VIDEHA — Issue 211 / अंक २११

Publication: VIDEHA · Issue: 211
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77 ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' २११ म अंक ०१ अक्टूबर २०१६ (वर्ष ९ मास १०६ अंक २११) ऐ अंकमे अछि:- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१.डॊ कैलाश कुमार मिश्र- मैथिली लोकगीतमे कौआ सम्बाहक २.२.सत्य नारायण झा- प्रजातंत्र एकटा मजाक २.३.उमेश मण्डल-इतिहास- सगर राति दीप जरय २.४.उमेश मण्डल आ पुनम मण्‍डल- समाद- सगर राति दीप जरय ३. पद्य ३.१.आशीष अनचिन्हार- २ टा गजल ३.२.वीरू सोनकर तीन टा हिंदी कविता- मैथिली अनुवाद आशीष अनचिन्हार ३.३.बाबा बैद्यनाथ-आजाद गजल ३.४.जगदीश चन्द्र ठाकुर  अनिल- गजल ४.बालानां कृते-प्रणव कुमार झा- अलर - बलर Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव Join official Videha facebook group. 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समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०१०-११ २०१० श्री गोविन्द झा (समग्र योगदान लेल) २०११ श्री रमानन्द रेणु (समग्र योगदान लेल) २.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११-१२ २०११ मूल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, कथा संग्रह) २०११ बाल साहित्य पुरस्कार- ले.क. मायानाथ झा (जकर नारी चतुर होइ, कथा संग्रह) २०११ युवा पुरस्कार- आनन्द कुमार झा (कलह, नाटक) २०१२ अनुवाद पुरस्कार- श्री रामलोचन ठाकुर- (पद्मानदीक माझी, बांग्ला- मानिक बंद्योपाध्याय, उपन्यास बांग्लासँ मैथिली अनुवाद) विदेह भाषा सम्मान २०१२-१३ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) 1.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार 2012 2012 श्री राजनन्दन लाल दास (समग्र योगदान लेल) 2.विदेह भाषा सम्मान २०१२-१३ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) २०१२ बाल साहित्य पुरस्कार - श्री जगदीश प्रसाद मण्डल केँ “तरेगन” बाल प्रेरक विहनि कथा संग्रह २०१२ मूल पुरस्कार - श्री राजदेव मण्डलकेँ "अम्बरा" (कविता संग्रह) लेल। 2012 युवा पुरस्कार- श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरीक “अर्चिस” (कविता संग्रह) 2013 अनुवाद पुरस्कार- श्री नरेश कुमार विकल "ययाति" (मराठी उपन्यास श्री विष्णु सखाराम खाण्डेकर) विदेह भाषा सम्मान २०१३-१४ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) २०१३ बाल साहित्य पुरस्कार – श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरी- “देवीजी” (बाल निबन्ध संग्रह) लेल। २०१३ मूल पुरस्कार - श्री बेचन ठाकुरकेँ "बेटीक अपमान आ छीनरदेवी" (नाटक संग्रह) लेल। २०१३ युवा पुरस्कार- श्री उमेश मण्डलकेँ “निश्तुकी” (कविता संग्रह)लेल। २०१४ अनुवाद पुरस्कार- श्री विनीत उत्पलकेँ “मोहनदास” (हिन्दी उपन्यास श्री उदय प्रकाश)क मैथिली अनुवाद लेल। विदेह भाषा सम्मान २०१४-२०१५ (समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान) २०१४ मूल पुरस्कार- श्री नन्द विलास राय (सखारी पेटारी- लघु कथा संग्रह) २०१४ बाल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (नै धारैए- बाल उपन्यास) २०१४ युवा पुरस्कार - श्री आशीष अनचिन्हार (अनचिन्हार आखर- गजल संग्रह) २०१५ अनुवाद पुरस्कार - श्री शम्भु कुमार सिंह ( पाखलो -  तुकाराम रामा शेटक कोंकणी उपन्यासक मैथिली अनुवाद) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१२ अभि‍नय- मुख्य अभिनय , सुश्री शि‍ल्‍पी कुमारी, उम्र- 17 पि‍ता श्री लक्ष्‍मण झा श्री शोभा कान्‍त महतो, उम्र- 15 पि‍ता- श्री रामअवतार महतो, हास्‍य-अभिनय सुश्री प्रि‍यंका कुमारी, उम्र- 16, पि‍ता- श्री वैद्यनाथ साह श्री दुर्गानंद ठाकुर, उम्र- 23, पि‍ता- स्‍व. भरत ठाकुर नृत्‍य सुश्री सुलेखा कुमारी, उम्र- 16, पि‍ता- श्री हरेराम यादव श्री अमीत रंजन, उम्र- 18, पि‍ता- नागेश्वर कामत चि‍त्रकला श्री पनकलाल मण्डल, उमेर- ३५, पिता- स्व. सुन्दर मण्डल, गाम छजना श्री रमेश कुमार भारती, उम्र- 23, पि‍ता- श्री मोती मण्‍डल संगीत (हारमोनियम) श्री परमानन्‍द ठाकुर, उम्र- 30, पि‍ता- श्री नथुनी ठाकुर संगीत (ढोलक) श्री बुलन राउत, उम्र- 45, पि‍ता- स्‍व. चि‍ल्‍टू राउत संगीत (रसनचौकी) श्री बहादुर राम, उम्र- 55, पि‍ता- स्‍व. सरजुग राम शिल्पी-वस्तुकला श्री जगदीश मल्लिक,५० गाम- चनौरागंज मूर्ति-मृत्तिका कला श्री यदुनंदन पंडि‍त, उम्र- 45, पि‍ता- अशर्फी पंडि‍त काष्ठ-कला श्री झमेली मुखिया,पिता स्व. मूंगालाल मुखिया, ५५, गाम- छजना किसानी-आत्मनिर्भर संस्कृति श्री लछमी दास, उमेर- ५०, पिता स्व. श्री फणी दास, गाम वेरमा विदेह मैथिली पत्रकारिता सम्मान -२०१२ श्री नवेन्दु कुमार झा नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१३ मुख्य अभिनय- (1) सुश्री आशा कुमारी सुपुत्री श्री रामावतार यादव, उमेर- १८, पता- गाम+पोस्‍ट- चनौरागंज, भाया- तमुरि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) मो. समसाद आलम सुपुत्र मो. ईषा आलम, पता- गाम+पोस्‍ट- चनौरागंज, भाया- तमुरि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (3) सुश्री अपर्णा कुमारी सुपुत्री श्री मनोज कुमार साहु, जन्‍म ति‍थि‍- १८-२-१९९८, पता- गाम- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही,जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) हास्‍य–अभिनय- (1) श्री ब्रह्मदवे पासवान उर्फ रामजानी पासवान सुपुत्र- स्‍व. लक्ष्‍मी पासवान, पता- गाम+पोस्‍ट- औरहा, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) टाॅसि‍फ आलम सुपुत्र मो. मुस्‍ताक आलम, पता- गाम+पोस्‍ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान (मांगनि खबास समग्र योगदान सम्मान) शास्‍त्रीय संगीत सह तानपुरा : श्री रामवृक्ष सि‍ंह सुपुत्र श्री अनि‍रूद्ध सि‍ंह, उमेर- ५६, गाम- फुलवरि‍या, पोस्‍ट- बाबूबरही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) मांगनि‍ खबास सम्‍मान: मिथिला लोक संस्कृति संरक्षण: श्री राम लखन साहु पे. स्‍व. खुशीलाल साहु, उमेर- ६५, पता, गाम- पकड़ि‍या, पोस्‍ट- रतनसारा, अनुमंडल- फुलपरास (मधुबनी) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान (समग्र योगदान सम्मान): नृत्‍य - (1) श्री हरि‍ नारायण मण्‍डल सुपुत्र- स्‍व. नन्‍दी मण्‍डल, उमेर- ५८, पता- गाम+पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) सुश्री संगीता कुमारी सुपुत्री श्री रामदेव पासवान, उमेर- १६, पता- गाम+पोस्‍ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) चि‍त्रकला- (1) जय प्रकाश मण्‍डल सुपुत्र- श्री कुशेश्वर मण्‍डल, उमेर- ३५, पता- गाम- सनपतहा, पोस्‍ट– बौरहा, भाया- सरायगढ़, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) (2) श्री चन्‍दन कुमार मण्‍डल सुपुत्र श्री भोला मण्‍डल, पता- गाम- खड़गपुर, पोस्‍ट- बेलही, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) संप्रति‍, छात्र स्‍नातक अंति‍म वर्ष, कला एवं शि‍ल्‍प महावि‍द्यालय- पटना। हरि‍मुनि‍याँ / हारमोनियम (1) श्री महादेव साह सुपुत्र रामदेव साह, उमेर- ५८, गाम- बेलहा, वार्ड- नं. ०९, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) श्री जागेश्वर प्रसाद राउत सुपुत्र स्‍व. रामस्‍वरूप राउत, उमेर ६०, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) ढोलक/ ठेकैता/ ढोलकि‍या (1) श्री अनुप सदाय सुपुत्र स्‍व.   , पता- गाम- तुलसि‍याही, पोस्‍ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) (2) श्री कल्‍लर राम सुपुत्र स्‍व. खट्टर राम, उमेर- ५०, गाम- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) रसनचौकी वादक- (1) वासुदेव राम सुपुत्र स्‍व. अनुप राम, गाम+पोस्‍ट- ि‍नर्मली, वार्ड न. ०७  , जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) शिल्पी-वस्तुकला- (1) श्री बौकू मल्‍लि‍क सुपुत्र दरबारी मल्‍लि‍क, उमेर- ७०, गाम- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) श्री राम वि‍लास धरि‍कार सुपुत्र स्‍व. ठोढ़ाइ धरि‍कार, उमेर- ४०, पता- गाम+पोस्‍ट- चनौरागंज, भाया- तमुरि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) मूर्तिकला-मृर्तिकार कला- (1) घूरन पंडि‍त सुपुत्र- श्री मोलहू पंडि‍त, पता- गाम+पोस्‍ट– बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) श्री प्रभु पंडि‍त सुपुत्र स्‍व.   , पता- गाम+पोस्‍ट- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) काष्ठ-कला- (1) श्री जगदेव साहु सुपुत्र शनीचर साहु, उमेर- ३६, गाम- ि‍नर्मली-पुरर्वास, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) (2) श्री योगेन्‍द्र ठाकुर सुपुत्र स्‍व. बुद्धू ठाकुर उमेर- ४५, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) किसानी- आत्मनिर्भर संस्कृति- (1) श्री राम अवतार राउत सुपुत्र स्‍व. सुबध राउत, उमेर- ६६, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) (2) श्री रौशन यादव सुपुत्र स्‍व. कपि‍लेश्वर यादव, उमेर- ३५, गाम+पोस्‍ट– बनगामा, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) अल्हा/महराइ- (1) मो. जीबछ सुपुत्र मो. बि‍लट मरहूम, उमेर- ६५, पता- गाम- बसहा, पोस्‍ट- बड़हारा, भाया- अन्‍धराठाढ़ी, जि‍ला- मधुबनी, पि‍न- ८४७४०१ जोगि‍रा- श्री बच्‍चन मण्‍डल सुपुत्र स्‍व. सीताराम मण्‍डल, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) श्री रामदेव ठाकुर सुपुत्र स्‍व. जागेश्वर ठाकुर, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) पराती (प्रभाती) गौनि‍हार आ खजरी/ खौजरी वादक- (1) श्री सुकदेव साफी सुपुत्र श्री   , पता- गाम इटहरी, पोस्‍ट- बेलही, भाया- ि‍नर्मली, थाना- मरौना, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) पराती (प्रभाती) गौनि‍हार - (अगहनसँ माघ-फागुन तक गाओल जाइत) (1) सुकदेव साफी सुपुत्र स्‍व. बाबूनाथ साफी, उमेर- ७५, पता- गाम इटहरी, पोस्‍ट- बेलही, भाया- ि‍नर्मली, थाना- मरौना, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) (2) लेल्हु दास सुपुत्र स्‍व. सनक मण्‍डल पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) झरनी- (1) मो. गुल हसन सुपुत्र अब्‍दुल रसीद मरहूम, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) (2) मो. रहमान साहब सुपुत्र...., उमेर- ५८, गाम- नरहि‍या, भाया- फुलपरास, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) नाल वादक- (1) श्री जगत नारायण मण्‍डल सुपुत्र स्‍व. खुशीलाल मण्‍डल, उमेर- ४०, गाम+पोस्‍ट- ककरडोभ, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) श्री देव नारायण यादव सुपुत्र श्री कुशुमलाल यादव, पता- गाम- बनरझुला, पोस्‍ट- अमही, थाना- घोघड़डीहा, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) गीतहारि‍/ लोक गीत- (1) श्रीमती फुदनी देवी पत्नी श्री रामफल मण्‍डल, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) (2) सुश्री सुवि‍ता कुमारी सुपुत्री श्री गंगाराम मण्‍डल, उमेर- १८, पता- गाम- मछधी, पोस्‍ट- बलि‍यारि‍, भाया- झंझारपुर, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) खुरदक वादक- (1) श्री सीताराम राम सुपुत्र स्‍व. जंगल राम, उमेर- ६२, पता- गाम- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) श्री लक्ष्‍मी राम सुपुत्र स्‍व. पंचू मोची, उमेर- ७०, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) काँरनेट- (1) श्री चन्‍दर राम सुपुत्र- स्‍व. जीतन राम, उमेर- ५०, पता- गाम- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) मो. सुभान, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्‍ट- चनौरागंज, भाया- तमुरि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) बेन्‍जू वादक- (1) श्री राज कुमार महतो सुपुत्र स्‍व. लक्ष्‍मी महतो, उमेर- ४५, गाम- ि‍नर्मली वार्ड नं. ०४, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) (2) श्री घुरन राम, उमेर- ४३, गाम+पोस्‍ट- बनगामा, भाया- नरहि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) भगैत गवैया- (1)  श्री जीबछ यादव सुपुत्र स्‍व. रूपालाल यादव, उमेर- ८०, पता- गाम इटहरी, पोस्‍ट- बेलही, भाया- ि‍नर्मली, थाना- मरौना, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) (2)  श्री शम्‍भु मण्‍डल सुपुत्र स्‍व. लखन मण्‍डल, पता- गाम- बढि‍याघाट-रसुआर, पोस्‍ट– मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, ि‍जला- सुपौल (बि‍हार) खि‍स्‍सकर- (खि‍स्‍सा कहैबला)- (1) श्री छुतहरू यादव उर्फ राजकुमार, सुपुत्र श्री राम खेलावन यादव, गाम- घोघरडि‍हा, पोस्‍ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जि‍ला- सुपौल, पि‍न- ८४७४५२ (2) बैजनाथ मुखि‍या उर्फ टहल मुखि‍या- (2)सुपुत्र स्‍व. ढोंगाइ मुखि‍या, पता- गाम+पोस्‍ट- औरहा, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) मिथिला चित्रकला- (1) सुश्री मि‍थि‍लेश कुमारी सुपुत्री श्री रामदेव प्रसाद मण्‍डल ‘झारूदार’ पता- गाम- रसुआर, पोस्‍ट-– मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, ि‍जला- सुपौल (बि‍हार) (2) श्रीमती वीणा देवी पत्नी श्री दि‍लि‍प झा, उमेर- ३५, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) खजरी/ खौजरी वादक- (2) श्री कि‍शोरी दास सुपुत्र स्‍व. नेबैत मण्‍डल, पता- गाम- रसुआर, पोस्‍ट-– मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, ि‍जला- सुपौल (बि‍हार) तबला- श्री उपेन्‍द्र चौधरी सुपुत्र स्‍व. महावीर दास, उमेर- ५५, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) श्री देवनाथ यादव सुपुत्र स्‍व. सर्वजीत यादव, उमेर- ५०, गाम- झाँझपट्टी, पोस्‍ट- पीपराही, भाया- लदनि‍याँ, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) सारंगी- (घुना-मुना) (1) श्री पंची ठाकुर, गाम- पि‍पराही। झालि‍- (झलि‍बाह) (1) श्री कुन्‍दन कुमार कर्ण सुपुत्र श्री इन्‍द्र कुमार कर्ण पता- गाम- रेबाड़ी, पोस्‍ट- चौरामहरैल, थाना- झंझारपुर, जि‍ला- मधुबनी, पि‍न- ८४७४०४ (2) श्री राम खेलावन राउत सुपुत्र स्‍व. कैलू राउत, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) बौसरी (बौसरी वादक) श्री रामचन्‍द्र प्रसाद मण्‍डल सुपुत्र श्री झोटन मण्‍डल, उमेर- ३०, बौसरी/बौसली/बासुरी बजबै छथि‍। पता- गाम- रसुआर, पोस्‍ट- मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, ि‍जला- सुपौल (बि‍हार) श्री वि‍भूति‍ झा सुपुत्र स्‍व. कनटीर झा, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्‍ट- कछुबी, भाया- तमुरि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) लोक गाथा गायक श्री रवि‍न्‍द्र यादव सुपुत्र सीताराम यादव, पता- गाम- तुलसि‍याही, पोस्‍ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) श्री पि‍चकुन सदाय सुपुत्र स्‍व. मेथर सदाय, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) मजि‍रा वादक (छोकटा झालि‍...) श्री रामपति‍ मण्‍डल सुपुत्र स्‍व. अर्जुन मण्‍डल, पता- गाम- रसुआर, पोस्‍ट- मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, ि‍जला- सुपौल (बि‍हार) मृदंग वादक- (1) श्री कपि‍लेश्वर दास सुपुत्र स्‍व. सुन्नर दास, उमेर- ७०, गाम- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) श्री खखर सदाय सुपुत्र स्‍व. बंठा सदाय, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) तानपुरा सह भाव संगीत (1) श्री रामवि‍लास यादव सुपुत्र स्‍व. दुखरन यादव, उमेर- ४८, गाम- सि‍मरा, पोस्‍ट- सांगि‍, भाया- घोघड़डीहा, थाना- फुलपरास, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) तरसा/ तासा- श्री जोगेन्‍द्र राम सुपुत्र स्‍व. बि‍ल्‍टू राम, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) श्री राजेन्‍द्र राम सुपुत्र कालेश्वर राम, उमेर- ५८, गाम- मझौरा, पास्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) रमझालि‍/ कठझालि‍/ करताल वादक- श्री सैनी राम सुपुत्र स्‍व. ललि‍त राम, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) श्री जनक मण्‍डल सुपुत्र स्‍व. उचि‍त मण्‍डल, उमेर- ६०, रमझालि‍/ कठझालि‍/ करताल वादक,  १९७५ ई.सँ रमझालि‍ बजबै छथि‍। पता- गाम- बढि‍याघाट/रसुआर, पोस्‍ट- मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) गुमगुमि‍याँ/ ग्रुम बाजा श्री परमेश्वर मण्‍डल सुपुत्र स्‍व. बि‍हारी मण्‍डल उमेर- ४१, १९८० ई.सँ गुमगुि‍मयाँ बजबै छथि‍। श्री जुगाय साफी सुपुत्र स्‍व. श्री श्रीचन्‍द्र साफी, उमेर- ७५, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) डंका/ ढोल वादक श्री बदरी राम, उमेर- ५५, पता- गाम इटहरी, पोस्‍ट- बेलही, भाया- ि‍नर्मली, थाना- मरौना, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) श्री योगेन्‍द्र राम सुपुत्र स्‍व. बि‍ल्‍टू राम, उमेर- ५५, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) डंफा (होलीमे बजाओल जाइत...) श्री जग्रनाथ चौधरी उर्फ धि‍यानी दास सुपुत्र स्‍व. महावीर दास, उमेर- ६५, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र),जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) श्री महेन्‍द्र पोद्दार, उमेर- ६५, पता- गाम+पोस्‍ट- चनौरागंज, भाया- तमुरि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) नङेरा/ डि‍गरी- श्री राम प्रसाद राम सुपुत्र स्‍व. सरयुग मोची, उमेर- ५२, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf          Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf       12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक,  १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf       Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf         21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010        Videha_01_10_2010_Tirhuta             67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010        Videha_15_11_2010_Tirhuta             70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010        Videha_15_12_2010_Tirhuta           72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011        Videha_01_03_2011_Tirhuta           77 ७) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012        Videha_01_08_2012_Tirhuta           111 ८) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013        Videha_15_03_2013_Tirhuta           126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013        Videha_15_11_2013_Tirhuta           142 १०) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १३) विदेह सम्मान विशेषा‍क- २००म अ‍क १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अ‍क १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आम‍ंत्रित रचनाकारक टिप्पणीक शृंखला १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी VIDEHA 209th issue विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 विदेह ई-पत्रिकाक  बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ Maithili Books can be purchased from: http://www.amazon.in/   For the first time Maithili books can be read on kindle e-readers. Buy Maithili Books in Kindle format (courtesy Videha) from amazon kindle stores, these e books are delivered worldwide wirelessly:- http://www.amazon.com/ अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। गजेन्द्र ठाकुर ggajendra@videha.com ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। २. गद्य २.१.डॊ कैलाश कुमार मिश्र- मैथिली लोकगीतमे कौआ सम्बाहक २.२.सत्य नारायण झा- प्रजातंत्र एकटा मजाक २.३.उमेश मण्डल-इतिहास- सगर राति दीप जरय २.४.उमेश मण्डल आ पुनम मण्‍डल- समाद- सगर राति दीप जरय डॉ. कैलाश कुमार मिश्र मैथिली लोकगीतमे कौआ सम्बाहक मैथिली लोकगीतक संसार अपूर्व संसार आ गीतक महासागर अछि। एहि महासागर केर हरेक गीत बेसकिमती सीपी जकां अछि जकर मूंह स्वातिक बूंद पेबा लेल खुजल छैक जाहि स ओ मोती बनि सकै। फेर ओ मोती समुद्रक कछेर में बालु आ अन्य वस्तुक ढेर में ओंघराएल अछि कुनो जौहरीक ताक में जे ओकरा गढि सकए तरासि सकए। मैथिली लोकगीत गंगा के अनेक आयाम छैक। सब आयाम के अपन महत्त्व। जखन लोकगीतक विस्तृत आ विशाल संख्या के देखैत छी त अनेक बिंदु दिस ध्यान जैत अछि। एहिना ध्यान एक गीतक अनुवाद करैत लोकगीत में कौआ के प्रयोग आ ओकर उपयोगिता दिस चलि गेल। लोकगीत में कौआ के मानवीकरण क नायिका के द्वारा कौआ के विभिन्न तरह स प्रयोग कैल गेल अछि। प्रचलित व्यवहार में कौआ के प्रति लोकक विश्वास पर गेल। अदौं सं लोकधारा में कौआ मनुखक खाश क महिला एवं बच्चा सबहक पल-पल केर मित्र बनल अछि। डॉ. कैलाश कुमार मिश्र इथनोग्राफर छथि, आ तंए पाब्लो नेरुदाक ई पद्य हुनका पसिन्न छन्हि/ ऐ आलेखक बीच ऐ पद्यक आनन्द आर बढ़ि जाएत/ Pablo Neruda "You start dying slowly" You start dying slowly;  if you do not travel, if you do not read, If you do not listen to the sounds of life, If you do not appreciate yourself. You start dying slowly: When you kill your self-esteem, When you do not let others help you. You start dying slowly; If you become a slave of your habits, Walking everyday on the same paths… If you do not change your routine, If you do not wear different colours Or you do not speak to those you don’t know. You start dying slowly: If you avoid to feel passion And their turbulent emotions; Those which make your eyes glisten And your heart beat fast. You start dying slowly: If you do not risk what is safe for the uncertain, If you do not go after a dream, If you do not allow yourself, At least once in your lifetime, To run away..... You start dying Slowly!!! Love your life Love yourself...``` अपना स सिनेह करू, अपना के सम्मान करू सदिखन  पाब्लो नेरुदा मैथिली अनुवाद : डॉ. कैलाश कुमार मिश्र  पाब्लो नेरुदा स्पेन के कवि छथि। साहित्य में योगदान हेतु हिनका नोबेल पुरस्कार भेटल छनि। अहाँ नहु-नहु मरै छी  यदि अहाँ यात्रा नहि करै छी  अहाँ अध्ययन नहि करै छी  अहाँ जीवनक स्वर के नहि सुनै छी  यदि अहाँ अपना गुणक स्वयं ग्राहक नहि छी अहाँ नहु-नहु मरै छी... जाहि घडी अहाँ आत्म-विश्वास के खून क दैत छी जखन अहाँ ककरो स मदतिकेर आशा नहि रखैत छी  अहाँ नहु-नहु मरै छी.... एकहि रस्ता पर प्रतिदिन चलैत  ..... जखन अहाँ अपन आदति के दास भ जैत छी यदि अहाँ अपन दैनन्दिनी के नहि बदलै छी  बिभिन्न रंगक परिधान नहि पहिरैत छी  किम्बा अहाँ कुनो अनजान मनुख स बातचीत नहि करैत छी  अहाँ नहु-नहु मरै छी.... यदि अहाँ जीवन में उत्साह आ त्वरित आवेग दिस उदास भ रहल छी  जे अहाँक आंखि के दिव्य आ झलकैत आ ह्रदय गति के तीव्र बनबैत अछि अहाँ नहु-नहु मरै छी.... अगर अहाँ जीवन में कम स कम एक बेर अनिश्चित के सुरक्षित करबाक हेतु जोखिम के स्वीकार नहि करैत छी  सपना के साकार करवाक प्रयास नहि करैत छी  सब जिम्मेवारी स भगबाक हेतु ..... अहाँ नहु-नहु मरै छी.... अपन जीवन स सिनेह करू अपना आप सं सिनेह करू...... विभिन्न प्रकारक जानवर आ चिरै-चुनमुन केर अति प्राचीन समय सं मनुखक जीवन स नाता रहल छैक। मैथिली लोकगीत में चिड़ई-चुनमुन के प्रति प्रेमक  अद्भुत वर्णन आ प्रेमाधिक्य देखल जा सकैत छैक। चिरै-चुनमुन  कुन क्षण मनुखक जीवनक अभिन्न अंग बनि जैत अछि पते नहि चलैत छैक।  भोजन बनबैत काल चिरै-चुनमुन आ जानवर लेल पहिल कौर माय राखि दैत छली। सामूहिक अवसर के निमित्त भोज-भात में भोजन बनबए स पूर्व चिरई-चुनमुन लेल पहिल कौर एखनो निकालि देल जैत अछि। काक़ भुशुंडी त कौआ छला जे पक्षीराज गरुड़ के रामकथा पहिने सुना देने छलथिन। अहि बातक वर्णन बाल्मीकी के रामायण आ तुलसीदास केर रामचरितमानस में भेटैत अछि। भगवान शिव पार्वती सँ कहैत छथिन: "कि हम जे सुंदर कथा अहाँ के सुनेलौ अछि ओहि कथा के काक़ भुशुंडी गरुड़ के सुना चुकल छथि। नारद केर ज्ञान सँ भगवान राम के नागपाश सँ मुक्त कए गरुड़ ज़खन अपन धाम घुरैत रहथि त एकाएक हुनकर मोन में एक शंका उत्पन्न होईत छनि कि केहेन भगवान छथि राम जे एक तुच्छ राक्षस द्वारा फ़ेकल नागपाश में बन्हा गेला? गरुड़ एहि शंका केर समाधान ऋषि नारद सँ पुछला। नारद अहि शंका के समाधान बतेबा में असमर्थ छथि। नारद गरुड़ के ब्रह्मा लग भेज दैत छथिन। ब्रह्मा जी सेहो अहि शंका के समाधान बतेबा में असमर्थ छला। आब ब्रह्माजी गरुड़ के महादेव लग पठा देलथिन। महादेव कहलथिन: "भगवानक माया बतेनाइ असम्भव अछि। एक चिरै दोसर चिरै के ठीक सँ बुझा सकैत छैक ताहि अहाँ काक़ भुशुंडी लग जाऊ। वैह अहाँ के सब बात नीक स बुझा देता। आ अंतत जखन गरुड़ काक़ भुशुंडी लग गेलाह त काक़ भुशुंडी अपन अद्भुत वैदुश्य के परिचय दैत गरुड़ के पूरा रामायण के कथा समझा देलथिन। ई कथा कौआ के बुद्धिमान प्रमाणित करैत अछि संगहि मानव मोन में चिरै-चुनमुन संगे गूढ़ बात के मनोवैज्ञानिक विश्लेषण के आधार के सेहो प्रमाणित करैत अछि। चिरै-चुनमुन आ कौआ केर मनुखक जीवन में महत्त्व के सब स उत्तम उदाहरण विष्णु शर्मा द्वारा रचित कालजयी रचना पंचतन्त्र अछि। प्राचीन भारत में गुरुकुल जंगल में होइत छल। गुरु अपन शिष्य के प्राकृतिक वातावरण में राखि ओकरा प्रकृति आ प्रकृति के अवयव जे गाछ-बृक्ष, चिरै-चुनमुन, जड़ी-बूटी, नदी-नाला, झरना, पोखरि, पहार, वन्यजीव आदिक जानकारी दैत छलथिन आ ओकरा संग कोना तारतम्य स्थापित हो से गुण सिखायल जैत छलैक। विष्णु शर्मा त चिरै-चुनमुन आ वन्यजीव के मानवीकरण कए पूरा पंचतन्त्र केर निर्माण बच्चा के ज्ञान विकसित करबा लेल क लेला। बात पंचतन्त्र के क रहल छी आ प्रसंग कौआ के अछि त पंचतन्त्र केर एक कथाक उल्लेख करब अनिवार्य बुझना जा रहल अछि जकर सम्बन्ध कौआ स छैक। कथा किछु ऐना छैक: बहुत पहिने एक झमटगर बर कौआ सबहक राजधानी छल। हजारो के संख्या में कौआ ओतए कागराज मेघवर्ण संग रहैत छल। बरक गाछ एक पहाड़ी रहैक जाहि में असंख्य गुफा रहैक। ओहि गुफा सब में उल्लू सब रहैत छल। उल्लुक राजा अरिमर्दन छल। अरिमर्दन पराक्रमी छल। कौआ सब के ओ अपन सबस पैघ दुश्मन बूझैत छल। कौआ स ओक़रा अतेक घृणा रहैक जे बिना कौआ के वध केने ओ भोजन तक नहि करैत छल। ज़खन बहुत संख्या में कौआ मरए लगलैक त मेघवर्ण बड्ड चिंतित भेल। अहि विषय पर विचार करबाक हेतु मेघवर्ण कौआ सभक एक बैसार केलक। मेघवर्ण बाजल: "हमर प्रिय कौआ सब, अहाँ सबके त बुझले अछि जे बेर-बेर उल्लू के आक्रमण केर कारण अपन सभक जीवन असुरक्षित भ गेल अछि। अपन सभक शत्रु शक्तिशाली आ एक नम्बर केर अहंकारी सेहो अछि। अपना सब पर रातिक हमला करैत अछि किएक जे अपने सब रातिक देखि नहि सकैत छी। हमर सभक विवसता ई अछि जे हमरालोकनि दिन में जवाबी आक्रमण नहि क सकैत छी कारण जे उल्लू सब गूप्प अनहार गुफ़ा में सुरक्षित बैसल रहैत अछि। ई कहि मेघवर्ण चतुर आ ज्ञानी कौआ सब स अपन-अपन सुझाव देबाक़ निवेदन केलक। एक डरपोक कौआ बाजि उठल: "हमरा सबके उल्लू सँ समझौता क लेबाक चाही। ओ सब जे कुनो शर्त रखैत छथि ओक़रा स्वीकार क लेबा में अपन सभक हित अछि। अपना स चफ़्फ़र शत्रु सँ बेर-बेर पराजित हेबा में कुन फ़ायदा?" अहि बात के काँव-काँव कए बहुत कौआ सब विरोध केलक। एक कौआ चिचियाएल: "हमरा सबके अहि दुष्ट सब स किन्नहुँ बात नहि करक चाही। सब गोटे उठु आ चढ़ाई करु।" एक निराशावादी कौआ बाजल: "शत्रु शक्तिशाली अछि। हमरासबके ई स्थान छोड़ि कतौ आर चलि जेबाक चाही।" एक बुझनुक़ कौआ बाजल: “अपन घर छोड़नाई ठीक नहि रहत। अगर हम सब अतए सँ चलि गेलौ त कतहुँ के नहि रहब। बिलकुल टुटि जाएब। अपना सब के एतहि रहि आरों चिरै सब सँ मदति लेबाक चाही जाहि सँ एकर समाधान भ सकय”। स्थिरजीवी ओहि कौआ सभ में सब सँ चतुर आ बुद्धिमान छल जे चुप चाप बैसल सभक तर्क ध्यानमग्न भ सुनि रहल छल। राजा मेघवर्ण ओक़रा दिस मुखाकृति भेला आ कहलथिन, "परमज्ञानी स्थिरजीवी, अहाँ चुप छी? हम अपनेक विचार जानए चाहैत छी।" स्थिरजीवी बाजल: “महाराज, हमर सोचब अछि जे शत्रु अधिक बलशाली हो त छलनीति के सहारा लेबाक चाही”। "केहेन छलनीति? कनि स्पष्ट करु, श्रीमंत स्थिरजीवी।" कागराज बजला। स्थिरजीवी: "अहाँ हमरा ऊँच-नीच कहु आ हमरा पर जानलेवा हमला करू।" मेघवर्ण अकचकेला, "ई अहाँ की बाजि रहल छी स्थिरजीवी?" स्थिरजीवी राजा मेघवर्ण बला ठाढि पर गेला आ कान में कहलथिन, "छलनीतिक हेतु हमरा ई नाटक कर पड़त। अपना सबके अग़ल-बग़ल के गाछ सब पर उल्लू जासूस अपन सबहक़ सभाक सब क्रिया-कलाप के देख रहल अछि। ओक़रा सबके देखाक अपना सबके आपसी फूट आ फ़सादक नाटक करए पड़त। ओक़र बाद अहाँ सब  कौआ के लक' ऋष्यमूक पर्वत पर पहुँच हमर प्रतीक्षा करु। हम उल्लूक दल में शामिल भ ओकर सबहक़ विनाश केर समान एकत्रित करब। घरक भेदी बनि लंका डाहि देबाक़ व्योंत करब।" फेर की छल। नाटक शुरू भेल। स्थिरजीवी चिकरैत बाजल: “हम जेना कहैत छी तेना कर राजा, राजा केर बच्चा। किएक हमरा सब के मारबाब' पर तुलल छैं?” मेघवर्ण गरजल: "ग़द्दार, राजा सँ एहेन बदतमीजी बला भाषा में आ सहो ज़ोर सँ तोरा बज़बाक हिम्मत केना भेलौक?" अनेक कौआ एकहि संगे चिचियैत बाजल: "अहि ग़द्दार के जान सँ मारि देल जाओ महाराज।" आब राजा मेघवर्ण अपन पंख सँ स्थिरजीवी के कनपट्टी में धेले चमेंटा मारैत ठाढि सँ नीचा खसा देलथिन आ तुरंत घोषणा केला की "हम ऐ ग़द्दार स्थिरजीवी के तुरंत के प्रभाव स कौआ समाज सँ बहिष्कृत क रहल छी। आब एखन सँ कुनो कौआ अहि अधम सँ कुनो तरहक़ नाता नहि राखत। ई हमर आज्ञा अछि।" अग़ल-बग़ल के गाछ पर नुकाक बैसल उल्लू जासूस के आँख़ि ख़ुशी स चमकि उठल। जासूस सब तुरंत उल्लू के राजा के संवाद देलक जे कौआ सबमें फूट पड़ि गेल अछि। मारि-पीटक संग-संग गारि-गरौअल भ रहल छैक। अतेक बात सुनितहि उल्लूक सेनापति राजा के सम्बोधित करैत बाजल:  "महाराज, यैह मौक़ा अछि कौआ सब पर आक्रमण करबाक हेतु। अहि समय में हम सब ओक़रा सबके आसानी सँ हरा देबैक़।" उल्लू सम्राट अरिमर्दन के अपन सेनापति के बात नीक लगलैक। ओ तुरंत आक्रमण केर आदेश द देलक़ैक़। फेर की छल हज़ारों केर संख्या में उल्लूक सेना बरक गाछ पर आक्रमण करक हेतु विदा भेल। यद्यपि ओतए एकौ टा कौआ नहि भेंटलैक। भेटबो कोना करितै? योजनाक अनुसार मेघवर्ण सब कौआ के ल क ऋष्यमूक पर्वत दिस कूच क गेल छल। खाली गाछ देखि उल्लूक राजा थूक फेकैत बाजल: “हम्मर सबहक सामना त की डरे कौआ सब भागि गेल। एहेन काएर पर एक हज़ार बेर थू-थू।” सब उल्लू जीतक मद में मातल ‘हू-हू’ के आवाज निकालि अपन जीतक घोषणा करए लागल। नीचा में जमीन पर झाड़ झंखाड़ में खसल स्थिरजीवी कौआ ई सब ध्यानपूर्वक देख रहल छल। स्थिरजीवी कांव-कांव केर आवाज़ निकाललक। ओकरा देखते मातर जासूस बाजि उठल: “अरे, ई त वैह कौआ अछि जकरा एकर राजा धक्का दए माटि पर खसा देने रहैक आ अपमानित करैत रहैक।” उल्लूक राजा सेहो ओतय आबि गेलैक ओ पूछलकैक: “तोहर एहेन दुर्दशा केना भेलह?” स्थिरजीवी बाजल “हम राजा मेघवर्णक नीतिमंत्री छलहु। हम ओकरा एक नेक सलाह देलयैक जे आई-काल्हि उल्लू सबहक नेतृत्व एक अति पराक्रमी राजा क रहल छथि। हमरालोकनि के उल्लू सबहक अधीनता स्वीकार क लेबाक चाही। हमर बात सुनि राजा मेघवर्ण तामसे लाल भ गेल आ फटकारलक, दूतकारलक, एवं अपमानित कए कौआ समाज सं निष्कासित क देलक। हे महाराज, हमरा अपन शरण में ल लीय।” उल्लूराज अरिमर्दन आब गहन सोच में पडि गेल। ओकर नीति सलाहकार कान में कहलकै “राजन, शत्रुक बात पर कखनो भरोसा नहि करक चाही। ई अपन सबहक़ शत्रु थिक। एकरा जान स मारि देल जाए।” एक चापलूस मंत्री बाजल “नहि राजन! एकरा नहि मारल जाए। एहि कौआ के बल्कि अपना दल में राखि लेबा में अपना सबके फायदा अछि. ई कौआ सबहक घरक भेद समय-समय पर बतबैत रहत।” राजा के सेहो भेलैक जे स्थिरजीवी के उल्लू सबहक साथ मिला लेबा में लाभे-लाभ अछि. ई सोचि उल्लूक झुण्ड स्थिरजीवी कौआ के अपने संगे लेने गेल। ओतए अरिमर्दन अपन उल्लू नौकर-चाकर के निर्देश दैत बाजल, “स्थिरजीवी के गुफा के शाही अतिथि कक्ष में रहबाक व्यवस्था कैल जै। हिनका कुनो तरहक कष्ट नहि होबाक चाही।” चतुर स्थिरजीवी कौआ हाथ जोड़ैत बाजल: “महाराज, अपने हमरा शरण देलहु, हमरा लेल ई बड्ड पैघ बात अछि। हमरा अहाँ अपन शाही गुफ़ा के बाहर एक पाथर पर एक सेवक जकां रह देल जाओ। हमर इच्छा अछि जे एतहि बैसक हम अहाँक गुणगान करैत रही।” एहि तरहें स्थिरजीवी शाही गुफ़ा के बाहर डेरा जमा लेलक। गुफ़ा में नीति सलाहकार एकबेर पुनः राजा के सावधान करैत कहलकैक: “महाराज, शत्रु पर कखनो विश्वास नहि करक चाही। शत्रु के अपन घर में शरण देब आत्महत्याक सामान अछि।” घमंडे मातल उल्लू सम्राट अरिमर्दन अपन नीति सलाहकार के दिस आंखि तरेरैत बाजल: “तों हमरा जादे नीति बुझाबए के कोशिश नहि कर। अगर तोरा ई लगैत छौ जे तोरा उचित सम्मान नहि भेट रहल छौक त तों अतए सं जा सकैत छै।” नीति सलाहकार उल्लू हारि मानि आब अपन दू-तीन मित्रक संग ओतय सं ई कहैत विदा भ गेल: “विनाशकाले विपरीत बुद्धि।” किछु दिनक बाद स्थिरजीवी अगल-बगल स लकड़ी अथवा काठी इत्यादि आनि गुफ़ा के द्वार लग एकत्रित करे लागल। कहला पर बाजल: “सरकार सर्दी आबै बला छैक। हम काठ आ झांखर सबहक फुसही मडैया बनबै चाहैत छी ताकि जार सं बचि सकी।” शनैः-शनैः लकड़ीक बड्ड पैघ ढेर जमा भ गेलैक। एक दिन जखन सब उल्लू सुति रहल छल तखन स्थिरजीवी उडिक सोझे ऋष्यमूक पर्वत पर पहुचल। ओतए योजना के अनुसार मेघवर्ण सब कौआ संग ओकर प्रतीक्षा क रहल छलैक। स्थिरजीवी बाजल: “आब अहाँ लोकनि समीप के जंगल सं जतए आगि लागल छैक एक-एक जरैत लकड़ी अपन-अपन चोंच में उठा हमरा पाछा-पाछा आउ।” समस्त कौआक सेना अपन-अपन चोंच में जरैत लुकाठी लेने स्थिरजीवीक पाछा-पाछा उल्लूक गुफ़ा में आबि गेल। स्थिरजीवी द्वारा एकत्रित कैल लकड़ीक ढेर में आगि लगा देल गेलैक। एक-एक टा उल्लू या त जडि क मरि गेल अथवा दम घोटला सं मरि गेल। कागराज मेघवर्ण स्थिरजीवी के योजना आ चातुर्य सं गद-गद होइत ओकरा कौआ रत्नाक उपाधि सं सम्मानित केलक। पंचतन्त्र केर ई कथा एहि बात के प्रमाणित करैत अछि जे चिड़ई-चुनमुन मनुखक जीवनक अभिन्न अंग जकां थिक। एकरा सब स सीख लेल जा सकैत अछि आ तारतम्य स्थापित क जीनाई निक। अर्थ भेल जे अपन लोक समाज आ व्यवहार ई कहैत अछि जे एकरा सब स प्रकृति में सामंजस्य स्थापित करू। एक दोसरक बिना जीवन अपूर्ण अछि। पशु आ चिरै स तारतम्य स्थापित केने लाभ। हलांकि एखन किछु वर्ष स ई सुनबा में आबि रहल अछि जे कौआ हेंजक-हेंज में मरि रहल अछि। मोन एहि तरहक बात सुनि आहत होइत अछि। कौआ त पर्यावरण के प्राकृतिक सफाईकर्मी थिक आ सैह मरि रहल अछि तखन पर्यावरण के की हैत? आब लोकगीत पर अपन ध्यान केन्द्रित करी। माय अपन बच्चा के मुँह में कौर दैत काल भांति-भांति के चिरई सब स सम्बन्ध जोड़ैत कहैत रहैत छथि ले बौआ ई कौर कौआक छौ; ई कौर मैनाक छौ, आदि-आदि। कदाचित एहि तरहे सामाजिक रुपे हमरालोकनि चिरै-चुनमुन स एक मानवीय सम्बन्ध बना लैत छी। चिरै केवल चिरै नहि अपितु, भाई, बहिन, सखा आ सम्बन्धी बनि जैत अछि। एकटा नेनाक गीतक किछु पंक्ति देखु: मेना के बच्चा चिरैया गे दू टा जामुन खसा लाली खसैबए त मारबौ गे दू टा कारी खसा तू छै बहिन तोहर हम भैया जौ ने खसेलें त बुझि ले दैया मारब खुआ तोरा जहर गे दू टा जामुन खसा मेना के बच्चा चिरैया गे दू टा जामुन खसा।। काली कान्त झा “बूच” अपन कविता “दीनक नेना” जे गीत सेहो कहल जा सकैत अछि में कौआ के सम्बाहक जकां प्रयुक्त करैत छथि। एहि गीत में कवि एक गरीब माय जकर पति बाहर कमेबा लेल गेल छैक, घर में ने अन्न ने ढउआ छै। छोट दुधपीबा बच्चा कखनो चाकलेट, कखनो बिस्कुट त कखनो कुनो आरो वस्तु लेल माय स जिद्द करैत छैक आ कनैत छै। लाचार माय एक कौआ के कुचरैत देखैत छैक आ ओकरे सहारा लए अपन कनैत होरिला के गीत सुना बौंसबाक प्रयत्न क रहलि छैक। बौआ देखु-देखु, ई क़ुआ गाबि रहल अछि। ई तोरे कुचरि क सुना रहल छौ रे बाऊ। तों ओसारा के बीच में सुतल छै आ ई कौआ पूब दिस तोरा देखि ख़ुशी स नाचि रहल अछि। अते सुन्नर पुरबा बसात जेना कौआ के नाचब लेल आ तोरा मस्त करक लेल  बसातक छनन-छनन लहरि सं बाँसुरी बजा रहल छौक। रे बौआ तोहर जन्म निर्धन घर में भेल छौक ताहि तोरा लेल बिस्कुट आ चाकलेट बनले नहि छौक। बिसरि जो एहि वस्तु सबके। तोहर गोलगर पेट नोन रोटी सं भरि जाऊ त भाग्य! लेकिन, चिंता के कोन बात? बसातक धुन आ कौआक मस्त भ नाचब मधुर बातक स्वरलहरी तोरा लेल तैयार केने छौ। अनका थोरे ने ई भाग्य छैक? तोहर पिता परदेसिया छौ रे बाऊ। कतेक दिन भ गेल मुदा निरमोहिया कुनो चिट्ठियों नहि भेजलक अछि! ई कोनो बात भेलै, कह ने? केना एहि अवस्था में ई कौआ अपन कुचरब सं आ बसातक झोंका अपन मधुर धुन स तोहर नींद स झकमैत माय के टीस जगा रहल छौक!  रे नेना! तों की बुझबैं जे गरीबी ककरा कहै छैक? श्रमजीवी के सपनों में सुख नहि लिखल छैक। बेचारा श्रमजीवी अपने त अन्हार घर में डिबिया जरा क राति बीतबैत अछि आ अपन परिश्रम सं समस्त नगर के जगमग करैत अछि। देख ने कोना ई हुलसगर बियनि अपन नहु-नहु मिठगर बसात सं तोरा सुता रहल छौक! निनियारानी, झटकि क बौआ लग आउ ने! बौआ के सुताउ ने! रे सोन, तों बिना वस्तु सब खेने उपासल छै। हम ग्लानि सं मरल जा रहल छी। मुदा हम छी लाचार करू त की करू रे बौआ?” मूल गीतमय कविता कनि देखू: देखहीं रौ बौआ, ई कौआ गवै छौ। सुनही रौ तोरे, कुचरि सुनवै छौ।। एम्हर तों सूतल छे माँझे ओसार पर ओम्हर ओ नाँचै पुवरिया मोहार पर पुरबा वसात बाँसुरी बजवै छौ.........। सुनही रौ तोरे, कुचरि सुनवै छौ।। तोरा लय बनलौ ने बिस्कुट आ चाकलेट नोनो रोटी सं भरतौ ई गोल पेट बातक मधुर स्वरलहरी अबै छौ .....। सुनही रौ तोरे, कुचरि सुनवै छौ।। बापे तोहर बनलौ परदेशी चिट्ठी ने एलौ भेलौ दिन वेशी माँ केर निनायल व्यथा जगबै छौ। सुनही रौ तोरे, कुचरि सुनवै छौ।। की बुझबैं ककरा कहै छै गरीबी सपनो में सुख नहि जतऽ श्रमजीवी लुत्ती लगाकऽ नगर बसबै छौ.......। सुनही रौ तोरे, कुचरि सुनवै छौ।। कोरा में तोरा सुताबै छौ बिनियाँ झटकल औ अविहें रौ नूनूक निनिया तोहर उपास हमरा लजबै छौ सुनही रौ तोरे, कुचरि सुनवै छौ।। कौआ मिथिला में दू प्रकारक पैल ज़ैत अछि सामान्य कौआ आ कार कौआ। दुनू के अपन-अपन स्थान मैथिल समाज आ लोक परम्परा में छैक। कार कौआ अशुभ के सूचना दैत अछि । आ सामान्य कौआ शुभक संकेत।  दुनू जे बजैत अछि तक़रा लेल अलग-अलग शब्द छैक। कार कौआ "डकै" छै आ सामान्य कौआ "कुचरै" छै। ड़कनाई अशुभ के सूचक आ कुचरनाई शुभक सूचक। किछु लक्षण छैक जाहि स ई पता चलैत छैक जे कौआ के कुन परिस्थिति में बेसब, उठब, कुचरब शुभ आ कोन परिस्थिति में अशुभ केर सूचना दैत अछि। कौआ जखन घरक चार अथवा आंगन में कुनो ऊँच चीज़ पर चढिक कुचरे त कहल जैत छैक जे ई शुभक संकेत अछि; संगहि घर में कियोक पाहून एता कतेको बेर एहि तरहक बात सत्य भ जैत अछि। यदि कौआ घरक छत (अथवा चार) अथवा आंगन में हरियर गाछ पर बैसए त हेरायल वस्तु भेटब निश्चित बुझु। एहन स्थिति में कोर्ट कचहरी में दबदबा बनैत छैक आ मुक़दमा में जीत हासिल होइत छैक एवं धन-धान्य में बृद्धि होइत छैक। कौआ अगर बखारी, अन्नक ढेर आदि पर बैसय त धनक लाभ होइत छैक। गाय केर माथ पर कौआ बैस गेल त प्रियजन सं भेट हेबेटा करत। एहो मान्यता प्रबल अछि अपन मैथिल समाज में कि अगर कौआ सुखैल मांटि किंवा गर्दा में ओंघराए लागल त एकर अर्थ ई भेल जे प्रचुर मात्र में वर्षा हैत। एहि सबहक बिपरीत कौआ जों कुनो सुखैल गाछ पर बैस क कुचरि रहल हो त ई कुनो महामारी फैलबाक पूर्व सूचना थिक। अगर ककरो माथ पर कौआ अपन चोंच स हड्डीक टुकड़ी खसा दैक त ओहि व्यक्ति के मृत्यु निश्चित बुझु। मैथिली लोकगीत महाकवि विद्यापति के बिना अपूर्ण अछि। एक विरही नायिका जकर पति परदेस गेल छैक केर वेदना आ केना ओ कौआ के अपन समदिया बनबैत अछि, केना ओकरा लोभबैत अछि इत्यादिक बहुत सुन्नर वर्णन महाकवि निम्न लोकगीत में करैत छथि: मोरा रे अंगनमा चनन केर गछिया ताहि तर कुरुरै काग रे। सोने चोंच तोहें बांधि देबौ बायस जौं पिया अओता आजु रे। गाबह गाबह सखि लोरी झूमरि मदन अराधन जानु रे। चहुं दिसि चंपा मेहुलि फूललि चंद्र इजोरिया राति रे। कोना कए हम मयन अराधब होयत बड़ी रतिसाति रे। पांक समय कागा केओ ने अपन हित देखल आंखि पसारि रे। विद्यापति कविवर इहो गाबए तोकें अछि गुनक निधान रे। राव भोगीसर सब गुन आगर पदमा देवी रमान रे।। एहि गीतक संक्षेप में अर्थ ई भेल जे हमरा आंगन में चानन केर गाछ अछि आ ओई गाछ के ठाढि पर एगो कौआ बैसल कुचरि रहल अछि। ई निश्चित रुपे शुभ समाचार केर लक्षण थिक। हे कौआ, अगर आई हमर प्रियतम आबि गेला त हम तोहर चोंच सोन स मढ़वा देबौ। आउ हे सखी बहिनपा सब, सब मिलि झूमर गाउ। आई हम प्रेमक आराधना कर जा रहल छी। चारु दिस चंपा आर भालसरी के फूल फुलाएल अछि। मुदा ई पूर्णिमाक राति? कोना हम कामदेवक  आराधना क’ पैब। कारण जे एहि मिलनक  सबस पैघ उपहार त कामदेवक आराधने हेतनि। सुन कौआ, खराप  समय में कियोक अपन नहि होइत छैक। ई बात आंखि खोलि क देखि चुकल छी। कवि विद्यापति कहैत छथि हे सुन्नरी, अहाँक प्रियतम गुणक खान छथि। जेना राजा भोगेश्‍वर छथि आर जे पद्मा देवी के साथ रमण करैत छथि। जाहि समय में आवागमन के सुविधा अतेक उन्नत नहि रहैक ताहि क्षण में कौआ के लोक खाश तौर पर स्त्रिगन आ नेना सब कहौतिया बूझैत छल। नायिका निवेदन करैत छथि जे आउ आ हमर अंगना में कनि कुचरू। अहांके हमर आंगन में स्वागत अछि। हम हम अहाँ के पानि स स्वागत करब, बेसबाक लेल पीढ़ी देब आ अगर अहाँ के कुचरला सं हमर प्रियतम कहीं आबि गेला त ओ जे कोनो सनेश अनता ताहि में पहिल हिस्सा अहींके देब। एतबे नहि, अगर हमर प्रियतम परदेसी आबि गेला त हम अहाँ लेल कंगना सनेश बनाएब। अहाँ चिंता नहि करू। हमर बात पर विश्वास करू। हमर हितग्राहक बनु आ आउ आ हमर अंगना में कुचरू। कनि देखू एहि गीत के: हे रे कौआ कुचरि बैस अंगना में। पानि देबौ पीढ़ी देबौ। पहिलुक सनेश हम तोरे देबौ। जौं प्रियतम परदेसी औता। तोरा सजैब हम कंगना में। हे रे कौआ कुचरि बैस अंगना में। अगर कुनो महिला आ नवकनिया कनि ताम-झाम वाली छैथ आ हुनकर दिमाग सातम असमान पर चढ़ल छनि। हरेक चीज़ भोजन स पहिरन धरि में नखरा छनि तकर अलगे बात! मूह-कान कुनो खाके सन मुदा घमंड ऐना जेना विश्वसुन्दरी होथि। यथार्थ में हुनकर मुह कौआ सनहक छनि। कमेंट हुनका पर छोटगर अछि ओहो गीतक रूप में। कनि देखी: कौआ सनहक़ कारी आ बाकूला सनहक़ ठोर। बैसल-बैसल चाही हिनका दाली भात तिलकोर। हमही सबस सुन्नरि छी आ हमरे सुन्नर दूल्हा। सासु कियैक नहि भानस करती नहि फूकब हम चुलहा।। ग्राम्यांचल में कौआ के कुचरब भोर होमाक सूचक अछि। नायिका के नायक कहैत छथिन जे कौआ बजलक आ भोर भ गेल; भोर भेल त नगर भरि में शोर भ गेल. आब कतेक काल सुतब? यै फलां बौआ के माय उठू ने! ऐना कोना चलत दिन? चलू आब नित्यकर्म में लागि जाई। कौआ जगलै भेलै भोर भेलै भरि नगरी में शोर आबो जागू यै बौआ के माय। माय अपन कनैत बच्चा के कौआके नाम लै सूतक हेतु तैयार करैत छथि। लोरी जकां कौआ के गीत में पात्र बना कनैत नेना के सुतबैत छथि। बौआ सुति रहू देखू-देखू आकाश में केना कौआ उडि रहल अछि। चिंता नहि करू अहाँक पिताजी जखन आबए लगता त पटना स अहाँ लेल ढ़ौआ लेने एता। चुप रहु चुप रहु बौआ आकाश में उड़ई अछि कौआ एयता बाबू पटना स लेने औता ढ़ौआ। चैताबर में नायिका के टीस आ कौआ दुनु के मेल देखल जा सकैत अछि। नायिका के आंगुर में सांप डसि लेने छैक. शायद विरह के डंक? अपन ननदि सं नायिका कहैत अछि जे के ओकरा लेल वैद बजा आनत? के ओकर पीड़ा के समाप्त करत? के ओकरा लेल पलंग के ओछायन तैयार करतै; नायिका के प्रियतमके के बजा अनतै हो राम? नायिका के पिता वैद बजेथिन, और माय पीड़ा मिटेथिन; ननदि पलंग पर ओछायन तैयार करथिन; देबर पिया के बजा अनथिन। नायिका कौआ स निवेदन करैत कहैत छथिन जे रे कौआ तोरा हम दही आ चूडा के भोज खुआ देबौक अगर हमर समाद के हमर प्रियतम तक लेने जयबै। आब कनि कौआ के मानवीकरण देखु, कौआ नायिका के कहैत अछि “ठीक छै हम तोहर समाद तोरा प्रियतम लग ल जेबौक मुदा एकटा समस्या अछि। हम तोहर प्रियतम के नहि जनैत छी फेर कोना तोहर समाद देबैक?” आब नायिका कौआ के अपन प्रियतम के हुलिया बतबैत कहैत अछि: “हमर प्रियतम के पातर-पातर डाँर छनि आ घरक दरबज्जा पर चानन केर गाछ छनि।” आब कौआ सहर्ष नायिका के समाद ल क ओकर प्रियतम लग जएबाक लेल तैयार भ जैत अछि। अंगुरी में डसलक नगिनियाँ हो रामा के मोरा जायत बैद बजाएत के मोरा हरत दरदिया हो रामा। के मोरा जाएत पलंगा ओछाएत के मोरा पिया के बजाएत हो रामा। बाबा मोरा जाएत बैद बजाएत अम्मा मोरा हरत दरदिया हो रामा । ननदि मोरा जाएत पलंगा ओछाएत दिओर मोरा पिया के बजाएत हो रामा देबऊ रे कागा दही-चूड़ा भोजन हमरो समाद नेने ज़ाह हो रामा। तोहरो बलमुजी चीन्हियो ने जानियौ कोना समाद नेने जाएब हो रामा। हमरो बलमुजी के मुठी एक डाँर छनि दुअरे चनन केर गछिया हो रामा।। आब कनि सोहर दिस चली. बिना सोहर के मैथिली लोकगीत कहेन? एक सोहर में नायिका जे गर्भ सं अछि कोना अपन भावना के व्यक्त क रहल अछि। संतान केर कामना में व्याकुल नायिका हरेक आगंतुक के सूचना देमए बला कौआ के चोंच के सोन स मढबाक अश्वासन दैत अछि आ अपन जानि बड्ड सिनेह स कौआ के कहैत अछि कि हे कागा अगर हमर अंगना में तोहर कुचरब शुभ सिद्ध भ गेल – आ यदि हमर परदेसी प्रियतम घर आबि जाथि त हमर बांझपन ख़तम भ जायेत। आ से भ गेल त हम तोहर चोंच के सोन स मढ़ा देबह। जों मोरा कगबा रे पिया अयताह होरिला जनम लेत रे। कगबा सोन में मढएबो दुनू लोल त बोलिया बर सोहाबन रे। चुपे रहू चुपे तिरिया जनिअ करू रोदन हे। तिरिया आजुए आओत घरबइआ बझिनिया पाप छुटत हे।। दोसर सोहर में नायिका के संतान प्राप्ति में आब देर नहि छैक। कखनो ई शुभ सूचना आबि सकैत छै। आब छठिहार में ककरा-ककरा सूचित कैल जाय आ निमंत्रित कैल जाय ताहि पर पति आ पत्नी में बात भ रहल छैक। होरिला के जनम भेल छैक से सूचना त कौआ ने देतैक? सगुन केर नौत त काग ने भाखत। हाँ जी हाँ. नायिका अपन पति के चिढ़बैत कहैत छथि जे दियाद आ लोक आ समाज के नौत त जैत मुदा हे पिया हम अहाँ बहिन के नहि नोतब कारण जे अहाँक भागिन नहि आबि पेता। कौआ के सगुनिया बनेबाक विधान सरिपहु बड्ड सोहनगर लगैत छैक। आरे-आरे कागा सगुनिया सगुन नौत भाख़ब रे कागा रे मोर घर उचित कल्याण कहाँ-कहाँ नौतब रे । दर जे नोतब दिआद लोक आओर समाज लोक रे। पिया हे आहाँक बहिन नहि नोतब कि भागिन कहाँ आओत रे।। एक विरह गीत में नायिका केर बेहाल हालक दारुण व्यथा व्यक्त कैल गेल अछि। तमाम चिड़ई जाहि में कागा सेहो सम्मिलित अछि गाछक डारि बैस गेल अछि। प्रात भ चुकल अछि आ प्रात होइतहि नभ मंडल में सूर्य केर लालिमा छटकि रहल छैक। नायिका अपन सखी के संबोधित करैत कहैत छथि “हे सखी, हमर प्रेमक पियास कोना मेटत? हम त विरह वेदना में तडपि-तडपि क दिन आ राति काटि रहल छी. राति बीत गेल; हम बेर-बेर चारू कात चकुयैल देखैत छी मुदा हे सखी, एखन धरि हमर पिया कहाँ अएला? खग उड़ि बैसल तरुवर डाली भेल गगन में प्रात सुलाली हमर पियास मेटत कोना सजनी तडपि-तडपि बितए दिन-रजनी रैन बितल मोरा पिया नहि आएल रहि-रहि चहुँ दिश ताकल सजनी।। मैथिली लोकगीतक सब सं सुन्दर रूप तखन द्रष्टिगोचर होइत अछि जखन कौआ संग-संग दोसर जंतु के सेहो मानवीकरण कए ओकर श्रृंगार आ प्रेम भाव के गीतक माध्यम सं व्यक्त कैल जैत अछि। एहि तरहक उदाहरण में सब सं सुन्नर उदाहरण विषहरि आ कौआक थिक। एक विषहरिक गीत में एहेन स्थिति अबैत छैक जे विषहरि के अंगूठी कौआ आ सोनक ग्रीमहार चिलहोरि ल क भागि गेलनि। आब विषहरि कानए लगली। लोक सब विषहरि के मनेबाक प्रयास क रहल अछि। सोनरा के बजा सोन देल जैत अछि आ पटबा के रूपा। दुनु के तुरत आदेश देल जैत अछि जे यथाशीघ्र विषहरि मुद्रिका आ ग्रीमहार गढ़ल जाय। कागा ल' गेल मुद्रिका चिलहोरि ग्रीमहार राम ताहि लेल विषहरि रोदना पसार। सोन ले रे सोनरा रूपा ले रे पटबा राम गढि दए सोनरा भैया सोने ग्रीमहार पहिर लीअ विषहरि मैय्या गले ग्रीमहार।। विषहरि के दोसर गीत में एक गहीर पोखरि में घुसि क जकर उचगर भिड छैक विषहरि स्नान क रहल छली। नहेला-सोनेला के बाद अपन नमहर-नमहर केश के थकरेत छली। एकाएक कौआ सोनाक ककबा ल क भागि गेल। आब कनैत-खीजैत विषहरि अपन माय लग आबि कहलथिन जे कोना कागा हुनकर ककबा चोंच में ल क  पर उडि गेलनि। माय बौंसति कहलथिन: “हे विषहरि दाई, अहाँ कानू-खिजू नहि हम अहाँ लेल फेर स सोना के ककबा बनबा देब”। आब विषहरि चुप भ गेली। नीची रे पोखरिया के ऊँची रे मोहार राम ताहि पइसि विषहरि करु स्नान। नहाय सोनाय विषहरि थकरथि केश राम सोना के ककहिया आजु काग लए गेल। कनैत खीजैते विषहरि आमा आगु ठाढि राम सोना के ककहिया आजु काग लए गेल। जुनि क़ानु जुनि खोजू विषहरि माय राम सोना के ककहिया हम देब बनबाय ।। तेसर बिषहरि गीत में एहेन कल्पना कैल गेल छैक जे एक छोटछिन जमुना के कछेर में बान्ह पर छोट कदम्बक गाछ छैक। ओहि गाछक छाहरि में बिषहरि जुआ खेल लगली। जुआ खेल काल ततेक बेसुध भ गेली की कखन कौआ उडिक एलई आ झपट्टा मारि बिषहरि के हार ल गेलनि से पते नहि चललनि। जखन होश में एली त कनैत खिजैत कौआ के पाछा-पाछा दौडली। रे कौआ तों जते बैसबैं हम तोरा छोरबौ ने ओतहि तोहर ठोर दागि देबौक। छोटी-मोटी जमुना-दह में छोटी नील गाछ राम ताहि तर विषहरि खेलू जुआसारि। ज़ुअबा खेलइते विषहरि भेली बेसूधि राम ताहि खन काग उड़ि हार लए गेल कनइते-खीजइते विषहरि धयल पछोर राम जहाँ धय बैसबह दागब तोर ठोर।। अहि तरहें मैथिली लोकगीत आ व्यवहार में कौआ आ मनुखक बीच प्रेम अनंत अछि। जतेक भीतर जैब आ जतेक मंथन करब ततेक अमृत भेटत। ओना चर्चा मैथिली लोकगीत आ कौआ पर क रहल छी मुदा कहि नहि कथीलेल यात्रीजीक (नागार्जुनक) “अकाल और उसके बाद” कविता स्मरण आबि रहल अछि। भुखक ज्वाला में एहि कविता में केवल नायिका नहि तड़पि रहल छैक अपितु ओकरा संगे गिरगिट, कुकुर, कौआ, मुस सब ओहि भुखक वेदना के सहयात्री छैक। कई दिनों तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदास कई दिनों तक कानी कुतिया सोई उनके पास कई दिनों तक लगी भीत पर छिपकलियों की गश्त कई दिनों तक चूहों की भी हालत रही शिकस्त। दाने आए घर के अंदर कई दिनों के बाद धुआँ उठा आँगन से ऊपर कई दिनों के बाद चमक उठी घर भर की आँखें कई दिनों के बाद कौए ने खुजलाई पाँखें कई दिनों के बाद। बाबा ई कविता हिंदी में लिखला। चूँकि ई लेख हम मैथिली में लिख रहल छी त सोचलौ एक बेर एहि कविता के मैथिली में अनुवाद करबाक प्रयत्न करी। कहेन भेल से नहि बुझल अछि मुदा प्रयत्न त केलहु। कनि देखू कतेक दिन धरि कानल चुलहा जांतो रहल उदास कतेक दिन धरि कनही कुकुर सुतलै ओकरा पास कतेक दिन धरि घरक भीत में गिरगिट केलक गश्त कतेक दिन धरि मुसो के रहलै हालत शिकस्त। दाना आएल घरक भीतर कतेक दिन के बाद देखल धुआं अंगना स ऊपर कतेक दिन के बाद मोन भेलै घर भरि के हरियर कतेक दिन के बाद सुगबुगेलक पाँखि के कौआ कते दिन के  बाद।। एकटा बसन्त के गीत में नायिका कागा के सम्बाहक बना कतेक बात बता दैत छैक। बेचारी नायिका, फगुआ नजदीक आबि गेलैक। लोक के देखि ओकरो रंग रभस करक इच्छा भ रहल छैक मुदा रंग खेलत त ककरा संग? पाहून त परदेसिया छथिन. दूर देस में बैसल छथि। हे कागा अहाँ हमर समदिया बनु आ उडि क हमर कंत के हमर समाद द अबियौन। ओ हमरा हीरा मोती आ नग सं सुसज्जित एक चोली पठा देने छला से तार-तार भ गेल। हुनकर बिरह वेदना अलग रहि-रहि हमरा सता रहल अछि. आब रहल नहि जैत अछि। ककरा संग खेलब ऋतु वसन्त। निरायल फागुन दूर बसु कन्त।। उड़ि-उड़ि कागा जाहु बिदेश। हमरो ललाजी के कहब उदेश।। चोलिया एक पहु देल पठाय। चारु दिश हीरा-मोती लाल जड़ाय।। चोलिया फाटल तारम्तार। विरह सताओल बारम्बार।। सूरदास जे गाओल वसन्त। एहि जग बहुरी ने आयल कन्त।। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। सत्य नारायण झा प्रजातंत्र एकटा मजाक बहुत पहिने एकटा फिल्म आयल रहैक जेकर नाम रहैक सत्यकाम ।ओहि मे धर्मेन्द्र एवं संजीव कुमार क्रमशः कलाकार आओर सह कलाकार रहथि ।दुनू सिविल इंन्जिनियर रहथि ।धर्मेन्द्र जाहि कम्पनी मे काज करैत रहथि ओहि कम्पनी के सर्वे करक ठीका भेटल रहैक । सर्वे करबाक लेल ओ मालिक के कहलखीन जे थियोडोलाइट मसीन चाही ।मलिक रहै मूर्ख ,ओ थियोडोलाइट के नामो नहि सुनने रहैक ।ओ इंजिनियर धर्मेन्द्र के कहै जे बहाना नहि कर ,पहिने सर्वे कर तखन मसीन किन देबौ ,कहबाक मतलव मालिक ने सर्वे बुझै आ ने थियोडोलाइट मसीन ओ त मूर्ख रहैक मुदा रहैक मालिक ।इंजिनियर महाशय के मालिकक बात सुनि पसीना देबय लगलनि जे एहि मूर्ख के कोना बुझाउ । हमर एकटा पित्ती छथि ओ हमरा पढ़ेनो छथि तै हुनका हम मास्टर साहेब सेहो कहै छियैन ।ओ एकटा खिस्सा कहलनि ।ओ जखन बी काँम कय गेलाह त जीबिका लेल पटना गेलाह ।तत्काल एकटा सेठक लोहाक कारखाना मे काज धेलनि ।कारखाना कोनो पैघ नहि रहैक ,तै काजो साधारणे रहैक जे कतेक लोहा सप्लाइ भेल आ के लय गेल तेकर नाम नोट करू ।मास्टर साहेब छलाह प्रतिभाशाली, बैसल मोन नहि लगनि,तै ओ रेस्ट मे सेठक बेटा रहैक दसवाँ क्लास मे, तेकरा पढ़ा देथिन, से सेठ के नीक लगैक ।पहिने अंग्रेजीक एकटा किताब पढ़ाइ होय 'बुक फोर' ,ओहि मे एकटा चैप्टर रहैक ' द अर्थ' (The Earth )एक दिन मास्टर साहेब सेठक बेटा के पढ़बैत रहथीन वैह चैप्टर द अर्थ ।ओ पढ़बैत रहथीन जे कोना पृथ्वी सूर्यक चारू कात घुमै छैक आ कोना चन्द्रमा पृथ्वी क चक्कर लगबैत छैक .कोना दिन राति होयत छैक ।विस्तृत सँ मास्टर साहेब पढ़बैत रहथीन ,आ गद्दी पर बैसल सेठ सेहो सभटा सुनैत रहैक ।ओकरा किछु नहि बुझाइक ।ओकरा आश्चर्य लगलैक जे कोना पृथ्वी सूर्यक चक्कर कटतैक आ कोना चन्द्रमा पृथ्वीक चक्कर कटतै ,से यदि होयतै त पटना कलकत्ता चलि जयतै आ कलकता दिल्ली ।चन्द्रमा घुमितै त तारा लग लोक रहिते ,हो ने हो ई मास्टरक दिमाग खराब भे गेल छै आ किछु दिन रहत त हमर बेटो पागल भए जायत ।मास्टर साहेब के नौकरी सँ निकालि देलकनि । गाम मे घूर तपैत रही त एक दिन रघू काका पुछलनि रे बौआ तू त बरका इंजिनियर छें ,एकटा चीज बता दे जे कलकत्ता सँ गाम फोन अबै छैक से एतेक जल्दी अवाज कोना चलि अबैत छैक ।बात एतेक जल्दी कोना सुनाय लगैत छैक ,हम हुनका टेली कमुनिकेसन के विस्तार सँ बुझाबय लगलियैन मुदा काका कहलनि तू त भूत जका बकै छै ,कि बजै छै से किछु ने बुझायल ।बगल मे हमर जेठ सार स्वामीजी बैसल रहथि ओ कहलखीन जे काकाजी हम बुझा दैत छी ,असल मे टेलीफोन मे तार रहै छै से त आहाँ देखने हेबै ?काका कहलखीन, हँ यौ पाहुन कियै ने देखबै ,हमरा गामे दके रेल गेल छै ,रेलक काते दके तार गेल छै ,स्वामी जी कहलखीन ,बस आब अहाँके बुझा जायत ।ओहि तार मे तरे तर भूर कयल छै ,जहाँ कियो फोन करत कि घंटी बाजत आ जौं बात करबैक कि भूरे भूर अबाज कालिका मेल जका तेज मे आबय आ जाय लगैत छैक ,बस गप्प भए जाइत छैक ।काका कहलखीन आब बुझलियैक ।पाहुन बहुत योग्य लोक छथि आ बौआ त अनेरे लेल इंजिनियर भेल ।  हमरा सभक प्रजातंत्रक सरकार की छी ,एकटा मजाक छी । एहि ठाम विशेषज्ञ पदाधिकारीक उपर अनुपयुक्त वोट सँ चुनल नेता बैसल छैक जाहि मे 90 प्रतिशत अबूझ रहैत छैक जेकर स्थित सत्यकामक सेठ जकाँ छैक ।ओना कहक लेल प्रजातंत्री सरकार मे पारदर्शिता रहैत छैक मुदा एहिठाम त सभटा झूठ पर आधारित छैक ।भारत मे सभके वोट देबाक समान अधिकार छैक मुदा वोट मे ठाढ़ होय बाला लेल योग्यता त रहबाक चाही । आइ ए एस ,इंजिनियर ,डाक्टर ,प्रोफेसर ,एवं सरकारक आओर पदाधिकारीक मंत्री त पदाधिकारी सँ योग्य हेबाक चाही ,एहि लेल कियो अवाज नहि उठायत ।ई केहन प्रजातंत्र छैक जेकर सरकारक मुखिया निरक्षरो भए सकैत अछि ।ई देसक दुर्भागय अछि ।हम त कहब एहि सत्यकामक सेठ ,लोहा कारखानाक सेठ आ ऱघू काका रुपी सरकारक मुखिया वोट मे नहि ठाढ़ हुए ताहि लेल अवाज एक संग उठेबाक प्रयोजन छैक आ कि नहि ? ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। उमेश मण्डल-इतिहास- सगर राति दीप जरय सगर राति दीप जरय केर 91म आयोजन संयोजक : दुर्गानन्‍द मण्‍डल स्‍थान : मध्‍य विद्यालय परिसर- गोधनपुर 24 September 2016 अयोजक : स्‍थानीय साहित्‍य प्रेमी, गोधनपुर (मधुबनी) प्रस्‍तुति‍ : उमेश मण्‍डल मो. +91 9931654742 सगर राति‍ दीप जरय (कथा पाठ एवं परि‍चर्चा) क्र.सं. स्‍थान ति‍थि‍ संयोजक अध्‍यक्षता/उद्घाटन पोथी लोकार्पण लेखक/लेखि‍का लोकार्पण कर्ता अन्‍य 1. मुजफ्फरपुर 21.01.1990 प्रभास कुमार चौधरी श्री रमानन्‍द रेणु शैलेन्‍द्र आनन्‍दक कथा यात्रा- डा. रमानन्‍द झा रमण 2. डेओढ़ 29.04.1990 जीवकान्‍त श्री प्रभास कुमार चौधरी 3. दरभंगा 07.07.1990 डा. भीमनाथ झा, प्रदीप मैथि‍ली पुत्र, बेवस्‍थापक- वि‍जयकान्‍त ठाकुर श्री गोवि‍न्‍द झा 1 सामाक पौती 2 मोम जकाँ बर्फ जकाँ गोवि‍न्‍द झा अमरनाथ डा. मुनीश्वर झा श्री प्रभास कुमार चौधरी 4. पटना 3.11.1990 गोवि‍न्‍द झा बेवस्‍थापक- दमनकान्‍त झा श्री उपेन्‍द्रनाथ झा ‘व्‍यास’ एवं राजमोहन झा - - - - 5. बेगुसराय 13.01.1991 प्रदीप बि‍हारी प्रो. प्रफुल्‍ल कुमार सिंह ‘मौन’ 3 हमर युद्धक साक्ष्‍य मे तारानन्‍द वि‍योगी उपेन्‍द्र दोषी - 6. कटि‍हार 22.04.1991 अशोक श्री उपेन्‍द्र दोषी 4 ओहि‍ रातुक भोर 5 अदहन अशोक शि‍वशंकर श्रीनिवास डा. भीमनाथ झा डा. रमानन्‍द झा ‘रमण’ वि‍भूति‍ आनन्‍दक कथा यात्रा- डा. रमण 7. नवानी 21.07.1991 मोहन भारद्वाज प्रो. सुरेश्वर झा 6 समाढ़ रमेश श्री कुलानन्‍द मि‍श्र - 8. सकरी 22.10.1991 प्रो. सुरेश्वर झा, बेवस्‍थापक- डा. राम बाबू श्री ए.सी. दीपक 7 साहि‍त्‍यालाप भीमनाथ झा पं. गोवि‍न्‍द झा - 9. नेहरा 11.10.1992 ए.सी. दीपक श्री मन्‍त्रेश्वर झा - - - - 10. वि‍राटनगर 14.04.1992 जीतेन्‍द्र जीत डा. गणेश प्रसाद कर्ण उद- गोवि‍न्‍द झा - - - नेपालमे मैथि‍ली कथा- डा. रमण 11. वाराणसी 18.07.1992 प्रभास कुमार चौधरी श्री मयानन्‍द मि‍श्र/ गंगेश गुंजन उद- ठाकुर प्रसाद सिंह एवं पं. रमाकान्‍त मि‍श्र - - - - 12. पटना 19.10.1992 राजमोहन झा श्री सुभाषचन्‍द्र यादव - - - - 13. सुपौल 1 18.10.1993 केदार कानन श्री बुद्धि‍नाथ झा 8 पुनर्नवा हेाइत ओ छौंड़ी वि‍भूति‍ आनन्‍द श्री महाप्रकाश - 14. बोकारो 24.04.1993 बुद्धि‍नाथ झा श्री गोवि‍न्‍द झा - - - - 15. पैटघाट 10.07.1993 डा. रमानन्‍द झा ‘रमण’ प्रो. उमानाथ झा 9. वि‍द्यापति‍क आत्‍मकथा गोवि‍न्‍द झा श्री प्रभास कुमार चौधरी - 16. जनकपुर 09.10.1994 रमेश रंजन श्री गोवि‍न्‍द झा उद- डा. रामावतार यादव 10 श्वेतपत्र 11 मि‍थि‍लावाणी- प्रत्रि‍का 12 गाम नहि‍ सुतैत अछि‍ 13 मर्सिनी- उपन्‍यास स. वि‍योगी एवं रमेश मि‍लाप, जनकपुरधाम महेन्‍द्र मलंगि‍या अरूण कुमार झा डा. धीरेन्‍द्र श्री धूमकेतु पं. गोवि‍न्‍द झा डा. रामावतार यादव - 17. इसहपुर 06.02.1994 डा. अरवि‍न्‍द कुमार ‘अक्कू’ डा. भीमनाथ झा - - - - 18. सरहद 23.04.1994 अमि‍य कुमार झा श्री प्रेमलता मि‍श्र प्रेम - - - - 19. झंझारपुर 09.07.1994 श्‍यामानन्‍द चौधरी श्री जीवकान्‍त - - - - 20. घोघरडीहा 22.10.1994 डा. नारायणजी श्री राजमोहन झा 14 कथा कुम्‍भ सं. बुद्धि‍नाथ झा पं. गोवि‍न्‍द झा - 21. बहेरा 21.01.1995 कमलेश झा श्री श्‍यामानन्‍द ठाकुर उद- चन्‍द्रभानु सिंह 15 सत्‍य एकटा काल्‍पनि‍क वि‍जय सारस्‍वत श्री जीवकान्‍त - 22. सुपौल (दरभंगा) 08.04.1995 कमलेश झा प्रो. रामसुदि‍ष्‍ट राय ‘व्‍याधा’ उद- गोवि‍न्‍द झा - - - - 23. काठमांडू 23.09.1995 धीरेन्‍द्र प्रेमर्षि डा. धीरेन्‍द्र 16 नख दर्पण गोवि‍न्‍द झा डा. रामावतार यादव - 24. राजवि‍राज 24.01.1996 रामनारायण देव डा. धीरेन्‍द्र, उद- डा. योगेन्‍द्र प्र. यादव, मुख्‍य- गजेन्‍द्रनारायण सिंह, मंत्री- नेपाल सरकार - - - - 25. कोलकाता रजत जयंती 28.12.1996 प्रभास कुमार चौधरी श्री गोवि‍न्‍द झा, उद- यमुनाधर मि‍श्र 17 नि‍वेदि‍ता 18 कथाकल्‍प सुधांशु शेखर चौधरी देवकान्‍त झा पं. गोवि‍न्‍द झा श्री प्रभास कुमार चौधरी - 26. महिषी 13.04.1997 डा. तारानन्‍द वि‍योगी/ रमेश प्रायोजि‍त श्री मायानन्‍द मि‍श्र 19 अति‍क्रमण 20 हस्‍तक्षेप 21 शि‍लालेश 22 परि‍चि‍ति‍ तारानन्‍द वि‍योगी तारानन्‍द वि‍योगी तारानन्‍द वि‍योगी सुस्‍मि‍ता पाठक पं. गोवि‍न्‍द झा श्री कुलानन्‍द मि‍श्र श्री सुभाष चन्‍द्र यादव श्री मोहन भारद्वाज - क्र.सं. स्‍थान ति‍थि‍ संयोजक अध्‍यक्षता/उद्घाटन पोथी लोकार्पण लेखक/लेखि‍का लोकार्पण कर्ता अन्‍य 27. तरौनी 20.06.1997 शोभाकान्‍त श्री जीवनकान्‍त - - - - 28. पटना 18.07.1997 प्रभास कुमार चौधरी श्री हरि‍नारायण मि‍श्र/ रामचद्र खान 23 समानान्‍तर रमेश श्री प्रभास कुमार चौधरी - 29. बेगूसराय 13.09.1997 प्रदीप बि‍हारी श्री प्रफुल्‍ल कुमार सिंह ‘मौन’ 24 कुक्करूकू आ कसौटी चन्‍द्रेश श्री प्रभास कुमार चौधरी प्रभास कुमार चौधरीक अन्‍ति‍म सहभागि‍ता 30. खजौली 04.04.1998 प्रदीप बि‍हारी श्री रमानन्‍द रेणु - - - - 31. सहरसा 18.07.1998 रमेश डा. महेश 25 ओना मासी 26 चानन काजर 27 प्रति‍क्रि‍या देवशंकर नवीन देवशंकर नवीन रमेश कुमारी ऋृचा श्री मायानन्‍द मि‍श्र पं. गोवि‍न्‍द झा - 32 पटना 10.10.1998 श्‍याम दरि‍हरे श्री राजमोहन झा, उद- गोवि‍न्‍द झा 28 भरि‍ राति‍ भोर के.डी. झा, श्‍याम दरि‍हरे एवं प्रदीप बि‍हारी श्री उपेन्‍द्रनाथ झा ‘व्‍यास’ - 33. बलाइन; नागदह 08.01.1999 पदम सम्‍भव श्री जीवकान्‍त - - - - 34. भवानीपुर 10.04.1999 डा. जि‍ष्‍णु दत्त मि‍श्र श्रीमती कामि‍नी 29 काल्हि‍ आ आइ धीरेन्‍द्र श्री जीवकान्‍त - 35. मधुबनी 24.07.1999 सि‍याराम झा ‘सरस’ बेवस्‍था– डा. कुलधारी सिंह श्री राजमोहन झा, उद- जयधारी सिंह 30 काजे तोहर भगवान शैलेन्‍द्र आनन्‍द डा. वि‍भूति‍ आनन्‍द - 36. अन्‍दौली 20.10.1999 कमलेश झा श्री चन्‍द्रभानु सिंह - - - - 37. जनकपुर 25.03.2000 रमेश रंजन डा. धीरेन्‍द्र, उद- डा. राजेन्‍द्र वि‍मल - - - - 38. काठमांडू 25.06.2000 धीरेन्‍द्र प्रेमर्षि डा. रामानन्‍द झा ‘रमण’, उद- महेन्‍द्र कुमार मि‍श्र, सांसद 31 मकड़ी 32 मि‍थि‍लांचलक लोक कथा 33 शि‍रीषक फूल- अनुवाद 34 हम मैथि‍ल छी- कैसेट 35 मंडनमि‍श्र अद्धैत मीमांसा प्रदीप बि‍हारी गंगा प्रसाद अकेला गंगा प्रसाद अकेला सि‍याराम झा ‘सरस’ रमेश/ दीनानाथ/ सुरेन्‍द्रनाथ श्री महेन्‍द्र मलंगि‍या डा. रामानन्‍द झा ‘रमण’ डा. ‘रमण’ डा. रामावतार यादव डा. रामावतार यादव - 39. धनबाद 21.10.2000 श्‍याम दरि‍हरे एवं रामचन्‍द्र लालदास राजमोहन झा, उद-कीर्तिनारायण मि‍श्र 36 मनक आड़ नमे ठाढ़ डा. भीमनाथ झा श्री राजमोहन झा - 40. बि‍टठो 21.01.2001 डा. अक्कू, बेवस्‍था- प्रो.वि‍द्यानन्‍द झा श्री बलराम, उद. कुलानन्‍द मि‍श्र 37 मातवर 38 दृष्‍टि‍कोण अशोक सुरेन्‍द्रनाथ डा. धीरेन्‍द्र डा. भीमनाथ झा मैथि‍ली कथाक समस्‍या डा. भीमनाथ झा 41. हटनी(घोघरडीहा) 19.05.2001 प्रो. योगानन्‍द झा/ अजि‍त कु.आजाद श्री सामदेव - - - - 42. बोकारो 25.08.2001 गि‍रि‍जानन्‍द झा ‘अर्धनारीश्वर’, बेवस्‍था- मि‍थि‍ला सा. परि‍षद् श्री दयानाथ झा, उद- हरेकृष्‍ण झा 39 नि‍ष्‍प्राण स्‍वप्‍न 40 मि‍थि‍ला दर्पण(1925/2001) दयाकान्‍त झा पुण्‍यानन्‍द झा, सं. रमानन्‍द झा ‘रमण’ श्री हरेकृष्‍ण मि‍श्र श्री फूलचन्‍द्र मि‍श्र ‘रमण’ - 43. पटना (कि‍रणजयंती) 01.12.2001 अशोक, बेवस्‍था- चेतना समि‍ति‍, पटना श्री सोमदेव 41 प्रलाप 42 युगान्‍तर 43 एकैसम शताब्‍दीक घोष्‍णा पत्र. गोवि‍न्‍द झा वि‍श्वनाथ रमेश/ श्‍याम दरि‍हरे/ मोहन यादव श्री सोमदेव पं. गोवि‍न्‍द झा श्री राजमोहन झा - 44. राँची 13.04.2002 कुमार मनीष अरवि‍न्‍द श्री साकेतानन्‍द, उद- परमानन्‍द मि‍श्र 44 चानन घन गछि‍या 45 शुभास्‍ते पन्‍थान: वि‍वेकानन्‍द ठाकुर परमान्‍न्‍द मि‍श्र श्री मोहन भारद्वाज श्री साकेतानन्‍द - 45. भागलपुर 24.08.2002 धीरेन्‍द्र मोहन झा श्री योगीराज, उद- डा. बेचन 46 कथा सेतु 47 पृथा 48 आउ, कि‍छु गप्‍प करी सं. प्रशान्‍त नीता झा कुलानन्‍द मि‍श्र डा. बेचन श्री राजमोहन झा डा. अरूणाकर झा - 46. वि‍द्यापति‍ भवन पटना 16.11.2002 अजि‍त कुमार आजाद श्री मोहन भारद्वाज उद- राजनन्‍दन लाल दास 49 काठ 50 एक फाॅक रौद 51 तीन रंग तेरह चि‍त्र 52 उदयास्‍त 53 साँझक गाछ 54 सर्वस्‍वांत 55 अभि‍युक्‍त 56 यात्री समग्र 57 मैथि‍ली बाल साहि‍त्‍य 58 The Colonial Periphery Imaging Mithila (1875-1955) 59 मैथि‍ल समाज पत्रि‍का, नेपाल वि‍भूति‍ आनन्‍द योगीराज सुधाकर चौधरी धूमकेतु राजकमल,सं.देवशंकर नवीन साकेतानन्‍द राजमोहन झा सं. शोभाकान्‍त दमन कुमार झा पंकज कुमार झा सं. धीरेन्‍द्र प्रेमर्षि डा. तारानन्‍द वि‍योगी श्री गोवि‍न्‍द झा श्री सोमदेव श्री सोमदेव श्री रामलोचन ठाकुर श्री सोमदेव श्री सोमदेव श्री गोवि‍न्‍द झा पं. गोवि‍न्‍द झा डा. हेतुकर झा क्र.सं. स्‍थान ति‍थि‍ संयोजक अध्‍यक्षता/उद्घाटन पोथी लोकार्पण लेखक/लेखि‍का लोकार्पण कर्ता अन्‍य 47. कोलकाता 22.01.2003 कर्णगोष्‍ठी, कोलकाता डा. रमानन्‍द झा ‘रमण’ उद- रमानन्‍द रेणु 60 आत्‍मालाप गोवि‍न्‍द झा श्री रमानन्‍द रेणु मैथि‍ली कथाक वर्तमान समस्‍या-डा.ता.न.वि‍योगी 48. खुटौना 07.06.2003 डा. महेन्‍द्र नारायण राम सोमदेव/उद- डा. खुशीलाल झा एवं रामलोचन ठाकुर 61. लाख प्रश्न अनुत्तरि‍त रामलोचन ठाकुर श्री सोमदेव - 49. बेनीपुर 20.09.2003 कमलेश झा डा. फूलचन्‍्द्र मि‍श्र ‘रमण’ उद- प्रो. रामसुदि‍ष्‍ट राय ‘व्‍याधा’ - - - - 50. दरभंगा 21.02.2004 डा. अशोक कुमार मेहता श्री गोवि‍न्‍द्र झा उद- चन्‍द्रनाथ मि‍श्र ‘अमर’ 62 दि‍दबल 63 चि‍तकावर 64 गंगा 65 बाबाक वि‍जया 66 सरि‍सब मे भूत 67 गहवर 68 हाथी चलय बजार 69 उगैत सूर्यक धमक 70 आदमी केँ जोहैत 71 ओना कहबा लेल बहुत कि‍छु हमरा लग 72 गाछ झूलझूल 73 खंजन नयन नि‍रंजन 74 हम भेटब 75 चि‍न्‍तन प्रवाह 76 दुर्वासा 77 पाथर पर दुभि‍ 78 कोशी घाटी सभ्‍यता‍ 79 जागि‍ गेल छी 80 हमरा मोनक खंजन चि‍ड़ैया 81 जयमाला 82 माटि‍क आबाज 83 इजोरि‍यरक अंगैठी मोर 84 बेसाहल 85 यदुवर रचनावली 86 सगर राति ‍दीप जरयक इति‍हास 87 अभि‍ज्ञा 88 वि‍मर्श 89 स्‍मरणक संग 90 कथा काव्‍य आ द्वादसी 91 तात्‍पर्य 92 हेमलेट 93 लोरि‍क मनि‍यार 94 कनुप्रि‍या 95 मन्‍दाकि‍नी 96 सीता व्‍याथा कथा 97 नागार्जुन के उपन्‍यास 98 Sesected Poems of Jee 99 अंतरंग हि‍न्‍दी पत्रि‍का मैथि‍ली वि‍शेषांक प्रभास कुमार चौधरी हंशराज यन्‍त्रनाथ मि‍श्र उमाकान्‍त श्‍याम दरि‍हरे डा. महेन्‍द्र नारायण राम डा. देवशंकर नवीन सि‍याराम झा ‘सरस’ कीर्तिनारायण मि‍श्र कुलानन्‍द मि‍श्र जीवकान्‍त अनंत बि‍.लाल. ‘इन्‍दु’ मार्कण्‍डेय प्रवासी धीरेन्‍द्रनाथ मि‍श्र जयनारायण यादव रमेश रमेश महेन्‍द्र राम फूलचन्‍द्र मि‍श्र ‘प्रवीण’ जयानन्‍द मि‍श्र मंजर सुलेमान सं. माला झा रमानन्‍द झा ‘रमण’ रमानन्‍द झा ‘रमण’ रमानन्‍द झा ‘रमण’ फूल चन्‍द्र मि‍श्र ‘रमण’ भीमनाथ झा वि‍भूति‍ आनन्‍द अरूण कुमार कर्ण अशोक कुमार मेहता प्रो. रमाकान्‍त मि‍श्र चन्‍द्रेश अनु. श्‍याम दरि‍हरे प्रभाष कुमार चौधरी अनन्‍त बि‍. लाल दास ‘इन्‍दू’ मोहि‍त ठाकुर मुरारि‍ मधुसुदन ठाकुर सं. प्रदीप बि‍हारी पं. गोवि‍न्‍द झा श्री सोमदेव पं. गोवि‍न्‍द झा श्री मार्कण्‍डेय प्रवासी श्री राजमोहन झा श्री जयनारायण यादव श्री राजमोहन झा डा. रामान्‍नद झा ‘रमण’ श्री मोहन भारद्वाज श्री कीर्तिनारायण मि‍श्र पं. गोवि‍न्‍द्र झा चन्‍द्रनाथ मि‍श्र ‘अमर’ पं. गोवि‍न्‍द झा श्री राजमोहन झा गोपालजी त्रि‍पाठी डा. शि‍वशंकर श्रीनि‍वास डा. शि‍वशंकर श्रीनि‍वास डा. रामदेव झा श्री मार्कण्‍डेय प्रवासी पं. चन्‍द्रनाथ मि‍श्र ‘अमर’ श्री मोहन भारद्वाज श्री अशोक श्री मार्कण्‍डेय प्रवासी पं. गोवि‍न्‍द झा श्री रमेश डा. रमानन्‍द झा ‘रमण’ डा. देवेन्‍द्र झा श्री रतीश चन्‍द्र झा श्री रमानन्‍द रेणु श्रीमती अंजलि‍ मेहता श्री नीलमणि‍ बनर्जी पं. गोवि‍न्‍द झा श्री श्‍यामसुन्‍द्र मि‍श्र पं. चन्‍द्रनाथ मि‍श्र ‘अमर’ डा. रमादेव झा डा. सुरेश्वर झा - डा. रमानन्‍द रेणु - 51. जमशेदपुर 10.07.2004 डा. रवीन्‍द्र कुमार चौधरी श्री सुरेन्‍द्र पाठक उद- राजनन्‍दनलाल दास मु. अति‍. सत्‍यनारायण लाल - - - - 52. राँची 02.10.2004 वि‍वेकानन्‍द ठाकुर डा. रमानन्‍द झा ‘रमण’ उद- राजनन्‍दन लाल दास 100 स्‍वास स्‍वास मे वि‍श्वास 101 सम्‍पर्क-4 वि‍वेकानन्‍द ठाकुर स. सि‍याराम झा ‘सरस’ डा. रमानन्‍द झा ‘रमण’ श्री राजनन्‍दन लाल दास - - क्र.सं. स्‍थान ति‍थि‍ संयोजक अध्‍यक्षता/उद्घाटन पोथी लोकार्पण लेखक/लेखि‍का लोकार्पण कर्ता अन्‍य 53. देवघर 08.01.2005 श्‍याम दरि‍हरे एवं अवि‍नाश श्री दयानाथ झा उद- यन्‍त्रनाथ मि‍श्र - - - - 54. बेगूसराय 09.04.2005 प्रदीप बि‍हारी श्री रामलोचन ठाकुर उद- सत्‍यनारायण लाल 102 भजारल 103 सरोकार 104 औरत 105 अन्‍तरंग पत्रि‍का डा. रमानन्‍द झा ‘रमण’ प्रदीप बि‍हारी मेनका मल्‍लि‍क स. प्रदीप बि‍हारी श्री कीर्तिनारायण मि‍श्र श्री राजमोहन झा श्रीमती ज्‍योत्‍सना चन्‍द्रम डा. आनन्‍द नारायण शर्मा - 55. पूर्णियाँ 20.06.2005 रमेश श्री साकेतानन्‍द - - - - 56. पटना 03.11.2005 अजीत कुमार आजाद डा. फूलचन्‍द्र मि‍श्र ‘रमण’ उद- गोवि‍न्‍द झा 106 अतीतालोक 107 गामक लोक 108 मैथि‍ली कवि‍ता संचयन 109 मैथि‍ली कथासंचयन ने.बु.ट्र. 110 बड़ अजगुत देखल 111 कि‍छु पुरान गप्‍प, कि‍छु नव गप्‍प गोवि‍न्‍द झा शि‍वशंकर श्रीनि‍वास सं. गंगेश गुंजन सं. शि‍वशंकर श्रीनि‍वास शरदि‍न्‍दु चौधरी कीर्तिनाथ झा श्री राजमोहन झा डा. रमानन्‍द झा ‘रमण’ पं. गोवि‍न्‍द झा श्री राजमोहन झा श्री फूलचन्‍द्र मि‍श्र ‘रमण’ श्री गोवि‍न्‍द झा - 57. जनकपुर (नेपाल) 12.08.2006 रमेश रंजन श्री महेन्‍द्र मलंगि‍या, डा. ‘रमण’ उद- डा. रेवती रमण लाल - - - - 58. जयनगर 02.12.2006 श्री नारायण यादव डा. कमलकान्‍त झा, उद- श्री रामदेव पासवान, मु.अ. भगीरथप्रसाद अग्रवाल - - - - 59. बेगूसराय 10.02.2007 प्रदीप बि‍हारी नवीन चौधरी 112 स्‍नेहलता डा. योगानन्‍द झा डा. तारानन्‍द वि‍यागी - 60. सहरसा 21.07.2007 कि‍सलय कृष्‍ण डा. रमानन्‍द झा ‘रमण’ डा. मनोरंजन झा 113 अक्षर आर्केस्‍ट्रा अनु- प्रदीप बि‍हारी डा. रमानन्‍द झा ‘रमण’ - 61. सुपौल-2 01.12.2007 अरवि‍न्‍द ठाकुर अंशुमान सत्‍यकेतु डा. धीरेन्‍द्र धीर 114 अन्‍हारक वि‍रोधमे अरवि‍न्‍द ठाकुर श्री अजि‍त कुमार आजाद 62. जमशेदपुर 03.05.2008 डा. रवीन्‍द्र कुमार चौधरी वि‍वेकानन्‍द ठाकुर वि‍द्यानाथ झा ‘वि‍दि‍त’ - - - - 63. राँची 19.07.2008 कुमार मनीष अरवि‍न्‍द वि‍वेकान्‍द ठाकुर/ डा. रमण उद- डा. वि‍दि‍त 115 समय शि‍लापर सुरेन्‍द्रनाथ डा. विद्यानाथ झा‘वि‍दि‍त’ 64. रहुआ संग्राम 08.11.2008 डा. अशोक अवि‍चल डा. रमण/डा. श्री शि‍वशंकर नि‍वास उद- उग्रनारायण मि‍श्र ‘कनक’ 116 भि‍न्न-भि‍न्न अभि‍न्न 117 अन्‍तर ध्‍वनि‍ 118 माइक चि‍ट्ठी 119 ई भेटल तँ की भेटल 120 बुद्ध का दुख और मेरा डा. रमण झा सुशीला झा अर्धनारीश्वर तारानन्‍द वि‍योगी तारानन्‍द वि‍योगी प्रो. खुशीलाल झा चण्‍डेश्वर खाँ डा. रमण डा. कमलकान्‍त झा डा. बोधकृष्‍ण झा 65. पटना कथा गंगा-3 21.02.2009 अजि‍त कुमार आजाद/ चेतना समि‍ति‍ अशोक प्रो. वि‍जय बहादुर सिंह 121 गजल हमर हथि‍यार थि‍क 122 कोढ़ि‍या घर स्‍वाहा 123 टावर चौकसँ 124 मि‍थि‍लाक सांस्‍कृति‍क परम्‍परा 125 हुगली उपर बहैत गंगा सुरेन्‍द्रनाथ ऋृषि‍ बशि‍ष्‍ट डा. भीमनाथ झा डा. रेवती रमण लाल राम भरोस कापड़ि‍ ‘भ्रमर’ म. प्रवासी पं. गोवि‍न्‍द झा म. प्रवासी डा. गंगेश गुंजन साकेतानन्‍द 66. मधुबनी 30.05.2009 दि‍लीप कुमार झा हीरेन्‍द्र कुमार झा डा. देवकान्‍त झा 126 घरमुहाँ 127 झुठपकड़ा मशीन शैलेन्‍द्र आनन्‍द ऋृषि‍ बशि‍ष्‍ट डा. रमानन्‍द झा ‘रमण’ डा. रमानन्‍द झा ‘रमण’ 67. मानारायटोल नरहन- समस्‍तीपुर 05.09.2009 रमाकान्‍त रय ‘रमा’ डा. रमानन्‍द झा ‘रमण’ डा. वि‍पि‍न बि‍हारी ठाकुर 128 कवि‍ताक छाँहमे 129 कल्‍पनाक सागरमे 130 भाषा टीका 131 उद्वेलन (हि‍न्‍दी) ललि‍त कुमार झा ललि‍त कुमार झा डा. वि‍भूति‍ आनन्‍द मुन्ना माधोपुरी डा. रमानन्‍द झा ‘रमण’ श्री रमाकान्‍त राय ‘रमा’ डा. रमानन्‍द झा ‘रमण’ डा. शंकर झा 68. सुपौल- 3 05.12.2009 अरवि‍न्‍द ठाकुर अशोक कुमार मेहता परमानन्‍द पाठक 132 मैथि‍लीक आरम्‍भि‍क यात्रा साहि‍त्‍य 133 कहाँ गये मेरे उगना डा. रमानन्‍द झा ‘रमण’ उषा कि‍रण खान डा. परमान्‍नद पाठक डा. रमानन्‍द झा ‘रमण’ 69. जनकपुर 03.04.2010 राजाराम सिंह ‘राठौर’ डा. रामानन्‍द झा ‘रमण’ उद- डा. रामावतार यादव 134 मि‍थि‍लाक बेटी (नाटक) 135 मौलाइल गाछक फूल(उपन्‍यास) 136 हम पुछैत छी (काव्‍य) 137 अर्चिस (काव्‍य) 138 भाग रौ आ बलचन्‍द्रा 139 नताशा (कौमि‍क्‍स) 140 मैथि‍ली कथा संग्रह 141 वि‍देह मैथि‍ली पद्य 142 नेपथ्‍य 143 वि‍देह मैथि‍ली प्रबन्‍ध-नि‍बंध 144 वि‍देह मैथि‍ली लघु कथा जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल वि‍नीत उत्‍पल ज्‍योति‍ सुनि‍त चौधरी वि‍भारानी देवांशु बत्‍स सं. रेवती रमण लाल सं. गजेन्‍द्र ठाकुर/उमेश मण्‍डल सं. रेवती रमण लाल सं. गजेन्‍द्र ठाकुर/उमेश मण्‍डल सं. गजेन्‍द्र ठाकुर/उमेश मण्‍डल डा. राजेन्‍द्र वि‍मल डा. रामवतार यादव श्री राम भरो. कापड़ि‍ ‘भ्रमर’ डा. वि‍भूति‍ आनन्‍द श्री अरवि‍न्‍द ठाकुर प्रो. प्र.कु. सिंह ‘मौन’ रमानन्‍द झा ‘रमण’ हीरेन्‍द्र कुमार झा डा. रामवतार यादव डा. रामावतार यादव ड. रामावतार यादव 70. कबि‍लपुर (दरभंगा) 12.06.2010 डा. योगानन्‍द झा डा. रामदेव झा उद- चन्‍द्रनाथ मि‍श्र ‘अमर’/ श्री शंकर झा वि‍शेष अति‍थि‍- डा. रमानन्‍द झा ‘रमण’ 145 मैथि‍ली भाषा साहि‍त्‍य 20म शताब्‍दी 146 पि‍लपि‍लहा गाछ 147 उत्‍थान-पतन (उपन्‍यास) 148 जि‍नगीक जीत (उपन्‍यास) 149 गामक जि‍नगी (लघु कथा) 150 गोनू झा आ आन मैथि‍ली चि‍त्रकथा 151 अमरजीक साहि‍त्‍यमे हास्‍य- व्‍यंग्‍य 152 वि‍धकरी 153 मैथि‍ली चि‍त्रकथा 154 मि‍थि‍लाक पंजी प्रबन्‍ध 155 खसल 156 जमीनमे फुटै छै अंकुर 157 हमरो लेने चलू 158 पक्षधर 159 उचाट 160 कथा लोक कथा 161 समाचार कथा 162 भारती - प्रेमशंकर सिंह मुरलीधर झा जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल प्रीति‍ ठाकुर भाग्‍यनारायण झा वि‍द्यानाथ झा ‘वि‍दि‍त’ प्रीति‍ ठाकुर सं. गजेन्‍द्र ठाकुर मनमोहन झा दयानन्‍द मि‍श्र अमरनाथ चौधरी शीतांशु काश्‍यप आशा मि‍श्र योगानन्‍द झा धीरेन्‍द्रनाथ मि‍श्र वीणा ठाकुर - आशा मि‍श्र डा. भीमनाथ झा डा. वीणा ठाकुर डा. मोहन मि‍श्र डा. कमला चौधरी प्रदीप मैथि‍लीपुत्र डा. सुरेश्वर झा डा. सुरेश्वर झा ज्‍योत्‍सना चन्‍द्रम चन्‍द्रनाथ मि‍श्र ‘अमर’ चन्‍द्रनाथ मि‍श्र ‘अमर’ चन्‍द्रनाथ मि‍श्र ‘अमर’ चन्‍द्रनाथ मि‍श्र ‘अमर’ चन्‍द्रनाथ मि‍श्र ‘अमर’ डा. रामदेव झा डा. रामदेव झा डा. रामदेव झा डा. रामदेव झा - 71. बेरमा (झंझारपुर) स्‍थान- मध्‍य वि‍द्यालय परि‍सर- बेरमा। (सार्वजनि‍क स्‍थलपर) 02.10.2010 जगदीश प्रसाद मण्‍डल बेवस्‍था- स्‍थानीय साहि‍त्‍य प्रेमी डा. तारानन्‍द ‘वि‍योगी’ उद- उग्रनारायण मि‍श्र ‘कनक’ 163 नि‍बन्‍ध तरंग 164 प्रलय रहस्‍य 165 जीवन-मरण (उपन्‍यास) 166 तरेगन 167 जीवन-संघर्ष (उपन्‍यास) 168 अलका श्रीपति‍ सिंह तारानन्‍द ‘वि‍योगी’ जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल कमलकान्‍त झा डा. रमानन्‍द झा ‘रमण’ डा. रमण कुमार रामेश्वर लाल दास डा. रमण, फूलचन्‍द्र ‘रमण’ उग्र.ना.मि‍श्र ‘कनक’/अशोक डा. धनाकर ठाकुर जन सहयोगसँ आयोजि‍त भेने, स्‍थानीय लोकक सहभावी बेस रहल। (पहिल बेर जन सहयोगसँ गोष्‍ठीक आयोजन) 72. सुपौल 04.12.2010 अरवि‍न्‍द ठाकुर डा. रमानन्‍द झा ‘रमण’ उद- डा. शचीन्‍द्रनाथ महतो 169 एकहि‍ पच्‍छ इजोर जीवकान्‍त श्री अरवि‍न्‍द ठाकुर 73. महि‍षी कथा राजकमल 05.03.2011 वि‍जय महापात्र अरवि‍न्‍द ठाकुर उद- साकार यादव, स्‍वामी रमेशानन्‍दजी महाराज 170 अघोषि‍त युद्ध की भूमि‍का 171 कुदरत बेहुस्‍न नहीं हुइ है (उर्दू) मू. अजि‍त कुमार आजाद मू. अजि‍त कुमार आजाद रमाकान्‍त राय ‘रमा’ श्री अरवि‍न्‍द ठाकुर 74. हजारीबाग 10.09.2011 श्‍याम दरि‍हरे डा. रमानन्‍द झा ‘रमण’ 172 Survey of Maithili lierature 173 मि‍थि‍लाक इति‍हास 174 धुंध के वाबजूद 175 परती टूट रही है 176 कठि‍न समयमे शब्‍द 177 कलानि‍धि‍ 178 रहए चाहैछ गाछ प्रो. राधाकृष्‍ण चौधरी प्रो. राधाकृष्‍ण चौधरी अजि‍त आजाद मू. अजि‍त आजाद मू. अ.कु. सि‍न्‍हा कालीकान्‍त झा ‘बूच’ जीवकान्‍त श्री अशोक श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल श्री जगदीश सिंह श्री रमानन्द झा‘रमण’ श्री जीवेन्द्रनाथ झा जीवेन्‍द्रनाथ झा श्री प्रदीप बि‍हारी श्री तुलानन्‍द मि‍श्र 75. पटना हीरक जयन्‍ती 10.12.2011 अशोक एवं कमलमोहन ‘चुन्नु’ श्री उग्रनारायण मि‍श्र ‘कनक’ 179 जुबैदा 180 समय साक्षी थि‍क 181 गंगा नहौन 182 बेटीक अपमान 183 अनचि‍न्‍हार आखर 184 सीतावरण 185 गाममे 186 नि‍बन्‍ध सुधा 187 जखन-तखन (प्रेम क.वि‍.) 188 वि‍हनि‍ कथाक पो. प्रदर्शनी 189 ऐ अकाबोनमे 190 कोशी कातक गंगा 191 जेना जनलि‍यनि‍ उग्र ना. मि‍श्र ‘कनक’ अनमोल झा नि‍शाकर बेचन ठाकुर आशीष अनचि‍न्‍हर मू.सनेहलता, सं.योगानन्‍दझा अनु प्रदीप बि‍हारी सुधा कुमारी सं. वि‍भूति‍ आनन्‍द मुन्नाजी राज साकेतानन्‍द महेन्‍द्र नारायण राम श्रीमती उषा कि‍रण खान श्री मोहन भारद्वाज डा. रमानन्‍द झा ‘रमण’ 76. चेन्नै 14.07.2012 वि‍भा रानी श्री रमानन्‍द झा ‘रमण’ उद- चन्‍द्रकान्‍ता गरि‍यारी (IAS) 192 हि‍आओल रमानन्‍द झा ‘रमण’ प्रो. श्रीश चौधरी - 77. दरभंगा कि‍रण जयन्‍ती 01.12.2012 अरवि‍न्‍द ठाकुर डा. भीमनाथ झा उद- राकेश कुमार मि‍श्र (IPS) 193 सी.डी. (37 गोट पोथीक) श्रुति‍ प्रकाशन दि‍ल्‍लीसँ प्रकाशनाधि‍न वि‍भि‍न्न रचनाकारक उपस्‍थि‍त समस्‍त वि‍द्वतजन क्र.सं. स्‍थान ति‍थि‍ संयोजक अध्‍यक्षता/उद्घाटन पोथी लोकार्पण लेखक लोकार्पण कर्ता अन्‍य 78. घनश्‍यामपुर 09.03.2013 कमलेश झा श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल, उद- डा. रमण, मं.सं- डा. अशोक मेहता 194 वर्णित रस (कवि‍ता संग्रह) उमेश पासवान (औरहा) जगदीश प्रसाद मण्‍डल - 79. औरहा (लौकही) (सार्वजनि‍क स्‍थलपर) 15.5.2013 उमेश पासवान श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल/ रामचन्‍द्र पासवान उद- श्री लक्ष्‍मी नारायण सिंह (औरहा नि‍वासी) 195 वि‍देह वि‍हनि‍ कथा, वि‍-स;5 196 वि‍देह मैथि‍ली प्रबन्‍ध-नि‍बन्‍ध समालोचना- वि‍-स;10 197 वि‍देह मैथि‍ली लघु कथा- 6 198 वि‍देह नाट्य उत्‍सव,वि‍-स;8 199 वि‍देह मैथि‍ली शि‍शु उत्‍सव, वि‍देह-सदेह- 9 200 वि‍देह मैथि‍ली पद्य वि‍.स; 7 सं. गजेन्‍द्र ठाकुर/ उमेश मण्‍डल सं. गजेन्‍द्र ठाकुर/ उमेश मण्‍डल सं. गजेन्‍द्र ठाकुर/ उमेश मण्‍डल सं. गजेन्‍द्र ठाकुर/ उमेश मण्‍डल सं. गजेन्‍द्र ठाकुर/ उमेश मण्‍डल सं. गजेन्‍द्र ठाकुर/ उमेश मण्‍डल श्री संजय कुमार सिंह श्री रामचन्‍द्र पासवान श्री मि‍थि‍लेश सि‍ंह श्री राजदेव मण्‍डल श्री लक्ष्‍मी नारायण सिंह श्री वीरेन्‍द्र कुमार यादव स्‍थानीय लोकक सहभावी बेस 80. निर्मली (स्‍थान- मानि‍क राम-बैजनाथ बजाज धर्मशाला, सुभाष चौक, निर्मली- सुपौल) 30.11.2013 उमेश मण्‍डल बेवस्‍था-स्‍थानीय साहि‍त्‍य प्रेमी एवं साहि‍त्‍यकार, वि‍शेष सहयोग- श्री धीरेन्‍द्र कुमार राय, श्री वि‍नोद कुमार साह, श्री अखि‍लेश कुमार ‘चि‍न्‍टुजी’; श्री अभि‍षेख पंसारी, श्री सीता राम चौधरी, श्री सुरेश कुमार महतो, श्री दुर्गानन्‍द मण्‍डल, श्री खड़ानन्‍द यादव, श्री रामदयाल भ्रमर, श्री रामदेव प्रसाद मण्‍डल ‘झारूदार’ श्री राहुल कुमार अध्‍यक्ष- डा. अशोक अवि‍चल एवं डा. रामाशीष सिंह (प्राचार्य, ह.प्र.सा.म.वि‍.नि‍.) उद्घाटन- श्री सतीश साह (वि‍धायक), श्री अरूण कुमार सिंह (अनुमण्‍डल पदाधि‍कारी), श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल, डा. अशोक अवि‍चल। डा. रामाशीष सिंह (प्राचार्य) मंच संचालक-कथा सत्र- श्री दुर्गानन्‍द मण्‍डल लोकार्पण सत्र-उमेश मण्‍डल 201 देवीजी (बाल नि‍बन्‍ध) 202 कुरुक्षेत्रम् अन्‍तर्मनक (वि‍वि‍धा) 203 अंग्रजी-मैथि‍ली शब्‍दकोष 204 मैथि‍ली-अंग्रेजी शब्‍दकोष-2 205 बजन्‍ता-बुझन्‍ता (वि‍हनि‍ कथा) 206 तरेगन (दोसर संस्‍करण) 207 सखारी-पेटारी (लघु कथा) 208 उलबा-चाउर (लघु कथा) 209 अर्द्धांगि‍नी (लघु कथा) 210 सतभैंया पोखरि‍ (लघु कथा) 211 भकमोड़ (लघु कथा) 212 शम्‍भुदास (दीर्घ कथा) 213 बसुन्‍धरा (कवि‍ता) 214 राति‍-दि‍न (कवि‍ता) 215रथक चक्का उलटि‍ चलै बाट 216 नि‍श्तुकी (कवि‍ता संग्रह) 217 इन्‍द्रधनुषी अकास (कवि‍ता) 218 प्रति‍क (कवि‍ता) 219 कि‍यो जानि‍ नै सकल हमरा 220 माझ आँगनमे कति‍याएल छी 221 मोनक बात (गजल) 222 अंशु (गजल) 223 गीतांजलि‍ (गीत) 224 तीन जेठ एगारहम माघ 225 सरि‍ता (गीत संग्रह) 226 सुखाएल पोखरि‍क जाइठ 227 हमरा बि‍नु जगत सुना छै 228 क्षणप्रभा (पद्य) 229 पाखलो (कोंकणी, उपन्‍यास) 230 रि‍हर्सल (नाटक) 231 बि‍सवासघात (नाटक) 232 बाप भेल पि‍त्ती आ अधि‍कार 233 रत्नाकर डकैत (नाटक) 234 स्‍वयंवर (नाटक) 235 पंचवटी (एकांकी संचयन) 236 कम्‍प्रोमाइज (नाटक) 237 झमेलि‍या बि‍आह (नाटक) 238 हमर टोल (उपन्‍यास) 239 जीवन-संघर्ष (उपन्‍यास, दो.संस्‍करण) 240 बड़की बहि‍न (उपन्‍यास) 241 जीवन-मरण (उपन्‍यास, दो.संस्‍करण) 242 नै धाड़ैए (बाल उपन्‍यास) 243 सह्त्रबाढ़नि‍ (ब्रेल लि‍पि‍मे उपन्‍यास) 244 जगदीश प्रसाद मण्‍डल एकटा वायोग्राफी (वायोग्राफी) 245 मध्‍य प्रदेशक यात्रा (संस्‍मरण) ज्‍योति‍ झा चौधरी गजेन्‍द्र ठाकुर गजेन्‍द्र ठाकुर एवं अन्‍य गजेन्‍द्र ठाकुर एवं अन्‍य जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल नन्‍द वि‍लास राय जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल राजदेव मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल राम वि‍लास साहु उमेश मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल मनोज कुमार कर्ण ‘मुन्नाजी’ ओम प्रकाश झा मनोज कुमार कर्ण ‘मुन्नाजी’ चन्‍दन झा अमि‍त मि‍श्र जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल रामदेव प्रसाद मण्‍डल ‘झारूदार’ शि‍वकुमार झा ‘टि‍ल्‍लू’ अनु शम्‍भु कुमार सिंह रवि‍ भूषण पाठक बेचन ठाकुर बेचन ठाकुर जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल राजदेव मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल गजेन्‍द्र ठाकुर गजेन्‍द्र ठाकुर ज्‍योि‍त झा चौधरी श्री राजदेव मण्‍डल डा. बचेश्वर झा डा. रामाशीष सिंह डा. अशोक अवि‍चल श्री अरूण कुमार सिंह SDO श्री सतीश साह, वि‍धायक डा. शि‍वकुमार प्रसाद श्री वि‍नोद कुमार साह श्री दुर्गानन्‍द मण्‍डल प्रो. जय प्रकाश साह श्री फागुलाल साहु सदरे आलम ‘गोहर’ श्री ओम प्रकाश झा श्री रामजी प्रसाद मण्‍डल श्री बेचन ठाकुर श्री रामदेव प्र.मं. ‘झारूदार’ श्री रामलखन यादव, पत्रकार श्री वीरेन्‍द्र कुमार यादव श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल श्री वीरेन्‍द्र कुमार यादव डा. शि‍वकुमार प्रसाद श्री कपि‍लेश्वर राउत श्री अमि‍त मि‍श्र श्री चन्‍दन कुमार झा श्री बालमुकुन्‍द पाठक श्री बि‍पीन कुमार कर्ण श्री मनोज कुमार बि‍हारी श्री राजाराम यादव श्री शंभु सौरभ श्री राम वि‍लास साफी श्री बालगोवि‍न्‍द यादव‘गोवि‍न्‍दाचार्य’ श्री राम वि‍लास साहु श्री कीशलय कृष्‍ण श्री शम्‍भु सौरभ श्री राजदेव मण्‍डल श्री रामप्रवेश मण्‍डल श्री वीरेन्‍द कुमार यादव श्री हेम नारायण साहु श्री नारायण यादव श्री शारदानन्‍द सिंह श्री राजलाल साहु श्री गुरुदयाल भ्रमर श्री मनोज कुमार राम श्री उमेश पासवान श्री नन्‍द वि‍लास राय 1. ‘कथा मि‍लन सदाय सगर राति‍ दीप जरय’ ई 80म आयोजन स्‍थानीय कलाकार स्‍व. मि‍लन सदाय केर नाओंपर आयोजत भेल। 2. श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल ‘भकमोड़’ लघु कथा संग्रह ऐ गोष्‍ठीक नामे समरपि‍त केलनि‍। 3. वि‍भि‍न्न वि‍धाक 45 गोट पोथी लोकार्पि‍त भेल। 81. देवघर (स्‍थान- बि‍जली कोठी, बम्‍पासटॉन, देवघर) 22.03.2014 ओम प्रकाश झा अध्‍यक्ष- श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल उद्घाटन- श्री ओ.पी. मि‍श्रा, (अ.प्र. अभि‍यंता, झारखण्‍ड सरकार) मंच संचालक-श्री गजेन्‍द्र ठाकुर 246 अंशु  (आलोचना) 247 मैथि‍ली-अंग्रेजी शब्‍दकोष-2 248 ऊँच-नीच (नाटक) 249 अंग्रेजी-मैथि‍ली शब्‍दककोष-1 250.जीनि‍योलोजि‍कल मैपिंग-2 251. जीनोम मैपिंग (मि‍थि‍लाक पंजी प्रबन्‍ध) शि‍वकुमार झा ‘टि‍ल्‍लू’ सं. गजेन्‍द्र ठाकुर बेचन ठाकुर सं. गजेन्‍द्र ठाकुर सं. गजेन्‍द्र ठाकुर सं. गजेन्‍द्र ठाकुर श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल श्री सुशील भारती श्री योगानन्‍द झा डा. उमेश ना. कर्ण डा. योगानन्‍द झा श्री राजीव रंगजन मि‍श्र एवं श्री ओम प्रकाश झा समीक्षाक समीक्षा (प्रति‍समीक्षा,प्रति‍आलोचना) केर आवश्‍यकतापर एक नव प्रयोग। -श्री गजेन्‍द्र ठाकुर -श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल -श्री ओम प्रकाश झा -श्री उमेश मण्‍डल 82. मेंहथ (झंझारपुर) कथा बौध सि‍द्ध मेहथपा 31.05.2014 गजेन्‍द्र ठाकुर अध्‍यक्ष- श्री अरवि‍न्‍द ठाकुर उद- श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल डा. कमलकान्‍त झा श्री शि‍वकुमार मि‍श्र स्‍वागत- श्री काशीकान्‍त झा ‘कि‍रण’ मंच संचालन-श्री उमेश मण्‍डल एवं श्री आनन्‍द कुमार झा 252. बैशाखमे दलानपर (गद्य-पद्य) 253. नेपालक नोर मरुभूमि‍मे(ग/प.सं) 254. उलहन (वि‍/ल.सं) 255. On the Dice Bord of the Millennium 256. सहस्त्रावि‍दि‍क चौपड़पर (प.सं) 257. The Science of  Words (Short Story) 258. धांगि‍ बाट बनेबाक दाम अगूवार पेने छँ (गजल) 259. सहस्रजि‍त (पद्य संग्रह) 260. कुरुक्षेत्रम् प्रबन्‍ध-नि‍बन्‍ध समालोचना-2 संदीप साफी वि‍न्‍देश्वर ठाकुर कपि‍लेश्वर राउत अनु- ज्‍योति‍ झा चौधरी गजेन्‍द्र ठाकुर Gajendra Thakur गजेन्‍द्र ठाकुर गजेन्‍द्र ठाकुर गजेन्‍द्र ठाकुर गजेन्‍द्र ठाकुर डा. कमलकान्‍त झा श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल गजेन्‍द्र ठाकुर डा. शि‍वकुमार प्रसाद श्री आनन्‍द कुमार झा श्री असीन ठाकुर, ललन कु कामत श्री रामदेव प्रसाद मण्‍डल ‘झारूदार’ श्रीबेचन ठाकुर/श्री रामवि‍लास साहु/श्री हेम नारायण साहु श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल, श्री अरवि‍न्‍द ठाकुर, श्री राजदेव मण्‍डल श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल ऐ बाल केन्‍द्रि‍त गोष्‍ठीक आयोजन पर  अपन “बाल-गोपाल” नामक लघु कथा संग्रह समरपि‍त केलनि‍। क्र.सं. स्‍थान ति‍थि‍ संयोजक अध्‍यक्षता/उद्घाटन पोथी लोकार्पण लेखक/लेखि‍का लोकार्पण कर्ता अन्‍य 83. सखुआ-भपटि‍याही सार्वजनि‍क स्‍थान- उत्‍क्रमि‍त मध्‍य वि‍द्यालयल परि‍सर। 30.08.2014 नन्‍द वि‍लास राय, फागुलाल साहु, सूरज नारायण राय ‘सुमन’ बेवस्‍था-स्‍थानीय वि‍द्वतजन वि‍शेष सहयोग- डा. वि‍मल कुमार राय, श्री धीरेन्‍द्र कुमार, श्री सूरज नारायण राय, श्री अशोक कुमार राय, श्री सुन्‍दर लाल साह, मो. रि‍जवान, श्री सि‍याराम साह, श्री शम्‍भू सिंह, श्री यादव, श्री उमाकान्‍त राय, श्री जगत नारायण राय, श्री ब्रजनन्‍दन साह, श्री उमेश साह, श्री सुधीर साह, श्री रामकुमार मण्‍डल, श्री सत्‍य नारायण सिंह आ श्री लक्ष्‍मी  मण्‍डल, उमेश मण्‍डल तथा श्री गजेन्‍द्र ठाकुर। अध्‍यक्ष मण्‍डल-डा. वि‍मल कुमार राय, डा. योगेन्‍द्र पाठक वि‍योगी, श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल, श्री कमलेश झा आ डा. शि‍व कुमार प्रसाद उद- डा. वि‍मल कुमार राय, श्री सूरज नारायण राय, डा. योगेन्‍द पाठक वि‍योगी, श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल, श्री ओम प्रकाश झा संचालन समि‍ति‍- श्री ओम प्रकाश झा, श्री दुर्गानन्‍द मण्‍डल, श्री राजदेव मण्‍डल आ उमेश मण्‍डल 261 “सूखल मन तरसल आँखि‍” (कवि‍ता संग्रह)साॅफ्ट कौपी 262 “कथा कुसुम” (वि‍हनि‍/लघु कथा संग्रह) 263 “भोँट” (नाटक) 264 “पंचैती” (पटकथा) 265 “जाल” (पटकथा) 266 “अपन-बि‍रान” (लघु/वि‍हनि‍ कथा संग्रह) 267 “पतझाड़” (लघु/वि‍हनि‍ कथा संग्रह) 268 “रटनी खढ़” (लघु/वि‍हनि‍ कथा संग्रह) 269 “बाल-गोपाल” (लघु/वि‍हनि‍ कथा संग्रह) 270 “लजबि‍जी” (लघु/वि‍हनि‍ कथा संग्रह) 271 “संत करु खि‍रहरि‍” (कारूक जीवनी) 272 “कारु खि‍रहरि‍” मुन्नी कामत दुर्गानन्‍द मण्‍डल बेचन ठाकुरक राजदेव मण्‍डल राजदेव मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल अयोधी यादव ‘अमर’ अयोधी यादव ‘अमर’ श्री फागुलाल साहु श्री शम्‍भु सौरभ श्री ब्रजनन्‍दन साह श्री हेम नारायण साहु श्री शि‍व कुमार मि‍श्र श्री कमलेश झा श्री उमेश नारायण कर्ण श्री फागुलाल साहु श्री राम कुमार मण्‍डल श्री ओम प्रकाश झा श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल डा. वि‍मल कुमार राय/ डा. योगेन्‍द्र पाठक ‘वि‍योगी’ जन सहयोगसँ गोष्‍ठीक आयोजन फलस्‍वरूप जन साधारणक उपस्‍थि‍ति‍। श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल ऐ गोष्‍ठीकेँ नारी केन्‍द्रि‍त लघु कथा संग्रह “लजवि‍जी” समरपि‍त केलनि‍। 84. बेरमा मध्‍य विद्यालय परिसर (बेरमा,मधुबनी) 20.12.2014 शि‍वकुमार मि‍श्र बेवस्‍था- स्‍थानीय साहित्‍यकार एवं साहित्‍य प्रेमी अध्‍यक्ष मण्‍डल- शिव कुमार प्रसाद,श्‍यामानन्‍द चौधरी,सच्‍चिदानन्‍द‘सचिद’। संचालन समिति- दुर्गानन्‍द मण्‍डल,ओम प्रकाश झा,उमेश मण्‍डल उद्घाटनकर्ता- श्‍यामानन्‍द चौधरी, जगदीश प्रसाद मण्‍डल,पं. सच्‍चिदानन्‍द मिश्र ‘सचिद’ 273 डीहक जमीन (विहनि/लघु कथा संग्रह) 274 समरथाइक भूत (लघु कथा संग्रह) 275 गामक शकल-सूरत (लघु कथा संग्रह) 276 अप्‍पन-बीरान (लघु कथा संग्रह) 277 बाल-गोपाल (लघु कथा संग्रह) 278 लजबिजी (लघु कथा संग्रह) 279 पतझाड़ (लघु कथा संग्रह) 280. रटनी खढ़ (दी.क. संग्रह) 281. शिव दर्शन (पद्य) 282. अभिलाषा (मैथिली भजनमाला) 283. मैथिली गजल: आगमन ओ प्रस्‍थान बिंदु (आलोचना संकलन) (सी.डी.) 284. सखुआवाली (विहनि/लघु कथा संग्रह) (सी.डी.) 285. निर्मल सनेस (विहनि/लघु कथा संग्रह) (सी.डी.) 286. देवघरक प्रसाद (विहनि/लघु कथा संग्रह) (सी.डी.) 287. कथा बौद्ध सिद्ध मेहथपा- (विहनि/लघु कथा संग्रह) (सी.डी.) ओम प्रकाश झा जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल पं. सच्‍चिदानन्‍द मिश्र पं. सच्‍चिदानन्‍द मिश्र सं.सं- गजेन्‍द्र ठाकुर,आशीष अनचिन्‍हार सं.सं- उमेश मण्‍डल सं.सं- उमेश मण्‍डल सं.सं- उमेश मण्‍डल सं.सं- विदेह ग्रुप जगदीश प्रसाद मण्‍डल, उमेश नारायण कर्ण,राम विलास साहु ओम प्रकाश झा,सच्‍चिदानन्‍द‘सचिद’, शम्‍भु सौरभ श्‍यामानन्‍द चौधरी, अनुप कुमार कश्‍यप,राजदेव मण्‍डल‘रमण’ बेचन ठाकुर,फागुलाल साहु,मिहिर झा महादेव, उमेश ना. कर्ण संजय कुमार मण्‍डल, सूर्य नारायण कामत (सूरज कामत),शम्‍भु सौरभ, शिव कुमार प्रसाद बमभोली झा,दुर्गानन्‍द मण्‍डल,शिव कुमार प्रसाद, गांधी प्रसाद (सरपंच) ओम प्रकाश झा,श्‍यामानन्‍द चौधरी, राम विलास साहु,नन्‍द विलास राय अरविन्‍द चौधरी,अनुपकुमार कश्‍यप,कपिलेश्वर राउत,मो. गुल हसन ओम प्रकाश झा,शम्‍भु सौरभ, शिव कुमार प्रसाद,कपिलेश्वर राउत श्‍यामानन्‍द चौधरी, बेचन ठाकुर (सरिसव पाही) श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल श्री ओम प्रकाश झा डा. शिव कुमार प्रसाद श्री राजदेव मण्‍डल ‘रमण’ श्री कपिलेश्वर राउत अन्‍य- जन सहयोगसँ गोष्‍ठीक आयोजन फलस्‍वरूप जन साधारणक उपस्‍थि‍ति‍। क्र.सं. स्‍थान ति‍थि‍ संयोजक/आयोजक अध्‍यक्षता/उद्घाटन पोथी लोकार्पण लेखक/लेखि‍का लोकार्पण कर्ता अन्‍य 85. भागलपुर ‘श्‍याम कुंज’ (द्वारिकापुरी भागलपुर) 04.04.2015 ओम प्रकाश झा जगदीश प्रसाद मण्‍डल, डा. प्रेम शंकर सिंह, श्री डा. केष्‍कर ठाकुर, श्री विवेकानन्‍द झा‘बीनू’ श्री राजदेव मण्‍डल,श्री श्‍यामानन्‍द चौधरी। संचालन समिति- श्री दुगानन्‍द मण्‍डल, श्री पंकज कुमार झा एवं उमेश मण्‍डल। 288. अपन मन अपन धन (लघु कथा संग्रह) 289. उकड़ू समय (लघु कथा संग्रह) जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल डा. केष्‍कर ठाकुर डा. प्रेम शंकर सिंह 1.अपन मन अपन धन (लघुकथा संग्रह) 2.उकड़ू समय- (लघुकथा संग्रह) 3.मिथि-मालिनी (वार्षिक पत्रिका) ऐ तीनू पोथीक पचास-पचास प्रति नि:शुल्‍क वितरण कएल गेल...। 86. लकसेना उनमुक्‍त आश्रमक गांधी सभा कक्ष जिला- मधुबनी 20.06.2015 राजदेव मण्‍डल‘रमण’ उ- डॉ. खुशीलाल मण्‍डल, डॉ. योगेन्‍द्र पाठक‘वियोगी’, श्री भोगेन्‍द्र यादव‘भाष्‍कर’, श्री कमलेश झा। अ- श्री दुर्गानन्‍द मण्‍डल (बनरझूला), डॉ. योगेन्‍द्र पाठक‘वियोगी’, श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल। 290. पसेनाक धरम (ल.क. संग्रह) 291. मधुमाछी (लघु कथा संग्रह) जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल डॉ. खुशीलाल मण्‍डल डॉ. योगेन्‍द्र पाठक ‘वियोगी’ श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डलक दूटा लघु कथा संग्रह, जे ऐ गोष्‍ठीमे लोकार्पित भेल तेकर पचास-पचास प्रति नि:शुल्‍क वितरण कएल गेल तथा डॉ रंगनाथ दिवाकरक लघु कथा संग्रह- ‘भखरैत नील रंग’, सेहो किछु कथाकारकेँ देल गेलनि। 87. श्‍यामा रेसिडेन्‍सी कॉम विवाह हॉल (एस.बी.आइ. केम्‍पस) निर्मली (सुपौल) 19.09.2015 संयोजक. उमेश मण्‍डल,आयोजक: निर्मलीक स्‍थानीय साहित्‍य प्रेमी अा साहित्‍यकार।विशेष सहयोग: श्री सत्‍य नारायण प्रसाद साहु,श्री नारायण प्रसाद सिंह,श्री पिंकु पंसारी, श्री राम प्रकाश साहु, श्री प्रभाष कुमार कामत, श्री देवेश कुमार सिंह, श्री मनोज कुमार शर्मा, श्री रामनाथ गुप्‍ता, श्री राम लखन भण्‍डारी, श्री अखिलेश चौधरी, श्री राम सुन्‍द्रर साहु, प्रो. धीरेन्‍द्र कुमार तथा डॉ. विमल कुमार राय। श्री विनोद कुमार, श्री सुरेन्‍द्र प्रसाद यादव, श्री सुरेश महतो। उद्धाटन : संयुक्‍त रूपे- डॉ. दुर्गा प्रसाद साहू, डॉ. राम अशीष सिंह, डॉ. विमल कुमार राय, श्री सुशील कुमार, श्री सत्‍य नारायण प्रसाद साहु, श्रीमती आशा देवी तथा प्रो. विलम कुमार राय। अध्‍यक्ष मण्‍डल- श्री नन्‍द विलास राय, श्री कपिलेश्‍वर राउत, श्री राम विलास साहु,प्रो. हेम नारायण साहु। स्‍वागत गीत : रामदेव प्रसाद मण्‍डल‘झारूदार’। स्‍वागत भाषण : डॉ शिव कुमार प्रसाद, डॉ श्री मोहन झा। 292. गुड़ा खुद्दीक रोटी (कथा) 293. फलहार (कथा संग्रह) 294.लजबिजी(अगिला संस्‍करण) 295. गामक शकल-सूरत (कथा) 296. जाल (पटकथा) जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल राजदेव मण्‍डल डॉ. दुर्गा प्रसाद साहू डॉ. राम अशीष सिंह श्रीमती आशा देवी प्रो. धीरेन्‍द्र कुमार राय डॉ. विमल कुमार राय श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डलक चारू पोथी जे आइ लोकार्पण भेल तेकर पचास-पचास प्रति संयोजक अपना दिससँ वितरण केलैन 88. मध्‍य विद्यालय- डखराम (बेनीपुर) 30.01.2016 आयोजक : श्री अमर नाथ झा संयोजक : कमलेश झा उद्धाटन : श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल, डॉ. शिव कुमार प्रसाद, श्री राजदेश मण्‍डल,फागु लाल साहु,उमेश पासवान,शारदा नन्‍द सिंह, नन्‍द विलास राय,उमेश नारायण कर्ण। स्‍वागत गीत : राधाकान्‍त मण्‍डल 297. ठूठ गाछ (उपन्‍यास) 298. एगच्‍छा आमक गाछ (कथा) जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल सम्‍मिलित रूपे अर्थात् गोष्‍ठीमे पहुँचल सबहक द्वारा श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डलक ‘खसैत गाछ’(लघु कथा संग्रह) आ ठूठ गाछ (उपन्‍यासक) पचास-पचास कॉपी वितरण लेखक अपना दिससँ केलैन। 89. लौकही स्‍थान: सूर्य प्रसाद उच्‍च विद्यालय-लौकही 26.03.2016 संयोजक : उमेश पासवान एवं प्रेम कुमार साहु उद्धाटन: श्री रामचन्‍द्र चौपाल,श्री राजदेव मण्‍डल ‘रमण’,श्री लक्ष्‍मी ना. सिंह, शम्‍भू सौरभ, अध्‍यक्ष मण्‍डल: श्री ज्रदीश प्रसाद मण्‍डल, रवि कुमार एवं शम्‍भू सौरभ, राजदेव मण्‍डल। मंच संचालन : श्री उमेश मण्‍डल, श्री नन्‍द विलास राय, श्री दुर्गानन्‍द मण्‍डल। 299. चन्‍द्रमणि (काव्‍य संग्रह) 300. शुभचिन्‍तक (ल.क. संग्रह) उमेश पासवान जगदीश प्रसाद मण्‍डल सम्‍मिलित रूपे सम्‍मिलित रूपे उमेश पासवानक पोथी‘चन्‍द्रमणि’ एवं जगदीश प्रसाद मण्‍डलक पोथी :‘शुभचिन्‍तक’ सए-सए कौपी वितरण। 90. लक्ष्‍मीनियाँ (मधुबनी) 18.06.2016 संयोजक : राम विलास साहु आयोजक : लक्ष्‍मीनियाँ गामक सम्‍स्‍त साहित्‍य प्रेमी। उद्घाटन: 301. गाछपर सँ खसला (क.संग्रह) 302. डभियाएल गाम (क. संग्रह) 303. अंकुर (क.संग्रह) जगदीश प्रसाद मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल राम विलास साहु सम्‍मिलित रूपे सम्‍मिलित रूपे सम्‍मिलित रूपे 91. गोधनपुर (मिथिला दीपसँ उत्तर) जिला- मधुबनी 24.9.2016 संयोजक : दुर्गानन्‍द मण्‍डल उद्धाटन: अध्‍यक्ष मण्‍डल: मंच संचालन : 304. कथा कुसुम (क. संग्रह) 303. गुलेती दास (क. संग्रह) दुर्गानन्‍द मण्‍डल जगदीश प्रसाद मण्‍डल ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। उमेश मण्डल आ पुनम मण्‍डल- समाद- सगर राति दीप जरय 91म सगर राति दीप जरय:गोधनपुर- 24.09.2016 91म सगर राति दीप जरय : गोधनपुर (मधुबनी) स्‍थान : उत्‍क्रमित मध्‍य विद्यालय परिसर नका चौक गोधनपुर 1. उद्घाटन सत्र- दीप प्रज्‍जवलन : श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल, डॉ. योगेन्‍द्र पाठक ‘वियोगी’, श्री अरविन्‍द ठाकुर, श्री राजदेव मण्‍डल आ श्री शम्‍भु सौरभ। स्‍वागत गीत : श्री राधाकान्‍त मण्‍डल। स्‍वागत भाषण : संयोजक दुर्गानन्‍द मण्‍डल। दू शब्‍द : श्री अरविन्‍द ठाकुर, श्री योगेन्‍द्र पाठक वियोगी आ श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल। एवं सत्रक संचालन : उमेश मण्‍डल। 2. पोथी लोकार्पण सत्र- अध्‍यक्ष मण्‍डल : डॉ. योगानन्‍द झा, श्री राजदेव मण्‍डल, डॉ. योगेन्‍द्र पाठक वियोगी, श्री कपिलेश्वर राउत, श्री गिरिजानन्‍द झा एवं अजीत झा आजाद, पहिल लोकार्पण- श्री दुर्गानन्‍द मण्‍डलक मौलिक पहिल कृति ‘कथा कुसुम’ (लघु कथा संग्रह) : लोकार्पणकर्ता- अध्‍यक्ष मण्‍डलक संग उपस्‍थित समस्‍त साहित्‍य प्रेमी आ साहित्‍यकार। दोसर लोकार्पण- श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डलक मौलिक पचपनम कृति ‘गुलेती दास’ (लघु कथा संग्रह) : लोकार्पणकर्ता- अध्‍यक्ष मण्‍डलक संग उपस्‍थित समस्‍त साहित्‍य प्रेमी आ साहित्‍यकार। लोकार्पण उद्वोधन- डॉ. योगानन्‍द झा, डॉ. योगेन्‍द्र पाठक वियोगी, श्री राजदेव मण्‍डल आ श्री अजीत झा आजाद। सत्रक संचालन- उमेश मण्‍डल। 3. कथा सत्र- अध्‍यक्ष मण्‍डल- डॉ. शिव कुमार प्रसाद, श्री राम विलास साहु, श्री बेचन ठाकुर, श्री शिव कुमार मित्र आ श्री शम्‍भु सौरभ। पहिल पालीक संचालन- श्री अजीत झा आजाद कथा पाठ, पहिल पालीमे : 1. ओ अनहरिया राति- (श्री ऋृषि बशिष्‍ठ) 2. जी-दाँत- (श्री बेचन ठाकुर) 3. बतीसोअना- (श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल) पहिल पालीक पठित कथा सभपर समीक्षा- डॉ. योगानन्‍द झा, पंडित बाल गोविन्‍द यादव आचार्य, श्री अरविन्‍द ठाकुर, श्री अनील कुमार ठाकुर, श्री शारदा नन्‍द सिंह तथा डॉ. शिवकुमार प्रसाद। दोसर पाली- संचालन : श्री संजीव कुमार ‘शमा’ कथा पाठ- 1. हमर लॉटरी निकलल- (श्री नन्‍द विलास राय) 2. छिटकी- (श्री अजय कुमार दास ‘पिन्‍टु’) 3. पढ़ए फारसी बेचए तेल- (डॉ. योगेन्‍द्र पाठक वियोगी) 4. करोड़पति- (डॉ. योगेन्‍द्र पाठक वियोगी) 5. भिनसुरका जतरा- (श्री बेचन ठाकुर) समीक्षा- श्री राजदेव मण्‍डल, डॉ. शिव कुमार प्रसाद, श्री शिव कुमार मिश्र आ श्री दुर्गानन्‍द मण्‍डल। तेसर पाली- संचालक : श्री नन्‍द विलास राय कथा पाठ- 1. भैयारी- (श्री शंभु सौरभ) 2. बेटीक बाप- (श्री आनन्‍द मोहन झा) 3. विडम्‍बना- (श्री शारदानन्‍द सिंह) 4. स्‍वयंभू- (श्री अरविन्‍द ठाकुर) समीक्षा- श्री अजीत झा आजाद, श्री कपिलेश्वर राउत, श्री अनील ठाकुर, श्री राम विलास साहु आ पंडित बाल गोविन्‍द यादव आचार्य। चारिम पाली- संचालक : श्री नन्‍द विलास राय। कथा पाठ- 1. कचोट- (श्री संजीव कुमार ‘शमा’) 2. शंका- (श्री कपिलेश्वर राउत) 3. हँ-निहँस- (श्री अखिलेश कुमार मण्‍डल)  समीक्षा- श्री ऋृषि बशिष्‍ठ, श्री अरविन्‍द ठाकुर, श्री राम विलास साहु, आ श्री अजय कुमार दास ‘पिन्‍टु’। पाँचिम पाली- संचालक : उमेश मण्‍डल कथा पाठ- 1. मकड़ाक जाल- (श्री शिवकुमार मिश्र) 2. विपैत- (श्री राम विलास साहु) समीक्षा- श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल, डॉ. योगानन्‍द झा आ डॉ शिव कुमार प्रसाद।  अन्‍तमे अध्‍यक्षीय उद्वोधन- तथा धन्‍यवाद ज्ञापन तथा दीप एवं पंजीक हस्‍तान्‍तरण।  सगर राति दीप जरय केर 92म आयोजन मधुबनी जिलाक नवानी गाममे श्री अजय कुमार दास ‘पिन्‍टु’ जीक संयोजकत्‍वमे अही सालक अन्‍तिम मासमे...। 90म सगर राति दीप जरय स्थान : लक्ष्मिनिया गाम तिथि : 18 जून 2016 ९०म खेपक दीप सगर राति लक्ष्‍मीनियाँमे जरल स्‍व. नेवी भगत केर स्‍मृतिमे ‘सगर राति दीप जरय’क ९०म आयोजन काल्‍हि साँझमे आरम्‍भ भेल जे आइ भोरमे इति भेल। ई खेप श्री राम विलास साहुजीक संयोजकत्‍वमे छल जेकर आयोजक समस्‍त लक्ष्‍मीनियाँ गामक साहित्‍य प्रेमी छला। ऐ गोष्‍ठीक अवसरपर तीनटा कथा संग्रहक लोकार्पण भेल। पहिल ‘अंकुर’ कथा संग्रह श्री राम विलास सहुजीक आ दोसर एवं तेसर क्रमश: ‘गाछपर सँ खसला’ आ ‘डभियाएल गाम’ श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डलजीक। ऐ तीनू पोथीक लोकार्पण गाष्‍ठीमे उपस्‍थित समस्‍त साहित्‍यकार एवं साहित्‍य प्रेमीक हाथे भेल। दीप प्रज्‍व्‍लन सेहो सम्‍मिलिते रूपे भेल। कथा संत्रक अध्‍यक्ष मण्‍डलमे श्री अरविन्‍द ठाकुर, श्री राजदेव मण्‍डल आ श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डलक चयन कएल गेल। तहिना संचालन समितिमे सेहो तीन गोट व्‍यक्‍तिक चयन क्रमश श्री नन्‍द विलास राय, श्री दुर्गानन्‍द मण्‍डल तथा उमेश मण्‍डलक भेल। ऐगला आयोजन श्री दुगानन्‍द मण्‍डलजीक संयोजकत्‍वमे दीप-गोधनपुर गाममे जरत। प्रत्‍येक पालिमे प्राय: तीन-तीन कथा पाठ आ तैपर तीन-चारि समीक्षकक समीक्षा होइत रहल। प्रस्‍तुत अछि पहिल पालीसँ अन्‍तिम पालि धरिक पठित कथाक नाओं एवं कथाकारक नाओं- १.      असली परिचय : राजदेव मण्‍डल २.     चोटक कचोट : शम्‍भु सौरभ ३.      मिड डे मिल : शारदा नन्‍द सिंह ४.     अपन जाति : नन्‍द विलास राय ५.     ई भाव हुनकामे जगए : रतन कुमार रवि ६.     देवगनाह : गौड़ी शंकर साह ७.     असाध्‍य पिता : फागुलाल साहु ८.      कुत्ताक डीह : कपिलेश्‍वर राउत ९.      मरियाएल मन : जगदीश प्रसाद मण्‍डल १०. स्‍वाभिमान : दुर्गानन्‍द मण्‍डल ११.  खिचड़ी मोछ : लक्ष्‍मी दास १२. रिमझिम : उमेश नारायण कर्ण १३.  पैयाही बुधि : उमेश मण्‍डल १४. बेंगक महंथी : राम विलास साहु १५. शंकाक बेमारी : ललन कुमार कामत १६. नेनाक बहादुरी : उमेश नारायण कर्ण १७. श्रोता बनल कथाकार : शारदा नन्‍द सिंह १८.  परतर : अरविन्‍द कुमार ठाकुर १९.   डेरा गेल छी : राजदेव मण्‍डल ‘रमण’ 89म सगर राति दीप जरय लौकहीमे श्री उमेश पासवान द्वारा ‘दलित विषयक कथा केन्द्रित २६ मार्च २०१६ केँ उच्च विद्यालय परिसर- लौकहीमे 88 म सगर राति दीप जरय 88म कथा-साहित्‍य गोष्‍ठी डखराममे सम्‍पन्न भेल डखराम (बेनीपुर) मुखियाजी श्री अमर नाथ झाक आयोजकत्‍व आ श्री कमलेश झाक संयोजकत्‍वमे ‘सगर राति दीप जरय’क 88म कथा-साहित्‍य गोष्‍ठी 30 जनवरीक साँझमे शुरू भेल। जेकर उद्घाटन सम्‍म्‍लित रूपे श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल, डॉ. शिवकुमार प्रसाद, श्री राजदेव मण्‍डल, श्री नन्‍द विलास राय, श्री फागुलाल साहु, श्री शारदा नन्‍द सिंह, श्री उमेश पासवान, श्री कपिलेश्वर राउ, श्री उमेश नारायण कर्ण, श्री शम्‍भु सौरभ श्री तथा श्री राम विलास साहु केलैन। उद्घाटनक पछाइत स्‍वागत गीत सेहो सम्‍मिलित रूपे समवैत स्‍वरमे श्री राधाकान्‍त मण्‍डल तथा श्री रामदेव प्रसाद मण्‍डल झारूदार गौलैन आ स्‍वागत भाषण श्री कमलेश झा कहलैन- ‘1990 इस्‍वीसँ ‘सगर राति दीप जरय’क आरम्‍भ यात्रा शुरू भेल जे चलैत-चलैत आब ओइ तहपर चलि आएल अछि जेतए खॉंटी माटिक सुगन्‍धसँ सुगन्‍धित कथाक लेखन एवं पठन भऽ रहल अछि...।’ उद्घाटन सत्रक पछाइत लोकार्पण सत्रमे प्रवेश भेल। श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डलक दूटा पोथी, पहिल एगच्‍छा आमक गाछ (कथा संग्रह) आ दोसर ठूठ गाछ (उपन्‍यास)क लोकार्पण सम्‍मिलित रूपे भेल। तथा ‘खसैत गाछ’ (लघु कथा संग्रह) नामक पोथीक वितरण सेहो भेल। क्रमश: कथा सत्रमे प्रवेश भेल। छह पालीमे कथाक पाठ। जइमे श्री उमेश नारायण कर्ण- ‘मौनी बाबा, अलवत्त छोड़ी’ शीर्षकक दूटा कथा पढ़लैन। श्री राजदेव मण्‍डल- एडजस्‍टमेन्‍ट, श्री राम विलास साहु- जाति, श्री शारदा नन्‍द सिंह- ‘आशातीत’ तथा ‘पलटा माय’, श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल- ‘एगच्‍छा आमक गाछ’, श्री लक्ष्‍मी दास- बापक धरम, श्री ललन कुमार कामत- बाबाक लोटा, श्री शम्‍भू सौरभ- परम्‍पराक बलि, श्री फागु लाल साहु- अछूत, श्री शिव कुमार मिश्र- व्‍यवहार तथा प्रौहित्‍य, श्री कपिलेश्‍वर राउत- घूर लगक गप, अखिलेश मण्‍डल- गढ़ैनगर हाथ, तथा अपने (उमेश मण्‍डल) पढ़लौं- ‘अपने गरदैन कटलौं।’ पठित कथा सभपर एक-सँ-एक समीक्षा सेहो भेल। डॉ. शिव कुमार प्रसाद, पण्‍डित बाल गोविन्‍द आर्य ‘गोविन्‍दाचार्य’, श्री फागु लाल साहु, राधाकान्‍त मण्‍डल तथा श्री कमलेश झा विषद रूपे समीक्षा कार्य केलैन। मुदा श्री राजदेव मण्‍डल, श्री शारदा नन्‍द सिंह, श्री कपिलेश्‍वर राउत, श्री उमेश पासवान, श्री शिवकुमार मिश्र, श्री राजा राम यादव, श्री नन्‍द विलास राय तथा अपने (उमेश मण्‍डल) सेहे समीक्षा कार्यमे भाग लेलौं। अगिला गोष्‍ठीक भार लैत श्री उमेश पासवान कहलैन- 89म सगर राति दीप जरय- लौकही (जिला मधुबनी)मे कराएब। जेकर हकार मंचेसँ दऽ रहल छी जे 89म गोष्‍ठीमे ‘दलित विषयक कथाक विशेष स्‍वागत होएत।’  ऐ तरहेँ 88म गोष्‍ठीक समापन भेल। 89 गोष्‍ठी लौकहीमे श्री उमेशजी करौता। सम्‍भव जे मार्चक अन्‍तिम शनिकेँ होएत। ८७म सगर राति दीप जरय सगर राति दीप जरल- ८७म कथा-साहित्‍य गोष निर्मली, दिनांक 19 सितम्‍बर 2015 : सगर राति दीप जरय समिति- निर्मलीक प्रस्‍तुतिमे शहरक विशालकाय विवाह भवन- श्‍यामा रेसिडेन्‍सी- सभागार-मे सगर राति दीप जरय केर 87म गोष्‍ठी ‘कथा तिलजुगा’क शुभारम्‍भ 6:30 बजे भेल। जेकर उद्घाटन सम्‍मिलित रूपे केलैन, नेतरहाट उच्‍चतर माध्‍यमिक विद्यालयक पूर्व प्राचार्य डॉ. दुर्गा प्रसाद साहू, हरि प्रसाद साह महाविद्यालयक पूर्व एवं वर्तमान प्राचार्य द्वय डॉ राम अशीष सिंह, डॉ. विमल कुमार राय, प्रखण्‍ड विकास पदाधिकारी श्री सुशील कुमार, जिला पार्षदक पूर्व सदस्‍या श्रीमती आशा देवी, श्‍यामा रेसिडेन्‍सीक निर्माणकर्ता श्री सत्‍य नारायण प्रसाद साहु तथा सी.एम.बी. कॉलेजक हिन्‍दी विभागाध्‍यक्ष सह मैथिली साहित्‍यक चर्चित साहित्‍यकार प्रो. धीरेन्‍द्र कुमार। अवसरपर श्री रामदेव प्रसाद मण्‍डल ‘झारूदार’ स्‍व रचित गीत- “करू स्‍वागत स्‍वीकार हे प्रियवर, हम नै अपनेक योग्‍य...।”सँ स्‍वागत केलैन, तथा धन्‍यवाद ज्ञापनक संग स्‍वागत-भाषण केलैन, प्रोफेसर द्वय डॉ. शिव कुमार प्रसाद, डॉ. श्रीमोहन झा। ऐ तरहें उद्घाटन सत्रसँ पोथी लोकार्पण सत्रमे प्रवेश भेल। सत्रक मुख्‍य अतिथि, बिहार अति पिछड़ा प्रकोष्‍ठक सदस्‍य मो. शरफराज अहमद संगे विशिष्‍ठ अतिथि रहैथ- डॉ श्‍यामानन्‍द चौधरी, डॉ. सुरेन्‍द्र प्रसाद सिंह, श्री अशोक कुमार मिश्र, श्री शंभु सौरभ, श्री दुर्गानन्‍द मण्‍डल, श्री उमेश नारायण कर्ण, श्री श्रीकृष्‍ण राम, श्री अजय कुमार दास, श्री नागेश्वर कामत, श्रीमती विभा कुमारी, श्रीमती अनुपम कुमारी, श्री मनोज कुमार साह उर्फ चन्‍दनजी, श्री जे. के. आनन्‍द, श्री रतन कुमार रवि, श्री विनोद कुमार गोप, श्री राम प्रवेश मण्‍डल तथा श्री रामलखन भण्‍डारी, तथा सत्रक अध्‍यक्षता केलैन- समर्पणक चेअरमेन श्री दुर्गानन्‍द मण्‍डल, मध्‍य विद्यालयक शिक्षक मो. ए.के. मंजूर, सामाजिक कार्यकर्ता श्री सुरेन्‍द्र प्रसाद यादव, श्री विनोद कुमार तथा मध्‍य विद्यालयक प्राचार्य श्री नारायण प्रसाद सिंह। पॉंच गोट पोथीक लोकार्पण भेल। जइमे टैगोर साहित्‍य पुरस्‍कारसँ पुरस्‍कृत एवं विदेह भाषा सम्‍मानसँ सम्‍मानित साहित्‍यकार श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल रचित चारि गोट पोथी- ‘गुड़ा-खुद्दीक रोटी’, ‘फलहार’, ‘लजबिजी’ आ ‘गामक शकल-सूरत’ लघुकथा संग्रहक छल आ पॉंचम- ‘विदेह’ आ ‘वैदेह’ द्वय सम्‍मानसँ सम्‍मानित साहित्‍यकार श्री राजदेव मण्‍डल रचित पोथी- ‘जाल’ (पटकथा) रहए। पाँचू पोथी भरि सभागारमे वितरणो भेल। भाड़ी संख्‍यामे विद्वत-श्रोतागणक उपस्‍थिति सेहो छल। जेना- इतिहासक विभागाध्‍यक्ष प्रो. जय प्रकाश साहु, अधिवक्‍ता सह पत्रकार श्री रौशन कुमार गुप्‍ता, श्री सागर कुमार साहु, श्री विष्‍णु कुमार गुप्‍ता, श्री टुनटुन कामत, श्री राम नरेश यादव, श्री अजय कुमार गुप्‍ता, श्री आलोक कुमार ‘नाहर’, श्री राम विलास सिंह, श्री बिहारी मण्‍डल, श्री राज कुमार यादव, श्री बद्रीलाल यादव, श्री राम नारायण कामत, श्री रामकृष्‍ण ठाकुर, श्री राजदेव मण्‍डल, श्री अरविन्‍द कुमार मण्‍डल, श्री राजेश पासवान, श्री संजीव कुमार, ई. आशुतोष कुमार, श्रीमती आराधना मिस्‍टी, श्री चन्‍द्र भूषण झा ‘राधव’, श्री मनोज कुमार झा, श्री राजकुमार मिश्र, श्री अरविन्‍द यादव, श्री विनय कुमार रूद्र, श्री बिलट मण्‍डल, श्री रामबाबू कामत, श्री दशरथ प्रसाद यादव, श्री राम अशीष मण्‍डल, श्री लक्ष्‍मी मण्‍डल, डॉ. विष्‍णुदेव ठाकुर, श्री गोपाल गिरि, श्री राजाराम यादव, संतोष कुमार पाण्‍डेय, श्री सत्‍य नारायण महतो, सुश्री काजोक कुमारी, श्री मदन महतो, श्री शम्‍भु कमार साह, श्री योगीलाल कामत, श्री हजारी प्रसाद साहु, तथा अवकाश प्राप्‍त शिक्षक श्री अशर्फी साहु इत्‍यादि-इत्‍यादि।  क्रमश: आगू बढ़ैत कथा सत्रमे प्रवेश कएल...। ऐ सत्रक अध्‍यक्षता केलैन ‘सखारी-पेटारी’ कथा संग्रहक कथाकार श्री नन्‍द विलास राय, ‘रथक चक्का उलैट चलै बाट’क कवि श्री राम विलास साहु, ‘उलहन’ कथा संग्रहक कथाकार श्री कपिलेश्वर राउत तथा अशर्फी दास साहु समाज इण्‍टर महिला महाविद्यालय- निर्मली केर मैथिली विभागाध्‍यक्ष प्रो. हेम नारायण साहु। सात पालीमे विभक्‍त पच्‍चीस गोट कथा पाठ भेल, समीक्षा भेल। ऐ तरहें तीनू सत्रक समापन भेल। जेकर संचालक छला- श्री संजीव कुमार ‘शमा’, श्री भारत भूषण झा, श्री दुर्गानन्‍द मण्‍डल तथा श्री उमेश मण्‍डल।  अन्‍तिम सत्र ‘अगिला गोष्‍ठी केतए’मे प्रवेश भेल। चारि गोट प्रस्‍ताव आएल, पहिल- श्री रोहित कुमार सिंहक दरभंगा लेल मार्च 2016. श्री दुखन प्रसाद यादवक ‘धबही’ लेल जून 2016 तथा दिसम्‍बर 2015क गोष्‍ठी लेल दूटा, प्रथम- श्री कमलेश झाक ‘डखराम’ लेल तथा श्री राजदेव मण्‍डलक ‘रतनसारा-मुसहरनियॉं’ लेल।  सभामे बैसल समस्‍तक विचारपर अध्‍यक्ष मण्‍डल द्वारा निर्णय भेलैन- डखराम। अत: अगिला गोष्‍ठी श्री कमलेश झाक संजोजकत्‍वमे दरभंगा जिलाक बेनीपुर अनुमण्‍डल अन्‍तर्गत ‘डखराम’ गाममे होएत। भावी संयोजक श्री कमलेश झाकेँ वर्तमान संयोजक श्री उमेश मण्‍डल दीप तथा पंजी समर्पित केलैन।  अन्‍तमे, धन्‍यवाद ज्ञापनमे, बाहरसँ आएल साहित्‍यकार, स्‍थानीय साहित्‍यकार एंव सहयोगी तथा विशेष सहयोगीकेँ संयोजक धन्‍यवाद-नमन केलैन। ऐ तरहें सगर रातिक कथा शेष भेल।  निम्न अछि- क्रमानुसार पठित कथाक नओं, कथाकारक नाओं, तथा समीक्षकक सुची, संगे सगर राति दीप जरय समिति- निर्मली केर सक्रिय कार्यकर्ता, संचालक तथा विशेष सहयोगीक सेहो। कथा पाठ एवं समीक्षा :  पहिल पाली- १. फ्रेण्‍ड : पल्‍लवी कुमारी २. सभसँ कठिन जातिक अपमान : रतन कुमार ‘रवि’ ३. अवाक् : राजदेव मण्‍डल समीक्षा : डॉ. विमल कुमार राय, डॉ. श्‍यामानन्‍द चौधरी, डॉ. राम अशीष सिंह। दोसर पाली- ४. अवसरवाद : अजय कुमार दास ५. ऊपर फरकी मामीक सराध : लक्ष्‍मी दास ६. हाथी आ मूस : जगदीश प्रसाद मण्‍डल समीक्षा : श्री कमलेश झा, श्री दुर्गानन्‍द मण्‍डल (बनरझूला) श्री दुर्गानन्‍द मण्‍डल। तेसर पाली- ७. बबाजीक मकड़जाल : संजीव कुमार ‘शमा’ ८. शैतान आ भगवान : दुर्गानन्‍द मण्‍डल ९. सहोदरा नै बना पेलौं : उमेश मण्‍डल समीक्षा : डॉ. शिव कुमार प्रसाद, डॉ. विमल कुमार राय, डॉ. श्‍यामानन्‍द चौधरी, डॉ. राम अशीष सिंह। चारिम पाली- १०. समाजक हाल : रोहित कुमार सिंह ११. इज्‍जतक सवाल : राम विलास साहु १२. हैवानक संग सधमुहोँ : दुखन प्रसाद यादव १३. बाल बोध : शम्‍भु सौरभ १४. एक दिन हमरो : शारदा नन्‍द सिंह समीक्षा : श्री फागु लाल साहु, श्री सुशील कुमार साह, श्री राजदेव मण्‍डल ‘रमण’। पॉंचिम पाली- १५. सिद्धि साध्‍ये : उमेश नारायण कर्ण ‘कल्‍पकवि’ १६. श्रोता : अशोक कुमार मिश्र १७. फ्रॉडिज्‍म : शिव कुमार मिश्र १८. कर्मक फल : फागु लाल साहु समीक्षा : श्री राजदेव मण्‍डल, श्री रतन कुमार ‘रवि’, श्री कमलेश झा। छठम पाली- १९. आब कहू : नन्‍द विलास राय २०. हमर समाज : कौशल झा २१. खुशी : पंकज कुमार ‘प्रभाकर’ २२. मौखिक : राधाकान्‍त मण्‍डल २३. मनुखक मोल : सुशील कुमार समीक्षा : श्री राम विलास साहु, श्री संजीव कुमार ‘शमा’, श्री उमेश मण्‍डल। सातम पाली- २४. एकटा आर : शारदानन्‍द सिंह २५. बरियातीमे गारि : लक्ष्‍मी दास समीक्षा : डॉ श्‍यामानन्‍द चौधरी, श्री कमलेश झा। ....................... श्री संजय कुमार मण्‍डल, श्री सत्रुघ्‍न कुमार मण्‍डल, श्री विनोद ठाकुर, श्री सुजीत कुमार साहु, श्री अखिलेश कुमार मण्‍डल, श्री शशि भूषण कुमार, श्री संतोष कुमार राय आदि। श्री सुरेश महतो, श्री मुकुल प्रसाद साहु, श्री सुरेन्‍द्र प्रसाद यादव, श्री विनोद कुमार तथा उमेश मण्‍डल। श्री सत्‍य नारायण प्रसाद साहु, श्री नारायण प्रसाद सिंह, श्री पिंकु पंसारी, श्री राम प्रकाश साहु, श्री देवेश कुमार सिंह, श्री प्रभाष कुमार कामत, श्री मनोज कुमार शर्मा, श्री देवेश कुमार सिंह, श्री रामनाथ गुप्‍ता, श्री राम लखन भण्‍डारी, श्री अखिलेश चौधरी, श्री राम सुन्‍द्रर साहु, प्रो. धीरेन्‍द्र कुमार तथा डॉ. विमल कुमार राय...। समाद : पुनम मण्‍डल। 86म दीप सरग राति जरल मधुबनी जिलाक फुलपरास अनुमण्‍डलक ‘लकसेना’ गाममे 20 जून 2015 केँ 86म ‘सगर राति दीप जरय’ (कथा-साहित्‍य गोष्‍ठी) क आयोजन ‘उन्‍मुक्‍त’क सौजन्‍यसँ श्री राजदेव मण्‍डल ‘रमण’क संयोजकत्‍वमे आयोजित भऽ सफल भेल। ऐ अवसरिपर श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डलक दूटा पोथी क्रमश: ‘पसेनाक धरम’ आ ‘मधुमाछी’ (लघु कथा संग्रह)क लोकार्पणक संग वितरण भेल। संगे हालहिमे प्रकाशित डॉ. रंगनाथ दिवाकार (मूल नाम- रंगनाथ चौधरी)क लधु कथा संग्रह ''भखरैत नील रंग'' किछु कथाकारकेँ देल गेलनि। अगिला गोष्‍ठीसुपौल जिला अन्‍तर्गत ‘निर्मली’मे हएत से सर्वसम्‍मतिसँ निर्णए भेल। फोटोक संग ब्रेकिंग न्‍यूज निम्न अछि- संयोजक- श्री राजदेव मण्‍डल ‘रमण’ आयोजक- उन्‍मुक्‍त उद्घाटन- डॉ. खुशीलाल मण्‍डल, डॉ. योगेन्‍द्र पाठक ‘वियोगी’, श्री भोगेन्‍द्र यादव ‘भाष्‍कर’, श्री कमलेश झा, श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल, श्री राजदेव मण्‍डल, डॉ. शिव कुमार प्रसाद। दू शब्‍द- श्री कमलेश झा, श्री नन्‍द विलास राय, श्री बाल गोविन्‍द यादव ‘गोविन्‍दाचार्य’ अध्‍यक्ष मण्‍डल- श्री दुर्गानन्‍द मण्‍डल (बनरझूला), श्री भोगेन्‍द्र यादव ‘भाष्‍कर’ (अवकाश प्राप्‍त शिक्षक), डॉ. शिव कुमार प्रसाद, डॉ. योगेन्‍द्र पाठक ‘वियोगी’, श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल आ श्री कमलेश झा। संचालन समिति- श्री दुर्गानन्‍द मण्‍डल आ उमेश मण्‍डल पोथी लोकार्पण- श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डलक दूटा लघु कथा संग्रह क्रमश: (1) पसेनाक धरम, (2) मधुमाछी। पहिल पोथीक लोकार्पण कर्ता- प्रो. खुशीलाल मण्‍डल, प्रो. राम विलास राय आ डॉ.योगेन्‍द्र पाठक ‘वियोगी’। दोसर पोथीक लोकार्पण कर्ता- श्री भोगेन्‍द्र यादव ‘भाष्‍कर’, श्री रतन कुमार ‘रवि’ आ श्री कमलेश झा। कथा पाठ- पहिल सत्र- (1) चोरविद्या- पल्‍लवी कुमारी (2) केतौ किछु होउ- लक्ष्‍मी दास  (3) टोन- दीन बन्‍धु झा समीक्षा- श्री कमलेश झा, डॉ. शिव कुमार प्रसाद, श्री राजदवे मण्‍डल, बाल गोविन्‍द यादव ‘गोविन्‍दाचार्य’ दोसर सत्र- (4) भगवनान भरोष- ललन कुमार कामत (5) सपनेमे बीति गेल जिनगी- संजीव कुमार ‘शमा’  (6) शबनम- उमेश नारायण कर्ण  (7) मुड़नक मुर- उमेश मण्‍डल समीक्षा- श्री राम विलास साहु, डॉ. योगेन्‍द्र पाठक ‘वियोगी’, श्री शम्‍भु ‘सौरभ’, दुर्गा नन्‍द मण्‍डल (बनरझूला) तेसर सत्र- (8) सस्‍ता रोबे वार-वार- डॉ. योगेन्‍द्र पाठक ‘वियोगी’ (9) गंगा सुखा गेल- डॉ. योगेन्‍द्र पाठक ‘वियोगी’ (10) गंगा नहाएब- राम विलास साहु (11) टुटैसँ बँचि गेल- दुर्गानन्‍द मण्‍डल समीक्षा- श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल, श्री भोगेन्‍द्र यादव ‘भाष्‍कर’, श्री संजीव कुमार ‘शमा’, श्री राजदेव मण्‍डल आ उमेश मण्‍डल। चारिम सत्र- (12) शिक्षाक अन्‍तिम उद्देश्‍य- नन्‍द विलास राय (13) वेस्‍तता- बेचन ठाकुर (14) छोटू- शम्‍भु सौरभ समीक्षा- श्री शारदा नन्‍द सिंह, श्री कमलेश झा, श्री अजय कुमार ‘पिण्‍टू’ पाँचम सत्र- (15) तितल बिलाड़ि- शिवकुमार मिश्र (16) आब कहिया चेतब- कपिलेश्वर राउत (17) लाचारी- गौड़ी शंकर साह समीक्षा- श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल, योगेन्‍द्र पाठक ‘वियोगी’, श्री नन्‍द विलास राय। छठम सत्र- (18) पहपटि- जगदीश प्रसाद मण्‍डल (19) इजोरिया राति- जगदीश प्रसाद मण्‍डल (20) खलिया बन्‍दूक भटाभटि- शारदा नन्‍द सिंह समीक्षा- श्री कमलेश झा, डॉ. योगेन्‍द्र पाठक ‘वियोगी’, डॉ. शिवकुमार प्रसाद, श्री बाल गोविन्‍द ‘गोविन्‍दाचार्य’, श्री दुर्गा नन्‍द मण्‍डल (बनरझूला) ८५ म सगर राति दीप जरय ‘कथा गंगा’मे सगर राति दीप जरल- ‘सगर राति दीप जरय’ एक ओहन मंचक नाओं छी, जइ मंचपर सभ वर्गक साहित्‍यकार भाग लइ छथि, जाइ-अबै छथि तथा भाषा-साहित्‍यक विकासक लेल विचार-विमर्श करै छथि। तँए ई ‘सगर राति दीप जरय’ मैथिली भाषा-साहित्‍यक सभसँ श्रेष्‍ठ मंच कहबैत अछि। एकर आयोजन जगह-जगह प्राय: तीन मासक अन्‍तरालपर १९९० ई.सँ होइत आबि रहल अछि। ८५म गोष्‍ठी श्री ओम प्रकाश झाक संयोजकत्‍व आ मिथिला परिषद केर प्रस्‍तुतिमे भागलपुरक द्वारिकापुरी स्‍थित ‘श्‍याम कुंज’मे आयोजित भेल जेकर उद्धघाटन वरिष्‍ठ समालोचक डॉ. प्रेम शंकर सिंह, ‘विदेह’ एवं टैगोर सम्मानसँ सम्मानित साहित्‍यकार श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल, तिलकामाझी विश्वविद्यालयक मैथिली विभागाध्‍यक्ष डॉ. केष्‍कर ठाकुर, डॉ. शिव प्रसाद यादव एवं अवकाश प्राप्‍त शिक्षक दुखमोचन झा संयुक्‍त रूपे दीप नेसि केलनि। पछाति एक विशिष्‍ठ अध्‍यक्ष मण्‍डल एवं संचालन समितिक निर्माण करि गोसाउनिक गीत, स्‍वागत गान एवं स्‍वस्‍ति वाचनसँ साँझक छह बजे गोष्‍ठीक शुभारम्‍भ भेल, रातिक १२:३० बजे घण्‍टा भरिक भोजनावकाश भेल, जइ शुन्‍यकालमे, भोजनक पछाति, संयोजक- सह गजलकार ओम प्रकाशजी अपन नव रचित दूटा गजल सुना कथाकार सभ साहित्‍यकार-साहित्‍य प्रेमीकेँ साहित्‍य-रसमे बोरि देलनि। पुन: कथा पाठ आ समीक्षाक क्रमकेँ आगू बढ़ौल गेल। जे चलैत-चलैत भिनसर छह बजेमे आबि अध्‍यक्षीय उद्बोधनक संग संयोजकक धन्‍यवाद ज्ञापन तथा दीप-पंजीक हस्‍तांतरणक पछाति इति भेल। ऐ गोष्‍ठीमे दूर-दूरसँ आएल साहित्‍यकार-कथाकार-समीक्षक एवं श्रोताक तथा स्‍थानीय साहित्‍यकार-कथाकारक संग कथा प्रेमीक बेस जमघट ताधरि बनल रहल जाधरि अगिला गोष्‍ठीक निर्णयक संग आयोजित गोष्‍ठीक समापनक घोषणा नहि कएल गेल। ८६म आयोजन मधुबनी जिला अन्‍तर्गत फुलपरास प्रखण्‍डक महिन्‍दवार पंचायतक ‘लकसेना’ गाममे होएत, जइमे पहुँचैक हकार दैत भावी संयोजक श्री राजदेव मण्‍डल ‘रमण’जी कहलनि- ‘अधिक-सँ-अधिक कथाकार-साहित्‍यकार-समीक्षक सभकेँ लकसेना गामक ८६म कथा गोष्‍ठीमे सुआगत छन्‍हि।’  ८५म गोष्‍ठीक अध्‍यक्ष मण्‍डल, संचालन समिति, कथायात्राक मादे दू शब्‍द, पोथी लोकार्पण, कथा पाठ एवं समीक्षा-टिप्‍पणीक विवरण निच्‍चाँमे देल जा रहल अछि- अध्‍यक्ष मण्‍डल- डॉ. प्रेम शंकर सिंह, श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल, डॉ. केष्‍कर ठाकुर, श्री विवेकानन्‍द झा ‘बीनू’ श्री राजदेव मण्‍डल, श्री श्‍यामानन्‍द चौधरी। संचालन समिति- श्री दुगानन्‍द मण्‍डल, श्री पंकज कुमार झा एवं उमेश मण्‍डल। कथायात्राक मादे दू शब्‍द- प्रो. केष्‍कर ठाकुर, पो. प्रेम शंकर सिंह, श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल, श्री विवेकानन्‍द झा ‘बीनू’ गोसाउनिक गीत- श्रीमती निक्की प्रियदर्शनी आ स्वीटी कुमारी। स्‍वस्‍ति वाचन- श्री शिव कुमार मिश्र। पोथी लोकापर्ण- अपन मन अपन धन (लघु कथा संग्रह) जगदीश प्रसाद मण्‍डलक उकड़ू समय (लघु कथा संग्रह) जगदीश प्रसाद मण्‍डलक लोकार्पण कर्ता- डॉ. केष्‍कर ठाकुर डा. प्रेम शंकर सिंह पहिल सत्रमे कथा पाठ- (१) लगक दूरी- निक्की प्रियदर्शनी (२) गहींर आँखिक बेथा- ओम प्रकाश झा (३) डोमक आगि- रामविलास साहु (४) शिवनाथ कक्काक डायरी- अखिलेश मण्‍डल। समीक्षा-टिप्‍पणी, पहिल सत्रक- डॉ. शिव कुमार प्रसाद, उमेश मण्‍डल, डॉ. शिव प्रसाद यादव एवं श्री नन्‍द विलास राय। दोसर सत्रमे कथा पाठ- (५) हमर बाइनिक विचार- जगदीश प्रसाद मण्‍डल (६) प्राश्चित- गौड़ी शंकर साह (७) मजाकेमे चलि गेलौं- लक्ष्‍मी दास। समीक्षा- श्री राम सेवक सिंह, प्रो. केष्‍कर ठाकुर, श्री श्‍यामानान्‍द चौधरी, डॉ. प्रमोद पाण्‍डेय। तेसर सत्रमे कथा पाठ- (८) जीन्‍स पेन्‍ट- नन्‍द विलास राय (९) लाल नुआँ- शम्‍भु सौरभ (१०) धोइते-धोइते भगवान बना देबइ- उमेश मण्‍डल (११) धर्म आ धार्मिक- दुख मोचन झा समीक्षा-  श्री ओम प्रकाश झा, डॉ. प्रेम शंकर सिंह, डा. शिव प्रसाद यादव, श्री राजदवे मण्‍डल। चारिम सत्रमे कथा पाठ- (१२) अनमेल बिआह- शिव प्रसाद यादव (१३) मुरझाएल फूल- कपिलेश्वर राउत (१४) पुत्रक कर्तव्‍य- नारायण झा (१५) भूख- पंकज कुमार झा (१६) बेसी भऽ गेल आब नहि- हेम नारयण साहु। समीक्षा- श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल, श्री विनोदानन्‍द झा ‘बीनू’, डॉ. शिव कुमार प्रसाद। पाँचिम सत्रमे कथा पाठ- (१७) भीखमंगा- प्रकाश कुमार झा (१८) भोला- ललन कुमार कामत (१९) विधवा बिआह- बेचन ठाकुर (२०) होटलमे पुकार- दुखन प्रसाद यादव (२१) चोंचाक खोंता- उमेश नारायण कर्ण समीक्षा- श्री श्‍यामानन्‍द चौधरी, डॉ. शिव कुमार प्रसाद, राजदेव मण्डल ‘रमण’ छठिम सत्रमे कथा पाठ- (२२) अपन घर- राजदेव मण्‍डल  (२३) चीफ गेष्‍ट- शिव कुमार मिश्र (२४) मायाक तागत- राजदेव मण्‍डल ‘रमण’ (२५) आमक ठाढ़ि- शिव कुमार प्रसाद (२६) हेराएल कोदारि- शिव कुमार प्रसाद (२७) डिजाइनवाली कनियाँ- शारदा नन्द सिंह समीक्षा- उमेश मण्‍डल, नन्‍द विलास राय, श्‍यामानन्‍द चौधरी एवं हेम नारायण साहु। समाद- उमेश मण्‍डल। ८४म सगर राति दीप जरय ८४म सगर राति दीप जरय २० दिसम्‍बरक साँझमे शुरू भ' २१ दिसम्‍बर २०१४क भिनसरमे सम्‍पन्न भेल। ८५म आयोजन भागलपुरमे श्री ओम प्रकाश झा केर संयोजकत्‍वमे मार्च २०१५क अन्‍तिम शनिकेँ होएत। ई निर्णए अध्‍यक्ष मण्‍डल एवं संचालन समिति तथा गोष्‍ठीमे उपस्‍थित सबहक विचारसँ भेल। ओना प्रस्‍ताव श्री राजदेव मण्‍डल ‘रमण’ जीक सेहो रहनि जे लकसेना (मधुबनी)मे हुअए। मुदा सर्वसम्‍मति भागलपुरेक रहल। अत: दीप आ पंजी वर्तमान गोष्‍ठीक संयोजक भावी संयोजककेँ देलखिन। संचालन समितिमे दुर्गानन्‍द मण्‍डल, ओम प्रकाश झा तथा उमेश मण्‍डल छला आ अध्‍यक्ष मण्‍डलमे शिव कुमार प्रसाद, श्‍यामानन्‍द चौधरी तथा सच्‍चिदानन्‍द ‘सचिद’। मो. गुल हसन एवं फिरोज आलम स्‍वागत गीत गौलनि, एवं स्‍वतीवाचन शिवकुमार मिश्र। तीन सत्रमे निम्न कार्यक्रमानुसार ऐ गोष्‍ठीक भरि रातिक यात्रा भेल-  उद्घाटन सत्र- परिचए-पात तथा दू शब्‍द- उद्घाटनकर्ता- श्‍यामानन्‍द चौधरी जगदीश प्रसाद मण्‍डल पं. सच्‍चिदानन्‍द मिश्र ‘सचिद’ मिहिर झा महादेव ओम प्रकाश झा शिव कुमार प्रसाद राजदेव मण्‍डल ‘रमण’ पोथी लोकार्पण सत्र- (१) डीहक जमीन (विहनि/लघु कथा संग्रह) ओम प्रकाश झाजी केर लोकार्पणकर्ता- जगदीश प्रसाद मण्‍डल, उमेश नारायण कर्ण, राम विलास साहु।  (२) समरथाइक भूत (लघु कथा संग्रह) जगदीश प्रसाद मण्‍डलजी केर लोकार्पणकर्ता- ओम प्रकाश झा सच्‍चिदानन्‍द ‘सचिद’ शम्‍भु सौरभ (३) गामक शकल-सूरत (लघु कथा संग्रह) जगदीश प्रसाद मण्‍डलजी केर लोकार्पणकर्ता- श्‍यामानन्‍द चौधरी अनुप कुमार कश्‍यप राजदेव मण्‍डल ‘रमण’ उमेश नारायण कर्ण  (४) अप्‍पन-बीरान (लघु कथा संग्रह) जगदीश प्रसाद मण्‍डलजी केर लोकार्पणकर्ता- बेचन ठाकुर फागुलाल साहु मिहिर झा महादेव रामाकान्‍त मिश्र  (५) बाल-गोपाल (लघु कथा संग्रह) जगदीश प्रसाद मण्‍डलजी केर लोकार्पणकर्ता-  संजय कुमार मण्‍डल सूर्य नारायण कामत (सूरज कामत) शम्‍भु सौरभ शिव कुमार प्रसाद (६) लजबिजी (लघु कथा संग्रह) जगदीश प्रसाद मण्‍डलजी केर  लोकार्पणकर्ता- बमभोली झा दुर्गानन्‍द मण्‍डल शिव कुमार प्रसाद गांधी प्रसाद (सरपंच) (७) पतझाड़ (लघु कथा संग्रह) जगदीश प्रसाद मण्‍डलजी केर लोकार्पणकर्ता-  ओम प्रकाश झा श्‍यामानन्‍द चौधरी राम विलास साहु नन्‍द विलास राय (८) रटनी खढ़ (लघु कथा संग्रह) जगदीश प्रसाद मण्‍डलजी केर  लोकार्पणकर्ता-  अरविन्‍द चौधरी अनुप कुमार कश्‍यप कपिलेश्वर राउत मो. गुल हसन (९) शिव दर्शन (पद्य) पं. सच्‍चिदानन्‍द मिश्र लोकार्पणकर्ता- ओम प्रकाश झा शम्‍भु सौरभ शिव कुमार प्रसाद कपिलेश्वर राउत (१०) अभिलाषा (मैथिली भजनमाला) पं. सच्‍चिदानन्‍द मिश्र लोकार्पणकर्ता- श्‍यामानन्‍द चौधरी बेचन ठाकुर (सरिसव पाही) (११) सीडी लोकार्पण- (१) मैथिली गजल: आगमन ओ प्रस्‍थान बिंदु (आलोचना संकलन) सं.सं- गजेन्‍द्र ठाकुर, आशीष अनचिन्‍हारजी केर (२) सखुआवाली (विहनि/लघु कथा संग्रह) सं.सं- उमेश मण्‍डलक  (३) निर्मल सनेस (विहनि/लघु कथा संग्रह) सं.सं- उमेश मण्‍डलक  (४) देवघरक प्रसाद (विहनि/लघु कथा संग्रह) सं.सं- उमेश मण्‍डलक  (५) कथा बौद्ध सिद्ध मेहथपा- (विहनि/लघु कथा संग्रह) सं.सं- विदेह- सम्‍मिलित रूपे लोकार्पण- जगदीश प्रसाद मण्‍डल शिव कुमार प्रसाद ओम प्रकाश झा राजदेव मण्‍डल ‘रमण’ कपिलेश्वर राउत। कथा सत्र- कथा पाठ एवं समीक्षा- पहिल पालीमे- लोकतंत्रक माने- ओम प्रकाश झा- टेटरा हीरा- नन्‍द विलास राय- समीक्षा- श्‍यामानन्‍द चौधरी फागुलाल साह शिव कुमार प्रसाद अनुप कुमार कश्‍यप। दोसर पाली- पवित्र पापी- उमेश नारायण कर्ण- जाति-पाति- दुर्गानन्‍द मण्‍डल समीक्षा- राम विलास साहु राजदेव मण्‍डल ‘रमण’ संयज कुमार मण्‍डल मिहिर झा महादेव तेसर पाली- एकर उत्तरदायी के?- शम्‍भु सौरभ कमतिया हवेली- राम विलास साहु समीक्षा- उमेश मण्‍डल फागुलाल साहु सच्‍चिदा नन्‍द झा ‘सचिद’ बेचन ठाकुर (नाटकार) चारिम पाली- खेती-वाड़ी- बेचन ठाकुर डीहक जमीन- ओम प्रकाश झा समीक्षा- शिव कुमार प्रसाद मिहिर कुमार झा बमभोली झा शम्‍भु सौरभ पाँचिम पाली- बिआह- गौड़ी शंकर साह इन्‍फेक्‍शन- फागुलाल साहु समीक्षा- कपिलेश्वर राउत राम विलास साहु शशिकान्‍त झा उमेश नारायण कर्ण छठिम पाली- पाँच भूत- उमेश नारायण कर्ण जरि गेल माइक आस- विपिन कुमार कर्ण समीक्षा- कपिलेश्वर राउत नन्‍द विलास राय ओम प्रकाश झा अनुप कुमार कश्‍यप सातिम पाली- शिव विद्यापति- सच्‍चिदानन्‍द ‘सचिद’ भरम- लक्ष्‍मी दास कलयुगक निर्णए- कपिलेश्वर राउत समीक्षा- शम्‍भु सौरभ जगदीश प्रसाद मण्‍डल श्‍यामानन्‍द चौधरी। अंतमे अध्‍यक्षीय भाषण तथा धन्‍यवाद ज्ञापन। ८३म सगर राति दीप जरय मैथि‍ली साहि‍त्‍यक प्रसि‍द्ध सर्वहारा मंच “सगर राति‍ दीप जरय” केर ८३म कथा गोष्‍ठी फुलपरास अनुमण्‍डलक सखुआ-भपटि‍याही गामक उत्‍क्रमि‍त मध्‍य वि‍द्यालय परि‍सरमे दि‍नांक ३० अगस्‍तक (२०१४) साँझ छह बजेसँ शूरू भऽ ३१ अगस्‍तक भि‍नसर छह बजे धरि‍ आकर्षक अध्‍यक्ष मण्‍डल तथा संचालन समि‍ति‍ केर अन्‍तर्गत चलैत रहल। अध्‍यक्ष मण्‍डलमे डा. वि‍मल कुमार राय, डा. योगेन्‍द्र पाठक ‘वि‍यागी’, श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल, श्री कमलेश झा, तथा डा. शि‍वकुमार प्रसाद रहथि‍, तहि‍ना मंचक संचालन समि‍ति‍मे श्री ओम प्रकाश झा, श्री राजदेव मण्‍डल आ श्री दुर्गानन्‍द मण्‍डल छला। जहि‍ना जन सहयोगसँ ई गोष्‍ठी आयोजि‍त छल तहि‍ना भपटि‍याही, सखुआ, छजना, नरहि‍या, निर्मली, औरहा, बेरयाही, सुरयाही, रतनसारा, चतरापट्टी, नवटोली, कदमपुरा, पकड़ि‍या, लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, गम्‍हरि‍या, बेलही इत्‍यादि‍ गामक तथा टोलक साहि‍त्‍य प्रेमीक उपस्‍थि‍ति‍ छल। नव-नव साहि‍त्‍य प्रेमी सोझाँ एला। पठि‍त कथापर त्‍वरि‍त समीक्षा/टि‍प्‍पणी दऽ केतेक गोटे अपन नव परि‍चए बनौलनि‍, देलनि‍ आ सोझा एला। जे सगर राति‍ दीप जरय’क उदेस रहल अछि‍। उपस्‍थि‍त साहि‍त्‍यकार सभ अह्लादि‍त भेला। केते गोटे अपन वि‍चार सेहो मंचेपर व्‍यक्‍त केलनि‍ जे अहि‍ना गोष्‍ठी जँ गाम-घरमे हएत तँ नव-नव लोकक प्रवेश स्‍वत: साहि‍त्‍य क्षेत्र होइत रहत, जइसँ समाजक संग साहि‍त्‍य डेग-मे-डेग मि‍ला कऽ चलत आ चलैत रहत। जइसँ जनजागरण हएत आ मैथि‍ली साहि‍त्‍यक मध्‍य एक खास अभावक पूर्ति सेहो हएत। नारी केन्‍द्रि‍त गोष्‍ठी भेने नारी वि‍मर्श करैत अनेक कथा आएल। कथा मध्‍य ढेर रास नारी-समस्‍याकेँ चि‍न्हि‍त कएल गेल। समीक्षक लोकनि‍ अपन-अपन मत दैत भरि‍ राति‍क यात्राकेँ सफल बनौलनि‍। गामक कि‍छु नारीओ गोष्‍ठीमे एक श्रोता रूपमे उपस्‍थि‍त छेली।  गोष्‍ठीक आरम्‍भ सामुहि‍क रूपेँ वि‍धि‍वत् दीप प्रज्‍वलि‍त कऽ स्‍थानीय डा. वि‍मल कुमार राय, श्री सूरज नारायण राय ‘सुमन’, संग-संग कलकत्तासँ आएल डा. योगेन्‍द्र पाठक ‘वि‍याेगी’, भागलपुरसँ आएल श्री ओम प्रकाश झा एवं बेरमासँ आएल श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डलजी द्वारा करौल गेल। छह पालीमे कुल २७ गोट नूतन वि‍हनि/लघु कथाक पाठ भेल। समीक्षा भेल, दर्जन भरि‍ पोथीक लोकार्पण भेल। जइमे दू गोट पोथी क्रमश: “कारू खि‍रहरि” आ “संत कारू खि‍रहरि”‍ अयोधी यादव ‘अमर’क। आ पाँच गोट लघु कथाक पोथीक साॅफ्ट कौपी क्रमश: “अप्‍पन-बीरान”, “पतझाड़”, “बाल-गोपाल”, “रटनी खढ़” तथा नारी केन्‍द्रि‍त कथा संग्रह “लजबि‍जी” जगदीश प्रसाद मण्‍डलक तहि‍ना दूटा पटकथा पहि‍ल “जाल” आ दोसर “पंचैती” राजदेव मण्‍डलक, एकटा कवि‍ता संग्रह “सूखल मन तरसल आँखि‍” मुन्नी कामतक आ बेचन ठाकुरक एकटा नाटक “भोँट” लोकार्पि‍त भेल। ८४म सगर राति‍ दीप जरयक आयोजन झंझारपुर अनुमण्‍डलक बेरमा गाममे शि‍वकुमार मि‍श्र जीक संयोजकत्‍वमे २० दि‍सम्‍बर-२०१४केँ होएत। बेरमा गाममे ७१म कथा गोष्‍ठी दि‍नांक ०२.१०.२०१०केँ मध्‍य वि‍द्यालय परि‍सर-बुढ़ि‍या गाछी-दुर्गा स्‍थान-मे भेल छल। एतेक दि‍नमे ई दोसर खेप छी।  अन्‍तमे संयोजक नन्‍द वि‍लास राय स्‍थानीय साहि‍त्‍य प्रेमी, जि‍नका सबहक वि‍शेष सहयोग छल ऐ आयोजनमे, तइ सभ बेक्‍तीकेँ धैनवाद ज्ञापन केलनि‍। संग-संग श्री गजेन्‍द्र ठाकुर दि‍ससँ श्रुति‍ प्रकाशनसँ प्रकाशि‍त मैथि‍लीक आधुनि‍क पोथी, सभ गोटेकेँ मंचेपर देल गेलनि‍। वि‍शेष सहयोगी सबहक नाओं ऐ तरहेँ अछि‍- डा. वि‍मल कुमार राय, श्री धीरेन्‍द्र कुमार, श्री सूरज नारायण राय, श्री अशोक कुमार राय, श्री सुन्‍दर लाल साह, मो. रि‍जवान, श्री सि‍याराम साह, श्री शम्‍भू सिंह, श्री यादव, श्री उमाकान्‍त राय, श्री जगत नारायण राय, श्री ब्रजनन्‍दन साह, श्री उमेश साह, श्री सुधीर साह, श्री रामकुमार मण्‍डल, श्री सत्‍य नारायण सिंह आ श्री लक्ष्‍मी मण्‍डल। ब्रेकिंग- अध्‍यक्ष मण्‍डल- डा. वि‍मल कुमार राय, डा. योगेन्‍द्र पाठक ‘वि‍यागी’, श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल, श्री कमलेश झा, डा. शि‍वकुमार प्रसाद। संचालन समि‍ति‍- श्री ओम प्रकाश झा, श्री राजदेव मण्‍डल, श्री दुर्गानन्‍द मण्‍डल। कथा पाठ एवं समीक्षा- पहि‍ल सत्रमे- जगदीश प्रसाद मण्‍डल- “गावीस मोइस”; शारदानन्‍द सिंह- “की करब से अहीं कहू”; राजदेव मण्‍डल- “दोख केकर” तथा लक्ष्‍मी दास- “गंगाजलक धोल” समीक्षा- योगेन्‍द्र पाठक ‘ि‍वयोगी’, कमलेश झा, वि‍मल कुमार राय, शि‍वकुमार प्रसाद, गौड़ी शंकर साह। दोसर सत्रमे- दुर्गानन्‍द मण्‍डल- “छुतहरि‍”; कपि‍लेश्वर राउत- “बड़का खीरा”, योगेन्‍द्र पाठक वि‍यागी- “वि‍जय दृश्‍य-१, वि‍जय दृश्‍य दू-२”; ललन कुमार कामत- “बेटी” समीक्षा- फागुलाल साहु, राजदेव मण्‍डल, अयोधी यादव ‘अमर’, कमलेश झा आ शि‍वकुमार प्रसाद। तेसर सत्र- ओम प्रकाश झा- बेटीक बि‍याह, शि‍व कुमार प्रसाद- “झमकी”; राम ि‍वलास साहु- “अवि‍सबास”; हेम नारायण साहु- “बेसी भ’ गेल आब नै” समीक्षा- उमेश मण्‍डल, शम्‍भु सौरभ, दुर्गानन्‍द मण्‍डल। चारि‍म सत्र- उमेश मण्‍डल- “कोटाक चाउर”; फागुलाल साहु- “मर्दानी नारी”; शम्‍भु सौरभ- “लाजो”; शि‍व कुमार मि‍श्र- “बाल वि‍धवा” समीक्षा- कमलेश झा, ओम प्रकाश झा, राजदेव मण्‍डल, उमेश नारायण कर्ण तथा दुर्गानन्‍द मण्‍डल। पाँचि‍म सत्र- ओम प्रकाश झा- “कुलच्‍छनी”; गौड़ी शंकर साह- “छोटकी”; उमेश नारायण कर्ण- “यूज एण्‍ड थ्रो”; अच्‍छेलाल शास्‍त्री- “गुलटेनमा”; नन्‍द वि‍लास राय- “दि‍व्‍या” समीक्षा- कमलेश झा, दुर्गानन्‍द मण्‍डल, राम कुमार मण्‍डल, फागुलाल साहु, राजदेव मण्‍डल। छअम सत्र- राम वि‍लास साहु- “बौआ बाजल”; फागुलाल साहु- “चतुर बालक”; जगदीश प्रसाद मण्‍डल- “रेहना चाची”; शारदा नन्‍द सिंह- “फक द’ नि‍साँस छूटल”; डाॅ. कीर्ति नाथ झा- (वाचक- उमेश मण्‍डल) “शेफाली, फुलपरासवाली आ हम” समीक्षा- अयोधी यादव, ओम प्रकाश झा, शम्‍भू सौरभ, ललन कुमार कामत, शि‍व कुमार मि‍श्र। पोथी लोकार्पणकर्ता डा. योगेन्‍द्र पाठक ‘वि‍योगी’/श्री कमलेश झा/श्री रामकुमार मण्‍डल- “कारु खि‍रहरि‍” अयोधी यादव ‘अमर’क श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल/ श्री राजदेव मण्‍डल/ डा. वि‍मल कुमार राय/ डा. शि‍वकुमार प्रसाद/ श्री शम्‍भु सौरभ- “संत कारू खि‍रहरि”‍ अयोधी यादव ‘अमर’क श्री फागुलाल साहु- “सूखल मन तरसल आँखि‍” (कवि‍ता संग्रह)- मुन्नी कामतक श्री शम्‍भु सौरभ- “कथा कुसुम” (वि‍हनि‍/लघु कथा संग्रह) दुर्गानन्‍द मण्‍डलक श्री ब्रजनन्‍दन साह- “भोँट” (नाटक) बेचन ठाकुरक श्री हेम नारायण साहु- “पंचैती” (पटकथा) राजदेव मण्‍डलक श्री शि‍व कुमार मि‍श्र- “जाल” (पटकथा) राजदेव मण्‍डलक श्री कमलेश झा- “अपन-बि‍रान” (लघु/वि‍हनि‍ कथा संग्रह) जगदीश प्रसाद मण्‍डलक श्री उमेश नारायण कर्ण- “पतझाड़” (लघु/वि‍हनि‍ कथा संग्रह) जगदीश प्रसाद मण्‍डलक  श्री फागुलाल साहु- “रटनी खढ़” (लघु/वि‍हनि‍ कथा संग्रह) जगदीश प्रसाद मण्‍डलक श्री राम कुमार मण्‍डल- “बाल-गोपाल” (लघु/वि‍हनि‍ कथा संग्रह) जगदीश प्रसाद मण्‍डलक श्री ओम प्रकाश झा- “लजबि‍जी” (लघु/वि‍हनि‍ कथा संग्रह) जगदीश प्रसाद मण्‍डलक -उमेश मण्‍डल ३१/०८/२०१४ ८२म सगर राति दीप जरय 82म सगर राति‍ दीप जरए केर ब्रेकिंग न्‍यूज- स्‍थान- गजेन्‍द्र ठाकुरक नि‍ज आवास, गाम- मेंहथ, जि‍ला- मधुबनी। दि‍नांक- 31 मई 2014 (शनि‍ दि‍न) समए- संध्‍या छह बजेसँ गोष्‍ठीक नाओं- कथा बौद्ध सि‍द्ध मेहथपा सगर राति‍ दीप जरए। आयोजनक खेप- 82म आयोजन संयोजक- गजेन्‍द्र ठाकुर वि‍शेषता- बाल साहि‍त्‍यपर केन्‍द्रि‍त। गोष्‍ठीक उद्घाटन- डॉ. कमलकान्‍त झा, राज देव मण्‍डल, डाॅ. शि‍व कुमार प्रसाद, शि‍वकुमार मि‍श्रा तथा जगदीश प्रसाद मण्‍डल। स्‍वागत, गीत गाबि‍ केलनि‍- काशीनाथ झा ‘कि‍रण’ कथा गोष्‍ठीक अध्‍यक्षता केलनि‍- अरवि‍न्‍द ठाकुर मंच संचालन केलनि‍- आनन्‍द कुमार झा आ उमेश मण्‍डल अगि‍ला गोष्‍ठी स्‍थान- मधुबनी जि‍लाक भपटि‍याही गामक सखुआ टोलपर। अगि‍ला गोष्‍ठीक केन्‍द्रबि‍न्‍दु- स्‍त्री वि‍मर्श। आगि‍ला गोष्‍ठीक संयोजक हेता- नन्‍द वि‍लास राय। अगि‍ला गोष्‍ठीक संभावि‍त ति‍थि‍- 30 अगस्‍त 2014 (शनि‍ दि‍न) हकार देलनि‍- सामुहि‍क रूपे अगि‍ला गोष्‍ठी लेल हकार मंचपर नन्‍द वि‍लास राय देलनि‍। समीक्षा/टि‍प्‍पणीमे भाग लेलनि‍- दुर्गानन्‍द मण्‍डल, शि‍वशंकर श्रीनि‍वास, राम वि‍लास साहु, बाल गोवि‍न्‍द्र गोवि‍न्‍दाचार्य, फागुलाल साहु, नन्‍द वि‍लास राय, शि‍वकुमार मि‍श्र, नारायणजी, कमलकान्‍त झा, काशीनाथ झा कि‍रण, शि‍वकुमार प्रसाद, बि‍पि‍न कुमार कर्ण, संजीव कुमार समा, उमेश नारायण कर्ण, शारदानन्‍द सि‍ंह, जगदीश प्रसाद मण्‍डल, संजय कुमार मण्‍डल, हेम नारायण साहु, पंकज सत्‍यम इत्‍यादि‍। आठ गोट पोथीक लोकार्पण भेल- 1. बैशाखमे दलानपर- गद्य-पद्य संग्रह संग आत्‍मकथा लेखक- संदीप साफी। लोकार्पण- डाॅ. कमलकान्‍त झा, अरवि‍न्‍द ठाकुर, राजदेव मण्‍डल, सीताराम साफी 2. नेपालक नोर मरुभूमि‍मे- गद्य-पद्य संग्रह, लेखक- वि‍न्‍देश्वर ठाकुर। लोकार्पण- जगदीश प्रसाद मण्‍डल, नन्‍द वि‍लास राय, चन्‍डेश्वर खाँ। 3. उलहन- वि‍हनि‍ आ लघुकथा संग्रह, लेखक- कपि‍लेश्वर राउत। लोकार्पण- गजेन्‍द्र ठाकुर, शि‍व कुमार प्रसाद, दुर्गानन्‍द मण्‍डल। 4. On the Dice Board of the Millennium- Joity Jha Chaudhary. लोकार्पण- कमल कान्‍त झा, आनन्‍द कुमार झा, शि‍व कुमार प्रसाद। 5. The Science of Words कथा संग्रह, अनुवादक- गजेन्‍द्र ठाकुर। लोकार्पण- असीन ठाकुर, ललन कुमार कामत, अरवि‍न्‍द कुमार ठाकुर। 6. धांगि‍ बाट बनेबाक दाम अगूबार पेने छँ, गजल संग्रह, गजलकार- गजेन्‍द्र ठाकुर। लोकार्पण- बाल गोवि‍न्‍द यादव ‘गोवि‍न्‍दाचार्य’, उमेश पासवान, रामदेव प्रसाद मण्‍डल ‘झारूदार’ राम सेवक ठाकुर। 7. सहस्रजि‍त- पद्य संग्रह, लेखक- गजेन्‍द्र ठाकुर, लोकार्पण- बेचन ठाकुर, राम वि‍लास साहु, हेम नारायण साहु। 8. प्रबन्‍ध-नि‍बन्‍ध समालोचना भाग- 2, आलोचक- गजेन्‍द्र ठाकुर। लोकार्पण- अरवि‍न्‍द ठाकुर, जगदीश प्रसाद मण्‍डल, फागुलाल साहु, राजदेव मण्‍डल। 33 गोट वि‍हनि‍/लघु कथाक पाठ भेल- 1. अखि‍लेश मण्‍डल- ललि‍याएल मुँह 2. ललन कुमार कामत- स्‍कूलक फीस 3. जगदीश प्रसाद मण्‍डल- ‘अवाक्’ तथा ‘पल भरि’‍ 4. चण्‍डेश्वर खाँ- ‘रोटी’ तथा ‘भोज’ 5. लक्ष्‍मी दास- दुश्‍टपना 6. जगदानन्‍द मनु- ‘भगवानकेँ जे नीक लगनि‍’ तथा ‘बड़का बाबू’ 7. उमेश पासवान- अजोह 8. शि‍व शंकर श्रीनि‍वास- हाथी आ गीदड़  9. बेचन ठाकुर- हरि‍या इन्‍सपेकटर 10. राम सेवक ठाकुर- मोटरीमे कथी छेलै 11. गौड़ी शंकर साह- परीक्षा 12. राम वि‍लास साहु- बोल-बोध 13. नन्‍द वि‍लास राय- अमर-मदन 14. शारदा नन्‍द सिंह- सुचीमे नाम’ तथा ‘एकर जवाबदेह के? 15. उमेश नारायण कर्ण- म्‍याऊँ म्‍याऊँ म्‍याऊँ 16. संजय कुमार मण्‍डल- एकन्‍त 17. शि‍व कुमार प्रसाद- अदि‍या 18. अजय कुमार दास ‘पि‍न्‍टूजी’- सचेतल प्रेम 19. पंकज सत्‍यम- जननायक 20. शि‍व कुमार मि‍श्र- गर्म आन्‍हर 21. दुर्गानन्‍द मण्‍डल- बुइध 22. फागुलाल साहु- माँ केर डाँट 23. राजदेव मण्‍डल- रूसल बौआ 24. कपि‍लेश्वर राउत- खराप 25. कमलकान्‍त झा- साँझक सुख 26. बि‍पि‍न कुमार कर्ण- निश्छल नारी 27. उमेश मण्‍डल- दूध 28. योगेन्‍द्र पाठक ‘वि‍योगी’- खजाना, कथा पाठ- उमेश मण्‍डल 29. गजेन्‍द्र ठाकुर- रेश 30. दीपाली झा- दादीक गाम, कथा पाठ- आनन्‍द कुमार झा 31. अरवि‍न्‍द ठाकुर- बेदरमैत ८१म सगर राति दीप जरय देवघरमे 81म सगर राति‍ दीप जरए सफलता पूर्वक सम्‍पन्न भेल :: उमेश मण्‍डल स्‍व. मायानन्‍द मि‍श्र तथा जीवकान्‍तक स्‍मृतकेँ समरपि‍त 81म सगर राति‍ दीप जरए केर आयोजन दि‍नांक 22 मार्च 2014केँ श्री ओम प्रकाश झाक संयोजकत्‍वमे संध्‍या 6 बजेसँ देवघरक बम्‍पास टॉनक बि‍जली कोठी-3 मे आयोजि‍त भेल। ओयोजनक उद्घाटन दीप प्रज्‍वलि‍त करि‍ कऽ श्री ओ.पी. मि‍श्राजी केलनि‍। मि‍थि‍लाक गाम-गामसँ आ भारतक शहर-शहरसँ आएल कथाकार, साहि‍त्‍यकार, समालोचक तथा साहि‍त्‍य प्रेमीक कसगर जुटान छल। साँझक पाँचे बजेसँ जुटान हुअ लगल। मि‍डि‍याकर्मीक थहाथही शुरू भऽ गेल। शुभारम्‍भ मंगला चरणसँ श्री एस.के. मि‍श्राजी केलनि‍। झारूदारजी अपन सृजि‍त अनुपम गीत “हम नै छी अहाँ योग यौ पाहुन/ अहाँ छी बड़ा महान/ स्‍वागत स्‍वीकार करू श्रीमान्/ अहाँ छी गंगा अहाँ छी यमुना/ पग धुलसँ पावण भेल अँगना...।” गाबि उपस्‍थि‍त साहि‍त्‍यप्रेमी आ साहि‍त्‍यकारकेँ स्‍वागत केलनि‍। पोथीक लोकार्पण शुरू भेल। गजेन्‍द्र ठाकुरक संग सम्‍पादनमे सम्‍पादि‍त मि‍थि‍लाक पंजी प्रबन्‍ध “जीनाेम मैपिंग भाग- 2” आ “जि‍नीयोलोजि‍कल मैपिंग” 950 एडीसँ 2009 एडी धरि‍क पंजीक लोकार्पण श्री ओम प्रकाश झा, डॉ. योगानन्‍द झा आ श्री राजीव रंजन मि‍श्रा जीक हाथे भेल। शि‍वकुमार झा ‘टि‍ल्‍लू’जी रचि‍त समालोचनाक पोथी “अंशु” केर लोकार्पण श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल, श्री राजदेव मण्‍डल आ श्री बेचन ठाकुरजी केलनि‍। अंग्रेजी-मैथि‍ली शब्‍द कोष भाग-2, “मैथि‍ली-अंग्रेजी कम्‍प्‍यूटर शब्‍दकोष” तथा बेचन ठाकुरक “ऊँच-नीच” नाटकक लोकार्पण सेहो भेल। दू शब्‍दक कड़ीमे प्रवेश केलौं। ओ.पी.मि‍श्रा, दि‍लीप दास, ओम प्रकाश झा, दैनि‍क समाचार पत्र प्रभात खबर केर सम्‍पादक श्री सुशील भारती मैथि‍लीक दशा दि‍सापर अपन वि‍चार प्रकट केलनि‍। ओ कहलनि-‍ “अही तरहक आयोजन मैथि‍लीक सम्‍पूर्ण वि‍कासक मार्ग सहज बनौत।” आयोजककेँ धन्‍यवाद ज्ञापन करैत एक-सँ-एक साहि‍त्‍यकार अपन मनक खुलता बात मैथि‍ली वि‍कास लेल स्‍वतंत्रता पूर्वक मंचपर रखलनि‍। मुख्‍य अति‍थि‍ ओ.पी. मि‍श्राजी सेहो एकटा सुन्‍दर गीत गाबि‍ स्‍वागतक भाव प्रकट केलनि‍। राजीव रंजनजी स्‍वलि‍खि‍त गजल गाबि‍ अपन भाव प्रकट केलनि‍। सगर राति‍ दीप जरए (सभ अज्ञानीमे ज्ञानक दीप जरौ) कथायात्राक मादे श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डलक वि‍चार बकतनक संग लि‍खतनमे सेहो वि‍स्‍तारपूर्वक आएल। दू पि‍ट्ठा कागत हाथे-हाथ बाँटल गेल। जे ऐ लिंकपर उपलब्‍ध अछि‍- http://maithili-samalochna.blogspot.in/…/…/blog-post_24.html 34 गोट लघुकथा/वि‍हनि‍ कथाक पाठ भेल। सात पालीमे बाँटि‍ सभ कथाक पाठ करौल गेल। अंति‍म पाली छोड़ि‍ छबो पालीमे पठि‍त कथापर तीन गोट समीक्षकक समीक्षा अबैत रहल आ समीक्षाक समीक्षा सेहो होइत रहल। समीक्षाक समीक्षा केनि‍हार सभ छला राजदेव मण्‍डल, नन्‍द वि‍लास राय, भाष्‍कर झा, उमेश मण्‍डल, चन्‍दन झा, डॉ. धनाकर ठाकुर, बि‍पीन कुमार कर्ण इत्‍यादि‍। प्रति‍समीक्षाक क्रममे एक गोट वि‍चारणीय टि‍प्पणी आएल। ओ छल, युवा समीक्षकक। अपन वि‍चार व्‍यक्‍त करैत कहलखि‍न-  “समसामयि‍क कथाक गहराइकेँ आधुनि‍क पाठक स्‍वागत नै करए चाहैए। से ई कथाक दोष भेल। फलस्‍वरूप पाठकक अभाव अछि‍।”  संचालक गजेन्‍द्र ठाकुरजी ऐ वि‍चारपर असहमति‍ जँतौलनि‍। कहलखि‍न-  “ई तँ भाषाक वि‍शेषता छि‍ऐ जे कथानककेँ गहराइ प्रदान करै छै। जेकर अभाव मैथि‍ली साहि‍त्‍यकेँ पाठक वि‍हि‍न केने रहल।”  ऐ तथ्‍यकेँ सत्‍यापि‍त करैत ठाकुरजी आइसलैण्‍डक भाषाक जि‍कि‍र केलनि‍। दू सत्रक पछाति‍ भोजनावकाश भेल। मि‍थि‍लाक खान-पानक आधुनि‍क रूप अकति‍यार केने छला आयोजक। करीब 125 गोटे एक पाँति‍मे बैस भोजन केलनि‍। ऐ तरहक समायोजनसँ हुनका मुँहक रोहानी फुलाएल गुलाबक फूल सन देखबामे आएल। बारीक सभ फुदैक-फुदैक अपन-अपन जि‍म्‍माकेँ जीतैत खेलाड़ी जकाँ निर्वहन करैत देखल गेला। भोजनक घंटा भरि‍ पछाति पुन: अगि‍ला सत्रक यात्रा शुरू भेल। पठि‍त कथापर समीक्षा हेतु वि‍शेष सुि‍वधा प्रदान कएल गेल छल। ओ ई जे जँ समीक्षक पठि‍त कथाकेँ कोनो कारणे धि‍यानसँ नै सुनि‍ पबथि‍ तँ हुनका लेल कथाक पाण्‍डुलि‍पि‍ उपलब्‍ध करौल जाइ छल। संचालकक कहब रहनि‍ जे मैथि‍ली साहि‍त्‍यमे समीक्षाक स्‍थि‍ति‍ उमदा नै अछि‍। ऐपर श्री अरवि‍न्‍द ठाकुर असहमति‍ व्‍यक्‍त केलनि‍। ओ कहलनि‍- “सगर राि‍तक अलि‍खि‍त नि‍अमो रहल अछि‍ जे समीक्षापर समीक्षासँ गोष्‍ठीमे वि‍वाद बढ़ि‍ सकैए तँए एहेन कार्यसँ बँचक चाही।”  सम्‍पूर्ण कार्यक्रमक लाइव प्रसारण कएल गेल। सगर राति‍क इति‍हासक पन्नामे ई एक गोट अनुपम कार्य सि‍द्ध हएत। सम्‍पूर्ण कार्यक्रमक वि‍डिओ यू-ट्यूबपर उपलब्‍ध करौल जाएत तेकरो बेवस्‍था आयोजक केने छला। मैथि‍ली साहि‍त्‍यकेँ पूर्णत: इलेक्‍ट्रॉनि‍क स्‍पोर्ट भेटौ ऐ हेतु आयोजक प्रति‍वद्ध छला। अगि‍ला गोष्‍ठी हेतु दू गोट प्रस्‍ताव आएल। बहुसंख्‍यक साहि‍त्‍यकारक वि‍चारकेँ आगू बढ़बैत अध्‍यक्ष श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल भावी संयोजककेँ दीप आ उपस्‍थि‍ति‍ पुस्‍ति‍का हश्‍तगत करौलनि‍। 31 मई 2014केँ मधुबनी जि‍लाक मेंहथ गाममे 82म कथा गोष्‍ठी हेतु भावी संयोजक श्री गजेन्‍द्र ठाकुर समगर्दा हकार दऽ सभकेँ आमंत्रि‍त करैत कहलखि‍न-  ”बालकथापर केन्‍द्रि‍त अगि‍ला गोष्‍ठी आयोजि‍त हएत।” अंतमे संयोजक श्री ओम प्रकाश झा आयोजक धन्‍यवाद ज्ञापन करैत कहलनि‍- “81m Sagar Raati Deep Jaray katha Gosthi 22 March 2014 saanjh sa shuru bha ka 23 March 2014 ke bhor me safalta poorvak Deoghar me sampann bha gel. Ehi beruka katha gosthi ke swargiy Mayanand babu aa swargiy Jeevkant ke samarpit kayal gel. Gosthik adhyakshta sri Jagdish Pd Mandal kayalanhi aa sanchalak chhalaah Sri Gajendra Thakur. Mukhy atithi Sri O. P. Mishra chhalaah. Kul 29 got kathaakaarak dwara 35 got katha paaTh kayal gel. Samalochna seho badd neek rahal. Kul milaa ka kathaa goshthi ekTa neek workshop saabit bhel. Katha goshthi me aaynihaar sab kathakaar lokani ke hum hriday sa aabhari chhi. Sangahi ahaa sab shubhkaamna denihaar mitra sabhak seho aabhari chhi. Kichhu gote anupasthitik khed prakaT karait shubhkaamna prakaT kelanhi, hunko sabhak aabhari chhi. Je jaani boojhi ka nai aylaah tinko aabhari chhi kiyak ta hunkar vyavhaar humra bheetar Maa Maithilik prati pratibaddhtaa aar badhaa delanhi.” ‍ 81म सगर राति‍ दीप जरए- देवघरमे सुसम्‍पन्न भेल 82म कथा गोष्‍ठी मेंहथमे होएत मायानन्‍द मि‍श्र जीवकान्‍त स्‍मृति‍-सगर राति‍ दीप जरए केर 81म कथा गोष्‍ठी– देवघर (झारखण्‍ड) संयोजक- ओम प्रकाश झा उद्घाटन सत्र- दीप प्रज्‍वलन- श्री ओ.पी. मि‍श्रा एवं समस्‍त कथाकार  संचालन- ओम प्रकाश झा लोकार्पण सत्र- अध्‍यक्ष- जगदीश प्रसाद मण्‍डल मुख्‍य अति‍थि‍- श्री ओ.पी. झा आ श्री गजेन्‍द्र ठाकुर संचालक- उमेश मण्‍डल दू शब्‍द- 1. ओ.पी. झा, अवकाश प्राप्‍त अभि‍यंता- झारखण्‍ड सरकार  2. सुशील भारती, संपादक, प्रभात खबर हि‍न्‍दी दैनि‍क। 3. दि‍लीप दास 4. ओम प्रकाश झा 5. मिथि‍लेश कुमार  6. जगदीश प्रसाद मण्‍डल कथा सत्र- अध्‍यक्ष- श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल, वरि‍ष्‍ठ साहि‍त्‍यकार मंच संचालक- श्री गजेन्‍द्र ठाकुर, संपादक, ‘वि‍देह’ इण्‍टरनेशनल ई-जनरल पहि‍ल सत्रमे पठि‍त कथा एवं कथाकार- असली हीरा- श्री दुर्गानन्‍द मण्‍डल (निर्मली) रि‍क्‍शाक भाड़ा आ बुधि‍ए बताह- श्रभ्‍ फागुलाल साहु (सखुआ) बुढ़ि‍या मैया- ओम प्रकाश झा (भागलपुर) केते बेर- उमेश मण्‍डल (निर्मली) समीक्षक- योगानन्‍द झा राजदेव मण्‍डल अरवि‍न्‍द ठाकुर प्रमोद कुमार झा समीक्षाक समीक्षक नन्‍द वि‍लास राय चन्‍दन झा धनाकर ठाकुर दोसर सत्र- सभसँ बड़का भी.आई.पी. गेष्‍ट- श्री नन्‍द वि‍लास राय (भपटि‍याही) डरक डंका- श्री राजदेव मण्‍डल (मुसहरनि‍याँ) ई छी हमर मजबूरी आ इमानदारीक पाठ- श्री राम वि‍लास साहु (लक्ष्‍मि‍नि‍याँ) अप्‍पन माए-बाप- श्री ललन कुमार कामत (ललमनि‍याँ) तेसर सत्र- छि‍न्ना-झपटी- श्री शि‍व कुमार मि‍श्र (बेरमा) बड़का मोछ- श्री कपि‍लेश्वर राउत (बेरमा) उतेढ़क श्राद्ध- श्री शम्‍भू सौरभ (बैका) जाति‍क भोज- श्री उमेश पासवान (औरहा) चारि‍म सत्र- गुरुदक्षि‍णा- डाॅ. योगानन्‍द झा (कबि‍लपुर) अपराध- श्री पंकज सत्‍यम् (मधुबनी लगक) ककर चरवाही आ चुनावधर्मी लोक- डॉ. उमेश नारायण कर्ण कबाउछ- डॉ. धनाकर ठाकुर पाँचम सत्र- आन्‍हर- श्री अखि‍लेश कुमार मण्‍डल (बेरमा) सरकारीए नौकरी कि‍एक- बि‍पीन कुमार कर्ण (रेवाड़ी) बनमानुष आ मनुष- डाॅ. शि‍वकुमार प्रसाद (सि‍मरा) वृधापेंसन आ मजबुरी- श्री शारदानन्‍द सि‍ंह पानि‍- श्री बेचन ठाकुर छअम सत्र- सत्ता-चरि‍त- श्री अरवि‍न्‍द ठाकुर (सुपौल) बापक प्राण- श्री भाष्‍करानन्‍द झा भाष्‍कर (कोलकाता)  संबोधन- श्री चन्‍दन कुमार झा (कोलकाता) ठीका- श्री आमोद कुमार झा चौठि‍या- श्री अच्‍छेलाल शास्‍त्री (सोनवर्षा) सातम सत्र- तखन, जखन- श्री गजेन्‍द्र ठाकुर (दि‍ल्‍ली) चैन-बेचैन- श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल (बेरमा) पहिल सगर राति जकरा सगर विश्वमे लाइव प्रसारित कएल गेल, लिंक छल: https://new.livestream.com/accounts/7191650/events/2827795 ऐ तरहेँ देवघरक गोष्‍ठीमे कुल कथाकारक संख्‍या 29 छल। 34 गोट कथाक पाठ भेल। 80म सगर राति‍ दीप जरय 80म कथा गोष्ठी “कथा मि‍लन सदाय-सगर राति‍ दीप जरय” निर्मलीमे पठि‍त कथा एवं कथाकारक नाओं- 1. जीवपर दया करी- पल्लवी कुमारी  2. स्पेशल परमीट- ओम प्रकश झा  3. ढेपमारा गोसाँइ- ओम प्रकाश झा  4. ओ स्त्री - सदरे आलम गौहर  5. बाल अधि‍कार- नारायण झा  6. मांग- अमि‍त मि‍श्र  7. नवतुरि‍या- अमि‍त मि‍श्र  8. जनता लेल- अमि‍त मि‍श्र  9. थ्रीजी- मुकुन्द मयंक  10. पढ़ाइ आ खेती- बि‍पीन कुमार कर्ण  11. बदरि‍या मूसक घर- उमेश पासवान  12. अपन घर- लक्ष्मी दास  13. मि‍त्र- नारायण यादव  14. प्रेम एगो अचम्भा - बाल मुकुन्द पाठक  15. भगवानक पूजा- संजय कुमार मण्डल  16. वि‍पन्नता- पंकज सत्‍यम  17. गौतमक अहि‍ल्या-- दुखन प्रसाद यादव  18. तरकारीक चोर- ललन कुमार कामत  19. व्यंग्य- मि‍थि‍लेश कुमार व्यास  20. खेनि‍हारक लेखा- चंदन कुमार झा  21. चाहबला- कपि‍लेश्वर राउत  22. बि‍लाइ रस्ता काटि‍ देलक- राम वि‍लास साहु  23. भैरवी- रौशन कुमार झा  24. संदेह- शारदा नन्द सिंह  25. अंधवि‍श्वास- शम्भू सौरभ  26. डीजे ट्रोली- बेचन ठाकुर  27. मुखि‍याजी सँ मंत्री धरि‍ एक्के रंग- दुर्गा नन्द ठाकुर  28. कारागार- कि‍शलय कृष्ण  29. पैघ लोक के?- नन्द वि‍लास राय  30. पेंच-पाँच- शि‍व कुमार मि‍श्र  31. महेशबाबूक चौकपर एकदि‍न- गौड़ी शंकर साह  32. परि‍वर्त्तन- राजदेव मण्डल  33. एकघाप जमीन- जगदीश प्रसाद मण्डल  34. गइ बुढ़ि‍या हम बड़ बि‍हर छी- डॉ. शि‍व कुमार प्रसाद  35. भीखमंगा- डॉ. अशोक अवि‍चल मिथिलांचलक प्रसिद्ध साहित्यिक मंच “सगर राति‍ दीप जरय” केर 80म आयोजन जे निर्मली (सुपौल)मे स्थानीय कलाकार स्व. मि‍लन सदाय केर नाओंपर आयोजित छल तइ कथा गोष्ठीमे जे समीक्षक-आलोचक सभ पठि‍त कथापर समीक्षा केने रहथि‍, आलोचना केने रहथि‍ से सूची निम्न अछि‍- डॉ. शिव कुमार प्रसाद  ओम प्रकाश झा  राजदेव मण्डल  जगदीश प्रसाद मण्डल  डॉ. अशोक अवि‍चल  डॉ. रामाशीष सिंह  उमेश पासवान  चन्दन कुमार झा  राम वि‍लास साहु  फागुलाल साहु  पंकज सत्यम्  किशलय कृष्ण  शंभु सौरभ  कपिलेश्वर राउत  बाल गोवि‍न्द यादव गोवि‍न्दा‍चार्य  वीरेन्द्र कुमार यादव  राम वि‍लास साफी  शि‍व कुमार मि‍श्र  दुर्गानन्द मण्डल  नारायण यादव  संजय कुमार मण्‍डल  राम प्रवेश मण्डल  नारायण यादव बालमुकुन्द पाठक  बेचन ठाकुर  दुर्गानन्द ठाकुर  शारदा नन्द सिंह 80म सगर राति‍ दीप जरय'' निर्मलीमे 45 गोट पोथीक लोकार्पण- बाल निबंध- 1. देवीजी (ज्योती झा चौधरी) कवि‍ राजदेव मण्डल वि‍वि‍धा- 1. कुरुक्षेत्रम अन्तर्मनक- (गजेन्द्र ठाकुर) डॉ. बचेश्वर झा शब्द.कोष- 1. अंग्रजी-मैथि‍ली शब्दकोष- (गजेन्द्र ठाकुर) डॉ. रामाशीष सिंह  2. मैथि‍ली-अंग्रेजी शब्दकोष- (गजेन्द्र ठाकुर) डॉ. अशोक अवि‍चल  वि‍हनि‍ कथा संग्रह-  1. बजन्ता-बुझन्ता (जगदीश प्रसाद मण्डाल) अनुमण्‍डलाधि‍कारी अरूण कुमार सिंह  2. तरेगन- दोसर संस्करण (जगदीश प्रसाद मण्डल)- वि‍धायक सतीश साह लघु कथा संग्रह-  1. सखारी-पेटारी (नन्द वि‍लास राय) डॉ. शि‍वकुमार प्रसाद  2. उलबा चाउर (जगदीश प्रसाद मण्डल) वि‍नोद कुमार ‘वि‍कल’  3. अर्द्धांगि‍नी (जगदीश प्रसाद मण्डल) दुर्गानन्द मण्डल  4. सतभैंया पोखरि‍ (जगदीश प्रसाद मण्डल) प्रो. जयप्रकाश साह  5. भकमोड़ (जगदीश प्रसाद मण्डल) फागुलाल साहु दीर्घ कथा संग्रह- 1. शंभुदास (जगदीश प्रसाद मण्डल) सदरे आलम गौहर कवि‍ता संग्रह- 1. बसुन्धरा (राजदेव मण्‍डल) गजलकार ओम प्रकाश झा  2. राति‍-दि‍न (जगदीश प्रसाद मण्डल) रामजी प्रसाद मण्डल  3. रथक चक्का उलटि‍ चलै बाट (रामवि‍लास साहु) नाटककार बेचन ठाकुर  4. नि‍श्तुकी दोसर संस्‍करण (उमेश मण्डल) जनकवि‍ रामदेव प्रसाद मण्डल ‘झारूदार’  5. इन्द्र्धनुषी अकास (जगदीश प्रसाद मण्डल) पत्रकार राम लखन यादव  6. प्रतीक (मनोज कुमार कर्ण मुन्नाजी) अधि‍वक्‍ता वीरेन्द्र कुमार यादव गजल संग्रह- 1. क्यो जानि‍ नै सकल हमरा (ओम प्रकाश झा) साहि‍त्‍यकार जगदीश प्रसाद मण्डल  2. माझ आंगनमे कति‍याएल छी (मनोज कुमार कर्ण मुन्नाजी) गायक रामवि‍लास यादव  3. मोनक बात (चन्दन कुमार झा) डॉ. शि‍वकुमार प्रसाद  4. अंशु (अमि‍त मि‍श्र) कथाकार कपि‍लेश्वर राउत गीत संग्रह- 1. गीतांजलि‍ (जगदीश प्रसाद मण्डल) अमीत मि‍श्र  2. तीन जेठ एगारहम माघ (जगदीश प्रसाद मण्डल) चन्दन कुमार झा  3. सरि‍ता (जगदीश प्रसाद मण्डल) बालमुकुन्द  4. सुखाएल पोखरि‍क जाइठ (जगदीश प्रसाद मण्डल) बि‍पीन कुमार कर्ण  5. हमरा बि‍नु जगत सुन्ना छै (रामदेव प्रसाद मण्डल ‘झारूदार’) अधि‍वक्‍ता मनोज कुमार बि‍हारी 6. क्षणप्रभा- (शि‍व कुमार झा ‘टि‍ल्लू‘’) राजाराम यादव अनुवाद साहि‍त्य- 1. पाखलो (उपन्यास (कोंकणीसँ हि‍न्दी सेवी फर्णांडि‍स एवं शंभु कुमार सिंह तथा हि‍न्दी‍सँ मैथि‍ली शंभु कुमार सिंह- कवि‍ शंभु सौरभ नाटक- 1. रि‍हलसल (रवि‍ भूषण पाठक) कवि‍ राम वि‍लास साफी 2. बि‍सवासघात (बेचन ठाकुर) बाल गोवि‍न्द यादव ‘गोवि‍न्दाचार्य’ 3. बाप भेल पि‍त्ती आ अधि‍कार (बेचन ठाकुर) कवि‍ रामवि‍लास साहु  4. रत्नाकार डकैत (जगदीश प्रसाद मण्डल) कि‍शलय कृष्ण  5. स्वयंवर (जगदीश प्रसाद मण्डल) कवि‍ शंभु सौरभ  6. पंचवटी एकांकी संचयन- (जगदीश प्रसाद मण्डल) उपन्‍यासकार राजदेव मण्डल 7. कम्‍प्रोमाइज- (जगदीश प्रसाद मण्डल) कथाकार राम प्रवेश मण्डल 8. झमेलि‍या बि‍आह (जगदीश प्रसाद मण्डल) अधि‍वक्‍ता वीरेन्द्र् कुमार यादव उपन्यास 1. हमर टोल (राजदेव मण्डल) कवि‍ हेम नारायण साहु  2. जीवन संघर्ष (दोसर संस्करण) जगदीश प्रसाद मण्डाल) नारायण यादव  3. बड़की बहि‍न (जगदीश प्रसाद मण्डल) कवि‍ शारदा नन्द सिंह  4. जीवन-मरण (दोसर संस्करण) (जगदीश प्रसाद मण्डल) डाकबाबू छजना 5. नै धाड़ैए (बाल उपन्यास, जगदीश प्रसाद मण्डल) गुरुदयाल भ्रमर सह्त्रबाढ़नि‍ (ब्रेल लि‍पि‍) गजेन्द्र ठाकुर) शि‍क्षक मनोज कुमार राम वायोग्राफी- 1. जगदीश प्रसाद मण्डल एकटा वायोग्राफी- (गजेन्द्र ठाकुर) कवि‍ उमेश पासवान  संस्‍मरण साहि‍त्‍य-  मध्य प्रदेशक यात्रा (ज्योति‍ झा चौधरी) कथाकार नन्द वि‍लास राय ७९म सगर राति‍ दीप जरय सगर राति‍ दीप जरय’क ७९म आयोजन ‘कथा कोसी’ उमेश पासवानक संयोजकत्‍वमे औरहामे सम्पन्न/ ८०म सगर राति‍ दीप जरय सुपौल जि‍लाक निर्मलीमे उमेश मण्‍डलक संयोजकत्वमे- उमेश मण्डल सगर राति‍ दीप जरय’क ७९म आयोजन ‘कथा कोसी’ नामक वैनरक नीचाँ दि‍नांक १५ जून संध्‍या ६.३० बजेसँ शुरू भऽ १६ जूनक भि‍नसर ६ बजे धरि‍ लौकही थाना अन्‍तर्गत औरहा गामक मध्‍य वि‍द्यालयक नव नि‍र्मित भवनमे श्री उमेश पासवानक संयोजकत्‍वमे सुसम्‍पन्न भेल। अगि‍ला ८०म गोष्‍ठी सुपौल जि‍लाक निर्मलीमे हेबाक लेल उमेश मण्‍डलक प्रस्‍ताव आएल जे सर्वसम्मति‍सँ मान्‍य भऽ घोषित भेल। श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल एवं श्री रामचन्‍द्र पासवान जीक संयुक्‍त अध्‍यक्षतामे तथा श्री वीरेन्‍द्र कुमार यादव आ श्री दुर्गागान्‍द मण्‍डलक संयुक्‍त संचालनमे ऐ कथा गोष्‍ठीक भरि‍ राति‍क यात्रा भेल। गोष्‍ठीक शुभारम्‍भ श्री लक्ष्‍मी नारायण सिंह एवं श्री रामचन्‍द्र पासवानजी संयुक्‍त रूपे दीप प्रज्‍वलि‍त कऽ उद्घाटन केलनि‍। दीप प्रज्वलनमे डॉ. रामानन्‍द झा ‘रमण’ श्री हेम नारायण साह श्री शंभु सौरभ संग-संग प्रेक्षागारमे उपस्‍थि‍त सभ कथा-साहि‍त्‍य प्रेमी थोपड़ी बजा सहयोग केलनि‍। वि‍देह-सदेह-५ वि‍देह मैथि‍ली वि‍हनि‍ कथा, वि‍देह सदेह-६ वि‍देह मैथि‍ली लघुकथा, वि‍देह-सदेह-७ वि‍देह मैथि‍ली पद्य, वि‍देह-सदेह-८ वि‍देह मैथि‍ली नाट्य उत्‍सव, वि‍देह-सदेह-९ वि‍देह मैथि‍ली शि‍शु उत्‍सव तथा वि‍देह-सदेह-१० वि‍देह मैथि‍ली प्रबन्‍ध-नि‍बन्‍ध-समालोचना नामक पोथीक लोकार्पण स्‍थानीय वि‍द्वतजन श्री संजय कुमार सिंह, श्री रामचन्‍द्र पासवान, श्री मि‍थि‍लेश सिंह, श्री राजदेव मण्‍डल, श्री लक्ष्‍मी नारायण यादव तथा श्री वीरेन्‍द्र प्रसाद सिंह (दुर्गानन्‍द मण्‍डल) जीक हाथे भेल। लोकार्पण सत्रक पछाति‍ दू-शब्‍दक एकटा महत्‍वपूर्ण सत्रक सेहो आयोजन भेल जइमे श्री रामचन्‍द्र पासवान, श्री बेचन ठाकुर, श्री कपि‍लेश्वर राउत, श्री कमलेश झा, श्री राजदेव मण्‍डल, श्री राम वि‍लास साहु, श्री उमेश नारायण कर्ण, श्री रामानन्‍द झा ‘रमण’, श्री शंभु सौरभ, श्री वीरेन्‍द्र यादव, श्री दुगानन्‍द मण्‍डल, श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल, श्री हेम नारायण साहु, डॉ शि‍वकुमार प्रसाद, श्री अरूणाभ सौरभ तथा हम माने उमेश मण्‍डल आ संयोजक श्री उमेश पासवान द्वारा ‘सगर राति‍ दीप जरय’ कथा गोष्‍ठीक दीर्घ यात्रा तथा उदेसपर सभागारमे उपस्‍थि‍त दूर-दूरसँ आएल कथाकार, समीक्षक-आलोचक एवं स्‍थानीय साहि‍त्‍य प्रेमीक समक्ष अपन-अपन मनतव्‍य रखलनि‍। सगर राति‍क ७५म आयोजनक पश्चात ७६म आयोजन जे श्री देवशंकर नवीन दि‍ल्‍लीमे करेबाक घोषना तँ केने रहथि‍ मुदा से नै करा साहि‍त्‍य अकादेमी द्वारा आयोजि‍त कथा गोष्‍ठीकेँ गनि नेने रहथि‍ जहू गि‍नतीकेँ सोझरौल गेल आ तँए ऐ गोष्‍ठीकेँ श्री उमेश पासवान अपन इमानक परि‍चए दैत ७९म आयोजन केलनि‍। ओ कहलनि‍ जे हम सभ अर्थात् वि‍देह मैथि‍ली साहि‍त्‍य आन्‍दोलनसँ जुड़ल मैथि‍ली वि‍कास प्रेमी छी। हम सभ ७७म, ७८म आयोजनक आयोजनकर्ताकेँ स्‍पष्‍ट रूपे कहैत एलि‍यनि‍ मुदा हमरा सबहक बात नहियेँ वि‍भारानी मानलनि‍ आ नहि‍येँ कमलेश झा मानलनि‍। मुदा से हमहूँ नै मानब आ सही-सही गि‍नती करब।” ऐ तरहेँ उक्‍त आयोजनकेँ ‘सगर राति‍ दीप जरय’क ७९मे बहुसंख्‍यक मनानुसार तँइ भेल, आयोजि‍त भेल। हलाँकि‍ दरभंगासँ आएल कथाकार श्री हीरेन्‍द्र कुमार झाक उकसेला पर रहुआसँ आएल श्री वि‍नय मोहन झा जगदीश, श्री दुखमोचन झा आ दरभंगेसँ आएल श्री अशोक कुमार मेहता, हीरेन्‍द्र झा जीक संग गोष्‍ठीक आरम्‍भक घंटा भरि‍क पछाति‍ चलि‍ जाइ गेला। जीवि‍ते नर्क (उमेश मण्‍डल), शि‍क्षाक महत (राम वि‍लास साहु), बि‍आहक पहि‍ल साल गि‍ड़ह (दुर्गानन्‍द मण्‍डल), बौका डाँड़ (लक्ष्‍मी दास), बंश (कपि‍लेश्वर राउत), टाटीक बाँस (राम देव प्रसाद मण्‍डल ‘झारूदार’), सगतोरनी (शि‍वकुमार मि‍श्र), पाथर, पि‍यक्कर, जोगार आ अंग्रेज नैना (अमीत मि‍श्र), संत आकि‍ चंठ (बेचन ठाकुर), अछोपक छाप (शम्‍भु सौरभ), नमोनाइटिस (उमेश नारायण कर्ण), द्वादशा (सुभाष चन्‍द्र ‘सि‍नेही’), राँड़ि‍न (रोशन कुमार ‘मैथि‍ल’), पँचवेदी (अखि‍लेश कुमार मण्‍डल), मुइलो बि‍सेबनि (जगदीश प्रसाद मण्‍डल) इत्‍यादि‍ महत्‍वपूर्ण लघु कथा/वि‍हन‍ कथाक पाठ भेल आ सत्रे-सत्र मौखि‍क टि‍प्‍पणी आ समीक्षा सेहो भेल। अछोपक छाप (शम्‍भु सौरभ) क समीक्षाक क्रममे श्री रमानन्द झा "रमण" कथावस्तुसँ अपन असहमति देखेलनि आ कहलनि- "नै आब ई गप नै अछि, एकटा गप एतै देखियौ, हम रमानन्द झा "रमण" श्रोत्रिय उच्च कुलक, आ कतऽ आएल छी! उमेश पासवानक दरबज्जापर!" श्री बेचन ठाकुर श्री रमानन्द झा "रमण"क नव-ब्राह्मणवादी सोचक विरोध करैत कहलनि- "लोकक मगजमे अखनो जाति-पाति भरल छै, मैलोरंगक प्रकाश झा तँए ने कहै छथि जे बेचन ठाकुर भरि दिन तँ केश काटैत रहैए, ई रंगमंच की करत!! श्रीधरमकेँ सेहो ई गप बूझल छन्हि।” माने मैथिली साहित्यकार, समीक्षक आ रंगमंचसँ जुड़ल ब्राह्मणवादी आ नव-ब्राह्म्णवादी सोचक लोककेँ देखैत ई कहल जा सकैए जे २१म शताब्दीमे श्री रमानन्द झा "रमण"क व्‍यान ई देखबैत अछि जे केना ओ उमेश पासवानक दरबज्जापर आबि उपकृत करबाक भावनासँ ग्रसित छथि। ऐ अवसरि‍पर वि‍देह मैथि‍ली पोथी प्रदर्शनी (२७म प्रदर्शनी) सेहो लागल रहए। अगि‍ला ८०म गोष्‍ठी सुपौल जि‍लाक निर्मलीमे हेबाक लेल उमेश मण्‍डलक प्रस्‍ताव आएल जे सर्वसम्मति‍सँ मान्‍य भऽ घोषित भेल। सभ कथाकार, कथा-साहि‍त्‍य प्रेमी एवं समीक्षक-आलोचकसँ आग्रह-अनुरोध-नि‍वेदन‍ जे ८०म सगर राति‍क कथा गोष्‍ठी- निर्मलीमे अपन गरि‍मामयी उपस्‍थि‍ति दि‍ऐ। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.आशीष अनचिन्हार- २ टा गजल ३.२.वीरू सोनकर तीन टा हिंदी कविता- मैथिली अनुवाद आशीष अनचिन्हार ३.३.बाबा बैद्यनाथ-आजाद गजल ३.४.जगदीश चन्द्र ठाकुर  अनिल- गजल आशीष अनचिन्हार- २ टा गजल गजल 1 किश्तेमे हँसबै किश्तेमे कनबै हम किश्तेमे जीबै किश्तेमे मरबै हम भोरसँ साँझसँ रातिसँ आइसँ की काल्हिसँ जहिया मगँबै खाली तोरे मँगबै हम अपने जौड़सँ बान्हल छानल रहलहुँ तँइ किछु जे कहबै तँ कहू किनका कहबै हम शब्द अहाँ बूझू की वाक्य अहाँ बूझू जीवन भरि खाली अपनाकेँ रचबै हम जइ दिन कहतै अनचिन्हार कियो हमरा ओही दिनकेँ थैहर थैहर बुझबै हम सभ पाँतिमे 222 + 222 + 222 + 22 मात्राक्रम अछि दू टा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि 2 झूठक बीजबिंदु एते टा साँचक बीजबिंदु एते टा देलक चोट फूल तँइ कहलहुँ काँटक बीजबिंदु एते टा जिंदा आदमीक संगे संग लाशक बीजबिंदु एते टा फैक्ट्रीकेँ लगा चला बुझलहुँ चासक बीजबिंदु एते टा खेतक पानि नापि कहलक ओ मेघक बीजबिंदु एते टा सभ पाँतिमे 2221 + 2122 + 2  मात्राक्रम अछि तेसर शेरक पहिल पाँतिक अंतिम लघु छूटक तौरपर लेल गेल अछि ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। वीरू सोनकर केर तीन टा हिंदी कविताक मैथिली भावानुवाद। अनुवादक आशीष अनचिन्हार 1 उपलब्धि धार अपन सभसँ बेसी जरूरी जात्रा पूरा केलक आ ओ अराम नै छल जखन सभ गाछ-बिरिछ रुकबाक मोन बनेलक योग छलै पहाड़क सन्यासक बदला जे धरतीमे गँहीर धरि चलि गेल छलै आ निशिबद्ता रचि रहल छलै सर्व-श्रेष्ठ गीतक बदला जिवनक पहिल जन्मौटी हँसी लेल बसातमे उठल हाथ अकाशकेँ केने छल प्रणाम समुद्र चौंकि उठल पहिल डेगक अवाजपर आ मोन बना लेलक जे सभ दिन नव रहब आ तइ लेल ओ लहरिकेँ चमड़ा बना सभ दिन हटा दैए पुरान चमड़ाकेँ एतेक होइतो कविता लेल बाँचल रहल जगह आ कविता अबिते कहलक बचबैत रह, बचैत रह एकरा संग कविता ईहो कहैत रहल बेर-बेर कि हरेक समयमे विश्व-विजेता घर नै पहुँचि पाबै छै मोनक हरेक चोटक इलाज कविताक लग देखि धरती एखनो धरि खुशीसँ नाचि रहल अछि अपन अइ एकमात्र उपलब्धिपर 2 नून हमर गेड़ुआ जे सोखने रहए नून से छीटल अछि पूरा धरतीपर आ हम अपन जुत्तासँ कहि रहल छी जे चलू ओ पूरा नून लाबए लेल बिना कोनो पहचानिक कोनो दुख नै रहत हमर खालपर आ जुत्तामे नुका कऽ आपस लऽ अनबै नूनकेँ आ रखबै ओहीमे घरमे जकर देबालपर हवा-बिहाड़िसँ टकराइत टाँगल अछि हमरे एकटा फोटो जकर रेखा साँपमे बदलि जाइत अछि आ पसरि जाइत अछि हमर ओछाएनपर कोनो एकटा बिंदुसँ शुरु फेर ओही बिंदुपर खत्म उदासीक संसारसँ अलग हम रचि रहल छी सात समुद्दरकेँ एकै डेगमे पार करबाक साहस 3 दिन बर्खक सभसँ गर्म दिनक भोरमे समयमे अखबार आएल देरीसँ देरसँ आएल रंग-बिरही समाद-समाचार नौकरीक प्रचार बला पन्नामे हम अपन संभावना नै देखलहुँ बिन उत्साहक दिनमे हम रहलहुँ असगरे ओइ योजना विहीन दिनक शुरूएमे हमरा सोचबाक छल जे रातिधरि सभ काज कऽ लेबाक छै आ हम काज करबाक बदला दिनेकेँ बुझाबए लगलहुँ आ दिन हमर हरेक बातमे हँ-हँ करैत बीति गेल रातिक अंतिम पहर भीजल अछि पछिला सर्दीक सुगंधसँ मुदा तैयो ई गर्मीक एकटा बेकार राति छल जे अपन अंतिम समयमे किछु सुगंध पसारलक एतेक होइतो ओ दिन अबस्से आस आएत भोरक चाहमे सर्दीक राति बला सुगंध सेहो आएत अखबार सेहो आ दिनकेँ तखन बुझाबए नै पड़त गुड  नाइट केर संग ओ कहत जे हम फेर आएब हमहूँ कहबै हँ ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। बाबा बैद्यनाथ आजाद गजल कतऽ गेलौं ये लग आबि जाउ ने एकबेर आबि पुनि भागि  जाउ ने प्रेमक मादे हमर फुटले  कपार  छै सपनेमे प्रेमगीत गाबि जाउ ने अहाँ बिना हम्मर करेजे फाटल छै स्नेहक ताग लऽ कऽ तागि जाउ ने अहाँ सन लोक एते निठुर तँ नहि हो एकबेर प्राण हमर मांगि  जाउ  ने चिन्तासँ मुक्त किये एत्ते निसभेर छी किये एतेक सूतल छी जागि जाउ ने गलती क्षमा करू माफी  मंगैत  छी सभ किछु बिसरि हृदय लागि जाउ ने एखनहु पड़ैछ मन देल अहँक प्रेमरस एकबेर चखा पुनि दागि जाउ  ने । ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। जगदीश चन्द्र ठाकुर  अनिल गजल 1 भोरे-भोरे     जागब सिखलौं आ अपनाकें ताकब सिखलौं आसन प्राणायामो     सिखलौं  तन-मन सुंदर राखब  सिखलौं सूगा सनके  बाजब  सिखलौं  आ कौआ सन भागब सिखलौं गायब  सिखलौं नाचब सिखलौं  आ रामायण     बांचब  सिखलौं आनब सिखलौं  रान्हब  सिखलौं  आ सभ जनमे    बांटब  सिखलौं सभ छी हमरे, हम छी सबहक  से सदिखन हम मानब सिखलौं जय- जय मिथिला, जय-जय भारत  जय-जय राधे -माधब   सिखलौं मात्रा-क्रम : 2222-2222 ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। बालानां कृते विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम भाषापाक प्रणव कुमार झा अलर - बलर मालिक – नौकर हम नै बुझी आटा चोकर हम नै बुझी खेल – बुझौअल में छी पारंगत अपन – अनकर हम नै  बुझी आमक गाछी दैड়बे करब खेतक छिमि तोड়बे करब कब्बै – मांगुर के लालच में बंसी ल क बैसबे करब बाबा गेलखिन हरवाही पर कक्का गेलखिन सुनवाही पर गर्मी छुट्टी में आम क गाछी में बैसल छी हम ओगरवाही पर बाबू के नै पसिन्द छैन लालू कहै छैथ ओ अछि बड्ड चालू आंगन में मां बडी काल सं पका रहल अछि सहजन-आलू हरवाहा सब हर जोतै अछि चरवाहा सब मुंह दूसै अछि बैट-बा̆ल ल क छौंडा सब चौका-छक्का खूब जडै় अछि । कंसार क भूंजा फ़ांक़बे करब एम्हर-आमहर झांक़बे करब दाय-माय के डेरबय खातिर कुकूर जेकाँ भुंकबे करब माँ के बात सेहो बुझब सोझा इस्कूल जेबे करब पानि पीब लेल मुदा दू मिनट चापा कल पर रुकबे करब कोठा पर हम सुतबे करब मना करय पर रूसबे करब इस्कूल क सबक याद कर लेल भोरका पहर उठबे करब पीसा कहै छैथ पायलट बनिह मामा कहै छथि डा̆क्टर बनिह जिनका जे कहबा क कहौथ ग हम जे चाहै छि से बनबे करब आर किछु बनी वा नै बनी निक मनुख हम बनबे करब (प्रणव कुमार झा, राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड, नई दिल्ली ) ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)2004-16. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽलेखकक नाम नैअछि ततऽसंपादकाधीन।विदेह- प्रथममैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम वि‍लास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)ggajendra@videha.comकेँमेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि।रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचयआ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेता, से आशा करै छी। रचनाक अंतमेटाइप रहए, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहलअछि।एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै। ऐ ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मीठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-16सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटारचनाआ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाकअनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतुggajendra@videha.co.inपर संपर्क करू। ऐ साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरीआ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल।५ जुलाई २००४ केँhttp://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ”जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सिद्धिरस्तु वि दे ह www.videha.co.inविदेहप्रथम मैथिलीपाक्षिक ई पत्रिकाwww.videha.com विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  'विदेह' २११ म अंक ०१ अक्टूबर २०१६ (वर्ष ९ मास १०६ अंक २११)मानुषीमिह संस्कृताम्ISSN 2229-547X VIDEHA

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