33 वि दे ह विदेह Videha বিদেহ www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १७९ म अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक १७९) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' १७९ म अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक १७९) ऐ अंकमे अछि:- नन्द विलास रायक दोसर लघुकथा संग्रह- मदन अमर फागुलाल साहु जीक किछु विहनि कथा/ आलेख-मानव जीवनमे नारी स्वरूपक गरिमा सारस्वत: कविता सारस्वतक [१ आ २ (२५ टा); ३.“निमोछिया अबीर "(पिरोजगढ़ युवा समिति दिस सँ देश आ विदेश मे बसल सब व्यक्तिकेँ सारस्वतक अशेष २०१५ होलीक हादिॅक शुभकामना संग)] नन्द विलास राय- मदन अमर (लघु कथा संग्रह) मदन-अमर रमणजी इलाहावाद विश्वविद्यालयमे प्रोफेसर छथि। हुनका एक बेटा आ एकटा बेटी छन्हि। बेटाक नाओं मदन आ बेटीक मीरा रखने छथि। मीरा आ मदन इलहेवादक एकटा कॉनवेन्टमे पढ़ैए। मदन स्टैन्डर्ड पाँच आ मीरा स्टैन्डर्ड चारिमे पढ़ैए। रमणजीक सासुर मिथिलांचलक कोयलख गाममे अछि। रमणजीक ससुर महराज रमणजी सँ गर्मी छुट्टीमे आम खाइले कोयलख आबए आग्रह केलखिन। रमणजी सपरिवार कोयलख एला। नानी गाममे मीरा आ मदन दुइए-चारि दिनमे गामक धिया-पुता संग तेना ने मिलि गेल जेना पानिमे चीनी मिलैए। मदन नानी गामक धिया-पुता संगे कबड्डी आ हाथी-चुक्का खेल खेलाइत रहए। मदन तँ इलाहावादमे बैडमिन्टन आ क्रिकेट देखैत रहए। कखनो-काल क्रिकेट खेलबो करए। ओकरा लेल कबड्डी आ हाथी-चुक्का खेल नव छेलै, मुदा ओकरा नीक लगैत रहै। नानी गाममे मदनकेँ अमर नामक एकटा बालकसँ दोस्ती भऽ गेल। एक दिन अमर मदनकेँ अपना अँगना लऽ गेल। अमरक घर फूसक रहए। ओकर बाबूजी दिल्लीमे दालि मीलमे काज करै छथिन। अमरक माए एकटा गाए पोसने छथिन। आइ-काल्हि गाए लगबो करै छन्हि। खेत-पथारक नाओंपर अमरकेँ बाधमे दस कट्ठा खेत, दू कट्ठा गाछी आ दू कट्ठा घराड़ी। अँगनामे दूटा घर। अमरक माए नीकहा-नीकहा आम मदनकेँ खइले देलखिन। मदन अमरकेँ माएसँ बड्ड प्रभावित भेल रहए। मदनक नानाकेँ पक्काक घर। चारू भागसँ पोखरा-पाटन। ऊपरोमे चारि कोठरी। गामक लोक मदनक नानाक घरकेँ हवेली कहैत अछि। मदनक नाना गोकूलबाबू पुरान जमीन्दारक बेटा, तइमे रिटारयर डिप्टी कलक्टर। गामक गरीब-गुरबा हुनका हािकम मालिक कहैत छेलनि। एक दिन मदन अपना संग अमरकेँ अपना नानीक घर लऽ जाइत छल। मैल-कुचैल कपड़ामे अमर। ऐसँ पहिने ओ कहियो हवेली नै गेल रहए। ओ धखाइते-धखाइत मदनक संगे हवेलीक सीढ़ीपर चढ़ल। आगू बढ़ल। देखिते मदनक नानी मदनकेँ पुछलखिन- “ई छौड़ा के छी। तोँ एकरा भीतर किए अनै छेँ?” तैपर मदन बाजल- “नानी ई अमर छी। हम एकरा संगे खेलाइ छी। एकरासँ हमरा दोस्ती भऽ गेल अछि।” मदनक बात सुनि नानी मदनकेँ डँटैत कहलखिन- “समूचा कोयलखमे तोरा यएह छौड़ा दोस्ती करैले भेटलौ। छोट लोकसँ दोस्ती करै छेँ!” तैपर मदन बाजल- “नानी ई छोट कहाँ अछि। ई तँ हमरे अतेटा अछि।” “तोँ नै बुझलेँ। ई सभ छोट जाति छी। एकरा सभकेँ हम सभ अपना हवेलीक भीतर नै आबए दइ छिऐ।” अमर दिस देखैत नानी फेर बजली- “रे छौड़ा, केकर बेटा छीही?” अमर बाजल- “भोला चौपालक।” “कह तँ खतबे जातिक छौड़ाकेँ हवेलीक भीतर अनै छेँ। हवेलीओ छुआ जाइत। रे छौड़ा भोलबा बेटा, जो भाग एतएसँ।” अमर ओतएसँ चलि देलक। मदन किछु बूझि नै पौलक। बकर-बकर नानीक मुँह दिस तकैत रहल। नानी ओकर हाथ पकड़ि हवेलीक भीतर लऽ गेली। अमर अपना आँगन जा माएकेँ सभ गप कहलक। माए पुछलखिन- “तूँ हवेली गेलही किए?” तैपर अमर बाजल- “माए, हमरा तँ मदन लऽ जाइत रहए। हम कहियो कहाँ हवेली दिस जाइ छी।” माए- “बाउ रौ, उ सभ पैघ लोक छथिन। हम पनरह बर्खसँ कोयलखमे छी मुदा आइ धरि हवेलीक भीतर नै गेलौं। कहियो काल खेरही तोड़ए हाकिम मालिकक खेतमे जाइ छी तँ हेवलीक ओसारक निच्चेसँ खेरही राखि आ बोइन लऽ घूमि जाइ छी।” अमर माएक बात नै बूझि सकल। पुछलक- “पैघ लोक केकरा कहै छै?” माए जवाब देलखिन- “पैघ लोक माने बड़का आदमी। धनीक आदमी। पढ़ल-लिखल हाकिम-हुकूम।” अमर- “हमहूँ पैघ लोक बनब।” माए- “पढ़बीही तब ने पैघ लोक बनमेँ। देखै छीही ने जीतनीक मामा पढ़ि-लिख कऽ हाकिम बनलखिन। ओ अबै छथिन तँ हाकिमो मालिक हुनका चाह-पान करबै छथिन। तहूँ मनसँ पढ़-लिख आ हाकिम बन।” माएक बात सुनि अमर बाजल- “तूँ तँ हमरा किताबो-काैपी ने आनि दइ छीही। टीशनो ने धरा दइ छीही। कहैत रहै छीही गाए चरा आन।” तैपर माए बजली- “तूँ मोनसँ पढ़। तोरा किताप-कौपी सभ आनि देबौ। गाइओ चरबए नै कहबो। टीशनो धरा देबौ।” अमर बाजल- “हम मोनसँ पढ़ब आ हाकिम बनब।” अमर पढ़ए लगल। ओ अपना किलासमे फस्ट करए। मैट्रिक आ इण्टरमे अपना जिलामे पहिल स्थान लौलक। चटिया सभकेँ टीशन पढ़ा कऽ बी.ए. आनर्स फस्ट क्लाससँ पास भेल। जीतनीक मामा हरियरीबला बीडीओ साहैबसँ भेँट केलक। ओ कहलखिन- “कोनो भी कम्पीटीशनक तैयारी लेल पटनामे बैसए परतह। तइले ढौआ चाही।” ई सभ गप्प अमर अपना माए-बाबूसँ कहलक। अमरक बाबू दस कट्ठा जमीनमे सँ पाँच कट्ठा जमीन बेच देलक। अमर पटनामे रहि बी.पी.एस.सी.क तैयारी करए लगल। गाममे कुट्टी-चालि चलए लगलै। जे जमीन बेच कऽ सभटा बेरबाद करैए फल्लमा। मुदा तेकर परवाह नै केलक अमरक पिता। पहिले खेपमे अमर सफल भऽ गेल, बी.डी.ओ.क पदपर चयन भऽ गेलै। प्रशिक्षणक बाद अमरक पदस्थापना निर्मली अनुमण्डलमे भेल। योगदानक दोसरे दिन हुनका चैम्बरमे हुनकर सहायक संचिका लऽ कऽ आएल। बी.डी.ओ. साहैबकेँ ओ चेहरा जानल-पहचानल लगलनि। ओ गौर करि कऽ सहायक दिस ताकए लगलखिन। आ दिमागपर जोर देलखिन जे हिनका तँ केतौ देखने छियनि। मुदा केतए से मोने ने पड़नि। सहायकसँ पुछलखिन- “अहाँक नाओं की छी?” सहायक जवाब देलखिन- “मदन कुमार ठाकुर।” मदन नाओं सुनिते बी.डी.ओ साहैबकेँ बचपनक सभ घटा मोन पड़ि गेलनि। हुनका भेलनि शाइत ओ वएह मदन छी जे हमरा हवेली लऽ जाइत छल, मुदा ओकर नानी हमरा डपैट कऽ भगा देने रहए। मुदा शंका समाधान दुआरे पुछलखिन- “अहाँक मामा गाम केतए अछि?” सहायक जवाब देलखिन- “जी, हमर मामा गाम कोयलख भेल। आ नाना स्व. गोकूल प्रसाद ठाकुर।” आब तँ बी.डी.ओ साहैबकेँ कोनो शंके ने रहलनि। ओ सभ संचिका पढ़ि कऽ ओइपर दसखत करैत कहलखिन- “साँझमे हमरा डेरापर आएब।” तैपर सहायक मदन पुछलकनि- “सर, कोनो खास गप्प छै की?” बी.डी.ओ. साहैब कहलखिन- “अहाँ आएब तँ ओतए आम आ खास मालूम भऽ जाएत।” सहायककेँ छातीक धड़कन बढ़ि गेलनि। ओ सोचए लगला की बात छिऐ। किएक साहैब डेरापर बजौलनि। कियो चुगली तँ ने कऽ देलक। साँझमे मदन बी.डी.ओ साहैबक डेरापर पहुँचला। बी.डी.ओ. साहैब हुनका बड़ प्रेमसँ भीतर लऽ गेलखिन। एकटा कुरसीपर अपना बैसला आ दोसरपर इशारा करैत मदनकेँ बैसैले कहलखिन। दुनू गोटे कुरसीपर बैसला। बी.डी.ओ. साहैब पत्नीकेँ सोर पाड़ैत कहलखिन- “चाह-जलखैक ओरियान करू। मदन एला।” मदनकेँ किछु बुझेबे ने करए। ओ बाजल- “सर, कथी लऽ बजेलौं। की आदेश छै।” तैपर बी.डी.ओ. साहैब कहलखिन- “सर नै अमर बाजू अमर। हम वएह अमर छी जेकरा संगे अहाँ मामा गाममे कबड्डी, हाथी चुक्का खेलैत रही। एक दिन अहाँ अपना नीनीक हवेली लऽ जाइत रही तँ अहाँक नानी अहाँपर बिगड़ैत हमरो डँटने रहथि। की अहाँकेँ ओ घटना मोन अछि?” मदनकेँ ममहरक सभ गप मोन पड़ि गेल। ओ ठाढ़ भऽ कऽ हाथ जोड़ैत बाजल- “सर, हमरा माफ कऽ दिअ। हम बड्ड लज्जित छी।” तैपर बी.डी.ओ. साहैब कहलखिन- “फेर सर! अमर बाजू। अमर।” कहि बी.डी.ओ. साहैब ठाढ़ होइत पुन: बजला- “आउ मदन, गला मिलू।” कहि दुनू बाँहि फैला देलखिन। मदन झिझकैत अमरसँ गला मिलल। मदनक दुनू आँखिसँ दहो-बहो नोर जाए लगलै। दिव्या निर्मली टीशनक पाछू, रेलबे परिसरेमे गुरु-चेलाक खेल भऽ रहल छल। गुरू लूंगी आ झोलंगा जकाँ कुरता पहिरि हाथमे डमरू नेने छला। लगभग दस बर्खक बालक चेला छल। ओकर समुच्चा देह कपड़ासँ झाँपल छल। चारू दिससँ लोक ठाढ़ भऽ खेलक मजा लेबए लेल तैयार छल। गुरु डमरू बजा चेलासँ पुछलखिन- “बोल चेला की हाल-चाल छौ?” चेला जवाब देलक- “गुरुजी, हमर हाल-चाल एकदम टनाटन अछि। अहाँ अपन कहू।” गुरु कहलखिन- “हमहूँ ठीक छी। अच्छा ई बता अखनि तों छेँ केतए।” चेला बाजल- “अखनि हम बरही गाममे छी।” गुरु- “ई बरही गाम केतए छै?” चेला- “बरही गाम नेपाल अधिराज्यक सप्तरी जिलामे पड़ै छै। राजविराजसँ लगधग तीन किलोमीटर दछिन। बरही गामसँ उत्तर पछिमी कोसी नहर छै।” गुरु- “अच्छा ई बता ओतए की कऽ रहल छेँ।” चेला- “विदेह इन्टरनेट पत्रिकामे खबरि जुटाबक समदियाक काज करए लगलौं हेन। नेपालक दौरापर छी।” गुरु- “तँ बरही गाममे एहेन काेन घटना भेलै जे तों बरही गाममे छेँ।” चेला- “घटना अथवा दुघर्टना तँ नै भेलै मुदा एकटा नव चीज जरूर भेलै।” गुरु- “काेन नव चीज भेलै हेन, कनी फरिछा कऽ बाज।” चेला- “बरही गाम सप्तरी जिलाक सदरमुकाम राजविराज बजारक लग रहितो मुख्य रूपसँ किसानक गाम छी। पश्चिमी कोसी नहरिसँ दछिन छै। सिचाईक भरपुर साधन रहैक कारण गरमा धान आ अगहनी धानक उपज बड़ नीक होइ छै।” गुरु- “कोन खेती गिरहस्तीक गप शुरू कऽ देलँह। नव बात जे भेलै से बाज ने।” चेला- “हम सभ गप फरिछा कऽ कहै छी। अहाँ धैर्यसँ सुनू। बरही गाममे रूपलाल नामक एकटा किसान छथि। हुनका एकटा बेटा आ एकटा बेटी छन्हि। बेटाक नाओं विवेक अछि। आे विराटनगर अस्पतालमे पेथोलौजिष्ट छथि। अपन प्राइवेट जाँच-घर सेहो रखने छथि। रूपलालक बेटी दिव्या बी.ए. पास कऽ राजेविराजमे बी.एड. कऽ रहली हेन।” गुरु- “कोन आहे-माहेक कथा पसारि देलँह से नै जानि। हम कहै छियौ नव बात बता।” चेला- “एतएसँ शुरू होइत अछि नव बात। अखनि हम नव बात जे भेल तेकर पृष्ठभूमिमे चलि रहल छी। अहाँ कनी धैर्यसँ सुनियौ।” गुरु- “अच्छा बता। आब हम बीचमे नै टोकबौ।” चेला- “हँ तँ हम कहैत रही जे रूपलालक बेटी जेकर नाओं दिव्या छी, राजेविराजमे बी.एड. कऽ रहली हेन। साल भरि पहिने दिव्याक बिआहक बात-चीज ठील्ला गामक रामअवतारक बेटाक संग चलल। रामअवतारक बेटा अनिल भोपालमे इंजीनियरिंग कऽ पढ़ाइ कऽ रहल छला। दस लाख नेपाली टकामे बात पक्का भऽ गेल छल। दुनू दिससँ छेका-छुकी सेहो भऽ गेलै। छह महिना पहिने अनिल इंजीनियरिंगक डिग्री लऽ भोपालसँ नेपाल आएल। दूर संचार विभागमे भैकेन्सी भेल। ओहो आवेदन देलक। अनिलक पिताजी रामअवतार तेज आदमी अछि। ओ दौग-धूप केलक। चारि लाख टका घूस मांगलकै। रामअवतार दौगल बरही आएल। रूपलालकेँ कहलखिन- अहाँ जमाएकेँ नौकरी भऽ रहल अछि। चारि लाख टका घूस लगै छै। अहाँ दस लाख टका जे बिआहमे देब तइमे सँ चारि लाख टका अखनि दऽ दिअ। बाँकी छह लाख टका बिआहसँ दस दिन पहिने दऽ देब। जमाएकेँ नोकरी भऽ जाएत तँ बेटी रानी भऽ कऽ रहत। रूपलाल विवेककेँ फोनपर सभ बात बतौलखिन। विवेक कहलकनि, ठीक छै, अहाँ रामअवतार बाबूकेँ विराटनगर भेज दियौ। हम चारि लाख टका दऽ देबनि। रामअवतार विराटनगर जा विवेकसँ चालि लाख टका आनि बेटाकेँ संग कऽ काठमाडू गेला। घूस दऽ बेटाकेँ नोकरी लगौलनि। गुरु बजला- “अच्छा, ई बता दिव्याक बिआह रामअवतारक बेटा अनिलसँ भऽ गेल ने।” चेला- “असलका गप तँ आब सुनाबै छी। कनी धियानसँ सुनियौ ने। आइसँ दस दिन पहिने रूपलाल अपना भातीजकेँ संग कऽ ठील्ला पहुँचला। रामअवतारकेँ बिआहक दिन पक्का करैले कहलखिन। ओ तीनटा दिनक प्रस्ताव रामअवतार लग रखलनि। आ कहलखिन अही तीनू दिनमे जे दिन अहाँकेँ सहुलियत हुअए से दिन तँइ करि लिअ। ढौआ जे बाँकी अछि ओ नगद लेब आकि चेक, सेहो कहि दिअ।” रामअवतार कहलखिन- “यौ रूपलाल बाबू, हमरा बेटाक भठियन गामबला पनरह लाख टका नगद, एकटा पल्शर मोटर साइकिल आ पाँच भरि सुन दऽ रहल अछि। अहाँक बेटीसँ हमरा बेटाक बिआहक गप पक्का अछि। अहाँ अनिलक नोकरी लेल चािर टका देने छी। तँए अहाँसँ मात्र पनरह लाख टकेटा लेब। गाड़ी आ सुन छोड़ि देब। जँ अहाँ पनरह लाख टकापर बिआह करैले तैयार छी, तँ फागुन दस गतेक दिन पक्का भेल। हमरा नगद टका दी अथवा चेक दी, हम सभमे तैयार छी। अहांकेँ जइमे सुविधा हुअए से करब।” तैपर रूपलाल बजला- “अहाँसँ तँ हमरा दसे लाखपर बात भेल अछि। आब अहाँ मन नै बढ़ाउ। हम बँकियौता छह लाख टकाक चेक भातीज मार्फत भेज देब।” रूपलालक गप सुनि रामअवतार तैशमे बजला- “जँ हमरा बेटाक संग अहाँकेँ अपना बेटीक बिआह करबाक अछि तँ मोल-मोलाइ छोड़ू आ पनरह लाख टकामे बात पक्का करि तीन दिनक भीतर बाँकी एबारह लाख टका पहुँचाउ। नै तँ कुटुमैती नै हएत। अहाँ चारि लाख टका हम अगिला महिनामे आपस कऽ देब।” आब तँ रूपलाल झमा गेला। आँखिक आगू अन्हार पसरि गेलनि। किछु फुड़बे ने करनि। गुरु फेर टोकलखिन- “अँइ रौ चेला, ई रामअवतार तँ बड़ नीच आदमी बुझाइत अछि।” चेला बाजल- “आगू सुनियौ ने।” गुरु- “अच्छा कह, आगू की भेलै।” चेला कहए लगल- “कनीकालक बाद रूपलाल अपनाकेँ सम्हारैत बजला, ठीक छै हम गाम जाइ छी। बेटासँ विचार करब। ओ जे कहत सएह करब।” रूपलाल आपस गाम आबि गेला। मुँहक उदासी देखि हुनकर पत्नी बूझि गेली जे शाइत दिन पक्का नै भेल। कोनो झंझट लगि गेल। दिव्या राजविराजसँ पढ़ि कऽ आपस नै आएल छेली। रूपलाल सभ बात पत्नीकेँ बतौलखिन। पत्नी कहलकनि, विवेकसँ फोनपर गप करू। तैपर रूपलाल बजला, अखनि तँ ओ क्लिनिकपर हएत रातिमे निचेनसँ गप करब। रूपलाल दुनू परानी रातिमे खेबो ने केलनि। रातिमे रूपलाल मोबाइलपर विवेकसँ गप करए लगला। गप करिते-करिते ओ कानए लगला। जखनि ओ बेटासँ मोबाइलपर गप करै छला, तखनि दिव्या अपना कोठरीमे पढ़ै छेली। कोनो गपक पता नै छेलनि। जखनि पिताजीकेँ कानब सुनली तखिन कान पाथि कऽ सभ गप सुनए लगली। सभ गपक थाह लगि गेलनि जे पिताजी फोनपर किए कनै छथि। दिव्याकेँ भरि राति नीन नै भेलै। ओ भरि राति सोचिते रहली। रामअवतार केते नीच आ कमीना अछि। चारि लाख टका हमरे बाबूजी सँ लऽ घूस दऽ बेटाकेँ नोकरी दियौलक। आइ बेटा नौकरी करए लगलनि तँ मन बढ़ि गेलनि। पाँच लाख टका बेसी कऽ हमरा बाबूजी सँ मंगै छथिन। एहेन नीच आ लोभी मनुखक बेटासँ हम अपन बिआह किन्नौं ने करब, चाहे जिनगी भरि कुमारिए किए ने रहि जाइ। गुरु फेर बजला- “वाह! वाह! दिव्या बड़ नीक बात सोचलक।” चेला बाजल- “आगू सुनियौ ने।” गुरु- “अच्छा सुना।” चेला कहए लगल- “विवेक फोनपर पिताजीकेँ कहलकनि, बाबू अहाँ जुनि कानू। हमरा एकेटा बहिन अछि दिव्या। अहाँक पएरक कृपासँ हम चारि-पाँच हजार टका डेली कमाइ छी। की करबै रामअवतार बाबूकेँ लोभ भऽ गेलनि। हम पाँच लाख टका आरो देबै। अहाँ शुक्र दिन रामअवतार बाबूकेँ बरही बजा लियौ। हम नगद एगारह लाख गिन देबै। चारि लाख तँ देनैहिए छियनि। शुक्र दिन साँझ धरि हमहूँ गाम पहुँच जाएब।” शुक्र दिन साँझमे रामअवतार बरही पहुँचला। सोचने रहथि जे नगद ढौआ देता तँ राजेविराज नेपाल बैंक लिमिटेडमे ड्राफ्ट बनबा लेब। नगद ढौआ लऽ जाइमे खतरा अछि। साँझमे विवेको गाम पहुँचला। खेनाइमे रामअवतारकेँ खूब सुआगत भेलनि। तरूआ, भुजुआक अलाबे खस्सीक मासु सेहो रहए। मुदा दिव्या एकदम गुमशुम। शनि दिन दस बजे रामअवतारकेँ पराठा आ अल्लुक भुजिया, हलुआ, सेबैक खीर आ रसगुल्लाक जलखै खुआएल गेल। जलखै करा एकटा कोठरीमे विवेक, रामअवतार आ रूपलाल बैसला। विवेक पुछलकनि- “ढौआ केना लऽ जेबै?” तैपर रामअवतार कहलखिन- “ढौआ दऽ दिअ आ अहाँ चलू राजविराज, नेपाल बैंकमे ड्राफ बनबा देब।” तैपर विवेक बजला- “आइ तँ शनि छी। छुट्टीक दिन छी। बैंक बन्न हएत।” रामअवतार बजला- “अच्छा अहाँ टका गिन कऽ दिअ। हम समधीकेँ संग कऽ ठील्ला चल जाएब। दू गोटे रहब तँ डर कम रहत।” विवेक आलमारी खोलि रूपैआ निकालि गिन कऽ रामअवतारकेँ देबए लगला आकि हहाएल-फुहाएल दिव्या पहुँच कऽ बजली- “रूकू भैया, रूकू। रूपैआ राखू। हम एहेन लोभी आ कमीना आदमीक बेटासँ अपन बिआह किन्नौं नै करब। चाहे जिनगी भरि कुमारि किएक ने रहि जाइ।” दिव्याक गप सुनि, सभ कियो अवाक् भऽ गेल। विवेक आ रूपलाल समझाबैक परियास केलनि तँ दिव्या अपना हाथमे एकटा शीशी देखबैत कहलकनि- “ऐ शीशीमे जहर छी। जँ अहाँ सभ जिद्द करब तँ हम जहर पीब लेब।” रामअवतार बाबू दिस घूमि बजली- “सुनू रामअवतार बाबू, अहाँ हमरा बाबूजीसँ चारि लाख टका लऽ गेल छी। जाबे धरि चारि लाख टका आपस नै करब अहाँ बरहीसँ आपस ठील्ला नै जा सकै छी।” गुरु डमरू बजबैत नाचए लगला। थोड़े काल नाचि बजला- “बड़ नीक बड़ सुन्नर। दिव्याकेँ बहुत-बहुत धैनवाद।” सभसँ बड़का भीआइपी गेस्ट हम आँगनमे चाह पीबैत रही। तखने पत्नी आबि टोकली- “यै, सुनै छिऐ?” हम कहलियनि- “हँ, कहू ने की कहै छी।” पुछलनि- “बम्बइ आम लऽ कऽ जीतू बौआ ओतए कहिया जेबै?” अकचकाइत हमरा मुँहसँ बहराएल- “हँ। ठीके मोन पाड़लौं। परसू रबि दिन भोरुका बस पकड़ि लेब। बारहे बजे तक पटना पहुँच जाएब। बम्बइ आमो खूब पाकए लगल अछि। चारि आना आम गाछेमे पाकि कऽ खसि पड़ल। काल्हि केकरो बजा कऽ आम तोरा कऽ रखि लेब आ परसू छह-बजिया बस पकड़ि लेब।” पत्नी कहलनि- “दस-बीस गो गछपकुओ लऽ लेबै।” हँ-मे-हँ मिलबैत कहलियनि- “हँ-हँ अबस्से लऽ लेबै।” हम आ जीतू दू भाँइ। हमर नाओं भोगेन्द्र आ हमर छोट भाए जीतेन्द्र। माए-बाबू हमरा भोगी आ जीतेन्द्रकेँ जीतू कहै छला। माए-बाबूक देखा-देखी आनो-आन लोक हमरा भोगी आ ओकरा जीतूए कहैत अछि। हम गाममे रहि कऽ खेती-गिरहस्ती करै छी। खेती की करब। अपना तँ मात्र एक्के बीघा खेत अछि। दू बीघा खेत लालबाबूसँ मनकूतपर नेने छी। जीतू पटनामे पंजाब नेशनल बैंकमे पी.ओ अछि। दोसर दिन हम एकटा गछचढ़ा लड़िकाकेँ बजा आम तोड़ेलौं। लगधग पाँच सए आम भेल। जइमे सए-सबा-सए पकले रहए। सभटा आम एकटा बोरामे लऽ मुँह बान्हि कऽ रखि लेलौं। एकटा झोरामे पचासटा गछपकू आम सेहो ओरिया कऽ रखि लेलौं। अगिला दिन साइकिलपर आम लऽ नवटोली चौकपर गेलौं। चौकेपर एकटा चिन्हारए ऐठाम साइकिल रखि सतबजिया बसपर चढ़लौं। लगधग डेढ़ बजे दूपहरमे पटना पहुँचलौं। जीतू डेरेपर छल। हमरा देखिते आबि कऽ गोर लगलक आ गामक समाचार पुछलक। हम असिरवाद दैत कहलिऐ- “गामकसभ समाचार ठीके अछि। तों अपन समाचार कहह, सभ कियो नीके-ना छह किने?” जीतू कहलक- “अहाँक असिरवादसँ हम दुनू गोटे कुशल छी।” हम कहलिऐ- “भगवानक किरपा।” जीतू बाजल- “केकरो मोबाइलसँ फोन केने रहितिऐ तँ खाना बनल रहितए।” हम कहलिऐ- “केकरा मोबाइलसँ फोन करितौं।” जीतू फेर बाजल- “एमकी गाम जाएब तँ एकटा मोबाइल नेने आएब। मोबाइल रहत तँ दुनू भाँइक बीच गप-सप्प होइत रहत। भौजीओसँ गप हाएत। अहाँ फ्रेश भऽ कऽ चाह पीबू। चाह पी कऽ जाबे स्नान करब ताबेमे खेनाइ बनि जाएत।” हम बाथरू जा फ्रेश भेलौं। फ्रेश भऽ ड्राइंगरूममे आबि बैसलौं। जीतूक कनियाँ एकटा प्लेटमे दालमोट आ छह-सात गोट बिस्कुट रखि हमरा गोर लगली। हम कहलियनि- “नीके रहू।” जीतू एक जग पानिआ एकटा गिलास नेने आएल आ कहलक- “ताबे पानि पी कऽ चाह पीब लिअ।” हम दालमोट आ बिस्कुट खाए लगलौं। पाँचे मिनटक पछाति कनियाँ दू कप चाह दऽ गेली। हम दुनू भाँइ चाहो पीबी आ गाम-घरक गपो-सप्पो करी। करीब पनरह-बीस मिनटक पछातिकनियााँ आबि कऽ बजली- “भात-दालि बनि गेल अछि। जाबे भायजी स्नान करथिन, तरकारीओ बनि जाएत।” हम बजलौं- “एते जल्दी केना बनि गेल।” जीतू कहलक- “भैया, गैसपर प्रेशर कुकरमे भात-दालि बनबैमे देरी नै लगै छै। आब अहाँ जल्दी-जल्दी नहा लिअ।” हम बाथरूमे जा कऽ स्नान कऽ कपड़ा बदलि ड्राइंगरूममे आबि कऽ बैसलौं। हमरा बसिते देरी जीतू एक जग पानि आ गिलास टेबूलपर रखि भीतर चलि गेल। कनियाँ एकटा थारीमे भात, कटोरीमे दालि आ एकटा प्लेटमे तीमन आ दोसर प्लेटमे भुजियाआ पापड़ दऽ गेली। जीतू एकटा कटोरीमे घीउ नेने आएल। किछु घीउ भातमे ढारि बाँकी दालिमे ढारि बाजल- “आब भोजन करू।” हम भोजन करए लगलौं। जाबे धरि हम खेनाइ खेलौं जीतू हमरा लग ठाढ़ रहल। कनियाँ परसनपर परसन आबि कऽ दैत रहली। भोजन केलाबादहम हाथ-मुँह धोइ कुरसीपर बैसलौं। जीतू लगमे आबि बाजल- “आब अपने अराम करू।” कहलिऐ- “जा तहूँ अराम करए गऽ” हम ओछाइनपर अराम करए लगलौं। हमरा पछिला सभ गप मोन पड़ि गेल। इण्टरमे पढ़ैत रही। जीतू सेहो अठमामे पढ़ैत रहए। जीतू पढ़ैमे चन्सगर रहए। ओ अपना किलासमे फस्ट करए। हमर बिआह भऽ गेल रहए। बाबूजी हमरा बिआहेमे धुर-बहुर करा दुरागमनो करा देने रहथि। मुदा हमर कनियाँ तैयो नैहरेमे रहै छेली। बाबूजी दिल्लीमे दालि मीलमे मोटियाक काज करै छला। हुनका ओतए बोखार लगि गेलनि। ठीकसँइलाज नै करा सकला। तेकर नतीजा भेलनि जे बड़ कमजोर भऽ गेला। डाक्टर कहलकनि- “कालाजार हो गया है।” तखनि हमरे एकटा गौआँ बहादूर काका हुनका नेने निर्मली टीशनपर उतरला। ओइ समैमे सवारीक सुविधा नै छेलै। हमर बाबूजी तेतेक कमजोर भऽ गेल छला जे पएरे गाम नै आबि सकला। तखनि बहादूर काका बाबू जीकेँ मोसाफिर खानामे बैसा अपने गाम आबि हमरा माएकेँ सभ बात कहलखिन। हम खेनाइ खा कऽ निर्मली कौलेज जाइले साइकिल निकालने छेलौं। माए हमरा लग आबि कहलक- “भोगी, केकरो टायरगाड़ी लऽ कऽ निर्मली टीशन चलि जा। गाड़ीपर बैसा कऽ बाबूकेँ आनए पड़तह। बाबूजी मोसाफिर खानामे छथुन। बड़ दुखित छथिन। चललो ने होइ छन्हि। कहाँदिन कालाजार भऽ गेलनि। बहादूर बौआ दिल्लीसँ संगे नेने एलनि। वएह आबि कऽ कहि गेला हेन।” हम साइकिल रखि मने-मन हियासए लगलौं जे केकर टायर गाड़ी लऽ जाइ। हमर नजरि बेचन काकापर गेल। हम बेचन काका ओइठाम विदा भेलौं। बेचन काका सोकबामे बैसि कऽ बाँसक पातक कुट्टी कटै छला। हमरा देखिते बजला- “आबह-आबह भोगी। कहऽ की हाल-चाल छह। आइ कौलेज नै गेलह की?” कहलियनि- “काका हमर हाल-चाल नीक नै अछि। बाबूजी बड़ दुखित छथि। कहाँदुन कालाजार भऽ गेलनि हेँ। चललो-फिरल नै होइ छन्हि। दिल्लीसँ आबि निर्मली निर्मली टिशनपर बैसल छथिन। बहादूर काका संगे एला हेन। वएह अखनि कहि गेला।” बेचन काका बजला- “तँ टायरगाड़ी लऽ जेबहक बाबूकेँ आनैले?” कहलियनि- “हँ, काका। तँए एलौं हेन।” कहलनि- “ठीक छै कनी जलखै कऽ लइ छी। ताबे बरदो खाइ छै।” हम कहलियनि- “हमहूँ गामपर सँ भेल अबै छी। अहाँ जलखै करि कऽ तैयार रहब।” “ठीक छै।” ओ बजला। हम गामपर आबि माएकेँ कहलिऐ- “बेचन काका जलखै करै छथिन। जलखै कऽ टायर जोति देथिन। किछु पाइ-कौड़ी छौ तँ दे। हएत तँ बाबूकेँ लऽ रामानन्द डाक्टरसँ देखा देबनि।” माए घर गेली। घरसँ एकटा फुच्ची निकालि अनली। फुच्चीकेँ उनटि दसटकही, पँचटकही, दू-टकही, एकटकही सभटा सिक्का सभ निकालि गिनलनि। सभटा मिला कऽ पाँच सए पचपन रूपैआ भेल। सभटा पाइ दैत माए कहली- “बाबूकेँ डाक्टरसँ जँचा दबाइ कीनि लिहेँ।” पाइ लऽ बेचन काका ओतए विदा भेलौं। बेचन काका टायरपर पुआर दऽ एकटा सतरंजी बिछा हमरे बाट तकैत रहथि। हमरा देखिते बजला- “गाड़ीपर बैसह। जोइत दइ छिऐ।” हम टायरपर बैसलौं। बेचन काका टायर जोइत विदा भऽ गेला। साढ़े बारह बजे हम सभ निर्मली टीशन पहुँचलौं। हम मोसाफिर खाना गेलौं। हमर बाबूजी मोसाफिर खानामे तौनी ओछा पड़ल छला। एकदम नरकंकाल जकाँ हुनकर शरीर भऽ गेल रहनि। हम लगमे जा टोकलियनि- “बाबू, बाबू?” ओ उठि कऽ बैसला आ बजला- “के भोगी! गाड़ी अनलह की?” बाबू जीक पएर छूबि गोर लागि कहलियनि- “हँ बाबू। बेचन कक्काक टायर अनलिऐ हेन। अहाँ किछु पानि-तानि पीलिऐ किने?” बाबूजी बजला- “हँ। एक गिलास बदामक सतुआ पी कऽ एक कप चाह पीने रहिऐ। “अच्छा उठू चलू टायरपर बैसू गऽ। डाक्टर रमानन्द बाबू लग चलै छी। हुनकासँ देखा दइ छी। तेकर पछाति खेनाइ खाएब।” -हम कहलियनि। बाबूजी बजला- “मुदा हमरा लग ढौआ कहाँ छह। दू महिनासँ बैसिले छेलौं। जेहो ढौआ छल, सभ दबाइमे खरच भऽ गेल।” हम कहलियनि- “अहाँ ढौआक चिन्ता जुनि करू। हमरा माए किछु ढौआ देलक हेन। आेइसँ ताबे इलाज करा दइ छी। डाक्टर साहैब की कहै छथि, तेकर बाद आगूक बात आगू सोचब।” बाबू जीकेँ लऽ कऽ हम डाक्टर रामानन्द बाबूक क्लिनिकपर एलौं। जाँचि कऽ डाक्टर साहैब कहलखिन- “हम दबाइ लिखि दइ छी। दबाइ लऽ कऽ हमरासँ देखा कऽ शुरू कऽ दियौ। मुदा हिनकर इलाज नीकसँ करबए पड़त। दरभंगा लऽ जा कऽ होसपीटलमे भर्ती करा दियौ।” डाक्टर साहैबक फीस दऽ दबाइ कीनिलौं। किशन होटलमे खेनाइ खेलौं। खेनाइ खा तीनू गोटे टायरपर बैसि विदा भेलौं। गोसाँइ डुमैसँ पहिने गाम पहुँचलौं। माए बाबूक हालति देखि बोम फाड़ि कऽ कानए लगली। माएकेँ कनैत देखि जीतूओ कानए लगल। हमरो आँखिसँ दहो-बहो नोर जाए लगल छल। बेचन काका हमरा हमरा सभकेँ चुप करबैत बजल छला- “कनने, खीजनेसँ किछ ने होइ जेतह। पाँच-सात हजार टाकाक ओरियान कऽ दरभंगा लऽ जाहुन आ नीकसँ इलाज कराबहुन।” पाँच कट्ठा खेत सात हजारमे भरना रखि चारिम दिन हम, माएकेँ संग कऽ बाबूकेँ लऽ दरभंगा गेलौं। बाबू जीकेँ दरभंगा अस्पतालमे भर्ती करेलौं डाक्टर साहैबसँ पुछने रहिऐ- “सर, बाबूजी केतेक दिनमे ठीक भऽ जेथिन।” डाक्टर साहैब बजल रहथिन- “रोगीकेँ रोग गरसि नेने अछि। लीवर सेहो ठीकसँ काज नै करै छै। तँए किछु कहब मोसकिल।” दरभंगा जाइसँ पहिने माए बेचन काका आ जीतूकेँ हमरा सासुर भेज हमरा कनियाँकेँ विदागरी करा अनने रहथिन। दिल्लीसँ एलाक मासे दिनक भीतर बाबूजी हमरा सभकेँ छोड़ि दुनियाँसँ चलि गेला। जीतू बाबू जीक पएरपर माथा पटकि-पटकि कनैत रहए।बेचन काका जीतूकेँ समझबैत कहने रहथिन- “तोरा तँ बाप तुल जेठ भाए भोगी छेबे करथुन। चुप भऽ जा। भोगी तोरा सभ किछु करतऽ। पढ़ेतह-लिखेतह, बिआह-शादी करतऽ।” जीतू हमर पएर पकड़ि कानए लगल रहए। हम जीतूकेँ भरि पाँजमे लऽ कनैत कहने रहिऐ- “तों चिन्ता जुनि कर। हम तोहर जेठ भाय छियौ। तोहर सभ जवाबदेही हमरापर दऽ बाबूजी चल गेला। हम अपन फर्ज पूरा करब।” बाबू जीक मरला बाद हम पढ़ाइ छोड़ि खेती-गिरहस्ती करए लगलौं। बाबू जीक सोगे माए जे सोगेली से ओहो छबे मासक भीतर हमरा सभकेँ छोड़ि बाबूएजी लग स्वर्ग चल गेली। जीतूक दुनू आँखि कनैत-कनैत फूलि गेल छल। ओ माइक पएरपर माथ पटैक-पटैक कानै छल। हमर कनियाँ जीतूकेँ सम्हारने छली। मरैसँ पहिने माए हमरा कहने छेली- “बौआ भोगी, जीतूकेँ पढ़ा-लिखा हाकिम बनाबिहऽ।” हम माएसकेँ कहने छेछिऐ- “माए चिन्ता जुनि कर। जीतूकेँ पढ़बैमे हमरा डीहो बेचए पड़त तँ बेचि लेब।” जीतू पढ़ैमे तँ चन्सगर रहबे रहए। ओ मैट्रिससँ लऽ कऽ एम.काँम. धरि फर्स्ट डिविजनसँ पास केलक। एम.काँम. केला बाद जीतू पटनामे रहि प्रतियोगिता परीछाक तैयारी करए लगल। जीतूकेँ पढ़बैमे हमरा एक बीघा खेत बेचए पड़ल। एम.काँम. केलाक बाद साले भरिक भीतर जीतू पंजाब नेशनल बैंकमे पी.ओ, पदपर बहाल भऽ गेल। जइ बैंकमे ओकरा नौकरी भेटल ओ पटने शहरमे अछि। हाजीपुरक स्टेट बैंक मैनेजरक बेटी संग जीतूक बिआह भेल। जीतूक एकटा जेठका सार पी.एम.सी.एच.मे डाक्टर छथिन। ई सभ सोचैत-साेचैत हम नीन पड़ि गेलौं। नीन टुटल तँ सुनलिऐ, जीतू अपना कनियाँकेँ कहैत रहनि- “भैया रबि दिनकेँ माछ-मासु नै खाइ छथिन। तीमन तरकारीमे की सभ आनए पड़त।” कनियाँ बजली- “अल्लू-पीऔज तँ अछिए। परोर, रामझुनी, करैला आ सजमनि लऽ लेब।” जीतू बाजल- “अच्छा झोरा दऽ दिअ। हम जक्सन जाइ छी ओम्हरेसँ तरकारी कीनने आएब। हँ, भैया सुति कऽ उठथिन तँ चाह बना कऽ दऽ देबनि।” कनियाँ बजली- “अहाँ कहबै तब हम भायजी केँ चाह बना कऽ दऽ एबनि। हमरा एतबो विवेक नै अछि की।” जीतू बाजल- “नै से नै। सएह कहलौं। ठीक छै हम जाइ छी।” कनियाँ बजली- “कनी सबेरे आएब। आन दिन जकाँ आठ राति नै बजा देबै।” “हमरो धियान रहतै जे भैया आएल छथिन।” - ई कहि जीतू झोरा लऽ कऽ चलि गेल। जीतूकेँ गेलाक पनरह-बीस मिनटक पछाति हम ओछाइनपर सँ उठि गेलौं बाथरूमे जा हाथ-मुँह धोइ कऽ कुरसीपर आबि बैसिले रही आबि कनियाँ एक गिलास पानि आ एक कप चाह दऽ गेली। चाह पीब हम कनियाँकेँ कहलियनि- “हम टहलि अबै छी।” कहि हम कपड़ा बदलि डेरासँ निकलि गेलौं सात-सबा-सात बजे आपस डेरापर एलौं। जीतूओ जक्सनसँ आबि गेल रहए। ओ कनियाँकेँ कहैत रहए- “दुधक पैकेट आ सेबैक पैकेट नेने आएल छी। चीनी सेहो नेने एलौं हेन। तरकारीमे परोर, रामझुमनी, करैला आ सजमनि अछि। सोल्हन्नी घीउमे पुरी छानि दियौ। अल्लू-परोरक तरकारी आ रामझुमनीक भुजिआ बना दियौ। सेबैक खीर सेहो बना दियौ।” कनियाँ बजली- “कनीए देशी घी घर-वेद रखने छी। जौं अखनि खरच करि लेब तँ कोनो भी.आई.पी. गेस्ट औत तँ केतएसँ आनब।” “कोन भी.आई.पी. गेस्ट?” - जीतू पुछलकनि। “अहाँक बैंक मैनेजर आ हमर डाक्टर भैया।” - कनियाँ बजली। “हमरा लेल सभसँ बड़का भी.आई.पी.गेस्ट हमर भैया छथि। जे माए-बाबूक मुइला बादो हमरा पढ़बैमे कहियो ढौआक कमी नै हुअए देलनि। हमरा पढ़बै खातिर एक बीघा खेत बेचि देलनि। हुनके कृपासँ आइ हम बैंकमे पी.ओ. छी।” जीतूक बात सुनि हमर छाती सूप सन भऽ गेल। फागुलाल साहु जीक किछु विहनि कथा- माइक डाँट बात बचपनक छी। हमर माए सदिखन हमरा नजरि चढ़ौने रहै छेली। पढ़ाइ खातिर सदिखन समझबैत रहै छेली, स्कूलक समैमे खिया-पिया कऽ सहियारैत-पुचकारैत विद्यालय पठबैत छेली। मुदा हम तँ बेसी दिन अदहे बाटमे संगतुरियाक संग खेलैत रहि जाइत रही। जखनि विद्यालयक छुट्टीक समए होइ छल तखनि झटदनि घर आपस आबि जाइ छेलौं। हमर माए नीक-निकुत खाइले दऽ दइ छेली। मुदा हम तँ विद्यालयक चौकैठो तक ने जाइ छेलौं। तँए, मन तँ गुदगुदाइत रहै छल। माए जखनि आन छात्र सभसँ पुछै छेलखिन हमर हाल-चाल तँ सभटा पोल खुलि जाइ छल। नै पढ़बा खातिर बहुतो टाँट-फटकार करैत लुलुआबैत छेली। हम मुँह लटकौने चुप्पी साधने सज्जनक स्वरूप बनौने लिबिर-लिबिर तकैत माइक ममता जगबैत अप्पन दोख छुपबैत सफाइ वचन बजैत रहै छेलौं। तेतबे नै! पीटाइओ तँ खाइए पड़ै छल। पिताजीक सेहो आ गुरुजीक तँ अलगे। मुदा हमरा तँ माइक डाँट बड़ अधला जकाँ लगै छल। हमरा ऐ बातक भान थोड़े छल जे माए पढ़ाइक महत जनै छथिन तँए डँटै छथिन। जेना-तेना मैट्रिक धरि तँ आबि गेलौं मुदा पढ़ाइमे हम केहेन छेलौं से तँ बुझिए गेल हएब। पिताजी सेहो हमर पढ़ाइ-लिखाइ खातिर चिन्तिते रहै छला। पिताजी सदिखन चिन्तामे डुमल रहै छला। एक दिन दिलक दौड़ा पड़ि गेलासँ स्वर्गधाम चलि बसला। आब हमरा विद्यालय जेबाक संग घर परहक पढ़ाइ सेहो बन्न भऽ गेल। चूकि घरोक काज-भार हमरेपर पड़ि गेल। बोर्ड परीक्षामे सेहो फेल भऽ गेलौं। मैट्रिक परीक्षामे फेल भेने लागल कि सम्पूर्ण जीवन दुखे-दुखमे बितल। संगी-साथीक सेझहा लज्जित सेहो रहए पड़त, ई सोचैत मन पड़ल माइक डाँट-फटकार। जखनि ओ हमरा पढ़ाइ खातिर डँटै छेली तखनि हमर अन्तर आत्मासँ अवाज आएल- “अखनि बेर नै भेल अछि, समए बँचल अछि शेष।” आब हमरा पढ़ाइक जुनुन सवार भऽ गेल। हम पुन: मैट्रिकक फार्म दुबारा भरैत पढ़ाइ शुरू केलौं। मैट्रिक परीक्षामे प्रथम स्थान केलौं। प्रथम स्थान पाबि आगूक पढ़ाइ जारी रखलौं। माइक कृपा भेल, संगे आसिरवाद भेटए लगल। आजूक दिन सरकारी सेवामे पदाधिकारीक पदपर रहि सेवा दऽ रहल छी। माइक डाँट, असिरवादमे बदलि गेल। हमर कामयावीक सभटा श्रेय माइक छी। संगे हमरा ई अनुभव भेल जे माता-पिताक डाँट-फटकार बेजा नै होइत अछि। किएक तँ माइक डाँटमे बच्चाक भलाइक कामना नुकाएल रहैत अछि। आत्म निर्भरता लेल कोनो उमेर नै- पछिला महिना हम अपन मित्रसँ मिलबाक खाितर राजस्थान गेल छेलौं। मित्रक घरक बगलमे एकटा साइठ बर्खक महिला छल। जिनकर माथ अँचरसँ झाँपल छल आ पल्थी मारि जमीनपर बैसल छेली। सहायता समूह जीविका प्रशिक्षण प्राप्त करि कऽ पापड़ बनबैत जीवनक आत्म निर्भर भऽ अपन सहायता समूहक माध्यमसँ गाममे एकटा परियोजना चला रहल छेली। परियोजनाक माध्यमसँ गामक बहुतो महिला सभ आत्म निर्भर प्रतिभावी प्राप्त केने कम्प्यूटर, सौर ऊर्जाक क्षेत्रमे समपन्न खुशहाली पकड़ि कऽ रखने छेली। संगे गामक बालक-बालिका सेहो सभ कुड़ा-कड़कट अथबा लकड़ीसँ खेलौना बनेनाइ सीख कऽ काबिलेतारिफ छल। हुनका सबहक प्रतिभा आ जीबठ देखैत बनै छल। देखैमे आएल जे ढलैत उमेरक औरत सभ जे कम्प्यूटरपर बैस अपन-अपन कारोबारक लेखा-जोखा तैयार करबामे सेहो काबिलेतारिफ छल। हमरा झाँकैत देखि ओ औरत मुस्कुराइत कहली- “अन्दर आबि जाउ ने।” हम अन्दर चलि गेलौं। पुछलियनि- “अहाँ की कऽ रहल छी?” बजली- “कम्प्यूटरपर नोटिश बना रहल छी। हमर काज अछि गाममे जा लोक सभसँ मिलि कऽ हुनकर सबहक तकलिफ आ सुझाव इकट्ठा करि कऽ कम्प्यूटरपर टाइप कऽ जीविका अधिकारीकेँ पठा देनाइ।” हम आगू पुछलियनि- “ई काज अपने केतेक दिनसँ करै छी?” ओ बजली- “किछुए सालसँ कऽ रहल छी। हम अनपढ़ छेलौं। ई काज करैले पढ़नाइ-लिखनाइ सीखलौं। आब हम ई-मेल करब।” ई कहैत हमरा धियानकेँ अपना तरफ खिंचैत टाइप करबामे लगि गेली। टाइप बिलकुल देवनागरी लिपिमे सुसज्जित छल, सजौल छल। ई साइठ बर्खक महिलाक तजुरबा देखि हम चकित भऽ गेलौं। आब हमर उत्सुकता आगू बढ़ल लगल। बढ़ैत उत्सुकताक क्रममे फेर पुछलियनि- “आर की सभ करै छी?” ओ बजली- “दू सए पचास लड़कीकेँ कम्प्यूटरक ज्ञान जेतेक हमरा अछि ओ सीखा चुकल छी।” हम ई सुनि आरो चकित भेलौं। नजरि बगलक कोठरीमे गेल। देखलौं एकटा नवयुवती कम्प्यूटरपर अपन आँगूर दौगा रहल अछि। ओइ नवयुवती दिस हमर नजरिकेँ देखैत पुन: बजली- “ओ नवयुवती जिनका अहाँ देखै छी, अनेक नव-नव लोककेँ आब हमरे जकाँ कम्प्यूटरक जानकारी दैत रोजगार योग्य बना रहल अछि।” हम एकबेर फेर चकित भऽ गेलौं। लागल जे किछु करबाक हेतु उमेर कोनो बाधा नै होइत सिरिफ जिज्ञासा चाही। मर्दानी नारी मर्दानीक मतलब होइत अछि, निडर, साहसी, स्वतंत्रता व आत्मनिर्भरता। नारी जेतेक अछि सबहक अन्दर ई तागत अछि, परन्तु खगता ऐ बातक अछि जे नारी सभ ई बातकेँ समझौ आ समझि कऽ बाहर निकालौ। ई कथा छी एकटा अब्बल-दुब्बर गरीब नारीक। बर्ख २०१३ तिथि स्वतंत्रता दिवसक दिन हरिपुर डीह टोलक रूपनी देवी, मधुबनीसँ कलुआही जाइवाली पक्की सड़कक कातमे एकटा छोट-छीन चाहक दोकान खोलि अपन रोजगारक शुरू केलक। रूपनीकेँ ई दोकान खोलैक प्रयोजन ऐ लेल पड़ल जे एक दिन अन्नक अभावमे बाले-बच्चे भूखले सूतए पड़लै। विहान भने रूपनीक पति भोला रोजी वास्ते गामक मालिक टुनटुन ठाकुरक हबेलीमे पहुँच मजदुरी करए लगल। दोकान खोलैसँ पनरह दिन पहिनेक बात छी। रूपनी अपन पतिक कमाएल बोइन लबैले टुनटुन ठाकुर हबेलीपर गेल। भिनसरक आठ बजैत रहै। रूपनीकेँ देखिते ठाकुर साहैब पुछि बैसल- “केतए एलेँ रूपनी?” बाजलि- “मालिक, बोइन लइले।” एतबे बात सुनैत टुनटुन बाबू भड़कि उठला। रूपनीकेँ फटकारैत बजला- “अखनि तँ भोलबा खेतमे पहुँचबे कएल आ तूँ बोइन ले चलि एलेँ।” रूपनी सकदम भऽ ठाढ़े छल। आकि पुन: टुनटुन बजला- “खुरपी ले, दरबज्जाक सभटा घास उखार तखने बोइन देबौ।” ई बात सुनिते रूपनीक आगू रातिक तरेगन सोझहामे आबि गेल। माथपर हाथ दऽ सोचए लगल। की करूँ, रातिमे तँ सब परानी भूखले सुति रहलौं। अखनि की खाएत आ खाएब। मालिकक बात तँ निठुर होइते अछि। कमाएलो बोइनपर लुलकार सुनैए पड़ै छै। आब की करब! पेटमे अन्न नै, गामपर बच्चा बाटे तकैत हएत जे मालिक ऐठामसँ किछु आनत माए तँ खाएब। मुदा ई कोन भगवानक चक्र छी। नै आब छूछ हाथे घर नै जाएब। सोचैत रूपनी चटे हबेलीसँ धुरियाएले पएरे घूमि बजार पहुँचल। बजारक एकटा किराना दोकानपर आबि दोकनदारकेँ कहलक- “मालिक, ई हमर नाकक छौंक रखि लिअ आ चाउर-आँटा दिअ।” दोकनदार बाजल- “भोला हमर दू दिन काज केने छल, जे बोइनो पछुआएल छै। अहाँ जे समान लेब से बाजू दऽ दइ छी।” रूपनी सोचैत बाजलि- “एक दिनक बोइनक चाउर-आँटा दऽ दिअ आ एक दिनककेँ चाहपती-चीनी आैर बिस्कुट आैरो पलाष्टिकक पचासटा गिलास दऽ दिअ।” दोकानदार बाजल- “पाहुन अबै छथि की?” रूपनी- “नै, चाहक दोकान खोलब।” दोकानदार चाहक दोकान खोलै जोकर सभ समान दैत समझबैत-बुझबैत दोकान चलबैक सभ तरीका बुझा रूपनीकेँ विदा केलक। रूपनी घर अबिते पहिने खेनाइ बना बाल-बच्चाकेँ खिआ पति लेल खेनाइ लऽ ठाकुर साहैबक खेत जा भोलोकेँ खिएलक। पछाति ओतएसँ घर आपस विदा भेल। बाटमे अबैत रूपनीकेँ ठाकुर साहैबक मलिकाना बात झुड़झुड़ाइत माथकेँ घुड़ियबैत, पछाति बरहम स्थानमे बैसि दोकानक जगह टोहिया लेलक। टोहियबिते ओतए घर आबि पहिने खेनाइ खेलक। दोसरे दिन रूपनी स्वतंत्रता दिवसक अवसरिपर चाहक दोकान खोलि अपन मधुर भाषाक सहयोगसँ चाह-बिस्कुट बेचए लगली। अपन हूनर संग साहसकेँ बटोरि पतिकेँ मजदूरी करैसँ मना करैत दोकानेपर काज करैक बोध देबए लगली। भोला सेहो मालिक ठाकुरक झझकारकेँ मोन पड़ैत दोकानक काजमे जतनसँ लागि गेल। रूपनी साले भरिमे काफी उन्नति करैत दोकानक रंग-ढंग बदलि देलक और अपन पति भोलाकेँ मालिक कहि सम्बोधित करैत चाहक दोकानसँ मिठाइ, जलपान आ भोजनक दोकान बना रूपनी अपन साहस आ मर्दानीक संग आत्म निर्भरताक परिचए दैत स्वतंत्रताक जिनगी जीवि रहल अछि। चतुर बालक ई कथा सोनू नामक एकटा दस बर्खक बालकक छी। सोनू गरीब परिवारमे जनम भेने गामक-घरक लड़का सभसँ कतराइते रहै छल जे, हमर माए-बाबू गरीबीक जिनगी जीब रहल अछि। एक दिन सोनू अपना गामसँ बजार चलि देलक। बाटमे सोचैत रहल जे गरीबसँ धनीक केना हएब। ई सोचैत सोनू एकटा होटलक सोझहा सड़कपर ठाढ़ भऽ गेल। सोचैत-सोचैत सोनू होटल दिस डेग बढ़ेलक। तखने होटलक मालिक मनेजरकेँ कहलक- “हम ऊपरका रूपमे सुतैले जाइ छी, बेसी खगता हुअए तखने हमरा उठाएब।” सोनू ऐ बखतकेँ मोनासीब बूझि दस मिनट रूकि कऽ मनेजरकेँ कहलक- “होटलक मािलक- बौधू बाबू हमर पिताक दोस्त छथिन। हुनकासँ भेँट करबाक अछि।” मनेजर एकटा बेड़ा दियए सोनूक समाद मालिक लग पठेलक। मािलक अधकचुआ नीनमे रहैक कारणे बेड़ाक बातकेँ ठीकसँ नै बूझि कहलनि- “जाउ, जे मगैत होइ से दऽ देबै।” निच्चाँ आबि बेड़ा मालिकक कहब मनेजरकेँ सुना देलक। आ अपन काजमे लगि गेल। मनेजर सोनूकेँ पुछलक- “बौआ, की लेबह?” सोनू उत्तर दैत कहलक- “खेनाइ खिआ दीअ आ जे बढ़ियाँ मिठाइ हुअए से दूटा डिब्बामे दऽ दीअ।” मनेजर सोनूकेँ खेनाइ खिआ दू डिब्बा बढ़ियाँ मिठाइ सजा कऽ दऽ देलक। सोनू होटलसँ दुनू डिब्बा मिठाइ लऽ विदा भऽ गेल। हाथमे दुनू डिब्बा लेने चतुराइ करबाक तजूरबा करबाक लेल दोसर शहर चलि गेल। ओतए सोना-चानीक दोकानमे पहुँचल। दोकानक मालिक लोभी छल। ई बात सोनूकेँ मालूम भऽ गेल छेलै। सोनू ओइ लोभी मालिककेँ चिन्ह, प्रेम-भाव देखबैत मिठाइक सुन्दर साजौल दुनू डिब्बा दैत बाबूजी शब्दसँ सम्बोधित करैत हाथमे थम्हा दैत अछि। लोभी मालिक मिठाइक डिब्बा अपन पत्नी निरूकेँ बजा दऽ दैत अछि। किछुए कालक बाद, जखनि दोकानमे गहिंकी सबहक भीड़ लगल, तखने बाजल- “बाबूजी, डिब्बा महक मिठाइ रखि लिअ आ डिब्बा हमरा दऽ दिअ।” मािलक बिनु सोचने सोनूकेँ कहलक- “जा भीतर, चाचीसँ डिब्बा मांगि लिहऽ।” सोनू भीतर गेल आ मालिकिनकेँ कहलक- “चाची, बाबूजी दूटा सोनाक सिक्का दइले कहलनि।” सुनिते मलिकिनी विचारए लगली। देबाक मन नै देखि सोनू जोरसँ बाजल- “बाबूजी, जाबए अपनेसँ नै कहबै ताबए चाची थोड़े देती, अपनेसँ कहियौ ने।” मालिक दोकानपर भीड़क कारणे गद्दीएपर सँ पत्नीकेँ कहलखिन- “दऽ दिऔ ने।” पतिक आदेश पाबि मलिकिनी सोनाक दूटा सिक्का सोनूकेँ दऽ देली। लऽ कऽ साेनू ओतएसँ ससरि गेल। आब सोनू ओतएसँ तेसर बजार गेल आ ओतए ओ दुनू सोनाक सिक्का बेचि धन इकट्ठा करए लगल। ऐ बातक जानकारी गामक मालिक नवीन बाबूकेँ सेहो भेलनि। नवीन बाबू दरबारक सिपाहीकेँ कहि सोनूकेँ बजा पूछ-ताछ केलनि। सभटा बात साँचे-साँच बतबैत कहलक- “अपन गरीबीसँ छुटकारा पबैले हम एना कऽ रहल छी।” ई बात कहैत सोनू मालिककेँ प्रणाम कऽ सोझहेमे ठाढ़ भेल रहल। किछुए कालक बाद सोनू फेर बाजल- “जाबे हमहूँ धनीक नै हएब ताबे कोनो ने कोनो चतुराइ तँ करिते टा रहब ने।” मालिक नवीन बाबू सोनूक चतुराइ संग धनीक हेबाक दृढ़ सोचकेँ देखैत गुम्म भऽ गेला। डण्डित करब सेहो मनमे एलनि मुदा ओ सोचलनि जे से नइ तँ एकरा निअमित काजमे लगा दिऐ जइसँ ऐ तरहक ठकपानासँ दूर भऽ जाएत। यएह सोचि अपना दरबारमे रखि लेलक। फागुलाल साहु जीक आलेख-मानव जीवनमे नारी स्वरूपक गरिमा मानव जीवनमे नारी स्वरूपक गरिमा :: फागु लाल साहु ई हमर माइयक सानिध्यक बात छी। हे माइ अहाँक सानिध्य पाबि हम जानि सकलौं जे नारी व्रह्मविद्या छी। श्रधा छी। कला, ममता, शान्ति, दया संगे पवित्रता सेहो छी। अहाँ सभटा छी जे संसारमे सर्वश्रेष्ठक दृष्टिगोचर होइत अछि। एतबे नै नारी कामधेनु अनुर्पर्णा सिद्धी-रिद्धी सेहो छी। नारी मानव प्राणीक समस्त अभाव कष्ट आ संकटसँ बाहर रखैक समयानुसार अपन स्वरूप बदलि-बदलि कऽ निष्ठापूर्वक सामर्थ्यवाण होइत अछि। जौं हुनक श्रद्धा-शक्ति आ क्षमताकेँ चिन्हल जाए, मानल जाए तँ समस्त विश्व भरिक कण-कणमे स्वर्गीय स्वरूप बहाल कऽ सकैत छथि। माए अहाँक सिनेह पाबि कऽ हमरा ई बोध भेल जे नारी सनातन शक्ति छी। आदिकालसँ समाजिक दायित्वकेँ अपन कान्हपर उठौने आबि रहली अछि। जौं ई भार पुरुखक कन्हापर दऽ देल रहैत तँ कहिया ने डगमगा गेल रहैत। किन्तु विशाल भवनक नीब जकाँ ओतबे कर्तव्यनिष्ठ मनोयोग, संतोष, संगमकेँ प्रसन्नतापूर्वक अखनो घर चलबैत चलि आबि रहली अछि। ई तँ मानवीय मूलक साकार प्रतिमा छी। हे जगत जननी अहाँक कृपासँ हम निम्न ऋृषि वाणीकेँ अन्त:करणमे बसौने रहै छी। कहल गेल अछि- विद्या समस्तातव देवी भेदा:। स्त्रिया: समस्ता सकला जगत्स।। त्वयैकया पूरितमम्बएतत् काते। स्तुति: स्तब्यपरा परोक्त्िा।। हे देवी समस्त संसारक सभ विद्या अहींसँ निकलल अछि। सभ स्त्री अहींक स्वरूप छी। समस्त विश्व एक अहींसँ पुरित अछि। अहाँक स्तुती कोन रूपे कएल जाए, अन्त:करणमे ऐ भावक घनीभूत अनुभूतिसँ प्रेरित भऽ हम सभ अहाँक सन्तान...। नास्ति मातृसमा छाया नास्ति मातृसमा गति:। नास्ति मातृसमा त्राणं: नास्ति मातृसमा प्रिया। माएक समान कोनो छाया नै अछि। माएक समान कोनो सहारा नै अछि। माएक सदृश कोनो रक्षक नै अछि। माएक सदृश कोनो प्रिय वस्तु नस्तु सहारा नै अछि। माएक समान 000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000ै अछि। सृष्टिक रचना आ ओकर पालन सेहो अहाँक कार्य रहल अछि। सन्तानो निर्माणमे माएक जे भूमिका रहैत रहल से पितासँ हजारो गुणा अधिक होइत देखल जाइत अछि। देवी अशिज पुत्र कादिवानकेँ अपना संरक्षण सान्धियमे रखि कऽ शिक्षा देलखिन। हुनका विद्वान बनेबाक अतिरिक्तो योग्य विद्यामे प्रकाण्ड विद्वता सेहो हाँसिल भेल। मर्मज्ञ ऋृषि पंचशिख विषयपर अनेको गंथ लिखलनि तइमे स्वयं स्वीकार केने छथि जे ई ज्ञान माइ सुलभासँ भेटल अछि। वनवासी शकुन्तला अपन पुत्र भरत जिनका नाओंपर ऐ देशक नाअों भारतवर्ष पड़ल अछि। हुनक पालन-पाेषण संगे प्रक्रमी बनेबाक श्रेय माएक अविरल अछि। भरत माइक सिनेह पाबि बचपनेसँ शेरक बच्चाक संग खेलैमे मस्त रहल। निष्ठा आ लगनक प्रतिक ध्रुवक पालन-पोषण हुनक माइ सुनीति तपश्वनी वनमे रहि कऽ केने छेली। अपन शिक्षण द्वारा संस्कारित कऽ बचपनेमे जीवनक रहस्यक बोध करा देलखिहिन। तइसँ ध्रुव प्रमात्माक अनुभूितकेँ साक्षात् दिग्दर्शन प्राप्त कऽ लेला। सत्यनिष्ठ सीता वनवासिनी अपन जीवनोपरान्त सातित्वक व्रर्त धारण करैत पतिव्रताक निर्वाहण करैत अभावग्रस्त स्थितिमे रहितो लव-कुशक पालन-पोषण वालमिकी आश्रम रहि केलनि आ लव-कुशकेँ एहेन योग्य सामर्थ पुरुषार्थ बनौलनि जे अजय हनुमान, तथा लक्ष्मण जैसन वीर महापुरुषकेँ लव-कुशक सोझहामे पराजित हुअ पड़लनि। ज्ञान विज्ञान आ आध्यात्मिक प्रतिभावक क्षेत्रमे देखल गेल कि ढेर रास उदाहरणक पात्र सोझामे आबि जाइए। जेना महर्षि पुलोत्माक पुत्री शची, महर्षि वशिष्ठक आश्रममे रहि कऽ ज्ञान-विज्ञानक प्रवीणता हाँसिल केने छेली। शचीकेँ साधनाक प्रतिभासँ प्रभावित भऽ कऽ देवराज इन्द्र हुनका मंगबैले पुलोत्माक दुआरपर स्वयं पहुँचला। तथा शची इन्द्रानी भऽ इन्द्रपुरीक मर्यादाकेँ बढ़ौलखिन। मनु एकबेर बजपेय यज्ञ केला। तँ कोनो योग्य पुरोहित नै मिल सकलनि। तखनि मनु अपन पुत्री इलाकेँ योग्य समझि यज्ञाचार्य नियुक्त केलनि आ अनुष्ठान सम्पन्न करौल गेल। इला अपन पिताक मर्यादाकेँ आगू बढ़ौलनि। आदि शंकराचार्य आ मण्डन मिश्रक शास्त्रार्थमे धर्मपत्नी भारती अपन विद्वतासँ प्रभावित करि कऽ सरस्वतीक उपमा प्राप्त कऽ चुकल छथि। तथा पति मण्डन मिश्रक विजयी हेबाक गौरव प्राप्त करा चुकल छथि। भारतक प्रसिद्ध जोतिष विद्वन भास्कराचार्य दुआरा रचित सिद्धान्त सिरोमणि पुस्तकेँ उत्तार्ध हुनक लड़की लिला दुआरा लिखल गेल छल। लिला अपन पिताक मर्यादाकेँ बढ़बैमे सदिखन तत्पर रहैत छेली। महराजा जनकक दरबारमे महाविदुषी गांग्रीकेँ आ महर्षि याज्ञवल्यकायक शास्त्रार्थ प्रसिद्ध अछि। ओही शास्तार्थमे याज्ञवक्कयकेँ गार्गीक पण्डित आ वैदुष्यकेँ लोहा मानए पड़ल अछि। एहेन बहुतो समतुल्य नारी छथि जेना उदलिंका, विध्यगाथा, अनुसुइया, गौतमीयमी, विहुला आदि अनेक विदुषीगण प्रख्यात अछि। ज्ञान, विज्ञानक क्षेत्रमे विश्वक अतिरिक्त शौर्य, साहस एवं पराक्रमीमे भारतीय नारीकेँ बढ़ल-चढ़ल देखल गेल अछि। अत: अवला कहबामे हास्यपद बुझना जा रहल अछि। उदाहरण स्वरूप तँ अनेको अछि जेना शिवक धनुषक शर्त राजा जनककेँ सीता स्वयंवरमे राखए पड़ि गेल जे ऐ धनुषक तोड़िनिहारेसँ सीताक बिआह करब। ई तँ सीताक पराक्रमक झलक छल। दशरथक युद्धमे केकयी सार्थिक भार निर्वाह करैत अपना पतिकेँ संकटसँ प्राण बँचौने छेली। कृष्णार्जुन युद्धमे अर्जुनक संग रथ संचालन द्रोपदी बड़ी कुशलताक संग निर्वाह केने छेलखिन। अर्थशास्त्रमे सेहो धनुषधारी महिलाक उल्लेख आबि रहल अछि। संगे ईहो वर्णन आबि रहल अछि जे बेटी-बेटीकेँ समान शिक्षा देल जाइत छल। ई जागरूकता आब समाजमे आबि रहल अछि। धर्म और समाज संस्कृतिक सेवामे नारी जाति बढ़ि-चढ़ि कऽ बलिदान प्रस्तुतक उदाहरण अछि। आचार्य वृहस्पतिक पुत्री देवीहूति और भावभव्यक कन्या रोमशा अपन पिता तथा पतिसँ आज्ञा प्राप्त कऽ विभिन्न क्षेत्रमे धर्म प्रचार केने छेली। तथा समाज कल्याणक कार्यमे दक्षता प्राप्त केने छेली। अभ्रण ऋृषिक कन्या एकटा गुरुकुल खोलि छात्र-छात्राक समान रूपे प्रवेशक अधिकार दऽ शिक्षा दान करबाक बेवस्था केने छेली। आइक जुगमे नारी रूपमे मदर टेरेसा भारतीय नारीकेँ गौरवान्ति सेहो केली अछि। नेतृत्वक क्षेत्रमे सेहो महिलाक भूमिका अग्रसर रहल अछि। इन्द्रकेँ दिशा निर्देश इन्द्रानीसँ प्राप्त होइत रहल छल। धृतराष्ट तँ राज्य संचालनमे अस्मर्थ छला। अही कार्मकेँ हुनक पत्नी गंधारी कऽ रहल छेली। ऐतिहासिक तथ्यकेँ देखलासँ स्पष्ट होइत अछि जे आइ धरि राजश्री रानी पद्मावती, लक्ष्मी वाइ, अहेल्या, सरोजनी नाइडू तथा कस्तुरवा गाँधी जकाँ अनगिनित उदाहरण अछि। बात प्रतिभा प्रमाणित करबाक तथा स्वयं विकसित हेबाक तक सीमित नै अछि। प्रतिभासँ कहीं अधिक हुनक तियागक अछि जे असीमित अछि। जेतए स्वयं पर्दामे रहि कऽ अपन पतिक समाज निर्माण आ आत्म निर्णाणमे सहायता प्रदान करैत रहल अछि। एतेबे नै, धर्मपत्नीक रूपमे योगदान प्रस्तुत करबामे सेहो मर्यादाक निर्वाह करैत रहल अछि। जेना महान विदुषी विधोतमाक बिआह अशिक्षित काली दाससँ भेल। विधोतमा एतेक विद्वान छेली जे बिआहक लेल शास्त्रार्थमे शर्त राखल गेल। अनेको विद्वान ओइठामसँ हारि मानैत आपस भऽ गेल। अन्तमे, क्षलसँ मूढ़ काली दासक संग हुनक बिआह करौल गेल। विधोतमाकेँ जब ऐ बातक पता चललनि तँ पति काली दासकेँ उत्तेजित करि कऽ ज्ञानक प्रति लगन पैदा केलनि आ हुनका अध्ययनक रूचि जगेलनि। फलस्वरूप मूढ़ मति काली दास अखनि महा कवि कालीदासक रूपमे विख्यात छथि। ऐ तरहेँ तुलसी दासक पत्नी रत्नावली अपन सुख-सुविधाकेँ तिलांजलि दैत अपन पतिकेँ कामुक्तासँ इश्वरभक्तिक ओर मोड़ैत रामभक्त महा लेखक बनौलखिन। ई सत् साहस रत्नावलीकेँ छल जे छुद्र मानवसँ तुलसी दास जकाँ संत आ रामचरित मानस महा ग्रंथक रचियेता बनौलनि। स्वयं रत्नावली उच्च कोटिक साहित्यकार सेहो छेली। मैत्रेयी महर्षि जाज्ञवल्कयक पत्नी छेली। ओ कोनो संसारिक सुखक वास्ते बिआह नै केने छेली। आपितु विशुद्ध आत्माक साधाना लेल हुनक सहधर्मीनी बनली। संसारिक सुखक इच्छाक विषयमे पुछलापर ओ साफ इन्कार कऽ गेली। ऐ तरहेँ राजकुमारी सुकन्या आन्हर वृद्ध चमन महर्षि केवल ऐ खातिर बिआह केलखिन जे हुनक तपस्या आ शोधकार्य हेतु आवश्यक साधन जुटबैमे सहायता प्रदान कऽ सकनि। राजा अश्वपतिक पुत्री विदुषी, अतिरूपनी राजकुमारी सावित्री एक वनबासी आ निर्धन सत्यवानसँ मात्र ऐ उदेशसँ बिआह केलनि जे हुनक बनौषधि शोधमे सहायक भऽ कऽ मानव मंगल हेतु महतपूर्ण योगदान करि सकनि। ऐ तरहेँ असंख्य प्रमाण अछि जइसँ सिद्ध होइए जे प्राचिने कालसँ आदर्शवादी नारीमे अपन प्रतिभा, क्षमता आ योग्यताक लाभ समाजकेँ देबामे अपन योगदान दैत मानव विकासमे मुख्य भूमिका निभाबैत रहल अछि। जरूरतो तँ बुझाइते अछि। नारी नर केर शक्ती अछि सृष्टि केर अभिव्यक्ति नारी बिना शिव सदृश कण-कणक शक्ति केर भक्ति। हमर समाजिक जीवन दाम्पति जीवनसँ आरम्भ होइत अछि। पति-पतिक बीच जेतेक प्रेम, सौजन्य, आत्म भाव, आत्म समर्पण आकि बफादारीक भाव रहत ओतबे मानवीय वा गृहस्ती जीवनमे आनन्दक प्राप्ति हएत। ओतबे अनुपातमे श्री समृद्ध एवं सुख-शान्ति भेटत। माएक स्वरूप धानण करैत गंगा सदृश भऽ जाइत अछि। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। सारस्वत: कविता सारस्वतक [१ आ २ (२५ टा); ३.“निमोछिया अबीर "(पिरोजगढ़ युवा समिति दिस सँ देश आ विदेश मे बसल सब व्यक्तिकेँ सारस्वतक अशेष २०१५ होलीक हादिॅक शुभकामना संग)] कविता सारस्वतक १ गौंवाँ हमर खेत के काटि रहल छथि धान, पाहुन मकड़ाक जाल बूनि खा रहल छथि पान । छोटकी ननदि तेत्तरि तोड़थि बड़की करथि कुटउन , मँझली बाड़ी साग उखाड़थि मुँह मे लेने पान । खुनियाँ पारा बाध नङहयए हँय - हँय केँ मार डाँङ , गौवाँ हमर खेत के तोड़ि रहल छथि चान । सारस्वत : पिरोजगढ । २ अप्पन माँटिक,अप्पन सुगंध/ मिथिला ,मैथिली जिनगीक कंठ।(1) नूतन,अविरल धरतीक आँखि/ स्वच्छ,सहज संसारक पाँखि।(2) हँसि-हँसि मानुक्ख, साटय प्राण/ प्रखर पहर इंसानक जान।(3) नवकी गाछी,नवका आम/ जिनगी सुन्दर ,दंत समान।(4) सूरजक आतुर, अर्क अबैयए/ चिड़ै कंठक बोल बजैयए।(5) रचि-रचि बदिरा पानि अनैयए/ धरतीक अमृत घोंट भरैयए।(6) उज्जर पाँखिक चन्नामामा/ आबू !,दौड़ू ! , पहीरि पैजामा।(7) रूद्राक्ष,शिव ताण्डव केर धरती/ गाबय हँसि-हँसि, टूटय परती। दरसन एक बेर फेर सँ मिथिलाक/ पायब सुख ,सौ जन्मक सितलाक।(9) , उतरी तोड़ि ,संसार रचैय छी/ रतुके जनमल ,ओस चटैय छी।(10) चुटूटी मुँहक ,लडूडु मीठ/ फह-फह करथि ,हमर सब मीत।(11) देहक संग क्रीड़ा-सुख करितहुँ/ हँसि-हँसि पाहुन पाग पहिरतहुँ।(12) कुक्करक खिस्सा,भेल बलाय/ देशक चिंता,देल सताय।(13) नवकी तोरी,फूल गुलाब/ उक्खरि मुसराक चोट जुराव।(14) ? साँसक सेल्फी,साउस बीमार/ गदही नाँचय अपने ताल।(15) संठी दऽ,धुआँ बहराइयए/ उघड़ल तागक घर बिलाइयए।(16) घरखस्सी मे झूटका भेटल/ हिनका,हुनका तमघैल भेटल।(17) राति सतरिया,दिन कनैयए/ बरदक नाङरि ढ़ील बीछैयए।(18) बड़का लोकक चार छिनार/ अगिला, पछिला उपर जाल।(19) पैसा भेने, भेल धनिक/ एहेन लोक लतमर्दन नीक।(20) धूर्त सियारक,नाङरि पैघ/ कोहा ,बासन उनटल घैल।(21) छाती,चूत्तर,तक्खन गाल/ आँखिक दूसल ,तकरो लाज।(22) छाउरक ढ़ेरी ,पैध अकास/ चौकी बैसल,फेंटथि ताश।(23) गोदना मे भरि गोबरक छत्ता/ कनमा भरि नहि,दूधक पत्ता।(24) , केहेन धरानी,रातिक आगि/ जरिते पुआर,उतरि गेल आगि।(25) सारस्वत;पिरोजगढ़। ३ “निमोछिया अबीर " (पिरोजगढ़ युवा समिति दिस सँ देश आ विदेश मे बसल सब व्यक्तिकेँ सारस्वतक अशेष २०१५ होलीक हादिॅक शुभकामना। गामक विकल्प शहर कहियो नै भऽ सकैछ।) भाङक गाछ तर रङक पुड़िया लेने ठाड़ि हमर नवकी भौजी आर जुआन भऽ गेलीह हेँ। हिनक पछुऐत मे अपन पिचकारी सँ रङ देबऽ मे अहुँकेँ नीक लागत। हउ वियोगी! आबह। सुस्मिताकेँ लगाबह। केदार बहुत लगेलक हेँ। कने प्रदीपोकेँ लगबऽ दहक। देवशंकर बैसल अछि अशोकक मुँह मे सिगरेट दऽ केँ । नचिकेताक मोंछक पमही देखियनहुँ कोना लगौने छथि ससरफानी रामलोचनकेँ। करिया बरदक आँड़ छापऽ मे लागल छथि रमणजी। हिनका शरदिन्दुक नाङरि पकड़ि भीमभाईक सोझहाँ लऽ चलू! सुनलहुँहें सुभाष आइ-काल्हि नवकी छौड़ीक सङ लुंगी घिनबैत छथि अजितक देखौंस कऽकेँ। भ्रमरक गाँती बान्हि बैसल अछि चंद्रेश। स्वंयप्रभाकेँ बढ़ चिक्कन सफाचट बर भेटलनि सौराठ मे मुछैल महदेवा। कामनीक हरियर झंडी लेने ठाढ़ अछि श्रीधरम। आब कतेक ठोर चुसत गौरीनाथ उषाकिरणीक भेस मे? लाहलोट भऽ गेल छथि मंत्रेश्वर प्रेमर्षिक पोन चटैत-चटैत। मरूवाक दाना छीटू नारायणजीक आँखि मे शिवशंकरक कान पकड़ि। कुणालक चश्मा पर बटुक भाइ पीत फेकलनि हेँ। गगनक मुट्ठीमे अछि अक्कूक जीह। चुन्नू चेतनाक मुँह मे गाड़ने छथि बासुकीनामा खन्ती। विभारानी शेफालिकाक सङे कछिया पहिरैक प्रैक्टिस कऽ रहलीहहेँ अमरजीक बथानपर। बिभूतिक हाथ मे पकड़ौवा पड़वा सब पाग पहिरि गोबर पथैत छथि। राजमोहनजीक हाथक अबीर जीवकांतजी लग पहुँच रहल अछि। नवका पतरा मे गोविंद बाबूक बियाहक दिन तकलनि हेँ बिमल शशिबोधक दुआरि पर। अनमोल, मनोज, शंकरदेव, राज, अमलेन्दु, सच्चू, मनुज आबि रहल अछि पिपही बजबैत। दमन अशोक मेहता सङे झालि बजबैत फोड़ि देलनि ढोल सुरबाबाक। मलंगिया भारद्वाजी जनउ पहिरऽ मे रमेशकेँ कोसी टपय देलक। मिथिलाक भाङक अय गाछ तर धुथूरक उज्जर-उज्जर फूल अहाँक हाथ मे अछि सरसजी । से कने रविन्दरोजीकेँ सुघऽ दिअहुँने तरि जयताह रंजनाक गालमे गुलाल लगयकेँ। एक बेर सूघि कऽ तँ देखू! एकर बीयाकेँ एक बेर चखिकेँ तऽ देखू! घोड़-नाङह देनाय अहुँ शुरू कऽ देब अद्धॆनारीश्वरजी बुधिनाथजीक सङे कीतिॅभाइक पटिया पर। नवका-नवका लोकक देह मे पियाउज भऽ गेल अछि देबूबाबू ! बिरेन्दर मल्लिकक मोटकीनामा छुलहँ? प्रेमलताक दुआरि पर किशोर गबैत अछि बरहमासा। पंकजक सङ भास्कर औंरऽह मारैत अछि। लिली रे केँ पकड़िकेँ राखू शैलेन्द्रभाइ! सुकांतक हाथ मे शोभाकांतक टाङ अछि। अहाँ देखै की छी अगिनपुष्प? कृष्णमोहन गिरगिट भऽ गेल अछि चँदेश्वर खाँक टाटपरहक। मधुकांतक सड़ल अंडा आब बच्चा नै दैत अछि। दूइये मास मे एकेडमीक सम्मानित लेखक भऽ जाइत अछि विद्यानन्द झाक साटिपीटी लऽ केँ। अविनाशक आँखि मे आङुर देने ठाढ़ अछि हरेकृष्ण। सबटा कौवा सबकेँ पकड़ि पकड़ि ललका रङ दिअहु तखने नवका-नवका लेखक बनत । नवका-नवका मधुबनी पेंटिग मे बंगलिया कुकूर सब आबि-आबि भूकैत अछि छत्तीसगढ़ी कटोराक पानि चाटिकेँ बूंदेलखंडी बसात मे। लालकिला लग बैसल म्याँउ-म्याँउ करैत हमर लोकतंत्रीय दाय-माय सब अहुँ आउने!पुआ खाउ ने! हमर अय गाम मे भाङक गाछ तर। परतानक भूर मे भोट खसबैत हम छी अहींक निमोंछिया अबीर। अहुँ आबिकेँ खसाउ ने! लटकल अछि तेत्तरि चूसिकेँ तऽ देखू हे हमर प्राणपियारी दाय-माय ! आउ! हमरा सङे अहुँ सब पुआ खाउ। अहींक निमोंछिया अबीर ।- (सारस्वत; पिरोजगढ़) ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)२००४-१५. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेता, से आशा करै छी। रचनाक अंतमे टाइप रहए, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/ संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै। ऐ ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-15 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.co.in पर संपर्क करू। ऐ साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल।५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सिद्धिरस्तु
वि दे ह विदेह Videha कब्दिक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ A अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक नि मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA —s 'विदेह' १७९ म अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक २७९) ला ऐ अंकमे अछि: ae विलास रायक दोसर लघुकथा संग्रह: मदन अमर फागुलाल साहु जीक fers विहनि कथा/ आलेख-मानव जीवनमे नारी स्वरूपक गरिमा सारस्वत: कविता सारस्वतक [2 आ २ (२५ टा); ३.*निमोछिया अबीर "(पिरोजगढ़ युवा समिति दिस SF देश आ विदेश मे बसल सब व्यक्तिकें सारस्वतक अशेष २०१५ होलीक हादिंक शुभकामना संग) aq विलास राय- मदन अमर (लघु कथा संग्रह) मदन-अमर रमणजी इलाहाबाद विश्वविद्यालयमे प्रोफेसर छथि। हुनका एक बेटा आ एकटा बेटी OS | बेटाक नाओं मदन आ बेटीक मीरा रखने छथि। मीरा आ मदन इलहेवादक एकटा कॉनवेन्टमे पढ़ैए | मदन स्टैन्डर्ड पाँच आ मीरा esd चारिमे पढ़ैए । रमणजीक सासुर मिथिलांचलक कोयलख गाममे अछि | रमणजीक ससुर महराज रमणजी S गर्मी छुट्टीमे आम खाइले HATES आबए आग्रह केलखिन | रमणजी सपरिवार कोयलख Wert | नानी गाममे मीरा आ मदन दुडइए-चारि दिनमे गामक घिया-पुता संग तेना ने मिलि गेल जेना पानिमे चीनी मिलैए। मदन नानी गामक घिया-पुता संगे कबड्डी आ हाथी-चुक्का खेल खेलाइत WTI मदन GT इलाहावादमे बैडमिन्टन आ क्रिकेट देखैत रहए | कखनो-काल क्रिकेट खेलबो करए। ओकरा लेल कबड्डी आ हाथी-चुक्का खेल नव Sel, मुदा ओकरा नीक लगैत रहै। नानी गाममे मदनकें अमर नामक एकटा Sere दोस्ती Us गेल | एक दिन अमर मदनकें अपना अँगना aS गेल | अमरक घर फूसक WSU | ओकर बाबूजी दिल्लीमे दालि मीलमे काज करै छथिन | अमरक माए एकटा गाए पोसने छथिन | आइ-काल्हि गाए लगबो करै OPS | खेत-पथारक नाओंपर अमरकें बाधमे दस कट्ठा खेत, दू MET गाछी आ दू HET घराड़ी । अँगनामे GET घर । अमरक माए नीकहा -नीकहा आम मदनकेँ खइले देलखिन | मदन अमरकें ATS बड़ प्रभावित भेल WET | ही
वि दे ह विदेह Videha कब्दिक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ A अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक का मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA मदनक नानाकें पक्काक घर। चारू भागसँ पोखरा-पाटन। ऊपरोमे चारि कोठरी । गामक लोक मदनक नानाक घरकें हवेली कहैत अछि। मदनक नाना गोकूलबाबू पुरान जमीन्दारक बेटा, तड़मे रिटारयर डिप्टी कलक्टर | गामक गरीब-गुरबा हुनका हाश्शिकिम मालिक कहैत छेलनि | एक दिन मदन अपना संग STAR अपना नानीक घर AS जाइत छल | मैल-कुचैल कपड़ामे अमर | VA पहिने ओ कहियो हवेली नै गेल teu | ओ धखाइते-धखाइत मदनक संगे हवेलीक सीढ़ीपर चढ़ल | आगू बढ़ल | देखिते मदनक नानी मदनकें पुछलखिन- "ई छौड़ा के छी | ताँ एकरा भीतर किए अनै छेँ?” तैपर मदन बाजल- “नानी ई अमर छी | हम एकरा संगे खेलाइ ST | VATS हमरा दोस्ती Us गेल अछि ।” मदनक बात सुनि नानी मदनकें Sed कहलखिन- “समूचा कोयलखमे तोरा यएह छौड़ा दोस्ती करैले भेटलौ | Ble लोकरसैं दोस्ती Ht SP तैपर मदन बाजल- “नानी ई छोट कहाँ अछि । ST हमरे अतेटा अछि ।” at नै बुझलें । ई सभ छोट जाति छी | एकरा Gh हम सभ अपना हवेलीक भीतर नै आबए ag छिऐ ।” अमर दिस देखैत नानी फेर बजली- & छौड़ा, केकर बेटा छीही?” अमर बाजल- “भोला चौपालक I” “कह तँँ खतबे जातिक छौड़ाकें हवेलीक भीतर अनै S| Cacia छुआ जाइत | रे छौड़ा भोलबा बेटा, जो भाग Wave ।” अमर ओतएसैं चलि देलक | मदन किछु बूझि नै पौलक | बकर-बकर नानीक मुँह दिस तकैत रहल | नानी ओकर हाथ पकड़ि हवेलीक भीतर ats गेली । अमर अपना आँगन जा माएकें सभ गप कहलक | ATT पुछलखिन- “तूँ हवेली गेलही किए?” तैपर अमर बाजल- “माए, हमरा तँ मदन AS जाइत रहए | हम कहियो कहाँ हवेली दिस जाइ छी ।” माए- “बाउ रौ, उ सभ पैघ लोक छथिन | हम पनरह TSS कोयलखमे छी मुदा आइ aft हवेलीक भीतर नै गेलौं | कहियो काल खेरही तोड़ए हाकिम मालिकक खेतमे जाइ छी a हेवलीक ओसारक Pred खेरही राखि आ बोइन as घूमि जाइ छी ।” 2
वि दे ह विदेह Videha कब्दिक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ A अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक का मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA अमर माएक बात नै बूझि सकल | पुछलक- “oe लोक केकरा He छै?” माए जवाब देलखिन- “पैच लोक माने बड़का आदमी | धनीक आदमी | पढ़ल-लिखल हाकिम-हुकूम ।” अमर- “eng पैच लोक बनब ।” माए- “पढ़बीही तब ने te लोक बनमेँ । देखे छीही ने जीतनीक मामा पढ़ि -लिख ws हाकिम बनलखिन | ओ ara छथिन तैँ हाकिमो मालिक हुनका चाह-पान करनै छथिन | ag मनरसैं पढ़-लिख आ हाकिम बन ।” माएक बात सुनि अमर बाजल- तूँ तैं हमरा किताबो-काशपी ने आनि as Stat | टीशनो ने धरा as छीही । Hea रहे छीही गाए चरा आन ।” तैपर माए बजली- “हूँ ae पढ़ | तोरा किताप-कौपी सभ आनि देबौ । गाइओ चरबए नै कहबो | टीशनो धरा Sat ।” अमर बाजल- “हम AME पढ़ब आ हाकिम बनब |” अमर पढ़ए लगल। ओ अपना किलासमे फस्ट करए। मैट्रिक आ इण्टरमे अपना जिलामे पहिल स्थान लौलक | चटिया सभकें टीशन पढ़ा ws बी.ए. आनर्स wee क्लाससँ पास भेल। जीतनीक मामा हरियरीबला बीडीओ asad भैंट केलक | ओ कहलखिन- “कोनो भी कम्पीटीशनक तैयारी cet पटनामे बैसए परतह | तइले ढौआ चाही ।” ई सभ गप्प अमर अपना माए-बाबूसँ कहलक | अमरक बाबू दस eT जमीनमे सैं पाँच कट्ठा जमीन बेच देलक | अमर पटनामे रहि बी.पी.एस.सी.क तैयारी करए लगल । गाममे कुट्टी-चालि चलए लगलै | जे जमीन बेच HS सभटा SAS FAT फल्लमा | Hal तेकर परवाह नै केलक अमरक पिता | पहिले खेपमे अमर सफल US गेल, बी.डी.ओ.क पदपर चयन भड गेलै। प्रशिक्षणक बाद अमरक पदस्थापना निर्मली अनुमण्डलमे भेल । योगदानक दोसरे दिन हुनका चैम्बरमे हुनकर सहायक संचिका as Hs आएल | बी.डी.ओ. साहैबकें ओ चेहरा जानल-पहचानल लगलनि। ओ गौर करि HS सहायक दिस ताकए लगलखिन | आ दिमागपर जोर देलखिन जे हिनका ct केतौ देखने छियनि । मुदा Hay से मोने ने पड़नि | सहायक पुछलखिन- “अहाँक नाओं की छी?” सहायक जवाब देलखिन- 3
वि दे ह विदेह Videha कब्दिक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ A अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक का मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA “मदन कुमार ठाकुर |” मदन नाओं सुनिते बी.डी.ओ साहैबकें बचपनक सभ घटा मोन पड़ि गेलनि। हुनका भेलनि शाइत ओ वएह मदन छी जे हमरा हवेली As जाइत छल, Fal ओकर नानी हमरा डपैट HS WT देने WU | मुदा शंका समाधान दुआरे पुछलखिन- “अहाँक मामा गाम hay अछि >” सहायक जवाब देलखिन- जी, हमर मामा गाम कोयलख ACT । आ नाना स्व. गोकूल प्रसाद ठाकुर ।” आब तैँ बी.डी.ओ साहैबकें कोनो शंके ने रहलनि। ओ ay संचिका ule ws ओइपर दसखत करैत कहलखिन- “TSA हमरा डेरापर आएब |” तैपर सहायक मदन पुछलकनि - “सर, कोनो खास गप्प छे की?” बी.डी.ओ. साहैब कहलखिन- “अहाँ आएब तँ ओतए आम आ खास मालूम भ$ जाएत ।” Berm छातीक धड़कन बढ़ि गेलनि। ओ सोचए लगला की बात छिऐ। किएक साहैब डेरापर बजौलनि | कियो Garett aA ws देलक | साँझमे मदन बी.डी.ओ साहैबक डेरापर पहुँचला | बी.डी.ओ. साहैब हुनका बड़ प्रेमसैं भीतर ais गेलखिन । एकटा कुरसीपर अपना बैसला आ दोसरपर इशारा करैत मदनकें बैसैले कहलखिन | दुनू गोटे कुरसीपर बैसला | बी.डी.ओ. ada पत्नीकेँ सोर पाड़ैत कहलखिन- “चाह-जलखैक ओरियान करू | मदन Vet” मदनकेँ fore बुझेबे ने करए । ओ बाजल- “सर, Het aS बजेलौं | की आदेश छे ।” तैपर बी.डी.ओ. साहैब कहलखिन- “सर नै अमर बाजू अमर | हम AUS अमर छी जेकरा संगे अहाँ मामा गाममे कबड्डी, हाथी a खेलैत रही। एक दिन अहाँ अपना नीनीक हवेली cs जाइत रही Ft अहाँक नानी अहाँपर बिगड़ैत हमरो Seat रहथि। की अहाँकें ओ घटना मोन अछि >” मदनकें ममहरक सभ गप मोन पड़ि गेल | ओ ठाढ़ US HS हाथ जोड़ैत बाजल- “सर, हमरा माफ HS feat | हम ag लज्जित छी ।” तैपर बी.डी.ओ. साहैब कहलखिन- 4
वि दे ह विदेह Videha कब्दिक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ A अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक नि मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA “फेर सर! अमर बाजू। अमर ।” कहि बी.डी.ओ. साहैब ठाढ़ होइत पुन: बजला- “STS मदन, गला Fe” कहि दुनू बाँहि फैला देलखिन | मदन झिझकैत sree गला मिलल | मदनक दुनू आँखिसैं दहो-बहो नोर जाए लगलै (000 5
वि दे ह विदेह Videha चब्तिझ www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ A अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक नि मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA दिव्या निर्मली टीशनक ure, रेलबे परिसरेमे गुरू-चेलाक खेल As रहल छल | गुरू लूंगी आ झोलंगा जकाँ कुरता पहिरि हाथमे डमरू नेने eT | लगभग दस बर्खक बालक चेला छल | ओकर समुच्चा देह कपड़ासँ झाँपल छल | are दिससैं लोक ठाढ़ WS खेलक मजा लेबए लेल तैयार छल | गुरु SAS बजा चेलासँ पुछलखिन- “बोल चेला की हाल-चाल छौ?” चेला जवाब देलक- “गुरुजी, हमर हाल-चाल एकदम टनाटन अछि। अहाँ अपन कहू ।” गुरु कहलखिन- “हमहूँ ठीक छी | अच्छा ई बता अखनि at छँँ केतए ।” चेला बाजल- “अखनि हम बरही गाममे छी ।” गुरु- “ई बरही गाम केतए 8?” चेला- “बरही गाम नेपाल अधिराज्यक सप्तरी जिलामे पड़े | राजविराजसँ लगधग तीन किलोमीटर दछिन । बरही गामसैँं उत्तर पछिमी कोसी नहर Ss ।” गुरु- “अच्छा ई बता ओतए की Hs रहल छेँ ।” चेला- “aes इन्टरनेट पत्रिकामे खबरि जुटाबक समदियाक काज करए लगलीं SA | नेपालक दौरापर छी ।” गुरु- dt बरही MAA एहेन HIS घटना भेलै जे ai बरही गाममे छेँ ।” चेला- “घटना अथवा दुघर्टना a नै भेलै मुद्दा एकटा नव चीज जरूर भेलै ।” गुरु- “कारन नव चीज भेलै हेन, कनी फरिछा HS बाज |” 6
वि दे ह विदेह Videha कब्दिक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ A अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक aS मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA चेला- “बरही गाम सप्तरी जिलाक सदरमुकाम राजविराज बजारक लग रहितो मुख्य रूपसँ किसानक गाम छी | पश्चिमी कोसी Agha दछिन छै। सिचाईक भरपुर साधन रहैक कारण गरमा धान आ अगहनी धानक उपज बड़ नीक होइ छै ।” गुरु- “कोन खेती गिरहस्तीक गप शुरू Hs देलैंह | नव बात जे भेलै से बाज ने ।” चेला- “हम सभ गप फरिछा HS He छी | sel ST सुनू । बरही गाममे रूपलाल नामक एकटा किसान छथि। हुनका एकटा बेटा आ एकटा बेटी Shs! बेटाक नाओं विवेक अछि। आए विराटनगर अस्पतालमे पेथोलौजिष्ट छथि। अपन प्राइवेट जाँच-घर सेहो रखने छथि। रूपलालक बेटी दिव्या बी.ए. पास Hs राजेविराजमे बी.एड. Hs रहली Ba |” गुरु- “कोन आहे-माहेक कथा पसारि देलैंह से नै जानि। हम कहै छियौ नव बात बता |” चेला- “एतएसैं शुरू CST अछि नव बात। अखनि हम नव बात जे भेल तेकर पृष्ठभूमिमे चलि रहल ST | अहाँ ot daa सुनियौ ।” गुरु- “अच्छा AM | आब हम बीचमे नै टोकबौ ।” चेला- “हूँ तै हम कहैत रही जे रूपलालक बेटी जेकर नाओं दिव्या छी, राजेविराजमे बी.एड. ws रहली हेन। साल भरि पहिने दिव्याक बिआहक बात-चीज diet गामक रामअवतारक बेटाक संग चलल। रामअवतारक बेटा अनिल भोपालमे इंजीनियरिंग Hs पढ़ाइ HS रहल Ge | दस लाख नेपाली टकामे बात पक्का US गेल छल | दुनू eas छेका-छुकी सेहो As Tet । छह महिना पहिने अनिल इंजीनियरिंगक डिग्री ल5 भोपालसैं नेपाल आएल । दूर संचार वि भागमे भैकेन्सी भेल | ओहो आवेदन AATF | अनिलक पिताजी रामअवतार तेज आदमी अछि। ओ दौग-धूप केलक | चारि लाख टका घूस मांगलकै । रामअवतार दौगल बरही आएल | STAs कहलखिन- अहाँ जमाएकें नौकरी Us ect अछि। चारि लाख टका चूस at S| अहाँ दस लाख टका जे बिआहमे देब तड़मे सँ चारि लाख car अखनि as fear | बाँकी छह लाख टका fasted दस दिन पहिने es देब | जमाएकें नोकरी Us जाएत तैँ बेटी रानी Us Hs Lea | रूपलाल विवेककें फोनपर सभ बात बतौलखिन | विवेक कहलकनि, ठीक छै, set रामअवतार बाबूकें विराटनगर भेज feat | हम चारि लाख टका ES देबनि | रामअवतार विराटनगर जा faders चालि लाख टका आनि बेटाकें संग HS काठमाड़ू Te | घूस द5 बेटाकें नोकरी लगौलनि । 7
वि दे ह विदेह Videha कब्दिक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ A अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक का मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA गुरु बजला- “अच्छा, ई बता दिव्याक बिआह रामअवतारक बेटा अनिलसैं भड गेल ने ।” चेला- “असलका TT तैँ आब सुनाबै छी । कनी घियानसैं सुनियौ ने । आइसैं दस दिन पहिने रुपलाल अपना भातीजकें संग as dicen पहुँचला | रामअवतारकें बिआहक दिन पक्का करैले कहलखिन | ओ तीनटा दिनक प्रस्ताव रामअवतार लग रखलनि | आ कहलखिन Stet तीनू दिनमे जे दिन अहाँकें सहुलियत हुअए से दिन de करि लिअ | ढौआ जे बाँकी अछि ait नगद ca आकि चेक, Val aie feat” रामअवतार कहलखिन- “यौ रूपलाल बाबू, हमरा बेटाक भठियन गामबला पनरह लाख टका नगद, एकटा TERR मोटर साइकिल आ पाँच भरि सुन Es रहल अछि। अहाँक STS हमरा बेटाक बिआहक गप पक्का अछि | अहाँ अनिलक नोकरी लेल Ue टका देने छी । AT अहाँसैं मात्र पनरह लाख टकेटा लेब | गाड़ी आ सुन छोड़ि देब । SF आहाँ पनरह लाख टकापर बिआह करैले तैयार छी, Ft फागुन दस गतेक दिन पक्का भेल | हमरा नगद टका दी अथवा चेक दी, हम सभमे तैयार छी | अहांकें जड़मे सुविधा हुअए से करब |” तैपर रूपलाल बजला- “अहाँसैँ तैं हमरा दसे लाखपर बात भेल अछि | आब अहाँ मन नै बढ़ाउ | हम बैंकियौता छह लाख टकाक चेक भातीज मार्फत भेज देब ।” रुपलालक गप सुनि रामअवतार तैशमे बजला- ST हमरा बेटाक संग अहाँकें अपना बेटीक बिआह करबाक अछि तँँ मोल-मोलाइ छोड़ आ पनरह लाख टकामे बात पक्का करि तीन दिनक भीतर बाँकी एबारह लाख टका पहुँचाउ । नै तैँ कुटुमैती नै हएत | अहाँ चारि लाख टका हम अगिला महिनामे आपस ws देब ।” आब तँ रूपलाल SAT गेला | आँखिक आगू अन्हार पसरि गेलनि। किछु फुड़बे ने करनि । गुरु फेर टोकलखिन- “aig रौ चेला, ई रामअवतार तैँ बड़ नीच आदमी बुझाइत अछि ।” चेला बाजल- “आगू सुनियौ ने ।” गुरु- “अच्छा कह, आगू की भेलै ।” चेला कहए लगल- “कनीकालक बाद रूपलाल अपनाकें सम्हारैत बजला, ठीक S हम WA जाइ छी । बेटा विचार wea | ओ जे कहत AVS करब |” 8
वि दे ह विदेह Videha चब्तिझ www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ A अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक का मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA रूपलाल आपस गाम आबि गेला | मुँहक उदासी देखि हुनकर पत्नी बूझि गेली जे शाइत दिन पक्का नै भेल । कोनो झंझट aft गेल। दिव्या राजविराजसँ पढ़ि ws आपस नै आएल छेली। रूपलाल सभ बात पत्नीकें बतौलखिन | पत्नी कहलकनि, faders फोनपर गप करू | तैपर रूपलाल बजला, अखनि F sit क्लिनिकपर हएत रातिमे Pre गप करब | रूपलाल दुनू परानी रातिमे खेबो ने केलनि । रातिमे रूपलाल मोबाइलपर विवेक्स गप करए लगला | गप करिते-करिते ओ कानए amet | जखनि ait aed मोबाइलपर गप करै ell, तखनि दिव्या अपना कोठरीमे पढ़े छेली | कोनो गपक पता नै छेलनि | जखनि पिताजीकँँ कानब सुनली तखिन कान पाथि क$ सभ गप सुनए लगली | सभ गपक थाह लगि गेलनि जे पिताजी फोनपर किए कनै छथि | दिव्याकेँ भरि ala नीन नै भेलै । ओ भरि राति सोचिते रहली | रामअवतार ad नीच आ कमीना अछि | चारि लाख टका हमरे बाबूजी सै as घूस Es बेटाकें नोकरी दियौलक | ang बेटा नौकरी करए लगलनि तैँ मन बढ़ि गेलनि। पाँच लाख टका बेसी क$ हमरा बाबूजी S मंगै छथिन। एहेन नीच आ लोभी मनुखक ses हम अपन बिआह किन्नौं ने करब, चाहे जिनगी aft कुमारिए किए ने रहि जाइ। गुरु फेर बजला- “वाह! वाह! दिव्या बड़ नीक बात सोचलक |” चेला बाजल- “आगू सुनियौ ने ।” गुरु- “अच्छा सुना |” चेला कहए लगल- “विवेक फोनपर पिताजीकें कहलकनि, बाबू अहाँ जुनि कानू । हमरा एकेटा बहिन अछि दिव्या। अहाँक पएरक HUE हम चारि -पाँच हजार टका डेली कमाइ छी। की करबै रामअवतार बाबूकेँ लोभ as गेलनि। हम पाँच लाख टका आरो देबै । अहाँ शुक्र दिन रामअवतार बाबूकेँ बरही बजा लियौ | हम नगद एगारह लाख गिन देबै । चारि लाख & देनैहिए छियनि । शुक्र दिन साँझ धरि eng गाम पहुँच जाएब ।” शुक्र दिन साँझमे रामअवतार बरही पहुँचला | सोचने रहथि जे नगद ढौआ देता तैँ राजेविराज नेपाल बैंक लिमिटेडमे ड्राफ्ट बनबा लेब | नगद ढौआ AS VISA खतरा अछि। साँझमे विवेको गाम पहुँचला | खेनाइमे रामअवतारकें खूब सुआगत भेलनि। तरूआ, भुजुआक अलाबे खस्सीक मासु सेहो WU | मुदा दिव्या एकदम गुमशुम । शनि दिन दस बजे रामअवतारकें पराठा आ अल्लुक भुजिया, हलुआ, सेबैक खीर आ रसगुल्लाक जले खुआएल गेल | जलखै करा एकटा कोठरीमे विवेक, रामअवतार आ रूपलाल बैसला | विवेक पुछलकनि - “ढोआ केना as जेब?” तैपर रामअवतार कहलखिन- “Stan es दिअ आ अहाँ चलू राजविराज, नेपाल बैंकमे ड्राफ बनबा देव ।” तैपर विवेक बजला- 9
वि दे ह विदेह Videha कब्दिक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ A अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक नि मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA “ans a शनि छी । छुट्टीक दिन छी । बैंक बन्न हएत ।” रामअवतार बजला- “अच्छा अहाँ टका गिन ws दिअ। हम समधीकें संग Hs Shee चल GTS | दू गोटे रहब I डर कम ea |” विवेक आलमारी wife Sten निकालि गिन ws रामअवतारकें देबए लगला आकि हहाएल-फुहाएल दिव्या पहुँच Hs बजली- “sp भैया, FH | रूपेआ राखू। हम एहेन लोभी on कमीना आदमीक बेटासँ अपन बिआह feat नै करब | चाहे जिनगी भरि कुमारि किएक ने रहि जाइ ।” दिव्याक गप सुनि, सभ कियो अवाक् Us गेल । विवेक आ रूपलाल समझाबैक परियास केलनि तैं दिव्या अपना हाथमे एकटा शीशी देखबैत कहलकनि - “ऐ शीशीमे जहर छी । St अहाँ सभ fe axa तँँ हम जहर पीब लेब ।” रामअवतार बाबू दिस घूमि बजली- “सुनू रामअवतार बाबू, Stet हमरा बाबूजीसैं चारि लाख टका AS गेल छी । जाबे धरि चारि लाख टका आपस नै करब अहाँ बरहीसैँ आपस Sheen नै जा सकै छी ।” गुरु डमरू बजबैत नाचए लगला । थोड़े काल नाचि बजला- “बड़ नीक बड़ सुन्नर । दिव्याकेँ बहुत-बहुत धैनवाद ।” OOO 0
वि दे ह विदेह Videha कब्दिक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ A अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक का मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA aye बड़का भीआइपी गेस्ट हम आँगनमे चाह पीबैत रही | तखने पत्नी आबि टोकली- a सुनै छिऐ?” हम कहलियनि- हैं, कहू ने की कहै छी ।” पुछलनि- “बम्बइ आम AS HS जीतू बौआ ओतए कहिया जेबै?” अकचकाइत हमरा Hee बहराएल- “हैं। ठीके मोन पाड़लौं | परसू रबि दिन भोरुका बस पकड़ि Aa बारहे बजे तक पटना पहुँच जाएब । बम्बइ आमो खूब पाकए लगल अछि | चारि आना आम गाछेमे पाकि Hs खसि usc | काल्हि केकरो बजा HS आम ART HS रखि लेब आ परसू छह-बजिया बस पकड़ि लेब ।” पत्नी कहलनि- “दस-बीस गो गछपकुओ as As |” हैं-मे-हैं मिलबैत कहलियनि- हैं-हैं TI cs लेबे ।” हम आ जीतू दू भाँड | हमर नाओं भोगेन्द्र आ हमर छोट भाए जीतेन्द्र। माए-बाबू हमरा भोगी आ जीतेन्द्रकें जीतू कहै छला | माए-बाबूक देखा-देखी आनो-आन लोक हमरा भोगी आ ओकरा जीतूए wee अछि | हम गाममे रहि ws खेती-गिरहस्ती करै छी । खेती की करब | अपना तैँ मात्र एक्के बीघा खेत अछि । दू बीघा खेत लालबाबूस मनकूतपर नेने छी | जीतू पटनामे पंजाब नेशनल बैंकमे पी.ओ अछि । दोसर दिन हम एकटा गछचढ़ा लड़िकाकें बजा आम तोड़ेलौं। लगधग पाँच AU आम Act GSA सए- सबा-सए पकले WUT | सभटा आम एकटा बोरामे aS मुँह बान्हि Hs रखि लेलौं | एकटा झोरामे पचासटा गछपकू आम सेहो ओरिया Hs रखि Set । अगिला दिन साइकिलपर आम AS नवटोली चौकपर Teil | चौकेपर एकटा चिन्हारए ऐठाम साइकिल रखि सतबजिया बसपर चढ़लौं | लगधग डेढ़ बजे दूपहरमे पटना पहुँचलौं । जीतू डेरेपर छल | हमरा देखिते आबि ws गोर लगलक आ गामक समाचार पुछलक | हम असिरवाद दैत कहलिएऐ- “गामकसभ समाचार ठीके अछि | तों अपन समाचार Hes, सभ कियो नीके-ना we किने?” जीतू कहलक- “अहाँक असिरवादसैँ हम दुनू Me कुशल छी ।”
वि दे ह विदेह Videha कब्दिक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ A अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक नि मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA हम कहलिएऐ- “भगवानक किरपा |” जीतू बाजल- “केकरो मोबाइलसैं फोन केने रहितिऐ Ff खाना बनल रहितए ।” हम कहलिएऐ- “केकरा मोबाइलसैं फोन करितौं ।” जीतू फेर बाजल- “एमकी TH जाएब F एकटा मोबाइल नेने आएब | मोबाइल रहत तैँ दुनू Mise बीच गप -सप्प होइत रहत। भौजीओसैं गप हाएत | अहाँ फ्रेश भ5 Hs चाह पीबू । चाह पी as जाबे स्नान करब ताबेमे खेनाइ बनि जाएत ।” हम TAS जा फ्रेश भेलौं । फ्रेश भड ड्राइंगरूममे आबि बैसलौं | जीतूक कनियाँ एकटा प्लेटमे दालमोट आ छह-सात Me बिस्कुट रखि हमरा गोर लगली | हम कहलियनि- AREY जीतू एक जग पानिआ एकटा गिलास नेने आएल आ कहलक- “ताबे पानि पी ws चाह Ute लिअ ।” हम दालमोट आ बिस्कुट खाए लगलौं | पाँचे मिनटक पछाति कनियाँ दू कप चाह es गेली । हम दुनू wis चाहो पीबी आ गाम-घरक गपो-सप्पो करी । करीब पनरह-बीस मिनटक पछातिकनियाँ आबि as बजली- “भात-दालि बनि गेल अछि | जाबे भायजी स्नान करथिन, तरकारीओ बनि जाएत ।” हम बजलौं- “एते जल्दी केना बनि गेल ।” जीतू कहलक- “भैया, गैसपर प्रेशर PHA भात-दालि TATA देरी नै लगै | । आब अहाँ जल्दी-जल्दी नहा लिअ ।” हम बाथरूमे जा HS स्नान HS कपड़ा बदलि ड्राइंगरूममे आबि क$ बैसलौं | हमरा बसिते देरी जीतू एक जग पानि आ गिलास टेबूलपर रखि भीतर चलि गेल। कनियाँ एकटा थारीमे भात, कटोरीमे दालि आ एकटा प्लेटमे तीमन आ दोसर प्लेटमे भुजियाआ पापड़ द5 गेली । जीतू एकटा कटोरीमे घीउ नेने आएल | fers dts भातमे ढारि बाँकी दालिमे ढारि बाजल- “आब भोजन करू I” 42
वि दे ह विदेह Videha कब्दिक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ A अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक का मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA हम भोजन करए लगलौं | जाबे धरि हम खेनाइ़ Veit जीतू हमरा लग ठाढ़ रहल | कनियाँ परसनपर परसन आबि ms दैत रहली | भोजन केलाबादहम हाथ-मुँह धोड़ कुरसीपर बैसलौं | जीतू लगमे आबि बाजल- “आब अपने अराम करू |” कहलिएऐ- “जा तहूँ अराम करए TS” हम ओछाइनपर अराम करए लगलौं | हमरा पछिला सभ गप मोन पड़ि गेल | इण्टरमे ea रही । जीतू सेहो अठमामे Use WU | जीतू USA चन्सगर रहए। ओ अपना किलासमे फस्ट करए। हमर बिआह Us गेल रहए। बाबूजी हमरा बिआहेमे धुर-बहुर करा दुरागमनो करा देने रहथि । मुदा हमर कनियाँ तैयो ASA रहै छेली । बाबूजी दिल्लीमे दालि मीलमे मोटियाक काज करै छला। हुनका ओतए shan लगि गेलनि। ठीकरसैंइलाज नै करा सकला | तेकर नतीजा भेलनि जे बड़ कमजोर Us Wel | डाक्टर कहलकनि- “कालाजार हो गया है ।” तखनि हमरे एकटा गौआँ बहादूर काका हुनका नेने निर्मली टीशनपर उतरला । ओइ समैमे सवारीक सुविधा नै Set हमर बाबूजी तेतेक कमजोर Us गेल छला जे पएरे गाम नै आबि सकला। तखनि बहादूर काका बाबू जीकें मोसाफिर खानामे Sat अपने गाम आबि हमरा माएकें BY बात कहलखिन | हम Vas खा HS निर्मली कौलेज जाइले साइकिल निकालने छेलौं | ATT हमरा लग आबि कहलक- “भोगी, केकरो टायरगाड़ी as क$ निर्मली टीशन चलि जा। गाड़ीपर बैसा ws बाबूकें आनए पड़तह। बाबूजी मोसाफिर खानामे छथुन | बड़ दुखित छथिन | चललो ने as छन्हि। कहाँदिन कालाजार As गेलनि | बहादूर बौआ दिल्ली सैं संगे नेने एलनि aus आबि ws कहि गेला हेन ।” हम साइकिल रखि मने-मन हियासए लगलौं जे केकर टायर गाड़ी aS जाइ। हमर ATI बेचन काकापर गेल । हम बेचन काका ओइठाम विदा भेलौं Sat काका सोकबामे बैसि Hs बाँसक पातक कुट्टी He छला। हमरा देखिते बजला- “आबह-आबह भोगी | HES की हाल-चाल छह | आइ कौलेज नै गेलह की?” कहलियनि- “काका हमर हाल-चाल नीक नै अछि | बाबूजी बड़ दुखित छथि। कहाँदुन कालाजार भड गेलनि हैं। चललो-फिरल नै dis OFS | facets आबि निर्मली निर्मली टिशनपर बैसल छथिन | बहादूर काका संगे एला हेन । वएह अखनि कहि गेला ।” बेचन काका बजला- a टायरगाड़ी AS जेबहक Tah आनैले?” कहलियनि- हैं, काका | AT एलौं हेन ।” 3
वि दे ह विदेह Videha कब्दिक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ A अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक aS मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA कहलनि- “ठीक छै Hal Tes HS लड़ छी | Aa बरदो खाइ छे ।” हम कहलियनि- “Sug गामपर & भेल अबै छी | अहाँ जलखै करि HS तैयार रहब ।” “ठीक छे ।” ओ बजला। हम गामपर आबि माएकें कहलिएऐ- “बेचन काका Vea करै छथिन | जलखै HS टायर जोति देथिन। fe पाइ-कौड़ी छौ तैँ दे। हएत तैं बाबूकें AS TAS डाक्टरसैं देखा देबनि |” माए घर गेली। घरसैँ एकटा फुच्ची निकालि अनली। फुच्चीकेँ safe दसटकही, पैंचटकही, दू-टकही, एकटकही सभटा सिक्का ay निकालि गिनलनि | सभटा मिला ws पाँच सए पचपन रूपैआ भेल | सभटा पाइ दैत माए कहली- “बाबूकें STH जैंचा दबाइ कीनि लिहैँ ।” Us aS बेचन काका ओतए विदा भेलौं | बेचन काका टायरपर पुआर द५ एकटा सतरंजी बिछा हमरे बाट तकैत रहथि | हमरा देखिते बजला- “गाड़ीपर Fas | जोइत as छिऐ ।” हम टायरपर बैसलौं | बेचन काका टायर जोइत विदा ys गेला । साढ़े बारह बजे हम सभ निर्मली टीशन पहुँचलौं | हम मोसाफिर खाना गेलौं | हमर बाबूजी मोसाफिर खानामे तौनी ओछा पड़ल WET | एकदम नरकंकाल जकाँ हुनकर शरीर AS गेल रहनि | हम लगमे जा टोकलियनि- “बाबू, बाबू?” ait उठि Hs बैसला आ बजला- “के भोगी! गाड़ी अनलह की?” बाबू site पएर छूबि गोर लागि कहलियनि- “हैं बाबू । बेचन कक्काक टायर अनलिऐ हेन । अहाँ किछू पानि-तानि पीलिऐ किने?” बाबूजी बजला- “S| Ue गिलास बदामक सतुआ पी Hs एक कप चाह पीने रहिऐ | “अच्छा SS चलू टायरपर बैसू TMS | डाक्टर TAS बाबू लग चलै छी। हुनकारों देखा GS छी । तेकर पछाति खेनाइ खाएब ।” -हम कहलियनि | बाबूजी बजला- 4
वि दे ह विदेह Videha कब्दिक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ A अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक का मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA “मुद्दा हमरा लग ढौआ कहाँ Be | | महिनासँ बैसिले छेलौं । जेहो ढौआ छल , TA दबाइमे खरच As गेल ।” हम कहलियनि- “अहाँ ढौआक चिन्ता जुनि करू । हमरा माए fees ढौआ देलक हेन | ASS ताबे इलाज करा दइ ST । डाक्टर साहैब की कहै छथि, तेकर बाद आगूक बात आगू सोचब ।” बाबू जीकें ल5 HS हम डाक्टर रामानन्द बाबूक क्लिनिकपर Veit | जाँचि Hs डाक्टर साहैब कहलखिन- “हम cars लिखि as छी । दबाइ OS HS GATS देखा HS शुरू HS दियौ | मुदा हिनकर इलाज नीकसैँ करबए पड़त | दरभंगा AS जा HS होसपीटलमे भर्ती करा दियौ ।” डाक्टर साहैबक फीस as cars कीनिलौं। किशन होटलमे खेनाइ Veit | खेनाइ खा तीनू गोटे टायरपर बैसि विदा भेलौं । गोसाँइ gaa पहिने गाम पहुँचलौं । माए बाबूक हालति देखि ata फाड़ि ws कानए लगली। माएकें कनैत देखि जीतूओ कानए लगल । हमरो आँखिसँँ दहो-बहो नोर जाए लगल छल। बेचन काका हमरा हमरा सभकें चुप करबैत बजल छला- “कनने, खीजनेसैं किछ ने होइ Ste | पाँच-सात हजार टाकाक ओरियान HS दरभंगा AS जाहुन आ नीकसँँ इलाज कराबहुन |” पाँच Hel खेत सात SARA भरना रखि चारिम दिन हम, माएकें संग Hs बाबूकें as दरभंगा गेलौं । बाबू जीकें दरभंगा अस्पतालमे भर्ती करेलौं डाक्टर साहैबसैं पुछने UST “सर, बाबूजी केतेक दिनमे ठीक भड जेथिन ।” डाक्टर साहैब बजल रहथिन- “रोगीकें रोग गरसि नेने अछि । लीवर सेहो Stas काज नै करै छै । तैए fees Hea मोसकिल ।” दरभंगा जाइसैं पहिने माए बेचन काका आ Side हमरा सासुर भेज हमरा कनियाँकें विदागरी करा अनने रहथिन | दिल्लीसैँ एलाक मासे दिनक भीतर बाबूजी हमरा सभकें छोड़ि shares चलि गेला । जीतू बाबू जीक पएरपर माथा पटकि-पटकि कनैत रहए ।बेचन काका जीतूकें समझबैत कहने रहथिन- “तोरा तँ बाप Ta जेठ भाए भोगी Ss करथुन | चुप AS जा। भोगी तोरा सभ fees Heats | पढ़ेतह- लिखेतह, बिआह-शादी करत |” जीतू हमर पएर पकड़ि कानए लगल रहए | हम जीतूकें भरि पाँजमे as कनैत कहने रहिएऐ- “at चिन्ता जुनि कर | हम तोहर जेठ भाय fat | तोहर सभ जवाबदेही हमरापर द५ बाबूजी चल गेला। हम अपन फर्ज पूरा करब |” बाबू जीक मरला बाद हम पढ़ाइ छोड़ि खेती-गिरहस्ती करए लगलीं । बाबू जीक सोगे माए जे सोगेली से ओहो छबे मासक भीतर हमरा सभकें छोड़ि बाबूएजी लग स्वर्ग चल गेली । Side दुनू आँखि कनैत-कनैत फूलि गेल छल । ओ माइक पएरपर माथ पटैक-पटैक कानै छल । हमर कनियाँ जीतूकें सम्हारने छली | Ae पहिने माए हमरा कहने छेली- 45
वि दे ह विदेह Videha चब्दिक www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका vaww.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ म अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक का मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA “बौआ भोगी, site पढ़ा-लिखा हाकिम बनाबिह5 ।” हम माएसकें कहने छेछिएऐ- “ag चिन्ता जुनि कर | जीतूकें पढ़बैमे हमरा डीहो बेचए पड़त तैँ बेचि aa ।” जीतू wea तँ चन्सगर we रहए। ओ मैट्रिससँ ल$ ms UIA. aft फर्स्ट डिविजनसैँ पास केलक | एम.काँम. केला बाद जीतू पटनामे रहि प्रतियोगिता परीछाक तैयारी करए लगल । जीतूकें पढ़बैमे हमरा एक बीघा खेत बेचए पड़ल | एम.काँम. केलाक बाद साले भरिक भीतर जीतू पंजाब नेशनल बैंकमे पी.ओ, पदपर बहाल Hs गेल ag बैंकमे ओकरा नौकरी भेटल ओ पटने शहरमे अछि | हाजीपुरक स्टेट बैंक मैनेजरक बेटी संग जीतूक बिआह भेल । जीतूक एकटा जेठका सार पी.एम.सी.एच.मे डाक्टर छथिन | ई सभ सोचैत-साध्श्चैत हम नीन पड़ि गेलौं । नीन टुटल तैँ सुनलिऐ, जीतू अपना कनियाँकें कहैत रहनि- “dar ve ack माछ-मासु नै खाइ छथिन | तीमन तरकारीमे की सभ आनए Ged |” कनियाँ बजली- “seq tea तैँ अछिए । परोर, रामझुनी, करैला आ सजमनि as लेब ।” जीतू बाजल- “अच्छा झोरा द5 दिअ। हम Wa जाइ ST ओम्हरेसैँ तरकारी कीनने आएब। हैं, भैया सुति ws Safer तैँ चाह बना Hs es देबनि ।” कनियाँ बजली- “set कहबै तब हम भायजी कें चाह बना HS ES एबनि | हमरा एतबो विवेक नै अछि की ।” जीतू बाजल- “नै से नै। सएह कहलौं | ठीक छे हम जाइ छी ।” कनियाँ बजली- “कनी सबेरे आएब | आन दिन जकाँ आठ राति नै बजा eat” “ert घियान ted जे भैया आएल छथिन ।” - ई HS जीतू झोरा as HS चलि गेल | जीतूकें गेलाक पनरह-बीस मिनटक verte हम ओछाइनपर & उठि गेलौं बाथरूमे जा हाथ-मुँह als Hs कुरसीपर आबि बैसिले रही आबि कनियाँ एक गिलास पानि आ एक कप चाह द5 गेली । चाह पीब हम कनियाँकें कहलियनि- “हम टहलि ata छी ।” कहि हम कपड़ा बदलि डेरासँ निकलि गेलौं सात-सबा-सात बजे आपस डेरापर एलौं। जीतूओ जक्सनसँँ आबि गेल teu | ait कनियाँकें कहैत रहए- 6
वि दे ह विदेह Videha चब्दिक www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका vaww.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ म अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक का मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA “दुधक पैकेट आ सेबैक पैकेट नेने आएल छी । चीनी सेहो AA एलौं हेन । तरकारीमे परोर , रामझुमनी, करैला आ सजमनि अछि। सोल्हन्नी घीउमे पुरी छानि feat अल्लू-परोरक तरकारी आ रामझुमनीक भुजिआ बना feat | सेबैक खीर सेहो बना दियौ ।” कनियाँ बजली- “कनीए देशी घी ude रखने छी। जौं अखनि ara aft लेब तैँ कोनो भी.आई.पी. गेस्ट औत तैं avd आनब ।” “कोन भी.आई.पी. गेस्ट?” - जीतू पुछलकनि | “अहाँक बैंक मैनेजर आ हमर डाक्टर भैया |” - कनियाँ बजली | “हमरा लेल Ga बड़का भी.आई.पी.गेस्ट हमर भैया OA जे माए-बाबूक मुइला बादो हमरा पढ़बैमे कहियो ढौआक कमी नै हुअए देलनि | हमरा asa खातिर एक बीघा खेत बेचि देलनि | हुनके HUT as हम बैंकमे पी.ओ. छी ।” जीतूक बात सुनि हमर छाती सूप सन AS गेल । फागुलाल साहु जीक किछु विहनि कथा- माइक डाँट बात बचपनक छी | हमर माए सदिखन हमरा AGI चढ़ौने रहै Sell | पढ़ाइ खातिर सदिखन समझनबैत रहै Sell, pers समैमे खिया-पिया ws सहियारैत-पुचकारैत विद्यालय पठबैत Set । मुदा हम तैँ बेसी दिन ares बाटमे संगतुरियाक संग खेलैत रहि जाइत रही । जखनि विद्यालयक छुट्टीक समए as छल तखनि झटदनि घर आपस आबि जाइ छेलौं। हमर माए नीक-निकुत खाइले Fs दइ छेली | मुदा हम a विद्यालयक चौकैठो तक ने Wis छेलौं | AU, मन तैँ गुदगुदाइत रहै छल | AQ Sa आन छात्र AMA Yo छेलखिन हमर हाल-चाल तैँ सभटा पोल खुलि जाइ छल । नै पढ़बा खातिर बहुतो टॉँट-फटकार करैत लुलुआबैत छेली। हम मुँह लटकौने चुप्पी साधने सज्जनक स्वरूप बनौने लिबिर-लिबिर तकैत माइक ममता जगबैत अप्पन दोख छुपबैत सफाइ वचन बजैत रहै छेलौं । तेतबे नै! पीटाइओ a खाइए पड़े छल | पिताजीक सेहो आ गुरुजीक तैँ अलगे | मुदा हमरा तैँ माइक Sie बड़ अधला जकाँ लगे छल | हमरा ऐ बातक भान थोड़े छल जे माए पढ़ाइक महत जनै छथिन aU Se छथिन | जेना-तेना मैट्रिक धरि तँ आबि 47
वि दे ह विदेह Videha कब्दिक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ A अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक नि मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA गेलौं मुदा पढ़ाइमे हम केहेन छेलौं से J बुझिए गेल हएब । पिताजी सेहो हमर पढ़ाइ-लिखाइ़ खातिर चिन्तिते रहै we! पिताजी सदिखन चिन्तामे डुमल रहै छला | एक दिन दिलक दौड़ा पड़ि गेलारं स्वर्गधाम चलि बसला | आब हमरा विद्यालय जेबाक संग घर परहक पढ़ाइ Sel Ta AS गेल । चूकि घरोक काज-भार हमरेपर पड़ि गेल | बोर्ड परीक्षामे सेहो फेल भड गेलौं। मैट्रिक परीक्षामे फेल भेने लागल कि सम्पूर्ण जीवन दुखे-दुखमे बितल | संगी- साथीक सेझहा लज्जित सेहो WU पड़त, ई सोचैत मन पड़ल माइक डाँट-फटकार | जखनि ओ हमरा पढ़ाइ खातिर Set छेली तखनि हमर अन्तर SAH अवाज आएल- “अखनि बेर नै भेल अछि, समए बैचल अछि शेष ।” आब हमरा पढ़ाइक जुनुन सवार Ys गेल । हम पुन: मैट्रिकक फार्म दुबारा भरैत पढ़ाइ शुरू केलौं । मैट्रिक परीक्षामे प्रथम स्थान केलौं | प्रथम स्थान पाबि आगूक पढ़ाइ जारी रखलौं। माइक कृपा भेल, संगे आसिरवाद भेटए लगल | आजूक दिन सरकारी सेवामे पदाधिकारीक पदपर US सेवा द५ रहल SH | माइक Sie, असिरवादमे बदलि गेल | हमर कामयावीक सभटा श्रेय माइक SH | संगे हमरा ई अनुभव भेल जे माता-पिताक डाँट-फटकार बेजा नै Sect अछि। किएक तैँ माइक डाँटमे बच्चाक भलाइक कामना नुकाएल रहैत अछि | OOO 8
वि दे ह विदेह Videha कब्दिक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ A अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक का मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA आत्म निर्भरता लेल कोनो SER नै- पछिला महिना हम अपन मित्रसँ मिलबाक खारिश्तर राजस्थान गेल छेलौं | मित्रक घरक बगलमे एकटा ass बर्खक महिला छल | जिनकर माथ She झाँपल छल आ eet मारि जमीनपर बैसल छेली | सहायता समूह जीविका प्रशिक्षण प्राप्त करि Hs पापड़ बनबैत जीवनक आत्म निर्भर भ5 अपन सहायता समूहक माध्यम गाममे एकटा परियोजना चला tect छेली। परियोजनाक माध्यम गामक बहुतो महिला BA आत्म निर्भर प्रतिभावी प्राप्त केने कम्प्यूटर, सौर Gales Gad समपन्न खुशहाली पकड़ि Hs रखने छेली | संगे गामक बालक- बालिका सेहो सभ कुड़ा-कड़कट AAT THA खेलौना बनेनाइ सीख Hs काबिलेतारिफ छल | हुनका TASH प्रतिभा आ जीबठ देखैत बनै छल । देखैमे आएल जे ढलैत उमेरक औरत सभ जे कम्प्यूटरपर Fa अपन-अपन कारोबारक लेखा-जोरवा तैयार करबामे Gel काबिलेतारिफ छल | हमरा Sicha देखि ओ औरत मुस्कुराइत कहली- “अन्दर आबि जाउ ने ।” हम अन्दर चलि tet । पुछलियनि - “अहाँ की Hs tect छी?” बजली- “कम्प्यूटरपर नोटिश बना रहल ST हमर काज अछि गाममे जा लोक सभरसँँ मिलि Hs हुनकर सबहक तकलिफ आ सुझाव इकट्ठा करि HS कम्प्यूटरपर टाइप HS जीविका अधिकारीकें Tot Sars |” हम आगू पुछलियनि - “ई काज अपने केतेक दिनसैं करै छी?” ओ बजली- “किछुए Mee HS रहल छी। हम अनपढ़ Beil | ई काज करैले पढ़नाइ-लिखनाइ सीखलौं | आब हम ई-मेल करब ।” ई कहैत हमरा घियानकें अपना तरफ खिंचैत टाइप करबामे लगि गेली | टाइप बिलकुल देवनागरी लिपिमे सुसज्जित छल, सजौल छल | ई साइठ बर्खक महिलाक तजुरबा देखि हम चकित भड गेलौं । आब हमर उत्सुकता आगू AGA लगल | बढ़ेत उत्सुकताक क्रममे फेर पुछलियनि - “आर की सभ करै छी?” ओ बजली- “दू सए पचास लड़कीकें कम्प्यूटरक ज्ञान जेतेक हमरा अछि ओ सीखा चुकल छी ।” 9
वि दे ह विदेह Videha कब्दिक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ A अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक हिला मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA हम ई सुनि आरो चकित भेलौं। नजरि बगलक कोठरीमे गेल । देखलौं एकटा नवयुवती कम्प्यूटरपर अपन आँगूर दौगा रहल अछि | ओइ नवयुवती दिस हमर नजरिकें देखैत पुन: बजली- “ओ नवयुवती जिनका अहाँ देखे छी, अनेक नव-नव लोककें आब हमरे जकाँ कम्प्यूटरक जानकारी दैत रोजगार योग्य बना रहल अछि ।” हम एकबेर फेर चकित Us Teil | लागल जे किछु करबाक हेतु उमेर कोनो बाधा नै होइत सिरिफ जिज्ञासा चाही। OOO 20
वि दे ह विदेह Videha कब्दिक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ A अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक का मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA मर्दानी नारी मर्दानीक मतलब होइत अछि, निडर, साहसी, स्वतंत्रता व आत्मनिर्भरता | नारी जेतेक अछि सबहक अन्दर ई तागत अछि, परन्तु खगता ऐ बातक अछि जे नारी सभ ई बातकें समझौ आ समझि Hs बाहर निकालौ । ई कथा छी एकटा अब्बल-दुब्बर गरीब नारीक। बर्ख २०१३ तिथि स्वतंत्रता दिवसक दिन हरिपुर डीह टोलक रूपनी देवी, मधुबनीसैँ कलुआही जाइवाली पक्की सड़कक कातमे एकटा छोट-छीन चाहक दोकान खोलि अपन रोजगारक शुरू केलक | रूपनीकें ई दोकान खोलैक प्रयोजन ऐ लेल पड़ल जे एक दिन अन्नक अभावमे बाले- बच्चे भूखले सूतए पड़लै। विहान भने रूपनीक पति भोला रोजी वास्ते गामक मालिक टुनटुन ठाकुरक हबेलीमे पहुँच मजदुरी करए लगल | दोकान Ged ware दिन पहिनेक बात छी। रूपनी अपन पतिक कमाएल बोइन लबैले टुनटुन ठाकुर हबेलीपर गेल | भिनसरक आठ बजैत रहे | रूपनीकें देखिते ठाकुर साहैब Yes बैसल- “केतए vet रूपनी?” बाजलि - “मालिक, बोइन लइ़ले ।” Uae बात सुनैत टुनटुन बाबू भड़कि Soe | SU फटकारैत बजला- “अखनि तँ भोलबा खेतमे पहुँचबे कएल आ हूँ बोइन ले चलि Vet ।” रूपनी सकदम Us SIS छल | आकि पुन: टुनटुन बजला- “खुरपी ले, दरबज्जाक सभटा घास SAK AEA बोइन देबौ ।” ई बात सुनिते रूपनीक आगू रातिक तरेगन सोझहामे आबि गेल | माथपर हाथ ES सोचए लगल | की करूँ, रातिमे तँ सब परानी भूखले सुति रहलौं | अखनि की खाएत आ TTS | मालिकक बात at Pat होइते अछि। कमाएलो बोइनपर लुलकार सुनैए पड़े छै। आब की करब! पेटमे अन्न नै, गामपर बच्चा बाटे तकैत हएत जे मालिक Vora fee आनत माए a खाएब | मुदा ई कोन भगवानक चक्र छी । नै आब BS हाथे घर नै जाएब | ara रूपनी चटे eae धुरियाएले पएरे घूमि बजार पहुँचल। बजारक एकटा किराना दोकानपर आबि दोकनदारकें कहलक- “मालिक, ई हमर नाकक छौंक रखि लिअ आ चाउर-आँटा दिअ ।” 2
वि दे ह विदेह Videha कब्दिक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ A अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक का मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA दोकनदार बाजल- “भोला हमर दू दिन काज HA छल, जे बोइनो पछुआएल छै | अहाँ जे समान लेब से बाजू द५ दइ छी ।” रूपनी सोचैत बाजलि - “एक दिनक बोइनक चाउर-आँटा es दिअ आ एक दिनककें चाहपती-चीनी ands बिस्कुट आभरो पलाष्टिकक पचासटा गिलास as fear ।” दोकानदार बाजल- “पाहुन अबै छथि की?” रूपनी- “नै, चाहक दोकान खोलब ।” दोकानदार चाहक दोकान खोलै जोकर सभ समान Oe समझबैत-बुझबैत दोकान चलबैक सभ तरीका बुझा रूपनीकेँ विदा केलक | रुपनी घर अबिते पहिने GAS बना बाल-बच्चाकें खिआ पति लेल खेनाइ AS ठाकुर साहैबक खेत जा भोलोकें खिएलक | पछाति straws घर आपस विदा भेल | बाटमे अबैत रूपनीकें ठाकुर साहैबक मलिकाना बात झुड़झुड़ाइत माथकें घुड़ियबैत, पछाति बरहम स्थानमे बैसि दोकानक जगह टोहिया लेलक । टोहियबिते ओतए घर आबि पहिने खेनाइ खेलक | दोसरे दिन रूपनी स्वतंत्रता दिवबसक अवसरिपर चाहक दोकान खोलि अपन मधुर भाषाक सहयोग चाह- बिस्कुट Sau लगली | अपन हूनर संग Teas बटोरि पतिकें मजदूरी HLS मना करैत दोकानेपर काज करैक बोध देबए लगली | भोला सेहो मालिक ठाकुरक झझकारकें मोन पड़ैत दोकानक काजमे जतनसँँ लागि गेल । रूपनी साले भरिमे काफी उन्नति करैत दोकानक रंग-ढंग बदलि देलक और अपन पति भोलाकें मालिक कहि सम्बोधित करैत चाहक deere मिठाइ, जलपान आ भोजनक दोकान बना रूपनी अपन साहस आ मर्दानीक संग आत्म निर्भरताक परिचए ta स्वतंत्रताक जिनगी जीवि रहल अछि। 000 22
वि दे ह विदेह Videha कब्दिक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ A अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक का मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA चतुर बालक ई कथा सोनू नामक एकटा दस बर्खक बालकक छी । सोनू गरीब परिवारमे जनम भेने गामक-घरक लड़का TUS कतराइते रहै छल जे, हमर माए-बाबू गरीबीक जिनगी जीब रहल अछि | एक दिन सोनू अपना TS बजार चलि देलक | बाटमे सोचैत रहल जे गरीबसैँ धनीक केना evs ई सोचैत सोनू एकटा होटलक सोझहा सड़कपर ठाढ़ Us गेल । सोचैत-सोचैत सोनू होटल दिस डेग बढ़ेलक | तखने होटलक मालिक मनेजरकें कहलक- “हम ऊपरका रूपमे सुतैले जाइ छी, Te LATA हुअए तखने हमरा उठाएब ।” सोनू ऐ बखतकें मोनासीब बूझि दस मिनट रूकि क$ मनेजरकेँ कहलक- “होटलक माएिश्लक- बौधू बाबू हमर पिताक दोस्त छथिन | हुनकारोँ भैंट करबाक अछि ।” मनेजर एकटा बेड़ा दियए सोनूक समाद मालिक लग पठेलक | tH अधकचुआ नीनमे रहैक कारणे बेड़ाक बातकें Stews नै बूझि कहलनि - “जाउ, जे मगैत de से as ea” निच्चाँ आबि बेड़ा मालिकक कहब AAG सुना देलक | आ अपन काजमे लगि गेल । मनेजर सोनूकेँ पुछलक- “alan, की लेबह?” सोनू उत्तर दैत कहलक- “खेनाइ खिआ दीअ आ जे बढ़ियाँ मिठाइ garg से get डिब्बामे es दीअ ।” मनेजर सोनूकें खेनाइ खिआ दू डिब्बा बढ़ियाँ मिठाइ सजा ws es देलक | सोनू होटलसैं दुनू डिब्बा मिठाइ as विदा us गेल । हाथमे दुनू डिब्बा लेने चतुराइ करबाक तजूरबा करबाक लेल दोसर शहर चलि गेल | ओतए सोना-चानीक दोकानमे पहुँचल। दोकानक मालिक लोभी छल । ई बात सोनूकें मालूम भ गेल Set GH ails लोभी मालिककें चिन्ह, प्रेम-भाव देखबैत मिठाइक सुन्दर साजौल दुनू डिब्बा दैत बाबूजी शब्द सम्बोधित करैत हाथमे थम्हा दैत अछि | लोभी मालिक मिठाइक डिब्बा अपन पत्नी Reb बजा as दैत अछि। feu कालक बाद, जखनि दोकानमे गहिंकी सबहक भीड़ लगल, तखने बाजल- 23
वि दे ह विदेह Videha re www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका wwwvideha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ म अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक हिला मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA. “बाबूजी, डिब्बा महक मिठाइ रखि लिअ आ डिब्बा हमरा es दिअ ।” माएिश्लिक faq सोचने सोनूकें कहलक- “जा भीतर, Urs डिब्बा मांगि लिह5 ।” सोनू भीतर गेल आ मालिकिनकेँँ कहलक- “चाची, बाबूजी get सोनाक सिक्का दइले कहलनि।” सुनिते मलिकिनी विचारए लगली | देबाक मन नै देखि सोनू sie बाजल- “बाबूजी, जाबए अपनेसैं नै कहबै ताबए चाची थोड़े देती, अपनेसैं कहियौ ने ।” मालिक दोकानपर भीड़क कारणे गद्दीएपर सै पत्नीकें कहलखिन- “es दिऔ ने ।” पतिक आदेश पाबि मलिकिनी सोनाक ger सिक्का are as देली । as Hs साशनू ओतएसैँ ससरि गेल । आब सोनू SATS तेसर बजार गेल आ ओतए ओ दुनू सोनाक सि aT बेचि धन इकट्ठा करए लगल | ऐ बातक जानकारी गामक मालिक नवीन बाबूकें सेहो भेलनि | नवीन बाबू दरबारक सिपाहीकें कहि सोनूकें बजा पूछ-ताछ केलनि। सभटा बात साँचे-साँच बतबैत कहलक- “अपन TIA छुटकारा पबैले हम एना HS रहल छी ।” ई बात कहैत सोनू मालिककें प्रणाम Hs सोझहेमे ठाढ़ भेल रहल | किछुए कालक बाद सोनू फेर बाजल- “जाबे हमहूँ धनीक नै हएब ताबे कोनो ने कोनो चतुराइ ct करिते टा रहब ने ।” मालिक नवीन बाबू सोनूक चतुराइ संग धनीक हेबाक Es Gas देखैत गुम्म भ5 Ter | डण्डित करब सेहो मनमे एलनि मुदा ओ सोचलनि जे से नइ तैँ एकरा निअमित काजमे लगा दिऐ जइसैं ऐ तरहक ठकपानासँ दूर AS जाएत | यएह सोचि अपना दरबारमे रखि लेलक | OOO फागुलाल साहु जीक आलेख-मानव जीवनमे नारी स्वरूपक गरिमा मानव जीवनमे नारी स्वरूपक गरिमा :: फागु लाल AE 24
वि दे ह विदेह Videha चब्तिझ www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ A अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक का मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ई हमर माइयक सानिध्यक बात छी । हे माइ अहाँक सानिध्य पाबि हम जानि सकलीौं जे नारी ब्रह्मविद्या छी । HM SH | कला, ममता, शान्ति, दया संगे पवित्रता सेहो छी sel सभटा छी जे संसारमे सर्वश्रेष्ठक हृष्टिगोचर होइत अछि। एतबे नै नारी कामधेनु अनुर्पर्णा सिद्धी-रिद्वी सेहो छी । नारी मानव प्राणीक समस्त अभाव कष्ट आ संकट बाहर रखैक समयानुसार अपन स्वरूप बदलि -बदलि ws निष्ठापूर्वक सामर्थ्यवाण होइत अछि। जौं हुनक श्रद्धा-शक्ति आ क्षमताकेँ चिन्हल जाए, मानल जाए तैँ समस्त विश्व भरिक कण-कणमे स्वर्गीय स्वरूप बहाल HS सकैत छथि। माए aia सिनेह पाबि as हमरा ई बोध भेल जे नारी सनातन शक्ति St आदिकालसँ समाजिक दायित्वकें अपन aren उठौने आबि tech अछि। जौं ई भार पुरुखक कन्हापर Us देल रहैत तैँ कहिया ने डगमगा गेल teat | किन्तु विशाल भवनक नीब जकाँ ओतबे कर्तव्यनिष्ठ मनोयोग, संतोष, संगमकें प्रसन्नतापूर्वक अखनो घर चलबैत चलि आबि tech अछि । ई तँ मानवीय मूलक साकार प्रतिमा छी । हे जगत जननी अहाँक कृपासँ हम निम्न ऋषि वाणीकें अन्त:करणमे बसौने रहै GT | कहल गेल अछि- विद्या समस्तातव देवी ar: । स्त्रिया: AAS सकला जगत्स | । त्वयैकया पूरितमम्बएतत् काते | स्तुति: स्तब्यपरा weet । । हे देवी समस्त संसारक सभ विद्या adie निकलल अछि। सभ स्त्री अहींक स्वरूप छी । समस्त विश्व एक arate पुरित अछि | अहाँक स्तुती कोन रूपे कएल जाए, अन्त:करणमे ऐ भावक घनीभूत अनुभूतिसैं प्रेरित As हम सभ अहाँक VIM... | नास्ति ATTA छाया नास्ति मातृसमा गति: । नास्ति मातृसमा त्राणे: नास्ति मातृसमा प्रिया । माएक समान कोनो छाया नै अछि | माएक समान कोनो सहारा नै अछि । AH GEM कोनो रक्षक नै अछि। माएक सहश कोनो प्रिय वस्तु नै अछि । सृष्टिक रचना आ ओकर पालन सेहो अहाँक कार्य tect अछि। सन्तानो निर्माणमे माएक जे भूमिका रहैत रहल से fiers हजारो गुणा अधिक होइत देखल जाइत अछि | देवी अशिज पुत्र कादिवानकें अपना संरक्षण सान्धियमे रखि HS शिक्षा देलखिन | हुनका विद्वान बनेबाक अतिरिक्तो योग्य विद्यामे प्रकाण्ड विद्वता सेहो हाँसिल भेल | मर्मज्ञ ऋषि पंचशिख विषयपर अनेको गंथ लिखलनि ash स्वयं स्वीकार केने छथि जे ई ज्ञान माइ सुलभासँ भेटल अछि | वनवासी शकुन्तला अपन पुत्र भरत जिनका नाओपर ऐ देशक ASIA भारतवर्ष पड़ल अछि | हुनक पालन-पाशषण संगे प्रक्रमी बनेबाक श्रेय माएक अविरल अछि | भरत माइक सिनेह पाबि बचपनेसैँ शेरक बच्चाक संग खेलैमे मस्त रहल | निष्ठा आ लगनक प्रतिक ध्रुवक पालन-पोषण हुनक ATS सुनीति तपश्चनी वनमे रहि HS केने छेली | अपन शिक्षण द्वारा संस्कारित Hs बचपनेमे जीवनक रहस्यक बोध करा देलखिहिन | तइसैं ध्रुव प्रमात्माक अनुभूर्श्तिकें साक्षात्दिग्दर्शन प्राप्त HS लेला | 25
वि दे ह विदेह Videha चब्तिझ www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ A अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक का मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA सत्यनिष्ठ सीता वनवासिनी अपन जीवनोपरान्त सातित्वक ad धारण करैत पतिव्रताक Prater करैत अभावग्रस्त स्थितिमे रहितो लव-कुशक पालन-पोषण वालमिकी आश्रम रहि केलनि आ लव-कुशकें एहेन योग्य सामर्थ पुरुषार्थ बनौलनि जे अजय हनुमान, तथा लक्ष्मण जैसन वीर महापुरुषकें लव-कुशक सोझहामे पराजित हुअ पड़लनि। ज्ञान विज्ञान आ आध्यात्मिक प्रतिभावक aad देखल गेल कि ढेर रास उदाहरणक पात्र सोझामे आबि जाइए | जेना महर्षि पुलोत्माक पुत्री शची, महर्षि वशिष्ठक आश्रममे रहि ws ज्ञान-विज्ञानक प्रबीणता हाँसिल केने छेली। शचीकेँ साधनाक ules प्रभावित ws Hs देवराज इन्द्र हुनका मंगबैले पुलोत्माक दुआरपर स्वयं पहुँचला | तथा शची इन्द्रानी भड इन्द्रपुरीक मर्यादाकें बढ़ौलखिन | मनु एकबेर बजपेय यज्ञ केला tH योग्य पुरोहित नै मिल सकलनि। तखनि मनु अपन पुत्री इलाके योग्य समझि यज्ञाचार्य नियुक्त केलनि आ अनुष्ठान सम्पन्न करौल गेल। इला अपन पिताक vata आगू बढ़ौलनि | आदि शंकराचार्य आ मण्डन मिश्रक शास्त्रार्थमे धर्मपत्नी भारती अपन विद्वतासँ प्रभावित ah ws सरस्वतीक उपमा प्राप्त HS चुकल छथि। तथा पति मण्डन मिश्रक विजयी हेबाक गौरव प्राप्त करा चुकल छथि। भारतक प्रसिद्ध जोतिष विद्वन भास्कराचार्य दुआरा रचित सिद्धान्त सिरोमणि पुस्तकें Sad हुनक लड़की लिला gama लिखल गेल छल | लिला अपन पिताक मर्यादाकें बढ़बैमे सदिखन तत्पर रहैत छेली। महराजा जनकक द्रबारमे महाविदुषी गांग्रीकें आ महर्षि याज्ञवल्यकायक शास्त्रार्थ प्रसिद्ध अछि। ओही शास्तार्थमे याज्ञवक्कयकें गार्गीक पण्डित at Ager लोहा AMT पड़ल अछि | एहेन बहुतो समतुल्य नारी छथि जेना उदलिंका, विध्यगाथा, अनुसुइया, गौतमीयमी, विहुला आदि अनेक विदुषीगण प्रख्यात अछि | ज्ञान, विज्ञानक क्षेत्रमे विश्वक अतिरिक्त शौर्य, साहस एवं पराक्रमीमे भारतीय ani बढ़ल-चढ़ल देखल गेल अछि | अत: अवला कहबामे SATS FST जा रहल अछि। उदाहरण स्वरूप ct अनेको अछि जेना शिवक धनुषक शर्त राजा जनककें सीता स्वयंवरमे राखए पड़ि गेल जे ऐ धनुषक तोड़िनिहारेसैं सीताक बिआह ara ई a सीताक पराक्रमक झलक छल | दशरथक युद्धमे केकयी सार्थिक भार निर्वाह करैत अपना पतिकें संकटरैं प्राण बैचौने छेली । कृष्णार्जुन युद्धमे अर्जुनक संग रथ संचालन द्रोपदी बड़ी कुशलताक संग निर्वाह केने छेलखिन । अर्थशास्त्रमे सेहो धनुषधारी महिलाक उल्लेख आबि रहल अछि | संगे ईहो वर्णन आबि tect अछि जे बेटी- बेटीकें समान शिक्षा देल जाइत छल । ई जागरूकता आब समाजमे आबि रहल अछि। धर्म और समाज संस्कृतिक सेवामे नारी जाति बढ़ि -चढ़ि ws बलिदान प्रस्तुतक उदाहरण अछि | आचार्य वृहस्पतिक पुत्री देवीहृति और भावभव्यक कन्या रोमशा अपन पिता तथा feet आज्ञा प्राप्त क5 विभिन्न क्षेत्रमे धर्म प्रचार केने Sell | तथा समाज कल्याणक कार्यमे दक्षता प्राप्त केने छेली । ayo ऋषिक कन्या एकटा गुरुकुल खोलि छात्र-छात्राक समान रूपे प्रवेशक अधिकार es शिक्षा दान करबाक बेवस्था केने छेली | आइक जुगमे नारी रूपमे मदर टेरेसा भारतीय नारीकें गौरवान्ति सेहो केली अछि। नेतृत्वक aan del महिलाक भूमिका अग्रसर रहल अछि | इन्द्रकें दिशा निर्देश Sarit प्राप्त होइत रहल छल। घृतराष्ट Ft राज्य संचालनमे असमर्थ Ge | अही HHI STH पत्नी गंधारी Hs रहल छेली। ऐतिहासिक तथ्यकेँ देखलासँ स्पष्ट होइत अछि जे आइ aft राजश्री रानी पद्मावती, लक्ष्मी वाइ, अहेल्या, सरोजनी नाइडू तथा कस्तुरवा गाँधी Stent अनगिनित उदाहरण अछि । 26
वि दे ह विदेह Videha चब्तिझ www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ A अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक का मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA बात प्रतिभा प्रमाणित करबाक तथा स्वयं विकसित हेबाक तक सीमित नै अछि । प्रतिभासँ कहीं अधिक हुनक तियागक अछि जे असीमित अछि। जेतए स्वयं पर्दामि रहि क५ अपन पतिक समाज निर्माण आ आत्म निर्णाणमे सहायता प्रदान करैत रहल अछि । एतेबे नै, धर्मपत्नीक रूपमे योगदान प्रस्तुत करबामे सेहो मर्यादाक निर्वाह ata रहल अछि। जेना महान विदुषी विधोतमाक बिआह अशिक्षित काली area भेल। विधोतमा एतेक विद्वान छेली जे बिआहक tet शास्त्रार्थमे शर्त राखल गेल | अनेको विद्वान ओइठामसैं हारि मानैत आपस भड गेल । AR, aes मूढ़ काली दासक संग हुनक बिआह करौल गेल | विधोतमाकेँ जब ऐ बातक पता चललनि at पति काली दासकें उत्तेजित करि क$ ज्ञानक प्रति लगन पैदा केलनि आ हुनका अध्ययनक रूचि जगेलनि। फलस्वरूप मूढ़ मति काली दास अखनि महा कवि कालीदासक रूपमे विरव्यात छथि। ऐ तरहें तुलसी दासक पत्नी wae अपन सुख-सुविधाकें तिलांजलि दैत अपन पतिकेँ कामुक्तारँँ इश्वरभक्तिक ओर मोड़ैत रामभक्त महा लेखक बनौलखिन | ई सत्साहस रल्लावलीकें छल जे OE Aa तुलसी दास जकाँ संत आ रामचरित मानस महा ग्रेथक रचियेता बनौलनि | स्वयं रल्लावली उच्च कोटिक साहित्यकार सेहो छेली । मैत्रेयी महर्षि जाज्ञवल्कयक पत्नी छेली । ओ कोनो संसारिक सुखक are बिआह नै केने छेली। आपितु विशुद्ध आत्माक साधाना cet हुनक सहथर्मीनी बनली | संसारिक सुखक इच्छाक विषयमे पुछलापर ओ साफ इन्कार क$ गेली | ऐ तरहेँ राजकुमारी THM आन्हर वृद्ध चमन महर्षि केवल ऐ खातिर बिआह केलखिन जे हुनक तपस्या आ शोधकार्य हेतु आवश्यक साधन जुटबैमे सहायता प्रदान HS THA | राजा अश्वपतिक पुत्री विदुषी, अतिरूपनी राजकुमारी सावित्री एक वनबासी आ निर्धन सत्यवानसैं मात्र ऐ seed बिआह केलनि जे हुनक बनौषधि शोधमे सहायक Ys Hs मानव मंगल हेतु महतपूर्ण योगदान करि सकनि। ऐ तरहें असंख्य प्रमाण अछि asd सिद्ध होइए जे प्राचिने कालसँँ आदर्शवादी नारीमे अपन प्रतिभा, क्षमता आ योग्यताक लाभ समाजकें देबामे अपन योगदान दैत मानव विकासमे मुख्य भूमिका निभाबैत weer अछि। जरूरतो तैँ बुझाइते अछि | नारी नर केर Bra अछि सृष्टि केर अभिव्यक्ति नारी बिना शिव सदश कण-कणक शक्ति केर भक्ति | हमर समाजिक जीवन दाम्पति stare आरम्भ dea अछि। पति -पतिक बीच जेतेक प्रेम, सौजन्य, आत्म भाव, आत्म समर्पण आकि बफादारीक भाव Tet ओतबे मानवीय वा गृहस्ती जीवनमे आनन्दक प्राप्ति हएत। ओतबे अनुपातमे श्री समृद्ध एवं सुख-शान्ति Fed | माएक स्वरूप धानण करैत गंगा सहश AS जाइत अछि 000 27
वि दे ह विदेह Videha चब्तिझ www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका wwwvideha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ म अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक नि मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA U रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। सारस्वत: कविता सारस्वतक [2 आ २ (२५ टा); ३.*निमोछिया अबीर "(पिरोजगढ़ युवा समिति दिस SF देश आ विदेश मे बसल सब व्यक्तिकें सारस्वतक अशेष २०१५ होलीक हादिंक शुभकामना संग) कविता सारस्वतक g गौंवाँ हमर खेत के काटि रहल छथि धान, पाहुन मकड़ाक जाल बूनि खा रहल छथि पान | छोटकी ननदि dak तोड़थि बड़की करथि कुटउन , मैंझली बाड़ी am उखाड़थि मुँह मे लेने पान । खुनियाँ पारा बाघ ASAT हैँय - हैँय कें मार डाँड , गौवाँ हमर खेत के तोड़ि रहल छथि चान । सारस्वत : पिरोजगढ | र् 28
वि दे ह विदेह Videha कब्दिक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ A अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक नि मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA अप्पन माँटिक,अप्पन सुगंध/ मिथिला ,मैथिली जिनगीक कंठ ।(7) नूतन,अविरल धरतीक आँखि/ स्वच्छ,सहज संसारक पाँखि (2) हँसि-हैँसि मानुक्ख, साटय प्राण/ प्रखर पहर इंसानक जान (3) नवकी गाछी,नवका आम/ जिनगी सुन्दर ,दंत समान (4) सूरजक आतुर, ah अबैयए/ चिड़ै कंठक बोल बजैयए (5) रचि-रचि बदिरा पानि अनैयए/ घरतीक अमृत घोंट भरैयए ।(6) Sar पाँखिक चन्नामामा/ आबू !,दौड़ ! , पहीरि पैजामा (7) रूद्राक्ष,शिव ताण्डव केर धरती/ गाबय हैंसि-हैँसि, टूटय परती । 29
वि दे ह विदेह Videha कब्दिक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ A अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक हिला मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA दरसन एक बेर फेर & मिथिलाक/ पायब सुख ,सौ जन्मक सितलाक ।(9) F उतरी तोड़ि ,संसार रचैय SY रतुके जनमल ,ओस चटैय छी (0) चुटूटी मुँहक erg मीठ/ फह-फह करथि ,हमर सब Ala ।(77) देहक संग क्रीड़ा-सुख करितहूँ/ हैँसि-हैँसि पाहुन पाग पहिरतहूँ I(2) कुक्करक खिस्सा,भेल बलाय/ देशक चिंता,देल सताय |(3) नवकी तोरी,फूल गुलाब/ उक्खरि मुसराक चोट जुराव ।(4) ? साँसक सेल्फी,साउस बीमार/ गदही नाँचय अपने ताल (5) संठी FS, Yat बहराइयए/ 30
वि दे ह विदेह Videha कब्दिक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ A अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक नि मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA उधघड़ल तागक घर बिलाइयए |(6) घरखस्सी मे झूटका भेटल/ हिनका,हुनका तमघैल भेटल ।(77) राति सतरिया,दिन कनैयए/ बरदक aS ढ़ील बीछैयए (8) बड़का लोकक चार छिनार/ अगिला, पछिला उपर जाल ।(9) पैसा भेने, भेल धनिक/ एहेन लोक लतमर्दन नीक ।(20) धूर्त सियारक,नाडरि पैघ/ कोहा ,बासन उनटल चैल I(2) DICH, LAL, THR गाल/ आँखिक दूसल ,तकरो लाज (22) छाउरक ढ़ेरी ,पैध अकास/ चौकी बैसल,फेंटथि ताश |(23) 32
वि दे ह विदेह Videha चब्तिझ www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका wwwvideha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ म अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक नि मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA गोदना मे ak गोबरक छत्ता/ कनमा भरि नहि,दूधक पत्ता (24) केहेन धरानी,रातिक ari जरिते पुआर,उतरि गेल आगि (25) सारस्वत;पिरोजगढ़ | 3 “निमोछिया अबीर " (पिरोजगढ़ युवा समिति दिस & देश an विदेश मे बसल सब व्यक्तिकें सारस्वतक अशेष २०१५ होलीक हार्दिक शुभकामना | गामक विकल्प शहर कहियो नै भ5 सकैछ |) भाडक गाछ तर रडक पुड़िया लेने ठाड़ि हमर नवकी भौजी आर जुआन as गेलीह हैं । हिनक पछुऐत मे अपन पिचकारी सै tS देब५ मे aes Ahem लागत | ws वियोगी! आबह | सुस्मिताकेँ लगाबह | केदार बहुत लगेलक हैं। कने प्रदीपोकें TAS SSH | देवशंकर बैसल अछि अशोकक 32
वि दे ह विदेह Videha re www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका wwwvideha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ म अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक नि मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA मुँह मे सिगरेट as केँ । नचिकेताक मोंछक पमही देखियनहूँ कोना लगौने ofa ससरफानी रामलोचनकें | करिया बरदक आड़ छाप$ मे लागल छथि रमणजी | हिनका शरदिन्दुक नाडरि पकड़ि भीमभाईक सोझहाँ as चलू! सुनलहूँहें सुभाष आइ-काल्हि नवकी छौड़ीक TS लुंगी fared छथि अजितक देखौंस Hse | WAH गाँती as बैसल अछि चंद्रेश | स्वंयप्रभाकें बढ़ RA सफाचट बर भेटलनि सौराठ मे मुछैल महदेवा । कामनीक हरियर झंडी लेने ठाढ़ अछि श्रीधरम | आब कतेक ठोर चुसत गौरीनाथ उषाकिरणीक भेस मे? लाहलोट US गेल छथि मंत्रेश्वर प्रेमर्षिक पोन चटैत-चटैत | मरूवाक दाना Sle नारायणजीक आँखि मे शिवशंकरक कान पकड़ि। कुणालक चश्मा पर बटुक भाइ पीत फेकलनि हैँ। गगनक मुट्टीमे अछि अक्कक SAS | qa चेतनाक मुँह मे गाड़ने छथि बासुकीनामा GT | विभारानी शेफालिकाक सडे कछिया पहिरैक प्रैक्टिस क५ रहलीहहेँ अमरजीक बथानपर | 33
वि दे ह विदेह Videha re www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका wwwvideha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ म अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक का मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA बिभूतिक हाथ मे पकड़ौवा पड़वा सब पाग पहिरि गोबर aad छथि। राजमोहनजीक हाथक SA जीवकांतजी लग पहुँच रहल अछि | नवका पतरा मे गोविंद बाबूक बियाहक दिन तकलनि हैँ बिमल शशिबोधक दुआरि पर | अनमोल, मनोज, शंकरदेव, राज, अमलेन्दु, सच्चू, मनुज आबि रहल अछि पिपही बजबैत | दमन अशोक मेहता सडे झालि बजबैत फोड़ि देलनि ढोल सुरबाबाक | मलंगिया भारद्वाजी जनउ पहिर$ मे रमेशकें कोसी cua देलक | मिथिलाक भाडक अय गाछ तर धुथूरक उज्जर-उज्जर फूल अहाँक हाथ मे अछि सरसजी | से कने रविन्द्रोजीकेँ qas दिअहुँने a जयताह रंजनाक गालमे गुलाल लगयकेँ । एक बेर सूचि ws तैँ देखू! एकर बीयाकें एक बेर चखिकें Ts देखू! घोड़-नाडह देनाय अहूँ YE HS देब अद्धेनारीश्वरजी बुधिनाथजीक सडे कीर्तिभाइक पटिया पर | नवका-नवका लोकक देह मे पियाउज Us गेल अछि देबूबाबू ! बिरेन्दर मल्लिकक मोटकीनामा were? प्रेमलताक दुआरि पर किशोर गबैत अछि बरहमासा | पंकजक सड भास्कर औंर5ह AT अछि । लिली रे कें पकड़िकें राखू शैलेन्द्रभाइ! सुकांतक हाथ मे शोभाकांतक TTS अछि । आहाँ देखे की छी अगिनपुष्प? कृष्णमोहन गिरगिट vs गेल अछि चैंदेश्वर खाँक टाटपरहक | मधुकांतक सड़ल अंडा आब बच्चा नै दैत अछि | aya मास मे एकेडमीक सम्मानित लेखक भड जाइत 34
वि दे ह विदेह Videha चब्तिझ www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका wwwvideha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ म अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक नि मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA अछि विद्यानन्द झाक साटिपीटी as केँ । अविनाशक आँखि मे आडुर देने org अछि HTT | सबटा कौवा सबकें पकड़ि पकड़ि ललका रड दिअहु तखने नवका-नवका लेखक बनत । नवका-नवका मधुबनी पेंटिंग मे बंगलिया कुकूर सब आबि-आबि भूकैत अछि छत्तीसगढ़ी कटोराक पानि चाटिकें बूंदेलखंडी बसात मे । लालकिला लग बैसल म्याँउ-म्याँठ करैत हमर लोकतंत्रीय दाय-माय सब आअहूँ आउने!पुआ GTS ने! हमर अय गाम मे भाडक गाछ तर । परतानक भूर मे भोट खसबैत हम छी अहींक निमोंछिया अबीर । अहूँ आबिकें खसाउ ने! लटकल अछि तेत्तरि चूसिकें as देखू हे हमर प्राणपियारी दाय-माय ! BB! हमरा AS अहूँ सब पुआ TS | अहींक निमोंछिया अबीर ।- (सारस्वत; पिरोजगढ़) ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (८)२००४-१५. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जत$ लेखकक नाम नै अछि ats संपादकाधीन | विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: WSs ठाकुर | सह-सम्पादक: उमेश 35
वि दे ह विदेह Videha कब्दिक www.videha.co.in face प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १७९ A अंक ०१ जून २०१५ (वर्ष ८ मास ९० अंक नि मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA मंडल | सहायक सम्पादक: राम विलास Ag, Aes विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण) | कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी | सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर | सम्पादक- सूचना- सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल | सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल | रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य wie) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक Bae doc, .docx, .rtf वा txt फॉर्मेटमे पठा ae Os | रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेता, से आशा HL छी | रचनाक अंतमे टाइप रहए, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकें देल जा रहल अछि | एत$ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक; संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक,/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकें छै । US पत्रिकाकें श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकें ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (८) 2004-5 सर्वाधिकार सुरक्षित | विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकत्ताक लगमे छन्हि | रचनाक अनुवाद आ पुन: प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.co.in पर संपर्क करू । ऐ साइटकें प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल ।५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur. blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh. html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तरैं प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका aft पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि | आब “भालसरिक TTS” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक््ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त AS रहल अछि | विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA N i | सिद्धिरस्तु 36