VIDEHA — Issue 178 / अंक १७८

Publication: VIDEHA · Issue: 178
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वि दे ह विदेह Videha বিদেহ  www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १७८ म अंक १५ मइ २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक १७८) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ  www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १७८ म अंक १५ मइ २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक १७८) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ  www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १७८ म अंक १५ मइ २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक १७८) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ  www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १७८ म अंक १५ मइ २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक १७८) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA 29 वि दे ह विदेह Videha বিদেহ  www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १७८ म अंक १५ मइ २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक १७८) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA 45 ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' १७८ म अंक १५ मइ २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक १७८) ऐ अंकमे अछि:- पल्लवी- दूटा विहनि कथा राम विलास साहुक दोसर कविता संग्रह- कर्म बि‍नु जग सुन्ना / किछु विहनि कथा चोरविद्या सुति कऽ उठले रही कि रधिया दादी मुहेँ सुनलौं- “रज विद्यासँ चोर विद्या भारी होइ छै।” रातियेमे आकि भोरमे कियो हुनकर टाट परहक सजमनि चोरा कऽ तोड़ि नेने रहनि, तँए गारियो पढ़ैत रहथिन आ बजबो केली जे ‘रज विद्यासँ चोर विद्या भारी।’ शनि दिन रहने भिनसुरके स्‍कूल रहए। मास्‍टर साहैबसँ पुछलियनि- “सरजी, चोर विद्या केकरा कहै छै?” सरजी कहलनि- “जइ विद्यासँ चोर चोइर करैए सएह भेल चोर विद्या।” फ्रेण्‍ड हमरा अँगनाक ऐंठारपर एकटा पौरकी आ एकटा मेना चरौर करए आएल। से कोनो आइए नै आएल, अबिते रहैए। लगेक बँसबीटमे रहबो करैए। भोर होइते पहिने पौरकी उठैए। पछाति मेना। मेनाकेँ संग करैत घरसँ दुनूटा निकलैए। एकठाम रहने दुनूमे बेवहारिक सरोकार तँ छै मुदा ने जाति छी, जे एक टाइटिल रहितै आ ने एक रंगक अछि, जे जातियो रहितए। ओना जातियोमे रंग-रंगक टाइटिल तँ चलिते छै। भिनसुरका तोरक भोजन केला पछाति मेना पौरकीकेँ कहलक- “गौऑं, दुनू गोरे फ्रेण्‍ड लगा लिअ।” मेनाक बात सुनि पौरकी कनीकाल मने-मन हिसाव जोड़लक। तँ बूझि पड़लै जे भलें एके ढेरीपर दुनू गोरेक गुजर किए ने चलैत हुअए मुदा दुनू गोरेक खान-पान तँ एक नइ अछि। ओ साकठ अछि आ अपने वैष्‍णव छी। पौरकी असमंजसमे पड़ि गेल। मेना पुछलकै- “गौआँ, सोझहे फ्रेण्‍ड लगेबह आकि ओकर नीको-बेजाए फरिछा लेबह?” पौरकीक विचार मेनाकेँ जँचलै। बाजल- “गौआ, अहॉंकेँ दुश्‍मन बेसी अछि, हमरा कम अछि। लाभ बेसी अहींकेँ अछि, जे जखन दुश्‍मन औत तँ हम अढ़ कऽ लेब।” पौरकी बाजल- “दछिनमुहेँ-गंगाजी दिस घुमि दुनू गोरे पहिने सप्‍पत खाउ, तखन फ्रेण्‍ड लगाउ।” नोट- ऐ कथाकेँ लिखैमे हमर बाबा- श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डलक सहयोग भेटल अछि। हुनका प्रणाम्। संगे अहूँ सभकेँ प्रणाम्। राम विलास साहुक दोसर कविता संग्रह- कर्म बि‍नु जग सुन्ना रामवि‍लास साहु कवि‍ता कर्म बि‍नु जग सुन्ना सूर्ज बि‍नु अकास सुन्ना बि‍जुरी बि‍नु वादल सुन्ना जीव बि‍नु धरती सुन्ना कोयल बि‍नु वगि‍या सुन्ना फूल बि‍नु फुलवारी सुन्ना शेर बि‍नु वन सुन्ना नयन बि‍नु जग सुन्ना प्राण बि‍नु देह सुन्ना प्राजा बि‍नु राज्‍य सुन्ना सत्‍य बि‍नु न्‍याय सुन्ना वाद्य बि‍नु संगीत सुन्ना नारी बि‍नु समाज सुन्ना दूध बि‍नु भोजन सुन्ना पानि‍ बि‍नु नदी सुन्ना देव बि‍नु मंदि‍र सुन्ना दया बि‍नु धर्म सुन्ना प्रेम बि‍नु भक्‍ति‍ सुन्ना कर्म बि‍नु जग सुन्ना। रौदी माथपर हाथ धेने खेति‍हरक आँखि‍सँ गि‍रलै नोर धरती सुखलै धान जरलै खेतमे फटलै दरारि‍ सुखले साउन-भादौ बि‍तलै खेति‍हरक नसीब फुटलै खेतसँ उड़ै छै धूल जरैत खेत देखि‍ दि‍ल जरैत जरि‍ गेलै सबहक तकदीर की खेबै अपना की खेतै धि‍या-पुता सोगसँ घटलै शरीर पूर्वा-पच्‍छि‍या फोंक गेलै सभ नक्षत्र बनलै ठक ऋृतु बदललै मौसम बदललै धतरीक दरारि‍ फटले रहलै पानि‍ बि‍नु सभ जीब तेजै छै नि‍त्‍य परान रौदी-दाही बहुते देखलौं एहेन जुलुम कहि‍यो नै देखलौं अछैतै ओरूदे गेलै परान ई मुसि‍बत के हरि‍ लेतै जखन भगवान, सरकार दुनू बेमुख बनल छै खेति‍हारक दुख के पति‍एतै मांगै छै पानि‍ तँ डीजलक अनुदान भैटै छै। सि‍म्मर केर फूल लाल-लाल सि‍म्मर-फूल देखि‍ सुग्गा ललचाइ फूल रंग भोगार भेल सुगा गेल लुभाइ अपन उद्देश्‍य बि‍सरि‍ सि‍म्मरकेँ सोइरी लेलक बनाइ सोइरी सेबैत-सेबैत सुग्‍गाकेँ चि‍ल्‍का गेल हेराइ फूलसँ फलसँ बनैत धरि‍ सुग्‍गा रहल उपास फल एहेन ललि‍चगर लोल मारि‍ते उड़ि‍ जाए सुग्‍गाक उपास नै टुटल पारनमे की खाएत आश लगौने सुग्‍गा सि‍म्मरपर भेल ि‍नरास लोभमे फँसि‍ सुग्‍गा अपने कर्मपर पचताए शोगाएल सुग्‍गा बाजल रूप रंग देखि‍ नै लोभाउ रूपक माया जाल फँसि‍ भुखले तेजब प्राण। ओलंपि‍क बच्‍चासँ बूढ़ भेलौं बड़-बड़ खेल देखैत रहलौं पैंसठ बरख आजादि‍योक भेल मुदा पूर्ण आजादी कहि‍यो ने देखलौं आइ धरि‍ सरकारक कठखेलमे ओलंपि‍क खेल शुरू भेल जनताक वि‍केट गि‍र गेल देसक रूपैया खेल-खेलमे मूड़ि-सूधि‍ सभ सधि‍ गेल सभ शहरमे स्‍टेडि‍यम बनि‍ गेल गाममे बेरोजगारी बढ़ि‍ गेल आजाद देशमे के आजाद भेल आजादीक झंडा फहरौने की ओलंपि‍क तगमासँ गरीबी-बेरोजगारी मि‍ट गेल जखन आजाद देशक जनता अखनो बाटीमे भीख मंगैए तखन सरकार ओलंपि‍कमे अरबो रूपैया कि‍अए लगबैए एतेक रूपैया खेती-उद्योग आ रोजगारमे कि‍अए ने लगबैए जखन देशमे एतेक गरीबी छै आलंपि‍ककेँ की जरूरी छै जखन देशक आत्‍मा गाम-घरमे बसै छै तँ गाम-वासी कि‍अए एतेक उपेक्षि‍त छै जे गामक लोक नरकमे जीबै-मरै छै गामवासीक लहु बेचि‍ सरकार ओलंपि‍क खेलै छै ओइसँ गरीबकेँ की भेटलै जखन खोदै छै पहाड़ तँ मूस भागि‍ जाइ छै। मेघक बरि‍आती- तारबतोर पूरबा बहै दि‍न-राित बहै नै थके गति‍ मन्‍द पड़ि‍ते गर्मी चढ़ल असमान उसनि‍याँ करनाइ शुरू भेल एहेन अचरज कहि‍यो नै भेल गर्मी भगबै ले मेघक बरि‍आती शुरू भेल भंडार कोणसँ गरजैत ढनकैत सेना संगे मेघ धमकि‍ गेल आगू-आगू अन्‍हर बि‍हारि‍ पाछू संगे शीतल व्‍यार ढन-ढन ढमकैत बि‍जुरी चमकैत मेघक बरि‍आती आबए लगल देखते मेघक बरि‍आती गर्मी जान बचा भागए लगल मेघक बरि‍आती पछारैत गेल झम-झम बर्खा बरसि‍ गेल गर्मीक परकोपसँ छुट्टी भेल मेघक बरि‍आती घूमि‍ घर गेल। पुसक राति‍ पुसक राति‍ जाड़क मारल थरथराइत देह केना बचाएब प्राण। फुइसक घर खोपड़ी सन केना िबताएब पुसक राति‍ घरक टाट-ठाठ झलफाँसी कनकनी हवा छुबैए प्राण घुराड़ी जरा-जरा बचबै छी कहुना प्राण मुदा धि‍या-पुताक केना बचतै प्राण। नार-पुआरक बि‍छौना गोनरि‍क छै ओढ़ना पजरेमे सटि‍ बि‍लाइ दुबकल छै अबगरहमे छै ओकरो जान सबहक मुँहेँ सुनै छी पुसक राति‍केँ फूसि‍ नै बुझि‍यौ कतेकोकेँ लइ छै प्राण माघो मास अगुआएले छै सुनि‍ कऽ करेजा दरकैए केना भेटत ऐसँ त्राण आब लगैए नै बचत प्राण के करत गरीबक कल्‍याण। केना कहब भारत महान जे देशक लेल ति‍याग करैए ओकरे जि‍नगी नरक सन बनल-ए गरीबक दुख कोइ नै बुझैए हाथ रहि‍तो नै छै कोनो काम सूखल खेत नै भेलै धान जि‍नगी बि‍तै छै बैसल मचान तौनी कोपीन पहि‍र जे रहलै गाम-समाजकेँ पकड़ि‍ चललै आफतमे मि‍ल देशकेँ बचैलकै गोली खा देलकै बलि‍दान देश अजाद भैलै मुदा दि‍न-दुखि‍याक दुख कि‍यो ने बटलकै गरीब बनल छै अखनो गुलाम सभ धन सरकारे लेल छै गरीब जनताक हक छि‍नलकै आइ धरि‍ नै भेलै गरीबक उत्‍थान भुखले पेट तेजै छै प्राण जे लहू पसि‍ना सभ दि‍न बहबै छै आगू बढ़ि‍ सीना तानि‍ ओकरे दुख नै सरकार बुझलकै ठेल देलकै नरकमे जानि‍ मरलकेँ मारैत रहलै जानि‍ बूझि‍ बि‍नु लाभ-हानि‍ देशक समस्‍या बढ़ैत जाइए सरकार ओकरा दबबैत जाइए समस्‍या बनल अछि‍ ज्‍वालामुखी समान केना कहब भारत महान। जीयब केना जीयब तँ जीयब केना दुनि‍याँ बदलि‍ गेल जेना चारूकात अधरमे कुकरमे दि‍न-दहारे डाका पड़ैए चौबटि‍यापर इज्‍जति‍ लुटाइए गाम-शहरमे दारू बि‍काइए मानव पीब दानव बनैए चोरी-डाका सि‍नाजोड़ी करैए बीच बजार बलत्‍कारी होइए कतए चलि‍ गेल धर्मक नीति‍ जेनए देखि‍यौ कुरि‍ति‍ये रीि‍त जीयब तँ जीयब केना दुनि‍याँ बदलि‍ गेल जेना। चलैत बाट डर लगैए चौर सि‍पाही खेल करैए सरकारक कानून उन्‍टा बनलए ि‍नर्दोषी लेल जहल बनलए दोषी घूमि‍-घूमि‍ मौज करैए सरकार अपराधीक बीच गरीब जनता पीसाइत रहैए सभ हत्‍यारा कंश बनलए सरकार धृष्‍टराष्‍ट बनलए अधि‍कारी मंत्री माल लुटैए देशक जनता बौक बनलए देखि‍ कवि‍ सोचमे पड़लए जीयब तँ जीयब केना दुनि‍याँ बदलि‍ गेल जेना।। मोनक आगि‍ पूर्णिमाक चान मलि‍न भेल देखि‍ तरेगन कनखी मारए। सोलह श्रृंगार काएल भेल मलि‍न। पिया बि‍नु भेलौं वि‍रहिन राति‍क फूल भोरे भेल मलि‍न। मृग तृष्‍णामे मृग बौआइए भटकि‍-भटकि‍ जहि‍ना परान गमबैए। तहि‍ना मन हमर भरमैए मोन आगि‍ रहि‍-रहि‍ जड़ैए। नै पि‍या पि‍यास मुझाइए सोलहकलासँ सजल चानकेँ जहि‍ना अन्हरा नै देखैए तहि‍ना परदेशि‍या पि‍या अपनाकेँ वि‍रान बुझैए। ि‍नरदैयाकेँ प्रेम केना जगतै प्रेम बि‍नु दुनि‍याँ केना चलतै। की चकबा चकबी जकाँ साँझ पड़ैत बि‍छुड़ि‍ पड़तै? पूर्णिमाक चन देखि‍ राति‍ बि‍तेतै कहैए कवि‍ राखू मोनमे धीरज एक दि‍न मेटत अमृतसँ पि‍यास अपन मोनक आगि‍केँ राखू दाि‍ब। मि‍थि‍लाक पि‍यास मि‍थि‍लाक पि‍यास नै मुझा सकल कोइ जे मुझबैक प्रयासो केलन्‍हि‍ ओ सभ दि‍न ठकि‍ते रहलै मि‍थि‍लाक पि‍यास बढ़ैत गेलै अपन अश्रुकेँ पीबैत गेलै पि‍याससँ मन व्‍याकुल भेलै मि‍थि‍ला तँ मैथि‍ली लेल पि‍यासल मैथि‍ली-रस पीबए चहै छलै से रस कड़ुआएले छलै पि‍यासल मि‍थि‍ला तड़ैप-तड़ैप मैथि‍ली लेल मड़ैत रहलै कहैले मैथि‍ली भाषा सभ जनक भाषा छी मुदा सभ दि‍न अपनेमे झगड़ैत रहलै एक दोसरसँ छुबाइत रहलै तँए मैथि‍लीक वि‍कास नै भेलै मकड़जालमे फँसल रहलै तॅए आइ धरि‍ नै मि‍थि‍लाक पि‍यास मुझलै जाधरि‍ मि‍थि‍लामे मैथि‍ली सभ जनक भाषा नै बनतै ताधरि‍ नै मि‍थि‍लाक पि‍यास मुझतै। कि‍अए छुबाइ छी छुबैसँ जखन छुबाइ छी तँए कि‍ परि‍वर्त्तन देखै छी काज जखन नै छुबाइए देहक लहू पानि‍ नै बनैए नै कि‍नको लकबा मारैए तँ केना छुबाइ छी? पानि‍ छुबाइए मुदा दूध नै पान-मखनसँ मान बढ़ैए चुड़ा-दहीक भोग लगैए भात देखि‍ मुदा मन ओकि‍ऐ भेद-भावक जाल बना मनुक्‍खकेँ मनुक्‍ख नै बुझै छी समाजकेँ कमजोर केना छी एतेक धि‍नौना कुकर्म करै छी तैयो अपनाकेँ पैघ बुझै छी गंगा नहाए पूजा करै छी उन्‍टे कहै छी छुबाइ छी। सूखल खेत आ भूखल पेट सूखल खेत जरैत जजाति‍ खेतक दाररि‍ देख-देख दरकि‍ करेजा जरैत रहलै पानि‍ बि‍नु खेत बज्‍जर भेलै कि‍सानक तकदीर जरलै की खाए बचैते परान महगीयो तेतबे छै पंूजी पतीक हाथे सरकार वि‍कल छै छि‍यासठि‍ बर्ख अजादीक भेल देशक कि‍सान कंगाले अछि‍ भरल नदी पानि‍ बहति‍ रहलै नै बनलै बान्‍ह सुलीस गेट केना जेतै खेतमे पानि‍ नै बनलै अखनि‍ धरि‍ नहर केना उपजतै खेतमे धान झुट्ठे वयान सरकार करै छै नै भेलै खेत-वि‍कासक काम देशक लेल सभ दि‍न दैत रहलै कि‍सान अपन खून-परान मुदा आइ धरि‍ नै सरकार कहि‍यो देलकै धि‍यान केना हेतै देशक कल्याण सूखल खेत भूखल पेट केना बँचतै गरीबक परान। के बँचेतौ तोहर जान चि‍ल्का कनैए दूध पीबैले देखि‍ दुखि‍त माए कनैत बाजलि‍- “सुक्खल देह हड्डीए देखाए लहूक कतरा दु:खे लेल अछि‍ स्‍तनसँ दूधक फेनगीओ ने चलैए जे तोरा चटा जीएबो लहू पीब पेट भरतो तँ पीब ले सभटा हमरा देहसँ।” चि‍ल्का नोर बहबैत लगले सूरमे कनैत रहल अस्‍सी बर्खक बुढ़ि‍या दादी ठेंगासँ ठेंगहति‍ लग आबि‍ पोतासँ बाजली- “अपना ने तँ गाए-महिंसक दूध अछि‍ जे पानि‍ फेंटि‍ पीआ दैति‍ओ जीवि‍तँए तँ हमरो कमा खि‍ऐबि‍तँए एक हाथ सेवा सभ दि‍न करि‍तँए सबहक असि‍रवाद पबि‍तँए भगवानो तँ बेमूख बनल छौ माए तोहर रोगही-टेटही छौ।” मुदा, चि‍ल्‍का फकसीहारि‍ कटैत रहल माए ममता भावपूर्ण पुन: बाजलि‍- “आन दूध बौआ नयनसँ नै देखलौं ने जीसँ कहि‍यो सुआद लेलौं के देतौ दूध जान बँचबैले नै बँचल छै धरतीपर इंसान कथी पीआ कऽ तोरा जीएबो से नइए कोनो इंजाम माए-बेटा आ बुढ़ि‍या दादी छी तीनू तीन जान तीनू मरि‍ संगे जाएब श्‍मशान एहेन स्‍वार्थी दुनि‍याँकेँ की देखब जैठाम गरीव जीबै छै कुकुर समान।” उन्‍टा साँस छोड़ैत चि‍ल्‍का जेना कि‍छु बाजि‍ रहल अछि‍ भूखक आगि‍मे छूटि‍ रहल प्राण नै कोइ अछि‍ दयावान ऐठाम चहुदि‍श देखै छी बदलल इंसान रावण-कंशसँ पैघ शैतान। आगि‍ए आगि‍ सगरो लगल छै आगि‍ए आगि‍ भागि‍ पड़ा केतए जाएब जेन्नैइ जाइ छी दइए झरकाए तन जरैए मन जरैए नैनक नोर सूखि‍ जाइए जेनए देखै छी आगि‍ए-आगि केनए भागि‍ जाएब हौ भाय सगरो लगल छै आगि‍ए आगि‍। मनक आगि‍सँ तन धधकैए दहेजक आगि‍सँ समाज जरैए चि‍न्‍ताक आगि‍मे दुनि‍याँ जरैए भ्रष्‍टक आगि‍सँ भ्रष्‍टाचार धधकैए महगीक आगि‍मे जनता जरैए पेट्रोल-गैसमे देश जरैए केनए भागि‍ जाएब हौ भाय सगरो लगल छै आगि‍ए-आगि। के मुझाएत ऐ आगि‍केँ सबहक लहू पानि‍ बनल छै जि‍नगी बनल छै जंजाल झरकि‍-झरकि‍ सभ मरै छै के लगेलक ई सगरो आगि‍ केकरो काेइ नै देखै छै केनए भागि‍ जाएब हौ भाय सगरो लगल छै आगि‍ए-आगि‍।।‍‍ दू नजरि ‍ रूप स्‍वरूप समरूप रहि‍ सभ मनुख मनुक्‍खे छी एक्के लहू समरूप रहि‍ भेद कुभेद कि‍ए करै छी हीन भावना राखि‍ ताकि एक-दोसरसँ छुबाइ छी बात करै छी सर्वहीतक सबहक दरद कि‍ए नै बाँटै छी अपना स्‍वर्ग तकै छी दोसरकेँ नरकमे ठेलै छी सभ एक्के छी तँ दू नजरि कि‍ए तकै छी रूप स्‍वरूप समरूप रहि‍ सभ मनुख मनुक्‍खे छी। बात बनेलासँ नै बात बनत कर्म बि‍ना नै जि‍नगी चलत अधर्मसँ नै कहि‍यो काज चलत सत् बि‍नु नै इंसान बनत केना कहब के इंसान छी बेइमानो कहब के शैतान छी शैतान-बेइमानक बि‍चबि‍चौआमे सभ इंसान ओझराएल छी। ओझरी-पोटरीमे अँटैक रहि‍ भि‍तरे-भीतर छुड़ी चलबै छी। रूप स्‍वरूप समरूप रहि‍ सभ मनुख मनुक्‍खे छी। राम विलास साहु- किछु विहनि कथा राम वि‍लास साहु स्‍कूलक खि‍चड़ी एकटा अभि‍भावक तमसा कऽ स्‍कूल पहुँचला। हेड मास्‍टरकेँ उपराग दैत बजला- “पढ़ाइ-लि‍खाइ तँ जएह-सएह होइए। खाली खि‍चड़ीयेमे बेहाल रहै छी। जखनि‍ धि‍या-पुता पढ़बे नै करतै तखनि‍ तँ हाकि‍म-हुकुमक तँ बाते छोड़ू चपरासि‍यो नै बनतै। एसँ नीक तँ प्राइवेटे स्‍कूल ने जइमे दूटा पाइये ने लगै छै, पढ़ाइ तँ नीक होइ छै। आइ तक ऐ स्‍कूलक बच्‍चा पढ़ि‍ कऽ कोन नाम कमेलकै।” मास्‍टर सहाएब शान्‍त भावसँ अभि‍भावककेँ समझबैत बजला- “देखू, तमसाउ नै कोनो हम खि‍बै छी खि‍चरी। ई तँ सरकारक योजना छी। ऐ योजनासँ लाभो बहुत छै। नि‍च्‍चासँ ऊपर धरि‍ सभ माले-माल होइ छै।” अभि‍भावक बजला- “से केना?” मास्‍टर सहाएब कहलखि‍न- “सहीमे प्राइवेट स्‍कूलक बच्‍चा सभ पढ़ि‍-लि‍खि‍ हाकि‍म-हुकुम बनै छै। आ ईहो देखैत हेबै जे ओ सभ माए-बाप, गाम-समाजकेँ छोड़ि‍ एवं मातृभूमि‍केँ बि‍सरि‍ जाइए, बूझू बौर जाइए। से तँ ऐ स्‍कूलक बच्‍चामे नै हाेइए।” चोर-सि‍पाही माघ मास अन्‍हरि‍या राति‍। ओस-कुहेससँ हाथो-हाथ ने सुझैत। एकटा चोर चारि‍ कऽ भागल जाइ छल। तखने एकटा सि‍पाही गस्‍तीमे आबि‍ रहल छल। चोर सि‍पाहीकेँ देखि‍ते भागल। चोर बूढ़ छल मुदा सि‍पाही बलंठ छलै। भागैत चोरकेँ रपटि‍ कऽ पकड़लक सि‍पाही। पकड़ि‍ हाजति‍ लेने जाइ छल। चोरकेँ डंढ़ासँ देह थरथराइ छल। मने-मन ईहो सोचै छल जे केना ऐ यमराजक हाथसँ बचब। थोड़े आगू चलि‍ कऽ देखल जे सड़कसँ हटि‍ एकटा घूर रहै। आगि‍ देखि‍ते चोर बाजल- “सर, अहाँ एत्तै रहू आ हम ओइ धूरासँ कनी बि‍ड़ी नेसने अबै छी?” सि‍पाही कने सोचि‍ कऽ बाजल- “अरे, तूँ हमरा मूर्ख बुझै छेँ रे! आ जे तूँ भागि‍ जेमे तँ हम तोरा पतालमे खोजबौ? चूपचाप एतए बैस हम अपनेसँ बीड़ी सुनगेने अबै छी।” इमानदारीक पाठ ननुआँ पुछलक कनुआँसँ- “भैया आइ-काल्हि‍ तँ गामोक स्‍कूलमे बड़ सुवि‍धा भेटै छै आ पढ़ाइओ होइ छै तैयो वि‍द्याथी सभ शहरक स्‍कलमे कि‍ए पढ़ै छै?” कनुआँ जबाब देलक- “गामक इस्‍कूलमे इमनदारीक पाठ आ शहरक इस्‍कूलमे रोजगारक पाठ पढ़बै छै।” “से केना?” -ननुआँ पुन: पुछलक। कनुआँ उत्तर देलक- “गामक इस्‍कूलमे एहेन पाठ पढ़बै छै जे कहुना साक्षर भऽ जाए, गाए-भौंस चराबए आ नमहर भेलापर हर-फार जोतए, खेती करए। अन्न उपजा कऽ अपनो खाए आ आनोकेँ खि‍याबए। ई छि‍ऐ ने इमानदारीक पाठ मुदा शहरक इस्‍कूलमे वि‍द्यार्थी सभकेँ रोजगारक पाठ पढ़बै छै। ओ सभ पढ़ि‍-ि‍लखि‍ रोजगार लेल आन-आन शहर चलि‍ जाइ छै। अपन घर-परि‍वार आ समाज सेहो छुटि‍ जाइ छै। समाजसँ बेमुख भऽ जाइ छै। आब तोहीं कह जे इमानदारीक पाठ के पढ़तै?” बौआ बाजल पढ़ल-लि‍खल बेरोजगार छी मुदा दि‍न केना कटै छल तकर कोनो सुधि‍-बुधि‍ नै छल। ऊपरसँ परि‍वारक बोझ, आगू पढ़बाक इच्‍छा रहि‍तो कि‍छु नै कऽ सकलौं। एक दि‍न मनमे फुराएल जे कि‍छु नेना-भुटकाकेँ पढ़ाएल जाए। अहुना तँ हम बुड़ि‍आएले छी औरो बुड़ि‍या जाएब। एक दि‍न भोरमे बौआ-बुच्‍चीकेँ ओसारपर पढ़बै छलौं। दुनू बेरा-बेरी प्रश्न पुछए आ हम उत्तर दइ छेलि‍ऐ। अहि‍ना स्‍थि‍ति‍मे बौआ पुछलक- “लोक एत्ते मेहनतसँ कि‍ए पढ़ैए, जे पढ़ैए सेहो आ जे नै पढ़ैए ओहो तँ एक ने एक दि‍न मरि‍ऐ जाइए?” बौआकेँ हम समझबैत कहलि‍ऐ- “जीवन-मरण तँ प्रकृति‍क नि‍अम छी। ओ नि‍रंतर होइत रहैत अछि‍।” बौआ फेर पुछलक- “तखनो लोक कि‍ए पढ़ैए?” “मनुख पढ़ि‍-लि‍ख ज्ञान अर्जित करैए आ ओइ ज्ञानसँ अपन जि‍नगीकेँ सुलभ बना असली जि‍नगी जीबैए। लोक पढ़ि‍-लि‍खि डाक्‍टर-इंजि‍नि‍यर, औफि‍सर, कवि‍ लेखक आ उपदेशक इत्‍यादि‍ बनैए। अच्‍छा ई कहह जे तूँ की बनबऽ?‍” बौआ बाजल- “हम पढ़ि‍-लि‍ख कोनो काज कऽ सकै छी मुदा कवि‍-लेखक नै बनब। सभ कमा कऽ सुख-मौजसँ जि‍नगी बि‍तबै छथि‍ मुदा कवि‍-लेखककेँ कोनो कमाइ नै होइत छन्‍हि‍। अखबारमे पढ़लि‍ऐ जे मरला बाद पुरस्‍कार भेटै छै।” घूसहा घर- मुखि‍याजी पंचायतक गामे-गाम आम सभाक बैसार लेल डोल्हो दि‍यौलनि‍। गामक लोक सभ एकजुट भऽ आम सभामे पहुँचला। सभाकेँ संवोधि‍त करैत मुखि‍याजी बजला- “ऐ बैसारमे सभ कि‍यो मि‍ल ि‍नर्णए लि‍अए जे पंचायतक गरीब आ मसोमात, जि‍नकर घर टुटल-फाटल होइ वा रहबा योग नै होइ छै। ओइ व्‍यक्‍ति‍क सूची बनाएल जाउ। हुनका सभकेँ सरकार तरफसँ घर बनबैले इन्‍दि‍रा-आवास योजनासँ रूपैया भेटतनि‍।” वार्ड सदस्‍यक सहयोगसँ मुखि‍याजी लग इन्‍दि‍रा आवासबला सूची पहुँचल। बि‍हानेसँ मुखि‍या जीक दलाल सभ सूचीमे नामांकि‍त व्‍यक्‍ति‍सँ भेँट कऽ एक-एकटा फार्म दऽ कहि‍ देलक जे फार्म भरि‍ कऽ मुखि‍याजी लग जमा करै जाउ आ बैंकमे खाता सेहो खोलबा लइ जाउ। संगे संग पाँच हजार रूपैआ सेहो दि‍अए पड़त। तखनि इन्‍दि‍रा आवास भेटै जाएत। बहुत गोटे तँ अपन गाए-महि‍ंस-बकरी-छकरी-गहना-जेबर जेकरा जे गर लगलै बेचि‍ कऽ रूपैआ दऽ रूपैआ उठेलक। कि‍छु आदमी एहनो छल जेकरा सकर्ता नै भेलै ओ वंचि‍त रहि‍ गेल। बदलामे पाइबला लोक अपना नामे उठा लेलक। कि‍छु दि‍नक बाद रघि‍या मसौमात इन्‍दि‍रा-आवास ले फार्म भरि‍ मुखि‍या जी लग पहुँचलीह। मुखि‍याजी फार्म पढ़ि‍ बजला- “पहि‍ले इन्‍दि‍रा आवासमे पचीस हजार भेटै छलै आब चालि‍स हजार भेटै छै मुदा आगू भेटैबला साइठ हजार भेटतै। जइमे पच्‍चीसमे पाँच हजार आ अखनि चालि‍समे दस हजार खर्चा लगै छै मुदा आगू साइठमे पनरह हजार लगतै।” रधि‍या सुनिते कानि‍-कलपि‍ कऽ अपन मजबूरी सुनौलकनि‍। मुखि‍याजी मुड़ी डोलबैत बजला- “यइ काकी, हमरे केनेे नै ने होइ छै, डेगे-डेग हाकि‍म-हुकुम बैसल छै। ओहो तँ कटि‍या सोन्‍हा कऽ रखने रहै छै तेकरा की हेतै। आ हमरो कोनो दरमाहा भेटै छै हमहूँ तँ ओहीमे नि‍महै छि‍ऐ। तँ ई हेतौ जे हम अपनबला नै लेबो।” सुनि‍ रधि‍या सभ बात सुनि‍ परि‍स्‍थि‍ति‍ बूझि‍ आपस आबि‍ गेलीह। बुधनी बुढ़ि‍या गाममे सभसँ उमेरगर। जुआनि‍येमे घरबला बाढ़ि‍मे डुमि‍ मरि‍ गेलखि‍न। दूटा बेटाक संग बुधनी कहि‍यो हि‍म्‍मत नै हारलि। संघर्ष करैत आत्‍म-ि‍नर्भरतापर धि‍यो-पुतोकेँ सक्कत बनौने छथि‍। हलाँकि‍ आर्थिक रूपे कमजोरे छथि‍। एक दि‍न मुखि‍या जीक नजरि‍ बुधनी बुढ़ि‍यापर पड़लनि‍ आ देखि‍ते पुछलखि‍न- “गामक बहुतो लोक सभ लाभ लेलक मुदा तूँ कोनो फारमो नै भरलीही? तोरा तँ दूटा लाभ भेटतौं। एकटा वृद्धा-पेंसन ओ दोसर इन्‍दि‍रा आवासक।” बधनी बजलीह- “ऐमे कोनो खर्चो-वर्चो लगैए?” मुखि‍याजी- “हँ, वृद्धा-पेंसनमे पाँच सए आ इन्‍दि‍रा-आवासमे पनरह हजार।” बुधनी- “हम ई लाभ नै लेब।” मुखि‍याजी- “कि‍ए नै लेब?” बुधनी- “घूस दऽ कऽ घर बनाएब तँ ओइ घूसहा घरमे रहैबला केहेन हेतै?” मुखि‍याजी आ बुधनी बुढ़ि‍याक गप अपना घरक कोनचर लगसँ रधि‍या मसोमात सुनैत छलीह अपना मनकेँ बुझबैत बजलीह- “इन्‍दि‍रा आवास कि‍ए घूसहा घर कहि‍यो ने।” जाति‍क भोज आइ फूलबाबूक बेटाक बिआहक भोज अछि‍। गौआँ सबहककेँ आशा छेलनि जे ई भोज हमरो सभकेँ खेबाक अवसरि भेटत। किएक तँ ऐ भोजकेँ सफल बनेबाक लेल बहुतो जाति-वर्गक लोकक सहयोग छेलनि। कियो जारनि फारए तँ कियो साफ-सुथरा करए। कियो बर्तन-बासन माजै छल। गामक डोम बाँससँ बनल छिट्टा-पथिया, ढकैस, डाल-दौरा, चङेरा बना देलक। मालि फूल आ फूलक माला, कुमहार वर्तन-वासन, महला पोखरिसँ माछ मारि मनक मन ढेर लगौलक। कतेको करीगर आ हलुआइ सभ भोजक समग्री बनबैमे भिरल छल। भोजमे सहयोग तँ सभ जातिक लोक द्वारा भेल। मुदा खाइक अवसर सभकेँ नै भेटलनि। ओतबे नै, किनको नगद टाका देल गेल तँ किनको उधार रहलै आ किनको सीदहा भेटलै। मुदा भोज खाइक नोत सभकेँ नै भेटलै। भोजक आयोजक भलहिं फूलबाबू छला मुदा करबारी तँ सभ जातिक लोक छेलखिन। किछु लोकक मनमे, जि‍नका सभकेँ नोत नै देल गेलनि‍। हुनका सबहक मनमे ईहो होन्‍हि‍ जे काज जखनि नै छुआइ छै तँ पाँति‍मे बैस खेलापर पाँति‍ केना छुबा जेतै। शि‍क्षाक महत जीबछ घरजमैया छल। हुनकर पत्नी रधिया, माए-बापक एकलौती बेटी बड़ दुलारि‍ छलि। रधि‍याक पि‍ताकेँ चारि‍ बीघा चास-बास, कलम-बाँस आ गाए-बड़द छल। खेती-बाड़ीसँ जि‍नगी चलै छेलनि‍। सोझमति‍या रहने कोनो क्षल-कपट नै रहनि। पि‍तमरू छला। परि‍वारमे अक्षरक बोध केकरो नै रहनि‍ खाली जीबछ ट-ब कए कऽ साक्षर छल। रधि‍याक पि‍ता जरूरति‍ पड़लापर जखनि‍ समाजमे कोनो लेन-देन करै छला तँ औंठेक नि‍शान दइ छला। एक साल एहेन समए भेलै जे इलाकाक इलाका बाढ़ि‍-पानि‍सँ दहि‍ गेलै। ने नेवान करैले अन्न आ ने दाँत खोदहैले नार-पुआर भेलै। दोसर साल रौदी भऽ गेलै। एक तँ बाढ़ि‍क मारल, दोसर रौदीक जरल। गरीब-गुरबाकेँ गुजर कटनाइ पहाड़ भऽ गेलै। केतेको परि‍वार तँ आन-आन गाम अपन-अपन कुटुमैती जा कि‍छु दि‍न समए कटकल। मुदा ई सुवि‍धा सबहक नशीव नै छेलै। गामक नम्‍हर जमीनदार, मालि‍क-गुमस्‍ता जे छला हुनका तँ पहुलके सालक पुरना अन्न बखारीक-बखारी भरल छेलनि। हुनका सभकेँ कोनो चि‍न्‍ता नै छेलनि‍। रधियाक माए-बाप बूढ़ रहने आन गाम जा केना काज करत। ओ दुनू गामेमे मालि‍कसँ कहि‍यो मरूआ तँ कहि‍यो धान तँ कहि‍यो छाँटी चाउर कर्जा लऽ समए काटै छल। कर्जा देनि‍हार मालि‍क सभ वि‍पति‍क समैमे गरीबक शोषण सेहो करैत। एक मन अन्नक बदला दू मन आ दोसर साल चुकेलापर तीन मनक करारीपर कर्जा लगबैत। तेकर बादो औंठाक नि‍शान एकटाकेँ के कहए जे तीन-तीनटा छाप कागतपर लइ छेलखि‍न। गरीब अपन परान बँचाएत आकि‍ छापक परबाह करत। कर्जा खेनि‍हार थोड़े बुझै छल कि‍ छाप देबै कागतपर आ हमर जमीन जत्‍था चलि‍ जेतै तक्खापर। एक दू साल समए बि‍तलै। जीबछ अपन सौसुराइरिएमे सासु-ससुरक सेवा आ खेती-बाड़ी कऽ गुजर-बसर करै छल। कि‍छु समए पछाति‍ सासु-ससुर मरि‍ गेलखि‍न। श्राद्ध-कर्मसँ नि‍वृत भेलै छल आकि‍ गामक मालि‍क-गुमस्‍ता लोकनि‍ अपन-अपन कागत लऽ जीबछ ऐठाम पहुँचए लगला। कर्जा तँ करारीपर देने रहनि‍। ओ अवधि‍ बीति‍ गेल छल। कर्जा खेनि‍हार पहि‍ले कागतपर छाप देने रहनि‍। ओइ कागतपर मालि‍क-जमीनदार लोकनि‍ जमीनक खाता-खेसरा रकबा लि‍खि‍ कऽ अपन नाओं कऽ लेलनि‍। गरीब सबहक जमीन मालि‍क-गुमस्‍ता हरपि‍ लेलकनि‍। जइमे रधि‍याक जमीन सेहो चलि‍ गेल। आब जीबछ-रधि‍याकेँ दूटा बेटी, एकटा बेटा आ परि‍वारक भरन-पोषण करनाइ कठि‍न भऽ गेल। जीबछ कमाइ खातीर बाहर चलि‍ गेल। बाहरमे पढ़ल-लि‍खल आदमीकेँ नोकरी जल्‍दीए होइ छेलै आ बेसी दरमाहा सेहो भेटै छेलै। जीबछ बेसी पढ़ल तँ नै मुदा साक्षर छल। जइसँ शि‍क्षाक महत जि‍नगीमे केतेक होइ छै से मोने-मन महशूस करै छल। जीबछ ट-ब-ट काए कहुना कऽ चि‍ट्ठी लि‍खि‍ घर पठेलक। ओइमे बेटा-बेटीकेँ पढ़बैले रधि‍याकेँ प्रेरि‍त करैत कहै छल जे पढ़ाइमे जेते खरच लगत, हम कमाए कऽ पठाएब मुदा अहाँ धि‍या-पुताकेँ पढ़बैमे कोनो कोताही नै करब। रधि‍यो मोने-मन सोचै छेली जे नीक लोक बनबाक लेल शि‍क्षाक बड़ महत छै। जे हम आ हमर माए-बाप जँए नै पढ़ल छेलौं तँए ने सभटा जमीन मालि‍क-गुमस्‍ता हरपि‍ लेलनि‍। जखनि‍ पढ़ल रहि‍तौं तँ ई मुसि‍बत नै अबि‍ताए। हम सभ जे केलौं से केलौं मुदा धि‍या-पुताकेँ जरूर पढ़ाएब। अइले हमरा जे परि‍श्रम आ ति‍याग करए पड़त ओ करब। ओ सभ दि‍न अपन धि‍या-पुताकेँ समैपर संगे जा स्‍कूल पहुँचाबए लगली। रधि‍याक टोलेमे बुच्‍ची बाबू छला। बुच्‍ची बाबू अंचलमे बाड़ाबाबू छथि‍। छुट्टीमे घर आएल छथि‍। हुनका काल्हि‍ भोरे ट्रेन पकड़ि‍ ड्यूटीपर जेबाक छेलनि‍ से रधि‍याकेँ कहलखि‍न- “रधि‍या, कि‍छु सामान अधि‍क अछि‍। गाममे कएक गोटेकेँ कहलि‍ऐ जे काल्हि‍ भोरके ट्रेन पकड़ब से कनी सामान स्‍टेशनपर पहुँचा दि‍अ, मुदा कि‍यो तैयार नै भेल। तूँ कनी पहुँचा दइ। हम तोहर बड़ उपकार मानबो।” रधि‍या बाजलि‍- “ठीक छै, कअए बजै चलब। कहि‍ दि‍अ हम समान पहुँचा देब।” बुच्‍ची बाबू बजला- “सात बजे भाेरेमे चलब। कि‍एक तँ आठ बजेमे ट्रेन छै। तीन-चारि‍ कि‍लो मि‍टर स्‍टेशन दूरो छै।” रधि‍या भोरे उठि‍ सभ काज कऽ जलखै बना धि‍या-पुताकेँ खाइले दऽ बजली- “तँू सभ जल्‍दीसँ खो, आइ कनी पहि‍नहिए तोरा सभकेँ स्‍कूल पहुँचा दइ छि‍यौ, तखनि‍ बुच्‍ची बाबूक समान पहुँचबैले टीशन जाएब।” एम्‍हर बुच्‍ची बाबू तैयार भऽ रधि‍याक बाट तकै छला। पाँच मि‍नट पछाति‍ रधि‍या पहुँचली। बुच्‍ची बाबू तमसाइत बजला- “रधि‍या, तोरा कहने छेलि‍ओ साते बजै चलैले, देरी भऽ गेल। ट्रेन छूटि‍ जाएत। तोरा कोनो चि‍न्‍ता नै।” रधि‍या बजली- “अपने तमसाउ नै। धीरे-धीरे बढ़ू हम समान लेने लफरल पि‍ट्ठेपर आबि‍ रहल छी। कनी धि‍या-पुताकेँ स्‍कूल पहुँचबैमे देरी लागि‍ गेल।” बुच्‍ची बाबू- “पहि‍ले सामान पहुँचा दइतैं, हमरा ट्रेन छूटि‍ जाइत। एक दि‍न तोहर बेटा-बेटी स्‍कूल नै जेतौ तँ की हेतै। एक्के दि‍न कोनो पढ़ि‍ कऽ कलक्‍टर बनि‍ जेतौ?” रधि‍या मोने-मन सोचए लगली, कहै छि‍यनि‍ आगू बढ़ैले से उठि‍ए ने होइ छन्‍हि‍। हम तँ लफरल हि‍नकासँ पहि‍नहि‍ पहुँच जाएब। ट्रेन थोड़े छुटतनि‍। अपने बेगरते आन्‍हर छथि‍। अनेरे गछलौं। ‍ ई छी हमर मजबूरी जमुना बाबाक दुआरि‍पर सतसंग-प्रवचन होइ छेलै। भीड़ देखि‍ हमहूँ ससरि‍ कऽ गेलौं आ बैस सुनए लगलौं। प्रवचनकर्ता सेहो ज्ञानी आ वि‍द्वान बूझि‍ पड़ला। ओ मनुखक जि‍नगीक समरूपता बतबै छला। कहब रहनि‍ जे सभ मनुख एक समान छी। सभ एके ईश्वरक संतान छी आ सबहक अत्‍मामे एके परमात्‍माक अंश रमि‍ रहल-ए। मुदा हम तँ बड़ अंतर देखै छी। सबहक क्रि‍या-कलाप, रहन-सहन आ खानो-पानमे बड़ पैघ भि‍न्नता अछि‍। केकरो बोरे-बोरे नून आ केकरो रोटीओपर ने नून। कोइ खाइते-खाइते मरैए आ कोइ खाइए बि‍नु मरैए। केकरो बीघा-बीघे कोठा-सोफा केकरो खोपड़ीओपर आफत। कोइ रौदे-वसाते जरि‍-मरि‍ काज करैए तँ कोइ ए.सी.मे मौजु करैए। कि‍यो उड़न जहाजसँ देश-वि‍देशक यात्रा करैए तँ कि‍यो पएरे चलि‍-चलि‍ सड़केपर पराण ति‍यागैए। कि‍नको बि‍मारीक इलाज करोड़ो रूपैआसँ वि‍देशमे होइए तँ कि‍नको पराण साधारण इलाज बि‍नु चलि‍ जाइए। ऐ सभ मुद्दापर सोच-वि‍चार करैत जखनि‍ प्रवचन खतम भेल तखनि‍ हम हुनका लग जा कहलि‍ऐ- “महराज, अपने प्रवचनमे सभ मनुखकेँ समरूप बतौलि‍यनि‍। मुदा हम तँ बड़ अन्‍तर देखै छी। से कनी फड़ि‍छा कऽ कहि‍यौ।” प्रवचनकर्ता मधुर स्‍वरमे बजला- “से तँ ठीके अहूँ कहै छी। हम जे प्रवचनमे कहलौं सेहो ठीक आ अहाँ जे कहै छी सेहो ठीक। सत्‍ ई छै प्राकृति‍ द्वारा जे सुवि‍धा मनुखक लेल उपलब्‍ध छै ओ समरूप छै। मुदा मनुखक बीचमे जे अन्‍तर छै से अन्‍तर बेवस्‍थामे कमीक कारणे छै। मनुखे मनुखक दुश्‍मन छि‍ऐ। जे जेते सवल छै ओ ओते दोसराक हक मारि‍ बेवस्‍थाकेँ दुरूपयोग करै छै। जहि‍ना हाथीकेँ दूटा दाँत होइ छै एकटा खाइबला आ दोसर देखबैबला तहि‍ना बेवस्‍था करैबलाकेँ दू नजरि‍ होइ छै। कथनी आ करनीमे अन्‍तर रखने छै। ऐ सभ बातक वि‍चार-अनुभव मनुखकेँ अपने करए पड़तै। ओकर समाधान लेल सघर्ष करए पड़तै। बि‍नु मांगने तँ भीखो नै मि‍लै छै। ई तँ अहाँ अधि‍कारक बात करै छी। जौं हम प्रवचनमे समरूपताक बात नै कहबै तँ बेवस्‍था हमरा नै ने जीबए देत। अहाँ जकाँ जौं हमहूँ प्रवचनमे बाजब तँ कहि‍या ने हमरा जमपुरी पहुँचा देने रहि‍तए। यहए छी हमर मजबूरी।” बाल-बोध दुखीलालकेँ दुखक पहाड़ माथसँ कहि‍यो नि‍च्‍चाँ नै भेल। बूढ़ माए-बापक सेवा टहल, तैपर सँ दूटा भलढ़ेरबा बेटी, छोट-छोट दूटा बेटा, पत्नी आ अपने कुल आठ बेक्‍तीक परि‍वार। पत्नी- फुलि‍या- परि‍वारक काजमे पि‍साइत छेली। सासु-ससुरक टहल-टि‍कोरा आ सेवासँ पलखति‍ए नै। ऊपरसँ एकटा पोसि‍या गाए, एकटा भजैति‍या बरद। मुदा दुनू बेटी चठेलगरि‍ आ हुनरगरि‍ छन्‍हि‍। घरक कमौआ दुखीलाल असकरे दि‍न-राति‍ फि‍रि‍शान रहैए। घरक खर्चा पुग्‍बे ने करैए जे पलखति‍ मारत। खेतीओ-पथारी कम्मे भेने जने-बुत्तापर घरक खर्चा चलैत अछि‍। जखनि‍ खेनाइओ-पीनाइओमे ढनसने तखनि‍ बेटा-बेटी पढ़त केना? बर्खक पेसतरे दुखीक माए लकबा रोगसँ मरि‍ गेली। पछाति‍ बूढ़ बाप सेहो रोगसँ रोगा-सोगा दम तोड़ि‍ देलकनि‍। श्राध-कर्म आ भोज-भात कर्जे हाथे भेल। दुखीलालकेँ एक-सबा कट्ठा डीह, तीन कट्ठा चौमास आ छह-सात कट्ठा तीन-फसि‍ला खेत छन्‍हि‍। जइसँ छह मास परि‍वारक गुजर चलै छन्‍हि‍। जन-मजदूरी कऽ शेष छह मास बि‍तबैत अछि‍। मुदा अखनि‍ तँ चौमास आ तीन-फसि‍ला खेत दस हजारमे डेढ़ा सूदि‍पर भरना लगि‍ गेल अछि‍। तैपर सँ दूटा बेटीक बि‍आहक अलगे। दुनू बेटा अखनि‍ बाल-बोध! समस्‍या-पर-समस्‍या लदल जा रहल अछि‍। जँ चारि‍-पाँच साल खेत-भरना रूपैआक सूदि‍ नै भरब तँ खेतो सूदि‍ए तरे चलि‍ जाएत। गाए बि‍कल चरबाहि‍येमे कहबी सन हएत। एक दि‍न दुखीलाल बैसारीए छल। कि‍छु सोचैत छल आकि‍ मनमे उपकलै खेतक भरना। जइ खेतसँ हमर बाप-दादा परि‍वार चलबै छला वएह खेत हमरो जीवि‍का अछि‍। मुदा आब बूझि‍ पड़ैए ओ खेत बि‍लटि‍ जाएत। ऐ क्रममे सोचैत दुखीलाल टहलि‍ मालि‍क प्रभूनाथ जीक दरबज्जापर पहुँचल। प्रभूनाथजी दुखीकेँ देखि‍ते कहलखि‍न- “आबह दुखी, एमकी बहू दि‍नपर भेँट करए एलह।” दुखीलाल- “मालि‍क, अहाँसँ कथी छुपल अछि‍। एतेक दि‍नसँ माए-बापक कहुना रीन उतारलौं मुदा अपनेक रीन केना चुकाएब से फुड़ेबे ने करैए।” प्रभूनाथजी- “केना चुकेबऽ से तँ तोहर काज छि‍अ। तइले हम कि‍ए मगजमारी करब। साले-साले हमरा रूपैआक डौरहा सूदि‍ बढ़ैत जेतह। पाँच सालक कराड़ी छह, नै चुकेबहक तँ खेत छोड़ह पड़तऽ।” दुखीलाल- “माि‍लक, एना नै ने बाजू। खेतक नाओं सुनि‍ हमर करेजा फाटि‍ जाइए। ई खेत हमर खनदानक पूजी आ इज्जति‍ छी। अपना जीबैत हम केना बि‍लटए देब।” प्रभूनाथजी- “से तँ तूँ ठीके कहै छह। रूपैआक सूदि‍ जोड़ि‍ चुकता कऽ दहक आ अपन खेत छोड़ा लैह।” दुखीलाल- “मालि‍क, अहींक दरबारमे जन-मजुरी कऽ जीब लेब। रहल अहाँक रूपैआक सूदि‍, तइ एबजमे हम अपन दुनू बेटाकेँ अहीं ऐठाम नोकरी राखि‍ दइ छी। बँचलोहो बासि‍-बेरहट खा जीब लेत आ अहूँक काज चलत। जाधरि‍ अहाँक रूपैआक सूद-मूर‍ नै सधत ताधरि‍ अहींक दरबारमे नोकर बनि‍ खटि‍ देत। रूपैओक चुकता भऽ जाएत आ हमरो खेत छुटि‍ जाएत।” प्रभूनाथजी- “कहलह तँ बड़ नीक। युक्‍ति‍ओ तोहर नीमन छह मुदा...।” दुखीलाल- “माि‍लक ‘मुदा’ कि‍ए कहलौं?” प्रभूनाथजी- “मुदा ऐ दुआरे बजलौं कि‍ तोहर बेटा दुनूकेँ तँ देखने नै छी। अबोध अछि‍ आकि‍ बाल-बोध ” दुखीलाल- “बल-बोध अछि‍। ठेकनगरि‍, एकबेर सेरि‍या कऽ बता देबै तँ दोसर बेर अढ़बए नै पड़त। देखि‍ते-देखि‍ते फुर्र-फुर्र काज कऽ देत। एक्को मि‍सि‍या असकति‍या नै अछि‍।” प्रभूनाथजी- “बेस काल्हि‍ए दुनूकेँ बजौने आबह। नैनसँ देखि‍यो लेब आ काज करै जोकर अछि‍ कि‍ नै सेहो ठेकानि‍ लेब।” दुखीलाल- “बेस मालि‍क, जाइ छी काल्हि‍ए दुनूकेँ संगे नेने अबै छी।” दुखीलाल अपन कर्तव्‍यकेँ हीन बूझि‍ चि‍न्‍तामे डूमि‍ गेल। हम केहेन बाप छी जे बाल-बोध बेटाकेँ भोजन-बस्‍त्र-शि‍क्षा इत्‍यादि‍ पूर नै कऽ अपने बेगरते नोकरी लगबै छी। बेटा-बेटी राजाक हुअए आकि‍ गरीबक सभकेँ अपन सन्‍तान दुलरूआ होइ छै। जखनि‍ नमहर-बुधि‍गर-ठकनगर हएत तँ की कहत! हमर बाप केहेन नि‍ष्‍ठुर छथि‍ जे हमरा संगे एहेन अन्‍याय केलनि‍। मुदा हमरा लग रस्‍ते कोन अछि‍। दोसर कोन उपए लगा सकब। मोनक बात मोनमे रखैत हृदैकेँ सक्कत कऽ बि‍हाने भने पनि‍पि‍आइ करा संगे नेने प्रभूनाथ जीक दरबार पहुँचल। दुनू बाल-बोध भाए गांगी-जमुनी, देखैओमे बड़ नुनुआगर, उमेरो आठ-दस बर्खक। प्रभूनाथ जीकेँ मनमे भेलनि‍ बड़ नीमन टहलू हएत। मुदा अनठबैत बजला- “दुखी दुनू बौआ तँ अखनि‍ लेधुरि‍ए अछि‍। हमरा ऐठाम कोन काज करत। ऐठाम तँ भीड़गर काज अछि‍।” दुखीलाल बूझि‍ गेल जे मालि‍क हमरा टाड़ि‍ रहल अछि‍। बाजल- “मालि‍क, छोट देखि झुझुआउ नै। घरक छोट-छोट सभ काज करत। गाए-बरदक कुट्टी-सानी, दरबज्जा, माल-जालक बथान आ गोहाल घरक झार-बहार करत। गोबर-करसी ढुल-ढालकेँ हटाएत। अहूँकेँ कि‍यो टहल-टि‍कोरा करैबला नै अछि‍ सेहो अपन समझि‍ करत। अहूँ अपने पोता सन बेवहार करबै। घरे ने बदलि‍ जेतै मुदा रहतै तँ गामेमे। अहाँ लग रहत तँ हम नि‍फि‍कि‍र रहब। ओना हमहूँ तँ अबि‍ते-जाइते रहब।” प्रभूनाथजी- “दुखी, तँू ने गाम-घरक बात करै छह। लोक तँ शहर जाइले गाम गमौने अछि‍।” दुखीलाल- “मालि‍क की कहब, लोक तँ चि‍ड़ै भऽ गेल अछि‍। जेतै पेट भरै छै ओतै खोंता बना रहैत अछि‍।” प्रभूनाथजी- “से ठीके। हमरे बेटाकेँ नै देखै छहक। गाम-समाज छोड़ि‍ हैदराबादमे रहैए। पावनि‍-ति‍हार तँ हम जाबै जीबै छी ताबे कहुना कऽ दइ छि‍ऐ, नै तँ घरक देवताकेँ एक चुरुक पानि‍ओ के देत।” दुखीलाल- “माि‍लक, छोड़ू दुनि‍याँ-दारीक गप-सप्‍प। हमरो काजपर जाइक अछि‍। और गप-सप्‍प दोसरो दि‍न हेतै। दुनू बाल-बोधकेँ सम्‍हारू।” प्रभूनाथजी- “दुखी, कनी आर बैसह। ई दुनू बौआ अनचि‍न्‍हार अछि‍। कनी बति‍या लइ छी। नाओं बूझल रहत तँ समैपर समझा-बुझा देबै। नै तँ पोसो नै मानत। तँू तँ बुझबे करै छहक जे हमरासँ दुनू बौआकेँ खटपट तँ नै हएत मुदा हमर बुढ़ि‍याक सोभाव आ बेवहारकेँ तँ तूँ नीकसँ जनै छह, ओ मक्कै लाबा जकाँ दि‍न भरि‍ फटफटाइते रहै छथि‍। तेहेन झनकाहि‍ अछि‍ जे केकरोसँ पटरीए ने खाइ छै। दि‍न-भरि‍ पूजे-पाठमे लगल रहैए, दि‍नक भोजन राति‍ आ रतुका भोरमे पाड़न करैए। जँ कि‍यो लागि‍ओ-भीड़ीओ देतै तँ कहत जे हमर सभ कि‍छु छुबा गेल। एकबेर के कहए जे तीन-तीन बेर नहाएत आ गंगाजलसँ शुद्ध करत। बेटो-पुतोहु आ पोता-पोती जखनि‍ अबैए तँ देखि‍ते बनरनी जकाँ लड़ि‍ते रहैए। तखनि‍ हमर जि‍नगी केहेन अछि‍ से बि‍नु कहने बूझि‍ गेल हेबह।” दुखीलाल- “मालि‍क, ई तँ घरक बात छी। ओइमे हम कि‍ए दखल देब। मनुखो कोनो एक्के रंगक होइए। लोक अपन सुख-दुखक सृजन अपने करैए। अपजश दोसरकेँ लगबैए।” बात समटैत दुखी दुनू बाल-बोधक दि‍स इशारा केलक। प्रभूनाथजी पुछलखि‍न- “बौआ, नाओं की छि‍अ?” दुनू भाँइ एक्के स्‍वरमे अपन-अपन नाओं बाजल- “बुधन-बेचन।” प्रभूनाथ- “मुँह सूखल छह। कि‍छु खेबह?” दुनू भाँइ बाजल- “नै, पनि‍पि‍आइ कऽ लेने छी।” प्रभूनाथजी- “तोहर बापक कहब अछि‍ जे दुनू भाँइ अहीठाम काज करत से करबहक ने?” बुधन- “हँ।” प्रभूनाथजी- “अपन काज कहुना सभ करैए मुदा बीरानक काज कि‍यो करैए आ कि‍यो नै करए चाहैए।” बुधन- “हम अपन आ बीरानमे नै बुझै छी। काज करब।” दुखीलाल बूझि‍ गेल जे बात बढ़ि‍ जाएत। बातकेँ सम्‍हारैत बाजल- “मालि‍क गरीबक बेटाकेँ कथी परीक्षा लइ छि‍ऐ। जे कहबै से करत।अबेर भऽ गेल काजपर जाइ छी।” प्रभूनाथजी- “कनी दरमाहा फरि‍आ लैह जे पछाति‍ कोनो मुहाँ-ठुठी ने हुअए।” दुखीलाल- “मालि‍क, दरमाहा की हेतै। अहाँसँ रूपैआ दस हजार नेने छी। सालमे पनरह हजार हएत। पँच-पँच सए रूपैआ महि‍नाक हि‍साबसँ दुनू भाँइक एक हजार भेल। पनरह महि‍नामे अहाँक रूपैआ फरि‍या जाएत, नै मानब तँ एक मास बेसीए खटि‍ देत। हमरो खेत छूटि‍ जाएत। ने अहाँकेँ दि‍अ पड़त आ ने हमरा। दुनू भाँइ अहींक दरबारमे खाएत-पीअत काज अहाँक अनुकूल करत।” प्रभूनाथजी- “ठीक छै मानि‍ लेलि‍अ। तँू तँ हमरोसँ तेज नि‍कललह। हम तँ बाल-बोधक फेरमे अबोध बनि‍ गेलौं।” अबि‍सवास काल्हि‍ए नूनू बाबूक बेटीकेँ बि‍आह छी। नूनू बाबू बि‍आहक सरमजान सबहक ओरि‍यानमे लगल छला। गि‍रहत आ सम्‍पन्न परि‍वार रहि‍तो रूपैआक अभाव छेलनि‍। चारि‍ लाख टाका, पाँच भरि‍ सोना आ एकटा मोटर साइकि‍ल देहेजपर बि‍आह फाइलन भेल छल। दुलहा इंजीनि‍यरिंग कौलेजक छात्र। सुखी सम्‍पन्न परि‍वार। दुलहाक पि‍ता मोहन बाबू एस.डी.ओ. औफि‍सक बाड़ाबाबू। नीक कमेने-खटेने छथि‍। तँए नूनू बाबू अपन बेटी सुचि‍ताकेँ हुनके घरमे कुटमैती करैक निर्णए नेने छथि‍। नूनू बाबू बहुत परि‍यास करैत तीन लाख रूपैआ मोटर साइकि‍ल, दू भरि‍ सोना ति‍लकक समैमे चुकता कऽ देलनि‍। शेष तीन भरि‍ सोना बेटीक गहना स्‍वरूप बि‍आहे दि‍न देब आ एक लाख रूपैआ जे बँकियौता रहि‍ गेल ओ बेटीक नामे एल.आइ.सी. बीमामे जमा अछि‍। जे दू तीन मास पछाति‍ मि‍लत सेहो चुकता कऽ देब। ति‍लक भेला पछाति‍ बि‍आहक दि‍न ठेकल गेल। मुदा दुलहाक पि‍ता मोहन बाबू बड़ लोभी। ओ मोने-मोन सोचलनि‍, पुतोहु जखनि‍ हमर हएत तँ एल.आइ.सी.क रूपैआ आइ ने काल्हि‍ हमरे हएत। बँकि‍यौता रूपैआ बि‍आहसँ पहि‍ने लऽ लेब तँ लाभमे रहब। मोहन बाबू बि‍आहसँ एक दि‍न पहि‍ने समाद नूनू बाबूक घर पठौलनि‍ जे हमर एक लाख टाका बँकि‍याहा अछि‍ ओ रूपैआ चुकता करि‍ दि‍अ तखने बरि‍याती जाएत नै तँ अहाँ जानू। नूनू बाबू समाद सुनि‍ते जेना देहपर बज्‍ज्‍र खसि‍ पड़ल। ओ सेचमे पड़ि‍ गेला। होश सम्‍हारि‍ मोहन बाबूसँ भेँट कऽ बड़ वि‍नती केलनि‍। अखनि‍ ऐ लेल माफी दि‍अ। हम बेटीबला छी। बहुत चीज-बौसक ओरि‍यान करए पड़त। तैपर सँ बरि‍यातीक सुआगतमे सेहो बहुत खरच हएत। मुदा मोहन बाबू नूनू बाबूकेँ एकोटा बात नै सुनलकनि‍, आ ने आँखि‍क नोर पोछलकनि‍। तखने नूनू बाबू बजला- “खैर, नै मानब तँ अहाँ बरि‍याती लऽ कऽ आउ, हम दरबज्‍जेपर बि‍अाहसँ पहि‍ने रूपैआ बरि‍यातीए घरमे चुकता करि‍ देब तखनि‍ बि‍आह करब।” नूनू बाबू खेत भरना रखि‍ रूपैआक ओरि‍यान केलनि‍। बरि‍याती समैपर आएल। सबहक सुआगत भेल। दरबज्‍जेपर सबहक सोझहेमे एक लाख टाका दुलहाक पि‍ता- मोहन बाबूकेँ चुकता कऽ देलनि‍। दुलहाक परि‍छन भेल, वरमालाक काज शुरू हएत तखने एकटा नव बातक चर्चा भेल जे दुलहा पहि‍ने दुलहि‍नकेँ देखता। पसि‍न भेला पछाति‍ ने बरमाला आ सेनूरदान हएत। ऐ बातसँ कन्‍याँ पक्षमे खलबली मचि‍ गेल आ आक्रोश सेहो बढ़ि‍ गेल। अन्‍तमे निर्णए भेल जे ठीक छै पहि‍ने कन्‍याँ देख लेल जाउ। तखने आगूक काज हएत। दुलहि‍न चित्रा तँ पहि‍नेसँ वरमाला लेल सजले छलि‍। एकटा कोठलीमे दुलहाकेँ लोकनि‍याँ संगे बजौल गेल। ओही कोठलीमे दुलहि‍न चि‍त्रा सहेलीक संगे आएल। चि‍त्रा इण्‍टर पास पूर्णिमाक चान सन सुन्नरि‍। दुलहा देखि‍ कऽ मोने-मोन खुश भेला। कि‍छु गप-सप्‍प सेहो भेलै। तखने चि‍त्रा बजली- “की यौ दुलहाजी, हम अपनेकेँ पसीन भेलौं?” दुलहा मुस्‍की मारि‍ पीठे लागल बजला- “हँ, की हमहूँ अहाँकेँ...।” चि‍त्रा तुरन्‍ते जवाब देलक- “नै अहाँ हमरा पसीन नै छी। तँए आब ई बि‍आह हम कि‍न्नौं ने करब। चि‍त्राक ई निर्णए सुनि‍ सखी-बहि‍नपा, माए-बाप, समाजक बुजुर्ग इत्‍यादि‍ बहुतो गोटे समझेलकनि‍ मुदा एकेठाम चि‍त्रा जि‍द्द धेने रहलि‍ जे ऐ वरसँ हम बि‍आह नै करब।” दरबज्‍जा बरि‍याती-सरि‍यातीसँ भरल छल। ई बात सुनि‍ते लगले सनसना कऽ अगि‍लग्गी जकाँ चारू दि‍स सौंसे गाम पसरि‍ गेल। बहुतो बुजुर्ग लोकनि‍ दुलहि‍नक पि‍ताकेँ बुझा-समझा कऽ कहलकनि‍ मुदा चि‍त्रा अपन दृढ़पर अरल रहलि‍। चि‍त्रासँ कारण पूछल गेल। कहलक- “जखनि‍ दुल्हाकेँ अपन माए-बाप आ सर-समाज कि‍नकोपर बि‍सवास नै छन्‍हि‍ तँ ओ हमरापर बि‍सवास केना करता आ हम केना हुनकापर बि‍सवास करब। दोसर बात जे हि‍नकर पि‍ताजी दहेजक खाति‍र जमीन आइज्‍जत बेचबा सकै छथि‍ तखनि‍ ओ हमरो बेचि‍ सकैत छथि‍ कि‍ने। तँए हम बीख पीब मरि‍ जाएब मुदा एहेन अवि‍सवासी आ दहेज रूपी दानवक बेटा संगे बि‍आह नै करब। ऐसँ नीक तँ हम ओहेन दुल्हा जे गरीबे कि‍एक ने हएत, ति‍नकासँ करब, जे अपन इज्‍जतक संगे दोसरोक इज्‍जत करत।” चि‍त्रा सहेली संगे कोठलीसँ नि‍कलि‍ गेलि‍। दुल्हा आ लोकनि‍याँ सभकेँ ओही कोठलीमे बन्न कऽ ताला लगा आँगन आबि‍ गेलि‍। बि‍आह नै भेल। ई खबरि‍ राति‍ए भरि‍मे चौतरफा पसरि‍ गेल। पंचैतीक बैसार भेल। पंच लोकनि‍ बि‍आह हेबाक बहुत परि‍यास केलनि‍ मुदा चि‍त्रा अपन संकल्‍पपर अडि‍ग रहलि‍। अन्‍तमे जे दहेजक लेन-देन आ सुआगतक खर्च भेल रहै ओ सभटा आपस भऽ जाए। दुलहि‍नक पि‍ता नूनू बाबू बजला- “चारि‍ लाख टाका, दू भरि‍ सोना, मोटर साइकि‍ल संगे सुआगतमे दू लाख टाका खर्च भेल अछि‍ से सभटा आपस कऽ दि‍अ तखने हि‍नका सभकेँ छुट्टी भेटतनि‍। नै तँ हम कानूनक शरण लेब आ दुनू बापूतकेँ जहल कटेबनि‍।” सभ पंचक वि‍चार भेलनि‍। बात तँ उचि‍ते ने नूनू बाबू कहै छथि‍। कोनो जबरन जुर्माना तँ नै...। दुल्हाक पि‍ता मोहनबाबू छह लाख टाका, सोना, मोटर साइकि‍ल घरसँ मंगबा नूनू बाबूकेँ पंचक बि‍च्‍चेमे आपस कऽ देलकनि‍। तखनि‍ हुनक बेटाकेँ कोठलीसँ बाहर नि‍कालि‍ देल गेल। जहि‍ना आन गामक चोटाएल कुकुर नांगरि‍ दबौने दुलकी दैत अपन गामक बाट पकड़ि‍ सोझहे-सोझ जाइत रहैए तहि‍ना सभ कि‍यो वि‍दा भेला। चि‍त्रा पि‍ताक मुरझाएल मुँह देखि‍ बाजलि‍- “बाबूजी, अहाँ एक्को पाइ चि‍न्‍ता नै करू। हम मनुख संगे बि‍आह करब। पढ़ल-लि‍खल कम्‍मो रहत तइले एको पाइ चि‍न्‍ता नै। एही खाति‍र ने एते झमेल होइए। एक्को पाइ चि‍न्‍ता नै करू।” ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)२००४-१५. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम वि‍लास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेता, से आशा करै छी। रचनाक अंतमे टाइप रहए, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/ संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै। ऐ ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-15 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.co.in पर संपर्क करू। ऐ साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल।५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सिद्धिरस्तु

fa दे ह fate Videha चमक www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Formightly ejournal fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक नि मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA —- 'विदेह' १७८ म अंक १५ AS २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक २३७८) हल ऐ अंकमे अछि:- पल्लवी- ger विहनि कथा राम विलास age दोसर कविता संग्रह- कर्म बिनु जग सुन्ना / fers विहनि कथा चोरविद्या Ole ws उठले रही कि रधिया दादी मुहँ सुनलौं- “रज fad चोर विद्या भारी as BP रातियेमे आकि भोरमे कियोहुनकर टाट परहक सजमनि चोरा क$ तोड़ि नेने रहन्रि तैए गारियो पढ़ैत रहथिन आ बजबो केली जे शज fears चोर विद्या भारी शनि दिन रहने भिनसुरके स्कूल रहए | मास्टर साहैबसैं पुछलियनि- “सरजी, चोर विद्या केकरा कहै के?” सरजी कहलनि- “ag विद्यासँ चोर चोइर करैए सएह भेल चोर fea”

fa दे ह fate Videha चमक www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Formightly ejournal fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक me मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA फ्रेण्ड हमरा अँगनाक ऐंठारपर एकटा UR ST एकटा मेना चरौर करए आएल। से कोनो आइए नै snug अबिते रहैए। लगेक बैसबीटमे रहबो HT | भोर होइते पहिने GH उठैए। पछाति मेना | मेनाकें संग करैत Ua दुनूटा निकलैए | एकठाम रहने दुनूमे बेवहरिक सरोकार FS Yar ने जाति छ, जे एक टाइटिल eet आ ने एक रंगक अछि, जे जातियो रहितए। sitar जातियोमे रंगरंगक टाइटिल तैँ चलिते छै। भिनसुरका dike भोजन केला पछाति मेना aa कहलक- “गौआँ, दुनू गोरे फ्रेण्ड लगा लिअ।” मेनाक बात सुनि पौरके कनीकाल मने-मन हिसाव जोड़लक | तैँ St पड़लै जे भलें एके ढेरीपर दुनू गोरेक गुजर किए ने चलैतहुअए मुदा दुनू गोरेक खान-पान तैँ एक नइ अछि | ओ साकठ अछि आ अपने वैष्णव छी | पौरकी असमंजसमे पड़ि गेल | BAT पुछलकै- “गौआँ, सोझहे hos लगेबह आकि ओकर नीको-बेजाए फरिछा लेबह?” पौरकीक विचार मेनाकें जैंचलै। बाजल- “गौआ, अहाँकें दुश्मन बेसी अछि, हमरा कम अछि । लाभ बेसी अहींकेैं अछि, जे जखन दुश्मन औत तैं हम अढ़ HS लेब ।” पौरकी बाजल- “दछिनमुहँ गंगाजी दिस BA दुनू गोरे पहिने सप्पत खाउ, तखन फ्रेण्ड लगाउ |” नोट- ऐ कथाकें लिखैमे हमर बाबा- श्री जगदीश प्रसाद मण्डलक सहयोग भेटल अछि | हुनका प्रणाम्‌ । संगे ag सभकें प्रणाम्‌ ।

fa दे ह fate Videha चमक www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Formightly ejournal fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक नि मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA राम विलास साहुक दोसर कविता संग्रह- कर्म बिनु जग सुन्ना रामविलास साहु कविता कर्म बिनु जग सुन्ना सूर्ज बिनु अकास सुन्ना बिजुरी faq वादल सुन्ना जीव बिनु धरती सुन्ना कोयल बिनु वगिया सुन्ना फूल बिनु फुलवारी सुन्ना शेर fag वन Gar नयन बिनु जग सुन्ना प्राण बिनु देह सुन्ना प्राजा बिनु राज्य सुन्ना सत्य बिनु न्याय सुन्ना वाद्य बिनु संगीत सुन्ना नारी बिनु समाज सुन्ना दूध बिनु भोजन सुन्ना पानि बिनु Tet Gat देव fag मंदिर Gar दया बिनु धर्म सुन्ना प्रेम बिनु भक्ति सुन्ना कर्म बिनु जग सुन्ना |

fa दे ह fate Videha चमक www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Formightly ejournal fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक नि मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA रौदी माथपर हाथ At खेतिहरक shad गिरलै नोर धरती सुखलै धान जरलै खेतमे फटलै दरारि सुखले साउन-भादौ बितिलै खेतिहरक नसीब फुटलै खेतसैं उड़े छै धूल जरैत खेत देखि दिल जरैत जरि गेलै सबहक तकदीर की खेबै अपना की खेतै थिया-पुता ana घटलै शरीर पूर्वा-पच्छिया फों क गेलै सभ नक्षत्र बनलै ठक ऋतु बदललै मौसम बदललै धतरीक दरारि फटले रहलै पानि बिनु सभ जीब तेजै छै नित्य परान रौदी-दाही बहुते देखलौं एहेन जुलुम कहियो नै देखलौं aed ओरूदे Tet परान ई मुसिबत के हरि लेतै जखन भगवान, सरकार wage बनल कै खेतिहारक दुख के पतिएतै मांगै छै पानि तैँ डीजलक अनुदान AES |

fa दे ह fate Videha चमक www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Formightly ejournal fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक नि मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA सिम्मर केर फूल लाल-लाल सिम्मर-फूल देखि सुग्गा ललचाइ फूल रंग भोगार भेल सुगा गेल लुभाइ अपन उद्देश्य बिसरि सिम्मरकें सोइरी लेलक बनाइ Met सेबैत-सेबैत सुग्गाकें fava गेल हेराइ फूल फलसैं बनैत धरि सुग्गा रहल उपास फल एहेन ललिचगर लोल मारिते उड़ि जाए सुग्गाक उपास नै टुटल पारनमे की खाएत आश लगौने सुग्गा सिम्मरपर भेल hare लोभमे फँसि सुग्गा अपने कर्मपर पचताए शोगाएल सुग्गा बाजल रूप रंग देखि नै लोभाउ रूपक माया Set HA भुखले तेजब प्राण ।

fe दे ह विदेह Videha re www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेहप्रथम मैथिली पाक्षिक ¢ पत्रिका"विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक १७८) मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA ओलंपिक बच्चासँ बूढ़ भेलौं बड़-बड़ खेल देखैत रहलौं पैंसठ बरख आजादियोक भेल Fer पूर्ण आजादी कहियो ने देखलौं आइ धरि सरकारक कठखेलमे ओलंपिक खेल शुरू भेल जनताक विकेट गिर गेल देसक रूपैया खेल-खेलमे मूड़ि-सूचि सभ सचि गेल सभ शहरमे स्टेडियम बनि गेल गाममे बेरोजगारी बढ़िगेल आजाद देशमे के आजाद भेल आजादीक झंडा फहरौने की ओलंपिक तगमासँ गरीबी-बेरोजगारी मिट गेल जखन आजाद देशक जनता अखनो बाटीमे भीख मंगैए तखन सरकार ओलेंफिक्रमे अरबो रूपैया किअए लगबैए 6

fe दे ह विदेह Videha re www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेहप्रथम मैथिली पाक्षिक ¢ पत्रिका"विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक १७८) मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA एतेक रूपैया खेती-उद्योग आ रोजगारमे किअए ने लगबैए जखन देशमे एतेक गरीबी कै आलंपिककें की जरूरी छै जखन देशक आत्मा गाम-घरमे बसै छै a गाम-वासी किअए एतेक उपेक्षित कै जे गामक लोक नरकमे जीबै-मरै है गामवासीक लहु बेचि सरकार ओलंपिक खेलै कै ओइसैं गरीबकें की भेटलै जखन Me छै पहाड़ तैँ मूस भागि जाइ S| 7

fe दे ह विदेह Videha re www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेहप्रथम मैथिली पाक्षिक ¢ पत्रिका"विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक १७८) मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA मेघक बरिआती- तारबतोर पूरबा बहै दिन-रा३्त्त बहै नै थके गति मन्द पड़िते गर्मी चढ़ल असमान उसनियाँ करनाइ शुरू भेल Usa अचरज Heat नै भेल गर्मी भगनै ले मेघक बरिआती शुरू भेल भंडार HU गरजैत ढनकैत सेना संगे मेघ धमकि गेल आगू-आगू re बिहारि Ure संगे शीतल व्यार ढन-ढन ढमकैत बिजुरी चमकैत मेघक बरिआती आबए लगल देखते मेघक बरिआती गर्मी जान बचा भागए लगल मेघक बरिआती पछारैत गेल झम-झम बर्खा बरसि गेल 8

वि दे ह fate Videha Were www.videha.co.in fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेहप्रथम मैथिली पाक्षिक ¢ पत्रिका"विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक aise me मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA गर्मीक परकोपसैं छुट्टी भेल मेघक बरिआती घूमि घर गेल | 9

fe दे ह विदेह Videha re www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेहप्रथम मैथिली पाक्षिक ¢ पत्रिका"विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक १७८) मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA पुसक राति पुसक राति जाड़क मारल थरथराइत देह केना बचाएब प्राण | फुइसक घर खोपड़ी सन केना रिश्बताएब पुसक राति WH टाट-ठाठ झलफाँसी कनकनी हवा छुबैए प्राण ATS जरा-जरा बचबे छी कहुना प्राण मुदा धिया-पुताक केना बचतै प्राण । नार-पुआरक बिछौना गोनरिक छै ओढ़ना पजरेमे सटि बिलाइ दुबकल छै 0

fe दे ह विदेह Videha re www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेहप्रथम मैथिली पाक्षिक ¢ पत्रिका"विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक १७८) मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA अबगरहमे S sitet जान सबहक He सुनै छी पुसक रातिकें फूसि नै बुझियौ कतेकोकें लड़ छै प्राण माघो मास अगुआएते कै सुनि क$ करेजा दरकैए केना भेटत Vs त्राण आब लगैए नै बचत प्राण के करत गरीबक कल्याण | q

fe दे ह विदेह Videha re www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेहप्रथम मैथिली पाक्षिक ¢ पत्रिका"विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक १७८) मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA केना कहब भारत महान जे देशक लेल तियाग करैए ओकरे जिनगी नरक सन बनल-ए गरीबक दुख कोइ नै GST हाथ रहितो नै छै कोनो काम सूखल खेत नै भेलै धान जिनगी fad 3 बैसल मचान तौनी कोपीन af जे tect गाम-समाजकेँ पकड़िचललै आफतमे मिल देशकें बचैलके गोली खा देलकै बलिदान देश अजाद भैलै मुदा दिन-दुखियाक दुख कियो ने बटलकै गरीब बनल H अखनो गुलाम सभ धन सरकारे लेल कै गरीब जनताक हक छिनलकै आइ धरि नै भेलै गरीबक उत्थान भुखले पेट तेजै छै प्राण Sag पसिना सभ दिन बहबै कै 42

fe दे ह विदेह Videha re www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेहप्रथम मैथिली पाक्षिक ¢ पत्रिका"विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक १७८) मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA आगू बढ़ि सीना तानि ओकरे दुख नै सरकार बुझलकै ठेल देलकै नरकमे जानि मरलकें मारैत रहलै जानि बूझि बिनु लाभ-हानि देशक समस्या बढ़ैत जाइए सरकार ओकरा दबबैत जाइए समस्या बनल अछि ज्वालामुखी समान केना HET भारत महान | 3

fe दे ह विदेह Videha re www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेहप्रथम मैथिली पाक्षिक ¢ पत्रिका"विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक १७८) मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA जीयब केना जीयब तैँ जीयब केना दुनियाँ बदलि गेल जेना चारूकात अधरमे कुकरमे दिन-दहारे डाका पड़ैए चौबटियापर इज्जति लुटाइए गाम-शहरमे दारू बिकाइए मानव पीब दानव बनैए चोरी-डाका सिनाजोड़ी करैए बीच बजार बलत्कारी होइए कतए चलि गेल धर्मक नीति जेनए देखियौ कुरितिये At जीयब तैँ जीयब केना दुनियाँ बदलि गेल ST | चलैत बाट डर लगैए चौर सिपाही खेल करैए सरकारक कानून SET बनलए रिश्नर्दोषी लेल जहल बनलए 4

fa दे ह fate Videha we www.videha.co.in fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेहप्रथम मैथिली पाक्षिक ¢ पत्रिका"विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक १७८) मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA दोषी घूमि-घूमि मौज करैए सरकार अपराधीक बीच गरीब जनता पीसाइत रहैए सभ हत्यारा कंश बनलए सरकार धृष्टराष्ट बनलए अधिकारी मंत्री माल लुटैए देशक जनता बौक बनलए देखि कवि सोचमे पड़लए जीयब a site केना दुनियाँ बदलि गेल जेना। । 45

fe दे ह विदेह Videha re www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेहप्रथम मैथिली पाक्षिक ¢ पत्रिका"विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक १७८) मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA मोनक आगि पूर्णिमाक art मलिन भेल देखि तरेगन कनखी ART सोलह श्रृंगार काएल भेल मलिन | पिया बिनु भेलौं विरहिन रातिक फूल भोरे भेल मलिन । मृग तृष्णामे मृग बौआइए भटकि-भटकि जहिना परान THAT | तहिना मन हमर भरमैए मोन आगि रहि-रहि VT I नै पिया पियास मुझाइए सोलहकलासँँ सजल चानकें जहिना argu नै देखैए तहिना परदेशिया पिया अपनाकें विरान FAT | रिजनरदैयाकें प्रेम केना जगतै प्रेम बिनु दुनियाँ केना चलतै। 6

fa दे ह fate Videha we www.videha.co.in fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेहप्रथम मैथिली पाक्षिक ¢ पत्रिका"विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक हि मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA की चकबा चकबी जकाँ साँझ पड़ैत बिछुड़ि पड़तै? पूर्णिमाक चन देखि राति बितेतै कहैए कवि राखू मोनमे धीरज एक दिन मेटत अमृतसैँ प्यास अपन मोनक arith राखू TEL । हा

fe दे ह विदेह Videha re www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेहप्रथम मैथिली पाक्षिक ¢ पत्रिका"विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक १७८) मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA मिधिलाक पियास मिथिलाक पियास नै मुझा सकल कोइ जे मुझबैक प्रयासो केलन्हि ओ सभ दिन ठकिते रहलै मिथिलाक पियास बढ़ैत गेलै अपन अश्रुकें पीबैत गेलै पियाससैं मन व्याकुल भेलै मिथिला तैँ मैथिली लेल पियासल मैथिली-रस पीबए ae wet से रस BITS छलै पियासल मिथिला तड़ैप-तड़ैप मैथिली लेल मड़ैत रहलै कहैले मैथिली भाषा सभ जनक भाषाछी Wer सभ दिन अपनेमे झगड़ैत रहलै एक Sata छुबाइत रहलै au मैथिलीक विकास नै भेलै 8

वि दे ह fate Videha Were www.videha.co.in fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेहप्रथम मैथिली पाक्षिक ¢ पत्रिका"विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक हि मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA मकड़जालमे फँसल रहलै ag ang धरि नै मिथिलाक पियास मुझलै जाधरि मिथिलामे मैथिली सभ जनक भाषा नै बनतै ताधरि नै मिथिलाक पियास मुझतै | 9

fe दे ह विदेह Videha re www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेहप्रथम मैथिली पाक्षिक ¢ पत्रिका"विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक १७८) मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA किअए wars St Bad जखन Gals छी au कि परिवर्त्तन देखै छी काज जखन नै छुबाइए देहक लहू पानि नै बनैए नै किनको लकबा मारैए aa छुबाइ छी? पानि छुबाइए Fal दूध नै पान-मखनसैं मान बढ़ैए चुड़ा-दहीक भोग लगैए भात देखि Gar मन ओकिरऐ भेद-भावक जाल बना मनुक्खकें मनुक्ख नै बुझै छी समाजकें कमजोर केना छी एतेक थिनौना कुकर्म करै छी तैयो अपनाकें पैघ get छी गंगा नहाए पूजा करै रे उन्टे कहै छी छुबाइ SH | 20

fe दे ह विदेह Videha re www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेहप्रथम मैथिली पाक्षिक ¢ पत्रिका"विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक १७८) मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA सूखल खेत आ भूखल पेट सूखल खेत जरैत जजाति खेतक दाररि देख-देख दरकि करेजा जरैत रहलै पानि बिनु खेत बज्जर भेलै किसानक तकदीर जरलै की खाए बचैते परान महगीयो तेतबे के Gezoht पतीक erat सरकार विकल कै छियासठि बर्ख अजादीक भेल देशक किसान कंगाले अछि भरल नदी पानि बहति रहलै नै बनलै are सुलीस गेट केना जेतै खेतमे पानि नै बनलै अखनि धरि नहर केना उपजतै खेतमे धान BS वयान सरकार करै कै नै भेलै खेत-विकासक काम 2

वि दे ह fate Videha Were www.videha.co.in fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेहप्रथम मैथिली पाक्षिक ई. पत्रिका"विदेह' १७८ म अंक १५ Ag २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक हि मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA देशक लेल सभ दिन दैत रहलै किसान अपन खून-परान War आइ धरि नै सरकार कहियो देलकै fart केना हेतै देशक कल्याण सूखल खेत भूखल पेट केना Sad गरीबक परान | 22

fe दे ह विदेह Videha re www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेहप्रथम मैथिली पाक्षिक ¢ पत्रिका"विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक १७८) मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA के sad तोहर जान चिल्का कनैए दूध पीबैले देखि दुखित माए कनैत बाजलि- “सुक्खल देह हड्डीए देखाए लहूक कतरा दुःखे लेल अछि SHS दूधक फेनगीओ ने चलैए जे तोरा चटा जीएबो wig पीब पेट भरतो तैँ पीब ले सभटा हमरा देहसैं ।” चिल्का नोर बहबैत लगले सूरमे कनैत रहल अस्सी बर्खक बुढ़िया दादी Sud ठेंगहति लग आबि heard बाजली- “अपना ने a गाए-महिंसक दूध अछि जे पानि फेंटि पीआ दैतिओ wife तँ हमरो कमा खिऐबितैंए एक हाथ सेवा सभ fer करितैए सबहक असिरवाद पबितैए 23

fe दे ह विदेह Videha re www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेहप्रथम मैथिली पाक्षिक ¢ पत्रिका"विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक १७८) मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA भगवानो t बेमूख बनल छौ माए तोहर रोगही-टेटही छौ ।” मुदा, fica फकसीहारि ped tect माए ममता भावपूर्ण पुन: बाजलि- “आन दूध बौआ नयनसैं नै देखलौं Foie कहियो सुआद cet के देतौ दूध जान बैचबैले नै बैंचल छै धरतीपर इंसान कथी पीआ as तोरा जीएबो से नइए कोनो इंजाम माए-बेटा आ fet दादी छी तीनू तीन जान तीनू मरि संगे जाएब श्मशान एहेन स्वार्थी दुनियाँकें की देखब जैठाम गरीव Bite छै pope समान |” Sz साँस छोड़ैत चिल्का जेना fers बाजि रहल अछि भूखक आगिमे छूटि रहल प्राण नै कोइ अछि दयावान ऐठाम 24

वि दे ह fate Videha Were www.videha.co.in fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेहप्रथम मैथिली पाक्षिक ¢ पत्रिका"विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक aise me मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA चहुदिश देखै छी बदलल इंसान रावण-कंशर्सै पैघ शैतान | 25

fe दे ह विदेह Videha re www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेहप्रथम मैथिली पाक्षिक ¢ पत्रिका"विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक १७८) मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA आगिए आगि सगरो लगल छै आगिए आगि भागि पड़ा केतए जाएब DAS जाइ छी दइए SHIT तन जरैए मन जरैए नैनक नोर सूखि जाइए जेनए देखै छी आगिए-आगि केनए भागि जाएब हौ भाय सगरो लगल छै आगिए आगि। मनक आगिसँ तन धधकैए दहेजक SI समाज जरैए free आगिमे दुनियाँ जरैए भ्रष्टक se भ्रष्टाचार धधकैए महगीक आगिमे जनता जरैए पेट्रोल-गैसमे देश जरैए ay भागि जाएब हौ भाय सगरो लगल छै आगिए-आगि। 26

fe दे ह विदेह Videha re www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेहप्रथम मैथिली पाक्षिक ¢ पत्रिका"विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक १७८) मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA के मुझाएत ऐ आगिकें सबहक लहू पानि बनल छै जिनगी बनल छै जेजाल झरकि-झरकि सभ AS के लगेलक ई सगरो आगि केकरो SINS नै देखै कै ay भागि जाएब St भाय सगरो लगल & आगिए-आगि। । 27

fe दे ह विदेह Videha re www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेहप्रथम मैथिली पाक्षिक ¢ पत्रिका"विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक १७८) मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA दू नजरि रूप स्वरूप समरूप रहि सभ मनुख Are St Us लहू समरूप रहि भेद Pig किए He छी हीन भावना रखि ताकि URS छुबाइ छी बात करै छी सर्वहीतक सबहक axe किए नै aie छी अपना स्वर्ग तकै छी दोसरकें नरकमे Set छी सभ एक्के छी तैँ दू नजरि किए ah Ht रूप स्वरूप समरूप रहि सभ मनुख AGS ST | बात बनेलासँ नै बात बनत कर्म बिना नै जिनगी चलत अधर्मसै नै कहियो काज चलत सत्‌ बिनु नै इंसान बनत 28

fe दे ह विदेह Videha re www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेहप्रथम मैथिली पाक्षिक ¢ पत्रिका"विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक १७८) मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA केना कहब के इंसान छी बेइमानो कहब के शैतान a शैतान-बेइमानक बिवबिचौआगमे सभ इंसान ओझराएल St | ओझरी-पोटरीमे अटैक रहि भितरे-भीतर छुड़ी चलबै छी । रूप स्वरूप समरूप रहि सभ मनुख Age छी | राम विलास साहु- fare विहनि कथा राम विलास साहु 29

वि दे ह fate Videha Were www.videha.co.in fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेहप्रथम मैथिली पाक्षिक ¢ पत्रिका"विदेह' १७८ म अंक १५ AS २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक हि मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA स्कूलक खिचड़ी एकटा अभिभावक तमसा HS स्कूल पहुँचला। हेड मास्टरकेँ उपराग दैत बजला- “पढ़ाइ-लिखाइ तँ जएह-सएह होइए। खाली खिचड़ीयेमे बेहाल te छी। sats घिया-पुता पढ़बे नै करतै waht F हाकिम-हुकुमक तैँ बाते छोड़ चपरासियो नै बनतै। एसैं नीक तै प्राइवेटे स्कूल ने SA दूटा पाइये ने लगै है; पढ़ाइ a नीक होइ छै। आइ तक ऐ स्कूलक बच्चा पढ़ि Hs कोन नाम कमेलकै |” मास्टर सहाएब MRT भावसैँ अभिभावककेँ समझबैत बजला- ‘Sq, तमसाउ नै कोनो हम खिबै छी खिचरी | Ft सरकारक योजना S| ऐ योजनासँैँ लाभो बहुत छै । निच्चासँ ऊपर धरि सभ माले-माल होइ कै ।” अभिभावक बजला- “से केना?” मास्टर सहाएब कहलखिन- 30

वि दे ह fate Videha Were www.videha.co.in fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेहप्रथम मैथिली पाक्षिक ¢ पत्रिका"विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक हि मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA “सहीमे प्राइवेट स्कूलक बच्चा सभ पढ़ि-लिखि हाकिम- हुकुम Tt छै। आ ईहो देखैत Fa जे ओ सभ माएबाप, गाम-समाजकें छोड़ि एवं मातृभूमिकें बिसरि जाइए, बूझू बौर जाइए | A ai ऐ स्कूलक बच्चामे नै GISST OOO 3.

वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १७८ म अंक १५ Ag २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक नि मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA चोर-सिपाही माघ मास अन्हरिया राति। ओस-कुहेससैँ हाथो-हाथ ने सुझैत | एकटा चोर aR Hs भागल जाइ छल। तखने एकटा सिपाही गस्तीमे आबि रहल छल | चोर सिपाहीकें देखिते भागल | चोर बूढ़ छल मुदासिपाही acts wet | भागैत ah रपटिक५ पकड़लक सिपाही | पकड़ि हाजति लेने जाइ छल | ake dard देह थरथराइ छल । मनेमन ईहो सोचै छल जे केना ऐ यमराजक TI बचब । थोड़े आगू चलि ms देखल जे सड़कसँ हटि एकटा घूर we | आगिदेखिते चोर बाजल- “सर, अहाँ Ud रहू आ हम sits TS कनी बिड़ी नेसने अबै छी?” सिपाही कने सोचि es बाजल- “अरे, तूँ हमरा मूर्ख बुझे SU an जे तूँ भागि जेमे तँ हम तोरा पतालमे खोजबौ? चूपचाप एतए बम हम aad बीड़ी सुनगेने अबै BPO 32

वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १७८ म अंक १५ Ag २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक नि मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA इमानदारीक पाठ ननुआँ पुछलक कनुआँसैं- “भैया आइ-काल्हि ct गामोक स्कूलमे बड़ सुविधा Ae ठै आ पढ़ाइओ Ste छै तैयो वि्याथी सभ शहरक स्कलमे किए पढ़े छै?” कनुआँ जबाब देलक- “गामक PTA इमनदारीक पाठ आ शहरक HATA रोजगारक पाठ पढ़नै कै ।” “से केना?” -ननुआँ पुन: Yous | कनुआँ उत्तर देलक- “गामक इस्कूलमे एहेन पाठ Ves S जे कहना साक्षर AS जाए, गाए-भौंस चराबए आ नमहर भेलापर हर-फार जोतए, खेती HT | अन्न उपजा HS अपनो खाए आ आनोकेंखियाबए | ई छिऐ ने इमानदारीक पाठ मुदा शहरक इस्कूलमे विद्यार्थी सभकें रोजगारक पाठ uss S| ait ay पढ़िःिश्लखि रोजगार लेल आन-आन शहर चलि जाइ छै। अपन घर-परिवार आ समाज सेहो छुटि जाइ छै। TA बेमुख as Ws छै। आब तोहीं कह जे इमानदारीक पाठ के पढ़तै” OOO 33

वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १७८ म अंक १५ Ag २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक नि मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA बौआ बाजल पढ़ल-लिखल बेरोजगार छी मुदा दिन केना He छल तकर कोनो सुधि-बुधि नै छल | Ba परिवारक बोझ, आगू पढ़बाक इच्छा रहितो fee नै Hs सकलौं | एक दिन मनमे फुराएल जे किछु नेना-भुटकाकें पढ़ाएल जाए। gal a हम बुड़िआएले छी औरो बुड़िया जाएब। एक दिन भोरमे बौआ-बुच्चीकें ओसारपर पढ़बै Oeil । दुनू बेरा बेरी WA YOU आ हम उत्तर दइ छेलिऐ। अहिना स्थितिमे बौआ पुछलक- “लोक ud मेहनतसैं किए पढ़ैए, जे पढ़ैए सेहो आ जे नै पढ़ैए ओहो तै एक ने एक fy मरिऐ जाइए?” बौआकें हम समझबैत कहलिऐ- “जीवन-मरण तैँ प्रकृतिक Fart छी | ओ निरंतर होइत रहैत अछि ।” बौआ फेर पुछलक- “तखनो लोक किए पढ़ैए?” “मनुख पढ़ि-लिख ज्ञान अर्जित करैए आ atts ज्ञानसैँ अपन जिनगीकें सुलभ बना असलीजिनगी stag | लोक पढ़ि-लिखि डाक्टर-इंजिनियर, औफिसर, कवि लेखक आ उपदेशक इत्यादि बनैए | अच्छा ई कहह जे तूँ की बनब5?” बौआ बाजल- “हम पढ़ि-लिख कोनो काज क$ सकै छी मुदा कवि-लेखक नै बनब | सभ कमा Hs सुख मौज जिनगी बितबै छथि मुदा कवि-लेखककें कोनो कमाइ नै होइत GS | अखबारमे पढ़लिऐ जे मरला बाद पुरस्कार Fes 000 34

वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १७८ म अंक १५ Ag २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक me मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA घूसहा घर- मुखियाजी पंचायतक गामे-गाम आम सभाक बैसार लेल Seat दियौलनि। गामक लोक सभ एकजुट As आम सभामे पहुँचला | सभाकें संवोधित करैत मुखियाजी बजला- “ऐ बैसारमे सभ fat मिल Levin लिअए जे पंचायतक गरीब आ मसोमात,जिनकर घर टुटल-फाटल होइ वा रहबा योग नै As छै। ओइव्यक्तिक सूची बनाएल VIS | हुनका TAH सरकार ACH घर बनबैले इन्दिरा-आवास योजनासँ रूपैया भेटतनि।” वार्ड सदस्यक सहयोगसँ मुखियाजी लग इन्दिरा आवासबला Felt wate | बिहानेसैं मुखिया जीक दलाल सभ सूचीमे नामांक्ति व्यक्तिसैँ le es एक-एकटा फार्म द५ कहि देलक जे फार्म ak ws मुखियाजी लग जमा करै GS आ बैंकमे खाता Vel खोलबा AS TS | ST संग पाँच हजारूपैआ Set दिअए Gea | तखनि इन्दिरा आवास भेटै ST | बहुत We ते अपन गाए-महिः/स-बकरी-छकरी-गहना-जेबर जेकरा जे गर लगलै FA Hs रूपैआ gs Stan उठेलक। किछु आदमी एहनो छल जेकरा सकती नै भेलै ओ वंचित रहि गेल । बदलामे पाइबला लोक अपना ATA उठा लेलक | fee fore बाद रघिया मसौमात इन्दिरा-आवास ले फार्म भरि मुखिया जी लग पहुँचलीह | मुखियाजी फार्म पढ़ि बजला- “पहिले इन्दिरा आवासमे पचीस हजार भेटै wel आब चलिस हजार Ae S Yar आगू भेटैबला ass हजार Fed | WH पच्चीसमे पाँच हजार an अखनि चालिसमे दस हजार खर्चा लगे छै मुदा आगू साइठमे पनरह हजार लगतै |” wear gad कानि-कलपि क५ अपन मजबूरी सुनौलकनि। मुखियाजी मुड़ी डोलबैत बजला- “Ts काकी, हमरे HAS नै ने Se कै, डेगेडडेग हाकिम-हुकुम बैसल S | ओहो तैँ कठ्या Gra Hs रखने रहे छै तेकरा की हेतै। आ हमरो कोनो दरमाहा भेटै S हम्हूँ तै ओहीमे निमहै छिऐ। AT हेतौ जे हम अपनबला नै लेबो ।” सुनि रघिया सभ बात सुनि परिस्थिति बूझि आपस आबि गेलीह। बुधनी बुढ़िया maa ae उमेरगर। जुआन्पिमे घरबला बाढ़िमे डुमि मरि गेलखिन | ger बेटाक संग get कहियो हिम्मत नै हारलि। संघर्ष करैत आत्म-रिःनर्भरतापर थियो-पुतोकेँ सक्कत बनौने छथि। हलाँकि आर्थिक रूपे कमजोरे छथि | एक दिन मुखिया जीक नजरि बुधनी बुढ़ियापर पड़लनि आ देखिते पुछलखिन- “गामक बहुतो लोक सभ लाभ लेलकमुदा तूँ कोनो फारमो नै भरलीही?तोरा तैँ दूटा लाभ भेटतौं । एकटा वृद्धा-पेंसन ओ दोसर इन्दिरा आवासक |” बधनी बजलीह- “OR कोनो खर्चे-वर्चो लगैए?” मुखियाजी- 35

वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १७८ म अंक १५ Ag २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक नि मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA “हैं, वृद्धा-पेंसनमे पाँच सए आ इन्दिरा-आवासमे पनरह हजार ।” बुधनी- “हम ई लाभ नै लेब ।” मुखियाजी- “किए नै लेब?” बुधनी- “चूस ES HS घर बनाएब SF ओइ घूसहा घरमे रहैबला केहेन हेतै?” मुखियाजी आ बुधनी gfe गप अपना घरक कोनचर eos दिया मसोमात सुनैत wells अपना Aaah बुझबैत बजलीह- “इन्दिरा आवास किए घूसहा घर कहियो ने ।000 36

वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १७८ म अंक १५ Ag २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक me मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA जातिक भोज as फूलबाबूक बेटाक बिआहक भोज अछि। गौआँ सबहककें आशा छेलनि जे ई भोज हमरो सभकें खेबाक अवसरि Fed | किएक तैँ ऐ भोजकेँ सफल बनेबाक लेल कुतो जाति-वर्गक लोकक सहयोग छेलनि। कियो जारनि फारए & feat साफसुथरा करए। कियो बर्तन-बासन AS छल | गामक डोम tas बनलछिट्टा- पथिया, Sha, डाल-दौरा,चडेरा बना देलक | मलि फूल आ फूलक माला, कुमहार वर्तन-वासन, महला पोखरिसैं ATS मारि मनक मन ढेर लगौलक | कतेको करीगर आ हलुआइ सभ भोजक सम्श्री बनबैमे भिरल छल | भोजमे सहयोग Fay जातिक लोकद्वारा भेल | मुदा खाइक अवसर सभकें नै भेटलनि | ओतबे त्रै किनको नगद टाका देल गेल तँ किनको उधार रहलै आ किनको सीदहा Veet | मुदा भोज खाइक नोत सभकें नै भेटलै। भोजक आयोजक भलहिं फूलबाबू छला मुदा करबारी तँ सभ जातिक लोक छेलखिन | ow लोकक मनमे, जिनका सभकें नोत नै देल गेलनि। हुनका सबहक मनमे ईहो Shs जे काज जखनि नै wang छै तैँ पाँतिमे बैस खेलापर पाँति केना छुबा जेतै LOCO 37

वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly cjournal fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका"विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक १७८) मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA शिक्षाक महत जीबछ घरजमैया छल | हुनकर पत्नी रधिया, माए-बापक एकलौती बेटी बड़ दुलरि छलि | रधियाक पिताकें चारि बीघा चास-बास, कलम-बाँस आ गाए-बड़द छल | खेतीबाड़ीसैं जिनगी चलै छेलनि। सोझमतिया रहने कोनो क्षल-कपट नै रहनि | फ्तिमरू छला | परिवारमे अक्षरक बोध केकरो नै रहनि खाली जीबछ ट-ब HU HS साक्षर छल | tearm पिता जरूरति पड़लापर जखनि समाजमे कोनो लेन-देन करै Gel F औंठेक निशान as छला। एक साल एहेन AAU भेलै जे इलाकाक इलाका बाढ़िपानिसैँ दहि गेलै। ने नेवान करैले अन्न आ ने दाँत खोदहैले नार-पुआर भेलै। दोसर साल रौदी As Tet एक तैँ बाकि मारल, दोसर रौदीक जरल | गरीब-गुरबाकेँ गुजर कटनाइ़ पहाड़ भड गेलै। केतेको परिवार तै आन-आन गाम अपन-अपन कुटुमैती जा fe दिन wag wee | मुदा ई सुक्धि सबहक नशीव नै छेलै। गामक नहर जमीनदार, मालिक-गुमस्ता जे छला हुनका तैँ पहुलके सालक पुरना अन्न बरवारीक-बखारी भरल छेलनि | हुनका सभकें कोनो चिन्ता नै छेलनि। रधियाक माए- बाप FS रहने आन गाम जा केना काज करत | ओ दुनू गामेमे eres कहियो मरूआ तैँ कहियो धान ct कहियो छाँटी चाउर कर्जी ल5 BAU काटै छल | कर्जी देनिहार मालिक सभ विपतिक समैमे गरीबक शोषण Vel करैत | एक मन अन्नक बदला दू मन आ दोसर साल चुकेलापर तीन मनक करारीपर कजालगबैत। तेकर बादो औंठाक निशान एकटाकें के कहए जे तीन-तीनटा छाप कागतपर लड़ छेलखेन | गरीब अपन परान बैचाएत आकिछापक परबाह करत | कर्जी खेनिहार थोड़े Gat छल किछाप Va कागतपर आ हमर जमीन जत्था चलि जेतै तक्‍्खापर | एक दू साल aay ferret | जीबछ अपन सौसुराइरिएमे सासु-ससुरक सेवा आ खेती-बाड़ी Hs गुजर-बसर करै छल | fee समए पछाति सासु-ससुर AR गेलखिन । श्राद्ध-कर्मसै निवृत Act छल आकि गामक मालिक- गुमस्ता लोकनि अपन-अपन कागत AS जीबछ ऐठाम Bay लगला। Halt करारीपर देने रहनि। ait अवधि बीति गेल छल। कर्जा खेनिहार पहिले कागतपर छाप देने रहनि। ओइ कागतपर मलिक-जमीनदार लोकनि जमीनक खाता-खेसरा रकबा लिखि Hs अपन नाओं क$ लेलनि। गरीब सबहक जमीन मलिक-गुमस्ता हरपि लेलकनि। ea रधियाक जमीन सेहो चलि गेल । आब जीबछ-रधियाकें ger बेटी, एकटा बेटा आ परिवारक भरन-पोषण करनाइ कठिन US गेल। जीबछ कमाइ खातीर बाहर Set गेल । बाहरमे पढ़ल-लिखल आदमीकें नोकरी जल्दीए dis छेलै आ बेसी दरमाहा सेहो भेटै छेलै। जीबछ बेसी पढ़ल TA मुदा wR छल । TST शिक्षाक महत जिनगीमे केतेक होइ छै से मोनेमन महशूस Ht छल | जीबछ ट-ब-ट काए कहुना ws चिट्ठी लिखि घर पठेलक | ओइमे बेटा-बेटीकें पढ़बैले रधियाकें प्रेरित करैत we छल जे पढ़ाइमे जेते खरच लगत,हम कमाए HS पठाएब मुदा अहाँ धिया-पुताकेँ पढ़बैमे कोनो कोताही नै करब | रधियो मोने-मन सोचै छेली जे नीक लोक बनबाक लेलशिक्षाक बड़ Hed छै। जे हम आ हमर माए-बाप BU नै पढ़ल छेलौं AT ने सभटा जमीन मलिक-गुमस्ता हरपि लेलनि। जखनि पढ़ल रहितौं as मुसिबत नै अबिताए। हम सभ जे केलौं से केलौं मुदाधिया-पुताकेँ जरूर पढ़ाएब | अइले हमरा जे परिश्रम आ तियाग करए पड़त ओ करब | ओ सभ दिन अपन घिया-पुताकेँ समैपर संगे जा स्कूल पहुँचाबए लगली | रघथियाक टोलेमे बुच्ची बाबू छला | Geet बाबू अंचलमे बाड़ाबाबू AT | छुट्टीमे घर आएल छथि। हुनका काल्हि भोरे ट्रेन पकड़ि ड्यूटीपर जेबाक छेलनिसे रधियाकेँ कहलखिन- “रथिया, fas सामान अधिक अछि | गाममे कएक गोटेकेँ कहलिऐ जे काल्हि भोरके ट्रेन पकड़ब से कनी सामान स्टेशनपर पहुँचा feat, Ger कियो तैयार नै भेल। तूँ कनी Gar asi हम तोहर बड़ उपकार मानबो |” 38

वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १७८ म अंक १५ Ag २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक me मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA रथिया बाजलि- ‘Shad, कअए बजै चलब | कहिदिअ हम समान पहुँचा देव ।” बुच्ची बाबू बजला- “सात बजे AERA aera | किएक GT आठ बजेमे ट्रेन छै । तीन-चारि किलो मिटर स्टेशन दूरो ठै ।” ear भोरे ss सभ काज Hs Vere बना धिया-पुताकें खाइले Es बजली- “ते. सभ Te खो, आइ कनी पहिनहिए तोरा सभकें स्कूल पहुँचा दइ छियौ, तखनि बुच्ची बाबूक समान पहुँचबैले टीशन जाएब PP एमहर बुच्ची बाबू तैयार 4s रधियाक बाट तकै छला | पाँचमिनट पछाति रथिया पहुँचली । बुच्ची बाबू तमसाइत बजला- “रधिया, तोरा कहने छेलिओ साते बजै चलैले, देरी As गेल । ट्रेन छूटि जाएत | तोरा कोनोचिन्ता नै।” रथिया बजली- “अपने तमसाउ नै। धीरे धीरे बढ़ हम समान लेने लफरल gat are रहल छी। कनी घिया-पुताकें स्कूल पहुँचबैमे देरी लागि गेल ।” बुच्ची बाबू- “पहिले सामान पहुँचा asd, हमरा ट्रेन छूटि जाइत। एक दिन तोहर बेटा-बेटी स्कूल नै जेतौ तैँ की हेतै। Um fea कोनो पढ़ि क५ कलक्टर बनि जेतौ?” रधिया मोने-मन सोचए लगली, कहै छियनि आगू बढ़ैले से उठिए ने होइ oe हम a लफरल tas पहिनहि पहुँच जाएब । ट्रेन थोड़े छुटतनि। अपने बेगरते आन्हर छथि। अनेरे गछलौं (000 39

वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १७८ म अंक १५ Ag २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक me मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA ई छी हमर मजबूरी WET बाबाक दुआरिपर सतसंग-प्रवचन Bs छेलै। भीड़ Fa हमहूँ ससरि ws गेलौं आ बैस सुनए weit | प्रवचनकर्ता सेहो ज्ञानी आ विद्वान बूझि पड़ला। ओ मनुखक जिनगीक समरूपता बतबै छला। कहब TE जे सभ ATS एक समान GF | सभ एके ईश्वरक संतान GH आ सबहक अत्मामे एके परमात्माक अंश रमि रहल-ए। मुदा हम A बड़ अंतर देखे Bl सबहक क्रिया-कलाप, रहन-सहन आ खानोयानमे बड़ पैघ भिन्नता अछि | केकरो TAR नून आ केकरो रोटीओपर ने नून। कोइ खाइलेखाइते AT आ कोइ खाइए fy AT! केकरो बीघा-बीघे कोठा-सोफा केकरो खोपड़ीओपर आफत । कोइ Veranda जरि-मरि art करैए तैँ कोइ ए.सी.मे मौजु करैए। क्यो उड़न जहाजसैं देश-क्दिशक यात्रा करैए ct कियो पएरे चलि-चलि सड़केपर पराण तियागैए। ferent बिमारीक इलाज करोड़ोरूपैआसँँ विदेशमे seu ct किनको पराण साधारण इलाज fy चलि जाइए। ऐ सभ मुद्दापर सोच-विचार करैत जखनि प्रवचन खतम भेल तखनिहम हुनका लग जा कहलिएऐ- “महराज, अपने प्रवचनमे सभ Ape समरूप बतौलियनि। मुदा हम तैँ बड़ अन्तर BA छी। से कनी फड़िछा as कहियौ ।” प्रवचनकर्ता मधुर SAA बजला- “Sa ठीके ag He छी । हम जे प्रवचनमे कहलौं सेहो ठीक an agi जे कहै B Aa ठीक । सत्‌ ई कै प्राकृति द्वारा जे सुविधा मनुखक लेल उपलब्ध छै ओ समरूप छै । मुदा मनुखक बीचमे जे अन्तर छै से अन्तर बेवस्थामे कमीक कारणे S | मनुखे मनुखक HAT छिऐ । जे Ga सबल छै ait aid दोसराक हक मारि बेवस्थाकें दुरूपयोग He S । जहिना हाथीकें दूटा दाँत होइ छै एकटा खाइबला आ दोसर देखबैबला तहिना बेवस्था करैबलाकें दू नजरि es छै। कथनी आ करनीमे अन्तर रखने छै। ऐ सभ बातक किचार- अनुभव ATE अपने HW पड़तै। ओकर समाधान लेल सर्घघकरए पड़तै। बिनु मांगने तँ भीखो नै fact छै। ई at अहाँ अधिकारक बात करै छी। जौं हम प्रवचनमे समरूपताक बात नै Hee तैँ बेवस्था हमरा नै ने जीबए देत। अहाँ जकाँ जौं हम्टूँ प्रवचनमे बाजब तैँ कहिया ने हमरा जमपुरी wa देने रहितए | यहए छी हमर मजबूरी 000 40

वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७८ म अंक १५ Ag २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक १७८) मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA बाल-बोध दुखीलालकें दुखक पहाड़ wee ofan निच्चाँ नै भेल। बूढ़ माए-बापक सेवा टहल, तैपर सैं दूटा भलद़ेरबा बेटी, छोट-छोट FET बेटा, पत्नी आ अपने कुल आठ बेक्तीक परिवार | पत्नी- फुलिया- परिवारक काजमे पिसाइत छेली। सासु-ससुरक टहल-ठ्क्रोरा आ Sart पलखतिए नै। Bos एकटा पोसिया गाए, एकटा भजैतिया बरद | मुदा दुनू बेटी Toe आ हुनरगरि whe | घरक कमौआ दुखीलाल असकरे क्ति-राति फिरिशान रहैए। घरक खर्चा पुग्बे ने करैए जे पलखति मारत। खेतीओ-पथारी कम्मे भेने जने-बुत्तापर घरक खर्चा चलैत अछि। जखनि खेनाइओ-पीनाइओमे ढनसने तखनि बेटा-बेटी पढ़त केना? बर्खक पेसतरे दुखीक माए लकबा res AR गेली | पछाति बूढ़ बाप सेहो Ws रोगा-सोगा दम तोड़िदिलकनि। श्राध-कर्म आ भोज-भात कर्ज हाथे भेल। दुखीलालकेँं एक-सबा कट्ठा डीह, तीन कट्ठा चौमास आ छह-सात wg तीन-फसिला खेत छन्हि। जइसैं छह मास परिवारक गुजर चलै OFS | जन-मजदूरी ws शेष छह मास ब्तिबैत अछि | मुदा अखनि तँ चौमास आ तीन-फसिला खेत दस हजारमे Sat सूद्सिर भरना लगि गेल अछि।। तैपर सैं ger बेटीक बिभाहक अलगे। दुनू बेटा अखनि बाल-बोध! समस्या-पर-समस्या लद॒ल जा रहल BAS जैं चारि-पाँच साल खेत-भरना रूपैआक सूदि नै भरब तैँ खेतो सूदिए तरे चलि जाएत | गाए बिकल चरबाहियेमे कहबी सन ETT | एक दिन दुखीलाल बैसारीए छल | किछु सोचैत छल आकि मनमे उपकलै खेतक भरना | जड़ VTS हमर बाप-दादा परिवार चलबै Ge ATS खेत हमरो जीक्क्नि अछि | मुदा आब बूझि पड़ैए ओ खेत बिलटि जाएत। ऐ क्रममे सोचैत दुखीलाल eee मालिक प्रभूनाथ जीक दरबज्जापर पहुँचल | प्रभूना थजी Gels देखिते कहलखिन- “आबह दुखी, एमकी बहू दिनपर He करए एलह |” दुखीलाल- “मालिक, seta कथी छुपल अछि। एतेक ers माए-बापक कहुना रीन उतारलौं Yet अपनेक रीन केना चुकाएब से फुड़ेबे ने करैए |” प्रभूनाथजी- “केना Peas से FT Het काज छिअ। ase हम किए मगजमारी करब | सालेसाले हमरा रूपैआक Skat सूदि बढ़ैत जेतह | पाँच सालक कराड़ी छह, नै चुकेबहक तैँ खेत छोड़ह Tea ।” दुखीलाल- “माध्ज्लिक, एना नै ने बाजू । खेतक नाओं सुनि हमर करेजा फाटि जाइए | ई खेत हमर खनदानक पूजी आ इज्जति छी। अपना जीबैत हम केना बिलिटए देव ।” प्रभूनाथजी- “Ad तूँ ठीके He छह ।रूपैआक Ye जोड़ि चुकता Hs दहक आ अपन खेत छोड़ा लैह |” दुखीलाल- “मालिक, अहीं क दरबारमे जन-मजुरी ws जीब लेब | रहल अहाँकरूपैआक सूदि, Ts एबजमे हम अपन दुनू बेटाकेँ अहीं ऐठाम नोकरी रखि दइ छी। बैचलोहो बासि-बेरहट खा जीब लेत आ अहूँक काज 4

वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १७८ म अंक १५ Ag २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक me मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA चलत | जाधरि अहाँक रूपैआक सूद-मूर नै सधत ताधरि अहीं क दरबारमे नोकर बनिखटि देत | रूपैओक चुकता AS जाएत आ हमरो खेत छुटिजाएत ।” प्रभूनाथजी- “कहलह a बड़ नीक | युक्तिओ तोहर नीमन छह मुदा... ।” दुखीलाल- “ae Ger किए कहलौं?” प्रभूनाथजी- “सुदा ऐ gat बजलौं कि तोहर बेटा Gah a देखने नै खे । अबोध अछि आकि बाल-बोध ” दुखीलाल- “बल-बोध अछि | ठेकनगरि, एकबेर सेरिया Hs बता देबै तै दोसर बेर अढ़बए नै ved | ढखेते-देखिते फुर्र-फुर काज HS Vet | एक्को मिसिया असकतिया नै अछि ।” प्रभूनाथजी- “बेस काल्हिए दुनूकेँ बजौने आबह | ATH FRAT लेब आ काज करै जोकर अछि कि नै सेहो ठेकानि aa” दुखीलाल- “बेस मालिक, जाइ छी काल्हिए दुनूकें संगे AA ats छी ।” दुखीलाल अपन कर्तव्यकें हीन बूझि चिन्तामे डूमि गेल । हम केहेन बाप छी जे बाल-बोध बेटाकें भोजन- बस्त्र-शिक्षा इत्यादि पूर नै क५ अपने बेगरते नोकरी लगबै छे। बेटा-बेटी राजाक हुअए आकि गरीबक सभकें अपन TAM दुलरूआ As छै। जखनि नमहर-बुधिगर-ठकनगर हएत Ft की Hed! हमर बाप केहेन निष्ठुर छथि जे हमरा संगे एहेन अन्याय केलनि | मुदा हमरा लग सस्ते कोन अछि | दोसर कोन SAU लगा सकब | मोनक बात मोनमे रखैत हदैकें सक्कत ws बिहाने भने पनिपिआइ करा at नेने प्रभूनाथ जीक दरबार फ्ुँचल | दुनू बाल-बोध भाए गांगी-जमुनी, देखैओमे बड़ नुनुआगर, उमेरो आठदस बर्खक | प्रभूनाथ जीकें मनमे भेलनि बड़ नीमन टहलू हएत | मुदा अनठबैत बजला- “दुखी दुनू बौआ a अखनि लेधुरिए अछि। हमरा ऐठाम कोन काज करत। ऐठाम तैँ भीड़गर काज अछि |” दुखीलाल बूझि गेल जे मालिक हमरा टाड़िरहल अछि | बाजल- “मालिक, छोट देखि झुझुआउ नै। घरक छोट-छोट सभ काज करत | गाएबरदक कुट्टी-सानी, दरबज्जा, माल-जालक TAT आ गोहाल घरक झार-बहार करत | गोबर-करसी ढुलढालकें हटाएत | अहूँकें कियो टहल-टिकोरा करैबला नै अछि सेहो अपन समझि करत | आहूँ अपने पोता सन बेवहार Hea | घरे ने बदलि St Fer ted तैँ गामेमे । अहाँ लग tea तैँ हम निफिकिर tea ओना हम्हूँ तै अबिते-जाइते wal” प्रभूनाथजी- “दुखी, Sez ने गाम-घरक बात HL छह | लोक तैँ शहर जाइले गाम गमौने उछि ।” 42

वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १७८ म अंक १५ Ag २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक me मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA दुखीलाल- “मालिक की कहब, लोक a fas as गेल अछि | Aa पेट भरै छै ओतै खों ता बना रहैत अछि ।” प्रभूनाथजी- “से ठीके। हमरे बेटाकें नै देखे छहक | गाम-समाज छोड़िहैद्राबादमे रहैए। पावनितिहार तैँ हम जाबै afta छी ताबे कहुना Hs GeO, नै a घरक देवताकें एक चुरुक पानिओ के देत ।” दुखीलाल- “माध्ज्लिक, छोड़ू दुनियाँ-दारीक गप-सप्प | हमरो काजपर जाइक अछि | और गप-सप्प दोसरो दिन हेतै। दुनू बाल-बो धरकें WTS |” प्रभूनाथजी- “दुखी, कनी आर बैसह। ई दुनू बौआ अनचिन्हार अछि | कनी बतिया लड़ छी। नाओं बूझल teat समैपर समझा-बुझा देबै । नै तँ पोसो नै मानत | eT बुझबे करै छहक जे SATS दुनू बौआकेँ खटपट तैँ नै हएत मुदा हमर Sere सोभाव आ बेवहारकें तैँ तूँ नीकसैँ जनै छह,ओ मक्कै लाबा जकाँ दिन भरि फटफटाइते रहै HT | ASA झनकाहि अछि जे केकरोसै पटरीए ने खाइ छै। द्ति-भरि पूजे-पाठमे लगल रहैए, दिनक भोजन राति आ रतुका भोरमे पाड़न करैए । St क्यो लागिओ-भीड़ीओ देतै तै कहत जे हमर सभ किछु छुबा गेल । एकबेर के कहए जे तीनशीन बेर नहाएत आ गंगाजलसैं शुद्र करत | बेटो-पुतोहु आ पोता-पोती जखनि अबैए तैँ देखिते बनरनी जकाँ aft रहैए । तस्वनि हमर जिनगी केहेन अछि से faq कहने बूझि गेल हेबह |” दुखीलाल- “मालिक, ई तँ घरक बात BH | ओइमे हम किए दखल देब | मनुखो कोनो Hy रंगक SST | लोक अपन सुख-दुखक सृजन अपने करैए | अपजश दोसरकेँ लगबैए |” बात समटैत दुखी दुनू बाल-बो धक दिस इशारा केलक | प्रभूनाथजी पुछलखिन- “बौआ, नाओं की छिअ?” दुनू भाँइ एक्के स्वरमे अपन-अपन नाओं बाजल- “बुधन-बेचन |” प्रभूनाथ- “मुँह Tad छह | fas खेबह?” SL Ais बाजल- “नै, पनिपिआइ as लेने छी ।” प्रभूनाथजी- “तोहर बापक कहब अछि जे दुनू भाँड अहीठाम काज करत से करबहक ने” बुधन- 43

वि दे ह विदेह Videha कन्तिर www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १७८ म अंक १५ Ag २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक नि मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA हुँ ।” प्रभूनाथजी- “अपन काज HET सभ करैए मुदा बीरानक काज feat करैए आ कियो नै करए चाहैए।” बुधन- “हम अपन आ बीरानमे नै बुझ्े खि। काज HEP? दुखीलाल बूझि गेल जे बात बढ़ि जाएत | बातकें सम्हौरैत बाजल- “मालिक गरीबक serch कथी परीक्षा लड़ छिऐ । जे कहबै से करत ।अबेर WS गेल काजपर जाइ SI” प्रभूनाथजी- “कनी दरमाहा फरिआ ae जे पछाति कोनो मुहाँ-ठुठी ने हुअए ।” दुखीलाल- “मालिक, दरमाहा की हेतै। Beta SAS दस हजार AA B | सालमे VAY हजार हएत | पैंच-पैंच सए रूपैआ महिनाक हिसाबसैं दुनू Vise एक हजार Fer | पनरह मह्लिमे अहाँक रूपैआ फरिया जाएत, नै मानब ft एक मास बेसीए खटिदेत | हमरो खेत छूटि जाएत । ने अहाँकें at पड़त आ ने हमरा । दुनू ATS अहीं क दरबारमे खाएत-पीअत HIT अहाँक अनुकूल करत |” प्रभूनाथजी- “ठीक छै मानि लेलिअ। tz tT eas तेज निकललह। हम तैँ बाल-बोधक फेरमे अबोध बनि गेलौं 000 44

वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'"विदेह' १७८ म अंक १५ AE २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक १७८) मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA अबिसवास काल्हिए नूनू बाबूक seth बिआह छी । नूनू बाबू बिआहक सरमजान सबहक अरियानमे लगल छला। गिरहत आ सम्पन्न परिवार रहितो State अभाव छेलनि। चारि लाख टाका, पाँच भरि सोना आ एकटा मोटर साइकिल देहेजपर बिआह फाइलन भेल wer! दुलहा इंजीन्पिरिंग कौलेजक छात्र। सुखी सम्पन्न परिवार । दुलहाक पिता मोहन बाबू एस.डी.ओ. औफ्सिक बाड़ाबाबू । नीक कमेनेखटेने छथि । aT नूनू बाबू अपन बेटी सुचिताकें हुनके घरमे कुटमैती करैक Frog नेने छथि | नूनू बाबू बहुत परियास करैत तीन लाख रूपैआ मोटर साइक्लि, | भरि सोना तिलकक समैमे Gora as देलनि। शेष तीन a सोना बेटीक गहना स्वरूप बिआहे दिन देब आ एक लाख रूपैआ जे बैंकियौता रहिगेल ait बेटीक नामे एल.आइ.सी.बीमामे जमा अछि | जे दू तीन मास पछातिमिलत Set चुकता ws देब । त्लिक भेला पछाति fasten दिन ठेकल गेल । मुदा दुलहाक फिता मोहन बाबू बड़ लोभी। ओ मोनेमोन सोचलनि, पुतोहु जखनि हमर हएत तैँ एल.आइ.सीक्र रूपैआ आइ ने काल्हि हमरे हएत। बैंकियौता Star fares पहिने as लेब तँँ लाभमे रहब | मोहन बाबू बिभाहसैँ एक दिन पहिने समाद नूनू बाबूक घर पठौलनिजे हमर एक लाख टाका बैंकियाहा अछि at Stan चुकता करि fear तखने बरियाती जाएत नै तँ अहाँ जानू । नूनू बाबू समाद Ufa जेना देहपर बज्जर खसि Geet | ओ सेचमे पड़ि गेला । होश सम्हारि मोहन बाबूसँ He Hs बड़ विनती केलनि। अखनि ऐ लेल माफी दिअ। हम बेटीबला छी । बहुत चीज-बौसक ओरियान करए पड़त | तैपर सैं Pardes सुआगतमे सेहो बहुत खरच SUA | मुदा मोहन बाबू नूनू बाबूकें एकोटा बात नै सुनलकऩिआ ने आँखिक AR पोछलकनि। तखने नूनू बाबू बजला- “खैर, नै मानब तैँ अहाँ बरियाती cs Hs आउ, हम दरबज्जेपर festa पहिने Star बरियातीए घरमे चुकता करि देब तखनि बिआह Hes |” नूनू बाबू खेत भरना रखे Stare ओरियान केलनि। बरियाती समैपर आएल | सबहक सुआगत Act | दरबज्जेपर सबहक सोझहेमे एक लाख टाका दुलहाक शि- मोहन aH चुकता HS देलनि। दुलहाक परिछन भेल, वरमालाक HIST शुरू हएत तखने एकटा नव बातक चची भेल जे दुलहा पहिने दुलहिनकेँ देखता | पसिन भेला पछाति ने बरमाला आ सेनूरदान STA । ऐ बातसैं HAT पक्षमे खलबली मचि गेल आ आक्रोश सेहो बढ़ि गेल | अन्तमे निर्णए भेल जे ठीक कै पहिने कन्याँ देख लेल जाउ | तखने आगूक काज GTA | दुलहिन चित्रा तँ पहिनेसँ वरमाला लेल सजले GHA | एकटा कोठलीमे दुलहाकेँ लोकनिधाँ संगे बजौल गेल । ओही कोठलीमे दुलहिन चित्रा सहेलीक संगे आएल। चित्रा suet पास पूर्ण माक चान सन सुन्नरि । दुलहा देखि कड मोने-मोन खुश भेला | es गप-सप्प सेहो भेलै। तखने चित्रा बजली- “की यौ दुलहाजी, हम अपनेकें पसीन Ab” दुलहा मुस्की मारि पीठे लागल बजला- “हैं, की हमहूँ अहाँकें... |” चित्रा Ged ware देलक- “नै अहाँ हमरा पसीन नै छी। तैए ana ई बिआह हम किन्नौं ने करब। चित्राक ई निर्णए सुनि सखी- बहिनपा, माए-बाप, समाजक बुजुर्ग इत्यादि बहुतो Me समझेलकनि मुदा एकेठाम चित्रा जिद्द It रहलि जे ऐ ad हम बिआह नै करब ।” 45

वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १७८ म अंक १५ Ag २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक me मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA दरबज्जा बरियाती-सरियातीसैँ भरल छल | ई बात GPA लगले सनसना HS अगिनग्गी जकाँ चारू दिस aa गाम पसरि गेल । बहुतो बुजुर्ग लोकनि दुलहिनक पिताकेँ बुझा-समझा ws कहलकनिमुदा चित्रा अपन हृढ़पर अरल रहलि | चित्रासँ कारण पूछल गेल | कहलकः “जखनि दुल्हाकेँ अपन माए-बाप आ सर-समाज किनकोपर बिसवास नै छन्हि तँ ओ हमरापर बिसवास केना करता आ हम केना हुनकापर बिसवास करब। दोसर बात जे ference पिताजी दहेजक खातिर जमीन आइज्जत बेचबा Uh छथि तखनि ओ हमरो बेचि aaa छथि किने du हम बीख da मरि जाएब मुदा एहेन अक्सिवासी आ दहेजरूपी दानवक बेटा संगे बिआह नै करब | VS नीक तैँ हम ओहेन दुल्हा जे गरीबे किएक ने हएत, तिनकासैँ करब, जे अपन इज्जतक A दोसरोक इज्जत करत |” चित्रा सहेली संगे कोठलीसँँ निकलि गेलि | gear on लोकनियाँ सभकें ओही कोठलीमे aa क५ ताला लगा आँगन आबि गेलि। बिआह नै भेल। ई खबरि रातिए भरिमे चौतरफा पसरि गेल । पंचैतीक बैसार भेल । पंच लोकनि बिआह tate बहुत परियास केलनि मुदा चित्रा अपन संकल्पपर अडिग रहलि। अन्तमे जे दहेजक लेन- देन आ सुआगतक खर्च भेल रहै ओ सभटा आपस As जाए | Getler पिता नूनू बाबू बजला- “चारि लाख टाका, दू भरि सोना, मोटर साइक्लि संगे सुआगतमे दू लाख टाका खर्च भेल अछि से सभटा आपस ws दिअ तखने हिनका aah छुट्टी भेटतनि। नै तँ हम कानूनक शरण लेब आ दुनू बापूतकें जहल कटेबनि।” सभ पंचक विचार भेलनि। बात ct उचिते ने नूनू बाबू कहै OT | कोनो जबरन जुर्मीना तैँ नै... । दुल्हाक पिता मोहनबाबू छह लाख टाका, सोना, मोटर साइक्लि VS मंगबा नूनू aah पंचक बिच्चेमे आपस HS देलकनि। तखनि हुनक बेटाकेँ lochs बाहर निक्रालि देल गेल। जहिना आन गामक चोटाएल कुकुर नांगरि दबौने दुलकी दैत अपन गामक बाट पकड़िसोझहे-सोझ जाइत रहैए तह्मि सभ कियो विदा Aer चित्रा पिताक मुरझाएल मुँह वेंखि बाजलि- “बाबूजी, अहाँ एक्को Us चिन्ता नै करू। हम मनुख संगे बिआह करब | पढ़ल-लिखल कम्मो ted Teal 'एको Urs चिन्ता नै । एही खातिर ने एते झमेल होइए | फ्क्लो पाइ चिन्ता नै करू ।” 000 ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह नि मैथिली साहित्य आन्दोलन (८)२००४-१५. सर्वाधिकार लेखका धीन आ Ms लेखकक नाम नै अछि ts संपादकाधीन | विदेह-प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर । सह-सम्पादक: उमेश मेडल | सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, ARS विलास राय AAT कुमार ATH आ मुन्नाजी (मनोज कुमार 46

वि दे ह face Videha चमक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal fate प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १७८ म अंक १५ Ag २०१५ (वर्ष ८ मास ८९ अंक me मानुषीमिह संस्कृताम्‌ ISSN 2229-547X VIDEHA कर्ण) | कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी | सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर | सम्पादक- सूचना- सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल | सम्पादक- अनुवाद विभाग-विनीत Ser | रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्ति) ggajendra@videha.com® मेल अटैचमेण्टक रूपमेंँ .doc, .docx, .rtf वा ..फॉर्मेटमे पठा सके छथि | रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन HUT गेल फोटो all, से आशा करै छी | रचनाक अंतमे टाइप रहए, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकें देल जा रहल अछि | एत5 प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखर्क संग्रहकर्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक,/ आर्काइवक अनुवादक आ आकीइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकें छै । ऐ ई पत्रिकाकें श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकें ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (८) 2004-5 सर्वाधिकार सुरक्षित | विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ agai लगमे OFS | रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन far आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.co.in पर संपर्क करू | ऐ साइटकें प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल ।५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “ भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवूत्तसैँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका aft पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित Sed अछि | आब “भालसरिक गाछ” जालवूत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्‍्ताक संग मैथिली भाषाक जालवूत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त Us रहल afe | विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA N = | सिद्धिरस्तु 47