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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५२ म अंक १५ जून २०१८ (वषᭅ ११ मास १२६ अंक २५२ ) मानुषीिमह सं᭭कृताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 1
ISSN 2229-547X VIDEHA 'िवदेह ' २५२ म अंक १५ जून २०१८ (वष; ११ मास १२६ अंक २५२ )
ऐ अंकमे अिछ:- २. गD २.१.१.आशीष अनिचIहार- नरेIKजीक मैिथली आ िहंदी गजलक तुलनाQमक िववेचना २.Rणव कुमार- मैिथली कथाम ◌े स◌्Vी २.२.दुगWनIद मXडल- लघुकथा- सीख २.३.१.१.जगदीश Rसाद मXडल- लघुकथा- संकट १.२. जगदीश Rसाद मXडल- पंगु - उपIयासक आरaभ (आगc) २.४.रबीIK नारायण िमf- १.नमgतgयै- उपIयासक आरaभ (आगc) २.लघुकथा- सनकल
३. पद ◌्य ३.१. आशीष अनिचIहार - गजल ३.२.डॉ. िशवकुमार Rसाद- िकछु किवता ३.३.डॉ. िशवकुमार Rसाद- िकछु अनुिदत काiय (मूल िहIदी रजनी छाबड़ा)- आगc ३.४.राजेश मोहन झा "गुंजन"-िकनकर िवकास?-(पूंजीवाद िक सव;हारा)- (याVीजी "बाबा नागाजु;न" कo जIम िदन पर)
४.१.बालानp कृते- राजेश मोहन झा "गुंजन "-गाछक गोहािर -(िवr पयWवरण िदवस पर )
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२. गD
Magazine िवदेह Rथम मैिथली पािक ई पिVका नव अंक देखबाक लेल पृ सभक िरेश कए देखू। २. गD
२.१.१.आशीष अनिचIहार- नरेIKजीक मैिथली आ िहंदी गजलक तुलनाQमक िववेचना २.Rणव कुमार- मैिथली कथाम ◌े स◌्Vी २.२.दुगWनIद मXडल- लघुकथा- सीख २.३.१.१.जगदीश Rसाद मXडल- लघुकथा- संकट १.२. जगदीश Rसाद मXडल- पंगु - उपIयासक आरaभ (आगc) २.४.रबीIK नारायण िमf- १.नमgतgयै- उपIयासक आरaभ (आगc) २.लघुकथा- सनकल १.आशीष अनिचIहार- नरेIKजीक मैिथली आ िहंदी गजलक तुलनाQमक िववेचना २.Rणव कुमार- मैिथली कथामे gVी
१ आशीष अनिचIहार
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नरेIKजीक मैिथली आ िहंदी गजलक तुलनाQमक िववेचना
एिहठाम समीा लेल हम नरेIKजीक मैिथली आ िहंदी गजलक चुनलहुँ अिछ। ई समीा एकै गजलकारक दू भाषामे िलखल गजलक तुलना अिछ। पिहने हम दूनू भाषाक गजल आ ओकर बहरक तती ओ रदीफ- कािफयाक समीा करब तकर बाद भाव, कय ओ भाषाक िहसाबसँ।
नरेIKजीक चािर टा मैिथली गजल जे िक िमिथला दश;नक Nov- Dec-16 अंकमे Rकािशत अिछ---
1 राज काज भगवान भरोसे अिछ सुराज भगवान भरोसे
मूलधनक तँ बाते छोड़ू सूिद याज भगवान भरोसे
खूब सयता आयल अिछ ई लोक लाज भगवान भरोसे
देह ठठा कऽ क िकसानी आ अनाज भगवान भरोसे
अपना भिर सब यॲत िभराऊ िकंतु भcज भगवान भरोसे
एिह गजलक पिहल शेरक पिहल पcितमे आठ टा दीघ; अिछ। दोसर पcितमे आठ टा दीघ; अिछ। दोसर शेरक पिहल पcितमे सात टा दीघ; आ एकटा लघु (तँ) अिछ। हमरा लगैए शाइर तँ शदक दीघ; मािन लेने छिथ जे िक गलत अिछ। पं. गोिवIद झाजी अपन iयाकरणक पोथीमे एहन शदक लघुए मानने छिथ जे िक सव;था उिचत तँइ एिह गजलमे सेहो ई लघु हएत। कोनो लघुक दीघ; मािन लेबाक परंपरा गजलमे तँ नै छै मुदा मैिथली गजलमे हमरा लोकिन संgकृतक िनयमक अनुसार अंितम लघुक दीघ; मानै छी मुदा एिह गजलमे तँ बीचक लघुक दीघ; मानल गेल अिछ जे दूनू परंपरा (गजल आ संgकृत) िहसाबo गलत अिछ। दोसर
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पcितमे आठ टा दीघ; अिछ। तेसर शेरक दूनू पcितमे आठ-ठ दीघ; अिछ। चािरम शेरक पिहल पcितमे सात टा दीघ; आ एकटा लघु अिछ (कऽ) एिहठाम हम दोसर शेरक पिहल पcित लेल जे हम बात कहने छी तकरे बुझू। दोसर शेरमे आठ टा दीघ; अिछ। पcचम शेरक दूनू पcितमे आठ-आठ टा दीघ; अिछ। एिह गजलक रदीफ "भगवान भरोसे" अिछ आ कािफया "आ" विन संग "ज" वण; अिछ जेना काज-सुराज, याज, लाज, अनाज मुदा पcचम शेरक कािफया अिछ "भcज" जे िक गलत अिछ। "भcज" केर विन "आँ" केर ज छै मुदा मतलामे "आ" विनक संग ज छै। तँइ पcचम शेरक कािफया गलत अिछ। ई गजल बहरे मीरपर आधािरत अिछ जािहमे जकर िनयम अिछ जे "जँ कोनो गजलमे हरेक माVा दीघ; हो तँ ओकर अलग-अलग लघुक सेहो दीघ; मानल जा सकैए। मुदा बहरे मीरक िहसाबसँ सेहो एिह गजलमे कमी अिछ।
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फोड़त आँिख िदवाली आनत कान कािट कनबाली आनत
अहॴक हाथ पयर कटबा लय टाका टािन भुजाली आनत
देश Rेम केर डंका पीटत केस मोकदमा जाली आनत
पेट बािIह कऽ क चाकरी एहने आब बहाली आनत
पूरा पूरी दान चुका कऽ सबटा िडबा खाली आनत
एिह गजलक पिहल आ दोसर शेरक हरेक पcितमे आठ-आठ टा दीघ; अिछ। तेसर शेरक पिहल पcितमे एकटा लघु फािजल अिछ तेनािहते दोसर पcितमे सेहो एकटा लघु फािजल अिछ। चािरम शेरक पिहल पcितमे छह टा दीघ; आ दू टा लघु अिछ। कऽ शदक िववेचना उपर जकc रहत। दोसर पcितमे "ए" शदक लघु मािन
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लेल गेल अिछ जे िक हमरा िहसाबo उिचत नै। पcचम सेरक पिहल पcितमे सात टा दीघ; आ एकटा लघु अिछ। कऽ लेल उपरके िववेचना देखू। दोसर पcितमे आठ टा दीघ; अिछ। एिह गजलक कािफया ठीक अिछ। ई गजल बहरे मीरपर आधािरत अिछ जािहमे जकर िनयम अिछ जे "जँ कोनो गजलमे हरेक माVा दीघ; हो तँ ओकर अलग-अलग लघुक सेहो दीघ; मानल जा सकैए। मुदा बहरे मीरक िहसाबसँ सेहो एिह गजलमे कमी अिछ।
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लाख उपलिधसँ ओ घेरा गेल अिछ बस हृदय आदमी के हेरा गेल अिछ
सब समाजक चलन औपचािरक बनल लोक संबंधसँ आन डेरा गेल अिछ
सबटा चेहरा बनौआ अपिरिचत जकc मूल चेहरा ससिर कऽ पड़ा गेल अिछ
भोरसँ सcझ धिर फूिस पर फूिस िथक लोक अपने नजिरसँ धरा गेल अिछ
देशक सोना पcिख बनत एक िदन फेर अनचोके मे ई फुरा गेल अिछ
एिह गजलक पिहल शेरक पिहल पcितक माVा¡म 2122-1122-2212 अिछ आ दोसर पcितक माVा¡म 2122-1222-2212 अिछ। दोसर शेरक पिहल पcितक माVा¡म 2122-1221-2212 अिछ आ दोसर पcितक माVा¡म 2122-1121-22212 अिछ। तेसर शेरक पिहल पcितक माVा¡म 2121-2122-12212 अिछ आ दोसर पcितक माVा¡म 2121-2122-12212 अिछ। चािरम शेरक पिहल पcितक माVा¡म 211212212212 अिछ आ दोसर पcितक 212212112212 अिछ। पcचम शेरक पिहल पcितक माVा¡म 22222112212 अिछ आ दोसर पcितक 212222212212 अिछ। एिह गजलक तेसर, चािरम आ पcचम
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शेरक कािफया गलत अिछ। एिह गजलक हमरा बहरेमीरपर मानबासँ आपि अिछ आ से िकए ई पाटक लोकिन माVा¡म जोिड़ देिख सकै छिथ जे अलग-अलग लघु जोड़लाब बादो लघु बिच जाइत छै। तँइ हमरा आपि अिछ संगे-संग ई गजल आर कोनो बहरपर आधािरत नै अिछ सेहो gप¢ अिछ।
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िडबा सन सन शहरक घर अिछ पािन हवा मे िमलल जहर अिछ
गाम जेना बेदखल भऽ रहल बाध बोन धिर घुसल शहर अिछ
आजुक युगमे कोना पकड़बै चोर साधु मे की अंतर अिछ
देश बनल शो केश बजारक जनतंVक बेजोड़ असर अिछ
अजब दौर अिछ ल£य िनपा िदशा हीन ई भेड़ सफर अिछ
मतलाक दूनू पcितमे आठ टा दीघ; अिछ। दोसर शेरक पिहल पcितमे आठ टा दीघ; आ एकटा लघु अिछ। दोसर पcितमे आठ टा दीघ; अिछ। तेसर शेरक पिहल पcितमे आठ टा दीघ; आ एकटा लघु अिछ। दोसर पcितमे आठ टा दीघ; अिछ। चािरम आ पcचम शेरक दूनू पcितमे आठ आठ टा दीघ; अिछ। एिह गजलमे आएल "भेड़ सफर" शद यु¤मपर आगू चिल भाषा खंडमे चचW हएत। ई गजल बहरे मीरपर आधािरत अिछ जािहमे जकर िनयम अिछ जे "जँ कोनो गजलमे हरेक माVा दीघ; हो तँ ओकर अलग-अलग लघुक सेहो दीघ; मानल जा सकैए। एिह गजलक मतलाक पिहल पcितक कािफया "घर" केर उ¥चारण िहंदी सन कएल जाए तखने सही हएत अIयथा मैिथली उ¥चारण िहसाबo गलत हएत। बाद बcकी शेरक कािफया मतलाक कािफयापर िनभ;र करत तँइ ओकर िववेचना हम नै क' रहल छी।
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नरेIKजीक चािर टा िहंदी गजल जे िक हुनक फेसबुकक वालसँ लेल गेल अिछ----
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यह जो चौपट यहp का राजा है कुछ नहॴ वक़्त का ताकाजा है
हम लड़ाई से बहुत डरते ह§ यूं िक कुछ घाव अभी ताजा है.
देश उनके िलए िखलौना है हमको इस बात का अIदाजा है
जैसे चाहे इसे बाजाते ह§ गोिक जनतंV एक बाजा है
अब उठा है तो धूम से िनकले यारो आिशक का ये जनाजा है
एिह गजलक पिहल पिहल आ दोसर दूनू शेरक शेरक माVा¡म 2122-12-1222 अिछ। एिह शेरक दोसर पcितमे शायद टाइिपंग गलती छै तँइ सही शद "तकाजा" हम मानलहुँ अिछ। दोसेर शेरक पिहल पcितक माVा¡म 2122-12-1222 आ दोसर पcितक माVा¡म 2122-112222 अिछ। तेसर शेरक पिहल पcितक माVा¡म 2122-12-1222 अिछ आ दोसर पcितक माVा¡म 2122-12-2222 अिछ। चािरम शेरक पिहल आ दोसर दूनू शेरक माVा¡म 2122-12-1222 अिछ। एिह शेरक दोसर पcितमे शायद टाइिपंग गलती छै तँइ सही शद "बजाते" हम मानलहुँ अिछ। पcचम शेरक दूनू पcितक माVा¡म 2122-12-1222 अिछ। बहरमे जतेक माIय छूट छै से लेल गेल अिछ। कुल िमला देखी तँ एिह गजलक दूटा शेर बहरसँ खािरज अिछ (दोसर आ तेसर)। एिह गजलमे कािफया ठीकसँ पालन भेल अिछ।
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क़यामत ऐन अब दालान पर है नज़र दुिनया की रौशनदान पर है.
न जाने रौशनी आयेगी कब तक अभी तो तीरगी परवान पर है.
िपघल जाता है उनके आँसुओं पर मेरा गुgसा िदले नादान पर है.
शगल उनके िलए है शायरी भी मगर मेरे िलए तो जान परहै.
मुहबत की वकालत करने वाला अभी नफ़रत की इक दूकान पर है.
एिह गजलक हरेक शेरक हरेक पcितमे 1222-1222-122 माVा¡म अिछ। बहरमे जतेक माIय छूट छै से लेल गेल अिछ। एिह गजलक कािफया सेहो ठीक अिछ।
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बाढ़ मo लोग िबलिबलाते ह§ रहनुमा बाढ़ को भुनाते ह§
घोषणाओं पे घोषणाएं ह§
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नाव वह काग़ज़ी चलाते ह§
इस तरफ़ भुखमरी का आलम है और वह आँकड़े िगनाते ह§
फंड जो भी जहp से आता है ख़ुद ही वो बcट करके खाते ह§
साल दर साल बाढ़ आ जाये दरअसल ये ही वो मनाते ह§
एिह गजलक हरेक शेरक हरेक पcितमे 2122-12-1222 माVा¡म अिछ। बहरमे जतेक माIय छूट छै से लेल गेल अिछ। एिह गजलक कािफया सेहो ठीक अिछ।
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आकाश से टपके हुए िकरदार नहॴ ह§ हम भी मक़ीन ह§ िकरायेदार नहॴ ह§ |
उनके इरादॲ की भी मालूमात है हमo ऐसा नहॴ िक हम भी ख़बरदार नहॴ ह§
वह नाम हमारा िमटायoगे कहc कहc बुिनयाद की हम ®ट ह§ दीवार नहॴ ह§ |
इंसान ह§ अपनी हदॲ का इ¯म है हमo हम आपके जैसा कोई अवतार नहॴ ह§ |
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हम अपनी मुहबत की नुमाइश नहॴ करते िर°ते िनभाते ह§ दुकानदार नहॴ ह§ |
पढ़ना ही अगर हो तो पढ़ो इQमीनान से अदबी िकताब ह§ कोई अख़बार नहॴ ह§ |
एिह गजलक पिहल शेरक पिहल पcितक माVा¡म 2212-2212-221122 अिछ। दोसर पcितक माVा¡म 2212-1212-221122 अिछ। दोसर शेरक पिहल पcितक माVा¡म 2212-2212-221212 अिछ। दोसर पcितक माVा¡म 2212-122-122-1122 अिछ। बहरमे जतेक माIय छूट छै से लेल गेल अिछ मुदा तइ बादो ई गजल बहरमे नै अिछ। मतलाक दूनू शेरेमे एकपता नै अिछ। तँइ हम माV दू शेरक तती केलहुँ अिछ बाद-बcकी शेरक िववेचना पाठक बुिझये गेल हेता। कािफया सेहो गलते अिछ।
बह रक िहसाबसँ नरेIKजीक गजल --
चा मैिथली गजलक देखल जाए तँ ई gप¢ अिछ जे नरेIKजी अिधकpशतः बहरे मीरपर आिfत छिथ आ ताहूमे कतेको ठाम हूसल छिथ। जखन िक बहरे मीर बहुत आसान बहर छै आ एिह बहरमे छूट बहुत छै। तेनािहते जँ चा िहंदी गजलक बहरक देखल जाए ई gप¢ होइए जे नरेIKजी बहरे मीरक अितिरत आन बहर सभपर सेहो हाथ चलबै छिथ आ ओहूमे कतेको gथानपर हूसल छिथ। तथािप ई उ¯लेखनीय जे आनो बहरपर ओ गजल लीिख सकै छिथ। नरेIKजी मैिथली-िहंदीक देल उपर बला गजलक बहर संबंधमे हमर ई gप¢ माIयता अिछ जे नरेIKजी माV लयक बहर मािन लै छिथ जखन िक लय आ बहरमे अंतर छै। लय मने गािब कऽ, गुनगुना कऽ। लयपर िलखलासँ केखनो बहर सटीक भैयो सकैए आ केखनो निहयो भऽ सकैए। बहर ओ कािफयाक आधारपर नरेIKजीक गजलक एकै बेरमे हम गलत नै किह सकै छी कारण मैिथलीक किथत गजलकार सभसँ बेसी मेहनित नरेIKजी अपन गजलमे केने छिथ आ जँ ई थोड़बे मेहनित करतिथ वा करता तँ िहनक गजल एकटा आदश; गजल भऽ सकैए। ओना एिह बातक संभावना कम जे ओ एिह तयक मानताह। करण वएह िजद जे iयाकरण कोनो जरी नै छै। रचनामे भाव Rमुख होइत छै आिद-आिद। मैिथलीमे नरेIKजीक गजल अपन पीढ़ीक अिधकpश गजलकार (सरसजी, तारानंद िवयोगी, रमेश, देवशंकर
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नवीन एवं ओहने गजलकार) सभसँ बेसी ठोस गजल छिन से मानबामे हमरा कोनो शंका नै मुदा बहर ओ कािफयाक िहसाबo पूरा-पूरी सही नै छिन (मने नरेIKजी माV अपन समकालीनसँ आगू छिथ)। एिहठाम हम नरेIKजीक चािर-चािर टा गजल लेलहुँ मुदा आन ठाम हुनक Rकािशत वा हुनक फेसबुकपर Rकािशत मैिथली आ िहंदी गजलक अनुपातसँ ई gप¢ अिछ जे नरेIKजी मैिथलीमे माV संपादकक आ²हपर गजल िलखै छिथ। मने मैिथली गजल हुनकर येय नै छिन। अइ बादॲ आ³य; जे िहंदी गजलमे हुनकर कोनो िवशेष gथान नै छिन। ई बात हम एकटा िहंदी गजल पाठकक तौरपर किह रहल छी। हुनकर समूहक िकछु लोक हुनका भने िबहारक िहंदी गजलकारक िलgटमे दऽ दौन मुदा वाgतिवकता इएह जे िहंदी गजल संसारमे नरेIKजीक कोनो gथान नै छिन। आ एकरा माV राजनीित नै कहल जा सकैए। िहंदी गजलमे एहतराम इgलाम, नूर मुहaमद नूर, जहीर कुरैशी सभ पुरान छिथ एवं नवमे गौतम राजिरषी, gवपिनल fीवाgतव, वीनस केसरी, मयंक अवgथी आिद अपन gथान बना लेला मुदा की करण छै जे नरेIKजी असफल रिह गेला। हम फेर कहब जे हरेक चीजमे राजनीित नै होइ छै। िहंदी गजलक नव शाइर गौतम राजिरषी, gवपिनल fीवाgतव, वीनस केसरी, मयंक अवgथी आिदक पाछू कोनो संपादक क हाथ नै छलिन मुदा नीक िलखलासँ कोन संपादक नै छापै छै। आ िहनकर सभहँक सभ गजल iयाकरण ओ भाव दृि¢सँ संतुिलत रहै छिन आ तँइ ई सभ बहुत कम समयमे िहंदी गजलमे अपन gथान बना लेला मुदा नरेIKजी नै बिढ़ सकला आ तािह लेल माV हुनक बहर ओ iयाकरण नै पालन करबाक िजद िजaमेदार छिन। मैिथली गजलमे तँ ई अपन समकालीन गजलकारसँ आगू बिढ़ जेता मुदा ई िहंदीमे िपछड़ले रहता कारण ओिहठाम बहर सेहो देखल जाइ छै जखन िक मैिथली गजलमे बहर देखानइ आब शु भेलैए।
िकछु एहन बात जे िक Rायः हम, सभ आलोचनामे कहैत िछयै " मैिथलीक अराजक गजलकार सभ िहंदीक िनराला, दु´यंत कुमार आ उदू;क फैज अहमद फैज केर बहुत मानै छिथ। एकर अितिरतो ओ सभ अदम गॲडवी मुµवर राना आिदक मानै छिथ। मैिथलीक अराजक गजलकार सभहँक िहसाबo िनराला, दु´यंत कुमार आ फैज अहमद फैज सभ गजलक iयाकरणक तोिड़ देलिखन मुदा ई ¶म अिछ। सच तँ ई अिछ जे िनराला माV िवषय पिरवत;न केला आ उदू; शदक बदला गजलमे िहंदी शदक Rयोग केला, तेनािहते दु´यंत कुमार इमरजेIसीक िव·¸ गजल रचना ¡pितकारी पo केलिथ। फैजक साaयवादी िवचारक गजल लेल जानल जाइत अिछ। मुदा ई गजलकार सभ िवषय पिरवत;न केला आ समयानुसार शदक Rयोग बेसी केला। एिहठाम हम िकछु िहंदी गजलकारक मतलाक तती देखा रहल छी ( जे-जे मतला हम एिहठाम देब तकर पूरा गजल ओ पूरा त¹ती हमर पोथी मैिथली गजलक iयाकरण ओ इितहासमे देिख सकै छी)---
सूय;कpत िVपाठी िनरालाजीक एकटा गजलक मतला देखू--
भेद कुल खुल जाए वह सूरत हमारे िदल मo है देश को िमल जाए जो पूँजी तुaहारी िमल मo है
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मतला (मने पिहल शेर)क माVा¡म अिछ--2122+2122+2122+212 आब सभ शेरक माVा¡म इएह रहत। एकरे बहर वा की वण;वृत कहल जाइत छै। अरबीमे एकरा बहरे रमल केर मुजाइफ बहर कहल जाइत छै। मौलाना हसरत मोहानीक गजल “चुपके चुपके रात िदन आँसू बहाना याद है” अही बहरमे छै जकर िववरण आगू देल जाएत। ऐठc ई देखू जे िनराला जी गजलक िवषय नव कऽ देलिखन Rेिमकाक बदला िवषय िमल आ पूँजी बिन गेलै मुदा iयाकरण वएह रहलै।
आब हसरत मोहानीक ई Rिस¸ गजलक मतला देखू---
चुपके चुपके रात िदन आँसू बहाना याद है हमको अब तक आिशक़ी का वो ज़माना याद है
एकर बहर 2122+2122+2122+212 अिछ।
आब दु´यंत कुमारक ऐ गजलक मतलाक तती देखू---
हो गई है / पीर पव;त /सी िपघलनी / चािहए, इस िहमालय / से कोई गं / गा िनकलनी / चािहए।
एकर बहर 2122 / 2122 / 2122 / 212 अिछ।
फैज अहमद फैज जीक ई गजलक मतला देखू--
शैख साहब से रgमो-राह न की शु¡ है िज़Iदगी तबाह न की
एिह मतलाक बहर 2122-1212-112 अिछ।
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आब कने अदम गॲडवी जीक एकटा गजलक मतलाक तती देखू—
ग़ज़ल को ले / चलो अब गc / व के िदलकश /नज़ारॲ मo मुस¯सल फ़न / का दम घुटता / है इन अदबी / इदारॲ मo
एकर बहर 1222 / 1222 / 1222 / 1222 अिछ।
एिहठाम हम ई माV भाव ओ कयसँ संचािलत गजलकारक कुतक;सँ बँचबा लेल देलहुँ अिछ। जखन दु´यंत कुमार सन ¡pितकारी गजलकार बहर ओ iयाकरणक मानै छिथ तखन नरेIKजी वा आन किथत ¡pितकारीक iयाकरणसँ कोन िद¹त छिन सेनै जािन।
भाव , कय , िवषय ओ भाषाक िहसाबसँ नरेIKजीक गजलक सीमा---
उप शीष;कमे "सीमा" एिह दुआरे िलखलहुँ जे भाव, कय ओ िवषय लेल कोनो रोक-टोक नै छै जे इएह िवषयपर िलखल जेबाक चाही वा ओिह िवषयपर नै िलखल जेबाक चाही। अइ ठाम देल गेल नरेIKजीक मैिथली-िहंदी गजलक भाव ओ भाषासँ gप¢ भेल हएत जे नरेIKजी चाहे मैिथलीमे िलखिथ वा िहंदीमे हुनकर िवषय मास;वादी िवचारधाराक आगू पाछू रहैत छिन। ओना ई खराप नै छै मुदा दुिनयc बहुत रास "भूख"सँ संचािलत छै चाहे ओ पेटक हो, जcघक हो िक धन, यश केर हो। जतबे सच पेटक भूख छै ततबे आन भूख सेहो। तँइ एकटा भूखक सािहQयक नीक मानल जाए आ दोसर भूखक खराप से उिचत नै। नरेIKजीक सेहो कोनो िवपरीत िलंगी आकिष;त केने हेथिन आ कोहबरमे हुनकर करेज सेहो धक-धक केने हेतिन। ओना िवचारधाराक महान बनेबा लेल ओ किह सकै छिथ जे ने हमरा कोनो िवपरीत िलंगी आकिष;त केलक आ ने कोबरमे करेज धक-धक केलक। ई हुनकर सीमा सेहो छिन हुनकर िवचारधाराक सेहो। अइ ठाम एकटा महQवपूण; R¾ राखए चाहब जे नरेIKजी वा हुनके सन ¡pितकारी गजलकार सभ iयाकरणक ई किह िवरोध करै छिथ जे iयाकरण क¿रताक Rतीक िथक मुदा आ³य; जे िवषय ओ भावक मािमलामे नरेIKजी वा हुनके सन गजलकार सभ क¿र छिथ। हमरा जतेक अनुभव अिछ तािह िहसाबसँ हम किह सकैत छी किथत पसँ छÀ मास;वादी सभ दोहरा बेबहार करै छिथ अपन जीवन ओ सािहQयमे। iयाकरणक क¿रताक िवरोध आ िवषय ओ भावक क¿रताक पालन इएह दोहरा चिरV िथक। एकै कयपर कोनो िवधाक रचना िलखलासँ ओिहमे दोहराव केर खतरा तँ होइते छै संगे संग पाठक इरीटेट सेहो भ' जाइत छै। कोनो रचना जखन
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पाठके लेल छै तखन पाठकक ·िचक अवमानना िकए? हँ एतेक सावधानी लेखकक जर रखबाक चाही जे पाठकक अवpिछत मcग जेना अ°लीलता, दंगा पसारए बला रचना नै लीखिथ। एक बेर फेर हम िहंदीक संदभ;मे कहए चाहब जे िहंदी गजलक कय बहुत िवgतृत छै। िहंदी गजलमे साaयवादी िवचारधारा बला गजलक अितिरत आनो िवषयपर गजल छै आ हमरा िहसाबo नरेIKजी िहंदी गजलमे नै बिढ़ सकला आ तािह लेल बहर ओ iयाकरण संग एकै कयपर िलखबाक िजद सेहो िजaमेदार छिन। एिहठाम देल नरेIKजीक मैिथलीक चािरम गजलमे "भेड़ सफर" मैिथलीमे अवpिछत Rयोग अिछ। नरेIKजीक भाषा Rयोग खतरनाक अिछ। हम जानै छी जे एना िलखलासँ लोक हमरा शु¸तावादी मानए लागत मुदा हम ई िचंता छोिड़ िलखब जे हरेक भाषामे आन भाषाक शदक Rयोग हेबाक चाही मुदा एकर मतलब नै जे सभ शदक Rयोग माIय भऽ जेतै। उदाहरण दैत कही जे मैिथलीमे "वफा" शद Rचिलत नै अिछ मुदा "वफादार" शद बहुRचिलत अिछ। एिहठाम R¾ उठैत अिछ जे जखन वफा शदक Rचलन नै तखन वफादार कोना Rचिलत भेल। ई बात शु¸ पसँ आम जनताक बात छै। आम जनताक जीह आ संदभ;मे "वफा" शद नै आिब सकलै जखन िक वफादार उ¥चारणक िहसाबसँ आ संदभ;क िहसाबसँ Rयोग होइत रहल अिछ।
िन´कष;--- नरेIKजी गजल बहर ओ कािफयाक िहसाबसँ दोषपूण; तँ अिछ मुदा मैिथलीक अपन समकालीन ओ परवतÁ गजलकार यथा सरसजी, रमेश, तारानंद िवयोगी, िवभूित आनंद, कलानंद भ¿, सुरेIKनाथ, धीरेIK Rेमिष;, राजेIK िवमल संगे एहने आन गजलकार सभसँ बेसी ठोस अिछ। िहनक िहंदी गजल सभ सेहो बहर ओ कािफयाक िहसाबसँ दोषपूण; अिछ आ ओिहठाम िहनकासँ पिहने बहुत रास iयाकरण ओ भाव बला गजलकार अपन मू¯याकंन लेल Rतीारत छिथ तँइ िहंदी गजलमे िहनकर िटकब बहुत मोि°कल छिन। िवrास नै हो तँ िहंदी गजलक गंभीर पाठक बिन देिख िलअ। जँ नरेIKजी iयाकरण पक सaहािर लेिथ आ आनो िवषयपर गजल कहिथ तँ िनि³त ई बहुत दूर आगू जेता। आ जेना िक उपरक िववेचनसँ gप¢ अिछ जे िहनका बेसी मेहनित नै करबाक छिन। िकछु अहम् ओ iयाकरणक हेय बुझबाक च¹रमे िहनक नीको गजल दूिर भेल अिछ। ओना हम उपरे आशंका बता देने छी जे आने किथत ¡pितकारी जकc ईहो iयाकरणक बेकार मानता।
नोट---- 1) एिह समीामे जतेक संदभ; लेल गेल अिछ से हमर पोथी "मैिथली गजलक iयाकरण ओ इितहास"सँ लेल गेल अिछ तँइ कोनो Rकारक संदभ; जेना पं गोिवIद झाजीक कोन पोथीक कोन पृपर चंKिबंदु युत gवर लघु होइत छै आिद जनबाक लेल ओिह पोथीक पढ़ू। 2) बहरक ततीमे जँ कोनो असावधानी भेल हो तँ पाठक सभ सूिचत करिथ। हम ओकरा सुधारब।
२. Rणव कुमार मैिथली कथामे gVी
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उपरोत िवषय पर चचW केनाय एेक ह¯लुक बात नै अिछ, तथािप हम जे िकछु लेखक केर रचना पढलहु◌ঁ अिछ ओय माÃक िकछ gVी पाV वा नाियका क भूिमका के िववेचना के RयÄ क रहल िछ।
सव;Rथम हम याVी बाबा के उपIयास ’पारो’ के नाियका पाव;ती उफ़; पारो केर चचW कय रहल छी। पारो के पिहल पिरचय पा◌ঁच छ: विष;य, °याम विण;य बुिचया के प मे कैल गेल अिछ, आ कथा के मािम;क अIत १७-१८ वष;क पारो के अकाल म◌ृQयु क घटना के संदभ; स ◌ঁ होय अिछ। मैिथली कथा मे gVी पाV सब मे पारो के चिरV एकटा एहन चिरV अिछ जे पाठक के हृ्दय gथली मo भावना के तीवÇ Rवाह त लैए आबै अिछ संगिह िमिथला ेV मo ७०-८०-९०के दशक मo(आ संभवत: िकछु एखनो) gVी जीवन के दशा के कैएक टा परत खोिल के रािख दैत अिछ। २-४ घंटा मo पारो सन नाियका के नेIपन केर खेलौर स ◌ঁ ल के िकशोरी पारो के चमQकृ्त क दै बला बुि¸, िववेक, मयWदा के िनभाब वाली िधया आ अंतत: समाजक दोष के कारणे अपिरपब अवgथा मo अकाल मृ्Qयु के वरण करैत पारो के झलक कोनो चलिचV जेका◌ঁ पाठक के आ ◌ঁिख के आगा एक के बाद एक क के िनकिल जाय अिछ। पारो नेनपने स चंचल छलीह आ िकशोरावgथा मo पहु◌ঁचैत पहु◌ঁचैत लोक iयवहार आ ¤यान मे पारंगत भ गेिल। कथावाचक कहै छैथ जे ओ पारो से १-२ वष;क जेठ छलाह मुदा तैयो लोक iयवहार के जे बात हुनका इंटर मo गेला पर बुझ एलैन से पारो ओिह बयस मo बुझै छलीह जखन कथावाचक आठमी मo छलाह। ऐ Rकारे याVीजी ई बात के इंिगत करै छैथ जे िमिथला के नारी मo मानिसक पिरपवता बहुत ज¯दी आिब जाय अिछ। पारो पÉबा िलखबा, कथा-किवता मo सेहो बेस तेज छलीह, gवाईत िहनकर िपताजी िहनका खूब पढैबा के इ¥छा रखै छलाह, मुदा से िहनकर माय के पिसµ नै छल। ई मैिथल समाज के एकटा आर चिरV िचVण अिछ जेकरा याVीजी ऐ कथा मo खोिल क देखेलिथIह अिछ। ई चिरV कमोबेस आजुक मैिथल समाज मo सेहो iयाÊत अिछ, gवाइत िमिथला ेV मo gVी सारता दर कदािचत सगर देश मo सभस ◌ঁ िनË gतर पर अिछ। औपचािरक िशा नैहो भoटला पर पारो रामायण, गीता, अमरकोष, िहतोपदेश आिद ²ंथ के घोिष लैत छिथन। Rेम िववाह आ िववाह स ◌ঁ पूव; अपन िजवनसंगी के िनक से जािन लै के इ¥छा आ ऐ से जुडल िदवाgवÌ सेहो पारो के मोन मे उचरै छैIह आ एकरा ओ कथावाचक के जािहर सेहो कर छिथन जे “िबरजू भैया, भाइये-बिहन मo ज ◌ঁिबआह दान होयतैक त कतेक िदव होयतै। कत’ कहा◌ঁदन अनिठया के जे लोक उठा ल अबै अिछ से कोन बुिधयारी!” िकशोरी पारो के मोन मे पु·ष जाित के Rित जे आशंका छल से ओकर िलखल किवता के ऐ लाइन मo सेहो iयत होय अिछ: सखी हम करमहीन कोन िविध खेपब िदन कोन िविध खेपब राित
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िनÎुर पुख क जाित कोन िविध काटभ काल हैत हमर की हाल। पिरिgथित के मारल पारो के िववाह िकशोरावसथे मo अपना सं दुना उिमर के दुि वर स ◌ঁ भ जाय अिछ। कथा के अंत होय अिछ शािरिरक प स ◌ঁ अपिरपव पारो के Rसव के कारण भेल अकाल मृQयु स ◌ঁ। इ भाग पढैत काल पाठक के कॲरह फ़ािट जाय से gवभािवक अिछ। ऐ Rकारे देखल जाय त पारो एकटा तेजिgविन िमिथलानी छिथ जे मैिथल समाज मo iयाÊत दोष के कारण िजबैत अपन अिभलाषा के समेट क रखै छिथन आ अंतत: अकाल मृ्Qयु के RाÊत हौय छिथन। आब अबै छी Rो० हिरमोहन झा के रचना पर। ओना त िहनकर कथा-उपIयास सब मo नाना Rकार के gVी पाV सब भरल परल अिछ, मुदा हम एतय िहनकर उपIयास कIयादान आ िÏरागमन के पाV बु¥ची दाई आ िमस िबजली बोस के चचW क रहल िछ। बु¥ची दाई के चिरV जत अपन समय के मैिथल समाजक gVी क वाgतिवकता अिछ त िमस िबजली कदािचत ओ चिरV अिछ जेहन लेखक मैिथल gVी के भिव´य देखय चाहै छलाह। बु¥ची दाई एकटा एहन अबोध बािलका के चिरV अिछ िजनका मानिसक आ शािरिरक पिरपवता से पिहनेहे िबआह क देल जाय छैIह आ तािह कारणे ऐ संबंध के बुझ आ िनभाब मे ओ अम छलीह। मुदा प आ गुण स ◌ঁ पूण; बुिचया समय िबतला पर आ िसखौला पढौला पर आधुिनकता के िलबास ओिढ लै अिछ। िमस िबजली बोस काशी िवrिवDालय मo पढै वाली ओ कIया छलीह जे कुशा² बुि¸ के संगे ठा◌ঁय पर ठा◌ঁय बाजय के कौशल सेहो राखै छलीह आ एिह कौशल के बले सीसी िमf के दप; चुड-चुड करै छिथन आ हुनका हुनकर गलित के एहसाह िदयाबै छिथन।
दू टा पुष लेखक के बाद दू टा gVी लेखक के रचना मo gVी पाVक चचW करै चाहै छी। सव;Rथम िलली रे के कथा उपसंहार के नाियका ’अपणW’ के चचW क रहल छी। िलली रे अपन िविभµ रचना मo gVी पाV के माफ़;त ऐ बात के उ¯लेख कएने छिथ जे मैिथल समाज gVी के िववाह, Rेम-संबंध आिद के ल क अनुदार रहल अिछ आ औखन तक अनुदार अिछ। जे मिहला वग; िपतृ्साQमक समाज मे युग युग स◌ঁ सीिदत आ Rतािड.त होइत रहल छिथ, सेहो वग; अपन समाजक दोसर सदgय के Rित अनुदार बनल रहलीह, सहानुभुित के अभाव रहलिन। िशित आ आधुिनक मानल जाय बला समाजक पुष वग;क मानिसकता मo पिरवत;न नै आयल। ’अपणW’ के चिरV एिह अIतरिवरोधक मम;gपशÁ उÐाटन अिछ। अपणW के Rित हुनक बिहनोइ िवनयक आचरण भावनाQमक निह, शोषणाQमक छैन। ओ डाटरी के Rवेश परीाक माग;दश;नक नाaपर अपणWके अपन मोह जाल मo फ़ा◌ঁिस लैत छिथ। अपणW के बिहन वसुधा के आचरण इ´यWभाव स ◌ঁ भरल अिछ ओ अपन पित के लंपटता के दोष नै दैत अिछ, अपणW के दोषी मानैत अिछ। ओ अपणW के तेज से जरैत अिछ। िपि लग िशकायत क अपन छोट बिहन के Rित घरक सदgय मo घृणा
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घिनभूत क दैत अिछ। घौल भेल िपता अपणW के दंिडत करबाक हेतु कठोरतम िनण;य करैत हुनकर पढाई छोरा एकटा मजदूर संगे सािह दैत छिथन। अपणW डाटर नै बिन सकिल मुदा अपन पिरfम आ िवDा के बल पर सासुर के खूब सुखी-सaपµ बना दैत छिथन। मुदा िवडंबना अिछ जे अपण;िहक पिरfम स◌ঁ िगरथाइिन बनिल ननिद सब सब सेहो हुनकर कुचे¢ा करै अिछ। अपणW Qयागमिय छिथ, सेवाभािव छिथ, सहानुभूितशील छिथ, अपन मोनक iयथा कौखन Rकट नै होमय दै छिथन। सबस ◌ঁ बिढ के धैय; आ gवािभमान छैक। इ gवािभमान पितक देहावसानक िज¤यासा मे आएल िपता के◌ঁ कहल वचन मo (’एिहठाम हमरा सब मानैत अिछ। अहा◌ঁस बहुत बेसी!’) सेहो gप¢ अिछ। अंितम gVी चिरV जेकर हम चचW एखन क रहल िछ ओ अिछ डा० शेफ़ािलका वमW के कथा ’मुित’ के नाियका ’मेहा’। मेहा कोमल सदृ्°य भाव वाली तेजिgवनी कIया छिथन िजनका समाजक देखावटी उQथान आ इिळटनेश नै पिसµ छैIह। ओ अपन मा◌ঁ के मिहला-मुित आंदोलन आ ओय स ◌ঁ जुड.ल सदgया सब के आलोचक छिथन जे मिहला-मुित के नाम पर बड.का बड.का जुलूस त िनकालै छिथन मुदा ई बात के अIतबÒध नै छैन जे मिहला के मुित चािह किथ स ◌ঁ। ओ अब अपनिह जानैत या अIजान मे नारी के Rतारणा के बढावा दै बला काज करै छिथन। एिह ¡म मे मेहा के िववाह एकटा Rोफ़ेसर साहब से होय बला रहै छैन जे वाgतव मे पकरौआ िववाह छल आ तेकर बदला लै लेल Rोफ़ेसर साहब मेहा संग हुनक पpच टा सिख के िसनुरदान क दैत छिथन। मुदा तेजिgविन मेहा ऐ िवकट पिरिgथित के अपन कुशा²ता आ तेज से gaहािर लैत छिथन, ओ ऐ िववाह के अमाIय सािबत क दैत छिथन आ Rोफ़ेसर साहब के मुत करैत बजै छिथन जे “हम एिह िववाह के नै मानैत छी आ नै हमर संगी मानत। हम सब एेक गेल-गुजरल नै छी । नारी के िनयित माV िववाह छैक मुदा हम एकरा नै मानैत छी। िववाह gVी पुषक समप;ण िथक। जे बलजोरी देल जाय आ जे ए¹िह संगे पा◌ঁच गोटे के देल जाय ओ िसIदूर धम;क दृ्ि¢ए मान भ जाए मुदा हम किहयो नै मनब। Rोफ़ेसर साहब मेहा के ऐ तक;-िवतक; से अवाक भ गेल। ओ एकटा अ¤यात सaमोहन स ◌ঁ आिव¢ भ मेहा से अपन अपराध लेल मा मpगैत छिथन आ हुनका अपन जीवन संिगिन बनाब के वचन दैथ छिथन। एिह Rकारे हम देखैत िछ जे जत पुष लेखक सब gVी पाV के Ïारा समाज मे gVी के अवgथा आ हुनका Rित iयाÊत कुRथा पर चोट करै छिथन ओतय मिहला लेिखका gVी समाजुक िgथित के सु£म िववेचना करैत छिथन।
एकटा जIमेजय कथा (iयं¤य )
ओना त महाभारतsक सबटा कथा सब युग के लेल Rासंिगक रहल अिछ, एिह ¡म मo राजा जIमेजयक एकटा कथा सेहो आजुक
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समय के िहसाब सं खूब Rासंिगक अिछ.राजा जIमेजय अजु;न के पोता आ राजा परीित के बेटा आ उरािधकारी छलाह. एक बेर राजा परीित कलयुगक Rभाव सं ²gत भs मरल सpप केर माला बनाय ऋिष शमीक के गर मo धs क हुनकर अपमान कदेलिखन. ऐ अपमान सं ऋिष के बेटा fृंगी
िपिया गेलाह. ओ िपे आिमल िपने छलाह आ अपन बाबू के अपमानक बदला लेबय के ठािन नेने छलाह. एिह के लेल ओ नागराज तक के बजाय, राजा परीित केिठकाना लगाबय के सुपारी द देलिखन. बस तखन की अजु;न सं परािजत आ अपमािनत तक एहने मौक़ा के बाट जोहैत छलाह, gवाइत ओ ऐ सुपारी उठब मo को नो कौताही नै रखलाह आ सही मौक़ा पािब ओपरीित के 'मड;र' क देलाह. परीित केर मड;र के बाद हुनकर बेटा जIमेजय गÔी पर बैसलाह. बापक ÃQया के सभटा िपहानी जानलाक बाद िहनका मो न मo बदलाक भावना RÕÕविलत भ गेलैन आ ओ तकसिहत सभटा नाग के समूल न¢ करै के ठािन लेलैथ आ ऐ के लेल सप; य Ö करेलैथ मुदा ऐ 'मड;र' के माgटरमाइंड यानी ऋिष fृंगी के छोिड़ देलिखन.
"आब एकटा 'बाबा' से के पंगा लै! बदले लै के छैक त तके सं ल लैत छी आ ओकर समूल नाश क दैत छी." (भ सकै अिछ एहने िकछु िवचार हुनका मोन मo आयल हेतैन, यDिप ऐ तरहक बात महाभारत मoआिधकािरक प सं कतौ ने
देखलहुँ पढ़लहुँ अिछ).हं त भेल एना की सप; यÖ मo एक एक क के सभटा िनदÒष सpप सब खिस खिस क भgम होमय लागल. ओकरा सब के पतो नै छल जे ओकर सब के दोष की छैक जेकर सजा ओकरा सब के भoट रहल छल. खैर.हजारोलाख सp प के मुइला के बाद जखन तक केर पािर एलै तखन पता नै ओ कुन देवता िपर से सेिटंग क के आिgतक नामक एकटा ×ाaहण के भेज के सप; यÖ ·कवा देलक आ तक केर जान बिच गेल.कहल जाय छैक जे एकर बाद जIमेजय आ तक दुनू बषÒ- बरख िजबैत रहलाह आ अपन-अपन राज पाट के भोग केलाह. कहcदैन कहल जायिछ जे तक केर बाद मo इIKक
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दरबार मo सेहो बØड िनक पैठ बिन गेलछल. आ ऐ तरहे देखल जाय त माgटरमाइंड ऋिष fृंगी, एसीयूटर तक आ बद ला लै पर उता जIमेजय के त िकछु नै भेल मुदा ऐ सब Rि¡या मo मारल गेल बेचारा हजारोलाख िनदÒष सpप सभ जेकर एकमाVअप राध जे ओ तक के समुदाय से छलाह. उपसंहार : आजुक समय मo एिह कथा के Rासंिगता िचिIहयौ आ िवचार किरयौ, अहc बुि¸जीवी छी
ऐ रचनापर अपन मंतiय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। दुगWनIद मXडल लघुकथा सीख नािIहयेटा मे बुधुआ बुिढ़या दादीक एक िदन तंग-तबाह केने छल। “दाय यइ दाय एकटा िखgसा किहयौ। नीमन िखgसा किहयौ। झब-दे किहयौ, निह तँ ठÚठ दािब कऽ मािर देब।” “रउ सरधुआ, छोड़ ने रौ। गरदैन छोड़ ने, निह तँ मिर जाएब।” दाय जोरसँ िचिचआ-िचिचआ ई कहैए। “अरौ बाप रौ बाप। ई छौड़ा हमरा मािर देलक!” बुधुआ दाइक गरदैन छोिड़ देलक आ जा कऽ दाइक कोरामे बैस जाइए, िखgसा सुनैले। दाय िखgसा शु केलैन। एक नगरमे एकटा राजा छेलइ। ओकरा फूलक एकटा बड़का फुलबाड़ी छेलइ। जइमे सभ तरहक फुल रोपल छेलै आ बहुत रास फूल फुलाएलो छेलइ। जइमे एकटा बड़ सुIदर फूल िखलल छल। नमहर आ सुIदर सेहो छेलइ। सभ फूल ओकरा राजा-गुलाब कहै छेलइ। रसे-रसे राजा गुलाब आन-आन फूल सभसँ अपन Rसµता पािब अंहकारी भेल जे छल। ओ एतेक अहंकारी भऽ गेल जे आब ओ आन-आन फूलसँ बातो ने करए चाहै छल। मुदा आन-आन सभ फूल राजा गुलाबक ऐ बेवहारक ओकर नादानी बुिझ ओकरा सaमान दइते रहल। ओइ राजा गुलाबक जिड़मे एकटा बेश नमहर किरया पाथर गाड़ल छेलइ। अकसरहॉं ओइ किरया पाथरक ओ राजा गुलाब डॉंटैत रहै छेलइ। जे तोरा कारण हमर प आ सौIदय; खराप भऽ रहल अिछ। तॲ केतौ िकए ने चिल जाइ छ।
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ओ पाथर कएक बेर राजा गुलाबक समझौलक। जे एतेक घमXड नीक नइ होइ छइ। मुदा राजा गुलाब अहंकारमे मातल अकैड़ कहलक- “अरेकाला पाथर, हमरा आगॉं तोहर कोन तुलना। तूँ तँ हमरा शरणमे पड़ल छ।” समय बीतैत गेल। िकछु िदनक पछाइत एक बेकती ओइ फुलबाड़ीमे आएल। घुमैत-घुमैत ओकर नजैर ओइ पाथरपर पड़लै। ओ ओकरा उखािड़ अपना संग नेने चिल गेल। राजा गुलाबक खुशीक कोनो ठेकान निह रहलै। ओ सोचए जे नीक भेल ई पाथर ऐठामसँ हिट गेल। अनेरे ई हमर सुIदरताक खराप करै छल। समय बीतैत गेल। थोड़बे िदनक पछाइत ओही फुलबाड़ीमे एक आदमी ओइ फुलबाड़ीमे आएल। ओकरा ओ राजा गुलाब फूल खूब नीक लगलै। ओ ओकरा तोिड़ एकटा मिIदरमे जा भगवानक मूित;क चरणमे समिप;त कऽ देलक। राजा गुलाबक ओतए एकदम नीक नै लगै छेलइ। ओकरा अपन पैछला िदन-राित मोन पड़ए लगलै। ओकरा फुलबाड़ीमे भेटए-बला सaमान सेहो मोन पड़ए लगलै। ताबत ओकरा केतौसँ हँसी सुनाइ पड़लै। ओ गुलाब एमहर-ओमहर चाकात तकलक मुदा केकरो ने देलक। ताबत ओकरा एकबेर िदiय आवाज सुिन पड़लै- “राजा गुलाब, तूँ एमहर-ओमहर की देखै छ। हमरा देख। हम वएह पाथरक मूित; छी, जेकरा तूँ ओइ फुलबाड़ीमे तु¥छ बुिझ सिदखन कटैत रहै छेल। आइ देख जे तूँ हमरा शरणमे पड़ल छ।” राजा गुलाब तँ आ³य;चिकत छल। बाजल- “भाय पाथर, तूँ एतए एल केना?” ओ मूित; पी पाथर बाजल- “सून राजा गुलाब, जे बेकती हमरा एतए अनलक ओ एकटा मूित;कार छल। ओ हमरा छेनी-हथौरीसँ तोिड़-तािड़ पाथरसँ भगवान बना ऐ मिIदरमे gथािपत कऽ देलक। आ तूँ..?” राजा गुलाबआQम ¤लािनसँ भरल ओइ मूित; पी पाथरक सामने िसर झूका मा याचना करैत बाजल- “भाय, अहंकारीक िसर सिदखन िन¥चॉं होइते छइ। अत: मानवक अपन अहंकारक Qयाग कऽ देबाक चाही। तािक ओकरा अपन हgतीक पता रहइ।” से सुन बौआ रौ बुधुबा, एतए बदमाशी नइ कर। सुन कहबी छै- मेटा िदअ अपन हgती यिद मितवा चाही िक दाना, मािटमे िमल कऽ गुले-गुलजार होइए। सीख- कखनो फूलक समान नै जीबू, जइ िदन जर िखलब आ तोडल जाएब। जीनाइ यिद छह तँ पाथर बिन जीबह, जइ िदन तराशल जेएब, भगवान बिन जाएब। बुधुबा तँ तात दाइक कोरमे अिलसा गेल छल। q
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१.१.जगदीश Rसाद मXडल- लघुकथा- संकट १.२. जगदीश Rसाद मXडल- पंगु - उपIयासक आरaभ (आगc) १ १.१. जगदीश Rसाद मXडल लघुक था संकट चािलस बख;क पछाइत राधाकाIतक कृ´णकाIतसँ भट भेलैन। भटो ओिहना नइ भेलैन, कृ´णकाIतसँ राधाकाIत िनयािर कऽ भट करए आएल छला। Rणाम-पाती भेला पछाइत कृ´णकाIत पुछलिखन- “भाय, की हाल-चाल?” ‘की हाल-चाल’किहकृ´णकाIतअिथित संगीक gवागत-बात करैमे लिग गेला। कुरसीपर बैइसैत राधाकाIत बजला- “भाय, की हाल-चाल रहत! संकटमे िजनगी पिड़ गेल अिछ..!” राधाकाIतक बात सुिन कृ´णकाIत अपन िवचारक रोिक आँगन जा पÄीक कहलैन- “पुरान िमV एला अिछ, तँए आदर-सQकारमे कमी नइ होइन।” िदनक एगारह बजेक समय, अगहन मास। ओना, गाम िक इलाकेमे जखन राधाकाIत Rवेश केला आ खेती-पथारी, उपजा-बाड़ीपर जे नजैर पड़लैन तखनेसँ मने-मन िवचारए लगला जे अपन इलाका की छल आ अखन की बिन गेल अिछ! ओना एक पिरवार रिहतो, जँ पिरवारमे अितिथ-अयागत अबै छैथ तँ एकरंग आदर-सQकार निहय होइत अिछ। तेकर कारण अिछ जे अयागतो-अयागतमे अIतर होइते अिछ। आ ओ होइए मनुख प देख निह, बनाबटी सaबIध देख। पाहुन एने जे gवागत-बात पिरवारमे होइए ओइसँ अलग सासुरक पाहुन एने होइए। तहूसँ अलग दोस-महीम आ िहत-अपेित एने सेहो होइते अिछ। खाएर जे होइए, ओ तँ पिरवार- पिरवारक अपन-अपन बेवहारपर िनभ;र अिछ। ऐठाम कृ´णकाIत आ राधाकाIतक दोgतीक सaबIध अिछ। पितक िवचार सुिनते °यामाक मनमे एलैन जे पुरानो िमV तँ एक रंगक निहय होइ छैथ। ओहूमे अIतर अिछए। पिहल ओहन िमV भेला जे बालपनसँ वृ¸पन धिर एक-रसमे िनमाहैत आिब रहला अिछ। माने ई जे जिहयासँ िमVता भेलतिहयेसँ आबाजाही होइत रहने रंग-रंगक सaबIधमे बढ़ोरी भेल रहैए आ दोसर भेल शुमे–माने जखन िमVता भेल–तैबीच नीक जकc िमVता चलल, मुदा आबाजाही कम रहने सaबIध ओतबेपर अँटैक गेल। सएह राधाकाIत आ कृ´णकाIतक बीच भेलैन। जिहया सी.एम. कौलेजमे पढ़ैले Rवेश केलातिहयेसँ राधाकाIत आ कृ´णकाIतक बीच िमVता भेलैन। संजोग एहेन बनल जे कौलेजमे नाओं िलखबए जिहये राधाकाIत पहुँचला तिहये कृ´णकाIतो। दुनू गोरेक
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मैिÞकक परीाक िरज¯ट सेहो एके रंग छेलैन। सेकेXड िडवीजनसँ मैिÞक पास केने रहैथ। ऑिफसमे जाधैर दुनूक एडिमशन भेल ताबे तक अपन-अपन काजमे लागल छला। नाम िलखौला पछाइत जखन दुनू गोरे ऑिफससँ िनकलला तखन गप-सÊप भेलैन। ओना, गप-सÊपक दोसरो कारण भेल। दोसर कारण भेल दुनूक डेरा लेब सेहो छेलैन। कौलेजक गेट टिप दुनू चाहो पीबैले आ गपो-सÊप करैले दोकानपर पहुँचला। खाली टेबुल देख दुनू गोरे एके टेबुलक कुरसीपर बैसला। राधाकाIत कृ´णकाIतक पुछलैन- “अहcक घर केतए छी?” िजला-जबार पुछैक जरत दुनूमे सँ िकनको िकए रहतैन। आइ ने दरभंगा िजला बँिट कऽ तीन िजला बिन गेल अिछ मुदा ओइ समयमे िजला तीन सिडवीजनमे बँटल छल- दरभंगा-मधुबनी आ समgतीपुर। दरभंगा िजलो आ सिडवीजनो छल। तँए समिgतयोपुर आ मधुबिनयोक बासी किन¢ छलाहे। कृ´णकाIत बजला- “हमर घर हिरपुर अिछ आ अहcक?” राधाकाIत- “हमर सीतापुर।” जखन सबहक बाबा एके छी माने िजला एक छी, तखन िपी आ बड़-भाय–माने सिडवीजनक आ लौक–क मोजरे केते, तँए दुनूक बीच कोनो मन-मनाIतर िकए उिठतैन। ओहुना िवDालयमे गाम-समाजक िहसाबसँ जातीय बIधन थोड़ेक ढील अिछए। माने ई जे कथा-कुटुमैतीमे जइ िहसाबे जाितक जिड़ खुिन-खुिन जीऔल जाइ छै, तैठाम तँ ओ जगजगार हेबे करत िकने। से िवDालय, महािवDालयमे निह अिछ। ओइ िहसाबे बुझू मािटक तरमे झँपाइते जा रहल अिछ। ओना,दुनूक चेहरो-मुहरामे तरपट निहय छेलैन। दुनूक सामंजसक बाधाक बीच केतौ बाट खाली नइ छल। संजोग भेल, चाहे दोकानदार अपन बीस बख;क कमाइसँ िन¥चc ®टा जोिड़ ऊपर सीमटीक चदरासँ छािड़ हालेमे एकटा घर बनौलक जइमे दूटा कोठरी छइ। एकटामे अपन पिरवार छै आ दोसर भाड़ा लगौत। राधाकाIतो आ कृ´णकाIतो दरभंगा शहरक लेल अनाड़ी छलाहे। चाह हाथमे पकड़ैत राधाकाIत दोकानदारक पुछलैन- “िवDाथÁक रहैबला डेरा भॉंजपर केतौ अिछ? ओना, दुनू गोरेक गामेसँ भॉंज लिग चुकल छेलैन जे चौबे लॉज छै, जइमे दू-चािर कोठरी सिदकाल खालीए रहैए। चौबेजी अपनो भिर िदन एकटा चटसारपर बैस गॉंजे पीबैत रहै छैथ तँए कोनो िवDाथÁक डेरा नइ भेटैक R¾ मनमे उिठते ने अिछ।” बगलक खाली कुरसीपर बैस दोकानदार अपन अIतर-शित जगबैत बाजल- “दू गोरेक रहैबला एकटा कोठरी हमरो अिछ।” रहैक डेराक आशा सुिन दुनूक मन ितरपीत भेल। कृ´णकाIत दोकानदारक पुछलैन- “की भाड़ा लेबइ?”
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एक तँ जेहने अनाड़ी दोकानदार तेहने अनाड़ी राधाकाIतो-कृ´णकाIत। ओना, जेहेन डेरा तेहेन भाड़ाक दर छेलैहे। मुदा कोनो नव, भाड़ा दइबला वा लइबलाक संग तँ िवक¯प बनले अिछ जे जइ तरहक घर अिछ तइ तरहक भाड़ा भेल। जिहना चौबे लॉजक भाड़ा, दस पैआसँ बीस पैआक बीचक अिछ, तेहने घर ने दोकानदारोक छैन। तैबीच दोकानदारक मन नचैतिवDा-अययन केिनहारक प लग पहुँच गेल। एक ×ßचारीक प देख दोकानदार ठॉंिह-पठॉंिह बाजल- “बौआ, अहc सभ छोट भाइक पमे रहब, तैठाम हमर बाजब नीक हएत। अहc दुनू गोरे अपनामे िवचािर िलअ, जे भाड़ा कहब, हम कोठरी दऽ देब।” एक तँ दुनूक मनमे सी.एम.कौलेजमे Rवेशक खुशी, तैपर चाहक खुशी सेहो छेलैIहे। तँए माता-िपताक सोहे-बात मनमे िकए रिहतैन जे अपन ओकाइितक िहसाबसँ काज किरतैथ। ओना, दुनूक मनमे नव िवचार सेहो अँकुिरये गेल छेलैन। ओ अँकुरल छेलैन दोकानदारक िवचार देख, जखन बेचारे अपने सभपर फेक देलैन तखन बजारक जे िहसाब अिछतइ िहसाबसँ ने बाजब। पचीस पैआ भाड़ा तय-तसिफया करैत दोकानदार बाजल- “किनये दूरपर घर अिछ, चलू चिल कऽ देखाइये देब आ तालाक कुàी सेहो दऽ देब।” सोना-चानी दोकान-ले िभनसुरका चािर पcच बजेक समय जिहना कुसमय भेल तिहना चाहक दोकानले दुपहरक समय भऽ जाइते अिछ। माने gप¢ अिछए। एकर िवपरीत िदशा सेहो अिछए। चाहक दोकान-ले चािर-पcच बजे भोरक समय शुभ भेल आ सोना-चानीक दोकान-ले अशुभ, तिहना सोना-चानीक दोकान-ले दुपहरक समय शुभ भेल मुदा चाहक दोकानदार-ले अशुभ भेबे कएल। खाएर जे होइए हुअ िदयौ अपना ताले दुनू बेताल अिछ। समय शुभ-अशुभ होइते ने अिछ,काज आ gथान ओकरा शुभ-अशुभ बनबैत अिछ। कौलेजमे अखन पढ़ाइ शु होइमे आठ िदन बcकी छल। तँए आठम िदनक िदन ठेक राधाकIतो आ कृ´णकाIतो आ दोकानदार सेहो अपन-अपन काज िदस बढ़ला। संग हटला पछाइत जिहना एक िदस दोकानदारक मन अपन एक िजनगी चढ़ैत देखलक। माने ई जे दरभंगा सन बजारमे अपन दस धुर घराड़ी बनौलक तेकर खुशी, तैपर दोकानक आमदनीक संग घरक भाड़ा सेहो देखलक। मने मन दोकानदार अपन RÕविलत होइत भिवस देखए लगल तिहना दोसर िदस राधाकाIतो आ कृ´णकाIतो अपना बले अपन काज सaहािर कऽ ने घरमुहc भेला, तँए मनमे मgती उठब सोभािवके अिछ। दुनू मgतीसँ आगू बढ़ैत ओइ मोड़पर आिब अँटैक कऽ ठाढ़ भेला जैठामसँ दुनू बेकतीक अपन-अपन गाम िदसक रgता फुटैत अिछ। माV दू घIटाक बीचक दुनू सaबIध जेना बहैत िजनगीक धारक एकठाम जोिड़ देलक। एक धारमे जुटला पछाइत धारसँ पुन: अलग दोसर धार बनाएब जिहना असान अिछ तिहना भािरयो तँ अिछए। ओना, होइत दुनू अिछ। एक पु·ष आ एक नारीक बीच सaबIध भेने सृि¢क शित जखन आिब जाइए तखन जँ दू पु·खक बीच सaबIध बनत तँ ओ भल सृि¢कतW निह बनए मुदा िसरजन कतW नइ बिन सकैए सेहो तँ निहय कहल जा सकैत अिछ। ओना, तैबीच दुनूक अपन-अपन पिरवारो आ िवDालयक िवDाययनक िवचार सेहो भइये गेल छेलैन जइसँ आमक कलमक गाछ जकc नमगर-चौड़गर देह-दैिहक िमलान सेहो भइये गेल छेलैन। एक तँ पैछला कथाक सaबIध, तैपर दू घIटाक टटका सaबIध सेहो तहदर-तड़गर बिनय रहल छेलैन। अिIतम िवदाइक नव आवरण दैत कृ´णकाIत बजला-
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५२ म अंक १५ जून २०१८ (वषᭅ ११ मास १२६ अंक २५२ ) मानुषीिमह सं᭭कृताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 24
“भाय, अखन तक हेराएल भैयारी छेलॱ, मुदा आब तँ भेटल संगी भेलॱ, संग िमिल चलबो अिछ आ चलैत रहबो अिछए। तँए एकटा िनसिचत समय बना िलअ जे केते बजे दरभंगा पहुँच जाएब।” राधाकाIत बजला- “भाय, अहc इलाकामे जे होइत हुअए मुदा हमरा इलाकामे बेटा होइ िक बेटी, माता-िपता घरसँ िबनु खेने नइ िनकलए दइ छैथ, तहूमे बुिझते िछऐ जे िवदाइयक भोजन केहेन होइ छइ। तँएबारह बजेक बादे घरसँ िनकैल हएत, तइ िहसाबे पहुँचब।” राधाकाIतक बात जेना कृ´णकाIतक छुिब देने होिन तिहना मन छुबाइन भऽ गेलैन। अपन इलाकाक ऊपर लागल कलंकक साफ करैत कृ´णकाIत बजला- “भाय, एना जे हमरा इलाका आ अपना इलाकाक बेवहारक बात केलॱ से की हमर घर िमिथलासँ बाहर अिछ?” सामंजस करैत राधाकाIत बजला- “भाय, हमर-अहcक एक बेवहार-िवचार रिहतो Rकृित अवघात किरते अिछ। की अपने ऐठाम एहनो इलाका नइ अिछ जे धार-धुरमे किट-छँिट कऽ तेनान¢ भऽ गेल जैठाम बेटा-बेटीक माता-िपता भूखले घरसँ िवदा नइ करै छैथ।की एकरा नकारल जा सकैए?” राधाकाIतक बातपर कृ´णकाIत अपन मुड़ी डोलबैत चुÊपे रहला। एक-दोसरक नजैर-मे-नजैर िमलबैत दुनू गोरे अपन-अपन गामक रgता पकैड़ िवदा भेला। एक डेरा आ एक कौलेजमे तीन साल समय बीतल। दुनू गोरे, राधाकाIतो आ कृ´णकाIतो एक संग एक घरमे चौबीसो घIटाक िकिरया-कम; करैत बी.ए. ऑनस;क िकलासमे पहुँच चुकल छला। अथ; शाgVक िवDाथÁ रहने दुनूक अथ;-चिरVक आQम-Öान मनमे जािग ई gप¢ कऽदेने छेलैन जे अपन जे पैतृक सaपैत अिछ ओ जीवनक लेल पिरयाÊत अिछ। तँए, नोकरीक मनसँ हटा दुनू गोरे अययन िदस अपनाक लगौने रहला। दुनू गोरे अथ;शाgV-Rिताक िड²ी पािब अपन पुgतैनी िकसानी िजनगी शु केलाह। पितक िवचार–माने पुरान िमV एला अिछ–सुिन °यामा अगिदगमे पिड़ गेली। अगिदग ई जे अयागतक माने तँ दोस-महीमसँ लऽ कऽ सर-सaबIधी होइत अनिठयोक संग अिछये, मुदा पिहने जे gवागतक ढंग छल ओइमे थोड़ेक तोड़-जोड़ सेहो भेबे कएल अिछ। पिहने एक लोटा जल अयागतक पएर धोइले देल जाइ छल मुदा आजुक पिरवेशमे ओ गौण भऽ गेल। तेकर अनेको कारण अिछ...। मुदा लगले °यामा अपन पितक नाड़ पकैड़ िमVक नाड़ी पकैड़ लेली। लोटामे जल आ िगलास नेने °यामा दरबÕजापर पहुँचली। ओना, °यामा सहैम-सरमा कऽ एकाएक धकचुका गेली। धकचुकाइक कारण भेलैन जे झुड़Áक आगमन भेने राधाकाIतक चेहरा झुिड़या गेल छेलैन जइसँ वयसगर रंग-प पकैड़ नेने छेलैन। मुदा अपन घर अपन होइए िकने। जेकर मान-सaमानक भार घरवारीक ऊपरमे अिछए। पÄीक धकचुकीक मिठयबैत कृ´णकाIत बजला- “एना धक-चुकाइ िकए छी।िमVतामे छोट-पैघ नइ होइ छइ। सबहक सaबIध िमVवत होइ छै, माने बराबरीक सaबIध। जिहना अहc िमVणी-मैVेयी भेिलऐन तिहना ओहो ने िमVणा भेला।”
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५२ म अंक १५ जून २०१८ (वषᭅ ११ मास १२६ अंक २५२ ) मानुषीिमह सं᭭कृताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 25
ओना, िकसान पिरवारसँ जुड़ल °यामा, मुदा अपनाक पितक आगूमे पितक पूरक पमे बुझै छेली, तँए मुँह दािब बाजबसोभािवके छल। लोटाक जल आ िगलास रिख °यामा चाह आनए आँगन गेली। पुतोहु चाह बना नेने छेलैन। िपयासक तृ´णा सेहो कनी-मनी राधाकIतक जिगये चुकल छेलैन। पािन पीिबते रहैथ िक °यामा चाह नेने पहुँच गेली। यएह ने भेल अितिथ-सQकार जे खान-पानक संग गप-सÊपमे मन बहलबैत बहेिलया बनल रही। टेबुलपर चाहक कप रिख °यामा आँगन िदस िवदा हुअ लगली।मुदा कृ´णकाIत रोकैत बजला- “िमV की कोनो हमरेटा िछआ जे अहc छोिड़ कऽ आँगन जाइ छी। जिहना ओ अहcक िमVणा छैथ तिहना अहूँ ने िमVणी िछऐन!” खग जानए खगक बोल, पितक िवचार सुिन मुgकुराइत °यामा आगूमे बैसली। टेबुलक एक भागमे राधाकाIत दोसर भाग कृ´णकाIत आ तेसर भाग °यामा छेली। जिहना दू पु·खक बीच एक नारीक रहने पु·ष परीा होइए, माने जिहना दुनू भॉंइक बीच सीताक रहने रामक परीा भेलैन तिहना ने ल£मणोक भेबे केलैन। से खाली पु·षेक परीाटा होइएएहेन बात निह अिछ, नािरयोक संग अिछए। ओ अिछ दू नारीक बीच एकटा पु·खक हएब। हँ! एकरा अहc सौतीनक डाह नइ बुझब। जेना थाकल-ठेिहयाएल राधाकाIत पािन पीलैन तेना चाह कXठसँ िन¥चc नइ ससैर रहल छेलैन। जइसँ िक-िक चाह पीबै छला। °यामा बीचमे ओिहना सकदम छेली जेना िकयो ओहन gथानपर पहुँचला पछाइत सभ िकछु हेराएल-हेराएल देख सकदम भेल रहैए।°यामाक मनमे उठैत रहैन जे पितक संग िमVक केहेन बेवहार रहल छैन। िबनु ओइ बेवहारक बुझने-जनने कोनो एहेन बेवहार ने भऽ जाए जे ओइसँ िवपरीत होइ वा हटल-हटल होइ। ओना, एहनो तँ मानले जाइए जे मूख;क उ¥चकोिटक Öानपन वएह भेल जे चुपचाप सुिन- सुिन मनमे घोड़ैत रहल। °यामा तँए चुप, मुदा राधाकाIतक सेहो चुपचाप सकदम देख कृ´णकाIत बजला- “िमV, चाहमे िकछु कमी अिछ जे पीबैमे बाधा उपिgथित होइए।” ब¥चासँ सीखल-जcचल राधाकाIत छलाहे, िमVक नस-नस ओिहना जिनते छला जिहना नक;क मंV घाट होइत अिछ। बजला- “िमV!िमVणीक चाहपिवV छैन मुदा अपने चाह अपिवV भऽ गेल अिछ।” राधाकाIतक बात सुिन °यामाक मन सेहो बजैले लुसफुसेलैन। लुसफुसाइक कारण भेलैन जे राधाकाIत िमVणीक चच; कऽ देने छेलिखन। ओना, °यामाक मनमे गाड़ी रोकैक ×ेक जकc आगू-पाछू सेहो दुनू ×ेक लागले छेलैन। मुदा ओ तँ सलाइ िरंच जकc बहुिपया अिछ, जइसँ ई िनधWिरत करब थोड़ेक किठनाह तँ अिछए जे कोन नट केतेपर िरंचसँ कसाएत। °यामाक मनमे ×ेक ई लगलैन जे पिरवारक मािलक तँ पु·ख भेला, घरक सभ छार-भार हुनका ऊपर भेलैन। हम तँ साधारण चाह अनिनहािर छेलॱ। पीिनहार सभ छी, बनौिनहार एक भेली माने पुतोहु बनौली, तैबीच िमVक एहेन बोल िकए भेलैन? एहनो तँ संभव अिछए जे जिहना दूधक फूलक जे सुगIध अिछ ओ ओकरे (माने दूधेक) लोिहयासँ सटल-जरल दूधक निहय अिछ। भले ओ दूधेक िकए ने होइ। ओ तँ जरल डारहीक जराइन महक िनकालबे करत। सएह तँ ने िमVोक भेल छैन।
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काग-भुशुXडी जकc रgता परहक बखWक पािनमे नहा पcिख फड़फड़ा कऽ झािड़ शाIत-िचसँ °यामा अपन मुँह बµ केने रहली। एमहर िमVक िवचार सुिन कृ´णकाIत gतध भऽ गेल छला। जे एहेन िवचार िमVक मुहसँ िकए िनकलल। ओना, मनमे ×ेक जकc ईहो लािग गेल रहैन जे िमVक मन जर बेथासँ बेिथत छैन। A Friend is a need friend in deed. केहेन बेथा? केना पुछबैन बेथाक बेहाल?मुदा िबनु बुझने िकयो केकरो बेहालक सुहालो तँ निहय बना सकैए। सभ समgयाक अपन-अपन सीमो छै आ fेिणयो छइहे। ओही सीमा- fेणीक बीच ने समाधानो अिछ। ई तँ निह ने, जेना कृ´ण-सुदामाक बीच भेलैन। दोिgतनीक जे िसनेही सनेस कृ´ण हँिस-हँिस खाए चाहै छला से सुदामा अढ़ दािब-दािबनुकबए चाहै छला। भल कृ´ण िचचोर छला बुिझ तँए गेला, मुदा सुदामाक अपन गरीबीक Rित ¤लािन नइ होइत रहैन सेहो केना निह कहल जाएत...। कृ´णकाIतक मन भीतरे-भीतर ितरिछयाइत ओतै पहुँच गेलैन जेतए िपयासलक पािनक तृ´णा तेज पमे जगैए।ओना, जिहना िपयासल गाए-मालक तीन प सामने अबैए। पिहल- जोर-जोरसँ िडिरयाएब, दोसर- हूकरब आ तेसर- अपन िपयासक आँिखसँ िनकािल मलकारक आँिख चिढ़-चिढ़ कण ¡Iदन करब। यएह िgथित कृ´णकाIतक बिन गेलैन। जे राधाकाIत बुिझ गेला। बुिझ ई गेला जे एक तँ हम सभ उमेरगर भेलॱ, अनेको रंगक दुख-दद; सहल देह अिछ, तैठाम अशुभ बात मुहसँ िनकालैमे कृ´णकाIतक असोकज; तँ भइये रहलैन अिछ। दुखाएल मने मुgकुराइत राधाकाIत बजला- “िमV, अहcक गाममे ल£मी साात् नािच रहली अिछ। मुदा हमर...।” बीच रgतामे राधाकाIतक िवचारक गाड़ीक िकते देख पाछूसँ ठेलैत कृ´णकाIत बजला- “से की?” राधाकाIत बजला- “कौलेज छोड़ला पछाइत अपन पैतृक सaपैितक काज- खेती-बाड़ीमे तेना बोिहया गेलॱ जे बीचक तीस साल केना बीत गेल से बुझबे ने केलॱ। जिहना वेरागी सभ राम-रमैया, कृ´ण-कIहैयाक सतसंगक पाछू बोिहया जाइ छैथ तिहना भेल। अहूँक िबसैर गेलॱ आ अहcक संग िमVिणयोक िबसैर गेिलऐन।मन अिछ िकने जे लोकिनया हमहॴ गेल रही। ओही गामक लोक ने हमरा ‘लोकना-लोकना’ कहए लगल।” राधाकाIतक िवचार सुिन °यामा अिखयास करए लगली। िहनकर बचपनाक देह केहेन लालबुIद छेलैन आ आइ झुड़Á पिड़ रहल छैन! जर केतौ-ने-केतौ िजनगीमे खॉंच-खरोच भेलैन अिछ। निह तँ एहनो होइ जे जे आम सुभर िनरोग छल ओ कोिलपदु भऽ जाएत! एकर माने ई नइ बुझबै जे जेतबो सत् बात छोट बेदरा बजैछल, तेतबो सत् बात आइ बाप-िपीक कोन बात जे बाबो निह बािज पबै छैथ। िकए ने बािज पबै छैथ से तँ अपनो मन किहते हेतैन...। बेर-बेर °यामा आँिख उठा-उठा राधाकाIतक शरीरपर नचबए लगली। ओना, कृ´णकाIतक मनमे ईहो उठए लगलैन जे खेला-पीला पछाइत िजनगीक नीक-बेजा एक बात करब नीक हएत। मुदा लगले मन ईहो कहए लगलैन जे दुखक जिड़ जेते ज¯दी मेट जाए ओते शुभ...। कृ´णकाIत बजला-
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“िमV, तीस साल पैछला िजनगी नीक रहलजे एक पीढ़ीक जीवन भेल, बिढ़यc बात। मुदा पछाितक दस बख;?” हारल िसपाही जकc निह, बाधासँ बािधत िसपाही जकc राधाकाIत बजला- “िमV दस बख;सँ जंगली गाइयक (नील गाए) उपKव गाममे तेते बिढ़ गेल अिछजे बाड़ी तकमे तीमन- तरकारीक उपज नइ भऽ पबैए। जिहना हाथ रहैत िनहQथा बिन गेल छी तिहना बुिध रहैत बुिधहीन सेहो बिन गेल छी। शुक तीन साल मनमे यएह होइत रहल जे जिहना बोन-झाड़ िदससँ नील गाए वौउरा कऽ गाम िदस आिब गेल अिछ तिहना चिलयो जाएत।” कृ´णकाIत बजला- “तइमे की बाधा भेल?” “की कहब!सबे नचाबे राम गोसcइ। एक िदस जिहना गंगा Rदूिषत धार दुिनयcमे घोिषत अिछ, तिहना दोसर िदस वैतरणी पार करैवाली पिवV धार िक नइ छैथ सेहो तँ वएह छैथ। जेते मनुखक लहास गंगा धारमे अिप;त-समिप;त होइए, तेते कोन धार पचा सकैए।गाइयक पमे जंगली जानवरक उपKव तेते बिढ गेल जे जीब किठन भऽ गेल अिछ।” कृ´णकाIत बजला- “पिहने नील गाएक सील-मोहर करए पड़त जे एकरा केहेन पशु मानल जाए।” अिIतम खुशी जािहर करैत राधाकाIत बजला- “िमV, आब िजनगीए केतेक शेष अिछ। एते िदन काजपर बैसल छेलॱ, काजमे समय नचैत छल, मुदाआब ओ सभ सभटा चिल गेलतँए आब थोड़ेक ी सेहो भइये गेलॱ, भट-घcट होइत रहत।” कृ´णकाIत- “िमV, पcच िदन रहू। अपन हाथक उपजौल एक-एक चीज-वौस खुआ देब। पcच िदनक पछाइत जाएब।” राधाकाIत बजला- “िमV, अपन िजनगी ओहने बना नेने छी जेहेन समय-साल बिन गेल अिछ। भनेचालीस बख;क बीचक भट-घcट जे गैप छल ओ समतल बिन जाएत। आइ भिर छी, कािâ भोरे चिल जाएब। q शद संãया : 2595, ितिथ : 4अRैल2018
१.२ जगदीश Rसाद मXडल पंगु
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उपIयासक आरaभ 2. 14 जनवरी 1934 इgवीक िदनक एक बजेमे जबरदस भुमकम भेल। अखुनका जकc भुमकमक नाप- जोख करैबला कोनो यंVक अिव´कार निहय भेल छल जइसँ लोक बुझैत जे केहेन भुमकम भेल, मुदा एते तँ भेबे कएल जे बड़का-बड़का गाछो सभ खसल, भीतघर सेहो खसल आ खेत-पथारमे दारािर फिट-फिट जमीनक भीतरसँ बाउल ऊपर आिब-आिब बाधक-बाध जमीनमे पसरबो कएल। पािनक मोकर सभ सेहो फुटल। गाम-गामक शकल बदैल गेल। घर खसने लोको मरल। आने गाम जकc ित सीतापुरमे सेहो भेल। ओना, सीतापुरमे एकोटा घर पजेबाक तँ निहय छलखालीपान-सात पिरवारक कँचका पजेबाक घर छेलै, ओहो सभ खसल। सीतापुरमे अिधकpश घर टटघर छल जे लकड़ी-बcसक खु¿ापर ठाढ़ छल, ओ िहल-डोिल जर गेल मुदा खसल निह। ओना, सीतापुरमे लोअर Rाइमरी gकूल सेहो छेलै मुदा सरकारी निह, एकटा िशक gकूल चलबै छला। बीस-प¥चीसटा िवDाथÁ छल। सभ िवDाथÁ शिनय-शिन हुनका सिनचराक पमे पाभैर चाउर आ एक-एकटा पाइ सभ दैत रहैन। एक गोरे ऐठाम िशक रहै छला जे खाइयो-पीबैले दइ छेलैन आ बदलामे पिरवारक ब¥चा सभक दरबÕजेपर पढ़बैत रहिथन।गॱऑंक सहयोगसँ पनरह हाथ नमती भीतघरक पमे gकूल छल। भुमकममे ओहो खिस पड़ल। gकूल खसला पछाइत बहरबैयाक [1] कचहरी[2]मे पढ़ाइ हुअ लगल। तीन-चािर सालक पछाइत gकूलक जगह बदैल, माने जैठाम gकूल छल ओइ जगहसँ हिट दोसरठाम एकटा परतीपर गॱएक सहयोगसँ पुन: भीतघर बनल। gकूलक जगह बदलैक कारण भेल जे ओइ जगहक लोक अशुभ मानलक। अंगरेजक िवरोधमे एहेन माहौल बिन गेल छल जे gकूलक जे िशक छला, ओहो चोरा-नुका कऽ लोक सभक देशक अजादीक िवषयमे बुझबै छला। गाम-गाममे अंगरेजी शासनक समथ;क सेहो छेलाहे। वएह सभ चुगली किर देलकैन जइसँ 1942 इgवीमे िशक पकड़ा गेला। gकूल बµ भऽ गेल। ओना, साल भिरक पछाइत जहलसँ िशक िनकललामुदा घुिर कऽ सीतापुर निह एला। gकूलक भीतघर ओिहना ठाढ़ भेल रहल। तीन सालक पछाइत दोसर िशक एला। हिरचरणक नाओं सेहो िपता[3] gकूलमे िलखा देलिखन। देश gवतंV भेल, मुदा अखन तक आमजन gवतंV शदक अथ; बुझबे ने करै छला। सीतापुर गाममे बेसी-बेसी जमीनबला सेहो छला मुदा मालगुजारी असुलिनहार जमीIदार मािलक नइ छला। जइसँ पाहीप¿ीक मािलक अपन पटवारी, गुमgता आ बरािहलक मायमसँ कचहिरयो चलबै छला आ मालगुजारी सेहो असुलै छला। कचहरी चलबैक माने भेल, गाममे जे झगड़ा होइ, तेकर पनचैती करब। ओना, तइ मानेमे जमीIदार कमजोर छला। तँए गामक मुँहगर सभक सेहो पनचैतीमे बजबै छला। कचहरीक कारोबारीक कमजोर होइक कारण छल जे दू पिरवार वा तीन पिरवारक बीच जे झगड़ा होइ छल ओइमे जे मािर-पीट होइ छल,ओ टटका रहै छलतँए किनयÚ अनुिचत भेने पाटÁ मानबे ने करैत रहए। माने पनचैती gवीकार नइ करैत छल। जइसँ कचहरीक आदेश टुिट जाइ छल। देश की gवतंV भेल की नइ भेल, से बुझिनहारक अभाव तँ रहबे करइ। मुदा रंग-रंगक भाषणो गाममे चिलते छल जइसँ िकछु हेराएल-भोिथयाएल मुÔा सभ सेहो जिगते छल। जमीIदारी टुिट गेल, जमीIदारक
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शासन सेहो टुिट गेल। आब मालगुजारी सरकार असुलत आ ओइ पाइक खच; समाजक काजमे लागत इQयािद...। अखन तक गाममे ने एकोटा नीक सड़क छल, ने एकोटा पुल, आ ने gकूल बनल। आम जनक नजैरमे सेहो नव-नव िवचार जगबे कएल। पुलक नाओंपर दसटा ईटा रgता परहक कोनो-कोनो खािधमे िबछा देल जाइत रहै, जैपर होइत लोक बरसातमे चलैत छल। आम-कटहरक खुदरा गाछो आ गाछीमे सेहो जमीIदारक ऐमला-फेमलाक संग लड़ाइ उठल। ओना, अखन धिरक [4] जे कचहरीक तबा छेलै ओ वौि¸क पमे कमल मुदा बेवहािरक पमे ओिहना छल माने पूव;ते। माने ई जे देश gवतंV भेला पछाितयो गािर पढ़ब, मारबइQयािद कचहरीक ऐमला-फेमलाक बेवहार रहबे कएल। आमक गाछीक लड़ाइ गाछक तड़ी-फड़ीक लेल भेल। तँए एकराआन गाममे जे कहल जाइत होइ मुदा सीतापुरमे ‘आमक गाछीक लड़ाइ’ कहल जाइत अिछ। से केबल आमक गाछीक लड़ाइये कहल जाइए से बात नइ अिछ। आमक गाछीक िबआहोक सभा-गाछी आ दोिgतयारीक धरम-गाछी सेहो कहले जाइए। आमक गाछीक लड़ाइ कचहरीक पटवारी-गुमgता-बरािहलक संग गुलाबचनक भेल। गुलाबचनक तीन भॉंइक भैयारी, तीनू भॉंइ काितक-सँ-फागुन धिर अपने गाछीमे अखड़ाहा खुिन कु°ती लड़ैत छल। गुलाबचनक िपता गोपीचनक अपन बुि¸-अिकल छेलैन तँए अपन सोच-िवचार सेहो छेलैIहे। तेकर एकटा कारण ईहो छल जे दस कÎा खेतक गोपीचन चा बापूत मीिल कोदारीए-सँ उनटा लइ छला, माने तािम लइ छला। तैसंग अपन चािरटा महॴस सेहो पोसने रहैथ, जेकर दूध-दही खाइते छला। तँए िजनगीमे ऐसँ बेसी आरो चाही की? कोनो िक गोपीचन शाgV-पुराण पढ़ने छला जे मनुखक देहपर हाथीक माथा आ िबनु घटकैितये राम- सीताक जोड़ी नगर बधू केना धनूष टुटैसँ पिहने लगा लेलैन, ऐ सभपर िवचार किरतैथ। ई तँ छी शाgV- पुरानक िवचार। अपन िवचार शाgV-पुरानमे रहअ। ऐसँ गोपीचन आ गोपीचनक तीनू बेटाक कोन मतलब? मतलब छै अपन मेहनतक संग बापक देल सaपैतक सुरित राखबसँ। पैछला साल गोपीचन मिर गेला। गोपीचन जा जीबै छला ता मािलकक अपन जमीनमे अपन रोपल आम-कटहरक फड़ अपना हाथे बcिट-बcिट दइ छेलिखन। बेटा सभ एतबे करै छेलैन जे गाछक आधा-िछधा आमो आ कटहरो तोिड़ आगूमे आिन रािख दइ छेलैन आ महॴस चरबए चिल जाइ छल। जइसँ मािलकक संग बँटबाराक मिहरम बुझबे ने केने छल। आम-कटहर तोड़बए कचहरीक बरािहल पहुँचल। गुलाबचनक एतबे अनुमान छेलै जे अपन गाछी-कलम छी। आन गामक लोक सभ कचहरीमे रहैए, ओकरो खेनाइ-पीनाइ तँ गॱए ने देत। तँए पcचटा दसटा आम हमहूँ देबइ। तीनू भॉंइ गुलाबचन मड़ुआ रोिप कऽ आएले छल। दुपहरक समय रहै, बरािहल आिब गुलाबचनक आम तोड़ए कहलिखन। तैपर गुलाबचन बाजल- “अखन मड़ुआ रोिप कऽ तीनू भॉंइ एबे केलॱ हेन, िनचेनसँ गाछीक आम तोड़ब। पछाइत पcचटा आम अहूँक कचहरीमे पहुँचा देब।” अखन धिर थाना-पुिलस जकc बरािहलो अपनाक बुिझते छल। पटवारीक नाओं कहैत बाजल-
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५२ म अंक १५ जून २०१८ (वषᭅ ११ मास १२६ अंक २५२ ) मानुषीिमह सं᭭कृताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 30
“सरकारक हुकुम छह, आम आइये तोड़बह।” तहीकाल गुलाबचनक मिझला भाए- बालचन पहुँचल। तीनू भcइमे बालचन सभसँ बूफगर। जेहने िछपगर जबान तेहने हाथो-पएर। बरािहलक मुँहक बात‘सरकारक हुकुम छह’ सुिनते बालचनक देहमे देशी सरकार बनैक िवचार जिग गेल। जगैक कारण ईहो रहै जे कािâये सcझमे सोराजीलालक मुहसँ सुनने छल जे देश- gवतंV भेल, सबहक देश भेल तँए केकरो िकयो मािलक निह रहल। सबहक देश भेल, सबहक शासन भेल। बरािहलक बालचन कहलक- “हम अपना चीजक अपने मािलक छीकी तोहर सरकार छह। जा, नइ देबह एकोटा आम।” बालचनक बात सुिन बरािहल ठमकल, मुदा जिहना शासनक कुसÁपर बैसल अफसर वा थानाक वदÁ पिहर एको लीबरक आदमीक ढोड़ सcपक फुफकार होइत अिछ तिहना बरािहलक सेहो भेल। तैबीच गुलाबचन अपन भाएक चुप करैत कहलक- “बालचन, दरबÕजापर आएल दु°मनोक लोक नीके बोल कहै छै, तूँ िकए अनेरे झगड़ा बेसाहै छँह।” ने गुलाबचने अपन िवचारक भावाथ; बुझलक आ ने बालचने बुझलक मुदा बरािहल बुिझ गेल। बुझबो केना ने करैत, िजनगी तँ बीतै छेलै शासकीय भाषा-शाgVीक बीच ने...। जँ गुलाबचनक एतबो होश रिहतै जे दरबÕजापर आिब बरािहल ऑंिख देखबैए आ हम ओकरा अयागत बुझै िछऐ! जँ से बुझैक शित रिहतै तखन जेठ भाइक भाषा नै बजैत। ओना, बरािहल बालचनक धुआ-काया देख सहैम गेल छल, मुदा जमीIदारीक मंV जे मनक पकैड़ नेने छेलै, तइसँ फुफकार रहबे करइ। गुलाबचनक दरबÕजापर सँ बरािहल कचहरी िदस िवदा होइत बाजल- “आइ तोरा सभ भॉंइक देखा दइ िछयौ।तीनू भॉंइक हथकड़ी लगा जेल जखन पठेबौ तखन अपने बुिझ जेबही!” बरािहल चिल गेल। गुलाबचन सेहो नहाइ-खाइ िदस बढ़ल। कचहरी पहुँच बरािहल पटवारीक सभ बात सुना देलकैन। ढहैत सामंती सोच आ उठैत जनवादी िवचारक बीच पटवारीक मनमे ÏIÏ पसैर गेल। मुदा समािजको सा तँ सा छीहे, ओहूमे केतेको भा अिछए। समाजोमे तँ एहेन लोकक िवचारक सा रहले अिछ जे राज-काजसँ या तँ जुड़ल रहल अिछ वा ओइमे सटल रहने अपन सा बनौने रहल अिछ। gकूली िशा तँ पटवारीक कaमे रहैन मुदा जमीIदारी सूVक नीक अनुभव रहबे करैन। बरािहलक राजक हिथयार बना लड़ाइयक सूमा बनौलैन। गाममे जेतेक मुँहगर-कIहगर लोक छल, जेना- मैनजन, देबान इQयािदजेसभ कचहरीसँ जुड़ल रहए–सबहक बैसार पटवारी केलक। अपनो गुमgता, बरािहलक संग गामक असेसर [5]क बजा एकठाम केलक। सव;सaमैतसँ कािâ आम तोड़ैक िनण;य भेल। समयक िहसाबसँ सभ गुलाबचनक गाछी पहुँच बलजोरी आम तोड़ब शु केलक। गुलाबचनक बुकौर लिग गेल। मुदा बालचनक िहaमतमे िमिसयो भिर कमी नइ आएल। बालचनक िहaमत देख गुलाबचन बाजल- “बौआ!धन, धरम दुनू जेतह। आम तोड़ै छै ते तोड़ए दहक। छोिड़ दहक। भगवानक दइक हेतैन ते ऐगला साल अहू बेरक साती आम दए देथुन।”
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जिहना गम; आिगमे पािन ढारने िमझा तँ जर जाइए मुदा ओकर पिरतापक ठXढा होइमे िकछु समय लिगते अिछ तिहना बालचनक मनमे ईहो उठैत रहै कचहरीक झगड़ा गाममे पसैर जाएत। हेबो केना ने किरतै गॱओ तँ संग छेलैहे। तेतबे निह, वेचारा ने किहयो gकूले देखने आ ने तेहेन पु·खक सतसंगे भेल छेलै जइसँ पु·खपनाक बोध होइतै। मुदा एकटा िवचार बालचनक मनमे जर जगलै जे जखन गॱऑं सभ हँसेड़ीक पमे कचहरीक संग हमर सaपैत लूटए आएल अिछतखन ओकरा संग हमर समािजक सaबIध केहेन हएत? की हम ओइ समाजसँ ई निह पुिछ सकै छी जे समाज जखन िवचारसँ चलैए तखन हँसेड़ी बनबैक की Rयोजन भेल? जर िकछु-ने-िकछु भीतरमे रहgय अिछ...। संजोग बनल। जखन गुलाबचनक गाछीमे आम टुटब शु भेल, तखने जेठुआ िबहािड़ जकc भिर गाममे िबड़Ò उठल। एकाएक नवतुिरया सभ सेहो गुलाबचन-ऐठाम पहुँचए लगल। गामक नवका पीढ़ी जे अखड़ाहापर खेलाइ छलओ सभ बालचनक गु· कहै छेलैन। सोराजीलाल सेहो गुलाबचनक ऐठाम एला। अिबते सोराजीलाल सबहक बीचमे गुलाबचनक कहलिखन- “गुलाबचन, अहc संग अIयाय होइए, एकरा रोकू।” सोराजीलालक िवचारक Rभाव जेते बालचनपर पड़ल तेते गुलाबचनपर नइ पड़ल। पड़बो केना करैत, जेकर िवचार पिहनिह हािर मािन चुकल छलओ केना लगले उिठ कऽ ठाढ़ होएत। घरसँ कड़ुतेल िपऔलहा लाठी िनकािल बालचन बाजल- “भैया, तूँ घरेपर रहह। घर-दुआरक संग gVीगणो आ बालो-ब¥चाक देखैत रिहहह। हम छोटका भैयाक संग जा कऽ आम तोड़बक रोकबै।” जिहना देशक ओइ िसमानपर जे शितशाली देशक सीमा सेहो छी, जाइत िसपाहीक पिरवारक लोक अिIतम िवदाइ बुझैएतिहना गुलाबचनक मनमे उठए लगल। एक िदस समpगक िजनगी देख रहल छलआ दोसर िदस सaपैत। रंग-िबरंगक िवचार गुलाबचनक मनमे चकभौर िलअ लगल। िजनगी-ले सaपैत अिछ वा सaपैत- ले िजनगी? मुदा अखन सोचै-िवचारैक लेल ओते समयो निहय अिछ जे आनो-आनसँ बुिझ िवचारब। तहूमे जखन लड़ाइयक मोचW बिन रहल अिछतखन सभसँ बुझबो-िवचारब केतेक नीक हएत? लड़ाइक मोचWक िवचारक अनुभवो सभक ए¹ेरंग निहय होइ छइ। जे लड़ाइयक मोचWपर उतरिनहार अिछ वा जे मोचWपर किहयो गेबे ने कएल, दुनूक िवचारोमे िभµता हेबे करत िकने..! सोचैत-िवचारैत गुलाबचन अपन दुनू भॉंइक–माने Öानचनो आ बालचनोककहलक- “बौआ, आम अपन पिरवारक तोिड़ रहल अिछ, मुदा जखनसमाजो पीठपोहु छैथतखन पाछुओ हटब नीक निह। तँए पिहने दरबÕजापर आएल सहयोगी सभक पुिछ लहुन जे आगू की करब।” गुलाबचनक िवचार सुिन जिहना दुनू भॉंइ–Öानचन आ बालचन–ठमकल तिहना समाजक नवतुिरया सभ सेहो ठमकल। मुदा सोराजीलाल, जे दज;नो बेर जेल-याVाक करैत गुलाम देशसँ मुित पािब चुकल छैथ, हुनका िवचारमे मुितक ओ प ओिहना झलैक रहल छेलैन जेना पौने छला। अगुआइ करैत सोराजीलाल बजला-
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“गुलाबचन, िजनगीक बाटमे केहनो आफद-असमानी वा केहनो रोड़ा-पाथर िकए ने आिब कऽ रोकए मुदा पाछू नइ हटी। िकएक तँ ओ िनणWयक दौर होइत अिछ। ओइठाम पाछू हटने लोक पछुआ जाइत अिछ। ओना, तइमे थोड़ेकहोिशयारीक खगता जर अिछ मुदा पाछू हटब िकµहु नीक निह।” सोराजीलालक िवचारमे गुलाबचनक की भेटल से तँ गुलाबचने जानत, मुदा िब¥चेमे बालचन बाजल- “सोराजी भैया, अहcक िवचार जँ संग रहत तँ सaपैत बँचबैले हम अपन जानक अरािध लेब। अहc जे कहबहमतइ िहसाबसँ करैले तैयार छी।” बालचनक िवचार सुिन सोराजीलाल बजला- “बालचन, लड़ाइक मोचWक एक-एक ण ओ ण छी जे णमे छनाक कऽ सकैए। तँए एको ण गमौने िबना चलह आम तोड़बक रोकैले।” सोराजीलालक िवचार सुिन बालचनक मनमे लहरैत आिग जकc एकेबेर धधरा उठल। अपन लाठी सaहािर बालचन गाछी िदस आगूए-आगू दौड़ल। पाछू-पाछू समाजक नवतुिरयो, सोरािजयोलाल आ पिरवारक बाल-ब¥चा सिहत जिनजाितयो सभ गिरयबैत िवदा भेल। आमक गाछीमे गुमgता, पटवारी, बरािहलक संग असेसरो आ समाजक पcचटा मुँहगर-कIहगर लोक सेहो छला। गामक हँसेड़ीक दौड़ैत अबैत सभ िकयो देखलैन। ए¹े-दुइये गुमgतो, पटबािरयो, बरािहलो आ असेसरो आमक गाछीसँ भागल। मुदा गामक जे पcचो गोरे छला ओ पूव;वते गाछीमे रहला। ओना, हुनका सबहक मनमे मािरक डर नइ पैसल रहैन। डर नइ पैइसैक कारण हुनका सबहक मनमे रहैन जे हम तँ समाजक लोक भेलॱ िकने, बीच-बचाउ करैत रहब। मुदा ई िवचार मनमे जगबे ने केलैन जे जे बात अखन मनमे उिठ रहल अिछओ तँ आम तोड़ैसँ पिहनॱ उिठ सकै छल। जँ से उठल रहैत तँ एहेन पिरिgथतीए िकए बनैत? जमीIदारक ऐमला-फिमलाक भागैत देख सोराजीलालक मन अड़हुलक फूल जकc फुला गेलैन। गाछी पहुँच टुटल आमक ढेरीक देखबैत सोराजीलाल बजला- “गुलाबचन, अहcक आम छी लऽ जाउ।” तही बीच िसंहेrर–माने गामेक एक जाितक मैनजन,बाजल- “गुलाबचन, अनेरे ने लाठी-लठौबैल करए चाहै छी। समझौता मािन िलअ।” िसंहेrरक िवचार सुिन गुलाबचन थकथकाएल मुदा सोराजीलाल बालचनक कहलिखन- “बालचन!समाजक यएह लु¥चा-लaपट सभ गरीबक सaपैियो आ इÕजतो-आबक सभ िदनसँ लूटैत आएल अिछ। अखन ई समाज निह राजक हँसेड़ी छी,तँए जे भागल से अपन जान बँचौलक, मुदा जे पकड़ा गेल तेकरा छोड़ब उिचत निहय हएत।” सोराजीलालक िवचार बालचन मािन लेलक। मुदा िवचारमे कनी संशोधन जर केलक। संशोधन ई केलक जे कड़ुतेल िपऔल लाठी अिछ, तँए ओइ लाठीसँ अवघात बेसी हएत। अवघात ई जे जिहना लोहाक तीर बनबैकाल कतेल िपऔलासँ ओ िवषात भऽ जाइएतिहना बcसक लािठयोमे होइए। जइसँ साधारण लाठीक अपेा ओइसँ बेसी अवघात भऽ सकैए। लाठी रिख बालचन िसंहेrरक दुनू गालमे दू चाट मारलक।
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िसंहेrरक गालमे चाट लिगते जेतेक नवतुिरया छल, भुआ जकc बcकी चापर लटैक हcइ-हcइ सभक चोिटयाबए लगल। दुनू हाथ उठा सोराजीलाल सभक शाIत केलैन। मुदा एक िदस जिहना मािरक चोटसँ चोटाएल गहुमन सcप जकc पcचो फुफकार कािट रहल छल तिहना दोसर िदस गनगुआिर-सcप जकc समाजोक िसपाही सभ सीटी बजाइये रहल छल। लड़ाइ जीतला पछाइत लड़ाइ लड़िनहारक िवचार सवÒपिर भइये जाइए। सव;-सaमैतसँ िनण;य भेल जँ पcचो गोरे साए-साए बेर कान पकैड़ समाजक बीच उठए-बैसएतँजान छोिड़ देबइ। आगू-पाछू पcचोक करैत देख सोराजीलाल पुन: िवचारमे संशोधन करैत बजला- “कान पकैड़ कऽ उठब-बैसब छोिड़ पcचोक थूक चटबाउ।” q शद संãया : 2156, ितिथ : 15मई2018
[1] पाहीप¿ीक [2] कामत [3] देवचरण [4] बीतल समयक [5] चौकारी टेस असुलिनहार
ऐ रचनापर अपन म ◌ंतiय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रबीIK नारायण िमf- १.नमgतgयै- उपIयासक आरaभ (आगc) २.लघुकथा- सनकल १ रबीIK नारायण िमf नमgतgयै उपIयासक आरaभ
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३. समयक च¡ आगा घूमल। घुमैक छलै। हम अपन माएक कोरमे सुरित रही। दूधपीबा ब¥चाक आओर चाहबे की करी?दूध आओर दूलार दुनू भेिट रहल छल। मुदा हमरा की पता जे हमर बाप हमरा आबए-सँ पिहनिह Rgथान कए चुकल अिछ। हमरा की पता जे जँ हम बेटा भए जIम िलतहुँ तँ ओिह राजपाटक उरािधकारी होइतहुँ जे बेटी भेनिह चूिक गेलहुँ। मुदा हमर माएक एकर अिखयास रहैक। घरबला गेलै से क¢ छलैहे, हमरा बेटा निह भेने दोसर-दोसर क¢ होमए लगलैक। ¡मश: िदयाद-बादक ·िख बदलए लागल। मसोमातक सामािजक हैिसयत जे हेबाक चाही से भए गेल। असगर हमर माए की-की किरतए? हमरा पालिथ, हमर बापक असमय िनधनक gमरणमे िदन-राित अपिसयॉंत रहिथ। गुजर-बसरक iयवgथा करिथ। समाज ओ कानूनसँ माV खोिरसक अिधकािरणी छली, से भेिट रहल छलिन। हमर िचIता सेहो ओकरा होइत छलैक। केना बढ़ब, के देखत, केना िबआह होएत? हमरा लए एतेक िचIता तखनिहसँ करब जरी निह छलैक। हमरा अखनो से सोिच हँसी लािग जाइत अिछ। िबआह कए अपन िजaमेदारीक इितfी करबा हेतु iयाकुल रहबाक कोनो तरह उिचत निह कहल जाए सकैत अिछ। आइ-कािâक समयबला गÊप निह रहैक। ओ समय छलैक बािलका बधूक। जतेक कम बएसमे बेटी िबआहल जाएत ततेक Rिता सुरित रहत। लोकक सोच एहने रहैक। तािहमे एकटा मसोमात कइए की सकैत छली? एक असामियक घटना जािहपर ककरो वश निह छलैक, जे हमर युवा, gवgथ सभ तरह सaपµ िपताक हेदावसान कए देलक, ओिह पिरवारक भिव´यक उलिट देलक। जँ हमर िपता जीिवत रिहतिथ, तखन ककरो िहaमत निह होइतैक जे हमर माएक एना दुरदुरौबित। जे से एकटा उपदेश लए ठाढ़ रहिथ। ओकर आिथ;क सामय;क एना िनचोिड़निह सकैत। मुदा ई सभ तँ आब माV क¯पने रिह गेल छल। यथWथक धरातलपर ठाढ हम एकटा नािIहटा ब¥चा आओर तकर मसोमात माएक कोनो बहुत िवक¯प निह छलैक। सभ िकछु होइतो गाम गामे होइत छैक। हमर बापक सहोदर तँ भcगमे मgतंग रहैत छलाह, मुदा हुनकर िपितऔत सभमे कए गोटाक यान हमरापर रहैत छलैक। एक िदन हमर िपी अपन िपितऔत सभसँ गÊप करैत छलाह िक ओ सभ हमर चच; उठा देलिखन। सभहक ब¥चा gकूल जाइत छलैक। हम असगर घरमे ट¯ली मारैत रहैत छलहुँ। पcचम बख; भए गेल छल...। हमर ककाक माथमे ई बात धँसलैक। आन ब¥चा सभक संग हमरो नाम gकूलमे िलखा देलक। पिहलबेर माgटरक मुहअपन नाम सुनिलऐक- “अपरािजता।” हम कतेक Rशµ भेल रही। ओिह िदन gकूल जाए। मािर ब¥चा सभक हँसैत, बजैत देखिलऐक। चिटआ सभक खाइत रहैत देिखऐक। ब¥चा सभक खेलाइत, धुपाइत देिखऐक। ततेक नीक लागल जे िनQय
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भोर होइते माएक gकूलक तैयारी करए हेतु िववश कए िदऐक। gकूल हमरा हेतु जबरदgत आकष;ण भए गेल छल। िनQय-Rितक िदनचयWमे gकूल जाएब सभसँ िRय लगैत छल। गामक एक छोरपर gकूल छल। ओिहठाम पcचमा धिर पढ़ाइ होइत छल। आगा पढ़बाक हेतु गाममे gकूल निह छलैक। तािह हेतु गामसँ बहरायब जरी छल। गामसँ पcच माइल दूर उ¥च िवDालय छलैक। गामक एकाधटा ब¥चा ओतए पढ़ैत छल। दूरी ओ कतेको तरहक असुिवधाक कारण अिधकpश ब¥चाक पढ़ाइ-िलखाइ पcचमे धिर सीिमत भए जाइत छल। तकर बाद ओ सभ अपन पु°तैनी iयवसायमे लािग जाइत छल। एहन पिरिgथितमे हम आगा पिढ़ सकब तकर सaभावना बहुत कम छल। तकर हमरा कोनो िचIता निह छल। सत कही तँ Öानो निह छल जे पcचमाक बादो पढ़ाइ होइत छैक आओर जॱ होइत छैक तँ कतए? बहुत आगा सोिच कए होइतैक की? जखन जे हेबाक हेतैक सएह हेतैक। त हमर अिभRाय वत;मानमे ओिह gकूलक िनQय-Rितक िदनचयWमे बाIहल RयWÊत छल। gकूलमे कैटा ब¥चा सभ हमर दोgत बिन गेल। ओिहमे अिधकpश आस-पासक गामक छली। त gकूलक बाद हुनका सभसँ भट निह होइत छल। gकूल जेबाक एक Rमुख आकष;ण अपन दोgत सभसँ भट- घॉंट होइत छल। gकूल लग पहुँचते जेना चुहचुही बिढ़ जाइत छल। ब¥चा सभक फुदकैत-खेलैत देिख हमरो मोन ओिहमे अिवलंब िमिल जेबाक हेतु iय² भए जाइत छल। gकूलपहुँचलहुँ, झोरा फेकलहुँ आओर भागलहुँ ब¥चा सभक लग। पता निह कहॉंसँ एतेक गÊप सभ फुराइत छल। ताबतेमे Rाथ;नाक घIटी बजैत। ब¥चा सभ भागैत Rाथ;ना करए। हमर gवर नीक छल। Rाथ;ना करबेबाक हेतु हमरे भार देल गेल छल। हम िनधोख सुgवर सरgवती बIदना करी आओर तकर बाद Rारaभ होइत छल पढ़ाइ-िलखाइ जे चािर-पcच घIटी धिर चलैत रहैत छल। बीचमे खेलक घIटीमे राजकुमार,हिरनIदन, अ·ण, गरमिसंह एक िदस आओर लड़की सभक एकिदस खेल-धूप होइत छल। q
४. एक िदन सॱसे गाममे ह¯ला भए गेलै जे अपरािजता हेरा गेल। यो कहैक लकरसुँघा आएल रहैक, वएह लए चिल गेलैक। यो िकछु, यो िकछु कहैक। जतेक आदमी, ततेक तरहक गÊप। हमर माए तँ छाती पीटैत-पीटैत बेहाल रहैक। हमर िपीक दस हजार फÕझैत केलक। मुदा ओ की किरतिथ? भcग पीबएसँ हुनका फुरसित होइतिन तखन ने कोनो आन बातपर यान दीतिथ। भेलै ई जे हम gकूल हेतु िवदा भेलहुँ जर मुदा रgतामे एकटा बबाजी लबनचूस देलक। लबनचूस खाइते हम बेहोश भए गेलहुँ। तकर बाद की भेलैक, िकछु मोन निह अिछ। दू िदनक बाद जखन होश आएल
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तँ देखी जे एकटा कोनो िवशाल भवनमे पड़ल छी। चाकात बIद कोठरीमे हम राखल गेल रही। ने यो आिब सकैत छल आओर ने जा सकैत छल। हमरा ओिह कोठरीमे कोनो चीजक अभाव निह छल। तरह- तरहक खेलौना, नाना Rकारक मधुरसँ भरल ओिह कोठरीमे हम असगरे छलहुँ। कखनो काल एकटा बुिढ़या हमर हाल-चाल पुछए अबैत। मुदा हमरा माए मोन पड़ैत,गामक ब¥चा मोन पड़ैत, gकूलक खेल-धूप मोन पड़ैत, ऑंिखसँ नोरक धार बहैत देिख ओिह बुिढ़आक सेहो कना जाइक मुदा ओ बाजैत िकछु ने। अपना भिर हमरा बॱसबाकRयÄ करैत। िकछु-िकछु खुआबक Rयास करैत आओर चिल जाइत। ओमहर हमर माएक हाल-बेहाल छलैक। जीबाक एक माV सहारा हमहॴ छिलऐक। ओहो परो भए गेल छलैक। छाती पीटैत-पीटैत कतेको बेर बेहोश भए गेल। डाटर, बैद बजाबए पड़लैक। कहुना-कहुना कए ओकर जान बॉंचल। हम ओिह कोठरीमे बIद छटपटाइत रही। ओमहर हमर माए बफािर तोड़ए। मुदा हमरा गामसँ अपहृत केिनहार सभ अपन धIधामे लागल छल। ओकरा सभक पता रहैक जे हम अपन पिरवारक एकमाV आशा छी। हमर घरक सaपµताक सेहो ओकरा सभक जानकारी भए गेल रहइ। इएह सभ सुिन हमरा अपहृत करबाक योजना बनाओल गेल। कतेको िदन ओ सभ हमर पछोड़ केलक। हमर िनQय-Rितक आवागमनक समय, रgता सभक रेकी केलक। आओर एक िदन अपन ल£यमे कामयाब एिह मोनेमे रहल जे हमर अपहरण कएलेलक। ओकरा सभक ई अनुमान निह भए सकलैक जे हमरा बाप निह छल। ओ सभ निह बुिझ सकल जे िबना बापक बेटी गाछसँ खसल पात जकc अिछ जे खसत तँ सुखा कए न¢े होएत आओर िकछु निह। हमर अपहरणकतW सभ ढाकीक-ढाकी टाका उगाही करए हेतु योजना बना रहल छल। तािह हेतु हमर िपीक गुमनाम िचÎी पठौलक जे तीन िदनक पेसतर ओकरा सभक दू लाख टका देल जाए तखने अपरािजताक छोड़ल जाएत अIयथा ओकर जीिवत लौटबाक कोनो सaभावना निह। संगिह एिह मामलाक जानकारी पुिलसक निह देल जाएत अIयथा पिरणाम घातक होएत। पैसा कखन ओ कतए, ककरा देल जाएत से अलगसँ ओही िदन सूिचत कएल जाएत। ओिह समयमे दू लाख टकाक बड़ महQव होइत छल। िचÎी पिढ़ हमर िपीक तँ जेना लकबा मािर देलकै। अबाजे निह िनकलै मुदा हमर मोह तँ रहबे करइ। अपहरणकतWक हाथे हमरा मरए तँ निह िदतिथ। तखन की करिथ से फुरा निह रहल छलिन। ओ हमर हालत देिख बुिढ़आक बहुत दुख होइक। ओ gवयं अपहरणकतW सभसँ Vgतछल। ओकर हािद;क इ¥छा रहैक जे जेना-तेना हमरा ओिहठामसँ िनकालल जाए, मुदा कोनो गरे निह बैसैत छलैक। ओिह बुिढ़याक अपने िखgसारहैक। ओ gवयं अपन अतीतसँ ओझराएल, थाकल, झमारल पिरिgथितसँ लाचार छल। निह चािहओ कए ओिह दुदWIत अपराधीक संगोरमे रहैत छल आओर ओकर सभक कहल करैत छल। की छलैक ओकर मजबूरी ओ िकएक एना मजबूर भेल छल? तँ सुिन िलअ। ओिह बुिढ़आक नाम असलमे छलैक पु´पा। ओ एकटा पैघ घरक पुतोहु छिल। िदयादी झगड़ामे ओकर पितक हQया भए गेलैक। हQया केनहार ओकर पितक अपने सहोदर छलैक जे आब एिह अपराधी िगरोहक
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५२ म अंक १५ जून २०१८ (वषᭅ ११ मास १२६ अंक २५२ ) मानुषीिमह सं᭭कृताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 37
सरगना बनल अिछ। भाएक हQयाक जूम;मे ओकरा आजIम काराबास भेल। मुदा ओ जहल फािन कए पड़ा गेल आओर से अखन धिर पड़ाएले अिछ। पता निह ककरा-ककरासँ ओकर संगित भेलैक, कतए-कतए गेल। अIततोगQवा ओ लूट-पाटआओरहQयाक कतेको मामलामे फँसैत चल गेल। पु´पाक पितक हQयाक बाद ओकर आओर ओकर एकमाV सIतानक राक कोनो iयॲत निह रिह गेल। एक राित ओकर देओर ओकरा सभक गामक घरसँ उठा अनलक। किह निह, कतए-कतए घुमबैत रहल। घुमैत-घुमैत ओ सभ एिह जंगल महलमे आनल गेल। ओकर बेटा कतए िनपा भए गेल से बुिझओ निह सकल। कनैत-कनैत ओकर नोर सुखा गेल। हृदय पाथर भए गेल। िविÊत जकc रहए लागिल। मुदा ओकर ब¥चाक कोनो अता-पता निह लागल। पु´पा अपन िदओरक कतेको बेर अपन बेटाक मारफत हाथ-पैर जोड़लक मुदा ओ ठहाका पाड़ए लागए। एक iयंगपूण; एवम् कूड़तासँ भरल आेपक संग कतहु घसिक जाइत। हQया, लूटपाटओकर िनQय-Rितक धIधा छल। ओ तँ सजाआÊताछलहे। आब आओर की यो किरतैक? जेलमे ओ मोछा ठाकुरक नामसँ कुãयात छल। जाबे जेलमे रहल, जेलक दादा रहए। छोट-मोट नवागIतुक कैदी सभ ओकर चाकरी करैत छल। जेलर बाबू सेहो ओकरासँ डरैत छलैक। कारण ओ gवयं चोर रहैक। कैदी हेतु देल गेल अµ-पािनक चोरा कए बेिच दैक। अपन पैघ-पैघ मोछक चलते मोछा ठाकुर नाम RाÊत कए ओ गौरवािIवत छल। भए सकैए मोछा ठाकुरक जेलसँ फरार होमएमे जेलरोक हाथ रहल होइक। तािह बातक जॉंच पड़ताल भेबो केलैक। मुदा जेलर बेदाग सािबत भेल आओर मोछा ठाकुर फरार भेल से भेल रिह गेल। q
५. दू िदनक बाद फेर यो हमर िपीक एकटा िचÎी पठओलक। ओिह िचÎीमे ओकरा gथान ओ समयक सूचना देल गेलैक, जतए ओकरा िफरौती लए पहुँचक रहैक। ओिहमे ईहो िलखल रहैक जे दगाबाजी केलापर गaभीर पिरणामक हेतु तैयार रहए। ओतेक पैसाक जोगार एतेक ज¯दी निह भए सकलैक। तथािप जे िकछु सaभव भेलैक से लए ओ िनयत समयपर िनयत gथानपर पहुँचल। मोछा ठाकुर gवयं ओिहठाम मौजूद छल। पैसाक बोरा लेबाक हेतु अ²सर भेल िक कतहुँसँ गोली चलबाक आबाज भेल। मोछा ठाकुर ओतिह धराम भए गेल। ओमहर पु´पा हमरा लए ओिह कोठरीसँ िनपा भए गेल। भेलैक ई जे मोछा ठाकुर ओकरा हमरा सुंझाओगाही करए गेल छल। पु´पाक ई मौका भेटलैक आओर हमरा लेने भागिल। संयोगवश भगैत-भगैत ओ ओहीठाम पहुँच गेल जतए मोछा ठाकुरक लाश पड़ल छल। हमर िपीक नजैर हमरापर पड़लैक। ओ झप¿ा मारलक आओर हमरा लैत इएह ले वएह ले चaपत भए गेल।
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असलमे भेलैक ई जे मोछा ठाकुरक RितÏंदी सभ पुिलसक मुखिवर बिन गेल छल। ओ सभटा सूचना पुिलसक दए देने रहए। पुिलस तँ ओकरा पाछा छलहे। पुिलसक अबैत देिख ओ भागवाक RयÄ केलक, मुदा सफल निह भए सकल। कनीके कालमे ओकरा आओर पुिलसमे गोलीवारी होमए लगलैक आओर ओ पुिलसक गोलीसँ ठामिह रिह गेल। इलाका भिरमे हमर लौिट जएबाक समाचार िबजली जकc पसिर गेल। हमरा ओतेक होश निह रहए मुदा एतबा तँ बुझिलऐक जे एकटा महान संकटसँ उबिर गेल रही। हमर माएक Rशµताक अंत निह छल। ओकरा फुरेबे निह करैक जे हँसए िक कानए। अफरातफरीमे पु´पा िदस ककरो यान निह गेल। हमरा लए कए हमर िपी गाम भागल। लोक सभ सेहो गाम िदिस ससरल। मुदा पु´पा...। ओ तँ मोछा ठाकुरक मृत देिख ठहाका पाड़ए लागल। ठहाका ततेक िवभQस ओ जोरदार छल जे सaपूण; वातावरणक िहला कए रािख देलक। बात एतबेपर निह कल। ओ RचXड पागल जकc मोछा ठाकुरक लहासक चाकात नाचए लागिल, गाबए लागिल। बड़बड़ाए लागिल- “आब ले हमर जमीन -जायदाद। ले हमर घर घराड़ी। हमर घरबला आिबते होएत। तोरा छोड़तह निह। अIयायक Rितकार कइए कए रहत। अपन अिधकार लइए कए रहत।” महाभारतमे दुgसाशनक लहासपर नचिनहार पु·ष छलैक भीम जकरा डरे के के ने डराइक। जकरा कतेको हाथीक बल रहैक। मुदा एतए तँ एकटा वृ¸ मिहला िचर Rितित Rितशोधक अि¤नमे धधिक रहल छल। की ओहो मोछा ठाकुरक छाती फािर देत? लगए तँ तेहने। पु´पाक अ¿ाहास सुिन िकछु ²ामीण घुिर अएलैक। ओ सभ जस-के-तस मु·त जकc ठाढ़े रिह गेल। चीQकारक gवर ओकरा सभक गितशूIय कए देलक। यो िकछु बुिझए निह पािब रहल छल। आिखर ई वृ¸ा के अिछ? की कहए चाहैत अिछ? ई मृतक एकरा कोन अIयाय केलक? यो िकछु कहैत तािहसँ पिहने ओ फेर िचकरए लागिल- “कतेक बेर अएताह राम?कतेक पाथर बनल अिह¯याक उ¸ार करताह। ई किलयुग छैक। सुनैत जाउ औ लोक सभ। त ई रासक नाश रामक Rतीा निह कए सकल।” एतबे बाजल की फेर वएह ठहाका मारलक। िनèास पागल भए गेल छल। गॱऑंक के िकछु निह बुझा रहल छलैक जे की करए? पु´पा ककरो सुनए हेतु तैयार निह छिल। आिखर बात हमर िपीक कान धिर गेलैक। हमरे संगे तँ ओ आएल छिल। ई बात बुिझते हमर िपीक आQमा कcिप उठल। मुदा ओ कोनो हालतमे हमरा एसगर निह छोड़ए चाहैत छल। त चािर-पcचटा बुझनुक लोकक पठौलिथ जे पु´पाक कहुना अपना ओिहठाम लए आनए। पु´पाक उ² प देिख ककरो ओकरा टोकबाक िहaमत निह भेल, बुझेबाक तँ बाते छोड़ू। ओकरा हाथमे दिबला पता निह कतएसँ आिब गेल। ओ बेिर-बेिर मोछा ठाकुरक चाकात घुिम-घुिम नृQय कए रहल छिल।
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सभ डरा गेल,कही ओ दिबला ओकरेपर ने चला दैक। इएह ले वएह ले सभ अपन जान लए भागल। पु´पा ओिहना रिह गेिल। कनी कालमे पुिलसक आला अिधकारी सभ ओतए पहुँचल। मोछा ठाकुरक लहासक थाना लए जेबाक रहैक। एक Þक पुिलस आएल। चाकात घेिर लेलक। अिधकpशक हाथमे हिथयार छल। जकरा हाथमे से निह छल से सभ गोटे मोट-सोट लाठी भcिज रहल छल। देिखते-देिखते मोछा ठाकुरक लहासपर पुिलसक कजा भए गेलैक। लहास चल गेल मुदा पु´पा एसगरे ओतिह िचकरैत-भोकरैत रिह गेल। कतहु यो निह। लहास चिल गेलाक बाद ओ धराम दए खसल आओर राित भिर ओिहना रिह गेल। भोरे लोक ओकरा तकलक। ओ ओिहना बेसुध पड़ल छिल। हमर माए सेहो उQसुकतावश ओकरा देखए गेली। ओ ओकरा देिख छगुIतामे पिड़ गेली। ओ तँ ओकर नैहरक छलैक। ओ पु´पाक नाम लए कैबेर उठौलक। पु´पा तकलकै। ऑंिख खोिलते हमर माएक िचिIह गेली। ओ माएक बात मािन ओकरे संगे िवदा भए गेली। इलाकामे गद; पिड़ गेल। हमरा ओिहठाम ओकरा देखक लेल के के निह आएल। एिह घटनाक बाद गाममे लोक सतक; भए गेल। यो अपन ब¥चाक असगरे कतहु निह जाए दैक। कैटा ब¥चा gकूल गेनाइ छोिड़ देलक। हमरो संग सएह भेल। हम चौथा पास कए पcचमामे गेले रही िक एिह आफतमे फँिस गेल रही। हमर िपी कोनो हालतमे gकूल पठबए हेतु राजी निह भेल। q २ रबीIK नारयण िमf लघुकथा रबीIK नारयण िमfक लघुकथा सनकल नहिरक काते-काते वो चल जाइत छल। फाटल-चीटल नुआसँ देहक लÕजावरण दैत दूनू हाथे दूनू ब¥चाक कोरतर दबने एक सुरे बढ़ल जाइत रहए। जेठक ठहा-ठही रौद। चाकात कतहुँ यो निह। मुदा ओ अपिसयcत भेल बढ़ले जाइत छलै। िक भेलै ओकरा से निह किह? Rाय: ओ सासुरसँ िस गेल छल। थाकल, ठेिहयाएल वो पाकिड़क छाहिर देिख बैिस गेल। ओकर आँिखसँ नोर झर-झर खसए लागल। के पोछत ओकर नोर? सुनैत छल जे सासुरमे लोकक बड़ सुख होइत छैक। सासु-ससुर, िदओर, िदयािदनी सभ छलै ओकरा। मुदा सभ जेना जIमी दु°मन रहैक ओकर। ओकर अनेरे िखदpस करब जेना ओकरा सभक
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धम; रहैक। खेबो-पीबोक ओकरा क¢े छलैक। घरबला कमासुत छलैक। मुदा भैयारीमे सभसँ छोट होयबाक कारण पिरवारक ऋृण ओकरापर बहुत रहैक।भाए सभ गरीबीमे छलैक। त जे चािर-कौरी कमाइतो छल से कैठाम बँिट जाइत छलैक। gVीसँ ओकरा Rेम तँ छलैक मुदा कालक Rभाव ओकरो निह छोड़लकै। समय बीतलासँ ओकरा सौIदय;-सौव कम भए गेल छलैक आ ओकर यान ¡मश: कोनो आन gVीपर केिIKत होमए लागल छलैक। ओ gVी सुµिर तँ छलै, संगिह ओकरामे आधुिनकताक पुट सेहो छलैक, आंिगक चमQकार छलैक आ यौवनक मादकता ओकरा आकष;णक केIK बना देने छलैक...। कोना-ने-कोना इएह बात सभ ओकरा कानमे पड़लैक जे ओकरा पचाओल निह भेलैक। दिरKाक भार फराक,तंदुgती घटैत से छलैक आ ओमहर घरबलाक उपेापूण; आचरण...। मोन जेना बेरत भए गेल रहैक आ तँए एक िदन वो सासुरसँ कcखक तर ब¥चाक दबने भािग गेल। नैहर धिनक तँ छलै मुदा भाए सबहक राज। िपता मिर गेलै आ माए सेहो बुढ़ भए गेल छलैक। यो घरमे मोजर निह करइ। मुदा बेटीक तँ की निहरे की सासुरे। आ तँए जखन वो नैहर पहुँचल तँ चाकात गामक नव-पुरान लोक ओकरा घेिर लेलक। “िकछु सुनिलऐ? फलनमाक बेटी सासुरसँ भािग अएलैक अिछ।” इQयािद-इQयािद, जकरा जे फुराइक से बाजैत छलै। आओर वो हतRभ बीच अँगनामे ठाढ़ रहए। के खॲइछ खोलत आ के पिटया ओछा कए बैसए कहतैक। अपने घरमे वो आन बनल छल। यो सहारा निह बुझाइ। ताबतमे Rाण दाइ कतहुँसँ एलिखन आ कहलिखन- “दूर जाइ जाउ। केहन पाथर भए गेलहुँ अहc लोकिन..! बेटी डाटी छइक आइ आएल, कािâ चल जाएत। तकर अनादर िकएक करैत जाइत छी।” कैटा किनयc सभ आिब गेल छलैक ओिह आँगनमे। तीनटा ओकरभाए छलैक। भिर-भिर िदन वो जेठकाक कोरा खेलबैत रहैत छलैक। जाड़क मासमे रौदमे तेल लए देह मलैत रहए आ कनेको जहc ब¥चाक सदÁ होइक तँ जेना ओकर Rाण सµ दए रिह जाइत रहैक। मुदा आइ चािर-पcच िदन अएला ओकरा भए गेल छलैक आ ताधिर जेठकासँ टोका-चाली निह भेलैक।भाए सभ तीनू तीन ठाम भए गेल छलैक आ माएक तीनू गोटे िमिल कए फराक खोिड़स दैत छलैक। हािर कए जखन ओकरा कोनोभाए निह पुछलकै तँ माएक संगे रहए लागल। माए तँ माए होइत छैक िकने। रिह-रिह कए नोरक धार बहाबए लगैत छलैक। उ¥च सुनैत छलैक आ त ओकरासँ जे खुिल कए गÊपो करैत सेहो निह होइक। कारण जे ओकर बात किनयc सभ सुनबाक हेतु टाट लागल रहैत छलैक। कहबीछैक जे गेलहुँ नेपाल आ कम; गेल संगे। सएह पिर ओकरो भेलैक। सासुरमे सासु, ननिद आ िदयािदनी
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तँ निहरामे ई किनयc सभ ओकर जानक जपाल भए गेल छलैक। तैयो माए लग छल। अिहठाम िकछु gवतंVता तँ छलैक। “सएह की हाल अिछ ओकरा सन-सन हजारो कIयाक जकरामे सासुर ने निहरे- यो कतहुँ सहारा निह होइत छैक?” सएह सभ सोचैत रहए। सोन दाइ सोन दाइ, सॱसे गाममे सोर रहैत छलैक। गोर नार दप-दप छल वो। ओकरामे सभ गुण छलैक। मुदा गुणसँ की हो? टाकाक िबआह होइत छैक। िपता धिनक तँ छलैक मुदा कंजूस छलिखन। बेटीक भाग निह देखलिखन आ एकटा साधारण लोकसँ ओकर िबआह करा देलिखन सॱसे गाम िछया-िछया कहलकै। “सएह हौ, लोचनो बाबू, िवचार घोिर कए पीिब गेलाह। बेटीक भिव´यक किनयÚ िवचार निह केलाह। पाइ तँ अबैत जाइत रहैत छैक।” इQयािद-इQयािद। बेटा सबहक भिव´यक िचIता जबरgत छलिन। की होएत की निह? बेटी तँ दोसर धर चल जाइत छैक। ओकरासँ वंशक रा तँ निह होइत छैक। मुदा बेटा तँ कुलक आधार छैक। सएह सभ हुनकर पुरनका िमजाज सोचैत रहैत छल। सासुरमे दिरKा चरम सीमापर छलैक। सभ िदयािदनी मआ कूटए। रोटी ठोकए। धनकु¿ी करए। िÏरागमनक पIKह-बीस िदन धिरतँ ओकरा यो िकछु निह कहलकै। मुदा काल¡मे सभक iयवहार कठोर होइत गेलैक। पिटदारी छलैक िकने। “गे मैयो भिर िदन बैसल रहतौ जेना फरफेसरक बहु हो..!” घरबला जाबत काल रहैक ताधिर यो ओकरा िकछु निह किहतै। ओकरा काजपर जाइते फेर वएह रामा वएह खटोली। ओकरा बासन छुआओल गेल आ ¡मश: ओ पार लगा कए चौका-बासनक काज करए लागल। मुदा ओिह घरमे तँ पिटदारी छलैक। जेठकी िदयािदनी बड़ ¡ूड़ छलैक। ओकर इ¥छा जे कुटनी- िपसनीमे सेहो पार लगौक। िकछु िदनक बाद ओकरा सIतान हेबाक सaभावना भेलैक। मुदा तािहसँ की? भानस-भात, कुटनी-िपसनी आ तािहपर सँ सासु ओ ससुर तथा िदयािदनी सबहक कटाह गÊप-सÊप। सुनैत-सुनैत ओकर दम फुलैत छल। मुदा करए की? ककरा किहतै अपन दुख। चाकात अIहारे- अIहार बुझाइक। जकर घरोबला ओकर पमे निह होइक तािह gVीगणक भगबाने मािलक होइत छैक आ सएह पिर ओकरो छलैक। ओना, नवमे ओकर घरबला बड़ आव-भाव रखलकै। नव-नव कपड़ा-ला सभ चीज आिन-आिन दैत छलैक। मुदा ओकरा यान जेना ¡मश: हटैत गेलैक। ओ एसगरे हकासिल-िपयासिल भिर िदन आ दुपहर राित धिर काज करैत रहैत छल। यो एहन नै भेटलैक जकरा अपन मोनक भाव किहतै, जकरा लग मोन भिर किनतै।
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“उपाय तँ छलैक। मुदा बोराक आम आ बेटीमे िमिथलामे कोनो अIतर निह छैक। सcिठ देनिह क¯याण। आ जँ एक बेर ककरो गारामे बािIह देिलअिन तँ फेर जIम भिरक लेल िनचैन भए जाउ। धIयवाद कही िमिथलाक समाजक जे एखनो धिर अपन gVी समाजक एतेक िनरघीन जीबन िवतएबाक हेतु मजबूर कए दैछ।” इएह सभ बात ओकर मोनमे उठैत रहैत छलैक। ओमहर ओकरभाए सभ अपनामे िभµ-िभनाउज कए लेलकै आ सभ अपना-अपनीक धन जमा करैत छलैक। सभक कोठा छलैक। जिहआ ओ नैहरसँ कनैत िबदा भेल छल तिहयो ओकर िपताक कोठा छलैक। मुदा अखन तँ ओकरा बुझाइत जेना दोसर ठाम आिब गेल हो। चाकात पोखिरया-पाटन छलैक। सएह, धन एतेक आ मोन कतेक छोट छै ओकरभाए सबहक। ठीके छै कहबी जे टाका आगू लोक सभ सaबIध िबसिर जाइत अिछ। िकछु िदन नैहरमे रहलाक बाद ओकर सासुरक लोक अएलैक। बड़ उपरागा-उपरागी भेलैक। आ ओकरा फेर लोक सासुर लए गेलैक। मुदा एिह बेर तँ ओकर सासु बाढ़िनये नेने ओकर gवागत केलक। एवम्-Rकारेण आनो-आनो लोकक आचरण ओकरा Rित कठोर होइत गेलैक। ओकर गहना सभ बेिच देल गेल रहैक। ओ ¡मश: अकान ओ सुµ भेल जाइत छल। एक िदन ओकरा ने आगू फुराई आ ने पाछू।िदमाग िबजलीक करेIट जकc फेल कए गेलैक। ओ फेर भागल नैहर। एिह Rकारे नैहर-सासुरओ कै बेर केलक। सभठाम ओकरा उपेा भेटैत छलैक। नैहरोसँ ओकर मोन उचिट गेल रहैक। त ओ सोचलक जे बरे लग चली। जेना-तेना हराइत-भुितयाइत ओ बरक डेरापर पहुँचलतँ जे देखलक से देिख कए गुaमे रिह गेल। भोरक समय छलैक ओकर घरबला कोनो दोसर gVीक संग एसगर घरमे रहैक। ओ चो¿े घुिम गेल आ भागल भागल-भागल निह जािन ओ कतए गेल। एमहर ओकर खोज-पुछािर होमए लगलैक आ कएक िदनक बाद एकटा टीशनपर ओकरा लोक बैसल िकछु-िकछु रखने फाटल-िचटल कपड़ा पिहरने देखलक। ओ ठहाका भिर कए हँसैत छलैक- जेना समgत समाजपर हँिस रहल हो। ओकरा ने कथुक लाज छलैक आ ने धाक। मुदा लोक सभ कहए लगलैक जे ओ एकदम सनिक गेल छल। ओ एकदम गुaम भए गेलैक। तकर बाद फेर किहओ ककरोसँ निह बजलकै। ¦
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३. पD
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३. पD ३.१. आशीष अनिचIहार - गजल ३.२.डॉ. िशवकुमार Rसाद- िकछु किवता ३.३.डॉ. िशवकुमार Rसाद- िकछु अनुिदत काiय (मूल िहIदी रजनी छाबड़ा)- आगc ३.४.राजेश मोहन झा "गुंजन"-िकनकर िवकास?-(पूंजीवाद िक सव;हारा)- (याVीजी "बाबा नागाजु;न" कo जIम िदन पर) आशीष अनिचIहार गजल िकछु काज भगवान भरोसे िकछु काज शैतान भरोसे िकछु लोक नोरेसँ भरल अिछ िकछु लोक मुgकान भरोसे िकछु आँिख सोनासँ सजल छै िकछु आँिख दुिभधान भरोसे बहुते मजा आिब रहल छै िकछु बात अनुमान भरोसे लाभक कथा के क' रहल अिछ िकछु लाभ नुकसान भरोसे सभ पcितमे 2212-21122 मVा¡म अिछ।
ऐ रचनापर अपन मंतiय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। डॉ. िशवकुमार Rसाद िकछु किवता
शहर ओ गेल शहर ओ गेल मनु ख बनए लेल
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गाममे रिह बन-मानुख छल शहरक पाथर केर जंगलमे ऊहो आिब आइ पथरा गेल। शहरक पाथर केर...।
गाममे छल भाए-बिह न सभ िकयो बाबू िकयो काका छल भैया-भौजी बेटी-भतीजी नै िकयो िब नु नाता छल। शहरमे जाइते िर° ता-नाता सभटा मिट या-मेट भऽ गेल शहरक पाथर केर....।
पथराएल शहरी पाथरमे किनको मानवता नै बcचल चािर बख;सँ चालीस बख; केर बु¥ची, जननी बिल चिढ़ गेल शहरक पाथर केर...।
बाट-बटोही देखतो आI हर सुिनतो दन बिह र भऽ गेल पशुतो एहेन कुकम; सुिन-सुिन चुड़ुक पािनमे डुिम मिर गेल शहरक पाथर केर जंगलमे सभक सभ आइ पथरा गेल।
सcझ सcझक संगे भािग रहल अिछ िचड़ै-चुनमुन बcसपर बरद-गाए केर जेबर तिहना
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दौिड़ रहल अिछ बाटपर।
गौधूिलसँ पािट रहल छै नभ-ऑंगन घर-गामक बछा-बाछी िचकिर रहल छै टोलक-टोल बथानपर।
सु·ज िसनुिरया अलोिपत भेल धूरा केर एिह मेघमे बेटी-बहुिरया दीप नेसने सcझ देिथ ऑंगन-दुआरपर।
बाट-बटोिहक डेग भेल नमहर गाछी-िबरछी भेलै िभयौन नेना-भुटकाक दीिठ उतारिथ दाइ-माइ ओसारपर।
आ गइ िनिनया बाट तकैत छौ हमर बौआ ओछैनपर कथा-िपहानी घुिम रहल छै बौआ केर िललारपर।
ढोलक बोखार सुनलक ढोिलया िटक भेल ठाढ़ गुणमIती भेल गामक भार गाम-गाममे गुणमIतीक छुिट रहल अिछ आब बोखार सुनलक ढोिलया...।
अगड़ा-िपछड़ा फoटम-फoट
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बाप-दइयासँ होइ छै भट पॉंच बख;सँ नीनक मातल घुिम रहल कुरयाबैत पेट कोना हएत आब नैया पार सुनलक ढोिलया...।
दूरक ढोल सोहनगर छेलै लगक ढोल छेलै भेल बेकार दंगलक डगर सुिनते मातर गुणमIतीक चढ़ल बोखार सुनलक ढोिलया िटक भेल ठाढ़। q
खेबैया सबहक नाहक भेटल खेबैया िब नु खेबैया हमरे नाह अिछ देखू पार आब केना लगैत अिछ िब नु खेबैया हमरे नाह अिछ।
िकनको टाका पार लगौतिI ह िकनको नेता पार लगौतिI ह अपन-अपन बcस िभ रौने बहुतो पार उतरलौ जाइ छिथ िब नु खेबैया हमरे नाह अिछ ।
दूर-दूर धिर नजिर िखरौने तािक रहल छी आँिक रहल छी िकनका पछुऔने पार लगत आव िकयो संगी नै भेिट रहल अिछ िब नु खेबैया हमरे नाह अिछ ।
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िकनको बड़का पैघ हबेली िकनको बड़का पागक डौड़ही िकनको सार िकनको छिन साढ़ू धोती िज नक अकास सुखाइत अिछ िब नु खेबैया हमरे नाह अिछ ।
माय हमर नव -कुa भ नहेली माय हमर नव कुa भ नहेली नै हुनका मन पापक गेठरी नै हुनका मन बcझक धोकरी नेना-भुटुकाक सcस हास संग िज नगी भिर ओ खूब नहेली माय हमर नव कुa भ नहेली।
नै किह यो ओ चानन केली नै किह यो संI यािस न भेली िगरहg थीकo g वग; बूिझ ओ कम;क संग Rभु कo गुण गेली माय हमर नव कुa भ नहेली।
नै ओ िवदुषी नै ओ सुµिर नै आडa वरी नै कनसोही बाट-बटोही सभ जन िह नका मनु ख पमे भेटल िस नेही माय हमर नव कुa भ नहेली।
मनक Rयागमे िV िव ध तापक कम;क हुलासमे अपन गव;क अपन मनोरथ परक सुख लेल आजीवन ओ डुमौने रहली
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माय हमर नव कुa भ नहेली।
छिठ पाबैन सबहक केरा सबहक नािरयल सबहक ठकुआ ए¹ेरंग सबहक मनमे भित-भावना ठकुए सन छै ए¹ेरंग सबहक ठकुआ ए¹ेरंग।
बcसक पिथया बcसक कोिनया मािटक िदया ए¹ेरंग मोट हौउ वा हौउ ओ पातर सबहक मुड़ै ए¹ेरंग सबहक ठकुआ...।
अâुआ-सुथनी, हरदी-आदी सेब-समतोला ए¹ेरंग नवका साड़ी नवका धोती भुवन भा´कर ए¹ेरंग सबहक ठकुआ...।
पोखिर हो िक कछेर धार केर आँगनक पोखिर ए¹ेरंग सभठाम पािनमे ठाढ पबनैितन सबहक वÇत छिIह ए¹ेरंग सबहक ठकुआ...।
सबहक अँगना गोबरे नीपल नेना-भुटका ए¹ेरंग सभक छिठ परमेशरी देिथन
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अिभलािषत वर ए¹ेरंग सबहक ठकुआ ए¹ेरंग।
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डॉ. िशवकुमार Rसाद िकछु अनुिदत काiय (मूल िहIदी रजनी छाबड़ा)- आगc (PAGHALAIT HIMKHAND Maithili translation of ‘PaighalteHimkhand’ An Anthology of Hindi Poems by Rajni Chhabra from H indi into Maithili by Dr. Sheo Kumar Prasad.)
बIहकी हाथ जोड़ने माथ झुकौने िसकुड़ल समटल सन ठाढ़ छल ओ िखड़कीसँ झरैत िकिरण लग अपन कलाकीित;क आगू िचVपट देखबैत छेलइ िितज छुवाक आसमे पoग भरैत उIमुत पाखी आर सोझामे िबनु पcिखक िचड़ए सन
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आहैत भाव नेने ओ िचVकार बIहक रािख चुकल छल अपन अनुभूितक क¯पना सaवेदना अपन कलाक संरक लग। q
की जािन िछतराएल छै अकासमे ऊँन सन मेघक गोला की जािन आइ परमतमो कोन गुण धुनमे लागल छिथ! q
पिरचय अIहारक अपन छातीमे समेटने जेना दीप बनबै छै अपन दीिपत पिरचय।
ओिहना अIतरमे अपन नोर नुकेने
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संसारक देमए पड़त माV अपन हँसी ।
अपन बेनाओं िजनगीक देमए पड़त अिहना नव पिरचय। q
हमर िदयारी सेहIताक बातीसँ जरेलहुँ एकटा िदयारी अहcक नाओं।
लाखक लाख िदयारी अहcक िसनेहक अपनिह िझलिमला गेलइ। q
मनक बµ केबाड़ एिहसँ पिहने की अपन अधख·आ कचोट अहcक चकनाचूर कऽ िदए सगर िजनगी हँसबासँ कऽ िदए नचार फोिल िदयौ
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मनकेर केवाड़ आ िनकािल िदयौ अपन मनक िवषाद।
दरद तँ सभक हृदयमे रिहते छै दरदक पुरबे पु·षासँ सभक सaबIध छै िकछु अपनो कहू िकछु हमरो सुनू दरदक िमल जुिल सहू।
एिहसँ पिहने िक ओ बहैत बहैत बिन जाए भोकµर िसनेहक मलहमसँ क ओकरा फराक िसनेहक अमृत पटा सुख दुख िलअ बcिट मनक संग जीवन िसनेहसँ क पूर फोिल िदयौ मनक बµ केबार आ िबषाद क दूर। q
घा मन आ आँिखक बीच बड़ गहॴर नाता छै मनक घा
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आँिखक नोरे बिन ने बहै छै। q
बहुत अिछ एक गोट सपना िनgतेज आँिखक लेल।
एकटा िससकी िनःशद ठोरक लेल।
एकटा िचÊपी फाटल छातीक िसबाक लेल।
बहुत छै एतेक समान हमरा जीबा लेल। q
बौआइत मन बौआइत मनक जखन िजनगीक कोनो अनभुआर रgतापर अपन मनक संगी
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िमल जाइ छै,
तँ ओकर चाह रहै छै किहयो निह कै ओ रgता एक एक ण बिन जाए जुग सन याVा अिहना चलैत रहए चलैत रहए जुग जुगाIतर धिर। q
अहc िबनु अहc िबनु िहरदे एना बेकल रहैत अिछ जे िदन उिगते सcझ िबतबाक बाट ताकए लगै छी। q
केकरा िचIता रहै छै केकरा िचIता रहै छै िबहािड़क बड़का अIहरक पछाइत।
सभटा दुख छोट भऽ जाइ छै कोनो बड़का िबपैत एलाक पछाइत। q
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सIतोषमे ओ सुआद केतऽ! सIतोषमे ओ केतऽ पाबी जे बेकलतामे सुआद छै सनकल बेकलतेसँ भेटए सदैत सफलता छै।
सIतोष जँ ठेकान तँ रgता बेकलता छै। q
ऐ रचनापर अपन मंतiय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। राजेश मोहन झा "गुंजन " िकनकर िवकास ? (पूंजीवाद िक सव;हारा) (याVीजी "बाबा नागाजु;न " कo जIम िदन पर ) सभ िकछु िबकाय त' चाने कo कीिन लेल चमकैत धरा केर इजोिरया के छीिन लेल। सोती कo सोिख ओ पािन बेचै छिथ बटुआ रहै भरल एतबिह बूझै छिथ अपन िदन महमह क' दोसर के दुिद;न देल। रस हुनक िहgसा हम आंठी चूसै छी भाग िविध सँ भेटय
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जानै सूनै छी हे िवधना तोहूं िबकैलह तोरो हम चीिIह लेल। सव;हारा तोरा ढ़ौआ केर मिहमाक Öान निह तंV बंदूक काIह पड़ल छूटय से भान निह लोकतंVी फसील मे तॲ भूgसे छo बूिझ ले। भूgसा! हp भूgसा! मशीन वा डpग सँ कूटतौ ओसयतौ चैतक सूखल पछबा मे तोरा उड़ैयतौ ढ़ेिर भ' खिरहान मे कोनो आश मे रहबo त अपन मुख बरदक भूख तोरे सँ मेटयतौ घूर मे जरयतौ सव;हारा छo तोरा पर Rदूषण-कलंक लगैतौ। ********
ऐ रचनापर अपन मंतiय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। िवदेह नूतन अंक बालानp कृते राजेश मोहन झा "गुंजन " गाछक गोहािर (िवr पयWवरण िदवस पर )
Rाण वायु संग ममता आंचर छpह प मे दैत छी
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कहू बदला मनुख अहp सँ हम िकछु मpगैत छी? हाथ कािट चूिâ जरयलहुं पात कािट क' चार छरैलहुं एतबहु पर संतोष निह जे चिढ क' शीष काटैत छी। देखू धरती केर प बदिल गेल सनीर सरोवर सूिख गेल जीवन जल बूµी हाट िबकाय "शु¸ जल" कीिन पीबैत छी। बाबा िसनेहक रोपल छलहुं सूिख गेल काया वृ¸ भेलहुं अहcक नेना केर मुिgक देिख मिर मिर हम जीबैत छी। आबहु सुधिर जाऊ हे मानव गाछ रोपल जाऊ हे मानव िवलोिपत वोन बरखा निह होयत एते त' अहूं बूझैत छी, हे सुनू एतबिह हम चाहैत छी,।। ******* राजेश मोहन झा "गुंजन"
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आगcक अंक
िवदेह "नेपालक वत;मान मैिथली सािहQय" िवषयक िवशेषpक िनकालबाक नेयार केलक अिछ जकर संयोजक fी िदनेश यादव जी रहता।
िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com
Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५२ म अंक १५ जून २०१८ (वषᭅ ११ मास १२६ अंक २५२ ) मानुषीिमह सं᭭कृताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 58
अइ िवशेषpकमे नेपालक वत;मान मैिथली सािहQय केर मू¯यpकन रहत। अइ िवशेषpक लेल सभ िवधाक आलोचना-समीा-समालोचना आिद Rgतािवत अिछ। समय-सीमा िकछु नै जिहया पूरा आलेख आिब जेतै तिहये, उaमेद अिछ िवदेहक ई Rयास दूनू पायापर एकटा पूल जर बनाएत। िवदेह Ïारा संचािलत "आमंिVत रचनापर आमंिVत आलोचकक िटÊपणी" शृंखलाक दोसर भागक घोषणा कएल जा रहल अिछ। दोसर भागमे अइ बेर नीलमाधव चौधरी जीक रचना आमंिVत कएल जा रहल अिछ आ नीलमाधवजीक रचना ओ रचनाधिम;तापर िटÊपणी करबा लेल कैलाश कुमार िमfजीक आमंिVत कएल जा रहल छिन। दूनू गोटाक औपचािरक सूचना जि¯दये पठाओल जाएत। रचनाकारक रचना ओ आलोचकक आलोचना जखने आिब जाएत ओकर अिगला अंकमे ई Rकािशत कएल जाएत।
अइ शृंखलाक पिहल भाग कािमनीजीक रचनापर छल आ िटÊपणीकतW मधुकpत झाजी छलाह।
जेना की सभ गोटा जनै छी जे िवदेह २०१५ मे तीन टा िवशेषpक तीन सािहQयकारपर Rकािशत केलक जकर मापदंड छल सालमे दूटा िवशेषpक जीिवत सािहQयकारक उपर रहत जइमे एकटा ६०-७० वा ओइसँ बेसी सालक सािहQयकार रहता तँ दोसर ४०-५० सालक ( मैिथली सािहQयकार मने भारत आ नेपाल दूनूक)। ऐ ¡ममे अरिवIद ठाकुर ओ जगदीश चंK ठाकुर "अिनल"जीपर िवशेषpक िनकिल चुकल अिछ। आगूक िवशेषpक िकनकापर हुअए तइ लेल एक मास पिहनेसँ पाठकक सुझाव मcगल गेल छल। पाठकक सुझाव आएल आ ओइ सुझाव अंतग;त िवदेहक िकछु अिगला िवशेषpक परमेrर कापिड़, वीरेIK मि¯लक आ कमला चौधरी पर रहत। हमर सबहक Rयास रहत जे ई िवशेषpक सभ २०१८ मे Rकािशत हुअए मुदा ई रचनाक उपलधतापर िनभ;र करत। मने रचनाक उपलधताक िहसाबसँ समए ऊपर-िन¥चा भऽ सकैए। सभ गोटासँ आ²ह जे ओ अपन-अपन रचना editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा दी।
िवदेहक िकछु िवशेषpक :- १) हाइकू िवशेषpक १२ म अंक , १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल िवशेषpक २१ म अंक , १ नवaबर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) िवहिन कथा िवशेषpक ६७ म अंक , १ अटूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha _01_10_2010_Tirhuta 67
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४) बाल सािहQय िवशेषpक ७० म अंक , १५ नवaबर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक िवशेषpक ७२ म अंक १५ िदसaबर २०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12 _2010_Tirhuta 72 ६) नारी िवशेषpक ७७म अंक ०१ माच; २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) बाल गजल िवशेषpक िवदेहक अंक १११ म अंक , १ अगgत २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 11 1 ८) भित गजल िवशेषpक १२६ म अंक , १५ माच; २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समीा िवशेषpक १४२ म, अंक १५ नवaबर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 १० ) काशीकpत िमf मधुप िवशेषpक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरिवIद ठाकुर िवशेषpक १८९ म अंक १ नवaबर २०१५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश चIK ठाकुर अिनल िवशेषpक १९१ म अंक १ िदसaबर २०१५ Videha_01_12_2015 १३ ) िवदेह सaमान िवशेषाक- २००म अक १५ अRैल २०१६ / २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016
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१४ ) मैिथली सी.डी./ अ¯बम गीत संगीत िवशेषpक - २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंिVत रचनापर आम ंिVत आलोचकक िटÊपणीक शृंखला १. कािमनीक पpच टा किवता आ ओइपर मधुकाIत झाक िटÊपणी VIDEHA 209th issue िवदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 जगदीश Rसाद मXडल जीक ६५ टा पोथीक नव संgकरण िवदेहक २३३ सँ २५० धिरक अंकमे धारावािहक Rकाशन नीचcक िलंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018
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Videha_15_04_2018
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िवदेह ई -पिVकाक बीछल रचनाक संग - मैिथलीक सव;fे रचनाक एकटा समानाIतर संकलन िवदेह :सदेह :२ (मैिथली RबIध -िनबIध -समालोचना २००९ -१० ) िवदेह :सदेह :३ (मैिथली पD २००९ -१० )
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िवदेह :सदेह :४ (मैिथली कथा २००९ -१० ) िवदेह मैिथली िवहिन कथा [ िवदेह सदेह ५ ] िवदेह मैिथली लघुकथा [ िवदेह सदेह ६ ] िवदेह मैिथली पD [ िवदेह सदेह ७ ] िवदेह मैिथली नाìय उQसव [ िवदेह सदेह ८ ] िवदेह मैिथली िशशु उQसव [ िवदेह सदेह ९ ] िवदेह मैिथली R बIध -िनबIध -समालोचना [ िवदेह सदेह १० ] The readers of English translations of Maithili Nove l "sahasrabadhani " and verse collection "sahasrabdik chaupar par " has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Ma ithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works i n English himself . After these translations are complete these would be the offici al translations authorised by the Author of original work .-Editor Maithili Books can be downloaded fr om: https://sites.google.com/a/videha.com/videha -pothi/ Maithili Books can be purchased from: http://www.amazon.in/ For the first time Maithili book s can be read on kindle e -readers. Buy Maithili Books in Kindle format (courtesy Videha) from amazo n kindle stores, these e books are delivered worldwide wirelessly: - http://www.amazon.com/ िवदेह सaमान : सaमान-सूची
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मैिथली सािहQय आIदोलन (c)2004-18. सवWिधकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अ िछ ततऽ संपादकाधीन। िवदेह- Rथममैिथली पािक ई-पिVका ISSN 2229-547X VIDEHA सaपादक: गजेIK ठाकुर। सह-सaपादक: उमेश मंडल। सहायक सaपादक: राम िव लास साहु, नIद िवलास राय, सIदीप कुमार साफी आ मुµाजी (मनोज कुमार कण;)। सaपादक- नाटक-रंगमंच-चलिचV- बेचन ठाकुर। सaपादक- सूचना-सaपक;-समाद- पूनम मंडल। सaपादक- अनुवाद िवभाग- िवनीत उQपल।
रचनाकार अपन मौिलक आ अRकािशत रचना (जकर मौिलकताक संपूण; उरदाियQव लेखक गणक मय छिIह) editorial.staff.videha@gmail.com क मेल अटैचम ेXटक पमे .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉमîटमे पठा सकै छिथ। रचनाक संग रचनाकार अपन संिÊत पिरचयआ अपन gकैन कएल गेल फोटो पठेता, से आशा करै छी। रचनाक अंतमे टाइप रहए, जे ई रचना मौिलक अिछ, आ पिहल Rकाशनक हेतु िवदेह (पािक) ई पिVकाक देल जा रहलअिछ। एतऽ Rकािशत रचना सभक कॉपीराइट लेखक/सं²हकW लोकिनक लगमे रहतिIह, माV एकर Rथम Rकाशनक/ िRंट-वेब आकWइवक/ आकWइवक अनुवादक आ आकWइवक ई-Rकाशन/ िRंट-Rकाशनक अिधकार ऐ ई-पिVकाक छै, आ से हािन-लाभ रिहत आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊय¯टीक/ पािरfिमकक Rावधान नै छै। त रॉय¯टीक/ पािरfिमकक इ¥छुक िवदेहसँ नै जुड़िथ, स े आ²ह। ऐ ई पिVकाक fीमित ल£मीठाकुर Ïारा मासक ०१ आ १५ ितिथक ई Rकािशत कएल जाइत अिछ। (c) 2004-18 सवWिधकार सुरित। िवदेहमे Rकािशत सभटा रचना आ आकWइवक सवWिधकार रचनाकार आ सं²हकW लगमे छिIह। ५ जुलाई २००४ कhttp://gajendrathakur.blogspot.com/2 004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसिरक गाछ”- मैिथली जालवृसँ Rारaभ इंटरनेटपर मैिथलीक Rथम उपिgथितक याVा “’िवदेह’- Rथम मैिथली पािक ई पिVका” धिर पहुँचल अिछ,जे http://www.videha.co.in/ पर ई Rकािशत होइत अिछ। आब “भालसिरक गाछ”जालवृ 'िवदेह' ई-पिVकाक Rवताक संग मैिथली भाषाक जालवृक ए²ीगेटरक पमे Rयुत भऽ रहल अिछ। िवदेह ई-पिVका ISSN 2229-547X VIDEHA िसि¸रgतु