34 ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' २२६ म अंक १५ मई २०१७ (वर्ष १० मास ११३ अंक २२६) ऐ अंकमे अछि:- रबीन्द्र नारायण मिश्र 1. आजादक अन्त्येष्टि 2. मकर संक्रान्ति 3. राँची चारि दसक बाद 4. गामक बात Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव Join official Videha facebook group. Join Videha googlegroups Follow Official VidehaTwitter to view regular Videha Live Broadcasts through Periscope. विदेह जालवृत्तक डिसकसन फोरमपर जाउ। संपादकीय विदेह "नेपालक वर्तमान मैथिली साहित्य" विषयक विशेषांक निकालबाक नेयार केलक अछि जकर संयोजक श्री दिनेश यादव जी रहता। अइ विशेषांकमे नेपालक वर्तमान मैथिली साहित्य केर मूल्यांकन रहत। अइ विशेषांक लेल सभ विधाक आलोचना-समीक्षा-समालोचना आदि प्रस्तावित अछि। समय-सीमा किछु नै जहिया पूरा आलेख आबि जेतै तहिये, मुदा प्रयास रहत जे एही साल मइ-जून धरि ई विशेषांक आबि जाए। उम्मेद अछि विदेहक ई प्रयास दूनू पायापर एकटा पूल जरूर बनाएत। विदेह द्वारा संचालित "आमंत्रित रचनापर आमंत्रित आलोचकक टिप्पणी" शृंखलाक दोसर भागक घोषणा कएल जा रहल अछि। दोसर भागमे अइ बेर नीलमाधव चौधरी जीक रचना आमंत्रित कएल जा रहल अछि आ नीलमाधवजीक रचना ओ रचनाधर्मितापर टिप्पणी करबा लेल कैलाश कुमार मिश्रजीकेँ आमंत्रित कएल जा रहल छनि। दूनू गोटाकेँ औपचारिक सूचना जल्दिये पठाओल जाएत। रचनाकारक रचना ओ आलोचकक आलोचना जखने आबि जाएत ओकर अगिला अंकमे ई प्रकाशित कएल जाएत। अइ शृंखलाक पहिल भाग कामिनीजीक रचनापर छल आ टिप्पणीकर्ता मधुकांत झाजी छलाह। जेना की सभ गोटा जनै छी जे विदेह २०१५ मे तीन टा विशेषांक तीन साहित्यकारपर प्रकाशित केलक जकर मापदंड छल सालमे दूटा विशेषांक जीवित साहित्यकारक उपर रहत जइमे एकटा ६०-७० वा ओइसँ बेसी सालक साहित्यकार रहता तँ दोसर ४०-५० सालक ( मैथिली साहित्यकार मने भारत आ नेपाल दूनूक)। ऐ क्रममे अरविन्द ठाकुर ओ जगदीश चंद्र ठाकुर "अनिल"जीपर विशेषांक निकलि चुकल अछि। आगूक विशेषांक किनकापर हुअए तइ लेल एक मास पहिनेसँ पाठकक सुझाव माँगल गेल छल। पाठकक सुझाव आएल आ ओइ सुझाव अंतर्गत विदेहक किछु अगिला विशेषांक परमेश्वर कापड़ि, वीरेन्द्र मल्लिक आ कमला चौधरी पर रहत। हमर सबहक प्रयास रहत जे ई विशेषांक सभ २०१७ मे प्रकाशित हुअए मुदा ई रचनाक उपलब्धतापर निर्भर करत। मने रचनाक उपलब्धताक हिसाबसँ समए ऊपर-निच्चा भऽ सकैए। सभ गोटासँ आग्रह जे ओ अपन-अपन रचना ggajendra@videha.com पर पठा दी। विदेह सम्मान विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान १.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०१०-११ २०१० श्री गोविन्द झा (समग्र योगदान लेल) २०११ श्री रमानन्द रेणु (समग्र योगदान लेल) २.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११-१२ २०११ मूल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, कथा संग्रह) २०११ बाल साहित्य पुरस्कार- ले.क. मायानाथ झा (जकर नारी चतुर होइ, कथा संग्रह) २०११ युवा पुरस्कार- आनन्द कुमार झा (कलह, नाटक) २०१२ अनुवाद पुरस्कार- श्री रामलोचन ठाकुर- (पद्मानदीक माझी, बांग्ला- मानिक बंद्योपाध्याय, उपन्यास बांग्लासँ मैथिली अनुवाद) विदेह भाषा सम्मान २०१२-१३ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) 1.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार 2012 2012 श्री राजनन्दन लाल दास (समग्र योगदान लेल) 2.विदेह भाषा सम्मान २०१२-१३ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) २०१२ बाल साहित्य पुरस्कार - श्री जगदीश प्रसाद मण्डल केँ “तरेगन” बाल प्रेरक विहनि कथा संग्रह २०१२ मूल पुरस्कार - श्री राजदेव मण्डलकेँ "अम्बरा" (कविता संग्रह) लेल। 2012 युवा पुरस्कार- श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरीक “अर्चिस” (कविता संग्रह) 2013 अनुवाद पुरस्कार- श्री नरेश कुमार विकल "ययाति" (मराठी उपन्यास श्री विष्णु सखाराम खाण्डेकर) विदेह भाषा सम्मान २०१३-१४ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) २०१३ बाल साहित्य पुरस्कार – श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरी- “देवीजी” (बाल निबन्ध संग्रह) लेल। २०१३ मूल पुरस्कार - श्री बेचन ठाकुरकेँ "बेटीक अपमान आ छीनरदेवी" (नाटक संग्रह) लेल। २०१३ युवा पुरस्कार- श्री उमेश मण्डलकेँ “निश्तुकी” (कविता संग्रह)लेल। २०१४ अनुवाद पुरस्कार- श्री विनीत उत्पलकेँ “मोहनदास” (हिन्दी उपन्यास श्री उदय प्रकाश)क मैथिली अनुवाद लेल। विदेह भाषा सम्मान २०१४-२०१५ (समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान) २०१४ मूल पुरस्कार- श्री नन्द विलास राय (सखारी पेटारी- लघु कथा संग्रह) २०१४ बाल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (नै धारैए- बाल उपन्यास) २०१४ युवा पुरस्कार - श्री आशीष अनचिन्हार (अनचिन्हार आखर- गजल संग्रह) २०१५ अनुवाद पुरस्कार - श्री शम्भु कुमार सिंह ( पाखलो - तुकाराम रामा शेटक कोंकणी उपन्यासक मैथिली अनुवाद) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१२ अभिनय- मुख्य अभिनय , सुश्री शिल्पी कुमारी, उम्र- 17 पिता श्री लक्ष्मण झा श्री शोभा कान्त महतो, उम्र- 15 पिता- श्री रामअवतार महतो, हास्य-अभिनय सुश्री प्रियंका कुमारी, उम्र- 16, पिता- श्री वैद्यनाथ साह श्री दुर्गानंद ठाकुर, उम्र- 23, पिता- स्व. भरत ठाकुर नृत्य सुश्री सुलेखा कुमारी, उम्र- 16, पिता- श्री हरेराम यादव श्री अमीत रंजन, उम्र- 18, पिता- नागेश्वर कामत चित्रकला श्री पनकलाल मण्डल, उमेर- ३५, पिता- स्व. सुन्दर मण्डल, गाम छजना श्री रमेश कुमार भारती, उम्र- 23, पिता- श्री मोती मण्डल संगीत (हारमोनियम) श्री परमानन्द ठाकुर, उम्र- 30, पिता- श्री नथुनी ठाकुर संगीत (ढोलक) श्री बुलन राउत, उम्र- 45, पिता- स्व. चिल्टू राउत संगीत (रसनचौकी) श्री बहादुर राम, उम्र- 55, पिता- स्व. सरजुग राम शिल्पी-वस्तुकला श्री जगदीश मल्लिक,५० गाम- चनौरागंज मूर्ति-मृत्तिका कला श्री यदुनंदन पंडित, उम्र- 45, पिता- अशर्फी पंडित काष्ठ-कला श्री झमेली मुखिया,पिता स्व. मूंगालाल मुखिया, ५५, गाम- छजना किसानी-आत्मनिर्भर संस्कृति श्री लछमी दास, उमेर- ५०, पिता स्व. श्री फणी दास, गाम वेरमा विदेह मैथिली पत्रकारिता सम्मान -२०१२ श्री नवेन्दु कुमार झा नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१३ मुख्य अभिनय- (1) सुश्री आशा कुमारी सुपुत्री श्री रामावतार यादव, उमेर- १८, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) मो. समसाद आलम सुपुत्र मो. ईषा आलम, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (3) सुश्री अपर्णा कुमारी सुपुत्री श्री मनोज कुमार साहु, जन्म तिथि- १८-२-१९९८, पता- गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही,जिला- मधुबनी (बिहार) हास्य–अभिनय- (1) श्री ब्रह्मदवे पासवान उर्फ रामजानी पासवान सुपुत्र- स्व. लक्ष्मी पासवान, पता- गाम+पोस्ट- औरहा, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) टाॅसिफ आलम सुपुत्र मो. मुस्ताक आलम, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, जिला- मधुबनी (बिहार) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान (मांगनि खबास समग्र योगदान सम्मान) शास्त्रीय संगीत सह तानपुरा : श्री रामवृक्ष सिंह सुपुत्र श्री अनिरूद्ध सिंह, उमेर- ५६, गाम- फुलवरिया, पोस्ट- बाबूबरही, जिला- मधुबनी (बिहार) मांगनि खबास सम्मान: मिथिला लोक संस्कृति संरक्षण: श्री राम लखन साहु पे. स्व. खुशीलाल साहु, उमेर- ६५, पता, गाम- पकड़िया, पोस्ट- रतनसारा, अनुमंडल- फुलपरास (मधुबनी) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान (समग्र योगदान सम्मान): नृत्य - (1) श्री हरि नारायण मण्डल सुपुत्र- स्व. नन्दी मण्डल, उमेर- ५८, पता- गाम+पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) सुश्री संगीता कुमारी सुपुत्री श्री रामदेव पासवान, उमेर- १६, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, जिला- मधुबनी (बिहार) चित्रकला- (1) जय प्रकाश मण्डल सुपुत्र- श्री कुशेश्वर मण्डल, उमेर- ३५, पता- गाम- सनपतहा, पोस्ट– बौरहा, भाया- सरायगढ़, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री चन्दन कुमार मण्डल सुपुत्र श्री भोला मण्डल, पता- गाम- खड़गपुर, पोस्ट- बेलही, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) संप्रति, छात्र स्नातक अंतिम वर्ष, कला एवं शिल्प महाविद्यालय- पटना। हरिमुनियाँ / हारमोनियम (1) श्री महादेव साह सुपुत्र रामदेव साह, उमेर- ५८, गाम- बेलहा, वार्ड- नं. ०९, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री जागेश्वर प्रसाद राउत सुपुत्र स्व. रामस्वरूप राउत, उमेर ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) ढोलक/ ठेकैता/ ढोलकिया (1) श्री अनुप सदाय सुपुत्र स्व. , पता- गाम- तुलसियाही, पोस्ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री कल्लर राम सुपुत्र स्व. खट्टर राम, उमेर- ५०, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) रसनचौकी वादक- (1) वासुदेव राम सुपुत्र स्व. अनुप राम, गाम+पोस्ट- िनर्मली, वार्ड न. ०७ , जिला- सुपौल (बिहार) शिल्पी-वस्तुकला- (1) श्री बौकू मल्लिक सुपुत्र दरबारी मल्लिक, उमेर- ७०, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री राम विलास धरिकार सुपुत्र स्व. ठोढ़ाइ धरिकार, उमेर- ४०, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) मूर्तिकला-मृर्तिकार कला- (1) घूरन पंडित सुपुत्र- श्री मोलहू पंडित, पता- गाम+पोस्ट– बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री प्रभु पंडित सुपुत्र स्व. , पता- गाम+पोस्ट- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) काष्ठ-कला- (1) श्री जगदेव साहु सुपुत्र शनीचर साहु, उमेर- ३६, गाम- िनर्मली-पुरर्वास, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री योगेन्द्र ठाकुर सुपुत्र स्व. बुद्धू ठाकुर उमेर- ४५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) किसानी- आत्मनिर्भर संस्कृति- (1) श्री राम अवतार राउत सुपुत्र स्व. सुबध राउत, उमेर- ६६, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) (2) श्री रौशन यादव सुपुत्र स्व. कपिलेश्वर यादव, उमेर- ३५, गाम+पोस्ट– बनगामा, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) अल्हा/महराइ- (1) मो. जीबछ सुपुत्र मो. बिलट मरहूम, उमेर- ६५, पता- गाम- बसहा, पोस्ट- बड़हारा, भाया- अन्धराठाढ़ी, जिला- मधुबनी, पिन- ८४७४०१ जोगिरा- श्री बच्चन मण्डल सुपुत्र स्व. सीताराम मण्डल, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री रामदेव ठाकुर सुपुत्र स्व. जागेश्वर ठाकुर, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) पराती (प्रभाती) गौनिहार आ खजरी/ खौजरी वादक- (1) श्री सुकदेव साफी सुपुत्र श्री , पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) पराती (प्रभाती) गौनिहार - (अगहनसँ माघ-फागुन तक गाओल जाइत) (1) सुकदेव साफी सुपुत्र स्व. बाबूनाथ साफी, उमेर- ७५, पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) (2) लेल्हु दास सुपुत्र स्व. सनक मण्डल पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) झरनी- (1) मो. गुल हसन सुपुत्र अब्दुल रसीद मरहूम, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) (2) मो. रहमान साहब सुपुत्र...., उमेर- ५८, गाम- नरहिया, भाया- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) नाल वादक- (1) श्री जगत नारायण मण्डल सुपुत्र स्व. खुशीलाल मण्डल, उमेर- ४०, गाम+पोस्ट- ककरडोभ, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री देव नारायण यादव सुपुत्र श्री कुशुमलाल यादव, पता- गाम- बनरझुला, पोस्ट- अमही, थाना- घोघड़डीहा, जिला- मधुबनी (बिहार) गीतहारि/ लोक गीत- (1) श्रीमती फुदनी देवी पत्नी श्री रामफल मण्डल, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) (2) सुश्री सुविता कुमारी सुपुत्री श्री गंगाराम मण्डल, उमेर- १८, पता- गाम- मछधी, पोस्ट- बलियारि, भाया- झंझारपुर, जिला- मधुबनी (बिहार) खुरदक वादक- (1) श्री सीताराम राम सुपुत्र स्व. जंगल राम, उमेर- ६२, पता- गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री लक्ष्मी राम सुपुत्र स्व. पंचू मोची, उमेर- ७०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) काँरनेट- (1) श्री चन्दर राम सुपुत्र- स्व. जीतन राम, उमेर- ५०, पता- गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) मो. सुभान, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) बेन्जू वादक- (1) श्री राज कुमार महतो सुपुत्र स्व. लक्ष्मी महतो, उमेर- ४५, गाम- िनर्मली वार्ड नं. ०४, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री घुरन राम, उमेर- ४३, गाम+पोस्ट- बनगामा, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) भगैत गवैया- (1) श्री जीबछ यादव सुपुत्र स्व. रूपालाल यादव, उमेर- ८०, पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) (2) श्री शम्भु मण्डल सुपुत्र स्व. लखन मण्डल, पता- गाम- बढियाघाट-रसुआर, पोस्ट– मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) खिस्सकर- (खिस्सा कहैबला)- (1) श्री छुतहरू यादव उर्फ राजकुमार, सुपुत्र श्री राम खेलावन यादव, गाम- घोघरडिहा, पोस्ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जिला- सुपौल, पिन- ८४७४५२ (2) बैजनाथ मुखिया उर्फ टहल मुखिया- (2)सुपुत्र स्व. ढोंगाइ मुखिया, पता- गाम+पोस्ट- औरहा, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) मिथिला चित्रकला- (1) सुश्री मिथिलेश कुमारी सुपुत्री श्री रामदेव प्रसाद मण्डल ‘झारूदार’ पता- गाम- रसुआर, पोस्ट-– मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) (2) श्रीमती वीणा देवी पत्नी श्री दिलिप झा, उमेर- ३५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) खजरी/ खौजरी वादक- (2) श्री किशोरी दास सुपुत्र स्व. नेबैत मण्डल, पता- गाम- रसुआर, पोस्ट-– मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) तबला- श्री उपेन्द्र चौधरी सुपुत्र स्व. महावीर दास, उमेर- ५५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री देवनाथ यादव सुपुत्र स्व. सर्वजीत यादव, उमेर- ५०, गाम- झाँझपट्टी, पोस्ट- पीपराही, भाया- लदनियाँ, जिला- मधुबनी (बिहार) सारंगी- (घुना-मुना) (1) श्री पंची ठाकुर, गाम- पिपराही। झालि- (झलिबाह) (1) श्री कुन्दन कुमार कर्ण सुपुत्र श्री इन्द्र कुमार कर्ण पता- गाम- रेबाड़ी, पोस्ट- चौरामहरैल, थाना- झंझारपुर, जिला- मधुबनी, पिन- ८४७४०४ (2) श्री राम खेलावन राउत सुपुत्र स्व. कैलू राउत, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) बौसरी (बौसरी वादक) श्री रामचन्द्र प्रसाद मण्डल सुपुत्र श्री झोटन मण्डल, उमेर- ३०, बौसरी/बौसली/बासुरी बजबै छथि। पता- गाम- रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) श्री विभूति झा सुपुत्र स्व. कनटीर झा, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- कछुबी, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) लोक गाथा गायक श्री रविन्द्र यादव सुपुत्र सीताराम यादव, पता- गाम- तुलसियाही, पोस्ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) श्री पिचकुन सदाय सुपुत्र स्व. मेथर सदाय, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) मजिरा वादक (छोकटा झालि...) श्री रामपति मण्डल सुपुत्र स्व. अर्जुन मण्डल, पता- गाम- रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, िजला- सुपौल (बिहार) मृदंग वादक- (1) श्री कपिलेश्वर दास सुपुत्र स्व. सुन्नर दास, उमेर- ७०, गाम- लक्ष्मिनियाँ, पोस्ट- छजना, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी (बिहार) (2) श्री खखर सदाय सुपुत्र स्व. बंठा सदाय, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) तानपुरा सह भाव संगीत (1) श्री रामविलास यादव सुपुत्र स्व. दुखरन यादव, उमेर- ४८, गाम- सिमरा, पोस्ट- सांगि, भाया- घोघड़डीहा, थाना- फुलपरास, जिला- मधुबनी (बिहार) तरसा/ तासा- श्री जोगेन्द्र राम सुपुत्र स्व. बिल्टू राम, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री राजेन्द्र राम सुपुत्र कालेश्वर राम, उमेर- ५८, गाम- मझौरा, पास्ट- छजना, भाया- नरहिया, जिला- मधुबनी (बिहार) रमझालि/ कठझालि/ करताल वादक- श्री सैनी राम सुपुत्र स्व. ललित राम, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री जनक मण्डल सुपुत्र स्व. उचित मण्डल, उमेर- ६०, रमझालि/ कठझालि/ करताल वादक, १९७५ ई.सँ रमझालि बजबै छथि। पता- गाम- बढियाघाट/रसुआर, पोस्ट- मुंगराहा, भाया- िनर्मली, जिला- सुपौल (बिहार) गुमगुमियाँ/ ग्रुम बाजा श्री परमेश्वर मण्डल सुपुत्र स्व. बिहारी मण्डल उमेर- ४१, १९८० ई.सँ गुमगुिमयाँ बजबै छथि। श्री जुगाय साफी सुपुत्र स्व. श्री श्रीचन्द्र साफी, उमेर- ७५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) डंका/ ढोल वादक श्री बदरी राम, उमेर- ५५, पता- गाम इटहरी, पोस्ट- बेलही, भाया- िनर्मली, थाना- मरौना, जिला- सुपौल (बिहार) श्री योगेन्द्र राम सुपुत्र स्व. बिल्टू राम, उमेर- ५५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) डंफा (होलीमे बजाओल जाइत...) श्री जग्रनाथ चौधरी उर्फ धियानी दास सुपुत्र स्व. महावीर दास, उमेर- ६५, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर),जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) श्री महेन्द्र पोद्दार, उमेर- ६५, पता- गाम+पोस्ट- चनौरागंज, भाया- तमुरिया, जिला- मधुबनी (बिहार) नङेरा/ डिगरी- श्री राम प्रसाद राम सुपुत्र स्व. सरयुग मोची, उमेर- ५२, पता- गाम+पोस्ट- बेरमा, भाया- तमुरिया, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शिविर), जिला- मधुबनी पिन- ८४७४१० (बिहार) विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 111 ८) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 १०) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १३) विदेह सम्मान विशेषाक- २००म अक १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १४) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आमंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी VIDEHA 209th issue विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of original work.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ Maithili Books can be purchased from: http://www.amazon.in/ For the first time Maithili books can be read on kindle e-readers. Buy Maithili Books in Kindle format (courtesy Videha) from amazon kindle stores, these e books are delivered worldwide wirelessly:- http://www.amazon.com/ अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। गजेन्द्र ठाकुर ggajendra@videha.com ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। रबीन्द्र नारायण मिश्र 1. आजादक अन्त्येष्टि 2. मकर संक्रान्ति 3. राँची चारि दसक बाद 4. गामक बात आजादक अन्त्येष्टि १९८१ इस्वीक २६ फरबरीकेँ एकटा इलाहाबादक एलफ्रेड पार्कमे जेकर नाम आब चन्द्रशेखर आजाद पार्क राखि देल गेल अछि, आजादक मृत्यु पुलिसक संग भेल मुठभेड़मे भेलैन। हुनक दाह-संस्कार दोसर दिन अर्थात् २८ फरबरी १९८१ इस्वीकेँ गंगाक रसूलावाद बाटपर कएल गेल। गुप्तचर विभागक उपलेख, स्वर्गीय शिवनायक मिश्रक संस्मरण तथा महामना मदनमोहन मालवीयक प्रपौत्र श्री पद्मकान्त मालवीयसँ ओइ घटनाक जानकारी होइछ। पं. शिवनायक मिश्र, आजादक निकटक सम्बन्धी छला। ओ बनारसमे छला आ हुनका ऐ काण्डक सूचना श्रीमती कमला नेहरू द्वारा पठौल गेल संवादवाहक द्वारा ११ बजे रातिमे भेटलैन। रातिमे इलाहावाद एबाक साधनक अभावक कारणेँ ओ प्रात:काल छोटी लाइनक गाड़ीसँ इलाहाबाद एला। आनन्द भवन गेलाक बाद कमला नेहरूसँ पता लगलैन जे आजादक लाशक पोस्टमार्टम भऽ रहल छैन। टमटमपर (इक्कापर) ओ अस्पताल गेला, जेतए पता लगलैन जे लाशकेँ पोस्टमार्टमक पछाइत दाह-संस्कारक हेतु पुलिस लऽ गेल। पोस्टमार्टम मोहनलाल आ कर्नल टाउनसेन्ड कएलैन। मिश्रजी तुरन्त जिलाधीशक ओतए गेला, जेतए जिलाधीशसँ हुनक गम्भीर बाता-बाती भऽ गेलैन। जिलाधीशक कहब रहैन जे अहाँ अपन सम्बन्धीकेँ एतबा दिन अबारागर्दी करबसँ किएक नहि रोकि सकलौं? अन्ततोगत्वा ओ दारागंजक थानेदारकेँ आदेश देलक जे पुलिसक देख-रेखमे हुनका आजादक अन्त्येष्टि करबाक अमुमति देल जाए। आजादक अन्त्येष्टिक समय श्री पद्मकान्त मालवीय उपस्थित छला। ओ ऐ घटनाक एक मात्र प्रत्यक्षर्दी छैथ जे अखनो जीवित छैथ। हुनका अनुसारेँ २७-२८ फरबरीक रातिमे पं. मदनमोहन मालवीय हुनका फोनपर कहलखिन जे चूँकि आजाद एकटा वीर आ क्रान्तिकारी लोक छला तँए हुनक संस्कारो ओही तरहक हेबाक चाही। राजर्षि टंडनक सहयोग लेबाक परामर्श सेहो ओ देलखिन। श्री पद्मकान्त मालवीय आ श्री शिव विनायक मिश्र जिलाधीशक आदेश दारागंजक थानेदारकेँ पढ़ि सुनौलखिन। ओ हुनका लोकनिकेँ संगमपर लऽ गेलखिन, मुदा ओतए किछु नहि भेटलैन। ओइठामसँ लौटैतकाल तुलारामवागमे एकटा छात्र नेता कहलकैन जे आजादक लाश रशूलबाद घाटपर गेलैन अछि। ओइठामसँ ओ लोकनि रशूलबाद पहुँचला। मालवीय आ मिश्रजी जखन रशूलबाद पहुँचला तँ चितामे आगि लगा देल गेल छल। ओहीठाम एकटा पुलिस इन्सपेक्टरसँ ओ लोकनि बेर-बेर आग्रह केलखिन, जे ओ लाश हुनका लोकनिकेँ दए देल जाइन। मुदा ओ इन्सपेक्टर समय काटक हेतुए अनेकानेक प्रश्न पुछैत रहल। ताधैर आजादक आधा लाश जरि चूकल छेलैन। तेकर बाद ओ लाशक संस्कार करबाक अनुमतिमे विलम्ब होइत देख मिश्रजीकेँ नहि देखल गेलैन। ओ बाजि उठला- “अंग्रेजक नून खाइत-खाइत तोहर आत्मा सेहो बिका गेलह की? आजादक संस्कार ओइ सरकारक पैसासँ कदापि नहि भऽ सकैत अछि। जेकर विरोध करैत-करैत ओ अपन प्राणक आहुति देलैन।” एकर बाद शिवकान्त मिश्र आ पद्मकान्त मालवीय दुनू गोटे मिलि कऽ चिताकेँ मिझौलैथ। फेर शास्त्रीय विधान आ मंत्रोच्चारक संग चितामे आगि देल गेल। ऐ हेतु ................................. कएल गेल। ताधैर पुरुषोत्म दास टंडन आ श्रीमती कमला नेहरू सेहो ओतए आबि गेल रहैथ। जल देमक समय एकटा फोटोग्राफर फोटो लेलक मुदा पुलिस ओकर कैमरा आ ओकर रील दुनू छीनि लेलक। अन्तमे शिवनायक मिश्र अस्थि संचय कए ओकर किछु भागकेँ गंगामे प्रवाहित केलैन। एकटा पोटरीमे पिताक भष्मावशेषकेँ वएह वनारस लऽ गेला। मूलत: आजादक संस्कार संगमपर करबाक निश्चय कएल गेल छल। मुदा ओतए बहुत अधिक दर्शकक भीड़ लागि जेबाक भयसँ ओ सभ अपन निर्णयकेँ अन्तिम क्षणमे परिवर्तित कएलैन। दाह-संस्कारसँ आपस भेलापर शिवविनायक मिश्र टंडनजीक ओइठाम एला। आ टंडनजीक निर्देशानुसार आपस हेबाकाल छात्र संघक तत्वावधानमे एकटा विशाल जुलुसक आयोजन भेल। सम्पूर्ण शहरमे अपूर्व तनाव छल। कखनौं किछु भऽ सकैत छल। ऐ स्थितिसँ निपटबाक हेतु शहर भरिमे सशस्त्र पुलिसबल नियुक्त कए देल गेल छल। सायंकाल अभ्युदय प्रेस लगसँ एक विशाल जुलुस निकलल जइमे हजारो युवक, स्त्री तथा पुरुष शामिल भेला। ऐ हेतु टंडनजीक दृढ़ समर्थन सहायक सिद्ध भेल। ओ ललैक कए कहलखिन- “आजादक रास्ता भने हमरा लोकनिसँ पृथक रहल होनि, मुदा ऐमे कोनो दूटा विचार नहि भऽ सकैत अछि जे ओ एक महान देशभक्त छला, आ तँए हुनक सम्मानमे जुलुस सभ आदि नहि करब एक बड़ पैघ राष्ट्रभक्तक अपमान करब होएत।” जुलुसमे आजादक भष्मावशेष एकटा कारी कपड़ामे बान्हि चौकीपर राखि घुमौल गेल। जानसेनगंज मुहल्लामे लोकक जमघट अनियंत्रित भऽ गेल आ पुलिस डडरे मुँह तकैत रहल। तदुपरान्त पी.डी. पार्कमे सभा भेल जइमे पुरुषोत्तम दास टंडन, कमला नेहरू, प्रसिद्ध क्रान्तिकारी श्री सचिन्द्रनाथ सन्यालक पत्नी आ पं. शिव विनायक मिश्र बजला। सभ गोटे आजादक महान त्यागक प्रशंसा करैत हुनक हार्दिक श्रर्द्धांजलि देलाह। ऐ प्रकारे भारतक एकटा महान सपूत आजादीक हेतु लड़ैत सदैत आजाद रहैत आत्म बलिदान कएल। जइ गाछक औढ़मे ओ गोली चलौलैन किंवा अन्ततोगत्वा सीनामे गोली लगलैन, ओही गाछक दर्शन करक हेतु लोक हजारक-हजार संख्यामे आबए लागल। जइसँ संग भऽ अंग्रेज शासक ओकरा कटबा देलक। आइ-काल्हि ओहीठाम एकटा दोसर पाखरिक गाछ रोपल अछि आ ओकर सामनेमे अछि आजादक भव्य मूर्ति जइमे हुनक एकटा हाथ मोँछपर आ दोसर हाथ पिस्तौलपर अछि। ऐठाम अखनौं हजारो लोक हुनका प्रति अपन सम्मान अर्पित करबाक लेल अबैत रहैत अछि। सरिपहुँ आजाद भारतक आजादीक लड़ाइमे प्राणक आहुति दए अमर भऽ गेला। ◌ रबीन्द्र नारायण मिश्र ग्राम : अड़ेर डीह पो. : अड़ेर हाट जिला : मधुबनी (बिहार) मकर संक्रान्ति मकर संक्रान्ति सम्पूर्ण भारत ओ नेपालमे सर्वत्र कोनो-ने-कोनो प्रकारसँ मनौल जाइत अछि। पौष मासमे जखन सूर्य मकर राशिमे अबै छैथ तखने ई पावनि मनौल जाइत अछि। प्रतिवर्ष मकर संक्रान्ति १४ वा १५ जनबरीकेँ पड़ैत अछि। तमिलनाडूमे मकर संक्रान्तिकेँ एकरा ‘पोंगल’ कहल जाइत अछि। कर्नाटक, केरल एवं आँध्रप्रदेशमे एकरा संक्रान्तिये कहल जाइत अछि। पंजाब आ हरियाणामे ‘फोहड़ी’ कहल जाइत अछि एवं एक दिन पहिने अर्थात् १३ जनबरीकेँ मनौल जाइत अछि। उत्तर प्रदेशमे एकरा मूलत: दानक पावनिक रूपमे मनौल जाइत अछि। प्रयागमे प्रतिवर्ष १४ जनबरीसँ माघमेला प्रारंभ होइत अछि। माघ मेलाक प्रथम स्नान १४ जनबरीसँ प्रारंभ भऽ कऽ अन्तिम स्नान शिवरात्रिकेँ होइत अछि। महाराष्ट्रमे ऐ दिन विवाहित महिला अपन पहिल संक्रान्तिपर तूर-तेल वा नून अन्य सुहागिनकेँ दइ छैथ। बंगालमे ऐ दिन स्नानक बाद तिल दान करबाक प्रथा अछि। ऐ अवसरपर गंगासागरमे प्रतिवर्ष विशाल मेला लगैत अछि। असममे मकर संक्रान्तिकेँ ‘माघ-विहू’ अथबा ‘भोगाली विहू’क नाओंसँ जानल जाइत अछि। राजस्थानमे ऐ पर्वपर सुहागिन महिला अपन सासुकेँ वियनि दऽ दऽ असीरवाद प्राप्त करै छैथ। संगे कोनो सौभाग्य सूचक वस्तुकेँ चौदहक संख्यामे पूजन एवं संकल्प कए चौदहटा ब्राह्मणकेँ दान दइ छैथ। एवम् प्रकारेण मकर संक्रान्तिक माध्यमसँ भारतीय सभ्यता एवं संस्कृतिक विविध रूपमे आभास होइत अछि। एहेन धारणा अछि जे मकर संक्रान्तिक दिन शुद्ध घी एवं कम्बलक दान केलासँ मोक्षक प्राप्ति होइत अछि। माघे मासे महादेव: यो दास्पति वृहकम्वलम् स भुक्त्वा सकलान भोगान अन्ते माक्ष प्राप्पति।। पुराणक अनुसार मकर संक्रान्तिक पर्व व्रह्मा, विष्णु, महेश, गणेश, आधशक्ति आ सूर्यक आराधना एवं उपासनाक पावन व्रत अछि जे तंत्र-मंत्र-आत्माकेँ शक्ति प्रदान करैत अछि। संत-महर्षि लोकनिक अनुसार एकर प्रभावसँ प्राणीक आत्मा शुद्ध होइत अछि, संकल्प शक्ति बढ़ैत अछि, ज्ञान तंतु विकसित होइत अछि। मकर संक्रान्ति अही चेतनाकेँ विकसित करैबला पावनि अछि। ई सम्पूर्ण भारतमे कोनो-ने-कोनो रूपे मनौल जाइत अछि। पुराणक अनुसार मकर संक्रान्तिक दिन सूर्य अपन पुत्र शनिक घर एक मासक हेतु जाइ छैथ, कारण मकर राशिक स्वामी शनि छैथ। यद्यपि ज्योतिषीय दृष्टिसँ सूर्य आ शनिक ताल-मेल संभव नहि अछि, तथापि ऐ दिन सूर्य स्वयं अपन पुत्रक घर जाइ छैथ। पुराणमे आजुक दिन पिता पुत्रक सम्बन्धमे निकटताक प्रारंभक रूपमे देखल जाइत अछि। मकर संक्रान्तिक दिन गंगाकेँ पृथ्वीपर आनैबला भगीरथ अपन पूर्वजक तर्पण केने छला। हुनक तर्पण स्वीकार केलाक बाद एही दिन गंगा समुद्रमे मिलि गेल रहैथ। तँए ऐ दिन गंगा सागरमे मेला लगैत अछि। विष्णु धर्मसूत्रक अनुसार पितरक आत्माक शान्तिक हेतु एवं अपन स्वास्थवर्द्धन ओ सबहक कल्याणक हेतु तिलक प्रयोग पुण्यदायक एवं फलदायक होइत अछि। तिल-जलसँ स्नान करब, ‘तिल’क दान करब, तिलसँ बनल भोजन, जलमे तिल अर्पण, तिलक आहुति एवं तिलक उवटन लगाएब। ऐ दिन भगवान विष्णु असुरक अन्त कए युद्ध समाजिक घोष्णा केने छला। ओ राक्षस सबहक मुड़ीकेँ मदार पर्वतमे दबा देने रहैथ। एतदर्थ ऐ दिनकेँ अशुभ एवं नकारात्मकताकेँ समाप्त करबाक दिनक रूपमे देखल जाइत अछि। सूर्यक उत्तरायण भेलाबाद देवता लोकनि व्रह्म मुर्हुत उपासनाक पुश्यकाल प्रारंभ होइत अछि। ऐ कालकेँ परा-अपरा विधाक प्राप्ति काल कहल जाइत अछि। साधनाक हेतु एकरा सिद्धिकाल सेहो कहल जाइत अछि। ऐ समयमे देव प्रतिष्ठा, गृह निर्माण, यज्ञकर्म आदि पवित्र काज कएल जाइत अछि। रामायण कालसँ भारतीय पत्र-पत्रिकामे दैनिक सूर्योपारायणक प्रचलन अछि। सबहक मोन-मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम द्वारा सूर्योपारायणक उल्लेख अछि। रामचरितमानसमे भगवान राम द्वारा गुड्डी उड़ेबाक कार्यक उल्लेख सेहो अछि। मकर संक्रान्तिक वर्णन वाल्मिकी रामायणमे सेहो भेल अछि। राजा भगीरथ सूर्यवंशी छला। ओ भगीरथ तप-साधनाक द्वारा पापनाशिनी गंगाकेँ पृथ्वीपर आनि अपन पूर्वजक उद्धार केने छला। राजा भगीरथ अपन पूर्वजक गंगाजल, अक्षत, तिलसँ श्राद्ध-तर्पण केने छला। तहियासँ मकर संक्रान्तिक स्नान आ मकर संक्रान्तिक श्राद्ध-तर्पणक परंपरा चलि रहल अछि। कपिल मुनिक आश्रमपर मकर संक्रान्तिक दिन माँ गंगाक पदार्पण भेल छल। पावन गंगाजलक स्पर्श मात्रसँ राजा भगीरथक पूर्वजकेँ स्वर्ग प्राप्ति भेलैन। कपिल मुनि वरदान दैत बजला- “मातृ गंगे त्रिकाल तक लोक सबहक पापनाश करती एवं भक्तजनक सात पुश्तकेँ मुक्ति एवं मोक्ष प्रदान करती। गंगाजलक स्पर्श, पान, स्नान एवम् दर्शन सभ पुण्यदायक फल प्रदान करत।” सूर्यक सातम किरण भारतवर्षमे आध्यात्मिक उन्नतिक प्रेरणादायी अछि। सातम किरणक प्रभाव भारतवर्षमे गंगा-जमुनाक मध्य अधिक समय तक रहैत अछि। ऐ भौगोलिक स्थितिक कारण हरिद्वार आ प्रयागमे माघमेलाक आयोजन होइत अछि। पितृतुल्य भगवान भास्कर दक्षिणायनसँ उत्तरायणमे जाइत काल उर्जामयी प्रकाश पृथ्वीपर वर्षा करै छैथ। अतुल्य शक्ति श्रोत प्रकृति रातिकेँ छोट एवं दिनकेँ पैघ करए लगै छैथ। पृथ्वीमाता उदरस्थ आनाजकेँ पकाबय लगै छैथ। चारू तरफ शुभे-शुभ होइत रहैत अछि। एहेन अद्भुत समयमे मकर संक्रान्तिक पर्व मनौल जाइत अछि। सक्रान्तिक दिन पंजाबमे ‘लोहड़ी’क नाओंसँ मनौल जाइत अछि। पंजाबक अतिरिक्त ई पावनि हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दक्षिणी उत्तर प्रदेश आ जम्मू काश्मीरमे सेहो धूम-धामसँ मनौल जाइत अछि। पारंपरिक तौरपर ‘लोहड़ी’ फसलक रोपनी आ ओकर कटनीसँ जुड़ल एक विशेष पावनि अछि। ऐ दिन वॉंनफायर जकाँ आगिक ओलाव जरा कऽ ओकर चारूकात नृत्य कएल जाइत अछि। बालक सभ भांगड़ा एवम् वालिका सभ गिद्धा नृत्य करै छैथ। लोहड़ीक आलावक आसपास लोक एकट्ठा भऽ दुल्ला-भट्ठी प्रशंसामे गायन करै छैथ। केतेको गोटेक मान्यता अछि जे ‘लोहड़ी’ शब्द लोई (सत कबीरक पत्नी) सँ उत्पन्न भेल मुदा अनेक लोक एकरा तिलोड़ीसँ उत्पन्न मानै छैथ, जे बादमे लोहाड़ी भऽ गेल। लोहड़ीक ऐतिहासिक सन्दर्भ सुन्दरी-मुंदरी नामक दूटा अनाथ कन्या छेली। ओकर काका ओकर विवाह नहि करए चाहै छल अपितु ओकरा राजाकेँ भेँट कए देबए चाहै छल। ओही समयमे हुल्ला भट्टी नामक एकटा उफाँइट छौड़ाकेँ नीकठाम बिआह कऽ देलक। वएह उफाँइट वरपक्षकेँ बिआहक हेतु मनौलक आ जंगलमे आगि जरा कऽ दुनू कन्याँक बिआह करौलक। कहल जाइत अछि जे दुल्ला शगुनक रूपमे गुड़ देलक। भावार्थ जे उफाँइट होइतो दुल्ला भट्टी निर्धन वालिका सबहक कन्याँदान केलक एवम् ओकरा अपन कक्काक अत्याचारसँ बँचौलक। लोहड़ीक दिन बच्चा सभ दुल्ला भट्टीक सम्मानमे गीत गबैत घरे-घर घुमैत अछि। बच्चा सभकेँ मिठाइ एवम् अन्य वस्तु सभ दैत अछि। जँ कोनो परिवारमे कोनो खास अवसर जेना बच्चाक जन्म, विवाह आदि अछि तँ लोहड़ी आर धूम-धामसँ मनौल जाइत अछि। सरिसवक साग आ मकईक रोटी खास कऽ ऐ अवसरपर बनौल जाइत अछि। तामिलनाडूमे ऐ समय ‘पोंगल’ मनौल जाइत अछि। प्रचूर मात्रामे अन्नक उपजापर भगवान सूर्यकेँ धन्यवाद ज्ञापन हेतु पावनिक आयोजन कएल जाइत अछि। तामिलनाडूक अलावा पुडुचेड़ी, श्रीलंका एवम् विश्व भरिमे पसरल तमिल लोकनि एकरा मनबै छैथ। ओइ पोंगलमे चारि दिन तक–माने १४ सँ १६ जनवरी तक–मनौल जाइत अछि। इन्द्र देवताक सम्मानमे पहिल दिन भोगी उत्सव मनौल जाइत अछि। पोंगल दोसर दिन माटिक वर्तनमे दूधमे चाउर पका कऽ खीर भगवान सूर्यकेँ आन-आन वस्तु संगे चढ़ौल जाइत अछि। ऐ अवसरपर घरक आगूमे कोलम (अपना ओइठामक अरिपन जकाँ) बनौल जाइत अछि। पोंगलक तेसर दिन मट्ठू पोंगल कहल जाइत अछि। ऐ दिन गायकेँ नाना प्रकारसँ सजा कऽ ओकरा पोंगल खुआएल जाइत अछि। चारिम दिन कन्तुम पोंगल कहल जाइत अछि। घरक महिला सभ स्नानसँ पूर्व हरदिक पातपर मिठाइ, चाउर, कुसियार हरदि आदि राखि कऽ अपन भाय लोकनिक कल्याण कामना करै छैथ। भाइक हेतु हरदि, चून, चाउरक पानिसँ आरती करै छैथ आ ई पानि घरक आगूमे बनल कोलमपर छिड़ैक देल जाइत अछि। जल्लीकट्टू मट्टू पोंगल दिन पोंगल पर्वक एक हिस्साक रूपमे खेलल जाइत अछि। ऐ लेल ग्रामीण सभ पहिनेसँ साँढ़केँ खुआ-पिआ कऽ तैयार केने रहै छैथ। ऐमे मूलत: केतेको गामक मन्दिरक साँढ़ (कोविल कालइ-तमिल नाओं) भाग लैत अछि। जल्लीकट्टूक तीन अंग होइत अछि : वाटि मन्जू विराट्टू, वेली विराट्टू आ वाटम गन्जु विराट्टू। वाटि मन्जु विराट्टूमे साँढ़केँ जे बेकती किछु दूरीपर किछु समय तक रोकि लइ छैथ, से विजेता होइ छैथ। वेली विराट्टूमे साँढ़केँ खाली मैदानमे छोड़ि देल जाइत अछि आ लोक ओकरा नियंत्रणमे करबाक प्रयास करैत अछि। वाटम मन्जुविराट्टूमे साँढ़केँ नमगर रस्सीसँ बान्हि देल जाइत अछि, आ खिलाड़ी सभ ओकरा नियंत्रित करबाक प्रयास करै छैथ। एक जानकारीक अनुसार २०१० सँ २०१४ इस्वीक बीचमे जल्ली कट्टूक कारण करीब ११०० लोक घायल भेला एवम् १७ लोक मुइला। पैछला २० सालमे करीब २०० लोक ऐ खेलक कारण मरि चूकल छैथ। ऐ खेलमे पशुक प्रति कूड़र्ताक संगे जीवनक क्षतिकेँ देखैत २०१६ इस्वीमे मा. उच्चतम न्यायालय प्रतिवन्ध लगा देलक। सम्पूर्ण देश जकाँ मिथिलांचलमे सेहो मकर संक्रान्तिक पर्व मनौल जाइत अछि। गाम-घरमे एकरा तिला सकराँति सेहो कहल जाइत अछि। अंग्रेजी नया सालक ई पहिल पावनि होइत अछि। लोकक घरमे नव अन्न भेल रहैत अछि। पहिनहिसँ लोक चूड़ा कुटा कऽ ऐ पावनिक तैयारी केने रहैए। अपना ऐठाम माघ मासकेँ अत्यन्त पवित्र मास मानल जाइत अछि। बुढ़-बुढ़ महिला सभ भोरे-भोर जाड़-ठाढ़केँ बिसरैत पोखैरमे डुबकी लगबै छैथ। गाममे कएटा मसोमात, वृद्धा सभकेँ थर-थर कँपैत स्नान करैत देखै छेलिऐन...। सभसँ मनोरंजक दृश्य तँ तखन होइत छल, जखन ओ सभ महादेवक माथपर जल ढाड़ैतकाल गाम-घरक सभटा झगड़ा सोझराबैमे लागल रहैत छेली। जानह हे महादेव! हमरा पेटमे किछु नहि अछि। हमर मोन गंगासन निर्मल अछि मुदा एहेन अत्याचारक निपटान तूँहीं करियह। ..पता नहि, महादेव सुनितो छेलखिन की नहि। मुदा हमरा ई सभ सुनि कऽ जरूर वकोर लागल रहैत छल। बच्चामे पावनि सभ अद्भुत आनन्दक विषय रहैत छल। सभसँ सरल ओ आनन्ददायी होइत छल तिला सकराँति। भोरे-भोर पोखैरमे जा कऽ डुबकी लगाउ। माइक हाथे तिल-चाउर खाउ। तिल-चाउर खिबैत माए पुछैथ- “तिल बहब की नहि?” तैपर कहिऐन- “खूब बहब।” विध समाप्त। तेकरबाद चुरलाइ, तिलबा इत्यादि भरि मोन खाउ...। कएक दिन पहिनहिसँ चुरलाइ, तिलबा (तिललाइ) आ लाइ (मुरहीक लाइ) बनेबाक कार्यक्रम प्रारंभ भऽ जाइत छल। घरक वातावरण चुरलाइक सुगन्धसँ परिपूर्ण। ऐ पावनिमे सभसँ विशेषता ई अछि पावनिक सामग्री बनि गेल तँ ओकरा लेल बेसी प्रतीक्षा नहि करए पड़ैत अछि। दिनमे व्राह्मण भोजन होइत छल। व्राह्मण कियो आसे-पासक लोक होइत छला, कारण भरि गाममे भोजे रहैत छल। बट्टा भरि-भरि घी खिचड़िमे देल जाइ। संगे तरह-तरह केर पकवान सभ सेहो रहैत छल। हमरा गाममे किछु गोटे ओइठाम तिला संक्रान्तिमे जिलेबी बनैत छल। भोजमे खिचड़िक संग जिलेबी खेबाक बच्चा सभकेँ अद्भुत उत्साह रहैत छल। खिचड़िमे तेतेक प्रचूर मात्रामे घी रहैत छल जे भोजनक बाद हाथ साफ-साफ धोनाइ कठिन। पावनिक कएक दिन बादो धरि चूरालाइ आ तिलबाक आनन्द भेटैत रहै छल। ऐ पावनिमे चूड़ा, दही, खेबाक सेहो परंपरा अछि। चूरा-दहीक वर्णन करैत खट्टर कका कहलखिन जे जखन पातपर चूड़ाक संग आम, धात्रीक अँचार ओ तरकारी परसल जाइत अछि तँ बुझू जे अन्हरिया आबि गेल। तेकर बाद जखन दही परसाएल तँ बुझू जे इजोरिया। जेना पातपर चन्द्रमा उतैर गेला। ऊपरसँ जँ मधुर राखि देल जाए ओ कौर पेटमे गेल तँ पुछू नहि। पुरा सोनित ठण्ढा जाइत अछि आ आत्मा तृप्त भऽ जाइत अछि। मिथिलांचलमे ऐ पर्वकेँ मनेबाक अद्भुत परंपरा अछि। चुरलाइ खाउ, चुरा-दही खाउ, खिचड़ि खाउ, जे खाउ, जखन खाउ...। वस्तुत: ई आनन्दक पर्व थिक जे कोनो-ने-कोनो रूपे सम्पूर्ण भारतपवर्षमे मनौल जाइत अछि। सूर्यक तेजक मकर संक्रान्तिसँ जहिना बढ़ैत रहैत अछि, तहिना सभ लोक-वेदक सुख बढ़ैत रहए, सएह ऐ पावनिक ध्येय थिक।◌ राँची चारि दसक बाद अगस्त १९७३ इस्वीमे दूरभाष निरीक्षक पदक प्रशिक्षण कार्यक्रमक हेतु हम पहिल बेर राँची गेल रही। ओइ समय डॉ. शुभद्र झाक संगे योगदा सतसंग मठमे हम एक मास रही। शुभद्र बाबू योददा महाविद्यालयक प्राचार्य रहैथ। प्राचार्यक निवासमे ओ एकटा नोकरक संग असगरे रहैथ। तीनटा कोठरी, भानसक घर, स्नान गृह आदि सुविधाक सहित आवासीय दृष्टिसँ उत्तम स्थान छल। आस-पासमे आमक गाछ सभ छल। गाछक आस-पासमे कुटी जकाँ कक्षा सभ चलैत छल। अन्दरमे योगदा सतसंग मढ़ छल। ओइ आश्रमक सात्विक वातावरण अत्यन्त मनोरम छल आ हमरा ओइठाम मोन लागि गेल। पहिल बेर राँची गेल रही तहिया हमर उमेर २१ वर्ष छल। जीवनक अनुभव नहि छल। विद्यार्थी रही। तेकर बाद नोकरी भेट गेल रहए। नोकरी करबाक इच्छा नहि रहए। आगू पढ़ाइ करए चाहैत रही। परन्तु परिवारमे सबहक विचार भेलै जे नोकरी पकैड़ लेबाक चाही, किएक तँ नोकरी जल्दी नइ भेटै छइ। पहिल नोकरीकेँ नहि छोड़क चाही,आएल लक्ष्मीकेँ लात नहि मारी इत्यादि...। ओहुना ओइ साल एम.एस-सी.क नामांकन भऽ गेल रहइ। हमर बहक परीक्षाकाल बिलम्बसँ आएल रहइ। तँए ई निर्णय भेल हम नोकरी पकैड़ ली। बससँ राँची पहुँचल रही। रस्तामे पहाड़ीक बीचमे खतरनाक रस्ता छल। ड्राइभरक ऊपर सबहक जीवन निर्भर छल। तँए ओ अपना लगक सीटपर एहने लोककेँ बैसबैत छल जे राति भरि जागि सकैथ। औंघाइत बेकतीकेँ लगमे बैसलासँ ड्राइभरोकेँ औंघी लागि सकै छल, अस्तु ई प्रयास कएल जाइत छल। राँची पहुँचते पिताजीक पत्रक संग शुभद्र बाबूक डेरापर पहुँचलौं। ओ पत्र पढ़ला आ हमरा अपन सामान सभ रखबाक हेतु कहलैन। शुभद्र बाबूकेँ एकाध बेर पहिनौं देखने रहिऐन, मुदा गप-सप्प नहि रहए। राँची हुनक डेरापर सामान सहित बिना पूर्व सूचनाक हम पहुँच गेल रही। ताहि हिसाबे ओ बहुत सहयोग केलाह। डेरामे ओ असगर रहैत छला, एकटा नोकर रहैन जे घरक सभटा काज करैत छल। भानस ओ स्वयं करैत छला। एक्के साँझ। रातिमे खेबाक बेवस्था सेहो भोरुके भानसक संग कऽ लैत छला। चूकी ओ अपने दिन भरि व्यस्त रहैत छला, तँए हुनकासँ भेँट-घाँट सामान्यत: साँझेमे होइत छल। रातिमे सुतबासँ पूर्व ओ स्वाध्याय करैत छला। हमरा रात-बिराति पढ़ैत देख ओ बहुत प्रसन्न होइत छला। कखनो काल हम नोकरीसँ त्यागपत्रक गप करी तँ ओ कहैथ जे बापसँ पुछि कऽ किछु करियह। नहि तँ ओ कहता जे मनो नहि केलखिन। ओइ डेरापर हम करीब एक मास रहलौं। मोन लागि गेल रहए। कएटा मैथिल सभसँ ओइठाम भेँट-घाँट होइत रहैत छल। मुदा ओइठाम केतेक दिन रहितौं। अपन बेवस्था तँ करबाके छल। तँए डेरा तकैमे लागि गेलौं। योगदा सत्संगमे दयामाताक आगमन भेल छल। हम डाक्टर साहैबक संगे दर्शनक हेतु गेल रही। गौर वर्ण एवम् अति तेजस्वी दयामाताक दुलर्भ दर्शन होइते मोन आनन्दित भऽ गेल। ओ कोनो प्रवचन नहि देलीह। किछु काल सभ गोट धियान केलक आ सभा समाप्त भऽ गेल। गप-सप्पक क्रममे शुभद्र बाबू एक दिन कहला जे ओ सिड़डीक साई बाबासँ बहुत प्रभावित भेल रहैथ। हुनकर आश्रममे शुभद्र बाबू गेल रहैथ। कहला जे मोनक बात सभ ओ अपने बाजए लागल रहैथ। कएक तरहक चमत्कार सेहो ओदेखला। चूकी हुनकर डेरा छोट छल, आ परिवारक अन्य सदस्य लोकनि सभ आबि गेल रहथिन, अस्तु हम अपन डेरा ताकि लेलौं आ करीब एक मास रहला पछाइत ओतए-सँ प्रस्थान केलौं। पहिरन-ओढ़नमे शुभद्र बाबू चुस्त-दुरुस्त ओ आधुनिक वस्त्रक पक्षधर रहैथ। हमरा ऐ बातक हेतु ओ कएक बेर टोकियो दथि। कहैथ जे ओ एकठाम साक्षात्कारमे भेष-भूषाक कारण छाँटि देल गेला। राँचीक संस्कृत कौलेजक पास हमर नव डेरा छल। एकटा कोठरी छल, जेकर किराया २० रूपैआ मासिक छल। भोजन स्वयं बनाबी। पानि इनारसँ निकालए पड़इ। बहुत गहींर इनार छल जइसँ पानि निकालबाक हेतु यथेष्ट प्रयास करए पड़ैत छल। बगलमे एकटा पैघ कोठरीमे चारिटा हमर सहकर्मी सभ मिलि कऽ रहै छला। ओहो सभ अपन भेाजन स्वयं बनाबैथ। ओइठामसँ एच.इ.सी. आसानीसँ देखाइ छल। ओइ छोटसन कोठरीमे हम पाँच मास धरि रहलौं। टेलीफोन एक्सचेंजमे प्रशिक्षण कार्यक्रम छल। प्रशिक्षणक वातावरण स्फूले जकाँ छल। ज्यादातर किताबी विषय पढ़ौल जाइत छल। प्रशिक्षणक दौरान रबि दिनक छुट्टी रहै छल। ओइ समयक उपयोग हम सभ आसपासक वस्तु सभ घुमै-फिरैमे करी। कहियो काल बी.आइ.टी. मिसरा जाइ। ओइठाम हमर स्कूलिया संगी इन्जिनियरिंगक पढ़ाइ कए रहल छला। छात्रावासमे रहबाक आ खेबाक-पिबाक उत्तम बेवसथा छल। चारूकात जंगलनुमा वातावरणमे रचल-बसल ओइ कौलेज परिसर अत्यन्त सुखदायी छल। सभसँ आनन्द होइत छल अपन स्कूलिया संगीसँ भेँट केलापर। हम सभ एक्के संग मैट्रिक केने रही। प्री यूनिभरसिटीमे आर.के. कौलेज मधुबनीमे संगे रही। तेकर बाद हम सी.एम. कौलेज- मधुबनीमे संगे रही। तेकर बाद हम सी.एम. कौलेज- दरभंगामे नाओं लिखेलौं आ ओ बी.आइ.टी. मिसरामे। बेहतर परीक्षा परिणामक बाबजूद हम इन्जिनियरिंगमे नाओं नहि लिखा सकलौं। यद्यपि मोतीलाल नेहरू इन्जिनियरिंग कौलेजमे हमर नामांकन निश्चित भऽ जाइत, कारण ओइ समय नामांकन डिग्रीवन साईसक प्राप्तांकक आधारपर होइत छल, आ हमरासँ बहुत कम प्राप्तांक बला सबहक नामांकन भऽ गेल रहइ। मुदा आब ऐ विषयपर सोचब व्यर्थ। परिश्रम कखनो व्यर्थ नहि जाइत अछि। ओही प्राप्तांकक आधारपर हमरा दूरभाष निरीक्षकक नोकरी भेल जेकर प्रशिक्षणक क्रममे हम राँचीमे रही। प्रशिक्षणक दौरान एक दिन घटल दुर्घटना अखनो तक मोनमे कचोटैत रहैए। हमर सबहक बगलबला कोठरीमे टेलीफोन ऑपरेटरक प्रशिक्षण चलैत छल। ओइमे एकटा प्रशिक्षु राजस्थानक छला। जाड़क मास छल। रातिमे अपन डेरामे अंगेठी जरा कऽ सुति गेल रहैथ। प्रात भेने ओ जखन नहि उठला तँ अगल-बगलक लोक सभ कोठरी खोललक तँ ओ मृत छला। अंगेठीसँ निकलल कार्वनमोनोक्साइड हुनकर मृत्युक कारण भेल। गामसँ हुनकर पिता ई समाचार सुनि आएल रहैथ आ एक्सचेंजक एक कोणमे राखल युवा पुत्रक लाश देख ठोह पाड़ि कऽ कनैत रहैथ। ऐ प्रकारेण जीवन-यापनक जिज्ञासामे निकलल एकटा युवकक असामयिक ऐ दुखद अन्त भऽ गेल। नित्य प्रति चारूकात एहेन केतेको घटना सभ घटित होइत रहैत अछि जे देख-सुनि मोनमे चिन्ता हएब सोभाविक। जीवन यात्रामे ऐ तरहक घटना झकझोरि कऽ राखि दैत अछि, तथापि जीवनमे विश्वास एवम् नियतिक अकाट्यता मानि आगू बढ़बे जीवन थिक। नीक काज करैत आगू चलैत चली, आगूक रस्ता अपने बनि जाइत अछि। एक दिन घुमैत-फिरैत हम सभ राँचीक कॉंके स्थित पागलखाना देखए गेलौं। ओइठामक दृश्य भयावह छल। माथक गड़बड़ीसँ मनुखक दुर्दशाक वर्णन असंभव छल। तरह-तरहक इशारा करैत, बड़बड़ाइत अपनेमे तल्लीन, सुखाएल, जीविते मरि गेल लोक सबहक दृश्य देख हृदय करुणासँ भरि आएल छल। केतेको विक्षिप्त लोक सभ ठीक भऽ गेल छल, मुदा हुनक परिजन कोनो खोज-पुछारि नहि कए रहल छल। ठीक-ठाक लोक सभ पागलखानामे पड़ल छल। आसपास विक्षिप्त लोकक समुहकेँ देखैत-सुनैत केकरो माथा भसकियो सकैत छल। ओइठामसँ गुजरैत मोनमे मानसिक स्वास्थ्यक महत्व बुझाइत छल। व्यर्थ चिन्ता कए, किंवा परिस्थितिसँ सामंजस्यक आभावमे केतेको लोक विक्षिप्त भऽ जाइ छैथ। शरीर व्यर्थ भऽ जाइत अछि। उचित देख-भालक अभावमे स्वस्थो लोक क्रमश: रुग्ण भऽ जाइत अछि। कएक गोटा असमयमे मानसिक चिकित्सालयेमे मरि जाइत अछि। मोनपर बेसी भार दऽ अपन दुर्गति कराएबसँ बँचब केतेक जरूरी अछि, से ओइठाम जा कऽ बुझाइत छल। ओना, आस-पासक मनोरम पहाड़ी दृष्य मोनकेँ सुखद अनुभव दैत छल, मुदा ओइठामक मानसिक बिमारीसँ ग्रस्त लोक सबहक दुर्दशा देख मोन खिन्न भऽ गेल छल। तँए जल्दिये हम सभ अपन डेरा आपस आबि गेल रही। टैगोर हिल राँटीक प्रसिद्ध स्थानमेसँ अछि। ऐ स्थानक अपन ऐतिहासिक महत्व अछि। रबीन्द्रनाथ टैगोरकेँ के नहि जनैत अछि। हुनक कविता संग्रह ‘गीतांजलि’क हेतु हुनका साहित्यक नोवेल पुरस्कार भेटल छल। मुदा ई बात कमे लोक जनैत अछि जे कवि, गायक एवम् चित्रकारक रूपमे रबीन्द्रनाथक बेकतीत्वक निर्माणमे हुनकर अग्रज ज्योतिन्द्रनाथ टैगोरक बहुत योगदान अछि। ज्योतिन्द्रनाथ शान्ति ओ ध्यानक हेतु ‘मोहरावादी हिल’ राँचीक चुनाव केलाह जे आब ‘टैगोर हिल’क नाओंसँ जानल जाइत अछि। १९१० इस्वीसँ १९२५ इस्वी धरि असगरे रहि कऽ ओ शान्ति धामक स्थापना केलाह। ओइ समयमे राँची एकटा छोट-छीन गाम छल। ज्योतिन्द्रनाथ अपन जापानी रिक्सासँ सायंकाल सभ दिन राँची घुमैत छला। ब्रिटिश भारतक प्रथम आइ.ए.एस. सत्येन्द्रनाथ टैगोर पहाड़क जड़िमे छोट-छीन घरो बनौने रहैथ जे सत्य धामक नाओंसँ जानल जाइत छल। वर्तमानमे ऐ स्थानक देखभाल राज्य पर्यटन निगम द्वारा कएल जाइत अछि। ४३ बर्खक बाद भातिजक विवाहक बरियातीमे शामिल हेबाक हेतु सपरिवार दिल्लीसँ राँची वायुयान द्वारा पहुँचलौं। २३ फरबरी २०१७ केँ ७:३५ बजे प्रात:काल वायुयानक उड़ानक समय छल। तीन बजे भोरेसँ तैयारी प्रारंभ कएल। प्रात:कालीन दिनचर्या समाप्त कए पौने पाँच बजे भोरे हवाइ अड्डा हेतु प्रस्थान कएल। साढ़े पाँच बजे हवाइ अड्डापर पहुँच सुरक्षात्मक जॉंच-पड़ताल ओ सामानक ठेकान लागि गेलाक बादो हमरा लोकनिकेँ १ घन्टा समय छल। तेकर उपयोग चाह-पीबैमे कएल गेल। हवाइ अड्डापर सभ वस्तुक दाम अतत: रहैत अछि। तैयो भोरक चाहक प्रयोजन छल। घरसँ भोरे विदा भऽ गेल रही। तँए जे दाम लेलक से दऽ कऽ दूटा चाह कीनि दुनू बेकती चाह पीबैत गप-सप्प करैत समय कटलौं। राँचीमे वायुयान नियत समय अर्थात् ९ बजे भोरे उतैर गेल। हम सभ कनिको थाकल नहि रही। सामान निकालैमे थोड़ेक समय लागल आ बाहर होइते हमर अनुज हमरा लोकनिक स्वागत हेतु मुस्तैद छला। हुनका संगे लाल गाड़ीपर बैस १५ मिनटमे हुनकर पटेल चौक, हरमू हॉउसिंग कालोनी स्थित आवासपर पहुँच गेलौं। ओइठाम पाहुन सबहक हुजुम छल। हमर भाय सभ सपरिवार पहिनहि पहुँच गेल रहैथ। बरक मामा गामसँ तँ केके ने आबि गेल छल। हुनकर नाना-नानीकेँ देख अतिशय प्रसन्नता भेल। ८२ वर्षक होइतो नाना थेहगर छथिन। ओ दड़िभंगाक कादिरावाद स्थित उच्चविद्यालयमे प्रधानाध्यापकक पदसँ सेवा निवृत भेल छैथ एवम् बहुत नफीस एवम् बेवहार कुशल बेकती छैथ। मुदा बरक नानीक स्थास्थ्य गड़बड़ाएल रहै छैन। किछु मास पूर्व दड़िभंगामे बहुत जोर बेमार पड़ि गेल रहैथ, कहुना कऽ जान बँचलैन। अखनो धरि वाकर पकैड़ किछु-किछु चलि पबै छैथ। नातिक बिआह देखबाक अति उत्साहमे सभटा बिसैर ओ राँची आबि सकलीह से अद्भुत बात...। यद्यपि डेरामे लोक सभ खचाखच भरल छल, तथापि हमरा हेतु रहबाक बहुत नीक बेवस्था छल। राँची हवाइ अड्डासँ घर अबैतकाल प्रसिद्ध क्रिकेट खेलाड़ी धोनीक आवाससँ गुजरलौं। कोनो बहुत विशिष्ट नहि बुझाएल तथापि धोनीक घर हेबाक कारणे लोकमे ओकरा देखबाक उत्सुकता बनल रहैत अछि। संगे रस्तामे बनल नव-नव कालोनी, आवासीय फलैट सभ देखाइत छल जेकर ४३ साल पूर्व नामो-निशान नहि छल। ओइ समयमे जेतए जंगल छल, तैठाम महल सभ ठाढ़ देखलौं। परिवर्तन एवम् विकास जीवनक परिभाषा थिक। मनुखक सोभाव अछि जे ओ निरन्तर आगाँ बढ़ैमे लागल रहैत अछि। ओ गाछ जकाँ ठाढ़ नहि रहि सकैत अछि। मनुख चल प्राणी अछि। सोभावश निरन्तर किछु-ने-किछुमे लागल रहैत अछि। यएह थिक ओकर विकास यात्राक अन्तर्रहस्य। सोचियौ जे हमरा लोकनिक पूर्वजजँ यथास्थितिसँ संतुष्ट भऽ गेल रहितैथ तँ आइ हम सभ रेल, हवाइ जहाज, कारमे चलि सकितौं? कदापि नहि। संघर्षेसँ स्वर्णिम भविष्यक आवाहन होइत अछि। संघर्षे जीवन थिक। कहबी छै जे ‘सफलता टीकासन चढ़ि कऽ बजै छइ। वएह हाल धोनीक छइ। राँचीमे जेतै देखू, जेकरे देखू धोनीक नाओंसँ, ओकरासँ जुड़ल वस्तु सभसँ अतिशय प्रभावित अछि। धोनी जइ स्कूलमे पढ़ला से प्रसिद्ध भऽ गेल। जइ घरमे छैथ से प्रसिद्ध भऽ गेल। राँचीसँ ६० किलोमीटर दूरपर भगवतीक मन्दिर प्रसिद्ध भऽ गेल अछि। सभ कहैत अछि जे धोनी राँची एलापर किंवा कोनो मैच खेलेबाक हेतु प्रस्थानसँ पूर्व ऐ भगवतीक दर्शन अबस्स करै छैथ। तँए सभ ओइ भगवतीक दर्शनक हेतु उत्सुक रहै छैथ। राँचीसँ हमरा लोकनिक ओइठामसँ सेहो किछु गोटे ओइ भगवतीक दर्शन करए गेला। हम सभ नहि जा सकलौं मुदा मोनमे इच्छा तँ रहबे करए। ओना, जमशेदपुरसँ आपस अबैतकाल कियो कहलक जे वएह ओ मन्दिर अछि जा दूरेसँ सही, भगवतीकेँ मोने-मोन प्रणाम केने रही। जमशेदपुरसँ आएल पाहुनक स्वागतमे सभ मुस्तैद भेलैथ। बरक चुमौन भेल दुर्वाक्षत हेतु दुर्वाक्षतमंत्रक हम उच्चारण कएल। बरक हाथ उठबए लेल कनियाँक पित्ती आएल रहैथ। बरक हाथ उठौला पछाइत सभ गोटे बेराबेरी जमशेदपुर हेतु कारमे बैस प्रस्थान केलौं। लगभग साढ़े तीन घन्टाक यात्राक बाद हम सभ जमशेदपुरमे प्रवेश कए रहल छेलौं। जमशेदपुर हम पहिनौं रहल छी। मई १९७४ सँ मार्च १९६५ धरि, दूरभाष निरीक्षक हम ओहीठाम रही। बिस्तुपुरक मैदानमे जय प्रकाश नारायणजीक भाषण भेल रहइ। वर्षाक बाबजूद सम्पूर्ण मैदान लोकसँ खचाखच भरल छल। जय प्रकाशजी राष्ट्र भरिमे आन्दोलन कए रहल छला। ओही क्रममे जमशेदपुरक यात्रा छल। जमशेदपुर पहुँच कऽ हमसभ होटलमे विश्राम केलौं। सभ बरियातीक हेतु उत्तम बेवस्था छल। थोड़बे कालमे जलखै देल गेल। पाकेट बन्द डिब्बामे नाना प्रकारक जलखैक वस्तु सभ राखल छल। पानिक बोतल राखल छल। कोठरी सभमे टेलीवीजन, ए.सी. आदि-आदि सभटा सुविधा छल। लगभग तीन घन्टा विश्रामक बाद बरियातीक काफिला विवाह स्थली दिस विदा भेल। अद्भुत, रोमांचकारी दृश्य छल। फटाकासँ अकास ओ धरती एक भऽ गेल छल। युवक सभ मनोहारी नृत्य कऽ रहल छला। थोड़बे कालमे हम सभ विवाह स्थल पहुँच गेलौं। मैथिल परंपराक अनुसार बरियाती सबहक हार्दिक स्वागत कएल गेल। फेर बरियाती सभ अपन-अपन स्थान ग्रहण केलाह। मंचपर बर कनियाँक माल्यार्पणक दृश्यक आनन्दक वर्णन करब शब्दक बसक बात नहि। तदुपरान्त आज्ञाडाला आएल, विवाहक अनुमति प्रदान करक विध भेल। थोड़ेकालक बाद बर परिछन हेतु विदा भऽ गेला आ हम सभ भोजनक हेतु...। भोजनक उत्तम बेवस्था छल। शकाहारी बहुत कम लोक छला। माछ सहित अन्यान्य निरामिष वस्तुक भरमार छल। विवाहमे बरियातीक हेतु एहेन उत्तम बेवस्था कम ठाम देखैमे आएल छल। भोजनोपरान्त बहुत रास बरियाती विश्राम हेतु होटल आपस चलि गेला। हम अनुज सहित राति भरि विवाह स्थलीमे रहि गेलौं। कएटा विध सभ करक रहइ। विवाहोपरान्त दुवोक्षत मंत्रक हेतु पुनश्च हम सभ उपस्थित रही। विवाह भऽ गेल। लगभग पाँच बजे हम आपस होटल एलौं। सरियातीक तरफसँ बहुत रास लोक आएल छला। स्थानीय महत्वपूर्ण बेकती–एम.एल.ए.–आदि सभ सेहो आएल छला। दोसर दिन पुनश्च बरियातीक भोजनक बेवस्था छल। अद्भुत बेवस्था छल। निरामिष भोजी सबहक पाँव बारह छल। शाकाहारी कम लोक छला। आ ओइठाम अलग-थलग पड़ि गेल रही। सभ तरहेँ सन्तुष्ट भऽ हम सभ आपस जमशेदपुरसँ राँची विदा भेलौं। लगभग सात बजे हम सभ राँची डेरापर पहुँचलौं तँ साँझक गीत भऽ रहल छल। घरमे पाहुन सभ गजगज करैत छल। लगभग दस दिन यएह हाल रहल। मुदा बेवस्थामे कोनो चूक नहि छल। केतेको कार्य कर्ता सभ दिन राति चाह-पान, भोजन, जलखै सबहक बेवस्थामे लागल रहैत छला। द्विरागमन, चारिदिन बाद भेल। आ तेकर बाद स्वागत भोज। स्वागत भोजोपरान्त तेतेक लोक छला जे गनब कठिन। नाना प्रकारक वस्तु खाइत रहू। चलैत रहू। गप करैत रहू। बर-कनिया संगे फोटो खिचाउ,आ आगू बढ़ि जाउ। १२ बजे तक ई कार्यक्रम चलल। विवाहोपरान्त बाँचल समयमे आस-पासक प्रमुख स्थान सभकेँ देखबाक इच्छा भेल। तइ क्रममे ४३ सालक बाद दोबारा टैगोर हिल देखए गेल रही। पहाड़ीपर चढ़ैले सीढ़ीमे किछु परिवर्तन बुझाएल। आस-पासक दोकान-दौरीक संख्यामे वृद्धि बुझाएल मुदा ओइ स्थानमे कोनो गुणात्मक परिवर्तन नहि बुझाएल। पहाड़ीपर ऊपर चढ़ि गेलाक बाद समूचा राँची शहरक परिदृश्य निश्चाय मनोरम लगैत अछि। गाहे-बगाहे कियो-कियो देखए आबि जाइत छल। मुदा एतेक पैघ साहित्यकार, कलाकारक नाओंसँ जुड़ल ऐ स्थानकेँ बेहतर स्थितक कामना छल। ओइठामसँ लौटैत काल सड़कक काते-काते तरह-तरहक दोकान सभ देखाएल। मुख्यमंत्री, राज्यपालक आवास देखाएल, मुदा हम सभ रूकलौं राक गार्डेन लग। ओइ गार्डेनकेँ देख मोन प्रसन्न भऽ गेल। लगैत छल जेना बसन्त ऋृत साक्षात्प्रकट भऽ गेल छैथ। लालाव किनार पहाड़ीक कछेरमे तरह-तरह केर सजावट प्रकृति स्वयं कऽ देने छल। गोंडा हिलक पासमे बनल राक गार्डेन जयपुरक राक गोर्डेनक प्रतिकृति कहल जाइत अछि। एकर निर्माण गोंडा हिलक पाथर सभसँ भेल अछि। मानव निर्मित जल प्रपात, चट्टान एवं शिम्पकल प्रकृतिक सौदर्भमे मानव पुरुषार्थक समावेशक प्रमाण प्रस्तुत करैत अछि। राक गोर्डेन मात्र दर्शनीय स्थान नहि अछि अपितु एकर सुरम्य ओ शान्त वातावरणमे आत्माकेँ एकटा सकून भेटैत अछि जे आनठाम सुलभ नहि अछि। कॉके डैमक समीप हेबाक कारण एकर सौंदर्य अनायासे बढ़ि जाइत अछि। धिया-पुताक संगे कखनो काल ऐठाम जा कऽ नीक समय व्यतीत कएल जा सकैत अछि। असगरो जा कऽ आत्म चिन्तन एवम् शान्तिक अन्वेषण करबाक ई एकटा उपयुक्त स्थान अछि। राक गोर्डेनमे हम सभ सपरिवार वर्तमान यात्रामे गेल रही। अद्भुत आनन्दक अनुभूति भेल। यत्र-तत्र हरियर कंचन, रंग-विरंगी फूल, पाथर काटि-काटि कऽ बनौल गेल तरह-तरह केर आकृति देख बहुत नीक लागल। किछुकाल बैस ओइठामक शान्ति ओ प्राकृतिक सौंदर्यक आनन्द लऽ हम सभ आगू बढ़ि गेलौं। राँची अपन आवो-हवाक हेतु प्रसिद्ध छल। लोक स्वास्थ्य लाभ करबाक हेतु ओइठाम जाइत छल। मनोरोगी सबहक प्रसिद्ध चिकित्सालय कॉके, राँचीमे अछि जेतए राँचीक सुरम्य वातावरणमे मनोरोगी सभ मानसिक स्वास्थ्य लाभ करैत छल। आध्यात्मिक दृष्टिमे योगदा सत्संग केर मुख्यालय राँचीमे अछि जैठाम गेलापर अखनो शान्तिक अनुभव होइत अछि। यद्यपि योगदा सत्संग मंठ आब शहरक बीचमे भऽ गेल अछि, तथापि अखनौं आश्रमक अन्दर गेलासँ आनन्द होइत छइ। योगदा आश्रमक स्थापना सन् १९१६ मे परमहंस योगानन्द द्वारा भेल। ओ ऐठाम आश्रमक आलावा बालक सबहक हेतु जीवन निर्माण विद्यालय एवम् क्रिया योगक प्रशिक्षणक बेवस्था केलैथ। योगदा आश्रममे ४३ सालक बाद फेरसँ पहुँच बहुत सन्तोष ओ आनन्दक अनुभव भेल। ओइठाम सभसँ पहिने योगानन्द परमहंसक कक्ष देखलौं। ओइमे गुरुजीक किछु सामान सभ राखल अछि। हुनका हाथ तथा पैरक निशान अछि एवम् हुनकर महासमाधिपर सँ आनल गुलावक फूल राखल अछि। गुरुजीक आवासक समीप एकटा लिचीक पैघ गाछ अछि जैठाम ओ बैस अपन विद्यार्थी सभकेँ प्रवचन करैत रहै छला। अखनो ओइ गाछकक जड़िमे गुरुजीक चित्र राखल अछि। आगन्तुक सभ ओइठाम बैस धियान कऽ आत्मशान्तिक अनुभव करै छैथ। राँची आश्रमक विद्यालयक स्टोर रूममे बैस गुरुजी कएक बेर आत्म चिन्तन करैत रहै छला।ओइठाम आइ-काल्हि स्मृति मन्दिर बनल अछि। षटकोणीय उज्जर संगमरमरसँ बनल ऐ स्मारकक मुकुटपर सुन्दर कमल बनल अछि। आश्रममे ध्यान केन्द्र अछि, जैठाम बैस लोक भोर-साँझ घन्टो धियान करैत अछि। अगल-बगलक तरह-तरहक वृक्ष सभ वातावरणकेँ अत्यन्त सुरम्य एवम् आकर्षक केने अछि। तकैत-तकैत प्राचार्य निवास पहुँचलौं–जेतए ४३ बर्ष पूर्व हम डॉ. शुभद्र झाक संगे एक मास रहल रही। ओ छोट सन भवन बन्द छल मुदा ओकर छबि ओहिना छल। देख कऽ भूतकालक दृश्य फेरसँ आँखिक सोझमे आबि गेल। ओइठाम बरामदापर बैस साँझ-के शुभद्र बाबू अध्ययन ओ चर्चा करैत छला। आश्रमक एकभागमे प्रशासकीय भवन अछि, जेकर नाओं शिवालय थिक। ओतए जा कऽ किछु पोथी किनलौं, किछु जानकारी इकट्ठा केलौं। आ घुमैत-फिरैत हरमू हॉउसिंग कालोनी स्थित अपन डेरा आपस आबि गेलौं। एक दिन अहिना घुमैत-फिरैत रामकृष्ण मिशन मठ पहुँच गेलौं। ओइ दिन रामकृष्ण परमहंसक जयन्ती मनौल जा रहल छल। सत्संग भवन खचाखच भरल छल। अधिकांश बंगाली लोकनि गाहे-बगाहे मैथिली भाषी सेहो देखेलाह। होमक बाद फूलसँ अर्चना भेल। भक्त सबहक हाथमे फूल देल गेल आ पूजोपरान्त एकएक बेकतीक हाथक फूल एकटा अढ़ियामे एकट्ठा कएल गेल जइसँ केतौ मैलि नहि भेल। थोड़े कालक बाद सभ कियो भंडारामे गेला जैठाम पुरनिक पातपर खिचड़ि देल जा रहल छल मुदा मंगलक उपासक कारण हम फरिक्केसँ प्रणाम कए पुस्तकालय चलि गेलौं। रामकृष्ण मिशन मठ, टैगोर हिलसँ लगे अछि। सन् १९१३ इस्वीमे श्रीरामकृष्ण परमहंसक अनन्य शिल्यमेसँ एक स्वामी सुबोधानन्द (खोका महाराज) क राँची शुभागमन भेल। ओ किछु भक्तक संग टैगोर हिल पहुँचला। भोजनादिक उपरान्त पेयजलक खोजमे वर्तमानमे रामकृष्ण मठ स्थित इनारपर पहुँचला आ ओकर पानिसँ अपन पियास बुझौलैथ। ओइ इनारकेँ अखनो स्मारकक रूपमे बँचा कऽ राखल गेल अछि। ओइठाम किछुकाल ठाढ़ भऽ सोचैत रहि गेलौं जे करीब साए साल पूर्व ई स्थान केहेन छल जे पानिक हेतु स्वामीजीकेँ एतए आबए पड़ल आ ऐगला साए सालक बाद पता नहि की रहत, की नहि रहत...। राँचीक नवनिर्मित खेलगॉव सेहो दर्शनीय अछि। तरह-तरहक खेलक हेतु प्रशिक्षणक बेवस्था ओइठाम अछि। ओइमे अनेकानेक प्रकारक इन्डोर स्टेडियम अछि जेकरा देखैत बनैत अछि। स्वच्छ ओ रमणीय वातावरणमे बनल ई खेल परिसर देखबामे बहुत आकर्षक अछि। मोन हएत जे घुमिते रही। राँची शहरसँ आध घन्टामे हमरा लोकनि विरसा जैविक उद्यान पहुँचलौं। उद्यानक अन्दर घुमबाक हेतु गाड़ी भेटै छै, मुदा जखन हम सभ पहुँचलौं तँ सभ गाड़ी खुजि गेल रहइ। एक घन्टाक बाद गाड़ी भेटैत तँए हम सभ पएरे उद्यानमे घुमबाक हेतु विदा भेलौं। तरह-तरह केर जीव-जन्तुसँ भरल उद्यानक हरियरी देखैत बनैत अछि। सभसँ पहने हम सभ शुतुरमुर्ग देखलौं, तेकर बाद गरूड़। गरूड़ देख आश्चर्य भेल जे विष्णु भगवान केना एकरा अपन वाहन बनौलथिन। क्रमश: हम सभ जाईट हेरोन, परिया चील आ तेकर बाद भारतीय बाघ देखलौं। बाघ ओइ बारक अन्दर लगातार घुमि रहल छल जेना कोनो शिकार करबाक हेतु आतुर हो। कनी कालक बाद तेंद्दुआ, हरिण, भाउल, शाहिल, कोटरा, नील गाए आ अन्तमे हाथी देखलौं। हाथीकेँ महथवार शिक्षित कए देने रहइ आ ओ दर्शक द्वारा फेकल गेल रूपैआकेँ शूरसँ उठा लैत छल। घुमैत-फिरैत अनेकानेक जीव-जन्तु देख सकलौं जे आइ तक नामो नहि सुनने रही मुदा मोनमे ई सोचि दुख भेल जे स्वतंत्र रहैबला ऐ प्राणी सभकेँ मनुख केना बान्हि देने अछि..! स्वार्थक हेतु मनुख संतति स्वतंत्र रहएबला जीव सबहक जिनगी नर्क कऽ देने अछि..! जंगलमे उन्मुक्त सदैत गरजैत-फरजैत रहएबला बाघ, चीता, भाउल इत्यादि सभ जीव मनुखक आत्याचारक कारणेँ बेवस अछि। बाघकेँ बेवस ओइ वारमे घुमैत-फिरैत देख हम अतिशय दुखी भऽ गेल रही। हे मनुक्ख! अहाँ अत्याचार, अहंकारपर विराम किएक ने दऽ रहल छी? केतबा दिन एतए रहब? चलि जाएब दुनियासँ तँ की छोड़ि जाएब? अत्याचारक मूक कथा? जे प्राणी प्रतिकार नहि कऽ सकल, जे बाजि नहि सकल किंवा जेकर चित्कारक भाषा अहाँ बुझि नहि सकलौं आ निर्दोष प्राणी सभकेँ सदा-सर्वदाक हेतु कारावासोसँ कठोर जीवन जीवाक हेतु विवस कए देलौं? केना शान्ति हएत, एहेन अत्याचारी आत्मा सभ? अस्तु मानव समाजकेँ सोचबाक चाही जे प्रकृति प्रदत्त सौन्दर्यक आनन्दक निवोध आनन्दक प्रयासमे ओकरा नष्ट किएक कऽ रहल अछि। लगभग चारि घन्टा धरि लगातार चलैत रहलाक बाद हमसभ थाकि गेल रही, सुस्ताएब जरूरी बुझाएल। अस्तु वोटींग स्थान लग बनल दोकानसँ पानि कीनलौं, किछु खेबाक सामान सेहो लेलौं आ खाइत-पीबैत किछुकाल विश्राम करैत पुन: विदा भेलौं। फेर नौका विहार हेतु टिकट लेलौं। नौका विहारक एहेन विचित्र बेवस्था आइ तक नहि देखलौं। छोट सन एकटा नाह दऽ देलक आ कहलक जे एकरा अपने चलाएब। कोनो नाविकक बेवस्था नहि अछि। परेशान भऽ गेलौं। नाह चलेबाक कोनो अनुभव हमरा नहि छल। चारि गोटे नाहपर बैसल रही। बेवस्थापक सभ बहुत हिम्मत देलक। तरह-तरहसँ प्रशिक्षित करबाक, बेझेबाक प्रयास केलक। मुदा हमरा हिम्मत नहि होइत छल। मनमे होइत छल जे जँ कहीं नाह डुबि जाएत, चाहे किछु गड़बड़ भऽ जेतै तखन तँ लेनीक-देनी पड़ि जाएत। तथापि बहुत हिम्मत कऽ ५-६ मीटर नाह खेबलौं। आगू बढ़बाक हिम्मत नहि भेल आ बहुत प्रयासक बाद आपस आबि नाहसँ उतैर गेलौं। उतैरते जेना जान-मे-जान आएल। सभ कियो थाकि गेल रही। अस्तु बाहर आबि गाड़ीमे बैस कऽ आगू बढ़ि गेलौं। राँचीक जगर्न्नाथ मन्दिर परिसरमे पहुँच आध्यात्मिक सुख भेटल। मंत्रोच्चार तथा भजनसँ वातावरण सुगन्धित छल। मन्दिरक गर्माहटमे बाहरे पण्डीजी छला। रूपैआ देखैत हुनक अन्दर भाव बढ़ि गेल अन्यथा ओसोझ मुहेँ गपो करबाक हेतु तैयार नहि रहैथ। किछु मंत्र पढ़ि हमरा लोकनिकेँ जगर्न्नाथजीकेँ पुष्पांजलि दियौलैथ। तद्दुपरान्त मन्दिरक किछु जानकारी सेहो भेटल। भोज खेबाक हेतु ३० प्रति बेकती एक दिन पूर्व जमा कराबए पड़ैत अछि तखने दोसर दिन बारह बजे भोग भेटैत अछि। पूरीक जगर्न्नाथ मन्दिरक भोगक स्मरण भऽ गेल। मुदा ओइठामक भोग तँ उम्दा होइत अछि जे खेलाक बाद आर किछु खेबाक इच्छा नहि होइत अछि- कहक माने जे भरिपेट्टा रहै छइ। देखबा योग्य राँचीक आसपास कएकटा डैम सभ अछि। आओर कएकटा ऐतिहासिक वस्तु सभ अछि, मुदा मोटा-मोटी हम खहरक परिभ्रमण कऽ लेने रही। टेलीफोन एक्सचें, कचहरी, शहीद चौक, रातु रोड विश्वविद्यालय आदि-आदि मुख्य स्थान सभसँ एकाधिक बेर भऽ आएल रही। ४३ साल बाद राँचीक स्मृति फेरसँ नूतन भऽ गेल आ एकटा अत्यन्त संतुष्टिक भाव मोनमे भेल। २ मार्च २०१७ इस्वीक भोरे हमर सबहक दिल्लीक हेतु वायुयान छल। साढ़े सात बजे भोरे डेरासँ हवाइ अड्डा प्रस्थान कएल। साढ़े नौ बजे दिल्लीक हेतु जहाज उड़ि गेल। एकटा मधुर स्मृतिक संग हम सभ राँचीसँ दिल्लीक यात्रा सम्पन्न कए एक बजे घर आपस आबि गेलौं। राँचीक एक सप्ताहक यात्रामे भातिजक बिआह तँ देखबे केलौं संगे बहुत रास आनो-आनो चीज सभ देख सकलौं। एकबेर फेर राँचीक स्मरण नवीन भऽ गेल छल। १२/३/२०१७ गामक बात बाल जीवनक तँ बाते किछु अलग होइत अछि। जखन लाउडस्पीकरसँ प्रचारित कएल जाइ जे आइ दड़िभंगा वा मधुबनीमे कोनो बड़का आदमीक अबाइ छै, तँ मोनमे भाव उठैत छल जे ओकरा अबस्स देखक चाही। पता नहि, ओ बड़का आदमी १० हाथक हएत कि बीस हाथक...। अहिना एकबेर बिनोबा भावे मधुबनी आएल छला। वाटसन स्कूल- मधुबनीमे बच्चा सबहक बीचमे प्रवचन केने रहैथ। हुनका देख आश्चर्यमे पड़ि गेलौं जे आखिर ई बड़का आदमी केना भेला। कद-काठीमे तँ छोटे रहैथ। तहिना एकबेर गुलजारी लाल नन्दाकेँ देखबाक हेतु मधुबनी सुरी स्कूलपर गेल रही। फेर वएह बात...। आखिर एकरा लोक बड़का आदमी किए कहै छइ? हमरे गामक लोक जकाँ पाँच फीटक आदमी तँ ईहो अछि। तखन पैघ कथीक भेल? ऐ प्रश्नक उत्तर ताकए-मे जिनगी निकैल गेल। पैघ के अछि? पैघत्वक प्रयासमे तँ सौंसे दुनियाँ लागल अछि, मुदा सबहक अकार-प्रकार तँ ओहिना-क-ओहिना रहि जाइत अछि। गाममे चौराहा सभपर घन्टो गप करैत लोकक दृश्य सामान्य बात छल। एमहरसँ एक गोरे आएल, ओमहरसँ कियो आएल आ गप शुरू भऽ गेल। हमहूँ सभ अपन दोस्त सभसँ अहिना गप करैत रहि जाइ छेलौं। कएक बेर हम अरियाति कऽ हुनका ओइठाम दऽ अबिऐन आ कएक बेर ओ हमरा। हाटपर, चौकपर तँ गपक गोष्ठी चलिते रहै छल। रास्तामे कियो भेट गेल तँ गप केने बिना केना चलि जाएत। आश्चर्य ई लगैत अछि जे आखिर लोक सबहक काज धन्धा केना चलइ। मुदा सभ किछु तँ हेबे करइ। असलमे लोकक जीबाक अन्दाज दोसर रहइ। सभ वस्तुमे, गप-सप्पमे, गरीबीमे, जीवन-संघर्षमे आनन्द ताकि लैत छल। जँ से नहि रहितैक तँ बोनि कऽ कऽ एकसंझू खाइबला बोनिहार सभ निचैन भऽ कऽ खेतमे गीत नहि गबैत, भोरे उठि कऽ लोक परातीकेँ स्वर नहि दऽ सकैत आ आठ बजिते चैनसँ सुति नहि जाइत। शहरक आपाधापी, प्रतिस्पर्धात्मक जीवन-शैली गाम तक नहि पहुँचल छल। लोक स्वत: स्फूर्त नैसर्गिकतासँ ओत्-प्रोत् छल। धन, एश्वर्य लोकक अवचेतन मोनपर तेते हाबी नहि छल जे श्रेष्ठताक प्रयत्नमे वर्तमानकेँ नर्क कऽ लिअए। परिवर्तन जीवनक संकेत थिक। जे काल्हि बच्चा छल ओ आइ जबान भऽ गेल, तहिना जबान प्रोढ आ क्रमश: बुढ़ भऽ गेल। ई प्रक्रिया तेहेन निरन्तर ओ सतत अछि जे हरषट्ठे किनको बुझए-मे नहि आबि सकैत अछि, जे की भऽ रहल छै, केना भऽ जाइ छइ। सेहो तेहेन जे जँ पाछू उनैट ताकब तँ तकिते रहि जाएब। आइसँ चालीस वा तीस साल पूर्व जे सभ गाममे कहबैका छला, धन-सम्पैत, प्रतिष्ठासँ ओत्-प्रोत् छला, आइ तिनकर नामो निशान नहि अछि। गाम वएह अछि, जगह वएह अछि, घरो वएह अछि, मुदा लोक गायब अछि। केकरा लग बैसब, केकरासँ कहबै मोनक गप, केकरासँ सहानुभूतिक अपेक्षा करब, केकरा उपलब्धिक समाचार लऽ कऽ जाएब। तकलोपर कियो नहि भेटत। एक-एक-केँ सभ गुजैर गेल, आ गुजरलो जा रहल अछि। तथापि वातावरणमे दम्भ, अहंकार आ प्रतिशोधादिक वृति ओहिना देखल जा सकैत अछि। फल्लाँ बाबू हमर पुरखाक अहित केलाह, अपमानित केलाह, आब हमहूँ देखा देबइ...। ऐधन चक्करमे पुश्त-दर-पुश्त लोक अपसियाँत अछि। आधुनिकताक प्रचण्ड बिहाड़िमे पूरातनक वैमनस्यताकेँ हिलाइये ने सकल आ लोक छोट-छोट बातपर गोलबन्द भऽ जाइत अछि। पतझड़ अबिते गाछक गाछसँ पात सभ खसि पड़ैत अछि। गाछ सुन्न भऽ जाइत अछि। ठूठ गाछकेँ देख कऽ छगुन्ता लागि जाइ छइ। लोक ठिठैक जाइत अछि। परन्तु प्रकृति आगू बढ़ैत अछि। क्रमश: एक-एक डारिमे हजारो नव पम्ही निकलै छइ। हरियरी फेरसँ ओइ गाछकेँ आवृत कए लैत अछि। हरियर कंचन नव-नव पल्लवसँ सम्पूर्ण नव कनियाँ जकाँ प्रकृति ओइ गाछकेँ एश्वर्यमयी कए लैत अछि। गामोमे सएह होइत अछि। पुरान-पुरान लोक सभ क्रमश: गुजैर गेल। नव-नव लोक घरे-घर पसैर गेल। प्रवासी लोक जखन गाम जाइ छैथ तँ अपने गाममे अनचिन्हार भऽ गेल छैथ। मुदा ई समयक प्रभाव अछि। जइ एकपेरियापर चलैत बच्चामे दोस्त सभसँ झगड़ा भऽ जाइत छल, जैठाम बैस घन्टो गप करैत रहै छेलौं, जैठाम जाइते अपनत्वक बोध होइत छल ओ सबटा आइ लुप्त भऽ गेल। रहि गेल अछि मोनमे ओइ सबहक एकटा सुखद स्मृति। गाममे कामरेड सभ तूफान केने रहैत छला। गामेमे आन्दोलनक जड़ि आ फुनगी छल। बेकतीगत ईर्ष्या-द्वेषकेँ ठेकाना लगेबाक एकटा साधन छल ओ आन्दोलन। किछु युवक सभ अपने टोलक सुखी परिवारक जमीनपर तरह-तरह केर फसाद करैत रहै छला। ओ नीक छला, खराप छला, जे छला मुदा ओइ आनदोलनक किछु परिणाम नहि भेल, सिवाय ई जे सुखीत लोक तंग भेल। ओकर जमीनमे उपजावारी कम भेल, गामक वातावरण दुषित भेल। आ अन्तमे ठाकक तीन पात। ओ युवक सभ अन्तत: गाम छोड़ि रोजी-रोटीक प्रयासमे बाहर चलि गेला। गाम फेरसँ शान्त भऽ गेल, पुरनका रस्तापर चलए लगल। बात-बातमे दुगोला कऽ लेब, खएन-पीन बन्द कऽ लेब आम बात छल। हम सभ जखन बच्चा रही तँ आधा गामसँ बेसी दुगोला रहइ। कहि नहि, कखन कोन बातपर मतान्तर भेल आ भऽ गेल दुगोला। बहुत दिनक बाज जा कऽ केना-ने-केना आपसी सहमति भेल। किछु युवक सबहक प्रयाससँ गाममे एकगोला भेल। सभ कियो एक-दोसरक ओइठाम नौत-पेहानी शुरू केलक। कमो-बेसी अखनो एकगोला चलि रहल अछि। दुगोलाक तेतेक प्रभाव रहै जे लोक सभ एक्के गाममे फराक-फराक रहैत छल। हमर सबहक घरक पछुआरमे डिही सबहक घर छल। मुदा बच्चामे कहियो आपसी आवागमन नहि देखए-मे आएल। ओइठाम एकटा इनार रहइ जेकर पानि बहुत स्वादिष्ट छेलइ। पानि भरए लोक ओतए जाइ छल, हमहूँ कएबेर गेल रही, मुदा आन सम्पर्क नहि छेलइ। ऐ तरहक स्वत: घोषित प्रतिवन्धित क्षेत्रक यथार्थमे मनुखक अहंकार ईष्या-द्वेष, प्रतिशोध रहैत अछि। ऐ तरहक निषेधात्मकताक कोनो सुखद परिणाम केतए होइत। गाममे रहितो छी आ नहियोँ छी। मुदा आब तँ एकगोलाक अछैतो गामक परिदृश्य बदैल गेल अछि। आपसी सम्पर्क कम कि जे नहियेँक बरबैर भऽ गेल अछि। लोक शहरे जकाँ चुप्पा-चुप्पी अछि। एक दिन हम अपन घरक ओसरापर बैसल रही कि अवाज भेल ‘तर्राक तर्राक..!’ एक वृद्ध बेकतीपर एक पहलवान टाइपक बेकती तर्रातर लाठी बरसा रहल छल। हे राम! कियो ओकरा रोकै नहि छल। की भऽ गेलै ऐ गामकेँ? कहैले सभ गौवें अछि। कोनो-ने-कोनो तरहेँ एक-दोसरसँ जुड़ल अछि, एक-दोसरक सम्बन्धी अछि, तखन एहेन दृश्य। भऽ सकैए ओइ वृद्धसँ किछु गलती भऽ गेल होइक, मुदा तेकर प्रतिफल एहेन हिंसात्मक तँ नहि हेबाक चाही। मुदा की हेबाक चाही आ की भऽ रहल अछि? देखैत रहू, चुप रहू नहि तँ ई लाठी छिटैक कऽ अहूँपर लागि सकैत अछि। आठ-दस लाठी खेलाक बाद केना-ने-केना ओ भागि सकला कि लोक बँचा देलकैन से तँ आब मोन नहि अछि, मुदा ऐ घटनाकेँ बिसरलो नहि भऽ रहल अछि। लाठी चलौनिहार बेकती आब दुनियाँमे नहि छैथ, लाठी खेनिहार सेहो नहि छैथ, मुदा ओ दृश्य पता नहि केतए-केतए आ केकरा-केकरा दिमागपर अंकित अछि। कम-सँ-कम हम तँ नहियेँ बिसैर सकलौं। कम-सँ-कम ३५-४० वर्ष पूर्वक ई घटना थिक। ‘तुम तो ठहरे परदेशी, साथ क्या निभाओगे, सुबह पहली गाड़ी से घर को लौट जाओगे....।’ ऐ गीतक भावसँ आत्मा झंकृत भऽ जाइत अछि। जइ गाममे हम बच्चा रही, युवक भेलौं आ पढ़लौं-लिखलौं, सएह आब प्रश्न चिन्ह लऽ कऽ ठाढ़ अछि। रोजी-रोटीक जोगारमे लोक गामसँ बहराएल। तैयो लोक अबै-जाइत तँ रहबे करए। मुदा क्रमश: ई रफ्तार कम भेल। आ गामक परिवेश बदलैत रहल। गामक गाम परदेशी (प्रवासी)क एकटा जबरदस्त हुजुम भऽ गेल। आब गाम जा कऽ ओ सभ किंकर्तव्यविमूढ़ भऽ जाइत अछि। जे गाममे रहि गेला से बाबा वैद्यनाथ जकाँ तेहन कऽ जमि गेल छैथ जे हुनका उखाड़ब कोनो रावणक बसक नहि रहि गेल अछि। तमसा कऽ औंठा गाड़ि देबै तँ गाड़ि दियौं, ओ धँसि जेता मुदा उखड़ता नहि। अपनाकेँ अहाँ केतए ठाढ़ करब? अहाँ लग के रहत? अहाँसँ केकरा की लाभ हेतइ? अहाँ तँ चलि जाएब। फेर तँ हमरा ऐठामक लोकसँ निपटक अछि, अही अर्न्तद्वन्दसँ अभिभूत गामसँ अपनो लोक बहरियासँ कात भऽ जाइत अछि। ऐ प्रसंगमे किछु दिन पूर्व एकटा खिस्सा पढ़ए-मे आएल जे बहुत प्रासंगिक लगैत अछि। एकटा हंसक जोड़ा राति भेलापर एकटा गाछपर टीक गेल। ओइ गाछक खोदमे एकटा उल्लू रहैत छल। रहि-रहि कऽ ओ अवाज देबए लगइ। हंसक जोड़ा राति भरि ओइ कर्कस अवाजकेँ सुनैत-सुनैत तंग भऽ गेल। ओकरा बुझेबे नहि करै जे ई उल्लू एतेक अवाज किएक कऽ रहल अछि। भोर भेने हंसक जोड़ा गाछपर सँ विदा होइत छल कि उल्लू आगू आबि कऽ रस्ता छेकि लेलकै आ कहलकै- “खबरदार जँ आगाँ बढ़लह! ई हंसिनी हमर अछि। ई हमरे संगे रहत।” हंसकेँ ठकविदोर लागि गेल। जोरसँ चिचिया उठल। उल्लूकेँ चेतौलक। मुदा उल्लू टस-सँ-मस नहि भेल। कहलकै जे पंचैती करा लएह। हंस ऐ बातसँ सहमत भऽ गेल। पंचायतमे सभ पंच सर्व सम्मतिसँ फैसला कऽ देलक जे हंसिनी, उल्लूक पत्नी अछि आ ओकरे संगे रहत। हंस अवाक् भऽ गेल। अन्तमे ओकरा उल्लू बुझौलकै- “देखलहक केहेन गाम छइ? ऐठामक सरपंच वएह कहतै जे हम चाहबै। कारण हम ऐठाम रहै छी। तूँ परदेशी छह। कनीकालमे उड़ि जेबह। तँए तोहर के संग देतह। जायज-नजायजक चक्करमे के पड़त? अही दुआरे हम तोरा राति भरि चिकैर-चिकैर कऽ कहैत छेलियह जे ऐ गामसँ दूर चलि जाह। ऐठाम तोहर कियो नहि हएत। मुदा तूँ नहि बुझलह। आबो भागि जाह।” ई कहि उल्लू हंसिनीकेँ मुक्त कऽ देलक आ हंस हंसिनीकेँ लऽ ओतए-सँ तेना भागल जे फेर उलैट कऽ नहि तकलक। दियादीमे कोनो मतान्तर भेल कि दियादनीकेँ डाइन घोषित कऽ देल जाइत अछि। तेकर बाद तँ एकर तेहेन चक्रव्यूह बनैत अछि जे ओइ तथाकथित डाइनक जीवन नर्क भऽ जाइत अछि। अपनो लोक सभ ओकरासँ कन्नी काटए लगैत अछि। ओकरा हाथे चाहो-पानि पीबैमे संकोच होमए लगैत अछि। जेतइ बैसू ऐ बातक कानाफुसी हएत। तरह-तरह केर अबलट सभ सुनैमे औत। अरे, फँल्लीं तँ गाछ हँकैत अछि! राति-के नँगटे नचै छइ। ओकरा तँ ब्रह्म-पिचास पोस छै, इत्यादि। तरह-तरह केर अफवाह निरन्तर चलैत श्रृँखलाक ने आदि होइत अछि आ अन्त। ऐ तरहक अफवाह ओ दोषारोपणक कोनो अन्त नहि अछि। केकरो पेटमे दर्द भेलै तँ डाइन कऽ देलकै, केकरो बच्चा बेमार भेलै तँ डाइन अगिनवान फेक देलकै। माने जेतेक जे कष्ट भेलै से वएह कऽ देलकै। ऐ वैज्ञानिक युगमे लोक केतए-सँ-केतए चल गेल मुदा अपन ग्रामीण समाज अखनो सैकड़ो साल पर्वक मानसिकतासँ मुक्त नहि भऽ सकल। गाममे केकरो घरमे चोरी भऽ गेल रहइ। चोरकेँ पकड़बाक हेतु बट्टा चलौल गेल। मूसक बिलसँ निकालल गेल माटिकेँ मंत्रा कऽ बट्टापर फेकल जाइक,आ ओझा-गुनी ओइ बट्टाकेँ कटकटा कऽ धेने रहइ। मंत्रोक प्रभावसँ बट्टा शुर्र-दे चलए लगइ, चोरक दिशामे। लोक सभ, खास कऽ बच्चा सभ पाछाँ-पाछाँ भागैत। बट्टाक दिशा देख अनुमान लगौल जाइत जे चोर केमहर गेल। गाममे सबहक माथा अपना-अपना तरीकाक होइत अछि। जेकरे कहबै जे ई सभ फुसि थिक, अहींक उपहास करए लागत। बट्टा चला कऽ चोर पकड़ब आ झाड़-फूक कऽ साँपक बीख उतारब आम बात छल। एकबेर हमहूँ अपन अनुजक संग दस बजे रातिमे साँपक बीख झाड़ैबला केँ–चटिवाह कहल जाइए–बजबए कलमे-कलम तकने फीरी। बाबूकेँ साँप काटि लेने रहैन। बहुत प्रयासक बाद ओ भेटला, उलटनक वेग..., पलटनक वेग..., किदैन-किदैन कऽ कऽ साँपक मंत्र पढ़ि-पढ़ि बाबूक टाँगपर चाटी-पर-चाटी पड़ल ओ बँचि गेलाह। असलमे ओ साँप ढोढ़ रहइ, तर्थात् विषहीन साँप। हाइस्कूलक कोठरीमे तीन गोटेकेँ पुलिस पकैड़ कऽ बन्द कऽ देने रहइ। गाम-गामसँ लेाक करमान लागि गेल छल। जेना-तेना केबाड़सँ लटैक कऽ, खिड़की बाटे, देबालक फट्ठाक भूरसँ ओकरा सभकेँ लोक एक बेर देखए चाहैत छल। असलमे बात ई भेल छल जे तीनू मिलि कऽ एकटा युवतीक बालात्कारक बाद हत्या कऽ देने छल। ओ युवती आसेपासक छल। घास काटैले घरसँ खुरपी ओ छिट्टा लऽ निकलल छल। रातियो भेलापर घर आपस नहि गेल, तँ खोज-पुछारि शुरू भेल। प्रात:काल महींस चरबैबलाकेँ ओकर लाश कलममे भेटलै। गर्द पड़ि गेल। पुलिस-थाना भेल आ शीघ्रे तीनू अपराधी पकड़ल गेल। ओइमे दूटा तँ ओइ महिलाक टोलेक छल आ तेसर अधवयसू कण्ठीधारी पड़ोसी टोलक छल जे घटनाक समय ओतए आबि गेल छल आ दुर्भाग्यवश ओइ अपराधमे सहयोगी भऽ गेल छल। तीनूकेँ आजन्म कारावास भेल। साले-साल ई दृश्य हमरा मोनमे उभरैत रहल, कचोटैत रहल जे केना एकटा मेहनतकश महिलाक अकाल मृत्यु भऽ गेल। ओइ महिलाक पिता मजदूर छल। हमरा गाममे बरोबरि मजदूरी करए अबैत छल। अपन कन्याँक हत्या दुखसँ सालो ओ शोक-संतप्त रहल। ग्रामीण परिवेशमे ओइ तरहक घटना कमे सुनबामे अबैत छल। मुदा मनुखक प्रवृतिक कोन ठेकान? कखन ओकरापर पैशाचिक पशुवृत्ति हाबी भऽ जाएत..? आजन्म कारावास काटि कऽ ओ सभ फेर घुरि आएल। फेरसँ अपन रोजी-रोटीमे लागि गेल मुदा ओइ बापकेँ बेटी आपस नहि आएल। ओ दुनियाँ प्रस्थान कऽ गेल। ई घटना आइसँ पचास साल पूर्वक अछि, मुदा लगैत अछि जे ओकर माए-बाप अखनो ओइ स्कूलपर ओहिना छाती पीट रहल हो, ओकर करुणामय चीत्कार जेना परोपट्टामे ओहिना पसैर गेल हो। आम आदमीक लेल वंशक ओ एक घटना मात्र रहल होइक, मुदा ओइ मेहनतकश गरीब माए-बापक दृश्य सदा-सर्वदा करूण क्रंदन करैत रहि गेल मुदा ओकर बेटी घुरि नहि आएल। हम सभ मैट्रिकक परीक्षा देबए गेल रही तँ एक्के संगे कएगोटा डेरा लेने रही। ओइमे एक गोटे रहिका उच्च विद्यालयक छात्र हमरे सबहक संगे रहैथ। कारी, सुगठित शरीर, मझौल कद-काठी। जहन नौकरी करैत इलाहावादमे रही तँ छुट्टीमे गाम आएल रही। बहुत दिन बाद फेर हुनकासँ भेँट भेल रहए। आसेपासक गाममे ओ प्राइमरी स्कूलमे शिक्षक रहैथ। कोनो बात लऽ कऽ गौंआँ सभसँ मतभेद भऽ गेलैन। गौआँ सभ हुनका स्कूलेमे घेर लेलकैन। अपन जान बँचबए हेतु ओ कोठरीकेँ अन्दरसँ बन्द कए लेलाह। मुदा भीड़ बढ़िते गेल। हुनका ओ सभ मारि देत, ऐ डरसँ ओ एकटा बच्चाक गरदैनपर छुरी धऽ कऽ लोककेँ डराबए लगलखिन। लोक सभ पुलिसकेँ बजौलक। पुलिस आबि कऽ हुनका कोठरी खोलबाक लेल कहलकै आ आश्वासन देलकै जे हुनका किछु अहित नहि हएत। पुलिसक आश्वासनक बाद ओ कोठरी खोलि देलखिन। कोठरी खुजिते यए-ले, वए-ले सैकड़ो लोक पुलिसक सामने हुनका पीटए लागल आ तेतेक पीटलक जे ओ ओहीठाम बेहोश भऽ कऽ खसि पड़लाह आ अस्पताल जाइत-जाइत हुनकर देहावसान भऽ गेल। सम्भवत: ग्रामीण सभसँ हुनकर विवाद पढ़ाइ-लिखाइ किंवा धिया-पुताकेँ डाँट-डपट लऽ कऽ भेल रहए, मुदा ओ विवाद बहुत आगू बढ़ि गेल आ असमयमे हुनकर जान चलि गेल। तीस सालसँ बेसी भऽ गेल मुदा अखनो धरि हमरा मोनमे ऐ घटनाक परिदृश्य उभरैत रहैत अछि। भीड़ केहेन अन्यायपूर्ण भऽ सकैत अछि तेकर ई ज्वलन्त दृष्टान्त अछि। कहुना कऽ जीवन-यापन करबाक प्रयासमे तत्पर एकटा युवकक एहेन दुखद अन्त मनुष्यतापर प्रश्नचिन्ह अछि। निसचित रूपसँ ओ अपराधी प्रवृतक लोक नहि छल। अनुशासनमे विद्यार्थी सभकेँ राखए चाहैत छल। गलत सही किछु विवाद भऽ गेलइ। ओकरासँ घबराहटमे गलती भेलै जे बच्चाक गारापर धुरी रखि कऽ आत्मरक्षा करबाक व्योँत तकलक मुदा बच्चाकेँ कोनो क्षति नहि केलकै। मुदा भीड़ तँ आशानीसँ उभैर जाइत अछि आ एहेन घटित भऽ जाइत अछि जेकर कल्पनो असंभव। गामक हाइस्कूलपर मोछ फरकबैत नेताजीक भाषण भेल। अड़ेरक छातीपर बिजलीक खाम्ह गाड़ल अछि, मुदा बिजली नहि अछि। ई महान अन्यायसँ गामकेँ मुक्ति दियाबक अछि तँ हुनका मतदान करू, एम.एल.ए. बनाउ। गाममे बिजली आबए-मे सालो लागि गेल आ जखन आबियो गेल तँ नहियेँ जकाँ, कारण तेतेक कमकाल रहैत छल जे मोबाइलो चार्ज करबामे बाट ताकए पड़ैत छल। आब किछु दिनसँ बिजलीक उपलब्धता बढ़ल अछि मुदा गाममे आपसी सम्पर्क ओही अनुपातमे घटि गेल अछि। शहरे जकाँ आब गामोमे लोक फराक-फराक रहैत अछि। सभ अपन-अपन घरमे दूरदर्शन सेटसँ सटल रहै छैथ। वियाहो-दानमे आएब-जाएब सीमित भऽ गेल अछि। किछु दिन पूर्व गाममे रही तँ बरियाती आएल रहइ। हमरा जेबाक इच्छा भेल मुदा हमर अनुज कहला जे हकार नहि अएलैक अछि। एवम् प्रकारेण सम्पर्ककेँ सीमित कए शान्ति स्थापनाक प्रयास गामक मौलिकतापर आधुनिकताक जबरदस्त आधात अछि। जीवन-यापन फिराकमे गाम-घर छोड़ि सालक-साल परदेश रहए पड़ल। पहिने गाम जेबाक क्रम बेसी रहैत छल जे क्रमश: कम होइत चल गेल। गाम जाइतकाल केतेक मनोरथ रहैत छल। अपन गाम जा रहल छेलौं। महिनोसँ ओकर तैयारी होइत छल। मुदा गाम जाइते होइत जे कखन आपस चली। गामक लेखे ओझा बताह आ ओझा लेखे गाम बताह। गाम जाइते तरह-तरह केर अपेक्षा, उपेक्षाक संग सामंजस्यक अन्तविरोध बढ़ैत गेल। अपनत्वपर अपेक्षाक भार भारी होइत गेल। सभ किछु होइते पू. मायकेँ हँसैत, आनन्दित ओ भावनापूर्ण दर्शनक संग यात्राक संतुष्टिवोध होइत छल मुदा आब तँ ओहो नहि रहली! ने हमर दोस्ट सभ रहला। एकटा घनिष्ट मित्र सालो पूर्व गुजैर गेला। किछु गोटा हमरे जकाँ प्रवासी भऽ गेला। किछु गोटे जे बाँचल छैथ, सेहो गुम्म पड़ि गेल छैथ..! ‘ओ दूर के मुसाफिर हमको भी साथ लेले हम रह गये अकेले...।’ क्रमश: असगर होइत जीवन यात्रामे गामकेँ बिसैर जाएब आसान नहि अछि, मुदा समयक तेतेक पैघ अनतराल बीचमे गुजैर गेल जे अपने गाम ‘अनचिन्हार’ भऽ गेल। युवक सबहक परिचय हेतु ओकर बाबाक नाओं पूछए पड़ैत अछि। परिवेशक जटिलताक संगहि अपनत्वक परिभाषा बदैल गेल अछि। सही बात बजनिहार नहि रहि गेल अछि। ऐ सबहक अछैत हम गाम अबैत-जाइत रहै छी। गामक कालीपूजाक चन्दा पठबैत रहै छी। मुदा आन-आन लेाक जेकरा अपेक्षा कम वा नहियेँ रहैत छइ, ओ भेँट भेलापर कएक बेर अद्भुत आनन्द कए दैत अछि। एहने उदाहरण एकबेर गाम अबिते भेल। गाममे प्रवेश केनहि रही की एकटा गामक हलुआइ भेटल। मिठाइ बना कऽ जाइत रहए। तर्र-दे मिठाइ निकालि कऽ आग्रह करए लागल, हाल-चाल पूछए लागल। ओकर सद्भावना अखनो मोन पड़ैत रहैत अछि। १८.३.२०१७ ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)2004-17. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथममैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमे .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचयआ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेता, से आशा करै छी। रचनाक अंतमे टाइप रहए, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहलअछि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। ऐ ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मीठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-17 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ता लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.co.in पर संपर्क करू। ऐ साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल। ५ जुलाई २००४ केँhttp://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा “’विदेह’- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका” धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ”जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सिद्धिरस्तु वि दे ह www.videha.co.inविदेहप्रथम मैथिलीपाक्षिक ई पत्रिकाwww.videha.com विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'विदेह' २२६ म अंक १५ मई २०१७ (वर्ष १० मास ११३ अंक २२६)मानुषीमिह संस्कृताम्ISSN 2229-547X VIDEHA
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