VIDEHA — Issue 232 / अंक २३२

Publication: VIDEHA · Issue: 232
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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' 232 म अंक 15 अग)त 2017 (वष/ 10 मास 116 अंक 232 ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 1

ISSN 2229-547X VIDEHA 'िवदेह ' 232 म अंक 15 अग)त 2017 (वष/ 10 मास 116 अंक 232 )

ऐ अंकमे अिछ:- १. संपादकीय संदेश

२. गG २.१.जगदीश Iसाद मJ डलक दूटा लघु कथा कोिढ़या सरधुआ आ िWकालदशX २.२.नZ द िवलास राय-दूटा लघु कथा हमर लॉटरी िनकलल आ िश\ाक अिZ तम उ^े_ य २.३.बेचन ठाकुरजीक दूटा एकeकी-नीशा मुिf त आ बरहम बाबा २.४.आशीष अनिचZहार-िमिथला )टूडhट यूिनयनक काजपर िरपोट/

३. ३.१. किपलेiर राउत -आधा दज/न लघु कथ ◌ा ३.२.नारायण यादव- चािरटा लघु कथ◌ा ३.३.रबीZ l नारायण िमm-पिहल नौकरी ३.४.िमिथलेश कुमार िसZहा-आज़ादी (बीहिन कथा)

४.१.१.आशीष अनिचZहार- १ टा बाल गजल आ २ टा गजल २. जगदीश चZl ठाकुर ’अिनल’- चािरटा गजल ३.अिqबकेश कुमार िमm दू टा किवत◌ा

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संपादकीय िवदेह "नेपालक वत/मान मैिथली सािहŒय" िवषयक िवशेषeक िनकालबाक नेयार केलक अिछ जकर संयोजक mी िदनेश यादव जी रहता। अइ िवशेषeकमे नेपालक वत/मान मैिथली सािहŒय केर मूयeकन रहत। अइ िवशेषeक लेल सभ िवधाक आलोचना-समी\ा-समालोचना आिद I)तािवत अिछ। समय-सीमा िकछु नै जिहया पूरा आलेख आिब जेतै तिहये, मुदा Iयास रहत जे एही साल मइ-जून धिर ई िवशेषeक आिब जाए। उqमेद अिछ िवदेहक ई Iयास दूनू पायापर एकटा पूल ज‘र बनाएत।

िवदेह ’ारा संचािलत "आमंिWत रचनापर आमंिWत आलोचकक िट“पणी" शृंखलाक दोसर भागक घोषणा कएल जा रहल अिछ। दोसर भागमे अइ बेर नीलमाधव चौधरी जीक रचना आमंिWत कएल जा रहल अिछ आ नीलमाधवजीक रचना ओ रचनाधिम/तापर िट“पणी करबा लेल कैलाश कुमार िमmजीक• आमंिWत कएल जा रहल छिन। दूनू गोटाक• औपचािरक सूचना जिदये पठाओल जाएत। रचनाकारक रचना ओ आलोचकक आलोचना

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जखने आिब जाएत ओकर अिगला अंकमे ई Iकािशत कएल जाएत।

अइ शृंखलाक पिहल भाग कािमनीजीक रचनापर छल आ िट“पणीकत‚ मधुकeत झाजी छलाह। जेना की सभ गोटा जनै छी जे िवदेह २०१५ मे तीन टा िवशेषeक तीन सािहŒयकारपर Iकािशत केलक जकर मापदंड छल सालमे दूटा िवशेषeक जीिवत सािहŒयकारक उपर रहत जइमे एकटा ६०-७० वा ओइसँ बेसी सालक सािहŒयकार रहता तँ दोसर ४०-५० सालक ( मैिथली सािहŒयकार मने भारत आ नेपाल दूनूक)। ऐ ममे अरिवZद ठाकुर ओ जगदीश चंl ठाकुर "अिनल"जीपर िवशेषeक िनकिल चुकल अिछ। आगूक िवशेषeक िकनकापर हुअए तइ लेल एक मास पिहनेसँ पाठकक सुझाव म~गल गेल छल। पाठकक सुझाव आएल आ ओइ सुझाव अंतग/त िवदेहक िकछु अिगला िवशेषeक परमेiर कापिड़, वीरेZl मिलक आ कमला चौधरी पर रहत। हमर सबहक Iयास रहत जे ई िवशेषeक सभ 2018 मे Iकािशत हुअए मुदा ई रचनाक उपल धतापर िनभ/र करत। मने रचनाक उपल धताक िहसाबसँ समए ऊपर-िन¢चा भऽ सकैए। सभ गोटासँ आ¤ह जे ओ अपन-अपन रचना editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा दी।

िवदेह सqमान िवदेह समानाZतर सािहŒय अकादेमी सqमान १.िवदेह समानाZतर सािहŒय अकादेमी फेलो पुर)कार २०१० -११ २०१० mी गोिवZद झा (सम¤ योगदान लेल) २०११ mी रमानZद रेणु (सम¤ योगदान लेल) २.िवदेह समानाZतर सािहŒय अकादेमी पुर)कार २०११ -१२ २०११ मूल पुर)कार- mी जगदीश Iसाद मJडल (गामक िजनग ◌ी, कथा सं¤ह) २०११ बाल सािहŒय पुर)कार- ले.क. मायानाथ झा (जकर नारी चतुर होइ, कथा सं¤ह) २०११ युवा पुर)कार- आनZद कुमार झा (कलह , नाटक) २०१२ अनुवाद पुर)कार- mी रामलोचन ठाकुर- (प¦ानदीक माझ ◌ी, बe§ला- मािनक बंGोपा¨याय, उपZयास बe§लासँ मैिथली अनुवाद) िवदेह भाषा सqमान २०१२ -१३ (वैकिपक सािहŒय अकादेमी पुर)कारक ‘पमे Iिस© ) 1. िवदेह समानाZतर सािहŒय अकादेमी फेलो पुर)कार 2012 2012 mी राजनZदन लाल दास (सम¤ योगदान लेल) 2. िवदेह भाषा सqमान २०१२ -१३ (वैकिपक सािहŒय अकादेमी पुर)कारक ‘पमे Iिस© ) २०१२ बाल सािहŒय पुर)कार - mी जगदीश Iसाद मJडल क• “तरेगन ” बाल Iेरक िवहिन कथा सं¤ह २०१२ मूल पुर)कार - mी राजदेव मJडलक• "अqबरा" (किवता सं¤ह) लेल। 2012 युवा पुर)कार- mीमती ¬योित सुनीत चौधरीक “अिच/स ” (किवता सं¤ह) 2013 अनुवाद पुर)कार- mी नरेश कुमार िवकल "ययाित" (मराठी उपZयास mी िव­णु सखाराम खाJडेकर)

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िवदेह भाषा सqमान २०१३ -१४ (वैकिपक सािहŒय अकादेमी पुर)कारक ‘पमे Iिस© ) २०१३ बाल सािहŒय पुर)कार – mीमती ¬योित सुनीत चौधरी- “देवीजी” (बाल िनबZध सं¤ह) लेल। २०१३ मूल पुर)कार - mी बेचन ठाकुरक• "बेटीक अपमान आ छीनरदेव ◌ी" (नाटक सं¤ह) लेल। २०१३ युवा पुर)कार- mी उमेश मJडलक• “िन_तुकी” (किवता सं¤ह)लेल। २०१४ अनुवाद पुर)कार- mी िवनीत उŒपलक• “मोहनदास ” (िहZदी उपZयास mी उदय Iकाश)क मैिथली अनुवाद लेल। िवदेह भाषा सqमान २०१४ -२०१५ (समानाZतर सािहŒय अकादेमी सqमान ) २०१४ मूल पुर)कार- mी नZद िवलास राय (सखारी पेटार ◌ी- लघु कथा सं¤ह) २०१४ बाल पुर)कार- mी जगदीश Iसाद मJडल (नै धारैए - बाल उपZयास) २०१४ युवा पुर)कार - mी आशीष अनिचZहार (अनिचZहार आखर - गजल सं¤ह) २०१५ अनुवाद पुर)कार - mी शqभु कुमार िसंह ( पाखलो - तुकाराम रामा शेटक कॲकणी उपZयासक मैिथली अनुवाद) नाटक , गीत , संगीत , नृŒय , मूित/कला, िशप आ िचWकला \ेWमे िवदेह सqमान २०१२ अिभ नय - मु°य अिभनय , सुmी िश  पी कुमारी, उ±- 17 िप ता mी ल² मण झा mी शोभा काZ त महतो, उ±- 15 िप ता- mी रामअवतार महतो, हा) य -अिभनय सुmी िI यंका कुमारी, उ±- 16, िप ता- mी वैGनाथ साह mी दुग‚नंद ठाकुर, उ±- 23, िप ता- ) व. भरत ठाकुर नृŒ य सुmी सुलेखा कुमारी, उ±- 16, िप ता- mी हरेराम यादव mी अमीत रंजन, उ±- 18, िप ता- नागेiर कामत िच Wकला mी पनकलाल मJडल, उमेर- ३५, िपता- )व. सुZदर मJडल, गाम छजना mी रमेश कुमार भारती, उ±- 23, िप ता- mी मोती मJ डल संगीत (हारमोिनयम ) mी परमानZ द ठाकुर, उ±- 30, िप ता- mी नथुनी ठाकुर संगीत (ढोलक ) mी बुलन राउत, उ±- 45, िप ता- ) व. िच  टू राउत संगीत (रसनचौकी) mी बहादुर राम, उ±- 55, िप ता- ) व. सरजुग राम िशपी-व)तुकला mी जगदीश मिलक,५० गाम- चनौरागंज मूित/-मृि‰का कला

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mी यदुनंदन पंिड त, उ±- 45, िप ता- अशफX पंिड त का´ -कला mी झमेली मुिखया,िपता )व. मूंगालाल मुिखया, ५५, गाम- छजना िकसानी-आŒमिनभ/र सं)कृित mी लछमी दास, उमेर- ५०, िपता )व. mी फणी दास, गाम वेरमा िवदेह मैिथली पWकािरता सqमान -२०१२ mी नवेZदु कुमार झा नाटक , गीत , संगीत , नृŒय , मूित/कला, िशप आ िचWकला \ेWमे िवदेह सqमान २०१३ मु°य अिभनय - (1) सुmी आशा कुमारी सुपुWी mी रामावतार यादव , उमेर - १८ , पता- गाम+पो) ट- चनौरागंज, भाया- तमुिर या, िज ला- मधुबनी (िब हार) (2) मो. समसाद आलम सुपुW मो. ईषा आलम , पता- गाम+पो) ट- चनौरागंज, भाया- तमुिर या, िज ला- मधुबनी (िब हार) (3) सुmी अप ण‚ कुमारी सुपुWी mी मनोज कुमार साहु, जZ म ित िथ - १८-२-१९९८, पता- गाम- लि² म िन य~, पो) ट- छजना, भाया- नरिह या, थाना- लौकही,िज ला- मधुबनी (िब हार) हा) य –अिभनय - (1) mी ¸¹दवे पासवान उफ/ रामजानी पासवान सुपुW- ) व. ल² मी पासवान, पता- गाम+पो) ट- औरहा, भाया- नरिह या, थाना- लौकही, िज ला- मधुबनी (िब हार) (2) टा◌ॅिस फ आलम सुपुW मो. मु) ताक आलम , पता- गाम+पो) ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, िज ला- मधुबनी (िब हार) नाटक , गीत , संगीत , नृŒय , मूित/कला, िशप आ िचWकला \ेWमे िवदेह सqमान (मeगिन खबास सम¤ योगदान सqमान ) शा) Wीय संगीत सह तानपुरा : mी रामवृ\ िस ◌ ंह सुपुW mी अिन ‘© िस ◌ ंह, उमेर- ५६, गाम- फुलविर या, पो) ट- बाबूबरही, िज ला- मधुबनी (िब हार) मeगिन खबास सq मान: िमिथला लोक सं)कृित संर\ण : mी राम लखन साहु पे. स् व. खुशीलाल साहु, उमेर- ६५, पता, गाम- पकिड़ या, पो) ट- रतनसारा, अनुमंडल- फुलपरास (मधुबनी) नाटक , गीत , संगीत , नृŒय , मूित/कला, िशप आ िचWकला \ेWमे िवदेह सqमान (सम¤ योगदान सqमान ): नृŒ य - (1) mी हिर नारायण मJ ड ल सुपुW- ) व. नZ दी मJ डल, उमेर- ५८, पता- गाम+पो) ट- छजना, भाया- नरिह या, िज ला- मधुबनी (िब हार) (2) सुmी संगीता कुमारी सुपुWी mी रामदेव पासवान , उमेर - १६ , पता- गाम+पो) ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, िज ला- मधुबनी (िब हार)

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िच Wकला- (1) जय Iकाश मJ ड ल सुपुW- mी कुशेiर मJ डल, उमेर- ३५, पता- गाम- सनपतहा, पो) ट– बौरहा, भाया- सरायगढ़, िज ला- सुपौल (िब हार) (2) mी चZ द न कुमार मJ ड ल सुपुW mी भोला मJ डल, पता- गाम- खड़गपुर, पो) ट- बेलही, भाया- नरिह या, थाना- लौकही, िज ला- मधुबनी (िब हार) संIित , छाW ) नातक अंित म वष/, कला एवं िश  प महािव Gालय- पटना। हिर मुिन य~ / हारमोिनयम (1) mी महादेव साह सुपुW रामदेव साह , उमेर - ५८ , गाम- बेलहा, वाड/- नं. ०९, पो) ट- छजना, भाया- नरिह या, िज ला- मधुबनी (िब हार) (2) mी जागेiर Iसाद राउत सुपुW ) व. रामस् व‘प राउत, उमेर ६०, पता- गाम+पो) ट- बेरमा, भाया- तमुिर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) ढोलक / ठेकैता/ ढोलिक या (1) mी अनुप सदाय सुपुW ) व. , पता- गाम- तुलिस याही, पो) ट- मनोहर प¼ी, थाना- मरौना, िज ला- सुपौल (िब हार) (2) mी क ल र राम सुपुW ) व. ख¼र राम, उमेर- ५०, गाम- लि² म िन य~, पो) ट- छजना, भाया- नरिह या, थाना- लौकही, िज ला- मधुबनी (िब हार) रसनचौकी वादक - (1) वासुदेव राम सुपुW ) व. अनुप राम, गाम+पो) ट- ि◌ नम/ली, वाड/ न. ०७ , िज ला- सुपौल (िब हार) िशपी-व)तुकला- (1) mी बौकू मि ल क सुपुW दरबारी मि ल क, उमेर- ७०, गाम- लि² म िन य~, पो) ट- छजना, भाया- नरिह या, िज ला- मधुबनी (िब हार) (2) mी राम िव लास धिर कार सुपुW ) व. ठोढ़ाइ धिर कार, उमेर- ४०, पता- गाम+पो) ट- चनौरागंज, भाया- तमुिर या, िज ला- मधुबनी (िब हार) मूित/कला-मृित/कार कला- (1) घूरन पंिड त सुपुW - mी मोलहू पंिड त, पता- गाम+पो) ट– बेरमा, भाया- तमुिर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी (िब हार) (2) mी Iभु पंिड त सुपुW ) व . , पता- गाम+पो) ट- नरिह या, थाना- लौकही, िज ला- मधुबनी (िब हार) का´ -कला- (1) mी जगदेव साहु सुपुW शनीचर साहु, उमेर- ३६, गाम- ि◌ नम/ली-पुरव‚स, िज ला- सुपौल (िब हार) (2) mी योगेZ l ठाकुर सुपुW ) व . बु©ू ठाकुर उमेर - ४५ , पता- गाम+पो) ट- बेरमा, भाया- तमुिर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) िकसानी- आŒमिनभ/र सं)कृित - (1) mी राम अवतार राउत सुपुW ) व. सुबध राउत, उमेर- ६६, पता- गाम+पो) ट- बेरमा, भाया- तमुिर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार)

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(2) mी रौशन यादव सुपुW ) व. किप लेiर यादव, उमेर- ३५, गाम+पो) ट– बनगामा, भाया- नरिह या, थाना- लौकही, िज ला- मधुबनी (िब हार ) अ½ा/महराइ - (1) मो. जीबछ सुपुW मो. िब लट मरहूम, उमेर- ६५, पता- गाम- बसहा, पो) ट- बड़हारा, भाया- अZ धराठाढ़ी, िज ला- मधुबनी, िप न- ८४७४०१ जोिग रा- mी ब¢ च न मJ ड ल सुपुW ) व. सीताराम मJ डल, उमेर- ६०, पता- गाम+पो) ट- बेरमा, भाया- तमुिर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) mी रामदेव ठाकुर सुपुW ) व . जागेiर ठाकुर , उमेर - ५० , पता- गाम+पो) ट- बेरमा, भाया- तमुिर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) पराती (Iभाती) गौिन हार आ खजरी/ खौजरी वादक - (1) mी सुकदेव साफी सुपुW mी , पता- गाम इटहरी, पो) ट- बेलही, भाया- ि◌ नम/ली, थाना- मरौना, िज ला- सुपौल (िब हार) पराती (Iभाती) गौिन हार - (अगहनसँ माघ-फागुन तक गाओल जाइत) (1) सुकदेव साफी सुपुW ) व. बाबूनाथ साफी, उमेर- ७५, पता- गाम इटहरी, पो) ट- बेलही, भाया- ि◌ नम/ली, थाना- मरौना, िज ला- सुपौल (िब हार) (2) ले½ु दास सुपुW ) व. सनक मJ डल पता- गाम+पो) ट- बेरमा, भाया- तमुिर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) झरनी- (1) मो. गुल हसन सुपुW अ  दुल रसीद मरहूम, पता- गाम+पो) ट- बेरमा, भाया- तमुिर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) (2) मो. रहमान साहब सुपुW...., उमेर- ५८, गाम- नरिह या, भाया- फुलपरास, िज ला- मधुबनी (िब हार) नाल वादक - (1) mी जगत नारायण मJ ड ल सुपुW ) व. खुशीलाल मJ डल, उमेर- ४०, गाम+पो) ट- ककरडोभ, भाया- नरिह या, थाना- लौकही, िज ला- मधुबनी (िब हार) (2) mी देव नारायण यादव सुपुW mी कुशुमलाल यादव, पता- गाम- बनरझुला, पो) ट- अमही, थाना- घोघड़डीहा, िज ला- मधुबनी (िब हार) गीतहािर / लोक गीत - (1) mीमती फुदनी देवी प¾ी mी रामफल मJ डल, पता- गाम+पो) ट- बेरमा, भाया- तमुिर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) (2) सुmी सुिव ता कुमारी सुपुWी mी गंगाराम मJ डल, उमेर- १८, पता- गाम- मछधी, पो) ट- बिल यािर , भाया- झंझारपुर, िज ला- मधुबनी (िब हार) खुरदक वादक -

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(1) mी सीताराम राम सुपुW स् व. जंगल राम, उमेर- ६२, पता- गाम- लि² म िन य~, पो) ट- छजना, भाया- नरिह या, थाना- लौकही, िज ला- मधुबनी (िब हार) (2) mी ल² मी राम सुपुW ) व. पंचू मोची, उमेर- ७०, पता- गाम+पो) ट- बेरमा, भाया- तमुिर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) क~रनेट - (1) mी चZ द र राम सुपुW- ) व. जीतन राम, उमेर- ५०, पता- गाम- लि² म िन य~, पो) ट- छजना, भाया- नरिह या, थाना- लौकही, िज ला- मधुबनी (िब हार) (2) मो. सुभान , उमेर- ५०, पता- गाम+पो) ट- चनौरागंज, भाया- तमुिर या, िज ला- मधुबनी (िब हार) बेZ जू वादक - (1) mी राज कुमार महतो सुपुW ) व. ल² मी महतो, उमेर- ४५, गाम- ि◌ नम/ली वाड/ नं. ०४, िज ला- सुपौल (िब हार) (2) mी घुरन राम , उमेर- ४३, गाम+पो) ट- बनगामा, भाया- नरिह या, िज ला- मधुबनी (िब हार) भगैत गवैया- (1) mी जीबछ यादव सुपुW ) व. ‘पालाल यादव, उमेर- ८०, पता- गाम इटहरी, पो) ट- बेलही, भाया- ि◌ नम/ली, थाना- मरौना, िज ला- सुपौल (िब हार) (2) mी शq भु मJ ड ल सुपुW ) व. लखन मJ डल, पता- गाम- बिढ याघाट-रसुआर, पो) ट– मुंगराहा, भाया- ि◌ नम/ली, ि◌ जला- सुपौल (िब हार) िख ) स कर - (िख ) सा कहैबला)- (1) mी छुतह‘ यादव उफ/ राजकुमार , सुपुW mी राम खेलावन यादव, गाम- घोघरिड हा, पो) ट- मनोहर प¼ी, थाना- मरौना, िज ला- सुपौल, िप न- ८४७४५२ (2) बैजनाथ मुिख या उफ/ टहल मुिख या- (2) सुपुW ) व. ढॲगाइ मुिख या, पता- गाम+पो) ट- औरहा, भाया- नरिह या, थाना- लौकही, िज ला- मधुबनी (िब हार) िमिथला िचWकला- (1) सुmी िम िथ लेश कुमारी सुपुWी mी रामदेव Iसाद मJ डल ‘झा‘दार’ पता- गाम- रसुआर, पो) ट-– मुंगराहा, भाया- ि◌ नम/ली, ि◌ जला- सुपौल (िब हार) (2) mीमती वीणा देवी प¾ी mी िद िल प झा, उमेर - ३५ , पता- गाम+पो) ट- बेरमा, भाया- तमुिर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) खजरी/ खौजरी वादक - (2) mी िक शोरी दास सुपुW ) व. नेबैत मJ डल, पता- गाम- रसुआर, पो) ट-– मुंगराहा, भाया- ि◌ नम/ली, ि◌ जला- सुपौल (िब हार) तबला- mी उपेZ l चौधरी सुपुW ) व. महावीर दास, उमेर- ५५, पता- गाम+पो) ट- बेरमा, भाया- तमुिर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार)

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mी देवनाथ यादव सुपुW ) व. सव/जीत यादव, उमेर- ५०, गाम- झ~झप¼ी, पो) ट- पीपराही, भाया- लदिन य~, िज ला- मधुबनी (िब हार) सारंगी- (घुना-मुना) (1) mी पंची ठाकुर, गाम- िप पराही। झािल - (झिल बाह ) (1) mी कुZ द न कुमार कण/ सुपुW mी इZ l कुमार कण/ पता- गाम- रेबाड़ी, पो) ट- चौरामहरैल, थाना- झंझारपुर, िज ला- मधुबनी, िप न- ८४७४०४ (2) mी राम खेलावन राउत सुपुW ) व. कैलू राउत, उमेर- ६०, पता- गाम+पो) ट- बेरमा, भाया- तमुिर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) बौसरी (बौसरी वादक ) mी रामचZ l Iसाद मJ ड ल सुपुW mी झोटन मJ डल, उमेर- ३०, बौसरी/बौसली/बासुरी बजबै छिथ । पता- गाम- रसुआर, पो) ट- मुंगराहा, भाया- ि◌ नम/ली, ि◌ जला- सुपौल (िब हार) mी िव भूित झा सुपुW ) व. कनटीर झा, उमेर- ५०, पता- गाम+पो) ट- कछुबी, भाया- तमुिर या, िज ला- मधुबनी (िब हार) लोक गाथा गायक mी रिव Z l यादव सुपुW सीताराम यादव, पता- गाम- तुलिस याही, पो) ट- मनोहर प¼ी, थाना- मरौना, िज ला- सुपौल (िब हार) mी िप चकुन सदाय सुपुW ) व. मेथर सदाय, उमेर- ५०, पता- गाम+पो) ट- बेरमा, भाया- तमुिर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) मिज रा वादक (छोकटा झािल ...) mी रामपित मJ ड ल सुपुW ) व. अजु/न मJ डल, पता- गाम- रसुआर, पो) ट- मुंगराहा, भाया- ि◌ नम/ली, ि◌ जला- सुपौल (िब हार) मृदंग वादक - (1) mी किप लेiर दास सुपुW ) व . सुÀर दास , उमेर- ७०, गाम- लि² म िन य~, पो) ट- छजना, भाया- नरिह या, थाना- लौकही, िज ला- मधुबनी (िब हार) (2) mी खखर सदाय सुपुW ) व. बंठा सदाय, उमेर- ६०, पता- गाम+पो) ट- बेरमा, भाया- तमुिर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) तानपुरा सह भाव संगीत (1) mी रामिव लास यादव सुपुW ) व. दुखरन यादव, उमेर- ४८, गाम- िस मरा, पो) ट- सeिग , भाया- घोघड़डीहा, थाना- फुलपरास, िज ला- मधुबनी (िब हार) तरसा/ तासा- mी जोगेZ l राम सुपुW ) व. िब  टू राम, उमेर- ५०, पता- गाम+पो) ट- बेरमा, भाया- तमुिर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार)

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mी राजेZ l राम सुपुW कालेiर राम, उमेर- ५८, गाम- मझौरा, पा) ट- छजना, भाया- नरिह या, िज ला- मधुबनी (िब हार) रमझािल / कठझािल / करताल वादक - mी सैनी राम सुपुW ) व. लिल त राम, उमेर- ५०, पता- गाम+पो) ट- बेरमा, भाया- तमुिर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) mी जनक मJ ड ल सुपुW ) व. उिच त मJ डल, उमेर- ६०, रमझािल / कठझािल / करताल वादक, १९७५ ई.सँ रमझािल बजबै छिथ । पता- गाम- बिढ याघाट/रसुआर, पो) ट- मुंगराहा, भाया- ि◌ नम/ली, िज ला- सुपौल (िब हार) गुमगुिम य~/ ¤ुम बाजा mी परमेiर मJ ड ल सुपुW ) व. िब हारी मJ डल उमेर- ४१, १९८० ई.सँ गुमगुि◌ मय~ बजबै छिथ । mी जुगाय साफी सुपुW ) व. mी mीचZ l साफी, उमेर- ७५, पता- गाम+पो) ट- बेरमा, भाया- तमुिर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) डंका/ ढोल वादक mी बदरी राम , उमेर- ५५, पता- गाम इटहरी, पो) ट- बेलही, भाया- ि◌ नम/ली, थाना- मरौना, िज ला- सुपौल (िब हार) mी योगेZ l राम सुपुW ) व. िब  टू राम, उमेर- ५५, पता- गाम+पो) ट- बेरमा, भाया- तमुिर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) डंफा (होलीमे बजाओल जाइत...) mी ज¤नाथ चौधरी उफ/ िध यानी दास सुपुW ) व. महावीर दास, उमेर- ६५, पता- गाम+पो) ट- बेरमा, भाया- तमुिर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र),िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) mी महेZ l पो^ार , उमेर- ६५, पता- गाम+पो) ट- चनौरागंज, भाया- तमुिर या, िज ला- मधुबनी (िब हार) नङेरा/ िड गरी- mी राम Iसाद राम सुपुW ) व . सरयुग मोची, उमेर - ५२ , पता- गाम+पो) ट- बेरमा, भाया- तमुिर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार)

िवदेहक िकछु िवशेषeक :- १) हाइकू िवशेषeक १२ म अंक , १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल िवशेषeक २१ म अंक , १ नवqबर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) िवहिन कथा िवशेषeक ६७ म अंक , १ अfटूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha _01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल सािहŒय िवशेषeक ७० म अंक , १५ नवqबर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक िवशेषeक ७२ म अंक १५ िदसqबर २०१०

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Videha_15_12_2010 Videha_15_12 _2010_Tirhuta 72 ६) नारी िवशेषeक ७७ म अंक ०१ माच/ २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) बाल गजल िवशेषeक िवदेहक अंक १११ म अंक , १ अग)त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 11 1 ८) भिfत गजल िवशेषeक १२६ म अंक , १५ माच/ २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समी\ा िवशेषeक १४२ म, अंक १५ नवqबर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 १० ) काशीकeत िमm मधुप िवशेषeक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११ ) अरिवZद ठाकुर िवशेषeक १८९ म अंक १ नवqबर २०१५ Videha_01_11_2015 १२ ) जगदीश चZl ठाकुर अिनल िवशेषeक १९१ म अंक १ िदसqबर २०१५ Videha_01_12_2015 १३ ) िवदेह सqमान िवशेषा क- २०० म अ क १५ अIैल २०१६ / २०५ म अ क १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016

Videha_01_07_2016

१४ ) मैिथली सी.डी./ अबम गीत संगीत िवशेषeक - २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017

लेखकसं आमंिWत रचनापर आम ंिWत आलोचकक िट“पणीक शृंखला १. कािमनीक पeच टा किवता आ ओइपर म धुकाZत झाक िट“पणी VIDEHA 209th issue िवदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016

िवदेह ई -पिWकाक बीछल रचनाक संग - मैिथलीक सव/mे´ रचनाक एकटा समानाZतर संकलन िवदेह :सदेह :२ (मैिथली IबZध -िनबZध -समालोचना २००९ -१० )

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िवदेह :सदेह :३ (मैिथली पG २००९ -१० ) िवदेह :सदेह :४ (मैिथली कथा २००९ -१० ) िवदेह मैिथली िवहिन कथा [ िवदेह सदेह ५ ] िवदेह मैिथली लघुकथा [ िवदेह सदेह ६ ] िवदेह मैिथली पG [ िवदेह सदेह ७ ] िवदेह मैिथली नाÅय उŒसव [ िवदेह सदेह ८ ] िवदेह मैिथली िशशु उŒसव [ िवदेह सदेह ९ ] िवदेह मैिथली IबZध -िनबZध -समालोचना [ िवदेह सदेह १० ] The readers of English translations of Maithili Nove l "sahasrabadhani " and verse collection "sahasrabdik chaupar par " has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore t he Author has started translating his Maithili works in English himself . After these translations are complete these would be the offici al translations authorised by the Author of original work .-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha -pothi/ Maithili Books can be purchased from: http://www.amazon.in/ For the first time Maithili books can be read on kindle e -readers. Buy Maithili Books in Kindle format (courtesy Videha) from amazo n kindle stores, these e books are delivered worldwide wirelessly: - http://www.amazon.com/ अपन मंतÇय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २. गG २.१.जगदीश Iसाद मJ डलक दूटा लघु कथा कोिढ़या सरधुआ आ िWकालदशX २.२.नZ द िवलास राय-दूटा लघु कथा हमर लॉटरी िनकलल आ िश\ाक अिZ तम उ^े_ य २.३.बेचन ठाकुरजीक दूटा एकeकी-नीशा मुिf त आ बरहम बाबा २.४.आशीष अनिचZहार-िमिथला )टूडhट यूिनयनक काजपर िरपोट/

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३.१. किपलेiर राउत -आधा दज/न लघु कथ ◌ा ३.२.नारायण यादव- चािरटा लघु कथ◌ा ३.३.रबीZ l नारायण िमm-पिहल नौकरी ३.४.िमिथलेश कुमार िसZहा-आज़ादी (बीहिन कथा) दूटा लघु कथा कोिढ़या सरधुआ आ िWकालदशX २ कोिढ़या सरधुआ राधे_ याम बाबा घरक बगलेक पोखैरमे ) नान किर एक हाथमे धोती आ दोसर हाथमे अछॴजल पािनसँ भरल लोटा नेने डेिढ़यापर पहुँचबे केला िक पाछूसँ र) तापर सँ लखन टोकलकैन- “बाबा, अहॴसँ कनी काज अिछ।” जिहना राधे_ याम बाबा लखनक बात सुनलैन तिहना आगूक डेग रोिक ठाढ़ होइत बजला- “केहेन काज छह हौ लखन?” अनका जक~ िबटंडी राधे_ याम काका निह छैथ जे पाछूसँ टोकने टोकािन लिगतैन। अपन िवचार छैन जइ अनुकूल अपन िजनगीक धार बहै छैन। जे गामे निह आनो गामक लोक जनैए। लखनक• सेहो बुझल छइहे, तँए भिर राधोपुरमे जँ केकरो िबसवास पाW मानैए तँ ओ माW राधे_ याम बाबाक•। िबसवासक संग लखन बाजल- “बाबा, एकटा नािलस अिछ।” लखनक बात सुिन राधे_ याम बाबा ठकुआएल ठाढ़ रहैथ। ओना लखनक• सेहो िचZ हते छैथ जे िमरचाइ, धिनय~, हरदी, लसुन, आदीक वेपार लखन आइये निह,तीसो-चालीस बख/सँ राधोपुर सिहत आनो-आन गाममे करैत आिब रहल अिछ। गामक उपकारी लोक तँ छीहे तँए जँ कोनो िवÊ न-बाधा र) तामे एलै तँ ओकर िनमरजना हेबेक चाही। मुदा लगले फेर भेलैन जे ) नान केने आिब रहल छी, भीजल धोितयो आ पूजाक अछॴजल सेहो हाथेमे अिछ, तैबीच लखनक नािलस सेहो अिछए। थकमकाएल ठाढ़ राधे_ याम बाबाक मनमे उठलैन जे अपनो आगूक काज अिछ जे पिहने अँगनाक ओसारपर अछॴजलक लोटा रिख घरक चारपर धोती पसारब, पूजा करब, भोजन आ अराम करब तेकर पछाइत ने दुिनय~-दारीक काजमे जुटब। मुदा लगले भेलैन जे अपने अपन काजमे जखने जुिट जाएब, तखने दरब¬ जापर आएल भूखल-दुखल बेकतीक उपकार केना हएत। तहूमे लखन सन लोक, जे तीन बजे भोरे उिठ अपन भोरका कम/–पर-पाखाना, कुर‚-आचमन–सँ िनवृित होइत चािरये बजेसँ अपना संग अनको दुख-धZ धाक पाछू लिग जाइए।

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राधे_ याम बाबाक मनमे उठलैन जे उपकारो तँ उपकार छी। ओहो तँ एËे रंगक निहय• अिछ। एक उपकार भेल जे केकरो कएल जाइए आ दोसर भेल जे उपकारीक• उपकार करब। जिहना कोनो गाछ जिड़सँ लऽ कऽ छीप तक एक पुरिखयाह होइए आ कोनो जिड़येसँ सघन बनैत जाइए, जिड़येसँ अनेको डािर-पात हुअ लगै छै तिहना लखनो सघन लोक अिछए...। राधे_ याम बाबाक मन मानए लगलैन जे पिहने लखनक जे नािलस अिछ तेकरे बुझी। अपन जे काज अिछ ओ तँ अपना जुितमे अिछ, कनी देिरये ने हएत। तहूमे लखन दस-दुआरी अिछ त• दस रंगक काजो हेतइ...। ऐठाम अबैत-अबैत राधे_ याम बाबाक मन मािन गेलैन जे पिहने लखनेक काज करब पछाइत अपन करब। मुदा लगले फेर मनमे उिठ गेलैन जे कोनो व) तुक लेन-देन तँ छी निह जे ओ मंगलक आ अपने घरसँ िनकािल दए देिलऐ। वा आगूक समए लऽ लेलॱ। नािलस छी, नािलसो-नािलसमे अZ तर अिछए। दू गोरेक बीचक जँ कोनो छोट-छीन बात रहल तँ ओरा लगले िनपटा लेब। मुदा जँ नमहर माने एकसँ अिधकक बीचक रहल तँ ओ लगले थोड़े फिरछौल जा सकैए। ओइमे तँ बेसी समए लगबे करत। तँए जँ आगू बिढ़ लखनक• पुिछऐ जे की नािलस छह, तखन तँ जिड़सँ छीप धिर बुझै पड़त। तइमे समए केते लगत तेकर कोनो ठेकान अिछ...। तइ िब¢ चेमे लखन बाजल- “बाबा, अहूँक• बहुत काज पछुआएल अिछ आ हमहूँ चािर बजे भोरेसँ घुमैत-घुमैत थािक गेल छी। मन गरमा गेल अिछ। घरपर जाएब, साइिकल रिख कनी ठंढ़ाएब पछाइत नहाएब-सोनाएब तखन ने खाएब आ अराम करब।” लखनक बात सुिन राधे_ याम बाबाक मनमे जेना नव िवचार लगलैन। नव िवचार ई जगलैन जे जे आदमी चािर बजे भोरसँ काजमे जुटल अिछ, अखन एगारह बिज रहल छै, ओइ आदमीक भूख-िपयास आ अपने जे छह बजेमे ओछाइनपर सँ उिठ पर-पाखाना होइत मुँह-कानमे पािन लइत चाह-पान करैत आठ बजेमे काज िदस बढ़लॱ,दुनूक भूख-िपयास एके रंग थोड़े भेल। मनमे अिबते दोसर िवचार जेना राधे_ याम बाबाक मनक• पकैड़ लेलकैन। दोसर िवचार ई पकैड़ लेलकैन जे िकयो आदमी ओहन अिछ जे एक स~झक भूखल अिछ आ िकयो तीन स~झक भूखल अिछ, दुनूक भूख की एËे रंग भेल। तैठाम पिहने केकरा खाइले भेटौ..? अबैत-अबैत राधे_ याम बाबाक मनमे थोड़ेक चैन एलैन। चैन अिबते बजला- “लखन, जखन तूँ नािलस डायर केलह तखन ओ ठाढ़े-ठाढ़ थोड़े हएत। हमहूँ अछॴजल ओसारपर रिख, धोती चारपर पसािर अँगनासँ अबै छी आ तोहूँ ताबे साइिकल लगा चौकीपर बैसह।” राधे_ याम बाबाक बात सुिन लखनक मनमे सवुरक मेवा खसल। जिहना कोनो आम वा आने फलक गाछक पीपही-पौध रोपैकाल ओ फल मनमे नचैत अपन सुआद िछटकाबए लगैए तिहना लखनोक मनमे भेल जे पनचैती हेबे करत।

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ओना सुिधया दादी सेहो अँगनाक मुँहथैर लग ठाढ़ भऽ दुनू गोरेक गप-स“ प सुनैत रहैथ। मुदा बजैथ िकछु ने। िकछु निह बजैक कारण रहैन जे जखन मरदा-मरदी गप भऽ रहल अिछ तखन बीचमे अनेरे बाजब नीक निह। मुदा तँए मनमे खॱझ निह उठैन सेहो बात निहय• अिछ। खॱझ तँ उठबे करैन। भेल जअमे पाथर खसब एकरे ने लोक कहै छइ। भिर िदन नीक-अधला वृि‰ लोक अपन खाइये-पीबैक जोगार-ले ने करैए, सेहो जँ तुकपर नइ भेल तँ की भेल। मुदा दुआरपर आएल केकरो अकची-दोकची कहब सेहो नीक निहय• छी। आँगनक पछबिरया ओसारपर अछॴजलक लोटा रिख चारपर धोती पसािर राधे_ याम बाबा दरब¬ जापर आिब चौकीपर बैसला। लखन पिहनेसँ चौकीपर बैसल छल। राधे_ याम बाबाक• िकछु पुछैसँ पिहने लखन बाजल- “बाबा, अहूँ देखै छी आ दादी सेहो देखैत आिब रहल छैथ, जे ई साल 2017 ई) वी हमर चािलसम बरीस रोजगारक छी।” िबच् चेमे राधे_ याम काका बजला- “हँ, से तँ भेले हेतह।” राधे_ याम बाबाक समिथ/त बात सुिन लखनक मनमे आरो उŒ साह बढ़ल। अपन िवचारक• पसारैत आगू बाजल- “बाबा, अहॴ कहू जे आइ धिर कोनो िशकबा-िशकाइत लऽ कऽ किहयो िकछु कहलॱ?” समथ/न करैत राधे_ याम बाबा बजला- “हँ, से तँ किहयो ने िकछु कहलह।” राधे_ याम बाबाक बात सुिन लखनक मनमे आरो मजगूती आएल। बाजल- “बाबा, जिहना अपन गाम आ पिरवार अिछ तिहना पँचकोसीक गामो आ पिरवारोक•, आइये निह सभ िदन अपन बुझैत आिबयो रहल छी आ कारोबार सेहो किरते छी। नगद-उधार सभ चिलते अिछ। धरमागती कहै छी जे ने अपने किहयो केकरोसँ एक पाइ झूठ बािज बेइमानी केिलऐ आ ने आने िकयो एको पाइ बेइमानी केलक।” लखनक बात सुिन राधे_ याम बाबाक मन कनी घुिरयेलैन। घुिरयाइक कारण भेलैन जे वेपारी छी तखन झूठ बािज नइ ठकने हेतइ से सq भव अिछ। तँए कनी िमरिमराइत बजला- “तइले किहयो िकछु कहिलयह?” लखन बाजल- “बाबा, अहूँ देखै छी आ अपनो-आन देखते छैथ जे झंझारपुर हाटपर सम) तीपुरबला वेपारीसँ समान कीनै छी आ तीस Iितशत लाभ लऽ कऽ बेचै छी।” ‘तीस Iितशत’ सुिन राधे_ याम बाबाक मन कनी ठमकलैन। ठमैकते बजला- “तीस Iितशत!”

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' 232 म अंक 15 अग)त 2017 (वष/ 10 मास 116 अंक 232 ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 16

राधे_ याम बाबाक बातक• ) वीकारैत लखन बाजल- “हँ बाबा, तीस Iितशतसँ कमपर काज करब तखन पेट भरत।” राधे_ याम बाबा लखनक कारोबारक तिहयाएल बात निह बुझै छला। रेिडयो-अखबारसँ बड़का वेपारी सबहक बात बुझै छला। जे एक Iितशत, दू Iितशत वा प~च-दस Iितशत लाभपर कारोबार करै छैथ। तैठाम लखन तीस Iितशत लाभपर कारोबार करैए, ई तँ सोझे गरदैनक¼ी करैए िकने..! बजला- “एक Iितशत, दू Iितशत लाभपर काज करैबला वेपारीक• उना-सँ-दूना होइ छै आ तोरा पेटो ने भरतह?” राधे_ याम बाबाक बात सुिन लखनक मनमे भेल जे राधे_ याम बाबा सुधंग लोक छैथ। सभ िदन खेती- िगरह) तीपर जीबैत आिब रहला अिछ तँए बिनय~-बेकालक वेपारक बात नइ बुझै छैथ। मुदा जाबे धिर नइ बुझता ताबे धिर िहनका नजैरमे ठक-फुिसआह बनले रहब। जेकरा अपन बजार बनौने छी आ ओइ बजारक बीच कारोबार करै छी जइसँ पिरवारो चलैए आ समािजकता सेहो बनले अिछ, तँए पिहने ई बुझाएब ज‘री अिछ। लखन बाजल- “बाबा, प~च हजार अपन पूजी अिछ आ प~च हजार वेपारीक– माने जेकरासँ समान कीनै छी–उधार छइ। दुनू िमला दस हजारक कारोबार भेल। सभ िदन गाम सभ घुिम बेचै छी, जइसँ किहयो प~च साए आ किहयो दुइयो साइक लाभ होइए। हराहरी बुझू तँ तीन-साढ़े तीन साइक कमाइ होइए। अह~क• अपनो पिरवार अिछ, सभ िकछु िमला खच/ जोड़बै तँ बुिझ पड़त जे लखनक कमाइ केते भेल।” सो होअना राधे_ याम बाबाक मन लखनक िवचारपर नइ जमलैन मुदा आधा-िछधा नइ जमलैन सेहो निहय• कहल जा सकैए। राधे_ याम बाबा बजला- “तोरा िहसाबे तँ केतौ गड़बड़ नइ बुिझ पेब रहल छी मुदा...।” ‘मुदा’ सुिन लखनक मनमे भेल जे बाबा िसमिरयामे बहैत गंगा वा झंझारपुरमे बहैत कमला वा सुपौलमे बहैत कोसी वा दरभंगामे बहैत बागमतीक बात तँ बुिझ रहला अिछ मुदा जैठामसँ धार सभ िनकलल अिछ वा दोसरमे जा-जा िमलल अिछ से निह बुिझ पेब रहला अिछ। तँए जाबे ओ नइ बुझता ताबे असल बात निह बुझता। लखन बाजल- “बाबा, हमसब खुदरा वेपारी छी। कम आँट-पेटक कारोबार अिछ। मुदा अह~क नजैरमे थौक वेपारी सभ छैथ, हुनका सबहक कारोबार करोड़ो-अरबोमे छैन, तँए हुनकर एक-दू Iितशत करोड़ो-अरबो आमदनीक भेल आ हमरा सबहक हजार-बजारक कारोबार अिछ तँए सौ-सÎकड़ आमदनीक भेल।” ओना अपना जनैत लखन नीक जक~ अपन िवचार बुझौलकैन मुदा राधे_ याम बाबाक मन नीक जक~ नइ बुिझ पेलकैन। तँए असमनजस करैत राधे_ याम बाबा बजला-

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“हमरा ते होइए जे सभ वेपारीक चािल-ढािल एके रंग अिछ, मुदा तोहर िवचार तँ...।” राधे_ याम बाबाक पेटक बात लखन बुिझ गेल। बाजल- “बाबा, केना कोन वौसक दाम बनैए ओ बड़ भारी अिछ। ओकरा कहैमे बड़ देरी लागत मुदा एकटा बात नजैरपर-के दइ छी।” लखनक बात सुिन राधे_ याम बाबा ठमकला। पाछू हटैत बजला- “खाइ-पीबैक बेर अिछ, तँए अनेरे गप-स“ पमे नइ गमाबह। जइ काजे ‘कलह तेकरा अगुआबह।” गप-स“ पक ममे लखनक मन जेना भिर गेल होइ तिहना बाजल- “बाबा, जखन दुनू गोरे बैस िवचािरये रहल छी तखन काजो हेबे करत। मुदा एकटा बात पछुआएल अिछ से पिहने सुिन िलअ।” राधे_ याम बाबाक मनमे भेलैन जे भने पिहने वएह सुिन ली। जखने मनक बात मनसँ िनकलतै तखने ने मन खाली हेतइ। जइमे कोनो बात आिक नव िवचार रखैयोमे बेसी गरगर हएत। बजला- “पिहने डोिरयेलहे िवचार सq पÀ करह। पछाइत नवका काजक गरे करब।” लखन बाजल- “बाबा, सड़कक काते-काते पेÏोल-डीजलक दोकान सभ देखते िछऐ। दस लाख-बीस लाख लीटर पेटरौलो आ डीजलोक ) टॉक ओकरा सबहक अिछ। अखन तक वेपारी सभ मुनाफा लइत जइ दरमे िबकरी कऽ रहल अिछ, ओ बारह बजे राितमे अZ हारे-अZ हारमे दू-‘िपया, तीन ‘िपया Iित लीटर बिढ़ जाए, जइसँ हजारक कोन बात जे लाखो-करोड़ो अपने चिल अबैए। से हमरा सभक• थोड़े औत। चालीस बख/सँ धिनय~- िमरचाइ-हरदी-आदी साइिकलपर लािद गामे-गाम घुिम-घुिम बेचै छी तखन सौ-सैकड़ मुँह आँिख देखै छी।” एकाएक राधे_ याम बाबा जेना िनण‚यक दौड़मे पहुँच गेला तिहना बजला- “पिरवार चलै छह िकने?” पिरवारक बात सुिनते लखन बाजल- “से ने िकए चलत। िधया-पुताक• पढ़ौनाइ-िलखौनाइ, िबआह-दान जेते भेल से तँ किरते आिब रहल छी। अखनो सात गोरेक पिरवार चलैबते छी।” लखनक बात सुिन बगलमे ठाढ़ सुधनी दादी बजली- “लखन िक कोनो आइए-सँ भौरी करैए, पाबैन-ितहारमे केते गोरेक ऐठाम खेबो करैए आ अपनो खुऐबते अिछ िक।” सुधनी दादीक समथ/न पेब लखन समरिथत होइत (समथारित ) वÐप) बाजल- “दादी, कमसँ कम एक साए पिरवारसँ खाएनो-पीन रखने छी आ बेटा-िबआहमे बिरयाती आ बेटी-िबआहमे समािजक सq बZ ध सेहो ऐछे। केकरो बेटीक िबआह होइ छै ते मास िदन पिहनिह किह दइ िछऐ जे मर- मस लाक िचZ ता छोिड़ आन िचZ ता करब। तिहना माइयो-बापक mा©मे किरते छी।” लखनक बात सुिन राधे_ याम बाबाक मन जेना भिर गेल होिन तिहना नरमाइत बजला-

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“अखन खाइ-पीबैक बेर अिछ लखन। पर-पनचैती तँ िनचेनीक काज छी, मुदा तैयो जइ काजे तोहूँ अन-पािन ितयागने छह आ हमहूँ ितयागने छी से पिहने करह।” अपन सभ िवचारक• मनमे कितयबैत लखन बाजल- “बाबा, पिहने रिसयारीवाली किनय~क• बजा िलअ। सोझा-सोझी गप नीक होइए।” बगले पिरवारक रिसयारीवाली, तँए सुधनी दादी दरब¬ जेपर सँ शोर पाड़ैत बजली- “हइ रिसयारीवाली, कनी एमहर आबह।” अखन तक रिसयारीवालीक• ई नइ बुझल जे पनचैती अपने ऊपर अिछ। मनो िनरिवकार। िनरिवकार ऐ दुआरे जे कोनो गलती केने निह छेली। रिसयारीवाली आिब सुधनी दादीक पँजरा लिग ठाढ़ भेली। रिसयारीवालीक• देखते लखन बाजल- “बाबा, भोरे-भोर बोहिनय•-काल रिसयारीवाली गािरसँ उकैट देलैन। मुदा हम िकछु बजलॱ निह। बोहनी- पहर छल। जँ भोरे जतरा कुजतरा भऽ जइतए ते भिर िदन गािरये-फ¬ झैत ने सुनैत रिहतॱ। मुदा जखैनसँ सुनलॱ तखैनसँ मनमे क~ट जक~ नइ गड़ल अिछ सेहो थोड़े निह...।” राधे_ याम बाबा बजला- “लखन तोहर बात नीक जक~ नइ बुझलॱ िकए तँ जिहना सॱसे रामायण एकटा छ“ पयमे सेहो कहल गेल अिछ, मुदा रामायिणक िवचारधाराक• जँ िजनगीक नजिरये बुझब तँ ओ सॱसे िजनगीक छी, तिहना तोहूँ एËे सूरेमे सभ बात बािज गेलह। जइसँ नीक जक~ निह बुिझ पेलॱ। पिहने रिसयारीए-वालीक गप सुनह।” रिसयारीवालीक• पँचवेदीमे ठाढ़ होइत देख लखनक मनक अदहा दद/ मनक मेटा गेल। बाजल- “भने अह~ कहिलऐ, बाबा।” तैबीच सुधनी दादी रिसयारीवालीक• चिरयबैत बजली- “िनधोखसँ बाजह। कोनो झूठ-फूस नइ बिजहह। पंचवेदीमे ठाढ़ छह।” रिसयारीवाली बजली- “लखनक• िकछु निह कहलॱ से बात नइ अिछ। बजलॱ ज‘र मुदा गािर निह पढ़िलऐ।” ओना लखनक मनमे ईहो उठैत रहै जे पिरवारोमे जखन कनी-मनी भाइए जाइ छै एना समाज तँ ओइसँ नमहर अिछए। तैसंग ईहो तँ ऐछे जे अही समाजक बीच ने जीबो करै छी आ सुख-दुखक गपो-स“ प करै छी। ओना, ईहो िवचार लखनक मनमे निचते रहै जे भोरका समए रहै बेसी लोक सुतले छल, तँए िकयो सुननॱ ने हएत। आ जँ सुननॱ हएत तँ मने-मन िवचािरये नेने हएत जे भोरका समैमे िकयो अनका थोड़े कहने हएत। तँए लखनोक मनक िचतपन कनी िन¢ च~ भेले जाइत रहइ। मुदा पँचवेदीमे जँ फुिसयाह बिन जाइ सेहो केहेन हएत। बाजल- “किनय~, अहॴ अपना छातीपर हाथ रिख कऽ बाजू जे ‘कोिढ़या-सरधुआ’ नइ कहने छेलॱ?” रंग-रंगक पिरि) थित राधे_ याम बाबाक आँिखक सोझमे उपि) थत भऽ गेलैन। तैसंग ईहो होिन जे दुइए गोरेक बीचक बात छी, तेसर िकयो अिछ निह जे तीनमे दू-एकक अधारपर िनण/य करब...।

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मुदा लगले मनमे एलैन जे मु^ा ने बेकतीगत भेल। मुदा समाजेक लोक ने दुनू छी तँए मु^ाक संग समाधानोक िवचार िकए ने दुनू गोरेसँ पिहने लऽ ली...। राधे_ याम बाबा बजला- “लखन, तोहूँ िक सोझे भौरीए करैबला वेपारी छह सेहो बात निहय• अिछ। कहुना ते पचास-पचपनक उमेर भाइए गेल हेतह। तॲही पिहने अपन िवचार बाजह।” लखन बाजल- “बाबा, माए जखन जीबै छल तखन ओहो कोिढ़या कहै छल आ घरवाली सेहो केता िदन कोिढ़या कहने हएत तेकर ठेकान निह। तँए कोिढ़याक• छोिड़ दइ छी मुदा सरधुआ जे रिसयारीवाली कहली से जँ हमर सराधे भऽ जाएत तखन सात गोरेक पिरवारक खरचा वएह देती।” अिधयाएल पनचैती होइत देख राधे_ याम बाबा रिसयारीवालीक• पुछलैन- “आब, किनय~ अह~ बाजू।” रिसयारीवाली बजली- “बाबा, खूब भोरे-के लखन आिब दरब¬ जापर सँ िचिचयाए लगै छैथ जे िमरचाइ, धिनय~, हरदी लेब अइ ऐ ऐ ऐ...। से यैह कहथु जे भोरका ओहन कड़कड़ाएल नीनक• जे दुइर करत तेकरा कोिढ़या-सरधुआ किहिलऐ ते कोनो बेसी कहिलऐ जे ओ गािर बुझै छैथ।” रिसयारीवालीक िवचार सुिन लखनक• बुझबैत सुिधया दादी बजली- “लखन, ‘कोिढ़या-सरधुआ’ गािर नइ छी। ओहुना ) Wीगण सभ एक-दोसरक• कहै छैथ। तँए ऐ बातक जँ कुवाथ भेल हुअए तँ ओकरा मनसँ िनकािल िलअ।” सुधनी दादीक चेहरापर सँ नजैर उठा राधे_ याम बाबाक िदस तकैत लखन बाजल- “जाइ छी बाबा।” ◌ श  द सं° या : 2285, ितिथ : 06 अग) त 2017

िWकालदशX मौसम बदैलते मौनसुनक मन बगैद गेल। ओना अछैते आमक बिगया रिहतो भूखले रहल। मुदा भूखो तँ भूख छी, जखने पेटमे लहैर पैसत िक बकबकी शु‘ हएत। भल• बकैमे िकयो बकैन जाइए आ िकयो बfता बिन जाइए। बकनाइक माने भेल ऐ साल [1] आम नइ फड़ल। हजारो बीघाक उपज मारल गेल। उŒ पादनक संग ओहन व) तुक Ñास भेल जेकरा फल कहै िछऐ आ ओ शरीरक माW पेटभरा भोजनेटा

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निह, पौि­ टक आहार सेहो छी। मुदा तँए िक ओ फल नइ फड़ैक कारण कहत? निह, ओ कहत जे लोक तेते ने पपीयाह भऽ गेल अिछ जे सभटा अमृत फल नक/ िदस जा रहल अिछ...। ओना, िवचारक• रह) यपूण/ मानलो जा सकैए मुदा जखन लोक रह) य गढ़ैक लूिर सीख लेत तखन ने रह) यक रह) य बुझत। से तँ अिछ निह, अिछ तँ ओहन लोक बेसी जे खेत रिहतो पड़ा कऽ नोकरी करए चिल गेल आ खेत रिह गेलै गाममे। जखन खेत छोिड़ पड़ा गेल तखन ओइ खेतक जे भिवतÇ य छै सहए ने हएत। तँए िजनगी भिरक एËे बेर खेती करैक िखयालसँ आम-कटहरक खेती कऽ लेलक। आम खाइले आ मचानपर बैस बरहमासा गबैले दस िदन गाम अबैए। मुदा गाममे ओहन लोकक किमयÒ तँ निहय• अिछ जे गामक उÀैत नइ चाहैए। भल• ओ ऐ बातक• बुझैत हुअए वा निह बुझैत हुअए जे बेकतीक िवकास माWसँ देश वा गामक िवकास निहय• हएत, जाबे िक ओकरा सामुिहक-समािजक ‘पमे नइ आनल जाएत। बरसाती मौसमक आगमन होइते बरसा तेना झड़झड़ा गेल जे बािढ़क ‘प पकैड़ लेलक। ओना, बुढ़- बुढ़ानुसक कहब छैन जे जँ अदरे न\Wमे भूिम भिर जाए तँ ओ नीक भेल। मुदा ऐठाम I_ न उठैए जे भूिम भरैक की ‘प। भूिम अनेको िक) मक अिछ। केतौ पोखिरक ‘पमे अिछ तँ केतौ डोह-डाबर आ कोचािढ़क ‘पमे। केतौ चौरक ‘पमे तँ केतौ नीचरस जमीनक ‘पमे अिछ। जँ चौर वा नीचरस जमीन अगते पािनसँ भिर जाएत तखन ओइ खेतक• अबािद केना सकै छी। जेकर अनेको कारणमे बीआक अभाव सेहो अिछए। ऊपरका भूिम जे खेतीक लेल अिछ ओकरा अबादैले जँ भूिम भरत तँ नीचला खेत डुिम जेबे करत। मुदा जे हुअए आइ हम एकैसम सदीक िकसान छी। हमरा बीच साइबेिरयासँ लऽ कऽ आ) Ïेिलयाक सहारा तक आ जापानसँ लऽ कऽ चीन तकक खेतीक जानकारी अिछ। तैठाम अपन ि) थित देखैत ने अपनो सभ करब। अिधक बरखा भेने गाममे पािन जबैक गेल। पािनक िनकासक समुिचत बेव) था निह। तैसंग धार-धूर बीचक गाम छीहे। ओना हमरा गाममे नािमत धार एकोटा ने अिछ, खाली एकटा चिरमिसया सुपेन [2] अिछ। मुदा ओहो किनय•-मिनय• सीमाक भीतर घुसल अिछ। खाएर जे अिछ मुदा एते तँ ऐछे जे चािर कोस पूब कोसी आ दू कोस पि¢ छम कमला बीचक गाम छीहे। तँए दुनूक भीतर जे जटा-जूट भेल भुतही िबहूल, गहुमा, बलान इŒ यािद धार नइ अिछ सेहो निहय• कहल जा सकैए। तँए सोलहÀी धारक कातक गाम निहयÒ तँ धारक पेटक गाम कहले जा सकैए। ओना गामक बनाबटो आन गामसँ िभÀ अिछए। िभÀ ई अिछ जे कोनो गाममे नीचरस जमीन कम अिछ आ ऊचरस बेसी अिछ। तैसंग उ‰रसँ दि¢ छनक ढलान जमीनक अिछये जइसँ उ‰रमे नेपाल तकक पािनक बहाव भाइए जाइए। हमर गाम एक तँ सघन अवादीबला गाम छी जइ अनुपातमे जमीन कम अिछ। तैसंग गामक जे बनाबट अिछ ओ िविचW अिछ। गामक चा‘कात चौर जमीन अिछ, जे गामक कुल खेती-जोकर जमीनमे आधासँ बेसी अिछ। ऐबेर अगते बरखा भेने गामे जलोदीप भऽ गेल। संगे बाहरी पािनक आमदनी सेहो भेबे कएल। जइ अनुपातमे पािनक आमदनी गाममे भेल तइ अनुपातमे िनकास नइ अिछ जइसँ पनरह िदनसँ गामक समु¢ चा खेत डुमल अिछ। गामक दशा देख अपन बेथाक• सामुिहक बेथा मािन सवुर केनिह छी। ओना गामक खेत-पथार डुमने सबहक बेथा एके रंग नइ अिछ। कम-बेसी तँ अिछए। माने ई जे जे पिरवारक संग बाहर जा नोकरी करै छैथ हुनकर बेथा, जे गामेमे रिह नोकरी करै छैथ हुनकर बेथा आ जे सोलहÀी खेतीक• जीिवका बना जीब

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रहला अिछ हुनकर बेथामे अZ तर अिछए। एहने लोक–माने सोलहÀी खेतीक• जीिवका बना जीिनहार–देवी काका सेहो छैथ। ओना हमर घर दोसर टोलमे अिछ आ देवी कËाक घर दोसर टोलमे छैन, मुदा बातो-िवचारमे आ जीिवको ‘पे गढ़गर सq बZ ध दुनू गोरेक बीच अिछए। अपने छोट िगरह) त छी तँए नोकसानो कम भेल मुदा देवी काका कम जमीन रिहतो नमहर िगरह) त छैथ तँए हुनका बेसी नोकसान भेबे केलैन अिछ। कम जमीन रिहतो नमहर िगरह) त बनैक कारण देवी कËाक छैन जे सिदकाल िवचारोसँ आ काजोसँ गामक उÀैितक पाछू लागल रहै छैथ, तँए अनेको रंगक अÀक खेतीक संग तीमनो-तरकारी, फलो-फलहरी आ मालो-जाल पोसनिह छैथ। जइसँ सिदकाल अपन िजनगीमे रमल रहै छैथ। मनमे भेल जे खुशहालीक समैमे सभ िदन एक-आध घZ टा एकठाम बैस अपनो आ समाजोक िवषयमे दुनू गोरे गप-स“ प किरते आिब रहल छी, अखन तँ सहजे क­ टहालीक समए आिब गेल अिछ, तँए भ•ट करैले जाइ। एक तँ खेत-पथार पािनमे डुमने काजो पतराएले अिछ जइसँ बेसी बैसारीए रहैए, दोसर बेर-िबपैत पड़ने भ•ट करब सेहो ज‘री बुिझ पड़ल। घर परक काज सq हािर प¾ीक• कहलयैन- “देवी काकासँ भ•ट केने अबै छी।” प¾ी कहलैन- “पािन-बुÀीक समए छी, बेसी देरी नइ लगाएब।” प¾ीक िवचार सुिन देवी काकासँ भ•ट करए िवदा भेलॱ। जू‰ा-च“ पल नइ पिहरलॱ। तेकर कारण छल जे एक तँ र) तामे थाल-खीच बेसी अिछ, दोसर तीन ठाम र) ता टुटल छै जइसँ पािनक रेत सेहो चलैए। उदास भेल देवी काका दरब¬ जापर बैसल मने-मन िवचािर रहल छला जे बखÓक मेहनत न­ ट भऽ गेल। खाली मेहनतेटा रहैत तखन संतोष होइमे बाधा नइ होइत। िकएक तँ बुिझितऐ जे समैक संग मेहनत गेल तँ गेल, आगू समैक संग िजनगी चलबे करत। मुदा तेतबे नइ अिछ। जखन घुमै-िफरैक उमेर छल तखन आन-आन गाम आ आन-आन िजलासँ लऽ कऽ आन-आन रा¬ य सभसँ तरकािरयो आ फलोक गाछ आिन-आिन सं¤ह केने छेलॱ, ओ सभटा चल गेल। आब फेरसँ सं¤ह करब से संभव निह अिछ। आब घुमै- िफरै-जोकर शरीरमे शिf त कह~ रहल..! ऐठाम आिब देवी कËाक मन चहकए लगलैन। चहकए ई लगलैन जे जेकरा संग-संग िजनगी बीतबै छेलॱ ओ संग छोिड़ चिल गेल जे पुन: आब नइ औत। संगी जक~ जिहना ओकरा पाछू–माने फलक गाछ–अपने लगल रहै छेलॱ, तिहना ओहो ने सिदकाल–अपन-अपन समयानुसार– पौि­ टकक संग ) वािद­ ट फलो दइ छल। जिहना ओकरा (माने गाछ-िबरीछक) संग अपन िजनगी बीतै छल तिहना ने ओकरो िजनगी अपना संग बीतैत रहइ। सहचर जक~ दुनू छेलॱ, मुदा आब ओहन सहचरी बना पएब? निह बना पएब! जँ कनी संभव अिछयो तँ बेसी निहय• अिछ। माने संभव ई भेल जे जँ कोनो उपायसँ गाछो आ बीओ भाइयो जाएत तैयो तँ गामक खेत-पथारक जे ‘प-रेखा बिन गेल अिछ ओ तँ Iितकूल भाइए गेल अिछ। Iितकूल ई जे पूव/व‰X सोचक जिहना सरकारी महकमा तिहना ने ठरो-ठीकेदार आ गामक कतÓ- धतÓ अिछए। जे गाम-समाजक• के कहए जे अपनो नीक-बेजाइक ने काज बुझैए आ ने बात-िवचार। जइसँ गाममे जे पािनसँ दुद/शा हएब शु‘ भेल अिछ ओ लगले थोड़े मेटा जाएत..! ऐठाम अबैत-अबैत देवी कËाक मन ठमैक गेलैन। ठमैकतो फुरलैन जे तखन तँ गामक भिवस अZ हरा जाएत! गामक भिवस अZ हरा जाएत

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तखन अZ हारमे लोकक िजनगी आ जीवन की हएत? की मनुख िवहीन धरती भऽ जाएत आिक धरती िवहीन मनुख। जिहना मनुख िबना धरतीक कोनो मोल निह तिहना ने धरितयोक िबना मनुखक कोनो मोल निहय• रहैए। ओना, िजनगीक अनुकूल अपन-अपन धरितयो होइए। मुदा ऐठाम िकसानी िजनगीक I_ न अिछ। एकाएक देवी कËाक मन ठहकलैन। ठहैकते िवचार ठहिकयेलैन। ठहिकयेलैन ई जे जेकरा हम पूव/वतX सोच-िवचार किह अपनाक• परवतX बुझै छी, ऐमे केतौ-ने-केतौ गुण छीपल अिछ जेकरा हम या तँ िबसैर रहल छी वा दृि­ टहीन छी..! दृि­ टहीन मनमे अिबते देवी कËाक नजैर िWकाल दश/न िदस बढ़लैन। िWकाल दश/न िदस बिढ़ते िWकाल िजनगीक इजोत भक-दे मनमे एलैन। अिबते िवचार उठलैन जे ने आइये एहेन पिरि) थितसँ लोकक• भ•ट भेल अिछ आ ने लोक अपन िजनगीक पाछू तकैत रिह गेल बिक आगू बढ़ैत गेल। भल• िजनगीए िकए ने केतौ पछुआ गेल होिन, आिक िजनगी पछुएलासँ िवचार-िववेक धिकया गेल होिन मुदा सोलहÀी मिर गेलैन सेहो तँ निहय• कहल जा सकैए आ जँ से रहैत तँ हजारो बख/क िजनगीक ‘प-रंग आइ नइ देखतॱ। से तँ देख रहल छी। एकाएक देवी कËाक मनमे िजÔासा जगलैन। िजÔासा जिगते िजÔासु जक~ पूव/व‰X िजनगीक िजÔासा केलैन। पूव/व‰X िजनगीक िजÔासा किरते मनमे उठलैन- जे धरती साइयो-हजारो िWकालदशX पैदा केने अिछ ओही धरतीपर ने आइ हमहूँ ठाढ़ छी! देवी काकाक• जेना हूबा जगलैन। हूबा जिगते िWकालदशXपर नजैर अँटकलैन। मनमे उठलैन- िWकालदशX की? भूत, वत/मान आ भिवसक• जनिनहार। भूत तँ भूत भेल जेकर िलिखत-अिलिखत इितहास छै, वत/मान सोझामे अिछ मुदा भिवस तँ हेराएल अिछ ओकरा केना िबसवासक संग तािक लेब..! ऐठाम आिब देवी कËाक िवचार महाभारतक साइयम _ लोक जक~ चौमुिड़या गेलैन। चौमुिड़याइते िवचार पनपलैन। पनैपते मन कलशलैन। कलैशते बदलल िवचार–माने पिरमािज/त िवचार–मनमे जगलैन। जगलैन ई जे जीता िजनगीमे िWकाल तँ अिबते अिछ। माने ई जे कखनो क­ टकर समए अबैए तँ कखनो समगम आ कखनो नीकमे नीक। अही तीनू समैक बीच िजनगी चलैए। मुदा छी तँ तीनू िजनगीए, तँए तीनू िजनगी जीबैक लूिर चाही। जखने जीबैक लूिर सीखब तँ नीक-बेजा समए अबैत-जाइत रहतै आ िजनगी अपना गितये कखनो दौड़ कऽ तँ कखनो डेगे-डेगी तँ कखनो ठाढ़े-ठाढ़ चलबे करत। देवी कËाक मनमे रसे-रसे उदपन उठए लगलैन...। तैबीच देवी कËाक लगमे पहुँच पएर छुिब Iणाम केिलऐन। ओना मने-मन काका िपताएल जक~ रहबे करैथ मुदा सभ िदन नीक अिसरवाद देिनहार आइ केना अपन दुख हमरेपर झािड़ देता। हम िक कोनो आन गाम रहै छी जे ओ नइ जनै छैथ। पएर छुिब गोड़ लािग चािनपर हाथ लेलॱ मुदा बजलॱ िकछु ने। ओना Iणाम करैक तीनू चलैन अिछए। केतौ पएर छुिब गोड़ लािग गोड़ लागब सेहो बाजल जाइए। मुदा ियागत िजनगी जनिनहार िबनु बजनॱ ओते बुिझ कऽ मािन लइते छैथ। केतौ दुनू हाथ जोिड़ Iणाम कहल जाइत आ केतौ खिलये मुह• सेहो Iणाम कहले जाइए। मुदा जे अिछ देवी काका हाथ उठा माथक• थपथपबैत बजला- “भगवान सभक• इ­ ट करथुन।” कËाक अिसरवाद सुिन मन झुझुआए लगल जे अपना िदससँ काका िकछु निह किह भगवानपर फेक देलैन। भगवान की इ­ ट करता! ओ तँ अपने इ­ ट-अिन­ ट दुनू छैथ। मनमे रंग-रंगक खटुका सभ उठए लगल जे देवी काका बुिझ गेला। बजला- “गौरी, मन िकए खट-मधुर भेल छह?”

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बजलॱ- “मन िकए खट-मधुर हएत। अपनेक अिसरवाद नीक जक~ नइ बुिझ पेलॱ।” देवी काका बजला- “बौआ, दुिनय~मे बुझहक आिक गाम-समाजमे दू रंगक लोक अिछ। ओना सगपितया लोक सेहो बहुत रंगक अिछ। सगपितया लोकक माने भेल ओहन लोक जे कनी इ­ टो केलैन आ कनी अिन­ टो केलैन। तिहना िकयो अिन­ ट कम केलैन आ इ­ ट बेसी केलैन, आ िकछु एहनो लोक छैथ जे इ­ ट कम आ अिन­ टे बेसी करै छैथ।” िब¢ चेमे बजा गेल- “केना बुझब जे बेसी इ­ ट करैबला छैथ आिक बेसी अिन­ ट करैबला?” हमर बात सुिनते, जेना चौरीमे केशौरक पÀा भेटते उखारिनहारक• िबसवास जिग जाइए जे आब केशौर भेटबे करत आ उखड़बे करत, तिहना िबसवासक संग देवी काका बजला- “जेकरा मनमे जेहेन अिभ­ ट रहल से तेहेन इ­ ट वा अिन­ ट करैए।” देवी कËाक कनी-मनी बात बुझबो केलॱ आ कनी-मनी निहयÒ बुझलॱ। मुदा मनमे खॲचार पड़ए लगल जे पनरह िदनक िजनगीक गप करए एलॱ आ अनेरे कथा-िपहानीमे वौआ रहल छी..! अपन िवचारक• मोड़ैत बजलॱ- “काका, ऐबेरक समए तँ अजीब भऽ गेल।” ‘अजीब’ सुिनते देवी कËाक मन जेना हुरकलैन तिहना हुरकैत बजला- “अजीब भेल िक सजीब से एना नइ बुझबहक।” देवी कËाक आŒ मा जिहना परमाŒ म ) व‘प छैन तिहना बुिधयो Iवु© छैन आ िवचारो परम छैZ हh तँए मन सकपका गेल जे िहनका केना कहबैन जे काका अह~क आगूक िजनगी गरथाहमे पिड़ गेल। जँ से कहबैन आ जँ ई किह दैथ जे एके गाममे ने दुनू गोरे छी तखन जिहना तोहर चलतह तिहना ने हमरो चलत। तइसँ हुनकर बेथा-कथा थोड़े बुिझ पएब। तखन तँ अपने िवषयमे िकए ने किहऐन जे जे सम) या अपनो अिछ सएह ने वृहत् ‘पमे हुनको छैन। ऐसँ एते तँ िवशेष लाभ हेबे करत जे जखने कोनो सम) याक समाधानक वृहद् ‘प दृि­ टगोचर हएत तखने ओ सम) या िब¢ चेमे दहलाए लगत। जखने दहलाए लगत तखने ओकरा या तँ हाथेसँ वा कोनो मेही व) तुसँ छािन कऽ कातमे फेक देब। िवचारमे मजगूती आएल। बजलॱ- “काका, आब जीवन किठन भऽ गेल, तँए जैठाम सुवन भेटत तैठाम चिल जाएब।” जिहना देवी काका कान रोिप सुनलैन तिहना आँिख उठा देखबो केलैन। I_ नक उ‰र दैत बजला- “बौआ गौरी, जखन अपन एते गेल तैयो जी-रोिप अपनाक• ठाढ़ केने गाममे छी, मुदा तोहर तँ बड़ छोट सम) या छह, तूँ िकए गामसँ पड़ेबह। हँ, सुवनक बात कहलह,ओ गामोमे बिन सकैए वशतÕ जँ जी-जान रोिप जीवनक• पकैड़ लेबह।”

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ओना देवी कËाक सभ गप सुनलॱ मुदा बुझलॱ अदहे-िछदहे। अदहा-िछदहा ई जे गामोमे सुवन बिन सकैए, एहेन िवचार मनमे आइ धिर उठले ने छल जे एको-आध िमनट ऐ िवषयक िवषयमे िवचािरतॱ। तँए नइ बुझल छल, जइसँ नीक जक~ नइ बुिझ पेलॱ। ओना, कËो बुिझ गेला जे गौरी नीक जक~ हमर िवचार नइ बुिझ पौलक। तैबीच बजलॱ- “काका सुवन..?” ‘सुवन’ बािज वाणीक• ऐ दुआरे रोकलॱ जे जँ एहेन बात बजा जाइए जइसँ I_ ने खिJ डत भऽ जाइए तखन तँ उ‰रो खिJ डत हेबे करत। जखने उ‰र खिJ डत हएत तखने िकछु-ने-िकछु िवचारो आिबये सकैए जे उतारक हुअए। मुदा ऐठाम तँ I_ नक• उतारैक निह बि क चढ़बैक अिछ। जे िवचार देवी कËाक मनमे पिहनिह जिग चुकल छेलैन। बजला- “बौआ गौरी, जिहना सरयुग नदीक तटपर बसल अयो¨ या अिछ, जे रामक जZ मभूिम रहल तिहना यमुना नदीक तटपर वृZ दावन सेहो अिछ जे कृ­ णक लीला-धाम रहलैन। तिहना गामोमे जखन सुिवचार जगत तखन सुकम/ सेहो जगबे करत। जखने सुकम/ जगत तखने सुकृि‰ ‘पक कम/भूिम बनत। आ जेना-जेना सुकृि‰ सुवृि‰ बनैत जाएत तेना-तेना जीवन सुवन िदस बढ़ैत जाएत।” ओना देवी काका तीन जुगक इितहास सुना देलैन मुदा अपन मन तँ जबदाह भाइए गेल छल। जबदाहो केना ने होइत, जखन पािनमे डुमल गामे जबदाह भऽ गेल अिछ तखन िक अपने गामसँ हटल थोड़े छी जे ओइसँ वंिचत रिहतॱ। जबदाह मन रहने नीक जक~ देवी कËाक िवचार नइ बुिझ पेलॱ। मन घुिरया गेल जे अपन िजनगी जे जबदाहसँ जबदी िदस बिढ़ गेल अिछ तेकर की उपाय हएत। तँए िवचारक• मोड़ैत बजलॱ- “काका, बड़ सेहZ तासँ प~चटा केराक गाछ केरलसँ अनने छेलॱ। प~चो पािनमे डुिम कऽ न­ ट भऽ गेल!” घावपर मलहम लगबैत देवी काका मुि) कयाइत बजला- “तोरो अपना इलाकामे केराक गाछ नइ भेटलह जे देशक सीमापर सँ आनए गेलह।” एक तँ मन केलहा काजपर–माने केरलसँ केरा गाछ आिन रोपैक Iिया तकमे–नचैत रहए तैपर तेहेन बात देवी काका किह देलैन जे िवचारे उनैट गेल। बजलॱ-“काका, सीमा-सुमीक बात नइ अिछ, केरासँ िसनेह अिछ। रामे_ वरम गेल रही। ओइठाम सॱसे बजारमे सभसँ लिलचगर केरे बुिझ पड़ल।” िब¢ चेमे देवी काका टोकला- “तखन तँ रामे_ वरम सो होअना फलहारे केने हेबह।” हमरो मनमे रामे_ वरम् ) थान निचते छल, तहूमे केराक बजारक बात, मन िमठाएल रहबे करए, बजलॱ- “काका सेहZ ते एक हŒ था कीनलॱ। हŒ थोक• लोकक हाथ जक~ प~चे आँगुरक छल, ब‰ीस छीमीक हŒ था छल। ओ दZ तार छीमी। नीको आ स) तो बुिझ पड़ल। खूब खेलॱ।” िब¢ चेमे टोकारा दैत देवी काका बजला- “खेबे टा केलह आिक ओकर सुआदो पौलह?” हमरो सुतरल। बजलॱ-

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“िबनु सुआद पौनिह एतेक दूरसँ बैजनाथ बाबाक कामौर जक~ गाड़ीमे केराक गाछ टँगने एलॱ।” हमर बात सुिनते देवी काका आगू बिढ़ बजला- “जखन रामे_ वरम्-सँ केराक गाछ अनलह तखन जँ किनय• आरो आगू बिढ़ लंका पहुँच जइतह तखन तँ हनुमानजी जक~ आरो फल-फलहरी अनबे किरतह िकने?” िवचारक धारामे िवचड़ैत रहबे करी, अनासुरतीए बजा गेल- “तइमे कोन राहु-केतु बाधा होइत।” तैबीच दुग‚ काकी चाह नेने पहुँचली। चाह देख मन हलैस गेल मुदा उदासीपन छाड़ने छल, जे दुग‚ काकी आँिक लेलैन। जिहना डाf टर ऐठाम आिक अ) पतालमे साधारण रोगबला रोगी पैघ रोगसँ रोगाएल रोगीक• देख मने-मन खुशी होइत जे जखन एहेन रोगी बँिच सकैए तखन तँ हम बँचले छी, तइले अनेरे मनक• ख¼ा केने रहब नीक निह, तिहना आi) त करैत दुग‚ काकी बजली- “ब¢ चा गौरी, हमर बड़का काका सिदकाल पोता सभक• कहैत रहिथन जे ‘नअ दहार तखनो ने िकछु उघार’, तखन एक दहार की िबगार...।” दुग‚ काकीक बातो सुनैत रही आ चाहो पीबैत रही। एक तँ सुअदगर चाह, तैपर दुग‚ काकीक मधुराएल िवचार सुिन आरो मन मीठा गेल। बजलॱ- “काकी, जखन नािZ ह-नािZ हटा चु¼ी घोदा-माली भऽ आिड़-धुरसँ िनकैल बािढ़क वेगमे हेलैत समुl तक पहुँच जाइए, तखन अपना सभ तँ कहुना मनुख भेलॱ िकने...।” हमरा िवचारमे दुग‚ काकीक• की भेटलैन से तँ ओ जानैथ मुदा मन हिरयरीसँ भिर-पूिर ज‘र गेलैन। जेकरा देख देवी काका िवचार िछनैत िब¢ चेमे बजला- “बौआ गौरी, यएह िवडq बना अिछ!” देवी कËाक आगूक िवचार सुनैले अपनाक• साकeच केलॱ। साकeच करैक कारण मनमे उठल जे नीक िवचार सुनैले जिहना अपन कानक• कनखारऽ पड़ैए तिहना ने िधयानक• िधयानी सेहो बनबए पड़ैए। सएह करैत बजलॱ- “की िवडq बना काका?” हमर बात सुिन देवी कËाक मनक िवचार जेना हुमैर कऽ कुदए चाहलकैन तिहना देवी कËाक मुखड़ामे लौकलैन। लौकते बजला- “बौआ, जिहना पिवW लोकक देवालपर देवालय ठाढ़ अिछ तिहना गुँहचोरा-ले सेहो अिछए ने।” देवी कËाक िवचारक• नीक जक~ नइ बुिझ पुछलयैन- “से केना?” िवहुँसैत देवी काका बजला-

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“ओना, बेकतीक• भीतर [3] सेहो सुकृि‰ कुकृि‰ अिछ, मुदा ओ बेकतीक• Iभािवत करैए। मुदा ऐठाम से निह, ऐठाम समािजक I_ न अिछ। समाज सेहो नीक-अधला करैबलाक समूह छी जे िकछु अÔानतासँ सेहो आ िकछु ढीठपनासँ सेहो होइए। जैठाम अÔानता होइए ओ \q य अिछ ओना \q योक सजाए चेतौनी ‘पमे ज‘री अिछए। मुदा जैठाम ढीठपनासँ होइए तैठाम समूहक• जिग कऽ जगबए पड़त। आ जँ से नइ हएत तँ समाज जेते उठए चाहत ओते िन¢ च~ खिस-खिस पड़त। तँए...।” िकछु-िकछु िवचार देवी कËाक बुझबो केलॱ आ िकछु-िकछु निहयÒ बुझलॱ। मुदा िब¢ चेमे प¾ीक बात मन पिड़ गेल जे बेसी देरी नइ लगाएब। तँए मन कछमछा लगल। बजलॱ- “काका, हिर अनZ त हिर कथा अनZ ता अिछए। अखन छु¼ी िदअ।” मु) की दैत देवी काका बजला- “छु¼ीए-छु¼ी छह। मुदा छु¼ीए-मे कहॴ अपने ने िजनगीक धारमे छुिट जइहह।” देवी कËाक िवचारक• जँ नीक जक~ बुझैत जइतॱ तब ने, से तँ बुिझये ने पेब रहल छेलॱ। तँए िसनेमाक कटल रील जक~ िवचार किट-किट जाइ छल। मुदा तैयो बजलॱ- “जीता-िजनगी जँ ई सभ नइ हएत तँ िजनगीक परी\ा केना हएत।” हमर िवचार देवी कËाक संग दुग‚ काकीक• सेहो नीक लगलैन। सह दैत दुग‚ काकी बजली- “दुग‚ दुग/त हािरणी छिथये िकने।” ◌ श  द सं° या : 2838, ितिथ : 25 जुलाइ 2017

[1] एËे सीजन आम फड़ैए तँए साल [2] सुपण‚ [3] िजनगीक ियाक बीच

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mी नZ द िवलास राय - दूटा लघु कथा हमर लॉटरी िनकलल आ िश\ाक अिZ त म उ^े_ य

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१ हमर लॉटरी िनकलल झंझारपुर रेलबे टीशनक बगलमे एकटा दवाइ दोकान अिछ, नाओं िछऐ- नवीन फामÕसी। ओइ दोकानक ई िवशेषता छै जे िनम/लीक डाf टर पुरजा हुअए वा दरभंगाक डाf टरक, फुलपरासक डाf टरक पुरजा हुअए वा तमुिरयाक डाf टरक सभ दवाइ भेट जाएत। तँए दोकानमे खरीदवालक भीड़ हिरदम लगले रहैत अिछ। हमरो प¾ीक इलाज चिल रहल अिछ। डाf टर साहैब कहने रहिथन जे छह मास धिर दवाइ खाए पड़तैन। प~च मास तँ बीित गेल आब छठम मासक दवाइ चलतैन। तँए हमहूँ दवाइ कीलैले झंझारपुर िवदा भेलॱ। चािरये बजे भोरबामे उिठ कऽ तैयार भऽ भपिटयाही ) कूल लग मु° यमंWीबला सड़कपर एलॱ। ओइठामसँ टेq पू पकैड़ परसा हा टपर पहुँचलॱ। परसा हा टपर िटकट कटा छह बिजया Ïेनक Iती\ा करए लगलॱ। बगलमे बैसल एक गोरे बाजल- “Ïेन आइ िनम/ली सबेर गेल अिछ तँए छह बजे धिर ऐठाम पहुँच जाएत।” मोबइलमे समए देखलॱ, पौने छह बजै रहए। ठीक छह बजे Ïेन परसा हा टपर पहुँचल। हम एकटा कोठरीमे चिढ़ गेलॱ। सबेर रिहतो Ïेनमे भीड़ छल। Ïेन घोघरडीहा टीशन पहुँच कऽ ‘कल। एकटा मिहला जे सलवार-समीज पिहने रहए, हमरे कोठरीमे माने जइ कोठरीमे हम बैसल रही, ओहीमे चढ़ल। घोघरडीहा टीशनपर Ïेनमे भीड़ बिढ़ गेल दल। ओ मिहला जैठाम हम बैसल रही, ओहीठाम आिब चा‘िदस िहया कऽ तकलक। केतौ खाली जगह नै देख हमरसँ कहलक- “बाबा, कने हमरो बैसए िदअ।” ओइ मिहलाक बाबा कहब सुिन हम छगुZ तामे पिड़ गेलॱ। आिखर हमरा ई औरत बाबा िकए कहलक। भाइजी कहैत तँ ठीक छेलइ। कËो कहैत तँ ओतेक सोच निह होइतए। बाबा िकए कहलक..! हम िहया कऽ िन¢ चा-सँ-ऊपर धिर ओइ मिहलाक• देखए लगलॱ। तैबीच ओ फेर टेकलक- “एना की िनंगहािर-िनंगहािर देखै छी। किहयो मौगी नै देखने िछऐ की? कनेक घुसकु ने।” आब तँ भेल औरो पहपैट। हमरा भेल जेना कोनो चीज चोिर करैत पकड़ा गेलॱ। हम कनी िखसैक गेलॱ। ओ मिहला हमरा देहमे सिट कऽ बैस गेली। दोसर िकयो रहैत तँ ओइ मिहलाक सटब नीके लिगते। धरमागती पुछू तँ हमरो नीक लगैत मुदा ओ औरत जे बाबा कहने छेली तही सोचमे डुमल रही। सोची जे एतेक बुढ़ भऽ गेलॱ जे ई मिहला हमरा बाबा कहलक..? गाड़ी सीटी देलक आ ससरए लगल। एकटा बीस-बाइस बख/कलड़की जेकरा कोरामे एकटा लकधक साल भिरक ब¢ चा रहै, ओ िखड़की लग “ लेटफाम/पर ठाढ़ छेली, ओइ औरतसँ बजली- “मq मी ठीकसँ जइह•। गाम पहुँचते फोन किरह•।” फेर कोरैला ब¢ चासँ कहली-

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' 232 म अंक 15 अग)त 2017 (वष/ 10 मास 116 अंक 232 ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 28

“बौआ, नानीक• टाटा कऽ िदयौ।” ओ मिहला िखड़कीसँ हाथ िनकािल िहलबए लगली। हमर मन खसल रहए। हम सोचैत रही, आिखर ई मिहला हमरा बाबा िकए कहलक! जखन िक ओकरो नाित-नाितनभेल छै जे अखने देखलॱ हेन। हम ओइ मिहला िदस िहया कऽ तकलॱ तँ बुिझ पड़ल जे ओकर केश रंगल छइ। सलवार-समीज तेतेक कसल रहै जे शरीरक अंग, जे परदामे रहबाक चाही ओ अदहासँ बेसी वेपद‚ भऽ जाइ जखन ओ कनेको िनहुरए। शरीरक रंग एकदम गोर। दोहरा हार-काठ। शरीर ने बेसी मोटे आ ने बेसी पातरे। एकदम छरहर। आँिखमे काज लगौने, कानमे आधुिनक िडजाइनक बाली पिहरने। एन-मेन सोनाक लगइ। एकटा हाथमे गो डेन चेनबला टाटा f वाज/ घड़ी। दोसर हाथमे कीमती चूरी। ठोरमे गाढ़ लाल रंगक िलिपि) टक, नाकमे पाथर पड़ल छक, गरदैनमे मोतीक माला। आँगुर सभमे पाथर पड़ल औंठी। आँिखमे गो डेन Öेमबला च_ मा। कZ हामे पस/ लटकल। हाथमे मेहदी लगौने। जखन ओकरा पएर िदस तकलॱ तँ तिकते रिह गेलॱ। दुनू पैरमे आरत लगौने जे ओकर पैरक सुZ दरतामे चािरचान लगबैत। हमरा कोनो किवक दोहा मोन पिड़ गेल- “न पैरो मh महावर रचाओ गोरी संगमरमर का कलेजा िपघल जाएगा।” हम अZ दाज लगेलॱ, ऐ मिहलाक उमेर कमतीमे 40-42 बख/सँ कम नै हेतइ। मुदा तेना कऽ मेZ टन केने अिछ जे तीस-ब‰ीस बख/क लगैत अिछ। की कहू,मन घोर-घोर भऽ गेल रहए। िकछु सोहेबे ने करए। ताबत ऐगला टीशनपर पहुँच Ïेन ‘कल। हम उतैर गेलॱ। पानक दोकानपर जा ऐनामे अपन चेहरा िनंगहािर कऽ देखलॱ तँ बुझाएल जे अदहासँ बेसी केश पािक कऽ उ¬ जर भऽ गेल अिछ। सोचलॱ, सुआइतई मिहला हमरा बाबा कहलक। फेर सोचलॱ, ओकरो केश तँ रेगलेरहइ। फेर ऐनामे देखलॱ तँ अपन गाल पचकल बुझाएल जखनिक ओइ मिहलाक गाल पुआ जक~ फूलल छेलइ। तहूँ सेव जक~ लाल। फरे ऐनामे देखलॱ तँ आँिख एक हाथ तरमे बुझाएल। पानक दोकानदार टोकलक- “पान खाएब की? केहेन पान खाइ छी, मीठा प‰ा आिक...।” िब¢ चेमे हम कहिलऐ- “नै यौ बाबू, पान नइ खाएब।” दोकानदार पुछलक- “एना िकए कननमुँह जक~ बजै छी? की िकयो ‘पैआ-तुपैआ नै तँ िनकािल लेलक ह•?” “से तँ नै भेल अिछ।” ई कहैत हम ससैर कऽ मोसािफर खानामे आिब एकटा ¸Îचपर बैस गेलॱ। मन हुअए बोम फािर कऽ कानए लागी। हमरा कौलेजक समै गप मन पिड़ गेल। की िजनगी छल। िफ मी हीरोक ) टाइलमे रहै छेलॱ। अिमताभ ब¢ चनक ) टाइलमे बाबरी राखी। अZ दर सुिटंग किर पेZ ट-सट/ पिहरैत रही। आँिखमे किरËा च_ मा रहैत छल। कौलेजक लड़की सभ हमरा राजेशखÀा कहए। एक िदन घटना मोन पिड़ गेल। एकटा

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लड़की जेकर नाओं अलका रहइ, ओ एकटा कागज हमरा कॉपीमे रिख देलक। हम कॉपी खोललॱ तँ ओ कागज देखिलऐ। ओइमे िलखल रहै- आइ लव यू अलका। हम बुझू अकासमे उड़ए लगल छेलॱ िकएक तँ अलकाक• कौलेजक छौड़ा सभ कौलेज f वीन कहैत छेलइ। ओ बड़ सुZ दर छेली। दोसर िदनसँ अलका कौलेज नइ अबैत रहए। पता चलल जे अलका बेमारपिड़ गेल अिछ। बादमे पता चलल ओकर बाबूजी जे पीएनबी बÎकमे मैनेजरक पदपर काज करै छला, हुनकर Iमोशन \ेWीय Iवंधकक पदपर दरभंगामे भऽ गेलैन हेन। तँए ओ सपिरवार दरभंगा चिल गेला। अलका आब दरभंगेमे पढ़त। एक मास तक हम अलकाक गममे गमगीन रहलॱ। ताबेतमे Ïेनक सीटी सुनलॱ। मुसािफर खानासँबाहर एलॱ, गाड़ी टीशनपर पहुँच चुकल छल। गाड़ीमे चिढ़ गेलॱ। परसा हा टपर Ïेनसँ उतैर टेq पू पकैड़ गाम आिब गेलॱ। धोती-कुरता पिहरनिह िबछौनपर जा पिड़ रहलॱ। प¾ी चूि ह लग छेली, ओ देखली तँ लगमे आिब पुछली- “मर! की भेल ह• जे एना िबना कपड़े बदलने पिड़ रहलॱ। मन-तन ठीक अिछ िकने?” हम िकछु निह बजलॱ। हमरा हुअए जे बोम फािर कानए लागी। प¾ी फेर पुछली- “दवाइ आनिलऐ की?” हम तैयो िकछु ने बजलॱ। प¾ी सोचए लगली आन िदन जे झंझारपुर दवाइ आनए जाइ छला तँ अढ़ाइ-तीन बजे धिर घुिम कऽ गाम अबै छला। आइ साढ़े दसे बजे आपस आिब गेला। भिरसक पाकेटमार ‘पैए निह तँ िनकािल लेलकैन। बजली- “‘पैआ ने तँ पॉकेटमारी भऽ गेल?” हम फेरो िकछ ने बजलॱ। हमर प¾ी सोचली जे आिखर ई बजैत िकए ने छिथन। ओ हमरा माथपर हाथ दैत पुछलैन- “माथ ने तँ दुखाइत अिछ?” हम िकछु ने बजलॱ। हमर प¾ी हमर हाथ अपना हाथमे लऽ कऽ बड़ “ यारसँ बजली- “अह~क हमर स“ पत छी, कहू की भेल। एना िकए उदास भऽ कऽ पड़ल छी।” हम कनैत जक~ बजलॱ- “की हम बुढ़ भऽ गेिलऐ।” तैपर हमर प¾ी बजली- “िकए, से िकएक पुछै छी। के अह~क• बुढ़ कहैत अिछ। हम तँ आइ धिर नै कहलॱ हेन।” हम कहिलऐ- “आइ Ïेनमे एकटा मौगी हमरा बाबा कहलक।”

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हम ओइ औरतक पूरा हुिलया अपना प¾ीक• बता देिलऐ। हमर प¾ी ठहËा लगा कऽ हँसल। हँसैत बाजल- “तँ ई बात िछऐ!” हम कहिलऐ- “अह~ िदल खोिल कऽ हँसै छी। हमरा मन होइए जे भोकािर पािड़ कऽ कानए लगी।” प¾ी बजली- “ऐमे केकर दोख। केतेक िदन कहलॲ जे समराट बिन कऽ रहू। मुदा अह~ छी जे खादीक धोती, झोलंगाबला कुरता पिहर कZ हापर गमछा लऽ केतौ िवदा भऽ जाइ छी। ने दाढ़ी कटबै दी आ नेकेशे सीटै छी। तँ बाबा नैकहत तँ बौआ कहत।” हम कहिलऐ- “स±ाट जे कहै िछऐ से कोनो हम राजा महराजाक बेटा छी जे स±ाट बिन कऽ रहब।” तैपर हमर बेटी जे टीशन पिढ़ कऽ आएले छल, बाजल- “पापा, मqमी स±ाट निह ) माट/ कहैत अिछ।” तैपर हमर प¾ी बजली- “हँ, हँ की कहलीही, बु¢ ची असमाट?” हमर बेटी जे आइ.एस-सी.मे पढ़ैत अिछ बाजल- “असमाट नै ) माट/।” हम प¾ीक• कहिलऐ- “अहूँ तँ किहयो काल कहैत रहै छी जे, आब अह~क• के पुछत?” प¾ी हमर हाथ अपना हाथमे लऽ बजली- “उ तँ “ यारसँ मजाकमे कहलॱ।” तैपर हम बजिलऐ- “के कहलक मजाकमे कहलॱ छी आिक...।” िब¢ चेमे हमर प¾ी हमर बात कटैत बजली- “अह~क देह छुिब कऽ कहै छी जे ई गप हम मजाकमे कहलॱ। आब मजाकोमे नै कहब। उठू, मुँह- हाथ धोउ ताबत हम चाह बना नेने अबै छी।” बजलॱ- “अखन हमरा चाह-पान िकछ ने सोहाइत अिछ।” तैपर प¾ी तोष दैत बजली-

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“अह~ एËो िमिसया मनमे टhशन नै िलअ। एËे मासमे अह~क• गोिवZ दा जक~ हीरो बना देब। फेर देखबै जे सोलह सालक लड़की अह~सँ केहेन बेवहार करैत अिछ।” िबहाने भने हमर प¾ी हमरा संग केने िनम/ली एली। पिहने डाf टर रमेश बाबूक f लीिनकपर अनली। डाf टर साहैबक• हमरा देखबैत हमर प¾ी बजली- “डाf टर साहैब, िहनकर तेना कऽ इलाज किर िदयौन जे गाल पुआ जक~ फुिल जाइन।” तैपर डाf टर साहैब कहलिखन- “गाल फुलबेटा निह करतैन बि क सेब जक~ लालो भऽ जेतैन मुदा दवाइक संग खानो-पान नीक हेबाक चाही।” प¾ी बजली- “डाf टर साहैब, अह~ जे-जे कहबै से-से खुएबैन मुदा गाल फुलबाक चाही।” डाf टर साहैब िकछु के“ सूल आ तीन फाइल टॉिनक िलख, खेनाइमे की-की हेबाक चाही से सभ हमरा प¾ीक• समझा देलिखन। डाf टर साहैबक िf लनीकसँ िनकैल हम सभ बजार गेलॱ। बजारमे एक िकलो मनËा, प~च िकलो सेब, प~च िकलो बदाम कीिन प¾ी झोरामे रखली। तेकर बाद f लॉथ इंपोिरयममे जा िवमल सूिटंग-सिट/ंग दू- दूटा पैZ ट-शट/क कपड़ा सेहो िकनलैन। कपड़ा लऽ कऽ हम सभ मॉडन/ टेलरमे जा कऽ नाप दऽ कपड़ा िसबए लेल देिलऐ। प¾ी टेलर मा) टरक• कहलकैन- “िफिटंग एकदम ठीक-ठाक हेबाक चाही।” तैपर टेलर मा) टर जवाब देलिखन- “मैडम, अह~ एËो र‰ी िचZ ता जुिन क‘, कपड़ा पिहरलाक बाद सर िब कुल गोिवZ दा जक~ लगिथन।” दजXक• कपड़ा देलाक बाद प¾ी हमरा लऽ कऽ हनमुमान रेडीमेडपर एली आ से समेनक• हमरा देखबैत कहलिखन- “िहनका लेल दूटा नीक जीZ स पैZ ट आ दूटा टी-शट/ िनकालू।” से समेन पुछलकैन- “की रेZ जमे िनकाली मैडम?” तैपर प¾ी बजली- “रhजक िचZ ता नै क‘। ) टेनडरसँ ) टेनडर िनकालू।” से समेन प¢ चीस-तीस पीस जीZ स पैZ ट आ प¢ चीस तीस पीस टी-शट/ हमरा सबहक आग~मे पसािर देलक। ओइमे सँ एकटा ¤े कलर आ एकटा   लू कलरक जीZ स पैZ ट पिसन केलॱ। तेनािहये एकटा लाल रंगक टी-शट/ आ दोसर   लू रंगपर उ¬जर धारीवला टी-शट/ पिसन केलॱ। चािर हजार टकाक िबल बनल। दोकानदार क• िबल भुतान कऽ च_ माक दोकानपर गेलॱ। ऐठाम गो डेन Öेमबला च_ मा खिरदली। च_ मा

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खरीदलाक बाद जूता दोकानपर जा एक जोड़ा खािदम कq पनीक लेदरबला फूल जूता आ एक जोड़ा सैिZ डल खरीदली। ई सभ खरीदलाक बाद प¾ी पुछली- “आर िकछ ब~की तँ नइ रहल ने।” हम कहिलऐ- “दूटा ‘माल, दूटा कोठारी गंजी आ एकटा टाई।” प¾ी बजली- “ठीके, चलू पंसारी रेडीमेड सेZ टरमे ई सभ लऽ लइ छी।” गंजी, टाइ आ ‘माल कीनलाक बाद प¾ी हमरा लऽ कऽ मुq बइ सैलूनमे गेली। ओइठाम प¾ी हजामसँ कहली- “िहनका िफ मी असटाइलमे बाबरी छ~िट िदयौन आ केशो रंिग िदयौन।” जाबे हजाम हमर केश बनौलक ताबेमे प¾ी एकटा नीक रेजर, एक पैकेट टोपाज   लेड, ¸श बा बिढ़य~ ीम आ फेयर इन लवली ीम सेहो कीिन कऽ आनली। सभ समान कीनलाक बाद हम सभ मुÀा होटलमे मासु-भात खेलॱ। आ कनीकालक बाद मोसािफर खानामे अराम कऽ चािर बजेमे टेq पू पकैड़ आपस गाम आिब गेलॱ। दोसर िदनसँ भोरमे अढ़ाइ साए ¤ाम सेबक फलाहार करी। फल खेलाक एक घZ टाक पछाइत साए ¤ाम औंकुरल बदामक संग गुड़ खाइ। फेर एक िगलास दूध पीबी। खानामे पालकक साग सेहो खाइ। राितमे सुतैसँ पिहने मनËा देल एक िगलास दूध पीबी। आ तेकर बाद डाf टर साहैबक िलखल के“ सूल आ टॉिनकक सेहो सेवन करी। पनरह िदनपर केश रंगी आ तेसरा िदनपर ढाढ़ी बनाबी। जिहया केतौ जेबाक हुअएतँ जाइसँ पिहने दाढ़ी बना कऽ फेयर इन लवली ीम लगौनाइ निह िबसरी। एक मास बीतैत-बीतै हमर गाल पुआ जक~ तँ निह फूलल मुदा सटकलो निहय• रहल। िचनाए गेलॱ। चेहरापर रौहानी आिब गेल। संयोजसँ िपितयौत सारक िबआहमे सासुर जेबाक रहए। गेलॱ। बिरयाती जाइ काल जखन   लू जीZ स पैZ ट आ ललका टी-शट/ पिहर गो डेन Öेमबला च_ मा लगा िवदा भेलॱ तँ हमर सािर जे एम.ए.मे पढ़ै छैथ, बजली- “पाहुन तँ गोिवZ दा जक~ लगै छिथन।” तैपर हमर प¾ीबजली- “गइ छौरी, एना निह हमरा दु हाक• आँिख लगाबही।” हमर मन तँ बुिझ अकासमे उड़ए लगल। िबआहसँ पिहने जखन बरमाला भऽ रहल छल तँ दुि हनक संग चािर-प~चटा लड़की सभ बरमालाबला मंचपर ठाढ़ छेली। ओइ चािर-प~चटा लड़कीमे एकटा स‰रह-

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अठारह बख/क बड़ सुÀैर जे एन-मेन करीना कपुर जक~ लगै छेली ओ एकटकसँ हमरे िदस िनहािर रहल छेली। जखन हमर आँिख हुनकर आँिखसँ िमलल तँ ओ हँसए लगली। बरमालाक बाद जखन ओ दुि हनक संग जाए लगली तँ हमरा लग आिब बजली- “हे लो, फेर भ•ट हएब।” ई किह ओ आग~ बिढ़ गेली। हमरा भेल जेना लाख टकाक लॉटरी भ•ट गेल। ◌ श  द सं° या : 1990 २

िश\ाक अिZ त म उ^े_ य रामनगर िड¤ी महािवGालयक ) थापनाक ) वण/ जयZ ती समारोहक आयोजन भेल। तीन िदवसीय काय/म रहए। पिहल िदन दू बजे िदनमे काय/मक उ×ाटन माननीय िश\ा मंWी एवम् कुलपित संयुf त ‘पसँ केलैन। उ×ाटनक पछाइत पिहल सWमे कौलेजक इितहासक संग कौलेजमे की कमी आ की बेसी अिछ ऐपर िव’ान- वf तालोकैन अपन-अपन िवचार रखलैन। ई काय/म स~झक प~च बजे धिर चलल। दोसर सWमे स~झक छह बजेसँ कौलेजक छाW-छाWा नृय, Iहसन आ गीतनाद I) तुत केलैन। दोसर िदन, िदनक एगारह बजे छाW-छाWाक बीच भाषण Iितयोिगताक आयोजन छल। जेकर िवषय छेलै- ‘लोक िकए पढ़ै-िलखैए, िश\ाक अिZ तम उदेस की अिछ?’ Iितयोिगताक जूरीमे कौलेजक Iाचाय/ महोदय, िश\क संघक अ¨ य\ आ छाW संघक अ¨ य\ छला। काय/ममे कौलेजक िश\कगण, कम/चारीगण आ पWकार लोकैन सेहो उपि) थत छला। अ¨ य\क आदेशसँ Iितयोिगता Iारq भ कएल गेल। पिहल वf ताक ‘पमे बी.ए. फाइनलमे पढ़ैत छाW आलोक ठाढ़ भेला।ओ अपना भाषणमे बजला- “पू¬ यनीय अ¨ य\ महोदय, पू¬ यपाद गुÐजन, उपि) थत वुजुग/ आ वुि©जीवी लोकैन, छाW-छाWालोकिन- आजुक समैमे पढ़ाइ-िलखाइक बड़ महत अिछ। जँ ई कहल जाए जे िश\ा रोशनी छी तँए कोनो अनुिचत निह हएत। िबनु पढ़ल-िलखल मनुख आँिख रिहतो आZ हर छैथ। िश\ाक मूल उदेस Ôानी बनब छी। आ Ôानी बिन कऽ अपन चिरW िनम‚ण करब िथक। ऐ सZ दभ/मे पू¬ य बापू गॉंधीजी कहने छैथ- िश\ाक अिZ तम उदेस चिरW िनम‚ण छी। चिरW िनम‚णक पØात रा­ Ï िनम‚ण करब सेहो छी। और सभसँ पैघ बात ईजे चिरW िनम‚णक संग मानवक सेवा िशि\त मनुखक सभसँ पैघ कतÇ य/ अिछ।” ई किह आलोक बैस जाइ छैथ। जोरदार थोपड़ी बजा mोता लोकैन हुनका भाषणक समथ/न केलिखन। दोसर वf ताक ‘पमे अंजली ठाढ़ होइ छैथ। अंजली बी.ए. ि’तीय वष/क छाWा छैथ, मैक पकैड़ सq बोधनक पØात अंजली बजै छैथ-

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“अखन जे पूव/ वf ता आदरणीय आलोक भाय बजला जे िश\ाक मूल उदेस चिरWिनम‚ण, रा­ Ï िनम‚ण ओ मानवक सेवा िथक, हम हुनका िवचारसँ िब कुल सहमत नइ छी।” mोतामे वुि©जीवी लोकैनक कान जाइत अिछ। अंजली आग~ बजै छैथ- “हम तँ कहब िश\ाक अिZ तक उदेस माW ढौआ कमेनाइ छी। देिखयौ, लोक पिढ़-िलख कऽ पैघ-सँ-पैघ इंजीिनयर, डाf टर, कलf टर, एस.पी; बी.डी.ओ;Iोफेसर, मा) टर निह जािन की की बनै छैथ। मुदा िकनकोमे चिरWक िनम‚ण कह~ होइ छैन। घूस लऽ कऽ अकूट सq पैत जमा करए लगै छिथन। डाf टर सभ कमीशनक लेल अनाव_ यक ज~च, कमीशनबला दवाई आ िबनु ज‘रतक ऑपरेशन करै छैथ। Iोफेसर सभक• डेढ़-डेढ़ लाख टका दरमाहा भेटै छैन, मुदा की ओ सभ िन­ ठा पूव/क अपन कतÇ य/क िनव/हन नइ करै छैथ। डेढ़-डेढ़ लाख टका दरमाहाक बादो हुनका सभक• सZ तोख कह~ छैन जे Åयूशनक पाछ~ बेहाल रहै छैथ। हम तँ कहब जे िव’ानसेबेइमान आ जे डाf टरसे डाकू!” mोता िदससँ जोरदार थोपड़ी बजैत अिछ। अंजली आगू बजै छैथ- “आलोक भाय बाजल छला- रा­ Ïक िनम‚ण...। यौ देखबे करै िछऐ जे पैघ-पैघ इंजीिनयर, डाf टर ढौआक लेल अपन देश छोिड़ िवदेश जाइ छैथ आ अपन गाम-घर, देश छोिड़ िवदेशमे बिस जाइ छैथ। एकटा बात आलोक भाय आरो बाजल छला जे मानवक सेवा। यौ जे अपन बुढ़ माए-बापक सेवा निह कऽ रहल छैथ ओ आन मनुखक सेवा केना करता। तखन मानवक सेवा केना भेल आिक मानवताक की भेल? हँ, प¾ीभf त भऽ सकैत छैथ। हमर अनुभव अिछ जे िव’ान लोकैन माए-बापसँ बेसी मोजर प¾ीक• दइ छिथन।” ई किह अंजली बिस जाइ छैथ। िहनका भाषणपर बड़ीकाल धिर थोपड़ी बजैत रहैत अिछ। तेसर वfताक ‘पमे िववेक ठाढ़ होइत बजला- “हम पिहलुका दुनू वfताक िवचारसँ िब कुल असहमत छी।” mोताक कान एकबेर फेर ठाढ़ भऽ जाइत अिछ। िववेक आगॉं बजै छैथ- “िश\ाक उदेस चौविनया नेता िगरी केना िथक। चौविनयॉं नेतािगरी कऽ   लौक, थानामे दलाली आ गाम-घरमे झगड़ा लगा अपन उ लू सोझ करब आइ-काि हक पढ़ल-िलखल लोकक मु° य काज रिह गेल हेन। जेतए तक पाइ कमेबाक बात अिछ तँ ओइ लेल िशि\त भेनाइ ज‘री निह छइ। हमरा ओतए एकटा डीलर अिछ, हँ-हँ वएह डीलर जे जनताक चाउर-गहुम आ मिटया तेल दइ छै, मोशिकलसँ दसखत करए अबै छै, मुदा ढौआ कमाइमे बड़का-बड़का इंजीिनयर-डाf टरक कान काटै छइ। प~च बख/ पिहनेसँ बोलेरो गाड़ीपर चढ़ैत अिछ। मनुखोक सेवा किरते अिछ। केकरो बेटीक िबआहमे पान-दस लीटर मिटया तेल दऽ दइ छइ। प~च-दस गोरेक• चौक-चौराहापर चाहो-पान करा दइते छइ। फगुआमे िकछ गोरेक• दा‘ओ िपयाइए दइ छइ।” ई किह िववेक बैस जाइ छैथ। िहनको भाषणपर थोपड़ी बजैत अिछ। चािरम वfताक ‘पमे अलका माइक पकड़ै छैथ। ओ अपना भाषणमे कहै छिथन-

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“हम पिहलुका तीनू वfताक िवचारसँ किनËो सहमत नै छी। यौ आजुक समैमे िश\ाक अिZ तम उदेस िबआहमे बेसी-सँ-बेसी दहेज लेब िथक।” वुि©जीवी लोकैन एक-दोसरक मुँह िदस देखए लगला। अलका आगू बजै छैथ- “देिखयौ, डाf टरक िबआहमे केतेक दहेज भेटै छै, फेर इंजीिनयरक• देिखयौ, कलf टर-एस.पी. आ बी.डी.ओ; सी.ओ.क तँ बाते िकछु और छै जे लिड़का कौलेजमे पहुँच जाइत अिछ बुिझयो हुनकर माए-बापक लौटरी िनकैल जाइत अिछ। ओइ लड़काक िबआहमे दस-बीस लाख टका नगद एकटा मोटर साइिकल,दू चािर भिर सोन दहेजक ‘पमे भेटब आम बात भऽ गेल अिछ। तेतबे निह, डाf टर-इंजीिनयरक• िबना चािर चËा गाड़ी आ कमतीमे बीस-प¢ चीस लाख टका नगदसँ िबआहे ने होइत अिछ। अह~ कहबै ई तँ लड़काक बात भेल, लड़कीक• सुनू- पढ़ल-िलखल लड़कीक मeग बेसी छइ। जे िमिडलो पास लड़का छै ओहो अपन किनयॉं कमतीमे इZ टर पास तकै छइ। िकए तँ नै बेसी तँ कम-सँ-कम इZ टर पास लड़की मा) टर तँ बिनय• जाएत। पढ़ल-िलखल लड़कीक िबआहमे दहेजोमे िकछु छूट भेटै छइ। यौ हम अपने पिरवारक गप कहै छी। हम दू भ~इ आ दू बिहन छी। जेठ दुनू भैया छैथ। बड़ा भैयासँ छोटा भैया एक बख/क छोट छैथ। बड़का भैया छठा तक पिढ़ खेती गृह) तीक काज देखए लगला। छोटका भैया कौलेजमे पढ़ै रहिथन। बड़का भैयापर जे बरतुहार सभ आबिथन आ हुनका सभक• जखन पता चलैन जे लड़का छठे धिर पढ़ल छै तँ ओ सभ जे आपस गाम जािथ से फेर घुिम कऽ नै आबैथ। मुदा छोटका भैयाक िबआहक लेल बरतुहारक लाइन लागल रहए। बड़का भैयाक िबआहमे बाबूजीक• अपना तरफसँ खच/ करए पड़ल रहैन। तँए हम कहै छी जे िश\ाक उदेस दहेज लेब छी आर िकछु निह।” ई किह ओ बैस जाइ छैथ। िहनको भाषणपर बड़ीकाल धिर थोपड़ी बजैत रहल। भाषण Iितयोिगताक Iथम पुर) कार अलकाक• भेटलैन। हम सोचै रही जे Iथम पुर) कार आलोक निह तँ अंजलीक• भेटतैन। मुदा से निह भेल। हम छगुZ तामे रही। सोचैतरही Iाचाय/ महोदय भेटता तँ पुछबैन। संयोग नीक बैसल। एकटा कथा गो­ ठीमे Iाचाय/महोदय भेटला। हम पुिछ देिलऐन- “mीमान्, ) वण/ जयिZ त समारोहमे कोन आधारपर अलकाक• Iथम पुर) कार देिलऐन?” Iाचाय/ महोदय गq भीर होइत बजला- “िश\क संघक अ¨ य\ आ छाW संघक अ¨ य\क िवचार Iथम पुर) कार आलोक• देबाक रहैन, मुदा हम अिड़ गेिलऐ आ हमरा आग~ हुनका दुनू गोरेक• िकछु ने चललैन।” हम पुछलयैन- “अपने कोन िबZ दुपर अिड गेिलऐ?” तैपर ओ जवाब देलैन- “हमरा अपन बेटाक िबआह मोन पिड़ गेल रहए, जखन हमरा बेटाक िबआहक लेल बरतुहार एला तँ हम ) प­ ट किह देिलऐन- हमरा बेटाक इंजीिनयर बनेबामे बारह लाख टाका खच/ अिछ। तँए ओकरा िबआहमे कमतीमे प¢ चीस लाख टका लेब। लड़कीबला सहष/ प¢ चीस लाख टका दइले तैयार भऽ गेल छला।” ◌

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श  दसं° या : 1073

ऐ रचनापर अपन मंतÇय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। बेचन ठाकुरजीक दूटा एकeकी-

नीशा मुिf त आ बरहम बाबा १ नीशा मुिf त

पाW पिरचय : नीशा मुिf त 1. शंकर : एकटा गरीब िकसान 2. सुनैना : शंकरक प¾ी 3. सुÀर : शंकरक बड़का बेटा 4. खखन : शंकरक छोटका बेटा 5. शािZ त : शंकरक बड़की बेटी 6. चानी : शंकरक छोटकी बेटी 7. ख¼र : शंकरक दोस 8. मीना : सतमा वग/क छाWा 9. राजीव : मीनाक इसकूलक छाW 10. रौशन : मीनाक इसकूलक छाW 11. केदार िसंह : पिहल पुिलस

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12. बदरी िसंह : दोसर पुिलस 13. रघुनाथ : पिहल चौकीदार 14. देवनाथ : दोसर चौकीदार 15. मटरा : ) थानीय िकराना दोकानदार 16.रामनाथ : रेल याWी 17. Iभुदयाल : रेल याWी 18. नZ द िकशोर : रेल याWी 19. िIयंका : रेल याWी 20. शिशकाZ त : Iधाना¨ यापक 21. सोमदेव : सहायक िश\क 22. अनूप : सहायक िश\क 23. सोनी : सहायक िशि\का 24. चZ दन : मानव mृंखलाक िवGाथX 25. गुंजन : मानव mृंखलाक िवGाथX 26. रानी : मानव mृंखलाक िवGाथX 27. अमन : मानव mृंखलाक िवGाथX 28. महारानी : मानव mृंखलाक िवGाथX 29. किपलदेव : मानव mृंखलाक िवGाथX 30. रामदेव : मानव mृंखलाक िवGाथX 31. हिरदेव : मानव mृंखलाक िवGाथX 32. लिलता : मानव mृंखलाक िवGाथX

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33. किवता : मानव mृंखलाक िवGाथX 34. महेiर : मानव mृंखलाक हािकम 35. िदनेश : फोटो¤ाफर 36. ब¢ चन : एकटा समािजक बेकती 37. राम शरण : ब¢ चनक सहयोगी 38. रामलाल : एकटा समािजक बेकती 39. रामबाबू : चाह दोकानदार 40. ललन : रामबाबूक सहयोगी

दृ_ य एक

() थान- शंकरक घर। शंकरक प¾ी सुनैना। दूटा बेटा। सुÀर आ खखन तथा दूटा बेटी शािZ त आर चानी मंचपर उपि) थत अिछ। सुनैना पिरवािरक दयनीय ि) थितक सq बZ धमे िचZ ताम§ न अिछ। शािZ त आर चानी तीती-तीती खेलैए। सुÀर आर खखन गु ली–डZ टा खेलैए।)

शािZ त- ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती था। चानी- ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती था। शािZ त- ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती था। ई हमर राज भेलौ। हमरा राजमे पएर नै दीहh। चानी- ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती था। ई हमर राज भेलॱ। तूँ हूँ हमरा राजमे पएर नै दऽ सकै छh।

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शािZ त- (चानीक राजमे जा कऽ) हम एबौ तोरा राजमे। तूँ की करिभन? चानी- तूँ हमरा राजमे सँ चिल जो। नै तँ कोनो बाप काज नै देतौ। शािZ त- नै जेबौ गइ, नै जेबौ। चानी- एक दू तीन कहै िछयौ मारबौ। नै तँ हमरा राजमे सँ अपना राजमे चिल जो। शािZ त- मािर कऽ देखही तँ। बापसँ भ•ट करा दइ िछयौ। (दुनूमे मािर फँिस गेल। दुनू उÚम-पटका करैए। सुनैना दौग कऽ आिब दुनूक• छोड़ा दू िदस केलक।) सुनैना- सरधुआक• खाली जनमाबै ले होइ छइ। Iितपाल करैमे करौआ लागल छइ। दा‘-ताड़ी-गाजा पीऐ ले होइ छइ। मुड़ी मच‘आक• एकौटा नीशा नै छूटल छइ। भ~ग खाइए। खैनी खाइए, बीड़ी-िसकरेट पीते अिछ। जद‚बला पान खाइते अिछ। चाह पीबते अिछ। हे मैया सरस‰ी, एहेन घरबला सात घर दु_ मनोक• नै देबइ। (सुनैना फेर माथा-हाथ दऽ बैस रहली।) सुÀर- (गु ली फhक कऽ) ओ‰ैसँ पढ़ैत आ। खखन- (एक ट~गपर) चैत-कबÛडी, चैत कबÛडी, चैत कबÛडी चैत कबÛडीऽ ऽ ऽ ऽ ऽ ऽ ऽ। (खखनक• र) तेमे स~स टुिट गेल।) सुÀर- सार नै भेलॱ, फेर पढ़। खखन- (फेर जगहपर जा क ऽ) चैत कबÛडी आबए दे, तबला बजाबऽ दे। गीत-नाद गाबए दे, नटुआ नचाबऽ दे ऽ ऽ ऽ ऽ ऽ ऽ ऽ। (खखन ठाढ़ भऽ हकैम रहलए।) सुÀर- फेरो नै भेलौ सार। फेरो जो। पढ़ गऽ। खखन- (तुरैछ कऽ) हम नै जेबौ सार। हम हकैम गेलॱ हेन। (सुÀर खखनक• एक सटका बैसा देलक। खखन िचिचआ कऽ कानऽ लागल आर हाथ पएर पटकऽ लागल।) माए गै माए, बाप रौ बाप, सार सभ मािर देलक, जे सार हमरा मारलकै ओकरा माएके। (सुनैना उिठ कऽ दौगली। दुनूक• एक एक चाट मािर अपना लग लऽ जा कऽ बैसेली। दुनू एक-दोसरपर कZ हुआइए।)

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सुनैना- तूँ सभ इसकूल िकए ने गेलहीन? घरपर गु ली-डZ टा खेलै छh आर मािर-गािर करै छh। सुÀर- कॉपी छे निहय• तँ इसकूल केना जेबै? खखन- हमरो पेन नइए तँ मुड़ी लऽ कऽ जेबै इसकूल? सुनैना- बापसँ पाइ मeगए जाइ गेलहीन? सुÀर- मंगिलऐ तँ कहलक- पाइ नै छौ। बुढ़बाक• दा‘-ग~जा पीऐ ले होइ छै पाइ आर कॉपी ले नै होइ छइ। खखन- हरदम बुढ़बा िखिसयाएले रहै छइ। हम मंगिलऐ तँ कहक-जो ने किहऐं माएक•। सुनैना- हँ हँ, िकए ने? हमरा थैली देने छै रखै ले। अपना ले लल आर गोइठा बीछऽ चल। अपना दा‘-ताड़ी, ग~जा-भ~ग ले पाइए नै होइ छै आर हमरा रखै ले पाइ दइए। ए‰ै केतौ नीश~ केनाइ होइ छइ। बाप रे बा, हरदम नीशेमे चूर। चकेठबा जेतै किहयो चटपटमे। टुनकीबा कमाइ कम नै छइ। मुदा पीऐ ले बेहाल रहै छइ। हम सभ अÀ बेगैर मरे छी। िधया-पुता कुकुर-बानर जक~ एमहर-ओमहर ढहनाइए। हे भगवान, हे दाता िदनकर, ओकर नेत सुधारहक। नै तँ हमरा सभक• मौगैत दऽ दएह। (सुनैना कानए लगली।) सुÀर- माए गइ, खाइ ले दे। बड़ भूख लागलए। खखन- (कनैत) केतए सँ देबौ। की देबौ? घरमे िक¢ छो नै छौ। शािZ त- खाइले दे नऽ माए। हमरा बड़ भूख लागलए। चानी- (कनैत) खाइले दे नऽ गइ। खाइ ले दे नऽ गइ। सुनैना- (िखिसया कऽ) खाइ जाइ जो नऽ हमर देह। नोिच ले हमर देह आर खाइ जाइ जो। (सुनैना कानऽ लगली। झूमैत-झामैत शंकरक Iवेश।) शंकर- की भेलै हन? सुÀर माए िकए कनै छh? शािZ त, की भेलौ हेन माएक•? शािZ त- खाइ ले मंगिलऐ तँ कानऽ लागल। शंकर- सुÀर माए, तूँ कनलh िकए? हमरा किहत•। खाइक जोगार हम किरितऐ। सुनैना- आबो की भेलै? दहक पाइ। कीन आनै छी।

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शंकर- (जेबी- ढÚामे तािक कऽ) पाइ कह~ छौ जे देबौ? पाइ तँ छेलै हन। की भेलै? लगैए केतौ खिस पड़लै। अ¢ छा जो, आइ केकरोसँ उधारी आिन लीहh। सुनैना- जा नऽ तूँही। आिन दहक नऽ। हमरा कोइ उधारी नै दइए। सभक• धरने िछऐ। सभ खॲिखया कऽ दौगैए। तूँही आिन दहक। शंकर- तूँही जो। हमरा तँ आओर कोइ नै दइए। तूँही जो। तोरा दऽ देतौ। तूँ मौगी िछहीन। सुनैना- हम नै जाएब, हम नै जाएब, हम नै जाएब। हम मुँह नोचबै ले जाउ गऽ। शंकर- (िखिसया कऽ) तोरा जाए पड़तौ। हमर कहल करए पड़तौ। नै तँ देखा देबौ। सुनैना- हम नै जाएब। हमरा कोइ उधारी नै दइए। अपने जा। शंकर- (िखिसया कऽ) हमर कहल नै करिभन तँ देखही हमर खेल। (शंकर सुनैनाक• अनधून मारऽ लागल चा‘ िधया-पुता कानऽ लागल। सुÀर आर शानित शंकरक• अपन-अपना िदस घीच कऽ छोड़बऽ लागल आिक सभ िधयो-पुताक• अनधून मारऽ लागल। सभ िकयो जोर-जोरसँ िचिचयाए लागल- माए गै, बाप रौ। अZ तमे सुनैनाक• मारऽ लागल। सुनैनाक मुहसँ खून खसैत देख शंकर भागल।) ◌ पटा\ेप।

दृ_ य दू

() थान- समूदाियक भवन। शंकर आर ख¼र दा‘ पी रहलए। दुनू गोरे दोस छैथ। दुनू चखनो खा रहलए।) शंकर- रौ बÎह ख¼रा, औझका दा‘ बड़ सुअदगर छौ। आइ भिर मन, भिर छ~क पीबौ। ख¼र- शंकर सार, आइ मटराक दोकानक ताला तोड़ै के छइ। छेनी, मिरया आर रीZ च लऽ लीहh।

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शंकर- लै के कोन ज‘री छइ। संगेमे छइ। (फ~ड़सँ िनकािल ख¼रक• देखौलक।) ख¼र- सार, तूँ पहुँचल फकीर छh रौ। शंकर- तब नऽ मलफै उड़बै िछऐ। (एकटा तेरह बख/क सुÀैर लिड़की मीना बस् ता लऽ कऽ गुजरली।) ख¼र- रौ सार शंकर, िकछु देखबो केलही? शंकर- कथी रौ? ख¼र- समान। चारा। शंकर- कथी कहै िछहीन रौ? खोिल कऽ बाज नऽ। ख¼र- एगो लड़की इसकूल जाइ छेलै। उ छेलै कमाल के। शंकर- चल नऽ कनी देिखऐ। सुनसान हेतै तँ देखबै। (शंकर आर ख¼र अZ दर गेल। मीना जोर-जोरसँ माए गै, बाप रौ िचिचआ रहलए। कनीकालक पछाइत मीना दम तोिड़ देली।) ख¼र- (अZ दरसँ) रौ सार शंकरबा, तोरा बुते मरलै। शंकर- (अZ दरेसँ) रौ बÎह ख¼रा, तोरा बुते मरलै। ख¼र- लऽ चल एकरा। केतौ सड़क कातमे फhक देबै। शंकर- ज दी चल। िवGाथX सभ अबै छइ। पकड़ा जाइ जेबh। (शंकर आर ख¼र मीनाक• उठौने Iवेश केलक। शीÜ दुनू गोरे मीनाक• मंचपर पटैक भािग जाइ गेल। राजीव आर रौशनक Iवेश। दुनू िवGाथX मीनाक लाश देख डिर कऽ चॱकल।) राजीव- रौ रौशन, उ तँ मीना छै। अपने इसकूलमे पढ़ै छइ। इसकूलक डरेशो पहीरने छइ। रौशन- राजीव, हमरा बड़ डर होइ छौ। भाग एतए सँ। ज दी चल, इसकूलमे सरक• कहबै।

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(राजीव आर रौशनक तेजीसँ I) थान। किनय• कालक पछाइत दूटा पुिलस केदार िसंहआ बदरी िसंह अपन दूटा चौकीदार रघुनाथ आर देवनाथक संग Iवेश केलैथ। चा‘ गोरे लाशक• देखलैथ।) केदार िसंह- रेहे चौकीदार, लाश को लादो गाड़ी मh। बदरी िसंह- सर, ई लड़की इसकूल जा रही थी। र) ता मं मौका पाकर कोइ दा‘बाज इसका जान ले िलया। साला िनशेवाज सभ, हरामी ब¢ चा ऐ भोली-भाली ब¢ ची को लगत काम करके मारकर फhक िदया। केदार िसंह- रेहे चौकीदार सभ, मुँह का देखता है? ज दी लादो लाश को गाड़ीमे। (रघुनाथ आर देवनाथ लाशक• उठा कऽ अZ दर लऽ गेलैथ। दुनू पुिलस सेहो पाछू-पाछू अZ दर गेलैथ। कनैत-कनैत मटराक Iवेश।) मटरा- (छाती पीटैत) माए गै माए, बाप रौ बाप। जुलुम कऽ देलक चोरबा जनमल सभ। हमर बाल- ब¢ चा आब केना जीयत? बाप रौ बाप। सार चोरबाक• पकैड़ितऐ तँ टhगारीसँ कु¼ी-कु¼ी कािट दैितऐ। (रघुनाथक Iवेश।) रघुनाथ- की भेलह हन मटरा भाय? मटरा- बाप रौ बाप, जुलुम भऽ गेलह हौ चौकीदार। िड लीसँ कमा कऽ एलॱ। एक लाख पूजी लगेलॱ। िकराना दोकान खोललॱ। मिहनो नै कमेलॱ। साला चोरबा ताला तोिड़ देलक। सभटा समान लऽ गेलऽ। आब कथी हम बेचबऽ? िधया-पुता कथी खेतऽ? आब हम की करबै हौ चौकीदार? हमरा िकछु नै फुराइ छह हौ चौकीदार। रघुनाथ- ई गप तूँ थानामे इZ Ïी करा दहक। मटरा- हमरा माहुरो खाइले पाइ नै छह। तँ थानापर केना जेबै? तूँही मदैत करऽ ने? रघुनाथ- छोिड़ दहक। हमहॴ बाड़ा बाबूक• किह देबैन। (रघुनाथक I) थान) मटरा- लगैए, शंकरबा सार लऽ गेल समान। मुदा हम देखिलऐ तँ निह। जॱ पकैड़ितऐ तँ सारक• टhगारीसँ कु¼ी-कु¼ी कािट ओतै रािख दैितऐ। ◌

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पटा\ेप।

दृ_ य तीन

() थान- सामूदाियक भवन। शंकर आर ख¼र दुनू दोस चखनाक संग ताड़ी पी रहल अिछ। दुनू म) तीमे अिछ।) शंकर- सार ख¼र, तूँ अनाड़ी छh। किनय• ले राितमे ब~िच गेलh। निह तँ दुनू गोरे धरा जैतh। चौकीदर अबै छेलै हन। ख¼र- सार शंकर, तूँही अनाड़ी छh। केहेन-केहेन पुिलस हमरा पकैड़ नै सकल। ई चौकीदरबा कोन माल-मे-माल छइ। बेसी एमहर-ओहमर करतै तँ ओकरो घरमे चोिर कऽ लेबै। लैत रहत गदहाबला। शंकर- औझका की Iो¤ाम छौ से कह सार ख¼रा। ख¼र- औझका हमर िवचार ई जे बहुत परदेशी सभ फगुआमे गाम अबैत हेतै िद ली-पÎजाब-मुq बइसँ कमा कऽ सभ लग बहुत-बहुत पाइ हेतइ। होिशयारीसँ सबहक जेबी मािर लेबै। चल आइ टीशनेपर। शंकर- ठीक िवचार छौ। चल टीशनेपर। जेबी नै सुतरतै तँ बैग-एटैची सुतरतै नऽ। मुदा जाइसँ पिहने ग~जा पी कऽ मूड बना ले। स¼र- हमरो तँ सएह मन छेलौ। जेबी मारनाइ आिक बैग-एटैची पार केनाइ भीड़ेमे बिढ़य~ होइ छइ। (दुनू गोटे ग~जा पीलक। फेर दुनू गोरे िसकरेट धरा कऽ पीबैत टीशन िदस िवदा भेल।) शंकर- रौ बÎह ख¼रा, टीशनपर छौड़ी-मौगी सभ बड़ रहै छइ। एक-पर-एक सुÀैर सभ रहै छइ। अपना सभक• जएह िकछु तँ संतोख हेतइ। ख¼र- शंकरबा सार, हमरा ओ‰ै नै पढ़ा। हम अपने ओइ सभसँ िरटाइर छी। भीड़मे के‰ेक• हम की नै करै छी। चल, चल। ज दी चल। गाड़ीक समए भऽ गेलै हन।

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(दुनू गोरे टीशन जा रहलए। दुनू गोरे \िणक समए ले अZ दर गेल। \िणक पटा\ेप भेल। अZ दरमे रामनाथ, Iभु दयाल, नZ द िकशोर आर िIयंका Ïेन पकड़ै ले तैयारअिछ। शंकर आर ख¼र मंचपर आएल। शीÜ पद‚ हटल। याWी चा‘ गोरे कुरसीपर बैसलए। शंकर दुनू गोरे घुिम रहलए।) शंकर- गाड़ी आिब रहल अिछ। पॉकीटमार सँ सावधान। (याWी चा‘ गोरे उठलैथ। Iभुदयाल जेबी टटोललैथ। शंकरसहैट कऽ Iभुदयाल लग आर ख¼र िIयंका लग गेल। शंकर दुनू गोरे पॉकेट मारऽ लागल आिक धरा गेल। चा‘ आदमी शंकर आर ख¼रक• मािर रहलए। मार सार के- मार सार क• ह ला भऽ रहलए। केदार िसंह आर बदरी िसंह Iवेश कऽ दुनूक• अनधुन मारऽ लागल। शंकर दुनू गोरे ओंघरा रहलए। बदरी िसंह शंकरक• आर केदार िसंह ख¼रक• मािर रहल छैथ।) अनुवोधक- (अZ दरसँ) याWीगण कृपया ¨ यान दh। जयनगर से चलकर नई िद ली को जानेवाली गरीब रथ एf सIेस “ लेटफॉम/ नं. १ पर आ रही है। (अनुवोधक ऐ गपक• दू बेर कहलैथ।) चा‘ याWी अZ दर गेल। दुनू पुिलस शंकर दुनू गोरेक• मारनाइ छोिड़ देलैथ। दुनू उिठ कऽ हाथ-पएर झाड़लक।) बदरी िसंह- ला साला, माल-पानी। शंकर- आइ नै देब सर। आइ बड़ मारलॱ हन। केदार िसंह- तूँ बड़ी चॱसठ बा। बहोत माल मारता है। लाउ एक हजार। ख¼र- आइ िकÀॱ नै देब। अह~ बड मारलॱ हन। केदार िसंह- ना मारी तँ पि  लक कैसे बुझी। पि  लक के बुझाना हाय जे हम पुिलस हाय। कुछ शो भी करना पड़ता हाय नऽ। जो ही कुछ देना है दे दऽ। ख¼र- आइ हम िकÀॱ नै देब। हमरा दवाइ कराबऽ पड़त। केदार िसंह- जाउ साला सभ, जाउ। आज छोड़ देते हÎ। (शंकर आर ख¼र लड़खड़ाइत-लड़खड़ाइत अZ दर गेल।) बदरी िसंह- केदार भाय, एगो गप बुझिलऐ हन की निह, दा‘क सq बZ धमे? केदार िसंह- निह, की भेलै से? बदरी िसंह- दा‘ बÀ भऽ गेल। हम भोरे पेपरमे पढ़लॱ। हेन सरकार चाहै छैथ जे देवरा¬ यक• नीशा मुf त करी। कारण ऐ सँ रा¬ यमे अनेक तरहक घटना दुघ/टना भऽ रहलै हन। जेना- चोरी-

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डकैती, छीनरपनी, बैमानी, लूट-पाट, बलŒ कारी इŒ यािद। ऐ सभ तरहक िशकाइत सरकारक• बहुत भेलै हन। तही दुआरे सरकार नीश~ मुिf तक करगर कदम उठेलक हन। (दुनू पुिलस कुरसीपर बैसलैथ।) केदार िसंह- कदम जदी सफल भऽ जेतैन तँ देवरा¬ य सरकारक• दुिनय~मे नीक Iित­ ठा भेटतैन। मुदा भाय, अपना सभक• बड़ िदËत भऽ जाएत। कारण ओइ बेगैर अपना सभक• एको िदन नै िनमहत। अपना सभ ले सरकार िकछु जोगार करतै, की निह? बदरी िसंह- उq मीद कम आर भरोस ¬ यादे। ओना पेपरमे दा‘, ताड़ी, ग~जा, भ~ग, खैनी, बीड़ी, िसकरेट, पान इŒ यािदपर रोक लगाएल गेल हन। कारण सभ मे नीशा छै आर उ नीशा कोनो-ने-कोनो ‘पमे देहक लेल नोकसानदायक अिछ। जेना खैनीमे िनकोटीन पएल जाइए जइसँ कÎसरक सq भावना रहैए। ओही खैनीसँ बीड़ी, िसकरेट, पान मशाला इŒ यािद बनैए। सोभािवक छै उ समान अपना सभक• नोकसान करत। दा‘सँ फेफड़ा जरै छै, कीडनी फेल करै छै। ग~जासँ फेफड़ा जरै छै, दq मा होइ छइ। ऐ तरहh हम किह सकै छी जे Iाय: सभ नीशाबला पदाथ/ देहक लेल खतरनाक अिछ जेकरा ितयागने ) वा) Ý यक र\ा हएत। केदार िसंह- भाय बदरी, सरकारक• जे करबाक हो, से करौ। मुदा हमरा ले दा‘क जोगार सरकार करैत रहौ। बदरी िसंह- अह~ बताह जक~ गप करै छी भाय। अह~ आब दा‘सँ छातीपर मुËा मािर िलअ। केदार िसंह- भाय, हमरा ओइ बेगैर नै बनत। बदरी िसंह- िकए नै बनतै? मनक• जे‰े चसकेबै, मन ओते चसकतै। मन जेते काबूमे रहत, ओते मानवतामे धिनक रहब। मने सभ िकछु िछऐ। कोनो शायर कहने छिथन- मन ही देवता, मन ही ईiर, मन से बड़ा न कोय। मन उिजयारा जब जब फैले, जग उिजयारा होइ। केदार िसंह- भाय, अह~ क• अ¨ यािŒ मक Ôान बड़ अिछ यौ। बदरी िसंह- हमरा अ¨ यािŒ मक Ôान सूइयाक नोको बरबैर नै अिछ। ओना, समए िनकािल कखनो-कखनो कोनो-कोनो अ¨ यािŒ मक पोथी पिढ़ लै छी। सरकारक नीशा मुिf त कदमक ) वागत करैत हम आइ संक प लै छी जे हम कोनो नीशा नै करब, नै करब, नै करब। ◌ पटा\ेप।

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दृ_ य चािर

() थान- शंकरक घर। सुनैना सूपमे चाउर फटैक रहलए। सुÀर आर शािZ त एक िदस तथा खखन आर चानी दोसर िदस भऽ कबÛडी खेल रहलए।) सुÀर- कबÛडी, कबÛडी, कबÛडी, कबÛडी, कबÛडीऽऽऽ। खखन- चैत कबÛडी, चैत कबÛडी, चौत कबÛडी, चैत कबÛडीऽऽऽ। शािZ त- कबÛडी कबÛडी, कबÛडी खेल। घृणा Œ यािग, राखू मेल। चानी- चैत कबÛडी अÛडा, बाप तोहर बुÛढ़ा। तोिड़ देबौ नhगरी, बना देबौ बॲगरी। सुÀर- चैत कबÛडी एला, माए तोहर लैला। बाप तोहर मजलूम, तूँ बाबा मखदूमऽऽऽऽ (खखन आर चानी सुZ नरक• ट~ग पकैड़ घीचैए अपना िदस आर सुÀर अÛडा िदस घीच कऽ लऽ जाइए। सुÀरक• अÛडासँ पिहने स~स टुिट गेल। खखन आर चानी थोपड़ी बजा कऽ खूम हँसए लागल।) खखन- कबÛडी कबÛडी, तोिड़ देबौ हÛडी। िनकािल देबौ पॲटा, मारबो दू सॲटाऽऽऽऽ। (खखन शािZ तक• घीचने-घीचने पढ़ैत-पढ़ैत अपना घर लऽ गेल। फेर खखन आर चानी थोपड़ी बजा कऽ हँसए लागल।) खखन- (नचैत-नचैत) हरा देिलयौ, हरा देिलयौ। चानी- (हािर गेलh ह‘आ, खा ले गूँहके त‘आ।) – 3

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(चा‘ भाए-बिहनमे मािर फँिस गेल। सुÀर-खखन आर शािZ त-चानी उÚम-पटका करैए। सुनैना चाउर फटकनाइ छोिड़ दौग कऽ आिब झगड़ा छोड़ाबऽ लगली। चा‘क• दू-दू चाट दऽ कऽ सुनैना अलग-अलग केली। चा‘ हकमैत एक-दोसरपर कZ हुआ रहलए।) सुनैना- तूँ सभ झगड़ा िकए करै जाइ गेलh? सुÀर- तोहर बेटी हमरा िकए कहलकौ- हािर गेलh ह‘आ, खा ले गूँहक त‘आ? तीन बेर कहलकौ। सुनैना- आब नै कहतौ। झगड़ा नै करै जाइ जो। भाए-बिहनमे झगड़ा करै जाइ जेबहीन तँ लोक बुड़बक कहतौ। खखन- माए गै, पापा केतए रहै छै? काए िदनसँ घर पर नै देखै िछऐ। सुनैना- केतौ रहौ सरधुआ। ओq हरै मिर जाउ। शािZ त- पापाक• गािर िकए दइ िछहीन गै? सुनैना- तोहर पापा ताड़ी-दा‘-ग~जा पी कऽ बु¢ च रहै छौ। अपना सबहक पेटक जोगार नै करै छौ। हमरा मजूरी कऽ पेटक जोगार करए पड़ैए। तोरा सबहक पढ़ैक जोगार नै करै छौ। दोकानदार सभक• उधारीबला पाइ नै दै छौ। अही सभसँ िदल बड दुखाएल अिछ। तँए ओकरा गिरयबै िछऐ। शािZ त- ओहेन पापाक• हमहूँ गिरयेबै। ओहेन पापाक•सुपैन धारमे देबै, गजहर गाछमे सुतेबै। (शंकरक• पकड़ने ख¼रक Iवेश। ख¼र साधुक भेषमे अिछ। शंकर एककातमे नीशामे ठाढ़ भऽ असिथरे-असिथरे िहलैए आर ख¼र ओकरा पकड़ने ठाढ़ अिछ।) ख¼र- दोसतीनी, दोसक• परसू स~झमे घुमैकाल एन.एच.पर एगो बोलेरोबला ठोकर मािर देलकै। हम उठा-पुठा कऽ टेq पूमे लािद हो) पीटल लऽ गेलॱ। डाf टर ज~च-परतालक पछाइत कहलैन- िहनकर फेफड़ा जरल छैन आर िकडनी सेहो फेल छैन। ई बहुत िसिरयस छैथ। ई दू-चािर िदनक मेहमान रिह गेल छैथ। िहनका घरेपर लऽ जाउ। सुनैना- अह~ तँ एकरा बहसा कऽ तूल कऽ देिलऐ। दा‘ पीआ-पीआ जान लऽ लेिलऐ िनशेवाज कहॴ के। ख¼र- दो) तीनी, जिहयासँ सरकार नीशा बÀ केलकै तिहयासँ हम नीशेबाजी छोिड़ देिलऐ। बबाजी बिन गेलॱ हन। देखै िछऐ, हमर बगे। सुनैना- झूठा निहतन। देखबैले बबाजी भऽ गेल हन।

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ख¼र- (कJ ठी देखा छुबैत) हम कJ ठी छुबै छी। झूठ नै कहै छी। हम सभटा नीशा छोिड़ देलॱ। (शंकर बैस गेल। ख¼र ठाढ़े रहल।) सुनैना- तँ दोसोक• िकए नै छोड़ा देिलऐ? ख¼र- दोसक• हम कहिलऐ। मुदा ओ नइ मानलैथ। केना-ने-केना केतौ-ने-केतौसँ ऊपर कऽ कनी-मनी पीए लै छैथ। सुनैना- अखनो तँ दोस पीनेए। ख¼र- हमरो लगैए। हमरा आ_ चय/ लगैए जे केना उपरा कऽ मािर दै छिथन। सुनैना- (िखिसया कऽ) बड़ पीयाक छै तँ भने ओq हरे हो) पीटलेमे मिर जइतै से निह। शंकर- (िखिसया कऽ झूमैत) तोरा बापक कमाइक• नै पीलॱ हन। अपना कमा कऽ पीलॱ हन। हमरा अपने बड़ मन खराप अिछ। तैपर िखिसयबैए। ख¼र- दोसतीनी, हम जाइ छी। सोसराइरमे साइरक• िबहा िछऐ। दोसपर नीक जक~ िधयान देबइ। (ख¼रक I) थान।) सुनैना- दा‘-ग~जा पीऐत-पीऐत मन खराप कऽ लेलक हन। पिरवारपर कोनो िधयाने निह। लेबरमे खिट-खिट हम कौहना पेट चलबै छी। एकरा एकर कोनो लाज निह। (शंकर टिग कऽ मिर गेल। सुनैना माए गै, बाप रौ िचिचयाए लगल। चा‘ िधया-पुता सेहो खूम कानए लागल।) केतए चिल गेलहक हौ सुÀर पापा। केतए चिल गेलहक हौ शािZ त पापा। आब केना रहबै हौ चानी पापा। ◌ पटा\ेप।

दृ_ य प~च

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() थान- एन.एच.। नीशा मुिfत हेतु मानव mृंखलाक पूण/ तैयारी भऽ चुकल अिछ। Iधाना¨ यापक शिशकाZ त आर सहायक िश\क सोमदेव नीशा मुिf तक सq बZ धमे गप-स“ प करै छैथ।) शिशकाZ त- सोमदेव बाबू, देवरा¬ य सरकारक• नीशाबZ दी कानून बड़ नीक रहलैन। Iाय: सq पूण/ रा¬ य नीशा मुf त भऽ गेल हन। दा‘ बाज सभ तँ छरपटाइए। मुदा केतौ दा‘ नै भेटैए ओकरा सभक•। दा‘ए-टा निह, ताड़ी, भ~ग, ग~जा, खैनी, बीड़ी, पान, िसकरेट सेहो बÀ भऽ गेल। सोमदेव- सर, देवरा¬ य सरकारक ई कदम बहुत सराहनीय रहल। मुदा िकछु हेहर, पतीत अखनो चोरा- नुका कऽ दा‘-ताड़ी-ग~जा मािरए लै छइ। आिखर रजबुिधसँ चोरबुिध भारी होइ छै िकने। शिशकाZ त- से जे हौउ। मुदा सरकारक ई नीशाबZ दी नीशामुिf त काय/म 99 Iितशत सफल रहल। ऐ ले हम सरकारक• हािद/क धैनवाद दै िछऐन। अिहना जदी सरकार अपराधपर िनयंWण करै तँ देवरा¬ य देवलोक बिन जाएत। सोमदेव- सरकारेक मन िछऐ। ऊहो भऽ सकैए। सर, अखैन धिर िवGाथX सभ नै जुटल हन। कहॴ चेकमे अपना सभ पकड़ा नै जाइ। सुनैना- पकड़ेबै िकए? हािकम नै बुझै छिथन ठंढाक समए छइ। सभ िवGाथX खा-पीब कऽ मजगूत भऽ कऽ आएत िकने। कारण एन.एच.पर रौदमे ठाढ़ हुअ पड़तै। गाम-गामसँ िवGाथXक• पहुँचैमे कनी- मनी अबैर-सबेर हेबै करतै। (सहायक िश\क अनूपक संग चZ दन, गुंजन, अमन, रानी आर महारानी अZ दरमे नारा लगा रहलए।) चZ दन- ताड़ी-दा‘ बÀ क‘। (शिशकाZ त सोमदेव उिठ कऽ टहैल रहल छैथ।) सभ िकयो- बÀ क‘, बÀ क‘। (सभ िकयो Iवेश केलैथ। चZ दनक हाथमे झJ डा छैन। अनूप सभसँ पाछू छैथ झंडापर नीशामुf त देवरा¬ य िलखल अिछ।) चZ दन- ग~जा-भ~ग बÀ क‘। (घुिम-घुिम कऽ) सभ िकयो- बÀ क‘ बÀ क‘। चZ दन- खैनी-बीड़ी बÀ क‘।

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सभ िकयो- बÀ क‘, बÀ क‘। चZ दन- िसकरेट-पान बÀ क‘। सभ िकयो- बÀ क‘, बÀ क‘। (अनूप सभ िवGाथXक• पतयानीमे लगेलैथ। सहायक िशि\का- सोनीक संग किपलदेव, रामदेव, हिरदेव, लिलता आर किवता अZ दरमे नारा लगा रहलए। अनूप अपन टीम लग ठाढ़ छैथ।) (शिशकाZ त आर सोमदेवक I) थान।) किपलदेव- ताड़ी-दा‘, बÀ क‘। सभ िकयो- नीरोग रहू, नीरोग रहू। (सभ िकयो Iवेश केलैथ। किपलदवेक हाथमे झJ डा छैन। सोनी सभसँ पाछू छैथ। झJ डापर नीशा हटाउ, देवरा¬ य बँचाउ िलखलए।) किपलदेव- ग~जा-भ~ग बÀ क‘। (घुिम-घुिम कऽ) सभ िकयो- बÀ क‘, बÀ क‘। किपलदेव- खैनी-बीड़ी बÀ क‘। सभ िकयो- बÀ क‘, बÀ क‘। किपलदेव- िसकरेट-पान बÀ क‘। सभ िकयो- बÀ क‘, बÀ क‘। किपलदेव- सुपारी-गुटका बÀ क‘। सभ िकयो- बÀ क‘, बÀ क‘। (सोनी सभक• पतयानीमे लगेलैथ। सोनी अपन टीम लग ठाढ़ छैथ।) अनूप- (घुिम कऽ) सभ गोरे ठाढ़ रह। ऊपरसँ हािकम सभ एिथन। फोटो झीकैबला एिथन। फोटो झीका कऽ जाइ जइहh। सभ िकयो सिट-सिट कऽ ठाढ़ रह आर नारा लगबैत रह।

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सोनी- (घुिम कऽ) जखन तोरा सभक• ट~ग दुखा जेतौ तँ बैस जाइ जइहh। िबना फोटो झीकेने कोइ नइ जाइ जइहh। किपलदेव- नीशा हटाउ, नीशा हटाउ। सभ िकयो- रा¬ य बँचाउ, रा¬ य बँचाउ। चZ दन- नीशा छोड़ू, पाय बँचाउ। सभ िकयो- िधया-पुता, पढ़ाउ-िलखाउ। (एकाएकी सभ गोरे बैस गेल। रामशरण आर ब¢ चनक पािन लऽ कऽ Iवेश। सभ गोरे ठाढ़ भऽ जाइ गेल। रामशरण आ ब¢ चन पािन बँटै छैथ। पािन ब~िट दुनू गोरे I) थान केलैथ। रामलाल िब) कुट लऽ कऽ Iवेश केलैथ। रामलाल िब) कुट बँटै छैथ। िब) कुट ब~िट रामलालक I) थान। राम बाबू आर ललनक चाह लऽ कऽ Iवेश। ई दुनू गोरे चाह बँटै छैथ। चाह ब~िट दुनू गोरे I) थान केलैथ।) अनूप- चZ दन, नीशामुिf तपर जे ऊ गीत तैयार केने छेलहीन से, गाबही ने। चZ दन- जी सर, गाबै िछऐ। (चZ दन आर रानी एक िदस झड़नी लऽ कऽ तथा गुंजन आर लिलता दोसर िदस झड़नी लऽ कऽ गीत गाबैले तैयार भेल।) चZ दन+रानी- हॉंएजीऽ ऽ ऽ ऽ, दा‘-ताड़ी बÀ भेलइ। बÀ भ~ग ग~जा। खैनी बीड़ी िसकरेट बÀ भेलैजी। गुंजन+लिलता- ह~एजीऽ ऽ ऽ ऽ, गुटको पान सुपारी हटलै। रोगी सभ िनरोग भेलइ। रा¬ य नीशामुf त भेलैजी। चZ दन+लिलता- ह~एजीऽ ऽ ऽ ऽ, चोरी हटलै डकैती घटलै अपराध बलŒ कारी भगलै। समुिचत िश\ा बढ़लै जी। गुंजन+रानी- ह~एजीऽ ऽ ऽ ऽ, अनुशासन, िश­ टाचार एलै।

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सुख-शािZ त बहार एलै। सहानुभूित परेम बढ़लैजी। चZ दन+रानी- ह~एजीऽ ऽ ऽ ऽ, आब नै किहयो नीशा औतै। औतै सŒ यानाश हेतै। सq हरल घर िबगैड़ जेतैजी। गुंजन+लिलता- ह~एजीऽ ऽ ऽ ऽ, चोरबु©ी भारी रहलै। रजबु©ी ह लुक। चोर उपरा कऽ पीतैजी। (थोपड़ीक बौछार भेल।) अनूप- (फोन िरिसभ कऽ) हे लो, सर Iणाम। जी जी। जी सर। हम सभ तैयार छी। (फोन किट गेल) सोनीजी, अह~ एक-एक हाथपर लाइन लगबा िलअ। हािकम आर फोटो¤ाफर आिब रहल छैथ। सोनी- जी सर, हम लाइन लगबा लै छी। सभ कोइ एक-एक हाथपर लाइन लगबै जाइ जो। (सोनी एक-एक हाथपर सभ िवGाथXक• लाइनमे लगेलैन।) (शािशकाZ त आर सोमदेवक Iवेश।) चZ दन- नीशेवाजी बÀ क‘। सभ िकयो- बÀ क‘, बÀ क‘। किपलदेव- नीशा भगाउ, इ¬ जत बँचाउ। सभ िकयो- इ¬ जत बँचाउ, इ¬ जत बँचाउ। (नीशाबZ दी काय/मक IखJ ड ) तरीय हािकम बैचयुf त महे_ वर आर फोटो¤ाफार िदनेशक Iवेश। महे_ वर िनरी\ण करै छैथ आर िदनेश फोटो झीकै छैथ।) महे_ वर- अनूपजी आर सोनीजी, हमरा दुनू गोटेक गेला पछाइत अहूँ सभक•छु¼ी। सरकारक नीशामुिf त काय/म पूण/ सफल रहल।

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(महे_ वर आर िदनेशक I) थान।) अनूप- आब सभ िवGाथX अपन-अपन घर ओिरया कऽ जाइ जाइ जो। एन.एच. नीक जक~ पार किरहh दुनू कात देख कऽ। (सभ िवGाथXक I) थान भेल। शिशकाZ त, सोमदेव, अनूप आर सोनी हाथ जोिड़ Iणाम कऽ मुड़ी झूका लेलैथ।) ◌ पटा\ेप। इित शुभम।

बरहम बाबा

पाW -पिरचय

(1.) बौकु- एकटा गरीब िकसान (2.) फूलो- बौकुक प¾ी (3.) बुधन- बौकुक पड़ोसी (4.) चानोदाइ- पिहल कारणी (5.) रामबती- दोसर कारणी (6.) बदरी- पिहल दश/क (7.) कारी- दोसर दश/क (8.) भू ला- तेसर दश/क

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(9.) अशफX- चािरम दश/क (10.) राम उदगार- पॉंिचम दश/क (11.) मुसना- बौकुक दू बख/क बेटा (12.) राम कुमारी- बौकुक बड़की बेटी (13.) रामपरी- बौकुक छोटकी बेटी

दृ_ य - एक

()थान- बरहम बाबाक गहबर। समए-सॱझका बौकु आ फूलो बरहम बाबाक पूजा ले सभ mमजानक संग उपि) थत छैथ। फूलो गहबर साफ कऽ रहली अिछ। तखने बुधन मृदंग आ झािलक संग Iवेश करैए।)

बुधन- भैया, बरहम बाबाक मिहमा अगम अथाह छैन। सुनलॱ, हुनके िकरपासँ तोरा बेटा भेलह। मन बड़ हिष/त भेल। आब ठीक छह- दूगो बेटी आ एगो बेटा। बौकु- हुनकासँ पैघ दुिनयॉंमे आर के? िहनका शरणमे जे िकयो एला, हुनकर क याण आइ धिर भेल हन आ अि¤मो हेबे करत। तँए ने हमर मुसना माए हुनक पूजामे जी-जान लगौने रहैए। बुधन- भैया, तूँ केतेक िदनसँ भीख मॉंगै छेलह? बौकु- तीन पिहनासँ बेसीए बुझीन। बुधन- ऐ बेर बरद नै ने बेचए पड़तह? बौकु- से नै पूछ। ओइ बेÐका मारल अखैन धिर छी। होश नै भेल हन। ओइ बेर पनरह िदन भीख मॉंगने रही। मुदा ऐबेर दुनू परानी तीन मिहनासँ भीख ले कोन-कोन गाम नै बौआक• कोरामे लऽ

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कऽ वौएलॱ। लगैए ऐ बेर नै घटतै। ओहीसँ पेटो चलै छेलए िकने। सॉंझू पहर घर चिल अबै छेिलऐ। बुधन- अँए हौ, पूजा ले भीख मॉंगै छेलहक आ ओहीसँ पेटो चलबै छेलहक? ई नीक बात नै भेलह। अइसँ पुन नै पापे हेतह। बौकु- की करबै, हमरा तँ और कोनो जोगार नै छेलए। बाबा नै बुझै छिथन जे हमरा भगतक• प~च आदमीक पिलवार छइ। (अपन-अपन डालीक संग चानोदाइ आ रामबतीक Iवेश। पूजाक सभ तैयारी फूलो कऽ लेली अिछ। बौकु झािल आ बुधन मृदंग बजबैत भगैत गािब रहल अिछ। फूलो ¨ यान) थ भेली। बदरी, कारी, भू ला, अशफX आ राम उदगारक Iवेश। राम कुमारी कोरामे मुसनाक• लऽ कऽ Iवेश केली। संगमे बहीन-रामपरी सेहो अिछ।) बौकु+बुधन- बरहम अँगनमामे, पीपरकेर गिछया हे। तै पर देवी ऽ, दे ऽ वता हे। बरहम अँगनमामे...। कौन फूल चढ़ै देवी, कौन फूल देवता हे। कौने फूल चढ़ै बरहम, बाऽ बाऽ हे। बरहम अँगनमामे...। अरहुल चढ़ै देवी, गhदा फूल देवता हे। गुलाब फूल चढ़ै बरहम, बाऽ बा हे। बरहम अँगनमामे...। फूल दीप मधुर देवी, लÛडू पान देवता हे। खीर पूड़ी बरहम, बाऽ बा हे। बरहम अँगनमामे...। (फूलोक देहपर बरहम बाबा अबै छिथन। मृदंग बजनाइ बÀ भऽ जाइए। सभ कारणी शाZ त भऽ हाथ जोिड़ लइ छैथ।)

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फूलो- बोल जय गंगा। बौकु- जय गंगा। सरकार, के िछयह तूँ? फूलो- बोल जय गंगा। हम बरहम िछयह। बोल जय गंगा। बौकु- जय गंगा। बड़ी कालसँ कारणी सभ बैसल छइ। कनी एकरो सभक• क याण करहक। फूलो- हम कोन जोकरक छी जे लोकक• क याण करबै। बोल जय गंगा। बौकु- जय गंगा। हम बुझै िछऐ िकने तूँ कोन जोकरक छहक से। ए‰े दूरसँ जे कारणी अबै जाइ छै से िबन क याणे अबै छइ। तूँ हीरा छहक। हीरा अपन मोल नै बतबै छइ। फूलो- बोल जय गंगा। हमरा बु‰े जे हेतह तइमे हम नै चुबहक। सएह ने। बोल जय गंगा। बौकु- जय गंगा। हे, ऐ कारणीक• देखहक। फूलो- (चानोदाइ िदस तािक) हइ, तोहर घरबला कमाइ बड़ छह मुदा भाभंश नै होइ छह। प~च आदमीक पिरवार छह। तीिन साए टाका रोज कमाइ छह। किहयो बैसलो नै रहै छह। मुदा पेटोपर आफद रहै छह। इएह बात छै की ने? चानोदाइ- (घोघ तरसँ मुड़ी डोलबैत) हँ। फूलो- हम जे कहबह, से करबहक की ने? चानोदाइ- हँ, करबैन। फूलो- स‰ करह। बाजह- ‘एक स‰ दू स‰, ¸¹ िवषुण स‰ अहॉंक कहल जे नै करए, अ) सी कोस नरकमे खस। चानोदाइ- एक स‰ दू स‰, ब¹ िवषुण स‰ अहॉंक कहल जे नै करए, अ) सी कोस नरकमे खस। फूलो- बोल जय गंगा। बौकु- जय गंगा। फूलो- तोहर घरबला दा‘ आ गॉंजा पीऐ छह। काजो करैले जाइ छह तँ पीकऽ बु¢ च रहै छह। ओकरा कखैन की हेतह, कोनो ठेकान निह। अँए हइ, तीन साए टाकामे दू साए-अढ़ाइ साएक पीए लेतह तँ बँचल-खॲचलसँ की भाभंश हेतह? तहूमे मँहगाइ अकास छूने जा रहल अिछ।

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घरवलाक• कौहुना ई आदैत छोड़ाबह। कहक- ‘दा‘-गॉंजाक बदलामे दूध-दही-घी खाउ। थकान ले हम सभ िदन मािलश कऽ देब।’ आ करबो करहक। अइसँ पिहने तूँ किहयो मािलश नै करै छेलहक। की, बात सॉंच िछऐ, की नइ? चानोदाइ- हँ, सॉंचे िछऐ। फूलो- बोल जय गंगा। बौकू- जय गंगा। फूलो- घरवलाक• हँसा कऽ खेला कऽ मािलश कऽ आ ओकरामे पैस कऽ रसे-रसे कड़ाइ करबहक तँ उ अब) स चेत जेतह। उ सुधरतह आ तोहर सभटा दु:ख भािग जेतह। बाजह हमर कहल करबहक की ने? चानोदाइ- हँ, अब) स करबैन। फूलो- जा, तोहर क याण हेबे करतह। (हाथ जोिड़ Iणाम कऽ चानोदाइक I) थान।) बोल जय गंगा। और के छह? बौकु- (रामबती िदस इशारा करैत) सरकार, ई छिथन। फूलो- बोल जय गंगा। तोहर दूटा बेटा आ एगो बेटी नै सुधैर रहल छह। हरदम नरहेर जक~ एमहर- ओहमर करैत रहै छह। तीनूक पाछू तोरा बड़ पाय खरच होइ छह। मुदा कोइ र) तापर नै आिब रहल छह। तोरा अपन िदयादनीपर शक होइ छह जे वएह िकछु कऽ देलक हन। सएह ने? रामबती- (मुँह उधािर) हँ, बाबा। अपने अंतय‚मी छिथन बाबा। फूलो- बोल जय गंगा। हइ, िदयादनीक कोनो दोख नै छह। तोहर अपने दोख छह। तीन साल पिहने परमानZ द मासाएबसँ छअ मिहना पढ़बा कऽ फील ले आइ-काि ह, आइ-काि ह करै छेलहक। एक िदन बेचारा खगने कनी जोरसँ पाय मॉंगलखुन तँ तूँ सभ हुनका सातू पुरखाक• उकटलहक आ मारबो करै जाइ गेलहक। बेचारा कािन कऽ दुआिरपरसँ गेलह। हुनके आप छयह। कहह तँ वेचरा टीशन कऽके गुजर-बसर करै छिथन। बेचारा बड़ असथीर लोक छिथन। हुनका संग हुनके बोिन ले एहेन खराप बेवहार! ई बड़ पैघ गलती भेलह। बोल जय गंगा। रामबती- बाबा, आब ओकर कोन उपाए छइ?

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फूलो- बोल जय गंगा। (कनीकाल िकछु सोिच कऽ) दुनू परानी हुनका ऐठाम जा कऽ पएर पकैड़ \मा मॉंगहक। उ दयालु लोक छिथन अब) स \मा कऽ देथुन। तेकर पछाइत हुनका बॉंकी फीसक दोबर फीस दऽ िदहौन आ हुनकासँ अनुनय-िवनय करीहक। जे िधया-पुताक• फेर पढ़ा िदयौ। अहॴ बु‰े उ सभ सुधैर सकै छइ। आब अहॉंक• नै छोड़ब आ ने अहॉं संग गलती करब। बोल जय गंगा। हइ, हमरा िबसवास छह जे उ मािन जेतह। जा, अf खैन जा। उ घरेपर छिथन। (हाथ जोिड़ Iणाम कऽ रामबतीक I) थान।) बोल जय गंगा। बौकु- जय गंगा। सरकार, हम जे सकिलयह तइमे जी-जान लगा कऽ पूजा केिलयह आ एिहना करैत रहबह। फूलो- बोल जय गंगा। हमर पूजा करै छह, नीक बात। मुदा हमरा पूजा खाितर तूँ बीिक जाह वा तकलीफ उठाबह वा Iित­ ठा हनन करह, से बात हमरा एËो र‰ी पसीन नै छÞ। हम तोरा पूजासँ एËेअना IसÀ िछअ। तोहर पूजा पनरहअना बेकार भेलह। बोल जय गंगा। बौकु- जय गंगा। हम तँ जी-जान लगा पूजा केिलयह जइसँ सरकार हमरापर सोलहÀी खुश रहिथन आ मनसँ अिसरवाद देिथन। मुदा केतए की गलती भेलै, उ तँ सरकार अपने कहबै। फूलो- हमरा पूजा खाितर तूँ बरद बेचलहक। से िकए? आ जँ बरद रिहतह तँ हरो जोित गुजर-बसर किरतह। कहह तँ, केते िदन कमेबह तँ बरद कीनबह? तहूमे पेटोक सवाल छइ। गरीब िकसान छह। बरद तोहर हाथ-पएर छह। बरद खाितर तोरा तकलीफ भऽ रहल छह। ओइसँ हमरो तकलीफ छह। तूँ भीख मॉंिग पूजा करै छह से िकए? अपन पसेनाक कमाइसँ पूजा करबहक तँ बेसी फल हेतह। भीख मॉंिग कऽ करैमे भीख देिनहार तोहर फल बॉंिट लइ छह। कनी देरी वा बेसी देरी हेतै पूजामे, सएह ने? तँ की भऽ जेतइ? हम तँ केतौ भागल नै जा रहल छी। तहूमे बेसी खरचा करबाक कोन खगता छइ। हम खीरक भूखल नै छी। हम Iेम-m©ाक भूखल छी। Iेमसँ जे िकछु भेलै आ जेतबे भेलै, वएह बड़ भेलइ। जी-जान लगेबाक कोनो खगता नै छै। बोल जय गंगा। बौकु- जय गंगा। सरकार, दोसर बेरसँ ऐ सभ बातक• िधयान रखबै। अखैन धिर जे िकछु घ¼ी-कुघ¼ी भेल हो, ओकरा माफ किरहक। फूलो- जा, माफ छह। आन बेरसँ लगती माफ नै हेतह। आब जाइ िछअ। केसटोलीमे पूजा ढारल छइ। बोल जय गंगा।

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(फूलो धरतीपर माथ टेकलैथ। बौकु गंगाजल छॴटलैथ। फूलो उिठ देह-हाथ झािड़ सq हािर कऽ बैसली। दुनू परानी दश/कक• हाथ जोिड़ Iणाम केलैथ। थोपड़ीक बौछार भेल।)

◌ इित शुभम्

ऐ रचनापर अपन म ◌ंतÇय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आशीष अनिचZहार िमिथला )टूडhट यूिनयनक काजपर िरपोट/ िवदेह सिदखन वाि)तिवक आ सामियक काज करए बलाक• सलाम ओ IोŒसािहत केलक अिछ। एखन बािढ़ पीिड़तक बीच जािह तरहh िमिथला )टूडhट यूिनयन (MSU) काज कऽ रहल अिछ से आगूक लेल एकटा उदाहरण बनत। ई पिहल बेर अिछ जखन िक िमिथलाक नामपर बनल कोनो सं)था जनताक बीच गेल आ ओकरा समथ/न भेटलै। ई समथ/न काज केलासँ भेटलैए। खाली मौिखक समथ/न नै तन-मन-धन तीनू भेटलैक अिछ आ िमिथला )टूडhट यूिनयन सािबत केलक जे हँ ओ भिव­यमे नमहर दाियŒव सqहािर सकैए। िवदेहक िकछु पिछला अंकमे सेहो िमिथला )टूडhट यूिनयनक काजक• रेखeिकत कएल जे अिछ जे िक संपादकीय वा िरपोट/क ‘पमे सुरि\त अिछ। िमिथला )टूडhट यूिनयन केर बािढ़ पीिड़त फंडमे दान देबाक लेल सभ गोटा )वतंW छी। चाहे Ðपया हो िक एक लाभ। िन¢चामे बÎक िडटेल देल जा रहल अिछ—

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िमिथला )टूडhट यूिनयन केर सभसँ बड़का िवशेषता अिछ िमिथलाक• दरभंगा-मधुबनीसँ बाहर करब। िमिथला )टूडhट यूिनयन केर ई Iवृित िनिØते भिव­यमे वृहद िमिथला रा¬यक गठन लेल बाट खोलत। ता धिर िमिथला )टूडhट यूिनयन केर एिह काजक लेल फेसँ सलाम करैत िकछु िचW परिस रहल छी जे िक सेनानी सभहँक मनोबलक• आर आगू बढ़ाएत—

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mी किपलेiर राउतजीक आधा दज/न लघु कथा- चाहबला “बाबू आब चाहक दोकान छोिड़ िदयौ। हम सभ भ~इ आब कमाए-खटाए लगलॱ। आब अह~क उमेरो पचपन-सािठ भेल। सभ िदन िक काम-धZ धा किरते रहब।” “बौआ कहलह तँ बड़ नीक बात, मुदा चाहे दोकानक बदौलत तूँ सभ मनुख बनलह आ आइ शहर जा ‘पैआ-पैसा देखै छहक। हम तँ कौहुना अपन रोजगारमे लागल रहै छी। देहक• धुिन गुजर-बसर करै छी।

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कमाएल-खटाएल देह अिछ, जेतेक शरीरक• चलाएब-िफराएब तेतेक ने देहक खून चालू रहत आ अपनो दुÐ) त रहब। तूँ सभ तँ हमरा कािहल बनबैक बात कहै छह। जाबत धिर पैÐख अिछ ताबत धिर हम कमेबे-खटेबे करबह। रिफक िमय~क• निह देखलहक, प~चटा बेटा छै, प~चो कमासुत, वेचाराक• सभ काम-धZ धा छोड़ा देलक। काज छुिटते वेचरा लोथ भऽ कऽ मिर गेल। नोकिरयोबला क• तिहना होइ छइ। जह~ ने िक काजसँ िरटायरमेZ ट भेटल िक वेचारा अपनाक• कोनो जोकरक निह बुझऽ लागल। िजबाक बीस बख/ तँ जीबत प~च बख/। मने झूस भऽ जाइ छइ।” सुखल नून, एकटा मोटगर रोटी आ एक लोटा पािन नेने रमाकाZ त बाबू बालेसरक• पनिपयाइ लऽ कऽ गेल छल। आिरपर ठाढ़ भऽ कऽ जोरसँ बजला- “रौ बाले, पनिपयाइ कऽ जो।” बालेसर आसा-बाटीमे रहबे करए। झट-दे बरद ठाढ़ कऽ आिरपर आिब, हाथ मुँह धो जलखै करए लागल। भूखलमे जिहना गु लैरो मीठ होइ छै तिहना बालेसर ह~इ-ह~इ प~चे-सात कौरमे रोटी खा गेल आ एËे नीशामे भिर लोटा पािन सेहो पीब गेल। मुदा आरो पािन पीबैक इ¢ छा रहइ। तैबीच रमाकाZ त बाबूसँ बालेसर कहलकैन- “मािलक थोड़ेक कालक बाद एक लोटा पािन लऽ कऽ आएब।” रामाकाZ त बाबू िकएक पािन लऽ कऽ जेता! पािन लऽ निह गेला। चैत-बैशाखक कर-करौआ रौद, तैपर पिछया हवा चिल रहल छल। एहेन समयमे बालेसर गहुमक खेतक• जोित रहल छल। पािनक आशा-बाटी तकैत रहल। मुदा जखन मािलक पािन लऽ कऽ निह गेलैन तँ िखिसया कऽ हर खोिल देलक। हर-बरद नेने घरपर पहुँच, बरदक• खु¼ापर बािZ ह हरक• गठु लामे रािख अघोर मने बालेसर अपना घरपर आिब गेल। थोड़ेक सुसतेलाक बाद भिर इ¢ छा पािन पीलक, तहन मन कनी शाZ त भेलइ। मुदा मनमे तेसरे तरहक उड़ी-िबड़ी धऽ लेलकै। रमाकाZ त बाबूक पिरवार गामक भिगनमान। सभतूर पढ़ल-िलखल। रमाकाZ त बाबूक पी‰ी दरभंगा महराजक ओइठाम नोकरी करैत, िकयो िदवान तँ िकयो पटबारी। रमाकाZ त बाबू अपने सात भैयारी, सातो भ~इमे दू भ~इ गामपर रहैत छला ब~की प~चो भ~इ िकयो सरकारी नोकरी तँ िकयो Iाइवेट नोकरी करैत। रमाकाZ त बाबूक मिझला भाए- िवनोद आ अपने गामक खेती-बाड़ीक काज देखैत छला। ऊपरसँ िन¢ च~ पिरवारक सभतूर धूत/ नq बर एक, जालफरेबी नq बर एक। िकयो सोनाक कंगना लऽ कऽ नदीक कछेरमे बैसल तँ िकयो बहु‘िपया ‘प धऽ कऽ अपन उ लू सोझ करैत। िसिरफ छोटका भाए जेहने नाम िवनोद तेहने काम िवन±। बालेसरक िपताक नाओं रामिकसुन। रामिकसुन अपना जाितक मैनजन छल। शरीर एकदम ह¼ा-कÚा रहै रामिकसुनक। रहबो िकए ने किरतै अखड़ाहा परक खेलेलहा देह रहै िकने। अपना जवानीमे रमाकाZ त

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बाबूक अमलदारीसँ पूव/ हुनके पिरवारमे हरवािह करैत छल। पछाइत जखन रामिकसुन हरबािह छोिड़ देलक तहन बेटा पकैड़ लेलकै, माने बालेसर हरबािह करए लागल। आइ बालेसर जखन तबधल मने घरपर आएल तँ मनमे एकटा संक प केलक। संक प ई जे आब अनकर हरबािह निह करब। अपन रोजगार करब। अपन काज करब। िबहान भने रमाकाZ त बाबू जखन हरबािह लेल बालेसरक• कहलिखन तँ ओ साफ-साफ किह देलकैन- “आब हम हरबािह नइ करब। आ ने अह~क ओइठाम कोनो आने काज करब।” रमाकाZ त बाबू पुछलिखन- “िकए ने हरबािह करमे? आ हमर जे कज‚-बज‚ अिछ से पिहने दऽ दे। बापे तेतेक खेने छौ से कहल ने जाए।” बालेसर ने आव देखलक आ ताव, तर-दे बाजल- “िहसाब कऽ िलअ।” “ठीक छै, घरपर आ िहसाब कऽ ले।” ई कहैत रमाकाZ त बाबू अपना घरपर चिल गेला। ऐ घटनाक• आइ मास-दू-मास बीित गेल। तैबीच ‘पौलीमे कोनो महतोक घरमे डकैती भेलइ। डकैत घरवारीक• मारबो-पीटबो केलकै आ लाखो ‘पैआक समान सेहो लूटलकै। रमाकाZ त बाबू जालफरेबी लोक तँ छिथए।   लॉकक Iमुख सेहो छैथ। दरोगासँ िमल कऽ बालेसरक िपताक• डकैती केसमे फँसा देलक। रामिकसुनक घरपर पुिलस सभ दौर-बरहा करए लगल। आब रामिकसुन बोन-झाड़मे नुकाएल िफरए। घरक सभ समeग सबहक मुँहपर फुफरी उड़ए लगलै। अZ तमे रामिकसुन रमाकाZ त बाबूक पएर-दाढ़ी पकैड़ केससँ उबारैक आ¤ह-बात करए लगल। बालेसरो हारल नटुआ जक~ फेर रमाकाZ त बाबूक हरबािह करए लगल। ओही समयमे पाहीप¼ीक एकटा मािलकक जमीन छेलइ। जइ जमीनक सटले रामिकसुनक घर सेहो छेलइ। ओ प~चो बीघा जमीन मािलक बेचैक सूरसार करए लगला। रमाकाZ त बाबू प~चो बीघाक गप कऽ लेलैन। िलखबै बेरमे रमाकाZ त बाबू ओइ प~च बीघाक अलाबे रामिकसुनक जे प~च कÚा जमीन सिहत घराड़ी छेलै तेकरो खाता-खेसरा आ रकबा चढ़ा लेलैन। दखल-क  जा बेरमे बालेसर रोकलक तैपर रमाकाZ त बाबू बजला- “रौ बाले, चूप रह। ई जमीन मािलकक छेलै ओ हमरा िलिख देने अिछ। हे देखही द) ताबेज।” बालेसर मुख/ तँए अनकासँ द) ताबेज देखा चूप भऽ गेल। चुपे निह भेल बि क बौक भऽ अँगना चिल आएल। िकछु फुरबे ने करइ। रामिकसुनक• तीन लड़का। जेठकाक नाओं- बालेसर, मिझला- राजशेखर आ छोटका- चZ lशेखर। बोिन- बु‰ा किर कऽ कोनो धरानी सभ समeगक गुजर-बसर चलैत रहइ।

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बालेसर नून-तेलक दोकान खोलने छल मुदा दोकान चलबै छेलै राजशेखर। समय बीतैत गेलइ। मुदा जखन समय खराप होइ छै तँ बारहोरंगक बसात बहए लिगते छै, सएह भेलै बालेसरक•। वेचाराक• तेतेक ने दोकानक उधारी लािग गेलै जे अZ तमे नून-तेलक दोकान छोड़ए पड़लै। पूजीक अभाव भेने वेचारा चाहक दोकान खोललक। कम पूजीमे चाहक दोकान नीक होइते छइ। चाहक दोकान खूब चललै। समय आब बोलसरक आपस एलइ। बालेसरक• तीन लड़का। जेठका लड़काक नाओं- चZ lमोहन, मिझलाक- कृ­ णमोहन आ छोटका नाओं छेलै- इZ lमोहन। तीनू भ~इ पिढ़-िलख कऽ िद लीमे नोकरी करैले चिल गेल। नोकिरयो नीक ठाम लगलै। एक एकाउJ टhट, दोसर संचार िवभागमे आ तेसर कृिष िवभागमे तृतीय mेणीक काज करए लगल। बालेसरक मिझला भाए- राजशेखरक• सेहो दू लड़का। पिहल उमाकानत आ दोसर कृ­ णकाZ त। उमाकाZ त एगारहवी केलाक बाद बq बइ चिल गेल आ कोनो सेठक ओइठाम áाइवरी करए लागल। आ छोटका लड़का चZ lशेखरक• एक लड़का जेकर नओं छेलै लालमोहन जे पढ़लक-िलखलक निह। जहन पZ lह बख/क भेल तँ भािग कऽ मामा गाम चिल गेल। आ एक गोरेक संगे लुिधयाना जा रहए लगल। लुिधयानामे ओ कोनो िकराना दोकानमे काज करए लगल। पिरवारमे चा‘ िदससँ आमदनी भेने बालेसर तीनू भ~इक मन हरदम खुशीए-खुशी रहए लगलै। जिहना अदरा न\Wमे झम-झमौआ बरखा भेने, अगहनमे नीक उपजा भेने िकसानक मन हिख/त होइ छै तिहना बालेसरोक पिरवारमे सबहक मन हिख/त रहए लगलै। िकछु िदनक बाद रामिकसुनक मृŒ यु भऽ गेलैन। बालेसर अपन िपताक mा©-कम/ नीक जक~ केलक। रसगु ला-लालमोहनक भोज केलक। घरो-दुआर नीक बना लेलक। Ïेकटर सेहो खदीर लेलक। शानसँ गुजर-बसर कऽ रहल अिछ। बालेसर मुदा चाहक दोकान किरते रहल। िधया-पुता सभ जहन गाम आबै तँ चाहक दोकान चलबैत िपताक• देख मन झूस भऽ जाइ। बालेसरक पिरवारक उÀैत देख रमाकाZ तक पिरवार गलल जाइ। दु­ ट बुिधक लोक छलाहे। एमहर उमाकाZ तक जेतए धनकुिटया मशील चलैत रहै, तेतइ छेलै एकटा आमक गाछ। बालेसरे ओकरा रोपने छल आ अपनेसँ गाछक सेवा सेहो केने छल। मुदा ओ गाछ क  जामे छेलै रमाकाZ त बाबूक•, ओकर फल वएह खाइ छला। संयोगसँ एक िदन एकटा आम दुआरे झंझट भेलै, माने रËा-टोकी भेलइ। एक िदन उमाकाZ त ओही आमक गाछपर दाबा ठोिक देलकै। झंझट उठलै। केस-फौदारी भेलइ। कोट/-कचहरीक आबा- जाही शु‘ भेल। रमाकाZ त बाबू बजैथ- “चाहक दोकानबला िक हमरासँ केस लड़त।” उमाकाZ तक िपता- राजशेखर अलगसँ कोट/मे जमीन-जŒ था सq बZ धी एकटा मोकदमा कऽ देलक, जइमे बाप-दादाक अरजलहा जमीन जे रमाकाZ त बाबू िलखा नेने छला तैपर मुकदमा चलए लगल। रमाकाZ त बाबूक• अपन केलहा पाप सभ भूत भऽ आग~मे नाचए लगलैन। सबूतक जखन देख-भाल मिज) Ïेटक कोट/मे होमए लागल तँ मिज) Ïेट रमाकाZ त बाबूसँ कहलकैन-

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“आपको िववािदत जमीन कैसे ह~सील हुआ और िजससे आप जमीन िलखबाये उनको ये िववािदत जमीन कैसे Iा“ त हुआ, इसका सबूत दािखल करh।” रमाकाZ त बाबूक• तँ ऊपर-िन¢ च~ सुझए लगलैन। िदनेमे तरेगन देखा लगलैन। एमहर बालेसरक समeग सभ चौक-चौराहापर बजैथ- “बहुत धन खेल• रे बगरा आ पड़लौ मरदसँ रगरा। जेतेक बेइमानी किर कऽ अरजने छ• से सभटा आब बेरा-बेरी िनकलतौ। निह तँ एकटा सâ य मनुख जक~ समाजमे रह। हम तँ कौहुना अपन रोजगार इमानदारी पूव/क करैत चाहे दोकानसँ आग~ बढ़लॱ। अपनापर हमरा अपन कम/क िबसवास अिछ। ठिक- फुसला कऽ तँ निह ने। कमाइबला खेतइ आ लूटैबला जेल जेतइ।” यएह सभ बात आइ बालेसर अपन चाहक दोकानपर चZ lमोहनक• किह रहल छला। ◌ श  द सं° या : 1279

गामे बीरान भऽ गेल िकसुन देव दुआर परहक चौकीपर असमंजस भेल बैसल छला। तेकर कारण छेलै जखन तीस-पÎतीस बख/क उमेर छेलैन, माने आइसँ सािठ बख/ पूव/- जहन जुआनी चढ़ल छेलैन, तेहेन अव) थामे कमाइ-ले मोरंग चिल गेला। गाममे किहयो कोनो साल रौदी, कोनो साल दाहीमे भूखमरीक सम) या उŒ पÀ भऽ जाइत। मुÚी भिर लोकक हाथमे जमीन-जŒ था, अिधकतर मजदूर तबकाक लोक। बोइन-बु‰ापर जीिनहारक• िवकट समय रहने कएक स~झ उपासे रहऽ पड़ै छेलैन। अही सभ बातक सोच आइ िकसुन देव भायक• भेल छेलैन। हाथमे चाहक कप देना प¾ीक• एक घZ टा भऽ गेल छेलैन। चाह पािन-पािन भऽ गेल छल। तखने राम सेवक चाह पीबैले िकसुन देव भाइक घरे लगक चाहक दोकानपर जाइ छला। राम सेवक िकसुन देव िदस तकैत पुछलिखन- “भाय एना िकए मन झूस अिछ। की केकरोसँ झगड़-झंझट भेल हेन, मुँह िकए तुÐछ केने छी?” समािजक िर) तामे िकसुन देव आ राम सेवकक बीच ‘भाय-भाय’ चलैत रहैन। िकसुन देव बजला-

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“निह भाय, कोनो बात निह अिछ, पैछला िजनगीक बात सभ मोन पिड़ गेल हेन। आबह-आबह बैसह, केतए जाइ छह। चाह पीब लएह, तैबीच िकछु गपो-स“ प हेतइ।” राम सेवक ससैर कऽ िकसुन देव लग जा चौकीए-पर बैसला। आ िकसुन देव प¾ीक• हाक देलिखन- “यइ सुलोचनाक माय, कनी एमहर आउ, निह तँ एक िगलास चाह आरो बनौने आउ।” अपना हाथक सरेलहा चाह िकसुन देव एके घॲटमे पीब लेला। आ बजला- “राम सेवक भाय, की कहब आब तँ हमर उमेर अ) सी-पचासीक लगभग भऽ गेल। प~चटा बेटा अिछ। सबहक िबआह-दुरागमन भऽ गेलै, सभ बेटा िधया-पुता आ किनय~ लऽ कऽ िद लीमे जमीन लऽ घर बना ओतै रहैत अिछ।” राम सेवक कहलकैन- “भाय साहैब, से तँ नीके ने अिछ, अपन कमाइए आ िधया-पुताक गूजर-बसर करैए। अह~क• कोनो तरहक जवाबदेिहयो तँ नइ अिछ।” िब¢ चेमे टोन दैत िकसुन देव कहलकैन- “नइ हौ सेवक भाय, से बात नै छइ। हम दुनू परानी बुढ़ा-बुढ़ी की कऽ सकै छी। िकयो एक लोटा पैनो देिनहार नइ अिछ। गाममे की रोजगारक आब कमी छइ। पिहने ने रोजगारक कोनो साधन निह छेलै, लोक ढाका, बंगाल, मोरंग, िदनाजपुर, िस लीगुरी जा कऽ धन रोपनी, म‘आ रोपनी आिक पटुआ झाड़ै छल, आ केते गोरे बहलमानी सेहो करै छल। चZ द िकिसमक रोजगार करै छल। हमहॴ एक िदन िबराटनगरसँ प~चटा बहलमानक संग कटही गाड़ी लऽ कऽ जंगल लकड़ी आनैले जाइत रही। तीन िदनका र) ता छेलै, राितमे बाघक दुआरे गाड़ीक• गोल कऽ कऽ रािख िदऐ, बीचमे बरदक• बाZ ही आ काते-कात चा‘ कोणपर लकड़ीए-क• घूर कऽ िदऐ आ एक गोरे िसरपैह लऽ कऽ खड़ा पहरा िदऐ आ बैली सभ सुती। िबहान भने गाड़ी जोित कऽ िवदा होइ। एक िदन लकड़ीसँ लादल गाड़ी छल। जंगलमे एकटा बाघ घात लगौने छल, डेरासँ दस ल§ गा गाड़ी जोइत कऽ आग~ गेल हएब आिक ऐगला गाड़ीक एकटा बरदक ऊपर बाघ झपटलक आ िघचने-ितरने घोर जंगल िदस लऽ गेल। कोनो तरह• िबराटनगर एलॱ।” राम सेवक पुछलकैन- “ऐँ यौ भाय, तहन तँ Iाण उिड़ गेल हएत, डर निह भेल जंगलसँ बहराइत?” िकसुन देव कहलकैन- “डर कहूँ नै हुअए, िहq मते ने किठन-सँ-किठन काजक• ह लुक बना दइ छइ। हमरा सभक• तँ रेहल- खेहल रहए, एहेन-एहेन घटना सभसँ।” राम सेवक कहलकैन- “यौ भाय साहैब, हम जॱ रिहतॱ तँ एक तँ Iाणे उिड़ जाइत आ जँ बँिचयो जइतॱ तँ नानी ने मिरहh जे फेर जंगल िदसक र) ता दोहरा कऽ धिरतॱ!” “हे सुनू एक बेरका घटना कहै छी।” िकसुन देव मुँहपर हाथ फेरैत बजला-

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“िस लीगुरीमे पटुआ झाड़ैत रही,भिर ज~घमे जॲक धऽ लेलक। से की कहब तमाकुल चुना कऽ रखने रही, हँसूआ सेहो रखने रहैत छेलॱ। ऊपरमे आिब हँसूआसँ सभ जॲकक• खड़ैर िदऐ आ चुनेलहा तमाकुल सबहक मुँहपर दऽ िदऐ। िकयो सुइया-डोरा सेहो रखने रहैत छल, सुइएसँ ग~िथ कऽ डोरामे धऽ लटका िदऐ आ डॉंरमे खॲिस िलअए। जॲक सभ पािनमे दहलाए लगए तहन पटुआ झाड़ी।” राम सेवक कहलकैन- “यौ भाय, तहन तँ बड़ जीबटगर काज करी।” िकसुन देव भाय फेर कहलिखन- “तोरा एतबेमे अचq भा लािग गेलह। हे सुनह- गाम आबी तँ सत-सत कÚा खेतमे हम आ हमर भजार अ¢ छेलाल िमल कऽ राित-के कोदािरसँ तािम िदऐ। दू-दू कÚा खेतमे असगरे धान-म‘आ रोिप ली। तब ने अ) सी बख/क उमेरमे दुÐ) त छी। म‘आ सनक िनरोग अÀक• लेाक Œ यािग देलक।” िबच् चेमे राम सेवक पुिछ देलकैन- “अ¢ छेलाल के छल?” “नै िचZ हलहक, िपतमराक बाप छल। ओकरा तेतेक तागत छेलै जे सात मनक पटुआ सोनक गिठयाक• िबराटनगरमे असगरे उठा कऽ गोदाममे रािख दइ। एक िदन गोदामक चौकीदार देखलकै, ओ जा कऽ नेपालक थानामे किह देलकै, वेचाराक• पकैड़ कऽ जेलमे दऽ देलकै। तिहना खाइयोमे छल, एक िकलो चौरक भात क लौमे आ सातटा म‘आ रोटी जलखैमे खाइ छल। एक िकलो राहैरक उसना तँ ओकर बामा-दिहना हाथक खेल छल। केतेक कहब िबतलाहा गप-स“ प। अखुनका िधया-पुताक• देखै िछऐ जे दबाइयेपर खेपैए। झरो िफरैले साइिकल वा मोटरे साइिकलसँ जाइत अिछ। बीसो िकलो गहुमक मोटरी लऽ कऽ िपसबैले नइ जा होइ छै,ओहूले जने चाही। काजसँ देह चोरबैत रहतह।” राम सेवक बाजल- “भाय साहैब, आब तँ गाम-घरमे लोके माने जुआन-जहान कह~ अिछ। खेत सभ परती पड़ल रहैत अिछ। निह तँ गाछ-िबरीछ लगौल अिछ। गाम जेना सून भऽ गेल हेन।” िकसुन देव भाय बजला- “यौ सेवक भाय, हमरा तँ बुझना जाइत अिछ जेना गाम उनैट गेल हेन आिक गाम सुनैट गेल हेन से बुझने ने जाइत अिछ। कान तँ सोन निह, आ सोन तँ कान निह।” गाममे देखबहक जे पिहने क¢ ची सड़क छल से आब पËीकरण भऽ गेल। जैठाम गाममे सबहक दुआरपर, केकरो एक प ला तँ केकरो जोड़ भिर बरद छल भÎस छेलै, गाए छेलै तैठाम आब देखबहक जे दस हजार लोकक ब) तीमे प~च जोड़ा बरद नै भेटत। जिहना बड़का माछ छोटका माछक• खा जाइत अिछ तिहना खेतीक उपकरण भेने भऽ गेल। आब Ïेf टर भेने जमीनक जोत-कोर, अÀक दौनी, फिसलक कमठान इŒ यािद सभ तरहक काज ह लुक भऽ गेल हेन। तिहना अÀक फिसलक बीआ-बैल भेने, सुख-सुिवधा तँ भऽ गेलै मुदा लोक गामे छोिड़ कऽ पड़ा गेल हेन तखन खेती तँ बीरान हेबे करत।” “हँ से तँ भाइये गेल हेन।” –राम सेवक बाजल।

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तैपर िकसुन देव बाजल- “यौ भाय, एम.बी.बी.एस. डाf टरक• देखबै जे मनुखक खून-पैखानाक जॉंच करत। हमरे पोती डोली िद लीसँ गाम आएल छल, दसमीमे पढ़ैत अिछ। एक िदन दलानपर बैसल रही, तखने गाए गोबर केलक, पोतीसँ कहिलऐ ‘गइ डोली गोबर कनी कोदािरसँ हटा दिहन तँ।’ मुदा पोती हमरापर ऑंिख गुड़रैत अँगना िदस चिल गेल। से कहू तँ कोदािरयोसँ गोबर उठबैमे िघरना भेलइ!” िब¢ चेमे राम सेवक िकछु बाजए लागल मुदा िकसुन देव रोकैत फेर बाजल- “यौ भाय, गोबर तँ ओहन व) तु अिछ जइसँ पूजाक ठ~उ नीपल जाइत अिछ। खेतमे िदयौ तँ उब/रा शिf त बढ़त, भानस कऽ सकैत छी, गोबरक छौरसँ माल-जालक थैरक• साफ कऽ सकै छी। कोनो िफनाइल वा अZ य दबाइक ज‘रत नइ पड़त। बरतन-बासन साफ कऽ सकै छी। से कहू भाय, देहात सनक शु© कोनो व) तु शहरमे भेटते। तेहेन गामक• Œ यािग कऽ लोक परदेशमे बास करैत अिछ। शहरमे जेकरा लेल ‘पैआ लगै छै से गाम-घरमे मंगिनय•मे भेट जाइ छइ। थोड़ेकाल चुप भऽ कऽ िकसुन देव फेर बाजल- “आब िक ओ गाम रहलै जे सभ व) तु लेल लोक कलहZ त छल। आब तँ गली-गलीमे पËी सड़क छै, घरे-घर टी.बी. छै, मोटर साइिकलक• के पुछैए चिरचिËया गाड़ी केतेको भऽ गेल अिछ गाम-घरमे। ) कूल छै, अ) पताल छै, िबजली छै मुदा जुआन-जहान लोकक अभावमे गाम बीरान भऽ गेल अिछ, एकदq म सुनसान जक~।” राम सेवक अपन मुड़ी डोलबैत िकसुन देव िदस तकैत रहल। मुदा िकछु बाजल निह। ◌ श  द सं° या : 1162

तीलक• तार लाल काकी स~झ दइले दीप नेस कऽ तुलसी चौरा लग जाइ छेली। अँगनामे गहुमक बोझ जह-पटार राखल छेलइ। दोगे-दोग लाल काकी तुलसी चौरा लग पहुँचली। तखने पिछया रमकल। लाल काकीक नजैर रहैन तुलसी चौरापर। हवा आ गमXसँ गहुमक बोझ हरनाठ भेले छल, कखैन-ने-कखैन एकटा बोझमे दीपसँ

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आिग लपैक लेलकै। तखन लाल काकी िकछु ने बुिझ सकली। जखन बोझसँ धुआँ िनकलए लगल िक मिझली पुतोहु ह ला केलिखन- “आिग लािग गेलइ।” घरक सटले दऽ कऽ पËी सड़क छेलै, लोकक आवाजाही तँ छेलैहे। िकयो बगलक गाम कछुबी-दे बाजल- ‘नवटोिलयामे आिग लागल छइ।’ ओतुËा लोक दौड़ल। िकयो कछुबीक• तँ िकयो तमुिरया िदस गेल। ओ बाजल- “नवटोिलया सुÛडाह भऽ गेल!” आब तँ नवटोिलयाक जेतेक कुटमैती लािगमे छेलै ओ सभ दौड़ल। जिहना कोनो नीक बात होइ िक अधला बात आिक कोनो समिदया एक दोसरक संग बात-चीत कहैमे िकछु ितिलया-फुिलया लगा दैत अिछ, आ िकछु बातक• घटा-बढ़ा कऽ कहैत अिछ, तिहना भऽ गेल। जहन देखए गेल तँ माW एकटा गहुमक बोझक िकछु अंश झरकल छल। तैबीच सुZ दरी पुतोहु बजली- “यै लाल काकी, देिखयौ लोकक िकरदानी! एतेक ने तीलक• तार बना कऽ बाजल जे कर-कुटुम तकक लोक पहुँच गेल।” लाल काकी बजली- “यै किनय~, अिहना लोक सभक• बजैमे कोनो िक टका-पैसा खच‚ होइ छै, गपक• िछलैन करैत-करैत केकरोसँ केकरो मुहÒ-ठुठी करा देतह। केकरो अपना बातसँ झूका देतह वा होशे उड़ा देतह। सही बात बुझत निह, आ तीलक• तार बना उड़बैत रहत।” ◌ श  द सं° या : 227

एक चुनौटी तमाकुल महान ािZ तकारी जुझा‘ समाज सेवी कq युिन­ ट नेता शुभंकर बाबू। अं¤ेजक शासन अिZ तम अव) थामे पहुँच गेल छल, गाम-घरसँ लऽ कऽ शहर तकमे ग~धी बाबाक पूण/ अजादीक घोषणा भऽ चुकल छल। जँिह- पटार ािZ तकारी सभ रेलक पटरी, टीलीफोनक तार, सरकारी कागजातसँ लऽ कऽ भवन आ थाना तकमे तोड़-फोड़ केलक, आिग लगा-लगा जारलक। ुर अं¤ेजक हािकम आ पलटन सभ सेहो ािZ तकारी सभक• पकैड़-पकैड़ केतेक• गाछमे ट~िग फँसरीपर चढ़ा दैत तँ केतेकोक• कालापानीमे भेज दैत छल। केतेक माए-

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बिहनक• म~गक िसनूर घुअ पड़लै। केतेक भायक• शहीद हुअ पड़लै। केतेकक• जेलमे सड़ा देल गेलइ। केतेको लोक ललका मुरेठा देख घरमे ढुकल रहैत छल। शुभंकर बाबू सेहो कएक बेर जेल गेला। नमक सŒ या¤हमे भाग लेलैन अं¤ेजक• भगबैमे जहॉं तक जे बुिध छेलैन ओ गुलामीसँ मुिf तक लेल लगौलैन। भंझारपुररेलक पटरी उखाड़ैमे िहनको जेलमे ठुिस देलकैन। जाबत जीला ताबत धिर किहयो लोभ-लालच, घूस-पhच आिदसँ दूर रहला। साधारण भेष-भूषा छेलैन शुभंकर बाबूक। शुभंकर बाबूक• एकटा बेटा िदवाकर। पढ़ैमे तेजगर तँ निह, मुदा जिहना गाइक नॉंगैर पकैड़ वेतरणी पार होइत अिछ तिहना िदवाकर दसमी तक पढ़लक आ   लौकमे िकरानीक नोकरी भेट गेलैन, सेहो ) वतंWता सेनानी शुभंकर बाबूक लड़का छिथन तँए। वेचारे शुभंकर बाबू तँ आब ऐ दुिनय~मे नइ छैथ मुदा हुनक कृत अखनो गाम, िजला आ रा¬ य तकमे छैZ हh। हमरा एकटा वोिरंगक ज‘रत भेल।   लौकसँ स‰ैर Iितशत छूटपर भेटैत रहइ। हमहूँ दरखास देिलऐ आ ब~की ‘पैओ जमा कऽ देिलऐ। िदवाकर बाबूक Iमोशन भेलैन। हुनका नाजीर आ बड़ा बाबूक काज देल गेलैन। हम वोिरंग उठबैले गेलॱ। नाजीरक• माने िदवाकर बाबूक• कहलयैन- “सर, हमर जे वोिरंग उठबैक आदेशबला कागज छै, ओ देल जाए।” िदवाकर बाबू कहलैन- “जाबत िकछु खच‚-वच‚ नै करब ताबत कोना कागज देब।” पुछलयैन- “सर, हम तँ सभ ‘पैआ आ जमीनक कागजात जमा कऽ देने छी। तहन फेर कोन खच/-बच/?” िदवाकर बाबू बजला- “से निह बुझिलऐ, ऑिफसमे चZ द तरहक ने खच/-बच/ छै िकने, तइमे िकछु पैसा लगबे करत।” ताबत एक गोरे सेहो नाजीर लग काज करेबाक लेल आएल। हुनको यएह बात कहलिखन। हम बाहर आिब वेवेकसँ सभ बात कहिलऐ ओ कहलैन- “यौ बाबू, िहनक हालत मैत पुछू। आ_ चय/क बात छै जे िहनक िपता mी शुभंकर बाबू गरीब लोकक लेल, देशक• अजाद करक लेल कोन-कोन यातना ने सहलैन। मुदा िहनका तइ सबहक एको रती लाज-िवचार नइ छैन। जाउ िकछु एमहर-ओमहर किर कऽ काज करा िलअ।” हम िदवाकर बाबूक कुरसी लग फेर गेलॱ आ कहलयैन- “सर, हमर काज कऽ िदअ ने।” िदवाकर बाबू बजला- “लाउ दू साए ‘पैआआ हे िलअ कागज।” हम कहलयैन-

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“सर, हम गरीब छी। सभ पाइ खच‚ भऽ गेल। हमरा लग आब ‘पैआ नइ अिछ।” िदवाकर बाबू बजला- “गरीबक• तँ भगवानो सहायता निह करै छिथन। अहॴ कहू तॕ कोनो भगवान आिक इ­ टदेवता िबना चढ़ौआ लेने केकरो काज करै छिथन? तहन हम मनुख भऽ कऽ कोना छु¢ छे कऽ देब..!” हम कहलयैन- “सर अह~क िपताmी तँ महान ) वतंWता सेनानी छला। गरीबेक िहतक लेल ने जहल गेला। माहूर खेलैन। एते तक जे ) वतंWता सेनानीबला पhशनो नै लेलिखन आ सरकारीए कोषमे जमा करक लेल कहलिखन। ओ एहेन ितयागी छला। आ अह~...।” तैपर िदवाकर बाबू बजला- “तँए ने, प~च बीघा जे जमीन छेलैन तइमे सँ लोके सबहक सेवा करैत-करैत तीन बीघा जमीन बेच लेलैन। बेसी गप-स“ प निह क‘। लाउ एके साए ‘पैआ आ कागज िलअ।” हम कहलयैन- “िदवाकर बाबू, हमरा लग तँ एकोटा टाका नइए, तहन हम केतए-सँ िदअ।” िदवाकर बाबू आँिख गुड़äत कहलैन- “पचासोटा टाका लाउ, निह तँ पचीसोटा टाका िदअ।” हम कहलयैन- “सेहो नइ अिछ।” फेर िदवाकर बाबू दराजसँ तमाकुलक िड  बी िनकािल कऽ दैत कहलैन- “तँ जाउ, दोकानसँ एक चुनौटी तमाकुले नेने आउ। हम ताबत कागज तैयार कऽ दइ छी।” हम सोचलॱ आब की करी की निह, चुनौटी लेलौ आ प~च ‘पैआक तमाकुल लेल िवदा भेलॱ। हमरा परोछ भेलाक बाद दोसर िकरानीसँ िदवाकर बजला- “एहेन बुिड़ लोकक• निह देखलॱ। प~चोटा टाका लऽ निह आएत   लौक! फोकटेमे काज कराएत!” हम जाबत तमाकुल लऽ कऽ एलॱ ताबत कागज तैयार छल। हाथमे कागज दैत िदवाकर कहलैन- “ई देब घर िछऐ, िबना देने काज नै ससरत।” कागज लऽ कऽ माल गोदाम िदस जाइत रही िक हमरा पंचायतक ¤ामसेवक जदूवीर पासवान भेट गेला। हुनका सभ बात कहलयैन। सेवकजी कहलैन- “िदवाकर बाबूक• आदते एहने छैन। जहन हमरो सभक• कहता जे तूँ सभ बड़ माल मारैत छह, चलह चाह-पान कराबह। केकरो िबना िकछु नेने काजे ने करै छिथन। तूँ तमाकुल देलहक ओकरा की करता तँ

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पÀीमे झािड़ कऽ रािख लेता आ दोसर जे िकयो काज करबए लेल औत, तँ ओकरा फेर ओ चुनौटी धरा देिथन जे एक चुनौटी तमाकुल नेने आबह।” “िकयो देखिनहार-सुनिनहार निह अिछ एहेन चू“ पा चोर सभक•।” -हम कहलयैन। तैपर सेवकजी बजला- “नाजीरक िपते ने तेहेन Œ याग-तप) या केने छैन जे िदवाकरक मुह• देख छोिड़ दइ छइ। जिहना िकयो बाप-दादाक कृतसँ उ©ार होइत चलैत अिछ तँ िकयो अपना बदौलत बाप-दादाक काजक• उ©ार करैत अिछ। िकयो हािर कऽ जीतैत अिछ तँ िकयो जीतला बाद हारैत अिछ। जेकर ओजने एक चुनौटी तमाकुल, तेकरासँ की उमीद कऽ सकै छह।” ◌ श  द सं° या : 794

आब किहया चेतब 25 अIैल 2015 इ) वीक घटना छी। िकयो ) नान करैत छल, िकयो ) नान किर कऽ खेनाइ खा रहल छल, िकयो अराम कऽ रहल छल। िकयो Ïेf टरसँ खेत जोता रहल छल जे रौदीमे जोतलाहा खेतक दुिभ मिर जाएत आ खेत िनरोग रहत। समय पिहल िदनुका सबा बारह बजे आ दोसर िदनुका साढ़े एगारह बजेक लगभग िछऐ। एकाएक धरती डोलए लगलै। अफरा-तफरी मिच गेल। के धनीक, के गरीब सभ एकरंगाह भऽ गेल, जेलक खेनाइ बेÐका समय जक~ सभ िकयो घरसँ िनकैल फिल जगहमे चिल गेल। घरसँ िनकलैमे आ अफरा-तफरी भेने केतेक गोरेक• ट~ग-हाथ टुटल। केतेक घर-दुआर तहन-नहँस भेल। कोन दÎत-दानो छेलै जे देवालयक• सेहो नइ बकसलक। केतेक• छातीक धड़कन बिढ़ गेल। अ) पतालमे रोगीक• रखैक जगह नइ रहलै। एके अिछयापर दस-दसटा मुद‚क डाह-सं) कार भेल। केतेक गोरे तँ मकानक मलबाक• तरेमे रिह गेल। जेकरा मशीनसँ धरतीए-मे पचा देल गेलइ। बाबाक नाम छेलैन छोटे लाल दास, लोक हुनका पारखी बाबा कहैत छेलैन। उमेर करीब 85-90 बख/क छेलैन। प¾ी सुशीला जीबते छेलैन। बबो ) नान किर कऽ भोजनपर बैसले छला। दू कर भात-दािल खेने हेता िक निह, प¾ी सुशीला कलपर सँ पािन आनए गेल छेली िक तखने धरती डोलए आ कुदकए लगलै। घर लगक पोखैरक पािन उछैल कऽ महार टिप गेल। प¾ी सुशीला बपहािर काटैत बजली- “ई की भेलै..!”

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कहैत सुशीला कलेपर धँइ भटका खसली आ अचेत भऽ गेली। बबो ताबत कुिद-फािन कऽ, फिल ऑंगन छेलैन, चल गेला। दू-तीन िमनट तक कनी-मनी धरती डोिलते रहलै। केकरो िकछु फुरेबे ने करै जे की करी। धरती उठतै िक आ बैसते आिक धँसतै। बाबा ह ला केलैन- “दौरे जाइ जा हौ..!” िकछु गोरे आएल आ सुशीलाक• उठा-पुठा कऽ दलानपर जे भागवत करौलहा मरबा छेलै, तेते बैसा कऽ पािनक छीचा देबए लागल। ताबत डाf टरोक• बजा कऽ आनल गेल। दवाइ-दा‘ कएल गेल। बड़ी कालक बाद सुशीला ठीक भेली। स~झक समय छेलै, बहुत गोरे मरबापर बैसल छल तखने सजन, बाबासँ पुछलकैन- “अँए यौ बाबा, एना िकए भेलै। ई की छेलै। हम तँ बौक भऽ गेल छेलॱ। जह~ िक देह डोलए लागल िक अँगनासँ भगलॱ। रोडोपर जेना िकयो उठा कऽ पटैक देलक तिहना बुिझ पड़ल।” पारखी बाबा, कहलिखन- “बौआ, ई भुमकम छेलै। तूँ सभ ने पिहल बेर भुमकम देखलहक। हम तँ छोटका-मोटका छोिड़ तीनटा बड़का भुमकम देखिलऐ हेन। पÎतीस इ) वीक भुमकम सभसँ जोरगर छेलै। केतेक ठाम बड़का-बड़का दरािर फािट गेलै, केतेक घर-दुआर नास भेल, केतेक जान-मालक नोकसान भेल तेकर कोन ठेकान। सतासीक बािढ़ आ अठासीक भुमकम नामी अिछ। ओहू बेरका कम नै छेलै अदहा भारतक• पुरबसँ पि¢ छम तक आ उ‰रमे नेपालक• सेहो डोला देलकै। अठासीक भुमकमक केZ l छेलै मधुबनी आ सीतामढ़ीक बीचमे आ ऐ बेÐका केZ l छेलै नेपालमे काठमाJ डूक नजदीक, तँए ओतए बेसी छित भेलै। जेकर केZ l जेतए रहैत अिछ तेतए बेसी छित आ दूरबलाक• कम असर पड़ै छइ।” “एना िकए छै बाबा?” –सजन पुछलकैन। ताबत पिJडत काका टीप देलिखन- “रौ सजन, धरती तरमे कौछु छै, ओकरापर जहन पापी सबहक भार पड़ै छै ने तहन ओ देहक• डोलबए लगैत अिछ तिहन भुमकम होइ छइ।” सजन पुछलकैन- “अँए यौ पिJ डत काका, केतेकटा कौछु छै जे पूरा धरतीए-क• डोला दइ छइ?” पिJ डत काकाक• िकछु फुरबे ने करैन। तैबीच भुलचन बाजल- “नइ यौ पिJ डत का, शेषनागपर ई धरती अिछ। ऐ धरतीपर जहन बेसी पाप, अŒ याचार, Ç यिभचार, अपहरण आ हŒ या हुअ लगैत अिछ तहन शेषनाग अपन फनक• डोला ह लूक करैत अिछ।” जेकरा जे जेना बुझल छेलै से तेना अपन-अपन तक/ दैत छल। पारखी बाबाक• जहन सबहक गप सुिन-सुिन कऽ मन घोर भऽ गेलैन तँ गप हँकिनहारक• पुछलिखन-

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“जापानमे िकए दसे िदनपर भुमकम होइ छइ?” सभ चुप भऽ गेल। िकयो ने िकछु बाजए। बाबा बजला- “ई बात निह छइ। Iकृितमे माने ¸¹ाJ डमे जेतेक व) तु-जात आिक पदाथ/ अिछ सभक• अपन-अपन गुण-अवगुण छइ। पृÝ वीक• सेहो अपन गुण-अवगुण छइ। पृÝ वी अपना पेटमे असं° य व) तु सभक• रखने अिछ। ठंढ-गम/ तँ सभ व) तु होइते अिछ िकने। सभक• अपन गित छै िकने। धरितयोक• अपन गित अिछ। ओकरो पेटमे जखन गैस वा पदाथ/मे गमX होइ छै तँ केतौ ¬ वालामुखी बिन, तँ केतौ परत-पर-परत चिढ़ गेल तँ केतौ धरतीए घँिस गेल, तँ केतौ झील बिन गेल तखनेने भुमकम होइ छइ। जिहना ल² मण रेखा टपला बाद सीता हरन भेलै तिहना अिधक कोनो व) तुमे भेलाक बाद उ¤ ‘प भाइये जाइ छइ।” सजन पुछलकैन- “ऑंइ यौ बाबा, तिहन तँ बाइढ़ोमे अिहना होइत हेतइ?” बाबा बजला- “हँ, Iकृितमे प~चटा जे तŒ व अिछ जेना अकास, सूय/, हवा, जल आ धरती एही प~चो तŒ वसँ बनल ई शरीर अिछ आ अही प~चोक नजैर सभ मनुखपर बराबर अिछ। यएह ने देवता भेल, जेकरामे कोनो भेद-भाव नइ होइ। अकासमे जेकरा जेतेक उड़बाक होइ उिड़ सकैए। सुÐजक नजैर सभपर बराबर पड़ैत अिछ। मौसमक िहसाबसँ अपन गुण-अवगुण छइ। बैशाख-जेठमे गमX जन-माÐख होइए आ वएह गमXक जाड़मे संजीवनी बुटीक काज करैत अि़छ। तिहना जलोक• छै, सबहक लेल बराबर बरसैत अिछ। मुदा वएह जल किहयो Iलयकारी बािढ़ सेहो आिन दैत अिछ तँ किहयो िपयासक लेल तरसबैत सेहो अिछ। तिहना हवोक• छै, सबहक लेल बराबर। किहयो माÐख तँ किहयो शीतलता सेहो दैत अिछ। तिहनाने धरितयोक अिछ। धरतीक• धरती माता किह कऽ लेाक पुकारैत अिछ, जिहना माए अपन िधया-पुताक• केतबो क­ ट सिह कऽ पालन-पोषन करैत अिछ तिहना ने धरती सेहो करैत अिछ।” ताबत सुशीला चाह नेने एलिखन। सभ िकयो चाह पीबए लगला। चाह पीब, िकयो तमाकुल तँ िकयो बीड़ी पीबैत गप-स“ प करए लगला। भुलचुन बाजल- “अँए यौ बाबा, हम सभ जे एतेक पुजा-पाठ करै छी से देवता सभ िकए ने क­ टक बेरमे सहायता करैत अिछ?” बाबा बजला- “रौ भुलचुन, लोकक चािल बुझबीहीन तँ देहमे आिग लिग जेतौ। चलाकक काज िछऐ। अपन ) वाथ/क लेल मनुखक• बँटैत-बँटैत लोक आŒ मोक• बॉंिट नेने अिछ। भगवान आ धरतीक• के पुछैए।” तैबीच सजन बाजल- “तिहन केना कऽ जीब?” बाबा कहलिखन-

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“बौआ, बाÐदक ढेरपर छह। कखन छह कखन निह, तेकर कोन ठेकान। बािढ़, रौदी, भुमकम, अिगल§ गी, आतंकवादीक आमण, सुनामी आ पैलोनक आमण, ऐ सभक• पछाड़ैत सही र) ता बना अपनाक• ठाढ़ केने जे जीब लेता वएह पूजणीय भेला। हुनके समाजमे पूजल जाइत अिछ। मृŒ युए-क नाम छै ने सŒ यम,िशवम, सुZ दरम्। आब मशीनी युग आिब गेल हेन। जिहना घZ टोक काज सकेJ डमे होइत अिछ, तिहना आफदो देखते-देखते Iलय मचा दइ छइ। तँए आबो चेतइ जाइ जा। मनुख बिन आएल छह, मनुख जक~ आचरण बना जीबह। केतेक की कहबह। बड़ ओझरी सभ छै ओझरीक• सोझरबैत चलैत रहह।” ◌ श  द सं° या : 997

िवघटनकारी तŒŒव जीवन बाबाक• िसिरफ प~च कÚा बाड़ी-झाड़ी छल। जे एËे िदनक बख‚मे एक मरद करीब पािन लािग गेल। तेकर कारण छल, चा‘कात व) ती रहने पािनक िनकास निह। जीवन बाबा एकटा दख‚) त एस.डी.ओ. आ जे.ई.क• देलिखन जे हमर सबहक पनरह बीघाक “ लॉट जे झीलनूमा बिन गेल हेन, तेकर िनदान कएल जाए। जीवन बाबाक िजनगी सभ िदन संघष/मे बीतल। जइ समैमे छाWक िजनगीमे छला तहू समैमे बाबा गाइक सेवा आ खेती-बाड़ीमे तरकारी-फरकारी उपजबैथ। वएह सोन सन चौमासमे करीब स‰ैर घौड़ केरा, पनरहटा अनरनेवाक गाछ, प~चटा सीमक गाछक संग करैला, सरीफा, धाWीम आ अनारसक करीब एक साए गाछ आ तैसंग कÚा भिरक घेरा गाछक जिड़मे दू हाथ-तीन हाथ पािन लािग गेलैन। रंग-िबरंगक जे फल-फलहरीसँ लऽ कऽ तरकारी-फरकारी तक छल ओ सुÛडाह भऽ गेलैन। यएह दुद/शा फलक देख बाबा दरखा) त देने छेलिखन। 1960-65 इ) वीक अमलमे पुरना मुिखया छला। ओ दिछनवािह टोल आ मुसहरीक बीचमे एकटा पाइप देने छेलिखन पािनक िनकास लेल। गामक जे गोठ टोल अिछ जइमे करीब पचास घर मुसलमान, अ) सी घर मुसहर, स‰ैर घर धानूक, चालीस घर वæ¹णक बास अिछ ओइ सबहक घर आ चौमासक पािन ओही पनरह बीघाक गोरहा खेतमे अबै छल आ पाइप देने पोखैर होइत दिछनबिरया बाघ िदस चल जाइत छल। जइसँ धान, गहुम, मौसरी, खेसारी, सेरसो, तीसीक संग रंग-िबरंगक तरकारी-फरकारी सभ उपजैत छल।

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दस साल पिहनॱ पंचायतसँ पुिलयाक िनम‚ण भेल छेलइ। आर.ड   यू.डी. सड़कसँ एकटा सड़क मू° य मंWीक योजनासँ मंजूर भेल। ओ सड़क धनुकटोलीसँ दिछनवािह टोल होइत मुसहरी होइत मुसलमानक टोलमे जा कऽ खतम होइत अिछ। जखन सड़कपर िम¼ीकारण होइत छल तखने पािनक िनकासी लेल गप-स“ प चललै। ठीकेदारक• एकटा पूल देबाक छेलै पािनक िनकासी लेल। ओ वेचाराक• िकयो अपना घरक आिक खेतक ऑंगामे पूल बनबैये ने देलक। वेचारा ठीकेदार हािर-थािक कऽ गोठक पुबिरया चौरमे जा कऽ एकटा पूल बना देलकै जेकर कोनो उपयोग निह। कहबी ठीके छै- लोल केतौ घोघ केतौ…। सएह पइर। सरकािरयो ऐमला-फिमला िक कम पhच-प~च लगबै छइ। िकयो अपना सीर अपजश लेबिह ने चाहत, ¤ामसेवकसँ लऽ कऽ बी.डी.ओ; जे.ई. आ कलf टर तक ओ ओकरा िलखत तँ ओ ओकरा िलखत। ताबे समैये बीत गेल। सएह भेलै जीवन बाबाक दरखा) तक। एस.डी.ओ. िलखलक बी.डी.ओ.क• आ बी.डी.ओ. िलखलक जे.ई.क•। जे.ई. जहन सहर-जमीनपर मोआइना करए एला तँ दिछनवािर टोलक िवघटनकारी तŒŒव सभ जलखै- चाह-पान करा तेसरसँ कहबा देलक जे ऐठाम पुलक ज‘रते ने अिछ। जहन ओहू टोलक लोकक जमीन ओइ पनरह-बीस बीघाक पलॉटमे। तेतबे निह ओही टोलक एकटा Iोफेसर साहैबक आँगनमे पािन भिर छाबा लागल। आ_ चय/ तँ ई जे ओहो कहलिखन जे ऐठाम पुलक ज‘रत नइ छइ। जहन ढलाइ पूरा भऽ गेलै तहन फेर जे.ई. साहैब सड़कक मोआइनामे एला। संयोगसँ आइ गॱआँ सभ उनटल जे.ई. साहैबपर। जीवन बाबाक तँ सभ िकछु दहाइये गेल छेलैन। मन िबखाएल रहबे करैन। जे.ई.क• देखते बजला- “रौ, घुरना इहे िछयो इZ जीिनयर, पकड़! ला रासा बाZ ह तँ आ क~च-करचीसँ देह ततािर दहीन।” जे.ई.क• तँ होशे उिड़ गेलइ। तखने जोिखयाक प~च बख/क बेटा बाड़ीमे कलपर चिल गेल। ओ ओंघरा-पॲघरा कऽ भिर ड~र पािनमे चिल गेलइ। ह ला भेलइ। जे.ई.क• आब तँ िकछु फुरबे ने करइ। ब¢ चा ताबे किनय• पािन पीने छल। जे.ई. बाजल- “अह~ सभ धीरज ध‘। हमरा जाए िदअ। कोनो-ने-कोनो िनदान भऽ जाएत।” तैपर िकसुन सदाय बाजल- “निह, नइ जाए िदयौ यौ जीवन बाबा।हमर जे घर खिस पड़ल हेन दाबा लागल अखनो पािन अिछ, से की हेतइ।” रहमान, जे कुजरटोलीक छल, तखने ओहो हहासल-िपयासल दौड़ल आएल। अिबते बाजल- “चलू तँ देिखयौ तँ हमरा ऑंगनमे भिर ठेहुन पािन लागल अिछ। स~प-कीड़ा सभ अँगने-घरे सहसह करैए।” मुदा दिछनवािह टोलक लोक िकयो ने िकछु बजैत। सबहक मन रहइ- धू: कनी-मनी \ितये ने भेल। बेसीसँ बेसी ऐबेर उपजा नै हएत। मुदा िवरोधी सबहक तँ घर-दुआर खसतै ने। जान-मालक \ित हेतइ ने।

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बड़ जे संघष/शील सभ छला तँ आब बुझौत। हमरा सभक• कोन अिछ िधया-पुता सभ बq बई-िद लीमे मारे कमाइए। गुजर-बसरमे किहयो किनËो िदËत थोड़े हएत। जे.ई.सँ जीवन बाबा पुछलिखन- “कहू तँ एक मिहना हमरा दरखा) त देना भऽ गेल। ताबे सड़कपर मािटये पिड़ रहल छल। आब तँ िग¼ी-गा¼ी दऽ कऽ िसमेZ टसँ ढलाइयो भऽ गेल। कहू तँ दरखा) त जे देने रही से किहयो हमरा सूचनो देलॱ जे अह~ चुपे-चाप ज~च किर कऽ चिलयो गेलॱ। देखू तँ हमर फिसल सबहक दशा।” जे.ई. बाजल- “ई हमरासँ गलती भेल। आब एना नै हेतइ।” जीवन बाबा कहलिखन- “तँ बाजू जे पूल वा पुिलया किहया बनतै आ हमरा सबहक घर-अँगनाक पािन किहया िनकलत?” जे.ई. बजला- “चािरसँ प~च िदनमे पािनक िनकासी भऽ जेतइ।” “ठीक छै जाउ, मोन राखब। निह तँ सभ गुJ डइ िनकैल जाएत।”- जीवन बाबा कहलिखन। जे.ई. साहैब तँ चिल गेला। 10 िदन समैयो बीत गेल मुदा कोनो तरहक कारगुजारी निह। िवघटनकारीलोक तँ अिहना सोिचते अिछ जे िकछु गमेलोसँ जँ अनकर \ित होइ तँ ओहन सोचबला लोकक मुँह मिलन नइ होइत अिछ। ओकरा खुशीए होइ छइ। सरकािरयो तंWक• तँ वएह गित अिछ। ऊहो िक आम जनताक• खुशहाल थोड़े देखए चाहैत अिछ। कुसX भेटलै सभ िकछु िबसैर गेल। ◌ श  द सं° या : 777

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नारायण यादवजीक चािरटा लघु कथा- चौदह नq ब र कोट/ रमेशक पढ़ाइ चिल रहल छल। बी.ए. पास कए बी-एड. कऽ रहल छला। बी-एड.क परी\ा दऽ घर आएल छला। आगू पढ़ैक िजÔासा सेहो छैZ हh। रमेशक िपता िकसान छैथ। हुनक आमदनी Z यून छैन। जेना-

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तेना घर-पिरवारक काम-काज चलै छैन। पैघ खच‚ लेल जमीन-जाल बेचए पड़ै छैन। रमेशक• देखते िपता कहलिखन- “बौआ, परी\ा केहेन भेलह। आब हम आग~क पढ़ाइ हेतु खच/ केतए-सँ देबह। औरो िधया-पुता अिछ। बेटीक िबआह आ िदनेशक पढ़ाइ कपारपर अिछ। आब अह~ केतौ नोकरी-चाकरी आिक कोनो नीक धZ धा क‘ जइसँ घरमे खुशहाली बनल रहत। घरक काम-काजमे आब अह~क माए नइ सकै छैथ। तँए आब िबआहो कए िलअ जइसँ माइयोक• सुख भेटत आ हमहूँ IसÀ रहब। अही साल अखाढ़मे सभा गाछी चलू।” िपताक बात सुिन रमेशजी मौन छला। मौन ) वीकार ल\णq । रमेशक बाबूजी रमेशक सहमित पािब सौराठक सभा गाछी जाइक तैयारी करए लगला। सौराठ मधुबनीसँ प~च-छह िकलोमीटर उ‰र-पि¢ छम कोणमे अिछ। िमिथलाक पौरािणक परq परा िविचW अिछ। िमिथला छोिड़ एहेन परq परा केतौ नइ छइ। माल-जालक हाट जक~ बरक हाट लगै छइ। िबआहक लेल बिन-ठिन कऽ बर सभा गाछी अबै छैथ। किनय~बला सेहो बरक खोजमे सभा गाछी पहुँचै छैथ। किनयागत बरक नाम, ठेकान, मूल, गोW आ यो§ यतासँ अवगत भऽ पंिजकारसँ सq पक/ करै छैथ। बर-किनय~क मेल आ बरक सोभावसँ किनयागत आiा) त भेला बाद िबआहक चच/ करै छैथ। ई केतेक नीक बेव) था मैिथली ¸ा¹ण समाजक बीच अिछ जे किनयागतक• बरक खोजमे घरे-घर, ’ारे-’ार निह जाए पड़ै छैन। ओना, िकछु किनयागत दलालक फेरामे पिड़ ठकाइयो जाइत अिछ। सभा गाछीमे एकटा पीपरक गाछ अिछ, सुनै िछऐ जे जइ िदन एक लाख ¸ा¹णक जुटान सभा गाछीमे भऽ जाइत अिछ ओइ िदन ओ पीपरक गाछ मौला जाइत अिछ। जे किनयागत ि) थर मने, धैय/सँ छानबीन कए बरक चयन करै छैथ हुनका सफलता ह~िसल होइ छैन। शादी-िबआह बड़ सोिच-समैझ कऽ करक चाही। बुढ़-पुरानक कथन छैन जे हाड़-िबयाही मeस निह। पिरवारक ) तq भ नारीए होइ छइ। कुशल गृहणी घरक• ) वग/ बना दैत अिछ। िबनु घरनी घर भूतक डेरा आ अिछ घरनी तँ लागत फेरा। तँए कZ य~क शील-सोभावक संग खनदान देिखए कऽ कथा-कुटुमैती ठीक करक चाही। रमेशक बाबूजी गामक दू-चािर भल मानुषक• संग कए सभा गाछी पहुँचला। एक-दू िदन केतेक कZ यागतक• आपस केलैन। बर, प~च-सात फीट नमगर,छरहरा बदन, गोर वण/ बड़ सुZ दर भÇ य शरीर। बरक अनु‘प किनया चाही आ बरातीक ) वागत सŒ कार सेहो खूब नीक जक~ हेबाक चाही। तैसंग िकछु दानो- दहेज गु“ त ‘पे हेबाके चाही। ओना, ई बरक िपताक इ¢ छा रिहते अिछ। तँए बुढ़-पुरान कहै छैथ जे सभ वरयाती कए मन? तँ ओकर जवाब होइत अिछ- ‘तीन मन।’ तीन मन ओजनमे निह, तीनटा मन, एकटा लड़काक मन जे खूब नीक किनय~ हुअए,दोसरमन बरक िपताक होइ छैन जे हमरा खूब दहेज भेटए आ तेसर मन बिरयातीक होइ छैन जे बिरयाती लोकैनक• खूब ) वागत-सŒ कार हेबाक चाही। एकटा पि¢ छम तरफक कZ यागत िहनका लग जे बरक बापक दूरक सरोकािरये छेलैन- टकरेला। बर- कZ य~क िवषयमे दुनू प\क• पिहनिहसँ जानकारी छेबे केलैन। िबआहक िदन-ठेकान तय भेल।

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मैिथल लोकैन बड़ बुिधयार होइ छैथ। िबआहक अिZ तम ल§ नक आस-पास सभा गाछीमे सभा लगबै छैथ। आ धड़फड़मे एËे-आध िदनक बीच िबआह ठीक करै छैथ। जइसँ ने काड/ छपबए पड़ै छैन आ ने गाड़ी-घोड़ाक बेव) था करए पड़ै छैन। प~च-दसटा बराती लए कम खच/मे िबआह कए लइ छैथ। हमरा गाममे एकटा पJ डीजीक बेटीक शादी ठीक भेलैन। किनयागत पुछलकैन- “समैध बराती केतेक एबइ?” बरक िपता कहलिखन- “बिरयाती Z यूनतम तीन अंकमे रहत।” तैपर कZ यागत बजला- “हम निह समैझ सकलॱ!” ताबत शीबू काका बजला- “निह बुझलहक, तीन अंकक सभसँ छोट अंक भेल- 100 यानी एक साए बिरयाती औता।” कZ यागत साए गोट बिरयातीक बेव) था केने छला। जखन बिरयाती दरब¬ जापर पहुँचला तँ माW एकटा मोटर गाड़ीमे बर लगा प~चटा आदमी छल। ओना, बरक िगनती बिरयातीमे निह होइ छइ। तँए घरवारी पुछलिखन- “समैध, आरो गाड़ी सभ अिछ िकने?” बरक िपता कहलिखन- “निह समैध, माW चािरटा बराती छी।” ई बात सुिनते कZ याक िपता आिग-बबूला भऽ गेला। तामसे थरथराइत बजला- “अह~ हमर सभ भोजनक साम¤ीक• बरबाद करेलॱ। अह~ कहनेरही जे हम एक साए बिरयाती आएब। मुदा तैठाम चािरटा बिरयाती एलॱ अिछ! कहू तँ हमरा सभक• बेइजत करा रहल छी िकने।” बरक िपता बजला- “समैध, चािरटा बराती घरपर एला आ एकटा पुरंधर काका पौखैर महारपर उतैर गेला। ओ पर-पैखाना किर कऽ औता।” कZ यागत कुदैत बजला- “हमरा अह~ बुिड़बक बनबै छी िकने।” पुन: बरागत बजला- “समैध, बरातीमे िनहालू बाबू। देखबू बाबू, िशबू बाबू, हम आ पुरZ धर काका छैथ।अह~क एËो चुटकी भोजनक कोनो साम¤ी बब‚द निह होएत। सुनू नौ (9) नेहालू (17) सWह देबू, बारह-बारह हम शीबू जखन औता पुरZ धर काका लगौता पचासक धËा। कहू सौ आदमीक पारस सधत िक निह। अह~क हम उपकारे केलॱ जे 100 आदमीक िवदाइक बदला माW प~च आदमीक• देबए पड़त।” कZ यागत िकछु निह बजला।

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रमेशक िबआह साधारणे पूव/क भेल। आब पित आ प¾ी खुशी पूव/क दामपŒ य जीवन िबता रहल छला। िकछु िदन सासुरेक ‘पैआ-पैसासँ सुख-मौज करैत रहला। मुदा आब प¾ीक फरमाइशक पूित/ निह भऽ रहल छैन। रमेश मने-मन सोचैथ जे केतौ जा कऽ कोनो नौकरी करी। रमेशक एक िमW सुरेश छेलिखन। दुनू िमW टाका-पैसा कमेबाक हेतु कलक‰ा जेबाक िवचार केलैन। िपताक िवचार सेहो छेलैन जे बेटा बाहरसँ िकछु टाका-पैसा कमा कऽ घर लाबैथ। Iाय: सभ िपताक ई इ¢ छा रिहते छैन जे बेटा नौकरी करैथ, टाकाक उपाज‚न करैथ आ घरक• खुशहाल बनाबैथ। रमेश आ महेश माए-बापसँ अनुमित लऽ कलक‰ा I) थान केलैन। कलक‰ा ‘कल’पर अिछ से ओ बुझैत छल। सेाहे आइ देख लेत। बरौनी होइत िसमिरया पूलपर पहुँचल। रमेश गंगा मैयाक मने-मन नम) कार केलक। आ जेबीसँ िकछु पैसा िनकािल दुनू िमW म~ गंगाक• चढ़ा देलक। आ म~ गंगासँ Iाथ/ना करैत बाजल- “हे गंगा मैया, हम सभ जइ धारणासँ कलक‰ा जा रहल छी, से पूरा करब।” गाड़ी िनयत समयपर कलक‰ा ) टेशन पहुँचल। ऐसँ पिहने दुनू िमW घरसँ किहयो िनकलल निह छल। शु© देहाती जक~ दुनू गोरेक देह-दशा आ बगे-वािण रहइ। धोती-कु‰‚ आ ललाटपर चानन िमिथलाक पहचान छल। कलक‰ा पहुँच ओ सभ अपने गॱआँ-घ‘आसँ भ•ट केलक। गाम-घरक लोक सभ अपना गॱआँ- घ‘आक• बड़ आगत-भागत करैत अिछ जे भेलैन। खूब ) वािद­ ट भोजन आ सq पूण/ कलक‰ाक èमण, महŒ वपूण/ ) थानक दश/न करौलकै। रमेश आ सुरेशक मेहमानी गॱआँ-घ‘आक ओइठाम चलए लगलै। ऐ तरह• दस-बारह िदन िबत गेल। दुनू िमWक• मन लागए लगलै। एक िदन दुनू िमW सबेरे उठला। ) ना-िधयान आ भोजन कए बजार िदस िवदा भेला। बाट गली जक~ छल। ई बाट गली होइत आग~ मेन रोडमे िमलैत छेलइ। जाइतकाल रमेशक• लघी लािग गेलैन। लघीक संवेदना िविचW होइते अिछ। जखन एक संगीक• लघी लगै छै तँ संगमे जे िमW रहल हुनको लघी लािगये जाइत अिछ। सुरेश सेहो एकटा नालीमे लघी करए लगला। लघी समा“ तो ने भेल छल िक पाछूमे दूटा बंगाली पुिलस ठाढ़ देखलक। जी तँ उिड़ गेलइ। तैबीच पुिलस बाजल- “आप इस गलीमे f यॲ पेशाव िकये हÎ। बगलमे पेशावखाना बना हुआ है। वह~ f यॲ नहॴ पेशाव िकये। गली को Iदूिषत करने के जूम/ मh आप दोनॲ को िगरéतार िकया जाता है।” दुनू िमW अचिq भत भऽ गेला। बंगाली पुिलसक सामने बड़ िगरिगरेलाह। िकछु ‘पैआ-पैसाक Iलोभन सेहो देलैन। मुदा िबहार पुिलस जक~ बंगालक पुिलस निह छल। ओ रमेशआ सुरेशक• डािट-टपैट देलक।आ बाजल- “िबहार से आये हो?” दुनू गोरे एËे बेर बाजल- “जी हुजुर, िबहारसँ आएल छी।”

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ओ सभ सोचलैन जे घूसखोरीमे िबहार केतेक बदनाम अिछ जँ िबहार रहैत तँ ज‘र छोिड़ दइत। दुनू गोरेक• पकड़ने पुिलस थानापर लऽ गेल। दुनूक• देखते थाना Iभारी बजला- “आप लोग प~च-प~च ‘पैआ जमा कीिजए।” सुिनते दुनू िमWक• मन बड़ खुशी भेलैन। जे प~चे ‘पैआमे जान छुिट गेल। पँच-पँचटा ‘पैआ दुनू िमW जेबीसँ िनकािल दरोगाक• देलैन। दरोगा एकटा रसीदक संग एकटा फाम/ सेहो भिर कऽ दैत दुनूक• कहलक- “ये सभ कागजात 14 नq बर कोट/मे मिज) Ïेट को दे दीिजएगा। वह~ केश दायर हो जाएगा। आप लोग भािगयेगा नहॴ। नहॴ तो फेरा मh पड़ जाइयेगा। और वारJ ट हो जाएगा।” थानापर सँ दुनू िमW उदास मने िवदा भेला। कागजात सेिरया कऽ रखलैन। राितमे डेरापर एला। भिर राित िनÀ निह भेलैन। भोरे उिठ ) नान-भोजन कए दस बजे कचहरी िदस िवदा भेला। लाजे कोनो गॱआँ- घ‘आक• ई बात निह कहलिखन। Ïामसँ कचहरी पहुँचला। कचहरीक दृ_ य देख आØय/चिकत भऽ गेला। एहेन सुZ दर आ एतेक मोट-मोट पायाबला मकान किहयो ने देखने। िकछु काल धिर रमेश आ सुरेश मकानक भÇ यता आ लोकक चहल-पहलक• देखैत रहला। तेकर बाद चौदह नq बर कोट/क• ताकए लगला। तकैत-तकैत लोगो सभसँ पुछैत-पुछैत आग~बला मकान तक पहुँचला। ओतए एकटा दéतरक आग~बला मकान तक पहुँचला। दéतरक आग~ िकछु लोक चटाइपर बैसल छल। चटाइपर बैसल बेकती सभसँ पुछलैन- “यौ 14 नq बर कोट/ यएह िछऐ?” मुंशी जे चटाइपर बैस िकछु िलख रहल छला। साकeच भऽ गेला। आ ओइ दुनू िमWक• शोर पाड़लैन। रमेश आ सुरेश मुंशीक ओतए पहुँचला। मुंशी पुछलिखन- “आप लोग मोड/न एपाट/मेZ ट गली मh पेशाव कर िदऐ हÎ।” दुनू गोरे एËे बेर बजला- “हँ यौ।” रमेशजी दरोगाक ’ारा देल कागज िनकािल कऽ मुंशीजीक हाथमे थमा देलैन। मुंशीजी बजला- “तीन-तीन ‘पैआ लाइए।” मुंशीजी क• तीन-तीन गोट टाका िनकािल दुनू िमW देलैन। मुंशीजी दूटा फाम/ िनकािल दुनूपर िकछु िलख रमेश आ सुरेशसँ ह) ता\र करा कोट/क अZ दर जा कऽ पेशकारक• सभ कागजात दए देलिखन। आ बाहर आिब रमेशक• कहलैन- “आप लोग यहॴ बैिठये। 2 बजे कोट/क• अZ दर चले जाइयेगा। यह~ कोई आप लोगोको बुलाएगा नहॴ।”

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दू बजेक इZ तजार करैत दुनू िमW बैसल रहला। जखन दू बाजल तँ दुनू गोरे कोट/क अZ दर Iवेश केलक। कोट/मे मिज) Ïेट बैसल छला। पेशकार इजलासक िन¢ च~ एकटा कुसXपर बैसल आग~ टेबुलपर िकछु संिचका सभक• उलट-फेर करैत छला। ओही समैमे रमेश मुंशीक ’ारा देल कागजात पेशकारक आग~मे रािख देलैन। पेशकार िहनकर कागज साहैबक• बढ़ा देलिखन। साहैब कागजक• उलटा-पुलटा कऽ पिढ़ बजला- “आप लोग मोड/न आपाट/मेZ ट गलीमे पेशाब कर िदऐ थे?” दुनू िमW अपन-अपन हाथ जोिड़ बजला- “जी सरकार! हम लोगॲ से गलती हो गई। अब से इस तरह की गलती नहॴ होगी।” मिज) Ïेट साहैब सहृदय बेकती छला। ओ पुछलिखन- “आप लोग िबहार से आये हÎ?” रमेशक मुहसँ िनकलल- “जी सर।” साहैब बजला- “आप लोग आठवh िदन आइयेगा आपका मुकदमा खŒ म कर दhगे।” रमेशक मुहसँ एकाएक बजा गेल- “कलका िरजभÕशन है। घर जाना है।” मिज) Ïेट साहैब दयालू सोभावक छला। पुछलिखन- “िबहार मh आप लोगॲ का घर कह~ पड़ता है?” रमेश कहलिखन- “मधुबनी िजला, सर।” साहैब बजला- “जह~ सौराठ सभा लगता है?” रमेश कहलकैन- “जी सर।” मुड़ी डोलबैत मिज) Ïेट साहैब पेशकारक• कहलिखन- “पेशकार साहेब, ऑड/र सीट तैयार कीिजए।” किह, मिज) Ïेट साहैब फाइलपर िकछु िलखए लगला। आ पेशकार साहैब ऑडर सीट तैयार कऽ मिज) Ïेट साहैबक टेबुलपर देलिखन। साहैब, रमेश आ सुरेशक• ऐ मुकदमासँ िरहा करैत बजला-

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“आप दोनॲ Ç यिf त ये ऑड/र लेकर थानापर दे दhगे तथा प~च-प~च ‘पये जो जमा िकये हÎ, ओ ले लhगे।” रमेश आ सुरेश थानापर आिब दरोगाक• मिज) Ïेट साहैबबला कागज देलकैन। दरोगा दुनू बेकतीक• पँच-पँच टाका जे बॉJ डबला छल से आपस दए देलैन। दुनू गोरे सोचए लगला जे कोन फेरामे भगवान हमरा लोकैनक• दऽ देलैन। ◌ श  द सं° या : 1723

चौरचनक बरतन अZ धराक हाट शु आ सोम िदन लगैत अिछ। वर) पैत िदन चौरचन पावैन िछऐ। इलाकाक लोक सभ पावैन-ले मािटक घैला,मटकुरी, लावन, दीप आ छ~छी कीनैक जोगारमे अिछ। चौरचनक धािम/क माZ यता जे होइ ई जानकारी दाइ-माइ लोकैनक• होिन वा निह होिन मुदा बहुत ताम-झामक संग ऐ पावैनक• मनौल जाइत छइ। सुवंश बाबू घरसँ बाहर िनकलला। िहनका घरक आगॉंमे एकटा यादवजीक घर छैन। सुवंश बाबू यादवजी क• कहलैन- “यौ जेठरैयित, चलू हाट चौरचनक बरतन आनए।” दुनू गोरे संगतुिरया छैथ। दुनूमे भजार लागल अिछ। दुनू भजार हाट िदस िवदा भेला। भिर बाट आन घरक जनानी सबहक िकरदानीपर गप-स“ प करैत ससैर रहल छला। सुवंश बाबू बजला- “यौ भजार, आइ-काि हक किनय~-बहुिरया केकरो लाज-धाक थोड़े मानैत अिछ। देिखयौ ने हमर प_ टनवाली किनय~ अपन ) वामीसँ सबहक सोझ•मे खूब बितयाइत रहैत छइ। कहू! हमरा सबहक िबआह- दुरागमन भेल। दूटा बाल-ब¢ चा भेल तैयो ने दोसरक सामने घरवाली हमरासँ बाजल हेती। बितयाइत अिछ ओ सभ आ लाज होइए हमरा।” जेठरैयित बजला- “की करबै! देश दुिनय~क हालत देिखए रहल छी। ऐ समैमे कनी अपने आँिख मुिन लेब नीक। की कहूँ हमर पुतोहु हमरा लग आिब बाबूजी-बाबूजी करैत रहैत अिछ आ बेटाक िशकायत करैत रहैत अिछ। ने माथपर नुआँ रखैत अिछ आ ने बदनपर कपड़ा। हम तँ लाजे कठौत बनल रहै छी। जेना हमर बेटी रहए तिहना करैत रहैत अिछ। की कहूँ, बेटो ने एËो बेर ड~टै-डपटै छइ। आनो बेकतीक लाज-धाक नइ होइ छइ।” दुनू भजार गप-स“ प करैत अZ हरा हाट पहुँचला।

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हाटपर चौरचन पाविनक सभ समान कीिनलैथ। दूटा घैला सुवंश बाबू कीनलैथ आ एकटा जेठरैयित। दुनू भजार बात-चीत करैत पुन: हाटसँ घर िदस िवदा भेला। गाम अबैसँ पिहनिह जेठरैयित मजाक करैत सुवंश बाबूक• कहलिखन- “यौ भजार, हमरा हाथमे एकटा घैल आ अह~ हाथमे दूटा। ई अह~क• नीक लगैत अिछ?” ई गप सुिनते सुवंश बाबू एकटा घैलक• जोरसँ पटैक देलिखन आ कहलिखन- “िलअ आब दुनू भजारक• एक-एकटा घैल रहल ने।” ◌ श  द सं° या : 301

छोटकी पुतोहु आनZ दक िबआह बड़ धूम-धामसँ भेल छल। किनय~ अित सुÀैर, तँए दानो-दहेज कमे भेटल छेलैन। आनZ दक िपताmीक घोषणा छल- “कद ऊँची, नाक लq बी और रंग गोरी तो आओ, नहॴ तो बाहर जाओ।” अही अधारपर किनय~क चुनाव भेल छल। किनय~क आगत-भागतमे आनZ दक माए राधादेवी परेशान छेली। मनमे होइत रहैन जे पुतोहु औत तँ काम-काजमे मदैत करत। सेवा सुmुषा करत। भानस-भात करत। माल-जालक नेकरम सेहो करत। बाधसँ आएब तँ एक लोटा पािन लाबत आ िबऐन हॱकैत...। आिद- आिद सभ टहल-िटकोरा करत...। आइ आनZ दक माए राधा देवी बड़ खुश छैथ। खुश ऐ लेल निह जे आनZ द किनय~ लए कऽ आिब रहल छैथ, खुश ऐ लेल जे आनZ द िबआह करैले तैयारे निह भऽ रहल छल। िबआहोक उमर होइ छइ। उमर टुटल जा रहल छेलइ। ओ िबआह नइ करबाक हेतु अनेको बहाना बना रहल छल। कहैत छल ऐगला साल करब, आ जब ऐगला साल आएल तँ फेर ऐगला सालक बहाना करैत रहै छल। राधाक आ¤हपर िबआहक लेल तैयार भेल छल। ओ िदन आिब गेल जखन आनZ द अपन प¾ीक• अपना घर अनलक। मोटर गाड़ीक अबाज सुिनते अड़ोस-पड़ोसक दाइ-माइ लोकैन सभ अपन काम-काज छोिड़-छोिड़ किनय~ देखए आबए लगली। ननौरवाली सागमे सँ अटकी-मटकी बीिछ रहल छेली। ओहो सभ िकछु छोिड़ दौगल एली।

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लौफावाली ब¢ चाक• दूध िपयाबैत छेलीसे ब¢ चाक• नेनिह दौगली। हड़Xवाली आ ठाढ़ीवालीक• आमक टुकला लेल झगड़ा होइत रहै, ओहो दुनू गोरे झगड़ा छोिड़ किनय~ देखए लफरल िवदा भेली। राधा बरतन माजै छेली। बरतन माजब छोिड़ किनय~क पिरछण हेतु साम¤ी ओिरयाबए लगली। सभ दाइ-माइ जमा भऽ गेली। माथपर दौरा जइमे दीप जरैत छेलै, लय भरैत बZ हने गीत गबैत मोटर गाड़ी लग, पहुँचली। गीतक बोल छल- “एलै शुभ-के लगनमा शुभे हे शुभे...।” प~च-सात गोट सधवा मौगी सभ किनय~क पिरछण केलक। तेकर बाद किनय~क ननैद ‘पम दाइ किनय~-बरक• आँगन लए गेल। जेतेक दाइ-माइ लोकैन आएल छेली ओ सभ अपन-अपन घर िदस िवदा भेली। बाटमे किनय~क िटका-िटपJणी हुअ लगल। िससवािरवाली काकी जे सभसँ बुजुग/ छेली ओ बजली- “गे दाइ, आइ तक एहेन किनय~ नइ देखने रही। देखही ने केकरो देख कऽ माथो झँपलकै। हमर पुतोहु एहेन रहैत ने तँ छाउर लगा कऽ जी खॴच लैितऐ। कहू तँ ससुरोक लाज केलकै।” नवानीवाली बजली- “एतेकटा कहॴ मौगी होइ छइ..!” तैपर भेजावाली बजली- “पीठ केहेन चाकर-चौरस छै, जेना सुकदेव पहलमान होइ!” गुलछर‚ छोड़ैत सभ अपन-अपन घर गेल। राधा भनसा घरमे जा बेटा-पुतोहुक लेल खूब नीक तीमन- तरकारी बनौलक। पापड़, ितलौरी, ितलकोरक त‘आ थारीमे सजा बेटा आनZ द आ पुतोहु सुलेखा लेल ओकरा कोठलीमे पहुँचली। माएक• देखते आनZ द बाजल- “माए, अखन आठो निह बाजल अिछ आ तूँ खेनाइ लऽ कऽ आिब गेल•।” राधा बजली- “हँ बेटा,किनय~ जे आएल अिछ। निह जािन किनय~ कखन भोजन केने हेती।” बजैत राधा टेबुलपर थारी रािख चापाकलपर सँ एक लोटा जल आ एकटा िगलास सेहो आिन कऽ टेबुलपर रािख देलक। आनZ द आ ओकर प¾ी सुलेखा दुनू गोरे भोजन करए लागल। सुलेखा बजली- “भोजन के बनौलक अिछ।” आनZ द कहलकै- “भोजन म~ बनेने हेती।” सुलेखा बजली-

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“खाना बनबैले नौकरानी निह रखने छी। हमरा ओतए तँ आँगनक लेल एकटा नौकरानी आ दरब¬ जा परहक लेल एकटा नौकर अिछ।” आनZ द आ सुलेखा भोजन करए लागल। राधा बीच-बीचमे आिब परसन दए दैत रहिथन। भोजन समा“ त भेल। राधा आँिठ फेिर एक जग पािन आ एकटा िगलास आिन टेबुलपर रािख गेली। आनZ द आ सुलेखा पूरब-पि¢ छमक गप-स“ प करैत कखन सुतली से राधा निह बुिझ सकली। राधा भोरे उिठ अँगना-दरब¬ जामे झाड़ू लगौलक। घर आ आँगनमे िफनाइलबला पािनसँ पोछा लगौलक, तेकर बाद रसोइ घरमे जा सभ बरतन सभ साफ केलक। चाह बनौलक। दू कप चाह पिहने सुलेखा आ आनZ दक हेतु छनलक। दू कप चाह लऽ कऽ आनZ दक कोठरीक दरब¬ जा खटखटेलक आ बाजल- “बेटा आनZ द, उठू। देखू सु‘ज भगवान िनकैल गेल छैथ। चाह पीब लीअ तखन सुतब।” दरबाजा खुजल राधा चाहक Ïे टेबुलपर रािख बाहर आिब गेली। एक कप चाह अपन बेटी ‘पम लेल आ एक कप चाह अपने वा) ते लए पीअ लगली। आनZ द आ सुलेखा सेहो चाह पीबैत रहैथ। सुलेखा रौतुका भोजनक आ अखुनका चाह Iशंसा करैत बजली- “आनZ दजी, अह~क माए अनमोल र¾ छैथ। िहनका हाथक चाह आ भोजन तँ मुहÒसँ निह छुटैत अिछ।” आनZ दजी बजला- “सुलेखा, माएक• सभ लूिर छइ। एकटा बेटी छइ। देिखयौ ने ओकरो सभ लूिर िसखा देने अिछ। हमरा बिहनक• कोन लूिर ने अिछ। ई सभटा माइक देन अिछ।” ताबत चाहक चु) की लैत ‘पम भौजीक कोठरीमे Iवेश केली आ बजली- “भौजी, हमर चच‚ िकए करै छी।” सुलेखा ऐंठैत बजली- “हम अह~क चच‚ िकएक करब। अह~क भाइये अह~क चच‚ करैत अिछ।” आनZ दजी बजला- “बिहन, कनी भौजीक• अपन लूिर सभ सीखा दहीन।” भौजी चद-दे बजली- “हमरा कोन लूिर नइ अिछ। जे हम अह~क बिहनसँ लूिर िसखब। ओ अपन लूिर अपने लग रखथु।” ‘पम अपन भौजीक हाव-भाव, बात-िवचार आ अहंकारक• भ~िप चुकल छल। ओ चाह पीबैत अपना कोठरीमे चिल गेली।

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आनZ द अपन खेती-पथारीक• देखैले बाध-बोन जाए लगला। राधा जन-बोिनहारक जलखै लए खेतपर पहुँचाबए लगली। राधा ओमहरसँ माल-मवेशीक लेल एक पिथया घासो नेने अबैत छेली। राधाक• मनमे होइत रहैत छल जे पुतोहु खाना बना कऽ रखने हेती। मुदा पुतोहु तँ जलखै कए जे सुतै छेली से सासुक• बाधसँ एलाक बाद आ भोजन बनलाक बादे उठै छेली। उिठ ) नान कए अपनेसँ खाना परैस िबनु केकरो खुऔनिह अपने खा कए पुन: कोठरीमे बZ द भऽ जाइत छेली। ऐ तरह• बहुतो िदन बीित गेल मुदा सुलेखामे कोनो सुधार निह भऽ सकल। कएक बेर आनZ दो किह कऽ थािक गेल छला। सुलेखा घरक वातावरणक• िबगारए लागल। सासु-पुतोहुमे मन-मुटाव बिढ़ गेल। राधाक मनमे भेल छलैन जे पुतोहु औत। सेवा करत। कपड़ा-ल‰ा साफ करत। मुदा सभ मनोरथ...। सेवा केनाइ तँ दूर जे Iेमसँ बातो निह करैत छेलैन। राधा भोरे उिठ सभ घर-दुआरक• झाड़ूसँ साफ कए पोछा लगा मवेशीक लेल चारा लाबए चल गेल। जखन ओ बाधसँ आबैथ तँ सुलेखाक• सुतले देखलैन। मन तँ घोर भऽ गेलैन। मनमे ई आशा लागल रहैत छेलैन जे घर जाएब तँ सुलेखा एक लोटा पािन आिन आग~मे देती। िबऐन डोलेती। मुदा एकोटा मनोरथ पूर निह भेल। पुतोहुक• सुतल देख राधा अपनेसँ चापाकलपर जा हाथ-पएर धोलैन। रसोइ घर खोिल ना_ ता परोिस कए हवामे बैस ना_ ता कए लैत छेली। राधा सुलेखाक खाितरदारी करैत-करैत उिब चुकल छेली। िबना िकछु बजनिह। िकछु ठंढ़ाइत फेर भनसा घर खोिल भानस करए लगली। मुदा सुलेखा सुतले रहली। राधा मनमे सोचै छेली जे बेटा खेतसँ आएत आ भोजन समयपर निह भेटतै तँ सुलेखाक• गािर-फ¬ झैत करत। आइ बेटासँ िशकायत करबाक उिचत मौका देख रहल छल। तँए सुलेखाक• सुतले छोिड़ देलक। सुलेखाक नीन अचानक टुिट गेल।ओ धड़फड़ाइत भनसा घर गेली। ओतए देखलैन जे सासु भनसा बना रहली अिछ। सुलेखा बजली- “चु हा लगसँ हटिथन ने हम भानस कऽ लइ छी।” राधा चु हा लगसँ निह उठली। सुलेखा मुँह िबजकबैत अपना कोठरीमे जा सुित रहली। आनZ द खेतमे काम-काजक• सलिटया जखन कलौ बेरमे घर एला तँ देखै छैथ माए खाना बना रहल अिछ आ सुलेखा अपना कोठरीमे सुतल अिछ। माएसँ पुछलिखन- “माए, भानस तूँ बना रहल छ•! सुलेखाक• िकछु भऽ गेलैह• की?” राधा अपन बेटाक मुहसँ ई बात सुिनते तमशाएल मुlामे बाजल- “किनय~क• की हेतइ। हम तँ तोरा सबहक नौकरानी छीहे।” आनZ द तामसे सुलेखाक• उठौलक आ ओकरा गािड़-फ¬ झैत करए लागल। सुलेखा मानएवाली निह। ओहो आनZ दक तेरहो-पुरखाक• उकटए लगल। आनZ द खेतसँ गरमाएल आएले छल, तमसाएल छलाहे सुलेखाक• एक-दू थ“ पर लगा देलक। आब तँ सुलेखा जोर-जोरसँ कानए लगली।

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कानब सुिन अड़ोिसया-पड़ोिसया जमा भऽ गेल। राधो भनसा घरसँ दौगल एली। आ बेटाक• डॉंट- फटकार देबए लगली। आनZ दक• हाथ पकैड़ कोठरीसँ बाहर केली। आ सुलेखाक• बोधए लगली। पुतोहु पैघ बापक बेटी तँए ओ केकरो ताना-बाना सहएवाली निह छेली। राधोक• गािड़-फ¬ झैत करए लगली। बात िदनानुिदन तनाव आ अशािZ तक तरफ बढ़ए लगल। सुलेखा दू िदनसँ िकछु ने खेने छेली। राधाक काम-काज बिढ़ गेल। आब तँ आनZ द आ आनZ दक माइयो परेशान रहए लागल। दुनूक• डर होमए लगलैन जे कहॴ आŒ महŒ या ने किर िलअए। केतेक बुझैला-सुझेलासँ आ घटनाक िजq मेदारी अपना ऊपरमे लए दुनू माय-पुत गलती सुलेखासँ मानलक, तखन सुलेखा जे दू िदनसँ भूखल-िपयासल छल। दतमैन केलैन आ मुँह धोलैन। आ पछाइत भोजन केली। राधा हािर मािन सभ काय/ पूव/वते करैत रहल। धीरे-धीरे दुनू पित-प¾ीमे िमलान भेलइ। आनZ द बाजल- “सुलेखा सभ माइ-बापक इ¢ छा होइ छैन जे पुतोहु घरक काम-धZ धाक• देखैथ आ सासु-ससुरक सेवा करैथ।” आनZ दक एतेक बजनाइयो समा“ त निह भेल छल िक िब¢ चेमे सुलेखा बािज उठल- “हम अह~-सबहक नौकरानी बिन निह आएल छी। हमर बाप केहेन छला जे हमरा एकटा िभखमंगा ओतए िबयािह देलक।” कहैत सुलेखा कानए लगली। सुलेखा धिनक घरक बेटी। किहयो भानस केनाइ तँ दूर जे अपन कपड़ो निह साफ करैत छल। ऐ Iकारे ओ अपन मजXसँ काम-काज करैत छल। राधाक इ¢ छा छल जे पुतोहु हमरासँ पुछैथ जे खानामे की सभ बनेबाक अिछ। केतेक चाउर, केतेक दािल... इŒ यािद इŒ यािद। मुदा सुलेखा अपन मजXसँ कोनो काज करैत छल। अपना मन मोतािबक रसोइ बनबैत छल। ओ खाना दोसरक• पिसन होइ अथबा निह। एक िदनक बात छी। सुलेखा त‘आ छािन रहल छल। ई देख राधा बाजल- “छािन कऽ खेबाक छह तँ बापक• कहक जे एक टीन तेल भेज देतह।” ऐपर सुलेखा जवाब देलक- “िहनकर बाप किहयो एक िकलो तेल भेज देने छेलैन।” राधा सुलेखाक जवाब सुिन ितलिमला कऽ रिह गेली। ऐ Iकारे सासु आ पुतोहुमे कोनो-कोनो छोटो-छोटो बातपर कखनो बहसवाजी शु‘ भऽ जाइत छल। राधा अपन मन मसोइस कऽ रिह जाइ छेली। कामकाजु राधा िदन-Iित-िदन िचड़िचड़ा सोभावक होबए लागल। ओना, एहेन बात निह छल जे आनZ द अपना प¾ी सुलेखाक• निह समझाबैत छल। परZ तु सुलेखा अपना सामने केकरो मोजरे ने दैत दल। एवम् Iकारेण पित-प¾ीमे सेहो मन-मुटाव बिढ़ गेल।

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सुलेखा अपना पिरवारक• नरक बना देने छल। सुलेखा ‘पवती छल तँए दहेजोमे छूट भेल छल। ओकरा अपन सुZ दरता आ बापक सq पैतपर घमण् ड छेलैन। ओ अपनाक• घरक मालिकन आ अZ य सद) यक• नौकर बुझैत छल। राधा टुिट चुकल छल। एक तँ काम-काजक बोझ, दोसर छोटो-छोटो बातक लेल हर-हर खट-खट होइत छल। एमहर दोसर बेटा सुरेश Iितयोिगता परी\ामे िदन-राित लागल रहैत छल। बी.एड. पास कए चुकल छल। टीईटी परी\ामे सेहो नीक अंक आएल रहइ। तँए ओ िश\क भऽ गेल छल। मुदा सुरेश अपना घरमे जेठ भाइक पŒ नी जे बड़का घरक बेटी छल, ओकर िकरदानी देख नेने छल। तँए हेतुए ओ सोचैत छल जे हम कोनो म¨ यम वग/क पिरवारक लड़कीसँ शादी करब। लड़कीक शील-सोभाव नीक होइ। काजुल होइ। घरक काज-करैमे िनपुण होइ। ओहन गुणवाली लड़कीसँ शादी करबाक सोचमे छल। सुरेशक िपताजी आब बुढ़ भऽ गेल छला। ओ जेठकी पुतोहुक बेवहारसँ एतेक ने आहत भऽ गेल छला जे   लड-Iेसरक िशकार भऽ गेला। सुरेशक माएक• जेतेक IसÀता जेठका बेटाक िबआह करैमे छल तेतेक सुरेशक िबआहमे निह। ओ गोनू झाक िबलािड़ जकॉं पािक चुकल छेली। तँए छोटका बेटाक िबआहक चचÓ नइ करै छेली। आ राधाक• कोनो िवशेष िजÔासो निहय• छल। संयोगवश भवानी Iसादजी अपन बेटी रोशनीक िर_ ता लऽ कऽ एला। सुरेश पिहनिहसँ ओइ पिरवारक• जनैत छल। भवानी Iसादक पुW सुरेशक संगी छल। तँए सुरेश भवानी Iसादक ओइठाम जाइत-अबैत छल। रोशनीक शील-सोभावसँ सुरेश तेतेक ने Iभािवत छल जे एको बेर नाकर-नुकर निह केलक। िर_ ताक मंजूरी दए देलक। दुनू पिरवार ) वजातीय छल। अZ तरजातीय िववाहसँ ओ घृणा करैत छल। एमर राधाक• कोनो उŒ सुकता आ IसÀता निह छल। ओ मने-मन सोचैत छल बड़की पुतोहु तँ सभ गुर गोबर काइये देलक। आब ई की करत ओ भगवान जानैथ...। सुरेशक िबआह भेल। बर-किनय~ घर आएल। राधाक मन टुटल छल तँए ओ पिरछनोमे निह गेल। लाचार भऽ िदयािदनी सुलेखा बर-किनय~क पिरछण कए घर लौलक। राधा तिवयत खरापक बहाना केने छेली। रोशनीक• जखन पता लागल जे सासु म~ बीमार छैथ तँ ओ कोहबर घरसँ िनकैल सासुक कमरामे गेल आ पिहने राधाक पएर छुिब Iणाम केलक। आ पुछलक- “म~, तिबयत ठीक अिछ की निह।” एकाएक नबकी पुतोहुक• देख राधा लजा गेली। उिठ कऽ बैसैत बजली- “किनय~, माथमे दद/ भऽ रहल अिछ।” रोशनी तुरZ ते िभf स लए सासुक माथमे लगौलक। आ िकछु काल धिर पएरक• सेहो दबलक। आइ बड़ फुतXसँ सुलेखा खूब नीक जक~ भानस-भात कए रोशनीक• भोजन परोिस खेबाक लेल दैत बाजल-

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“किनय~, खाना खा लीअ, कखन खेने हएब कखन निह।” रोशनी बजली- “जखन सासु म~ भोजन करती तेकर बादे हम भोजन करब।” तैपर सुलेखा बजली- “म~क तिबयत खराप छैन, जखन इ¢ छा हेतैन खा लेती।” रोशनी अपन खाना लए खुद सासु म~क कमरामे गेली आ एक कौर भात दािलमे िमला हाथमे लए बजली- “म~, छोटकी पुतोहुक हाथसँ एक कौर खाना खाथु।” कहैत हाथ सासु म~क मुँहमे देलक। राधाक एक कौर भातसँ सभ दुख दूर भऽ गेल। भोजन करैत कहलक- “बेटी, जाउ अहूँ भोजन कए लीअ।” “निह म~ जाबत अह~ निह खाएब ताबत हमहूँ निह भोजन करब।” राधा छोटकी पुतोहुक िज^क• निह टािर सकल। राधा भिर पेट भोजन केलक। राधाक खाना खेलाक बाद रोशनी आँिठ फेिर कोठरीसँ बाहर भेल। पछाइत सुलेखा आ रोशनी माने दुनू िदयािदनी संग-संग भोजन केलक। भोजन केला बाद सुलेखा सुतबाक लेल अपना कोठरीमे चल गेल। आ रोशनी एक लोटा पािन लए सासु म~क कोठरीमे जा रािख देलक आ सासु-म~क पएर दबाबए लगल। राधा जखन बाजल- “जाउ किनय~, अह~क आइ पिहल िदन अिछ, थाकल ठेिहयाएल हएब। अराम क‘ गे।” तखन रोशनी सासु-म~क• िबछौन झािर मशहरी लगा कए अपन कोठरीमे आराम करक लेल चल गेली। राधा मने-मन रोशनीक• अिसरवाद दऽ रहल छल। आ सोचैत छल। भिवसमे जे हुअए मुदा अखन तँ अबैत देरी एतेक खाितरदारी तँ केलक। राधा छोटकी पुतोहुक पिरछणमे नइ गेली तेकर आब पØाताप हुअ लागल छैन। रोशनी सा\ात देवी छैथ जे हमरा घरक• ) वग/ बनौत...। यएह सभ सोचैत-िवचारैत राधा कखन सुित रहली से निह जाइन। रोशनी आ राधाक बीच जे ियाकलाप होइत छल से सुलेखा देखैत रहल। सुलेखा अपन सासु-म~क अदखोइ-बदखोइ रोशनीक• सुनाबए लगली। रोशनी सुलेखाक कोनो बातक जवाब निह दइ छेलिखन। रोशनीक• अपन िबआहक पूव/िहसँ सुलेखाक िकरदानी सुरेशक मा¨ यमसँ बुझल रहैन। भोरे रोशनी उिठ झाड़ू लऽ कऽ घर-आँगनक• बाहरए-सोहरए लगली। फरीच निह भेलाक कारणे जखन सुलेखा अँगना बहारैत देखलक तँ ओकरा पिहने भेलैन जे राधाआन िदनुका जक~ आँगनमे झाड़ू लगा रहल अिछ। मुदा जखन आगॉं बढ़ल तँ रोशनीक• बाढ़ैन लगबैत देखलक तँ आØय/चिकत होइत बाजल-

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“किनय~, अह~ काि हये एलॱ आ आइये बाढ़ैन पकैड़ लेलॱ। कहू तँ अह~क माए-बाप की कहता। एतेक काज केनाइ कोनो ज‘री छइ!” रोशनी बजली- “बिहन, ई तँ हमर अपन काज अिछ। हम नइ करब तँ के करत।” सुलेखा चुपे रिह गेली। राधा भोरे उिठ बाधसँ घास आनए गेल छेली। छोटकी पुतोहुक बेवहारसँ राधा गदगद छेली। तँए राित खूब मनसँ सुतलो छेली। रोशनी घर-दुआिरक• बहािर एकटा टोकरीमे बाहरन-सोहरन उठा रहल छेली। ताबत राधा घास लऽ कऽ आँगनमे Iवेश केलैन। आिक रोशनी देखलक,चटे बाढ़ैन छोिड़ सासुक माथपर सँ घासक िछ¼ा लऽ घास रखैक जगहपर जा कऽ रािख आएल। राधा रोशनीक• कहए लगल- “तूँ िकएक बढ़नी धेलह। हम अिबतॱ तँ झाड़ू लगा िदतॱ।” ई कहैत रोशनीक हाथसँ बाढ़ैन लेबए लगली। मुदा रोशनी बजली- “माए, आब अह~क• काज करैक जमाना नइ अिछ। अह~ बैसू, अराम क‘ आ हम सभ काज करब।” राधा सुसताए लागल। ताबत रोशनी सासुक लेल एक लोटा पािन आ एकटा दतमैन आिन हाथमे थq हबैत बजली- “सासु-म~, ई दतमैन करौथ हम ताबत जलखै बना दइ िछऐन।” जलखै तैयार भेल। सुरेशक लेल भोजन आ िटफीन सेहो तैयार केलक। िकएक तँ सुरेशक• िवGालय जेबाक छेलैन। आनZ द आ राधा जलखै किर अपन-अपन काजमे लािग गेल। एमहर रोशनी अपन जेठ िदयािदनीक• माने सुलेखाक• हुनक कोठरीमे जलखै लऽ कऽ पहुँचली। सुलेखा रोशनी संगे जलखै केलैन। आ दुनू अपना-अपना काजमे लािग गेली। रोशनी राधाक आधासँ बेसी काजक• सq हािर लेलैन। सुलेखा रोशनीक बेवहारसँ आहत होइत रहली आ मने-मन अपनाक• अपराधी मािन प_ चातापो करैत रहै छेली। रोशनीक Ôान, िव’ुता आ चािल-चलन ओकरा घमJ डक• तोिड़ देलक। राधा आब सकुन महसूस करए लगली। फेर घरमे खुशहाली आबए लागल। एक िदन रोशनी अपन घरक सभ काम-काज िनपटा भोजन कए सुतल छेली। ताबत रोशनी कोठरीमे चौकीपर सुतल राधाक पएर दबा रहल छेली। ओही समैमे § लािनसँ मम‚हत सुलेखा कनैत ओइ कमरामे घुसल आ बाजल- “माए, ऐ अभािगनक• \मा कए दीअ। अह~ हमरा सबहक सुख-सुिवधा लेल एतेक िदन-राित खटैत रहै छी। माए, हमरासँ अह~क• बड़ क­ ट भेल। हम अहंकारी भऽ गेल छेलॱ। रोशनी हमरा घरक सा\ात ल² मी छैथ। एतेक पढ़ल-िलखल भऽ कऽ जे हमरा सबहक सेवा करै छैथ ओहीसँ हमरो रोशनीसँ िश\ा भेटल जे पिरवारक सद) य खास कए सासु-म~ सँ बिढ़ ऐ संसारमे िकयो निह अिछ। तँए हमरा सन अभािगनक• माफ कए दीअ।”

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कनैत सासु-म~क• पएर दबाबए लगली। राधा बजली- “बेटी भोरक हेराएल जँ स~झमे घर आिब जाए तँ ओकरा हेराएल निह कहल जाइ छइ।” आनZ द पढ़ल-िलखल युवक, सभ तमाशा देख रहल छल। बाजल- “माए, सुलेखाक• माफ कए दहीन। कुल आ नीक खनदानक बेटी छोटकी किनय~ हमरा घरक• सा\ात् ल² मी छैथ। म¨ यम घरक बेटी एहेन होइत अिछ जे िबगरल घरक• सुधािर दैत अिछ।” ई कहैत आनZ दोक आँिखसँ नोर झहरए लगल। ◌ श  द सं° या : 2636

गोबर िबछनी कमली आ मंगली बाल-संगनी छेली। दुनूक घर सटले रहैन। दुनू माए-बाप अमीर िकसानक ओतए मजदूरी कए घर चलबैत छेलिखन। घरक िधया-पुता सेहो ऐ काजमे हुनका लोकैनक• सहयोग करैत रहैन। कमली आ मंगली भोरे उिठ घरक सभ काम-काज कए जलखै कऽ गोबर बीछैले गाइक पाछू-पाछू चलैत रहै छेली। स~झ-िभनसर गैवार-महॴसवार अपन-अपन गाए-महॴसक• चरबैले खोलै छल। कमली आ मंगली माथपर पिथया लेने महॴसक पाछू-पाछू गोबर िदस तेना िधयान लगौने रहै छेली जेना पोखिरक कछेरमे बौगला माछ पकड़ै खाितर िधयान लगौने रहैत अिछ। तप) वी जेना तप) यामे लीन रहै छैथ तिहना कमली आ मंगली गोबर बीछैमे लीन रहैत छल। िचतकबरी गाए गोबर केलक आिक दुनू सहेली दौड़ल आ कमली अगुआ कऽ गोबर उठा लेलक। दुनूमे कq पेिटशन रहै छेलइ। हम अिधक गोबर िबछी तँ हम अिधक गोबर उठाबी। जखन गोबरसँ पिथया भिर जाइत रहै तखन दुनू सहेली नमहर आिरक कछेरमे ओकरा जमा कऽ लैत छेली। आ फेर गोरब बीछैमे लीन भऽ जाइ छेली। गोबरक उपयोिगता आ ओकर महŒ व कमली आ मंगली बुझौ िक निह मुदा गोबर जमा कए ओकर गोरहा-िचपड़ी बनाएब तँ जिनते छेली। समय-समयपर ओकरा बेच िकछु आमदनीक जोगार सेहो कए लैत छेली। एक िदन गोबर बीछैक ममे गामक नेना-भुटकाक• िसलेट-पेिZ सल लए िवGालय जाइत देखलक। दुनू अपनामे संक प केलक जे हमहूँ सभ पढ़ब। ई िवचारक भाव दुनूक मनमे जगलै। ई िवचार करैत अपन- अपन घर पहुँचल। दुनू अपन-अपन माए लग पढ़बाक इ¢ छा जािहर केलक। दुनूक उमेर तकरीवन आठ-नअ बख/क भेल छेलइ। दुनूक माए अपन बेटीक• डॉंट-फटकार देबए लागल। कहलक-

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“गइ लड़िकयो केतौ पढ़लकै हेन। तूँ पिढ़ कऽ हाकीम बनबh की। तो पढ़बh तँ की नौकरी करब•? घरक काम-काज के करत? बेटीक• पढ़ौला-िलखौलासँ ओ दूिर भऽ जाइ छइ। ओकरामे उदJ डता, लोक ल¬ जा, िनम/जता आ आिद-आिद दुगु/ण सभ आिब जाइ छइ। तँए तोरा नइ पढ़ए देबौ।” दुनूक माए एकठाम जमा भऽ अपना-अपना बेटीक• समझाबए-बुझाबए लगली। ओही समैमे कमलीक िपताजी सेहो आँगन आिब गेला। घरवालीक• िबगड़बाक कारण पुछलिखन। घरवाली Ç यंग पूव/क बाजल- “अह~क बेटी पढ़त आ हाकीम बनत। िकदैन कहलकै जे हम पटोर पिहरब तँ आँिख कहलकै जे हम संगेमे िछयौ।” कमलीक िपताजी बजला- “कमली पढ़त तँ अह~क देह एना िकए जरैत अिछ।अह~क• एना ई­ य‚ िकए भऽ रहल अिछ। अह~क माए-बाप निह पढ़ौलक सएह एकरो Iित सोचै छी।” कमलीक• ओकर िपता दुलारसँ गोदमे लैत पुछलिखन- “बेटा, तॲ पढ़बh तँ हम िसलेट, पेिZ सल, िकताब-कॉपी सभ कीिन कऽ आिन देबौ।” कमली डेराइत बाजल- “बाबूजी, हम घरक कामो-काज कए देब आ पढ़बो करब।” तैपर कमलीक िपता कहलिखन- “तॲ जह~ धिर पढ़म• हम पढ़ेबो।” कमली बड़ खुश भेली। तुरZ त दौग कऽ सभ हाल मंगलीक• सुनौलैन। कमली आ मंगली खुश भऽ नाचए लगली आ बजली- “हमहूँ पढ़ब, हमहूँ पढ़ब।” दोसरे िदन दुनूक िपता मजदूरी किर कऽ पैसासँ Iाथिमक िवGालयमे नाम िलखा देलक। आ ओइ दुनू छाWाक नाम बदैल देल गेलइ। आब कमलीक नाम राधा आ मंगलीक िनकहा नाम कुसुम भऽ गेल। राधा आ कुसुमक• िसलेट-पेन् िसल आ मनोहर पोथी खरीद देल गेलइ। दुनू सहेली मन लगा कऽ पढ़ए लगल। राधा ओ कुसुमक काम बिढ़ गेलइ। गोबर िबछनाइ, घरक बरतन-बासन मँजनाइ आ पढ़नाइ-िलखनाइ इŒ यािद। गोबर बीिछ गोरहा-िचपड़ी बना ओकरा बेच अपन पढ़ाइक खच/ सेहो िनकािल लैत छल। िकछुए िदनमे ओकरा सभक• िकताब पढ़नाइ, िलखनाइ सेहो आिब गेलइ। ‘बाले दJ ड आ िसयाने पाठक’ ऐ आधारपर ओ दुनू वग/मे नीक ) थान आनए लागल। िश­ ट रहबाक कारणे िश\को लोकैन अिधक मानए लगलैन।

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सव/ िश\ा अिभयानसँ दुपहरक भोजन आ पोशाकक रािश सेहो भेटए लगलै। दुनूक लगनशीलता, कम/ठता, अनुशासन आ गुÐभिf त देख िश\को लोकैन ओकरा Iित अिधक संवेदनशील रहैत छला। दुनूक हरेक सम) याक समाधान िश\क लोकैन करैत छला। ऐ तरहh दुनू सहेली Iाथिमक िश\ा ¤हण कए मा¨ यिमक िश\ा Iा“ त करबाक लेल उ¢ च िवGालयमे नामeकन करौलैन। सरकारी योजनाक तहत दुनूक• साइिकलक आ छाWवृितक रािश सेहो भेटलै। दुनू सहेली मैिÏकक वोड/ परी\ामे Iथम mेणीसँ उ‰ीण/ भेली। सरकारी योजनासँ दस-दस हजार ‘पैआक IोŒ साहन रािशक चेक सेहो भेटलै। आब राधा आ कुसुम ग स/ कौलेजमे इZ टरक पढ़ाइ करए लगली। अपन मेहनतक बलपर दुनू सहेली इZ टरमे सेहो Iथम mेणी Iा“ त भेलैन। आ पुन: पनरह-पनरह हजारक चेक Iा“ त भेलैन। आगॉं पढ़बाक िललसा बनल छेलइ। माए-बापक सेहो मनोबल बढ़ैत रहलै। दुनू सहेली बी.ए. मे नाम िलखा कौलेज जाए- आबए लगली। राधा आ कुसुम आब वय) क भऽ गेल छेली। वसZ तक मादकता, कोयलीक कूक सावनक फुहार आ कामदेवक Iहारसँ अवगत होमए लागल छेली। कौलेजक छाW-छाWामे एक-दोसरक Iित आकष/ण बढ़ए लागल छेलइ। ओही ममे राधाक• एकटा राजेश नामक लड़कासँ दो) ती भऽ गेलइ। राजेशक• कपड़ा-दोकान छेलै आ बी.ए.क थड/ पाट/मे पढ़ैत सेहो छल। कभी-कभार कौलेजमे मौज-म) तीक लेल जाइत छल। राधा आ राजेशक दो) ती Iगाढ़ हुअ लगलै। दो) तीक बहाने दुनू एक-दोसरसँ Iेम करए लागल। राजेश-राधाक लेल नव-नव उपहार लाबए लागल। कुसुमक• राधा-राजेशक दो) ती पिसन निह छेलैन। तथािप ओ दुनूक िया-कलापपर िवशेष िधयान देमए लगलै। राजेश चाहैत छल जे राधाक• बहला-फुसला कऽ अपना फ~समे फँसा घरसँ िनकैल जाइ। मुदा राधा पढ़ल-िलखल आ होिशयार लड़की, तँए घरसँ िनकललासँ पिहनिह ओ एक िदन राजेशक घर पहुँचली। राजेशक माए घरमे छेलिखन। राजेशक माएक• Iाणाम करैत राधा अपन पिरचए देलैन- “माइजी, हम राजेशक िमW छी।” राजेशक माए कहलिखन- “आउ बेटी, बैसू। राजेश तँ दोकानपर अिछ।” ताबत ओकरा ओइठाम गामक िकछु सq èाZ त पिरवारक मिहला लोकैन आिब गेलिखन। राजेशक माए ओइ मिहला सबहक खाितरदारीमे लािग गेली। राधा आँगनमे असगरे बैसल छेली। तखने छोट ब¢ चाक कनबाक ¨ विन सुनाइ पड़लैन। एकटा दुबर-पातर मिहलाक• एक घरसँ दोसर घरमे जाइत देखलैन। ओ औरत राधा िदस घुिर-घुिर कऽ तकैत छेलिखन। राधा ओइ औरतक• अपना लग बजा पुछलिखन- “अह~ हमरा िदस एना िकए गुq हरै छी? अह~ के छी?” ओ अपनाक• राजेशक प¾ी बतौलक। छोट-छोट िधया-पुताक कारणे ओ परेशान छेली। राजेशक प¾ी राधासँ पुछलिखन-

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“की अहॴक नाओं राधा छी? अह~ तँ पढ़ल-िलखल बुझना जाइ छी तखन केना अह~ हुनका चËरमे फँिस गेलॱ?” एकाएक राधाक• फँसबाक आभास भेलैन। सोचए लगली। हम वा) तिवकतासँ दूर हिट एक कपटी, \ली, लq पट आ चिरWहीनक जालमे फँिस रहल छेलॱ। राधा राजेशक माएसँ िवदा लैत अपना घर एली। कुसुमसँ भ•ट कए सारा वृताZ त सुनौलैन। दुनू सहेली राजेशक• सबक िसखेबाक लेल षडयंW रचलैन। स~झमे राजेशसँ भ•ट करैले ओ आइ पिहनिहसँ इZ तजारमे छेली। स~झ पड़ैत देरी राजेश दोकान बÀ कए घर अबैत छल। िनयत समैपर राधासँ भ•ट भऽ गेलैन। कुसुम गाछक अढ़मे नुकाएल छेली। राजेश राधासँ Iेमक वात‚ करए लागल। तइ िब¢ चेमे राधा जोरसँ ह ला करए लगली। ह ला सुिन लोक सभ जमा भऽ गेल। कुसुम पुिलसक• खबर पिहनिहसँ कए देने छेली। पुिलस राजेशक• धारा 376 केर अZ तग/त िगरéतार कए जहल भेज देलक। राधा अपन नजैर कुसुम िदस दैत बाजल- “गोबर िबछनीमे की शिf त छै से देखौ...।” ◌ श  द सं° या : 1039

ऐ रचनापर अपन मंतÇय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रबीZ l नारायण िमm

पिहल नौकरी दिड़भंगामे हम प~च सालसँ िकछु बेसीए िदन रहलॱ। तीन साल तँ सी.एम.कौलेजमे पढ़ैत िवGाथX रही। ओइ समय िवÔान, कला, वािण¬ य सभ संकाय िमला कऽ एËे कौलेज छल। सी.एम.कौलेज-दिड़भंगासँ हम बी.एस-सी. (भौितकी Iित­ ठा) पास केलॱ। बी.एस-सी केला बाद आगू की करी ई सम) या छल। पी\ाफल िबलमसँ एबाक कारणे एम.एस-सी.क नामeकन सेहो बZ द भऽ गेल रहइ। ओहुना ओइ समैमे पढ़ाइ-िलखाइक \ेWमे सq पूण/ िबहारमे अराजकता छल। परी\ामे नकल करब तथा नकल कराएब दुनू गौरवक गप छल। िवGाथX सबहक अिभभावक सभ पुजX पहुँचबैले जान लगौने रहैथ। ऐ पिरि) थितमे िबहारक तेतेक बदनामी भऽ गेल छल जे सिहयो िवGाथXक यो§ यतापर I_ न िचZ ह लािग जाइत छल।

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ओइ समयमे डाक-तार िवभागमे दूरभाष िनरी\कक पदक िरिfतक िवÔापन िनकलल रहइ। हम मधुबनी पो) ट ऑिफसमे आवेदन-पWक लेल एकटा आ¤ह पो) ट काड/पर िलिख खसा देिलऐ। िकछुए िदनमे आवेदन- पW Iा“ त भेल। आवेदन-पW Iा“ त होइते भिर कऽ आइ.एस-सी.क अंक-पWक संग पठा देिलऐ। आइ.एस-सी.क Iा“ तeकक आधारपर ओइ पदपर चयन हेबाक रहइ। हमरा आइ.एस-सी. परी\ामे बहुत नीक Iा“ तeक छल। िकछुए मासक बाद हमरा पटना टेलीफोन िवभागसँ दूरभाष िनरी\कक पदक हेतु िनयुिf त-पW भेटल। िनयुिf त-पW भेटलाक बाद असमंजसक ि) थित बिन गेल, कारण हम बहुत महाŒ वाकe\ी रही। पैघ पदपर जेबाक इ¢ छा रहए, तइ हेतु तैयारीक काय/म छल,मुदा हाथमे आएल ल² मीक• लात मारब नीक निह, ई बात केतेको गोटे कहैथ। अछताइत-पछताइत ओइ िनयुिf तक• ) वीकार करैत अग) त १९६३मे र~ची Iिश\ण हेतु चल गेलॱ। र~ची टेलीफोन एf सचhजक भूतलपर Iिश\णक बेव) था छल। ओइ Iिश\णमे कएटा नीक-नीक िवGाथX सभ छला। कए गोटा एम.एस-सी. सेहो केने रहैथ। सरकारी नौकरीक बात छेलइ। सभ आँिख मूिन कऽ पकैड़ लेलक। र~चीमे छह मासक Iिश\णक बाद हमर तीन मासक बेवहािरक Iिश\ण-लहेिरयासराय टेलीफोन एf सचhजमे भेल। ओइ ममे बलभlपुर, लहेिरयासरायमे एकटा िवGाथXक संग डेरा रहए। एक िदन ओ िवGाथX गाम चिल गेला आ हमरा कोठरीक कुंजी निह रहए। लातसँ तेतेक जोरसँ केबाड़मे धËा मारिलऐ जे टुिट गेल। बादमे मकान मािलक नाराजगी Ç यf त केलाह, मुदा बात जेना-तेना शाZ त भऽ गेल। ओइ Iिश\णक दौरान फगुआमे हम गाम एलॱ आ २-३ िदन फािजल रिह गेलॱ। फोन िवभागमे झाजी इZ जीिनयिरंगक सुपरवाइजर रहैथ। वएह हमर हािकम छला। हमरा डराबए लगला। की जे Iिश\ण अधूरा रिह गेल, ¸ेक लािग गेल। मुदा असलमे िकछु निह भेल। हमर Iिश\ण समयसँ पूरा भेल आ हम जमशेदपुरमे ३ मई १९७४ क पदभार ¤हण कएल। ओहीठाम एकटा आर संगी पदभार ¤हण केलैथ। सरकारी काज करबाक हमरा िकछु अनुभव निह छल। एसडीओ फोZ स बड़ा करगर अिधकारी रहैथ। अपन ड~टसँ अधीन) थ सबहक सीटीपीटी गुम केने रहैत छला। जमशेदपुर ओइ समयमे िबहारक सुÇ यवि) थत एवम् साफ-सुथरा शहरमे मानल जाइत छल। छु¼ीक िदन शहरमे केतौ-केतौ घुमबाक काय/म बरबैर बनबैत रही। साf ची ओ िव­ टुपुरमे तरह-तरहक दोकान सभ छेलइ। जुबली पाक/मे घुमब आनZ ददायी छल। ओइ पाक/मे टहलबसँ हम आनZ दक अनुभव करैत रही। एक िदन मौका पािब कऽ हम टाटा ) टीलक अZ दरसँ देखबाक अवसर सेहो Iा“ त कएल। अित उ¢ च तापमपर लोहाक• गला कऽ lÇ य ‘पेमे एकठाम-सँ-दोसरठाम जाइत देखलॱ। भयानक ‘पसँ लाल रहैत छल ओ तरल लोहा।

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हमर ‘मेट िसगरेट पीबैत छला। शु‘क एक मास तँ कहुना कऽ हुनका संग िबतौल मुदा आग~ बहुत िदन धिर हुनका संग चलब सq भव निह बुझाएल। एक िदन हम हुनका ) प­ ट कहिलऐन जे या तँ अह~ िसगरेट छोड़ू निह तँ अहॉंक• हम छोिड़ अलग डेरा लऽ लेब। ओ िसगरेट निह, छोिड़ सकला आ हम अलग डेरा लऽ लेलॱ। जमशेदपुरमे रहैत केZ lीय िसिभल सिभ/सेजक (संघ लोक सेवा आयोगक) परी\ा हेतु छु¼ीक काज छल। अिधकारीगण छु¼ी मना कऽ देला। अZ तमे हम िबना अनुमितयेक ओतए-सँ घसैक गेलॱ आ करीब एक मासक बाद परी\ा दऽ कऽ आपस एलॱ। एसडीओ फोZ सक• मोटर साइिकलपर अबैत देखलयैन, हुनका देखते देबाल फािन कऽ एकटा दोकानपर बैस गेलॱ। मोनमे तरह-तरह केर आशंका रहए। हम बाटे तकैत रही िक हुनकर बुलाबा आिब गेल आ तरह- तरह केर उपदेश ओ देलाह। एवम् -Iकारेण लगभग आठ मास धिर ओतए नौकरी केलॱ, पछाइत बाबूजीक Iयाससँ हमर ) थानाZ तरण जमशेदपुरसँ डीइटी दिड़भंगाक अधीन भऽ गेल। मुदा एसडीओ फोZ स काय/मुf त करैमे नाकर-नुकुर करैत छला। हम ज दीसँ ज दी दिड़भंगा आिब काय/भार ¤हण करए चाही। हमर सहकमXक सेहो ) थानाZ तरण दिड़भंगे भेल रहैन। ओ पिहने काय/मुf त भऽ ओतए पहुँच गेल छला। हमरा लटकौने छेलैथ। Iात:काल भोरे-भोर हम डीइटीक डेरापर पहुँचलॱ। ओहीठाम लेखािधकारी सेहो रहैत छला। हम हुनका सभटा बात कहलयैन। ओ बहुत सहृदय बेकती छला। हमरासँ पुछलैन जे आिखर अह~क बदली केना भेल। तँ कहलयैन जे बाबूजी पटना जा कऽ िकछु Iयास केलैन जइसँ हमर ) थानाZ तरण दिड़भंगा िडवीजन भेल अिछ। हमरा दिड़भंगा जाएब बहुत ज‘री अिछ। आिद-आिद। सभ बात सुिन ओ आiासन देला जे अह~क आइ अब) स काय/मुिf त कए देल जाएत। भेबो कएल सएह। काय‚लय खुिजते ओ एसडीओ फोZ सक• फोनपर आदेश देलिखन जइसँ ओ ितलिमला गेला। मुदा हमरा ओइ िदन ओइठामसँ काय/मुf त कए देल गेल। स~झमे बससँ दिड़भंगा िवदा भेलॱ। दिड़भंगा पहुँचलापर पता लागल जे दुइएटा जगह खाली छइ। एकटा जयनगरमे आ दोसर सुपौलमे। जयनगरक खाली पदपर हमर संगी अपन जोगार लगा लेलैन। आब रिह गेल सुपौल। कोनो दोसर उपाय निह देख हम सुपौलक र) ता पकड़लॱ। सहरसा वोट सुपौल Ïेनसँ जाएब ओइ समयमे बेस टेढ़ काज छल। तथािप ओतए पहुँच काय/भार ¤हण कएल। छोट-छीन टेलीफोन एf सचhज छल जइमे िकछु ऑपरेटर, एकटा मेकेिनक पिहनेसँ काय/रत छल। हम ओतए विर­ ठतम बेकती छेलॱ। सहरसामे उ¢ च अिधकारी बैसैत छला। फोन ’ारा तरह-तरह केर आदेश पठबैत रहै छेलिखन। सुपौल छोट-छीन नीक शहर बुझाएल। ओइठामक माड़वाड़ी बासाक उ‰म ओ ) वािद­ ट भोजनक ) मरण कए अखनो जीहमे पािन आिब जाइत अिछ। ओइठाम रेलबे ) टेशनक ठीक सामने लाल कोठीक एकटा

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कोठरीमे हम आ पो) टमा) टर डेरा लेने रही। पो) ट मा) टर बहुत कम/ठ छला। भोरे जािथ तँ देर राित थाकल-झमारल अबैथ। हुनका संगे तेकर बाद हँसी-ठठा होइत छल। ओही डेरामे रहैत हमरा पोसुआ कुकुर कािट लेलक आ दोसरे िदन ओ कुकुर मिर गेल। आब तँ बड़ िचZ तामे पिड़ गेलॱ। कुकुरक नमगर-नमगर चौदहटा सूई पेटक अँतरीमे लगबए पड़ल। एक िदन सुई लगिबते काल एकटा घटक आिब गेला। सूई लगबैत देख लेला से िचZ तामे पिड़ गेलॱ। ओना, कोनो कारणसँ ओ कथा निह पटल। िकछु िदन बाद हमर ससुर अपन अनुज ओ एकटा आर बेकतीक संग िववाहक ममे हमरासँ गप करए टेलीफोन एf सचhज- सुपौल आएल रहैथ। हुनका सभक• यथासq भव ) वागत कएल। िववाहक आहटसँ मोनमे IसÀता छल। जे जे पुछला, सभ उ‰र देिलऐन। स~झमे हमर िपितया ससुर डेरापर सेहो एला। डेराक हालत तँ वण/न जोग निहय• छल। ऊपरसँ हमरा गंजी मोइल छल से बात हमर ससुरक• पता लगलैन। ओ िचZ तामे पिड़ गेला, कारण ओ ) वयं साफ-सुथरा रहैत छला। सुपौलक दही आ पेरा बड़ नामी छल। अित ) वािद­ ट पेरा खेबाक ) मरण होइते अखनॱ मुँहमे पािन आिब जाइत अिछ। िकछु िदनक बाद हमर ) थानाZ तरण सुपौलसँ दिड़भंगा डीइटी ऑिफसमे पीआइक पदपर भऽ गेल। ३ जून १९७४ क हम डीइटी दिड़भंगाक काय‚लयमे पदभार ¤हण कए जखन गाम पहुँचलॱ तँ दरब¬ जापर अलगे Iकारक गहमा-गहमी पसरल छल। हमर संगी एवम् िमW- लाल ब¢ चा () व. Iो. िव­ णु काZ त िमm) कहला जे हमर िबआह ठीक भऽ गेल अिछ। मश: सभटा जानकारी भेटल। Iात भेने माने ४ जून १९७५ क• हमर िबआह छल। कोनो जानकारी निह हेबाक कारण हम ओही िदन काय‚लय जा एकाएक िववाहक हेतु छु¼ीक आवेदन देिलऐ आ तखन राितमे आठ बजे दिड़भंगासँ गाम एलॱ...। काय‚लयमे ई समाचार िबजलौका जक~ पसैर गेल। चा‘कातसँ वधाइ दैत सहकमX लोकिन हमर आनZ दक• कएक गुना बढ़ा देला। गाम पहुँचते िववाहक तैयारीमे लािग गेलॱ। गाड़ी सभ लागल छल। िबरयाती तैयार छल आ बरक Iती\ा छल। बरक• अिबते धराधर िवध सभ पूरा कएल गेल। हमर िपितया ससुर हथधरीक हेतु आएल रहैथ। ओ िब¢ चे दरब¬ जापर धोती-कुत‚ पिहरने हमर Iती\ामे बैसल रहैथ। आर-आर लोक सभ दरब¬ जापर मु) तैद छला। हमर िमWगण सभ सेहो मौजूद छल। हथधरी भेल। बिरयाती सभ चटपट गाड़ीमे बैसल। कुल १९ गोट बिरयाती छल जे ओइ समयक िहसाबे बेसीए छल। निह तँ पिहने प~चटा-सातटा बिरयाती पय‚“ त होइत छेलइ। बिरयातीक सं° या लऽ कऽ जे अपना समाजमे रेबाज बदलल अिछ से दुभ‚§ यपूण/, कारण सैकड़ोक तादादमे गाम-गामसँ बिरयातीक• लािद कऽ कZ याक िपताक माथपर पटैक देब कोनो वुि©मानी निह कहल जा सकैत अिछ। Ç यथ/क परेशानीक अलाबा आिथ/क \ित सेहो होइत अिछ, जेकर कोनो केकरो लाभ निह।

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..ओइ समयमे सीिमत सं° यामे बिरयाती जाइत छल तँ ओकर शोभे अलग रहै छेलइ। एक-एक बेकतीपर पय‚“ त िधयान देल जाइत छल। बिरयाती सबहक बेकतीगत पिरचय होइत छल। आब तँ ढाकक ढाक बिरयाती जाइ छैथ आ दुपहिरये-राितयेमे खुआ-िपआ कऽ िवदा कए देल जाइत छैन। हमरा लोकिन दस बज राितमे पJ डौल डीह टोल पहुँचलॱ। गीत-नादक मनोरम वातावरणमे िववाहक Iिया सq पÀ भेल। ऐसँ जीवन संिगनीक ‘पमे आशा िमm भेटली जे ओइ समयमे माW १७ बख/क छेली आ हमर उमेर २२ बख/ छल। अGतन हमरा िजनगीमे ओ संगे सुख-दुखक सहभागी छैथ जइसँ हम नाना Iकारक झंझावातसँ उवैर जीवनक ऐ पड़ावपर ठाढ़ छी। लगभग दस िदनक अवकाश समाि“ तपर छल। िववाहोपराZ त हम गाम आएल रही। माय केतेक IसÀ भेल रहैथ तेकर वण/न करब असq भव अिछ। हमर िपितआइन सभ सेहो उŒ सुकतावश किनय~ ओ ओकर पिरवारक िवषयमे पुछैत रहली...। Iात भेने काय‚लय गेलॱ तँ सभ िकयो हमरा उŒ सुकतासँ हाल-चाल पुछैत, फाटो सभ देखैथ। ऐ तरह• केतेको िदन बीित गेल। एक िदन काय‚लयसँ झटैक कऽ दिड़भंगा बस ) टेJ डपर बस पकड़ए जाइत रही िक पाछूसँ अबाज सुनबामे आएल- “िमसरजी! सासुर जा रहल छी की?” डेगक गितक अनुमान कए ओ हमर सासुरक याWाक अZ दाज लगा लेला जे एकदम सही छल। दिड़भंगा काय‚लय लगमे रहबाक कारण ओइठामसँ पJ डौल जाएब असान रहै छल। छु¼ी निह लेबए पड़ैत छल। डीइटी दिड़भंगा काय‚लयमे हम करीब दू साल काज केलॱ। काज तँ कोनो खास निह छल। पुरान टेलीफोनक बकाया असूली करक रहै छेलइ। जइ लेल हमरा लगभग पूरा उ‰र िबहार मुéत èमण करबाक हेतु पास भेटल छल। ओना, ओइ पासक उपयोग िकयो आन करैत छल आ हम अपन समय अपन समय Iितयोिगता परी\ा सबहक तैयारीमे लगबैत छेलॱ। पढ़ाइ-िलखाइ कखनो Ç यथ/ निह जाइत छइ। सन् १९९७ क केZ lीय सिचवालय सेवा हेतु आयोिजत संघ लोक सेवा आयोगक एसीसटेZ ट ¤ेडक परी\ा हम पिहले Iयासमे पास कऽ लेलॱ। िकछु िदनमे िनयुिf त- पW सेहो आिब गेल। िनयुिf त-पW हाथमे अिबते मनमे उठल- काय‚लय, काज, ) थान सभ पिरवत/न भऽ जाएत। ई सोिच मोन आगू-पाछू करए लागल। अZ ततोगŒ वा िनण/य कएल जे िद लीए जेबाक चाही। ओइठाम अपना तँ जे हएत से हएत मुदा ब¢ चा सभक• पढ़ै-िलखैक बेहतर अवसर भेटत। आिद-आिद।

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सोच-िवचारक बाद हम दिड़भंगाक दूरभाष िनरी\कक पद छोिड़ िदली ि) थत केZ lीय सिचवालय सेवाक सहायकक पदभार ¤हण करबाक िनण/य कएल। ई िनण/य केतेक सही रहल, केतेक निह तेकर िवचार- िवमश/क आब समय निह रहल। जे भेल से नीके भेल। गते न सोचािम कृतं न मZ येत। सही कहल गेल अिछ जे िववाह भावी जीवनक िदशा दसा तय करैत अिछ। यGिप हमरा लोकिनक िववाह अिभभावक गण तय केने रहैथ, मुदा हम आब िनØय किह सकैत छी जे ओ सभ बहुत वुि©म‰ापूण/ िनण/य केने छला। जीवन भिरमे हर समय हमर mीमती हमर संगे निह देलैन अिपतु जीवन माग/क• अपे\ाकृत सुगम सेहो करैत रहली। हुनकर रचनाŒ मक सोच एवम् शाZ त मि) त­ कक लाभ हमरा भरपूर भेटैत रहल अिछ। आ से घरोमे आ ऑिफसोमे। केतेको जिटल सम) या सभपर हुनकर राय बहुत कारगर होइत रहल अिछ। बहुत सZ तोष पूव/क सीिमत आमदनीमे इमनदारीपूण/ िजनगी केना जीबी तेकर ओ उदाहरण छैथ। हमर सासुर पJ डौल डीह टोल रेलबे लाइनसँ थोड़बे दूरपर अिछ। घरे बैसल अबैत-जाइत Ïेन देखाइत रहैत अिछ। जखन हम सभ िद लीसँ पJ डौल आबी तँ रेलक आगमनक सूचना घरे बैसल हमर सासुरमे भेट जाइक। भवानीपुरक महादेव मिZ दर सामने देखाइत रहैत अिछ। केतेको गोटे िनयिमत भवानीपुर जाइत रहै छैथ आ महादेवक जलढरी करै छैथ, घुमै-िफरै छैथ। असलमे गाम-घरमे लोकक जीबाक अZ दाज अखनो अ¨ यािŒ मकतासँ जुड़ल अिछ। कोनो-ने-कोनो ‘पे लोक उपवास, पूजा-पाठमे लगले रहै छैथ। िशवराितक• भवानीपुरमे जबरद) त मेला लगैत अिछ। ) थानीय आकाशवाणीसँ सG: Iशारण सेहो होइत अिछ। पJ डौल डीह बहुत ऊँचमे बसल अिछ। टोलक सामनेक जमीन सेहो घराड़ीमे उपयोग कएल जा सकैत अिछ। एहेन अइल-फइल ओ ऊँच घराड़ी िमिथाक कम गाममे देखल जाइत अिछ। पJ डौलमे आदम-जमानासँ रेलबे टीशन अिछ। मुदा रेलबे टीशनसँ डीहटोल एबामे बहुत समय ओ संघष/ रहैत अिछ। पJ डौल बजार केतेक पुरान अिछ से कहब किठन। आव_ यकताक सभ व) तु ओतए भेट जाइत अिछ। उ‰म कोिटक धोती ओइ बजारसँ आिन हम वषÓसँ पिहरैत छी। पJ डौल डीह ओ भवानीपुरक बीचक एकपेिरया र) तामे डरसामा डीह अबैत अिछ। कहल जाइत अिछ जे पाJ डव गु“ त बासमे ऐठाम रहल रहैथ। िनिØत ‘पसँ कहल जा सकैत अिछ जे मनुखक जीवनमे िववाह एकटा िनण‚यक िबZ दु होइत अिछ। आइ-काि ह तँ तरह-तरह केर लोक पिरचय आ की की िमलान करैत अिछ, तथािप िववाह िव¢ छेदक सं° यामे िनरZ तर बढ़ो‰री भऽ रहल अिछ। हम तँ िकछु निह देखिलऐ, माW कZ य~क एकटा छोट-छीन फोटो हमरा सासुरसँ आएल छल, ओहो िववाह तय भेलाक बाद। ई निह कहल जा सकैत अिछ जे आधुिनकतासँ Iभािवत वत/मान िववाह सq बZ धमे सभ िकछु गड़बड़ीए अिछ,मुदा ई बात तँ तय अिछ जे केहनो नीक-सँ-नीक िववाहक• सफलतापूव/क आगू चलेबाक हेतु दुनू प\क• समझदारी आ समझौता ज‘री अिछ, अZ यथा संकट उŒ पÀ हएब भारी बात निह।

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' 232 म अंक 15 अग)त 2017 (वष/ 10 मास 116 अंक 232 ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 107

हमर ससुर () व. गणेश झा) ऐ बातसँ िचिZ तत भऽ गेल रहैथ जे हम दिड़भंगाक नौकरी छोिड़ कए िद ली जा रहल छी मुदा िकछुए िदनक बाद हम पिरवारक• संगे लऽ अनलॱ। जइसँ हुनका अितशय IसÀता भेलैन। हमर गाम अड़ेर डीह। अड़रे डीह चौदह टोलक गाम अिछ। पिहने एËे पंचायतमे सभटा टोल छल। अड़ेर पुवािह टोल, अड़ेर डीह टोल, िव­ णुपुर, जमुआरी होइत िवचरवाना तक एËे पंचायत छल- अड़ेर। ओकर मुिखया बहुत िदन तक ) व. माक/J डेय भJ डारी छला। आ हमर िपताजी सरपंच रहैथ। ओइ समय ¤ाम पंचायतक• आइ-काि ह जक~ अिधकार नइ रहै तथािप मुिखया-सरपंचक नाम तँ पंचायतमे िव° यात भाइए जाइत छल। पंचायतक चुनाव ओहू समयमे गहमा-गहमीसँ भरल होइत छल। हम सभ ) कूलमे पढ़ैत रही तँ चुनाव भेल रहइ। ) व. माक/J डेय भJ डारीजी मुिखयाक चुनाव जीतल रहैथ। स“ पत ¤हण समारोहक ममे आयोिजत उŒ सवक Iसंग अखनो मनसँ मेटाएल निह। ई मोन बड़ा िविचW चीज अिछ िकने। किह निह एकर कZ तोरमे केतेक खल होइत छै जे तरह-तरह केर गप-स“ प सालो-साल चौपेतल रहैत अिछ। ओइ समयमे ) व. माक/J डेय भJ डारीजीक इलाकामे फूक चलैत छल। अड़ेरक िसनुआरा टोलमे हुनकर घर अिछ। सभ तरह• सq पÀताक संग समािजक मान-सq मान हुनका भरपूर भेटल छेलैन। स~झक• जे अड़ेरक सड़कपर दल-बलक संगे हुनका टहलैत देिखऐन। ओह..! अड़ेर डीह टोल माने हमर गामक इितहास बहुत परान लगैत अिछ। गाममे आब जनसं° याक अनुपातमे आवासीय जमीन सीिमत अिछ। तँए घरेपर घरक दृ_ य अिछ। लोक सभ अगल-बगलमे घर बना रहल छैथ। कलममे सेहो बास भऽ गेल अिछ। सभसँ चमŒ कारी िवकास तँ चौकक आसपास भेल अिछ। चौकक कातेकाते करीब-करीब दू साए दोकान खुिज गेल अिछ। तरह-तरह केर थौक आपूित/ करएबला दोकान सभ सेहो खुिज गेल अिछ। असलमे अड़ेर चौकसँ चा‘कात रोड बिन गेल अिछ। तँए इलाकाक लोक य-िबयक लेल ओइठाम पहुँचै छैथ। अड़ेरमे ) टेट बÎक ऑफ इिJ डयाक शाखा अिछ, ओकरे एटीएम सेहो अिछ। थाना अिछ, पो) ट ऑिफस अिछ, सरकारी िडसपhसरी अिछ। Iाइमरी ) कूल,िमिडल ) कूल तथा हाइ सकूल अिछ। संगे एकटा सं) कृत िवGालय सेहो अिछ जेतए सुनै छी जे िवGाथX सभ नदारदर छैथ मुदा सािट/िफकेट भेट जाइत छैन। गाममे तीनटा पोखैर किह निह किहयासँ अिछ। ओकर अितिरf त गामक बाहर नवका पोखैर, कु¼ी लगक पोखै सेहो अिछ। गामक बीचमे पोखैर हेबाक कारण बासक जगहक िदËत छइ। हम सभ जखन ब¢ चा रही तँ गाममे हाइ ) कूल निह रहइ। गामक िवGाथX सभ पढ़बाक हेतु एकतारा, लोहा वा रिहका जाइत रहैथ। एकाघ-टा िवGाथX मधुबनी िकंवा बेनीप¼ी सेहो जाइत छला।

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कहल जाइत अिछ जे एकबेर अं¤ेज सभ गामक बाटे जाइत काल पहलमान सभक• सौरो करैत जे देखलकै आ िठठैक गेल। पुछलकै जे ई सभ डकैत िछऐ की?तँ िकयो कहलकै जे निह सरकार! ई सभ पहलमान छैथ, सुखी सq पÀ छैथ आ खेती-बारी किर कऽ Iित­ ठा पूव/क जीबैत छैथ। अड़ेरमे कमला नदीसँ जोड़ल नाला अिछ जइमे पािन तखने अबैत अिछ, जखन िक कमलामे बािढ़ आिब जाइत अिछ। कृिष काजमे ऐ नालाक योगदान नगJय अिछ। ) थानीय िकसान सभ भगवानक कृपापर िनभ/र छैथ। िचिकŒ साक मामलामे हमर गाम िपछड़ल अिछ। केतौ-केतौसँ इलाज-बात होइए। पिहने दिड़भंगामे इलाजक नीक बेव) था छल। पैसा खच/ केलापर लोकक• औÐदा रहलापर जान बँिच जाइत छल, मुदा आब तँ भगवाने मािलक। बेमरी िकछु, इलाज कथुक। हमर एकटा पिरिचतक• तेतेक करगर एZ टीवायोिटक देल गेल जे हुनकर दुनू िकडनी फेल भऽ गेलैन। आब डयिलिसस करा कऽ कहुना जीिब रहला अिछ। जेतेक िदन ससैर जाइथ। हमर गामक ¸¹) थानमे सालमे एकबेर नवाह अब) स होइत अिछ। ओइठाम युवक सभ भÇ य मिZ दरक िनम‚ण केलैथ। पिहने काली पूजामे मूित/क ) थापना होइत छल जे पूजाक बाद भँसा देल जाइत छल। आब होइठाम ) थायी ‘पसँ म~ कालीक भÇ य मूित/ ) थािपत भऽ चूकल छैथ। सालमे िदयावातीक राितमे भÇ य आयोजन होइत अिछ जइमे अड़ेर चौकसँ काली मिZ दर धिर नाना Iकारक ब ब सभ जगमग करैत रहैत अिछ। काली पूजामे नाच-गानक अितिरf त तरह-तरह केर मनोरंजनक बेव) था रहैत अिछ। पहने हमरा गाममे काली पूजाक रेबाज निह छल। लगभग ४५ सालपूव/ िकछु युवक सभ एकरा Iारq भ केलैन जे तखनसँ एकटा पिरपाटी भऽ गेल अिछ। काली मिZ दरमे माइकसँ लगातार घोषणा होइत रहैत अिछ जे फ ल~ ठामसँ नाच-गान करए-बला/करए-वाली आएल छैथ, अब) स देखब...। आिद-आिद। सुनबमे आएल जे पÐक~ आयोजनक ममे िकछु झंझट भऽ गेल। पता निह, आग~ ऐ ाय/मक की ‘परेखा रहत। अड़ेर बहुत सािवक गाम अिछ। मधुबनीसँ बेनीप¼ी जेबाक ममे ई गाम अबैत अिछ। किहयासँ ई पËा रोड बनल अिछ से पता निह। आब ओही रोडक• थोड़ेक चौड़गर सेहो कऽ देल गेल अिछ। सीतामढ़ीक हेतु दिड़भंगा-पटनासँ जाइबला बस सभ हमरे गाम दऽ कऽ जाइत-अबैत अिछ। कुल िमला कऽ देखल जाए तँ हमर गाम छोट-छीन शहरक ‘प धऽ नेने अिछ। गाममे पढ़ल-िलखल लोकक कमी निह, देशमे सव/W हमरा गामक लोक भेट जेता। िद ली ओ मुq बइमे तँ भरल छैथ। एकर माने गामक जनसं° यामे कमी आिब गेल सेहो बात निह आिखर िमिथलाक भूिम िथक िकने। हमरा लोकिन सोदरपुिरये मिनक मूलकक सािJ ड य गोWीय मैिथली वæा¹ण छी। ७ पु) त पूव/सँ हमरा लोकिनक पूव/जक िववाह अड़रे डीह गाममे भेलैन आ हुनका ससुर गामेमे बसा देलिखन। पय‚“ त जमीन-जŒ था

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देलिखन। मश: ओ सभ उGमसँ Iचूर धन-सq पैत अिज/त कए इलाकाक Iिति­ ठत धनीकमे मानल जाइत छला। मश: पिरवारक िवकास हेइत गेल। जनसं° या बढ़ैत गेल आ ओही ममे पिरवािरक िसरफुटौऐल सेहो बढ़ल। हम ब¢ चा रही तँ कए बेर कएक गोटाक आपसी मािर-पीिटमे कपार फुटैत देिखऐन। मोकदमावाजी तँ चलबे कएल। हमरा सबहक परबाबा तीन भ~इ रहैथ। गुमनी िमm, माना िमm ओ तुफानी िमm। माना िमmक पुW ) व. कमर िमm सं) कृतक IकाJ ड िव’ान छला। सुनैमे अबैत अिछ जे दिड़भंगा महाराज हुनका अपन राज पिJ डत बनबाक आ¤ह केलिखन जे ओ अ) वीकार कऽ देलाह। ओ ) वयं एकटा पाठशाला चलबैत रहैथ। ओइ पाठशालामे सैकड़ो िवGाथXक• िन:शु क भोजन आ आवासक संग िवGा दान देल जाइत छल। हुनकासँ पढ़ल सैकड़ो िवGाथX िमिथलeचलमे हुनकर गुणगान करैत छला। ओइ समयमे अड़ेरमे नामी पहलमान भेल रहैथ ) व. ब¢ चा झा। हुनकर शिf तसँ दिड़भंगा महाराज Iभािवत रहैथ। सुनबामे आएल जे ओ लोहाक हथकड़ीक• जोर लगा कए तोिर देने छला। हमरा गाममे पूव/कालमे मूलत: कृिष आधािरत लोक छला। अिधकeश लोकक• जमीन-जŒ था रहइ। गाम खुशहाल छल। दुपहिरयाक समयमे बरबैर अ हा-‘दलक गीतमय किवता पाठक आयोजन ढोलकक तालपर होइते रहै छल। ऐ तरहक आयोजन आम छल। मुदा आब समय-साल बदलल अिछ। िश\ा िदस लोकक ‘झान बढ़ल अिछ। लोक अपन छोट-छोट ब¢ चाक• पढ़ाइक लेल मधुबनी पठा रहल छैथ। पि  लक ) कूलक चला-चलती बढ़ल अिछ। िश\ा ओ िचिकŒ साक सम) या हमरे गाम तक सीिमत निह अिछ। ओ तँ पूरा िबहारक सम) या अिछए। तथािप लोक Iयासरत अिछ। आशा अिछ, कालाZ तरमे हमरो गाममे िचिकŒ साक बेहतर बेव) था भऽ सकत जइसँ ) थानीय लोकक• पटना/िद ली निह दौड़ए पड़तैन। गाममे आब धनीक लोकक भरमार भऽ गेल अिछ। केतेको बेकतीक• आिथ/क िवकास बहुत भेल। गाममे जबार हएब आम बात भऽ गेल अिछ। गाम लऽ कऽ भोज तँ होइते रहैत अिछ। लोक सभ कहैत रहै छैथ जे ओ सभ भोज खाइत-खाइत तंग भऽ गेल छैथ। केतेको गोटाक•   लड-सूगर बिढ़ जाइत छैन। रसगु ला- छेनाक िबना तँ कोनो भोज होइते ने अिछ। पुरना जमानामे िकलोक िकलो भोजन चट केिनहार लोक सबहक िख) सा सुनैत रहै छेलॱ मुदा आइयो- काि ह एहेन एकाध बेकती हमरा गाममे मौजूद छैथ। जँ अपनेक• धैय/ जवाब निह दऽ िदए तँ हुनकर भोजनक ममे कदमताल देख सकैत छी। हुनका ’ारा खएल गेल रसगु लाक िगनतीक हेतु जन लगबए पिड़ सकैत अिछ। भोजनोपराZ त लदबद चलैत अपन घर आपस जाइत हुनका देख छगुZ तामे पिड़ जाएब। आिखर ओ केना जीब रहल छैथ? आØय/..!

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एतेक भोज होइत रहैत अिछ, मुदा सभजाना भोजमे अखनो ) Wीगणक• शािमल निह कएल जाइत अिछ। जँ बेव) थापक नीक छैथ तँ घरे-घर खएक (पारस) पहुँचा दइ छिथन, मुदा ओहो दुपहर राितमे जखन िक िकयो ) Wीगण भोजनक व) तु Iती\ा मजबुिरयेमे कए सकैत अिछ। हम गाहे-वगाहे ऐ बेव) थामे सुधारक चच/ करै छी, मुदा ¤ामीण बेव) थामे सुधारक गुनाजाइश सहज निह होइत अिछ। देखै छी, आग~ की होइत अिछ। हमरा गाममे हाइ ) कूलक ) थापना हेतु इलाकाक गणमाZ य लोक सभ Iयास केलाह। ओइमे हमर बाबूजी सेहो अŒ यZ त सिय रहैथ। ) व. ब¢ चा झाक पिरवारक लोक बहुत रास योगदान देलैथ। ) थानीय लोक सभ सेहो योगदान केलिखन जइसँ हाइ ) कूलक नाओं- ‘ब¢ चा झा जनता उ¢ च िवGालय- अड़ेर’ पड़ल। िकछु िदन धिर ओ िवGालय पंचायत भवनमे चलैत छल। मश: िवGालयक अपन पËा मकान एवम् आन- आन सुिवधा भेल। गेनखेलीक हेतु हमर गाम Iिस© छल। अं¤ेजी हुकुमतक लोक सभ हमरा गामक लोक सबहक गेनखलीमे अिभÐिच देख दंग रहैथ। हमर बाबूजी सेहो ऐमे मािहर रहैथ। केतेको मेडल हुनका भेटल छल। गेनखेलीसँ Iभािवत भऽ अं¤ेज अिधकारी सभ हमरा गामक कएक गोटाक• छोट-मोट नौकरी धरा देलिखन। अड़ेरक फुटबॉल टीमसँ बड़का-बड़का शहरक टीम सभ घबड़ाइत छला। हम सभ जखन ब¢ चा रही तखनो िव­ णुपुरक मैदानक गेनखेलीमे बाबूजीक• भाग लैत देिखऐन। कए िदन हुनका पैरमे चोट लािग जाइन। चोट सबहक देशी इलाज होइत छल। आब समय-साल बदलल अिछ। गामोमे लोकक आपसी सq पक/ \ीण भऽ गेल अिछ। फगुआ सन पाबैनमे लोक अपन दरब¬ जा ओगरने रहैत अिछ। तथािप गाम तँ गामे अिछ। आशा करै छी जे कालाZ तरमे मश: हमरा गाममे आर सभ सुिवधा हएत जेकर क पना सुखद जीवनक हेतु कएल जाइत अिछ। जइ Iकारक चौह^ी हमर गामक अिछ तइमे एकरा िवकासक िशखर तक पहुँचनाइ एक सफल )वपÀ भऽ सकैत अिछ, वशतÕ गामक युवा शिf त रचनाŒ मक ‘ख धरैत सही िदशामे अ¤सर होइथ। ◌ ितिथ : 15 अग) त २०१७ , श  द सं° या : ३४४०

ऐ रचनापर अपन मंतÇय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। िमिथलेश कुमार िसZहा आज़ादी (िबिहिन कथा).

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'अह~ कh जZमाêमी आओर )वतंWता िदवस केर बधाई' !' प¾ी बजलीह.

'अहूँ के बधाई !'

'ई शुभ िदन खासक' अहॴ वा)ते आएल अिह !' जबाब देलिथZह.

'िकएक, हमरे वा)ते शुभ िदन . . ? हम पुछिलयैZह.

'से नै बुझलौहुँ ? अहूँ सात बिहन पर एगो छोट भाय.... कृ­ण भेलौहुँ आ कृ­णो सन Çयवहारो अिह.... पेशा सं वकील छी हे, जे )वतंW पेशा अिह.... अह~ आज़ाद छी !' प¾ी बुझौलीह.

हम उस~स ल' मोने-मोन बजलहुँ,' हं ठीके, कृ­ण त' भेलहुँ मुदा आज़ाद....?' दीवार पर ट~गल अपन िववाह'क फ़ोटो देिख, मुड़ी गोइंत लेलहुँ. ऐ रचनापर अपन मंतÇय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।

िवदेह नूतन अंक बालानe कृते िवदेह मैिथली मानक भाषा आ मैिथली भाषा सqपादन पाìयम भाषापाक १.आशीष अनिचZहार - १ टा बाल गजल आ २ टा गजल २. जगदीश चZl ठाकुर ’अिनल ’- चािरटा गजल ३.अिqबकेश कुमार िमm दू टा किव ता १ आशीष अनिचZहार - बाल गजल तीने वण/क बनल िमठाइ तीने वण/क बनल मलाइ

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तीने वण/क बनल िकताब तीने वण/क बनल पढ़ाइ

तीने वण/क बनल सलाह तीने वण/क बनल लड़ाइ

तीने वण/क बनल फच~िड़ तीने वण/क बनल िपटाइ

तीने वण/क बनल अकास तीने वण/क बनल लटाइ

तीने वण/क बनल इजोत तीने वण/क बनल सलाइ

सभ प~ितमे 22-2212-121 माWाम अिछ गजल

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छै सभ िकयो असगर अपने अपन सहचर

ई आिग ओ आिग दुÀू रहल मजगर

बुझबै अह~ सभ िकछु एतै जखन अवसर

जीवन मने िबजनस िर)को रहत कसगर

संवेदना टूटल खूनो रहै पिनगर

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सभ प~ितमे 2212-22 माWाम अिछ दोसर शेरक पिहल प~ितक लघुक• दीघ/ मानबाक छूट लेल गेल अिछ।

2

छन भिर के पिहचान छै जीवन भिर अनुमान छै

सोना चानी बÎकमे आँचरमे दुिभ धान छै

पुरिहत आ जजमान संग अपने ओ भगवान छै

चु“पे रहलहुँ देिखतो केहन ई अिभमान छै

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)वामी अनिचZहार जी हमरे सन बइमान छै

सभ प~ितमे 222+2212 माWाम अिछ तेसर शेरक पिहल प~ितक अंितम लघु छूटक तौरपर लेल गेल अिछ मकतामे हमरा जनैत दोष छै। पिहल प~ितमे "जी" आदर सूचक छै तँ दोसर प~ितमे "छै" बराबरी सूचक। आ¤ह जे उपाय बताएल जाए।

२ जगदीश चZl ठाकुर ‘अिनल ’ ४ टा गजल

(1) शौय/ शील आ घाम तकै छी ह’म )वयंमे राम तकै छी

गाम छोिड़क’ एलॱ पटना आब अहूठ~ गाम तकै छी

अह~ गीत छी अहॴ गजल अहॴमे चा‘ धाम तकै छी

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' 232 म अंक 15 अग)त 2017 (वष/ 10 मास 116 अंक 232 ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 116

सभ पोथीमे सभ पÀामे खाली अपने नाम तकै छी

मैिथल छी मैिथल ब)तीमे धोती और खराम तकै छी (सरल वािण/क बहर/वण/-10 ) (2) कानमे तूर धेने अिछ लोक गजल की कहबै भोरेसं भeग खेने अिछ लोक गजल की कहबै

बिरयातीकh चाही माछ माउस और रसगुला िपबैले’ जान देने अिछ लोक गजल की कहबै

हो  लडIेशर डायिबटीज िक आन कोनो रोग भोजले’ मूंह बेने अिछ लोक गजल की कहबै

खु¼ा त गडतै ओहीठाम जत’ ह’म कहै िछऐ एकेटा गीत गेने अिछ लोक गजल की कहबै ढेपाक जवाब पाथरसं देबाक चलन गेल हाथमे बम नेने अिछ लोक गजल की कहबै

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चतुथX मधुmावनी कोजगरा और जराउर ितलकh ताड़ केने अिछ लोक गजल की कहबै

चािहयै सभकh जाडमे रौद आ गमXमे बसात िखड़की बंद केने अिछ लोक गजल की कहबै (सरल वािण/क बहर/वण/-18 )

(3) ह’म कनैछी हँसैए लोक पता ने की की बजैए लोक

कZयादान अह~क घ’रमे लेिकन बख/ गनैए लोक

सयमे न बे फ़ूिस बजैए हिरØंl कहबैए लोक

पोनेपर ठोकै छी तबला खूब अहूँकh िचZहैए लोक

िकयो बनैए छत कोनोठ~ सीढ़ी जखन बनैए लोक

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देखू fयो मिरयोक’ जीबय िजिबते कतौ मरैए लोक (सरल वािण/क बहर/वण/-10) (4) अपन उपि)थित दज/ कराब’ चाहै छी ऐ संसारमे तािक रहल छी भोरे-भोरे नाम अपन अख़बारमे

छओटा कZयादान केलॱ आ बारहटा वरदान सेहो एक पैर घ’रमे रहै छल दोसर हाट-बजारमे

भार-दौड़ आ भोज-भातमे स’भ िदन लगले रहलॱ स’भ साल कज‚ पर कज‚ सटले रहल कपारमे

उिचतनुिचतक ¨यान नै केलॱ नै गेलॱ मतदानमे आब बैिस टेटर गनैत छी ऐ चूनल सरकारमे

एिह धामसं ओिह धाम कबुला-पाती किरते रहलॱ नै केलॱ कोनो पिरवरतन अ“पन तु¢छ िवचारमे भािग एलॱ मंिदर-मि)जद-िगिरजाघर-गुВारासं एखनो लोक तकैए हमरा ऋिषकेश-हिर’ारमे (सरल वािण/क बहर/वण/-20) ३

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अिqबकेश कुमार िमm दू टा किवता १ "मौिगयाहा नैइतन " गामपर रही जाबत सुिन बाबूजीकs ताना-फ¬जित ¤ेजुएशन भs गेलै दू पाई कमायत से नै घुिसयायल रहैत अिछ घरमे जेना सेबने होइ सौिर मौिगयाहा नैइतन|

दू िदन भेल शहर ऐना गामपर कनैत अिछ माय पछताई छिथ बाबूजी फोनका कहैतैमsए बउवा तमशा गेलिह िक................. नै म~ ..................... दाई कहै बÛडबईमान भsगेलए बउवा आब तs फोनो नै करैछ……..| २

"िदली" ई शहर छी, िदली ...

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ह~ ! िदलबलाकs शहर िदल? िदल जतs भरल अिछ सपना आबचलाहाजगहमेधुवeसँ ई राजधानी छी धूव~कs जकर शहंशाहैकाब/नमोनोऑfसाइड|

ई शहर छी हाथमे िसगरेट आ पेटमे धूव~कs अतयनाकसँ िनकलैत ऐ ि\ण होईत आयुक Iितकृित आ उिड़याईतs चिल जायत अिछ ओजोन परततक

इZतजारमे ऐ शहर कखन खसतs ओजोन आ बिढ़ जायत मकानकs भाड़ा आर बेिस बिढ़ जायत जैकेटकs िबी गमXमे रने-बनेभगत लोकs अपनाके बचाबैलय सु‘जक पराबैगनी िकरणसs तखन एकटा छ‰ा बेचव दू सैय Ðपैये

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क‰े िनक! अिqबकेश कुमार िमm ¤ाम+पो)ट-सतघरा(बाबूबरही) मधुबनी

ऐ रचनापर अपन मंतÇय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।

िवदेह

मैिथली सािहŒय आZदोलन (c)2004-17. सव‚िधकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अिछ ततऽ संपादकाधीन। िवदेह- Iथममैिथली पाि\क ई-पिWका ISSN 2229-547X VIDEHA सqपादक: गजेZl ठाकुर। सह-सqपादक: उमेश मंडल। सहायक सqपादक: राम िव लास साहु, नZद िवलास राय, सZदीप कुमार साफी आ मुÀाजी (मनोज कुमार कण/)। सqपादक- नाटक-रंगमंच-चलिचW- बेचन ठाकुर। सqपादक- सूचना-सqपक/-समाद- पूनम मंडल। सqपादक- अनुवाद िवभाग- िवनीत उŒपल।

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