ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' १९६ म अंक १५ फरबरी २०१६ (वर्ष ९ मास ९८ अंक १९६) ऐ अंकमे अछि:- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१.कामिनी कामायनी- नोम्पेंह २.२.जगदीश प्रसाद मण्डल- दूटा लघु कथा २.३. मुन्ना जी- १.प्रेम विहनि कथा- बखरा २. विहनि कथा- करोट २.४.अनिल झा- व्यंग्य- अनटोटल गप्प ३. पद्य ३.१.आशीष अनचिन्हार- गजल ३.२.मुन्ना जी- गजल ३.३.नन्द विलास राय- नैतिकता आ इमान ३.४.जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’- ४टा गजल Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव Join official Videha facebook group. Join Videha googlegroups Follow Official VidehaTwitter to view regular Videha Live Broadcasts through Periscope. विदेह जालवृत्तक डिसकसन फोरमपर जाउ। संपादकीय विहनि (बिहैन) कथाक विश्व परिदृश्य: अपन एक पांति-दू पांति, एक पाराग्राफ- दू पाराग्राफक अति-लघुकथा लेल अंग्रेजी साहित्यक एकटा नव विधाक आविष्कार करएवाली लिडिया डेविसक लेखनी लघुकथा, उपन्यास आ कविताक जेनेरिक वर्गीकरणकें नै मानैत अछि आ लेखकीय स्वतंत्रताक समर्थक अछि/ हुनकर किछु लघुकथा कविता सन अछि तं किछु निबन्ध सन/ हुनकर अति- लघुकथा चुट्टीकट्टा नै अछि आ इलियटक ’आबजरवेशन’ सन अछि, बिनु भावक, जइमे भावनाक हिलकोर पाठमे पैसल अछि, बाहरमे नै/ लिडिया डेविससं जखन एकटा इंटरव्यूमे ई पूछल गेल जे ’फ्लैश फिक्शन’, ’लघ-लघुकथा’, ’अति लघुकथा’ ’गद्य कविता (प्रोज-पोएम)’ बा ’प्रोएम’ आदिक ढेर रास वर्गीकरण साहित्यमे पसरल घोर-मट्ठाक समाधान अछि तं ओ कहलनि जे जं नव वर्गीकरणक आवश्यकताक अनुभव हएत तं से बनबे करत आ स्वीकार्य हेबे करत, ओना ओइमे किछु समए लागि सकैए/ ओ कथाकें कवितासं बेसी लचक बला वर्गीकरण मानै छथि आ गद्य कविताकें कथा कहैत छथि/ लिडिया डेविसकें २०१३ ई. क मैन बूकर अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कारसं सम्मानित कएल गेल/ सैमुएल बेकिट, फ्रैन्ज काफका आ जोर्ज लुइस बोर्गेसक कथा सभ सेहो एक पैराग्राफसं सं सए पन्ना धरिक अछि/ मुदा ऐ तीनू गोटे सं भिन्न छथि फेलिक्स फेनिअन, जिनकर हजार सं बेशी तीन पांतिक उपन्यास सभक संग्रहक फ्रेंचमे १९४० ई. मे सोझां आएल आ जकर अंग्रेजी अनुवाद २००७ मे ’तीन पांतिक उपन्यास (नोवेल्स इन थ्री लाइन्स)’ क नामसं प्रकाशित भेल/ फ्रेंचमे एकर अर्थ ’लघु उपन्यास’ आ ’समाचार’ दुनु होइए आ ओ अपन समएक न्यूजक संकलन अछि/ अरन्स्ट हेमिंग्वेक ६ शब्दक कथा:”फॊर सेल: बेबी शूज, नेवर वोर्न” मे प्रारम्भ (फॊर सेल), मध्य (बेबी शूज) आ अन्त (नेवर वोर्न) तीनू छै, ई फ्लैश फिक्शनक अति रूप अछि आ हेमिंग्वेसं एकर सम्बन्ध छलैहो आकि नै, सेहो विवादक विषय अछि, कारण हुनकर मृत्युक ३० बर्खक बाद १९९१ मे हुनकासं एकर सम्बन्ध जोड़ल गेल/ ओना ऐ तरहक किछु अति प्रयोग जेना सिक्स वर्ड मेमोइर्स सीरीज (ऒनलाइन स्मिथ मैगजीन) लोकप्रिय रहल/ मैथिलीक विहनि कथा मैथिलीमे एकटा स्थापित होइत गेल विधाक लेल नव नववर्गीकरणक आवश्यकताक अनुभवक बाद बनल आ स्वीकृत भेल आ ’फ्लैश फिक्शन’, ’लघ-लघुकथा’, ’अति लघुकथा’ ’गद्य कविता (प्रोज-पोएम)’ बा ’प्रोएम आ ’आबजरवेशन’ सन ’सीड स्टोरी’क रूपमे बेशी चिन्हार भेल अछि/ साहित्य अकादेमीक ’बी’ टीम: पटना आ दिल्लीमे चेतना समितिक तर्जपर दू टा आर संस्था खुजल अछि, मैथिली लेखक संघ, पटना आ मैथिली साहित्य महासभा, दिल्ली/ चेतना समिति जकां ई दुनू सेहो नव-ब्राह्मण्वादी वार्षिक विद्यापति पर्व समारोह करैत अछि जकर नाम क्रमसं मैथिली लिटेरेचर फेस्टिवल आ वार्षिक संगोष्ठी छिऐ/ तीनूमे बहुत रास समानता छै, मैथिली साहित्यमे जे कट्टरता छै तकर ई सभ पोषण करैत अछि, साहित्यिक चोरिक जातिक नामपर ई दुनू समर्थन करैत अछि चाहे ओ पंकज झा पराशर हुअए वा सुशीला झा, चेतना समिति चोर सभकें युग-युग जियाबैत अछि आ शेष दुनू संस्था तकरा टानिक दैत अछि/ तीनू संस्था साहित्य अकादेमीसं सांइठ-गांइठ केने अछि आ चेतना समिति जकां शेष दुनू ओकरासं मान्यता प्राप्त करबा लेल लालायित आ प्रयासरत अछि, मैथिली लेखक संघ ’सगर राति दीप जरय’ कें साहित्य अकादेमी द्वारा गीड़ि लेबाक प्रयासक पूर्ण समर्थन केलक आ समानान्तर धाराक विरोधक बाद कने काल लेल ओइ प्रयासमे थमकल अछि, ओकरा द्वारा साहित्यिक चोरकें प्रश्रय देलाक कारण आ नव-ब्राह्मणवादक समर्थनक कारण समानान्तर धाराक साहित्यकार मैथिली लिटेरेचर फेस्टिवलक बायकाट केलन्हि/ जाबे ई तीनू संस्था (पहिल अछि मैरेज हाल आ शेष दुनू अछि पोस्ट मैरेज रिसेप्सन कमिटी) अपन कार्य आ उद्देश्यमे परिवर्तन नै करैत अछि, समानान्तर धाराक लोककें साहित्य अकादेमीक संग ऐ तीनूसं सेहो सावधान रहबाक चाही/ ई-पत्र सामा गीत Jan Anand Mishra, Akshay Anand Sunny, धनञ्जय झा and 4 others like this. Comments Bishnu Mandal अशीषजी ! अपनेक विवेचना ठीक अछि । मुदा एक्केटा बात के बेसी घोर मट्ठा बनेनाइ ततेक नीक नहि । धन्यवाद । Unlike · Reply · 1 · January 31 at 8:40pm Gangesh Gunjan ... मुदा विष्णु बाबू अपने मिथिला मे एकटा उक्ति बड़ प्रशस्त छैक (अशुद्धि हो तं ध्यान नहि देब:) ' वादे वादे जायते तत्त्व बोधः' सस्नेह Unlike · Reply · 2 · February 1 at 8:33am धनञ्जय झा नीक प्रयास smile emoticon Unlike · Reply · 1 · February 1 at 12:39am Ashish Anchinhar एहि प्रयासकेँ आर नीक करबाक छै तँए सुझाव देल जाए Like · Reply · February 1 at 5:05pm Jan Anand Mishra लोक गीत हमर भाषा आ समाजक जीवन्तताक परिचायक छी, साहित्यमे दस, बीस, सए, हज़ारकें हरदम निश्चित परिमाणकरूपमे नहि लेल जा सकैत अछि:, उदाहरणक रूपमे शेक्सपियरक एहि पांतिकें देखल जाए I loved Ophelia Forty thousand brothers, with all their quality of love Can not make up my sum. अइमे "Forty thousand " क अर्थ चालिस हजार नहि भ' "कतबो" अछि तहिना "हाथ दस " क अर्थ भाइक सामर्थ्य अनुसार निश्चित हैत Unlike · Reply · 1 · February 1 at 8:41am Ashish Anchinhar बहस हमरो सहए अछि जे नै बेसी तँ दसो हाथक पोखरि खुना दे मने सामर्थ्य अनुसारें Like · Reply · 1 · February 1 at 8:52am Jan Anand Mishra Ashish Anchinhar हमर विचार अहाँसँ मेल खैत अछि Unlike · Reply · 1 · February 1 at 8:59am Bhavanath Jha लोकगीत काव्य थिक। काव्य में मूल होइत छैक रस। रस में रति, हास, शोक, क्रोध, उत्साह, भय, जुगुप्सा, विस्मय, शान्त आ भक्तिएतबे भाव होइत छैक। एहि लोकगीत मे उत्साहसँ अन्य कोनो भाव नहिं भए सकैत अछि। आ उत्साह क भाव मे 'नै तँ---' के कोनो गुंजाइस नै होइत छैक।तें एतए कोनो प्रकारें विशाल पोखरिक भाव अएबाक चाही। से जेना हो। हमर एतबे कथ्य। Unlike · Reply · 1 · February 1 at 5:19pm Ashish Anchinhar Bhavanath Jha--हमरा जनैत अहाँ ऐ गीतक अर्थ दिस नै जा सकलहुँ अछि। ऐ गीतमे कुल पाँचटा कल्पित पात्र छै। पहिलबहीनि ओकर बड़का-छोटका भाए आ बड़की-छोटकी भाउज। प्रायः ई अनुभवसिद्ध गप्प छै जे भाइ केर बियाहक बाद ननदि-भाउजमे किछु-ने किछु होइतरहै छै (वाहे नीक हो की बेजाए) ननदि-भाउज दूनू अपन-अपन अधिकारक प्रयोग क्रमशः भाए आ पतिपर राखै छै। प्रस्तुत गीतमे ननद भाउज केर ओहीनोंक-झोंक केर वर्णन अछि। आब एकरा अहाँ ऐ रसक जे नाम दी। ऐठाम हम गीतक भाग जाहिमे बहीनि अपन बड़का-छोटका भाएकेँ संबोधित कऽ रहलछै तकरा राखै छी-
गाम के अधिकारी तोहें बड़का भैया हो भइया हाथ दस पोखरि खुनाय दिअ चम्पा फूल लगाय दिअ हे
गाम के अधिकारी तोहें छोटका भैया हो भइया हाथ दस पोखरि खुनाय दिअ चम्पा फूल लगाय दिअ हे
बहीनि दूनू भाएकेँ लक्ष्य करैत कहै छै जे मानलहुँ अहाँक बियाह भऽ गेल आ आब अहाँ भौजीकेँ सभ किछु देबै मुदा हमरा नै बेसी तँ कमसँ .....(कोनो वस्तुभए सकै छै) दसो हाथक पोखरि खुना दिअ।
आब गीतक ओइ भागकेँ राखै छी जाहिमे ओ ननदि अपन दूनू भाउजकेँ संबोधित करै छै--
भैया लोढ़ायल भौजो हार गाँथू हे आहे सेहो हार पहीरि बड़की बहिनी साम चकेबा खेलत हे
ई भाग ऐ गीतकेँ बुझबामे बहुत सहायता करत कारण सभ अर्थ एही भागमे छै। ननदि अपन भाउजकेँ कहै छै जे " हमर भाए जे फूल लोढ़ि कऽ (अहाँ लेल)लाएल अछि तकर अहाँ हार बनाउ (मुदा ओ हार अहाँ नै हम पहिरबै) आ हार पहीरि हम सामा खेलबै। ऐ भागसँ स्पष्ट अछि जे प्रस्तुत गीत ननदि-भउज केर नोंक-झोकक उत्कृष्ट उदाहरण अछि।
आब अहाँ ऐ नोंक-झोंककेँ जाहि रसमे राखी। मुदा ऐ गीतक मूल मंतव्य हमरा जनैत इएह।.. Like · Reply · 1 · February 1 at 6:45pm Bhavanath Jha हमरा तँ सामाक कोनो गीत मे नोंक-झोंक नहिं भेटैए। एहि सभ में नोंक-झोंक ताकब सामा पाबनिक मूल भावना कें घटाएब थिक।वास्तव मे सामा क गीत मे बहिन अपन भाइ के परम वीर योद्धा, गामक अधिकारी, रसिक, आ सभ तरहें सुखी-सम्पन्न देखए चाहैत अछि। बहिनिकउक्ति मे सभ ठाम एही मूल भावक अनुकूल शब्द छैक आ एकरे अभिव्यक्ति सभ ठाम होइत अछिोै। एकरा Fantasy कहि सकैत छी। ननदि अपनभाउजसँ जे किछु चौल करैत छैक ओहो स्वाभाविके अछि। सभ ठाम अपन नैहरक घर कें वहिन उत्कृष्ट देखए चाहैत छैक। ओहि उदात्त भावनाक दृष्टिसँदेखू तँ सभटा स्पष्ट भए जाएत। एहि भावना मे ने तँ नोंक-झोंकक गुंजाइश छैक आ ने ------ई नै तँ ई----- के कोनो गुंजाइश। नोंक-झोंक उद्दीपन भएसकैत अछि, स्थायीभाव नहिं। आ गीतक भावना स्थायीभावसँ स्पष्ट होइत छैक। Unlike · Reply · 1 · February 1 at 10:24pm धनञ्जय झा Bhavanath जी - नोंक-झोंक मतलब हंसी-ठट्ठा सेहो होइत छै Unlike · Reply · 1 · February 1 at 11:22pm Ashish Anchinhar नीक Like · Reply · February 2 at 11:06am Bhavanath Jha सामाक गीतक बहिनक दृष्टि मे ओकर भाइ एतेक वीर छैक जे वृन्दावन मे आगि लगला पर ओकरा मिझा सकैए आ चकबा बनलअपन बहिन कें ओहि आगि सँ बँचा सकैए। ओहि भाइक एक आँखिक इसारा पर एक के कहए कतेको हथिदह पोखरि खुना सकैए। ओकर भाइ लग कोनोविवशता नै छै। ओकर आज्ञा अप्रतिहत छै, अमोघ छै। भाइक जे चरित्र सामाक गीत सभ मे आएल अछि तकरा स्वतन्त्र भारतक सन्दर्भ मे नहिं बूझिवीरगाथाकालीन कोनो नायकक रूप में बूझल जेबाक चाही। बहिन अपन भाइके एहने रूप मे देखैत अछि। एकर परिवेश आ प्रवृत्ति के पाश्चात्त्यभावाभिव्यक्ति क शब्दावलीसँ सेहो परखल नै जै सकैए जतए प्रेमीक लेल घडीक चेन खरीदबा लेल प्रेमिका अपन केश काटि बेचि दैए आ प्रेमी प्रेमिकाकलेल हेयरपिन खरीदै ले अपन घडी बेचि दै ए। ई भारत छियै, एतए चन्द्रमा आ तारा तोडिकए अनबाक बात होइ छै। तैं सामाक एहि गीतक मे कोनो प्रकारेंविशाल पोखरिएक ममोला छैक आ बहिनक यैह शुभकामना छैक जे हमर भाइ एहने रहए जनिक एक इसारा पर हथिदह पोखरि खुना सकए, चम्पाक फूललगाओल जाइत रहए, कोनो विवशता नै रहै। यैह थिक सामाक बहिनक चरित्र आ ओकर शुभकामना जे एकरा गरिमा दैत छैक। एतए दसो हाथक पोखरिखुनएबाक खंघस्टल नेहोरा नै छै। Unlike · Reply · 1 · February 2 at 9:21am Ashish Anchinhar Bhavanath Jha जी आश्चर्य तँ ई लगैत अछि जे अहाँ कोन गीतक आधारपर चर्चा कऽ रहल छी से नै जानि। श्रीमान् "गाम केअधिकारी" नामक जे गीत छै तकरा जँ कियो पढ़तै तँ ओ नै कहतै जे ऐमे उदात भावना नै छै। सामा गीतमे उदात भावना प्राचुर्य छै तै आधारपर ई नैकहल जा सकैए से उदात भावना सामा गीतक अनिवार्य अंग छै। आग्रह जे एक गीत वा रचनाक आधारपर दोसर गीत वा रचनाक आलोचना नै करी जँकरबाको हो तँ तुलनात्मक रूपसँ करी।
श्रीमान् नचारी आ महेशवाणी दूनूक विषयवस्तु अलग-अलग होइ छै तँए अहाँ ओकरा अलग-अलग देवतासँ संबंधित मानि लेबै?
एकटा सोहरमे छै जे हम एतेक पातरि छी जे दर्द सहल नै होइए। दोसर सोहरमे छै जे आइ जेहन हमरा कष्ट भऽ रहल अछि आ ई कष्ट जे देलक तकरालग आइसँ हम नै जेबै। तेसर सोहर मे छै जे राति हम सूतल रही कृष्ण अपन आँगनमे खेलाइत रहथि। तँ की अहाँ हिसाबें एकटा सोहर हेतै आ बाद-बाँकीनै ?
एक बेर फेर हम ओ पूरा सामा गीत दऽ रहल छी जाहिपर अपनेक मूल बहस रहए आ जाहिपर हमर ई आलेख अछि। कने कहियौ जे कोन पाँतिमे एहनउदात भावना छै जे हमरा नै देखाइ पड़ि रहल अछि--
गाम के अधिकारी तोहें बड़का भैया हो भइया हाथ दस पोखरि खुनाय दिअ चम्पा फूल लगाय दिअ हे
गाम के अधिकारी तोहें छोटका भैया हो भइया हाथ दस पोखरि खुनाय दिअ चम्पा फूल लगाय दिअ हे
भैया लोढ़ायल भौजो हार गाँथू हे आहे सेहो हार पहीरि बड़की बहिनी साम चकेबा खेलत हे
कथी बझाएब बन तितिर हे आहे कहाँ के बझाएब राजा हंस चकेबा खेलब हे
जाले बझाएब बन तितिर हे आहे रौब से बझाएब राजा हंस चकेबा खेलब हे
गाम के अधिकारी तोहें फलां भइया हे भइया हाथ दस पोखरि बना दैह चम्पा फूल लगा दैह हे.. Like · Reply · February 2 at 11:05am · Edited Bhavanath Jha सामाक जतेक गीत छैक ओकर एकेटा कथ्य छै। ओ सभटा एके भावक पोषक छैक। अहाँकें सभटा गीत में उदा्त्त भावनाक खोजकरबाक चाही। भाइक प्रति बहिनक शुभकामना ओ बहिनक प्रति भाइक शुभकामना। शुभकामना सदिखन उदात्त होइत छैक। अहाँ एकटा गीत मेओझराएल छी। हमरा सोंझाँ ओकर कथा, ओकर पुराण आ ओकर ढेर रास गीत नाँचि रहल अछि आ संगहिं एकर परिवेश बुझबाक लेल मिथिलाक समस्तलोक गाथाक ध्वनि बुझए पडत। सभटाक आधार पर कोनो निर्णय होइत छैक। भाइक लेल गामक अधिकारी होएब की थिक? की ओ अपन भाइकेंसामन्तक रूपमे सर्वसम्पन्न देखबाक ममोला नै थिकै? Unlike · Reply · 1 · February 2 at 11:18am Ashish Anchinhar Bhavanath Jha जी हमरा बूझल छल जे अहाँ अही तर्कपर आएब। जँ अहाँ ऐ गीतमे अधिकारी केर मतलब सामंत वा officerबूझै छिऐ तखन तँ भगवाने मालिक छथि। श्रीमान् माए अपन बच्चाकेँ कहै छै "राजा बाबू" तकर ई मतलब थोड़े छै जे ओ कोनो महाराजाधिराजकेँसंबोधित केलकै।
अहाँ ढ़ेर रासपर किए जाइ छी असली फंदा इएह अछि। सामा गीतक मूल भावना छै भाए-बहीनक प्रेम से ओ अधिकारी कहि प्रगट होइ, मोती-माणिकसँप्रगट होइ की दसे हाथक पोखरिसँ प्रगट होइ। विषय हरेक सामागीतक अलग-अलग भऽ सकै छै। जेना की हम उपरमे पुछलहुँ अछि--"नचारी आमहेशवाणी दूनूक विषयवस्तु अलग-अलग होइ छै तँए अहाँ ओकरा अलग-अलग देवतासँ संबंधित मानि लेबै?
एकटा सोहरमे छै जे हम एतेक पातरि छी जे दर्द सहल नै होइए। दोसर सोहरमे छै जे आइ जेहन हमरा कष्ट भऽ रहल अछि आ ई कष्ट जे देलक तकरालग आइसँ हम नै जेबै। तेसर सोहर मे छै जे राति हम सूतल रही कृष्ण अपन आँगनमे खेलाइत रहथि। तँ की अहाँ हिसाबें एकटा सोहर हेतै आ बाद-बाँकीनै ?
अहाँ एकटा गीतक फरिझौट कऽ लिअ। सभ फरिझा जाएत।.. Like · Reply · 1 · February 2 at 11:29am · Edited Bhavanath Jha ममोला शब्दक अर्थ जँ अहाँ बुझने रहितहुँ तँ एना नै लिखितहु। Like · Reply · February 2 at 10:19pm Ashish Anchinhar Bhavanath Jha जी हम स्वीकार करै छी जे अहाँ जाहि अर्थमे ममोला प्रयोग केलिऐ से नै बुझि पेलहुँ। हम सार्वजनिक आग्रहकरै छी जे अहीं कहियौ कमसँ कम हमरा संगे आरो लोक अर्थ बुझता। ओना कनी कहि सकै छी जे ममोला =संकेत, ललायित हएब, दर्द, एकटा पक्षी, छोटबच्चा आदि होइत छै। मूल रूपसँ मोमोला एना लिखल जाइत छै ممولا संगे-संग हम ईहो धेआन राखब जे मूल बहस आन शब्दक जालमे फँसि दूर ने चलिजाए Like · Reply · February 3 at 12:34pm Bhavanath Jha ममोलाक प्रयोग एहन मनोरथ ले होइत छैक जे ओकर दृष्टि मे कहियो पूरा नै हेतैक मुदा ओकरा लेल ओ कमना करै-ए। बहिनकएहने कामना थिकैक। सम्पूर्ण सामाक गीत मे इयैह कामना छै। अहाँ जेकरा प्रेम कहै छियै ओ कामना थिकै, शुभकामना। आ तैं ओकर परिवेश उदात्तछैक। कोनो आनो लोकक उन्नति पर जँ अहाँ हुनका सँ भोज मँगबनि तँ की कहियो कहबनि जे रोटिये तरकारी खुआउ? तखनि बहन अपन भाइसँ कियैककहत जे अहाँ दसे हाथक पोखरि खुना दिय।आ जँ कहत तँ ओहिसँ बहिनक भौतिक दीनता बुझल जेतैक, जे सामाक गीतक मूल भाव नै थिक। जतएकतहु शुभकामनापूर्ण कथन हेतैक ओतए कोनो फरमाइश अपन उत्कृष्ट रूप मे हेतैक। कोनो लोकगीत मे कतहु अहाँ देखा दिय जे ननदि अपन भाउजसँपितरियाक गहना मँगैत होथि? अहाँकें भेटत जे एहेन सभठाम सोनाक गहना कि मोतीक हार माँगल गेलैए। एतए एही चरम कथनसँ शुभकामना व्यक्तहोइत छै। अहाँ अपनहुँ गजलकार छी। की एहन प्रयोग कतहु करबैक? Unlike · Reply · 1 · February 3 at 1:06pm · Edited Ashish Anchinhar Bhavanath Jha--जी जीवनक हरेक क्षेत्र जकाँ साहित्योमे प्रसंगानुकूल आ पात्रानुकूल भाषा होइत छै। ओना हमर अध्य्यनकम अछि मुदा जतबे अछि ताहिमे देखलहुँ जे ननदि अपन भाउज लग पूरा रौब-दाब, ठेसी ओ अकड़ केर संग बात करै छै। बात-बातमे नोंक-झोंक,लोकगीतमे तँ भाउज एतेक धरि कहै छै गामक कौआ-कुकुरकेँ नोंत पठा देबै मुदा ननदिकेँ नै कारण ओ बड़ झगड़ालू छथि। तँइ कोनो लोक गीत कीव्यवहारिक जीवनमे ननदि अपन भाउजसँ पितरियाक गहना नै मँगैत छै मुदा भाए लग ओ जाहि भाषाक प्रयोग करै छै ओ विनयसँ भरल रहै छै ( हरेकवस्तुक अपवाद छै एकरो भऽ सकै छै)। प्रस्तुत गीतमे एहि पात्रानुकूल भाषा पूरा-पूरी देखाइ पड़त।
प्रस्तुत गीतक ओ भाग जे भाएसँ संबोधित छै आ जे भाउजसँ संबोधित छै दूनू अलग-अलग पात्रानुकूल भाषाक उदाहरण छै।
की अहाँ मानै छिऐ जे ननदि-भाउज केर जे भाषा छै सएह भाषा भाए-बहीनक सेहो हेबाक चाही? Like · Reply · February 3 at 1:46pm Bishnu Mandal नीक सम्वाद , मुदा फोसरी सं भोकन्नर .. .. .. ॥ Unlike · Reply · 2 · February 3 at 2:32pm Gangesh Gunjan मुदा फोसड़ी संँ भोकन्नर नहि, ई कहब बेसी उपयुक्त - ' हंँसी सं मसकरी भऽ रहल ' बुझाइए हमरो आब। विष्णु बाबू की कहलजाय। मुदा घटना ई सकारात्मके थिक। सस्नेह प्रबोध साहित्य सम्मान:श्री केदार नाथ चौधरीकेँ प्रबोध साहित्य सम्मान देल गेलन्हि। बधाइ। हुनकर चारू पोथीक लिंक नीचां देल जा रहल अछि। चमेलीरानी CHAMELIRANI_MAITHILI.pdf माहुर Mahur_KedarnathChaudhary.pdf करार Karar_Kedarnath_Chaudhary.pdf अबारा नहितन विदेहक २०० म अंक: १५ अप्रैल २०१६ केँ विदेहक २०० म अंक ई-प्रकाशित हएत। ऐ मे विदेह सम्मान/ समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मानसँ सम्मानित लेखक आ हुनकर कृतिपर समीक्षा/ निबन्ध प्रकाशित हएत। अहाँसँ रचना सादर आमंत्रित अछि। विदेह सम्मान विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान १.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०१०-११ २०१० श्री गोविन्द झा (समग्र योगदान लेल) २०११ श्री रमानन्द रेणु (समग्र योगदान लेल) २.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११-१२ २०११ मूल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, कथा संग्रह) २०११ बाल साहित्य पुरस्कार- ले.क. मायानाथ झा (जकर नारी चतुर होइ, कथा संग्रह) २०११ युवा पुरस्कार- आनन्द कुमार झा (कलह, नाटक) २०१२ अनुवाद पुरस्कार- श्री रामलोचन ठाकुर- (पद्मानदीक माझी, बांग्ला- मानिक बंद्योपाध्याय, उपन्यास बांग्लासँ मैथिली अनुवाद) विदेह भाषा सम्मान २०१२-१३ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) 1.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार 2012 2012 श्री राजनन्दन लाल दास (समग्र योगदान लेल) 2.विदेह भाषा सम्मान २०१२-१३ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) २०१२ बाल साहित्य पुरस्कार - श्री जगदीश प्रसाद मण्डल केँ “तरेगन” बाल प्रेरक विहनि कथा संग्रह २०१२ मूल पुरस्कार - श्री राजदेव मण्डलकेँ "अम्बरा" (कविता संग्रह) लेल। 2012 युवा पुरस्कार- श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरीक “अर्चिस” (कविता संग्रह) 2013 अनुवाद पुरस्कार- श्री नरेश कुमार विकल "ययाति" (मराठी उपन्यास श्री विष्णु सखाराम खाण्डेकर) विदेह भाषा सम्मान २०१३-१४ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) २०१३ बाल साहित्य पुरस्कार – श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरी- “देवीजी” (बाल निबन्ध संग्रह) लेल। २०१३ मूल पुरस्कार - श्री बेचन ठाकुरकेँ "बेटीक अपमान आ छीनरदेवी" (नाटक संग्रह) लेल। २०१३ युवा पुरस्कार- श्री उमेश मण्डलकेँ “निश्तुकी” (कविता संग्रह)लेल। २०१४ अनुवाद पुरस्कार- श्री विनीत उत्पलकेँ “मोहनदास” (हिन्दी उपन्यास श्री उदय प्रकाश)क मैथिली अनुवाद लेल। विदेह भाषा सम्मान २०१४-२०१५ (समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान) २०१४ मूल पुरस्कार- श्री नन्द विलास राय (सखारी पेटारी- लघु कथा संग्रह) २०१४ बाल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (नै धारैए- बाल उपन्यास) २०१४ युवा पुरस्कार - श्री आशीष अनचिन्हार (अनचिन्हार आखर- गजल संग्रह) २०१५ अनुवाद पुरस्कार - श्री शम्भु कुमार सिंह ( पाखलो - तुकाराम रामा शेटक कोंकणी उपन्यासक मैथिली अनुवाद) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१२ अभिनय- मुख्य अभिनय , सुश्री शिल्पी कुमारी, उम्र- 17 पिता श्री लक्ष्मण झा श्री शोभा कान्त महतो, उम्र- 15 पिता- श्री रामअवतार महतो, हास्य-अभिनय सुश्री प्रियंका कुमारी, उम्र- 16, पिता- श्री वैद्यनाथ साह श्री दुर्गानंद ठाकुर, उम्र- 23, पिता- स्व. भरत ठाकुर नृत्य सुश्री सुलेखा कुमारी, उम्र- 16, पिता- श्री हरेराम यादव श्री अमीत रंजन, उम्र- 18, पिता- नागेश्वर कामत चित्रकला श्री पनकलाल मण्डल, उमेर- ३५, पिता- स्व. सुन्दर मण्डल, गाम छजना श्री रमेश कुमार भारती, उम्र- 23, पिता- श्री मोती मण्डल संगीत (हारमोनियम) श्री परमानन्द ठाकुर, उम्र- 30, पिता- श्री नथुनी ठाकुर संगीत (ढोलक) श्री बुलन राउत, उम्र- 45, पिता- स्व. चिल्टू राउत संगीत (रसनचौकी) श्री बहादुर राम, उम्र- 55, पिता- स्व. सरजुग राम शिल्पी-वस्तुकला श्री जगदीश मल्लिक,५० गाम- चनौरागंज मूर्ति-मृत्तिका कला श्री यदुनंदन पंडित, उम्र- 45, पिता- अशर्फी पंडित काष्ठ-कला श्री झमेली मुखिया,पिता स्व. मूंगालाल मुखिया, ५५, गाम- छजना किसानी-आत्मनिर्भर संस्कृति श्री लछमी दास, उमेर- ५०, पिता स्व. श्री फणी दास, गाम वेरमा विदेह मैथिली पत्रकारिता सम्मान -२०१२ श्री नवेन्दु कुमार झा नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१३ मुख्य अभिनय- (1) सुश्री आशा कुमारी सुपुत्री श्री रामावतार यादव, उमेर- १८, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) मो. समसाद आलम सुपुत्र मो. ईषा आलम, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (3) सुश्री अपर्णा कुमारी सुपुत्री श्री मनोज कुमार साहु, जन्म तिथि- १८-२-१९९८, पता- गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) हास्य–अभिनय- (1) श्री ब्रह्मदवे पासवान उर्फ रामजानी पासवान सुपुत्र- स्व. लक्ष्मी पासवान, पता- गाम+पोस्ट- औरहा, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) टाॅसिफ आलम सुपुत्र मो. मुस्ताक आलम, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, जिला- मधुबनी (बिहार) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान (मांगनि खबास समग्र योगदान सम्मान) शास्त्रीय संगीत सह तानपुरा : श्री रामवृक्ष सिंह सुपुत्र श्री अनिरूद्ध सिंह, उमेर- ५६, गाम- फुलवरिया, पोस्ट- बाबूबरही, जिला- मधुबनी (बिहार) मांगनि खबास सम्मान: मिथिला लोक संस्कृति संरक्षण: श्री राम लखन साहु पे. स्व. खुशीलाल साहु, उमेर- ६५, पता, गाम- पकड़िया, पोस्ट- रतनसारा, अनुमंडल- फुलपरास (मधुबनी) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान (समग्र योगदान सम्मान): नृत्य - (1) श्री हरि नारायण मण्डल सुपुत्र- स्व. नन्दी मण्डल, उमेर- ५८, पता- गाम+पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) सुश्री संगीता कुमारी सुपुत्री श्री रामदेव पासवान, उमेर- १६, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, जिला- मधुबनी (बिहार) चित्रकला- (1) जय प्रकाश मण्डल सुपुत्र- श्री कुशेश्वर मण्डल, उमेर- ३५, पता- गाम- सनपतहा, पोस्ट– बौरहा, भाया- सरायगढ़, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री चन्दन कुमार मण्डल सुपुत्र श्री भोला मण्डल, पता- गाम- खड़गपुर, पोस्ट- बेलही, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) संप्रति, छात्र स्नातक अंतिम वर्ष, कला एवं शिल्प महाविद्यालय- पटना। हरिमुनियाँ / हारमोनियम (1) श्री महादेव साह सुपुत्र रामदेव साह, उमेर- ५८, गाम- बेलहा, वार्ड- नं. ०९, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री जागेश्वर प्रसाद राउत सुपुत्र स्व. रामस्वरूप राउत, उमेर ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) ढोलक/ ठेकैता/ ढोलकिया (1) श्री अनुप सदाय सुपुत्र स्व. , पता- गाम- तुलसियाही, पोस्ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री कल्लर राम सुपुत्र स्व. खट्टर राम, उमेर- ५०, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) रसनचौकी वादक- (1) वासुदेव राम सुपुत्र स्व. अनुप राम, गाम+पोस्ट- िनर्मली, वार्ड न. ०७ , जिला- सुपौल (बिहार) शिल्पी-वस्तुकला- (1) श्री बौकू मल्लिक सुपुत्र दरबारी मल्लिक, उमेर- ७०, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री राम विलास धरिकार सुपुत्र स्व. ठोढ़ाइ धरिकार, उमेर- ४०, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) मूर्तिकला-मृर्तिकार कला- (1) घूरन पंडित सुपुत्र- श्री मोलहू पंडित, पता- गाम+पोस्ट– बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री प्रभु पंडित सुपुत्र स्व. , पता- गाम+पोस्ट- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) काष्ठ-कला- (1) श्री जगदेव साहु सुपुत्र शनीचर साहु, उमेर- ३६, गाम- िनर्मली-पुरर्वास, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री योगेन्द्र ठाकुर सुपुत्र स्व. बुद्धू ठाकुर उमेर- ४५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) किसानी- आत्मनिर्भर संस्कृति- (1) श्री राम अवतार राउत सुपुत्र स्व. सुबध राउत, उमेर- ६६, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) (2) श्री रौशन यादव सुपुत्र स्व. कपिलेश्वर यादव, उमेर- ३५, गाम+पोस्ट– बनगामा, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) अल्हा/महराइ- (1) मो. जीबछ सुपुत्र मो. बिलट मरहूम, उमेर- ६५, पता- गाम- बसहा, पोस्ट- बड़हारा, भाया- अन्धराठाढ़ी, जिला- मधुबनी, पिन- ८४७४०१ जोगिरा- श्री बच्चन मण्डल सुपुत्र स्व. सीताराम मण्डल, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री रामदेव ठाकुर सुपुत्र स्व. जागेश्वर ठाकुर, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) पराती (प्रभाती) गौनिहार आ खजरी/ खौजरी वादक- (1) श्री सुकदेव साफी सुपुत्र श्री , पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) पराती (प्रभाती) गौनिहार - (अगहनसँ माघ-फागुन तक गाओल जाइत) (1) सुकदेव साफी सुपुत्र स्व. बाबूनाथ साफी, उमेर- ७५, पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) (2) लेल्हु दास सुपुत्र स्व. सनक मण्डल पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) झरनी- (1) मो. गुल हसन सुपुत्र अब्दुल रसीद मरहूम, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) (2) मो. रहमान साहब सुपुत्र...., उमेर- ५८, गाम- नरहिया, भाया- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) नाल वादक- (1) श्री जगत नारायण मण्डल सुपुत्र स्व. खुशीलाल मण्डल, उमेर- ४०, गाम+पोस्ट- ककरडोभ, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री देव नारायण यादव सुपुत्र श्री कुशुमलाल यादव, पता- गाम- बनरझुला, पोस्ट- अमही, थाना- घोघड़डीहा, जिला- मधुबनी (बिहार) गीतहारि/ लोक गीत- (1) श्रीमती फुदनी देवी पत्नी श्री रामफल मण्डल, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) (2) सुश्री सुविता कुमारी सुपुत्री श्री गंगाराम मण्डल, उमेर- १८, पता- गाम- मछधी, पोस्ट- बलियारि, भाया- झंझारपुर, जिला- मधुबनी (बिहार) खुरदक वादक- (1) श्री सीताराम राम सुपुत्र स्व. जंगल राम, उमेर- ६२, पता- गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री लक्ष्मी राम सुपुत्र स्व. पंचू मोची, उमेर- ७०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) काँरनेट- (1) श्री चन्दर राम सुपुत्र- स्व. जीतन राम, उमेर- ५०, पता- गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) मो. सुभान, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) बेन्जू वादक- (1) श्री राज कुमार महतो सुपुत्र स्व. लक्ष्मी महतो, उमेर- ४५, गाम- िनर्मली वार्ड नं. ०४, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री घुरन राम, उमेर- ४३, गाम+पोस्ट- बनगामा, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) भगैत गवैया- (1) श्री जीबछ यादव सुपुत्र स्व. रूपालाल यादव, उमेर- ८०, पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री शम्भु मण्डल सुपुत्र स्व. लखन मण्डल, पता- गाम- बढियाघाट-रसुआर, पोस्ट– मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) खिस्सकर- (खिस्सा कहैबला)- (1) श्री छुतहरू यादव उर्फ राजकुमार, सुपुत्र श्री राम खेलावन यादव, गाम- घोघरडिहा, पोस्ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जिला- सुपौल, पिन- ८४७४५२ (2) बैजनाथ मुखिया उर्फ टहल मुखिया- (2)सुपुत्र स्व. ढोंगाइ मुखिया, पता- गाम+पोस्ट- औरहा, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) मिथिला चित्रकला- (1) सुश्री मिथिलेश कुमारी सुपुत्री श्री रामदेव प्रसाद मण्डल ‘झारूदार’ पता- गाम- रसुआर, पोस्ट-– मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) (2) श्रीमती वीणा देवी पत्नी श्री दिलिप झा, उमेर- ३५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) खजरी/ खौजरी वादक- (2) श्री किशोरी दास सुपुत्र स्व. नेबैत मण्डल, पता- गाम- रसुआर, पोस्ट-– मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) तबला- श्री उपेन्द्र चौधरी सुपुत्र स्व. महावीर दास, उमेर- ५५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री देवनाथ यादव सुपुत्र स्व. सर्वजीत यादव, उमेर- ५०, गाम- झाँझपट्टी, पोस्ट- पीपराही, भाया- लदनियाँ, जिला- मधुबनी (बिहार) सारंगी- (घुना-मुना) (1) श्री पंची ठाकुर, गाम- पिपराही। झालि- (झलिबाह) (1) श्री कुन्दन कुमार कर्ण सुपुत्र श्री इन्द्र कुमार कर्ण पता- गाम- रेबाड़ी, पोस्ट- चौरामहरैल, थाना- झंझारपुर, जिला- मधुबनी, पिन- ८४७४०४ (2) श्री राम खेलावन राउत सुपुत्र स्व. कैलू राउत, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) बौसरी (बौसरी वादक) श्री रामचन्द्र प्रसाद मण्डल सुपुत्र श्री झोटन मण्डल, उमेर- ३०, बौसरी/बौसली/बासुरी बजबै छथि। पता- गाम- रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) श्री विभूति झा सुपुत्र स्व. कनटीर झा, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- कछुबी, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) लोक गाथा गायक श्री रविन्द्र यादव सुपुत्र सीताराम यादव, पता- गाम- तुलसियाही, पोस्ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) श्री पिचकुन सदाय सुपुत्र स्व. मेथर सदाय, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) मजिरा वादक (छोकटा झालि...) श्री रामपति मण्डल सुपुत्र स्व. अर्जुन मण्डल, पता- गाम- रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) मृदंग वादक- (1) श्री कपिलेश्वर दास सुपुत्र स्व. सुन्नर दास, उमेर- ७०, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री खखर सदाय सुपुत्र स्व. बंठा सदाय, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) तानपुरा सह भाव संगीत (1) श्री रामविलास यादव सुपुत्र स्व. दुखरन यादव, उमेर- ४८, गाम- सिमरा, पोस्ट- सांगि, भाया- घोघड़डीहा, थाना- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) तरसा/ तासा- श्री जोगेन्द्र राम सुपुत्र स्व. बिल्टू राम, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री राजेन्द्र राम सुपुत्र कालेश्वर राम, उमेर- ५८, गाम- मझौरा, पास्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) रमझालि/ कठझालि/ करताल वादक- श्री सैनी राम सुपुत्र स्व. ललित राम, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री जनक मण्डल सुपुत्र स्व. उचित मण्डल, उमेर- ६०, रमझालि/ कठझालि/ करताल वादक, १९७५ ई.सँ रमझालि बजबै छथि। पता- गाम- बढियाघाट/रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, जिला- सुपौल (बिहार) गुमगुमियाँ/ ग्रुम बाजा श्री परमेश्वर मण्डल सुपुत्र स्व. बिहारी मण्डल उमेर- ४१, १९८० ई.सँ गुमगुिमयाँ बजबै छथि। श्री जुगाय साफी सुपुत्र स्व. श्री श्रीचन्द्र साफी, उमेर- ७५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) डंका/ ढोल वादक श्री बदरी राम, उमेर- ५५, पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) श्री योगेन्द्र राम सुपुत्र स्व. बिल्टू राम, उमेर- ५५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) डंफा (होलीमे बजाओल जाइत...) श्री जग्रनाथ चौधरी उर्फ धियानी दास सुपुत्र स्व. महावीर दास, उमेर- ६५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री महेन्द्र पोद्दार, उमेर- ६५, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) नङेरा/ डिगरी- श्री राम प्रसाद राम सुपुत्र स्व. सरयुग मोची, उमेर- ५२, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 111 ७) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 ८) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 ९) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 १०) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 ११) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ Maithili Books can be purchased from: http://www.amazon.in/ For the first time Maithili books can be read on kindle e-readers. Buy Maithili Books in Kindle format (courtesy Videha) from amazon kindle stores, these e books are delivered worldwide wirelessly:- http://www.amazon.com/ अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। गजेन्द्र ठाकुर ggajendra@videha.com २. गद्य २.१.कामिनी कामायनी- नोम्पेंह २.२.जगदीश प्रसाद मण्डल- दूटा लघु कथा २.३. मुन्ना जी- १.प्रेम विहनि कथा- बखरा २. विहनि कथा- करोट २.४.अनिल झा- व्यंग्य- अनटोटल गप्प कामिनी कामायनी नोम्पेंह भोरे करीब पाँच बजे आंखि खुजल त अपना के मेकोंग नदी के तीर प ठाढ़ पयलों।कनी कनी निनियायल ,कनी कनी यात्रा स झमाराल ,उपर चितिर बीतिर आसमानदेख् क ,आ प्रातः के प्रमुदित समीरक स्पर्श स मोन प्रफुल्लित भ उठल।दूर नदी मे नाव चलि रहल छल।बड़का विशाल नदी [तीन नदी ,मेकोंग ,बास्साक,टोनलसप,जाहि मे मेकोंग सबस पईघ अछि ],जे अनेकों देशक माटीसींचने आबिरहल छल ,अपन लंबाई मे ओतय बहि रहल छल ,एकरे चाकर चौरस छाती प बसलछै ,कोनो समय एशिया के मोती कहाबय बाला ,ओहि देश क राजधानी ,नोम्पेंह । मन के उद्दाम वेग के लगाम दईत पहिने स बुक होटल जाकय,स्नान ,खान पान केबाद तुरतही शहर भ्रमण के लिए निकसबा के छल समय बड़ कम छल ,दर्शनीय स्थान बेशी । मुख्य मुख्य स्थान के लिस्ट कैब ड्राईवर के पकड़ा देलिए। सेयाम रेयाप स कनी बिशेष स्थिति ।देशक राजधानी अछि ,त स्वाभाविके छै ,जे देशक सबटा गणमान्य ,ओहदादार, पाग वाला लोक सब अहि ठाम रहैत छथी।सुंदर भवन ,प फ्रांसीसी स्थापत्य कला के बेसी प्रभाव छैक।[ कोनो समय मे फ्रांसीसी उपनिवेश जे छल] ठाम ठाम प नगरक रच्छा करैत जेना ,विश्रामक मुद्रा मे , पाछा के दु पैर मोड़ने ,अगुलका दु पैर ठाढ़ शेरक मूर्ति सब विगत के राजसी वैभव के प्रदर्शित करिरहलछल। शहर के सड़क चौड़ा चौड़ा,साफ सुथरा सुचिक्कन सुंदर छै । कतेक ठाम ओकर सब के नेता के मूर्ति सेहो ठाढ़। फूल ,फव्वारा स सुसज्जितमैदान ,सड़क ,दोग,दाग । पहिलुक पड़ाव छल म्यूजियम ,बड़ दिव्य , प्राचीन खमेर कालक बस्तु आ कलाकृति स ऊबडुब। अँकोर काल स पहिनुक ,[चौथी सदी ]स ,अंकोर काल धरि[चौदहवी सदी के ] सबटा प्रमुख इतिहास जेना अहिठाम रेखांकित कयल गेल अछि । ओहिठाम स किछुए दूरी प राजभवन व राजकीय महल अछि ,जे अहि शहरक गौरव और बढ़ा दईत अछि । अहि विस्तृत भवन परिसर मे अनेकों दिव्य आआकर्षक महल सब अछि ,जेना दरबार हौल ,नृत्य कक्ष ,राजा के निवास ,रानी के निवास ,नेपोलियन पैवेलियन ,आ भव्य पेगोडा। अहि ठाम अंकोरवट जेका बड़भीड़ छल । शहर मोटा मोटी चारि भाग मे विभक्त छै –उत्तर दक्षिण आकर्षक आवासीयक्षेत्र ,आ फैक्ट्री ,पश्चिम बहू मूल्य आवासीय आ आर्थिक क्षेत्र{विशेष}आ मध्यव हृदय अहि शहर के फ्रांसीसी भाग ,जतय मिनिस्ट्री ,बैंक ,उपनिवेश मकान ,बाजार आ होटल सब छै । पीयर रंगक सेंट्रल मार्केट ,खरीदवैया सभक अड्डा बनल रहैतअछि ,ओहि ठाम अनेक प्रकारक स्वर्ण आ रजतक आभूषणक स्टौल लगल अछि एकरा संग संग पुरानसिक्का ,कपड़ा लत्ता ,घड़ी ,फूल ,पेंटिंग आ खेनाय के सामाग्री स भरल पड़ल अछि । दोसर प्रसिद्ध बाजार अछि टुओल टॉम पोंग मार्केट ई रसियन बाजार के नाम स से विशेष जानल जाइत अछि । अनेक ठाम नाईट मार्केट सेहो लिखल देखाय पड़ल । ओतुक्का समय जीएमटी स सात घंटा आगा छैक। स्थानीय करेंसी रिएल छै,मुदा यू स डी निधोक भ क चलै छैक । अहि ठाम रायल यूनिवर्सिटी ,यूनिवर्सिटी ऑफफाइन आर्ट ,रॉयल यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रिकल्चर आदि अवस्थित छैक । शहर स कनिक फराक विश्व प्रसिद्ध किरीरोम नेशनल पार्क छै, जेकरा घूमबा लेल पर्याप्त समय चाही। अहि ठाम प्रत्येक वर्ष बड़ भव्य जलोत्सव होईत ,छैक, जेकरओरियौन कएक मास पहिनहि स प्रारम्भ भ जाईत छैक । एक सुंदर ,एक स्वप्न मयी राजधानी के दोसर हृदय विदारक पहलू ओकर किलिंग फील्ड सेहो छैक ,जे कोनो भीषण तानाशाहक ,लोम हर्षक ,नृशंस ,नरसंहार कजीवित दस्तावेज़ अछि । सन 1975 स 1989 धरि तानाशाह पोलपोट आ ओकर मंडली द्वारा सृजित कंपूचिया के रक्त रंजीत इतिहासक खुजल पृष्ठ । वार म्यूजियमके हथियारक ,आयुधक क्रूरता के कथा अहि ठाम अखन धरि सिसकी रहल अछि । ओहि विशाल परिसर के घेर क पर्यटक स्थल बनाओल गेल अछि ,जतय करीब20,000 स बेसी लोक के{जाहि मे स्त्री आ दु बरखक बच्चा सब सेहो रहैक } अमानुषिक हत्या कयल गेल छल ।ओकर सबहक खोपड़ी ,ओकर सबहक हड्डी ,ओकरसबहक पहिरल वस्त्र के एक गोट स्मारक बना क सुरक्षित राखल गेल अछि । ठाम ठाम लिखल छैक ,जे कृपया मैदानक घास प पैर नहीं राखू,के जाने ककर मृत शरीर अहि ठाम खसल छैक । ओहि भयानक त्रासदी के खिस्सा सुनि क ,आ प्रमाण देखि क ,मन अथाह वेदना स भरि गेल छल । गाईड बाजि रहल छल ,लोककहत्या करबा मे कोनो गोली व बारूद नहि खर्च भेलए,खजूरक काँटेदार जड़ि मे पटैक क ,बच्चा सब के मारल गेलै,आओर दुर्दांत वर्णन सुनि क मन खराप हुए लगल ,ततुरते ओहि ठाम स प्रस्थान कयलहू । आब शहरक बीच ओहि बड़का स्कूल मे अनलक ,जे ओहि नरसंहारक पहिल पृष्ठ छल ।औचक एक दिन जे सब स्कूल गेलाओ फेर आपस नै घुरला । कक्षा सब के जेल बनादेल गेल छल ,चारहु दिस कंटीली तार स तुरत घेरल गेल , आनन फानन मे एक एक कक्षा मे तीन तीन टा ईंट कदेवार ,अलग अलग सेल ,पॉल पॉट के जे जतय विरोध केलकै, ओकरा ओहिठाम निबटाबय के खूनी प्रयास । स्कूल के अन्य कमरा सब संग्रहालय बनल ,ओहि समयके साहित्य ,पत्रिका ,हत्या मे उपयोगी सामाग्री सब के समेटने सून आंखि स संसार के हेर रहल अछि ।हजारो हजार पन्ना अहि खूनी खेल प लिखल गेल ,फिल्म बनलदुनिया त्राहि त्राहि करि उठल छल । अहि विभीषिका के पार निकलबाक प्रयास मे आय धरि ई देश लागल अछि ,गरीबी ,बेरोजगारी ,बाल मजदूरी अनेकों विपत्ति छैक ,दुनिया भरी के स्वयम सेवीसंस्था त छैक ,मुदा काज की भ रहल छै भगवान जानै थ [, कतेकों मास धरि ई दृश्य हमर मन मस्तिष्क के तिरोहित करैत रहल छल ।] कहुना करि इमहर उमहर तकैत ,शहरक मनभावन चाकर चौरस बाट प मटर गस्ती करैत एक एक क्षणक आनंद उठाबैत रहलहू । स्थानीय समयानुसार करीब तीन बजे हम सब मंदिर पहुचलहु ,अनेक सीढ़ी चढ़ि क महात्मा बुद्धक मंदिर ,अहि ठाम ओ अमिताभ रूप मे छथी। सम्मुख पाँच पाँचफुट स बेशी उंच मोट मोट मोमबत्ती सब ,एक दु टा जरि रहल छल ।ओहि परिसर मे कीछु और मूर्ति सब छैक,कनी नीचा सीढ़ी स उतरि क एक नीक जलपान गृहसेहो छैक ,एक ठाम बाहर मे सेहो किछू पूजनीय मूर्ति सब के सजा संवारि क राखल गेल छल।ओहि ठाम स नीचा के दृश्य बड़ा रमणीय लगैक। नोम्पेंह के नाम अहि मंदिर प अछि ,पहाड़ी मंदिर ।एकर किस्सा सेहो बड़ मनोहर छैक । शहर मे नदी कातक दृश्य अति मनोहारिणी ,जल मे छोट पैघ जहाज पर पर्यटकक आवाजही ,संध्या समय भोरे जका भ्रमण करैत लोक ,अपन अपन छोट मोटसमान बेचैत फेरीवाला ,सायकिल के एक दीस अपन ठेला व टोकरी बान्हने फल ,सूखल माछ आ दि बेचैत लोक ।कत्तों बड़ तीव्र ध्वनि लगा क नब पीढ़ीनाचि रहल छल । नदी के कात म पाथरक बेंच प बैसल लोग भाव विभोर सन देखाई पड़े छल । कनी आगा एक टा बड़का विश्रामालय सन बनल [रौद वपानि स रक्षा करबा लेल’] ओहि ठाम फुटपाथ प एक टा छोट छिन मंडिल अछि ,जाहि मे मोंछ बाला तीन टा देवता विराजमान छलाह,ओहि के छोट प्रांगण मेआगि जरि रहल छल,,एक पूजैगिरि सन लोक बैसल,फूल बिकाय,लोक अपन श्रद्धा सुमन सफ़ेद कमल के रूप मे अर्पित करैक। सड़क के दोसर कात पार्क ,आ भव्य पैघ पैघ होटल ,मकान,दोकान सब । सोझा मे एक टा भारतीय होटल छल ,नीक अपन स्वादक शाकाहारी भोजन भेटल । दोकान्दार बतौलक ,बाहरी आगंतुक सबभारतीय भोजन पसीन्न करैक छै। ओतुक्का बाजार सब पाँच बजे बन्न भ जाय छै राति मे होटल ,बार एहने सन स्थान खुजल रहे छै । सड़क कात बेचय वाला सेहोअपन समय व गांहकि देखि व्यापार करैत अछि । भिनसरे स ,झाड पोछ करि दोकान सब खुजय लगे छै । बड़का बड़का ,फूल ,फल स सजल बाजार केटपैत ,आखिरी नजर स सलाम करैत,भोरे भोर हम दुनु गोटे एयर पोर्ट लेल प्रस्थान भ चुकल छी। शहर स नौ किलो मीटर प एयर पोर्ट छै ,टैक्सी के किराया सात यूसडी। अनेक सुंदर ,इमारत ,सरकारी सस्थान ,विभिन्न देशक सहयोग स चलैत संस्थान सबहकविशाल भवन सब स सजल सड़क एक गोट आधुनिक देशक झलक प्रस्तुति करि रहल छल । हाँ ,पॉल पौट के तानाशाही के यादगार सन एक ठाम{कत्तोंऔर ,भरिसक किलिंग फील्ड दिस ज़ेबा काल ] बड़का टा के होर्डिंग सन लागल,कोनो अंगरेजी अखबारमे युद्धक समय के छपल लोग सबहक फोटो छै,जाहि मे असंख्य लोग ,,शरणार्थी ,अपन प्राण बचबय लेल माथ प समान सब उठा क भागि रहल छै । जे किन्स्यातभविष्य के पीढ़ी लेल एक टा बड़का टा के चेतावनी छैक । बड़ मार्मिक छल । शहर के अधिकांश आबादी नवयुवक आ छोट बच्चा सब के छैक। समय के संग ,मुंह उठेबा के प्रयास मे लागल ,मुदा धूर्त वाणिज्यिक सभ्यताक युग मे मददिगारपहिने अपन स्वार्थ तकैत अछि ,रक्षक भक्षक अहिने अहिने ठाम बनि जाय छै। बड़का कंपनी अपन सामान बेचबा मे तल्लीन ,बड़का छोटका मौल के बिक्री बिशेख। तखन “समरथ के नहिं दोख गोसाई’ अहिना चलैत एलै है संसार । अनेक विसंगति के उपरांत , ई सुंदर शहर अपना संग ढेर रास खिस्सा पिहानी नेने बड़ दिन धरि ऊहापोह मे रखने छल । ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। श्री जगदीश प्रसाद मण्डलक दूटा लघु कथा- आजुक जिनगीक आइ परीछा जिनगीक संग परीछा कोनो आइये नइ सभ दिनसँ होइत आबि रहल अछि, आगूओ होइत रहत। मुदा से नइ, पचपन बर्खक श्याम सुनर बाबू, जिनका किछु गोरे श्याम बाबू सेहो कहै छैन, जे सत्ताक उच्चासीन छैथ, हुनके हाथे परसू साहित्यकारक सम्मान प्रसारित हएत...। दोसैर साँझ शुरू होइते श्याम सुनर बाबू अपन बैठकीमे घूमि-फिरि कऽ आबि चाह पीबिते रहैथ कि धक्-दे मन पड़लैन। मन पड़िते आलमारीसँ फाइल निकालि टेबुलपर अनलैन। कपक बँचल चाह पीब पान खेलैन। फाइलपर हाथ दइते मन धकधकए लगलैन। मोबाइलिक घण्टी जेना मनमे टनटनए लगलैन। सैकड़ो साहित्यकारक सैकड़ो पैरवी मनमे नाचए लगलैन। सभकेँ तँ यएह ने कहने छिऐन जे समए एलापर देखल जाएत। मुदा कि देखल जाएत? मोबाइलोक पैरवीकार कि कोनो एके रंगक छैथ। रंग-रंगक तँ ओहो छैथे। किछु गुरुजन छैथ तँ किछु संगी-साथी, किछु हितो-अपेक्षित तँ छैथिये। तैठाम की देखब..? लगले श्याम बाबूक मनमे दोसैर साँझक शाम समाए लगलैन। समाइते मन फुड़फुड़ेलैन। फुड़फुड़ेलैन ई जे अड़तीस सालक राजनीतिक जिनगीमे जे कौलेज छोड़ि राजनीतिमे आएल रही, अही संकल्प संग ने जे समाजक उत्थानमे सहयोगी बनब, जइसँ देशक उत्थान हएत, देश उठि कऽ आगू बढ़त। जइसँ समाजो उठि-उठि आगू बढ़त। अहीले ने जयप्रकाश बाबूक आन्दोलनमे जहल गेल रही। ओहो ने सम्पूर्णताक माने सम्पूर्ण क्रान्तिक डाक भरने रहैथ। तइ दिन तँ एतबे ने मनमे रहए जे समाजक अंग बनि समाज-सेवा करब। वएह ने राजनीति भेल। जखन कि अनुकूल समए भेटल, आइ राज्यक श्रेष्ठ सम्मान पुरस्कार दइक भार ऊपरमे अछि...। श्याम बाबूक मन ठमकलैन। ठमकलाक किछु कालक पछाइत श्याम बाबूक मन अपन जिनगीक राजनीतिक खेल खेलाए लगलैन। अखन धरि जहिना अनका संग अपने छह-पाँच केलौं, तहिना ने अपनो संग आनो कम नहियेँ केलक। जे आनो बुझैए आ अपनो मन कहिते अछि...। मुदा किछु भेल, एकरो तँ नकारल नहियेँ जा सकैए जे चाहे कोसी-गंगाक स्वच्छ पानिक घाट हौउ, आकि कमला-बलानक धोर-मट्ठा भेल पानिक घाट, चाहे लिढ़ाएल-समाढ़ाएल कोनो पोखरियेक घाट हौउ, आकि सड़ल-गनहाएल डबराक घाट, आकि मैल-कुचैल चिक्कन करैबला धोबिये-घाट हौउ.., अड़तीस बर्खक राजनीतिक बढ़ैत जिनगीक संग रंग-रंगक टपानो टपैट ऐठाम आबि उच्चासीन भेले छी..! ‘उच्चासीन’ मनमे ऐबते श्याम बाबूक मन चौंकलैन। ऊहि जेना जगलैन। भवितव्य गाछक फल बँटैक बेर छी! भविसक संग जिनगी सटैक धार छी। जइ धारक घाट टपैक प्रश्न अछि...। श्याम बाबूक हृदए धकधकेलैन, धकधकाइते बोल निकललैन– “पवित्र पावन मनसँ विचार करक अछि।” टेबुलपर राखल फाइल खोललैन। सैयो साहित्यकारक सूची अछि! अखन एते कम समैमे केना नीक-बेजाएकेँ बेड़ा सकब..? ठमकल मन श्यामबाबूकेँ, ने आगूक कोनो बाट सुझैन आ ने पाछूए हटने बनैबला। सरकारी काज छी। आगू-पाछूक बीच सीमापर श्याम बाबूक मन ओहिना ओझरा गेलैन, जहिना धरती-अकासक बीच क्षितिजपर कोनो हवाइ-जहाज फँसि जाइए। साहित्य अकादेमीसँ फोन एलैन– “परसू दस बजे समारोह छी, मात्र काल्हि भरिक समए अछि, अहीमे कार्यालयक सभ काज सम्हारि पुरस्कार पौनिहारक हाथमे आमंत्रणक चिट्ठी थमा देब अछि, तँए..?” आगूमे राखल फाइलिक कागजात, चारूकात पसारि कऽ मने-मन विचार करैक विचार उठिते ई+मन विचार उठौलक– “अखन तक साहित्य क्षेत्रमे जे अछि, ओ तँ कौलेजेसँ देखैत आबि रहल छी, मुदा..?” ‘मुदा’ लग ऐबते श्याम बाबूक मन ओहन अन्हारमे ओतऽ अन्हारा गेलैन, जेतए लोक बुझैए जे आब खसब छोड़ि कोनो सहारा नइ अछि...। लगले मनमे उठलैन– “धरती-अकासक बीच क्षितिजपर तँ अखन अपने छी, तखन..?” श्याम बाबूक मन तेना अन्हारा गेलैन जे ने आगू किछु देखैथ आ ने पाछू...। ओही अन्हारमे अन्हराएल मन टोकलकैन– “इतिहासो तँ आगूमे बैसले अछि। अखन तँ जीबै छी, मुइला पछाइतो केतेको लोक ओहन भेला, जिनकर एगारह-एगारह बेर साड़ासँ निकालि पोस्ट-मार्टम भेल। आ केते कि भेल से इतिहास बुझनिहार जानैथ...।” मनक टोनसँ श्याम बाबूक मनमे टंकार जगलैन। केकरो रोटीपर नोन नइ, केकरो बोड़ा-बोड़ा! स्पष्ट धारा बनि रहल अछि जे किछु परिवार, जाइत नहि, सत्ताक परिवार बनि गेल अछि आ बहुसंख्य कात लागल अछि! ओकरा के देखत? मुदा अखन तँ सत्ताक ओइ घाटपर तँ अपने ने आसीन छिऐ...। ‘सत्ताक घाटपर अपने’ मनमे ऐबते श्याम बाबूक विचार आगू घुसैक गेलैन। घुसैकते असथिर चित्त करैक विचार दोसर मन देलकैन। विचार जगिते जेना सभ किछु बिसैर गेला तहिना श्याम बाबूक मन फरिछा गेलैन। फरीच होइते चाह पीबैक इच्छा भेलैन। अपन की चाह अछि, एकरे तँ परीछा छी आ यएह छी आजुक जिनगीक औझका परीछा। जाबे तक कियो कोनो विचारकेँ संकल्प सदृश्य नहि पकड़त ताबे तक जिनगी ढुलमुल बनल रहत। मुदा सत्तो तँ सत्ता छी, शासन छी, जे बिना अनुशासित भेने नइ चलै छै...। बिच्चेमे पत्नी चाह नेने आबि श्याम बाबूकेँ टोकलकैन– “मन बड़ खसल देखै छी?” एक घोंट चाह पीब श्याम बाबू बजला– “मन की खसल रहत, बेठेकान भऽ गेल अछि।” पत्नी– “केहेन फाइल अछि जे मने बेठेकान भऽ गेल अछि?” श्याम बाबू– “बुड़िबकहाक फाइल रहैत तखन तँ गहुमक भूसी जकाँ बोड़ामे कसि कऽ रंगसँ ऊपरमे टीप दैतिऐ, मुदा से नइ ने छी कविलाहाक फाइल छी, जँ एकोरत्ती एनए-ओनए हेतै तँ सभ कबलैती घोंसाइर देत।” ‘कविलाहा’ सुनिते सुचिताक मनमे सुचिन्त्यनाथ नाचि उठलैन। उठिते पतिकेँ मन पाड़ए चाहली, मुदा तइ बिच्चेमे मोबाइलिक घण्टी टनटनेलैन– “सर, परसुए समारोह छिऐ, अपने कहने रही जे समए एलापर मन पाड़ि देब...।” ‘समए एलापर मन पाड़ि देब’ सुनिते श्याम बाबू थकथका गेला। ‘बाप रे! की जबाव देबइ..!’ मुदा तैयो श्याम बाबू अपना मनकेँ बाटीक पानि जकाँ रसे-रसे थीर केलैन। थीर होइते बजला– “नाम बजिते ने छी आ छुछे ओहिना मन पाड़ै छी, अखन ओते समए अछि जे खिस्सा-पिहानी सुनब। अहू सभकेँ ई आदत लगि गेल अछि जे छोटो-छीन बात-ले घण्टा भरि भूमिके बन्है छी!” मोबाइलमे फेर घण्टी बाजल। श्याम बाबू पहिल लाइनकेँ काटि दोसर गोरेसँ गप-सप्प शुरू केलैन...। एकटा संगी अपन समांगक सम्बन्धमे मुहाँ-मुहीं गप-सप्प केने रहैन। गप-सप्पक क्रममे श्याम बाबू कहि देने रहथिन– “जे काज अपना हाथक अछि, ओ करैमे थोड़े हिचकिचाएब। समए एलापर बुझल जेतइ।” समैक ताकमे सभ अपन-अपन घाटपर बंशी पाथने। ओना मोबाइलमे नाओं आबि गेल रहैन, मुदा तैयो श्याम बाबू पुछलखिन– “के बजै छी?” “किशोर छी, भाय साहैब अपने संगे जे साहित्य सम्मानक सम्बन्धमे चर्च भेल छल, वएह..?” श्याम बाबू सकपका गेला। की जबाव देब। मुदा तैयो मनकेँ दबैत-दबैत असथिर केलैन। असथिर होइते बजला– “अखन निर्णयपर नइ पहुँच पेलौं अछि, तँए जे किछ कहैक हुअए, झब-दे कहू।” ‘झब-दे कहू’ सुनि किशोरक मनमे भेल जे भरिसक हमरा काजकेँ गम्भीरतासँ नइ लिअ चाहै छैथ। मुदा काजो तँ हुनके हाथक छी, दोसर उपाइयो तँ नहियेँ अछि। बाजल– “भाय साहैब, जिनका सम्बन्धमे अपने लग अर्जी पहुँचेलौं अछि, ओ जानल-मानल साहित्यकार छैथ। साहित्य सेवा छोड़ि जिनगीमे दोसर काज नइ केलैन। ओना दर्जनो रचना केने छैथ मुदा किछुमे उपसंहार लिखै दुआरे शेष छैन, तँ किछु अधखड़ुआ छैन। मुदा बीस बर्खसँ युनिभर्सिटीक आलमारीमे पाँचटा पोथी छपैले तैयार राखल छैन।” बिच्चेमे मोबाइलिक घण्टी फेर टनटनाएल। अकादेमीक फोन रहैन– “राइतिक बारह बाजि रहल अछि।” ‘बारह’ सुनिते श्याम बाबूक मन तरंगि गेलैन। तरंगि ई गेलैन जे विचार करैमे अपने परेशान छी, तैपरसँ...। मुदा तमसेबो केकरापर करता। तैयो अनखनाएले मने अकादेमी-कार्यालयकेँ उत्तर देलखिन– “भाय, पटनासँ छह घण्टाक दूरी राज्यक कोना-कोना भऽ गेल अछि, तखन सूचना पहुँचेबाक एते धड़फड़ी किए अछि।” जबाव नीक जकाँ समाप्तो ने भेल छेलैन कि मोबाइलमे फेर घण्टी भेलैन। नम्बर देखते श्याम बाबू चौंक उठला जे ई तँ गुरुदेवक फोन छी- विलास बाबूक। जिनकासँ कौलेजमे पढ़ने छी! कौलेजक शिक्षक..! मोबाइल हाथमे नेने श्याम बाबू रिसिभ नइ कऽ रहल छैथ। जेना मनमे महाभारत शुरू भऽ गेलैन। एक दिस गुरुजन, सर-सम्बन्धीक संग कुटुम-परिवार अछि आ दोसर दिस मनकेँ अर्जुन रोग चारू दिससँ घेर नेने अछि! एहेन घड़ीमे की करब नीक हएत? दुबिधामे पड़ल श्याम बाबूकेँ किछु फुरिये ने रहल छेलैन। बिच्चेमे फेर मोबाइलमे घण्टी टनटनेलैन। मनमे उठलैन जे नीक हएत पत्नीकेँ हाथमे मोबाइल दऽ दिऐन आ कहबा दिऐन जे अखन सूतल छैथ। अधो घण्टा ने सुतना भेलैन अछि, केना उठेबैन..! मुदा लगले श्याम बाबूकेँ मन धिक्कारलकैन। धिक्कारलकैन ई जे संकल्पित जीवन बना जीब सबहक नैतिक जिम्मेवारी होइए। तैबीच अनेको रंगक बाधा उपस्थित होइते छै। गुरुदेव की कहि रहला अछि से बिनु सुनने केना बुझब...। फोन रिसिभ करैत श्याम बाबू बजला– “प्रणाम गुरुदेव! जे आदेश होइ...।” विलास बाबू बजला– “अपने भातीज सेहो छैथ, भैयारियो भेलखुन। हुनका ऐ सालक साहित्य सम्मान दऽ दहुन।” विलास बाबूक आदेश सुनि श्याम बाबू गुम भऽ गेला। गुम ई भऽ गेला जे अपन आत्माराम की चाहि रहल अछि आ चारू दिससँ की भऽ रहल अछि! श्याम बाबूक मन आ छाती तरेतर छहोँ-छित हुअ लगलैन...। छहोँ-छित भेल छातीकेँ समटैत बजला– “श्रीमान, अखन पुरस्कार पत्रक पूर्व पीठिका नइ लिखलौं अछि। वएह लिखैले बैसल छी।” ‘बड़ बेस बड़ बेस’ कहैत विलास बाबू आगू बजला– “बौआ भवेश जे छैथ ओ अपने मुँह खोलि बजला अछि जे जँ ऐ सालक साहित्य सम्मान भेटत तँ आगू हमहूँ रचना करब। तँए जे मनक मनसूबा छैन ओकरा भंग करब नीक हएत?” विलास देव बाबूक विचार सुनि श्याम बाबूक मन विचलित भऽ गेलैन। ‘बुझल जेतइ’ कहि मोबाइल हाथमे दैत पत्नीकेँ कहलखिन– “ऐठामसँ मोबाइल लऽ जाउ, स्विच-अफ कऽ-के नइ राखब तेकर भिन्न फझैत, आ ओन कऽ कऽ राखब तेकर भिन्न हएत। एक दिस समए निकैल रहल अछि, दोसर दिस काजक ओझरी बढ़ि रहल अछि।” हाथमे मोबाइल लैत कुरसीपर सँ उठैत सुचिता बजली– “सदिकाल सुचिन्त्य नाथक चर्च करैत रहै छी जे ओ कौलेजेक संगीए नइ, कौलेज छोड़ि देश सेवाक व्रत लैत संगे जहलो गेल रही।” सुचिन्त्य नाथक नाओं सुनिते श्याम बाबू चौंक गेला। जेना अखन धरिक सभ बिसरल बात मन पड़ए लगलैन। जहलमे दुनू गोरे एक-दोसरकेँ गवाही रखैत क्रान्तिकारी समूहक बीच सम्पूर्ण क्रान्तिक शपथ नेने रही, जे ‘अन्याय-अत्याचारक विरोधमे पूर्ण जिनगी ठाढ़ रहब...।’ आनकेँ मन होइ वा नइ होइ मुदा अपन मन तँ कहिते अछि। अड़तीस सालक राजनीतिक जिनगीमे जहिना अन्हर-बिहारिमे जन्म भेल तहिना ने अहूबेर ओहिना भेल। यएह जिनगी ने भेल तूफानी जिनगी, मुदा कि अखनो तूफानमे ठाढ़ होइक साहस भऽ रहल अछि? ..शासनक उच्च कोटिक सम्मान समारोह छी। ओना रचनाकारक रचने अपन सम्मानक गीत गबैए, मुदा शासनो-सूत्र तँ महत रखिते अछि। समाजसँ सरोकार रखैबला जे रचनाकार होइथ, आकि आनो-आनो जिनगीक कीर्ति रखैबला होइथ, समाजक तँ सभ सम्मानित भेबे केला। ओना रचनाकार समाज साहित्यक बीच जिनगीक पथ-प्रदर्शित करैबला छथिये, तँए समाजक संग-संग शासनोक सम्मानित भेबे केला। मुदा जैठाम निर्धारित सीमा अछि तैठाम तँ ओही अनुकूल ने क्रियान्वित हएत। अनायास श्यामबाबूक मन सुचिन्त्य नाथक चौबगली घुमए लगलैन। कौलेज छोड़ि हम राजनीतिक मंचपर एलौं आ ओ राजनीतिक मंचपर एलो पछाइत छोड़ि कऽ फेर कौलेजेकेँ धेलक। नीक रिजल्टो भेलै आ रचनाकारक रूपमे सेहो जागल। कौलेजक नोकरीक बीच, परिवारक गाड़ी चलबैत साहित्य जगतमे सेहो जेते सम्भव भेलै तेते सेवा तँ केनहि अछि। जँ एहेन-एहेन संकल्पित चरित्रकेँ दरकिनार कएल जाइए तँ इतिहास एकरा कहियो स्वर्णाक्षरमे नइ लिखत..? ◌ शब्द संख्या : 1684, तिथि : 01 फरवरी 2016 मोहरा मास दिनक पछाइत पता लगल जे कुरसोंवालीक सराधो भऽ गेल। गामक ओहन काज जे एक-दिना आकि एक-क्षणा नइ छी, जे चुपचाप भऽ जाएत। सराधक पाछू क्रिया-कर्मक भोज-भातक संग नह-केश अछि तइसँ पहिने तेरातिक भोजो आ छौरझँपी होइए, तहूसँ पहिने लहाश जरौल जाइए। एते नमगर-चौड़गर काज आ बुझबो ने केलौं..! फेर अपनेपर नजैर पड़ल, नजैर पड़िते जखन मास दिनकेँ गुनलौं तँ केतौ खोंच-खरोंच नइ बूझि पड़ल। माने जहिना सभ-दिना जिनगी अछि तहिना ऐछे, तखन किए ने बुझलौं। आइ जँ केतौ मास-दिनक तीर्थ-वर्तमे गेल रहितौं आकि कोनो महानगरे घुमैले गेल रहितौं, सेहो तँ नहियेँ केतौ गेलौं हेन। मुदा मनमे ईहो जिज्ञासा तँ जगले रहए जे जे कुरसोंवाली एक समए गामक रंगमंचपर मुख्य नचनिहारि छलि, तेकर सराध केहेन भेल? फेर भेल जे मास दिनक पुरान गप छी तखन जँ केकरोसँ पुछबे करबैन जे कुरसोंवालीक सराध भऽ गेलैन तँ ओ मुँह दुसि कहबे करत कि ने जे तूँ गाममे नइ छेलह जे देखतहक आकि सुनितहक जे पहिने सराध भेल आकि मुइल, एतबो ने बुझल छह। कोनो गरे ने देखिऐ जे की करब। मुदा मनमे बुझैक जिज्ञासा तँ रहबे करए। विचारलौं जे रस्ते-रस्ते दछिनवरिया बाधक खेत देखैक बहन्ने जाएब, ओही बीचमे कुरसोंवालीक घर पड़ै छै, जँ कोनो सुराग बूझि पड़त तँ गप खोड़ि देबै, माने चर्चा चालि देबइ। जखने चर्चा उठत कि जहिना धिया-पुता चौमास खेतक अल्लू उखड़लाहा वाड़ीकेँ कियो खुरपीसँ तँ कियो ठेंठिया कोदारिसँ चलिया-चलिया अल्लूसँ किर्ड़ी तक बीछ लइए तहिना सभ बीछा जाएत...। यएह सोचि दछिन-मुहेँ विदा भेलौं। संयोज नीक बैसल। कुरसोंवालीक बेटा- सिंहेसरा उत्तरे-मुहेँ अबैत रहए। खुटियाएल केशो देखलिऐ आ रंग झड़ल धोतियो बूझि पड़ल। बूझि एना पड़ल जे नवका धोतीक पाइढ़ ओहिना चक-चक करैत जेहेन नव रंगलमे चक-चकाइत रहैए। लगमे अबिते मनमे भेल माइयक सराधक विषयमे सिंहेसरासँ पुछिऐ। मुदा फेर भेल जे जँ नइ मरल होइ तखन तँ अनेरे ई कहि गरियौत जे हमरा माएकेँ जीवितेमे सराधक बात पुछैए। भाय! सरधा ने जीवितमे होइ छै मुदा सराध तँ मुइला पछातिये होइ छै। अन्तर एतबे ने अछि जे परक अधिकार धऽ घर चैल जाइए। आगूमे देखते सिंहेसरे बाजल– “काका, गोड़ लगै छी, माए-बापक करजासँ फारकती भेल।” ‘माए-बापक करजा’ सुनि मनमे ठहकल जे निसचित माइक सराध कऽ निचेन भेल अछि। गपक पन्ना भेटल। पन्ना पकैड़ पुछलिऐ– “नीक जकाँ कर्जासँ फारकती पौलह किने?” ‘नीक जकाँ फारकती’ सुनि सिंहेसराक जेना छाती दहैल कऽ कुड़बुड़ा उठलै। बाजल- “कक्का, जिनगी भरि जेकरा सेवलक ओहो देह चोरा लेलक।” सिंहेसराक बात भाँजेपर ने चढ़ल जे की कहलक। पुछलिऐ– “से की?” बाजल– “कक्का, तोरा सभकेँ ते बुझले छह जे माइयो आ बाबूओ दुनू परानी जिनगी भरि खुशीलाल कक्का ऐठाम खटल, जे कमाएल-खटाएल से खेलक-पीलक, हमरो पोसलक। हमरा बिआहो कऽ देलक। गाममे केते कमाइये होइ छै जे औझका लोक जकाँ गुजर कैरतौं तँए पंजाब चैल गेलौं। एम्हर बाबूओ मरि गेल। पनरहे दिन गेना भेल रहए, भड़ो जोकर पाइ नइ कमेने रहौं जे अबितौं, नइ एलौं। माइये आगियो देलकै आ सराधो केलकै।” सह दैत कहलिऐ– “जहिना बेटाकेँ अधिकार अछि तहिना ने माइयोकेँ अछि, नीके भेलह।” बाजल- “नीके की हएत कक्का, तखन तँ गरीब लोकक माए-बापक सराध भगवाने भरोसे होइए, सएह भेल।” झमान भऽ सिहरैत सिंहेसराक मन देख कहलिऐ- “पार-घाट तँ लगिये गेलह किने?” झुझुआइत सिंहेसरा बाजल- “पार की लागत तखन तँ अपन हारल लोक बाजिये कऽ की करत।” जे बात बुझैक जिज्ञासा छल ओ तर पड़ि गेल। ऊपर चैल आएल पिताक सराध। माइक सराध दिस बातकेँ बढ़बैत पुछलिऐ- “माइयक कहह?” ‘माए’ सुनि सिंहेसरा विचलित होइत बाजल- “कक्का, बाउकेँ मरना थोड़बे दिनक पाछू माए दुखित पड़ि गेल। अपने गामोमे ने रही, खुशीलाल कक्का एको दिन खोजो-पुछाइर ने केलखिन आ एक पाइक गोटीकेँ के कहए। भनसिया समाद देलक। जे पाइ कमेने रही से पठा देलिऐ, अपने जँ चैल ऐबतौं तँ ओहो कमाइ ने होइत।” बिच्चेमे कहलिऐ- “से ते नीके केलह।” ‘नीक’ सुनि सिंहेसराक बोल ने आगू उठै आ ने पाछू होइ। हेबो केना करैत, कोनो कि समाजमे छपित बात अछि जे लोकक किरदानी भेड़िया-धसान जकाँ छै। अधलोकेँ तेते नीक कहत जे राड़ीक फूल जकाँ अपने हवामे उड़ैत अकास चढ़ि जाइए, आ अकास चढ़ल काजकेँ धकियबैत-धकियबैत खेत-कातक रस्ता जकाँ बहुपेड़ियाकेँ एकपेड़िया बनबैत नाओं मेटा खेते बना लइए आ जखन खोज-खबैर होइ छै ते कहैए जे सर्वेक खतियानमे ने खत्ते-खेसरा चढ़ल अछि आ ने नक्शामे नक्शे बनल अछि। मुदा सिंहेसरा से नइ केलक, अपन इमानकेँ इमनदारीसँ अङैजैत बाजल- “कक्का, तोरा लग मुँह उठबैत लाज होइए, मुदा बाप-पित्ती तँ तोहीं सभ ने भेलह, बेटा-भातीज जँ लगतियो करत तँ तोहीं सभ ने तेकर निमरजना करबहक।” सिंहेसराक बात सुनि जेना हृदयमे धक्का लगल। धक्को केना ने लगैत, एकटा बाल-बोध ऐसँ बेसी कहिये की सकैए। पीठ उघारि आगूमे देत जे कक्का लिअ गलती केलौं एक सए जूता मारू। मनुख विवेकी छी, लाज ओकर आभूषण छिऐ, जे अंगीकार केला पछाइत लोककेँ रहिये की जाइ छै...। मनमे जेना उड़ी-बीड़ी जकाँ लगल। मुदा गुण भेल जे सिंहेसरे बाजल- “कक्का, जे बुढ़ियाक धारलिऐ से ते करबे केलिऐ।” मुदा की धारलिऐ, की केलिऐ की नइ केलिऐ, की करक चाही, की नइ करक चाही..? एक संग अनेको प्रश्न मनमे नाचि उठल। नचैत मन सिंहेसराक पिता- ढोरबापर पड़ल। सुधंग लोक खुशीलालक एकटा महींसक सेवाक सोल्होअना भार ढोरबापर, यएह जिनगी यएह दुनियाँ। कुरसों बिआह भेल रहैन। कुरसोंक जइ टोलमे बिआह भेल, ओ अगुआएल लोकक टोल, ओइमे एकघरा। माने सिंहेसराक माइयक चिष्टो-चार आ बजै-भुकैक ढंग सेहो अगुआएल। सुधंग पति पेब कुरसोंवाली एक-छत्र परिवारक गारजन बनि गेलि। सत्तैर-अस्सीक दशकमे मिथिलांचलमे भूमि आन्दोलन जोरपर छल। आने गाम जकाँ हमरो गाममे पहीपट्टीबलाक आधासँ बेसी जमीन। बटेदार जगि कऽ बटायदारी आन्दोलन केलक। ओना गामबलाक खेत नहि मुदा बहरबैयाक प्रलोभन जे अहीं सभकेँ सभटा खेत सुमझा देलौं। लोभमे गामक लोक संग भऽ गेल। जमीनेक लोभ कुरसोंवालीकेँ सोझहामे रखि, नेता बना टोलमे ठाढ़ कऽ देलक। बुझलो बातमे कुरसोंवाली लोभा गेली। बुझल बात ई जे जे खेत बटाइ करैए ओकर तँ हक बनिते छै। मुदा मुफ्तक माल केकरा गाड़ा लगै छै जे कुरसोंवालीकेँ लगितै, ओ ओइ आन्दोलनमे चारित्रिक गुण[5] बिसैर ओइ बटाइ जमीनपर अपन हक बनबैले छोट-छोट खोपड़ीनुमा घर बनबा, ओइमे आगि लगबा, गामक तीस-पैंतीस गोरेक बीच ओइ अगिलग्गी केसमे हमरो नाओं घोंसिया देलक। वएह कुरसोंवाली जे मोहरा बनि गाममे एते भारी फसाद केलक। तेकरे सराधक चर्च छी। निरीह, निरदोस सिंहेसराकेँ पुछलिऐ- “बुढ़ियाक मृत्यु नीक जकाँ भेल किने?” हमर बात जेना सिंहेसराक मनकेँ बेध देलकै। ओकरो अपन माइयक किरदानी मनमे ठहकैत रहइ। जहिना विश्वमोहिनी लग नारद बाबाक बगलेमे शिवजीक दूत देख बानरक मुँह बनौने, तहिना बूझि पड़ल। मुदा आब उपाइये की अछि। यएह ने जे ओ गामक इतिहासक एक अंश भेल। मृत्यु सुनि सिंहेसरा बाजल- “कक्का, हम जे दू सालसँ पंजाब जाए लगलौं हेन, तेकर माक खुशीलाल काकाकेँ भऽ गेलैन। ई बिसैर गेलखिन जे सरकारो नोकरीबलाकेँ जनम भरि पार लगबै छै।” सिंहेसराक बात सुनि बूझि पड़ल जे माइक पीड़ा ओकरा सता रहल छै। कहलिऐ- “से की?” सिंहेसरा बाजल- “कक्का, जखन माए दुखित पड़ल, अपने गाममे नइ रही, घरवालीक समाद गेल, जे रूपैया रहए से पठा देलिऐ। जँ अपने गाम चैल ऐबतौं ते ओहो आमदनी केतएसँ आनितौं।” बजलौं किछु ने मुदा मुड़ी तँ डोलाइये देलिऐ। डोलैत मुड़ी देख जेना सिंहेसराकेँ सह भेटलै। बाजल- “कक्का, बेमारी आगू हम सभ सकबै, केते कमाइये अछि। बुढ़ियाक दवाइ छुटि गेलइ। पछाइत बहीन आबि अपना ऐठाम लऽ गेलै। ओहो ते हमरे जकाँ अछि। ओहो नइ सकलै। बेमारी बैढ़ते गेलइ। ओतै मरि गेल। ओतै जराओलो गेल।” जेना साँस छुटल, बजलौं- “तँए ने बुझने छेलौं। भोज-भात नीक जकाँ केलहक किने?” सिंहेसराक आँखि ढबढबाएल। बाजल- “केकरा नइ माए-बापक सेवाक लिलसा रहै छै, मुदा ओते वैभवो रहत तखन ने पार लागत।” कहलिऐ- “अखन काजक बेर अछि, तोहूँ जाह अपन काज देखहक आ हमहूँ खेत देखैले जाइ छी।” ◌ शब्द संख्या : 1222, तिथि : 15 फरवरी 2016 [1] इमान [2] पतिक पुरान संगी [3] क्रान्तिक हवा [4] सुचिन्त्य नाथ [5] क्लास कैरेक्टर ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। मुन्ना जी १ प्रेम विहनि कथा बखरा
उँह........! की भेल. ? अहाँक दाढ़ी गड़ैए . हा....हा....हा !नीक चौल केलौं. पहिने त' बिन काटलो दाढ़ी नै गड़ल कहियो. आ आब.....! आब बौआ भेलै ने . " त' की, बौआ भेने हमर गाल मे काट उगि गेल की ." से नै यौ......! आ की हमरा लेल अहाँक हृदय मे पाथर समा गेल ? नै यौ, सिनेह त' आब बौओ के चाहियै ने . हँ, समय अलग - अलग हेतै . नै , हमरा अहाँक बीचक सिनेह मे सँ आब ओकरो बखरा लगतै. " हे देखियौ, अहाँक किरदानी पर ओहो मुस्कियाइए ." २ विहनि कथा करोट ----------- -------------- यै कनिया, सुनि के दुख हएत, मुदा कहि देब उचित बुझै छी. की कहै छथिन माँ कहौथ ने, हिनकर सबहक बात के दुख किएक हएत. बौआ लाजे नै कहैए.हम सब निर्णय केलहुँ ऐछ जे मयंकक दोसर विआह करा दियै. माँ, ई सब जे निर्णय करथिन सएह उचित हेतै .मुदा दोसर विआहक प्रयोजन की ? " हे , कोनो पुतौह आइ धरि साउस सँ मुह नै लगेने छलीह.बाबूजी, ई कहौथ जे अय सँ पहिने कोन बेटाक दोसर विआह करेने छलखिन्ह ?" यै कनिया, साउस त' जे सुनै छथि जे हमरो दस लोकक बीच कुचेष्टा सुन' पड़ैए. जे महाकान्त बाबू अहाँ दलालक फेर मे बाँझ कनिया उठा अनलौं. बातोत' ठीके छै एतेक दवाई आ जाँचक पछातियो परिणाम शुन्य ऐछ.आब अहीं निर्णय क' कहू हमर वंश कोना बढ़त ? बाबू जी हम लाजे चुप्प छलौं . आ अपन कपारक दोष बुझि तरे तर गलल जाई छी.सत्य त' छै जे दवाई दारू आ जाँच ई विश्वस्त केलक जे कमी हुनके मेछनि! आब ई कहौथ जे कए टा विआह क' कुमारि बेटीक जीवन गार्त करथिन त' मोन भरतैन. ?" कनिया हम लज्जित छी, हमरा माफ क' दौथ.आअपन कपारक दोष बुझि संतोष करौथ. " नै बाबूजी से कोना हेतै ?" से नै, त' और की करब अहाँ ? " बाबूजी हम दोसर विआह करब. ." के करत अहाँ सँ विआह ? कोनो नि: संतान, जे मर्द हएत ! आ कन्यादान ई क' दिह'थिन. ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। अनिल झा व्यंग्य अनटोटल गप्प बहुत सोच-विचार केलाक उपरांत हम अहि नतीजापर पहुँचलहुँ जे आब हमरो किछु करहे पड़त। बहुत भेलफेसबुक आ वाट्सएपपर मैथिली लेल आँखिमे आँगुर घुसिया कऽ नोर चुएनाइ। आब सत्ते हमर करेजा फटैया। अहि लेल नहि जे मैथिली के की दशा छनि। अहि लेल फटैया जे जँ हम सोचितेरहि गेलहुँ तँ एहन नहि जे बादमे संस्थाक कोनो नामे नइँ भेटए। जँ नाम भेटिओ गेल त फेर अध्यक्षे टासँ तँकाज नइँ चलि जाएत। ओकर कोषाध्यक्ष, सचिव , मनोरंजन , गुटफोरन आदि आदि सीट लेल सेहो ने मनुखचाही। मिथिलामे जाहि तेजीसँ समीति बनेवाक आंदोलन चलि रहल अछि, निसंदेह किछु दिनक बाद हमराकियो खाली नइँ भेटता। तँइ आइ हम असगरे सर्वसम्मतिसँ ई पास केलहुँ जे जँ सत्तेमे हम मिथिला - मैथिल आ मैथिली केर समुचितविकास होइत देखऽ चाहैत छी तँ आइए एकटा समीति केर गठन करी जँ नहि करब तँ मिथिला आंदोलनमे सभअगुआ जाएत आ हम पछुआ जाएब. हेयौ की नाम राखू हम अपन समीति केर टोलसँ लऽ कऽ अन्तरराष्ट्रिय तक एकौ टा नाम आब बाँचल नइँ। बहुतनियार-भाषक बाद ई नाम फुराएल अपने लोकनि अपन अपन आपति दर्ज करा सकै छी जँ कोनो हुअए तँ-- समीतिक नाम -- ''अंतर-ब्रम्हाण्डीय मैथिल महासभा '' 1. अध्यक्ष-- अनिल कुमार झा 2. कोषाध्यक्ष -- स्वयं 3. सचिव -- सेहो अपने 4. मनोरंजन प्रभाग-- असगरे बेसी छी 5. अन्यमे -- सभटा अपने नोट - अपनेक सलाह आ सुझाव तर्क -वितर्क करवा हेतु स्वीकार्य अछि। ओना अहाँ सब आब अपन - अपन घरधऽ लिय आब हमहीं टा खाली रहब सब भागि जेता। ''जय मिथिला, जय मैथिली ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.आशीष अनचिन्हार- गजल ३.२.मुन्ना जी- गजल ३.३.नन्द विलास राय- नैतिकता आ इमान ३.४.जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’- ४टा गजल आशीष अनचिन्हार गजल
बड़ सरल छै फिजिकल मरनाइ बड़ कठिन छै डिजिटल मरनाइ
जे सिनेहक बेगर मरि गेलै तकरे कहबै क्रिटिकल मरनाइ
बाँहिमे जकरा तागति छै से चाहि रहलै कोस्टल मरनाइ
देह छै संगीतक तैयो तँ बड़ कठिन छै लिरिकल मरनाइ
मरि कऽ हमहूँ जिबिते देखाइ एहने हो मिथिकल मरनाइ
मतलाक काफिया भारत भूषणजीक फेसबुक पोस्टसँ प्रेरित अछि, ई गजल प्रारंभिक स्वरूपमे अछि
सभ पाँतिमे 2122+22221 मात्राक्रम अछि दोसर शेरमे दूटा दीर्घ आ तेसर शेरक एकटा दीर्घकेँ लघु मानबाक छूट लेल गेल अछि। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। मुन्ना जी गजल. --------- अजीबो गरीबी कहानी क' गेलै बच्चा जे छलै तें नदानी क' गेलै पहिने पता केलकै बाट ओतै छलै बिसरल जे जबानी क' गेलै पछाड़ैत कोना रहितै नढ़िया चढ़ि माथ देहो कटानी क' गेलै कहिया धरि रैहतै आस मे ओ रहि शेख काजो पठानी क' गेलै मंदिरोक शानो छलै जे तहिया ध्वजा के बचेबा अजानी क' गेलै पहिने छलै जे कतिया क' ठाढ़ो भगेबाक काजो मशानी क' गेलै बहर- ए- मुतकारिब. मात्रा क्रम-१२२ १२२ १२२ १२२ ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। नन्द विलास राय नैतिकता आ इमान खेत बेच देब खलिहान बेच देब तइसँ काज नै चलत तँ कमान बेच देब। जमीन बेच देब आसमान बेच देब अपन आ परिवारक समुच्चा अरमान बेच देब। मान बेच देब सम्मान बेच देब मानवताक रक्षा खातिर कीमती समान बेच देब। आन बेच देब शान बेच देब वतनक लेल हम अपन पराण बेच देब। वचनक तेल अर्जित पहचान बेच देब हरिश्चन्द्र जकाँ अपना संगे पत्नी आओर सन्तान बेच देब। मरियो जाएब या मिटियो जाएब केतबो बच्चा नोर बहाएत वा पत्नी रूसि कऽ नैहर जाएत मुदा ढौआ खातिर की अपन नैतिकता आ इमान बेच देब? ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’ ४टा गजल 1. मात्रा-क्रम : 22222222-1212 सभ दिन ओ कूदथि आ फ़ाँनथि घडी-घडी आ तामसमे थर-थर काँपथि घडी-घडी सभ दिन घरमे सभकें राखथि कना-कना आ तहिना अपनो ओ कानथि घडी-घडी पठबनि बेटा मासे-मासे कमा-कमा तैयो सभठाँ दुखडा बाँचथि घडी-घडी बूढ़ी सभटा काजो करथिन कुहरि-कुहरि आ बुढ़ियेकें थापर मारथि घडी-घडी अपने सभदिन भागल रहला जहाँ–तहाँ आ अनका उपदेशो झाडथि घडी-घडी मौगीकें ओ रस्ता नरकक कहै छथिन आ सीता-चालीसा गाबथि घडी-घडी नाचै छी हम सभ दुनियामे ख़ुशी-ख़ुशी भगवानो जहिना जे चाहथि घडी-घडी 2. मात्रा-क्रम : 22222-221 कुदने आ फनने की हैत अपनामे लड़ने की हैत मुरखो अछि सेहो ठकि लेत लिखने आ पढने की हैत बेटो सभ मोजर नै देत ‘हम्मर छी’ जपने की हैत सोचू जे केलनि की राम दोहा सभ रटने की हैत घुरि-फिरि अपने काजो देत अनका लग कनने की हैत लीखल जे छै हेतै सैह टाका टा गनने की हैत यौ बौआ गामो दिस जाउ पटनेमे रहने की हैत 3. मात्रा-क्रम : 222221-122 हमरा मोनक मीत अहाँ छी हमरा ठोरक गीत अहाँ छी हमहीं गोकुलकेर दुलरुआ आ हम्मर नवनीत अहाँ छी धी बेटामे भेद करै छी मानू बालुक भीत अहाँ छी सौंसे दुनिया कोस करोडो बूझू एकहि बीत अहाँ छी दुसलौं हम्मर मूंह अहाँ जे लागल अक्कत तीत अहाँ छी जे छी से छी आब हमर छी खेला जीवन, जीत अहाँ छी 4. मात्रा-क्रम : 2222222 दुनियामे अप्पन क्यो नै दुनियामे दुश्मन क्यो नै धरतीपर अबिते-अबिते बनलै वीरप्पन क्यो नै भेला लाखो कवि जगमे लेकिन ओ बच्चन क्यो नै सभ क्यो छी संतति हुनके हरिजन आ ब्राह्मण क्यो नै सभकें चाही सभ सुविधा मानत अनुशासन क्यो नै संतोषक धन नै जकरा तकरा सन निरधन क्यो नै हम मानै छी जीवनमे साधू छथि सदिखन क्यो नै ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)2004-16. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेता, से आशा करै छी। रचनाक अंतमे टाइप रहए, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/ संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै। ऐ ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-16 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.co.in पर संपर्क करू। ऐ साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल।५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सिद्धिरस्तु 3 वि दे ह विदेह Videha বিদেহ www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १९६ म अंक १५ फरबरी २०१६ (वर्ष ९ मास ९८ अंक १९६) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA
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