43 ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ (वर्ष १० मास १०९ अंक २१७) ऐ अंकमे अछि:- १. संपादकीय संदेश २.१.दिनेश यादव-नेपाल मे“मैथिली गीत-संगीतक अवस्था” २.२.प्रदीप पुष्प- सिनेहिया: जगा क' टीस हृदयमे केहेन कठोर भेलौं २.३.योगेन्द्र पाठक ‘वियोगी'- वन्दनाक स्वरूप २.४.चंद्रेश- अरिपन ३.१.इरा मल्लिक- शारदा सिन्हाजीक "विवाह गीत" ३.२.मनीष झा बौआभाइ- वर्तमान मैथिली गीत-संगीत हमरा नजरिसँ ३.३.१. डॉ. कैलाश कुमार मिश्र- मैथिली लोक गीत मे प्रोफेसरचण्डेश्वर झा केर सी. डी./डी. वी. केर प्रयोग २.गजेन्द्र ठाकुर- मैथिली सी.डी. एल्बम ३.४.जगदीश चंद्र ठाकुर अनिल- महाकवि चन्दा झा कृत रामायणक सुन्दरकाण्डक एलबम ४.बालानां कृते- गजेन्द्र ठाकुर- मैथिलीमे बाल सी.डी अल्बमक सर्वथा अभाव Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव Join official Videha facebook group. Join Videha googlegroups Follow Official VidehaTwitter to view regular Videha Live Broadcasts through Periscope. विदेह जालवृत्तक डिसकसन फोरमपर जाउ। संपादकीय विदेहक नवरूप दसम बर्खमे प्रवेश कऽ गेल अछि। विदेहक ऐ २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ (वर्ष १० मास १०९ अंक २१७)मे मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक प्रस्तुत अछि। दिनेश यादव नेपाल मे “मैथिली गीत-संगीतक अवस्था” पर लिखने छथि। संगमे प्रदीप पुष्प, योगेन्द्र पाठक ‘वियोगी' , चंद्रेश, इरा मल्लिक, मनीष झा बौआभाइ, जगदीश चंद्र ठाकुर अनिल, कैलाश कुमार मिश्र आदिक आलेख देल गेल अछि। मैथिलीक परम्परागत गीत-संगीत आ बाल गीत-नाटक आदिक उपलब्ध सी.डी. एल्बमक एकटा संकलन प्रस्तुत कएलगेल अछि। जेना की सभ गोटा जनै छी जे विदेह २०१५ मे तीन टा विशेषांक तीन साहित्यकारपर प्रकाशित केलक जकर मापदंड छल सालमे दूटा विशेषांक जीवित साहित्यकारक उपर रहत जइमे एकटा ६०-७० वा ओइसँ बेसी सालक साहित्यकार रहता तँ दोसर ४०-५० सालक ( मैथिली साहित्यकार मने भारत आ नेपाल दूनूक)। ऐ क्रममे अरविन्द ठाकुर ओ जगदीश चंद्र ठाकुर "अनिल"जीपर विशेषांक निकलि चुकल अछि। आगूक विशेषांक किनकापर हुअए तइ लेल एक मास पहिनेसँ पाठकक सुझाव माँगल गेल छल। पाठकक सुझाव आएल आ ओइ सुझाव अंतर्गत विदेहक किछु अगिला विशेषांक परमेश्वर कापड़ि, वीरेन्द्र मल्लिक आ कमला चौधरी पर रहत। हमर सबहक प्रयास रहत जे ई विशेषांक सभ २०१७ मे प्रकाशित हुअए मुदा ई रचनाक उपलब्धतापर निर्भर करत। मने रचनाक उपलब्धताक हिसाबसँ समए ऊपर-निच्चा भऽ सकैए। सभ गोटासँ आग्रह जे ओ अपन-अपन रचना ggajendra@videha.com पर पठा दी। विदेह सम्मान विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान १.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०१०-११ २०१० श्री गोविन्द झा (समग्र योगदान लेल) २०११ श्री रमानन्द रेणु (समग्र योगदान लेल) २.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११-१२ २०११ मूल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, कथा संग्रह) २०११ बाल साहित्य पुरस्कार- ले.क. मायानाथ झा (जकर नारी चतुर होइ, कथा संग्रह) २०११ युवा पुरस्कार- आनन्द कुमार झा (कलह, नाटक) २०१२ अनुवाद पुरस्कार- श्री रामलोचन ठाकुर- (पद्मानदीक माझी, बांग्ला- मानिक बंद्योपाध्याय, उपन्यास बांग्लासँ मैथिली अनुवाद) विदेह भाषा सम्मान २०१२-१३ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) 1.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार 2012 2012 श्री राजनन्दन लाल दास (समग्र योगदान लेल) 2.विदेह भाषा सम्मान २०१२-१३ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) २०१२ बाल साहित्य पुरस्कार - श्री जगदीश प्रसाद मण्डल केँ “तरेगन” बाल प्रेरक विहनि कथा संग्रह २०१२ मूल पुरस्कार - श्री राजदेव मण्डलकेँ "अम्बरा" (कविता संग्रह) लेल। 2012 युवा पुरस्कार- श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरीक “अर्चिस” (कविता संग्रह) 2013 अनुवाद पुरस्कार- श्री नरेश कुमार विकल "ययाति" (मराठी उपन्यास श्री विष्णु सखाराम खाण्डेकर) विदेह भाषा सम्मान २०१३-१४ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) २०१३ बाल साहित्य पुरस्कार – श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरी- “देवीजी” (बाल निबन्ध संग्रह) लेल। २०१३ मूल पुरस्कार - श्री बेचन ठाकुरकेँ "बेटीक अपमान आ छीनरदेवी" (नाटक संग्रह) लेल। २०१३ युवा पुरस्कार- श्री उमेश मण्डलकेँ “निश्तुकी” (कविता संग्रह)लेल। २०१४ अनुवाद पुरस्कार- श्री विनीत उत्पलकेँ “मोहनदास” (हिन्दी उपन्यास श्री उदय प्रकाश)क मैथिली अनुवाद लेल। विदेह भाषा सम्मान २०१४-२०१५ (समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान) २०१४ मूल पुरस्कार- श्री नन्द विलास राय (सखारी पेटारी- लघु कथा संग्रह) २०१४ बाल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (नै धारैए- बाल उपन्यास) २०१४ युवा पुरस्कार - श्री आशीष अनचिन्हार (अनचिन्हार आखर- गजल संग्रह) २०१५ अनुवाद पुरस्कार - श्री शम्भु कुमार सिंह ( पाखलो - तुकाराम रामा शेटक कोंकणी उपन्यासक मैथिली अनुवाद) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१२ अभिनय- मुख्य अभिनय , सुश्री शिल्पी कुमारी, उम्र- 17 पिता श्री लक्ष्मण झा श्री शोभा कान्त महतो, उम्र- 15 पिता- श्री रामअवतार महतो, हास्य-अभिनय सुश्री प्रियंका कुमारी, उम्र- 16, पिता- श्री वैद्यनाथ साह श्री दुर्गानंद ठाकुर, उम्र- 23, पिता- स्व. भरत ठाकुर नृत्य सुश्री सुलेखा कुमारी, उम्र- 16, पिता- श्री हरेराम यादव श्री अमीत रंजन, उम्र- 18, पिता- नागेश्वर कामत चित्रकला श्री पनकलाल मण्डल, उमेर- ३५, पिता- स्व. सुन्दर मण्डल, गाम छजना श्री रमेश कुमार भारती, उम्र- 23, पिता- श्री मोती मण्डल संगीत (हारमोनियम) श्री परमानन्द ठाकुर, उम्र- 30, पिता- श्री नथुनी ठाकुर संगीत (ढोलक) श्री बुलन राउत, उम्र- 45, पिता- स्व. चिल्टू राउत संगीत (रसनचौकी) श्री बहादुर राम, उम्र- 55, पिता- स्व. सरजुग राम शिल्पी-वस्तुकला श्री जगदीश मल्लिक,५० गाम- चनौरागंज मूर्ति-मृत्तिका कला श्री यदुनंदन पंडित, उम्र- 45, पिता- अशर्फी पंडित काष्ठ-कला श्री झमेली मुखिया,पिता स्व. मूंगालाल मुखिया, ५५, गाम- छजना किसानी-आत्मनिर्भर संस्कृति श्री लछमी दास, उमेर- ५०, पिता स्व. श्री फणी दास, गाम वेरमा विदेह मैथिली पत्रकारिता सम्मान -२०१२ श्री नवेन्दु कुमार झा नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१३ मुख्य अभिनय- (1) सुश्री आशा कुमारी सुपुत्री श्री रामावतार यादव, उमेर- १८, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) मो. समसाद आलम सुपुत्र मो. ईषा आलम, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (3) सुश्री अपर्णा कुमारी सुपुत्री श्री मनोज कुमार साहु, जन्म तिथि- १८-२-१९९८, पता- गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही,जिला- मधुबनी (बिहार) हास्य–अभिनय- (1) श्री ब्रह्मदवे पासवान उर्फ रामजानी पासवान सुपुत्र- स्व. लक्ष्मी पासवान, पता- गाम+पोस्ट- औरहा, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) टाॅसिफ आलम सुपुत्र मो. मुस्ताक आलम, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, जिला- मधुबनी (बिहार) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान (मांगनि खबास समग्र योगदान सम्मान) शास्त्रीय संगीत सह तानपुरा : श्री रामवृक्ष सिंह सुपुत्र श्री अनिरूद्ध सिंह, उमेर- ५६, गाम- फुलवरिया, पोस्ट- बाबूबरही, जिला- मधुबनी (बिहार) मांगनि खबास सम्मान: मिथिला लोक संस्कृति संरक्षण: श्री राम लखन साहु पे. स्व. खुशीलाल साहु, उमेर- ६५, पता, गाम- पकड़िया, पोस्ट- रतनसारा, अनुमंडल- फुलपरास (मधुबनी) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान (समग्र योगदान सम्मान): नृत्य - (1) श्री हरि नारायण मण्डल सुपुत्र- स्व. नन्दी मण्डल, उमेर- ५८, पता- गाम+पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) सुश्री संगीता कुमारी सुपुत्री श्री रामदेव पासवान, उमेर- १६, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, जिला- मधुबनी (बिहार) चित्रकला- (1) जय प्रकाश मण्डल सुपुत्र- श्री कुशेश्वर मण्डल, उमेर- ३५, पता- गाम- सनपतहा, पोस्ट– बौरहा, भाया- सरायगढ़, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री चन्दन कुमार मण्डल सुपुत्र श्री भोला मण्डल, पता- गाम- खड़गपुर, पोस्ट- बेलही, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) संप्रति, छात्र स्नातक अंतिम वर्ष, कला एवं शिल्प महाविद्यालय- पटना। हरिमुनियाँ / हारमोनियम (1) श्री महादेव साह सुपुत्र रामदेव साह, उमेर- ५८, गाम- बेलहा, वार्ड- नं. ०९, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री जागेश्वर प्रसाद राउत सुपुत्र स्व. रामस्वरूप राउत, उमेर ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) ढोलक/ ठेकैता/ ढोलकिया (1) श्री अनुप सदाय सुपुत्र स्व. , पता- गाम- तुलसियाही, पोस्ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री कल्लर राम सुपुत्र स्व. खट्टर राम, उमेर- ५०, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) रसनचौकी वादक- (1) वासुदेव राम सुपुत्र स्व. अनुप राम, गाम+पोस्ट- िनर्मली, वार्ड न. ०७ , जिला- सुपौल (बिहार) शिल्पी-वस्तुकला- (1) श्री बौकू मल्लिक सुपुत्र दरबारी मल्लिक, उमेर- ७०, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री राम विलास धरिकार सुपुत्र स्व. ठोढ़ाइ धरिकार, उमेर- ४०, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) मूर्तिकला-मृर्तिकार कला- (1) घूरन पंडित सुपुत्र- श्री मोलहू पंडित, पता- गाम+पोस्ट– बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री प्रभु पंडित सुपुत्र स्व. , पता- गाम+पोस्ट- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) काष्ठ-कला- (1) श्री जगदेव साहु सुपुत्र शनीचर साहु, उमेर- ३६, गाम- िनर्मली-पुरर्वास, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री योगेन्द्र ठाकुर सुपुत्र स्व. बुद्धू ठाकुर उमेर- ४५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) किसानी- आत्मनिर्भर संस्कृति- (1) श्री राम अवतार राउत सुपुत्र स्व. सुबध राउत, उमेर- ६६, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) (2) श्री रौशन यादव सुपुत्र स्व. कपिलेश्वर यादव, उमेर- ३५, गाम+पोस्ट– बनगामा, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) अल्हा/महराइ- (1) मो. जीबछ सुपुत्र मो. बिलट मरहूम, उमेर- ६५, पता- गाम- बसहा, पोस्ट- बड़हारा, भाया- अन्धराठाढ़ी, जिला- मधुबनी, पिन- ८४७४०१ जोगिरा- श्री बच्चन मण्डल सुपुत्र स्व. सीताराम मण्डल, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री रामदेव ठाकुर सुपुत्र स्व. जागेश्वर ठाकुर, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) पराती (प्रभाती) गौनिहार आ खजरी/ खौजरी वादक- (1) श्री सुकदेव साफी सुपुत्र श्री , पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) पराती (प्रभाती) गौनिहार - (अगहनसँ माघ-फागुन तक गाओल जाइत) (1) सुकदेव साफी सुपुत्र स्व. बाबूनाथ साफी, उमेर- ७५, पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) (2) लेल्हु दास सुपुत्र स्व. सनक मण्डल पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) झरनी- (1) मो. गुल हसन सुपुत्र अब्दुल रसीद मरहूम, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) (2) मो. रहमान साहब सुपुत्र...., उमेर- ५८, गाम- नरहिया, भाया- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) नाल वादक- (1) श्री जगत नारायण मण्डल सुपुत्र स्व. खुशीलाल मण्डल, उमेर- ४०, गाम+पोस्ट- ककरडोभ, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री देव नारायण यादव सुपुत्र श्री कुशुमलाल यादव, पता- गाम- बनरझुला, पोस्ट- अमही, थाना- घोघड़डीहा, जिला- मधुबनी (बिहार) गीतहारि/ लोक गीत- (1) श्रीमती फुदनी देवी पत्नी श्री रामफल मण्डल, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) (2) सुश्री सुविता कुमारी सुपुत्री श्री गंगाराम मण्डल, उमेर- १८, पता- गाम- मछधी, पोस्ट- बलियारि, भाया- झंझारपुर, जिला- मधुबनी (बिहार) खुरदक वादक- (1) श्री सीताराम राम सुपुत्र स्व. जंगल राम, उमेर- ६२, पता- गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री लक्ष्मी राम सुपुत्र स्व. पंचू मोची, उमेर- ७०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) काँरनेट- (1) श्री चन्दर राम सुपुत्र- स्व. जीतन राम, उमेर- ५०, पता- गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) मो. सुभान, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) बेन्जू वादक- (1) श्री राज कुमार महतो सुपुत्र स्व. लक्ष्मी महतो, उमेर- ४५, गाम- िनर्मली वार्ड नं. ०४, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री घुरन राम, उमेर- ४३, गाम+पोस्ट- बनगामा, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) भगैत गवैया- (1) श्री जीबछ यादव सुपुत्र स्व. रूपालाल यादव, उमेर- ८०, पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री शम्भु मण्डल सुपुत्र स्व. लखन मण्डल, पता- गाम- बढियाघाट-रसुआर, पोस्ट– मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) खिस्सकर- (खिस्सा कहैबला)- (1) श्री छुतहरू यादव उर्फ राजकुमार, सुपुत्र श्री राम खेलावन यादव, गाम- घोघरडिहा, पोस्ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जिला- सुपौल, पिन- ८४७४५२ (2) बैजनाथ मुखिया उर्फ टहल मुखिया- (2)सुपुत्र स्व. ढोंगाइ मुखिया, पता- गाम+पोस्ट- औरहा, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) मिथिला चित्रकला- (1) सुश्री मिथिलेश कुमारी सुपुत्री श्री रामदेव प्रसाद मण्डल ‘झारूदार’ पता- गाम- रसुआर, पोस्ट-– मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) (2) श्रीमती वीणा देवी पत्नी श्री दिलिप झा, उमेर- ३५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) खजरी/ खौजरी वादक- (2) श्री किशोरी दास सुपुत्र स्व. नेबैत मण्डल, पता- गाम- रसुआर, पोस्ट-– मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) तबला- श्री उपेन्द्र चौधरी सुपुत्र स्व. महावीर दास, उमेर- ५५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री देवनाथ यादव सुपुत्र स्व. सर्वजीत यादव, उमेर- ५०, गाम- झाँझपट्टी, पोस्ट- पीपराही, भाया- लदनियाँ, जिला- मधुबनी (बिहार) सारंगी- (घुना-मुना) (1) श्री पंची ठाकुर, गाम- पिपराही। झालि- (झलिबाह) (1) श्री कुन्दन कुमार कर्ण सुपुत्र श्री इन्द्र कुमार कर्ण पता- गाम- रेबाड़ी, पोस्ट- चौरामहरैल, थाना- झंझारपुर, जिला- मधुबनी, पिन- ८४७४०४ (2) श्री राम खेलावन राउत सुपुत्र स्व. कैलू राउत, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) बौसरी (बौसरी वादक) श्री रामचन्द्र प्रसाद मण्डल सुपुत्र श्री झोटन मण्डल, उमेर- ३०, बौसरी/बौसली/बासुरी बजबै छथि। पता- गाम- रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) श्री विभूति झा सुपुत्र स्व. कनटीर झा, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- कछुबी, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) लोक गाथा गायक श्री रविन्द्र यादव सुपुत्र सीताराम यादव, पता- गाम- तुलसियाही, पोस्ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) श्री पिचकुन सदाय सुपुत्र स्व. मेथर सदाय, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) मजिरा वादक (छोकटा झालि...) श्री रामपति मण्डल सुपुत्र स्व. अर्जुन मण्डल, पता- गाम- रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) मृदंग वादक- (1) श्री कपिलेश्वर दास सुपुत्र स्व. सुन्नर दास, उमेर- ७०, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री खखर सदाय सुपुत्र स्व. बंठा सदाय, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) तानपुरा सह भाव संगीत (1) श्री रामविलास यादव सुपुत्र स्व. दुखरन यादव, उमेर- ४८, गाम- सिमरा, पोस्ट- सांगि, भाया- घोघड़डीहा, थाना- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) तरसा/ तासा- श्री जोगेन्द्र राम सुपुत्र स्व. बिल्टू राम, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री राजेन्द्र राम सुपुत्र कालेश्वर राम, उमेर- ५८, गाम- मझौरा, पास्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) रमझालि/ कठझालि/ करताल वादक- श्री सैनी राम सुपुत्र स्व. ललित राम, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री जनक मण्डल सुपुत्र स्व. उचित मण्डल, उमेर- ६०, रमझालि/ कठझालि/ करताल वादक, १९७५ ई.सँ रमझालि बजबै छथि। पता- गाम- बढियाघाट/रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, जिला- सुपौल (बिहार) गुमगुमियाँ/ ग्रुम बाजा श्री परमेश्वर मण्डल सुपुत्र स्व. बिहारी मण्डल उमेर- ४१, १९८० ई.सँ गुमगुिमयाँ बजबै छथि। श्री जुगाय साफी सुपुत्र स्व. श्री श्रीचन्द्र साफी, उमेर- ७५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) डंका/ ढोल वादक श्री बदरी राम, उमेर- ५५, पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) श्री योगेन्द्र राम सुपुत्र स्व. बिल्टू राम, उमेर- ५५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) डंफा (होलीमे बजाओल जाइत...) श्री जग्रनाथ चौधरी उर्फ धियानी दास सुपुत्र स्व. महावीर दास, उमेर- ६५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर),जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री महेन्द्र पोद्दार, उमेर- ६५, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) नङेरा/ डिगरी- श्री राम प्रसाद राम सुपुत्र स्व. सरयुग मोची, उमेर- ५२, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 111 ८) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 १०) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १३) विदेह सम्मान विशेषाक- २००म अक १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १४) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आमंत्रित रचनाकारक टिप्पणीक शृंखला १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी VIDEHA 209th issue विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ Maithili Books can be purchased from: http://www.amazon.in/ For the first time Maithili books can be read on kindle e-readers. Buy Maithili Books in Kindle format (courtesy Videha) from amazon kindle stores, these e books are delivered worldwide wirelessly:- http://www.amazon.com/ अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। गजेन्द्र ठाकुर ggajendra@videha.com ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। २. गद्य २.१.दिनेश यादव-नेपाल मे“मैथिली गीत-संगीतक अवस्था” २.२.प्रदीप पुष्प- सिनेहिया: जगा क' टीस हृदयमे केहेन कठोर भेलौं २.३.योगेन्द्र पाठक ‘वियोगी'- वन्दनाक स्वरूप २.४.चंद्रेश- अरिपन ३.१.इरा मल्लिक- शारदा सिन्हाजीक "विवाह गीत" ३.२.मनीष झा बौआभाइ- वर्तमान मैथिली गीत-संगीत हमरा नजरिसँ ३.३.१. डॉ. कैलाश कुमार मिश्र- मैथिली लोक गीत मे प्रोफेसरचण्डेश्वर झा केर सी. डी./डी. वी. केर प्रयोग २.गजेन्द्र ठाकुर- मैथिली सी.डी. एल्बम ३.४.जगदीश चंद्र ठाकुर अनिल- महाकवि चन्दा झा कृत रामायणक सुन्दरकाण्डक एलबम ४.बालानां कृते- गजेन्द्र ठाकुर- मैथिलीमे बाल सी.डी अल्बमक सर्वथा अभाव दिनेश यादव नेपाल मे“मैथिली गीत-संगीतक अवस्था” १. उठू यौ मैथिल भेलैय फोर, चुनमुन चिरैया करैय शोर, कोशी कमला अमृत जलधारा, आलस छोडु कहे भुरुकुवा तारा ..... –विनित ठाकुर २. हम छी मैथिलबाबु, मेड इन मिथिला... –डिजे मैथिल ३. चल–चल रे अपन देश, स्वर्ग स सुन्दर अपन मधेश..... –कालीचरण वैठा नेपालक मिथिला क्षेत्र गीत-संगीत मे कतेक धनि अछि, तकर प्रमाण थिकैह यी उपर देल गेल तीन रचना । पहिल गीत मे समग्र मिथिलाबासी के उठबाक आग्रह अछि, दोसर मे पहिचान आ तेसर में अपन भूमि के बखान कयल गेल अछि । कोनो आन भाषा-भाषी से ई बेजोड सिर्जना कनिको दुबर नए अछि । ऐहन रचना कएनिहार स“ भरल–पुरल अछि नेपालक मिथिला क्षेत्र । गाम–गाम आ जन–जन के बोली एही“ मे समटल गेल अछि । त“ईयो मिथिला कुहरी काट्बाक बाध्य अछि । एकर कारण बहुतो अए, आ भ“ सकैत छैक । मिथिला क्षेत्र मे ‘देवराज’ सभहक कमी, ‘दैत्यराज’ आ ‘दानवराज’ सभ बढि गेला के कारण समस्या अछि । ‘भगवती’ नए ‘अग्गती’ सभ बड बेसी भ“ गेल छन्हिन, मिथिला क्षेत्र में । त“ई हरेक क्षेत्र में सम्पन्न रहितौ मिथिला हुक्कहुक्की ल“ रहल अछि । नेपालक मिथिला क्षेत्र मे टक्का के“ लेल बेसी आ मैथिली गीत-संगीत, साहित्य-संस्कृति आ कला-परम्पराक उन्नति आ प्रगतिक लेल कम काज भ“ रहल छैक । आजू मिथिलाक जन–कोकिलकवि विद्यापति किछु खास वर्ग, जाति आ धर्म विशेषक बैन (तन्खाह) कमेबाक माध्यम बनल अछि । बनिहारी सभ एतेक बेसी भ“ गेल अछि जे हुनका सभ के मात्र बैन चाही, आर किछु नए । एहेन गतिविधि नेपालक मिथिला क्षेत्र मे मात्र नए, भारतक मिथिला क्षेत्र मे सेहो ओतबे भेटत । एतेह विद्यापति के नाम पर करोड टाकाके“ अक्षयकोष खडा सरकार केने छए, मुदा नाताबाद, कृपाबाद, गुटबाद आ जातिबाद के कारण कोष स्थापना काले स“ विवाद मे फसल अछि । त“ई आब विद्यापति के नाम पर घोषणा होमेवाला पुरस्कार-पदक मे ग्रहण लागल बुझाएत अछि । पुरस्कार प्राप्त कएनिहार सभ के ‘मन–कोत’ भ“ जाए छन्हि, ओ सभ मन स“ पुरस्कार लेबाक अवस्था मे नए थिकैह । मिथिला रत्न, वरिष्ठ गायक एवं संगीतकार गुरुदेव कामत एहीं विषय पर निक प्रतिक्रिया देने छन्छि । ओ कहैथ छन्हि, ‘महाकवि विद्यापति के प्रख्याति आ बेजोड चिनारी गायन-गायक क्षेत्र स“ भेल रहैए । गायक सभ हुनक गीत गाबी–गाबी के हुनका चर्चा मे अनने रहन्हि । हुनक नाम मे स्थापना भेल पुरस्कार अखनधरि गायक आ संगीतकार के नय, साहित्यकार आ अनुवादक के मात्र भेटलइए । ई दुखद बात थिक ।’ कामत कहैथि छन्हि, ‘पा“च विद्या मे ७ वर्ष स प्रदान कयल जा रहल इ पुरस्कार स्थापना काल स विवाद मे अछि । हम सभ सक्रिय रुप स“ एही क्षेत्र मे वर्षौ स लागल छि , नए भेटल त नया“ पीढी के इ पुरस्कार भेटनाए मुस्किल अए ।’ विद्यापति के नाम भजेनाए असल मिथिलाप्रेमी के आब बन्द करै पडत । कम स कम आबो मिथिला गीत-संगीत मे दशकों लागत आ सक्रिय लोकन्हि के खोजि होबाक पक्ष मे ओ छथि । वरिष्ठ गायक कामत आगा कहैथि छन्हि जे किछु लोक पोखरी मे जन्मल जलकुम्भी जका बनि बसल अछि । कनिको हावा बहल त एही महार कात स ओही महार कात चलि जाएत अछि । एहा“ दुखद बात अछि । हुनक बात किनको बेजाय लागि सकैत छन्हि । मुदा वास्तम मे मिथिला क्षेत्र मे पाछा स“ पैर(खुट्टा) खिचनिहार सभहक कारण मैथिली गीत-संगीत के जतेक प्रगति होबाक चाही से नए भ रहल अछि । किछु स्वनामधारी ‘कलाकार’ सभ वर्षौवर्ष अही क्षेत्र मे लागल लोकन्हि सभ के छुत जका व्यवहार क“ रहल छन्हि । एहेन अवस्था मे बहुतो के मन खिन्न होनाए स्वाभाविक छए । एतह के मैथिली गीत-संगीत क्षेत्र मे मुठ्ठीभरी लोकनिक हालीमुहाली छए, ओ सभ के गरिब, दरिद्र आ कलुषित एवं संकिर्ण मानसिकताक कारण ‘कार्टेलिङ’ के स्थिति देखबा मे आबि गेल अछि । एक–दोसर के सम्मान त दुरक बात, पुछोताछो होनाए बर्जित जका भ गेल छैक । युवा पीढि सभ फेसनक लेल अहीं क्षेत्र के प्रवेश क“ रहल अछि , व्यवसायिक दिस किनको चिन्ता नए । सभ के सभ मैथिली भाषाक नाम पर अपन–अपन खेति मे लागल अछि । त“ई कोनो लोकविशेष बेसी काल धरि एही मे टिकबाक हिम्मत नए जुटा पाबि रहल अछि । अपना के ‘सुपरमेसी’ मानएवला लोकन्हि सभ के कारण यी क्षेत्र दिनानुदिन दरिद्र, निसहाय आ मसोमात आ मुहदुब्बरा के श्रेणी मे पहु“चल जा रहल अछि । एक कहबी अछि जे अपन सिर्जना के टक्का स“ तौलबाक प्रयास नए होबाक चाही । मुदा ई बात बुझत के ? दोसर बात, विवादास्पद व्यक्ति सभ स“ नेपालक मैथिली गीत-संगीत जकरल अछि । त“ई एकर उथान आ प्रगतिक धरातल कमजोर भ“ गेल छैक । एकेटा मनुस जे ‘जेटिए’ पद मे रही सरकारी सेवा क“ रहल छन्हि आ गीतकार, संगीतकार, नाटककार, विज्ञापनकार, गायक, पत्रकार, रेडियोकर्मी, लेखक, विश्लेषक, अधिकारकर्मी, अभियानकर्मी, संस्कृतिकर्मी, राजनीतिकर्मी, भाषाकर्मी, एनजीओकर्मी.......बनि मिथिलाक के नाम पर बनियागिरी क“ रहल अछि । अहिठाम ई कही दिई जे ओ हुनक बहुआयामिक प्रतिभा भ सकैत छन्हि , मुदा हुनक ‘सिन्डीकेट प्रथा’ अहिठाम बर्जित होनाए अति आवश्यक अछि । किएत त हुनक ई ‘दुलर्भ प्रतिभा’ मिथिला के गीत-संगीत के क्षय दिश उन्मुख क रहल छैक । मिथिला के ऐतिहासिक गौरव गाथा आ प्रतिष्ठा मे आ“च पहु“चा रहल छैक । प्रचार के लेल प्रचार मे जुटल लोक सभ ‘अलकत गगरी छलकत जाय’ से उपर नए उठि सकैति छैन्हि । त“ई आब कम से कम ई बनियागिरीक अन्त्य होमाक चाही । रेडियो मे अपने प्रस्तोता,अपने गायक आ अपने गीत बजोनाए जौ बन्द भ जाए त मिथिला सटसिन आ सुहगनगर रुप से उपर उठि जाएत । नेपालक मिथिला क्षेत्र सप्तरी मे जन्मनिहार उदितनारायण झा मैथिली गीत-संगीत स“ बेसी भारत मे हिन्दी गायक के रुप मे परिचित अछि । सिरहा के मुरलीधर मैथिलीक धरोहर थिकैह, मैथिली गीत-संगीत मे हुनक योगदान अतुलनीय छैक । मैथिली फिल्म स“ ल“के मिथिला कला-संस्कृति के जगेर्ना मे हुनक जोडा नए । मुदा ओहो मिथिला क्षेत्र मे पिछला समय देखल जा रहल गलत परिपाटी स दुखित छन्हि । किछु वर्ष पहिले काठमाण्डू के एक बेर भेट मे ओ कहने छलाह, ‘अपन माटीपानी के मौलिक पहिचान आ बोली जाधरि मिथिलाकर्मीक जूनुन नए बनत, मैथिली के विकास, प्रर्वधन, उन्नति आ प्रगति असम्भव अए । मिथिला मे नटवरलाल सभ बढि रहल अछि, एकरा रोकबाक दिस पहल जरुरी भ चुकल अछि ।’ एही बेरक विद्यापति पुरस्कारक लेल हुनकर नाम सेहो सिफारिस भेल । मुदा जे विद्या मे ओ कहियो काज नए केने रहन्हि ओई के लेल हुनका पुरस्कार देबाक निर्णय भेल । भाषा अनुवादक लेल हुनक नामक चयन कएल गेल । मुदा मुरलीधर मात्र एहन मिथिलापुत्र आ योद्धा निकलल जे लाख टका के ओ पुरस्कार प्रदान कएनिहार सभ के विरोध केलन्हि । अहिपारक मैथिली गीत-संगीत मे महत्वपूर्ण योगदान कएनिहार मे गुरुदेव कामत के नाम सबसे उपर अछि । ओ नेपालक शास्त्रिय संगीतक एक धरोहर थिकैह । मिथिला क्षेत्र के दुर दराज गाम मे जन्मि के नेपालक राजधानी मे अखन एक स्थापित कलाकार बनल अछि । बहुतो मिथिलाबासी के ओ अपन शिष्य बना के“ मैथिली गीत-संगीतक उथ्थान आ प्रगतिके अभियान मे जुट छन्हि । कामत काठमाण्डू मे गुरुकूल संगीत महाविद्यालय खोली बहुतो के संगीत आ गायन क्षेत्र मे अएबाक लेल निपुण बनबति दिक्षित केने अछि । हरेक वर्ष आ हरेक कार्यक्रम मे अपन माय के बोली मैथिली मे ओ गीत गेबेटा करैति छथि । तहिना नेपाली गीत-संगीत स“ अपना के स्थापित कएनिहार वरिष्ठ गायक रामा मण्डल के मैथिली भाषाक गायन मे बड बेसी योगदान अछि । हुनक हमेसा प्रयास रहैत छैक जे मैथिली गीत-संगीत आगा बढए, मुदा किछु मिथिला अभियान हुनका साथ छुत के व्यवहार करैति छन्हि । आधा दर्जन स बेसी मैथिली सिडी-एलबम मे हुनक आबाज लोकप्रिय मात्र नए संग्रहणीय छन्हि । उपर उल्लेख कयल गेल लोकन्हि सभ व्यावसायिक रुप स एही क्षेत्र मे लागि अपन मु“हक लेल माड(रोटी) जुटा रहल अछि । अहीं पार मैथिली गीत-संगीतक श्रीबृद्धि करबा मे गायक हरिशंकर चौधरी, कमल मण्डल, सन्तोष कुमार, अभास लाभक योगदानक चर्चा नय केनाए अन्याय होइत । एही क्षेत्र मे नवप्रवेशी सभ सेहो पंक्तिबद्ध भ टाड अछि । भागवत मण्डल, कैलाश झा, अन्जू यादव, अन्जली पटेल, रञ्जित शर्मा, संजय यादव, अरुण बिजया, तनुजा चौरसिया, वीरेन्द्र झा सनक गायक सभ नेपालक मैथिली गीत-संगीत क्षेत्र मे बेजोड योगदान क रहल अछि । ओना त धिरेन्द्र आ रुपा सेहो गायन क्षेत्र मे अए, मुदा हुनक गायन ‘स्वप्रचार’ अभियानक कारण मात्र चर्चा मे अछि । पुरान लोक होइतो ई दुइ गोटा के गीत-संगीत घर–घर के नए बनि सकल अछि । हेल्लो मिथिला कार्यक्रम आ हुनक चिनह जानल लोकन्हि के एफएम बाहेक मे हिनका सभहक गीत नहिए के बराबर बजाओल जाएत छैक । अही पारक मैथिली गीत-संगीत के विषय मे चर्चित गीत एवं संगीतकार कमल मण्डल के कहबी अए जे ई क्षेत्र स्थिति सन्तोषजन नए छैक । नवप्रवेशी के प्रोत्साहन कएनिहार लोकन्हि के बड अभाव छैक । गीत-संगीत के नशा लागल लोक सभ कोनो धरानी एही क्षेत्र मे प्रवेश त करैत छैक मुदा बेसी दिन टिक नए पायब रहल अछि । कारण रेडियो-टेलिभिजनलगायतक के संचार माध्यम मे स्थानीय कलाकार सभ प्रस्तोता के रुप मे रहला स ओ सभ अपन आ चिन्ह्ल लोकन्हि के मात्र स्थान दैति छथि । ओ कहथि छन्हि, ‘मैथिली भाषा क्षेत्र मे धमाधम रेकर्डिङ स्टुडियो सभ खुजि रहल अछि । एकरा सकारात्मक रुपमा ल सकैत छि । अही“ क्षेत्रक भविष्य इजोत अछि । नेपालक मिथिला भूमि मे“ मैथिली साहित्यकार, गीतकारक सेहो कमी नए अछि । हुनका सभक योगदान मिथिलाक अनुपम पु“जि कही सकैत छि । कालिकान्त झा ‘तृषित’, विनित ठाकुर, सागरवीर कडारी, अर्जून गुप्ता, डिजे मैथिल,जेएन झा, कालीचरण वैठा सभ के मैथिली गीत रचनामे अतुलनीय योगदान रहलैए आ अइछे । हिनका सभहक गीत में जन–जन के जिभक आबाज सुनल जाएत छैक । ओना त मैथिली गीतकार मे आन लोक सेहो छैथि । ओही मे प्रमुख नाम राजेन्द्र विमल, अशोक दत्त, सुनिल मल्लिक आ धिरेन्द्र प्रेमर्षी के ल“ सकैत छि । मुदा ओ सभ मैथिली भाषी के लेल कम सरकारी आ गैरसरकारी संस्था के लेल बड बेसी गीत लिखैत छन्हि । ‘पैसा फेकु आ तमासा देखु’ बला भूमिका मे अही मे स“ किछु गोटा के ल सकैत छि । अही म स एकटा मान्यवर मिथिला क्षेत्र मे रही के नेपाली भाषा-साहित्यक मे योगदान करबाक लेल लाख टका के पुरस्कार सेहो ग्रहण क चुलक अछि । रेडियो मे हिनका सभहक पकड भेला के कारण हुन सभक बजाओल जायत अछि मुदा मैथिलीजन के मन स“ गुनगुनाय के कोटी मे नए रहैत छैक । युवा गीतकार विनित ठाकुर मिथिला क्षेत्रक एक संभावनायुक्त आ प्रतिभाशाली हस्ताक्षर अए । हुनक गीत सभ ‘इभर ग्रीन’ आ मन के झक्झोरै बाला कोटी मे रहैत छन्हि । हुनक कहब अछि जे नव–नव गायक सभ के इन्ट्री के बाबजूदो नेपाल मे मैथिली गीत-संगीतक अवस्था सन्तोषजनक नए छैक । किएक त बिना प्रशिक्षण के ओ सभ अहीं क्षेत्र मे प्रवेश कर रहल छन्हि । विचौलिया सभ स नवप्रवेशी तंग भरहल अछि, कम पाई मे एलबम आ गीत-संगीत उपलब्ध करा देब कही के ठगि सेहो भ रहल छैक । त“ई नव शब्द आ गीतक विन्यास मे कमजोरी भेला के कारण अश्लिल सब्द सभ सेहो पसरल जा रहल अछि । मैथिली गीत-संगीतक मौलिक टेस्ट आ फ्लेभर मे हिन्दी, भोजपुरी आ अंग्रेजी भाषा के प्रभाव सेहो बहुत बढी गेल छैक । त“ई मैथिली गीत-संगीत संक्रमण अवस्था मे छैक । ठाकुर आगा कहैथि छन्नि, ‘उपर उठेबाक लेल मिडिया के महत्वपूर्ण हात होयत छैक । मुदा मिडिया मे मैथिली के नाम पर किछु गलत व्यक्ति के पहु“च भेला स“ समस्या मे पडल अछि । व्यक्तिबादी सोच हाबी भेला के कारण अपने गीत-संगीत के प्रचार मे किछु मनुस लागल रहैत छैक । एफएम और केन्द्रिय रेडियो मे काज कएनिहार सभ ‘हमही सबा सेर छी, अउर सभ किछु नए’ तेहेन अभियान मे छथि । केन्द्रक ई रोग नेपालक तराई–मधेस मे संचालन भ“ रहल रेडियो सभ मे से हो पैसरी गेल अछि, देखल जा रहल अछि । अधिकांश स्थानीय एफएम रेडियोमे ओतएह के गायक सभ प्रस्तोता भेला के कारण अपन गीत-संगीत बाहेक दोसर के बजेनाए मुनासिब नए मानैत छैक ।’ एक मुखी हैकम के कारण मैथिली गीत-संगीत के विकास मे समस्या छैक । त“ई एकरा तोडबाक दिस सबगोटा अग्रसर हउ । ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। प्रदीप पुष्प सिनेहिया: जगा क' टीस हृदयमे केहेन कठोर भेलौं मैथिली गीत -संगीतमे कुंज बिहारी मिश्रजी खूब परिचित नाम छथि।हिनक बहुतो रास गीत बेस लोकप्रिय छन्हि। एतय हिनक 'सिनेहिया' नामक अलबमक गीत-संगीतक समीक्षा कयल जा रहल अछि। अलबममे कुल सात गोट गीत संकलित अछि।गंगा कैसेटसँ निकलल एहि अलबमकेँ गीत-गजलक श्रेणीमे राखल गेल अछि मुदा सब रूपे ई गीतक संग्रह अछि गजलक नहिं। गीतकारक नाओ कभरपर स्पष्ट नहिं देखबामे आयल। स्वर मिथिला रत्न कुंज बिहारी मिश्राक छन्हि।गीतक क्रम हिसाबे चर्चा करब बेसी नीक हैत- १) गोरी सजना सिनेहिया जगा त' दिय- कैसेटक पहिल गीत हेबाक कारणे ई खूब झमकौआ मैथिली गीत अछि।कुंज बिहारीजी एहिमे प्रेम आ सिंगार रसमे ओत -प्रोत भाव प्रकट केने छथि।गायकीमे हुनक जे अपन खास स्टाइल छन्हि तकर नीक उपयोग केने छथि।गीतक शब्द शुरूमे सामान्य जनक लेल आसान अछि मुदा अंतरामे ई कहब जे' अहाँ आभा बनल छी तिमिर जालमे,रश्मि सूर्यक अपन ई देखा त' दिय' कने कठिन भ' गेल अछि।स्थायीक हिसाबे कने मुश्किल लगैत अछि ।संगीत सामान्य लोकगीत स्तरक अछि।की बोर्ड आ ढोलकसँ रेकर्ड गीतमे कोनो वाद्य सजीव बजाओल नहिं गेल अछि। जेना मिश्राजीक गायन अछि ताहि तरहक संगीतक निर्माण नहिं कयल गेल अछि। हँ, झमकौआ जरूर लगैए। २)सभक पाहुन शरीफा लगौलन्हि-मूलत: ई हास्य गीत अछि। मिथिलाक परम्परा रहल अछि पाहुन संग हास- परिहासक।गीतक उद्देश्य मात्र मनोरंजन अछि।गीतक स्थायी आ अंतरामे समान मीटर राखल गेल अछि।मजकिया गीत हेबा कारणे हाय हाय कहब कने बेसी आनंद दैत अछि।गीतकार हास्यक उत्पतिमे कने बेसी अगुता गेल छथि तें शुरूमे त ठीक मुदा ई कहब 'सभक पाहुन ......ह्वाइट लेबल पियेलन्हि,ग्रीन लेबल पियेलन्हि,सिगरेट पियेलन्हि,हमर पाहुन एगो बीड़ी पियेलन्हि' आन अंतराक अपेक्षा ओतेक प्रभावी नहिं लगैत अछि। ३) एक मिसिया जे मुस्किया देलियै-ई बहुत पुरान गीत अछि। बहुतोक लेल गजल कहाओत मुदा गजल नइ अछि, गजलनुमा कहि सकैत छी। ई रोमांससँ सराबोर प्रेमीक उद्गार अछि।कुंज बिहारीजीक गायन नीक अछि। स्थायीक पहिल पाँतीमे गायक वेरायटी देबाक नीक प्रयास केने छथि जाहिसँ हेमकांतजीक गाओल यैह गीतसँ फूट लागए मुदा आगू फेर वैह भास आबि जाइत अछि।आलाप गुलाम अलीक प्रसिद्ध ' वो कैसी पागल लड़की थी' सँ मिलैत जुलैत अछि।आरंभमे पिआनो बजाओल गेल अछि मुदा बादमे फेर वैह सामान्य संगति। हँ हारमोनियम जरूर ठाम ठाम पर सुनबामे अबैए।दोसर आ तेसर अंतरामे बिहुँसैत शब्दक रिपीट होयब किछु खटकैए । गायक ओना शुद्ध उच्चारणक नीक आग्रही छथि मुदा एक ठाम दोष बुझना गेल _मुस्किया देलियै मे। टेम्पो आओर पीच कम्म क' गीतकें और प्रभावी बनाओल जा सकैत छल मुदा ई सत्य जे झमकौआ ऩहिं भ' सकितय। ४) हम त' छी परदेसमे गाममे कानैत हेतै चान- ई एगो पैरोडी थिक । मूल गायक जगजीत सिंह छथि । आ गीत अछि- देश में निकला होगा चाँद। पैरोडी करबामे गीतकार गीतकें परदेसी कमौआक जीवनक चित्र बना उपस्थित केने छथि। एगो दूर देशमे नौकरी चाकरी करय बला लोकक नीक चित्र अछि गीतमे।रोजगारक समस्या मिथिलामे सब दिन रहल अछि आ परदेसीक दुख - विरह अदौसँ गाओल सुनल जाइत रहल अछि। जगजीत सिंह अपन गायनमे स्वरक माधुर्य आ भावक पूरा ध्यान रखने छथि आ गुनगुनाक' गायन हुनक विशेषता अछि मुदा कुंजबिहारी जी एकरा लोकगीत बना गओने छथि। संगीतमे कोनो बेसी प्रयोग नहिं कहल जाय, हँ एकास्टिक बेंजोसँ मूल गीतक पीस बजाओल गेल अछि। ५) नैनसँ नैन मिलल नशा बेजोड़ भेलै- ई अलबमक सबसँ उम्दा गीत अछि । प्रेममे मातल प्रेमीक मनोदशाक चित्र। गजले जकाँ मधुर भाव आ शब्दक संयोग अछि मुदा व्याकरणक कमी हेबा कारणे ई गीते कहाओत।कंठक प्रयोग, अदायगी आ सुर तालक हिसाबे सुन्दर प्रस्तुति मुदा वाद्य यंत्र सामान्ये लोकगीत जकाँ बजाओल गेल अछि जे खटकैत अछि। ६) भुतिया गेलौं हम पीबैते- पीबैते - गीत रचना आ संगीत निर्माण दुनू हिसाबे ई आन गीत सभक तुलनामे कमजोर बनल अछि । गीतकार कखनो निराश भेल प्रेमी लगै छथि त' कखनो प्रेममे डूबल रसिकजन।हुनक कहबाक अभीष्ट पूरा देखार नहिं भ' सकल अछि। बिम्बक निर्माण स्पष्ट नहिं हेबाक कारणे गीत सुनलो बाद एकर प्रयोजन नहिं पता चलैत अछि ।सुनबा लेल एकमात्र चीज गायकक स्वर पर पकड़ अछि जे श्रोताकेँ किछु सीमा धरि रोकि सकैत अछि। संगीत आने गीत जकाँ काम चलाऊ अछि। संगीतकार एहि पाछू समय गमाएब उचित नहिं बुझने छथि। ७)नव कनियाँ जकाँ लगै छी अहाँ- अलबमक आखिरमे ई एगो मधुर गीत राखल गेल अछि।गीतक लय आ ताल बहुत हद धरि कव्वालीक आभास करबैत अछि। हँ गायक संगे कोरस नहिं अछि से किछु खटकैत रहैए। शब्दमे जेना स्थायी पर मेहनति कयल गेल अछि तेना अंतरा पर नहिं कयल गेल अछि। बुझाइत अछि जे मुखड़ा रचला बाद गीतकार किछु हड़बड़ा गेलाह।'अहाँ एक लाजबाब नारी छी,प्रेमी हमहूँ निपट अनाड़ी छी' सुनला बाद लगैए जे ई कोनो टीन एज लव होई मुदा स्थायी हिसाबे प्रौढ प्रेमीक मनोदशा थिक' नव कनियाँ जकाँ लगैए छी अहाँ'। ओना गीत सुनबामे कर्णप्रिय अछि तकर कारण गायकी नीक अछि । एहि तरहें अलबम ' सिनेहिया' लोकगीतक प्रस्तुति अछि। गंगा कैसेटक आने प्रस्तुति जकाँ की बोर्ड आ ढोलक संगहि पैडक संयोजनमे बनल।इन्ट्रो आ एम टू समान अछि जे चालू लगैए। जाहि गीतमे तबला लगबाक चाही ओतहु ढोलक बाजब बजटकेँ सीमा दिस इशारा करैत अछि। बाँसुरीक कमी स्पष्ट देखबामे अबैए। नीक होइत जे आनो आनो वाद्य सब आरिजनल बजाओल जाइत। अलबम मैथिली गजल प्रेमीकेँ ई सनेश दैत अछि- जगाक' टीस हृदयमे केहेन कठोर भेलौं। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। योगेन्द्र पाठक ‘वियोगी' वन्दनाक स्वरूप वर्तमान मे मिथिला क्षेत्र अपरिभाषित अछि। अपना अपना हिसाबें लोक एकर परिभाषा बनबैत अछि, पुरान कृति सब सॅं भौगोलिक सीमा उद्धरित करैत अछि। राजनीतिक कुचक्र तेहन सन बनलैक जे जेना परोसियाक आड़ि लोक काटि कए अपना खेत मे मिला लैत अछि तहिना एकरा लेल होमए लगलैक आ तखन एकर सीमा छोट होमए लगलैक। एहन स्थिति मे मिथिलाक लेल कोनो राष्ट्रगान ताकब जरूर कठिन काज छैक। तथापि किछु उत्साही संस्था आ कार्यकर्ता लोकनि विद्यापति लिखित भगवती वन्दना “जय जय भैरवि...” कें आगू बढ़ौलनि। प्रचार भेल जे कोनो कार्यक्रमक प्रारम्भ मे भगवती वन्दना जरूर गाओल जाए आ सब गोटे आदरभाव देखबैत ठाढ भs जाइ। ई प्रथा कतए आ कहिया शुरू भेलैक से हमरा ज्ञात नहि अछि। मुदा हमरा जे बात कहबाक अछि तकरा लेल ई जरूरी नहि। हम मानि लैत छी जे ई नीक बात भेल आ आशा करैत छी जे भगवती वन्दना सबकें पसिन्न परतनि। असली प्रश्न तकर बादे उठैत अछि – एहि वन्दना कें गाओल कोना जाए ? हम गीत संगीत शास्त्रक कोनो ज्ञान नहि रखैत छी आ जे किछु कहब से मात्र स्रोताक अनुभवक आधार पर। मैथिली कार्यक्रम मे हम किछुए दिन सॅं भाग लs रहल छी तें हमर अनुभव बहुत छोट अछि मुदा एतबे मे ई जरूर देखल जे एक ध्रुव पर कतहु कोनो ख्यातिप्राप्त गवैया हलहली सॅं युक्त भास पर रुकिरुकि कए गबैत अनेरे गीत कें बेर बेर तीरैत रहैत भेट्लाह तs दोसर ध्रुव पर कतहु अन्यत्र कोनो एहन बच्चा गीत गओलक जकरा ने पूरा वन्दना रटल छलैक आ ने ओकरा सामने गीत लीखल कागत छलैक। बेसी ठाम जकरा जेना मोन होइत छैक गाबि लैत अछि। एहन स्थिति मे ठाढ़ भेल लोकक की कर्तव्य ? सहभागी बनए कि मात्र शोक प्रस्तावक स्थिति बला मौन धारण कएने रहए ? सहभागी बनि नहि सकैत अछि कारण लय बूझल नहि रहैत छैक। स्थिति बेसी कष्टकर भs जाइत छैक जखन हलहली आ गीत तीरबाक क्रम मे अत्यधिक समय लागि जाइत छैक। सहभागी नहि रहला सॅं उचिते प्रतीक्षाक समय अखरs लगैत छैक। आ यदि कोनो बच्चा गलतीए गाबि रहल अछि तखन तs आरो खराप लगैत छैक। ओना तs कहबी छैक जे पूजा आ प्रार्थनाक कोनो निश्चित विधि नहि होइत छैक मुदा राष्ट्रगानक सम्बन्ध मे किछु मानक जरूर रहक चाही। एही दृष्टिकोणें “जन गन मन ...” बला गीतक एकटा मानक लय भास बनलैक जाहि मे कोनो तरहक हलहली आ कि पाँती कें दोहरा कए तीरबाक प्रावधान नहि रहलैक। फल ई भेलैक जे कश्मीर सॅं केरल आ अरुणाचल सॅं राजस्थान तक मिलिट्री सॅं लs कए छोट इसकुलिया बच्चा तक सब लोक एके भास मे गीत सिखलक आ जखन राष्ट्रगान होइत छैक तखन देखनहि हेबैक जे अधिकांशतः लोक स्वतः गीत गाबs लगैत अछि, ओकरा व्यतिक्रमक कोनो डर नहि रहैत छैक। नीक कोरस गान अनेरे प्रस्तुत भs जाइत छैक। की “जय जय भैरवि...” वन्दनाक एहन प्रस्तुति सम्भव नहि छैक ? जरूर छैक। एहि सम्बन्ध मे हम अपन अनुभव कहs चाहैत छी। पछिला शताब्दीक पचास--साठिक दशक के आसपास जे व्यक्ति मधेपुर हाइ स्कूलक छात्रावास मे रहल होएताह तिनका नीक जकाँ स्मरण हेतनि जे विद्यापतिक ई वन्दना छात्रावास मे प्रातःकाल सब बच्चा गबैत छल, ई अनिवार्य छलैक। ओहि गान लेल एकटा सरल भास बनल छलैक, कोना बनलैक, के बनौलनि से हमरा नहि बूझल अछि कारण ई परम्परा हमरा समय सॅं पूर्वहिं सॅं चल अबैत छलैक। मुदा एतेक जरूर छलैक जे ओ लय बहुत सुन्दर आ सरल छलैक आ सब बच्चा गाबि लैत छल। ई विद्यालयक प्रार्थना नहि, छात्रावासक प्रातःकालीन प्रार्थना छलैक। तहिना सायंकालीन प्रार्थना छलैक गीता सॅं उद्धरित अंश “त्वमादि देवः पुरुषः पुराणः .....”। एकरो लय भास सरल आ आकर्षक छलैक आ कोनो बच्चा कें गेबा मे दिक्कत नहि होइत छलैक। हम एखनहु ओहि लय मे ई वन्दना जखन तखन गबैत रहैत छी। ईहो सोचब जे मधेपुर स्कूल एकमात्र एहन जगह छल जतए ई प्रार्थना कराओल जाइत छलैक, सम्भव नहि लगैत अछि। जरूर आनो आन स्कूल मे ई प्रथा रहल हेतैक, नीक प्रथाक नकल हेबे करैत छैक। भs सकैत अछि मधेपुर स्कूलक शिक्षक लोकनि अपनहि एहन निर्णय लेलनि अथवा कतहु आनठाम सॅं नकल केलनि। ईहो सम्भव जे मधेपुरेक देखादेखी अन्यत्र एहन प्रार्थना शुरू कएल गेल। जे छात्र एतुका छात्रावस मे रहि पढलनि आ बाद मे आन ठाम शिक्षक भेलाह हुनको इच्छा भेले हेतनि जे एहन प्रार्थना अपना स्कूल मे शुरू कराबी। एवं प्रकारें हमरा बुझने जरूर बहुत रास स्कूल रहल होएत जतए सरल लय मे ई प्रार्थना गाओल जाइल छल होएत। जखन कोनो गीत संगीतक नामी कलाकार गाजा बाजा लs कए राष्ट्रगान “जन गन मन ...” गबैत छथि तखनहु हुनका ई विकल्प नहि रहैत छनि जे अपना हिसाबें ओकर लय बनाबथि। एहि गान लेल हुनका अपन प्रतिभा प्रदर्शित करबाक अवसर नहि भेटैत छनि। बाजा सॅं निःसृत धुन ओएह होइत छैक जे लोक कें सिखले छैक। “जय जय भैरवि ....” वन्दनाक रूप मे सरल छैक, बहुत पैघ सेहो नहि छैक आ यदि लोक कनिको परिश्रम करए तs निश्चिते सीख लेत। यदि हम सब इच्छा रखैत छी जे विद्यापति लिखित वन्दना सर्वमान्य होअए तs पहिल शर्त होएत जे एकर एकटा सरल लय बनाओल जाए। ई काज सिद्धहस्त कलाकारे कs सकैत छथि। हमर लिखबाक प्रयोजन एतबे जे एहन मैथिल कलाकार लोकनि अपना मे मिल कए एहि विषय पर विमर्श करैत एहि वन्दनाक लय बनाबथु आ जे कोनो लय बनि जाइ तकरा सब गोटे सीख ली, ओकर अनुसरण करी। जहिना “जनगन मन ....” गबैत काल लोक रुकैत नहि अछि तहिना हमरा सब कें ईहो ध्यान राखs पड़त जे नव लय मे रुकबाक अथवा कोनो पाँती कें टेक देबाक (दोहरेबाक) प्रावधान नहि रहैक। तखने कोनो आयोजन मे जन साधारण ठाढ़ भs कए वन्दना मे सहभागी भs सकत आ लोक कें ठाढ़ होएब अखरतै नहि। आइ कालि यूट्यूबक जमाना मे गीतक लय कें प्रसारित करब कठिन काज नहि छैक। आशा करी जे विद्वान मैथिल समाज एहि प्रश्न पर सकारात्मक विचार सॅं ध्यान दैत आगू बढ़ताह। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। चंद्रेश अरिपन क प्रस्तुति (नओ गोट बिबिध गीतक भिडियो एल्बम) इतिहासक हेतु चर्या गीतमे मैथिलीक अस्तित्वपर जतेक गुमान करी, वास्तवमे मैथिली गीतक स्वरुप चौदह्म शताब्दीक वर्णरत्नाकरक रचयिता कविशेखर ज्योतिरीश्वर ठाकुरक नाट्य रचना धूर्त समागममे प्रयुक्त भेल गीत सँ देखार भेल जकरा विश्व स्तर पर चर्चित प्रसारित कयलनि महाकवि विद्यापति । एहि बीच बहुतो गीतकार अएलाह , स्थापित भेलाह । लोक गायनक संग आधुनिक गीत संगीतक जोड़ चलैत रहल । अझुका समयमे भोजपुरी गीतक चलती सँ प्रभावित भऽ किछु मैथिलीयोक गीतकार झमकौआ गीतपर भसिया रहल छथि । हँ, मैथिली गीतकेँ स्वच्छ आ प्रतिष्ठित रुपमे स्थापित करबाक काज रविन्द्र महेन्द्रक जोडी कयलनि जे एक दशक धरि तँ तहलको मचौने रहल । आब त राँक स्टारक युगमे मैथिलीक मधुर गीत कतेककेँ पचतनि । तथापि लिखनिहारक कलम एखनो संयमित आ मर्यादित रहैत मैथिली गीतक उँचाइकेँ स्थापित करबामे लागल अछि । लौले सही नेनामे (प्रायः १३-१४ वर्षमे) राम भरोस कापडि़ भ्रमर गीत लिख लगलाह । जनकपुरक रेलवे स्टेशनपर काँखमे झोरा लटकौने, हाथमे अठपेजिया गीतक पर्ची लेने महिनाथपुर दिशक कोनो पंडितजीकेँ गीत गाबि गाबि ओ पर्चीनुमा किताब बेचैत देखि गीत लिखबाक मोन भेलैन आ तेहने सन गीत लिखि जनकपुरक तत्कालीन हिमाली छापाखानामे छपौलनि । गाममे एकटा दोकानमे बेचबाक हेतु देलखिन आ किछु ओहु रेलवे टिसनबला गबैयाकेँ । बस, गीत लिखबाक यात्राक शुरुआत भेल से आइधरि जारी अछि । समाजिक मर्यादाके भीतर लिखल गीतसभ पत्र पत्रिकामे छपैत रहैत छन्हि – संग्रहोमे आएल छन्हि । तखन मंचपर ततेक नहि जा सकल अछि । आ मंचक लेल चहटगर गीतक मांग प्रायः एकर बाधा रहल । से एक बेर भेलनि । ‘सीता’ नेपाली फिल्मक हेतु एकटा होरी गीत लिखबाक आग्रह कयलकनि अशोक शर्मा । लिखि पठौलनि । मुदा शम्भुजीत बाँसकोटाकेँ नहि अरघलैक ओकर साधु शब्दसभ । हारि कऽ दू अर्थि गीत लिखऽ पडलनि । ‘होरी है, होरी है, होरी है, आजु जनकपुरमे होरी है । कहबाक जरुरति नहि –ओहि वर्ष नेपाली फिल्मी गीतक समीक्षा प्रकाशित भेल तँ दश गोट श्रेष्ठ आ चर्चित गीतमे एकरा सामेल कएल गेल छलैक । ई छैक माया नगरीक माया आ रंग ताल । अरिपनमे की अछि ! कयक सालक उधेडबुनक बाद अन्ततः श्री राम भरोस कापडि़ भ्रमरक नओ गोट विविध विषयक गीतक भिडियो एल्बम आएल अछि – अरिपन । फेर एहि ठाम गीतकारक साधु प्रवृति हावी भऽ गेल अछि – नामाकरणमे । आजुक बजार ओहुना कम छैक सीडी , भीसीडी आदिकेँ । ताहि पर पूर्णतः साँस्कृतिक-मांगलिक नाम अरिपन – पता नहि कतेककेँ आकर्षित करतैक । मुदा एहिमे सामेल नओ गीत विविध सामाजिक जीवन तत्वकेँ प्रतिनिधित्व करैत संस्कारी भाषा आ भावक संग आएल अछि । पूर्णतः परिवारिक सरगम । अहाँ कम्प्युटर हो, टी भी हो अथवा प्रोजेक्टरसं देख चाही तँ सीनेमाक पर्दाधरि , एकाग्र चीते एकर आनन्द उठा सकै छी । नओ गीतमे तीन दाम्पत्य जीवनक नोक झोक, प्रेम विछोडकेँ देखबैत अछि । एकटा गीत युवासभकेँ ध्यानमे राखि लिखल गेल अछि से उत्तेजनामुलक नहि , सन्देश मुलक अछि । अपनो हँसु आ दोसरोकेँ हँसाउ सन उत्प्रेरणामूलक भाव सँ युवा पीढीक मानसीकताकेँ उद्वोधित करबाक प्रयास कएल गेल अछि । तहिना एक गीत शांत रसमे राखल गेल छैक – मनकेँ भीतर अन्दर दर्द भरल अछि ..। साँसारिक व्यामोहक प्रपंचनाक सुन्दर उपस्थापन एहि गीतमे भेल अछि । एकटा गीत नेनासभक हेतु आएल अछि – रुनझुन रुनझुन बाजे पैजनिया... । एहु गीतमे भाव भंगिमा आ स्वर सभक संगम सँ नेनाक बालपनक मनो विज्ञानकेँ प्रस्तुत करबाक प्रयास कएल गेल अछि । प्रसिद्ध शास्त्रिय गायक गुरुदेब कामतक स्वरमे एकर स्वरुप आरो निखरल अछि । एकटा गजल अछि । भ्रमरक पूर्वमे प्रकाशित चर्चित गजल छैक । पाबी ने हम इजोरिया तँ अन्हारी छिनत के हम्मर .. । हरिशंकर चौधरीक मधुर स्वर आ उपस्थिति गीतकेँ मार्मिक आ दर्शनीय बनबैत छैक । एहि एलबममे एकटा होरी गीत सेहो छैक जे सामान्यतः होरी गीतक चलताउ परिपाटी सँ भिन्न स्वरुपमे लिखल आ प्रस्तुत कएल गेल छैक । आभास लाभ एकरा स्वर देने छथि ।सभ सँ महत्वपूर्ण आ सम्भवतः पहिल बेर मैथिलीमे राखी गीतक प्रस्तुतीकरण भेल अछि जे काफी रोचक ढंग सँ मिथिलाञ्चलक कुआमे फिल्माओल गेल छैक । रामा मंडल आ रश्मी रानी ई गीत गौने छथि । नव की अछि ? एहि भिडियो एलबममे नवताक बात करी तँ बहुृतरास अछि जाहिमे एकर फिल्मांकनक हेतु लोकेशनक चयनक बात छैक । अधिकांश नेपाली भाषी भिडियो कलाकार सभक संग काठमाण्डूक पहाडी क्षेत्रमे एकर फिल्मांकन भेल छैक । पहाडी आ मैथिली संस्कृतिकेँ समन्वित स्वरुप एहि मैथिली भिडियो एलबममे अद्भूत छटा प्रदर्शित करैत अछि । एकर फिल्मांकनमे एम पाँच कैमराक प्रयोग भेल अछि जे बढका पर्दाक हेतु कएल जाइछ । एकर नृत्य निर्देशक आ सम्पादक नेपाली भाषी क्रान्ती केसी अछि मुदा ओ मैथिली संस्कृतिकेँ विविध पक्षकेँ बुझबाक प्रयास कर्रैत एहि भिडियोकेँ पूर्ण कएलक अछि । ई भिडियो कोना उपलब्ध हएत ! एहि भिडियोकेँ बाजारमे उतारबाक हेतु दूगोट माध्यम राखल गेल छैक । एकटा अनलाइन बिक्रीक व्यवस्था । दोसर खुल्ला बिक्री । अनलाइनमे अर्डर दऽ कऽ घर बैसले मंगा सकैत छथि ग्राहक तँ खुल्ला बिक्रीक हेतु सेहो दू गोट प्रविधान राखल गेल छैक । अनलाइनक हेतुकगउउथ mबचत सं सम्पर्क कएल जा सकैछ । एकर राँयल साइजमे विक्रीक हेतु बौक्समे राखि सुरक्षित आ संग्रहणीय बनाओल गेल छैक । एक मूल्य रु २५०-– टका छैक जे ग्राहककेँ २००-– टकामे भेटतैक । दोसर सस्ता संस्करण छैक जे नब्बे टकाक होइतो पचास टकामे उपलब्ध हएतैक । ई सुबिधा निर्मातासं खरिद कएने मात्र उपलब्ध भ सकैछ । दुनू संस्करणमे डिभिडी मौलिक आ टिकाउ राखल गेल छैक आ नक्कल करबा सँ रोकबाक हेतु ९०-– टकाबला संस्करणक प्रत्येक प्रतिपर गीतकारक हस्ताक्षर कएल गेल छैक । एकर कभरक डिजाइनकेँ नक्कल करबो सहज नहि छैक । सभ तरहे सुरक्षित , विश्वसनीय आ पारिवारिक मनोरंजनक उत्तम साधनक रुपमे अरिपनक पदार्पण भेल अछि । एहि एलबमक संगीतकार छथि दशरथ चौधरी जे मैथिली क्षेत्रक हेतु नव होएतो उत्तम काज कएने छथि । आशा अछि गीत संगीतक मर्मकेँ बुझनिहार श्रोता, दर्शक अवश्य एहि एलबमकेँ हृदय सँ स्वागत करत । ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। इरा मल्लिक शारदा सिन्हाजीक "विवाह गीत" संगीत एक उत्कृष्ट कला थिक! लोगक हृदयक भावना के मधुर उद्गार प्रकट करबाक एक सरल सहज आ सुन्दर माध्यम मानल गेल अछि! कला के मुख्य उद्देश्य मानव मोन के अभिव्यक्ति अछि!आत्मा सँओ परमात्मा के एकाकार होयबाक साधन संगीत अछि। संगीत जन मन के सुरमय आवाज थिक ! लोग सुख दुख विरह मिलन आनन्द सब अवस्था में गीत संगीत सँओ अपन भावना सहजहि प्रदर्शित कs लैत अछि! संगीत के दू भाग में बाँटल गेल अछि! १: मार्गी संगीत तथा २: देशी संगीत! परमेश्ववर के प्राप्ति के अतिरिक्त जे संगीत जन मन रंजन के लेल प्रयुक्त भेल ओ देशी संगीत छल! देशी संगीत लोक अनुरूपे परिवर्तित होयत गेल! भिन्न भिन्न प्रान्त अपन अपन भाषाक अनुसार गीत रचना करैत जायत गेल! आधुनिक भारत में सब वाग्गेयकार अपन अपन प्रान्त के भाषा में समयानुसार, परंपरा आ संस्कृति , अवस्थाक वर्णन करैत गेलखिन्ह! मिथिला में गीत संगीतक परम्परा आदिकाल सँओ अछि ! समग्र विश्व के सबसे मधुरतम भाषा मैथिली के उत्थान क लेल मैथिली गीत संगीत एकटा सशक्त माध्यम सिद्ध भेल अछि! मिथिला समाज में शिशु जन्म सँओ लsकs जीवन के हरेक चरण सँओ गुजरैत सब संस्कार के गीत संगीत द्वारा दरशाओल गेल अछि! एकर अपन एकटा इतिहास छैक! परंपरा छैक! मैथिली संस्कार, परिवेश , संस्कृति आचार व्यवहार के मैथिली लोक संगीत के माध्यम सँओ विश्व मंच तक पहुँचेबा में पद्मश्री तथा बिहार कोकिला श्रीमति शारदा सिन्हाजी के विशिष्ट योगदान छैन्ह! हिनकर गायकी में भाषा कोनो महत्व नहिं रखै छै! ओ मैथिली भाषा के संग संग भोजपूरी, वज्जिका, मगही, अवधि हिन्दी अहि सब भाषा में समान रूपे बहुत कुशलता सँओ गायन प्रस्तुत करैत छैथ! हुनकर गायकी में गीत संगीतक मधुरता ते छैन्ह संगे दोसर दिस घर परिवारिक सम्बन्धक अपनापन के जीवन्त दर्शन होयत अछि! श्रीमति शारदा सिन्हाजी के सब म्युजिक कैसेट ,अल्बम अत्यन्त लोकप्रिय एवं कर्णप्रिय अछि! परंच हुनकर एकटा अल्बम 'विवाह- गीत हमर मोन के बहुत प्रभावित केलक! अहि विवाह गीत एल्बम में गीत संग्रह पारंपरिक रचना होयतो बहुत सुन्दर अछि! विवाह- गीत अल्बम में A तथा B दूटा साइड अछि! दुनु साइड में कुल मिलाकs सोलह टा गीत छैक! जे क्रमश: एना अछि:- साइड-A 1: मोरे बबुआ को नजरियो न लागे २: आज धनमा कुटाउ रघुबरबा सँओ ३: राजा जनकजी के बाग में ४: अरही वन के ५: सीता के सकल देखि ६: द्वार के छेकाई ७: चुमाबहु हे ललना ८: दुलहा सिन्दुर लियौ हाथ ९: शुभ शुभ के लगनवा १०: बड़ रे जतन सँ साइड:- B १: सोना के रे डलवा २: ठुनुक ठुनुक बोले ३: मोही लेलखिन्ह सजनी ४: सुतल छलियै बाबा ५: माय हे अयोध्या नगर ६: दुलहिन सिन्दुर लियौ हाथ लोकगीतक गायनमे शब्द-विन्यास राग-भास, लय ताल अहि सब आयाम पर समान रूपे ध्यान देल जायत अछि! श्रीमति शारदाजी के अहि म्युजिक अल्बम में उपरोक्त सब नियम के सर्वथा पालन भेल अछि! हुनकर आवाज में एक खनक ,जोरदार सुर लगबय के तरीका में मिथिला के माटि , गाम घरक संस्कारक सुगन्ध सहजहि भेट जायत अछि! स्वर लगेबाक अन्दाज , ठोस लयकारी , आलापक तान ,स्वर विस्तार के व्यापकता सब किछ अनुपम अछि! भाव पच्छ सेहो मजबूती सँओं दृढ़ अछि! गायकी के मौलिकता निस्सन रूपें प्रतिष्ठित भेल अछि! शब्द चयन प्रक्रिया में कतहु त्रुटि नहिं भेटत! पारंपरिक गीतक ई अल्बम अछि जाहि में श्रोता आ गायक गीत संगीत सब एकाकार भs जायत अछि! श्रोता ओहि गीत सँओ अपना कय जोड़य लागै छैथ! आनन्द के उद्भव होमय लगैत छैक! यैह ते सार्थकता अछि संस्कार गीत के! गीतक शब्द हृदयग्राही होयत छैक तैं गीत सँ लोग अपन भावना के आत्मसात करय लगै छैथ! गीत मोरे बबुआ को नजरियो न लागे , अहि गीत मे मानवीय सम्बन्ध में प्यार दुलार संगे सम्बन्धक भव्यता के बड्ड मनोहर ढ़ंग सँ दर्शाओल गेल अछि! अल्बम के सब गीत रचना सँओ मैथिल विधि व्यवहार, अनुशासन , हास परिहास , गृहस्थ धर्म के पालन , खुशी समदाओन गीत सँ छलकैत बेटी के करूणा , माता- पिता के प्यार, बेटी विदा करय के मर्मांतक व्यथा सबकिछ जेना आँखि के आगाँ सजीब भs उठैत अछि! गीतक शब्द के अपन गुण- धर्म होयत छैक! जे बड़ी सूक्छमता सँओ जनमानस तक पहुँचाबय के शक्ति रखैत छैक! विवाह-गीत अल्बम के सुन्दरता , मौलिकता , मधुरता श्रोता के मन- मस्तिस्क में अमिट छाप छोड़य मे सफल भेल अछि! अहि अल्बम के एडिटिंग के जरूरति नहिं बुझना जायछ! पारंपरिक गीत के ई अल्बम में श्रीमति शारदाजीक नैसर्गिक आवाज यथावत सुन्नर लगैत छैन्ह! हम स्पष्टरूपे कहि सकैत छी कि " विवाह-गीत" के अहि पारंपरिक अल्बम के माध्यम सँओ मैथिल गीत संगीत जगत के एक बेमिशाल आवाज भेटल अछि जे सर्वग्राह्य तथा सर्वमान्य अछि! शायद इयैह कारण छैक कि म्युजिक कंपनी के बाजारीकरण मे एतेक कठिन प्रतियोगिता होयतो श्रीमति शारदाजीक "विवाह-गीत " अल्बम एखनो एतेक लोकप्रिय अछि! ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। मनीष झा बौआभाइ वर्तमान मैथिली गीत-संगीत हमरा नजरिसँ साहित्यमे अन्यान्य विधा जेंका गीत-संगीतक सेहो अपन वैशिष्ट्यता अछि. विदेह संपादन समूह द्वारा मैथिली गीत-संगीत केन्द्रित विषय पर आलेख हेतु विशेषांक निर्धारित करब एहि विधाक प्रति गंभीरताक द्योतक अछि. उक्त विषय पर विस्तृत आलेख शोधक विषय-वस्तु थिक, तैं एहि सभस’ फराक अपन व्यक्तिगत अनुभव स’ किछु लिखबाक चेष्टा मात्र क’ रहल छी. वर्तमान समयमे पारम्परिक गीतक अपेक्षा आधुनिक लोकगीत बेस प्रचलनमे अछि. कारण स्पष्ट अछि व्यावसायिक दृष्टिकोण. नव तूरक लोककें लटक झटक बेस रुचै छन्हि आ तदनुरूप गवैया ओ गीतकार सेहो ओहिमे रमबाक प्रयासमे वा कही जे फरमाइशकें यथासंभव पूर करबाक चेष्टा करैत छथि. पारम्परिक गीतक श्रोता वा कही जे खाँटी संस्कृति प्रेमी छथि त’ मुदा सीमित संख्यामे. आधुनिकतामे रमल नव पीढ़ीक नहि त’ गवैया लोकगीत कें गंभीरता स’ लैत छथि आ नें श्रोता. मैथिली गीत-संगीतक क्षेत्र वर्तमानमे कत्तेको कलाकारकें जीविकोपार्जन केर साधन बनल अछि. संगीत चाहे पारंपरिक होउ वा शास्त्रीय होउ वा आधुनिक होउ मैथिलीक सेवा क’ अर्थोपार्जन क’ जीवनयापन करब जतबे आह्लादक विषय अछि ततबे साहसिक डेग सेहो. साहसिक डेग स’ अभिप्राय ई जे वर्तमान जुगक अवधारणा अछि जे अहाँकें जाहि कोनो प्रतिभामे आत्मविश्वास अछि ओकरा आगाँ ल’ व्यावसायिक बनाउ आ अपन अभिरुचिक अनुसारे ओहिमे समर्पण भाव स’ योगदान देल जाउ, मुदा मैथिली गीत-संगीतक प्रति एकर विपरीत अवधारणा अछि जकर मुख्य कारण अछि अर्थोपार्जनमे अनिश्चितता. पूर्वक पीढ़ीमे अपवादस्वरूप किछुए लोक मुदा वर्तमान समयक बेसी-स-बेसी युवा एहि मिथककें तोड़बाक प्रयास केलनि अछि आ अपन जीविकोपार्जन केर साधन बनौलनि अछि. आलेख हेतु देल गेल विषयमे किछु महत्त्वपूर्ण बिन्दु सभ पर अनुभव साझा करबाक प्रयास मात्र क’ रहल छी. गीत-संगीतक भाव पक्ष केर संदर्भमे एतबा जरूर देखल जाइछ जे, गीतकार जे कोनो गीत लिखैत छथि ओ सर्वबोधगम्य हेबाक चाही, जिनक शब्द लेखन आम जनक बोलचाल वा दैनिकीय भाषा मे नियमित प्रयोग मे अबैत होइक आ जकरा संगीतकार लोकनि कर्णप्रिय बना सुन्दर गवैयाक माध्यम स’ जन-जन धरि पहुँचेबाक प्रयास करथि. गीतमे क्लिष्ठता ओ साहित्यिक शब्दक चयन एक वर्ग विशेष धरि सीमित रहैत अछि जे अमूमन एक सामान्य श्रोता द्वारा स्वीकार्य नहि होइत अछि. मूलतः देखल जाए त’ संगीतक प्रारंभिक रूप गीतक शब्द होइछ तैं गीतकारकें शब्द चयन हेतु विभिन्न अभिरुचिक श्रोताकें ध्यान मे राखि मर्यादित गीत लिखक चाहियनि. वर्तमान मे मैथिली गीत संगीत मे देखौंसक प्रक्रिया बेस हाबी भ’ रहल स्थिति मे विकृतता आएब स्वाभाविक अछि. संगीत जहिना मनोरंजन हेतु आवश्यक विधा अछि तहिना भाषा-संस्कृति केर रूपमे वाहकक श्रेणीमे सेहो अबैछ तैं गीतकार-संगीतकार आ गायक लोकनिकें एहि बातक समुचित धेआन रखबाक चाही. तकनीकी पक्षक जत’ तक प्रश्न अछि गीतक शब्दक अनुरूपे संगीत वा संगीतक अनुरूपे गीतक शब्दक तालमेल परम आवश्यक होइछ, कोन गायकक कंठ मे कोन गीत बेसी रोचक लगैछ एहि सभ विषय पर सेहो ध्यान देल जाए त’ गीत आर बेसी अपन सुन्नर रूपमे निखरि क’ सोझा आबि सकैत अछि. प्रस्तुतिक दू गोट रूप वा त’ मंच वा स्टूडियो रेकॉर्डिंग जाहिमे वाद्य-वादन सेहो गीतकें तकनीकी रूप स’ मजगूती प्रदान करैत अछि. आइ-काल्हि स्टूडियो रेकॉर्डिंग के नवका चलन आएल अछि डी-टोन केर. डी-टोन कोनो आवाजक टोन कें अपना स्तर स’ बदलि देइत अछि जकर प्रभाव मे गायकक मौलिक स्वर केर अंदाज करब सेहो मोसकिल अछि. सुर स’ भटकैत गवइया लोकनि एखन एकर प्रयोग बेसी स’ बेसी करैत देखल जाइ छथि आ ई प्रथा हरियाणवी आ भोजपुरी संगीत स’ बेस प्रभावित अछि. यत्र-तत्र कम स’ कम लागत मे दिनानुदिन पसरि रहल स्टूडियो,कैसेट कंपनी आदि स’ मैथिली संगीतक कमजोर गुणवत्ता त’ देखबामे अबैत अछि मुदा नव-नव कम्पनी के खुजला स’ नव प्रतिभावान कलाकार लोकनिक वास्ते एकटा नीक माध्यम बनि सोझा अबैत अछि. मार्केटिंग पक्षक दृष्टिकोण ज’ देखल जाए त’ मैथिली गीत-संगीतकें व्यावसायिक रूप प्रदान करबा लेल मार्केट एखनो धरि व्यापक स्तर पर सक्रिय नहि भेल अछि. आन-आन भाषा के तुलना मे मैथिली गीत-संगीतक बाजार एखनो बड्ड छोट आ सीमित अछि. कीनिक’ सुन’ बला मनोवृति एखनो धरि नहि जागल अछि. एकर दुन्नू कारण भ’ सकैइयै, पहिल जे लोककें मनमोताबिक संगीतक उपलब्धता नहि होइ छनि वा दोसर जे विधा स’ जूड़ल लोक द्वारा फ़ोकट मे बंटबा बला प्रवृति जकर स्थिति कमोवेश साहित्ये बला अछि. हालांकि डिजिटल व्यवस्था भेला स’ उपलब्धता सहूलियत स’ भ’ रहल अछि आ कलाकार लोकनिकें मंच, एलबम,सिनेमा आदिमे लिखबाक,गेबाक ओ धुन बनेबाक अवसर भेटैत छनि जेकि कएक टा मायनेमे महत्त्व रखैत अछि. एहि डिजिटल जुगमे दर्शक/श्रोताक पसीनकें धेआनमे रखैत प्रायः अधिकाधिक कम्पनी वीडियो बना बजार मे वितरण करै छथि वा सोशल नेटवर्कक विभिन्न श्रोत स’ जन-जन धरि पहुँचेबाक प्रयास करै छथि. अधिकाधिक संख्या मे देखल जाए त’ विडियो शूटिंगमे गीतक केन्द्रित विषय स’ आंशिको रूप स’ तालमेल नैं खाइत अछि, मने गीतक विषय किछु आर मुदा अभिनय द्वारा किछु आर दर्शाओल जाइत अछि.एहि पक्ष पर गंभीरता लाएब सेहो ओतबे आवश्यक अछि. मैथिली गीत-संगीत मे नैं गीतकारक अभाव छै आ नैं गौनिहार कें अभाव छैक मुदा सभस’ बेसी अभाव संगीतकारक देखबामे अबैछ. बनल-बनाएल धुन (ओ चाहे हिन्दी फिल्म संगीतक तर्ज पर होए वा आन-आन क्षेत्रीय भाषा केर तर्ज पर होए) आखर फिट क’ गीतकार द्वारा लिखब आ तदनुरूप गायक द्वारा ओकरा गाएल जेबाक प्रथा बेस जोर पकड़ने अछि. ओना संगीत विधा स’ जूड़ल प्रत्येक व्यक्ति के चाहियनि जे अपन-अपन अभिरुचिक क्षेत्रमे प्रशिक्षित होथु मुदा ताहूमे सभस’ बेसी खगता धुन बनेनिहारक अछि जेकि वर्तमान समयमे गीतकार ओ गायकक संख्याक तुलनामे बड्ड कम वा कहल जाए जे मात्र गिनल-चुनल लोक छथि. ओना एहि विधामे सभ दिने स’ गीतकार-संगीतकारक तुलनामे गायकक प्रसिद्धि बेसी रहल अछि, कारण गायक लोकनि अपन एक विशेष प्रकारक स्वरक बले समाजमे चिन्हल जाइ छथि संगहि मंचक सोझा स’ श्रोता/दर्शक स’ प्रत्यक्ष संवाद हेतु समय-समय पर उपलब्ध होइत रहैत छथि, एहेन सन स्थितिमे गायक लोकनिक एक इमानदार प्रयास अपेक्षित रहैत अछि जे ओ मंच पर वा कोनो साक्षात्कार मे गीत प्रस्तुति स’ पूर्व संगीतकार ओ गीतकारक नाओं केर उल्लेख करथि, कारण हुनकर प्रसिद्धिक पाँछा हिनका लोकनिक जोगदानकें नकारल नैं जा सकैत अछि. मैथिली गीत-संगीतमे कतबो विकृति आबि गेल छैक मुदा आलोचनात्मक दृष्टिकोण रखबा लेल संख्या मे बढ़ोत्तरी अपेक्षित अछि. आलोचना वा तुलना ओत’ प्रभावी होइत अछि जत’ संख्या केर उपलब्धता अधिकाधिक होइछ. मैथिली गीत-संगीतकें अपन कर्मक्षेत्र बना गुजर-बसर केनिहार एक-एक कलाकारकें साधुवाद जे चाहे जाहि कोनो तरहें मुदा अपन मातृभाषाकें सेवैत अर्थोपार्जन क’ रहल छथि, बहुत हिम्मत के काज छैक. निवेदन जे भाषा संरक्षणक संग-संग संस्कृति संरक्षण पर सेहो ध्यान केन्द्रित करैत एहि क्षेत्रमे आगाँ बढैत छथि त’ से आर बेसी आह्लादक गप्प हएत. जय मिथिला. जय मैथिली. ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १. डॉ. कैलाश कुमार मिश्र- मैथिली लोक गीत मे प्रोफेसरचण्डेश्वर झा केर सी. डी./डी. वी. केर प्रयोग २.गजेन्द्र ठाकुर- मैथिली सी.डी. एल्बम १ डॉ. कैलाश कुमार मिश्र मैथिली लोक गीत मे प्रोफेसरचण्डेश्वर झा केर सी. डी./डी. वी. केर प्रयोग जीवन में किछु एहेन क्षण अबैत छैक जखन लोक अपना के अनेरे असहाय अनुभव करैत अछि सब किछु रहैत छैक आ किछु नहि रहैत छैक। एहने सन अवस्था एखन हमर भेल अछि। स्वर्गीयप्रोफेसरचण्डेश्वर झा के गीतक सी. डी. अथवा डी. वी. डी. पर तीन दिन सं लिखक प्रयास क रहल छी मुदा नहि क पाबि रहल छी। से कथी लेल? एहि लेल जे हुनकर सब किछु हुनके हाथक देल हमर व्यक्तिगत संकलन में हमर पुस्तकालय केर एक कोण में रहैत अछि। अचरज ई भ रहल अछि जे नहि त कुनो पोथी आ नहिये कुनो सी. डी./ डी. वी. डी. भेट रहल अछि। ऐना में आशीष अनचिन्हार हमरा पर उपकार केलनि आ यू टयूब केर लिंक भेजलनि जाहि में आ आरो लिंक सं तकला पर सब मिलाक प्रोफेसर चण्डेश्वर केर निम्नलिखित चारि गीत भेटल अछि: (क) जोगिया मोर जगत सुखदायक दुःख ककरो नहि देल https://youtu.be/buED_dpmsxg (ख) हे हरि हे हरि सुनिय श्रवण भरि अब ने बिलासक बेरा https://youtu.be/klSuYBZko4s (ग) सबहक सुधि अहाँ लै छी हे अम्बे हमरा कियैक बिसरै छी हे https://youtu.be/KpKbUeeLG-0 (घ) बड़ अजगुत भेल गिरिवर के भंगिया कुटुम्ब भए गेल https://youtu.be/mXPmW8I-Dgg एहि चारि गीतक माध्यम सं हुनका बारे में किछु लिखब झुझुआन सन लगैतअछि मुदा दोसर कोनो उपाय नहि अछि। जे अछि तहिये मे संतोष करैत लिख में भलाई। प्रोफेसर चण्डेश्वर झा अपन सहज स्वभाव, गीत-नाद आ नाट्यक प्रति समर्पण, मैथिली वांग्मय के प्रति सोच, शास्त्र के प्रति ध्यान आ लोकज्ञान के प्रति अभिमानक कारने हमर प्रिय, सम्मानित आ अभिभावक तुल्य विद्वान आ गायक रहल छथि। हुनका संग आत्मीय लगाव १९९२ ईस्वी सं जे शुरू भेल से ४ जनवरी २०११ अर्थात हुनकर देहावसान दिन तक शाश्वत रहल। नित प्रगाढ़ होइत रहल। लगाव भौतिक आ शास्त्रीय ज्ञान दूनू कारने दुनू स्तर पर छल। भौतिक अहि हेतु जे जखन कखनो दिल्ली सं गाम जाई त हुनका सं भेंट अनिवार्य छल। सब तरहक गप्प – पारिवारिक शास्त्रीय। शास्त्रीय में साहित्य आ समाज; लोक आ शास्त्र दुनू के बीच परस्पर सामंजस्य, लेन-देन, आवाजाही। ओ एक के देह त दोसर के आत्मा बुझैत छला। भावुक होइत गप्प करैत छला। बीच-बीच में किछु गाबय लगैत छला। अतेक विषय सं लगाव रहैत छलनि जे बिना कहने हमहू भावुक भ जैत छलहुं। प्रोफेसर चण्डेश्वर सं गप्प करैत ई अनुभूति होइत छल जेना ओ उपनिषद परंपरा केर ऋषि (गुरु) होथि आ हम घनघोर अज्ञानी शिष्य। हमर काज मात्र एक प्रश्न पुछब तक छल। ओ कनि गंभीर होइत शुरू भ जैत छला। उत्तर देथि। अपना आपके हमर मनोदशा में आनि जे हमर जिज्ञसा अथवा शंका भ सकैत छल तकरा बुझि जाथि आ कहथि, “कैलाशजी, अहांके एकर बाद एहनो प्रश्न भ सकैत अछि?” हम मंत्रमुग्ध होइत गरदनि हिला हाँ कहि दैत रहियैनआ ओ प्रश्नों केने जाथि आ ओकर निराकरण सेहो। ओहमरमनोदशा के ऐना हृदयंगम क लैत छला जे हम भाव विह्वल भ हुनका घंटों सुनैत रही। अहु चिंता सं मुक्त रही जे कुनो प्रश्न अथवा जिज्ञासा करबाक अछि। एकौ मिसिया समयक बरबादी नहि। भले हम विवेकानन्द नहि रही मुदा प्रोफेसर चण्डेश्वर झा कम-सं-कम हमर मोनक जिगेसा हेतु रामकृष्ण परमहंस सं एकौ रत्ती कम नहि छला। हमेशा अपन शोध, नव राग में अन्य रागक मिश्रण, निक गीतक रचना, फेर ओहि गीत के गेनाई, आदि विषय पर गप्प करैत छला। सेहो सहज आ निश्छल ह्रदय सं। एक बात जे हुनका संगे भेलनि आ शायद ओ बात हुनका दीर्घायु नहि होमय देलकनि ओ बात छल विश्वविद्यालयकेर प्रबंधन आशिक्षक समुदाय केर तुच्छ राजनीति।एहि कारने ओ बहुत दुखी रहैत छला। अगर दरभंगा छोडि कोनो आन ठाम रहितथि त पद्मश्री कोनो पैघ बात नहि। मुदा प्रोफेसर चण्डेश्वर त ललित नारायण मिथिलायूनिवर्सिटी में बारिक पटुआ छला। लोक सभ जे शैक्षणिक कार्य में घासलेट आ तुच्छ राजनीति आ बितंडावाद में माहिर ओ सब हमेशा हिनकर संगीत साधना के वाधित करैत रहलथिन। कल्पना करू की जाहि यूनिवर्सिटी में एक जॉइंट रजिस्ट्रार अनेरे एक विद्वान प्रोफेसर केर विद्या क्षेत्र में बलगेंग करैक आ दोसर विद्वान सब इर्ष्या सं विद्वान के विपरीत जाथि ओत की भ सकैत अछि? सरस्वती भोकासी पारि कानती। सैह ने? सैह भेल। ओ मैथिली गीत, संगीत, लोक विद्या आदि पर बहु विषयक विद्वानक संग परियोजना करए चाहैत छला। कतेक बेर विश्विद्यालय अनुदान आयोग एवं अन्य संस्था सं अपन वैदुश्यक बल सं परियोजना हेतु धन सेहो आनि लैत छला मुदा विश्विद्यालय केर लोक सब हुनकर सब मनोरथ के अनेरे अड़ंगा लगा ध्वस्त क दैत छलनि.प्रश्न ई उठैत अछि जे एहेन संस्था के की हैत? परिणाम प्रत्यक्ष अछि।अकादमिक स्तर पर ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी के की हाल अछि से ककरो सं अज्ञात नहि अछि। चण्डेश्वर जी मिथिलाक गामे गामे घूमि क लोक सब सं १५०० गीतक अद्भुत संग्रह केने छथि,विभिन्न राग पर आधारित एक सए सं अधिक गीतक रचना केने छथि।एकर अतिरक्त निम्नलिखित तीन महत्वपूर्ण सी. डी./ डी. वी. डी. (केसेट) केर निर्माण हिनकर मधुर स्वर में भेल छनि: (अ) दुर्गति दूर करू माँ (सी. डी. एवं केसेट्स निर्माण)– २००५ ईस्वी (आ)जागू गिरिजाजागू महेश (सी. डी. निर्माण) – २००६ ईस्वी (इ) चंदा झा रचित मैथिली रामायण केर सुन्दरकाण्ड (सी. डी. निर्माण) – २००७ ईस्वी मिथिला में रागक बात करैत चण्डेश्वर कहैत छला जे मैथिली साहित्य में धूर्त समागम पहिल रचना अछि जाहि में रागोल्लेख भेटैत अछि। उदाहरणस्वरूपरचना में राग एवं तालक विवरण प्रस्तुत अछि। प्रथम अंक में - विभास रागे गीतं, सालंगी रागे – पणिताले गीतम, वराली रागे – एकताली ताले गीतम, ललित रागे – एक ताली ताले गीतम, मालव रागे – एक ताली ताले गीतम, नटरागे – यति ताले गीतम, कानल रागे – प्रति ताले गीतम, द्वितीय अंक में – शालंगी रागे – यतिक त्रिताले गीतम, देशाख रागे – एकताली ताले गीतम, कोलाव रागे – परिमंठ ताले गीतम, धनछी रागे – एक ताली ताले गीतम अछि. एहि तरहें अगर प्रोफेसर चण्डेश्वर के मानी त मैथिली साहित्य में राग परंपराक यात्रा ज्योतिरेश्वर ठाकुर के समय सं प्रारंभ होइत अछि। मुदा एक बात जे महत्वपूर्ण अछि ओ ई थिक जे एक तरह सं ओ स्वीकार करैत छथि जे मिथिला के इलीट या विशेष वर्ग में शास्त्रीय गीत आ संगीत केर परंपरा बहुत पहिने आबि गेल परन्तु जखन ओ गीत गबैत छथि त लोक सं अपना आपके जोडि लैत छथि आ वैह संपर्क, वैह सरोकार, वैह परिवेश आ अंत में आर त आर अपना आपके कतौं-कतौं नारी ह्रदय में घुसा लैत छथि। एकर निवारण हुनकर चारि गीत के जौ गंभीरता सं देखल जाय त स्वतः भ जैत। आबएक-एक गीत पर कनि विचार करी: प्रथम गीत प्राती अर्थात भोरक गीत छैक जे विद्यापति रचित थिक: हे हरि हे हरि सुनिअ स्र्वन भरि, अब न बिलासक बेरा। गगन नखत छल से अबेकत भेल, कोकुल कुल कर फेरा। चकबा मोर सोर कए चुप भेल, उठिअ मलिन भेल चंद। नगरक धेनु डगर कए संचर, कुमुदनि बस मकरंदा। मुख केर पान सेहो रे मलिन भेल, अबसर भल नहि मंदा। विद्यापति भन एहो न उचित थिक, जग भरि होएत निंदा। ई गीत शृंगार आ भक्ति के सोन्हगर आंच में पाकल प्राती थिक। एकर चुनाव बहुत गंभीरता सँ चण्डेश्वर जी केलनि अछि। अपन बोलक उतार चढ़ाव सँ भोरक भान करबैत छथि। पुरुष स्वर में नारी मनोदशा के चित्रण केने छथि। से तखने संभव छैक जखन ओहि भाव आ संवेदना के आत्मसात कैल जाए। एक गायक के रुप में ओ नारीक ह्रदय के तह में प्रवेश क जाइत छथि। गीत पुरुष के बुझना जाइत मुदा अंतर्मन स्त्रीगण केँ। भोरक अनुभूति जखनो कखन एहि गीतके सुनब तखने हैत। गीत केवल ऑडियो छैक तकर लाभ श्रोता के ई भ सकैत छनि जे आँखि मुनि गीत सुनथि आ भाव के स्वप्नलोक में भ्रमण करथि। सुरुज केर इजोत, कोइली के बोल,भोरक सुगंध, नव् ऊर्जा सब किछु त भेटबे करत ओकरा संगे प्रेम, सृंगार आ भक्ति के अनुपम समंजस्यक भान अलग। एहि गीत में शास्त्रीय आ लोक दुनु केर मध्य आश्चर्यजनक मिश्रण भेटैत छैक। बुझना ऐना जाइत जेना ई गीत लिखले अछि प्रोफेसर चण्डेश्वर झा के गेबाक लेल। गीत सुनला बाद मोन में बैकुंठक शान्ति भेटैत छैक। दोसर गीत: सबहक सुधि अहाँ लय छी हे अम्बेहमरा कियै बिसरय छी हे। हमरा कियै बिसरय छी हे माताहमरा कियै बिसरय छी हे। छी हम पुत्र अहीं के जननीसे तऽ अहाँ जनय छी हे। एहेन निष्ठुर कियै अहाँ भेलौंकनिको दृष्टि नै दय छी हे। क्षण-क्षण पल-पल ध्यान करय छीनाम अहीं के जपय छी हे। रैन दिवस हम ठाढ रहय छीदरसन बिनु तरसय छी हे। छी जगदम्बा जग अवलम्बातारिणी तरणि बनय छी हे। हमरा बेरि कियै न तकय छीपापी जानि फेरय छी हे। सबहक सुधि अहाँ लय छी हे अम्बेहमरा कियै बिसरय छी हे।। उपरोक्त गीत में जे की एक भक्ति गीत छैक जाहि में एक भक्त आर्त भाव सं भक्ति में लीन भेल भगबती सं अपन सम्बाद गीतक रूप में क रहल छैक,में एक नूतन प्रयोग ई छैक जे एहि में कनि झटकारकेर गति छैक मुदा संतुलन यथावत छैक। गति एहेन जे गायक एकरा बटगमनी के बाट देखबैत आड़िये धुडिये जेना भक्ति में लीन कुनो मंदिर दिश जा रहल होथि। भक्ति भावना में कोनो कमी नहि। अहि गीतक एक अद्भुत अनुभूति जँ पहिल गीत जकाँ एकरो आँखि मुनि आ कान खोलि क सुनब त अनुभूति हैत जेना एक भक्त स्नान ध्यान सँ निबृत भ अपन हाथ में अछिन्जल आ नाना तरहक फूल आ बेलपात सँ भरल फुलडाली लए भगबनाक ध्यान में लीन भेल गीत गबैत कुनो मंदिर में भगबती जगदंबा केर पूजा अर्चना के हेतु जा रहल हो। एकपेडिया रास्ता संगे शरीरक संग गीतक संतुलन बनएबाक हेतु गीत जेना कनि दौड़ैत हो। मुदा गति सँ गीत सुगीत बनैत छैक। एकर भाव आरो प्रबल भ जाइत छैक। भक्त केर आर्त भाव स्पष्ट होइत रहैत छैक। श्रोता अपना आपके गायक संगे ताल में ताल मिला ई गीत सुनि आ गाबि सकैत अछि। बड़ अजगुत भेल गिरिवर के भंगिया कुटम्ब भ गेल। पहिरन में शिव के पीताम्बर देल। सेहो छोड़ि शिवजी मृगछाला ओढ़ि लेल। कोबर में शिब के जे तेल फुलेल देल। सेहो छोड़ि शिबजी जे भसम लोपि लेल। भोजन में शिबके खीर पूरी देल। सेहो छोड़ि शिबजी जे भांग पिब लेल। बड़ अजगुत भेलगिरिवर के भंगिया कुटम्ब भ गेल।। ई लोककंठ में बसल महेशबानी अछि। एहि विलक्षण महेशबानी के गेबाक हेतु चयन कैल गेल अछि। गीत सुनब त मोनक घबराहट, बेमेल विवाहक पीड़ाक सँग-सँग भक्तक भगबान सँ स्नेहाधिक्य केर स्वतः आवेगक अप्रतिम अनुभूति भेटत। भावक सँग शब्दक उतार-चढ़ावक सँग लय में सेहो उतरब चढ़ब केर परंपरा में चलि जैब। शास्त्रीय राग चलैत छैक लेकिन एखुल्ला नहि लोकक ताल आ व्यवहारक सँगे। भाव भक्तिक आह्लाद केर अनुभूति हैत, खिदांश नहि। हिनक स्वरक पक्ष अतेक प्रवल छनि जे तमाम भाव के पाछा छोड़ैत आगु बढ़ैत जाइत छैक। गीतक आखर-आखर मोन में छपल जाइत छैक। शब्दक अर्थ छिलका जकाँ बाहर भेल जाइत छैक। तमाम अवगुणक सँग शिब प्रशंशनीय, वंदनीय, आ सहज स्वीकार्य छथि। शब्द कखनो काल भले भावना केर संप्रेषण में कमजोर भ गेल हो परंतु चण्डेश्वर जीक स्वर, हुनक सतत संगीत साधना आ शोधक कारणे एक एक शब्द के कान में जेना मिशरी के घोल जकाँ घुसा दैत हो। वाद्य यंत्र बोलक सहचर अछि, गीतक प्राबल्य छैक हुनकर सधल स्वर। अन्तिम गीत पुनः विद्यापतिक रचित एक महेशबानी छैक: आगे माई , जोगिया मोर जगत सुख दायक , दुख ककरो नहि देल। दुख ककरो नहीं देल महादेव, दुख ककरो नहि देल। एहि जोगिया के भांग भुलेलक, धतुर खोआए धन लेल। आगे माई, कातिक गणपति दुइजन बालक , जग भर क नहि जान। तिनका अभरन किछुओ न थिकईन, रतिएक सोन नहि कान। आगे माईसोना रूपा अनका सुत अभरनअपन रुद्रक माल। अपना सुत लए किछुओ ने जुरइनिअनका लए जंजाल। आगे माईछन मे हेरथि कोटि धन –बकसथि ताहि देबा नहि थोर। भनहि विद्यापतिसुनुहे मनाईनथिका दिगम्बर भोर।। अहु गीतक अन्तस में प्रवेश क जैत छथि गायक-साधक चण्डेश्वर झा. स्वर साधना में अतेक प्रवीन जे बिना कुनो अवरोध के गबैत रहैत छथि। गीत घुसकैत नहि दौरैत अछि।शब्दक अनुरूप आरोहन अवरोहन अवश्य होइत छैक मुदा भावना के सम्प्रेषण त बेजोड़ छैक। गायक गीत संगे न्याय करैत छथि, विद्यापति संगे न्याय करैत छथि, आ अंततः गीतक भाव संगे न्याय करैत छथि। स्पष्ट किनाई आवश्यक अछि जे हिनकर उपलब्ध सी. डी. अथवा डी. वी. डी. केर सम्बन्ध में हम कुनो छंद, ताल, मात्रा, अथवा रागक व्याकरण आ गणित केर सूत्र के आधार पर नहि लिखने छी। अहेन नहि त हमर शिक्षा अछि आ नहिये हमर सामर्थ्य। हमर प्रयास गीत सुनि, बुझि जे गीतक कोग्निटिक आ बोल केर भाव आ गायन के प्रति सामान्य श्रोता केर भाव जैत छैक तकर सम्बन्ध में वार्तालाप करब। सैह एहि में कएल गेल अछि। २ गजेन्द्र ठाकुर मैथिली सी.डी. एल्बम मैथिलीक किछु सी.डी. अल्बमक लिस्ट प्रस्तुत अछि। गुणक दृष्टिकोणसँ जागे महतो आ जागे राउत क संग बिरासी सदा बेछप छथि। धनीराम महतोक सल्हेश आदिक दरभंगा रेडियो स्टेशनपर रसास्वादन केनिहार केँ ओ मोन पड़ि जेता। आब धनीराम महत दरभंगा रेडियो स्टेशनपरसेहो अनुपलब्ध छथि, दरभंगा रेडियो स्टेशन अपन आर्काइवसँ हुनका निकालत तहूपर संदेह अछि। मिथिलाक लोकसंगीतक अल्बमक एकटा छोट सूची प्रस्तुत अछि। धनीराम महतो (सल्हेश आदि दरभंगा रेडियो स्टेशन- आब अनुपलब्ध- दरभंगा रेडियो स्टेशन अपन आर्काइवसँ एकरा निकालत तहूपर संदेह) कारिक झूमर- जागे महतो आ जागे राउत (गंगा कैसेट्स) सोखा झूमर- जागे महतो आ जागे राउत (टी सीरीज) https://youtu.be/p-LQS2ZHJ9o?list=PLTwW4p11kfqqUeI442nSqvoKWQ5aFs9bo https://youtu.be/gZsK3ZwXpYA https://youtu.be/Vmmighmi3hk https://youtu.be/sYT5iTsC3a4 गोविन्द झूमर- जागे महतो आ जागे राउत (गंगा कैसेट्स) गहील माता के पूजा- बिरासी सदा (गंगा कैसेट्स) काली माइ के पूजा- बिरासी सदा (गंगा कैसेट्स) भुइंया बाबा के पूजा- बिरासी सदा (गंगा कैसेट्स) गंगा माइ के पूजा- बिरासी सदा (गंगा कैसेट्स) भुइया बाबा -भगैत प्रसंग- रमाकान्त पजियार (गंगा कैसेट्स) बाबा बख्तौर भुइया बाबा- सकलदेव दास आ साथी (सुप्रीम वीडियो) भक्त ज्योति (भगैत प्रसंग)- रंजीत पजियार (नीलम वी.सी.डी.) बैताली यादव- तपेश्वर यादव आ कामेश्वर यादव (गंगा कैसेट्स) कुँवर बृजवान- (गंगा कैसेट्स) [गीत मैथिली संवाद हिन्दी] भुखना-भुखनी- राम खेलावन महतो, नेथल मण्डल, महीन्दर यादव, राम असेश्वर दास, हेमू मुखिया आ बिल्टु मुखिया [गीत मैथिली संवाद मैथिली] रेशमा चूहड़मल- रामवृक्ष ठाकुर एण्ड पार्टी (गंगा कैसेट्स) [गीत मैथिली संवाद मैथिली आ हिन्दी] राजा सल्हेश- विदेशिया नाच पार्टी, देवेन्द्र साहनी आ पार्टी (गंगा कैसेट्स) [गीत मैथिली संवाद हिन्दी] आल्हा रुदल झगरू बध- - विदेशिया नाच पार्टी, देवेन्द्र साहनी आ पार्टी (गंगा कैसेट्स) [गीत मैथिली संवाद हिन्दी] संत बाबा करू खिरहरी- रुदल पजियार (जयश्री कैसेट्स) [गीत मैथिली आ हिन्दी संवाद हिन्दी] ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। जगदीश चंद्र ठाकुर अनिल महाकवि चन्दा झा कृत रामायणक सुन्दरकाण्डक एलबम मिथिलाक प्रसिद्ध गायक-गायिका श्री विकास झा आ रश्मि झाक स्वरमे कविवर चन्दा झा विरचित मिथिला भाषा रामायणक सुन्दरकाण्डक एलबम दू भागमे यू-ट्यूब पर उपलब्ध अछि। अध्याय 2 धरि प्रस्तुत कएल गेल अछि। https://youtu.be/1ZED0SeYJwY?list=PLUmTaUxB0Bdv9bzuqkjpfKB0Uly1IAGoA https://youtu.be/ZKkd-UCNSEA एहि पर हमर मन्तव्य प्रस्तुत अछि : 1.प्रस्तुति : शारदे म्यूजिक । 2.योगदान : हेमानंद ठाकुर, शशिकान्त झा आ शम्भुनाथ झा आजाद । 3.संगीत : रश्मि आ मिथिलेश झा । 4.स्वर : श्री विकास झा आ रश्मि झा। 5.स्वरक प्रभाव : मधुर, मनमोहक, आनन्ददायक। 6.संगीतक प्रभाव : विलक्षण । 7.प्रस्तुतिक कोटि : प्रभावशाली। 8.उच्चारण : अधिकांश शब्द सबहक उच्चारण एकदम शुद्ध भेल अछि। अपवाद स्वरुप किछु शब्द सभमे कतहु-कतहु उच्चारण दोष अछि , जाहिसं बचल जा सकैत छल । जेना ई शब्द सभ : शब्द उच्चारण शूनि शूनी अपन अप्पन सपन सप्पन बैशि बैशी अनुकूला अनुकुला करति करती अवनि अवनी 9.अन्य दोष : अध्याय 2 मे कवित्त धनाक्षरी गीत, सवैया छन्द, गीत काफी, गीत पहिल, दोसर आ तेसरक चारिम पाँति धरि गायनमे नहि आएल अछि । 10.टिप्पणी : मैथिलीमे उपलब्ध आ हमर देखल-सूनल किछु उच्च कोटिक एलबमक श्रेणीमे एहि एलबम कें राखब। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। बालानां कृते विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम भाषापाक गजेन्द्र ठाकुर मैथिलीमे बाल सी.डी अल्बमक सर्वथा अभाव मैथिलीमे बाल सी.डी अल्बमक सर्वथा अभाव अछि। तैयो एकटा छोट संकलन लिंकक संग प्रस्तुत अछि। मैथिली नाटक बुधियार छौडा आ राक्षस, २५ नोभेम्वर 2011, रसियन कल्चर सेन्टर, कमल पोखरी , काठमाण्डूमे प्रस्तुत लेखन रमेश रंजन https://youtu.be/lbyItMF9STE http://maithili-drama.blogspot.in/2011/12/blog-post_27.html कक्का हौ हमहू जेबै इस्कूल https://youtu.be/zikDHR8IXXc (धीरेन्द्र पूजा) https://youtu.be/rRjJmckzhSg गुरुदेव कामत https://youtu.be/7ZzEsE8XULc अंजना इस्सर https://youtu.be/J2FNIeMdopM रजनी पल्लवी https://youtu.be/_wlw2gjFyJQ https://youtu.be/LSDRp1bmE-w?list=PLE58799CC1970F50F https://youtu.be/3oL_MGVAm2g?list=PLE58799CC1970F50F https://youtu.be/BiTT330h9ok?list=PLE58799CC1970F50F ममता गाबय गीत (मैथिली फिल्म) (सौजन्य: केदार नाथ चौधरी) mamitohar.mp3 (सुमन कल्याणपुर) https://youtu.be/CcN4w47e4Fg https://youtu.be/vDMv-qUVDRg Arr_Bakri_Geeta_Dutt Kahu_Rame_Ram_Mahendra_Kapoor विश्वक पहिल देशभक्ति गीत (दूर्वाक्षत मंत्र , शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र २२: साभार आइ.आइ.एस.एच.)Doorvakshat_Mantra.mp3 वर्णमाला (शुद्ध उच्चारणक लेल: साभार संस्कृत भारती ) AtoGya.mp3 (बालमंडली किशोर-जगत) : गजेन्द्र ठाकुर GajendraThakurI0.mp3 जानकी एफ.एम. सामाचकेवा पर बिशेष रिपोर्ट २०१० https://youtu.be/AmLvMzZrfO8 https://youtu.be/3rAcKjUfijw चना जोर गरम https://youtu.be/H1vyD058V3Q https://youtu.be/QUBS5v1Cufk https://youtu.be/-H278XhHD6g https://youtu.be/0UjFakZe4BM https://youtu.be/_26zQlsDLPU https://youtu.be/Znmt3F7D98M https://youtu.be/kldDIcnL25k https://youtu.be/P7k9CnIaLds https://youtu.be/230RK3DB5SI https://youtu.be/GiT6oT4yaac https://youtu.be/V7g6wcp45RQ https://youtu.be/Ix6QF3fkNOU बौआ चान सन (विजय/ काजोल) https://youtu.be/3txJOqUySZw https://youtu.be/SW4fX6Wigrs दीक्षा भारती http://youtu.be/pTPYg_4a_II http://youtu.be/25NmustCBPI http://youtu.be/k43HnEW-TBk http://youtu.be/LXhMeEPnqys गीत-गोविन्ददास (गायन दीक्षा भारती) http://youtu.be/BJEH6Cy4rNk http://youtu.be/9Jvupm02uHg http://youtu.be/Sn3H8yuH9PU http://youtu.be/EpAvkk9Qa40 http://youtu.be/FNWGQz1evRg http://youtu.be/D2AxSdv8LyA
मैथिली गजल (गजल- गजेन्द्र ठाकुर, गायन दीक्षा भारती) http://youtu.be/WDcPyKqAKIc http://youtu.be/weA0vk5-d8g (बहरे मुतकारिब) http://youtu.be/vma-sniQ8zs http://youtu.be/b2ti1ASefn4 82 म सगर राति दीप जरए, स्थान- गजेन्द्र ठाकुर जीक निज आवास, गाम- मेंहथ, जिला- मधुबनी। दिनांक- 31 मई 2014 (शनि दिन), समए- संध्या छह बजेसँ। गोष्ठीक नाओं- कथा बौद्ध सिद्ध मेहथपा सगर राति दीप जरए। आयोजनक खेप- ८२ म आयोजन, संयोजक- गजेन्द्र ठाकुर। विशेषता- बाल साहित्यपर केन्द्रित। https://www.youtube.com/watch?v=lnu6pf9e7zY हमर देवानन्द नाम यौ https://youtu.be/G2DYX8fouNE माए किन दे गै बकड़ी https://youtu.be/TtnPyo3tJBA ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)2004-17. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽलेखकक नाम नैअछि ततऽसंपादकाधीन।विदेह- प्रथममैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)ggajendra@videha.comकेँमेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि।रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचयआ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेता, से आशा करै छी। रचनाक अंतमेटाइप रहए, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहलअछि।एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै। ऐ ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मीठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-17 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटारचनाआ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाकअनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतुggajendra@videha.co.inपर संपर्क करू। ऐ साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरीआ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल।५ जुलाई २००४ केँhttp://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ”जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सिद्धिरस्तु वि दे ह www.videha.co.inविदेहप्रथम मैथिलीपाक्षिक ई पत्रिकाwww.videha.com विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'विदेह' २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ (वर्ष १० मास १०९ अंक २१७)मानुषीमिह संस्कृताम्ISSN 2229-547X VIDEHA
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