54 ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' १९९ म अंक ०१ अप्रैल २०१६ (वर्ष ९ मास १०० अंक १९९) ऐ अंकमे अछि:- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१.रवि भूषण पाठक- दोस आ दोसक चालि प्रकृति बेमेय २.२.ओम प्रकाश झा विहनि कथा-विछोहक नोर २.३.अब्दुर रज्जाक-दोहा-कतारमे साँझक चौपारिपर कें आठम मासक बैसार सम्पन्न ! २.४.सृजन शेखर 'अज्ञेय'-विहनि कथा-अशुभ इच्छा ३. पद्य ३.१.सृजन शेखर 'अज्ञेय'-किछु कविता ३.२.किछु कविता- बिनीता झा/ विकास झा/ मुन्नाजी ३.३. जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- चारि टा गजल ३.४.किछु गजल- अशरफ राईन/ अब्दुर रज्जाक/ नीरज कर्ण ४.बालानां कृते- डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह” किछु बाल कविता Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव Join official Videha facebook group. Join Videha googlegroups Follow Official VidehaTwitter to view regular Videha Live Broadcasts through Periscope. विदेह जालवृत्तक डिसकसन फोरमपर जाउ। संपादकीय श्रद्धांजलि : अणिमा सिंह नै रहली/ श्रद्धांजलि/ हुनकर मैथिलीमे काजक लिस्टमे लोकगीत आ नेना-भूटका लोक साहित्य सम्मिलित अछि/ प्रबोध साहित्य सम्मान:श्री केदार नाथ चौधरीकेँ प्रबोध साहित्य सम्मान देल गेलन्हि। बधाइ। हुनकर चारू पोथीक लिंक नीचां देल जा रहल अछि। चमेलीरानी CHAMELIRANI_MAITHILI.pdf माहुर Mahur_KedarnathChaudhary.pdf करार Karar_Kedarnath_Chaudhary.pdf अबारा नहितन विदेहक २०० म अंक: १५ अप्रैल २०१६ केँ विदेहक २०० म अंक ई-प्रकाशित हएत। ऐ मे विदेह सम्मान/ समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मानसँ सम्मानित लेखक आ हुनकर कृतिपर समीक्षा/ निबन्ध प्रकाशित हएत। अहाँसँ रचना सादर आमंत्रित अछि। विदेह सम्मान विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान १.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०१०-११ २०१० श्री गोविन्द झा (समग्र योगदान लेल) २०११ श्री रमानन्द रेणु (समग्र योगदान लेल) २.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११-१२ २०११ मूल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, कथा संग्रह) २०११ बाल साहित्य पुरस्कार- ले.क. मायानाथ झा (जकर नारी चतुर होइ, कथा संग्रह) २०११ युवा पुरस्कार- आनन्द कुमार झा (कलह, नाटक) २०१२ अनुवाद पुरस्कार- श्री रामलोचन ठाकुर- (पद्मानदीक माझी, बांग्ला- मानिक बंद्योपाध्याय, उपन्यास बांग्लासँ मैथिली अनुवाद) विदेह भाषा सम्मान २०१२-१३ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) 1.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार 2012 2012 श्री राजनन्दन लाल दास (समग्र योगदान लेल) 2.विदेह भाषा सम्मान २०१२-१३ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) २०१२ बाल साहित्य पुरस्कार - श्री जगदीश प्रसाद मण्डल केँ “तरेगन” बाल प्रेरक विहनि कथा संग्रह २०१२ मूल पुरस्कार - श्री राजदेव मण्डलकेँ "अम्बरा" (कविता संग्रह) लेल। 2012 युवा पुरस्कार- श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरीक “अर्चिस” (कविता संग्रह) 2013 अनुवाद पुरस्कार- श्री नरेश कुमार विकल "ययाति" (मराठी उपन्यास श्री विष्णु सखाराम खाण्डेकर) विदेह भाषा सम्मान २०१३-१४ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) २०१३ बाल साहित्य पुरस्कार – श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरी- “देवीजी” (बाल निबन्ध संग्रह) लेल। २०१३ मूल पुरस्कार - श्री बेचन ठाकुरकेँ "बेटीक अपमान आ छीनरदेवी" (नाटक संग्रह) लेल। २०१३ युवा पुरस्कार- श्री उमेश मण्डलकेँ “निश्तुकी” (कविता संग्रह)लेल। २०१४ अनुवाद पुरस्कार- श्री विनीत उत्पलकेँ “मोहनदास” (हिन्दी उपन्यास श्री उदय प्रकाश)क मैथिली अनुवाद लेल। विदेह भाषा सम्मान २०१४-२०१५ (समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान) २०१४ मूल पुरस्कार- श्री नन्द विलास राय (सखारी पेटारी- लघु कथा संग्रह) २०१४ बाल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (नै धारैए- बाल उपन्यास) २०१४ युवा पुरस्कार - श्री आशीष अनचिन्हार (अनचिन्हार आखर- गजल संग्रह) २०१५ अनुवाद पुरस्कार - श्री शम्भु कुमार सिंह ( पाखलो - तुकाराम रामा शेटक कोंकणी उपन्यासक मैथिली अनुवाद) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१२ अभिनय- मुख्य अभिनय , सुश्री शिल्पी कुमारी, उम्र- 17 पिता श्री लक्ष्मण झा श्री शोभा कान्त महतो, उम्र- 15 पिता- श्री रामअवतार महतो, हास्य-अभिनय सुश्री प्रियंका कुमारी, उम्र- 16, पिता- श्री वैद्यनाथ साह श्री दुर्गानंद ठाकुर, उम्र- 23, पिता- स्व. भरत ठाकुर नृत्य सुश्री सुलेखा कुमारी, उम्र- 16, पिता- श्री हरेराम यादव श्री अमीत रंजन, उम्र- 18, पिता- नागेश्वर कामत चित्रकला श्री पनकलाल मण्डल, उमेर- ३५, पिता- स्व. सुन्दर मण्डल, गाम छजना श्री रमेश कुमार भारती, उम्र- 23, पिता- श्री मोती मण्डल संगीत (हारमोनियम) श्री परमानन्द ठाकुर, उम्र- 30, पिता- श्री नथुनी ठाकुर संगीत (ढोलक) श्री बुलन राउत, उम्र- 45, पिता- स्व. चिल्टू राउत संगीत (रसनचौकी) श्री बहादुर राम, उम्र- 55, पिता- स्व. सरजुग राम शिल्पी-वस्तुकला श्री जगदीश मल्लिक,५० गाम- चनौरागंज मूर्ति-मृत्तिका कला श्री यदुनंदन पंडित, उम्र- 45, पिता- अशर्फी पंडित काष्ठ-कला श्री झमेली मुखिया,पिता स्व. मूंगालाल मुखिया, ५५, गाम- छजना किसानी-आत्मनिर्भर संस्कृति श्री लछमी दास, उमेर- ५०, पिता स्व. श्री फणी दास, गाम वेरमा विदेह मैथिली पत्रकारिता सम्मान -२०१२ श्री नवेन्दु कुमार झा नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१३ मुख्य अभिनय- (1) सुश्री आशा कुमारी सुपुत्री श्री रामावतार यादव, उमेर- १८, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) मो. समसाद आलम सुपुत्र मो. ईषा आलम, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (3) सुश्री अपर्णा कुमारी सुपुत्री श्री मनोज कुमार साहु, जन्म तिथि- १८-२-१९९८, पता- गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) हास्य–अभिनय- (1) श्री ब्रह्मदवे पासवान उर्फ रामजानी पासवान सुपुत्र- स्व. लक्ष्मी पासवान, पता- गाम+पोस्ट- औरहा, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) टाॅसिफ आलम सुपुत्र मो. मुस्ताक आलम, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, जिला- मधुबनी (बिहार) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान (मांगनि खबास समग्र योगदान सम्मान) शास्त्रीय संगीत सह तानपुरा : श्री रामवृक्ष सिंह सुपुत्र श्री अनिरूद्ध सिंह, उमेर- ५६, गाम- फुलवरिया, पोस्ट- बाबूबरही, जिला- मधुबनी (बिहार) मांगनि खबास सम्मान: मिथिला लोक संस्कृति संरक्षण: श्री राम लखन साहु पे. स्व. खुशीलाल साहु, उमेर- ६५, पता, गाम- पकड़िया, पोस्ट- रतनसारा, अनुमंडल- फुलपरास (मधुबनी) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान (समग्र योगदान सम्मान): नृत्य - (1) श्री हरि नारायण मण्डल सुपुत्र- स्व. नन्दी मण्डल, उमेर- ५८, पता- गाम+पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) सुश्री संगीता कुमारी सुपुत्री श्री रामदेव पासवान, उमेर- १६, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, जिला- मधुबनी (बिहार) चित्रकला- (1) जय प्रकाश मण्डल सुपुत्र- श्री कुशेश्वर मण्डल, उमेर- ३५, पता- गाम- सनपतहा, पोस्ट– बौरहा, भाया- सरायगढ़, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री चन्दन कुमार मण्डल सुपुत्र श्री भोला मण्डल, पता- गाम- खड़गपुर, पोस्ट- बेलही, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) संप्रति, छात्र स्नातक अंतिम वर्ष, कला एवं शिल्प महाविद्यालय- पटना। हरिमुनियाँ / हारमोनियम (1) श्री महादेव साह सुपुत्र रामदेव साह, उमेर- ५८, गाम- बेलहा, वार्ड- नं. ०९, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री जागेश्वर प्रसाद राउत सुपुत्र स्व. रामस्वरूप राउत, उमेर ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) ढोलक/ ठेकैता/ ढोलकिया (1) श्री अनुप सदाय सुपुत्र स्व. , पता- गाम- तुलसियाही, पोस्ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री कल्लर राम सुपुत्र स्व. खट्टर राम, उमेर- ५०, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) रसनचौकी वादक- (1) वासुदेव राम सुपुत्र स्व. अनुप राम, गाम+पोस्ट- िनर्मली, वार्ड न. ०७ ,जिला- सुपौल (बिहार) शिल्पी-वस्तुकला- (1) श्री बौकू मल्लिक सुपुत्र दरबारी मल्लिक, उमेर- ७०, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री राम विलास धरिकार सुपुत्र स्व. ठोढ़ाइ धरिकार, उमेर- ४०, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) मूर्तिकला-मृर्तिकार कला- (1) घूरन पंडित सुपुत्र- श्री मोलहू पंडित, पता- गाम+पोस्ट– बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री प्रभु पंडित सुपुत्र स्व. , पता- गाम+पोस्ट- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) काष्ठ-कला- (1) श्री जगदेव साहु सुपुत्र शनीचर साहु, उमेर- ३६, गाम- िनर्मली-पुरर्वास, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री योगेन्द्र ठाकुर सुपुत्र स्व. बुद्धू ठाकुर उमेर- ४५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) किसानी- आत्मनिर्भर संस्कृति- (1) श्री राम अवतार राउत सुपुत्र स्व. सुबध राउत, उमेर- ६६, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) (2) श्री रौशन यादव सुपुत्र स्व. कपिलेश्वर यादव, उमेर- ३५, गाम+पोस्ट– बनगामा, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) अल्हा/महराइ- (1) मो. जीबछ सुपुत्र मो. बिलट मरहूम, उमेर- ६५, पता- गाम- बसहा, पोस्ट- बड़हारा, भाया- अन्धराठाढ़ी, जिला- मधुबनी, पिन- ८४७४०१ जोगिरा- श्री बच्चन मण्डल सुपुत्र स्व. सीताराम मण्डल, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री रामदेव ठाकुर सुपुत्र स्व. जागेश्वर ठाकुर, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) पराती (प्रभाती) गौनिहार आ खजरी/ खौजरी वादक- (1) श्री सुकदेव साफी सुपुत्र श्री , पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) पराती (प्रभाती) गौनिहार - (अगहनसँ माघ-फागुन तक गाओल जाइत) (1) सुकदेव साफी सुपुत्र स्व. बाबूनाथ साफी, उमेर- ७५, पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) (2) लेल्हु दास सुपुत्र स्व. सनक मण्डल पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) झरनी- (1) मो. गुल हसन सुपुत्र अब्दुल रसीद मरहूम, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) (2) मो. रहमान साहब सुपुत्र...., उमेर- ५८, गाम- नरहिया, भाया- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) नाल वादक- (1) श्री जगत नारायण मण्डल सुपुत्र स्व. खुशीलाल मण्डल, उमेर- ४०, गाम+पोस्ट- ककरडोभ, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री देव नारायण यादव सुपुत्र श्री कुशुमलाल यादव, पता- गाम- बनरझुला, पोस्ट- अमही, थाना- घोघड़डीहा, जिला- मधुबनी (बिहार) गीतहारि/ लोक गीत- (1) श्रीमती फुदनी देवी पत्नी श्री रामफल मण्डल, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) (2) सुश्री सुविता कुमारी सुपुत्री श्री गंगाराम मण्डल, उमेर- १८, पता- गाम- मछधी, पोस्ट- बलियारि, भाया- झंझारपुर, जिला- मधुबनी (बिहार) खुरदक वादक- (1) श्री सीताराम राम सुपुत्र स्व. जंगल राम, उमेर- ६२, पता- गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री लक्ष्मी राम सुपुत्र स्व. पंचू मोची, उमेर- ७०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) काँरनेट- (1) श्री चन्दर राम सुपुत्र- स्व. जीतन राम, उमेर- ५०, पता- गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) मो. सुभान, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) बेन्जू वादक- (1) श्री राज कुमार महतो सुपुत्र स्व. लक्ष्मी महतो, उमेर- ४५, गाम- िनर्मली वार्ड नं. ०४, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री घुरन राम, उमेर- ४३, गाम+पोस्ट- बनगामा, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) भगैत गवैया- (1) श्री जीबछ यादव सुपुत्र स्व. रूपालाल यादव, उमेर- ८०, पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री शम्भु मण्डल सुपुत्र स्व. लखन मण्डल, पता- गाम- बढियाघाट-रसुआर, पोस्ट– मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) खिस्सकर- (खिस्सा कहैबला)- (1) श्री छुतहरू यादव उर्फ राजकुमार, सुपुत्र श्री राम खेलावन यादव, गाम- घोघरडिहा, पोस्ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जिला- सुपौल, पिन- ८४७४५२ (2) बैजनाथ मुखिया उर्फ टहल मुखिया- (2)सुपुत्र स्व. ढोंगाइ मुखिया, पता- गाम+पोस्ट- औरहा, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) मिथिला चित्रकला- (1) सुश्री मिथिलेश कुमारी सुपुत्री श्री रामदेव प्रसाद मण्डल ‘झारूदार’ पता- गाम- रसुआर, पोस्ट-– मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) (2) श्रीमती वीणा देवी पत्नी श्री दिलिप झा, उमेर- ३५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) खजरी/ खौजरी वादक- (2) श्री किशोरी दास सुपुत्र स्व. नेबैत मण्डल, पता- गाम- रसुआर, पोस्ट-– मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) तबला- श्री उपेन्द्र चौधरी सुपुत्र स्व. महावीर दास, उमेर- ५५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री देवनाथ यादव सुपुत्र स्व. सर्वजीत यादव, उमेर- ५०, गाम- झाँझपट्टी, पोस्ट- पीपराही, भाया- लदनियाँ, जिला- मधुबनी (बिहार) सारंगी- (घुना-मुना) (1) श्री पंची ठाकुर, गाम- पिपराही। झालि- (झलिबाह) (1) श्री कुन्दन कुमार कर्ण सुपुत्र श्री इन्द्र कुमार कर्ण पता- गाम- रेबाड़ी, पोस्ट- चौरामहरैल, थाना- झंझारपुर, जिला- मधुबनी, पिन- ८४७४०४ (2) श्री राम खेलावन राउत सुपुत्र स्व. कैलू राउत, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) बौसरी (बौसरी वादक) श्री रामचन्द्र प्रसाद मण्डल सुपुत्र श्री झोटन मण्डल, उमेर- ३०, बौसरी/बौसली/बासुरी बजबै छथि। पता- गाम- रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) श्री विभूति झा सुपुत्र स्व. कनटीर झा, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- कछुबी, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) लोक गाथा गायक श्री रविन्द्र यादव सुपुत्र सीताराम यादव, पता- गाम- तुलसियाही, पोस्ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) श्री पिचकुन सदाय सुपुत्र स्व. मेथर सदाय, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) मजिरा वादक (छोकटा झालि...) श्री रामपति मण्डल सुपुत्र स्व. अर्जुन मण्डल, पता- गाम- रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) मृदंग वादक- (1) श्री कपिलेश्वर दास सुपुत्र स्व. सुन्नर दास, उमेर- ७०, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री खखर सदाय सुपुत्र स्व. बंठा सदाय, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) तानपुरा सह भाव संगीत (1) श्री रामविलास यादव सुपुत्र स्व. दुखरन यादव, उमेर- ४८, गाम- सिमरा, पोस्ट- सांगि, भाया- घोघड़डीहा, थाना- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) तरसा/ तासा- श्री जोगेन्द्र राम सुपुत्र स्व. बिल्टू राम, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री राजेन्द्र राम सुपुत्र कालेश्वर राम, उमेर- ५८, गाम- मझौरा, पास्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) रमझालि/ कठझालि/ करताल वादक- श्री सैनी राम सुपुत्र स्व. ललित राम, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री जनक मण्डल सुपुत्र स्व. उचित मण्डल, उमेर- ६०, रमझालि/ कठझालि/ करताल वादक, १९७५ ई.सँ रमझालि बजबै छथि। पता- गाम- बढियाघाट/रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, जिला- सुपौल (बिहार) गुमगुमियाँ/ ग्रुम बाजा श्री परमेश्वर मण्डल सुपुत्र स्व. बिहारी मण्डल उमेर- ४१, १९८० ई.सँ गुमगुिमयाँ बजबै छथि। श्री जुगाय साफी सुपुत्र स्व. श्री श्रीचन्द्र साफी, उमेर- ७५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) डंका/ ढोल वादक श्री बदरी राम, उमेर- ५५, पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) श्री योगेन्द्र राम सुपुत्र स्व. बिल्टू राम, उमेर- ५५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) डंफा (होलीमे बजाओल जाइत...) श्री जग्रनाथ चौधरी उर्फ धियानी दास सुपुत्र स्व. महावीर दास, उमेर- ६५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री महेन्द्र पोद्दार, उमेर- ६५, पता-गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) नङेरा/ डिगरी- श्री राम प्रसाद राम सुपुत्र स्व. सरयुग मोची, उमेर- ५२, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 111 ७) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 ८) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 ९) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 १०) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 ११) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ Maithili Books can be purchased from: http://www.amazon.in/ For the first time Maithili books can be read on kindle e-readers. Buy Maithili Books in Kindle format (courtesy Videha) from amazon kindle stores, these e books are delivered worldwide wirelessly:- http://www.amazon.com/ अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। गजेन्द्र ठाकुर ggajendra@videha.com २. गद्य २.१.रवि भूषण पाठक- दोस आ दोसक चालि प्रकृति बेमेय २.२.ओम प्रकाश झा विहनि कथा-विछोहक नोर २.३.अब्दुर रज्जाक-दोहा-कतारमे साँझक चौपारिपर कें आठम मासक बैसार सम्पन्न ! २.४.सृजन शेखर 'अज्ञेय'-विहनि कथा-अशुभ इच्छा रवि भूषण पाठक दोस आ दोसक चालि प्रकृति बेमेय आ जे काज मिश्रा जी नइ केलखिन से झा जी क' देलखिन ।वाह रे झाजी ,एकदम नगाड़ा बजा देलियइ आ सिंह कैम्प मे एकदम नैराश्यक स्थिति ।मिश्राजी जे बाजियो के नइ केलखिन ,से झाजी बिन बाजने सुतारि देलखिन ।एकरा कहै छै आदमी क' मतलब आदमी ,मुंहक मतलब मुंह ,हाथक मतलब हाथ आ जे कैह देलियौ से क' देलियौ ।ई भेलै ने ....आ ईहो देखियौ जे आदमी लोकल नइ ,पचास किलोमीटर दूर दरभंगा के आ मधुबनीक किला पर फहिरा देलकै धूजा ।आ पूरा दरभंगामंडली पुलकित ,पुलकित ब्राह्मण वर्ग आ आशान्वित कलक्टरी क' खबरी-छिनरी सब ।आ रंग-रंगक खिस्सा कि झाजी कैह देलखिन 'केवल अाहीं टा कमायब' कि 'केवल आहींटा क' घर-परिवार' कि 'केवल आहीं के गानै मे मून लागैत अछि ' आ पता नइ की झाजी कहलखिन आ की सिंहजी सुनलखिन ।पता नइ दूनू मे की बात भेलै ,ओना दूनू आदमी अपन-अपन कैम्प बनेबाक प्रयास जरूर केलखिन ,मुदा बहुत सफलता नइ भेलेन ।जे सीरियस आदमी सब रहथिन ,ऊ परिणामक साफ-साफ अनुमान केलखिन आ बहुत दूर नजरि फेकैत साफ-साफ देखलकिखन कि दूनू मे संघर्षक कुनो संभावना नइ आ स्पष्ट बूझल गेलै कि किमहरो गेनै मतलब अपन पहचान डूबेनए आ एहन स्थिति मे गुटनिरपेक्षता सदैव काम्य होइत छैक आ वाह रे कलक्टरीक बुधियार इंस्पेक्टर आ कर्मचारी वर्ग ओ किमहरो नइ गेलै ,ओ किछुओ नइ सुनलकै ,ओ किछु नइ निर्णय लेलकै ।ओ सुनितो आगू निकलि गेलै........... आ बहुत जल्दी सिंह-झा संधिक अघोषित परिणामक लिस्ट बजार मे बिकाइत भेटलै ।तू ले कलुआही आ हम लइ छी जयनगर ,दूनू आदमी भरि मून चर ।अपन-अपन पेट आ अपन-अपन जीभक' रक्षा कर ।तू बाभन सब के पोट हम राजपूत के पोटैत छी ।बहुत जल्दी खुलबाक आवश्यकता नइ ,बहुत दोस्ती देखेबाक जरूरी नइ ,बहुत भेंट करबाक कोन प्रयोजन ।से अपना-अपना खुट्टा पर टीकल रह , अपना खुट्टा पर सँ खूब लथाडि़ मार ,खूब सिंह भांज ।एना के सिंह भांज कि मालिको (हाकिम)तक डराइ ।आ यैह भेलै कि हाकिम तक डराइत रहलखिन कि यदि एकर सबक अधिकारक्षेत्र मे किछु परिवर्तन करबै त' कत्तओ सँ फोन आबि जायत । आ अहां झाजी सँ भेंट करियौ ,त' ओ आनी-मूनी स्टायल मे भांजता 'सिंह जी देखेबो केला' । अहां कहबै 'नइ' तखन फेर हफियाइत पूछता 'ओमहर गेल नइ रहियइ' । अहां यदि फेर कैह देलियइ 'नइ' तखन ओ आश्वस्त होइत कहता 'हां ठीके अछि अप्पन काज सँ मतलब रखबाक चाही ।' मतलब झाजीक साफ छैक 'अहां सब सिंहजी सँ नइ भेंट करियौ ,एकांत मे त' कखनो नइ ।आ नइ भेंट करबै त' बातचित नइ हैत ,बातचित नइ करबै तखन सेटिंग-गेटिंग नइ हैत आ ई सब झाजीक लेल खुशखबरी आ भेंट करबै त' झाजी क' एकटा स्टार कमि जेतै । भेंट करबै त' सिंह-झा -पालिटिक्स केर गोपनीयता संकट मे पड़तै ,ऐ राजनीति क' बौद्धिक पेटेंट खतम भ' जेतै ।' जेना सिंह जी तेहने झाजी जाति-जिला फैक्टरक प्रयोग करैत छथिन ,तें दूनू गोटेक बासन आ औजार अलग-अलग ।झाजी सेहो सिंहजी क' विरोध ऐ अंदाज मे करता कि समस्त ब्राह्मणक लेल सिंहजीक रहनै खतरनाक आ झाजी अपन किछु चलाकी ,किछु क्षुद्रता ,किछु बाताबाती कें एना प्रस्तुत करैत छथिन जेना ब्राह्मण जाति ,दरभंगा जिला ,बहेड़ी प्रखंड आ करेह नदीक उद्धार आब जल्दिए भ' जेतै ।बस अहां सब झाजी जिंदाबाद करैत रहियौ । झाजी अपना आप के बड़का विद्वान मानैत छथिन ।आ अपना सँ नमहर अपना भाय कें आ भाय सँ किछु बेशी अपना बाबा कें ।भाय एकटा विश्वविद्यालय मे प्रोफेसर छथिन आ बाबा स्वतंत्रता सेनानी रहथिन ।बात कत्तौ सॅं उठलै ,आबि के गिरतै भैया पर ।वेद आ कुरानक लाईन सँ बात शुरू भेल होय ,मुदा खतम हेतै भैया झा पर ।आ ई खतम होय के पावर भैया झा के लिखल समान मे होय भाय नइ होय छोटका झा के ठोरठोरई मे जरूर छैक ।आ सिंह जी के कलुआही लूटबाक छेन ,से ओ बिना शर्त झाजीक बौद्धिकताक समर्थन करैत छथिन ।यदि केओ झाजीक बौद्धिकता पर निशान लगाओत त' सिंह जी ओकर भक्शी झोंकि देथिन ।सिंह जी चाहैत छथिन कि झाजी बौद्धिक बनबाक निशां मे मधुबनी छोडि़ के दरभंगा चलि जाए ,मुदा हाय रे सिंह जी झाजी एकदमे उनैस नइ छथिन ,हुनका कवि नइ बनबा के ,हुनका विद्वान नइ बनबा के ,हुनका अजर-अमर नइ बनबा के ,हुनका कालजयी नइ बनबा के ,आ यदि कालजयी के मतलब किछु होयत होए त' ऊ दू-चारि बिगहा अरजि के ,पटना-दरभंगा मे एक-दूटा घर बनाके हुुअ' चाहैत छथिन ।कालजयी मतलब ई नइ कि अहां के एक-दूटा किताब छपि गेल आ दू-चारि टा लोक अहां पर लिख देलक ।कालजयी मतलब ई जे तीनमहला क' ऊपरका महल पर संगमरमर सँ लिखल फलां झा तीन-चारि पीरही तक जगजगार होयत रहै । आ ऐ ठाम सब अपना-अपना हिसाबें कालजयी भ' रहल अछि । सिंहजी क' दू टा प्लॉट पटना मे एकटा दरभंगा मे आ एकटा समस्तीपुर मे ।मधुबनी मे जइ मकान मे रहि रहल छथि से सारि क'नाम सँ ।दुनिया सारि आ सारिक प्लॉट ...दूनू के सिंहजीक मानैत अछि ,मुदा सिंहजी सन ईज्जतदार आदमी ....च्चचच..झाजी एकटा प्लॉट दरभंगा मे आ एकटा पटना मे आ जल्दिए सिंहजी कें पाछू क' देथिन ।नेबोलाल पटने मे नइ दिल्लीयो मे एकटा मकान खरीदने अछि ,आ ओकरा सन भाग्य आ बहीन त' भगवान सबके देथिन ।बहिनोय एक्साईज विभाग क' बड़का अधिकारी रहथिन आ जीता-जी पचास-साठि करोड़ कमा गेलखिन ।घर-परिवार,स'र-संबंधी ,सबहक नाम सँ बेेनामी संपत्ति ,आ भगवानक लीला ई कि एकदिन दूनू प्राणी मे झगड़ा भेलै आ दूनू प्राणी गोली सँ आत्महत्या क'लेलखिन ।आ सब स'र संबंधी चुप्पी मारि गेलै ,केओ नइ कहलकै कि फलां जी हमरा नामे ई खरीदने रहला ।आ रंजन जी जइ दूमहला कें अपन बाबूजी क' नाम सँ बताबै छथिन ,तइ पर रंजन जी कें होमलोन मिलल छैक ।आ ई सब खिस्सा गोपनीय छैक ,तावते तक जावत तक कि दोसर के पता नइ चलैत छैक ,आ फेर दोसर सँ तेसर आ तेसर सँ चारिम ।आ ई सब खिस्सा तावत तक गोपनीय रहतै ,जावत तक सिंह डरेतै झा से आ झा डरेतै नेबोलाल से ।आ यदि एक्को टा मटकूरी फूटलै ,तखन सब फूटतै .... आब त' नबका-नबका अधिकारी सब सेहो आबि रहल अछि जिला मे ।अइ मे एकटा सिंहजी क' परिचित छथिन ,ईहो सिंह ,हिनका जूनियर सिंहजी कहल जाए ।जेना सिंह जे बाजै मे भटभटिया ,तहिना जूनियर एकदम चुप्पा ।पहिले सब के बूझेलै जे जूनियर मितभाषी ,संकोची छैक ,बाद मे पता चललै कि जूनियर मुंह मे पान,तमाकू आ सुपारी ठूसने रहै छैक ,मुह मे ,गाल मे ,ठोर मे ।बेशीकाल ईशारे से काज चलेला ,बेशी जरूरी होए वा नमहर एमाउंट होए । बेशी काल मुंह खोलै छथिन -तीस ,चालीस या थर्टी , फोर्टी कहबा क' लेल ।आ कखनो कखनो खोलै छथिन नमहरका मुंह -पचास ,प चा स ।जल्दिए जिला बूझि गेलै कि जूनियर किछु मायने मे सीनियरो क' कक्का ।जूनियर रहै सिंहजी क' परिचित ,तें भैया...भैया....कहिते रहै हरदम आ टेक्नीक मे सेहो भैया के नकल करैत ,मुदा ऐ अधपक्कू नकल पर हँसबा के नइ शांति सँ बूझबाक जरूरी छैक । जूनियर क' साथे एकटा आर चुप्पा आयल छैक ,एकर चुप्पी कनेक अभौतिक कनेक भौतिक छैक ।लेबा के, खूब लेबा के ,अहगर लेबाके ,बेर-बेर लेबाके ईच्छा एकरा मोन मे जागै छैक ,मुदा हाय रे ध्वनि तंत्र ,हाय रे बाजै वला सिस्टम सब ।मोन मे रहै छैक किछुआर ,निकलै छैक किछु आर ।मोन मे आबै छैक जल्दी लाऊ आ मुंह से निकलै छैक राखू ने बादे मे देब ।आ कखनो काल त' ईहो नइ निकलै छैक ।एकर ऊलझन सबसँ क्लासिक ।पइसा के सबसे बेशी जरूरी ,मुदा भ्रष्टाचारविरोधी आंदोलन दिस उन्मुखता ।अपनो हाल-चाल उजरल-उपटल ,मुदा दोशर कें फैदा पहुंचेबाक नीयत ,गरीब कें कष्ट नइ देबाक आदर्श ।वौआ दूनू चीज कोना साथ-साथ ल' के चलबहीं ।धनी-मनी सब देतौ नइ किछु आ गरीबहा के संग मे छइ नइ किछु ,त' बाज ने कोना काज चलतै ।जे देनिहार छैक ऊ नेता-मंत्री सब सँ फोन करा के काज करा लेतौ आ जे नइ देनिहार छैक से भुक्खल जिन्न जँका आफिसक बाउंडरी मे हँफिया रहल छैक ।ऊ बस हाथ-पैर जोड़तौ ,ऊ बस आर्शीवाद देतौ ,आ ऊ आर्शीवादो नइ देतौ ।आर्शीवाद देबाक प्रक्रिया मे एकटा हूनर छैक आ ई एत्ते गरीब ,एत्ते हियाक हारल छैक जे आर्शीवादो देबाक हूब एकरा देह मे नइ छैक ।आब बाज ने की करबीहीं । नया किछु नइ होय वला ,या त' बनही सिंहजी ,झाजी ,मिश्रा जी या फेर नेबोलाल ।सफलताक यैह सब किछु मॉडल छैक । सबहक अपन-अपन झूठ-सांच रहै ,सबहक नोकरी आ सबहक परिवार ।सिंह जी कहथिन जे हमर वियाह त' बालपने मे भ' गेल रहै ।माए नइ रहथिन आ सब जिम्मेवारी हमरे पर ।मिश्रा जी कहथिन जे हमर कनियां बूझू जे करीना कपूर ।करीना कपूरक चयन हुनकर ,हम्मर नइ आ यैह हीरोइनक नाम किए ओ लैत छथिन एक्कर सही-सही जबाब वैह देता ।झा जी कहथिन जे हम्मर कनियांक पिता बैंक मे उच्चाधिकारी छलखिन ने ,आ हम्मर कनियां कतेको बेर हवाई जहाजक यात्रा केने छथि ।दोसर सबहक पत्नीक व्यवहार पर प्रश्न करैत अप्प्न कनियांक व्यवहारक उपयुक्तता आ प्रौढ़ता पर दस से पनरह मिनट .....एहन सन कि अहां कि देखायब हमर कनियां दसे-बारह साल सँ सब किछु देखने छथि ।आ जखन ओ अपन कनियांक योग्यता एल0एल0बी0 ,बी0एड0 कहथिन त' हुनकर गरदनिक नस सब हरियर-हरियर होइत पूरा बलक साथ हुनकर समर्थन मे मोट भ' जाइत रहै ।नेबोलालजी क' समस्या किछु आर छलै ओ अपन कनियांक वणिक् पारिवारिक पृष्ठभूमि सँ बेसी परेशान रहथिन आ अप्पन ससुरक लेल विशेष पंचाक्षरी गारिक प्रयोग करैत रहथिन....मादर...केवल अपना बेटी के दोकान पर बैसेनए आ गल्ला सम्हारनए सिखेलकै ।तैयो अप्पन कनियांक गोर-नार चेहरा आ वयस्क-व्यवहार सँ बेस प्रसन्न रहथिन । सब अपना-अपना तरहें डपोरशंखी वृत्तिक परिचय देथिन आ ऐ मे सबसँ आगू सिंहजी रहथिन ।पता नइ अपन परहाई-लिखाईक' समै मे की सब केलखिन ,मुदा हरदम बतेता कि चारि बेर आई0ए0एस0 मे इंटरव्यू देलियै ,सात-आठ बेर बी0पी0एस0सी0 मे ,पता नइ किएक सेलेक्शन नइ भेल ।आ जावत अहां ऐ तथ्य पर विचार करबै ,तावत दू-चारिटा आई0ए0एस0 सबहक नाम गिना देता ,ओइ मे एगो-दूगो त' हिनकर नोटे सँ पास भेल रहै ,आ एगो-दूगो क' फोन एखनो आबै छैक ।आ यदि अहां एखनो ऐ भौकालीक प्रभाव मे नइ एलियै तखन तुरत्ते एगो-दूगो विधायक के फोन लगबैत होलीक शुभकामना डिस्पैच कर' लागत ।मिश्रा जी संस्कृतक दू-चारिटा कठिन श्लोक फेकैत ऐ तथ्य पर बल देता कि आब विश्वविद्यालय खरीद-फरोख्तक अड्डा बनि गेल अछि आ कतेको बेर बस पइसाक अभाव मे हुनकर नियुक्ति विश्वविद्यालय मे नइ भेलै ।आ झा जी जखन आफिस मे कहै छथिन जे हौ हमरो दूरक नइ बूझह' ,बस नदी पार करहक आ .....।ई गर्वोक्ति नव्यन्यायक नइ थिकै ,मुदा आफिसक वातावरण मे खास प्रभाव उत्पन्न करैत घूसक राशि मे अपेक्षित वृद्धि करैत छैक ,यदि वृद्धि नहियो होइत छैक त' अगिला व्यवहारक लेल ई खास भय उत्पन्न् करैत छैक कि झाजियो लोकले छथिन ।
आ सिंह जीक लेबाक टेकनीक अलग ।पहिले खूब हल्ला करता ,हम त’ लइते नइ छी ,हम त’ लइते नइ छी ,फेर ओहियो सँ बेशी जोर सँ चिचियेता कि पागल छहीं की ,बिन देने काज हेतौ ।सिंह जी कहता ‘हम त’ दस-बीस हजार सँ कम नइ लै छियै आ जँखन लेबाक टाईम होइत छैक त’ अठन्नियो उठा लैत छथिन ।दोस सबक बीच मे कहता कि गरीब सँ नइ किछु लेबाक चाही आ गरीब यदि बीस हजार ल’ के आयल छैक आ हिनका पचीस चाही ,त’ ओकरा पचीस दइए के छैक ।आ सिंह जीक रेंज जोरगर ,ओ सब किछु ल’ लेता रूपया-पइसा ,गहना ,दही-दूध ,अनाज ,साड़ी ,आदि ।मुदा रेंजक प्रतियोगिता मे मिश्रा जी सेहो केकरो सँ कम नइ ।हिनकर गिफ्ट मे अन्न-तत्वक विशेष महिमा ।मिश्रा जी ओइ ठाम मकई ,मड़ुआ ,टमाटर ,सीम ,सामा-कौनी सब चलै छैक ।आ यदि रूपया देबाक अछि त’ बाहर मे गणेश-लक्ष्मीक मूर्ति राखल छैक ,ओकरा पर अर्पित क’ दियौ ।ऐ वृत्ति आ घटना कें खास आध्यात्मिक स्वरूप दैत मिश्राजी देनए-लेनए कें भगवाने पर छोड़ैत छथिन ।आ मानि लियौ जे केओ आबि गेलै सांझ मे आ ओकरा साईन करेबाक छैक त’ मिश्रा जी पेन बंद क’ लेथिन ,जावत तक आटा नइ पिसेतइ ओ पेन कोना खोलि सकैत छथिन ।तें आब ओइ व्यक्ति क’ राष्ट्रीय कर्तव्य भ’ गेल छैक कि ओ मिश्रा जी ओत’ दस-बीस किलो आटाक पैक आनि दए ,नइ त’ मिश्रा जी पूरा बजार बौएथिन आ ओकरा दस राति बजेथिन ।आ यदि ओ आदमी पुरान छैक ,मिश्रा जी कें जानै छैक आ मिश्राजी क’ शब्दजाल पर धेयान नइ दैत छैक त’ ओ बिना समै नष्ट केने आटा आनै ले चैल जेतै ।आ मिश्रा जी ओत’ के सब आबि रहल छैक ,मिश्रा जी ओइ ठाम कोन-कोन चीज आबि रहल छैक ,सबहक लिस्ट सिंहजी बना रहल छथिन ।मतलब घर भरा रहल छैक मिश्रा जी के आ लिस्ट भरा रहल छैक सिंह जी क’ ।आ जखन मिश्रा जी मीटिंग मे कहैत छथिन जे ई महीना त’ एकदम खालिए रहल ,सिंह जी आदमी आ लिफाफाक पूरा हूलिया दैत मिश्रा जी कें चित्त क’ दैत छथिन ।सिंह जी के ईहो पता छैन कि मिश्राजी के चिनुआर मे राखल घी बकेन गायक छैक ।मिश्रा जी सिंह जी कें ऐ जानकारी कें विशुद्ध षड्यंत्र कोटि मे राखैत छथिन आ हँसि के उड़ेबाक असफल प्रयास करैत छथिन ।
रंजनजी क’ रेंज सेहो छोट नइ ,मुदा मृदु ,होयबाक नाते आ लोकल नय होयबाक नाते कनेक घाटा मे रहैत छथिन ,मुदा हिनकर चोट वैह जानैत छैक ,जे खेने होय ।गजब रंजन सर ,गजब ,एकदम बौद्धिक मारि .....,बम-फटक्काक अवाज नइ ,बस हृदय दरकबाक ध्वनि ।आ सबसँ तुच्छ ,क्षुद्र आ ठोर मे सँ छिनै वला आंखि केकरो देने होथिन भगवान त’ नेबोलाल के ।आ ल’ त’ लेत सब किछु ,मुदा देनिहार के वैह पंचाक्षरी गारि ,मतलब दियौ तखन आर्शीवाद रूप मे आ नइ दियौ तखन गारिक भंगिमा मे ,मुदा भेटत वैह ।जूनियरक गाड़ी जखन केकरो दलान पर लागि जाइ छैक त’ ओकर तीन पीरही तीन दिनक मूतान एडवांसे मे मूति दैक छैक ।से की कहौं खिस्सा...... आ सब गोटे अपने घर-परिवार त’ छैक ,तें कहबा मे सेहो कोनो दोख नइ ।तें कहियो दैत छी त’ खराब नइ मानब ,किएक त’ अहां सँ की बॉंचल अछि .....
ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। ओम प्रकाश झा विहनि कथा विछोहक नोर पछिला साल कोचिंग करै लेल बेटीक नाम कोटामे लिखौने छलौं। जखन ओकरा कोटामे छोड़ि क' आबैत रही तखन ओ बड्ड उदास छल। ओकरा बुझेलियै जे हम नियमित रूप सँ आबि भेंट करैत रहबै। मुदा नौकरीक झमेलामे फुरसति नै भेंटल आ हम कहियो नै जा सकलौं। साल पूरा भेला पर ओ डेढ़ मासक छुट्टी पर गाम आएलछल। ऐ बेर ओकरा कोटा छोड़ै लेल फेर हमहीं गेलियै। ओकरा छोड़लाक उपरान्त जखन वापसीक ट्रेन पकड़बा लेल हम टीसन आबैत रही तखन ओ कातर दृष्टिसँ हमरा दिस ताकि रहल छल एकदम चुपचाप। हमहुँ ओकरासँ नजरि चोरेने औटोमे बैसि गेलौं। ओ हमरा गोर लागलक आ बेछोह कानय लागल। हमर आँखिमे सेहो जेनामेघ उमड़ि गेल मुदा ओइ मेघकेँ रोकैत ओकरा बूझबय लागलौं। रामायणक चौपाई मोन पड़ि गेल:- लोचन जल रहे लोचन कोना जैसे रहे कृपण घर सोना। खैर टीसन आबि ट्रेनमे बैसि गेलौं। जखने ट्रेन टीसनसँ घुसकल तखने ओकर कातर नजरि मोन पड़ि गेल आ लागल जे करेज फाटि जायत। नोरक मेघ ऐ बेर नै मानलक। हम सहयात्री सबसँ नजरि चोरबैत ट्रेनक बाथरूममे ढुकि गेलौं । बाथरूमक भीतर हमर मेघ बान्ह तोड़ि देलक आ हम पुक्की पारि क' कानय लागलौं। विछोहक नोरआवाजक संग पूर्ण गतिसँ बहय लागल मुदा हमर क्रन्दन ट्रेनक धड़धड़ीक आवाजमे विलीन भ' गेल। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। अब्दुर रज्जाक दोहा-कतारमे साँझक चौपारिपर कें आठम मासक बैसार सम्पन्न ! "मातृभाषाक जगेर्णा हमरा सबहक प्रेरणा" मूल नाराके संग बिगत ८ मास सँ निरन्तर रुपमे आयोजना होइत आबि रहल मैथिली काव्य-सन्ध्या अन्तर्गतके कार्यक्रम #साँझक_चौपारि_पर के आठम मासक बैसार २5 मार्च २०१६ बितल शुक्र दिन दोहाक सनैया गरेंड मल्ल क प्रांगणमे भेल । एहिबेरक कार्यक्रम आन बैसारक तुलनामे किछ कम श्रोता आ कबि बिन्देश्वर जी घर गेलाक कारण आ काम बिशेष कबि अशरफ जी अनुपस्थित रहला । बैसारमे नियमित सर्जक सब सँ बहुतो कम नव सर्जक आ श्रोता लोकक कम उपस्थिती रहल । तहिना भाषा-साहित्य प्रति सदैव सजग सचेत युवा कार्यकर्ता श्री मनिष राय जीलगायत एक सँ एक व्यक्तित्व सबहक उपस्थिति छल । कवि शोगार्थ जीक संयोजकत्वमे शुरु भेल ऐ कार्यक्रममे पहिल चरणमे सब गोटे अपन -अपन परिचय देलाह । तकरा बाद दोसर चरणमे सम्पूर्ण स्रष्टा सब द्वारा रचना वाचन कएल गेल । रचना वाचन केर क्रममे बेचन महतो,सोगारथ यादव,प्रणव कान्त झा,अब्दूर रज्जाक जी द्वारा कविता वाचन भेल । तहिना रवीन्द्र उदासी जीक अपना स्वरमे गाओल गीत सँ सब गोटे मन्त्रमुग्ध भऽ गेलाह । एकर अतिरिक्त अँनलाइन सँ पठाओल रचना सबमे कवि प्रयास प्रेमी मैथिल, राजदेव राज जी के होलि बिशेष रचना बाचनकैल गेल । कार्यक्रमके बीचमे मधेशक क्षति के कारणे होली पर्ब नै मनाउल गेल। शहीदक सम्मान सोरुप साहित्यकार लोकेन होलि नै मनौने अबगत करौलनि। संग हेल्प मधेसी होली बिशेषके निमन्त्रणा पर अनुपस्थितिके लेल नै दुख रखबाक अनुरोध कैल गेल। समग्रमे बैसार जय जय रहल । चौपारि-पर उपस्थित सबगोटे बड बेसी उत्साहित भेलाह । कार्यक्रमक अन्तमे प्रमुख अतिथि सब द्वारा प्रवासमे रहियोकऽ अपन भाषा-साहित्य लेल भऽ रहल ऐ प्रयासके बहुते बेसी सराहल गेल । संगे सदैव साथ-सहयोग रहत आ उत्तरोत्तर प्रगति होइत रहत से आश्वासन सेहो दियौलनि । ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। सृजन शेखर 'अज्ञेय' विहनि कथा अशुभ इच्छा दादी माँ के पहिल बरखी नज़दीक आबि गेल छलै।बच्चा में जखन कियो हँसियों में कहि दै छलै जे दादी मरि जेतौ कि हेमों-ढेकार भऽ कानब शुरू ,से दादी माँ के बरखी लगचिआ गेल छलै।साल बितऽ वला छलै लेकिन अखनहुँ फ़ोटो के देख कऽ असग़र में हिचकी उठि जाय छलै,चुपचाप अइंख पोइछ लैतछलए। बिआहक पहिल साल कोजगरा नय भऽ पेलै।बिआह भेलै बीच जेठ में ,ने मधुश्रावनीए के छुट्टी भेटलै ने कोजगरे में।दादी माँ आैर माँ धमकी दऽ देने रहै जे किछ भऽ जाय कोजगरा एय साल हेब्बे टा करतै चाहे नौकरी छोड़ऽ किए नय पड़ै। किछु फुरा ने रहल छलै जे कोना कऽ छुट्टी लेल जाय,फेर अचानक सँ जेना किछ फुरलै गेलै Boss लऽग गेल आ कहलकै जे दादी माँ के तबीयत बहुत ख़राब अछि हमरा तुरंत छुट्टी चाही।कोजगरा बहुत धूमधाम सऽ भेलै ।दादी माँ बड्ड प्रसन्न छलै,ख़ूब मखान बँटलकै।इ पूछला पर जे कोना छुट्टी भेटलै ओ चुप्पेरहि जाए।चारि-पाँच महीना के बाद दादी माँ के सच में बड़ ज़ोर मोन ख़राब भऽ गेलै आ तकर दू-तीन महीना बाद ब्रेन हेमोरेज सऽ हुनक देहांत।अखनहुँ सोचैये जे दादी माँ के मोन ख़राब के बहाना सँ छुट्टी नहिं नेने रहितउँ। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.सृजन शेखर 'अज्ञेय'-किछु कविता ३.२.किछु कविता- बिनीता झा/ विकास झा/ मुन्नाजी ३.३. जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- चारि टा गजल ३.४.किछु गजल- अशरफ राईन/ अब्दुर रज्जाक/ नीरज कर्ण सृजन शेखर 'अज्ञेय' किछु कविता 1 गीत सँ पहिने गीत सँ पहिने शब्द छऽल चुप प्रकाश सँ पहिने अन्हार छऽल ..... समय भागि गेल समय भागि रहल समय आगू एत्तै समय सँ पहिने समय छऽल ..... कि कि ने केलौं कि कि ने भेलौं समटि नहिं सकलौं एक मुट्ठी जिनगी जिनगी सँ पहिने साँस छऽल .... अन्हार भेल मंच पर चलि रहल तमाशा नाचि रहल नटुआ टूटल ताल ताशा मेला सऽ पहिने बजार छऽल ...... रूकतैऽ तऽ मरतैऽ मरतैऽ तऽ रूकतैऽ तकतैऽ तऽ भेटतैऽ देखतैऽ तऽ बुझतैऽ चलय सऽ पहिने रूकल छऽल ...... आगू सऽ बढि गेल आगू सऽ बिका गेल रहि गेल से रहि गेल गाड़ी जकर छूटि गेल सपना सऽ पहिने अइंख छऽल ...... बात कि हेतै मुँह जे नय खुजतै ठाढ़ कोना रहतै डोरी जे टूटतै अंत सऽ पहिने आदि छऽल ..... माटिक मुरूत पानि बिनु फाटैत माटिक मुरूत पानि छू भखरैत माटि सऽ पहिने माटि छऽल..... भेंट नय भेलै भीड़ छलै बहुत रूकि नय पेलै जल्दी छलै बहुत प्रेमी सऽ पहिने प्रेम छऽल ..... 2 हऽम हऽम कनी तमसएऽल छी निन्न टूटल अखने तैं ओंघाएऽल छी केलौं बहुत स्वाँग भऽ गेलौं निर्लज्ज देखलौं मुँह एना में तें कनी लजायल छी छोड़ू ओहि बात के दोसर कोनो बात करू टारि-टारि एहिना सच बिसराएऽल छी चलब ने अनचिन्हार बाट अन्हार राइत डरि-डरि एहिना डरे नुकाएऽल छी बचि-बचि के चलैत रहलौं जिनगी भरि सहेजलौं ने एक्कहु साँस तें खलियाएऽल छी लिखैत रहलौं जाहि हाथ सऽ जाली ख़त उसरै ने पुण्य काज तैं कँपकपाएऽल छी माँगैय के अछि आदत खोललौं ने बंद मुट्ठी दै के बेर तें कनी हिचकिचाएल छी हँसि ने पेलौं कानि ने पेलौं बनलौं बुधियार विदा के बेर तें आय नोरे नहाएल छी जिनगी के दस्तावेज़ 3 हऽम तऽ छी टूटल एगो डारि आउर आब टूटब कथी चिट्ठिए हमर हेरेलक डाकिया सनेस हम पायब कथी लागल एहन ऐगलग्गी जे पूरा गाम जरि गेल घऽर अपन बचायब कथी कानय के एहन हिस्सक भेल हँसनाय बिसरि गेलौं गीत आब गायब कथी बेचि रहल छी नित अपना कें खरचि रहल छी हिरदय के जुड़ायब कथी असली किछु नय मुखौटा सभक मुँह पर संगी ककरो बनायब कथी हेरा गेल जे छल झोरी में चोरेलक नय केओ आब कथुके चिंता कथी मारलक नय कियो जिनगीए बिसरि गेलौं मुइल के जिआयब कथी 4 सभ मैथिल के लेल हम सब रने-बने छिछिया रहल छी पीबऽ चाहैत छी अमृत बिख पीने जा रहल छी रस्ता क थाह नहिं अछि छी अगम अथाह में दिशाहीन भटकल अनेरे बौएने जा रहल छी आन के अपन के के अछि हित के अछि दुश्मन चिन्हारो के अनचिन्हार केने जा रहल छी जागल छी कि सूतल बेहोश छी कि होश में जिनगी के टूकड़ा हज़ार केने जा रहल छी चलि रहल साँस तऽ आ भीतर भऽ गेल मुर्दा धक्का सँ गुड़कैत जिनगी गुड़कने जा रहल छी आयल ने मसीहा ने कोनो दुखहर्ता अइंख पथराएल कर्म के भाग के मंदिर-मस्जिद चिचिएने जा रहल छी 5 प्रेम के गीत-सृजन मनुक्ख छी,मनुक्ख में बस मनुक्ख देखैत छी मनुक्ख छी, मनुक्ख के बस मनुक्ख चीन्हैत छी हम तऽ जनै छी प्रेम बस प्रेम करै छी भेंट करै छी जखन किनको सँ चीन्ह पाबी लोक के बस ने जाइत-धर्म रंग आ भाषा ने देश-समाज,कर्म-पैसा मुस्की बुझै छी अइंखक दीप्ति चीन्है छी हम तऽ जनै छी प्रेम बस प्रेम करै छी नै तकै छी ईश्वर ने स्वर्ग ने मोक्ष जिनगी के पुजारी बस जिनगी के सौख जिनगी पबै छी जिनगी बँटै छी जिनगी गबै छी जिनगी हँसै छी जिनगी छी जिनगीक सम्मान करै छी हम तऽ जनै छी प्रेम बस प्रेम करै छी देश कथी विदेश कथी सीमा के लकीर कथी धरती खुजल आकाश खुजल हवा पर कोनो बन्हन नय खूनक रंग एक्के उँच कथी नीच कथी भावना के सागर मनुष्य छुच्छ हाथ आबय-जाय पहिल साँस सऽ आख़िरी के एगो तान कहय छी हम तऽ जनै छी प्रेम बस प्रेम करै छी कि सिखलौं कि बुझलौं नय पढलौं जँ प्रेम पाठ शब्द ने कहिओ कहि सकत कहब जोग जे बात अरजलौं कथी सजेलौं जँ नय पकड़लौं प्रेमक हाथ थारी आगू आ भूखल रहलौं एहिना बीतल सगर बाट प्रेमी छी प्रेमक इएह गान कहै छी हम तऽ जनै छी प्रेम बस प्रेम करै छी ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। किछु कविता- बिनीता झा/ विकास झा/ मुन्नाजी १ बिनीता झा रखबार राघव, रक्षक राघव रसना रमल राघव रस रे l राति, रौदक रचयता राघव रचना रमल राघव रस रे l रग-रगमें रघूवर राघव रग-रग रमल राघव रस रे l राउ राघव, रत्न राघव रत्ती-रत्ती रमल राघव रस रे l रकटल रपटल रने रने रमचेलबा रमल राघव रास रे l राम राम रामदुलरीक रक्षक रेघा रहल रमल राघव रस रे l २ विकास झा एलै फागुन मास सखी हे . एलै फागुन मास सखी हे ,प्रियतम छथि बनबास भीजल अंग रंग सँ दहबह ,तैयो उठए पियास सखी हे एलै फागुन मास ! बिहुसैत आँगन बारी कानन ,खेतक हरियर चास बैरी प्रियतम प्रीत ने परसैथ,सुनगए मोनक आस सखी हे एलै फागुन मास ! कुहुकै कोइली चहुदिश भोरे,महमह मजरक झाँस सिहकि सिहकि टीसे दै पछबा,पिय बिनु रहल उदास सखी हे एलै फागुन मास ! अहु मधुमासे मोन उपासे, नेहक बनल खबास नीपल रंग बहुतो फगुआ ,पिया बिनु रहल उजास सखी हे एलै फागुन मास ! रंग अबीर अंग नहिं लागय ,भाबय ने मधुमास धन्न विधाता आस पुराओल, पहु घर अएला पास सखि हे एलै फागुन मास ! ३ मुन्ना जी कविता ऐब की बेरिया --------- ------------------- ऐबकी बेरिया आब' ने दियौ, जाइ के बेर हमहू जड़े लागि जेबै. की बुझै छै अपना के ओ ! ओत' एकसरे रहि करैत हेतै रंग- रभस आ हम......, गाम मे एकसरे रहि करू जीवन गार्त. ईह ...! ओ पुरूष भेल त' बड़ चलाक. अय बेर किन्नहु नै छोड़बनि..! जँ जाइ काल मुँह फेरलनि त' धरबनि गट्टा आ की क' लेब फेर सँ गेँठजोड़बा. सुनै छीयै- कहाँ दन ओत' राति दिन एके जकाँ हेइ छै मरदवा आ मौगी मिलि दुनू दिन राति खटै छै. ओइ ठामक खएन पीयन सब दीवगर. ओढ़ना -पहिरना आ लोक, मलूक ! जए दियौ स'ख जाइ चुल्हिमे विआह सँ पहिने लोक रहैए दोसरा परिवारक अंश विआहक पछाति छओंड़ी की छओंड़ा होइए अपन पैलवार वला सत्ते तहने त' होइ छै अपन परिवार . परिवारक संपुर्णता लेल चाही- चिलका मुदा ई मनसा त' हमरा देखिते छिड़ियाइ छै. कहीं मनसा ना मनसा त' नै छै. कहू- आव कोना जएत हमर जीवन, कोना बढ़त.....वंश ! नै ओकर खाँहिस नै....! आव त' हमरा अपने बुत्ते बचा क' राख' पड़त ओकर आ ओकर पुरखाक नाम मुदा ओकर संग नै , कोनो मनसाक दुरखा लागि. अहिवात आ वंशमानिक लेल. नाम बरू ओकरे चलतै. चलू ताकि लेबै नव बाट...! भविष्यक इजोतक लेल मौगिये वलें त' बाँचल रहै छै पुरूषक पुरषा आ वंश मनसा त' दंभ मे रहै छै हेरएल मोछ पर ताव दैत- पुरखैतीक. ----------------- ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’ चारि टा गजल 1. मात्रा-क्रम : 222-221-12 शिक्षाके सम्मान करू सभ झंझटि आसान करू भोजन वा जलपान करू अन्नक नै अपमान करू छागरके बलिदान किए पाखण्डक बलिदान करू सभकें चाही स्नेह-सुधा सभ जनले’निरमान करू सभ रस्ता हो स्वच्छ सदा नव-नव अनुसंधान करू भरि दुनियामे जाप चलय सुन्दर हिन्दुस्तान करू 2. मात्रा-क्रम : 2222-21-12 पहिने एके काज करू सभकें बाँटू राज करू किछु-किछु अनको पूछि लियौ किछु अपनो अंदाज करू पचपनमे छी आब अहाँ किछुओ लोकक लाज करू जेले अछि सभ जाति-धरम अप्पन चिन्तन साफ़ करू ई जिनगी थिक गीत गजल पावन सभ सुर साज करू 3. मात्रा-क्रम : 222-222-122 सुतलोमे खिखिआइत रहल ओ नै बाजल घिघिआइत रहल ओ नै गेलै कत्तौ नोकरीले’ गामेमे घुरिआइत रहल ओ नै सुनलक की कोना कहलिऐ हमरेपर खिसिआइत रहल ओ ककरो ओ जीमे ने लगेलक जिनगी भरि छिछिआइत रहल ओ नै रह्तै महगी आ गरीबी दुनियाले’ चिचिआइत रहल ओ 4. मात्रा-क्रम : 222-221-221 जायब हम दोकान कोना क’ कीनब हम ओ चान कोना क’ हाबामे छै गंध माहुरक बाँचत सबहक जान कोना क’ जे माथोमे तेल ने लेथि से करता किछु दान कोना क’ किछु दिन भोगू क्लेश जीवनक चीन्हब अप्पन-आन कोना क’ दूना केलक लोभ आ मोह तकरा कहबै ज्ञान कोना क’ सुख सुविधा आनंद जीवनक सभले’ हो आसान कोना क’ संपर्क------- जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’ मो. 9570635372 31. मात्रा-क्रम : 22222222 किछु नरमे नारायण देखल बाँकीमे बस रावण देखल सभठाँ सभ घटनामे भैया शकुनी आ दुरयोधन देखल झगडा-झाँटी गामेमे छै बाहरमे अपनापन देखल सबहक अनुमोदन छल पहिने पाछाँ सय संशोधन देखल बड़का टा छल पेटो ओकर भोजन अति साधारण देखल लाठी भालाके बदलामे फूलक हम आयोजन देखल ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। किछु गजल- अशरफ राईन/ अब्दुर रज्जाक/ नीरज कर्ण १ अशरफ राईन , सिनुरजोडा, धनुषा, हॉल :क़तार किछु गजल १ दोसरक सुख लेल अपन दुःख चोरा कऽ राखी हृदय भीतर सदैब उज्जवल दीप ज़रा कऽ राखी मानवता केर सदिखन ख्याल राखि समाज में एक दोसर मिल क प्रेमक बस्ती सजा कऽ राखी की जाती धर्मक भेद बिभेद लक लडि रहल छी पहिने बनि मनुष्य हृदय सँ हृदय मिला कऽ राखी मैर रहल छै जरि रहल छै बेटी कुप्रथाक चपेट में दहेजक ठीकेदार सँ अपन बेटी बचा कऽ राखी सभक शोणित एकहि रंग त रहू मिल संग संग प्रेमक डोर बान्हि सब संग मीत लगा कऽ राखी २ पायक लोभें परिवार सँ मुह मोड़ी रहल छी फेर दू साल लेल अपन देश छोड़ि रहल छी हृदय में अपना नुका देश प्रतिक माया आब रेगिस्तानक मरुभूमी सँ नाता जोड़ी रहल छी मोतीयो सँ बेसी अनमोल पसीना बेचैत हम खेती बारी छोड़िक एत पाथर फोड़ि रहल छी जरि - जरि कऽ कटि रहल जबानी हमर मानु अपने जीवन में अपने बिस घोडि रहल छी मेहनत अशरफ़ रंग लेतै की एह आश लऽ अपन निसबक चाभी बालूमे खोजि रहल छी सरल वार्णिक बहर वर्ण:१८ २ अब्दुर रज्जाक (हाल कतार ) किछु गजल आ कता १ बनल एक सवालक जवाफ छीअहाँ बसन्तमें फुलल एक गुलाब छीअहाँ उठल तूफान भs मोंनक हियासंग साजल हमरा लेल उ सबाब छिअहाँ देखैत हम जागलमें जेना देखलेलौ नहीं सुतल बेरक सुंदर खाब छीअहाँ हमर प्रीत मिलल जंs अहाक नैनासंग देखैत रहलौ एक खाश जनाब छीअहाँ 'अब्दुल'क ह्र्दयमें फुलल फुलबारीस किए तोइरक फूल बनलौ बेताब अहाँ २ अहाँ सब फूलमें रानी छी किया बनल हमर दिबानी छी बिनअहाँक नही आब हमरा बस एक झलकप धियानी छी झ्ल्कैत रूप संग कहबाक नही बनल बेजोर हरदम मस्तानी छी जं कोई नैन गरा देखलेत देखब जानु अहा ओकर निशानी छी नहीं बस कोई फूल अहा संगे मुदा सजावल सुंदर फूलदानी छी। ३ चलू किछ देर अहिसंग छी नै करु अबेर अहिसंग छी 'लsजाक' अहाँ मुसकेलौं किए हृदयमे हर बेर अहिसंग छि किछ कहबाक छल मुदा की ? मोंनक सब सबेरअहिसंग छी हम देखलौ अपनों दर्पणमें छाँया नै अन्हेर अहिसंग छी 'अब्दुल'के निशब्द बनाक अहा हम प्रेमक अलिसेर अहिसंग छी ४ कता लाठी भराठी लsक नारा दsके भत्ता करैय इसरा लुटीहारा सब हsक एहे चलन अछि जनता बनौने जनता क' हतयारा ३ नीरज कर्ण गजल की करबै जौं जिनगी सून भ गेलै बिन कर्मक सुखलाहा चून भ गेलै सुख दुख अछि जिनगीकेँ जोड़ घटाऊ किछु चौगुन भेलै किछु दून भ गेलै रहलै सोअदगर सभ लोग मुदा यौ किछु नुनगर आ किछु मधनून भ गेलै बुझियौ जकरा अप्पन नोर करेजक जग में ऊ नीरक दू बून भ गेलै "नीरज" अछि खूनी कनि माफ क देबै मोनक सेहन्ता के खून भ गेलै प्रत्येक पाँति में मात्राक्रम 222222-21122 ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह नूतन अंक बालानां कृते विदेहमैथिलीमानकभाषाआमैथिलीभाषासम्पादनपाठ्यक्रम भाषापाक डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह” किछु बाल कविता बागर (बाल कविता) कोना करै छेँ - “बागर” सनि, बागर की होइ छै - से बता । बागर - बागर लोक बाजैए, बागर की - ककरो ने पता ।। जे कहबेँ - पएबेँ ईनाम, सोचै जाइ जो सभ धियापुता । हारि गेलेँ, तखने हम कहबौ, नञि तँऽ छी हमरो ने पता ।। एहिना बहुते शब्द मैथिलीक, हेरा गेल ककरो ने पता । जे बाँचल, पैघो ने बाजए, सीखतै कोना धियापुता ।। नेनपनमे सुनलहुँ, पूछल, पर अर्थ ने बूझल छल ककरो । उत्कण्ठा तकबाक हिलोरल, तेँ किछु बूझल अछि हमरो ।। “बागर” परबा केर प्रजाति, सन्दर्भ भेटल हमरा एक ठाँ ।*१ उकपाती आ बड़ झगड़ौआ, बड़ हल्ला रहितए जाहि ठाँ ।।*२ संकेत आ किछु रोचक तथ्य - *१ - CSIR (आब NISCAIR) NEW DELHI द्वारा प्रकाशित पोथी WEALTH OF INDIA : BIRDS केर अनुसार “बागर” परबाक एक प्रजाति छल । कल्याणी कोशक अनुसार “बागर” एक प्रकारक बकरी थिक । सम्भवतः दुहु अपना - अपना अनुसारेँ सही छथि आ “बागर” अनेकार्थी शब्द थिक । *२ - एहि ठाम हम परबाक एकटा प्रजातिक रूपमे बागरकेँ लेल गेल अछि जे स्वभावसँ बहुत झगरौआ, उकपाती आ हल्ला मचबए बला होइत छल आ परबाक प्रतियोगिता (परबाबजी) केर उद्देश्यसँ पोषल जाइत छल । गेंड़ा (बाल कविता) केहेन अजगुत जीव ! − पहिरने “सूट - सफारी” । लागय सेना केर वर्दीमे भागल वर्दीधारी ।।*१ नाकक ऊपर सिंघ एगो या दूगो*२ छै जनमल ।*३ सिंघक*४ वार - प्रहार जेना तरुआरिक सनकल ।।*५ बास ओकर, घास संगहि क्षेत्र दलदली ।*६ देखितहिं देरी सिंहहुमे मचि जाइछ खलबली ।।*५ घासहि खा कऽ जिबैत अछि ई जीव शाकाहारी । निर्मम वध कऽ रहल एकर सिंघ केर व्योपारी ।।*७ भारत केर उत्तर आ पूब दिशि एकरहि राज छै । काजीरंगा - जलदापाड़ा - दुधवामे सोराज छै ।।*८ नेपालक परसा - चितबन - बर्दिया भूटानमे । भारतीय गेंड़ा बाँचल छै, एहने किछु सुठाममे ।।*८ कहियो सौंसे बास छलै - सिन्धुसँ दिहांग धरि ।*९ आब तँऽ बूझू बाँचल छै बङ्ग ओ असाम धरि ।। एकसिंघी भारत - नेपाल - भूटान आ जावा । दूसिंघी - गेंड़ा भेटैतछि अफ्रिका - सुमात्रा ।।*१० संकेत आ किछु रोचक तथ्य - *१ - गेंड़ाक शरीर पर चमरीक मोट सुरक्षात्मक स्तर होइत अछि जकर मोटाई डेढ़सँ पाँच सेन्टीमीटर धरि भऽ सकैत अछि । *२ - “एगो” आ “दूगो” क्रमशः “एक गोट” आ “दू गोट” केर संक्षिप्त रूप थिक । ठीक तहिना जेना कि अंग्रेजीक RHINO शब्द RHINOCEROS केर संक्षिप्त रूप । *३ - गेंड़ाक नाकक ऊपर एक या दू टा सिंघ होइत अछि । *४ - श्रृंग (तत्सम) > सिंग (अर्ध तत्सम) > सिंघ (तद्भव), संगहि एकसिंगही = एकसिंघी = एक सिंग/सिंघ बला । सिंघ शब्द सिंह केर तद्भव स्वरूपमे सेहो प्रयुक्त होइत अछि । एहि तरहेँ सिंघ शब्द मैथिलीमे तद्भव शब्द भेल आ अनेकार्थक शब्द सेहो कारण एकर दू टा भिन्न अर्थ होइत अछि - पहिल श्रृंग (HORN) आ दोसर सिंह (LION) । *५ - सिंघ केर उपयोग गेंड़ा अपन सुरक्षा लेल करैत अछि । सिंघ जखन पैघ भऽ जाइत अछि तँऽ ओ एतेक मजगूत भऽ जाइत अछि कि ओकर प्रहारसँ गेँड़ा कोनहु मजगूत गाछकेँ सेहो तोड़ि सकैत अछि । एहि सिंघक प्रहारसँ बाघ - सिंह सेहो डऽर मानैत अछि । *६ - गेंड़ा शाकाहारी प्राणी अछि । दलदली क्षेत्र जकर आस - पास घासक प्रचूरता हो − से गेंड़ाक प्राकृतिक आवास क्षेत्र होइत अछि । *७ - गेंड़ाक सिंघ केर तश्करी होइत अछि आ ताहि कारणेँ ओकर निर्मम अवैध हत्या कएल जाइत अछि । *८ - भारतीय गेंड़ा पहिने सम्पुर्ण उतरबारी भारतक जंगलमे पाओल जाइत छल पर आब सिर्फ किछु सुरक्षित अभ्यारण्य या निकुञ्जमे बाँचल अछि । *९ - “दिहांग” नदी - अरुणाचल प्रदेशमे “ब्रह्मपुत्र” नदी केर नाँओ । *१० - भारत, नेपाल, भुटान, म्यांमार आ जावामे प्राकृतिक रूपसँ पाओल जाए बला गेंड़ाक नाकक ऊपर मात्र एक टा सिंघ होइत अछि जखनि कि अफ्रिका महादेश आ सुमात्रामे पाओल जाए बला गेंड़ाक नाकक ऊपर दू टा सिंघ होइत अछि । दू आखर हुनिका लेल जनिका “सिंग” केर एवजमे “सिंघ” नञि रुचैत हो - (एहि अंशकेँ प्रकाशित करबाक वा नञि करबाक पुर्ण अधिकार सम्पादक महोदयकेँ छन्हि । चाहथि तँऽ ओ एहि अंशकेँ बालानां कृतेसँ अलग आन ठाम कतहु स्थान दऽ सकैत छथि ।) Ø “सिंग” सही कि “सिंघ” ? - एहि तरहक प्रश्न करब अनुचित । Ø भाषाशास्त्री लोकनिक एहि तरहक प्रश्न गलत ओ अपुर्ण अछि । Ø प्रश्न होयबाक चाही कि “सिंग” आ “सिंघ” जँ दुहु मैथिलीक शब्द थिक तँ ओहिमे भाषाशास्त्रीय दृष्टिकोणसँ की अन्तर ? Ø अथवा, प्रश्न होयबाक चाही कि ओ दुहु शब्द भाषाशास्त्रक कोन आधार पर मैथिलीक शब्द भेल ? (एहि प्रश्नक उतारा हम ऊपरमे देबाक प्रयास कएल अछि) । Ø हम आओर अहाँ अपना मान्यताक आधार पर के होइत छी सही-गलत केर प्रमाण पत्र देनिहार ? Ø मैथिलीक जँ वास्तवमे हित चाहैत छी तँऽ मैथिलीक भाषाशास्त्री ओ व्याकरणाचार्य लोकनिकेँ आन भाषाक भाषाशास्त्री ओ व्याकरणाचार्य लोकनि जेकाँ “एकहरबा वा एकढ़बा” बनबाक स्थान पर समावेशी होअए पड़तन्हि । ठीक तहिना जेना अंग्रेजी मे COLOUR सेहो सही अछि आ COLOR सेहो सही । LEUCOCYTE सेहो सही अछि सेहो LUCOCYTE सही आ LUKOCYTE सेहो सही । Ø आनहु भाषा यथा हिन्दी, भोजपुरी, मगही, मराठी, बाङ्ग्ला आदिमे ई समावेशी नीति अपनाओल जा रहल अछि । यथा हिन्दीक एकटा उदाहरण नीचाँक दुहु चित्रमे देखू - Ø केओ कहैत छथि हम मात्र संस्कृतनिष्ठ शब्दकेँ मैथिली मानैत छी । केओ कहैत छथि हम मात्र “स” कें मैथिली बुझैत छी “श” आ “ष” केँ नञि । यौ (अओ,औ), अहाँक अहाँक मानब ओ बूझब अहाँक अप्पन मोनक बात छी, ओ सभ पर नञि थोपल जा सकैत अछि । जँ सएह करबाक छल तँऽ कथी लेल “मैथिली वर्णमाला”केँ मैथिली व्याकरणमे स्तान देल आओर किएक किएक पढ़बेत छिऐ जे उद्गमक आधार पर शब्द मुख्यतः चारि प्रकारक होइत अछि - तत्सम, तद्भव, देशज ओ विदेशज । Ø कोनहु जिबैत भाषा सतत प्रवाहमान नदी जेकाँ होइत अछि । ओएह नदी जिबैत अछि जे सतत प्रवाहमान होइत अछि आ अपना दुहु किनाराक माटिकेँ काटि अपनामे भँसिआ, अपना धारक संग बहा आगाँ बढ़बाक सामर्थ्य रखैत अछि । जाहि नदीमे से सामर्थ्य नञि ओ क्रमिक रूपेँ सूखाए जाइत अछि आ अन्ततः मृत भऽ जाइत अछि । Ø कोनहु जिबैत भाषाक व्याकरण सतत समावेशी होइत अछि आ कालक्रमेण धीरे-धीरे ओहिमे किछु-किछु सकारात्मक परिवर्तन होइत रहैत अछि । शेक्सपियरकालसँ एखन धरिक अंग्रेजी व्याकरणक अध्ययन अपने कऽ सकैत छी । ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)2004-16. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽलेखकक नाम नैअछि ततऽसंपादकाधीन।विदेह- प्रथममैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)ggajendra@videha.comकेँमेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि।रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचयआ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेता, से आशा करै छी। रचनाक अंतमेटाइप रहए, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहलअछि।एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै। ऐ ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मीठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-16सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटारचनाआ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाकअनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतुggajendra@videha.co.inपर संपर्क करू। ऐ साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरीआ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल।५ जुलाई २००४ केँhttp://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ”जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सिद्धिरस्तु विदे हwww.videha.co.inविदेहप्रथम मैथिलीपाक्षिक ई पत्रिकाwww.videha.comVideha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'विदेह' १९९ म अंक ०१ अप्रैल २०१६ (वर्ष ९ मास १०० अंक १९९)मानुषीमिह संस्कृताम्ISSN 2229-547X VIDEHA
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* iad बाराएसिंगा) SWAMP DEER lus duvaucelic) श इसके सिर पर बारह छोटे सिंगो के कारण इसे बारह सिंगा कहा जाता है। यह कीचड़ वाले स्थान पर रहना पसंद करता हैं। ~4 अत Videha” Ose शशिधर gar “विदेह” © wl मलियव ORES Lcd डा. है स्थानें -संजय गाँधी जैविक उद्यान, पंटना
mY _ 5 _ } कर ् o> © Or. Shashidhgll ही f डॉ. शशिधर कुमर “विदेह” 6 छा Pa बूभव rr 7 | ह | Lal Aw _ oF s 4 J & ve \\ gf rd — aa “a " _ पहिने ब्रम्हपुत्र 3 सिन्धु नदी af समस्त उतरबारी भारतक मैदानी भागक दलदली क्षेत्रमे "sist" पाओल जाइत छल | संस्कृतक "गण्डक" नाम ओकर गण्डक नदीक कछेरक दलदली भागमे एहि प्रणीक उपस्थिति दिशि इशारा करैछ | एसव्नडु नेपालक "ORT याष्ट्रिय निकुज्ज" ओ "चितवन या०्नि०"मे sistp उपस्थिति एडि बातक समर्तक अछि | पर भारतक मिथिला क्षेत्रसँ आब ई प्राणी विलुप्न भ5 चुकल अछि | उपयेक्त छायाचित्रमे sigh प्रतिमा आ ताहि ऊपर दू cr मवेशी बगुला (CATTLE EGRET) आ पाछाँमे गेंड़ा GA कएल गेल गोबर देखाओल गेल अछि 3 प्रतिमा "बिहार अंतर्राष्ट्रिय संग्रहालय, पटना" मे अछि जाहिमे प्रतिमाक संगहि ठाढ़ि छथि श्रीमति सुप्रिया कुमारी (हमर धर्मपत्नी) |
croc eit Ae N ES गे हर if (ieee Ve ee eee re —_——_ पर * डा =" *+ se स्थान - संजय गाँधी जैविक उद्यान; पटना मैंथिली - गेंड़ा (चित्रमें एकसिंघी भारतीय sist) हिन्दी - गैंण्डा (चित्रमे एकसिंगी भ्रारतीय गैण्डा) संस्कृत - गण्डक, गण्ड, गण्डाड्ग, तैतिल, खड्ग, रखड्गगिनू आदि अंग्रेजी - RHINOCEROS / RHINO (Short abbreviated form) जेववैज्ञा० नाम - Rhinoceros spp. (चित्रमे Rhinoceros unicornis) नोट - संस्कृत भाषामे आयल हरेक नाँओ या पर्यायी नाँओ स्वतः मैथिली भाषामे पर्यायी नाँओ ots जाइत अछि - तत्सम स्वरूपमे)
Piso 7 “ 4 i, i Eee: ‘ oye ही हे ahh भी . 3 ‘= . 4 i St ihr omar i " Osh शशिधर gat “विदेह” © ul xf = co कं | vim ck all ore Be eS घास खाइत एकसिंघी भारतीय sist (Rhinoceros unicornis)
; कट oes Os सन eS eee Se om aes दर ee oe. oe es Dr. Shashidhar Kumar “Vide OGIO कमर “Pea” रा ? iy स्थाल-संजय गाँधी जैविक उद्यान, पटना (Rhinoceros unicornis syn. Rhinoceros indicus)