72 ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' १९८ म अंक १५ मार्च २०१६ (वर्ष ९ मास ९९ अंक १९८) ऐ अंकमे अछि:- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१.रवि भूषण पाठक लघु कथा (व्यंग्य) दोस यौ दोस २.२.ओम प्रकाश झा विहनि कथा- मातृवत परदारेषु २.३.अब्दुर रज्जाक- कतारक मौसम आ बिन मौसम क बर्षा २.४.किछु विहनि कथा १. राम विलास साहु- जाति २. लक्ष्मी दास- पक धरम ३. ललन कुमार कामत- बाबाक लोटा ३. पद्य ३.१. सृजन शेखर 'अज्ञेय' हमर गाम ३.२.महेश डखरामी- रंग रास ३.३. जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- चारि टा गजल ३.४. ओम प्रकाश झा- गजल ४.बालानां कृते- डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह” किछु बाल कविता Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव Join official Videha facebook group. Join Videha googlegroups Follow Official VidehaTwitter to view regular Videha Live Broadcasts through Periscope. विदेह जालवृत्तक डिसकसन फोरमपर जाउ। संपादकीय संपादकीय श्रद्धांजलि : अणिमा सिंह नै रहली/ श्रद्धांजलि/ हुनकर मैथिलीमे काजक लिस्टमे लोकगीत आ नेना-भूटका लोक साहित्य सम्मिलित अछि/ पंकज पराशर/ सुशीला झा/ सिन्धुनाथ झा द्वारा कएल साहित्यिक चोरीक पर्दाफासक बादो मैथिलीमे एहन घटना नव साहित्यकार द्वारा भऽ रहल अछि। जँ मूल कारण तकबै तँ जे लोक वा संस्था पंकज पराशरकेँ बढ़वा देलक सएह आब नव साहित्यकारकेँ साहित्यिक चोरी लेल प्रेरित कऽ रहल अछि। दिलीप कुमार झा केर आगुआइमे मैथिली साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समिति, आदर्श नगर, मधुबनीसँ 2014 मे प्रकाशित दीप नारायण विद्यार्थी केर गजल संग्रह "जे कहि नञि सकलहुँ" साहित्यिक चोरी आ सीनाजोरीक एकटा घृणित उदाहरण अछि। ऐ किताबमे दीप नारायण विद्यार्थी मधुबनीक संस्था ओ ओकर कर्ता-धर्ता दिलीप कुमार झा केर सहयोगसँ आशीष अनचिन्हारक 2011 मे प्रकाशित पोथी "अनचिन्हार आखर", आ अही नामसँ 2008 सँ चलि रहल ब्लाग ओ फेसबुकपर पसरल आशीष अनचिन्हारक लेखकेँ चोरा कऽ अपन पोथीमे अपन नामसँ लेख रूपमे दऽ देलन्हि आ ओइमे रेफरेन्सक रूपमे "अनचिन्हार आखर" केर कतौ चर्चा नै अछि। आगू बढ़बासँ पहिने एकटा स्क्रीनशाट राखि रहल छी जे 2011 केर अछि आ जाहिमे आशीष अनचिन्हार अपन मेलसँ दीप नारायण विद्यार्थीकेँ "अनचिन्हार आखर" पोथी मेलसँ पठेने छथि। ई आश्चर्यक गप्प नै कारण दीपनारयण समेत बहुत लेखक अनचिन्हार आखर ब्लागसँ जुड़ल छथि / छलाह आ हुनको सभकेँ ई पठाएल गेलन्हि। ओना आपत्ति करऽ बला कहि सकै छथि जे पारिभाषिक शब्दावली एकै होइत छै मुदा धेआन ई देबऽ पड़त जे 2008 मे शुरू भेल अनचिन्हार आखर ब्लाग आ तही नामसँ 2011मे प्रकाशित किताब दूनूसँ दीप नारायण विद्यार्थी जुड़ल छलाह। आ 2008सँ पहिने मैथिलीमे गजलक पारिभाषिक शब्दावली तँ छलैहे नै तखन ओ कोना लेलन्हि। कहऽ बला ईहो कहि सकै छथि जे दीप नारायण विद्यार्थीकेँ महान रिसर्चर छथि। तँ आउ एक बेर किछु आर तथ्य देखी। दीप नारायण मकताक जे परिभाषा देलनि से पूराक पूरा अनचिन्हार आखरसँ चोराएल अछि कारण "मकतामे एकहि नामक प्रयोग हेबाक चाही" से पहिल बेर मैथिलीमे "अनचिन्हारे आखरमे लिखल गेल। संसारक कोनो गजलक किताबमे ऐ तरहें नै लिखल गेल छै। स्पष्ट अछि जे ई चोरी अनचिन्हार आखरसँ भेल अछि। दोसर जे गजलक संसारमे (चाहे ओ कोनो भाषामे किएक ने हो) सरल वार्णिक बहर अनचिन्हारे आखरसँ शुरूआत भेल छै। 2009 मे हम ई सिंद्धात ओतऽ शुरू केने रही। आन सभ तथ्यकेँ छोड़ि देल जाए तँ एक मात्र एही तथ्यपर कहल जा सकैए जे दीपनारायण विद्यार्थी साहित्यिक चोरी केने छथि। फेर दीप नारायणजी दुर्गा शप्तशती केर मंत्रक वर्णन करै छथि सेहो अनचिन्हारे आखरसँ लेल गेल अछि। ई स्क्रीन शाट देखू— ई पोस्ट बहुत नमहर छै तँए सभहँक स्क्रीन शाट नै लगा रहल छी मुदा पोस्ट आ पोस्ट तारीख देखि अहाँ सभकेँ बहुत किछु बुझा गेल हएत। संगे-संग गजल नव विधा की पुरान तैपर सेहो आलेख छल तकरो सक्रीन शाट देखू। सप्ष्ट अछि ईहो तथ्य चोराएल गेल अछि— ऐ केर अतिरिक्त सभ तरहक पराभाषिक शब्दावली आ ओकर कहबाक शैली अनचिन्हारे आखरसँ लेल गेल अछि पाठक लेल अनचिन्हार आखर आ दीपनारायण केर आलेख दूनू ऐठाम उपल्बध करबाओल जा रहल अछि जाहिसँ पाठक सत्यता केर जाँच करता। 2013सँ भेल आशीष अनचिन्हारक फेसबुक संदेश बाक्समे दीपनारायणजीक लिखल किछु संदेश स्क्रीन शाट केर रूपमे राखि रहल छी जाहिसँ ई स्पष्ट हएत जे दीप नारायणजी कतऽसँ सिखलथि आ कोना सिखलथि— अनचिन्हार आखर केर लेख पढ़बाक लेल ऐ लिंकपर आउ-- https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/Home/AnchinharAakhar.pdf?attredirects=0 Ashish Anchinhar with प्रदीप पुष्प and 37 others. March 21 at 10:56am · नवका साहित्यिक चोर : दीप नारायण विद्यार्थी Deep Narayan Vidyarthi पंकज पराशर/ सुशीला झा/ सिन्धुनाथ झा द्वारा कएल साहित्यिक चोरीक पर्दाफासक बादो मैथिलीमे एहन घटना नव साहित्यकार द्वारा भऽ रहल अछि। जँ मूल कारण तकबै तँ जे लोक वा संस्था पंकज पराशरकेँ बढ़वा देलक सएह आब नव साहित्यकारकेँ साहित्यिक चोरी लेल प्रेरित कऽ रहल अछि। दिलीप कुमार झा Dilip Jha केर आगुआइमे मैथिली साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समिति, आदर्श नगर, मधुबनीसँ 2014 मे प्रकाशित दीप नारायण विद्यार्थी केर गजल संग्रह "जे कहि नञि सकलहुँ" साहित्यिक चोरी आ सीनाजोरीक एकटा घृणित उदाहरण अछि। ऐ किताबमे दीप नारायण विद्यार्थी मधुबनीक संस्था ओ ओकर कर्ता-धर्ता दिलीप कुमार झा केर सहयोगसँ आशीष अनचिन्हारक 2011 मे प्रकाशित पोथी "अनचिन्हार आखर", आ अही नामसँ 2008 सँ चलि रहल ब्लाग ओ फेसबुकपर पसरल आशीष अनचिन्हारक लेखकेँ चोरा कऽ अपन पोथीमे अपन नामसँ लेख रूपमे दऽ देलन्हि आ ओइमे रेफरेन्सक रूपमे "अनचिन्हार आखर" केर कतौ चर्चा नै अछि। पूरा सबूत सहित पढ़बाक लेल ऐ लिंकपर आउ-- http://www.videha.co.in/aboutme.htm हमरा पूरा विश्वास अछि जे दीप नारायण विद्यार्थीक ऐ घृणित कृत्यकेँ अहाँ सभ विरोध करब आ साहित्य केर पक्षमे ठाढ़ हएब। जिनका सभकेँ हम टैग केलहुँ तिनकासँ क्षमा, मुदा ई जरूरी छल 'विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका (c).सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतए लेखकक नाम नहि अछि ततए संपादकाधीन। VIDEHA.CO.IN Top of Form Like Angry CommentShare 14Malaynath Mishra, Sachidanand Sachu and 12 others Comments Kundan Kumar Karna मैथिली साहित्यमे चोरी फैशन बनल जा रहल छै । जे की निन्दनीय आ दुखद बात छी । साहित्य सृजनामे नैतिकताक पैघ महत्व होइ छै से सर्जक सभकेँ नै बिसरबाक चाही । चोरी करऽवलासँ बेसी दोषी ओ सभ छथि जे चोराएल रचनाके प्रशंसा आ ओहन रचनाकार सभकेँ प्रबर्द्धन करै छथि । Unlike · Reply · 2 · March 21 at 11:22am Malaynath Mishra बहुत कष्ट होइये एतेक उठा पटक देखि के। एकरा सत्य मानी त दुख होइये एहन साहित्य सृजन कथी ले? असत्य अछि त दीप नारायणजी अपन पक्ष राखथु। Unlike · Reply · 3 · March 21 at 11:28am Ashish Anchinhar मलयजी असत्य कथिक। सभ सबूत सामने छै। Like · Reply · 2 · March 21 at 11:31am Malaynath Mishra मानि लेलहुँ। Like · Reply · 1 · March 21 at 11:38am Write a reply... Deep Narayan Vidyarthi मलय भाइजी, हिनका एहिके साक्ष पहिनहुँ भेटल छन्हि, रहलैक आलेखक त' दुनू पोथीक पढ़लाक बाद सभ गोटे केँ बुझा जाएत । आलेखमे कतौसँ समानता नै छैक, हिनका क्रेडिट चहिअनि सेटा नहि भेटलनि, बाँकी हिनक काजे आब एतबे छन्हि। से सभ केओ जनैत छथि... Like · Reply · March 21 at 12:09pm Ashish Anchinhar लिंकपर सभहँक काँपी राखल छै। जे चाहथि पढ़ि सकै छथि। ई स्पष्ट हएत जे कोना कोना अहाँ अनचिन्हार आखर केर आलेख चोरेलियै तकर सक्रीनशाट देल गेल अछि।
ओना आब ऐ बातक चर्चाक कोनो फायदा नै जे 2010मे जखन अहाँ राची-हजारी बाग मे रही तखन हम अनचिन्हार आखरक प्रकाशनसँ पहिनेहें हम ओकर प्रिंट पठेने रही। उद्येश्य जे मैथिली गजल बढ़तै।
रहल बात रहल बात क्रेडिट केर तँ लोक जानैए जे केकरा क्रेडिट चाही आ केकरा नै चाही Like · Reply · 1 · March 21 at 12:26pm Ashish Anchinhar @All-- सभ गोटासँ आग्रह जे उपर देल गेल लिंकपर पढ़थि। सभ सबूत क्रमबद्ध तरीकासँ देल गेल अछि। सहूलियत लेल ई लिंक एहू ठाम दऽ रहल छी--http://www.videha.co.in/aboutme.htm 'विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका (c).सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतए लेखकक नाम नहि अछि ततए संपादकाधीन। VIDEHA.CO.IN Like · Reply · Remove Preview · March 21 at 12:34pm Sanjay Jha dayiyavak nirvahan aavshyak Unlike · Reply · 1 · March 21 at 1:42pm Srijan Shekhar · 13 mutual friends File a lawsuit ,hamar suggestion. Unlike · Reply · 1 · March 21 at 1:45pm Manoj Karn मैथिली मे लोथ मानसिकताक कनेको अभाव नै ऐछ.दोसराक रचना चोरा अपना नामे छपेवाक परम्परा सन भ' गेल ऐछ.जकर निर्वहन सब पीढी/ तूरक रचनाकार क' रहल छ थि. हुनका सबकें जे एकर संरक्षक छथि( प्रत्यक्ष/ अप्रत्यक्ष) थू....थू.... छी....छी....! ऐ सँ पहिने दीपनारायण आ किशन कारीगरक प्रसंग मैथिली दर्पनक बात उठल छल.जाहि मे संपादक महोदय अपन गलती स्वीकारने रहथि.सब गोटे सक्रिय भेल रहथि ऐ करतूत पर सब चुप्प छथि ! ऐ मूक / बधिरता के की मानल जए समर्थन/ स्वीकृति/ बढाबा वा किछु आओर.......? Unlike · Reply · 1 · March 21 at 1:54pm Vinit Utpal a case must be filed against Deep Narayan vidyarthi. Unlike · Reply · 1 · March 21 at 2:33pm Yogendra Pathak Viyogi हम एहि झगड़ा सॅं हटले रहए चाहैत छलहुँ। साहित्यिक चोरीक अनुभव हमरा नहि अछि मुदा विज्ञानक क्षेत्र मे एकरा बड़ पैघ अपराध बूझल जाइत छैक। देश विदेश सब ठाम नीक नीक लोकक नोकरीओ गेलैक अछि। विद्यार्थीजीक वचाव कमजोर लागल, तें हम ई लिख रहल छी। पहिल बात जे यदि कोनो लेखक कतहु सॅं किछु उद्धरित केलनि तs सूत्रक उल्लेख जरूरी। एकरे कहैत छैक ‘ethics’। नहि कएने उचिते ओ नकल अथवा plagiarism कहल जाइत छैक। एकरा लेल बहुत रास कानूनी प्रावधान छैक। यदि विद्यार्थी कें लगैत छनि जे हुनका अनेरे बदनाम कएल जा रहलनि अछि तs ओहो मानहानिक मोकदमा ठोकि सकैत छथि। ओना मामिला मोकदमा मे जेबा सॅं पूर्व ई अपनहि मे यदि फरिया जाइत तs नीक रहैत। यदि विद्यार्थी कें कनियो लगैत होनि जे हुन्कर पक्ष कमजोर छनि तs एकर दूटा तरीका छैक – पहिल जे विज्ञानक क्षेत्र मे नीक जकाँ स्थापित व्यवस्था छैक – withdraw your article. माने भेल सम्पादक कें लिखल जाए जे हमरा सॅं भूल भेल, हम एहि लेख कें वापस लैत छी। तखन सम्पादक अगिला अंक मे एहि तरहक सूचना छापु देताह। दोसर अछि सार्वजनिक माफी। यदि विद्यार्थी कें अपना पर दृढ़ विश्वास छनि जे ओ कोनो गलती नहि केलनि अछि तs निश्चिते अनचिन्हार कें नीक जकाँ चिन्हार करथु। ओकीलक नोटिस पठा देथुन। Unlike · Reply · 7 · March 21 at 5:06pm Ashish Anchinhar निश्चित रूपसँ हमहूँ सएह चाहैत छी। ओना हमरा द्वारा किछु सबूत देल गेल अछि से ऐ लिंक पर देखल जा सकैएhttp://www.videha.co.in/aboutme.htm आ वहए कम नै अछि। 'विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका (c).सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतए लेखकक नाम नहि अछि ततए संपादकाधीन। VIDEHA.CO.IN Like · Reply · Remove Preview · 1 · March 21 at 5:19pm Write a reply... Ashish Anchinhar किछु गोटेक चुप्पी संदेहक जन्म द रहल अछि Like · Reply · 2 · March 21 at 11:00pm Deep Narayan Vidyarthi आदरणीय योगेन्द्र पाठक वियोगी सर केँ गप्पसँ हम सहमत छी, हम जतेक जनै छीयैक आशिष अनचिन्हारजीक नामे पोस्ट करै छी..कोनो चीजकेँ विषय बनेबा पहिने हमरा जनतबे संबंधित व्यक्ति सँ गप्प क लेल जाय त' नीक रहितैक।एहिकेँ सभगोटे सौहार्दताक संग लैल जाय...उचित समाधान आ सजाक लेल हम तैयार छी... Like · Reply · 2 · March 22 at 7:48am Malaynath Mishra बिद्यार्थीजी अहाँ त अनचिन्हारजीक सँ कते बात सिखबाक बात हुनका इनबॉक्स मे केने छी। किएक नै हुनका सँ सीधा सम्पर्क कय समाधान तकै छी। लिंक कहि रहले जे दुनू मे गुरू आ शिष्य सदृश्य सम्बन्ध रहल अछि। Like · Reply · 1 · March 22 at 7:59am Ashish Anchinhar मतलब एक तँ अहाँ चोरी करियौ आ दोसर विषय बनेबासँ पहिने अहाँसँ गप्पप करत । बाह एकरे कलियुग कहै छै Like · Reply · March 22 at 10:33am Write a reply... Deep Narayan Vidyarthi एहिसँ हम कखनो नै मुकरि रहल छियनि जे अनचिन्हार आखर ब्लाँगसँ अपने (आशिष अनचिन्हारजी)हमरा जोरलहुँ...ओतयसँ होसला सेहो ठीके बरहल, संगहि फोन क'क' हम सेहो पुछपाछ करैत रहलहुँ...परिणाम हम लगातार लिखय लगलहुँ। पोथी निकालय केँ मोन भेल त' सभसँ पहिने अपनहि केँ फोन केलहुँ...कहलहुँ ऐहि पोथी पर भूमिका लिख दिय...ताहि लेल हम बेर बेर फोन कयने रहि. अपने हमरा टारति रहलहुँ... ओहि समयमे कने कचोट सेहो भेल हम अमित मिश्र केँ कहबो कयलियनि । ई बात सत्य छै जे ओहि समयमे हम आओर किनका कहियनि जे हमरा लिखि देता से नै जनैत रहियैक।तखन अपनेसँ लिख' बैसलहुँ... एहि आलेखमे आहाँक कहब अछि... रदीफ, काफिया, मकता, मतला, गजलक परिभाषा जे हम देने छियनि सेयह इहो देने अछि। कि कोनो चिजकेँ परिभाषा सेहो दु हेतैक? से कोना हेतैक! हम एतबे बूझलियैक। ओना हम आलेख गजलक व्याकरण लिखनहि नै छियैक।अपन लेखकियमे दु टप्पी चर्च कयने छियकि परिभाषा कहने छियकि, अपने देखियैक परिभाषोक मिलान नै छैक, वाँकी परिभाषा क बाहेक जे लिखल छैक ओ त कतैसँ नहीए मिल रहल छैक। भने दुनू पोथीक पन्ना पोस्ट कयने छियनि अपने । हमरा लग जे छल से सभक सोझा रखि देलहुँ, Like · Reply · 1 · March 22 at 7:55am Deep Narayan Vidyarthi ओना "गजल...दुष्यंत के बाद" ( सम्पादन : दिक्षीत दनकौरी)क 1अथवा 2 मे हमरा गजलक ओहि तत्व सभक अंश भेटैऐ जे आदरणीय आशीष अनचिन्हारजी अपन पोथीमे गजलक जाहि सभ तत्वकेँ समेटने छथि, Like · Reply · March 22 at 8:23am Deep Narayan Vidyarthi हँ, हमर गजल आ गजलक कोनो शेर वा पाँती किनकोसँ मेल खाइत हो त' कृपया कहल जाउ... Like · Reply · March 22 at 8:52am Ashish Anchinhar Deep Narayan Vidyarthi यदि एखनो अहाँकेँ ई लागि रहल अछि जे अहाँ अनचिन्हार आखरसँ तथ्य नै चोरेलियै तँ फेर ओइ किताबक अंश तँ सभहँक सामने दियौ जाहिमेसँ अहाँ कि कियो सरल वार्णिक बहरक गजलमे प्रयोग केना हो से देल होइ। ओहो अंश दियौ जे मकताक परिभाषा बला छै। संपादक तँ पहिनेहें लीखि चुकल छथि जे "कियो कहि सकै छथि जे पराभाषिक शब्दावली एकै होइ छै.."
आब या तँ अहाँ सभहँक सामने ओ किताबक अंश दियौ जाहिमे सरल वार्णिक ओ मकताक ओहन परिभाषा हो, या तँ जेना वियोगी Yogendra Pathak Viyogi जी कहने छथि जँ अहाँकेँ लगैत हो जे अनेरे परेशान कएल जा रहल अछि तँ हमरा उपर मानहानिक केस करू या तँ फेर संपादककेँ लीखि गलती मानू। या तँ हमरो लोक सभ सलाह देने छथि, कापीराइटक केस लेल ..
हम जाहि ठामसँ संदर्भ लेने छियै तिनकासँ व्यक्तिगत अनुमति लऽ कऽ केने छियै तँइ हमर चिन्ता नै करू। जनता- जनार्दनकेँ सूचित कएल जाइए जे ई हमरा कियो फोन नै केला। मानि लिय जँ फोन केबे केला आ हम भूमिका नै लिखलियै तकर ई मतलब नै जे संदर्भ नै देता। हमरा आब ऐ बातसँ मतलब नै अछि जे हमरासँ के गजल सिखला। Like · Reply · March 22 at 10:25am · Edited Ashish Anchinhar पंकज चौधरी, Vikash Jha, Bal Mukund Pathak Amit Mishraआदिक चुप्पीकेँ की बूझल जाए ? Like · Reply · March 22 at 10:37am Vikash Jha की विचार भैया, मौनः स्वीकृति लक्षणम बुझैत हमरो प' कॉपीराइटक केस करबै की ? हम अहाँकेँ पोथी पीडीएफ रूपेँ रखने छी मुदा दीपनारायण विद्यार्थीजीक पोथी हमरा लग उपलब्ध नहि अछि। एहन मे किछु कोना कहि सकैत छी ? Unlike · Reply · 1 · March 22 at 10:46am · Edited Ashish Anchinhar लिंक पर तँ सभ देले छैhttp://www.videha.co.in/aboutme.htm जा कऽ देखि लिय।
मौनः स्वीकृति लक्षणम पर कापीराइट तँ नै होइ छै मुदा संदेहक कोन अंत 'विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका (c).सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतए लेखकक नाम नहि अछि ततए संपादकाधीन। VIDEHA.CO.IN Like · Reply · Remove Preview · 1 · March 22 at 10:47am Vikash Jha ठीक छै, साँझ मे पढ़लाक बाद कहैत छी ! Like · Reply · March 22 at 10:49am Ashish Anchinhar Like · Reply · 1 · March 22 at 10:49am Ashish Anchinhar Like · Reply · 1 · March 22 at 10:49am Ashish Anchinhar Like · Reply · March 22 at 10:54am Ashish Anchinhar लिय दैए देलहुँ एहू ठाम। Like · Reply · March 22 at 10:54am Write a reply... Deep Narayan Vidyarthi विकाशजी हमरा बाला पृष्टकेँ आशीष अनचिन्हारजी उपर देने छथि...देखल जाउ... Like · Reply · March 22 at 11:37am Ashish Anchinhar यदि एखनो अहाँकेँ ई लागि रहल अछि जे अहाँ अनचिन्हार आखरसँ तथ्य नै चोरेलियै तँ फेर ओइ किताबक अंश तँ सभहँक सामने दियौ जाहिमेसँ अहाँ कि कियो सरल वार्णिक बहरक गजलमे प्रयोग केना हो से देल होइ। ओहो अंश दियौ जे मकताक परिभाषा बला छै। संपादक तँ पहिनेहें लीखि चुकल छथि जे "कियो कहि सकै छथि जे पराभाषिक शब्दावली एकै होइ छै.."
आब या तँ अहाँ सभहँक सामने ओ किताबक अंश दियौ जाहिमे सरल वार्णिक ओ मकताक ओहन परिभाषा हो, या तँ जेना वियोगी Yogendra Pathak Viyogi जी कहने छथि जँ अहाँकेँ लगैत हो जे अनेरे परेशान कएल जा रहल अछि तँ हमरा उपर मानहानिक केस करू या तँ फेर संपादककेँ लीखि गलती मानू। या तँ हमरो लोक सभ सलाह देने छथि, कापीराइटक केस लेल ..
हम जाहि ठामसँ संदर्भ लेने छियै तिनकासँ व्यक्तिगत अनुमति लऽ कऽ केने छियै तँइ हमर चिन्ता नै करू। जनता- जनार्दनकेँ सूचित कएल जाइए जे ई हमरा कियो फोन नै केला। मानि लिय जँ फोन केबे केला आ हम भूमिका नै लिखलियै तकर ई मतलब नै जे संदर्भ नै देता। हमरा आब ऐ बातसँ मतलब नै अछि जे हमरासँ के गजल सिखला। Like · Reply · 1 · March 22 at 12:04pm Write a reply... Ashish Anchinhar जँ Deep Narayan Vidyarthi अनचिन्हार आखरसँ साहित्यिक चोरी नै केने छथि तँ एखन धरि ओ सबूत किएक नै दऽ रहल छथि जे हम अनचिन्हार आखरसँ नै ऐठामसँ गजलमे सरल वार्णिक बहरक प्रयोग सिखलहुँ। संगे-संग मकताक परिभाषाक लाइन छै तकरो ओ सबूत देथि जे ओ कहाँसँ लेलथि।
जँ Deep Narayan Vidyarthi सही रहतथि तँ एतेक देरमे ओ सभहँक सामने सबूत दऽ देने रहितथि। स्वाभाविक छै जे सबूत हुनका लग नै छनि कारण कोनो भारतीय भाषामे पहिल बेर सरल वार्णिक बहरक प्रयोग अनचिन्हार आखरपर 2009मे गजेन्द्र ठाकुर केला जकरा पूरा रेफरेन्स सहित हम अपन किताबो धरिमे देलियै। मकताक ओ परिभाषा जे हम अपन ब्लाग ओ पोथीमे देने छियै आ जकरा चोरी केने छथि ओ परिभाषा वएह रूपमे कोनो भारतीय भाषा केर गजलक किताबमे नै छै। जँ छै तँ Deep Narayan Vidyarthi एतेक देरी किए कऽ रहल छथि?
प्रकाशक Dilip Jha केँ सूचना देबऽ चाहबन्हि हम जे एहन प्रकरणमे प्रकाशको केर भूमिकापर प्रश्नचिन्ह लागै छै आ बड़का-बड़का प्रकाशककेँ खेद सहित किताब वापस लेबऽ पड़ल छै। Like · Reply · 1 · March 23 at 10:17am Amit Mishra सर ई विवादकेँ बन्द करू ।पुरा मिथिला जानैत अछि जे मैथिलीमे पसरल गजलक क्रेडिट केवल अहाँ आ विदेहकेँ जाइए ।हम सब जे किछु जानैत छी से सब ड्यू टू अन्चिन्हार आखर ।ई बात विद्यार्थी जी सेहो स्वीकार केने छथि ।रहल बात परिभाषाक त' गुरू जे सिखेलनि से चेला लिगलनि ।ओनाहितो जहिया दीप बाबूक पोथी छपल तहिया धरि अन्चिन्हार आखर आ गजलक परिभाषा जगजगार भ' गेल छल ।ओनाहितो गजलक पारिभाषिक शब्द प्राचीनसँ कहल जाइत रहल अछि ।हमरा नजरिमे दुर्गा सप्तशती बला उदाहरण अछि दुनूमे ।बस्स ।हम एतबे कहब जे मामलाकेँ बेसी नै घीचू ।ओहो त अहींक शिष्य छथि गजलमे ने Unlike · Reply · 2 · March 23 at 12:45pm · Edited Ashish Anchinhar देखियौ आब शिष्य आ गुरू केर बाते नै छै। बात छै साहित्यिक चोरी केर। Deep Narayan Vidyarthi एखनो ई स्वीकार नै कऽ रहल छथि जे अपन लेख लेल सामग्री अनचिन्हार आखरसँ लेला। ई मानि लेबा बला बात तँ वियोगीजीYogendra Pathak Viyogi पहिने कहने छलखिन मुदा जखन Deep Narayan Vidyarthi स्वीकार नै कऽ रहल छथि तखन उपाय तँ वएह जे अंतमे वियोगी जी आ आनो लोक सभ देने छथि हमरा।
जँ दुर्गा सप्तशती बला उदाहरण अछि दुनूमे तखन ईहो फरिझौट हेबाक चाही ने जे सरल वार्णिक बहर ओ कहाँसँ लेला, मकताक जे परिभाषा छै से कहाँसँ ? Like · Reply · 1 · March 23 at 12:09pm Write a reply... Jagdanand Jha हम कहब जे दिप नारायण विद्यार्थीकेँ सार्वजनिक रूपसँ एहि गप्पकेँ मानि कए, एहि विवादकेँ एहिठाम विराम देल जेए । Unlike · Reply · 2 · March 23 at 8:52pm Jagdanand Jha विद्यार्थीजी, एक लानि ई लिख देने वा मानि लेने - "आभार अनचिन्हार आखर" अपन मान तँ नहि घटत । गजल वा गजलक शेर सोलहो आना अपनेक अछि मुदा व्याकरणस जुरल आलेख? आ जखन अपने उपर, मानै छी गजल सिखैमे आशीषजीक योगदान तहन हुनक सामने समर्पन किएक नहि । Unlike · Reply · 2 · March 23 at 9:10pm Manoj Karn मनु जी, मैथिली मे आइ धरि कियो चोरि नै गछलनि.जहन गुरू चोरि करए आ करबए तहन विद्यार्थी जी अपन साख( जे बनबे नै केलनि) कोना खराब करताह. संगे एकर प्रकाशक सेहो अपन गलती स्वीकार क' एहि पोथी आ रचनाकार पर प्रतिबन्ध लगा अपन साख बचा सकै छथि.मुदा अखन धरिक चुप्पी सँ ओहो ऐचोरि मे समिलात बुझल जेताह. मुन्ना जी Unlike · Reply · 2 · March 23 at 9:32pm Ashish Anchinhar एखन धरि ने Deep Narayan Vidyarthi दिससँ कोनो संतोषजनक उत्तर आएल अछि आ ने प्रकाशक Dilip Jha दिससँ। तकरा देखैत आब हम दोसर दिशामे जाएब। ऐ कमेंट केर दस दिनक भीतर जँ लेखक Deep Narayan Vidyarthi संतोषजनक उत्तर नै देताह तखन हम कानूनी कारवाइ लेल स्वतंत्र रहब आ एक पूरा उतरदायित्व लेखक Deep Narayan Vidyarthi केर रहतनि। संगे-संग प्रकाशक Dilip Jha केर भूमिकापर सेहो जतेक कारवाइ कएल जा सकैए कएल जाएत।
संगे-संग विदेहक नव अंक अबिते ऐ चोरी प्रकरणक लिंक स्थायी भऽ जाएत आ ओही लिंकक रेफरेन्स दैत साहित्य अकादेमीकेँ सेहो सूचना देल जाएत संगहि-संग आन संस्था सभकेँ सेहो सूचना देल जाएत जे Deep Narayan Vidyarthi साहित्यिक चोर छथि आ हुनका कोनो कार्यक्रममे नै बजाएल जेबाक चाही।
जेहन हाल पंकज पराशरकेँ भेलै निश्चित तौरपर दीपो नारायणक तेहने हाल हेतै। हम ऐ कमेंटक माध्यमसँ दिल्लीक दूटा संस्थाक अध्यक्ष-सदस्य Sanjay Jha आ संजीव सिन्हासँ आग्रह करबनि जे ओ अपन भविष्य सभहँक कार्यक्रममे Deep Narayan Vidyarthi केँ नै बजाबथि।.. Like · Reply · 3 · March 26 at 11:45am Kavi Ekant Rajiv Jha Ehi karan Facebook par hathat kono rachna post nai karait rahait chhi Unlike · Reply · 2 · March 26 at 11:47am Manoj Karn स्वरचित रचना मे ड'र केहेन ? Unlike · Reply · 1 · March 26 at 2:38pm Manoj Karn किए यौ, अहूँ दोसराक लिखल अपना नाम केलहूँ की ? हा....हा....हा....! Like · Reply · March 26 at 10:17pm Bottom of Form प्रबोध साहित्य सम्मान:श्री केदार नाथ चौधरीकेँ प्रबोध साहित्य सम्मान देल गेलन्हि। बधाइ। हुनकर चारू पोथीक लिंक नीचां देल जा रहल अछि। चमेलीरानी CHAMELIRANI_MAITHILI.pdf माहुर Mahur_KedarnathChaudhary.pdf करार Karar_Kedarnath_Chaudhary.pdf अबारा नहितन विदेहक २०० म अंक: १५ अप्रैल २०१६ केँ विदेहक २०० म अंक ई-प्रकाशित हएत। ऐ मे विदेह सम्मान/ समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मानसँ सम्मानित लेखक आ हुनकर कृतिपर समीक्षा/ निबन्ध प्रकाशित हएत। अहाँसँ रचना सादर आमंत्रित अछि। विदेह सम्मान विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान १.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०१०-११ २०१० श्री गोविन्द झा (समग्र योगदान लेल) २०११ श्री रमानन्द रेणु (समग्र योगदान लेल) २.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११-१२ २०११ मूल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, कथा संग्रह) २०११ बाल साहित्य पुरस्कार- ले.क. मायानाथ झा (जकर नारी चतुर होइ, कथा संग्रह) २०११ युवा पुरस्कार- आनन्द कुमार झा (कलह, नाटक) २०१२ अनुवाद पुरस्कार- श्री रामलोचन ठाकुर- (पद्मानदीक माझी, बांग्ला- मानिक बंद्योपाध्याय, उपन्यास बांग्लासँ मैथिली अनुवाद) विदेह भाषा सम्मान २०१२-१३ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) 1.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार 2012 2012 श्री राजनन्दन लाल दास (समग्र योगदान लेल) 2.विदेह भाषा सम्मान २०१२-१३ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) २०१२ बाल साहित्य पुरस्कार - श्री जगदीश प्रसाद मण्डल केँ “तरेगन” बाल प्रेरक विहनि कथा संग्रह २०१२ मूल पुरस्कार - श्री राजदेव मण्डलकेँ "अम्बरा" (कविता संग्रह) लेल। 2012 युवा पुरस्कार- श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरीक “अर्चिस” (कविता संग्रह) 2013 अनुवाद पुरस्कार- श्री नरेश कुमार विकल "ययाति" (मराठी उपन्यास श्री विष्णु सखाराम खाण्डेकर) विदेह भाषा सम्मान २०१३-१४ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) २०१३ बाल साहित्य पुरस्कार – श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरी- “देवीजी” (बाल निबन्ध संग्रह) लेल। २०१३ मूल पुरस्कार - श्री बेचन ठाकुरकेँ "बेटीक अपमान आ छीनरदेवी" (नाटक संग्रह) लेल। २०१३ युवा पुरस्कार- श्री उमेश मण्डलकेँ “निश्तुकी” (कविता संग्रह)लेल। २०१४ अनुवाद पुरस्कार- श्री विनीत उत्पलकेँ “मोहनदास” (हिन्दी उपन्यास श्री उदय प्रकाश)क मैथिली अनुवाद लेल। विदेह भाषा सम्मान २०१४-२०१५ (समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान) २०१४ मूल पुरस्कार- श्री नन्द विलास राय (सखारी पेटारी- लघु कथा संग्रह) २०१४ बाल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (नै धारैए- बाल उपन्यास) २०१४ युवा पुरस्कार - श्री आशीष अनचिन्हार (अनचिन्हार आखर- गजल संग्रह) २०१५ अनुवाद पुरस्कार - श्री शम्भु कुमार सिंह ( पाखलो - तुकाराम रामा शेटक कोंकणी उपन्यासक मैथिली अनुवाद) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१२ अभिनय- मुख्य अभिनय , सुश्री शिल्पी कुमारी, उम्र- 17 पिता श्री लक्ष्मण झा श्री शोभा कान्त महतो, उम्र- 15 पिता- श्री रामअवतार महतो, हास्य-अभिनय सुश्री प्रियंका कुमारी, उम्र- 16, पिता- श्री वैद्यनाथ साह श्री दुर्गानंद ठाकुर, उम्र- 23, पिता- स्व. भरत ठाकुर नृत्य सुश्री सुलेखा कुमारी, उम्र- 16, पिता- श्री हरेराम यादव श्री अमीत रंजन, उम्र- 18, पिता- नागेश्वर कामत चित्रकला श्री पनकलाल मण्डल, उमेर- ३५, पिता- स्व. सुन्दर मण्डल, गाम छजना श्री रमेश कुमार भारती, उम्र- 23, पिता- श्री मोती मण्डल संगीत (हारमोनियम) श्री परमानन्द ठाकुर, उम्र- 30, पिता- श्री नथुनी ठाकुर संगीत (ढोलक) श्री बुलन राउत, उम्र- 45, पिता- स्व. चिल्टू राउत संगीत (रसनचौकी) श्री बहादुर राम, उम्र- 55, पिता- स्व. सरजुग राम शिल्पी-वस्तुकला श्री जगदीश मल्लिक,५० गाम- चनौरागंज मूर्ति-मृत्तिका कला श्री यदुनंदन पंडित, उम्र- 45, पिता- अशर्फी पंडित काष्ठ-कला श्री झमेली मुखिया,पिता स्व. मूंगालाल मुखिया, ५५, गाम- छजना किसानी-आत्मनिर्भर संस्कृति श्री लछमी दास, उमेर- ५०, पिता स्व. श्री फणी दास, गाम वेरमा विदेह मैथिली पत्रकारिता सम्मान -२०१२ श्री नवेन्दु कुमार झा नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१३ मुख्य अभिनय- (1) सुश्री आशा कुमारी सुपुत्री श्री रामावतार यादव, उमेर- १८, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) मो. समसाद आलम सुपुत्र मो. ईषा आलम, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (3) सुश्री अपर्णा कुमारी सुपुत्री श्री मनोज कुमार साहु, जन्म तिथि- १८-२-१९९८, पता- गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) हास्य–अभिनय- (1) श्री ब्रह्मदवे पासवान उर्फ रामजानी पासवान सुपुत्र- स्व. लक्ष्मी पासवान, पता- गाम+पोस्ट- औरहा, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) टाॅसिफ आलम सुपुत्र मो. मुस्ताक आलम, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, जिला- मधुबनी (बिहार) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान (मांगनि खबास समग्र योगदान सम्मान) शास्त्रीय संगीत सह तानपुरा : श्री रामवृक्ष सिंह सुपुत्र श्री अनिरूद्ध सिंह, उमेर- ५६, गाम- फुलवरिया, पोस्ट- बाबूबरही, जिला- मधुबनी (बिहार) मांगनि खबास सम्मान: मिथिला लोक संस्कृति संरक्षण: श्री राम लखन साहु पे. स्व. खुशीलाल साहु, उमेर- ६५, पता, गाम- पकड़िया, पोस्ट- रतनसारा, अनुमंडल- फुलपरास (मधुबनी) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान (समग्र योगदान सम्मान): नृत्य - (1) श्री हरि नारायण मण्डल सुपुत्र- स्व. नन्दी मण्डल, उमेर- ५८, पता- गाम+पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) सुश्री संगीता कुमारी सुपुत्री श्री रामदेव पासवान, उमेर- १६, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, जिला- मधुबनी (बिहार) चित्रकला- (1) जय प्रकाश मण्डल सुपुत्र- श्री कुशेश्वर मण्डल, उमेर- ३५, पता- गाम- सनपतहा, पोस्ट– बौरहा, भाया- सरायगढ़, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री चन्दन कुमार मण्डल सुपुत्र श्री भोला मण्डल, पता- गाम- खड़गपुर, पोस्ट- बेलही, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) संप्रति, छात्र स्नातक अंतिम वर्ष, कला एवं शिल्प महाविद्यालय- पटना। हरिमुनियाँ / हारमोनियम (1) श्री महादेव साह सुपुत्र रामदेव साह, उमेर- ५८, गाम- बेलहा, वार्ड- नं. ०९, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री जागेश्वर प्रसाद राउत सुपुत्र स्व. रामस्वरूप राउत, उमेर ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) ढोलक/ ठेकैता/ ढोलकिया (1) श्री अनुप सदाय सुपुत्र स्व. , पता- गाम- तुलसियाही, पोस्ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री कल्लर राम सुपुत्र स्व. खट्टर राम, उमेर- ५०, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) रसनचौकी वादक- (1) वासुदेव राम सुपुत्र स्व. अनुप राम, गाम+पोस्ट- िनर्मली, वार्ड न. ०७ ,जिला- सुपौल (बिहार) शिल्पी-वस्तुकला- (1) श्री बौकू मल्लिक सुपुत्र दरबारी मल्लिक, उमेर- ७०, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री राम विलास धरिकार सुपुत्र स्व. ठोढ़ाइ धरिकार, उमेर- ४०, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) मूर्तिकला-मृर्तिकार कला- (1) घूरन पंडित सुपुत्र- श्री मोलहू पंडित, पता- गाम+पोस्ट– बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री प्रभु पंडित सुपुत्र स्व. , पता- गाम+पोस्ट- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) काष्ठ-कला- (1) श्री जगदेव साहु सुपुत्र शनीचर साहु, उमेर- ३६, गाम- िनर्मली-पुरर्वास, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री योगेन्द्र ठाकुर सुपुत्र स्व. बुद्धू ठाकुर उमेर- ४५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) किसानी- आत्मनिर्भर संस्कृति- (1) श्री राम अवतार राउत सुपुत्र स्व. सुबध राउत, उमेर- ६६, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) (2) श्री रौशन यादव सुपुत्र स्व. कपिलेश्वर यादव, उमेर- ३५, गाम+पोस्ट– बनगामा, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) अल्हा/महराइ- (1) मो. जीबछ सुपुत्र मो. बिलट मरहूम, उमेर- ६५, पता- गाम- बसहा, पोस्ट- बड़हारा, भाया- अन्धराठाढ़ी, जिला- मधुबनी, पिन- ८४७४०१ जोगिरा- श्री बच्चन मण्डल सुपुत्र स्व. सीताराम मण्डल, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री रामदेव ठाकुर सुपुत्र स्व. जागेश्वर ठाकुर, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) पराती (प्रभाती) गौनिहार आ खजरी/ खौजरी वादक- (1) श्री सुकदेव साफी सुपुत्र श्री , पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) पराती (प्रभाती) गौनिहार - (अगहनसँ माघ-फागुन तक गाओल जाइत) (1) सुकदेव साफी सुपुत्र स्व. बाबूनाथ साफी, उमेर- ७५, पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) (2) लेल्हु दास सुपुत्र स्व. सनक मण्डल पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) झरनी- (1) मो. गुल हसन सुपुत्र अब्दुल रसीद मरहूम, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) (2) मो. रहमान साहब सुपुत्र...., उमेर- ५८, गाम- नरहिया, भाया- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) नाल वादक- (1) श्री जगत नारायण मण्डल सुपुत्र स्व. खुशीलाल मण्डल, उमेर- ४०, गाम+पोस्ट- ककरडोभ, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री देव नारायण यादव सुपुत्र श्री कुशुमलाल यादव, पता- गाम- बनरझुला, पोस्ट- अमही, थाना- घोघड़डीहा, जिला- मधुबनी (बिहार) गीतहारि/ लोक गीत- (1) श्रीमती फुदनी देवी पत्नी श्री रामफल मण्डल, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) (2) सुश्री सुविता कुमारी सुपुत्री श्री गंगाराम मण्डल, उमेर- १८, पता- गाम- मछधी, पोस्ट- बलियारि, भाया- झंझारपुर, जिला- मधुबनी (बिहार) खुरदक वादक- (1) श्री सीताराम राम सुपुत्र स्व. जंगल राम, उमेर- ६२, पता- गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री लक्ष्मी राम सुपुत्र स्व. पंचू मोची, उमेर- ७०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) काँरनेट- (1) श्री चन्दर राम सुपुत्र- स्व. जीतन राम, उमेर- ५०, पता- गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) मो. सुभान, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) बेन्जू वादक- (1) श्री राज कुमार महतो सुपुत्र स्व. लक्ष्मी महतो, उमेर- ४५, गाम- िनर्मली वार्ड नं. ०४, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री घुरन राम, उमेर- ४३, गाम+पोस्ट- बनगामा, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) भगैत गवैया- (1) श्री जीबछ यादव सुपुत्र स्व. रूपालाल यादव, उमेर- ८०, पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री शम्भु मण्डल सुपुत्र स्व. लखन मण्डल, पता- गाम- बढियाघाट-रसुआर, पोस्ट– मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) खिस्सकर- (खिस्सा कहैबला)- (1) श्री छुतहरू यादव उर्फ राजकुमार, सुपुत्र श्री राम खेलावन यादव, गाम- घोघरडिहा, पोस्ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जिला- सुपौल, पिन- ८४७४५२ (2) बैजनाथ मुखिया उर्फ टहल मुखिया- (2)सुपुत्र स्व. ढोंगाइ मुखिया, पता- गाम+पोस्ट- औरहा, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) मिथिला चित्रकला- (1) सुश्री मिथिलेश कुमारी सुपुत्री श्री रामदेव प्रसाद मण्डल ‘झारूदार’ पता- गाम- रसुआर, पोस्ट-– मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) (2) श्रीमती वीणा देवी पत्नी श्री दिलिप झा, उमेर- ३५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) खजरी/ खौजरी वादक- (2) श्री किशोरी दास सुपुत्र स्व. नेबैत मण्डल, पता- गाम- रसुआर, पोस्ट-– मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) तबला- श्री उपेन्द्र चौधरी सुपुत्र स्व. महावीर दास, उमेर- ५५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री देवनाथ यादव सुपुत्र स्व. सर्वजीत यादव, उमेर- ५०, गाम- झाँझपट्टी, पोस्ट- पीपराही, भाया- लदनियाँ, जिला- मधुबनी (बिहार) सारंगी- (घुना-मुना) (1) श्री पंची ठाकुर, गाम- पिपराही। झालि- (झलिबाह) (1) श्री कुन्दन कुमार कर्ण सुपुत्र श्री इन्द्र कुमार कर्ण पता- गाम- रेबाड़ी, पोस्ट- चौरामहरैल, थाना- झंझारपुर, जिला- मधुबनी, पिन- ८४७४०४ (2) श्री राम खेलावन राउत सुपुत्र स्व. कैलू राउत, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) बौसरी (बौसरी वादक) श्री रामचन्द्र प्रसाद मण्डल सुपुत्र श्री झोटन मण्डल, उमेर- ३०, बौसरी/बौसली/बासुरी बजबै छथि। पता- गाम- रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) श्री विभूति झा सुपुत्र स्व. कनटीर झा, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- कछुबी, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) लोक गाथा गायक श्री रविन्द्र यादव सुपुत्र सीताराम यादव, पता- गाम- तुलसियाही, पोस्ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) श्री पिचकुन सदाय सुपुत्र स्व. मेथर सदाय, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) मजिरा वादक (छोकटा झालि...) श्री रामपति मण्डल सुपुत्र स्व. अर्जुन मण्डल, पता- गाम- रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) मृदंग वादक- (1) श्री कपिलेश्वर दास सुपुत्र स्व. सुन्नर दास, उमेर- ७०, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री खखर सदाय सुपुत्र स्व. बंठा सदाय, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) तानपुरा सह भाव संगीत (1) श्री रामविलास यादव सुपुत्र स्व. दुखरन यादव, उमेर- ४८, गाम- सिमरा, पोस्ट- सांगि, भाया- घोघड़डीहा, थाना- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) तरसा/ तासा- श्री जोगेन्द्र राम सुपुत्र स्व. बिल्टू राम, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री राजेन्द्र राम सुपुत्र कालेश्वर राम, उमेर- ५८, गाम- मझौरा, पास्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) रमझालि/ कठझालि/ करताल वादक- श्री सैनी राम सुपुत्र स्व. ललित राम, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री जनक मण्डल सुपुत्र स्व. उचित मण्डल, उमेर- ६०, रमझालि/ कठझालि/ करताल वादक, १९७५ ई.सँ रमझालि बजबै छथि। पता- गाम- बढियाघाट/रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, जिला- सुपौल (बिहार) गुमगुमियाँ/ ग्रुम बाजा श्री परमेश्वर मण्डल सुपुत्र स्व. बिहारी मण्डल उमेर- ४१, १९८० ई.सँ गुमगुिमयाँ बजबै छथि। श्री जुगाय साफी सुपुत्र स्व. श्री श्रीचन्द्र साफी, उमेर- ७५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) डंका/ ढोल वादक श्री बदरी राम, उमेर- ५५, पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) श्री योगेन्द्र राम सुपुत्र स्व. बिल्टू राम, उमेर- ५५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) डंफा (होलीमे बजाओल जाइत...) श्री जग्रनाथ चौधरी उर्फ धियानी दास सुपुत्र स्व. महावीर दास, उमेर- ६५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री महेन्द्र पोद्दार, उमेर- ६५, पता-गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) नङेरा/ डिगरी- श्री राम प्रसाद राम सुपुत्र स्व. सरयुग मोची, उमेर- ५२, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 111 ७) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 ८) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 ९) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 १०) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 ११) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ Maithili Books can be purchased from: http://www.amazon.in/ For the first time Maithili books can be read on kindle e-readers. Buy Maithili Books in Kindle format (courtesy Videha) from amazon kindle stores, these e books are delivered worldwide wirelessly:- http://www.amazon.com/ अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। गजेन्द्र ठाकुर ggajendra@videha.com २. गद्य २.१.रवि भूषण पाठक लघु कथा (व्यंग्य) दोस यौ दोस २.२.ओम प्रकाश झा विहनि कथा- मातृवत परदारेषु २.३.अब्दुर रज्जाक- कतारक मौसम आ बिन मौसम क बर्षा २.४.किछु विहनि कथा १. राम विलास साहु- जाति २. लक्ष्मी दास- पक धरम ३. ललन कुमार कामत- बाबाक लोटा रवि भूषण पाठक लघु कथा (व्यंग्य) दोस यौ दोस
ऑफिस मे हमर सबसँ प्रिय (हुनकर प्रिय हम नइ)मित्र रंजन जी के लेल धूस एकटा टेक्निकल मुद्दा छलै । आ घूस पर बतिआइत हुनका हम देखि अभिभूत भ' जाइत रहियै ।इतिहास सँ ल' के ,अर्थशास्त्र सँ ल' के ,समाजशास्त्र सँ ल' के आ भारतीय आयोजन तकक समस्त जानकारी के पता नइ कोन-कोन सूय्या -डोरा ल्ा’ के ओ सी दैत छथिन ,से पूछू नइ ।आ मिथिला के कथित रूप सँ सबसँ विद्वान जगह आ सबसँ नमहर माथ वला जगह सँ होयबाक नाते ओ बतहुत्थनो कम नइ करैत छथिन ।घूस क निशान ओ ऋग्वेद आ इलियड मे ढ़ूरहैत उत्तर आधुनिक साहित्य तक आबि जेता ।चाणक्य ,अदम गोंडवी आ गुन्नार मिड्रल के उद्धृत करैत-करैत ओ एते भावुक भ' जेता कि अहां अपना-आपके घूस नइ लेबाक विभिन्न प्रसंग मे दोषी मान' लागबै । नहू-नहू बाजै वला रंजन जी खुरपी ,कोदारि ,हांसू सब राखै छथिन ।मात्र राखबे नइ करैत छथिन ,कत्त' कोन चीज चलाबी ,सेहो बखूबी जानैत छथिन ।केकरा लग जातिक संदर्भ ,केकरा लग क्षेत्रक ,कत्त' मिथिला वला संदर्भ राखी ,कत्त्ा’ सेक्युलर बनी आ कत्त'राष्ट्रवादी ,एकर सर्वोत्तम प्रयोग देखबाक लेल अहां के दस-पनरह दिन रंजन जीक साथ रहबाक चाही ।आ कखन की बाजी आ कोन मौसम मे केकरा संग रही ,ई अहां हुनके सँ सीखि सकै छी ।ईनकम टैक्स भरबाक समै मिश्राक संग ,भोरे घूमबाक लेल झाजी ,माछ किनबाक लेल यादव जी ,गाम जेबाक लेल कर्णजी साथ आ कुनो तिकड़म होए त' सिंह जीक संग । रंजन जीक संग मे एक सँ एक मशीन ।अहां केखनो भावुक भ' जाएब ,कखनो क्रोध सँ लाल-पीयर आ केखनो रंजन जीक लालित्य सँ अभिभूत ।मुदा रंजन जी ओहने छथिन ,बस काज भेलाक बाद ओ अपन मौलिक अवस्था मे विदा भ' जेता । आ रंजन जी कें पता छैन कि अहां सँ कोन चीज कोना उगलबएल जाए ।ओ नब्ज छूता आ अहां अपन बोखार आ दस्तक पुराण एक्के सांस मे बहार क' देबै ...... 2 रंजन जी क' सबसँ नजदीकी मित्र सिंह जी छथिन ।दू-चारि बेरक शीतयुद्ध छोडि़ दियौ ,दू-चारि प्रकरणक प्रतियोगिता कें बिसरि जाइयौ ,तीन-चारि टा हारजीतक संदर्भ पर धियान नइ दियौ ,तखन ई बात पूरा जिलाके पता छैक कि रंजन जी क' सबसँ प्रिय के आ सिंह जी क' सबसँ प्रिय के ।ई बात केकरो पता नइ छैक कि बेशी जरूरत केकरा छैक दोसर के ,ईहो पता नइ कि के केकरा सँ बेशी फैदा उठबैत छथिन ।ईहो पता नइ कि ऐ दोस्ती के बनेने रहबाक लेल के बेशी प्रयासरत छैक ,आ के एक सीमाक' बाद ऐ चीज कें इग्नोर करैत छैक ।मिला-जुला कें एकरा सामाजिक सहजीविता(सोशल सिम्बायोसिस) कहल जाए ,जीव विज्ञानक छात्र होयबा कें कारण हमरा दिमाग मे लाईकेन आबि रहल छैक ,पूर्णत: शैवाल आ कवक केर घालमेल ।केओ देह देने छैक त' केओ अपन हरियरी ।तहिना ऐ ठाम सेहो एकटाक दिमाग छैक आ दोसरक लंठई आ ऐ कंबिनेशनक परिणाम पूरा जिला भोगैत छैक । सिंहजीक लंठई छोट दिमाग मे नइ घूसि सकैत अछि ,किएक त' सिंह जी ओकील सँ ,किसान सँ आ परिवादक सँ ऐ हिसाब सँ मिलैत छथिन जे केकरो पता नइ चलत कि ऐ लंठक दिमाग मे की चलि रहल छैक ।परहल-लिखल संग परहल जँका आ मोटपसम लोक संग मोटपसम बात ।वाह रे सिंह जी ।बात लिय' त' विद्यापति सँ ल' के ज्ञानेंद्रपति तकक कविताक मानचित्र सामने राखि देता ।इतिहासक बात करब त' ईसवी ,उद्धरण ,पृष्ठ संख्या आ स्टैंजाक बामा कात की दहिना कात सब बात कहि देता ।सौ -दूसौ टकाक कुनो बात होइ तखन अपन पर्स खोलि कें अहांके द' देता ।केकरो ओइ ठाम श्राद्ध होए ,बेटीक बियाह होए त' आदमी अप्पन गाड़ी क' के पहुंच जाए ,मुदा जेखन नमहर डीलिंगक कुनो बात होए तखन अपन पिताजीक पैरवी सेहो नइ सुनत ।एतबे नइ नियम-कानूनक अपन व्याख्या करैत ओ चाहता कि फाईलक क्रिया-कर्म भ' जाए । आ एहन विवादास्पद काज सब करबाक लेल बड़का करेजा केवल सिंहे जी मे भेटत ।आ सिंहजी क' करेजा मे कतेको आदमीक धमनी आ शिरा जुड़ल छैक ।डी0एम0 आफिसक चपरासी ,बाबू ,अधिवक्ता संघक अध्यक्ष्ा -मंत्री,अखबारक संवाददाता-उपसंपादक आदि,आदि ।ऐ सब गोटे कें पता छैन कि सिंह जी की करैत छथिन ,मुदा की कहबै कहियो ने कहियो ई सब सिंह जी सँ उपकृत भेल छथिन ।आ विभागीय अधिकारीक बाते छोड़ू ,सबक फिज मे सिंहजीक रसगुल्ला ,एतबे नइ फ्रिज तक सिंह जी क' खरीदल ।केकरो रेलवे क' टिकस ,केकरो इसकुलक फी ,केकरो डाक्टरीक पर्चा .....सब सिंहजी क' जेबी मे ।एतबे नइ ऊपरका नेता-अधिकारी तक पैरवी करबाक हो ,ट्रांसफर करेबा आ रोकेबाक हो ,सबक हिसाब सिंह जीक संग । विभागीय अधिकारीक पहिल चाय आ अंतिम चाय सिंहजी क' संग ।बाकी टाइम मे सिंह जी की करथिन ,एकरा सँ केकरो लेबा-देबाक नइ ।अहां सिंह जी कें अपना कुरसी पर नइ देखि सकैत छियै ।मोटा-मोटी जातिवाद सँ दूर ,मुदा एहनो नइ कि जातिवादक उपयोग नइ करी ।अप्पन जातिक अफसर मिलि जाइ त' दूहाथ जाति-जाति सेहो खेल ली ।आ अप्पन कुरसी के बचेबाक हो ,केकरो सँ किछु छिनबा क होए त' 'जाति-जाति' किएक ने खेली । आ सिंह जीक बियाह सेहो एहिए जिला मे भेल छलै ,से किसान आ ओकील कें ई बात बताबै मे सिंह जी कंजूसी नइ करथिन आ ओकील साहेब सब आ किसान भाय सब ऐ संकेत के बूझैत सिंह जी कें निराश नइ करैत छथिन ।अहां सिंह जी कें जातिवादी कैह सकैत छियेन ,मुदा हुनकर द्वार पर आंहू केर स्वागत अछि ।अहां क' लेल जाति जाति हैत,हुनका लेल जजाति छैक ,जेकरा मे जत्ते खाद-पानि देबै ,ओत्ते बम्फार फसल हैत ।मात्र खादे-पानि नइ ,सही समै पर कमौनी सेहो जरूरी ।कमौनीक सबसँ नीक समै भोर आ सांझ ।किछु बाजियौ आ किछु बजबाक मौका दियौ ,केखनो चाय-मिठायक संग केखनो खालियो हाथ.........सिंह जी जिंदाबाद ,राजपूत जाति जिंदाबाद ,मधुबनी जिला जिंदाबाद आ आनो जाति सब मुरदाबाद नइ ,बल्कि दम होए त’ करा ले अप्पन जिंदाबाद आ दम नइ हो त’ दम धर। 3 आ सिंहजी क' दहिना हाथ नेबो लाल ।दहिना नइ बामा ,किएक त' सिंहजीक सब घटिया काज नेबोलालक सलाह सँ ।दूनू गोटे एके पद पर आ नेबोलालक ऐ स्थान पर बहाली मे सिंहजीक विशेष योगदान ।कर्णजी क' बेज्जत क' के नेबोलाल कें आनबा मे सिंहजी क' पलानिंग सफल रहलै ।ओना कर्णजी के रहलो सँ सिंहजी क' आसन पर विशेष फर्क नइ रहै ,मुदा कर्ण जी कें बाजबाक बेमारी रहै ,कखनो -कखनो डरितो -डरितो मुंह सँ किछु निकलिए जाए आ तहिए समै मे जिला मे आगमन भेल रहै श्री श्री 108 नेबोलाल जी कें आ बहुत कम्मे दिन मे नबका विभाग आ स्थानक जानकारी .....जानकारी नइ रेकिंग करबा मे सफल रहला श्री नेबोलाल जी ।नेबोलाल जी क' जाति क' विषय मे विशष जिज्ञासा नइ करू ।नेबोलाल जी जातिक मध्य मे छथिन ,ने बेसी ऊपर ने बेसी नीचे ।एकदम मध्यविन्दु कहनै उचित नइ ,मुदा जातिव्यव्स्था क' एकदम संवेदनशील स्थान पर जरूर छथिन ।तें एकदम ऊपरक आ एकदम निचलका क' लेल अद्भुत पंचाक्षरी गारि क' बेशी काल प्रयोग करैत छथिन ।एहन राष्ट्रीय गारि जे कश्मीर सँ ल' के तमिलनाडु तक एहिना हनहनाइत छैक आ जेकर अर्थ बूझबा मे कतौ भाषाक कोनो झंझट नइ ।तें नेबोलाल जी ऐ गारि क' संग बेसी आत्मीय छथिन ।नेबोलाल जी जानै छथिन कि ई गारि जे0एन0यू0 आ आई0आई0टी0 कानपुर सँ ल' के बिसफी आ बीहट तक ओहिना उपलब्ध छैक ।की बाम की दक्षिण ,की साहेब आ की अर्दली ।एकर अर्थक गरिमा सँ सब पराजित ।मुदा ई केकरो नइ पता चललै कि नेबाेलालजी ऐ गारी क' कोन पराक्रम सँ लुबुधल छथिन । आ नेबोलालजी क' नियुक्ति मे हुनकर एकटा सद्य:जात झूठक विशेष योगदान रहलै कि हमरा बच्चा नइ ......बच्चा हेबाक लेल विशेष ओपरेशनक जरूरी ......ऐ ऑपरेशनक लेल सात-आठ लाखक जरूरी.......कनियाक बेडरेस्ट जरूरी......कनियाक हास्पीटल मे बेडरेस्ट जरूरी......।शताधिक बेर कहल ऐ वाक्य मे मात्र यैह टा सत्य छल कि हुनका एको टा बच्चा नइ रहेन आ एकर अतिरिक्त सब बात झूठ ।किएक त' बहालीक बाद नेबोलाल दू टा पुत्ररत्न कें जन्म देलखिन आ दोसर त' एकदम मधुबनिए मे भ' गेलै ।पहिलक लेल पटना प्रवासक एकटा सिचुएशन क्रिएट कैल गेल छलै ,मुदा दोसर बेर एकर जरूरी नइ बूझल गेलै ,किएक त' आब नेबोलालजी स्थापित भ' गेल रहथिन ।मुदा वौआ हम ने बिसरि जेबौ ,सिंह जी थोड़बे बिसरथुन ,हुनका सब किछु यादि छैन ,अपन गर्भ मे एनै सेहो आ एहियो सँ पहिले के बात सभ.......ऊ गिन-गिन के ,गाबि-गाबि के तोरा यादि करेथुन । नेबोलालजी साल दू साल तक सिंह जी क' प्रति कृतज्ञ रहलखिन ,एकर बाद हुनकर धियान न्याय दिस गेल । सिंह जी किएक एते कमेता आ हम किएक कम कमाएब ।हुनका किएक एते मान-सम्मान आ हम की केकरो सँ कम आदि आदि ।ऐ तर्क मे सबसँ बेशी ऐ तथ्य पर बल रहै कि हम किएक कम कमाए छी ।आ ऐ गणितक क्षतिपूर्ति लेल नेबोलाल जी ओकील सबक दारूपार्टी मे बैस' लागला ।स्टाफ सबक सेटिंग शुरूा भ' गेल ।किछु सिंहविरोधी स्टाफ सबकें जातिक कैप्सूल खुआयल गेलै ।पूरा सप्पत आ पूरा ठोस आश्वाशनक संग ।कमीशन आ हिसाबक स्पष्ट उद्घोषणाक संग । आ किछु दिनक लेल सही मे नम्बर एक इंस्पेक्टर भ' गेल नेबोलालजी ।मुदा जातिक काउंटररिएक्शन शुरू भ' गेलै नेबोलालजी ।ऐ राजपूत बहुुुुल क्षेत्र मे राजपूत विरोधी अभियान कत्ते दिन नेबोलालजी ।आ जातिवादक विरोध एकटा नया जातिवाद सँ ।वाह रे वाह नेबोलाल जी..... आ नेबोलाल जी लगभग दरजन बेरि मारि खेबा सँ बचल हेथिन आ ओतबे बेर ठोस शिकायतक संग ओकील साहेब लोग डी0एम0 ओइ ठाम प्रदर्शन केने हेथिन ।अंत मे नेबोलाल सिंहजीक लग सरेंडर केलखिन ।सरेंडरप्रस्ताव क' असली कॉपी हमरा लग नइ अछि ,नइ त' हम हूबहू बतेतौं छल ,मुदा जरूरी सवाल ओइ प्रस्तावक पाठन नइ ,ओइ आदमी क' चिन्हनइ छैक ।ओ आदमी कोन आदमी के नइ गरिएलकै ,कोन जाति के नइ ,मौका मिललै त' किछु क्षेत्र आ राज्य के सेहो ।एकरा लग ओकरा गरिएनए आ ओकरा लग दोसरा के ।ई पालिटिक्स नमहर नइ खिचाइ छैक दोस ।कतबो नेमारबए ,कतबो तीरा-तीरी करबै ,जल्दिए टूटि जायत आ टूटि के अपने मुंह मे लागत टूटलका रब्बर सन । नेबोलालजी कें गारि दैत देखनए एकटा नाटकीय अनुभव छल ।हुनका मुंह सँ रूपैयाक लेल ,नीक समानक लील ,जवान स्त्रीक लेल चूबैत ...।आ नेबोलालजी कोन स्त्री कें कल्पना मे नइ भोगलखिन ।कोन मर्द कें कल्पना मे ईज्ज्त नइ लेलखिन ।कोन दोस कें कल्पना मे भीख मांगैत नइ देखलखिन ।आ नेबोलालक जादू जल्दिए खतम भ' गेलै ।लागै छैक जे नेबोलालक जादूक रहस्य बच्चा-बच्चाक पता चलि गेल छलै ......सिंहविरोधी गीतनाद जल्दिए खतम भ' गेलै ।सिंहजीक परिचित अधिकारी पटना सँ आयल छलखिन ।आपात मीटिंग भेलै आ आन बातक अलावे नेबोलालक रसगर गाम टांसफर भ' गेलै ।ऐ ट्रांसफरक प्रभाव नेबोलाल साल-दू साल बूझलखिन ....बूझै सँ पहिले नेबोलालक टांसफर कैमूर जिला भ' गेल छलै ।नेबोलाल कें प्रोत्साहित कैल गेल छलै कि जाऊ बाबू जाऊ आनंदे मे रहब.....जत्ते पच्छिम तत्ते माल.....मुदा ई एकटा आर कथा छलै । सिंह जी के बूझनै कनेक नइ खूब-खूब कठिन काज ।सिंह जी क’ रूटीन के बूझनै ओहियो सँ कठिन आ ऐ रूटीन सँ होमय वला फैदाक ब्यौरा तैयार केनए एकरो सँ कठिन ।सिंह जी पादितो छथिन पूरा रूटीन आ पूरा उद्देश्य सँ ।वास्तव मे ओ शतरंजक खेलाड़ी छथिन आ अपन अगिला आ चारि-पांच टा आगू वला स्टेप कें आगू –पाछू जोड़ैत चलै वला खेलाड़ी ।हुनकर कुनो स्टेप अहांके बेकुफ वला बुझा सकैत अछि ,मुदा ओकर अंतिम परिणाम की हेतै से बस सिंहे जी जानै छथिन ।सिंहजी क’ विस्तृत सर्किल कें देखि के अहां के आश्चर्य भ’ सकैत अछि या फेर अहां सिंह जी कें अत्यंत व्यर्थ घोषित क’ सकैत छियै ,मुदा एकर परिणाम कनेक देखियौ ।सिंह जी क’ विभाग मे पुलिसक कोनो काज नइ ,मुदा सिंह जी बहुत रास दरोगा सँ हित-मित बनेने ।आ दरोगा सँ काज केकरा नइ पड़ैत छैक ,से जखने कुनो पैरवी वला काज होए सिंह जी थाना पहुंचि जाथिन ।आ ई पैरवी उचित शुल्क आ उचित बेन-तिहारक संग होइत छलै ।सिंह जी कें ड्रग इंस्पेक्टर सँ दोस्ती आ सिंहजी क’ सासुरक दवाचोर ,मिलाबटखोर सब कें एकटा नीक सीरही मिलि गेलै ।आ पाहुन सिंहजी उचित दर सँ एकर निस्तारण शुरू क’ देलखिन ।एतबे नइ सिंह जी कें पंडित-ज्योतिषी सँ परिचय आ सिंह जी एकटा स्पेशल डेट कें गुप्त पूजा ठानि देलखिन ।ज्योतिषी कहने रहै जे ऐ तिथि क’ पता केवल हमरे टा ।
सिंहजी भोर उठिते साहब ओत’ चलि जेता आ भोजन सँ पहिले तक ओतै रहता ,फेर सांझ मे चाह क’ बेर सँ भोजनक समै तक ।ऐ रूटीनक प्रताप ई छलै जे साहेब ओतबे कहैत छलै आ ओतबे करैत छलै जत्ते कि सिंहजी ।साहेबक हरेक भूर आ साहेबक हरेक गुर पर सिंहजी के धियान ।तरकारी ,दूध आ ठंढ़ा क’ बहाने किचन तक पहुंच ।सिनेमाक टिकट ,मिठाई आ जन्मदिन ,विवाहदिन आदि क’ बहाने मैडम तक पहुंच ।चाकलेट ,बैडमिंटन आ कॉमिक्स क’ बहाने वौआ सेहो कब्जा मे ।आब की चाही ।दोसरक घर पर एतेक धियान देला पर की नइ मिलि सकैत छैक ,मुदा सिंह जी कें सब किछु नइ चाही ।हुनकर टारगेट निश्चित छैक ,बस ओ ओमहरे बरहैत छथिन ।एत्ते इंतजाम ,ई अनुशासन आ ई व्यवहार सब ओइ टारगेटक माध्यम बस।
4 आ सिंह जी कें जइ आदमी से सबसँ बेशी डर होइत छलेन से रहथिन मिश्रा जी ।जिला मे मिश्रा जी क' आगमन नया-नया भेल छलै आ संयोग देखियौ जे मिश्रा जी ठहरलखिन सिंहजीक डेरा पर ।आ शुरू-शुरू मे त' मिश्रा जी अपन बड़का भाय आ गुरू बना लेलखिन,आ जेना कि हरेक चलाक आदमी करैत छैक मिश्रा जी अपन माया फैलेनए शुरू क' देलखिन ।अपन मंचोचित अवाज आ थर्ड डिवीजन एम0ए0 मे रटल संस्कृत श्लोकक रस्ते जल्दिए एकटा मिश्रामित्रमंडली बनि गेलै ।आ देखियौ त' हाल जे कि जखन पूरा पटना -दिल्ली दलित-विमर्श आ स्त्री विमर्श सँ भरल रहै ,पूरा अखबार आ टी0वी0 चैनल भ्रष्टाचारविरोधी आंदोलन सँ भरल रहै ,मिश्रा जी हरेक बातक पक्ष मे आ विपक्ष मे एकटा संस्कृतक श्लोक राखि देथिन ।आ कखनो -कखनो त' राखनै क' अंदाज प्रवक्ता बला,वक्ता बला ,मेंटर वला ,दार्शनिक वला ,तीर्थकर वला आ पैगम्बर वला सेहो ।आ बुधियार लोक सब सुनलाक बाद या पाछू मे ऐ श्लोक श्रवण कें किछु अन्य क्रिया सँ -फेंकनए ,ठोकनए आदि सेहो कहै ।जे किछु नइ बूझै वला छलखिन अपन संस्कृत ज्ञानक आधार पर,अपन व्यस्तता आ थेथरई के दुआरे ओ लोकनि सेहो मुसकिया दैत छलखिन ,वाह-वाह क' दैत छलखिन आ कखनो काल मिश्रा जी कें विद्वान सेहो कहैत छलखिन ।आ मिश्रा जी ऐ सब कें भगवानक आर्शीवाद ,माया आदि कैह के आत्ममुग्ध होयबाक असफल प्रयास करैत छलखिन । मिश्राजीक ई मायावाद प्रारंभिक तौर पर सिंह जी कें नया चीज बूझेलेन ,शुरू-शुरू मे ऊहो रस लेबाक प्रयास केलखिन ।धीरे-धीर हुनका बुझेलेन जे ई मिसरबा त' हमरा उखाडि़ केे रहत ,आ जल्दिए हुनकर व्यक्तित्व मे एकटा आलोचनात्मक दृष्टि क' उभार भेलै आ मधुबनी कलक्टरीक विद्वान लोकनि ऐ उभार कें जल्दिए ब्राह्मण बनाम राजपूत आ नया बनाम पुरान कहबाक असफल प्रयास केलखिन ।किछु लोकनि जे बेशी बुधियार रहथिन जे शासन-सत्ता कें बीस-पचीस बरिस सँ देखने रहथिन ओ एकरा अस्थायी प्रवृत्ति कैह प्रतीक्षा कर' लागलखिन ।जेेे शासन आ भ्रष्टाचारक पारस्परिकता कें नीक जँका चिन्हैत रहथिन ,हुनका लागलेन जे ई कोनो प्रवृत्ति नइ थिकै ,मुदा कलक्टरी आ ऐ विभाग कें एकटा नया मसल्ला मिलि गेलै ।बात ई भेलै जे मिश्रा जी क' बजबा क' कला सँ किछु अधिकारी ,किछु प्रोफेसर ,किछु पत्रकार लोकनि बेशीए प्रभावित भ' गेलखिन आ जेना कि होइते छै जे मिथिला त' बजबा क' तेल सँ बरहै छैक तें मधुबनी जिला आ ऐ विभाग कें मिश्रा जी में बेशी विकास देखेलए ।वाह रे मिश्रा जी ,वाह रे कालिदास आ माघक श्लोक आ हाय रे सिंह जी के लंठई ,हे सिंहजी हेे सिंह तोहर लंठई एत्ते कमजोर कि ऐ मिसरबाक अशुद्ध श्लोके सँ पराजित भ' गेलै ।मुदा नइ नइ ,ऐ भ्रम मे नइ रहू ।अशुद्ध श्लोकक दुनिया जल्दिए बेरबाद भ' गेलै ,बरबाद नहियो भेलै त' दीप्ति घैट गेलै ।धीरे-धीरे श्लोकक प्रतिक्रिया ,प्रशंसा ,ताली-थोपड़ी ,मुसकी घटैत गेलै ।आ अशुद्ध श्लोक कें पराजित केलकै शुद्ध घी ,शुद्ध कमीशन रहित घूस आ पहिले सँ पसरल सिंहवाद ।जल्दिए ब्राह्मण अधिकारी ,किसान आ पत्रकार तक सिंहजीक नजदीकी भ' गेलखिन आ आब समै रहै मिश्रा जी कें बदलबा क' ,मिश्रा जी जल्दिए अपना आप के सिंह जी क' छोट भाय कें रूप मे देख' लागलखिन ।आ हवा पलटिते मधुबनी कलक्टरी क' पाया ,कुरसी ,सीरही ,अलमारी आ फाईल सब देख' लागलै सिंहजी क' मुंह । आ धीरे-धीरे मिश्रा जी अपना आपके छब्बीस जनवरी ,पनरह अगस्तक भाषण आ कर्मचारीक विदाय समारोह तक समेट लेलखिन (आफिस मे) ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। ओम प्रकाश झा विहनि कथा मातृवत परदारेषु इसकूलेक समैसँ ओ पढ़ैत छल "मातृवत परदारेषु"। श्लोकक ई अंश ओ सबकेँ सुनाबैत छल। आब ओ नौकरी करैए। ओ एखनो धरि ई श्लोक अंश दोहराबैत रहैए। मुदा सड़क पर, बसमे वा ट्रेनमे कोनो स्त्री वा बालिकाकेँ देखैत देरी ओकर आँखिमे एकटा चमक आबि जाइ छै आ ओअपन नजरिसँ ओकर सभक देह ऊपरसँ नीचा धरि नापि लैत अछि। कतेको बेर ओ ऐ कलाक प्रदर्शनक बाद स्त्रिगण सभक कोपभाजन सेहो बनि चुकल अछि। मुदा आदतिमे कोनो बदलाव नै। कहल गेल अछि जे चालि, प्रकृति, बेमाय, तीनू संगे लागल जाय। आइ चौक पर जखन ओअपन कलाक प्रदर्शन करैत छल तखन पीड़ित स्त्रीक हल्ला करै पर भीड़ ओकर पूजा क' देलकै लात जूतासँ। जावत किछु लोक ओकरा बचेलकै तावत ओकर मुँह कान फूलि चुकल रहै। हम जखन चौक पर पहुँचलौं तँ ओ अपन पूजा करबा क' चलि आबैत छल। हम पूछलिए कीहाल चाल मीता। ओ कहरैत बाजल हाल देखिये रहल छह आ चालि हमर बूझले छह जे मातृवत परदारेषु। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। अब्दुर रज्जाक कतारक मौसम आ बिन मौसम क बर्षा बर्षा प्रकृतिक क अनुपम रचना मे सऽ एक अद्भुत प्रकृया अछि। समय आ भौगोलिकताक स्थान संग मौसम क बिशेष संयोग क मिलन सऽ बर्षा क रूप अपने सऽ बनि जाइए। अलग-अलग स्थान अलग-अलग तरहक बर्षा देखऽमे आबैए जेना कोनो ठाम झिसी क रूपमे तऽ कोनो ठाम झमकउवा क रूपमे।प्रसंग कतारक बर्षा- बर्तमान समय मे कतारमे बहुत गर्मी रहै छल मुदा अइ साल बर्षा दू दिन सऽ शुरु अछि। दू साल सऽ कतारक गर्मी नेपाल मे नेपाल क बर्षा कतरक भिशा लगाकऽ आइब गेल अछि। नेपाली सब संगे नेपाल क खैनी गुल आ बहुत तरहक अमली सबहक़ चीज आइल अछि, ओनाही मौसमसेहो आइब गेल जेना लगैया। बर्षा सऽ अतुक विभिन्न कीशिमक निर्माण सब काज जेना भवन निर्माण ,पुला निर्माण ,रेल बिभागक निर्माण सब किछ प्रभाबित भs जाइए। प्रकृतिक रूप सऽ अखैन कतार क मौषम मे बहुत गर्मी होबाक चाही मुदा अखैन ठीक उल्टा मौसम मनोरम ठंढा अछि। बिश्व जलबायु परिबर्तनक सीधा असर कतारकमौसम मे देखल जाs रहल अछि। चारु दिश समुद्रक घेरा क तट मे रहल ई देश बहुत सुन्दर अछि। समुद्री हवा संग एकर समुद्री तट मे एगो अनुपम बीअइर आबैत रहैए। ओना प्रकृतिक रूप सऽ दुनियाक हर क्षेत्रक अपने विशेषता अछि। खास कऽ बर्षा सऽ प्रभाबित होमऽबला निमार्ण सऽ जुड़ल कंपनी सब बर्षासऽ नोकसान उठबैए मुदा प्रकृतिक रूप सऽ बर्षाक प्रभाव बहुत उत्तम अछि। काज सब जे बाहर होइत रहैय से सब तऽ किछ देर वा दिनला अवरोध वा प्रभाबित होइए, फेर संचालन भs जाइए। यहन कतारक बातावरण मौसम अइठाम रहनिहार सबहक मन मोहने जा रहल अछि। कतारक धरती पर अपन पसीना बेचैला घर-परिवार क खुशी के खातिर बहुत मनुवा सब खुशी नजर आउत ओहु मे एकर मौसम सोन मे सुगंधा रखबाक काज करैय। दुनियाक उगैत अर्थबेबस्था मे कतारक स्थान बीतल साल सब सऽ उच्च छल मुदा अइ साल सऽ किछ गिरारबट देखा रहल अछि। दुनियाक बहुत देशक मनुवा सब अपन देश छोइर छोइर अइठाम आइब रहल अछि, आइलो अछि अपना देश मे आबऽ लेल छान पगहा तौड़ैत लोग ऐठाम क मौसम सऽ हिचकैत छल मुदा नै, ओना नै अछि अखैन ऐठामक अबस्था। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। किछु विहनि कथा १. राम विलास साहु- जाति २. लक्ष्मी दास- पक धरम ३. ललन कुमार कामत- बाबाक लोटा १ राम विलास साहु जाति आसिन मासक चारिम सप्ताहक समए अछि। बर्खाक पानि आ बाढ़िक पानि सेहो थीर भऽ गेल अछि। मुदा चर-चाँचरमे पानि भरले अछि। जइमे खेतिहर सभ पटुआ, सन्नइ, चन्नी, चन्ना काटि-झाड़ि गोड़ैत अछि। पानि गनहा रहल अछि। दू गामक बीच अछि तँए चर दूर तक पसरल अछि। बहुत पहिनहिसँ दुनू गामक लोकक सेवा सेहो करैए। बुढ़-पुरानक कहब छैन जे पहिने कोसी अही चर देने बोहै छल। पछाइत मुँह भरना भेने दोसर दिस धार घूमि गेल। बरखा आ बाढ़िक समए उनटे कोसीक पानि आबि चरकेँ उपेछाल करि दइए। जखन बाढ़िक पानि घटैए तखन चरोक पानि स्वत: घटि जाइए। चरक पानि करिया समाढ़सँ करियाएल, तइमे भैँटक फूल कोसी धरि फुला शोभा बढ़ेने रहैए। तैबीच सिल्ली, गागन, लालशर, पनिकौआ इत्यादि अनेको रंगक चिड़ै-चुनमुनीक क्रीड़ा स्थलक संग शरण स्थल सेहो बनलए। एक-दोसर गामक लोक जाइ-अबैले केतए-केतए समाढ़ हटा-हटा बीचमे सिरौर बना पानिटपैले रस्ता बनौने अछि। पानि बेसी रहने नाहक साधन सभ अपन-अपन रखने। जे नै रखने अछि ओ भरि डाँड़ भरि जाँघ पानि टपि ऐ-पारसँ ओइ-पार करैत अछि। बेवस्थो कोसी क्षेत्र-ले बेमुखे अछि। ऐ क्षेत्रक नेता सभ क्षेत्रक विकास तँ कमे सन मुदा अपन विकास कऽ गामसँ दूर शहरमे बड़का फ्लैट बना रहै छैथ। तँ गाम बाढ़ि-पानिमे डुमैले किए औता। ई तँ गामबला बुझत जे गाम केकर छी। डीहबासूकेँ आकि बहरबैयाकेँ। नेतासभ तँ पाँच बर्खक पछाइत चुनावी महाकुम्भमे मात्र नहाइले अबै छैथ। सभ पुण्यकेँ मोटरी बान्हि नेने चलि जाइ छैथ। चुनावक समए आएल। नेता सबहक उजैहिया गामे-गाम आबि गेल। क्षेत्रक वोँट बटोरै खातिर ओही कोसी कोसीक चर टपि अगिला गाम जेबाक छैन। सोचलैन पएरे टपने लोक संघर्षशील नेता बुझत। जइसँ अधिक भोँट हएत। नेता आ नेताक पीठलगुआ गामक कार्यकर्ता संगे सभ कियो जाँघर भरि पानि टपि पार हुअ लगला। तही क्रममे नेताजीकेँ एकटा नमहर पलैहिया जोंक धऽ लेलकैन। पार होइते नेताजीक जाँघसँ छरछर खून निकलए लगलैन। छरछर खून बहैत देख नेताजी छटपटा उठला। संगी सभ निहारि देखलक तँ देखैए नम्हरगर जोंककेँ, जे खून पीब मोटागेल अछि। नेताजी जीबठ बान्हि जोंककेँ हाथसँ पकैड़ खींच-तीर कऽ छोड़ौलैन। एक हाथसँ छरछराइत खूनक दाढ़केँ दबने आ दोसर हाथसँ आ दोसर हाथसँ एकटा संगीक लाठीक हूरसँ जोंककेँ थोकैच-थोकैच मारए लगला। जोंक तँ कठजीब होइते अछि। लाठीक हूरसँ नै मरैबला। तमसाएल नेताजीक मुहसँ निकलैन- “तोरा आर कियो ने भेटलौं जे हमरे खून पीबैले एलेँ। तोरा खनू बोकराए मारि देबौ।” छटपटाइत जोंक बाजल- “हमहूँ तँ अहींक जाति छी, जाति जातिये लग ने जाएत। अहाँ जे एहेन निष्ठूर भऽ हमरा मरै छी से जातियोपर ने कनियोँ दया-धरम अछि। अखन हम कोनो अपराधो तँ नहियेँ केलौं अछि। ई तँ जातिक सोभाव छी।” नेताजी डाँटैत बजला- “तूँ जलकीट, असरधे पानिमे रहैबला आ हम श्रेष्ठ मनुख फ्लैटमे रहनिहार, तखन तूँ केना हमर जाति भऽ सकै छेँ?” जोंक कुहरैत बाजल- “जहिना अहाँ जनताक खून पीबै छी तहिना ने हमहूँ खूने पीलौं अछि। अहूँ खूनपीबा आ हमहूँ खूनपीबा। तखन दुनू गोरे जातिये ने भेलौं। जातिक सर्टिफिकेटक चालि-चलनसँ बढ़ि कऽ आरो कोनो नमहर प्रमाण होइ छै जे देब। एक तँ पहिनहिसँ अहाँ सभ हमरापर एतेक अतियाचार केलौं जे हम भागि पड़ा कऽ पानिमे शरण नेने छी...।” नेताजी आँखि लाल-पीअर करैत बजला- “तूँ अपन प्राण बँचबैले ई गुमला हमरा सुनबै छेँ। तोरा बिनु मारनेहम नै छोड़बै।” बाजि नेताजी अनधुन लाठी जोंकक देहपर बरसाबए लगला। अधमरू भेल जोंक बाजल- “अदना सन गलतीपर हमरा सन अब्बल जीवकेँ जानसँ मारै छी आ अहाँ जे लाखक-लाख जनताक खून श्रेष्ठ मनुख भऽ पीबितो एलौं आ पीबितो छी से नीक लगैए।” जोंकक ई बात नेताजीकेँ आरो तरङा देलकैन। तखने जुमलासँ एक गोरे कहलकैन- “नेताजी, चुन लगबैक आदेश देल जाए, अपने खून बोकरए लगत।” चुनक नाओं सुनिते जोंक अपन प्राणक भीख मंगैत बाजल- “जेकर आधार बना अहाँ अपन जीवनक यात्रा करै छी यएह तँ हमहूँ छी। दया करू..! जातिपर दया करू..!” २ लक्ष्मी दास बापक धरम छोट-खुट्टी देखने झुझुआएब नइ, आदमी हम हण्ड्रेड परसेन्ट पक्का छी, तइमे एको परसेन्ट कम नइ, तँए एहेन धोखा ने हुअए से पहिनहि कहि देलौं अछि। किसानी जिनगी अछि तँए किसान बनि भगवानक भक्ति दिन-राति करै छी। भगवानो खुश रहै छैथ। अठारहम बरख दुरागमन केला भेल अछि, जइमे नअटा धिया-पुता अछि, मनुख कि कोनो अल्लू-भाँटा छी, जे तीनियेँ मासमे फड़ पकैड़ लेत। मनुखकेँ बुधि-विवेक होइ छै तँए ओ बच्चाक हिसाब जोड़ि लइए जे नअ मासक पछाइत बच्चाकेँ माइक दूधक खगता अन्नो पुड़ा सकैए, तैपर नअ मास पेटोमे तँ रहबे करत, तँए दुनू मिला कऽ भेल अठारह मास। दूटा काज भेल तँए तीन-तीन मास जबड़ा दऽ दियौ, चौबीस मास भेल। तइ हिसाबे अहाँ कहू जे हम पक्का छी आकि कच्चा? ओना पक्का बनबैमे भगवानो मदैत केलैन। ओ मदैत ई केलैन जे एकोटा धिया-पुताकेँ ने रोग-वियाधि लगा घिसियौलैन आने अछैते औरूदे केकरो प्राण लेलैन...। आब अहाँ पुछब- “एते धिया-पुता अछि, परिवार नियोजन किए ने करेलौं?” जहिना अहाँ पुछब जे परिवार नियोजन किए ने करा लेलौं तहिना हमहूँ ने कहब- “पैतालीस-पचासक उमेर अपनो दुनू परानीक लगिचाएले जाइए, तइले अनेरे कृत्रिम तरीका अपनाएब उचित हएत। जखन भगवानो दहिन छैथे जे किसानीमे ने कहियो मरहन्ना भेल आ ने कहियो लाही-चुट्टी लगल। किसान छी मनुखसँ लऽ कऽ माल-जाल, सुग्गा-परबा धरि पोसबो करै छी आ उपजेबो करै छी। हमरा कोन मतलब अछि अनकर राज-पाटसँ, जेते भार अछि से करै छी।” अहीं कहू जे मनुख सन धनक उपज रोकब नीक हएत? अच्छा छोड़ू ऐ बातकेँ। नबोटा धिया-पुताकेँ जहिना सिरियली जनम भेलै तहिना सिरियली स्कूलक बाट धड़बैत गेलौं। एकटा बी.ए.सँ आगू बढ़ि गेल बाँकी सभ गामक स्कूलसँ लऽ कऽ कौलेज तक धरियाएल अछि। तइसँ होइए ई जे ने एको मास नागा रहैए आ ने एको दिन, जइ दिन कागज-कलमसँ लऽ कऽ फीस-फासक खगता नइ रहैए। सरकारी कारोबार थोड़े छी जे कहियो छुट्टीए रहत तँ कहियो हाकिमे नइ! अपन जिनगीक बजट अछि। शिक्षा मदमे अनिवार्य खर्च अछि। जेठका बेटा शिक्षा मित्रक रूपमे साल भरिसँ काजरत भेल। एते दिन ने ओकरा खगता भेलै आ ने पुछलक, तइले हमरो दुख नहियेँ भेल। दुखो केना होइत अहाँकेँ हमर खगता नइ हुअए, से की कोनो अधला भेल, नीके भेल किने। मुदा काल्हि जेना ज्ञान भेलै तहिना चेतुआ आबि पुछलक- “बाबू, बापक धरम की भेल?” सभ दिन सोझ-मतिया आ सोझ-चलिया रहलौं, धरम-करमपर विचार नइ केने छेलौं। मुदा एक तँ बेटा पुछलक,तहूमे सरकारी शिक्षक सेहो छी। काल्हि दिन जे कोनो विद्यार्थी ओकरो पुछतै, तखन तँ ओहो ने वएह बात कहतै जे हम सीखेने रहबै। तखन? मन के केतबो पाछूसँ धक्का दिऐ जे भाय इज्जत डुबि रहल अछि। दुनियाँमे पिता छोड़ि दोसर ऐछे के जे एते नमहर हएत। ज्ञानक संग भक्त बना दुनियाँक बीच ठाढ़ करब नान्हिटा बात थोड़े भेल। जँ कियो छुच्छे ज्ञान देलैन आ भोगैक लूरिये ने देलैन, तखन केहेन भक्त हएब से तँ अपनो मन कहबे करैए। मुदा मन घुसकबे ने करए जे बेटाकेँ जवाब दैतिऐ...। मुदा लगले मन फेर धिकारलक- “रे बुड़िबक! कातिक मास जे ब्रह्म स्थानमे भागवतमे सुनने रहेँ, वएह बात दोहरा कऽ बाज ने।” फेर हुअए जे एक तँ कातिक मास, जइमे केते परिवारकेँ मासो दिन दुनू साँझ चुल्हि नइ जरैत, ओ मास जिनगीक पर्व मास छी। इतिहास दर्शन, जिनगीक ओहन बाटक घाट पार करैक मास छी जे मनुखकेँ मानव बनबैक मास छी। तैठाम एकटा शिक्षक बेटाकेँ केना किछु कहि फुसला देबइ। जब फुसलबैबला छल, फुसलैयो कऽ तँ जवान बना काज तक पहुँचाइए देलिऐ। आब अपने एतबो ने बुझतै जे अपनो बिआह-दान भेल, बाल-बच्चा हएत। किछु बात एहेन अछि जे बातेसँ लोक बूझि जाइए, मुदा सभटा तेहने अछि सेहो तँ नहियेँ अछि। ओकरा तँ मथनीमे मोहैन चला मथि कऽ निकालऽ पड़ै छै...। सोचलौं जे जँ बेटा बनि पुछने हएत तँ किए ने पण्डित काकाबला बात दोहरा कऽ कहि दिऐ। खाली एतबे ने बेसी कहए पड़त जे बौआ पण्डित कक्काक वचन छी, हुनके बचपनक अनुसार पोसि-पालि पूछ करै जोकर[1] ने बना देलिऐ। मुदा लगले मनमे सुतरल। कहलिऐ- “बौआ, सभ प्रश्न सभकाल ने पुछले जाइए आ ने ओकर उत्तरे देब उचित होइए। तँए साँझू पहर जखन निचेन हएब तखन नीक जेना हम तेना बुझा देबह, जेना बापक धरम होइ छै।” ◌ [1] पितासँ पुछै जोकर ३ ललन कुमार कामत बाबाक लोटा जेठक दुपहरियाक समए, टहटहाएत रौद, उपर ताकैते ऑंखि चोन्हराइत रहिन। कछुआ बाबा दलानपर काठक खुर्शिपर बैसल छथिन्ह आ गामक उफॉंइट नबतुरिया सभकेँ बिखनि-बिखनिक गारि पैर रहल छिथन्ह। गामक दु-चारिटा छौड़ोसभ मारिते बदमाश छेलैन, कछुआबाबाकेँ देखैते इत्यादि तरहक अमर्यादित बात बाइज ‘झामलाल-बुड़बा घाम किए चुबैछ?’, ‘बाबा झल कटेलहक?’, ‘बाबा ढे़का खसलऽ, ढेका खोंसऽ’, ‘चेशमामे भुड़ छै।’ इत्यादि तरहक बातसँ कछुआबाबाकेँ पिनकाबैत रहैए आ माजा लुटैत रहैए। मजाकक पात्र बनि, कछुआेबाबा, अकट-बकट बाजैत रहै छथिन्ह। कछुआबाबाक नअ बर्खक पोता, बिरखा सेहो वएह संगतक रिझल-खिझल शैतानक जरि रहिन, बाबाक फुलही लोटामे आगि भरिकेँ अंगनाक ओसािरपर बैस स्कूलक पोसाकमे आइरन करि रहल छल, ताहि समए कछुआबाबाकेँ जोरसँ मैदान लागि गेल। कछुआबाबाक ऑंख कमजोर रहिन, अपन झलफलाइत नजैरसँ लोटा तकैत दुआरि परसँ ऑंगन एलनि, चारू दिशा नजरि घुमेलखिन मुदा कतौ लोटापर नजरि नै पड़ल। कछुआबाबाक आदैत छेलनि अपन जरूरीक चीज-बीत अपने संग राखैक, मुदा बिरखाक शैतानीसँ अवगत छेलैन, हिनका बुझना गेल जे बिरखे हुनक चीत-बीतमे हाथ लगाबैत अछि। घुरि-फिरकेँ बाबाक नजरि बिरखापर अटकल, जे कछुआबाबाक लोटामे आगि भरिकेँ कपराक आइरन करैत रहिन। बाबा चिकैरकेँ पुछलखिन- “के छी बिरखाऽऽ? एऽइह बाजे किए नै छै, छिनरीक सॉंए, मँुहक मालगुजारी लागैछौ?” बिरखा उचैककेँ बाजल- “की भेलऽ हौ? देखै नै छहक, काम करैछी? सदिखन बड़-बड़, चड़-चड़ करैत रहैत अछि।” कछुआबाबा- “ऊँऽ हँ! बोलीमे तेना एकोरति लैशे नै अछि। पुछै छियौ हमर लोटा देखलीहीं केतौ?” बिरखा लोटा परसँ हाथ ढ़ील्ला करैत बाजल- “कोए तोहर लोटा खेने नै जाइ छऽ। रूकि जा कनीए कला भऽ गेलै।” खिसियाएल कछुआबाबा छड़ी उपर तानि जोड़सँ बाजलखिन- “देखै छिही ठेंगा, ठॉंएसिन माथपर बजारि देबो? सब खेल-बेल तोहर बाहर करि देबो। हमरा पेखाना जोड़सँ लागल अछि आ तूँ मजाक करै छी?” बिरखाक पोसाकक आइरन पुरा नै भेल रहिन मुदा इहो बुझैत रहिन जे आब लोटा नै देब तँ मारि खाए परत। बिरखा अपन अंगाक आइरन केनाइ छाेरि, भरल लोटा आगि बाबाक हाथमे धराए देलक। “लाए, तोहर प्राण किए छुटल जाए छऽ?” एक दिश जेठक तपैत गर्मी, तैपरसँ आगिसँ भरल लोटा, बाबाक हाथमे परैते सटसीन बैस गेल। कछुआबाबा जोरसँ हाथ झमारैत लोटा फेकलखिन, आ धुँसि सीन जमीनपर खसल, छरपटाए लागल। कछुआबाबाक चेशमा हाइ पाबरक रहिन सेहो ऑंखिसँ फेका गेल आ दू टुकरी भऽ गेल। पाकल हाथक लहैर आ तमशएल मन, कछुआबाबा छड़ी उठा दौरल बारैले, मुदा बिरखा माथपर पैर लेने नऽ दू एगारह भऽ गेल। कछुआबाबा घोलाइत रहल। कनीए समेक पछाति बाबाक मन हलुक भेल, तब मैदान कैर एलनि, हाथ-मुँह धोए, दलानक नींचा दरबज्जापर छहारिमे बैसल रहिन। तखैने घुटरा, मनुआ आ मखना आएल आ कछुआबाबाक मजाक उड़ाबे लागल... घुटरा- “चेश्मा कि भेलह बाबा हौ?” कछुआबाबा- “चेश्माकेँ खेलकै हँ बिरखा, ई छौरा हमरा जिए नै देत! सभ पराणी मारैमे लागल अछि।” मनुआ- “बाबा, धोतीमे कि लागल छऽ हौ? खोखना बाजैत रहै, जे कछुआबाबा कपड़े-बस्त्रमे पैखाना कऽ देलकै!” ई बात सुनैते मातैर कछुआबाबा तमताए उठल आ माइए-बहिने उकटे लागल। इहो चारूगाोटे इएह चाहैत रहिन जे बुढबा गैर दिए आ सभगोटे माजा लुटी। तखैने मखनाकेँ एकटा अटपटाएल बात फुराएल आ कछुआबाबाक पछारि जाएकेँ जोड़सँ बाजल- “भागऽ बाबा भागऽ, पाछामे नेंगड़ा सड़हा आबि रहल छ!” घुटरा, मनुआ सेहो हँ मे हँ मिलाबैत बाइज उठल- “हँ हौ बाबा भागऽ, फैर हेऽ हुरर्रऽ हुरर्रऽ हे!” कछुआबाबाकेँ बुझना गेल साइत ठीके सढहा आइब गेल, हाथमे लोटा उठेलक आ भॉंजे लागल। कछुआबाबा- “तुहेसभ सढहाकेँ रेबाने एलँ कतौ सँ। फैर हेऽ भागले कि नै? हुल्लेऽ... हुल्लेऽ...” मखना कछुआबाबाक पछा जाएकेँ जोड़सँ चिकैर बाजल- “बाबा तोरे पाछारिमे छऽ हौ! भागऽ नऽ!” कछुआबाबा पछा उलटिकेँ फुलहीक लोटा जोड़सँ फेकलक... लोटा सिधा मखनाक मँुहपर जाए थप्पसिन लागल, धुस्सऽ सिन मखना जमीनपर खसल आ तिलमिलाए लागल। मखनाकेँ ऑंखिक आगु अन्हार भऽ गेल आ अधरातिक तारा देखाए लागल। गामक आरो किछु लोकसभ जमा भेल अा बाजे लागल- “नीके भेलौ तोरा सभक संग। जे किओ बुढ-पुरानसँ मसखड़ी करत तकरा मजाकमे एहने सुजाक हेबक चाही।” ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१. सृजन शेखर 'अज्ञेय' हमर गाम ३.२.महेश डखरामी- रंग रास ३.३. जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- चारि टा गजल ३.४. ओम प्रकाश झा- गजल सृजन शेखर 'अज्ञेय' हमर गाम खुजल अइंख बंद करी तऽ छुच्छ मोन में सजि जाययै रंग जमि जाययै महफ़िल आ याइद क बड़ ज़ोर पूरबा चलैये हमर गाम हमरा संगे रहैये आकाश जतय अखनहुँ खुजल छै नै बान्हल छै पूरबा-पछबा देखाय पड़ैत अिछ राइत तरेगन भोर क सुरूज आ साँझ क चान पीपरक गाछ भगजोगनी चमकैये हमर गाम हमरा संगे रहैये चीन्है जतय छै सब कियो सब केर भोर में झगड़ा आ साँझ धरि मेल बेमतलब बात पर टोल अनघोल कहै सब एक दोसर के दूधक धोल हित आ दुश्मन जतऽ संगे बसैये हमर गाम हमरा संगे रहैये निर्धन तऽ छै मुदा नीरस कियो नय गुणवान भले नय छै आन कियो नय मीठ छै कखनो तऽ लागय बड़ तीत गाम छै कानब गाम छै गीत गूँज जकर हिरदय में गूंजिते रहैये हमर गाम हमरा संगे रहैये पाबनि-तिहारक हुलास एतय अछि संगी-साथी क संग आ गप्प एतय जीवन-मरणक शोक आ नोर भरि मोन कानय के फ़ुरसत जतय मोनक पर्दा पर रील जेना घूमैये हमर गाम हमरा संगे रहैये हमर गाम के समर्पित हमर अइंखक दू बूँद नोर ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। महेश डखरामी -----रंग रास------
☆ खींचल खूँट कमल उजास उर उत्तान मन मदन वास ☆ सिहकल समीर मन अधीर पकरल डेन रगड़ल अबीर ☆ भावे भरल प्रीति पिचकारी भीजल अङ्ग तीतल साड़ी ☆ रङ्ग लालम रङ्गल गाल माथहि टीका शोभन भाल ☆ मदनक मान निरंतर नेह सकल अर्पण सुधा सिनेह ☆ सजन सुजान बनल महान मन मनमथ वेधन पचवान ☆ मनक वाञ्छा किछु विशेष अंकम गहि गहि अधर श्लेष ☆ सकल प्रकृति राधहि रूप पुरुख प्रवृति कृष्ण स्वरूप ☆ ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’ चारि टा गजल 1. मात्रा-क्रम : 2222-21-12 अमरित वचनक दान करय सभ सबहक सम्मान करय हम नै कोनो काज करी सभ हम्मर भगवान करय छठि महरानी केर कृपा आ किछु चौठी-चान करय बम खसलै पेशावरमे छट-पट हम्मर जान करय अप्पन छल से भेल अलग सेवा-वारी आन करय किछु नै करता पंडितजी खेती आ खरिहान करय 2. मात्रा-क्रम : 2212-1222 कागज़ कलम धरौलनि ओ अपने कथा पढौलनि ओ सबहक घरे-घरे गेला प्रेमक दिया जरौलनि ओ खुरपी बनल कलम हुनकर गाछो कते लगौलनि ओ भूखल बहुत-बहुत रहला हड्डी अपन गलौलनि ओ मोजर कियो कहाँ देलनि उधबा कते उठौलनि ओ अपने जतय-जतय गेला सिक्का अपन चलौलनि ओ 3. मात्रा-क्रम : 21-12-2222 सत्य-कथा बजतै क्यो नै दोख अपन कहतै क्यो नै यैह चलन छै दुनियामे दोसरले’ मरतै क्यो नै तानि चलै घोघो सदिखन लाज मुदा करतै क्यो नै जन्म-मरण जे नै जनलक कष्ट तकर हरतै क्यो नै साँझ पड़त आ सभ जायत देह वला रहतै क्यो नै नीक लगै सभकें सदिखन बात तखन कटतै क्यो नै 4. मात्रा-क्रम : 2222222222 अपनामे तकलौं प्रिये हम तोरा सपनामे तकलौं प्रिये हम तोरा गाछीमे तकलौं पोखरिमे तकलौं अङनामे तकलौं प्रिये हम तोरा साडीमे तकलौं चूड़ीमे तकलौं गहनामे तकलौं प्रिये हम तोरा काशीमे तकलौं मथुरामे तकलौं सतनामे तकलौं प्रिये हम तोरा दिल्लीमे तकलौं मुंबइमे तकलौं पटनामे तकलौं प्रिये हम तोरा आखरमे तकलौं शब्दहुमे तकलौं रचनामे तकलौं प्रिये हम तोरा ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। ओम प्रकाश झा गजल ताकै छी, अपन पता चाही जिनगी जे कहै, कथा चाही हम छी खोलने करेजाकेँ छै गुमकी, कनी हवा चाही नै चाही जगतसँ किछु हमरा हमरा बस सभक दुआ चाही लूटलकै मजा बहुत सब यौ हमरो आब ई मजा चाही "ओम"क छै करेज ई पजरल नेहक एकरा सजा चाही मात्राक्रम 2-2-2-1, 2-1-2-2, 2 प्रत्येक पाँतिमे एक बेर ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह नूतन अंक बालानां कृते विदेहमैथिलीमानकभाषाआमैथिलीभाषासम्पादनपाठ्यक्रम भाषापाक डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह” किछु बाल कविता सूरा आ फाड़ा (बाल कविता) गहूमक संग देखू “सूरा” पिसाइत छै ।*१ फोकला बना कऽ गहूम खा जाइत छै ।। देखियौ, ई जीव केहेन असञ्जाइत छै ! एकरा पानि ने मिसियो सोहाइत छै ।।*२ गहूमहि टा नञि, आनहु जजाइत छै ।*३ जेहने अन्न रूचए, तेहने प्रजाइत छै ।।*३*४ चाउर, मकई सभ सेहो खा जाइत छै । धानक सूराकेँ उड़बा लए पाँइख छै ।।*३ धानक सूरा - वयस्क भऽ जाइत छै । पाँइख जन्मै छै “फाड़ा” कहाइत छै ।।*३*५ उपजल अन्नक करइत बड़ नाश छै । भेटैछ दबाइ आब तेँ किछु उसास छै ।।*६ संकेत आ किछु रोचक तथ्य - *१ - मैथिलीक ई एकटा पुरान कहबी थिक जाहिमे सूरा आ ओकर बासस्थानक चर्च अछि । *२ - “सूरा छेँ जे पानि नञि पिबैत छेँ” − मैथिलीक दोसर पुरान कहबी । वास्तवमे सूरा कहियो पानि नञि पिबैत अछि । शरीरमे भोजनक चयापचय क्रियासँ उत्पन्न पानि (METABOLIC WATER) सूराक जीवन निर्वाहक लेल पर्याप्त होइत अछि । *३ - बहुत लोकसभ लिखल वा टंकित मैथिलीक उच्चारण वा पाठ मैथिली जेकाँ नञि कऽ कऽ हिन्दी जेकाँ करैत छथि । तेँ किछु शब्द सभक मैथिली वर्तनी वा उच्चार स्वरूपकेँ उपरोक्त कवितामे स्थान देल गेल अछि । एहि शब्दसभक लिखबाक सही स्वरूप निम्न अछि - क्र॰सं॰ लिखबाक सही स्वरूप मैथिली उच्चार वा वर्तनी १ जजाति जजाइत २ प्रजाति प्रजाइत ३ पाँखि पाँइख नियमानुसार उपरोक्त सब्द सभक सही स्वरूपहि लिखल जएबाक चाही आ पढ़बा काल उच्चार उपरोक्त प्रकारेँ होयबाक चाही । पर पाठक लोकनिक हिन्दीपरक उच्चार कविताक अभिप्रेत उच्चारकेँ विकृत कऽ सकैत छल तेँ एहि कवितामे सीधा अभिप्रेत उच्चारकेँ स्थान देल गेल अछि । *४ - विभिन्न प्रकारक अन्नमे सूराक विभिन्न प्रकार (प्रजाति) लागैत अछि । *५ - धानमे लागए बला सूराकेँ वयस्कावस्थामे पाँखि जनमि जाइत अछि आ तेँ ओ उड़ि सकैत अछि । एहि उड़ए बला सूराकेँ मैथिलीमे फारा (फाड़ा) कहल जाइत अछि । · फारा या फाड़ा - धानमे लागए बला सूरा । · फाँरा या फाँड़ा - अँचार बनएबाक लेल काटल आमक (प्रायः लम्बवत काटल गेल) टुकड़ी । *६ - उपजाक भण्डारण काल ई अन्नक बहुत नाश करैत अछि । यद्यपि एखन सूरा मारबाक बहुत रास दबाई (गोली आ पाउडर) बजारमे उपलब्ध छै जाहिसँ किछु उसास भेल छै तथापि एखनहु ओ उपजल अन्नक बहुत नाश करैत अछि । बगेरी (बाल कविता) पोखरिक भीड़ ई, एम्हर घाट । ओम्हर नञि छी आबरजात ।। ओहि भीड़ पर जंगल - झाड़ । देखू ! पानिमे लटकल गाछ ।।*१ ताहि गाछ पर अजगुत खोंता । कोना बनओलक, होइछ छगुन्ता ।।*२ खोंता डाढ़िसँ लटकि रहल छै । बीच फूलल, मूँह गोल ओकर छै ।। ओहिमे सँ उड़लै जे चिड़ै । बगरा सनि देखबामे छै ।। किछु केर माथ छै सुन्नर पीयर । पर दोसर किछु, नञि छै पीयर ।।*३ झुण्डक - झुण्ड आबै छै, देखू ! खेतहि - खेत घुमै छै, देखू !! जखनि झुण्ड बड़ पैघ रहै छै । फसिलक बड़ नोकशान करै छै ।।*४ चिड़ै-बझौआ जाल बिछओलक । पकड़ि बगेरी पिञ्जरा धएलक ।।*५ संकेत आ किछु रोचक तथ्य - *१ - एहन स्थान जाहि ठाम मनुक्खक पहुँच सुलभ नञि हो (प्रायः कोनहु जलाशयक परित्यक्त भीड़ परक कोनहु पैघ गाछ पर) ई चिड़ै अपन खोंता लगबैत अछि । *२ - एक खोंता विशिष्ट प्रकारक होइत अछि । खोंताक उपरुका शिर्ष गाछक कोनहु डाढ़िसँ बान्हल रहैत अछि आ निचलुका भाग हावामे झुलैत रहैत अछि । खोंताक बीचक भाग फुलल रहैत अछि जाहिमे चिड़ै केर अएबा - जएबा लेल गोलाकार मूँह बनल रहैछ । प्रायः एक गाछ पर कतेकहु एहि तरहक खोंता रहैत अछि । *३ - बगेरी देखबामे बहुत किछु बगरा सनि लागैत अछि । बरखाक समयमे पुरुष बगेरीक माथक रंग टुहटुह पीयर भऽ जाइत अछि जखनि कि स्त्री बगेरीमे से नञि होइत अछि । *४ - ई चिड़ै खेतमे अन्नक दाना चुनि कऽ अपन पेट भरैत अछि । तेँ बहुत अधिक संख्यामे भेला पर खेतक जजातिकेँ नोकशान सेहो पहुँचबैत अछि । *५ - चिड़ै बझओनिहार लोकनि एकरा जालमे बझाए बजारमे बेचैत छथि । किछु लोक पिञ्जरामे पोषबाक लेल तँऽ किछु लोक एकर मांसु खएबाक लेल एहि चिड़ैकेँ किनैत छथि । टिटही (बाल कविता) टि - टि - टि - टि बाजए टिटही । एम्हर - ओम्हर भागए टिटही ।। माथ - वक्ष - गर्दनि छै कारी । दुहु दिशि उज्जर छै एक धारी ।। टाङ्गक रंग छै टुहटुह पीयर । नाङ्गरि कारी, लोलहु पीयर ।। शेष शरीर पिरौंछे - भूरा । आँखिक परितः लाल कि पिउरा ।।*१ ओना तँऽ बहुतहु छैक प्रकार । विविध रूप ओ रंग - आकार ।।*२ अपना दिशि जे सुलभ भेटैछ । बेसीतर एहेनहि रहैछ ।।*३ कहबी - “टिटही टेकल पर्वत” । कारण चिड़ै ई बहुतहि सजग ।।*४ कनिञो खतरा भेल आभास । उड़ि भागल टिटही ओहि चास ।। जाइत - जाइत ओ करैछ सचेत । टि - टि - टि खतरा - संकेत ।।*५ संकेत आ किछु रोचक तथ्य - *१ - परितः = चारू कात । आँखिक चारू कात आ गलचर्म लाल अथवा पीयर होइत अछि । *२ - टिटही शब्दसँ बहुत व्यापक चिड़ैसमूहक बोध होइत अछि । एहि शब्दसँ अंग्रेजीक LAPWING आ SANDPIPER समूहक चिड़ैसभक बोध होइत अछि । *३ - एहि कवितामे अपना दिशि बेसी भेटए बला टिटहीक वर्णन अछि जे कि LAPWING समूहक सदस्य अछि । *४ *५ - अपना दिशि कहबी छै - “टिटही टेकल पर्वत” । लोक कहैत छै जे टिटही अपन पएर उपर कऽ कऽ सुतैत अछि आ ओकरा होइत छै कि ओ अपना पएरसँ पर्वतकेँ उठओने अछि । पर ई बात बस सत्य नञि । वास्तवमे टिटही बहुत सजग चिड़ै अछि । कोनहु खतरा केर आभास भेला पर ओ तुरन्त ओहि ठामसँ उड़ि भागैत अछि आ संगहि टि-टि-टि-टि आवाज निकालि आस - पासक आनहु चिड़ैसभकेँ खतरासँ सावधान कऽ दैत अछि । सम्भवतः तेँ उपरोक्त कहबी बनल होयत । किताबी कीड़ा (बाल कविता) घूसल रहैछ किताबहिमे, ओ तँऽ छै “किताबी कीड़ा” ।*१ एहिना नञि ई कहबी बनलै, जञो कहबी, तँऽ कीड़ा ।।*२ बहुतहि दिनसँ राखल जे, पुरना किताब जञो फोलब । फोलितहि उज्जर छोट-क्षिण, कीड़ाकेँ भागैत देखब ।। माछक छी आकार ओकर, माछहि सनि ध्रुव दुहु नोकगर । बीचमे छी फूलल - फूलल, पएरक लगाति छै चौड़गर ।।*३ संकेत आ किछु रोचक तथ्य - *१ - मैथिलीक एक टा पुरान कहबी । *२ - ओना तँऽ कतेकहु तरहक कीड़ा किताबकेँ नोकशान पहुँचबैत अछि । पर ई विशिष्ट कीड़ा किताबी कीड़ाक नामेँ प्रशिद्ध अछि । *३ - एहि कीड़ाक देह कतेको खण्डमे विभक्त रहैत अछि आ जाहि खण्डसँ खोकर पएर जुड़ल रहैत अछि से सबसँ बेसी चौड़गर होइत अछि । ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)2004-16. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽलेखकक नाम नैअछि ततऽसंपादकाधीन।विदेह- प्रथममैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)ggajendra@videha.comकेँमेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि।रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचयआ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेता, से आशा करै छी। रचनाक अंतमेटाइप रहए, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहलअछि।एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै। ऐ ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मीठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-16सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटारचनाआ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाकअनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतुggajendra@videha.co.inपर संपर्क करू। ऐ साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरीआ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल।५ जुलाई २००४ केँhttp://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ”जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सिद्धिरस्तु विदे हwww.videha.co.inविदेहप्रथम मैथिलीपाक्षिक ई पत्रिकाwww.videha.comVideha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'विदेह' १९८ म अंक १५ मार्च २०१६ (वर्ष ९ मास ९९ अंक १९८) मानुषीमिह संस्कृताम्ISSN 2229-547X VIDEHA
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: ..... हम कहय area छी ........ रछथि।| . छि आ नव-पुरान dete उपमा सभ दिन as देल जाइत B, आओर चानेरँ देल SRS दर्ज करा... जाइत रहतै, मुदा गजलक Udo उपमा त' स्वर्ग सुन्दरी मेनका सेहो नजि ण विद्यार्थी अपन... देल जा सकैत अछि | आ ने एहिकैँ कोनो भाषामे area जा सकैत अछि | गजल नात्र रसानुभव eae गजल अछि चाहे ओ कोनो भाषामे कहल जाय | गजल काव्यक एक विधा गा, समाजमे व्याप्त... अछि | कमरोँ कम आखरमे पैघ सँँ पैघ बात कहबाक सामर्थ्य waa अछि | गजल LST उत्कृष्ट... भावाभिव्यक्तिक एकटा ses सशक्त माध्यम अछि । कम आखरमे कल्पना, T ओकर संस्कृति, संवेदना, प्रेम, सुख-दुःख, करूणा, कोमल भावना Gs आखमे बान्हबाक दे 'विद्यार्थी' जीक aT क्षमता छैक गजलमे | गजलक विशेषता रहल अछि छन्दक माध्यम इत अछि | मैथिली संरचना | Gt छन्द aS त' गजलक कल्पना नजि कयल जा ada अछि। वि गोष्ठीमे हिनक अपनेक हाथमे हमर ई पहिल पोथी अछि, cas सम गजल सरल वार्णिक way aa हिनक गजल कहल गेल अछि | छोटछीन चर्चा गजल आ UE छन्द पर ............ fae गजलक मिसरा : — शे'रक एक पाँतिकैँ मिसरा कहल जाइत अछि, आ समान i नव रचनाकारकँ तुकबन्दीके BIE सन प्रयास _ _ . दूटा मिसराक (पाँतिक) मिलाक' शे'र बनैत छै | हि नजि सकलहूँ' गजल : — oat कम पाँचटा शेर जे एक तुकान्तक मने एक प्वमाविके pe Ss रदीफ-काफियाक, कथ्य साहित्य de STAR गजलक सभ तत्वक संग एक ठाम राखल जाय त्त' गजल Re पोथी किनि | बनैतछै। a. प्रफगत वा कोनो .......... मंतला : — गजलक पहिल शे'र जकर दुनू पाँतिमे रदीफ आ काफिया रहय PR सुझाव द' a : जाइत B | . ._..... रदीफ :- गजलक पहिल शे'र मने मतला बाला शे'रकैँ अन्तिम भागक ओहि read कहल जाइत छै, जे दुनू मिसरा मे (eA) समान woe होइत B | पा ...... उदाहरणार्थ एकटा . मतला :- चहुँदिस लगैए अन्हार सनक समिति, मधुबनी नजि Gat waa चिन्हार सनक एहि शेरमे 'सनक' रदीफ अछि, ई मतला बाला SH दुनू पाँतिमे आ पूरा
\ ey ¥= ‘Wan सौजन्य - विकिपीडिया पब्लिक डॉमेन अंग्रेजी - SILVER FISH जैववैज्ञा० नाम - Lepisma saccharina ete - संस्कृत भाषामे आयल हरेक नाँओ या पर्यायी नाँओ स्वतः मैथिली भाषामे पर्यायी नाओ ars जाइत अछि - तत्सम स्वस्पमे)
- he | apte जकरा देखि हमर हृदय ey भरि गेल आ हमर आन्तरिक ar आ हम कृतज्ञ छी अपन पूजनीय पिता-श्री राम पुकार मंडल एवं पूजनीया माता Sele’ देलक, हमर कवि हृदयकैँ am देलक, ges अनायास हमर श्रीमती धनेश्वरी देवी, धर्मपत्नी - श्रीमती गिरिजा नारायण, अनुज - चन्द्र संवेदना, प्रेम, हर्ष-विषाद, क्रोध करूणा, कोमल भावना आ कल्पना कविता, ART जे सतत हमरा काव्यकर्ममे प्रोत्साहित्स करैत रहला अछि | हम कृतज्ञ गीत, गजल af हमर लेखनीरँ बंहराय लागल | | छी अपन मामा श्री शैनी प्रसाद मंडल (प्रधानाध्यापक)क जिनका सान्निध्यमे fe | Te हमरा. चित्रकला आओर साहित्य दुनूमे रूचि रहल, शिक्षा ग्रहण कयल | नवम-दशम वर्गमे साहित्य विषयमे सबक भेटैत छल ओकर जबाव हम कवित्व साहित्यिक यात्राक उमर-खाभर बाट होइत आइ हम एहि पोथी धरि भाषामे लिखिक' आनैत wag | साहित्यक शिक्षक आ कवि sh गणेश प्रसाद... |... पहुचलहुँ अछि । एहिमे ऋषि वशिष्ठक सर्वाधिक योगदान SUNS i TERY अपन सानिध्यमे राखि हमरा एहि विधासँ परिचय करौलनि | नान्हियैंटासं सारायाहिक NSIS TA ATEN] TENE eae STINET रखना तुकबन्दी करैत रही, मुदा हमर पहिल रचना हिन्दीमे जीवाकान्त जी (सम्पादक) WAh पुस्तकाकार देवामे देबामे हिनक बेसी योगदान भेटल | om 3 पाक्षिक समाचार पत्र पक्ष-दर-पक्ष 2099 मे छपलनि। “ge FRG आलोक GAN. STE REA IR AGB आ मैथिलीक पहिल Ser रचना ऋषि वशिष्ठ हैमासिक पत्रिका मिथिला सृजनक आ अमित मंडलमुंगेर)क गुण जनिकर सहयोगक बिना Gel पोथीक प्रकाशन अप्रील-मई 2099 कँँ पहिल छापमे छपलनि | एहि पत्रिकासँ हमर साहित्यिक संभव नजि छल | SH ऋणी छी मैथिली सहित्यिक एवं सांस्कृतिक समितिक जे | FT शुरू भेल | एकरा बाद बरमहल कय गोट पत्र-पत्रिकामे स्थान भेटैत अपन प्रकाशनक लेल हमर एहि पोथी 'जे कहि नजि सकलहूँ' कैँ चयनित | रहल, मधुबनीक समस्त साहित्यिक मंचक संगहि, जयनगर आ जनकरर कयलनि | सुधी पाठकवृन्दरँ अनुरोध जे अपन अमूल्य सुझावराँ अवगत करयबाक | (निपाल)क मैथिली साहित्यिक मंच सेहो Fea, मधुबनीमे विशेष wai डा0 | कॉल करी | कुलघारी सिंह, प्रो. योगानन्द 'सुधीर', श्री बामदेव झा, श्री हेमचन्द्र झा, डॉ0 नरेश मोहन झा, प्रो0 सर्व नारायण मिश्र, श्री सुभाष चन्द्र 'स्नेही', श्री महाकान्त ठाकुर, Wo गंगाराम झा , डॉ. जगन्नाथ झा, डॉ. सुरेन्द्र लाल दास, श्री बेचन झा, श्री जे fos हम लिखैत छी 'दीपक' i हृदयक बात अछि | | जीवछ ठाकुर आदिक आर्शीवाद प्राप्त भेल | दिलीप कुमार झा हमर साहित्यिक ने कोना गजल, कविता, eet यानी इशारा दाद UAH एकटा नव मोड़ देलनि | | मधुबनी आ AAR बाहरक समस्त साहित्यकार एवं साहित्यानुरागी | q | लोकनिक हम आभारी छी जे हमर पठित vans सुनलनि आ अपन अनमोल ं ॥ मन्तव्य a" हमर काव्यगत कमीकँ दूर केलनि | आभारी छी श्री प्रजापति ठाकुर -ददीप नारायण “विद्यार्थी” | जी जे छोट भाइ जकाँ मानलनि आ सदिखन मदतिकरैत रहलाह | संगहि अनिल दिनांक ०४ फरवरी २०१४ | ) ठाकुर, डॉ0 विनय विश्वबन्धु, अमित मिश्र, प्रीतम कु0 निषाद, डॉ. रानी srt ce एस सतत उत्साहित होइत Wes |
x, 4 a = ३ 3 WZ, a * IWS मेथिली - बगेरी हिन्दी - बया संस्कृत - पीतमुण्ड wafasa अंग्रेजी - BAYA / BAYA WEAVER / WEAVER BIRD जैववैज्ञा० नाम - Baya philippinus (नोट - संस्कृत भाषामे आयल हरेक नाँओ या पर्यायी नाँओ स्वतः मैथिली भाषामे पर्यायी नाओ Sts जाइत अछि - तत्सम स्वरूपमे)
एररूररुण/ Te ~~ =o oF er Pes Ske ra Be भर मी RS अर weet dee Sis «अर उस aaa te hy AED py" कै श्र हा a a, A, < \ $ कै मैथिली - टिटही (विशेष ws Lapwincs केर अर्थमि प्रयुक्त) feodt - टिटहरी (विशेष ws sanppirers केर अर्थमि प्रयुक्त) संस्कृत - fetes, कोयष्टि, यष्टिक अंग्रेजी - LAPWINGS & SANDPIPERS जैंववैज्ञा० नाम - LAPWING - Vanellus spp. (लाल गलचर्म - V.indicus, पीयर गलचर्म - V. malabaricus) SANDPIPER - स्कॉलॉपिंसाइडी गण (Order - SCOLOPACIDAE) केर २० वंशक (Genera) सब जाति (Species) हनौट- संस्कृत भाषामे आयल हरेक नाँओ या पर्यायी नाँओ स्वतः मैथिली आषामें पर्यायी नाँओ ats जाइत अछि - तत्सम स्वरूपमे)
wR iON x a = welt sae ae ee ae, ) . ae ee foe. : SS ot A a Pie aie oe 8 ee Bis 6; ba oa ae —— 2 ee. — = :... नहरिक पं लत SS = = = बगेरीक
: a : J NI साभार सौँजन्य - विकिपीडिया पब्लिक डॉमेन मैथिली - BA (गडूमक, धानक, चाउरक, Hes Wz आदि) WRI या फाड़ा (धानक वयस्क पाँखियुक्त AWD हिल्दी - घुन (गेहूँ का, अनाज का) संस्कृत - ...................८. अंग्रेजी - GRANARY WEEVIL (WHEAT-, RICE-, MAIZE-, GRAIN-) जैववैज्ञा० नाम - Sitophilus granarius (गढूमक सूखा) (उपरुका चित्रमे) Sitophilus zeamais (मकई केर सूखा) Sitophilus oryzae (चाउर आ धालक सूखा आ फाड़ा) नोट - संस्कृत भाषामे आयल हरेक नाँओ या पर्यायी नाँओ स्वतः मैथिली भाषामे पर्यायी नाँओ as जाइत अछि - तत्सम स्वरूपमे)
@ = Chrome File Edit View History Bookmarks People Window Help तार @e = $0 की Bus. था) Frit005AM Q वह semis 8 https://mail.google.com/mail/u/0/#inbox/54056f3ccd3be9 | 8 https://mail.google.com/mail/u/O/#inbox/I54056f3ccd3b09 TT @ 3] = ee ७ ७ 6 es g Ss ie a & @ is = = ze कल Google हद ८- mn 6 है? (no subject) inbox x eo ... ‘Ad to circles Inbox [,79) हु Deepnarayan vidyarthi <deepnarayanvidyarthia¢@gmail.com> ‘Apr ह (4 days ago) a कि! a. ‘Starred to me |=) Setval पहिने RA मे गजल लिखेंत रही। हमर eee रचना सेहो हिन्दी मे गजल अछि। MRA मे डेग cet Fg दिनक बाद अनपिन्हार आखरक ae soe हमर रचना क्रम a रहल।ई बात हम पहिनहूँ कहने छियेंक। रहले बात सरल वार्णिक छंदक नामकरणक त हम ठीके ई Drafts अनचिन्हार आखर मे पहिल बेर देखने रही। अछि। हमरा से ई बात लेखकीय में लिखब छुटि गेल छल। हम पोथीक दोसर संस्करण मे एहिकें समाहित करब। ई हमर जीवनक पहिल पोथी अछि, फरवरी 200 ase ई पोथी छपल रहैक, ई मैं बुझियेक कतय कोन चिज लिखल जयबाक चाही। चोरी, ५०७ नक़ल आ क्रेडिट तीनू अलग अलग चीज st क्रेडि में नाम देव छुटल अछि, से अबूझ मे। आव बुझाइए जे किछु चीजक गलत तरह वर्णन सेहो हमर द्वारा भेल अछि एहु समकें सुधारि अगिला संस्करण मे लिखब। (0 Friends (66) re P- छा BT | cick here to Reply or Forward ‘http:/Awww.videha.co.in/ «© Jaydeep Sarangi 40.32 68 (68%) of 5 GB used Progam Polties Manage Last account activity: 0 hours ago ® Kusum Thakur Powered by Google™ ५: TO nous age ® Ram Bharos Kapari ® Umesh Mandal ® Ashish Anchinhar ® astha thakur ® Jyoti Chaudhary ® rabi pathak ® Rajesh Ranjan ® SADRE ALAM GA... ® Satyanand Nirupam ® Shefalika Verma 7 LTS SS On BE TO@? COT UE 28e 8 2® 998%) Ok * है , =) ey write 7 : GO “REOCKRE TO® oh BB ae ze S g हल है 2०6 डे
| गजलमे सभ शे'रक दोसर मिसरामे (पौँतिमे) होयबाक चाही | हि ; | काफिया : gard काफिया कहल जाइत B, tated पहिलुका शब्दक fa srona gg Pe लिपि पर piste as a तुकान्त जे समान वर्ण हो आ ओहि at पहिने बाजयमे समान ध्वनि बुझना de कहबै त' गजलक सभ शे'रक सभ मिसरामे (पौँतिमें) १३टा वर्ण होयबाक = । जायत त' ओ काफिया भेल | काफिया शे'रक चरमोत्कर्ष अछि | शाइरक विचार eek कय tle गजलकार कहैत छथि, गजल HAG एकटा नव विधा । काफियेक आगू--पाछू घुमैत रहक चाही | इहो रदीफे GT सभ ALS (मतला अछि | मुदा दुर्गा सप्तशती क पाँचम emer मंत्र समक सौन्दर्य गजलक छन्द हर । | wife’) दोसर मिसरामे (पाँतिमे) अनिवार्य अछि | शास्त्र रदीफे आ काफियाक कारणे अछि। आ एहि मंत्र ware सेहो समाने वर्ण a i मकता : -गजलक अन्तिम शे'र जाहि शे'रमे शाइर अपन नामक वा उपनामक बाला oA wea गेल अछि, देखल जाउ we मंत्रसमक सभ पौँतिम 4a | |... प्रयोग करैत छथि, मकता कहल जाइत छँ। मकतामे एकहि नामक प्रयोग Sacre’ art अछि | ES | होयबाक चाही i 2 | कटा मकता te: कि या देवी सर्वमूतेषु विष्णुमायेतिशब्दिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै TAT नमः |= a या देवी सर्वमूतेषु चेतनेत्यभिधीयते नमस्तस्ये नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः im कंतेको राति हम “दीपक' अपन aed जरेने छी जी भगजोगनी पकड़लासँ किछु मुदा नै aga do या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता नसस्तस्यै नमस्तस्थै reed नमो नमः be | | oR मकतामे 'दीपक क प्रयोग भेल अछि, हम अपन पहिल गजलसैं 'दीपक'क या देवी सर्वभूतेषु Parador संस्थिता नमस्तस्वै arated नमस्तस्यै नमो नमः a — आबि रहल Bi a आब oat 'दीप' अथवा 'विद्यार्थी'क प्रयोग नजि जे कहिं नजि सकलहूँ' हमर जिनगी केर सत्य अछि आओर ई सत्य क क' waa छी | ई भेल गजल हैं .... एकटा गप्प आओर गजलक शीर्षक नजि हमर जिनगीक दुःखक ओहि Tee निकलल अछि जाहिमे रहिक' हम हि | | =. प्रत्येक शे'र अपना-आपमे स्वतंत्र आ पूर्ण होइत B | ओ दुःखकँँ भोगलहूँ, आ wae aired कि ओ समस्त दुःख आँखि बाटे मोम wei : | i THE मानल जाइत अछि | आब दू टप्पीमे सरल वार्णिकछन्द पघलि-पघलि हमरा अपार हर्षक अनुभूति देवय 'लागल,परिणामत: एहि संसार पर आउ: ह प्रदत्त समस्त दुःखरों हमर तादात्म्य स्थपित भ' गेल । ओना त' दुःख शाश्वत सरलवार्णिक wa: - मने मतलाक पहिल मिसरामे Gift) जतेक वर्ण छै, सत्य अछि, एहिसैं भागल A जा uae a ia ee aa | | | | ओहि गजलक सभ शे'रक 'सभ मिसरामे (HRA) ओतबें वर्ण होयवाक याही, ई दुःख, मरयमे दुःख, जीबयमे दुःख, अपनी दुःख, आनसैं दुःख, सम्बन्ध सं दुःख, | जत्तेक वर्ण अछि (अ, on, सं ल'क'य,र,ल.व, .....धरि | )कैँ एकटा वर्ण गानल शा su et दोष बुझलनि, gab a नजि ees ओ aate | जाइछ | जतेक SAT बाला अक्षर अछि तकरा शून्य (0), संयुक्ताक्षरकैँ एक (9) ap गेला | दुःखकें हैंसिक' जीबनाइ मुक्ति अछि, बर्बाद भेनाइ सजाय | | | | जेना ' खिस्सा' एहिमे ger वर्ण भेल एकटा ‘fe’ आ दोसर RA / एकटा हम ने कोनो कवि, साहित्यकार आ ने सन्त छी, हम मात्र एक अल्पज्ञानी . । मतला आओर देखू छी। हमरा ने कोनो छन्दक ज्ञान अछि, ने हमर काव्यकालकं कोनो धारा हम | खाली सुख संसार अहाँ देखलहूँ अपन get बहरायल fs आखरकीँ मात्र जोड़लहूँ अछि | आ ताहि लेल हम { की जिनगी पहाड़ अहाँ देखलहूँ ऋणी छी अपन समाज, परिवार, मित्र आ सर-कुटुम्ब सभक जे हमरा बुझल आ . | | : बिनबुझलमे दर्द देलनि | हम ऋणी छी ओहि सामाजिक परिवेश, परिस्थिति आ | i. ..... ।|_॒॑.
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