचा कहै छला जे मुन्नी जँ लिखए तँ कहबै लिखैले। पत्रिकामे छपतै। तखने हम अपन वएह तुकबंदी पढ़ि कऽ सुना देलियनि। कविता सुनि चाची हमरा आगू लिखैले प्रेरित केली आ कहली जे एकरा आब मैथिलीमे लिखू। आइ अगर हम किछु लिखलौं आकि लिखि रहल छी, एकर सभटा श्रेय चाचा-चाचीकेँ छन्हि। वएह छथि जे हमरा बेर-बेर प्रेरित करैत रहला/रहली। जेना माए-बाप अपन बच्चाकेँ सही रस्ता देखबै छै तहिना चाचा-चाची हमरा आँगुर पकड़ि एतए तक अनलथि। हम हुनका धैनवाद दऽ सिनेहक मोल नै लगबए चाहै छी बल्की जइ ऊँचाइपर ओ हमरा देखए चाहै छथि ओइ ऊँचाइपर हम चढ़ि हुनका उपहार दिअ चाहै छी। श्री गजेन्द्र ठाकुर जीक सहयोग तथा हुनक प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष प्रेरणा सदति मन राखबा योग्य अछि। हुनके आशिर्वादक फल छी जे आइ हमर ई छोट-छिन पोथी प्रकाशित भऽ अपने सबहक हाथ धरि पहुँचल। हम हुनका प्रति कृतज्ञ छी आ सच्च हृदैसँ हुनक आभारी छी। सभ पन्ना उज्जर रहि जाइत सभ गप्प उड़िया जाइत श्रुति प्रकाशनक सहयोगक बिना केतेक भावना मनमे मरि जाइत। पोथी प्रकाशित करबा लेल एक बेर फेर सम्पूर्ण सहयोगीकेँ सादर धैनवाद। मुन्नी कामत पति- श्री अरूण कामत ग्राम+पोस्ट- सुरयाही भाया- फुलपरास जिला- मधुबनी बिहार। सम्पर्क नम्बर-९८१८८३२५६८ केतए जा रहल छी हम- केतौ तपि रहल अछि, केतौ गलि रहल अछि, केतौ धँसि रहल अछि, तँ, केतौ उठि रहल अछि आइ धरती! तपा रहल अछि एकरा मनुखक बढ़ैत भूख, जे दिन-प्रतिदिन गाछ-वृक्ष काटि एकरा छत्रहीन बनबैत अछि। समाजक कुरीति एकरा गला रहल अछि। अपन बेटीपर देखि अतियाचार ई बेबस भऽ धँसि रहल अछि। देखि ई सभ विडम्बना माँ धरती क्रोधसँ पहाड़ बनि संकल्प करैत अछि कि सम्पूर्ण जहाँकेँ ऐ विशाल चोटीसँ झाँपि एकर सर्वनाश करि दी। मुदा ओ किछु नै करैले मजबूर अछि। जेना आइ धरती बेबस लाचार आ कड़ीसँ बान्हल देखाइत अछि ओहिना हमरा समाजमे नारीक स्थिति अछि। आइ भाय जल्लाद बनल अछि आ बाप पापक रूप लेने अछि। प्राचीन कालसँ जइ रिश्ताकेँ भगवानसँ पहिल जगह मिलल अछि। आइ ओकर नामो लइसँ घृणाक बोध होइए। आइ हमरा समाजमे सभसँ अधिक नजाइज सम्बन्ध गुरु आ शिष्याक बीच अछि। हम एगो अरमान मनमे बसा अपन बच्चामे अच्छा संस्कार आ उच्च शिक्षाक अभिलाषा लेने गुरु लग जाइ छी मुदा वएह गुरु हमर आत्मसम्मानकेँ ठेँस पहुँचाबैत हमर बच्चाक साथ शोषण करैत अछि। भाय शब्द अतेक पावन, अतेक पवित्र अछि कि सभ बहिन भाय शब्दकेँ सम्बोघित करैत ई सोचैत अछि कि ई हमर केवल भाय नै कृष्णक रूप अछि जे युग-युग तक हमर आबरू आ सम्मानक रक्षा करत। चाहे ओ चचेरा, ममेरा आकि फुफेरा भाय किएक नै हुअए। पर वएह भाय जब अपन बहिनक बिसवास तार-तार करैत ओकरा संगे बलात्कार करैए तँ ओकरा की नाम देल जाएत। जनम देनहार बाप जेकरा पिता परमेश्वर कहल जाइत अछि वएह बाप अपन जनमल बेटी संग पाप करैत अछि अही समाजमे। आखिर केतए ठाढ़ छी हम, केतए जाइले डेग बढ़ा रहल छी एक पल लेल, सोचू। ऐ गंदा पएरसँ चलि हम अपन स्वच्छ आ पवित्र समाजक निर्माण कऽ सकै छी? केवल सादा कागजपर कलम दौगेनाइ सीखनेसँ संस्कार आ सोच नै बदलैत अछि। अपन जमीर आ अपन आत्माक अबाज सुनु आ कहू कि बेटी कलंकक पुड़िया अछि। हमर समाज ओकरा कलंकित करैत अछि? कविताक क्रम- समरपित होइत बेटी- नव जिवनक निर्माण- घर-घर बढ़ल अतियाचार- संकल्प- दहेजक बिहाड़ि- एहेन समाज- सुरज-दादा- सयान भेल हमर खेल- महगाइक खेल- सुखद अछि ई मिलाप- सान हमर मिथिला- विरह- देशक राजनीति- विदेशी चालि- किए बेटी बनेलहक विधाता! दुनियाँ तबाह भऽ गेल- अनहार भेल जाइए देश अपन- बाबू हम सिपाहि बनबैए- आगमन अहाँक- हरल जाइए जननि- कौआक दुलार- कोइस रहल छी जनमकेँ- गाम-घर- मलार- मुनगा- सगरे इजोत हमर मिथिलाक- अरकंचन- हमर मिथिला हमर परान- नारी- जट-जटिन- सूखल मन तरसल आँखि- मनुखक सौदा- अनमोल-बोल चलाकक दुनियाँ- बून-बून बँचाबी हम- जिनगीक मरीचिका तकैत जिनगी कूड़ाक ढेरमे- संकल्प- ठमकल शब्द- दहेजक बिहाड़ि- हराएल हमर रूप- विदाइ- बेटी- दहेजक आगि- ओइ पार- नेताजी- पहिल बरखा- किसान- समाजक विडम्बना- दर्दक टिस- रोकू कोइ ऐ सैलाबकेँ- नोराएल आँखि- किए छी हम अछूत- भ्रष्टाचारक प्रसाद- तब हँसत तुलसी- शिल्पकार- यादि गामक- आसक किरण- नारीक पहचान- आजाद गजल- बौआ देखहक चांदकेँ- भोरक सनेस- बेटी-लहास- बाल-श्रम- फगुआ- आनहर कानुन- बुन्नक मोल- करी मिथिलासँ पहचान- करिझुमरी कोसी- नै लेब आब हम दहेज- मिथिलाक दादा- पाहुनक माछ- हमरा पागल कहैत अछि लोक- सगरे अनहार अछि- माएक रूदन- अपना दिस निहारू- मजबूर किसान- स्वच्छ समाज- माए एक चुटकी नुन दअ दे- बेटी- कारी-बजार- शब्दक खेल- माए बता तूँ एगो बात- अनहार घरमे हत्या- बेटी- भेल पुरा आस भाइक सिनेह अलहर मेघ- सिया तोरे कारण- ठिठुराबैत जाड़- बंदिश- पैसासँ बिआह- काँच बाँस जकाँ लचपच उमरिया- मनक वेदना- शरहद- जतरा- अंकक मेल- बहिन- समरपित होइत बेटी- जहिया अकर जनम भेल तहिए डिबिया मिझा गेल, सभ कहलक कलंक एलौ छठिहारोसँ गीत हरा गेल। ज्यों-ज्यों ई नमहर भेल समाजक बोझसँ दबैत गेल गामक लाज, बाबूक पगड़ी पकड़ि बेटी सियान भेल। एक जनम बितल, दोसर जनम लऽ तैयार भऽ गेल केकरो नै किछु कहलक हरिदम समरपित होइत गेल जुबान रहितो बेजुबान बनि सभ दुख सहैत गेल। बेटी बनि गेल समर्पण आ तियागक मुर्ति तैयो एगो कलंक एकरा माथ पर किए लगि गेल किए कहैए हमर समाज की बेटी जनमिते दू हाथ धरती तर चलि गेल। नव जिवनक निर्माण- ब्रह्रमाक छी संतान हम ब्रह्रमा बनि आएल छी जेकर कर्म अछि नित नव निर्माणक नै हम केना ई बिसरल जाइ छी। अछि हमरा बाजुमे बल मस्तिष्कमे अपार ज्ञान फेर किए हम सुस्त बनि अपन मनोबल घटेने जाइ छी। एक्के माटि आ एक्के साँच अछि परमात्मा ले जइसँ ओ सभ मनुखक निर्मान करैत अछि एक्के ज्ञानक सारसँ ओ सभपर बरसा करैत अछि। फेर अहाँ किए पछुआएल छी अपनापर बिसवास रखू आत्मबल मजगूत करू असगर चलु राहपर केकरो नै बाट देखू मंजिल अहाँक आगू अछि पाछू मुइर नै कमजोर बनू ब्रह्माक संतान अहाँ छी तँए ब्रह्मा बनू नित नव गुण, संस्कार आ नव जिवनक निर्माण करू। घर-घर बढल अतियाचार- घूमि आउ शरहदक लाल ओतए रहनाइ अछि बेकार सीमाक परवाह छोड़ू देखियौ अपन देशक हाल। बिसरि गेल सभ मर्यादा अपन मान-सम्मान संस्कृति अपन धर्म-मानवता भेल बेकार बढ़ि रहल अछि अतियाचार। बाहरबलासँ नै आब घरबलासँ खतरा अछि मुस बाघ बनल गीदर बनल अवारा अछि। दुश्मनक डेरा ओइ पार नै एतै घर-घर बसेरा अछि पाँच सालक बेटी बे-आबरू भऽ रहल अछि की यएह हमर परम्परा अछि? इंसान, इंसानक दुश्मन बनल नै केतौ कोनो भाइचारा अछि हर रिस्ता खण्डित भेल आइ देखि रहल छी भविस अपन केतेक कारी सियाह अछि। संकल्प- बान्हि लिअ मनकेँ कर्तव्यक डोरसँ कहीं मनक चंचलता बेलगाम ने बना दिअए हुंकार भरि ई अहंकारी कहीं अहाँकेँ शैतान ने बना दिअए। गिरैसँ पहिले गर सम्हरि जाए तँ चोट नै लगत, इरादा होइ सच्चा तँ आसमानकेँ झुकबैत कोनो देर नै लगत। एना तँ घटि-घटि कऽ चान एक दिन पूर्ण होइ छै ढलैत सुरूजक संसार रोशन करैक वचन दिया दइ छै। नै हारिक संकल्प रखू मनमे तँ पूसक कपकपाइत ठण्डमे गरमाहट एगो जुगनु दइ छै। दहेजक बिहाड़ि- माए- “लाइघ एलौं सासुरक चौखटि, कलंकित तूँ हमर कोइख केलँह ओनइ केतौ डुमि मरितँह मोलि चुनर ओढ़ि, किए ऐ आँगन एलँह।” बेटी- “माए हम आन नै, अहींक खुन छी नै बनाउ हमरा बीरान, ईहो तँ हमरे घर छी।” माए- “बेटी बीरान बिअाहे दिन भऽ जाइ छै, माएक आँचर माथसँ उठि जाइ छै, वएह दिन ओ दू कुलक लाज रखैक कसम खाइ छै, मर्यादाक पाजेब पहिर, अपन सासुरकेँ स्वर्ग बूझि हर कर्त्तव्य निमाहैत ओत्तै जीवन समपन्न करै छै।” बेटी- “माए हम नै कोनो पाप केलौं, नै अहाँक कोइखकेँ कलंकित केलौं, हमरा सभ वादा याद अछि, अपन मर्यादाक अभास अछि। पर हमहूँ तँ एगो जान छी, न कि कोनो वस्तु, जेकर बार-बार सौदा होइत अछि।” अहीं कहू जहियासँ अहाँ हमर बिआह केलौं सभटा खेत, जेवर-जत्था बेचि देलौं, आब ई घरो गिरबीपर अछि, तैयो नै ओकर पेट भरैत अछि।” माए- “हमरा शरीरमे जब तक जान अछि हम ओकर मांग पुरा करैत रहब जब तक ओकर सुधा शांत नै होइ हम खुन बेचि ओकरा तृप्त करैत रहब।” बेटी- “किए अहाँ अनहारमे छी, हमरा बेटी होइपर शर्मसार करै छी, तँए आइ पाजेब हम उतारि एलौं, सभ रिस्ता तोड़ि एलौं दऽ एलौं हम तलाक हारि एलौं दहेजक वाक।” माए- “चुप रह निरलज! ई की बात बजै छँह, हिन्दु भऽ मुस्लिम रीत चलबै छँह, एक बेर ई डोर बन्हैए मरन तक नै गाठ खुलैए ई दहेजक आगि हमरेटा नै घर-घर लगै छै।” बेटी- “माए दहेज लेनाइ-देनाइ दुनू पाप अछि, तलाक नर्ककेँ स्वर्ग बनबैक मार्ग अछि, एगो सुयोग जीवन-साथी हर बेटीक अधिकार अछि। माए- “चाइर अक्षर पढ़ि तूँ हमरा सिखाबए चललँह, बरखसँ चलैत आएल परंपरापर तूँ ओंगड़ी उठबए लगलँह। एक बेर जे छोड़ि दइ पतिकेँ ओ राँर कहाबै छै, एहेन पापन तँ नरकोमे नै जगह पबै छै। नै बाज किच्छो, तोरा वाणी सँ दुषित पुरा गाम हेतै, जो डुमि मरिहँ केतौ, हमर कोइखक उद्वार हएत।” बेटी- “माए तुहों तँ एगो बेटी छीही? फेर अपन बेटीक दर्द किए नै बुझै छीही, नारी बनि किए नारीकेँ असहाय करै छीही। जे परम्परा जीवैक कधिकार छीनि लइत ओकर हाथ किए पकड़ै छीही। जइ बेटीक खुशीले तूँ दहेजक दलदलमे फँसल छँह, आइ वएह बेटीकेँ मरैक दुआ करै छीही। तूँ सच-सच बता दे माए, हमर खुशीले तूँ निलाम भेलँह आकि अपन परम्परा प्रतिष्ठाले। तोरे जकाँ माए-बाप दहेजक बिहाड़ि उठेलकै एकबेर देखि माए, ई बिहाड़ि केतेक बेटीकेँ जिनगी उजारलकै। ई कोनो प्रतिष्ठा नै, पाप छिऐ जेकर जननी कोइ ने माए-बाप छिऐ। आबो बन्न करू मुट्ठी तबे मिलत बेटीक श्रापसँ मुक्ति।” माए- “बेटी हम नीन्नसँ सूतल छेलिएे, घोर अन्हारमे डुमल छेलिएे नै चिनहलिएे ऐ दानवकेँ नित सेवा करि नमहर केलिएे आइ देखलौं ऐ भोकारकेँ, खोइल ई परम्पराक पट्टा दहेज मुक्त बनाएब अपन समाजकेँ। बताएब जन-जनकेँ की, पुरुख सत्तात्मक समाजमे महिलोकेँ अधिकार छै जब पुरुख कऽ सकैए पूनर्विवाह तँ महिलो लेल नै कोनो रिति-रिवाज छै। स्वतंत्रता हर बेक्तीकेँ जन्मसिद्ध अधिकार छै।” एहेन समाज- घूमि एलौं पुरे संसार तैयो रहलौं घरसँ अंजान! ६२ बर्खक बाबा केलक चुमौन १५ बर्खक नवालिकसँ कहू केहेन भेल मन। करियाक बिआहक भेल चारि साल! सात गो खुन केलक नै भेल कोनो केस-फोदार गर्भेमे मारैत गेल बेटीक गला घोटैत गेल ई दुगो हर साल। मास्टर-साहैब अपन दुनू बेटीकेँ घरमे बैठा चुल्हा-चौका करबैत अछि अपन घर अनहार करि केना दोसरक घर इजोत करैत अछि। ई कोनो एक जगहक नै हर कोणक दृश्य अछि हमरे ऐ अगल-बगलमे घटित भऽ रहल यथार्थ अछि। सुरज-दादा- बाल-कविता माए केहेन ई सुरज-दादा छै किए नै ई कोनो स्कुल जाइ छै। जब प्राणीकेँ कष्ट देनाइ पाप छै तँ फेर ई किए पाप करै छै। जाड़मे नुकाएल रहै छै गुमारमे जड़बै छै। माए तुहीं एकरा समझाबिही ई किए नै केकरो बात मानै छै। चंदा मामा जकाँ ईहो किए नै काज करै छै? माए- बौआ नै तूँ बुझबहक अखनि ई राज धैन ई दादा जे चलैत अछि सभ काज। पढ़ि-लिखि जब तूँ नमहर हेबहक सभ गुत्थी अपने सुलझेबहक। असिम शक्ति छै हिनका लग अपार गुण हिनकामे विद्यमान छै तँए तँ पहिल अर्ग हिनका दऽ कऽ जग नत-मस्तक होइ छै। सयान भेल हमर खेल- अँगना-अँगना ढोल बजैए सभ खुशीमे झुमैए-गबैए बाबू हमहूँ अपन गुड़ियाक बिआह करब ईहो नमहर भेल जाइए। आजन-बाजन हम मँगाएब गहना-जेबर गड़हएब लहंगा पहिरा अपन खुशीकेँ हम दुलहन बनाएब। गाम-गमाति न्योंत पठाएब। अँगना-अँगना ढोल बजैए सभ खुश सभ धी-सुआसिनकेँ मंगाएब सोहर-समधौन गाइब कऽ अपन दुलारीकेँ सासुर पठाएब। पर बाबू केकरा संगे हम एकर बिआह रचाएब ऐ लोभी समाजमे केना एकरा दहेजसँ बँचाएब। नै लगाएब हम सियाकेँ मेहदी कोनो सौदेवाजक रंगसँ नै उठाएब हम सुहागक चुनरी जे रंगल होइ दहेजक कलंकसँ। महगाइक खेल- टमाटर अपन रंग देखा सभकेँ ललचबैए पिऔजक बात की कहूँ भाग तँ छिलके तैयो कनाबैए। बढ़ल जाइए दूधक दाम धानक खेत भेल बीरान गरीबक रोटीपर अखरे नून ओंघराइए। केतौ बंजर तँ केतौ दहार नै अछि खुशी नअ केतौ बहार। रूपैआ तँ आब झुटका भेल कऽ रहल अछि सभ नेता ई खेल। देख कऽ देशक समस्या मन गरमाइए, सोचि कऽ देशक भविस जी घबराइए। सुखद अछि ई मिलाप- दिवानगीसँ सुसज्जित प्रेमक गाथा देखलौं अम्बरकेँ झुकबैत समुद्रक आगू माथ। ई प्रेमक हर्ष अछि या मिलनक उत्तेजना जँ उफनैत अछि लहर झुमैत अछि हर एक बुन्न चुमैले ओइ अन्नत अकासक अँगना। ठार समुद्रक कछेरमे बहुत दूर-दूर तक देखि रहल छी आनन्दमय दृश्य हम। झूमि रहल अछि जलपरि हर्षित अछि सुरूज पहिरा कऽ अपन रंगक ओढ़नी साक्षात् भेल ऐ प्रेमकेँ देखि रहल छी ई मनमोहक दृश्य समुद्र आ अकासक मिलाप हम। सान हमर मिथिला- हम मिथिला वासी पहचान हमर मैथिल छी हमर संस्कार सीता भक्ति हमर उगना छी। कहैए दुनियाँ हमरा तूँ तँ उज्जर बालुमे सिमटल छँह नै छौ कोनो सुख-सुविधा तूँ तँ पाइ-पाइले तरसल छँह। ने नीक स्कुल छौ ने कौलेज तूँ तँ रोजगार ले भटकै छँह जे किछु छौ तोरा ले सेहो भ्रष्टाचारमे घिरल छौ। पर हम यएह कहै छी की हमर मिथिलाक दुनियाँमे पहचान अलग छै करोड़ोक बीचमे ठाढ़ ओकर सान अलग छै। एकर कला-कृति विदेशमे सराहल गेल एकर सभ्यता-संस्कार देशमे सम्मानित भेल। हमर मेहनतिक आगू दुनियाँ नत्मस्तक भेल जब उज्जर रेतमे हरियाली लहलहा गेल। असुविधाक बादो केतेक विद्वानक जनम भेल नै छी पाछू किच्छोमे नून-रोटी खाइ छी दिन-राति कमाइ छी बाल-बच्चा परिवार संग गर्वसँ स्वर्गमे जीवन-यापन करै छी। विरह- प्रेम संगे विछोह किए रहै छै सावन अबैत केतेक झूला सुन्न परि जाइ छै। कोनो घर हंसै छै तँ कोनो आंशुसँ डुमै छै। केतौ धरती तरसै छै तँ केतौ मन तरपै छै ने सजनीक मन साजन समझै छै ने धरतीक तड़प बादल बुझै छै। कहने छै कोनो सायर “सावनो कहियो प्रेम केने छेलै अपन प्रेमीक नाओं बादल रखने छेलै जब कनै छेलै दुनू एक-दोसरक विरहमे तँ लोग ओकर नाओं बारिस देने छेलै।” पर जब विरहक अग्निमे झुलसए लगलै धरती तँ लोग ओकर नाओं उज्जर रीत रखलकै अकाल, बंजर, सुखार रखलकै। मुदा ऐ विरहकेँ की नाओं देल जाए प्रितमक इंतजारमे भऽ रहल छै पाथर मन एकरा कोन आस देल जाए। आब तँ ई सावन चिढ़ाबऽ लगलै कारी मेघ हंसी लगलै मिलनक आसमे ग्रहन लगलै बज्जर पुरा तन भेलै कान्हा जबसँ गेलै केतेक गोपी खामोश भऽ गेलै। देशक राजनीति- दिन-राति फेक रहल छी पासा तैयो नै खेलक बोध अछि, ई अहाँक नै शासनक दोष अछि। नित लड़ै छी झगड़ै छी अपन एकता बिखड़ै छी जब-जब घरमे भेदिया पलैत अछि तब लंका जकाँ स्वर्ण भवन छौरक ढेर बनैत अछि। कहियो पुरब, कहियो पछिम कहियो उत्तर, कहियो दक्षिण मुँह बाैने ठार अछि कहि फेर हुअ न कैद चिड़िया पिंजरा चारुकात अछि। नै अछि आइ बापू कोइ न अम्बेदकर, न पटेल न कोइ निस्वार्थ राष्ट्रवाहक अछि, खण्डित भऽ रहल देश अछि टुकड़ा-टुकड़ामे बसैत अहंकार अछि। आबो समझू राजनीतिक राज मेटाउ आपसमे कलह-विकार नै तँ अहिना पार्टी-पार्टी बँटैत जाएत सभ अपनेमे मरैत जाएत वंशहीन भऽ जाएत ई समाज सगरे उज्जर साड़ी फहराइत जाएत। राजनीति बहुत पेचेदार अछि कुर्सीक लालच बढ़बैत अतियाचार अछि। विदेशी चालि- की कहब शहरक हाल देशी मुर्गीक भेल विदेशी चाल। जेकरा माएक दर्जा मिलल अछि जेकरा बिनु नै होइए कोनो शुभ काज ओइ माएक दशा देखि होइए पुरे देह लाज। कॉट-झार एतए हरियाली भरैए पर माए तुलसी पानि बिनु सूखल जाइए। ससुर-भैंसुरसँ भेल बेपर्दा आँखिक लाज हराएल जाइए। साड़ी-सूटक बात छोड़ू टीसर्ट-स्कर्ट पहिराबा भेल बढ़ैत महगाइ जकाँ कपड़ा छोट होइत गेल। पहिरन अछि सभ एतए नकाब केतेक करब हम बखान की कहब शहरक हाल देशी मुर्गीक भेल विदेशी चाल। किए बेटी बनेलहक विधाता! पजेब अछि पएरमे जेकर घ्वनि मघुर अछि मुदा पकर बहुत मजगूत कहैत अछि कि तूँ अजाद छँह पर अछि सिमा; कदम-कदमपर। एगो एहेन दिवारक जे बनल अछि; बिनु बालु-सिमेंटसँ सोचक दिवार! चाहे असमानमे उड़ी हम पर ओइ दिवारक ऊँचाइ नै समाप्त होइत अछि आखिर केतेक जनम तक पिछाँ करत ई दिवार! आ कखनि तक हम कहब किए बेटी बनेलहक विधाता। दुनियाँ तबाह भऽ गेल- बाबू किए एहेन समैक घारा बदलैए सच्चे कहै छेलै मुसहरु काका दू हजार बारहमे दुनियाँ तबाह भऽ जेतै! नित एतए अन्याय होइ छै मनुख-मनुखकेँ मारने फिड़ै छै आन गोरेक बात छोड़ह भाए भाएकेँ आ बेटा बापकेँ कोदाइरसँ काटने फिड़ै छै। अपने घरमे सभ हराएल रहै छै पड़ोसी जकाँ सभ घोसियाएल रहै छै नै छै केकरोसँ मेल-मिलाप घर-घर नाचि रहल छै कोन अभिशाप। अँगनामे तुलसी सुखाएल जाइ छै नारीक लक्ष्मी रूप हराएल जाइ छै नै डरै छै कोइ भगवानसँ नित गिरै छै अपने इमानसँ। ईमानदारी लुप्त भऽ बेइमानी उजागर भेलै झूठक खेती पनपैत गेलै मनसँ मन दूर भेलै सच देखहक बाबू यएह छिऐ ठीके दुनियाँ तबाह भऽ गेलै। अनहार भेल जाइए देश अपन- राम राज भेल खतम रावण राज अछि चरमपर, देखियौ यो भलमानुस सभ अछि ऐ करमसँ। गरम हाथ बजबैए ताली नरम हाथ मसुआएल अछि, पर ताण्डव दुनू दिसन कोइ उन्चास तँ कोइ पचास अछि। सभ कहैए कि हम उत्तम, हम इमानदार, हम सर्वश्रेष्ठ छी। मुदा कोइ नै छी केकरो सभ-क-सभ भ्रष्टाचारी कुष्ट छी। अपने माएकेँ बेचि खाइबला अछि सभ ऐ संसारमे, नित बढ़ि रहल अछि महगाइ केना जिन्दगी कटत अनहारमे। बाबू हम सिपाहि बनबैए- बाबू जहिया हम नमहर हेबह देशक बेटा बनबह बन्दूक लऽ कऽ सीमापर दुश्मन संगे लड़बै। बाबू हमरा एगो बर्दी सिआ दिअ फौजीबला स्कुलमे नाओं लिखा दिअ। जे अखनिसँ हम सिखबै तब ने असली हिरो बनबै। जनगणमण नित गाबि कऽ माताक चरणमे नतमस्तक हेबै नै हेतै कम कखनो हमर सान बढ़ेबै हम अपन देशक मान। आगमन अहाँक- अहाँक आगमनसँ अशान्त मन शान्त भेल हर्षित भेल घर-आँगन खुशी सगरे उझला गेल। उदास हमर मन-मंदिरमे अहाँक इंतजार छल सुनैले ई किलकारी एक-एक पल पहाड़ छल। कमल नयन, चन्द्र मुस्कान माखनसँ बेसी नाजुक छी अहाँ बिनु अपूर्ण छेलौं हम हमर पूर्णताक अहाँ पहचान छी। सुरूज जकाँ प्रकाशमान वायु जकाँ गतिमान ज्ञानक सभटा सार मिलए सुख-समृद्वि आ सम्पन्नता सगरे अहाँकेँ सम्मान मिलए। जुग-जुग जीबए हमर लाल पुरा होइ सभ अरमान मीलै सभ खुशी एकरा दिअ यएह माए हमरा अहाँ वरदान। हरल जाइए जननि- जइ पुरुखकेँ स्त्री जनम देलक आइ वएह गहुमन बनि फुफकारैए ई आनहर ३ सालक बच्चीओकेँ डसने जाइए। जे औरत मर्दकेँ रूप, आकृति, पहचान देलक अपन खुनसँ सिंच प्रकाशक राह दखेलक आइ वएह औरतक जिनगी अनहार करैए ओकरा बजार आ कोठाक राह देखबैए। जइ आदमीकेँ आँगुर पकड़ि कऽ चलनाइ नारी सिखेलक आइ वएह नारीकेँ पएर तोड़ैए घरक ४ दिवारमे ओकर अवाज दफन करैए। जे आँचर ओकरा शीतल छाँह देलक आइ वएह आँचरमे नोर उझलि देलक। कौआक दुलार- कोइ दुष्ट कोइ करिया तँ कोइ पपियाहा कहि ऐ कौआकेँ बजबैए पर एकर निःस्वार्थ प्रेम देखि हमर आँखि डबडबाइए। चुइन-चुइन दाना लाइब सभ बच्चाकेँ खिआबैए ओ नै बुझैत बेटा-बेटी एकर तँ दुनू अपने संतान अछि हमरा मानवसँ केतेक ऊँच देखियौ ऐ करियाक विचार अछि। जन्मक संगे हम माए बनि अन्याय करै छी बेटीकेँ पराइ आ बेटाकेँ वंशक मान बुझै छी झूकि जाइए मन हमर बाँटि लइ छी प्यार अपन जब माएक प्रेम नै मिलल एक रंग तब कोइ केना देत बेटीक संग। कोइस रहल छी जनमकेँ- तीन सालक उमेर छल तुतना लगल बोल छल गुड्डा-गुड़िया हमर सहेली दिन-राति करैत रही बाबा संग अठखेली। अ-आ अखनि जननौं ने छेलौं पएर अखनि तिति खेलैले उठेनौं ने छेलौं की बधि गेल ऐमे घुँघरू। की दोख छल हमर जे रातिक अनहरियामे छोड़ा कऽ माएक आँचर पकड़ा देलक बाइयक आँगुर सीमासँ सिमाबाई बनलौं बेटी छेलौं कहियो आइ तँ वाइफ बनलौं। केना कहब समाज लूटलक हमरा केलक बे-आबरू बजारमे जब अपने कातिल भेल हमर तँ कि करब शिकायत केकरोसँ हम। अपने हालपर कनै छी बेटी छेलौं तँए आइ अपन जिनगीकेँ कोसै छी। गाम-घर- कदिमा, भुजिया, तिलकोरक तरूआ भँट्टा-अल्लूक झोर यौ मन पड़ैए ओ पटुआ साग-चटनीक मेल यौ। आमक टुकला पिऔजक गोला बसिया भात आ माछक मुड़ा आब बुझाइए सबहक मोल यौ। मखानक लाबा बाबाक पनबटिया ओरहा-डाढ़ीक खेल यौ। मन पड़ैत अछि गामक बतिया दिन छल ओ केतेक अनमोल यौ। मलार- आँखि तोहर मटरक दाना ठोर कमलक पंखुड़ि गाल मथल मक्खन मुस्कान तोहर चाँद रे। मुट्ठीमे भाग मुनने तूँ भाँफि रहल छेँ सभ किछु बन्न आँखिसँ देखि रहल छेँ तूँ सगरे संसार रे। चला रहल छँह तूँ पएर आगु बढ़ैले बूझि रहल छी हम तोहर मनक चंचलता छूबि अनेक तोरा मुखपर सवाल रे। मुनगा- घौरछे-घौरछे झुलैए जजमान देखैमे लगैए सुगबा साँप भरि गाछ गछारने छै भुआ कोइ कहैए सोहिजन तँ कोइ मुनगा एलै जुरशीतल हेतै हलाल मुट्ठीए-मुट्ठीए परसेतै भरि गाम मुनगा तीमन ठण्डा होइ छै आँखिक ज्योति से बढ़बै छै एकर फुलक तरूआ अछि लाजवाब मुदा गाछक नै होइ छै कोनो काज तैयो मिथिलामे छै एकर राज। सगरे इजोत हमर मिथिलाक- गोल रहि हम हिमांचल भेटल एगो बाबा मांजल कहलखिन छी गर मैथिल अहाँ तँ करू व्यान मिथिलाक सत्कार अछि किए महान? कहलौं हम जे अछि अतिथि हमरा लेल भगवान जकाँ। पहिले लोटामे पानि लेने पखाड़न आ आछमनक रिवाज अछि भात-दालि, तरकारी, भुजिया तैपर तरूआ, हमर पकवान अछि। दही-चुड़ा संगे अँचार जानैए सभ संसार पान-मखान विदाइक बेला करैए अपन व्यान अछि। छोट-नमहरकेँ सम्मान देखेने हमर दलान अछि जड़िकेँ शीतलता देने अछि सिखेने हमर संस्कार अछि। सुनि कऽ कहलखिन बाबा अलगे छै ओ संसार धन्य छै ओ मिथिला भूमि जेतए उपजैए एहेन नेक विचार। अरकंचन- खत्ता-खुत्ती, कछेर-छापर सुखलोमे हरिया जाइ छै चाकर-चाकर होइ छै पत्ता पानि ओइपरसँ ओंघरा जाए छै। दूगो जाइत छै एकर हरिअरका बेसी आ ललका कम कबकबाइ छै। नै छै कोनो जी अंजान मिथिलामे घर-घर एकरा सभ स्वादसँ खाइ छै। अनेरबे ई जनमैए एतए तँए बुझाइए अरकंनचन नाओं छै तीमन एकर बड़ सुअदगर माछसँ कम नै सान छै। की करी हम बखान एकर सोचिओ कऽ गाल गुदगुदाइ छै।. हमर मिथिला हमर परान- हमर मिथिला, हमर जननि हमर ई परान अछि देखलौं बर दुनियाँ आगू मुदा मिथिले हमर जान अछि। एतुक्का माटिमे खुशबू संस्कारक जे नै बुझैत केकरो आन अछि आनोकेँ अपना बनबैए यएह मिथिलाक पहचान अछि। एतए गोबरक होइत अछि पूजा बगराकेँ मिलैत दुलार अछि एहेन पावन धरती हमर एतइ जननिक धाम अछि। जे एला एतै बैसि गेला कखनो राम तँ कखनो उगना छला, देवतो करैत ऐ माटिसँ दुलार अछि एहेन पावन हमर धरती एहेन सुन्दर हमर गाम अछि। नारी- निर्मल अछि ओ ममता अछि निर्मल हुनकर दुलार ओ नारी अछि ऐ समाजक जइमे रचल-बसल अछि संसार। नै मिल अनुकुल परिवेश हुनका नै ज्ञानक सार तैयो हैरी छी देखि कऽ केतेक उच्च आ आदर्श अछि हिनकर विचार। सभ युगमे दबबैत आएल नारीक कुटनितिक ई संसार। तैयो कहि रहल अछि आइ नारी जननी छी हम समाजक हमहीं बदलब एकर सोच-विचारके पैदा करब अपन कृतिसँ एतए मानवताक निश्छल संस्कार निर्मल रहब हम ममता रहब बाँटब जन-जनमे प्यार। जट-जटिन- जटिन- “छोड़ि मिथिला नगरिया बान्हि अपन ई पोटरिया तूँ केतए जाइ छँह रे..! जटबा केतए जाइ छँह रे...! छोड़ि अपन सजनियाँ तियाग कऽ सभ खुशियाँ तूँ केतए जाइ छँह रे जटबा केतए जाइ छँह रे...!” जट- “जाइ छियौ गे जटिन देश-गे-विदेश जटिन देश-गे-विदेश भऽ गेलैए गैर आब अपन प्रदेश! साड़ी अनबौ गे जटिन गहना अनबौ गे...। साड़ी अनबौ गे जटिन गहना अनबौ गे बौआ-बुच्ची ले सेहो नव अंगा अनबौ गे!” जटिन- “नै लेबो रे जटबा विदेशक सनेस नै लेबो रे जटबा विदेशक सनेस हमरा तँ चाही जटबा तोेहर संग आ सिनेह!” जाट- “नै रोक गे जटिन हमर तँू डेग कमेबै नै तँ केना भरब सबहक पेट! बौआ कनतौ गे जटिन बुच्ची ललेतौ गे बौआ कनतौ गे जटिन बुच्च्ी ललेतौ गे जरतौ जे पेट जटिन कोइ नै सोहेतौ गे।” जटिन- “घुर-घुर रे जटा सुन-सुन रे जटा जिद्द छोड़ रे जटा कोइ नै ललेतौ रे जटा हरे जटबाऽऽऽ रे मेहनति करि नुन रोटी खेबै मुदा संगे मिथिलेमे रहबै रे जटा..! चल-चल रे जटा अपन देश रे जटा अपन खेत रे जटा मरूआ रोटी रे जटा नुन रोटी रे जटा हे रे जटबाऽऽऽ तूँ धान रोपीहेँ हम जलखै लऽ कऽ एबौ रे जटा...!” जटा- “सुन-सुन गे जटिन हमर सजनी तूँ जटिन घरक लक्ष्मी तूँ जटिन हमर जिनगीक गाड़ी तूँ जटिन हमर ज्ञानक खान तूँ जटिन हे गे जटनी ई ई ई...। तूँ जीतलँह हम हारलौं गे जटिन छोड़ि अपन देश नै केतौ जाएब गे जटिन रहतै मिथिलेमे सदैव अपन बास गे जटिन हे गे जटनी ई ई ई...। गै दुनू गोरा मिलि मेहनति करबै तँ जिनगी स्वर्ग हेतैय गे जटिन।” जटिन- “हमर साजन तूँ जटा तोहर सजनी हम जटा हे रे जटबाऽऽऽ...। दुनू गोरा हँसैत अहिना जिनगी काटब रे जटा...।” सूखल मन तरसल आँखि- एगो सहारा छल गरीबक, अखरा रोटीपर मेल पिआैजक! ऊहो सुआद छिनाएल जाइए खेतसँ पिऔज हराएल जाइए। सभटा अंगोरा गरीबेपर ढराएल सूखल रोटी तेल ले ललाएल तैपर सँ पिऔज गुल खेलाएल। बान्हए परतै जुन्ना आब पेटमे, केकरो किछु कहैसँ तँ नीक छै यएह की बज्जर खसाबी अपने मुँहमे। मनुखक सौदा- लाख-दू-लाख पाँच-पाँच लाख पर बात होइ छै, तिमन-तरकारी जकाँ मनुखोक आब सौदा होइ छै। मास्टरकेँ दू-लाख इंजीनियरकेँ पाँच लाख डाक्टरकेँ दस लाख भाव छै, जेहेन सौदा लेबहक हो बाबू तेहेन माल दइक रिवाज छै। लक्ष्मी लऽ लक्ष्मी जाइ छै, गरीबक घर बज्जर खसै छै, कन्यादान बिखाएल जाइ छै, पहिले तँ खाली बेटीए छल, आब बापोक लहास पोखरि-इनारमे ढेरीआएल जाइ छै। दानक नाओं पर प्राण मंगै छै हमर समाज निःसंकोच ई पाप करै छै, कहिया एकर बुधि खुलतै, अनहार घरसँ इजोतमे एतै, जल्दी मुझाउ ई दहेजक आगि नै तँ जरए पड़त सभकेँ अइमे आइ-ने-काल्हि। अनमोल-बोल बाल कविता जलसँ शीतल मुस्कान मिसरीसँ मीठ बोल! सभ कष्ट दूर होइ जे करैए एकर मोल। कम बाजी उचित बाजी नै बाजी कोनो अनरगल बोल! जीवनमे आनि नीक आचरन जे अछि अनमोल। करूआ वाणि कटुता बढ़ाबैए अपनेकेँ अपनासँ दूर भगाबैए! नै कही केकरो तितगर बोल जे नाश करैए जिनगी ओइ पिटाराकेँ नै कहियो खोल। चलाकक दुनियाँ- आउ सुनाबी एगो बात पुरानी जंगलमे छल एगो लोमड़ी सियानी चलाकी आ बुद्विमानीकेँ ओ खान छल सभकेँ चकमा देनाय ओकर काम छल। एकबेर खाइ छल रोटी बौआ झपैट कऽ भागल रोटी कौआ जइकेँ बैठल लोमड़ी आगाँ देखि कऽ रोटी लोमड़ी ललचाएल! भरि-भरि मुँह ओकरा पानि आएल पबैले रोटीकेँ चलाबी कोन तीर ऐ बुधुपर। कहलक जेतेक सुहनगर रंग तोहर कौआ ओहोसँ मीठ तोहर बोल रे, कान हमर तरैस रहल यऽ सुना तूँ कोनो राग अनमोल रे। मुर्ख कौआ फुइल गेल अपन प्रशंसा सुनि सभ भूलि गेल। जखने कहलक काँव-काँव रोटी कहलक हम जाँव-जाँव हमर भूखल पेटकेँ तृप्त करॉव-करॉव। बून-बून बँचाबी हम- एलै गुमार चढ़लै खुमार जरलै धरती फटलै दराड़ि। बून-बून लऽ फेर सभ तरसतै हेतै सभकेँ सभ बिमार। सुन रमुआ, चल डोमरा करी हम एगो काज अखनेसँ हम बरखा पानि जमा कऽ बुझाबी हम धरतीक पिसास। तब नै ई दराड़ि फटतै नै कोनो अपदा घटतै आइएसँ हम अपन कएल बनाएब, अपन देशकेँ सुखारसँ बँचाएब। जिनगीक मरीचिका- लटैक रहल छल गुच्छा गाछमे रसभरल मीठ आमक शरारती मन ललचाइत जी कहलक तोड़ि खाइ एकरा मुदा कि करी भय छल पहरेदारेक। मन नै मानलक पाइन मुँहमे भरि गेल फेर सोचलूँ बस एगो तोड़ू तँ डर केहेन यएह तँ निअम अछि संसारक। सभ खाइत अछि छुपि कऽ कखनो घरमे तँ कखनो बाहरमे ऊँच, नीचसँ बनैए एतए सभ अपन यएह पथ पर तँ चलैत अछि सभक सभ। पर सच जे अनभिग अछि सभसँ ई अछि ई मीठ फल नै जहर अछि कोनो जे बदलि रहल अछि हमर नियत आ हमर संस्कार जे दऽ कऽ अपन मिठासक लालच झोंकि रहल अछि धधकैत भट्ठीमे। जिनगीक राहमे ऐत नित्य केतेक मरीचिका पर सीखब हम अकरेसँ संघर्षक रोज नव सलीका। तकैत जिनगी कूड़ाक ढेरमे- देह सूखल पेट हाड़ी आँखि दुनू लाल छल। टुकुर, टुकूर ताकैत छल हमरा दिस ओ ओकरा मुखमे अनंत सवाल छल। पटनाक रेलवे लाइन पर ठार एगो मासुम बच्चा फटल पुरान लटकौने टाँगने छल एगो बोरा अपन पीठ पर देखि कऽ ओकरा एना लागल जेना ताकि रहल अछि अपन जिनगी गन्दगीक ढेरमे। पर नै जानि केतेक मासुम अहिना पनपैत अछि ऐ संसारमे। नित ताकैत अछि अपन मंजिल, अपन भविष्य अहिना कूड़ाक ढेरमे। संकल्प- छोड़ि जाएत माझी पतवार उफनैत जिनगीक राहमे अछि हसरत हुनकर कि, थामैए पतवार हुनके अंश ऐ मजधारमे। छी गर अहाँ कृति हुनकर तँ राही बनू ऐ राहक उठाउ पतवार आ माझी बनू जिनगीक अपन राहक। ऐल छी अहां जेतए तक ओइसँ आगुक कल्पना करू देखि रहल अछि राह मंजिल अहाँक मुस्कुराइत ओइ पारमे। छोड़ि कऽ मोह वट वृक्षक समना करू हवा आ पानिक तब बनत बेक्तीत्व अहाँक अहाँक नामसँ ऐ संसारमे। अहाँ अगर अंश छी हुनकर तँ बुझाइ नै कहियो ई दीप जे छोड़ि गेल अपन सभ किछु बस एगो अहींक बिसवासमे। ठमकल शब्द- रूकि जाइत ई हवा ई नजारा ई बहार, दुनियाँक हम भऽ जाएब विलीन केतौ रूकि जाइत ई कलम आर हरा जाइत शब्द केतौ। नै उठत वेदना मनमे नै उमड़त भावना कोनो। जब जाएब खामोश एतएसँ तँ मेटौ जाएत सभ हसरत दिलक ने आएब हम याद केकरो ने करब हम याद किनको ओइ अज्ञात सफरमे नै मिलत हमराही कोनो बरसैत मेघ, चिलमिलाइत धूप सबहक बीचमे रहब हम असगर ठार ने लऽ जएब, ने छोड़ि जएब किछो बस एगो दिया जे जरत ऐठाम सदखन, सबहक मनमे हएत ओ हमर कृति, हमर करमक ज्योति। दहेजक बिहाड़ि- कहिया तक रहबै हम समान यौ भैया कहिया मिटतै ई अभिशाप यौ हमरो तँ परमतमे भेजलक मुदा अबैत ऐ संसारमे सभ हेयसँ देखलक कोइ कुलक्छनी तँ कोइ कलंकनी कहलक। भैयाकेँ दुलार केलक हमरा धुतकाइर कऽ माए भगौलक दिन-राति हम माएक हाथ बटै छी बाबू-दायक सेवा करै छी तैयो किए ई फटकार सुनै छी! सुनि रहल छी सबहक मुँहसँ दहेज बिनु नै हएत हमर बिआह जे थामत हाथ हमर बाबू भरत पहिले जेब ओकर। हम बेटी छी आ कि समान जे गाम-गामसँ औत लाेक करै लऽ हमर दाम छाम। आब सजबए पड़त सभ बेटीकेँ अपन आत्मदाहक साज आरो कहिया तक पिसाइत रहतै बेटीक समाज। हराएल हमर रूप- जब एलौं तँ रूइ छेलौं कोमलताक सागरमे डूबल छेलौं प्यारसँ छुबै छल सभ हमरा हम सपनामे सूतल छेलौं। अंजान छेलौंव दुनियाँक हकीकतसँ ऐ शोर शराबा, ऐ धधकैत भट्ठीसँ छीनि गेल ओ स्वरूप देलक दुनियाँ हमरा नव रूप। देखि कऽ दुनियाँक रंग काँइप रहल अछि हमर अंग छल, कपट, धोखाधरी सभ अछि सबहक संग। केतेक अरब रामक आबए पड़त करैले एतएसँ पापक अंत देखि कऽ ई हम छी दंग, आइ सबहक मनमे बसल अछि हजारो रावणक अंग। विदाइ- जो गै बेटी, आब कि निहारि रहल छी नोराइल आँखिसँ केकरा ताकि रहल छी। अतै तक लिखल छेलै साथ अतै तक छेलियौ हम तोहर बाप। एक जनम तूँ एतए गमेलऽ हमरा संगे सभ सुख दुख हँसि कऽ बितेलऽ अहिना तूँ ओतौ रहिअ खुशीक दीप जराइयहँ केलियौ आइ हम तोरा पराइ मन रोबैत अछि ठोर हंसैत अछि कऽ रहल छी आइ तोहर विदाइ। जड़ैत ज्योत माए गे, केतेक दिन तक हम बच्चा रहबै बकरी संगे खेलैत रहबै हमरो दुनियाँकेँ जानैक एगो मौका दऽ दे माए हमरा बस्ता दिया दे। छै छोट हमरासँ मालिकक बेटा अंगरेजियेमे फटर-फटर करै छै हम नै बुझै छी देवनागरीयोक एगो अक्षर माए गे, हमरो स्कूल जाए दे। मालिकसँ जा कऽ तूँ कहि दही नै चरेबइ आब हम भैंस हुनकर नै खेबै तरकारी, रोटी हमरा नूने रोटी खा दे मुदा माए गे, हमरा तूँ पढ़ैले जाय दे। पढ़ि लिख हम अफसर बनबै तोरा लऽ लब साड़ी अनबै बाबूक बुरहक सहारा बनि हम दुनियाँमे नाम करबै माए गे, आब हमरा अपन भविष्य बनाबए दे हमरा जिनगी सवारऽ दे। बेटी- बेटी अभिशाप नै वरदान अछि। तिलकक बिहारिसँ बेटीकेँ नै बहाबू ई छी घरक लक्ष्मी एकरा नै समान बनाबू। नै अछि ई बोझ नै अभागी शक्तिक ई प्रतिरूप अछि एकरा नई शापित बनाबू। दुर्गा, काली, लक्ष्मी, सरस्वती संगे सीतो अइमे समाइल अछि हिनकर आॅंचलमे हमर काल्हि अछि एकरा नै कलंकित बनाबू। दहेजक आगि- सुनथुन यै सासुमा हमहूॅं छी किनको बेटी हमहूॅं किनको दुलार छी हमहूॅं ९ महिना किनको कोइखमे आस आ ममतासँ सिंचल छी। नै बुझियौ आन हमरा हमहूॅं एगो माएक अंश छी लऽ कऽ आइल छेलौं आश एगो कि, माएकेँ छोड़ि, माए लग जाइ छी। बाबू छोड़ि बाबू लग यएह अरमान बसैनउ हम सपना सजेने एलौं हम। बाबू हमर अछि गरीब बेटीक कन्यादान कऽ कए तँ राजा जनको भऽ गेल छल फकीर जब दिलक टुकड़े सोंइप देलकनि तँ कि आगाँ चाह रखैत छी। दहेजक खातिर केतनो बेर अहाँ हमरा जरैब तैयो नै अहाँ अपन एक बितक पेटक अग्निकेँ बुझा पएब छोड़ू ई लालच, मोह अहूॅं तँ केकरो बेटी छी। आइक नै तँ काल्हिक चिंता करू घरमे बेटी अछि अहूँक जवान अपन नै तँ ओकर परवाह करू। ओइ पार- तूँ बता रे माझी कि छै ओइ पारमे माए, बाप, भाय, बहिन अपन, पराया सभ नाता, रिश्ता मिलतै ओइ संसारमे। सुनै छिऐ राजा हुअए या रंक छोड़ऽ पड़तै सभकेँ ई देहक संग तूँ बता रे माझी बिन देहक वएह मलार मिलतै ओइ संसारमे। नै मंजिलक अछि खबर नै रस्ताक पहचान तूँ बता रे माझी अन्हार राह पर चलैत हम एकोगो राह बना पेबै ओइ पारमे। नेताजी- सफेद लिबासमे लिपटल नेताजी हाथ जोड़ि, नतमस्तक नेताजी जुबान खामोश, अबोध नेताजी देखियौ आइल हमर गाम हमर पालन हार, नेताजी। मंगैले भीख आश लगौने नेताजी भिखक नाम पर खून मॉंगैत अछि, नेताजी। केतेक सालसँ हम सभ चुसाइत छी आब बस पाइन अछि देहमे यौ नेताजी। ब्ुझि रहल छी करतुत अहाँक सफेद वस्त्रक भीतर कारी मन अहाँक नेताजी। केतनो खाइ छी तैयो दैतक खुनल पेट नै भरैत अछि अहाँक नेताजी। ज्यों फेर पकड़ा देब बंदूक हवलदार बनि हमरे सभ पर दहारब अहाँ यौ नेताजी। पहिल बरखा- छूबि हमर मनकेँ गुदगुदेलक ओ प्यारसँ छुलक हवाक झोका हमरा अपन शीतलताक मलारसँ। छिटका रहल छल चॉंद-चॉंदनी जे थपथपैलक हमरा गालकेँ अपन ममतामय दुलारसँ। झमौक कऽ ऐल कारी मेघ नहलाकऽ गेल ऐ जहाँ केँ अपन होठक मिठाससँ। छू कऽ हमर अंग-अंगकेँ चुइम कऽ धरतीक कण-कणकेँ पुचकारलक सहलैलक अपन सिनेहक बरखासँ। किसान- होइत भिनसरे अजबे नजारा सभ गामक कोइ पकड़ि बड़दक जुआ कोइ खाय रोटी संग नुनमा दौड़ल अपन काम पर। सबे परानी माइट संगे अपन जीवन बिताबैए बच्चा तँ बच्चा बड़को अहिना पोसाइए। दिन-राति मेहनत कइर ई धरतीक कौइखसँ अन्न उपजाबैत अछि नै कोनो थकान एकरा नै केकरोसँ शिकाइत अछि। एहेन निर्मल अछि हमर किसान जिनकर प्रतिदान आ संतोषे संस्कार आ पहचान अछि। समाजक विडम्बना- देखि कऽ ई समाजक विडम्बना बिआहब आब हम धिया केना चारपर खढ़ नै पेटमे अन्न नै नै अछि संगमे एक्को अना! मांग भेल ड्राइवरकेँ लाख मास्टर आ डाक्टरक नै पुछूँ बात दिनक उजयारि भेल कारी, भेल घनघर राति! ई हमरेटा नै जन-जनक दुखरा अछि बेटीबला केँ मलिछ बेटाबलाकेँ खिलल मुखरा अछि नन्हिटा धिया हमर भेल आब सयानी तिलकक ऐ युगमे बिआहव केना बिटिया रानी बहि रहल यऽ अरमान सभ, जेना मुट्ठीमे पानि। दर्दक टिस- पहाड़ जकाँ दु:ख देलक पहाड़ एहेन एबकी आएल अखाड़ सगरे मचल हाहाकार। केतए गेल सभ देव केतए नुकाएल दुःख हरता कुहरा कऽ जन-जनक धियान मग्न भेल रक्षण कर्ता महादेव। माएक सुन भेल आंचर केतौं हराएल नुनुक बोल असगर छोड़ि बूढ़ बापकेँ बिछुरि गेल बेटा अनमोल। बाबा-बाबा करैत गेल केतेक प्राण किए ने बचेलौं हे बाबा अपन भक्तक अहाँ जान। रोकू कोइ ऐ सैलाबकेँ- और केतेक जानक बलि देबै यो इनसान, किया बनैले चाहै छी भगवान देखियौ अहींक करनीसँ समसान बनल उत्तराखण्ड प्रान्त। पहाड़क छाती चिर कऽ ओकरा घाइल अहीं केलिऐ नदीकँ हाथ-पएर काटि कऽ ओकरा अपाहिज सेहो बनेलिऐ गाछ-बिरिछ काटि कऽ छत हिन माए धरतीकेँ केलिऐ शुरू केलिऐ अहाँ विनासक लिला सभ ताण्डव ठाढ़ अहीं केलिऐ। आब प्रकृतिसँ खेलवारि करैक सजा देखियौ नदीक हुहंकार सुनियो बुन्न-बुन्न लऽ केतौ तरसैत धरती तँ केतौ वएह बुन्नमे डुमैत जान देखियौ। ऐ असंतुलिताक कारण अहाँ छी किए अहाँ बनैले चाहैए महान छी आबो खोलू अपन कपाट कहि पुरा दुनियाँ ने बनि जाए श्मशान-घाट। नोराएल आँखि- उजरल घरमे पोखरिक पानि पीब रहल अछि अखनो लोक पूछि रहल अछि मासुम बच्चा कहिया तक भोगबै हम ई सोग। केना उजरल घर बसतै केना एकर नोर सुखतै आैर केतेक दिन अहिना भोगतै ई भोग। सबहक दाता वएह एगो माता जिनकर अछि समान पूत कोइ कहाबए हिन्दू-मुस्लिम आ कोइ अछूत। भाय-भायकेँ जातिमे बाँटि धुतकारैत देखैत छी समाजमे की कहब हम ई विडम्बना केतेक चोट लगैत अछि काेढ़मे। किए छी हम अछूत- वएह विधना हमरो बनौलक वएह रँग-रूप-गुण देलक पर अबिते ऐ संसारमे परजाति कहि कऽ सभ धुतकारलक। पहिले जाति बारि कऽ गाम बँटलक मनक संग पाइनो बँटलक नै कोइ सोचलक हमरा मनुख देखि कऽ सभ मुँह फेरलक। कहू पर हे बुधिजीवी हमरेसँ सभ उद्धार होइए हमर बनेलहा दौरा देवताक सिरपर चढ़बैए! एक्के धरतीपर सभ जनम लेलौं वएह माटिपर सभ ठाढ़ छी तँ हम किए अछूत कहाइ छी!! भ्रष्टाचारक प्रसाद- एगो खेल खेलैत देखलौं स्कूलमे हरा गेल छल खिचरी सभ प्लेटमे। देखि कऽ भेल अचम्भा पुछलौं सर ई कोन अछि जादू-टोना सर कहलखिन कि कहब हम केहेन अछि भ्रष्टाचारक मारि अबैए तँ यऽ भरल प्लेट मुदा मिलैत अछि यएह जादूक खेल। एक मुट्ठी बड़का बाबू एक मुट्ठी छोटका बाबू दू मुट्ठी अफसर साहैब आ झपटैत अछि तीन मुट्ठी कलर्क बाबू देखिते-देखिते गाममे फकाइत अछि मुट्ठी-मुट्ठी अहिना बटैत अछि। जेकरा देखू टक लगेने अछि कहैत छथि हमरा दिअ ई तँ सत्यनरायण भगवानक प्रसाद अछि। तब हँसत तुलसी- हम एक पुरुखक बेटी छी एक पुरुखक बहिन एक पुरुखक पत्नी तँ एक पुरुखक मॉं हर पग-पग पर हर संघर्षक बीच हर सुख-दुखमे हर रूपमे हम पुरुखक संगे ठार छी हमरो मुँहमे वएह जुवान अछि हमरो दृष्टि वएह देखैत अछि हमरो दिमाग वएह सोचैत अछि हमरो जिगर मे वएह साहस आ हौसला अछि आइ पुरुखक संगे चलैमे हम समर्थ छी तँ फेर किए आइयो १००मे सँ ७५ महिला घरेलू हिंसाक शिकार अछि ई हमरा लेल नै हे बद्धिजीवी अहाँले शर्मक बात अछि। आबो जागु हे मानुस विकसित अपन विचार करू नारीकेँ परितारित करनाइ छोड़ूू नव युगक निर्माण करू। जेतए नै हएत नारीक इज्जत ओइ समाजक केना विकास हएत केना रहत हँसैत तुलसी केना आँगन मुस्कुरैत माएक पूजा पहिले करि नतमस्तक भऽ मन झुकाए देखयौ फेर काल्हि अपन केतेक सुन्दर अछि हँसैत खेलाइत। शिल्पकार- आइ हम देखै छी जइ दिस वएह दिस ठार एगो शिल्पकार अछि दौड़ रहल यऽ सभक सभ ऐ रेसमे लऽ कऽ अपन औजार कहि रहल अछि देव हम संसारकेँ नव रूप रंग आकार। मुदा केकरो नै टटोलैत देखै छी खुदकेँ नै निखारैत अपन प्रतिभा आ गुणकेँ। ई संसार तँ परिपूर्ण अछि सभ लोभ मोह आ भयसँ दूर अछि फेर एकरा हम कि देव अकार रूप रंग आ प्रकार। बनबैक यऽ तँ बनाउ अपन प्रतिमा अपन ओजारसँ निखारू मानवता खुदमे अपन उच्च विचारसँ। यादि गामक- गामक बर मन पड़ैए पिपरक गाछ पुरबा बसात पिअर सरसो मन पड़ैए। लटकल आम मजरल जम गमकैत महुआ मन पड़ैए। धारक खेल कदबा खेत रोटी-चटनी मन पड़ैए। बाधक झिल्ली मुठिया धान पुआरक बिछौैन मन पड़ैए। घुरक आगि पकैल अलुहा ओ गपशप मन पड़ैए। गामक बर मन पड़ैए। आसक किरण- अखार बितल सौन बितल बितल जाइए भादबक बहार सुइख गेल सभ इनार-पोखैर नै बरसल अबकि एको अछार। बजर भेल मॉं धरती कारी सभ गाछ-पात कोन पाप भेल हमरा सभसँ आबो तँ बताबए हौ सरकार। नै खाइ लऽ अन्न नै बुझबै लऽ तरास अहिना तक बितेबएय और केतेक मास आब समटऽ अपन भाभट दए हमरा सभकेँ जिऐ कऽ आसार हे भगवान तूँ बरसाबए पानिक बोछार। नारीक पहचान- देखि कऽ चिड़ै-चुनमुन मन होइत छल कि हमहूँ उड़ी अम्बरमे। जा कऽ देखी घरक अलावा की अछि ऐ संसारमे। भैया संगे हमहूँ जाइतौं स्कूल उलझल रहितौं किताबमे। मुदा जब निहारलौं अपन दिस छल बानहल जंजीर पएरमे। माए कहलक हमर मान आ बाबूक पगरी छै दुनू तोरे हाथमे। नैनटा हमर उछलैत मन मरि गेल विडम्बनाक ऐ संसारमे। सपना देखैसँ पहिले जगा देलनि सुनि माएक वचन बहुत कचोट भेल मनमे। हम बेटी छी आकि अवला जे चुप रहैक यएह इनाम मिलैत अछि पुरुख सत्तातमक ऐ समाजमे। आजाद गजल- १ मनमे आस सफर लम्बा अनहार बहुत पनपि रहल अछि मनमे सुविचार बहुत नै डर अछि मिटै कऽ हमरा एको रती बढ़ैत ने रहए चाहे ई अतियाचार बहुत सर उठा कऽ चलैत रहब हम सदिखन दिलमे अछि घुरमि रहल धुरझार बहुत बेदाग रहत चुनरी सीताक बुझल अछि से देहमे अछि अखनो प्राण आ इनकार बहुत चिड़ैैत रहब अनहारक कलेजा छी ठनने मुन्नीकेँ मिलत अइसँ आगू प्रकार बहुत २ मुदत्ते बाद महफिलसँ मुँह झाम निकलल बेकार छल निकलल जेना काम निकलल हरा गेल भीड़मे आबि कऽ ताकी निङ्गहारि नतीजा जे छेलै निकलबाक सरे-आम निकलल छीन गेल सरताज हमर खाली माथ हँसोथी बेबस बनि लाचार शर्मसार अवाम निकलल फेर सत्तामे अबैक उम्मीद नै एक्को रती घुरब नै फेर आइ ओ देने पैगाम निकलल सच तँ ई अछि राजनीतिमे दाग लागल मुन्नी अपनेे करमसँ कत्लेआम निकलल बौआ देखहक चांदकेँ- चंदा मामा दूर छै देखहक केतेक मजबूत छै नित कटै-छटै छै तैयो हंसैत छै केतेक अटल निर्भय छै। बौआ तुहो अहिना बनिहक दुखसँ नै कहियो घबरैहक गिरबहक तबे तँ चलनाइ सीखबहक लगतऽ चोट तँ सम्भलनाइ सीखबहक देखह ऐ चांदकेँ जे घटैत-घटैत मिट जाइ छै पर एक बेर नै घबड़ाइ छै धीरे-धीरे फेर आगा बढ़ि परिपूर्ण भऽ कऽ पुनः आसमान मे खिलखिलइ छै। भोरक सनेस- उठऽ हौ बौआ उठू यइ बुच्चिया देखियौ नजारा भिनसरक। भागल अनहरिया भेल इजोत करू स्वागत दादा सूरजक। जतेक भिनसर उठबहक बौआ ओतेक नमहर हेतऽ दिन कुल्ला-आछमन कैर लए आशीष अपन नमहरक। भिनसरे नहेनेसँ मन तरो-ताजा हएत निरोग बनल रहब अहाँ नै दरकार हएत कोनो डाक्टरक। खुब पढ़ि-लिख बौआ -बुच्ची आगू-आगू दौड़ैैत चलू अछि अहीं कन्हापर भार अपन देसक। बेटी-लहास- एक-एक दिन बितल पुरल एक मास, अन्हार घरमे सूतल छेलौं हम नअ मास। देखैक बहुत जिज्ञासा छल हमरा ऐ घरक मालिककेँ जे नअ मास तक बिनु कहले मेटबैत अएल हमर सभ भूख पियास। आइ भेटत रौशनी हमरा देखब हम संसारक चेहरा, लेब हम आइ नव जीवनक साँस पुरा हएत हमर आइ सभ आस। आँखि बंद अछि किछो देखि नै सकै छी हम मुदा महसुस भऽ रहल-ए एगो ब्रज हाथ, जे दबौचि रहल अछि हमर कंठकेँ एगो अबाज जे बार-बार हमरा कान तक पहुँिच रहल अछि बेटी छिऐ माइर दहिन! बस रूकि गेल हमर साँस बनि गेलूँ हम लहास। बाल-श्रम- कुड़ा-कड़कट बीछ कऽ बाबू नै हम कोनो पाप करै छी, अहाँकेँ गन्दगी पहिले साफ करि फेर अपन पेटक जोगार करै छी। बाल-श्रम अछि जुलुम बड़का-बड़का पोस्टरमे पढ़लौं पर अफसर आ नेतेक घरमे नित काज करैत एलैं जब पेटक आगि धधकैत अछि तब ने कोनो कागज-कलम सोहाइत अछि। चोरी-चपाटीसँ तँ नीक मेहनति करि दूगो रोटी खाइ छी। फगुआ- सभ मिलि करैए हमजोली कान्हा संग गोपिया खेल रहल अछि होली। निला पिला लाल हरा अछि सभ रंग सुनेहरा, आइ बेरंग नै रहैए कोइ चाहे धोती होइ या घाघड़ा। दादी चाउरक पुआ बनेतै माए दही आ खीर खियेतै बाबू देतै आशिष, रंगा-रंग होइ सबहक जिनगी जिबैए सभ लाख बरिस। ई अवसर नित अबैत रहैए ई मेल-मिलाप बनल रहैए नै हइय केकरोसँ झगड़ा सभकेँ मुबारक ई दिन प्यारा। आनहर कानुन- देश-देशसँ एलै अबाज तैयो नै बदलल हमर समाज। नै होइए एकरा दरद कोनो नै देखैए ई कोनो पाप किएक तँ बानहल अछि एकरा आँखिपर कारी साँप। जे डसि रहल अछि हमर संस्कारकेँ हमर अच्छाइकेँ आ करा रहल अछि हमरासँ नित पाप। बुन्नक मोल- फाटल धरती जरल घास एक बुन्न पानि बिनु अछि सभक सभ उदास। नै बुझलौं हम प्रकृतिक निअम तँइ कानै पड़त आब केतेक जनम। आइ बुझितौं मोल जे पाइनकेँ तँ एना पियासल नै मरैतौं जाइन कऽ। बहुत नाच नचेलौं छन्नी-छन्नी धरतीकेँ केलौं अपन सुविधा खातिर धरतीकेँ सिमेंट बालुसँ झाँपि देलौं वएह अपमानक बदला छी ई लागए नै पएरमे माटि तेकर सजा छी ई आब तँ लोरोमे नै पानि अबैए जेकरा पीब हम पियास बुझाबी बुझा रहल यऽ आइ ओइ एक बुन्नक मोल छल हमराले ओ केतेक अनमोल। करी मिथिलासँ पहचान- चलू मिथिला, सुनियौ मैथिली केतेक मीठ ई बोल यौ मिसरी घुलल अछि हर शब्दमे करियौ एकर मोल यौ। सीताक नैहर एतए उगनाक ई प्रिय स्थान यौ ऋषि-मुनिक भूमि ई अछि एतऽ विद्वानक खान यौ। होइत भिनसर सुगा सीता-राम पढ़ैत अछि बौआ नुनु कहि सभ बात बजैत अछि करियौ ऐ भूमिक पहचान यौ। एतए कऽ माछ-पानक दुनियाँ करैए बखान यौ धोती-कुरता आ पाग अछि पुरुखक पोषाक यौ। ऐ धरतीपर हम जनमलौं अछि ओइ जनमक कोनो नीक काज यौ फेर-फेर हम एतै जनमी अछि अतनी प्रार्थना भगवान यौ। करिझुमरी कोसी- दू-चाइर दिन नै आइ सात दिनसँ ऊपर भेल कोसी करिझुमरी सभ लेने चलि गेल। नै खाइ लऽ अन्न अछि नै पीबैले पानि ऊ डसिनिया सभ ढेकारैत लऽ गेल। बाउ हराएल अछि भाय ढिस भऽ पड़ल अछि राइते-राति आएल एहेन निरलज्जिया जे कुहरा कऽ चलि गेल। नै बँचल एक कनमो किछो नै भाय-बाप नै रिश्तेदार कोइ असगर ठार छी कछारिमे ई कोसी करिझुमरी असहाय छोड़ि हमरा हँसैत चलि गेल। नै लेब आब हम दहेज- दहेजक खातिर गिर गेलौं हम मानवताक समाजमे। कि कहब आब अपन दुखरा कि लिखल छल कपारमे। धोती-कुरता पहिर कऽ बाबू ठाठसँ चिबबैत पान अछि हमरा बना कऽ पापी आब ओ कात अछि। पढ़ि-लिख हम बानर बनलौं बाबूक बातमे एलौं दहेज लऽ कऽ केहेन काज केलौं। नै बुझलौं नारीक शक्ति नै ओकर सम्मान केलौं, कि कहब आब हम कि केतेक घिनौन कुकर्म केलौं। मिथिलाक दादा- खेत बेच मन कारी झाम मुदा खाइए माछ सुबह-शाम। जमीनक मोल नै जानैए ई पुरखा अरजलहा बेचैमे लागैए कि। बैठल-बैठल ताल करैए पटुआ धोती पहिर गाम घुरैए। चुप रहि कऽ सभ नाच नचाबैए हुक्का गुरगुड़बैत अपन काज सलटियाबैए। फाटल जेब मुदा ऊँच शान देखियौ मिथलाक एगो ईहो पहचान। तैयो खुआबैए ई बुढ़बा सभकेँ नित पान आ मखान। पाहुनक माछ- एलखिन पाहुन लऽ कऽ माछ भदवरियामे नै अछि सूखल कोनो गाछ। माए हम करबै आब कोन काज केना रखबै मान केना सजेबै साज। सुनु कनिया हमर बात छानि उजारू करू ई काज। नै केना बना कऽ देबै रामकेँ केना उपासल रखबै। छानि उजरतै तँ फेर बनेबै मुदा रूसल पाहुन केना मनेबै। पजारू चुल्हा पड़लैए साँझ लगाउ आसन परसू तिमन संगे तरल माछ। हमरा पागल कहैत अछि लोक- लरखड़ाइत कदम थरथड़ाइत होठ नसाबाज हम नै, अछि जालिम सभ लोक। चोरी केलौं नै मुदा चोर कहेलौं पर डकैती करि बाइज्जत घूमि रहल अछि लाेक। एक मु़ट्ठी अन्न लऽ तरसि रहल छी देखियौ गोदामक-गोदाम अन्न सरा रहल अछि लाेक। हम मेहनतो करि नै अपन पेट भरि पाबै छी पर हमर सरकार भरल पेट अरबोक घोटाला करैत अछि आब सोचियौ सभ लोक। सगरे अनहार अछि- भ्रष्ट आ भ्रष्टाचारसँ भरल पूरा संसार अछि कोइ नै बँचल एतए सौंसे ओकरे राज अछि। कोइ देखा कऽ लुटैए कोइ चोरा कऽ लुटैए तँ कोइ शरमा कऽ लुटैए लुइटिक एतए बजार अछि। के कहत केकरा एतए सभ एक प्रकार अछि गर्भमे सिखैए भ्रष्टाचार यएह नव युगक संस्कार अछि। कदम-कदमपर घूस दैत मानव ऐ दुनियाँमे अबैए आगुओ घुसे दैत घुसकैल जाइए हर मोरपर देखबैत यएह नाच अछि घुस दैबला सभसँ बड़का बइमान अछि। माएक रूदन- सोचलौं बेटा बेटी भेल रोपलौं आम बबुल उगि गेल। बढ़ि रहल अछि समाजक अतियाचार केना बचैब हम १८ बरख अकर लाज। ई हमर बोझ नै हमर अंश छी जेकरा हम नैनामे बसाएब, मुदा केना कऽ सियाही भरल घरमे अपन चुनरी बचैब। कलंक बेटी नै ई समाज अछि जे युग-युगसँ उज्जर चुनरीमे लगबैत दाग अछि। चारू दिस छल लक्ष्मण रेखा तैयो हरण भेल सीता सुलेखा। कऽ रहल अछि मजबूर हमरा बेटीसँ दूर हमरा। शूल बनि मनमे गड़ैए बेटी तँए गर्भमे चुभैए बंद करू आब अतियाचार बसाबए दिअ हमरा बेटीक संसार। अपना दिस निहारू- बड़ केलौं उक्टा पेंच अक्कर खिद्यांस ओकर धेंस कहियो तँ आंगुर अनेरो उठाउ अपन मनकेँ बुझाउ। उठैए जे एगो आंगुर केकरो दिस तीन आंगुर देखबैए यऽ अपने दिस। मारू ऐ साँपकेँ निकालू मनक ऐ काँटकेँ जतेक साफ नजर रखबै दुनियाँ ओतेक सुन्दर देखबै। बहुत भटकलै खोजैले भूत दुबकि कऽ बैठल छल हमरे करेजामे बनि कऽ सूत। मजबूर किसान- बाबू केना हेतै आब पाबनि त्योहार। बीसे-बीस दिनपर हेतै खर्चाक भरमार नै अगहनक करारीपर देतै कोइ पैंच उधार बाबू केना हेतै आब पाबनि- त्योहार। छुछे छाछी रहि जेतै अबकी चौरचनमे मरूआ भेल अलोपित आब मिथिलामे केना कि उपाय करिऐ केतएसँ करिऐ हम जोगार बाबू केना हेतै आब पाबनि-त्योहार। जतरामे धिया-पुता लव कपड़ा मंगै छै दिवालीमे फटक्काले कनै छै छट्ठी मइयाक की अरग देबै ऐबेर बाबू केना हेतै आब पाबनि-त्योहार। स्वच्छ समाज- छोड़ि जाइ छी एगो चेन्ह हम। निस्प्राण भऽ गेलौं मुदा हमर दरद सदि जीबैत रहत, हम चुपचाप जा रहल छी मुदा हमर चिख अहाँकेँ हरिदम झकझोरैत रहत। दोष हमर नै, अहाँक मानसिकताक छल बुराइ हमरामे नै अहाँकेँ संस्कारम छल। बेजुबान हम नै अहाँकेँ बना कऽ गेलौं खामोश भऽ कऽ अपन अबाज बुलंद करि गेलौं। अगर अछि अहाँमे जिंदा कनियो मानवता तँ बचाउ दोसर ‘दामिनी‘क लाज, यएह हमर इच्छा अछि निस्पाप हुअए अपन समाज, करू नै समर्पित हमरापर फूल आ मोमबत्ती गाड़ि देब हमरा सहि श्रर्द्धाजलि तँ करू संकल्प! बनाएब अहाँ नारीकेँ जीऐले एगो स्वच्छ समाज। माए एक चुटकी नुन दअ दे- आइ हम जनलिऐ बेटी आ बेटामे कि भेद होइ छै, गर्भमे बेटी किए गरै छै। नारीक दुःख नारिये जनै छै, तँए तँ हर माए बेटी जनमबैसँ डरै छै। जइ बेटीकेँ माए जीवन दइ छै, वएह बेटीकेँ समाजक अतियाचार करि मरैले मजबूर करै छै। बेआबरू भऽ कऽ मरैसँ तँ नीक माए इज्जत कऽ तँू मौत दऽ दे ई पुरुख सत्तात्मक समाज छीऐ माए जनमिते तूँ हमरा एक चुटकि नुन दऽ दे। बेटी- छोड़ऽ काका बेटा-बेटी कऽ अंतरक खेल। सोचऽ तूँ एक बेर बेटा-बेटी मे की फरक भेल। बेटा कनेतऽ पर बेटी पोछतऽ लोर बेटा एक कुल मुदा बेटी दू कुल करतऽ इजोर। थाकि-हारि कऽ जब तूँ केतौसँ एबहक काका सिनेह बरसाबै लऽ आगु जेतऽ बेटी। किछु दिन कऽ मेजमान बनि ई तोरा घर आइल छऽ तोहर दुलार आ आशीष लऽ कऽ चुप-चाप चलि जेतऽ बेटी। तब फाटतऽ तोहर कोढ़ आ अंतरमनसँ एतऽ एगो आवाज कि अगला जनम तूँ फेर ऐ आँगनमे अहियहन बेटी। कारी-बजार- कारी-धन कारी-बजारी कारी चादरसँ लिपटल हमर देश अछि। केना बेदाग करब एकरा सगदर कारी-स्याह अछि। निचाँ-निचाँ की देखब जब ऊपरे अंधकार अछि कोनो दोसर नै रंग एतए सगदर कारी-बजार अछि। राष्ट्रपति होए या प्रधानमंत्री सभ कऽ सभ दरिद्र अछि कि कहब बेशर्मी केतेक हद तक एकरा देहमे समैल अछि। भगाबू ऐ दिम्मक कऽ अपन घरसँ नै तँ ई हड्डी तक खाइ लऽ तैयार अछि सोचु -बिचारू अपनामे अहीं कऽ हाथमे कैलक सरकार अछि। शब्दक खेल- चुन्नु- “अ सँ अनार आ सँ आम रटैत जी थोथरा गेल, आब नै खेलब हम ई शब्दक खेल।” माए- “तँ चलू उराबए चलि पतंग हरिअर अपन लाल ओकर पिअर भैया कऽ आब कहू सभ मिलाकऽ केतेक उड़ि रहल अछि पतंग।” चुन्नु- “एतौ तँ अछि सवालक जाल माए हमरा पहिले ई बता दिअ एक सँ आगाँ केतेक होइ छै सुलझा दिअ ई महाजाल।” माए- “पहिले कहू आब कहियो नै उबबै ऐ खेलसँ, नै उलझबै अंकक जालसँ तब हम अहाँकेँ सभ सिखाएब। सभ सबालक जवाब अहाँकेँ बनाएब।” माए बता तूँ एगो बात- माए बता तूँ एगो बात खोल तूँ ई मेघक राज के सभ रहै छै ओतऽ कि छै ओकरा सबहक काज। भोरक सुन्दर सुरज दुपहर कऽ किए जरबै छै साँझ पड़ैत फेर केतए हरा जाइ छै। राति कऽ अबै छै मामा सजा कऽ मोतियक थार कि ओतौ छै बहुत बड़का संसार। कहियो देखै छी कनीए कहियो बेसी कहियो तँ साफे नै देखाइए तूँ बता माए मामा एना किए नुका-छुप्पी कऽ खेल खेलैए। सुनु बौआ हमर बात बिना पढ़ने नै खुलत ई राज जेना-जेना अहाँ पढ़ैत जएब सभ भेद कऽ भेदैत जएब। अनहार घरमे हत्या- हम बेटी छी तँ हमर कोन दोष हमहूँ तँ एगो जान छी हमरो आँखि यऽ कान यऽ मुँह यऽ हम नै निष्प्राण छी। नै चलाबू एना कैंची हमर मन डराइए देखियौ हमर कटल हाथसँ लाले खुन बहराइए। अनहार घरसँ तँ निकलऽ दिअ एक बेर तँ हमरो ऐ निष्ठुर संसारकेँ देखए दिअ। केना लेलक एतए जन्म सिता ओइ रहस्यकेँ जानऽ दिअ हमरा नै मारू जेकरा लाेक पुजै छै ओइ माएक मँुह देखए दिअ। बेटी- जनम भेल तँ कहलक दाइ भेल दू हाथ धरती तर कोइ नै सोचलक हमहूँ जान छी कहलक दही नून तरे-तर। बावू कपार पीटलनि माए भेल बेहोश जँ हम जनितौं तँ नै अबितौं ऐ लोक ऑंखि अखनि खुलल नै कान अखनि सुनलक नै आ बना देलक हमरा आन कहलक कोनो अट्ठारह बरख रखबिहि एकर मान ने केकरो किछु लेलौं हम ने केकरो किछु देलौं हम जे माए हमरा जनम देलक ओकरो मुँह नै देखि पबलौं हम अजब दुनियाँ अछि ई अछि गजबक लोक किएक करैत अछि एना किएक भेजैत अछि बेटीकेँ परलोक अबैत ऐ धरतीपर इजोतसँ पहिल भेल अन्हार हमहूँ डूमि गेलौं आ डूमि गेल संसार समाज बनल हत्यारा बाप बनल जल्लाद बसैसँ पहिने उजारि देलनि बेटीक संसार। भेल पुरा आस उमरल ऐल देखी कारी मेघ चलि गेल धानी पुबरिया खेत। बंजर भूमि आब पनिया जेतै, मिटतै आब अपनो दुख सगरे अन्न उझला जेतै। बुच्ची लऽ लब आंगी अनबै तोरा लऽ लव साड़ी अबकी जतरामे निर्मली बजारक खेबै पकौरी। आइ पुबाइर बाध रोपबै काल्हि पछबाड़ि परसू उत्तरबाड़ि आ दक्षिणबाड़ि चारू दिस लहलहेतै खुशहाली सुख-सम्पन्न हम सभ भऽ जेबै। भाइक सिनेह जब छोट छेलौं तँ केतेक सिनेह करै छल हमरा भैया हमर एगो नोरपर केतेक रूप बदलै छल भैया हाथी घोड़ा भालू बनि कऽ मनबै छल हमरा भैया। पहिलुक कर हमरा खिया कऽ फेर सुगा मैना कऽ हिस्सा सेहो खियाबै छल भैया। पर आब एगो अलगे रूप बदललखिन भैया भिन-भिनौजक खेल खेला रहल छथिन भैया। केतनो कनै छी तैयो नै देखै लऽ अबैए भैया। आब हम नै खेलबै ई खेल रहि नै सकबै भैयासँ करि कऽ बाइर भगवान हमरा फेरसँ बच्चा बना दइए हमरा भैयासँ ओ सिनेह मंगा दइए। अलहर मेघ- बजबैए मेघ तबला ढोल बरसाबैए पानि टिपिर-टिपिर झनर-झनर राग अनमोल। सन-सन-सन हवा सनसनाय तन-मन केँ ओ थिरकाबैत उड़ि जाए। झमकि कऽ आबैए कारी बादल चुमै लऽ धरतीक चरनकेँ तृप्त भऽ ई अल्हर बादल हँसैत खिलखिलाइत यएह आसमानमे पुनः विलुप्त भऽ जाए। सिया तोरे कारण- जनक दुलारी सिया सहैत एलौं सभ दरद अहाँ किए? रानी भऽ वनमे रहलौं पतिक खातिर सभ सुख तियागलाैं पग-पगपर संघर्ष केलौं हर परीक्षामे खड़ा उतरलौं तँ फेर ई समाज नै अहाँकेँ अपनेलक किए? जइ पति ले सभ किछु अहाँ तियागलौं वएह अहाँकेँ तियागलक किए? किए ने विद्रोह अहाँ केलौं नारीक हित ले अबाज उठेलौं। सदिखन सुनै छी हम एक्के बात। एहेन सति सीता नै बँचलै तँ केना बँचतौ तोहर लाज? जौं एगो सीता जे अबाज उठैइतै, तँ फेर कोनो सीता नै परितारित होइतै। चुप रहैक ई सजा मिलैए, केतेक सीता नित वनवास भोगैए। ठिठुराबैत जाड़- एलैए जाड़ लऽ कऽ दुखक पहाड़। केना कटत दिन-राति केना बीतत ई जाड़क कड़ार। उजरल छौइन टुटल अछि टाट नै अछि कोनो ओहार घरक चारू कात अछि बाटे-बाट। पुआरक ओर्हना पुआरक बिछौना केकरा कहै छै लाेक कम्मल केना कहै छै होइ छै जाड़ सुहाना। कहियो घरसँ निकलि कऽ देखियौ एक राित अतए बिता कऽ देखियौ ठिठुइर कऽ मरैए लाेक नित केतेक जेना। गरिबेकेँ तँ भगवानो मारै छै अगर नै! तँ फेर पत्थरक देह बना किए नै भेजै छै। जे ढाहि दइ सरकारक भीखकेँ अनुदानक नाओंपर भेटैत मजाकक इन्दिरा-अवास आ सरकारी राहत कोषकेँ। बंदिश- हाथ-पएर दुनू अछि पर नै चलि पबै छी नै किछु करि पबै छी जुबान अछि पर बउक बनल छी बस आँखिसँ देखि रहल छी कानसँ सुनि रहल छी अत्यन्त वेदनाक भट्ठीमे अपन देह झुलसा रहल छी जिंदा लहास बनि जी रहल छी केकरासँ कही केकरा बुझाबी कि हमहूँ एगो जान छी कही ओइ बेवस्थासँ कि बेवस्था बनबैबला लोकसँ कि स्वयंसँ। सहज ई मानि ली कि हम चुप रहै लऽ बाध्य छी किएकि हम लड़की छी। पैसासँ बिआह- काका घरमे बाजै बधइया होइ छै बुचिया कऽ बिआह यौ चारि बहिन हमहूँ छी चारू कऽ चारू कुमार यौ। दिन-राति मेहननि करि रोटीएटा कऽ करि पबै छी जोगार यौ छी हम महगाइ आ गरीबी कऽ मारल अछि बाबू हमर किसान यौ। दिदियो कऽ देखै लेल ऐल गाम-गामसँ केतेक ने बरतुहार यौ पसिन करि खाइयो कऽ गेल सबटा तरूआ आ पान यौ। तैयो अछि हमर दीदी २५ सालसँ कुमार यौ। कहलक सभ बरतुहार बिना दहेजक केेना चलत काम यौ हम छी बेटा बाला अपन पैसा खर्चा करि नै करब बिआह यौ। ऐ युगमे लड़की सँ नै पैसासँ होइत अछि बिआह यौ। काँच बाँस जकाँ लचपच उमरिया- काँच बाँस जकाँ लचपच उमरिया डगमगैत अछि डेग यौ केना भरब हम गगरी केना चलब डगर यौ। किया जनमलउ ऐ धरतीपर की छल हमर गुनाह यौ माए-बाबू नीकसँ बाइजो नै पाबलउँ बनलौं अपने हम माए यौ। ज्ञान, पोथियक दुनियाँसँ रहलौं जे अनचिनहार यौ की कहब केहेन अछि हमर जिनगी भेल पुरे संसार अनहार यौ। मनक वेदना- रहि-रहि एगो हुक उठैए सउँसे देह दगद भेल जाइए आब नै बँचत मान भऽ रहल छी हम निष्प्राण। जिनगी बनि गेल धुँआ हवा कऽ मलारोसँ काँपि उठैए सभ रूआ। अछि सभ रस्ता अंजान करिया गेेल मनक अरमान। केतए ठार छी केतए जा रहल छी नै अछि हमरा किछो ज्ञान पर बुझैत छी हम अतेक कि जिनगीक आखरी सफर लऽ जाइत अछि समसान। शरहद- ई शरहद, ई सीमा कथी लऽ? जमीन बॉंटै लऽ! पर जमीनक संगे मन बँटाइत अछि इंसानकेँ इंसानसँ जुदा करैत अछि। हम एक जाति छी मानव जाति! फेर किए नै कोइ ई बुझैत छी जाति-पाति लऽ किए लड़ै छी? शरहद कऽ नाओंपर भाय-भाय कऽ बाँटै छी धिक्कार अछि हमरा अपन मानवतापर जे ऐ शरहदक सीमा मे बैंध गेल छी हमरासँ नीक तँ ई हवा, पानि आ पक्षी अछि जे स्वतंत्र भऽ अइ छोरसँ ओइ छोर तक अपन दोस्त बनबैत अछि पर हम ऐ दिवारक बिच कैद छी जब लगैत अछि जे आब दुरी मिटा जाएत भाय-भायसँ गला मिलत तब ई दिवार आैर मजबूत भऽ गगन केँ छुबए लगैत अछि आखिर कहिया ई शरहद हटत? कहिया ई मनक दिवार गिरत? हमर अबैबला पीढ़ी यएह दीवार मे कैद रहत? जतरा- बाल कविता बाबू आबि रहल अछि जतरा लेब अहाँसँ लब कपड़ा घुरै लऽ जएब अहाँ संगे मेला देखब ओतऽ कठपुतलीक खेला कीनब हम एगो उड़न जहाज तैपर बैइठ घुमब सगरे संसार। अंकक मेल- चलू खेलब आइ हम एगो खेल जइमे एक संगे करब केतेक अंकक मेल। १-२-३-४-५-६-७-८-९-दस अइसँ आगू चलत एगो बस। छुक-छुक नै ई तेज दौड़ैए एक-पर-एक एग्यारह भऽ जाइए। एक-पर-दू बैठ १२ एक-पर-तीन बैठ १३ एक-पर-चारि बैठ १४ एक-पर-पाँच बैठ १५ एक-पर-छअ बैठ १६ एक-पर-सात बैठ १७ एक-पर-आठ बैठ १८ एक-पर-नअ बैठ १९ दूपर बैठ जिरो बीस भऽ गेल पहिले एक असगर छल आब उन्नीसटा भऽ गेल अहिना एकता अपन जीवन मे अहूँ लाउ मिल कऽ अपन शक्ति बढ़ाउ। बहिन- माए हमरा एगो बहिन आनि दे। चल बजार उ बजैबला गुड़िया कीनि दे। जे हमरा भैया कहत हर साल हमरा हाथ पर राखी बान्हत उ चुलबुलिया मुनिया आनि दे। किए तूँ हमरा असगर रखने छऽ हमरासँ बहिनक सिनेह छीनने छऽ तूँ अपन कान्हाकेँ द्रोपदी आनि दे माए हमरा एगो बहिन आनि दे। केकर भय तोरा सतबै छउ कोन बात छै जे तोहर आँखि भरै छउ तूहों तँ केकरो बहिन छी तँ फेर किए हमरा बहिन लऽ कंश बनल छी हमरा तूँ एगो मौका दऽ दे माए हमरा बहिनक जिनगी बइक्ष दे ई सोन चिरैया चिड़िया आनि दे माए हमरा एगो बहिन आनि दे। विदेह नूतन अंक भाषापाक रचना-लेखन इंग्लिश-मैथिली-कोष / मैथिली-इंग्लिश-कोष प्रोजेक्टकेँ आगू बढ़ाऊ, अपन सुझाव आ योगदान ई-मेल द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ। Top of Form १.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली आ २.मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम १.नेपाल आ भारतक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली
१.१. नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक उच्चारण आ लेखन शैली (भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन १.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङ, ञ, ण, न एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना- अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।) पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।) खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।) सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।) खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।) उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंक, पंच, खंड, संधि, खंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्ग, चवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंक, चंचल, अंडा, अन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओ लोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि। नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोक बेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोट सन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽ कऽ पवर्ग धरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽ कऽ ज्ञ धरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ। २.ढ आ ढ : ढक उच्चारण “र् ह”जकाँ होइत अछि। अतः जतऽ “र् ह”क उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ लिखल जाए। आन ठाम खाली ढ लिखल जएबाक चाही। जेना- ढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढङ्ग, ढेरी, ढाकनि, ढाठ आदि। ढ = पढ़ाइ, बढब, गढब, मढब, बुढबा, साँढ, गाढ, रीढ, चाँढ, सीढी, पीढी आदि। उपर्युक्त शब्द सभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ अबैत अछि। इएह नियम ड आ डक सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि। ३.व आ ब : मैथिलीमे “व”क उच्चारण ब कएल जाइत अछि, मुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथ, बिद्या, नब, देबता, बिष्णु, बंश, बन्दना आदि। एहि सभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथ, विद्या, नव, देवता, विष्णु, वंश, वन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकील, ओजह आदि। ४.य आ ज : कतहु-कतहु “य”क उच्चारण “ज”जकाँ करैत देखल जाइत अछि, मुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञ, जदि, जमुना, जुग, जाबत, जोगी, जदु, जम आदि कहल जाएबला शब्द सभकेँ क्रमशः यज्ञ, यदि, यमुना, युग, यावत, योगी, यदु, यम लिखबाक चाही। ५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि। प्राचीन वर्तनी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आदि। नवीन वर्तनी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आदि। सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहि, एना, एकर, एहन आदि। एहि शब्द सभक स्थानपर यहि, यना, यकर, यहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारू सहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे “ए”केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि। ए आ “य”क प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैल, हैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो “ए”क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि। ६.हि, हु तथा एकार, ओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हि, हु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहि, अपनहु, ओकरहु, तत्कालहि, चोट्टहि, आनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनके, अपनो, तत्काले, चोट्टे, आनो आदि। ७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खडयन्त्र), षोडशी (खोडशी), षट्कोण (खटकोण), वृषेश (वृखेश), सन्तोष (सन्तोख) आदि। ८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि: (क) क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमे सँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : पढए (पढय) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पडतौक। अपूर्ण रूप : पढ’ गेलाह, क’ लेल, उठ’ पडतौक। पढऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पडतौक। (ख) पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछ, मुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह। अपूर्ण रूप : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह। (ग) स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापद, संज्ञा, ओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि। अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल। (घ) वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : पढैत अछि, बजैत अछि, गबैत अछि। अपूर्ण रूप : पढै अछि, बजै अछि, गबै अछि। (ङ) क्रियापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप: छियौक, छियैक, छहीक, छौक, छैक, अबितैक, होइक। अपूर्ण रूप : छियौ, छियै, छही, छौ, छै, अबितै, होइ। (च) क्रियापदीय प्रत्यय न्ह, हु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : छन्हि, कहलन्हि, कहलहुँ, गेलह, नहि। अपूर्ण रूप : छनि, कहलनि, कहलौँ, गेलऽ, नइ, नञि, नै। ९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटि कऽ दोसर ठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन), पानि (पाइन), दालि ( दाइल), माटि (माइट), काछु (काउछ), मासु (माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्द सभमे ई निअम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि। १०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्द सभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषा सम्बन्धी निअम अनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरण सम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्ष सभकेँ समेटि कऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनीकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽबला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषी पर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पडि रहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषता सभ कुण्ठित नहि होइक, ताहू दिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए। -(भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) १.२. मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली
१. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-
ग्राह्य
एखन ठाम जकर, तकर तनिकर अछि
अग्राह्य अखन, अखनि, एखेन, अखनी ठिमा, ठिना, ठमा जेकर, तेकर तिनकर। (वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य) ऐछ, अहि, ए।
२. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैकल्पिकतया अपनाओल जाय: भऽ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।
३. प्राचीन मैथिलीक ‘न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ‘न’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।
४. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।
५. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत: जैह, सैह, इएह, ओऐह, लैह तथा दैह।
६. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे ‘इ’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।
७. स्वतंत्र ह्रस्व ‘ए’ वा ‘य’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ‘ए’ वा ‘य’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।
८. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ‘य’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढैआ, विआह, वा धीया, अढैया, बियाह।
९. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव ‘ञ’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।
१०. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:- हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। ’मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ‘क’ क वैकल्पिक रूप ‘केर’ राखल जा सकैत अछि।
११. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।
१२. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।
१३. अर्द्ध ‘न’ ओ अर्द्ध ‘म’ क बदला अनुसार नहि लिखल जाय, किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ‘ङ’ , ‘ञ’, तथा ‘ण’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।
१४. हलंत चिह्न निअमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।
१५. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क’ लिखल जाय, हटा क’ नहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।
१६. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रापर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं।
१७. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।
१८. समस्त पद सटा क’ लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोडि क’ , हटा क’ नहि।
१९. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।
२०. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।
२१.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा' ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।
ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा "सुमन" ११/०८/७६
२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम २.१. उच्चारण निर्देश: (बोल्ड कएल रूप ग्राह्य):- दन्त न क उच्चारणमे दाँतमे जीह सटत- जेना बाजू नाम , मुदा ण क उच्चारणमे जीह मूर्धामे सटत (नै सटैए तँ उच्चारण दोष अछि)- जेना बाजू गणेश। तालव्य शमे जीह तालुसँ , षमे मूर्धासँ आ दन्त समे दाँतसँ सटत। निशाँ, सभ आ शोषण बाजि कऽ देखू। मैथिलीमे ष केँ वैदिक संस्कृत जकाँ ख सेहो उच्चरित कएल जाइत अछि, जेना वर्षा, दोष। य अनेको स्थानपर ज जकाँ उच्चरित होइत अछि आ ण ड जकाँ (यथा संयोग आ गणेश संजोग आ गड़ेस उच्चरित होइत अछि)। मैथिलीमे व क उच्चारण ब, श क उच्चारण स आ य क उच्चारण ज सेहो होइत अछि। ओहिना ह्रस्व इ बेशीकाल मैथिलीमे पहिने बाजल जाइत अछि कारण देवनागरीमे आ मिथिलाक्षरमे ह्रस्व इ अक्षरक पहिने लिखलो जाइत आ बाजलो जएबाक चाही। कारण जे हिन्दीमे एकर दोषपूर्ण उच्चारण होइत अछि (लिखल तँ पहिने जाइत अछि मुदा बाजल बादमे जाइत अछि), से शिक्षा पद्धतिक दोषक कारण हम सभ ओकर उच्चारण दोषपूर्ण ढंगसँ कऽ रहल छी। अछि- अ इ छ ऐछ (उच्चारण) छथि- छ इ थ – छैथ (उच्चारण) पहुँचि- प हुँ इ च (उच्चारण) आब अ आ इ ई ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ऐ सभ लेल मात्रा सेहो अछि, मुदा ऐमे ई ऐ ओ औ अं अः ऋ केँ संयुक्ताक्षर रूपमे गलत रूपमे प्रयुक्त आ उच्चरित कएल जाइत अछि। जेना ऋ केँ री रूपमे उच्चरित करब। आ देखियौ- ऐ लेल देखिऔ क प्रयोग अनुचित। मुदा देखिऐ लेल देखियै अनुचित। क् सँ ह् धरि अ सम्मिलित भेलासँ क सँ ह बनैत अछि, मुदा उच्चारण काल हलन्त युक्त शब्दक अन्तक उच्चारणक प्रवृत्ति बढल अछि, मुदा हम जखन मनोजमे ज् अन्तमे बजैत छी, तखनो पुरनका लोककेँ बजैत सुनबन्हि- मनोजऽ, वास्तवमे ओ अ युक्त ज् = ज बजै छथि। फेर ज्ञ अछि ज् आ ञ क संयुक्त मुदा गलत उच्चारण होइत अछि- ग्य। ओहिना क्ष अछि क् आ ष क संयुक्त मुदा उच्चारण होइत अछि छ। फेर श् आ र क संयुक्त अछि श्र ( जेना श्रमिक) आ स् आ र क संयुक्त अछि स्र (जेना मिस्र)। त्र भेल त+र । उच्चारणक ऑडियो फाइल विदेह आर्काइव http://www.videha.co.in/ पर उपलब्ध अछि। फेर केँ / सँ / पर पूर्व अक्षरसँ सटा कऽ लिखू मुदा तँ / कऽ हटा कऽ। ऐमे सँ मे पहिल सटा कऽ लिखू आ बादबला हटा कऽ। अंकक बाद टा लिखू सटा कऽ मुदा अन्य ठाम टा लिखू हटा कऽ– जेना छहटा मुदा सभ टा। फेर ६अ म सातम लिखू- छठम सातम नै। घरबलामे बला मुदा घरवालीमे वाली प्रयुक्त करू। रहए- रहै मुदा सकैए (उच्चारण सकै-ए)। मुदा कखनो काल रहए आ रहै मे अर्थ भिन्नता सेहो, जेना से कम्मो जगहमे पार्किंग करबाक अभ्यास रहै ओकरा। पुछलापर पता लागल जे ढुनढुन नाम्ना ई ड्राइवर कनाट प्लेसक पार्किंगमे काज करैत रहए। छलै, छलए मे सेहो ऐ तरहक भेल। छलए क उच्चारण छल-ए सेहो। संयोगने- (उच्चारण संजोगने) केँ/ कऽ केर- क ( केर क प्रयोग गद्यमे नै करू , पद्यमे कऽ सकै छी। ) क (जेना रामक) –रामक आ संगे (उच्चारण राम के / राम कऽ सेहो) सँ- सऽ (उच्चारण) चन्द्रबिन्दु आ अनुस्वार- अनुस्वारमे कंठ धरिक प्रयोग होइत अछि मुदा चन्द्रबिन्दुमे नै। चन्द्रबिन्दुमे कनेक एकारक सेहो उच्चारण होइत अछि- जेना रामसँ- (उच्चारण राम सऽ) रामकेँ- (उच्चारण राम कऽ/ राम के सेहो)। केँ जेना रामकेँ भेल हिन्दीक को (राम को)- राम को= रामकेँ क जेना रामक भेल हिन्दीक का ( राम का) राम का= रामक कऽ जेना जा कऽ भेल हिन्दीक कर ( जा कर) जा कर= जा कऽ सँ भेल हिन्दीक से (राम से) राम से= रामसँ सऽ , तऽ , त , केर (गद्यमे) एे चारू शब्द सबहक प्रयोग अवांछित। के दोसर अर्थेँ प्रयुक्त भऽ सकैए- जेना, के कहलक? विभक्ति “क”क बदला एकर प्रयोग अवांछित। नञि, नहि, नै, नइ, नँइ, नइँ, नइं ऐ सभक उच्चारण आ लेखन - नै त्त्व क बदलामे त्व जेना महत्वपूर्ण (महत्त्वपूर्ण नै) जतए अर्थ बदलि जाए ओतहि मात्र तीन अक्षरक संयुक्ताक्षरक प्रयोग उचित। सम्पति- उच्चारण स म्प इ त (सम्पत्ति नै- कारण सही उच्चारण आसानीसँ सम्भव नै)। मुदा सर्वोत्तम (सर्वोतम नै)। राष्ट्रिय (राष्ट्रीय नै) सकैए/ सकै (अर्थ परिवर्तन) पोछैले/ पोछै लेल/ पोछए लेल पोछैए/ पोछए/ (अर्थ परिवर्तन) पोछए/ पोछै ओ लोकनि ( हटा कऽ, ओ मे बिकारी नै) ओइ/ ओहि ओहिले/ ओहि लेल/ ओही लऽ जएबेँ/ बैसबेँ पँचभइयाँ देखियौक/ (देखिऔक नै- तहिना अ मे ह्रस्व आ दीर्घक मात्राक प्रयोग अनुचित) जकाँ / जेकाँ तँइ/ तैँ/ होएत / हएत नञि/ नहि/ नँइ/ नइँ/ नै सौँसे/ सौंसे बड / बडी (झोराओल) गाए (गाइ नहि), मुदा गाइक दूध (गाएक दूध नै।) रहलेँ/ पहिरतैँ हमहीं/ अहीं सब - सभ सबहक - सभहक धरि - तक गप- बात बूझब - समझब बुझलौं/ समझलौं/ बुझलहुँ - समझलहुँ हमरा आर - हम सभ आकि- आ कि सकैछ/ करैछ (गद्यमे प्रयोगक आवश्यकता नै) होइन/ होनि जाइन (जानि नै, जेना देल जाइन) मुदा जानि-बूझि (अर्थ परिव्र्तन) पइठ/ जाइठ आउ/ जाउ/ आऊ/ जाऊ मे, केँ, सँ, पर (शब्दसँ सटा कऽ) तँ कऽ धऽ दऽ (शब्दसँ हटा कऽ) मुदा दूटा वा बेसी विभक्ति संग रहलापर पहिल विभक्ति टाकेँ सटाऊ। जेना ऐमे सँ । एकटा , दूटा (मुदा कए टा) बिकारीक प्रयोग शब्दक अन्तमे, बीचमे अनावश्यक रूपेँ नै। आकारान्त आ अन्तमे अ क बाद बिकारीक प्रयोग नै (जेना दिअ , आ/ दिय’ , आ’, आ नै ) अपोस्ट्रोफीक प्रयोग बिकारीक बदलामे करब अनुचित आ मात्र फॉन्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक)- ओना बिकारीक संस्कृत रूप ऽ अवग्रह कहल जाइत अछि आ वर्तनी आ उच्चारण दुनू ठाम एकर लोप रहैत अछि/ रहि सकैत अछि (उच्चारणमे लोप रहिते अछि)। मुदा अपोस्ट्रोफी सेहो अंग्रेजीमे पसेसिव केसमे होइत अछि आ फ्रेंचमे शब्दमे जतए एकर प्रयोग होइत अछि जेना raison d’etre एतए सेहो एकर उच्चारण रैजौन डेटर होइत अछि, माने अपोस्ट्रॉफी अवकाश नै दैत अछि वरन जोडैत अछि, से एकर प्रयोग बिकारीक बदला देनाइ तकनीकी रूपेँ सेहो अनुचित)। अइमे, एहिमे/ ऐमे जइमे, जाहिमे एखन/ अखन/ अइखन केँ (के नहि) मे (अनुस्वार रहित) भऽ मे दऽ तँ (तऽ, त नै) सँ ( सऽ स नै) गाछ तर गाछ लग साँझ खन जो (जो go, करै जो do) तै/तइ जेना- तै दुआरे/ तइमे/ तइले जै/जइ जेना- जै कारण/ जइसँ/ जइले ऐ/अइ जेना- ऐ कारण/ ऐसँ/ अइले/ मुदा एकर एकटा खास प्रयोग- लालति कतेक दिनसँ कहैत रहैत अइ लै/लइ जेना लैसँ/ लइले/ लै दुआरे लहँ/ लौं गेलौं/ लेलौं/ लेलँह/ गेलहुँ/ लेलहुँ/ लेलँ जइ/ जाहि/ जै जहिठाम/ जाहिठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि/ अहि/ अइ (वाक्यक अंतमे ग्राह्य) / ऐ अइछ/ अछि/ ऐछ तइ/ तहि/ तै/ ताहि ओहि/ ओइ सीखि/ सीख जीवि/ जीवी/ जीब भलेहीं/ भलहिं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि/ नै/ नइ गइ/ गै छनि/ छन्हि ... समए शब्दक संग जखन कोनो विभक्ति जुटै छै तखन समै जना समैपर इत्यादि। असगरमे हृदए आ विभक्ति जुटने हृदे जना हृदेसँ, हृदेमे इत्यादि। जइ/ जाहि/ जै जहिठाम/ जाहिठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि/ अहि/ अइ/ ऐ अइछ/ अछि/ ऐछ तइ/ तहि/ तै/ ताहि ओहि/ ओइ सीखि/ सीख जीवि/ जीवी/ जीब भले/ भलेहीं/ भलहिं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि/ नै/ नइ गइ/ गै छनि/ छन्हि चुकल अछि/ गेल गछि २.२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम नीचाँक सूचीमे देल विकल्पमेसँ लैंगुएज एडीटर द्वारा कोन रूप चुनल जेबाक चाही: बोल्ड कएल रूप ग्राह्य: १.होयबला/ होबयबला/ होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला/ होयबाक/होबएबला /होएबाक २. आ’/आऽ आ ३. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ल’/लऽ/लय/लए ४. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए गेल ५. कर’ गेलाह/करऽ गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह ६. लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’/ ७. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करैबला/क’र’ बला / करैवाली ८. बला वला (पुरूष), वाली (स्त्री) ९ . आङ्ल आंग्ल १०. प्रायः प्रायह ११. दुःख दुख १ २. चलि गेल चल गेल/चैल गेल १३. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन १४. देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह १५. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि १६. चलैत/दैत चलति/दैति १७. एखनो अखनो १८. बढ़नि बढइन बढन्हि १९. ओ’/ओऽ(सर्वनाम) ओ २० . ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ २१. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ २२. जे जे’/जेऽ २३. ना-नुकुर ना-नुकर २४. केलन्हि/केलनि/कयलन्हि २५. तखनतँ/ तखन तँ २६. जा रहल/जाय रहल/जाए रहल २७. निकलय/निकलए लागल/ लगल बहराय/ बहराए लागल/ लगल निकल’/बहरै लागल २८. ओतय/ जतय जत’/ ओत’/ जतए/ ओतए २९. की फूरल जे कि फूरल जे ३०. जे जे’/जेऽ ३१. कूदि / यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद/ यादि (मोन) ३२. इहो/ ओहो ३३. हँसए/ हँसय हँसऽ ३४. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/ नौ वा दस ३५. सासु-ससुर सास-ससुर ३६. छह/ सात छ/छः/सात ३७. की की’/ कीऽ (दीर्घीकारान्तमे ऽ वर्जित) ३८. जबाब जवाब ३९. करएताह/ करेताह करयताह ४०. दलान दिशि दलान दिश/दलान दिस ४१ . गेलाह गएलाह/गयलाह ४२. किछु आर/ किछु और/ किछ आर ४३. जाइ छल/ जाइत छल जाति छल/जैत छल ४४. पहुँचि/ भेट जाइत छल/ भेट जाइ छलए पहुँच/ भेटि जाइत छल ४५. जबान (युवा)/ जवान(फौजी) ४६. लय/ लए क’/ कऽ/ लए कए / लऽ कऽ/ लऽ कए ४७. ल’/लऽ कय/ कए ४८. एखन / एखने / अखन / अखने ४९. अहींकेँ अहीँकेँ ५०. गहींर गहीँर ५१. धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए ५२. जेकाँ जेँकाँ/ जकाँ ५३. तहिना तेहिना ५४. एकर अकर ५५. बहिनउ बहनोइ ५६. बहिन बहिनि ५७. बहिन-बहिनोइ बहिन-बहनउ ५८. नहि/ नै ५९. करबा / करबाय/ करबाए ६०. तँ/ त ऽ तय/तए ६१. भैयारी मे छोट-भाए/भै/, जेठ-भाय/भाइ, ६२. गिनतीमे दू भाइ/भाए/भाँइ ६३. ई पोथी दू भाइक/ भाँइ/ भाए/ लेल। यावत जावत ६४. माय मै / माए मुदा माइक ममता ६५. देन्हि/ दइन दनि/ दएन्हि/ दयन्हि दन्हि/ दैन्हि ६६. द’/ दऽ/ दए ६७. ओ (संयोजक) ओऽ (सर्वनाम) ६८. तका कए तकाय तकाए ६९. पैरे (on foot) पएरे कएक/ कैक ७०. ताहुमे/ ताहूमे ७१. पुत्रीक ७२. बजा कय/ कए / कऽ ७३. बननाय/बननाइ ७४. कोला ७५. दिनुका दिनका ७६. ततहिसँ ७७. गरबओलन्हि/ गरबौलनि/ गरबेलन्हि/ गरबेलनि ७८. बालु बालू ७९. चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध) ८०. जे जे’ ८१ . से/ के से’/के’ ८२. एखुनका अखनुका ८३. भुमिहार भूमिहार ८४. सुग्गर / सुगरक/ सूगर ८५. झठहाक झटहाक ८६. छूबि ८७. करइयो/ओ करैयो ने देलक /करियौ-करइयौ ८८. पुबारि पुबाइ ८९. झगड़ा-झाँटी झगड़ा-झाँटि ९०. पएरे-पएरे पैरे-पैरे ९१. खेलएबाक ९२. खेलेबाक ९३. लगा ९४. होए- हो – होअए ९५. बुझल बूझल ९६. बूझल (संबोधन अर्थमे) ९७. यैह यएह / इएह/ सैह/ सएह ९८. तातिल ९९. अयनाय- अयनाइ/ अएनाइ/ एनाइ १००. निन्न- निन्द १०१. बिनु बिन १०२. जाए जाइ १०३. जाइ (in different sense)-last word of sentence १०४. छत पर आबि जाइ १०५. ने १०६. खेलाए (play) –खेलाइ १०७. शिकाइत- शिकायत १०८. ढप- ढ़प १०९ . पढ़- पढ ११०. कनिए/ कनिये कनिञे १११. राकस- राकश ११२. होए/ होय होइ ११३. अउरदा- औरदा ११४. बुझेलन्हि (different meaning- got understand) ११५. बुझएलन्हि/बुझेलनि/ बुझयलन्हि (understood himself) ११६. चलि- चल/ चलि गेल ११७. खधाइ- खधाय ११८. मोन पाड़लखिन्ह/ मोन पाड़लखिन/ मोन पारलखिन्ह ११९. कैक- कएक- कइएक १२०. लग ल’ग १२१. जरेनाइ १२२. जरौनाइ जरओनाइ- जरएनाइ/ जरेनाइ १२३. होइत १२४. गरबेलन्हि/ गरबेलनि गरबौलन्हि/ गरबौलनि १२५. चिखैत- (to test)चिखइत १२६. करइयो (willing to do) करैयो १२७. जेकरा- जकरा १२८. तकरा- तेकरा १२९. बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे १३०. करबयलहुँ/ करबएलहुँ/ करबेलहुँ करबेलौं १३१. हारिक (उच्चारण हाइरक) १३२. ओजन वजन आफसोच/ अफसोस कागत/ कागच/ कागज १३३. आधे भाग/ आध-भागे १३४. पिचा / पिचाय/पिचाए १३५. नञ/ ने १३६. बच्चा नञ (ने) पिचा जाय १३७. तखन ने (नञ) कहैत अछि। कहै/ सुनै/ देखै छल मुदा कहैत-कहैत/ सुनैत-सुनैत/ देखैत-देखैत १३८. कतेक गोटे/ कताक गोटे १३९. कमाइ-धमाइ/ कमाई- धमाई १४० . लग ल’ग १४१. खेलाइ (for playing) १४२. छथिन्ह/ छथिन १४३. होइत होइ १४४. क्यो कियो / केओ १४५. केश (hair) १४६. केस (court-case) १४७ . बननाइ/ बननाय/ बननाए १४८. जरेनाइ १४९. कुरसी कुर्सी १५०. चरचा चर्चा १५१. कर्म करम १५२. डुबाबए/ डुबाबै/ डुमाबै डुमाबय/ डुमाबए १५३. एखुनका/ अखुनका १५४. लए/ लिअए (वाक्यक अंतिम शब्द)- लऽ १५५. कएलक/ केलक १५६. गरमी गर्मी १५७ . वरदी वर्दी १५८. सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ १५९. एनाइ-गेनाइ १६०. तेना ने घेरलन्हि/ तेना ने घेरलनि १६१. नञि / नै १६२. डरो ड’रो १६३. कतहु/ कतौ कहीं १६४. उमरिगर-उमेरगर उमरगर १६५. भरिगर १६६. धोल/धोअल धोएल १६७. गप/गप्प १६८. के के’ १६९. दरबज्जा/ दरबजा १७०. ठाम १७१. धरि तक १७२. घूरि लौटि १७३. थोरबेक १७४. बड्ड १७५. तोँ/ तूँ १७६. तोँहि( पद्यमे ग्राह्य) १७७. तोँही / तोँहि १७८. करबाइए करबाइये १७९. एकेटा १८०. करितथि /करतथि १८१. पहुँचि/ पहुँच १८२. राखलन्हि रखलन्हि/ रखलनि १८३. लगलन्हि/ लगलनि लागलन्हि १८४. सुनि (उच्चारण सुइन) १८५. अछि (उच्चारण अइछ) १८६. एलथि गेलथि १८७. बितओने/ बितौने/ बितेने १८८. करबओलन्हि/ करबौलनि/ करेलखिन्ह/ करेलखिन १८९. करएलन्हि/ करेलनि १९०. आकि/ कि १९१. पहुँचि/ पहुँच १९२. बत्ती जराय/ जराए जरा (आगि लगा) १९३. से से’ १९४. हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए) १९५. फेल फैल १९६. फइल(spacious) फैल १९७. होयतन्हि/ होएतन्हि/ होएतनि/हेतनि/ हेतन्हि १९८. हाथ मटिआएब/ हाथ मटियाबय/हाथ मटियाएब १९९. फेका फेंका २००. देखाए देखा २०१. देखाबए २०२. सत्तरि सत्तर २०३. साहेब साहब २०४.गेलैन्ह/ गेलन्हि/ गेलनि २०५. हेबाक/ होएबाक २०६.केलो/ कएलहुँ/केलौं/ केलुँ २०७. किछु न किछु/ किछु ने किछु २०८.घुमेलहुँ/ घुमओलहुँ/ घुमेलौं २०९. एलाक/ अएलाक २१०. अः/ अह २११.लय/ लए (अर्थ-परिवर्त्तन) २१२.कनीक/ कनेक २१३.सबहक/ सभक २१४.मिलाऽ/ मिला २१५.कऽ/ क २१६.जाऽ/ जा २१७.आऽ/ आ २१८.भऽ /भ’ (’ फॉन्टक कमीक द्योतक) २१९.निअम/ नियम २२० .हेक्टेअर/ हेक्टेयर २२१.पहिल अक्षर ढ/ बादक/ बीचक ढ़ २२२.तहिं/तहिँ/ तञि/ तैं २२३.कहिं/ कहीं २२४.तँइ/ तैं / तइँ २२५.नँइ/ नइँ/ नञि/ नहि/नै २२६.है/ हए / एलीहेँ/ २२७.छञि/ छै/ छैक /छइ २२८.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २२९.आ (come)/ आऽ(conjunction) २३०. आ (conjunction)/ आऽ(come) २३१.कुनो/ कोनो, कोना/केना २३२.गेलैन्ह-गेलन्हि-गेलनि २३३.हेबाक- होएबाक २३४.केलौँ- कएलौँ-कएलहुँ/केलौं २३५.किछु न किछ- किछु ने किछु २३६.केहेन- केहन २३७.आऽ (come)-आ (conjunction-and)/आ। आब'-आब' /आबह-आबह २३८. हएत-हैत २३९.घुमेलहुँ-घुमएलहुँ- घुमेलाें २४०.एलाक- अएलाक २४१.होनि- होइन/ होन्हि/ २४२.ओ-राम ओ श्यामक बीच(conjunction), ओऽ कहलक (he said)/ओ २४३.की हए/ कोसी अएली हए/ की है। की हइ २४४.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २४५ .शामिल/ सामेल २४६.तैँ / तँए/ तञि/ तहिं २४७.जौं / ज्योँ/ जँ/ २४८.सभ/ सब २४९.सभक/ सबहक २५०.कहिं/ कहीं २५१.कुनो/ कोनो/ कोनहुँ/ २५२.फारकती भऽ गेल/ भए गेल/ भय गेल २५३.कोना/ केना/ कन्ना/कना २५४.अः/ अह २५५.जनै/ जनञ २५६.गेलनि/ गेलाह (अर्थ परिवर्तन) २५७.केलन्हि/ कएलन्हि/ केलनि/ २५८.लय/ लए/ लएह (अर्थ परिवर्तन) २५९.कनीक/ कनेक/कनी-मनी २६०.पठेलन्हि पठेलनि/ पठेलइन/ पपठओलन्हि/ पठबौलनि/ २६१.निअम/ नियम २६२.हेक्टेअर/ हेक्टेयर २६३.पहिल अक्षर रहने ढ/ बीचमे रहने ढ २६४.आकारान्तमे बिकारीक प्रयोग उचित नै/ अपोस्ट्रोफीक प्रयोग फान्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक ओकर बदला अवग्रह (बिकारी) क प्रयोग उचित २६५.केर (पद्यमे ग्राह्य) / -क/ कऽ/ के २६६.छैन्हि- छन्हि २६७.लगैए/ लगैये २६८.होएत/ हएत २६९.जाएत/ जएत/ २७०.आएत/ अएत/ आओत २७१ .खाएत/ खएत/ खैत २७२.पिअएबाक/ पिएबाक/पियेबाक २७३.शुरु/ शुरुह २७४.शुरुहे/ शुरुए २७५.अएताह/अओताह/ एताह/ औताह २७६.जाहि/ जाइ/ जइ/ जै/ २७७.जाइत/ जैतए/ जइतए २७८.आएल/ अएल २७९.कैक/ कएक २८०.आयल/ अएल/ आएल २८१. जाए/ जअए/ जए (लालति जाए लगलीह।) २८२. नुकएल/ नुकाएल २८३. कठुआएल/ कठुअएल २८४. ताहि/ तै/ तइ २८५. गायब/ गाएब/ गएब २८६. सकै/ सकए/ सकय २८७.सेरा/सरा/ सराए (भात सरा गेल) २८८.कहैत रही/देखैत रही/ कहैत छलौं/ कहै छलौं- अहिना चलैत/ पढैत (पढै-पढैत अर्थ कखनो काल परिवर्तित) - आर बुझै/ बुझैत (बुझै/ बुझै छी, मुदा बुझैत-बुझैत)/ सकैत/ सकै। करैत/ करै। दै/ दैत। छैक/ छै। बचलै/ बचलैक। रखबा/ रखबाक । बिनु/ बिन। रातिक/ रातुक बुझै आ बुझैत केर अपन-अपन जगहपर प्रयोग समीचीन अछि। बुझैत-बुझैत आब बुझलिऐ। हमहूँ बुझै छी। २८९. दुआरे/ द्वारे २९०.भेटि/ भेट/ भेँट २९१. खन/ खीन/ खुना (भोर खन/ भोर खीन) २९२.तक/ धरि २९३.गऽ/ गै (meaning different-जनबै गऽ) २९४.सऽ/ सँ (मुदा दऽ, लऽ) २९५.त्त्व,(तीन अक्षरक मेल बदला पुनरुक्तिक एक आ एकटा दोसरक उपयोग) आदिक बदला त्व आदि। महत्त्व/ महत्व/ कर्ता/ कर्त्ता आदिमे त्त संयुक्तक कोनो आवश्यकता मैथिलीमे नै अछि। वक्तव्य २९६.बेसी/ बेशी २९७.बाला/वाला बला/ वला (रहैबला) २९८ .वाली/ (बदलैवाली) २९९.वार्त्ता/ वार्ता ३००. अन्तर्राष्ट्रिय/ अन्तर्राष्ट्रीय ३०१. लेमए/ लेबए ३०२.लमछुरका, नमछुरका ३०२.लागै/ लगै ( भेटैत/ भेटै) ३०३.लागल/ लगल ३०४.हबा/ हवा ३०५.राखलक/ रखलक ३०६.आ (come)/ आ (and) ३०७. पश्चाताप/ पश्चात्ताप ३०८. ऽ केर व्यवहार शब्दक अन्तमे मात्र, यथासंभव बीचमे नै। ३०९.कहैत/ कहै ३१०. रहए (छल)/ रहै (छलै) (meaning different) ३११.तागति/ ताकति ३१२.खराप/ खराब ३१३.बोइन/ बोनि/ बोइनि ३१४.जाठि/ जाइठ ३१५.कागज/ कागच/ कागत ३१६.गिरै (meaning different- swallow)/ गिरए (खसए) ३१७.राष्ट्रिय/ राष्ट्रीय DATE-LIST (year- 2013-14) (१४२१ फसली साल) Marriage Days: Nov.2013- 18, 20, 24, 25, 28, 29 Dec.2013- 1, 4, 6, 8, 12, 13 January 2014- 19, 20, 22, 23, 24, 26, 31. Feb.2014- 3, 5, 6, 9, 10, 17, 19, 24, 26, 27. March 2014- 2, 3, 5, 7, 9. April 2014- 16, 17, 18, 20, 21, 23, 24. May 2014- 1, 2, 8, 9, 11, 12, 18, 19, 21, 25, 26, 28, 29, 30. June 2014- 4, 5, 8, 9, 13, 18, 22, 25. July 2014- 2, 3, 4, 6, 7. Upanayana Days: February 2014- 2, 4, 9, 10. March 2014- 3, 5, 11, 12. April 2014- 4, 9, 10. June 2014- 2, 8, 9. Dviragaman Din: November 2013- 18, 21, 22. December 2013- 4, 6, 8, 9, 12, 13. February 2014- 16, 17, 19, 20. March 2014- 2, 3, 5, 9, 10, 12. April 2014- 16, 17, 18, 20. May 2014- 1, 2, 9, 11, 12. Mundan Din: November 2013- 20, 22. December 2013- 9, 12, 13. January 2014- 16, 17. February 2014- 6, 10, 19, 20. March 2014- 5, 12. April 2014- 16. May 2014- 12, 30. June 2014- 2, 9, 30. FESTIVALS OF MITHILA (2013-14) Mauna Panchami-27 July Madhushravani- 9 August Nag Panchami- 11 August Raksha Bandhan- 21 Aug Krishnastami- 28 August Kushi Amavasya / Somvari Vrat- 5 September Hartalika Teej- 8 September ChauthChandra-8 September Vishwakarma Pooja- 17 September Anant Caturdashi- 18 Sep Pitri Paksha begins- 20 Sep Jimootavahan Vrata/ Jitia-27 Sep Matri Navami-28 Sep Kalashsthapan- 5 October Belnauti- 10 October Patrika Pravesh- 11 October Mahastami- 12 October Maha Navami - 13 October Vijaya Dashami- 14 October Kojagara- 18 Oct Dhanteras- 1 November Diyabati, shyama pooja-3 November Annakoota/ Govardhana Pooja-4 November Bhratridwitiya/ Chitragupta Pooja- 5 November Chhathi -8 November Sama Poojaarambh- 9 November Devotthan Ekadashi- 13 November ravivratarambh- 17 November Navanna parvan- 20 November KartikPoornima- Sama Visarjan- 2 December Vivaha Panchmi- 7 December Makara/ Teela Sankranti-14 Jan Naraknivaran chaturdashi- 29 January Basant Panchami/ Saraswati Pooja- 4 February Achla Saptmi- 6 February Mahashivaratri-27 February Holikadahan-Fagua-16 March Holi- 17 March Saptadora- 17 March Varuni Trayodashi-28 March Jurishital-15 April Ram Navami- 8 April Akshaya Tritiya-2 May Janaki Navami- 8 May Ravi Brat Ant- 11 May Vat Savitri-barasait- 28 May Ganga Dashhara-8 June Harivasar Vrata- 9 July Shree Guru Poornima-12 Jul VIDEHA ARCHIVE १.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक
विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक http://sites.google.com/a/videha.com/videha/ https://sites.google.com/a/videha.com/videha-archive-part-i/ https://sites.google.com/a/videha.com/videha-archive-part-ii/ २.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download http://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi ३.मैथिली ऑडियो संकलन Maithili Audio Downloads http://sites.google.com/a/videha.com/videha-audio ४.मैथिली वीडियोक संकलन Maithili Videos http://sites.google.com/a/videha.com/videha-video ५.मिथिला चित्रकला/ आधुनिक चित्रकला आ चित्र Mithila Painting/ Modern Art and Photos http://sites.google.com/a/videha.com/videha-paintings-photos/ "विदेह"क एहि सभ सहयोगी लिंकपर सेहो एक बेर जाउ। ६.विदेह मैथिली क्विज : http://videhaquiz.blogspot.com/ ७.विदेह मैथिली जालवृत्त एग्रीगेटर : http://videha-aggregator.blogspot.com/ ८.विदेह मैथिली साहित्य अंग्रेजीमे अनूदित http://madhubani-art.blogspot.com/ ९.विदेहक पूर्व-रूप "भालसरिक गाछ" : http://gajendrathakur.blogspot.com/ १०.विदेह इंडेक्स : http://videha123.blogspot.com/ ११.विदेह फाइल : http://videha123.wordpress.com/ १२. विदेह: सदेह : पहिल तिरहुता (मिथिला़क्षर) जालवृत्त (ब्लॉग) http://videha-sadeha.blogspot.com/ १३. विदेह:ब्रेल: मैथिली ब्रेलमे: पहिल बेर विदेह द्वारा http://videha-braille.blogspot.com/ १४.VIDEHA IST MAITHILI FORTNIGHTLY EJOURNAL ARCHIVE http://videha-archive.blogspot.com/ १५. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मैथिली पोथीक आर्काइव http://videha-pothi.blogspot.com/ १६. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ऑडियो आर्काइव http://videha-audio.blogspot.com/ १७. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका वीडियो आर्काइव http://videha-video.blogspot.com/ १८. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मिथिला चित्रकला, आधुनिक कला आ चित्रकला http://videha-paintings-photos.blogspot.com/ १९. मैथिल आर मिथिला (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त) http://maithilaurmithila.blogspot.com/ २०.श्रुति प्रकाशन http://www.shruti-publication.com/ २१.http://groups.google.com/group/videha २२.http://groups.yahoo.com/group/VIDEHA/ २३.गजेन्द्र ठाकुर इडेक्स http://gajendrathakur123.blogspot.com २४. नेना भुटका http://mangan-khabas.blogspot.com/ २५.विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट http://videha123radio.wordpress.com/ २६.Videha Radio २७. Join official Videha facebook group. २८. विदेह मैथिली नाट्य उत्सव http://maithili-drama.blogspot.com/ २९.समदिया http://esamaad.blogspot.com/ ३०. मैथिली फिल्म्स http://maithilifilms.blogspot.com/ ३१.अनचिन्हार आखर http://anchinharakharkolkata.blogspot.com/ ३२. मैथिली हाइकू http://maithili-haiku.blogspot.com/ ३३. मानक मैथिली http://manak-maithili.blogspot.com/ ३४. विहनि कथा http://vihanikatha.blogspot.in/ ३५. मैथिली कविता http://maithili-kavita.blogspot.in/ ३६. मैथिली कथा http://maithili-katha.blogspot.in/ ३७.मैथिली समालोचना http://maithili-samalochna.blogspot.in/ महत्त्वपूर्ण सूचना: The Maithili pdf books are AVAILABLE FOR free PDF DOWNLOAD AT
https://sites.google.com/a/videha.com/videha/ http://videha123.wordpress.com/ http://videha123.wordpress.com/about/ विदेह:सदेह:१: २: ३: ४:५:६:७:८:९:१० "विदेह"क प्रिंट संस्करण: विदेह-ई-पत्रिका (http://www.videha.co.in/) क चुनल रचना सम्मिलित। सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Details for purchase available at publishers's (print-version) site http://www.shruti-publication.com or you may write to shruti.publication@shruti-publication.com विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)२००४-१३. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतए लेखकक नाम नहि अछि ततए संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: शिव कुमार झा, राम विलास साहु आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। भाषा-सम्पादन: नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी आ रश्मि रेखा सिन्हा। सम्पादक-शोध-अन्वेषण: डा. जया वर्मा आ डा. राजीव कुमार वर्मा। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल आ प्रियंका झा। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। ’विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका अछि आ ऐमे मैथिली, संस्कृत आ अंग्रेजीमे मिथिला आ मैथिलीसँ संबंधित रचना प्रकाशित कएल जाइत अछि। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-13 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.com पर संपर्क करू। एहि साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल।५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सिद्धिरस्तु 108 वि दे ह विदेह Videha বিদেহ www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १५४म अंक १५ मई२०१४ (वर्ष ७ मास ७७ अंक १५४) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA