ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' १५६ म अंक १५ जून २०१४ (वर्ष ७ मास ७८ अंक १५६) ऐ अंकमे अछि:- मुन्नी कामत विहनि कथा / नाटक एकांकी कैंसर रोगी- बाप रे बाप ........आब नै जिबै....... माय गे माय..............हो...........दौड़ऽ होउ लोक सब डॉक्टर- चुपु, ई अस्पताल छिऐ, अहाँ कऽ दलान नै जे एना ढ़करै छिऐ। की भेल, देखै सँ तँ भला चंगा छी, कोन तकलीफ यऽ। रोगी- डॉक्टर साहेब, हम एगो आम आदमी छी। हमरा कैंसर भेल अछि जे हमर प्राण लऽ कऽ हमर पीछा छोड़त। हमरा मरै कऽ गम नै अछि पर हमर पुरे परिवार कऽ सेहो ई कैंसर अपना गिरफत मे लऽ रहल अछि। की हमरा आ हमरा परिवार कऽ मुक्ति मिलत? डॉक्टर- हअ-हइ, किएक नै। दुनियामे एहन कोनो बीमारी नै अछि जकर आइक युगमे इलाज नै होइत अछि। पर अहाँ कऽ आ अहाँक पुरे परिवार कऽ कैंसर अछि ई अहाँ केना जनै छी? एना भइए नै सकैत अछि। देखै सँ तँ अहाँ पागल नै लगैत छी, फेर पागल जेकाँ बात किए करैत छी। पहिले जॉंच कराउ, फेर इलाज शुरू करब। रोगी- डॉक्टर साहेब, की जाँचब अहाँ, कि हमरा घरमे आइ सात दिन सँ सब उपास यऽ कि नै? सरकार घर मे गोदामक-गोदाम अन्न सड़ैत अछि पर हम गरीब एक मुटठी अन्न लऽ तरसि रहल छी। आकि ई जाँचब जे हम कतेक दिन सँ प्यासल छी। ने देह मे आगि लगबै लऽ मटिया तेल अछि ने जहर खाइ लेल जेब मे पाइ। डॉक्टर- अहाँ की कहि रहल छी? हमरा समझमे किछु नै आबि रहल अछि। रोगी- कहियो गरीबी कऽ जिंनगी जिलिऐ हऽ डॉक्टर साहेब। हमरा मंॅंहगाइ, गरीबी, लाचारी आ बेरोजगारी अइ तरहक अनेक बिमारी गरसने अछि जे आब कैंसरक रूप लऽ लेलक। कहुँ अहि लाइलाज बिमारी कऽ इलाज अछि अहाँक डॉक्टरी दुनियामे? डॉक्टर- ऐ बिमारी सँ तँ कोइ नै बचल अछि। ई तँ दिन-प्रतिदिन भयंकर रूप लेने जाइ यऽ। अकरा सँ मुक्ति तँ मौते दिया सकै यऽ। हमर संस्कार आंगनमे बैसि बिट्टू कखैनसँ ने चारू भर चौकन्ना भऽ सभ घरकेँ निग्हारैत छलाह। पता नहि कतैक सबालसँ अपन माथकेँ ओझरौने छलाह। ओ सदिखन सोचैत छलाह- किएक होइत भीनसर घरमे बगड़ा फुदकए लगैत अछि। आखिर ओकर प्राण हमरे घरमे किएक लटकल रहैत अछि। किएक नहि ओहो आन चिड़ै जकॉं गाछ-बिरीछपर रहैत अछि? एक दिन बाबासँ बिट्टू पुछलक- “बगड़ाकेँ हमरा सभसँ िकएक नै डर होइत छै? हम तँ ओकरा कखनो नोकसान पहुँचा सकै छी।” बाबा बिट्टूक बात सुिन मुस्कुराइत बजलाह- “बौआ, हमर उँच संस्कारक पहचान यएह बगड़ा छी, जे नीकसँ बुझैत अछि जे हमर संस्कार एकरा नोकसान नहि पहुँचा सकैत अछि। मिथिलाक समर्पणक खिस्सा विश्व भरिमे पसरल अछि। जहिना बच्चाकेँ जकरासँ दुलार भेटैत अछि ओ ओकरे अपना बुझए लगैत अछि। एहिना ई बगड़ा मिथिलाक घर-घरमे दुलार पबैत अपन घर बसबैत अछि।” करैलाक मीठ गुण सासु-पुतौहक नाता तँ खटगर-मीठगर होइत अछि। रगर-झगरक बीच पीसाइत ई संबंध हमरा समाजमे एक प्रतिष्ठित उँचाइ पबैत अछि। एहि ठकराउक मुख्य कारण ई होइत अछि- ने सासु पुतौहकेँ बेटी जकॉं दुलार करैत अछि आ ने पुतौह सासुकेँ माए जकॉं सम्मान। प्रियांसी बी.ए. पास नव विचारक महिला अछि। जे सासुरमे पएर रखैत सासु-पुतौहक उँच-निचक दीवारकेँ खदेर देलक। ओकरा नैहरसँ ई बात मनमे गड़ि गेल छल जे सासु माने हुनकर माए कहैक मतलब ई जे ओकरा नजरिमे सासु आ सतौत माए दुनू एक्के सिक्काक दू परत छी। एहिसँ प्रियांसी सोचलक जे सासुर जाइत ई बुढ़िया अपन सासु गिरि करैत एहिसँ पहिले हम एकर लगाम तनने रहब। तखने हमरा ई सासुर बसए देति। कोहवरसँ निकलैत प्रियांसी डाढ़मे ऑंचरक खुट खोंसैत तइपर दुनू हाथ धऽ सासुकेँ कहलक- “सुनि लौथु हम जेना नैहर रहैत छलौं तहिना रहबनि, हम सासुरक जहलमे नहि खटबनि, मंजूर छन्हि तँ कहौत नहि तँ हमरा दुनू परानीकेँ अखने अलग कए दोथू।” घोघ तरसँ बाजि उठल कनियॉंकेँ ई बोली सुनि सासु तिलमिला गेलीह। मुदा मर्यादाक सम्मान आ कुटुमक ख्याल करैत बजलीह- “आब ई राज-पाट अहींकेँ छी। एकरा अहॉं जेना राखी आइसँ एहि परिवारक मान-सम्मान हम अहॉंकेँ सोपैत छी।” प्रियांसी अपन व्यवहारसँ सासुरक लोककेँ नाकोदम कए देलक। जएह गरम मिजाज नैहरमे छल सएह तेबर सासुरोमे काइम करैत ओ उधियाइ छेलीह। ने भैंसुरक लेहाज आने ससुरक इज्जत ओकरा लेल सभ ओकर दिअर जकॉं छल। घरबलाकेँ तँ गणेशीए बुझैत छलि। ओ अपना आगॉं सभकेँ हीन बुझि हँसि दैत छलि। एकर एहि व्यवहारकेँ लाेक ओकर मतिछीन्नू बुिझ चुप रहि जाइत छल। कोइ ओकरासँ मतलब नहि रखैत छल। ओकरा घरबला सेहो ओकरासँ हरिदम रूझाइल-रूझाइल रहैत छल। किछु मासक बाद प्रियांसीकेँ अपन व्यवहार आ परिवारमे अपन स्थितिक नीक जकॉं ज्ञान भऽ गेल ओ बुझि गेलि जे लड़कीकेँ हरदम बेटीए नहि पुतोहुओ बनि कऽ रहबाक चाही। एगो नीक मनुक्खक निर्माण बदलैत परिस्थिति आ समऐ करैत अछि। अगर नदीमे बाढ़ि नहि आबै तँ तलाबक पानि समुद्रक गहराइकेँ कोना जानि सकैत अछि। तहिना बेटीकेँ उछलैत पैरमे मान-मर्यादा, परिवार, समाज आ देशक दायित्वकेँ बेड़ी बान्हि ओकरा अपन कर्तव्यक ज्ञान कराओल जाइत अछि। सासु बेटीसँ बनल पुतौहकेँ फुलक पगरी सोपैत अछि। जहिमे ओ अपन ई काज कुमहार जकॉं करैत अछि। जेना कुमहार माटिक बर्तनकेँ पीट-पीट आ भट्ठीमे पका कऽ दुनियॉं योग बनबैत अछि। ओहिना सासु कखनो मीठगर तँ कखनो तीतगर बोलीसँ मक्खनसँ पालल बेटीकेँ दुनियॉंक अनुरूप बना कऽ ओकर व्यक्तित्वक निर्माण करैत अछि। कतऽ जा रहल छी हम! कतऽ जा रहल छी हम! कतौै तपि रहल अछि, कतौै गलि रहल अछि, कतौै धँसि रहल अछि, तँ, कतौ उठि रहल अछि आइ धरती! तपा रहल अछि अकरा मनुखक बढ़ैत भूख, जे दिन-प्रतिदिन गाछ-वृक्ष काटि अकरा छत्रहीन बनबैत अछि। समाजक कुरीति अकरा गला रहल अछि। अपन बेटी पर देख अत्याचार ई बेबस भऽ धँसि रहल अछि। देख ई सभ विडम्बना मॉं धरती क्रोधसँ पहाड़ बनि संकल्प करैत अछि कि सम्पूर्ण जहाँक अइ विशाल चोटीसँ झाँपि अकर सर्वनाश कैर दी। मुदा ओ कुछ नै करै लेल मजबूर अछि। जेना आइ धरती बेबस लाचार आ कड़ीसँ बानहल देखाइत अछि ओहिना हमरा समाजमे नारीक स्थिति अछि। आइ भाइ जल्लाद बनल अछि आ बाप पापक रूप लेने अछि। प्राचीन कालसँ जइ रिश्ताकेँ भगवानसँ पहिल जगह मिलल अछि आइ ओकर नामो लइ सँ घृणाक बोध होइए। आइ हमरा समाजमे सभसँ अधिक नजाइज सम्बन्ध गुरू आ शिष्याक बीच अछि। हम एगो अरमान मनमे बसा अपन बच्चामे अच्छा संस्कार आ उच्च शिक्षाक अभिलाषा लेने गुरू लग जाइ छी मुदा वएह गुरू हमर आत्मसम्मान केँ ठेस पहुँचाबैत हमर बच्चाक साथ शोषण करैत अछि। भाइ शब्द अतेक पावन, अतेक पवित्र अछि कि सभ बहिन भाइ शब्दकेँ सम्बोघित करैत ई सोचैत अछि कि ई हमर केवल भाई नइ कृष्णक रूप अछि जे युग-युग तक हमर आबरू आ सम्मानक रक्षा करत। चाहे ओ चचेरा ममेरा फुफेरा भाइ किएक नइ हुअए। पर वएह भाइ जब अपन बहिनक विश्वास तार-तार करैत ओकरा संगे बलात्काकार करैए तँ ओकरा की नाम देल जाएत। जन्म देनहार बाप जकरा पिता परमेश्वर कहल जाइत अछि वएह बाप अपन जनमल बेटी संग पाप करैत अछि यएह समाजमे। आखिर कतऽ खडा छी हम, कतऽ जाइले डेग बढ़ा रहल छी एक पलक लेल, सोचलेसँ अहि गंदा पैर सँ चलि हम अपन स्वच्छ आ पवित्र समाजक निर्माण कऽ सकैत छी? केवल सादा कागज पर कलम दौड़ेनाइ सिखनेसँ संस्कार आ सोच नइ बदलैत अछि। अपन जमीर आ अपन आत्माक अवाज सुनु आ कहू कि बेटी कलंकक पुरिया अछि कि हमर समाज ओकरा कलंकित करैत अछि। टूटल मन एगो जान छल हमरा संगे, ९ महिनाक सुख-दुखक संगी। अनेकानेक सपना हमर, अनेक सवालक जवाब छल। बहुत खुश रहए हमर परिवार। रहै इंतजार सबहक नयनमे कि कहिया ई मास खत्म हएत आ गुॅंजत किलकारी आंगनमे। आइ ओ इंतजार खत्म भेल। हम एगो मासूमकेँ जन्म देलौं, हम अपन अंशकेँ ऐ संसारमे आनलौं। हमरा लेल ओ ने बेटा छल ने बेटी। बस हमर संतति छल, हमर अरमान, हमर सपना, हमर भविष्य छल। पर कोइ नै बुझलक हमर ई आश, कहलक कि दुनियामे आँखि खोलैसँ पहिले ओ आँखि मूइन लेने छल। हम संतोष कइर लेलौं, ई नै बुझलौं कि बेटाक लालचमे ओ बेटीकेँ माइर देलनि। जे हाथ ओइ मासुमक गला पर छल उ एक बेर नै कांपल, ओकर कान अकर रूदनकेँ नै सुनलक। ई हमरे टा नै बहुत नारीक कथा छी। हम अवला नै पर ऐ समाज आ अपनाकेँ आगु अवला बनैल गेल छी, जबतक हम जुर्म सहैत रहै छी तबतक हम परित्याग, शांति आ ममताक मूर्ति छी। जब ओकर जुर्मकेँ आगु खरा उतरै छी तँ हम कुलच्छनी आ कलंकनी छी। आखिर हमहूँ ऐ संसारक गारीक एगो पहिया छी, अगर एगो पहिया निकलि जएत तँ असगर कतेक दूर तक अहाँ नै संसारकेँ लऽ जा सकब। कहिया तक बेटीक बली चढ़बैत रहब आ मायक कलेजाकेँ छन्नी-छन्नी करैत रहब। एकांकी-नाटक खण्ड एकांकी- पात-पातसँ बनल परिवार प्रथम-दृश्य- (बड़की भौजी असगरे तामशसँ लाले-लाल अछि, जेना लगैत अछि जे ओकरा देह मे आ बोलमे कोइ लुंगिया मेरचाय रगड़ि देने हुअए।) बड़की भौजी- उंउ कइर-झुमरि, कइर-लुठबी बुझै कि छै अपनाकेँ? हमरासँ मुँह लगाओत। नमहर छोटक लिहाज नै, बाप रो बाप मुँहमे मेचो नै परै छै बजैत कला। आय अबए दै छिऐ टुनमा बाबूकेँ, कहबै नै बनत हमरा एे मोगिया संगे हमरा भीन करि दिअए। (शंकर कअ प्रवेश) शंकर- टुनमा माए, हे यैयय टुनमा माए, कि भेल? एना किआ तिलमिला रहल छी! असगरे केकरा संगे बात करै छिऐ। बड़की भौजी- ओइ ऊपरबला सँ, जे नमहर बना कऽ तँ पठेलक ऐ घरमे पर भैलू कुत्तो जकाँ नै यऽ। आब तँ छोटकीकेँ बोल फुटए लगलैए। अपन बेज्जति करबैसँ नीक यऽ कि पहिले सर्तक भऽ जाइ। हम भीन हइ लऽ चाहै छी। शंकर- धुर्रर, बताह भेलिऐ कि! लोग कि कहत चुप रहू। चलु हम हाथ-पएर धोने अबै छी जल्दि खेनाइ लगाउ बड़ जोड़ भुख लगल अछि आ अहूँ कनी संगे खा लिअ तामश हटि जएत। (पटाक्षेप।) दोसर-दृश्य- पंकज- छोटकी कि भेलै यइ? आय भौजी पुरे घरकेँ अपना माथपर उठेने छै। छोटकी- अहाँकेँ भौजी बेसी बलगर अछि तइ खातिर छोट-मोट बातपर हंगामा खड़ा केने रहैए। असल बात तँ ई छै कि दुनू पावर मिलल छै ने, साउसोकेँ आ जेठानियोकेँ तँइ मति छिन्नु भऽ गेल छै। पंकज- (तमसा कऽ कहै।) अहाँकेँ बजैक तमीज नै अछि। अहाँ अपन माइयो संगे अहिना बजैत रहिऐ आकि अतए सठियेलियइ हेँ। ठीके भौजी कहै छै अहाँकेँ जुवान नै रेती छी रेती। खब्बरदार जे हमरा माए सनक भौजीक विरूध एको गो अनरगल शब्द बजलौं तँ जीह घीचि लेब। धनि ई भौजी जे हम जिंदा छी। बिनु माएक तँ हम अनाथे भऽ गेल रही, यएह भौजी जे माए बनि हमरा सहारा देलक। आइ ओकर एगो बात अहाँकेँ घोंटल नै जाइए। छोटकी- हम छोट छी तँ अकर मतलब कि बड़काकेँ एड़ी तर मसलैत रही। हम आगू भऽ कऽ लड़ैले नै जाइ छी, मुदा एगो बात बूझि लिअ कोइ आगु भऽ कऽ जे हमरा बात कहत तँ पाछु सँ हम छोड़ब नै। नमहर लोककेँ अपन बेवहारसँ छोटक आगु नमहर भऽ कऽ रहए पड़ै छै तबे उ नमहर कहाइ छै। (दूरेसँ शंकरक अवाज सुनाइत अछि) शंकर- बौआ पंकज हौ कथीकेँ बहस करै छहक दुनू गोरे। आबा घरसँ बाहर आबह। जेना छोट बच्चा लड़ाइ-झगड़ा कऽ फेर एक्केठीम आ ओकरे संगे हसए-खलए लगैत अछि तहिना एकरा दुनूकेँ झगरा छै। तूँ आब एना बात नै बढ़ाबह। पंकज- अबै छी भैया। (पटाक्षेप।) तेसर दृश्य- (3-4टा बच्चाक संगे पायल आ काजल घरक बाहर खेलाइत अछि। खेल-खेलमे दुनू बहिन आपसमे लड़ए लगैए, तखने बड़की भौजी बच्चाकेँ चिख-पुकार सुनि घरसँ बाहर अबैए आ एक थप्पर अपन बेटी पायलकेँ आ एक थप्पर छोटकीकेँ बेटी-काजलकेँ मारैत अछि। (थप्पर लगैत पाँच सालक काजल मुँह भरे खसि पड़ैत अछि। तखने छोटकियो दौगल अबैए।) छोटकि- बाप रे बाप, मारि देलक हमरा बेटीकेँ। मुँहसँ खुन बोकड़ैत अछि। कोइ दौगू डॉक्टरकेँ बजेने आउ। काजल... बेटी काजल....! (जहिना छोटकी काजलकेँ कोरामे उठाबैत अछि सभ अबाक् रहि जाइत अछि। काजलकेँ मुँहसँ खुनक पमारा निकलैत अछि। काजल मुर्छित भऽ जाइत अछि। बड़की भौजी दौग कऽ एक लोटा पानि अनैए आ काजलक मुँह पर पानि छिटैए।) बड़की भौजी- बुच्ची काजल, बाबू कि भेल आँखि खोलू। छोटकी- ई मगरमछक नोर लऽ कऽ सहानुभूति देखबै लऽ अतए नै आउ। हमरा बेटीकेँ ऐ अवस्थामे पहुँचा कऽ आब हमदर्दी देखबै छी! अगर अहाँ एक बापक बेटी छी तँ हमरा नजरिसँ दूर भऽ जाउ। हम अहाँक मुँह देखए नै चाहै छी। (बड़की भौजी कनैत घर चलि जाइत अछि। पंकज डॉक्टरकेँ संगे दौगैत अबैत अछि।) डॉक्टर- (काजलकेँ देखि ओकर खुन सब पोछैत) चिंताक कोनो बात नै छै, अगुलका दाँत ठोरमे कनियेँ गरि गेल रहै आ छोट बच्चा छै तँइ मुर्छित भऽ गेलै। हम किछु दवाइ लिखि दै छी। मंगबा लिअ तीन दिनक खोराक अछि आ घबरा नै किच्छो नै भेलै। बच्चाकेँ अहिना छोट-मोट चोट लगिते रहै छै। पंकज- चलु डॉक्टर सहाएब, हम अहाँकेँ छोड़ि अबै छी। (पटाक्षेप।) चारिम दृश्य- (बड़की भौजी आ शंकर दुनूक बीच ऐ प्रसंग पर चर्चा होइत अछि।) शंकर- पायल माए, अहाँ ई ठीक नै केलौं। घरक झगड़ाकेँ तामशसँ अहाँ छोट बच्चापर निकालि लेलौं। बड़की भौजी- छोटकी आ बौआ तँ यएह सोचै छै कम-सँ-कम अहाँ तँ हमरा समझू, हम तँ झगड़ा छोड़बै खातिर दुनूकेँ कनिकबे जोरसँ मारलिऐ, हमरा कपारमे दोष लिखल छेलै तँइ ई घटना घटलै। छोटकी- घटना घटलै कि घटना घटेलिऐ। हमरासँ लड़ि कऽ मन नै शांत भेल तँ हमरा बच्चोकेँ नै छोड़लौं। (पंकज दिश ताकैत) सुनै छिऐ आय अखने भीन होउ नै तँ हम अपना देहपर मटिया तेल छीट कऽ आगि लगा लेब। पंकज- अच्छा शान्त रहू, हमहुँ नै आब जड़िमे रहब। ऐ खुनक खेल खेलाइ सँ तँ नीक रहत जे अलगे रहू मुदा शांतिसँ रहू। शंकर- बौआ कि बजै छहक तूँ। एकरा सभकेँ बातमे आबि कऽ तुहों अहिना बजए लगलहक। खबरदार जे फेरसँ भीनक नाओं लेलहक। पंकज- भैया, ई हमर आखिरी फेसला छी। आब हम जड़मे नै रहब। शंकर- बौआ, लोक कि कहतह, एना नै करह। जल्दिबाजीमे कोनो फेसला नै करल जाइ छै। पंकज- हमरा लोकक परबाह नै छै अगर परवाह छै तँ अपन बच्चा आ परिवारक। जखनि हमर बच्चा लहु-लोहान छल तखनियेँ हमर मन तोरासँ भीन भऽ गेलौ। (सभ मुँह लटका अपना-अपना कमरामे चलि जाइत अछि।) (पटाक्षेप।) अंतिम दृश्य- (घरक सभ सदस एक संगे एकट्ठा होइत अछि।) राधेश्याम- बौआ पंकज, कि भेलै जे बात भीन-भिनाओज पर चलि एलै। पंकज- बाबु हम कोनो तर्क-वितर्क करैले नै चाहै छी, हमरा जड़मे नै बनैए तँइ हम भीन हएब। राधेश्याम- छोट-मोट बातपर घबड़ेनाइ आ जिनगीक संघर्षसँ मुकरनाइ ई इंसानक काज नै भगोराक काज छी। पंकज- बाबू, आय हमर बेटीकेँ ई हाल भेल काल्हि किछु और हएत। अतेक दिनसँ काजलक माए संगे होइत रहै तँ हम किछो नै कहैत रहिऐ, आब हमरा बच्चा संगे करए लागल अखनो जे हम किछो नै बजब तँ कहीं काल्हि अंजाम ईहोसँ बूड़ा नै हुअए। राधेश्याम- बौआ, काजल संगे जे भेलै उ संयोग मात्र रहै। एनाहियो तँ भऽ सकैए कि काल्हि आइयोसँ नीक होय। बौआ भिन्न भेनेसँ खाली अंगना नै मनो बटाइत अछि। सम्मलित परिवार एक शरीर जकाँ होइत अछि। जेना शरीरक कोनो अंगमे एगो काँट गड़ैसँ ओकर दरदक लहरि पुरे शरीरमे दौगैत अछि तहिना सम्मलित परिवारमे कोनो एक व्यक्तिकेँ किछो हो छै तँ ओकर दरदक एहसास पुरे परिवारक हर सदस्यकेँ होय छै। असगर रहनेसँ इंसान स्वार्थी भऽ जाइत अछि। जेना शरीरक कोनो अंगमे घाव भऽ गेलापर ओकरा काटि कऽ अलग करि कऽ बजैए मलहम लगा कऽ ठीक करल जाइत अछि, तहिना परिवारक बीच बरहल मन-मोटओकेँ प्यारक मलहमसँ आ आपसी समझौतासँ दूर करैत अछि। आय बड़की कनियाँकेँ एक थप्पर तोरा नजरि एलह आ ओकर अतेक सालक दुलार बिसरि गेलहक। जे भौजी माए बनि हरिदम तोरा आगु ठाढ़ रहह उ अगर तोरा बेटीकेँ एक थप्पर माइरे देलकह तँ कि गुनाह केलकह। छोटकि कनिया हमर एगो बात सुनह, सासुरमे सासु माएक रूप आ दियादिनी बहिनक रूप होइत अछि। अोकरा जाबे तक जिनगीमे उतारबहक नै घर स्वर्ग नै बनतह बस मकान बनि कऽ रहि जेतह। जतए रहै आ खाइक सुविधा होय छै और किछो नै। (सब एक संगे हाथ जोड़ि कऽ) बाबु हमरा सभकेँ माफ करि दिअ, हम सभकेँ सभ गुनेहगार छी। जँए अहाँकेँ मन दुखेलौं। हम आपसमे कहियो नै लड़ब ने कहियो भीन हएब। (पटाक्षेप।) इति। नाटकः- शिक्षित बेटी प्रथम-दृश्य दुलारी- माय..................बाबू...... देखियौ, हमर परिक्षाफल ऐल। जइमे हम सभसँ अघिक अंक सँ उतीर्ण भेलौं। फूलदाय- एना किए चिकरैय छऽ। लगैए जेना कानक झिल्ली फाटि जएत। सभ काज राज छोड़ि कऽ मुँह केँ अगोरने रहै छऽ किताबेमे। आब ई चिटठा लऽ कऽ डकरने फिरै छऽ। सभ तोहर बापक सनकी छियौ जे तूँ एना उधियाइ छी। ला अनऽ, आइ अकरा चुल्हामे झौकि दै छिऐ। दुलारी- माय, ई एक टुकरा कागज नइ, हमर साल भरक मेहनत छिऐ, हम नइ देब। फूलदाय- तूँ नइ देबही तँ आइ ई झारू तोरा पीिठ पर टुइट जेतौ। (फूलदाय झारू लात घुसा दुलारी पर बरसाबैत भद्दा-भद्दा गारि दैत आ हुनकर हाथसँ अंकपत्र लऽ कऽ खुण्डी-खण्डी कऽ दैत अछि।) पटाक्षेप दोसर दृश्य खट्ठर-दुलारी बेटा, दुलारी कतऽ छहक। दुुलारी-अबै छी बाबू जी! खट्ठर- आइ तँ तोहर परीक्षाफल अबैबाला छेलऽ, कि भेलऽ? अच्छा जा तूँ अपन अंक-पत्र नेने आबऽ। हम तोरा लऽ एगो तोउफा आनलिअ, जकरा देख तूँ खुश भऽ जेबहक। हम तोरा लऽ कलम आनलिअ, आब जल्दी जा कऽ हमर उपहार नेने आबऽ। (दुलारी चुपचाप ओतै बैठ दुनू आँखि सँ नोर बहाबैत यऽ, तखने फूलदायक प्रवेश।) फूलदाय-अहींक दुलार अकरा बिगाड़ि कऽ राखि देलकैए। जेना पढ़ि-लिख कऽ हमरा कमा कऽ खिऐत बड़का मसटरैन बनबै लऽ चलल, के करतै बियाह। कतौ बिएबहक तँ पहिले चुल्हा लग घुसकेतऽ बेटीकेँ। कॉपी-कलम पकड़ा नै ओकिली करै लऽ लए जेतऽ, बुजलहक कि नै। खट्ठर-बेटा, तोहर मायक तँ आदते छऽ बजै कऽ। छोड़ऽ, तूँ कहऽ की भेलऽ स्कूलमे। (दुलारी नोराइल आँखिसँ चुपचाप माय आ बाबू दिस निहारैत रहैए।) फूलदाय-गइ सून, दुआर पर गोबरक ढेर,ी जो उठाकऽ महार पर पाथने आ। आ अकर बात सुनमे तँ अहिना कुहल जेमऽ। बर ऐल पढ़ै-लिखै बाली। देखै छियौ, आब तोरा के पढ़बै छौ। खट्ठर-अहॉं बताह छिऐ कि! अपनो जनमल आन लगैए अहाँकेँ। तँइ तँ तूँ निपुत्र छी। डाइन कहाँकऽ। भगवान तोरा बाँझे रखितौ तँ नीक होइत। पटाक्षेप तेसर दृश्य (किछु दिन बाद दुलारीक शिक्षकक हुनकर घरपर आगमन।) शिक्षक-खट्ठर................यौ खट्ठर...... कतऽ छी यौ। खट्ठर-मास्टर साहेब प्रणाम। शिक्षक- प्रणाम-प्रणाम! लिअ, आइ हम अहाँ कऽ मुँह मीठ करै लऽ एलौंए। खट्ठर- की खुशीमे! शिक्षक- किए, अहाँ कऽ नै बुजहल अछि जे अहाँक बेटी अहि गामक संगे अपन जिलोक नाम रौशन केलक। आइ हमरा गर्व भऽ रहल अछि जे हम दुलारी जेकाँ होनहार छात्राक शिक्षक छी। खट्ठर-पर दुलारी तँ हमरा किछु नै कहलक। हम तँ ई बुझै छेलौं कि दुलारी बोड परीक्षामे असफल भऽ गेल। दुलारी..........बेटा दुलारी........ दुलारी- जी बाबूजी! खट्ठर-बेटा, हमरासँ अतेक खुशीक बात केना छुपा कऽ राखि लेलौं। दुलारी-बाबूजी, ऊ माय हमर अंकपत्रकेँ.. (कहैत दुलारी कानऽ लगैए।) शिक्षक-दुलारी, आइ तूँ गर्वसँ हमरा सभक सर ऊँच कऽ देलऽ। खट्ठर! दुुलारीकेँ सरकार १० हजार रूपैया आ इंटर कॉलेजमे दाखिला संगे दू सालक पढ़ै-रहै आ खाए कऽ खर्चा सभ देत। आ हम शिक्षकगण स्कूलक तरफसँ ५ हजार रूपैया अहाँ केँ देब जे अहाँ अपन बागमे अतेक सुन्दर फूल उगेलौं, पूरे समाजसँ लड़ि अपन बेेटीकेँ आगू बढ़ेलौं। आब सभ अपन बेटीकेँ बेटा जेकाँ पढ़ैत। पटाक्षेप चौथा दृश्य (अपन पत्नीसँ) खट्ठर-आब कहू बेटी कमाकऽ देलक कि नै! हम एहन दीप जरेलौं जकर प्रकाश पुरे जिलाक लोक देखलक। कि अहाँक मन अखनो अनहार यऽ? फूलदाय-हमरा माफ कऽ दिअ दुलारी बाबु, हमरा सँ गलती भऽ गेल, हम अनपढ़ नै। बुझलौं शिक्षाक की मोल होइए। जब हम घर सँ निकलै छेलौं तँ लोग सभ ताना मारै छेल, कहै छेल, बेटीकेँ बेटा जकाँ स्कूल भेजनेसँ देखबै, नाक कटैत। आइ जाइ छी हम, वएह लोग केँ कहै लऽ कि देखियौ, हमर बेटी नाक नै कटौलक बल्कि सर ऊँच केलक। खट्ठर-अच्छा चलू, दुलारी आब दू साल पढ़ै लऽ पटना जएत, तकर तैयारी करू। फूलदाय- हऽ दुलारी बाबु, जरूर। पटाक्षेप अंतिम दृश्य (दू सालक बाद।) खट्ठर-बेटा, आब आगू कि करबहक? और पढ़बहक! दुलारी-बाबु आगाँ तँ पढ़ब मुदा अहि संगे हम एगो काम सेहो करब, अपन गाममे प्रोढ-शिक्षा अभियान शुुरू करब। खट्ठर- ई की होइ छै! दुलारी-बाबू जाबऽ तक जड़ि नै स्वच्छ हौत तँ निक डारि केना पनपत। जबतक नारी शिक्षाक मोलक एहसास नै हएत तब तक कोय अपन बेटीकेँ नै पढ़ैैत। बाबू हम अपन गामक सभ बेटीकेँ दुलारी बनैत देखऽ चाहै छी। खट्ठर-हँ बेटी, अहिमे हम अहाँक संग छी। अक्षर-अक्षर दीप जलत कक्का-काकी,बाबा-दाय सभ मिल कऽ पढ़त तबे बेटा-बेटीक भेद मिटत आ समान हक सँ दुनू आगू बढ़त। नाटक अंधविश्वास प्रथम दृश्य गंगा- बउआ………..बउआ, सुतल छहक की, देखहक बाबू दरबाजा पर बजबै छऽ। शंकर- कि, आ..हू हू हू…। गंगा- कि भेलऽ। एना किए कराहै छहक। माय गे, माय हो, देेह तँ झरकैत छह। बउआ आँखि खोलऽ, (रूदन स्वरमे) हयौ सुनै छिऐ, दौड़ू यौ, देखियौ बउआ कऽ कि भेल। यौ, आँखि ताँखि उलटेने छै यौ, जल्दी आउ ने। (रामाक धोती सम्हारैत आंगनमे प्रवेश) रामा- एना चिकरनाइ भोकरनाइसँ काम नै चलत। जाउ दौड कऽ गोसाईं घरसँ गंगाजल नेने आउ। (गंगा दौड कऽ जाइत अछि आ गंगाजलक डिब्बा नेने अबैत अछि आ कनैत-कनैत कहैत छथि।) गंगा- हे काली माइ, हमरा कोइखक लाज राखब। हमर लालकेँ ठीक कइर दिअ। हम सहि कऽ सांझ देब। रामा- पहिले गंगाजल लाउ ने तब कोबला-पाती करैत रहब। (रामा अपन पत्नीकेँ हाथसँ झटैक कऽ गंगाजलक डिब्बा छीन लैत अछि आ शंंकरक उपर गंगाजल छीट हुनकर मुॅंह वएह जलसँ धोइ दैत अछि।) रामा- बउआ उठऽ, केना लगै छऽ आब। शंंकर- बाबूजी, हमर माथा दर्दसँ फाटल जाइत अछि आ जाड़ सेहो होइत अछि। रामा- अच्छा लै ई कम्बल ओढ़ि कऽ सुइत रहऽ, कनिकबे कालमे सभ ठिक भऽ जेतऽ। यै सुनै छिऐ शंकरक माय। गंगा- कि कहै छिऐ। रामा- बउआक माथपर पीरी परहक भभूत लगाउ आ अकरा अराम करऽ दियौ। पटाक्षेप दोसर दृश्य (पति-पत्नी अपन कक्षमे बेटाक हालत पर विचार विमर्श करैत।) गंगा- कि भेल, किए अहाँ काल्हिसँ चुप छिऐ? कि कोनो अभास भऽ रहल अछि? कहू ने, के भइडाही केने छइ। एक बेर अहाँ नाम कहि दिअ, अखने झोटा पकड़ि पोटा निकालि देबै आ घिसियाबैत पूरा गाम ओंघरेबै। सँइखोउकी बेटखोइकी सभ ककरो नीक देखै लेल नै चाहै छइ। रामा- (जोरसँ) बन्द करु अपन सत्यनरायलनक कथा। ई ककरो केलहा नै अपने घरक गोसाँइ अछि। आइ तक ककरो एहेन बोखार देखने रहिऐ। अपन देहमे अतेक आगि देविये रखैत अछि। जरूर हमरासँ कोनो गलती भेल जे हमरा पर मइया तमसा गेलखिन। हमरा हिनका शांत करै लेल गुहार लगबइये पड़त। गंगा- अहाँ तँ अपने भगत छी। कौल्हका दिन निक अछि, काल्हिये बैसकी बैठाउ। हम जाइ छी, पूजाक सामग्री जुटबै लेल। (गंगाक प्रस्थान होइत अछि आ रामा गम्भीर सोचमे डुबल रहैत अछि।) पटाक्षेप तेसर दृश्य (एगो दौरामे पूजा सामग्री एकट्ठा करि गंगा आ शंंकरक आगमन, हुनके पाछू दू-चाइर लोकनी सेहो अबैत अछि।) गंगा- बउआ बाबू आबै छऽ, ताबे तूँ पूजा करऽ। ई फूल अक्षत चढा कऽ धूप देखबऽ। शंकर- (फूल जल चढबैत कहैत छथि) आब की करब? गंगा- अतऽ कल जोइड़ बैठू। (रामाक संगे चारि लोग जे ढोल आ झाइल लेन अछि, हुनकर प्रवेश।) रामा- शंकरक माय सभ तैयारी कऽ लेलौं? गंगाजल संगेमे राखने रहब। (रामा गोसाँइ निपैत अछि आ फूल अक्षत चढा कऽ माँक प्रार्थना करऽ लगैत अछि। चारू लोकनी डाला बिचमे रखैत माँक गुहार लगबैत अछि आ ढोल झाइल सेहो बजबैत अछि।) चारू लोकनी- तोहरे दुआरे मइया हम अर्जी लगैलियइ हेऽऽऽऽऽऽऽऽऽ हूंऽऽऽऽऽऽऽ बोल जय गंगे, बोल जय गंगे, बोल जय गंगे। बोल कि कष्ट छउ, किए बजेलऽ हमरा, बोल, बोल, कि भेलउ? गंगा- हे मइया, कि गलती भेल हमरासँ आ हमरा घरवालासँ। सभ दिन तँ अहींक पिरी निपैत आँखि खुलैत यऽ हमर, कि अपराध भेल जे हमरा बेटाकेँ अहाँ चारि दिनसँ मतेने छी। रामा- अहिना भूइज कऽ खेबउ। अपना खाय छऽ छप्पन प्रकार आ हमरा लऽ फूल अक्षत। एक दिशसँ सभकेँ भूइज-भूइज खेबउ। गंगा- एना किए कहै छऽ, अगर हमरासँ कोनो कुघटी भेल तँ हमरा माफ कइर दिअ, अहाँ जे कहब हम सभ करै लेल राजी छी। रामा- तँअ ठिक छइ, हमरा जानक बदले जान चाही। हमरा हर अमावश्याक राइतमे इकरंगा खस्सीक बैल देबही तँ तोहर कल्याण भऽ जेतउ। ले ले, लेह अक्षत, बोल बोल जय गंगे, बोल बोल जय गंगे, बोल बोल जय गंगे। गंगा- अहिना हएत भगवान, हम जानक बदले जान देब। रामा- होऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ हएऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ बोल जय गंगा, बोल बोल जय गंगे, बोल बोल जय गंगे। आब हम चलै छी। पटाक्षेप चौथा दृश्य (ग्रामीणक बीचमे) गंगा- हयोउ, जब घरक देवता बैल मांगै छइ तँ अहाँकेँ दइमे कि हिचकिचाहट भऽ रहल अछि। बउआ दिश देखियौ तँ, आइ पॉंच दिन भेल, बेदरा एक बेर नै आँखि खोलइ यऽ। रामा- आब अपन गहबरमे बैल नै पड़ैत अछि, हमर बाबा अपन अंगोरिया आंगुर चिर कऽ बैल सौपने रहथि, ओही कऽ बदले लरू चढबैत रहथि। केना फेरोसँ बैल दी वएह सोचै छी। गंगा- अहाँकेँ बेटाक चिंंता नै अछि? हम बैल देबै, हम वचन देने छी। एगो ग्रामीण- हो रामा, किए अतेक सोचै छऽ तूँ। अपना मने तँ नइ दै छऽ। माँ मांगलकऽ। जाधरि तूँ बैल नइ देबहक शंंकर ठीक नइ हेतऽ। बेटा लऽ दऽ दहक। गंगा- सुगनी लग एक रंगा खस्सी छइ। लऽ आनू गऽ। हम कहने रहियै तँ कहलकै, लऽ जाउ। पटाक्षेप अंतिम दृश्य (ग्रामीणक भीड़क बीच बेहोस अवस्थामे शंंकर।) गीत- काली मइया हे कनिये, काली मइया हे कनिये. होइयो न सहायऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ रघुनाथ- हयोउ, कि बात छिऐ। यौ रामा, कक्काक अइठाम अतेक भीड़ कथी कऽ छिऐ। एगो ग्रामीण- हुनका बेटा कऽ देहमे काली समैल छइ, कहै छइ कि जानक बदले जान नइ देबही तँ अकरा भूइज कअ खेबउ। अखन वएह बैइल दैत अछि, ओकरे भीड़ छिऐ। रघुनाथ- कहिया तक ई अंधविश्वास रहत अहि गाममे। चलू चलि कऽ देखै छी। (रामाक घरमे रघुनाथक आगमन) रघुनाथ- काकी, कतऽ अछि बउआ, देखू। गंगा- रघुनाथ बउआ, आइब गेलहक सहरसँ। अए, देखहक ने आइ छऽ सात दिन भऽ गेलैए, आँखि नइ खोलै छइ। जाधरि बैइल नइ देबइ, नइ छोड़थिन मइया। (रघुनाथ शंंकरक नब्ज देखैत आ सिर पर हाथ राखि आँखि देखैत कहैत छथि।) रघुनाथ- काकी अहाँ सभ अपन मुर्खताक कारण अकरा जानसँ माइर देबइ। अकरा दिमागी बुखार भेल अछि। अगर इलाजमे देर करबै तँ बेटा कतौ नइ मिलत। रामा- बेसी तूँ इंगलिस नइ बतिया, ई कोनो बुखार नइ देवीक केलहा छिऐ, हमरा अपन काज करऽ दे। रघुनाथ- हो कक्का, एगो बातक जबाब तूँ सभ ग्रामीण मिल क दए। तोरा दुगो पुत्र छऽ, एगो बिमार छऽ तँ कि तूँ एगो पुत्रक जान लऽ कऽ दोसर पुत्रक जान बचेबहक, नइ ने। तँ फेर माँ काली ई कोना करथिन। हुनका लेल तँ अहि संसारमे रहैबला हर जीव माँक संतान छी। फेर ओ ई कोना करथिन। अंधविश्वासक चादरमे नइ लिपटल रहऽ। जागऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ आबो तँ जागऽ। रामा- तूँ आइ हमर आँखि खोइल देलहक। चलऽ बउआकेँ अस्पताल लऽ चली। “जानक बदले जान देनाइ अछि ई अंधविश्वासक बाइन करि परन हमसभ ई कि नइ लेब आब ककरो प्राण। इति। जिन्दगीक मोल प्रथम-दृश्य राम रतन- बाबू सुतल छिऐ? भिक्खन- कि कहै छहक बउआ? जागले छिऐ, बाजऽ, बहुत परेशान लागि रहल छहक। राम रतन- बाबू, हम बाहर कमाइ लेल जाइ के सोचि रहल छी। तोहर की विचार छऽ। भिक्खन- नै बउआ, हम अतेक दिन तक तोरा नै कतौ जा देलियऽ। आबो नै जा देबऽ। तोरा सिवा हमरा के छै। तोहर माइ तोरा हमरा कोरामे दऽ कऽ दुनिया छोड़ि देलक। तहियासँ हमर सभ कुछ तूँ छहक। हम तोरासँ एक पल खातिर दूर नै रहि सकै छी। राम रतन- बाबू आब हम १८ बरसक भऽ गेलिऐ। हम अपन ख्याल राखैमे सक्षम छी। हमरा बाहरक दुनियाँ देखै कऽ एगो मौका दऽ दिअ, बस एक बेर जा दिअ, फेर अहीं संगे रहब। भिक्खन- नै, अबकी बैशाखमे तोहर बियाह करै कऽ अछि। बियाह करि लऽ, फेर तोरा जतऽ जाय कऽ मन हेतऽ जायहक। राम रतन- बाबू आब माइनो जाउ। किछु दिनक तँ बात छै। फेर अहाँ जेना कहब हम तहिना करब। भिक्खन- ठीक छै, अहाँक हठक आगू हमरा झुकइये पड़तै। ककरा संगे आ कतऽ जेबहक? राम रतन- बाबू, काल्हि फुलचनमा हिमाचल जा रहल छै। हम ओकरे संगे हिमाचल जाएब। भिक्खन- ठीक छइ, काइले जेबहक तब तँ पाइ कौरीक ओरियान करऽ पड़तै। कखुनका गाड़ीसँ जेबहक। राम रतन- रातिक ११ बजे निर्मली सँ गाड़ी पकड़बै। आब हम जाइ छी, अपन कपड़ा-लत्ता साफ करै लऽ। । पटाक्षेप। दोसर दृश्य भिक्खन- बउआ हइए..... फूलचन एलऽ। राम रतन- आबैय छी बाबू। कपड़ा पिनहै छी। भिक्खन- बउआ फूलचन। तूँ तँ ओतै रहै छहक। तोरा तँ ओतौका सभ किछु कऽ पता हेतऽ। फूलचन- हउ कक्का, तूँ चिंता नै करऽ। राम रतन हमरे संगे रहतै। ओतऽ ओकरा कोनो चीजक तकलीफ नै हेतै। भिक्खन- तूँ तँ दवाइबला कम्पनीमे काज करै छहक नऽ! कथीक काज करै छहक? फूलचन- हँ कक्का। दवाइयेबला कम्पनीमे छिऐ। ओइमे तँ बहुत तरहक काज होइ छै। जे काज भेटल सएह करि लेलौं। भिक्खन- अच्छा चलऽ, ठीक छै। राम रतन- चल फूलचन! भिक्खन- बउआ सभ किछु ठीकसँ लऽ लेलहक नऽ? आ सभ िदन हमरा फोन करैत रहिअ। बाहर जाए छहक, गाड़ी-घोड़ा देख कऽ चलइहक। राम रतन- ठीक छै बाबू, अहाँ चिंता बिलकुल नै करू। अपन ख्याल रखब। समय-समयपर खाना खाइत रहब आ बेसी काज नै करब। हम जल्दी घुइम-फिर कऽ आबि रहल छी। सबहक प्रस्थान! ।पटाक्षेप। तेसर दृश्य (हिमाचल पहुँच कऽ) राम रतन- फूलचन, आइ गामसँ एला छऽ दिन भऽ गेलैए। तूँ तँ काम पर चलि जाइ छऽ आ हमरा असगर पहाड़ जकाँ समय लगै यऽ। हमरो कतउ काज लगा दे नऽ। फूलचन- अच्छा ठीक छै। काल्हि हम अपन मालिकसँ तोरा लऽ बात करबउ। दोसर दिन फूलचन- राम रतन, काल्हिसँ तूँहो चलियहन हमरा संगे। ८ हजार मासिक तनखुआ पर हम तोरा लऽ बात केलियौहँ, मंजूर छउ नऽ। मन लगा कऽ काज करबही तँ अओर तनखुआ बढ़ेतउ। राम रतन- ई तँ हमरा लऽ बहुत खुशीक बात अछि। अखने हम बाबूकेँ ई शुभ समाचार दै छी। पटाक्षेप। चारिम दृश्य कम्पनीक कैनटिंगमे बैठ राम रतन आ फूलचन खाना खाइत गप्प करैत अछि। राम रतन- फूलचन अतऽ कोन काज होइ छै। हमरा सँ आइ कोनो काज नै करेनकैए। डॉक्टरबला कोट पहिरने एगो आदमी एलै आ हमरा एगो गोली खिया कऽ चलि गेलै। कुछो समझमे नै आबै छै, उ हमरा कथीक दवाइ देलकैए। ओतऽ चारि-पाँच गरऽ अओर छेलै, सभकेँ वएह दवाइ देलकैए। फूलचन- अतऽ अलग-अलग बिमारीक दवाइ बनै छै, ओकरे जाँच खातिर कम्पनी किछु लोककेँ नौकरी पर रखै छै, जइमे सँ एगो तुहो छी। राम रतन- ओइ दवाइसँ कोनो हानि तँ नै होइ छै? फूलचन- नै! अगर हेबे करतै तँ अतऽ डॉक्टरक आ दवाइयक कोनो कमी छै? जे खर्चा ओकर इलाजमे लगतै सभ कम्पनी देतै। हमहूँ तँ कतेक साल तक यएह काज केलिऐ, कहाँ किछु भेलै। एक आदमी- फूलचन, राम रतनकेँ पठाउ, डॉक्टर साहेब बजेने छै। फूलचन- जी। (रामरतनसँ) जो देखहीं की कहै छउ। राम रतन डॉक्टरक चेम्बरमे जाइत अछि। राम रतन- साहेब अहाँ बजेलौं। डॉक्टर- ई दवाइ खा लिअ आ एतऽ पड़ि रहू, किछु इन्जेक्सन लगेबाक अछि। दवाइ खा कऽ राम रतन सुइ लइ लऽ मेज पर लेट जाइए! २ घंटा बाद डॉक्टर- राम रतन ओ राम रतन उठू। डॉक्टर राम रतनकेँ हिलाबैत अछि आ फेर नब्ज देखऽ लागैत अछि! डॉक्टर- ई की, ई तँ मरि गेल। कियो अछि, डॉक्टर खुरानाकेँ बजाउ। डॉक्टर खुराना- की भेल? डॉक्टर- सर, एकरा देखू, की भऽ गेलै, नब्ज नै चलै छै। डॉक्टर खुराना- ओह नो! ई मरि गेल। कोन दवाई देलौं एकरा? डॉक्टर-सर ई तीनू। डॉक्टर खुराना- की अहाँ पागल छी? एक साथ एतेक दवाइ, सेहो पहिले बेरमे। पहिने अहाँ एकरा नींदक गोली खुएलौं, तकर बाद एतेक पावरक दू-दू इन्जेक्सन दऽ देलौं? डॉक्टर-सर आब की हएत? डॉक्टर खुराना- हमरा सभ ऐठाम तँ ई रोजक बात अछि। एकर परिवारबलाकेँ मुआवजा दऽ कऽ चुप करा दियौ, आ हँ जखन सभ चलि जाए तखन बॉडी बाहर निकालब। ता तक एकर मरबाक खबर ऐ चहरदिवारीसँ बाहर नै एबाक चाही, बुझि गेलौं। रातिक ९ बजे फूलचन- सर, राम रतन कतऽ अछि, ओकर छुट्टी नै भेल? डॉक्टर- आइ एम सॉरी फूलचन, राम रतन आब ऐ दुनियाँमे नै रहल। हमरा एकर अफसोस अछि। ओकर परिवारबलाकेँ कम्पनी एक लाख रूपैया मुआवजाक तौरपर देत। हम ओकरा नै बचा पेलौं। फूलचन मने-मन सोचैत अछि -आब हम की जबाब देब कक्काकेँ। केना कहब कि ओकर जिअइ कऽ सहारा छिन गेल। केना जिथिन ओ, हे भगवान, एना केना भऽ गेल। पटाक्षेप! अंतिम-दृश्य फूलचन- हेल्लो.. कक्का, तूँ जेना छहक तहिना अखने गाड़ी पकड़ि लए। राम रतन बहुत जोर बीमार छऽ। भिक्खन- बउआ, एक बेर हमरा राम रतन सँ बात करा दए। की भेलैए हमर बाबूकेँ। हम तँ देखनइयो नै छिऐ हिमाचल तँ केना एबऽ। फूलचन- कक्का, हमर छोटका भाइ तोरा लऽ कऽ एतऽ। ओ अखने तोरा घर आबि रहल छऽ, तूँ बस जल्दी आबि जा। भिक्खन- हम अबै छिअ बउआ, तूँ हमरा बउआक ख्याल रखियहक। फूलचन- ठीक छै, आब फोन रखै छिअ। कहैत-कहैत फूलचन कानऽ लगैत अछि दोसर दिन हिमाचल पहुँच कऽ भिक्खन-बउआ........बउआ राम रतन कतऽ छहक? फूलचन- कक्का पहिले अहाँ किछो खा लिअ। राम रतन ठीक यऽ। भिक्खन- पहिले हम अपना बेटाकेँ देखब तब किछो मुँहमे लेब। फूलचन भिक्खनक गला पकड़ि कानऽ लगैए आ सभ किछु बता दइए। भिक्खन- फूलचन, हमरा बेटाक जीवनक सौदा तूँ ८ हजार मे केलहक। तूँ सभ किछु जानै छेलहक, तइयो ओइ मौतक मुँहमे हमरा बेटाकेँ धकेल देलहक। तूँ हमर सभ किछु लऽ लेलहक, हमरा निष्प्राण बना देलहक। हमर बेटाक मौतपर हमरा १ लाखक भीख तोहर कम्पनी देतऽ, उ ओकरे मुँह पर फेक दिहक। हमरा नै चाही कोनो भीख। आइ हमर बेटा मरल, काल्हि ककरो अओरक बेटा मरत। आखिर ई मौतक खेल किए खेलल जाइए? जे दवाइक परीक्षण जानवरक ऊपर करबाक चाही ओकरा भोला-भाला गरीब मनुष्यक ऊपर करैत अछि। कि अकरा रोकै लेल कोनो कानून नै अछि? एक घार रूदनक संगे पटाक्षेप विदेह नूतन अंक भाषापाक रचना-लेखन इंग्लिश-मैथिली-कोष / मैथिली-इंग्लिश-कोष प्रोजेक्टकेँ आगू बढ़ाऊ, अपन सुझाव आ योगदान ई-मेल द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ। Top of Form १.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली आ २.मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम १.नेपाल आ भारतक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली
१.१. नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक उच्चारण आ लेखन शैली (भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन १.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङ, ञ, ण, न एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना- अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।) पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।) खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।) सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।) खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।) उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंक, पंच, खंड, संधि, खंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्ग, चवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंक, चंचल, अंडा, अन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओ लोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि। नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोक बेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोट सन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽ कऽ पवर्ग धरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽ कऽ ज्ञ धरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ। २.ढ आ ढ : ढक उच्चारण “र् ह”जकाँ होइत अछि। अतः जतऽ “र् ह”क उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ लिखल जाए। आन ठाम खाली ढ लिखल जएबाक चाही। जेना- ढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढङ्ग, ढेरी, ढाकनि, ढाठ आदि। ढ = पढ़ाइ, बढब, गढब, मढब, बुढबा, साँढ, गाढ, रीढ, चाँढ, सीढी, पीढी आदि। उपर्युक्त शब्द सभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ अबैत अछि। इएह नियम ड आ डक सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि। ३.व आ ब : मैथिलीमे “व”क उच्चारण ब कएल जाइत अछि, मुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथ, बिद्या, नब, देबता, बिष्णु, बंश, बन्दना आदि। एहि सभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथ, विद्या, नव, देवता, विष्णु, वंश, वन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकील, ओजह आदि। ४.य आ ज : कतहु-कतहु “य”क उच्चारण “ज”जकाँ करैत देखल जाइत अछि, मुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञ, जदि, जमुना, जुग, जाबत, जोगी, जदु, जम आदि कहल जाएबला शब्द सभकेँ क्रमशः यज्ञ, यदि, यमुना, युग, यावत, योगी, यदु, यम लिखबाक चाही। ५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि। प्राचीन वर्तनी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आदि। नवीन वर्तनी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आदि। सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहि, एना, एकर, एहन आदि। एहि शब्द सभक स्थानपर यहि, यना, यकर, यहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारू सहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे “ए”केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि। ए आ “य”क प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैल, हैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो “ए”क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि। ६.हि, हु तथा एकार, ओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हि, हु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहि, अपनहु, ओकरहु, तत्कालहि, चोट्टहि, आनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनके, अपनो, तत्काले, चोट्टे, आनो आदि। ७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खडयन्त्र), षोडशी (खोडशी), षट्कोण (खटकोण), वृषेश (वृखेश), सन्तोष (सन्तोख) आदि। ८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि: (क) क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमे सँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : पढए (पढय) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पडतौक। अपूर्ण रूप : पढ’ गेलाह, क’ लेल, उठ’ पडतौक। पढऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पडतौक। (ख) पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछ, मुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह। अपूर्ण रूप : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह। (ग) स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापद, संज्ञा, ओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि। अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल। (घ) वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : पढैत अछि, बजैत अछि, गबैत अछि। अपूर्ण रूप : पढै अछि, बजै अछि, गबै अछि। (ङ) क्रियापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप: छियौक, छियैक, छहीक, छौक, छैक, अबितैक, होइक। अपूर्ण रूप : छियौ, छियै, छही, छौ, छै, अबितै, होइ। (च) क्रियापदीय प्रत्यय न्ह, हु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : छन्हि, कहलन्हि, कहलहुँ, गेलह, नहि। अपूर्ण रूप : छनि, कहलनि, कहलौँ, गेलऽ, नइ, नञि, नै। ९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटि कऽ दोसर ठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन), पानि (पाइन), दालि ( दाइल), माटि (माइट), काछु (काउछ), मासु (माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्द सभमे ई निअम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि। १०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्द सभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषा सम्बन्धी निअम अनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरण सम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्ष सभकेँ समेटि कऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनीकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽबला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषी पर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पडि रहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषता सभ कुण्ठित नहि होइक, ताहू दिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए। -(भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) १.२. मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली
१. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-
ग्राह्य
एखन ठाम जकर, तकर तनिकर अछि
अग्राह्य अखन, अखनि, एखेन, अखनी ठिमा, ठिना, ठमा जेकर, तेकर तिनकर। (वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य) ऐछ, अहि, ए।
२. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैकल्पिकतया अपनाओल जाय: भऽ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।
३. प्राचीन मैथिलीक ‘न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ‘न’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।
४. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।
५. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत: जैह, सैह, इएह, ओऐह, लैह तथा दैह।
६. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे ‘इ’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।
७. स्वतंत्र ह्रस्व ‘ए’ वा ‘य’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ‘ए’ वा ‘य’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।
८. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ‘य’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढैआ, विआह, वा धीया, अढैया, बियाह।
९. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव ‘ञ’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।
१०. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:- हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। ’मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ‘क’ क वैकल्पिक रूप ‘केर’ राखल जा सकैत अछि।
११. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।
१२. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।
१३. अर्द्ध ‘न’ ओ अर्द्ध ‘म’ क बदला अनुसार नहि लिखल जाय, किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ‘ङ’ , ‘ञ’, तथा ‘ण’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।
१४. हलंत चिह्न निअमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।
१५. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क’ लिखल जाय, हटा क’ नहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।
१६. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रापर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं।
१७. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।
१८. समस्त पद सटा क’ लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोडि क’ , हटा क’ नहि।
१९. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।
२०. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।
२१.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा' ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।
ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा "सुमन" ११/०८/७६
२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम २.१. उच्चारण निर्देश: (बोल्ड कएल रूप ग्राह्य):- दन्त न क उच्चारणमे दाँतमे जीह सटत- जेना बाजू नाम , मुदा ण क उच्चारणमे जीह मूर्धामे सटत (नै सटैए तँ उच्चारण दोष अछि)- जेना बाजू गणेश। तालव्य शमे जीह तालुसँ , षमे मूर्धासँ आ दन्त समे दाँतसँ सटत। निशाँ, सभ आ शोषण बाजि कऽ देखू। मैथिलीमे ष केँ वैदिक संस्कृत जकाँ ख सेहो उच्चरित कएल जाइत अछि, जेना वर्षा, दोष। य अनेको स्थानपर ज जकाँ उच्चरित होइत अछि आ ण ड जकाँ (यथा संयोग आ गणेश संजोग आ गड़ेस उच्चरित होइत अछि)। मैथिलीमे व क उच्चारण ब, श क उच्चारण स आ य क उच्चारण ज सेहो होइत अछि। ओहिना ह्रस्व इ बेशीकाल मैथिलीमे पहिने बाजल जाइत अछि कारण देवनागरीमे आ मिथिलाक्षरमे ह्रस्व इ अक्षरक पहिने लिखलो जाइत आ बाजलो जएबाक चाही। कारण जे हिन्दीमे एकर दोषपूर्ण उच्चारण होइत अछि (लिखल तँ पहिने जाइत अछि मुदा बाजल बादमे जाइत अछि), से शिक्षा पद्धतिक दोषक कारण हम सभ ओकर उच्चारण दोषपूर्ण ढंगसँ कऽ रहल छी। अछि- अ इ छ ऐछ (उच्चारण) छथि- छ इ थ – छैथ (उच्चारण) पहुँचि- प हुँ इ च (उच्चारण) आब अ आ इ ई ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ऐ सभ लेल मात्रा सेहो अछि, मुदा ऐमे ई ऐ ओ औ अं अः ऋ केँ संयुक्ताक्षर रूपमे गलत रूपमे प्रयुक्त आ उच्चरित कएल जाइत अछि। जेना ऋ केँ री रूपमे उच्चरित करब। आ देखियौ- ऐ लेल देखिऔ क प्रयोग अनुचित। मुदा देखिऐ लेल देखियै अनुचित। क् सँ ह् धरि अ सम्मिलित भेलासँ क सँ ह बनैत अछि, मुदा उच्चारण काल हलन्त युक्त शब्दक अन्तक उच्चारणक प्रवृत्ति बढल अछि, मुदा हम जखन मनोजमे ज् अन्तमे बजैत छी, तखनो पुरनका लोककेँ बजैत सुनबन्हि- मनोजऽ, वास्तवमे ओ अ युक्त ज् = ज बजै छथि। फेर ज्ञ अछि ज् आ ञ क संयुक्त मुदा गलत उच्चारण होइत अछि- ग्य। ओहिना क्ष अछि क् आ ष क संयुक्त मुदा उच्चारण होइत अछि छ। फेर श् आ र क संयुक्त अछि श्र ( जेना श्रमिक) आ स् आ र क संयुक्त अछि स्र (जेना मिस्र)। त्र भेल त+र । उच्चारणक ऑडियो फाइल विदेह आर्काइव http://www.videha.co.in/ पर उपलब्ध अछि। फेर केँ / सँ / पर पूर्व अक्षरसँ सटा कऽ लिखू मुदा तँ / कऽ हटा कऽ। ऐमे सँ मे पहिल सटा कऽ लिखू आ बादबला हटा कऽ। अंकक बाद टा लिखू सटा कऽ मुदा अन्य ठाम टा लिखू हटा कऽ– जेना छहटा मुदा सभ टा। फेर ६अ म सातम लिखू- छठम सातम नै। घरबलामे बला मुदा घरवालीमे वाली प्रयुक्त करू। रहए- रहै मुदा सकैए (उच्चारण सकै-ए)। मुदा कखनो काल रहए आ रहै मे अर्थ भिन्नता सेहो, जेना से कम्मो जगहमे पार्किंग करबाक अभ्यास रहै ओकरा। पुछलापर पता लागल जे ढुनढुन नाम्ना ई ड्राइवर कनाट प्लेसक पार्किंगमे काज करैत रहए। छलै, छलए मे सेहो ऐ तरहक भेल। छलए क उच्चारण छल-ए सेहो। संयोगने- (उच्चारण संजोगने) केँ/ कऽ केर- क ( केर क प्रयोग गद्यमे नै करू , पद्यमे कऽ सकै छी। ) क (जेना रामक) –रामक आ संगे (उच्चारण राम के / राम कऽ सेहो) सँ- सऽ (उच्चारण) चन्द्रबिन्दु आ अनुस्वार- अनुस्वारमे कंठ धरिक प्रयोग होइत अछि मुदा चन्द्रबिन्दुमे नै। चन्द्रबिन्दुमे कनेक एकारक सेहो उच्चारण होइत अछि- जेना रामसँ- (उच्चारण राम सऽ) रामकेँ- (उच्चारण राम कऽ/ राम के सेहो)। केँ जेना रामकेँ भेल हिन्दीक को (राम को)- राम को= रामकेँ क जेना रामक भेल हिन्दीक का ( राम का) राम का= रामक कऽ जेना जा कऽ भेल हिन्दीक कर ( जा कर) जा कर= जा कऽ सँ भेल हिन्दीक से (राम से) राम से= रामसँ सऽ , तऽ , त , केर (गद्यमे) एे चारू शब्द सबहक प्रयोग अवांछित। के दोसर अर्थेँ प्रयुक्त भऽ सकैए- जेना, के कहलक? विभक्ति “क”क बदला एकर प्रयोग अवांछित। नञि, नहि, नै, नइ, नँइ, नइँ, नइं ऐ सभक उच्चारण आ लेखन - नै त्त्व क बदलामे त्व जेना महत्वपूर्ण (महत्त्वपूर्ण नै) जतए अर्थ बदलि जाए ओतहि मात्र तीन अक्षरक संयुक्ताक्षरक प्रयोग उचित। सम्पति- उच्चारण स म्प इ त (सम्पत्ति नै- कारण सही उच्चारण आसानीसँ सम्भव नै)। मुदा सर्वोत्तम (सर्वोतम नै)। राष्ट्रिय (राष्ट्रीय नै) सकैए/ सकै (अर्थ परिवर्तन) पोछैले/ पोछै लेल/ पोछए लेल पोछैए/ पोछए/ (अर्थ परिवर्तन) पोछए/ पोछै ओ लोकनि ( हटा कऽ, ओ मे बिकारी नै) ओइ/ ओहि ओहिले/ ओहि लेल/ ओही लऽ जएबेँ/ बैसबेँ पँचभइयाँ देखियौक/ (देखिऔक नै- तहिना अ मे ह्रस्व आ दीर्घक मात्राक प्रयोग अनुचित) जकाँ / जेकाँ तँइ/ तैँ/ होएत / हएत नञि/ नहि/ नँइ/ नइँ/ नै सौँसे/ सौंसे बड / बडी (झोराओल) गाए (गाइ नहि), मुदा गाइक दूध (गाएक दूध नै।) रहलेँ/ पहिरतैँ हमहीं/ अहीं सब - सभ सबहक - सभहक धरि - तक गप- बात बूझब - समझब बुझलौं/ समझलौं/ बुझलहुँ - समझलहुँ हमरा आर - हम सभ आकि- आ कि सकैछ/ करैछ (गद्यमे प्रयोगक आवश्यकता नै) होइन/ होनि जाइन (जानि नै, जेना देल जाइन) मुदा जानि-बूझि (अर्थ परिव्र्तन) पइठ/ जाइठ आउ/ जाउ/ आऊ/ जाऊ मे, केँ, सँ, पर (शब्दसँ सटा कऽ) तँ कऽ धऽ दऽ (शब्दसँ हटा कऽ) मुदा दूटा वा बेसी विभक्ति संग रहलापर पहिल विभक्ति टाकेँ सटाऊ। जेना ऐमे सँ । एकटा , दूटा (मुदा कए टा) बिकारीक प्रयोग शब्दक अन्तमे, बीचमे अनावश्यक रूपेँ नै। आकारान्त आ अन्तमे अ क बाद बिकारीक प्रयोग नै (जेना दिअ , आ/ दिय’ , आ’, आ नै ) अपोस्ट्रोफीक प्रयोग बिकारीक बदलामे करब अनुचित आ मात्र फॉन्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक)- ओना बिकारीक संस्कृत रूप ऽ अवग्रह कहल जाइत अछि आ वर्तनी आ उच्चारण दुनू ठाम एकर लोप रहैत अछि/ रहि सकैत अछि (उच्चारणमे लोप रहिते अछि)। मुदा अपोस्ट्रोफी सेहो अंग्रेजीमे पसेसिव केसमे होइत अछि आ फ्रेंचमे शब्दमे जतए एकर प्रयोग होइत अछि जेना raison d’etre एतए सेहो एकर उच्चारण रैजौन डेटर होइत अछि, माने अपोस्ट्रॉफी अवकाश नै दैत अछि वरन जोडैत अछि, से एकर प्रयोग बिकारीक बदला देनाइ तकनीकी रूपेँ सेहो अनुचित)। अइमे, एहिमे/ ऐमे जइमे, जाहिमे एखन/ अखन/ अइखन केँ (के नहि) मे (अनुस्वार रहित) भऽ मे दऽ तँ (तऽ, त नै) सँ ( सऽ स नै) गाछ तर गाछ लग साँझ खन जो (जो go, करै जो do) तै/तइ जेना- तै दुआरे/ तइमे/ तइले जै/जइ जेना- जै कारण/ जइसँ/ जइले ऐ/अइ जेना- ऐ कारण/ ऐसँ/ अइले/ मुदा एकर एकटा खास प्रयोग- लालति कतेक दिनसँ कहैत रहैत अइ लै/लइ जेना लैसँ/ लइले/ लै दुआरे लहँ/ लौं गेलौं/ लेलौं/ लेलँह/ गेलहुँ/ लेलहुँ/ लेलँ जइ/ जाहि/ जै जहिठाम/ जाहिठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि/ अहि/ अइ (वाक्यक अंतमे ग्राह्य) / ऐ अइछ/ अछि/ ऐछ तइ/ तहि/ तै/ ताहि ओहि/ ओइ सीखि/ सीख जीवि/ जीवी/ जीब भलेहीं/ भलहिं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि/ नै/ नइ गइ/ गै छनि/ छन्हि ... समए शब्दक संग जखन कोनो विभक्ति जुटै छै तखन समै जना समैपर इत्यादि। असगरमे हृदए आ विभक्ति जुटने हृदे जना हृदेसँ, हृदेमे इत्यादि। जइ/ जाहि/ जै जहिठाम/ जाहिठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि/ अहि/ अइ/ ऐ अइछ/ अछि/ ऐछ तइ/ तहि/ तै/ ताहि ओहि/ ओइ सीखि/ सीख जीवि/ जीवी/ जीब भले/ भलेहीं/ भलहिं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि/ नै/ नइ गइ/ गै छनि/ छन्हि चुकल अछि/ गेल गछि २.२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम नीचाँक सूचीमे देल विकल्पमेसँ लैंगुएज एडीटर द्वारा कोन रूप चुनल जेबाक चाही: बोल्ड कएल रूप ग्राह्य: १.होयबला/ होबयबला/ होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला/ होयबाक/होबएबला /होएबाक २. आ’/आऽ आ ३. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ल’/लऽ/लय/लए ४. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए गेल ५. कर’ गेलाह/करऽ गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह ६. लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’/ ७. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करैबला/क’र’ बला / करैवाली ८. बला वला (पुरूष), वाली (स्त्री) ९ . आङ्ल आंग्ल १०. प्रायः प्रायह ११. दुःख दुख १ २. चलि गेल चल गेल/चैल गेल १३. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन १४. देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह १५. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि १६. चलैत/दैत चलति/दैति १७. एखनो अखनो १८. बढ़नि बढइन बढन्हि १९. ओ’/ओऽ(सर्वनाम) ओ २० . ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ २१. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ २२. जे जे’/जेऽ २३. ना-नुकुर ना-नुकर २४. केलन्हि/केलनि/कयलन्हि २५. तखनतँ/ तखन तँ २६. जा रहल/जाय रहल/जाए रहल २७. निकलय/निकलए लागल/ लगल बहराय/ बहराए लागल/ लगल निकल’/बहरै लागल २८. ओतय/ जतय जत’/ ओत’/ जतए/ ओतए २९. की फूरल जे कि फूरल जे ३०. जे जे’/जेऽ ३१. कूदि / यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद/ यादि (मोन) ३२. इहो/ ओहो ३३. हँसए/ हँसय हँसऽ ३४. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/ नौ वा दस ३५. सासु-ससुर सास-ससुर ३६. छह/ सात छ/छः/सात ३७. की की’/ कीऽ (दीर्घीकारान्तमे ऽ वर्जित) ३८. जबाब जवाब ३९. करएताह/ करेताह करयताह ४०. दलान दिशि दलान दिश/दलान दिस ४१ . गेलाह गएलाह/गयलाह ४२. किछु आर/ किछु और/ किछ आर ४३. जाइ छल/ जाइत छल जाति छल/जैत छल ४४. पहुँचि/ भेट जाइत छल/ भेट जाइ छलए पहुँच/ भेटि जाइत छल ४५. जबान (युवा)/ जवान(फौजी) ४६. लय/ लए क’/ कऽ/ लए कए / लऽ कऽ/ लऽ कए ४७. ल’/लऽ कय/ कए ४८. एखन / एखने / अखन / अखने ४९. अहींकेँ अहीँकेँ ५०. गहींर गहीँर ५१. धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए ५२. जेकाँ जेँकाँ/ जकाँ ५३. तहिना तेहिना ५४. एकर अकर ५५. बहिनउ बहनोइ ५६. बहिन बहिनि ५७. बहिन-बहिनोइ बहिन-बहनउ ५८. नहि/ नै ५९. करबा / करबाय/ करबाए ६०. तँ/ त ऽ तय/तए ६१. भैयारी मे छोट-भाए/भै/, जेठ-भाय/भाइ, ६२. गिनतीमे दू भाइ/भाए/भाँइ ६३. ई पोथी दू भाइक/ भाँइ/ भाए/ लेल। यावत जावत ६४. माय मै / माए मुदा माइक ममता ६५. देन्हि/ दइन दनि/ दएन्हि/ दयन्हि दन्हि/ दैन्हि ६६. द’/ दऽ/ दए ६७. ओ (संयोजक) ओऽ (सर्वनाम) ६८. तका कए तकाय तकाए ६९. पैरे (on foot) पएरे कएक/ कैक ७०. ताहुमे/ ताहूमे ७१. पुत्रीक ७२. बजा कय/ कए / कऽ ७३. बननाय/बननाइ ७४. कोला ७५. दिनुका दिनका ७६. ततहिसँ ७७. गरबओलन्हि/ गरबौलनि/ गरबेलन्हि/ गरबेलनि ७८. बालु बालू ७९. चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध) ८०. जे जे’ ८१ . से/ के से’/के’ ८२. एखुनका अखनुका ८३. भुमिहार भूमिहार ८४. सुग्गर / सुगरक/ सूगर ८५. झठहाक झटहाक ८६. छूबि ८७. करइयो/ओ करैयो ने देलक /करियौ-करइयौ ८८. पुबारि पुबाइ ८९. झगड़ा-झाँटी झगड़ा-झाँटि ९०. पएरे-पएरे पैरे-पैरे ९१. खेलएबाक ९२. खेलेबाक ९३. लगा ९४. होए- हो – होअए ९५. बुझल बूझल ९६. बूझल (संबोधन अर्थमे) ९७. यैह यएह / इएह/ सैह/ सएह ९८. तातिल ९९. अयनाय- अयनाइ/ अएनाइ/ एनाइ १००. निन्न- निन्द १०१. बिनु बिन १०२. जाए जाइ १०३. जाइ (in different sense)-last word of sentence १०४. छत पर आबि जाइ १०५. ने १०६. खेलाए (play) –खेलाइ १०७. शिकाइत- शिकायत १०८. ढप- ढ़प १०९ . पढ़- पढ ११०. कनिए/ कनिये कनिञे १११. राकस- राकश ११२. होए/ होय होइ ११३. अउरदा- औरदा ११४. बुझेलन्हि (different meaning- got understand) ११५. बुझएलन्हि/बुझेलनि/ बुझयलन्हि (understood himself) ११६. चलि- चल/ चलि गेल ११७. खधाइ- खधाय ११८. मोन पाड़लखिन्ह/ मोन पाड़लखिन/ मोन पारलखिन्ह ११९. कैक- कएक- कइएक १२०. लग ल’ग १२१. जरेनाइ १२२. जरौनाइ जरओनाइ- जरएनाइ/ जरेनाइ १२३. होइत १२४. गरबेलन्हि/ गरबेलनि गरबौलन्हि/ गरबौलनि १२५. चिखैत- (to test)चिखइत १२६. करइयो (willing to do) करैयो १२७. जेकरा- जकरा १२८. तकरा- तेकरा १२९. बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे १३०. करबयलहुँ/ करबएलहुँ/ करबेलहुँ करबेलौं १३१. हारिक (उच्चारण हाइरक) १३२. ओजन वजन आफसोच/ अफसोस कागत/ कागच/ कागज १३३. आधे भाग/ आध-भागे १३४. पिचा / पिचाय/पिचाए १३५. नञ/ ने १३६. बच्चा नञ (ने) पिचा जाय १३७. तखन ने (नञ) कहैत अछि। कहै/ सुनै/ देखै छल मुदा कहैत-कहैत/ सुनैत-सुनैत/ देखैत-देखैत १३८. कतेक गोटे/ कताक गोटे १३९. कमाइ-धमाइ/ कमाई- धमाई १४० . लग ल’ग १४१. खेलाइ (for playing) १४२. छथिन्ह/ छथिन १४३. होइत होइ १४४. क्यो कियो / केओ १४५. केश (hair) १४६. केस (court-case) १४७ . बननाइ/ बननाय/ बननाए १४८. जरेनाइ १४९. कुरसी कुर्सी १५०. चरचा चर्चा १५१. कर्म करम १५२. डुबाबए/ डुबाबै/ डुमाबै डुमाबय/ डुमाबए १५३. एखुनका/ अखुनका १५४. लए/ लिअए (वाक्यक अंतिम शब्द)- लऽ १५५. कएलक/ केलक १५६. गरमी गर्मी १५७ . वरदी वर्दी १५८. सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ १५९. एनाइ-गेनाइ १६०. तेना ने घेरलन्हि/ तेना ने घेरलनि १६१. नञि / नै १६२. डरो ड’रो १६३. कतहु/ कतौ कहीं १६४. उमरिगर-उमेरगर उमरगर १६५. भरिगर १६६. धोल/धोअल धोएल १६७. गप/गप्प १६८. के के’ १६९. दरबज्जा/ दरबजा १७०. ठाम १७१. धरि तक १७२. घूरि लौटि १७३. थोरबेक १७४. बड्ड १७५. तोँ/ तूँ १७६. तोँहि( पद्यमे ग्राह्य) १७७. तोँही / तोँहि १७८. करबाइए करबाइये १७९. एकेटा १८०. करितथि /करतथि १८१. पहुँचि/ पहुँच १८२. राखलन्हि रखलन्हि/ रखलनि १८३. लगलन्हि/ लगलनि लागलन्हि १८४. सुनि (उच्चारण सुइन) १८५. अछि (उच्चारण अइछ) १८६. एलथि गेलथि १८७. बितओने/ बितौने/ बितेने १८८. करबओलन्हि/ करबौलनि/ करेलखिन्ह/ करेलखिन १८९. करएलन्हि/ करेलनि १९०. आकि/ कि १९१. पहुँचि/ पहुँच १९२. बत्ती जराय/ जराए जरा (आगि लगा) १९३. से से’ १९४. हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए) १९५. फेल फैल १९६. फइल(spacious) फैल १९७. होयतन्हि/ होएतन्हि/ होएतनि/हेतनि/ हेतन्हि १९८. हाथ मटिआएब/ हाथ मटियाबय/हाथ मटियाएब १९९. फेका फेंका २००. देखाए देखा २०१. देखाबए २०२. सत्तरि सत्तर २०३. साहेब साहब २०४.गेलैन्ह/ गेलन्हि/ गेलनि २०५. हेबाक/ होएबाक २०६.केलो/ कएलहुँ/केलौं/ केलुँ २०७. किछु न किछु/ किछु ने किछु २०८.घुमेलहुँ/ घुमओलहुँ/ घुमेलौं २०९. एलाक/ अएलाक २१०. अः/ अह २११.लय/ लए (अर्थ-परिवर्त्तन) २१२.कनीक/ कनेक २१३.सबहक/ सभक २१४.मिलाऽ/ मिला २१५.कऽ/ क २१६.जाऽ/ जा २१७.आऽ/ आ २१८.भऽ /भ’ (’ फॉन्टक कमीक द्योतक) २१९.निअम/ नियम २२० .हेक्टेअर/ हेक्टेयर २२१.पहिल अक्षर ढ/ बादक/ बीचक ढ़ २२२.तहिं/तहिँ/ तञि/ तैं २२३.कहिं/ कहीं २२४.तँइ/ तैं / तइँ २२५.नँइ/ नइँ/ नञि/ नहि/नै २२६.है/ हए / एलीहेँ/ २२७.छञि/ छै/ छैक /छइ २२८.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २२९.आ (come)/ आऽ(conjunction) २३०. आ (conjunction)/ आऽ(come) २३१.कुनो/ कोनो, कोना/केना २३२.गेलैन्ह-गेलन्हि-गेलनि २३३.हेबाक- होएबाक २३४.केलौँ- कएलौँ-कएलहुँ/केलौं २३५.किछु न किछ- किछु ने किछु २३६.केहेन- केहन २३७.आऽ (come)-आ (conjunction-and)/आ। आब'-आब' /आबह-आबह २३८. हएत-हैत २३९.घुमेलहुँ-घुमएलहुँ- घुमेलाें २४०.एलाक- अएलाक २४१.होनि- होइन/ होन्हि/ २४२.ओ-राम ओ श्यामक बीच(conjunction), ओऽ कहलक (he said)/ओ २४३.की हए/ कोसी अएली हए/ की है। की हइ २४४.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २४५ .शामिल/ सामेल २४६.तैँ / तँए/ तञि/ तहिं २४७.जौं / ज्योँ/ जँ/ २४८.सभ/ सब २४९.सभक/ सबहक २५०.कहिं/ कहीं २५१.कुनो/ कोनो/ कोनहुँ/ २५२.फारकती भऽ गेल/ भए गेल/ भय गेल २५३.कोना/ केना/ कन्ना/कना २५४.अः/ अह २५५.जनै/ जनञ २५६.गेलनि/ गेलाह (अर्थ परिवर्तन) २५७.केलन्हि/ कएलन्हि/ केलनि/ २५८.लय/ लए/ लएह (अर्थ परिवर्तन) २५९.कनीक/ कनेक/कनी-मनी २६०.पठेलन्हि पठेलनि/ पठेलइन/ पपठओलन्हि/ पठबौलनि/ २६१.निअम/ नियम २६२.हेक्टेअर/ हेक्टेयर २६३.पहिल अक्षर रहने ढ/ बीचमे रहने ढ २६४.आकारान्तमे बिकारीक प्रयोग उचित नै/ अपोस्ट्रोफीक प्रयोग फान्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक ओकर बदला अवग्रह (बिकारी) क प्रयोग उचित २६५.केर (पद्यमे ग्राह्य) / -क/ कऽ/ के २६६.छैन्हि- छन्हि २६७.लगैए/ लगैये २६८.होएत/ हएत २६९.जाएत/ जएत/ २७०.आएत/ अएत/ आओत २७१ .खाएत/ खएत/ खैत २७२.पिअएबाक/ पिएबाक/पियेबाक २७३.शुरु/ शुरुह २७४.शुरुहे/ शुरुए २७५.अएताह/अओताह/ एताह/ औताह २७६.जाहि/ जाइ/ जइ/ जै/ २७७.जाइत/ जैतए/ जइतए २७८.आएल/ अएल २७९.कैक/ कएक २८०.आयल/ अएल/ आएल २८१. जाए/ जअए/ जए (लालति जाए लगलीह।) २८२. नुकएल/ नुकाएल २८३. कठुआएल/ कठुअएल २८४. ताहि/ तै/ तइ २८५. गायब/ गाएब/ गएब २८६. सकै/ सकए/ सकय २८७.सेरा/सरा/ सराए (भात सरा गेल) २८८.कहैत रही/देखैत रही/ कहैत छलौं/ कहै छलौं- अहिना चलैत/ पढैत (पढै-पढैत अर्थ कखनो काल परिवर्तित) - आर बुझै/ बुझैत (बुझै/ बुझै छी, मुदा बुझैत-बुझैत)/ सकैत/ सकै। करैत/ करै। दै/ दैत। छैक/ छै। बचलै/ बचलैक। रखबा/ रखबाक । बिनु/ बिन। रातिक/ रातुक बुझै आ बुझैत केर अपन-अपन जगहपर प्रयोग समीचीन अछि। बुझैत-बुझैत आब बुझलिऐ। हमहूँ बुझै छी। २८९. दुआरे/ द्वारे २९०.भेटि/ भेट/ भेँट २९१. खन/ खीन/ खुना (भोर खन/ भोर खीन) २९२.तक/ धरि २९३.गऽ/ गै (meaning different-जनबै गऽ) २९४.सऽ/ सँ (मुदा दऽ, लऽ) २९५.त्त्व,(तीन अक्षरक मेल बदला पुनरुक्तिक एक आ एकटा दोसरक उपयोग) आदिक बदला त्व आदि। महत्त्व/ महत्व/ कर्ता/ कर्त्ता आदिमे त्त संयुक्तक कोनो आवश्यकता मैथिलीमे नै अछि। वक्तव्य २९६.बेसी/ बेशी २९७.बाला/वाला बला/ वला (रहैबला) २९८ .वाली/ (बदलैवाली) २९९.वार्त्ता/ वार्ता ३००. अन्तर्राष्ट्रिय/ अन्तर्राष्ट्रीय ३०१. लेमए/ लेबए ३०२.लमछुरका, नमछुरका ३०२.लागै/ लगै ( भेटैत/ भेटै) ३०३.लागल/ लगल ३०४.हबा/ हवा ३०५.राखलक/ रखलक ३०६.आ (come)/ आ (and) ३०७. पश्चाताप/ पश्चात्ताप ३०८. ऽ केर व्यवहार शब्दक अन्तमे मात्र, यथासंभव बीचमे नै। ३०९.कहैत/ कहै ३१०. रहए (छल)/ रहै (छलै) (meaning different) ३११.तागति/ ताकति ३१२.खराप/ खराब ३१३.बोइन/ बोनि/ बोइनि ३१४.जाठि/ जाइठ ३१५.कागज/ कागच/ कागत ३१६.गिरै (meaning different- swallow)/ गिरए (खसए) ३१७.राष्ट्रिय/ राष्ट्रीय DATE-LIST (year- 2013-14) (१४२१ फसली साल) Marriage Days: Nov.2013- 18, 20, 24, 25, 28, 29 Dec.2013- 1, 4, 6, 8, 12, 13 January 2014- 19, 20, 22, 23, 24, 26, 31. Feb.2014- 3, 5, 6, 9, 10, 17, 19, 24, 26, 27. March 2014- 2, 3, 5, 7, 9. April 2014- 16, 17, 18, 20, 21, 23, 24. May 2014- 1, 2, 8, 9, 11, 12, 18, 19, 21, 25, 26, 28, 29, 30. June 2014- 4, 5, 8, 9, 13, 18, 22, 25. July 2014- 2, 3, 4, 6, 7. Upanayana Days: February 2014- 2, 4, 9, 10. March 2014- 3, 5, 11, 12. April 2014- 4, 9, 10. June 2014- 2, 8, 9. Dviragaman Din: November 2013- 18, 21, 22. December 2013- 4, 6, 8, 9, 12, 13. February 2014- 16, 17, 19, 20. March 2014- 2, 3, 5, 9, 10, 12. April 2014- 16, 17, 18, 20. May 2014- 1, 2, 9, 11, 12. Mundan Din: November 2013- 20, 22. December 2013- 9, 12, 13. January 2014- 16, 17. February 2014- 6, 10, 19, 20. March 2014- 5, 12. April 2014- 16. May 2014- 12, 30. June 2014- 2, 9, 30. FESTIVALS OF MITHILA (2013-14) Mauna Panchami-27 July Madhushravani- 9 August Nag Panchami- 11 August Raksha Bandhan- 21 Aug Krishnastami- 28 August Kushi Amavasya / Somvari Vrat- 5 September Hartalika Teej- 8 September ChauthChandra-8 September Vishwakarma Pooja- 17 September Anant Caturdashi- 18 Sep Pitri Paksha begins- 20 Sep Jimootavahan Vrata/ Jitia-27 Sep Matri Navami-28 Sep Kalashsthapan- 5 October Belnauti- 10 October Patrika Pravesh- 11 October Mahastami- 12 October Maha Navami - 13 October Vijaya Dashami- 14 October Kojagara- 18 Oct Dhanteras- 1 November Diyabati, shyama pooja-3 November Annakoota/ Govardhana Pooja-4 November Bhratridwitiya/ Chitragupta Pooja- 5 November Chhathi -8 November Sama Poojaarambh- 9 November Devotthan Ekadashi- 13 November ravivratarambh- 17 November Navanna parvan- 20 November KartikPoornima- Sama Visarjan- 2 December Vivaha Panchmi- 7 December Makara/ Teela Sankranti-14 Jan Naraknivaran chaturdashi- 29 January Basant Panchami/ Saraswati Pooja- 4 February Achla Saptmi- 6 February Mahashivaratri-27 February Holikadahan-Fagua-16 March Holi- 17 March Saptadora- 17 March Varuni Trayodashi-28 March Jurishital-15 April Ram Navami- 8 April Akshaya Tritiya-2 May Janaki Navami- 8 May Ravi Brat Ant- 11 May Vat Savitri-barasait- 28 May Ganga Dashhara-8 June Harivasar Vrata- 9 July Shree Guru Poornima-12 Jul VIDEHA ARCHIVE १.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक
विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक http://sites.google.com/a/videha.com/videha/ https://sites.google.com/a/videha.com/videha-archive-part-i/ https://sites.google.com/a/videha.com/videha-archive-part-ii/ २.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download http://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi ३.मैथिली ऑडियो संकलन Maithili Audio Downloads http://sites.google.com/a/videha.com/videha-audio ४.मैथिली वीडियोक संकलन Maithili Videos http://sites.google.com/a/videha.com/videha-video ५.मिथिला चित्रकला/ आधुनिक चित्रकला आ चित्र Mithila Painting/ Modern Art and Photos http://sites.google.com/a/videha.com/videha-paintings-photos/ "विदेह"क एहि सभ सहयोगी लिंकपर सेहो एक बेर जाउ। ६.विदेह मैथिली क्विज : http://videhaquiz.blogspot.com/ ७.विदेह मैथिली जालवृत्त एग्रीगेटर : http://videha-aggregator.blogspot.com/ ८.विदेह मैथिली साहित्य अंग्रेजीमे अनूदित http://madhubani-art.blogspot.com/ ९.विदेहक पूर्व-रूप "भालसरिक गाछ" : http://gajendrathakur.blogspot.com/ १०.विदेह इंडेक्स : http://videha123.blogspot.com/ ११.विदेह फाइल : http://videha123.wordpress.com/ १२. विदेह: सदेह : पहिल तिरहुता (मिथिला़क्षर) जालवृत्त (ब्लॉग) http://videha-sadeha.blogspot.com/ १३. विदेह:ब्रेल: मैथिली ब्रेलमे: पहिल बेर विदेह द्वारा http://videha-braille.blogspot.com/ १४.VIDEHA IST MAITHILI FORTNIGHTLY EJOURNAL ARCHIVE http://videha-archive.blogspot.com/ १५. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मैथिली पोथीक आर्काइव http://videha-pothi.blogspot.com/ १६. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ऑडियो आर्काइव http://videha-audio.blogspot.com/ १७. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका वीडियो आर्काइव http://videha-video.blogspot.com/ १८. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मिथिला चित्रकला, आधुनिक कला आ चित्रकला http://videha-paintings-photos.blogspot.com/ १९. मैथिल आर मिथिला (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त) http://maithilaurmithila.blogspot.com/ २०.श्रुति प्रकाशन http://www.shruti-publication.com/ २१.http://groups.google.com/group/videha २२.http://groups.yahoo.com/group/VIDEHA/ २३.गजेन्द्र ठाकुर इडेक्स http://gajendrathakur123.blogspot.com २४. नेना भुटका http://mangan-khabas.blogspot.com/ २५.विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट http://videha123radio.wordpress.com/ २६.Videha Radio २७. Join official Videha facebook group. २८. विदेह मैथिली नाट्य उत्सव http://maithili-drama.blogspot.com/ २९.समदिया http://esamaad.blogspot.com/ ३०. मैथिली फिल्म्स http://maithilifilms.blogspot.com/ ३१.अनचिन्हार आखर http://anchinharakharkolkata.blogspot.com/ ३२. मैथिली हाइकू http://maithili-haiku.blogspot.com/ ३३. मानक मैथिली http://manak-maithili.blogspot.com/ ३४. विहनि कथा http://vihanikatha.blogspot.in/ ३५. मैथिली कविता http://maithili-kavita.blogspot.in/ ३६. मैथिली कथा http://maithili-katha.blogspot.in/ ३७.मैथिली समालोचना http://maithili-samalochna.blogspot.in/ महत्त्वपूर्ण सूचना: The Maithili pdf books are AVAILABLE FOR free PDF DOWNLOAD AT
https://sites.google.com/a/videha.com/videha/ http://videha123.wordpress.com/ http://videha123.wordpress.com/about/ विदेह:सदेह:१: २: ३: ४:५:६:७:८:९:१० "विदेह"क प्रिंट संस्करण: विदेह-ई-पत्रिका (http://www.videha.co.in/) क चुनल रचना सम्मिलित। सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Details for purchase available at publishers's (print-version) site http://www.shruti-publication.com or you may write to shruti.publication@shruti-publication.com विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)२००४-१३. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतए लेखकक नाम नहि अछि ततए संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: शिव कुमार झा, राम विलास साहु आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। भाषा-सम्पादन: नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी आ रश्मि रेखा सिन्हा। सम्पादक-शोध-अन्वेषण: डा. जया वर्मा आ डा. राजीव कुमार वर्मा। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल आ प्रियंका झा। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। ’विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका अछि आ ऐमे मैथिली, संस्कृत आ अंग्रेजीमे मिथिला आ मैथिलीसँ संबंधित रचना प्रकाशित कएल जाइत अछि। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-13 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.com पर संपर्क करू। एहि साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल।५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सिद्धिरस्तु 51 वि दे ह विदेह Videha বিদেহ www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १५६म अंक १५ जून २०१४ (वर्ष ७ मास ७८ अंक १५६) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA