VIDEHA — Issue 227 / अंक २२७

Publication: VIDEHA · Issue: 227
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134 ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' २२७ म अंक ०१ जून २०१७ (वर्ष १० मास ११४ अंक २२७) ऐ अंकमे अछि:- नीलमाधव चौधरी- ढेर रास कविता Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव Join official Videha facebook group. Join Videha googlegroups Follow Official VidehaTwitter to view regular Videha  Live Broadcasts through Periscope. विदेह जालवृत्तक डिसकसन फोरमपर जाउ। संपादकीय विदेह "नेपालक वर्तमान मैथिली साहित्य" विषयक विशेषांक निकालबाक नेयार केलक अछि जकर संयोजक श्री दिनेश यादव जी रहता। अइ विशेषांकमे नेपालक वर्तमान मैथिली साहित्य केर मूल्यांकन रहत। अइ विशेषांक लेल सभ विधाक आलोचना-समीक्षा-समालोचना आदि प्रस्तावित अछि। समय-सीमा किछु नै जहिया पूरा आलेख आबि जेतै तहिये, मुदा प्रयास रहत जे एही साल मइ-जून धरि ई विशेषांक आबि जाए। उम्मेद अछि विदेहक ई प्रयास दूनू पायापर एकटा पूल जरूर बनाएत। विदेह द्वारा संचालित "आमंत्रित रचनापर आमंत्रित आलोचकक टिप्पणी" शृंखलाक दोसर भागक घोषणा कएल जा रहल अछि। दोसर भागमे अइ बेर नीलमाधव चौधरी जीक रचना आमंत्रित कएल जा रहल  अछि आ नीलमाधवजीक रचना ओ रचनाधर्मितापर टिप्पणी करबा लेल कैलाश कुमार मिश्रजीकेँ आमंत्रित कएल जा रहल छनि। दूनू गोटाकेँ औपचारिक सूचना जल्दिये पठाओल जाएत। रचनाकारक रचना ओ आलोचकक आलोचना जखने आबि जाएत ओकर अगिला अंकमे ई प्रकाशित कएल जाएत। अइ शृंखलाक पहिल भाग कामिनीजीक रचनापर छल आ टिप्पणीकर्ता मधुकांत झाजी छलाह। जेना की सभ गोटा जनै छी जे विदेह २०१५ मे तीन टा विशेषांक तीन साहित्यकारपर प्रकाशित केलक जकर मापदंड छल सालमे दूटा विशेषांक जीवित साहित्यकारक उपर रहत जइमे एकटा ६०-७० वा ओइसँ बेसी सालक साहित्यकार रहता तँ दोसर ४०-५० सालक ( मैथिली साहित्यकार मने भारत आ नेपाल दूनूक)। ऐ क्रममे अरविन्द ठाकुर ओ जगदीश चंद्र ठाकुर "अनिल"जीपर विशेषांक निकलि चुकल अछि। आगूक विशेषांक किनकापर हुअए तइ लेल एक मास पहिनेसँ पाठकक सुझाव माँगल गेल छल।  पाठकक सुझाव आएल आ ओइ सुझाव अंतर्गत विदेहक किछु अगिला विशेषांक परमेश्वर कापड़ि, वीरेन्द्र मल्लिक आ कमला चौधरी पर रहत। हमर सबहक प्रयास रहत जे ई विशेषांक सभ २०१७ मे प्रकाशित हुअए मुदा ई रचनाक उपलब्धतापर निर्भर करत। मने रचनाक उपलब्धताक हिसाबसँ समए ऊपर-निच्चा भऽ सकैए। सभ गोटासँ आग्रह जे ओ अपन-अपन रचना ggajendra@videha.com पर पठा दी। विदेह सम्मान विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान १.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०१०-११ २०१० श्री गोविन्द झा (समग्र योगदान लेल) २०११ श्री रमानन्द रेणु (समग्र योगदान लेल) २.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११-१२ २०११ मूल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, कथा संग्रह) २०११ बाल साहित्य पुरस्कार- ले.क. मायानाथ झा (जकर नारी चतुर होइ, कथा संग्रह) २०११ युवा पुरस्कार- आनन्द कुमार झा (कलह, नाटक) २०१२ अनुवाद पुरस्कार- श्री रामलोचन ठाकुर- (पद्मानदीक माझी, बांग्ला- मानिक बंद्योपाध्याय, उपन्यास बांग्लासँ मैथिली अनुवाद) विदेह भाषा सम्मान २०१२-१३ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) 1.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार 2012 2012 श्री राजनन्दन लाल दास (समग्र योगदान लेल) 2.विदेह भाषा सम्मान २०१२-१३ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) २०१२ बाल साहित्य पुरस्कार - श्री जगदीश प्रसाद मण्डल केँ “तरेगन” बाल प्रेरक विहनि कथा संग्रह २०१२ मूल पुरस्कार - श्री राजदेव मण्डलकेँ "अम्बरा" (कविता संग्रह) लेल। 2012 युवा पुरस्कार- श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरीक “अर्चिस” (कविता संग्रह) 2013 अनुवाद पुरस्कार- श्री नरेश कुमार विकल "ययाति" (मराठी उपन्यास श्री विष्णु सखाराम खाण्डेकर) विदेह भाषा सम्मान २०१३-१४ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध) २०१३ बाल साहित्य पुरस्कार – श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरी- “देवीजी” (बाल निबन्ध संग्रह) लेल। २०१३ मूल पुरस्कार - श्री बेचन ठाकुरकेँ "बेटीक अपमान आ छीनरदेवी" (नाटक संग्रह) लेल। २०१३ युवा पुरस्कार- श्री उमेश मण्डलकेँ “निश्तुकी” (कविता संग्रह)लेल। २०१४ अनुवाद पुरस्कार- श्री विनीत उत्पलकेँ “मोहनदास” (हिन्दी उपन्यास श्री उदय प्रकाश)क मैथिली अनुवाद लेल। विदेह भाषा सम्मान २०१४-२०१५ (समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान) २०१४ मूल पुरस्कार- श्री नन्द विलास राय (सखारी पेटारी- लघु कथा संग्रह) २०१४ बाल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (नै धारैए- बाल उपन्यास) २०१४ युवा पुरस्कार - श्री आशीष अनचिन्हार (अनचिन्हार आखर- गजल संग्रह) २०१५ अनुवाद पुरस्कार - श्री शम्भु कुमार सिंह ( पाखलो -  तुकाराम रामा शेटक कोंकणी उपन्यासक मैथिली अनुवाद) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१२ अभि‍नय- मुख्य अभिनय , सुश्री शि‍ल्‍पी कुमारी, उम्र- 17 पि‍ता श्री लक्ष्‍मण झा श्री शोभा कान्‍त महतो, उम्र- 15 पि‍ता- श्री रामअवतार महतो, हास्‍य-अभिनय सुश्री प्रि‍यंका कुमारी, उम्र- 16, पि‍ता- श्री वैद्यनाथ साह श्री दुर्गानंद ठाकुर, उम्र- 23, पि‍ता- स्‍व. भरत ठाकुर नृत्‍य सुश्री सुलेखा कुमारी, उम्र- 16, पि‍ता- श्री हरेराम यादव श्री अमीत रंजन, उम्र- 18, पि‍ता- नागेश्वर कामत चि‍त्रकला श्री पनकलाल मण्डल, उमेर- ३५, पिता- स्व. सुन्दर मण्डल, गाम छजना श्री रमेश कुमार भारती, उम्र- 23, पि‍ता- श्री मोती मण्‍डल संगीत (हारमोनियम) श्री परमानन्‍द ठाकुर, उम्र- 30, पि‍ता- श्री नथुनी ठाकुर संगीत (ढोलक) श्री बुलन राउत, उम्र- 45, पि‍ता- स्‍व. चि‍ल्‍टू राउत संगीत (रसनचौकी) श्री बहादुर राम, उम्र- 55, पि‍ता- स्‍व. सरजुग राम शिल्पी-वस्तुकला श्री जगदीश मल्लिक,५० गाम- चनौरागंज मूर्ति-मृत्तिका कला श्री यदुनंदन पंडि‍त, उम्र- 45, पि‍ता- अशर्फी पंडि‍त काष्ठ-कला श्री झमेली मुखिया,पिता स्व. मूंगालाल मुखिया, ५५, गाम- छजना किसानी-आत्मनिर्भर संस्कृति श्री लछमी दास, उमेर- ५०, पिता स्व. श्री फणी दास, गाम वेरमा विदेह मैथिली पत्रकारिता सम्मान -२०१२ श्री नवेन्दु कुमार झा नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१३ मुख्य अभिनय- (1) सुश्री आशा कुमारी सुपुत्री श्री रामावतार यादव, उमेर- १८, पता- गाम+पोस्‍ट- चनौरागंज, भाया- तमुरि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) मो. समसाद आलम सुपुत्र मो. ईषा आलम, पता- गाम+पोस्‍ट- चनौरागंज, भाया- तमुरि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (3) सुश्री अपर्णा कुमारी सुपुत्री श्री मनोज कुमार साहु, जन्‍म ति‍थि‍- १८-२-१९९८, पता- गाम- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही,जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) हास्‍य–अभिनय- (1) श्री ब्रह्मदवे पासवान उर्फ रामजानी पासवान सुपुत्र- स्‍व. लक्ष्‍मी पासवान, पता- गाम+पोस्‍ट- औरहा, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) टाॅसि‍फ आलम सुपुत्र मो. मुस्‍ताक आलम, पता- गाम+पोस्‍ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान (मांगनि खबास समग्र योगदान सम्मान) शास्‍त्रीय संगीत सह तानपुरा : श्री रामवृक्ष सि‍ंह सुपुत्र श्री अनि‍रूद्ध सि‍ंह, उमेर- ५६, गाम- फुलवरि‍या, पोस्‍ट- बाबूबरही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) मांगनि‍ खबास सम्‍मान: मिथिला लोक संस्कृति संरक्षण: श्री राम लखन साहु पे. स्‍व. खुशीलाल साहु, उमेर- ६५, पता, गाम- पकड़ि‍या, पोस्‍ट- रतनसारा, अनुमंडल- फुलपरास (मधुबनी) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान (समग्र योगदान सम्मान): नृत्‍य - (1) श्री हरि‍ नारायण मण्‍डल सुपुत्र- स्‍व. नन्‍दी मण्‍डल, उमेर- ५८, पता- गाम+पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) सुश्री संगीता कुमारी सुपुत्री श्री रामदेव पासवान, उमेर- १६, पता- गाम+पोस्‍ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) चि‍त्रकला- (1) जय प्रकाश मण्‍डल सुपुत्र- श्री कुशेश्वर मण्‍डल, उमेर- ३५, पता- गाम- सनपतहा, पोस्‍ट– बौरहा, भाया- सरायगढ़, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) (2) श्री चन्‍दन कुमार मण्‍डल सुपुत्र श्री भोला मण्‍डल, पता- गाम- खड़गपुर, पोस्‍ट- बेलही, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) संप्रति‍, छात्र स्‍नातक अंति‍म वर्ष, कला एवं शि‍ल्‍प महावि‍द्यालय- पटना। हरि‍मुनि‍याँ / हारमोनियम (1) श्री महादेव साह सुपुत्र रामदेव साह, उमेर- ५८, गाम- बेलहा, वार्ड- नं. ०९, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) श्री जागेश्वर प्रसाद राउत सुपुत्र स्‍व. रामस्‍वरूप राउत, उमेर ६०, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) ढोलक/ ठेकैता/ ढोलकि‍या (1) श्री अनुप सदाय सुपुत्र स्‍व.   , पता- गाम- तुलसि‍याही, पोस्‍ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) (2) श्री कल्‍लर राम सुपुत्र स्‍व. खट्टर राम, उमेर- ५०, गाम- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) रसनचौकी वादक- (1) वासुदेव राम सुपुत्र स्‍व. अनुप राम, गाम+पोस्‍ट- ि‍नर्मली, वार्ड न. ०७  , जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) शिल्पी-वस्तुकला- (1) श्री बौकू मल्‍लि‍क सुपुत्र दरबारी मल्‍लि‍क, उमेर- ७०, गाम- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) श्री राम वि‍लास धरि‍कार सुपुत्र स्‍व. ठोढ़ाइ धरि‍कार, उमेर- ४०, पता- गाम+पोस्‍ट- चनौरागंज, भाया- तमुरि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) मूर्तिकला-मृर्तिकार कला- (1) घूरन पंडि‍त सुपुत्र- श्री मोलहू पंडि‍त, पता- गाम+पोस्‍ट– बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) श्री प्रभु पंडि‍त सुपुत्र स्‍व.   , पता- गाम+पोस्‍ट- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) काष्ठ-कला- (1) श्री जगदेव साहु सुपुत्र शनीचर साहु, उमेर- ३६, गाम- ि‍नर्मली-पुरर्वास, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) (2) श्री योगेन्‍द्र ठाकुर सुपुत्र स्‍व. बुद्धू ठाकुर उमेर- ४५, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) किसानी- आत्मनिर्भर संस्कृति- (1) श्री राम अवतार राउत सुपुत्र स्‍व. सुबध राउत, उमेर- ६६, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) (2) श्री रौशन यादव सुपुत्र स्‍व. कपि‍लेश्वर यादव, उमेर- ३५, गाम+पोस्‍ट– बनगामा, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) अल्हा/महराइ- (1) मो. जीबछ सुपुत्र मो. बि‍लट मरहूम, उमेर- ६५, पता- गाम- बसहा, पोस्‍ट- बड़हारा, भाया- अन्‍धराठाढ़ी, जि‍ला- मधुबनी, पि‍न- ८४७४०१ जोगि‍रा- श्री बच्‍चन मण्‍डल सुपुत्र स्‍व. सीताराम मण्‍डल, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) श्री रामदेव ठाकुर सुपुत्र स्‍व. जागेश्वर ठाकुर, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) पराती (प्रभाती) गौनि‍हार आ खजरी/ खौजरी वादक- (1) श्री सुकदेव साफी सुपुत्र श्री   , पता- गाम इटहरी, पोस्‍ट- बेलही, भाया- ि‍नर्मली, थाना- मरौना, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) पराती (प्रभाती) गौनि‍हार - (अगहनसँ माघ-फागुन तक गाओल जाइत) (1) सुकदेव साफी सुपुत्र स्‍व. बाबूनाथ साफी, उमेर- ७५, पता- गाम इटहरी, पोस्‍ट- बेलही, भाया- ि‍नर्मली, थाना- मरौना, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) (2) लेल्हु दास सुपुत्र स्‍व. सनक मण्‍डल पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) झरनी- (1) मो. गुल हसन सुपुत्र अब्‍दुल रसीद मरहूम, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) (2) मो. रहमान साहब सुपुत्र...., उमेर- ५८, गाम- नरहि‍या, भाया- फुलपरास, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) नाल वादक- (1) श्री जगत नारायण मण्‍डल सुपुत्र स्‍व. खुशीलाल मण्‍डल, उमेर- ४०, गाम+पोस्‍ट- ककरडोभ, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) श्री देव नारायण यादव सुपुत्र श्री कुशुमलाल यादव, पता- गाम- बनरझुला, पोस्‍ट- अमही, थाना- घोघड़डीहा, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) गीतहारि‍/ लोक गीत- (1) श्रीमती फुदनी देवी पत्नी श्री रामफल मण्‍डल, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) (2) सुश्री सुवि‍ता कुमारी सुपुत्री श्री गंगाराम मण्‍डल, उमेर- १८, पता- गाम- मछधी, पोस्‍ट- बलि‍यारि‍, भाया- झंझारपुर, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) खुरदक वादक- (1) श्री सीताराम राम सुपुत्र स्‍व. जंगल राम, उमेर- ६२, पता- गाम- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) श्री लक्ष्‍मी राम सुपुत्र स्‍व. पंचू मोची, उमेर- ७०, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) काँरनेट- (1) श्री चन्‍दर राम सुपुत्र- स्‍व. जीतन राम, उमेर- ५०, पता- गाम- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) मो. सुभान, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्‍ट- चनौरागंज, भाया- तमुरि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) बेन्‍जू वादक- (1) श्री राज कुमार महतो सुपुत्र स्‍व. लक्ष्‍मी महतो, उमेर- ४५, गाम- ि‍नर्मली वार्ड नं. ०४, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) (2) श्री घुरन राम, उमेर- ४३, गाम+पोस्‍ट- बनगामा, भाया- नरहि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) भगैत गवैया- (1)  श्री जीबछ यादव सुपुत्र स्‍व. रूपालाल यादव, उमेर- ८०, पता- गाम इटहरी, पोस्‍ट- बेलही, भाया- ि‍नर्मली, थाना- मरौना, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) (2)  श्री शम्‍भु मण्‍डल सुपुत्र स्‍व. लखन मण्‍डल, पता- गाम- बढि‍याघाट-रसुआर, पोस्‍ट– मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, ि‍जला- सुपौल (बि‍हार) खि‍स्‍सकर- (खि‍स्‍सा कहैबला)- (1) श्री छुतहरू यादव उर्फ राजकुमार, सुपुत्र श्री राम खेलावन यादव, गाम- घोघरडि‍हा, पोस्‍ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जि‍ला- सुपौल, पि‍न- ८४७४५२ (2) बैजनाथ मुखि‍या उर्फ टहल मुखि‍या- (2)सुपुत्र स्‍व. ढोंगाइ मुखि‍या, पता- गाम+पोस्‍ट- औरहा, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) मिथिला चित्रकला- (1) सुश्री मि‍थि‍लेश कुमारी सुपुत्री श्री रामदेव प्रसाद मण्‍डल ‘झारूदार’ पता- गाम- रसुआर, पोस्‍ट-– मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, ि‍जला- सुपौल (बि‍हार) (2) श्रीमती वीणा देवी पत्नी श्री दि‍लि‍प झा, उमेर- ३५, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) खजरी/ खौजरी वादक- (2) श्री कि‍शोरी दास सुपुत्र स्‍व. नेबैत मण्‍डल, पता- गाम- रसुआर, पोस्‍ट-– मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, ि‍जला- सुपौल (बि‍हार) तबला- श्री उपेन्‍द्र चौधरी सुपुत्र स्‍व. महावीर दास, उमेर- ५५, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) श्री देवनाथ यादव सुपुत्र स्‍व. सर्वजीत यादव, उमेर- ५०, गाम- झाँझपट्टी, पोस्‍ट- पीपराही, भाया- लदनि‍याँ, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) सारंगी- (घुना-मुना) (1) श्री पंची ठाकुर, गाम- पि‍पराही। झालि‍- (झलि‍बाह) (1) श्री कुन्‍दन कुमार कर्ण सुपुत्र श्री इन्‍द्र कुमार कर्ण पता- गाम- रेबाड़ी, पोस्‍ट- चौरामहरैल, थाना- झंझारपुर, जि‍ला- मधुबनी, पि‍न- ८४७४०४ (2) श्री राम खेलावन राउत सुपुत्र स्‍व. कैलू राउत, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) बौसरी (बौसरी वादक) श्री रामचन्‍द्र प्रसाद मण्‍डल सुपुत्र श्री झोटन मण्‍डल, उमेर- ३०, बौसरी/बौसली/बासुरी बजबै छथि‍। पता- गाम- रसुआर, पोस्‍ट- मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, ि‍जला- सुपौल (बि‍हार) श्री वि‍भूति‍ झा सुपुत्र स्‍व. कनटीर झा, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्‍ट- कछुबी, भाया- तमुरि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) लोक गाथा गायक श्री रवि‍न्‍द्र यादव सुपुत्र सीताराम यादव, पता- गाम- तुलसि‍याही, पोस्‍ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) श्री पि‍चकुन सदाय सुपुत्र स्‍व. मेथर सदाय, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) मजि‍रा वादक (छोकटा झालि‍...) श्री रामपति‍ मण्‍डल सुपुत्र स्‍व. अर्जुन मण्‍डल, पता- गाम- रसुआर, पोस्‍ट- मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, ि‍जला- सुपौल (बि‍हार) मृदंग वादक- (1) श्री कपि‍लेश्वर दास सुपुत्र स्‍व. सुन्नर दास, उमेर- ७०, गाम- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) श्री खखर सदाय सुपुत्र स्‍व. बंठा सदाय, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) तानपुरा सह भाव संगीत (1) श्री रामवि‍लास यादव सुपुत्र स्‍व. दुखरन यादव, उमेर- ४८, गाम- सि‍मरा, पोस्‍ट- सांगि‍, भाया- घोघड़डीहा, थाना- फुलपरास, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) तरसा/ तासा- श्री जोगेन्‍द्र राम सुपुत्र स्‍व. बि‍ल्‍टू राम, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) श्री राजेन्‍द्र राम सुपुत्र कालेश्वर राम, उमेर- ५८, गाम- मझौरा, पास्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) रमझालि‍/ कठझालि‍/ करताल वादक- श्री सैनी राम सुपुत्र स्‍व. ललि‍त राम, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) श्री जनक मण्‍डल सुपुत्र स्‍व. उचि‍त मण्‍डल, उमेर- ६०, रमझालि‍/ कठझालि‍/ करताल वादक,  १९७५ ई.सँ रमझालि‍ बजबै छथि‍। पता- गाम- बढि‍याघाट/रसुआर, पोस्‍ट- मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) गुमगुमि‍याँ/ ग्रुम बाजा श्री परमेश्वर मण्‍डल सुपुत्र स्‍व. बि‍हारी मण्‍डल उमेर- ४१, १९८० ई.सँ गुमगुि‍मयाँ बजबै छथि‍। श्री जुगाय साफी सुपुत्र स्‍व. श्री श्रीचन्‍द्र साफी, उमेर- ७५, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) डंका/ ढोल वादक श्री बदरी राम, उमेर- ५५, पता- गाम इटहरी, पोस्‍ट- बेलही, भाया- ि‍नर्मली, थाना- मरौना, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) श्री योगेन्‍द्र राम सुपुत्र स्‍व. बि‍ल्‍टू राम, उमेर- ५५, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) डंफा (होलीमे बजाओल जाइत...) श्री जग्रनाथ चौधरी उर्फ धि‍यानी दास सुपुत्र स्‍व. महावीर दास, उमेर- ६५, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र),जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) श्री महेन्‍द्र पोद्दार, उमेर- ६५, पता- गाम+पोस्‍ट- चनौरागंज, भाया- तमुरि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) नङेरा/ डि‍गरी- श्री राम प्रसाद राम सुपुत्र स्‍व. सरयुग मोची, उमेर- ५२, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf          Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf       12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक,  १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf       Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf         21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010        Videha_01_10_2010_Tirhuta             67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010        Videha_15_11_2010_Tirhuta             70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010        Videha_15_12_2010_Tirhuta           72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011        Videha_01_03_2011_Tirhuta           77 ७) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012        Videha_01_08_2012_Tirhuta           111 ८) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013        Videha_15_03_2013_Tirhuta           126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013        Videha_15_11_2013_Tirhuta           142 १०) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १३) विदेह सम्मान विशेषा‍क- २००म अ‍क १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अ‍क १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १४) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आम‍ंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी VIDEHA 209th issue विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 विदेह ई-पत्रिकाक  बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of original work.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ Maithili Books can be purchased from: http://www.amazon.in/   For the first time Maithili books can be read on kindle e-readers. Buy Maithili Books in Kindle format (courtesy Videha) from amazon kindle stores, these e books are delivered worldwide wirelessly:- http://www.amazon.com/ अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। गजेन्द्र ठाकुर ggajendra@videha.com नीलमाधव चौधरी- ढेररास कविता 1 हम त' ठीक छी : सत्ते ? हम सब एतेक कोना बदलि सकैत छी जेना बदलि गेल छी कोनो आकर्षण नहि कोनो प्रतिरोध नहि जे जेहेन करता से तेहेन भोगता बडड संतुष्ट, बडड सहज बाप- भाय मीलि क' बहिन- बेटी संग नौ वर्ष तक अस्सी सालक संत सोलह सालक कन्या मुदा हमर खून नहि खौलैत अछि अपना पर नजर दौडबैत छी पहिनेसँ बेसि सशक्त भ' गेल छी बेसि बुद्धिमान (समय आ अनुभव के देखेत, ओना त) आ बेसी गुदकर मुदा पहिनेसँ बेसी असंतुष्ट असुरक्षित अपमानित नहि फरछिआइत अछि प्रगति क पथ पर छी कि अवनति क पथ पर ? 2 की ई प्रकृति क नियम अछि ? गाछ , रूग्नतासँ नग्नता धारण करैत अछि कि प्रकृति केर चिर नियम के पालन करैत अछि यश नाम ओकरे साम दाम ओकरे जे सीख गेल धूर्तइ अछि फोड़ैत रहू कपार जपैत रहू शिक्षा संस्कार जे चलि गेल से कहाँ घुरैत अछि मरैत अछि लोक अभावसँ भुखमरीसँ बीमारीसँ मरैत अछि लोक ज्ञानसँ विवेकसँ लाचारीसँ अप्पन की आनक उचित अधिकार लेल कत’के मरैत अछि लोक सब दिन एहिना अपना लेल जीवैत छल लोक आइयो ओहिना अपना लेल जीवैत अछि | 3 दीपसँ अन्हार दीपसँ दीप नेसल जा सकैत अछि दीपसँ अन्हार मिटाओल जा सकैत अछि दीपसँ इजोत आनल जा सकैत अछि मुदा ई अन्हारसँ दीप जड़ेबाक कोशिश ई अन्हारसँ अन्हार भगेबाक कोशिश एहि धुआँमे तँ दीवालीक इजोतो बेकार दीया तँ नेसलहूँ आँखि खुलबा लय कहाँ तैयार | मोनमे जोशे नहि सजल अछि घर संसार जेबमे खिद्दी नहि विदा भेलहुँ हाट बाजार बिना युद्धे सीमापर नित्य शहीद होइत जवान हवामे प्रदूषण मुश्किल अछि बचनाय प्राण | 4 ककर दोष? अन्हरिया रातिक एहि शून्य बेलामे कहियो जन्म लेने छलाह कारी कृपा निदान कृष्ण पाँछा देखैत छी बस हमर पदचिह्न केर स्वर कतैक आगू आबि गेल छी कि लौटब संभव ? आगू अथाह दुर्गम बाट हमरा एकसरे पार कर' पड़त एहि गँहीर सागरकेँ | एकटा आमक गाछपर नजर जाइत अछि आह केहेन मधुगंध बरसा रहल छल पल-छिन लेल मोन भावविह्वल भ' गेल परन्तु हवाक तीव्र झोंखासँ खसि पडल बहुत रास आम्र मज्जर आह की वएह खसल मज्जर तँ नहि हम सत्ते कते क्रूर अछि प्रकृति ना ना नहि नहि ? ककर दोष? ओकर वाल्यपन केर कि ई हवाक झोंखाक नहि सोचि पबैत छी हम हमर दोष की युगक' प्रवाह केर ? 5 मुँह भरे खसब कहाँ एतेक मुश्किल छै सीधा चलब किएक होएय ड'र जे मुँह भरे खसब करू अपनापर विश्वास ई चीज बड्ड खास खखार बुझि खूनकेँ एना जे फेकब खखरीकेँ चाउर बुझि एना जे समेटब बेटाक आसमे बेटीक हत्या केहन भविष्य होयत की आशा करब पढेबन्हि जे पाठ बौआ वएह पढताह देखेबन्हि जे बाट बौआ ओहीपर चलता जतबे जरूरी स्कूलक पोथी सम्हारब ततबे आवश्यक घर आँगन बहारब निज़ भाषा संस्कृतिकेँ जँ नहि राखब ज्ञान पायब कतहुँ कोना सम्मान 6 अहाँ नहीं रुकि सकब नहि जनैत छी अपन अधिकार नहि मँगैत छी हम अहाँ सँ न्याय बस एतबे प्रार्थना अछि हमर दोष बतौने जाउ जिनगी बड्ड छोट होइत छैक सेहो नहि निश्चय कखन मौत आत्मसात क' लेत किछ बुझल नहि किछ देखल नहि ओना तँ जीबाक इच्छा तहिये मरि गेल जहिया अस्वीकार केलक अहाँक हृदय हमर प्रेमातुर मोनकेँ मुदा उम्मीद अछि अहाँ लौट आयब समय नहि अछि किछ छन रुकि क' पाछू मुड़ि क' देखबाक अहाँ व्यस्त छी हमरा संग जिनगी बेकार नहि कर' चाहैत छी हम बुझैत छी नहि बुझैत अछि जिनगीक पिपासा लोक दुनियाँ समाज हमर अहाँ क' विवशता अहाँ नहि रुकि सकब मुजराक तानपर वेश्याक गानपर शराबक दुकानपर अहाँ लौट आयब मिथिलाक आनपर एहि टूटल मचानपर ढलान लैत दलानपर गामक सीमानपर। 7 कहाँ ककरो मंजूर आँखि लगले छल ओ कहलनि भोर भ' गेल नाम सुनतहि भोरक मोन घोर भ' गेल एना किएक जे रातिए राति नीक लगैत अछि बीच मुहान छोड़ि क' कोन कात ठीक लगैत अछि सबतरि पसरि रहल अछि आगि आ मोम भेल जा रहल छी आकांक्षाक बजार गरम जेब नरम रूकब कि झूकब कहाँ ककरो मंजूर पाछू लागल आगि अछि बस उड़ल जा रहल छी | 8 पसरल बादल देहक दर्द, मोन नहि बुझल रहल मोहमे डुबल सदिखन व्याकुल सदिखन उलझल आर कहाँ किछ सुझल अपने करेजकेँ भुजि-भुजि खाय की सीझल की पाकल नोर नयनकेँ घोरि घोरि पीबी रहल आत्मा प्यासल एसगर सुतल रही पलंगपर देखलहु सब किछ भीजल दूर छिटकि गेल चान गगनसँ सबतरि पसरल बादल 9 छाँह जकाँ अन्हार घरमे छाँह जकाँ हेरा गेल छी अपने घरमे हम अपने बिला गेल छी गाँव टोल पोखरि नहि जानि कहिया छुटल नींदमे एखनो बड़बड़ा गेल छी 10 थाह जिनगीक टूटल डंटीक कपमे राखल दू घोंट चाह नहि जानि कखनसँ सेरा रहल छल जेना हमर जिनगी एक घोंट चाह जिनगीक थाह 11 जिनगीक माने गप्प जखन करब हम अप्पन करब बुझैत छी हमर गप्प अहाँ बुझि नहि सकब सह्स्त्रो भ्रम अछि कोटि-कोटि अहम अछि अहाँक मार्गमे कहाँ कतहुँ श्रम अछि उपलब्धिक खजानासँ भरल अछि अहाँक घर हमर हिस्सामे बस ओकरा निहारैत रहब हम बुझब कोना अहाँक तगमाक महत्व जिनगीक माने हम बुझलहुँ बस त्यागैत रहब 12 संयोग ककरासँ प्रेम ई कहेन वियोग अछि हमर जिनगीक ई केहेन संयोग अछि जकरासँ स्नेह करी ओकरेसँ होइत अछि संहार जकरासँ रहल विमुख ओकरेसँ उद्धार अछि 13 हेरैत प्रश्नक उत्तर प्रकृति क खोहमे बौआइत दिन राति तकैत छी अपने सन कोनो बताह प्राणी जे हमरा असगर छोडि नहि चलि जाय जेना संग छोडि दैत अछि सूर्य चाँद तारा तकैत छी कोनो ज्ञानक डारि प्रकृतिक झुरमुट कोनमे तकैत छी कोनो अपसरा कोनो सुंदरीक नग्न मूर्ति जकरा बिना बुझाइत अछि सम्पूर्ण वन अपूर्ण तकैत छी कोनो भावपूर्ण युक्ति तकैत छी ह्रदयमे उठल पीड़ाक कारण करैत नव नव कविताक श्रृजन किएक नव नव कोमल पल्लव रौदमे जरैत जरैत झरि जाइत अछि ई देखि बिना बादल ई आकाश किएक नहि बरसि जाइत अछि 14 तिकड़म आ पराक्रम हमर अधिकार की हमर अधिकारपर तँ पहिनेसँ कब्ज़ा कएने छी अहाँ हम सहैत छी जिवैत छी बनल अहाँक शिकार अपन शोणितकेँ बनौने अहाँक आहार नित्य बढैत अछि अहाँक अत्याचार बिना कोनो विरोध प्रतिकार करैत छी स्वीकार जेठक दुपहरिया हो वा माघक भोररिया हो बितैत अछि कठिन श्रमक संग जीवन स्वीकारैत छी क्रूरसँ क्रूर संताप बिना केने देहक कोनो परवाह दिन रति साँझ भोर खटैत छी खटैत रहल छी आ अहाँ वातानुकूलित बंद कोठरीमे करैत छी हमर मजुरीक हिसाब खुशीसँ पिबैत शराब विलायती धुनपर अलापैत गान बिना रखने सभ्यता संस्कृति केर मान जेना जेना बढैत अछि हमर सहनशीलता दुन्ना वेगसँ बढैत अछि अहाँक लुटबाक क्षमता हमरे रुधिरक कमाइसँ करैत छी हमारे संग व्यापार दस टका दैत छी लैत छी हज़ार मुदा हम बुझियो क' करैत अयलहुँ स्वीकार अहाँक छल प्रपंचसँ भरल व्यवहार जखन कि हमरो अछि ज्ञात अहाँक गुप्त बात कोना बनलहुँ अहाँ फेखनासँ फेकू बाबू किएक अहाँक बेटी करैत छथि फर्स्ट पहिरने बिना ब्लाउजकेँ स्कर्ट अहाँ करैत छी ओबामा, जिनपिंग केर बात भाषणमे करैत छी मार्क्स लेनिनकेँ मात करैत छी मजूर कृषक नेता संग गठबंधन जे नहि बुझैत अछि अहाँक तिकड़म़ आ जखन वो फँसि जाइए अहाँक तिकड़म़बाजीमे ओकरे हथियारसँ करैत छी ओकर संहार वाह वाह कहि उठय जग अपने धन्य छी सरकार बाढ़ भूकंप अकालसँ पीड़ित हम जखन करैत छी क्रंदन अहाँ करैत छी विमान सर्वेक्षण आकाशसँ खसबैत छी रोटीक टुकड़ा तहियो लेल एतय होइत अछि झगड़ा आहि रौ बाप भेटल कहाँ हमरा भेटल कहाँ हमरा एतय तँ सभ किछमे मुँहजोड़गरक जीत जकरे कैंचा छै तकरे जीत छैक 15 गोधूलि बेला जँ माने ताकब तँ मजा छुटि जाएत जीवनक अद्भुत कथा छुटि जायत हेतै आब की एहिसँ खराब बात मोनमे अबिते अछि खतम सब जबाब जे बचल अछि नेह सेहो टूटि जाएत जँ माने ताकब तँ मजा छुटि जाएत जे होइ छै से सब बुझले प्रभुक अछि माया हुनक देल धड़कन हुनक देल काया जे लिखल अछि करममे कहूँ के मिटायत जँ माने ताकब तँ मजा छुटि जाएत 16 अतृप्त प्यास चिर शांति पसरल छल मानस पटलपर जाहिमे नहि छल कोनो कथा कविता किम्बा व्यथा जेना कोनो शांत सरिता नहि कोनो तूफानक तरंग छल नहि धाराक गति नहि उल्लास, नहि हर्ष नहि चिंता,नहि विस्मय जिनगी चलल जा रहल छल नाव बढल जा रहल छल अथाह समुद्रक सम पटलपर शनैः शनैः अनंत दिस नहि ज्ञान आदिक नहि अंतक परिचय नहि जीबाक ध्यान नहि मरणक निश्चय अकारण अनिश्चित दिशामे बढल जा रहल छल छोट छीन जिनगीक नाव अथाह समुद्रक सम पटलपर कतहुँसँ उड़ि आयल कोनो पीड़ा सोन्हिया गेल जिनगीक पोर पोरमे हरियरसँ भेल मोन पीयर गरि गेल सीसा मोनक कोर कोरमे कतहुँसँ उठल बसंती बयार खसल सरिताक निश्छल पटलपर जोरसँ शोर भेल घोर गर्जनाक संग रातिसँ भोर भेल सूर्यक पहिलुक किरण सरिताक ठोरक जल चुम्बित करबाक लेल व्यग्र भ' गेल छल बात चलैत बटोहीक अबोधता स्वीकार नहि क' सकल एहन प्रेम परिणयकेँ क्रोधाग्निसँ भरल मुखसँ दुर्वासाक श्राप निकलल जा सरिते सूर्यक तापसँ भरि जिनगी जरैत रहब' आशा नित्य दिन रहत सूर्यक पहिल किरणक संग ढहि जाएत तोहर स्वप्नक महल आ ओहि दिनसँ जड़ि रहल अछि सरिताक अतृप्त मोन दिवाकरक पवित्र प्रेम परिणयकेँ लेल क्षणिक दैहिक प्रणयकेँ लेल जरैत छल जरैत अछि जरैत रहत सनातन सरिताक प्रेममेँ डूबल हृदय जिनगी जे सुतल चल चिड़ शांतिमे बनि गेल कल्लोल कोलाहलक रंगभूमि कल कल निनाद सरिताक शांत स्वर तूफानी तरंगमे हेरा गेल पानिक तीव्र हिलकोरमे डगमगा गेल जीवनक छोट छीन नाव चिर शांति पसरल छल मनस पटलपर जाहिमे कोनो कथा कविता किम्बा व्यथा नहि छल भरि गेल अछि करुणा दया सपनासँ 17 संकल्प संकल्पित छी जिनगीक बाटपर चलबाक लेल बुझल अछि आगा खाधि हेतैक अछि बुझले नहि हम तडपि सकब मोनक ज्वालाक शांति लेल बढ़ि रहल छी अप्स्याँत भेल कएक बेर लागल ठेस मुदा नहि संतुष्ट भेल हमर क्षुधा उठल बेदनाक तृप्ति लेल बढ़ि रहल छी अप्स्याँत भेल जगह नहि छै चुट्टियों ससरबाक तैयो चाहैत छी घोसिया रही प्रगति केर आसमे भ्रमित हम बढ़ि रहल छी अप्स्याँत भेल ई आगि एहन अछि बढ़बाक सुख शांतिकेँ जे जरा देलक गाम-घर, सर-संबन्धी सब छोड़ि बढ़ि रहल छी अप्स्याँत भेल जिनगीक छै नइ ओर छोर सब रातुक बाद होइछ भोर रातुक तिमिरमे डूबल हम बढ़ि रहल छी अप्स्याँत भेल की चाही ओ कोना भेटत ई तँ कहियो सोचलहुँ नहि अप्पन प्रणकेँ अर्पित हम बढ़ि रहल छी अपस्यांत भेल 18 विश्वास महान वएह जे अपन जीवनसँ दसक उपकार करैत अछि ओजस्वी वाणीसँ मुर्दामे शक्ति संचार करैत अछि अपना लेल तँ सब करैया ओरदा रहैत के मरैया दुःख कियो अपनाइए क' ककरो उद्धार करैत अछि परम सत्य जे लिखल विधाता सैह टा होयत कतबो पीटब कपार विधिक विधान नहि बदलत तैँ कि मानव कर्तव्य छोड़ि भाग्य लेल दौरय अपन कर्मक फल तँ सब कियो अपने भोगय मन्दिर आ मसजिद के तँ लागल अछि अंबार एतय भक्त लोकक तँ देखू लागल अछि बाज़ार एतय नहि बुझाइत भगवान केर वास हेतैन्हि पुजारियो के रहि गेल विश्वास हेतैन्हि 19 जनतंत्र ? पौधसँ गाछ भेल गाछसँ जारनि झरकल पजरल आब धुधुँआ रहल अछि | 20 जीवन - सार पहिले डेगपर भ्रमर गुंजन यौवनक अंतिम छोर तक खुशीसँ भरल जीवन छौडैत यौवनक संग मधुप करथि दूर विचरण इएह जीवन गाथा इएह जीवन दर्शन ओ सोच' लागल सम्पूर्ण जीवनक सार की यौवन जकर बीत गेल ओकरा लेल संसार की कोन बिधिये यौवन कतेक दिन संग देत संग जँ छोड़बे करत तखन एकर सिंगार की ? प्रकृतिक नियम एतेक क्रूर किएक छैक साँझसँ भोर एतेक दूर किएक छैक एहि संसारसँ भेटत किछ नहि तखन एतेक मोह किएक क्षणिक सुखक लेल लोक एतेक व्यथित किएक छैक संसार के रचनिहार की एहि बातसँ अनभिज्ञ छथि नहि कथमपि नहि इएह तँ जीवन क सार थिक जतहि प्रगति रुकि जाय ओतहि जीवनक संहार थिक 21 जरूरत बढैत गेल अहाँ लिखैत रहलहुँ पाथरपर फुल उगेबाक खिस्सा हम गहुँमक पटौनी हेतु पानि लेल लड़ैत रहलहुँ खेत-खरिहान तँ सिमटैत गेल आ अन्नक जरूरत बढैत गेल 22 मँझधार थिक सुख दुख तँ जिनगी क शृंगार थिक जिनगी जँ किछ तँ मँझधार थिक किएक हम बैसि जाय किछ बेसी बुझि क' जिनगी बुझबाक नहि अनबुझ रफ्तार थिक कतेक कोस कतेक मील तकर ककरा कोन ठेकान की भेटल की छुटल कतेक राखब एकर ध्यान चानीक थारीमे परसल महुअक खीर जँ तँ जेठक रौदमे जड़ैत खेत पथार थिक 23 छाँह जकाँ अन्हार घरमे छाँह जकाँ हेरा गेल छी अपने घर मे हम अपने बिला गेल छी गाँव टोल पोखरि नहि जानि कहिया छुटल नींदमे एखनो बड़बड़ा गेल छी 24 भ्रष्टाचार तिरंगा जे प्रतीक स्वाधीनताक ओकर हरियर आ केसरिया रंग तँ ओहिना गाढ़ अछि मुदा उज्जर रंगक आगू जेना कियो ठाढ़ अछि कनी गौर करियो वएह भ्रष्टाचार अछि 25 मोनक तृष्णा लगातार चारि दिन सँ बरसैत पानि अकच्छ भ' गेल अछि मोन ओना बारिसक मनभावन द़ृश्य बड्ड नीक लगइत छैक मुदा कखन जखन पेटक भूखसँ मोन व्यथित नहि हो जखन कोनो घावसँ देह पीड़ित नहि हो जखन नव तरुणी संग यौवन उमड़ल हो मोनमे उल्लास , जेब भरल हो मुदा एखन अहि अकालबेलामे जतय नून रोटी जुटेबाक समस्यामे प्रतिभाक एक-एक काठी जड़ब' पडैत छैक जतय रोज बापक बीमारी मायक फाटल साडी बहिन-बेटीक बढैत उम्र चारु कात सँ घेरने रहैत हो कोना लीखि सकैत छी अपन प्रेयसी पत्नीक हृदय सागरक अथाह प्रेम वर्णन जीवन-आनंदक सूक्ष्म पवित्र दर्शन जतय फूल बनबासँ पहिने झहरि जाइत अछि कोमल-कोमल कोढ़ीं वॄक्ष बनबासँ पहिने सुखा जाइत अछि प्रेमक गाछ कोना लिखि सकैत छी शृंगारक कविता, प्रेमक गीत ओना जाड़क उन्मुक्त राति बड्ड प्रियगर देहक पोर-पोरमे जागृत करैत अछि कामवासनाक आगि जगा दैत अछि अंतर्मनमे नुकायल मनलग्गु दैत्यकेँ मुदा भावनाक लहरि तोड़ि दैत अछि यथार्थक क्रूर बोध काँपी कलम हाथसँ छुटि जाइत अछि क्रोधग्नि स्वर ज्वालासँ मोन मलिन भ' जाइत अछि गृहस्थी क माँदे बडी कालसँ ओ किछ कहैत रहैत हम चुप- चाप घरसँ बहरा जाइत छी कोनो जोगार, कोनो व्यवस्थामे भीजल तीतल अवस्थामे अपूर्ण कविता अपूर्णे रहि जाइत अछि मोनक तृष्णा प्यासल, हारल, थाकल, निराश मोनहिमे दबि जाइत अछि 26 सत्ताक स्वाद टिकट तँ भेटि गेल प्रश्न आब एतबे लोकप्रियता कोना भेटत ? समय बड्ड कम रातो राति प्रसिद्धि कोना भेटत ? बिना स्टंट बिना पब्लिसिटीकेँ कोना भेटत सत्ताक स्वाद बिना नव नव आवरणकेँ कोना भेटत जिंदाबाद फेर वएह पुरनका खेल तू चोर तू भ्रष्ट तू अराजक तू बैमान तू आतंकी तू सांप्रदायिक तू पागल तू नपुंसक परोक्षसँ बजैत सुनैत आब खुल्लमखुल्ला एक दोसरापर ढेला फेकैत नेपथ्यमे झाँकबाक जरुरत बुझायल कहाँ कहियो राजनीति कि राजनेता जानबाकक फुर्सत भेल कहाँ कहियो एहि कादो कोयलासँ सभ्य लोक बचिते रहल जिम्मेदार बनि देश लेल सब कष्ट उठबिते रहल मुदा एहि बेर आमसँ खास धरिमे भरल अछि उन्माद नपुंसक लोकतंत्रक प्रदर्शनमे छद्म मर्दानगीक पार्टीवाद अतृप्त प्यास चिड़ शांति पसरल छल मानस पटल पर जाहि में नहि छल कोनो कथा कविता किम्बा व्यथा जेना कोनो शांत सरिता नहि कोनो तूफान क तरंग छल नहि धारा क गति नहि उल्लास, नहि हर्ष नहि चिंता,नहि विस्मय जिनगि चलल जा रहल छल नाव बढल जा रहल छल अथाह समुद्र क सम पटल पर शनैः शनैः अनंत दिस नहि ज्ञान आदिक नहि अंतक परिचय नहि जीबाक ध्यान नहि मरणक निश्चय अकारण अनिश्चित दिशा में बढल जा रहल छल छोट छिन जिनगिक नाव अथाह समुद्र क सम पटल पर कतहु स उड़ि आयल कोनो पीड़ा सोन्हिया गेल जिनगि क पोर पोर में हरियर स भेल मोन पीयर गरि गेल सीसा मोन के कोर कोर में कतहु स उठल वसंती बयार खसल सरिताक निश्छल पटल पर जोर स शोर भेल घोर गर्जना क संग राति स भोर भेल सूर्यक पहिलुक किरण सरिता के ठोर के जल चुम्बित करबाक लेल व्यग्र भ गेल छल. बात चलैत बटोही क अबोधता स्वीकार नहि क सकल एहन प्रेम परिणय के क्रोधाग्नि स भरल मुख स दुर्वासा क श्राप निकलल जा सरिते सूर्यक ताप स भरि जिंनगी जरैत रहब' आशा नित्य दिन रहत' सूर्यक पहिल किरणक संग ढहि जेत' तोहर स्वप्नक महल आ ओहि दिन स जड़ि रहल अछि सरिताक अतृप्त मोन दिवाकर क पवित्र प्रेम परिणय के लेल क्षणिक दैहिक प्रणय के लेल जरैत छल जरैत अछि जरैत रहत सनातन सरिताक प्रेम में डूबल हृदय. जिनगि जे सुतल चल चिड शांति में बनि गेल कल्लोल कोलाहल क रंगभूमि कल कल निनाद सरिता क शांत स्वर तूफानी तरंग में हेरा गेल पानि क तीव्र हिलकोर में डगमगा गेल जीवन क छोट छिन नाव चिड़ शांति पसरल चल मनस पटल पर जाहि में कोनो कथा कविता किम्बा व्यथा नहिं छल भरि गेल अछि करुणा दया सपना स . नीलमाधव चौधरी अपने अपन हंता सहजता सँ नहि किएक किछुओ मोन स्वीकार करैत अछि किएक बुझाइये सबके संग सब, बस अहाँ नहीं रुकि सकब नहि जनैत छी अपन अधिकार नहि मांगेत छी हम अहाँ स न्याय बस एतबै प्रार्थना अछि हमर दोष बतौने जाऊ जिनगी बड्ड छोट होइत छैक सेहो नहि निश्चय कखन मौत आत्मसात क लेत किछ बुझल नहि किछ देखल नहि ओना त जीबाक इच्छा तहिये मरि गेल जहिया अस्वीकरलक अहाँक हृदय हमर प्रेमातुर मोन के मुदा उम्मीद अछि अहाँ लौट आयब समय नहि अछि किछ छन रुकि क पाछु मुडिक देखबाक अहाँ व्यस्त छी हमरा संग जिनगी बेकार नहि कर चाहैत छी हम बुझैत छी नहि बुझैत अछि जिनगीक पिपासा लोक दुनियां समाज हमर अहाँ क विवशता अहाँ नहि रुकि सकब मुजरा के तान पर वेश्या क गान पर शराब क दुकान पर अहाँ लौट आयब मिथिला क आन पर एहि टूटल मचान पर ढलान लैत दलान पर गमक सीमान पर। आँचर तर सहेज मुंडे मुंडे मतिर भिन्ना  दिन राति आफत भेल दूना  आब आफते के  भाग्य मानि बैसल छी  कोरो तक जाडि क  खएबा में नहि संकोच  हाल सुधरत से निश्चय जानि बैसल छी बिहार क नाम पर  मिथिला क बद्ध भेल  मैथिल सब नेता भेला लोक करबद्ध भेल  सेंट्रल में ललित बाबु क छवि छल महान  छलल गेला अपने स  विधि के छल विधान  मुख्य मन्त्री मिश्राजी  मैथिल स भरल बिधान सभा  मधुबनी दरभंगा छुटि गेल  बिसरि गेल लोक सौराठ सभा  तकर बाद क त फेर पूछु नै  केहेन ने केहेन कांड भेल बिकाय लागल पटना स्टेशन श्वेतनिशा उर्फ बाँबी हत्याकांड भेल ललित बाबु क छोडि  नहि कियो देलिइन मिथिला पर ध्यान  भोट लेल बस मिथिला प्रेम पाग पहरि शुरू करथि अभियान  मिथिला के अछि मैथिले बिसरल  नहि आन के मिथिला स परहेज  बेटे त्यागथि बूढ माय के  जे रखलनि आँचर तर सहेज | नीलमाधव चौधरी  04 12 16 आजुक दिनचर्या आय लिखूँ त लिखूँ कि मोन अछि उदास भोर स साँझ धरि रह्ल अछि उपास भोरे भोर वो कह्लन्हि मुनियाँ परल अछि बीमार देखेबैय नै डॉक्टर सँ करबैय नै कोनो उपचार मनोहर के सेहो देल्कन्हि स्कूल स निकालि पोथि नहि छैन्हि, जेहो छलन्हि सेहो लेला फारि धिया –पुता के नहि अछि अहांके कोनो परवाह मुदा भरि दिन में पियब दस बेरक चाह अहांक संग मुश्किल अछि आब हमर निर्वाह सम्हारु अप्पन घर द्वार वरु क दियो सुद्दाह कहालियान्हि हूनका जे एतेक जुनि तमसाऊ अहां भगवान पर भरोस क भोजन-भात बनाऊ अहां डॉक्टर साहब के बजौने अबैत छि हम तावत चूल्हा पर एक बेर चाय चढाऊँ अहां कहलन्हि ओ,हमरा संग जुनि करूँ बकवास बुझलहु चलल्हु खेलेयबा लेल ताश बद्द धर्म केने छलहु, जे भेटल अहाक संग हे भगवान उठा लिअ पुरि गेल जिनगि सब आस् हम कहलियन्हि यथार्थ मुदा  बुझलयन्हि ओ व्यंग्य एकरा डेहरी पर ठाडि भ' कर लगली झगड़ा  हाल हमर देखि मित्र सभ मुस्काइत छल किछ्ने बुझाइत छल स्थिति अप्पन कहब ककरा सत्ते हमरा सन् लोकक  ई केहेन मजबूरी छैक एक टा पाय नहि  हजार टा जरूरी छैक. आत्मा क हनन बसात पूर्वा बहय कि पछबा बहय ई रूकि रुकि चलय कि निरंतर चलय घर हमर अहाँ तक पहँचैत कहाँ अछि रोकि लैत अछि बाटे में बड़का बड़का महल जाहि मे इमहर सँ उमहर घुमरैत रहैत अछि कहूँ करब की ल क ई भोर जे रातुक अन्हार सँ अछि बेसि कठोर नहि गाएल जाइत प्राती लागल अछि दाँती बोक बताह बनल बस टूक टूक तकैत छि हँसि लिअय बाऊँ आई देख हमर स्थिति हम अहाँक भविष्य देख कानियो नहि पबैत छि । यो उठि कँ ठाढ होउँ देखियो केहेन इजोत छै आबि रहल अछि केकटा सुरुज चान अकास इ आओत अपने आँगन अपने मिथिला मे देखब लिखत नव इतिहास नव निर्माण क रूप रेखा अछि बनि रहल सबहक मोन मे जे एखन तक बनैत छल बाध बन कोनो कोन में परदेशी क दंश कतेक दिन सहन करत पेट के ज्वाला क शाँति लेल कतेक दिन आत्मा क हनन करत । नीलमाधव चौधरी 28 06 16 की ई आधुनिकता अछि ? पेट के दुख देब देह के सुख देब देह के दुख देब पेट के सुख देब बच्चे मे इ बात ओकरा माय कंठस्थ करा देने रहइ बहुत दिन तक ई बात तर्कसंगत सेहो बुझेलैय मुदा शीघ्रे भ्रम टूटि गेलै किछ दिन स' वो देखि रहल छल जतैक बेसी देह के दुख दैत अछि पेटो ततबहि दुख दैत छैक जे देह के दुःख देतैय ओकरा एतैक पैघ पेट कोना हेतैक ? त' की हम सभ आधुनिक भ' रहल छीं ? की ईएह आधुनिकता अछि ? आर कतैक दूर भ' सकैत अछि बाहर क हवा किछ दूषित होमय किछ लोक अप्प्न स्वार्थ लेल व्यथित होमय मुदा बिन प्रयासे की किछुओ भेटत जे अछि कि सेहो बाँचल रहत ऐना जे खिड़की किबाड बंद केने रहब हवा आ रोशनी पर पैबन्द लगेने रहब कहूँ कतैक दिन हम सब सही सकैत छि आर कतैक दूर तक रही सकैत छि ? इक्कीस फरवरी : मातृभाषा दिवस कोना हेतै एक रंग भोर आ साँझ क किरण निन्न तोडि दुनियाँ लागल जकर प्रतीक्षा मे की होइत छय मातृत्व के सपूत जखन छोडि जाइत छय आन ककरो रक्षा मे अश्रुपूर्ण भ जाइछ लोचन होइछ आहत अंतर्मन मर्म मुदा जागल रहैत छय मौन उम्हरे टांगल रहैत छय कहैत छथि राहुल देव मातृभाषा, भाषा के जीवंतता प्रदान करैत अछि कोनो मातृभाषा के कतेक प्रतिशत लोक बजैत अछि बजबे टा नहि, लिखैत-पढैत अछि आधुनिक कि प्रगति क मातृभाषा में कतेक समावेश अछि भाषा के बचेबा के अछि त एकर ध्यान कर' पडत तीन सौ भाषा लुप्त भ चुकल अछि नौ सौ द्वारि पर जखन डा. रमेश चन्द्र मेहता कहैत छथि दू शब्द इंग्लिश बाजि दीयों इज़्ज़त में इजोरिया आबि जाइत छय मोन पडि जाइत अछि कान दूनू ऐंठ ली जावत ई मानसिकता रहत मातृभाषा के बचनाय कठिन अछि मुदा हम सब विवश छि सामाजिकता पर आर्थिक आघात तेहेन बज्रघात सावित भेल जे भाषा आ संस्कृति हम सब अपने नष्ट-भ्रष्ट क रहल अछि | नीलमाधव चौधरी 21 02 17 ई उपराग के सुनत ? हम सब कतैक अभागल छी ? अन्तिम दर्शन तक नहि क सकलहुँ ओहि दादी के जे नहि जानि कतैक राति बिना नींद बीता देने होयतीह एतबहि लेल कि हमर नींद में बिघ्न नही होमय ई दर्द हमरे नहि आजुक सभ पोता -पोती क दर्द अछि मुदा कैल की जाय दादी रहैत छैथ कोनो कस्बा कोनो गाँव में कोनो अपन - कोनो आनक छांव में पोता-पोती एडीलेड,बिस्बेन,वॉशिंगटन,स्विट्ज़रलैंड बड्ड मुश्किल घुरि आयब अप्पन लैंड कैक टा काज जे छैन्हि बड्ड जरुरी नहि करता त’ जयतैन्हि इ नौकरी केहेन ई मंदा के युग छै से सभ बुझले छन्हि पुनः कहाँ आबि होयतन्हि,सभ सुझले छन्हि बउआ आ बॉबी के पढ़ाई साफ़ भ जयतन्हि शिक्षक के बात कि बिद्यार्थियो बोकियतन्हि एक त' ओनाहिये एतय निम्न बुझल जाइत छथि जे अबैत रहैत छैन्हि सेहो कह' में धकाइत छथि पता नहि कहिया धरि ई धाक छुटतन्हि काश ई कारी चमड़ी हिनको उज्जर होइतन्हि दादी के लेल कोना धिया पुता क जीवन बरबाद करी बीतल काल्हि लेल आब' बला काल्हि कोना खराब करी मुदा एकटा संशय जीव' नहि दैत छन्हि दादी ओहो बनतिह से सोचि डर होइत छन्हि दादी के त सब अपने छलन्हि देश में हम्मर कि होयत नहि जानि एहि विदेश में | उचिते व्यवहार करूँ झडकल मुँह नहि झाँपल नीक आबहूँ ओकरा उघार करूँ एक सँ एक डाक्टर बैद एक सँ एक दवाई चलल अछि बोक बहीर बाजैत ,सुनैत अछि नाँगर लूल्ह आसमान उडैत अछि की नहि आब संभव बस उचित व्यवहार करूँ जँ कतहूँ ग़लत देखैत सुनैत छी आबहूँ ओकर प्रतिकार करूँ बिना आचरण नहि संभव खत्म होयत आतंक , भ्रष्टाचार ई प्रगति -सम्पत्ति , आत्मघाती बिना उचित शिक्षा संस्कार बीतल बात बिसरूँ लाऊँ मोन मेँ नव नवीन विचार जग के समेटियो ने दियो एकरा पूर्ण विस्तार विश्व के विकास के फेर के रोकि सकत छइ ककर मजाल जे फेर कियो टोकि सकत मोन के स्थिर करूँ आत्मा के सत्कार करूँ झडकल मुँह नहि झाँपल नीक आबहूँ ओकरा उघार करूँ नीलमाधव चौधरी 7 12 15 एखन तक त अछि इ दवाई अछि  कि गरल  इ त समय बताएत  मुदा इ निश्चित जे  दिन बीतल नहि लौटि पाएत  एखन तक त छी  लाइन में लागल डर अछि जे  लाईन नहि बिगडि जाय  एखन तक त अछि  भूख प्यास जागल  डर अछि जे  भूख प्यासे नहि मरि जाय  नीलमाधव चौधरी  20 11 16 एतबे अनुसंधान चाही छुबि क देखियो ई पाथर,पाथरे रहत विरह, दुख, चिंता कि सुख शान्ति सेहंता क आखर नहि भ सकत आब नहि कोनो अहिल्या राम अहाँक प्रतीक्षा में आब नहि कोनो सीता क रूचि वनवास कि अग्नि परीक्षा में आब नहि एहि दुनियाँ के उचित-अनुचित क ज्ञान चाही कोनो प्रयत्ने पैसा झहरैय बस एतबे अनुसंधान चाही | नीलमाधव चौधरी 22 11 15 ओकर जीवन राति अन्हार अछि माया क संचार स' सर्वत्र ई प्रचार अछि लोकलाज स' वंचित हमर ई व्यापार अछि लोक जे कहय हमर जीबाक आधार अछि नइ चाहैत करैत छि नित्य पाप अछि जीवन हमर बनल अभिशाप नहि जानि ककर ई पडल श्राप यैह जीवन अछि यैह दुख:संताप ककर दोष? अन्हरिया रातिक एहि शून्य बेला में कहियो जन्म लेने छलाह कारी कृपा निदान कृष्ण पाँछा देखैत छी बस हमर पदचिह्न के स्वर कतैक आगु आबि गेल छी कि लौटब संभव ? आगु अथाह दुर्गम बाट हमारा एकसरे पार कर' पड़त एहि गहीर सागर के | एकटा आमक गाँछ पर नजर जाईत अछि आह केहेन मधुगंध बरसा रहल छल पल-छिन लेल मोन भावविह्वल भ' गेल परन्तु हवा क' तीव्र झोंखा स' खसि पडल बहुत रास आम्र मज्जर आह वएह खसल मज्जर त नही हम सत्ते कते क्रूर अछि प्रकृति ना ना नाहि नाहि ? ककर दोष? ओकर वाल्यपन के की ई हवा क' झोंखा के नही सोचि पबैत छी हम हमर दोष की युगक' प्रवाह के ? कते कम अछि भ्रम मे अछि जिनगी कि जिनगिये भ्रम अछि सब तरि पसरल अछि अनर्थ केर ठहाका क गुंज देख लिअय सबहक आंखि मुदा नम अछि कतेक दिन बीत गेल एक छनक मुस्की लेल हंसी के लेल ठीके ई जिनगी कते कम अछि नीलमाधव चौधरी 30 07 16 कहाँ वो मनुक्ख किछुए दूर तक जेहेन चाहैत अछि तेहन बाट चुनैत अछि मुदा किछुए दूर तक फेर कहाँ बाट कि जिनगी अप्पन रहैत अछि सोन बेचि माटि खयबा लेल होइछ विवश फेर कहाँ वो मनुक्ख कहूँ मनुक्ख रहैत अछि नीलमाधव चौधरी 22 12 16 कहैत त छलइए ई विश्व अप्पन आखिर ई हाल किएक पिछला किछ समय मेँ जहिना घृणित लोक क संख्या बढल अछि तहिना निक लोक धन प्रतिष्ठा क लोभ में खराब बनबा लेल बेचैन भेल छथि ढीठपन तँ देखियोन जे सब के बुझल बात परिणाम कोनो हाले निक नहि सेहो विकास क नाम पर नीक भ जाइत अछि जाती धर्म क बात छोडू सब घर बांटल अछि मन्दिर-मस्जिद त चमकि दमकि रहल गीता-कुरान नाँथल अछि भूकंप त्रासदी स पार पेबाक कोशिश में नेपाल ओह, ताहि पर आब ई बबाल मोन भेल उद्वेलित अछि एहेन ज्ञान , एहेन प्रगति कहूँ कत के रहि गेलहूँ कहैत त छलइए ई विश्व अप्पन घर क त नहि अप्पन रहि सकलहूँ ? नीलमाधव चौधरी 1 10 15 काजर भरल नयन के देखूँ कि देखूँ पूर्णिमाक चन्दा देखब पीठ पाछु कियो करय ने निन्दा कारण ऐखन देशक गड़ा में लागल छैक फाँसी के फन्दा झंडा फहराबैत देश क राजनेता राष्ट्र-गान गबैत भुखल प्यासल जनता बुझैत नही पुरल स्वतंत्रता क सेहंता नेताजी क संग त' देबहे पड़त देश समाजक त' वएह छथि भाग्य नियंता तिरंगा जे प्रतीक् अछि स्वाधीनता के ओकर हरियर आ केसरिया रंग त' ओहिना गाढ़ अछि मुदा उज्जर रंगक आगु जेना कियो ठाड अछि सत्ते गौर करियो वएह भ्रष्टाचार अछि जतैक दबबैत छी ततबे बढल जाइया मौन में उठैत अछि विचार देशक लेल करी किछ काज स्वीकार मुदा धरमक सेवक छी करूँ कोना अत्याचार मुदा आब जंग में आबय पड़त सुतल धरती के जगाब' पड़त दुष्ट दानव के पराजय लेल उठब' पड़त कटार पाबय लेल निज़ अधिकार नीलमाधव चौधरी 09818757445 कारी कारी केश के बीच ई सिन्नुरक लाल रेख बेचैन क देलक मौन के सखी कि कहूँ विधाता क लेख जिनगि क सुंदर सपना रही गेल कल्पैत कल्पना अपने काज में निकालि अपने हम मीन मेख सखी की कहूँ विधाता का लेख 2 चलूँ दीअय एक धक्का आर एहि पार कि ओहि पार चलूँ नाव उतारू धार एहि पार कि ओहि पार तखन ने झुमरि खेलायब ढेका बान्हु फाँड में तखन ने हिम्मत जुटाएब अहा बढ़ूँ त' आगु संगी सभ बहुत भेटत एक पीह्कारी पर पूरा देश जुटत मुँह नही मलिन करूँ पिछला सभ सोचि क' आब ज' कियो बाजत त' खा जेबें नोचि क' मिथिला क' सपूत नइ आब रुकी सकत रणभेरी बाजी गेल आब नही झुकी सकत किएक नहि डर किएक नहि बुझैत छीं मधुश्रावनी , पंचमी किएक नहि बुझैत छीं छोडि किछ लक्ष्मी किएक नहि डर बाढि , भूकंप स किएक नहि डर भय , आतंक स किएक नहि डर आक धतुर स किएक नहि डर देवता पितर स किएक त हमरा फुरसति नहि जिनगी क बबाल स जीविका की चकारी की पारिवारिक जंजाल स किछ एहन सन जिनगि क हिसाब-किताब व्यर्थ के व्यस्त रहू जबरदस्त तनावग्रस्त रहूँ दिन रति एक छीं एक केने मुदा बिन ककरो से नेने नहि कोनो महीना बीतैत अछि छोड़ूँ की सूनब बहुत लोकक जिनगि किछ एहिना बीतैत अछि | नीलमाधव चौधरी 08 08 16 किछ एहिना बीतैत अछि किएक नहि बुझैत छीं मधुश्रावनी , पंचमी किएक नहि बुझैत छीं छोडि किछ लक्ष्मी किएक नहि डर बाढि , भूकंप स किएक नहि डर भय , आतंक स किएक नहि डर आक धतुर स किएक नहि डर देवता पितर स किएक त हमरा फुरसति नहि जिनगी क बबाल स जीविका की चकारी की पारिवारिक जंजाल स किछ एहन सन जिनगि क हिसाब-किताब व्यर्थ के व्यस्त रहू जबरदस्त तनावग्रस्त रहूँ दिन रति एक छीं एक केने मुदा बिन ककरो से नेने नहि कोनो महीना बीतैत अछि छोड़ूँ की सूनब बहुत लोकक जिनगि किछ एहिना बीतैत अछि | नीलमाधव चौधरी 08 08 16 की इच्छा अछि कतय छी उलझल जागल छि कि छी अहाँ सुतल कतय जेबाक अछि कतय जा रहल छि मोन मे की अछि की सुना रहल छि अहाँ दैत छी ज्ञान पोथि के जे पोथि हम फाडि चुकल छी संस्कार के पाठ पढा क' हमरा किए अहाँ मारि रहल छी हम मैथिल आब किछ नहिं बुझब अप्पन मिथिला लेल हम जुझब बड्ड चुप रहलहुँ आब नहिं रहब बड्ड दिन सहलहु आब नहिं सहब गप्प अन्हार में अन्हार क गप्प हमर अन्हार सँ हुनकर अन्हार बेसि घनगर बेसि प्रियगर अन्हार मे होइत अछि नाना तरहक घटनाक्रम अन्हार मे होइत अछि पैघ सँ पैघ पराक्रम एहन उदारता एहन समानता कतहूँ नहि केहनो पुरान गुरू केहनो नव शिष्य सबहक सामने एके रंग क दृश्य सबके एकेटा दुःख कोना एहि अन्हार में मात्र अपने लेल अपने टा लेल ईजोत आनल जाय ईश्वर सँ कि सृष्टि सँ अपन सूरक्षा मात्र अपने टा सूरक्षा माँगल जाय कोनो दधिचि ,कोनो कर्ण कोनो भीष्म क अराधना में लागल अछि विश्व कोनो न कोनो साधना में मुदा आब ओ दधिचि कि दानवीर कर्ण कहाँ मानव धर्म में विश्वास होय आब से वर्ण कहाँ ? नीलमाधव चौधरी 17 07 16 गाम गाम थिक भारत क कोनो गाम हो एक दिन एहिना पहुँचि गेल रही गाजियाबाद क समीप रावण क गाम विशरख आ राजेश पायलट क गाम वेदपुरा कम्पलेन भिजिट छल संग में कम्पनी क इंजिनियर, ड्राइवर, गाडी शर्मा जी जतबे कुशल किसान ततबे कुशल व्यापारी बात फरियने नहि फरियबय क्लेम पचास के पाँचो मुनासिब नहि शर्मा जी के मृदुल स्वभाव , सत्कार स्वागत देखि इ त निश्चित जे शर्माजी क नुकसान नहि होइन मुदा अपन प्रतिष्ठा आ कम्पनी क प्रति निष्ठा सेहो देखनाय जरूरी छल अंतत: सब बात ठीके रहल मुदा जे मूलता: आकर्षित कयलक ओ छल ग्रामीण समाज एखनो ग्रामीण समाज में पर्दा अछि प्रेम अछि अक्षर बोध भने नही होय मुदा बचल संस्कार अछि ज बिगडल अछि किछुओ त ओ सरकारी संस्था कि सरकार अछि चारि पाँच घंटा क बीच जाहि तरहक परिवेश देखलहूँ गाम घर सँ हजारो मील दूर मिथिले सन कोनो देश देखलहूँ किछ बात जरुर अजगुत जे इंजिनियर सिन्हा जी के पसिन्न ने कुमार वार छथि एतइन राति मे निन्न ने मौगी सब मुँह तँ झपने छल मुदा छाती उघार छलैक व्यवहार में शालीनता बोली लटठमार छलैक बहुत किछ अन्तर होइतहुँ मिथिले के कोनो गाम सन लाल काकी क अँगना फढुँआ काका क मचान सन कएक बेर कदीमा साबुत कि कदीमा क फूल तरूआ लेल ल गेल छि याद आबैत छल स्कूल ई त छल उजडल प्रदेशक उजडल कोनो गाम अपन मिथिला त स्वर्ग अछि ओहिना ने कहाइत अछि ई मिथिला धाम तखन बात पहिलुका आब कहूँ कोना रहत गाम की शहर अपने नहि पेट रहैत अछि पेट क सँग कएक टा जुडल घेँट रहैत अछि नीलमाधव चौधरी | 21 08 16 गिलेबा लेपैत छी आई जँ मिथिला मैथिली क ई हाल अछि कमोबेसि हमरे अहाँक कमाल अछि भौतिक सुखक लेल छी भेल व्यग्र आन्तरिक आनंद के कहाँ कनेको खयाल अछि जखन समय छल भूर मुनबाके तखन त दुनियाँ क उदार बनि बैसिलहू आब खाली कोठी में गिलेबा लेपैत छी मुट्ठियो भरि अन्न नहि समय विकराल अछि अप्पन आन क बात की लोक दुनियाँ समाज की धिया पुता क भविष्य क चिन्ता तँ सबके माय बाप मुदा बनल सवाल अछि काज सब स्वीकार्य अछि कहूँ कोना पेट मानत मोन में जे उठल अछि बिर्रो कहूँ एकर के लेत जमानत बच्चा आ बुढक की जुआनी बेहाल अछि आई जँ मिथिला मैथिली क ई हाल अछि कमोबेसि हमरे अहाँक कमाल अछि नीलमाधव चौधरी 22 11 15 घनघोर अन्हरिया जे बीति रहल ताहि पर तँ कोने गरे नहि दिन बीतल के कोना बजा लैत छी सजल अछि महल रंग विरंगक प्रकाश सँ चन्द्रमा अचंभित छैथ मनुक्खक प्रयास सँ आँखि क पर्दा नहि किए हटा लैत छी राति घनघोर अन्हरिया लोक सजा लैत अछि सुख दुख बिसरि दीवाली क मजा लैत अछि दूर कत अहाँ अपना क बझा लैत छी हेत त वएह जे एखन तक भेलै सुरुज डुबल राति भेल सुरुज उगलै भोर भेलै राति दिन में एना किए मिला दैत छी । नीलमाधव चौधरी 06 11 16 ज भेलहूँ पथभ्रष्ट सब तरि बात अधिकार के कर्तव्य नष्ट निर्मूल न्याय क आस त सब करैत अछि कानून बनल अछि शूल सत्य न्याय के बाट पर चलब कखनहूँ कहाँ रहल आसान ज भेलहूँ पथभ्रष्ट त फेर समाजक कत' कल्याण सब धर्म केर मूल मे एक मात्र परोपकार एक दोसर सँ जुडल रही होइत रहय सपना साकार मुदा एहि वैचारिक अकाल अनाहार में धिया पुता क पढाई कि नून रोटी क जोगार में लोक-वेद , गाम घर दुनियाँ समाज बिसरल छी उचित अनुचित क विचार त्यागि धर्म क मार्ग स उतरल छी ऐहेन में जिनगी क मर्म कोना बाँचल रहत बिना सत्यं न्याय के धर्म कोना बाँचल रहत नीलमाधव चौधरी 22 12 15 जनतंत्र ? पौध स' गाछ भेल गाछ स जारनि झरकल पजरल आब धुधुँआ रहल अछि | जरूरत बढैत गेल | अहाँ लिखैत रहलहुँ पाथर पर फुल उगेबाक किस्सा हम गहुँम क पटौनी हेतु पानि लेल लडैत रहलहू खेत-खरिहान त सिमटैत गेल आ अन्नक जरूरत बढैत गेल | थाह जिनगि क टूटल डंटीक कप में राखल दू घोंट चाह नहि जानि कखन स' सरा रहल चल जेना हमर जिनगि एक घोंट चाह जिनगि क थाह जीवन-धारा नही छल प्रेमबाट  चलबाक पूर्ण ज्ञान हृदय सम्पूर्णताक बोध अबोधता द्यौतक बनल छल , अपूर्व अनुपम मुखडा सँ कोकिल स्वर सुनि हृदय डुबि गेल छल . सौन्दर्यक प्रेम पचीसी मे नव आकुलता क संग विकसित भेल छल प्रेम परिचय जिनगि जीबाक निश्चय साँझ खन तुलसी चौडा लग दीप जडाय गवैत छली ओ गीत स्वर सँ अमृत झहरि रहल छल. उदास मोन डुबि गेल हुनकर स्वर सजावट मे मोनक भाव विह्वल छल प्रेमक नवश्रृगांर करबा लेल जीवन वाटिका मे बहार अनबा लेल . थाकल प्यासल उपेक्षित मोन के जीबाक पवित्र साधन भेटलै मादकताक संग सलजताक  समावेश छल जिनगि क लेल तँ ई सबसँ पैघ आवेश छल नि:शब्द , नि:स्वर , निश्छल भॅ स्वीकार कयलहुँ एहि तरहे ई दरिया पार.कयलहुँ जीवन - सार पहिले डेग पर भ्रमर गुंजन यौवन क अंतिम छोर तक खुशी स' भरल जीवन छौडैत यौवन क संग मधुप करैथ दूर विचरण इएह जीवन गाथा इएह जीवन दर्शन ओ सोच' लागल सम्पूर्ण जीवन क सार की यौवन जकर बीत गेल ओकरा लेल संसार की कोन बिधिये यौवन कतैक दिन संग देत संग ज छोड़बे करत तखन एकर सिंगार की ? प्रकृति के नियम एतेक क्रूर किएक छैक साँझ स भोर एतेक दूर किएक छैक एहि संसार स' भेटत किछ नहि तखन एतेक मोह किएक क्षणिक सुखक लेल लोक एतेक व्यथित किएक छैक संसार के रचनिहार कि एहि बात स' अनभिज्ञ छथि नहि कथमपि नहि ईएह त' जीवन क सार थिक जतहि प्रगति रुकि जाय ओतहि जीवन क संहार थिक नीलमाधव चौधरी जुनि करूँ खट-पट मोन भरियाइत अछि जतैक सोचैत छी मोन ओतबे बोआईत अछि कलम रुकि जाइत अछि कविताक लीक टूटि जाइत अछि मोन में उठल भावना क लहर - गति रूकि जाइत अछि जुनि करूँ खट-पट मोन भरियाइत अछि कतैक जतन स' लिखल दू पांति आय दूनू पांति वियोगक दू पोथी बुझाइत अछि अहांक श्रिंगार में छलहु कखन लीन हम ओहि समय के ताक में राति बीति जाइत अछि जुनि करूँ खट-पट मोन भरियाइत अछि आपसक झंझट छल अपनहि सम्हारि लैतहु कोना मोन मानलक सभ छोडि चल जाइत छी छनहि में तोडि मान -मर्यादा क सभ धनुष विवेक छोडि बिना पुंछ पशु बनि जाइत छी हमर अश्रु-पूर्ण आंखि बाट तकिते रहि जाइत अछि जुनि करूँ खट-पट मोन भरियाइत अछि देखू ई जीवन छै सूख दुःख केर संगम सूख क अनुभूति बिना दुःख के नहि होइत अछि एना जे मानव दुःख स' पडाइत घूरत जिनगि क बृह्त ज्ञान ओकरा कहाँ होइत अछि भीजेबै तखन ना सूखत , सूखल त टटाइत अछि जुनि करूँ खट-पट मोन भरियाइत अछि टघार चिनवार सँ टघरल पिठार क टघार जखन खूनक धार बुझाए लागय पडोसी क आत्मघाती व्यवहार स साकार जखन अप्पन हार बुझाय लागय बाज़ार सँ कीनल उधार क हथियार जखन अप्प्न कपार बुझाए लागय बुझि लीअय धर्म विलुप्त भ रहल अछि बिना धर्म बगदादी कि ओसामा त संभव मुदा असंभव अछि विवेकानंद कि टैगोर भेटब | नीलमाधव चौधरी | 21 09 16 टूटि चुकल छी हम सब टूटि नहि रहल छी टूटि चुकल छी वैह टा करैत छी जे सरकार चाहैत अछि गाम घर दुनिया समाज प्रेम-घृणा, लोक-लाज लोक वेद टोल परिवार रीति रिवाज पर्व तिहार सब छूटि चुकल अछि सत्ता वर्ग बुझैत अछि हम सब किछ एहेन बन्हन में बन्हि जाइत छीं जे तोडि नहि सकइत छी मोह-माया हित-अहित लोक-परलोक वाय-पित्त छोडि नही सकैत छीं एहेन ई शासन सत्ता क गुप्त षड़यंत्र कि हम सब आलासी , स्वार्थी नपुंसक भेल जां रहल छीं कतहुँ कोनो प्रतिरोध के आवज नहि ज अइछो त समवेत नहि हजारों ,लाखो , करोडो क भीड़ में सब एसकर आ एसकर त वृहस्पतियो झूठ | नीलमाधव चौधरी 09 08 16 तिकड़म आ परक्रम हमर अधिकार कि हमर अधिकार पर त पहिने स कब्ज़ा कएने छि अहाँ हम सहैत छि जीवैत छि बनल अहाँ क शिकार अपन शोणित के बनौने अहाँ क आहार नित्य बढैत अछि अहाँ क अत्याचार बिना कोनो विरोध प्रतिकार करैत छि स्वीकार जेठ क दुपहरिया हो वा माघ क भोररिया हो बितैत अछि कठिन श्रम क संग जीवन स्वीकारैत छि क्रूर स क्रूर संताप बिना केने देह क कोनो परवाह दिन रति साँझ भोर खटैत छि खटैत रहल छि आ अहाँ वातानुकूलित बंद कोठरी में करैत छि हमर मजुरी क हिसाब खुशी स पिबैत शराब विलायति धुन पर अलापैत गान बिना रखने सभ्य्ता संस्कृति केर मान जेना जेना बढईत अछि हमर सहनशीलता दुना क वेग स बढईत अछि अहाँक लुटबाक क्षमता हमरे रुधिर के कमाई स करैत छि हमारे संग व्यापार दस टाँका दैत छि लैत छि हज़ार मुदा हम बुझियो क करेत अयलहु स्वीकार अहाँक छल प्रपंच स भड़ल व्यवहार जखन कि हमरो अछि ज्ञात अहाँक गुप्त बात कोना बनलहु अहां फेखना स फेखु बाबु किएक अहाँक बेटी करेत छथि फर्स्ट पहिरने बिना ब्लाउज के स्कर्ट अहाँ करेत छि ओबामा , जिनपिंग क बात भाषण में करेत छि मार्क्स लेनिन के मात करेत छि मजूर कृषक नेता संग गठबंधन जे न ही बुझैत अछि अहाँक तिकड़म़ आ जखन वो फंसि जाइए अहांक तिकड़म़बाजी ओकरे हथियार स करेत छि ओकर संहार वाह वाह कही उठय जग अपने धन्य छी सरकार बाढ़ भूकंप अकाल स पीड़ित हम जखन करैत छी क्रंदन अहाँ करैत छी विमान सर्वेक्षण आकाश स खसबैत छी रोटी क टुकड़ा तहियो लेल एतय होइत अछि झगड़ा आहि रौ बाप भेटल कहाँ हमरा भेटल कहाँ हमरा एतय त सभ किछ में मुहजोड़गरक जीत जकड़े कैंचा छै तकरे जीत छैक \ तीक्ष्ण क्रान्ति सँ बुझैत छी भाय  अहाँ जीब चाहैत छी  सुख शाँति सँ  होइत अछि डर  हल्ला गूल्ला तीक्ष्ण क्रान्ति सँ  मुदा ई बुझि लीअय  आब नहि  ई शाँति बरकरार रहत  पैघ भ गेल खाइधि  बिना भरने  नहि काज चलत  जाति रहल दूइये टा धनिक की गरीब  बडका क पैघ कपार  छोटका क छोट नसीब  आब नहि फर्क  कौआ आ कोईली मेँ  दूनूँ क मोन मे बस  धन केर चाह अछि  प्रकृति क देल  रंग रूप भाग्य प्रवृति  आब कहाँ मिसियो भरि  तकर परवाह अछि  कर्म जे करतय  वएह आगु बढतय  मंत्र क छद्म बोल पर  आब नहि थाप चलतय  मंत्र पर अछि विश्वास त  बिल में अपने हाथ दीअय  साँप के खीचू बिल स  पूर्ण यश माथ लीअय | नीलमाधव चौधरी  20 10 16 दीप चाहे कतहूँ जरय | जिनगी ककरा कहैछ जिनगी क माने की लोक उजडल सभ ठाम के हमहि अहाँ नहि उजडल छी मुदा फर्क अछि जेना हम सब बसल रही की तहिना आनो आन बसल छल ? परिवर्तन जीवन क मूल अछि सामर्थ्यवान के लेल समय सदैव अनुकूल अछि मुदा ई सामर्थ्य ककरो संग कतेक दिन बालपन,जुआनी आ वृद्धावस्था जहिना सत्य तहिना ध्रुवसत्य जे अन्तिम साँस तक अप्प्न भाषा , अप्पन माँटि पानि अप्प्न लोक-वेद अपने अछि हाँ एतबा जरूर जे विकास क भीषण छद्म मानवता के झँपने अछि होईक सम्मिलित प्रयास जे मिथिला मैथिली बाँचल रहय ईजोत सब तरि हेबाक चाही दीप चाहे कतहूँ जरय | नीलमाधव चौधरी 11 10 15 दीप से अन्हार दीप से दीप नेसल जा सकैत अछि दीप से अन्हार मिटाओल जा सकैत अछि दीप स इजोत आनल जां सकैत अछि मुदा ई अन्हार स दीप जडेबाक कोशिश ई अन्हार स अन्हार भगेबाक कोशिश एहि धुआँ में तँ दीवाली क इजोतो बेकार दीया तँ नेसलहूँ आँखि खुलबा लय कहाँ तैयार | मोन मे जोशे नहि सजल अछि घर संसार जेब मे खिद्दी नहि विदा भेलहूँ हाट बाजार बिना युद्धे सीमा पर नित्य शहीद होइत जवान हवा में प्रदूषण मुश्किल अछि बचनाय प्राण | नीलमाधव चौधरी 06 11 16 दोसर गाल बढ़ायब दुःख नहि होइत अछि जखन कोनो आई ए एस कि आई पी एस कोनो बेईमान भ्रष्ट देशद्रोही नेता-मंत्री स थापर खाइत अछि दुःख नहि होइत अछि जखन कोनो कर्नल लेफ्टिनेंट कोनो जवान के हिस्सा खा पचा लैत अछि दुःख नहि होइत अछि जखन कोनो देशद्रोही नेता, कैबिनट मंत्री राष्ट्रपिता गांधी के गरीयबैत अछि कारण हम सब गांधी के मोन नहि राख चाहैत छी । गाँधी जी क मृत्यु आजाद भारतक पहिल हिन्सा छल तँ शास्त्री जी क मृत्यु पहिल षडयंत्र इन्दिरा तक अबैत अबैत तँ गाँधी जी बस वोट की नोट लेल कहां हुनक मार्ग पर चलबाक भेल प्रयास गाँधी के चश्मा कियो ल सकैत अछि गाँधी के चरखा कियो ल सकैत अछि मुदा गाँधी के गाल पायब आसान नहि एक गाल पर लागल चोट छन में बिसरि दोसर गाल बढ़ायब आसान नहि। नीलमाधव चौधरी 16 01 17 नमन करू संसकृति संस्कार के आजुक नेना , नेनपन बिसरल माय बाप सँ रहत छिटकल छिटकल वजन बराबर बस्ता ऊघय मध्य रात्रि तक तैयो नहि ना ऊँघय डर' मेम के करेज में पसरल नहि रहय जागल नहि रहय सूतल बंद करू एहि शिक्षा व्यापार के नमन करू संसकृति संस्कार के | नीलमाधव चौधरी 16 8 15 नव एहिना पनपत अछि तँ सब अंग सूरक्षित एना किएक अपंग भेल छि भरलहूँ त कतेक रंग जिनगि में एना किएक बेरंग भेल छि की हित की बेजाय कहाँ किछ स्पष्ट तकैत रहलहूँ मृग मरिचिका भगैत रहलहूँ सरपट आब देश दुनियाँ क हाल देखि एना किएक दंग भेल छि । नव एहिना पनपत पुरान के झर पडतय झहरि के जेहेन बीया खसत तेहने ने पौध बनतय अपने रोपल गाछ अछि तखन एहि छाँह स एना किएक तंग भेल छी नीलमाधव चौधरी 30 07 16 नव परिभाषा गढि सकय लिखल त जाइत अछि मुदा एहेन कहां जे लोक के पढ़ब सिखैबतैय जे पढ़ल छै ताहि पर दृढ निश्चय रहब सिखैबतैय सब के लेल सब एना किए कुक्कुर बानर अपने बेगरते अछि भेल विश्व आन्हर सामने की परोक्ष लोकक सम्मान कहाँ जे भंगठि गेल तकर कतहूँ निदान कहाँ लिखल गेल लोक लेल कि अपना लेल नहि हमर प्रश्न मुदा ई लेखनी नहि रोकि सकल समाज क पतन निश्चिते जे लोक नहि किछओ पढ़ि सकल निज स्वार्थ क परिधि स बाहर नहि निकलि सकल चलू होय प्रयास जे बेसि स बेसि लोक पढि सकय जिनगी क सुंदर सन नव परिभाषा गढि सकय । नीलमाधव चौधरी 30 07 16 नहि अप्पन नहीं आन करूँ ।. एखन तक त  बात, मात्र  जोड़' के कएल गेल  तखन तँ ई हाल  घरो में विलायल छी * आ तोडब  त तोडब की  लोक अपने  टूटल अछि  बिजोह केर बाट में  नहि कतहु ब्राह्मण  भूखल अछि  उनटे निमंत्रण भेल  पराभव छय  छूट्टी क बात माने  नौकरी ताकव छय  अंस भरि ओहि  योगदान के सम्मान करूँ  माँ मैथिली बसैथ हृदय मे नहि अप्पन नहीं आन करूँ ।. (*दरभंगो, सहरसा में लोक मैथिली नहीं बजैत अछि) नीलमाधव चौधरी 10 01 16 नहि पछाडि सकलहूँ निन्न भूख के खूब बुझैत छी किएक नित दिन बढैत जाइत अछि चपलता , किएक नहि पुर्ण भेल हमर सेहन्ता कहाँ कहियो खुलि क जिनगी क भार सम्हारि सकलहूँ निन्ने मे सब स्वप्न जरि क खाक भेल , खूजल आँखियो कहाँ कनियो निहारि सकलहूँ । जिनगी क असंख्य रूप लोको रंग विरंग के कोनो रंग में नहि मुदा अपना के निखारि सकलहूँ जे भेटल से रूचल नहि जे रूचल से पचल नहि अपने निन्न भूख के नहि पछाडि सकलहूँ नीलमाधव चौधरी 14 10 15 नहि रहल  हँसबा, कनबाक समय कहिया खुलि क हँसल रही  नहि याद अछि  खूब जोर दैत छी दिमाग पर  कहाँ याद अबैत अछि  कोनो खुशी क बात  भेले नहि हो, से त नहि सवा करोड़ लोक क देश  तीन सौ पैसठ दिन में  तीन सौ से बेसि पावनि-तिहार समाज परिवार सेहो कम झमटगर नहि  राष्ट्रीय कि सामाजिक कि व्यवसायिक कतेक तरह क मनमोहक कार्यक्रम  कतेक ब्याह दान, जन्मदिन क सुअवसर  कहाँ खुलि क हँसि पयलहूँ  मोन में ई विचार चलिते छल कि  तखने मोन में नव प्रश्न उठल  खुलि क कानल कहिया रही  कएक टा एहेन घटना भेल जे  हृदय के अत्यधिक चोट देलक  जुआन, बच्चा, हित-परिचित क मृत्यु  देखबा, भोगवा लेल विवश भेलहूँ रोज़ सीमा मर जवान त  खेत देख किसान  शहीद होइत देखि सुनि  मोन आक्रोशित भेल  दूं चारि बूँद नोरो टपकल  खुलि क कानि कहाँ सकलहूँ  बुझाइए आब नहि रहल  हँसबा, कनबाक समय  आब नहि रहाल कोनो बातक हर्ष-विषाद, चिंता कि विस्मय  नीलमाधव चौधरी  11 11 16 (written 06 11 post 11 11 ) नहि रहल  हँसबा, कनबाक समय कहिया खुलि क हँसल रही  नहि याद अछि  खूब जोर दैत छी दिमाग पर  कहाँ याद अबैत अछि  कोनो खुशी क बात  भेले नहि हो, से त नहि सवा करोड़ लोक क देश  तीन सौ पैसठ दिन में  तीन सौ से बेसि पावनि-तिहार समाज परिवार सेहो कम झमटगर नहि  राष्ट्रीय कि सामाजिक कि व्यवसायिक कतेक तरह क मनमोहक कार्यक्रम  कतेक ब्याह दान, जन्मदिन क सुअवसर  कहाँ खुलि क हँसि पयलहूँ  मोन में ई विचार चलिते छल कि  तखने मोन में नव प्रश्न उठल  खुलि क कानल कहिया रही  कएक टा एहेन घटना भेल जे  हृदय के अत्यधिक चोट देलक  जुआन, बच्चा, हित-परिचित क मृत्यु  देखबा, भोगवा लेल विवश भेलहूँ रोज़ सीमा मर जवान त  खेत देख किसान  शहीद होइत देखि सुनि  मोन आक्रोशित भेल  दूं चारि बूँद नोरो टपकल  खुलि क कानि कहाँ सकलहूँ  बुझाइए आब नहि रहल  हँसबा, कनबाक समय  आब नहि रहाल कोनो बातक हर्ष-विषाद, चिंता कि विस्मय  नीलमाधव चौधरी  11 11 16 (written 06 11 post 11 11 ) निन्न में बड़बड़ाइत हम सब टूटि नहि रहल छी टूटि चुकल छी वैह टा करैत छी जे सरकार चाहैत अछि गाम घर दुनिया समाज प्रेम-घृणा, लोक-लाज लोक वेद टोल परिवार रीति रिवाज पर्व तिहार सब छूटि चुकल अछि सत्ता वर्ग बुझैत अछि हम सब किछ एहेन बन्हन में बन्हि जाइत छीं जे तोडि नहि सकइत छी मोह-माया हित-अहित लोक-परलोक वाय-पित्त छोडि नही सकैत छीं एहेन ई शासन सत्ता क गुप्त षड़यंत्र कि हम सब आलासी , स्वार्थी नपुंसक भेल जां रहल छीं कतहुँ कोनो प्रतिरोध के आवज नहि ज अइछो त समवेत नहि हजारों ,लाखो , करोडो क भीड़ में सब एसकर आ एसकर त वृहस्पतियो झूठ | नीलमाधव चौधरी 09 08 16 पसरल बादल देहक दर्द,मोन नही बुझल रहल मोह में डुबल सदिखन व्याकुल सदिखन उलझल आर कहाँ किछ सुझल अपने करेज के भुजि-भुजि खाय की सीझल की पाकल नोर नयन के घोरि घोरि पीबी रहल आत्मा प्यासल एसगर सुतल रही पलंग पर देखलहु सब किछ भीजल दूर छिटकि गेल चान गगन स’ सब तरि पसरल बादल नीलमाधव चौधरी पाथर पर बसंत आयल बसंत मुदा भेल कहाँ कष्ट केर अंत छिरिआयल डेग डेग पर ओहिना अछि बाधा अनन्त कोनो बात क असर नहि एहनो कतहूँ भेलइय पाथर पर कहूँ बसंत कतहूँ एलइय ज्ञान-बोध कुंठित ताक़ि रहल छी मेवा सब तरि तकैत छी माँ के अछि बिसरि गेल सेवा एहि हाल मे ककरो संपूर्ण सुख भेटलइय पाथर पर कहूँ बसंत कतहूँ एलइय फूल बनबाक कहाँ सेहन्ता बचल अछि गाछ काटि प्रगतिक सडक बनय सभक इच्छा बनल अछि कल्पना क सागर में नव नव कमल खिलइय पाथर पर कहूँ बसंत कतहूँ एलइय अछि उपजल मधुबन बस काँट कूस भारी काल कोठरी मे बंद गरीबक सोहारी कहां ओकर चूल्हि सं एखन धधरा उठलइय पाथर पर कहूँ कतहूँ बसंत एलइय चाही बसंत तँ भाय गाछ फूल बन पडत बिसरि कुरहरि टेंगारी मज्जर सँ देह भर' पडत फूल क जिनगि में कहूँ कतहूँ' काल्हि भेलइय पाथर पर कहूँ कतहूँ बसंत एलइय नीलमाधव चौधरी 03 02 17 पैघ पैघ लक्ष्य जे कष्ट छल अछि  से त रहिये गेल  झूट्ठे फुसलेबा  कोशिश करैत अछि  कखनहूँ एमहर  त कखनहूँ ओमहर  टहलेने अछि  अनेरे अजमेबा क  कोशिश करैत अछि  जंग लागल छय सत्ता  जर्जर छय भेल तन्त्र  चाही पारदर्शिता  डेगे डेग भरल षड्यंत्र  सब चोर संसद में मुलुर-मुलुर तकैत अछि  शाह क शाह जोडी कि  कियो आने फसैत अछि  पैघ लक्ष्य छय  कने कष्ट बरदाश्त करूँ  ऊँच-नीच छोडूँ एकता क बात करूँ  मामला गंभीर छय  नित्य बुझेबा के  कोशिश करैत अछि  नीलमाधव चौधरी  06 12 16 प्रयोजन समुद्र क लहर के की प्रयोजन  किएक बुझत  कि, की स्थिर  कूल में अछि ? अंत (मृत्यु) त यथावत  ओहिना के ओहिना रहत परिवर्तन त' जिनगीक  मूल में अछि ? प्रेमक आतुर मोन वीणाक झंकार सा झँकृत हमर जीवन अहाँक यौवन में डूबल रहय सदिखन क्रीडा कौतुक स भड़ल रहय उपवन अछि प्रयास तइयों नहि बह्कय हमर मोन आसक्त भेल अहिंक रूप पर हमर चंचल यौवन जीवन सागर में बरसा गेल प्रेम क सावन प्रिय पात्र महि छवि हमर ह्रदय अहांक किंचन हम मदहोश मधुप छी अहां गंधयुक्त कंचन मन मदिरा लय आनय मधुगंध मधु बयार अहां बसंत क सार नही बुझल बुझलहु बस संसार हम अबोध नही बुझल प्रेम बानल व्यपार नहि अछि अंत प्रेम के की अई पार की ओय पार.. नीलमधव चौधरी बजट के भ्यु की ई सावन के घटा ई मन भावन छँटा बिहुँसि बिहुसि डारि पात गाछ के डोला रहल गाछक व्याकुल मोन मुसलाधार बरसात देख् जडि के आजमाँ रहल डांर भरि डुबल गाछ ! फल फूल स भरल गाछ | कहिया कत स लाल किला ओहिना ठाड अछि देखलक कतैको प्रधान मंत्री कतैको प्रधान मंत्री क अनेकानेक बेर बदलल रूप परिस्थितिजनक रूप कहियो कोनो राज्य मुख्य मुद्दा त कहियो कोनो , कहियो साउथ क चर्चा त कहियो सिर्फ़ नोर्थ ईस्ट कहियो शिक्षा कहियो व्यापार कहियो कलाधन कहियो भ्रष्टाचार बात त कहलौ बड्ड निक छोट मोट नौकरी क लेल इन्टरव्यू की ? जखन परीक्षा इंटरव्यू लेबहे पडत तखन शिक्षा के बजट के भ्यु की ? शिक्षा आ स्वास्थ्य ई दुनू सेवा सिर्फ़ सरकारी हो नहि कोनो जाती धर्म क भेद नहि गरीबी अमीरी क फर्क नहि कोर्से में कतहूँ कोनो विविधता शिक्षा व्यापार नहि नहि शिक्षक व्यापारी हो नहि डाक्टर साक्षात यमराज नहि रोग कोनो महामारी हो शिक्षा क अर्थ पाय कमाबय नै बनब संसकारी हो मोदी जी एहि शापित शहरी जीवन में चमक दमक माँल मेट्रो क कृत्रिम तिलस्म में ओझरा गेल अछि मनूक्ख ताहि पर ई एहन झमठ्गर बरसात राजीव गांधी क करेंगे , करेंगे एखन तक रेंगते अछि ई आस्वासन क हरियरी त ठीक मुदा एतेक नहि जे गलि जाय उत्कंठा उत्सव क बीच देखब कर्तव्य मर्यादा नही बिसरि जाय | नीलमाधव चौधरी 16 8 15 बीच मुहान छोडि क आँखि लगले छल ओ कहलनि भोर भ गेल नाम सुनतहि भोर क मोन घोर भ गेल एना किएक जे रातिए राति नीक लगैत अछि बीच मुहान छोडि क कोन कात ठीक लगैत अछि सब तरि पसरि रहल अछि आगि आ मोम भेल जा रहल छी आकांक्षा क बजार गरम जेब नरम रूकब कि झूकब कहाँ ककरो मंजूर पाछू लागल आगि अछि बस उडल जा रहल छी | नीलमाधव चौधरी 9 4 16 बेतुकक सवाल थमकि जाइत छी देख क अपने अपन हाल कहूँ कोना धिया पुता स करी बेतुकक सवाल नहि किताब नहि ट्यूशन नहि आधुनिकता क फैशन स्कूल दूर जाएब समस्या विकट मुदा आनैत अछि शत प्रतिशत रिजल्ट कोना क कहियो बाऊ गे , नहि तोरा पढेबाक इच्छा नहि जानि भगवती किएक लैत छैथ बेर बेर परीक्षा कोशिश कम नहि जे हमहूँ पोजिटिव होय , बनल रहय धिया पूता क अबोधता बुद्धि ज्ञान निक होय मुदा छनहि चिक्कन चेहरा विकृत भ जाइत अछि नहि कोनों स्पष्ट , प्रत्यक्ष कारण बुझाइत अछि | नीलमाधव चौधरी 20 12 15 भरोस पर जीब लीअय स्वाद जिनगी के देखूँ आब बदलि गेल अछि माउँस छोडि दियों आर सोनित पीब लीअय महीना दू महीना मेँ एक दिन बनत रोटी भात बाँकी दिन गोली क भरोस पर जीब लीअय जँ चाही माँल मैट्रो पिज्जा बर्गर क जिनगी तँ बेसि नहि एतबा करूँ मोन के मारि लीअय मूँह के सीब लीअय । नीलमाधव चौधरी 24 8 15 1 जनतंत्र ? पौध स' गाछ भेल गाछ स जारनि झरकल पजरल आब धुधुँआ रहल अछि | 2 थाह जिनगि क टूटल डंटीक कप में राखल दू घोंट चाह नहि जानि कखन स' सरा रहल चल जेना हमर जिनगि एक घोंट चाह जिनगि क थाह 3 जरूरत बढैत गेल | अहाँ लिखैत रहलहुँ पाथर पर फुल उगेबाक किस्सा हम गहुँम क पटौनी हेतु पानि लेल लडैत रहलहू खेत-खरिहान त सिमटैत गेल आ अन्नक जरूरत बढैत गेल | 4. मँझधार थिक सुख दुख तँ जिनगी क श्रिँगार थिक जिनगी जँ किछ त' मँझधार थिक किएक हम बैसि जाय किछ बेसि बुझिक जिनगी बुझबाक नहि अनबुझ रफ्तार थिक कतेक कोस कतेक मील तकर ककरा कोन ठेकान की भेटल की छुटल कतैक राखब एकर ध्यान चानीक थाडी में परसल महुअक खीर जँ त' जेठक रौद में जडैत खेत पथार थिक 5. छाँह जकाँ अन्हार घर मेँ छाँह जकाँ हेरा गेल छी अपने घर मे हम अपने बिला गेल छी गाँव टोल पोखरि नही जानि कहिया छुटल नींद में एखनो बडबडा गेल छीं 6. भ्रष्टाचार तिरंगा जे प्रतीक् स्वाधीनता के ओकर हरियर आ केसरिया रंग त' ओहिना गाढ़ अछि मुदा उज्जर रंगक आगु जेना कियो ठाढ़ अछि कनि गौर करियो वएह भ्रष्टाचार अछि 7. हम त' ठीक छी : सत्ते ?

हम सब एतेक कोना बदलि सकैत छी  जेना बदलि गेल छी कोनो आकर्षण नहि कोनो प्रतिरोध नहि जे जेहेन करता  से तेहेन भोगता बडड संतुष्ट,बडड सहज बाप- भाय मिल क'  बहिन- बेटी संग  नौ वर्ष तक  अस्सी साल क संत  सोलह साल क' कन्या मुदा हमर खून  नहि खौलैत अछि अपना पर नजर दौडबैत छी  पहिने स' बेसि  सशक्त भ' गेल छी  बेसि बुद्धिमान (समय आ अनुभव के देखेत, ओना त) आ बेसि गुदकर मुदा पहिने स' बेसि  असंतुष्ट  असुरक्षित  अपमानित  नहि फरछाईत अछि  प्रगति क पथ पर छी  कि अवनति क पथ पर ? 8. मुँह भरे खसब कहाँ एतेक मुश्किल छै सीधा चलब किएक होएय ड'र जे मुँह भरे खसब करूँ अपना पर विश्वास ई चीज बड्ड खास खखार बुझि खून के एना जे फेँकब खखरी के चाउर बुझि ऐना जे समेटब बेटा के आस मेँ बेटी क हत्या केहन भविष्य होयत की आशा करब पढेबैन्हि जे पाठ बौआ वएह पढताह देखेबन्हि जे बाट बौआ ओहि पर चलता जतबे जरूरी स्कूलक पोथि सम्हारब ततबे आवश्यक घर आँगन बहारब निज़ भाषा संस्कृति के ज' नहि राखब ज्ञान पायब कतहू कोना सम्मान 9. जीवन - सार पहिले डेग पर भ्रमर गुंजन यौवन क अंतिम छोर तक खुशी स' भरल जीवन छौडैत यौवन क संग मधुप करैथ दूर विचरण इएह जीवन गाथा इएह जीवन दर्शन ओ सोच' लागल सम्पूर्ण जीवन क सार की यौवन जकर बीत गेल ओकरा लेल संसार की कोन बिधिये यौवन कतैक दिन संग देत संग ज छोड़बे करत तखन एकर सिंगार की ? प्रकृति के नियम एतेक क्रूर किएक छैक साँझ स भोर एतेक दूर किएक छैक एहि संसार स' भेटत किछ नहि तखन एतेक मोह किएक क्षणिक सुखक लेल लोक एतेक व्यथित किएक छैक संसार के रचनिहार कि एहि बात स' अनभिज्ञ छथि नहि कथमपि नहि ईएह त' जीवन क सार थिक जतहि प्रगति रुकि जाय ओतहि जीवन क संहार थिक 10. मोन क तृष्णा लगातार चारि दिन स' बरसैत पानि अकच्छ भ गेल अछि मोन ओना बारिस क मनभावन द़ृश्य बड्ड नीक लगइत छैक मुदा कखन जखन पेटक भूख स मोन व्यथित नहि हो जखन कोनो घाव स देह पीड़ित नहि हो जखन नव तरुणी संग यौवन उमडल हो मोन में उल्लास , जेब भडल हो मुदा एखन अहि अकालबेला में जतय नून रोटी जुटेबाक समस्या में प्रतिभा क एक एक काठी जडब' पडैत छैक जतय रोज़ बाप क बीमारी माय क फाटल साडी बहिन-बेटी क बढैत उम्र चारु कात स' घेरने रहैत हो कोना लिखी सकैत छी अपन प्रेयसी पत्नी क हृदय सागरक अथाह प्रेम वर्णन जीवन-आनंद के सूक्ष्म पवित्र दर्शन जतय फूल बनबा स पहिने झहरि जाइत अछि कोमल-कोमल कोड़ी वॄक्ष बनबा स पहिने सूखा जाइत अछि प्रेम क गाछ कोना लिखि सकैत छी श्रिंगार क कविता, प्रेम क गीत ओना जाडक उन्मुक्त राति बड्ड प्रियगर देह क पोर पोर में जागृत करैत अछि कामोवासना क आगि जगा दैत अछि अंतर्मन में नुकायल मनलग्गु दैत्य के मुदा भवना का लहरि तोडि दैत अछि यथार्थ क क्रुर बोध काँपी कलम हाथ स' छुटि जाइत अछि क्रोधग्नि स्वर ज्वाला स' मोन मलिन भ' जाइत अछि गृहस्थी क माँदे बडी काल स' वो किछ कहैत रहैत हम चुप- चाप घर स' बहरा जाइत छी कोनो जोगार, कोनो व्यवस्था में भीजल तीतल अवस्था में अपुर्ण कविता अपुर्ण रहि जाइत अछि मोन क तृष्णा प्यासल, हारल, थाकल, निराश मोनहि में दबि जाइत अछि 11. सत्ता क स्वाद टिकट त भेट गेल प्रश्न आब एतबे लोकप्रियता कोना भेटत ? समय बडड कम रातो राति प्रसिद्धता कोना भेटत ? बिना स्टंट बिना पब्लिसिटी के कोना भेटत सत्ता क स्वाद बिना नव नव आवरण के कोना भेटत जिंदाबाद फेर वएह पुरनका खेल तू चोर तू भ्रष्ट तू अराजक तू बेईमान तू आतंकी तू सांप्रदायिक तू पागल तू नपुंसक परोक्ष सँ बजैत सुनैत आब खुल्लमखुल्ला एक दोसरा पर ढेला फेकैत नेपथ्य में झाँकबाक जरुरत बुझायल कहाँ कहियो राजनीति कि राजनेता जानबाक क फुर्सत भेल कहाँ कहियो एहि कादो कोयला सँ सभ्य लोक बचिते रहल जिम्मेदार बनि देश लेल सब कष्ट उठबैते रहल मुदा एहि बेर आम स' ख़ास धरि में भरल अछि उन्माद नपुंसक लोकतंत्र क' प्रदर्शन में छद्म मर्दानगी क पार्टीवाद | मर्म बिसरि गेल छी रोज किछ ने किछ हेराइत अछि रोज किछ ने किछ भेटइत अछि जे हेराएल सेहो नहि अप्पन जे भेटल ओहो नहि अप्पन मुदा एहि हेरेनाय आ भेटनाय मे जे समय बीतैत अछि से नितांत अप्पन मुदा ओहो कतैक अप्पन नीक बीतय एहि से बेसि की चाहब सहेजब की आ सहेज क राखब की तखन, नहि कनियो नहि नहि भसियाल छी ? नहि हेरायल छी ? नहि भुतियाल छी ? कहि कर्मक प्रतिफल कर्म बिसरि गेल छी साँस त चलैत अछि जीवनक मर्म बिसरि गेल छी जतेक सहन करब तकेक कष्ट भोगब जनता जनार्दन जागूँ प्रतिरोध प्रतिकार करूँ व्यर्थक नहि व्यर्थ के जय जयकार करूँ इतिहास कलंकित हैत जँ आबहूँ मोन रहब दुनियाँ नहि पुछत जँ अपने घर मे गौण रहब मिथिला की मैथिल ताधरि बचल रहत जावति जीवैत रहती भाषा अप्प्न मैथिली एतबा प्रयास होय जे मातृभाषा क ज्योति नहि क्षीण होय हरेक मैथिल नैना बुझय कि होइछ टीकला कोइली | नीलमाधव चौधरी 15 09 16 माँ किछ नहि बाजल मोन होइत अछि पडा जाय , भागि जाय मुदा कत' आ किएक एहने सन स्थिति मे मायक कोरा सँ प्रिय कहाँ किछ रहैत छैक एखनो याद अछि एक एक शब्द एहिना बाप भागैत भागैत चलिये गेलखुन तू हूँ भागि जेब' भागि जा हमर की जकर देहरि पर रहबय घिसिया क फेकिए देत याद अबैत अछि कहियो माँ के जेवर ल क भागि गेल छलहूँ बम्बई मुदा नहि साहस भेल देखबितअइ कोनो सोनार के प्राते भने लौटि क आबि गेल रही माँ किछ नहि बाजल नहि तमसायल नहि कनियो आँखि नोरेलय दुनियाँ क सातम आश्चर्य सँ कम नहि माँ हमर एहने छल | नील माधव चौधरी 09 08 16 माँ मने महिषी जखन जखन ठेस लगैत अछि मोन पडैत अछि माँ माँ मने महिषी माँ मने मिथिला माँ माने तारा माँ मने शीतला माँ मने गंगा मोन भेल चंगा माँ के चरण सँ पवित्र आर किछ कहाँ माँ बिन दुनियाँ में सुख कतहूँ कहाँ | नीलमाधव चौधरी 6 2 16 माँ मैथिली अहाँके | कोना बिसरि सकैत छी माँ मैथिली अहांके कतहुँ जे कियो भेटैय कहूँ अहाँ कहाँ के नहि गेल देखल छौरा भुखल भागि एलहूँ परदेश भेट गेल नमहर झोरा जे नहि भरैत अछि कहियो हम गदहा घोड़ा मुदा तैँ कि, माँ मैथिली अहाँ के बिसरब कत जाएब फेर कहूँ माँ जँ फेर हम खसब हाँ दुःख अछि जे भेटल हमरा शिक्षा संस्कार नहि भेटि रहल धिया पुता के ओ सुदृढ़ आधार नहि बुझि रहल अछि ओ अहाँक महिमा उदगार नहि जानि किएक नहि भेल अहाँक प्रचार प्रसार एहि दोष के प्रायश्चित कहूँ माँ कोना की कएल जाय जे जेना जाहि मजबूरी बिसरि अहाँके बैसल छथि हुनका घर बजायल जाय | नीलमाधव चौधरी 21 02 15 मैथिली बसैथ हृदय मे एखन तक त  बात, मात्र  जोड़' के कएल गेल  तखन तँ ई हाल  घरो में विलायल छी * आ तोडब  त तोडब की  लोक अपने  टूटल अछि  बिजोह केर बाट में  नहि कतहु ब्राह्मण  भूखल अछि  उनटे निमंत्रण भेल  पराभव छय  छूट्टी क बात माने  नौकरी ताकव छय  अंस भरि ओहि  योगदान के सम्मान करूँ  माँ मैथिली बसैथ हृदय मे नहि अप्पन नहीं आन करूँ ।. (*दरभंगो, सहरसा में लोक मैथिली नहीं बजैत अछि) नीलमाधव चौधरी 10 01 16 मोन क तृष्णा लगातार चारि दिन स' बरसैत पानि अकच्छ भ गेल अछि मोन ओना बारिस क मनभावन द़ृश्य बड्ड नीक लगइत छैक मुदा कखन जखन पेटक भूख स मोन व्यथित नहि हो जखन कोनो घाव स देह पीड़ित नहि हो जखन नव तरुणि संग यौवन उमडल हो मोन में उल्लास होमय जेब भडल हो मुदा एखन अहि अकालबेला में जतय नून रोटी जुटेबाक समस्या में प्रतिभा क एक एक टा काठी जडब' पडैत छैक जतय रोज़ बाप क बीमारी माय क फाटल साडी बहिन-बेटी क बढैत उम्र चारु कात स' घेरने रहैत हो कोना लिखी सकैत छी अपन प्रेयसी पत्नी क हृदय सागरक अथाह प्रेम वर्णन जीवन-आनंद के सूक्ष्म पवित्र दर्शन जतय फूल बनबा स पहिने झहरि जाइत अछि कोमल-कोमल कोढी वॄक्ष बनबा स पहिने सूखा जाइत अछि प्रेम क गाछ कोना लिखी सकैत छी श्रिंगार क कविता, प्रेम क गीत ओना जाडक उन्मुक्त राति बड्ड प्रियगर देह क पोर पोर में जागृत करैत अछि कामोवासना क आगि जगा दैत अछि अंतर्मन में नुकायल मनलग्गु दैत्य के मुदा भवना का लहरि तोडि दैत अछि यथार्थ क क्रुर बोध काँपी कलम हाथ स' छुटि जाइत अछि यथार्थ. कवि क कल्प्ना क सीमा लांघि जाइत अछि चारि जोडी आँखि टुकुर टुकुर हमारे देखि रहल छल हम चुप- चाप घर स' बहरा जाइत छी कोनो जोगार, कोनो व्यवस्था में भीजल तीतल अवस्था में अपुर्ण कविता अपुर्ण रहि जाइत अछि मोन क तृष्णा प्यासल, हारल, थाकल, निराश मोनहि में दबि जाइत अछि | नीलमाधव चौधरी मोन छोट क दैत अछि जहिना जहिना रंग चढैत छ्य तहिना तहिना उतरय छय इ दुनियाँ में सिद्ध बात जे जे फ़डय से झहरय छय तखन इ रस्ता त अपने चूनल अछि आब गडल कांट त' माँ मोन पडैत अछि नहि गाऊँ फगुआ नहि कोनो रंग लगाउँ एहि गीत एहि रंग स गामक गमक अबैत अछि नहि जानि किएक ई पाबनि तिहारि मोन छोट क दैत अछि खुशी क एहेन सन मौका पर मोन वेदना सँ भरि दैत अछि ऐसगरे बुझाइत छी अछि भरल घर आँगन आब की हर्ष विषाद नहि रंग कोनों एहि आनन | अछि बुझल नहि छय कत्तो खुशी मुदा छी हम प्रतीक्षा में परिणाम त बुझल अछि लागल छी परीक्षा में | नीलमाधव चौधरी 25 3 15 मोन परतारि रहल छी बात एतबे सत्त जे सभ झुट्ठे घूमि रहल अछि नीक कि बेजाय जे बुझायल अप्पन तकरे चुमि रहल छी मुदा एहि छन किछ भेल परिवर्तन बड्ड जल्दी बदलि गेल आन आ अप्पन कतेक सम्बन्ध लुप्त भेल कतेक नव गढल गेल ओहि लुप्त सम्बन्ध के एहि गढल नव रुप सँ जिनगी सम्हारि रहल छी हरियर पीअर बात सँ मोन के परतारि रहल छी | नीलमाधव चौधरी 20 12 15 यत्र तत्र सर्वत्र कष्ट होइत छैक ककरा आ किए होइत छैक ककरा बुझबा के चाही आ समय ककरा ककरा बुझा दैत छैक आदमी आ आदमी मे एतेक फर्क किए एकटा लूटै छै दुनियाँ एकटा लुटा दैत छैक चुप रहैत छि तँ आत्मा कानि जाइत अछि किछ बजा गेल तँ जिनगि विपरीत भ जाइत अछि बिन बाते क लोक बात बना दैत छैक आब नहि साहस नहि ओ पैरूख अछि बाँचल यत्र तत्र सर्वत्र चिंता क बर्छी अछि गाँथल हाल ऐहेन मे कोनो ईच्छा व्यथा होइत छैक नहि भरोस करूँ कनियो नहि विरोध करूँ कनियो जिनगी क किछ ऐहने सन कथा होइत छैक नीलमाधव चौधरी 25 10 15 यथार्थ अमावस्याक डर छोट-छोट बात कते पैघ-पैघ खुशी दैत अछि पैघ बात मोन मे अबिते मोन एना किएक व्यथित भ जाइत अछि नहि इ नीक नहि ओ नीक मुँह क स्वादे जेना अछि भेल तीत कोन मिष्ठान्न कोन पकवान कहाँ किछ लगैत रुचिगर घर आँगन कि बहरी दलान कहाँ कतहूँ किछ प्रियगर रोज बनैत, रोज टुटैत बीतल जा रहल व्यर्थ जीवन दुःख मे कि सुख मे लोक-समाज त जुटिते अछि शुभकामना मे सद्भावना क जेना अभाव सन बुझाइत अछि | हाल बदलत जेना पहिने सँ बदलल अछि , आटा-दालि क अकाली मोबाइल लैपटोप पसरल अछि दिव्य पुर्णिमा क ईजोरिया राति क स्वप्न जुआनी पर यथार्थ अमावस्याक डर मुदा छनो भरि लय मोन सँ कहाँ जाइत अछि नीलमाधव चौधरी | 5 3 16 रहल अछि रौदी-दाही अन्हार आ इजोत ज़रूरी त दुनू अछि जखन जकर प्रयोजन तखन से भेटत कोना राति केर दिन केलौ दिन केर राति आब समयानुसार सुरूज चान ऊगत कोना खेत-खरिहान छूटल कलम बाग निपत्ता अंगना दलान छूटल खत्म भेल पोखरि खत्ता आब हवा पानि के संरक्षण, शुद्धिकरन चाही दुनियाँ त ओहिना के ओहिना अछि सब दिने रहल अछि रौदी-दाही तखन एना किएक एको बेर मुँह पर मुस्की नहि अबैत अछि छोट छोट बात पर लोक कते पैघ पैघ लडाइ लडैत अछि | नीलमाधव चौधरी 12 06 16 रूग्नता सँ नग्नता गाछ , रूग्नता सँ नग्नता धारण करैत अछि कि प्रकृति केर चिर नियम के पालन करैत अछि यश नाम ओकरे साम दाम ओकरे जे सीख गेल धूर्तइ अछि फोडइत रहूँ कपार जपैत रहूँ शिक्षा संस्कार जे चलि गेल से कहाँ घुरैत अछि मरैत अछि लोक अभाव सँ भुखमरी सँ बीमारी सँ मरैत अछि लोक ज्ञान सँ विवेक सँ लाचारी सँ अप्पन की आनक उचित अधिकार लेल कत’ के मरैत अछि लोक सब दिन एहिना अपना लेल जीवैत छल लोक आइयो ओहिना अपना लेल जीवैत अछि | नीलमाधव चौधरी 27 12 16 लालटेन क ईजोत में रूस फ्रांस अमेरिका कहिया स लागल अछि बगदादी क भाग्य जे एखनो ओ बांचल अछि शकील ,खुर्शीद , अय्यर पाकिस्तान दिस देखैत छथि भारत क छोडि पाकिस्तान में शान्ति तकैत छथि नीतीश संग तेजस्वी की तेज प्रकाश एहि लालटेन क ईजोत में नहि जानि कोना होयत विकास हे भगवान उठूँ युग के आश्वस्त करूँ आतंक क गाढ अन्हार में हेरायल अछि दुनियाँ प्रकाश पूंज बनि शांति क मार्ग दूरूस्त करूँ | नीलमाधव चौधरी 22 11 15 लोक परेशान टा भेटत तीव्र गति स भागल जा रहल अछि समय नहि पकडि पबैत छी जीवनक सुर ताल लय परिवर्तन तँ संसार क शाश्वत नियम अछि ई रूकत से त संभव नहि मुदा सार्थक बीतय से किए नहि भ रहल अछि रात अन्हार दिन अन्हार भोर सांझ कहाँ भ रहल अछि किएक मोन मे बात जे मात्र नुकसाने टा भेटत जिम्हरे कदम बढाएब लोक परेशान टा भेटत किएक नहि मोन मे आस जे सभ बिहूँसैत भेटत किएक नहि ई विश्वास जे लोक बाट तकिते भेटत लोक निर्मल अछि मिथिला के प्रेम सत्कार बचल अछि माँ मैथिली के कृपा स लोक लाज बचल अछि मूल मुद्दा मुदा जे पलायन रोकब कोना जे बिसरल छथि कुल-शील हुनका टोकब कोना छुटतहि कहता कहूँ किछ अपराध भेल जीबी रहल छि की ई नहि विश्वास भेल कोना बूझता की कहिइन किएक नोयडा सन बंजर जमीन सोन भेल अछि अर्थतंत्र क चक्रव्युह में फँसि प्रतिभा मोन भेल अछि नीलमाधव चौधरी | 21 09 16 लोके बदलय साल बदलल हाल बदलत सोचैत तँ सब साल छी हम कि बदलब लोके बदलय ततबे लेल बेहाल छी नियमे नित्य धँसि रहल छी डेग डेग पर फँसि रहल छी बढल अछि क्लेष भेटैत अछि उपदेश सब कहैत अछि हम की करबै अपने ओझराएल महाजाल छी राम के पढलहूँ कृष्ण के पढलहूँ गीता बाइबिल कुरान उलटलहूँ सबतरि लीखल एक्के भाषा जीवन कि प्रकृति ईश्वर के देल अमूल्य धन नष्ट करबा लेल हम सब स्वयं बनल महाकाल छी ।. नीलमाधव चौधरी । 04 01 17 विलापक बखान कतेक रास झुठ फेर पसरल फेर कतेक पुत्र क करेज में मातृ-प्रेम उमडल मुदा सत्य बहुत दूर बहुत चिंतनीय अछि इतिहास कहत एहि काल खंड में पुत्र क प्रकोप बहुत निंदनीय अछि मानल देश भरल अछि जुआनी स नाम करै अछि दुनियाँ में रहैत अछि फुटानी स मुदा वो संस्कार कि समय कहाँ जे माँ-बाप क सम्मान करय देवता होइत छल कि होइत हेताह कहियो आब त दूरे सँ देख विलापक बखान करय | नीलमाधव चौधरी 09 05 16 विश्वास महान वएह जे अपन जीवन स' दस के उपकार करैत अछि ओजस्वी वाणी स' मुर्दा में शक्ति संचार करैत अछि अपना लेल त' सब करैया ओरदा रहैत के मरैया दुःख कियो अपनाइयेक ककरो उद्धार करैत अछि परम सत्य जे लिखल विधाता सैह टा होयत कतबो पीटब कपार विधिक विधान नहि बदलत तैँ कि मानव कर्तव्य छोरि भाग्य लेल दौरय अपन कर्मक फल त सब कियो अपने भोगय मन्दिर आ मसजिद के त' लागल अछि अंबार एतय भक्त  लोक क त देखू लागल अछि बाज़ार एतय नहि बुझाइत भगवान केर वास हेतैन्हि पुजारियो के रही गेल विश्वास हेतैन्हि शांति बनल हाहाकार अछि प्रीत तँ सब दिन सँ स्वार्थ क प्रतीक थिक , कि निक की बेजाय सब भाग्य क ट्रिक थिक समय क संग सब किछ सब दिन बदलैत रहल रीति-रिवाज,पाप -धर्म समयानुकुल बदलैत रहल सब दिन लिखल गेल निक-निक ग्रन्थ सब दिन होइत रहला एक स एक महान संत तखन पाप कोना एतेक बढ़ि गेल सत्य चढल फांसी झूठ गद्दी चढ़ि गेल अर्थतंत्र क च्क्रव्युह में हताश आदमी बेहिसाब फँसैत गेल सुख , संतुष्टि आ सुरक्षा क आस में मौन क शांति बिसरि गेल सुख कत',सुख कथि के ? देह के,पेट के की मोन के की क्षणिक सुख की सर्वकालिक की धार्मिक की चमत्कारिक संतुष्टि , ओह जरूरी स जरूरी काज नहि क पबैत छि कहाँ छनो भरि लय अप्प्न आकलन करैत छि सुरक्षा क बात त केनाय आब बेकार अछि घर बाहर आतंक मचल शांति बनल हाहाकार अछि | नीलमाधव चौधरी 18 9 15 संकल्प संकल्पित छीं जिनगि क बाट पर चलबाक लेल बुझल अछि आगा खाधि हेतैक अछि बुझले नहि हम तड़पि सकब मोनक ज्वाला क शांति लेल बढ़ि रहल छीं अप्स्याँत भेल कएक बेर लागल ठेस मुदा नहि संतुष्ट भेल हमर क्षुधा उठल बेदना क तृप्ति लेल बढ़ि रहल छीं अप्स्याँत भेल जगह नही छै चुट्टियों ससर’ के तैयो चाहैत छी घोसिया रही प्रगति के आस में भ्रमित हम बढ़ि रहल छीं अप्स्याँत भेल ई आगि एहेन अछि बढ़बाके सूख शांति के जे जरा देलक गाम-घर.सर-संबन्धी,सब छोरि बढ़ि रहल छीं अप्स्याँत भेल जिनगी क छै नइ ओर छोड़ सब रातु क बाद होइछ भोर रातुक तिमिर में डूबल हम बढ़ि रहल छीं अप्स्याँत भेल की चाही , वो कोना भेटत ई त कहियो सोचलहु नहि अप्पन प्रण के अर्पित हम बढ़ि रहल छी अपस्यांत भेल | संयोग ककरा स' प्रेम ई कहेन वियोग अछि हमर जिनगि क' ई केहेन संयोग अछि जकरा स' स्नेह् करी ओकरे स' होईत संहार अछि जकरा स रहल विमुख ओकरे स' उद्धार अछि नीलमाधव चौधरी सएह टा बात कोना भ सकैत हम सब बड्ड नीचाँ धसि गेल छी आ भगवान बड्ड उपर चलि गेलाह नहि भजन सुनैत छथि नहि आँखिक नोर देखैत छथि ठीके कलयुग मे आबि भगवानो बदलि गेलाह , ततेक जल्दी वातावरण कि प्रयोजन बदलि जाइत अछि उपराग दैते दैते गारि, प्रार्थना मेँ बदलि जाइत अछि तखन कथि लेल एतेक व्यग्रता तखन कथि क एतेक प्रशन्नता तँ की हम सभ माँटिक मुरुत बनि पडल रही बारू किछ होइक दुनियाँ मेँ कम्बल ओढि सुतल रही भगवान दूर नहि बड्ड लग आबि गेल छथि क्रिया कलाप के फल तुरंत द दैत छथि कहाँ कोनों एहन नीक कर्म छल जे नीक भाग्य भ सकैत हमरे जे जे निक लागय सएह टा बात कोना भ सकैत | नीलमाधव चौधरी 4 9 15 . की पायब सम्मान ? हम सभ एखनहु किएक पाछु ? नहि कोनो षड़यंत्र नहि कोनो विद्वेष क परिणाम अछि ई मात्र आलस अकर्मण्यता आ अज्ञान अछि आन के अछि ? शत्रु त' देश के अपनहि संतान अछि स्वार्थ के वशीभूत मातल आ शिथिल पैघ-पैघ तोंद तीव्र निद्रा स व्यथित लागल छीं मात्र अप्पन मरण के ओरियान मे मात्र अप्पन तृष्णा के समर्पित सम्मान मे सरिपहूँ बचल रहत पहिने लोक टूटैत अछि तखन घर टूटैत अछि तखन समाज टूटैत अछि आ फेर देश भाषा संस्कृति सभ सुड्डाह भ जाइत अछि । तैँ हे बंधु जँ चाहैत छी देश भाषा संस्कृति बचल रहए तँ चलूँ करी प्रयास लोक के बचेबाक लोक जे अपने उपजाएल समस्या सँ पार नहि पबैत अछि समस्या क अम्बार क पहाड क बीच झुलैत अछि कोनो ना कोनो तरहे जीवन यापन त सुरक्षित होय ओहिमे नहि सरकार नहि अनुकम्पा के जरुरी होय लोक क आत्मविश्वास ज बनल रहत देश भाषा संस्कृति सरिपहूँ बचल रहत | नीलमाधव चौधरी 29 1 15 हम की गाम खराब ? बदलि गेल गाम कि बदलि गेलहूँ हमसब रास्ता बदलि गेल कि गामक लोकसब मुदा भगवती ताराक स्थान त' वेएह अछि मंडन व राजकमल क' गाम त' वेएह अछि की अप्पन दोष की कारण कहूँ कोना अपना के नून रोटी क सतायल कहूँ गाम मे घर नहि की कहूँ की वजह दर्जनो बीघा खेतक मालिक मुदा पैर रखबाक नहि जगह की भ गेल किएक नहि गाम हम्मर गाम रहल बाबा-पिता क नाम संग किएक नहि हम्मर नाम रहल बाबा बनौने छलाह सब स' पाहिल दुमहल्ला जे आब खण्डहर बनल खसबाक' लेल बेताब नहीं बुझि सकैत छी हम की गाम खराब ? हम त' ठीक छी : सत्ते ?

हम सब एतेक कोना बदलि सकैत छी  जेना बदलि गेल छी कोनो आकर्षण नहि कोनो प्रतिरोध नहि जे जेहेन करता  से तेहेन भोगता बडड संतुष्ट,बडड सहज बाप- भाय मिल क'  बहिन- बेटी संग  नौ वर्ष तक  अस्सी साल क संत  सोलह साल क' कन्या मुदा हमर खून  नहि खौलैत अछि अपना पर नजर दौडबैत छी  पहिने स' बेसि  सशक्त भ' गेल छी  बेसि बुद्धिमान (समय आ अनुभव के देखेत, ओना त) आ बेसि गुदकर मुदा पहिने स' बेसि  असंतुष्ट  असुरक्षित  अपमानित  नहि फरछाईत अछि  प्रगति क पथ पर छी  कि अवनति क पथ पर ? हमरा चाही ईलाज कहैत अछि युवा राष्ट्र के बिग़डल लोकतंत्र यों नेताजी अहाँके चाही काज हमरा चाही ईलाज बात कहूँ बनत त बनत कोना अहाँके चाही स्वराज हमर अछि सर्व समाज बात कहूँ निभत त निभत कोना भेल छलहूँ जखन स्वतंत्र भेटल छलै जनता के उत्तम शिक्षा स्वास्थ्य क नि:शूल्क सुविधा जीवन तहियो कठिन छल छल तखनो दुविधा मुदा आस्था आ विश्वास प्रेम, अपनत्व बनल छल दूर रहितो लोक गाम-घर लोक-वेद स जुडल छल ग्रामीण की शहरी शिक्षित लोक संस्कारी होइत छल आम जनता के लेल प्रतिष्ठित लोक सरकारी होइत छल किछुए दिन दिन बाद मुदा बाज़ार तेना हावी भ गेल शिक्षा, स्वास्थ्य की लोक क जिनाय भारी भ गेल सत्ता के रोकबाक चाही मुदा से कहाँ भेल अपने सबहक चरित्रहीनता स सत्ता स्व्यं खेल भ गेल नीलमाधव चौधरी 14 09 16 हमरा लेल : हम्मर गाम गाँव आब हमरा लेल वीरान भ गेल हम्मर गाम हमरा लेल निसप्राण भ गेल बाबा मुइला भेल सब काज गामे मे पिता मुइला भेल सब काज गामे मे मुदा दादी आ माँ के नहि गाम देखा सकलहूँ गामक माँटि पानि के नहि कर्ज चुका सकलहूँ नहीं बुझि सकलहूँ कोना की भेल मुदा सरिपहूँ गाम हम्मर बहुत दूर छूटि गेल हेरैत प्रश्न क उत्तर प्रकृति क खोह में बौआईत दिन राति तकैत छी अपने सन कोनो बताह प्राणी जे हमरा एस्कर छोडि नहीं चलि जाय जेना संग छोडि दैत अछि सूर्य चाँद तारा तकैत छी कोनो ज्ञान क डारि प्रकृतिक झूरमुठ कोन में तकैत छि कोनो अपसरा कोनो सुंदरी क नग्न मूर्ति जकरा बिना बुझाइत अछि सम्पूर्ण वन अपूर्ण तकैत छि कोनो भावपूर्ण युक्ति तकैत छी ह्रदय में उठल पीड़ा क कारण करैत नव नव कविता क श्रृजन किएक नव नव कोमल पल्लव रौद में जरैत जरैत झरि जाइत अछि इ देखि बिना बादल ई आकाश किएक नहि बरसि जाइत अछि . ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)2004-17. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथममैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम वि‍लास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमे .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचयआ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेता, से आशा करै छी। रचनाक अंतमे टाइप रहए, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहलअछि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। ऐ ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मीठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-17 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ता लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.co.in पर संपर्क करू। ऐ साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल। ५ जुलाई २००४ केँhttp://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा “’विदेह’- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका” धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ”जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सिद्धिरस्तु वि दे ह www.videha.co.inविदेहप्रथम मैथिलीपाक्षिक ई पत्रिकाwww.videha.com विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'विदेह' २२७ म अंक ०१ जून २०१७ (वर्ष १० मास ११४ अंक २२७)मानुषीमिह संस्कृताम्ISSN 2229-547X VIDEHA

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