95 ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' १८२ म अंक १५ जुलाइ २०१५ (वर्ष ८ मास ९१ अंक १८२) ऐ अंकमे अछि:- ऐ अंकमे अछि:- पंचैती (लघु पटकथा) / जाल (पटकथा) / लाज (एकांकी-नाटक)-राजदेव मंडल कागज-कलम- पल्लवी मण्डल पंचैती (लघु पटकथा) परिचए-पात : राजदेव मंडल जन्म : १५ मार्च १९६० ईं.मे। पिता : स्व. सोनेलाल मंडल उर्फ सोनाइ मंडल। माता : स्व. फूलवती देवी। पत्नी : श्रीमती चन्द्रप्रभा देवी। पुत्र : निशान्त मंडल, कृष्णकान्त मंडल, विप्रकान्त मंडल। पुत्री : रश्मि कुमारी। मातृक : बेलहा (फुलपरास, मधुबनी) मूलगाम : मुसहरनियाँ, पोस्ट- रतनसारा, भाया- िनर्मली, जिला- मधुबनी। बिहार- ८४७४५२ मोबाइल : ९१९९५९२९२० शिक्षा : एम.ए. (मैथिली, हिन्दी, एल.एल.बी) ई पत्र : rajdeokavi@gmail.com प्रकाशित कृति : (१) अम्बरा- कविता संग्रह (२०१०) (२) बसुंधरा कविता संग्रह (२०१३) (३) हमर टोल- उपन्यास (२०१३) पंचैती (लघु पटकथा) पुरुष पात्र- धनेसर रमुआ- ललिताक बाप चारिटा ग्रामीण सहदेव- किशनक पिता मास्टर साहैब पंच प्रमुख तीनटा पंच जमादार किशन किछु पंच, ग्रामीण, धीया-पुता, पुलिस।) स्त्री पात्र- धनेसरक पत्नी गीता- धनेसरक बेटी किशनक माए पहिल दृश्य- स्थान- धनेसरक आँगन समए- दिन पात्र- धनेसर आ धनेसरक पत्नी। (धनेसर अँगनामे प्रवेश करैत अछि। ओकरा चेहरापर परेशानीक भाव अछि। एनए-ओनए ताकैत पत्नीसँ पुछैए) धनेसर- गीताक माए, एक गिलास पानि लाउ। बड़ी जोरसँ पियास लगल अछि। गीताक माए- आब हम भात पसेबै आकि अहाँकेँ पानि देब? धनेसर- किए? गीता केतए गेल अछि? गीताक माए- बेटी परीक्षा दइले गेल अछि आ अहाँकेँ पतो नै अछि। धनेसर- (मुँहपर तामसक भाव) की हेतै पढ़ि-लिखि कऽ किछो सुनबो केलिऐ? गीताक माए- की सुनबै? धनेसर- अहाँकेँ बुझले नै अछि जे गाममे की भेलै। गीताक माए- हमरा काज धंधासँ फुरसति भेटतै तब ने। धनेसर- रमुआक बेटी कोनो छौड़ा संगे उड़ि गेलै। फुर्रऽऽऽ। गीताक माए- अँए! (अचरज भरल आँखिसँ पति दिस देखैत अछि।) धनेसर- हँ...! बेसी पढ़ि-लिखि कऽ एहए सभ होइ छै। गीताक माए- अहाँ तँ कोनो गपकेँ पकड़ि लइ छिऐ। ई सभ कहिया नै होइ छेलै। हँ, पहिने कम होइ छेलै आब बेसी होइ छै। (समए बिहरौन (बिहरन) सन भऽ जाइ छै।) कट टू. दोसर दृश्य- समए- दुपहरिया स्थान- रमुआक दुआरि (रमुआ माथपर हाथ देने चिन्तामे डुमल अछि। तखने गामक किछु लोक पहुँचैए। लड़कीकेँ भागि गेलाक कारणे अपन-अपन तामस परगट कऽ रहल अछि।) ग्रामीण एक- (क्रोधमे) देखियौ ने, हम सभ परेशान छी आ ई घरमे मुँह घोंसिया कऽ पड़ल अछि।) ग्रामीण दू- लाज-शरम तँ होइते नै छै। एनए जाति सबहक नाक कटि गेलै। ग्रामीण तीन- धुर! गामक लोक तँ थू-थू कऽ रहल छै। ग्रामीण चारि- नै पूछू काका, गामक लफंगा छौड़ा सभ कहै छेलै, जँ छौड़ीक अभाव छौ तँ चलि जो ओइ टोलपर। फीरीमे मिलि जेतौ। हमरा तँ तामसे देह बहीर भऽ गेल। काटि देबै सारकेँ। ग्रामीण एक- नै नै, एनामे तँ जाति-जातिमे झग्गड़ बझि जेतौ। आ दूटा जातिमे झगड़ा हेतौ तँ तेसर जातिकेँ फैदा हेतै। ग्रामीण तीन- मन तँ होइत अछि जे रमुआकेँ खुंडी-खुंडी कऽ दी। ग्रामीण दू- पहिने चल पंच सबहक पास। ग्रामीण एक- नै, पहिने अपना जातिमे फैसला कऽ लेबै। ग्रामीण चारि- (रमुआ तरफ इशारा करैत) ओकरा कही, छौड़ीकेँ ताकि लाबतौ। नै तँ...। (हाथसँ इशारा करैत अछि।) कट टू. तेसर दृश्य- समए- राति स्थान- सहदेवक घर। पात्र- किशन, सहदेव, किशनक माए, ललिता। (किशन आ ललिता नुकाइत अँगनामे प्रवेश करैत अछि। ओकर पदचाप सुनि सहदेव लालटेन नेने घरसँ बाहर निकलैत अछि। लालटेनक इजोत किशन आ ललिताक मुँहपर पड़ैत अछि। सहदेव डरा जाइत अछि। झपटि कऽ किशनकेँ पकड़ैत अछि आ घरक भीतर लऽ जाइत अछि।) सहदेव- रमुआबेटीकेँ ऐठाम किए लाबलीही? बुझै छीही, रमुआ आ ओकर जाति सभ केते तमसाएल छै। अपन भला चाहै छीही तँ एकरा आपस घर पहुँचा दही नै तँ ई सभ जीनाइ मोसकिल कऽ देतौ। (किशन किच्छौ नै बजैए।) तूँ बजै किए नै छँह रौ? किशन- की बजबै? अहाँ तँ देखिते छिऐ जे हम दुनू गोटे एक-दोसरकेँ केते चाहै छिऐ। सहदेव- तोरा चाहने आ नै चाहनेसँ की हेतौ? किशन- हमरा चाहनेसँ की नै हेतै। हम दुनू गोटे बालिग छिऐ। हमरा कानून द्वारा बिआह करैक अधिकार छै। सहदेव- कानून अपना जगहपर छै आ पिछड़ल समाज अपना जगहपर अड़ल छै। ऐठाम ई सभ नै चलतौ। कहै छियौ, मारल जेमेँ। किशन- पता नै, अहाँ सभ पुरना गपकेँ कहिया तक लाधने रहबै। केतेक लोक कुरवान हैत रहतै। ठीक छै, हमरा फैसलासँ अहाँ डरै छिऐ तँ हम जा रहल छी। (ललिताक हाथ पकड़ि किशन जेबाक लेल तैयार होइत अछि। किशनक माए आबि कऽ आगूसँ रोकैत अछि।) किशनक माए- बौआ एते रातिकेँ केतए जेबहक? बातकेँ बुझहक। हमरा सभ एतेक तगतगर नै छी जे समाजसँ लड़ि सकब। (किशन ललिताक संगे चलि जाइत अछि। ओकरा माए चिचियाइत हल्ला करैत अछि।) रौ बौआ, रूकि जो रौऽऽऽ। की हेतै की नै। (कानए लगैत अछि।) कट टू. चारिम दृश्य- समए- दिन स्थान- गीताक घर। पात्र- गीता, धनेसर, गीताक माए, एवं किछु धिया-पुता। (घरक बाहरी भाग। गीता कुरसीपर बैसल अछि। आगूमे बैसल किछु धिया-पुता पढ़ि रहल अछि। दस बर्खक एकटा छौड़ा दौग कऽ अबैत अछि आ एकटा चिट्ठी गीताक हाथमे दैत अछि। फेर ओ शीघ्रतासँ आपस भऽ जाइत अछि। चिट्ठी खोलि गीता पढ़ए लगैत अछि।) गीता- ओह! ललिता मोसीबतमे फँसि गेलै। एकरा मदति केनाइ बड़ जरूरी छै। (चिट्ठीकेँ फाड़ि ओहीठाँ फेकि दैत अछि आ बगलमे ठाढ़ साइकिल लऽ कऽ विदा होइत अछि।) अँगना दिस घूमि) माएऽऽ हम कनीकालक बाद आपस एबौ। (साइकिल तेजीसँ बढ़बैत अछि। धिया-पुता हल्ला करैत पड़ा जाइत अछि।) कट टू. पाँचम दृश्य- समए- दिन। स्थान- सड़क। पात्र- गीता। (गीता परेशान मुद्रामे साइकिलसँ जा रहल अछि। अपन प्रेमक बीतल कथामे डुमल अछि। सड़कपर चलि रहल। निर्देशानुसार...।) कट टू. छअम दृश्य- स्थान- मास्टर साहैबक घर। पात्र- गीता, मास्टर साहैब। (सेवा निवृत्त मास्टर साहैब अपना नीजी पुस्तकालमे पढ़ि रहल छथि।) गीता- (प्रवेश करैत) परनाम सर। मास्टर सहैब- (असीरवाद दैत) आबह, बैसह। बहुत दिनक बाद देखलियौ। कोनो विशेष गप छै की? गीता- हम अहाँसँ मदति लइले आएल छी। मास्टर साहैब- केहेन मदति? गीता- अहाँ तँ ललिता आ किशनक बारेमे सभ किछु जनिते हेबै। एहेन स्थितिमे...। मास्टर साहैब- सभ किछु बुझै छिऐ अपन समाज रूढ़िवादी छै। हमर तँ सभ दिनसँ कोशिश रहल अछि जे ई जातिक बंधन टुटै। समाजकेँ बदलैले पूरा जिनगी लगा देलिऐ। किन्तु सिन्तु ी छै। हमर तँ सभ दिनसॅ 000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000माज नै बदलल। खैर, एतेक दिनक पछाति तूँ कमसँ कम ऐ बातक लेल ठाढ़ तँ भेलेँ। हमरा बुते जेते संभव हेतौ तेते मदति जरूर करबौ। कट टू. सातम दृश्य- समए- दिन। स्थान- गीताक घर। पात्र- गीता आ धनेसर दुनू परानी। (धनेसर चिट्ठीबला कागतक टुकड़ी हाथमे नेने पत्नी दिस बढ़ैत अछि। ओही समैमे गीता साइकिल नेने प्रवेश करैत अछि। ओकरापर नजरि पड़िते धनेसर तमसा जाइत अछि।) धनेसर- (सक्रोध) गीता! एनऽ आ। (कागत देखबैत) ई की छिऐ? गीता- (चुपचाप ठाढ़ अछि।) धनेसर- तूँ जबाव किए ने दइ छेँ? पत्नी- (बिच्चेमे आबि) अहाँ किए हमरा बेटीपर तमसा रहल छिऐ। धनेसर- अहीं एकरा कपारपर चढ़ा नेने छिऐ। देखियौ, ई ललिताक चिट्ठी। (गीता दिस घूमि कऽ) तोरासँ एहेन आशा नै छल। गीता- ऐमे ओकरा सबहक कोनो गलती नै छै। धनेसर- (तामस बढ़ि जाइत अछि।) लगैए, तोराे दिमाग खराप भऽ गेलौ। अखनिसँ तूँ केतौ नै जा सकै छेँ। चल घरक अन्दर। (हाथ पकड़ि धकिया कऽ घरक अन्दरमे दऽ कऽ बाहरसँ केबाड़ लगा दैत अछि।) पत्नी- अहाँ बताह जकाँ किए करै छिऐ। धनेसर- हमरा एलासँ पहिने जँ घर खोलबै तँ हमरा जीअत नै देखबै। (झपटि कऽ झोरा लैत अछि आ तेजीसँ बाहर निकलि जाइत अछि।) पत्नी- आब हम की करबै। (कानए लगैत अछि।) कट टू. आठम दृश्य- समए- दिन। स्थान- धनेसरक घर। पात्र- गीता आ धिया-पुता, किछु लोक। (गीता घरक भीतरीमे टहलि-बुलि रहल अछि। मुँहपर बेचैनीक भाव छै। खिड़की खोलैत अछि।) किछु लोक सड़कपर जा रहल अछि। एकटा आठ बर्खक छौड़ाकेँ गीता सोर पाड़ैत अछि। आ ओकरा इशारासँ केबाड़ खोलैले कहैत अछि। जे बाहरसँ बन्न अछि। छौड़ा टेबुलपर चढ़ि केबाड़ खोलि दैत अछि।) कट टू. नअम दृश्य- समए- दिन। स्थान- गामक पंचायत स्थल। गामक बाहर गाछतर चबुतरापर पंच-प्रमुख आ पंचगण बैसल अछि। चबुतराक निच्चाँमे गौआँ-घरूआ सभ जमा भेल अछि। किछु युवक सभ लाठी नेने किशन आ ललिताकेँ घेरने अछि। ग्रामीण सभ आपसमे घोलफच्चका कऽ रहल अछि। पंच प्रमुख- सभटा गप सुनलौं। वास्तबमे, अपना गाम आ समाजक लेल ई घिनौना घटना छी अइले ओहने भरिगर डण्ड हेबाक चाही। पंच एक- हँ... हँ... अहाँ ठीके कहै छिऐ। जँ ऐ तरहेँ हैत रहतै तँ केकरो इज्जति-परतिष्ठा नै बँचतै। पंच दू- ने जातिक बन्धन आ ने बड़ छोटक खियाल। हमरा सबहक जमानामे कहियो एना भेल छेलै। पंच एक- (किशन दिस हाथ चमकबैत) ई सभ पढ़ि-लिखि कऽ गामक नाओं की करतै। उनटे समाज आ जातिकेँ दाग लगा देलकै। (भीड़सँ गीता निकलैत अछि। ओकर नजरि अपना बाबूसँ मिलैत अछि आ पिताक नजरि झूकि जाइत अछि।) पंच प्रमुख- (क्रोधमे) एकरा केश कटा कऽ कारिख-चुन लगा आ गदहापर बैसा दही। पंच एक- हे रौ, कारिख-चुन एनए ला। लगा, मुँह-कानमे। (लाबैत अछि।) पंच दू- ऐ छौड़ीकेँ पीठपर कोड़ा लगबाक चाही। (भीड़केँ ठेलैत गीता आगू अबैत अछि।) पंच एक- घोड़ाक कोड़ा कहाँ छौ? ला हमरा हाथमे। (लाबैत अछि।) गीता- यौ पंच मरमेसर, कानूनक हिसाबसँ अहाँक फैसला गलत अछि। देश-दुनियाँ केते आगू बढ़ि गेलै आ अहाँ सभ ओही पुरना गपमे लटपटाएल छी। परेम कएल नै जाइ छै, भऽ जाइ छै। आ परेम जाति, धरम नै देखै छै। आब तँ सरकारो एकर मान्यता दऽ देने छै। कानून बनि गेल छै। अहाँ सभ तँ कानूनक रखबार छी। कनी सोचियौ, अहाँ सबहक फैसलासँ दूटा जिनगी बेरबाद भऽ जेतै। अपन वर्चस्व देखबैले ई अन्याय कऽ रहल छिऐ। दुनू बालिग छै, तँए बिआह करबाक लेल स्वतंत्र छै। पंच दू- धनेसरजी, अहाँ अपना बेटीकेँ एहने बात सभ सिखौने छिऐ? अहाँ तँ समझदार छी। एतेक लोकक बीचमे अहिना बजल जाइ छै? एहेन गप बजैत लाज हेबाक चाही। (पुलिसक गाड़ी धड़धड़ा कऽ अबैत अछि। जमादारक संग मास्टर साहेब उतरैत अछि। सभ ताकए लगैत अछि।) मास्टर साहैब- लाज तँ अहाँ सभकेँ हेबाक चाही। ऐ दुनूकेँ कानूनी शादी भऽ गेल छै। एकर पछातिओ अहाँ अतियाचार कऽ रहल छिऐ। जमादार- (तामससँ लोककेँ हटबैत) जे पंच छी, से सभ सुनि लिअ। ऐ दुनूकेँ बिआहक कानूनी कागत थानामे जमा छै। अहाँ सभ अतियाचार कऽ रहल छिऐ। कानूनक हिसाबसँ अहाँ सभ गिरफ्तार भऽ जाएब। (जमादारक बात सुनि सभ पंचक माथा झूकि जाइत अछि। जमादार भीड़मे ढुकि किशन आ ललिताकेँ बाहर निकालैत अछि। किशन आ ललिता मास्टर साहैबक पएर छुबैत अछि। पाछूसँ गीता निकलैत अछि आ मास्टर साहैबकेँ प्रणाम करैत अछि।) मास्टर साहैब- (असिरबाद दैत) गीता, तोरा काजसँ हम बड्ड खुशी छी। (धनेसर दिस ताकि।) यौ धनेसरजी, अहाँक बेटी समाजक लेल बड़का काज केलक। अहाँक गौरव हेबाक चाही। असिरबाद दियौ। (धनेसर गीताकेँ असिरबाद दैत अछि।) शब्द संख्या- १५३५ कट टू. समाप्त। जाल पटकथा दू शब्द- मैथिली साहित्यमे पटकथाक अभावकेँ देखैत ऐ विषयमे अज्ञ रहितो, एकटा लघु परियास केलौं। सफल भेलौं आकि असफल, निर्णए तँ समाजे करता। -राजदेव मण्डल पात्र परिचए- (पटकथा) विक्रम- नायक बरसा- नायिका श्यामबाबू- बरसाक पिता मनदेव- बरसाक मामा रखिया- बरसाक मामी हरिया- खलनायक सुइदचन- खलनायकक पिता मुंशी- सुइदचनक मुंशी चनकी- हरियाक प्रेमिका फुलिया- चनकीक माए डोलना- चनकीक पिता भकोलबा- चनकीक भाए विक्रमक माए- नायकक माए रघुआ- विक्रमक संगी टहलू- गामक एक बेकती (दोकनदार, सिपाहीक दल, हरियाक संगी बदमाश तथा किछु ग्रामीण आ पंचगण।) पहिल दृश्य- समए- भोर। स्थान- नदीक किनार। नदीक आस-पड़ोसक दृश्य उभड़ैत अछि। सुरुज उगि रहल अछि। किनारपर गाम-घरक लोक, चारूभर पसरल हरिअरी, गाए, भैंस, बकरी सभ चरैत। गरदा आ थाल-कादोमे खेलाइत धिया-पुता। दूर-दूर धरि देखाइत अछि। कट टू। धारमे नाह चलि रहल अछि। जैपर चैढ़ कऽ गामक लोक शहर जाइत अछि, जरूरी चीज-बौस कीनै आ बेचैले। धारक ऐ पार गाम आ ओइ पार देखा पड़ै अछि- कौलेज, स्कूल, रेलबे टीसन, चलैत आ ठाढ़ बस। केते गोटे नाहसँ उतैर कऽ गाम दिस आबि रहल अछि। नदी आ ओइठामक जिनगीसँ सम्बन्धित गीत नवरिया गाबि रहल अछि। कट टू। दोसर दृश्य- समए- भोर। नायक- विक्रम, विक्रमक माए। स्थान- विक्रमक घरक बाहरी भाग। (घरक बाहर दुआरिपर गाए आ बरद बान्हल अछि। विक्रमक माए गाए दूहि रहल अछि। दूधसँ भरल बाल्टीन दुआरिक कोनपर रखैत अछि। आ बड़बड़ाइत अँगना दिस बढ़ैत अछि। विक्रमक माए- विक्रम अखनी तक सुतले छै शाइत। की करतै छौड़ा, परेशान रहै छै। पढ़नाइक संगे घरोक काज करए पड़ै छै। (जोरसँ) हे रौ बौआऽऽऽ विक्रम बेटाऽऽ, उठ जल्दी भोर भऽ गेलौ। कट टू। तेसर दृश्य- स्थान- विक्रमक घरक भीतरी भाग। समए- दिन पात्र- विक्रम (विक्रम घरमे सूतल अछि। चौकीक बगलमे टेबुलपर पोथी आ कॉपीक ढेरी अछि। ओइपर एकटा टेबुल घड़ीओ अछि। माएक स्वर सुनि देहपर सँ चद्दैर हटबैत अछि। अँगैठी करैत घड़ीपर नजैर दैत अछि। घड़ी दिस देखिते फुड़फुड़ा कऽ उठैत अछि।) विक्रम- भोर भऽ गेलै। जुलुमक गप्प! आइ घड़ियो नै बजलै। दूध कखैन शहर पहुँचैबै? (जोरसँ) अबै छियौ माएऽऽऽ। कटू टू। चारम दृश्य- स्थान- विक्रमक दुआरि। समए- दिन। पात्र- विक्रमक माए आ विक्रम। विक्रमक माए एकटा बड़का कनस्तरमे दूध भरि रहल अछि। दूध भरि कऽ आँगन दिस तकैत अछि। तखने विक्रम शर्टक बटम लगबैत अँगनासँ निकलैत अछि। दुआरिक कातसँ साइकिल लाबि ओइपर दूधक वर्तन लटकबैत अछि। आगू-पाछू देखैत, घण्टी टुनटुनबैत आगू बढ़ैत अछि।) विक्रमक माए- आइ दूधो कमे भेलौ। (साइकिलपर चैढ़ चलि पड़ैत अछि। ओकर माए पाछूसँ सोर पाड़ैत अछि।) विक्रमक माए- विक्रमऽऽऽ। तूँ किछो बिसरबो केलही? विक्रम- नै...। कहाँ किछो। विक्रमक माए- मन पड़लौं? विक्रम- हँ-हँ। ऊ वेकेन्सीबला फार्म पोस्ट ऑफिसमे रजिष्ट्री करबाक छै। मन नै परितौ तँ डेटे बित जइतै। (माए लेटर लाबि कऽ दैत अछि आ जेबीमे रखैत विक्रमक साइकिल चलि पड़ैत अछि।) विक्रमक माए- भुलक्कड़ भऽ गेलै। (रस्ता दिस तकिते रहि जाइत अछि।) कट टू। पाँचम दृश्य- स्थान- गामक एक भाग। समए- दिन। पात्र- रघुआ, विक्रम। दुआरिक चबुतरापर रघु नहा रहल अछि। कपारपर पानि ढरैत काल जोर-जोरसँ ‘राम-राम’क जाप कऽ रहल अछि। बगलसँ गुजरैत डगरपर साइकिलसँ विक्रम जा रहल अछि। रघुआक नजैर ओकरापर पड़ैत अछि। रघुआ- यौ दरोगा भाय। कनी सुस्ता लिअ। बस एक मिनिट। हमहूँ अहींक संगे चलबै। तैयारे छी। बस धोतीक ढेका खोंसए दिअ। विक्रम- नै रघु काका। हमरा देरी भऽ गेल अछि। रघुआ- रौ भतीजबा। तुरत्तेमे दुनियाँ आछन भऽ जेतै। हे रौ ठाढ़ रह। हे हे ढेका खोसए दे। (विक्रम साइकिल आगू बढ़ा लैत अछि। पाछूसँ रघुआ डाँड़मे धोती लटपटबैत रहि जाइत अछि।) कट टू। साइकिलक दुनू पहिया तेज गतिसँ चलि रहल अछि। ओहीपर चढ़ल आ जोर-जोरसँ निसाँस खिंचैत विक्रम देखा पड़ैत अछि। असगरेमे बड़बड़ाइत अछि। विक्रम- बेदरामे चोर-सिपाहीक खेल खेलाइत काल-सिपाही बेसी हमरे बनए पड़ै छल। तहिएसँ सभ हमरा दरोगा कहए लगल। आब कहैत अछि तँ तामस लहरैत अछि। करबै की? आब हमरा दरोगा बनैक उपए करए पड़तै। जे होइ ऐ परीछामे पूरा जोर लगबए पड़तै। (पाछू मुहेँ घुमि कऽ तकैत अछि। रघुआ धोती सम्हारैत दौगल आबि रहल अछि।) रघुआ- (हाथ उठा कऽ हल्ला करैत) रे भतीजबा, ठाढ़ रह। एतेक दूरसँ दौगल अबै छियौ, आबो तँ चढ़ा कऽ नेने चल। (विक्रम फेंर तेजीसँ साइकिल आगू बढ़ा लैत अछि।) कट टू। छअम दृश्य- समए- दिन। स्थान- नदीक तट्क बाहरी भाग। पात्र- बरसा (नायिका) नदीक काते-कात घास-फूसक बीचमे बाट देखा पड़ैत अछि। ओइ बाटपर हाथमे पोथी नेने बरसा तेजीसँ आबि रहल अछि। कट टू। नदीक कछेरमे नाह ठाढ़ भेल देखा पड़ैत अछि। लोक सभ नाहपर चैढ़ रहल अछि, किछु गोटे चढ़ेक प्रयासमे अछि। कट टू। देखा पड़ैत अछि- एक तरफ तेजीसँ साइकिलपर चढ़ल विक्रम आबि रहल अछि आ दोसर दिससँ बरसा दौगैत आबि रहल अछि। कट टू। (नाह खुगैले तैयार अछि। तखैने बरसा पहुँच जाइत अछि। कैएक स्त्री-पुरुख एके संग कहैत अछि।) स्त्री-पुरुख- हौ नवरिया, कनी रूकि जाहक। स्त्री- हाथ बढ़ाउ दाय। खैंच कऽ चढ़ा लइ छी। बरसा- कोनो बात नै हम अपने चैढ़ जाएब। (कहैत नाहपर चैढ़ जाइत अछि।) (तखैने विक्रम साइकिलक घण्टी बजबैत आ हल्ला करैत नाह लग पहुँच जाइत अछि। साइकिलक ब्रेक लगबैत फानि कऽ उतरैत अछि।) विक्रम- हे रौ भाय। हमरो चढ़ा ले। आइ अहुना हमरा लेट भऽ गेल छौ। (साइकिलकेँ नाहपर लादैत अछि। आ चैढ़ जाइत अछि। नाह खुगि जाइत अछि।) कट टू। (देखा पड़ैत अछि जे विक्रमकेँ पैरसँ बरसाक पएर चिपा रहल अछि। बरसा पएर खिंचैक कोशिश कऽ रहल अछि। ताबे विक्रमक नजैर निच्चाँ पड़ैत अछि। ओ चट दनि अपन पएर हटा लैत अछि।) विक्रम- ओह...। हड़बड़ीमे पएर पड़ि गेल। चिपा गेल की? धकम-धुक्कीमे एना भऽ जाइ छै। (बरसा किछो नै बजैत अछि।) बरसा- (टाँग दिस तकैत) एँह...। (विक्रम ओकरा दिस देखैत अछि। बरसा नजैर झुका लैत अछि। विक्रम टकटकी लगा कऽ ओकरा दिस देखते रहि जाइत अछि।) (फ्लैश बैक- दुनू सपनामे प्रेम गीत गाबि रहल अछि।) (फ्लैश बैक समाप्त) (विक्रम बरसाक हाथ पकड़ने ठाढ़ अछि।) बरसा- (तामसमे) हाथ छोड़ू। दिमाग ठीक अछि की नै। विक्रम- गल्ती भऽ गेल। हे हम जानि कऽ एना नै केलौं। लेकिन अहाँ बड्ड तमसाह छी। (बरसा तामसमे ओकरा दिस आँखि गुड़ारि कऽ देखैत अछि। लोक सभ हल्ला-गुल्ल करैत नाहसँ उतैर रहल अछि। विक्रम ओकरा क्रोधसँ बँचबाक लेल आसमान दिस ताकए लगैत अछि।) विक्रम- समए केते सुन्दर छै। ई बादलक टुकड़ी सभ केते रेशमे दौगल जा रहल छै। लगै छै केकरोसँ भेँट करबाक लेल हड़बड़ीमे हुअए। कट टू। (नाहसँ सभ उतैर गेल छै। लोक सभ दू-चारि डेग आगू बढ़ि गेल छै। असगरे विक्रम नाहपर अछि।) नवरिया- हे यौ भाय। आसमानक तारा गिनै छी की? यौ अखैन दिन छै राति नै। झट दऽ नाहसँ उतरू। अखैन तारा नै भेटत। विक्रम- हँ...। हैया उतरै छी। लोको केते हड़बड़ीमे छै। (चट दऽ साइकिल उतारि आगू बढ़ैत अछि।) कट टू। सातम दृश्य- समए- दिन। स्थान- छोटका शहर। (मिष्टान आ चाहक दोकान) (दोकनदार एकटा बड़का कराहमे दूध ओंट रहल अछि। ओकरा बगलमे टेबुल-बेंच लगल अछि। ओइपर बैस कऽ दूटा मोंछबला चूड़ा-दही सुड़ैक रहल अछि। तखैने विक्रम सायकिलक घण्टी टुनटुनबैत पहुँचैत अछि।) दोकदार- यौ विक्रम भाय। हमरा तँ लगै छेलए जे आइ अहाँक दरशने नै हेतै। हे... हे... सम्हारि कऽ। (विक्रमक सायकिल खलिया दूधक वर्तनसँ टकरा जाइत अछि।) यौ भाय, बसन्तीकेँ लगाम नै अछि की? विक्रम- यौ, हमरा बसन्तीकेँ नजैर नै लगाउ। (सायकिलसँ हड़बड़ा कऽ विक्रम उतरैत अछि। दूध नापि कऽ कराहमे दैत अछि। मोंछबला तेजीसँ दही सुड़ैक रहल अछि।) आइ जँ दूध नै आनितौं तँ चाहक दोकान केना चलैत? जँ दोसरासँ दूध लैतौं तँ हमर रोजगार मारल जाइत। दोकानदार- हँ से तँ ठीके। विक्रम- खेत नै उपजैत अछि तँ ई दूधक रोजगार पैदा केलौं। तहूमे अपने टाँगमे कुड़हैर मारि लेब। (सायकिल आगू बढ़बैत अछि।) कट टू। आठम दृश्य- समए- दिन। स्थान- पोस्ट आँफिस। (विक्रम पोस्ट आँफिसक काउन्टरपर लेटर दऽ रहल अछि। आँफिसक किरानी स्प्ीडपोस्टक मोहर लगा कऽ रसीद विक्रमकेँ हाथमे दैत अछि।) कट टू। स्थान- पोस्ट ऑफिसक बाहरी भाग समए- दिन (एक दिससँ लेटरवाँक्समे लेटर गिरा कऽ बरसा निकलैत अछि। दोसर दिससँ रसीदकेँ देखैत विक्रम अबैत अछि। दुनू एक-दोसरासँ टकरा जाइत अछि। बरसाकेँ हाथसँ पुस्तक गिर पड़ैत अछि। विक्रम पुस्तक उठेबैले झुकैत अछि। ओकरासँ पहिने तमसाइत बरसा पुस्तक उठा कऽ चलि जाइत अछि। विक्रम- (ऊपर देखैत) हे भगवान एकरासँ रक्षा करू। कट टू। नअम दृश्य- समए- राति। स्थान- विक्रमक घर। (घरमे लालटेनक मद्धिम इजोत। विक्रम चद्दैर ओढ़ने बारम्बार कर फेर रहल अछि। ओकरा सपनामे बारम्बार बरसा चलि अबैत अछि। जइ कारणे ओकरा निन्न नै होइत अछि। लालटेनक इजोतकेँ कम करैत अछि आ चद्दैर तानि सुतैक परियास करैत अछि।) कट टू। (फलैश बैक- बरसा आ विक्रम सपनामे प्रेम-गीत गाबि रहल अछि।) (फ्लैश बैक समाप्त।) कट टू। (मालक घर दिससँ मवेशी खढ़क टाटमे धक्का मारि रहल अछि। स्वर सुनि विक्रम चट दनि उठैत अछि आ लालटेनक इजोत बढ़बैत अछि। टाटक भूरसँ हुलकी मारैत अछि। खुगल बड़द देखा पड़ैत अछि। फेर लालटेनक इजोत कम करि दैत अछि। अन्हार ससैर कऽ लगमे चलि अबैत अछि।) कट टू। दसम दृश्य- समए- भोर। स्थान- नदीक किनार। (दूरमे मंदिर आ मस्जिद देखा पड़ैत अछि। मंदिरक घण्टाक स्वर। मुर्गाक अबाज। गाए, बकरी, बड़द हाँकने जाइत लोक सभ। सायकिलपर चढ़ल विक्रम जा रहल अछि।) कट टू। समए- दिन। स्थान- नदीक किनार। (विक्रम नदीक किनारपर बैसल बरसाक प्रतीक्षा कऽ रहल अछि। नाह ऐपार-सँ-ओइपार अबैत अछि, जाइत अछि। किन्तु बरसा नै अबैत अछि। मिलैले विक्रम छटपटा रहल अछि।) डिजॉल्व। कट टू। एगारहम दृश्य- समए- दिन। स्थान- सुइदचनक घर। (सुइदचन आ ओकर मुंशी कुरसी-टेबुल लगा कऽ बैसल अछि। सुइदचन किछु सोचि रहल अछि, ओकरा बगलमे मुंशीजी बही-खाता उनटा-पुनटा रहल अछि।) मुंशी- मालिक! अहाँ श्याम बाबूकेँ किए नै कहै छिऐ। ओकरापर तेतेक सुइद बढ़ि गेलै जे सभटा खेत लिखि देत तैयो नै सधतै। सुइदचन- हमहूँ तँ सहए सोचि रहल छी। मुंशी- गामक धिया-पुताकेँ टीसन पढ़बै छै। एनए खेती नै उपजै छै। की हेतै। सुनै छी जे बेटीकेँ पढ़ा रहल छै। आमदनी अठन्नी आ खरचा रूपैआ। सुइदचन- बस नै वएह बेबस हेतै। हम नै तँ हमर बेटा बेबस कऽ देतै। करजा सधबैमे देरी हेतै तब ने खेत-पथार आ गहना-जेवर देइले बेबस हेतै। मुंशी- जँ अगिला सालक फसल नीक हेतै तँ बेचि कऽ चुकता कऽ देत। तब? सुइदचन- समैपर खाद-पानि भेटबे नै करतै तँ उपजा नीक केना कऽ हेतै। हमर जाल केतेक दूर धरि पसरल छै। अहाँ तँ बुझिते छी। बैंको समैपर टका नै देतै। (दुनूकेँ आँखि मिलैत अछि आ दुनू हँसए लगैत अछि।) कट टू। बारहम दृश्य- समए- दिन। स्थान- नदीक कछेर। (विक्रम ओतए प्रतीक्षा करैत रहैत अछि। जेतए बरसासँ मिलबाक संभावना रहैत अछि। ऐ क्रममे आइ सुनहट बाधमे ठाढ़ अछि। तखैने बरसाकेँ चिचियाइत सुनैत अछि। विक्रम दौग कऽ ओतए पहुँचैत अछि तँ देखैए जे तीन-चारिटा बदमाश बरसाकेँ घिसियबैत नेने जा रहल अछि। बरसा ओकरा सभसँ छुटबाक परियास कऽ रहल अछि। विक्रम ओइ दृश्यकेँ देखिते चिचिया लगैत अछि।) विक्रम- हे रौ, ओकरा छोड़ि देबही की देखबीही। बदमाश- ई केतएसँ आबि गेलौ रौ। मार सारकेँ। (बदमाश आ विक्रमक बीच झगड़ा शुरू भऽ जाइत अछि। हल्ला-गुल्ला सुनि खेतमे काज करैत जन-मजूर सभ हँसुआ आ लाठी लऽ कऽ दौगैत अछि। लोकक संख्या देखि कऽ बदमाश सभ भागि जाइत अछि। विक्रमक संगे बरसा घर दिस विदा भऽ जाइत अछि।) कट टू। तेहरहम दृश्य- समए- दिन। स्थान- विक्रमक घर। (डेढ़ियापर ठाढ़ भऽ कऽ टहलू हल्ला करैत अछि।) टहलू- (चकोना होइत) केकरो नै देखै छिऐ। अँगनामे कियो छी कि नै यौ? विक्रमक माए- (अँगनासँ हुलकी दैत) टहलू बौआ छी। अँगना चलि आउ। बहुत दिनक बाद देखलौं। टहलू- हँ, हम तँ टहलैते रहै छी। से आइ टहैलते काल बड्ड अजगुत देखलौं। विक्रमक माए- की देखलिऐ? टहलू- देखलौं, अहाँक बेटा गुण्डा–बदमाश सभसँ लड़ैत छल। सेहो एकटा लड़की लेल। विक्रमक माए- (आश्चर्यसँ) आँए...! टहलू- झूठ छिऐ की साँच। अपना बेटेसँ पूछि लेबै। हम जाइ छी। (विदा होइत अछि।) कट टू। पनरहम दृश्य- समए- दिन। स्थान- विक्रमक घर। (विक्रमक माए अँगना बहारि रहल अछि। विक्रम अँगना पहुँचिते माएसँ कहैत अछि।) विक्रम- आइ कनी बेसी देरी भऽ गेलौ माए। विक्रमक माए- राह-बाटमे गुण्डा-अवारासँ झगड़ा करबीही तँ देरी लगतौ ने। खाइक लेल अन्नक जोगाड़ नै छौ। जिनगी केना सुधरतौ तइले सोचबें आकि हीरो बनल घुमै छेँ। विक्रम- हमरो गप्प सुनबीही तब ने माए। विक्रमक माए- सुनबै की। उ सभ बड़का खुनियाँ छिऐ। ओकरासँ झगड़बें तँ जिनगी बेरवाद कऽ देतौ। केते गोटेकेँ मारि कऽ धारमे भँसा देने छै। विक्रम- माए, तोहीं तँ कहने रही जे केकरोपर अतियाचार होइत रहै तँ चुप नै रहबाक चाही। एकटा लड़कीकेँ संगे उ सभ जबरदस्ती करै छेलै तँ हम चुप भऽ कऽ देखैत रहितौं। से तोरा नीक लगितौ? (विक्रमक माए सोचमे डुमि जाइत अछि।) विक्रमक माए- नीक तँ नै लगितए। मुदा ओ सभ पैसाबला लोक छै। पुलिस आ कानून ओकरा मुट्ठीमे छै। ओकरासँ के लड़तै? विक्रम- हम लड़बै माए हम। हम अपने बनबै पुलिसबला। सभकेँ सोझ कऽ देबै। रस्तापर लबैले चाहे जे करए पड़ए। कट टू। सोलहम दृश्य-– समए- दिन। स्थान- सुइदचनक घर। सुइदचन- मुंशीजी, सुनै छी, किरपलबाक बेटा कहै छल जे हम करजा आपस नै करबै। मुंशी- उ कहै छै जे हमरापर बेसी सुइद जोड़ि देने छी। सुइदचन- तेकर मतलब, हमरा बेइमान बनबए चाहै छै। मुंशी- एना करतै तँ देखा-देखी समाजक आनो लोक...। सुइदचन- केकरा समाजमे हिम्मत छै जे हमरासँ टकरा जाएत। हरियाकेँ कहि दियौ किरपलबा बेटाकेँ चारि सटका लगा देतै। ओकर लबरपनी बन्न भऽ जेतै। आ नै सुधरतै तँ राफ-साफ। (हाथसँ इशारा करैत अछि।) कट टू। सतरहम दृश्य- समए- दिन। स्थान- श्यामबाबूक घर। (बरसा चुप्पी साधने बैसल अछि। श्यामबाबू गहींर नजैरसँ बेटी दिस देखि रहल अछि।) श्यामबाबू- बरसा, तोरा किछो होइ छौ, आकि कोइ किछु कहलकौ? (बरसा किछु ने बजैत अछि।) श्यामबाबू- तोहर माए तँ बचपनेमे मरि गेलौ। केकरा कहबीही। किछु बात छै तँ हमरे कहए पड़तौ। (बरसाक आँखिसँ दहो-बहो नोर खसए लगैत अछि।) श्यामबाबू- की भेलौ तोरा? बजबीही तब ने। (बरसा आँखि पोछैत अछि।) बरसा- पढ़ि कऽ अबैकाल बाधमे गुण्डा–छौड़ा सभ घेर नेने छल। घिसिया कऽ नेने जाइत छल। खेतसँ जन सभ आ ओ दौगल, नै तँ...। (फेर कानए लगैत अछि।) श्यामबाबू- तब तँ केते गोटेक बुझने हेतै। चिन्हने हेतै। आइ हम ओकरा बापसँ भेँट करा देबै। (तमसा कऽ चलि पड़ैत अछि।) बरसा- (पाछूसँ हल्ला करैत अछि।) बाबूजीऽऽऽ कट टू। अठारहम दृश्य-– समए- दिन। स्थान- गामक डगर। (श्यामबाबू जा रहल अछि। आगूसँ अबैत सुइदचन ओकरा टोकै छै।) सुइदचन- यौ श्यामबाबू, उदास छी। की बात? किछु भेल की? श्यामबाबू- की कहब। आ केना कहब? सुइदचन- हम तँ अहाँक हित छी। हमरा लग नै बाजब तँ फेर...। श्यामबाबू- हमर बेटी पढ़ि कऽ अबैत रहए से बाटमे...। (श्यामबाबू नजदीक आबि कानमे सुइदचनकेँ सभटा गप कहैत अछि।) सुइदचन- ई गप दोसरठाम नै बजब। ऐसँ अहींक इज्जत उघार हएत। बुझलौं किने। श्यामबाबू- तब एकर निदान केना हेतै? सुइदचन- धुर। तेकर चिन्ता नै करू। अइले तँ हमर बेटा हरिया काफी छै। फोनसँ सभ गप कहि दइ छिऐ। अहाँ जाउ। (सुइदचन फोनसँ गप करए लगैत अछि। श्यामबाबू चलि पड़ैत अछि।) कट टू। उन्नैसम दृश्य- समए- दिन। स्थान- नदीक किनार। (घोड़सवार तेजीसँ आबि रहल अछि। ओकर फोनक घण्टी बजैत अछि। एकाएक घोड़ा रोकैक परियास करैत अछि। गतिक कारणे घोड़ा नचैत अँइठ कऽ ठाढ़ भऽ जाइत अछि। फोनपर गप करैत-करैत ओ फ्लैश बैकमे चलि जाइत अछि।) कट टू। दृश्य परिवर्तन फ्लैश बैक स्थान- सड़क समए दिन। (श्यामबाबू अपना बेटीक संगे शहरसँ आपस आबि रहल अछि। बजारसँ कीनल वस्तु सभ हाथमे लटकौने अछि। आगूमे हरियाकेँ देखि ठाढ़ होइत अछि। हरियो ठाढ़ भऽ जाइत अछि।) श्यामबाबू- की यौ बौआ, अहाँक बाबूजी कुशल छैथ ने? हरिया- हँ-हँ ठीके छैथ। (हरियाक नजैर बरसापर पड़ैत अछि। बरसा नजैर झुका कऽ आगू बढ़ि जाइत अछि।) श्यामबाबू- अच्छा-अच्छा, परसू अबै छी तँ भेँट करबैन। (कहैत चलि पड़ैत अछि।) कट टू। फ्लैश बैक समाप्त। दृश्य परिवर्तन। हरिया- चिन्ह गेलौं, वएह लड़की छी। (हरिया फोन जीबीमे रखैत अछि। सिरकेँ झटकैत अछि आ तेजीसँ घोड़ाकेँ आगू बढ़ा दैत अछि।) कट टू। बीसम दृश्य- समए- राति। स्थान- निर्जन। (हरिया अपना संगी बदमाश लग पहुँचैत अछि। बदमाश सभ आपसमे फुसराहैट करए लगैत अछि।) हरिया- हे रौ, तूँ सभ आइ कोनो लड़कीकेँ घेरने रही। (सभ चुप्पीुप्पी , तोरा सभ आइ कोनो लड़की 000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000 साधि लैत अछि।) बजै छी किए नै रौ। हमर तामस नै देखने छी। साँच बज नै तँ कान-कपार ढाहि देबौ। बदमाश एक- हजूर, अहाँ तामसकेँ रोकू। अहाँ बिनु पुछने ई गलती भऽ गेल। हरिया- हँ-हँ बाज ने। की गलती? (बदमाश एक लगमे आबि कानमे सभटा बात कहैत अछि।) बदमाश दू- हजूर, आगूक लेल आदेश दियौ। हरिया- ओइ लड़कीक संग दोबारा गलत बेवहार नै हेबाक चाही। ओ लड़की अपने जातिक अछि। ओकरा बापक संगे हमरा पिताजीक पुरान सम्बन्ध छै। मुड़ी डोलबैत) हँ एकटा बातक पता लगा जे ओइ लड़कीक संगे लड़का के छेलै। (हरिया तेजीसँ प्रस्थान करैत अछि।) कट टू। एकैसम दृश्य- समए- दिन। स्थान- श्यामबाबूक घर। (श्यामबाबू अपना दुआरिपर बैसल छैथ। हरिया पहुँचैत अछि।) श्यमाबाबू- आऊ बौआ, कहू महाजनक समाचार? ठीक छैथ ने? हरिया- हँ-हँ ठीके छैथ। श्यामबाबू- बरसा बेटीऽऽऽ। बरसा- (भीतरसँ बजैत अछि।) हँ, बाबूजी। श्यामबाबू- चाह नेने अबिहेँ। हरिया- हमरा बाबूजी भेजने छैथ। श्यामबाबू- हँ-हँ कहू की बात? हरिया- वएह, करजाक सम्बन्धमे। अहाँसँ भेँट करए चाहै छैथ। श्यामबाबू- देखियौ ने, धिया-पुता सभकेँ पढ़बै छी। ओहो सभ रूपैआ नै देने अछि। सभटा असूल कऽ नेने अबै छी। आ भेँटो हेतै। (श्यामबाबू आँगन दिस जाइ छैथ ताबत बरसा चाह नेने आबि जाइत अछि।) हरिया- एकटक बरसा दिस ताकि रहल अछि। बरसा नजैर झुकौने चाह हरिया दिस बढ़बैत अछि। हरिया चाहक कप तेना कऽ पकड़ैत अछि जे चाह हरा जाइत अछि। तखैने श्यामबाबू पुन: आपस आबि जाइ छैथ। बरसा तमसा कऽ आँगन चलि जाइत अछि।) कट टू। बाइसम दृश्य- समए- दिन। स्थान- निर्जन बाट। (बरसा लोकक नजैरसँ नुकाइत जा रहल अछि। हरियाकेँ नजैर ओकरापर चल जाइत अछि। किन्तु बरसाकेँ ऐ बातक पता नै चलैत अछि। हरिया चोरा कऽ ओकरा पाछू-पाछू जा रहल अछि।) कट टू। दृश्य परिवर्तन- समए- साँझ। स्थान- बाध। (बरसाकेँ ओतए पहुँचिते विक्रम खेतसँ निकलैत अछि।) विक्रम- अहाँ, बहुत काल धरि प्रतिक्षा करबौलौं। बरसा- की करबै। लोक तँ तकिते रहै छै। कहुना नुकाइत-छिपाइत एलौं। विक्रम- ऐठाम रस्ता छै। चलू नदीक कछेरपर। निधोख भऽ कऽ गप करब। (दुनू गोटे चलि पड़ैत अछि।) कट टू। दृश्य परिवर्तन- दुनू एक-दोसराक हाथ पकड़ने खुशीक गीत गाबि रहल अछि। झोंझमे छिपल हरिया देखि रहल अछि।) कट टू। तइसम दृश्य- समए- साँझ। स्थान- निर्जन। (हरियाक मुँहपर घृणाक भाव अछि। दारूक बोतल मुँहसँ लगबैत अछि। फेर जोरसँ फेक दैत अछि।) हरिया- (क्रोधमे) सार, हीरोपनी करैत अछि। हमरा सोझहामे। हमरा चिन्हने नै अछि। जातिक लड़कीक संगे...। आइए तोरा मुइलहा बापसँ भेँट करा देबौ। (बोतलकेँ टाँगसँ ठोकर मारैत अछि आ तेजीसँ घोड़ापर चैढ़ चलि दैत अछि।) कट टू। चौबीसम दृश्य- समए- साँझ। स्थान- विक्रमक घर। (विक्रमक माए घर-अँगनाक काज कऽ रहल अछि। हरिया अपना तीन-चारि साथीक संगे पहुँचैत अछि। घोड़सवार सभकेँ देखिते बुढ़िया भ्यभीत भऽ जाइत अछि।) हरिया- गे बुढ़ियाऽऽऽऽ। तोहर बेटा बिकरमा कहाँ छौ? विक्रमक माए- हौ बाबू। हमरा नै बूझल अछि। की भेलै से? हरिया- साँपकेँ पोसने छी आ पुछै छी की भेलै। निकाल अँगनासँ आइ हड्डी तोड़ि देबौ सारकेँ। विक्रमक माए- यौ बाबू मुँह सम्हारि कऽ गप करू हमर बेटा पढ़ै छै। कोनो लुच्चा-लोफर नै अछि। हरिया- लोफर नै छौ तँ छौड़ीक संगे रसलीला किए केने घुरै छौ। विक्रमक माए- हमरा बेटापर झूठ-मूठक दोख नै लगाउ। नै तँ ठीक नै हएत। हरिया- (कोड़ा देखबैत) देखै छीही कोड़ा। हरामजादी पीठ परहक खाल खींच लेबौ। नै तँ बेटाकेँ सम्हारि ले। (हरियाक एकटा संगी अँगनासँ ताकि कऽ बहार निकलैत अछि।) संगी- अँगनामे नै छै बिकरमा। हरिया- सुनि ले बुढ़िया। बेटा जँ रस्तापर नै एतौ तँ काटि कऽ धारमे भँसा देबौ। (घोड़ापर चैढ़ सभ तीव्र गतिसँ चलि पड़ैत अछि।) पचीसम दृश्य- स्थान- सुइदचनक घर। (हरिया शराब पी रहल अछि। सुइदचन आ मुंशी जीकेँ अबैत देखि बोतल फेंक कऽ चलि पड़ैए।) सुइदचन- मुंशीजी, हरिया किएक तमसाएल छै? गाँजाक बिजनीशमे घाटा लगलै की? मुंशी- नै बुझलिऐ मालिक। श्यामबाबूक बेटी छै ने बरसा। ओकरा अपन हरीबाबू पसिन कऽ लेलकै। ओकरेसँ बिआह करबाक मन बना लेने छै। सुइदचन- वाह। काबिल अछि। असलमे बेटा तँ हमरे छिऐ। पैघ हाथ मारलक। सोचै छेलौं ओकर जमीन करजा तरमे लिखेबै। आब तँ दहेजेमे सभटा आबि जेतै। मुंशी- से तँ श्यामबाबूकेँ सन्तानक नामपर वएह बेटी मात्र छै। किन्तु...। सुइदचन- दिक्कत की छै जे किन्तु लगौने छी? मुंशी- मालिक! एकटा पढ़ुआ छौड़ा छै बिकरमा। सुनै छी जे ओइ लड़कीसँ मेल-जोल छै। देरी करबै तँ हाथसँ सब कुछौ निकैल जाएत। सुइदचन- मुंशीजी। हमरा जालसँ निकलनाइ एते असान छै की। चलू अखने देखै छिऐ। (दुनू चलि पड़ैत अछि।) कट टू। छबीसम दृश्य- स्थान- श्यामबाबूक घर। समए- दिन। (श्यामबाबू, सुइदचन आ मुंशीक संगे बैसल अछि।) सुइदचन- अहीं कहू श्यामजी, जे ओइ दिनसँ अहाँ बेटी दिस कोनो गुण्डा-बदमाश तकबो करैए? श्यामबाबू- से तँ अहीं सबहक छत्र-छायामे ने हमरा सभ सुरक्षित छी। सुइदचन- धियानसँ सुनि लिअ। अहां बेटीकेँ हम अपन पुतोहु मानि लेने छी। आ हम बुझिते छी जे अहाँ हमरा गप्पकेँ सहर्ष स्वीकार करबे करब। श्यामबाबू- कनी बेटीसँ...। (सुइदचन चुप रहबाक इशारा करैत अछि।) सुइदचन- अहाँ चुप रहू। अहांपर करजो ततँ बहुत भऽ गेल छै। सभटा खेत बिका जाएत, तैयो नै सठत। मुंशी- मालिक अहाँ कथी बजै छी। आब तँ हिनक खेत-पथार बेटीए-जमाएक हेतै। सुइदचन- से तँ हम बुझिते छी। हम तँ ई कहैले एलौं, जे कोइ हमरा पुतोहु दिस अधला नजैरसँ तकतै तँ हम ओकर आँखि फोड़ि देबै। बुझलौं। चलू मुंशीजी। (सुइदचन, मुंशी चलि पड़ैत अछि।) कट टू। सत्ताइसम दृश्य- समए- दिन। स्थान- श्यामबाबूक घर। (श्यामबाबू बैसल अछि। बरसा ठाढ़ अछि।) श्यामबाबू- (तमसाइत) ओइ टोलक विक्रमक संग एतेक मेल-जोल किएक रखने छी? तोरा पता छौ- लोक सभ केहेन-केहेन अफवाह उड़ा रहल छै। बरसा- (मुड़ी गोंतने) बाबूजी ओ नीक लोक छै। ओइ दिन ओकरे कारणे हमर इज्जत आ जान बँचल। श्यामबाबू- तूँ भ्रममे छेँ। सभ सुइदचन बाबूक कृपा छेलै। बरसा- तखैन तँ वएह मारियो खा कऽ हमरा बँचौलक। समैपर आन लोक सोझहा कहाँ आएल। श्यामबाबू- मुँह लगल नै बाज। ऊ लड़िका हमरा जातियो-बेरादरीक तँ नै छी। आ एने तोरा बिआहक सभ गप्प तँइ-तसफिया भऽ गेल छौ। (बरसा तमसा कऽ जा रहल अछि।) सुनि ले, आब तूँ घर-अँगनासँ बाहर नै निकैल सकै छेँ। (झटैक कऽ विदा भऽ जाइए बरसा।) कट टू। अट्ठाइसम दृश्य- स्थान- विक्रमक घर। समए- दिन। (विक्रमक माए घाड़ खसौने बैसल अछि। विक्रम प्रसन्न मुद्रामे पहुँचैत अछि।) विक्रम- माए, तूँ कथीक चिन्तामे डुमल छेँ? विक्रमक माए- हमर चिन्ता बुझै नै छीही। सोचै छी जे तोरा नोकरी भेट जाउ तँ हमरो जिनगी सुफल भऽ जाएत। विक्रम- आइसँ तोहर चिन्ता खतम। (लेटर देखबैत) लेटर भेटि गेल छै। आइ सौझुका गाड़ीसँ हम जा रहल छियौ। सभ किछो सैंति कऽ झोरामे दऽ दही। विक्रमम माए- अँए...। ठीके...। (अचरजक भाव) कट टू। उनतीसम दृश्य- समए- साँझ। स्थान- सड़क। (विक्रम टीसन दिस बढ़ल जा रहल अछि। विचारमे डुमल अछि। आगूमे रघुआकेँ देखि बजैत अछि।) विक्रम- (स्वत:) बरसाकेँ सभ गप्पक जानकारी दऽ देबाक चाही। (रघुआकेँ रोकैत अछि) यौ रघुजी, कनी रूकि जाउ। एगो हमर चिट्ठी नेने जाउ। रघुआ- (रूकि कऽ) की यौ दरोगाजी, बनियेँ गलिऐ अहाँ दरोगा। अच्छा जाउ, जाउ आ लाउ केकरा देबाक छै चिट्ठी? विक्रम- हे लिअ। कोइ बुझहए नै। चुपेचाप बरसाकेँ हाथमे दऽ देबै। रघुआ- अहाँ निचेन रहू। कोइ नै बुझतै। मुदा घूस दिअ पड़त। (दुनू हँसैत अछि।) कट टू। तीसम दृश्य- समए- साँझ। स्थान- श्यामबाबूक घर। (आस-पड़ोसक औरतिया सभ अँगनामे जमा अछि। बिआहसँ पूर्वक विध-बेवहार भऽ रहल अछि। पुरुख सभ बरियातीक प्रतिक्षा कऽ रहल अछि। रघुआ कोनटा लगसँ बरसाकेँ इशारा करैत अछि। बरसाकेँ लगमे पहुँचिते चिट्ठी ओकरा हाथमे पकड़ा दैत अछि।) कट टू। एकतीसम दृश्य- (विक्रम ट्रेनपर चढ़ैत अछि। आ गाड़ी खुगि जाइत अछि। चलैत गाड़ीक पाछूमे बरसा दौग रहल अछि। बरसाक पाछूसँ एकटा घोड़ सवार रेबाड़ने जा रहल अछि।) कट टू। मध्यान्तर बत्तीसम दृश्य- समए- राति। स्थान- श्यामबाबूक घर। (श्यामबाबू उदास भऽ बैसल छैथ। घरक समान सभ अस्त-बेस्त अछि। एकटा घोड़ सवार अबैत अछि। श्यामबाबू मुड़ी उठा कऽ ओकरा दिस तकै छैथ।) श्यामबाबू- हमरा बेटीक कोनो पता लगल? घोड़ सवार- टीशनक चारूभर आ दूर-दूर धरि तकलौं, पता नै, गाड़ीपर चैढ़ गेल आकि केनौ नुका रहल, अन्हारमे। मुदा चिन्ता नै करू। हमर संगी सभ ताकिये रहल अछि। जेतै केतए।) (घोड़ सवार चलि दैत अछि।) कट टू। तैंतीसम दृश्य- समए- भोर। स्थान- श्यामबाबूक घर। (श्यामबाबू स्नानक उपरान्त सुरूजकेँ नमस्कार करै छैथ।) श्यामबाबू- (सुरूज दिस तकैत) हे सुरूज महराज! पता नै, दोख हमर अछि आकि हमरा बेटीक। केतए हेतै आ केहेन हालमे हेतै। हम ओकर बाप छिऐ। चिन्ता तँ हमरे हेतै। समाज तँ हँसि रहल छै। आइ ओकर माए रहितै तँ ई दशा नै होइतै। पता नै, बापकेँ जे करबाक चाही से हम करि रहल छी आकि नै। हे सुरूज महराज, ओकर रक्षा करब। ओह...। (आँखिमे नोर भरि जाइ छै।) कट टू। चौंतीसम दृश्य- समए- दिन। स्थान- सुइदचनक घर। (सुइदचन आ मुंशीजी बैसल अछि।) मुंशीजी- मालिक! केतेक दिन बीति गेल। मुदा अखनी तक ुंशी- ँ त) घरढुक्काकेँ बनै 000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000000श्यामक बेटीक कोनो पता नै लगल। लगै छल- जे छुच्छे फैदा हएत लेकिन...। सुइदचन- लेकिन की लगबै छी। सुइदखोरकेँ कहियो घाटा लगै छै। हमर बेटा कच्चा खेलाड़ी नै छै। लड़की केतौ नुकाएल हेतै ओ खोजि कऽ निकालि लेतै। फेर हम जे चाहबै सएह हेतै। कट टू। पैंतीसम दृश्य- समए- दिन। (हरिया अपना कोठलीमे दारू पीब रहल अछि। बोतल खाली कऽ झुमैत-झामैत बाहर निकलैत अछि। आ घोड़ापर चैढ़ चलि दैत अछि।) कट टू। छत्तीसम दृश्य- स्थान- बाधक निर्जन भाग। समए- दिन। (हरिया घोड़ापर सँ उतरैत अछि। कातक गाछ तरमे ओकर प्रेमिका फुलिया ठाढ़ अछि। दुनूक बीच प्रेमसँ भीजल गप-सप्प् होइत अछि, दुनूमे प्रेमालाप।) फुलिया- एकटा गप्प तँ अहाँकेँ नै कहलौं। हरिया- कोन गप्प? फुलिया- हम तँ अहाँ बच्चाक माए बनैवाली छी। हरिया- धुर, ऐ झंझटकेँ हटाउ। खसा लिअ। फुलिया- एना कहीं होइ छै। अहाँ बाप बनैबला छी। (पेट दिस इशारा करैत) ई अहींक बच्चा छी। हरिया- एनामे तँ हम केतेक धिया-पुताक बाप बनि जेबै, आ केतेक लड़कीक पति। फुलिया- तेकर मतलब...। हरिया- (क्रोधमे) मतलब किछो नै। गर्भपात करबा लिअ। खरच हम देबै। फुलिया- हम से नै करब। हरिया- (क्रोधमे) केतौ किछो बजबेँ वा हमरा लग एबही तँ परान खैंचि लेबौ। तोरा हमरा बीच सभ बात खतम। (घोडापर चैढ़ सक्रोध प्रस्थान।) कट टू। सैंतीसम दृश्य-– समए- दिन। स्थान- फुलियाक घर। (फुलियाक माए चनकी अपना धिया-पुतका खाएक परैस रहली अछि। धिया-पुता भात मंगैत अछि।) चनकी- (करछुल थारीमे पटकैत) ले, थारियो-बरतन खा ले। (तखैने फुलियाक बाप डोलना निशाँमे झुमैत पहुँचैत अछि।) डोलना- फुलियाक माएऽऽऽ। एको लवनीक दाम लाबह। कंठ सुखा गेल। हे तोरा नीक नै हेतह। एको चुरूक दाम निकालह। (चनकी पैसा राखएबला गुल्लककेँ फोड़ैत अछि, आ सभटा पैसा तामसे छिड़िया दैत अछि।) चनकी- ले सभटा पैसा ले। नै होइ छौ तँ धियो-पुताकेँ रकत पी ले। (तामसे चनकी धिया-पुताकेँ थोपराबए लगैत अछि। तखैने फुलिया पहुँचैए आ कोनमे बैस कऽ कानए लगैए।) चनकी- तोरा की भेलौ गइ? फुलिया- माए गइ माए, तोहर इज्जत...। (कानए लगैए) चनकी- हमरा इज्जतकेँ की भेलै गइ? फुलिया- सुइदखोरबाक बेटा इज्जत खराप कऽ देलकौ गइ। हमरा पेटमे ओकर...। (कानए लगैत अछि।) चनकी- हमर इज्जत खराप करत अनजनुआ जनमल ओकरा तँ हम...। फुलिया- कहने रहै जे बिआह करबो, तोरा संगे। चनकी- ओइ कोंढ़िफुट्टाकेँ बिआह करए पड़तै। चल देखै छिऐ केना नै बिआह करतै ऊ। नै करतै तँ सौंसे समाजमे ढोल पीट देबै। कारिख-चुन लगा देबै। घिना कऽ रखि देबै- आइ। सभ गोरे चल। कहि दही सभकेँ। (एके संग सभ चलि दैत अछि।) कट टू। अरतीसम दृश्य- समए- दिन। स्थान- सुइदचनक घर। (सुइदचन आ मुंशी दलानपर बैसल अछि। एक हेंज लोक अबैत अछि। ओइमे फुलिया ओकर माए-बाप आ ओइ टोलक आनो-आन लोक सभ अछि। सभ तामसे गारि-बात दऽ रहल अछि, मुंशी पुछै छै।) मुंशी- की बात छिऐ? अहाँ सभ केकरा गरिया रहल छिऐ? सुइदचन- सार सभ निशाँ पीने अछि। बताह भऽ गेल छै सभटा। पता छौ जे केकरा दुआर पर छी। मुंशीजी- हे रौ भाग जो तोरा सभ। तमसेतौ तँ मालिक गोली मारि देतौ। (फुलियाक माए चनकी करिया खापैड़ नेने आगू अबैत अछि।) चनकी- देखै छी खापड़ि। माएक दूध पीने छी तँ सामनेमे चलि आ। आइ चानि ठोकि देबौ। सुइदचन- रे सोर पार तँ खलीफाकेँ। ला लाठी, चुतर तोड़ि देबै। (लाठी हाथमे लेने आगू बढ़ैत अछि। चनकी खापैड़ फेकैत अछि। सुइदचनक कपारपर खापैड़ लगैत अछि अछि फूटि जाइत अछि। कपार पकैड़ बैस जाइत अछि।) मुंशीजी- मालिक जान बँचाउ। सुइदचन- रे बहींचो, कोनेसँ बजर खसलौ रे। मुंशी- सुइदबला छी। चनकी- (गरजैत) घरढुक्काक बाप। असली बजर तँ आब गिरतौ। कहाँ छौ बेटा? करा बिआह। सुइदचन- बिआह? हमरासँ? मुंशीजी- मालिक! अहासँ नै। अहाँक बेटासँ बिआह करौत। (भीड़मे श्यामबाबू ठाढ़ भऽ कऽ सभ किछु देखि सुनि रहल अछि।) सुइदचन- की बात भेलै रौ? (एक गोटे आगू बढ़ि सभ गप्प सुइदचनक कानमे कहैत अछि। माथापर चोट मारैत श्यामबू प्रस्थान करैत अछि। किछु लोक हल्ला केनिहारकेँ शान्त कऽ रहल अछि।) कट टू। उनचालिसम दृश्य- स्थान- गामक चौक। समए- दिन। (श्यामबाबू साइकिलसँ उतरैत अछि।) श्यामबाबू- (पसेना पोछैत) हमहूँ तँ ओही जातिक छी। मुदा एतेक गिरल लोक...। सुइदखोर एहनो होइ छै। केहेन पाप केलौं हम। केना कटत ई पाप? (पश्चाताप करैत आगू बढ़ैत अछि।) कट टू। चालिसम दृश्य- समए- राति। स्थान- फुलियाक घर। (फुलियाक माए चनकी आ बाप डोलना धिया-पुताक संग सूतल अछि। किछो खट-खटाइत अछि। संगे बिलायक ‘म्याँउ म्याँउ’ सुनाइत अछि। चनकी धड़फड़ा कऽ उठैत अछि आ घर खोलि बहरा निकलैत अछथ्। ओसारपर ओकर बेटी फुलिया गरदैनमे जौड़ी बान्हि लटकल अछि। ओ मरि गेल अछि। फुलिया केंकहारि कटैत कानए लगैत अछि। आस-परोसक लोक सभ जमा भऽ जाइत अछि।) बेकती एक- की भेल छेलै जे फुलिया फाँसी लगा लेलकै। एकर मतलब तूँ गारि-बात देने रही? चनकी- (कनैत) नै हओ बाबू। सभटा बात सुइदखोरबा बेटाक कारणे भेलै। ऊ हरिया हमरा बेटीक परान लऽ लेलक। ओकरा हम नै छोड़बै। भोरे फुलिया-दरोगासँ पकड़ा देबै। बेकती एक- अच्छा चुप रह। विचार कर जे केना की करमेँ। (लोक सभ आपसी फुसराहैट शुरू कऽ दैत अछि।) कट टू। एकतालिसम दृश्य- समए- राति। स्थान- सुइदचनक घर। (सुइदचनक घरमे सूतल अछि। दुआरिकेँ कियो खट-खटबैत अछि।) सुइदचन- के छी यौ? मुंशी- हम छी मालिक। सुइदचन- एतेक रातिमे...। की बात छै? मुंशी- जुलुम भऽ गेलै मालिक। सुइदचन- की भेलै? जल्दी बाज ने। मुंशी- फुलिया फँसड़ी लगा कऽ मरि गेलै। ओकर माए-बाप सभटा दोख अपना हरी बाबूपर लगा रहल अछि। अड़ोसी-पड़ोसी सभ संग देने छै। सुइदचन- (हड़बड़ाइत उठैत अछि। अटैचीमे रूपैआ भरैत अछि।) चलू मुंशीजी। कोनो उपए तँ लगबए पड़तै। कट टू। बिआलिसम दृश्य- समए- दिन। स्थान- नदीक किनार। (घोड़ापर सवार भऽ हरिया जा रहल अछि।) हरिया- (स्वत:) ईहो जंजाल हटि गेल। ई छौड़िया काले छल। एकरा मरलासँ मन हल्लुक भऽ गेल। एनए केतेक दिनसँ बरखाकेँ ताकि रहल छी। केतौ भेटिये ने रहल अछि। मुदा जाएत केतए। (घोड़ाकेँ तेजीसँ दौगबैत अछि।) कट टू। तैतालिसम दृश्य- समए- दिन। स्थान- नदी। (नाह मँझधारमे चलि रहल अछि। नदीसँ सम्बन्धित संगीक चलि रहल अछि। नाहपर लोकक बीच श्याम बाबू बैसल अछि। उदास मुँह हाथमे झोरा टँगने हाटसँ आपस आबि रहल अछि।) कट टू। चौआलिसम दृश्य- समए- दिन। स्थान- सड़क। (मोटर साइकिलसँ सुइदचन आ मुंशी जा रहल अछि। माल-जालक झूण्ड आगूमे आबि जाइत अछि। साइकिल रोकि झूण्डकेँ हाँकैत अछि फेर मोटर साइकिल आगू बढ़बैत अछि।) कट टू। पैतालिसम दृश्य- समए- दिन। स्थान- श्यामबाबूक घर। (श्यामबाबू बैसल छैथ। मुंशीक संगे सुइदचन पहुँचैत अछि। श्यामबाबू सुइदचनकेँ सुआगत करैत बैसबैत अछि।) सुइदचन- दुख तँ हमरो अछि। मुदा की करबै, कोनो उपैयो तँ नै अछि। बचियाकेँ घरसँ निकलला केतेक दिन भऽ गेल। आखिर हमरो सभ तँ रिश्तेदारे छी। दुख तँ हेबे ने करतै। समाजक लोक तँ एहने ताकमे रहै छै। कटलाहापर नून छिटैले तैयार। केतेक गोटे तँ पुछबो केलक जे आब बिआहक गप्प केना की करबै। मुंशी- मालिक, एनए कर्जोबला टका हिनकापर दू-अढ़ाइ लाखक लगभग भऽ गेलै। श्यामबाबू- अँए, एतेक भऽ गेलै। (आश्चर्य भावे) सुइदचन- धुर। ओकर चिन्ता अहाँ नै करू। अहाँ तँ अपन लोक छी। आब देखियो ने, समाजमे एहनो लोक छै जेकरा समैपर मदतियो केलिऐ आ ओ बेइमान बना देलक। की मुंशीजी? मुंशी- हँ मालिक, लोक तँ सिरिफ लेनाइ जानै छै। चलू। (सुइदचन आ मुंशी विदा होइत अछि।) कट टू। छिआलिसम दृश्य- समए- दिन। (श्यामबाबू अपना बेटीकेँ गाम आ शहर सभ जगह, आ सभ रिश्तेदारक घर जा-जा ताकि रहल अछि। सम्बन्धित संगीक चलि रहल अछि। बरसा अपना मामीक घरमे नुकाएल अछि। श्यामबाबू ओतए पहुँचैत अछि तँ बरसाक मामी रखिया झूठ बाजि दैत अछि।) श्यामबाबू- बरसा ऐठाम आएल अछि? मामी- रखिया- हमरा भगिनीकेँ मारि-पीट कऽ भगा देलिऐ की? ओकरा ताकि कऽ लाउ नै तँ बूझि लिऔ...। बेदरदा कहीं कऽ...। (निराश भऽ श्यामबाबू आपस जा रहल अछि।) कट टू। सैतालिसम दृश्य- समए- भोर। स्थान- गाम। (बरसा अपना मामी रखियाक संगे मन्दिर जा रहल अछि।) रखिया- बरसा, कहीं ओ तोरा बिसैर तँ ने गेलौ? बरसा- नै मामी, एना नै भऽ सकै छै। रखिया- किए नै भऽ सकै छै? बरसा- हमरा ओकरापर पूरा बिसवास अछि। एनए देवी माय छथिन। रखिया- ठीके छै। चल मन्दिर। कट टू। अरतालिसम दृश्य- स्थान- मन्दिर। समए- भोर। (बरसा मामीक संग मन्दिरक सीढ़ी चैढ़ रहल अछि।) रखिया- बरसा, आब तोहर दुख हमरासँ देखल नै जाइत अछि। बरसा- की भेल मामी? रखिया- घरपर जा कऽ खोज-खबर लेबाक चाही। केतेक दिन भऽ गेलै। एतेक दिनसँ तूँ किरिया-सप्पत दऽ कऽ हमरा चुप रखने छेँ मुदा आब चुप नै रहबौ। तोरा बापक केहेन हालत भेल हेतौ। से पता नै। ओइ दिन झूठ बाजि घुमा देने रहिऐ। बरसा- नै मामी, किछु दिन आरो। सिरिफ किछु दिन...। रखिया- जेहेन तोरा उचित बुझाउ। (दुनू गोटे आँखि मूनि देवीक समाने नतमस्तक भऽ जाइत अछि। घोड़ाक टाप-टप-टप सुर सुनाइ पड़ैत अछि। पहिने बरसाक आँखि खुगैत अछि। घोड़ सवार देखा पड़ै छै। जे मन्दिर दिस बढ़ल आबि रहल अछि। बरसा अपना मामीकेँ हाथ पकैड़ घिंचैत अछि।) बरसा- मामी, एतएसँ आगू जल्दी। रखिया- किए। की बात छिऐ? बरसा- ओनए देखियो। भागू...। (ओंगरीसँ इशारा करैत अछि। दुनू गोटे मन्दिरक पछुआर दिस भागि जाइत अछि। किछु पल बाद घोड़ सवार पुजेगरीक लग पहुँचैत अछि।) घोड़ सवार- (कर्कश स्वरे) पुजेगरी हऽ। अखनी जे लड़की ऐठाम रहौ। से के छिऐ? केतए रहै छै? पुजेगरी- ओ शाइत...। घोड़ सवार- (डपटैत) ठीकसँ बता। नै तँ बूझिले। पुजेगरी- ओ मनदेव आ रखियाक भगिनी छिऐ। पुवारिकात घर छै। घोर सवार- (मुड़ी डोलबैत) अच्छा। बूझि गेलिऐ। (घोड़ सवार आपस चलि दैत अछि।) कट टू। उनचासम दृश्य- समए- दिन। स्थान- बरसाक मामा-घर। (घरसँ कनी दूर गाछ तर पंच सभ बैसल अछि। ओइमे सुइदचन, मुंशी आ श्यामबाबू अछि। संगे ओकरा गामक जाति-परजातिक किछु लोक अछि। बरसाक मामा पंचक बीच ठाढ़ अछि आ मामी किछु दूर हटि कऽ औरतिया सभ लग ठाढ़ अछि। श्याम बाबूक चेहरापर बेवसीक भाव अछि। सुइदचन अपना लठैतक संग ठाढ़ होइत अछि।) सुइदचन- हँ, पंच लोकैन सुनू। ई लड़की हमरा जातिक अछि आ हमरा गामक अछि। हमरा बेटासँ एकर बिआह होइबला छल। बिआहक राति ई भागि गेल। केतेक दिनसँ तकैत-तकैत अपसियाँत भऽ गेल छेलौं। खैर, भेटि गेल। एकर बाप हमरा संगे अछि। बिसवास नै होइत अछि तँ पूछि लिऔ। ई हमर होइबला पुतोहु अछि। लड़कीकेँ हमरा सबहक संग लगा दिअ। ऐठामसँ लऽ कऽ अपना गाम जाएब। (बरसाक माम मनदेव चटदैन ठाढ़ होइत अछि।) मनदेव- नै यौ, लड़की जाइले तैयार नै अछि। हम नै जाए देबै। मुंशी- लड़की अपना बाप संगे किए नै जेतै। अहाँ रेाकनिहार के? जखैन बापो तैयार छै। (श्यामबाबू मुड़ी गोंति लैत अछि।) मनदेव- ओकर बाप की बजत। ओ अहाँक करजा खेने अछि। हमहूँ तँ मामा छी। हमरो अधिकार अछि। पंच- अहीं बिआहक खरचा देबै? अहाँ बुते हएत बिआह करबौल? मनदेव- हँ, हम खरचा देबै। (पंचक बीच हल्ला–फसाद हुअ लगै छै।) पंच प्रमुख- (हल्लाकेँ शान्त करैत) सुनू, ई हमरा सबहक ममिला नै छी। ओतौका ग्रामीण एकर फैसला करता। ऐ बातक लेल हमरा गाममे झगड़ा-झंझट किए हएत। ई ओकरा गामक आ जातिक ममिला अछि। लड़कीकेँ बापक संग लगा दियौ। अपना गाममे जा कऽ फैसला कऽ लेता। (कनी दूर हटि कऽ बरसा टाटक भूरसँ सभ किछु देखि-सुनि रहल अछि। पंचक निर्णए सुनि ओ नुका कऽ तेजीसँ भागि जाइत अछि।) कट टू। दृश्य परिवर्तन- समए- दिन। स्थान- बरसा मामक दुआरि। (बरसाक मामा आ मामी दुआरिपर ठाढ़ अछि।) रखिया- आब की हेतै? मनदेव- की करबै। हम अपना दिससँ तँ लड़बे केलिऐ। बरसाक एहेन स्थिति नै छै। जे बापसँ लड़त। ओकर बाप किछु बजबे ने करै छै। बिआहक बात जे भेल छै से लड़का जातिक छिऐ। जँ बापक संग नै भेजबै तँ ओइ गामक जाति आ समाज पकड़तै। कोनो बात ओहेन भऽ जेतै तँ दोख हमरेपर लगतै। रखिया- की कहै छी हमरा? मनदेव- बरसाकेँ नेने अबियौ। (रखिया अँगना दिस जाइत अछि। ताबत् एकटा पंच मनदेव लग पहुँच जाइत अछि। रखिया तेजीसँ बाहर अबैत अछि।) रखिया- बरसा घर-अँगनामे नै छै। केतौ भागि गेलै। मनदेव- अँए...। (सभ अचरजमे डूमि गेल अछि। कनाफुूसी शुरू अछि।) कट टू। पचासम दृश्य- स्थान- निर्जन सड़क। समए- राति। (बान्हक आगू जा कऽ पक्का सड़कसँ मिल जाइत अछि। अन्हारमे बरसा सुनहट सड़कपर भागल जा रहल अछि। ओकरा पाछू घोड़ सवार देखा पड़ैत अछि। बरसा अन्हारमे नुका रहैत अछि। घोड़ सवार आगू बढ़ैत अछि। पाछूसँ पुलिसक गाड़ी सायरन बजबैत आबि रहल अछि।) कट टू। एकाबनम दृश्य- समए- राति। स्थान- शहरक अन्तिम भाग। (बरसा नुकाइत आगू बढ़ैत अछि। पाछूसँ एकटा घोड़ सवार देखा पड़ैत अछि। बरसा तेजीसँ बगलक दुआरि दिस चलि जाइत अछि। आ दरबज्जा खटखटबैत अछि। दरबज्जा विक्रमक माए खेलैत अछि। दुनूमे जान-पहिचान कहियो ने भेल रहै छै। तँए नै चिन्है छै।) विक्रमक माए- की भेलौ बेटी? एते अपसियाँत किए भेल छँह? बरसा- बदमाश सभ हमरा रेबाड़ने आबि रहल अछि। विक्रमक माए- अच्छा, आब चिन्ता नै कर। जल्दी भीतर चलि आ। (विक्रमक माए ओकरा सहारा दैत भीतरी कोठलीमे बैसा दैत अछि। आ बाहर अबैत अछि। केकरो नै देखैत अछि। फेर जा कऽ सूति रहैत अछि।) कट टू। बाबनम दृश्य- स्थान- विक्रमक घर। समए- रातिक तेसर पहर। (विक्रम थानेदारक वर्दीमे अबैत अछि। माएकेँ सोर पाड़ैत अछि। ओकर माए उठि कऽ अबैत अछि। विक्रमक माए- एते राति तक केतए छेलहक बेटा? विक्रम- पुलिस-दरोगाक नोकरीमे समए देखल जाइ छै। (टोपी उतारैत) की कहबौ माए। एकटा लड़कीक पाछू गुण्डा लगल छेलै आ गुण्डा-बदमाशक पाछू हम लगल छेलिऐ। विक्रमक माए- एकटा लड़की तँ अहुठाम भागि कऽ आएल छै। विक्रम- केतए छै उ लड़की? विक्रमक माए- भीतरका कोठलीमे सूतल छै। भागैत-भागैत अपसियाँत भेल छेलै। कहलिऐ अराम करैले। विक्रम- चल तँ। कोने छै। (दुनू कोठलीक भीतर जाइत अछि। बरसा ओइठाम सँ निकैल गेल अछि।) विक्रम माए- अहीठाम सूतल रहै। शाइत चलि गेलै। हड़बड़ीमे पोटरी छूटि गेलै। देखै छी गिरल छै। (विक्रम झूकि कऽ पोटरी उठबैत अछि। ओकरा शर्टक अगिला जेबीसँ एकटा फोटो गिर पड़ैत अछि। जे विक्रम नै देखैत अछि। ओकर माए फोटो उठा कऽ देखैत अछि।) विक्रम- अगल-बगलमे ताक हेरि करही माए। विक्रमक माए- ई फोटो केतए भेटलौ बौआ? ई जेकर फोटो छियौ। वएह लड़की छेलौ। विक्रम- ठीके माए, तोरा धोखा तँ ने भऽ रहल छौ। विक्रमक माए- वएह छिऐ, हमरा पूरा बिसवास छै। ई लड़की के छिऐ बौआ? (विक्रम टोपी लगा तेजीसँ चलैत अछि।) विक्रम- आपस आबि सभ बात बुझा देबौ। (चलि दैत अछि।) कट टू। तीरपनम दृश्य- समए- राति। स्थान- सड़क। (तलाशी तथा गश्ती तेजीसँ चलि रहल अछि। विक्रम अपना दल-बलक सहयोगसँ तीनटा बदमाशकेँ पकैड़ लैत अछि। पिटाइ लगला पछाति बदमाश सभ बतबैत अछि जे ओकर हेड हरिया-लड़कीकेँ गाम लऽ गेल हएत। शाइत ओहीठाम बिआह करत। असली बातक पता लगिते विक्रम आदेश दैत अछि।) विक्रम- अहाँ सभ बदमाशकेँ थानापर लऽ जाउ। हम अबै छी। (सिपाही सभ बदमाशकेँ थाना दिस लऽ जाइत अछि। विक्रम तेजीसँ चलि दैत अछि।) कट टू। चौबनम दृश्य- समए- भोर। स्थान- विक्रमक गाम। (बरसा कोनो तरहेँ नुकाइत-छिपाइत गाम अबैत अछि। विक्रमक घर लग पहुँचिते निराश भऽ जाइत अछि। केतेको दिनसँ बन्न पड़ल सन बुझाइत अछि। परोसी औरतसँ पुछैत अछि।) बरसा- ई अहाँक पड़ोसी केतए चलि गेलै? केतेक दिनसँ एकर घर बन्न छै? पड़ोसी औरत- एकर बेटा शहरमे पुलिसिया हाकिम भऽ गेलै। नोकरी मिलला पछाति गाम आएल रहै। माएकेँ संग लऽ चलि गेलै। की बात? केतए रहै छिऐ? बरसा- कोनो बात नै। हमरो घर अही गाममे पछवारि टोलपर अछि। भेँट करैले आएल छेलौं। (उदास भऽ चलि जाइत अछि।) कट टू। पचपनम दृश्य- समए- दिन। स्थान- नदीक किनार। (बरसा उदास भऽ बैसल अछि। ई वएह स्थान अछि जैठाम बरसा आ विक्रम पहिने मिलैत छल। ओइ जगहकेँ गाछ-बिरिछ, जंगल-‘झाड़ सभ-चीजकेँ बरसा छूबैत अछि। आर विक्रम संगे भेल प्रथम मिलनकेँ स्मरण करैत अछि।) बरसा- (स्वत:) जेकर हम एतेक दिन तक प्रतीक्षा केलौं, ओ हमर कोनो खोज-खबरि नै लेलक। भेटोँ तक करैले नै आएल। (बजैत-बजैत आँखि मूनि लैत अछि। फेर आँखि खोलैत अछि।) की सोचि रहल छी हम। जखैन ओ ऐठाम नै अछि तँ भेँट करैले केना आएत। और के ऐछे हमर। कियो हमर अपन नै अछि। ऐ संसारमे। जखैन सभ आने अछि तँ हमरा लेल मारि मरि जेनाइ सभसँ नीक हएत। (आत्महत्या करबाक उदेससँ भरल नदीमे कुदए चाहैत अछि। आकि दूटा बदमाश पाछूसँ पकैड़ लइ छै।) बदमास एक- लऽ कऽ चल जल्दी। बॉश इन्तजारी करैत हेतौ। (बरसाकेँ जबरदस्ती लऽ कऽ विदा होइत अछि। बरसा चिचिया रहल अछि। आगूसँ भकोलबा घेर लैत अछि।) भकोलबा- (लाठी देखबैत) कहै छियौ, छोड़ि दही लड़कीकेँ। नै तँ कपार ढाहि देबौ। बदमाश दू- तूँ के छेँ रौ? हटि जो आगूसँ नै तँ मारल जेमेँ। भकोलबा- चिन्ह ले हमरा। चनकीकेँ भाए भकोलबा छियौ हम। परसुए तँ बाहरसँ गाम एलियौ। सभ बातक पता लगि गेलौ हमरा। तखैनेसँ ताकै छेलियौ। अखनी धरा गेलही चोटपर। बदमाश एक- भकोलबा, कहि देत छियौ। हरिया मालिक जँ बुझतौ तँ...। भकोलबा- रौ सार, कहाँ छौ हरिया? ओकरे कारण हमर बहिन फाँसी लगेलकै। ओकर तँ हम जान लऽ लेबौ। केतए छौ ऊ सार कह नै तँ फोड़ि देबौ कपार। (भकोलबा लाठी लऽ कऽ हुड़कैत अछि। बदमाश एकसँ भिड़ जाइत अछि। दुनूकेँ लड़ैत देखि बदमाश दू भकोलबाकेँ पाछूसँ अबैत अछि आ लाठीसँ माथापर प्रहार कऽ दैत अछि। भकोलबा अचेत भऽ गिर पड़ैत अछि। दुनू बदमाश बरसाकेँ लेने-लेने तेजीसँ भागि जाइत अछि।) कट टू। छप्पनम दृश्य- समए- दिन। स्थान- मन्दिर। मन्दिरक अँगनीमे बिआहक मण्डप सजल अछि। दुल्हाक जगहपर हरिया बैसल अछि। ओकरा बगलमे पण्डित अछि। गुण्डा-बदमाश सभ लाठी लेने ठाढ़ अछि। बरसाकेँ जबरदस्ती आनैत अछि। हरिया- पण्डितजी, बिआहक काज शुरू करू। पण्डित- हँ, दुलहिनकेँ ऐठाम लाउ। बदमाश एक- ई तँ एबे नै करै छै। (घिंचैत अछि।) पण्डित- शुभ कार्यमे देरी नै। शीघ्र लाउ। (तखैने सुइदचन किछु बदमाशक संग श्यामबाबूकेँ पकड़ने अबैत अछि। बरसा अपना बाप दिस तकैत अछि। श्यामबाबू नजैर झूका लैत अछि। आ लोर पोछि लैत अछि।) बरसा- ऐसँ नीक होइत बाबूजी जे हमरा कोनो भेड़िया लग सौंपि दैतौं ई तँ ओकरोसँ नीच अछि। (हरिया उठि कऽ एक चमेटा बरसाकेँ लगा दैत अछि।) हरिया- चुप रह। हम भेड़िया...। श्यामबाबू- (तेज स्वर) लाज नै होइत अछि, हमरा बेटीपर हाथ उठैत। सुइदचन- ई काज तँ ऐसँ पहिने हेबाक चाही। चुपचाप बैसल रहू। नै तँ ठीक नै हएत। (अपसियाँत होइत मुंशीजी अबैत अछि।) मुंशी- मालिक। किछ गड़बड़ होइबला अछि। सुइदचन- शुभघड़ीमे बकबास करै छेँ। (मुंशी लग आबि सुइदचनक कानमे कहैत अछि।) मुंशी- कनी बाहर आबि कऽ देखियौ मालिक। सुइदचन- (उठि कऽ) चल तँ...। कट टू। सन्ताबनम दृश्य- समए- दिन। स्थान- मन्दिरक बाहरी भाग। (मन्दिरसँ बाहर गाम दिससँ बहुत गोटे एक संग आबि रहल अछि। केकरो हाथमे लाठी-भाला तँ केकरो हाथमे हँसुआ अछि। सभ तमसाएल अछि। भकोलबा फूटल माथकेँ गमछासँ बन्हने आगूमे लाठी नेने चलि रहल अछि।) ग्रामीण- सुनै छी जे श्यामबाबूपर दबाब देने छै। जबरदस्ती ओकरा बेटी संगे बिआह कऽ रहल छै। ग्रामीण- ऐ बदमासीकेँ हमरा सभ बरदास नै करबै। चाहै जे भऽ जाइ। ग्रामीण तीन- सुदिखोरीक धन्धा तँ करिते छेलै। आब अनहेर करए लगल। ग्रामीण दू- एकर बेटो तँ सभ दिन अधलाहे काज केलक। अनकर इज्जतपर धाबा। ग्रामीण एक- सुनै छी जे बदमाशकेँ रखने छै। भकोलबा- बदमाश अछि ने। हम सभसँ आगूमे रहबो। चलो बहादूर डर नै राखो। चाहे जान रहे की जाय। कट टू। अन्ठाबनम दृश्य-– समए- दिन। स्थान- श्यामबाबूक दरबज्जा। (पुलिस दलक संगे विक्रम गाड़ीसँ उतरैत अछि। श्यामबाबूक घरपर कियो ने अछि।) पुलिस- सर, हिनका ऐठाम तँ कियो नै अछि। आब केना करबै। (विक्रम बाटपर जाइत एकटा औरतियासँ पुछैत अछि।) विक्रम- श्यमबाबू केतए गेल अछि? औरतिया- (रूकि कऽ) ओकरा तँ बदमाश सभ पकैड़ कऽ लऽ गेलै। विक्रम- केतए लऽ गेलै। औरतिया- गामक मन्दिरमे। ओकरा बेटीसँ हरिया जबरदस्ती बिआह करतै। (विक्रम अपना पुलिस बलक संगे तेजीसँ चलि दैत अछि।) कट टू। उनसठम दृश्य-– समए- दिन। स्थान- मन्दिर परिसर। (मन्दिर परिसरमे ग्रामीण तथा बदमाशक मध्य मारि-पीट भऽ रहल अछि। भकोलबापर हरिया गोली चला दैत अछि। गोली भकोलबाकेँ बामा हाथमे लगैत अछि। तैयो ओ रेबाड़ि कऽ हरियापर लाठी चला रहल अछि। बरसाकेँ अवसैर भेटि जाइत अछि। ओ नुकाइत मन्दिर परिसरसँ भागैत अछि।) कट टू। साइठम दृश्य- समए- दिन। स्थान- मन्दिरसँ बाहरबला सड़क। (विक्रम गाड़ीसँ अपना पुलिस बलक संगे मन्दिर दिस आबि रहल अछि। एमहर मन्दिर दिस बरसा भागल जा रहल अछि। विक्रम ओकरा देखि लैत अछि। गाड़ीपर सँ सोर पाड़ैत अछि। मुदा बरसा नै सुनैत अछि। भागले जा रहल अछि। गाड़ी रोकि विक्रम पुलिस दलकेँ आदेश दैत अछि।) विक्रम- अहाँ सभ मन्दिर परिसरमे जल्दी जाउ आ स्थितिकेँ सम्हारू। कानून तोड़ैबला सभकेँ ऐरेस्ट करू। हम लड़कीकेँ बँचाबै छी। (पुलिस दल मन्दिर परिसर दिस बढ़ैत अछि। विक्रम तेजीसँ बरसाक पाछू दौगैत अछि।) कट टू। एकसठिम दृश्य- समए- दिन। स्थान- निर्जन सड़क। (बरसा भागल जा रहल अछि। पाछूसँ विक्रम हल्ला करैत दौग रहल अछि।) विक्रम- ठाढ़ रहू...। रूकि जाउ बरसाऽऽऽ। हम विक्रम छी। (बरसा स्वर सूनि पाछू मुहेँ तकैत अछि। विक्रमकेँ देखि ठाढ़ भऽ जाइत अछि। विक्रमकेँ गलामे लटैक बरसा कानए लगैत अछि।) बरसा- केतए चलि गेल रहिऐ, एतेक दिन? विक्रम- गाम आएल रही। अहाँकेँ खोजलौं। लोक कहलक बरसाक कोनो पता नै चलि रहल अछि। जे ओ केतए अछि। निराश भऽ आपस चलि गेलौं। बरसा- हमरापर...। विक्रम- आगू किछु ने बाजू। (कहैत विक्रम ओकरा बाँहिक घेरामे बान्हि लैत अछि।) (हरिया हाथमे पिस्तौल नेने नुकाइत-छिपाइत विक्रमक लग आबि गेल अछि। विक्रम आ बरसा ओकरा नै देखि रहल अछि। हरिया फायर करैले पिस्तौल तानैत अछि। पाछूसँ अबैत भकोलबा हरियाकेँ देखि लैत अछि। ओ छड़ैप कऽ हरियाक पीठपर चैढ़ जाइत अछि। हरिया मुहेँभरे गिरैत अछि। आ उनैट कऽ भकोलबापर फायर कऽ दैत अछि। तावत् विक्रम देखि लैत अछि। देखिते झपैट कऽ हरियासँ पिस्तौल छीन लैत अछि। आ ओकरापर लात-घुस्सासँ प्रहार करए लगैत अछि। बरसा खूनसँ भीजल भकोलबाकेँ उठबए चाहैत अछि।) बरसा- (कनैत) भैया...। हमरा सबहक कारणे तूँ खून बहा देलहक। भकोलबा- नै दाय। अहाँ नै कानू। अहाँमे हम अपना बहिनक रूप देखि रहल छी। अहाँ दुनू गोटे बँचि गेलौं। हमर असिरवाद अहाँक संगे अछि। आइ गामक पुरना जाल टूटि गेल। आब हमरा खुशीसँ मरए दिअ। (कहैत-कहैत भकोलबाक सिर एक तरफ लुढ़ैक जाइत अछि। पुलिसक दल चारूभरसँ घेरि कऽ ठाढ़ अछि।) शब्द- ७,४५५ समाप्त। लाज (एकांकी-नाटक) राजदेव मण्डल नाट्य प्रेमी एवं कर्मीकेँसमरपित नाट्य प्रेमी एवं कर्मीकेँ समरपित दू शब्द- इष्ट-मित्रक इच्छा छल- नाटक खेलेबाक। हुनका सबहक आग्रहक आदर करैत एकांकी-नाटक लिखबाक प्रयास केलौं। अभ्यासक अभाव रहितो एकटा प्रयाय...। -राजदेव मण्डल १४ जनवरी २०१५ परिचए-पात :: राजदेव मण्डल जनम : १५ मार्च १९६० ईं.मे। पिता : स्व. सोनेलाल मण्डल उर्फ सोनाइ मण्डल। माता : स्व. फूलवती देवी। पत्नी : श्रीमती चन्द्रप्रभा देवी। पुत्र : निशान्त मण्डल, कृष्णकान्त मण्डल, विप्रकान्त मण्डल। पुत्री : रश्मि कुमारी। मातृक : बेलहा (फुलपरास, मधुबनी) मूलगाम : मुसहरनियाँ, पोस्ट- रतनसारा, भाया- िनर्मली, जिला- मधुबनी। बिहार- ८४७४५२ मोबाइल : ९१९९५९२९२० शिक्षा : एम.ए. द्वय (मैथिली, हिन्दी, एल.एल.बी) ई पत्र : rajdeokavi@gmail.com सम्मान : अम्बरा कविता संग्रह लेल विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार वर्ष २०१२क मूल पुरस्कार तथा समग्र योगदान लेल वैदेह सम्मान-२०१३ प्राप्त। प्रकाशित कृति : (१) अम्बरा- कविता संग्रह (२०१०), (२) बसुंधरा कविता संग्रह (२०१३), (३) हमर टोल- उपन्यास (२०१३) श्रुति प्रकाशनसँ प्रकाशित। अप्रकाशित कृति- चाक (उपन्यास), त्रिवेणीक रंग (लघु/विहनि कथा संग्रह)। पात्र परिचए :: लाज (एकांकी) पुरुष पात्र- हरिचरण- गामक किसान धिरबा- हरिचरणक बेटा कुलानन्द— गामक सम्पन्न जमीनदार भोगेन्दर- कुलानन्दक बेटा बिसेखी- गामक एकटा मजदूर श्यामबाबू- शिक्षक स्त्री पात्र- चनपटीवाली- हरिचरणक पत्नी सबिता- हरिचरणक बेटी (दू-तीनटा शिक्षक, चारिटा ग्रामीण, डाक्टर, नर्स, दस-बारहटा छात्र एवं छात्रा।) दृश्य- १ समए- दिन। स्थान- हरिचरणक घर। (चनपटीवाली भानस-भात कऽ बैसल अछि। हरिचरण अबैत अछि।) चनपटीवाली- केतए गेल छेलिऐ? खेबै की नै? हरिचरण- हँ... हँ। कनी हाथ-मुँह धोइ छी। धिरबा स्कूल गेल की नै? चनपटीवाली- हँ। ऊ तँ दसे बजे खा-पी कऽ चलि गेल। हरिचरण- ऊ छौड़ी, सवितियाकेँ नै देखै छी। चनपटीवाली- सबितिया तँ गाए-बकरी चरबैले बाध दिस गेल। की भेलै से? हरिचरण- हेतै की। बेटी-चाटीकेँ कनी दाबि-चापि कऽ राखी। देखै नै छिऐ गामक हवा। चनपटीवाली- हे, हमर कुल-खनदान ओहन नै अछि। जाउ अहाँ हाथ धोने आउ। (हरिचरण चलि पड़ैत अछि।) पटाक्षेप। दृश्य- २ स्थान- गामक विद्यालय। समए- दिन। (स्कूलक आगूमे तीन-चारि शिक्षक कुरसीपर बैसल अछि। आपसी गप-सप्प कऽ रहल अछि। किछु धिया-पुता पढ़ि रहल अछि आ किछु बाहरी भागमे खेल रहल अछि) श्याम बाबू- यौ हीरा बाबू, अहाँ जे अपना बचियाक बिआहक गप करै छेलिऐ, तइमे लेन-देन फाइनल भेल? शिक्षक दू- धुर की कहब। वरक माँग अलग आ वरक बापक माँग अलग। टका-पैसा लाउ। मोटर साइकिल लाउ, सोना लाउ, लैपटॉप लाउ। की कहूँ, हथियाक सूढ़ जकाँ डिमान्ड बढ़ले जा रहल अछि। हे यौ, जे बेटीक बिआह करैत अछि से बूझू जे जमपुरीसँ घूमि कऽ अबैत अछि। (एकटा छात्र लगमे अबैत अछि) छात्र एक- यौ मास्टर साहैब, ई छौड़ा हमरा गारि पढ़ै छै। श्याम बाबू- तूँ सभ गारि पढ़ैले एलही आकि पढ़ैले? (छौंकी देखबैत) हमरा सभ गप्प करै छी। ऐठामसँ जो जल्दी। छात्र दू- माहटर साहैब, पाँच मिनट। (जोरदार अवाजमे कहैत विदा होइत अछि।) शिक्षक दू- (छौंकी देखबैत) बैस चुपचाप नै तँ देखै छीही छौंकी। छात्र दू- नै जाए देबै तँ हम अहीठाम लगही करि देब। शिक्षक दू- पढ़ै छीही कथीले। जो ने लघीए करैत रहिहेँ। (शिक्षक सभ पुन: गप-सप्प करए लगै छथि। एकटा हरबाहा कान्हपर हर लेने ओही बाटसँ जा रहल अछि।) हरबाह- यौ माहटर साहैब, अहाँ सभ गप्प कटाबलि करैत रहू। बाहरमे छौड़ा सभ मारापीटी करैत अछि। अहिना चलै छै स्कूल यौ...? शिक्षक तीन- हे, अहाँ जा कऽ हर जोतू। (क्रोधमे) अहाँ स्कूलक भाँज की बुझबै यौ। हरबाह- हँ हँ छौड़ा सभ तँ भैंसवार बनबे करतै। अहाँ फोकटमे रूपैआ लैत रहू। कियो कहैबला तँ अछि नै। शिक्षक तीन- (छौंकी लऽ कऽ ठाढ़ होइत) कहै छी चल जाउ ऐठामसँ। हरबाह- यौ अहाँ छौंकी देखबै छी। हमरो हाथमे हरबाही पेना अछि। श्यामबाबू- हे यौ की लगल छी। जाउ ऐठामसँ। हरबाह- हमरा थोड़े ओते फुरसत अछि। हम अपना काजकेँ भगवान बुझै छी। अहूँ सभ अपना काजकेँ भगवान बुझियौ। बेमतलबमे अबेर भऽ गेल। जाइ छी। (हरबाहा भनभनाइत चलि जाइत अछि।) (शिक्षक एकटा बोर्डपर लिखैत अछि संगे पढ़बैत अछि। सबिता बकरीकेँ एकटा गाछमे बान्हि स्कूलक खिड़कीसँ सभ देखि-सुनि रहल अछि।) श्यामबाबू- ई सभटा पढ़ेलहा काल्हि मुँह-जबानी सुनबौ। (शिक्षक सबिताकेँ देखि लैत अछि। जोरसँ सोर पाड़ैत अछि) एमहर सोझहामे आ। के हुलकी मारै छँह? (सबिता डेराइत सोझहामे अबैत अछि) श्यामबाबू- तोहर नाम की छियौ? केकर बेटी छँह? सबिता- हम सबिता छी। हमरा बाबूक नाम श्री हरिचरण अछि। श्यामबाबू- ऐठाम कथीले एलही? सबिता- यौ मास्टर साहैब। हमरो पढ़ऽ दिअ। श्यामबाबू- पढ़बें, ई तँ नीक गप। अच्छा कह, पाँच जोड़ पाँच केतेक भेलै। सबिता- दस भेलै माहटर साहैब। श्यामबाबू- दिमाग तेज छौ। तोराले परियास करबाक चाही। घरपर जेबौ, तोरा बापकेँ समझबैले। अखनी तूँ जो। (सबिता चलि दैत अछि। बर्खाक छोट-छोट बून गिरए लगैत अछि। छात्र सभ भागए लगैत अछि।) एकटा छात्र- यौ माहटर साहैब। बरखा शुरू भऽ गेल। हम भागै छी। अहूँ भागू। (कहैत पड़ाइत अछि।) छुट्टी... छुट्टी...। पटाक्षेप। दृश्य- ३ स्थान- हरिचरणक घर। (शिक्षक-एक जे श्यामबाबूक नामसँ जानल जाइत अछि, प्रवेश करैत अछि) श्यामबाबू- हरिचरणजी छी यौ। (जोरसँ चिकरैत अछि।) हरिचरण- (अँगनासँ बाहर निकलैत) मास्टर साहैब, प्रणाम-प्रणाम। आउ बैसू। कहू, हमर छौड़ा ठीकसँ पढ़ैत अछि किने? श्यामबाबू- हँ हँ, नीकसँ पढ़ैत अछि। हम दोसरो काजसँ आएल छी। हरिचरण- कहू ने, आओर की बात छै। (अँगना दिस तकैत जोरसँ बजैत अछि।) सुनै छिऐ सबितियाक माए। चाह बनौने आउ। (श्यामबाबू दिस तकैत) कहू मास्टर साहैब, की कहै छी? श्यामबाबू- अहाँक बेटी बड्ड संस्कारी अछि। बुद्धियोमे तेज। पढ़त-लिखत तँ जरूर नाम रोशन करत। काल्हिसँ अोकरा स्कूल भेजू। हरिचरण- यौ मास्टर साहैब, बेटी की पढ़तै। ओकरा घर-अँगनाक काजसँ फुरसत कहाँ होइ छै। श्यामबाबू- फुरसत देबै तब ने पढ़तै। हे यौ, ऐ देशक बेटी तँ देशसँ विदेश धरि अपन नाम चमका रहल अछि। हरिचरण- हे यौ, ओहन पलिवारो रहै छै तब ने होइ छै। हमर तँ समाजो तेहेन अछि जे बेटीकेँ घरसँ निकलैत देखि खाली दोखे लगौत। श्यामबाबू- दोख लगौलासँ की हेतै। अपन-अपन चरित्र होइ छै। लोकक कहलासँ नीक बेकती अधला भ जेतै। हे यौ आब तँ सरकार, कानून सभटा ऐ दिशामे सहयोग कऽ रहल अछि। हरिचरण- बेटाकेँ पढ़बैमे तँ जुमबै ने करैए छी आ बेटीकेँ...। श्यामबाबू- देखियो, बेटा-बेटीमे कोनो अन्तर नै होइ छै। गाछ रोपबै तब ने फल भेटत। (हरिचरणक स्त्री चाह लेने आबि जाइत अछि।) हरिचरण- अँगनामे रहै छै तँ माइयोकेँ थोड़-बहुत काज सम्हारि दइ छै। असगरे तँ...। श्यामबाबू- यौ काजो करतै अा पढ़बोकरतै। खरचो बेसी नै छै। सरकारी सहयोग भेटै छै। चनपटीवाली- बात मानि लियौ। माहटर साहैब अधला नै कहैत हेथिन। हरिचरण- ठीके छै। जँ सभ कहै छी तँ स्कूल जेतै। श्यामबाबू- खुशी भेल। काल्हिसँ समैपर स्कूल भेजू। (एक-दोसराकेँ प्रणाम करैत श्यामबाबू विदा भऽ जाइ छथि।) पटाक्षेप। दृश्य- ४ स्थान- स्कूल। समए- दिन। (शिक्षक पढ़ा रहल छथि। छात्र आ छात्रा सभ पोथी, कौपी, लेने पाँतिमे बैसल अछि।) शिक्षक दू- जे सवाल बनबैले देने छियो, जल्दी बना कऽ ला, जे सभसँ पहिने लाबबेँ से तेजगर कहेमेँ आ जे सभसँ पाछू देखेमेँ तेकरा छौंकी लगतौं। सबिता- माहटर साहैब, हम सवालकेँ हल कऽ लेलौं। (ठाढ़ भऽ कऽ कौपी देखबैत अछि।) शिक्षक दू- देखही रौ छौड़ा सभ। मेहनतक फल। किछे दिनमे सबितिया सभसँ आगू भऽ गेलौ। एकरे कहै छै कादोमे कमल फुलेनाइ। धिरबा- माहटर साहैब हमहूँ हिसाब बना लेलौं। शिक्षक दू- बनेलेँ तँ किन्तु पाछूसँ। तोरा तँ पहिने एबाक चाही, तोहर बहिन तँ किछे दिन पहिनेसँ स्कूल आबए लगलौ। तूँ तँ कहियासँ ऐठाम पढ़ै छेँ। छात्र दू- माहटर साहैब, भोगेन्दर हमरा बिठुआ काटि लेलक। शिक्षक दू- हँ-हँ बिठुआ काटतौ। आर की करतौ। एकर बाप कुलानन्द बाबू तँ कहैत रहै छै जे हमरा किछोक कमी नै अछि। बेटाकेँ चारि-चारिटा टीसन धरौने छी। आ बेटा तेहेन भुसकोल छै जे पाछूमे बैसि कऽ बिठुआ कटै छै। (मुड़ी उठा कऽ देखैत) हे रौ भोगेन्दरा, ला कौपी। हिसाब बनौलेँ? भोगेन्दर- यौ माहटर साहैब, अहाँक सवाल गलत अछि। शिक्षक दू- आँइ! सबाले गलत अछि। सबिता- यौ माहटर साहैब, ई तँ भरि दिन लोकक बाड़ीक लताम तोड़ैत अछि नै तँ परतीपर क्रिकेट खेलैत रहै छै। एकरा बुते कहूँ सवाल बनै। तँए सवालेकेँ गलत कहै छै। शिक्षक दू- ठीके, ई छौड़ा खचरपनी करै छै। रौ ला तँ कौपी। की गलत छै। भोगेन्दर- हिसाब बनतै तेकर बाद देखाएब। कोनो की हम बनरनी छी जे चट दऽ कूदि कऽ देखा देब। सबिता- माहटर साहैब, सुनै छिऐ। हमरा बनरनी कहै छै। भोगेन्दर- लगै छी बनरनी सन। तँ कहबौ बनरनी। देखही रौ बनरनीकेँ। शिक्षक दू- (उठि कऽ चारि-पाँच छौंकी भोगेन्दरक पीठ आ बाँहिपर लगबैत) गामोपर बदमासी आ स्कूलोमे खचरपनी। ऐठाम बिठुआ कटैले अबै छेँ आकि पढ़ैले? हमरो सोझहामे लुचपनी। भोगेन्दर- हे माहटर साहैब, हम कहि दइ छी। ई छौड़ी हमरा मारि खुआ रहल अछि। एकरो ठीक करि देबै। जाइ छी, बाबूकेँ सभटा गप्प कहबै। शिक्षक दू- (छौंकी उठबैत) जो, पहिने बाबूकेँ कहि आबही। भोगेन्दर- (विदा होइत अछि) कहि दइ छी, हम सभकेँ ठीक कऽ देब। हमरो नाम भोगेन्दरा छिऐ। (चलि दैत अछि) (घण्टी टुनटुनाइत अछि।) शिक्षक दू- जाइ जो। टिफिन भऽ गेलौ। (छात्र सभ बाहर दिस चलि दैत अछि।) पटाक्षेप। दृश्य- ५ स्थान- स्कूलक बाहरी भाग। समए- दिन। (शिक्षक सभ स्कूलसँ बाहर सड़क दिस जा रहल अछि। हरिचरण अपना बेटी सबिताक संगे दोसर दिससँ अबैत रहैए। ओकरा पाछू एकटा ग्रामीण बिसेखी अछि। सबिताक कपड़ा-लत्ता फटल अछि।) हरिचरण- प्रणाम, मास्टर साहैब। (सबिता कानि रहल अछि।) श्यामबाबू- प्रणाम, हरिचरणजी। सबिता किए कानि रहल अछि? की भेल? हरिचरण- हम तँ ओही दिन कहने छेलौं जे अपना बेटीकेँ नै पढ़ाएब। अहाँ हमरापर बड्ड जोर देलिऐ। तेकर फल देखि लियौ। श्यामबाबू- गप कहबै तखनि ने बुझबै। भेलै की? हरिचरण- हेतै की। गरीबक धिया-पुताकेँ पढ़बाक एहेन अधिकार छै। जे देखि लियौ। कुलानन्द बाबूक बेटाक किरदानी। ओ हमरा बेटीकेँ मारैत-मारैत बाटमे खसा देने छेलै। श्यामबाबू- कोन गपक झगड़ा भेलै? हरिचरण- सुनै छी, जे कुलानन्द बाबूक बेटाक बारेमे सबितिया किछो बजल रहै। तही कारणे अहाँ ओकरा मारने रहिऐ। श्यामबाबू- कम्पलेन केने रहै। सबितियाक बातो साँचे छेलै। ऊ छौड़ा ठीके बदमाश अछि। हरिचरण- बदमाशी केनाइ तँ धनिकक धिया-पुताक सिंगार छिऐ। श्यामबाबू- ई कोन गप भेलै। अधला गपक तँ विरोध हेबाक चाही। हरिचरण- देखै नै छिऐ। हमर बेटी विरोधमे बजलै तँ केहेन दशा भेलै। मास्टर साहैब, नीक होइतै जे हम अपना बेटीकेँ नै पढ़बितौं एकरा कपड़ा-लत्ताक हालत देखियौ। (आँखिमे नोर भरि जाइत अछि।) की हेतै पढ़ा कऽ? श्यामबाबू- एहेन गप नै बाजू। नीक काजमे अहिना अड़चन होइ छै। अहाँ अपना बेटीकेँ पढ़ाउ। हम कहै छी- अहाँक बेटी नाम रोशन करत। हरिचरण- केना पढ़ेबै यौ मास्टर साहैब? श्यामबाबू- अहाँ िचन्ता नै करब। हम कुलानन्द बाबूसँ भेँट करैले जाइ छी। चलू यौ बिसेखीजी, हमरा संगे। बिसेखी- हँ-हँ चलू। (सभ कियो विदा भऽ जाइ छथि।) पटाक्षेप। दृश्य- ६ स्थान- कुलानन्दक घर। समए- दिन। (कुलानन्द अपन दरबज्जापर असगरे कुरसीपर बैसल छथि। कनेक हटि कऽ दूटा हथटुट्टा, पुरान कुरसी रखल अछि। शिक्षक श्यामबाबूक संग बिसेखी प्रवेश...। श्यामबाबू- प्रणाम यौ कुलानन्द बाबू। कुलानन्द- (मुड़ी उठा कऽ देखैत) प्रणाम मास्टर साहैब। प्रणाम-प्रणाम!! (व्यंग्य करैत) वाह! बिसेखीओकेँ देखै छी। हे रौ बिसेखी! कनी कुरसी ला ओमहरसँ। मास्टर साहैब बैसता। (बिसेखी कुरसी आनि कातमे ठाढ़ भऽ जाइत अछि।) श्यामबाबू- हमरा सभ एकटा विशेष काजे आएल छी। कुलानन्द- बिना कारणे टिटही थोड़े लगै छै। हम बुझै छी। रौ बिसेखिया मुँह किए तकै छेँ, बाज ने की बात छिऐ? बिसेखी- की कहब मािलक। अहाँक भोगेन्दर बदमाशी केलक। ओ हरिचरणक बेटीकेँ बड्ड मारि मारलखिन। कुलानन्द- हे रौ हमर बेटा कोनो बताह छै। जे बिना कारणे केकरो पीटतै। ओकरो बेटी खचरपन्नी केने हेतै। श्यामबाबू- ओ तँ सिरिफ भोगेन्दरक कम्पलेन केने रहै। बिसेखी- धिया-पुताकेँ हाँटि-दबाड़ि देबाक चाही। एनामे धिया-पुता मनबढ़ू भऽ जाइत अछि। कुलानन्द- तू हमरा सिखबै छेँ। ऊ स्कूल हमरा जमीनपर ठाढ़ छौ। हम मदति केलियौ तँ स्कूल बनलौं। आइ हम अपने धिया-पुताकेँ मारि-पीट कऽ भगा देबै!!! श्यामबाबू- भगबैले कहाँ कहै छी। कनी समझा-बुझा देबै तँ नीक रहतै। कुलानन्द- हमर गाम छी। हम नीक-अधला बुझै छिऐ। हरिचरणा बेटाकेँ तँ पढ़ाइए ने सकैए आ बेटीकेँ केतएसँ पढ़ाएत। ओकरा कारणे हम भोगेन्दरकेँ मारबै? ईह! बड़ छोट से उनचास हाथ!! बिसेखी- कनी बेसी गलती भऽ गेलै मालिक। मारैत-मारैत सबितियाकेँ सभटा कपड़ा-लत्ता फाड़ि देने छै। कुलानन्द- ओ, आब बुझलौं। कपड़ा-लत्ताकेँ हमरा दाम लगत! सएह ने रौ? बिसेखी- से हम कहाँ कहै छी। कुलानन्द- तूँ की कहै छेँ से हम बुझै छिऐ। दुआरिपर आबि कऽ उपराग देलेँ। मास्टर साहैबक सोझहामे की कहबौ। यौ मास्टर साहैब हमर गाम छी। हम सभ गप बूझि-समझि लेबै। अहाँ सभ ऐठामसँ अखनि चलि जाउ। (मास्टर साहैबक संग बिसेखी चलि जाइत अछि।) पटाक्षेप। दृश्य- ७ स्थान- हरिचरणक घर। (हरिचरण अपना साढ़ू संगे दुआरिपर बैसल अछि। साढ़ू रघुवीर घड़ीमे समए देखैत अछि।) रघुवीर- साढू! हम तँ किछुकालक बाद चलि जाएब। एकटा गप कहबाक छल। हरिचरण- हँ-हँ- कहू की बात? रघुवीर- हमर पत्नी तँ बेमार रहैत अछि। आ अखनि गर्भवती अछि। असगरे बेचारीकेँ बड्ड दिक्कत होइ छै। हम सरकारी सेवामे छी। कखनि घरपर आएब तेकर कोनो ठेकान नै। एहेन परिस्थितिमे...। हरिचरण- अहाँ की कहए चाहै छी? रघुवीर- अहाँ छोटकी बचियाकेँ हमरा घरपर जाए दैतिऐ तँ पत्नीकेँ सहारा भऽ जइतै। हरिचरण- ओ तँ पढ़ै छै। (निसाँस छोड़ैत) ओना लड़कीकेँ पढ़ौनाइ बड्ड कठिन छे। मुदा सबिताकेँ पढ़बए पड़तै। किए तँ ओ तेजगर छै। रघुवीर- तेकर चिन्ता अहाँ नै करू। हमहूँ सर्विस करै छी। शहरमे पढ़ौनाइ असान छै। टाइमपर पढ़बो करतै आ अपना मौसीकेँ देख-भालो करतै। पत्नीआंे असगर नै रहतै। अनमना लगल रहतै। हरिचरण- कहै तँ छी ठीके किन्तु अपन धिया-पुता अपने लग ठीक रहै छै। पढ़ाइमे खरचो तँ लगै छै। रघुवीर- खर्चाक िचन्ता नै करू साढ़ू। हमरो किछोक अभाव नै अछि। सबिता जेते धरि पढ़तै सभ खर्च-वर्च हमर। (हरिचरणक पत्नी चाह लेने अबैत अछि। ठमकि कऽ सभ सुनि लैत अछि।) पत्नी- आब एतेक जिद्द करै छथिन तँ जाए दियौ सबितियाकेँ। सुनने नै छिऐ जे माए मरे आ मौसी जिऐ। (सबिता ओनएसँ दौगल अबैत अछि। हरिचरण ओकरा रोकैत अछि।) हरिचरण- सबिता एमहर सुन! मौसा संगे गाम जेबही? (सबिता किछु ने बजैत अछि।) तोहर मौसा ओहीठाम स्कूलमे पढ़ैक बेवस्था लगा देतौ। सबिता- हँ जेबै। मौसी संगे रहबै आ ओहीठाम पढ़बै। हरिचरण- लिअ साढ़ू। अहाँक समस्याक समाधान भऽ गेल। रघुवीर- ठीक छै। तैयार होउ। दू घण्टा बाद गाड़ीसँ चलब। पटाक्षेप। दृश्य- ८ स्थान- गामक चौक। (तीन-चारिटा ग्रामीण सड़कक कातमे गाछतर बैसल अछि। चबूतरापर गप-सप्प कऽ रहल अछि।) ग्रामीण एक- (गाछ दिस इशारा करैत) देखियौ, ई गाछ केतनेटा रहै। देखिते-देखिते केतेक विशाल भऽ गेलै। ग्रामीण दू- एकरा रोपनिहार तँ जुआन भऽ गेलै। समए बितैत कोनो देरी होइ छै। ग्रामीण तीन- हँ यौ, ऐ स्कूलक धिया-पुता सभ एकरा रोपने रहै। ग्रामीण चारि- देखै नै छिऐ, धिरबा, सबितिया, भोगेन्दर सभ धिया-पुता आब जुआन भऽ गेलै। ग्रामीण एक- सुनै छिऐ, सबितिया शहरक स्कूलमे पढ़ि कऽ बड़का डागदरनी भऽ गेलै। हरिचरणकेँ नाम रोशन कऽ देलकै। ग्रामीण चारि- धुर हरिचरण बुते थोड़े होइतै। ई तँ ओकर साढ़ू पढ़ाइक खरचा देलकै तब भेलै। ग्रामीण तीन- हँ यौ ऊ बगलक शहरमे अस्पताल चलबैत अछि। हमर काकी तेतेक बीमार रहै जे नै जीबितै। सबितेक दवाइसँ बँचि गेलै। ग्रामीण दू- तब तँ नामी डाक्टर अछि यौ। ग्रामीण एक- अच्छा गामकेँ ऊँच केलक। (कुलानन्दक बेटा भोगेन्दर दारू पीने आ अड़-बड़ बजैत, गारि पढ़ैत, लड़खड़ाइत जा रहल अछि।) भोगेन्दर- ओऽऽऽ सा... ले... तेरी... माँ... के... छोड़बौ नै। (लड़खड़ाइत अछि।) ग्रामीण एक- के छी यौ? एना गारि पढ़ैत किए जाइ छी? ग्रामीण दू- पियक्कड़ छथि। भोगेन्दरा। माए-बापक नाम रोशन कऽ रहल छथि। (भोगेन्दर उनटि कऽ ग्रामीण-दू केँ पकड़ि लैत अछि।) भोगेन्दर- रे सार तूँ हमरा गारि देलही। तोरा हम आइ बापसँ मोलाकात करबा देबौ। (ग्रामीण तीन दुनूकेँ बीच होइत झगड़ाकेँ छोड़बैत अछि।) ग्रामीण तीन- एना नै करू। ई किछु नै बजला। अहाँ बेकारमे झगड़ा नै करू। जाउ, ऐठामसँ। भोगेन्दर- ई तोरा बापक जगह छियौ जे चलि जेबौ, ऐठामसँ। (भोगेन्दर गारि पढ़ैत-पढ़ैत बोकरए लगैए।) ग्रामीण एक- बाप रे बाप! ई तँ खून बोकरै छै। की भऽ गेलै यौ। सोर पाड़ू कुलानन्द बाबूकेँ। एकर हालत बड़ खराप छे! (ग्रामीण चारि कुलानन्दकेँ सोर पाड़ए जाइत अछि। भोगेन्दर बेहोश भऽ गिर पड़ैत अछि।) ग्रामीण तीन- एकरा जल्दी शहरक अस्पताल नै लऽ कऽ जेतै तँ परान बँचाएब मोशकिल भऽ जेतै। ग्रामीण दू- एकरे कहै छै- कर्मक फल। दुनू बापुत समाजमे कुकरम करैत रहै छेलै। डरसँ के बजतै? सभ किच्छो बरबाद कऽ देलकै। आइ देख लियौ फल। ग्रामीण एक- एकरे डरसँ हरिचरण अपना बेटीकेँ साढ़ू संगे भेजि शहरमे पढ़ौलकै। आ शहरक नामी-गिरामी डाक्टर बनल छै। (कुलानन्द अबै छथि। अपना बेटाक हालत देखिते आँखिसँ नोर खसए लगै छन्हि।) कुलानन्द- आब कोन उपाय करबै हौ। केना परान बँचतै हौ। हौ भाय, हमरा एकेटा बेटा अछि हौ। ग्रामीण एक- यौ कुलानन्द बाबू, एकरा शहरक अस्पताल लऽ कऽ चलू। अपने गामक बढ़ियाँ डाक्टर अछि ओइठाम। कुलानन्द बाबू- के हौ? ग्रामीण एक- हरिचरण बेटी डा. सबिता कुमारी। केहेन-केहेन बीमारीकेँ ठीक कऽ देलकै। एकरो ठीक करतै। कुलानन्द बाबू- (मुड़ी झूका लैत अछि।) हौ सुनने तँ छिऐ, मुदा की कहबै? अपने कएल किरदानी। सोझहामे केना जेबै? ग्रामीण तीन- अहाँ कोनो चिन्ता नै करू। लऽ कऽ चलू। हमहूँ सभ संगे चलै छी। सभ ठीक भऽ जेतै। एकरा उठाउ। चलै चलू। (भोगेन्दरकेँ उठाबए लगैत अछि।) पटाक्षेप। दृश्य- ९ स्थान- अस्पतालक बरामदा। (तीन-चारिटा ग्रामीण बेंचपर बैसल अछि। डाक्टर सबिता आ नर्स सभ एमहरसँ ओहमर आबि रहल अछि आ जा रहल अछि। कुलानन्द भीतरसँ निकलैत अछि।) ग्रामीण एक- यौ कुलानन्द बाबू! आब तँ अपना सभकेँ गाम दिस चलबाक चाही। कोनो तरहेँ भोगेन्दरक जान बँचि गेल। कुलानन्द- कोनो तरहेँ की कहै छी। ई कहियौ जे डाक्टरनी सबिताक कृपासँ परान बँचि गेल। ग्रामीण दू- से तँ ठीके। मुदा डागदरनीकँ धैनवाद देलिऐ? कुलानन्द- की कहब यौ। हमरा तँ सबिताक सोझहोमे जाइत लाज होइत अछि। हमर बेटा ओकरा मारि-पीट कऽ सकूलसँ भगा देने रहै। तइ कारणे ओकरा गामसँ बाहर रहि पढ़ए पड़लै। वएह आइ हमरा बेटाक जान बँचौलकै। ओइ दिन मास्टर साहैब हमरा उपराग देबाक लेल गेल रहै। मुदा हमहूँ किछो नै केलिऐ। उनटे मास्टर साहैबकेँ डपटि कऽ भगा देलिऐ। हम दुष्ट लोक छी। (आँखिमे नोर आबि जाइत अछि।) ग्रामीण दू- दुखित नै होउ। अपसोच नै करू। कुलानन्द- अपसोच तँ हेबाक चाही। गलतीकेँ स्वीकार करबाक चाही। अहूँ सुनि लिअ- समाजक धिया-पुता पढ़ैत-लिखैत हो वा कोनो नीक काज करैत हो तँ ओकरा सभकेँ सहयोग करबाक चाही। कोनो सुआरथक गप नै सोचबाक चाही। ग्रामीण एक- सबिता हरिचरणक बेटी नै अछि। समूचा समाजक बेटी अछि। अपना गामक डंका शहरमे बजा रहल अछि। (सबिताक संगे भोगेन्दर प्रवेश करैत अछि। भोगेन्दर मुड़ी झूकौने अछि।) सबिता- आब अहाँसभ गाम जा सकै छी। (भोगेन्दर दिस इशारा करैत) हिनकर स्थिति गाम जेबाक योग्य भऽ गेल छन्हि। बीमारी कन्ट्रोलमे अछि। मुदा ठीक समैपर दवाइ दैत रहबनि आ पुन: आबि कऽ चेक करबा लेब। ग्रामीण एक- (हाथ जोड़ैत) अहाँ धन्य छी- सबिताजी। सबिता- (ग्रामीणकेँ प्रणाम करैत) अहाँ सभ हमरा असीरवाद दिअ जे अहिना हम अहाँ सबहक सेवा करैत रही। ग्रामीण एक- चलै चलू। (कुलानन्द संगे ग्रामीण सभ हाथ जोड़ने विदा भऽ जाइत अछि। भोगेन्दर ठाढ़े रहि जाइत अछि। सबिता लगमे अबैत अछि।) सबिता- हमर देल किरिया-सप्पत मन राखब। कहियो दारू-शराब नै पीअब आ ने हाथसँ छूअब। दवाइ टेमपर खाइत रहब। (भोगेन्दरक आँखि नोरा जाइत अछि। नोराएल आँखिकेँ पोछए लगैत अछि।) भोगेन्दर- हम अपराधी छी। हमरा गलतीकेँ माफ कऽ दिअ। (हाथ जोड़ैत विदा भऽ जाइत अछि।) शब्द संख्या- २८४० पटाक्षेप। समाप्त। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। पल्लवी मण्डल कागज-कलम कागज-कलमसँ दोस्ती केलासँ किस्मत बदैल जाइ छै स्याहीमे रंगि ई, इतिहासमे परिस्कृत भऽ जाइ छै अप्पन गप्प जे कहि दियौ गप्पकेँ गप्प बुझि अपना धरि राखि ई मुस्काइ छै किछु ग्लानि लिखू वा लिखु किछु तबवज्जो ओ बस लिखैत जाइ छै केकरो किछु साबित करबाक ओकरा चिन्ता नहि ने गलत आ ने सही बस लिखि-लिखि ओ किछु कहए चाहै छै "करबाक अछि अहाँके अपन काज तखने अहाँके मिलत अपन आवाज़" ई विचार ई रखैत सदिखन किछु गुनगुनाइ छै ऐतेक स्पष्टता सहेजने व्यवहार कतेक मिलनसार अछि अहिना नहि कहै छी जे हिनकासँ दोस्ती कऽ कए किस्मत बदैल जाइए ई जे सदिखन हमरा सभकेँ हमर यथार्थसँ भेँट कराबैए हिनका जकाँ दोस्ती कहाँ कियो निमाहैए भेँट करू हिनकासँ तखन बुझब ई केतेको क्रान्तिकारीकेँ साहसक संग लिखै-बजैक क्षमताकेँ बढ़ाबैए!! ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)२००४-१५. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेता, से आशा करै छी। रचनाक अंतमे टाइप रहए, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/ संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै। ऐ ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-15 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.co.in पर संपर्क करू। ऐ साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल।५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सिद्धिरस्तु वि दे ह विदेह Videha বিদেহ www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १८२ म अंक १५ जुलाइ २०१५ (वर्ष ८ मास ९१ अंक १८२) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA
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