81 ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' १९७मअंक०१मार्च२०१६ (वर्ष९मास९९अंक१९७) ऐ अंकमेअछि:- १. संपादकीयसंदेश २. गद्य २.१.१. राजदेव मण्डल- लघुकथा- अवाक २.रविभूषण पाठक- फलनमा.. चिलनमा... ठेकनमा (व्यंग्य) २.२.आशीष अनचिन्हार- सभ्य लोक (व्यंग्य निबंध) २.३. १. उमेश मण्डल- 88मकथा-साहित्य गोष्ठी डखराममे सम्पन्न भेल २. अखिलेश कुमार- बाबू भोला लालदासक जयंती मनल २.४.किछु विहनि कथा १. राम विलास साहु- जाति २. लक्ष्मी दास- पकधरम ३. ललन कुमार कामत- बाबाक लोटा ३. पद्य ३.१. सृजन शेखर- गीत एगो सपना ३.२.गंगानन्दझा सृजन (सृजन शेखर)- जिनगीके गीत ३.३. जगदीशचन्द्रठाकुर ‘अनिल’- चारिटागजल ३.४. ओमप्रकाशझा- गजल ४.बालानांकृते- डॉ॰शशिधरकुमर “विदेह” किछुबालकविता Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव Join official Videha facebook group. Join Videha googlegroups Follow Official VidehaTwitter to view regular Videha Live Broadcasts through Periscope. विदेह जालवृत्तक डिसकसन फोरमपर जाउ। संपादकीय प्रबोध साहित्य सम्मान:श्री केदार नाथ चौधरीकेँ प्रबोध साहित्य सम्मान देल गेलन्हि। बधाइ। हुनकर चारू पोथीक लिंक नीचां देल जा रहल अछि। चमेलीरानी CHAMELIRANI_MAITHILI.pdf माहुर Mahur_KedarnathChaudhary.pdf करार Karar_Kedarnath_Chaudhary.pdf अबारा नहितन विदेहक २०० म अंक: १५ अप्रैल २०१६ केँ विदेहक २०० म अंक ई-प्रकाशित हएत। ऐ मे विदेह सम्मान/ समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मानसँ सम्मानित लेखक आ हुनकर कृतिपर समीक्षा/ निबन्ध प्रकाशित हएत। अहाँसँ रचना सादर आमंत्रित अछि। विदेह सम्मान विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान १.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०१०-११ २०१० श्री गोविन्द झा (समग्र योगदान लेल) २०११ श्री रमानन्द रेणु (समग्र योगदान लेल) २.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११-१२ २०११ मूल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, कथा संग्रह) २०११ बाल साहित्य पुरस्कार- ले.क. मायानाथ झा (जकर नारी चतुर होइ, कथा संग्रह) २०११ युवा पुरस्कार- आनन्द कुमार झा (कलह, नाटक) २०१२ अनुवाद पुरस्कार- श्री रामलोचन ठाकुर- (पद्मानदीक माझी, बांग्ला- मानिक बंद्योपाध्याय, उपन्यास बांग्लासँ मैथिली अनुवाद) विदेह भाषा सम्मान २०१२-१३ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) 1.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार 2012 2012 श्री राजनन्दन लाल दास (समग्र योगदान लेल) 2.विदेह भाषा सम्मान २०१२-१३ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) २०१२ बाल साहित्य पुरस्कार - श्री जगदीश प्रसाद मण्डल केँ “तरेगन” बाल प्रेरक विहनि कथा संग्रह २०१२ मूल पुरस्कार - श्री राजदेव मण्डलकेँ "अम्बरा" (कविता संग्रह) लेल। 2012 युवा पुरस्कार- श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरीक “अर्चिस” (कविता संग्रह) 2013 अनुवाद पुरस्कार- श्री नरेश कुमार विकल "ययाति" (मराठी उपन्यास श्री विष्णु सखाराम खाण्डेकर) विदेह भाषा सम्मान २०१३-१४ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) २०१३ बाल साहित्य पुरस्कार – श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरी- “देवीजी” (बाल निबन्ध संग्रह) लेल। २०१३ मूल पुरस्कार - श्री बेचन ठाकुरकेँ "बेटीक अपमान आ छीनरदेवी" (नाटक संग्रह) लेल। २०१३ युवा पुरस्कार- श्री उमेश मण्डलकेँ “निश्तुकी” (कविता संग्रह)लेल। २०१४ अनुवाद पुरस्कार- श्री विनीत उत्पलकेँ “मोहनदास” (हिन्दी उपन्यास श्री उदय प्रकाश)क मैथिली अनुवाद लेल। विदेह भाषा सम्मान २०१४-२०१५ (समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान) २०१४ मूल पुरस्कार- श्री नन्द विलास राय (सखारी पेटारी- लघु कथा संग्रह) २०१४ बाल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (नै धारैए- बाल उपन्यास) २०१४ युवा पुरस्कार - श्री आशीष अनचिन्हार (अनचिन्हार आखर- गजल संग्रह) २०१५ अनुवाद पुरस्कार - श्री शम्भु कुमार सिंह ( पाखलो - तुकाराम रामा शेटक कोंकणी उपन्यासक मैथिली अनुवाद) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१२ अभिनय- मुख्य अभिनय , सुश्री शिल्पी कुमारी, उम्र- 17 पिता श्री लक्ष्मण झा श्री शोभा कान्त महतो, उम्र- 15 पिता- श्री रामअवतार महतो, हास्य-अभिनय सुश्री प्रियंका कुमारी, उम्र- 16, पिता- श्री वैद्यनाथ साह श्री दुर्गानंद ठाकुर, उम्र- 23, पिता- स्व. भरत ठाकुर नृत्य सुश्री सुलेखा कुमारी, उम्र- 16, पिता- श्री हरेराम यादव श्री अमीत रंजन, उम्र- 18, पिता- नागेश्वर कामत चित्रकला श्री पनकलाल मण्डल, उमेर- ३५, पिता- स्व. सुन्दर मण्डल, गाम छजना श्री रमेश कुमार भारती, उम्र- 23, पिता- श्री मोती मण्डल संगीत (हारमोनियम) श्री परमानन्द ठाकुर, उम्र- 30, पिता- श्री नथुनी ठाकुर संगीत (ढोलक) श्री बुलन राउत, उम्र- 45, पिता- स्व. चिल्टू राउत संगीत (रसनचौकी) श्री बहादुर राम, उम्र- 55, पिता- स्व. सरजुग राम शिल्पी-वस्तुकला श्री जगदीश मल्लिक,५० गाम- चनौरागंज मूर्ति-मृत्तिका कला श्री यदुनंदन पंडित, उम्र- 45, पिता- अशर्फी पंडित काष्ठ-कला श्री झमेली मुखिया,पिता स्व. मूंगालाल मुखिया, ५५, गाम- छजना किसानी-आत्मनिर्भर संस्कृति श्री लछमी दास, उमेर- ५०, पिता स्व. श्री फणी दास, गाम वेरमा विदेह मैथिली पत्रकारिता सम्मान -२०१२ श्री नवेन्दु कुमार झा नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१३ मुख्य अभिनय- (1) सुश्री आशा कुमारी सुपुत्री श्री रामावतार यादव, उमेर- १८, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) मो. समसाद आलम सुपुत्र मो. ईषा आलम, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (3) सुश्री अपर्णा कुमारी सुपुत्री श्री मनोज कुमार साहु, जन्म तिथि- १८-२-१९९८, पता- गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) हास्य–अभिनय- (1) श्री ब्रह्मदवे पासवान उर्फ रामजानी पासवान सुपुत्र- स्व. लक्ष्मी पासवान, पता- गाम+पोस्ट- औरहा, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) टाॅसिफ आलम सुपुत्र मो. मुस्ताक आलम, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, जिला- मधुबनी (बिहार) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान (मांगनि खबास समग्र योगदान सम्मान) शास्त्रीय संगीत सह तानपुरा : श्री रामवृक्ष सिंह सुपुत्र श्री अनिरूद्ध सिंह, उमेर- ५६, गाम- फुलवरिया, पोस्ट- बाबूबरही, जिला- मधुबनी (बिहार) मांगनि खबास सम्मान: मिथिला लोक संस्कृति संरक्षण: श्री राम लखन साहु पे. स्व. खुशीलाल साहु, उमेर- ६५, पता, गाम- पकड़िया, पोस्ट- रतनसारा, अनुमंडल- फुलपरास (मधुबनी) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान (समग्र योगदान सम्मान): नृत्य - (1) श्री हरि नारायण मण्डल सुपुत्र- स्व. नन्दी मण्डल, उमेर- ५८, पता- गाम+पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) सुश्री संगीता कुमारी सुपुत्री श्री रामदेव पासवान, उमेर- १६, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, जिला- मधुबनी (बिहार) चित्रकला- (1) जय प्रकाश मण्डल सुपुत्र- श्री कुशेश्वर मण्डल, उमेर- ३५, पता- गाम- सनपतहा, पोस्ट– बौरहा, भाया- सरायगढ़, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री चन्दन कुमार मण्डल सुपुत्र श्री भोला मण्डल, पता- गाम- खड़गपुर, पोस्ट- बेलही, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) संप्रति, छात्र स्नातक अंतिम वर्ष, कला एवं शिल्प महाविद्यालय- पटना। हरिमुनियाँ / हारमोनियम (1) श्री महादेव साह सुपुत्र रामदेव साह, उमेर- ५८, गाम- बेलहा, वार्ड- नं. ०९, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री जागेश्वर प्रसाद राउत सुपुत्र स्व. रामस्वरूप राउत, उमेर ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) ढोलक/ ठेकैता/ ढोलकिया (1) श्री अनुप सदाय सुपुत्र स्व. , पता- गाम- तुलसियाही, पोस्ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री कल्लर राम सुपुत्र स्व. खट्टर राम, उमेर- ५०, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) रसनचौकी वादक- (1) वासुदेव राम सुपुत्र स्व. अनुप राम, गाम+पोस्ट- िनर्मली, वार्ड न. ०७ ,जिला- सुपौल (बिहार) शिल्पी-वस्तुकला- (1) श्री बौकू मल्लिक सुपुत्र दरबारी मल्लिक, उमेर- ७०, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री राम विलास धरिकार सुपुत्र स्व. ठोढ़ाइ धरिकार, उमेर- ४०, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) मूर्तिकला-मृर्तिकार कला- (1) घूरन पंडित सुपुत्र- श्री मोलहू पंडित, पता- गाम+पोस्ट– बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री प्रभु पंडित सुपुत्र स्व. , पता- गाम+पोस्ट- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) काष्ठ-कला- (1) श्री जगदेव साहु सुपुत्र शनीचर साहु, उमेर- ३६, गाम- िनर्मली-पुरर्वास, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री योगेन्द्र ठाकुर सुपुत्र स्व. बुद्धू ठाकुर उमेर- ४५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) किसानी- आत्मनिर्भर संस्कृति- (1) श्री राम अवतार राउत सुपुत्र स्व. सुबध राउत, उमेर- ६६, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) (2) श्री रौशन यादव सुपुत्र स्व. कपिलेश्वर यादव, उमेर- ३५, गाम+पोस्ट– बनगामा, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) अल्हा/महराइ- (1) मो. जीबछ सुपुत्र मो. बिलट मरहूम, उमेर- ६५, पता- गाम- बसहा, पोस्ट- बड़हारा, भाया- अन्धराठाढ़ी, जिला- मधुबनी, पिन- ८४७४०१ जोगिरा- श्री बच्चन मण्डल सुपुत्र स्व. सीताराम मण्डल, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री रामदेव ठाकुर सुपुत्र स्व. जागेश्वर ठाकुर, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) पराती (प्रभाती) गौनिहार आ खजरी/ खौजरी वादक- (1) श्री सुकदेव साफी सुपुत्र श्री , पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) पराती (प्रभाती) गौनिहार - (अगहनसँ माघ-फागुन तक गाओल जाइत) (1) सुकदेव साफी सुपुत्र स्व. बाबूनाथ साफी, उमेर- ७५, पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) (2) लेल्हु दास सुपुत्र स्व. सनक मण्डल पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) झरनी- (1) मो. गुल हसन सुपुत्र अब्दुल रसीद मरहूम, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) (2) मो. रहमान साहब सुपुत्र...., उमेर- ५८, गाम- नरहिया, भाया- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) नाल वादक- (1) श्री जगत नारायण मण्डल सुपुत्र स्व. खुशीलाल मण्डल, उमेर- ४०, गाम+पोस्ट- ककरडोभ, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री देव नारायण यादव सुपुत्र श्री कुशुमलाल यादव, पता- गाम- बनरझुला, पोस्ट- अमही, थाना- घोघड़डीहा, जिला- मधुबनी (बिहार) गीतहारि/ लोक गीत- (1) श्रीमती फुदनी देवी पत्नी श्री रामफल मण्डल, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) (2) सुश्री सुविता कुमारी सुपुत्री श्री गंगाराम मण्डल, उमेर- १८, पता- गाम- मछधी, पोस्ट- बलियारि, भाया- झंझारपुर, जिला- मधुबनी (बिहार) खुरदक वादक- (1) श्री सीताराम राम सुपुत्र स्व. जंगल राम, उमेर- ६२, पता- गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री लक्ष्मी राम सुपुत्र स्व. पंचू मोची, उमेर- ७०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) काँरनेट- (1) श्री चन्दर राम सुपुत्र- स्व. जीतन राम, उमेर- ५०, पता- गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) मो. सुभान, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) बेन्जू वादक- (1) श्री राज कुमार महतो सुपुत्र स्व. लक्ष्मी महतो, उमेर- ४५, गाम- िनर्मली वार्ड नं. ०४, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री घुरन राम, उमेर- ४३, गाम+पोस्ट- बनगामा, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) भगैत गवैया- (1) श्री जीबछ यादव सुपुत्र स्व. रूपालाल यादव, उमेर- ८०, पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री शम्भु मण्डल सुपुत्र स्व. लखन मण्डल, पता- गाम- बढियाघाट-रसुआर, पोस्ट– मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) खिस्सकर- (खिस्सा कहैबला)- (1) श्री छुतहरू यादव उर्फ राजकुमार, सुपुत्र श्री राम खेलावन यादव, गाम- घोघरडिहा, पोस्ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जिला- सुपौल, पिन- ८४७४५२ (2) बैजनाथ मुखिया उर्फ टहल मुखिया- (2)सुपुत्र स्व. ढोंगाइ मुखिया, पता- गाम+पोस्ट- औरहा, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) मिथिला चित्रकला- (1) सुश्री मिथिलेश कुमारी सुपुत्री श्री रामदेव प्रसाद मण्डल ‘झारूदार’ पता- गाम- रसुआर, पोस्ट-– मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) (2) श्रीमती वीणा देवी पत्नी श्री दिलिप झा, उमेर- ३५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) खजरी/ खौजरी वादक- (2) श्री किशोरी दास सुपुत्र स्व. नेबैत मण्डल, पता- गाम- रसुआर, पोस्ट-– मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) तबला- श्री उपेन्द्र चौधरी सुपुत्र स्व. महावीर दास, उमेर- ५५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री देवनाथ यादव सुपुत्र स्व. सर्वजीत यादव, उमेर- ५०, गाम- झाँझपट्टी, पोस्ट- पीपराही, भाया- लदनियाँ, जिला- मधुबनी (बिहार) सारंगी- (घुना-मुना) (1) श्री पंची ठाकुर, गाम- पिपराही। झालि- (झलिबाह) (1) श्री कुन्दन कुमार कर्ण सुपुत्र श्री इन्द्र कुमार कर्ण पता- गाम- रेबाड़ी, पोस्ट- चौरामहरैल, थाना- झंझारपुर, जिला- मधुबनी, पिन- ८४७४०४ (2) श्री राम खेलावन राउत सुपुत्र स्व. कैलू राउत, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) बौसरी (बौसरी वादक) श्री रामचन्द्र प्रसाद मण्डल सुपुत्र श्री झोटन मण्डल, उमेर- ३०, बौसरी/बौसली/बासुरी बजबै छथि। पता- गाम- रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) श्री विभूति झा सुपुत्र स्व. कनटीर झा, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- कछुबी, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) लोक गाथा गायक श्री रविन्द्र यादव सुपुत्र सीताराम यादव, पता- गाम- तुलसियाही, पोस्ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) श्री पिचकुन सदाय सुपुत्र स्व. मेथर सदाय, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) मजिरा वादक (छोकटा झालि...) श्री रामपति मण्डल सुपुत्र स्व. अर्जुन मण्डल, पता- गाम- रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) मृदंग वादक- (1) श्री कपिलेश्वर दास सुपुत्र स्व. सुन्नर दास, उमेर- ७०, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री खखर सदाय सुपुत्र स्व. बंठा सदाय, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) तानपुरा सह भाव संगीत (1) श्री रामविलास यादव सुपुत्र स्व. दुखरन यादव, उमेर- ४८, गाम- सिमरा, पोस्ट- सांगि, भाया- घोघड़डीहा, थाना- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) तरसा/ तासा- श्री जोगेन्द्र राम सुपुत्र स्व. बिल्टू राम, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री राजेन्द्र राम सुपुत्र कालेश्वर राम, उमेर- ५८, गाम- मझौरा, पास्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) रमझालि/ कठझालि/ करताल वादक- श्री सैनी राम सुपुत्र स्व. ललित राम, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री जनक मण्डल सुपुत्र स्व. उचित मण्डल, उमेर- ६०, रमझालि/ कठझालि/ करताल वादक, १९७५ ई.सँ रमझालि बजबै छथि। पता- गाम- बढियाघाट/रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, जिला- सुपौल (बिहार) गुमगुमियाँ/ ग्रुम बाजा श्री परमेश्वर मण्डल सुपुत्र स्व. बिहारी मण्डल उमेर- ४१, १९८० ई.सँ गुमगुिमयाँ बजबै छथि। श्री जुगाय साफी सुपुत्र स्व. श्री श्रीचन्द्र साफी, उमेर- ७५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) डंका/ ढोल वादक श्री बदरी राम, उमेर- ५५, पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) श्री योगेन्द्र राम सुपुत्र स्व. बिल्टू राम, उमेर- ५५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) डंफा (होलीमे बजाओल जाइत...) श्री जग्रनाथ चौधरी उर्फ धियानी दास सुपुत्र स्व. महावीर दास, उमेर- ६५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री महेन्द्र पोद्दार, उमेर- ६५, पता-गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) नङेरा/ डिगरी- श्री राम प्रसाद राम सुपुत्र स्व. सरयुग मोची, उमेर- ५२, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 111 ७) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 ८) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 ९) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 १०) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 ११) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ Maithili Books can be purchased from: http://www.amazon.in/ For the first time Maithili books can be read on kindle e-readers. Buy Maithili Books in Kindle format (courtesy Videha) from amazon kindle stores, these e books are delivered worldwide wirelessly:- http://www.amazon.com/ अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। गजेन्द्र ठाकुर ggajendra@videha.com २. गद्य २.१.१. राजदेवमण्डल- लघुकथा- अवाक २.रविभूषण पाठक- फलनमा.. चिलनमा... ठेकनमा (व्यंग्य) २.२.आशीषअनचिन्हार- सभ्य लोक (व्यंग्य निबंध) २.३. १. उमेशमण्डल- 88मकथा-साहित्यगोष्ठीडखराममेसम्पन्नभेल २. अखिलेशकुमार- बाबूभोलालालदासकजयंतीमनल २.४.किछुविहनिकथा१. रामविलाससाहु- जाति २. लक्ष्मीदास- पकधरम ३. ललनकुमारकामत- बाबाकलोटा १. राजदेव मण्डल- लघु कथा- अवाक २.रविभूषण पाठक- फलनमा.. चिलनमा... ठेकनमा (व्यंग्य) १ राजदेव मण्डल- लघु कथा- अवाक अन्हरिया राति। लगै छेलै जेना आसमान अन्हार उगैल रहल होइ। ऊपरसँ हाँइ-हाँइ बहैत हवा गाछ-बिरिछकेँ झिकझोरि रहल छेलै। तैपर कखनो-काल टिपटिपाइत पानिक बून...। कखैन समए ठीक भऽ जेतै आ कखैन अधला तेकरा कोन ठेकान। ऐपर केकर वश चलि सकै छै? ओ तँ...। जितू ऊपर मुहेँ तकलक। लगलै मेघ उनटल आबि रहल अछि। देखते ओकरा टाँगमे पाँखि लगि गेलइ। एहेन खराप समए आ दू कोसक रस्ता! बान्ह-सड़क बनिते छेलै तँए ओइ गाम बस-ट्रक तँ जाइते ने छल। एहेन बिगड़ल समैमे रिक्शा, टेम्पू जेबे नै करतै। पैदले जाए पड़त। केकर कपार खराप हेतै जे एहेन समैमे निकलत। जितू निकलल छल ठीके समैपर। ओकरा की पता छेलै जे बाटमे बस भँगैठ जेतै आ बसक डरेबरसँ जातरी सभकेँ झगड़ा-फसाद भऽ जेतै। तइ कारण बसकेँ दू घण्टा बेमतलब ठाढ़ केने रहतै। आ जातरी सभकेँ एते समस्या हेतइ। तइसँ बसबलाकेँ मतलबे की। सभ तँ अपने सुआरथमे डुबकी मारैत अछि। सुआरथ पूर भेल तँ वाह नइ तँ आह। अनकासँ केकरो की मतलब। ओ सोचलक- मुदा हम तँ स्वार्थमे नै छी। बेमार सारि बारम्बार फोन कऽ रहल छेली जे- “हम जीअब की मरब तेकर कोनो ठेकान नहि। एक बेर भेँट कऽ जाउ।” ओइठाम केना नै जाएब, जैठाम जेनाइ कर्तव्य अछि। ‘केतबो लिखब लेख, परेमक रूप अनेक।’ भेँट होएत। ओइ भेँट करबामे नै जानि केतेक सुख छै। केतेक आनन्द छै। सूचना मिललाक उपरान्त जितूकेँ कछमछी लगलै से अखनो धरि लगलै छेलै। ओकरा यादि पड़लै। अँगनासँ निकलैत-काल पत्नी टोकने रहइ। “केतए जाइ छिऐ। कोनो ओइठाम लोक नै छै।” पत्नी जेना तमसाएल रहइ। शंकामे औनाइत मन! तामसे फड़फड़ाइत! जितू मिलबैत बाजल- “कोनो आनठाम जाइ छिऐ जे एना तमसाएल छी। अहींक गाम तँ जाइ छी।” हँसैत जितू निकैल गेल छेलै। सड़कपर ऐबते दोस टोकि देने रहइ- “हे यौ, सासुर अछि पछिम आ जाइ छिऐ उत्तर मुहेँ।” “कनी बैंकसँ टको-पैसा लेबाक अछि। अखैन हम नै रूकब।” कहैत आगू बढ़ि गेल रहइ। जितूकेँ मनमे आएल। जतरा पहर टोकि देने रहए तँए शायद बाटमे एना बाधा भऽ रहल अछि। पुन: सारिक संगे बिताएल समए ओकरा स्मरण हुअ लगलै। हँसी-खेल, फगुआक रंग-अबीर, आमक मास, मधुमास। ओकर रूप, गुण, बोली आ मुस्की मारैत मुख...। किछुकाल लेल जेना ओ स्वर्गक सागरमे डुमकी मारए लगल। सुखकेँ यादि केलासँ लोक किछु पलक लेल पुन: सुखी भऽ जाइत अछि भोगर सुखक नव रूप! सुनमसान बाट आ बिकट समए। जेना सभ किछु बिला गेल छेलै। एकाएक मेघक गर्जनासँ जितूकेँ धियान भंग भऽ गेलइ। जेना फेर चारू-भरसँ अन्हार घेर लेलकै। एहने समैमे घटल घटनाक सबहक चित्र आगूमे आबए लगलै। ओकरा मन पड़लै। एकबेर सासुरेमे सारक दोस कहने रहए- “हे यौ, इलाकामे जँ कुसमए केतौ फँसि जाएब तँ हमर नाम सुमैर लेब।” सारक मुहसँ दोसक बड़ाइ खूबे सुनने रहए। जितूकेँ बुझेलै जेना कातमे किछो छेलै। मुदा ओ अन्हारमे किछो नहि देख रहल छल। पएर थरथराए लगलै। कथी छेलै- भूत-प्रेत आकि चोर-डकैत। पता नै ओतए पहुँच सकब आकि बाटेमे प्राण बिला जाएत...। फेर भट्ट दऽ किछो खसल। डेराइते ओम्हर तकलक। देखते जेना मनकेँ भरोस भऽ गेलइ। कियो आगूमे बाट धेने धड़फड़ाइत जा रहल छेलै। जहिना लटछुटु माल दोसर माल-जालकेँ देखते स्थिर भऽ जाइत अछि तहिना जितूकेँ सन्तोख भेलै। शंका सभ मेटाए लगलै। डेग बढ़ौलक जे संगे चलब, लगमे जाइते ओ उनैट कऽ कर्कश अवाजमे पुछलक- “रेऽऽ ठाढ़ रह! केतऽ रहै छी?” तखने बिजली चमकल। ओही इजोतमे जितू ओकर भयंकर रूप देखलक। भागल भय जेना फेरसँ देहमे समा गेल। डरे देह थराराए लगल। पेटक हवा निकास लेल गोंगिया उठल मुदा ओहो डरसँअन्दरेमे बिला गेल। अनायासे मुहसँ निकलल- “हौ, अही अगिला गाम हमर सासुर अछि। हमहूँ तोरा चिन्हते छिअ आ तहूँ हमरा चिन्हते हेबहक। एना किए करै छहक।” “आ रे तोरी-के, कोनए गेलै रौ, चेला सब, ई तँ सभकेँ चिन्हते छौ। जुलुम भेलौ। सभटा भेद खोलि देतौ। सभ किछो छीन-ले आ सारकेँ साफ कऽ दही।” “हौ बाप, हम केकरो नहि चिन्हैत छी।” “चुप...।” तड़ाक-तड़ाक मुँहपर चमेटा खसए लगल।लगलै जेना बजर गिरैत अछि। जितू धड़फड़ा कऽ भूमिपर खसि पड़ल। “देखै छी पाछूमे इजोत1 पुलिस आबि रहल छौ। सभ किछो छीन-ले आ गरदैन काटि दही। हम आगू निकलै छियो।” एकटा चेला तरूआरि लेने जितू दिश बढ़ल आर सभ तेजीसँ आगाँ बढ़ि गेल। चेला जितू लग आबि सभ जेबीक तलाशी लेलक आ उठैत बाजल- “यौ गुरू ई तँ थप्परेसँ मरि गेलै। मारबै की। भागू जल्दी, पुलिसक इजोत लगीच आबि गेल।” सभ पड़ा गेल। जितू चिन्हल अवाज सुनि कुहरैत उठल। मन घृणासँ भरि गेलइ। अचरजमे डुमल स्वर निकललै- “धनक लेल लोक एतेक नीचाँ गिर सकैत अछि। केकरा कहबै के पतिएतै, जेकरे कहबै सएह लतिएतै।” जेना लगलै केतौ किछु नहि, कोनो सम्बन्ध नहि। मनुख केहेन आ जानवर केहेन। के नीक? अनायासे ओकर हाथ ओहइ जेबी दिस गेलै जइमे आठ हजार टका रखने रहए। सभ टका-पैसा सुरक्षिते रहइ। ओ अवाक् भऽ गेल। सोचलक- केतौ आ केकरो लग इमान रहि सकैत अछि। बुढ़-पुराणक बात मोन पड़लै- केतबो काटबहक जड़ि इमानक सोर पताल धरि। २ रविभूषण पाठक फलनमा.. चिलनमा... ठेकनमा (व्यंग्य) ओकरा ,ओकराआओकराआगूबरहाआएकरा ,एकराआएकरटांगखीच।ऊदेखहीनेबरानील-टीनोपालझारनेछौ ,ओकरादिसएकलौपकादोफेक ,देखहीनेकनियोनेकनियोलागबेकरतए ,नइलागतैत' डरेबोत' करतौआडराजेतओत' कमसँकमसाइकिलकहेंडिलजरूरेखसकतैआखसकतैत' ऊगिरतौ। ओकरादिसईढ़ेपा ,ओकरादिसईछौंकीआओकरादिसईझूटकीफेक।देखहीबसखपटिएफेकबाकचाही ,डांगकयुद्धनइथिकैई ,नाहककेकरोलागिगेलौत' खूनकमोकदमाहेतौ। स्पष्टप्रशंसानइस्पष्टआलोचनानइ ,बसमुसकियाइतरहियौ ,बस....। ओकरासटालियौत' ईसबफैदा ,ओकराबजाबियौत' ओहोआयत।ओकराहटेनेरहूनइत' ओसबनराजभ' जेता।ओकरासाथरखबाकअछित' रातिकएकांतमेबजाबियौ ,केओदेखैनइ ,केओअनुमानतकनइलगासकै।ईआदमीअहांकेभविष्यमेकाजदेत,तेंएकराईग्नोरनइकरियौ ,कुनोनेकुनोलेईसँसटेनेरहू।ईबरालराकूटाईपकअछि ,एकराआगूराखू ,ईकलमआकोदारिसँसाथरहतआईलेखकजेंकात' अछिमुदाअछिबराचुप्पा ,एकराएकदमपंजियेनेरहू ,मंच ,पुरस्कारआप्रकाशनकशताधिकअभियानमेएकरासनखबासपूरालेखकसमुदायमेनइभेटत। आयदिफलनमाकेधकियेबाकअछित' चिलनमाकेआगूराखू ,हमजनैछीजेचिलनमाअहांकप्रियनइअछि ,मुदायदिअहांअपनप्रियठेकनमाकेआगूकरबैत' निश्चितेबूझूजेफलनमाआगूभ' जायततेंसबआदमीजोरसँकहियौश्रीचिलनमाझाजिंदाबाद। ऐरचनापरअपनमंतव्य ggajendra@videha.com परपठाउ। आशीषअनचिन्हार सभ्य लोक (व्यंग्य निबंध) 1 हुनका एकटा बेमारी छनि। सभ्य बनबाक। आब दुनियाँमे ई एहन बेमारी छै जकर कोनो इलाज नै। किछु कऽ लिऽ केहनो कऽ लिअ कोनाहुतो कऽ लिअ, हुनका राति-दिन सभ्यताक अनुसरण चाही। हुनका बुझाइ छनि जे सभ्य बनलासँ दुनियाँ तगमा दै छै। आ ऐ तगमा लेबा लेल ओ किछु करबाक ले तैयार छथि। उदाहरण लेल हुनका एकटाआदमीसँ बड़ शिकायत छनि। एतेक जे ओ परोक्षमे हुनकर माए बहीनिकेँ उकटि दै छथिन मुदा सामने एलापर हुनका प्रणाम करै छथिन। आ हुनका हिसाबें इएह सभ्यता छै....... 2 मिठ बाजब एकटा बड़का कला छै। ऐ कलासँ बड़का-बड़का काज भऽ जाइत छै। लोकेँ सदिखन जश भेटै छै। आदि-आदि। एकटा धोती धारी अति सज्जन महाशय अपनासँ छोटकेँ ई व्याख्यान दऽ रहल छलखिन। ओही ठाम एकटा बच्चा ओहि महा सभ्य लोकसँ पूछि बैसल जे जँ हम अहाँकेँ कही जे "हे कृपालु सभ्य ओ सुशील मानव -"अतिसुंदर बचन बाजऽ बाली जे अहाँक बेटी छथि तिनका संग हम एक राति रतिक्रिया करऽ चाहैत छी" तँ कहू जे हमर काज सिद्ध हएत की नै?...... ओ सभ्य लोक मिठगर बोलीक फेरमे पड़ि आब अवाक् छथि..... 3 सभ्य लोक बहुत बेसी सभ्य बनबाक फेरमे छथि। ओ भरि दिन सुग्गा आ कसाइ बला कथा रटैत रहै छथि जे कसाइ एबे करतै, जाल पसारबे करतै, अनाज फेकबे करतै तों लोभ नै करहिहें। मुदा पता नै सभ्य लोक सभ ई रटैत-रटैत कहिया विचारधाराक लोभमे फँसि जाइ छथि से वएह टा खाली जानै छथि। अहाँकेँ ओ बहुत बेर कहता जेसाहित्यकारक कोनो विचारधारा नै होइ छै मुदा ओ अपन विचारधारा ताकि लै छथि। सभ्य लोक बहुत बेर रामधारी सिंह दिनकरजीक ई पाँति समाजक सामने राखै छथि जे-- "समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याघ्र, जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध" मुदा जखन कोनो गलत काजक विरोध करबाक समय आबै छै तखन सभसँ पहिने इएह सभ्य लोक सभ भागि जाइ छथि। फेर किछु दिनक बाद आबै छथि बिना लाज शर्मक। कहै छथि जे ई काज भऽ गेल छल तँ ओ काज भऽ गेल। मुदा वास्तविकता ई छै जे ओ तटस्थ रहै छथि। हुनका हिसाबें सभ्यता इएह भेलै। ऐरचनापरअपनमंतव्य ggajendra@videha.com परपठाउ। १. उमेश मण्डल- 88म कथा-साहित्य गोष्ठी डखराममे सम्पन्न भेल २. अखिलेश कुमार- बाबू भोला लाल दासक जयंती मनल १ उमेश मण्डल 88म कथा-साहित्य गोष्ठी डखराममे सम्पन्न भेल :: डखराम (बेनीपुर)क मुखियाजी श्री अमर नाथ झाक आयोजकत्व आ श्री कमलेश झाक संयोजकत्वमे ‘सगर राति दीप जरय’क 88म कथा-साहित्य गोष्ठी 30 जनवरीक साँझमे शुरू भेल। जेकर उद्घाटन सम्म्लित रूपे श्री जगदीश प्रसाद मण्डल, डॉ. शिवकुमार प्रसाद, श्री राजदेव मण्डल, श्री नन्द विलास राय, श्री फागुलाल साहु, श्री शारदा नन्द सिंह, श्री उमेश पासवान, श्री कपिलेश्वर राउत, श्री उमेश नारायण कर्ण, श्री शम्भु सौरभ तथा श्री राम विलास साहु केलैन। उद्घाटनक पछाइत स्वागत गीत सेहो सम्मिलित रूपे समवैत स्वरमे श्री राधाकान्त मण्डल तथा श्री रामदेव प्रसाद मण्डल झारूदार गौलैन आ स्वागत भाषण करैत श्री कमलेश झा कहलैन- ‘1990 इस्वीसँ ‘सगर राति दीप जरय’क आरम्भ यात्रा शुरू भेल जे चलैत-चलैत आब ओइ तहपर चलि आएल अछि जेतए खॉंटी माटिक सुगन्धसँ सुगन्धित कथाक लेखन एवं पठन भऽ रहल अछि...।’ उद्घाटन सत्रक पछाइत लोकार्पण सत्रमे प्रवेश भेल। श्री जगदीश प्रसाद मण्डलक दूटा पोथी, पहिल एगच्छा आमक गाछ (कथा संग्रह) आ दोसर ठूठ गाछ (उपन्यास)क लोकार्पण सम्मिलित रूपे भेल। तथा ‘खसैत गाछ’ (लघु कथा संग्रह) नामक पोथीक वितरण सेहो भेल। क्रमश: कथा सत्रमे प्रवेश भेल। छह पालीमे कथाक पाठ भेल। जइमे श्री उमेश नारायण कर्ण- ‘मौनी बाबा, अलवत्त छोड़ी’ शीर्षकक दूटा कथा पढ़लैन। श्री राजदेव मण्डल- एडजस्टमेन्ट, श्री राम विलास साहु- जाति, श्री शारदा नन्द सिंह- ‘आशातीत’ तथा‘पलटा माय’, श्री जगदीश प्रसाद मण्डल- ‘एगच्छा आमक गाछ’ तथा हहौती, श्री लक्ष्मी दास- बापक धरम, श्री ललन कुमार कामत- बाबाक लोटा, श्री शम्भू सौरभ- परम्पराक बलि, श्री फागु लाल साहु- अछूत, श्री शिव कुमार मिश्र- व्यवहार तथा प्रौहित्य, श्री कपिलेश्वर राउत- घूर लगक गप, अखिलेश मण्डल- गढ़ैनगर हाथ, तथा अपने (उमेश मण्डल) पढ़लौं- ‘अपने गरदैन कटलौं।’ पठित कथा सभपर एक-सँ-एक समीक्षा सेहो भेल। डॉ. शिव कुमार प्रसाद, पण्डित बाल गोविन्द आर्य ‘गोविन्दाचार्य’, श्री फागु लाल साहु, राधाकान्त मण्डल तथा श्री कमलेश झा विषद रूपे समीक्षा कार्य केलैन। संगे श्री राजदेव मण्डल, श्री शारदा नन्द सिंह,श्री कपिलेश्वर राउत, श्री उमेश पासवान, श्री शिवकुमार मिश्र, श्री राजा राम यादव, श्री नन्द विलास राय, राम विलास साहु, उमेश नारायण कर्ण तथा अपने (उमेश मण्डल) सेहे समीक्षा कार्यमे भाग लेलौं। अगिला गोष्ठीक भार लैत श्री उमेश पासवान कहलैन- 89म सगर राति दीप जरय- लौकही (जिला मधुबनी)मे कराएब। जेकर हकार मंचेसँ दऽ रहल छी जे 89म गोष्ठीमे ‘दलित विषयक कथाक विशेष स्वागत होएत।’ ऐ तरहेँ 88म गोष्ठीक समापन भेल। 89 गोष्ठी लौकहीमे श्री उमेशजी करौता। सम्भव जे मार्चक अन्तिम शनिकेँ होएत। २ अखिलेश कुमार बाबू भोला लाल दासक जयंती मनल ६ फरवरी २०१६- शनि दिन, मधुबनीक माध्यमिक शिक्षक संघ भवनमे भोला लाल दास लोक संस्कृति एकेडमी द्वारा बाबू भोला लाल दासक जयंती समारोहक आयोजन भेल। समारोहक उद्घाटन विधायक श्री समीर कुमार महासेठ केलैन। स्वागत करैत एकेडमीक संयोजक श्री बी.एन. झा कार्यक्रमकेँ आगू बढ़ौलैन। मंच सजल। दर्शक-दीर्घा भरल। विशिष्ठ अतिथि श्री जगदीश प्रसाद मण्डल, श्री उदय चन्द्र झा ‘विनोद’ आ श्री कमलेश झा मंचासिन भेला। मंचक अध्यक्ष डॉ. सुरेन्द्र लाल दास एवं मुख्य अतिथि विधायकजी सेहो मंचपर आसीन भेला। उद्घाटन भाषणसँ समारोहक कार्यक्रमकेँ आगू बढ़बैत विधायक श्री समीर कुमार महासेठ बजला- बाबू भोला लाल दास मातृभाषा मैथिलीक समर्पित अनुरागी छला। ओ अपन समुच्चा जिनगी मिथिला आ मैथिलीक विकासमे लगेलैन। खगता अछि जे हमरो सबहक कर्तव्य-कर्म ओहन हुअए जे मिथिला-मैथिलीक विकास क्रमकेँ आगू बढ़बैत एकैसम सदीक मथिला बनए। विशिष्ठ अतिथि श्री जगदीश प्रसाद मण्डलजी कहलैन- मधुबनी, आइ जेतए भोला बाबूक जयंती समारोहमे अपना सभ छी, ई ओ जगह अछि जेतए ग्रियर्सन सन भाषा-विद् रहि काज केलैन, ओ ‘लिग्विष्टिक सर्वे ऑर्फ इण्डिया’मे जे मैथिली भाषा आ भाषाक दिशापर कार्य केलैन ओ अद्भुत अछि, विराट अछि। जेकरा भोला बाबू सेहो अपन सर्वस्व धन-मन लगा आगू बढ़ेबामे अपन भरि जिनगी लागल रहला। पत्रकारिता-कार्यमे अपन घराड़ी तक बेच कऽ लगा देलखिन...। तँए भोला बाबूक योगदानकेँ जँ हम सभ मैथिली मात्रक अनुरागी मानै छिऐन तखन हुनका संग अन्याय हेतैन। ओ मैथिलीक संग हिन्दी, अंग्रेजी आदि भाषामे सेहो अनुपम योगदान केने छैथ। तेतबे नइ, १९२०-२१ ईस्वीमे महात्मा गांधीक संग जहल सेहो कटने छैथ। जमीनी कार्य करबाक जे हुनकामे उत्साह छेलैन,गुण छेलैन ओ अद्भुत, जे औझका साहित्यकारमे विरले देखबामे आबि रहल अछि। भोला बाबूक बेवहारिक पक्षपर जँ हम सभ नजैर दी तँ स्वत: हमरा सबहक मुहसँ बहराएत- भोला बाबू मिथिलाक ओहन सपूत छला जे अपन कर्तव्य-कर्ममे तन-मन-धन सभ किछु अर्पित करैत रहला, कहियो पाछू नै हटला...। समारोहक कार्यक्रमकेँ आगू बढ़बैत श्री उदय चन्द्र झा विनोद भोला बाबूक दधीचिक उपाधिक चर्च करैत कहलैन जे भारती पत्रिकाक प्रकाशन कऽ बाबू भोला लाल दास मैथिली पत्रकारिताक क्षेत्रमे क्रांति आनि देलैन। ओहन आन्दोलनकारी आ सर्जनात्मक क्षमता विरले कोनो आन साहित्यकारमे भेटैए। वृहत व्याकरण ग्रंथक रचना कऽ ओ मैथिलीक जे सेवा केलैन से अतुलनीय अछि...। समरोहकेँ संबोधित करैत विशिष्ठ अतिथि श्री कमलेश झा कहलैन- विश्वविद्यालयमे मैथिलीक पढ़ाइ शुरू करबैमे भोला बाबूक अहम् भूमिका छेलैन। १९३९ ईस्वीमे पटना विश्वविद्यालयमे मैथिलीक पढ़ाइ भोले बाबूक योगदानसँ भेल तँए बाबू भोला लाल दास साधारण पुरुष नै विराट पुरुष छला...। ऐ तरहेँ समारोहक यात्रा बढ़ैत रहल। दर्शक-दीर्घासँ सेहो संबोधन भेल। श्री सुनील कुमार नायक कहलैन- अपन पूर्वजक उपलब्धिकेँ जानब संगे भावी पीढ़ीकेँ जनाएब हमरा सबहक जिम्मेवारी अछि। तँए ऐ सभ तरहक कार्यक्रम होइत रहए। कहब ने किए,अपने आइसँ पहिने भोला बाबूक कएल कार्यकेँ नै जनैत रही जे आइ जनलौं अछि। तेतबे नै आइये जे ऐ मंचपर साहित्यकार सभ छैथ, तइमे कए गोटेकेँ अखने चिन्हलिऐन अछि। निश्चित रूपेँ पत्र-पत्रिकासँ पाठकक जे सम्बन्ध हेबक चाही से नै रहब एकटा कारण भेल, मुदा पत्र-पत्रिका दोखी नै अछि ईहो नै कहल जा सकैए...। अध्यक्षीय उद्वोधनक पछाइत कार्यक्रमक समापनक घोषणा भेल। ऐ अवसरपर श्री जगदीश प्रसाद मण्डल अपन स्वरचित पचासम पोथी- ‘खसैत गाछ’ (लघु कथा संग्रह) क वितरण दर्शक-दीर्घामे केलैन। ०६. फरवरी २०१६ ऐ रचनापरअपनमंतव्य ggajendra@videha.com परपठाउ। किछु विहनि कथा १. राम विलास साहु- जाति २. लक्ष्मी दास- पक धरम ३. ललनकुमारकामत- बाबाकलोटा १ राम विलास साहु जाति आसिन मासक चारिम सप्ताहक समए अछि। बर्खाक पानि आ बाढ़िक पानि सेहो थीर भऽ गेल अछि। मुदा चर-चाँचरमे पानि भरले अछि। जइमे खेतिहर सभ पटुआ, सन्नइ, चन्नी, चन्ना काटि-झाड़ि गोड़ैत अछि। पानि गनहा रहल अछि। दू गामक बीच अछि तँए चर दूर तक पसरल अछि। बहुत पहिनहिसँ दुनू गामक लोकक सेवा सेहो करैए। बुढ़-पुरानक कहब छैन जे पहिने कोसी अही चर देने बोहै छल। पछाइत मुँह भरना भेने दोसर दिस धार घूमि गेल। बरखा आ बाढ़िक समए उनटे कोसीक पानि आबि चरकेँ उपेछाल करि दइए। जखन बाढ़िक पानि घटैए तखन चरोक पानि स्वत: घटि जाइए। चरक पानि करिया समाढ़सँ करियाएल, तइमे भैँटक फूल कोसी धरि फुला शोभा बढ़ेने रहैए। तैबीच सिल्ली, गागन, लालशर, पनिकौआ इत्यादि अनेको रंगक चिड़ै-चुनमुनीक क्रीड़ा स्थलक संग शरण स्थल सेहो बनलए। एक-दोसर गामक लोक जाइ-अबैले केतए-केतए समाढ़ हटा-हटा बीचमे सिरौर बना पानिटपैले रस्ता बनौने अछि। पानि बेसी रहने नाहक साधन सभ अपन-अपन रखने। जे नै रखने अछि ओ भरि डाँड़ भरि जाँघ पानि टपि ऐ-पारसँ ओइ-पार करैत अछि। बेवस्थो कोसी क्षेत्र-ले बेमुखे अछि। ऐ क्षेत्रक नेता सभ क्षेत्रक विकास तँ कमे सन मुदा अपन विकास कऽ गामसँ दूर शहरमे बड़का फ्लैट बना रहै छैथ। तँ गाम बाढ़ि-पानिमे डुमैले किए औता। ई तँ गामबला बुझत जे गाम केकर छी। डीहबासूकेँ आकि बहरबैयाकेँ। नेतासभ तँ पाँच बर्खक पछाइत चुनावी महाकुम्भमे मात्र नहाइले अबै छैथ। सभ पुण्यकेँ मोटरी बान्हि नेने चलि जाइ छैथ। चुनावक समए आएल। नेता सबहक उजैहिया गामे-गाम आबि गेल। क्षेत्रक वोँट बटोरै खातिर ओही कोसी कोसीक चर टपि अगिला गाम जेबाक छैन। सोचलैन पएरे टपने लोक संघर्षशील नेता बुझत। जइसँ अधिक भोँट हएत। नेता आ नेताक पीठलगुआ गामक कार्यकर्ता संगे सभ कियो जाँघर भरि पानि टपि पार हुअ लगला। तही क्रममे नेताजीकेँ एकटा नमहर पलैहिया जोंक धऽ लेलकैन। पार होइते नेताजीक जाँघसँ छरछर खून निकलए लगलैन। छरछर खून बहैत देख नेताजी छटपटा उठला। संगी सभ निहारि देखलक तँ देखैए नम्हरगर जोंककेँ, जे खून पीब मोटागेल अछि। नेताजी जीबठ बान्हि जोंककेँ हाथसँ पकैड़ खींच-तीर कऽ छोड़ौलैन। एक हाथसँ छरछराइत खूनक दाढ़केँ दबने आ दोसर हाथसँ आ दोसर हाथसँ एकटा संगीक लाठीक हूरसँ जोंककेँ थोकैच-थोकैच मारए लगला। जोंक तँ कठजीब होइते अछि। लाठीक हूरसँ नै मरैबला। तमसाएल नेताजीक मुहसँ निकलैन- “तोरा आर कियो ने भेटलौं जे हमरे खून पीबैले एलेँ। तोरा खनू बोकराए मारि देबौ।” छटपटाइत जोंक बाजल- “हमहूँ तँ अहींक जाति छी, जाति जातिये लग ने जाएत। अहाँ जे एहेन निष्ठूर भऽ हमरा मरै छी से जातियोपर ने कनियोँ दया-धरम अछि। अखन हम कोनो अपराधो तँ नहियेँ केलौं अछि। ई तँ जातिक सोभाव छी।” नेताजी डाँटैत बजला- “तूँ जलकीट, असरधे पानिमे रहैबला आ हम श्रेष्ठ मनुख फ्लैटमे रहनिहार, तखन तूँ केना हमर जाति भऽ सकै छेँ?” जोंक कुहरैत बाजल- “जहिना अहाँ जनताक खून पीबै छी तहिना ने हमहूँ खूने पीलौं अछि। अहूँ खूनपीबा आ हमहूँ खूनपीबा। तखन दुनू गोरे जातिये ने भेलौं। जातिक सर्टिफिकेटक चालि-चलनसँ बढ़ि कऽ आरो कोनो नमहर प्रमाण होइ छै जे देब। एक तँ पहिनहिसँ अहाँ सभ हमरापर एतेक अतियाचार केलौं जे हम भागि पड़ा कऽ पानिमे शरण नेने छी...।” नेताजी आँखि लाल-पीअर करैत बजला- “तूँ अपन प्राण बँचबैले ई गुमला हमरा सुनबै छेँ। तोरा बिनु मारनेहम नै छोड़बै।” बाजि नेताजी अनधुन लाठी जोंकक देहपर बरसाबए लगला। अधमरू भेल जोंक बाजल- “अदना सन गलतीपर हमरा सन अब्बल जीवकेँ जानसँ मारै छी आ अहाँ जे लाखक-लाख जनताक खून श्रेष्ठ मनुख भऽ पीबितो एलौं आ पीबितो छी से नीक लगैए।” जोंकक ई बात नेताजीकेँ आरो तरङा देलकैन। तखने जुमलासँ एक गोरे कहलकैन- “नेताजी, चुन लगबैक आदेश देल जाए, अपने खून बोकरए लगत।” चुनक नाओं सुनिते जोंक अपन प्राणक भीख मंगैत बाजल- “जेकर आधार बना अहाँ अपन जीवनक यात्रा करै छी यएह तँ हमहूँ छी। दया करू..! जातिपर दया करू..!” २ लक्ष्मी दास बापक धरम छोट-खुट्टी देखने झुझुआएब नइ, आदमी हम हण्ड्रेड परसेन्ट पक्का छी, तइमे एको परसेन्ट कम नइ, तँए एहेन धोखा ने हुअए से पहिनहि कहि देलौं अछि। किसानी जिनगी अछि तँए किसान बनि भगवानक भक्ति दिन-राति करै छी। भगवानो खुश रहै छैथ। अठारहम बरख दुरागमन केला भेल अछि, जइमे नअटा धिया-पुता अछि, मनुख कि कोनो अल्लू-भाँटा छी, जे तीनियेँ मासमे फड़ पकैड़ लेत। मनुखकेँ बुधि-विवेक होइ छै तँए ओ बच्चाक हिसाब जोड़ि लइए जे नअ मासक पछाइत बच्चाकेँ माइक दूधक खगता अन्नो पुड़ा सकैए, तैपर नअ मास पेटोमे तँ रहबे करत, तँए दुनू मिला कऽ भेल अठारह मास। दूटा काज भेल तँए तीन-तीन मास जबड़ा दऽ दियौ, चौबीस मास भेल। तइ हिसाबे अहाँ कहू जे हम पक्का छी आकि कच्चा? ओना पक्का बनबैमे भगवानो मदैत केलैन। ओ मदैत ई केलैन जे एकोटा धिया-पुताकेँ ने रोग-वियाधि लगा घिसियौलैन आने अछैते औरूदे केकरो प्राण लेलैन...। आब अहाँ पुछब- “एते धिया-पुता अछि, परिवार नियोजन किए ने करेलौं?” जहिना अहाँ पुछब जे परिवार नियोजन किए ने करा लेलौं तहिना हमहूँ ने कहब- “पैतालीस-पचासक उमेर अपनो दुनू परानीक लगिचाएले जाइए, तइले अनेरे कृत्रिम तरीका अपनाएब उचित हएत। जखन भगवानो दहिन छैथे जे किसानीमे ने कहियो मरहन्ना भेल आ ने कहियो लाही-चुट्टी लगल। किसान छी मनुखसँ लऽ कऽ माल-जाल, सुग्गा-परबा धरि पोसबो करै छी आ उपजेबो करै छी। हमरा कोन मतलब अछि अनकर राज-पाटसँ, जेते भार अछि से करै छी।” अहीं कहू जे मनुख सन धनक उपज रोकब नीक हएत? अच्छा छोड़ू ऐ बातकेँ। नबोटा धिया-पुताकेँ जहिना सिरियली जनम भेलै तहिना सिरियली स्कूलक बाट धड़बैत गेलौं। एकटा बी.ए.सँ आगू बढ़ि गेल बाँकी सभ गामक स्कूलसँ लऽ कऽ कौलेज तक धरियाएल अछि। तइसँ होइए ई जे ने एको मास नागा रहैए आ ने एको दिन, जइ दिन कागज-कलमसँ लऽ कऽ फीस-फासक खगता नइ रहैए। सरकारी कारोबार थोड़े छी जे कहियो छुट्टीए रहत तँ कहियो हाकिमे नइ! अपन जिनगीक बजट अछि। शिक्षा मदमे अनिवार्य खर्च अछि। जेठका बेटा शिक्षा मित्रक रूपमे साल भरिसँ काजरत भेल। एते दिन ने ओकरा खगता भेलै आ ने पुछलक, तइले हमरो दुख नहियेँ भेल। दुखो केना होइत अहाँकेँ हमर खगता नइ हुअए, से की कोनो अधला भेल, नीके भेल किने। मुदा काल्हि जेना ज्ञान भेलै तहिना चेतुआ आबि पुछलक- “बाबू, बापक धरम की भेल?” सभ दिन सोझ-मतिया आ सोझ-चलिया रहलौं, धरम-करमपर विचार नइ केने छेलौं। मुदा एक तँ बेटा पुछलक,तहूमे सरकारी शिक्षक सेहो छी। काल्हि दिन जे कोनो विद्यार्थी ओकरो पुछतै, तखन तँ ओहो ने वएह बात कहतै जे हम सीखेने रहबै। तखन? मन के केतबो पाछूसँ धक्का दिऐ जे भाय इज्जत डुबि रहल अछि। दुनियाँमे पिता छोड़ि दोसर ऐछे के जे एते नमहर हएत। ज्ञानक संग भक्त बना दुनियाँक बीच ठाढ़ करब नान्हिटा बात थोड़े भेल। जँ कियो छुच्छे ज्ञान देलैन आ भोगैक लूरिये ने देलैन, तखन केहेन भक्त हएब से तँ अपनो मन कहबे करैए। मुदा मन घुसकबे ने करए जे बेटाकेँ जवाब दैतिऐ...। मुदा लगले मन फेर धिकारलक- “रे बुड़िबक! कातिक मास जे ब्रह्म स्थानमे भागवतमे सुनने रहेँ, वएह बात दोहरा कऽ बाज ने।” फेर हुअए जे एक तँ कातिक मास, जइमे केते परिवारकेँ मासो दिन दुनू साँझ चुल्हि नइ जरैत, ओ मास जिनगीक पर्व मास छी। इतिहास दर्शन, जिनगीक ओहन बाटक घाट पार करैक मास छी जे मनुखकेँ मानव बनबैक मास छी। तैठाम एकटा शिक्षक बेटाकेँ केना किछु कहि फुसला देबइ। जब फुसलबैबला छल, फुसलैयो कऽ तँ जवान बना काज तक पहुँचाइए देलिऐ। आब अपने एतबो ने बुझतै जे अपनो बिआह-दान भेल, बाल-बच्चा हएत। किछु बात एहेन अछि जे बातेसँ लोक बूझि जाइए, मुदा सभटा तेहने अछि सेहो तँ नहियेँ अछि। ओकरा तँ मथनीमे मोहैन चला मथि कऽ निकालऽ पड़ै छै...। सोचलौं जे जँ बेटा बनि पुछने हएत तँ किए ने पण्डित काकाबला बात दोहरा कऽ कहि दिऐ। खाली एतबे ने बेसी कहए पड़त जे बौआ पण्डित कक्काक वचन छी, हुनके बचपनक अनुसार पोसि-पालि पूछ करै जोकर[1] ने बना देलिऐ। मुदा लगले मनमे सुतरल। कहलिऐ- “बौआ, सभ प्रश्न सभकाल ने पुछले जाइए आ ने ओकर उत्तरे देब उचित होइए। तँए साँझू पहर जखन निचेन हएब तखन नीक जेना हम तेना बुझा देबह, जेना बापक धरम होइ छै।” ◌ [1] पितासँपुछैजोकर ३ ललनकुमारकामत बाबाकलोटा जेठकदुपहरियाकसमए, टहटहाएतरौद, उपरताकैतेऑंखिचोन्हराइतरहिन।कछुआबाबादलानपरकाठकखुर्शिपरबैसलछथिन्हआगामकउफॉंइटनबतुरियासभकेँबिखनि-बिखनिकगारिपैररहलछिथन्ह।गामकदु-चारिटाछौड़ोसभमारितेबदमाशछेलैन, कछुआबाबाकेँदेखैतेइत्यादितरहकअमर्यादितबातबाइज ‘झामलाल-बुड़बाघामकिएचुबैछ?’, ‘बाबाझलकटेलहक?’, ‘बाबाढे़काखसलऽ, ढेकाखोंसऽ’, ‘चेशमामेभुड़छै।’ इत्यादितरहकबातसँकछुआबाबाकेँपिनकाबैतरहैएआमाजालुटैतरहैए।मजाककपात्रबनि, कछुआेबाबा, अकट-बकटबाजैतरहैछथिन्ह। कछुआबाबाकनअबर्खकपोता, बिरखासेहोवएहसंगतकरिझल-खिझलशैतानकजरिरहिन, बाबाकफुलहीलोटामेआगिभरिकेँअंगनाकओसािरपरबैसस्कूलकपोसाकमेआइरनकरिरहलछल, ताहिसमएकछुआबाबाकेँजोरसँमैदानलागिगेल।कछुआबाबाकऑंखकमजोररहिन, अपनझलफलाइतनजैरसँलोटातकैतदुआरिपरसँऑंगनएलनि, चारूदिशानजरिघुमेलखिनमुदाकतौलोटापरनजरिनैपड़ल।कछुआबाबाकआदैतछेलनिअपनजरूरीकचीज-बीतअपनेसंगराखैक, मुदाबिरखाकशैतानीसँअवगतछेलैन, हिनकाबुझनागेलजेबिरखेहुनकचीत-बीतमेहाथलगाबैतअछि।घुरि-फिरकेँबाबाकनजरिबिरखापरअटकल, जेकछुआबाबाकलोटामेआगिभरिकेँकपराकआइरनकरैतरहिन।बाबाचिकैरकेँपुछलखिन- “केछीबिरखाऽऽ? एऽइहबाजेकिएनैछै, छिनरीकसॉंए, मँुहकमालगुजारीलागैछौ?” बिरखाउचैककेँबाजल- “कीभेलऽहौ? देखैनैछहक, कामकरैछी? सदिखनबड़-बड़, चड़-चड़करैतरहैतअछि।” कछुआबाबा- “ऊँऽहँ! बोलीमेतेनाएकोरतिलैशेनैअछि।पुछैछियौहमरलोटादेखलीहींकेतौ?” बिरखालोटापरसँहाथढ़ील्लाकरैतबाजल- “कोएतोहरलोटाखेनेनैजाइछऽ।रूकिजाकनीएकलाभऽगेलै।” खिसियाएलकछुआबाबाछड़ीउपरतानिजोड़सँबाजलखिन- “देखैछिहीठेंगा, ठॉंएसिनमाथपरबजारिदेबो? सबखेल-बेलतोहरबाहरकरिदेबो।हमरापेखानाजोड़सँलागलअछिआतूँमजाककरैछी?” बिरखाकपोसाककआइरनपुरानैभेलरहिनमुदाइहोबुझैतरहिनजेआबलोटानैदेबतँमारिखाएपरत।बिरखाअपनअंगाकआइरनकेनाइछाेरि, भरललोटाआगिबाबाकहाथमेधराएदेलक। “लाए, तोहरप्राणकिएछुटलजाएछऽ?” एकदिशजेठकतपैतगर्मी, तैपरसँआगिसँभरललोटा, बाबाकहाथमेपरैतेसटसीनबैसगेल।कछुआबाबाजोरसँहाथझमारैतलोटाफेकलखिन, आधुँसिसीनजमीनपरखसल, छरपटाएलागल।कछुआबाबाकचेशमाहाइपाबरकरहिनसेहोऑंखिसँफेकागेलआदूटुकरीभऽगेल। पाकलहाथकलहैरआतमशएलमन, कछुआबाबाछड़ीउठादौरलबारैले, मुदाबिरखामाथपरपैरलेनेनऽदूएगारहभऽगेल।कछुआबाबाघोलाइतरहल।कनीएसमेकपछातिबाबाकमनहलुकभेल, तबमैदानकैरएलनि, हाथ-मुँहधोए, दलानकनींचादरबज्जापरछहारिमेबैसलरहिन।तखैनेघुटरा, मनुआआमखनाआएलआकछुआबाबाकमजाकउड़ाबेलागल... घुटरा- “चेश्माकिभेलहबाबाहौ?” कछुआबाबा- “चेश्माकेँखेलकैहँबिरखा, ईछौराहमराजिएनैदेत! सभपराणीमारैमेलागलअछि।” मनुआ- “बाबा, धोतीमेकिलागलछऽहौ? खोखनाबाजैतरहै, जे कछुआबाबाकपड़े-बस्त्रमेपैखानाकऽदेलकै!” ईबातसुनैतेमातैरकछुआबाबातमताएउठलआमाइए-बहिनेउकटेलागल।इहोचारूगाोटेइएहचाहैतरहिनजेबुढबागैरदिएआसभगोटेमाजालुटी।तखैनेमखनाकेँएकटाअटपटाएलबातफुराएलआकछुआबाबाकपछारिजाएकेँजोड़सँबाजल- “भागऽबाबाभागऽ, पाछामेनेंगड़ासड़हाआबिरहलछ!” घुटरा, मनुआसेहोहँमेहँमिलाबैतबाइजउठल- “हँहौबाबाभागऽ, फैरहेऽहुरर्रऽहुरर्रऽहे!” कछुआबाबाकेँबुझनागेलसाइतठीकेसढहाआइबगेल, हाथमेलोटाउठेलकआभॉंजेलागल।कछुआबाबा- “तुहेसभसढहाकेँरेबानेएलँकतौसँ।फैरहेऽभागलेकिनै? हुल्लेऽ... हुल्लेऽ...” मखनाकछुआबाबाकपछाजाएकेँजोड़सँचिकैरबाजल- “बाबातोरेपाछारिमेछऽहौ! भागऽनऽ!” कछुआबाबापछाउलटिकेँफुलहीकलोटाजोड़सँफेकलक... लोटासिधामखनाकमँुहपरजाएथप्पसिनलागल, धुस्सऽसिनमखनाजमीनपरखसलआतिलमिलाएलागल।मखनाकेँऑंखिकआगुअन्हारभऽगेलआअधरातिकतारादेखाएलागल।गामकआरोकिछुलोकसभजमाभेलअाबाजेलागल- “नीकेभेलौतोरासभकसंग।जेकिओबुढ-पुरानसँमसखड़ीकरततकरामजाकमेएहनेसुजाकहेबकचाही।” ऐ रचनापरअपनमंतव्य ggajendra@videha.com परपठाउ। ३. पद्य ३.१. सृजन शेखर- गीत एगो सपना ३.२.गंगानन्दझा सृजन (सृजन शेखर)- जिनगीके गीत ३.३. जगदीशचन्द्रठाकुर ‘अनिल’- चारिटागजल ३.४. ओमप्रकाशझा- गजल सृजन शेखर गीत एगो सपना जाइत-धरम सबटा मेट जाय भेद-भरम सबटा मेट जाय प्रेमक डगरा दै छी हे संगी संगे अहूँ गबियौ ने गीत गूँजै गली-गली कहिया तक लड़ब लड़ि क मरब व्यर्थ के झगड़ा सँ जिनगी के उत्सव किए नय जीयब किए बनल मुइल मुरदा सन होली कने खेला लिअ दीप कने जरा लिअ कनी हँसू ने कने गाबू ने गीत गूँजै गली-गली नुका त जएब दुनियाँ सँ नुकायब कोना मुदा अपना सँ कतेक मोन कारी कतेक अछि उज्जर बचब ने सत के धधरा सँ पवित्र भ जाउ गंगा नहाउ सत्य क स्वर जगाबू ने गीत गूँजै गली-गली चारि दिन बस यएह अछि जिनगी जिनगी जते मना लिअ रहत ने सब दिन टूटि जाएत फुनगी चाहे जते बचा लिअ जिनगी अछि झंकार जिनगी अछि गीत अाउ कने छम-छम नाचू ने गीत गूँजै गली-गली २१.०२.२०१६ (विदेहकऐअंकमेसृजनशेखरकपहिलरचनाप्रकाशितभऽरहल अछि/) ऐरचनापरअपनमंतव्य ggajendra@videha.com परपठाउ। गंगानन्द झा सृजन (सृजन शेखर) जिनगी के गीत नोरक उफनैत समुद्र सँ मुस्की के मोती चुइन आनै छी हम जिनगी के गीत गाबय छी अछि सुर सबटा बिखरल जीवन वीणा के तार टूटल चारु दिस अछि अन्हार भरल आलोकक सब दीप मिझल निराशाक अनंत अन्हार ई आशाक दीप जराबै छी हम जिनगी के गीत गाबय छी सिनेहक सब टूटल माला दगधल करेज भोकल भाला अप्पन जे सब आन भेला सब दुआरि एगो ताला चीन्है नै अछि कियो ककरो हम मुस्की के माला पहिराबै छी हम जिनगी के गीत गाबय छी दू मिल भेल एक कहाँ अछि प्रीत जग के रीत कहाँ गीतक अछि मनमीत कहाँ हृदयक अछि संगीत कहाँ मनुक्ख बिकाइके हाट ई हम प्रेमक सितार बजाबै छी हम जिनगी के गीत गाबय छी ऐरचनापरअपनमंतव्य ggajendra@videha.com परपठाउ। जगदीशचन्द्रठाकुर ‘अनिल’ चारिटागजल 1. मात्रा-क्रम : 22222222 सभजनअछिलागलअपनामे हमराले’ नै क्यो दुनियामे जे सुनतै से थूके देतै गलतीकिछुनैछै कनियामे वरकनियाँदिसनैदेखलिऐ बाझलहमरहलौं गहनामे सभटाठकि-ठकिलइएलेलनि देलनिजेकिछुमुंहबजनामे दुनियामेकिछुओनैभेटल घुमइतहमरहलौं सपनामे देशकखातिरलड़बैमरबै कतबोझंझटिहो अपनामे 2. मात्रा-क्रम : 2221-222 एत्तेबात सुनतैके एत्तेतूर धुनतैके एत्ते पानिबहितैनै एत्तेखाधि खुनतैके ईरस्तातसबहकछै एत्तेकाँट चुनतै के एत्ते मूसकेमारत एत्तेभूरमुनतै के एत्तेचोर केपकड़त एत्तेजाल बुनतैके 3,. मात्रा-क्रम : 2222-21-122-222 मोनक बच्चाकानिरहलअछिकीकरियौ किछुकेनेनहिमानिरहलअछिकीकरियौ कखनो चाही चान तथा कखनो चानी मजबूरीनहिजानिरहलअछि कीकरियौ सदिखन हमरे संग रहै छल नेनामे सेहमरेपरफानि रहलअछि कीकरियौ मोनो नै छै भेल रहैकी ककराले’ अपनेकीर्तिबखानिरहलअछिकीकरियौ के की ओकर बात करै छैसेसूनत सदिखनझगडाठानिरहलअछिकीकरियौ सभजन पहुँचल राम-कथामे मंदिरपर आओसीड़कतानिरहलअछिकीकरियौ फूटल थारी और अपन कपडा-लत्ता सभहमरालगआनिरहलअछिकीकरियौ ( चारिमशेरकदोसरपांतिमेदूटाअलग-अलग लघुकेंदीर्घमानबाकछूटलेलगेलअछि ) 4. मात्रा-क्रम : 2222222 सभकेंकिछुलाचारीछै सबहकदुःखबडभारीछै बाहरआदरअभिनन्दन भीतर मारा-मारी छै कोनोठाँ गोली-बारी आकत्तहुतैयारीछै भोजकखातिरसभगेलै बांचलबाड़ी-झाडीछै ककरोलोटा-थारीनै ककरोमोटरगाडीछै देखूअछिगाडीउनटल नीचाँनरआनारीछै छैआपसमेझगडा नै चोरोमे भैयारी छै ऐरचनापरअपनमंतव्य ggajendra@videha.com परपठाउ। ओमप्रकाशझा गजल
रंगिदिय' हमरारंगबसंती आबचाहीहमअंगबसंती
ओकरेनामेलीखलजिनगी भेलछैओकरसंगबसंती
ढंगएहनबनिजायहमरजे सबकहैदेखूढंगबसंती
जोशजेनबकाफेरसँचढ़लै विस्मयसँभेलैदंगबसंती
शत्रु "ओम"करणछोड़िपड़ायत हमलड़बएहनजंगबसंती
मात्राक्रम 2-1-2, 2-2-2-1, 1-2-2 सबपाँतिमेएकबेर। ऐरचनापरअपनमंतव्य ggajendra@videha.com परपठाउ। विदेहनूतनअंकबालानांकृते बालानांकृते विदेहमैथिलीमानकभाषाआमैथिलीभाषासम्पादनपाठ्यक्रम भाषापाक डॉ॰शशिधरकुमर “विदेह” किछुबालकविता हरियल (बालकविता) परबागणकेर, तेँपरबेसनि, *१ देखबामे ओ लागै छै। हरियरदेहआपीयरपएरछै, बहुते सुन्नर लागैछै।।*२ परपरबानञिआनेपोरकी, हरियलनाँओ कहाबैछै। लजकोटरिओछैपोरकीसनि, परबासनिभलेलागैछै।। ककरो - ककरोपंखआमूरी, हरियररंगकनञिहोइछै।*२ ककरो - ककरो पएरनारंगी, लालगाढ़, कत्थीहोइछै।। ककरो - ककरोवक्षनारंगी, पीयर सेहो होइ छै। फेँट - फाँटयाअगबेहरियर, हरियल सब कहबै छै।।*३ बऽड़आपीपड़पाकड़िगुल्लड़ि, फऽड़केँ ओ ताकै छै। अपनाकाजकफऽड़नेजेसे, ओकरा बड़ भावै छै।।*४ ओहनेगाछपरखोंतालगबै, प्रेमसँ दुनु परानी। ऊँचडाढ़िपरबिनाउछन्नर, रहतै दुहु परानी।।*५ परमनुक्खसनिकेरअगत्ती, आन जीव नेहोइछै। मारिगुलेतीखसबएहरियल, जीह अपन जुड़बैछै।।*६ संकेतआकिछुरोचकतथ्य - *१ - प्राणीशास्त्रक “परबागणमे (Order Columbidae)” परबाक (परेबाक) अतिरिक्तमैथिलीमेहरियलओपोरकी (पौड़की) नामकचिड़ैसभसेहोसमाविष्टअछि।हरियलदेखबामेपरबासनिलगैतअछि; अन्तरएतबाजरूरजेहरियलकदेहकरंगमेकमोबेशहरियरवाहरियर-पीयररंगअवश्यसमाविष्टरहैतअछि।हरियलपोरकीजेकाँलजकोटरिहोइतअछिआप्रायःजोड़ामेदेखलजाइतअछि। *२ - हरियलशब्दमैथिली, हिन्दी, मराठी, बंगालीआदिभाषामेप्रयुक्तहोइतअछि−परअर्थमेकिछुअन्तरअछि - · हरियल (मैथिलीआबंगालीभाषामे) - समस्त GREEN PIGEON केरलेलप्रयोज्यअथवा Treron वंश (Genus) केरसमस्तजातिक (Species) लेलप्रयोज्य।चाहेहरियलकपएरकरंगजेहो (पीयर, गाढ़नारंगीवाकत्थीआदि) अथवादेहकरंगमेहरियररंगकप्रतिशतजेहोपरओमैथिलीमे (आतहिनाबंगालीमेसेहो) हरियलहिकहबैतअछि। · हरियल (मराठीभाषामे) - महाराष्ट्रकराजकीयचिड़ैहरियलअछितथाओमात्रपीयरपएरबलाहरियलकेँ (YELLOW FOOTED GREEN PIGEON) हरियलकरूपमेपरिभाषितकरैतअछि। · हरियल (सामान्यजनकहिन्दीभाषामे) - मैथिलीओबंगालीभाषासदृश। · हरियल (अन्तर्जाल / इण्टरनेटओआधिकारिकहिन्दीभाषामे) - एखनुकाअन्तर्जालक (इण्टरनेट, INTERNET) अनुवादक्षेत्रतथाप्राकृतिकइतिहाससंग्रहालय (NATURAL HISTORY MUSEUM) परमराठीभाषा-भाषीक वर्चस्वककारणतदनुसारअनुदितहिन्दीमराठीसँप्रभावितअछिआहरियलकेँमराठीअहिजेकाँपारिभाषितकरैतअछि। *३ - मैथिलीभाषाकहरियलककिछुजातिकेरदेहवापाँखिकरंगमेहरियररंगकअतिरिक्तकत्थी, नारंगीयापीयरआदिचटकरंगकसमावेशसेहोभेटैतअछि। *४ - बड़, पीपर, पाकड़ि, गुल्लरिआदिगाछक (FICUS TREES) फऽड़सभहरियलकेँबहुतपसिन्नपड़ैछआतेँओहितरहकगाछसभपर (प्रायःछुपुङ्गीपरबैसल) ओआसानीसँदेखलजासकैतअछि। *५ - बड़, पीपर, पाकड़ि, गुल्लरिआदिगाछकउपरुकाडाढ़िसभपरओअपनखोंताबनबैतअछिआप्रायःजोड़ामेदेखलजाइतअछि। *६ - मनुक्खप्रायःगुलेतीसँ (CATAPULT / SLING) एकरशिकारकरैतअछि। माटिकचालीयाबरसातीचाली (बालकविता) बरखामेसह-सहकरैतअछि, जे बरसाती चाली। भीजलमाटिफोड़िकऽनिकसए, सेबरसातीचाली।। नमरैछ, फेरआगाँबढ़ैतअछि, ईबरसातीचाली। माटिकभीतर छुपलरहैतछि, ई बरसाती चाली।। डरूनेबौआ - बुच्चीएहिसँ, काटएनञिईचाली। बोर बनैछ बंशीमे माछक, से बरसाती चाली।।*१ माटिमे जेजीवांश रहैछ, तकरेखाजीबएचाली। माटिक उपजाशक्ति बढ़ाबए, इएहबरसातीचाली।।*२ विश्वमेभेटए भाँति-भाँति केर, ईबरसातीचाली। ककरोमाटिप्रिययागोबर, यासऽड़ऽलतरकारी।।*३ जैविककचड़ा अछि जेहने, तेहनेतँऽचाहीचाली। हरतरहक जैविककचड़ाकेँ, खाद बनाबए चाली।।*४ संकेतआकिछुरोचकतथ्य - *१ - बंशीसँ (FISHING HOOK) माछमारएकालबहुतलोकचालीकेँमारिकऽओकरटुकड़ीकेँ बोर (FISHING BAIT) केररूपमेप्रयोगकरैतछथि। *२ - माटिमेजे जीवांश (DEAD ORGANIC MATTER) रहैतअछितकरेखाऽकऽमाटिकचालीजिबैतअछि।ईपेटकचालीजेकाँ परजीवी (PARASITE) नञिभऽकऽ स्वतन्त्रजीवी (FREE LIVING) अछि।एहिजीवांशसभकेँपचाऽकऽओ जैविकखादमे (BIO FERTILIZER) बदलिदैतअछि। *३ - विश्वमेमाटिकचालीकहजारहुजाति - प्रजातिछैकआप्रायःहरजातिकेँएकविशिष्टप्रकारकजीवांशकप्रतिरूचिरहैतछै−ककरहुमाटिमेउपस्थितगाछकमृतभागकप्रति, ककरहुगोबरकप्रति, ककरहुघऽरमेउत्पन्नतरकारीआदिकजैविककचड़ाकप्रति ………………आदि, आदि। *४ - जैविकखादबनएबाकउपक्रमकलेलजाहितरहकजैविककचड़ाउपलब्धरहैछताहितरहकताहितरहकरूचिरखनिहारचालीकचयनकएलजाइतअछि। मयूरयामोर (बालकविता) कहबए मयूर अथवा मजूर। परलीखल जाइछसभठाँमयूर।।*१ छीमोरक नामतँऽ सबसुनने। मोरक रंग - रूप सेहो देखने।। “पीकॉक” तँऽछी हमसभरटने। “पीहेन” मुदा कम्महि सुनने।।*२ अपना दिशि भेटैछ ने मोर। बसइछ पच्छिमभारतककोर।।*३ की भेलै जञो नहिञे भेटैछ। छीचित्रसभक मनमे बसैछ।। मोरकसुन्नरसनिपाँखिरहैछ। नञि मोरनीक तेहेन रहैछ।।*४ भारतकमोरछी “नीलमोर” । जावामे हरियर भेटैछ मोर।।*५ उज्जर रंगक जे छैकमोर। से उत्परिवर्तित नील मोर।।*६ अपनहुठाँ भेटैतछलपहिने। वनउपवनसेविचरएपहिने।।*३ नञिजंगल आबनेमोरेछी। देखब तखनेजँ पोषने छी।। छीमोरचकोर कुलक एक्के।*७ परमोरकछी बातहिअलगे।। पाँखिक आकर्षण मनमोहक। नरकी - नारायणकेँ रुचिगर।। छी राष्ट्र - चिड़ै भारतवर्षक। मस्तकशोभितछीश्रीकृष्णक।। कार्तिकेय केर छी वाहन। शाहजहाँ केर “मोर-सिंहासन” ।।*८ लागि गेलै मेघो कारी। मोरकमोन मारएकिलकारी।। संकेतआकिछुरोचकतथ्य - *१ - मैथिलीमेएहिपक्षीकेँ “मोर” अथवा “मयूर” कहलजाइतअछि।मयूरलिखलापरकिछुलोकएकरतत्समस्वरूपकउच्चारण “मयूर” करैतछथितँऽकिछुलोकअर्धतत्समस्वरूपमे “मजूर” पढ़ैतछथि। उच्चारणभलहिकिछुहोपरलीखएकाल “मयूर” लीखलजाइतअछि। “मजूर” लिखलासँओकरअर्थ “मजदूर” होइतअछि । *२ - अंग्रेजीक PEAFOWL सँमयूरकदुहुलिङ्गकबोधहोइतअछि, जखनिकि PEACOCK सँमोरआ PEAHEN सँमोरनीकबोधभेल। *३ - प्राकृतिकरूपसँमोरएखनपच्छिमभारतकप्रदेशसभमे (राजस्थानआओकरसीमासँसटलआनप्रदेशसभकभूभागमे) पाओलजाइतअछि।बहुतपहिनेजहियाअपनादिशिसघनवनछलतहियासम्भवतःअपनहुदिशिप्राकृतिकरूपसँभेटैतछल। *४ - मयूरकजेसुन्नरपाँखिप्रशिद्धथिकआजकराकारणसंस्कृतमेएकरा “चित्रपत्रक” सेहोकहलगेलअछिसेवास्तवमेमात्र “नरमयूर”केँहोइतअछि। “स्त्रीमयूर”केँओहेनआकर्षकपाँखिनञिहोइतअछि। *५ - भारतकमोरककण्ठगाढ़नील (INDIGO / DEEP BLUE) रंगक होइतअछितेँएकरासंस्कृतमे “नीलकण्ठ” नामसेहोदेलगेलअछि।एकरमूलक्षेत्रसम्पुर्णभारतकअतिरिक्तनेपाल, भूटान, बाङ्गलादेशआश्रीलंकाकेँमानलजाइतअछि।तेएकरा “भारतीयमोर” (INDIAN PEAFOWL / Pavo cristatus) सेहोकहलजाइतअछि। ई भारत आ श्रीलंकाक राष्ट्रियचिड़ै (NATIONAL BIRD OF INDIA & SRI LANKA) अछि। *६ - प्राणी (जैविक) उद्यानसभमे (ZOO) जेउजरामोरदेखैतछीसेमोरककोनहुआनप्रकारनञिअछि।वास्तवमेओभारतीयनीलमोरथिकजेएकटाविरलेजैववैज्ञानिक (RARE BIOLOGICAL PHENOMENON) वाआनुवांशिकपरिघटना (RARE GENETIC PHENOMENON) केरफलस्वरूपउत्पन्नभेलअछि।एहिविरलेआनुवंशिकपरिघटनाकेँजैववैज्ञानिकलोकनि उत्परिवर्तन (MUTATION) कहैतछथि।तेँ उजरामोरकेँ (WHITE PEAFOWL) नीलमोरक उत्परिवर्तितप्रतिरुप (MUTATIONAL VARIANT) कहिसकैतछी। एकरअतिरिक्तविश्वमेमोरकआनदूप्रकारसेहोअछि।पहिलअछि हरियरमोर या जावामोर (GREEN / JAVA PEAFOWL / Pavo muticus ) आदोसरअछि कॉङ्गोमोरयाअफ्रिकी (CONGO / AFRICAN PEAFOWL / Afropavo congensis) मोर।जावामोरभारतीयमोरजेकाँहोइतअछिआम्यांमार, जावा, सुमात्रआदिदेशओद्वीपसमूहमेभेटैछ।एकरगर्दनिकेररंगनीलनञिभऽकऽहरियरहोइतअछि।कॉङ्गोयाअफ्रिकीमोरबहुतहुपरिप्रेक्ष्यमेभारतीयमोरसँभिन्नहोइतअछि। *७ - मोरआचकोरदुहु मयूरकुल (Family - Phasianidae) केरचिड़ैअछिजँमोरकआकर्षकपाँखिहटाएदेलजाएतँऽदुहुमिलैत - जुलैतसनिलागत।प्रायःएहिकुलकपक्षीबेसीदूरनञिउड़िपाबैतअछि। *८ - मोरकेँअरबीभाषामे “ताऊस” कहलजाइतअछि।मुगलबादशाहशाहजहाँजाहिसिंहासनपरबैसैतछलाहओकरनामछल “तख्त-ए-ताऊस” मतलबकि “मोरसिंहासन” या “मयूरसिंहासन” ।एहिसिंहासनकआकृतिमोरसनिछल।दूटामोरकअनुकृतिकबीचबादशाहकगद्दीछलआगद्दीकपाछाँमेसेहोएकटामोरकअनुकृतिछल। मएना (बालकविता) पीयरलोल आ पीयरटाङ्गक, चिड़ै नाम छै मएना। दाना चुनबा लेल आबैए, कुदकए-फुदकए भरिअङ्गना।। देह ओकर भूरा रङ्गक छै, माथ आ नाङ्गरि कारी। मनुखक डऽर लेशमात्रे टा, ढीठ चिड़ै बड़ भारी।। बगराबिलटल, आबरहल बस, घर - आङ्गन कौआ - मएना। इएह चिड़ै दू बाँचल जकरा, चीन्हए पहिने नेना।। एकरहि एक विशेष प्रजाति, छी नाम “पहाड़कमएना” ।*१ एकरा सभसँ छी अलगे, मैथिलीक “पहाड़ीमएना” ।। ओ जे “पहाड़केरमएना” से, अपना दिशि कहाँ भेटैए ? एहि साधारण मएनासँ ओ, एकदम भिन्न लागैए।। ओना विश्वमे मएना केर छै, बहुतहि विषम समूह। अपना दिशि एहने भेटैछ, सभ जातिक चर्च दुरूह।।*२ संकेतआकिछुरोचकतथ्य - *१ - अंग्रेजीककेर HILL MYNA हिन्दीअनुवादथिक “पहाड़ीमैना” ।परञ्चमैथिलीमे “पहाड़ीमएना” एकटाआनचिड़ैलेलप्रयुक्तहोइतअछिजकराहिन्दीमे “पीलक” कहलजाइतअछि। हिन्दीक “पीलक” चिड़ै लेल मैथिलीनाम “पहाड़ीमएना” मएनाकप्रकारहोयबाककारणनञिअपितुमएनासदृशआकार - सुकारहोयबाककारणपड़लअछि; तेँएकराअनुवादनञिबूझि “रूढ़िसंज्ञकशब्द” बूझबाकचाही।अंग्रेजीक HILL MYNA लेल मैथिलीअनुवाद “पहाड़ीमएना” नञिकऽजञो “पहाड़ीकमएना” या “पहाड़कमएना” कएलजाएतँऽबेशीउपयुक्तहोयतआकोनहुभ्रमसँबाँचलरहत।एहिठामहमसएहकएलअछि। HILL MYNA केरजैववैज्ञानिकनाँओ Gracula religiosa अछि।ईअपनादिशिनञिभेटैतअछि। *२ - व्यापकरूपसँस्टॉर्लिङ्गकुलक (Starling family or Family - Sturnidae) सभजातिक (लगभग३०टाजाति) चिड़ैकेँ “मएना” मानलगेलअछि।हरतरहकमएनाकवर्णनएहिठामसम्भवनञि, तेँमात्रदेशीमएना (जेकिअपनाओहिठामसालोभरिरहैछ) केरवर्णनकएलगेलअछि। बगुला (बालकविता) काकचेष्टा बकोध्यानम्। छलजे विद्यार्थीक लक्षण।। सेजेबकछलओएहबगुला, अछिकहाबैतमैथिलीमे।।*१ नमगरआपातर छै टाङ्ग, पीयर - मटियाकारीटाङ्ग। माथ उज्जर, धऽर उज्जर, लोल कारी या छैपीयर।। माछछैबड़प्रियजकरा, सएह बगुला मैथिलीमे।। बगुलानञि छै एकरंगक, नञि बनावट एकढंगक। बेसी अगबे साफउज्जर, याकोनहुफेंटलछैउज्जर।।*२ जेहो, परछैटाङ्गनमगर, तेँछैकहबीमैथिलीमे।।*३ बाध - खेत - पथार सौंसे, भेटए हरदम धार काते। वाकोनहु उत्थर जलाशय, देखबकीड़ा - माछताकैत।। ठाढ़एकटकध्यानदेने, तेँप्रशिद्धओमैथिलीमे।।*४ संकेतआकिछुरोचकतथ्य - *१ - संस्कृतमे “वक” या “बक” शब्दसँजाहिचिड़ैसमूहकबोधहोइतअछिसेमैथिलीमे “बगुला” कहबैतअछि। *२ - बगुलानामकचिड़ैकेरअन्तर्गतविभिन्नआकार - प्रकारकबहुतरासचिड़ैआबैतअछि।अंग्रेजीक हेरॉन (HERON) आ एग्रेट (EGRET) शब्दसँबोधहोइबलासबचिड़ैमैथिलीमे “बगुला” कहबैतअछि।बेसीतरबगुलाउज्जररंगकहोइतअछिपरकिछुआनफेंट-फाँटरंगकसेहो।सबबगुलाकटाङ्गपातरआनमगरहोइतअछिआउड़बाकालअपनगर्दनिअन्दरसिकोड़िकऽ (RETRACTED INWARD) रखैतअछि। *३ - “बगुलाटाङ्ग” मानेकिनमगरटाङ्ग−ईमिथिलाकप्रशिद्धकहबीसबमेसँएकअछि। *४ - माछपकड़बाकलेलबगुलाकएकटकध्यान, संयमआतपस्यामिथिलामेआतेँमैथिलीसाहित्यमेउदाहरणकरूपमेबड़प्रशिद्धअछि। “मवेशीबगुला” (CATTLE EGRET) पालतूचौपायाजानवर (जेनाकिगाए, महींष) आदिकपीठपरबैसिओकरचामपरहक बाह्यपरजीवी (ECTOPARASITES) कीड़ासभकेँखाएजाइतअछि।ई सहोपकारितासम्बन्धक (SYMBIOTIC RELATIONSHIP) एकटानीकउदाहरणथिक।एहिसँबगुलाकेँभोजनआमवेशीसभकेँपरजीवीसँमुक्तिभेटैतअछि। बगुली (बालकविता) बगुलाकुलकेरचिड़ैअछैतहु, ओ बगुलासँ भिन्नछै।*१ देखबै बगुलहिसंगजतऽजे, बासदुहुक अभिन्नछै।। बगुलापेक्षा छोट छै गर्दनि, धऽरमुदाकिछुछै भारी। देहक मूल रंग उज्जर पर, कारी - भूरा सनिधारी।।*२ खाइतईहोछैमाछआकीड़ा, साँपबेङ्गआ बेङ्गची। बगुलेकुलकेरछै, छोटमुदा, कहबइएओ तेँबगुली।।*३ संकेतआकिछुरोचकतथ्य - *१ - मैथिलीमे “बगुला” केरस्त्रीलिङ्ग “बगुली” नञिथिक।दुहुमेनर (पुरुष) आमादा (स्त्री) जोड़िपुलिङ्गकिंवास्त्रीलिङ्गकनिदेशकएलजाइतअछि।अंग्रेजीक HERON आ EGRET मैथिलीमे “बगुला” कहबैतअछिजखनिकि BITTERN “बगुली” ।ईदुहु बगुलाकुलक (Family - ARDEIDAE) सदस्यरहितहुँपरस्परकिछुभिन्नअछि। Ixobrychus, Botaurus आ Zebrilus वंशसभक (GENERA) चिड़ैसभ “बगुली” केरअन्तर्गतआबैतअछि। *२ - देहउज्जररंगकहोइतअछिपरबगुलासनिनञि।बगुलीकगर्दनिपरभूरा-कारीसनिवामटियाहीधारीहोइतअछिआपंखसेहोउपरसँओहनेरंगकहोइतअछि। *३ - बगुलहिकुलकेरमुदाऊँचाईमेछोटहोएबाककारणेँएकरनाम ‘बगुली” अछि। दहियल (बालकविता) खञ्जनआँखि, चंचल आँखि। लोकबूझए, बड़कारीआँखि।।*१ एक भ्रमसँ दोसर भ्रम। एहिना चलिते रहइछ क्रम।।*२ कारी गर्दनि आँखि आमूरी। खजिन चिड़ैञा भ्रमसँ बूझी।। खजिनचिड़ैञाडोलबएनाङ्गरि। ऊपर - नीचाँ करइछनाङ्गरि।। ईहोचिड़ैञा डोलबए नाङ्गरि। बसऊपर फहड़ाबए नाङ्गरि।।*३ यूरोपक रॉबिन जे चिड़ै। तकरेसँ आकार मिलए।।*४ तेँ कहलक “मैग्पीरॉबिन” । जुनिबूझू “इण्डियनरॉबिन” ।।*४ अनुवादक भ्रम देल पसारि। लीखलक नीलकंठअविचारि।।*५ “दहियल” ई कहबैछ चिड़ै। बाङ्गलामे “दोयेल” कहबै।।*६ स्त्री - दहियल कम कारी। छाउरक रंग गर्दनि - मूरी।। पेट सभक भेटत उज्जर। पाँखिओनाङ्गरि चितकाबर।। संकेतआकिछुरोचकतथ्य - *१ *२ - “खञ्जनआंखि”केँमतलबसामान्यजनभ्रमवश “कारीआँखि” बूझएलागल।ईभ्रमकालान्तरमेएकटाआओरहुभ्रमकेँजन्मदेलक−लोकदहियलनामकचिड़ैकेँसेहोखञ्जनेबूझएलागल।ईचिड़ैखञ्जनहिआकारकआचितकाबररंगकहोइतअछि।एकरमूरीआगर्दनिकेरसंगहिआँखिसेहोगाढ़कारीहोइतअछि।ईवस्तुतःएकटाक्रमागतत्रुटिवाभ्रम (PROGRESSION OF ERRORS) केरउदाहरणथिक; एकभ्रमसँदोसरभ्रम, दोसरसँतेसरआएहिनाआगूसेहो। *३ - ईहोचिड़ैअपननाङ्गरिकेँडोलबैतअछिपरञ्चऊपर - नीचाँयादायाँ - बायाँनञिअपितुकेवलऊपरदिशिआसेहोऊपरदिशिजपानीपंखाजेकाँखोलिकऽफहड़ादैतअछि। *४ - एहिचिड़ैकेरआकारयूरोपकरॉबिननामकचिड़ैसँमिलैतअछितेँअंग्रेजीमेएकरा “मैग्पीरॉबिन” या “ऑरिएण्टलमैग्पाइरॉबिन” नामदेलगेलअछि।एकरा “नीलकण्ठ” वा “इण्डियनरॉबिन” नञिबूझी।एहिचिड़ैमेलेशमात्रहु “नीलरंग” नञिहोइतअछि । *५ - किछुनवसिखुआअनुवादकसभअन्तर्जालपर “रॉबिन” देखिनीलकण्ठअनुवादकएनेछथिसेसर्वथाअनुचितओभ्रमकारक।लेशमात्रहुनीलरंगनञिथिकएहिचिड़ैमे। *६ - “दहियल”केँबाङ्ग्लाभाषामे “दोयेल” कहलजाइतअछिआओ “बाङ्ग्लादेश” केरराष्ट्रियचिड़ैअछि। कौआ (बालकविता) का - का, का - का, कोनाकरैछै, देखहीबौआ। कारी रंगक चिड़ै ई देखही, कहबै कौआ।।*१ देह - लोल छै चमकैत कारी, सगरे “कौआ” । गर्दनि छाउरक रंग - सिलेटी, “घरैयाकौआ” ।। जकरअबाजछैकमकर्कश, से “घरैयाकौआ” । पहिनुकतुलनाकमभेटैछआब “घरैयाकौआ” ।।*२ जकर छै सौंसे देहे कारी, “बनैयाकौआ” । एकरअबाजछीबड़कर्कश, ईछी “कारकौआ” ।। एकरेनामछै “कागा” सेहो, इएह “कारकौआ” । आबतँऽघर-आङ्गनबेसीछी इएहकारकौआ।।*३ व्यापकअर्थेँ काक - काग विश्वकसभकौआ।*४ कोइलीमूरुखबनाबएजकरा, सएहई कौआ।।*५ संकेतआकिछुरोचकतथ्य - *१ - “कौआ” आ “मएना” ईएहेनचिड़ैअछिजकराअजुकअधिकांशनेना - भुटकासभअपनजिनगीमेसभसँपहिनेप्रत्यक्षरूपमेदेखैतअछि।पहिलुकासुचीमे “बगरा” सेहोआबैतछलपरआबनञि। *२ - सभकौआकेरदेहआलोलचमकैतकारीरंगकहोइतअछि।परजकरगर्दनिछाउरकरंगकवासिलेटीरंगकहोइछसेसामान्यमैथिलीभाषामे “कौआ” कहबैतअछिअधिकविशिष्टरूपसँओकरा “घरैयाकौआ” (HOUSE CROW) कहिसकैतछियै। *३ - जँउपरुकाकौआकेँ “घरैयाकौआ” कहैतछीतँजाहिकौआकेरपुरादेहेकारीहोइतअछितकरा “बनैयाकौआ” (JUNGLE CROW) कहिसकैतछी।सामान्यमैथिलीमे “बनैयाकौआ” केरलेल “कागा” अथवा “कारकौआ” शब्दव्यवहृतहोइतअछि।पहिनेघऽर - आङ्गनमेबेसीतरघरैयाकौआदेखाइतछलपरआइ - काल्हिकारकौआबेसीभेटैतअछिजेकिपछिलाकिछुदशकमेघरैयाकौआकेरघटैतसंख्याँकेरपरिचायकथिक। *४ - व्यापकअर्थमे “कौआ” या “कागा” शब्दसँविश्वकसभतरहककौआकबोधहोइतअछिचाहेओअंग्रेजीककोनहु HOUSE CROW हो, JUNGLE CROW हो, RAVEN हो, CARRION CROW होयाफेर JACKDOW किएकनेहो। *५ - “कौआ” ओएहचिड़ैअछिजे “कोइली” नामकचिड़ैलेल शिशु-भरणपोषक (BROODING HOST) केरभूमिकानिमाहैतअछि। *६ - कचबचिया (बालकविता) कचबच - कचबच बड़ीकरैछेँ, कहबौहम “कचबचिया” तोरा। सुन्नर देह, रंग सुन्नर छौ, परतोरबोल किएछौरोड़ा।।*१ कौआकुलकेर, तेँकौएसनि, बोल छै कर्कश ओक्कर।*२ ओना एकटा आओरहुस्वर, जे लागए मीठ - मनोहर।।*३ मुदाजे कर्कश ध्वनि तोहर, से बेसी छैक उजागर। तेँ संस्कृतसँ मैथिली धरि, भेलतोहरनाम केरकारक।।*४ सौंसे भारत भरि भेटैछ, मैदान हो या कि पठार।*५ ऊँच हिमालय पर भेटैत अछि, तोर विशिष्ट प्रकार।।*६ संकेतआकिछुरोचकतथ्य - *१ - कचबचियाकेरनामओकरकर्कशवाअप्रियस्वरक (UNPLEASANT SOUND) कारणपड़लअछि।इएहगुणककारणउल्लूकपर्यायीनाँओसेहोकचबचियाअछि। *२ - कचबचियासेहो कौआकुल (Family - CORVIDAE) केरसदस्यअछिआतेँओकरबोलसेहोकिछु - किछुसाम्यरखैतअछि। *३ - कचबचियाऊपरवर्णितस्वरकअलावेएकटाआओरोस्वरनिकालैतअछिजेमीठआकर्णप्रिय (LOUD MUSICAL CALLS) होइतअछि। *४ - कहबीछैजेनीकगुणकेओनञिदेखैतअछिपरखड़ाबगुणजगजियारभऽजाइतअछि।सएहएहिचिड़ैलेलसेहोउचित।मैथिली, संस्कृत, बंगालीआदिभाषामेएकरजेनामपड़लअछिसेएकरखड़ाबबोलककारणजखनिकिएकरनीकबोलबहुधालोकआनचिड़ैकेरबूझिजाइतअछि। *५ - ईचिड़ैसौंसेभारतमेभेटैतअछिआभारतहिकिएकसौंसेभारतीयउपमहाद्वीपमेभेटैछ। *६ - हिमालयकेरअधिकऊँचाईबलाभागमेएकरएकआनप्रकारभेटैतअछिजकरा हिमालयीकचबचिया (GREY TREEPIE / HIMALAYAN TREEPIE) कहलजाइतअछि।एकरजैववैज्ञानिकनाँओ Dendrocitta formosae अथवा Dendrocitta himalyensis अछि।एकरपेटकनेकबेसीमोटहोइतअछिआपाँखितथानाङ्गरिमेउजरारंगनञिरहैतअछि। चातक (बालकविता) चातक एलै ! चातक एलै ! संगमे बरखा - बुन्नी लेलै।।*१ धरती तबधल, खेतहु दगधल। मनुक्खक मोन, सेहो छै बगधल। धरतीकप्यासमिझाबऽएलै।। करिया पीठ, सुरूजदिशिकएने। उजरा पेट, धरा दिशि धएने। जानिकतऽसँ, कोनाकऽएलै ! ! *२ माथक कलगी, कारी रंगक। परजीवी ओ, कोइली ढंगक।*३ जलदक दूत धरा पर एलै।। लोक कहए, पहिलुकवर्षाजल। पिउबि बिताबए, जिनगी चातक। अर्थछीएतबहि, पावसएलै।।*४ संकेतआकिछुरोचकतथ्य - *१ - चातकआपपीहाकआगमनभारतमे (खासकऽउतबारीभारतमे) मॉनसूनवावर्षाऋतुकआगमनकसूचनादैतअछि। *२ - ईचिड़ैअफ्रिकामहादेशकमूलनिवासीअछिआग्रीष्मऋतुमेबेसीगर्मीपड़लापरओभारतआबिजाइतअछिआफेरशरदऋतुमेआपिसअफ्रिकाचलिजाइतअछि। *३ - कोइलीजेकाँईहोचिड़ै “शिशु-भरणपरजीवी” (BROOD PARASITE) अछिआकौआआदिआनचिड़ैकेरखोंतामेअण्डादैतअछि। *४ - कहबीछैकिईचिड़ैमात्रबरखाकपानिपिउबि (स्वातीनक्षत्रकवर्षाकपानि) रहैतअछिपरताहिमेकोनहुयथार्थनञि।मतलबबसएतबहिकिचातककआकमनवर्षाकअगमनकपरिचायकअछि। गाबएबलापक्षीहोयबाककारणेँआएक्कहिसमयमेभारतमेआगमनहोयबाककारणेँमैथिलीकसंग - संगआनभारतीयसाहित्यसभमेबहुधा “पपीहा” ओ “चातक” पर्यायवाचीकरूपमेप्रयुक्तहोइतअछि।परयथार्थमेदुहुएकदमभिन्नचिड़ैअछि।पपीहापरेबायाबाजकआकारकहोइतअछिजखनिकिचातकमएनाकआकारक। बंगालीमेचातकशब्दअंग्रेजीकस्काइलार्क (SKYLARK) (Alauda spp.) चिड़ैलेलसेहोप्रयुक्तहोइतअछि, जकराहिन्दीमे “चकता” या “अबाबील” कहलजाइतअछि।एकरमैथिलीनाँओएखनिधरिहमरानञिबूझलअछि। खञ्जनचिड़ैयाखजिनचिड़ैञाआसोनचिड़ैञा (बालकविता) “खजिनचिड़ैञा” भारतभरिमे, आँखिकलेलप्रशिद्धछै।*१ बरखाऋतुमे आबि शरदरहि, गर्मीएतएनिषिद्धछै।।*२ “खजिनचिड़ैञा” केर आँखिमे, की एहेन से बातछै। कारी आँखिक उपमालएनञि, आनहिकोनहु बातछै।।*३ साहित्यमैथिली, हिन्दी, संस्कृत, बङ्गालीवाआनकोनो। खञ्जनकेरचञ्चलआँखिकछै, दोसरनेउपमानकोनो।।*३ कारी - उज्जर रंग चितकाबर, बगरासनि आकारछै। अपना दिशि एहने बेसी छै, आनो मुदा प्रकारछै।।*४ किछुनीलाभपीताभतँऽआनक, पीयर - भूरारंग सेहो। बस जमीन पर, दौड़ैत देखब, कूदैतनेदेखबकहियो।।*५ छाती - पेट जकर पीयर हो, तकर ‘पिनाकी’ नामछै। “सोनचिड़ैञा” इएहमैथिलीक, एकरअलगसँनामछै।।*६ चिर-परिचितखञ्जनछैप्रवासी, साइबेरियामे धामछै।*७ सोनचिड़ैञाएतहिरहैतअछि, सालोभरिआरामछै।।*७ आँखितँऽचञ्चलछैहे ओक्कर, नाङ्गरिसेहोचञ्चलछै। बैसल - बैसल नाङ्गरि डोलबए, तखनेबूझू खञ्जनछै।।*८ संकेतआकिछुरोचकतथ्य - *१ - खजिनचिड़ैञा मैथिली, संस्कृतओआनभारतीयसाहित्यसभमेअपनाआँखिकलेलखूबचर्चितअछि। *२ - अपनादिशिवर्षाऋतुकअन्तसँलऽकऽशीतकालधरिईचिड़ैबेसीदेखबामेआबैतअछि। *३ - सामान्यजन “खञ्जनआँखि” केरमतलब “कारीआँखि” बूझैतअछिजखनिकिसेबातनञि।साहित्यमे “खञ्जनआँखि” केरउपमान “चञ्चलआँखि” केररूपमेदेलजाइतअछिनञिकिकारीआँखिकलेल। “खञ्जनआँखि” केरमतलबईनञिथिककिखञ्जनकेरआँखिकसमानआँखि (जेनामृगनयन/नीमेहोइछ) । “खञ्जनआँखि” केरमतलबथिकस्वयंखञ्जनचिड़ैसनिचञ्चलआँखि।खञ्जनचिड़ैबहुतचञ्चलहोइतअछितुरत्तहिउड़ैतअछि, बैसैतअछि, जमीनपरउतड़ैतअछि, फुदकैतअछिसंगहिजखनकोनहुडाढ़िपरबैसैतअछितँऽकिछुतिरछाभऽबैसलबूझिपड़ैतअछि।एकरइएहप्रकृतिककारणसुलभहोइतहुँएकरछविकर्षणबड़दुरूहकाजथिक। *४ *७ - अपनादिशिजेचिड़ै खञ्जन वा खजिनचिड़ैञा नामसँप्रसिद्धअछिसेचितकाबररंगकहोइतअछिजाहिमेमुख्यतः३टाजाति (SPECIES) आबैतअछि ।अंग्रेजीमेएकरा “वैगटेल” (WAGTAIL) कहलजाइतअछि। अंग्रेजीक “वैगटेल” (WAGTAIL) केरअंतर्गतमोटासिल्लावंशक (Genus - MOTACILLA) सभजातिकअतिरिक्तआनहुकिछुजातिसभअबैतअछिपरमैथिलीमेप्रायःखजिनचिड़ैञानाममात्र Motacilla alba, Motacilla aguimp आ Motacilla madraspatensis धरिसीमितबूझिपड़ैतअछि। ताहूमेजँएहिबातपरजोड़देलजाएकि “खजिनचिड़ैञा” केरआगमणवर्षाऋतुकअन्तमेहोइतअछिआग्रीष्मऋतुसँपहिनेओआपिसचलिजाइतअछितँमात्र “मोटासिल्लाअल्बा” (Motacilla alba) नामकचिड़ैकेँखजिनचिड़ैञामानएपड़तकारणजेमात्रइएहटाचितकाबररंगकजातिअछिजेवर्षाऋतुकअन्तमेरूसकसाइबेरिया (अतिशीतक्षेत्र) क्षेत्रसँअपनाओहिठामआबैतअछिआग्रीष्मऋतुसँपहिनेआपिसओत्तहिचलिजाइतअछि । MONIER - WILLIAMS SANSKRIT ENGLISH DICTIONARY मेसेहोमोटासिल्लाअल्बा” (Motacilla alba) नामकचिड़ैकेँखञ्जनमानलगेलअछि। शरदमेएहिचिड़ैकेरआगमनकेँआनरूपसँसेहोदेखलजासकैतअछि।जेजातिभारतकमूलनिवासीअछिआप्रवासीनञिअछिओकररहबाकस्थान, खोंताबनएबाकस्थानआदिपहिनेसँतयरहैतअछि।जेप्रवासीजातिअछिसेएहिठामअएलाकबादनऽवढंगसँरहबाकओखोंतालगएबाकलेलभागैत - दौड़ैतबूझिपड़ैतअछि।ओकरबढ़लसंख्याओविचरणसँईआभासहोइतअछिकिशरदऋतुमेअचानकहि “खजिनचिड़ैञा” केरआगमनभेलअछि।एहिबातकेँध्यानमेरखैतहमनिम्न३गोटजातिकेँखजिनचिड़ैञाकरूपमेमानलअछि - Ø WHITE WAGTAIL - Motacilla alba Ø AFRICAN PIED WAGTAIL - Motacilla aguimp Ø WHITE BROWED WAGTAIL / LARGE PIED WAGTAIL - Motacilla maderaspatensis चितकाबररंगकआधारपरनिम्न२टाजातिकेँसेहोसम्मिलितकएलजासकैतअछि - Ø JAPANESE WAGTAIL - Motacilla grandis Ø FOREST WAGTAIL - Motacilla indica syn. Dendronanthus indicus *५ - खजिनचिड़ैञावाअंग्रेजीकवैगटेल (WAGTAIL) नामसँजाहिचिड़ैकेरबोधहोइतअछिसेसभजमीनपरदौड़िकऽनञिचलैतअछिअपितुफुदकि - फुदकिकऽचलैतअछि। *६ - अंग्रेजीक “वैगटेल” (WAGTAIL) केरअंतर्गत मोटासिल्लावंशक (Genus - MOTACILLA) एहेनजातिसभजकरपेटआवक्षपीयररंगकहोइतअछिवापीयररंगकधब्बाहोइतअछिसेमैथिलीमे “सोनचिड़ैञा” कहबैतअछि । “सोनचिड़ैञा” केरअन्तर्गतनिम्नजातिसभआबैतअछि - Ø WESTERN YELLOW WAGTAIL - Motacilla flava Ø EASTERN YELLOW WAGTAIL - Motacilla tschutschensis Ø CITRINE WAGTAIL - Motacilla citreola Ø GREY WAGTAIL - Motacilla cinerea *८ - खजिनचिड़ैञा होअथवा सोनचिड़ैञा −अंग्रेजीमेवैगटेलकहबएबलासभचिड़ैबैसल - बैसलअपननाङ्गरिकेँसततऊपर - नीचाँडोलबैतरहैतअछि।मात्र “बनैयाखजिनचिड़ैञा” अपननाङ्गरिकेँऊपर - नीचाँनञिडोलाएदायाँ - बायाँडोलबैतअछि।तेँएकरनिम्ननामसभअछि - Ø डुलिका (संस्कृत) - जेनाङ्गरिडोलबए Ø खञ्जन - जेपएरसँनाङ्गर (खञ्ज) मनुक्खजेकाँतिरछाबैसैतहोयाजकरनाङ्गरिनाङ्गर (खञ्ज) मनुक्खकपएरजेकाँडोलैतहो। Ø वैगटेल (WAGTAIL) (अंग्रेजी) - जेनाङ्गरिडोलबए (WAGGING TAIL) Ø मोटासिल्ला (MOTACILLA) (लैटिन) - जेनाङ्गरिडोलबए (MOTILE CILA = MOVING TAIL) ऐरचनापरअपनमंतव्य ggajendra@videha.com परपठाउ। विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)2004-16. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽलेखकक नाम नैअछि ततऽसंपादकाधीन।विदेह- प्रथममैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)ggajendra@videha.comकेँमेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि।रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचयआ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेता, से आशा करै छी। रचनाक अंतमेटाइप रहए, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहलअछि।एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै। ऐ ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मीठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-16सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटारचनाआ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाकअनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतुggajendra@videha.co.inपर संपर्क करू। ऐ साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरीआ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल।५ जुलाई २००४ केँhttp://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ”जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सिद्धिरस्तु विदे हwww.videha.co.inविदेहप्रथम मैथिलीपाक्षिक ई पत्रिकाwww.videha.comVideha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'विदेह' १९७मअंक०१मार्च२०१६ (वर्ष९मास९९अंक१९७)मानुषीमिह संस्कृताम्ISSN 2229-547X VIDEHA
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कर एन Ee का छः, २ कि. ८. Ge is ee ven oe ee tf roa es By oe me rs “re vy \ Seales Fue oats Pa a S285 a 4 noes BS gy Sak “3 es py Cie a a 8, ony A Sek y pee X | Zs fe Saar aire के के Sy ee Cap Sra: Ot
Pay Ayn Pes Se oo es Sf कर ft C VA . el Sr "Rs 2७2 ८ wl Fond V4 2 + मैथिली - arch (उच्चा० - मैंटक arch, माटिक चाली, Rar areit facet - basi संस्कृत - गर्ग, किन्चिलिका, Are, Bifesiog, झ्षितिज कृमि, वर्षा, वर्षाश्वी, दीप्तरस, रक्तजन्तुक, भ्रूलता, क्षितिनाग, PA, अंग्रेजी - EARTHWORM जैववैज्ञा० नाम - करीब २० वंशक १००० 2 ऊपर जाति सभ चित्रमे - Pheretima posthuma नोट - संस्कृत भाषामे आयल हरेक नाँ ओ या पर्यायी aia स्वतः मैथिली भाषामे पर्यायी नाँओ अर जाइत अछि - तत्सम STI
we SAAN GZ op Ol: ae aS थे Ved -- न =a Lay ही खा रे साभार सौँजल्य - विकिपीडिया पब्लिक डॉमैन उजरा मोर (WHITE PEACOCK / LEUCISTIC VARIANT OF BLUE INDIAN PEACOCK) Pavo cristatus (LEUCISTIC VARIANT)
= बज दि J. | . ” है , = y es) Motacilla citreola i eee A = VF अनु c a: = a eee, no | > ee a A कर & Motacilla flava Motacilla cinerea ee ee साझार सौजन्य (तीनू चित्र) - विकिपीडिया पब्लिक मैंथिली - सोन चिड़ैना (-याँ) हिन्दी - wen, पिल्किया संस्कृत - पिनाकी अंग्रेजी - WAGTAIL (GREY + YELLOW + CITRINE) जैंववैज्ञा० नाम - Motacilla flava (wEsTERN YELLOW WAGTAIL) Motacilla cinerea (GREY WAGTAIL) Motacilla citreola (crrRiNE WAGTAIL) M. tschutchensis @AsTERN YELLOW WAGTAIL) नोट - संस्कृत भाषामे आयल हरेक नाँओ या पर्यायी iat स्वतः मैंथिली ाषामे पर्यायी नाँओ ats जाइत अछि - तत्सम स्वरूपमे)
=, हु अ — 2 AN Stee |, > | : \ 3 जय भर घाइगार ऊपर - oie! डालवबेत ते मैंथिली - खजिन चिड़ैना (-याँ), सज्जन fers हिन्दी - खंजन, धोबन संस्कृत - pow, डुलिका, खज्जरीट, स्विंडरिच, खंडलिच अंग्रेजी - WHITE WAGTAIL & AFRICAN PIED WAGTAIL जैववैज्ञा८ नाम - Motacilla alba (White Wagtail) Motacilla aguimp (African Pied Wagtail) (चित्रमें Motacilla alba alboides) नोट - संस्कृत भाषामे आयल हरेक नाँओ या पर्यायी नाँओ स्वतः मैथिली भाषामे पर्यायी नाँओ भर जाइत अछि - तत्सम स्वरूपमे)
ed ae, छः oe 4 दरें ( ) ey ] A ne —— 9 \wilt | i —-. ae | , - | xe é Jj rie &« विकिर्प ‘of #7: न ग्यर. | मैथिली - चातक (बंगालीक चातकरसें पृथक), स्वाती fers हिल्दी - चातक संस्कृत -चातक, सारन, मेघजीवन, स्वातीक्रक्त अंग्रेजी - JACOBIN CUCKOO / PIED CRESTED CUCKOO / PIED CUCKOO जैववैज्ञा८ नाम - Clamator jacobinus syn. Coccystes melanoleucos syn. C. hypopinarius syn. Oxylophus jacobinus नोट - संस्कृत भाषामे आयलर हरेक नाँओ या पर्यायी नॉओ स्वतः मैंथिली झाषामे पर्यायी atte जाइत अछि - तत्सम स्वरुपमे)
2 2 ae. AE Se ge a *, ee > ees eae) em + ४ न AY She 73.0 a ee ie a oN , sie 5 = ie oc an 2 अर पे सं a क .- “कि Ss 4 Tm Pike? ee a Ga शूट | x a* 2 mae A Fa ही खाक था aN मैथिली - कचबचिया हिल्दी - महालत संस्कृत - कयायिका अंग्रेजी - RUFOUS TREEPIE जैववैज्ञा० नाम - Dendrochitta vagabunda_ syn. (पर्याय) Dendrochitta rufa (नोट - संस्कृत भाषामे आयल हरेक नॉो या पर्यायी नाँओ स्वतः मैथिली झाषामे पर्यायी AT Sts जाइत अछि - तत्सम रूपमे)
fa te ca | k. sags 4 tee Kumar Mideha® © tec शशिधर crabs POS fia axa “ficCRe- ' Oe ike - TMS ln 8 2 Ld res od a el ‘i : TY, “7 fA - i > , ‘ 4 om hy \ ८ e/ ee ae मैथिली - कारकौंआ, कागा हिन्दी - जंगली कौवा संस्कृत - वनकाक अंग्रेजी - INDIAN JUNGLE CROW & EASTERN JUNGLE CROW / JUNGLE CROW / LARGE BILLED JUNGLE CROW / THICK BILLED JUNGLE CROW जैववैन्ञा०८ जाम - Corvus culminatus (INDIAN JUNGLE CROW) Corvus macrorhynchos (EASTERN JUNGLE CROW) ete - संस्कृत भाषामे आयल हरेक नाँओ या पर्यायी नाँओ स्वतः मैथिली भाषामे पर्यायी नाँओ ss जाइत अछि - तत्सम स्वरूपमे)
Wire, Sod a me ८.» हवन ate ate के कर कि हे ayn ) “3620. Shashidhar Kumar "Videha” © डॉ. शशिधर कुमर' ¥% ae GST ननियव 34 faiene : eo > Bae: 2 रा श्र - ee - 2 oa as स्थान - संजय site जैविक sare, 'पटना मैथिली - कौंआ, घंरैया कौआ हिन्दी - कौवा संस्कृत - ग्राम्य काक अंग्रेजी - HOUSE CROW, INDIAN / GREYNECKED / CEYLON / COLOMBO CROW जैंववैज्ञा८ नाम - Corvus splendens नोट - संस्कृत भाषामे आयल हरेक नाँओ ar ee नाँओ स्वतः मैंथिली भाषामे पर्यायी नाँओ ats जाइत अछि - तत्सम स्वरूपमे)
if = pe | बाइग्लादेशमे ढाकाक ”दोयेल चटवार” (DOYEL / DOEL SQUARE) पर delet दहियलक जोड़ीक पाषाण प्रतिमा
श्र Sa खरिह 35> NS eT tS ae . Sek wa Ly fe “ee ७ P 8 Y So ry ९-6 Dr. Shashidgargumar डॉ. डा << ~ डी . | { 4 ‘ ey J ि 4 - ह a. Se eS ही लि re ier ol मैथिली - दहियल हिन्दी - दहियल / दहियर संस्कृत - दहियक अंग्रेजी - ORIENTAL MAGPIE ROBIN जैंववैज्ञा८ नाम - Copsychus saularis नोट - संस्कृत भाषामे आयल हरेक नाँओ या पर्याय नाँओ स्वतः मैथिली भाषामे पर्यायी नाँओ ats जाइत अछि - तत्सम स्वरूपमे)
4 =. ae है Z = ae ee pe ; ——= a : है कट i i Paes amie Oe दस न “अदा मैथिली - बड़की बगुला (उच्चा० - बौगला) अंग्रेजी - GREAT EGRET / GREAT WHITE HERON / LARGE EGRET / COMMON EGRET जैंववैज्ञा० नाम - Ardea alba syn. Egretta alba ete संस्कृत भाषामे आयल Reais या पर्यायी नाँओ स्वतः मैथिली भाषामे पर्यायी नाँओ भड जाइत अछि - तत्सम स्वरूपमे)
oo aig: ' ‘ ’ ‘ कमी | | मैथिली - छोटकी बगुला (उच्चा० - छोटकी बौगला) हिन्दी - छोटा बगला संस्कृत - वक Was अंग्रेजी - LITTLE EGRET जेववैज्ञा० नाम - Egretta garzetta नोट - संस्कृत भाषामे आयल हरेक नाँओ या पर्याय नाँओ स्वतः मैथिली भाषामे पर्यायी नाँओ ats जाइत अछि - तत्सम स्वरूपमे)
de t, x Se ie i Pd, Pe Be, ? 2, 4 og GREE FZ, J take १ fl ie OM SOS “nk Fe YO De'Shashidhar Kula bhideba” WOES कुमर “विदे” OT cist 84 farce” | | प्र 7. an ex? aR wer iat , ee SS he wy Pgs Dp F भ awe >> मैंथिली - मएना / देशी मएना / सामान्य मएना / साधारण मएना हिन्दी - dion , साधारण Font संस्कृत - सारिका, मदना अंग्रेजी - MYNA / COMMON MYNA / MYNAH (द० आप- भारतीय वर्तली) जैंववैज्ञा०८ जाम - Acridotheres tristis नोट - संस्कृत भाषामे आयल हरेक नाँओ या पर्याय नाँओ स्वतः मैथिली ाषामे पर्यायी नाँओ ats जाइत अछि - तत्सम स्वरूपमे)
; LE © ही. Shashidhar Kumar Le LE Fr) © छा “P44 कक <3 bie: wy | ‘Fallot - संजय गाँधी जैविक उद्यान, पटेला Seas उतरबारी भारतमे GAL बला नर मयूरक (मोरक) पाँखिक पछिला आकर्षक भाग (TRAIN) हरेक वर्ष अगस्तमे झड़ि जाइत (MOULS) अछि आ फरबरीमे zi बढ़ि जाइत अछि (REGENERATES) | उपरूका छवि एहने सनि मोरक अछि जकर पाँखि झड़ि गेल अछि |
re eine Pig sO Aiege 4 हा कद 27 #3 शी सफल न x ig } iy i: a oe Vig, ae ; Ree. BN \ ev iy Ye z Ce ese em i PRE AS Yo sey Ae कि (as See, = ee हद a c in Pa NES OF ee PS iT ERS) 3 ia ie ae San ao gO Re 3 aes a Mei) Seay fe bis =e —— . eee ee AOL SS रन गए मैथिली - मयूर (उच्चारण - HAZ / AG), मोर (चित्रमें - भारतीय / नील मोर आ मोरनी) हिन्दी - मोर संस्कृत - aR, शिस्वि, नीलकण्ठ, अर्जुन, नर्तक, चित्रफ्ज़क आदि अंग्रेजी - PEAFOWL (चित्रमे - INDIAN / BLUE PEAFOWL) PEACOCK (मोर / नर मयूर) & PEAHEN (मोरनी / Sit मयूर) जैववैज्ञा० जाम - Pavo cristatus tte - संस्कृत भाषामे आयल हरेक नाँओ या पर्यायी नाँओ स्वतः मैथिली भाषामे पर्यायी नॉँओ भड जाइत अछि - तत्सम स्वरूपमे)
| पर i, OO Se | ae ™ दर मैथिली - मयूर (उच्चारण - HZ / मजूर), मोर (चित्रमें - भारतीय / नील मोर आ मोरनी) हिन्दी - मोर संस्कृत - मयूर, शिखि, नीलकण्ठ, अर्जुन, नर्तक, चित्रफन्रक आदि अंग्रेजी - PEAFOWL (चित्रमे - INDIAN / BLUE PEAFOWL) PEACOCK (मोर / नर मयूर) & PEAHEN (मोरनी / Sil मयूर) जैववैज्ञा८ नाम - Pavo cristatus लौट - संस्कृत भाषामे आयल हरेक नाँओ या पर्यायी नाँओ स्वतः मैथिली भाषामे पर्याय नाँओ as जाइत अछि - तत्सम ETA
ae ea ee eee of -_ y | ee —) 7 जि 2 & क्र मैंथिली - हरियल अंग्रेजी - GREEN PIGEON (चित्रमे YELLOW FOOTED) जैववैज्ञा० od - Treron spp. (RPIATreron phoenicoptera) नोट - संस्कृत भाषामे आयल हरेक नॉँओ या ae नॉओ स्वतः मैथिली भाषामें पर्यायी नॉओ ats जाइत अछि - तत्सम ETT)
Beg i cae “ é Pet "सा: लि . \ | wy ee ee Mee tages) | Ee ame |) 3 ie | ee HG ( GF ही | . We a ey ay a ‘el { कं ही +. dich द्वारा गोबरसेँ जैविक खाद बनएबाक उपक्रम (स्थान - लक्ष्मीपुर (गन्हबारि - पाण्डेय टोल), मधुबनी
कर ini Ryd Pea i 8\) ¢ ta ० is MF 5 rh A, a Wy aS "TS Si " wee & Dy y 55 PS id ON i SSA te ty oe मैथिली - मवेशी बगुला, खेतक बगुला (उच्चा० - बौगला) हिन्दी - मवेशी बगला संस्कृत - वक Was अंग्रेजी - CATTLE EGRET जेंववैज्ञा० नाम - Bubulcus ibis syn. Ardea ibis syn. Ardeola ibis syn. Egretta ibis syn. Lepterodetis ibis नोट - संस्कृत भाषामे आयल हरेक नाँओ या पर्यायी नाँओ स्वतः मैथिली भाषामे पर्यायी नाँओ ats जाइत अछि - तत्सम रूपमे)