27 वि दे ह विदेह Videha বিদেহ www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १७६ म अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक १७६) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' १७६ म अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक १७६) ऐ अंकमे अछि:- ललन कुमार कामत विशेषांक ललन कुमार कामत भगवाने भरोसे कोसीक कछेरमे एकटा छोट-छीन गाम- छोटपुर अछि। छोटपुरमे अटकुदास नामक एगो मध्यमवर्गीय किसान छथि। कोसीक बिकराल रूपसँ ग्रामीण लोकनि रेहल-खेहल छथिये। सभ साल कोसीकेँ झेलैत आएल छथि। अटकुदास धार्मिक प्रवृतिक लोक छथि। प्रकृतिक विपतिकेँ झेलैतो भगवानपर हिनका अनन्त आस्था छन्हि। अखार मास आएल। कोसीक मिजाज बिकराल हुअ लगल। लोकसभ आन साल जहाँति तैयारीमे रहथि। मुदा ऐबेर कोसी अपन बाढ़िक अनहोनी-घण्टी शुरूहेसँ बजबऽ लगल। लोक सभकेँ भनक लागल जे कुसहा-बान्ह टुटि गेल! सौंसे दिगारिमे आतंक जकॉं मचि गेल! गाम-घरमे बाढ़िक पानि पसरए लगल। सभठाम हाहाकार मिच गेल! सभ कियो अपन-अपन जानमाल लेने ऊँचका स्थान दिस भागऽ लगल। जगह-जगहपर फँसल लोककेँ बँचबै खातिर नाह चलए लागल। सभ कियो घर-बार छोड़ि देलक मुदा अटकुदास अपन घरक छतपर चढ़ि कऽ भगवान-भगवान करए लगला। भीषण बाढ़िक चपेटमे आबि सौंसे गामक घर-मकान डुमऽ लगल। जइ घरक छतपर अटकुदास ठाढ़ छला सेहो नकसकाइत-नकसकाइत डुमि गेल। मुदा अटकुदासकेँ अखनो अपन मालिकपर अटुट भरोष छनिहें, ओ अपन घर नै छोड़लनि। गामक एकगोटे भसाठीबला लकड़ीकेँ जोड़ि डोंगा-नाव बना अटकुदासकेँ बँचबैले आएल। घर लग आबि सोर पाड़ैत कहलखिन- “भागऽ हौ अटकुदास! तूँ किए एतए अँटकल छहक? भागऽ नै तँ जान नै बँचतऽ।” अटकुदास घरेपर सँ बजला- “तूँ सभ भागि जा, हमरा किछु नै भऽ सकत। हमरा भगवानपर भरोस अछि। वएह हमरा बँचेथिन।” नाहबला अपन जान बँचबैत आगू बढ़ि गेल। बाढ़िक स्तरमे आरो वृद्धि होएत गेल। अटकुदासक घरक छतपरसँ आब पानि बहए लगल। एकटा सरकारी आदमी मोटर नाव नेने फँसल लोक सभकेँ ताकि रहल छल। अकटुदासकेँ अझप्पे देखि चकरि कऽ सोर केलक- “के छहक! आबऽ हमरा नावपर बैठ जा, भीषन बाढ़ि आबि रहल छै, जान बँचाब।” अटकुदास हिनको वएह उतर देलखिन- “तूँ सभ भागि जा, हमरा किछु नै भऽ सकत। हमरा भगवानेपर भरोस अछि वएह हमरा बँचेथिन।” नावपर आरो किछु लोकसभ बैसल छल, नावबला आगू बढ़ि गेल। बाढ़िक पानि आरो बढ़ैत गेल। कनीकालक पछाति फेर, एकटा हेलीकेप्टरबला आएल। हिनका देखिते ऊपरसँ रस्सा खसबैत चिकरि कऽ अबाज देलकनि- “आब! रस्सी जोरसँ पकड़! हम खींचै छियौ। हम तोरा सुरक्षित जगहपर पहुँचेबौ।” अटकुदास हिनको नकारि देलखिन- “तूँ सभ भागि जा, हमरा किछु नै भऽ सकत। हमरा भगवानेपर भरोस अछि, उवेह हमरा बँचेथिन।” हेलीओकेप्टरबालकेँ हारि कऽ जाए पड़ल। अन्तमे अटकुदासकेँ स्वर्गक रस्ता देखए पड़ल। जब भगवानक दरबारमे हाजरीक समए आएल। अटकुदासक मनमे भगवानसँ जे उल्हन-उपराग रहनि से कहऽ लगलनि- “हे नाथ! हमरा अहॉंक प्रति अटुट बिसवास छल, अटुट भरोष छल जे अहॉं हमरा बँचबै खातिर निश्तुकी आएब। मुदा एना केना भऽ गेल, अपने हमरा किए नै बँचेलौं?” भगवान जबाव देलखिन- “तोरा आब केते मदति हमरासँ चाही? दूटा नावबलाकेँ हमहीं भेजलौं तूँ नै एलँ, एकटा हेलीकेप्टर बलाकेँ सेहो भेजलौं, तूँ नै एलँ। बाजऽ, आब आरो केते तोहर सहायता हम करब।” -ललन कुमार कामत सम्पर्क- ललमनियाँ, मरौना, सुपौल। गोल इंग्लिश गार्डेन निर्मली। दहेजक मारि एकटा समए छल जब शिवचरणकेँ चारि बिगहा खेत, जोड़ भरि बरद, कटही गाड़ी आ माल-भैंस सँ दुआरि भरल-पूरल रहै छल। हिनकर जिनगीओ खेितएमे, खेती करैत बीतल अछि। खेतक उपयोगी सभ समान, जेना हर, पालो, चौकी, कोदारि, खुरपी, हँसुआ, इत्यादि, एखैनो दुआरिपर पसरल अछि, मुदा शिवचरणकेँ आब खेत नै बँचल। खेतक बिनु सभ ओजार झाम बुरैए आ बीज खेने जाइए। एगो बुड़बा नेङरा बरद टुटलाहा लाधिपर टकटकी लगौने ताकैत रहैए। कटही गाड़ीक तक्था सरैककेँ ख्ास्सल जाईए। एकटा चक्का माटिमे धसल आ दोसरक डेना सभ छुटि-झरिकेँ बिखरल जाइत अछि। शिवचरणकेँ तीनटा बेटी रामेशरी, कालो, पारो आ तैपरसँ बिरजू, पनरह सालक सभसँ छोट बेटा अछि। शिवचरण आए बिना जथा-पथाक लोकमे गिनल जाइत अछि। एकर कारण अछि तीनटा बेटीक बिआह। सभटा बेटीयो तरे-उपरे छेलनि तँए बिआहाे आ दहेजो तिलकक बोझतर दबाएकेँ लकीर सँ फकीर बनि गेल अछि। दहेज! ई केहन प्रतिरोधी प्रथा छी जेकर शिकार शिवचरणेटा नहि कतेक आरो लोक भेल अछि। मोल-भाव तँ माल-जाल आकि चीज-बीतक काएल जाइये। आऽ जाहि बस्तुक दाम प्राप्त होइत अछि, ऊ चीज कीननिहारकेॅं सौंप देल जाइत अछि। मुदा ई केहन प्रथा छी, जेकर मोल-भाव केलहा रकमो, आ कन्या रूपी बस्तुओ, एके आदमी नेने जाइए? परिवारमे एकटा आबनिहारि बहूक माने होइत अछि, काम-काजमे आ परिबारीक उपार्जनक बास्ते एकटा अतिरिक्त श्रमिक। दोसर दिश, कनियॉंक पिताक परिबारमे एकटा कमाऊ सदस्यक खगता भऽ जाइत अछि। छति तँ कनियॉंक पिताकेँ होइत अछि, मुदा छतिपूर्ति बड़क बाप आकि बड़केँ प्राप्त होइत अछि। दहेज! कोनो सहेजकेँ राखैक प्रथा छी? शिवचरण पचपन बरिखक आ हिनक पत्नि पार्वती पचासक अबस्थामे छथि। हिनका एके बिगहा जमीन बचल अछि। पनरह बरिखक एकलोता बेटा बिरजू बृद्ध माए बापक बृद्धा-वस्थाक पहिया खीचैले पनपिते रहिन की असहनीय कर्जाक बोझ तरमे तेहेनकेँ दबाए गेल, जेना उनार भेल कटही गाड़ीक पाछॉं असगर बहलवान दबिकेँ फर-फराए उठैए। तीन महिना पहिले छोटकी बेटी पा़रोकेँ बिआह सम्पन्न केलखिन, जैमे कर्जा-बर्जा भऽ गेल रहिन। तैपरसँ, एे बेरूक गहुँमक खेती तेहेनकेँ धोखा देने छल जे गफाे भरि फसल घर नै आएल छलनि। माध फागुनमे, जब फसल नीककेँ पकल जाइत छल, पछुआ झँाटि, बिहारि आ पत्थरक बज्रपात तेहेनकेँ भेल छल, जे सभ किसानक फसल माटिया माटि भऽ गेल रहिन आ काइल-धाइल खेती नोकसान भऽ गेल छल। ओहुना शिवचरणक घरमे अन्न पानिक दिक्कत चलिते रहैत छल। मुदा एहि साल सनक दिक्कत, साइते कहियो भेल रहिन। ओनातँ, बहुतो लोक गाममे ओहने गरीबीकेँ झेल रहल अछि। सभक अपन जीबैक तरीका अछि। शिवचरणक घर छ मास चाउर आ छ मास गहुमक सहारे कटैए। कहलो जाइए, गरीब लोक भगवाने भरोसे जीबैए। मुदा भगवानक ऑंखि कख्खैन केकरा पर टेंड़ भऽ जाइत अछि, ई कोइ बुझि सकैए। ऐ बेरि धान महराज तँ अप्पन पारि पुरेलखिन, मुदा गहुम महराज खिसिया गेलखिन। जन मजदूर सभ परदेश आकि शहर खटैले चलिगेल। मुदा शिवचरण ऐ बुड़हारीमे कते जाएत आ की करत? सोचएपर मजबूर अछि। बिकना, नन्हीया आ चौठिया ढेरबे सँ पंजाब खटैत अछि। तीनुटा गामक सभसँ गरीब घरक रहिन मुदा जहियासँ परदेश खटै लागल, गरीबी हिनका सभक घरसँ भागि गेल। हिनका सभक जथा, पुजी आ नीक लता-कपराकेँ देखि कते लोकनिक मुॅंह ललिया जाईए। बिकना आइये काल्हमे पंजाबसँ एल अछि, जे बेदरामे शिवचरणकेॅं चरवाही कैरकेँ आ अन्न-पानि खाएकेँ पोसल-पालल गेल रहिन। मांगि-चांगि केँ आकि केकरो देलहा, अंगा पेन्ट पहिरैत छेलिन। कतेक-कतेक दिन तकि, फाटल-चिटल अंगा, पेन्टक बिचला सिलाई टूटि जाइत रहिन आ भालरि सन डॉंरमे फर-फर करैत रहिन। ततबे नै, डॉंरसँ मटिया-माटि भेलहा कच्छा, बिस्टी जँका झूलैत रहै छल। मुदा पहिनुक बिकना, आ आजुकमे अन्तर भऽ गेल अछि। हिनकर रोनक आ चालि-चलन देखिते बनैए। जब गाम आबैए तँ लक्स सुजुकिकेँ लबका जँघिया, लबका गंजी आ लबे लुँगी पहिरकेँ, कांखमे तीन बैण्डक फिलिप्स रेडियो लऽकेँ फुल भाइसमे, दहिना हाथे लुंगी उठाएकेँ तेना पकरैए, जेनाकी तरका सुजूकिक जँघिया ओहिना देखाइत रहैए। इ पहिराबा देखिकेँ कतेकोक ऑंखि पथराइत रहैत अछि। जब जब बिकना गाम आबैए, शिवचरण-पार्वती दुनु बेक्तिक भेंट जरूर करैए। एहि बेरूक शिवचरणक लचारी के नै जानैत अछि? बिकना अपन सलाह आ सहानुभूतिकेँ प्रकट करैले आएल आ कहै छैन्ह- “ददागौ, बिरजू कक्काकेँ ऐबेर हमरा संगे पंजाब कमाईले जाए दहक।” पार्वतीकेॅं ई बात पसिन नै परलनि। ओ बजली- “एखैन! ऐ अजोह बेदराकेँ? नै रौ बौआ, जो तुँहें कमैहँ गामे मऽ छै तँ कनु बैठल रहै छै? खेती-बाड़ी, हर-फार तँ कैैरते छै। असगर तँ बड़हसपतियो झूठे होयत छै। एकरा बाबू जीसँ आब नै सम्हरै छै।” मुदा शिवचरणक बिचार अलग रहिन। ओ अपन लचारीक जानैत रहथि जँ दु पाएक आमदनीक जोगार नै हेत तऽ आब इज्जत नै बचत। बजलखिन- “कमौत नै तऽ ऐ खेतके ओगरनेसँ किछु नै हाएत। उबजा-बारि साड़हे बाइस अछि। एकर भरोसे काज नै चलबला अछि।” हँमे हँ भरैत फेरि शिवचरण बाजे छथि- “हँ रो बिकना हमर मन छौ नने जाहि तू अपने संगे। नीक काम धराए दियहनि।” टालमटोल हैत बिरजूकेॅं पंजाब जाइले सहमति बैनिए गेल। पार्वतीकेॅं बेटा मोह मे मन घबराइत रहेन मुदा मानए परल। भड़ा खर्चा बिकने गछलक। जाएक दिन एल। पार्वती दू किलो खेड़हि बेचकेॅं बिरजू बास्ते बटखरचा बनेलखिन। दरभंगा सॅं अमृतसर के तीन बजे दुपहर मे ट्रेन अछि। निर्मली सॅं छ बजिया भोरका गाड़ी पकरैले पाचे बजे सभगोटे बिदाह भेलनि। बिरजूकेॅं स्टेश््रन छोरैले पार्वती माथ पर बेग आ हाथमे बटखरचाकेॅं पन्नी नेने बिदाह भेली। बिरजूओ गोंसाइकेॅं गोर लागि, मोहल्लाकेॅं बूढ पूरानकॅं पाएर छुबैत आगा बढल। शिवचरणो संग लागल बिदाह भेलनि। बाट भरि बिरजूकेॅं समझाबैत बुझाबैत, “असगर कतौ नै निकलिहन। मन लगाएकेॅं काम करिहेन। केकरोसॅं झगड़ा झटि नै करिहेन। टेलिफोन करैत रहिन।” इत्यादि तरहसॅं सिखाबैत स्टेशन पर पहुॅंचल। ओमहर पार्वतीकेॅं मन बेथित छैन, ऑंखि डबडबाएल अछि मुदा नोर भितरे भितरे पिबैत रही। साड़ीसॅं मुॅंहकेॅं झॉंपने, मनक बेदनाकेॅं मनेमे दबेने, बिरजूकेॅं स्नेहक दृष्टिसॅं देखैत, गाड़ी खुलैकेॅं इन्तजार कैर रहली हेन। कनीए कालकेॅं पछाति गाड़ी स्टेशनसॅं ससरे लागल, पार्वतीेकेॅं मन आउर बिहल होयत गेल। जेना दुधारू गायकेॅं लेरू दुध पिलाकेॅं पछाति नंगरी ऊठाएकेॅं मल्लेछा मारैत जब नजरिसॅं ओझल भऽ जाइए आ ओम्हर गाए कान खड़ा कैर बोमि दिए लागै अछि। तहिना पार्वतीकेॅं मन होइय कानी, मुदा सोचै छथिन्ह जे बेटाकेॅं सामने कानब त बेटाकेॅं मन दुखी भऽ जाएत। गाड़ी रेस पकरै लागल, एकबरि फेरि बिरजू अंतिम झलकले माए पिताकेॅं तरफ ताकलक। गाड़ी आगा बढैत गेल आ पार्वतीकेॅं धैरजकेॅं बान्ह टुटैत गेल। अदृश्य होयत गाड़ी परसॅं नजरि घुमि आएल आ पार्वती भोकारि पारि केॅं काने लागली। जेठक महिना आएल। समएसॅं बरखा हुए लागल, आ किसान सभ रोपनीमे भिर गेल। शिवचरणो एकटा बरदक भजैती हरसॅं काम चलाबे लागल। एक दिन छौड़ि एक दिन हरकेॅं पार होयत रहेन ओयसॅं कतए सम्हरत? मुदा रहथि असगरे। अवस्थो हिनकर किनारे पकरने जाएत रहेन। चिन्ता फिकिर, तैपरसॅं खान पान मे कमि, देखैमे सत्तर सालक लागैत रहेन। सरीर सुखिके जेना जिमहरके सट्टा सन भऽ गेल रहेन। एक एकटा नस देह परहसॅं ऊपर अलैग गेल रहेन। पजराकेॅं, पीठकेॅं आ आनो हार परकेॅं मांस जेना बिलाए गेल रहेन। सचमे, अन्हरिया रातिमे कोय अनचिन्हार हिनका देखता त असलि भूत समैझ बेहोश भ जेता। ई तऽ जबानीकेॅं खाएल पीयल काया छैन्ह जे चिमठि आ करगर छैन। आय पनरह दिनसॅं भरि भरि दिन खेतमे काम करैत झूल झूल भऽ गेल अछि। जेना अन्न पानिसॅं भेंटे नै। सॉंझ होयत घर आबैये आ बोखार सॅं हुहुवाए लागैए। गामक बैद्य सॅं ईलाज करेलक मुदा कोनो फर्क नै परल। एक तऽ खेतिकेॅं तरक आ दोसर हाथ मुॅंठी खली। नीक डाक्टरसॅं ईलाज कतए सॅं कराएत? अहु हालत में, जाबे धरि देहमे शक् लागल शिवचरण खेतमे खून पसीना बहाबैत रहल। जेना तेना खेति सम्पन भेल। खेति सम्पन होयते, शिवचरण नीक जेका बीमार भऽ बिछान धरि लेलक। बिनु पायकेॅं ईलाज कतए सॅं हाएत? ओहुना भादो मासमे किसानकेॅं घर खगले रहैए। कर्जा केॅं नाम पर लोकसभ ठाड़हो नै हुए दैए। सेठ साहुकार आ पुजी पघा बला लोक बिनु गहना जेबरकेॅं बातो नै करैए। पारोकेॅं दुरागमन नै भेल रहेन तॉंय नैहरे मे रही। पिताकेॅं हालति देखि पारोकेॅं नै रहल गेली, ओ अपन बुट्ट आ हॅंसुली निकाएलकेॅं माए पार्वतीकेॅं दैत कहली “माए! इ ले, एकरा बन्हकी लगाकेॅं बाबू जीकेॅं ईलाज कर।” पार्वत़ीक मन एकर स्वीकृति नै दैत रहेन मुदा पतीकेॅं जर्जर अवस्थाक देखि बेझक स्वीकार कऽ सेठ लूचाय ठाकुर लङ रखि पनरह सए टका उठाए शिवचरणकेॅं तमुरियाक डा. डी. एस. प्रसाद सॅं देखाए दबाई चलाबे लगली। भोर सॉझ आ दुपहर पनरह दिनक दबाई केॅं डोज रहेन। दस दिन भरि दबाई चलल, मुदा हिनका स्वाश्थमे कोनो उतार चढाव नै भेल। उल्टे कमजोरि तेहेनकेॅं बढि गेल कि बिछान परसॅं उठब बैसबमे समस्या भऽ गेलनि, खोराकि सेहो साफके कमि गेल। चेहरा उसठ भऽ गेल, पेट साफे बैठके पीठमे सटि गेल। बरहिया लैग गेल। आय शिवचरण भोरे सुति उठिकेॅं बाध दिश बिदाह भऽ गेला। पार्वतीकेॅं बुझना परल, साईत हिनकर मन नीक भऽ गेल अछि। टोकैत पुछलखिन- ”कतए बिदाह भऽ गेलिय भोरे भोर?“ शिवचरण सूखले मने बाजल- ”बाध दिश जायछी, बहुते दिना भऽ गेल हेन खेतकेॅं देखला।“ श्विचरणकेॅं पाछुलागल पार्वती पीठे पर बिदाह भेली। दुनु बेक्ति सभटा खेतक आरि पर जाऽ धान लागल फसलकेॅं लहलहाएत हरियालि देखि हर्खित होयत बात करै छथि। शिवचरणश् ”देखु! ऐ बेरि सभटा गाछ जेना हलैशकेॅं उगलै हेन।“ पार्वतीश् ”एहन रहत तखने ने? के जनैए मोसमक मियाद? कहि रौदी नै भऽ जा!“ श्विचरण उझटिकेॅं बाजलश् ”छोरूने! काल्हि कि हाएत कै जनैए? एख्नि नीक अछि तऽ बुझिलियन आगुवो निके रहत।“ उपर आसमान मे कड़िया मेघ आ सुरूजकेॅं बीच नुका छिपिक खेल भोरेसॅं चलैत रहेन। ऐ खेलमे कड़िया मेघक जीत पक्का बुझना गेल रहेन। दक्षिणश्पूबक कोणसॅं कड़िया मेघक एकटा खूब तरगर अछाड़ अन्हार केने रमकल आएल। जे हरहराएत आ फटकार लगाबैत, ‘जे जते कतौ छिही अपन अपन घर जाए जो, आय हम्मर दिन छौ हेन।’ शिवचरण आ पार्वती मेघक उनटल मियादकेॅं भॉंप, घर दिश बिदाह भेलनि। मुदा घर पहुॅंचैत धरि दुनु बेक्ति नीक जॅंका भीज गेलनि। गायक दूध आ रोटी खेनाइक पछाति दबाई लेलक आ शिवचरण दरबजा पऽ जा बैसल। पार्वती बिछान नने एली आ भिंए मे बिछा लेट जाएले कहलनि। शिवचरण लेट तऽ गेल मुदा छटश्पट कछश्मछ करैत पेटमे दर्द कहि कहरे लागल। दर्द बढैत गेल, घंटे भरिक पछाति शिवचरण असहाय होयत, सुधि बुधि सभ चैल गेल। सौसे आंगनमे कना रोहटि शुरू भऽ गेल। अरोसि परोसि सभ जमा भेलनि। शिवचरणक भातिज मुंगालाल ई हाल देखि कहैए ”काकी! कि देखै छिऐ! उठाव! डाक्टर ले लऽ चलु।“ मुंगालाल हष्ठ पुष्ट जबान रहथि। हंाय हंायकेॅं कन्हाप उठेलक आ निर्मलीकेॅं डा. के. एन. गुप्ता लंग लऽ गेल। पार्वती आ पारो दुनु माय बेटी पाछुसॅं हायश्बाप करैत दौरल एली। डाक्टर मरीजकेॅं परीक्षण केलाक पछाति इमरजेन्सी दबाई लाबैक आदेश देलखिन आ पुछैएश् ”कोन डाक्टरसॅं इलाज कराबैत रहियनि?“ पार्वती मॅंुहप नुआ लऽ सभटा बात बतेलखिन। फेरि डाक्टरसाहेब बाजैएश् ”सभटा उल्टा पुल्टा दबाई दऽके पेसेन्टकेॅं जान मारि देलक हेन। खराबी किड़नीमे अछि आ दबाई खाली ब्लड प्रसर के दकलक हेन।“ नसमे पानिक बोतल आ तीनटा सूई आरो दबाई देलाक पछाति डाक्टर साहेब एकटा डिलेवरी पेसेन्टकेॅं होमकॉंल पर चैल गेलखिन। कनीए कालक पछाति शिवचरणकेॅं मुॅंहसॅं गौंज पोटा चलए लागल। हिचकी जोर जोरसॅं उठि गेल, देह हाथ तनाए गेल आ ठण्ढा भऽ गेल। फेरि एकबेर कना रोहटि पसरि गेल। -ललन कुमार कामत लघु कथा- भोला :: ललन कुमार कामत आम तरहसँ देखल जाइए जे सतमाइक खिधांश जोर-साेरसँ लोग करैए। अगर कोनो बच्चाकेँ सतमाए रहैए तँ ओकरा लोकक सहानुभुति रहैत अछि। मुदा कोनो सोतेला बापक जिकिर केतौ होइत नै देखल जाइए। जखनि कि भेद-भाव दुनूठाम होइत अछि। भाेला अपन माए दुखनीक दोसर बिआहमे पछिलगुआ बनि आएल रहए। करम बुड़ल छेलनि दुखनीकेँ जे बिआहक दसे दिनक पछाति बिअहुआ घरबलाक देहान्त हेजाक बेमारीसँ भऽ गेल छल। पतिक गुजरलासँ दुखनीक नाता ओइ घरसँ टुटि गेल। मुदा आशाक किरण नअ मास अनहरिया बीतला पछाति भोलाक जनम भेलासँ फेरि चमकि उठल। दुखनीकेँ लागल जेना बेटाक जनमसँ बिअहुआ घर चिकरि कऽ सोर पाड़लकनि मुदा ईहो इजोत गहनलगुआ भऽ गेल, चानपर दाग लगि गेल। सोसराक लोक दुखनीकेँ स्वीकार नै केलक, कियो कुलच्छनी तँ कियो कुलनासनी कहैत सदाक लेल ठाेकर मारि देलक। तइ दिनमे समाज आकि विज्ञान ओते प्रगति नै केने छल जे डी.एन.ए आकि आरो जाँचसँ साबित करितै जे भोला दुखनीक जाइज सन्तान छी। समैक पहिया नाचैत गेल। दुखनी एकटा बेटा रूपी धनसँ सवुर केने जीनगीक सुख-दुखसँ तालमेल बैसबैत पाँच बरख काटि लेली। आब टोला-मोहल्ला आ समाजक लोक सभ दुखनीकेँ दोसर बिआहक गप-सप करए लगल। होइत-होइत खुर्शेला गामक मोहन दाससँ चुमौन सम्पन्न भेल, जेकर एकटा बेटी सोसरा बसै छेली आ एगो बेटा-पुतोहु भीन भऽ कऽ रहै छल। मोहनाक थोर-बहुत खेत आ चारिटा भैंस रहनि जेकर दूध बेचि गुजर-बसर करै छला। चुमौन भेलासँ दुखनी-मोहनाक जीवन हरिअरी तँ घुमि आएल मुदा भोला जे पिताक खातिर जनमसँ बेलल्ला छल, ओकरा पिताक सुख नसीब नै भऽ रहल छेलै जे मोहनासँ भेटबाक चाही। भोलाकेँ बालपनमे पिता भेटल, मुदा ऐ अबोध नेनाक जरूरतसँ हिनकर सतबाप साफ कऽ अनभिग छथिन। मोहनाक चुमौन करैत धरि दूटा कमौआ प्राणी घर आएल, दुखनी पत्नी बनि घर-आँगनक काम-काज सम्हारली आ भोला पोसल-पालल बेटा रूपमे भैंसक चरबाहि आ घासो भूसामे लगाैल गेल। दुखनीक इच्छा छेलनि जे भोलाकेँ पढाबी-लिखाबी, तइ बास्ते गामक स्कूलमे नाओं लिखा देली। मुदा मोहनाक इच्छा नै छेलनि जे भोलाकेँ पढाबी। हिनक खिसियाएल रबैया भोलाक प्रति देखि दुखनीक सस-बस नै चलि सकल। ऐ खातिर बेर-बेर भोलाकेँ डाँट-फटकार मोहनासँ पड़ैत रहै। दुखनीकेँ तरे-तर टुसकेलापर भोला कहियो-काल नुका-छिपा कऽ स्कूल जाइत छल मुदा र्इ बेसी दिन नै चलि सकल। भोला एकदिन स्कूलसँ अबिते धरि मोहनाक तामसपर चढ़ि गेल। मोहना तमसाएल दाँत पिसैत हूरकैत बजला- “बड़ नबाबक नाति छिही! केतौ बैस कऽ बाप-संगे कौड़ी खेलैत हेबही आ कहै छीही पढ़ैले गेल छेलिएे! मरि किए नै गेलेँ ओतै? जब घास-ले जाइ छिही तँ तोरा घासे नै मिलै छौ। कहबी खुरपी भोँथ भऽ गेलै तँ बेँटे ढील्ला भऽ गेलै। पचासटा बहन्ना बनबै छँह। हट नजरिपर सँ झलमुहाँ!” पाइरक चप्पल निकालि कऽ झट-झट सिन पीठपर बरसाए देलखिन। भोला धम्म सिन ओतै बैसि गेल आ छट-पटाइत बोमी पाड़ि कानए लगल। मोहनाक अपन बेटा नै रहनि तँए ममत नै, मुदा माता कुमाता नै भऽ सकैए, दुखनी दौगल एली आ भोलाकेँ उठा-पुठा कऽ पजिऔने अँगना लऽ गेली। पुरुष प्रधान समाजमे स्त्री शब्द केतेक असुरक्षित होइत अछि से दुखनीक हालतसँ बूझल जाए सकैए। स्त्रीकेँ अपन अर्धाग्नी बनेलोपर हुनकर मति मोहि कऽ पुरुख अपना अनुकूल बना लैत अछि। रसे-रसे धरक वातावरण बदलैत गेल आ मोहनाक आकर्षन दुखनीपरसँ घटैत गेल। धरक काम-कजक अलाबे माल-जाल आ खेतीओ-पथारी दुखनीक माथपर बजरि गेल। मोहना भिनसरे भैंस दूहि, दूधक डोल बजार लेने जाइए, अनुमण्डलक पजरेमे दुर्गा दासक होटल अछि, जइमे दूधक उठौना लगल अछि, एतए एला पछाति गप-सरक्का संगे गाजाक लत सेहो पुड़बैत एक्केबेर दुपरियामे होइत घर अबै छथि। होटलक मालिक दुर्गा दास बेदरूकिया नाेकरक खोजमे रहथि जेकर जिकिर ओ मोहनासँ केलखिन- “आठ-दस बर्खक बेदरा काज करैबला गाममे जँ भेटत तँ नने अबिहऽ। तों तँ जानिते छहक होटलमे खेनाइ-पीनाइक कोनो कमी नहियेँ रहै छै। लूइरो-बूइध सीखतै आ पोसलो-पाललो तँ जेबे करतै?” मोहनो भरोस दैत कहलखिन- “अच्छा दैखै छिऐ, नजरिपर एतै तँ नेने एबऽ।” घर एलापर बेरमे मोहनक खियाल बेदरूकिया नोकरपर गेल, मने-मन सोचैत एला जे केकरा कहक चाही ऐ वास्ते? एकाएक मोहनाक धियान भोलपर गेल आ सोचए लगल। अन्तमे ई विचार केलनि जे भोलाकेँ होटलमे लगा देब सएह नीक रहत। घर अबिते दुखनीकेँ गप-सप्पक झाँसा दैत कहलखिन- “भोलाकँ बजारमे नोकरी लगा दइ छिऐ। घरमे खाइ-पिबैक दिक्कत भऽ रहल छै। बजारमे रहतै तँ दूटा लूइरो-बुइध सिखतै, गाममे देखै छिऐ ने बौनाएल जाइए?” दुखनी ऐ बातसँ राजी नै छेली मुदा मोहनक जिद्दक आगू हारए पड़लनि। अगिले दिनसँ भोला दुर्गा दासक होटलमे काम करए लगल। ऐ अबोध बेदराक वोनबाससँ एकटा आरो नेनाक मौलिक अधिकारसँ रोकि देल गेल। सोतेला माइक खिद्धांश तँ होइत अछि मुदा सोतला बापोक हेबक चाही जेकर हकदार मोहन भेलखिन। स्कूली शिक्षा तँ बाल-बोधक मौलिक अधिकार होइत अछि जे आम लोककेँ समझमे नै आबि रहल अछि। परिणाम स्वरूप, अखनो बाल-श्रम अपना देशमे चरमपर अछि। गरीब घरक नेना-भुटका सभसँ बलपूर्वक आकि जोर-जबरदस्ती भारी-भरकम काज जेना स्टोर उत्पादनमे जूताक पाैलिश, दोकानमे साफ-सफाइ, भोजनक ढाबा आ होटलमे जबरन बरतन-बासनक माजैक काज, चाह दोकानपर गिलास धोइक अलाबे आनो अनोपचारिक क्षेत्रमे काज कराएल जाइत अछि। घरेलु काज करैले सेठ-साहुकार सभ काम-काजी बेदराकेँ घरमे नुका कऽ राखैए, जइसँ सरकारी श्रम निरीक्षक आकि मीडिआक नजरिसँ बँचि सकए। ई सभटा काज न्यूनतम मजदूरीपर बेदरा सभसँ कराएल जाइए, बुझितो जे ई कानूनी जुलुम अछि। एकरा अनुचित आ शोषित मानल जाइए तैयो बहुत गरीब परिवार अछि जे अपन अबोध बेदराक मजुरीक सहारे भरन-पोषन करैए। कानूनो बनल अछि जे अठारह बर्खसँ कम उमेरक बालक मजूरी नै कऽ सकैए। मुदा कानूनक अनदेखी कएल जाइए आ भोला सनक नअ बर्खक बेदरासँ सतरह-सँ-बीस घण्टा काज कराएल जाइत अछि। दुर्गादासक होटलमे अनुमण्डल आ बेंकोक स्टाफ जेना हाकिम, किरानी, चपरासी आ आनो भी.आइ.पी सबहक चाह, नस्ता, कल्लौ बनैए। किछु महानुभावक डेरापर चाह, नस्ता, खेनाइ पठाएल जाइए। दुर्गा दास सोभावसँ एक नमरक पोल्टिसबाज छथिन जहिसँ कामकाजी बेदरा सभसँ गप मारि काज करबै छथि। जरूरी पड़लापर डाँट-फटकार आ लप्पर-थप्परसँ सभकेँ सकपकेने रहै छथि। होटलमे छहसँ दस बर्खक आराे चारिटा बाल-मजदूर काज करैत छल। भिनसरबाक चारि बजैत धरि सभटाकेँ हुरपेट कऽ जगाएल जाइए आ बरतन-बासन, चुल्हा-चौकीक माँज-मजबैल, निपा-पोतीसँ झार-पोछक काजमे लगाएल जाइए। कोइ चाह लऽ डेरे-डेरा पहुँचाबैए तँ कोइ जलखै, खेनाइ बनाबैमे लगि जाइए। कखनो-काल सभ बेदरामे कोनो-कोनो बातपर टोना-मानीसँ झगड़ा-झाँटी भऽ जाइत अछि, तइ घड़ीमे दुर्गाकेँ अपन सकत मियादि देखबऽ पड़ै छै, जारनि लऽ कऽ झँटियेबो करैए। खेनाइमे सभटाकेँ बसिया भात, टटाएल रोटी, महकौआ तीमन आ बँचल-खूचल तरकारी दैत बजै छथिन— “रै छौड़ा सभ अते नीक चीज तँ तोहर बापो-ददा नै खेने हेतौ। खाइ जाइ जो मन लगा कऽ।” दुर्गा दासक एकलौता बेटा- अमर- दरभंगामे पढ़ैत अछि। जहिया कहियो ओ गाम अबैत अछि तँ जाइ घड़ीमे टीसनपर पहुचबैक जिम्मा भोलेकेँ रहैत अछि। आइ अमर दरभंगा विदा भेल। दस-दस किलोक गहुम आ चाउरक मोटा भोलाक माथपर आ कन्हापर बैग लटकेने टीसन मुहेँ विदा भेल जे करीब कोस भरि हटि कऽ अछि। रस्तामे भारीसँ भोलक कन्हा-पजरा ऐंठने जाइत रहै मुदा गाड़ी छुटैक डरे केतौ जिराइओ नै सकल। टीसन पहुँचिते रेलगाड़ी ससरऽ लगलै। अमर लपैक कऽ पौदान पकड़ि चढ़ल। भोला नीचासँ सभटा मोटा-चोटा आ बैगो जेना-तेना अमरकेँ पकड़ा आ अपन भाड़ उतारलक। भोलाक माथक बोझ उतरिते मन हल्लुक हुअ लगलै, मुदा घुरन्ती-डेग नै उठि रहल छै भोलाकेँ। मन भेलै किछुकाल जिरा ली। कन्हा आ गरदनि सेहो ऐंठने जाइत रहै। गाछक चबुतरापर धम्म दऽ बैस कऽ हाँफए लगल। किछुकाल बैसला पछाति आलस आबि गेलै आ ओतइ ओंघरा कऽ सुति रहल। साइत एते निचेनक नीन कहियो नै सुतल छल। ओ नीनक महासागरमे हेला मारऽ लगल। चारि घण्टाक कड़गर नीन खींचला पछाति जखनि गाछक छाहरि घुसकि कऽ दूर हटि गेल आ देहपर दुपहरियाक रौद लागए लगलै तखनि जा कऽ आँखि खुजलै। भूखो जोरसँ लगि गेल रहै, आँखि मिरैत होटल दिस विदा भेल। ओमहर दुर्गा दास तामससँ आगि अंगोरा होइ छला। भोलाकेँ देखिते मातर तरबामे लहरि दिअ लगल, गारि-बात दैत घौलाइत हूरकैत भोलाकेँ कहलखिन- “रे सार! गेलही तँ मरि गेल रही? की बाप पकड़ि लेने छेलौ? भुख लगलौ तँ दौगल एलही। नमक हरामी कहीं कऽ! मुलुर-मुलुर केना तकैए सार!” बगलसँ करमीलक छड़ी उठा आ भोलाक पीठपर सटाक-सटाक खिंचए लगलखिन। भोला ओतै तिलमिलाइत लूद सिन बैसि रहल आ बाप-माए चिचियाए लगल- “गै माएऽऽ... हौ बापऽऽ... मरि गेलियौ गैऽऽ... माए गै माएऽऽ...” खिसियाले मुहेँ दुर्गा दास फेरि बजला- “सार तूँ हमरा होटलमे टपि नै सकै छेँ। जो जइ बाप लग जेमे। देखै छियौ तोरा के रखै छौ आ के खेनाइ दइ छौ।” घण्टा भरि भोला ओतै कनैत रहल। रहि-रहि कऽ दुर्गा दास हूरैक-हूरैक मारैले छुटैत रहथिन आ बजैत रहथिन- “भगलेँ कि नै सरबा? एने की टक-टकी देने छीही? आब खाले? टपऽ तँ देबौ नै आ खेनाइ के देतौ? चलि जाइत रह जतए जेबाक छौ।” भोलाकेँ बुझना गेल आब निश्तुकी नै रहए देता आ ने खेनाइए भेटत। उठि-पुठि कऽ काेसी प्रोजेक्टबला खरंजा पकड़ने एस.डी.ओ साहैबक अवास दिस विदा भऽ गेल। मन्हुआलए-सन्हुआलए आँखिक नोर पोछैत भोला एस.डी.ओ.क अवासक आगूसँ जाइत छल तखने भीम बहादुरक नजरि भोलापर गेलनि। भीमबहादुर एस.डी.आे साहैबक भनसिया, जे दयालु प्रवृतिक नेपाली पहाड़ी जातिक छथि। बहादुर भोलकेँ जानिते रहथि पुछलखिन जे की भेलौ, किए कनै छीही, केतए जाइ छेँ? भोला हिचैक-हिचैक कऽ सभटा बात बतेलक- “हमरा नै रखतै। मालिक कहलखिन भागि जो, नै रहए देबौ।” भीमबहादुरक उमेर पचास-पचपनसँ कम नै हेतनि मुदा खुश मिजाज आ दयालु प्रवृतिक लोक छथि। भोलाकेँ केम्पसक भितर लऽ गेलखिन आ खाइले दूटा रोटी संग कनी तरकारी देलखिन जे बँचल छेलनि। भोला भोरुके खेलहा, भूखसँ लहालोट हरबे करए। मुदा ऐ रोटीक पैनठेगहासँ देहमे हूबा एलै। किछुकाल धरि ओतए बैसल रहल। एस.डी.ओ पाठक जीक दुनू सन्तान नन्दन सात बर्खक आ नेहा चारि बर्खक अछि जे केम्पसमे बैट-बौल खेलाइत रहए। भोलो दौग-दौग कऽ संग दिअ लगल। साँझ होइत धरि पाठक जीक जीप केम्पसमे प्रवेश केलक संग लगल किछु गाम-घरक नेता लोकनिक हुजुम सोहो जुटए लगल। गप-सरक्काक बीच सभ नेतागण अपन-अपन काज करा विदा होइत गेला। बीच-बीचमे पाठक जीक नजरि तीनु नेनापर सेहो जाइत रहनि जे प्रसन्नचित मुद्रामे खेलैमे मग्न अछि। भोला एस.डी.ओ साहैबक कार्यालयमे चाह पहुँचबैले जाइत रहनि तँए चिन्हतो रहथिन। मुदा भोलाकेँ एतए देख पाठकजी दुविधामे छला। पाठकजी बहादुरसँ पुछलखिन- “बहादुर, ई लड़का तँ दुर्गादास-होटलक लगैए, ई एतए केना आएल?” भीमबहादुर सभटा बातक जानकरी दैत आग्रह केलखिन- “साहैब, धिया-पुता जाइत छिऐ, भगा देने छै, राति-विराति केतए जेतै, आइ भरि एतै रहे दैतिऐ तँ नीक होइतै।” पाठकोजी नेक विचारक लोक, हँ भरैत बजलखिन- “रहऽ दहक की हेतै? धिये-पुता तँ िछऐ।” बहादुर गरीबीक दिन देखने। तँए मनमे गरीब लाेकक प्रति दजा आ सहानुभूति भरल छन्हि। बहादुरमे दूटा नीक गुण अछि, पहिल ई जे जब केतौ भूखलकेँ देखैत तँ खेनाइक आग्रह जरूर करैत, दोसर ई जे दोसरक बाल-बोधकेँ अपना जकाँ सिनेह दैत छथिन। एस.डी.ओ- पाठकोजी- तहिना मिलनसार आ दयालु प्रवृतिक लोक छथिन, तँए दुनू गोटेमे नीक जकाँ बनै छन्हि। भिनसर भने बहादुरक दैनिक काजमे भोला संग दिअ लगल। दस बजैत पाठकजी ऑफिस विदा भेला। बहादुर अपने संगे भोलोकेँ जलखै करबैत गप-सप्पमे पुछलखिन- “होटल धुमि कऽ जेमे की गाम? भोला सकपका गेल, किछु नै बाजल, मुदा बहादुर ऐ चुप्पीकेँ बुझै खातिर फेर पुछलखिन- “होटल जेबाक मन नै होइ छौ?” भोला मुँह लटकेने बाजल- “नै जेबै, दुर्गा मालिक बड़ मारै छै। खेनाइओ भरि पेट नै दइ छै आ भगाइओ देलक, कहलक आब तोरा नै रखबौ।” बहादुर- “तूँ अपना बापकेँ किए नै कहै छी?” भोला- “हमर बाबा एक बरखसँ दूध लऽ कऽ नै अबै छथिन। दुर्गा मालिक कहलखिन, बाबू सबटा भैंस बेचि लेलकौ।” बहादुर- “माइअो भेँट-घाँट करैले नै अबै छौ?” भोला- “भेँट नै केलकै। एकबेर खजुरी कका दिअए समाद पठेने रहै भेँट करि जाइले। मुदा दुर्गा मालिक नै जाए देलखिन आ हमरा गाम देखलो नै छै।” एकबेर फेरि बहादुरकेँ भोलापर दया लगलनि, जे कि मनुखक मूल सोभावो छी। ओना तँ सभ धर्मक पोथीमे बताैल गेल अछि, जे लोकनि कनैत-कल्पैत नेना-भुटका, भूखल, बेमार आ बूढ़-पुरानपर दया-दरेज नै करि सकैए, ओकर ई मनुखक जीनगी बेकार होइत अछि। मनुखक पुनरावृतिक लक्षण अछि, जनम भेनाइ, खेनाइ-पिनाइ, पलनाइ-बढ़नाइ, बिआह-दानसँ बंश-बृद्धि करैत परिवारकेँ आगू बरहेनाइ आ फेर मरि जेनाइ। ई जीवन तँ पशु आ पक्षीओ जीबैए। तखनि मनुख आ जानवरमे की फरक रहत? दया मनुखक सभ गुणमे श्रेष्ठ अछि जे मनुखमे रहबाक चाही। भीमबहादुरक मनमे विचार उठल, साहैबसँ गप करि भोलाकेँ अहीठामक काजमे रखि लेब तँ एकटा बेदराक उपकार भऽ जाइत! साँझ पड़ैत पाठकजी एलखिन। काजसँ फूर्सत भेला पछाति बहादुर पाठकजी सँ बिनती करैत भोलाक खातिर गप कहलखिन जेकरा पाठकजी स्वीकार केलकिन। भोला घरक काजमे संग-साथ दिअ लगल। मौका भेटलापर नन्दन-नेहा संगे पढ़ैओले बैसि जाइत रहए। कनी दिन बीतला पछाति बहादुर भोलाक माए-बाबूकेँ समाद पठेलखिन, भेँट करैले। डेढ सालसँ दुखनी बेटाक सोगमे चिन्तीत छेली। मुदा ई खबरि जे भोला एस.डी.ओ साहैबक घरमे काज करैत अछि, सुनि सुप सन कलेजा भेलै। अगिले दिन दुखनी दौगल एली। दू बरिख्ापर भोलाकेँ देखिते दुखनीकेँ खुशीक ठेकाना नै रहलै। गप-सपसँ पता लागल जे भोलाक सतबाप, मोहना भैंसपर सँ खसि पड़ल आ डाँर टुटि गेल। पछाति सभटा भैंसकेँ बेचए पड़लै। तहियासँ आइ तक माेहना बेमारे रहै छथि, कोनाे काज-राज हिनकासँ नै भऽ रहल छन्हि। भेँट-घाँट भेला पछाति दुखनी गाम दिस विदा हुअ लगल मुदा एस.डी.ओ साहैबसँ भेँट करैत निहोरा केली- “हूजूर, आइसँ अहीं ऐ निभोगाक माइ-बाप छिऐ। अहींक नून खा कऽ एकर भाग चमकतै।” पाठकजी भरोस दैत कहलखिन- “भोलासँ अहाँ निफिकिर रहू। खर्चा-पानीक दिक्कत हएत तँ हमरा खबरि करब।” पाठकजी भोलाक हाथे पाँच सए टका आ एक सेट कपड़ा दुखनीकेँ विदागरीमे देलखिन। दुखनी हँसी-खुशीसँ गाम दिस विदा भऽ गेली। सम्पर्क- ललमनियाँ, मरौना, सुपौल। गोल इंग्लिश गार्डेन निर्मली। ललन कुमार कामत लघु कथा- अप्पन माए-बाप सुनील जीकेँ दूटा सन्तान। सौरभ दस सालक जे पाँचमा कक्षामे आ छोटका सुमन छह सालक जे पहलामे मेडोना स्कूल, कटहल वाड़ी दरभंगामे पढ़ैए। स्कूल घरेक बगलमे छै। सुनीलजी अकाशवाणी दरभंगामे नौकरी करै छथि। हम सुनील जीक दुनू बच्चाकेँ घरपर जा ट्यूशन पढ़बै छी। हुनकर कनियाँ मंजू हरिदम बच्चाक कपड़ा-लत्ता, वर्तन-बासन आ आनो-आन घरक काम-काजमे ओझराएल रहै छथिन। सुनीलजी नौ बजे भोरे निकलै छथि अपना काजपर। दू बजे खेनाइ खाइले अबै छथि। फेर रातिमे दस बजे घर अबै छथि। चारि बजे बेरू पहरमे हम पढ़बैले सभ दिन जाइ छी। आइओ गेलौं। कनीए काल पछाति मंजू चाह लऽ कऽ हमरा लग एली। चाहक कप पकड़ा बच्चाक बदमाशीक उपराग कम मुदा काजक बेस्तताक पोथी खोलि छनेमे संसारक परेशानीक पाठ पढ़ि गेली। फेर काजमे एना लागि गेली जेना टाँग-पर-टाँग नै पड़ैए। छुट्टीक समैमे सुनीलजी सेहो घरक काम-काजमे बेस्त रहै छथि। दुनू गोटेक परिवारक प्रति समरपन देखि हमरा बुझाइत रहैए जे ऐ छोट परिवारक अलाबे हिनका सभकेँ ऐ संसारमे किछु ने छन्हि। अचानक गामसँ हुनका फोन एलनि जे हुनकर पिताजी सिरियस छथिन। सुनीलजी आॅफिसमे छुट्टी लेल दरखास दऽ गाम बिदा भेला। गाम जा पिता जीक संग माएकेँ सेहो संगे दरभंगा आनि लेलनि। बाबूजीकेँ असपतालमे डाक्टरसँ जँचबौलनि। डाक्टर कहलकनि- “अहाँक पिताजी केँ टी.बी. भऽ गेलनि हेन।” “आब की उपए अछि डाक्टर साहैब?” सुनीलजी पुछलखिन। “नौ मासक दबाइक कोर्स अछि। देख-रेखमे समैपर दबाइ चलबए पड़त।” सुनीलजी, आॅफिस जा अदहा दिनक छुट्टी छह मासक लेल दरखास लगा माए-बापक सेवामे लीन भऽ गेला। कटहल वाड़ी स्थित नीज अवासपर माए-बाबू रहए लगला। मुदा सप्ताहमे दू दिन असपतालमे जाए-आबए पड़नि। आब मंजू पहिनेसँ बेसी परेशान रहए लगली। एक दिन मंजूक वार्ता हमरासँ भेल। बजली- “की कहूँ सर, एक्को-रती मन नै होइए जे ऐ घरमे रही।” हम पुछलियनि- “किए, की भेल?” “तेतबे घरक काज तेतबे धिया-पुताक काज आ तैपरसँ माए-बाबूजी माथक बोझ बनि गेल छथि। अपने जे छथि ओ एकाेटा काज नै सम्हारै छथि।” हम कहलियनि- “अहिना होइ छै, काम-धाम तँ सभ दिन लगले रहै छै। मुदा माए-बापक सेवा सेहो ऐ जीवनमे जरूरी छै।” मंजूकेँ जेना हमर उपदेश एक्को-रत्ती नै सोहेलनि। तमतमाइत बजली- “मास्टरजी, हमरा अहाँ नै सिखाउ। अहाँकेँ दुनियाँ-दारीक थाह नै चलल अछि अखनि। सासु-ससुर हमर ओहेन अदरगर नै छथि।” मंजूक ई बात सुनि हम स्तब्ध रहि गेलौं। मुँहक बात मुहेँमे रहि गेल। संच-मंच बच्चा सभकेँ पढ़बए लगलौं। मुदा मंजू बड़बड़ाइत रहली- “चौबीस घंटा काजे-काज। सभ अढ़बैए बला। ऐ घरमे रहैक मन एकोरती नै होइत अछि। जेतबे घरक काम-काजसँ माथा दुखाइत रहैए आ तैपर सँ बुढ़बा-बुढ़िया माथ भुकबैत रहै छथि।” तही बीच बुढ़हाक खौंखी जोर-जोरसँ सुनि पड़ल। खौंखी करैत-करैत बदहाल भऽ कहरि-कहरि कऽ बाजए लगला- “कनहौलीवाली, सुनीलक माए, केतए छी? ओहू बुढ़ियाकेँ जेना हमरा लग नीक नै लगै छै। जेना हम काटैले दौड़ै छिऐ।” बुढ़हाक हफनीक अवाज फेर सुनि पड़ल- “कनियाँ छी हे, लहानवाली, ऐ सौरभक माइ? बाप रे बाप! कोइ ने सुनैए।” मंजू बड़बड़ाइत घुमली- “मरबो ने करैए बुढ़ा जे हमर सिरक बोझ हटैत। जानि ने कोन पापक फल छी।” सुनील जीक घरक ई कथा रोजक भऽ गेल। एक दिन अनायास हुनकर घरक हवा एकदम शान्त बुझना गेल। छतक चौकीपर जाजीम बिछौल छल। दुनू बच्चा ओइपर आबि पढ़ैले बैसल। हम पलास्टिकक कुरसी खिंच बैसलौं। कनीए काल पछाति मंजू पलेटमे जलपान आ कपमे चाह लऽ मीठ-मीठ चालिमे मुस्कीआइत एली। हमरा बुझाएल जे आइ मंजूजी तिरपित छथि। इच्छा भेल जे ऐ खुशीक कारण जानी। पुछलियनि- “भाभीजी, आइ अपने बड़ खुश नजरि अबै छी, की बात छिऐ?” “हँ, खुशी किए ने हएब। आइ हमर अपन माए-बाबू गामसँ एला अछि। खुशी तँ सोभाविक छै।” मंजुक ई बात सुनि खुश तँ भेबे केलौं जे माए-बापक दर्शनसँ सोभाविक खुशी जे हेबक चाही से हिनको भेलनि। मुदा दुख सेहो भेल। दुख ई भेल जे आखिर सासु-ससुरक विषयमे जे मिथिलाक दर्शनमे नारी लेल बतौल गेल छै जे अपन माए-बापसँ बढ़ि कऽ सासु-ससुर होइ छै से हिनकामे किए नै छन्हि। सम्पर्क- ललमनियाँ, सुपौल। ललन कुमार कामत लघु कथा- स्कूलक फीस- मानस तीन सालक छल तहिये माएक देहावसान भऽ गेलनि। पिताजी गामक मुखिया छथिन। समाजक कहलापर दोसर बिआह केलनि। लबकी कनियाँ थोड़-बहुत पढ़ल-लिखल, सोभावशील, विचारू आ सुन्दर भेलनि। तीन सालमे मुखिया जीकेँ दूटा सन्तान और भेलनि। चन्दन आ नन्दन। नन्दनक जन्मक छह मासक पछाति मुखियाजी स्वयं भगवानक प्रिय भऽ गेला। एकबेर फेर परिवारसँ लऽ कऽ गाम भरिमे शोकक लहरि पसरि गेल। मुदा मुखियानि शोकक सागरसँ बाहर आबि तीनू बच्चाकेँ लालन-पालनक लेल फेरसँ अपन दिन-दुनियाँमे लीन भऽ गेली। अपना सुइध-बुइधसँ बच्चा सबहक बरबरि लार-प्यारसँ पोसैमे कोनो कसरि नै छोड़ै छथिन। मानस आब दस सालक भऽ गेल। प्राइवेट स्कूलक चारिम कक्षामे पढ़ैए। महिनाक पाँच तारीख तक सभ बच्चा अपन-अपन फीस जमा करैए। लेट-सेट छह तारीख धरि विलम शुल्कक संग जमा करब आवश्यक अछि। नै देने नाओं काटि देल जाइ छै। मानस प्रत्येक महिना अतिरिक्त शुल्कक संग जमा करैत छल। मुदा ऐ मास सेहो नै भेलै। पीठपर पोथीक बैग टाँगि, अनजान चालिमे डेल उठबैत, एमहर-ओम्हर तकैत स्कूल दिस विदा भेल। घरसँ लगभग एक किलो मीटर भरि पूब स्कूल छै। बाटेमे मानसक मन फीपर गेलै। आइ तँ छह तारीख छी। मुदा फीस तँ अछि नै। सरजी की कहता की नै। असमंजसमे पड़ल मानस स्कूलक हाता धरि पहुँच गेल। हातासँ आगू नै बढ़ि बाहरेमे ठाढ़ रहल। किछु काल पछाति आपस घूमि गेल। अगल-बगलमे डबरा-डुबरीमे पहिल मानसुनक बर्खासँ पानिक जमाव सभकेँ देखैत, बेंगक टरटरेनाइ आदिकेँ देखैत-सुनैत लीन भऽ गेल। ओमहर स्कूलमे सरजी हाजली मिलौला पछाति मानसक अनुपस्थितिपर बजला- “मानस आइ नै एलौं?” एकटा बालक कहलकनि- “आएल तँ छल मानस, साइत बाहरमे हएत।” सरजी- “आइ फेर फीस नै अनने होएत।” फेर वएह बालक बाजल- “सरजी, अहाँ कहब तँ हम मानसकेँ बजा आनब।” सरजीक धियान मुद्रापर गेल। बजला- “जो, आ कहि दिहनि जे आइ जँ फीस नै लऽ कऽ आएत तँ दोबर फीस लगतै।” बालकक नाओं सौरभ अछि। सौरभ स्थानीय बेवारीक बेटा छी। सौरभ केर घर स्कूलक बगलेमे छै। मानससँ मित्रता छै। मानस केर प्रति सहायताक भाव सेहो रहै छै। सौरभ विदा भेल मानसकेँ तकैले। बाहर जा एमहर-ओम्हर नजरि दौड़ौलक। मानसपर केतौ नजरि नै पड़लै। कनी और आगू बढ़ल। देखलक एकटा गाछक छाँहमे ठाढ़ किछु देखि रहल अछि। देखिते चिकरि कऽ सोर पाड़लक- “मानस, की करै छी। एमहर आ।” मानस अवाज सुनि-ताकि लग आबि बाजल- “आइ हम स्कूल नै जेबौ। सरजीकेँ नै कहिहनि जे मानस गाछ तर अछि।” सौरभ- “जौं तूँ स्कूल नै जेमेँ तँ एतए की करै छीही। घरेपर रहितेँ।” मानस- “तूँ नै बुझै छीही। घरपर जँ रहब तँ माइक सैकड़ो प्रश्नक उत्तर दिअ पड़त। घरमे पाइ-कौड़ी नै छै। माए कहलक जे दू-चारि दिनमे पाइ देबौ।” सौरभ स्कूलक निअमसँ अवगत अछि। जौं छह तारीख तक फीस जमा नै हेतै तँ स्कूलसँ निकालि देल जाइ छै। ई सभ सोचि मानसकेँ कहलकै- “स्कूलक निअम नै बूझल छौ जे केते कड़ा छै। माएकेँ नै कहने छीही?” मानस किछु बाजल नै, आ ने किछु फुरेलै। चुप रहल। सौरभ घूमि कऽ स्कूल चलि गेल।। सम्पर्क- ललमनियाँ, सुपौल। ललन कुमार कामत लघु कथा- दस हजरिया नोट- हम अपन इलाकामे जानल पहचानल पेन्टर छेलौं। पेन्टिंगमे बेदरेसँ लगाव रखैक कारण, भाड़ी-सँ-भाड़ी चित्र पल भरिमे बनेनाइ हमरा लेल असान छल। एकटा लङोटिया दोस्त छल धीरेन्द्र, किराना दुकानदार आ जातिक भूमिहार। बखत-कु-बखतपर हम एक दोसरकेँ मदति निस्वार्थ भावसँ करै छेलौं। एक दोसरकेँ विशुद्ध दोस्त मानै छेलौं। लोक सभ हमरा ऐ दोस्तीकेँ देखि हैरत रहै छल। हैरत ऐ खातिर रहै छल जे हमर दोस्त धीरेन्द्र भुमिहार जातिक छल। केते लोग कहैतो छल- “की रौ, भुमिहारसँ दोस्ती केलँह..., ठीकसँ रहिहेँ. कहीं भुमिहारी दाउमे फँसलँह तँ बुझियैहनि!” मुदा ऐ बातपर हम कोनो कान-बात नै दइ छेलौं। एकदिन जहिना हम रंग-ब्रशक झोरा लऽ कऽ केतौ काजपर विदा भेल छेलौं आकि जनक काका दलानपर सँ चिकड़ि कऽ बजा कहलथि- “रौ, सुन कहै छियौ तूँ जौं भुमिहारसँ दोस्ती केलँह तँ भुमिहारी दाउ एकोटा सिखलेँ आकि नै?” हमरा जिज्ञासा भेल आ पुछलियनि- “काका, भुमिहारी दाउ केकरा कहै छै हौ?” “हम जँ बुझितौं तँ हमहीं ने तोरा सिखा दैतिऔ? लोक बाजै छै जे भुमिहारी दाउ बड़ पेंचिदा होइ छै।” हम भरि बाट गुन-धुन करैत एलौं ‘मुदा ई कोन दाउ छी? जे लोक सभ दोसक संग देखि पुछैत रहैए? से नै तँ, आइ हम दोसेसँ ऐ बिषयमे पुछि कऽ रहब। दुपहरियाक रौदामे हम कोसी प्रोजेक्टक देवालपर एकटा विज्ञापन लिखैत रही संयोगसँ तखने पाछूसँ मोटर साइकिलक सीटीक अवाज पिपियाएल! हम रंगक डिजाइन बनबैमे मगन रही। मने-मन तामससँ देह बहिर भऽ गेल! ‘के एहेन दुष्ट छी जे डिस्टर्ब करैए?’ मुदा ताकब केना? जौं ताकब तँ डिजाइन खराप भऽ जाएत। लगल हाथ छोड़ि,़ ताकलौं। अवाक् रहि गेलौं! वएह भुमिहार दोस धीरेन्द्र छल। दोस्तीमे कनी-मनी शैतानी तँ चलिते रहैत छल। मन्द मुस्कान चेहरासँ सेहो छुटल। तैबीच धीरेन्द्रक नजरि पेन्टिंगपर पड़ल आ प्रशंसा करए लगल। मुदा हमर प्रशंसा, जे हमरे मुँहपर बाजल जाइत अछि! नीक नै लगल, अंग्रेजीक एकटा मुहावरा मन पड़ि गेल, ‘रेस्ट ऑन वन्स लॉरेल्स’ अर्थ अछि, ‘अप्पन ख्यातिसँ संतुष्ट नै रहक चाही,’ हम विनम्रतासँ कहलियनि- “दोस, अहाँक ऐ प्रशंसासँ हम खुश नै छी। हम मात्र एकटा छोटका कलाकार छी, खरचा-पानि चलेबा लेल ई काज करै छी।” तैबीच हमरा मन पड़ल ‘भुमिहारी दाउ’ पुछलियनि- “दोस, लोक कहैए जे भुमिहारी दाउ बड़ नीक होइ छै, हमरो सिखा दिअ।” धीरेन्द्र पहिले तँ हमरा बातपर धियान नै देलक मुदा बेर-बेर जिद्द केलापर सोचए लगल, कनीकाल सोचि कऽ बाजल- “दाउ तँ अहाँकेँ सिखा देब मुदा बदलामे किछु दिअ पड़त।” हम पुछलियहन- “कथी देबए पड़त? बाजू।” धीरेन्द्र फेर बजला- “अहाँकेँ एकटा दस-हजरिया नोटक पेन्टिंग बना कऽ हमरा दिअ पड़त।” हम बजलौं- “रूपैआक नोट! दस-हजरिया आ पँच-हजरिया की, जौं पेन्टिंगेसँ बनाएब तँ किए नै? जरूर बना देब। कनीए दिन रूकू फुरसति हुअ दिअ तँ छापि देब।” पेन्टिंग हमर ईश्वरीय देन छल, बेदरेसँ अनेक प्रकारक चित्र पाड़ै छेलौं, स्कूलमे सरजीकेँ यार-दोस्तक आ संग पढ़ैत लड़कीओ सबहक। बाबूजी सधारण किसान छल, हमर पढाइ लेल पर्याप्त खर्चा नै रहैक कारण अध्ययनक संग उपार्जनक मार्ग अपनौने रहौं। अखनि हम निर्मली आ आसपासक क्षेत्रमे जानल-पहचानल चित्रकार छी। कामक व्यस्तता हरिदम रहैए। ऐ व्यस्ततामे दोसक लेल दस-हजरिया नोट बनेनाइ हम साफे बिसरि गेलौं। एकदिन हम नगर सेठक दोकानक बगलमे साइन बोर्ड बनबैत रही, तखने धीरेन्द्रक अवाज सुनि पड़ल। काम रोकि गद्दी लग हम ससरि कऽ एलौं, तही समैमे आउरो किछु जानल-पहचानल बेपारी सभ पहँुचल छल। धीरेन्द्र जोरसँ सभकेँ सुना कऽ हमरा कहैए- “की दोस, हमर काम नै हेतै?” हम चौंकि गेलौं जे हमरा कोन काम कहने छथि! पुछलियनि, “कोन काज?” “वएह दस हजारबला!” हमरा मन पड़ि गेल दस-हजरिया नोट! मुड़ी हिला स्वीकृति दैत कहलियनि- “ओऽ हाँ, हेतै, हेतै, किछुए दिन और रूकू।” सेठजी नोटक गड्डी गीनैत-गीनैत, चेश्माक भीतरे-भीतर, रूपैआक बात सुनि हमरा दिस ताकए लगल। हम चुपचाप, काम करए लगलौं। हमरा एला पछाति़, धीरेन्द्र सभ लग बाजल, जे ‘ई पेन्टर हमर दोस छी, हमरासँ दस हजार टाका लेने अछि, केतेक महिना भऽ गेल, मुदा टाका मांगलापर, आइ-काल्हि करैत, समए काटैए।’ समए बीतैत गेल, छह महिना-साल भरिक बाद, फेरि दोसर बेपारीक दोकानपर दस हजारक तकेजा केलक। हम दस-हजरिया पेन्टिंगक नोट समझि टाड़ि देलौं। मुदा हमरा गेलाक पछाति धीरेन्द्र सभ लग बाजल फिरै छल जे साँचेमे ई हमर रूपैआ लेने अछि। ऐ बातक दू बरख भऽ गेल। जेतए-तेतए लोक सभ हमरा कहए लागल- “धीरेन्द्रक रूपैआ किए ने फड़िया दइ छिही! दोस-बोनक पैसा एते-एते दिन रखनाइ नीक बात नै छै।” पहिले तँ हम असमंजसमे रहौं मुदा, जखनि पता चलल जे धीरेन्द्र दस-हजरिया पेन्टींगक बदलामे दस हजार टाका लोक सभ लग बाजल फिड़ैए, हम अवाक् रहि गेलौ! केतेक गोटेकेँ समझेबाक परियासो केलौं ई बात, मुदा जेकरे कहिऐ वएह, बुड़िबक बनबए लगल- ‘कलाकार भऽ कऽ एहेन नीयत तोहर नै हेबा चाही।’ हम चिंतित भऽ सोचए लगलौं, ‘ई दोस्त नै छी, दुश्मन छी, एते भाड़ी फेरामे पड़ा देलक! केतएसँ एते टाकाक ओरियान करब!’ हमर ओकाति हजार टाका जेना लाख टाकाक के बराबरि छल। बिना जमीन-जथा बेचने दोसर उपए नै छल। कनीए दिनक पछाति, पंचैती भेल, पंचक फैसला भेल, कटि-मारि कऽ दू हजार सुइदकक संग बारह हजारक देनदारी ठहरौल गेलौं। लोक सभ बाजए नै दैत छल। जीवनमे एहेन बेज्जती कहियो नै भेल रहए। दस दिनक समए देल गेल। टाकाक ओरियान नै भऽ रहल छल। कोनो गुंजाइश नै देखि, एकटा उपए सूझल, जमीन बेचु नै तँ, भरना लगाउ। एक बीघा जमीन भैयारीक फाँट पड़ल छल। बेचब तँ फेर कीनल नै हएत, से नै तँ भरने लगा देबाक चाही। हजार टाकाक दरसँ बारह कठ्ठा खेत भरना लगेलौं, रूपैआ लऽ कऽ दोसक घर पहुँचलौं। दलानपर कियो नै छल असगरे बैस गेलौं, दोस्तीनीकेँ खबरि गेल। कनीकालक पछाति, दोस्तीनी एक हाथमे पानिक लोटा आ दोसर हाथसँ घोघ तानि, अदहा मुँह झाँपल अदहा देखाइत, आगूमे पानि बढ़ा देली। तामससँ तँ हमर देह बहिर छल, सोचने छेलौं जे दोसकेँ किछु कहबनि, मुदा की करब! चोटपर दोस्तीनी पड़ि गेली। भाड़ीए मनसँ कहलियनि- “दोसकेँ बजाउ आ कहियन जे अपन टाका लेता।” कनी काल पछाति धीरेन्द्र हँसैत-हँसैत दलानपर एला। ई हँॅसी, हमरा हरियाएल घापर, नूनक लहरि जकॅंा लागल। चुप चाप रूपैआक गड्डी देलियनि, गिनला पछाति फेरसँ हमरे हाथमे धराऽ देलनि। हम चुपे छेलौं मुदा धीरेन्द्र बाजल- “दोस, याद करू। अहाँ हमरा कहने छलिएे ने भुमिहारी दाउ सिखबैले? यएह छिऐ भूमिहारी दाउ।” एकबेर फेर दोसक ऐ बर्तावसँ हम चकित रहि गेलौं। (लोक कथाक पुनर्लेखन) ललन कुमार कामत लघु कथा- लगन गोनर बेदरेसँ संगीतक प्रेमी अछि। दिवाली, दशहारा, सरोसती पूजा आ आनो-आन अवसरिपर गाममे नाटक होइक परचलन अछि। मुदा गोनरकेँ ओइ सभमे मौका कमे मिलैए। मौका ओकरे पहिल बेर मिलैए जे ओइमे चन्दा दइए। गोनरक पिता साधारण किसान छथि। गोनरक पिताक दोस्त देबन पंडित गाममे कीर्तनियाँमण्डली चलबै छथि, तँए लोकसभ गबैया कहै छन्हि। गोनरकेँ संगीतसँ लगाउ देखि पिताजी केतेक बेर कहै छन्हि- “गोनर, दोसक ऐठाम जा कऽ घड़ी-घंटा हैरमुनियाँ किए ने सीख अबै छँह?” आइ स्कूलमे शनिचराक पछाति सरजी गोनरसँ गीत गबौलनि आ खुश भऽ खुब प्रसंशो केलनि। स्कूलसँ अबैतकाल बाट भरि गोनर सोचैत आएल जे आइ देबन काकाक घर जा हैरमुनियाँ सीखनाइ शुरू करब। दुपहरियाक टहटहाइत रौदमे, सभ लोक घरे-घर सूतल-पड़ल, अराम करैत रहए मुदा गोनर, देबन पंडितक घर बिदा भेल। देबन सभ दिन बेरूपहरमे अप्पन एकलौता पुत्र हरियाकेँ संग कऽ साज-बाजक संग रियाज करैत रहथि। आब गोनरो संग दिअ लगलनि। सप्ताहे दिनमे गोनर हरिमुनियाँक रीढ़ आ पटरीकेँ नीक जकाँ परखि लेलक आ सा रे गा मा पा पहिलुक धुन बजबए लगल। ई आकस्मिक आ तेज शुरूआत देखि देबन सोचमे पड़ि गेल, ‘हमर हरिया बेदरेसँ साज-बाजक संग खेलैत आएल तैयो अखनि धरि एतेक नै सीख सकल! देबनके डाहक संग पक्षपातक भावना सक्कत भऽ आ अगिले दिनसँ गोनरकेँ दुआरि पहुँचिते, साज-बाज समेटि रखि दैत रहए। एक-दू दिन गोनर जाइते रहल मुदा ओहिना घुमि कऽ आबि जाइत रहए। गोनर उदास तँ होइते रहए मुदा हताष आ निरास नै भेल, तँए संगीत सिखैक जीद्द मनसँ नै गेल। साँझ पड़ैत सभ दिन, देबन चाह-पान करैले बजार जाइ छल। ई बात गोनर जनैत रहए, तँए साँझ होइते देबनक घर पहँुच कऽ, हरियाकेँ फुसला कऽ साज-बाज पसारि सीखए लगल। मुदा ईहो सीखनाइ तीने-चारि दिनक पछाति स्थाइ रूपे बन्न भऽ गेल। जइ दिन देबन पण्डित दुनू छौड़ाकेँ साज-बाज निकालि सिखैत देखि गेला। कड़गर फटकारो दुनूटाकेँ लगेलखिन आ सभटा साज-बाज समेटि कऽ संदूकमे बन्न कऽ देलखिन। कहल जाइए जे समए आ लहरि केकरो इंतजार नै करैए। ई बात साँच भेल। गोनर ऐ दसे दिनमे जे किछु सिखने रहए वएह रामवाण भऽ गेल आ सक्कत अधार बनि, तारक गाछ सन बढ़ए लगल। कहल जाइए जे कोनो तरहक बुधि आ हूनर सिखैले निर्धारित समए नै होइए। जेतै-तेतै, चलैत-फिरैत गोनर सुर आ तानकेँ साधैत, गुनगुनाइत धूनमे रमल रहै छल। मुदा साँझ-भोर संगीतक अभ्यास केनाइ अप्पन दिनचर्या सेहो बना लेलक। टोल-टपड़ा आ गाममे जखनि केतौ भजन-कीर्तन आकि नाच-गानक आयोजन होइत रहए तइमे गोनर बड़ी तत्परतासँ भाग लैत रहए। तइसँ गाम भरिमे लोकसभ गोनरकेँ गबैया कहए लगल। गामक सटले शहर अछि। शहर छोटे सन अछि सुखी सम्पन्न लोक आ पैग-पैग बेपारीसँ लक हाकिमो-अफसर सभ एतए रहै छथि। गोनरकेँ शहरमे केकरोसँ जान-पहिचान नै अछि। एकटा डाक्टर सुरेन्द्र नारायण नामक गण्यमान बेकती छथिन जे महिला काैलेजमे हिन्दीक सरकारी प्रोफेसर आ संगै-संग महिला कल्याण संस्थानक अध्यक्ष सेहो छथिन। संगीतक प्रेमी रहैक कारण साले-साल सांस्कृतिक कार्यक्रमक आयोजन करबैत रहै छथि। प्रोफेसर साहैबक एगो बेदरूकिया संगी जे दिल्लीमे नाट्य आ कला विभागक प्रोफेसर छथि ओ रिटायर भऽ अपन पैतृक शहर पहिल बेर एला, तइसँ ऐबेरक आयोजन बड़ जोर सोरसँ भऽ रहल अछि। शहरक गण्यमान लोकसभ जे ऊँच-ऊँ पदपर कार्यरत छथि, सभकेँ कार्यक्रममे शामील होइक बास्ते न्योँत पठाएल गेल। तइमे ऐबेर टी.वी सीरियलक जानल-मानल कलाकार जीतुराज जोहर सेहो हिस्सा लऽ रहल छथिन। कार्यक्रमक दिन लगिचाइत गेल। शहरमे जगह-जगह बैनर-पोस्टर लगाएल गेल जे अमुख तिथिकेँ सांस्कृतिक कार्यक्रमक आयोजन जानल-मानल संगीत प्रेमी सबहक सहयोगसँ भऽ रहल अछि। मुदा गोनरकेँ ऐ बातक कोनो खबरि नै भेल छेलै। शहरमे स्टेशन चौकपर बबाजी पानबला अछि। हिनका दोकानपर गामक बेसी लोक पान खाइले साँझ-बिहान जाइत-अबैत रहैए। बबाजीकेँ बूझल छन्हि जे गाम भरिमे गोनर सेहो नीक गबैया छी। मात्र दू दिन बँचल रहए, जब गोनर अनायास बबाजीक पानक दोकानपर गेल, बबाजीकेँ मनमे ठहकलनि आ जनैक जिज्ञासा भेलनि जे गोनर ऐ कार्यक्रममे भाग लेने अछि की नै। पुछलखिन- “की रौ तूँ ऐ कार्यक्रममे हिस्सा लेने छेँ किने?” गोनर जिज्ञासु भऽ विनम्रतासँ पुछलक- “भैया हौ, के ई कार्यक्रम करबै छै हौ?” बबाजी बूझि गेला जे गोनर भाग नै लेने अछि तैयो आस्वासन दैत बजला- “अच्छा रूक, हम परोफेसर साहैबसँ बात करै छी।” बबाजी मोबाइल लऽ कऽ नम्बर मिलौलनि आ बात करए लगला- “हेल्लो सरजी, परनाम! हम बबाजी पानबला बजै छी।” ओमहरसँ जे जबाव पुछने होन्हि, मुदा बबाजी फेर बजला- “एकटा नवजुबक बड़ नीक गबैया छथि।” कनीए कालक पछाति फेरि बजला- “लड़का तँ लोकले छथि मुदा एक नम्मर गबैया छथि!” कनीए काल रूकि कऽ फेर आग्रहक स्वरमे बबाजी बजला- “सर! देखियौ कनीए, मौका देल जेबक चाही।” कनीकाल पछाति फोन डिसकनेक्ट भेल। गोनरकेँ बबाजी कहलखिन- संस्थापर चलि जो, ओतए बजेलकौ हेँ। पहिने गीत गबबेतौ तब चुनाव हेतौ। अखने चलि जो।” गोनरकेँ बसंती साइकिल रहबे करए, मुदा बूझल नै छल जे संस्थान छै केतए! तैयो पुछैत-पुछैत बिदा भेल। शहरक दच्छिन, बान्हक कछेरमे उजरा रंगक मकान, अगुआरे-पछुआरे नाना परकारक रंग-बिरंगक फूलक गाछसँ सजल-धजल फुलबाड़ी अछि। सड़कक कातमे साइनबोडपर लिखल अछि ‘महिला कल्याण संस्थान’। गोनर साइकिल नीचाँ धँसा संस्थानक प्राङगनमे पहुँचल, जैठाम दुचक्किया आ चरिचक्किया गाड़ीक पार्किंग लगल छल। बुझना गेल, एते सभकेँ-सभ भी.आई.पी. पहुँचल अछि। कातमे साइकिल लगा, एकटा हॉलमे लोक सबहक सुनगाम देखि भीतर घूसल। प्रोफेसर साहैबक नाओं पूछि गोनर लग गेल आ परिचए देलकनि। परिचए दइते बैसैक आदेश भेटलै। गीत गोनहार, नाच केनहार आ आनो आन कलाक प्रदर्शन केनहार सभ रहए आ रिहलसल होइत रहए। कनीए कालक पछाति गोनरसँ गीत गबबौल गेल, गोनरक सेलेक्सन नै हेबाक तँ कोनो सवाले नै रहए, आश्वासन भेट गेलै जे एकटा गीत गोनरो गाैत। गीतक आयोजन शुरू भेल। एक-सँ-एक भी.आइ.पी. सभ पहँुचल छला। विशिष्ठ अतिथि सभकेँ बैसैक बेवस्था मंचपर आ मंचक अगल-बगलमे कएल गेल रहए। ई आयोजन सार्वजनिक चंदा चिठ्ठासँ होइत रहए जइमे बड़का-सँ-बड़का पुजीबला लोकक धिया-पुता सभ भाग लेने रहए। सिवनाथ सहाय, जीतुराज जौहर आ स्थानीय सिविल अधिकारी सभ मुख अतिथिक रूपमे मंचपर आसीन भेल रहथि। गायन, वादन आ नृत्य ई तीनु संगीत छी एकर प्रस्तुति रसे-रसे हुअ लगल। हर-एक आदमी जे बाजि सकैए ओ गाइबो सकैए किएक तँ गायन बोलीएक एकटा उन्नत रूप छी। मुदा नव-सिखुआ गाबैया लेल समान रूपसँ निर्देशन आ निअमित रूपसँ अभ्यास जरूरी होइत अछि, जे बेसी-सँ-बेसी बच्चा सभमे ओतेक नै छन्हि। गायन एकटा एहेन काज छी जइमे स्वरक सहायतासँ संगीतमय ध्वनि निकालल जाइत अछि। सुवेवस्थित ध्वनि जे रस दैत अछि आ रसक अनुभूति करबैत अछि वएह संगीत कहबैत अछि। ऐ कलाक प्रदर्शन युद्ध, उत्सव, प्रार्थना आ भजनक समए मनुखक द्वारा गावन आ बजावनक माध्यमसँ कएल जाइत अछि। जे गाबैए ओकरा गबैया, जे नाचै ओकरा नचनियाँ आ जे बजबैए ओकरा बजनियाँ कहल जाइए। प्रोग्राम होइत-होइत अदहा राति बीति गेल मुदा अखनि धरि गोनरकेँ मौका नै भेटल। बखत केर पहिया बढ़ैत गेल आ राति दू बाजि गेल। विशिष्ठ अतिथि सभ घर दिस बिदा भेला, दर्शको सभ रसे-रसे जाए लगल, तब जा कऽ गोनरक नाओं एलोन्स कएल गेल। गोनर स्टेजपर आएल। गोनरक मुँहसँ राग लयात्मक रूपसँ बेवस्थित भऽ संगीतरूपी लहरि समुद्रक ज्वारि जकाँ पसरए लगल। जइ प्रस्तुतिमे कलाक प्रदर्शन हुअए आ जइ कलाकेँ संगीत या मनोरंजन कहल जाए, गोनरके कंठसँ वएह सुरीली कंठाध्वनि, ओहिना उत्पन्न हुट लगल जेना वाद्ययंत्रसँ सुसज्जित घ्वनि निकलैए। जे सभ प्रोग्राम छोड़ि,़ घर दिस बिदा भेल रहए, ऊहो ओतै ठमकि गेल, डेग पाछू खींचए लगलै, सभ आपस आबए लगल आ जेकरा घरपर अबाज जाइत रहए, ओकराे जिज्ञासा हुअ लगल जे के एहेन गवैया छी आ केतक छी? किछु विशिष्ठ मेहमान सभ सेहो घूमि आएल छला। गोनरक गाैला पछाति सभ हिनका लग बजा परिचए-पात पुछए लगल आ प्रसंशा सेहो करए लगल। गोनरकेँ आशा जगल जे कियो हिनका मदति करथि। जौं शुद्ध मनसँ भगवानकेँ यादि कएल जाए तँ भगवानो कोनो रूपमे दर्शन देबे करै छथिन। वएह भेल, जीतुराज जौहर टी.वी कलाकार, गोनरकेँ आश्वासन देलकनि- “दू महिना बाद अहाँ दिल्ली आउ, ओतए संगीतक ऑडिसन छै।” गोनर हर्षित भऽ गेल आ जोर-सोरसँ ऑडिसनक तैयारीमे लगि गेल। ललन कुमार कामत लघु कथा- बेटी सोमनाथजी म्युनसीपल आँफिसमे पैंतीस बरख नोकरी केला पछाति रिटायर भेला। जीवनमे एक्को पाइ नजायज नै ग्रहन केलनि। सोनमनाथजी हृदैसँ पवित्र, शालिन, विनम्र आ दयाक भाव हिनका मुख-मण्डलसँ हरिदम झलकैत रहैए तँए हिनकर बिशेषता बेक्तीगत संज्ञा (उपनाम) मे बदलि गेलनि आ घरसँ लऽ कऽ आँफिस धरि लोक सभ हिनका सोनाजी कहि बोलबए लगलनि। सोनाजीकेँ तीनटा सन्तान, बड़ दुइटा लड़का, जेठ बबलू तैपर सँ डबलू आ सभसँ छोटकी बेटी उषा छन्हि। उषाक बिआह नीक घरमे, इंजीनियर बड़सँ कऽ सम्पन्न केलखिन। जमाइबाबू मुजफरपुरमे नोकरी करै छथिन ओतै सरकारी अवास भेटल छन्हि, तइमे उषा सङ्गे रहै छथिन। जेठका बेटा बबलूक किरदानीसँ दुनू परानी सोनाजीक मन बेथित छन्हि। बबलू इंजीनियरिंग करैले दिल्ली गेला मुदा हरियानाक एकटा लड़िकीक प्रेममे फँसि अपन जीवनक नैयाकेँ किनार कऽ लेलनि आ ओतै प्रेम-बिआह करि बसि गेला। डबलू नागपुरमे बैंक मनेजर छथिन। हिनकरो बिआह भेला पछाति पत्नी सङ्गे आतै रहै छनिन। सालमे एक-आध बेर कभी-कभार घर अबै छथिन। सोनाजी अपन जीवनसंगिनी ममताक सङ्ग बुढ़ाड़ीक पहिया जेना-तेना खिंचै छथि। बेटा-पुतोहुक सुख हिनका नसीब नै होइ छन्हि मुदा उषा, बेटी रहैतो, बेटा जकाँ देखभाल करैए। सप्ताहमे एकबेर आबि कऽ जरूरे देखि जाइत अछि। उषाक सोभाव पिताजीसँ बिरासतमे प्राप्त भेल छन्हि तँए मधुरो आ एक दोसरसँ अनुकूलो छन्हि। सोनाजीक ई पैंसैठम बरख चलि रहल छन्हि। नोकरीसँ रिटायर भेल रहथि तँ शरीरसँ स्वस्थ छला आ भरोसा छेलनि जे आगुओ नीके रहता, मुदा मनुख तँ मात्र इच्छा करैए, होइ तँ अछि वएह जे ऊपरबलाक मरजी रहै छन्हि। उषाक बिआहक पछाति दुनू बेटा दू जगह अपन-अपन घर बसा लेलकनि। सोनाजी दुनू परानीकेँ चिन्ता-फिकिर घरेड़ देलकनि। जीवन-शक्ति शिथिल भऽ गेलनि। हाथ-पएर धीमा पड़ि गेलनि। आँखिक रोशनी कमि गेलनि। कानोसँ कम सुनाइ दिअ लगलनि। पाचनतंत्र गड़बड़ा गेलनि आ दिल-दिमाग सेहो दुरूस नै रहलनि। मतलब बुढ़ापा हिनकर समस्या बनि गेलनि। बेटा सभ कभी-कभार फोन घुमा हालचाल करैत रहै छन्हि। दोस्त-यारकेँ- दबाइ दोकनदार आ मोहल्लाक डाक्टर- सभकेँ फोन घुमा कहैत रहैए जे माए-बाबूकेँ देखैत रहबै। सोनाजी दुनू गोटेकेँ ई परिपक्व अवस्था अछि जइमे ज्ञान, स्थिरता आ अनुभव छन्हि आ तहिक सहारे दुनू बेकती जीवन रूपी नैयाकेँ आगू खिंच रहल छथि। ओना तँ बुढ़ापा भार नै होइत अछि मुदा जब खाएल-पीअल काया जड़जड़ भऽ जाइए आ परिवारक सदस्यक संग तालमेल नै रहैए तँ परीवारमे अपन उपयोगितापर विराम लगि जाइत अछि। वृद्ध लोकनिकेँ ऐ अवस्थामे सहायता आ सहयोगक जरूरत पड़ितै छै। जे बेटा-पुतोहु अपन वृद्ध माए-बापकेँ सेवा करैए वएह जीवनक उत्तम कर्म करैए। एहेन पूत जे माए-बापकेँ जीबिते छोड़ि दइए आ अपनेमे मगन रहैए ओ ओहने काज करैए जेना धिया-पुता सभ बालुक रेतसँ महल बना लइए आ तैपर गाछक डारि-पात गाड़ि कऽ बगीचा बना लइए आ खुशी मनबैत रहैए मुदा जेकरा ज्ञान अछि ओ अपन जीवनक उत्तम कर्म करैसँ पाछू नै हटैए। आजुक समाजमे बेकती अपन बाल-बच्चा संग परिवारमे रीझल रहैए। माए-बाप, बूढ़-पुरानक मान-मर्यादा, तेकर सेवा सत्कारकेँ साफे बिसरि जाइए। ओहेन मनुख हरिदम पाबैक पाछू बेहाल रहैए मुदा जे हिनका लग प्राप्त वस्तु अछि ओकर उपयोग करनाइ नै जानैए। बूढ़-पुरान अनुभवी होइ छथि तँए हिनका समाजमे विशिष्ट स्थान भेटबाक चाही। जे बेकती वृद्धक सेवा नै करैए, ओ कायर होइए आ कायर लोग काल्पनिक विचारक धनवान आ महा गप्पी होइत अछि। जाबे धरि वृद्धजनक आ जुबकक समाजमे तालमेल आ समानता नै बैसत ताबे धरि समाजिक आ सांस्कृतिक काजमे स्थइरूपसँ बिकास सम्भव नै भऽ सकत। सोनाजी शरीरसँ कमजोर होइत गेला आ बेटा पुतोहुक सहायता आ सहानुभूति घटैत गेलनि। आब हिनका याद आबै छन्हि ओ दिन, जइ दिन बेदरूकिया सभकेँ ठेहुनापर लऽ घौआ-छु मल्ले-छु करैत पढ़ैत रहथि ‘लब घर उठे आ पुरान घर खसे...। खैर जे ऐ हाथसँ करैए ओकरा ओइ हाथसँ भोगए पड़ैए। अहु अवस्थामे सोनाजीकेँ रोज-मर्ड़ाक समान कीनए बास्ते हाट-बजार जाइए पड़ै छन्हि। आइ सोनाजी सुति ऊठि कऽ शौचालय गेलखिन। होनीकेँ किछु भेनाइ रहनि, बाहर निकलितै चक्कर आबि गेलनि आ शौचालयक दरबाजासँ टकरा कऽ खसि पड़ला। ममताकेँ गिरैक अभास भेलनि, भिरकाएल फाटककेँ ठेल देखलखिन सोनाजी ढनमनाएल असहाय अवस्थामे ओङ्गराएल आ कहरि रहल छथि। ममता धबरा गेली आ उठबैक परियास केलखिन, हिला-डोला कऽ पुछै छथिन- “बबलूक पपा! की भेल! केना खसलिऐ! बाजू ने?” मुदा कोनो जवाब नै भेटलनि। सोनाजीकेँ मुहसँ छर-छर लेहू बहै छेलनि। ई देखि ममता हाय-बाप करए लगली, असगरि हिनकासँ उठि नै सकल, दौगल-दौगल दरबज्जापर जा हरेरामकेँ सोर पाड़लक, हरेराम दुनू परानी दौगल आएल, सोनाजीक ई दशा देखि हाँइ-हाँइ कऽ उठा-पुठा कऽ ओसार परहक खाटपर सुतेलकनि। सोनाजीक ई हलात देखि ममताक देह जेना केराक भालरि जकाँ काँपए लगलनि। की करब! आ केना हएत! किछु नै फुड़ै छेलनि। हरेराम हड़बराइत बाजल- “काकी! डागडरकेँ फोन करू!” मुदा फोनक डायरी सोनेजी रखने छेलखिन। ममताकेँ भेटिते ने रहनि। हरेरामक पत्नी मंजू बुझि गेलखिन जे बेगरतापर एहेन छोटसन चीज नै भेटैत छन्हि, डाक्टरकेँ बजबैले दौगल-दौगल गेली। मोहल्लेमे डाक्टर इकबालक घर छन्हि, एलखिन। सोनाजीक मुँहक ऊपरका दूटा दाँत नीचला ठोरमे भोंका गेल रहनि तइसँ मुहसँ लेहूक टघार चलै छेलनि।़ उपचार शुरू भेल, कनीएकाल पछाति सोनाजीकेँ होश एलनि। ममतोकेँ जानमे जान एलनि। डाक्टर इकबाल ढाढ़स दैत कहलखिन- “अखनि कोनो चिन्ता करैक बात नै छै, सोनाजीक ब्लडपेसर आ सूगर बढ़ि गेल छन्हि तइसँ, चक्कर एलनि मुदा समैसँ जाँच आ इलाज हेबाक चाही नै तँ हार्टएटेकक सम्भावना बाढ़ि सकैए।” डाक्टर इकबाल पूर्जी लीखि हरेरामकेँ हाथमे दैत कहलखिन- “ई दबाइ जल्दीए लऽ कऽ आउ, सोनाजीकेँ ठोरमे टाँका लगबए पड़त।” तत्कालीन उपचार भेल। सोनाजीक मन पहिनेसँ नीक भेल। ममताक जीक मन हल्लुक हुअ लगल आ बेटा सभकेँ फोन लगबए लगली। जेठका बेटा बबलुकेँ पहिने फोन लगा घटनाक जानकारी देलखिन मुदा बबलू ऐ बातकेँ गंभीरतासँ नै लैत कहलकनि- “केना खसि गेलौ? बाबूजी दबाइ खाइत रहौ की नै? तों केतए रही? दिन राति टेन्शन दइमे तूँ सब लगल रहै छँह।” ऐ घड़ीमे बेटासँ एहेन तरहक जवाब सुनि ममताक मोह भंग भऽ गेलनि। फेर छोटका बेटा डबलूकेँ फोन लगा स्थितिक जानकारी देलखिन। डबलू पिताक हाल सूनि अस्वासन दैत बाजल- “चिन्ता नै कर। डाक्टर साहेबसँ हम बात करै छी। दीपू दोस्तकेँ घरपर भेजै छियौ डाक्टरसँ देखा कऽ दबाइओ-दारू सभ लाबि देतौ। तूँ कान-खीज नै कर।” ममताकेँ बँचल-खोंचल आस नीरास भऽ गेलनि। खैर हिनका सभसँ ओते आसो नै लगेने छेलखिन। आब बेटी उषाकेँ फोन लगेलनि। आन दिन उषा माए-बाबूकेँ फोन करि हालचाल जनैत रहए मुदा, आइ माइक फोन देखि चौंकली आ उत्सुकता पूर्वक बाजलि- “हँ माय! हम सब नीके छी, मुदा बाबूजी केना छथिन?” ममता जनैत छेली जे साँच बात बतेलासँ उषा बेसी घबरा जाएत तँए बातकेँ छोट करैत बजली- “बाबूजीक तबीयत गड़बड़ा गेलौ आबि कऽ देखि जाही।” मुदा भारी मन आ अवाजक थड़-थड़ाहटिसँ उषा भाँपि गेली जे साइत बाबूजीकेँ तबीयत बेसी खराब भऽ गेल अछि। घबराहटि तँ भेबे केलनि मुदा संयमसँ फोन रखि सोचए लगली जे की करी! फेर उठि कऽ बैग झारि, कपड़ा-लत्ता चोपतए लगली आ तुरंत नैहर अबैक ओरयान करए लगली। उषाकेँ एक सालक बेटी छेलनि तेकरो मँुह-कान पोछि तैयार कऽ एक काँखमे बच्चा आ दोसर हाथमे बैग उठा ओसारपर रखि घर दरबज्जामे ताला लगबए लगली। घरक चाभी बिसवासी पड़ोसीकेँ दैत पति इंजीनियर साहेबकेँ फोन लगेलकनि जे घंटे भरि पहिले ड्यूटीपर नीकलले छेलखिन, इंजीनियर साहैब फोन रीसीभ करैत बजला- “हँ बाजू, की बात अछि?” उषाक मन तँ हड़बड़ाएले रहनि मुदा तैयो सम्हरि कऽ बजली- “हम बाबूजीकेँ देखैले गाम जा रहल छी, माइक फोन आएल जे बाबूजी सिरियस छथिन। अहूँ साँझ धरि बाबूजीकेँ देखैले आबि जाएब।” ई बात सुनि इंजीनियर साहैब चौंकि गेला। पुछलखिन- “अखनि! अचानक! किए गाम विदा भेलौं?” ताबे धरि उषा रिक्सापर बैसि बस स्टैण्ड दिस बिदा भऽ गेल छेली। हड़बड़ाइत बजली- “अखनि ओते गप हम नै करब, बूझि लियनु जे बाबूजीक हालत ठीक नै अछि।” उषाकेँ हड़बड़ाएल अवाजसँ इंजीनियर साहैब बूझि गेला जे आब हिनका कोइ नै रोकि सकैए। भरोस दैत बजला- “जाएब तँ जाउ, मुदा मनके अस्थीर केने जाउ, आ बाजू जे पाइ-कौड़ी किछु संगमे अछि किने?” उषा- “अहाँ पाइक चिन्ता नै करू, हमरा संगमे ओते पाइ अछि जइसँ, हम गाम जा सकै छी।” इंजीनियर साहैब बात टोहियबैत पूछि देलकखिन- “पाइ केतएसँ लाबलौं अहाँ? बजैत रहै छिऐ जे हमरा हाथमे एकोटा छिद्दीओ ने रहैए।” उषा सकपका गेली। सकपकेबो केना ने करितथि? पतिक जेबीसँ बँचल-खूचल पाइ रोजे निकालिते रहै छेली। तैपर सँ ऊपरौसँ किछु ने किछु मांगि जरूरतिक समान कीनैबिते रहै छेली आ सभसँ जरूरी काज माए-बाबूकेँ देखै बास्ते जाए पड़ै तइमे खर्चा-बर्चा तँ होइते रहै। ई बात इंजीनियरो साहैब जनिते रहथि तँए उषा बातकेँ खोलैत बजली- “अहाँक जेबी, जे रोज साफ होइत रहैए, वएह कोशलिया कऽ हम रखने रही, विशेष पाइक ओरीयान अहाँ साँझ धरि केने आउ।” बेटा सभकेँ नै एलासँ ममता दुखी तँ छेली। मुदा ऊषाकेँ एलासँ निरासाक बादल छँटि गेलनि। साँझ होइत-होइत उषाक पति इंजीनियरो साहैब ऑफिससँ छुट्टी लऽ पहुँच गलखिन। विहाने भने एम्बुलेन्ससँ सोनाजीकेँ दरभंगा लऽ गेलनि आ डाक्टर यू.के बिश्वाससँ इलाज चलए लगलनि। तत्काल किछु दबाइ शुरू काएल गेल, ऑक्सिजनक खगता सेहो पड़लनि आ दिनमे तीन बेर एकर परयोग हुअ लगल। विभिन्न तरहक जाँच कराैल गेल। जाँचक किछु रिपोट तीन दिनक पछाति आएल आ किछु रिपोट हप्ता भरिक बाद आएत। जे रिपोर्ट आएल ओइमे बी.पी हाइ, सूगर बढ़ल आ संगे-संग हार्ट अटेकक सम्भावना बताएल गेल। सप्ताह भरि इलाज चलैत रहल, तबीयतमे उतार-चढ़ाव होइत रहल, कखनो नीक जकाँ गप-सप्प करैत रहथि तँ कखनो आँखि पथरा जान्हि, दम फुलए लगनि आ बेहोस भऽ जाथि। कखनो बेसुधि अवस्थामे अपने-आपसँ बड़बड़ए लगथि- “बबलू! कखनि एलँह आ आ बैठ! कनियाँ! घर जा। अहाँ पोती छी हमर? आब! आब! बिस्कूट एकटा हमरो दिए ने! एे डबलू चाह लाबह! माएकेँ कहक चाह देत! ईह छिनरीक साँए! जेते खाएत नै तेते छिड़याएत!” दुनू पजरामे बैसि उषा आ उषाक माए- ममता- बेना होंकि रहल छन्हि। सोनाजीक ई बड़बड़ेनाइ रोकैक बास्ते उषा सोनाजीकेँ छातीपर हाथ रखि हिला-डोला कऽ कहैए- “बाबूजी! बाबूजी! केकरासँ गप करै छिऐ?” सोनाजी चौंकैत बजला- “ऊँह! नै नै गप करै छी। तोहर माए केतए छौ?” सोनाजी किछुकाल ऊपर एकटकी नजरिसँ तकैत रहला। फेरि जेना कोनो आहटि चौंकैए तहिना चौंकैत बजला- “डबलू गाड़ीसँ उतरि गेल जा अगुआ कऽ लाबि लहक! काल्हिए कहै छी तोहर माए किछु बुझिते नै छँह।” सोनाजीक स्मरण शक्ति छीन्न भऽ गेल रहनि। आँखिक रोशनी चलि गेल रहनि। रहि-रहि कऽ बिछाैन होंथड़ए लगै छला। ई बेचैनीक अवस्था देखि उषा आ ममताकेँ जी-मन उड़ैत रहनि। मुदा उषा साहसी, कखनो अपन घबड़ाहटिकेँ दृष्टिगोचर नै हुअ दैत रहनि। मनकेँ थिर करैत उषा बाजलि- “बाबूजी! बाबूजी? एम्हर ताकू ने! हमरा चिन्है छिऐ? हम के छी कहू ते?” सोनाजी आब देखि नै पबथि। मुदा जखनि स्मरण लौटैत रहनि तखनि अवाज परेखि नजरि घुमा-घुमा एम्हर-ओम्हर ताकि देखैक परियास करैत रहथि। कहलखिन- “हँ, चिन्है छी! उषा दाइ छी ने अहाँ? केतए छहक आगु आबह ने।” आइ अस्पतालमे नअ दिन भऽ गेल रहनि। एकटा जाँचक रिपोट आइ आएत। दस बजे डाक्टर बजौने छथिन। उषाक पति आ उषा रिपोटक जानकारीले क्लिनीकपर पहुँचला। कनीए कालक पछाति कम्पाउण्डर अवाज देलकनि- “सोनाजीक गारजियन डाक्टर साहैब से मिलिए।” उषा दुनू परानी वेटिंग हाॅलमे बैसल रहथि, बोलाहटि सुनिते डाक्टरक चेम्बरमे पहुँचला, सोफा-कुरसी लागल रहए, बैसैक संकेतक पछाति दुनू गोटे बैस गेला। डाक्टर दुनू गोटेसँ सोनाजीक संग जे सम्बन्ध छेलनि तेकर परिचए लऽ कहलखिन- “मरीजक हालत गम्भीर अछि, रीकौभरक सम्भावना नै बँचल, जाबै धरि छथि, सेवा सत्कार करैत रहियनु।” डाक्टरक ई बात सुनि, उषा बौक जकाँ भऽ गेल। मुँहपर रूमाल रखि सिसैक-सिसैक कानए लगली। उषाक पति सेहो अवाक् रहि गेला! तैयो जिज्ञासु भऽ डाक्टर साहैबसँ पुछलखिन- “डाक्टर साहैब! केना एना भऽ गेलनि?” डाक्टर कहलखिन- “फेंफड़ा हिनकर बिल्कुल खतम भऽ गेल छन्हि। ब्रेन ट्युमर सेहो बढ़ि गेलनि आ शरीरक आनो-आनो अंग सबहक कार्यक्षमता शिथिल भऽ रहल छन्हि।” विभिन्न तरहक विमारी आ समस्याक विषयमे वार्तालापक पछाति निष्कर्ष यएह भेलनि जे सोनाजीक बिमारी ठीक हेबाक कोनो गुंजाइश नै छन्हि। दुनू बेकती नीराश भऽ चेम्बरसँ बाहर एला, उषा बाहर निकलिते भोकारि पाड़ि-पाड़ि कानए लगली। पति साहस बढ़बैत कहलखिन- “अहाँ जौं एना कनब तँ माएकेँ की हएत? शान्त रहू, मनकेँ बुझाउ! जे हेबक छै से तँ भाइए कऽ रहत। सुझि-बुधिसँ काम लिअ! माएकेँ ऐ बातक जानकारी नै चलक चाही। हुनको सम्हारि कऽ आब अहींकेँ राखए पड़त ने। नै कानू। चूप रहू।” उषो सोचलनि जे अखनि हमरा कानबसँ नोकसान छोड़ि आर किछु नै हएत। कहुना मनकेँ बुझबैत चुप भेली। सोनाजी कमरामे बेडपर पड़ल रहथि, बगलमे ममता पंखा हौंकैत रहनि, तइ बगलमे पजरा लागि उषा बैस गेली आ सोनाजीकेँ मँुह निहारए लगली। बेटा सभ टाल-मटोल करैत पिताक पराण छुटैकाल गाम आएल जखनि सोनाजी केकरो ने चिन्ह सकै छेलनि आ ने केकराे देखिए सकै छला। ललन कुमार कामत सम्पर्क- ललमनियाँ, मरौना, सुपौल। गोल इंग्लिश गार्डेन निर्मली। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)२००४-१५. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेता, से आशा करै छी। रचनाक अंतमे टाइप रहए, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/ संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै। ऐ ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-15 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.co.in पर संपर्क करू। ऐ साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल।५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सिद्धिरस्तु
वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' १७६ A अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक mee मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA =. हि : ® 'विदेह' १७६ म अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक १७६) हा ऐ अंकमे अछि:- ललन कुमार कामत विशेषांक ललन कुमार कामत भगवाने भरोसे कोसीक POA एकटा छोट-छीन गाम- छोटपुर अछि | छोटपुरमे अटकुदास नामक एगो मध्यमवर्गीय किसान छथि। कोसीक बिकराल रूपसैं ग्रामीण लोकनि रेहल-खेहल छथिये। सभ साल Hlth झेलैत आएल छथि। अटकुदास धार्मिक प्रवृतिक लोक छथि। प्रकृतिक fafa झेलैतो भगवानपर हिनका अनन्त आस्था ore अखार मास आएल। कोसीक मिजाज बिकराल हुअ लगल | लोकसभ आन साल जहाँति तैयारीमे THT । War ऐबेर कोसी अपन बाढ़िक अनहोनीघण्टी शुरूहेसँ बजब५ TTT | लोक सभकेँ भनक लागल जे कुसहाबान्ह टुटि गेल! ata दिगारिमे आतंक जकाँ मचि गेल! गाम-घरमे बाढ़िक पानि पसरए लगल | सभठाम हाहाकारमिच गेल! सभ कियो अपन-अपन जानमाल लेने ऊँचका स्थान दिस UMTS Wet | जगह-जगहपर फँसल लोककें बैचबैखातिर नाह चलए लागल | सभ कियो घर-बार छोड़ि देलक मुदा अटकुदास अपन घरक छतपर चढ़ि HS भगवान-भगवान करए लगला। भीषण बाढ़िक चपेटमे आबिसौंसे गामक घर-मकान SAS लगल | जड़ घरक छतपर अटकुदास ठाढ़ छला सेहो नकसकाइत-नकसकाइतडुमि गेल | मुदा अटकुदासकेँ अखनो अपन मलिकपर sige भरोष छनिहिं ओ अपन घर नै छोड़लनि | गामक एकगोटे भसाठीबला लकड़ीकें जोड़िडों गा-नाव बना अटकुदासकें बैचबैले आएल | घर लग आबि सोर पाड़ैत कहलखिन- “AMIS St अटकुदास! तूँ किए एतए अँटकल Sew? भाग नै a जान नै बैंचत5 |” अटकुदास घरेपर सै बजला- “तूँ सभ भागि जा, हमरा Kew नै As सकत | हमरा भगवानपर भरोस A | वएह हमरा बैंचेथिन |” नाहबला अपन जान बैचबैत आगू बढ़िगेल | बाढ़िक स्तरमे आरो वृद्धि होएत गेल। अटकुदासक घरक DATS आब पानि TST लगल | एकटा सरकारी आदमी मोटर नाव नेनेफँंसल लोक सभकें ताकि रहल छल | अकटुदासकें अझमे देखि चकरि Hs सोर केलक- |
वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' १७६ A अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक mee मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA “के छहक! aS हमरा नावपर बैठ जा, भीषन बाढ़ि आबिरहल B, जान बैचाब |” अटकुदास हिनको वएहउतर देलखिन- “तूँ सभ भागि जा, हमरा Ree नै भ5 सकत | हमरा भगवानेपर भरोस AD वएह हमरा बैचेथिन ।” नावपर आरो fee लोकसभ बैसल छल, नावबला आगू बढ़ि गेल बाढ़िक पानि आरो बढ़ैत गेल । कनीकालक पछाति फेर, एक्टा हेलीकेप्टरबला आएल। हिनका देखिते ऊपरसैं aT खसबैत चिकरि Hs अबाज देलकनि- “आब! रस्सी SIRE पकड़! हम खीं चै छियौ | हम तोरा सुरक्षित जगहपर पहुँचेबौ ।” अटकुदास हिनको नकारि देलखिन- “तूँ सभ भागि जा, हमरा Rew नै भ5 सकत | हमरा भगवानेपर भरोस ABS, Sate हमरा बैचेथिन ।” हेलीओकेप्टरबालकेँ हारि HS जाए पड़ल | अन्तमे अटकुदासकेँ स्वर्गक TT देखए पड़ल | जब भगवानक द्रबारमे हाजरीक AAT आएल | अटकुदासक AAA WTS जे हन-उपराग रहनि से HES लगलनि- “हे नाथ! हमरा अहाँक प्रति अटुट बिसवास छल, अटुट भरोष छल जे अहाँ हमरा sas खातिर निश्तुकी BUTT | FAT एना केना AS गेल, अपने हमरकिए नै बैचेलौं?” भगवान जबाव देलखिन- “तोरा आब केते मदति हमरासँ चाही? Fer नावबलाकेँ हमहीं भेजलौं तूँ नै एलँ एकटा हेलीकेप्टर बलाकें सेहो भेजलौं, तूँ नै एलैं। TAS, आब आरो Het तोहर सहायता हम HT |” -ललन कुमार कामत सम्पर्क- ललमनियाँ, मरौना, सुपौल | गोल इंग्लिश गार्डन निर्मली । दहेजक मारि एकटा समए छल जबशिवचरणकें चारि बिगहा खेत, जोड़ भरि बरद, कटही गाड़ी आ माल-भैंस S दुआरि भरल-पूरल रहै छल | हिनकर जिनगीओ VLA, खेती करैत बीतल अछि | खेतक उपयोगी सभ समान SAT हर, Wen, चौकी, कोदारि, खुरपी, हैंसुआ, इत्यादि, एखैनो दुआरिपर पसरल अछि, मुदा शिवचरणकें आब खेत नै बैचल। खेतक बिनु सभ ओजार झाम बुरैए आ बीज SA जाइए। एगो बुड़बा नेडरा बरद टुटलाहा Ha टकटकी लगौने ताकैत WAU | कटही गाड़ीक GU सरैककें GAA जाईए। एकटा च्क्ञा माटिमे Tact आ दोसरक डेना सभ छुटि-झरिकें बिखरल जाइत अछि। शिवचरणकें तीनटा बेटी रामेशरी कालो, पारो आ तैपरसैं बिरजू पनरह सालक AAS Ble बेटा 3छि। शिवचरण आए बिना जथा-पथाक लोकमे गिनल जाइत sf | एकर कारण अछि तीनटा बेटीक fare | सभटा बेटीयो तरे-उपरे छेलनि ay बिआहाः? आ दहेजो तिलकक बोझतर दबाएकें लकिर सँ HA बनि गेल अछि | 2
वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' १७६ A अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक mee मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA दहेज! ई केहन प्रतिरोधी प्रथा छी जेकर शिकार शिवचरणेटा नहि कतेक आरो लोक भेल sh । मोल-भाव a माल-जाल आकि चीज-बीतक काएल जाइये। ams जाहि age दाम प्राप्त ded अछि, ऊ चीज beret: सौंप देल जाइत अछि | मुदा ई केहन प्रथा छी, जेकर मोल-भाव केलहा रकमो,आ कन्या रूपी बस्तुओ, एके आदमी नेने जाइए? परिवारमे एकटा आबिनहरि age माने होइत अछि, काम-काजमे आ परिबारीक उपार्जनक बास्ते एकटा अतिरिक्त श्रमिक | दोसर दिशु कनियाँक पिताक Ware एकटा कमाऊ सदस्यक खगता AS जाइत अछि | छति a कनियाँक पिताकें होइत af, मुदा छतिपूर्ति बड़क बाप आकि बड़कें प्राप्त होइत अछि | दहेज! कोनो सहेजकें राखैक प्रथा छी? शिवचरण पचपन बरिखक on हिनक fla पार्वती पचासक अबस्थामे छथि | हिनका एके बिगहा जमीन बचल अछि | पनरह बरिखक एकलोता बेटा बिरजू कू माए बापक बूद्धा-वस्थाक पहिया खीचैले पनपिते रहिन कि असहनीय कर्जीक बोझ तरमे तेहेनकें दबाए गेलु जेना SAR भेल कटही गाड़ीक Wet असगर बहलवान दबिकें फर-फराए उठैए। तीन महिना पहिले छोटके बेटी ups fees सम्पन्न केलखिन, जैमे कर्जा-बर्जा ws गेल रहिन | doe, US बेरूक गहुँमक खेती तेहेनकें धोखा देने छल जे TH भरे फसल घर नै आएल Safa | ATT फागुनमे, जब फसल नीककें पकल जाइत छल, पछुआ see freak आ पत्थरक बज्रपात तेहेनकें भेल छल, जे सभ किसानक फसल माटिया माटि us गेल रहिन आ काइल-धाइल खेती नोकसान Us गेल छल | ओहुना शिवचरणक घरमे अन्न पानिक दिक्कत चलिते रहैत छल। Yar एहि साल सनक दिक्कत, साइते कहियो भेल ter | ओनातँ, बहुतो लोक गाममे ओहने गरीबीकें झेल रहल BS | सभक अपन जीबैक तरीका अछि | शिवचरणक घर छ मास चाउर आ छ मास ग्हुमक सहारे कटैए। कहलो जाइए गरीब लोक भगवाने भरोसे जीबैए | मुदा भगवानक आँखे Hees केकरा पर ee भ5 जाइत अछि, ई कोइ बुझि सकैए । ऐ बेरि धान महराज तैँ अप्पन पारि पुरेलखिन, मुदा गहुम महराज खिसिया गेलखिन | जन मजदूर सभ परदेश आकि शहर खटैले चलिगेल | मुदा शिवचरण ऐ बुड़हारीमे Ha जाएत आ के करत? सोचएपर मजबूर अछि | बिकना, et आ चौठिया ढेरबे सै पंजाब खटैत अछि। तीनुटा गामक ays गरीब घरक रहिन Far wears परदेश खटै लागल, गरीबी हिनका सभक घरसैँ भागि गेल | हिनका सभक जथा, पुजी आ नीक लता- कपराकें देखि कते लोकनिक मुंह ललिया जाईए । बिकना आइये area पंजाबसैँं एल अछि, जे dard Rea: चरवाही कैरकें आ आन्न-पानि खाएकें पोसल-पालल गेल रह्हि | मांगि-चांगि के आकि केकरो देलहा, अंगा पेन्ट पहिरैत छेलिन | कतेक-कतेक दिन तकि, फाटल-चिटल अंगा, पेन्टक बिचला सिलाई टूटि जाइत रहिन आ भालरि सन SA फर-फर करैत रहिन। ada नै, डॉरसैँ मटिया-माटि भेलहा कच्छा, feet जैंका झूलैत रहै छल । Yar पहिनुक बिकन आ आजुकमे अन्तर भ गेल अछि। हिनकर रोनक आ चलि-चलन देखिते बनैए। जब गाम आबैए तैँ लक्स सुजुकिकें लबका जैंघिया, लबका गंजी आ लबे लुँगी पहिरकें, कांखमे तीन बैण्डक फिलिप्स रेडियो ash फुल भाइसमे, दहिना हाथे लुंगी उठाएकें तेना पकरैए, जेनाकी तरका सुजूकिक जैंघिया ओहिना देखाइत रहैए। इ पहिराबा Sach कतेकोक आँखि पथराइत रहैत अछि । जब जब बिकना गाम आबैए, शिवचरण-पार्वती दुनु बेक्तिक भेंट जरूर करैए। US sen शिवचरणक लचारी के नै जानैत अछि? बिकना अपन सलाह आ सहानुभूतिकेंप्रकट करैले आएल आ He छैन्ह- “ददागौ, बिरजू कक्काकें ऐबेर हमरा संगे पंजाब कमाईले जाए दहक ।” पार्वतीके: 3 ई बात पसिन नै परलनि | ओ बजली- “एखैन! ऐ अजोह बेदराकें? नै रौ बौआ,जो तुँहें HAS TA 4s छै a कनु बैठल रहे है खेती-बाड़ी, हर- फार तैं Hola छै । असगर Ff बड़हसपतियो झूठे होयत छै। एकरा बाबू जीसैं आब नै LS” मुदा शिवचरणक बिचार अलग रहिन | ait अपन लचारीक जानैत TA जैं हु पाएक आमदनीक जोगार नै हेत त५ आब इज्जत नै बचत । बजलखिन- 3
वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' १७६ A अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक mee मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA “कमौत नै as ऐ Bae ओगरनेसैं feo नै हाएत | उबजाबारि साड़हे बाइस अछि | एकर भरोसे काज नै चलबला अछि |” Sa हैं भरैत GR Raa बाजे छथि- “हैं रो बिकना हमर मन छौ नने जाहि तू अपने संगे । नीक काम धराए दियहनि” टालमटोल हैत fees पंजाब जाइले सहमति बैनिए गेल waite बेटा मोह मे मन घबराइत रहेन मुदा AMT eet | भड़ा खचीबिकने गछलक | जाएक दिन Vet | पाकी दू किलो खेड़हि Tah! बिरजू aR बटरवरचा बनेलखिन | दरभंगा सँ अमृतसर के तीन बजे दुपहर मे .झ अछि । निर्मली सै छ बजिया भोरका गाड़ी पकरैले पाचे बजे सभगोटे बिदाह भेलनि flees GRA पार्वती माथ पर बेग आ हाथमे बटखरचाकेः ८ wat नेने बिदाह Ach बिरजूओ wash गोर only मोहल्लाकेः Fe YAH पाएर छुबैत आगा बढल । शिवचरणो संग लागल बिदाह भेलनि | बाट भरे बिरजूकेः Tas बुझाबैत, करत “असगर कतौ नै निकलिहन | मन लगाएकेर ५? काम करिहेन | केकरोसैं झगड़ा झटि नै करिहेन । टेलिफोन et रहिन।” इत्यादि aed सिखाबैत स्टेशन पर पहुेंश्चल। ओमहर पार्वतीके wa बेथित छैन, आँखि डबडबाएल अछि मुदा नोर भितरे भितरे पिबैत रही। aS मुरहकेर/ झाँपने, मनक बेदनाके WA दबेने, faci Aen ea देखैत, गाड़ी qe इन्तजार कैर रहली हेन। कनीए कालके ८ पछाति गाड़ी स्टेशनसैँ ससरे लागल, Ua मन आउर बिहल होयत गेल। जेना दुधरू ATH लेरू दुध frees पछाति नंगरी ऊठाएके ST मरैत जब नजरिसैँ ओझल WS जाइए आ ओम्हर गाए कान खड़ा कैर बोमि दिए लागै अछि । तहिना पार्वतीकेः aA होइय कानी, मुदा सोचै fers जे eva सामने कानब त dered मन दुखी भड जाएत | गाड़ी रेस पकरै लागल एकबरि फेरि बिरजू अंतिम झलकले माए पिताकेः 7? तरफ ताकलक | गाड़ी आगा Set गेल att OTe Shi aes ged गेल । sea होयत गाड़ी wea नजरि घुमि आएल आ पार्वती भोकारि पारि के काने लागली । जेठक महिना आएल | PATS बरखा हुए लागल, आ किसान सभ रोपनीमे भिर गेल | शिवचरणो एकटा बरदक भजैती A काम चलाबे लागल। एक दिन छौड़ि एक दिन Se पार होयत WA sas कतए सम्हरत? मुदा रहथि असगरे। अवस्थो हिनकर किनारे पकरने जाएत Tea ।चिन्ता फिकिर, तैपरसै खान पान मे कमि, देखैमे सत्तर सालक लागैत रहेन | सरीर सुखिके जेना जिमहरके सट्टा सन As गेल WT | एक एकटा नस देह USS ऊपर अलैग गेल WA | ToT पीठकेर on आनो हार ae मांस जेना बिलाए गेल रहेन। waa, अन्हरिया रातिमे ata अनचिन्हार हिनका देखता a ade भूत समैझ बेहोश भ जेता। ई as wart: खाएल पीयल काया Se जे चिमठि आ करगर Se | आय पनरह feat भरि भरि दिन खेतमे काम करैत Ser Set AS गेल af | जेना अन्न पानिसैं Fe नै। साँझ होयत घर आबैये आ बोखार सैंहुहुबाए लागैए । गामक बेद्य सँ ईलाज करेलक मुदा कोनो Hews परल | एक As Wife: तरक आ दोसर हाथ Al खली | नीक डक्टरसै ईलाज कतए सै कराएत? aig हालत में, जाबे aft देहमे ep लागल शिवचरण खेतमे खून पसीना बहाबैत eet । जेना तेना खेति GA भेल । खेति सम्पन होयते, शिवचरण नीक Seer बीमार भ$ बिछान रे लेलक । बिनु oa: ईलाज कतए S हाएत? ओहुना भादो मासमे किसानकेः ae खगले TST | HoH नाम पर लोकसभ ठाड़हो नैहुए aT सेठ साहुकार आ पुजी पघा बला लोक बिनु गहना Sas बातो नै करैए । पारोके ८? दुरागमन नै भेल रहेन aia नैहरे मे रही । पिताके: area देखे पारोके ४? नै रहल गेली; ओ अपन gE आ Gael निकाएलकेर ८? माए पार्वतीकेः ८ दैत कहली “माए! इ ले, एकरा बन्हकी लगाकेरं: बाबू Shea ईलाज कर P पार्वतीक मन एकर स्वीकृति नै दैत रहेन मुदा ude: जर्जर अवस्थाक देखि बेझक स्वीकार ws सेठ लूचाय ठाकुर लड रखि पनरह सए टका Sore aa: तमुरियाक डा. डी. एस. प्रसाद सैँ देखाए दबाई 4
वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' १७६ A अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक mee मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA चलाबे लगली। भोर सॉझ आ दुपहर पनरह दिनक दबाई BI डोज रहेन। दस दिन भि दबाई चलल, मुदा हिनका स्वाश्थमे कोनो उतार चढाव नै भेल | See कमजोरि AeA als गेल कि बिछान was उठब बैसबमे समस्या भड$ गेलनि, खोराकि सेहो साफके a गेल । चेहरा sas 4s गेलु पेट साफे बैठके पीठमे सटि गेल । बरहिया लैग गेल | आय शिवचरण भोरे afer sis are दिश बिदाह भड गेला । Wales बुझना परल, साईत हिनकर मन नीक ws गेल 3छि | टोकैत पुछलखिन- "pau बिदाह us गेलिय wit are“ शिवचरण सूखले मने बाजल- mare दिश जायछी, बहुते दिना WS गेल हेन खेतकेः Sere f Pao पाछुलागल पार्वती पीठे पर बिदाह भेली। gy faa सभटा खेतक आरि पर os धान लागल Hae लहलहाएत हरेयालि देखि हर्खित होयत बात करै OA | शिवचरणश् "Sq! ऐ बेरि सभटा We जेना wes उगलै हेन पार्वतीश् ”एहन Ted तखने ने?के जनैए मोसमक मियाद? कहि Vet नै as जा!” श्विचरण Serle ae बाजलशू् "Sted! wifes कि हाएत के aw एखि नीक अछि as बुझिलियन आगुवो निके tea I उपर आसमान मे कड़िया Ae an Bahl बीच नुका छिपिक खेल aM चलैत रहेन। ऐ खेलमे कड़िया मेघक जीत फक्का बुझना गेल रहेन | वंक्षेणश्पूबक कोणसँ Hisar मेघक एकटा खूब तरगर BGS अहार केने रमकल आएल | जे हरहराएत आ फटकार लगाबैत,जै जते Hal छिही अपन अपन घर जाए जो, आय हम्मर दिन छौ हेन। शिवचरण आ पार्वती मेघक उनटल मियादकेः ८ भाँप, घर दिश बिदाह भेलनि। मुदा घर agree धरि दुनु बेक्ति नीक Sar भीज गेलनि । गायक दूध आ रोटी खेनाइक पछाति दबाई लेलक आशिवचरण दरबजा Us जा बैसल | पार्वती बिछान नने एली आ भिंए मे बिछा लेट जाएले कहलनि | शिवचरण लेट as गेल मुदा Save कछश्मछ करैत पेटमे दर्द कहि कहरे लागल | दर्दबढैत गेल, घंटे भरिक पछाति शिवचरण असहाय होयत, सुधि बुधि ay चैल गेल । सौसे ऑगनमे कना रोहटि शुरू AS गेल | अरोसि परोसि सभ जमा भेलनि ।शिवचरणक भातिज मुंगालाल ई Stet FAT HEV *काकी! कि देखे छिऐ! उठाव! डाक्टर ले लड चलु मुंगालाल BS YS Ma रहथि | Sova Pata aera उठेलक art Pree: डा. के. एन. गुप्ता लंग ats Tet पार्वती आ पारो दुनु माय बेटी पाछुसँ हायबाप करैत दौरल एली | डक्टर मरीजकेः परीक्षण केलाक पछाति SAGA दबाई लाबैक आदेश देलखिन आ पुछैएश् ”कोन SHEL इलाज कराबैत रहियनिः?” पार्वती HST नुआ Ms सभटा बात बतेलखिन | फेरि डाक्टरसाहेब बाजैएश् "AMET उल्टा पुल्टा दबाई द$के Veh: जान मारि देलक Sa खराबी किड़नीमे अछि आ दबाई खाली ब्लड प्रसर के दकलक हेन नसमे पानिक बोतल आ तीनटा सूई आरो दबाई देलाक पछाति डक्टर साहेब एकटा डिलेवरी Tae होमकाँल पर चैल गेलखिन । कनीए कालक पछातिशिवचरणकेः Bee गौंज पोटा चलए लागल | AH जोर VE उठि गेलु देह हाथ तनाए गेल आ ठण्ढा As गेल | HR एकबेर कना रोहटि TA गेल | -ललन कुमार कामत 5
वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' १७६ A अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक ae मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA लघु कथा- भोला :: ललन कुमार कामत आम Wee देखल जाइए जे सतमाझ खिधांश TATA CITT RIT | अगर कोनो बच्चाकें सतमाए रहैए तँ ओकरा लोकक सहानुभुति रहैत SS | मुदा कोनो सोतेला बापकजिकिर केतौ होइत नै देखल जाइए | जखनि कि भेद-भाव दुनूठाम होइत अछि | AST अपन माए दुखनीक दोसर बिआहमे पछिलगुआ बनि आएल TU | करम बुड़ल छेलनि Gas जे बिआहक दसे दिनक पछातिबिअहुआ घरबलाक tert हेजाक TA भड गेल छल | पतिक गुजरलासँ दुखनीक नाता sits Us टुटि गेल । मुदा आशाक किरण नअ मास rarer बीतला पछाति भोलाक जनम भेलासँ फेरे चमकि उठल | दुखनीकेँ लागल जेना बेटाक STAs बिअहुआ घर चिकरि es ak पाड़लकनि ger sal इजोत गहनलगुआ ws गेल, चानपर दाग लगि गेल। सोसराक लोक दुखनीकें स्वीकार नै केलक, कियो कुलच्छनी a feat कुलनासनी कहैत सदाक Set ठाधःकर मारि देलक | TS दिनमे समाज आकि विज्ञान ata प्रगति नै केने छल जे डी.एन.ए आकि आरो Gee साबित करितै जे भोला दुखनीक जाइज सन्तान छी | समैक पहिया नाचैत गेल | दुखनी एकटा बेटारूपी धनसैं सवुर केने जीनगीक Gagad तालमेल बैसबैत पाँच बरख काटि लेली | आब टोलामोहल्ला आ समाजक लोक सभ Gerdes दोसर बिआहक गप-सप करए लगल | होइत-होइत खुर्शला गामक मोहन SR चुमौन सम्पन्न भेल, जेकर एकटा बेटी सोसरा बसै छेली आ Tit बेटा-पुतोहु भीन As Hs रहै छल | मोहनाक थोरबहुत खेत आ चारिटा भैंस रहनि जेकर दूध बेचि गुजर-बसर करै छला। चुमौन ers दुखनी-मोहनाक जीवन हरिअरी तैँ ght आएल मुदा भोला जे पिताक खतिर जनमसैँ See छल, ओकरा पिताक सुख नसीब नै As रहल छेलैजे Hes भेटबाक चाही | Mere बालपनमे पिता भेटल, मुदा ऐ अबोध नेनाक जरूरतसैँं हिनकर सतबाप साफ क$ अनभिग छथिन। मोहनाक चुमौन करैत धरि ger कमौआ प्राणी घर आएल, दुखनी पत्नी बनि घर-ऑआँगनक काम-काज सम्हारली आ भोला पोसल-पालल बेटा रूपमे भैंसक चरबाहि आ घासो भूसामे लगारल गेल | दुखनीक इच्छा छेलनि जे भोलाकें पढाबीपलिखाबी, as बास्ते गामक स्कूलमे नाओं लिखा देली | मुदा मोहनाक इच्छा नै छेलनि जे भोलाकें पढाबी। हिनक खिसियाएल wer भोलाक प्रति देखि दुखनीक सस-बस नै चलि सकल । ऐ खातिर बेर-बेर भोलाकें डॉट-फटकार AA पड़ेत रहै। दुखनीकें तरे-तर ट्सकेलापर भोला कहियो-काल नुकाछिपा WS स्कूल जाइत छल Yar Saat दिन नै चलि सकल | भोला एकदिन स्कूलसैँ अबिते aft मोहनाक तामसपर चढ़ि गेल | मोहना तमसाएलदाँत पिसैत aa बजला- “बड़ नबाबक नातिछिही! केतौ बैस ws बाप-संगे कौड़ी Gera Hel आ कहै छीही पढ़ैले गेल Sera! AR किए नै गेलेँ ओतै? जब घास-ले जाइ छिही तैँ तोरा घासे नै मिलै छौ Heat खुरपी भाँथ as गेलै तैँ Se dive Vs Tat | पचासटा Fea TAS GE | हट नजरिपर S Here” पाइरक चप्पल निकालि ws झट-झट सिन पीठपर बरसाए देलखिन | भोला धम्म सिन ओतै बैसि गेल आ छट-पटाइत बोमी पाड़ि कानए लगल | मोहनाक अपन बेटा नै रहनि HT ममत नै, मुदा माता PAT नै AS सकैए, दुखनी दौगल एली आ भोलाकेँउठा-पुठा ws पजिऔने अँगना as गेली | पुरुष प्रधान समाजमे स्त्री शब्द केतेक असुरक्षित होइत अछि से दुखनीक हालतसैं BT जाए THT | स्त्रीकँं अपन अर्धाग्नी बनेलोपर हुनकर मति मोहि Hs पुरुख अपना अनुकूल बना लैत अछि । रसे-रसे धरक वातावरण बदलैत गेल आ मोहनाक आकर्क् दुखनीपरसैं घटैत गेल | धरक काम-कजक अलाबे माल-जाल आ 6
वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' १७६ A अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक mee मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA खेतीओ-पथारी दुखनीक माथपर बजरि गेल। मोहना भिनसरे भैंस दूहि, que डोल बजार लेने जाइए, अनुमण्डलक GHA दुर्ग दासक होटल अछि, wea दूधक उठौना लगल अछि, एतए Vert पछाति WAHT संगे गाजाक लत सेहो Weta एक्केबेर दुपरियामे होइत घर अबै छथि। होटलक मालिक दुर्गा दास बेदरूकिया ना: ?करक खोजमे TAD जेकर जिकिर ओ मोहनासँ केलखिन- “आठ-दस बर्खक IAT Hist करैबला गाममे Gt भेटत तैँ नने अबिहज al a जानिते छहक होटलमे खेनाइ-पीनाइक कोनो कमी नहियेरहै छै । लूइरो-बूइध सीखतै आ पोसलो-पाललो तैं जेबेकरतै?” मोहनो भरोस दैत कहलखिन- “अच्छा ova feu, नजरिपर एतै तैँ AA Vas |” घर एलापर बेरमे Heh खियाल बेदरूकिया नोकरपर गेलु मने-मन सोचैत एला जे केकरा कहक चाही ऐ aa? एकाएक मोहनाक घियान भोलपर गेल आ सोचए लगल | aaa ई विचार केलनि जे भोलाकें होटलमे लगा देब सएह नीक रहत | घर अकित दुखनीकें गप-सप्पक झाँसा दैत कहलखिन- “भोलाकँ बजारमे नोकरी लगा दइछिऐ। घरमे खाइ-पिबैक दिक्कत As रहल S| बजारमे Led तैं दूटा लूइरो-बुइध सिखतै, गाममे देखे छिऐ ने बौनाएल जाइए?” दुखनी ऐ aad राजी नै छेली मुदा मोहनकजिद्दक आगू हारए पड़लनि | अगिले fers भोला दुर्गा दासक होटलमे काम करए लगल । ऐ अबोध बेद्राक वोनबाससँँ एकटा आरोनेनाक मौलिक अधिकारसं रोकि देल गेल । सोतेला माइक खिद्धांश तै होइत अछि मुदा सोतला बापोक हेबक चाही जेकर हकदार मोहन भेखेन | स्कूली शिक्षा t बाल-बोधक मौलिक अधिकार होइत अछि जे आम cine समझमे नै आबि रहल अछि। परिणाम स्वरूप, अखनो बाल-श्रम अपना देशमे चरमपर अछि | गरीब घरक नेना-भुटका AAS बलपूर्वक आकि जोर- जबरदस्ती भारी-भरकम काज SAT स्टोर उत्पादनमे जूताक TINS, दोकानमे साफ-सफाइ, भोजनक ढाबा आ होटलमे जबरन बरतन-बासनक माजैक काज,चाह दोकानपर गिलास धोइक अलाबे आनो अनोपचारिक क्षेत्रमे काज कराएल जाइत अछि । घरेलु काज करैले सेठ-साहुकार सभ काम-काजी Aah घरमे नुका Hs WaT, wee सरकारी श्रम निरीक्षक आकि मीडिआक नजरिसैँ बैंचि सकए। ई सभटा काज न्यूनतम मजदूरीपर बेदरा सभरँ कराएल जाइए, बुझितो जे ई कानूनी जुलुम अछि । एकरा अनुचित आ Mia मानल जाइए तैयो बहुत गरीब परिवार अछि जे अपन अबोध Sacre Aas सहारे भरन-पोषन करैए ।कानूनो बनल अछि जे अठारह बर्खसै कम उमेरक बालक मजूरी नै क५ BHU | मुदा कानूनक अनदेखी कएल जाइए आ भोला सनक नअर्खक FATT सतरह-सै-बीसघण्टा काज कराएल जाइत अछि | दुर्गादासक होटलमे अनुमण्डल आ बेंकोक स्टाफ जेना हाकिम, किरानी, चपरासी आ आनो भी.आइ.पी सबहक चाह, ASM, Heel TAT | fos महानुभावक RM चाह, नस्ता, GAS पठाएल जाइए। दुर्गा दास सोभावसैं एक नमरक पेल्टिसबाज छथिन oes कामकाजी बेदरा सभसँ गप at काज करबै छथि | जरूरी पड़लापर डाँट-फटकार आ लप्पर-थप्परसैं सभकें सकपकेने रहै GF | होटलमे wea दस बर्खक आरा? afer बाल-मजदूर काज करैत छल | भिनसरबाक चारि बजैत aft सभटाकें हुरपेट ws जगाएल जाइए आ बरतन- बासन, चुल्हा-चौकीक माँज-मजबैल, निपा-पोतीसैं झार-पोछक काजमे लगाएल जाइए। कोइ चाह लड डेरे-डेरा पहुँचाबेए तैँ कोइ जलखै, खेनाइ बनाबैमे लगि जाइए | कखनो-काल सभ बेदरामे कोनो-कोनो बातपर टोना-मानीसैँ झगड़ा-झही US जाइत अछि, ds घड़ीमे दुर्गकँँ अपन सकत मियादि teas पड़े छै, जारनि as Hs झँटियेबो करैए। खेनाइमे सभटाकेँ बसिया भात, टटाएल रोटी, महकौआ तीमन आ बैचल-खूचल तरकारी दैत बजै GA RX छौड़ा सभ अते नीक चीज तैँ तोहर बापो-ददा नै खेने हेतौ | खाइ जाइ जो मन लगा Hs |” 7
वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' १७६ A अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक mee मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA दुर्गा दासक एकलौता बेटा- अमर- दरभंगामे पट्नै अछि। जहिया कहियो ओ गाम aaa अछि a जाइ ada टीसनपर पहुचबैक जिम्मा भोलेकें रहैत अछि | आइ अमर दरभंगा विदा भेल | दस-दस किलोक TEA आ चाउरक मोटा भोलाक माथपर आ HAIL बैग लटकेने टीसन मुहँविदा भेल जे करीब कोस भरि हटि ws अछि। TATA भारीसैं भोलक कन्हा-पजरा ऐंठने जाइत रहै मुदा गाड़ी छुटैक डरे केतौ जिराइओ नै सकल । टीसन पहुँचिते रेलगाड़ी Sats लगलै। अमर लपैक Hs पौदान पकड़ि चढ़ल | भोला नीचासँँ सभटा मोटा-चोटा आ At जेना- तेना AAC पकड़ा आ अपन भाड़ उतारलक। भोलाक माथक बोझ SAA मन SoH हुअ MTA, मुदा चुरन्ती-डेग नै उठि wet कै भोलाकेँ। मन भेलैकिछुकाल जिरा ली। Har आ गरदनि Sel Vos जाइत रहै। गाछक चबुतरापर GT ES बैस HS हाँफए लगल | किछुकाल बैसला पछाति आलस आबि गेलैआ ओतइ sitet कड$ सुति tect | साइत Ua निचेनक नीन कहियो नै Geet छल | ओ नीनक महासागरमे हेला As लगलचारि घण्टाक कड़गर नीन खींचला पछाति जखनि गाछक ort घुसकि ws दूर हटि गेल an देहपर दुपहरियाक रौद लागए लगलै तखनि जा SHS आँखि खुजलै। भूखो SAS लगि गेल रहै आँखि मिरैत होटल दिस विदा Aer । A दुर्गा दास ASS आगि अंगोरा Sls छला | भोलकें देखिते मातर तरबामे लहरि दिअ लगल, गारि- बात दैत घौलाइत हूरकैत भोलाकें कहलखिन- “रे सार! गेलही तैँ मरि गेल रही? की बाप पकड़ि लेने छेलौ? We लगलौ a दौगल एलही। नमक हरामी कहीं HS! मुलुर-मुलुर केना तकैए सार!” बगलसैं करमीलक छड़ी उठा आ भोलाक पीठपर सटाक-सक् खिंचए लगलखिन। भोला ओतै तिलमिलाइत लूद सिन बैसि रहल आ बाप-माए चिचियाए लगल- “नै माए55... ही बाप55...मरि गेलियौ Ass... माए गै माए 55...” खिसियाले मुहँँ दुर्गा दास फेरि बजला- “सार तूँ हमरा होटलमे टपि नै ah SG जड़ aM लग जेमे | देखे छियौ तोरा के रखै Bt आ के खेनाइ wer घण्टा भरि भोला ओतै कनैत रहल । रहि-रहि ws दुर्गा दास हरैक-हरैक मारैले wed रहथिन आ बजैत रहथिन- “भगलेँ कि नै सरबा? WA की टक-टकी देने छीही? आब खाले? |US Test नै आ खेनाइ के देतौ?्चलि जाइत रह WAT जेबाक Bt” भोलाकें बुझना गेल आबनिश्तुकी नै रहए देता आ ने खेनाइए Fea | उठि-पुठि Hs काशी प्रोजेक्टबला खरंजा पकड़ने एस.डी.ओ alee अवास दिस विदा भ गेल । मन्हुआलए-सन्हुआलए आँखिक AK पोछैत भोला एस.डी.ओ.क अवासक ang जाइत छल तखने भीम बहादुरक Aa भोलापर गेलनि। भीमबहादुर एस.डी.आएर साहैबक भनसिया, जे दयालु प्रवृतिक नेपाली पहाड़ी जातिकछथि। बहादुर भोलकें जानिते रहथि पुछलखिन जे की Ach, किए कनै छीही, dau जाइ S? भोला हिचैक्-हिचैक Hs सभटा बात बतेलक- “हमरा नै Wad | मालिक कहलखिन भागि जो, नै रहए देबौ ।” भीमबहादुरक उमेर पचास-पचपनसैं कम नै हेतनि मुदा खुशमिजाज आ दयालु प्रवृतिक लोक छथि। भोलाकें केम्पसक भितर as गेलखिन आ खाइले get रोटी संग कनी तरकारी देलखिन जे Sat छेलनि | भोला भोरुके खेलहा, TS लहालोट KS HT | Yar ऐ रोटीक पैनठेग्लौं देहमे Gar एलै। किछुकाल afk ओतए बैसल रहल | एस.डी.ओ पाठक जीकदुनू सन्तान नन्दन सात बर्खक आ नेहा चारि बर्खक अछि जे केम्पसमे बैट- बौल खेलाइत रहए। भोलो दौग-दौग ws संग fear लगल | SH होइत धरि पाठक जीक जीप केम्पसमे प्रवेश 8
वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' १७६ A अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक mee मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA केलक संग लगल किछु गाम-घरक नेता लोकनिक SYA सोहो जुटए लगल | गप-सरक्काक बीच सभ नेतागण अपन-अपन काज करा विदा होइत गेला। बीच-बीचमे पाठक जीक्नजरि तीनु नेनापर Sel जाइत रहनि जे प्रसन्नचित मुद्रामे खेलैमे मग्न अछि । भोला एस.डी.ओ साहैबक कार्यालयमे चाह पहुँचबैले जाइत रहनि AT चिन्हतो रहथिन। मुदा भोलाकेँ एतए देखपाठकजी दुविधामे wer । पाठकजी sgt पुछलखिन- “बहादुर, ई लड़का A दुर्गादास-होटलक लगैए, ई एतए केना आएल?” भीमबहादुर सभटा बातक जानकरी दैत अप्रह केलखिन- “ares, घिया-पुता जाइत छिऐ, भगा देने छै, राति-विराति केतए Vg ang ale ud रहे दैतिऐ तै नीक asa” पाठकोजी नेक विचारक लोक, हैं भरैत कालखिन- “TES दहक की हेतै? घिये-पुता तैँ fd ।” बहादुर गरीबीक दिन देखने | ATA गरीब Tae प्रति दजा आ सहानुभूति भरल BS | बहादुरमे दूटा नीक गुण अछि, पहिल ई जे जब केतौ भूखलकें Var st खेनाइक आग्रह जरूर करैत, दोसर ई जे दोसरक बाल-बोधकेँं अपना जकाँसिनेह दैत छथिन | एस.डी.ओ- पाठकोजी-तहिना मिलनसार आ दयालु प्रवृतिक लोक छथिन, av दुनू गोटेमे नीक जकाँ बनै ore । भिनसर भने बहादुरक दैनिक काजमे भोलासंग feat लगल। दस बजैत पाठकजी ऑफिस विदा भेला। Mex अपने संगे भोलोकेँ vers करबैत गफ्सप्पमे पुछलखिन- “होटल धुमि ws जेमे की गाम? भोला सकपका गेल, किछु नै बाजल,मुदा बहादुर ऐ चुप्पीकें ga खातिर फेर पुछलखिन- “होटल जेबाक मन नै होइ छौ?” भोला मुँह लटकेने बाजल- “नै Se, दुर्गा मालिक बड़ AS | खेनाइओ भरि पेट नै es छे आ भगाइओ देलक, कहलक आब तोरा नै रखबौ ।” बहादुर- “तूँ अपना बापकें किए नै कहै BP” भोला- “हमर बाबा एक We दूध aS HS नै अबै छथिन। दुर्गा मालिक कहलखिन, बाबू सबटा भैंस बेचि werent |” बहादुर- “माइअएओ Fe-aie करैले नै अबै छौ?” भोला- “de नै केलके | एकबेर खजुरी कका दिअए समाद पठेने रहै SF करि जाइले | मुदा दुर्गा मालिक नै जाए देलखिन आ हमरा TTA देखलो नै कै 9
वि दे ह विदेह Videha कन्तिर www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' १७६ A अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक mee मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA एकबेर फेरि बहादुरकें भोलापर दया लगलनि, जे कि मनुखक मूल सोभावो छी। ओना Tt सभ धर्मक पोथीमे garter गेल अछि, जे लोकनि कनैत-कल्पैत नेना-भुटका, भूखल, बेमार आ बूढ़-पुरानपर दया-दरेज नै करि aby, ओकर ई मनुखक जीनगी बेकार होज्ञा अछि । मनुखक पुनरावृतिक लक्षण अछि, जनम भेनाइ, खेनाइ-पिनाइ, पलनाइ-बढ़नाइ, बिआह-दानसैं seals करैत परिवारकें आगू बरहेनाइ आ फेर मरि जेनाइ। ई जीवन तैँ पशु आ पक्षीओ जीबैए । तखनि मनुख आ जानकमे की फरक रहत? दया मनुखक सभ गुणमे श्रेष्ठ अछि जे मनुखमे रहबाक चाही | भीमबहादुरक मनमे विचार उठल, साहैबसैँ गप करि भोलाकेँ अहीठामक काजमे रखे लेब a एकटा बेदराक उपकार AS जाइत! GE पड़ैत पाठकजी एलखिन | SITs फूर्सत Fer पछाति बहादुर पाठकजीसँं बिनती करैत भोलाक खातिर गपकहलखिन जेकरा पाठकजी स्वीकार theres | भोला घरक काजमे संग-साथ feat लगल | Ate भेटलापर नन्दन-नेहा संगे पढ़ैओले बैसि जाइत WTI कनी दिन बीतला पछाति बहादुर भोलाक माए-बाबूकेँंसमाद पठेलखिन, भेंट करैले । डेढ सालसैं Gert बेटाक सोगमे Re छेली । मुदा ई aa जे भोला एस.डी.ओ साहैबक घरमे काज करैत अछि, सुनि सुप सन कलेजा भेलै। अगिले दिन दुखनी दौगल एली । दू बरेर अपर भोलाकें देखिते Gere खुशीक ठेकाना नै रहलै। गप-सपरँ पता लागल जे भोलाक सतबाप, मोहनाभैंसपर सै खसि पड़ल आ sit टुटि गेल। पछाति सभटा भैंसकें बेचए पड़लै। तहियासँ आइ तक Asa बेमारे रहै छथि, AAS काज-राज हिनकासँ नै भ5 रहल छन्हि। भैँट-घाँट भेला पछाति दुखनी गाम दिस विदा हुअ लगल मुदा एस.डी.ओ साहस Fe करैत निहोरा केली- “हूजूर, आइसैं अहीं ऐ निभोगाक माइ-बाप छिऐ | अहींक नून खा HS एकर भाग चमकतै |” पाठकजी भरोस दैत कहलखिन- “भोलासँ अहाँ निफिकिर रहू | खर्चा-पानीक दिक्कत हएत a हमरा खर्बरे करब |” पाठकजी भोलाक हाथे पाँच सए टका आ एक सेट कपड़ादुखनीकें विदागरीमे देलखिन । gat हैँसी- खुशी गाम दिस विदा ws गेली । सम्पर्क- ललमनियाँ, मरौना, सुपौल | गोल इंग्लिश गार्डन निर्मली | 4 प | ललन कुमार कामत लघु कथा- 0
वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' १७६ A अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक mee मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA अप्पन माए-बाप सुनील जीकें दूटा सन्तान | सौरभ दस सालक जे पाँचमा कक्षामे आ छोटका सुमन छह सालक जे पहलामे मेडोना स्कूल, कटहल वाड़ी दरभंगामे पढ़ैए ।स्कूल घरेक बगलमे छै। सुनीलजी अकाशवाणी दरभंगामे नौकरी करै छथि। हम सुनील जीक दुनू बच्चाकें घरपर जा ट्यूशन पढ़बै छी। हुनकर कनियाँ मंजू हरिदम बच्चाक कपड़ा- लता, वर्तन-बासन आ आनो-आन घरक कामकाजमे ओझराएल रहै छथिन | सुनीलजी नौ बजे भोरे Feet ofa अपना काजपर | दू बजे VAS Geet अबै छथि | फेर रातिमे दस बजे घर अबै छथि। चारि बजे बेरू पहरमे हम पढ़बैले सभ fer जाइ छी। आइओ गेलौं । कनीए काल पछातिमंजू चाह ats aS हमरा लग एली | चाहक कप पकड़ा aH बदमाशीक उपराग कम मुदा काजकबेस्तताक पोथी खोलि छनेमे संसारक परेशानीक पाठ पढ़िगेली | फेर काजमे एना लागिगेली जेना टाँग-पर-टाँग नै पड़ैए । छुट्टीक समैमे सुनीलजी सेहो घरक कामकाजमे Sea रहै OHA दुनू गोटेक परिवारक प्रति समरपन देखि हमरा बुझाइत WU जे ऐ छोट परिवारक अलाबे हिनका ah ऐ संसारमे किछु ने OFS | अचानक TA हुनका फोन एलनि जे हुनकर पिताजी सिरियस छथिन | सुनीलजी sft छुट्टी लेल दरखास द5 गाम बिदा भेला। गाम जा पिता जीक संग माएकें Sal GA दरभंगा आनिलेलनि। बाबूजीकें असपतालमे Sree जैंचबौलनि। डाक्टर कहलकनि- “अहाँक पिताजी & टी.बी. ws गेलनिहेन ।” “आब की उपए अछि डाक्टर साहैब?” सुनीलजी पुछलखिन | “नौ मासक दबाइक कोर्स अछि । देख-रेखमे समैपर दबाइ चलबए पड़त ।” सुनीलजी, आर्ेफिस जा अदहा दिनक छुट्टी छह मासक लेल दरखास लगा माए-बापक सेवामे लीन As गेला। कटहल AS स्थित AT अवासपर माए-बाबू रहएलगला | मुदा सप्ताहमे दू दिन असपतालमे जाए-आबए पड़नि। आब मंजू पहिनेसैं बेसी परेशान रहए लगली | एक कि मंजूक वार्ता हमरासँ भेल | बजली- “की कहूँ सर, एक्कलो-रती मन नै होइए जे ऐ घरमे रही ।” हम पुछलियनि- “किए, की भेल?” “तेतबे घरक काज तेतबे धिया-पुताक काज आ Aas माए-बाबूजी माथक बोझ बनिगेल छथि। अपने जे छथि ait Vat Let काज नै सम्हारै छथि ।” हम कहलियनि- “अहिना ds छै, काम-धाम a ay fer लगले रहै छै। मुदा माएबापक सेवा Aa ऐ जीवनमे wea or Tah जेना हमर उपदेश एक्लो-रत्ती नै सोहेलनि। तमतमाइत बजली-
वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' १७६ A अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक mee मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA “मास्टरजी, हमरा अहाँ नै सिखाउ | अहाँकें दुनियाँ-दारीक are नै चलल अछि अखनि। सासु-ससुर हमर ओहेन अदरगर नै FA ।” मंजूक ई बात सुनि हम स्तब्ध रहि Teil । मुँहक बात मुहँमे रहिगेल | संच-मंच बच्चा सभकें पढ़बए लगलौं | मुदा मंजू बड़बड़ाइत रहली- “चौबीस घंटा काजे-काज | सभ अढ़बैए बला | ऐ घरमे रहैक मनएकोरती नै dled अछि | जेतबे घरक काम-काजसैँं AM दुखाइत रहैए आ तैपर सैं बुढ़बाबुढ़िया माथ भुकबैत रहे Sa |” तही बीच बुढ़हाक Stet जोर जोरसैं सुनि पड़ल | खौं खी करैत-करैत बदहाल Us कहरि-कहरि ws बाजए लगला- “कनहौलीवाली, सुनीलक माए, केतए sh? ओह बुढ़ियाकें जेना हमरा लग नीक नै लगै छै। जेना हम काटैले दौड़ छिऐ |” बुढ़हाक हफनीक अवाज फेर सुनिपड़ल- “कनियाँ छी हे, लहानवाली, ऐ सौरभक माइ? बाप रे बाप! कोइ ने सुनैए |” मंजू बड़बड़ाइत घुमली- “मरबो ने करैए बुढ़ा जे हमरसिरक बोझ Sed | जानिने कोन पापक फल छी ।” सुनील जीक घरक ई कथा रोजक As गेल। एक far अनायास हुनकर घरक हवा एकदम VAT बुझना गेल। छतक चौकीपर जाजीम बिछौल छल । दुनू बच्चा ओइपर आबि पढ़ैले बैसल। हम पलस्टिकक कुरसी facia बैसलौं । कनीए काल पछाति मंजू पलेटमे जलपान आ कपमे चाह as मीठ-मीठ चलिमे मुस्कीआइत एली। हमरा बुझाएल जे आइ मंजूजी तिपित छथि | इच्छा भेल जे ऐ खुशीक कारण जानी | पुलियनि- “भाभीजी, आइ अपने बड़खुश नजरि अबै छी, की बात FBV?” “हैं, खुशी किए ने हएब | आइ हमर अपन माएबाबू TTS एला अछि | खुशी ct सोभाविक छै ।” मंजुक ई बात सुनि खुश a Aa केलौं जे माएबापक ahs सो भाविक खुशी जे हेबक चाही से हमको भेलनि। मुदा दुख सेहो भेल ga ई भेल जे अखिर सासु-ससुरक विषयमे जे मिथिलाक दर्शनमे नारी लेल बतौल गेल छै जे अपन माए-बापसैं बढ़िक5 सासु-ससुर होइ छै से हिनकामे किए नै छन्हि 000 सम्पर्क- ललमनियाँ, सुपौल | 2
वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' १७६ A अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक mee मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA | ललन कुमार कामत लघु कथा- स्कूलक फीस- मानस तीन सालक छल aft माएक देहावसान As गेलनि। पिताजी गामक मुखिया छथिन | समाजक कहलापर दोसर बिआह केलनि। लबकी कनियाँ थोड़-बहुत पढ़ल-लिखल, सोभावशील, किवारू आ सुन्दर भेलनि। तीन सालमे मुखिया जीकें ger सन्तान और भेलनि। चन्दन आ ART | नन्दनक जन्मक छह मासक पछाति मुखियाजी स्वयं भगवानक प्रिय as गेला | एकबेर फेर परिवारसैँ as HS गाम भरिमे शोकक लहरि पसरि गेल। मुदा मुखियानि शोकक ARS बाहर आबितीनू बच्चाकेँ लालन-पालनक लेल फेरसैं अपन कि-दुनियाँमे लीन Us Tell | अपना Yeager बच्चा सबहक SA HCA पोसैमे कोनो Hae नै छोड़े छथिन | मानस आब दस सालक US गेल | प्राइवेट स्कूलक चारिम कक्षामे पढ़ैए । महिनाक पाँच तारीख तक सभ बच्चा अपन-अपन फीस जमा करैए | eae छह तारीख धरि विलम शुल्कक संग जमा करब आवश्यक अछि। नै देने नाओं काटि देल जाइ छै । मानस प्रत्येक महिना अतिरिक्त शुल्कक संग जमा करैत छल | Far ऐ मास सेहो नै भेलै। पीठपर पोथीक बैग टाँगि अनजान चालिमे डेल उठबैत, एमहर-ओम्हर तकैत स्कूल दिस विदा भेल। घरसैँ लगभग एक किलो मीटर भरि पूब स्कूल छै । बाटेमे मानसक मन Fur गेलै। आइ तैँ छह तारीख GB । मुदा फीस तैँ अछि नै। सरजी की कहता की नै । असमंजसमे पड़ल मानसस्कूलक हाता धरि पहुँच गेल | Steg आगू नै बढ़ि बाहरेमे ठाढ़ रहल | fea काल पछाति आपस घूमि गेल । अगल-बगलमे डबरा-डुबरीमे पहन मानसुनक Tee पानिक जमाव Buh देखैत, बेंगक टरटेनाइ amie देखैत-सुनैत लीन As गेल । ओमहर Spot सरजी हाजली मिलौला पछाति मानसक अनुपस्थितिपर बजला- “मानस आइ नै Ue” एकटा बालक कहलकनि- “आएल f छल मानस, साइत बाहरमे हएत I” 3
वि दे ह विदेह Videha कन्तिर www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' १७६ A अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक mee मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA सरजी- “arg फेर फीस नै अनने होएत |” फेर AVS बालक बाजल- “सरजी, अहाँ कहब TSH मानसकें बजा आनब |” सरजीक घियान मुद्रापर गेल | बजला- “जो, आ कहिदिहनि जे आइ जैं फीस नै as HS आएत तैँ दोबर फीस लगतै |” बालकक नाओं सौरभ अछि। सौरभ स्थानीय बेवारीक बेटा Gi सौरभ केर घर स्कूलक बगलेमे छै। aaa मित्रता & | मानस केर प्रति सहायताक भाव सेहो रहै छै। सौरभ fer Act मानसकें तकैले | बाहर जा एमहर-ओम्हर नजरि दौड़ौलक | मानसपर केतौ ASH नै पड़लै। कनी और आगू बढ़ल | देखलक एकटा गाछक छाँहमे ore किछु देखि रहल अछि | देखिते चिकरि क$ सोर पाड़लक- “मानस, की Ht छी | एमहर आ मानस अवाज सुनि-ताकि लग आबि बाजल- “आइ हम स्कूल नै जेबौ | सरजीकें नै कहिहिनि जे मानस गाछ तर अछि ।” सौरभ- “Sit तूँ स्कूल नै जेमें तै एतए की करै छीही | घरेपर रहितेँ ।” मानस- “हूँ नै ga Heal | घरपर जैं रहब i माइक सैकड़ो प्रश्नक उत्तर दिअ Ged | घरमे पाइ-कौड़ी नै छै। माए कहलक जे दू-चारि दिनमे पाइ देबौ ।” सौरभ स्कूलक Pears अवगत अछि | जौं छह तारीख तक फीस जमा नै हेतै तैँ स्कूल निकालि a जाइ छकै। ई सभ सोचि aah कहलकै- “स्कूलक निअम नै बूझल St जे केते कड़ा छै | माएकें नै कहने छिही?” मानस किछु बाजल नै, आ ने किछु फुरेलै । चुप रहल । सौरभ घूमि क$ स्कूल चलि गेल | |IOOO सम्पर्क- ललमनियाँ, सुपौल | 44
वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly cjournal fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'बिदेह' १७६ म अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक बिक मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA rE | ललन कुमार कामत लघु कथा- दस हजरिया नोट- हम अपन इलाकामे जानल पहचानल Vex Sail | पेन्टिंगमे बेद्रेसं लगाव TAH कारण, भाड़ी-सैं-भाड़ी चित्र पल aha बनेनाइ हमरा लेल असान छल। एकटा लडोटिया दोस्त छल ies, किराना दुकानदार आ जातिक भूमिहार | बखत-कु-बखतपर हम एक drach मदति निस्वार्थ भावसैँ करै छेलौं । एक दोसरकें fgg दोस्त मानै छेलौं। लोक सभ हमरा ऐ दोस्तीकें देखि हैरत रहै छल | हैरत ऐ खातिररहै छल जे हमर दोस्त धीरेन्द्र भुमिहार जातिक छल | Ha लोग कहैतो छल “की रौ, afters दोस्ती केलैंह..., Sows eee कहीं भुमिहारी दाउमे फँसलैंह तैँ बुझियैहनि!” Wer ऐ बातपर हम कोनो कान-बात नै दइछेलौं। एकदिन जहिना हम रंगब्रशक झोरा as HS केतौ काजपर विदा भेल छेलौं आकि जनक काका दलानपरसैँ चिकड़ि Hs बजा कहलथि- “रौ, सुन कहै छियौ तूँ जौं भुमिहारसैँ दोस्ती केलैंह Ft भुमिहारी दाउ एकोटासिखलेँ आकि नै?” हमरा जिज्ञासा भेल आ पुछलियनि- “काका, भुमिहारी दाउ केकरा He छै ही?” “हम St बुझितौं तँ हमहीं ने तोरा सिखा दैतिऔ? लोक बाजै छै जे भुमिहारी दाउ बड़ पेंचिदा होइ BP हम भरि बाट गुन-धुन करैत एलौं “Gar ई कोन दाउ GP जे लोक सभ दोसक संग ee पुछैत रहैए? से नै a, Sg हम Aaa ऐ बिषयमे Oe ws रहब | दुपहरियाक रौदामे हम कोसी प्रोजेक्टक देवालपर एकटा किज्ञापन लिखैत रही SATS तखने पाछूसँ मोटर साइकिलक सीटीक अवाज पिपियाएल! हम रंगक डिजाइन बनबैमे मगन रही | मने-मन तामससँ देह बहिर Us गेल! “के एहेन दुष्ट छी जे डिस्टर्ब करैए?” मुदा ताकब केना? जौं ताकब तँँ डिजाइन खराप Vs जाएत। लगल हाथ छोड़ि, ८; ताकलौं | aarp रहि गेलौं! ave भुमिहार de dike छल | दोस्तीमे कनी-मनी शैतानी a चलिते रहैत छल | WS मुस्कान Aaa सेहो Geet | तैबीच elegy नजरि पेन्टिंगपर पड़ल आ प्रशंसा करए लगल। मुदा हमर प्रशंसा, जे हमरे मुँहपर बाजल जाइत ofS! नीक नै लगल, अंग्रेजीक एकटा मुहावरा मन पड़ि गेलु We ऑन aa लॉरेल्स' अर्थ अछि, “अप्पन wafers संतुष्ट नै रहक चाही," हम विनम्रतासँ कहलियनि- “ara, अहाँक ऐ प्रशंसासँ हम खुश नै छी | हम मात्र एकटा छोटका कलाकारछी, खरचा-पानि चलेबा लेल ई काज करै छी ।” तैबीच हमरा मन पड़ल “भुमिहारी as पुछलियनि- 45
वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' १७६ A अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक mee मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA “aa, लोक कहैए जे भुमिहारी as बड़ नीक होइछै, हमरो सिखा दिअ ।” धीरेन्द्र पहिले & हमरा बातपर घियान नै देलक मुदा बेस्बेर जिद्द केलापर सोचए लगल, कनीकाल सोचि HS बाजल- “दाउ तैँ अहाँकें सिखा देब मुदा बदलामे feng दिअ dea P हम पुछलियहन- “कथी देबए पड़त? STL |” aig फेर बजला- “अहाँकें एकटा दस-हजरिया नोटक पेन्टिंग बना Hs हमरा fest पड़त हम बजलौीं- “रूपैआक नोट! दस-हजरिया आ पैंच-हजरिया की, vit पेन्टिंगेसं बनाएब ct किए नै? जरूर बना देब। कनीए दिन रूकू फुरसति gar दिअ तैँ छापि देव ।” पेन्टिंग हमर ईश्वरीय देन छल, बेदरेसैं अनेक प्रकारक चित्र पाड़े छेलौं, स्कूलमे Gaal यार-दोस्तक आ संग पढ़ैत लड़कीओ सबहक। बाबूजी सधारण किसान छल,हमर पढाइ लेल पर्याप्त खर्चा नै रहैक कारण अध्ययनक संग उपार्जनक मार्ग अपनौने रहीं । अखनि हम निर्मली आ आसपासक क्षेत्रमे जानल-पहचानल =e छी | कामक व्यस्तता हरिदम रहैए । ऐ व्यस्ततामे दोसक लेल दस-हजरिया नोट बनेनाइ हम साफे बिसरि Tet | एकदिन हम नगर सेठक दोकानक बगलमे साइन बॉडबनबैत रही, तखने धीरेन्द्रक अवाज सुनि पड़ल। काम रोकि गद्दी लग हम ससरि chs Veil, तही समैमे आउरो fee जानल-पहचानल बेपारी सभ पहुँगु/चल छल | धीरेन्द्र RG Gh सुना HS हमरा कहैए- “की दोस, हमर काम नै हेतै?” हम चौंकि गेलौं जे हमरा कोन काम कहने Ba! पुछलियनि, “कोन काज?” “वएह दस हजारबला!” हमरा मन पड़ि गेल दस-हजरिया नोट! मुड़ी हिला स्वीकृति दैत कहलियनि- “alts हाँ, हेतै, हेतै, किछुए दिन और रूकू |” सेठजी नोटक at गीनैत-गीनैत, चेश्माक भीतरे-भीतर, रूपैआक बात सुनि हमरादिस ताकए लगल | हम चुपचाप, काम करए लगलौं। हमरा एला पछाति, धीरेन्द्र सभ लग बाजल, जे *ई et हमर दोस छी, हमरासँ दस हजार टाका लेने अछि, केतेक AAT As गेल, Fel टाका मांगलापर, आइ-कल्हि करैत, TAT काटैए ।' समए बीतैत गेल, छह महिनासाल भरिक बाद, फेरि दोसर बेपारीक दोकानपर दस हजारक तकेजा Sere | हम दस-हजरिया पेन्टिंगक नोट समझि टाड़ि देलौं । मुदा हमरा गेलाक पछाति धीस्द्र सभ लग बाजल fet छल जे साँचेमे ई हमर रूपेआ लेने अछि | ऐ बातक दू बरख AS गेल | जेतएतेतए लोक सभ हमरा कहए लागल- “dita Star किए ने फड़िया दइछिही! दोस-बोनक पैसा utue दिन रखनाइ नीक बात नै के ।” पहिले तँ हम असमंजसभे SI मुदा, जखनि पता चललजे धीरेन्द्र दस-हजरिया पेन्टीं गक बदलामे दस हजार टाका लोक सभ लग बाजल फिड़ैए, हम अवाक् Ue गेलौ! केतेक गोटेकें समझेबाकपमरियासो केलौं ई बात, Far जेकरे कहिऐ वएह, बुड़िबक बनबए लगल- “कलाकार US HS एहेन नीयत तोहर नै AT चाही ।” हम चिंतित us सोचए wei, 'ई दोस्त नै छी, दुश्मन छी, ud wet फेरामे पड़ा देलक! Haws wa टाकाक ओरियान axa! हमर ओकाति हजार टाका जेना लाख टाकाक के बराकरे छल । बिना जमीन-जथा बेचने दोसर उपए नै छल | 6
वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' १७६ A अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक mee मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA कनीए दिनक पछाति, पंचैती Fa, पंचक फैसला Aa, कठिमारि क$ | हजार सुइदकक संग बारह हजारक देनदारी ठहरौल गेलौं। लोक सभ बाजए नै दैत छल | जीवनमे एहेन Sart कहियो नै Act SU । दस दिनक समए देल गेल । टाकाक ओरियान नै भ$ रहल छल | कोनो गुंजाझ्ा नै देखि, एकटा उपए सूझल, जमीन बेचु Ad, भरना लगाउ। एक बीघा जमीन भैयारीक wie पड़ल छल । बेचब Ft फेरकीनल नै हएत, से नै a भरने लगा देबाक चाही | हजार टाकाक LAINE कट्ठा खेत भरना लगेलौं, SIs as Hs दोसक घर फ्हुँचलौं | दलानपर कियो नै छल असगरे बैस Aci, edith Gah गेल | कनीकालक पछाति, दोस्तीनी एक हाथमे पानिक लोटा आ दोसर wae घोघ तानि, seer मुँह झाँपल अदहा देखाइत, आगूमे पानि बढ़ा देली | तामससँ Tt हमर देह बहिर छल, सोचने छेलौं जे दोसकें किछु कहबनि, मुदा की करब! चोटपर दोस्तीनी पड़ि गेली । भाड़ीए was कहलियनि- “दोसकें बजाउ आ कहियन जे अपन टाका लेता |” कनी काल पछाति धीस्द्र हैँसैत-हँसैत दलानपर एला। F Beh, हमरा हरियाएल घापर, नूनक लहरि WT लागल। चुप चाप रूपैआक Tet देलियनि, गिनला पछाति Hes हमरे हाथमे धरा5 देलनि | हम चुपे Vit मुदा धीरेन्द्र बाजल- “दोस, याद करू | अहाँ हमरा कहने Beas ने भुमिहारी दाउ सिखबैले? aug छिऐ भूमिहारी as Pr एकबेर फेर दोसक ऐ बर्तावसँँ हम चकित रहि गेलौं | (लोक कथाक पुनर्लेखन) 7
वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly cjournal fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'बिदेह' १७६ म अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक बिक मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA rE | ललन कुमार कामत लघु कथा- लगन गोनर Fata संगीतक प्रेमी अछि । दिवाली, दशहारा, सरोसती पूजा at आनोआन अवसरिपर गाममे नाटक होइक परचलन अछि। मुदा Mach sis सभमे मौका कमे मिलैए । मौका ओकरे पहिल बेर मिलैए जे ओइमे wea दइए। गोनरक पिता साधारण किसान छथि। गोनरक flare दोस्त देबन पंडित गाममे कीर्तनियॉमण्डली चलबै Bla, AT लोकसभ गबैया He छन्हि | Mah संगीतसैं लगाउ देखि पिताजी केतेक बेर कहै छन्हि- “गोनर, दोसक ऐठाम जा Hs घड़ी-घंटा हैरमुनियाँकिए ने सीख अबे Ser” आइ स्कूलमे शनिचराक पछाति सरजी गोनरसैं गीत गबौलनिआ खुश भड Ws प्रसंशो केलनि | स्कूल अबैतकाल बाट भरि गोनर सोचैत आएल जे आइ देबन काकाक घर जा हैरमुनियाँसीखनाइ शुरू HLA | दुपहरियाक टहटहाइत रौदमे, सभ लोक घरे-घर स्कूल-पड़ल, BATA करैत रहए Yel गोनर, देबन पंडितक घर बिदा भेल । देबन सभ दिन बेरूपहरमे अप्पन एकलौता पुत्र हरियाकेँ संग Ss साज-बाजक संग रियाज करैत रहथि। आब गोनरो संग feat लगलनि। सप्ताहे दिनमे गोनर हरिमुनियाँक रीढ़ आ पटरीकें नीक जकाँ परखि लेलक आ सा रे गा मा पा पहिलुक धुन बजबए लगल | ई आकस्मिक आ तेज शुरूआत VS देबन सोचमे पड़ि गेल, हमर हरिया बेदरेसैँ साज-बाजक संग खेलैत आएल तैयो अखनिधरि एतेक नै सीख सकल! देबनके डाहक संग पक्षपातक भावना सक्कत AS आ अगिले fers गोनरकें दुआरि पहुँचिते, साज-बाज समेटि रखि दैत रहए। एक-दू दिन गोनर SA रहल मुदा ओहिना FA Hs आबि जाइत रहए। गोनर उदास तैँ Bisa रहए Yar हताष आ निरास नै भेल, ay संगीतसिखैक जीद्द मनसै नै गेल । साँझ पड़ेत सभ दिन, देबन चाह-पान करैले बजार जाइ छल | ई बात गोनर जनैत WU, AV S dec देबनक घर Wea HS, share फुसला HS साज-बाज पसारि सीखए are | मुदा gat सीखनाइ तीनेचारि दिनक पछाति erg रूपे aa भ5 गेल। जड़ दिन देबन पण्डित दुनू छौड़ाकें साज-बाज निकालि सिखैत देखि TAT | कड़गर फटकारो दुनूटाकँ लगेलखिन आ सभटा साज-बाज THe HS संदूकमे TA HS देलखिन | कहल जाइए जे समए आ लहरि केकरो इंतजार नै करैए। ई बात साँव भेल। गोनर ऐ दसे दिनमे जे fs सिखने रहए वएह रामवाण Us गेल आ स्क्कत अधार बनि, तारक WS सन बढ़ए लगल | कहल जाइए जे कोनो तरहक बुधि आ हूनर सिखेैले निर्धारित समए नै होइए। जेतै-तेतै, चलैत-फिरैत गोनर सुर आ तानकें area, 8
वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' १७६ A अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक mee मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA गुनगुनाइत धूनमे रमल रहै छल | मुदा SEK संगीतक अभ्यास केनाइ अप्पन दिनचर्या सेहो बना लेलक। टोल-टपड़ा आ गाममे जखनि केतौ भजन-कीर्तन आकि नाच-गानक आयोजन होइत रहए Asa गोनर बड़ी AAT भाग लैत रहए। ASA TTA भरिमे लोकसभ Mah गबैया HSU लगल | गामक सटले शहर अछि। शहर छोटे सन अछि सुखी सम्पन्न लोक आ पैग-पैग बेपारीसँ लक हाकिमो- अफसर सभ एतए रहै छथि। गोनरकें शहरमे केकरोसैँ जानपहिचान नै अछि | एकटा डाक्टर सुरेन्द्र नारायण नामक गण्यमान बेकती छथिन जे महिला काशैलेजमे हिन्दीक सरकारी प्रोफेसर आ संगै-संग महिला कल्याण संस्थानक अध्यक्ष सेहो छथिन | संगीतक प्रेमी रहैक कारण साले-साल सांस्कृतिक कार्यक्रमक आयोजन Hatt रहै छथि | प्रोफेसर साहैबक एगो बेदरूकिया संगी जे fecha नाट्य आ कला विभागक प्रोफेसर छथि ओ रिटायर US अपन पैतृक शहर पहिल बेर एला, Ass ऐबेरक आयोजन बड़ जोर PSs रहल अछि | शहरक गण्यमान लोकसभ जे ऊँच-ऊँ पद्पर कार्यरत छथि, सभकें कार्यक्रममे शामील होइक बास्ते Aid पठाएल गेल | ASA ऐबेर टी.वी सीरियलक जानल-मानल कलाकार जीतुराज जोहर सेहो feat as रहल SHA | कार्यक्रमक दिन लगिचाइत गेल। शहरमे जगह-जगह बैनरपोस्टर लगाएल गेल जे अमुख त्थिकें सांस्कृतिक कार्यक्रमक आयोजन जानल-मानल संगीत प्रेमी सबहक सहयोगसँ Us रहल अछि | मुदा गोनरकें ऐ बातक कोनो GALA भेल Set | शहरमे स्टेशन चौकपर बबाजी पानबला अछि | हिनका दोकानपर गामक बेसी लोक पान खाइले साँझ- बिहान जाइत-अबैत WAT | बबाजीकें कल OFS जे गाम भरिमे गोनर Vet नीक गबैया छी । मात्र दू दिन बैचल TSU, जब गोनर अनायास बबाजीक पानक दोकानपर गेल, बबाजीकेँ मनमे Sewer जनैक जिज्ञासा भेलनि जे गोनर ऐ कार्यक्रममे भाग लेने अछि की नै । पुछलखिन- “की रौ तूँ ऐ कार्यक्रममे हिस्सा लेने छँँ किने?” गोनर जिज्ञासु भ5 विनम्रतासँ पुछलक- “dar a, के ई कार्यक्रम करने छे ही?” बबाजी बूझि गेला जे गोनर भाग नै लेने अछि तैयो आस्वासन दैत बजला- “अच्छा रूक, हम परोफेसर ASIA बात HLS |” बबाजी मोबाइल AS HS नबर मिलौलनि आ बात करए लगला- “Soci सरजी, परनाम! हम बबाजी पानबला बजैछी |” ओमहरसैँ जे जबाव पुछने होन्हि, Far बबाजी फेर बजला- “एकटा नवजुबक बड़ नीक गबैया छथि |” कनीए कालक पछाति फेरि बजला- “लड़का तँँ लोकले छथि मुदा एक नम्मर गबैया छथि!” कनीए काल रूकि क$ फेर आग्रहक स्वरमे बबाजी बजला- “सर! देखियौ कनीए, मौका देल जेबक चाही ।” कनीकाल पछाति फोन डिसकनेक्ट भेल | गोनरकें बबाजी कहलखिन- संस्थापर चलि जो, ओतए बजेलकी हैं। पहिने गीत गबबेतौ तब चुनाव Veit | अखने चलि जो ।” गोनरकें बसंती साइकिल रहबे करए, HET बूझल नै छल जे संस्थान छै केतए! तैयो पुछैत-पुछैत बिदा Aer शहरक Chat, बान्हक कछेरमे उजरा रंगक मकान, अगुआरे-पछुआरे नाना परकारक रंग-बिरंगक फूलक WIT सजल-धजल फुलबाड़ी अछि | सड़कक कातमे साइनबोड्मर लिखल अछि “महिला कल्याण संस्थान” | गोनर साइकिल नीचाँ far संस्थानक प्राडगनमे पहुँचल, जैठाम दुचक्किया आ चरिचक्किया गाड़ीक पार्किंग लगल छल | बुझना गेल, एते सभकेँ-सभ भी.आई.पी.पहुँचल अछि । कातमे साइकिल लग] एकटा हॉलमे लोक सबहक सुनगाम देखि भीतर घूसल | प्रोफेसर साहैबक नाओं पूछि गोनर लग गेल आ परिचए देलकनि। परिचए ast बैसैक आदेश भेटलै। गीत गोनहार, नाच केनहार आ आनो आन कलाकप्रदर्शन केनहार सभ रहए आ रिहलसल 49
वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' १७६ A अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक mee मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA होइत WU) कनीए कालक पछाति Waa गीत गबबौल गेल,ग़ोनरक सेलेक्सन नै हेबाक a कोनो सवाले नै रहए, आश्वासन भेट गेलै जे एकटा गीत गोनरो AMAT । गीतक आयोजन शुरू भेल | एक-सैं-एक भी.आइ.पी. सभ पहँःचल छला | विशिष्ठ अतिथि सभकें बैसैक बेवस्था मंचपर आ मंचक अगल-बगलमे कएल गेल BT |S आयोजन सार्वजनिक चंदा चिट्ठासँ होइत TT HSA बड़का-सैं-बड़का पुजीबला लोककथिया-पुता सभ भाग लेने रहए | सिवनाथ सहाय जीतुराज जौहर आ स्थानीय सिविल अधिकारी सभ मुख अतिथिक रूपमे मंचपर आसीन भेल TSA | गायन, वादन आ नृत्य ई तीनु संगीत छी एकर प्रस्तुति रसे-रसे हुअ लगल | हर-एक आदमी जे बाजि सकैए ओ गाइबो सकैए किएक a गायन बोलीएकएकटा उन्नत रूप छी। Yar नव-सिखुआ गाबैया लेल समान रूपसैं निर्देशन an निअमित रूपसैँ अभ्यास जरूरी dea अछि, जे बेसी-सैं-बेसी बच्चा सभमे sida tors । गायन 'एकटा एहेन काज छी जमे स्वरक सहायतासँ संगीतमय ध्वनि निकालल जाइत अछि। सुवेवस्थित ध्वनि जे रस दैत अछि on tam अनुभूति करबैत अछि aug संगीत कहबैत अछि | ऐ कलाक प्रदर्शन युद्ध, उत्सव, प्रार्थना आ भजनक समए मनुखक द्वारा गावन आ बजावनक माध्यम HUT जाइत अछि । जे गाबैए ओकरा Waa, जे are ओकरा नचनियाँ आ जे बजबैए ओकरा बजनियाँकहल जाइए | प्रोग्राम होइत-होइत अदहा राति बीतिगेल मुदा अखनि धरि गोनरकें मौका नै भेटल । बखत केर पहिया बढ़ेत गेल आ राति दूबाजि गेल | विशिष्ठ अतिथि सभ घर दिस बिदा Aen, दर्शको सभ रसे-रसे जाए लगल, तब जा HS गोनरक ABT एलोन्स कएल गेल । गोनर स्टेजपर आएल | गोनरक मुँहसैं राग लयात्मक STS बेवस्थित US संगीतरूपी लहरि समुद्रक ज्वारि जकाँ पसरए लगल | GTS प्रस्तुतिमे कलाक प्रदर्शन हुअए आ Gig कलाकें संगीत या मनोर॑जन कहल जाए, गोनरके कंठसैंबएह सुरीली कंठाध्वनि, ओहिना उत्पन्न हुट लगल GAT ARTA सुसज्जित ध्वनि निकलैए । जे सभ प्रोग्राम aie; घर दिस बिदा भेल teu, wel ओतै ठमकिगेल, डेग we खीं चए लगलै, सभ आपस STAT लगल आ जेकरा घरपर अबाज जाइत रहए, ओकराशेजिज्ञासा हुअ लगल जे के एहेन गवैया छी आ केतक छी? fee विशिष्ठ मेहमान सभ Vel FA age छला। गोनरक TAT पछाति सभ हिनका लग बजा परिचए-पात YOU लगल आप्रसंशा सेहो करए लगल | गोनरकें आशा जगल जे कियो हिनका मदत्क्िरथि | जौं शुद्ध मनसैँ भगवानकें यादि कएल जाए तैँ भगवानो कोनो रूपमे दर्शन देबे Ht छथिन | वएह भेल, जीतुराज जौहर टी.वी कलाकार, Tach अश्वासन देलकनि- “दू महिना बाद अहाँ दिल्ली आउ, ओतए संगीतक ऑडिसन कै ।” गोनर हर्षित Ws गेल आ जोर-सोरसैँ ऑडिसनक तैयारीमे लगिगेल | 20
वि दे ह विदेह Videha कन्तिर www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' १७६ A अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक mee मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ही ललन कुमार कामत लघु कथा- बेटी सोमनाथजी म्युनसीपल आँफिसमे पैंतीस बरख नोकरी केला पछातिरिटायर भेला। जीवनमे एक्को पाइ नजायज नै ग्रहन केलनि । सोनमनाथजी ees पवित्र, शालिन, विनम्र आ दयाक भाव हिनका मुख-मण्डलसैं हरिदम झलकैत रहैए aU हिनकर बिशेषताबेक्तीगत संज्ञा (उपनाम) मे बर्दलि गेलनि आ Ua Ts HS ऑफिस धरि लोक सभ हिनका सोनाजी कहि बोलबए लगलनि। सोनाजीकें तीनटा सन्तान, बड़ दुइटा लड़का, Vo बबलू तैपर F डबलू आ ag छोटकी बेटी उषा Og | sore बिआह नीक घरमे, इंजीनियर बड़सैँ Hs सम्पन्न केलखिन | जमाइबाबू मुजफरपुरमे नोकरी करै छथिन ओतै सरकारी अवास भेटल GS, Asa उषा BE रहै छथिन | जेठका बेटा बबलूक किरदानीसैंदुनू परानी सोनाजीक मन बेथित wis बबलू इंजीनियरिंग करैले दिल्ली गेला मुदा हरियानाक एकटा लड़िकीक प्रेममे फैंसि अपन जीवनक नैयाकें किनार as लेलनि आ ओतैप्रेम-बिआह करि बसि गेला। डबलू नागपुरमे बैंक मनेजर छथिन | हिनकरो बिआह भेला पछाति पत्नी aE आतै रहै छनिन | सालमे एक- आधे बेर कभी-कभार घर set छथिन | सोनाजी अपन जीवनसंगिनी ममताक ag बुढ़ाड़ीक पहिया Saran खिंचै छथि। बेटा-पुतोहुक सुख हिनका नसीब नै होइ छन्हि er उषा, बेटी रहैतो, बेटा जकाँदेखभाल करैए | सप्ताहमे एकबेर आबि क5 जरूरे देखि जाइत अछि | उषाक सोभाव पिताजीसँँ बिरासतमे प्राप्त भेल OFS AT मधुरो आ एक eas अनुकूलो ore | सोनाजीक ई पैंसैठम बरख चलि रहल OS | Aedes रिटायर भेल रहथि ¢ MR स्वस्थ छला आ भरोसा छेलनि जे आगुओ A रहता, मुदा मनुख तैंमात्र इच्छा करैए, Ss तँ अछि ave जे ऊपरबलाक मरजी रहै छन्हिं। sare बिआहक पछाति दुनू बेटा दू जगह अपन-अपन घर बसा लेलकनि। सोनाजीदुनू परानीकेँ चिन्ता-फिकिर घरेड़ देलकनि | जीवन-शक्ति शिथिल ws गेलनि । हाथ-पएर धीमा पड़िगेलनि | आँखिक रोशनी कमि गेलनि । कानोसँ कम सुनाइ दिअ लगलनि। पाचनतंत्र गड़बड़ा गेलनि आ दिलःिमाग सेहो दुरूस नै रहलनि | मतलब बुढ़ापा हिनकर समस्या बनि गेलनि । बेटा सभ कभी-कभार फोन घुमा हालचालकरैत रहै OS | दोस्त-यारकेँ- als दोकनदार आ Herc डाक्टर- सभकें फोन घुमा कहैत रहैए जे माए-बाबूकें देखैत WSS | 2
वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' १७६ A अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक mee मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA सोनाजी दुनू गोठेकें ई परिपक्व अवस्था अछि set ज्ञान, स्थिरता आ अनुभव os an तहिक सहारे दुनू बेकती जीवन रूपी Aah any खिंच रहल छथि। ओना तैँ बुढ़ापा भार नै होइत अछि मुदा जब खाएल-पीअल काया जड़जड़ AS जाइए आ परिवारक सदस्यक संग तालमेल नै रहैए a परीवारमे अपन उपयोगितापर विराम ait जाइत अछि | वृद्ध लोकनिकें ऐ अवस्थामे सहायता आ सहयोगकजरूरत Usd छै। जे बेटा-पुतोहु अपन वृद्ध माए-बापकेँ सेवा करैए वएह जीवनकउत्तम कर्म करैए | एहेन पूत जे माए-बापकें जीबिते छोड़ि दइए आ अपनेमे मगन रहैए ओ ओहने काज करैए जेना घिया-पुता सभ बालुक रेतसैँ महल बना ISU आ तैपर गाछक डारि-पात गाड़ि Ss बगीचा बना AST आ खुशी मनकै LT Fal जेकरा ज्ञान अछि ओ अपन जीवनक उत्तम कर्म करैसैं पाछू नै हटैए। आजुक समाजमे बेकती अपन बालबच्चा संग परिवारमे रीझल WT | माए-बाप, कू-पुरानक मान-मर्यादा, तेकर सेवा सत्कारकें साफे बिसरि जाइए | ओहेन मनुख हरिदम पाबैक पाछृ बेहाल रहैए Yar जे हिनकालग प्राप्त वस्तु अछि ओकर उपयोग करनाइ नै जानैए । बूढ़-पुरान अनुभवी as छथि ay हिनका समाजमे विशिष्ट स्थान भेटबाक चाही । जे बेकती agen सेवा नै करैए, ओ कायर होइए आ कायर लोग काल्पनिक विचारक धनवान आ महा गप्पी ga अछि। जाबे धरि वृद्धननक आ जुबकक समाजमे तालमेल आ समानता नै बैसत ताबे धरि समाजिक आ सांस्कृतिक काजमे स्थइरूपसैँ बिकास सम्भव नै भ5 सकत | सोनाजी mks कमजोर होइत गेलाआ बेटा पुतोहुक सहायता आ सहानुभूति घटैत गेलनि। आब हिनका याद आबै छन्हि ओ दिन, We दिन बेदरूकिया सभकें SETA as घौआ-छु मल्ले-छु करैत पढ़ैत Tafa *लब घर उठे आ पुरान घर खसे... । खैर जे ऐ हाथरस wry ओकरा ओइ हाथसैंभोगए पड़ैए ag अवस्थामे सोनाजीकें रोज-मर्डाक समान कीनए Sed हाट-बजार जाइए पड़ैछन्हि। आइ सोनाजी सुति ऊठि ws शौचालय गेलखिन | होनीकें few भेनाइ रहनि, बाहर निकलितै चक्कर आबि गेलनि आ शौचालयक दरबाजासँ टकरा HS Ma पड़ला। ममताकेँ गिरिक अभास भेलनि, भिरकाएल फाटककें ठेल देखलखिन सोनाजी ढनमनाएल असहाय अवस्थामे ओड्टराएल आ कहरि रहल छथि। ममता धबरा गेली आ उठबैक परियास केलखिन, हिला-डोला ws YS छथिन- “बबलूक पपा! की भेल! केना खसलिएऐ! बाजू ने?” मुदा कोनो जवाब नै भेटलनि। सोनाजीकें qed छर-छर | बहै छेलनि। ई देखि ममता हाय-बाप करए लगली, असगरि हिनकारँ उठि नै सकल, दौगल-दौगल TASHA जा हरेरामकें AK पाड़लक, हरेराम दुनू परानी दौगल आएल, सोनाजीक ई दशादेखि हाँड-हाँड Hs उठा-पुठा ws ओसार परहक खाटपर सुलकनि | सोनाजीक ई हलात देखि ममताक देह जेना केराक भालरि जकाँ काँपए लगलनि। की करब! आ केना हएत! fs नै ws छेलनि। हरेराम हड़बराइत बाजल- “काकी! डागडरकें फोन करू!” मुदा फोनक डायरी सोनेजी रखने छेलखिन | ममताकें भेटिते ने रहनि। हरेरामक पत्नी मंजू बुझि गेलखिन जे बेगरतापर एहेन छोटसन चीज नै भेटैतछन्हि, डाक्टरकें बजबैले दौगल-दौगल गेली | Alecia डाक्टर इकबालक घर छन्हि, एलखिन | सोनाजीक मुँहक ऊपरका दूटा दाँत नीचला Sha भों का गेल रहनि asd ed लेहक CUR चलै छेलनि co: उपचार YE भेल, कनीएकाल पछाति सोनाजीकें होश एलनि। Fade जानमे जान एलनि ।डाक्टर इकबाल ढाढ़स दैत कहलखिन- “अखनि कोनो चिन्ता करैक बात AS, सोनाजीक ब्लडपेसर आ सूगर बढ़ि गेल छन्हि asd, चक्कर एलनि मुदा समैसैँ जाँच आ इलाज हेबाक चाही नैतैँ हार्टटटेकक सम्भावना बाढ़ि सकैए ।” डाक्टर इकबाल पूर्जी लीखि हरेरामकें हाथमे दैत कहलखिन- 22
वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' १७६ A अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक mee मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA “ई दबाइ जल्दीए US HS आउ, सोनाजीकें SA chr लगबए पड़त |” तत्कालीन उपचार भेल | सोनाजीक्र मन पहिनेसैं नीक भेल | ममताक जीक मन SEH हुअ लगल आ बेटा सभकें फोन लगबए लगली | जेठका बेटा बबलुकें पहिने फोन लगा घटनाक जानकारी देखिन Yet बबलू ऐ बातकें गंभीरतासँ नै लैत कहलकनि- ‘Sal खसि गेलौ? बाबूजी दबाइ खाइत Tel की नै? तों केतए रही? दिन राति ठेशन asa तूँ सब लगल रहे छँह I” ऐ घड़ीमे बेटासँ एहेन तरहक जवाब सुनि ममताक मोह भंग भड गेलनि फेर Slew बेटा Sach फोन लगा स्थितिक जानकारी देलखिन | डबलू पिताक हाल सूनि अस्वासन दैत बाजल- “चिन्ता नै कर । डाक्टर ANTS हम बात करै छी | Ay cath घरपर भेजै छियौ sews देखा ws दबाइओ-दारू सभ लाबि देतौ | तूँ कान-खीज नै कर ।” ममताकें बैंचल-खोंचल आस नीरास Us गेलनि। खैर हिनका AAG ओते आसो नै लगेने छेलखिन | आब बेटी उषाकें फोन लगेलनि। आन दिन उषा माए-बाब्कूँ फोन करि हालचाल जनैत रहए मुदा, आइ माइक फोन देखि चौंकली आ उत्सुकता पूर्वक बाजलि- “हैं माय! हम सब नीके GH, Far बाबूजी केना छथिन?” ममता जनैत छेली जे साँव बात Ade उषा Sat घबरा जाएत AT बातकें छोट करैत बजली- “बाबूजीक तबीयत गड़बड़ा Tet आबि seta जाही ।” Yel भारी मन आ अवाजक थड़-थड़ाहिँ उषा भाँपि गेली जे साइत बाबूजीकँँ तबीयत बेसी खराब As गेल अछि | घबराहटि तैँ भेबे केलनि मुदा संयमसँ फोन रखि सोचए लगली जे की करी! फेर उठि ws बैग झारि, कपड़ा-लत्ता चोपतए लगली आ तुरंत नैहर अबैक ओरयान करए लगली | उषाकेँ एक सालक बेटी छेलनि Sar Ager पोछि तैयार ws एक काँखमे बच्चा आ दोसर हाथमे बैग उठा ओसारपर रखि घर दरबज्जामे ताला लगबए लगली | घरक चाभी बिसवासी पड़ोसीकें ta पतिइंजीनियर साहेबकेँ फोन लगेलकनि जे घंटे भरे पहिले ड्यूटीपर नीकलले छेलखिन, इंजीनियर साहैब फोन रीसीभ करैत बजला- “हैँ बाजू, की बात अछि?” उषाक मन तैँ हड़बड़ाएले रहनिमुदा तैयो सम्हरि क५ बजली- “हम बाबूजीकें देखैले गाम जा रहलछी, माइक फोन आएल जे बाबूजी सिरियस छथिन | अहूँ Bist af बाबूजीकें देखैले आबि जाएब।” ई बात सुनि इंजीनियर ares चौंकि गेला | पुछलखिन- “अखनि! अचानक! किए गाम feat भेलौं?” ara aft उषा रिक्सापर बैसि बस eve fea बिदा ys गेल छेली | हड़बड़ाइत बजली- “अखनि ओते गप हम नै करब, बूझि लियनु जे बाबूजीक हालत ठीक नै अछि ।” उषाकें हड़बड़ाएल अवाजसैं इंजीन्पिर साहैब बूझि गेला जे आब हिनका कोइ नै रोकि सकैए। भरोस दैत बजला- “जाएब t जाउ, Fal मनके अस्थीर केने जाउ, आ बाजू जे पाइ-कौड़ी few संगमे अछि किने?” 23
वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' १७६ A अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक mee मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA उषा- “अहाँ पाइक चिन्ता नै करू, हमरा ATA ओते पाइ अछि जइसैं, हम गाम जा सकैछी ।” इंजीनियर साहैब बात टोहिय्बैत पूछि देलकखिन- “पाइ HATS लाबलौं अहाँ? THT रहै छिऐ जे हमरा हाथमे एकोटाछिद्दीओ ने रहैए ।” उषा सकपका गेली । सकपकेबो केना ने करितथि? पतिक Ves बैंचल-खूचल Us रोजे निकलिते रहै छेली। तैपर सै Sus few ने किछु मांगि जरूरतिक समान कीनैबिते रहै छेली आ Tas जरूरी काज माए- बाबुकें देखे बास्ते जाए पड़े तड़मे खर्चा-बर्चा ct होइते रहै। ई बात इंजीनियरो साहैब जनिते रहथि ae उषा बातकेँ खोलैत बजली- agin जेबी, जे रोज साफ Ped रहैए, वएह कोशलिया Hs हम रखने रही, Pty पाइक ओरीयान अहाँ साँझ घरि केने आउ ।” बेटा सभकें नै एलासैँ ममता दुखी तैँ छेली | मुदा ऊषाकेँ Wena निरासाक बादल छँठिगेलनि। Gist होइत- होइत उषाक पति इंजीनिपरो ares ऑफिसर छुट्टी ल५ पहुँच गलखिन । विहाने भने एम्बुलेन्ससैं सोनाजीकें दरभंगा aS गेलनि आ डाक्टर यू.के बिश्वाससँ इलाज चलए लगलनि। तत्काल fees दबाइ शुरू काएल गेल, ऑक्सिजनक खगता सेहो पड़लनि आ दिनमे तीन बेर एकर परयोग gat लगल। विभिन्न तरहक जाँच HUA गेल | जाँचक fee Rate तीन दिनक पछाति आएल आ किछुरिपोट een भरिक बाद आएत | जेरिपोर्ट आएल ओइमे बी.पी हाइ, सूगर बढ़ल आ संगेसंग हार्ट अटेकक सम्भावना बताएल गेल | सप्ताह भरि इलाज चलैत Ceci, तबीयतमे उतार-चढ़ाव होइत रहल, He नीक जकाँगप-सप्प करैत रहथि तँ HET aie पथरा जान्हि, दम फुलए लगनि आ बेहोस As जाथि। Ha बेसुधि अवस्थामे अपने- आपस बड़बड़ए लगथि- “बबलू! कखनि एलैंह A आ बैठ! कनियाँ! घर जा। अहाँ पोती छी हमर? आब! ara! बिस्कूट एकटा हमरो दिए ने! US डबलू चाह लाबह! माएकें कहक चाह देत!ईह छिनरीक साँए! Sd खाएत नै तेते छिड़याएत!” हुनू पजरामे बैसि उषा आ उषाक माए- ममता- बेना होंकि रहल OFS | सोनाजीक ई बड़बड़ेनाइ रोकैक Sea उषा सोनाजीकें छातीपर हाथ रखि हिला-डोला HS कहैए- “बाबूजी! बाबूजी! केकरासँ गप करैछिऐ?” सोनाजी चौकैत बजला- “Hel नै नै गप करै छी | तोहर AT केतए छौ?” सोनाजी किछुकाल ऊपर एकटकी AS तकैत रहला। THR Gat कोनो आहटि चौंकैए तहिना चौंकैत बजला- “डबलू TS salt गेल जा अगुआ Hs लाबि लहक! काल्हिए He छी तोहर माए fee बुझिते नै oer सोनाजीक स्मरण शक्ति छीन्न AS गेल रहनि। आँखिक रोशनी afer गेल रहनि। रहि-रहि ws farsa desu at छला। ई बेचैनीक अवस्था देखि उषा आ ममताकें जी-मन उड़ैत रहनि। मुदा उषा साहसी, Het अपन घबड़ाहटिकें हृष्टिगोचर नै gar दैत रहनि। मनकें थिर करैत उषा बाजलि- 24
वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' १७६ A अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक mee मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA “बाबूजी! बाबूजी? एम्हर ताकू ने! हमरा fers छिऐ? हम के छी कहू ते?” सोनाजी आब Ye नै पबथि। मुदा जखनि स्मरण लौटैत रहनि Ta अवाज परेखि नजरि घुमा-घुमा एम्हर-ओम्हर ताकि देखैक परियास करैत रहथि | कहलखिन- “हैं, चिन्है छी! उषा दाइ छी ने अहाँ? केतए छहक ay आबह ने।” ang अस्पतालमे नअ दिन Ys गेल रहनि। एकटा जाँवक रिपोट आइ आएत। दस बजे डाक्टर बजौने छथिन। उषाक पति आ उषा रिपोटक जानकारीले क्लिनीकपर पहुँचला | कनीए कालक पछाति कपाउण्डर अवाज देलकनि- “सोनाजीक गारजियन डाक्टर साहैब से मिलिए ।” उषा दुनू परानी वेटिंग aed बैसल रहथि, बोलाहटि सुनिते डाक्टरक चेम्बरमे पहुँचला, सोफा-कुरसी लागल रहए, बैसैक संकेतक पछाति दुनू गोटे बैस गेला | डाक्टर दुनू Mes सोनाजीक संग जे सम्बन्ध छेलनि तेकर परिचए as कहलखिन- “मरीजक हालत गम्भीर अछि, रीकौभरक सम्भावना नै saa, जाबे धरि ofa, सेवा सत्कार ata रहियनु।” डाक्टरक ई बात सुनि, उषा बौक जकाँ As गेल | मुँहपररूमाल रखि सिसैक-सिसैक कानए लगली | उषाक पति सेहो stare रहि ten! dat जिज्ञासु As डाक्टर साहैबसैं पुछलखिन- “डाक्टर साहैब! केना WaT भड गेलनिः” डाक्टर कहलखिन- “फेंफड़ा हिनकर बिल्कुल खतम भड गेल ore | ब्रेन ट्युमर Sel aie गेलनि आ शरीरक आनो-आनो अंग सबहक कार्यक्षमता शिथिल Hs रहल छन्हि।” विभिन्न तरहक विमारी on समस्याक विषयमे वार्तालापक पछाति निष्कर्ष ave भेलनि जे सोनाजीक बिमारी ठीक हेबाक कोनो गुंजाइश नैछन्हि | SL बेकती नीराश As Vas बाहर एला, उषा बाहर निकलिते भोकारि पाड़ि-पाड़ि कानए लगली | पति साहस बढ़बैत कहलखिन- “अहाँ oil एना कनब तैँ माएकें की हएत? शान्त रह, मनकें बुझाउ! जे हेबक छै Va भाइए ws रहत। सुझि-बुधिसँँ काम लिअ! माएकें ऐ बातक जानकारी नै चलकचाही | हुनको सम्हारि Hs आब अहीकें TAU पड़त ने। नै कानू । चूप |” उषो सोचलनि जे अखनि हमरा कानबसैँ नोकसान छोड़ि आर fag नै हएत। कहुना मनकें बुझबैत चुप Ach | सोनाजी कमरामे बेडपर पड़लरहथि, बगलमे ममता wat हौकैत रहनि, AS बगलमे पजरा लागि उषा ST गेली आ सोनाजीकें Ae निहारए लगली | बेटा सभ टाल-मटोल करैत are पराण छुटैकाल WT आएल जखनिसोनाजी केकरो ने चिन्ह सकै छेलनि आ ने ena देखिए सकै Sa | ललन कुमार कामत सम्पर्क- ललमनियाँ, मरौना, सुपौल | 25
वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' १७६ A अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक बे मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA गोल इंग्लिश mS निर्मली । ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह नि मैथिली साहित्य आन्दोलन (८)२००४-१५. सर्वाधिकार लेखका धीन आ Ms लेखकक नाम नै अछि ts संपादकाधीन | विदेह-प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर । सह-सम्पादक: उमेश मेडल | सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, ARS विलास राय AAT कुमार ATH आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण) | कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी | सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर | सम्पादक- सूचना- सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल | सम्पादक- अनुवाद विभाग-विनीत Seat | रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य wis) ggajendra@videha.com endra@videha.com® मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .ऋफॉर्मेटमे पठा सके छथि | रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेत] से आशा करै छी | रचनाक अंतमे टाइप रहए, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकें देल जा रहल अछि | Vas प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक संग्रहकर्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकें ठै। ऐ ई पत्रिकाकें श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकें ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (८) 2004-5 सर्वाधिकार सुरक्षित | विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार SAT संग्रहकत्ताक लगमे OFS | रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन far आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.co.in पर संपर्क करू | ऐ साइटकें प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल।५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवूत्तसैँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका aft पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि | आब “भालसरिक गाछ” जालवूत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक््ताक संग मैथिली भाषाक जालवकूततक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त US रहल अछि | विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA 26
वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' १७६ A अंक १५ अप्रैल २०१५ (वर्ष ८ मास ८८ अंक बिक मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA N 2 mz सिद्धिरस्तु 27