56 ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' २१८ म अंक १५ जनवरी २०१७ (वर्ष १० मास १०९ अंक २१८) ऐ अंकमे अछि:- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१.वन्दना अवस्थी दुबेजीक हिन्दी कथा (अनुवाद आशीष अनचिन्हार द्वारा) २.२.डॉ. कैलाश कुमार मिश्र- महाराजा पंहिबा: मणिपुर केर ग़रीब नबाज़ २.३.रबीन्द्र नारायण मिश्र- वरिष्ठ नागरिक २.४.बीहनि कथा- ठ'रल सीरक. : सुकेश साहनी (हिन्दीसँ मैथिली मैथिली रूपान्तरण- मुन्नाजी) ३. पद्य ३.१.आशीष अनचिन्हार- ३ टा गजल ३.२.डा जियाउर रहमान जाफर- आजाद गजल ३.३.१. डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह”- ६ टा कवित२.बाबा बैद्यनाथजीक आजाद गजल ३.४.प्रणव कुमार-राईत इजोरिया ताइक रहल अछि ४.बालानां कृते- १.रतन कुमार लाल दास- कोईली बाजी रहल अई २. डॉ. शशिधर कुमर- ७ टा बाल कविता Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव Join official Videha facebook group. Join Videha googlegroups Follow Official VidehaTwitter to view regular Videha Live Broadcasts through Periscope. विदेह जालवृत्तक डिसकसन फोरमपर जाउ। संपादकीय विदेह द्वारा संचालित "आमंत्रित रचनापर आमंत्रित आलोचकक टिप्पणी" शृंखलाक दोसर भागक घोषणा कएल जा रहल अछि। दोसर भागमे अइ बेर नीलमाधव चौधरी जीक रचना आमंत्रित कएल जा रहल अछि आ नीलमाधवजीक रचना ओ रचनाधर्मितापर टिप्पणी करबा लेल कैलाश कुमार मिश्रजीकेँ आमंत्रित कएल जा रहल छनि। दूनू गोटाकेँ औपचारिक सूचना जल्दिये पठाओल जाएत। रचनाकारक रचना ओ आलोचकक आलोचना जखने आबि जाएत ओकर अगिला अंकमे ई प्रकाशित कएल जाएत। अइ शृंखलाक पहिल भाग कामिनीजीक रचनापर छल आ टिप्पणीकर्ता मधुकांत झाजी छलाह। जेना की सभ गोटा जनै छी जे विदेह २०१५ मे तीन टा विशेषांक तीन साहित्यकारपर प्रकाशित केलक जकर मापदंड छल सालमे दूटा विशेषांक जीवित साहित्यकारक उपर रहत जइमे एकटा ६०-७० वा ओइसँ बेसी सालक साहित्यकार रहता तँ दोसर ४०-५० सालक ( मैथिली साहित्यकार मने भारत आ नेपाल दूनूक)। ऐ क्रममे अरविन्द ठाकुर ओ जगदीश चंद्र ठाकुर "अनिल"जीपर विशेषांक निकलि चुकल अछि। आगूक विशेषांक किनकापर हुअए तइ लेल एक मास पहिनेसँ पाठकक सुझाव माँगल गेल छल। पाठकक सुझाव आएल आ ओइ सुझाव अंतर्गत विदेहक किछु अगिला विशेषांक परमेश्वर कापड़ि, वीरेन्द्र मल्लिक आ कमला चौधरी पर रहत। हमर सबहक प्रयास रहत जे ई विशेषांक सभ २०१७ मे प्रकाशित हुअए मुदा ई रचनाक उपलब्धतापर निर्भर करत। मने रचनाक उपलब्धताक हिसाबसँ समए ऊपर-निच्चा भऽ सकैए। सभ गोटासँ आग्रह जे ओ अपन-अपन रचना ggajendra@videha.com पर पठा दी। ई-पत्र विदेह गीत-संगीत केंद्रित अंक पढ़लहुँ (217) दिनेश यादव भाई जी द्धारा लिखल गेल लेख के लेल प्रतिक्रिया बहुत निक आ शान्दर्भिक लिखलौं भाई जी, हम मैथली बहुत नई लिख पावै छि मुद्धा अहा के लिखल लेख पढला के बाद ई मालुम भेल मैथलि वा मिथिला के ठिकेदार सभ लुइट रहल अछि । किछु दिनु पहिलो जनकपुर मे जनकपुर साहित्य महोत्सव भेल छयल ..... ओ कार्यक्रम के लिस्ट वा वक्ता सभ के नाम देखलाके बाद हम बहुत दुखित भेलउ.....तब हमरा बुझायल जे शायद हम मिथिला मे त रहैं छि मुद्धा हम मैथिल कम सोलकन बेसी छि....एके टा बात कहव ...मिथिला र मैथिली के करो पिता जी के अर्जन सम्पती नै छैयक....जय मिथिला जय मैथिली -अनन्त अनुराग विदेह गीत-संगीत केंद्रित अंक पढ़लहुँ (217)। कोनो साहित्यिक पत्रिका द्वारा गीत-संगीत लेल पूरा अंक देब से प्रायः पहिले बेर भेल हएत। सभ आलेख एकटा-एकटा बिंदु लऽ कऽ उठल अछि आ भविष्यमे एकर महत्व बुझेतै। अइ अंक लेल विदेहकेँ तँ बधाइए संगे-संग सभ लेखक सेहो बधाइ -आशीष अनचिन्हार अंक 216मे सुशान्त झा "अवलोकित"जीक कविता पढ़ि नीक लागल। हुनकर आरो कविता आएत से आशा अछि। डॉ. शशिधर कुमर जीक बाल कविता नीक छनि मुदा नमहर वाक्य सभहँक कारणे ई कविता सभ पाठ कऽ सकत ई विचारक विषय। कैलाशजीक जाहि तरहें आलेख आबि रहल अछि ओहि हिसाबें आबए एकटा पोथी विचार बनिते छै। -आशीष अनचिन्हार विदेह सम्मान विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान १.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०१०-११ २०१० श्री गोविन्द झा (समग्र योगदान लेल) २०११ श्री रमानन्द रेणु (समग्र योगदान लेल) २.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११-१२ २०११ मूल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, कथा संग्रह) २०११ बाल साहित्य पुरस्कार- ले.क. मायानाथ झा (जकर नारी चतुर होइ, कथा संग्रह) २०११ युवा पुरस्कार- आनन्द कुमार झा (कलह, नाटक) २०१२ अनुवाद पुरस्कार- श्री रामलोचन ठाकुर- (पद्मानदीक माझी, बांग्ला- मानिक बंद्योपाध्याय, उपन्यास बांग्लासँ मैथिली अनुवाद) विदेह भाषा सम्मान २०१२-१३ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) 1.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार 2012 2012 श्री राजनन्दन लाल दास (समग्र योगदान लेल) 2.विदेह भाषा सम्मान २०१२-१३ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) २०१२ बाल साहित्य पुरस्कार - श्री जगदीश प्रसाद मण्डल केँ “तरेगन” बाल प्रेरक विहनि कथा संग्रह २०१२ मूल पुरस्कार - श्री राजदेव मण्डलकेँ "अम्बरा" (कविता संग्रह) लेल। 2012 युवा पुरस्कार- श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरीक “अर्चिस” (कविता संग्रह) 2013 अनुवाद पुरस्कार- श्री नरेश कुमार विकल "ययाति" (मराठी उपन्यास श्री विष्णु सखाराम खाण्डेकर) विदेह भाषा सम्मान २०१३-१४ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) २०१३ बाल साहित्य पुरस्कार – श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरी- “देवीजी” (बाल निबन्ध संग्रह) लेल। २०१३ मूल पुरस्कार - श्री बेचन ठाकुरकेँ "बेटीक अपमान आ छीनरदेवी" (नाटक संग्रह) लेल। २०१३ युवा पुरस्कार- श्री उमेश मण्डलकेँ “निश्तुकी” (कविता संग्रह)लेल। २०१४ अनुवाद पुरस्कार- श्री विनीत उत्पलकेँ “मोहनदास” (हिन्दी उपन्यास श्री उदय प्रकाश)क मैथिली अनुवाद लेल। विदेह भाषा सम्मान २०१४-२०१५ (समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान) २०१४ मूल पुरस्कार- श्री नन्द विलास राय (सखारी पेटारी- लघु कथा संग्रह) २०१४ बाल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (नै धारैए- बाल उपन्यास) २०१४ युवा पुरस्कार - श्री आशीष अनचिन्हार (अनचिन्हार आखर- गजल संग्रह) २०१५ अनुवाद पुरस्कार - श्री शम्भु कुमार सिंह ( पाखलो - तुकाराम रामा शेटक कोंकणी उपन्यासक मैथिली अनुवाद) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१२ अभिनय- मुख्य अभिनय , सुश्री शिल्पी कुमारी, उम्र- 17 पिता श्री लक्ष्मण झा श्री शोभा कान्त महतो, उम्र- 15 पिता- श्री रामअवतार महतो, हास्य-अभिनय सुश्री प्रियंका कुमारी, उम्र- 16, पिता- श्री वैद्यनाथ साह श्री दुर्गानंद ठाकुर, उम्र- 23, पिता- स्व. भरत ठाकुर नृत्य सुश्री सुलेखा कुमारी, उम्र- 16, पिता- श्री हरेराम यादव श्री अमीत रंजन, उम्र- 18, पिता- नागेश्वर कामत चित्रकला श्री पनकलाल मण्डल, उमेर- ३५, पिता- स्व. सुन्दर मण्डल, गाम छजना श्री रमेश कुमार भारती, उम्र- 23, पिता- श्री मोती मण्डल संगीत (हारमोनियम) श्री परमानन्द ठाकुर, उम्र- 30, पिता- श्री नथुनी ठाकुर संगीत (ढोलक) श्री बुलन राउत, उम्र- 45, पिता- स्व. चिल्टू राउत संगीत (रसनचौकी) श्री बहादुर राम, उम्र- 55, पिता- स्व. सरजुग राम शिल्पी-वस्तुकला श्री जगदीश मल्लिक,५० गाम- चनौरागंज मूर्ति-मृत्तिका कला श्री यदुनंदन पंडित, उम्र- 45, पिता- अशर्फी पंडित काष्ठ-कला श्री झमेली मुखिया,पिता स्व. मूंगालाल मुखिया, ५५, गाम- छजना किसानी-आत्मनिर्भर संस्कृति श्री लछमी दास, उमेर- ५०, पिता स्व. श्री फणी दास, गाम वेरमा विदेह मैथिली पत्रकारिता सम्मान -२०१२ श्री नवेन्दु कुमार झा नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१३ मुख्य अभिनय- (1) सुश्री आशा कुमारी सुपुत्री श्री रामावतार यादव, उमेर- १८, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) मो. समसाद आलम सुपुत्र मो. ईषा आलम, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (3) सुश्री अपर्णा कुमारी सुपुत्री श्री मनोज कुमार साहु, जन्म तिथि- १८-२-१९९८, पता- गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही,जिला- मधुबनी (बिहार) हास्य–अभिनय- (1) श्री ब्रह्मदवे पासवान उर्फ रामजानी पासवान सुपुत्र- स्व. लक्ष्मी पासवान, पता- गाम+पोस्ट- औरहा, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) टाॅसिफ आलम सुपुत्र मो. मुस्ताक आलम, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, जिला- मधुबनी (बिहार) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान (मांगनि खबास समग्र योगदान सम्मान) शास्त्रीय संगीत सह तानपुरा : श्री रामवृक्ष सिंह सुपुत्र श्री अनिरूद्ध सिंह, उमेर- ५६, गाम- फुलवरिया, पोस्ट- बाबूबरही, जिला- मधुबनी (बिहार) मांगनि खबास सम्मान: मिथिला लोक संस्कृति संरक्षण: श्री राम लखन साहु पे. स्व. खुशीलाल साहु, उमेर- ६५, पता, गाम- पकड़िया, पोस्ट- रतनसारा, अनुमंडल- फुलपरास (मधुबनी) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान (समग्र योगदान सम्मान): नृत्य - (1) श्री हरि नारायण मण्डल सुपुत्र- स्व. नन्दी मण्डल, उमेर- ५८, पता- गाम+पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) सुश्री संगीता कुमारी सुपुत्री श्री रामदेव पासवान, उमेर- १६, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, जिला- मधुबनी (बिहार) चित्रकला- (1) जय प्रकाश मण्डल सुपुत्र- श्री कुशेश्वर मण्डल, उमेर- ३५, पता- गाम- सनपतहा, पोस्ट– बौरहा, भाया- सरायगढ़, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री चन्दन कुमार मण्डल सुपुत्र श्री भोला मण्डल, पता- गाम- खड़गपुर, पोस्ट- बेलही, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) संप्रति, छात्र स्नातक अंतिम वर्ष, कला एवं शिल्प महाविद्यालय- पटना। हरिमुनियाँ / हारमोनियम (1) श्री महादेव साह सुपुत्र रामदेव साह, उमेर- ५८, गाम- बेलहा, वार्ड- नं. ०९, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री जागेश्वर प्रसाद राउत सुपुत्र स्व. रामस्वरूप राउत, उमेर ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) ढोलक/ ठेकैता/ ढोलकिया (1) श्री अनुप सदाय सुपुत्र स्व. , पता- गाम- तुलसियाही, पोस्ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री कल्लर राम सुपुत्र स्व. खट्टर राम, उमेर- ५०, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) रसनचौकी वादक- (1) वासुदेव राम सुपुत्र स्व. अनुप राम, गाम+पोस्ट- िनर्मली, वार्ड न. ०७ , जिला- सुपौल (बिहार) शिल्पी-वस्तुकला- (1) श्री बौकू मल्लिक सुपुत्र दरबारी मल्लिक, उमेर- ७०, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री राम विलास धरिकार सुपुत्र स्व. ठोढ़ाइ धरिकार, उमेर- ४०, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) मूर्तिकला-मृर्तिकार कला- (1) घूरन पंडित सुपुत्र- श्री मोलहू पंडित, पता- गाम+पोस्ट– बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री प्रभु पंडित सुपुत्र स्व. , पता- गाम+पोस्ट- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) काष्ठ-कला- (1) श्री जगदेव साहु सुपुत्र शनीचर साहु, उमेर- ३६, गाम- िनर्मली-पुरर्वास, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री योगेन्द्र ठाकुर सुपुत्र स्व. बुद्धू ठाकुर उमेर- ४५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) किसानी- आत्मनिर्भर संस्कृति- (1) श्री राम अवतार राउत सुपुत्र स्व. सुबध राउत, उमेर- ६६, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) (2) श्री रौशन यादव सुपुत्र स्व. कपिलेश्वर यादव, उमेर- ३५, गाम+पोस्ट– बनगामा, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) अल्हा/महराइ- (1) मो. जीबछ सुपुत्र मो. बिलट मरहूम, उमेर- ६५, पता- गाम- बसहा, पोस्ट- बड़हारा, भाया- अन्धराठाढ़ी, जिला- मधुबनी, पिन- ८४७४०१ जोगिरा- श्री बच्चन मण्डल सुपुत्र स्व. सीताराम मण्डल, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री रामदेव ठाकुर सुपुत्र स्व. जागेश्वर ठाकुर, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) पराती (प्रभाती) गौनिहार आ खजरी/ खौजरी वादक- (1) श्री सुकदेव साफी सुपुत्र श्री , पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) पराती (प्रभाती) गौनिहार - (अगहनसँ माघ-फागुन तक गाओल जाइत) (1) सुकदेव साफी सुपुत्र स्व. बाबूनाथ साफी, उमेर- ७५, पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) (2) लेल्हु दास सुपुत्र स्व. सनक मण्डल पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) झरनी- (1) मो. गुल हसन सुपुत्र अब्दुल रसीद मरहूम, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) (2) मो. रहमान साहब सुपुत्र...., उमेर- ५८, गाम- नरहिया, भाया- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) नाल वादक- (1) श्री जगत नारायण मण्डल सुपुत्र स्व. खुशीलाल मण्डल, उमेर- ४०, गाम+पोस्ट- ककरडोभ, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री देव नारायण यादव सुपुत्र श्री कुशुमलाल यादव, पता- गाम- बनरझुला, पोस्ट- अमही, थाना- घोघड़डीहा, जिला- मधुबनी (बिहार) गीतहारि/ लोक गीत- (1) श्रीमती फुदनी देवी पत्नी श्री रामफल मण्डल, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) (2) सुश्री सुविता कुमारी सुपुत्री श्री गंगाराम मण्डल, उमेर- १८, पता- गाम- मछधी, पोस्ट- बलियारि, भाया- झंझारपुर, जिला- मधुबनी (बिहार) खुरदक वादक- (1) श्री सीताराम राम सुपुत्र स्व. जंगल राम, उमेर- ६२, पता- गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री लक्ष्मी राम सुपुत्र स्व. पंचू मोची, उमेर- ७०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) काँरनेट- (1) श्री चन्दर राम सुपुत्र- स्व. जीतन राम, उमेर- ५०, पता- गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) मो. सुभान, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) बेन्जू वादक- (1) श्री राज कुमार महतो सुपुत्र स्व. लक्ष्मी महतो, उमेर- ४५, गाम- िनर्मली वार्ड नं. ०४, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री घुरन राम, उमेर- ४३, गाम+पोस्ट- बनगामा, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) भगैत गवैया- (1) श्री जीबछ यादव सुपुत्र स्व. रूपालाल यादव, उमेर- ८०, पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री शम्भु मण्डल सुपुत्र स्व. लखन मण्डल, पता- गाम- बढियाघाट-रसुआर, पोस्ट– मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) खिस्सकर- (खिस्सा कहैबला)- (1) श्री छुतहरू यादव उर्फ राजकुमार, सुपुत्र श्री राम खेलावन यादव, गाम- घोघरडिहा, पोस्ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जिला- सुपौल, पिन- ८४७४५२ (2) बैजनाथ मुखिया उर्फ टहल मुखिया- (2)सुपुत्र स्व. ढोंगाइ मुखिया, पता- गाम+पोस्ट- औरहा, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) मिथिला चित्रकला- (1) सुश्री मिथिलेश कुमारी सुपुत्री श्री रामदेव प्रसाद मण्डल ‘झारूदार’ पता- गाम- रसुआर, पोस्ट-– मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) (2) श्रीमती वीणा देवी पत्नी श्री दिलिप झा, उमेर- ३५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) खजरी/ खौजरी वादक- (2) श्री किशोरी दास सुपुत्र स्व. नेबैत मण्डल, पता- गाम- रसुआर, पोस्ट-– मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) तबला- श्री उपेन्द्र चौधरी सुपुत्र स्व. महावीर दास, उमेर- ५५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री देवनाथ यादव सुपुत्र स्व. सर्वजीत यादव, उमेर- ५०, गाम- झाँझपट्टी, पोस्ट- पीपराही, भाया- लदनियाँ, जिला- मधुबनी (बिहार) सारंगी- (घुना-मुना) (1) श्री पंची ठाकुर, गाम- पिपराही। झालि- (झलिबाह) (1) श्री कुन्दन कुमार कर्ण सुपुत्र श्री इन्द्र कुमार कर्ण पता- गाम- रेबाड़ी, पोस्ट- चौरामहरैल, थाना- झंझारपुर, जिला- मधुबनी, पिन- ८४७४०४ (2) श्री राम खेलावन राउत सुपुत्र स्व. कैलू राउत, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) बौसरी (बौसरी वादक) श्री रामचन्द्र प्रसाद मण्डल सुपुत्र श्री झोटन मण्डल, उमेर- ३०, बौसरी/बौसली/बासुरी बजबै छथि। पता- गाम- रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) श्री विभूति झा सुपुत्र स्व. कनटीर झा, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- कछुबी, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) लोक गाथा गायक श्री रविन्द्र यादव सुपुत्र सीताराम यादव, पता- गाम- तुलसियाही, पोस्ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) श्री पिचकुन सदाय सुपुत्र स्व. मेथर सदाय, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) मजिरा वादक (छोकटा झालि...) श्री रामपति मण्डल सुपुत्र स्व. अर्जुन मण्डल, पता- गाम- रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) मृदंग वादक- (1) श्री कपिलेश्वर दास सुपुत्र स्व. सुन्नर दास, उमेर- ७०, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री खखर सदाय सुपुत्र स्व. बंठा सदाय, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) तानपुरा सह भाव संगीत (1) श्री रामविलास यादव सुपुत्र स्व. दुखरन यादव, उमेर- ४८, गाम- सिमरा, पोस्ट- सांगि, भाया- घोघड़डीहा, थाना- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) तरसा/ तासा- श्री जोगेन्द्र राम सुपुत्र स्व. बिल्टू राम, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री राजेन्द्र राम सुपुत्र कालेश्वर राम, उमेर- ५८, गाम- मझौरा, पास्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) रमझालि/ कठझालि/ करताल वादक- श्री सैनी राम सुपुत्र स्व. ललित राम, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री जनक मण्डल सुपुत्र स्व. उचित मण्डल, उमेर- ६०, रमझालि/ कठझालि/ करताल वादक, १९७५ ई.सँ रमझालि बजबै छथि। पता- गाम- बढियाघाट/रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, जिला- सुपौल (बिहार) गुमगुमियाँ/ ग्रुम बाजा श्री परमेश्वर मण्डल सुपुत्र स्व. बिहारी मण्डल उमेर- ४१, १९८० ई.सँ गुमगुिमयाँ बजबै छथि। श्री जुगाय साफी सुपुत्र स्व. श्री श्रीचन्द्र साफी, उमेर- ७५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) डंका/ ढोल वादक श्री बदरी राम, उमेर- ५५, पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) श्री योगेन्द्र राम सुपुत्र स्व. बिल्टू राम, उमेर- ५५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) डंफा (होलीमे बजाओल जाइत...) श्री जग्रनाथ चौधरी उर्फ धियानी दास सुपुत्र स्व. महावीर दास, उमेर- ६५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर),जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री महेन्द्र पोद्दार, उमेर- ६५, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) नङेरा/ डिगरी- श्री राम प्रसाद राम सुपुत्र स्व. सरयुग मोची, उमेर- ५२, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 111 ८) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 १०) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १३) विदेह सम्मान विशेषाक- २००म अक १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १४) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आमंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखलाW १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी VIDEHA 209th issue विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ Maithili Books can be purchased from: http://www.amazon.in/ For the first time Maithili books can be read on kindle e-readers. Buy Maithili Books in Kindle format (courtesy Videha) from amazon kindle stores, these e books are delivered worldwide wirelessly:- http://www.amazon.com/ अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। गजेन्द्र ठाकुर ggajendra@videha.com ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। २. गद्य २.१.वन्दना अवस्थी दुबेजीक हिन्दी कथा (अनुवाद आशीष अनचिन्हार द्वारा) २.२.डॉ. कैलाश कुमार मिश्र- महाराजा पंहिबा: मणिपुर केर ग़रीब नबाज़ २.३.रबीन्द्र नारायण मिश्र- वरिष्ठ नागरिक २.४.बीहनि कथा- ठ'रल सीरक. : सुकेश साहनी (हिन्दीसँ मैथिली मैथिली रूपान्तरण- मुन्नाजी) वन्दना अवस्थी दुबेजीक हिन्दी कथा (अनुवाद आशीष अनचिन्हार द्वारा) -प्रस्तुत अछि वन्दना अवस्थी दुबेजीक कथा केर अनुवाद। ई कथा एकटा एहन विषय-वस्तुपर अछि जे कि प्रायः छूअल नै गेल। तँइ ई कथा अहाँक अपन कथा लागत। हमरा हिसाबें ई कथा पुरुष दृष्टिकोणसँ लिखल गेल अछि मुदा खिड़की स्त्रीक दिशामे खुलैत छै। तँ पढ़ू ई कथा-- वन्दना अवस्थी दुबे-- कथा -- दायित्व "रमणीक जी गुजरि गेलाह"................ ई समाद अखबारक पहिले पन्नापर छल। ओह, ई समाद पढ़िते आभा उदास भऽ उठल आ बजा गेलै "आब की हेतै"। फेर अपने कहलक की हेतै तकर कोनो मतलब नै। सभकेँ मरहे के छै। अट्ठासी बर्खमे मरला। कम उमर नै छलनि। अभय सेहो कोनो नार्मल समाद सन एकरा लेलक। नार्मल रूपें तँ आभा सेहो लेने छल मुदा आब ओकरा चिंता आब रमणीकजीक परिवारकेँ छलै जकर संचालन अपने रमणीकजी करैत छलाह। अट्ठासी बर्खक उम्रमे सेहो जबाने सन फुर्ती छलनि। मजाल जे कोनो बात बिसरि जाथि। दू-दू टा दोकान छलनि मुदा दूनूकेँ अपने सम्हारने। बेटा सभ सेहो साठिक उम्र धरि पहुँचल मुदा एखनो बापक देल खर्चापर निर्भर। घरक सभ काज रमणीकजीक फैसलासँ होइत छल चाहे ओ अपन कनियाँक एनाइ-गेनाइ हो कि पुतहुअक या बेटा बेटीक। हँ खर्चा दै छलखिन तँ हिसाबो सेहो पूरा लै छलखिन। हिसाबमे गड़बड़ी हुनका पसंद नै छलनि। कहियो-कहियो आभाकेँ रमणीकजीक पुतहु-बेटासँ बड़ ईर्खा होइत छलै। होइत छलै जे ओकरे जकाँ बिना जिम्मेदारीक जीवन रहितै तँ कते नीक।ने घरक चिंता ने बाहरक। ओकरा सभकेँ पहिने खर्चा भेटि जाइ छै आ हमरा खर्चा देबऽ पड़ैत अछि। आभाकेँ अपन ससुरपर तामस आबऽ लागै छै। ओकर बियाहक एकै सालक बाद अभयकेँ कहि देल गेलै अपन खर्चा अपने चलबए लेल। आभा फेर सोचैए एकटा हमर ससुर छलाह आ एकटा छलाह रमणीकजी जे मरितो धरि बेटा पुतहुकेँ कोनो दिक्कत नै देलथि। एकटा प्रतिष्ठित कपड़ा बेपारी छलाह रमणीकजी। ग्राहकक सभहँक एहन विश्वास जे हिनकेसँ सभ कपड़ा कीनए। रमणीकजीक टा टा बेटा छल। जाहिमेसँ दू टा साठि पास कऽ चुकल छथि। आ तेसर पार करहे बला छथि। रमणीकजी अपन तीनू बेटा लेल एक नम्बरक घर बनबेने छलाह। घरो एकै छलनि आ सोफा-कोठा सभ एकै रंगक। आभाक सहेली छलै हर्षा, रमणीकजीक बड़की पुतहु। से जखन आभा हर्षाक घर गेल सोफा सभ देखाबए तँ से देखि आभाकेँ कतेको दिन निंद नै भेलै। आ अपन ससुरपर फेरो तामस एलै। अपन बर अभयपर सेहो जे पने पाइसँ घर खरिदबाक सपना देखैए। पता नै कहिया हेतै ओकर अपन घर। मुदा पता नै किए आभाकेँ लगै छलै जे रमणीकजीक बेटा सभ खुश नै छल। आ खुश केना रहितनि। पुतहुए सभ नाखुश छलनि। जखन-जखन हर्षा आभा लग अबैत छल। शिकाइतक मोटरी सेहो नेने अबैत छल। "कमनियाँ (कामना) नैहर गेलै तँ बाबूजी बीस हजार देलखिन आ हमरा बेरमे दसे। हम तँ कहि देलियनि जे हम नै जाएब नैहर। दस हजारमे की सभ हेतै। बुझिते नै छथिन।" शिकाइत करैत-करैत हर्षाक मूह लाल भऽ जाइत छलै। आभाकेँ आश्चर्य लगैत छलै आ कहैत छलै- "लेकिन दस हजारमे पूरा महिनका खर्च पूरा कोना हेतै" "नइ से नइ, खेनाइ-पिनाइ, बिजली,स्कूलक फीस, नौकर-चाकर सभ बाबुएजी दै छथिन" हर्षा ई लिस्ट गनबैत जाइत छलै आ आभाकेँ छगुन्ता लगैत रहलै जे सभ किछु जखन बाबुएजी करै छथिन तखन इम्हर-उम्हरकेँ खर्च लेल दस हजार कम कोना पड़ि जाइत छै। हमरा तँ दस हजारमे पूरा घर चलबऽ पड़ैए। देखियौ कतेक निश्चिंती जीबन छै एकर सभहँक तैयो खुश कहाँ छै ई सभ। आभा एखनो चिंतामे छल जे आब की हेतै? रमणीकजीक बेटा सभ हुनका जिबितेमे अलग हेबाक लेल जे फरफर करै छल से तँ अजाद भैए गेलै। अइ घटनाकेँ एक मास भऽ गेल रहै मुदा काजे सभ एहन अबैत गेलै जे आभा आ हर्षाक भेंट नै भेल रहै। मुदा ओहि दिन आभा हर्षाकेँ हाटमे देखलकै तँ चिन्हबामे धोखा भऽ गेलै। "की भेल, तबीयत खराप अछि की?" "तबीयत तँ ठीक अछि मुदा भागे खराप अछि। बड़का दोकान मझला देखै छलखिन आ छोटकाकेँ दुन्नू भाए। से मझला आब ओइ दोकानपर कब्जा जमा लेलखिन। ओइ दोकानक एकौ पाइ देबा लेल तैयार नै छथि। आब एक दोकानमे ई दू परिवार कोना चलत। घरक खर्च कते छै से आब बुझा रहल अछि?" हाटेमे हर्षा अपन दुख कहऽ लगलै। आब आभाकेँ बुझा गेल रहै हर्षाक चेहरा एना किए भेलै। "बाबूजी सभ राज-काज अपने देखै छलखिन से अइ दुन्नू भाए पते नै कोना काज होइ छै। सभ दिन बाबुएजीक कहलपर काज केला अपना मोने तँ किछु केबे नै केला" ई सभ कहैत-कहैत हर्षा हकमए लागल छल। से सच छैहे जे नौकर जकाँ खटब आ मालिक जकाँ काज सम्हारब दुन्नूमे भारी फरक छै। आभाकेँ ई एखनो नै बुझएमे आबि रहल छलै जे रमणीकजीक नीक केला की खराप। बेटा सभकेँ काजसँ दूर रखला आ ओकरा सभकेँ अपन पएरपर ठाढ़ नै होमए देलाह। साठि सालसँ बापपर निर्भर रहए बला बेटा सभ दोकानक नौकरपर निर्भर छल। आपना बच्चामे अपनो काज करबाक बुद्धि नै।एना किए केलखिन रमणीकजी। अपन बेटा सभकेँ अपने बकलेल बना देलखिन। लोथ सन बना देलखिन। आभाकेँ लगलै आब ओ कते सुखी अछि अपन छोट परिवार, अपन कम पाइमे। पहिल बेर आभा अपन ससुरक फोटोकेँ नीक जकाँ देखलक, बहुत देर धरि देखिते रहल। (मूल शीर्षक-- रमणीक भाइ नहीं रहे) ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। डॉ. कैलाश कुमार मिश्र- महाराजा पंहिबा: मणिपुर केर ग़रीब नबाज़ अजमेर केर हजरत ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (1141-1236) के ग़ुरबतमे जीवन जिबैत लोकसँ आ जनसाधारणसँ अगाध प्रेमके कारण ग़रीब नबाज़ कहल जाइत छनि। मुग़ल बादशाह अकबर महान (1542-1605) के ग़रीब नबाज़ केर नामसँ जानल जाइत छैक। ओ प्रजावत्सल छला, ग़रीब, दुखी एवं असहाय के मदति करैत छला। "ग़रीब नबाज़" शब्द लोक कंठमे एना बैस गेलैक जे आर त आर महाकवि तुलसीदास (1497-1623) अपन अजेय कृतिरामचरितमानसमे भगवान राम लेल ग़रीब नबाज़ (गरीबनेबाजू) शब्दके प्रयोग करैत एक पद लिख लेला: गईबहोर गरीबनेबाजू। सरल सबल साहिब रघुराजू।। बुधबर नहि हरि जस अस जानी। करहि पुनीत सुफल निजबानी।। एकर अर्थ भेल, “प्रभु रघुनाथ हेरायल या हाथसँ चलि गेल वस्तुके फेरसँ आनि सकैत छथि, ग़रीबनबाज़ (दीनबन्धु) , सरलस्वभाव, सर्वशक्तिमान आ सबहक स्वामी छथि। यैह बात बुझि गुणीजन ओहि श्रीहरि केर यशगानसँ अपनवाणीके पवित्र आ उत्तम फल देब' बला बनबैत छथि।” आश्चर्य तखन भेल जखन पूर्वोत्तर भारतके एकांतमे बसल राज्यमणिपुरमे अपन प्रवासक दौरान हमरा पता चलल जे मणिपुरके गौरवमय इतिहासमे सेहो एक प्रतापी, प्रजापालक, सम्यक, सहिष्णु राजा भेला जिनकर नाम ग़रीब नबाज़ छलनि। मणिपुर केर कुकी आदिवासी समुदायके डॉ. Leban Serto दिल्लीविश्विद्यालयमे हमर सहपाठी छला। काल्हि हुनकर एक मैसेज देखल जाहिमे ओ लिखने छथि जे दू आदिवासी समूह, नगा आ कुकीके बीच झगड़ाके चलते पूरा मणिपुर अस्त-व्यस्त भेल अछि। नेटवर्क या त बंद छैक अथवा कतौ कतौ बहुत मंथर गतिसँ चलि रहल छैक। लेबानके ई दुःख छनि जे अगर स्थिति अहिना रहलैक त क्रिसमस आ नववर्ष केर शुभकामना संदेश ओ अपन मित्रके नहि द पेताह। ताहि ओ 17 दिसम्बरक एडवांसमे सबके दुनु चीज़क शुभकामना द देलथि। दुर्भाग्यसँ हमरा लोकनि मणिपुर आ पूर्वोत्तर भारतके संबंधमे बहुत बातसँ बंचित छी। हम सब मीडिया द्वारे ई जरूर जनैत छी जे मणिपुरमे सेना आ सामान्य जनताके बीच सौहार्दय नहि छैक, आदिवासी आ गैर आदिवासीके बीच लड़ाई चलैत रहैत छैक, आदिवासी समाजक दू समहू, नगा आर कुकीके बीच युद्ध चलैत रहैत छैक, मारिकाट होइत रहैत छैक, सड़क जाम भ जाइत छैक, पेट्रोल 200 रुपया केर एक लीटर भ गेलैक, आदि-आदि। मुदा एहि राज्यके ऐतिहासिक , सांस्कृतिक, शैक्षणिक गौरव दिस ककर ध्यान जाइत अछि? हमरा लोकनि बिसरि जाइत छी जे यूनान आ चीनके मध्य मणिपुर सिल्करूटसँ जुडैत अछि। समस्त पूर्वोत्तर भारतमे मात्र दू राज्य अछि जतयसँ सिल्करूट जाइत छैक, जाहिमे एकटा राज्य मणिपुर सेहो अछि। ईराज्य 32 आदिवासी जे मूलतः नगा आ कुकी ग्रुपमे बॉटल अछि केर अतिरिक्त मैती समाजक गढ़ अछि। अतै केर तीन हिस्सा धरती पहाड़ आ एक हिस्सा मैदान छैक। अतै केर लोक अति प्राचीन समयसँ युद्धकला, संगीतकला, घुड़सवारी, मल्लयुद्ध, मार्शलआर्ट, नृत्य, नाटक, गायन, चित्रांकन आदिमे प्रबुद्ध रहल छथि। कहब त दंतककथा लागत मुदा ई शुद्ध ऐतिहासिक तथ्य छैक जे इसामसीहके जन्मसँ 33 वर्ष पूर्व मणिपुरके लिखीत इतिहास केर दस्तावेज उपलब्ध छैक। कहबाक तात्पर्य ई की जखन भारतके बहुत तथाकथित विकसित प्रान्त सबमे कुनो लिखित इतिहासके प्रथा नहि छल मणिपुरमे लिखित आ क्रमबद्ध लिखित इतिहास केर परंपरा रहल अछि। अतै बहुत राजा, राजकीय व्यवस्था, वंशावली आदि भेटत जे अहाँके मानय लेल बाध्य करत जे मणिपुर कुनो सामान्य राज्य नहि अछि। छोट छैक त की भेल, बहुत गौरवपूर्ण इतिहास आ परंपराके समेटने अछि। चलु बात करैत छी मणिपुर केर महाराजा ग़रीबनबाज़ केर सम्बन्धमे। ग़रीबनबाज़ के बात करैत छी त एक बात आरो स्मरण आबि गेल। एक संगोष्टीमे हम मणिपुर केर राजधानी इम्फालमे भाषण दैत रही। हमरा संगे पद्म श्री आर. के. जिलाजित सिंह बैसल छला। बिलकुल मैथिल पंडित जकाँ धोती कुर्ता पहिरने, कपारमे गोल ठोप लगेने, कान्हपर गमछा धारण केने। जखन हमर भाषण समाप्त भेल त ओ कहलनि: "अहाँ विद्यापति केर भूमिसँ छी। अहाँसँ नीक बात सुनबाक आकांक्षा छल। अहाँ आकांक्षाके पूरा केलौं। मणिपुर केर सेहो मिथिला जकाँ बौद्धिक, सांस्कृतिक गौरवपूर्ण इतिहास छैक। एकर सामरिक इतिहास, युद्धकौशल केर इतिहास बहुतों प्रदेशसँ उत्तम छैक। अतै एक राजा छला जिनका हमरा लोकनि ग़रीब नबाज़के नामसँ जनैत छी। अगर अहाँ संगे बैसब त निश्चिन्तसँ हुनकर सम्बन्धमे चर्चा करब।" अहि तरहेँ पद्मश्री जिलाजित सिंह हमरा मोनमे ई अद्भुत इतिहास जनबाक इच्छा जागृत क देलनि। बादमे कतेक दिन हुनकासँ आ आनो लोक सबसँ ग़रीब नबाज़पर चर्चा भेल। ई बात 2006 ईस्वीके अछि। सुनल इतिहासके जे बात सब स्मरण अछि तकरा आई यथावत लिखबाक प्रयास क रहल छी। हमर लेखनी संगे यात्रा करु बहुत आनंदित हैब। नव बात सुनब। भारतक संस्कृति केर एक क्षेत्र केर महानता सुनि समग्रतामे भारतपर गर्वक अनुभूति हैत। त इतिहासक एक कथा प्रारम्भ करैत छी।ग़रीब नबाज़ मणिपुरमे 1709 सँ 1748 ईस्वी धरि अर्थात क़रीब 4 दशक धरि राज केलनि। हिनकर पिताक नाम छलनि महाराजा चेराई सोंगबा। ग़रीबनबाज़ मणिपुरी नाम कुनो दृष्टिकोणसँ नहि बुझना जाइत अछि। लोक सब कहलक जे मणिपुरी सब हिनका पंहिबा कहैत छलनि। यद्यपि ई समस्त ग़रीब नबाज़के रूपमे ख्याति पौने छथि। ई पूर्णतः मुसलमानी नाम छैक जे कदाचित असममे मुस्लमानके आबि जेबाक कारणे मणिपुरमे एहि तरहक शब्द अपन वैशिष्यके कारण प्रचलनमे आबि गेल होइक। अहि बातपर सेहो इतिहास आ मानवशास्त्र केर विद्वान शोध क सकैत छथि। हालाँकि किछु विद्वानके मानव छनि जे सांस्कृतिक विस्तारवादके कारण भारतक लोक शायद हिनका ई नाम देलथिन जाहिसँ मणिपुरके सेहो भारतीय पुरातन आ समग्र परंपराके हिस्सा बुझल जा सकै। भइयो सकैत अछि जे मुग़ल अपन विस्तारवादी नीतिके कारण किछु एहेन केने हो। भ किछु सकैत अछि। पियाऊज केर छिलकाके परत त उखारब तखने पता चलत जे यथार्थ आखिर की छैक? खैर! अंगरेज सबके मानब छनि जे ग़रीब नबाज़ आदिवासी समाजसँ छला। लेकिन मणिपुरकेर अधिकांश लोक आ जिलाजित सिंहके मानव छनि जे गरीब नबाज़ ओतै केर राजाक पुत्र छला। से कोना? एहेन मान्यता छैक जे ई अर्थात ग़रीब नबाज़ राजा केर दोसर पत्नीके पुत्र छला। रानी हिनका जन्मिते एक आदिवासी परिवारमे गुप्त रूपसँ पठा देलथिन। ओतए हिनकर लालन पालन होमय लगलनि। ई बहुत तेज आ बलशाली नेनेसँ छला। कहल जाइत अछि जे जंगल केर बाघ, शेर आ तमाम हिंसक जानवर हिनका संगे खेल खेलैत छल। ई निर्भीक भावसँ सब संगे रहैत छला। तीरधनुष आ अन्य जंगली युद्धविद्यामे माहिर भ गेल रहथि। मुदा हिनक पिताके एहि सम्बन्धमे कोनो जानकारी नहि छलनि। महाराजा चेराई सोंगबाके पहिल रानीसँ कोनो संतान नहि छलनि। बल्कि हुनका हिसाबे कोनो रानीसँ हुनका पुत्र नहि छलनि। बूढ़ होब लागल छला। चिंतित छला जे हुनकर बाद राज सिंहासनपर के बैसतनि। एक दिन किछु सोचैत अपन सब रानीके बजेलनि आ कहलथिन: “देखु, हम आब बूढ़ भेल जा रहल छी। संतान होबाक उम्र समाप्त भ गेल। चिंता एहि बातक अछि जे हमरा बाद एहि राजगद्दीपर के बैसत। अगर अहाँ सबमे किनको पुत्र अछि जे हमरा ज्ञात नहि हो त हमरा सूचित करी अन्यथा हम अपन अधिकारी केर चुनाव आम जनतासँ कुनो पराक्रमी आ होनहार युवकके देखि करब।” महाराज चेराई सोंगबाके एहि बातपर सब रानी चुप रहली। मुदा कनि कालमे शांतिके भंग करैत दोसर महारानी बजली: “महाराज, हमरा माफ़ कैल जाओ। हमरा एक पुत्र भेल छल। ओहि समयमे हम नैहरमे रही। चूँकि परंपराके हिसाबे पहिल रानीके पुत्र राजगद्दीके सम्हारैत छैक से सोचि हम अपन पुत्रके एक आदिवासी लग गुप्त रूपेँ भेज देल। ओ ओतहि रहि रहल छथि। बली छथि। पराक्रमी छथि। शारीरिक सौष्ठवमे विलक्षण छथि। राजपुत्र छथि। चूँकि आब एहि वंशके वारिश चाही त हमरा हिसाबे आ यदि सब रानी आ अपनेक अनुमति हो त हम हुनका बजा दैत छी। ओ अहाँक प्राकृतिक उत्तराधिकारी छथि।” राजाक सँग सब रानी दोसर रानी केर एहि हर्षमय रहस्योद्घाटनसँ गदगद भ गेली। तुरंत आदमी भेजि ओहि पुत्रके राजमहलमे बजैल गेल। वैह युवक छला ग़रीब नबाज़। ग़रीब नबाज़ राजाके रूपमे समदर्शी छला। प्रजा पालक छला। आदिवासी आ मैतीके बीच नीक आ सहिष्णु छला। सर्वप्रिय छला।पहिने मणिपुरमे चंनामाई संस्कृति छलैक मुदा धीरे धीरे वैष्णव संस्कृतिके प्रचार होमय लगलैक। ओ सांस्कृतिक, धार्मिक एकतामे विस्वास राखैत छला। आर त आर पडोसी वर्माके राजा के सेहो जित लेलनि आ वर्मा (आजुक म्यंमार) मे अपन सुधारक कार्यक्रम चलौलनि। मणिपुरके सीमा विस्तार करैत रहला। एक दिस वर्मा त दोसर दिस असम धरि आबि गेला। ई बहुत मजबूत आ कुशल प्रशासक छला। एतबे नहि, महाराज ग़रीब नबाज़ बहुत तरहक चीज़ आ यंत्रके विकास केलनि। पहिल बेर टाइम मशीन केर निर्माण हिनका समयमे भेल। ई मशीन पानि आ किछु फेनेल केर एहेन युग्मसँ बनल छलैक जे सटीक टाइम देबामे सक्षम छलैक। ग़रीब नबाज़ केर दोसर खोज अथवा विकास छलनि अरामबाई। ई अरामबाई की भेल? ई बहुत खतरनाक आ प्रलयंकारी अस्त्र थिक। एकरा महाराजा ग़रीब नबाज़ बिना ककरो मदतिके अपने हाथे निर्माण केला। ओहि समय केर ई सबसँ खतरनाक अस्त्र छल। घोड़सवार एकरा अपना डाँर लग बहुत सावधानीसँ रक्षाकवचके रूपमे राखैत छल। हुनका समयमे मणिपुरके सैनिक आ योद्धा घोड़सवारी, घोडाके नियंत्रण, अश्वयुद्ध केर सञ्चालन, भाँति भाँतिके घोडाके पालन आ ओकर प्रशिक्षणमे माहिर छल। बतबैत चली जे पोलो खेलके जन्मदाता मणिपुर रहल अछि। पोलोके कतेक धुरंधर एहि धरापर भेल छथि। एखनो इम्फाल शहर केर पोलो ग्राउंड जेना अपन गौरवमय इतिहास केर गाथा गबैत हो। घोडापर चढ़ल घोड़सवार सैनिक रणकौशलमे अतेक माहिर छल जे घोडाके एकदिशामे अर्थात पांज लग आबि दौड़ैत अवस्थामे सेहो घोडापर चढ़ल एक हाथे घोडाके लगाम आ दोसर हाथे तीर धनुष अथवा आरो कुनो दुर्दांतक अस्त्रसँ दुश्मनके ध्वस्त क सकैत छल। ओ आगासँ, पाछासँ, कातसँ आ घोड़ाक पांजर लगसँ कतौसँ अपन सस्त्र चला सकैत छल। शत्रुके स्वाहा क सकैत छल। सबसँ प्रमुख बात ई जे राजा ग़रीब नबाज़ सब बात अपन नेतृत्वमे करैत छला। अरामबाई बहुत प्रलयंकारी आ कुनो सैनिक हेतु अमोघ अस्त्र छल। आर त आर अंग्रेज सब सेहो एहि अस्त्रसँ प्रभावित छल। आ एकरा सम्बन्धमे बहुत रास बात अपन डायरीमे लिखने छथि। कारण ओहि समयमे अंग्रेज लग अहि तरहक कुनो अस्त्र नहि छलैक। आई काल्हि अरामबाईके भारतीय राष्ट्रीय खेलमे शामिल क लेल गेल छैक। अहि तरहेँ महाराजा ग़रीब नबाज़ एक सर्वगुण संपन्न राजा छला। एक सफल राजा, सफल योद्धा, सफल सेनापति, अग्रचेति, दूरद्रष्टा, सफल प्रजापालक। मणिपुर केर सीमाके वर्माके ऊपरी भागसँ असमके सीमावर्ती क्षेत्र धरि विस्तार केलनि। मणिपुर केर लोक, ओतै केर वस्त्र विन्यास, महिला द्वारे वस्त्र बुनबाक परंपरा, ओतय केर नृत्य, प्राकृतिक छटा, खानपान, आ स्वर्णिम इतिहास अहाँके अपना दिस आकर्षित करत। कनि हमर बात मानि थोरेक दिन भ आउ ने मणिपुरसँ! ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। रबीन्द्र नारायण मिश्र वरिष्ठ नागरिक सन् २००७ मे भारतवर्षमे माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकक भरण-पोषण एवं कल्याण कानून लागू भेल। ऐ कानूनमे मूलत: निम्नलिखित चारिटा बिन्दुपर धियान राखल गेल अछि- १. माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकक आवश्यकताक अनुसार गुजाराक जोगार हेतु उपयुक्त बेवस्था माने उपयुक्त सरंजाम। २. वरिष्ठ नागरिक हेतु वेहतर चिकित्साक बेवस्था। ३. वृद्ध लोकनिक जीवन एवं सम्पैत केर रक्षा हेतु संस्थागत बेवस्था। ४. प्रत्येक जिलामे वृद्धाश्रमक स्थापना। उपरोक्त कानूनक अनुसार सन्तानक माने वालिग पुत्र, पुत्री, पौत्र, पौत्री अछि। साठि साल वा ओइसँ अधिकक कोनो बेकती विरिष्ठ नागरिककेँ कहल जाएत। नि:सन्तान वरिष्ठ नागरिकक सम्पैतिक वारिस वा ओकर सम्पैतपर कब्जा रखनिहार वालिग बेकती ओकर सम्बन्धी मानल जेता। गुजारामे भोजन, वस्त्र,आवास एवं चिकित्साक उचित बेवस्था शामिल अछि। प्रश्न अछि जे उपरोक्त कानूनक आवश्यकता किए भेल? अपन माटि-पानिक संस्करमे वृद्धजनकेँ सदैव आदर-भावसँ देखल जाइत छल। परिवारकेँ हुनकर ज्ञान एवं अनुभवक लाभ तँ भेटिते छल, संगहि सेवा सामान्य रूपसँ होइत रहैत छल। कालक्रमे संयुक्त परिवार टुटैत गेल। लोक गाम-घर छोड़ि कऽ नौकरी-चाकरीक जोगारमे महानागर चल गेल। गाममे वृद्ध असगर भऽ गेला। शहरी वृद्धक हालत तँ आरो खराप होइत जा रहल अछि, कारण ओइठाम लोक अलग-थलग रहैत अछि। अड़ोस-पड़ोससँ कोनो मतलब नहि रहैत छइ। उपरोक्त परिस्थितिमे बुढ़ सबहक हालत खराप होइत गेल। जीवनक अन्तिम वर्ष संघर्षमय एवं दुखद भेल जा रहल अछि। परिवारिक भावात्मक लगाउ कम भेल जा रहल अछि। केतेको वृद्ध लोकनिकेँ आमदनीक श्रोत नहि छैन आ परिवार उचित बेवस्था नहि करैत अछि। जिनका अधिक धिया-पुता अछि ओ सभ एक-दोसरपर फेका-फेकी करैत रहै छैथ। उपरोक्त परिस्थिति निपटक हेतु एवं वृद्धजनक कल्याणक हेतु ई कानून बनल। ऐसँ पूर्व सी.आर.पी.सी.क अधीन राहत हेतु मोकदमा चलि सकैत छल,मुदा ओ बहुत जटिल प्रक्रिया अछि। निपटानमे बहुत समय लागि जाइत अछि। २०१७ इस्वीसँ लागू उपरोक्त कानून बहुत असरदार अछि। ऐमे तीनसँ चारि महिनामे न्याय भऽ जाइत अछि। कोनो पक्ष वकील नहि राखि सकैत अछि। हरेक जिलामे ऐ हेतु न्यायाधिकरण अछि। न्यायाधिकरण मामलाक सार-संक्षेपमे सुनवाइ कऽ कऽ १० हजार रूपैआ मासिक तकक राहत दिया सकैत अछि। ऐ कानूनमे सभसँ विशेष बात ई अछि जे जँ माता-पिता किंवावरिष्ठ नागरिकक सम्पैत हुनक सन्तान किंवा सम्बन्धी लइ छैथ आ हुनकर पालन-पोषणमे कोताही करै छथिन तँ सम्बन्धित माता-पिता वा वरिष्ठ नागरिक न्यायाधिकरणमे दर्खास्त दऽ सकै छैथ आ न्यायाधिकरण के ओहन सम्पैत हस्तांतरणकेँ निरस्त करि ओइपर माता-पिता वा वरिष्ठ नागरिकक मालिकाना हक आपस दिया सकै छैथ। ऐ न्यायाधिकरणक निर्णयक विरूद्ध कोनो सिविल कोर्टमे सुनवाइ नहि भऽ सकैत अछि। जरूरत पड़लापर अपील जिलाधिकारीक समकक्ष अधिकारीक अध्यक्षतामे गठित अपीलीय न्यायाधिकरण ओइठाम कएल जा सकैत अछि। ऐ कानूनकेँ लागू भेला पाँच बर्ख भऽ गेल तथापि गामसँ शहर तक वृद्ध-वृद्धा लोकनिक समस्याक समाधान नहि भऽ सकल। तेकर एकटा प्रमुख कारण ई थिक जे माता-पिता अपने सन्तानक विरूद्ध अवाज नइ उठबै छैथ। लोक लाजक कारणेँ परिवारिक विषयपर चर्चो नहि करए चाहै छैथ। अपवादिक मामलामे आसपासक लोककेँ पता लगैत छइ। थाना, पुलिस, कोर्ट, कचहरी के करत? जीवनक संध्यामे ऐ तरहक फसाद करब संभव नहि बुझाइत अछि। समस्या मात्र आर्थिक नहि अछि। वयोवृद्ध लोकनिकेँ शारिरिक अक्षमता एवं निर्भरता बढ़ैत जाइत छैन। जँ पैसा बैंकमे ऐछो तँ आनत के? जँ कियो आनियोँ देलक तँ रोज-रोज वस्तु-जात केना आएत? आबियो जाएत तँ ओकर उपयोग वा मनोनुकूल कऽ सकता तइ बातकेँ के सुनिश्चित करत? जे बात हृदय एवं श्रद्धासँ भऽ सकैत अछि ओकरा कानून द्वारा लागू केना कएल जाएत? जइ वृद्ध सभकेँ सन्तान नहि अछि, हुनक समस्या आर जटिल रहैत अछि कारण निकट सम्बन्धी हुनकर सम्पैतपर धपाएल रहै छैथ आ सम्पैत कब्जा करिते निपत्ता..! भारतीय संविधानक चारिम भागक ४१म अनुच्छेदमे वृद्ध लोकनिक हित रक्षा करबाक परामर्श अछि। मुदा ई दिशा निर्देश हेबाक कारणेँ कानूनी अधिकार नहि दैत अछि। हिन्दू दन्तक ग्रहणसँ भरण-पोषण अधिनियम, १९५६क अधीन पहिल बेर कानूनी तौरपर बेटा एवं बेटीकेँ माता-पिताक पालन-पोषण करबाक जिम्मेदारी देल गेल। अपराधिक प्रक्रिया संहिताक धारा१२५ मे पहिल बेर सन् १९७३ मे बेवस्था कएल गेल जे आर्थिक रूपसँ सक्षम सन्तानकेँ माता-पिताक भरण-पोषण करबाक कानूनी दायित्व अछि। मुदाऐ कानूनकेँ बेवस्थाक अनुसार ज्यादासँ ज्यादा ५०० रूपैआ प्रतिमास माता-पिताकेँ भेट सकैत छैन। उपरोक्त रकम वर्तमान समयमे देखैत हास्यास्पद लगैत अछि। ई कानून सभ धर्मक लोकपर लागू होइत अछि। वृद्ध लोकनिक भरण-पोषण हेतु सभसँ धारदार कानून माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम २००७ अछि। वरिष्ठ नागरिकक जीवन संध्यामे आर्थिक कष्टक निवारण हेतु रिभर्स मोर्गेज स्कीम २००८ आनल गेल अछि। ओअपन अर्जित मकानकेँ बैंकक पास बन्धक राखि कऽ ओइ एवजमे आजन्म मासिक आय प्राप्त कऽ सकै छैथ, संगे मासिक आय प्राप्त कऽ सकै छैथ, संगहि ओइ मकानमे रहियो सकै छैथ।हुनकर मृत्युक पछाइत हुनकर उत्तराधिकारी बैंकक ऋृण सूद सहित अदा कऽ मकान आपस अपना नामे करा सकै छैथ अन्यथा बैंक ओइ मकानकेँ बेचि कर्जक रकम चुकता कऽ सकैत अछि। एहनो वृद्ध छैथ जिनका ने सन्तान अछि आ ने सम्पैत। ओ की करता? कानूनसँ हुनका कोनो मदैत संभव नहि? बहुत रास वृद्धक सन्तान परदेशमे नौकरी आकि बेवसाय करै छथिन। एहेन बुढ़ सभ मजबूरीमे शहर अपन सन्तान लग चलि जाइ छैथ मुदा ओइठाम हुनका मन नइ लगै छैन। गाम-घर छुटबाक दरेग हरदम मनमे कचोटैत रहै छैन। सारांश जे वृद्धजनक जीवन-यापन एवं समुचित बेवस्था एकटा गम्भीर समस्या भऽ गेल अछि चाहे ओ गाम हो, शहर हो,धनीक हो वा गरीब। सभ ऐ समस्याक शिकार छैथ। सभकेँ एक दिन ऐ परिस्थितिसँ गुजरबाक छइ। जे आइ युवक अछि, काल्हि ओहो वृद्ध हएत। समाजिक परिस्थिति क्रमश: बिगैड़ते जा रहल अछि। धिया-पुता जे देखत सएह ने आगू करत। ई बात सभ सोचैत अछि मुदा किछु मजबूरीमे आ किछु लापरवाहीमे घरक बुढ़केँ काहि काटक हेतु विवश छोड़ि दइ छैथ। बुढ़ चाहे वयोवृद्ध लोकनिसँ जुड़ल एक-सँ-एक घटना नित्यप्रति समाचार पत्र, रेडियो, दुरदर्शनपर अबैत रहैत अछि। एकटा एहने घटना किछु दिन पूर्व दिल्लीमे घटल। एक वृद्ध महिलाक पतिक मृत्यु भऽ गेल छेलैन। दिल्लीमे हुनका आलीशान भवन छेलैन। पुत्र अमेरिकामे काज करैत रहथिन। बहुत दिनपर पुत्र दिल्ली एला आ माएकेँ अपना संगे चलबाक प्रस्ताव केलखिन। बेटाक बातसँ माए बहुत प्रसन्न भेली। दिल्लीक एकाकी जीवनसँ ओ तंग भऽ गेल छेली। बेटा कहलखिन जे जखन सभ गोरे अमेरिकामे रहब तँ दिल्लीक घरक की हएत? से नइ तँ एकरा बेचि लेनाइए ठीक रहत। माए सहर्ष ई प्रस्ताव मानि लेलैथ। दिल्लीक मकान बेचि देल गेल। सभटा रूपैआ बेटाक एकाउन्टमे जमा भेल। तेकर बाद सभ कियो दिल्ली हवाई अड्डा पहुँचला। अमेरिकाक यात्राक क्रममे। माएकेँ बाहर बैसा देलखिन, ई कहि कऽ जे टिकट कटा कऽ आबि रहल छैथ। माए बाहर प्रतीक्षा करैत रहली आ ओ कथीले आपस एता। जखन बहुत समय गुजैर गेल तँ पुलिस ओइ वृद्धा लग आएल आ ओकर बात बुझलक। तखन हठात् पुलिस कहलकै जे अमेरिकाक जहाज उड़ला तँ घण्टो भऽ गेलइ। ओकर बटा माएकेँ छोड़ि कऽ अमेरिका चल गेल। बुढ़िया असगर कनैत रहल...। ई बात ओकर मकान कीननिहारकेँ सेहो पता लगलैक। बुढ़ियाकेँ अपन घरमे एकटा छोटसन जगह देलकै। बेटा घुरि कऽ कहियो हाल-चाल लेबए नहि आएल। अपन सन्तान लोककेँ केतेक धोखा दऽ सकैए तेकर ई उदाहरण अछि। दिल्ली विश्वविद्यालयक विधि विभागक प्रोफेसर लोतिका सरकारक खिस्सा लोमहर्षक अछि। दिल्लीक K-१/१० हौजखास इनक्लेभमे हुनकर घर छल जेकरा हुनकर परिवारिक मित्र हथिया लेने छला। घटनाक्रम तेहेन भेल जे हुनका अपनहि घरसँ बाहर होमए पड़ल। तखन हुनकर इष्ट-मित्र सभकेँ ऐ बातक जानकारी भेटल। ८७ वर्षीय प्रो. लोतिका सरकारक तरफसँ समाजिक संगठन वरिष्ठ नागरिक ट्राइवूनलमे केस केलक। तमाम पूछ-ताछक पछाइत उपरोक्त ट्राइवूनल लोतिका सरकार द्वारा कथित उपहारमे देल गेल अनुबन्धक रक्षक हुनकर घर हुनका आपस दियौलक। लोतिका सरकारक सम्पैत हरपनिहार एक उच्च पदस्थ पुलिस अधिकारी छला जे हुनकासँ दोस्तीक स्वांग करैत-करैत हुनकर कीमती घरकेँ कब्जिया लेला। जँ दिल्लीक संभ्रान्त समाजक मदैत नहि उठाबैत तँ प्रो. लोतिका सरकारक अपन सर्वत्र लूटा गेल छल। सेहो केहेन बेकती द्वारा जे स्वयं अति शिक्षित उच्च पदस्थ पुलिस अधिकारी छला। रक्षको पक्ष भक्षक सावित भऽ रहल छल। होमपेज इण्डिया द्वारा कएल गेल एकटा सर्वेक्षणक मुताबिक प्रत्येक तीनमे सँ एक वृद्धकेँ परिवारिक लोक द्वारा प्रतारणाक सामना करए पड़ैत छैन। ५६ प्रतिशत एहेन मामलाक हेतु पुत्र एवं २५ प्रतिशत मामलामे पुत्रवधु जिम्मेदार होइ छैथ। ऐमे सँ आधासँ अधिक वृद्ध एहेन घटनाक बारेमे मूलत: परिवारिक प्रतिष्ठाकेँ धियानमे रखैत केकरो नहि कहैत छैथ। एहेन घटना मध्य प्रदेशमे सभसँ अधिक (४७.९२ प्रतिशत) आ राजस्थानमे सभसँ कम (१.६७ प्रतिशत) भेल। अधिकांश वृद्धक धारणा अछि जे वृद्ध लोकनिक दुर्दशा रोकबाक हेतु धिया-पुताकेँ सचेष्टकरब जरूरी अछि। वृद्ध एवं बच्चाकेँ आपसी सिनेह एवं सामंजस बढ़ाएब जरूरी अछि। अर्जित आत्म निर्भरता सेहो जरूरी अछि। वृद्धजनकेँ संयुक्त परिवारमे रहबाक बेवस्थाकेँ उत्साहित करबाक हेतु राष्ट्रीय नीति बनक चाही एवं ओहन लोक सभकेँ टैक्स एवं सरकारी नौकरीमे विशेष सुविधा देबाक चाही। एक अन्य प्रतिवेदनक अनुसार सन् २००० सँ २०५० क बीचमे भारतक जनसंख्या ६० प्रतिशत बढ़ि जाएत। ऐ अवधिक बीच वरिष्ठ नागरिकक संख्या ३६ प्रतिशत बढ़ि जाएत जे तत्काल आवादीक २० प्रतिशत हएत। ईहो कहल गेल अछि जे विश्वमे २०५० इस्वी तक महिला वरिष्ठ नागरिकक संख्या पुरुखसँ अधिक भऽ जाएत। समाजमे महिलाक स्थिति ओहिना संघर्षपूर्ण रहैत अछि। ८० बर्खसँ ऊपर पुरुखक तुलनामे महिला अधिक दिन जीबै छैथ। जइमे अधिकांश विधवा भऽ गेल रहै छैथ। सर्वेक अनुसार ८० बर्खसँ बेसी आयुवर्गमे ७० प्रतिशत विधवा एवं २९ प्रतिशत विधुर छैथ। समाजक उपेक्षा एवं लिंग आधारित भेदभावक कारण विधवा वृद्धाक जीवन अपेक्षाकृत बेसी कष्टकर भऽ जाइत अछि। शिक्षा एवं जगरुकताक अभावमे ओ सरकारी सहायताक लाभ नीकसँ नहि उठा पबै छैथ। कएक बेर हुनकर सम्पैतकेँ हरैप लेल जाइत अछि एवं नाना प्रकारक प्रतारणाक शिकार सेहो होमए पड़ैत अछि। निरंतर बढ़ैत वृद्धक जनसंख्या आ लड़खड़ाइत परिवारिक संरचना वरिष्ठ नागरिक सबहक समस्याकेँ जटिल केने जा रहल अछि। पूर्वमे किछु कानूनी बेवस्थाक चर्चा भेल मुदा समस्या अछि जेअपने सन्तानक विरूद्ध न्यायक मांग कऽ आगू बढ़ैबला हजारमे कियो एक बेकती होइ छैथ, शेष लोक यंत्रनापूर्ण जीवन बीतबैत स्वर्ग सीधारि जाइ छैथ। आइसँ करीब २९ बर्ख पूर्व दिल्लीमे स्कूटरक पाछाँ एकटा बुढ़केँ उघारे देहे आ एकटा हाथ ऊपर उठेने जाइत देखने रहिऐक। पुछलिऐ जे ई एना किए छैथ? तँ आसपासक लोक सभ कहलक जे किछु साल पर्व हुनका अपन बेटाक संगे किछु विवाद भऽ गेल रहैन आ ओ हुनकर अँगा फाड़ि देलखिन। तहियासँ ओ बुड़हा अँगा पहिरब छोड़ि देलखिन आ विरोध-स्वरूप एकटा हाथ हमेशा अकास दिस केने रहै छैथ। ..सोचल जा सकैए जे ओइ पिताकेँ केतेकआन्तरिक कष्ठ भेलैन जे एहेन रूप धऽ लेलक। समस्या तँ ई अछि जे घर-परिवारसँ अनादृत, उपेक्षित होइतो वृद्ध लोकनि जाथि तँ केतए जाथि? कोनो दोसर विकल्प नहि बुझाइत अछि? नौकर-चाकरपर निर्भरता केतेको बेर जानलेबा साबित होइत अछि। घरमे असगर रहनिहार बुढ़क समस्या तँ आर जटिल भऽ गेल अछि। सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्था द्वारा विरष्ठ नागरिकक हेतु आवाससहित रखरखाउ लेल आन बेवस्था सभ सेहो कएल गेल अछि मुदा ओ अपर्याप्त अछि। दिल्ली, फरीदावाद, नोएडामे एहेन केतेको आवास (ओल्ड एज होम) अछि। परन्तु ऐ सभठाम रहनिहार वृद्ध लोकनिक हालत कोनो नीक नहि कहल जा सकैत अछि। कलकत्तामे डीगनीटी फाउण्डेसन, प्रोग्राम आदि नाओंसँ केतेको एहेन संस्था सभ ऐ क्षेत्रमे काज कऽ रहल अछि। मुदा वृद्ध लोकनिक संख्या देखैत एहेन सुविधा नगण्य अछि। फेर अधिकांश बुढ़ तँ ग्रामीण क्षेत्रमे रहि रहल छैथ। जैठाम परिवारक अतिरिक्त कोनो प्रकारक सहायताक संभावना नहि अछि। सरकार वरिष्ठ नागरिक लोकनि लेल कएटा सुविधा सभ दैत अछि, जेना- रेल टिकटमे छूट, अस्पतालमे अलग काउन्टर, पोस्ट ऑफिस, बैंक आदि सन सार्वजनिक जगहपर अतिरिक्त सुविधा मुदा बेवहारमे ई सुविधा सभ पर्याप्त नहि होइत अछि। अक्सर वृद्ध लोकनिकेँ झगड़ा करैपर मजबूर होमए पड़ै छैन। ऐ मामलामे दिल्लीक मेट्रोमे निश्चय बेहतर बेवस्था अछि। वरिष्ठ नागरिककेँ आसानीसँ आरक्षित जगहपर बैसए देल जाइत अछि। दिल्ली लोदी गार्डेनमे भोरू-पहरमे टहलैबला सबहक हुजुम रहैत अछि। ओइमे कएटा संगठित समूह बनि गेल अछि जइमे अधिकांश वरिष्ठ नागरिक लोकनि छैथ। ओ सभ भोरकेँ टहलै तँ छैथे संगे आपसमे भेँट-घाँट आ गप-सप्प सेहो करैत रहै छैथ। श्री भूटेलाल ठाकुर (सेवा निवृत्त आइ.ए.एस.) द्वारा ट्रस्ट सेहो ओइठाम बहुत सक्रिय अछि। वृहस्पति दिनकेँ नि:शुल्क चाहक बेवस्था ओतए रहैत अछि। टहलला पछाइत सभ ओतए एकट्ठा होइ छैत, चाह पीबै छैथ आ आपसमे अपन-अपन नीक-बेजाइक चर्च-बर्च करैत, हाँ-हाँ–हीं-ही करैत सभ कियो घर घुमै छैथ। ऐ सम्पर्कक प्रभावसँ कएटा वृद्धकेँ घोर विपत्तिसँ उबड़ैत पुनश्च नव उत्साहक संग जीबैत देखलौं। श्री ठाकुर द्वारा ट्रस्ट एकटा गैर-सरकारी संगठन अछि जे केतेको तरहक सेवा कार्य करैत अछि। कोसीक जखन बाढ़ि आएल छल तँ अहू ट्रस्ट द्वारा ट्रक भरि सहायता-सामग्री लऽ कऽ लोक सभ ओतए जरूरतमन्द लोकनिकेँ बीच वितरित केलैन। लोदी गार्डेनमे सेहो समय-समयपर अनेको कार्यक्रम ई सभ आयोजित करैत रहै छैथ। हौज खास, दिल्ली स्थित डियर पार्कमे सिनियर सिटिजन कॉसिल, दिल्लीक नामक एकटा संस्था अछि जे वरिष्ठ नागरिकक सुख-सुविधा आ मनोरंजनक लेल बेवस्थामे लागल रहैत अछि। समय-समयपर ओ सभ निवेश भ्रमणपर सेहो जाइत रहै छैथ। भोरमे ७ बजेसँ ८:३० बजे धरि नित्य ‘योग व्यायाम’ सहित अन्यान्य सांस्कृतिककार्यक्रमक आयोजन कएल जाइत अछि। पाँच साएसँ अधिक नागरिक ऐ संस्थाक सक्रिय सदस्य छैथ। किछु दिन पूर्व केन्द्र सरकार गरीबी रेखासँ निच्चाँबला वरिष्ठ नागरिकक हेतु मुफ्तमे छड़ी, चश्मा आ कानमे लगबैबला उपकरण देबाक घोषणा केलक अछि। जिलाक कलक्टरक अधीन गठित एकटा समिति एहेन लाभार्थीक पहचान करत। उपरोक्त समिति कानमे लगबैबला मशीन, चश्मा आ नकली दाँत इत्यादि वरिष्ठ नागरिकक हेतु बनेबाक लेल मूलभूत मेडिकल परीक्षण सेहो करौत। जनवरी २०१७ इस्वीसँ मार्च २०१७ इस्वीक बीच हर जिलामे १००० वरिष्ठ नागरिककेँ ई सुविधा देल जाएत। एवम् प्रकारेण सरकार ओ समाज सेवी लोकनि वरिष्ठ नागरिकक कल्याण हेतु बहुविध प्रयास कऽ रहल छैथ। मुदा ई समस्त प्रयास मिलियो कऽ परिवारक दायित्वक स्थान नहि लऽ सकैत अछि। अस्तु जरूरी अछि जे आधुनिकता एवम् वैश्वीकरणक प्रवाहमे हमरा लोकनि अपन संस्कारकेँ नहि बिसरी। माता-पिता, एवम् अन्य वरिष्ठ नागरिकक प्रति अपन दायित्व निर्वाह आनन्दपूर्वक करी जइसँ ओ गर्वसँ जीबैथ आ शान्तिसँ अपन जीवनक यात्रा पूर्ण करैथ,स्वर्गारोहण करैथ। समाजमे एहेन लोककेँ उत्साहित करक चाही जइसँ अधिकांश लोक अपन माता-पिताक सेवा कानूनक भयसँ नहि अपितु कर्तव्यक भावनासँ करै छैथ। ऐ उद्देश्यसँ पटना स्थित आचार्य किशोर कुणालजी द्वारा स्थापित महावीर मन्दिर ट्रस्ट द्वारा श्रवण कुमार पुरस्कार पुत्र द्वारा माता-पिता आ पुतोहु द्वारा ससुरक सेवा केनिहारकेँ देल जाइत अछि। समाजमे विरिष्ठ नागरिकक जीवन पुत्र सुगम करबामे ऐ तरहक प्रयास निश्चय प्रेरणादायी भऽ सकैत अछि। अस्तु समाजमे वृद्ध लोकनिक आदर, सम्मान ओ सेवा बढ़य से संस्कार बच्चेसँ धिया-पुताकेँ देल जाए, ऐमे सबहक कल्याण अछि। अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविन: चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विधा यशोवालम्। ◌ ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। प्रख्यात हिन्दी लघुकथाकार श्री सुकेश साहनीक चर्चित आ पुरस्कृत लघुकथा " ठंढी रजाइ " क मैथिली रूपान्तरण- मुन्ना जी द्वारा .प्रस्तुत ऐछ ! --------------------------------------- बीहनि कथा ठ'रल सीरक. : सुकेश साहनी """"""""""""""". """""""""""""""" " के छल ?" ओ आगि दिस हाथ पसारि तपैत पुछलक . " वएह. सोझाँ बालीक ओतए सँ , " कनिञाँ चिढ़ैत सुशीलाक नकल उतारलक. " बहीन, तुराय दीयय, हुनकर संगी एलनि हें ." फेर सीरक ओढति बडबडएल. " हिनका सब दिन सीरक मँगैत लाज नै होइ छनि ! हम त' साफ मना क' देलियै, कहि देलियै-" आइ हमरो ओत' कोइ अबै बला ऐछ." " नीक केलौं " ओहो सीरक मे नुकाइत बाजल ," ओकरा सबहक इएह इलाज ऐछ . " " बहुत ठंढी ऐछ !" ओ बड़बडएल . " हमर अपने हाथ - पएर सुन्न भेल जा रहल ऐछ.कनिञाँ अपन खटिया के धधकैत आगि ल'ग घीचैत बाजल." " सीरक त' जेना पुरे बर्फ भ' रहल ऐछ, नीन्न आओत कोना !" ओ करोट फेरैत बाजल. " नीन्न के त' जेना कोनो पते नै ऐछ." ऐ सरदी मे भरल सीरक सेहो बेअसर सन भ' गेल ऐछ." " एक बात कहू, खराप नै मानब ?" घ'रबला कहलक. " केहेन गप्प करै छी ?" " आइ खुब ठंढी छै , सोझाँ बला के ओतए कुटुमो आयल छै, तेहेन मे सीरक बिना बेशी कष्ट होइत हेतै." " हँ त',!" ओ आस लगा घ'रबला दिस तकलक . " हम सोइच रहल रही...हमर..मतलब इ छल जे..अपना ओतए एक टा सीरक त' फाजिले पड़ल ऐछ." " अहाँ त' हमर मोनक बात कहि देलौं, एक दिन ओढला सँ सीरक पतरा थोड़े ने जेतै, ओ चमकि के ठाढ़ भ' गेल, हम एखने सुशीला के सीरक द' के अबै छीयै." जहन ओ सुशीला के सीरक द' घुरल त' हरान छल ओ ओही ठ'रल सीरक मे निसभेड़ भ' सुतल छल. " ओहो अपन सीरक मे आबि घोसिया गेल. ओकरा सुखद आश्चर्य भेलै , सीरक खुब गरमएल छलै. ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.आशीष अनचिन्हार- ३ टा गजल ३.२.डा जियाउर रहमान जाफर- आजाद गजल ३.३.१. डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह”- ६ टा कवित२.बाबा बैद्यनाथजीक आजाद गजल ३.४.प्रणव कुमार-राईत इजोरिया ताइक रहल अछि आशीष अनचिन्हार- ३ टा गजल 1 कना कऽ पूछै हाल जगत बहुत पसारै जाल जगत अहींसँ भेलै दीन दुखी अहींसँ मालामाल जगत सुतल सुतल छै ड्राइवरे खसल पड़ल तिरपाल जगत के के बढ़ल अछि आगू तकर बहुत करै पड़ताल जगत हुनक जगत छनि सोन सुगंधि हमर तँ कादो थाल जगत सभ पाँतिमे 12-122-21-12 मात्राक्रम अछि तेसर शेरक पहिल पाँतिमे दीर्घकेँ लघु मानबाक छूट लेल गेल अछि अंतिम शेरक पहिल पाँतिक अंतिम लघु छूटक तौरपर लेल गेल अछि 2 आहि उठबे करतै इयाद एलापर नोर खसबे करतै इयाद एलापर पानि खाली देहक मिझा सकैए बस मोन जरबे करतै इयाद एलापर हाल केहन से अनुभवेसँ बुझि सकबै फूल झड़बे करतै इयाद एलापर मलहमो बेकारे बुझाइए हमरा घाव रहबे करतै इयाद एलापर पड़ि रहब ओछाएनपर नै छै सूतब आँखि जगबे करतै इयाद एलापर सभ पाँतिमे 2122+2212+1222 मात्राक्रक अछि अंतिम शेरक पहिल पाँतिमे एकटा दीर्घकेँ लघु मानबाक छूट लेल गेल अछि 3 आर जिलेबी पार जिलेबी बड़ सुंदर संसार जिलेबी किछु ने कहबै चुप्पे रहबै अपने छै बुधियार जिलेबी चाक कहू चक्र कहू या किछु सभ सुनतै कुम्हार जिलेबी ओ सभ कहथिन भोजन साजन हम कहबै हथियार जिलेबी रसगुल्ला सभहँक संगतमे बनि गेलै खुंखार जिलेबी सभ पाँतिमे 22-22-22-22 मात्राक्रम अछि दू टा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। डा जियाउर रहमान जाफर- आजाद गजल अहाँ यदि उपकार करब हमहूँ नीक व्यवहार करब खुशी जिनगीमे नहि आयत दुख के जब विस्तार करब धर्म जात पे नाम पे आखिर कब तक अत्याचार करब चढ के बोलत मिथ्यावादी सच के जब इनकार करब ईहे सोचि के बिसरल सभ दिन भिनसर मे दीदार करब केकरा अहाँ कहै छी नियम हमर अछी सरकार करब हमर भाखा मैथिली भाखा कोना अकर इनकार करब -डा जियाउर रहमान जाफरी, पीएच डी हिन्दी , हाइ स्कूल माफी , पो..माफी , जिला..नालंदा , बिहार -803107 ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १. डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह”- ६ टा कवित२.बाबा बैद्यनाथजीक आजाद गजल १ डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह”- ६ टा कविता हमर ई छओ गोट कविता मौलिक रूपसँ मैथिलीमे लिखित ओ अप्रकाशित अछि । ई कविता सभ तहिया लिखल गेल छल जहिया हम कॉलेज ऑफ आयुर्वेदमे (भारती विद्यापीठ, पूना) B.A.M.S. द्वितीय ओ तृतीय वर्षक (2nd & 3rd PROFESSIONAL YEAR) छात्र रही । ताहि समएमे महाविद्यालयक छात्र लोकनिमे EXTRA CO-CURRICULAR ACTIVITY केँ बढ़एबाक लेल “निर्मिती” नामक WALL MAGAZINE पर कविता आदि साहित्यिक कृति लगाओल जाइत छल जकर संयोजिका श्रीमति इण्दापुरकर मैडम (तत्कालीन लेक्चरर आ बादमे विभागाध्यक्ष - शारीर क्रिया विभाग) छलीह । हमहूँ मैथिली कविता लेल प्रस्ताव देल मुदा पाठक आन केओ नञि छलाह तेँ ओकर हिन्दी अनुवाद (स्वयं द्वारा अनुदित) देब स्वीकृत भेल । ताहि अनुदित रचना पर स्पष्ट उल्लेख रहैत छल कि मूल रचना “मैथिली” भाषामे अछि । - डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह” कालचक्र (कविता) पन्ना पर पन्ना उनटि रहल, हर पृष्ठ नवल नित्-नूतन छी । जे बीति चुकल से छल अद्भुत, आबएबाला सेहो अनुपम छी ।। ई समय-सरित् अविरल बहइछ, अप्पन प्रवाह - गति ओ लयमे । हम मूक ठाढ़ भऽ देखि रहल, हर एक दृश्य अतिविश्मयमे ।। प्राचीर कतेकहु ध्वस्त भेल, कतबा तटबन्ह भेल कवलित । फेर ओकरहि सलिल-सुधा-रससँ, कतबा कोंढ़ी* भेलछि विकसित ।। एकरहि प्रभाओसँ फेर अगिन, पाथर मोती बनि निखरि गेल । अगनित हीरा पुनि भेल मलिन, आ सीसा - टुकड़ी बदलि गेल ।। जे श्वेत प्रतीत होइत छल से, देखल तँऽ कारी - गुजगुज छल । पाषाण-प्रतिम छल जे लगैत, खन मोम जेकाँ देखल पघिलल ।। के भेल एतए जे कालचक्रसँ, बाँचि सकल कहुखन कहियो ? सुरपुर - जञो इन्द्र ने बचा सकथि, की मानव केर हस्ती - कहियौ ?? * एहि कवितामे “कोंढ़ी” शब्दक प्रयोग “पुष्प-कलिका” अथवा अविकसित फूल वा फूल केर फुलएबासँ पुर्वक अवस्थाक अर्थमे भेल भछि । विमर्शः- कोंढ़ - ई शब्द मैथिलीमे “अनेकार्थक शब्द” जेकाँ प्रयुक्त होइत अछि । एकर एकटा अर्थ “कुष्ठ वा महाकुष्ठ” (अंग्रेजीक लेप्रसी वा LEPROSY) नामक बेमारीक सन्दर्भमे होइत अछि । दोसर प्रयोग “डाँढ़” (हिन्दीक “कमर” आ अंग्रेजीक “वेस्ट वा WAIST”) केर सन्दर्भमे होइत अछि (यथा - कोंढ़ तोड़ि देलक ………….इत्यादि) । कल्याणी कोशकार “कोंढ़गर” माने “कलेजगर” बतओलन्हि अछि । मुदा मैथिलीमे “कोंढ़-करेज” दूनू संगहि-संग सेहो प्रयुक्त होइत अछि (यथा - ओकरा कोंढ़-करेज काटि कऽ दऽ दितियै की ? …………… आदि) जाहिसँ ई ध्वनित होइत अछि कि विशिष्ट अर्थमे “कोंढ़” आ “करेज” दूनू अलग-अलग अर्थ रखैत अछि । कोंढ़ी - ईहो शब्द मैथिलीमे “अनेकार्थक शब्द” जेकाँ प्रयुक्त होइत अछि । एकर पहिल अर्थ पुष्प कलिकाक (हिन्दीक “कली” आ अंग्रेजीक “फ्लोरल बड् वाFLORAL BUD”) केर अर्थमे होइत अछि । दोसर प्रयोग “कुष्ठ-रोगी” केर अर्थमे होइत अछि । कोढ़ि - एकर उच्चारण मैथिलीमे “कोइढ़” होइत अछि जकर मतलब अछि “आलसी” । यथा - कोढ़िआ बड़द, कोढ़िआ मचान आदि । कोढ़ि - ई शब्द सेहो दू अर्थमे प्रयुक्त अछि । पहिल “कोढ़” रोगसँ ग्रसित व्यक्ति आ दोसर एहेन ताड़क गाछ जाहिसँ ताड़ी नञि गरैत हो । कोंढ़ी आ कोढ़ी - किछु लेखक लोकनिक मानब छन्हि जे “कोंढ़ी” शब्द “पुष्प-कलिका” केर परिचायक थिक जखनि कि “कोढ़ी” शब्द “रोग विशेष”केँ निरूपित करैछ । एहि बातक पुष्टि किछु सीमा धरि “कोढ़ि या कोइढ़” शब्दसँ होइत अछि जकर निष्पत्ति सम्भवतः “कोढ़ वा कोढ़ी” शब्दसँ भेल अछि । आयुर्वेदमे कुष्ठरोगक (कोढ़क) प्रमुख कारण आलस्य आ आलस्यकारी भोजन (मधुर ओ स्निग्ध) बताओल गेल अछि आ मैथिलीमे “कोढ़ि या कोइढ़” शब्दक अर्थ सेहो “आलसी” अछि । “कोढ़ि” शब्दक उत्पत्तिक एहि आधारकेँ मानलासँ “कोढ़” शब्द कुठक परिचायक बूझि पड़ैछ आ “कोढ़ी” शब्द कुष्ठ रोगीक परिचायक जखनि कि “कोंढ़ी” शब्द पुष्प कलिकाक रूपमे प्रयुक्त बूझल जाएत । परञ्च सामान्य रूपेण देखबामे अबैत अछि कि जे केओ जीवन भरि गामहिमे रहलाह (वा रहलीह) आ हिन्दी नञि केर बराबर जनैत छथि ओ आनुनासिकक प्रयोग करैत पुष्प-कलिका ओ रोग-विशेष दुहुक लेल “कोंढ़ी” शब्दक प्रयोग करैत छथि । जखनि कि, विशेषतः शहरमे रहनिहार (वा रहनिहारि) लोक जे हिन्दी नीक जेकाँ जनैत अछि से आनुनासिकक प्रयोग नञि करैछ आ उपरोक्त दुहु अर्थमे “कोढ़ी” शब्दक प्रयोग करैछ । कागत केर फूल (कविता) हम छोड़ि चलल हुनिकर नगरी, जनिकर दुनिञामे प्यार ने छल । छल द्वेष - लोभ - छल - कपट सगर, नञि छल तँऽ केवल प्यार ने छल ।। वन - उपवन आ फुलबाड़ी छल, पर डाढ़ि कोनहु ने फूल एकहु । जे किछु छल, सब किछु कागत केर, नञि छल सुगन्धि वा गमक कोनहु ।। हम जनिका लेल रही पागल, नञि हुनिका छल विश्वास हमर । सब लऽग रहथि बस कहबा लए, केओ अप्पन कहनिहार ने छल ।। विमर्शः- गमक = सुगन्धि (मैथिलीमे; यथा - फूल गमकि रहल अछि) महक = दुर्गन्धि (मैथिलीमे; यथा - आलू सड़ि कऽ महकि रहल अछि) = गन्ध (हिन्दीमे) (हिन्दीमे “महक” या “मेहक” शब्द दुहु प्रकारक गन्ध मतलब कि “सुगन्धि” ओ “दुर्गन्धि” केर लेल प्रयुक्त होइत अछि) । गन्ह, गन्धि आ गन्ध - “गन्ध” तत्सम रूप थिक, “गन्धि” अर्धतत्सम ओ “गन्ह” तद्भव रूप । मैथिलीमे तीनूक मतलब एक्कहि थिक आ से नाक/घ्राणेन्द्रिय (NOSE / OLFACTORY RECEPTORS) ग्राह्य विषय थिक जकरा अंग्रेजीमे “स्मेल” (SMELL / OLFACTION) कहल जाइत अछि । मैथिलीमे एहि शब्दसभक प्रयोग तीन अर्थमे होइत अछि - (१) गन्ध केर स्वरूप अज्ञात भेला पर; यथा - ई कोन तरहक गन्ध/गन्धि/गन्ह अछि ? (२) प्रायः दुर्गन्धि केर अर्थमे; यथा - ई की गन्ध करै(त) छै अथवा ई की गन्हाइत छै ? (३) कोनहु आन विशेषण लगला पर अथवा परिस्थिति या भाव विशेषक अभिव्यक्तिक कारणेँ सुगन्धिक अर्थमे; यथा - महमह गन्ध, सुन्नर गन्ह, गुलाबक मादक गन्ध, रातुक रानीक गन्ध, मीठ गन्ध आदि । दू शब्द - अहँक प्रति (कविता) अहँ जाए छी तँऽ जाउ, अहँक मर्जी, सप्पत हमरा, हम नञि रोकब । हमरासँ दूर जँ खुश अपने, सप्पत हमरा, हम नञि रोकब ।। अहँ केर जिनगी, अधिकार अहँक, अहँ केर इच्छा, जे अहाँ करी । मधु - अमृत - पान करी या फेर, हालाहल - घट केर वरण करी ।। जाहि मृगतृष्णामे भटकि रहल छी, गीरह बान्हू, अहँ पछताएब । जाहि बाटसँ उनटहि पएर गेलहुँ, आपिस ओहिठाँ घुरि पुनि आएब ।। जकरा पाछाँ छी भागि रहल, से तँऽ बस माया छी केवल । अप्पन मतिभ्रमकेँ थीर करू, पुनि सोचू की छूटल - भेटल ।। हे आकांक्षे ! (कविता) हम आपना प्रति उत्तरदायी छी, तोहर कृत्यक तोंऽऽहींऽ जानए । हम कएलहुँ जे से उचित रहए, तोहर औचित्य तोंहीं जानए ।। अप्पन छवि अपनहि सोझाँमे, कारी-मलीन नञि बनल रहए । अपनहि समक्ष अप्पन माथा, लाजेँ बोझिल ने झूकल रहए ।। ई प्रीति पुनीत रहए हम्मर, हम तँऽ बस एतबहि टा बूझल । तोहर प्रदत्त अपमान - गरल, सेहो अमृत सनि हम बूझल ।। सभटा बन्हन आब टूटि चुकल, भ्रम मोह छोड़ि पाछाँ अएलहुँ । रही दूर स्वयंसँ भटकि गेल, आपिस फेर अपनाकेँ पओलहुँ ।। हे “आकांक्षे” ! हम मुक्त भेलहुँ, तोहर एहि विस्तृत मायासँ ।* मुइलहुँ ने, तपि कऽ निखड़ल छी, ओहि हवनकुण्ड केर छायासँ ।। * आकांक्षा = इच्छा, स्पृहा = प्रायः एहेन इच्छासभ जे ककरहु अहं केर तुष्टि लेल होइछ । दर्द (कविता) एतबा भेटल जे दर्द केर अभ्यस्त भऽ गेलहुँ । नोरहिकेँ प्रति आइ हम आशक्त भऽ गेलहुँ ।। सोचने रही हम बैसब, कोनहु प्रेम - खोहमे । देखल जे प्रेम - रंग तँऽ विरक्त भऽ गेलहुँ ।। निकलल रही हम चाह लऽ फूलहि केर सोहमे । थाम्हल जे काँट आँचर संशक्त भऽ गेलहुँ ।। भटकैत रही निरन्तर इजोतहि केर खोजमे । इजोतक चमकसँ आइ अनाशक्त भऽ गेलहुँ ।। सुनइत छलहुँ अन्हार करए सेन्ह ओजमे । अन्हारेक शांति पाबि कऽ सशक्त भऽ गेलहुँ ।। सुनने रही खड़ाब छै पड़िहेँ ने मोहमे । देखल जे ताहि सोचसँ विभक्त भऽ गेलहुँ ।। अहम् / अहं (कविता) हम देखि रहल छी सिन्धु-लहरि, जे अछि उठैत टकराइत अछि । अम्बर छूबा केर आश नेने, किछु दूर गगनमे जाइत अछि ।। किछु काल लागैतछि एहना जे, ओ सिन्धु छाड़ि पाछाँ आएल । पर नभ असीम, अतिशान्त, शून्य, के कहिया ओकरा अछि पाओल ?? एतबामे शैल-शिखर भेटल, आ लहरि ओतहि जा टकराएल । फेर आँखि फुजल, मुड़ि कऽ देखल, पुनि सिन्धु बीच स्वकेँ पाओल ।। ओ क्षुब्ध मनेँ बैसल किछु क्षण, नञि हारि मुदा तइयो मानल । शैथिल्य त्यागि कऽ सजग भेल, पुनि आपिस जएबा केर ठानल ।। किछु पुनि बेसी, आओरहु बेसी, ओ कसगर फेर प्रयास करैछ । अम्बरसँ लहरि धरिक दूरी, मूँह बओने ओहिना ठाढ़ रहैछ ।। कते दण्ड-पऽल, क्षण ओ प्रतिक्षण, बीतल कतबा दिन - राति बरख । ओ तन - मन - धनसँ लागल छल, श्रम - साफल्यक पर दूर दरस ।। निज रूप - अहं ओ त्यागि देल, एतबहिमे ओकरा की फूरल ! घनगृहसँ नीचाँ ताकि रहल, अम्बर पर अपनाकेँ देखल !! २ बाबा बैद्यनाथजीक आजाद गजल आउ सभ मैथिल माय जानकी पर एतबहि उपकार करी 'मिथिला-राज्य' बनय ई कहुना सभ मिलि एकर विचार करी सहैत रहल छी घोर उपेक्षा सभदिनसँ सभ लोक एतऽ एते सहब नहि तेँ सभ मिलि कऽ जन-जन केर हुंकार करी सहनशील होइते छी मैथिल बूझए नहि डरपोक कियो जखन जेना जे भाषा बूझय तहिने सभ व्यवहार करी कतेक शक्ति एहि माटि-पानिमे आब सगर दुनियाँ देखतै आब कोनो अन्याय देखितहि तखनहि सभ प्रतिकार करी एखन पलायन सँ सभ मैथिल भटकि रहला पूरे दुनियाँ कोना घूरि कऽ सभ घर आबथि मिलि खेती रोजगार करी राजनीति केर चक्रचालिमे बांटैत अछि सभकेँ नेता जाति-पाति केर भेद बिसरि कऽ कटुता केर संहार करी अपन कानमे तूर-तेल दए सुतले आब कोना रहबै सुप्त पड़ल जे सभकेर मनमे ऊर्जाक नव संचार करी शंखनाद करबैक जँ मिलिकऽ लेबैक सभ अधिकार अपन मातृभूमि केर कर्ज उतारी मिथिलाकेर उद्धार करी। -- बाबा बैद्यनाथ, पूर्णियाँ ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। प्रणव कुमार राईत इजोरिया ताइक रहल अछि राईत इजोरिया ताइक रहल अछि छौंडा सब भकुआइत रहल अछि फ़ेसबुक पर टिपिर-टिपिर किद्देन-कहां सब छाईप रहल अछि नुनू बाबु एना जुनि करू बनू नै अहां दिनजरू वाट्सएप-फ़ेसबुक सं फ़ुरसत लय क पोथी-पुस्तक सेहो धरू बुच्ची दाई के शौख बड्ड भारी चाहियैन हुनका बड়का गाडी पा̆प, रैप आ डिस्को क चक्कर में बिसरि गेल ओ गोसाऊनि आ नचारी बाबू कहथिन पढ गै बुच्ची नै त भेंटतौ वर खुरलुच्ची पढि लिखि क जौं लोक बनलैं त शौख पुरा हेतौ सच्ची-मुच्ची वैदेहि बेटी अछि बड्ड होसगर बैस जाई अछि ओ पढै लेल एकसर आंगन में आन धिया-पुता सब खुसुर-फ़ुसुर बतियाइत रहल अछि राईत इजोरिया ताइक रहल अछि छौंडा सब भकुआइत रहल अछि कियौ करैथ इंजिनियरिंग के तैयारी किनको मेडिकल भेटले चाही सोशल-मिडीया के भ्रमजाल में, मुदा सभ कियौ ओझराय रहल अछि राईत इजोरिया ताइक रहल अछि छौंडा सब भकुआइत रहल अछि नेता सब मुस्काइत रहल अछि जनता सब मुंह ताइक रहल अछि हरियर-लाल रंग में रंगिक पुरने भाषण बांचि रहल अछि राईत इजोरिया ताइक रहल अछि छौंडा सब भकुआइत रहल अछि कहै ’प्रणव’ अछि सुन छौंडा सब काज नै आबय सुख्खल भाषण जेकरा कर के लक्ष्य हासिल छै कठीन निशाना साईध रहल अछि राईत इजोरिया ताइक रहल अछि छौंडा सब भकुआइत रहल अछि - प्रणव कुमार, राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड, नई दिल्ली ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। बालानां कृते विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम भाषापाक १.रतन कुमार लाल दास- कोईली बाजी रहल अई २. डॉ. शशिधर कुमर- ७ टा बाल कविता १ रतन कुमार लाल दास कोईली बाजी रहल अई कोईली बाजी रहल अई, उठु मिथलावासी भेय गेल भोर, जाती-पाती के ताख पर राखु, चलु विकासक ओर ।
बऊआ- बच्चा किलोल कय रहल अई, चलु पटना के ओर, चारऊ दिशा मे नहर बनाबु , किसान के लय चलु उन्नति के ओर ।
बड़का-छोटका कय रहल अई दंगा शोर चलु मिथलावासी दिल्ली के ओर, अधौगिक लेल बिजली चाही एही सँ भय जायत मिथला मे भोर
बहिन -बेटी बिलखी रहल छैथ पोछैथ आँखीक नोर, दहेजक अई बहुत घनघोर बहिन- बेटी कुमैरे रहती भेजू जेलक ओर । २ डॉ. शशिधर कुमर- ७ टा बाल कविता १ कठसुग्गी / कठसुगीया हरियर हरियर चिड़ै छै बैसल । बऽड़क फऽड़ भखै छै बैसल । नञि सुगवा-सीकी ने हरियल । नाम ओकर कह बुच्ची !! *१ लोल ओकर मजगूत लगै छै । ठक् - ठक् गाछक काठ खोधै छै । ठोस लोल आबाज करै छै । छै ने मुदा कठखोद्धी ।।*२ सूर्योदय खन बड़ चहकै छै । मुदा ने तकलासँ भेटै छै । जानि कतए ओ नुका रहै छै । हड़बड़ाए देखि लुक्खी ।।*३ बच्चा हरियर रंग गात छै । चेतन गर्दनि-माथ लाल छै । जहिना बऽड़क फऽड़ - पात छै । नाम ओकर कठसुग्गी ।।*४ संकेत आ किछु रोचक तथ्य - *१ - हरियर रंगक चिड़ै सभमे अपना दिशि सभसँ प्रशिद्ध अछि सुग्गा आ हरियल । सुगवा सीकी सेहो हरियर रंगक होइत अछि । एहि कवितामे वर्णित चिड़ै सेहो हरियर रंगक अछि मुदा एहिठाँ नामित चिड़ै सभमेसँ नञि अछि । *२ - एहि कवितामे वर्णित चिड़ैकेँ मजगूत लोल होइत छै जाहिसँ ओ गाछक काठकेँ खोधि अपना रहबा लेल घऽर बनबैत अछि । सक्कत लोलसँ काठ पर प्रहार करबाक कारणेँ ठक् - ठक् केर स्इष्ट ध्वनि सेहो कर्णगोचर होइत अछि । मुदा तथापि ओ कठखोद्धी नामक चिड़ै नञि अछि । *३ - सूर्योदय खन सूर्य पहिल किरण पड़लाक लगभग एक घण्टा धरि ई चिड़ै खूब जोर - जोरसँ चहचहाइत अछि मुदा गाछक नीचाँ ठाढ़ भए ऊपर तकला पर देखबामे नञि अबैत अछि वा बड्ड मोश्किलसँ गोटेक - दूटा देखाइ दैत अछि । एकर मुख्य कारण ओहि चिड़ै केर रंग अछि जे गाछक पात पर पड़ैत सूर्य किरणसँ हू-ब-हू मेल खाइत अछि । *४ - कठसुग्गीक उपरुका लोलक ठीक ऊपर कड़गर नम्मा केस सदृश किछु संरचना होइत अछि जकरा अंग्रेजीमे बॉर्ब (BARB) कहल जाइत अछि । तेँ कठसुग्गीकेँ अंग्रेजीमे बार्बेट (BARBET) नामक चिड़ै कहल जाइत अछि । कठसुग्गीक कएक टा भेद - प्रभेद अछि जकरा जीवविज्ञानमे अलग-अलग जातिक (Species)रूपमे वर्गीकृत कएल गेल अछि । एहिमेसँ एकटा भेद जे अपना दिशि खूब भेटैत अछि, से अछि लाल माथ बला कठसुग्गी (COPPERSMITH BARBET) जकर वयस्कावस्थामे माथक ऊपर सुन्नर लाल रंगक मुकुट सनक संरचना रहैत अछि । एहने लाल रंगक संरचना गर्दनिपर अगिला भागमे सेहो रहैत अछि । एहि चिड़ै केर बाल्यकालमे एहि तरहक कोनहु लाल संरचना नञि रहैत अछि । एकर रंग आ बगए - बानी भोरुका रौद पड़ैत बऽड़क पातक ओ फऽड़क रंगसँ तेना ने मेल खाइत अछि कि सोझाँ रहितहुँ मनुक्खक आँखिकेँ ता धरि चिन्हबामे नञि आबैत अछि जा धरि ओ कोनहु प्रकारक हलचल नञि करैछ । अपना दिशि बेसी भेटए बला कठसुग्गीक दोसर प्रकार अछि भूरा या मटियाही माथ बला कठसुग्गी (BROWN HEADED BARBET) जकर जीवनकालक कोनहु अवस्थामे गर्दनि ओ माथ पर लाल रंगक कोनहु संरचना नञि होइत अछि । एकर माथ ओ गर्दनिक रंग भूरा या गाढ़ मटियाही रंगक होइत अछि । २ भगजोगनी गे भगजोगनी, बड़ चमकै छेँ ! कतएसँ बिजुरी छेँ । घुप्प अन्हरिया, बाटक कातेँ, चकमक चकमक कएने छेँ ।। आबि गेलेँ हमरा सोझाँ, हमरा हाथक तरहत्थी पर । बिजुरीसँ ने हाथ जरैतछि, छौ इजोत तोहर शीतल ।।*१ पेटक निचुला भाग पता नञि, केहेन माया रचने छेँ ! डिबिया - टेमी बिना तोँ सौंसे, भुक्-भुक् भुक्-भुक् कएने छेँ ।। पीच सड़क केर कातेँ - कातेँ, जमकल पानि आ गाछ छै । ताहि गाछ पर सत्ता - सोड़े, भगजोगनी केर बास छै ।।*२ भारी बरखा आ ठण्ढीमे, पतनुकान लए लैत छै । बरखक शेष समएमे ओ तँऽ, भुक् - भुक् - भुक् चमकैत छै ।।*३ भगजोगनीकेँ पकड़ि - पकड़ि, बन्न करैत छी शीशीमे । भूर छी कएने मुन्नामे, साँस लेबा लेल शीशीमे ।।*४ संकेत आ किछु रोचक तथ्य - *१ - भगजोगनीक उदर भाग (VENTRAL SURFACE) केर नीचाँमे विशिष्ट अवयवी संरचना होइत अछि जकरा प्रकाश उत्पादक अंग (LIGHT EMITTING ORGANS) कहल जाइत अछि । एहिमे ल्यूसीफेरेज (LUCIFERASE) नामक एकटा किण्वक या एञ्जाइम (ENZYME) होइत अछि जे ऑक्सीजन आ मैग्नेशियम आयनक (Mg++) उपस्थितिमे ल्यूसीफेरीन (LUCIFERIN) नामक रासायनिक पदार्थ पर क्रिया कऽ कऽ प्रकाश या इजोत उत्पन्न करैछ । एहि तरहेँ इजोतक उत्पत्ति जैव संदीप्ति (BIOLUMINESCENCE) केर उदाहरण अछि । भगजोगनीक एहि इजोतकेँ शीत इजोत (COLD LIGHT) कहल जाइत अछि । एहि इजोतमे पराबैगनी (ULTRA VIOLET) ओ अवरक्त (INFRA RED) किरण नञि रहैत अछि । अवरक्त किरणक अनुपस्थितिक कारणेँ एहिमे उष्णता या गर्मी नञि रहैत अछि आ तेँ छुअबा (छूबा) पर हाथ नञि पाकैत अछि । विश्वमे भगजोगनीक करीब दू (दुइ) हजार जाति (SPECIES) होइत अछि । भगजोगनीक विभिन्न जाति-प्रजातिक अनुसारेँ एहि इजोतक रंग पीयर, हरियर या पिरौंछ लाल भऽ सकैत अछि । *२ - भगजोगनी दलदली अथवा पानि लागल ओ गाछ-बिरिछसँ युक्त जगह सब पर रहैत अछि । एहि तरहक आवास क्षेत्र (HABITAT) अपना दिशि पीच (पक्का) सड़कक कातेँ-कातेँ आसानीसँ भेटि जाइत अछि कारण अछि ओहि सड़कक दूनू कात माटि कटलासँ गँहीर भेल स्थानमे बरख या बाढ़िक पानिक जमाव आ संगहि - संग भेल वृक्षारोपण । *३ - आन सन्धिपाद प्राणी (Arthropods) सब जेकाँ भगजोगनी सेहो शीतरक्तीय प्राणी (Cold blooded / Poikilothermal animal) अछि आ तेँ ठण्ढीक समएमे ओ पतनुकान लऽ लैत अछि अर्थात् शीतनिष्क्रिय अवस्थामे (Hibernating Stage) चलि जाइत अछि । किछु तँऽ बेङ्ग आ भेंक जेकाँ माटिक भीतर नुकाए रहैत अछि । तहिना बेसी तेज बरखा भेला पर सेहो । *४ - बहुतहु लोक अपन नेनपनमे भगजोगनीकेँ पकड़ि शिशीमे किछु काल वा किछु दिनक लेल बन्न कएने होएताह आ एखनहु धियापुता सब करैत अछि । ३ सतबहिनी मटियाही गात छै । दस - पाँच - सात छै । तेँ ओ कहाइत छै सतबहिनी ।।*१ छोट छिन समाज छै । खाइत ओ अनाज छै । दाना चुगि खाइत छै सतबहिनी ।। देखने जरूर छी । चिन्हबासँ दूर छी । गुण ने विशेष कोनहु सतबहिनी ।। मैथिली कि अंग्रेजी । बंगाली या हिन्दी । सभतरि कहाबैछ ओ सतबहिनी ।।*२ संकेत आ किछु रोचक तथ्य - *१ - ई चिड़ै प्रायः पाँच सँ सात धरिक छोट समूहमे रहैत अछि । तेँ एकर नाम सतबहिनी (सप्त = सात; शत = सए) पड़ल । *२ - अंग्रेजीमे एकर नाम सेवेन सिस्टर्स (seven sisters) बंगाली भाषाक नाम “सातभाई” सँ पज़ल अछि — से बताओल जाइत अछि । मुदा ध्यातव्य जे पहिने मिथिला सेहो अंग्रजक अनुसारेँ बंगाल प्रॉविन्सक भाग छल आ ग्रियर्शन महोदयक काजसँ पहिने मैथिलीक स्वतन्त्र अस्तित्व अंग्रेजक डाटाबेसमे नञि छल । मिथिलामे ३, ५, ७, ११ आदि विषम संख्याक किछु अलगहि महत्तव रहल अछि; जेना कि - सतभैंया, पंचभैंया आदि । ४ हमहूँ पढ़बै मैथिली हे ऐ बहिनजी, यौ मास्टरजी, हमहूँ पढ़बै मैथिली । हिन्दी, ईंग्लिश, जर्मन सीखबै, पर ने बिसरबै मैथिली ।। मैथिली बाजथि दादा - दादी, नाना - नानी मैथिली । बाहर जा कऽ माम बिसरलाह, मामी बिसरलीह मैथिली ।। कक्का - काकी जखन बजै छथि, हिन्दी फेंटल मैथिली । बौआ - बुच्चीक मोन होइछ पर, सीखितहुँ हमहूँ मैथिली ।। तेँ टीचरजी हमरा पढ़बू, हम्मर भाषा मैथिली । आनो भाषा नीक लगए, पर मीठगर छी बड़ मैथिली ।। गणित - ज्ञान - विज्ञानक भाषा, जखनहि होयत मैथिली । बुझबामे भाङ्गठ नञि होयत, अप्पन भाषा मैथिली ।। ५ ईद छै कि होली छै ईद छै कि होली छै । दुर्गा − छठि − दिवाली छै । हमरा लए हर दिन सुन्नर, कारण इस्कूलमे छुट्टी छै ।। कक्कर पाबनि, के मनबै छै । कहाँ बात से एतेक फुरै छै । हमसभ खुश छी इएह सोचि कऽ, आबै बला छुट्टी छै ।। ककर जन्म आ कक्कर बरषी । सभटा सरकारक मनमर्जी । हम बच्चासब इएह सोचै छी, एक दिन फेरो छुट्टी छै ।। रौद छै कड़गर, लूऽऽ चलै छै । बर्खा - बुन्नी, शीतलहरी छै । एतेक प्रखर हो हर मौसिम जे, होअए घोषणा - छुट्टी छै ।। ६ अबोध बच्चा टुकुर-टुकुर ओ ताकि रहल अछि । आँखिसँ दुनिञा नापि रहल अछि । एहि जग केर जगमगकेँ निहारैत, जग केर माया भाँपि रहल अछि ।। बाल-गोपाल स्वरूप छी बच्चा । सृष्टिक कोमल रूप छी बच्चा । छी अबोध, पर बोध कराबैछ, भगवानक छवि-रूपकेँ बच्चा ।। बच्चा नञि बस अगबहि बौआ । बच्चा माने बुच्ची आ बौआ । नेन्ना कोमल, कोमल नेनपन, देखि कऽ बिहुँसए आङ्गन कौआ ।। ७ मच्छर दुनिञामे मनुक्खक आगमसँ, बड़ पहिनेसँ मच्छर अछि ।*१ छोट जीव, मुदा पैघ जीवकेँ, कएने बहुत उछन्नर अछि ।। मच्छर केर जे पुरुष रूप से, पुष्प - परागकेँ चूसैत अछि । मच्छर केर स्त्रैन रूप मुदा, खून पीबि कऽ जीबैत अछि ।।*२ मच्छर अपनहि छोट अछैतहुँ, सूक्ष्मजीव केर आश्रय अछि । ओक्कर लेड़ - ग्रण्थिमे कएटा, परजीवी केर प्रश्रय अछि ।।*३ खून चूसबा काल लेड़ संग, परजीवी प्रस्थान करैछ । जकर खून चूसल जा रहलए, तकर काय स्थान धरैछ ।। नऽव कायमे ओ परजीवी, रोगक अछि निर्माण करैत । संग मनुक्खक आनहु पशुमे, नूतन ब्याधि-विधान करैछ ।।*४ जापानी एनसिफेलाइटिस ओ, डेङ्गू आओर मलेरिया । चिकेन गुनिञा सनक बेमारी, अथवा रोग फलेरिया ।।*५ मच्छर छी बड़ असञ्जाति, ओ हर युक्तिक प्रतिरोध गढ़ैछ । मशहरीक नञि तोड़ कोनहु छी, मच्छर केर अवरोध करैछ ।।*६ संकेत आ किछु रोचक तथ्य - *१ - एहि धरती पर जीवनक क्रमविकाशमे (Organic Evolution) नवीन मतानुसार मच्छरक उद्गम कमसँ कम 2 अरब 30 करोड़ वर्ष पहिने भेल छल जखनि कि आधुनिक विज्ञानानुसार मनुक्ख वंशक (Genus - Homo) उद्भव करीब 2 करोड़ वर्ष पहिनहि भेल अछि । आधुनिक मानव (Homo sapiens) केर उत्पत्ति तँऽ मात्र 2 लाख 50 हजार वर्ष पहिने बताओल जाइत अछि । *२ - पुरुष वा नर मच्छर पुष्प पराग पीबि (पिउबि) कऽ अपन जीवन निमाहैत अछि जखनि कि स्त्री या मादा मच्छर मनुक्खक अतिरिक्त किछु आन जन्तु सभक खून पीबि (पिउबि) जीवन निर्वाह करैछ । एकर पोषक जन्तु सबमे (Host animals) किछु रीढ़धारी आ किछु आन सन्धिपाद प्राणी सभ रहैत अछि । रीढ़धारी प्राणी सभमे स्तनपायी (Mammals), चिड़ै (Birds), सरिसृप (Reptiles), उभयचर (Amphibians), मत्स्य (Fishes) आदि वर्गक प्राणी सभ एकर पोषक जन्तु (Host animals) भऽ सकैत अछि । *३ *४ - स्त्री मच्छरक लेर ग्रण्थिमे (Salivary gland) बहुत रास अन्तः परजीवी सभ (Internal Parasites) निवास करैत अछि । जखन कोनहु परजीवीसँ संक्रमित वा व्यापित स्त्री मच्छर (Infected or Infested Female Mosquito) कोनहु पोषक जन्तु केर खून चूसैत (चूषैत) अछि तँऽ ओ परजीवी मच्छरक लेर(Saliva) केर संग ओहि पोषक जन्तुक रक्त परिसंचरण तन्त्रमे (Haemo Circulatory system) प्रवेश पबैछ । तकर बाद अपन विशिष्ट जीवन चक्रक (Specific Life Cycle) अनुसार ओहि पोषक जन्तुकेँ विभिन्न तरहक रोगसँ आक्रान्त करैछ । *५ - मनुक्खक मच्छर जनित बेमारी सबमे किछु प्रमुख अछि · मलेरिया (Malaria) · फलेरिया (Filariasis / Elephantiasis) · जपानी मस्तिष्क शोथ (Japanese Encephalitis) · डेङ्गू या डेङ्गी (Dengue) · चिकनगुनिञा (Chickengunya) · जिका वायरस बोखार (Zika Virus Fever) · पच्छिमी नील वायरस बोखार (West Nile Fever) आदि । *६ - कोनहु प्रकारक मच्छरनाशी वा मच्छररोधी रसायनक प्रति मात्र किछुअहि साल वा महीनामे मच्छर प्रतिरोध (Resistance) उत्पन्न कऽ लैत अछि ओ ओकरा बेअसरि कऽ दैत अछि । मच्छरसँ बचबाक लेल मशहरीक प्रयोग सस्ता आ रामबाण तरीक अछि । मैथिलीमे “मच्छर” ओ “मशहरी” दूनू तद्भव शब्द भेल जकर मूल संस्कृत शब्द क्रमशः “मत्सर” आ “मशकहरी” अछि । ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)2004-17. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽलेखकक नाम नैअछि ततऽसंपादकाधीन।विदेह- प्रथममैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)ggajendra@videha.comकेँमेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि।रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचयआ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेता, से आशा करै छी। रचनाक अंतमेटाइप रहए, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहलअछि।एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै। ऐ ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मीठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-17 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटारचनाआ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाकअनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतुggajendra@videha.co.inपर संपर्क करू। ऐ साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरीआ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल।५ जुलाई २००४ केँhttp://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ”जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सिद्धिरस्तु वि दे ह www.videha.co.inविदेहप्रथम मैथिलीपाक्षिक ई पत्रिकाwww.videha.com विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'विदेह' २१८ म अंक १५ जनवरी २०१७ (वर्ष १० मास १०९ अंक २१८)मानुषीमिह संस्कृताम्ISSN 2229-547X VIDEHA
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