75 ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' १९५ म अंक ०१ फरबरी २०१६ (वर्ष ९ मास ९८ अंक १९५) ऐ अंकमे अछि:- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१.अब्दुर रज्जाक-१.२ टा प्रेम बिहैन कथा २. १ टा राजनैतिक बिहैन कथा २.२.कामिनी कामायनी- सेयाम रेयापक स्वर्णिम अतीत (यात्रा वृत्तान्त) २.३.आशीष अनचिन्हार- गाम के अधिकारी तोहे बड़का भैया हो (आलोचना) २.४.१.विन्देश्वर ठाकुर १. एकटा राजनैतिक विहनि कथा २.एकटा प्रेम विहनि कथा २. मुन्नाजी-प्रेम विहनि कथा- सेल्फी ३. पद्य ३.१.डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह”- दू टा गीत ३.२.दिलीप कुमार साह- १ टा कविता ३.३.१.अब्दुर रज्जाक- ११ टा चरिपतिया २.विन्देश्वर ठाकुर- एकटा गजल ३.४.जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’- ४टा गजल ४.बालानां कृते-१.आशीष अनचिन्हार- बाल गजल २.डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह” किछु बाल कविता Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव Join official Videha facebook group. Join Videha googlegroups Follow Official VidehaTwitter to view regular Videha Live Broadcasts through Periscope. विदेह जालवृत्तक डिसकसन फोरमपर जाउ। संपादकीय साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक विषयमे किछु कहनाइ अपन समए खराप केनाइ हएत। २०१५ मे एकटा बिर्रो उठल, जइमे सभ भाषामे किछु गोटे अकादेमी पुरस्कार घुरेलन्हि, आ जे नै घुरेलन्हि सेहो अकादेमीक किछु खास बिंदुपर गुमकी लाधलापर प्रश्न उठेलन्हि। मुदा ऐ बिर्रोमे जइ भाषाक विभाग साहित्य अकादेमीक सभसँ बेसी कृतज्ञ/ वफादार रहल से छल मैथिली विभाग। पुरस्कार घुरेनाइ तँ दूर, कोनो तरहक कोनो-प्रश्न, कोनो सिम्बोलिक विरोध धरि नै। आ ओइ कृतज्ञता/ वफादारी लेल ओकरा निर्लज्जतापूर्ण कार्य करबाक लाइसेंस, जे ओकरा लग पहिनहियेसँ रहै, केर पुनः नवीनीकरण भ’ गेलै, साहित्य अकादेमी तकर नवीनीकरण क’ देलकै। आब मात्र ‘सगर राति दीप जरय’ आ ‘समानांतर साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक विरुद्ध ठाढ़ अछि। ‘सगर राति दीप जरय’ पर साहित्य अकादेमीक ग्रहण क्षणिक रूपसँ लागिते रहैए, ओहुना ग्रहण क्षणिके होइ छै। भारतक साहित्य अकादेमीक उद्देशय की छै? जँ एकर मैथिली विभागक कार्यक हिसाबसँ कोनो छात्रकेँ एकर उत्तर देबा लेल कहल जाए तँ एकर उत्तर ओ एना देत- -साहित्यमे एकटा खास जातिक खास परिवार/ ग्रुपक प्रतिक्रियावादी आ मेडियोकर रचना/ रचनाकारकेँ पुरस्कृत करब -सेमीनार, अनुवाद आदि कार्यक्रम/ असाइनमेण्टमे अवहट्ठ-सन कृत्रिम मैथिली लिखैबला तथाकथित लेखक सभकेँ मुख्यतया सम्मिलित करब -साहित्यमे एकटा खास जातिक किछु खास परिवारकेँ मुख्यतया ई पुरस्कार बाँटब -अनुवाद पुरस्कार आदि तकरा देब जे मात्र पुरस्कार लेल एकटा अनुवाद अवहट्ठ-सन कृत्रिम मैथिलीमे केने होथि -दोसर जातिक किछु लेखककेँ आशा दिअबैत रहब जइसँ ओ ‘स्टेटस को’ मे बाधा नै बनथि -सुच्चा मैथिलीक उत्कृष्ट रचनाकेँ सरकारी तंत्रसँ दूर राखब आ अवहट्ठ-सन कृत्रिम मैथिलीकेँ आगू बढ़ाएब -मैथिलीक सिलेबसमे जमींदार आदिक जीवनी अवहट्ठ-सन कृत्रिम मैथिलीमे देब जइसँ जनसामान्य आ सुच्चा मैथिलीक उत्कृष्ट साहित्यक प्रशंसक अपन बच्चाकेँ मैथिलीसँ दूर करएबला अवहट्ठ-सन कृत्रिम मैथिलीक पढ़ाइसँ दूर राखथि, आ जइसँ सरकारी तंत्रक मैथिलीपर हुनकर कब्जा काएम रहन्हि। एकर निम्नलिखित सुखद आ दुखद परिणाम भेलै:- -भारतीय संविधानक अष्टम सूचीमे गेलाक बादो प्राइमरी शिक्षा धरिमे मैथिलीक पढ़ाइ लेल कोनो तरहक इच्छा जनसामान्यमे नै एलै। एकर विपरीत किछु ठाम अवहट्ठ-सन कृत्रिम मैथिलीक पढ़ाइक विरोध भेल, सिलेबसक विरोध भेल। -मैथिलीक समानांतर परम्पराक प्रारम्भ भेलै, जइसँ उत्कृष्ट कोटिक मैथिली साहित्यसँ संसारक परिचए भेलै। -साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागकेँ ओकर कृतज्ञता लेल निर्लज्जतापूर्ण कार्य करबाक लाइसेंसक साहित्य अकादेमी द्वारा नवीनीकरण कएल गेलै। -मूल धाराक साहित्यक स्तर निरंतर नूतन अधम स्तरकेँ प्राप्त करैत गेल। -स्कूल कॉलेजमे मैथिली विभाग छात्र विहीन भ’ गेल, ओतुक्का शिक्षककेँ एन.सी.सी., स्काउट गाइड, प्रोटोकॉल आदि कार्य लेल प्रयोग कएल जेबाक मजबूरी प्रशासन लेल भ’ गेलै। -साहित्य अकादेमी आदि द्वारा प्रकाशित पोथी कृत्रिम मैथिलीमे रहबाक कारणेँ गोदाममे सड़ि गेलै। -मूल धाराक कृत्रिम मैथिलीक पत्र-पत्रिका आ पोथी लोक अपने छापि पुरस्कार लेल अपने पढ़ए लगला। -‘सगर राति दीप जरय’ पर साहित्य अकादेमीक ग्रहण लाग’ लगलै। -सम्पूर्ण सरकारी संरक्षणक बादो मूल धाराक कृत्रिम मैथिली भाषा, ओकर सिलेबस आ ओकर एजेण्डा जनसामान्यसँ दूरे रहल आ ओकरा अपने मध्य कन्नारोहट बढ़ैत गेल। -मैथिली भारतक एकमात्र भाषा भेल जत’ सामानांतर धार फौदाइत रहल आ मूल धार घी-मलीदा खाइत रहलाक बादो मरनासन्न भ’ गेल। साहित्य अकादेमी संपोषित कृत्रिम मैथिली आ ओइमे देल जाएबला पुरस्कारक अवमूल्यनक पाछाँ मैथिलीकेँ मारबाक, आ मैथिलीक माध्यमसँ भेटैबला नोकरी-चाकरी, सुविधा, पुरस्कार आदिपर एकक्षत्र राज्य करबाक, सरकारी-एनजी.ओ.- संस्थाक पाइपर घुमैत-फिरैत खाइ-पिबैक आकांक्षाक पूर्ति करबाक साकांक्ष उद्देशय रहल। आ ई सभ मैथिलीक बदलामे भेल। ई-पत्र आशीष अनचिन्हार दुनियाँ गोल छै तँइ शुरू आत करी बालानां कृतेसँ। शशिधरजीक नीक बाल कविता। हरेक अलग-अलग पक्षीपर। नीक प्रयास। गंगानंदजीक कविता देखि नीक लागल। ऐ कविताक -- सिनेहक सब टूटल माला दगधल करेज भोकल भाला अप्पन जे सब आन भेला सब दुआरि एगो ताला... पाँति सभ बहुत किछु कहि जाइए। नन्द विलास रायजीक कविता "नेताजी" हिंदी चुटकुला अनुवाद अछि। एहने चुटकुला प्रचलित छै। ऐ सभसँ नन्द विलास रायजी दूर हटि मौलिक चिंतनसँ एही विषयपर नीक कविता लीखि सकै छथि। दिलीप कुमार साहजीक स्वागत छनि हिनक दोसर कविता "क्षण भरि..." नीक चिंतन कहल जा सकैए। ऐ कविताक ई पाँति-- बौआसँ आब बुढ़-बुढ़ानुस भेलिऐ हारल झुटका आबो तँ जीत लिअ मैथिली साहित्यमे अमर पाँति अछि। ई पाँति मौलिक चिंतन केर उत्कृष्ट प्रमाण अछि। दिलीप कुमार साह आ विदेह दूनूकेँ बधाइ ऐ पाँति लेल। कामिनी कामायनीजी कविता "अंकोरवट मंदिर" नै बुझबामे आएल। आ अंतमे प्रणव झाजीक धन्यवाद जे हमर व्यंग निबंध केर संदर्भमे सुझाव देला। आगूसँ ई धेआन रहत हमरा। प्रबोध साहित्य सम्मान:श्री केदार नाथ चौधरीकेँ प्रबोध साहित्य सम्मान देल गेलन्हि। बधाइ। हुनकर चारू पोथीक लिंक नीचां देल जा रहल अछि। चमेलीरानी CHAMELIRANI_MAITHILI.pdf माहुर Mahur_KedarnathChaudhary.pdf करार Karar_Kedarnath_Chaudhary.pdf अबारा नहितन विदेहक २०० म अंक: १५ अप्रैल २०१६ केँ विदेहक २०० म अंक ई-प्रकाशित हएत। ऐ मे विदेह सम्मान/ समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मानसँ सम्मानित लेखक आ हुनकर कृतिपर समीक्षा/ निबन्ध प्रकाशित हएत। अहाँसँ रचना सादर आमंत्रित अछि। विदेह सम्मान विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान १.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०१०-११ २०१० श्री गोविन्द झा (समग्र योगदान लेल) २०११ श्री रमानन्द रेणु (समग्र योगदान लेल) २.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११-१२ २०११ मूल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, कथा संग्रह) २०११ बाल साहित्य पुरस्कार- ले.क. मायानाथ झा (जकर नारी चतुर होइ, कथा संग्रह) २०११ युवा पुरस्कार- आनन्द कुमार झा (कलह, नाटक) २०१२ अनुवाद पुरस्कार- श्री रामलोचन ठाकुर- (पद्मानदीक माझी, बांग्ला- मानिक बंद्योपाध्याय, उपन्यास बांग्लासँ मैथिली अनुवाद) विदेह भाषा सम्मान २०१२-१३ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) 1.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार 2012 2012 श्री राजनन्दन लाल दास (समग्र योगदान लेल) 2.विदेह भाषा सम्मान २०१२-१३ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) २०१२ बाल साहित्य पुरस्कार - श्री जगदीश प्रसाद मण्डल केँ “तरेगन” बाल प्रेरक विहनि कथा संग्रह २०१२ मूल पुरस्कार - श्री राजदेव मण्डलकेँ "अम्बरा" (कविता संग्रह) लेल। 2012 युवा पुरस्कार- श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरीक “अर्चिस” (कविता संग्रह) 2013 अनुवाद पुरस्कार- श्री नरेश कुमार विकल "ययाति" (मराठी उपन्यास श्री विष्णु सखाराम खाण्डेकर) विदेह भाषा सम्मान २०१३-१४ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) २०१३ बाल साहित्य पुरस्कार – श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरी- “देवीजी” (बाल निबन्ध संग्रह) लेल। २०१३ मूल पुरस्कार - श्री बेचन ठाकुरकेँ "बेटीक अपमान आ छीनरदेवी" (नाटक संग्रह) लेल। २०१३ युवा पुरस्कार- श्री उमेश मण्डलकेँ “निश्तुकी” (कविता संग्रह)लेल। २०१४ अनुवाद पुरस्कार- श्री विनीत उत्पलकेँ “मोहनदास” (हिन्दी उपन्यास श्री उदय प्रकाश)क मैथिली अनुवाद लेल। विदेह भाषा सम्मान २०१४-२०१५ (समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान) २०१४ मूल पुरस्कार- श्री नन्द विलास राय (सखारी पेटारी- लघु कथा संग्रह) २०१४ बाल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (नै धारैए- बाल उपन्यास) २०१४ युवा पुरस्कार - श्री आशीष अनचिन्हार (अनचिन्हार आखर- गजल संग्रह) २०१५ अनुवाद पुरस्कार - श्री शम्भु कुमार सिंह ( पाखलो - तुकाराम रामा शेटक कोंकणी उपन्यासक मैथिली अनुवाद) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१२ अभिनय- मुख्य अभिनय , सुश्री शिल्पी कुमारी, उम्र- 17 पिता श्री लक्ष्मण झा श्री शोभा कान्त महतो, उम्र- 15 पिता- श्री रामअवतार महतो, हास्य-अभिनय सुश्री प्रियंका कुमारी, उम्र- 16, पिता- श्री वैद्यनाथ साह श्री दुर्गानंद ठाकुर, उम्र- 23, पिता- स्व. भरत ठाकुर नृत्य सुश्री सुलेखा कुमारी, उम्र- 16, पिता- श्री हरेराम यादव श्री अमीत रंजन, उम्र- 18, पिता- नागेश्वर कामत चित्रकला श्री पनकलाल मण्डल, उमेर- ३५, पिता- स्व. सुन्दर मण्डल, गाम छजना श्री रमेश कुमार भारती, उम्र- 23, पिता- श्री मोती मण्डल संगीत (हारमोनियम) श्री परमानन्द ठाकुर, उम्र- 30, पिता- श्री नथुनी ठाकुर संगीत (ढोलक) श्री बुलन राउत, उम्र- 45, पिता- स्व. चिल्टू राउत संगीत (रसनचौकी) श्री बहादुर राम, उम्र- 55, पिता- स्व. सरजुग राम शिल्पी-वस्तुकला श्री जगदीश मल्लिक,५० गाम- चनौरागंज मूर्ति-मृत्तिका कला श्री यदुनंदन पंडित, उम्र- 45, पिता- अशर्फी पंडित काष्ठ-कला श्री झमेली मुखिया,पिता स्व. मूंगालाल मुखिया, ५५, गाम- छजना किसानी-आत्मनिर्भर संस्कृति श्री लछमी दास, उमेर- ५०, पिता स्व. श्री फणी दास, गाम वेरमा विदेह मैथिली पत्रकारिता सम्मान -२०१२ श्री नवेन्दु कुमार झा नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१३ मुख्य अभिनय- (1) सुश्री आशा कुमारी सुपुत्री श्री रामावतार यादव, उमेर- १८, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) मो. समसाद आलम सुपुत्र मो. ईषा आलम, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (3) सुश्री अपर्णा कुमारी सुपुत्री श्री मनोज कुमार साहु, जन्म तिथि- १८-२-१९९८, पता- गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) हास्य–अभिनय- (1) श्री ब्रह्मदवे पासवान उर्फ रामजानी पासवान सुपुत्र- स्व. लक्ष्मी पासवान, पता- गाम+पोस्ट- औरहा, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) टाॅसिफ आलम सुपुत्र मो. मुस्ताक आलम, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, जिला- मधुबनी (बिहार) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान (मांगनि खबास समग्र योगदान सम्मान) शास्त्रीय संगीत सह तानपुरा : श्री रामवृक्ष सिंह सुपुत्र श्री अनिरूद्ध सिंह, उमेर- ५६, गाम- फुलवरिया, पोस्ट- बाबूबरही, जिला- मधुबनी (बिहार) मांगनि खबास सम्मान: मिथिला लोक संस्कृति संरक्षण: श्री राम लखन साहु पे. स्व. खुशीलाल साहु, उमेर- ६५, पता, गाम- पकड़िया, पोस्ट- रतनसारा, अनुमंडल- फुलपरास (मधुबनी) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान (समग्र योगदान सम्मान): नृत्य - (1) श्री हरि नारायण मण्डल सुपुत्र- स्व. नन्दी मण्डल, उमेर- ५८, पता- गाम+पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) सुश्री संगीता कुमारी सुपुत्री श्री रामदेव पासवान, उमेर- १६, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, जिला- मधुबनी (बिहार) चित्रकला- (1) जय प्रकाश मण्डल सुपुत्र- श्री कुशेश्वर मण्डल, उमेर- ३५, पता- गाम- सनपतहा, पोस्ट– बौरहा, भाया- सरायगढ़, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री चन्दन कुमार मण्डल सुपुत्र श्री भोला मण्डल, पता- गाम- खड़गपुर, पोस्ट- बेलही, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) संप्रति, छात्र स्नातक अंतिम वर्ष, कला एवं शिल्प महाविद्यालय- पटना। हरिमुनियाँ / हारमोनियम (1) श्री महादेव साह सुपुत्र रामदेव साह, उमेर- ५८, गाम- बेलहा, वार्ड- नं. ०९, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री जागेश्वर प्रसाद राउत सुपुत्र स्व. रामस्वरूप राउत, उमेर ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) ढोलक/ ठेकैता/ ढोलकिया (1) श्री अनुप सदाय सुपुत्र स्व. , पता- गाम- तुलसियाही, पोस्ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री कल्लर राम सुपुत्र स्व. खट्टर राम, उमेर- ५०, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) रसनचौकी वादक- (1) वासुदेव राम सुपुत्र स्व. अनुप राम, गाम+पोस्ट- िनर्मली, वार्ड न. ०७ , जिला- सुपौल (बिहार) शिल्पी-वस्तुकला- (1) श्री बौकू मल्लिक सुपुत्र दरबारी मल्लिक, उमेर- ७०, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री राम विलास धरिकार सुपुत्र स्व. ठोढ़ाइ धरिकार, उमेर- ४०, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) मूर्तिकला-मृर्तिकार कला- (1) घूरन पंडित सुपुत्र- श्री मोलहू पंडित, पता- गाम+पोस्ट– बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री प्रभु पंडित सुपुत्र स्व. , पता- गाम+पोस्ट- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) काष्ठ-कला- (1) श्री जगदेव साहु सुपुत्र शनीचर साहु, उमेर- ३६, गाम- िनर्मली-पुरर्वास, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री योगेन्द्र ठाकुर सुपुत्र स्व. बुद्धू ठाकुर उमेर- ४५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) किसानी- आत्मनिर्भर संस्कृति- (1) श्री राम अवतार राउत सुपुत्र स्व. सुबध राउत, उमेर- ६६, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) (2) श्री रौशन यादव सुपुत्र स्व. कपिलेश्वर यादव, उमेर- ३५, गाम+पोस्ट– बनगामा, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) अल्हा/महराइ- (1) मो. जीबछ सुपुत्र मो. बिलट मरहूम, उमेर- ६५, पता- गाम- बसहा, पोस्ट- बड़हारा, भाया- अन्धराठाढ़ी, जिला- मधुबनी, पिन- ८४७४०१ जोगिरा- श्री बच्चन मण्डल सुपुत्र स्व. सीताराम मण्डल, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री रामदेव ठाकुर सुपुत्र स्व. जागेश्वर ठाकुर, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) पराती (प्रभाती) गौनिहार आ खजरी/ खौजरी वादक- (1) श्री सुकदेव साफी सुपुत्र श्री , पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) पराती (प्रभाती) गौनिहार - (अगहनसँ माघ-फागुन तक गाओल जाइत) (1) सुकदेव साफी सुपुत्र स्व. बाबूनाथ साफी, उमेर- ७५, पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) (2) लेल्हु दास सुपुत्र स्व. सनक मण्डल पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) झरनी- (1) मो. गुल हसन सुपुत्र अब्दुल रसीद मरहूम, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) (2) मो. रहमान साहब सुपुत्र...., उमेर- ५८, गाम- नरहिया, भाया- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) नाल वादक- (1) श्री जगत नारायण मण्डल सुपुत्र स्व. खुशीलाल मण्डल, उमेर- ४०, गाम+पोस्ट- ककरडोभ, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री देव नारायण यादव सुपुत्र श्री कुशुमलाल यादव, पता- गाम- बनरझुला, पोस्ट- अमही, थाना- घोघड़डीहा, जिला- मधुबनी (बिहार) गीतहारि/ लोक गीत- (1) श्रीमती फुदनी देवी पत्नी श्री रामफल मण्डल, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) (2) सुश्री सुविता कुमारी सुपुत्री श्री गंगाराम मण्डल, उमेर- १८, पता- गाम- मछधी, पोस्ट- बलियारि, भाया- झंझारपुर, जिला- मधुबनी (बिहार) खुरदक वादक- (1) श्री सीताराम राम सुपुत्र स्व. जंगल राम, उमेर- ६२, पता- गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री लक्ष्मी राम सुपुत्र स्व. पंचू मोची, उमेर- ७०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) काँरनेट- (1) श्री चन्दर राम सुपुत्र- स्व. जीतन राम, उमेर- ५०, पता- गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) मो. सुभान, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) बेन्जू वादक- (1) श्री राज कुमार महतो सुपुत्र स्व. लक्ष्मी महतो, उमेर- ४५, गाम- िनर्मली वार्ड नं. ०४, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री घुरन राम, उमेर- ४३, गाम+पोस्ट- बनगामा, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) भगैत गवैया- (1) श्री जीबछ यादव सुपुत्र स्व. रूपालाल यादव, उमेर- ८०, पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री शम्भु मण्डल सुपुत्र स्व. लखन मण्डल, पता- गाम- बढियाघाट-रसुआर, पोस्ट– मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) खिस्सकर- (खिस्सा कहैबला)- (1) श्री छुतहरू यादव उर्फ राजकुमार, सुपुत्र श्री राम खेलावन यादव, गाम- घोघरडिहा, पोस्ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जिला- सुपौल, पिन- ८४७४५२ (2) बैजनाथ मुखिया उर्फ टहल मुखिया- (2)सुपुत्र स्व. ढोंगाइ मुखिया, पता- गाम+पोस्ट- औरहा, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) मिथिला चित्रकला- (1) सुश्री मिथिलेश कुमारी सुपुत्री श्री रामदेव प्रसाद मण्डल ‘झारूदार’ पता- गाम- रसुआर, पोस्ट-– मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) (2) श्रीमती वीणा देवी पत्नी श्री दिलिप झा, उमेर- ३५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) खजरी/ खौजरी वादक- (2) श्री किशोरी दास सुपुत्र स्व. नेबैत मण्डल, पता- गाम- रसुआर, पोस्ट-– मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) तबला- श्री उपेन्द्र चौधरी सुपुत्र स्व. महावीर दास, उमेर- ५५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री देवनाथ यादव सुपुत्र स्व. सर्वजीत यादव, उमेर- ५०, गाम- झाँझपट्टी, पोस्ट- पीपराही, भाया- लदनियाँ, जिला- मधुबनी (बिहार) सारंगी- (घुना-मुना) (1) श्री पंची ठाकुर, गाम- पिपराही। झालि- (झलिबाह) (1) श्री कुन्दन कुमार कर्ण सुपुत्र श्री इन्द्र कुमार कर्ण पता- गाम- रेबाड़ी, पोस्ट- चौरामहरैल, थाना- झंझारपुर, जिला- मधुबनी, पिन- ८४७४०४ (2) श्री राम खेलावन राउत सुपुत्र स्व. कैलू राउत, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) बौसरी (बौसरी वादक) श्री रामचन्द्र प्रसाद मण्डल सुपुत्र श्री झोटन मण्डल, उमेर- ३०, बौसरी/बौसली/बासुरी बजबै छथि। पता- गाम- रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) श्री विभूति झा सुपुत्र स्व. कनटीर झा, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- कछुबी, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) लोक गाथा गायक श्री रविन्द्र यादव सुपुत्र सीताराम यादव, पता- गाम- तुलसियाही, पोस्ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) श्री पिचकुन सदाय सुपुत्र स्व. मेथर सदाय, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) मजिरा वादक (छोकटा झालि...) श्री रामपति मण्डल सुपुत्र स्व. अर्जुन मण्डल, पता- गाम- रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) मृदंग वादक- (1) श्री कपिलेश्वर दास सुपुत्र स्व. सुन्नर दास, उमेर- ७०, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री खखर सदाय सुपुत्र स्व. बंठा सदाय, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) तानपुरा सह भाव संगीत (1) श्री रामविलास यादव सुपुत्र स्व. दुखरन यादव, उमेर- ४८, गाम- सिमरा, पोस्ट- सांगि, भाया- घोघड़डीहा, थाना- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) तरसा/ तासा- श्री जोगेन्द्र राम सुपुत्र स्व. बिल्टू राम, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री राजेन्द्र राम सुपुत्र कालेश्वर राम, उमेर- ५८, गाम- मझौरा, पास्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) रमझालि/ कठझालि/ करताल वादक- श्री सैनी राम सुपुत्र स्व. ललित राम, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री जनक मण्डल सुपुत्र स्व. उचित मण्डल, उमेर- ६०, रमझालि/ कठझालि/ करताल वादक, १९७५ ई.सँ रमझालि बजबै छथि। पता- गाम- बढियाघाट/रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, जिला- सुपौल (बिहार) गुमगुमियाँ/ ग्रुम बाजा श्री परमेश्वर मण्डल सुपुत्र स्व. बिहारी मण्डल उमेर- ४१, १९८० ई.सँ गुमगुिमयाँ बजबै छथि। श्री जुगाय साफी सुपुत्र स्व. श्री श्रीचन्द्र साफी, उमेर- ७५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) डंका/ ढोल वादक श्री बदरी राम, उमेर- ५५, पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) श्री योगेन्द्र राम सुपुत्र स्व. बिल्टू राम, उमेर- ५५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) डंफा (होलीमे बजाओल जाइत...) श्री जग्रनाथ चौधरी उर्फ धियानी दास सुपुत्र स्व. महावीर दास, उमेर- ६५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री महेन्द्र पोद्दार, उमेर- ६५, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) नङेरा/ डिगरी- श्री राम प्रसाद राम सुपुत्र स्व. सरयुग मोची, उमेर- ५२, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 111 ७) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 ८) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 ९) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 १०) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 ११) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ Maithili Books can be purchased from: http://www.amazon.in/ For the first time Maithili books can be read on kindle e-readers. Buy Maithili Books in Kindle format (courtesy Videha) from amazon kindle stores, these e books are delivered worldwide wirelessly:- http://www.amazon.com/ अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। गजेन्द्र ठाकुर ggajendra@videha.com २. गद्य २.१.अब्दुर रज्जाक-१.२ टा प्रेम बिहैन कथा २. १ टा राजनैतिक बिहैन कथा २.२.कामिनी कामायनी- सेयाम रेयापक स्वर्णिम अतीत (यात्रा वृत्तान्त) २.३.आशीष अनचिन्हार- गाम के अधिकारी तोहे बड़का भैया हो (आलोचना) २.४.१.विन्देश्वर ठाकुर १. एकटा राजनैतिक विहनि कथा २.एकटा प्रेम विहनि कथा २. मुन्नाजी-प्रेम विहनि कथा- सेल्फी अब्दुर रज्जाक (धनुषा हरिपुर)- १.२ टा प्रेम बिहैन कथा २.१ टा राजनैतिक बिहैन कथा १ २ टा प्रेम बिहैन कथा १. ई बात उइखक आइर पर सं इदिया कहैत रहला की- "हमहूं एक दिन दिबाना रही अहापर आश रखने छलौ। सिहकैत हावा के झोका संग दिलक हाल सुनाबै छलौं।" किछ भितर उइखक खेत सं जुलेखाक आवाज आइल- " अगर अहां मस्त हावा के झोकामे अपन दिलक हाल सुना देलियै लागल हमरो दिल मे एना हमहू दिलक चाभी किनको थमा देलियै" इदिया बाजल- "हमरा एना लगैया अहा ककरो बाट जोहै छी" जुलेखा "ओकर झुठा वादा कऽ के, हरेक ईदक दिन अइठाम आबि कऽ भेटबाक प्रयासरत रहै छी, मुदा उ बेवफा लगैयऽ, मात्र तीन साल भऽ गेल, नै मिलैयऽ/" इदिया- "आइ तऽ ईद छलै, दुनिया के रंगीनता कें छोड़ि कऽ कैला सुनसानमे नुकाइल छी?" जुलेखा कहलनि- "ईदक दुनियाबी रंगीनता दिलक रुखा-सुखापन कें नै रंगीन कऽ सकैयऽ, अगर इहे बात अहां कें पूछी तऽ?" --"दुनिया के रंगीनतासं हमरो खास नौता नै, आइ काइल एकान्तता सेहे मित्र भेल जाइयऽ, अहांक उदासीक कारण पूछू तऽ?" तमसाइल आवाजमे- "अहां हमरा एहन प्रश्न करनिहार के? अहांकें जतऽ जेबाक अछि जाउ, किए हमरा एहन बात सब पुछलौं?" मुदा सुनसान वातावरणकें चिरैत फेन आवाज आइल- "ओकर वादासं बेचैनी अछि/" इदिया- "वादा करऽबला सब बेवफा मात्र किन्नो नै भऽ सकैयऽ, ई सच अछि/ कियो समयसं पैघ आ अटल अछि/ किस्मत ओकरासं किछ आरो अगाअछि/" -" समय के घुंघट आ किस्मत के पर्दा सं बादा कें किए झपने गेल उ/ " बहुत जोर सं चिचिया कऽ आबाज आइल, संगे आवाज कम होइत गेल- "बेवफाइ, वादा-खिलाफी/ भाग्यसं आगां मौत अछि, जं इहे संग लागि गेल तऽआरो की?" जुलेखा उइखसं बाहर भऽ देखऽ चाहलक तऽ इदियाक रूहके हमशकल दूर चलि गेल रहै/ आवाज सुनाइ दैत रहल से -"जन्नतमे जरुर आइब, प्रेम जिबित रहबे करत/" मुदा जुलेखा कें देल घड़ी आइर पर फेकल रहै, जे ता-कयामत तक इन्तजार करैत रहल, संग इदियाकें देल प्रेम-पत्र आइयो ओहने अछि। २. -बड़ सुन्दर आइ लगै छें गै -झुठ्ठा गारी दऽ देबौ -है साँचे कहै छियौ -लोक देखै है, अगा चल कनी बाद मे कहबौ - हं तऽ लोक देख कऽ कथी कऽ लेतै देखऽ नऽ दहिन -बादमे देखबे करतै अगां के बात सब तऽ -जो-जो, गे दैया जो न अगां, नै तऽ हल्ला कऽ कऽ बजबौ, से कहिये दै छियौ -कथी बजबें अखैन बाज नऽ -हं, बादमे मुंहगोतिहें नै, हम भखारु मल्लिक (डोम) कें बेटी छी कि डोमिनिया सं प्रेम नै छुयेतौ तऽ कह आ संगे बैस आ प्रेमक बात कर। आब आ नऽ नजदीक/ हिर्दये सं घिर्ना भऽ गेलौ/ चलियौ तोरा घरे जाइ देबहीं, गोसांइ घरमे ,हड्डी तऽ नै छुयेलौ, हमरा संग चलबे तऽ चल हमरा घरे -है, धीरे सं बोल नऽ, बफाइर तोरै छें, हल्ला नै कर, अते दिन सं कहियो कैला नै कहलें से अपन सब कुछो -जो आब, प्रेम हमर अपवित्र रहै तै सऽ ई दिवार जाइतक तोरा सुझा गेलौ २ राजनैतिक बिहैन कथा हरिपुरक बिजुलिया कमाइला दिल्लीमे १० बर्ष बितौलक। बचपन मे गेल बिजुलिया ओइठाम बिहारक चानन क निबासी सैदुलके छोटकी बेटी अमीनासंनिकाह करा लेलक। बिजुलिया अपना सं बेसी प्रेम अमीनासं करै छल। दिन समयके दोष, घरमे बूढ़ माईबाबूके उमेर बहुत भेलाक कारण फोनपरबिजुलिया कें ’आइब जो बउवा आब नै चल सकैयै छियौ खेत-पथार, जायला बहुत तकलीफ होइए’ नित्ये कहऽ लागल। फैक्ट्रीके चौकीदार के नौकरीकेंछोड़ि कऽ अमीना कें लऽ कऽ बिजुलिया चलल अपना गाम दिस। ओना ओकरा नेपालक कानून सब के जानकारी नै छल मुदा मधेशक आंदोलन संमधेशी के अधिकार ला उठल नाराजुलुश भऽ रहल बात अरुण कहने छल दिल्लीमे। जं- जं दिल्लीके दुरी हरिपुर सं लग होइत गेल मधेशक आन्दोलनक चर्चा-परिचर्चा बिजुलिया के जानकारी बढ़ाबैत गेल। जयनगरक रेल सं उतरैत बिजुलिया अपना देशक नेपाल रेलबे-सेवा देखबैत कनियाँ के कहलक जे येहे अछि हमरा देशक रेलसेवा। बढ़का-बढ़का रेल देखनिहार बिजुलियाक कनियाकें रेल देखते झुझुवाउन तं लागि गेल मुदा जेबाक तं ओही देशमे अछि। जनकपुरक रेलक प्लेटफॉर्म पर जब दुनू बेगैत उतरल तऽ देखलक लोग अनेकन नारा-जुलुशमे। कहैत रहे जे मधेसी एकता, "जिंदाबाद", 'मधेशी के मांग --पूरा कर " नाराजुलुश के एहन आवाज कें सुनि कऽ एगो भला आदमी सन मनुख कें बिजुलिया पुछलक- "हौ कथीक नारा जुलुश अछि?" भला-आदमी कहलक- "अपने के घर कतऽ भेल?" "नेपालमे हरिपुर"/ भला आदमी फेन सं पुछलक " अपने कऽ कनियाँ अछि ई की ?" "हं, हम की पुछ्लौं तेकर जवाफ नै देलियै, खाली हमरे सं पूछै छियै?" -" जेहए, कन्या की भारत के छौ? " बिजुलिया कहलक " हं "/ भला-आदमी जवाब देलैन- "ई अधिकारक आंदोलन अछि, आब अहाँक कनियाँक नागरिकता वैवाहिक अंगकृत भेलेपर नागरिकता पाओत। जेकर परिणाम अहां के जे बउवा हेतै तेकरो अंगकृत नागरिकता मिलतै जै सं नेपालक उच्च पद पर कहियो, कतनो बचबा पढ़ने लिखने रहत तऽ, उ नेपालक पैघ नेता हाकिम नै बैन सकत/ तइ सभक विरोधमे ई आंदोलन जिंदाबाद-मुर्दाबाद भऽ रहल अछि। बिजुलिया कें बिजली सं जेना झटका लगैया, तेना लागल मनमे। कनिया दिस तकैत सोचैत रहल जे आब की करू, फेन दिल्ली लौट जाउ? कनियाँक बैबाहिक अंगकृत नागरिकता आ होमऽ बला बच्चाक अंगकृत नागरिकताक चिन्ता होमऽ लागल। मुदा जुलुश लगैते रहल -अंगकृत नागरिकता खारिज कर। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। कामिनी कामायनी सेयाम रेयापक स्वर्णिम अतीत (यात्रा वृत्तान्त) धन धान्य स लबालब ,ऊंच ऊंच ,मोटका मोटका विशाल बिरिछ सबहक छाहरि मे ,नदी सब के मृदु जलक मध्य ,सुस्ताति, अलसायल ,कनी सुतल ,कनी जागल,प्राचीन सभ्यता के अतुल्य भार अपन छाती प रखने ,धरती के ई टुकड़ा ,विश्व के समक्ष अपन सबटा रहस्य खोलबा के लेल बेकल , विह्वल भ यात्री सभक प्रतीक्षा करि रहल अछि,यात्रीगण पर्याप्त संख्या मे अबितौ छथी । चारहू दिस पसरल,कुहरैत,विभत्स, निर्धनता ,अपन देशक कोनो रेलवे स्टेशन सन एयर पोर्ट ,लोकक आंखि मे संहियायल सन्नाटा, कोनो गहीड़ व्यथा के अकथ भूमिका मे डूबल सन लागल,त मोन मे हठात सहस्त्रों प्रश्न उठब स्वाभाविक छल ,अतेक पिछड़ल ,एहेन सकुचल वर्तमान वाला भूमि ,आखिर अजस्त्र प्रकृतिक सम्पदा स परिपूर्ण कोना ? अनेकों अही भांति के प्रश्न के मोन के कोनो कोन मे विराम दइत ,होटल आबि कनी विश्राम करबा लेल विवश भेलहू। दिन के साढ़े चारि बाजि रहल छल । अन्य पर्यटकक पसंदीदा सवारी टुकटुक लेलहू,आ गाईड के सलाह अनुसार मंदिरक एक छोट सन परिक्रमा लेल अग्रसर भेलहू। मंदिर के गेट धरि पहुंचैत पहुंचैत पाँच बजबा मे दस मिनट बाकी ।टिकट 40 डौलर प्रति व्यक्ति ,,मुदा तीन दिन धरि भ्रमण करब के अनुमति । पाँच बजे भोर स पाँच बजे सांझ धरि मंदिर के समय निर्धारित छैक। अहि धरती प पएर रखबा स पहिनहि स बूनि पड़ी रहल छल ,से जिद्दी बालक सन ठुमकैत रहि गेल छल भरि दिन ,ओहि मौसम मे टुकटुक प बइसल बइसल पघिलैत मेघ मे भिजैत अतीत के भव्यता स्मरण करैत मंदिर मंदिर देखैत रहलहू । शाकाहारी भोजन लेल शहरि के चीरेत,महाराजा होटल पहुचय मे परंपरागत दोकान सबहक भव्य झांकी बड़ सुखमय दृश्य प्रस्तुत करि रहल छल । हिन्दी भाषि होटल मालिक के हर्षित भ पुछलिय भारतीय छी? “ नई पाकिस्तान,पंजाब केर”। एक क्षण लेल विचलित मोन भेल ,पाकिस्तान त भारते छलय नै,खेनाय पिनाय सेहो एके । जे से । दोसर दिन अंकोरवट मंदिर आ म्यूजियम के कार्यक्रम बनल । मंदिरक टिकट कीनिए नेने रहि ,समय बचल ,विशाल अँकोरवट परिसर के परिक्रमा करबा लेल विश्व के प्राय सब कोना के लोग जुटल। [किछूयात्री त कएक दिन ,बल्कि महीनों स ओत्तय डेरा जमौने छल, अहि सभ्यता आ इतिहासक अनुसंधान करयवाला ,लेखक ,विद्यार्थी छथी ।] खमेर युग के स्वर्णिम कालक प्रतिनिधित्व करैत भीषण अरण्य मे ठाढ़ ,विश्व हेरिटेज मे शामिल ,अहि परिसर मे अंकोरवट मंदिर विश्व के सबस विशाल आ विस्तृत मंदिर अछि .सरिपहू मे अजगुत अछि , ,वास्तु,शिल्प कला के बेजोड़ प्रमाण ।नीक जका सुरक्षित रखल गेल अछि राजा सूर्य बर्मन द्वितीय द्वारा ,1,950,000,स्क्वायर मीटर, आने कि195 हेक्टेयर जमीन प बनाओल ई मंदिर प्रारम्भ मे हिन्दू देवता विष्णु के समर्पित कएल गेल छल,कालांतर मे बौद्ध धर्मक शरण मे चलि गेल । दोसर पईघ मंदिर अछि ,बायोन टैम्पल –महायान बौद्ध मंदिर सब मे ई सबस पैघ,अछि ,एकरा अँकोर थोम के मध्य मे बनाओल गेल छल ।तेसर ता प्रोम टैम्पल ,पर्यटकक सबस बेसी ध्यान आकर्षित करैत अछि ।समय व काल द्वारा उपेक्षित रहलाक कारणे मोटका मोटका विशाल बृक्ष सब मंदिरभवन ,आँगन के चीर क अपन प्रभाव स्थापित कय नेने अछि ।अहि मे मोट मोट ,लंबा लंबा अजोध साँप सब सेहो अड्डा जमौने अछि । आब एकर देख भाल बड़ सावधानी स कयल जा रहल अछि ,जाहि स मंदिर ढांचा के कोनो क्षति नहि पहुचे। बेकोंग मंदिर पिरामिडक शक्ल मे बनल भगवान शिव के समर्पित अछि ।मंदिर के प्रवेश द्वार सात मुंह वाला नाग सब स संरक्षित अछि । अनेकों देश एकर पुनरुत्थान लेल मददि कय रहल अछि । अहि क्रम मे भारत सरकारक पुरातत्व विभागक बोर्ड सेहो लागल देखल जा सकैत अछि । अनेकों ठाम यूनिसेफ के मददि स जीर्णोद्धार के काज भ रहल छै। किछू मंदिरक सिडही बड्ड उंच उंच ,नहि जानि ओहि प लोक कोना आराम स चढ़ैत होयत ,पर्यटकक सुविधा लेल अनेक ठाम लकड़ी के सुविधा जनक सिडही बनाओल गेल अछि । कतेको भूमिगत छिड़ियायल पाथरि कोनो समय मे भरल पूरल उल्लसित पूजनीय देव स्थल छल। अनेक ठाम ओहि प्राचीन पाषाण ईट के जोडि क कोनो प्राचीन ढांचा के रूप देल जा रहल छल । भवन के छत ,छज्जा प मोट मोट हरियर हरियर मखमली काही जमल छल , बड़ सोहनगर लगैत छल ।एक ठाम पुलक दुनु कात अनेकों यक्ष यक्षिणी के डाढ़ धरि मूर्ति सब, किछू साबूत,किछू भांगल ,किन्स्यात ओ कोनो किला के मुख्य दरवाजा रहल हेतैक। अप्सरा ,नाग ,हाथी ,शेर ,कमल दानव आदि के मूर्ति ,व भित्ति चित्र स कोना कोना आच्छादित अछि ।किछू मंदिर मे महात्मा बुद्ध के पीत वस्त्र पहिरा क हुनका समक्ष पुष्प अगरबत्ती राखल छल । किछू स्त्रीगण सब ,पर्यटक स फूल अगरबत्ती खरीदबा के अनुग्रह सेहो करैतछल । एक मंडिल के प्रांगण मे एक पुजारी सन लोक चादरि प बैस क किछू कन्या सभक हाथ मे ताग बन्हि रहल छल । मंदिर आ स्तूपक ई स्थान जादू ,टोना ,तंत्र ,मंत्र के आधिपत्य मे सेहो बड़ बेशी समाहित छल“[किन्स्यात एखनों] हिन्दू धर्म के प्रायः गणमान्य देवी देवता साबहक पाथरि प उत्खनन ,आ मूर्ति ,ई साबित करबा लेल पर्याप्त अछि जे एक समय ओतय हिन्दू धर्म के डंका बाजि रहल छल ,तदुपरान्त बौद्ध धर्म के प्रधानता भ गेल ॥महात्मा बुद्ध के जन्म स निर्वाण धरिक कथा ,जातक कथा ,के बड़ निक जका अनेक ठाम भित्तिचित्र मे ,प्राचीर मे दर्शाओल गेल अछि ।तीन दिन पर्याप्त अछि नीक जका घुमबा लेल ,ताही स तीन दिनक टिकट दईत छैक । मुदा हमारा सब लग समयक अभाव छल । सेयाम रेयप कोनो समय खमेर राज्य क राजधानी छल । हजारों हजार स्वर्ण मुद्रा खर्च करि क एकर निर्माण भेल छल ,आय अहि देशक अर्थ व्यवस्था एकरे काँध प अछि ,कंबोडिया लोक अँकोरवट के मंदिरे देखय अबैत अछि ,आ पर्यटन उद्योग स आम जन जीवन अपन जीवन यापन करैत अछि । अन्य देशक बनिस्पत ई देश बड़ सस्त,चीज बोस्त,गाड़ी ,होटल ,खेनाय ,स्पा ,मालिश ,सब किछू । बेशी संख्या धिया पूता के ,जवान लोक के ,बुढ़बड्ड कम ,देखाय पड़ल । तेसर दिन सेयाम रेयप के दोसर धरोहरि फ्लोटिंग विलेज के लेल प्रस्थान कएल। ड्राईवर चेन के गाम उमहरे छल ,ओ अप्पन गाम सेहो देखेबाक चाहैत छल । ओतुका गाम के देखबा के लालसा हमरो उद्दाम भ चुकल ,अविलंब ओकर प्रस्ताव स्वीकार कयलहू ।गाम एखनहु अपन अतीत के गरा लगौने ठाढ़ छै। कच्ची सड़क ,[जेकरा पक्की बनेबाक सरकारी प्रयास भ रहल छैक]के दुनु कात लहलह करैत धान क फ़सील रोपल जा रहल छल,सड़क पर कनिए दूर निकलला प ओकर भाय एक गोट स्कूटर प बइसल अपन संगी संग विपरीत दिस स आबि रहल छल ।चेन के दिस तकैत,मुसकैत । गाड़ी रोकि क ओ अप्पन पहिरलहा चमड़ा के नीकहा चप्पल भाई के दैत हमारा सब स बाजल ,ई हमर छोट भाय अछि’ ,आ अप्पन पर्स खोलि किछू टाका सेहो देलके।हमहु सब किछू ओतुका करेंसी देलियै। कनिए दूर आगु चलला के बाद ,बीच खेत स ,नितांत कच्ची {पुरना जमाना के बैल गाड़ी वाला रास्ता}देखा ,चेन कहलक पंदरह बीस मिनट पैदल चलय पड़त हम्मर गाम धरि,ओतय गाड़ी नहि जा सकैत अछि । ओहि ऊब्बड खाबड़ सड़क पर अहिना हमर मोंन परेशान ,शरीर अशोथकित भ गेल छल । आब हिम्मत नहिं,पैदल चलबा के । हमर मना केला के बाद ओ बाट घाट के घर सब देखबैत जेना गाईड बनि गेल । सड़क बनि रहल छै,जे प्रगति के सूचक छै ,बिजली के खंभा दूर दूर धरि नजरि आबैत छै ।अपना सब दिस के मचान सनक छोट छोट फूसक घर ,नीचा लकड़ी वला गाड़ी ,माल जाल ,,ऊपर सीढ़ी चढ़ि लोकवेद रहैत अछि ।घरक ,देवाल चार ,किछू फूसक ,किछू ताड़क खजूरक पत्ता के । किछू पक्का के सेहो । कहलक ओ “ अहि ठाम बड़ बारिस होय छैक ।,बरसा के मौसम मे ई सब ईलाका पानि मे डुबि जाय छै ।,ताहि लेल अहि ठाम बांसक,लकड़ीक एहेन घर बनाओल जाय छैक ।किछू खेत मे मिरचाई के पौधा लागल छल,कत्तेक ठाम बत्तकक फार्म छल ।किछूघर मे बइसल ज़नानी सब बांस के ,खजूरके पात स सामान बनबै छल ,जे खुजल दरबज्जा स ओहिना देखाय पड़ी रहल छल । दूर दूर धरि पसरल बाध ,एक टा खेत मे किछू स्त्रीगण पुरुख बड़का बड़का हैट पहिरने धान रोपि रहल छल । हमरा फोटो झिकैत देखि क ठठा क हंसल छल । कच्ची सड़क पाँच दस कोशक बाद पक्की सड़क मे एकाकार भ चुकल छल ।सड़क क कात वएह झोपड़ी सन घर व दोकान ,मुदा सब ठाम पानिक बोतल ,भांति भांति के लाल ,पियर,हरियर ,चिप्स व बिस्कुट के पैकेट । पर्यटकक सुविधा के चीज सब ।,हाँ , कतेको ठाम दु लीटर, पाँच लीटर के बोतल मे पेट्रोल ,डीजल बिकाईत छल । आगा ,जंगल झाड स बढ़ैत गाड़ी एकटा,गुमती लग रोकलक ,जतय25 डौलरक प्रति टिकट खरीदय पड़ल। जाबैत चेन टिकट लैत छल ,पाँच सात टा, सात स दस बरखक बच्चा सब गाड़ी के चारो कात स घेर लेलक ,हम एक टा फोटो खिचलिये ,त सब फटाफट गाल प,माथ प हाथ राखि ,पोज बना क ठाढ़ भ गेल । एक टा कन्या के हाथ मे पारदर्शी प्लास्टिक मे जीवित कछुआ छले,हॅलो हॅलो करैत ओ खरीदबा के ईसारा करय लगल ,आन बच्चा सब सेहो तरहत्थी पसारि देलके।चेन बड्बड़ाय लागले ,बाहरि आदमी सब केकरा सब के भिखमंगा बना देलके । कनिए दूर स नदी के सोर सुनाई पडैट छल । नदी के कात खूब चहल पहल ,नाव ,जहाज ,मल्लाह पैलवार ,पर्यटक सब । एक टा जहाज मे बैस क नदी के लंबाई मे यात्रा सुरू भेल । करीब आधा घंटा लागल ,फ्लोटिंग विल्लेज मे प्रवेश कयलहू ।आजूक युग मे इहो संभव छैक की? पानि के ऊपर बसल संसार ,बांस ,लकड़ी ,सब के बन्हि छिन्ह क बनल ,जल प तैरेत घर ,दोकान,पुरातनता के संग ,आधुनिकता सेहो घेंट मे घेंट मिलौने । जहाज क कैप्टन अपन जहाज के ओहि ठाम रोकलक ,जे एक टा पइघ दोकान सन छल,खेबा पीबा के ,चीज बोस्त खरीदबा के ,बाथरूम आदि के सुविधा स परिपूर्ण ।ओहि घर स सटल लकडी के पोखरा पाटन घर सन दू मंज़िला घर छल ,जाहि मे नीचा जाल स घेरल छल ,कतेक रास छोट पइघ मगरमच्छ सब ओतय विश्राम के मुद्रा मे निढाल भ पड़ल छल । एक टा दोसर घर मे नाइलोनक जाल सन दु टा बांस के खंभा मे बांहल छल ,जाहि प एक गोट स्त्री सुतल छली ,कत्तों कोनो स्त्री अपन आठ नौ मासक तंदुरुस्त बच्चा के लोईक लोईक क खेला रहल छल ॥ कियो रस्सी बुनेत ,कोनो कोनो दिनचर्या मे लगल ।एक ठाम दु घरक़ बीच पानि प जाफरी सन बनल ,ओहि मे मच्छरदानी लागल ,बत्तक ,आदि मजा स तैर रहल छल ।कुकुर सेहो छल । आवागमन के लेल प्राय सब के अपन अपन नाव ,छैक,चर्च ,स्कूल ,हेयर कटिंग सैलून ,अस्पताल सेहो सब छैक । टूटल भांगल अंगरेजी बाजिक अपन रोजी रोटी कमा रहल अछि । कोनो समय मे ई ईलाका कोनो राजा के नुकेबाक स्थान छल। नदी प डोलैत ओ गाम आदिम मनुखक कथा जेना कही रहल हो। पानी मे रहनाय कष्ट कारक त छइए। ओतुका पानि बड़ गंद,शिक्षा के स्तर त पूरे देशे मे खराप छै,तखन ओतुक्का गप्पे की । आपसी मे बड़ कम समय{12मिनट} पाँच बजवा मे बचल रहे ।सब किछू पाँच बजे बन्न भ जाय छै। बाटे मे वार म्यूजियम छल , काउंटर प ठाढ़ लड़की साढ़े पाँच तक खुलल रहबा के कही क टिकट काटि देने छल । वार मेमोरियल – हमरा सब के अलावा दस टा आर पर्यटक अहि धोका मे भीतर चली गेल रही ,सरकारी गाईड अपन टुटल,तोतराईल अंगरेजी मे देशक भीषण दुर्भाग्यक बखान करैत[,युद्ध के बाद इमहर ओमहार छितरायल सबटा लड़ाकु विमान ,हथियार सबके एक ठाम एक टा घेरल मैदान मे राखी देल गेल अछि ,आ एक कात किछू एकचारी जका बनल घर मे युद्ध के विभीषिका के जीवित तस्वीर सब ,लगाओल गेल छै]कोन बम के कतेक मारक क्षमता छल ,माईनिंग ब्लास्ट मनुक्ख लेल कतेक खतरनाक ,छोटका बम ,बड़का बम ,सैनिक के वस्त्र , क्रांति करि सबके कारी कारी परिधान । ओ बाजि रहल छल ,हमर देशक सीधा सादा किसान ,जे अतुका उर्वर माटि पानि मे अन्न उपजा क हंसी खुसी अपन जीवन जीबैत छल ,मुदा ओकर मुंहक अन्न छीन क ई सब हथियार ,टैंक ,प्रशिया ,रसिया ,चीन स मंगाओल गेल ,जखन युद्ध समाप्त भेल अतुका जंगल ,झाड ,बियाबाँ ,खेत ,मे लावारिस एकरा सब के आनि राखल गेल ,ई हमर देशक बरबादी के ,कथा कहि रहल अछि ।ओ सब जतेक नर संहार केलक धनक अपव्यय केलक ,देशक डाढ़ टुटले अछि । बिशेख किछू देखबा स पहिनहि समय समाप्त भ चुकल छल । तेसर दिन कल्चरल विल्लेज देखल -15 डालर प्रति व्यक्ति ,प्राचीन वास्तु शिल्प के प्रदर्शित करैत । सबटा कार्यक्रम दुपहर ढाई बजे स प्रारम्भ होईत छैक। एखन साढ़े एगारहे बाजि रहल छल।अहि स्वर्णिम समय के ओहि भव्य इमारत परिसरक परिक्रमा मे लगेबाक प्रयास मे आगा बढ़लहू त देखलहून ,हमारा सब संग संसार ससरि रहल अछि ,पर्यटकक बड़ निक उपस्थिति छल । चारि पाँच टा त थिएटरे छल ,न्यू थियेटर ,मिलेनियम थियेटर आदि । सांस्कृतिक गाँव ,जेना कि ओकर शब्दार्थ मे निहित अछि ,अपन सबटा ऐतिहासिक संपदा के एक ठाम सहेजने विश्व समुदाय के आश्चर्य चकित करबा के लेल उत्सुक अछि ।सन 2001 मे बनल आ 2003 मे जनता के लेल खुजल अहि थीम पार्क के 210,000 स्क्वेयर मीटर मे बनाओल गेल अछि जाहि मे एगारह टा ग्राम ,सब युगक अपन अपन रीति रिवाजक संग । संग्रहालय मे ,बुद्ध,के अनेक प्रतिमा ,शिवलिंग ,विष्णु ब्रम्हा ,अप्सरा हाथी ,बाघ ,प्राचीन जनजाति ,आदि के भव्य मूर्ति बड़ नीक प्रकार स लगाओल गेल अछि । चीनी विलेज ,खमेर विलेज आदि के नङ्घैत हम सब फ्लोटिंग विलेज पहुंचलहू। जलाशय मे बनल काष्ठ के विस्तृत घर ,पुल,भवन आदि ,मूल स बड़ बेशी सौन्दर्य वान लागि रहल छल । ठामे ठाम नयनाभिराम ,मनोरम मूर्ति ,मनुक्ख ,जानवर सब के बनल जे ओहि देशक संस्कृति के उद्योतक अछि । एक ठाम धरती मे छाती धरि धंसल,दुनु हाथ ऊपर उठौने दु टा भीमकाय पुरुषक मूर्ति छल ,जेकर एकटा के मुंह पर असीम वेदना ,आ दोसर के प्रकांड प्रसन्नता बड़ आकर्षित करि रहल छल ।बड़का गुरिल्ला जेकर झूला सन बनल दुनु गोलाकार हाथ प बईस क लोक सब फोटो खिचवा रहल छल, कत्तों बारह पंदरह फीट उंच सुपर मैन आदि इत्यादि । परिक्रमा करबा लेल बैटरी जनित गाड़ी सेहो सुलभ छल ,मुदा एक्का दुग्गी के छोड़ि सब पैरे बुलैत छल । देखैत देखैत ढाई बाजि गेल ,न्यू थिएटर मे प्रोग्राम देखवा लेल लोक सब अपन अपन स्थान ग्रहण कायल , भव्य कक्ष ,उत्तम साज सज्जा हाल पईघ रहे त आधे भरल लागै ।कलाकार सब आबि क अपन परंपरागत नृत्य प्रस्तुत कैल । ,बांस के ,मल्लाह के ,कमलक फूल के ,अप्सरा के आदि । मल्लाहक नाच देखि अपन देशक नाच मोन पड़ लागल ,ओहिना पाँच सात टा स्त्री सब ,घइल ल क पानि भरय नदी मे जाय अछि ,मल्लाह के पानि मे ज़ेबा स मलाहीन बरजै त अछि ,, उखड़ि समाट मे धान कुटैत अछि । बांस वला नृत्य मणिपुरक मोन पाड़ल। अप्सरा नृत्य ओतय के बड़ प्रसिद्ध छै॥एक थियेटर मे एके टा प्रो ग्राम ,दोसरि लेल दोसर ठाम ।मिलेनियम थियेटर बड़ निक ,लकड़ी के उत्कृष्ट कलाकृति अछि ।ओतय ,खमेर राजा सब के कोना विवाह होय छल एकर प्रस्तुति छल ।चीनी गाम मे चीनी नृत्य के मनोहारी मंचन कतेक रास कार्यक्रम देखैत हम सब बड़ थाकि गेल रही ,त कनी पहिनहि ओत स प्रस्थान कयलहू। अँकोर राष्ट्रीय स्ंग्रहालय अहि देशक सभ्यता संस्कृति के संग्रहण ,संरक्षण करबा के पुरातत्व विभाग के एक गोट अतीव सुंदर स्थान अछि । फ्रांसीसी स्थापत्य कला स ओत प्रोत, अहि प आधुनिक आ पुरातन दुनु शैली के प्रभाव अछि । अहि ठाम अनेक गैलरी अछि ,जाहि मे बुद्धा गैलरी मे बुद्ध के एक हजार दुर्लभ मूर्ति सब संग्रहीत अछि । आन गैलरी सब मे खमेर के स्वर्णिम इतिहासक ,मूर्ति ,राजा रानी ,परिधान ,आभूषण ,कलाकृति ,पाषाण के कथा , आदि के बड़ मनोहारिणी प्रस्तुति अछि । प्रायः सब प्रमुख भाषा मे [हिन्दी छोड़िए क] ऑडियो गाईड उपलब्ध अछि । फोटो झिकनाय निषेध छल ,ताहि लेल कानी मोन मलिन सेहो भ गेल । बहरेलों त आकाशक रंग बदलल छल सांझ उतरय लागल ,चारहु कात बिजली मुसैकमुसैक क अपन मुंह देखबय लगलै। आजूक राति एतय लेलअंतिम छल ,काल्हि कत्तों और ठेकान । शहर मे इमहर ओमहर बौवाबैत ढहनाबैत, घड़ी मे आठ बाजि गेले ,तखन पहिनहि स बुक कराओल होटल मे जा कए ओहि संस्कृति के महान अप्सरा नृत्य के आनंद मे डूबि गेल रही । ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। आशीष अनचिन्हार गाम के अधिकारी तोहे बड़का भैया हो (आलोचना) [18, November 2015केँ भवनाथजी अपन फेसबुक वालपर एकटा बहस शुरू केला जे शारदा सिन्हा द्वारा आओल सामा गीतक पाँति "हाथ दस पोखरि खुना दैह कि चम्पा फुल लगा दैह हे।" गलत अछि जकरा ऐ लिंकपर देखल जा सकैएhttps://www.facebook.com/bhavanath.jha/posts/1004404362949791 एही संदर्भमे प्रस्तुत अछि हमर आलेख जाहिमे ई सिद्ध करबाक प्रयास कएल गेल अछि जे सामा गीतक बोल ठीक छै आ भवनाथजीक तर्क गलत अछि।-आशीष अनचिन्हार] किछु शब्द एहन होइ छै जकर अर्थ भूतकालमे तँ किछु होइत छै मुदा वर्तमान कालमे बदलि जाइत छै। ओना बहुत बेर जबरदस्ती अपन महत्व देखेबाक लेल सेहो बदलि देल जाइत छै। भारतमे जखन भाषाविज्ञानक काज शुरू भेल तँ ओकर कर्ता-धर्ता संस्कृत भाषामे बान्हल लोक सभ छला। जकर परिणामस्वरूप भाषाविज्ञानक सभ अध्याय संस्कृतसँ शुरू भेल आ संस्कृतेपर खत्म। ओ लोक सभ संस्कृत छोड़ि आन भाषाक महत्व नै स्वीकारलथि आ तँए भारतीय भाषाविज्ञान बहुत अर्थमे एकांगी अछि। कोनो कालक भाषा शुद्ध नै होइ छै। हरेक समयमे हरेक आन भाषाक शब्द ओ व्याकरणक प्रभाव एक-दोसरापर पड़ैत रहलैक अछि। मुदा हुनका सभ लेल मात्र संस्कृते सभ किछु। ई सत्य जे संस्कृत भारतक राजकीय ओ धार्मिक (जनताक नै) भाषा छल तँए ओकरो प्रभाव आन भाषापर पड़लै मुदा सभ भाषा संस्कृतेसँ निकलल अछि या सभ भाषाक मूल संस्कृते टा अछि एहन विचार संकुचित विचार अछि। आधुनिक कालमे जखन लोक सभ शब्दक मूल ताकऽ लगला तँ अनयासे किछु लोक संस्कृते टाकेँ मूल मानि लेलनि आ दोषपूर्ण परिणाम निकलैत रहल। मात्र शब्दें नै श्लोकक अनर्थपूर्ण व्याख्या सेहो भेल। दूटा उदाहरण देखू--- एतदेव विपर्यस्तं संस्कार गुण वर्जितम् विज्ञेयं प्राकृतं पाठ्यं नाना वस्थान्तरात्मकम्। (भरत मुनि) मने जे मूल शब्दक अक्षरकेँ आगू-पाछू कए वा सरलीकृत कए बाजब प्राकृत पाठ कहाइए। ऐठाम मूल शब्द कोनो भाषाक भए सकैए मुदा ओ सभ मूल शब्द मने संस्कृतक शब्द मानि लेलनि। की भरत मुनिक समयमे एकमात्र संस्कृते भाषा छल? स्पष्ट अछि जे भरत मुनि हरेक भाषाक मूल शब्द लेल कहने छथि हँ जेना पहिने कहलहुँ संस्कृत केंद्रीय भाषा छल तँए बेसी शब्दक मूल ओतत्हिसँ भेटत। वर्तमानमे "डरेबर", "इस्कूल", "औड़ी-नौड़ी" आदि सभ बहुत प्राकृत शब्द भेटत मुदा तँए कि ओकरा संस्कृतेसँ निकलल मानि लेबै डरेबर driver शब्दसँ अछि, इस्कूल school शब्दसँ तँ औड़ी-नौड़ी ordinary शब्दसँ। तेनाहिते आर आन शब्द सभ अछि। भाषामे वर्णविपर्य सेहो होइत छै मुदा आधुनिक भाषा वैज्ञानिक मात्र अपन श्रेष्ठता सिद्ध करबाक लेल एकर प्रयोग करै छथि। तेनाहिते आचार्य भर्तृहरि जी प्राकृतक सम्बन्धमे कहै छथि जे-- दैवीवाक् व्यवकीर्णेयम शकतैरभि धातृभिः मने जे दैवीवाक् अशक्त लोकक मूँहमे आबि भिन्न-भिन्न रूपमे आबि जाइ छै। आब ऐठाम प्रश्न उठैए जे दैवीवाक् की? तँ सभहँक मूँहसँ उत्तर भेटत संस्कृत मुदा ई गलत हएत कारण जेना ओइ समयक एकटा पंडित लेल दैवीवाक् संस्कृत रहल हेतै तेनाहिते ओइ समयक आन भाषा सेहो ओकर बजनाहर लेल दैवीवाक् रहल हेतै। तखन फेर संस्कृते टा किएक? या ईहो भऽ सकै छै जे भरत मुनि या भर्तृहरि लेल मूल या दैवीवाक् केर मतलब संस्कृते टा रहल हो। एहन अवस्थामे ई मानए पड़त जे हिनक दूनूक अवधारणा संकुचित छल जैसेँ एकौ डेग आगू वर्तमान ओ आधुनिक भाषावैज्ञानिक नै जा सकलाह अछि। किछु दिन पहिने भवनाथ झाजी फेसबुकपर एकटा पोस्ट देला जे— “सामाक एकटा गीत गबैत छथि शारदा सिन्हा- "हाथ दस पोखरि खुना दैह कि चम्पा फुल लगा दैह हे।" कहू तँ, दस हाथक पोखरि केहन होएत? मुदा एकर बोल कें ठीक कए लिय- हथदह पोखरि खुना दैह..............। हाथी दहाएबला पोखरिक कामना थिकैक” एकर उत्तरमे हम ओहीठाम लिखलहुँ जे— "बीतो भरिक जे खोपड़ी रहितै। एकर मतलब ई थोड़े छै जे एकै बीतक खोपड़ी होइ छै ऐ गीतमे बहीनक आग्रह छै जे नै नमहर तँ कमसँ कम दसे हाथ पोखरि खुना दिअ। साहित्य अभिधामे बेसी नै चलै छै। ओनाहुतो हथदह नै हथिदह हेबाक चाही हाथीक संदर्भमे" एकर बाद बेस घमर्थन चलल आ बहस दह शब्दपर भेल जाहिमे भवनाथजीक कहब छलनि जे दह शब्दकेर निर्माण संस्कृतक "ह्रद" शब्दसँ भेल अछि। मुदा हमर कहब छल जे दह शब्द संस्कृत शब्दक नै आन भाषाक शब्दसँ आएल अछि। बेस घमर्थन चलल आ दूनू पक्ष अपन-अपन खुट्टापर कायम रहला। जँ ओ पूरा बहस देब तँ अनावश्यक रूपें पन्ना बढ़ि जाएत। तँए ओइ बहसकेँ हम ओत्तहि छोड़ी आ आगू चली (मूल बहस भवनाथजीक वालपर छनि, ओना काजक लेल हमहूँ ओकर काँपी-पेस्ट रखने छी)। ऐठाम ई स्पष्ट करी जे हम ऐठाम दूनू पक्ष राखब संस्कृतसँ सेहो दह केर संबंध जोड़ब आ बाहरी भाषासँ सेहो मुदा हमर मूल उद्येश्य अछि शारदा सिन्हा जीक गाओल आ अनाम गीतकारक गीतक रक्षा करब, ओहीक्रममे दह केर विवेचन हएत। बहुत संभव जे दह संस्कृतेसँ निकलल हो मुदा शारदा सिन्हाजीक जै गीतपर भवनाथजीकेँ आपत्ति छनि ताहिमे "ह्रद" बला दह केर कोनो जरूरति नै छै। ऐठाम ईहो देखब जरूरी जे भवनाथजी बिना कोनो विवेचनाकेँ अपन मंतव्य सुना देलनि जे गीतक बोल गलत अछि आ झट ओकर निराकरण सेहो दऽ दै छथि जे गीतक बोल ई हेबाक चाही।हमर ई नै कहब अछि जे लोकगीतक उपर चर्चा नै हेबाक चाही मुदा हम ई जरूर कहब जे बिना तर्क ओ तथ्यकेँ कोनो लोकगीतक बोलकेँ बदलब ओतबे खराप छै जते की कोनो जीवित आदमीकेँ जानसँ मारब। विस्तारमे जेबासँ पहिने जँ एक मिनट लेल भवनाथजीक बात मानि ली हथदह मने हाथी दहाए बला पोखरि भेलै आ हाथीक विशालतासँ पोखरिक विशालता बुझाइत छै तखन हमरा ईहो जनबाक अछि जे मिथिलामे "नागदह" सेहो छै तँ की ओइमे नाग दहाइत हेतै आ ओकर विशलाता नागे जकाँ छोट हेतै? मिथिलामे "कमलदह" सेहो छै तखन सहज जिज्ञासा जे कमल एतेटा पोखरि लैए कऽ की हैतै? हमरा बुझने भवनाथजी कनी बेसिए भावुक भऽ गेल छथि विशालताक लेल। आब चली हम अपन मूल विवेचना दिस आ सभसँ पहिने तँ हमहूँ आने पंडित जकाँ संस्कृत दिस जाइ। संस्कृतमे दहन बला शब्दक संबंध ज्वाला,अग्नि आदिसँ छै। बोखारक गर्मी सेहो दाह कहल छै। मैथिलीमे दाह संस्कृतसँ मानल जा सकैए। द्रोह शब्द दहन केर विस्तार थिक जकर मतलब छै केकरो घृणामे जरि जाएब। तँए भवनाथजी द्वारा उपरमे देखाओल दह शब्द दहन शब्दसँ नै भऽ सकैए कारण एक आगि तँ दोसर पानि। केकनो काल कऽ एकै शब्दक विपरीत अर्थ सेहो भेटि जाइत छै मुदा से ऐठाम नै अछि। आब संस्कृतेक दोसर शब्द "दश" केर हाल देखी। जखन प्राकृत भाषा एकै तखन "दश" "दह"मे बदलि गेलै मुदा अर्थ नै बदलि सकलै। मतलब दश ओ दह दूनू संख्यावाची रूपमे रहल। दसोदिसिया या दहोदिसिया दूनू रूप भेटत। ओना ई रोचक जे जँ प्रचलित शब्द खिया जाइत छै आ ताहीक्रममे दस शब्द दह शब्दमे बदलि गेल हेतै तैयो ओकर अर्थ नै बदलबाक चाही। भवनाथजीक वालपर अमरनाथ झा नामक पाठक कहै छथि जे शब्द प्रचलनमे आबि खिया जाइत छै, ठीम हमहूँ मानलहुँ मुदा अर्थ????????????????????????? अर्थ तँ वएह रहतै जे भाइ हमरा कमसँ कम दसे हाथक पोखरि खुना दिअ। मुदा से तँ ने भवनाथजीकेँ ई काम्य छनि आ ने अमरनाथ झाजीकेँ । फेर संस्कृतक "ह्रद" शब्दपर आबी। "ह्रद" मने जलाशय, सरोवर, ध्वनि, नाद, किरण, मेढ़ा नामक पशु आदि एकर अर्थ भेल। मुदा एकर प्रचलन जलाशय लेल बेसी भेल। किछु अलग विशेषता लेने "ह्रद" सभ लेल अलग नामाकरण भेल जेना कपिला ह्रद, पुंडरीक ह्रद,आदि। ह्रदिनी मने नदी भेल। संस्कृत भाषाक विसर्ग प्राकृतमे "ह" जकाँ ध्वनि दैत छै। बहुत संभव जे ह्रद: केर उच्चारण ह्रदह=हदह=दह भऽ गेल हो। मुदा ऐठाम धेआन रखबाक थिक जे भवनाथजी पाठककेँ एहन कोनो सूचना नै दै छथि। बस ओ मानै छथि जे संस्कृतसँ विकास भेलै तँ भेलै ओकर कोनो विवेचना नै करऽ चाहै छथि। जेना कि हम उपरेमे पुछने छी जे भवनाथजीक हिसाबें जँ हथदह मने हाथी दहाए बला पोखरि भेलै आ हाथीक विशालतासँ पोखरिक विशालता बुझाइत छै तखन हमरा ईहो जनबाक अछि जे मिथिलामे "नागदह" सेहो छै तँ की ओइमे नाग दहाइत हेतै आ ओकर विशलाता नागे जकाँ छोट हेतै? मिथिलामे "कमलदह" सेहो छै तखन सहज जिज्ञासा जे कमल एतेटा पोखरि लैए कऽ की हैतै? आब कने संस्कृतकेँ विराम दैत आन भाषा दिस देखी--- अरबीमे Dahaha मैथिलीमे- दह (دَحَاهَا ई मूल उच्चारण अछि) केर दूटा मतलब होइत छै-- पहिल भेल " पसारनाइ" आ दोसर भेल “पसरल”,अर्थविस्तारक कारणें सभ चीजक पसारनाइ लेल एकर प्रयोग होइत छै ।किछु विद्वान अरबीमे Dahaha केर मतलब अण्डाकार धरती मानै छथि आ तैपर बेस घमर्थन भेल छै। कने हटि कऽ अरबिएमे दोहा (Doha) الدوحة केर मतलब वर्गाकार जलाशय होइत छै। तेनाहिते तुर्कीमे Daha केर मतलब बेसी होइत छै। तुर्कीमे कम-बेसी लेल एकरा उपसर्ग जकाँ प्रयोग कएल जाइत छै जेना- faster लेल daha hızlı slower लेल daha yavaş more intelligent लेल daha zeki more hardworking लेल daha çalışkan more beautiful लेल daha güzel आदि-आदि जँ गौरसँ देखबै तँ पता चलत जे अरबी-तुर्कीमे जे दह केर अर्थ छै सएह अर्थ भवनाथजी द्वारा देल गेल दह शब्दसँ बेसी मेल खाइत अछि। मने ओहन विशाल पोखरि, गहींर जलाशय, सुंदर जलाशय आदि जाहिमे किछु अलग विशेषता हो । मिथिलाक अनेक गामक नाम भेटत जे पोखरिक नामपर या भौगलिक विषेशताक नामपर अछि जेना नागदह, चकदह, कमलदह। आब एकर अर्थपर आबी ।अर्थ हम अरबी-तुर्की केर हिसाबें लऽ रहल छी। दह मने बेसी वा पसरल भेल आ ओइसँ पहिने विशेषण लगा एकरा आर अर्थ विस्तारित कएल गेलै, जेना कमलदह ( ओहन पोखरि वा जगह जाहिमे बहुत रास कमलक फूल हो), जमुनदह (ओहन पोखरि जकर भीड़पर जामुनक गाछ हो वा ओहन जगह जाहि ठाम बेसी जामुनक गाछ हो) नागदह (ओहन पोखरि जकर भीड़पर नाग वा साँपक बिल हो वा ओहन जगह जाहि ठाम बेसी संख्यामे साँप-नाग हो, समान्यतः मिथककेँ रूपमे नागकेँ पानिमे रहब सेहो देखाएल जाइत छै) चकदह ( ओहन पोखरि जकर बनावट चक्राकार हो या ओहन जगह जे चक्रकार हो) आदि, आदि। हमर ऐ विवेचनासँ स्पष्ट अछि जे संस्कृत बला “ह्रद” शब्दसँ बनल दह केर अपेक्षा अरबी-तुर्कीसँ लेल गेल दह बहुअर्थी शब्द अछि। संगे-संग ईहो स्पष्ट अछि जे शारादा सिन्हाजीक द्वारा जे सामा गीतक जे बोल अछि-- "हाथ दस पोखरि खुना दैह कि चम्पा फुल लगा दैह हे" से अपन अर्थमे ठीक अछि। जँ शब्द खिया कऽ "हाथ दस" बदला "हथदह" हेतै तैयो ओकर अर्थ नै बदलतै। ओकर अर्थ संख्येवाची रहतै। मिथिला की हरेक क्षेत्रक जनानी अपन-अपन पंडित वर्गसँ प्रताड़ित रहल अछि। भाषा बदलि गेलै, खान-पान ओ भेष-भूषा धरि बदलि गेलै मुदा पंडित वर्ग द्वारा जनानीपर आक्रमण करबाक प्रवृति नै बदललै। आधुनिक युगमे पंडित सभ आर खुंखार भऽ कऽ आएल अछि। आजुक पंडित सभ कोट-पैंट-टाइ पहिरैए मुदा एतेक आधुनिक भेलाक बादो ओ आन की अपनो घरक जनानीकेँ बढ़ल नै देखऽ चाहैत अछि। बेसी पढ़ल-लिखल आ पाइ बला पंडित वर्गमे ई प्रवृति बेसी देखल जा रहल अछि। मध्यकालीन समयमे जखन पंडित सभ अपन बहीनि, बेटीकेँ बियाहक नामपर नाँगर, लुल्ह आ बौक-बेरोजगार सभहँक हाथें बेचबाक परंपरा चलेलक तकर विरोधमे जनानी सभ "परिछन" नामक बिध चलेलथि। एनाहिते पंडित वर्गक आक्रमण आ जनानी द्वारा तकर विरोध मिथिलाक वैवाहिक परंपरा आ आन क्षेत्रमे ताकल जा सकैए। जेना कहि आएल छी आजुक आधुनिक युगमे पंडित वर्ग नव व्यूह रचनाक संग जनानी सभकेँ प्रताड़ित करबाक लेल तैयार भेल छथि। आजुक पंडित आब संविधान ओ लोकतंत्रक कारणें जनानी सभकेँ वियाहक की आन देखार तरहें प्रताड़ित नै करैए मुदा तकर बदलामे ओ जनानी सभ केर बोल आ ओकर भावनाकेँ बदलि देबाक ओकरा नष्ट करबाक कुच्रक करैए। मैथिली लोकगीतक ई सभसँ बड़का विशेषता छै जे ओहिमे तमाम बदलाब केर बाबजूदो पंडित सभहँक आक्रमण आ तकर मुँहतोड़ जबाब दूनूक सबूत एखन धरि बाँचल छै आ तँइ एखनो धरि पंडित वर्ग लोकगीत मारबाक षड्यंत्र करैत छथि। तँ आउ, हमरा लोकनि ओहन सभ बहीनक पक्षमे ठाढ़ होइ, ओहन सभ जनानी केर पक्षमे ठाढ़ होइ जे पूरा जीवन अपन भावना अपन तर्क अपन शक्तिकेँ लोकगीतमे समाहित कऽ देलनि। आउ, हमरा लोकनि ओहन सभ बहीनक पक्षमे ठाढ़ होइ, ओहन सभ जनानी केर पक्षमे ठाढ़ होइ जे पूरा जीबन मूँह सीबि कऽ रहृत छथि आ अपन सभ इच्छा,सौख-सेहंता आदिकेँ "बीतो भरि", "दसो हाथ", "दसो धूर", "एकौ घोंट"' "दुइयो कौर" सन छोट आ तुच्छ शब्द खंडमे कहि धरतीसँ विदा भऽ जाइत छथि पंडित सभहँक कुच्रककेँ खंडित कऽ कऽ। परिशिष्ट---- शारदा सिन्हा जी द्वारा गाएलल ई मूल गीतक प्रारूप अछि ( वर्तनी गीत गेबाक हिसाबें अछि) गाम के अधिकारी तोहें बड़का भैया हो भइया हाथ दस पोखरि खुनाय दिअ चम्पा फूल लगाय दिअ हे गाम के अधिकारी तोहें छोटका भैया हो भइया हाथ दस पोखरि खुनाय दिअ चम्पा फूल लगाय दिअ हे भैया लोढ़ायल भौजो हार गाँथू हे आहे सेहो हार पहीरि बड़की बहिनी साम चकेबा खेलत हे कथी बझाएब बन तितिर हे आहे कहाँ के बझाएब राजा हंस चकेबा खेलब हे जाले बझाएब बन तितिर हे आहे रौब से बझाएब राजा हंस चकेबा खेलब हे गाम के अधिकारी तोहें फलां भइया हे भइया हाथ दस पोखरि बना दैह चम्पा फूल लगा दैह हे ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.विन्देश्वर ठाकुर १. एकटा राजनैतिक विहनि कथा २.एकटा प्रेम विहनि कथा २. मुन्नाजी-प्रेम विहनि कथा- सेल्फी १ विन्देश्वर ठाकुर १ एकटा राजनैतिक विहनि कथा - अहीसब ला' तोरा कहि दै छियौ तऽ कहै छें जे कहै छी ! ई लाई-मुरहीके मोटा बन्हनाइ छोडि क' कतऽगपास्टिंगमे भीरल छले से कह तऽ ! - सब किछो कहै छीयै । पहिने ई शान्त होउक न । आइ पबनीओके दिनमे कैला अते तम्साइ है? - है हम कि शान्त रहूं घण्टा? देखै नै छिही जे दू पहर अहिठाँ बीत गेल आ अते दूरक रास्ता है। कखनी जाइब आ कखनी फेउर घुमि कऽ आइब? ओतऽ बेटीयो तऽ हमर पैरा तकैत होत कि नइ? - अच्छा, ठीक है ! ई भात खाउक ताबे हम बान्हि दै छीयै मोटरी । गेल छलियै भदौरिया काकीके कनी लाई-मुरही दिअ ला' । से उहे बैठा लेलकै ...... - ओह ! भदौरिया काकी लग गेल छलै ई ? केना है ओकर अवस्था अखनी ? - कि कहियै टुनमाके पापा ! बेटाक शोग अते जल्दी कहूं माइ सँ बिसरैतै ? आ ओहो अकालमे मरल लक्का जबान बेटाके ?? भरिदिन कनिते रहै छै ..... - ओह ! हे भगवान ........ रमौलबालीके ई गप्प सुनिते 'दामोदर' भैयाके आँखिमे ३ महिना अगाड़ीके मधेश आन्दोलन आ ओहि आन्दोलनमे पुलिसद्वारा मारल गेल भदौरिया काकीक २० बर्षक बेटा बिरजुके दृष्य फनफन क' घुमऽलगलै ........ २ एकटा प्रेम विहनि कथा -आलोक ! आब त परीक्षाके बाद १ महिनाके छुट्टी होबऽ बला छै । कोना भेट हेतै आब अपना सबके? - एह ! एक्के महिनाके बात तऽ छै सोनी ? १ सालके थोडे छै ? आ बीचमे फेसबूक-स्काइप जिन्दाबाद छै ने !! - हँ रौ मुदा तैयो ... पता नै ब्रेकअप सँ हमरा बड डर लगैए । -धुर बताही तुहू ने ! अनेरे अपना दिमाकके दही बनबैत रहै छें । गे ई फिलीम थोडे छै जे आइ अफेयर्स आ काल्हिए ब्रेकअप भऽ जेतै ? - नै रौ ! तैयो । देखै नै छिही, रियलो जिनगीमे चट्टे अफेयर्स आ पट्टे ब्रेकअप होइ छै से ?? - अच्छा आब बुझलियौ जे तू रणबीर आ कैट्रीना दिस इसारा क' रहल छें । तऽ सून ! ओ फिलीमके जिनगी आ बलिउडके दिनचर्या फराक नै छै । मुदा अपना सबहक जिनगी, व्यवहार, समाज-संस्कार सब ओइसँ अलग छै। तें तो चिन्ता जुनि कर । २. मुन्नाजी प्रेम विहनि कथा सेल्फी यौ, अपन मोनक एक टा बात कह' चाहै छी , कहू ? कहू ने एत' कियो दोसर त' छै नै. हमर मोन कहैए- जेना हमरा अहाँ स' प्रेम भ' गेल ऐछ. यै हमहू फरिछाइए दी, सत्ते अहाँ हमरा हृदय मे समा गेलौं ऐछ मुदा हम अहाँ सँ प्रेम नै करै छी. बुद्धु कहीं के ! प्रेम कएल नै जाइ छै, ओ त' अपने भ' जाइ छै. यै , जे अपने भ' जाइ छै से अनेरूआ कहाइ छै. ओकर कोनो ठौर- ठेकाना नै होइ छै. तहन दुनू गोटे एहिना रह' दियौ. " एक दोसरा क् करेज मे समाएल ." ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह”- दू टा गीत ३.२.दिलीप कुमार साह- १ टा कविता ३.३.१.अब्दुर रज्जाक- ११ टा चरिपतिया २.विन्देश्वर ठाकुर- एकटा गजल ३.४.जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’- ४टा गजल डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह”, ग्राम – रुचौल (दुलारपुर-रुचौल) , पो॰ – मकरमपुर, जिला – दरभंगा, पिन – ८४७२३४ दू टा गीत १ फागुनक पानि फागुनक पानि, अकालक पानि । तइयो लाभ आ किछु छी हानि ।। गहूम पुष्ट, मज्जर मजगूत । मसुरीक छी सद्यः यमदूत ।। धियापुता लए मजगर बात । इस्कूल बन्दी छै बरसात ।। पुरिबा - पछबा बहए बसात । ठिठुराबै - कँपबै छै गात ।। बीतल ठण्ढी पुनि घुरि गेल । सोएटर - कम्मल बाहर भेल ।। मुरही कचड़ी झिल्ली चौप । चाहक चुस्की चौके - चौक ।। गरम जिलेबी, लिट्टी बेस । गरम सिंघारा खेपे - खेप ।। नहिञे गरजय - तरजय मेघ । टिप्-टिप्-टिप्-टिप् बरिसय मेघ ।। बरसाती, छत्ता की भेल ? छोड़ू ! एक दिनक छी खेल ।। २ माघ सिहकैत बसात, ठिठुरैत माघ । ओसक टप् - टप्, कानए अकास ।। सभ आढ़ि - धूर पर उगल घास । ओसेँ भीजल, पिछड़ैत लात ।। ओसेँ भीजल अछि गाछ - पात । टप् - टप् भू पर पानिक प्रपात ।। पर ओस चाटि की मेटए प्यास ? एकटा अछार एखनो छै आश ।। पछता गहूम केर हो ने नाश । तेँ दमकलसँ अछि पटैत चास ।। नाला - पौती अछि बितल बात । प्लास्टिकक पाइप संबल उसास ।। अजगर सनि पसरल बीच बाध । फक् फक् करैत दमकलक साथ ।। गमछा - मफलर बन्हने गाँती । चद्दरि – सोएटर झँपने छाती ।। निकलल – जकरा भोरे छै काज । काजक बदलामे नञि छै लाथ ।। शीतलहरी पूसहु केर बाद । नञि जानि कते दिन रहत आब ।। कनकनी एहेन कँपबैछ हाड़ । तइयो धड़फड़मे घटकराज ।। एहनोमे धोएबा लेल पाप । जा रहल लोक दौगल प्रयाग ।। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। दिलीप कुमार साह गाम : इटहरी वार्ड न. १०, पोस्ट : बेलही, भाया : निर्मली , जिला : सुपौल , पीन न. ८४७४५२ , योग्यता : नन मैट्रिक, जीविकोपार्जन : खेती-गृहस्ती, ड्राइविंग अहाँ हमर... अहाँ हमर जीवनक जीवनी बनू पेज उनटा-उनटा पाठ हम पढ़ैत रहब अहाँ हमर कलमक सियाही बनू जिनगीक कागजपर लिखैत रहब। अहाँ हमर...। सौंसे मिथिला जनकपुर घुमलौं महज अहाँ जकाँ कियो मिलल कहाँ गेंदा ने कमल आ गुलाबो कोनो अहाँ जकाँ केतौ खिलल कहाँ अहाँ हमर दीआक एगो वाती बनू प्रेमक घीमे सभ दिन जरबैत रहब। अहाँ हमर...। बाबा सिंहेश्वरकेँ तेसरेँ कबुलने छेलौं ओही मंसाक नीमन परसाद छी अहाँ गेसू गाल मुखराक कैदी छी हम अहाँक अँचरासँ कखनो अजाद छी कहाँ अहाँहमर मनबाक मीत बनू हृदय करेजासँ हम मानैत रहब। अहाँ हमर...। दिलक जागिर किए ई मोहब्बत भेलइ आँखिक मोती गिरइ छै कानैतकाल सभसँ पहिने, हमरासँ नियम बिआहकरू उलैट जाए चाहै ई कलजुग भला अहाँ हमर ऑंगनक डारि बनू पात बनि कऽ हम फड़ैत रहब अहाँ हमर जीवनक जीवनी बनू पेज उनटा-उनटा पाठ हम पढ़ैत रहब। अहाँ हमर...। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.अब्दुर रज्जाक- ११ टा चरिपतिया २.विन्देश्वर ठाकुर- एकटा गजल १ अब्दुर रज्जाक (धनुषा हरिपुर) चरिपतिया १ अपनो धरती पराया भेल डेग -डेगपर देखलौं सिमान तिकरम बाजी राजनैतिक संग अपनो धरती बिरान २ उपनिवेश सं निचां गिराकऽ सदा दामासाहीमे रखने अधिकार सत्ता संग जल्लाद बनल अछि जनता कहे अधिकार पुकार ३ बंद, हड़ताल आ चक्काजाम संग निरीह बने गरीबक भाग चलन केहन नियत राजनैतिकर्मी के जे डसाबे ओकरे नाग। ४ कर्म-परधान संसारक रित अछि अइखनो लोक फकीर जं सनजोग समय अनुकुल बने निरधनियोकें हुअए हकदार चाबसिके तकदीर ५ मुस्कानक मोल अनमोल अछि दिलसं निकलल सुस्कानकें दिल दिमाग संग तनाबक मुक्ति परमान ओठपर मुस्कानक ६ निशब्द राइतक मौनतामे बिर्रो उठल याद संग जं करोट फेरकऽ देखलौं तं अदभुत भऽ गेल बर्तमान संग ७ घुर लागल अछि आंगन असोरा पर लोक बैसल घुरा संग बतकहा सुरु पूरब पश्चिम के सुनु आबू अहूं संग। ८ पुर्बा पछिया बियार संग थरथराबे जारक ठार कमब्बल ,सिरक ,आ आइग अखन कबज संग हथियार ९ प्रितमा सड्ग प्रितमके सदखैन प्रेमक साथ गरीबी कष्ट आ दुखक हालमे परीक्षा प्रेमक हाथ १० सूफी संतक सही बाटपर लोक चलैयऽ कम कुपथके संगी सब अगतिया समाजिकतामे राखे बम ११ नियंत्रण करु अन्तर मनक आवाज़ सं भावना;इच्छा भय श्रेष्ठ व्यक्तित्व सब भरल रहत पैघ वैचारिकता पर निश्चय २ विन्देश्वर ठाकुर गजल अपनहि गीत गाबैछी नङ्टे नाच नाचैछी घरमे सब किओ भुखले दुनियाँ नेह बाटैछी भेटत मान कोना ये सदिखन झूठ बाजैछी भेटत के अपन नेही सबके दूर राखैछी काँनब 'विन्दु' बनि जगमे दुख जे देखि भागैछी मात्राक्रम: २२२१ २२२ ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’ ४टा गजल 1. मात्रा-क्रम : 22222222222 सोचै छी हम की की देखल जिनगीमे की की छूटल आ की भेटल जिनगीमे दशरथ कौशल्या आ माता कैकेयी सुख दुःख सभ वनबासक भोगल जिनगीमे अन्हड़ आयल बादरि आ बरखा-बुन्नी सभ छल अपने मांगल कीनल जिनगीमे इर्ष्या देखल निन्दा आ भय भावुकता मोने अछि की की सभ कूटल जिनगीमे कखनो नेहक फूलो हँसइत देखल अछि आ कखनो अपनो सभ रूसल जिनगीमे माइक ममता माटिक ममता छल संगे कखनो ओ डोरी नहि टूटल जिनगीमे 2. मात्रा- क्रम : 22222222 आँखिक भाषा पढ़लौं हम नै जूआ पाशा जनलौं हम नै आयल दुःख जिनगीमे कत्ते लेकिन कहियो कनलौं हम नै माला ककरो हम नै पहिरल माटिक मूरुत बनलौं हम नै देखा-देखी हू –ले –ले -ले पाछाँ-पाछाँ चललौं हम नै लाठी-भाला सन आखर किछु कखनो ककरो कहलौं हम नै तिल आ चाउर जे-जे देलक के बाजत जे बहलौं हम नै 3. मात्रा - क्रम : 2222222 बाहर ताकब कत्ते दिन गामसँ भागब कत्ते दिन न्यायक खातिर करियौ किछु खाली कानब कत्ते दिन अपनापर संयम राखू बहुकें मारब कत्ते दिन बदनामी होयत अपने करजा टारब कत्ते दिन पाछाँ तकने भेटत की बिरहा गायब कत्ते दिन अनको सूनब आवश्यक अपने तानब कत्ते दिन 4. मात्रा-क्रम : 2221-12-22 चानन ठोप करी नै हम ककरो छोट कही नै हम जैठाँ लोकक आदर नै तैठाँ पैर धरी नै हम पापक भोग अहाँ भोगू रस्ता टेढ़ चली नै हम दिन विपरीत कते आबय जिबिते भाइ मरी नै हम मोनक बात कहू ककरा ककरो संग उडी नै हम मूँह्क गारि भने सहि ली आँखिक नोर सही नै हम ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। बालानां कृते विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम भाषापाक १.आशीष अनचिन्हार- बाल गजल २. डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह” किछु बाल कविता १ आशीष अनचिन्हार बाल गजल अब्बा पीटै अम्मी चाहै हमरा खाला भगबै मामू डाँटै हमरा चुप्पे गेलहुँ घुमि एलहुँ मेला तँइ बड़का भैया मारै पीटै हमरा सभ दिनमे चलि एन्नी ओन्नी चलि जाइ खाली दादा दादी राखै हमरा हमरो आपा आबै गाबै नाचै तँइ ओ सुंदर सुंदर लागै हमरा सुंदर काकी देलथि अरफी बरफी तँइ कक्का हँसुआ लऽ कऽ काटै हमरा सभ पाँतिमे दस टा दीर्घ अछि। तेसर शेरक पहिल पाँतिक अंतिम लघु छूटक तौरपर अछि। टू टा लघुकेँ एकटा दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि। खाला= मौसी आपा=बड़की बहीन २ डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह” किछु बाल कविता हंस (बाल कविता) हंसक बीच ने बगुला शोभए, बड़ पुरान ई कहबी छी ।*१ बगुला खेत - पथार भेटैतछि, हंस केहेन − नञि देखने छी ।।*२ सरस्वती माएक वाहन अछि, चित्रमे हम से देखने छी ।*३ अंग्रेजी केर ‘एस’ सनि गर्दनि, बस किताबमे पढ़ने छी ।।*४ सुनै जो बौआ ! सुनै गे बुच्ची ! एहि ठाँ हंस प्रवासी छी । उत्तर दिशि अतिशीत क्षेत्र जे, ताहि ठामक ओ वासी छी ।।*५ एहि ठाँ जे आबैत हंस छल, देह - पाँखि उज्जर होइ छल । लोलक उद्गम - स्थल कारी, लोल गाढ़ - पीयर होइ छल ।।*६ शीत समयमे छल आबैत, कहियो ओ उड़ैत हिमालयसँ । अपनहुँ ठाँ देखना जाइत छल, सटल जे क्षेत्र हिमालयसँ ।।*७ चर्चा अछि साहित्यमे सौंसे, मानसरोवर - श्वेत हंस केर । करैछ ईशारा टपि हिमगिरि, ने बेसी काल रहैछ हंस फेर ।।*८ विश्वक छै मौसिम बदलि गेल, पहिनुक सभटा छै उनटि गेल ।*९ बीतल कए बरख, कतेक पुस्त, ने हंसक छी आगमण भेल ।।*१० सए बरख - हजार पता नञि से, कहियासँ हंस निपत्ता अछि । साहित्यमे सौंसे धवल - हंस, पर दर्शन हएब सिहन्ता अछि ।।*१० हंसक ई अर्थ विशिष्ट भेल, सामान्य अर्थ बड़ व्यापक अछि । बहुविध जलीय पक्षी शामिल, कलहंस, राज आ जलपद अछि ।।*११ ओना तँऽ अप्पन शास्त्र कहैतछि, हंस होइत अछि उज्जर । मुदा हंस किछु कारी सेहो, भेटैछ एहि धरती पर ।। किछु एहनो छी हंस जकर बस, गर्दनि टा कारी होइए । जँ बूझी अहँ हंस धवल बस, तँऽ विश्मयकारी होइए ।।*१२ संकेत आ किछु रोचक तथ्य - *१ - ‘न शोभते सभामध्ये हंसमध्ये वको यथा’ - संस्कृतहि युगक कहबी छै । *२ - छोटकी बगुला सभ तँऽ बहुतायतमे पानि लागल खेत - पथारसभमे देखबामे आबैत अछि । पर हंस अपना दिशि केओ नञ देखने अछि । जँ केओ देखने अछि तँऽ मात्र चित्रमे वा प्राणी उद्यानमे अथवा जँ केओ कीनि कऽ पोषने हो । *३ - धवल-श्वेत होयबाक कारण हिन्दू धर्म शास्त्रक अनुसार हंसकेँ माए सरस्वतीक वाहन मानल गेल अछि । देवी सरस्वतीक चित्र वा प्रतिमाक संग प्रायः हंसक चित्र वा प्रतिमा सेहो रहैत अछि । यद्यपि ओ चित्र वा प्रतिमा काल्पनिक होइत अछि पर परम्पराक आधारेँ बनैछ तथा ओ परम्परा अति प्राचीन अछि - हजारों वर्ष पुरान । *४ - किताबसभमे वर्णन रहैछ कि हंसक गर्दनि अंग्रेजी वर्णमालाक “एस” (S) आखर सनि होइत अछि । *५ *७ - अतिप्राचीन कालहिसँ भारतीय साहित्यमे हंसक प्रवासी होयबाक बात कहल गेल अछि जे कि हिमालयसँ सटल भू-भागमे हिमालय शिखरसँ उतरि मात्र शीतऋतुमे आबैत छल । *६ - पारम्परिक जनश्रुति ओ संस्कृत आ आन संस्कृतेतर साहित्यसभसँ ज्ञात होइत अछि कि हंसक धऽर आ गर्दनि धवल श्वेत वर्णक होइत छल जखनि कि लोल गाढ़ पीयर रंगक । लोल जाहि ठाम मूरीसँ जुड़ल रहैत छल ओहि ठामसँ आँखि धरिक स्थान कारी होइत छल । *८ - कैलास पर्वत पर मानसरोवरमे हंस रहैत अछि, ओतहिसँ ठण्ढीमे आबैत अछि आ फेर ओतहि चलि जाइत अछि । ई एकटा ईशारा थिक कि हिमालय वा हिमालयसँ आओरो आगाँ (उत्तर वा उत्तर-पच्छिम दिशि) हंस सभक मूल निवास स्थान अछि । *९ - विश्वक जलवायू आ मौसिम निरन्तर बदलैत रहैत अछि । केवल आजुक ‘हरित गृह प्रभाव’ तथा ‘वैश्विक गर्मी’ केर बात नञि अछि । किछु हजार वर्ष पहिनहु मौसिमक बदलावक संकेत आयुर्वेदक महान कृति “सुश्रुत संहिता”मे भेटैछ । जखनि कि हंसक प्रथमोल्लेख ऋग्वेदमे भेटैछ । आयुर्वेद अथर्ववेदक उपांग मानल जाइत अछि जे कि निश्चित रूपेँ ऋग्वेदसँ नऽव अछि । *१० - विगत कतेको सए अथवा हजार वर्षसँ हिमालयक दच्छिनमे आ खास कऽ दच्छिन-पूबमे हंसक प्राकृतिक रूपसँ आगमण नञि भेल अछि । ओहिसँ पहिने सम्भवतः “मूक हंस / म्यूट स्वान” (MUTE SWAN) ठण्ढीमे भारतक हिमालयसँ सटल क्षेत्रसभमे आबैत छल किएक तँऽ भारतीय वाङ्गमयमे वर्णित हंस केर विवरण ओकरहिसँ मेल खाइत अछि । ई हंस विश्व केर आन हंस आ जलपदक अपेक्षा कम हल्ला मचबैत अछि तेँ ओकरा अंग्रेजीमे “म्यूट स्वान”(MUTE SWAN) कहल जाइत अछि जकर मैथिली अनुवाद भेल “मूक हंस” । ई हंस पुर्ण रूपसँ बौक नञि होइत अछि अपितु अपेक्षाकृत कम बजैत अछि । *११ - “हंस” शब्द जखन अगबे प्रयुक्त होइत अछि तँऽ ओहि शब्दसँ जाहि विशिष्ट चिड़ै केर बोध होइत अछि से अंग्रेजीमे “स्वान” (SWAN) कहबैत अछि जकर गर्दनि अंग्रेजीक “एस” आखर सनि होइत अछि । ई “हंस” शब्दक विशिष्ट अर्थ भेल । “हंस” शब्द जखन हंस सदृश समस्त जलीय पक्षीक बोध करबैत अछि तखन ओहि मे हंस केर अलावे आन जलीय पक्षी (जेना कि - हंसक वा जलपद) सेहो आबैत अछि । ई “हंस” शब्दक सामान्य अर्थभेल । जखन हंस शब्द आन कोनहु विशेषण या उपसर्गक संग (यथा - कलहंस, राजहंस आदि) आबैत अछि तँऽ ओहिसँ तदनुरूप आन कोनहु जलीय पक्षीक बोध होइत अछि । *१२ - भारतीय वाङ्गमयमे यद्यपि मात्र धवल-श्वेत हंस केर चर्च भेटैत अछि पर पृथिवीक दच्छिनी गोलार्ध केर महाद्वीप सभमे कारी हंस सेहो भेटैत अछि । दच्छिनी अमेरिका महाद्वीपमे हंसक जे प्रजाति भेटैछ तकर गर्दनि आ मूरी कारी तथा धऽर उज्जर होइत अछि । ऑस्ट्रेलिया महाद्वीपमे भेटए बला हंस केर मूरी, गर्दनि आ धऽर पूरा कारी होइत अछि । चकोर (बाल कविता) अहाँ नील गगन केर चन्दा, हम छी धरतीक चकोर । गाबै छथि ई गीत भाइजी, भऽ कऽ बड़ भाव-विभोर ।।*१ शायद जिनगीमे भैय्या, देखल ने कहियो चकोर । जँ देखता तँऽ फेर ने कहता, हम धरतीक चकोर ।।*२ रातिमे बैसल एकटक चानकेँ, देखल करैछ चकोर । साहित्यक छी कोर−कल्पना, साँच ने एहिमे थोड़ ।।*३ छोट लोल आ छोटकी मूरी, बड़की टा केर पेट छै । छोटकी दूटा पाँखि उड़ए नहि, सौंसे देह बस पेट छै ।।*२ तित्तिर बटेर सनि लड़ैछ ईहो, करैछ मनुक्खक मनोरंजन । इएह कारणेँ राष्ट्र-चिड़ै कहि, पाक करैतछि अभिनन्दन ।।*४ संकेत आ किछु रोचक तथ्य - *१ *२ - मैथिली सहित समस्त भारतीय साहित्यमे चान आ चकोरक उपमा-उपमेय रूपी उदाहरण प्रसिद्ध अछि । ओहने एकटा गीत केओ भाइसाहेब गाबैत छलाह आ ताहि पर आँगनक छोट मुदा नटखट भाए-बहीन सभक ई कटाक्ष भरल उक्ति अछि । ओ सभ गीतक भाव नञि बूझि शाब्दिक अर्थकेँ ध्यानमे राखि कटाक्ष कऽ रहल अछि जे चकोरक तँऽ सौंसे देहमे खाली पेटे छै तखन भाइजी ओकरा अपनासँ तुलना कोना कऽ रहल छथि; शायद भाइजी कहियो चकोर नञि देखने छथि । *३ - मैथिली सहित समस्त भारतीय साहित्यमे चान आ चकोरक जे खिस्सा-पिहानी बताओल गेल अछि से बस साहित्यिक प्रलाप थिक । ओहिमे वास्तविकता लेशमात्रो नञि अछि । *४ - बटेर आ तित्तिर जेकाँ चकोर केर लड़ाएब सेहो किछु समुदायमे प्रसिद्ध अछि । तेँ ओ मनोरंजक पक्षीक श्रेणीमे आबैत अछि । पाकिस्तानक ओ राष्ट्रिय चिड़ै अछि । हंसक या जलपद (बाल कविता) हम हंसक, जलपद सेहो कहबी, लोक तँऽ हमरो हंस कहैए ।*१ हंस भेल भारतसँ अलोपित, लोक तँऽ हमरे हंस बुझैए ।।*२ हंस ओ बत्तख दुहुक बीचमे, हमरहि तँऽ स्थान आबैए । की बेजाए हंसहि सनि हमरो, जगमे जञो सम्मान भेटैए ?? ओहुना जगमे कहाँ कतहु छै, “नीर - क्षीर - विवेकी” हंस ? *३ ग्रीवक वक्रता आ आकारकेँ, बिसरि जाइ तँऽ छीहे हंस ।।*४ ओहुना हंसक प्रतिनिधि रूपमे, हमरहि अहँ सब बूझी हंस । ने विशिष्ट तँऽ, व्यापक अर्थमे, हमरा मानि सकै छी हंस ।।*५ संकेत आ किछु रोचक तथ्य - *१ - आकार-सुकार आ आन गुणधर्मक आधार पर “हंसक” समूहक जलीय पक्षी “हंस” तथा “बत्तख” केर बीचक जैव श्रृंखलामे अबैछ । तेँ साहित्यमे बहुधा स्पष्ट नामकरण ओ वर्गीकरणक अभाव देखल जाइछ आ उपरोक्त तीनू शब्द भ्रामक रूपेँ परस्पर पर्यायी जेकाँ प्रयुक्त होइत आयल अछि । *२ - भारतमे (विशेष कऽ पुबारी भारत ओ नेपालमे) कतेको सए किंवा हजार वर्षसँ हंसक प्रवास नञि होयबाक कारण उपरलिखित तथ्य क्रमशः आओरो बलगर होइत गेल अछि । *३ - नीर-क्षीर विवेकी हंस अर्थात दूध आ पानिकेँ फेंटला पर पृथक करएबला हंस विश्वमे कतहु नञि होइत अछि । ई मात्र साहित्यिक गल्प थिक, वास्तविकता नञि । *४ - ग्रीवा सुरेबगर वक्रता आ देहक आकारकेँ जँ छोड़ि देल जाए तँऽ हंस ओ हंसकमे बेसी अन्तर नञि । *५ - ओहुना सम्पुर्ण भारतीय उपमहाद्वीपमे वास्तविक “हंस” केर अनुपस्थितिक कारण सैकड़ों बरखसँ प्रतिनिधिस्वरूप हंसकेकेँ हंस मानल जाइत रहल अछि। चकबा या चकेबा (बाल कविता) साम - चक, साम - चक, चक माने की ? *१ चकसँ चकेबा − से बुझही ।। चकबा - चकेबा एक्कहि बात । संस्कृतमे कहबए चक्रवाक ।।*२ एकरे नाम छी ब्राह्मिणी हंस । कर अबाज जेना करइछ हंस ।।*३ चक्रबद्ध निकसए छै अबाज । तेँ कहबैछ ओ चक्रवाक ।।*४ सामा दाइकेँ पड़लन्हि श्राप । तेँ ओ भए गेलीह चक्रवाक ।।*१ ई छी एकटा चिड़ै केर नाम । बसए चिड़ै जे दोसर ठाम ।।*५ उत्तर - भर ठण्ढा जे प्रदेश । ततहिसँ आबए अपना देश ।।*५ ठण्ढीमे आबए एहि ठाम । शान्त जलाशय कर विश्राम ।। कोशीक कछेड़, कोशी बैराज । एकर प्रिय - स्थली - प्रवास ।।*६ कहुखन बड़का पोखरि बीच । पानिमे बत्तख सनि ई जीव ।।*६ रातिमे विचरए सर्वाहारी । लोल पछलुका पाँखि छै कारी ।।*७ स्वर्णिम बिचला देह आ पाँखि । उज्जर गर्दनि कारी आँखि ।।*७ संकेत आ किछु रोचक तथ्य - *१ - संदर्भ पाँती − “साम-चक, साम-चक अबिहऽ हे” − मिथिलाक विशिष्ट पाबनि “सामा - चकेबा”सँ । एहि पाबनिक कथामे सामा दाइ श्रापक कारण चकेबा चिड़ै भऽ गेल छलीह । *२ - तत्सम “चक्रवाक” केर तद्भव रूप अछि “चकबा” या “चकेबा” । *३ - हंस सनि आबाज निकालबक कारण एकरा संस्कृत साहित्यमे “ब्राम्हिणी हंस” सेहो कहल गेल अछि । *४ - चकेबाक ई हंसवत आबाज चक्रबद्ध रूपमे नकलैत अछि (A SERIES OF LOUD NASAL HONKING NOTES/CALL) तेँ संस्कृतमे एकर नाम पड़ल “चक्रवाक” (चक्र = चक्रबद्ध तथा वाक् = बोल/आवाज) । *५ - मिथिला सहित सम्पुर्ण भारतवर्षमे चकेबा प्रवासी पक्षी (MIGRATORY BIRD) केर रूपमे आबैत अछि । एकर मूल स्थान उतरबारी एशिया (रूसक साइबेरिया क्षेत्र) आ दच्छिन-पूब यूरोप अछि जाहि ठाम सालहु भरि भारतक अपेक्षा मौसिम ढण्ढा रहैत अछि । ठण्ढीक समयमे ओहि क्षेत्रसभमे असहनीय ढण्ढी पड़बाक कारण ई चिड़ै पड़ाए कऽ वा प्रवास कऽ हिमालय केँ नाँघि भारतीय उपमहाद्वीपमे आबैत अछि आ एहि ठामक पैघ ओ मीठ पानिक जलाशयसभमे, वा शान्त बहैत नदीक कछेड़ वा बाढ़िक पानिसँ बनल दलदली क्षेत्रसभमे देखल जा सकैत अछि । नेपाल स्थित कोशी-बैराजमे कोनहु एक समयमे एहि चिड़ै केर उपस्थिति चारि हजार (4000) धरि देखल गेल अछि । *६ - पानिमे हेलैत काल ई स्वर्णाभ-पीयर पाँखियुक्त बत्तख सनि लागैत अछि । कहुखन - कहुखन सिल्ली जेकाँ सेहो लागैत अछि पर चकेबा आ सिल्ली दुहु दू चिड़ै केर नाम थिक । *७ - एकर लोल आ पछिला नाङ्गरि परहक पाँखि कारी होइत अछि । शेष पाँखि ऊपर सँ स्वर्णाभ-पीयर आ भीतरसँ उज्जर होइत अछि । वक्ष तथा उदर सेहो स्वर्णाभ-पीयर रहैत अछि । माथ, गर्दनि आ मुख्य पंखक पछिला हिस्सा प्रायः उज्जर सनि रहैत अछि । नाङ्गरि/लाङ्गरि आ नाङ्गर मैथिलीमे श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द अछि - · नाङ्गरि/लाङ्गरि - पूँछ (TAIL) · नाङ्गर - प्रायः एक पएरसँ विकलाङ्ग (HEMIPARESIS / HEMIPARALYSIS / HEMIPLEGIC); दुहु पएरसँ विगलाङ्ग तथा चलबा वा ठाढ़ हएबामे असमर्थ “लोथ” (PARAPARESIS / PARAPARALYSIS / PARAPLEGIC) कहल जाइत अछि । बत्तख (बाल कविता) हंस आ हंसकसँ हम छोट । ओकरा सभसँ कम्मे मोट । तइयो उड़ि नञि पाबैत छी ।।*१ हमरामे बहुते वैविध्य । बेसीतर नहिञे उड़ैछ । जलक्रीड़ा केर आदति छी ।।*२ नञि उड़ैछ बत्तख संज्ञा । जँ उड़ैछ हंसक उपमा । उड़बासँ हंस कहाबैत छी ।।*३ चितकाबर उज्जर कारी । पीयर भूरा मटियाही । पएर पीयर - नारंगी छी ।।*४ पानिमे हेलएमे माहिर । डुम्मी काटएमे माहिर । उड़बा केर बदला इएह सही ।।*५ अंडा छी कम्मे स्वादिष्ट । पर बूझू बहुते पौष्टिक । तेँ अहँ पोषैत - पालैत छी ।।*६ संकेत आ किछु रोचक तथ्य - *१ - हंस ओ हंसक केर तुलनामे बत्तख बहुत छोट आ हल्लुक होइत अछि पर तइयो बेसीतर बत्तख उड़ि नञि पाबैत अछि । *२ - अंग्रेजीक DUCK शब्द केर क्षेत्र बहुत व्यापक अछि; तहिना मैथिलीक “बत्तख” केर क्षेत्र सेहो । एकर अन्तर्गत कतेको वंशक जलीय पक्षीक बहुतो जाति ओ प्रजाति आबेत अछि जाहिमे बेसीतर नञि उड़ि सकैत अछि । *३ - DUCK या “बत्तख” शब्दक अन्तर्गत आबए बला बेसीतर चिड़ै उड़ि नञि पाबैत अछि । पर एकरहि अन्तर्गत उपविभाग SHELDUCK मे आबए बला चिड़ै नीक उड़ान भरैत अछि आ प्रवासी प्रकृतिक होइत अछि । मैथिलीमे प्रायः नञि उड़ि सकए बला DUCK केँ “बत्तख” कहल जाइत अछि पर उड़ए बला DUCK केँ व्यापक स्वरूपमे “हंस” कहि देल जाइत अछि । एहेन किछु DUCK केर लेल मैथिलीमे विशिष्ट नाम सेहो अछि, यथा - चकेबा, सिल्ली आदि । *४ - देहक रंग जे हो पर अपना दिशि प्रायः बत्तखक पएरक रंग पीयर वा नारंगी सनि होइत अछि । *५ - ओना तँऽ प्रायः हर बत्तखमे कमोबेश हेलबाक आ गोंता लगएबाक क्षमता होइत अछि, पर समुद्री परिवेशमे भेटए बला बत्तख बहूत गँहीर गोंता लगाबएमे माहिर होइत अछि । *६ - जे केओ अण्डा खाइत छथि तनिका कथनानुसार बत्तखक अण्डा मुर्गीक अण्डाक अपेक्षा कम स्वादिष्ट होइत अछि । यूनानी आ पारम्परिक चिकित्सामे एकरा विशेष पौष्टिक ओ औषधीय गुण सम्पन्न मानल जाइत अछि । पपीहा (बाल कविता) पपीहा, देखू देखि रहल अछि पपीहा । पपीहा, जा कऽ सभसँ कहत पपीहा । पपीहा, देखू चुप नञि रहत पपीहा ।*१ पपीहा, मुदा केहेन होइछ पपीहा ?? कू - कू - कू - कू कोइली गाबए । पी - पी पपीहा राग अलापए । किछु कोइली सनि लागि रहल ओ, लोल बाज केर भ्रम उपजाबए ।।*२ बहुत किछु कोइलीसँ मिलए पपीहा । लागए खन एक्के कोइली - पपीहा । बहुत केओ कह पर्याय पपीहा । मुदा छी अलगे कोइली - पपीहा ।।*३ भरण-परजीवी कोइली सनि ओहो । आन चिड़ैकेँ धोखबै छै ओहो । अपन ने खोंता बनबै छै आ, अनकहि खोंता अण्डा दैछ ओहो ।।*४ बहुत धोखेबाज चिड़ै छै पपीहा । केवल नर गाबए गीत पपीहा ।*५ गीत, धोखा केर गीत पपीहा ।*६ अहाँ देखितहुँ ने चिन्हब पपीहा ।।*७ संकेत आ किछु रोचक तथ्य - *१ - ई तीनू पाँती एक टा पुरान हिन्दी फिल्मी गीतक मैथिली अनुवाद थिक । फिल्मक नाम छल “फरियाद” जे सन १९६४ ई॰मे बनल छल । एहि गीतमे कहल गेल बातकेँ वास्तविकतासँ कोनहु सम्बन्ध नञि थिक । पर मोनमे एक टा जिज्ञासा अवश्य होइत अछि कि आखिर ई “पपीहा” नामक चिड़ै देखबामे केहेन होइत अछि । *२ - कोइली आ पपीहा एक्कहि परिवारक चिड़ै अछि । दुनुकेर आवाज मनुक्खक लेल कर्णप्रिय थिक । पपीहा केर लोल “बाज” नामक चिड़ै जेकाँ आगाँसँ मुड़ल होइत अछि तेँ अंग्रेजीमे एकरा HAWK CUCKOO कहल जाइत अछि । *३ - बहुत लोक कोइली आ पपीहाकेँ एक-दोसराक पर्यायी नाँओ बुझैत छथि पर से नञि - दुहु भिन्न चिड़ै थिक । *४ - सभ प्रकारक कोइली आ पपीहा शिशु-भरण परजीवी (BROODING PARASITE) होइत अछि । ओ अपन अण्डा कौआ, करिया धनछुआ, धनछुआ या एहि तरहक आन चिड़ैसभक खोंतामे दैत अछि जे कि शिशु-भरण पोषक (BROODING HOST) केर भूमिका निमाहैत अछि । शिशु-भरण परजीवी अपन अण्डा चोड़ा-नुका कऽ शिशु-भरण पोषकक खोंतामे दऽ दैत अछि आ शिशु-भरण पोषक अपन अण्डाक संग-संग परजीवीक अण्डाकेँ सेहो सऐत अछि, अण्डासँ बच्चाकेँ निखालेत अछि आ खोअबैत-पिउपैत अछि । उड़बा जोकर भेलापर परजीवी कोइली या पपीहाहक बच्चा अपना-अपना झुण्डमे भागि जाति अछि आ ताहि बच्चाकेँ भागि गेला पर स्त्री/मादा कौआकेँ उदास होइत सेहो देखल गेल अछि । *५ - नर/पुरुष कोइली जेकाँ केवल नर/पुरुष पपीहा “पी - पी” केर आवाज निकालैत अछि, मादा/स्त्री पपीहा नञि । *६ - पपीहा “पी - पी” केर आवाज वास्तवमे कौआ आदि केँ खौंझएबाक लेल निकालैत अछि । कौआ खौंझा कऽ अपन खोंता छोड़ि नर/पुरुष पपीहाकेँ खेहाड़ैत अछि आ ताहि बीचमे मादा/स्त्री पपीहा अपन अण्डा ओहि कौआक खोंतामे धऽ दैत अछि । कोइलीक “कू - कू” केर आवाज सेहो इएह तरहक आवाज अछि । *७ - कएक बेर पपीहा सामने रहितो अछि तँऽ साधारण लोक ओकरा नञि चीन्हि पाबैत अछि, ओकरा “बाज” बुझबाक धोखा कऽ बैसैत अछि । पपीहा, कोइली आ मएना भूआ खाए मे माहिर (EXPERT) होइत अछि । ओकरा बूझल रहैत छै कि भूआ (CATERPILLARS / CATERPILLAR LARVAE) केर कोन भाग विषाह छै । भूआक विषाह भागकेँ ओ अपन चाङ्गुरसँ दाबि कऽ आ गाछक ठोस डाढ़ि पर रगरि कऽ हटा दैत छै आ खा जाइत अछि । सिल्ली (बाल कविता) झुण्डक - झुण्ड आबै छै, उतरए पोखरि - डबरा - खत्ता । सर्वेक्षण कऽ पहिने देखैछ, कत्तऽ मनुक्ख निपत्ता ।।*१ जाहि ठाम मनुखक सञ्चर, ने उतड़ए ओ ताहि ठाम । आबादीसँ दूर जलाशय, ठण्ढी - सिल्ली - धाम ।। उतड़ए शान्त जलाशय, खेलए - कूदए - भूख मेटाबए । कनिञे कालमे उड़ए झुण्ड, ताकए फेर नऽव जलाशय ।। बत्तख सनि लागए धरती पर, दूर - गगन पानिकौआ । सिल्ली हेंजक-हेंज आबैछ, एकसरि प्रायः पानिकौआ ।।*२ मिथिलामे बुझले अछि सभकेँ, जीहक बड़ चटकार । मांसु लेल सिल्ली केर होइतछि, गामे - गाम शिकार ।। संकेत आ किछु रोचक तथ्य - *१ - पानिकौआ आ सिल्ली दुहु चिड़ै पानिमे उतड़बासँ पहिने पूरा क्षेत्र केर आकाशीय सर्वेक्षण करैत अछि आ मनुक्खसँ सुरक्षित दूरी देखलाक बादे पानिमे उतरैत अछि । ई सर्वेक्षण एक वा एकाधिक बेर ताहि क्षेत्रविशेषक चक्कर काटि कऽ कएल जाइत अछि । पानिकौआ ई सर्वेक्षण प्रायः एकल स्वरूपमे करैत अछि जखनि कि सिल्ली सामुहिक रूपसँ । *२ - पानिमे हेलैत काल सिल्ली बत्तख सनि लागैत अछि जखनि कि आकाशमे उड़ैत काल पानिकौआ सनि । पर बत्तख एतेक ऊँच कखनहु नञि उड़ैत अछि आ पानिकौआ एतेक पैघ झुण्डमे कहियो नञि देखाई दैत अछि । पानिकौआ या पानिकौर (बाल कविता) पाछाँ कौआ सनि छै कारी, या कारी नर कोइली सनि । आगाँ ककरो कारी - उज्जर, या छाउरक छै रंग जेहेन ।।*१ कोनो जलाशय, जतऽ मनुक्खक, आबाजाही कम हो । ताहि भीड़*२लग, गाछ बाँस पर, पानिकौआ हरदम हो ।। आँखि गड़ओने, पोखरिक पानिमे, बैसल एकटक ताकए । देखिते माछ, ओ आबए चट दऽ, लूझि लोलमे भागए ।। बहुधा माछ पकड़बा लए ओ, पानिमे गोंता मारए । भीजल पाँखिकेँ, ऊँच गाछ पर, फोलि हवामे सुखाबए ।।*३ पानिमे हेलबासँ पहिने, ओ करैछ क्षेत्र सर्वेक्षण । दूरी उचित मनुक्खसँ तखनहि, पानिक बीच पदार्पण ।।*४ कारी हंस वा बत्तख सनि ओ, पानिमे हेलैत लागैछ । मनुखक आहटि दूरहुसँ जँ, चट दऽ उड़ि कऽ भागैछ ।। जलकर - माछक व्यवसायीकेँ, करैछ बहुत नोकशान । बान्हि छकाबए करिया पन्नी, बूझए उतड़ल आन ।।*५ एहि धरती केर एक द्वीप पर, पानिकौआ छी एहनो । उड़ि ने सकै ओ पंख अछैतो, उड़ै छल पहिने कखनो ।।*६ संकेत आ किछु रोचक तथ्य - *१ - पानिकौआ (उच्चारण - पैनकौआ) या पानिकौर (उच्चारण - पैनकौर) केर पछिला भाग (पीठ दिशका भाग) भीजल रहला पर एकवर्णी कौआ सनि कारी लागैत अछि जखनि कि सुखाएल रहला पर कारी तँऽ अवश्ये रहैत अछि पर कारीक मात्रामे तर-तम भाव बुझना जाइछ । अगिला भाग (पेट दिशका भाग) कोनहु प्रजातिमे कारी, कोनहुमे उज्जर वा कोनहुमे छाउरक रंग सनि कारी होइत अछि । लोल सेहो छाउरक रंग सनि होइत अछि । *२ - भीड़ - ई शब्द मैथिलीमे अनेकार्थक अछि - · भीड़ - पहिल अर्थ भेल “मेला-रेला” या “जनसमूह” · भीड़ - दोसर अर्थ भेल “पोखरिक भिण्डा” एहि ठाम दोसर अर्थ (भिण्डा) अभिप्रेत अछि । *३ - पानिकौरक लेल पानिसँ भीजल अपन पंखकेँ सुखाएब आवश्यक थिक । ताहि हेतु ओ कोनहु गाछक ऊँच डाढ़ि पर वा बाँसक छुपुङ्गी पर अपन पंखकेँ पसारि कऽ बैसि जाइत अछि आ हवामे ओकरा सुखबैत अछि । *४ - पानिकौआ आ सिल्ली दुहु चिड़ै पानिमे उतड़बासँ पहिने पूरा क्षेत्र केर आकाशीय सर्वेक्षण करैत अछि आ मनुक्खसँ सुरक्षित दूरी देखलाक बादे पानिमे उतरैत अछि । ई सर्वेक्षण एक वा एकाधिक बेर ताहि क्षेत्रविशेषक चक्कर काटि कऽ कएल जाइत अछि । पानिकौआ ई सर्वेक्षण प्रायः एकल स्वरूपमे करैत अछि जखनि कि सिल्ली सामुहिक रूपसँ । *५ - पानिकौआ आ सिल्ली दुहु माछ खाइत अछि आ तेँ व्यावसायिक रूपेँ माछ पोषनिहार लोकक लेल हानिकर अछि । तेँ ओसभ डोरीमे बीच-बीचमे करिया पन्नीकेँ (पॉलीथीन) बान्हि पोखरिक एक भीड़सँ दोसर भीड़ धरि टाँगि दैत छथि । आकाशीय सर्वेक्षण करए काल पानिकौआ आ सिल्ली एकरा पहिनेसँ उतरल आन पानिकौआ या सिल्लीक समूह बूझि धोखा खाए जाइत अछि आ ओहि जलाशयक पानिमे नञि उतड़ैत अछि । *६ - प्रशान्त महासागरक (GALAPAGOS ISLANDS) गॅलापॅगॉस द्वीपसमूह पर पानिकौरक एक टा एहेन प्रजाति थिक जकरा पाँखि तँऽ छै पर ओ उड़ि नञि सकैत अछि । मतलब कि उड़नाइ बिसरि गेल अछि आ तेँ ओकर पंख बहुत छोट भऽ गेल छै आ देह भारी । एकरा गॅलापॅगॉस पानिकौआ या गॅलापॅगॉस पानिकौर (GALAPAGOS CORMORANTS) कहल जाइत अछि । एकर वैज्ञानिक नाँओ फॅलॅक्रॉकॉरेक्स हॅरीसी (Phalacrocorax harrisi) थिक । कठखोद्धी या कठखोधी (बाल कविता) काठ खोधै छै अपना लोलसँ, कहबै छै तेँ कठखोद्धी । जे धरती पर माटि खोधै छै, से ने बुझियौ कठखोद्धी ।। काठ खोधि बनबइए धोधरि, गाछे - गाछे कठखोद्धी । गाछे नञि लकड़ीक उपस्कर, खाम्हो खोधैछ कठखोद्धी ।। माटिखोद्धी केर पातर लोल, कठखोद्धी केर मोट छै । माटिखोद्धी केर नमगर लोल, कठखोद्धीक किछु छोट छै ।। माटिखोद्धी केर माथक कलगी, पीयर आओर विभक्त छै । कठखोद्धी केर लाले टुहटुह, जँ छै तँऽ संशक्त छै ।।*१ पीठ - पाँखि पर स्वर्णिम पीयर, मूल रंग चितकाबर छै । अपना ठाँ इएह बेसी भेटत, जगक विविधता व्यापक छै ।।*२ चिड़ै छै पर गाछहु पर ओ तँऽ, सरपट दौड़ै - भागै छै ।*३ नाङ्गरिकेँ ओ आड़*४ बना कऽ, टिका गाछ पर बैसए छै ।। लोलसँ ठक-ठक करइत गाछमे, धोधरि सेहो बनाबै छै । अपनहु ओहिमे बास करैए, आ दोसरोकेँ बसाबै छै ।।*५ काठक अन्दरमे जे कीड़ा, परजीवी बनि पैसल छै । तकरा खा कऽ पेट भरए ओ, गाछक जिनगी बढ़बै छै ।।*६ संकेत आ किछु रोचक तथ्य - *१ - माटिखोद्धी केर माथक कलगी नारंगी-पीयर रंगक ओ अरीय रूपसँ विभक्त होइत अछि । जखनि कि आपना दिशि सामान्य रूपसँ भेटए बला कठखोद्धीक माथक कलगी लाल रंगक होइत अछि आ माटिखोद्धीक कलगीक तुलनामे संशक्त होइत अछि । विश्वक आन भाग मे पाओल जाए बला कठखोद्धीक किछु प्रजातिमे या तऽ कलगी नञि होइत अछि या आन रंगक सेहो होइत अछि । *२ - विश्वमे कठखोद्धीक बहुत तरहक बगए-बानी अछि पर अपना दिशि बेसीतर एहने भेटैछ । *३ - चिड़ै होयबाक बावजूदो ई गाछ पर उदग्र रूपेँ (VERTICALLY) तेजीसँ दौड़ि सकैत अछि । ई एकर विशेषता अछि । *४ - आड़ = गाछ पर अपनाकेछ एक स्थान पर बेसी काल टिकएबाक लेल आ काठ खोधए काल देह हिलए-डोलए नञि ताहि हेतु कठखोद्धी अपन नाङ्गरिकेँ मजगूत आड़ जेकाँ उपयोगमे आनैत अछि । *५ - माटिखोद्धी गाछमे वा काठमे धोधरि नञि बनबैत अछि जखनि कि कठखोद्धी बनबैत अछि । ओहि धोधरिमे पहिने अपने रहैत अछि आ बादमे छोड़ि देला पर ओहि परित्यक्त धोधरिकेँ आन चिड़ै (जेना कि - सुग्गा) वा दोसर कोनहु जीव ओकरा अपन खोंता या घऽरक रूपमे प्रयोग करैछ । *६ - गाछक अन्तः परजीवीक (ENDO PARASITES) रूपमे जे कीड़ा-मकोड़ा गाछमे घुसल रहैत अछि आ गाछक लेल नोकशानदायक होइछ तकरा आ तकर अण्डा ओ बच्चाकेँ कठखोद्धी खा जाइत अछि । एहि तरहेँ कठखोद्धीक पेट भड़ैत अछि आ संगहि गाछ सभक आयुर्दा बढ़ैत अछि । पानिडुब्बी या मछरेंगा (बाल कविता) मत्स्यरंक संस्कृतक छी हम, अंग्रेजीक किंगफिशर । पानिडुब्बी सभ लोक कहैए, मिथिला माटिक ऊपर ।।*१ मछरेंगा सेहो हमरे नाम छी, संस्कृतहिसँ निकलल । दच्छिन-पूब विदेहक भू पर, नाम ईहो अछि भेटल ।।*१ नील-हरित छी पीठ-पंख, आ श्वेत श्याम वक्षोदर । लाल-नारंगी चटक रंग सेहो, बीचमे फेंटल फाँटल ।।*२ लाल-नारंगी-कत्थी-कारी, चटक रंग छी लोलक । कायक तुलना पैघ लोल छी, से अपनहुँकेँ बूझल ।।*३ कएटा जाति-प्रजाति हमर, सौंसे संसारमे पसरल । पर मिथिलासहिते भारतमे, बेशी एहने भेटत ।।*४ माछ प्रिय हमरा छी बहुत, तेँ एहने सभटा नाम । बेरि - बेरि काटी हम डुम्मी, पानिडुब्बी तेँ नाम ।।*१ कोनहु जलाशय नहरि-नदी वा पोखरि-डबरा-खत्ता । काते-काते बैसल देखब, झुकल गाछ वा खुट्टा ।। संकेत आ किछु रोचक तथ्य - *१ - मैथिलीमे एकर दू टा नाम अछि । पहिल अछि “पानिडुब्बी चिड़ै” (उच्चारण - पैनडुब्बी) जे कि माछ पकड़बा लेल बेर - बेर गोंता लगएबाक (वा झपट्टा मारबाक) कारण पड़ल होयत । दोसर पर्यायी नाम अछि “मछरेंगा” जे कि सम्भवतः संसकृत नाम “मत्स्यरंक” केर तद्भव रूप थिक । *२ - एकर किछु प्रजातिमे लालछौंह पीयर वा नारंगी रंग सेहो भेटैछ आन किछु प्रजातिमे नञि । *३ - पूरा शरीरक तुलनामे एकर लोल बेस नमगर, मोट आ ठोसगर बुझना पड़ैछ । *४ - विश्वमे पानिडुब्बी चिड़ै केर कएक टा जाति - प्रजाति पाओल जाइत अछि जाहिमे कोनहु पीयर रंगक तँऽ कोनहु नारंगी, कोनहु भूरा तँऽ कोनहु चितकाबर रंगक सेहो होइत अछि । माटिखोद्धी या माटिखोधी (बाल कविता) बैसल - बैसल माटि खोधै छेँ, माटिमे की तोँ ताकै छेँ ? गाछ लोलसँ ठक - ठक करइत, कठखोद्धी सनि लागै छेँ ।।*१ हम ने अनेरो माटि खोधै छी, कीड़ा − खएबा लेल तकै छी । गाछक छालकेँ खोधि-खाधि कऽ, सेहो अपन आहार तकै छी ।।*२ काठ खोधि ने धोधरि बनबी, कठखोद्धीसँ भिन्न छी हम ।*३ हमर लोल पातर - नमगर छी, माटि खोधक उपयुक्त जेहेन ।।*४ माथ - वक्ष - गर्दनि छी पीयर, पीयर - नारंगी अछि कलगी । खोधए काल माटि − पंखा सनि, शोभए माथ हमर कलगी ।।*५ पछिला भाग पाँखि आ नाङ्गरि, श्वेत - श्याम एकान्तर छी । कठखोद्धी देखब ने माटि पर, हमरा - ओकरामे अन्तर छी ।।*६ संकेत आ किछु रोचक तथ्य - *१ - नमगर आ पातर लोलसँ माटि वा गाछक अलगल छाल पर बेरि - बेरि आघात करबाक कारण अपना दिशि सामान्य लोक एकरा प्रायः कठखोद्धी बूझि लैत अछि । *२ - माटिखोद्धी माटिक तऽरसँ आ गाछक छालक भीतरसँ कीड़ा-मकोड़ा आ ओकर अण्डा बच्चाकेँ ताकि कऽ खा जाइत अछि । *३ - माटिखोद्धी गाछक छालक भीतरसँ मात्र कीड़ा-मकोड़ाकेँ ताकि भक्षण करैत अछि; कठखोद्धी जेकाँ काठकेँ खोधि कऽ धोधरि नञि बनबैत अछि । *४ - माटिखोद्धीक लोल कठखोद्धीक लोलक अपेक्षा बहुत पातर आ नमगर होइत अछि जे किछु नम (भीजल) माटि आ गाछक अलगल छाल खोधबाक लेल विशेष उपयुक्त अछि नञि कि मजगूत काठ खोधबाक लेल । *५ - माटिखोद्धीक माथ पर नारंगी-पीयर रंगक कलगी (CROWN) होइत अछि । ई कलगी मुर्गाक कलगी जेकाँ अविभक्त नञि भऽ कऽ अरीय ढंगसँ(RADIALLY) विभक्त वा खण्डित रहैत अछि । माटि खोधबा काल ई कलगी पंखा जेकाँ फुजि जाइत अछि (FANNING) वा पसरि जाइत अछि । *६ - माटिखोद्धीक पछिला भाग पर एकान्तर क्रममे कारी आ उज्जर रंगक पट्टी रहैत अछि । माटिखोद्धी जेकाँ कठखोद्धीकेँ माटि खोधैत नञि देखब । ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)2004-16. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेता, से आशा करै छी। रचनाक अंतमे टाइप रहए, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/ संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै। ऐ ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-16 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.co.in पर संपर्क करू। ऐ साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल।५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सिद्धिरस्तु वि दे ह विदेह Videha বিদেহ www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १९५ म अंक ०१ फरबरी २०१६ (वर्ष ९ मास ९८ अंक १९५) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA
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का. की fa PHOS eis Tn teat ee ek नर, के aie 4 मैथिली - सिरैली cif कि सिरोली) / नकली नीलकण्ठ हिन्दी - नकली नीलकण्ठ संस्कृत - नीलाड्ग, चलपुच्छ अंग्रेजी - INDIAN ROLLER (इण्डियन रॉलिर) / BLUE JAY (ब्ल्यू / ब्लू जे) जैववैज्ञा० नाम - Coracias indica syn. Corvus bengalensis syn. Coracias bengalensis etre - संस्कृत भाषामे आयल हरेक नाँओ या पर्यायी नाँओ स्वतः मैथिली भाषामे पर्यायी नॉओ ats जाइत अछि - तत्सम स्वरूपमे)
oe | y / he tf fy ma 4 ( हे ae ae : i es लिन a ROLLER | INDIANROLLER | INDIANROLLER aréfor - आसमाली ‘oréfor - मटियाही पीयर गर्दनि - मटियाही पीयर (ननि कि often (नील रेग लेशो of (संगहि लीलाभ) = = स्थान - यूजेप (योजेप) | प्राप्ति स्थान - पच्छिमी एशिया, |... प्राप्ति स्थान - दच्छिल-पूब समस्त भारत (पच्छिम-उत्तर- एशिया यथा - थाइलैण्ड, 'पूब-दच्छिल आ संगडहि पुर्वोत्तर | म्यांमार, कम्बोडिया, भारतमें BE, लाओस, वियतनाम, सिंगा- प्रजातिः- प्रजातिः- पुर आदि; संगहि सटल i Coracia bengalensis होयबाक कारण पुर्वोत्तिर Coracia garrulus garrulus bengalensis |___भारतक किछु भागमें | & & प्रजातिः- | Coracia garrulus seminowi Coracia bengalensis indicus | | Coracia bengalensis affinis|
> ey 2 ग््णया —-«@ _— d ‘ ~ io q © Dr. Shashidhar Kumar “Videha” © डॉ. orf fe ora tage Ga आ लीख उपटएबाक Yio ओ पारम्परिक तरीका "sla ताकब" | ढील तकाबए काल 'जस्वन RIGA Neto करैत छल वा see चाहित छल तस्वन ढील तकनिडारि लोकनि ओकरा पड़तारि ws, पोल्हा5 ws, स्विस्सा-पिद्ानी सुना ws ढील ताकित Geils | ताहि क्रममे विभिल््न प्रकारक स्वसचित वा स्वसंशोधित गीतसभ Ral ZA छल, यथा - "lei Boil, ढीलो राली, DAS TIS छी .................."। Te ai a
तप we rate ae =, ‘eal 7 सपस ~ Pass =i Ww न efi ey हि, ‘s feaepUlis AP Ufecta? डॉ मेठ i . | Ie vy |) मैथिली - कोइली Cader) हिन्दी - कोयल संस्कृत - कोकिल, पिक आदि अंग्रेजी - cucKOO (INDIAN, ASIAN, AUSTRALIAN, PACIFIC) & KOEL / TRUE CUCKOO, Gaasilo नाम - Eudynamys spp., Cuculus spp. (मुख्यतः) the - संस्कृत भाषामे आयल हरेक नाँओ या पर्यायी नाँओ स्वतः मैथिली भाषामें पर्यायी नाँओ sts जाइत अछि - तत्सम स्वस्पमे)
| TEE ‘ - “$ a ts : लि ¢ Any . . og ret a . मं. iis tll : © Dr. Shashidhar Kumar “Videll a nd : wy. 3 SB - 2“
\ 4 fe ही ot रे की कप ५ - मैथिली - उड़ीस हिन्दी - खटमल संस्कृत - मत्कुण अंग्रेजी - BED BUGIS (बेड बैग) जैववैज्ञा० नाम - Cimex lectularis (मुख्यतः) (नोट - संस्कृत भाषामे आयल Rw लॉंओ या पर्यायी लॉओ स्वतः मैथिली भाषामे पर्यायी जाओ भर जाइत अछि - तत्सम सवरूपमे)
2 or का 77 & J thr f € eee f me. ft! iP. मैथिली - सिल्ली / सील्ली हिल्दी - सिलाही / सिल्ही / सील्ही _ संस्कृत - प्रस्ौ्यात शरली अंग्रेजी - LESSER WHISTLING DUCK / LESSER WHISTLING TEAL / INDIAN WHISTLING DUCK जैववैज्ञा० नाम - Dendrocygna javanica ete संस्कृत भाषामे आयल हरेक नाँओ या पर्यायी नाँओ स्वतः मैथिली भाषामे पर्यायी नाँओ sts जाइत अछि - तत्सम स्वरूपमे)
Se one NY SS SS: et हू २-३५ WS “ DS . Sry ONS ? ६४. em BENS ES oe - “Sess! दे £ न कक. © Dr. Shashidh@t Kumar “Videlat “Sen, SN be -—e- “ax y YS NY GS. आदिम “Rar ow va aaa mae SS Se A x ९५३ mA NS 2 wes aS कि के के LAS मैथिली - मोहखा / ear हिन्दी - महोस्त संस्कृत - महोक / काकोल / वनकाक अंग्रेजी - CROW PHEASANT / GREATER COUCAL जैंववैज्ञा८ नाम - Centropus sinensis (नोट - संस्कृत भाषामे आयल हरेक नाँओ या पर्यायी नाँओ स्वतः मैथिली भाषामे पर्यायी नाँओ भ$ जाइत अछि - तत्सम स्वरूपमे)
ye न —— a = —— मैथिली - चकबा / चकेबा / चकवा हिन्दी -चकवा संस्कृत - चक्रवाक, ब्राह्मिणी हंस अंग्रेजी - RUDDY SHELDUCK / BRAHMINY DUCK जैववैन्ञा० जाम - Tadorna ferruginea नोट - संस्कृत भाषामे आयल हरेक नाँओ या पर्यायी नाँओ स्वत: मैथिली भाषामे पर्यायी नाँओ भड जाइत अछि - तत्सम स्वरूपमे)
Wy “pf Mh, Py J वि । ? हि ny ee . कै A WGI Lae - \<Z ce BSS डर लि ae oe ye pel 4. मैथिली - चकोर अंग्रेजी - CHUKAR / CHUKAR PARTRIDGE / INDIAN CHUKAR जैंववैज्ञा० जाम - Alectoris chukar (नोट - संस्कृत भाषामे आयल हरेक नाँओ या पर्यायी नाँओ स्वतः मैथिली भाषामे पर्यायी नाँओ भड जाइत अछि - तत्सम स्वरूपमे)
कि जी जे ~~ wi 7 हर a @ | ay ‘se we re mat. gf 0 mn ~ जे Sz ey, y na q e by पे ५ . मैथिली - Nase / भग्हरा / शैंवरा / भौंरा हिन्दी - start / भौंरा संस्कृत - श्रमर / अलि / मधुप xfer / मिलिन्द / मधुकर आदि अंग्रेजी - HUMBLE BEE (Old Eng.), BUMBLE BEE, BLACK BEE / BEETEL (New Eng.) जैववैज्ञा० नाम - Bombus spp. are संस्कृत भाषामे आयल हरेक नाओ या पर्यायी नॉओ स्वतः मैथिली भाषामे पर्यायी नॉओ भ$ जाइत अछि - तत्सम स्वसपमे)
दुडु लोलक बीचमे खाली स्थान एना बुझि || Ss x * ] A + 7 = _ ©] thar Kui gga = 4 ate हु क्र x, fA, s » : \ है... अल भ जज a कै 2 Rex we के मैथिली - हँसुआ दाबी हिल््दी - बक की एक प्रजाति संस्कृत - dw, सारस अंग्रेजी - oPENBILLS / OPENBILLED STORKS (ASIAN & AFRICAN) जैंववैज्ञा० जाम - Anastomus oscitans (ASIAN) & Anastomus lamellegerus (AFRICAN) ete - संस्कृत भाषामे आयल हरेक नाँओ या पर्यायी नाँओ स्वतः मैथिली आाषामे पर्यायी नाँओ ats जाइत अछि - तत्सम स्वरूपमे)
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हा री माटालीतकण्ठ (लेकली) का अर कक cd Fy — i See aan 4 C5 a “2 = = tn ae ee कप ~ oo Ga मैंथिली - जीलकएण्ठ (असली) हिन्दी - जीलकण्ठ (असली) संस्कृत - नीलकण्ठ अंग्रेजी - INDIAN ROBIN (इण्डियन रॉबिन) जैववैज्ञा०८ नाम - Saxicoloides spp. (5, fulicatus, 5. intermedius etc.) tte संस्कृत भाषामे आयल हरेक नाँओ या पर्यायी नाँओ स्वतः मैथिली भाषामे पर्यायी नाँओ भड जाइत अछि - तत्सम स्वरूपमे)
| | 5 eS han <4 i Xi: a a pea . की * © Dr. Shashidhar Kumar “Videha” © डॉ. शशिष्र कुमर eager MPaageaa ‘face? f war किए भरेत्र पता ने ककरहु, पर जैँ we एहिना। ६. संग्रहालयमे काल्हि देखत याँ, बगरा सगरों दुनिजा !! \. "बिहार संग्रहालय” पटनामे "aR केर प्रतिमा