VIDEHA — Issue 162 / अंक १६२

Publication: VIDEHA · Issue: 162
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ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' १६२ म अंक १५ सितम्बर २०१४ (वर्ष ७ मास ८१ अंक १६२) भोँट-नाटक- बेचन ठाकुर पल्लवी मण्डल- नदीक धारा सन भोँट नाटक बेचन ठाकुर अक्षर संयोजन- अखि‍लेश मण्‍डल सामाजिक आ राजनैतिक मैथिली नाटक “भोंट” केर पात्र-परिचए 1. गोबर्धनलाल - एकटा एम. पी. प्रत्याषी 2. रामेष्वर - गोबर्धनलालक सहयोगी 3. जीतेन्द्र - गोबर्धनलालक सहयोगी 4. श्रीलाल - गोबर्धनलालक सहयोगी 5. फीरन - दोसर एम. पी. प्रत्याषी 6. कृष्णानंद - फीरनक सहयोगी 7. कन्हैया - फीरनक सहयोगी 8. राकेश - फीरनक सहयोगी 9. ब्रजेश - तेसर एम. पी. प्रत्याषी आ वर्तमान एम. पी. 10. सुरेश - ब्रजेशक पी. ए. 11. भोलू - ब्रजेशक अंगरक्षक 12. शोभू - ब्रजेशक अंगरक्षक 13. सुभद्रा - चारिम एम. पी. प्रत्याषी 14. चन्द्रमोहन - सुभद्राक सहयोगी 15. माला - सुभद्राक सहयोगी 16. उमाकांत - सुभद्राक सहयोगी 17. विवेक - पाँचिम एम. पी. प्रत्याषी 18. सूरज - विवेेकक सहयोगी 19. पंकज - विवेेकक सहयोगी 20. मोहन - विवेेकक सहयोगी 21. पप्पू - विवेेकक सहयोगी 22. राम प्रताप - चुनाव आयुक्त 23. गिरिराज -चुनाव उपायुक्त 24. मानसिंह - सुरक्षा बल 25. चानसिंह - सुरक्षा बल 26. राघव - चुुनाव कार्यालयक चपरासी 27. बैजू - चुुनाव कार्यालयक किरानी 28. आनन्द - चुुनाव कार्यालयक बड़ा बाबू 29. हरिदेव - नोमिनेशन पदाधिकारी 30. राम - गोबर्धनलालक समर्थक 31. श्याम - गोबर्धनलालक समर्थक 32. महेश - गोबर्धनलालक समर्थक 33. गोपाल - गोबर्धनलालक समर्थक 34. सोहन - गोबर्धनलालक समर्थक 35. गोलू - फीरनक समर्थक 36. जीबछ - फीरनक समर्थक 37. राजा - फीरनक समर्थक 38. पलट - फीरनक समर्थक 39. पंडित - फीरनक समर्थक 40. नवीन - ब्रजेशक समर्थक 41. प्रवीण - ब्रजेशक समर्थक 42. सुमन - ब्रजेशक समर्थक 43. संजीव - ब्रजेशक समर्थक 44. राहुल - ब्रजेशक समर्थक 45. लालू - सुभद्राक समर्थक 46. कालू - सुभद्राक समर्थक 47. रहीम - सुभद्राक समर्थक 48. करीम - सुभद्राक समर्थक 49. बदलू - सुभद्राक समर्थक 50. बालचन - विवेकक समर्थक 51. लालचन - विवेकक समर्थक 52. नन्दन - विवेकक समर्थक 53. कुन्दन - विवेकक समर्थक 54. चन्दन - विवेकक समर्थक 55. भीखन - ढोलहो देनिहार 56. बच्चा बाबू - गामक प्रतिष्ठित बेक्ती 57. उतीम - बच्चा बाबूक गौआँ 58. बेचू - बच्चा बाबूक गौआँ 59. किशुन - बच्चा बाबूक गौआँ 60. भगत - बच्चा बाबूक गौआँ 61. घुटर - बच्चा बाबूक गौआँ 62. मुटर - बच्चा बाबूक गौआँ 63. ननकू - बच्चा बाबूक गौआँ 64. सुलेमान - बच्चा बाबूक गौआँ 65. सलीम - बच्चा बाबूक गौआँ 66. सलाउद्दीन - बच्चा बाबूक गौआँ 67. जीबू - बच्चा बाबूक गौआँ 68. मरर - बच्चा बाबूक गौआँ 69. पंचू - बच्चा बाबूक गौआँ 70. वनझरु - बच्चा बाबूक गौआँ 71. सुजीत - थानाक बड़ा बाबू 72. रंजीत - थानाक छोटा बाबू 73. बुधन - थानाक हवलदार 74. सुभाष - चौकीदार 75. प्रेम प्रकाश - पीठासीन पदाधिकारी 76. महेन्द्र - सी. आर. पी. एफ. 77. रवीन्द्र - सी. आर. पी. एफ. 78. सुरेन्द्र - सी. आर. पी. एफ. 79. सौरभ - चुनाव प्रतिनिधि 80. गणपति - डी. एस. पी. 81. पवन - सी. आर. पी. एफ. 82. रमन - सी. आर. पी. एफ. 83. राणा - ब्रजेशक गुंडा 84. तस्लीम - ब्रजेशक गुंडा 85. मोस्लीम - ब्रजेशक गुंडा 86. ब्रह्मानंद - ब्रजेशक गुंडा 87. नाजनी - मतदाता 88. हीना - मतदाता 89. लरुबती - मतदाता 90. आनन्दी - मतदाता 91. बबाजी - चाह दोकानदार 92. देवनाथ - भगवती मंदिरक पूजारी 93. प्रदीप - ब्रजेशक गुण्डाक सरदार 94. उमेश - प्रदीप गैंगक गुण्डा 95. रमेश - प्रदीप गैंगक गुण्डा 96. गणेश - प्रदीप गैंगक गुण्डा 97. महेश - प्रदीप गैंगक गुण्डा 98. कुलदीप - कलक्टर 99. इन्द्रदेव - कलक्टरक चपरासी 100.प्रेमकांत - गिनती पदाधिकारी 101.शुभकांत - गिनती पदाधिकारी पहिल अंक- पहिल दृश्य- (स्थान- गोबर्धनलालक अवास। गोबर्धनलाल पुरान बी.ए. पास एकटा साधारण नेता छथि। दलानपर उ अपन तीनटा अपेक्षित रामेश्वर, जीतेन्द्र, आ श्रीलालक संग बैस भोँटक सम्‍बन्‍धमे कुरसीपर बैस गप-सप्‍प करै छथि।) रामेश्वर- गोबर्धन भाय, पहिने अहाँ मिठाइ खियाउ। तखनि खुश-खबरी सुनाएब। गोबर्धन- पहिने सुनाउ तखनि खियाएब। रामेश्वर- नै पहिने खियाउ तखनि सुनाएब। गोबर्धन- नै भाय, अहाँ पहिने कहू तखनि निश्चित खियाएब। रामेश्वर- नै भाय, पहिने अहाँ खियाउ, तखनि एक-दू-तीन कहै छी पक्का खुशखबरी सुनाएब। जीतेन्द्र- रामेश्वर भाय, चढ़ू समधी तँ, चढ़ू समधी। गाड़ी छूटि गेल तँ, कटहर लिअ समधी। एते कियो बात फेक्कबलि करए। अहाँ अपन खुश-खबरी सुना दियनु। हुनका मन हेतनि तँ मिठाइ खिएता आ नै तँ कोनो बात नै। अइले समए कि‍ए बेरबाद करै छी? श्रीलाल- रामेश्वर भाय, अहाँ कि‍ए ऐ फुसियाही गपकेँ ओत्ते गंभीर कऽ देलिऐ? संगी-साथीमे ओहिना बात कटोबलि होइत रहै छै। कहै छै, जहाँ चार यार मिले, वहाँ रात कट जाइ। गोबर्धन- सभ कियो शान्‍त रहू। कटौज बन्न करै जाइ जाउ। रामेश्वर भायक विचार छन्‍हि‍ जे पहिने मिठाइ खाएब तखनि खुश-खबरी सुनाएब। तँ हिनके विचार सही। रामेश्वर भाय हइए पाइ लिअ आ अपनेसँ मन पसीन मिठाइ नेने आउ। (गोबर्धन रामेश्वरकेँ एगो नमरी जेबीसँ निकालि कऽ देलनि आ रामेश्वर मिठाइ लेल बहरेला।) जीतेन्द्र- गोबर्धन भाय, रामेश्वर भायक खुशखबरी हमरा किछु अनुमानमे आबि रहल अछि। श्रीलाल- भायकेँ कहि ने दियनु। पछाति रामेश्वरकेँ बुड़बक बनबै जाएब। जीतेन्द्र- अनुमान तँ अनुमाने होइ छै। शत-प्रतिशत साँच नहियोँ भऽ सकैए। गोबर्धन- अहाँ कहियौ ने। की हेतै, फुसि हेतै तँ हेतै। जीतेन्द्र- हमरा लगैए, उ भोँटक सम्‍बन्‍धमे किछु कहत। अप्रैल-मईमे लोकसभा चुनाव होइबला छै। (रसगुल्ला लऽ कऽ रामेश्वरक प्रवेश।) रामेश्वर- गोवर्धन भाय, हइए लिअ। अपनेसँ बाँटू। गोवर्धन- अपनेसँ अहीं बाँटू। कियो तँ अपने हिस्सा खाएत ने? आकि‍ अहाँ पेटू छी? रामेश्वर- पेटू तँ नै छी। मुदा सर्वसोंख अबस्‍स छी। गोवर्धन- तँ की हेतै? सर्वसोख छी तँ रस सभटा सोंखि लेब आ रसगुल्ला हमरा लोकनिकेँ दऽ देब। रामेश्वर- अहींक विचार रहतै भाय। रस चुसि कऽ रसगुल्ला बाँटि देब। मुदा एगो गपक डर भऽ रहलए जे रस चुसैतकाल रसगुल्लो नै घोंटा जाए। जीतेन्द्र- रामेश्वर भाय, पहिने सबहक हिस्सा बाँटि दियौ। तखनि अपन हिस्सा चुसैमे आकि‍ घोंटैमे जे मन हएत से करब। रामेश्वर- (मुँह चटपटबैत) ठीके कहै छी भाय। पहिने बाँटऽ दिअ। (रामेश्वर सभकेँ रसगुल्ला बाँटि रहल छथि। सभ कियो रसगुल्ला खेलथि आ हाथ-मुँह धोइ फेर गप-सप्‍प शुरू केलथि।) गोवर्धन- आब कहू, की खुशखबरी छल? रामेश्वर- अप्रैल-मईमे लोकसभा चुनाव होइबला छै। ओइमे अहाँकेँ ठाढ़ करैक चर्चा सगरो छै। अहाँकेँ ठाढ़ भेनाइ अछि। गोवर्धन- जीतेन्द्र भाय, अहाँक अनुमान साँच निकलि गेल। लगैए अहाँक भवि‍सवाणी साँच भऽ सकैए। अही गपपर अहाँ बताउ जे जदी हम ऐबेर ठाढ़ हएब तँ जीतब की नै? जीतेन्द्र- भवि‍सवाणी तँ ज्योतिष सभ करै छथिन, सिद्ध बाबा सभ करै छथिन। हम एकटा साधारण लोक छी। तैयो किछु कहि दइ छी, अहाँ जीत जाएब। निर्विरोध जीतब आकि‍ एकलाख भोँटसँ जीतब आकि‍ एक भोँटसँ जीतब, ई नै कहि सकै छी। गोवर्धन- भाय, अहाँ केना बुझै छिऐ जे हम जीत जाएब? जीतेन्द्र- हम बुझै नै छिऐ, अनुमान करै छिऐ। हमरा नजरिमे अपनेटा समाजकेँ नै कतेको समाजकेँ अहाँसँ उपकार भेल छै। अहाँमे कोनो तरहक दाग नै छै। अहाँमे धैर्य आ लगन अछि। समाजक सेवाक भावना अहाँकेँ नस-नसमे समाएल अछि जे प्राय: लोक सभ जानि रहलए। जे प्रत्याशी समाजसेवी आ कर्मठ हेतै, ओकर जीत निश्चित छै। गोवर्धन- मुदा लोक प्रत्याशीक गुण कहाँ देखै छै। खाली माल देखै छै माल। मालेपर कमाल होइ छै। ताड़ीए-दारूपर भोँट भेट जाइ छै। हमरा भनकी लगल हेन जे ऐबेर फीरन, ब्रजेश, सुभद्रा आ उ जे कियोटबा छै कथीदुन नाओं छिऐऽऽऽ। श्रीलाल- विवेक। गोवर्धन- हँ-हँ विवेके। हमरा लगा कऽ पाँच आदमी भेलै। ऐ पाँचू आदमीमे हम सभसेँ गेल-गुजरल छी। अहीं सभ कहूँ तँ ब्रजेश आ बिनोदक आगूमे हम कथी छी? कतए राजा भोज आ भोजबा तेली। हाथीसँ केतौ चुट्टी लड़ै। जदी लड़तै तँ पीच कऽ चटनी-चटनी बना देतै। जीतेन्द्र- आ जौं चुट्टी टूटि हाथीक सूड़मे कहुना पैसि जेतै तखनि की हेतै? गोवर्धन- की हेतै पानि संङे सुरैक जेतै। जीतेन्द्र- गोवर्धन भाय, अपन-अपन बचैक गियान सभकेँ रहै छै। अहाँ की बुझै छिऐ जे चुट्टी हाथीक सूड़मे पैसि अरामसँ मेहमानी करैत रहैत आकि‍ काटि लेतै। कटलाहा चुट्टी टूटि जेतै तँ छोड़तै नै, हाथीकेँ भकमच्छर छोड़ा देतै। खाइर हाथी-चुट्टीक खेरहा छोड़ू। अपन खेरहापर आउ। श्रीलाल- गोवर्धन भाय, अपना सभ कर्म करैक मालिक छिऐ। फल देनिहार कियो और छथिन। फलक चिन्ता अपना सभकेँ नै करबाक चाही। गोवर्धन- श्रीलाल भाय, अपने एकलाखक नै, करोड़सँ बेसीक गप कहलौं। अच्छा, एगो कहू अहाँ सबहक की विचार? श्रीलाल- हमर पूरा विचार अछि जे अहाँ अबस्‍स ठाढ़ होइ। रामेश्वर- अहाँ ठाढ़ नै हेबै तँ हमरा-अहाँक दोसतियारी खतम। जीतेन्द्र- अहाँ निश्चित ठाढ़ होउ। हम सभ अहाँक संग छी। गोवर्धन- अहाँ सभ हमर परम अपेक्षित छी। जे कहै जाइ जाएब से करैले तैयार छी। मुदा एगो बड़ पैघ असोकर्ज अछि। जीतेन्द्र- बाजू की असोकर्ज? गोवर्धन- अर्थक अभाव। चुनाव लड़ैमे बड़ पाइ खरच होइ छै। लाखटका तँ खैनीक नोइश बुझु। जीतेन्द्र- अखनि अहाँ लग केते अछि? गोवर्धन- कुलम जथा-दस हजार। जीतेन्द्र- तखनि केना हएत। और कोनो जोगाड़ नै अछि की? गोवर्धन- और कोनो जोगाड़ नै अछि। खाली एक बीघाखेत अछि, बस। नै हेतै तँ बेच लेबै। देखल जेतै जे हेतै से हेतै। जीतेन्द्र- धर-फराकेँ नै बेच लेब। रसे-रसे बेचब। जेना-जेना खगता हएत तेना-तेना बेचब। तखनि जे घटतै तँऽऽ जनते-जनार्दनसँ एगो भोँट आ एगो नोट माँगब। तइमे हमरा लोकनि तन-मन धनसँ मदति करब। गोवर्धन- जखनि अपने सभ हमरा एते बोल-भरोस दइ छी तँ हम अपने सबहक बात नै काटब। रामेश्वर- चलू गोवर्धन भाय, फेर अहाँ हमरा पेटक जोगाड़ केलौ। हे कहि दइ छी जे नोमिनेशनमे हम रसगुल्ला नै खाएब, हमरा माछ-भात चाही। गोवर्धन- से हम कोनो अहाँसँ जमीन रजिस्ट्री कराएब की? रामेश्वर- हमर जमीन रजिस्ट्री नै कराएब, बल्कि अहाँ अपन जिनगीक रजिस्ट्री कराएब। बुझै छिऐ, जौं अहाँ एक्कोबेर एम.पी. बनि गेलौं तँ जिनगी बनि जाएत। गोवर्धन- से हमहूँ बुझै छिऐ। मुदा हमरा ओत्ते धरि पहुँचल हएत की नै, से केँ जनैए? कहबी छै- पानिमे मछरी नअ-नअ कुटिया बखरा। पहिने अहाँ सभ जीताउ तखनि जे जेना कहबैसे अबस्‍स हेतै। श्रीलाल- रामेश्वर भाय, अखनेसँ हिनका चुसए लगलिऐ तँ आगू की करबै? बेचारा टग हानै छथि आ अहाँ खत्ता दि‍स ठेलै छिऐ। तेँए ने नेता सभ जीतला पछाति जनता दि‍स घूमि नै तकै छथि। पहिनहेँ जनता नेताकेँ कुहरा दइए। तेँए उ अपनामे लगि जाइए। जीतेन्द्र- किछु ईहो बात छै। मुदा हमरा नजरिमे बेसी ई गप छै जे कुरसीमे बदनेतीक चुम्मुक सटल रहै छै जे ओइ नेतामे सटि ओकर नेतकेँ बदनेत बना दइ छै आ उ जनता दि‍स नै ताकि बैमान नेता दि‍स ताकैमे लगि जाइ छथि आ ओकर जकाँ माल होंसतैमे भीड़ जाइ छथि। भोँट लइ कालमे जनता भगवान आ सभ किछु मुदा जीतला पछाति जनता शैतान आ बेकूफ। गोवर्धन- जीतेन्द्र भाय, अहाँ बड़ दूरक गप बजै छी। अहाँक भावनाक आदर हेतै। समए आबए दियौ। जीतेन्द्र- भाय, कहलासँ नै होइ छै, केलासँ होइ छै। गोवर्धन- समए एलापर हम अहाँ सभकेँ यानी जनताकेँ नै बिसरब, सएह ने? जीतेन्द्र- तँ आरो की? जनताक सेवा यानी परमपिता परमेश्वरक पूजा। तँ अहाँ चुनावक तैयारीमे लगि जाउ। हम सभ कोनो तरहसँ पएर पाछू नै करब। पटाक्षेप- दोसर दृश्य- (स्थान- फीरनक घर। दलानपर फीरन, कृष्णानंद आ कन्हैया कुरसीपर बैस भोँटक सम्‍बन्‍धमे विचार-विमर्श करै जाइ छथि।) कृष्णानंद- फीरन काका, अहाँ केते दिनसँ कहै छिऐ जे अगिला बेर ठाढ़ हएब, अगिला बेर ठाढ़ हएब। ऐबेर से सभ बहाना नै चलत। एम.पी. मँ ठाढ़ हुअ पड़त। कहू तँ, अहाँ नेतागरीमे जिनगी गुदस कऽ देलिऐ। मुदा एकटा जगहपर पहुँच कऽ जनताक सेवा नै केलिऐ। अहाँ ई बूझियौ जे हमर जिनगी राड़ी-बेटखौकीमे, सँए मुड़ी भाएमे आ भाए मुड़ी सँएमे गुदस भेल जे सफल जिनगीक पहचान नै भेल। कन्हैया- फीरन भाय, कृष्णानंद बड़ दुरसक गप कहै छथि। हमरा नजरिमे ई जनताक सेवापर बल दइ छथि। जनताक सेवा बड़ पैघ सेवा छै। जदी जनताक सेवासँ चुकलौं तँ बुझु जिनगी व्यर्थ बीतल। फीरन- अहाँ सभ जे किछु कहलौं, सभटा बुझलौं आ नै कि‍ए बुझब। सभदिन तँ एतबे केलौ। मुदा हाथ नै मुठ्ठी, छड़पटा उठ्ठी। अपन हारल आ बौहक मारल, की कही। ओना अहाँ सभ जनिते हएब। तीनबेर मुखियासँ ठाढ़ भेलौं। मुदा तीनूबेर हारि गेलौं। तीन बेरमे तीनबीघा जमीन बीकि गेल। आब हमरा जमीनो नै अछि जे बेचि कऽ चुनाव लड़ी। तहूमे एम.पी. चुनाव तँ आरो भरिगर होइ छै। मात्र दूकठ्ठा बासडीह अछि। ओइसँ की हएत? कुकर बधिया करब तँ उ काटत नै? हम एहेन कुकर्म आब कि‍ए करब जे हमरेपर बीषा जाए। कन्हैया- सोच अहाँक नीक अछि। मुदा कही तँ कही की। कृष्णानंद- ककाक समस्या तँ गंभीर छन्‍हि‍हेँ। मुदा कोनो ढक-पेच वा कोनो अलपी-पचिया ऐबेर लगेबाक छै। ऐबेरका माहौल उपयुक्त लगै छै। फीरन- एहेन ढक-पेच नै लगा लेब जे केतबो हुराए तँ हुरबे नै करए। अलपी-पचिया ओहेन नै लगाएब जे सभकेँ माथा-पेची बढ़ि जाए। कृष्णानंद- ओत्ते जे सोचबै कका,तँ जिनगीक गाड़ी लसकले रहत जेना अखनि धरि अछि। हँ, सहचेतीक जरूरी छै, से रहब। फीरन- बिना विचारे जो करे, सो पाछे पछताय। धरफड़ाकेँ जेकियो कोनो बीड़ा उठबैए, ओइमे बेसी असफलताक संभावना रहै छै। कृष्णानंद- अपना सभ सएह ने विचार करए बैसल छी। (वर्तमान एम.पी. ब्रजेशक चमचा राकेशक प्रवेश। राकेश कुरसीपर बैसला। आपसमे नमस्कार-पाती भेल।) राकेश- फीरन भाय, की हाल-चाल? फीरन- भाय, बड़ नीक अछि। आर सभ अपन दि‍सक सुनाउ। राकेश- हमरो दि‍सक नीके अछि। फीरन- राकेश भाय, हमरा सभकेँ एना बिसरबै तँ हम सभ कोना जीबै आ केतए भऽ कऽ रहबै? राकेश- भाय, हमरा जूत्ता भीजा कऽ मारै छी। फीरन- (मुस्कीआ कऽ) नै भैया, हम कोन जोकर छी जे अहाँकेँ जूत्तासँ मारब। राकेश- अहाँ कोन जोकर नै छी, से नै कहियौ। तँए ने एम.पी. साहैब हमरा अहाँ लग पठेलथि हेन। फीरन- (आश्चर्यसँ) बापरे बाप। आइ केन्ने सूरुज उगलै जे एम.पी. साहैब हमरा लग अहाँकेँ पठेलनि हेन। राकेश- अहाँ छी गुदरीक लाल। अहाँक जोड़ा नेता ऐ परोपट्टामे आरकेँ? फीरन- हम तँ तेहेन योग्य नेता छी जे तीनबेर मुखिया चुनाव हारि गेलौं जइमे तीन बीघा जमीनो बीक गेल। अखनि दर-दर ठोकर खाइ छी। राकेश- यौ भाय, हीराक पहचान जाहूरी करै छै। अपने केते पानिमे छी, से हम नीक जकाँ जनै छी। अच्छा, ई गप-सप्‍प छोड़ू आ किछु विशेष गप करू। फीरन- कोन विशेष गप छै, सेँ बाजू। राकेश- इएह जे अगिला चुनावमे अहाँकेँ ठाढ़ भेनाइ अछि। कृष्णानंद- बड़ नीक हेतनि। हमहूँ सभ सएह आग्रह करै छियनि। फीरन- राकेश भाय, हमरा बशक बात नै अछि। अनेरे लौल करू गऽ। कृष्णानंद- अइमे लौलक कोनो बात नै छै। मौकाक फेदा उठेबाक चाही। फीरन- केतएसँ मौकाक फेदा उठाएब? बिनु मालक कमाल केना हेतै। राकेश- अहाँक मालक समस्या अछि। सएह ने? मुदा मन पुरा अछि ने? फिरन- भाय, मनो पुरा नै अछि। कारण जनताकेँ नीक-अधलाक फैसला नै करए आबै छन्‍हि‍। खाली स्वार्थक फैसला करए आबै छन्‍हि‍। तहूमे टटका सुखबला स्वार्थ जौं हुअए तँ घीओसँ चिक्कन। राकेश- ओइमे अपने सभकेँ ने फेदा हेतै आ होइ छै। जनता जौं मूर्ख-मचंड हुअए तँ नेताकेँ और नफ्फा। फीरन- अइसँ देशक विकास केना हएत? राकेश- नेताकेँ देशक विकाससँ कोन मतलब छै? सिर्फ अपन विकससँ मतलब छै। जनताक चाह परख पड़त आ खुशी परख पड़त। जदी उ दारूएसँ खुश रहतै तँ ओकरा दारूक जोगाड़ लगा दियौ, भोँट हेब्बे करत, अहाँ जीतबे करब। फीरन- लगैए हम ताइँ हारि जाइ छेलौं। हम एक्केटा गप बुझै छेलिऐ जे ईमानदारीसँ बड़क्कति होइ छै। मुदा आइ ई परदा हटि गेल। हम ओत्ते तरी-पेंटी नै बुझै छिऐ कारण हमरा ओहन सलाहकार नै भेटल आ नै तकलौं। हम लाइँ-लपटाइँसँ सभदिन हटल रहलौं। हरदम नुनक सरियत दइकेँ सोभाब रखलौं। आइ धरि कियो हमरापर आँगूर नै उठेलथि हेन। लटपट काज हमरा एक्को रत्ती पसीन नै। राकेश- अहाँकेँ हारैक ओहए ने कारण अछि। अस्सल नेता जनताकेँ हरदम लटपटा कऽ राखै छथि। और बहुत रास गप-सप्‍प हेतै पछाति। अखनि एगो कनफुस्की कऽ लइतौं अपना सभ। फीरन- अबस्‍स कऽ लिअ। (उठि कऽ दुनू गोटे कात जा कऽ कनफुस्की करै छथि। फीरन माथ हिला कऽ हूँ-हूँ कहै छथि) राकेश- फीरन भाय, आब चलैक आज्ञा दिअ। एम.पी. साहैबक कार्यक्रम मे जेबाक छै। फीरन- एतेकाल गप-सप्‍प भेलै आ एक्को बेर चाहो नै भेलै। चाह पीब लिअ तखनि जाएब। राकेश- अखने घरपर सँ चाह पी कऽ आएल रही। आब मन नै होइए पीबैक। ओना बेसी चाह पीऐ छी तँ गैस्टिक तेज भऽ जाइए। फीरन- तखनि जिद्द नै करब। राकेश- भाय, दोसरदिन अबस्‍स हेतै, आइ जाइ छी। नमस्कार। (आपसमे नमस्कार-पाती भऽ राकेशक प्रस्थान) कन्हैया- फीरन भाय, कनफुस्कीमे की गप भेलै? फीरन- इहए जे अहाँकेँ कोनो परिस्थितिमे ठाढ़ भेनाइ अछि। ओइमे हींगसँ हरदि धरि खर्च हम पुड़ाएब। कहलखिन किनको कहबनि नै। मुदा अहाँ सभ तँ हमर अपनोमे अपन छी। तँए हुनकर गप कहि देनाइ उचित बुझलौं। कृष्णानंद- तखनि आब अहाँ प्रसन्न छी, की नै? फीरन- आब प्रसन्न छी आ अबस्‍स ठाढ़ हएब। कन्हैया- तखनि नोमिनेशनमे देरी नै करब। नोमिनेशन जल्दीसँ-जल्दी करा कऽ अपन तैयारीमे लगि जाइ जाएब। पटाक्षेप- तेसर दृश्य- (स्थान- एम.पी. ब्रजेशक अवास। ब्रजेश, पी.ए. सुरेश आ दूटा अंगरक्षक भोलू कुरसीपर बैस चुनावक सम्‍बन्‍धमे गप-सप्‍प करै छथि।) सुरेश- सर, कात-करोटसँ पता चलैए जे अहाँक माहौल नीक नै अछि। बहादुरगंजमे जूताक मालासँ स्वागत भेल रामनगरमे कारी झंडासँ स्वागत भेल, बेलभद्दरपुरमे रोड़ेबाजीसँ स्वागत भेल, बाबरनगरक सभामे दसोटा लोक नै छल। केते कहौं? ब्रजेश- अहाँक नजरिमे एकर मूल कारण की छै? सुरेश- हमरा नजरिमे मूल कारण अछि जनताक संग गदे्देदारी। जहियासँ अहाँ एम.पी. भेलिऐ तहियासँ एक्कोबेर अपन क्षेत्रमे नै गेलिऐ आ नै विकासक काज केलिऐ। ई बात अहूँ जनिते हेबै। कहै छेलौं तँ अहाँ अनठिया दइ छेलिऐ वा आइ-काल्हि, आइ-काल्हि करै छेलिऐ। आब पहिलुकाबला गप नै रहलै। रसे-रसे जनतामे जागृति आबि रहलै हेन। जनतामे रसे-रसे विवेक बढ़ि रहलै हेन। आब जनताकेँ काज चाही काज। नै तँ रस्ता नापू। (राकेशक प्रवेश) राकेश- साहैब प्रणाम। ब्रजेश- प्रणाम, प्रणाम। राकेश- सुरेश बाबू प्रणाम। सुरेश- प्रणाम,प्रणाम। आउ भाय, बैसू। (राकेश कुरसीपर बैसलथि। कातमे दुनू अंगरक्षक भोलू आ शोभू खैनी चुना कऽ खेलिथि। दुनू ओंघा कऽ ठाढ़े-ठाढ़ धुसि-धिसि खसै छथि।) राकेश भाय, बहुत दिनपर जगलौं हेन। राकेश- जी, सेँ तँ ठीके छिऐ। मुदा करबै की? बड्ड काज रहै छै। क्षेत्रोहमरेऔरकेँ देखऽ पड़ै छै। कारण साहैब ओम्हर दि‍स एक्कोबेर घुरिया कऽ नै तकै छथिन। जनता हमरा सभकेँ बात-कहिनी कहै छथि। हवा-पट्टी दऽ हम केते सम्हारबै? अहीं कहू। सुरेश- हँ, से तँ ठीके बात छै। सर अपने जाइतथिन से आ हम-अहाँ जेबै, तइमे जमीन-आसमानक फरक छै। हमरा नजरिमे सर अइमे बड्ड चुकि गेलखिन हेँ। राकेश- तेँए ने क्षेत्रक बच्चा-बच्चा हिनकापर खिसिआएल अछि आ एकर कुप्रभाव अगिला चुनावमे हिनकापर बढ़िया जकाँ पड़तनि। (भोलू और शोभू निन्नमे सपनाइ छथि।) भोलू- (निन्नमे) यै, अहाँक ओइ बहिनकेँ बियाह भेलै की नै? मंदाकिनी- (अन्दरसँ) कहाँ भेलै? ओकरा जोग वरे नै भेटै छै। (ब्रजेश, सुरेश आ राकेश शान्‍त भऽ भोलू आ शोभूक गप-सप्‍प सुनि आनन्द लऽ रहल छथि।) भोलू- नै भेटै छै तँ हमरेसँ करा दियौ ने। उ हमरा अहूँसँ चिक्कन लगैए। मन होइए जे उ हरदम हमरेलग रहितए। मंदाकिनी- जाइ छी हम ओकरे पठाए दइ छी आ हम ओतै रहि जाएब। भोलू- नै-नै रूकू, सुनु तखनि जाएब। मंदाकिनी- अच्छा कहू, की कहै छी। (भोलू भरि पाँज कऽ शोभूकेँ पकड़ि लेलक। तइमे दुनूगोटे धरफड़ा कऽ खसि पड़ल आ दुनू उठ्ठम-पटका करैए। एम.पी. साहैब तीनू गोटा बड़ी जोरसँ हँसलथि भोलू आ शोभू उठ्ठम-पटका बन्न केलक आ नीक जकाँ ठाढ़ भेल।) ब्रजेश- अहाँ सभ मजाक कि‍ए करै जाइ छी? भोलू- सर, मजाक नै बा, सपना बा। ब्रजेश- अहाँ सभ शान्‍त भऽ रहै जाइ जाउ। पुलिसकेँ एते कोढ़ि नै रहक चाही। राकेश, आब कहू, केना की करबै? जे भेल तेकरा बिसरि जाउ। राकेश- क्षतिपूर्तिमे मालक खर्चा बढ़ि गेल आब। आब मालेपर कमाल हएत। ऊनक दून लागत। ब्रजेश- जे लगतै, तइले तैयार छी। मुदा खरचा पहिने कि‍ए नै केलौं, तेकर कारण छै। अखनो जनता बड़ बेसी मूर-मचंड छै। ओकरा टटका फेदापर बेसी धियान रहै छै। अखनि चुनाव लगचिआएल छै। अखुनका काज बेसी नजरिपर रहतै। देखियौ, जनता कुत्ता होइ छै। जखनि उ भूकए ओकरा आगू रोटी फेक दियौ। उ खुश भऽ खा लेत आ अहाँक पाछू-पाछू जाए लगत आ जेना-जेना कहबै तेना-तेना करत। ई सभ तरी-पेंटी हम बड्ड बुझै छिऐ। ऊँट कोन गरे उठि बैसत, से हम जनै छिऐ। सुरेश- मुदा सर, जनताकेँ एते बेकूप नै बुझक चाही। जनता जनार्दन होइ छथि। हुनके किरपासँ अहाँ आइ एत्त धरि पहुँचल छिऐ। जेना दोकानदार आ गैंहकीमे अन्योन्यश्रय सम्‍बन्‍ध होइ छै तहिना अहाँ आ जनतामे अन्योन्‍याश्रय सम्‍बन्‍ध अछि। ऐ सम्‍बन्‍धकेँ तोड़नाइ बुड़बकाइ अछि आ तइसँ पराजय निश्चित अछि। ब्रजेश- सुरेश, खराप नै मानब। एकटा बात पुछै छी जे अहाँक सोच हरदम नकारात्मक कि‍ए होइए? सुरेश- कि‍ए नै हएत? अहाँ जनताकेँ बुड़बक बुझै छिऐ, बेकूप बुझै छिऐ आ ओकरा संग बदनेती करै छिऐ, बैमानी करै छिऐ जे हमरा नै देखल जाइए। तँए नकारात्मक सोचि भऽ जाइए। सचि‍व, वैद, गुरु तीन जो, प्रिय बोलहि भय आस। राजधर्म तन तीनिकर, होइ बेगही नास हमरा जे नीक बुझाइए से कहै छी। हम अपन करतब करै छी। जदी अहूँ अपन करतब करितिऐ तँ अहाँक पूजा भगवानोसँ बेसी होइताए। अहाँ अखनि एम.पी. छी। निर्विरोध प्रधानमंत्री चुनल जइतौं। ब्रजेश- सुरेश, अहाँ हमरा ओना समझा रहल छी जेना दादी पोताकेँ समझाबैत होइ। ओतेक समझेबाक खगता कहाँ छै। हम कोनो साधारण राजनीतिज्ञ छी की? राकेश- साहैब, गलती केकरोसँ भऽ सकैए। ओत्ते बड़का हाथी होइए, कहियो ऊहो चुकि जाइए। सुरेश बाबू अपनेकेँ जे किछु कहलथि, बड़ नीक कहलथि आ मार्मिक गप कहलथि। हिनका अहाँ बुड़बक बनाए देलयनि। हमरा विचारसँ ई नीक नै भेलै। ब्रजेश- राकेश, की नीक होइतै, अहीं कहियौ तँ? राकेश- हमरा मने नीक ई होइतै जे अहाँ सुरेशक आदर्शपर चलितहूँ आ हुनकर आदर करितऔं तँ अपनेक प्रतिष्ठा आर बढ़ि जइताए। ब्रजेश- अहाँ सभ खाली काल्पनिक बात बाजि रहल छी। तइसँ काज नै चलत। बातकेँ यथार्थ दि‍स आनू। अच्छा राकेश, कहने छेलौं से की भेल? राकेश- सएह कहऽ एलौं हेन। फीरनसँ हम बात कऽ लेलौं। उ पक्का ठाढ़ हेता। अर्थक अभावमे नै, नै कहै छलाह। बड़ कहलयनि, बड़ कहलियनि तँ उ तैयार भेला। चुनावक कुल खर्च अहींकेँ वहन करए पड़त। ब्रजेश- फीरन हँ कहि देलथि ने? राकेश- हँ, हँ कहि देलथि। ब्रजेश- सभ कियो मिल-जुल कऽ चुनावक भारकेँ पार लगबै जाउ। ऐ बेर कोनो परिस्थितिमे चुनाव जीतनाइ अछि। ऐ बेर जे भेल से भेल। मुदा अगिला बेरसँ कोनो शिकाइत नै करए देब, से गछै छी। राकेश- साहैब, किछु माल-पानी देबो करबै? ब्रजेश- आवश्यकता हेतै तँदिहे पड़तै। नै देलासँ काज केना चलतै? राकेश- साहैब, फीरनकेँ ताबे किछु दऽ दैतिऐ। हुनको किछु भरोस भऽ जइतनि। गछने छियनि। ब्रजेश- केते गछने छियनि? राकेश- ई नै गछने छियनि जे एते की ओते? ब्रजेश- केते दऽ दी बाजू? राकेश- कमसँ-कम एको दियौ। ब्रजेश- ताबे पचाससँ काज चलाउ। आगू देखल जेतै। (ब्रजेश अन्दरसँ पचास हजार टाका आनि राकेशकेँ देलनि।) राकेश- जदी अइमे उ नै मानता तखनि? ब्रजेश- जदी नै मानता तँ कहबनि दस दिनमे दइ छी। राकेश- ठीक छै साहैब। आब हम चलै छी। ब्रजेश- बेस जाउ। (प्रणाम कऽ राकेशक प्रस्थान। पर्दा खसैए। राकेश फेर मंचपर आबैए।) राकेश- आइ पचासे हजार देलखिन। खाइर की करबै? जे देलखिन तहीमे से मेल-पाँच कऽ लेबै। नै हेतै तँ आधा हुनका दऽ देबनि। ओना और कम देबनि तँ चलतै। मुदा आधामे बाधा नै हेबाक चाही। अनुचित भऽ जेतै। कारण फीरन बेचारा गाए छथिन गाए। पटाक्षेप- चारिम दृश्य- (स्थान- सुभद्राक अवास। अवासपर सुभद्रा, माला, चन्द्रमोहन आ उमाकान्त अगिला लोकसभा चुनवाक सम्‍बन्‍धमे आपसी विचार-विर्मश कऽ रहल छथि।) चन्द्रमोहन- दीदी पछिला बेर अहाँ मात्र दू भोँटसँ हारि गेलौं। हार्दिक तकलीफ भेल। कारण बड़ मेहनत केने छेलौं। सात दिन भरि अन्न-पानि नीक नै लगल। मुदा अहाँकेँ की भेल हएतसे एकटा अहीं आकि दैब जानैत हेथिन। (सुभद्राक आँखिसँ नोर बहऽ लगै छन्‍हि‍।) माला- दीदी, अहाँक आँखि कि‍ए ढबढबा गेल? सुभद्रा- पछिला बेरक चुनावक बेथा मन पड़ि गेल। अहीं सभ तँ मन पारलौं। बड़ खर्च केने रही। तैपर सँ खून-पसीना सेहो एक कऽ देने रही। ओकरे आहि आबि गेल रहए तँए आँखि ढबढबा गेल रहए। माला- एना होइ छै। कोनो बात नै। मुदा नेताक दिल एते कमजोर नै रहक चाही। कारण नेताक समक्ष कतेक समस्या उपस्थित होइ छै। सुभद्रा- नेताकेँ ओत्ते कठोर भेनाइ सेहो नीक बात नै भेलै। कारण नेता अपन क्षेत्रक जनताक मालिक होइ छथिन आ मालिककेँ रंग-बिरंगक झाँटि-बिहारिक सामना करए पड़ै छन्‍हि‍। उमाकांत- माला बुच्ची, छोड़ह ई गप-सप्‍प। आगू की केना करै जाइ जेबहक, से विचार-विमर्श करै जाइ जाए। माला- काका, अपने श्रेठ्ठ छिऐ, जे जेना विचार देबै, से हेतै आ करै जाइ जेबै। उमाकांत- आ जौं हम हुसि जाइ तँ तूँ सभ सम्हारै जाइ जेबहक कीने? माला- अहाँ हुसिए नै सकै छी। कारण अहाँ बड़ अनुभवी छी। उमाकांत- ‌ खाइर हम पूरा परयास करब जे नै हुसि। मुदा जदी हम हुसऽ लागब तँ सभ कियो सम्हारैले छीहे। हमर विचार अछि जे जदी भगवान सकरता देने छथि तँ हिम्मत नै हारू। पछिला बेरसँ ऐबेर सभ तरहसँ बेसी मेहनत करबाक छै। पछिला बेर किछु दलाल सभ धोखा देलक। ऐबेर ओइ धोखेबाजसँ सावधान रहबाक छै। अति विश्वसनीय कार्यकर्तासँ लेन-देनबला काज करबैक छै। सुभद्रा- काका, सकरता तँ देने छथि। मुदा सकरताक उपयोग हम ऐबेर अनैतिक रूप सँ नै करए चाहै छी। कारण अइमे धनक प्रधानता भऽ जाइ छै, गुणक प्रधानता झँपा जाइ छै। आवश्यक आ उचित खर्च तँ करबे करबै। मुदा अनावश्यक आ अनुचित खर्चसँ बचैक पूरा परयास करबै। अइमे अपनेक की विचार? उमाकांत- लोकसभा चुनाव कोनो मामूली चुनाव नै होइ छै। ऐ चुनावमे प्राय: हुनके जीत होइ छन्‍हि‍ जे छल-बल-कलसँ पूर्ण होथि। कंजूसाइसँ काज नै होइबला अछि। तन-मन-धनसँ काज लेबै तहने सफलताक आश कऽ सकै छी। हँ, जनता किछु जगलै हेन जे गुणक प्रधानता देत। मुदा ओकर संख्या अखनो बड़ कम अछि। अपना सभकेँ चाही भोँटक संख्या जे धनक प्रधानता देबएबला जनताक हाथमे अछि। ओइले धने चाही। हवा-पट्टीसँ काज नै चलत। सुभद्रा- हारि तँ निश्चित अछि। कारण बड़का जरदगब सभ ठाढ़ हेता। उमाकांत- जखनि अहाँ अपन हारि निश्चित बुझै छिऐ तखनि चुनावमे ठाढ़ हेबाक लौल कि‍ए करै छी? कनिको धन कि‍ए गमबऽ चाहै छी? सुभद्रा- ऐ दुआरे जे जनताक बीच सभदिन रहि ओकर सेवा केलौं जे अपने जनिते छी। खबरकेँ वा बिनु खबरकेँ हम प्राय: सभ जनताक दुख-सुखमे उपस्थित छी से खलीए नै तन-मन-धनसँ। की ऐ सेवाकेँ जनता बिसरि जेतै? उमाकांत- जाधरि अहाँ जनता ऐठाम ठाढ़ रहबै ताधरि अहाँ मन रहबै। ओकरा ऐठामसँ अहाँ ससरलिऐ, बस उ बिसरि गेल। बड़ कम्मे जनता एहेन हएत जे अहाँकेँ मन राखत। जनता टटका नफ्फा ताकै छै। जेम्हर खीर, तेम्हर भीड़। इहएटा जनता, केर फीकीर। हमर विचार जदी मानी तँ कहितौं जे तन-मन-धनसँ चुनाव लड़ू वा नै तँ लौले छोड़ि दियौ अछरकटु काज नीक नै होइ छै। माला- दीदी, काका ठीके कहै छथिन। कोनो काज करी तँ नीक जकाँ आ नै तँ नहियेँ करी, से नीक। आब अहीं विचार करू जे की करबाक अछि? जदी मन नै मानए, आत्मा नै कबुलए तँ जबर्दस्ती नै करू। चन्द्रमोहन- दीदी, कहाँदुन अपनेक पिताकेँ राजनीतिमे नीक प्रतिष्ठा रहनि। उ प्रतिष्ठा हुनका मुखियासँ एम.पी. धरि पहुँचा देलक। उमाकांत- हमरा हुनकर छवि देखल अछि। जइ काजमे उ हाथ दइ छेलखिन उ काज सफल भेनाइ छेलै। सुभद्रामे हुनके सभटा लक्षण छै। मुदा एकरामे एगो कमी छै। उ छै हिम्मत। कोनो काज करबामे हिम्मतक बड़ पैघ योगदान होइ छै। हिम्मत हारि दियौ, काज फँसि जाएत। जनताक सेवा देश सेवा छी आ देश सेवा सभसँ पैघ सेवा होइ छै। सुभद्रा मनोहर भायक एकमात्र संतान अछि। भाय तँ स्वर्ग सिधारि गेला। मुदा हुनक नाओंकेँ रौशन लेल जनता सेवामे जीवन समरपि‍त कऽ रहलीह हेन। जेकर प्रमाण सुभद्राक ऐ बातसँ भेटैए जे ई बियाह नै केली। हमरा सभटा खेरहा बुझल अछि। कारण हमरा एकरा परिवारसँ सभदिन नीक सम्‍बन्‍ध रहल। आइ-काल्हि एते तियाग के कऽ सकैए? (सुभद्रा सोचमे पड़ि जाइए।) माला- दीदी, अहाँसँ जनताकेँ बड़ स्वार्थ छै। एकबेर हिम्मत कऽ बाजि दियौ जे छल-बल-कलसँ हम चुनाव लड़ब। सुभद्रा- (गंभीर साँस लऽ कऽ) हिम्मत कऽ हम कहि रहल छी जे छल-बल-कलसँ नै मुदा तन-मन-धनसँ चुनाव हम अबस्‍स लड़ब। हम अपने सभसँ प्रण करै छी जे नैति‍क रूपसँ हमरा जे धन खर्च करए पड़तै, से हम पूरा करब। उमाकांत- सुभद्रा बुच्ची, हमरा पूर्ण बिसवास अछि जे तोहर काज आ तियाग तोरा सफलता प्रदान करतौ। नोमीनेशनमे देरी नै करहि‍न। जल्दी नोमिनेशन करा क्षेत्रमे भोँटक जोगाड़मे भीड़ जाइकेँ छै। सुभद्रा- से तँ अपने रहबे करबै कीने? जे जेना सलाह देबै तेना हेतै आ करबै। पटाक्षेप- पाँचिम दृश्य- (स्थान- विवेकक मकान- दरबज्जापर विवेक, सूरज, पंकज, मोहन आ पप्पू दारू-पार्टीमे मस्त छथि।) सुरज- विवेक भैया, ऐबेर कोनो सारकेँ नै चलऽ देबै। जइमे फरीएबाक हेतै तइमे फड़ि‍याएत। पछिला बेर तोहर जमानत जप्त भऽ गेल छेलै आ ऐबेर सभ सारकेँ जमानत जप्त करा देबै। विवेक- पाँचसालमे हम बैसल थोरहे छेलिऐ, जोगाड़मे भीड़ल छेलिऐ। गाम-गाममे छौड़ा सभ तैयार छै। से तेहेन-तेहेन छौड़ा सभ छै जे ओकरा देखैत लोक फुद्दी भऽ जेतै। प्रत्येक मतदान केन्द्रक चारू कात बम बिछा देबै आ मात्र चारिटा खुंरवार छौड़ाकेँ चारू कोनपर हथियार लऽ कऽ ठाढ़ कऽ देबै। बेसी नै तीन-तीनटा छौड़ाकेँ प्रत्येक केन्द्रपर पठेबै। सभटा भोँट छापि लेतै। सभ प्रत्याशी अल्हुआ आ सुथनी लऽ कऽ घर आएत। मुदा हम जीतक प्रमाण-पत्र लऽ कऽ घर आएब आ पलेनसँ दिल्ली जा लाल किलापर तिरंगा झंडा फहराएब। हा-हा-हा ऽ ऽ ऽ। पंकज- हा-हा-हा ऽ ऽ ऽ। विवेक भैया, ऐबेर सार सभकेँ बापसँ भेँट करेबै। ओइबेर बड़ड हेरा-फेरी करै जाइ गेल। सार पुलिसबा सभ मुँह तकैत रहि गेल आ भोँट लूटा गेल। तहीपर ने ब्रजेश अखनि छहर-महर करैए। दिल्ली, मुंबई आ कोलकतामे जमीन कीनलक हेन। इंगलैण्डमे एगो फ्लैट कीनलक हेन। एन एच-५७ कऽ कातमे पेट्रोलपम्प खोललक हेन। ई कम विकास भेलै? विवेक- हम ऐबेर सभकेँ फाइल कऽ देगा। हम अमीरकामे फ्लैट कीनकेँ रहेगा आ ओत्तै पेट्रोलपम्प बनाएगा। तूँ सभ देखेगा हमर विकास केहेन होता है। रि‍जर्ब बैंककेँ हमरा से कर्जा लिअ पड़ेगा। हा-हा-हाऽऽऽ। मोहन- ब्रजेशबा तँ अपने बड़ड विकास किया। लेकिन पब्लिक केँ कोन विकास किया। पब्लिक केँ विकासपर कनियो धियान नै दिया, से तँबड्ड खराब बात न भिया। पब्लिकेँ पर न ऊ आइ एम.पी. बनल हाय। विवेक- धुर सार मोहना, तोरा दिमाग नै हाय। तूँ बड्ड बेकूप हाय। एतबो नै बुझता हाय जे बरजेशबा पब्लिकपर एम.पी. बनल हाय की अपनेपर बनल हाय। सार मोहना, सुन। बरजेशबा बम-बारूदपर एम.पी. बनल हाय। मोहन- हमहूँ तँ सहए कहता हाय जे ऐबेर बरजेशवाकेँ छक्का छोड़ाएगा। सभ बम-बारूद घुसारि देगा। विवेक- आब तूँ रस्तापर आया। हा-हा-हा ऽ ऽ ऽ। हमरा तोरा सनक बीर रहेगा तँ सभ सारकेँ देखा देगा जे कोन बाँसकेँ दाहा होता हाय। हा-हा-हा ऽ ऽ ऽ। पप्पु- विवेक भैया, जइ पर्टीक मालिक तूँ हेबहक ओइ पार्टीसँ कोन माएक लाल जीत सकैए? विवेक- हा-हा-हा ऽ ऽ ऽ। जइ पार्टीमे पप्पु रहेगा ओइ पार्टी से कोन सार हाथ मिलाएगा? रे सुरजा, माल खतम हाय। जल्दी लऽ केँ आ। मालेपर न सभ कमाल होता हाय आ होगा। सुरजा जल्दी आ,। (सुरजक प्रस्थान।) पप्पु- विवेक भैया, सूरजा बड़ देरी कऽ दिया। माल सधि गिया। मन चटपटा रहल हाय। सार जल्दी आएगा से नै। जे तूकपर नै से कथीदूनपर। हरामी बच्चा सूरजा बड़ी कोढ़िया हाय। (कार्टूनमे दारू लऽ कऽ सूरजक प्रवेश।) वाह। वाह। सूरज भाय, हमरा नै बुझल था जे तोरा एते फुर्ती हाय। तूँ बड़ी कामकेँ लड़का हाय। (सूरज कार्टून ‌खोलि दारूक बोतल निकालि कऽ राखलक आ कार्टून दर्शक दि‍स फेंक देलक। बोतल खोलि सबहक गिलासमे दारू ढारलक। सभ मस्तीमे पी रहलए।) विवेक- आइ जे पार्टी भऽ रहल हाय से एम.पी. एलेक्शनमे नाओं करेगा। हा-हा-हा ऽ ऽ ऽ।गोरकी पतरकी रे मारे गुलेलवा जियरा उड़ी-उड़ी जाय। पप्पू- तूँ चीज बड़ी है मस्त-मस्त, तूँ चीज बड़ी है मस्त। हा-हा-हा ऽ ऽ ऽ। अखनि जे माल आया हाय, से बड़ी कमाल माल हाय। हे भगवती। हे सरस्वती मैया। सभकेँ इहए बुधि दिहक जे अपना-अपना घरमे एहने मालबला कंपनी बैसाबए। हा-हा-हा ऽ ऽ ऽ। पंकज- पप्पू सार, अखनि तूँ की बाजि दिया। तोरा कनियो दिमाग हाय की नै? केकरो घरमे हम ऐ मालक कंपनी नै बैसबऽ देगा। हम अपने घरमे बैसाएगा आ सौंसे दुनियाँमे हमहीं माल सफलाइ करेगा। हा-हा-हा ऽ ऽ ऽ। दुनियाँमे सभ से बेसी हमहीं धनिक भऽ जाएगा। खाली विवेक भायसे बेसी धनिक नै होगा। विवेक- हा-हा-हा ऽ ऽ ऽ। हमर आदर तँ सभ करता हाय। जाँइ गुण हाय ताँइ न करता हाय। हा-हा-हा ऽ ऽ ऽ। पप्पु- हा-हा-हा ऽ ऽ ऽ। काल्हि हम दुनू भैयारी दुनियाँपर शासन करेगा। हा-हा-हा ऽ ऽ ऽ। ऐ मेरे वतनकेँ लोगो जरा आँखमे भर लो पानी। जो शहीद हुए है उनकी, जरा याद करो कुर्बानी। हा-हा-हा ऽ ऽ ऽ। आइ हम सभ शहीद हाय आ रहेगा। मोहन- ऐ बेरका एलेक्शनमे प्रधानमंत्रीकेँ होगा। मनमाना घूस दइके लेल। हमरा सभके घूस नै देगा तँ प्रधानमंत्री अपने हारि जाएगा। हमरे सभके हाथमे न सभ कुछ हाय। हम सभ मामूली आदमी हाय। हा-हा-हा ऽ ऽ ऽ। परदेशीओ से न अँखिया मिलाना, परदेशीओ से न अँखिया मिलाना। सभ परदेशीओ को है एक दिन जाना। विवेक भैया, नोमिनेशन दिन आइसँ नमहर पार्टी धमगिज्जर पार्टी दिअ पड़तह। विवेक- बौआ सभ, पहिने तूँ सभ हमरा जीता। तखनि नोमीनेशन कराएब आ धमगिज्जर पार्टी देबै। पटाक्षेप- छठम दृश्य- (स्थान- दिल्लीक कार्यालय। कार्यालयमे चुनाव आयुक्त राम प्रताप, उपचुनाव आयुक्त गिरिराज, दूटा सुरक्षाबल मानसिंह आ चानसिंह उपस्थित छथि। राम प्रताप आ गिरिराज कुरसीपर बैस चुनाव-तैयारीक विषयमे गप-सप्‍प करै छथि। मानसिंह आ चानसिंह गेटपर ठाढ़ छथि।) राम प्रताप- गिरिराज बाबू, पछिला चुनावमे की-की त्रुटि देखल गेल आ ओकर की समाधान हेतै? ई भार ऐबेर अपने सभकेँ सौंपल गेल हेन। गिरिराज- सर, ई भार बड्ड पैघ भार होइ छै। एते नमहर भार अपना सभसँ सम्हरतै की नै? राम प्रताप- अबस्‍स सम्हरतै। नै कि‍ए सम्हरतै? अपना सभ दृढतापूर्वक बुधि-विवेकसँ काज लेबै आ करबै। आखिर देशक सवाल छै। एकरत्ती हुसबै तँ देशपर पड़तै। एहनो भऽ सकैए जे देश रसातलमे ने चलि जाए। ताँइ अपना सभकेँ बड सोचि-विचारि कऽ कदम राखऽ पड़तै। अच्छा गिरिराज बाबू अपने ई बताउ जे चुनावक समस्या की की सभ अछि? एकहकटा समस्याकेँ टिपबाक अछि आ प्रत्येक समस्या समाधान गंभीरतापूर्वक करबाक अछि। बाजू, अहाँ नजरिमे कोन समस्या अछि? गिरिराज- टिपल जाए सर। (१) बुथ लुटनाई सुरक्षा बलकेँ रहैत। (२) बक्सा हेरी-फेरी केनाइ। (३) भोँट मशीनक खरापीसँ भोँटकेँ सही जगहपर नै जेनाइ। (४) भोँटक प्रशिक्षणक अभावमे भोँटकेँ खराप भेनाइ। (५) सुदूर इलाकामे यातायातक साधनक अभावमे चुनाव अधिकारकेँ पहुँचैमे असुविधा। (६) समए अभावमे पूर्ण मतदान नै भेनाइ। (७) प्रशिक्षित पदाधिकारीकेँ अनुभवहीन रहने सील-मोहर आ लेखन क्रियामे गड़बड़ी। (८) कड़गर निरीक्षकक अभाव। (९) पदाधिकारीगणकेँ दवाबमे रहनाइ। (१०) पदाधिकारीगणकेँ बिक जेनाइ। (११) भोँटक गिनतीमे बैमानी भेनाइ। (१२) अफसर शाही केनाइ। (१३) सुदूर इलाकामे चुनाव निरिक्षकेँ नै पहुँचनाइ। राम प्रताप- अहाँकेँ एते अनुभव अछि। तखनि अहाँ कहै छेलौं जे एते नमहर भार केना सम्हरत? ऐ अनुभवसँ बुझाइए जे अहाँ लेल ई भार किछु नै भेल। हनुमानजीक लेल सूर्य एगो फल छै। गिरिराज- सर, हमरासँ किछुए नै, बड बेसी समस्या छुटल हेतै। उ अपने पूर्ण करियौ। राम प्रताप- हमरा नजरिमे अपनेसँ प्राय: किछु नै छुटल। मुदा दूटा चीज छुटल लगैए। गिरिराज- सर, की? बजियौ। राम प्रताप- इहए जे (१) प्रत्याशीकेँ भोँट कीननाइ। (२) मतदाताकेँ ताड़ी-दारू पीआ अपना बशमे केनाइ। गिरिराज बाबू, आब ई विचार कएल जाए जे भोँटक समस्याक समाधान केना हएत? अपना सबहक पहिल समस्या छल सुरक्षाबलकेँ रहैत बुथ लुटनाइ। हम अपन अनुभव कहै छी जे अब्बल सुरक्षा बलक कारणे बुथ लुटा जाइए। उ गुंडा सभसँ डरि ओकरासँ सामना नै करए चाहैए। जदी उ बलगर आ जोशगर रहितै तँ उ ताउ नै मानितै। उमरितै वा मारितै। जदी उ सुरक्षाबल अपने मरि जाइतै तँ चुनाव प्रकिया कड़गर होइतै आ मतदान उचित होइतै। जदी उ गुंडा मरि जइतै तँ दोसर गुंडा फेर बुथ लुटैक हिम्मत नै करितै। गिरिराज- दोसर समस्या की अछि? राम प्रताप- दोसर समस्या अछि बक्सा हेरा-फेरी केनाइ। गिरिराज- सुरक्षाबलक बीचसँ भोँटक बक्सा बदला जाइए। ई केना सम्‍भव छै? अबस्‍स ओइमे कोनो भाँज लगै छै। सुरक्षाकर्मी या तँ माल लऽ कऽ बक्सा बदलऽ दइ छै वा मारैक धमकीक डरसे बदलऽ दइ छै। जदी सुरक्षाकर्मी ऐ बदनेतीसँ बचै तँ ओइ तरहक घटना कि‍ए हेतै। हमरा विचारसँ विश्वसनीय सुरक्षाकर्मीक बेवस्था हेबाक चाही जे अपना काजमे अडिग रहत।सर, तेसर समस्या की अछि? राम प्रताप- तेसर समस्या अछि भोँट मशीनक खरापीसँ भोँटक सही जगहपर नै जेनाइ। सभ मशीन तँ खराप नै रहैए। मुदा किछु मशीन खराप रहैए जइसँ बहुत रास भोँट एम्हरसँ-ओम्हर भऽ जाइए। एकहकटा भोँटकेँ बड़ महत्व छै जे आन कोइ ओत्ते बढ़ियासँ नै बूझि सकैए। बहुत बढ़ियासँ ऊ बूझि सकैए जे एक भोँटसँ हारल होइ वा एक भोँटसँ जीतल होइ। जदी मशीन जाँचल-परखल हुअए तँ ऐ तरहक समस्यासँ बँचल जा सकैए। संगही प्रत्येक क्षेत्रमे मशीनक अचानक खरापी लेल मिस्त्रीक बेवस्था हुअए। गिरिराज- चारिम समस्या की अछि? राम प्रताप- चारिम समस्या अछि भोँटक प्रशिक्षणक अभावमे भोँटकेँ खराप भेनाइ। (मान सिंह आ चान सिंह खैनी चुना कऽ एक-दोसराक मुँहमे खिअबैए।) गिरिराज- बास्तवमे प्रशिक्षिणक अभावमे बड्ड भोँट नोकसान भऽ जाइए। मतदाताकेँ दाबक चाही कोनो बटन आ दाबि देलक कोनो बटन। पी केलक वा नै केलक, मतदाता छोड़ि विदा भेल। वा एक बेरक बदला दूबेर दाबि देलक। अथवा मोहर मारक चाही एकटा छापपर। मुदा मारि देलक दूटापर तीनटापर। स्वभाविक छै भोँटकेँ बोकस भेनाइ। अखनि मुखिया चुनावमे अक्सर एना होइए। जदी मतदाताकेँ चुनाव पूर्व पशिक्षिण दिया बेवहारिक रूपमे आनल गेल रहितै तँ समस्याक अधिकाधिक समाधान भऽ जइतै। पाँचिम समस्या की छै सर? राम प्रताप- पाँचिम समस्या अछि सुदूर इलाकामे यातायातक साधनक अभावमे चुनाव अधिकारीकेँ पहुँचैमे असुविधा। अखनो भारतमे सुदूर देहातमे सड़कक अभाव अछि। जत्त कोनो चारि चकिया नै चलैए। बेसी-सँ-बेसी मोटर साइकिल चलैए। जइ अधिकारीकेँ मोटर साइकिल नै छन्‍हि‍ उ ओइ बुथपर कोना पहुँचतथि। पैदल जाइ-अबैमे परेशानीक सामना करए पड़तनि। बिनु अभ्यासबला अधिकारी ओही बेथे कुहरतथि। जदी ओइ विशेष इलाका लेल हेलिकाँप्टर प्रयोग होइतए तँ समस्याक समाधान सम्‍भव छेलै। छठम समस्या अछि समैएक अभावमे पूर्ध मतदान नै भेनाइ। गिरिराज- चुनावक प्रकिया तेते नमहर रहै छै जे मतदाताकेँ पतयानीमे ठाढ़ भेल-भेल मन अकच्छ भऽ जाइ छै आ कियो बेसी व्यस्त मतदाता आबि गेला तँ पतयानी देखि घुरि गेला आ फेर उ नै आबि सकला।जदी कोनो एहेन विषेश सरकारी कार्ड रहितै जेकरा पहचान पत्रसँ सत्यापित कऽ छाप-विशेषबला बक्सामे खसा देल जइतै तँ समस्याक समाधान सम्‍भव छेलै। सतम समस्या की छै सर? राम प्रताप- सातम समस्या अछि प्रशिक्षित पदाधिकारीकेँ अनुभव हीन रहने सील-मोहर आ लेखन-क्रियामे गड़बड़ी। चुनाव पदाधिकारीमे बहुत एहनो होइ छथि जे प्रशिक्षित रहितो अप्रशिक्षित रहै छथि। जइ कारणे बक्साक सील-मोहर नीकसँ नै भऽ सकल आ लेखन-क्रियामे उल्टा-पुल्टा भऽ गेल। समाधान लेल पीठासन पदाधिकारीकेँ पूर्ण प्रशिक्षित हेबाक चाही। (दुनू सुरक्षाबल खैनी चुना कऽ नोंइस लऽ छीकैए। फेर दुनू एक-दोसराक पेन्टक भीतर खैनी दैए।) आठम समस्या अछि कड़गर निरीक्षकक अभाव। गिरिराज- कड़गर निरिक्षक अभावमे बुथपर हो-हल्ला भऽ जाइए। मतदाताकेँ दलाल सभ भड़का दइए। मतदाता डरे भोँट खसबैले नै जाइए। तइमे जनानी मतदाता आर डरि बुथपर नै गेली। जदी निरिक्षक लोकनि भोँटक दलालकेँ पकड़ि कड़गर सजा दइतै जेकरा देखि दोसर दुस्साहस नै करितै। आब अगिला समस्या सर? राम प्रताप- नअम समस्या अछि पदाधिकारीगणक दवाबमे रहनाइ। बहुत बुथपर पहुँचल पदाधिकारीगण पर स्थानीय दबंग बेक्ती द्वारा दवाब बनाएल जाइए जइसँ डरि उ पक्षपात करैसँ मजबुर भऽ जाइए आ अनुचितोकेँ उचित बूझि मतदान करबैए। गिरिराज- दसम समस्या अछि पदाधिकारीगणकेँ बिक जेनाइ। कतेक पदाधिकारीगण प्रत्याशीक विशेष दलालक हाथसँ बिक जाइ छथि। बदलामे उ हुनका आन्तरिक सहयोग करै छथिन। उ पक्षपात करैत मूर्ख मतदाताकेँ कहै छथिन जे ओइ बटनकेँ दबबियौ वा ओइ छापपर मोहर दियौ। ई सरासर गलत भेलै। अइमे सुधार हेबाक चाही। राम प्रताप- एगारहम समस्या अछि भोँटक गिनतीमे बैमानी भेनाइ। भोँट गिनतीक बरिष्ठ पदाधिकारी अपन कलासँ जीतल पार्टीक हरा सकैए। जनरेटर गुम्म करा कऽ बक्साक हेरा-फेरी करा सकैए। जेना अमीनक जेबीमे दू-चारि करी जमीन रहैए तहिना गिनती पदाधिकारीक जेबीमे सए-पचास भोँट रहै छै जेकर प्रयोगसँ उ हारल पार्टीकेँ जीता सकैए। जदी विशेष दल द्वारा भोँटक गिनती विशेष निगरानीमे कएल जाए तँ समस्यासँ उबरल जा सकैए। गिरिराज- बारहम समस्या अछि अफसरशाही केनाइ। जेना चोर-चोर ममियौत भाए तहिना अफसर-अफसर मसियौत भाए। अफसर-अफसरक बात सुनबे करत आ ओकर कहल करबे करत। सभ प्रत्याशीकेँ कोनो नै कोनो रूपमे ऊपरका अफसरसँ मेल रहै छै। विशेष परिस्थितिमे ओइ मेलक प्रयोग होइ छै आ एकटा अफसर अपन पक्षक हारल पार्टीकेँ जीता दइ छथिन। जे नीक नै भेलै। कहबी छै, जखनि बड़के छुलाय तँ छोटका भरे लागल खाय। जखनि बड़के बैमान भऽ जाइए तँ छोटका भेल वा हएततँ कोन जुलूम? राम प्रताप- तेरहम समस्या अछि सुदूर इलाकामे चुनाव निरीक्षक के नै पहुँचनाइ। अइसँ ओइ क्षेत्रमे मतदन मनमाना भऽ जाइ छैो जिसकी लाठी उसकी भैंसबला गप आबि जाइ छै। चुनाव अधिकारीकेँ बंदी बना दबंग बेक्ती बुथपर कब्जा कऽ लइ छै। यातायातक साधनक अभावमे जदी हेलीकाँप्टर प्रयोगसँ निरीक्षक के बुथ धरि पहुँचाएल जाए आ दोखीकेँ पकड़ि कड़गर सजा देल जाए तँ समस्यासँ उबरल जा सकैए। गिरिराज- दूटा छूटल समस्यामे पहिल अछि प्रत्याशीकेँ भोँट कीननाइ। प्रत्याशी एक सए-दू सए टके भोँट कीनै छथि। ऊहो देखा कऽ नै। चोरा-नुका कऽ। चुनावसँ पहिने एकदिन वा दूदिन रातिमे घरे-घरे घूमि कऽ पाइ बँटै जाइ छथि। मूर्ख-मचंड जनता टटका स्वार्थ लीन भऽ बेसी पाइबला पार्टीकेँ दइ छै। भलेहिं उ पार्टी केतबो सड़ल कि‍ए ने होउ। राम प्रताप- अन्तिम समस्या हमरा समक्ष अछि मतदाताकेँ ताड़ी दारू पीआ अपना बशमे केनाइ। प्रत्याशी प्रत्यक्ष रूपसँ वा अप्रत्यक्ष रूपसँ जनताकेँ ताड़ी-दारू पीएैक खर्चा दइ छथिन। जनताकेँ नीशाँमे मता कऽ उन्टा-पुन्टा, सीखा-पढ़ा अपना दि‍स करै छथि आ भोँट बटोरै छथि। (मानसिंह आ चानसिंह खैनी चुना कऽ खा पुच-पुच थूक फेंकै छथि। राम प्रताप आ गिरिराज दुनूक किरदानी देखि रहल छथि। मानसिंह आ चानसिंह ठाढ़े-ठाढ़ ओंघा गेल। निन्नमे दुनू एक-दोसराक देहपर पुच-पुच थूक फेंकैए आ धुसि-धुसि खसैए।) गिरिराज- (खीसियाकेँ) मानसिंह, चानसिंह। (दुनू एक दोसराक कान पकड़ि उठा-बैसी करए लगल आ पुच-पुच थुकड़ए लगल।) अखनि बरन्डा साफ कर। (दुनू ओंघारा कऽ बरन्डा पोछए लगल आ पुच-पुच थूकए लगल।) अखनि कुर्रा करै जो। (दुनू अंदरसँ पानि आनि कुर्रा कऽ एक दोसराक देहपर फेंकए लगल।) अखनि बर्दी साफ करै जो। (दुनू कमीज निकालि कुर्रासँ कमीज खींचए लगल।) राम प्रताप- गिरिराज बाबू, काल्हिसँ ऐ दुनू गोटेकेँ छुट्टी दऽ दियौ। ई सभ बाति गेल हेन। (दुनू कान पकड़ि अलग-अलग उठा बैसी करैए। पटाक्षेप- सातम दृश्य- (स्थान- नोमिनेशन कार्यालय। नोमिनेशन पदाधिकारी हरिदेव, बड़ा बाबू आनंद, किरानी बैजू आ चपरासी राघव कार्यालयमे उपस्थित छथि। सभ कियो अपन काजमे भीड़ल छथि।) राघव- की बैजू? आइ माल होंसतैत-होंसतैत नेहाल भऽ जेबें। बैजू- से तूँ केना बुझै छिहीन? राघव- आइ नोमिनेशन लेल नेता सभ औतै। सभ खुशी-खुशी माल-पानी देबे करतै। बैजू- नमहरका बटुआ आनलेँ हेन कीने? राघव- (बटुआ देखबैत) इइए नवका आ नमहरका बटुआ। बैजू- लिहेँ, गोलाबरदबला लटकलहा। नेता सभ कानूनची होइ छै आ कैयाब होइ छै। उ तँ अपने अनका सोधैपर लागल रहै छै। राघव- हमहूँ बड़्ड हेहर छिऐ। हँसाकेँ-खेलाकेँ-पएर-दाढ़ी पकड़ि कऽ जेना हेतै तेना माल टनबे करबै। नै तँ मोहरे नै देबै। हम कोनो आइसँ चपरासी छी। बैजू- से तँ हमरासँ सीनीयर छेँ। हौ भाय, सुतार। साँझमे पार्टी चलैतै करकराकेँ। राघव- आ जौं नै सुतरलै तँ सौंझुका पर्टी तोरा लगतौ। तैयार छँए ने? बैजू- तूँ अपन पर्टी अपने लग रखऽ। (आगू-आगू गोबर्धनलाल, पाछु-पाछु रामेश्वर, जीतेन्द्र, श्रीलाल आ पाँचटा समर्थक राम, श्याम, महेश, गोपाल आ सोहन छथि।गोबर्धन माला पहिरने छथि। समर्थक नारा लगा रहल अछि। गोबर्धन हाथ जोड़ने मुसका रहल छथि। तीन-चारिबेर अन्दरमे नारा लागल।) राम- (अंदरसँ) गोबर्धनलाल जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। रामू- कंगाली पार्टी जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। राम- देशक नेता केहेन हो? चारू- गोबर्धनलाल जेहेन हो। राम- देशक लाल। चारू- गोबर्धनलाल। (सभक प्रवेश। फेर नारा लगबैत सभ ठाढ़ कार्यालयक आगूमे।) राघव- अहाँ सभ कार्यालक आगूमे हल्ला-गुल्ला नै करू। अखनि कार्यालय खाली अछि। जल्दी काज कराउ आ निकलू। नेताजी परणाम।(नारा बन्न भेल) गोबर्धन- परणाम परणाम। की हाल-चाल राघव? राघव- सभ ठीक छै। अहूँ ठीक छी। ऐबेर अहाँक गोटी लाले अछि। जतरा किछु बनाउ ने नेताजी? पहिने-पहिने एलौं हेन। गोबर्धन- (मुड़ी डोलाए) हेतै, अबस्‍स हेतै। (गोबर्धनलाल बैजू लग जा डायरीसँ निकालि अपन प्रमाण पत्र जमा कऽ हुनकासँ फारम लऽ कऽ अपनेसँ शीघ्र भरि आनंद लग गेलथि। आनंदकेँ उ फारम देलथि।) आनंद- (फारम पढ़ि) नेताजी, हरबडीमे गड़बड़ी भऽ जाइ छै। देखियौ एतए दसखत छूटल अछि। गोबर्धन- (मुस्कीआइत) लाउ सर, दसखत कऽ दइ छिऐ। (गोबर्धन दसखत केलनि। फेर आनंद दसखत केलनि।) आनंद- ई लिए, सर लग जाउ। (गोबर्धन हरिदेव लग जा हुनका फारम देलथि। हरिदेव- (फारम पढ़ि) एते वार्ड-संख्या छूटल अछि। (गोबर्धन वार्ड-संख्या भरलनि। हरिदेव दसखत केलनि। राघव हरिदेवसँ फारम लेलथि।) राघव- नेताजी, जल्दी करू। जतरा बनाउ। फेर भीड़ भऽ जाएत तँ अहूँ फँसि जाएब। गोबर्धन- काल्हि अबै छी तँ लेब। राघव- तखनि काल्हिए फारम लऽ लेब। गोबर्धन- हम शिकाइत कऽ देब। बेकारमे फँसि जाएब। राघव- से हम कोनो जबदस्ती मंगै छी। खुशीसँ मंगै छी। प्रेमसँ मंगै छी। अहाँ हीरा छी। अहाँ जनताक मालिक बनए चलल छिऐ। अबस्‍स बनबो करबै। अहीं सभपर ने हमरो बड़ आश छै। होउ शुभ काजमे बिलम नै करू।(गोबर्धन एगो नमरी निकालि राघवकेँ देलनि। राघव प्रसन्न भऽ मोहर देलक।) आब अहाँ सभ जाउ। चुनावक तैयारी करू गऽ। (नारा लगबैत सबहक प्रस्थान) राम- गोबर्धनलाल जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। राम- कंगाली पार्टी जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। राम- गोबर्धन भैया जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। राम- कटहर छाप जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। (सबहक प्रस्थान। अन्दरमे फीरन, कृष्णानंद आ कन्हैयाक संग गोलू, जीबछ, राजा, पलट आ पंडित पाँचटा समर्थक छथि। फीरन माला पहीर सजल-सधल छथि। फीरनक पार्टी अन्दरमे नारा लगबै छथि।) गोलू- (अंदरसँ) फीरन भैया जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। गोलू- मारूती पार्टी जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। (आगू-आगू फीरन आ पाछू-पाछू कृष्णानंद, कन्हैया आ सभ समर्थकक प्रवेश) गोलू- मौगी-साइकिल जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। गोलू- देशक नेता केहेन हो। चारू- फीरन भैया जेहेन हो। राघव- नेताजी परणाम। फीरन- परणाम, परणाम। ठीक छी ने? राघव- जी ठीक छी। अपने सभ शान्‍त भऽ कऽ आउ। बड़ नीक समैपर एलौं हेन। मुहूर्तो शुभ अछि। अहाँक विजय पक्के अछि। (फीरन अपन पमाण-पत्र बेगसँ निकलि बैजूकेँ दऽ फारम लेलथि। फारम कृष्णानन्द भरि रहल छथि।) बैजू- नेताजी, स्वहस्तलिखित फारम हेबाक चाही। अपनेसँ भरू। नै तँ आवेदन रद्द भऽ जाएत। फीरन- अहाँ रहैत हमर आवेदन रद्द भऽ जेतै। जूलूम भऽ जेतै। बैजू- अहाँ अपनेसँ भरू। तइमे कोनो तिरोटी हेतै तँ सुधार हम कऽ देबै। फीरन- अहाँ सभकेँ रहैत हम फारम भरब तँ लोक की कहत? बैजू- नै भरबै तैयो लोक कहत जे नेताजीकेँ फारमो नै भरल होइ छै। नै भरलापर लोक आर बुड़बक बुझत। फीरन- बैजू बाबू, अहीं भरि दियौ। जे जेना कहबै से भऽ जेतै। बैजू- अहाँकेँ भरल नै होइए से? फीरन- पढ़ला-लिखला बड़ दिन भऽ गेलै। सभटा बिसरि गेलिऐ। बैजू- दसखतो होइए की नै? फीरन- जाए ठाम कहब ताए ठाम कऽ देब। बैजू- प्रमाण-पत्र बी.ए. पासक अछि। प्रणाम-पत्र जलिया तँ नै अछि? फीरन- नै बैजू बाबू, हमहींटा भुसकोल छी। हमर प्रमाण-पत्र भुसकोल नै अछि। बैजू- अच्छा फारम लाउ, हमहीं भरि दइ छी। (बैजू फीरनक फारम भरै छथि। फीरन एगो पनसौआ निकालि बैजूक जेबीमे राखि देलथि।) बैजू- हे एत्त दसखत करू। (फीरन दसखत केलनि।) बड़ा बाबू लग जाउ। (बड़ा बाबू फारम लऽ कऽ पढ़लथि।) आनंद- नेताजी, फारम स्वहस्तलिखित हेबाक चाही। अहाँ बैजू बाबूसँ भरेलौं। कहीं आवेदन रद्द ने भऽ जाए। (फीरन एकटा पनसौआ आनंदक जेबीमे रखि देलथि।) फीरन- सर, अहीं हाथमे सभ किछु छै। जे करबै से हेतै। आनंद- जाउ, हमरापर छोड़ि देलौं, तखनि किछु नै हएत। (अपन दसखत कऽ आनंद फीरनकेँ फारम दऽ देलनि।) जाउ नेताजी सर लग जाउ। (फीरन हरिदेव लग गेलथि।) फीरन- सर, प्रणाम। (फीरन हरिदेवकेँ फारम देलथि।) हरिदेव- (फारम पढ़ि) नेताजी, अहाँ बी.ए. पास छी। मुदा एकटा आवेदन नै भरऽ अबैए। ई घिनौना बात भेल। अहाँ इसकूल की करए जाइ छेलिऐ? पढ़ैले आकि‍ गाछी-बिरछी बौआइले? मैट्रीक, इन्टर आ बैचलर कोना कऽ गेलिऐ। लगैए बोर्ड वा परिषद बताह भऽ गेल हएत। जइ देशक नेता एहेन योग्य हेतै, ओइ देशक दुर्दशा ब्रहमो नै मेटा सकैए। अहाँक आवेदन रद्द करएबला अछि।बाजू की विचार? फीरन- सर, गोर लगै छी। आवेदन रद्द नै करियौ। (फीरन आनंद लग जा किछु कनफुस्की केलथि। फेर आनंद हरिदेव लग आबि कनफुस्की केलथि।) हरिदेव- जाउ नेताजी, आवेदन रद्द नै करै छी। बड़ा बाबूक पैरबी सुनहे पड़त। (हरिदेव दसखत कऽ देलनि‍। राघव फारम लऽ लेलथि।) राघव- नेताजी, मोहर दिआइ माल-पानी दियौ। फीरन- पहिने मोहर दियौ ने, तखनि दइ छी।(राघव मोहर देलथि) राघव- लाउ नेताजी। (फीरन एगो नमरी देलनि।) धुह, ई की देलिऐ। बनबै एम.पी. आ देलिऐ एक्के सए टाका। फीरन- एम.पी. बनबै, तखनि जे कहब से देब। राघव- एम.पी. बनला पछाति अहाँ अपन माए-बापकेँ हाथ लगबे नै करब आ हमरा केतएसँ लगब। फीरन- हम सभकेँ हाथ लगबै। केकरो नै बिसरबै। राघव- बेस नेताजी। ताबे किछु आरो किरपा करियौ। (फीरन एक सए टाका आर देलथि आ मोहर लऽ सभ नारा लगबैत प्रस्थान।) गोलू- फीरन भैया जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। गोलू- मारूती पार्टी जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। गोलू- मौगी साइकिल जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। (सबहक प्रस्थान) ब्रजेश, सुरेश, राकेश, भोलू आ शोभूक संग समर्थक नवीन, प्रवीण सुमन, सजीव आ राहुल अन्दरमे छथि।ब्रजेश प्रत्यासिक रूपमे सजल-धजल अछि। ब्रजेश आगू-आगू आर सभ कियो पाछू-पाछू नारा लगबैत प्रवेश।) राहुल- ब्रजेश भैया जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। राहुल- भैंसा पार्टी जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। राहुल- बत्तू छाप जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। राहुल- भैंसराज जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। (नारा बन्न भेल) राघव- नेताजी प्रणाम। ब्रजेश- प्रणाम-प्रणाम। राघव- कार्यालयमे अपनेक स्वागत अछि। (सभ कार्यालय पैसलथि। पी.ए. सुरेश बैजूसँ फारम लऽ कऽ भरि ब्रजेशसँ दसखत करा कऽ फारम आनंदकेँ देलनि।) आनंद- (फारम जाँचि कऽ) सर ठीक अछि। (आनंद दसखत कऽ देलनि आ सुरेश फारम लऽ कऽ हरिदेव। लग गेला। ब्रजेश कुरसीपर बैस पेपर पढ़ै छथि।) हरिदेव- (फारम पढ़ि) सर फारम ठीक अछि। मुदा अहाँ कि‍ए भरलिऐ? स्व हस्तलिखित हेबाक चाही। सुरेश- एम.पी. साहैबकेँ कष्ट केना दैतयनि? हरिदेव- अइमे बड़ बेसी कष्ट तँ नै छेलै। साहैबकेँ फारम भरैमे कष्ट होइ छन्‍हि‍। मुदा घोटाला करैमे कष्ट नै होइ छन्‍हि‍। सुरेश- चूपु-चूपु, साहैब सुनि जेता। हरिदेव- सुनि जेता की हेतै? हम कोनो गलती नै कहै छियनि। अहीं सोचियौ सर, देशके कानून बनेनिहार अपने-अपन कानूनकेँ पालन नै करै छथिन, ओइ देशकेँ की गति हेतै? दुर्दाशा छोड़ि आर की भऽ सकै छै? सुरेश- छोड़ू सर, केते समुन्दर उपछब? हरिदेव- करैले तँ हम कए देब मुदा आवेदन रद्द करैबला अछि। सामनेमे कानूनक उल्लंघन नै शोभै छन्‍हि‍। सुरेश- बुझैले तँ सभ गप बूझिते छिऐ। मुदा करबै की? दसखत कऽ दियौ। हरिदेव- लाउ कऽ दइ छी। मुदा एना नै हेबाक चाही। (हरिदेव दसखत केलनि। राघव हरिदेवसँ फारम लऽ लेलनि।) राघव- सर, ऐपर मोहर देबै। किछु खर्चा-पानि दियौ ने? सुरेश- एहेन बात नै बाजू। साहैब सुनि जेता। नोकरीपर पड़ि जाएत। राघव- कि‍ए यौ सर, हम प्रेमसँ मंगै छी तँ हमर नोकरी चलि जाए आ जे हरदम घोटाला करैत रहै छथिन तँ हुनका आर घोटालाक मौका भेटए। तँए ने भारत एते पछुआएल अछि आ रहत। सुरेश- भारतक पछुएनाइ वा अगुएनाइक चिन्ता लेल दिल्लीमे बड़ कलाकार सभ बैसल छथि। राघव- दिल्लीमे कियो कलाकार नै छथि। सभ कलाकार छथि जे हरदम अपने जोगाड़मे रहै छथि। सर, हमरा ओत्ते नै सुनै-सुनबेकेँ अछि। खुशीसँ किछु देब तँ दिअ नै तँ कोनो बात नै। सुरेश- अच्छा, मोहर देने आउ। (राघव मोहर देलथि। सुरेश फारम लेलथि।) फेर एक सप्ताहमे क्षेत्र दौड़ामे आएब तखनि लऽ लेब। राघव- धन्य छी प्रभु, धन्य छी। (नारा लगबैत सबहक प्रस्थान।) राहुल- ब्रजेश भैया जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। राहुल- भैंसा पर्टी जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। राहुल- बत्तू छाप जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। राहुल- देशक नेता केहेन हो? चारू- ब्रजेश भैया जेहेन हो। (नारा बन्न भेल। अन्दरमे सुभद्रा, माला, चन्द्रमोहन आ उमाकांत अपन समर्थक लालू, कालू, रहीम, करीम आ बदलूक संग उपस्थित छथि। सुभद्रा प्रत्याशीक रूपमे सजल छथि। नारा लगबैत सबहक प्रवेश। आगू-आगू सुभद्रा हाथ जोड़ने छथि।) लालू- सुभद्रा दीदी जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। लालू- खच्चर पार्टी जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। लालू- गदहा छाप जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। (नारा बन्न भेल) राघव- मैडम प्रणाम। सुभद्रा- प्रणाम, प्रणाम। राघव- मैडम बड़ देरी कऽ देलिऐ अपने। सुभद्रा- कनी देरी तँ भऽ गेल। की करबै? नोमीनेशनक तैयारीमे कनी बेसी समए लगि गेल। आर सभ ठीक कीने? राघव- जी सभ ठीक छै। आउ, कार्यालयमे अपने सभकेँ स्वागत अछि। जल्दी काज कऽ लिअ। भीड़ भऽ जाएत। (सुभद्रा अपनेसँ बैजूकेँ प्रमाण पत्र देखा फारम लऽ भरि कऽ आनंदकेँ देली।) आनंद- (फारम पढ़ि) मैडम, अक्षर बड्ड नीक अछि। भरलो ठीक अछि। (आनंद दसखत कऽ सुभद्राकेँ फारम दऽ देलथि। सुभद्रा हरिदेव लग हुनका फारम देली।) हरिदेव- (फारम पढ़ि ऊँपर-नि‍च्‍चाँ निहारि) बड़ नीक फारम भरलौं हेँ। अक्षर आँखिमे रखैबला अछि। (हरिदेव दसखत कऽ देला। राघव फारम लऽ लेलथि।) राघव- मैडम, ऐपर मोहर दइले किछु हमरोपर दया करियौ। (सुभद्रा पर्ससँ दूटा नमरी निकालि राघवकेँ देली। राघव शीघ्र मोहर दऽ फारम सुभद्राकेँ देलथि। सभ कियो नारा लगबैत प्रस्थान।) लालू- सुभद्रा दीदी जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। लालू- खच्चर पार्टी जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। लालू- गदहा छाप जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। लालू- मदर मालती जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। (नारा बन्न भेल। अन्दरमे विवेक, सुरज, पंकज, मोहन आ पप्पुक संग समर्थक बालचन, लालचन, नन्दन,कुन्दन आ चन्दन दारू पी कऽ मस्तीमे छथि। विवेक खूम सजल छथि। सभकेँ नारा लगबैत झुमैत-झुमैत प्रवेश) बालचन- विवेक भैया जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। बालचन- पेस्तोल छाप जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। बालचन- बारूद पार्टी जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। बालचन- विवेक भैया अमर रहे। चारू- अमर रहे, अमर रहे। (सभ कियो झूमैत-झामैत नाच करै छथि। राघव कातमे ठाढ़ भऽ मुसकिया रहल छथि।) राघव- नेताजी प्रणाम। विवेक- प्रणाम प्रणाम। की रौ चपरासिया की हाल-चाल छौ? नीके हेबें। राघव- अहाँ कहि देलिऐ तँ नीक रहबे करब। चलै चलू, नोमिनेशन करा लिए गऽ। विवेक- चल, आबै छी। आँफिसमे सभकेँ कहि दिहनि जे विवेक बाबू आबि रहल छथि। (सभ कियो कार्यालय पहुँचलथि। विवेक राघव लग पहुँचल। सभ झूमि रसे-रसे नाचि रहल छथि।) रे चपरसिया, कतए नोमिनेशन होइ छै? राघव- नेताजी, ई सभ्यताक बात नै भेल। कनी सभ्यतासँ बाजू। विवेक- चपरासी भैया, केतए नोमिनेशन होइ छै? राघव- (बैजू दि‍स इशारा करैत) बैजू बाबू लग फारम लिअ आ भरू। (विवेक बैजू लग जा फारम लऽ कऽ अपने भरि रहल छथि। भरैत-भरैत कखनो-कखनो धरफरा कऽ गिरए लगै छथि। विवेक फारम भरि लेलथि।) विवेक- रौ चपरसिया भैया, फारमकेँ आब की करबै? राघव- (आनंद दि‍स इशारा करैत) हुनका दियनु। (आनंद लग जा कऽ विवेक हुनका फारम देलथि।) आनंद- (नाक-भों सिकुड़ाबैत आ विवेकेँ ऊँपर-नि‍च्‍चाँ निहारि कऽ) अहिना फारम भरल जाइ छै? एते गलतीसँ फारम रद्द भऽ जाएत। विवेक- (मूडमे) कोन सरबा रद्द करेगा, ओकरा हम देख लेगा। आनंद- मुँह सम्हारि कऽ बाजू, प्रत्याशी छी। विवेक- जी सर, गलती भऽ गिया। सर, दसखत कऽ दीजि‍ए। (आनंद दसखत कऽ देलनि। फारम हुनकासँ विवेक लऽ लेलनि।) चपरासी भैया, ऐ फारमकेँ आब की करेगा? राघव- (हरिदेव दि‍स इशारा करैत) हुनका दियनु। (विवेक झुमैत-झामैत हरिदेव लग जा कऽ फारम देलथि) (हरिदेव फारम पढ़ि विवेककेँ ऊँपर-नि‍च्‍चाँ निहारि कऽ देखै छथि।) विवेक- हमरा की देखै छी अल्हुआ। आकि‍ चुपचाप दसखत करब। हरिदेव- जइ देशमे एहेन सभ्य प्रत्याशी एम.पी. सँ ठाढ़ भऽ रहल छथि ओइ देशक कल्याण युग-युगान्तर पछातिओ हएत की नै, से नै कहि। अहाँक फारम बिल्कुल रद्द करैबला अछि आ हम रद्द करै छी। विवेक- कनी रूकि जाउ, तखनि रद्द करब। बौआ पंकज आ पप्पु हाकिम फारम रद्द करए चाहै छथिन, से कनी हिनका देख लियनु। (नाच बन्न भऽ गेल। पंकज आ पप्पु हरिदेवकेँ दुनू कनपट्टीमे पेस्तोल सटा देलक।) पंकज- सार, आब बाज, दसखत करबिहीन की नै? रद्द करबिहीन? हरिदेव- (डरे सकपकाति) हँ कऽ दइ छिऐ। रद्द नै करबै। हमरा छोड़ि दइ जाउ। पप्पु- पहिने दसखत कर, तखनि छोड़बौ। (हरिदेव दसखत कऽ फारम विवेककेँ देलनि।) आँफिसक सभ आदमी, कान खोलि सुनि लइ जाइ जो जे ई बात केतौ नै बजै जाइ जइहिन। नै तँ हमर दोख नै दइ जाइ जइहनि। विवेक- बौआ सभ, हाकिमकेँ छोड़ि दहक। हाकिम बड़ नीक लोक छथिन। अपन्न लोक छथिन। आब किछु एम्हर-ओम्हर नै करै जाइ जेथिन। (पंकज आ पप्पु पेस्तोल हटा ओत्तसँ हटि गेल। सभ कियो नारा लगबैत प्रस्थान करै छथि।) बालचन- विवेक भैया जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। बालचन- पेस्तोल छाप जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। बालचन- बारूद पार्टी जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। बालचन- विवेक भैया अमर रहे। चारू- अमर रहे, अमर रहे। बालचन- वीर विवेक मूर्दावाद। चारू- मूर्दावाद मूर्दावाद। (सबहक प्रस्थान आ नारा बन्न भेल) हरिदेव- आनंद बाबू, बैजू बाबू। देखलिऐ दुनियाँ केतए पहुँच गेल अछि। आइ हम बाल-बाल बचलौं। नै तँ उचित बजै खातिर आइ गेले छेलौं। चुनाव बड्ड रिश्की काज छै। तइमे जौं किछु भऽ गेल, जेना मारल गेलौं तँ सरकार नगन्य धियान देत। हमरा परिजनकेँ दूधक डाढ़ी जकाँ मदति भेटत। कारण हम साधारण सरकारी नोकर छी। ओहए जौं पैघ सरकारी नोकर मारल जेता तँ हुनका परिजनकेँ हमरा अपेक्षा कमसँ कम दस गुना मदति बेसी भेटतनि। सरकारक नीति‍ए बड़ घिनौना छै। मुदा अपना सभ कए की सकै छी? पटाक्षेप- दोसर दृश्य- (स्थान- सभागार। मंचपर कुरसीपर बैसल छथि श्रीलाल। राम, श्याम, महेश, गोपाल आ सोहन ठाढ़ छथि। राम नारा लगा रहल छथि। मंचपर कंगाली पर्टीक बैनर टाँगल अछि।) राम- गोबर्धनलाल जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। राम- कंगाली पर्टी जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। राम- कटहर छाप जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। राम- देशक लाल। चारू- गोबर्धनलाल। श्रीलाल- आब अहाँ सभ कनी दम धरू। नारा बन्न करू (नारा बन्न भेल) अखनि धरि नेताजी नै एला हेन। हमर जनता जनार्दनकेँ बैसल-बैसल वा ठाढ़ भेल-भेल पएर दुखा गेल हेतनि। कहु तँ सभ काज-धंधाबला लोक सभ छथिन, सभकेँ काज हर्जा होइत हेतनि। खाइर धीरज धरै जाइ जाउ। अबिते हेथिन। हुनको क्षेत्रक दौड़ा रहै छन्‍हि‍ कीने। केतौ फँसि गेल हेथिन। (गोबर्धनलाल, रामेश्वर आ जीतेन्द्रक प्रवेश। थोपरीक बोछार भेल। गोबर्धनलाल हाथ जोड़ि प्रणाम करै छथि। सभ कुरसीपरबैसला।) राम- गोबर्धनलाल जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। राम- कटहर छाप जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। श्रीलाल- अहाँ सभ असथीर रहै जाउ। आब रामेश्वर भाय अपने सभकेँ दू शब्द कहता। रामेश्वर भाय पार्टीक समरपि‍त बेक्ती छथि। ई आइसँ नै, जमानासँ ऐ पार्टीमे छथि। रामेश्वर- आदरणीय सज्जन वृन्‍द, रामेश्वर भायक हार्दिक अभिनंदन। ऐबेर कंगाली पार्टीसँ गोबर्धनलाल भायकेँ टिकट भेटलै हेन। भाय नै, नै करै छेलथि जे जनता-जनार्दन होइ छथिन जिनकर सेवा बड़ भरिगर काज होइ छै। हमरासँ एते पैघ काज नै सम्हरत। मुदा जनताक प्रति हिनक भावना तेते नीक छेलनि जे पार्टी मजबूर भऽ हिनका टिकट देलकनि। पार्टी हिनकर जनसेवासँ अति प्रसन्नअछि। एतबे नै हिनका कोनो इएहटा गुण नै छन्‍हि‍ अपितु अनेक गुण छन्‍हि‍। जेना ईमानदारी, जुझारूपन, कर्मठता, लोकप्रियता इत्यादि। अपने सभसँ हमर करबद्द आग्रह जे जदी अपने सभकेँ एकटा सुयोग्य नेता चुनबाक हो तँ भाय गोबर्धनलालकेँ कटहर छापपर बटन दाबि विजयी बनाउ। हमर आत्म विश्वास अछि जे चनौरानगर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रसँ भाय गोबर्धनलाल अबस्‍स चुनल जेता। बल्कि चुना गेला। (थोपड़ी बोछार भेल। रामेश्वर बैस गेला।) श्रीलाल- (कुरसीपर सँ उठि) भाय रामेश्वरकेँ कोटि-कोटि धैनवाद। आब अपना सबहक प्रिय नेता गोबर्धनलालसँ दू शब्द सुनब। मुदा तइसँ पहिने भाय जीतेन्द्रसँ दू शब्द सुनल जाउ। (श्रीलाल कुरसीपर बैस गेला।) जीतेन्द्र- (कुरसीपर सँ उठि हाथ जोड़ि) आदरणीय सभामे उपस्थित भाय-बहिन आ माता-पिता। हमर हार्दिक प्रणाम। सभसँ पहिने ऐ मंचपर पार्टीक तरफसँ दू शब्दकहैक हमरा मौका भेटल, तइले आइ हम अतिधन्य छी। हम कंगाली पार्टीकेँ धैनवाद दइ छी आ अहूसँ पहिने अहाँ सभकेँ धैनवाद दइ छी जे एते कालसँ धीरज धऽ कऽ अपन प्रिय नेता गोबर्धनलालकेँ सुनऽ आ चुनऽ रूकल छी। कहैत तँ लाजो होइए मुदा कहि दइ छी जे हिनकासँ योग्य नेता नै भेटत, नै भेटत, नै भेटत। तँए हिनकर कटहर छापपर बटन दाबि हिनका भारीसँ-भारी भोँट से जीताउ आ सुख-शांतिक जिनगी बीताउ। (ई कहि जीतेन्द्र बैस रहला कुरसीपर) श्रीलाल- (कुरसीपर सँ उठि) भाय जीतेन्द्रकेँ धैनवाद अन्तमे कठगर दही आ गोटगर चीनी परसता अपना सबहक प्रिय नेता गोबर्धनलाल। (श्रीलाल कुरसीपर बैस गेला।) गोबर्धनलाल- (कुरसीपर सँ उठि हाथ जोड़ि) परम आदरणीय माए-बहि‍न,भाय-बाप, धिया-पुता आ बुढ़ा-बुढ़ी। गोबर्धनलालक सादर नमन। हम ठाढ़ होइबला नै रही। मुदा अपने सबहक प्रेम हमरा ठाढ़ होइसँ मजबूर कऽ देलक। जदी अपने सभ हमरा काजसँ प्रसन्न होइ तँ ऐबेर हम अपनेक सेवा करैक मौका माँगि रहल छी। आइ अपने सबहक भीड़ आ श्रद्धा हमरा नवजीवनक संदेश दऽ रहलए आ उ संदेश अछि कटहर छापक जीत। (थोपरीक बोछार) अपन जीतपर गछै छी आ गछबे नै करै छी पक्का पुराएब। सभ घरमे एक-एकटा पाकल कटहर देब जइमे तीनटा फेदा हएत- कुआ, आँठि आ नेरहा। ओइ कटहरक उपयोगसँ जदी देहमे कोनो तरहक बेमारी हुअए तेकर इलाजक पूर्ण खर्च एम्बुलेंस सहित हम वहन करब। (थोपरीक बोछार भेल।) ऐ उपहारसँ हमरा मन नै भरल। हम फेर गछै छी जनानीकेँ एक-एकटा बनारसी साड़ी आ मुसलमान भाय ले एक-एकटा हाथी छाप लूंगी। वदे नै करै छी निभेबो करब। (थोपरीक बोछार भेल।) हमरा आशीर्वादमे एगो भोँट आ एगो नोट चाही। हम बेसी किछु नै कहब। बेसी भचर-भचर केलासँ नीक नै होइ छै। नीक होइ छै काज केलासँ। अन्तमे अपने सभकेँ हार्दिक धैनवाद दैत कहब जे कंगाली पार्टीक कटहर छापकेँ नै बिसरबै। (थोपरीक बोछार भेल। गोबर्धनलाल हाथ जोड़ि प्रणाम कऽ बाइ-बाइ करैत प्रस्थान।) पटाक्षेप- दोसर दृश्य- (स्थान- सभागार। मंचपर मारूती पार्टीक बैनर टाँङल अछि। मंचपर गोलू, जीबछ, राजा, पलट आ पंडित उपस्थित छथि। सभ कियो नारा लगा रहल छथि।) गोलू- फीरन भैया जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। गोलू- मारूती पार्टी जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। गोलू- मौगी साइकिल जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। (नारा बन्न भेल।) पंडित- मौगी साइकिलपर, मौगी साइकिलपर बटन दबेबै भैया मौगी साइकिलपर। (बटन दबेबै भैया, यौ दबेबै भैया) मौगी साइकिलपर। (फीरन भैया, मारूती पार्टी प्रिय नेता, पुरान पार्टी) योग्य कर्मठ, नेक प्रत्याशी मौगी साइकिलपर बटन दबेबै यौ भैया। (जनता जनार्दन, नीक काज, शिक्षा, बिजली, उधम राज) (सड़क रस्ता, बनत समाज) मौगी साइकिलपर बटन दबेबै यौ भैया...। (हिन्दु मुस्लिम, सीख इसाइ आपसमे सभ, भाई-भाई) (गरीबक मसीहा, पर्वत राइ) मौगी साइकिलपर बटन दबेबौ यौ भैया... । गोलू- अपने सभकेँ देखि अपार हर्ष होइए आ बिसवास सेहो होइए जे मौगी साइकिल छापकेँ विजय ऐबेर निश्चित अछि। आब अपना सबहक नेता अबिते हेता। हुनका दिन-राति चैन कहाँ छन्‍हि‍। हरदम क्षेत्रक दौड़ामे भीड़ल रहै छथि आ भीड़थिन नै तँ सेहो नीक नै। (फीरन, कृष्णानंद आ कन्हैयाक प्रवेश। थोपड़ीक बोछार भेल। फीरन दर्शककेँ हाथ जोड़ि कऽ प्रणाम करै छथि। फेर सभ कियो कुरसीपर बैसै छथि। गोलू उठलथि।) गोलू- फीरन भैया जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। गोलू- मौगी साइकिल जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। गोलू- के जीतत भाय केँ जीतत? चारू- फीरन मौगी साइकिल जीतत। (नारा बन्न भेल।) गोलू- आब कृष्णानंद भायसँ आग्रह करै छियनि जेउ अपने सभकेँ किछु शब्द सनेश दथि। कृष्णानंद- (ठाढ़ भऽ कऽ) समस्त जनता जनार्दन आ उपस्थित नेता लोकनि, सप्रेम नमस्कार। हम जनता जनार्दनकेँ की सनेश देबनि? जनते जनार्दन हमरा सनेश दइ छथि जे ऐबेर फीरन भायक जगता जोर छन्‍हि‍ आ उ जीतबे करता, से निश्चित। हम एतबे आग्रह करब जे जदी अपने सभ देशक चहुमुखी विकास चाहै छी तँ फीरन भैयाकेँ नै बिसरब। नै तँ पाँच बरख धरि झूलैत रहब। धैनवाद। (कृष्णानंद कुरसीपर बैस गेला।) गोलू- (ठाढ़ भऽ कऽ) आब भाय कन्हैयासँ सादर आग्रह जे उ अपन मुखार बिन्दुसँ संक्षेपमे प्रवचन दथि। (गोलू बैसला आ कन्हैया उठि ठाढ़ भेला।) कन्हैया- आदरणीय भाय-बहि‍न, हमर हार्दिक प्रणाम। सभसँ पहिने अपनेसँ कहब जे हम बबाजी नै छी जे प्रवचन देब। हँ एतेक अबस्‍स कहब जे हमरा बबाजीसँ बड़ प्रेम रहैए आ अहूसँ बेसी प्रेम सँकठाहासँ रहैए। हम प्रारंभेसँ डेढ़बा माछक शौकीन छी। कारण जाए कअर खाएब ताएटा मुड़ी मुँहमे जाएत। ओइ मुड़ी लेल काएगो सँकठाहासँ उठ्ठम-पटका भऽ गेल जइमे कतेकोकेँ हम हाड़ तोड़ि देलिऐ। ई कमाल ओइ डेढ़वा मुड़ीक अछि। हम लीकसँ हटि गेल रही। तइले क्षमा चाहै छी। आदरणीय साँकट आ बबाजी लोकनिसँ हमर करबद्द आग्रह जे खान-पानकेँ बिसरि जाति-पाँतिसँ ऊपर उठि भाय फीरनकेँ जीताउ आ अपने देशकेँ विकाससँ सजाउ। हिनकर छाप छियनि- मौगी साइकिल छाप। मौगी साइकिल छाप, सबहक अप्पन छाप। ई छाप जनानी विकासक छाप छी आ जनानीक विकाससँ देशक विकास पूर्ण सम्‍भव अछि। अन्तमे सभकेँ धैनवाद कहब जे मौगी साइकिल छाप सबहक दिलक छाप छी। (कन्हैया बैस गेला। गोलू उठला।) गोलू- अन्तमे अपन प्रिय नेता, भाय फीरनसँ नम्र-निवेदन जे उ अपन जनताकेँ दूटा अमृत वचन कहथि। फीरन- (हाथ जोड़ि मुस्कीआइत) परम श्रेद्देय, बड़का छोटका आ मैझला वर्गक सज्जन वृन्द। चनौरानगर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रसँ मारूति पार्टीक उम्मीदवार हमहीं छी। हमर छाप मौगी साइकिल छाप अछि। हमरा बेसी भाषण दइकेँ आदति नै अछि आ आदति लगबैयो लेल नै चाहै छी। हम आइ धरि काज करैक आदति लगेलौं आ ई आदति बढ़ाइए रहल छी। परिणामस्वरूप हमरा अखनि धरि आशातीत सफलता भेटल अछि आ पूर्ण बि‍सवास अछि जे भवि‍ष्योमे हमरा इएह सफलता अबस्‍स भेटत।हम अपने सभसँ वादा करै छी जे जदी अहाँ सभ अपन भोँटक गाड़ीसँ हमरा दिल्ली पहुँचेलौं तँ प्रत्येक परिवारमे एगो-एगो मौगी साइकिल अबस्‍स देब। अहाँक अप्पन छाप-मौगी साइकिल छाप।माए-बहिनक छाप- मौगी साइकिल छाप। काका-काकीक छाप- मौगी साइकिल छाप। जय हिन्द। जय भारत। जय मौगी साइकिल। (थोपड़ीक बोछार भेल आ फीरन बाइ-बाइ करैत प्रस्थान केलक) पटाक्षेप- तेसर दृश्य- (स्थान- सभागार। मंचपर भैंसा पार्टीक बैनर टाँगलए। मंचपर नवीन, प्रवीण, सुमन, संजीव आ राहुल उपस्थित छथि। सभ कियो नारा लगा रहल छथि।) राहुल- ब्रजेश भैया जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। राहुल- भैंसा पर्टी जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। राहुल- बत्तू छाप जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। राहुल- माए-बहि‍नक छाप। चारू- बत्तू छाप। राहुल- काका-काकीक छाप। चारू- बत्तू छाप। राहुल- सबहक छाप। चारू- बत्तू छाप। राहुल- बड़का-छोटका छाप चारू- बत्तू छाप।(नारा बन्न भेल।) राहुल- ब्रजेश भैयासँ नीक नेता आर केँ छथि? नवका नेताकेँ दिल्लीक दुआरि देखलो नै छै। मुदा हिनका सभ दुआरि देखल छन्‍हि‍। बड़का-बड़का नेतासँ जान-पहचान छन्‍हि‍। किनकोसँ पहिने कोनो काज हिनका हेतनि। तँए कहब जे आँखि मुनि कऽ सभ एकजूट भऽ भाय ब्रजेशकेँ जीताउ। (ब्रजेश, सुरेश, राकेश, भोलू आ शोभूक प्रवेश राकेशक माथपर लुंगी धोती आ साड़ीक मोटा अछि। ब्रजेश मुस्कीआइत सभकेँ हाथ जोड़ि प्रणाम करै छथि।) अपने सभ बड़ीकालसँ जइ महापुरुषक बेसब्रीसँ प्रतीक्षा करै छेलौं, से अपने सबहक समक्ष उपस्थि‍त छथि। एकबेर जोरसँ नारालगाउ। ब्रजेश भैया- जिन्दाबाद। बत्तू छाप जिन्दाबाद। (सभ कियो बैसलथि। राहुल ठाढ़ए) आब राकेश भायसँ आग्रह जे उ अपन सनेश बाँटथि। राकेश- हम जनता जनार्दनकेँ की सनेश देबनि। हम कोन जोकरक छी। तैयो जे किछु नीक-अधला सनेश तुल्य अछि ब्रजेश भैयाक किरपा छी आ ई किरपा पान नै, पानक डँटकी छी। पान जीतक पछाति भेटत जे योजना तैयार कऽ लेल गेल अछि। हम पानक डँटकी रूपमे प्रत्येक जनानी-पुरुखक लेल एक-एकटा धोती आ साड़ी लऽ कऽ उपस्थि‍त छी। प्रत्येक जनानी-पुरुखसँ आग्रह जे बेरा-बेरी आबि अपन-अपन वस्त्र लऽ जाइ। (जनानी-पुरुष आबि-आबि कऽ राहुलसँ धोती-साड़ी आ लुंगी लऽ जाइ छथि। धोती-साड़ी सधि गेल। किछु जनानी-पुरुष बिनु वस्त्रकेँ घुरि गेल।) हमरा बड्ड खेद अछि जे हम सभकेँ सेवा नै कऽ सकलौं। ओनाजिनकर धोती-साड़ी हमरापर बाँकी रहल हुनका चुनावक शीघ्र पछाति अबस्‍स भेटत। कृपया बाँकी बेक्ती अपन-अपन नाओं लिखा दी। (बाँकी बेक्ती अपन-अपन नाओं राकेशकेँ लिखेलनि।) कियो नै छूटै जाएब, से हम गछै छी। धैनवाद। (राकेश बैस जाइ छथि। राहुल ठाढ़े छथि।) राहुल- आब सुरेश भायसँ आग्रह करबनि जे पार्टीक प्रति उ अपन उदगार व्यक्त करथि। (राहुल बैसलथि।) सुरेश- (ठाढ़ भऽ कऽ) भैंसा पार्टी भारतक एकटा पुरान पार्टी अछि। ऐ पार्टीक प्रदर्शन आन कोनो पार्टीसँ नीक अछि जे सभ जनै छी। हमरा ऐ पार्टीसँ बड्ड लगाव रहल अछि। कारण ऐ पार्टीमे काज करैक आ करबैक नीक क्षमता अछि। देशकेँ काज चाही आ विकास चाही जे अही पार्टीसँ सम्‍भव अछि। पार्टी कोनो खराप नै होइ छै। पार्टीक काजकर्ता नीक-अधला होइ छै।ओकरेसँ पार्टी नीक-अधला होइ छै। तइमे भैंसा पार्टीक काजकर्ता भैंसा जकाँ जिदयाह होइ छथि जे कोनो काजकेँ बिना केने दम नै मारता। हमर जिनगी आइ धरि अही पार्टीमे बीतल आ अही पार्टीमे बीतबो करत, से परम बि‍सवास अछि। अही शब्दक संग हम अपन वाणीकेँ बिराम दइ छी। (सुरेश बैस गेला। राहुल उठला।) राहुल- पी.ए. साहैबक उदगार अति सराहनीय रहल। अन्तमे हम लोकप्रिय, जुझारू, ईमानदार, कर्मठ आ सुयोग्य नेता अप्पन ब्रजेश भायसँ सविनय निवेदन करबनि जे उ अपने सभकेँ संबोधित करथि। ब्रजेश- (ठाढ़ भऽ मुस्काइत आ हाथ जोड़ि) परम आदरणीय हिन्दु-मुस्लिम सिख-इसाई, भाय ब्रजेशक हार्दिक बधाई। अपने सबहक प्रेम आ श्रधा हमरा निर्विरोध जीतक संकेत दऽ रहलए। (थोपरीक बोछार भेल।) जेना हीराक पहचान सभ आदमी नै कऽ सकैए। तहिना नीक नेताक पहचान सभ जनता नै कऽ सकै छथि। मुदा हमर जनतामे एकटा अदभुत गुण देखै छियनि जे सभ हीराक पहचान करैबला जाहुरी छथि। सभ कियो हमरा पहचानलथि आ पहचानि हमरा जीतबैले दृढ संकल्पित छथि। तइले हम सभकेँ हार्दिक धैनवाद दइ छियनि। अपन बड़ाई करैमे लाज भऽ रहलए। मुदा अपन दिलक पुकारकेँ नै रोकि पाबि रहल छी। तँए कहऽ पड़ै अछि जे आन सभ पार्टीकेँ ऐबेर जमानत जब्त हेब्बे करत। कोइ माइक लाल नै काटि सकैए। अखनि धरि हम अपने सभकेँ मात्र पानक डँटकी दऽ सकलौं हेन। सेहो पुरा नै भऽ सकल। अइले हमरा बड़ खेद अछि। अपने सबहक सेवा लेल हम एकटा योजना तैयार केलौं हेँ जेकर आपूर्ती अपन जीतक पछाति अबस्‍स करब। हम अपन योजना अपने सभकेँ बता देनाइ उचित बुझै छी। (१) प्रत्येक मतदाताकेँ पाँचो-टुक वस्त्र देब, जइमे जनानी-पुरुषकेँ अपन-अपन नाप दिअ पड़तनि। (२) अठारह बर्खसँ कम उमरक धिया-पुताकेँ सेहो ओकर नापक अनुसार पाँचो टुक वस्त्र देब। (३) प्रत्येक थाकल-किसान लेल सौंझुका आ भिनसुरका दारू लेल ओकर क्षमतानुसार पाइ देब। (४) प्रत्येक थाकल महिला किसान लेल ओकर क्षमतानुसार एक महि‍नापर दशमुलारिष्ट आ अशोकारिष्ट देब। (५) प्रत्येक नियोजित शिक्षककेँ औझका तेबर तनखा कऽ देब। (६) प्रत्येक नियोजित शिक्षिकाकेँ औझुका चौबर तनखा कऽ देब। (७) प्रत्येक नियोजित शिक्षिकाकेँ प्रसब-अवधिमे तीन महि‍नाक तनखा मुफ्त भेटतनि आ सठौरा दवाई ओकर क्षमतानुसार भेटतनि। (८) आन प्रत्येक महिलाकेँ प्रसब-अवधिमे सठौरा दवाइ आ दुध लेल मौसरी-मंगरैल-गूड़ आदि ओकर क्षमतानुसार भेटतनि। (९) प्रत्येक जनानी-पुरुख हुनकर धिया-पुता सहित आइब्रो बनबैले एक-एकटा स्टील चुट्टा प्रत्येक रविकेँ भिनसरे भेटतनि। मुदा पाँच बर्खसँ नीच्चाँबला धिया-पुताकेँ नै भेटतनि। (१०) प्रत्येक साँकटक परिवारमे प्रत्येक सप्ताह जुम्माकेँ एक-एक किलो घोंगही भेटतनि। (११) प्रत्येक बैष्णो परिवारमे प्रत्येक सप्ताह रविकेँ एक-एक किलो कटहरक कुआ भेटतनि। बशर्ते कि उ मतदाता कटहर छापपर बटन नै दवाबए। हमर आर बहुत योजना बनि रहलए। (१२) केकरो कमाए नै देब। सभकेँ बैसा कऽ खिआएब। हम सभटाकेँ सार्वजनिक करैक सप्पत खाइ छी। बेसी किछु नै कहब। धैनवाद। (थोपड़ीक बोछार भेल। दर्शककेँ ब्रजेश हाथ जोड़ि प्रणाम केलथि। बाइ-बाइ करैत सबहक प्रस्थान।) पटाक्षेप- चारि मदृश्य- (स्थान-सभागार। मंचपर खच्चर पार्टीक बैनर टाँगल अछि। मंचपर चन्द्रमोहन,लालू,कालू, रहीम करीम आ बदलू उपस्थि‍त छथि। सभनारा लगा रहल छथि।) लालू- सुभद्रा दीदी जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। लालू- खच्चर पार्टी जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। लालू- गदहा छाप जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। (नारा बन्न भेल।) चन्द्रमोहन- भैया-भौजी, गदहा छाप जीताउ। खच्चर पार्टी जीताउ। भैया-भौजी, गदहा छाप जीताउ। सुभद्रा दीदी छथिन, नेक नेता, जुझारू, कर्मठ, योग्य नेता, माए बहि‍न हिनका दिल्ली पहुँचाउ यै दिल्ली पहुँचाउ। भैया-भौजी गदहा छाप जीताउ, गहदा छाप जीताउ। जनसेवामे, बीतलनि जीवन घर-घर केर, खेलनि तीमन। काका-काकी, देश बचाउ, देशप्रेम जागाउ। भैया-भौजी, गदहा छाप जीताउ। हिन्दु-मुस्लिम, सीख-इसाई। भारतमे सभ भाई-भाई। गदहा छापपर, बटन दबाउ, सुभद्रा सजाउ। भैया-भौजी खच्चर पार्टी जीताउ। लालू- सुभद्रा दीदी जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। लालू- गदहा छाप जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। चन्द्रमोहन- सुभद्रा दीदीकेँ अबैमे कनी बिलम भेल। तइले हम क्षमाप्रर्थी छी। हुनका अखनि क्षेत्र दौड़ा रहै छन्‍हि‍। तँए बिलम भेलनि हेन जे स्वभाविक छै। ओना उ अबिते हेथिन। बस, कनिए काल आर धीरज धरै जाइ-जाउ। (सुभद्रा, माला आ उमाकान्तक प्रवेश। सुभद्रा मुसकीआ दर्शककेँ हाथ जोड़ि प्रणाम करै छथि। सभ कियो कुरसीपर बैसलथि।) अपने सभकेँ बड़ीकालसँ जिनकर इन्तजार छल, उ अपने सबहक समक्ष उपस्थित छथि। हुनक बात बहुत रास सुनब। मुदा तइसँ पहिने बहि‍न मालासँ किछु सुनल जाउ। (माला कर जोड़ि उठली। चन्द्रमोहन बैसला।) माला- आदरणीय भोँटक मालिक-मलि‍काइन, हमर सप्रेम नमस्कार। अपने सबहक उपस्थिति सुभद्रा दीदीकेँ सुनिश्चित जीतक प्रतीक अछि। (थोपरीक बोछार भेल।) हम बेसी किछु नै कहब। सिरीफ एतबे कहब जे जदी भोँट खसबैक अधिकार अछि तँ भोँट अबस्‍स खसाबी। ओइमे बस एकटा बात धियान सदति राखी जे हमर भोँट बेकार तँ नै जा रहल अछि। बेकार भोँट खसा कऽ कोन फेदा। नै गाए घर नै गुआर घर। खूब बढ़ियासँ सोचि ली, समझि ली, विचारि ली जे भोँट केकरा देबाक छै। अपने नै बुझऽ अबए तँ किनकोसँ पुछि कऽ सोचि-विचारि ली। तखनि भोँट खसबैले जाइ। ई तँ दूबेर नै खसाएल जाइ छै। एकबेरक फैसला पाँच बरख धरि चलै छै। एतबे नै एम.पी. केर चुनावसँ देशक प्रतिष्ठा जोड़ल छै। हम हुसबै यानी मतदाता हुसतै तँ देश गर्तमे चलि जेतै। तँए भोँट हुरार जकाँ नै खसाबी, बुधियार जकाँ खसाबी। धैनवाद। (थोपरी भेल। माला बैस गेली। चन्द्रमोहन उठला।) चन्द्रमोहन- माला बहि‍न अपने सभकेँ बड्ड मार्मिक बात कहली। आब उमाकान्त बाबूसँ हमरा लोकनि आशीर्वचन लइले चाहै छी। (उमाकान्त हाथ जोड़ि मुस्कीआइत ठाढ़ भेल।) उमाकान्त- हम आर्शीवचन दइ जोग एक्को रत्ती नै छी। मुदा चन्द्रमोहन बौआ किछु बजैक मौका देलनि, से हम अपना भरि खाना पूर्ति करै छी। आदरणीय मतदाता लोकनि हमर हार्दिक प्रणाम। हम प्रणाम नै करितौं। कारण हमरासँ क्षेष्ठ ऐ सभागारमे शायद कियो नै हेता। जदी हेता तँ हुनका प्रणाम। मुदा नै, मतदाता देशक आधार होइ छथिन, नीब होइ छथिन। हुनकर फैसलापर देशमे इजोत हएत वा अन्हार हएत। तँए हम हार्दिक प्रणाम केलौं से बड़ कम बुझाइए। मन होइए जे शत-शत प्रणाम करिते रही।हम ऐ खच्चर पार्टीमे आइसँ नै, जमानासँ छी, प्रारंभेसँ छी। ऐ पार्टीक तहक बात हम जनै छी। ई पार्टी केते तीत-मीठ अछि, सबटा जनै छी। मुदा छोड़ि नै रहल छी। तेकर कारण अछि पार्टीक सुबेवस्था ऐ पार्टीमे तेहेन योग्य बेक्ती सभ छथि जे परोपकारकेँ सभसँ पैघ काज बुझै छथि आ बुझबे नै करै छथि अपितु करबो करै छथि। सामान्यतया आन पार्टीक नेता सभ जनताकेँ मुँहदुस्सी बना कऽ स्वार्थ सिद्धिमे लीन भऽ जाइ छथि। मुदा ऐ पार्टीमे ई बेमारी नै छै। जनसेवाकेँ प्राथमिकता आ प्रधानता देल जाइए। सुभद्रा बुच्ची दऽ की कहब, प्राय: जनिते छी। तैयो दू शब्द कहि दइ छी। हिनक जीवन अखनि धरि जनसेवामे बीतलनि आ भवि‍सोमे बीतते रहतनि। ई घर-घर जा कऽ जनताक दुख-सुखमे संग रहै छथि आ यथा सम्‍भव मदति करै छथि। ई घरक नेता छथि, अप्पन नेता छथि। हिनकर छाप गदहा छाप छियनि। ऐबेर हिनका भारी मतसँ विजय बनेबाक अछि आ देशक कल्याण करबाक अछि। हमरा अशे नै पूर्ण बिसवास अछि जे सुभद्रा बुच्ची सभकेँ जमानत जप्त करा देती। (थोपरीक बोछार भेल।) इएह कहि मतदाता मालिककेँ हमर शत-शत बेर नमन, शत-शत बेर नमन, शत-शत बेर नमन। धैनवाद। चन्द्रमोहन- (उठि कऽ) आब बहि‍न सुभद्रासँ हमर आग्रह, बिनय, निवेदन जे उ अपन दू शब्द जनता जनार्दनकेँ परसथि। सुभद्रा- (मुस्कीआइत उठि आ हाथ जोड़ि) आदरणीय देशक कर्णधार लोकनि, हमर हार्दिक प्रणाम।हम भाषण नै देब। कारण हमरामे उ कला नै अछि। मुदा एतबा जरूर कहब जे भोँटक सुदपयोग हुअए, दुरूपयोग नै। अपने सभकेँ जिनकापर बिसवास हुअए हुनका भोँट दियौ। जनताकेँ चाही काज। तइमे हम केते धरि सक्षम छी, ई निर्णयक विषय अछिजे अपने सबहक हाथमे अछि। अशिक्षाक कारणे मतदाता लोकनि पहिने ताड़ीए-दारूपर लोभा जाइ छेलथि आ थोड़-बहुत अखनो लोभाइ छथि। मुदा अखनि बहुत हद धरि सुधार अछि। मतदातामे बहुत होशियारी एलनि हेन आ दिनानुदिन बढ़िते जाएत। अपने सभ जानि रहल छी जे खच्चर पार्टी विश्वासनीय पार्टी छी जिनकर छाप गदहा छाप छियनि। पार्टी आ छापक नाओं अभद्र जकाँ बुझाइए। मुदा नाओंपर नै जाइ, काजपर जाइ। जेना किनको नाओं छियनि अमर। एकर माने की बुझल जाएत जे उ कहियो नैमरता आकि सभकेँ अमर कऽ देता। नै, ई सभ कोनो बात नै छै। अस्सल बात ई छै जे पार्टी वा छाप केहनो हुअए वा कोनो हुअए, जनता जनार्दनकेँ काज चाही काज। अन्तमे हम इहए कहब जे गदहा छापक विजय सुभद्राक विजय छी आ सुभद्राक विजय, अहाँक विजय छी। धैनवाद। (थोपरीक बोछार भेल। सुभद्रा बाइ-बाइ करैत बैसली। सभाक विसर्जन भेल। सबहक प्रस्थान।) पटाक्षेप- पाँचिम दृश्य- (स्थान- सभागार। मंचपर बारूद पार्टीक बैनर टाँङल अछि। मंचपर मोहन, बालचन, लालचन, नन्दन, कुन्दन आ चन्दन उपस्थित छथि। सभ दारू पी कऽ मस्तीमे छथि। सभ नारा लगा रहल छथि।) बालचन- विवेक भैया जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। बालचन- बारूद पार्टी जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। बालचन- पेस्तोल छाप जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। बालचन- विवेक भैया अमर रहे। चारू- अमर रहे अमर रहे। बालचन- विवेक भैया मूर्दाबाद। चारू- मूर्दाबाद-मूर्दाबाद। मोहन- (उठि कऽ मस्तीमे) अहाँ सभ नारा आब बन्न करै जाइ-जाउ। (नारा बन्न भेल।) अहाँ सभ मूर्दाबादक नारा कि‍ए लगौलिऐ? ई तँ बड़ गलत नारा भेल। एकर माने बड़ खराप भेल। एकर माने भेल जे सभ जनता मरि जाए। जौं सभ मरिए जेता तँ विवेक भैया केना जीतता? गोला बरदक आँड़सँ उ जीतता। नै जीतता तँ लइ जाएब कटहर। नै, नै,नै कटहर नै। गदहाबला। नै नै गदहा नै। अल्हुआ, सुथनी। कनी सोचि-समझि कऽ नारा लगबियौ। जनताकेँ बुड़बक नै बनबियौ। जनता प्रत्याशी लेल अस्सल भगवान होइ छथिन। विवेक भैयाक सामनेमे उ नारा लगा सकै छी। कारण हुनकर धाक किछु आर छन्‍हि‍। मुदा अपना सभ अपजश कपारपर कि‍ए लेब? (विवेक, सुरज, पंकज आ पप्पुक प्रवेश। जनताकेँ हाथ जोड़ि प्रणाम कऽ विवेक बैसला। सूरज दारू-पार्टीक शीघ्र तैयारी केलक। पार्टी चलि रहलए। सभ मस्तीमे झूमि रहलए।) सूरज- विवेक भैया, ऐबेर तोहर जीत निश्चित छह। पंकज- भैया, ऐबेर नै जीतबह तँ कहियो नै जीतबह। विवेक- ऐबेर कोन सार हरा सकता हाय? हम कोनो मामूली नेता हाय। छल-बल-कल तीनूसेँ भरल हाय। एकेटा बम मारेगा आ बुथ लूटि लेगा। जे सार बजेगा ओकरा लेल पेस्तौल हाय। बेसी नै एक्के गोली मारेगा, मारेगा नै मरबाएगा कि उ जय सियाराम भऽ जाएगा। काहे कोय डरसेँ बजेगा? हा-हा-हा ऽ ऽ ऽ। पप्पु- विवेक भैया, ई बात तोरा जनताक सामनेमे नै बाजक चाही। कारण जनतेमे मतदाता छथिन। विवेक- रे पपुआ, हमरा तूँ उपदेश नै दो। हम अपने ऐ सभमे फेरल हाय। उ अपने सभ किछु बुझता हाय। रे सार पपुआ, हमरा कोन जनता नै चिन्हता हाय। सभ जनता बूझि रहल हाय जे ऐबेर विवेक भैया छोड़ि कोय नै जीतेगा। जौं जीतेगा तँ विवेक भैया आ नैजीतेगा तँ विवेक भैया। हा-हा-हा ऽ ऽ ऽ। पप्पु- भैया, घमंडबला गप नै बजियौ। ओइसँ जनताकेँ आक्रोश पेदा होइ छै। विवेक- हे पप्पु बाबू, गोर लगता हाय। हमरा नै सीखा। हम केतेकेँ सीखाया हाय आ केतेकेँ सीखाएगा। एलेक्शनकेँ बाद तूँ सभटा खेल-बेल देखेगा। हा-हा-हा ऽ ऽ ऽ। चुनाव आयोगकेँ हिला देगा। पप्पु भाय, देखता हाय, गीत सभ बजबैत। आ अपना पार्टीमे ई सभ बेवस्था कहाँ हाय? खाइर तूँही सभ किछु गीत सुनाओ। पप्पु- खेलै छेलिऐ, धूपै छेलिऐ, करै छेलिऐ नाम मने-मन विचारै छेलिऐ, मने-मन विचारै छेलिऐ। विवेक भैया करतै नाम, भैया हो रामे-राम।रामे-राम हो भाय, आहो पेस्तौल छाप जीततै। खेलै छेलिऐ...। विवेक- हा-हा-हा ऽ ऽ ऽ। वाह। वाह एहने गीत गाबै जाउ। सूरज- ताड़ीवाली ताड़ी पिया दऽ, दारूबला दारू पिया दऽ। (ताड़ी न पीअब तँ काज न चली, दारू न पीअब तँ मन नै लगी।ताड़ी-दारूमे है बड़ दम, पेस्तौल करतबम-बम-बम। ताड़ीवाली ताड़ी पिया दऽ...। विवेक- वाह। वाह। वाह। सूरजाबा तूँ तँ कमाल करि दिया। पंकजबा तूँहूँ कलाकार हाय की? हाय तँ एकटा सुनाउ। पंकज- बारूद पार्टी मस्त-मस्त, पेस्तौल छाप मस्त। विवेक भैया जीतबे करत-विवेक भैया जीतबे करत।सूर्य पूरबमे कि‍ए नै अस्त।बारूद पार्टी मस्त-मस्त...। विवेक- वाह। वाह। वाह। हमरा नै बुझल था जे हमरा पार्टीमे एते कलाकार हाय। आइ हम सौंसे जनताकेँ बीच दारू बोतल सप्‍पत खाता हाय जे ऐबेर हम नै जीतेगा तँ कहियो नै जीतेगा। जय हिन्द। जय भारत। जय बिहार। जय चनौरानगर। (विवेक हाथ जोड़ि प्रणाम केलथि। सभा उसरल। सबहक प्रस्थान।) पटाक्षेप- छठम दृश्य- (स्थान- पंचायत भवन। भीखन ढोलहो दऽ रहल छथि।) भीखन- सुनै जाइ-जाउ, सुनै जाइ-जाउ, गौआँ-घरूआ सभ सुनै जाइ-जाउ। आइए साँझमे पंचाइत भवनपर बैसार छिऐ। भोँटक विषयमे विचार-विमर्श हएत। ओइमे प्रत्येक घरक मुखिया अबस्‍स एबै। बैसार बच्चा बाबू करा रहल छथि। (तीनबेर ई गप कहि भीखन ढोलहो दैत अंदर गेल। गौआँ सभ रसे-रसे पहुँचऽ लगल। बच्चा बाबू, उतीम, बेचू, किशुन आ भगतक प्रवेश। सभ कियो मंचपर बिछाएल दरीपर बैसलथि।) बच्चा बाबू- उतीम भाय, मात्र एक सप्ताह भोँटक समए रहि गेलैए। अपन गौआँक भोँट बेरबाद नै हुअए, योग्य प्रत्याशीकेँ जाए, आपसमे हल्ला-फसाद नै हुअए, तही दुआरे एकटा बैसारक विचार मनमे आएल। ई विचार अहाँकेँ केहेन लगैए? भाय अहूँ सभ बाजब। उतीम- बच्चा बाबू, हमर उमेर साठिक आँट-पेट अछि। आइ धरि ऐ तरहक बैसार कहियो नै भेल छल। आब बुझै छी जे एकर खगता पैहिनैयों छेलै। मुदा नै होइ छेलै। जइ कारणे अपनेमे कपार फोड़ा-फोड़ी भऽ जाइ छेलै। अपनेक विचार बड़ नीक अछि। बेचू- बच्चा बाबू, हम तँ अमरूख छी। किछु नै बुझै छिऐ। मुदा एते अबस्‍स कहब जे ऐ विचार आ बैसारसँ अपन समाजक प्रतिष्ठा बढ़त। किशुन- बच्चा बाबू, अपनेक विचार समाजकेँ एकताक सूत्रमे बान्हैबला अछि। अइसँ समाजक विकास हएत। भगत- भाय, हम की कहब? सभटा तँ ई सभ कहिए देलथि। तैयो मुँह छोहनि कऽ लइ छी। अहाँक विचार तेहेन सुन्नर अछि जइसँ सम्पूर्ण देशक कल्याण भऽ सकैए। बशर्ते कि प्रत्येक समाज ऐ तरहक विचारक अमल करथि। (घूटर, मुटर, ननकू, जीबू, मरर, पंचू आ बनझरूक प्रवेश। सभ दरीपर बैसलथि।) घुटर- बच्चा बाबू, हमरा बड़ देरी भऽ गेल। क्षमा माँगै छी। बच्चा बाबू- धूर मरदे, क्षमा कि‍ए मंगै छी? आ हम कोन जोग छी क्षमा करब। अहाँ कोनो गलती केलौं हेन। घुटर- अहाँ कहै छी हम कोनो जोग छी। अहाँ तँ हीरा छी। तँए ने सौंसे गौआँ दौगल अबैए। मुटर- बच्चा बाबू, गप-सप्‍प कखनि शुरू करबै? हमरा घरपर बड़ काज अछि। कनियाँक समए पूड़ि‍ गेल छन्‍हि‍। उ कखनो घर औझरा सकै छथि। घरपर आर कियो नै अछि। पहिलोठे छियनि। उठलो-बैठलो नै होइ छन्‍हि‍। बच्चा बाबू- अहाँकेँ बड्ड जरूरी अछि तँ जा सकै छी। काल्हि हम घरेपर गप कऽ लेब। मुटर- कनीकाल आर देखै छी। बच्चा बाबू- की करबै? लोक सभ समैक महत नै बुझै छथिन। भरि-भरिदिन बिना खेने-पीने ताश-ताश खेलैत रहै छथि। चाह-जलखैक दोकानपर बैस कऽ गुलछर्रा छोड़ैत रहै छथि। तइले समए रहै छै। मुदा समाजक प्रतिष्ठा लेल समैक अभाव रहै छन्‍हि‍। कहू तँ अपना सभ केते कालसँ बैसल छी। डाँड़-पीठी अँइठ गेल। मुदा अखनि धरि दू सए घरक बस्तीमे दस-पनरह आदमी पहुँचल छथि। ननकू- बच्चा बाबू, नै हेतै तँ ताबे गप-सप्‍प शुरू करू। लोक आगू-पाछू अबै जाइ जेता। बड़ देरी भऽ रहल अछि। बच्चा बाबू- ठीके कहै छी भाय, अपना सभ गप शुरू करू। ऐबेर अपना सबहक समक्ष पाँचटा पार्टी अछि कंगाली पार्टी, मारूति पार्टी, भैंसा पार्टी, खच्चर पार्टी आ बारूद पार्टी। ऐ पाँचू पार्टीमे कोन पार्टी सभसँ नीक अछि? पहिने ऐपर विचार करी। तखनि भोँटक विचार हेतै। उतीम- हमरा नजरिमे सभसँ नीक पार्टी गोबर्धनलालक पार्टी कंगाली पार्टी अछि। गोबर्धनलाल बड़ नीक प्रत्याशी छथि। हिनका ऐबेर जीतेबाक अछि। बेचू- हमरा विचारसँ सभसँ बढ़ियाँ पार्टी फीरनक मारूती पार्टी अछि। उ गरीबक दुख बूझि सकै छथि। ऐबेर हुनके जीतबै जाइ-जाउ। किशुन- हम तँ कहब जे ब्रजेश भैयाक पार्टी भैंसा पार्टी सभसँ विसवसनीय पार्टी अछि। ब्रजेश भैयाकेँ बेवहारिक अनुभव छन्‍हि‍। ई जेते काज करता, तेते कियो नै कऽ सकै छथि। तँए अहुबेर ब्रजेशे भैयाकेँ जीताउ। भगत- हमरा विचारसँ सुभद्रा सभसँ नीक प्रत्याशी छथि जिनकर पार्टी छियनि खच्चर पार्टी। हुनकामे काज करैक नीक क्षमता छन्‍हि‍। ऐबेर हिनका भारी मतसँ विजय बनबै जाइ-जाउ। घुटर- बच्चा बाबू, विवेक भैया सभसँ नीक प्रत्याशी छथि। हिनका ऐबेर निश्चित दिल्ली पठेबाक अछि। मुटर- (अकचकाइत) हुनका की भेलौ हेन सेँ? दारू पीऐत-पीऐत हुनकर अँतरी डहि गेलै हेन की? अस्पताल जेता की? घुटर- धूर बुड़बक अस्पताल कथीले जेथिन? लोकसभा जेथिन। मुटर- ओत्त की करथिन? दारू फैक्टरी खोलथिन की? घुटर- ओत्तेसँ अपना सभपर शासन करथिन। अपना सभकेँ कोनो कम्मी नै हुअ देथिन। मुटर- जेकर कनियाँ नै हेतै ओकरा कनियोँ देथिन की? घुटर- हँ, सभटा देथिन। पछाति कहबो। मुटर- (मोंछ पीजबैत) बड़ नीक हेतै। बच्चा भेला पछाति कनियाँकेँ नैहर दऽ एबै। ओकरो जान बचतै। घुटर- बच्चा बाबू, अहाँ अप्पन विचार किछु नै देलिऐ? बच्चा बाबू- बेरे-बेरी ने अपन-अपन विचार दइ जाइ जेबै। अहाँ सभ अपन-अपन विचार देलिऐ। आब हम दइ छी। नीक प्रत्यशी के भेला?हमरा नजरिमे नीक प्रत्यशी उ भेला जे अपन क्षेत्रक विकास तन-मन-धनसँ करथि, अपन जनतासँ नीक जकाँ जुड़ल रहथि आ देश भक्तिसँ परिपूर्ण रहथि। हमरा नजरिमे सभसँ नीक प्रत्याशी सुभद्रा छथि जिनकामे ई सभ गुण विद्यमान छन्‍हि‍। उ सदति अपना सबहक दुख-सुखमे तत्पर रहै छथि। एतबे नै हुनक तियाग सेहो सराहनीय छन्‍हि‍। हमरा विचारसँ सुभद्राकेँ भारी मतसँ जीता दिल्ली पठाउ। अइसँ आगू अपने सबहक विचार आ मर्जी। (सुलेमान, सलीम आ सलाउद्दीनक प्रवेश) आउ-आउ भाय, बैसु। (सभ बैसलथि।)बड़ देरी कऽ देलिऐ। सुलेमान- टोलमे मरद सभ बेसी बाहर खटै छथि। जनानी सभ कहलखिन, अहीं सभ जाउ। जे जेना विचार हेतै तइमे हमरो रहबे करत। हमरा सबहक विचार भेल जे ऐबेर सुभद्राकेँ जीताबी। सलीम- सुभद्राक तियाग आ जनता प्रति लगाव कोनो छिपल नै अछि।ओकरामे काज करैक क्षमता हइ और सभ गेल-गुजरल हऽ। एगो बरजेशबा जे हऽ से जहियासे जीतकेँ गेलह तहियासे घूमिकेँ नै एलह आ एलह तँ फेर भोँट लइले। सलाउद्दीन- अपना-अपनाकेँ सभ पार्टी सफाइ दइ छै। अपना दहीकेँ कोइ खट्टा कहलकै हेन। बरजेशबा तँ घोषणा-पर-घोषणा कऽ गेल हेन आ धोती-साड़ी-लुंगी बाँटि गेल हेन। हम सभ अमरूख छी तँ अनछेड़ू छी।सभटा बुझै छिऐ। भोँट लइ कालमे गदहो नाना भऽ जाइ छै आ जीतला बाद सबहक परदादा भऽ जाइ छै। ऐबेर आँखि मुनि कऽ सुभद्राकेँ भोँट देबाक छै। मौगी छै तइसे की? पुरुखक कान कटै छै। बच्चा बाबू- अपन-अपन विचार आ तर्क दइ जाइ जइयौ। जीबू- हमर विचार अछि जे ऐबेर सुभद्रा दीदी जिन्दाबाद। खच्चर पार्टी जिन्दाबाद। गदहा छाप जिन्दाबाद। मरर- हम की कहब? एतबे कहब जे छापपर नै जेबाक छै आ नै बातपर जेबाक छै। जेबाक छै कथीपर तँ प्रत्याशीक काजपर। देखै छिऐ किछु उचक्का छौड़ा सभ पार्टीसँ पाइ टानि दारू पीब हुड़दंग मचबैए आ अपने-अपनेमे झगड़-दन करए लगैए। से ने हेबाक चाही।केकर खेती केकर गाए, कोन पापी रोमऽ जाए। बच्चा बाबू- जखनि पार्टी सभ पाइ लुटए चाहैए तँ हम सभ बबाजी कि‍ए बनी? मुदा आपसमे झगड़ा नै करी, से हरदम धियान राखी। पंचू- जौं कोनो पार्टी फँसतै तँ नीक जकाँ माल टानि अपनामे बाँटि लइके छै। खाली सुभद्राकेँ छोड़ि देबाक छै। कारण ओकर बहुत सम्‍पति‍ समाज सेवामे लगल छै, उ कोनो कमाइ छै? बापबला बेचि कऽ जनता सेवा करै छै। बनझरू- हमरा तँ मन होइए जे ऐबेर कोनो सारकेँ भोँट देबे नै करितिऐ। कारण सभ सार ओत्त जा कऽ बैमान बनि जाइए। माल होंसतैमे लगि जाइए। नून घोटाला, पियौज घोटाला, बकरी घोटाला, साँढ़ घोटाला, फलना घोटाला, चिल्ला घोटालामे मस्त भऽ जाइए आ मारल माल देशमे राखि‍ विदेशमे रखैए जे कोइ बुझए नै। सार सभ हमर माल मारि एश-मौजक जिनगी जीबै जाइए आ हमरा सभकेँ कमाइत-कमाइत रग टूटि जाइए तैयो पेट नै भरैए। ऐबेर कोनो सारकेँ भोँट नै देबै। भैरि दिन बरदाजाएब, कोनो सार एक्को साँझक बुतातो देत। बच्चा बाबू- बनझरू भाय, तोहर कहब पूर्णतह ठीक छह। मुदा अपन करतबमे नै चुकबाक छै। भारतक नागरि‍क छहक आ भोँट दइकेँ अधिकार छह तँ भोँट देबाके छै। तइमे होशगर प्रत्याशी चुनैकेँ छै। बनझरू- जौं तूँ कहै छह तँ सुभद्राकेँ भोँट दऽ देबै। ई लगै छह जे बैमान नै हेतह। बच्चा बाबू- तखनि सुभद्राकेँ जीतबैमे किनको कोनो आपति‍? सभ- कोनो आपति‍ नै, कोनो आपति‍ नै। बच्चा बाबू- तखनि सुभद्रा निश्चित जीत गेली। सएह ने? सभ- निश्चित जीतती, निश्चित जीतती। बच्चा बाबू- एकटा हमर सलाह सुनै जाइ-जाउ। उ ई जे कोनो पार्टीसँ बातमे टूटबाक नै छै। सभकेँ हँ-हँ कहैक छै। मुदा भोँट दइ कालमे ओकरे देबै जे हमरा मनमे अछि। आइ-काल्हि नै उ देवी छै आ नै उ कराह छै जे राजा हरिशचंद्र बनि जाइ। हमरा विचारे समैक अनुसार सतर्कतासँ चली। (गोबर्धनलाल, रामेश्वर, जीतेन्द्र, आ श्रीलालाक प्रवेश। गोबर्धन सभकेँ हाथ जोड़ि प्रणाम करै छथि।) गोबर्धन- बच्चा बाबू, की हाल-चाल? बच्चा बाबू- पहिने बैसल जाउ। तखनि हाल-चाल हेतै। गोबर्धन- अखनि बैसैक समए नै छै। मुदा कनियेँ बैसै छी। (सभ कुरसीपर बैसलथि।) बच्चा बाबू- नेताजी, अहाँ पूरा ठीक छी। विजय सुनिश्चित अछि। हम सभ विचार कऽ लेलौं हेन। कटहर छाप जिन्दाबाद। सभ- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। (दुनू हाथ उठा कऽ) बच्चा बाबू- गोबर्धनलाल जिन्दाबाद। सभ- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। रामेश्वर- (उठि कऽ) बच्चा बाबू, एकमिनट समए दिअ। बच्चा बाबू- जी कहल जाउ। (रामेश्वर आ बच्चा बाबू अंदर गेलथि। रामेश्वर बच्चा बाबूकेँ पाँच हजार टाका देलथि। फेर दुनूक प्रवेश) रामेश्वर- आब हमरा लोकनिकेँ आज्ञा देल जाउ। बड़ काज छै। बच्चा बाबू- अहाँ निफीकीर भऽ केँ जाउ। (गोबर्धन दलक प्रस्थान) पंचू- बच्चा बाबू, केते माल झरलै? बैमानी नै करबै बच्चा बाबू- जदी अहाँ सभकेँ हमरापर बि‍सवास अछि तँ हम बि‍सवासघात नै करब। मात्र पाँचे हजार झड़लै। से हम अखने आ एत्तै बाँटि दइछी। (सभकेँ बच्चा बाबू पाइ बाँटै छथि।) पंचू- हे भगवान। हे भगवती। अहिना माल अबैत रहितै तँ भोँट खसबैमे बड़ मन लगितै। (ब्रजेश, सुरेश, राकेश, भोलू आ शोभूक प्रवेश) बच्चा बाबू- पधारल जाउ, पधारल जाउ नेताजी? ब्रजेश- कहु बच्चा बाबू, चुनावक हाल-चाल। बच्चा बाबू- पहिने बैसू, गप-सप्‍प हेबे करतै। (ब्रजेश, सुरेश आ राकेश कुरसीपर बैसलथि। भोलू आ शोभू ठाढ़े-ठाढ़ ओंघाइ छथि।) अहाँकेँ के हरा सकैए? अहाँकेँ मरौसी क्षेत्र छी। हमरा लगैए, अहाँ सभकेँ जमानत-जप्त करबा देबै। जत्त-तत्त अहींक माहौल अछि। कहीं सोलहन्नी भोँट अहींकेँ नै भेट जाए आ पक्का भेटत। ब्रजेश- पहिने अहाँ सभ एकटा खुशखबरी लऽ लिअ। विवेक हमरामे मिल गेलथि। बच्चा बाबू- तखनि घीओसँ चिक्कन आ सोनामे सुगंध भऽ गेल। अहाँक जीत सुनिश्चित भऽ गेल। राकेश- बच्चा बाबू, हमरा एक मिनट समए दिअ। एगो जरूरी गप करबाक अछि। बच्चा बाबू- (उठि कऽ लग जा कऽ) कहियौ भाय। (राकेश आ बच्चा बाबू अन्दर गेलथि। राकेश बच्चा बाबूकेँ दसहजार टाका देलनि। राकेश आ बच्चा बाबूक प्रवेश।) ब्रजेश- बच्चा बाबू, खुश छिऐ ने? बच्चा बाबू- अखनि कहब तँ बि‍सवास नहियोँ भऽ सकैए। हमरा लोकनि केते खुश छी, से जीतक पछाति बुझाएत। ब्रजेश- तखनि आज्ञा देल जाए। बहुत ठाम जेबाक छै। (हाथ जोड़ि प्रणाम कऽ ब्रजेश, सुरेश, राकेश, भोलू आ शोभूक प्रस्थान) पंचू- बच्चा बाबू, अइमे केते सुतरलै? बच्चा बाबू- ओकर दोबर, दस हजार मात्र। पंचू- अइ सारसँ आर टानितौं से नै। ई सार तँ बड़ माल मारने हएत। कारण क्षेत्रमे केतौ कोनो विकास नै देखै छिऐ। (बच्चा बाबू पाइ बाँटि रहल छथि।) बच्चा बाबू- कियो छूटब नै आ कियो दूबेर नै मारब। (विवेक, सूरज, पंकज आ पप्पुक प्रवेश। सभ कियो दारू पी कऽ बुच्च छथि। विवेक हाथ जोड़ि सभकेँ प्रणाम केलनि।) विवेक- (झुमैत-झुमैत) विवेक भैया आइ धरि बापोकेँ नै गोर लगने हएत। मुदा अहाँ सभकेँ गोर लगि रहल छथि। से बिसरै नै जाइ जेबै, प्रतिष्ठा रखबै। नै तँ हमर दोख नै दइ जाइ जाएब। बच्चा बाबू- नेताजी, बैस कऽ गप कएल जाए। (वि‍वेकक टीम कुरसीपर बैसलथि।) घुटर- नेताजी, सुनलौं, अपने भैंसा पार्टीमे मिल गेलिऐ हेन। विवेक- ठीके सुनलिऐ। की करबै? ब्रजेश भैया अपने हमरा दूरापर आबि खेखनियाँ करए लगलै। हमरा दया आबि गेल हँ कहि देलिऐ। जीयत ठारि सभ पकड़ैले चाहै छै। हमहूँ सएह केलौं। घुटर- नेताजी, माल बड़ भेटल हएत। विवेक- नै दिया साला। कम्मे दिया। दस लाखसे कथी होगा? बच्चा बाबू, ऐबेर बत्तू छापकेँ कोनो हालतमे जीतेबाक हाय। बच्चा बाबू- नेताजी, ऐबेर बत्तूए छापक चलती अछि, हवा अछि। एकराकेँ हरा सकैए। तइमे अहूँ मिल गेलिऐ। कोन माएकेँ लाल बत्तू छापकेँ हरा सकैए? विवेक- पहिने ओकरा अहाँ सभ जीताइए। तब उ जत्ते चीज गछा हाय, से ओकरा बापसे लेगा। तैपर सँ एकटा चीज और हम गछवाया हाय। बच्चा बाबू- कथी नेताजी? विवेक- प्रत्येक मतदाता लेल एक-एक जोड़ा बनारसी बिन्दी। घुटर- नेताजी, अहाँक बत्तू छाप जीतलोमे जीतल अछि। किछु माल-पानी खरच-बरच करियौ ने? विवेक- सभ माल दारूमे सधि गिया। पहिने अहाँ सभ ब्रजेश भैयाक जीताइए तब सभकेँ एक-एकटा बत्तू दिया देगा। आब हम सभ जाता हाय। बत्तू छापकेँ नै बिसरिएगा। (विवेक दलक प्रस्थान।) घुटर- बच्चा बाबू, अपना सभ बिन्दी आ बत्तू की करबै? बच्चा बाबू- की करबै, बिन्दी माथपर, दुनू गालपर, नाकपर आ काटल दाढ़ीपर साटबै आर बत्तूसँ भाड़ा कमेबै। (सुभद्रा, माला, चन्द्रमोहन आ उमाकांतक प्रवेश। सुभद्रा हाथ जोड़ि प्रणाम करै छथि।) सुभद्रा दीदी जिन्दाबाद। सभ- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। बच्चा बाबू- गदहा छाप जिन्दाबाद। सभ- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। बच्चा बाबू- दीदी, अपने सभ पहिने बैइसै जाउ। तखनि गप-सप्‍प हेतै। (सुभद्रा दल बैसलथि) सुभद्रा- बच्चा बाबू, चुनावक की माहौल अछि? बच्चा बाबू- हमरा जनैत ऐठाम अहाँक माहौल पूरा ठीक अछि आ जीतो सुनिश्चित अछि। मुदा आन ठामक माहौल केहेन अछि से अहीं कहब। सुभद्रा- सभ ठामक माहौल नीके नै बड़ नीक बुझाइए। तखनि सूरदासबला गप, घी गरगने बुझबै। मतदाताकेँ हमरासँ केते श्रधा छन्‍हि‍ से समए एला पछातिए बुझबै। उमाकांत- बौआ भगवान सभ, अहाँ सभ जे करबै से हेतै। हिनकर माहौल आर बनाउ आ हिनका जीताउ। ई अखनि किछु देती नै। जीतला पछाति काज करती आ महि‍नामे एक सप्ताह क्षेत्रमे रहि जनता दरबार लगेती आर सबहक समस्याक समाधान करती वा करेती। सुभद्रा- भाय सभ, आब चलैक आज्ञा देल जाउ। बहुत ठाम जेबाक अछि। बच्चा बाबू- सुभद्रा दीदी जिन्दाबाद। सभ- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। बच्चा बाबू- गदहा छाप जिन्दाबाद। सभ- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। (सुभद्रा दलक प्रस्थान।) पटाक्षेप- सातम दृश्य- (स्थान- थाना। बड़ा बाबू सुजीत, छोटा बाबू रंजीत, हवलदार, सुभाष आ चौकीदार बुधन मंचपर उपस्थित छथि। सभ चुनावक- तैयारीसम्‍बन्‍धमे विचार-विर्मश कऽ रहल छथि। सुजीत-रंजीत कुरसीपर बैसल छथि। सुभाष-बुधन ठाढ़ छथि कातमे) सुजीत- छोटा बाबू, चुनाव बड़ी नजदीक बा। मंगलेवारकेँ बा। आज से 144 लगा दी? रंजीत- बड़ा बाबू, आचार संहिता लगाना जरूरी बा। सुजीत- छोटा बाबू, ढोलहो से काम चली की लाउडस्पीकर से? रंजीत- हमरा विचार से लाउडस्पीकरे अच्छा होइ। सुजीत- लाउडस्पीकर अच्छा बा। (सुजीत कागतपर किछु लिखलथि।) रहए बुधन, एन्ने सुन। बुधन- (लगि आबि) जी सर। सुजीत- हे ई ले। गंगा टेन्टकेँ हीयाँ जो। लाउडस्पीकर लेके प्रचार कऽ दे। कागतमे लिखल हउ। देखके कहै के हउ। बुधन- हमरा बढ़ियाँ जकाँ अक्षर नै चलै छे से? सुजीत- जो न, जइसे होइ तइसे पढ़ देना। बुधन- जे आज्ञा सर। (बुधनक प्रस्थान।) सुभाष- (सुजीतसँ) सर, इसबार चुनावक आयुक्त बड़ी टाइम बा। इसबार बड़ी सावधान रहैके बा। क्षणिक पटाक्षेप (बुधनक प्रवेश) बुधन- सरव सधारण को सूचित किया जाता है कि आज नौ बजे रातसे 144 लागू किया जाता है। चार आदमी एक जगह जहाँ-तहाँ एक साथ नहीं रह सकते है। पकड़े जानेपर कड़ी सजा दी जाएगी तथा पाँच हजार तक की जुर्माना हो सकती है। प्रचार-प्रसार बंद रहेगा। (तीन बेर अही बातकेँ बुधन प्रचार केलथि। बुधनक प्रस्थान। घुटर, मुटर, ननकू आ उतीमक प्रवेश।) घुटर- ऐबेर सुभद्राकेँ जीतेबाक छै। मुटर- छै तँ मौगी। मुदा काज करैमे जोशगर बड़ छै। ननकू- जदी ऐबेर उ मौगी नै जीततौ तँ अपना सभ मसोमात भऽ जेबै। उतीम- ओइ मौगी लेल हम जान दइले तैयार छिऐ। घुटर भाय किछु हेबो करतै की? घुटर- अबस्‍स हेतै, अबस्‍स हेतै। बोल शंकर कैलाशपति। कथीदुनपर पादे लाखपति। (राकेशक प्रवेश। घुटर, मुटर, ननकू आ उतीम गाँजा पीऐले बैसै जाइ गेल। घुटर गाँजा निकलि मुटरकेँ देलक। मुटर गाँजा काटि ननकूकेँ देलक। ननकू गाजा लटा कऽ उतीमकेँ देलक। उतीम गूल बना कऽ गाँजा चीलममे दऽ आगि लगौलक। चारू मस्तीमे गाँजापी रहल छथि। राकेश चारूकेँ दू-दूसए टाका दइ छथि। सुजीत, रंजीत, सुभाष आ बुधनक प्रवेश। पुलिस राकेशकेँ रंगल हाथ पकड़ि लेलथि। पड़ाएल। तइमे ननकू पकड़ा गेल आर तीनू भागि गेल। राकेश आ ननकूकेँ चारि-पाँच सटका सुभाष देलक। दुनू माए गै, बाप रौ चिचिआएल।) सुभाष- साला सभ गाजा पीयत बा। शरीरपर एक्को रत्ती मौस नै बा। हरमजादा सभ पूरा परिवारकेँ गाँजामे पीकेँ नाश करेला। हौ बुधन,सालाकेँ बानधह, ले चलह थाना। बापसे भेँट हो जाइ। (बुधन हथकड़ी लगबैए ननकूकेँ) ई नेतबोकेँ बानहह। टाकासे भोँट खरीदी। (बुधन राकेशकेँ बान्हलक।) इहए साला सभ, पब्लिककेँ गुमराह करत बा। चलऽ एकरा भीतर करी। ननकू- सर, आब गाँजा नै पीबै। गरीब आदमी छी। आइ माफ कऽ दिअ। आब कहियो नै पीबै गाँजा। सुभाष- साला नाही समझता है- नाशा का जो हुआ शिकार। उजड़ा उसका घर परिवार। ननकू- हे सर, गोर लगै छी, पएर पकड़ै छी। (ननकू सुभाषक पएर पकड़ि लेलक) सुभाष- बुधन, खोल दह सालाकेँ। (बुधन हथकड़ी खोलि देलक।) साला, कान पकड़िकेँ दसबार उठो-बैठो। (ननकू कान पकड़ि दसबेर गिन कऽ उठा-बैसी केलक।) जो साला। अब पकड़ाई तब बापसे भेँट कराई। (ननकूक प्रस्थान) रंजीत- बड़ा बाबू, एगो कहबी बा- घरमे भुजी भाँङ नै, मियाँ पादए चुड़ा। साला सभ कमानेमे कोढ़िया बा। लेकिन गाँजा पीनेमे बड़ी तेज बा। सुजीत- छोटा बाबू, इसबार इधर-उधरमे जो पकड़ाई उ साला सीधे ऊपर जाई। ई चुनाव आयुक्तकेँ आँर्डर बा। इसबार चुनाव का नया सिस्टमबा। एक महि‍नासँ प्रत्येक ब्लाँकपर बड़ी ढंगसे प्रत्येक मतदाताकेँ प्रशिक्षण हो रहल बा। मतदाताकेँ आने-जाने के लिए सरकार की ओरसे गाड़ी की बेवस्था बा। पटाक्षेप- (तेसरअंक) पहिल दृश्य- (स्थान- प्राथमिक विधालय। भोँटक तैयारी पूर्ण भऽ गेल अछि। मंचपर पीठासीन पदाधिकारी प्रेम प्रकाश आर तीनटा सी.आर.पी.एफ. महेन्द्र, रवीन्द्र आ सुरेश उपस्थित छथि। प्रेम प्रकाश कुरसीपर बैसल छथि आ हिनका आगूमे टेबूलपर पहचान पत्रसँ मिलैत-जुलैत मतदाताक कार्ड राखल अछि। प्रेम प्रकाश लग दुनू कात महेन्द्र आ रवीन्द्र ठाढ़ छथि। भोँट मशीन कातमे राखल अछि। भोँट मशीन लग सुरेन्द्र ठाढ़ छथि। वातावरण बिल्कुल शान्‍त अछि। प्रेमप्रकाशक कातमे कुरसीपर चुनाव प्रतिनिधि सौरभ बैसल छथि। प्रेम प्रकाश आ सौरभमे सँ कियो ग्रामीण नै छथि।) प्रेम प्रकाश- (घड़ी देखैत) सौरभ, समए भऽ गेल हेन। अखनि धरि कियो मतदाता नै आबि रहल हेन। की कारण छै? सौरभ- हमरा लगैए जे ग्रामीणकेँ नै बुझल छन्‍हि‍ जे आइए भोँट छी। प्रेम प्रकाश- नै, ई नै भऽ सकैए। एक-एकटा भोँटक महत बड़ बेसी छै। प्रत्याशी आ थाना निश्चित बतेने हेतै। ई भऽ सकैए जे मतदाता समैक महत नै बुझैत हेथिन वा प्रत्याशीक काजकर्ता कोढ़ि हएत। (रामेश्वर, जीतेन्द्र, श्रीलाल, राम, श्याम, महेश, गोपाल, सोहन, कृष्णानंद, कन्हैया, गोल, जीबछ, राजा, पलट, पंडीत, सुरेश, राकेश, नवीन, प्रवीण, सुमन, संजीव, राहुल, माला, चन्द्रमोहन, उमाकान्त, लालू, कालू, रहीम, करीम, बदलू, बालचन, लालचन, नन्दन, कुन्दन, आ चन्दनक प्रवेश। सभ कियो पंक्तिबद्ध छथि। सभ कियो बेरा-बेरी अपन पहचान पत्र सौरभकेँ देखा आगू बढ़ि‍ प्रेमप्रकाशसँ भोँट कार्ड लऽ भोँट मशीन लग जा अपन-अपन छापपर कार्ड घुसा बटन दबबै छथि आ प्रस्थान भेल जाइ छथि। ऐ तरहेँ रामेश्वर, जीतेन्द्र आ श्रीलाल प्रस्थान केलथि।) कृष्णानंद- सर, बड़ देरी होइए। गाड़ी जल्दी-जल्दी घीचियौ। बड़ीकालसँ ठाढ़ छी। प्रेमप्रकाश- हम कोनो सुतल नै छी। काज केहन सुन्नर भऽ रहल अछि। बेसी हड़बड़ी अछि तँ पहिने काज केने जाउ। (राम, श्याम, महेश, गोपाल, आ सोहनक भोँट दऽ कऽ प्रस्थान।) राजा- सभटा भुसकोलहा हाकिमकेँ सरकार बुथपर पठा दइ छै। तँए ने एते देरी होइए। सौरभ- अहीं बड्ड तेज छी तँ हाकिम भऽ जइतौं ने? अन्ट-सन्ट नै बाजू। नै तँ बेकारमे धरा जाएब। जे काज करैले आएल छी से काज चुपचाप करू आ रस्ता नापू। (कृष्णानंद, कन्हैया, गोलू, जीबछ आ राजाक भोँट दऽ कऽ प्रस्थान।) राकेश- सर, कनी हाथ चला कऽ काज करियौ। घरपर बड़ जरूरी काज छै। अधरतिएसँ महीस डिरिआइ छै। प्रेमप्रकाश- तखनि जाउ, पहिने महीसेकेँ भोँट खसबा आउ। ओकर तूक बड़ कड़गर होइ छै। (पलट, पंडीत, सुरेश, राकेश आ नवीनक भोँट दऽ कऽ प्रस्थान।) माला- एते सुन्नर ढंगसँ भोँट कहियो नै भेल छल। पहिने तेते ओल-झोल रहै छेलै जे लोककेँ ठाढ़ भेल-भेल डाँर-पीठी अँइठ जाइ छेलै। मुदा ऐबेर सराक-सराक घीचाइ छै। प्रेमप्रकाश- हम ऐबेर लगा कऽ चारिम बेर लोकसभा चुनाव करा रहल छी। मुदा ऐ बेरका जकाँ नीक प्रकिया कोनो बेर नै छल। (प्रवीण, सुमन, संजीव, राहुल आ मालाक भोँट दऽ प्रस्थान।) रहीम- सिपाही साहैब, पाछूसँ हमरा ठेलैए। हमहूँ ठेल दइ जाइ जेबै। तखनि हमर दोख नै देब। महेन्द्र- (रहीमक लग आबि) के ठेलता हाय जी? शान्‍त से लाइनमे रहो। भगदड़ मचाएगा तो चला जाएगा ऊपर। ऊपरेसे आँडर हाय। (सभ ठेला-ठेली बन्न कऽ शान्‍त अछि। महेन्द्र अपन जगहपर गेला। चन्द्रमोहन, उमाकांत, लालू, कालू, रहीम आ करीमक भोँट दऽ प्रस्थान। बदलू, अपन पहचान पत्र सौरभकेँ देलथि। सौरभ तजबीज कऽ देखलनि।) सौरभ- अहाँक की नाम अछि? बदलू- बदलू। सौरभ- पिताजी नाम? बदलू- (कनीकाल गुम्म भऽ) चन्दे। सौरभ- गलत। सिपाही साहैब, ई गलत आदमी छथि। फोटो सेहो नै मिलै छन्‍हि‍। महेन्द्र- (पकड़ि कातमे लऽ जा कऽ) अरे साला, तूँ दुसरे आदमी का फोटो चुराकर काहे आ गया? (बेंत बरसाबए लगल। बदलू बाप रौ, माए गै चिचिआइए। सभ मतदाता ओकरा देखै छथि। बदलू खसि पड़ल। बेंत बरसि रहलए। तत्काल भोँट रूकल अछि।) बदलू- सिपाही साहैब, आब नै यौ। आब छोड़ि दिअ। आब नै गलती करबै। (महेन्द्र पीटनाइ छोड़ि देलथि।) महेन्द्र- साला, कान पकड़ो आ उठो-बैठो। (बदलू कान पकड़ि उठल-बैसल।) जाओ साला। (बदलूक प्रस्थान। भोँट शुरू भेल। महेन्द्र अपना जगहपर गेलथि। बेरा-बेरी बालचन, लालचन, नन्दन, कुन्दन आ चन्दनकेँ भोँट दऽ कऽ प्रस्थान। कनीकाल कोनो मतदाता नै एला।) सौरभ- सर, मतदाता लोकनि कि‍ए नै आबि रहल छथि? प्रेमप्रकाश- भोजनक समए भऽ गेलै। भऽ सकैए अहू दुआरे नै आबैत होथि। एगो मतदाताकेँ अखनि मारि लगि गेलै। तहूसँ दहसत भऽ गेल हेतै।सीपाही साहैब, ओत्ते कि‍ए पीटलिऐ? महेन्द्र- सर, कम्मे पीटा। और पीटना चाहिए। ताकि दूसरा ऐसा नहीं करे। ऊपर से ही आँडर है। (बच्चा बाबू, घुटर, मुटर, भीखन, उतीम, बेचू, किशुन, भगत, ननकू, सुलेमान, सलीम, सलाउद्दीन, नाजनी, हीना, लरूबती, आनन्दी, जीबू, पंचू आ बनझरूक प्रवेश। सभ कियो एक्के पंक्तिमे ठाढ़ छथि। भोँट शांतीपूर्ण चलि रहल अछि। बच्चा बाब, घुटर, मुटर, भीखन उत्तीमक भोँट दऽ कऽ प्रस्थान। बेचू- सर, कहाँदुन बदलूकेँ सिपाही साहैब बड्ड मारलखिन बेचाराकेँ पानि चढ़ै छेलै। सौरभ- गलती करै जाइ जेबै तँ अहिना होइ जाएत। खूनबै खादि तँ खसबै नै। (चुनाव निरिक्षक डी.एस.पी. गणपती आ दूटा सी.आर.पी.एफ. पवन आ रमन केर प्रवेश। वातावरण आर शान्‍त भऽ गेल भोँट शांतीपूर्ण चलि रहलए।) गणपति- (प्रेमप्रकाशसँ) सर, भोँटक की स्थित अछि? प्रेमप्रकाश- बड़ नीक जकाँ चलि रहल अछि सर। गणपति- कोनो तरहक समस्या? प्रेमप्रकाश- नै सर, कोनो समस्या नै। गणपति- जदी कोनो तरहक समस्या आबए, फोन करब। हमरा लोकनि चलै छी। (गणपति, पवन आ रमनक प्रस्थान। बेचू, किशुन, भगत,ननकू आ सुलेमानक प्रस्थान।) सलीम- सलाउद्दीन भाय, अपन छाप गदहा छाप मन रखीयह। महेन्द्र- सभ चुपचाप रहो। कोइ किसी को ये सभ नहीं बताएगा। ये सभ गुप्त रखने की बातें है। सभ चुपचाप अपना भोँट डालकर जाउ। (सलीम, सलाउद्दीन, नाजनी, हीना, लरूबती, आनंदीक भोँट दऽ कऽ प्रस्थान। सूरज, पंकज, मोहन आ पप्पुक प्रवेश। चारू लग हथियार छन्‍हि‍। चारू मस्तीमे अछि। चारू प्रेमप्रकाश आ सौरभ लग गेलथि।) सूरज- (सौरभसँ) सर, अखनि धरि केते भोँट भेल हएत? सौरभ- लमसम पचास प्रतिशत भेल। पंकज- आब अपने सभ कनी कात होइयौ। बाँचल भोँट हम सभ खसेबै। मोहन- अहाँ सभ ऊपर शिकाइत सेहो नै करबै। नै तँ घुरि कऽ घर नै जाएब। (शीघ्र मोहनकेँ महेन्द्र गोली मारि खसा देलक। एक दि‍स तीनू सिपाही आ दोसर दि‍स तीनू भोँट लूटैबला मे गोली चलए लगल। जीबू, पंचू आ बनझरू खराप स्थिति देखि पड़ा गेल। प्रेमप्रकाश आ सौरभ अढ़मे नुका रहलथि। पाँचटा गुण्डा राजू, तसलीम, मोसलीम आ ब्रहानंदक प्रवेश। अंधाधुन गोली चलि रहल अछि। सुरेन्द्रकेँ गोली लगि गेल। उ खसि पड़ल। खसलाहा सभ कराहि रहल अछि। शीघ्र सूरज, पंकज आ राजू खसि पड़ल। गणपति, पवन आ रमनक प्रवेश। गणपति, पवन आ रमन सेहो गोली चलाबए लगल। राणा, तसलीम, मोसलीम आ ब्रहानंद खसि पड़ल। पप्पु मौका पाबि भागल। सिपाही खिङहारलथि‍। कनी दूर जा कऽ पप्पूकेँ गोली लगि गेल आ उ खसि कराहि रहल अछि। शीघ्र पप्पु दम तोड़ि देलक। पाँचू सिपाही बुथपर एलथि।) महेन्द्र- आज सुरेन्द्र भाई शहीद हो गए। सभी बुथ लुटेरों के परिजन रोएंगे, बिलखेंगे। हा-हा-हा। ऽ ऽ ऽ। हमारे बुजुर्ग लोग जो छुपे हुए है, कृपया यहाँ आँए। (प्रेमप्रकाश आ सौरभ बहरेलथि आ सभ एकठाम भेलथि।) हमलोग शहीद सुरेन्द्र की आत्मा की शांती के लीए एक मिनट का मौन धारण रखें। (सातू आदमी एकमिनट मौन धारण रखलनि।) गणपति- भाय सुरेन्द्रक लाशकेँ बाइ इज्जत हिनका परिजनकेँ चलू सौंपि दी। भोँटक समए आब खतमे भऽ रहल अछि। ओम्हरसँ ओम्हरै थाना पर सेहो कहि देबै ऐ लाशकेँ पोस्टमार्टम लेल लऽ जाइ ले। (महेन्द्र आ रवीन्द्र सुरेन्द्रक लाशकेँ उठा कऽ लादि अन्दर गेलथि। गणपति, पवन आ रमन सेहो अन्दर गेलथि।) पटाक्षेप- दोसर दृश्य- (स्थान- बबाजीक चाह दोकान। दोकानपर रामेश्वर, जीतेन्द्र, कृष्णानंद, कन्हैया, राकेश, उमाकांत आ चन्द्रमोहन बैस कऽ भोँटक विषयमे गप-सप्‍प करै छथि। आर चाह पीबै जाइ छथि।) बबाजी- रामेश्वर बाबू, अपना क्षेत्रसँ ऐबेर कोन पार्टीकेँ निकलैक उम्मीद छै? रामेश्वर- निश्चित कहनाइ तँ मुश्किल छै। कारण कोन मतदाता कोन पार्टीकेँ भोँट देलक, ई बुझनाइ बड़ असम्‍भव छै। तखनि हमर पार्टीक माहौल नीक छेलै। ओकरा जीतैक बेसी संभवाना छै। जीतेन्द्र- कटहर छाप केते भोँटसँ जीतत? ई नै कहि सकै छी। मुदा निश्चित जीतत, से हमर दाबा अछि। उमाकांत- बाउ, दाबा नै ठोकहक। अपन दहीकेँ कोइ खट्टा नै कहै छै। अपना भरि सभ पार्टी एकपर-एक छै। बबाजी- बाबा, अपनेक विचारसँ कोन पार्टी पक्का निकलतै? उमाकांत- पक्काबला बात हम नै कहि सकै छी। पानिमे मछरी नअ-नअ कुटिया बखरा। हम अनुमानतह कहि सकै छी जे बेसी उम्मीद ब्रजेश निकलि जाएत। राकेश- काका, अहाँक अनुमान पूर्ण ठीक अछि। कारण ब्रजेशमे छल-बल-कल सभटा छन्‍हि‍। कृष्णानंद- फीरन भैयाक मारूती पार्टकेँ कियो नै हरा सकै छथि। पब्लिक आब ओत्ते मुरूख नै रहि गेल हेन। रसे-रसे सभ बुधियार भऽ रहल छै। फीरन भैयाक कला सभकेँ अपना दि‍स घीचबे करतै। कन्हैया- कृष्णानंद भाय, मौगी साइकिल छाप तँ अपन छाप छी। हमरा ऐ छापक सम्‍बन्‍धमे नै बाजक चाही जे ई छाप हारि जाएत। मुदा बाजऽ पड़ैए जे अपन छापकेँ जीतैक संभावना बड़ कम छै। चन्द्रमोहन- जदी पब्लिककेँ कनियो-कनियो दिमाग हेतै तँ सुभद्रा दीदी यानी गदहा छाप निश्चित जीतत। पब्लिक आब चलाक भऽ गेलै हेन। बड़ सोचि-विचारि कऽ भोँट खसबै छै। सभ नेताकेँ बुझाइ छन्‍हि‍ जे पब्लिक हमरे दि‍सन अछि। मुदा नै। पब्लिक केम्हर छथि, से वएहटा बूझि सकै छथि। ई हुनकर बुधियारी छियनि। उमाकांत- बौआ, एकलाख नै करोड़क बात बजलह। जनतामे जागृति तीव्र गतिसँ एलै हेन आ आबि रहलै हेन। तखनि किछु-किछु हुरार आ मचंड रहबे करतै। सए हंसमे एगो बौगला हंसे। (सभ कियो चाह पीब कप निच्चासँ रखलनि। बबाजी शीघ्र कप धोलनि।) बबाजी- ऐबेर जौं विवेक भैया ब्रजेश भैयामे नै मिलतथिन तँ हुनकर जीत सुनिश्चित छेलनि। कृष्णानंद- जखनि उ ब्रजेश भैयामे मिलि गेलखिन तँ ब्रजेश भैयाकेँ निश्चित जीतक चाही। मुदा हुनकर जोगाड़ नै सुतरलनि। बेचारा जइ तागतपर कुदै छलाह, से सभ तागत भोँट दिन ऐ दुनियाँसँ चलि गेलखिन। बेचारा विकलांग भऽ गेल। चन्द्रमोहन- बेचारा सभ आगि बड़ मुतै छेलखिन। बाबाजी- भोँटक गिनती कहिया हेतै? चन्द्रमोहन- कौल्हुके समए छै। अखनि सभ पार्टी कबुला-पाती करैत हएत जे हम जीतब तँ ई चढ़ाएब, हम जीतब तँ ई चढ़ाएब। राकेश भायक पार्टी ऐबेर जीतबे करत एक, दू, तीन। जीतक पछाति अहाँ कथी चढ़ेबै भाय? नै हएत तँ रसगुल्ले बरसा देब। राकेश- (खीसिया कऽ मुड़ी डोलबैत) चन्द्रमोहन, हम सभटा बुझै छी। हमरा अहाँ बुड़बक बना रहल छी। बात खराप भऽ जाएत। चन्द्रमोहन- जे पार्टी जनताकेँ पाइसँ पटीएलथि, उ पार्टी नै जीतत तँ आन कोन पार्टी जीतत? राकेश- अहींक पार्टीकेँ बड्ड दम छेलए तँ कीअए नै जनताकेँ पाइसँ पटि‍येलथि? चन्द्रमोहन- हमरा पार्टीकेँ अहाँ जकाँ घोटालाबला थोरहे छै से? राकेश- हमरा पार्टीकेँ जे छै से अपन कमाइ छै आ अहाँक पार्टीकेँ बापबला घोटालाक पाइ छै। चन्द्रमोहन- जे छै से जनसेवामे लगा रहल छथिन आ अहाँक पार्टी पेट पूजामे लगा रहल छथि। राकेश- हमर पार्टी अहाँक पार्टीकेँ चुटकीमे मीड़ देत। चन्द्रमोहन- तँए ने पुलिसबला ओइ राति सुआगत केने रहथि। बड़ दम छेलए तँ पुलिसकेँ चुटकीमे मीड़ दइतिऐ ने? राकेश- पुलिसबला तोहर बाप छियौ। चन्द्रमोहन- तोरे बाप छियौ। राकेश- तोहर बापक बाप छियौ। चन्द्रमोहन- मुँह सम्हारि कऽ बाज। उनटे चोरी उनटे सीना जोरी। राकेश- साला, तोहर माए-बहि‍नकेँ चोरौलियौ? चन्द्रमोहन- सार, जो ने अपन माए-बहि‍नकेँ चोरबिहेँ। उमाकांत- बौआ सभ, अपनामे झगड़-दन नै करै जाइ जो। केकर खेती केकर गाए, कोन पापी रोमऽ जाए। जीतत कोइ आर मारि करू आ मरू हम सभ। ई बात नीक नै। तूँ सभ शान्‍त भऽ जाइ जो। राकेश- सएह कहियौ ने? ऐ सरबाकेँ दिमाग जे नै छै। चन्द्रमोहन- सार, तूँ बड़ सार-सार करै छेँ। अखनि भेँट करा देबौ। राकेश- (उठि कऽ ठाढ़ भऽ) हरमजादा, आ फरीयाले। कोन बाप काज दइ छौ, देखै छियौ। बबाजी- हे सरकार सभ, अपने सभ दोकानपर सँ जइयौ। एत्त झगड़ा नै करू। अपनामे एना कि‍ए करै जाइ छी? फेर रहै जाएब एक्केठाम। चन्द्रमोहन- हरामी बच्चा गारि कि‍ए पढ़ि देलक? एक्को रत्ती दिमाग नै छै हरामी बच्चाकेँ। राकेश- रै घोड़ा बच्चा, तोरा हम नानासँ भेँट कराबै छियौ। (चन्द्रमोहन आ राकेश लप्पर-थप्पर करैत उठा-पटकी करए लगल। दुनू एक-दोसरकेँ पटकि रहलए। उमाकांत छोड़बैले गेला। हुनको ताउ नै मानै जाइ गेल। हुनको खसा देलक। उ उठि कऽ प्रस्थान कऽ गेला। उठ्ठम-पटका चलि रहलए। बबाजी आ रामेश्वर झगड़ा छोड़ा दुनूकेँ दू दि‍स केलनि। चारूगोटे हकमि रहलए।) कृष्णानंद- चन्द्रमोहन आ राकेश, तूँ सभ ई नीक नै करै जाइ गेलेँ। आइ समाज बूझि गेलौ जे तूँ सभ पक्का मुरूख आ मचंड छेँ। पटाक्षेप- तेसर दृश्य- (स्थान- भगवती मंदीर। मंदीरमे पूजारी देवनाथ उपस्थित छथि। देवनाथ धूप-आगरब्ती करै छथि।) देवनाथ- या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमह। (ई शलोक देवनाथ तीन बेर गाउलनि। धूप अगरबत्ती रखि देलनि।) ऐबेर भोँट बड़ बढ़ियाँ भेलै। एक्को रत्ती एम्हर-ओम्हर सरकार नै चलऽ देलकै। केहेन-केहेन मोंछबलाकेँ बापसँ पुलिस भेँट करा देलकै। भोँटक गिनती काल्हिए छिऐ। जे नशीबक तेज हेतासे निकलता। ओना हमरा लगैए जे ब्रजेश भैया निकलि जेता। आनदिन ऐबेर धरि किछु दक्षिणा-पाती भऽ गेल रहै छेलए। मुदा औझका संजोगे खराप लगैए। (गोबर्धन आ रामेश्वरक प्रवेश। दुनूगोटे भगवतीकेँ प्रणाम केलथि।) गोबर्धन- पंडीजी प्रणाम। देवनाथ- कोन असि‍रवाद दी जजमान? पकिया-कचिया वा मझौलबा? गोबर्धन- पकिया असि‍रवाद देब की? देवनाथ- अहाँकेँ पकिए चाहबे करी। मुदा ओकर रेट बड़ कड़गर छै। गोबर्धन- केते? देवनाथ- पाँचसए एक टाका। गोबर्धन- पंडीजी रेट ठीके बड़ कड़गर अछि। किछु कम करियौ। देवनाथ- जाउ जजमान, बोहनि‍ अखनि धरि नै भेल हेन तँए चारिसए एके टाका दिअ। अहाँ नै बुझै छिऐ, भोँट भेलै हेन। मँहगाइ बढ़त आ बढ़लो अछि। गोबर्धन- अच्छा छोड़ू लटारम। तीन सए एक टाका देब। अहाँ असि‍रवाद दिअ। देवनाथ- जजमानक बात तँ मानहे पड़त। अच्छा लाउ। (गोबर्धन तीनसए एक टाका देवनाथकेँ देलनि। देवनाथ गोबर्धनकेँ पीठी ठोकि रहल छथि।) एक, दू, तीन। अहाँ पक्का जीतब, पक्का जीतब, पक्का जीतब। गोबर्धन- हे भगवती जदी हम जीत गेलौं तँ एकमन घीसँ बनल लड़ू चढ़ाएब। (भगवतीकेँ प्राणाम कऽ गोबर्धन आ रामेश्वरक प्रस्थान। फीरन आ कन्हैयाक प्रवेश।) देवनाथ- आउ-आउ जजमान, बड़ भाग्यशाली छी अहाँ। (फीरन आ कन्हैया भगवतीकेँ प्रणाम केलनि।) फीरन- परणाम। देवनाथ- अहाँ प्रत्याशी छिऐ। बिनु दक्षिणाकेँ असि‍रवाद नै देब। अहाँले औझका असि‍रवाद बड़ महत छै। फीरन- हौ ने, अहाँ असि‍रवाद दिअ दक्षिणा अबस्‍स हेतै। देवनाथ- पहिने तँए करू, केते देब। पछाति हम हुज्जत नै करब। फीरन- अहाँ असि‍रवाद दियौ ने। अहाकेँ दक्षिणा कम नै देब, बेसीए देब पूरा एगारह टाका। (देवनाथ पीनकि कऽ भागि गेला। फेर शीघ्र आपस एला।) देवनाथ- गोबर्धनलाल हँसी-खुशीसँ पान सए एकावन टाका देलखिन हेन। अहाँ चारिओ सए एक दियौ। फीरन- अहाँ असि‍रवाद दिअ। जौं हम जीत गेलौं तँ अहाँक पएरपर पाँचसए एक टाका दऽ जाएब। देवनाथ- उधारी केतौ असि‍रवाद होइ। अच्छा लाउ, एक सए एके टाका। फीरन- तखनि आइ अहाँ असि‍रवाद छोड़ि दियौ। काल्हि हम अबै छी। देवनाथ- (पीनकि कऽ) जाउ, ने तँ गुणे फल हएत। फीरन- कौआ सरापने बेंग नै मरै छै। मैया भगवतीक किरपा रहक चाही। हे भगवती। जौं हम जीत गेलौं तँ अहाँकेँ जुआएल पारा चढ़ाएब। (फीरन आ कन्हैयाक प्रस्थान।) देवनाथ- ई नेतबा तँ ठाँइ गिरह छेलए। ओह। हुसि गेल। नै सुतरि सकल। एगारहो टाका भऽ जइतए तँ नफ्फे छेलए। हमहूँ बड़ बेकूफ छिऐ। (अपन मुँहपर थप्पर मारलक।) सार मुँह, तूँ कि‍ए नै बजलेँ- जे देबसे दियौ। आइसँ सार मुँह कहियो एना गलती नै करिहेँ। नै तँ बापसँ भेँट करेबौ। (विवेक आ राकेशक प्रवेश। दुनू मस्तीमे छथि।) विवेक- (झुमैत-झामैत) पंडीज, की हाल-चाल? देवनाथ- विवेक भैया, अहाँक किरपासँ बड़ नीक अछि। पहिने भगवतीकेँ प्रणाम करू। (विवेक आ राकेश भगवतीकेँ प्रणाम केलनि।) भैया, अहाँक पार्टी ऐबेर बाजी मारबे करत। अहाँ जइ पार्टी दि‍स तकबै ओकर विजय सुनिश्चित छै। विवेक- अहाँक मुहसँ एहेन सुन्नर बचन बहराएल, ओइसँ हम बड़ प्रसन्न छी। देवनाथ- जदी अहाँ हमरापर प्रसन्न छी तँ किछु दक्षिणा-पाती दऽ दइतिऐ तँ बड़ नीक होइतै ही, ही, ही ऽ ऽ ऽ। विवेक- जदी अहाँ मुँह छोड़ि देलौं तँ नै पान तँ पानक डंटी हेबे करतै। (एगो पनटकही विवेक जेबीसँ निकलि देवनाथकेँ देलनि।) पंडीजी, खुश छिऐ ने? देवनाथ- भैया, अहाँपर खुश नै रहबै तँ हम केतए भऽ कऽ रहबै? ही, ही, ही ऽ ऽ ऽ। अहाँ एम.पी. साहैबक अप्पन आदमी छिऐ। अहाँकेँ बेसी दक्षिणा देबाक चाही। विवेक- पंडीजी, अहाँ मन छोट नै करू। हम जीतक पछाति फेर अबै छी। मनमाना दक्षिणा-पाति देब। हमर जीत निश्चिते अछि। अहाँ दक्षिणा-पातिमे की सभ लेब, से विचारि कऽ राखू। देवनाथ- ही, ही, ही ऽ ऽ ऽ। बेस हम सोचि-विचारि लइ छी। मुदा भगवतीकेँ अहाँ की चढ़ेबनि, से कहि दि‍यनु नति दि‍यनु। हुनके हाथमे सभ किछु छन्‍हि‍। विवेक- हे भगवती, अहाँक किरपासँ हमर पार्टी जीतबे करत। हमरा तँ मन छल जे अहाँकेँ हम शेरक बलि दइतौं। कारण हमर पार्टी बड़ पैघ पार्टी छै। मुदा शेर अहाँक सवारी छी तँए शेरक बलि अनुचित हएत। तै बदलामे हम कबुला करै छी जे एक जोड़ा जुआएल बत्तूक बलि देब। की पंडीजी, ठीक भेलै ने? देवनाथ- घीओसँ चिक्कन भेलै। (विवेक आ राकेशकेँ भगवतीकेँ प्रणाम कऽ झुमैत-झामैत प्रस्थान।) पटाक्षेप- चारिम दृश्य- (स्थान- समाहरणालय। समाहरणालयक एकटा कोठलीमे भोँट मशीन सभ राखलए। दूटा सी.आर.पी.एफ. महेन्द्र आ रवीन्द्र भोँट मशीनक पहरा दऽ रहलए, रौतुका समए। तखने ब्रजेशक गुण्डाक सरदार प्रदीपक साधारण भेषमे प्रवेश।) प्रदीप- (महेन्द्रसँ) सर, की हाल-चाल अछि? महेन्द्र- हाल-चाल अच्छा है। लेकिन बात क्या है? प्रदीप- सर, बात कोनो खास नै छै। अखनि अहाँकेँ किछु माल कमाइकेँ बढ़ियाँ मौका अछि। माल लेल सौंसे दुनियाँ हरान छै। महेन्द्र- आप कहना क्या चाहते है? प्रदीप- सर, अपने सभ वुजुर्ग बेकती छिऐ। बूझिए गेल हेबै। तैयो कहि दइ छी। हम एम.पी. साहैब ब्रजेशक आदमी छी। भोँट मशीन बदलैक आँर्डर दइतिऐ। मुँहमंगा इनाम भेटतए। महेन्द्र- आप चुपचाप यहाँ से चले जाइए। हमलोगोको कोइ इनाम नहीं चाहिए। सरकार हमको बहुत इनाम दे रही है। ब्रजेशबा को कहना- अपना इनाम अपने पास रखनेके लिए। प्रदीप- अहाँकेँ बजैक सभ्यता नै अछि की? एम.पी. साहैबकेँ केना कहि देलिऐ ब्रजेशबा? महेन्द्र- आप बहुत सभ्यता वाले आदमी हैं। क्या आपका यही काम है भोँट हेरा-फेरी करना? चुपचाप यहाँसे चले जाइए। बकबास मत कीजिए। प्रदीप- सर, कृपया कोठरीक चाभी देल जाउ। रवीन्द्र- यदि आप भला चाहते हैं तो चुपचाप यहाँ से चले जाइए। अन्यथा बकसे नहीं जाऐंगे। ऊपरसे ही आँर्डर है। प्रदीप- अहाँ सभ चाभी दिअ, नै तँ बकसल नै जाएब। (महेन्द्र प्रदीपकेँ गोली मारि देलथि। शीघ्र चारिटा गुण्डा उमेश, रमेश, गणेश आ महेशक प्रवेश। प्रदीप कराहैत-कराहैत मरि गेल। दुनू तरफसँ गोली चलि रहलए। रवीन्द्र उमेशकेँ गोली मारलथि। उमेश खसि कराहि‍ रहलए। महेन्द्र, रमेशकेँ गोली मारलथि। रमेश खसि कराहि‍ रहलए। उमेश मरि गेल। रवीन्द्र गणेशकेँ गोली मारि खसेलथि। गणेश कराहैत-कराहैत मरि गेल। महेश महेन्द्रकेँ बाँहिमे गोली मारि देलक। रवीन्द्र महेशक माथमे गोली मारि देलथि। महेश कराहैत-कराहैत दम तोड़ि देलक। ऐ तरहेँ पाँचू गुण्डा मरल पड़ल अछि। महेन्द्र बाँहि पकड़ने ठाढ़ छथि। महेन्द्र आ रवीन्द्र हकमैत ठाढ़ अछि। रवीन्द्र- महेन्द्र भाय, आपकी हालत कैसी है? महेन्द्र- मै ठीक हूँ। जल्दी हाँस्पीटल ले चलिए। (कलक्टर साहैब कुलदीप आ हिनक चपरासी इन्द्रदेवक प्रवेश। दृश्य देखि कुलदीप आश्चर्यचकित छथि।) कुलदीप- अहाँ सभ ठीक छी किने? रवीन्द्र- सर, महेन्द्र भाय की बाँहमे गोली लगी है। कुलदीप- इन्द्रदेव, अहाँ महेन्द्रकेँ जल्दी अस्पताल लऽ जाउ। इन्द्रदव- जे आज्ञा सर। (आगू-आगू इन्द्रदेव आ पाछू-पाछू महेन्द्रक प्रस्थान।) कुलदीप- अहाँ सभ भारतक वीर सपूत छी। अहाँ सभकेँ हमर हार्दिक धैनवाद। (कुलदीप सुजीतकेँ फोन करै छथि।) हल्लो बड़ा बाबू, अहाँ जल्दी आबि लाशकेँ पोस्टमार्टम लेल लऽ जाउ। सुजीत- जी सर, तुरन्त एलौं। कुलदीप- हम अहाँ दुनू सुरक्षा बलक वीरतासँ अति प्रसन्न छी। महेन्द्र एता तँ हम अहाँ दुनूकेँ सम्मानित करब। (सुजीत, रंजीत, सुभाष आ बुधनक प्रवेश आपसमे प्रणाम-पाती भेल।) सुजीत- (कुलदीपसँ) जी सर, हम हाजिर छी। कुलदीप- लाशकेँ पोस्टमार्टम लेल जल्दी लऽ जाउ। (सुभाष आ बुधन लाशकेँ अन्दर लऽ गेलथि। फेर आपसमे प्रणाम-पाती भऽ सुजीत, रंजीत सुभाष आ बुधनक प्रस्थान। कुलदीप बैसलथि।) अच्छा रवीन्द्र, ई सभ भेल केना? रवीन्द्र- पाँचू गुण्डा ब्रजेशबा आदमी छल। जइमे एगो कम्पयुटर इंजीनियर सेहो छल। सभ भोँटक हेरा-फेरीमे आएल छल। हमरा सभकेँ मुँह मंगा इनाम गछलक आ कोठलीक चाभी माँगलक। हम सभ चाभी नै देलिऐ। हमरा सभकेँ कम्‍प्‍यूटर इंजीनियर चुनौती दऽ देलक। तहीपर दुनू दि‍ससँ गोली चलए लगल। परिणाम अपनेक समक्ष अछि। (इन्द्रदेव आ महेन्द्रक प्रवेश। महेन्द्रकेँ मरहम-पट्टी लागल छन्‍हि‍।) कुलदीप- महेन्द्र, जदी भारतमे अहीं सभ जकाँ वीर सिपाही भऽ जाइ तँ भारतक चौमुखी वि‍कासमे अति शीघ्रता आएत। काल्हि हम दुनू वीरकेँ सम्मानीत करब। भारतमे बेसी पुलीस माल कमाइक चक्करमे रहै छै। उ घूस लऽ कऽ नमहरसँ-नमहर केसकेँ छोटसँ-छोट बना दइ छै। फलस्वरूप अपराधीकेँ सह बढ़ै छै आ उ मनमाना करै छै। मारल जाइ छथि पब्लिक बेचारा। एतुक्का संविधानो किछु उटपटांग छै। ओइमे हमरा नजरिमे प्रधान अछि- प्रत्येक विभागपर राजनीतिक दवाब। महेन्द्र आ रवीन्द्र, काल्हि भोँटक गिनतीसँ पूर्व हम अपने सभकेँ सम्मानित करब। पटाक्षेप- पाँचम दृश्य- (स्थान- समाहरणालय। भोँटक गिनतीक तैयारी अछि। महेन्द्र आ रवीन्द्र भोँट मशीनक रक्षा कऽ रहल छथि। गोवर्धनलाल, रामेश्वर आ श्रीलालक प्रवेश। सभ बैसलथि कुरसीपर। शीघ्र फीरन, कृष्णानंद आ कन्हैयाक प्रवेश। सभ कुरसीपर बैसलथि। ब्रजेश,सुरेश, विवेक, राकेश, भोलू आ शोभूक प्रवेश। सभ कुरसीपर बैसलथि। सुभद्रा, माला, चन्द्रमोहन आ उमाकांतक प्रवेश। सभ कुरसीपर बैसलथि। गिनती पदाधिकारी प्रेमकान्त आ शुभकान्तक प्रवेश। सभ अपन-अपन सीटपर बैसलथि। अन्तमे इन्द्रदेवक संग कुलदीपक प्रवेश। इन्द्रदेवक हाथमे दूटा फूलमाला दूटा प्रशस्ति पत्र आ दूटा मेडल छथि। कुलदीपकेँ देखि सभ ठाढ़ भऽ गेलथि। हुनका बैसला उपरान्त सभ अपन-अपन सीटपर बैसलथि। वातावरण बिल्कुल शान्‍त अछि।) कुलदीप- आदरणीय प्रत्याशी लोकनि, हुनकर सहयोगी लोकनि आ सुरक्षाबल लोकनि। औझुका दिन अपने सबहक लेल बड़ महत्वपूर्ण दिन अछि। अहाँ सभ जनसेवा लेल जे तन-मन-धनसँ परिश्रम केलौं ओकर परिणाम आइ घोषित कएल जाएत। ऐबेर नव ढंगसँ भोँट भेल जइमे केतौसँ कोनो तरहक गड़बड़ीक सूचना नै अछि। मुदा एगो प्रत्याशी गड़बड़ करैक प्रयास केलनि जइमे हुनका सफलता नै भेटलनि। हमरा नजरिसँ उ बड़ पैघ घिनौना काज केलनि। हम हुनकर नाओं कहि दइतौं, मुदा नै कहब। कारण ओइ प्रत्याशीक नाओं लइमे हमहीं पापी साबित हएब। ऐ बीचमे हम अपने सबहक मात्र पाँच मिनटक समए बरबाद करब। ऊहो हम अपना लेल नै, अहीं सबहक सुरक्षा आ संरक्षा लेल। अखनि अपना सबहक बीच उपस्थित देशक दूटा वीर सपूत महेन्द्र आ रवीन्द्रकेँ हम सम्मानीत करबनि। (महेन्द्र आ रवीन्द्र हाथ जोड़ि सभकेँ प्रणाम केलथि।) कारण ई दुनू गोटे जानपर खेल कऽ अपन कर्त्तव्यक पूर्ण पालन केलथि। आइ देशमे एहने वीर सपूतक आवश्यकता छै। नै तँ देशफेर गुलाम भऽ जाएत। भाय महेन्द्र आ रवीन्द्रसँ आग्रह जे अपने सभ देशक भवि‍स लोकनिक समक्ष उपस्थित हेबाक कष्ट करी। (महेन्द्र आ रवीन्द्र कुलदीप लग जा दर्शक दि‍स घुमलथि। कुलदीप पहिने महेन्द्रकेँ फूलमाला पहिरौलथि। थोपरीक बोछार भेल। प्रशस्‍तीपत्र देखलखिन। फेर कुलदीप रवीन्द्रकेँ फूलमाला पहिरौलथि। थोपरीक बोछार भेल। फेर उ हुनका प्रशस्तीपत्र देलखिन। थोपरीक बोछार भेल।) आब अपना सभ भोँटक गिनती दि‍स आबि आ अपन-अपन भाग्यकेँ अजमाबी। (महेन्द्र आ रवीन्द्र अपन जगहपर बिराजमान भऽ गेलथि।) गिनती पदाधिकारीसँ आग्रह जे भोँटक गिनती शुरू करथि। (दुनू गिनती पदाधिकारी भोँट मशीनसँ भोँटक व्योरा निकालिएक ठाम करै जाइ गेलथि। सबहक भोँटक योग भेल।) प्रेमकांत- महानुभाव, भोँटक गिनती भऽ गेल। गोबर्धनलाल- कटहर छाप- ५०,००९ फीरन- मौगी साइकिल छाप- १५,०८० ब्रजेश- बत्तू छाप- ५,००२ सुभद्रा- गदहा छाप- १,२५,३६१ (गोबर्धनलाल, फीरन आ ब्रजेशक दलक उदास मने प्रस्थान। फेर शीघ्र ब्रजेश दलक प्रवेश सुभद्रा दल पसन्न छथि।) कुलदीप- हल्लो सर, जी, जी, जी, जी, जी। सर, बहुत असम्‍भव छै। कनी-मनीक अन्तर नै छै। केतए एक लाख पच्चीस हजार तीनसए एकसठ आ केतए मात्र पाँच हजार दू। एक-दू सएक अन्तर रहितै तँ किछु सोचल जा सकै छेलै। मुदा एते अन्तरमे किछु सोचनाइ बेकूफी अछि। सर, प्रतिष्ठा बड़ी कठिनसँ अबै छै। जी, जी, जी, जी, जी। सर कोनो उपए सम्‍भव नै छै। जी, जी, जी। सर, अहाँ एक करोड़क बात कहै छिऐ। हजारो-लाखो करोड़मे ई काज सम्‍भव नै अछि। हम अपन प्रतिष्ठाक संग खेलवार नै करब। (फोन काटि देलथि कुलदीप।) अंतीम परिणाम हम घोषित करै छी। सुभद्रा अपन निकटतम प्रतिद्वन्दी गोबर्धनलालसँ ७५,३५२ भोँटसँ आगू निकलि विजयी भेली। शीघ्र हिनका प्रमाण पत्र भेटतनि। (ब्रजेश दलक प्रस्थान। कुलदीप प्रमाण पत्र बना ओइपर मोहर दऽ तैयार केलथि।) आउ सुभद्रा, अहाँ अपन जीतक प्रमाण पत्र लऽ जाउ। (सुभद्रा कुलदीप लग जा अपन प्रमाण पत्र कुलदीपसँ लेली। थोपरीक बोछार भेल। सुभद्रा प्रसन्न मने आपस भेली। सुभद्रा दलक नारा लगबैत प्रस्थान। चन्द्रमोहन नारा लगौलनि।) आन क्षेत्रक भोँटक गिनती पछाति हएत। जेना-जेना भोँट भेल वा हएत, तेना-तेना भोँटक गिनती भेल वा हएत। नीक परिणाम लेल नीक सिस्टम चाही। पटाक्षेप- छठम दृश्य- (स्थान- सुभद्राक अवास। सुभद्रा, माला, चन्द्रमोहन, लालू, कालू, रहीम, करीम, बदलू आ उमाकांत उपस्थित छथि। सभ रंग-अबीर लगेने पसन्न छथि। मुख्य आदमी कुरसीपर बैसल छथि आ किछु आदमी ठाढ़ छथि।) सुभद्रा- (हाथ जोड़ि) काका, अपने सबहक असि‍रवादसँ हमरा नीक सफलता भेटल। दिल्ली जाइसँ पहिने अपन जनता जनार्दनकेँ दर्शन कऽ ली आ उ आइए बढ़ियाँ होइतै। उमाकांत- बुच्ची, अहाँक विचार उत्तम अछि। अखनि सभ कियो सम्हरल छी। चलै-चलू। चन्द्रमोहन- दीदी, एगो नै हेतै। काल्हि वा परसु एगो आम सभाक आयोजन करू। पब्लिक सभ एबे करथिन। ओहीमे पब्लिक दर्शन भऽ जेतै। सुभद्रा- हमरा विचारसँ बढ़ियाँ नै हेतै। भोँट लइ कालमे घरे-घरे जाइ छेलिऐ आ जीतक पछाति जनता जनार्दनक दर्शन लेल आम सभाक मदति लेब। ई हमरा नै अरघैए। पहिलुका सम्‍बन्‍धसँ अखुनका सम्‍बन्‍ध नीक हेबाक चाही। मतलब निकल गया तो पहचानते नहीं बला गप उचित नै। माला- दीदी, अहाँ तँ अपने दूध-पानि बेरा दइ छिऐ। अहाँक विचार उत्तम अछि। अखने चलै-चलू, जनता जनार्दनकेँ दर्शन कऽ ली। (सबहक प्रस्थान। आगू-आगू सुभद्रा तइ पाछू माला छथि। सुभद्रा फूलमाला पहिरने आ हाथ जोड़ने मुस्कीया रहल छथि। माला पाछूमे उमाकांत आ चन्द्रमोहन छथि। सभसँ पाछू लालू, कालू, रहीम, करीम आ बदलू नारा लगा रहल छथि।) लालू- सुभद्रा दीदी जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। लालू- खच्चर पार्टी जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। लालू- गदहा छाप जिन्दाबाद। चारू- जिन्दाबाद जिन्दाबाद। लालू- जीत गेली भाय जीत गेली। चारू- सुभद्रा दीदी जीत गेली। लालू- देशक नेता केहेन हो। चारू- सुभद्रा दीदी जेहेन हो। (पब्लिकक एकटा भीड़ सुभद्राक प्रतीक्षामे छथि। सुभद्राक दल ओइ भीड़ धरि पहुँच रूकि गेल।) सुभद्रा- समस्त जनता जनार्दनकेँ हमर हार्दिक प्रणाम। अपने सबहक शुभ पियारसँ हम धन्य छी। (थोपरीक बोछार भेल।) हमरा आइ बि‍सवास भऽ गेल जे जनतामे जागृति तीव्र गतिसँ आबि रहलै हेन। नीक-अधला बेरबैक क्षमता आबि रहलै हेन। अपने सबहक असि‍रवादसँ अपन जनता भगवानक सेवा लेल तन-मन-धन निछाबर करैक सप्पत खाइ छी। (थोपरीक बोछार भेल।) एतबे नै उमाकांत काका कहने रहथि जे जीतला पछाति काज करती आ महि‍नामे एक सप्ताह क्षेत्रमे रहि जनता दरबार लगेती आर सबहक समस्या समाधान करती वा करेती। उ हम करबे करब। अइले हमरा जे बेलना बेलऽ पड़ए। (थोपरी बोछार भेल।) अन्तमे अपने सभकेँ धैनवाद दइ छी आ वादा निमभैक असि‍रवाद चाहै छी। उमाकांत- जदी एम्हर-ओम्हर करती तँ हम सभ छीहे। सुभद्रा- आब आगू बढ़ैक आज्ञा दइ जाइ जइयौ। बहुत गोटे प्रतीक्षामे हेथिन। (हथ जोड़ि प्रणाम कऽ आगू बढ़ली। लालू नारा लगबैत आगू बढ़ि रहल अछि। सभ कियो अन्दर जा कऽ फेर मंचपर एलथि। सभ कियो दर्शककेँ प्रणाम केलथि।) पटाक्षेप- इतिशुभम् बेचन ठाकुर वि‍देह मैथि‍ली समानान्‍तर रंगमंचक संस्‍थापक। जनम- ५ नवम्‍वर १९७०ई.मे, गाम- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, जि‍ला- मधुबनी, बि‍हार। पि‍ताक नाओं- स्‍व. राम सुन्‍दर ठाकुर, माता- स्‍व. कलावती देवी। साहि‍त्‍यि‍क कृति‍- नाटक- बेटीक अपमान आ छीनरदेवी, बि‍सवासघात, बाप भेल पि‍त्ती आ अधि‍कार, ऊँच-नीच प्रकाशि‍त। कौआसँ गेल्ह बुधि‍यार, सि‍मरि‍याक पंडा, तेतरि‍ गाछमे आम केना, राखीक लाज, घोघटवाली कनि‍याँ, सपूत नाटक आ रमेश डि‍लर, महावि‍रलाल, कि‍शुन बम, बरहमबाबा, रसून-पि‍आजु नुक्कर नाटक आ नाटक अप्रकाशि‍त। पल्लवी मण्डल, गाम- बेरमा, जिला- मधुबनी। नदीक धारा सन जखन कियो साथ नइ दिअए तखन एकटा काज करब अपनासँ नै हारब जँ गलत नहि छी तँ अपनाकेँ नहि बदलब अप्पन संग नहि छोड़ब बाँकी सभ ठीक हएत जहि सफ़रपर चलि रहल छी ओ एकटा खोज हएत लोकक एकटा आयाम हएत जखन बिसरैत अछि नदी अपन रस्ता तयौ ओ अपन धाराक संग चलैत चिरैत बनबैत अछि एकटा आर रस्ता ओ मोन नहि रखैत अछि अपन सीमितता ओ बहैत अछि बहैत रहैत अछि अनवरत... किएक तँ बहबे ओकर काज छी अहूँ अपन काजकेँ अही रूपेँ लिअ कियो साथ दिए वा नहि तैयो अपन काज करैत चलू बहैत चलू ओही नदीक धारा सन!! विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)२००४-१४. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम वि‍लास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेता, से आशा करै छी। रचनाक अंतमे टाइप रहए, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। ऐ ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-14 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.com पर संपर्क करू। ऐ साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल।५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सिद्धिरस्तु 78 वि दे ह विदेह Videha বিদেহ  www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' १६२ म अंक १५ सितम्बर २०१४ (वर्ष ७ मास ८१ अंक १६२) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA

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