40 ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' २१९ म अंक ०१ फरबरी २०१७ (वर्ष १० मास ११० अंक २१९) ऐ अंकमे अछि:- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१.१.जवाहर लाल कश्यप- बीहनि कथा- कुक्कुर २. राजेश वर्मा "भवादित्य"- बीहनि कथा- सोंगर २.२.डॉ. कैलाश कुमार मिश्र- मैथिलानी पर विमर्श क अधिकारी के? २.३.मुन्ना जी-४ टा बीहनिकथा-विधान,फसाद !,निवहता, हुव्वा २.४.१. कल्पना झा- २ टा बीहनि कथा- निर्वहन, निरुत्तर २.अभिलाष ठाकुर- २ टा बीहनि कथा- साँठ गाँठ, नोटबन्दी ३. पद्य ३.१.आशीष अनचिन्हार- ३ टा गजल ३.२.अशोक कुमार सहनी- गजल ३.३.डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह”- ४ टा कविता ३.४.राजेश मोहन झा 'गुंजन' -सरस्वती वंदना ४.बालानां कृते- डॉ. शशिधर कुमर- २ टा बाल कविता Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव Join official Videha facebook group. Join Videha googlegroups Follow Official VidehaTwitter to view regular Videha Live Broadcasts through Periscope. विदेह जालवृत्तक डिसकसन फोरमपर जाउ। संपादकीय विदेह "नेपालक वर्तमान मैथिली साहित्य" विषयक विशेषांक निकालबाक नेयार केलक अछि जकर संयोजक श्री दिनेश यादव जी रहता। अइ विशेषांकमे नेपालक वर्तमान मैथिली साहित्य केर मूल्यांकन रहत। अइ विशेषांक लेल सभ विधाक आलोचना-समीक्षा-समालोचना आदि प्रस्तावित अछि। समय-सीमा किछु नै जहिया पूरा आलेख आबि जेतै तहिये, मुदा प्रयास रहत जे एही साल मइ-जून धरि ई विशेषांक आबि जाए। उम्मेद अछि विदेहक ई प्रयास दूनू पायापर एकटा पूल जरूर बनाएत। विदेह द्वारा संचालित "आमंत्रित रचनापर आमंत्रित आलोचकक टिप्पणी" शृंखलाक दोसर भागक घोषणा कएल जा रहल अछि। दोसर भागमे अइ बेर नीलमाधव चौधरी जीक रचना आमंत्रित कएल जा रहल अछि आ नीलमाधवजीक रचना ओ रचनाधर्मितापर टिप्पणी करबा लेल कैलाश कुमार मिश्रजीकेँ आमंत्रित कएल जा रहल छनि। दूनू गोटाकेँ औपचारिक सूचना जल्दिये पठाओल जाएत। रचनाकारक रचना ओ आलोचकक आलोचना जखने आबि जाएत ओकर अगिला अंकमे ई प्रकाशित कएल जाएत। अइ शृंखलाक पहिल भाग कामिनीजीक रचनापर छल आ टिप्पणीकर्ता मधुकांत झाजी छलाह। जेना की सभ गोटा जनै छी जे विदेह २०१५ मे तीन टा विशेषांक तीन साहित्यकारपर प्रकाशित केलक जकर मापदंड छल सालमे दूटा विशेषांक जीवित साहित्यकारक उपर रहत जइमे एकटा ६०-७० वा ओइसँ बेसी सालक साहित्यकार रहता तँ दोसर ४०-५० सालक ( मैथिली साहित्यकार मने भारत आ नेपाल दूनूक)। ऐ क्रममे अरविन्द ठाकुर ओ जगदीश चंद्र ठाकुर "अनिल"जीपर विशेषांक निकलि चुकल अछि। आगूक विशेषांक किनकापर हुअए तइ लेल एक मास पहिनेसँ पाठकक सुझाव माँगल गेल छल। पाठकक सुझाव आएल आ ओइ सुझाव अंतर्गत विदेहक किछु अगिला विशेषांक परमेश्वर कापड़ि, वीरेन्द्र मल्लिक आ कमला चौधरी पर रहत। हमर सबहक प्रयास रहत जे ई विशेषांक सभ २०१७ मे प्रकाशित हुअए मुदा ई रचनाक उपलब्धतापर निर्भर करत। मने रचनाक उपलब्धताक हिसाबसँ समए ऊपर-निच्चा भऽ सकैए। सभ गोटासँ आग्रह जे ओ अपन-अपन रचना ggajendra@videha.com पर पठा दी। ई-पत्र आदरनीय सम्पादक महोदय, “विदेह” मैथिली ई-पत्रिकाक २१८म अंकमे (१६ जनबरी २०१७) श्री आशीष अनचिन्हारजीक ई-पत्र पढ़ल । पढ़ि कऽ नीक लागल । हुनिकर मन्तव्य छन्हि जे पैघ वाक्यक प्रयोगक कारणेँ एहि कवितासभकेँ पढ़त के ? - से विचारनीय । हुनिकर ई मन्तव्य सम्भवतः “प्राणी जगत कविता श्रृंखला” केर अन्तर्गत छपि रहल हमर बाल कवितासभक सन्दर्भमे छन्हि । एहि कवितासभक सन्दर्भमे आओरहु किछु पाठक लोकनिक नीक-बेजाए प्रतिक्रिया हमरा व्यक्तिगत रूपेँ प्राप्त भेल अछि । प्रतिक्रिया नीक हो वा बेजाए, दूनू हमरा नीक लागल आ ताहि लेल श्री अनचिन्हारजी सहित आनहु पाठक लोकनिक हम आभारी छी । एहि श्रृंखलाक प्रयोजन, भाषा, शैली, जानकारी संचय करबाक तरीका आदि बहुत रास विषय अछि जाहि सम्बन्धमे पाठक लोकनिक जिज्ञासा व प्रश्न होएब स्वभाविकहि अछि । एहि तरहक सभ जिज्ञासा व प्रश्नक हम स्वागत करैत छी । आगाँ कोनहु अंकमे “प्राणी जगत कविता श्रृंखलाक प्रस्तावना” नामसँ एक गोट लेख केर माध्यमसँ हम पाठक लोकनिक जिज्ञासा ओ प्रश्नक उत्तर देबाक यथासम्भव प्रयास करब । ता धरि एखन एतबहि कहब जे, (१)॰ अनचिन्हारजी ओ आन पाठक लोकनि द्वारा निर्दिष्ट त्रुटिसभकेँ आगामी कवितासभमे यथासम्भव परिमार्जनक प्रयास कएल जाएत । (२)॰ एहि श्रृंखलाक मुख्य उद्देश्य अछि मैथिली भाषामे प्रचलित प्राणीसभक नामकेँ एकटा व्यापक ओ वैज्ञानिक आधार दए साहित्य जगतक सोझाँ आनब ताकि काल्हि कोनहु मैथिलीप्रेमी धियापुताकेँ हमरा जेकाँ ओहि नैराश्यक सामना नञि करए पड़ए जे कहियो हमरा करए पड़ल छल । ओ अपना इस्कूल, कॉलेज वा विश्वक आन कोनहु मंच पर माथ उठा कऽ ताल ठोकि कऽ कहि सकए कि “डोकहर” वा “कठसुग्गी” कोनहु गँवार वा देहाती शब्द नञि थिक । ओ हमर भाषाक विशिष्ट शब्द थिक जकरा अंग्रजीमे क्रमशः ADJUTANT STORK आ BARBET कहल जाइत अछि आ जैववैज्ञानिक रूपसँ एहि विशिष्ट प्राणी वा प्राणी समूहक परिचायक थिक । (३)॰ एहि सम्बन्धमे “कल्याणी कोश”मे किछु काज भेल अछि, मुदा से अत्यल्प अछि जकर कारण सम्भवतः शब्दकोशक सीमित कलेवर रहल होयत (जेना कि शब्दकोशकार स्वयं प्रस्तावनामे लिखने छथि) । एहि श्रृंखलाक कवितासभक संगहि देल गेल छायाचित्रसभ वस्तुतः कविताक आत्मा थिक आ श्रृंखला लेखनक मूल उद्देश्यक पुर्तिमे सहयोगी सेहो । पछिला २-३ बेरसँ छायाचित्र पठओलाक बादहु प्रकाशनमे ओकरा सम्मिलित नञि कएल जा रहल अछि । तेँ सम्पादक महोदयसँ विनम्र निवेदन जे कृपया छायाचित्रसभकेँ सेहो पत्रिकामे स्थान देथु । जँ सभ चित्रक समावेश सम्भव नञि होअए तँ कमसँ कम कविताक पहिल परिचायक छायाचित्रकेँ पत्रिकामे स्थान देल जाओ । वस्तुतः कविता लिखब कोनहु भारी बात नञि अछि आ एहि श्रृंखलाक लगभग ५० गोट कविता एखनहु हमरा लग लिखल अछि । मुदा एहि तरहक विशिष्ट उद्देश्यक कविता लेल छायाचित्र प्राप्त करब (यथासम्भव मिथिलहि केर क्षेत्रसभसँ), परिचायक चित्र बनाएब आ पाद टिप्पणी लिखब महत्त्वपुर्ण, श्रमसाध्य ओ समए व्ययक काज थिक । एखनुकहि स्थिति एहेन अछि कि अपना मिथिलामे बेसीतर लोक जीव-जन्तु ओ चिड़ै-चुनमुन्नीक मैथिली नाम तँऽ जनैत छथि मुदा प्रत्यक्ष देखला पर बहुत विद्वानहु लोकनि (किछु अपवादकेँ छोड़ि) निश्चितताक संग नञि चीन्हि पाबैत छथि । एखनहि किछु दिन पहिने फेसबुक पर “हरियल” नामक चिड़ै केर छायाचित्र प्रेषित कएल गेल छल जकरा बेसीतर लोक “परबा” कहलन्हि तँऽ किछु लोक “पौड़की” । किछु आन लोकनिकेँ “रँगल कबूतर” वा “फोटोशॉपसँ रंग चढ़ाओल परबा” लगलन्हि । एकाधहि गोटे निश्चितताक संग “हरियल” कहि सकलाह । लोक बागर, कठसुग्गी, खिखीर, खुटेर, हुरार आदि कहैत तँऽ छथि मुदा चिन्हैत नञि छथि । खिखीरकेँ केओ सपनौर जातिक मानैत छथि तँऽ केओ सियार जातिक । “खुटेर” केर विषयमे कल्याणी कोश मात्र एतबहि कहैत अछि कि ओ एकटा पक्षी अछि जे ठीक मध्यान्हमे बजैत अछि । भविष्यमे ई समस्या मैथिलीक संग आओरहु गम्भीर भए सकैत अछि । तेँ सम्पादक महोदयसँ पुनः अनुरोध जे हमर एहि निवेदन दिशि ध्यान देथु आ छायाचित्रसभकेँ कविताक संगहि पत्रिकामे स्थान देथु । धन्यवाद संग - डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह” विदेह सम्मान विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान १.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०१०-११ २०१० श्री गोविन्द झा (समग्र योगदान लेल) २०११ श्री रमानन्द रेणु (समग्र योगदान लेल) २.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११-१२ २०११ मूल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, कथा संग्रह) २०११ बाल साहित्य पुरस्कार- ले.क. मायानाथ झा (जकर नारी चतुर होइ, कथा संग्रह) २०११ युवा पुरस्कार- आनन्द कुमार झा (कलह, नाटक) २०१२ अनुवाद पुरस्कार- श्री रामलोचन ठाकुर- (पद्मानदीक माझी, बांग्ला- मानिक बंद्योपाध्याय, उपन्यास बांग्लासँ मैथिली अनुवाद) विदेह भाषा सम्मान २०१२-१३ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) 1.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार 2012 2012 श्री राजनन्दन लाल दास (समग्र योगदान लेल) 2.विदेह भाषा सम्मान २०१२-१३ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) २०१२ बाल साहित्य पुरस्कार - श्री जगदीश प्रसाद मण्डल केँ “तरेगन” बाल प्रेरक विहनि कथा संग्रह २०१२ मूल पुरस्कार - श्री राजदेव मण्डलकेँ "अम्बरा" (कविता संग्रह) लेल। 2012 युवा पुरस्कार- श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरीक “अर्चिस” (कविता संग्रह) 2013 अनुवाद पुरस्कार- श्री नरेश कुमार विकल "ययाति" (मराठी उपन्यास श्री विष्णु सखाराम खाण्डेकर) विदेह भाषा सम्मान २०१३-१४ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) २०१३ बाल साहित्य पुरस्कार – श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरी- “देवीजी” (बाल निबन्ध संग्रह) लेल। २०१३ मूल पुरस्कार - श्री बेचन ठाकुरकेँ "बेटीक अपमान आ छीनरदेवी" (नाटक संग्रह) लेल। २०१३ युवा पुरस्कार- श्री उमेश मण्डलकेँ “निश्तुकी” (कविता संग्रह)लेल। २०१४ अनुवाद पुरस्कार- श्री विनीत उत्पलकेँ “मोहनदास” (हिन्दी उपन्यास श्री उदय प्रकाश)क मैथिली अनुवाद लेल। विदेह भाषा सम्मान २०१४-२०१५ (समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान) २०१४ मूल पुरस्कार- श्री नन्द विलास राय (सखारी पेटारी- लघु कथा संग्रह) २०१४ बाल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (नै धारैए- बाल उपन्यास) २०१४ युवा पुरस्कार - श्री आशीष अनचिन्हार (अनचिन्हार आखर- गजल संग्रह) २०१५ अनुवाद पुरस्कार - श्री शम्भु कुमार सिंह ( पाखलो - तुकाराम रामा शेटक कोंकणी उपन्यासक मैथिली अनुवाद) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१२ अभिनय- मुख्य अभिनय , सुश्री शिल्पी कुमारी, उम्र- 17 पिता श्री लक्ष्मण झा श्री शोभा कान्त महतो, उम्र- 15 पिता- श्री रामअवतार महतो, हास्य-अभिनय सुश्री प्रियंका कुमारी, उम्र- 16, पिता- श्री वैद्यनाथ साह श्री दुर्गानंद ठाकुर, उम्र- 23, पिता- स्व. भरत ठाकुर नृत्य सुश्री सुलेखा कुमारी, उम्र- 16, पिता- श्री हरेराम यादव श्री अमीत रंजन, उम्र- 18, पिता- नागेश्वर कामत चित्रकला श्री पनकलाल मण्डल, उमेर- ३५, पिता- स्व. सुन्दर मण्डल, गाम छजना श्री रमेश कुमार भारती, उम्र- 23, पिता- श्री मोती मण्डल संगीत (हारमोनियम) श्री परमानन्द ठाकुर, उम्र- 30, पिता- श्री नथुनी ठाकुर संगीत (ढोलक) श्री बुलन राउत, उम्र- 45, पिता- स्व. चिल्टू राउत संगीत (रसनचौकी) श्री बहादुर राम, उम्र- 55, पिता- स्व. सरजुग राम शिल्पी-वस्तुकला श्री जगदीश मल्लिक,५० गाम- चनौरागंज मूर्ति-मृत्तिका कला श्री यदुनंदन पंडित, उम्र- 45, पिता- अशर्फी पंडित काष्ठ-कला श्री झमेली मुखिया,पिता स्व. मूंगालाल मुखिया, ५५, गाम- छजना किसानी-आत्मनिर्भर संस्कृति श्री लछमी दास, उमेर- ५०, पिता स्व. श्री फणी दास, गाम वेरमा विदेह मैथिली पत्रकारिता सम्मान -२०१२ श्री नवेन्दु कुमार झा नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१३ मुख्य अभिनय- (1) सुश्री आशा कुमारी सुपुत्री श्री रामावतार यादव, उमेर- १८, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) मो. समसाद आलम सुपुत्र मो. ईषा आलम, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (3) सुश्री अपर्णा कुमारी सुपुत्री श्री मनोज कुमार साहु, जन्म तिथि- १८-२-१९९८, पता- गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही,जिला- मधुबनी (बिहार) हास्य–अभिनय- (1) श्री ब्रह्मदवे पासवान उर्फ रामजानी पासवान सुपुत्र- स्व. लक्ष्मी पासवान, पता- गाम+पोस्ट- औरहा, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) टाॅसिफ आलम सुपुत्र मो. मुस्ताक आलम, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, जिला- मधुबनी (बिहार) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान (मांगनि खबास समग्र योगदान सम्मान) शास्त्रीय संगीत सह तानपुरा : श्री रामवृक्ष सिंह सुपुत्र श्री अनिरूद्ध सिंह, उमेर- ५६, गाम- फुलवरिया, पोस्ट- बाबूबरही, जिला- मधुबनी (बिहार) मांगनि खबास सम्मान: मिथिला लोक संस्कृति संरक्षण: श्री राम लखन साहु पे. स्व. खुशीलाल साहु, उमेर- ६५, पता, गाम- पकड़िया, पोस्ट- रतनसारा, अनुमंडल- फुलपरास (मधुबनी) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान (समग्र योगदान सम्मान): नृत्य - (1) श्री हरि नारायण मण्डल सुपुत्र- स्व. नन्दी मण्डल, उमेर- ५८, पता- गाम+पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) सुश्री संगीता कुमारी सुपुत्री श्री रामदेव पासवान, उमेर- १६, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, जिला- मधुबनी (बिहार) चित्रकला- (1) जय प्रकाश मण्डल सुपुत्र- श्री कुशेश्वर मण्डल, उमेर- ३५, पता- गाम- सनपतहा, पोस्ट– बौरहा, भाया- सरायगढ़, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री चन्दन कुमार मण्डल सुपुत्र श्री भोला मण्डल, पता- गाम- खड़गपुर, पोस्ट- बेलही, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) संप्रति, छात्र स्नातक अंतिम वर्ष, कला एवं शिल्प महाविद्यालय- पटना। हरिमुनियाँ / हारमोनियम (1) श्री महादेव साह सुपुत्र रामदेव साह, उमेर- ५८, गाम- बेलहा, वार्ड- नं. ०९, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री जागेश्वर प्रसाद राउत सुपुत्र स्व. रामस्वरूप राउत, उमेर ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) ढोलक/ ठेकैता/ ढोलकिया (1) श्री अनुप सदाय सुपुत्र स्व. , पता- गाम- तुलसियाही, पोस्ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री कल्लर राम सुपुत्र स्व. खट्टर राम, उमेर- ५०, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) रसनचौकी वादक- (1) वासुदेव राम सुपुत्र स्व. अनुप राम, गाम+पोस्ट- िनर्मली, वार्ड न. ०७ , जिला- सुपौल (बिहार) शिल्पी-वस्तुकला- (1) श्री बौकू मल्लिक सुपुत्र दरबारी मल्लिक, उमेर- ७०, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री राम विलास धरिकार सुपुत्र स्व. ठोढ़ाइ धरिकार, उमेर- ४०, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) मूर्तिकला-मृर्तिकार कला- (1) घूरन पंडित सुपुत्र- श्री मोलहू पंडित, पता- गाम+पोस्ट– बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री प्रभु पंडित सुपुत्र स्व. , पता- गाम+पोस्ट- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) काष्ठ-कला- (1) श्री जगदेव साहु सुपुत्र शनीचर साहु, उमेर- ३६, गाम- िनर्मली-पुरर्वास, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री योगेन्द्र ठाकुर सुपुत्र स्व. बुद्धू ठाकुर उमेर- ४५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) किसानी- आत्मनिर्भर संस्कृति- (1) श्री राम अवतार राउत सुपुत्र स्व. सुबध राउत, उमेर- ६६, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) (2) श्री रौशन यादव सुपुत्र स्व. कपिलेश्वर यादव, उमेर- ३५, गाम+पोस्ट– बनगामा, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) अल्हा/महराइ- (1) मो. जीबछ सुपुत्र मो. बिलट मरहूम, उमेर- ६५, पता- गाम- बसहा, पोस्ट- बड़हारा, भाया- अन्धराठाढ़ी, जिला- मधुबनी, पिन- ८४७४०१ जोगिरा- श्री बच्चन मण्डल सुपुत्र स्व. सीताराम मण्डल, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री रामदेव ठाकुर सुपुत्र स्व. जागेश्वर ठाकुर, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) पराती (प्रभाती) गौनिहार आ खजरी/ खौजरी वादक- (1) श्री सुकदेव साफी सुपुत्र श्री , पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) पराती (प्रभाती) गौनिहार - (अगहनसँ माघ-फागुन तक गाओल जाइत) (1) सुकदेव साफी सुपुत्र स्व. बाबूनाथ साफी, उमेर- ७५, पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) (2) लेल्हु दास सुपुत्र स्व. सनक मण्डल पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) झरनी- (1) मो. गुल हसन सुपुत्र अब्दुल रसीद मरहूम, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) (2) मो. रहमान साहब सुपुत्र...., उमेर- ५८, गाम- नरहिया, भाया- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) नाल वादक- (1) श्री जगत नारायण मण्डल सुपुत्र स्व. खुशीलाल मण्डल, उमेर- ४०, गाम+पोस्ट- ककरडोभ, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री देव नारायण यादव सुपुत्र श्री कुशुमलाल यादव, पता- गाम- बनरझुला, पोस्ट- अमही, थाना- घोघड़डीहा, जिला- मधुबनी (बिहार) गीतहारि/ लोक गीत- (1) श्रीमती फुदनी देवी पत्नी श्री रामफल मण्डल, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) (2) सुश्री सुविता कुमारी सुपुत्री श्री गंगाराम मण्डल, उमेर- १८, पता- गाम- मछधी, पोस्ट- बलियारि, भाया- झंझारपुर, जिला- मधुबनी (बिहार) खुरदक वादक- (1) श्री सीताराम राम सुपुत्र स्व. जंगल राम, उमेर- ६२, पता- गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री लक्ष्मी राम सुपुत्र स्व. पंचू मोची, उमेर- ७०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) काँरनेट- (1) श्री चन्दर राम सुपुत्र- स्व. जीतन राम, उमेर- ५०, पता- गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) मो. सुभान, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) बेन्जू वादक- (1) श्री राज कुमार महतो सुपुत्र स्व. लक्ष्मी महतो, उमेर- ४५, गाम- िनर्मली वार्ड नं. ०४, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री घुरन राम, उमेर- ४३, गाम+पोस्ट- बनगामा, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) भगैत गवैया- (1) श्री जीबछ यादव सुपुत्र स्व. रूपालाल यादव, उमेर- ८०, पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री शम्भु मण्डल सुपुत्र स्व. लखन मण्डल, पता- गाम- बढियाघाट-रसुआर, पोस्ट– मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) खिस्सकर- (खिस्सा कहैबला)- (1) श्री छुतहरू यादव उर्फ राजकुमार, सुपुत्र श्री राम खेलावन यादव, गाम- घोघरडिहा, पोस्ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जिला- सुपौल, पिन- ८४७४५२ (2) बैजनाथ मुखिया उर्फ टहल मुखिया- (2)सुपुत्र स्व. ढोंगाइ मुखिया, पता- गाम+पोस्ट- औरहा, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) मिथिला चित्रकला- (1) सुश्री मिथिलेश कुमारी सुपुत्री श्री रामदेव प्रसाद मण्डल ‘झारूदार’ पता- गाम- रसुआर, पोस्ट-– मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) (2) श्रीमती वीणा देवी पत्नी श्री दिलिप झा, उमेर- ३५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) खजरी/ खौजरी वादक- (2) श्री किशोरी दास सुपुत्र स्व. नेबैत मण्डल, पता- गाम- रसुआर, पोस्ट-– मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) तबला- श्री उपेन्द्र चौधरी सुपुत्र स्व. महावीर दास, उमेर- ५५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री देवनाथ यादव सुपुत्र स्व. सर्वजीत यादव, उमेर- ५०, गाम- झाँझपट्टी, पोस्ट- पीपराही, भाया- लदनियाँ, जिला- मधुबनी (बिहार) सारंगी- (घुना-मुना) (1) श्री पंची ठाकुर, गाम- पिपराही। झालि- (झलिबाह) (1) श्री कुन्दन कुमार कर्ण सुपुत्र श्री इन्द्र कुमार कर्ण पता- गाम- रेबाड़ी, पोस्ट- चौरामहरैल, थाना- झंझारपुर, जिला- मधुबनी, पिन- ८४७४०४ (2) श्री राम खेलावन राउत सुपुत्र स्व. कैलू राउत, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) बौसरी (बौसरी वादक) श्री रामचन्द्र प्रसाद मण्डल सुपुत्र श्री झोटन मण्डल, उमेर- ३०, बौसरी/बौसली/बासुरी बजबै छथि। पता- गाम- रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) श्री विभूति झा सुपुत्र स्व. कनटीर झा, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- कछुबी, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) लोक गाथा गायक श्री रविन्द्र यादव सुपुत्र सीताराम यादव, पता- गाम- तुलसियाही, पोस्ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) श्री पिचकुन सदाय सुपुत्र स्व. मेथर सदाय, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) मजिरा वादक (छोकटा झालि...) श्री रामपति मण्डल सुपुत्र स्व. अर्जुन मण्डल, पता- गाम- रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) मृदंग वादक- (1) श्री कपिलेश्वर दास सुपुत्र स्व. सुन्नर दास, उमेर- ७०, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री खखर सदाय सुपुत्र स्व. बंठा सदाय, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) तानपुरा सह भाव संगीत (1) श्री रामविलास यादव सुपुत्र स्व. दुखरन यादव, उमेर- ४८, गाम- सिमरा, पोस्ट- सांगि, भाया- घोघड़डीहा, थाना- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) तरसा/ तासा- श्री जोगेन्द्र राम सुपुत्र स्व. बिल्टू राम, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री राजेन्द्र राम सुपुत्र कालेश्वर राम, उमेर- ५८, गाम- मझौरा, पास्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) रमझालि/ कठझालि/ करताल वादक- श्री सैनी राम सुपुत्र स्व. ललित राम, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री जनक मण्डल सुपुत्र स्व. उचित मण्डल, उमेर- ६०, रमझालि/ कठझालि/ करताल वादक, १९७५ ई.सँ रमझालि बजबै छथि। पता- गाम- बढियाघाट/रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, जिला- सुपौल (बिहार) गुमगुमियाँ/ ग्रुम बाजा श्री परमेश्वर मण्डल सुपुत्र स्व. बिहारी मण्डल उमेर- ४१, १९८० ई.सँ गुमगुिमयाँ बजबै छथि। श्री जुगाय साफी सुपुत्र स्व. श्री श्रीचन्द्र साफी, उमेर- ७५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) डंका/ ढोल वादक श्री बदरी राम, उमेर- ५५, पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) श्री योगेन्द्र राम सुपुत्र स्व. बिल्टू राम, उमेर- ५५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) डंफा (होलीमे बजाओल जाइत...) श्री जग्रनाथ चौधरी उर्फ धियानी दास सुपुत्र स्व. महावीर दास, उमेर- ६५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर),जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री महेन्द्र पोद्दार, उमेर- ६५, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) नङेरा/ डिगरी- श्री राम प्रसाद राम सुपुत्र स्व. सरयुग मोची, उमेर- ५२, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 111 ८) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 १०) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १३) विदेह सम्मान विशेषाक- २००म अक १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १४) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आमंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखलाW १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी VIDEHA 209th issue विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ Maithili Books can be purchased from: http://www.amazon.in/ For the first time Maithili books can be read on kindle e-readers. Buy Maithili Books in Kindle format (courtesy Videha) from amazon kindle stores, these e books are delivered worldwide wirelessly:- http://www.amazon.com/ अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। गजेन्द्र ठाकुर ggajendra@videha.com ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। २. गद्य २.१.१.जवाहर लाल कश्यप- बीहनि कथा- कुक्कुर २. राजेश वर्मा "भवादित्य"- बीहनि कथा- सोंगर २.२.डॉ. कैलाश कुमार मिश्र- मैथिलानी पर विमर्श क अधिकारी के? २.३.मुन्ना जी-४ टा बीहनिकथा-विधान,फसाद !,निवहता, हुव्वा २.४.१. कल्पना झा- २ टा बीहनि कथा- निर्वहन, निरुत्तर २.अभिलाष ठाकुर- २ टा बीहनि कथा- साँठ गाँठ, नोटबन्दी १.जवाहर लाल कश्यप- बीहनि कथा- कुक्कुर २. राजेश वर्मा "भवादित्य"- बीहनि कथा- सोंगर १ जवाहर लाल कश्यप बीहनि कथा कुक्कुर कार के पिछला सीट पर बैसल कुक्कुर, गरदनि उठेने दूनु कात ताकि रहल अछि आदमी दिस | नहिं ताकि रहल अछि पाछां जतय आओर कुक्कुर सब दौर रहल अछि कार के संगे , भुकैत एक दोसर क पछुआबैत । गाड़ी रुकल सब रुकि गेल । एकटा आदमी ओहि में स पॉलीथिन में किछु समान लेने उतरल, अप्पन कुक्कुर के बाहर निकाललक । ताबैत सब कुक्कुर आबि गेल छल । सब कुक्कुर के बीच ओकर चालि जेना ओ सिंह हो आ बाकि सब गीडर । आदमी आ कुक्कुर संगे-संगे आ बांकी कुक्कुर पाछा-पाछा। समुद्र कात तक गेल । ओतय ओ आदमी अप्पन पॉलिथीन में स माँसक बुट्टी नीकलि फेक देलक सब कुक्कुर झाऊ-झाऊ क लुझय लागल । ओ आदमी संगे कुक्कुर वापस आबि गेल । कुक्कुर के चाली मे एकटा अजीब गौरब छल ओकरा ई नहीं पता छलै जे हम्मर किछु नहीं अछि , जे अछि से हम्मर मालिक के , कुक्कुर संगे चलैत ओहि आदमी क सेहो नहिं पता छल हम्मर किछु नहि अछि...... २ राजेश वर्मा "भवादित्य" बीहनि कथा- सोंगर मोहना राइतो-राति हीरो बनि गेलै। गाममे सभ ओकर प्रशंसा कऽ रहल छै।प्रशासनिक सेवाक परीक्षा जे पास केलकै अछि। तीनबट्टी पर गप्प चलि रहल छै-- "बूझलिए भाय! आय एकटा पिछड़ा वर्गक छात्रक कल्याण भऽ गेलै।" "ऐँ हौ कथीक पिछड़ल? बाप-भाय-भौज-घर-घरेना सभ तऽ सरकारिए नौकरीमे छै।" दोसर टोकलकै। "ऐँ रौ रौशना किएक नहि पास केलकै? ओहो तऽ दिन-राति एक केने रहय।" तेसर बाजल। "हँ से तऽ ठीके। रौशना तऽ पढबो मे बेसी तेज छलै। सभ दिन इसकुलमे फस्टे आबय। बेचारा माय बापक एकमात्र सहारा।टीसन क' कय घर चलबैत छैक। ओकरा एकटा नोकरी भेनाय बड्ड जरूरी।" सुनैत-सुनैत शंभुआ के नहि रहल गेलै-- "हे हौ! तों सभ तऽ अनठा-अनठा कऽ गप्प करैत छहक। जेना बुझले नञ। मोहना के पीछा से बड़का सोंगर लागल छैक। संवैधानिक सोंगर! तेँ नञ ओकर परिवार दिनोदिन अकास ठेकल जाय छै।" गप्प के आब झगड़ा मे बदलबाक प्रबल संभावना देखि हम ओतय सँ खिसकि गेलहुँ। =========================== --राजेश वर्मा "भवादित्य" पटोरी (पछवारि टोल) सहरसा 852124 ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। डॉ. कैलाश कुमार मिश्र मैथिलानी पर विमर्श क अधिकारी के? मैथिलानी अथवा मिथिला में स्त्री केर स्थिति पर चर्चा करक अधिकारी के: स्त्री? पुरुष? अथवा दूनू? आजुक सन्दर्भ में जखन स्त्री विमर्श पर महिला; दलितवर्ग पर दलित; कला पर कलाकार काज क रहल छथि, लिख रहल छथि; ओहेन स्थिति में ई एक बहुत महत्वपूर्ण बिंदु बुझना जैत अछि। हमहु स्त्री पर आ कखनो काल मिथिलाक स्त्री पर हुनक जीवन के विभिन्न आयाम पर लिखैत रहैत छी।जे ओहि वर्ग सं छथि सैह लिखता अथवा व्यक्त करता किछु एहेन सन अवस्था अछि जे हमरा थोरेक परेशान करैत अछि। लगैत अछि “जेना हम दोसरक अधिकार क्षेत्र में अधिक्रमण क रहल होई?” बातमे कनि उलझन छैक। मैथिलानी जं अपना पर नहि लिखती त आन के लिखतनि? जे अनुभव छैक तकर सटीक वर्णन आ व्यख्या वैह क सकैत छथि! लेकिन फेर एक दोसर बात मोन में अबैत अछि। हमरा लोकनि नृतत्वशास्त्र आ समाजशास्त्र में दोसरक संस्कृति (other cultures) के बारे में पढैत छी। दोसरक संस्कृति पर काज करैत छी। अहू दुनु विधा में स्थानीयया मूल (native) आ दोसर केर बीच द्वन्द छैक। एक के कहब छैक जे स्थानीय अथवा नेटिव चूँकि ओहि समाज आ संस्कृति केर हिस्सा छैक ताहि ओ ओकरा निक सं बुझैत छैक, ओहि में जीबैत छैक आ ओकर अक्षरसः व्यख्या क सकैत छैक।एकर विपरीत दोसर संस्कृति पर आन द्वारा अध्ययन कर बला के ई मानब छनि जे वैश्विक बात त आने कहत। से कोना? कखनो काल जं बाहरी दुनिया के मापदण्ड नेटिव विद्वान के नहि बुझल होनि त ओ बहुत बात के चर्च करब छोडि देता। अपन शोध आ फिल्डवर्क केर एक सत्य उदाहरण दैत छी जे आंखि सं देखल आ कान सं सूनल अछि। हम मुसहर जाति पर एक विस्तृत परियोजना पर काज करैत रही। परियोजना केर उद्देश्य एहि समाजक लोक के शिक्षा, स्वास्थ, आर्थिक आ सामाजिक उन्नति के दिशा में प्रयत्न रहैक. शिक्षा संग संग सांस्कृतिक धरोहर केर रक्षा सेहो मूल रहैक.विषय के गंभीरता के देखैत आ अपन पूर्व में अहि समाज पर कुनो तरहक काजक अनुभव नहि होबाक कारने एक मुसहर समुदाय के पढ़ल युवक के साथ लय हम मुसहरटोलीमें गेलौं।स्थिति देखि द्रवित भेलौं. भेल, “आजुक जुग में ई सब मुसहर जातिक लोक कतेक दुखक जीवन जी रहल अछि?ककरो घर दढ़ नहि. ककरो भरि देह वस्त्र नहि. भेल,फेर कुन तरहक विकास अपन देश अर्थात भारत क रहल अछि?सब के पुछ्लियैक: “अहाँ सब के की चाही?” झट दनि एक माईनजन उठला आ कहलनि: “हमरा सबके माटि काटक काज आ घर के मरम्मत भ जै त हम सब धन्य भ जैब।” हमर दोसर प्रश्न छल: “कतेक पाई में घरक मरम्मत भ जैत?” हुनकर जवाब तहिना भेटल: “मालिक, हम सब फुसही झोपडी में रहैत छी। २००० टाका भेट जेतैक त सब समस्याक समाधान।” आब देखू, ओ सब कियोक ढंग सं वस्त्र नहि पहिरने छल। सबहक पीठ उघार। मैल-फाटल धोती, ५-६ वर्ष केर बच्चा सब नंगटे। तथापि ओकर मांग मात्र २००० टका घर ठीक करेबाक हेतु आ माटि काटक काज नोन रोटी खेबाक लेल। नहि शिक्षा, नहि स्वास्थ, नहि आरो कोनो वस्तु केर अभिलाषा।ओहि समुदाय केर पढल युवक अर्थात हमर सहयोगी सेहो कुनो निक व्योंत बतेबा में अपन असमर्थता व्यक्त केलनि।ओ कहलनि: “सर, हम सब भोजन, वस्त्र, आवास मात्र तीन वस्तु जनैत छी. अतेक भेट गेला सं सब मस्त. ने शिकबा ने शिकायत.” अहि तरहक बात आदिवासी आ अन्य समाज में सेहो देखना जैत अछि।हम आब अपन विषय केर दोसर बात जे“सत्य वैह नहि होइत छैक जे लोक कहैत अछि, सत्य ओहो होइत छैक जे अहाँक आंखि देखैत अछि, आत्मा, आ विवेक कहैत अछि”, के मूल मानि अपन प्रतिवेदन लिखलौं. उपरोक्त उदाहरण देबाक तात्पर्य ई अछि जे जखन कुनो समुदाय अथवा वर्ग अपन समस्या तक व्यक्त करबा में असमर्थ अछि त ओकरा समस्या के के बुझत? दोसर. तहिना मैथिलानी के समस्या मैथिलानी लिखथि से निक बात मुदा पुरुख सेहो लिखथि. समस्या के तह में जाथि आ ओकर समाधान तकथि आ लिखथि. जखन महिला के बात करैत छी त अतेक जानब अनिवार्य भ जैत अछि जे महिला समाज पुरुष या पित्रसत्तात्मक व्यवस्था में ऐना मिल गेल अछि जे ओकर अपन स्वरूप जेना हेरा गेल होइक? के स्त्री पुत्र जन्म देलाक बाद अपना के भगवंत नहि बुझैत छथि? कथी लेल सासु पुतहु झगरेतछथि? कथी लेल महिला अपन पुत्री के पुत्र जकां स्वतंत्रता नहि दैत छथि? मुदा एहि में हुनक गलती नहि, पुरुष के बनाएल संरचना के गलती अछि।अपन गलती के भान पुरुष करथु। पुरुष जखन स्त्री विमर्श करथि त अपन अंतरात्मा में एक स्त्री केर भाव आनथि। किछु एहेन भाव जे स्त्रिग्न नहि कहि सकैत छथि सेहो निर्विकार आ बिना कुनो अहम के बाजथि।ई समस्या अहि हेतु उत्पन्न भेल अछि जे एक के कम आ दोसर के अधिक महत्त्व देल जैएत अछि. प्रयोजन ई होबाक चाही जे मातृभाव आ पितृभाव बराबर हो. एकर सर्वोत्तम उदाहरण अफ्रिका के घाना देशक असन्ति (Ashanti) जनजातिक परिवार आ संस्कृति केर संकल्पना में देखल जा सकैत अछि. असन्ति केर संस्कार में परिवार आ माताक गोत्रबहुत पैघ स्थान रखैत छैक. एहेन मान्यता छैक जे शिशु अपन पिता सं आत्मा, प्राण आ साँस लैत अछि आ माता सं माँस (देह) आ शोनित. बच्चा ओना त दुनु पक्ष सं जुड़ल छैक परन्तु मातृपक्ष सं ओकर लगाव शोनितक लगाव, भावनाक लगाव, कहियो समाप्त नहि होबबला लगाव छैक. पूर्वोत्तर भारत केर मेघालय राज्य में खासी जनजाति में माता के सर्वोपरि मानबक परंपरा एखनो अछि. एकर तात्पर्य ई भेल जे संस्कृति में संस्कार एहेन हो जे स्त्रीगन के सम्मान करय. कतेक लोक संस्कृति के रक्षा केर नाम पर नारी अधिकार, सम्मान, बराबरी, स्वतंत्रता आदि के विरोध करैत छथि. हुनका डर होइत छनि जे सब किछु समाप्त भ जैएत. मिथिलाक पतन भ जैत. लिंग आ वर्ग संघर्ष शुरू भ जैत. सम्मान, परम्पराक ह्रास भ जैत. एकर मतलब की जे स्त्री के घेंट दबाक मारि दी? स्त्री के विकासक सहगामिनी नहि बन दी? स्त्री के हुनक सुविधाक अनुसारक वस्त्र, गहना, पहिरक स्वतंत्रता नहि दी? हुनका आत्मसम्मान नहि दी? संस्कृति आ संस्कार बचेबाक लेल स्त्री मात्रक बध, ई कहेन बात? पुरुख बहुत दिन पहिने पेन्ट पहिर लेला, संस्कृति नहि मरल; स्त्री पेन्ट, सलवार पहिर लेती त संस्कार खत्म भ जैत! बेटी माता पिताके सम्पति के मांग करती त कोर्ट कचहरी शुरू भ जैत, आदि-आदि. ई सडल-गलल मानशिकता अछि. एकरा त्याग करक चाही. अगर भाई-भाई में मुक़दमा चलैत अछि त समाज कहाँ समाप्त भ जैत अछि? अगर बेटा आ बेटी दूनू के पता लागि जेतनि जे माता –पिता केर सम्पति सं जवावदेही धरि हुनकर सामान अधिकार छनि त नहु-नहु ई अहं समाप्त भ जैत. मैथिलानी सेहो समग्रता में पुरुष पर ओहिना लिखथि जेना पुरुष हुनका पर लिखैत छथि। महिला आ पुरुष सं पैघ बात ई जे समाज, ओकर परिवेश, ओकर संस्कृति, ओकर संस्कार, ओकर इतिहास, ओकर लोक व्यवहार पर जिनका रूचि होनि, जिनका जिज्ञासा होनि, जिनका किछु करबाक उत्साह होनि से लिखथि।मुदा सब सं पैघ बात ई जे पुरुख मैथिलानी के मनोदशा के बुझथि, ओहि पर मनन करथि आ तटस्थ भाव सं लिखथि. विकास लेल लिखथि. समानता के भाव लेल लिखथि. दिल्ली में एक कार्यक्रम में साहित्य अकादेमी पुरुस्कार सं सम्मानित तीन मैथिलानी: डॉ. नीरजा रेणु, डॉ. शेफालिका वर्मा आ डॉ. उषा किरण खान बजली जे अधिकांश लोकगीत केर रचना मैथिलानी केने छथि। हुनकर सबहक बात के सीधे कटबाक हिम्मत हमरा नहि अछि। ओ सब साहित्य केर हस्ताक्षर छथि। बहुत अनुभव, मनन के बाद एहि निष्कर्ष पर ऐल हेती। मुदा नारीवाद के घमर्थन जखन सामाजिक विज्ञान के शोध छात्रक रुपें करैत छी त किछु आरे बात सब बुझना जैत अछि।महिला त केवल गबैत छली। हुनका अपन बारे में सोचबक स्वतंत्रता कहाँ छलनि? आ समय सेहो नहि।ओ त पुरुष रचित व्यवस्था में मशीन जकां काज करैत छली। हमरा होइत अछि अधिकांश गीत पुरुष लिखलनि। मुदा जखन ओ गीत केर रचना कर’ लगला त अपन मोन, ह्रदय सब में एक स्त्रिग्न के भाव आनि लेलनि। अतेक निक जे स्त्रिग्न सब ओहि भाव में मस्त भ गेली। ओकरा अपन मानि लेलनि। पुरुष रचनाकार ओहि गीतक देवकी आ स्त्रिग्न सब ओकर यशोदा भ गेली। एक एहेन हरिजन स्त्री जकर पति अर्थोपार्जन लेल दूर देस गेल छैक, सासु, ससुर बुढ छैक आ सासु ससुर केर आंखि में रतौंधी छैक, कान बहिर छैक। छैक त हरिजन, अछूत मुदा सुन्दरता के खान, कामायनी. वैह पुरुष जे छुआछूत केर बात, वर्ग विभेद केर बात, जाति-पातिक बात करैत छथि, सैह सब ओहि महिला के गसल देह, यौवन के सुख प्राप्त कर’ चाहैत छथि। आब ओ अछूत महिला अपन यौवन आ गसल देह के कारण पाण्डित्य कला में निपुण पुरुष के सजाति बुझना जैत छनि। ओकरा अपन बाहुपाश में लेबाक लेल उद्यत छथि। राति में चोरी सं ओकर घर में घुसि सब अक्षम्य काज आ कर्म कर’ लेल परेशान छथि. बेचारी महिला लाचार अछि। ओकर वेदना के सुनतै? मुदा एक पुरुष जे महाकवि विद्यापति छथि से सुनैत छथि आ द्रवित होइत अपन कलम उठा ओहि वेदना के लिखैत छथि: हम जुवती पति गेला बिदेस। लग नहि बसए पड़ोसिया देस।। सासु दोसर किछुओ नहि जान। आंखि रतौन्धी सुनए नहि कान।। जागह पथिक जाह जनु भोर। राति अन्हार गाम बड़ चोर।। भरमहु भोर ने देअ कोतबार। कहुक कियोक न करए विचार।। अधियन कर अपराधहु साति। पुरख महत सब हमर सजाति।। भनहि विद्यापति एहि रस गाब। उकुतिहि अबला भाव जनाब।। सब सं पैघ बात ई जे विद्यापति पीड़िता के दुःख सं केवल द्रवित नहि होइत छथि, ओकर मनःस्थिति के वर्णन आखर-आखर करैत छथि। नारी भाव के ऐना अपना भीतर आत्मसात क लैत छथि जे गीतक अंत में ई तक घोषणा क दैत छथि जे हिनकर गीतक रस मात्र अबला के भाव के जगब’ बला रस छनि। ओ अपन गीत अही रस में लिखैत छथि। विद्यापति के अनेको गीत नारी भाव, श्रृंगार, मनोदशा के अक्षरसः वर्णन अछि। अतेक निक जे मैथिलानी ओकरा अपन बना लैत छथि। गीत के कंठाग्र क लैत छथि। गीतक पोर-पोर सं कनेक्ट भ जैत छथि। किछु पुरुष गीत लिखनहार त एहेन छथि जे नारी भावना के तह तक घुसबा लेल समस्त नारी मनोदशा के संग-संग अपन नाम, व्यवहार तक नारी जकां क लैत छथि। एक बहुत प्रचलित भक्ति गीत जे मिथिला आ मैथिलानी द्वारा मिथिलाक गुणगान करैत अछि ओकर दू पांति देखी: साग पात खोंटि खोंटि दिवस गमेबै हे हम मिथिले में रहबै। अपना किशोरीजी के टहल बजेबै हे हम मिथिले में रहबै।। एहि गीतक रचैता छथि कपिलदेव ठाकुर। ई राम आ सीता सं आ कृष्ण आ राधा सं सम्बंधित मधुर भक्ति गीत रचैत छथि। विष्णु भक्ति में ततेक तल्लीन भ जैत छथि जे अपन अस्तित्व महिलाक अस्तित्व में परिणत क लैत छथि। अपन नाम तक बदलि लैत छथि। कपिलदेव ठाकुर सं स्नेहलता भ जैत छथि। नारी मनोदशा के लिखैत छथि आ ओही मनोदशा में जीबैत छथि। हिनकर रचित अनेक गीत नारी भाव, भक्ति, श्रृंगार आ मनोदशा के व्यक्त करैत अछि। “पत्रहीन नग्नगाछ” में जे नारी मनोदशा केर वर्णन यात्रीजी केलनि अछि तकर कुनो जवाब अछि? “पारो”, “घसल अठन्नी” आदि केर नायिका के बेदना मैथिलानी वर्दाश्त क सकैत छली मुदा ओकरा हु-बहु उकेरब बला काज त दोसर (other) अर्थात यात्री आ मधुप सनहक पुरुष नारी ह्रदय के अपना में आनिक क’ सकैत छल! गरीबीक बिपत्तिसँ मारलि आ असहाय विधवा कंद मूल आ कुअन्न बांसक ओधिसँ अपना टूटल मडैयामे नीक जेकाँ नीपल-पोतल चुलहामे पका रहल अछि। बांसक ओधि धुआंक घर होइत अछि। फटने ने फटैत अछि। जरने नञ जरैत अछि। तकर जे भाव यात्री व्यक्त केलनि से कुनो समान्य बात अछि? तीनू महिला विदुषी अर्थात डॉ. नीरजा रेणु, डॉ. उषाकिरण खान आ डॉ. शेफालिका वर्मा एक बात अंत में बड्ड निक बजली: “साहित्यकार के सत्य लिखक चाही, मानव पर लिखक चाही, स्त्री-पुरुष केर बन्धन सं उठि क लिखक चाही। स्त्रिग्न केवल मैथिलानी पर नहि लिखथि पुरुषो पर लिखथि. तहिना पुरुष सेहो स्त्रीगण पर सेहो लिखथु। कुनो वाद अथवा लिंग केर बन्धन उचित नहि।” हमरा ई निचोड़ कथन बड्ड सोहनगर लागल। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। मुन्ना जी ४ टा बीहनिकथा-विधान,फसाद !,निवहता, हुव्वा १ विधान ---------- ------------ -- तों एना धौना किए खसेने छें गै, जो ने झंडा ल' के सब धीया पुता खुशी मनबै छै. -- कथी के खुशी यौ ? -- आइये के दिन देशक अपन विधान ( संविधान ) बनल रहै. -- उँह....! भइया लेल , हमरा लेल थोडे ने ? -- इह , छओंड़ी मुँह केना तुरूच्छ जकाँ केने ऐछ ! -- गै मम्मी, तों त' नहिये बाज, भइया के बड़का झंडा आ हमरा छोटकी सन ! " माने दुनू भए- बहीन लेल फराक विधान , नै ?" -- गै बुच्ची ,एना किए घाठि फेनै छें गै ? -- यौ पप्पा, साँझ खन मम्मी के कहलियै-' डोलकी ला दुध आइन दै छीयौ .' कहलक -' बताहि भेलें हँ , मुनहारि साँझ के जुआन- जबान छओंड़ी जेतै दोसरा बस्ती , भइया के कही अनतौ दुध .' -- " ठीके बात गै, स्त्री एखनो पुरूषक चांगुरक शिकार भ' जाइए ". --" माने एखनो बेटे के नामक पतक्खा फहराइए देश मे, बेटी पछुआ.....! " २ फसाद ! --------- ------------- -- पप्पा, बेर उनहल जाइ छै, मुर्तिक भसाओन मे कखन जेबै ? -- थमहू ने, देखै नै छीयै नमाज पढ़ै बला सब सगरो के बाट छेकि रखने छै. -- त' भसाओन आइ नै हेतै ? -- यौ, भागू...भागू ! घर पैसू. -- कीए पप्पा , की भेलै ? -- फस़ाद ! -- फस़ाद की होइ छै ? --" नेता सब के दोसराक चुल्हि पर अपन रोटी पकएब. " ३ निवहता ----------- ------------- -- धौर, तहन सँ एकरा सबहक खुशामद क' अपस्याँत छी, कोइ टेरबे नै करैए. -- कथी मे अपस्याँत छी यै ? -- तील बहमे ? के रीत निमाहै लए. -- झुट्ठे अपस्याँत छी, आब की पहिलका जकाँ पुत सब बैसल रहै छै घर मे मए बापक निवहता लए. -- से त' छै, मोन त' पतिया लेब. -- जे धीया - पुता, तील - चाउर खाय मे घैहर कटबैए ओकरा सँ तील बहबाक मनोरथ रखै छी ? --" हमरा नै खुएब तील- चाउर ?" -- अहाँ के हमर निवहता लए त' हमर मए- बाप , तिलाञ्जलि द' जनम भरिक गेंठजड़बा क' देलनि. " हम अहाँ त' बिना तिल- चाउर खेनहु, एक दोसराक जिनगी भरि निमाहति रहब." ४ हुव्वा …............... -- यौ , देखै छी जे सगरो लोक नव वर्षक अवैया मे उत्साहित ऐछ . पुरना के बिसरि जेतै की ? -- अहाँ बिसैर गेलियै ? -- हिया के कीया मे बन्न कतौ बहरए ! -- तहन पुरने के हुव्वा पर नवका पोषेतै ने ! ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १. कल्पना झा- २ टा बीहनि कथा- निर्वहन, निरुत्तर २.अभिलाष ठाकुर- २ टा बीहनि कथा- साँठ गाँठ, नोटबन्दी १ कल्पना झा २ टा बीहनि कथा १ निर्वहन ........................ -- माय गे ! दादी त हाथे सँ लपे - लप तिल , चाउर परसै छलीह, मुदा तों त चम्मच सँ परसे छें ? -- धुरररररररर ! ताहि सँ की हेतैक ? -- नहि हेतेक की......? हमरो सभ के नीक रस्ता भेटल . -- से की ? -- येह जे ' निर्वहन' में सेहो 'चम्मच' लगौल जा सकैछ २ निरुत्तर -------------- - - - - - -- माए गे , माए ! लक्ष्मी की होइत छथि ? -- ध'नक देवी ,, -- धनक देवी माने ? -- जे सब के रूपैया - पाइ, बौस्त - जात देथा. -- तहन बुच्ची के जनम पर बाबा किएक कहलनि 'घर में लक्ष्मी एलीह हए' -- लबड़ी नहितन चुप्प ! बेटी सेहो घरलागनि होइत छैक. -- तहन बुच्ची के देखिते तोहर ऑखि किए नोरा गेलौ ? "लक्ष्मी नहि सोहाइ छौ की"? २ अभिलाष ठाकुर २ टा बीहनि कथा १ साँठ गाँठ बौआ - यै भौजी ऐना तमसैल किए छी। भौजी- यौ बौआ की कहु आब अहाँ के भैया फोन केनाइ सेहो बिसरि जाइ छैथ, बूझि पड़ैए कोनो ककरो सँ कोनो साँठ-गाँठ तऽ नहि। बौआ- एना जुनि बाजु, हमर भैया राम थिकाह अौर अपन सीता छोइर साँठ-गाँठ असंभव। २ नोटबन्दी लाल काका- हौ आइ झुमना बजै छल मोदीके कारने बैंकमे पुरा दुपहरिया लाइनमे लाग् पड़ल आ गाइ एखन धरि भुखले छल। टुनटुनमा- हाहाहा कका यौ कारी धन जमेने हेतैथ। लाल काका- धुर बुरबक। टुनटुनमा- त ॥ लालकाका- फोचन बाबु कहलखिन 1000 हजार बेसी देबौ इ थकी जमा केने आ तखन रौतका भोजन संगे। से पुरा दिन सांझ भ गेलै आ बरका बौआ गाइ कऽ सानी लगेलक॥ ॥पाइ की नै कराबै॥ ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.आशीष अनचिन्हार- ३ टा गजल ३.२.अशोक कुमार सहनी- गजल ३.३.डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह”- ४ टा कविता ३.४.राजेश मोहन झा 'गुंजन' -सरस्वती वंदना आशीष अनचिन्हार- ३ टा गजल 1 एकै रातिमे फकीर भऽ गेलै दुइए पाँतिमे कबीर भऽ गेलै भरि देने रहै जै खाधि समस्याक कनियें कालमे गँहीर भऽ गेलै जे सुंदर इजोरिया लऽ कऽ नाचल ग्रहणक नामपर अधीर भऽ गेलै पहिने नाम बड़ सुनलकै विकासक ओकर बाद सभ बहीर भऽ गेलै मेटा देलकै निशान गरीबक एनाही तँ सभ अमीर भऽ गेलै सभ पाँतिमे 2221-212-1122 मात्राक्रम अछि दोसर शेरक पहिल पाँतिक अंतिम लघु छूटक तौरपर अछि किछु दीर्घकेँ लघु मानबाक छूट लेल गेल अछि 2 प्रश्नो चुप छै उतरो चुप छै आँखिक दुखपर सपनो चुप छै उघड़ल बरतन झँपनो चुप छै मेल मिलापो झगड़ो चुप छै अनका संगे अपनो चुप छै सभ पाँतिमे 2222 मात्राक्रम अछि दूटा अलग अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि 3 सौंसे दाबल अछि आँजुर भरि संघर्ष किछुए बाँचल अछि आँजुर भरि संघर्ष ओ अनलथि हीरा मोती हुनका लेल हमहूँ आनल अछि आँजुर भरि संघर्ष नोटक संगे भोटक संगे घुमि घुमि कऽ बहुते नाचल अछि आँजुर भरि संघर्ष सुंदर हाथें बिच्चे आँगनमे खूब अरिपन पाड़ल अछि आँजुर भरि संघर्ष चिन्हारो एतै अनचिन्हारक बाद ता धरि राखल अछि आँजुर भरि संघर्ष सभ पाँतिमे 22-22-22-22-221 मात्राक्रम अछि ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। अशोक कुमार सहनी ।। गजल ।।
नहिं ऐलै राति निन्द बस लिखैत गेलहुँ अपन दर्द कागज पऽ निखारैत गेलहुँ
रही जमिनपऽ कोना छुब सकब अकाश बस तरेग्न बिच, चाँन्द निहारैत गेलहुँ
कमजोर रहिती तऽ कहिया टूटि जैतहुँ छी नरम ठाँरि सभ आगु झुकैत गेलहुँ
ओ जहिना-जहिना बदलैत गेलै रसता हम इ जीनगीकें ओहिना पिसैत गेलहुँ
आयल अशोककें जीनगीमे हावा बनिक ओंहे आँन्धिस्ँ हम जीनगी सिखैत गेलहुँ
सरल वार्णिक बहर--१६
'अशोक कुमार सहनी' लहान- ४ रघुनाथपुर ,सिरहा,नेपाल हाल- दोहा कतार ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह”- ४ टा कविता १ बाबू साहेब चौधरी ।। ०१ ।। बाबू साहेब चौधरी । के छलाह ? ……………….. हम नञि चिन्हैत छी । यौ ! अहींक गाम - पंचायतक छलाह । ……………….. हम नञि चिन्हैत छी । यौ ! ब्राह्मणहि छलाह ओहो । ……………….. हम नञि चिन्हैत छी । आश्चर्य ! बड़ पैघ आश्चर्य !! अहाँ हुनिका नञि चिन्हैत छी !! ।। ०२ ।। हाँ ! हम चिन्हैत छी । हम चिन्हैत छी — मैथिलीक अभियानीकेँ । हम चिन्हैत छी — मिथिलाक सेनानीकेँ । हाँ ! हम चिन्हैत छी — नेनपनहिसँ चिन्हैत छी । साक्षात नञि देखल, मुदा काजहिसँ चिन्हैत छी । ।। ०३ ।। हाँ ! हम जानैत छी । हम जानैत छी, मिथिलाक ओहि सशक्त व्यक्तित्वकेँ । मैथिलीक ओहि सशक्त हस्ताक्षरकेँ । मैथिलीक अमर प्रकाश पुञ्जकेँ । मिथिलाक अडिग दृढ़ स्तम्भकेँ । ।। ०४ ।। हम चिन्हैत छी । हाँ ! हम हुनिका चिन्हैत छी । जे समस्त मिथिलाक रहथि । प्रेरणाक श्रोत रहथि, हमरा लेल, हमर बाप - पित्तीक लेल । आ हमरहि सनि, आनहु समस्त मैथिली प्रेमीक लेल । सनस्त मैथिलक लेल । समस्त मिथिलाक लेल ।। ।। ०५ ।। मिथिलाभाषा । मिथिलाक जन - जन केर भाषा । मिथिलाक जड़ि - चेतन केर भाषा । मिथिलाक हर जाति - धर्म केर भाषा । मिथिलाक बारहो वर्ण केर भाषा । आ ताहि भाषा लेल जिनगी अर्पित कएनिहार, बाबू साहेब चौधरी । कोना नञि चिन्हबन्हि हुनिका । किएक नञि चिन्हबन्हि हुनिका ।। अखिल भारतीय मिथिला संघ कोलकाताक सहयोगसँ दुलारपुरमे (रुचौल-दुलारपुर) ०८ जनबरी २०१७ कऽ आयोजित बाबू साहेब चौधरी जन्म शताब्दी समारोहक कवि सम्मेलनमे पठित । २ मैथिली दधीचि (कविता) बाबू साहेब चौधरी - मैथिली दधीचि । हँऽऽ ! हँऽऽ !! थम्हू !!! दधीचि छथि भोला लाल दासजी । नञि ! नञि !! से कोना ? दधीचि छथि लक्ष्मण झाजी । अओ भाइ लोकनि ! किएक लड़ैत छी ? दधीचि माने की ? दधीचि के ? दधीचि जे अपन अस्थि दान देल । दान देल वृत्तासुरक संहार लेल । जीवितहि अस्थि दान - जिनगीक दान । मिथिलाक महायज्ञमे, मैथिलीक महायज्ञमे, नञि जानि एहने कतेको लोक, लगा देल अपन जिनगी । आ कतेको लगओताह । ओ सभ मैथिली दधीचि छलाह । आ ओ सभ मैथिली दधीचि होएताह । यज्ञ एखन बाँकी अछि । हवन एखन बाँकी अछि । कतेकहु दधीचि केर, अवतरण बाँकी अछि ।। ३ कुहेस (कविता) कुहेस । एखनहु धरि लगलहि अछि । हटि रहल शनैः शनैः । मुदा, एखनहु धरि लगलहि अछि ।। मैथिलीक अस्तित्व पर लागल कुहेस । मिथिलाक मानचित्र पर लागल कुहेस । मैथिलक मैथिल होएबा पर लागल कुहेस । छँटि रहल शनैः शनैः । मुदा, एखनहु धरि लगलहि अछि ।। बिकास कए रहल अछि ई राज्य । विकाश कए रहल अछि अपन देश । मिथिलाक ऊपर सरिपहुं घनगर कुहेस । फाटि रहल शनैः शनैः । मुदा, एखनहु धरि लगलहि अछि ।। अगनित पीढ़ीसँ चलि रहल ओ प्रश्न । ओएह भात - रोटी - भुखमरीक प्रश्न । ओएह उच्चतर नीक शिक्षाक प्रश्न । सृजन करैछ नित कुहेस । तेँ, एखनहु धरि लगलहि अछि ।। ४ गीत (कविता) साहित्य रहितहु, साहित्यहि लेल तीत छी । नाम ओकर गीत छी । हरेक ठोर पर सजल, सुख - दुख केर मीत छी । नाम ओकर गीत छी ।। कण्ठ - कण्ठ पसरए, बैसाखक अगिलग्गी सनि । मानस सरोवरमे, चतरए जललत्ती सनि । शोभा हर मूँहक ओ, पतित मुदा पीक छी । हरेक ठोर पर सजल, सुख - दुख केर मीत छी । नाम ओकर गीत छी ।। गीतसँ छी “गीतकार”, “कवि”सँ फराकहि छी । गद्य ने छी, पद्य मुदा, तइयो तँऽ कातहि छी । तोषित हर कण्ठ, पारितोषक विपरीत छी । हरेक ठोर पर सजल, सुख - दुख केर मीत छी । नाम ओकर गीत छी ।। लिखल जञो गीत तँऽ, साहित्यक मान नञि । श्रोता अछैतहुँ, साहित्यक सम्मान नञि । पाठ करू कविता कहि, कहियौ ने — गीत छी । हरेक ठोर पर सजल, सुख - दुख केर मीत छी । नाम ओकर गीत छी ।। कतबहु उत्कृष्ट शब्द, भाव - अर्थ युक्त छी । कहि देल जँ गीत, बूझू सब गुण विलुप्त छी । कविता जँ कहि देल तँऽ, काज बड़ दीब छी । हरेक ठोर पर सजल, सुख - दुख केर मीत छी । नाम ओकर गीत छी ।। बनलहुँ जञो “गीतकार”, साहित्यक काँट छी । करतल ध्वनि संग तेँ, साहित्यक भाँट छी । साहित्यक मञ्च पर ने, पुररष्कृत गीत छी । हरेक ठोर पर सजल, सुख - दुख केर मीत छी । नाम ओकर गीत छी ।। गीतक साम्राज्य कहाँ, तइयो थम्हैत छै । गीतक नञि सर्जना, तइयो रुकैत छै । मानल जे पद्य - मञ्च, तिरस्कृत गीत छी । हरेक ठोर पर सजल, सुख - दुख केर मीत छी । नाम ओकर गीत छी ।। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। राजेश मोहन झा 'गुंजन' सरस्वती वंदना *********** नव नव पल्लव घट नव, गंगाजल भरि हे सखि हे ! अंगना मे गाबथि वसंत माँ शारदा पूजन बेरि हे। एक कर वीणा साजै, दोसर वेद भावथि हे सखि हे ! सुर संग विद्यादायिनी विनमहुं वागीश्वरी हे। श्वेत वसन वीणापाणी, हंस सवारी हे सखि हे ! केसर कुमकुम रोली ल' माँ के चरण गही हे। शब्द-रागक स्वामिनी, वाणी कहावथि हे सखि हे ! आजुक दिन घर आबथि माँ शारदा ज्ञानेश्वरी हे। ******* सरस्वती पूजा आ वसंत पंचमीक शुभकामनाक संग । :----- राजेश मोहन झा 'गुंजन' ॥ ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। बालानां कृते विदेह मैथिली मानक भाषा आ मैथिली भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम भाषापाक डॉ. शशिधर कुमर- २ टा बाल कविता १ देबाड़ या दिबाड़ (बाल कविता) कतबहु हो मजगूत मकान । चाहे हो परोपट्टाक शान । भूकम्प - बाढ़ि - अन्हररोधी । या तड़ितपात - ठनकारोधी । पर तइयो ने अजर - अमर बुझियौ, कारण एक्कर छी दिबाड़ ।। छी दिबाड़ बड़ ढीठ जीव । बड़ असंजाइत नाशी ई जीव । भीजल - भू छाहरि एकर डीह । नञि सुखलहुमे ई करैछ पीठ । ओ रक्षित नञि स्थान कोनहु, पहुँचए नञि जाहि ठाँ ई दिबाड़ ।।*१ छी भाँति - भाँति केर रंग रूप । जल - थल सभठाँ भेटै ई भूप । किछु लागै उजरा चुट्टी सनि । किछु उड़ैबाला कीड़ी सनि ।*२ हर निर्माणक ढाहैछ अहं, जे छोट जीव कहबैछ दिबाड़ ।। संकेत आ किछु रोचक तथ्य - *१ - दिबाड़ यद्यपि भीजल (वा नम वा आर्द्र) आ छाहरियुक्त स्थान पर बेसी भेटैत अछि मुदा सही कही तँऽ धरतीक दूनू ध्रुवीय (आर्कटिक ओ अण्टार्कटिक) प्रदेशकेँ छोड़ि विश्वमे सभठाँ भेटैत अछि । *२ - दिबाड़केँ अंग्रेजीमे व्हाइट ऑण्ट (WHITE ANT = उजरा चुट्टी) कहल जाइत अछि । सम्भवतः तेँ कल्याणी कोशमे एकरा चुट्टीक एक प्रकार कहल गेल अछि मुदा जीव विज्ञानक अनुसारेँ ई चुट्टीक प्रकार नञि अछि अपितु जैविक क्रमविकाशमे चुट्टीसँ बहुत दूर अछि । उनटहि दिबाड़ जैविक क्रमविकाशमे सनकिड़बाक बेसी नजदीक अछि । २ घोरन (बाल कविता) चुट्टी सनि छी वा चुट्टी छी, चुट्टीसँ किछु भिन्नहु छी । चुट्टा सनि छी रूप मुदा, संतोला रंगक ई छी ।।*१ आम या जामुन केर गाछ पर, रहइछ प्रायः सोहरल । जखने केओ चढ़ैछ गाछ पर, ओकरा देहमे लुधकल ।। आमक गाछक पात सीबि कऽ, गोल - गोल खोंता बनबए । चुट्टा सनि ई जीव छी घोरन, आ “घोरन छत्ता” बनबए ।।*२ अपना देशक वन्य भागमे, जन - जातिक आहार थिकै । भुजिया चटनी बहुत चहटगर, अम्मत खटगर स्वाद थिकै ।।*३ पात सीबैछ, तेँ अंग्रेजीमे, ‘वीवर ऑण्ट’ छै नाम ओकर । ‘ग्रीन’ माने जंगल सेहो होइए, ‘ग्रीन ऑण्ट’ सेहो नाम ओकर ।।*४ संकेत आ किछु रोचक तथ्य - *१ - मोटा-मोटी जँ देखी तँऽ घोरन सेहो चुट्टीएक (चुट्टीअहिक) प्रभेद छी, मुदा तथापि अपन विशिष्टताक कारणेँ ई चुट्टीसँ फराक छी । *२ - आम, जामुन आदि गाछक स्वस्थ पातकेँ सीबि (सिउबि) कऽ घोरन रहबाक लेल घऽर बनबैछ जकरा “घोरनक छत्ता” (COMB OF A WEAVER / GREEN ANT) कहल जाइत अछि । सिउब = सीअब वा सीयब; सिउबैछ = सीबैछ । *३ - अपना देशक जनजातिय भागमे आ विश्वमे आन बहुतहु ठाम घोरनकेँ भूजि कऽ वा चटनी बनाए कऽ वा आन तरहेँ खाएल जाइत अछि । *४ - पात सीबि कऽ छत्ता बनएबाक कारण अंग्रेजीमे एकरा “वीवर अण्ट” (WEAVER ANT) आ गाछ पर रहबाक कारण “ग्रीन अण्ट” (GREEN ANT) कहल जाइत अछि । एहि ठाम ग्रीन (GREEN) केर मतलब हरियर रंग नञि अछि अपितु जंगल अछि । ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)2004-17. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽलेखकक नाम नैअछि ततऽसंपादकाधीन।विदेह- प्रथममैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)ggajendra@videha.comकेँमेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि।रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचयआ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेता, से आशा करै छी। रचनाक अंतमेटाइप रहए, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहलअछि।एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै। ऐ ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मीठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-17 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटारचनाआ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाकअनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतुggajendra@videha.co.inपर संपर्क करू। ऐ साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरीआ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल।५ जुलाई २००४ केँhttp://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ”जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सिद्धिरस्तु वि दे ह www.videha.co.inविदेहप्रथम मैथिलीपाक्षिक ई पत्रिकाwww.videha.com विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'विदेह' २१९ म अंक ०१ फरबरी २०१७ (वर्ष १० मास ११० अंक २१९)मानुषीमिह संस्कृताम्ISSN 2229-547X VIDEHA
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