VIDEHA — Issue 253 / अंक २५३

Publication: VIDEHA · Issue: 253
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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 1

ISSN 2229-547X VIDEHA 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वष> ११ मास १२७ अंक २५३ )

िव दे ह िवदेह Videha িবেদহ http://www.videha.co.in िवदेह Eथम मैिथली पािJक ई पिLका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह Eथम मैिथली पािJक ई पिLका नव अंक देखबाक लेल पृR सभकT िरVेश कए देखू। ऐ अंकमे अिछ:- १. संपादकीय संदेश

२. ग_ २.१.१.आशीष अनिचbहार- आधुिनक मैिथली गजलक संिJdत आलोचनाgमक पिरचय २.उमेश मiडल-सगर राित दीप जरय- ९८म कथा गोRी- िसमरा (झंझारपुर) २.१.उमेश मiडल- बीहैन कथा- िभनसुरका गप-सप २.रबीbm नारयण िमoक िकछु लघुकथा २.३.जगदीश Eसाद मiडलक २ टा लघुकथा २.४.१. जगदीश Eसाद मiडल- पंगु (उपbयास)- आगs २.रबीbm नारायण िमo- नमtतtयै (उपbयास)- आगs

३. पद ◌्य ३.१. उमेश पासवानक िकछु किव त◌ा ३.२.Eीतम कुमार िनषादक िकछु किवता ३.३.डॉ. िशवकुमार Eसाद- िकछु किवत◌ा ३.४.डॉ. िशवकुमार Eसादक िकछु अनुिदत काxय (रजनी छाबड़ाक मूल िहbदीसँ)

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संपादकीय सािहgय अकादमी, िदŒली मैिथली लेल ऐ बेका युवा सािहgय पुरtकार oी उमेश पासवान जी कT हुनकर २०१२ मे Eकािशत प_ संŽह "विण>त रस’ पर देबाक िनण>य लेलक अिछ। िनण>य िवलि‘बत मुदा tवागत यो’य अिछ। https://dbb13891 -a-96a2f0ab -s -sites.googlegroups.com/a/videha.com/videha - pothi/Home/UmeshPaswan.pdf?attachauth=ANoY7coRlGM02 SpW8rbrtLhu4Nv4f7F4v tyo56SmjrOoRMDSi9nHhMV9uqV0mwLzGsgdjK - R2HKNiVvSkqvqdJUXDR4Q5zlGEZ7PfHHEaiD9LFLEjz2sIC8F7p yCruDc0J4T3NS0zb 1RSoLfQ nCONbYP7XRoG3Pn1fr8Ol8w2644nsB5Qfz5Edz1dw9DqNLUdQ6X - yQM3XUI0i3P31bUMqOlaD_EkRdzQQ%3D%3D&attredirects=0 http://sahitya -akademi.gov.in/sahitya -akademi/pdf/Pressrelease _YP -2018.pdf सािहgय अकादमीक मैिथलीक नव परामश>दाLी सिमित आ जूरी संकीण>तासँ बाहर एबामे सफल भेल, तइ लेल धbयवादक पाL अिछ। डॊ. Eेम मोहन िमo नव परामश>दाLी सिमितक अ¥यJ छिथ, मैिथलीक नै वरन् रसायनशाtLक Eोफेसर छिथ, से मेिडयोकर नै छिथ। मुदा असली परीJाक पिरणाम सािहgय अकादमीक मैिथलीक मूल पुरtकार देबा काल सोझs आएत, जखन पता लागत जे नव परामश>दाLी सिमित टी.एन. शेषन बनल आिक फेर भोथला गेल आ िपछला ५० सालसँ जे होइत रहल ओही रtतापर चलऽ लागल।

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बी.बी.सी. क िहbदी िवभागमे ऐ पुरtकारक चच„ भेल तँ संगमे दिलत bयूजमे सेहो आ अरिवbद दास सेहो ऐपर िलखलिbह: https://www.bbc.com/hindi/india -44635012 http://www.dalitdastak.com/yuva -sahitya -akademi -awardee -2018 -maithili-poet -umesh - paswan -latest -news -story -literature/ https://www.thelallantop.com/bherant/dr -arvind -das -writes -about -a-maithili-poet - umesh -paswan -who -is -a-watchman -in -madhubani/ मुदा ऐसँ िवपरीत मैिथलीक िकछु युवा आ अधवयसु सािहgयकारक िटdपणी सोचबापर िववश केलक जे २१म शता¨दीयो मे िहनकर सभक सोच कतेक पाछू छिbह। मुदा ऐ तरहक लोकक सं©या नगiय अिछ, से खुशीक गप। .......................................................................................................................................... ........................................................................

२. ग_ २.१.१.आशीष अनिचbहार- आधुिनक मैिथली गजलक संिJdत आलोचनाgमक पिरचय २.उमेश मiडल-सगर राित दीप जरय- ९८म कथा गोRी- िसमरा (झंझारपुर) २.१.उमेश मiडल- बीहैन कथा- िभनसुरका गप-सप २.रबीbm नारयण िमoक िकछु लघुकथा २.३.जगदीश Eसाद मiडलक २ टा लघुकथा २.४.१. जगदीश Eसाद मiडल- पंगु (उपbयास)- आगs २.रबीbm नारायण िमo- नमtतtयै (उपbयास)- आगs १.आशीष अनिचbहार - आधुिनक मैिथली गजलक संिJdत आलोचनाgमक पिरचय २.उमेश मiडल -सगर राित दीप जरय - ९८ म कथा गोRी- िसमरा (झंझारपुर ) १ आशीष अनिचbहार आधुिनक मैिथली गजलक संिJdत आलोचनाgमक पिरचय Etतुत आलेख हम मैिथली गजलपर िलखने छी। वत>मान शोधकT मानी तँ आब मैिथली गजल लगभग112 बख>क भऽ गेल अिछ। एिह 112 बख>मे मैिथली गजलमे बहुत रास Eयोग आ tथापना भेलै तकरे िनªपण करब एिह लेखक उ_े«य अिछ। एिह लेखकT पढ़बासँ पिहने िकछु त­य सामने रािख दी जािहसँ मैिथली गजलक सभ Eयोग आ tथापनाकT अहs सभ नीक जकs परिख सकब--

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1) गजल लेल बहर ओ कािफया अिनवाय> छै (बहरक पालनमे िकछु छूट सेहो भेटै छै गजलकारकT मुदा धेआन राखू जे बहरमे िलखते नै छिथ हुनका लेल ई छूट कोन काजक)। पं.जीवन झासँ आधुिनक मैिथलीक गजलक जbम मानल जाइत अिछ आ tवाभािवक छै जे पिहल चीजमे सही आ गलत दूनू तgव रहै छै तँइ पं.जीक िकछु गजलमे बहर ओ कािफयाक नीक Eयोग भेटत तँ िकछु गजल गीत जकs भेटत। मुदा तकर बाद किववर सीताराम झा आ काशीक®त िमo मधुपजी मैिथलीक गजलक भार उठेला आ मैिथली गजलकT िवtतार देला। किववर आ मधुपजीक गजल सभ पूण>ªपेण बहर ओ कािफयासँ सजल अिछ। िहनक दूनूक गजल यथाथ>मे मैिथली गजल अिछ (भाषा मैिथलीक आ गजल xयाकरणकT मैिथलीक अनुªप देल गेल अिछ)। किववरजी आ मधुपजी दूनू क‘मे गजल िलखलाह मुदा हमरा जनैत ई गजल सभ xयाकरणयु°त आधुिनक मैिथली गजलक पृRभूिम अिछ। 2) लगभग 1970-75सँ मैिथली गजल ओहन धाराक लोक सभहँक हाथमे आिब गेल जे िक गजल बारेमे िकछु नै जनैत छलाह। ओ माL दू पsितक बहर-कािफयाहीन पsित सभसँ बनल किवताकT गजल कहए लगलाह। कोनो िवधामे Eयोग खराप नै छै मुदा पाठककT ±िमत कए कऽ कएल Eयोग हािनकारक होइत छै। एिह धाराक लोक सभ कहैत छलाह गजलमे कोनो िनयम नै होइत छै। िकछु गोटे कहैत छलखिन जे मैिथलीमे गजल भैए ने सकैए। जखन िक हुनका सभसँ पिहनेह² किववर आ मधुपजी xयाकरणयु°त गजल लीिख चुकल छलाह। उपरेमे कहने छी जे एिह धाराक लोक सभकT गजलक ³ान नै छलिन संगे-संग िहनका सभकT मैिथली गजलक इितहासक बारेमे सेहो पता नै छलिन अbयथा "गजलमे कोनो िनयम नै होइ छै" वा " मैिथलीमे गजल िलखले नै जा सकैए" एहन-एहन बयान देबासँ पिहने ओ सभ जªर पं.जीवन झा, किववर सीताराम झा, काशीक®त िमo मधुपजीक गजलमे Eयोग भेल िनयम सभकT जªर देिखतिथ। 3) एिह आलेखमे हम दूनू धाराक उŒलेख करब। दूनू धाराक गजलमे की-की अंतर अिछ, दूनू धाराक गजलमे कोन-कोन काज भेल अिछ। दूनू धाराक की कमजोरी अिछ। दूनू धाराक Eितिनिध गजलकार सभहँक िकछु शेर सभ सेहो हम देब। मैिथलीमे xयाकरणयु°त धारा पिहनेसँ अिछ तँ पिहने ओकरे वण>न हएत बादमे िबना xयाकरण बला धाराक। जे गजलक िनयम पालन नै करै छिथ हुनकर कहब छिन जे xयाकरणसँ िवचार ओ भाव बbहा जाइ छै (ई मोन राखू जे एहन कहए बला लोक सभ माL सा‘यवादी वा किथत Eगितशील भावक बात करै छिथ)। हम एिह लेखमे xयाकरणयु°त गजल सभहँक उदाहरण दैत सािबत करब जे कोना xयाकरणसँ भाव िक िवचार आिद पु´ होइत छै। 4) मैिथली गजल मने ओ गजल जे िक मैिथलीमे िलखल गेल चाहे ओकर देश कोनो िकएक ने हो। 5) एिह आलेखक सभ त­य हमर पोथी "मैिथली गजलक xयाकरण ओ इितहास"मे आिब चुकल अिछ जकरा हम एिहठाम Eसंगक िहसाब² पुनलµखन केलहुँ अिछ। आधुिनक मैिथली गजलक इितहास मैिथलीमे गजल उदू> भाषाक मा¥यम² आएल। उदू>मे फारसीसँ आ फारसीमे अरबीसँ। पं.जीवन झा (जbम आ मृgयुः 1848-1912) अपन नाटक "सुbदर संयोग" आ "सामवती पुनज>bम"मे पिहल बेर गजल िलखलाह। सुbदर संयोग 1905 इ.मे Eकािशत भेल छल। तकर बाद किववर सीताराम झा (जbम 1891 ई.मे तथा िनधन 1975 ई) गजल िलखलाह। किववरजीक "जगत मे थािक जगद‘बे अिहंक पथ आिब बैसल छी" ई गजल 1928मे Eकािशत किववर सीताराम झा जीक " सूि°त सुधा ( Eथम िबंदु )मे संŽहीत अिछ।

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काशीक®त िमo मधुप (जbम-मृgयुः 1906-1987) "िमिथलाक पूव> गौरव निह ¥यान टा धरै छी" नामक गजल िलखलाह जे िक 1932मे मैिथली सािहgय सिमित, ¸ारा काशीसँ "मैिथली-संदेश" नामक पिLकामे Eकािशत भेल। xयाकरणयु°त आधुिनक मैिथली गजलक इितहास पं.जीवन झाजीसँ एिह धाराक शुआत भेल आ तकर बाद किववर सीताराम झा, काशीक®त िमo मधुप, योगानंद हीरा, जगदीश चbm ठाकुर "अिनल", िवजय नाथ झा, गजेbm ठाकुर, मु¹ाजी, शािbतलºमी चौधरी, ओमEकाश झा, अिमत िमo, जगदानbद झा मनु,, कुbदन कुमार कण>, oीमती इरा मिŒलक, राम कुमार िमo, नीरज कुमार कण>, Eदीप पु»प, राजीव रंजन िमoा, चंदन कुमार झा आिद भेलिथ। एिह धाराक अंतग>त सरल वािण>क बहरमे लीखए बला िकछु गजलकार एना छिथ-- इरा मिŒलक, सुनील कुमार झा, पंकज चौधरी नवल oी, िमिहर झा, अिनल मिŒलक, दीप नारायण िव_ाथ¼,Eवीन नारायण चौधरी Eतीक, भावना नवीन, रिव िमoा भार¸ाज, अजय ठाकुर मोहन, Eभात राय भ½, सुिमत िमoा "गुंजन" आिद। एिह ठाम tप´ करब बेसी जªरी जे सरल वािण>क बहर माL आरंिभक अनुशासन लेल अिछ। एकर उ_े«य ई अिछ जे पिहने गजलकार हŒलुकसँ सीखिथ आ तकर बाद गजलक मूल बहरपर जािथ। ओना ई कहबामे हमरा कोनो संकोच नै जे बहुतो िबना xयाकरण बला गजलकार सभसँ नीक ई सरल वािण>क बला गजलकार सभ लीखै छिथ। सरल वािण>क बहर मूल वैिदक छंद अिछ जािहमे गजलक हरेक पsितमे अJरक सं©या एक समान देल जाइ छै जखन िक गजलक मूल बहर वण>वृत अिछ जािहमे गजलक हरेक पsितक माLा¾म एक समान रहै छै मने हरेक पsितक लघुकT िन¿चा लघु आ दीघ>क िन¿चा दीघ>। उपरक नाम सभहँक अलावे हम अपने xयाकरणयु°त गजलक समथ>क छी आ िकछु गजल सेहो लीिख/किह लै छी। xयाकरणयु°त आधुिनक मैिथली गजलमे भेल काज 1905सँ लगातार xयाकरणयु°त िलखाइत रहल आ 11/4/2008कT “अनिचbहार आखर” नामक ¨लाग इंटरनेटपर आएल। एकरा एिह िलंकपर देखल जा सकैए https://anchinharakharkolkata .blogspot.in/ । अनिचbहार आखर केर छोटका नाम " अ-आ " राखल गेल अिछ। ई ¨लाग हमरा ¸ारा शुª कएल गेल छल आ समय-समयपर आन-आन गजलकार सभकT जोड़ल गेल। वत>मानमे ई ¨लाग हमरा आ गजेbm ठाकुर ¸ारा संपािदत भऽ रहल अिछ तँ देखी xयाकरणयु°त आधुिनक मैिथली गजल लेल भेल िकछु एहन काज जे अ.आ ¸ारा भेल --- 1) अ-आ िEंट वा इंटरनेटपर पिहल उपिtथित अिछ जे की माL आ माL गजल एवं गजल अधािरत िवधापर केिbmत अिछ। 2) अ-आ केर आŽहपर oी गजेbm ठाकुर जी गजलशाtL िलखला जे की मैिथलीक पिहल गजलशाtL भेल। एही गजलशाtLमे ठाकुरजी सरल वािण>क बहरक जbम देलाह। 3) अ-आ ¸ारा "गजल कमला-कोसी-बागमती-महानbदा स‘मान" केर शुªआत भेल। जे की tवतbL ªप² गजल िवधा लेल पिहल स‘मान अिछ।

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4) अ-आ केर ई सौभा’य छै जे ओ मैिथली बाल गजल नामक नव िवधाकT जbम देलक आ ओकर पोषण केलक। मैिथली भि°त गजल सेहो अ-आ केर देन अिछ। िवदेहक अ 111 पूण> ªपेण बाल-गजल िवशेष®क अिछ आ अ 126 भि°त गजल िवशेष®क। 5) बख> 2008 आ 2015 मsझ करीब 30टासँ बेसी गजलकार मैिथली गजलमे एलाह। ई गजलकार सभ पिहनेसँ गजल नै िलखै छलाह। संगे-संग करीब 6-7टा गजल समीJक-आलोचक सेहो एलाह। 6) पिहल बेर मैिथली गजलक JेLमे एकै बेर करीब 16-17 टा आलोचना िलखाएल। 7) अ-आ मैिथली गजलकT िवÃिव_ालय ओ यू.पी.एस. सी एवं बी.पी.एस. सीमे tथान िदएबाक अिभयान चलौने अिछ आ एकटा माडल िसलेबस सेहो बना कऽ Etतुत केने अिछ। 8) अ-आ प. जीवन झा जीक मृgयु केर अंŽेजी तारीख पता लगा ओकरा गजल िदवस मनेबाक अिभयान चलौने अिछ। 9) अ-आ 1905सँ लऽ कऽ 2013 धिरक गजल सÄÅहक सूची एकÆा ओ Eकािशत केलक (xयाकरणयु°त एवं xयाकरणहीन दूनू)। 10) अ-आ अिधक®श गजलकारक (xयाकरण यु°त एवं xयाकरणहीन दूनू) संिJdत पिरचय Etतुत केलक। 11) अ-आ 62 खiडमे गजलक इtकूल नामक oृखंला चलौलक जे की समाbय पाठकसँ लऽ कऽ गजलकार धिर लेल समान ªपसँ उपयोगी अिछ। 12) अ-आ मैिथलीमे पिहल बेर आन-लाइन मोशयाराक आर‘भ केलक आ ई बेस लोकिEय भेल। 13) मैिथली गजल आ अbय भारतीय भाषाक गजल बीच संबंध बनेबाक लेल "िवà गजलकार पिरचय शृखंला" शुª कएल गेल। 14) एखन धिर अ.आ केर मा¥यम² मैिथली गजलमे गजल-1386, बाइ-417, बाल गजल 207, बाल बाइ-47, भि°त गजल-47, हजल-21, आलोचना-28, कसीदा-3, नात-2, बंद-4,भि°त बाइ-1, मािहया-2, देल जा चुकल अिछ। जतेक गजलकार अ.आ केर मा¥यम² आएल छिथ हुनका सभ ¸ारा रिचत गजलक सं©या जोड़ल जाए तँ लगभग 3000 गजलक सं©या पहुँचत। अनिचbहार आखरक एही काज सभकT देखैत मैिथली गजलक पिहल अªजी गजेbm ठाकुर 2008क बाद सँ लऽ कऽ वत>मान कालखंडकT "अनिचbहार युग" केर नाम देलाह (1905सँ लऽ कऽ 2007 धिरक कालखंडकT गजेbmजी आधुिनक मैिथलीक पिहल गजलकार जीवन झाजीक नामपर "जीवन युग" नाम देलाह)।

मैिथली गजलमे िवदेह केर योगदान िवदेह इंटरनेटक EिसÇ मैिथली पिLका अिछ जे िक गजेbm ठाकुरजी ¸ारा संचािलत अिछ आ हरेक मासक 1 आ 15 तारीखकT Eकािशत होइत अिछ। एकरा एिह िलंकपर देखल जा सकैए http://videha.co.in/ िवदेहक िकछु एहन काज जै िबना आधुिनक xयाकरणयु°त मैिथली गजलक उgथान स‘भव नै छल-- 1) िवदेहक 21म अंक (1 नव‘बर 2008)मे राजेbm िवमल जीक 2 टा गजल अिछ। राम भरोस कापिड़ ±मर आ रोशन जनकपुरी जीक 11 टा गजल अिछ। संगे-संग धीरेbm Eेमिष> जीक 1 टा आलेख मैिथलीमे

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गजल आ एकर संरचना। अिछ संगे-संग ऐ आलेखक संग 1 टा गजल सेहो अिछ Eेमिष> जीक। िवदेहक ऐ अंकमे कतहुँ ई नै फिड़छाएल अिछ जे ई गजल िवशेष®क िथक मुदा िवदेहक ऐसँ पिहनुक अंक सभमे गजलक माद² हम कोनो तेहन िवtतार नै पबै छी तँए हम एही अंककT िवदेहक गजल िवशेष®क मानलहुँ अिछ। 2) िवदेहक अंक 96 (15 िदस‘बर 2011)मे मु¹ाजी ¸ारा गजल पर पिहल पिरचच„ भेल। ऐ पिरचच„क शीष>क छल मैिथली गजल: उgपिŠ आ िवकास (tवªप आ स‘भावना)। ऐमे भाग लेलिथ िसयाराम झा सरस, गंगेश गुंजन, Eेमचंद पंकज, शेफािलका वम„, िमिहर झा ओमEकाश झा, आशीष अनिचbहार आ गजेbm ठाकुर भाग लेलिथ। ऐकT अितिर°त राजेbm िवमल, मंजर सुलेमान ऐ दूनू गोटाक पूव>Eकािशत लेखक भाग, धीरेbm Eेमिष>जीक पूव> Eकािशत लेख) सेहो अिछ। 3) िवदेहक अंक 111 (1/8/2012) जे की बाल गजल िवशेष®क अिछ जािहमे कुल 16 टा गजलकारक कुल 93 टा बाल गजल आएल। 4) िवदेहक 15 माच> 2013 बला 126म अंक भि°त गजल िवशेष®क छै। 5) 15 नव‘बर 2013कT िवदेहक 142म अंक "गजल आलोचना-समालोचना-समीJा" िवशेष®क छल। एिह सभहँक अलावे िवदेह समय-समयपर िविभ¹ िवधाक गोRी करबैत रहल अिछ जािहमसँ एकटा गजल सेहो अिछ। आधुिनक xयाकरणयु°त मैिथली गजलक आलोचना आधुिनक xयाकरणयु°त गजल आलोचनाक बात करी तँ सभसँ पिहने रामदेव झा जी ¸ारा िलखल ओ रचना पिLकाक जून 1984मे Eकािशत ओिह लेख केर चच„ करए पड़त जकर शीष>क "मैिथलीमे गजल" छल। हमरा जनैत ई लेख ओिह समयक िहसाब² मैिथली गजल आलोचनाक सभ मापडंद पूरा करैत अिछ (वत>मान समयमे रामदेव झाक जीक पुL सभ एही आलेखसँ वत>मान गजलकT मापै छिथ आ ई हुनकर सीमा छिन। ईहो कहब उिचत जे वत>मान समयक िहसाब² ओ आलेख औसत tतरक अिछ मुदा एही कारणसँ एकर महgव कम नै भऽ जेतै)। ओना ई उŒलेखनीय जे ईहो आलेख गजलक िवधानकT ओझरा कऽ रािख देने अिछ कारण एिह लेखमे गजलक बहरकT मािLक जकs मानल गेल छै जे िक वtतुतः लेखक महोदय केर सीमा छिन। वण>वृत छंदमे हरेक पsितक माLाक जोड़ एकै अबै छै आ मािLक छंदमे सहो। हमरा जनैत रामदेव झा जी एहीठाम ±ममे फँिस गेलाह। वण>वृतमे लघु-गुª केर िनयत tथान होइत छै मुदा मािLक छंदमे लघुक tथानपर दीघ> सेहो आिब सकैए आ दीघ>क tथानपर लघु सेहो। मुदा गजलक बहर वण>वृत छै। तथािप कमसँ कम ओिह समयमे ई कहए बला िकयो सेहो भेलै जे गजलमे िवधान होइत छै आ सएह एिह आलेखक पिहल िवशेषता अिछ। एिह आलेखक दोसर िवशेषता ई जे रामदेव झाजी Eाचीन मैिथली गजलकार सभहँक नाम देने छिथ जे िक सभ गजलक इितहासकार ओ पाठक लेल उपयोगी अिछ। एिह आलेखक तेसर िवशेषता अिछ जे रामदेव झाजी tप´ tवरमे ओिह समयक बहुत रास किथत ¾®ितकारी गजलकार सभहँक गजलकT खािरज करै छिथ जे िक ओिह समयक िहसाबसँ बड़का िवtफोट छल। ई आलेख ततेक Eभावकारी भेल जे ओ समयक िबना xयाकरण बला गजलकार सभ िछलिमला गेलाह आ एिह आलेखक िवरोधमे िविभ¹ व°तxय सभ देबए लगलाह। उदाहरण लेल िसयाराम झा सरस, तारानंद िवयोगी, रमेश ओ देवशंकर नवीनजीक संपादनमे Eकािशत साझी गजल संकलन "लोकवेद आ लालिकला" (वष> 1990) केर कितपय लेख

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सभ देखल जा सकैए जािहमे रामदेव झाजी ओ हुनक tथापनाकT जिम कऽ आरोिपत कएल गेल अिछ। ओही संकलनमे देवशंकर नवीन अपन आलेख "मैिथली गजलःtवªप आ संभावना"मे िलखै छिथ जे "............पुनः डा. रामदेव झाक आलेख आएल। एिह िनबbध मे दू टा बात अनग>ल ई भेल जे गजलक पंि°त लेल छंद जकs माLा िनध„िरत करए लगलाह आ िकछु एहेन xयि°तक नाम मैिथली गजल मे जोिड़ देलिन जे किहयो गजल नै िलखलिन" आन लेख सभमे एहने बात सभ आन आन तरीकासँ कहल गेल अिछ। रामदेव झाजीक आलेखक बाद एहन आलेख नै आएल जािहमे गजलकT xयाकरण दृि´सँ देखल गेल हो कारण तािह समयक गजलपर किथत ¾®ितकारी गजलकार सभहँक क¨जा भऽ गेल छल। कोनो िवधा लेल आलोचना Eाण होइत छै तँइ "अनिचbहार आखर" अपन शुªआतेसँ आन काजक अितिर°त गजल आलोचनापर सेहो ¥यान क²िmत केलक आ मैिथली गजलक अपन आलोचक सभकT िचिÉत कऽ बेसी आलोचना िलखबेलक। आ एही कारणसँ मैिथली गजल आब ओहन आलोचक सभसँ मु°त अिछ जे िक मूलतः सािहgय केर आन िवधाक आलोचक छिथ आ किहयो काल गजलक आलोचना कऽ गजलपर एहसान करै छिथ। ई पsित िलखैत हमरा गव> अिछ जे मैिथली गजलकT आब छह-सात टासँ बेसी अपन आलोचक छै। अनिचbहार आखर जे-जे गजल आलोचना िलखबा कऽ Eकािशत करबेलक तकर िववरण एना अिछ---- 1) गजलक साºय (तारानंद िवयोगी जीक गजल संŽह केर आशीष अनिचbहार ¸ारा कएल गेल आलोचना) 2) बहुिपया रचनामे (अरिवbद ठकुर जीक गजल संŽह केर ओमEकाश जी ¸ारा कएल गेल आलोचना) 3) घोघ उठबैत गजल (िवभूित आनंद जीक गजल संŽह केर ओम Eकाश जी ¸ारा कएल गेल आलोचना) 4) िवदेहक 103म अंकमे Eकािशत Eेमचंद पंकजक दूटा गजलक समीJा जे की ओमEकाश जी केने छिथ 5) मु¹ाजीक गजल संŽह "मsझ आंगनमे कितआएल छी"- समीJक गजेbm ठाकुर 6) मैिथली गजल आ अभÆाकारी 7) अ³ानी संपादकक फेरमे मरैत गजल (घर-बाहर पिLकाक अEैल-जून 2012 अंकमे Eकािशत गजलक समीJा) 8) मैिथली बाल गजलक अवधारणा 9) कितआएल आखर (मु¹ा जीक गजल संŽह केर अिमत िमo जी ¸ारा कएल गेल आलोचना) 10) गजलक लेल (िवजयनाथ झा जीक गजल ओ गीत संŽह- अहीँक लेल के ओमEकाश जी ¸ारा कएल समीJा) 11) भोथ हिथयार (oी सुरेbm नाथ जीक गजल संŽह केर ओमEकाश जी ¸ारा कएल गेल आलोचना) 12) पहरा अधपहरा (बाबा बै_ानथ जीक गजल संŽह केर आशीष अनिचbहार ¸ारा कएल गेल आलोचना) 13) गजलक लहास (tव. कलानbद भ½जीक गजलसंŽह केरजगदानbद झा मनु ¸ारा कएल गेल आलोचना) 14) सूयÊदयसँ पिहने सूय„tत (राजेbm िवमल जीक गजल संŽहक आशीष अनिचbहार कएल गेल आलोचना) 15) बहुत िकछु बुझबैएः िकयो बूिझ ने सकल हमरा (ओमEकाशजीक गजल संŽहपर चंदन कुमार झाजीक आलोचना) 16) EितबÇ सािहgयकारक अEितबÇ गजल (िसयाराम झा सरसजीक गजल संŽहपर जगदीश चंm ठाकुर अिनलजीक आलोचना)

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17) अरिवbदजीक आजाद गजल (अरिवbद ठाकुरजीक गजल संŽहपर जगदीश चंm ठाकुर अिनलजीक आलोचना) 18) छË गजल (गंगेश गुंजनजीक गजल सन िकछुपर आशीष अनिचbहार ¸ारा कएल आलोचना) 19) कलंिकत चान (राम भरोस कापिड़ ±मरजीक गजल संŽहक आशीष अनिचbहार ¸ारा कएल आलोचना) 20) मैिथली गजल xयाकरणक शुªआती Eयोग (गजेbm ठाकुरजीक गजल संŽह "ध®िग बाट बनेबाक दाम अगूबार पेने छँ" केर आशीष अनिचbहार ¸ारा कएल आलोचना) 21) िचकनी मािटमे उपजल नागफेनी (रमेशजीक गजल संŽह "नागफेनी" केर आशीष अनिचbहार ¸ारा कएल आलोचना) 22) नवगछुलीक E®जल सरस रसाल: नव अंशु (अिमत िमo केर गजल संŽह "नव-अंशु" केर िशव कुमार झा"िटŒलू" ¸ारा कएल गेल समीJा) 23) िसयाराम जा सरस जीक गजल संŽह "शोिणताएल पैरक िनशान"पर कुंदन कुमार कण>जीक िटdपणी 24) oी जगदीश चbद ठाकुर ऽअिनलऽ जीक िलखल गजल संŽह "गजल गंगा" केर जगदानंद झा"मनु" ¸ारा कएल समीJा 25) मैिथली गजलक संसारमे अनिचbहार आखर (आशीष अनिचbहारक गजल संŽहक जगदीश चंm ठाकुर अिनलजी ¸ारा कएल आलोचना) 26) थोड़े मािट बेसी पािन (िसयाराम झा सरसजीक गजल संŽहपर कुंदन कुमार कण>जीक आलोचना) आधुिनक xयाकरणयु°त मैिथली गजलक िकछु उदाहरण एिह ठाम आब हम िकछु शेरक उादहरण देब आ एिहमे हम अरबी बहर जे िक गजलक मूल बहर अिछ आ सरल वािण>क बहर दूनूमे िलखल शेर सभ Etतुत करब। हम उदहारणमे सभ िवचार बला शेर राखब जािहसँ पाठक सहजिहं बुझता जे बहर-xयाकरण गजलक िवचारमे बाधक नै होइत छै। गजलक पिहल पsितमे जे माLा¾म रहै छै तकर ओ पूरा गजलमे पालन करब छंद वा बहरक िनव„ह केनाइ भेलै। ऐठाम हम tप´ करी जे मैिथलीक आधुिनक xयाकरणयु°त गजलकारक सं©या बहुत बेसी अिछ मुदा हम एिहठाम माL ओतबे गजलकारक शेर लेलहुँ अिछ जािह हमर उ_े«य पूरा भऽ जाए (उदाहरणमे आएल शेर सभ एकौ गजलक भऽ सकैए आ अलग अलग गजलक सेहो। संपादक महोदयसँ आŽह जे उदाहरणमे देलग गेल शेर सभहँक वत>नीकT यथावत् राखिथ)।-- पं जीवन झाजीक एकटा गजलमे विण>त िवरहक नीक िचLण देखू—

अनंÄ सbताप सॱ जरै छी अहsक िचbता जतै करै छी सखीक लाजे ततै मरै छी जतै कही वा जतै कहाबी एिह शेरक माL¾म 12+122+12+122+12+122+12+122 अिछ आ पूरा गजलमे एकर Eयोग भेल अिछ। झाजीक दोसर गजलक एकटा आर िवरहपरक शेर देखू—

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अहs सॲ भ²ट जिहआ भेल तेखन सॲ िवकल हम छी उठैत अbधार होइए काज सब करबामे अJम छी एिह शेरक माLा¾म 1222+1222+1222+1222 अिछ आ पूरा गजलमे एकर Eयोग भेल अिछ। उपरक एिह तीन टा उदाहरणसँ tप´ अिछ जे पं. जीवन झाजी मैिथली गजल आ गजलक xयाकरणक बीच नीक ताल-मेल रखने छलाह। फेर हुनक तेसर शेरक एकटा आरो शेर देखू जे िक Eेममे पड़ल नायक-नाियका मनोभाव अिछ-- पड़ैए बूिझ िकछु ने ¥यानमे हम भेल पागल छी चलै छी ठाढ़ छी बैसल छी सूतल छी िक जागल छी एिह शेरक माLा¾म 1222+1222+1222+1222 अिछ आ पूरा गजलमे एकर Eयोग भेल अिछ। किववर सीताराम झाजीक िकछु शेरक उदाहरण देखू—

हम की मनाउ चैती सतुआिन जूड़शीतल भै गेल माघ मासिह धधकैत घूड़तीतल` मतलाक छंद अिछ 2212+ 122+2212+ 122 आब एही गजलक दोसर शेर िमला िलअ-

अिछ देशमे दुपाटी कङरेस ओ िकसानक हम मsझमे पड़ल छी बिन कै िबलािड़ तीतल पिहल शेर आइयो ओतबे Eासंिगक अिछ जते पिहले छल। आइयो नव साल गरीबक लेल नै होइ छै। दोसर शेरकT नीक जकs पढ़ू आइसँ सािठ-सŠर साल पिहलुक राजनीितक िचL आँिख लग आिब जाएत। tप´ अिछ जे िबना xयाकरण तोड़ने किववरजी Eगितशील भावक गजल िलखला जे अजुको समयमे ओतबे Eासंिगक अिछ जतेक की पिहने छल। जे ई कहै छिथ जे िबना xयाकरण तोड़ने Eगितशील गजल नै िलखल जा सकैए हुनका सभकT ई उदाहरण देखबाक चाही। काशीकाbत िमo "मधुप" जीक दूटा शेर देखल जाए—

िमिथलाक पूव> गौरव निह ¥यान टा धरै छी सुिन मैिथली सुभाषा िबनु आिगय² जड़ै छी

सूगो जहsक दश>न-सुनबैत छल तहीँ ठs हा आइ "आइ गो" टा पिढ़ उ¿चता करै छी

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एिह गजलमे 2212-122-2212-122 माLा¾म अिछ जे िक गजलक हरेक शेरमे पालन कएल गेल अिछ। देखू मधुपजी िभ¹ tवर लऽ कऽ आएल छिथ मुदा िबना xयाकरण तोड़ने। योगानंद हीराजीक गजलक दू टा शेर—

मोनमे अिछ सवाल बाजू की छल कपट केर हाल बाजू की मतलाक दूनू पsितमे 2122-12-1222 अिछ आ दोसर शेर देखू-

छोट सन चीज कीिन ने पाबी बाल बोधक सवाल बाजू की हीराजी दोसर गजलक दू टा आर शेर देखू—

शूल सन बात ई संसदे जेल अिछ

आब हीरा कहै जौहरी खेल अिछ एिह गजलक हरेक शेरमे सभ पsितमे 2122+12 माLा¾म अिछ। आब अहॴ सभ कहू जे हीराजीक गजलमे समकालीनता, Eगितशीलता आिद छै िक नै। पिहल शेरमे शाइर वत>मान जीवनमे पसरल अजरकताकT देखा रहल छिथ तँ दोसर शेरमे अभावक कारण ब¿चा धिरकT कोनो चीज नै दऽ पेबाक िववशता छै। तेसर शेर आजुक िवडंबना अिछ। संसद वएह छै जे पिहने छलै मुदा स®सद सभ आब अपराधी वग>क अिछ तँइ शाइरकT ओ जेल बुझा रहल छिन। चािरम शेरमे शाइर Eायोिजत Eसंशाक खेलकT उजागर केने छिथ। ई खेल सािहgय िक आन कोनो JेLमे भऽ सकैए। जगदीश चंm ठाकुर "अिनल" जीक गजलक दू टा शेर—

टूटल छी तँइ गजल कहै छी भूखल छी तँइ गजल कहै छी मतलाक दूनू पsितमे 2222 +12 + 122 छंद अिछ आ एकर दोसर शेर देखू—

ऑिफस सबहक कथा कहू की

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लूटल छी तँइ गजल कहै छी भूख केर कथा सेहो xयाकरणयु°त गजलमे। सरकारी आिफसक कथा सभ जनैत छी। अिनलजी एहू कथाकT xयाकरणक संग उपिtथत केने छिथ। समकालीन tवरे नै कालातीत tवरक संग िवजयनाथ झा जीक ऐ गजलक दूटा शेर देखू—

िचदाकाश मधुमास मधुम°त मित मन िवभव अिछ िविवधता उदय Óास अपने मतलाक छंद अिछ 122-122-122-122 आब दोसर शेरक दूनू पsितकT जsच कऽ िलअ संगे संग भाव केर सेहो-

खसल नीर िनम„Œय िनिध नोर जानल सकल Ôोत oुित िवbदु िवbयास अपने जँ आिद शंकराचय> केर मातृभाषा मैिथली रिहतिन तँ शायद िवजयनाथेजी सन िलखने रिहतिथ ओ। राजीव रंजन िमoजीक ई गजल देखू—

िजनगी खेल तमाशा टा आसक संग िनराशा टा

के जानल गऽ कखन केहन दैबक हाथ तऽ पासा टा

उपरक दूटा शेरक माLा¾म 2221 1222 अिछ आ एिह गजल सभ शेरमे एकरे पालन कएल गेल अिछ। जीवनक गूढ़ बातकT सरल श¨दमे कहल गेल अिछ सेहो xयाकरणक संग। आस आ िनराश दूनू िजवनक भाग छै। दोसर शेरमे भ’य केखन पलटत तकर वण> अिछ। अहॴ कहूँ िवचार कतए बbहा गेल छै xयाकरणसँ। ओमEकाशजीक ई दूटा शेर देखू—

कखनो सुखक भोर िलखै छी कखनो खसल नोर िलखै छी

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िमठगर रसक बात कहै छी संगे कª झोर िलखै छी 2-2-1-2, 2-1, 1-2-2 माLा¾म Egयेक पsितमे अिछ। शाइर अपन िनजी जीवनक बातकT बहर-xयाकरणमे कहलिथ आ नीक जकs कहलिथ अिछ। कोनो शाइरकT जीवनमे भऽ रहल सभ बातकT िलखबाक चाही मुदा अफसोच जे लोक िकछु Jिणक लाभ लेल ने सच बाजए वाहैए आ ने सूनए चाहैए। मुदा शाइर अपन मीठ- तीत सभ बात xयाकरणमे किह रहल छिथ। कहs कोनो िदÕत छै। अिमत िमoक दूटा शेर देखल जाए—

जािह घरमे भूखल दीन अहs देखने होयब हाड़ म®सक बनल मशीन अहs देखने होयब

एक पाइक लेल परान अपन बेच दै छै ओ गाम घरमे एहन दीन अहs देखने होयब एकर माLा¾म 2122-2112-1122-1222 अिछ। एिह गजलमे Eगितशीलता सेहो अिछ आ बहर-xयाकरण सेहो। एखनो कतहुँ-कतहुँसँ समाद आिब जाइए से फŒलs िकछु पाइ लेल अपन ब¿चा बेिच लेलक वा अपन ब¿चा संग जान दऽ देलक। ई सभ बात गजलमे अिमतजी xयाकरणक संग रखने छिथ। Eदीप पु»प केर एकटा गजल देखल जाए आ समकालीनता, xयं’य आ xयाकरण तीनू एकै संग देखू---

गमकैत घाम बला लोक चमकैत चाम बला लोक

भाषण आमो पर दै छै थुर¼ लताम बला लोक

बsटै दरद सगरो खूब ई झंडु बाम बला लोक

करतै उÇार िमिथलाक िदŒली असाम बला लोक

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मॱसो केर हाट लगबै गsधीक गाम बला लोक 222-222-2 सब पsितमे माLा¾म अिछ। Eदीपजीक ई गजल समŽ ªप² ओहन गजलकार सब लेल अिछ जे िक अनेरे गजलक xयाकरणकT खराप मानै छिथ। Eदीपजी जखन दोसर शेरमे "थुर¼ लताम बला लोक" कहै छिथ तँ xयं’यक पराकाRा भऽ जाइत अिछ। अंितम शेरमे Eयोग भेल "गsधीक गाम बला लोक" पsित ओहन लोकक नकाब उतारैत अिछ िजनकर जीवनमे भीतर िकछु छिन आ बाहर िकछु। राम कुमार िमoजीक टूटा शेर देखू—

जाित- धम>क जु¹ाम² अँिटयाइते रहलहुँ छूत-अछुतक अदहनम² उिधयाइते रहलहुँ

पेट कोना जड़लै पितयौलक िकयो किहया झूठ-सsचक भाषण धिर पितयाइते रहलहुँ

सभ पsितमे माLा¾म 2122+222+2212+22 । जाित-धम> एखनो अपना समाज लेल भयावह सपना अिछ। आ शाइर रामकुमार िमoजी xयाकरणक संग एकर वण>न केने छिथ। दोसर शेरमे ओ झूठ भाषणसँ जनता कोना तृdत होइ छै से कहने छिथ। अहॴ सभ कहू की xयाकरणसँ भाव बbहा गेलै? दू टा शेर कुंदन कुमार कण>जीक देखू जािहमेसँ पिहल शेर िनिÖते ªप² उपिनषद् केर मोन पािड़ दैए -- भाव शुÇ हो त मोनमे भय कथीके छोिड़ मृgयु जीव लेल िनÖय कथीके

जाित धम>के बढल अहंकार कुbदन रिह िवभेद ई समाज सुखमय कथीके एकर माLा¾म 212-1212-122-122 अिछ। भय िक डर ओकर होइ छै जे गलत काज करै छै। कुंदनजीक पिहल शेर एकरे उØािटत करैए। दोसर शेरमे शाइरक िवÃास छिन जे जा धिर जाित भेद ने हटत ता धिर समाज सुखमय नै भऽ सकैए। Eसंगवश कही जे कुंदन कुमार कण> नेपालमे मैिथली ओहन पिहल गजलकार छिथ जे िक अरबी बहरमे गजल िलखै छिथ। आगू बढ़बासँ पिहने सरल वािण>क बहर बला गजलक िकछु उदाहरण देिख ली। मु¹ाजीक दूटा शेर देखू-

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केखन धोखा देत ई समान बजआ गारंटी नै ई केखनो हँसाएत केखनो देत कना गारंटी नै

सरकार बनाबै एहन योजना गरीबक लेल केखन जेतैक गरीबक अिtतgव मेटा गारंटी नै (19 वण> हरेक पsितमे।) मु¹ाजी आजुक बजारवादसँ उपजल कमगुणवŠा बला समानक हाल अपन पिहल शेरमे कहलिथ। दोसर शेरमे ओ सरकारी योजनका मूल उ_े«यपर xयं’य कऽ रहल छिथ। आब देखू सुिमत िमo गुंजनजीक दूटा शेर—

नै कहू कखनो पहाड़ छै िजनगी दैबक देलहा उधार छै िजनगी

भारी छै लोकक मनोरथक भार कनहा लगौने कहार छै िजनगी (वण>-13) गुंजनजीक पिहल सेर आसासँ भरल अिछ। ओ जीवनकT भारत मानबाक ओकालित नै करै छिथ। दोसर शेरमे ओ लोकक अनेरेक सेहंताक संकेत देने छिथ। सरल वािण>क बहरक उपरका उदाहरणक अितिर°त िवजय कुमार ठाकुर, नारायण मधुशाला, रामसोगारथ यादव , िव_ानंद बेदद¼ आिद सभ सेहो सरल वािण>क बहरमे गजल िलखबाक Eयास कऽ रहल छिथ। एही ¾ममे मैिथल Eश®तजीक नाम सेहो जोड़ जा सकैए। मुदा िचंता ई जे ई सभ िविभ¹ िवधामे सेहो िलखैत छिथ तँइ िहनकर सभहँक गजलक Eभाव केर आकलन एखन ताgकाल नै भऽ सकैए। दोसर िचंता ईहो जे xयाकरणक मूल भाव रचना सुंदर करब छै केकरो आलोचनामे tथान भेटबाक िक पुरtकार Eािdत िक आन कोनो Eयोजन नै। तँइ बहुत रास गजलकार एहनो भऽ सकै छिथ जे कोनो अभी´ पूरा नै भेलापर xयाकरणक पालन छोिड़ सकै छिथ। मुदा फेर दोहरा दी जे "xयाकरणक मूल भाव रचना सुंदर करब छै आन कोनो Eयोजन िसÇ करब नै"।

मैिथली बाल गजल

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मैिथली बाल गजल श¨दक िनªपण हमरा ¸ारा भेल छल मुदा एिह िवषय-वtतुक गजल किववर सीताराम झा पिहने लीिख गेल छिथ। तँइ ई मानब उिचत जे बाल गजलक अिtतgव मैिथलीमे पिहनेसँ छल मुदा ओकर नामाकरण अनिचbहार आखर कालखंडमे भेलै। उपर जतेक गजलकार सभहँक उदाहरण देने छी वएह सभ बाल गजल सेहो िलखने छिथ तँइ बेसी नै तँ दू-चािर टा बाल गजलक शेर रािख रहल छी। पिहने किववर सीताराम झाजीक ई बाल गजल देखू—

बाउजी जागू ठारर भरै छी िकयै xयथ> सूतल िक बैसल सड़ै छी िकयै 2122+ 122+ 122+ 12 माLा¾म अिछ। आब कुंदन कुमार कण>जीक बाल गजल देखू—

गामक बूढ हमर नानी छै ममतासँ भरल खानी 2221-1222 माLा¾म अिछ। आब अिमत िमoजीक देखू—

हाट चल हाथकT पकिड़ भैया हमर भीड़मे जाउँ नै िबछिड़ भैया हमर 212-212-212-212 माLा¾म अिछ। आब पंकज चौधरी नवलoीजीक देखू—

देख भेलै भोर भैया आब आलस छोड़ भैया

दाय-बाबा माय-बाबू लाग सभके गोर भैया 2122+2122 माLा¾म अिछ। मैिथली भि°त गजल मैिथली भि°त गजल श¨दक िनªपण अिमत िमo ¸ारा भेल छल मुदा एिह िवषय-वtतुक गजल किववर सीताराम झा पिहने लीिख गेल छिथ। तँइ ई मानब उिचत जे बाल गजलक अिtतgव मैिथलीमे पिहनेसँ छल मुदा ओकर नामाकरण अनिचbहार आखरक बाद भेलै। उपर जतेक गजलकार सभहँक उदाहरण देने छी वएह सभ बाल गजल सेहो िलखने छिथ तँइ बेसी नै तँ दू-चािर टा भि°त गजल क शेर रािख रहल छी, पिहने किववर सीताराम झाजीक—

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जगत मे थािक जगद‘बे अिहंक पथ आिब बैसल छी हमर °यौ ने सुनैये हम सभक गुन गािब बैसल छी 1222+1222+1222+1222 माLा¾म मने बहरे हजज। आब जगदानंद झा मनुजीक भि°त गजल देखू—

ह‘मर अँगना मैया एली गमकै चहुँिदस अड़हुल बेली

धन हम छी धन ह‘मर अँगना मैया जतए दश>न देली 22-22-22-22 माLा¾म अिछ। आब कुंदन कुमार कण>जीक भि°त गजल देखू—

हे शारदे िदअ एहन वरदान हो जैसँ िजनगी हमरो कŒयाण 2212-222-221 माLा¾म अिछ। आब अिमत िमoजीक देखू—

सजल दरबार छै जननी भगत भरमार छै जननी

िकओ नै हमर छै संगी खसल आधार छै जननी 1222-1222 माLा¾म अिछ। उपरक एिह उदाहरण सभसँ ई tप´ भऽ गेल हएत जे xयाकरण केखनो भाव वा िवचार लेल बाधक नै होइ छै। हँ, हजारक हजार रचनामे िकछु एहन रचना बुझाइ छै जािहमे xयाकरणक कारण भाव बािधत भेलैए मुदा ई तँ रचनाकारक सीमा सेहो भऽ सकै छै। गजल, भि°त गजल ओ बाल गजलक अितिरि°त मैिथलीमे xयाकरणयु°त बाइ, बाल बाइ, भि°त बाइ, कता, हजल, नात आिद िवधा सेहो िलखल गेल अिछ आ ओकर उदाहरण Eचुर माLामे अिछ आ अहs सभ एकरा अनिचbहार आखरपर नीक जकs देिख सकै छी। िबना xयाकरण बला मैिथली गजलक इितहास

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लगभग 1970-75सँ एखन धिर बहुतो गजलकार ओहन गजल िलखलिथ जािहमे गजलक िनयमक पालन नै भेल अिछ। ई कहब बेसी उिचत जे ओिह धाराक गजलकार सभ िनयम पालन करहे नै चाहैत छिथ। ओ हुनकर अवधारणा हेतिन। एिहठाम ओिह धाराक िकछु Eितिनिध गजलकार सभहँक नाम देल जा रहल अिछ - - 1) रवीbm नाथ ठाकुर, 2) मायानंद िमo, 3) कलानंद भ½, 4) िसयाराम झा "सरस", 5) अरिवbद ठाकुर, 6) सुध®शु शेखर चौधरी, 7) धीरेbm Eेमिष>, 8) बाबा बै_नाथ, 9) िवभूित आनbद, 10) तारानbद िवयोगी, 11) रमेश, 12) राजेbm िवमल…आिद। उपरमे देल Eितिनिध गजलकारक अितिर°त बहुतॲ एहन शाइर सभ छिथ जे की िछटपुट आजाद गजल िलखला आ अbय िवधामे महारत हािसल केलाह। एिह सूचीमे बाबू भुवनेÃर िसंह भुवन, रमानंद रेणु, फूल चंm झा Eवीण, वैकुiठ िवदेह, शीतल झा, Eेमचंm पंकज, प.िनgयानंद िमo, शारदानंद दास पिरमल, केदारनाथ लाभ, तारानंद झा तण, रमाक®त राय रमा, महेbm कुमार िमo, िवनोदानंद, िदलीप कुमार झा िदवाना, वै_नाथ िमo बैजू, िवलट पासवान िवहंगम, सारtवत, कण> संजय, अिनल चंm ठाकुर, «याम सुbदर शिश, अशोक दŠ, कमल मोहन चु¹ू, रोशन जनकपुरी, िजयाउर रहमान जाफरी, धमµbm िवहवल्, सुरेbm Eभात, अतुल कुमार िमo, रमेश रंजन, कbहैया लाल िमo, गोिवbद दहाल, चंmेश, चंmमिण झा, फजलुर रहमान हाशमी, रामलोचन ठाकुर, िवनयिवà बंधु, रामदेव भावुक, सोमदेव, रामचैतbय धीरज, महेbm, केदारनाथ लाभ, गोपाल जी झा गोपेश, नंद कुमार िमo, देवशंकर नवीन,माक>iडेय Eवासी,अमरेbm यादव, नरेbm आिद। बहुत रास नाम धीरेbm Eेमिष> जी ¸ारा संपािदत गजल िवशेष®क पर आधािरत अिछ। िकछु िदन धिर गीतल नामसँ सेहो Eयोग भेल मुदा हम एकरा अजादे गजल मानै छी आ वtतुतः ओ अजादे गजल छै। आ तँइ िन¿चा हम ओकरो समेटने छी एिहठाम। िबना xयाकरण बला मैिथली गजलमे भेल काज िबना xयाकरण बला मैिथली गजलमे एखन धिर कोनो एहन काज नै भेल अिछ तँइ एिह आधारपर एकर मूŒयाकंन करब असंभव तँ नै मुदा बहुत किठन अिछ। एिह धाराक शाइर सभ बस अपन-अपन गजलक पोथीकT Eकािशत करबा लेबाकT काज मािन लेने छिथ। आगूसँ हम "िबना xयाकरण बला मैिथली गजल" लेल “अजाद गजल” श¨दक Eयोग करब। अजाद गजलक इितहासमे जे पिहल जगिजयार काज देखाइए ओ अिछ एिह1990मे िसयाराम झा सरस, तारानंद िवयोगी, रमेश आ देवशंकर नवीनजी ¸ारा संकिलत ओ संपािदत साझी गजल संŽह "लोकवेद आ लालिकला" केर Eकाशन। एिह संकलनमे कुल 12 टा गजलकारक 84 टा गजल अिछ। भूिमका सभहँक अनुसारे ई संकलन Eगितशील गजलक संकलन अिछ आ जािहर अिछ जे एिहमे सहभागी गजलकार सभ सेहो Eगितशील हेबे करता। बारहो गजलकारक नाम एना अिछ कलानंद भ½, तारानंद िवयोगी, डा.देवशंकर नवीन, नरेनm, डा. महेbm, रमेश, रामचैतbय धीरज, रामभरोस कापिड़ ±मर, रवीbm नाथ ठाकुर, िवभूित आनंद, िसयाराम झा सरस, Eो. सोमदेव। एिह संकलनक अलावे धीरेbm Eेमिष>जी ¸ारा संपािदत पŒलव केर "गजल अंक" जे िक 2051 चैतमे मैिथली िवकास मंच, माठम®डूक मािसक सािहिgयक Eकाशन अंतग>त Eकािशत भेल (वष>-2, अंक-6, पूणÚक-15) सेहो अजाद गजलक धारामे नीक काज अिछ। जँ अंŽेजी तारीखसँ बूझी तँ माच>,1995 केर लगभगमे पŒलवक "गजल अंक" Eकािशत भेल अिछ ( नेपालक तारीख बदलबामे जँ हमरासँ गलती भेल हो तँ ओकरा सुधारल जाए)। आगू बढ़बासँ पिहने

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पŒलवक गजलक अंकक िकछु बानगी देिख िलअ--एिह गजल िवशेष®कमे कलानंद भ½, फूलचंm झा Eवीण, रमानंद रेणु, िसयाराम झा सरस, राजेbm िवमल, रामदेव झा, बैकुंठ िवदेह, रामभरोस कापिड़ ±मर, रमेश, शेफािलका वम„, शीतल झा, गोपाल झाजी गोपेश, Eेमचंm पंकज, पं.िनgयानंद िमo, शारदानंद पिरमल, रमाक®त राय रमा, महेbmकुमार िमo, धीरेbm Eेमिष>, चंmेश, िवनोदानंद, िदिलप कुमार झा दीवाना, वै_नाथ िमo बैजू, रोशन जनकपुरी, सारtवत, कण> संजय, «यामसुंदर शिश, अिजत कुमार आजाद, ललन दास, धमµbm िवÛल, सुरेbm Eभात, अतुल कुमार िमo, रमेश रंजन, कbहैयालाल िमo, गोिवbद दहाल आिद 34 टा गजलकारक एक एकटा गजल अिछ मने 34 टा गजलकारक 34 टा गजल अिछ। एिह िवशेष®कक संपादकीय अजादक गजलक िहसाबे अिछ। ई पिLका कुल चािर प¹ाक छपैत छल आ ओिह िहसाब² चॱतीस टा गजल कोनो खराप सं©या नै छै। नेपालसँ Eकािशत पŒलवक "गजल अंक" आ भारतसँ Eकािशत "लोकवेद आ लालिकला" दूनूक समयमे करीब 6-7 बख>क अंतराल अिछ (Eकाशनसँ पिहनेक तैयारीकT सेहो देखैत)। दूनूक संपादको अलग छिथ। दूनू काजक tथान ओ पिरिtथितयो अलग अिछ मुदा ओिह के अछैत एकटा दुयÊग दूनूमे एक समान ªपसँ िव_मान अिछ। ई दुयÊग अिछ ओिह अंक िक संकलनमे पुरान गजलकारकT tथान नै देब। जँ दूनू संपादक चाहतिथ तँ ओिह अंक िक संकलनमे पुरान गजलकारकT समेिट कऽ एकटा संपूण> िचL आिन सकै छलाह मुदा पता नै कोन पिरिtथित िक तgव छलै जे दूनू ठाम एिह काजमे बाधक बनल रहल। Eाचीन गजल बेसी अिछए नै तँइ ने बेसी पाइ लगबाक संभवाना छलै आ ने बेसी मेहनितक जªरित छलै। भऽ सकैए जे िहनका सभ लेल ई EÜ महgवपूण> नै हो मुदा एकटा गजल अ¥येताक ªपमे हमरा सभसँ बेसी इएह बात खटकल अिछ। िकछु एहन तgव तँ जªर रहल हेतै जािहसँ Eभािवत भऽ कऽ दूनू संपादकक एकै रंगक सोच रखने छलाह। खएर सूचना दी जे वत>मान समयमे हमरा ओ गजेbm ठाकुरजी ¸ारा संपािदत पोथी "मैिथलीक Eितिनिध गजलः1905सँ 2016 धिर" जे िक ई-भस>न ªपमे Eकािशत अिछ तािहमे उपरक दुयÊगकT दूर कऽ देल गेल अिछ। एिह संकलनमे सभ Eाचीन गजलकारकT tथान देल गेल अिछ जािहसँ मैिथली गजलक संपूण> छिव पाठक लग आिब जाइत छिन। उपरक काजक अलावे एक-दू बख> पिहने मधुबनीमे सेहो अजाद गजलकार सभ ¸ारा गजल काय>शाला आयोिजत भेल रहए मुदा ओकर समुिचत त­य हमरा लग नै अिछ तँइ ओिहपर हम िकछु बजबासँ बsिच रहल छी। अजाद गजलक शाइर सभ काजमे नै “Eयोग”मे बेसी िवÃास राखै छिथ आ तकर बानगी िथक "गीतल"। गीतल (जे िक वtतुतः अजादे गजल अिछ) केर जbमदाता छिथ मायानंद िमo। ओ अपन गीतल िवधा केर पोथी "अवातंतर" केर भूिमकामे(पृR 6 पर) िलखै छिथ-- "अवाbतरक आर‘भ अिछ गीतलसँ। गीतं लातीित गीतलम्ऽ अथ„त गीत कT आनऽ बला भेल गीतल। िकbतु गीतल पर‘परागत गीत निह िथक, एिहमे एकटा सुर गजल केर सेहो लगैत अिछ। गीतल गजल केर सब बंधन ( सत> ) कT tवीकार निह करैत अिछ। कइयो निह सकैत अिछ। भाषाक अपन-अपन िवशेषता होइत अिछ जे ओकर संtकृितक अनुªप² िनिम>त होइत अिछ। हमर उ_े«य अिछ िमoणसँ एकटा नवीन Eयोग। तÝ गीतल ने गीते िथक, ने गजले िथक, गीतो िथक आ गजलो िथक। िकbतु गीित तgवक Eधानता अभी´, तÝ गीतल।" ई पोथी 1988मे मैिथली चेतना पिरषद्, सहरसा ¸ारा Eकािशत भेल। उपरका उØोषणामे अहs सभ देिख सकै िछऐ जे कतेक दोखाह tथापना अिछ।

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Eयोग हएब नीक गdप मुदा अपन कमजोरीकT भाषाक कमजोरी बना देब कतहुँसँ उिचत नै आ हमरा जनैत मायानंद जीक ई बड़का अपराध छिन। जँ ओ अपन कमजोरीकT आँकैत गीतल केर आर‘भ करतिथ तँ कोनो बेजाए गdप नै मुदा मायाजी पाठककT ±िमत करबाक Eयास केलाह जे िक ताgकाल सफल सेहो भेल। ई मोन राखब बेसी जªरी जे 2011मे Eकािशत किथत गजल संŽह " बहुिपया Eदेश मे " जे की अरिवbद ठाकुर ¸ारा िलिखत अिछ ताहूमे ठीक इएह गdपकT दोहराओल गेलैए। गीतल िवधाक उØोषणापर सभसँ बेसी आपिŠ िसयाराम झा सरसजीकT छिन जकरा ओ अपन पोथी "शोिणताएल पएरक िनशान" केर भूिमकामे िलखलिन अिछ आ एहीठाम अजाद गजल दू ठाम बँिट गेल। पिहल िसयाराम झा सरस एवं अbय जे िक गजलकT गजल मानै छलाह जािहमे तारानंद िवयोगी, रमेश, देवशंकर नवीन आिद छिथ। दोसर गीतल जािहमे मायानbद, तारानbद झा तण, िवलट पासवान िवहंगम, आिद एला वा छिथ। ऐठs हम ई tप´ करऽ चाहब जे नाम भने जे होइ मायानbद जी बला गुट वा सरसजी बला गुट दूनू गुटमेसँ कोनो गोटा गजल नै िलखै छलाह कारण ओ xयाकरणहीन छल। आ xयाकरणहीन किथत गजलकT गजल नै गीतले टा कहल जा सकैए। मैिथलीक अजाद गजलमे नै भेल काज 1) गजलक सं©या वृिÇ िदस धेआन नै देब-- गजलक सं©या वृिÇसँ हमर मतलब अपनो िलखल गजल आ अनको िलखल गजल अिछ। किथत ¾®ितकारी सभहँक िवचार अिछ जे क‘मे िलखू मुदा नीक िलखू। मुदा सवाल ओतिgह रिह जाइ छै जे नीक रचना िनध„रण केना हो जखन िक लोक लग सीिमत सं©यामे रचना रहै। हमरा िहसाब² ई ±®ित अिछ जे कम रचलासँ नीके होइत छै। हमर tप´ िवचार अिछ जे रचना सं©या बढ़लासँ अपना भीतर Eितयोिगता बढ़ै छै आ भिव»यमे नीक रचना िलखबाक संभावना बिढ़ जाइत छै। जािह िवधामे बेसी िलखाइत छै ओकर Eचार-Eसार ओ लोकिEयता बेसी जŒदी होइत छै। मुदा अजाद गजलकार सभ एिह मम>कT नै बुिझ सकलाह। हमरा बुझाइए जे मैिथलीक अजाद गजलकार सभ Eितयोिगतासँ डेराइत छिथ। हुनका बुझाइ छिन जे जँ कादिचत् Eितयोिगतामे हािर गेलहुँ तँ हमर की हएत। मुदा हुनका सभकT बुझबाक चाही जे सािहgयमे जीत-हािर सन कोनो बात नै होइ छै। 2) गजलकारक सं©या वृिÇ िदस धेआन नै देब--- कोनो िवधाक िनयम टुटलासँ ओ िवधा सरल बिन जाइत छै आ ओिह िवधामे बहुत रास रचनाकार आबै छिथ जेना िक किवता िवधामे भेलै। तखन मैिथलीमे िबना िनयम केर गजल रिहतॲ ऐमे शाइरक कमी िकएक रहल? मैिथलीक अजाद गजलकार सभ कते नव शाइरकT Eोgसािहत केलिथ। जबाब सु¹ा भेटत। मैिथलीक अजाद गजलकार सभ अपने लीखै छिथ आ अपनेसँ शुª आ अपनेपर खgम। आिखर गजल िवधामे नव शाइर अनबाक िज‘मा केकर छलै? ईहो कहल जा सकैए जे मैिथलीक अजाद गजलकार सभ जािन बूिझ कऽ अपन वच>tव सुरिJत रखबाक लेल नव शाइरकT Eोgसािहत नै केलिथ। हुनका सभ डर छिन जे कहॴ हमरासँ बेसी ओकरे सभहँक नाम नै भऽ जाइ। 3) मैिथली गजलक आलोचना िदस धेआन नै देब-- जेना िक सभ जानै छी जे आलोचना कोनो िवधा लेल Eाण होइत छै मुदा आÖय> जे मैिथलीक अजाद गजलकार सभ गजल-आलोचनाकT हेय दृि´सँ देखला। मैिथलीमे अजाद गजलक Eितिनिध गजलकार िसयाराम झा सरस, तारानंद िवयोगी, रमेश, देवशंकर नवीनजीक संपादनमे बख> 1990मे " लालिकfला आ लोकवेद " नामक एकटा साझी गजल संŽह आएल। एिह संŽहमे गजलसँ पिहने तीनटा भा»यकारक आमुख अिछ। पिहल आमुख सरसजीक छिbह आ ओ तकर शुआत एना करै छिथ -- " समालोचना आ सािहिgयक इितहास लेखनक JेLमे तकरे कलम भँजबाक चाही जकरा ओिह सािहिgयक

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Egयेक सूºतम tपंदनक अनुभूित होइ......."। अथ„त सरसजीकT िहसाब² कोनो सािहिgयक िवधाक आलोचना, समीJा, वा ओकर इितहास लेखन वएह कए सकैए जे की ओिह िवधामे रचनारत छिथ। जँ हम एकर xया©या करी तँ ई नतीजा िनकलैए जे गजल िवधाक आलोचना वा समीJा वा ओकर इितहास वएह लीिख सकै छिथ जे की गजलकार होिथ। मुदा हमरा आÖय> लगैए जे ने 1990सँ पिहले सरसजी ई काज केलाह आ ने 1990सँ 2008 धिर ई काज कऽ सकलाह (सरसेजी िकए आनो सभ एहन काज नै कऽ सकलाह)। 2008कT एिह दुआरे हम मानक बख> लेलहुँ जे कारण 2008मे िहनकर मने सरसजीक एखन धिरक अंितम किथत गजल संŽह "थोड़े आिग थोड़े पािन" एलिbह मुदा ओहूमे ओ एहन काज नै कऽ सकलाह। ई हमरा िहसाब² कोनो गजलकारक सीमा भए सकैत छलै मुदा सरसजी फेर ओही आमुख के तेसर आ चािरम पृRपर िलखै छिथ" मैिथली सािहgयमे तँ बंगला जकs गीित-सािहिgयक एकटा सुदीघ> परंपरा रहलैक अिछ। गजल अही परंपराक नxयतम िवकास िथक, कोनो EितबÇ आलोचककT से बुझऽ पड़तैक। हँ ई एकटा दीगर आ महgवपूण> बात भए सकैछ जे मैिथलीक समकालीन आलोचकक पास एिह नxयतम िवधाक आलोचना हेतु कोनो मापदंिडके निह छिbह। निह छिbह तँ तकर जोगार करथु........" आब ई देखल जाए जे एकै आलेखमे कोना दू अलग अलग बात किह रहल छिथ सरसजी । आलेखक शुआतमे हुनक भावना छिbह जे " जे आदमी गजल नै लीखै छिथ से एकर समीJा वा इितहास लेखन लेल अयो’य छिथ मुदा फेर ओही आलेखमे ओहन आलोचकसँ गजल लेल मापदंड चाहै छिथ जे किहयो गजल निह िलखला। भए सकैए जे सरसजी ई आरोप सरसजी अपन पूव>वत¼ िववादाtपद गजलकार मायानंद िमo पर लगबिथ होिथ। जे की सरसजीक हरेक आलेखसँ tप´ होइत अिछ। मुदा ऐठाम हमरा सरसजीसँ एकटा EÜ जे जँ कोनो कारणवश माया जी ओ काज नै कए सकलाह वा जँ मायानंद जी ई किहए देलिखbह मैिथलीमे गजल नै िलखल जा सकैए तँ ओकरा गलत करबा लेल ओ अपने (सरसजी) की केलिखbह। 2008 धिर मैिथलीमे 10-12 टा किथत गजल संŽह आिब चुकल छल। मुदा अपने सरसजी कहs एकौटा किथत गजल संŽह समीJा वा आलोचना केलिखbह। गजलक xयाकरण वा इितहास लेखन तँ बहुत दूरक बात भए गेल। ऐ आलेखसँ दोसर बात इहो tप´ अिछ जे सरसजी कोनो समकालीन आलोचककT गजलक समीJा लेल मापदंड देबा लेल तैयार नै छिथ। जँ कदािचत् कनेकबो सरसजी आलोचक सभकT मापदंड िदतिथन तँ संभवतः 2008 धिर गजल JेLमे एहन अकाल नै रिहतै। आब हम आबी िवदेहक अंक 96 पर जािहमे oी मु¹ा जी ¸ारा गजल पर पिरचच„ करबाओल गेल छल। आन-आन Eितभागीक संग-संग Eेमचंद पंकज नामक एकटा Eितभागी सेहो छिथ। पंकजजी अपन आलेखमे आन बातक संग इहो िलखैत छिथ -“ कितपय xयि°त एकटा राग अलािप रहल छिथ जे मैिथलीमे गजलक सुदीघ> पर‘परा रिहतहु एकरा माbयता नै भेिट रहल छैक। एहन बात Eायः एिह कारणे उठैत अिछ जे मैिथली गजलकT कोनो माbय समीJक-समालोचक एखन धिर अछूत मािनकऽ ए‘हर ताकब सेहो अपन मय„दाक Eितकूल बूझैत छिथ। एिह स‘बbधमे हमर xयि°तगत िवचार ई अिछ, जे एकरा ओहने समालोचक-समीJक अछूत बुझैत छिथ िजनकामे गजलक सूºमताकT बुझबाक अवगितक सव>था अभाव छिन। गजलक संरचना, िमजाज आिदकT बुझबाक लेल हुनका लोकिनकT tवयं Eयास करऽ पड़तिन, कोनो गजलकार बैिस कऽ भÆा निह धरओतिन। हँ, एतबा िनÖय जे गजल धुड़झाड़ िलखल जा रहल अिछ आ पसिर रहल अिछ आ अपन सामथ>यक बल पर समीJक-समालोचक लोकिनकT अपना िदस आकिष>त कइए कऽ छोड़त “ अथ„त Eेमचंद

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जी सरसे जी जकs भÆा नै धरेबाक पJमे छिथ। सरसजी 1990मे कहै छिथ मुदा पंकजजी 2011केर अंतमे मतलब 22साल बाद। मतलब बख> बदलैत गेलै मुदा मानिसकता नै बदललै। ऐठाम हम ई जर कहए चाहब जे भÆा धराबए लेल जे ³ान आ इ¿छा शि°त होइ छै से बजारमे नै िबकाइत छै। संगे-संग ईहो कहए चाहब जे मायानंद िमoजीक बयान आ अ³ानतासँ मैिथली गजलकT जतेक अिहत भेलै तािहसँ बेसी अिहत सरसजी वा पंकजजीक सन गजलकारसँ भेलै। ऐठाम ई tप´ करब बेसी जªरी जे हम ऐ बातसँ बेसी दुखी नै छी जे ई सभ िबना xयाकरणक गजल िकए िलखला मुदा ऐ बातसँ बेसी दुखी छी जे ई गजलकार सभ पाठकक संग िवÃासघात केला। जँ ई सभ सॲझ ªप² किह देने रिहतिथन जे गजलक xयाकरण होइ छै आ हम सभ ओकर पालन नै कऽ सकै छी तखन बाते खgम छलै मुदा अपन कमजोरीकT नुकेबाक लेल ई सभ नाना Eकारक Eपंच रचला जकर दु»पिरणाम गजल भोगलक। हमरा जहs धिर अ¥Þयन अिछ तहs धिर लगभग माL 4-5 टा गजल आलोचना tवतंL लेखक ªपमे अजाद गजलकार सभ ¸ारा िलखल गेल अिछ (जँ पोथीक भूिमका सभकT सेहो जोड़ी तँ एकर सं©या 8-9 टा भऽ सकैए)। एिह कड़ीमे तारानंद िवयोगीजीक "मैिथली गजलः मूŒयाकंनक िदशा", देवशंकर नवीनजीक "मैिथली गजलःtवªप आ संभावना", धीरेbm Eेमिष>जीक "मैिथलीमे गजल आ एकर संरचना" आिद Eमुख अिछ। मैिथलीक अजाद गजलक िकछु उदाहरण जेना िक पिहने कहने छी अजाद गजलमे xयाकरण नै अिछ तँइ हम एकर उदाहरणमे शेर सभहँक खाली भाव संबंधी िववेचना करब (उदाहरणमे आएल शेर सभ एकौ गजलक भऽ सकैए आ अलग अलग गजलक सेहो। संपादक महोदयसँ आŽह जे उदाहरणमे देलग गेल शेर सभहँक वत>नीकT यथावत् राखिथ)-- सुध®शु शेखर चौधरी जीक दू टा शेर--

अपने बेसाहल बाटसँ पेरा रहल छी हम अपने लगाओल कsटसँ घेरा रहल छी हम xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx हम पल ओछौने बाट छी िनराश नै करबै िनतुआन सन अधार छी हताश नै करबै पिहल शेरमे शाइर सुध®शुजी अपनेसँ जbमल समtया कोना परैशान करै छै तकर नीक संकेत देलाह अिछ। दोसर शेर िहनक गजलक मूल भाव (खुदा-बंदा बला, एकरा संसािरक ªपमे सेहो लऽ सकै िछयै) समेटने अिछ।

अरिवbद ठाकुर जीक दू टा शेर—

संसद केर फोटो मे िकछुओ निह हेर फेर स®पनाथ नागनाथ इएह दुनू बेर बेर

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xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx लीक छोिड़ जे चलल िसयार बिन गेल एक िदन चौकीदार पिहल शेरमे शाइर अरिवbद ठाकुरजी देशक जनताक िवडंवनाक िचLण केने छिथ। जनता बª कोनो पाट¼कT भोट िकए ने दै सभ पाट¼क चिरL एकै रंगक भऽ जाइ छै। दोसर शेरक िहनक xयं’य अिछ जािहमे नकली ¾®ितकािरताकT उजागर कएल गेल अिछ।

िवभूित आनंद जीक दू टा शेर—

एकेटा धारणा अिछ एकेटा उदेस °यो ने होए रंक आ ने °यो नरेश xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx फूलो मे फूल, अड़हूल केर रंग जकs चाªभर तेजी सँ पसिर रहल जनता पिहल शेरमे शाइर िवभूित आनंदजी सभहँक मोनक बात रखने छिथ। आ दोसर शेरमे ओ क‘यूिन´ पाट¼क Eतीक लाल रंगक तुलना हड़हूल फूलसँ केने छिथ।

कलानंद भ½ जीक दू टा शेर—

शंकामे िव¥वंसक आइ जीिब रहल लोक अिववेकी अिधकारमे अणुबम भेल छै xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx अिछ बटोही सशंिकत बनल बाट पर िदन मे आभास रातुक अभिर गेल अिछ पिहल शेरमे शाइर कलानंद भ½जी वत>मान समtयाक वण>न केने छिथ। कोन देश कोन बह¹ासँ कतए किहया आ¾मण कऽ देत तकर कोनो िठकान नै। दोसर शेरमे सेहो एहने सन भाव अिछ।

बाबा बै_नाथ जीक दू टा शेर—

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कोन एहन हम काज कª जे लागय कोनो पाप निह भूखक आिगसँ बेसी भैया अिछ कोनो संताप निह xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx किहयो जँ मोन पड़ए अपन अतीतक जीवन बस आँिख मूिन दूनू किनय² लजा िलअ अरब देशक एकटा कहबी छै जे पाथर वएह मारए जे कोनो पाप नै केने हो। एही भावकT शाइर वै_नाथजी अंिकत केने छिथ पिहल शेरमे। दोसर शेर िहनक कमालोसँ कमाल अिछ। कोनो कुकम¼कT एिहसँ बेसी धुतकारल नै जा सकैए।

रवीbm नाथ ठाकुर जीक दू टा शेर—

हँसैत भोर सजल सsझ लोक सदा चाहैए उदास भोर मरल सsझ तकर की होयत xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx जे पािन पीिब बैसल हो घाट घटा केर पता तकरिहंसँ जाय पूछी बजार हाट केर शाइर रवीbmजी पिहल शेरमे घटल लोकक संकेत देने छिथ Eतीकक ªपमे। पाइ घिटते सम®ग सेहो घिट जाइ छै अइ दुिनयsमे। दोसर शेरमे कमालक Eतीकक Eयोग भेल अिछ। हाट-बजारमे वएह ठिठ सकैए जे िक घाट-घाट केर पािन पीने हो। ई बात Eाचीन हाटसँ लऽ कऽ एखनुक आधुिनक tटोरपर सेहो लागू अिछ।

मायानंद िमo जीक दू टा शेर—

एखन तँ राित अिछ आ राित केर बातो अिछ कतेक राित धिर कतेक राित केर चलतै xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx देखक बाद निह देखैक बड़ बहाना अिछ चलैत भीड़ मे एकसगर जेना हेरायल छी शाइर मायानंदजी पिहल शेरमे समयच¾सँ संदिभ>त बात कहने छिथ। दोसर शेरमे हुनकर ओहन दुख सामने आएल अिछ जािहमे पिहचानल लोक सेहो अनिचbहार बिन जाइ छै।

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िसयाराम झा सरस जीक दू टा शेर—

पूिण>मा केर दूध बोड़ल ओलिड़ गेल इजोर हो Ãेत वसनक घोघ तर धरतीक पोरे पोर हो xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx माथ उठबए सवाल सोिनत के काल लीखैछ हाल सोिनत के िसयारामजीक पिहल शेर शाÃत सॱदय>क वण>नमे अिछ तँ दोसर शेर Eगितशील।

रमेश जीक दू टा शेर—

सॴथ जए टा चाही तए टा छूिब िलय टीस मुदा तािजbदगी रहैत छै xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx जामु आ ग‘हािर केर छाह तर मे बsस केर कोपर सुखैल जा रहल शाइर रमेश जीक पिहल शेर असफल Eेम आ ओकर टीसक नीक वण>न अिछ। दोसर शेर उbटा अिछ। xयावहािरक ªपसँ बsसक छाहमे कोनो आर गाछ नै नमहर होइत छै मुदा शाइर अपन शेरमे जामु आ ग‘हािर केर छाहसँ बsसक भयक वण>न केने छिथ। दोसर शेरक िविवध xया©या भऽ सकैए।

राजेbm िवमल जीक दू टा शेर—

डािरसँ जे चूकत तँ बानर बङौर लेत बेरपर हूसत से केराके घौर लेत xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx चानीक ब½ा सन नभमे संिचत नJLक मोती अहॴ लेल बस अहॴ लेल सृि´क सतरंगी जोती

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शाइर राजेbmजीक पिहल शेर हमरा जनैत जनतापर xयं’य अिछ। जनते एहन अिछ जे सभ समय हो-हो करैए मुदा बेरपर हुिस जाइए। िहनक दोसर शर Eेमक सॱदय> वण>न अिछ।

धीरेbm Eेमिष> जीक दू टा शेर—

िजनगी अिछ बड़ िघनाह नाक चुबैत पोटासन सुड़िक–सुड़िक तैयो छी ढोिब रहल मोटासन! xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx कोन िवजय लए खेल ई खुिनयs जइमे सभक िसकtत भेल छै जीवनकT िनमािहए कऽ िकयो महान बनै छै। आ जीवन िनमाहए लेल नीक-बेजाए सभ करए पड़ैत छै धीरेbmजीक पिहल शेरक मूल भाव इएह अिछ। दोसर शेरमे धीरेbmजी ओिह अ³ात मजबूरी िदस संकेत केने छिथ जािह कारणसँ लोक एक दोसरक दुश्मन बिन गेल अिछ। आ माL अपन जय लेल सभहँक पराजय केर जोगाड़ करैए मुदा अंतमे सभहँक संग ओहो हािर जाइए अनेक कारणसँ।

तारानंद िवयोगी जीक दू टा शेर—

िघचने िघचाइछ निह िजनगी के गाड़ी एक खंड मुtकी आ बहुते लचारी xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx ओिहना के ओिहना िजनगी मरैत गेलै एÕे सन फोटो सँ एलबम भरैत गेलै पिहल शेरमे शाइर तारानंद िवयोगी जीवन ओिह सीमापर पहुँिच गेल छिथ जतए आदमी हताश भऽ बैिस जाइए। िकछु लोक एिह सेरकT िनराशावादी किह सकै छिथ मुदा हमरा जनैत िनराशा सेहो जीवनेक अंग छै। दोसर शेरमे शाइर जीवनक एकरसतासँ उिबआएल बुझाइत छिथ।

रोशन जनकपुरी जीक दू टा शेर—

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आङनमे अिछ गु‘हिर रहल कागजके बाघ घर घरमे अिछ रोहिट-क¹ा, डर लगैए xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx जािन ने किहया धिर बूझत ई लोक जे वधशालामे आgमाक जोर निह होइत छै पिहल शेरमे शाइर जनकपुरीजी लोकक भीतरक अ³ात अदंकक वण>न केने छिथ। सभकT बूझल छै जे बाघ कागज केर छै मुदा एखनुक लोक असगर भऽ चुकल अिछ आ ओही कारणसँ ओकरा कागजक बाघसँ सेहो डर लािग रहल छै। कोनो हgया करए बला आदिमए होइत छै से दोसर शेरसँ बुझा जाइत अिछ जखन िक शाइर हgयाराक पैरवी करै छिथ। आब ई हgयारा कोनो ªपमे कोनो कारणसँ िकयो भऽ सकैए। माL आदिमएकT मारए बला हgयारा होइत छै से मानब एकभगाह अिछ।

उपरमे देल गेल अजाद गजलक उदाहरणसँ ई बात tप´ अिछ जे सभ अजाद गजलकार सभहँक भाव नीक छिन। भावमे बसल िबंब खsटी मैिथल छिन। Eतीक सेहो नव छिन मुदा बस गजलक xयाकरण नै छिन। जखन िक शुआतेमे कहने छी िबना कािफया बहरक गजल नै होइत छै। आÖय> ईहो जे अजाद गजलकार सभ दु»यंत कुमार िक अदम गॲडवी की फैज अहमद फैज केर उदाहरण दै छिथ मुदा दु»यंत कुमार िक अदम गॲडवी की फैज अहमद फैज केर गजलमे Eयोग भेल xयाकरणकT नै देिख पाबै छिथ। अजाद गजलकार सभहँक तक> छिन जे जखन रचनामे भाव, िबंब, िवचार सभ िकछु छै तखन ओकरा गजल मानबामे की िदÕत। मुदा हम उbटा पूछब जे ओकरा किवते मानबामे की िदÕत? अंततः कोनो किवतामे भाव, िबंब, िवचार होइते छै ने। तँइ ओकरा किवते मानू। मुदा दुखद जे अजाद गजलकार सभ कहता जे ई किवता नै गजल अिछ मुदा कोना तइ लेल हुनका तक> नै छिन। िकछु तँ तgव हेतै जे किवता, गीत आ गजलकT अलग-अलग करैत हेतै। हमरा िहसाब² बहर-कािफया, xयाकरण ओ तgव छै जािहसँ किवता, गीत आ गजलमे अंतर कएल जा सकैए। उपरमे हम कहने छी जे अजाद गजलकार सभ दु»यंत कुमार, अदम गॲडवी आिदकT बहुत मानै छिथ तँ एक बेर कने ईहो देिख ली जे दु»यंत कुमार, अदम गॲडवी सभ गजल xयाकरणक पालन केने छिथ की नै--- सूय>क®त िLपाठी िनराला जीक ई शेर देखू-

भेद कुल खुल जाए वह सूरत हमारे िदल म² है देश को िमल जाए जो पूँजी तु‘हारी िमल म² है मतला (मने पिहल शेर)क माLा¾म अिछ-- 2122+2122+2122+212 आब सभ शेरक माLा¾म इएह अिछ। िनरालाजीक ई गजल तािक कऽ पढ़ू आ िमलाउ जे पूरा गजलमे xयाकरणक पालन भेल छै िक नै। दु»यंत कुमारक ऐ गजलक त°ती देखू---

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हो गई है / पीर पव>त /सी िपघलनी / चािहए, इस िहमालय / से कोई गं / गा िनकलनी / चािहए। अइ शेरक माLा¾म 2122 / 2122 / 2122 / 212 अिछ। दु»यंतजीक ई गजल तािक कऽ पढ़ू आ िमलाउ जे पूरा गजलमे xयाकरणक पालन भेल छै िक नै। आब कने अदम गॲडवी जीक दू टा गजलक त°ती देखू—

ग़ज़ल को ले / चलो अब गs / व के िदलकश /नज़ारॲ म² मुसल्सल फ़न / का दम घुटता / है इन अदबी / इदारॲ म² अइ शेरक माLा¾म 1222 / 1222 / 1222 / 1222 अिछ।

भूख के एह / सास को शे / रोसुख़न तक /ले चलो या अदब को / मुफ़िलसॲ की / अंजुमन तक /ले चलो अइ शेरक माLा¾म 2122 / 2122 / 2122 / 212 अिछ। अहs सभ अदमजीक दूनू गजल तािक पढ़ू आ िमलाउ जे पूरा गजलमे xयाकरणक पालन भेल छै िक नै। एकटा ओहन गजलकारक गजल केत त°ती देखा रहल छी िजनक नाम लऽ सभ अजाद गजलकार सभ बहर ओ छंदक िवरोध करै छिथ। तँ चलू फैज अहमद फैज जीक ई गजल देखू—

शैख साहब से रtमो-राह न की शु¾ है िज़bदगी तबाह न की अइ शेरक माLा¾म 2122-1212-112 अिछ। अहs सभ पूरा गजल तािक पढ़ू आ िमलाउ जे पूरा गजलमे xयाकरणक पालन भेल छै िक नै। तेनािहते आजुक EिसÇ शाइर मुनxवर राना केर ऐ गजलक त°ती देखू—

बहुत पानी बरसता है तो िम½ी बैठ जाती है न रोया कर बहुत रोने से छाती बैठ जाती है अइ शेरक माLा¾म 1222 / 1222 / 1222 / 1222 अिछ। अहs सभ पूरा गजल तािक पढ़ू आ िमलाउ जे पूरा गजलमे xयाकरणक पालन भेल छै िक नै। हसरत मोहानीक ई EिसÇ गजल देखू---

चुपकेचुपके रात िदन आँसू बहाना याद है हमको अब तक आिशक़ी का वो ज़माना याद है

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अइ शेरक माLा¾म 2122+2122+2122+212 अिछ। अहs सभ पूरा गजल तािक पढ़ू आ िमलाउ जे पूरा गजलमे xयाकरणक पालन भेल छै िक नै। अंतमे राहत इbदौरी जीक एकटा गजलक दू टा शेरकT देखू देखू— चरागॲ को उछाला जा रहा है हवा पर रौब डाला जा रहा है

न हार अपनी न अपनी जीत होगी मगर िसÕा उछाला जा रहा है अइ दूनू शेरक माLा¾म गजल (1222 / 1222 / 122) (बहर-ए-हजज केर मुजाइफ) अिछ। अहs सभ पूरा गजल तािक पढ़ू आ िमलाउ जे पूरा गजलमे xयाकरणक पालन भेल छै िक नै। उपरमे देल गेल िहंदी-उदू> गजलकार सभहँक शेर सभकT देखलासँ पता चलत जे िनराला जी गजलक िवषय नव कऽ देलिखन Eेिमकाक बदला िवषय िमल आ पूँजी बिन गेलै मुदा xयाकरण वएह रहलै। अदमजी भखूक एहसासकT शेरो-सुखन धिर लऽ गेलाह मुदा ओही xयाकरणक संग। दु»यंतजी अपन गजलक मा¥यमे िहमालयसँ गंगा िनकािल देलाह मुदा xयाकरण ने तोड़लाह। फैज अहमद फैज अपन गजलमे धािम>क क½रताक िवरोध केलाह मुदा ओहो xयाकरण नै तोड़लाह। तेनािहते आनो शाइर सभ नव भाव-भंिगमाक गजल िलखने छिथ सेहो xयाकरणक पालन करैत। तखन ई मैिथलीक अजाद गजलकार सभ कहै छिथ जे xयाकरणसँ भाव- िवचार बbहा जाइ छै या गजलमे xयाकरण नै होइ छै से कते उिचत? एिहठाम आिब हमरा ई कहबा / tवीकार करबामे कोनो संकोच नै जे जँ ई अजाद गजलकार सभ अपन िजद छोिड़ एखनो गजलक xयाकरण tवीकार कऽ लेता तँ मैिथली गजलक सुिदन शुª भऽ जाएत कारण िहनका सभ लग भाव-बोध, िवचार ओ अनुभव बहुत बेसी छिन मुदा िवधागत xयाकरण ने पालन करबाक कारणे िहनकर सभहँक िलखलपर िवधाक ªपमे EÜिचÉ लािग जाइत अिछ। िसयाराम झा सरसजीकT दुख छिन जे गीत िवधा वत>मानमे मैिथलीक क²mीय िवधा िकए नै अिछ (देखू हुनकर पोथी आखर-आखर गीत केर भूिमका)। ई दुख हमरो अिछ गजलक संदभ>मे, गीतक संदभ>मे आ सभ छंदयु°त काxयक संदभ>मे। हमरो ई इ¿छा अिछ जे गजल-गीत-अbय छंदयु°त काxय मैिथली सािहgय केर क²mीय िवधा बनए। बिनयो सकैए। जँ अनिचbहार आखर-िवदेह माL दस बख>मे िकछुए गजल काय>कत„क संग अपन गजल संबंधी लºय पूरा कऽ सकैए तँ फेर अनुमान कª जे जँ सभ अजाद गजलकार सभ अपन िजद छोिड़ xयाकरण बला गजल िलखनाइ शुª कऽ देिथ तँ कतेक कम समयमे ई लºय पूरा हएत? मुदा तािह लेल जªरी छै िवधागत छंद ओ xयाकरणकT माननाइ। एकटा गजल काय>कत„क तौरपर हमरा िवÃास अिछ जे जँ सभ नै तँ अिधक®श अजाद गजलकार िजद छोिड़ िवधागत छंद के मानता तँ माL 15-20 बख>मे गजल-गीत-अbय छंदयु°त काxय मैिथली सािहgय केर क²mीय िवधा बिन जाएत। ई िवÃास हमरा एनािहते नै अिछ एकर पाछू अनिचbहार आखर ओ िवदेहक िवÃास सेहो अिछ। गजलक एकटा काय>कत„क तौरपर हम EतीJा कऽ रहल छी जे किहया मैिथली गजलकT ई सौभा’य भेटतै जे ओ मैिथली सािहgयक क²mीय िवधा बनत आ ताहूसँ पिहने हमरा अइ बातक EतीJा अिछ जे कोन-कोन अजाद गजलकार सभ हमर एिह सपनाकT यथाथ>मे बदलबाक लेल सहयोग देता। EतीJारत.....................

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२ उमेश मiडल -सग र राित दीप जरय - ९८ म कथा गोRी- िसमरा (झंझारपुर ) सगर राित दीप जरय - िसमरा (झंझारपुर) 98म कथा गोRी संयोजक : डॉ. िशव कुमार Eसाद उØाटन सL - दीप Eçजवलन : oी महावीर Eसाद, डॉ. योगेbm पाठक ‘िवयोगी’, oी «यामानbद चौधरी, oी अरिवbद ठाकुर, oी जगदीश Eसाद मiडल, पो. Eीतम‘िनषाद’, oी उमेश नारायण कण>, oी नारायण यादवआ oी योगेbm राउत। उØाटन भाषण : oी अरिवbद ठाकुर, oी «यामानbद चौधरी, oी जगदीश Eसाद मiडल, डॉ. योगेbm पाठक ‘िवयोगी’आ oी महावीर Eसाद। मंच संचालक : oी संजीव कुमार ‘शमा’ पोथी लोकाप>ण सL - लोकािप>त पोथी : (1.) मरजादक भोज (कथा संŽह) : नbद िवलास राय (2.) दुधबेचनी (कथा संŽह) : राम िवलास साहु (3.) देखल िदन (कथा संŽह) : जगदीश Eसाद मiडल (4.) कथा कुसुम (क.सं. दो.सं.) : दुग„नbद मiडल (5.) सॲहॉंत-अनसॲहsत (काxय संŽह) : डॉ. िशव कुमार Eसाद (6.) पघलैत िहमखंड (काxय संŽह, अनु.) डॉ. िशव कुमार Eसाद (7.) नमtतtयै (उपbयास) : रबीbm नारायण िमo (8.) पंगु (उपbयास) : जगदीश Eसाद मiडल लोकाप>ण कत„ : oी महावीर Eसाद, डॉ. योगेbm पाठक ‘िवयोगी’, oी «यामानbद चौधरी, oी अरिवbद ठाकुर, oी जगदीश Eसाद मiडल, पो. Eीतम ‘िनषाद’, oी उमेश नारायण कण>, Eो. शुभ कुमार वण>वाल, oी नारायण यादवआ oी योगेbm राउत। दू श¨द : oी महावीर Eसाद

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मंच संचालक : उमेश मiडल कथा सL - अ¥यJ मiडल डॉ. योगेbm पाठक ‘िवयोगी’, oी «यामानbद चौधरी, oी अरिवbद ठाकुर, oी जगदीश Eसाद मiडल, पो. Eीतम ‘िनषाद’ संचालन सिमित : सूय> नारायण यादव, दुग„नbद मiडल, नbद िवलास राय, अनील ठाकुर कथा पाठ - Eथम पाली- 1. Eेमक अoुधार : नारायण यादव 2. बोझ : दुग„नbद मiडल 3. देखल िदन : जगदीश Eसाद मiडल समीJा : «यामानbद चौधरीजी, राम िवलास साहुजी, अरिवbद ठाकुरजी, योगेbm पाठकजी दोसर पाली- 4. दहेज पाप छी : नbद िवलास राय 5. संघष> : अरिवbद ठाकुर 6. िभनसुरका गप-सdप समीJा : दुग„नbद मiडलजी, उमेश नारायण कण>जी, िशव कुमार Eसादजी, नारायण यादवजी तेसर पाली- 7. घरतोड़नी : Eो. Eीतम कुमार ‘िनषाद’ 8. ऐगला पड़ाव : ललन कुमार कामत 9. ई केकर दोख : राम िवलास साहु समीJा : किपलेÃर राउतजी, उमेश मiडलजी, «यामानbद चौधरीजी चािरम पाली- 10. मराएल िजनगी : किपलेÃर राउत 11. केकरो िकयो निह : लºमी दास 12. काबू : उमेश नारायण कण>

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समीJा : नारायण यादवजी, Eीतम कुमार ‘िनषाद’जी, योगेbm पाठकजी पॉंचम पाली- 13. Eेत लेल लड़ाइ : अमर काbत लाल 14. जाएब नेपाल मुदा कपार जाएत संगे : िशव कुमार िमo 15. पुL मोह : लºमी नारायण Eसाद समीJा : नारायण यादवजी, Eीतम कुमार ‘िनषाद’जी, राम िवलास साहुजी छठम पाली- 16. िटdस : रामदेव Eसाद मiडल ‘झाªदार’ 17. नसीहत : नारायण यादव 18. आमक चोर सगर शोर : अ¿छेलाल शाtLी समीJा : नbद िवलास रायजी, िशव कुमार Eसादजी, सूय> नारायण यादवजी सातम पाली- 19. वाइफ : लºमी नारायण Eसाद 20. अनुशािसत EितRान : oीमती çयोित कुमारी 21. कोिचंग : oीमती çयोित कुमारी समीJा : Eीतम कुमार ‘िनषाद’जी, «यामानbद चौधरीजी, नारायण यादवजी अ¥यJीय भाषण : oी जगदीश Eसाद मiडल, पो. Eीतम कुमार ‘िनषाद’ धbयवाद ³ापन : डॉ. िशव कुमार Eसाद। ऐगला आयोजन : Eो. Eीतम कुमार ‘िनषाद’क संयोजकgवमे, tथान- मुरहदी (बाबूबरही)

ऐ रचनापर अपन मंतxय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।

१.उमेश मiडल - बीहैन कथा- िभनसुरका गप -सप २.रबीbm नारयण िमoक िकछु लघुक था १

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उमेश मiडल बीहैन कथा- िभनसुरका गप -सdप सभ िदन िभनसरे-िभनसरबुलैले िनकलै छी। कौलेजक िफŒडपर पहुँच ऐकातसँ-ओइ-कातपsच-दस चÕर लगबै छी।ओना तँ अनेको लोक िफŒडपर चÕर लगैबते छैथ मुदा चािर-पsच बेकतीक िमL-मiडलीमेहमहूँ रहै छी। किहयो अपने पिहने पहुँचलॱ, किहयो वएह सभ पिहनेसँ पहुँचल रहै छैथ। संगे सभ िकयो टहलै-बुलै छी। पछाइत सबहक बैसार चाहक दोकानपर होइत अिछ। दोकानोपर खाली हमहॴ सभ रहै छी सेहो निहयT कहल जाएत, आरो-आरो लोक सभ रहै छैथ। िकछु लोक पिहनॱसँ बैसल रहै छैथ आ पछाितयो अिबते छैथ। चाहक दोकानपर रंग-िबरंगक गपो-सdप चिलते अिछ। रंग-िबरंगक माने िवषयगत सेहो आ बेकतीगत- सामुिहक सेहो। बेकतीगत गप-सdप तँ बेकती-बेकतीक बीच चलैए, मुदा तैसंग िकछु एहनो बात चिलते अिछजे सामुिहक रहल।सामुिहक बात जखन िकमहरोसँ चलैए तँ ओइमे कोनो समुहक लोक अपन िवचार राखब उिचत बुझै अिछ। ओना, समुहो समुहमे अbतर अिछए। नवयुवक, अÇ>वृÇआवृÇसँ लऽकऽसहरगंजाक संगतगमाबला धिरक समूह अिछए। मुदा िवषयो तँ बहुत एहेन अिछए जे करीब-करीब सभ तरहक लोकक कानकT ठाढ़ कइयेदैत अिछ। आजुक गप-सdपक िवषय छल- आरJण। िकछु लोकक कहब रहैन आरJण अनुिचत अिछ आ िकछु लोक आरJणकT उिचत कहै छला। कए गोरे अपन-अपन बात बािज-बािज चुप भऽगेल छला आ कए गोरे बािजयो रहल छला। िकछु गोरे पJमे आ िकछु गोरे िवपJमे बािज रहल छला। माने आरJण निह रहक चाही ई एक समूहक कहब रहैन। कहबे निह रहैन, सािबत कहैत एक गोरे tप´ िवचार रखबो केलाह- “आरJण अनुिचत अिछ। मािन िलअ, डा°टरीए पढ़ाइमे जे आरJण अिछ। ऐसँ Jित हेबे करैए िकने। जइ काजमे कुशाŽ बुिधक जªरत अिछ ओ काज आरJणक चलैत मbद बुिधक हाथ पड़ने की Jित नइ होइए। हेबे करैए।” बेसी गोरेकT ऐ िवचारपर जेना सहमैत बनलैन।वाtतवमे आरJण नइ रहक चाही। जेना चुdपी पसैर गेल। मुदा चुdपी रहल निह। िब¿चेमेहमर िमL- िशबुजी सेहो थोड़ेक सह लगा देलिखन- “देखै नइ िछऐ, आएिदन केहेन-केहेन घटना ऑिफस-काय„लयसँ लऽकऽअtपताल धिरमे होइत रहैए।” ओना, िशबुजी िकछु आर बातकT गप-सdपमे आनए चािह रहल छला, मुदा हुनका,माने जे पिहनेसँ बािज रहल छलाितनका बुिझ पड़लैन जे आरJणक िवरोधेमे िशबुजी बजला अिछ। ओ अपन मुड़ी डोलबैत िब¿चेमे िशबुजीकT कहलिखन-

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“तँए ने कहलॱ, आरJण बेकार अिछ। आरJण हिट जेबा चाही।” हुनकर बात सुिनते िशबुजी हमरा िदस ताकए लगला। हमहूँ िशबुजीक चेहरा देखए-पढ़ए लगलॱ। बुिझ पड़ल जेना इशारेमे किह रहला हेन- “देिखयौ, आरJणक माL एक पहलूकT कनी-मनी जनैए िक निह जनैए, मुदा पंनचैती केना करैए!” बुिझ पड़ल िकछु बजबाक चाही। ओइ बेकतीकT पुछलयैन- “अँइ यौ भाय साहैब, डोनेसनपर जे नाम®कण होइ छै, ओ की एक Eकारक आरJण नइ छी? की ओइमे सभटा कुशाŽे बुिधक नाम®कण होइ छइ?” कए गोरे अपन-अपन कपकT देखबुिझ गेला जे आब चाह सिठ गेल,मुदाकए गोरे से िबनु देखनिह मुँहमे लगा-लगाबुझला- जा! चाह तँ सिठ गेल। जिहना सबहक कपक चाह सिठ गेल तिहना गपो सिठ गेल। २ रबीbm नारयण िमoक िकछु लघुकथा हम बौक छी पाकड़ी गाछ तर ओ पसीना पोिछ रहल छल। आगा-पाछा ओकर °यो निह छलैक। अगसरे छल। िनgय भोरे उठैत छल आ सsझ धिर पिरoम करैत छल। बदलामे िकछु अ¹-पािन भेिट जाइत छेलैक। दुपहिरयामे जहन कनेक उसास होइक तँ गामक जे पूव िदस पाकिरक गाछ छेलैक ओकरे छाहिरमे बैिस पसीना पोछए लगैत छल। दस साल बएस ओकर हेतैक। पता निह, किहआ ओकर माए-बाप मिर गेलैक। ओकरे संगतुिरया सभ कैटा छैक जे tकूल जाइत रहैत छैक। माए-बाप सभ ओकरा रंग-िबरंगक कपड़ा कीिन दैत छैक। िकताब कीिन दैत छैक। केहन भागबंत छैक ओकर संगी सभ। सएह सभ अर>-दर> ओ सोचैत रिह जाइत अिछ। पता निह अखन धिर कतेक मािलक ओिहठाम ओ काज केने अिछ। जतिह गेल ओतिह लात-जुŠासँ tवागत भेलैक। मुदा ओ की कए सकैत छल?पेटक सबाल छलैक। जाधिर सिह सकैत छल, सहैत छल। आ किहओ चुdपे भािग जाइक। पाछू लागल मािलक गरजैत उठैत छलैक। जेना-तेना कए ओ अपन पेट पोसैत गेल। आगा बढ़ैत गेल। जीबनक एक-एक िदन एकटा उपलि¨ध जकs बीतैत गेलैक। ¾मश: ओ जवान भए गेल। एमहर सरकार नया-नया योजना सभ लागू केलक अिछ। गाम-गाममे बÝक सभ खुिज गेलैक अिछ। एक िदन ओहो बÝक गेल आ मनेजर साहेबक आगू उिचती-िवनती केलक। मनेजर साहेब ओकरा एकटा िर°सा कीिन देलिखन।

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ओकरो नाम मनेजरे छलैक मुदा गामक लोक मनेजरा कहैत छलैक। मनेजरा िर°सा चलबए लागल। िनgय दससँ पbmह टाका आमदनी भए जाइत छलैक। ठाठसँ िजनगीक गाड़ी सरकए लगलैक। ‘मनेजर राय’ िलखल रहैक िर°सापर। भोरे उठए मनेजरा आ घiटी बजबैत दनादन िनकिल पड़ए। मनेजराक EितRा छोटका लोक सभमे बढ़ए लगलैक। कैटा कथा सेहो ओकरा िबआहक लेल आबए लगलैक। आ अbततोगgवा मनेजरा िबआह कए लेलक। गामसँ पsच कोस पि¿छम सासुर छलैक। अमन-चैन भए गेल रहैक ओकर िजनगीमे। भोरे छह बजे िर°सा लए कए िबदा भए जाइत आ सsझमे सात बजे एक ढेरी कÝचा लेने आपस होइत। मुदा ओकर ई िजनगी बेसी िदन निह चिल सकलैक। सात-आठ बख> पिहने ओ फूल बाबूसँ दसटा टका पÝच लेने छलैक। संयोगसँ वो पैसा आइ धिर आपस निह भए सकल छलैक। ओकर हालतमे सुधार देिख गॱआ-घªआ सभ अनेरे ओकरासँ जरएलागल छलैक। ओिह िदन सsझमे आपस भेल। बेस आमदनी भेल रहैक। घर पहुँचले छल िक फूल बाबूक गज>न सुनेलैक- “मनेजरा छT, मनेजरा छT?” “की है मािलक।” “तॲ अपन िहसाब िकएक निह फिड़छा रहल छT।” “कोन िहसाब?” “कोन िहसाब! केना बजैत अिछ जेना एकरा िकछु बुझले ने होइक। दस बख> भए गेलौ ओिह कज„कT। किहओ देबाक सुिध अएलौक? सुिद समेत ओकर आब पsच सौ टाका भए गेल अिछ! कािê भोर तक टाका चूका दे, निह तँ...।” मनेजरा तामसे बुŠ भए गेल। निह सिह भेलैक ई सरासर अbयाय ओ बैमानी। तामसमे ओहो गरजए लागल- “होशमे बात कª मािलक..! बुझलॱ जे बड़ टाकाबला छी।” एतबा ओ बाजल िक फूल बाबू गिरआएब शुª केलिखन। मनेजराकT सेहो टाकाक गरमी रहबे करैक। ओ अgयाचारक Eितकार करब कत>xय बुिझ गेल छल। एहले-वएहले फूल बाबूकT ग½ा पकड़लक आ गद>िनयs दैत अपना दरबाजापर सँ भगा देलक। फूल बाबू बेस तावमे आिब गेल छलाह। मैिथली छोिड़ िहbदीमे गरजए लगलाह- “कल देख ल²गे। ऐसे-ऐसे िकतने पाजी को मÝने ठीक िकया हूँ।”

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जबरदtत हŒला गाममे बजिर गेलैक। चाªकातसँ लोक सभ दौड़लैक आ दूनू गोटेकT फराक कए देलक। फूल बाबू अड़>-बड़> बजैत आपस अएलाह। Eात भेने मनेजरा पूव> जकs िर°सा िनकाललक। ठाठसँ ओकर सीटपर बैसल आ घiटी टनटनबैत घरसँ िबदा भेल। गामसँ बहराएल िक िर°साक चािलक² तेज कए देलक। िर°सा हवामे उड़ए लगलैक। िकछु दूर आगा बढ़लापर रtतापरजारिन राखल भेटलैक। मनेजरा िर°सा रोकलक आ जारिनकTहटबए लागल। एतबेमे चािर-पsचटा लठैत दन-दन कए दूनू कातसँ धानक खेतसँ बहरेलैक। दन-दन-दन। मनेजराक कपारपर लाठी पड़ए लगलैक। मनेजरा ठामिह खिस पड़ल। ओ लठैत सभ िर°सा पकड़लक आ ओकरा मािर लाठीसँ, मािर लाठीसँ ओतिह खiड-खiड कए देलक। फेर पता निह, ओ लंठ सभ कतए िनपŠा भए गेलैक। बहुत काल धिर मनेजरा एिहना अचेत बीच रtतापर पड़ल रहल आ ओकर िर°सा टुकड़ी-टुकड़ी भए कए बगलमे राखल रहैक। माथपर सँ खुन टपकैत रहैक आ मािरसँ सॱसे देह भुजरी-भुजरी भए गेल रहैक। धiटा भिरक बाद एकटा िर°साबला ओही रtतासँ गेल। मनेजराकT ओतए पड़ल देिख ओ स¹ रिह गेल। ओकरा िर°सापर दूटा याLी छलैक हुनका सभकT िर°सेपर छोिड़ ओ उतरल। मनेजरा िर°सा चलबैमे ओtताद भए गेल छल आ तT िर°साबला ओकरा 'गु' किह कए बजबैत छलैक। 'गु'क ई दशा के केलक? िकछु काल धिर ओ िर°साबला Jु¨ध रहल। आ तकर बाद जेना ओकरा अिकलमे सभटा फुराय लगलैक। धराक दए मनेजराकT िर°सापर लदलक आ आपस अtपताल िदिस िर°साकT तेजीसँ चलबए लागल। मनेजरा तीिन िदन धिर लगातार अtपतालमे पड़ल रहल। ऑ°सीजन देल गेलैक। बहुत रास दवाइ करए पड़लैक। चािरम िदन सsझमे ओ आँिख खोललक। होश अिबते अपन िर°साकT ताकए लागल। मुदा °यो िकछु निह कहलकै। मनेजरा फेर चुdप भए गेल। अtपतालमे ओकरा एक मास समय लािग गेलैक। गामपर ब¿चा सभ अ¹-पािनक अभावमे मरणास¹ रहैक। घरवाली मािलक सभबहक आँगनमे काज कए कए गुजर करैक। मुदा जािह िदन मनेजरा आपस अtपतालसँ अएलैक तँ ओकर घरवाली खुशीसँ दौड़ए लगलैक। मनेजरा घुिर तँ आएल मुदा ओकर बsमा पैर न²गराय लागल छलैक। िर°सा थकूचल गेल रहैक। आगा िक करए से निह फुरा रहल छलैक। घरमे दूटा ब¿चा सेहो भए गेल छलैक। सभ अ¹ िबना रोगा रहल छलैक। डा°टर मनेजराकT मास िदन आराम करबाक परामश> देने छलैक। मुदा घरक पिरिt थित देिखकए ओकरा बैसल निह गेलैक। मनेजरा साहस केलक आ आँगनसँ िनकलल। मुदा जाए तँ कतए? ट®ग टुिट गेल छलैक। िर°सा थकुचाएल राखल छलैक। गाममे माL फूले बाबू लहनाक कारोबार करैत छलाह। कीकरए? झख मािर कए फूल बाबूक ओिहठाम पहुँच गेल। ओकरा अखन धिर निह बुझल छलैक जे ओकर घरवाली फूले बाबूक ओतए काज करैत छैक। फूल बाबू ओकरा बेस ¥यान करैत छलिखन। ओकर घरवालीक नाम सुनरी

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छलैक। तेहने गुणो छलैक। मुदा सौbदय> गरीबीसँ दागल छलैक। फूल बाबूक किह ने किहआसँ ओकरापर नजिर गिर गेल रहिन।मनेजरा पहुँचते फूल बाबूकT सुनरीसँ असगरेमे हँसी-ठठा करैत देिख लेलक। ओ कतहुँ दोगमे नुका गेल आ तमासा देखए लागल। सुनरी नै नै करैत रहलैक। मुदा फूल बाबूक आ¾मकता बढ़ले गेलिन। एिहसँ आगू मनेजराकT देखबाक शि°त निह रिह गेल रहैक। Egया¾मणक साम­य> निह रहैक। तT ओ चो½े घुिर गेल आ घरमे आिब कए धराम दए खसल। िकछु बाजल निह होइक। ओ बौक भए गेल। ¦ फाटू हे धरती ! पिiडतजी बेस कम>काiडी छलाह। भोरसँ सsझ धिर जतेक काज किरतिथ सभमे भगवानकT tमरण अव«य किरतिथ। मंLो¿चार करैत उिठतिथ आ मंLे¿चारेक संग सुिततिथ। िLपुiड आ तािह पर लाल ठोप हुनक ललाटकT सुशोिभत केने रहैत छल। तािहपरसँ हरदम मुँहमे पान कचरैत, लाल-लाल पानक पीक फेकैत ओ साJात् कालीक अवतार लगैत छलाह। कारी चामपर ललका वtL धारण कए जखन ओ भगवतीक बbदना करए पहुँचैत छलाह तँ वातावरणमे एकटा अपूव> सनसनी पसिर जाइत छल। पिiडतजीक बएस करीब ४५ बख> होएतिन। पिरवारमे दुटा बेटी आ एकटा बेटा छलिन। घरवालीक tवग>वास आइसँ दस साल पिहने भए गेल छलिन। पिiडतजीक दूनू बेटी बेस सु¹िर आ लुिड़गर छलिन। मुदा हुनका पासमे टाकाक अभाव छलिन तT कतहु कbयादान पटैत निह छलिन। बेटा िभ¹ भए गेल छलिखन आ पिiडतजी अपन दूनू बेटीक संग एकठाम छलाह। पिiडतजीक घरक आस-पासमे बेस स‘प¹ पिरवार सभ छलैक। पिiडतजीक गुजरो हुनके सभहक मा¥यमसँ होइत छलिन। बेटा अपन घरवालीक संग दिरभंगामे रहैत छलिखन। ओिहठाम िडtëी°ट बोड>मे खज®चीक काज करैत छलाह। मुदा पिiडतजीकT िकछु मदित निह करैत छलिखन। ओ अखनो पिiडताइक बले जीवैत छलाह। दूनू बेटी समथ> छलिखन। गामेक हाइ tकूलसँ मैिëक धिर सभकT पढ़ौलिखन। आगा पढेबाक साम­य> निह रहिन। िबआहक लेल छटपटाएल छलाह मुदा कतहु टाका निह भेटैत छलिन। िबना टकाक कोनो बर िबआह करए हेतु तैयार निह छलिन। इएह सभ िचbतामे ओ िचिbतत रहैत छलाह। ओना पिiडतजीक स‘बbध पूरा गामसँ मधुर छलिन। मुदा दू-तीन पिरवारक लोक हुनका बेसी आदर करैत छलिखन। हीरा बाबूक ओतए तँ भोर-सsझ दू घbटा जªर बैसार होइत छलिन। मुदा पिiडतजी ककरो किहओ अपना हेतु िकछु कहलिखन निह। हीरा बाबूकT चािरटा बेटा छलिखन। दूटा तँ बाहर रहैत छलिखन मुदा छोटका दूनू मैिëक उतीण> केने छलिखन आ बससँ िनgय मधुबनी जाइत छल िकलास करए। सरोज ओ मीरा सेहो ओकरे सभहक संगे मैिëक उतीण> केने छल। एक िदन सॱसे गाम सुतल आ सुित कए उठल तँ गु‘मे रिह गेल। सरोज चुपचाप घरसँ िनपŠा भए गेल छलैक। घरे-घर तका-हेरी भेलैक मुदा कोनो पता निह। आbहर हीराबाबूक दोसर बेटा सेहो कािêएसँ गाएब छलैक। सॱसे गाममे कनाफुसी होमए लगलैक। पिiडतजी गरीब जªर छलाह मुदा हुनका अपन

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EितRाक पूरा ¥यान छलिन। ओ अिह ग‘भीर चोटकT निह सिह सकलाह आ राितमे सुतलाह से सुतले रिह गेलाह।गु‘म, सु‘म आÖय>चिकत ओ सोिच निह पािब रहल छलीह जे की करिथ। मीरा आब एकसिर छिल। आगू-पाछू °यो निह। िपताक मरला चािर िदन भए गेल छलै। सॱसे गाममे सरोजक भगबाक समाचार िबजली जकs पसिर गेल रहैक। मीराक तँ बकारे निह फुटैत छलैक। की करए ? पsचम िदन सभ िदयाद-वादक बैसार भेल। तय भेल जे गाम लए कए oाÇ भए जाए। पैसा-कौरी हीराबाबू गछलिखन। मीरासँ माL एतबा गछबा लेल गेलैक जे काज भेलाक बाद घर- घराड़ीहीराबाबूक नाम कए देल जएतिन। वएह पिiडतजीक एक माL स‘पिŠ छलिन। बैसार खतम भेल मीरा गुमसुम एकचारी िदस देिख रहल छल। पिiडतजीक oाÇ नीक जकs समप¹ भेल। हीराबाबू रिज´ारकT गामेपर बजा अनलाह। िलखा-पढी स‘प¹ भए गेल। हीराबाबू मीराकT कहलिखन- “मीरा, मास दू मास अही घरमे रह। तोरे घर छौक ने।” मीरा चुपचाप सुनैत रहिल जेना ठकिबदरो लािग गेल हो। अपने गाममे, अपने घरमे मीरा बेघर भए गेल छल। गामक लोक ओकरा Eित सहानुभूित तँ देखबैत छलैक मुदा महज माL देखौटी। धीरे-धीरे ओहो खतम। पbmह िदन भए गेल छलैक घरक रिज»ëीक। मीराकT आब ओिह घरमे एक पल िबताएब अस‘भव लगैत छलैक। एक िदन सएह सभ सोिच रहल छल िक लगलैक जेना दरबाजापर °यो ठाढ़ होइक। “हीराबाबू, अपने एतेक राितमे..?” हीराबाबू िकछु बजबाक िह‘मित निह कए पािब रहला छलाह। मीराक तामस अितपर पहुँच गेलैक। ओ िचिचआएिल – “चोर!चोर!” हीराबाबू भगलाह। अगल-बगलक लोकक ओिहठाम भीड़ एकÆा भए गेल छलैक। मीरा भोकािस पािड़ कए कािन रहल छिल। दाइ-माइ सभ दस रंगक गdप-सdप करैत पहुँिच गेल छलैक। जकरा जे मोन होइक से बजैक। मीरा चुपचाप सभ िकछु सुनैत रहल। ¾मशः भीड़ ओिहठामसँ हटैत गेलैक। राित ग‘भीर भेल जाइत छलैक। सॱसे गामक लोक सुित रहल छलैक। मीरा चुपचाप गामसँ बाहर भए गेिल। ओकरािकछु निह बुझल छलैक जे ओ कतए जा रहल अिछ मुदा कोनो दोसर िबकŒपो निह रिह गेल छलैक। मीरा बìड पढ़लो निह छिल। शहरमे किहओ रहल निह छिल। मुदा तकर बादो ओकरा कोनो गम निह छलैक। टीशनपर गाड़ी आिब गेल छलैक आ आओर अिधक सोच-िवचार करबाक अवसरो निह छलैक। ओ तरदए टीकट कीनलक आ गाड़ीपर चिढ़ गेल। ëेनमे बेस भी छलैक। िकछु काल तँ ओ ठाढ़े रहल मुदा ताबते ओकरा िचर-पिरिचत अिमत सेहो ओकर सामनेक सीटपर बैसल भेटलैक। हीरा बाबूक çयेR पुL अिमत। मीराकT ëेनमे धÕम-धुÕी करैत देिख ओ तुरbत उिठ गेलैक। “मीरा तूँ कतए जा रहल छT?”

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पुछलकै अिमत। मीरा ओकरा देिख कए अवाक् रिह गेल। िकछु बजबे निह करैक। अिमत ओकरा अपना सीटपर बैसा देलकै। अिगला टीशनपर िकछु याLी उतरलैक। अिमत सेहो ओिहठाम उतरए चाहैत छल मुदा मीराकT एकसिर छोिड़ देब ओकरा नीक निह लािग रहल छलैक। ओ मीरासँ ओकर गbतxय पुछए चाहलकै। मुदा मीरा िकछु बजबे निह करैक। बड़ मोसिकलसँ मीरा ओकर कहब मािन ओतिह उतिर गेल। गाड़ी सीटी दैत ओिहठामसँ आगा बिढ़ गेलैक। ëेनपर सँ उतिर कए मीरा कानए लागल। अिवरल अoुक Eवाह देख अिमतक मोन कªणासँ भिर गेलैक। ओ मोनिह मोन िनÖय केलक जे मीराकT ओकर घर आपस िदआ कए रहत चाहे ओकरा कतबो संघष> िकएक निह करए पड़ैक। ओ बड़ मोसिकलसँ मीराकT चुप केलक आ अपना संगे गाम आपस नेने अएलैक। ओिह िदन पूरा गामक बैसारी भेलैक। सभ हीराबाबूकT ‘िछया-िछया’ कहलकिन। ताबतमे अिमत कतहुसँ आएल आ साफ-साफ घोषणा कए देलक जे ओ मकान मीराक छैक, ओकरे रहतैक। सॱसे गॱवा Eस¹ भए ओकर जयगान करए लागल। मुदा हीराबाबूकT जेना नअ मोनपािन पिड़ गेलिन। बैसारीसँ लौिट ओ छटपटाएल रहिथ। सsझमे बाप-बेटामे बेस िववाद पसिर गेलिन। मुदा अिमत हुनकर गdप सुनबाक हेतु तैयार निह छल आ एक बेर फेर साफ-साफ किह देलकिन जे एिह अbयायमे ओ िहनकर संग निह देतिन। बाद-िवबाद बिढ़ते गेल। अbततोगgवा हीराबाबू क‘बल, िबछाओन आिद सिरओलिन आ गामसँ िबदा भए गेलाह। °यो टोकलकिन निह। अिमत मोने-मोन सोचैत रहल- भने ई आफद टिर रहल छिथ। हीराबाबू तँ चिल गेलाह मुदा मीराकT तैयो चैन निह भेटलिन। सॱसे गाममे दु´ लोक सभ मीरा आ अिमतक बारेमे नाना Eकारक कुEचार करए लगलैक। िनgय एकटा नव अफवाह गामक एक कोनसँ िनकलैत आ दोसर कोन धिर पसिर जाइत। मीराकT ई सभ गdप °यो-ने-°यो आिब कए किह दैक। ओ बड़ संवेदनशील छिल, भावुक छिल, तँए एहन-एहन गdप-सdप सुिन कए कानए लगैत छिल। एक िदन अिहना एसगरे अँगनामे कनैत रहए। अिमत कतहुसँ आिब गेलै। ओकरा एना कनैत देिख बड़ तकलीफ भेलै अिमतकT। “मीरा निह कान!” जेना िक सभ बात ओकरा बुझले होइक। “सुन! हमर बात मािन ले। हमरासँ िबआह कए ले।” मीरा आओर जोरसँ कानए लगल। अिमत ई सभ निह देिख सकल आ चुdपे ओतएसँ सरिक गेल। तकर बाद अिमत दोबारा घुिर कए निह अएलैक ओकरा लग। पूरा गाममे हŒला भए गेलैक जे अिमत कतहु चल गेल। मीरा ओतेकटा गाममे फेर एकसिर भए गेल छल। गाममे कोनो थाह पता निह छलैक। ब¿चा सभकT íयूशन पढ़ा-पढ़ा कए गुजर करैत छल। मुदा अिमतक एकदम गामसँ िनपात भए गेलाक बाद ओ अgयिधक दुखी छिल। ककरोसँ िकछु गdप करबाक इ¿छा निह रहैक। एतबेमे ककरो गरजब सुनेलैक। हीराबाबूक िपितयौत अिगआ बेताल छलाह। “कहs गेल पिiडतक बेटी..!” इgयािद-इgयािद।

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मीराकT ई सभ गdप निह सिह भेलैक। मोन कहैक: “फाटू हे धरती आ समा िलअ”।मुदा ओ िकछु बािजओ निह सकल। असोरापर करोट भए गेल। चाªकातसँ लोक सभ दौड़ल। हŒला भए गेलैक जे ‘मीराक हाट> फेल कए गेलैक। ओ घराड़ी सु¹ भए गेलैक।’ ¦

उपकारक भार ओ िनî म¥यवग¼य पिरवारमे पालल-पोसल गेल छल। मुदा सभ िदनसँ ओकर महgवाक®Jा पैघ छलै। गाममे िमिडल tकूल रहै। महॴस चरा कए आबए आ फटलाही अंगा पहीिर कए फÕा फँकैत tकूल िबदा भए जाइत छल। सातमामे जहन ओ Eथमआएल छल तँमाtटर सभ ओकर पीठ ठोिक देने रहिथन। पीठ ठोकैत Eधाना¥यापकजी सेहो कहलिखन- “बाह रे बेटा, अिहना आगू करैत रह..!” सॱसे गाममे ओकर नाम तेजtवी, सुशील ओ Eितभाशाली ब¿चाक ªपमे ©यात भए गेल छलै। आ लोकक लेल धिर ई सभ धिनसन। ओकरा पढ़बाक धुन लािग गेल छलै। िकताब लए लैत, महॴसपर चिढ़ जाइत आ पढ़ैत रहैत। खेबा-पीबाककोनो सुिध निह। मैिëकक परीJामे ओ िजला भिरमे Eथम tथान Eाdत कएलक। सरकारक िदिससँ ओकरा ३०० टाका Eित मासक छाLवृित सेहो भेटलैक आ ओ गामसँ दूर बहुत दूर पढ़क लेल चल गेल। कलकŠा िवÃिव_ालयक ओ स‘मािनत छाL भए गेल छल। एवम् Eकारेण ओ पिढ़ते गेल, बिढ़ते गेल। कलकŠामे ओकरा रहए जोगर कोनो नीक tथान निह भेिट रहल छलै। मास िदन भए गेल रहैक कलकŠा अएला। मुदा कोनो ठौर-ठेकान निह भेल छलै। किहओ ककरो ओिहठाम, किहओ कतौ। एिहना मास िदन बीित गेलै। एक िदन िवÃिव_ालयक वाचनालयमे एसगरे बैसल छल। गुमसुम। एतबेमे ओकरे वग>क एकटा छाLा ‘मालती’ अएलै आ ओकरा एकटा हŒलुक सन चाटी मारलकै आ एकसुरे बजैत रिह गेलै- “एना िकएक गुमसुम रहैत छT?” आलोककT ओकर सभटा बातसँ जेना छगुbता लािग गेलै। ओ मालती िदस एकटक तकैत रहल। मुदा िकछुए कालमे ओआgमलीन भए गेल। मालतीकT ओकर एिह अbतमु>खी आकृितसँ बड़ असमंजस भए गेलै।

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कनीकाल ओहो गु‘हरल आ फेर ओिह ठामसँ चो½े घुिम गेल। आलोक िकछु निह कहलकै। चुप-चाप किह निह की की सोचैत रिह गेल? सsझक समय लगीच छलै। वाचनालयक चपरासी कहलकै- “बाबूजी। आब समय समाdत छैक। कोठरीमे ताला लगतैक।” आलोक चुdपे ओिह ठामसँ िबदा भेल।आलोकक िजनगी अिहना अbहिरयामे बीतैत रहल छलै। इजोिरयाक Egयाशामे जीिव रहल छल। एक-एक डेग संघष>क पृRभूिममे किह निह ओकरा केमहर लए जाइत छलै। मुदा ओ चिलते रहल छल। नेनासँ अखन धिर क´ कटैत-कटैत ओकर संवेदनशीलता शीिथल भए रहल छलै। Eकृितक सौbदय>सँ दृि´ हटल जा रहल छलै। ओिह समयमे मालतीक संग ओकर भTट जेना ओकर दृि´कT एकदम बदिल देबाक हेतु तgपर भए गेल होइक। य_िप ओ मालतीसँ भिर पोख गdपो निह केने छल, मुदा किह निह ओकरासँ िकएक एहन आgमीयता बुझाइत छलै। मालती सौbदय>क Eितमूित> छल। ओकर tवभावक संतुलन, एवम् दृि´क मािम>कता एक-एक श¨दसँ अbदाजल जा सकैत छल। ओ कोनो बहकल लोक निह छल। मुदा ओकरा आलोकक Eित एकटा tवत: tफूत>, tनेह उभरैत छलै। संभवत: ओ आलोकक संघष>क Eित अिधक संवेदनशील भए गेल छल। आलोककT कलकŠाअएला डेढ़ माससँ ऊपर भए गेल छलै। मुदा ओकरा अखन धिर रहए जोगर मकान निह भेिट सकल छलै। मालतीक मकानमे बहुत रास जगह छलै। आसानीसँ ओ एकटा कोठरी आलोककT दए सकैत छल। मुदा आलोकसँ िकछु कहबाक ओकरा साहस निह होइत छलै। आलोकक गंभीर मौन ओ तजtवी xयि°तgव जखन कखनो ओकरा सामने पड़ैत छलै, ओ ओिहनाक ओिहना रिह जाइत छिल। एही ¾मे मास िदन आओर बीित गेल। वाचनालयमे एक बेर फेर आलोक भेट गेलै। बेस दुखी बुझाइत रहैक। मालतीकT निह रहल गेलै। पुछलकै- “की बात छै? आइ बड़ उदास लािग रहल छT?” आलोक चो½े कहलकै- “गाम घुिर रहल छी। लगैत अिछ आब आगा पढ़ब भागमे निह िलखल अिछ।” मालती पुछलकै- “िकएक?” आलोक गु‘म रिह गेलै। मालती कहलकै- “चल हमरा संगे।” आलोक ओकरा पाछू-पाछू िबदा भेल।

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मालतीक िपता पुिलसक एकटा विरR अिधकारी छलिखन आ पिÖम बंगाल कैडरमे काज कए रहल छलिखन। माL दूटा कbया छलिन। शीला ओ मालती। शीलाक िबआह, ि¸रागमन सभ िकछु स‘प¹ भए गेल छलै। मालती कलकŠा िवÃिव_ालयक आइ.ए.क. छाLा छिल। बड़ीटा मकान खाली खाली रहैत छलै। डी.आइ.जी साहैब आलोककT देिखते Eभािवत भए गेलाह। गंभीर, तेजमय xयि°तgव। संघष>क समयमे आलोक xयि°तgव आओर तेजtवी भए गेल छल। मालती ओकर गु‘मी, ओकर Eितभा आ सभसँ बेसी ओकर सौ‘यतापर मंLमु’ध छल। डी.आ.जी. साहेब तेज लोक छला। आलोकक EितभाकT ओ एकदम तािर गेलाह। आलोकक सभ वृताbत मालतीक मुहT सुनने छलाह। कहलिखन- “आलोक। ई अहॴक घर अिछ। िनिÖbत भए रहू। कोनो बातक Eयोजन हो तँ िन: संकोच बता देल करब। संगिह मालतीकT कखनोक पढ़ा देल करबै। गिणत कमजोर छैक। सुनैत छी अहs गिणतमे बेस मजगूत छी।” अपना बारेमे एकटा अितचिच>त xयि°तसँ एतेक रास गdप सुिन कए आलोक गुम रिह गेल। मालती अपन िपताक गdप-सdपसँ बेस Eस¹ छल। ओकरा सएह उमीदो छलै। आलोक आ मलती आब संगे संग रहैत दल। संगे पढ़ैत छल, कालेज जाइत छल आ किह निह कतेक काल धिर संगे गdप-सdप करैत रहैत छल। आलोक िन«छल भावसँ किह निह ओकरा की की किह जाइत छल। मुदा मालती लेल धिन-सन। ओ सभ चुdपे सिह जाइत छिल। आइ.ए.क परीJा लगीच छलै। दूनू गोटे परीJाक तैयारीमे िभड़ल छल। आलोकक सहारा भेट गेलासँ मालती सेहो नीक पढ़ाइ कए रहल छल। दूनू गोटे परीJा देलक आ नीकसँ परीJा उतीण> कए गेल। आलोक िवÃिव_ालयमे Eथम tथान Eाdत केने छल। मालती Eथम oेणीमे नीक न‘बर अनलक। डी.आइ.जी. साहेब आलोकसँ बड़ Eश¹ छलिखन। मुदा आलोक लेल धिन-सन। जािह आदमी लए कए शहर भिरमे धूम मचल छल, सएह आदमी गुमसुम कोठाक ऊपरी मंिजलपर किह निह की की सोचबामे xयtत छल। डी.आइ.जी. साहेब मालती सिहत हुनकर पूरा पिरवार आलोककT मदित करबामे जान लगा देने छल। मुदा आलोककT ई सभ कोना दिन लगै। ओकरा आव«यकतानुसार सभ िकछु भेट गेल रहैक मुदा तैयो ओ किह निह िकएक दुखी रहैत छल। मुदा करए की? अभावक असीम समुmमे कतेको काल धिर हेलैत-हेलैत एकटा सहारा भेटल छलै। मुदा लािग रहल छलै जे समुmसँ तँ उविर गेल मुदा ओिह टापूक कोनो गहॴर कूपमे डुिब जाएत जािहसँ फेर ओ निह िनकिल सकत। आिखर डी.आइ.जी. साहेब आ हुनकर पिरवार ओकरा एतेक मदित िकएक करैत छैक? मुदा किरतै की? कोनो दोसर िवकŒपो निह छलै। आगू बढ़ए,सहारा छोिड़ िदए तँ फेर वएह असीम समुm देखाइत छलै- अभाव, क´ ओ संघष>क चरमोgकष>। कतए जाए? की करए? असमंजसमे जीिव रहल छल। इएह सभ सोचैत छल की मालती ऊपर आिब गेलै।

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मौन एकाएक भंग भेलै। ओकरा एना गु‘म देिख मालती किह उठलै- “चल, चल नीचा चल। आइयो एिहना गलफुŒली रखबÝ की? तोरे कारण तँ हम एतेक नीक न‘बर लए कए उतीण> भेलहुँ अिछ। चल, तोरा भिर पेट िमठाइ खुएबौ।” आलोक हँसल आ मालतीक पछोर धए लेलक। नीचामे डी.आइ.जी. साहेब आ ओकर पिरवारक सभ लोक आलोकक EतीJामे छलाह। ओ सभ आलोकक tवभावसँ पिरिचत भए गेल छलाह आ तT िकछु कहलिखन निह मुदा ओकर अbयमनtकताकT तँ ओ िनिÖत ªपसँ तािर गेलाह। डी.आइ.जी. साहेब बात बदलैत कहलिखन- “बी.एस-सी.मे कतए नाम िलखैब आलोक? अखन िकछु सोचिलयैक निह? हमर िवचार तँ अिछ जे एहीठाम कलकŠा िवÃिव_ालयमे नाम िलखाउ। कारण ई नीक िवÃिव_ालय अिछ।” आलोक चुdपे रिह गेल। फेर आन-आन बात होमए लगलैक। ताबतेमे टेलीफोनक घbटी बजलैक आ डी.आइ.जी. साहेब जªरी काजसँ ऑिफस िबदा भए गेलाह। मालतीक माए सेहो कतहु उिठ कए चिल गेलै। आब माL मालती आ आलोक ओतए रिह गेल छल। मालती गdप शुª करैत कहलकै- “आलोक। तूँ बड़ नीक लोक छT।” आलोक एिह बातपर हँिस देलकै। कहलकै- “नीक तँ छी मुदा...।” “मुदा, मुदा िकछु निह!जे किह रहल िछयौ से सुन। एहीठाम रह आ संगे संग दूनू गोटे बी.एस-सी. करब। कोनो बातक िचbता निह कर।” आलोक किह निह कोना- ‘हँ’ किह देलकै। मालतीक खुशीक ठेकान निह छलै। ओ दौड़ल घर गेल आ एक बाकुट िमठाइ आिन कए आलोकक मुँहमे ठुिस देलकै। आलोक मधुर खाइत चल गेल। मालती आ आलोक एकटा नामक दू अंश भए गेल छल। भावुकताक संग पिरिtथितक सामंजtय कए लेने छल आलोक। मुदा भावनाक तरंगमे बिह जाएब सेहो ओकरा पिसन निह छलै। ओ अपन लºयपर अिडग छल। जीवनमे ओकरा बढ़बाक छलै। एही कारण ओ बहुत िकछु tवीकार कए लेने छल। मुदा ओ अपनिहसँ लगाओल लŠीमे ओझराए निह चाहैत छल। ओमहर मालतीक भावgमकता सीमोŒलंघन करबाक हेतु उफान केने छल। आलोक एही कसामसीसँ परेशान छल। मुदा बीचमे संŽामसँ भािग जाएब ओकरा मंजूर निह छलै। ओ मालतीकT पढ़ए-िलखएमे भिरसक मदित करैक। गdपो-सdप कए लैक मुदा ओिहसँ बेसी िकछु निह। मालतीक मोन ओिहसँ भरैक निह। असंतोषक रेखा ओकर चेहरापर tप´ देखार भए जाइत छलै। संतुलन बनएवाक दृि´सँ आलोक किहओ काल डsिटओ दैक। मुदा मालतीकT ओकर डsटो मीठे लगै।

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आलोकक tवभावसँ मालतीक पूरा पिरवार Eभािवत छल। मुदा ओकरा लेल धिन-सन। ओकर पूरा ¥यान पढ़ाइमे लागल छलै। जे िकछु समय बsचल रहैक से मालतीकT पढ़बएमे लगा दैक।आओर िकछु निह। मालती ओ आलोकक Eगाढ़ अbतरंग स‘बbध ओकर माए-बापकT छलै मुदा ओ सभ आलोकक tवभावसँ पिरिचत छलाह। मालती भलT बड़ भावुक छल, मुदा आलोकक संतुिलत, संयत ओ अbतमु>खी xयि°तgव अपेJाकृत अिधक िवÃसनीय छलै। ओमहर आलोकक अbतम>न ओकरा Eित कएल गेल उपकारक भारसँ दबल छलै। ओकर िकछुओ सहारा सिध जाइक तािह हेतु ओ मालतीकT पढ़बैत रहैत छल। बी.एस-सी. परीJाक माL दू मास शेष रिह गेल छलै। Eितिदन १०-१२ घbटा ओ tवयं पढ़ैत छल आ शेष समयमे मालतीकT पढ़बैत रहैत छल। परीJाक समय çयð-çयð िनकट अएलै, ओ मालतीक पढ़ाइक Eित अपेJाकृत अिधक सचे´ होमए लागल। ओकर एिह पिरoमक पिरणाम भेलै जे मालती पुनÖ Eथम oेणीमे उतीण> केलक, संगे आलोक िवÃिव_ालयमे Eथम tथान Eाdत केलक। एक बेर फेर ओकर घरक वातावरण आनbदमय भए गेलै। ओिह राित मालतीकT िन¹ निह भेलै। किह निह की की सोचैत रिह गेल। भोर भए गेल रहैक। चाª कात लोक काजमे लािग गेल रहैक। मुदा आलोकक कतहु पता निह रहैक। िकएक भेलै एतेक अबेर उठबामे? से सोचैत ओ आलोकक घर िदस बढ़ल। घरक केबाड़ी खूजल छलै। चौकीपर एकटा िचÆी राखल छलै। मालती िचÆी खोिल कए पढ़ए लागल- “िEय मालती! बहुत रास गdप करबाक मोन छल। मुदा किह निह िकएक िकछु बजाइत निह छल। तोरो बहुत रास गdप करबाक इ¿छा रहल होएतौक सेहो हमरा बूझल अिछ। तोरा लोकिनक उपकारक भारसँ हम ततेक दिब गेल छी जे आब एÕो घड़ी एिहठाम निह रिह सकब। किह निह तोहर सभहक कज„ िकछुओ सधा सकबौक की निह? माफ किरहT।”

तोहर आलोक।

मालती आकाश िदस शूbय भावसँ देखैत रिह गेिल। ¦

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ऐ रचनापर अपन मंतxय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। जगदीश Eसाद मiडलक दूटा लघुकथा- एकतीस माच> सरकारीए सूL जकs हमरो गाम सूLवÇ अिछ। जिहना सरकारी काम-काजक वष>क एकतीस माच>कT होइए आ एक अEीलसँ सालक शुª, तिहना हमरो गाममे सालक अिbतम काज माच>क अिbतम तारीखकT भेल। ओना, अपना ऐठाम अनेको ितिथ-िमित अिछए। जेना एकटा भेल फागुनक फगुआ जे सालक अिbतम पाबिनयð आ सालक अिbतम िदन सेहो छी, तिहना अंŽेजीक एकतीस िदस‘बर सेहो अिbतम िदनक तारीख भेल आ पिहल जनवरी सालक पिहल िदन भेल। तेतबे नइ ने अिछ, बैशाखक Eातसँ साल सेहो शुª होइते अिछ आ वैशाखी पाबैन भेल सालक अिbतम िदन। अखाढ़ सेहो अिbतम मास भेल आ सौन सेहो शुª मास भेल। तेकर अितिर°तो अनेको ितिथ-िमित सेहो अिछए। िव_ापितक िदन-ठेकान ल.स. संवतसँ सेहो होइत अिछ। खाएर जे होइए से सभ नीके तँ अिछए। बेसी लोकमे जँ बेसी तीिथ-िमित नइ चलैत रहत सेहो नीक निहयT हएत, िकएक तँ जनसं©या बेसी रहने जँ ितिथ-िमित कम रहत तखन तँ ओ ओिहना हेरा जाएत िकने जेना सरकारी tकीम हेरा जाइए। ओना, एते रहला पछाितयो गोटे-गोटे हेराइयो जाइए आ भोिथयाइयो जाइते अिछ। जँ से निह हेराएत-भोिथयाएत तखन तँ एÕे पाबैन दू-िदना िकए होइत। खाएर...। ओना, पाबिनयTकT की मुँह- नाÄैर अिछ, गोटे पाबैन सालमे एके िदन होइए तँ गोटे-गोटे सालमे दू िदन। माने दू मासमे होइते अिछ। जेना छिठ पाबैन अिछ जे काितकमे सेहो होइए आ चैतमे सेहो होइते अिछ, तिहना एहनो पाबैन तँ ऐछे जे सालमे तीन बेर, चािर बेर होइए। आ सेमासोक िहसाबसँ। जेना घड़ी पाबैन अिछ एकर ने मासक ठेकान अिछ आ ने िदन-तारीखक। िकएक तँ जिहना सौनमे होइए तिहना दोसरो मासमे होइते अिछ।तेतबे निह,एÕे मासमे बुधे-बुध सेहो होइए आ शिनये-शिन सेहो होइते अिछ। खाएर जेतए जे होइए, होइए। हमरा गामक ितिथ-िमित सरकारी ितिथ-िमितक संग चलैए,सेहो तँ कहले जा सकैए। ओना, गाममे अपना-अपनीक स‘बbध सबहक बीच अिछए जे अपना-अपना मासक तारीखक िहसाबे वा ितिथ-िमितक िहसाबे चिलते अिछ। कोनो चैत-बैशाखक जे सूL अिछ तइ िहसाबे अनहिरया-इजोिरया ितिथक िहसाबसँ चलैए तँ कोनो ितला-सकरsितक मुँह-िमलानीक िहसाबसँ चलैए, माने जिहना ितला-संकरsइत अंगरेजीक चौदह जनवरीसँतिहना िवÃकम„ पूजा सतरह िसत‘बरसँ मुँह-िमलानी केनिह अिछ। ओना, दुनूक मुँह-िमलानी एक रंग सेहो निहयT अिछ। ितला-सकरsितक िहसाबसँ मासक िहसाब सेहो चलैए, मुदा िवÃकम„ पूजाक िहसाब सेहो संयासीक सहवास जकs असगरे पिरवारो आ िदनो-ठेकान ठेकले अिछ। हमरा गामक सालक अिbतम उgसव स‘प¹ भेल, िनगु>ण-स‘Eदायक कबीर संत स‘मेलन अÆाइस सालक Eौढ़ जवानक उgसव छल। ओना, िछट-फुट ढंगसँ कबीर दासेक समयसँ–माने म¥यकालक चौदहमी-पनरहमी शता¨दीसँ–शुª भेल। मुदा ओइ समयमे गृह-बासू किहयौ आिक गाम-बासूसे नइ भेल। हमरा गाममे शुª भेल

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अÆाइस बख> पिहनेसँ, लोचन दासकT महाgमा भेला पछाइतसँ। लोचन दास ओहन िनिRत महाgमा तँ छिथये जे भीख मॉंिग भीख बँटै छैथ। जइसँ तीन गामक अिधकारी िहtसेदार नइ भेला सेहो केना नकारल जा सकैए। खाएर लोचन दास जे छैथओ अपने छैथ मुदा समाजक तँ एते छेबे करैथ जे असगरो नुÕर नाटक जकs सेहो आ छोट-पैघ भनडाराक बीच मंचपर चिढ़ सेहो अपन गामक संत-स‘मेलनक दल-हकार बsिट-बsिट िनगु>ण िवचारक शरबत घोिर-घोिर नइ पीआबैत छैथ सेहो केना नकारल जाएत। पीऐबते छैथ। ई तँ भेल सालक खुदरा-खुदरी कारोबार, असल होइए अbतर„»ëीय िनगु>ण सbत स‘मेलन, जे कबीर सbत स‘मेलनक नाओंसँ सेहो जानले जाइए आ मानलो तँ जाइते अिछ। से भेल एकतीस माच>कT। तीन िदनक स‘मेलन छल। पिहल िदन राशन-पानीसँ लऽ कऽ सभ तैयारी भेल आ दोसर-तेसर िदन भेल कीत>न-भजनक संग Eवचन। नीक-नीक जानकारो आ िवचारको महाgमा सबहक आगमन भेल छल। एक-सँ-एक महाgमा पहुँचल छला। सbत-समागम खूब जमल, नीक उgसव भेल। सरकारी योजना जिहना गोटे साल नीक दलक बीच संचािलत भेलासँ नीक जकs सफलो आ सुbदरो होइए तिहना ऐ साल हमरो गाममे भेल। माने ई जे सालक शुªसँ अbत धिर एकोटा पाबैन-ितहार ने दू-िदना भेल आ ने कटबी भेल। अपन-अपन मासो आ िदनो-बेरागन सबहक ठेकानपर रहलैन तँए एक-दोसरकT पुछनॱ वा िबनु पुछनॱ सभ एक-िदने ओिहना केलैन जिहना एक इंिजनक दूटा इंजीिनयरकT एÕे रंग लूिर-बुिध रहने परोछो आ सोझहोमे एÕे रंग, एक धारामे काज संचािलत होइत रहैए। ई तँ भेल आगू िदस चलिनहारक, मुदा एहनो तँ अिछए जेकर ितिथ-िमितक िदशा िभ¹ अिछ, हुनकर जे दिहना छैन ओ अहsक बामा भऽ जाइए। माने अहs जिहना हुनका आगू िदस बुझै िछऐन तिहना ओहो अपनाकT आगूए िदस बुझै छैथ, मुदा अहsक मासक िवपरीत हुनकर मास भऽ जाइ छैन, जइसँ अहsकT िवपरीत िदशा देखाए पड़ैए। तँए, अbतर माL एतबे भेल। मुदा अपन-अपन पिरवारक आ अपन-अपन समाजक बात जखनबिसया भात खेिनहार जकs माने सsझक भोरे िबसरिनहार जकs, लोक िबसैर जाइए तखन साल भिरक पाबैन-ितहार मन िकए रखता, िकए कोनो पाबैनक नीक-बेजाएक िवचार करत, चौरचनक दही आ खीर-पुड़ीसँ हुनका मतलबे की छैन। छिठक कुिशयारक खॲइचाकT मुँहक दॉंतसँ सोिह-सोिह गुŒला कािट-कािट िकए रस-पान करता। जखन िक देखते छी जे बनले-बनल गुŒलो आ बनले-बनल लालमोहनो बजारमे टटके भेटै छइ। िकए कुिशयारक िमल बिन लोक रस पीता..? अहs भलT बुिझऐ जे टटका रस चुसै छी, मुदा ओहो तँ ितरपेखैन किर कऽ घुमलै रहै छैथ िकने। माने भेल कुिशयारक रससँ आगू बिढ़ सÕड़ वा राब बिनचाहेचीनी बिन चीिनयाएल बोरमे डुमल रिहते अिछ। खाएर जे अिछ से अिछ मुदा ईहो तँ अिछए जे धानक दौन करैकाल जिहना ऐगला बरद माने पैटक बरदकT दौड़-दौड़ चलए पड़ै छै तँ बीचला दोसरोक भरे चलैए आ मेहोता तँ सहजे मेहे बनल मिहयाइत चिलते अिछ, तिहना समाजोक बीच समाजक ओहन लोक नइ छैथ सेहो केना कहल जा सकैए!सेहो तँ छिथए। साधारण पिरवारमे लोचन दासक जbम भेल छैन। साधारण िशJा, माने गामक साधारण tकूलसँ लोचन दास िशJा पौने छैथ। ओना, हमर गाम देखौआ साधु-महाgमाक बड़का कारखाना छी, जइमे धनकुिटया मशीनसँ लऽ कऽ पिन-पिटया मशीन तक तैयार होइते अिछ। माने ई भेल जे रौदी भेने बिढ़ जाइए आ बरसात भेने घिट जाइए। जइसँ जिहना देशमे एक-पाटीसँ दोसर पाटीमे, नेताकT जाइ-अबैमे देरी नइ लगैए तिहना हमरो गाममे अिछए। आन लोककT जªरीए की छै जे पुछतैन अहs कौआ छी आिक मेना? एक स‘Eादायसँ दोसर आ दोसरसँ तेसर स‘Eदायमे लोक भदविरया धार जकs ऐ खेतसँ ओइ खेतआ ऐ धारसँ ओइ धारमे बिहते

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अिछ। आन-आन गाममे जे होइत हौ मुदा हमरा गाममे तँ एहेन अिछए जे सेवकजी सभकT दरमाहा दए-दए महाgमाजी सभकT संगमे रखए पड़ै छैन। जँ से नइ करब तँ सñाजवादी दाहीमे महनथाना रािख केना सकब। तइ रखैले जँ कोनो कल-बल छुिट जाएत तँ अनेरे ने ओ कपारपर लिद जाएत। भाय, जखन देशमे महगी आएल तँ लोकोमे महंगी एबे करत िकने। लोचन दास पिरवािरक महाgमा छैथ। पचास बख>क लोचन दासक नमहर पिरवार छैन। माता-िपताक संग तीन भैयारी सेहो छैथ। नाित-नाितन, पोता-पोतीसँ घर भरल छैbहे। िनî पिरवारमे रिहतो लोचन दासक पिरवारमे िशJाक tतर गामक िहसाबे अगुआएल छैbहे। ओना, आन गामक लोक हमरा गामकT जिहना संसकिरया मानै छैथ तिहना अिग-लिगया सेहो मािनते छैथ। सbत-स‘मेलनक समापनक तीन िदनक पछाइत लोचन दास भेटला। रंग-ªपसँ बुिझ पड़ल जे लोचन दासक चला-चलती िकछु बिढ़ गेल छैन। जइसँ तबािहयो[1] बिढ़ गेल छैन आ स‘मेलनक सफलताक खुिशयो मनमे छैbहे। मुदा से झँपाएल जकs बुिझ पड़ै छल। चेहराक जे ªिख छेलैन ओ मेहनतक छेलैन तँए मिलन सेहो छेलैbहे। ओना, गाममे स‘मेलनक जागृत उgसाह जिगये गेल छल जइसँ जहs-तहs माने दुआर- दरबçजा, चौक-चौराहाक गप-सdपक ¾ममे स‘मेलन छेलैहे। होइतो अिहना छै जे पिरवारमे कोनो नीक काजकT सफल भेने जिहना पिरवारोमे तिहना समािजक काजकT सफल भेने समाजोमे खुशीक लहैर उिठते अिछ। भेटते लोचन दासकT पुछलैयन- “की हाल-चाल, महाgमाजी?” ओना, अखन तक ‘महाgमाजी’क Eयोग लोचन दासक संग नइ करै छेलॱ, उमेरोक िहसाबसँ आ समािजक िहसाबसँ सेहो लोचने दास कहैत आिब रहल छेिलऐन। महाgमाजी कहलासँ लोचन दासक मन चॱकलैन मुदा पािनमे उठल çवार जकs धीरे-धीरे असिथर सेहो हुअ लगलैन। तेकर कारण भेल जे हमरासँ पिहने,माने स‘मेलने िदनसँ बहरबैयो महाgमा सभ लोचन दासकT महाgमेजीक नाओंसँ स‘बोधन करै छेलैन। आ गामो- समाजक लोक सेहो सएह कहै छेलैन। जही धारामे हममहाgमाजी कहने छेिलऐनतही धारक पािनमे लोचन दासक मन िमिल िवलीन भऽ गेलैन, जिहना समुmमे उठल çवार िवलीन भऽ जाइए। लोचन दास बजला- “अपना नजिरये बुिझ पड़ैए जे सभ ठीके-ठाक अिछ। तखन तँ य³T छल, हजारो रंगक काजक िवहीत छेलैहे, तँएदोग-दागमे कोनो छुिट गेल हुअए सेहो भइये सकैए।” लोचन दासक िवचारमे सेहो सुधार भेल बुिझ पड़ल। सुधरबे ने जीवनक सभ िकछु छी। जेना-जेना अbहार ससरैत जाइए तेना-तेना इजोत सेहो िजनगीमे पसरैत जाइते अिछ। अbहारसँ इजोत िदस अपनाकT सुधारैत बढ़ाएबे ने िजनगी भेल...। बजलॱ- “आब य³क काजसँ तँ िनवृत भऽ गेल हएब िकने?” लोचन दासक मन उिधयाएल रहबे करैन, तँए भँिसयाइत बजला- “की िनवृिŠ हएब! जखन मायामे पड़ले छी तखन िनवृिŠक कोन बात। जािनयT कऽ ते सभ भगवानेक माया छी। जाबे ओ रहता ताबे मायाक अbत थोड़े हएत। जिहना ³ानक संग अ³ान तिहना कायाक संग

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 48

मायो ने सटले अिछ। एकटासँ छुटब दोसर पकड़त, तखन तँ जोगो माया हुनके िछऐन। वएह पकड़ए चाहै छी से पकड़मे अिबते ने अिछ।” लोचन दासक चढ़ैत िवचारकT आगूए-सँ घेिर बजलॱ- “बाहरक महाgमा सभ खुशीसँ गेला िकने?” ‘बाहरक महाgमा’ सुिन लोचन दास बजला- “बाहरक महाgमा तँ एते खुशी भेला जे संगे-संग चलैले कहै छला, दोसर-तेसर जगह सेहो स‘मेलन सभ छी। मुदा अखुनका समयमे गामसँ िनकलैबला हम थोड़े छी। जिहना एते नमहर स‘मेलन पसरलतिहना ने ओकरा उसारैमे िकछु समय लगबे करत।” लोचन दासक मनमे जे छेलैन से बुझबे ने केलॱ, तँए बजा गेल- “से की?” लोचन दास बजला- “अखनो तक गामकT नइ िचbहै िछऐ?” ‘गामकT नइ िचbहै िछऐ’सुिनते मनमे भारी धÕा लगल। धÕा ई लगल जे जइ गाममे जनैम कऽ अधवेशू भेलॱ, तइ गामकT नइ िचbहै िछऐ। कहू जे एहनो होइ जे हमर कोन बात जे सात पुtतसँ जइ गाममे रहैत आिब रहलॱ हेन, तइ गामकT अखनो धिर निह चीbह पेलॱ। मुदा पैछलो पुtतक िकयो िचbहलैन आिक नइ िचbहलैन। जँ िचbह पौने रिहतैथ ते एक-दोसरकT चेतौने रिहतिथन िकने जे आँिखये-मुहT बढ़ैत हमरो लग तक आिब गेल रहैत। फेर भेल अनेरे जे मनकT एते औंटै-पौड़ै छीसे बेकार। िकए ने लोचने दाससँ पुिछ िलऐन जे केना नइ गामकT िचbह सकलॱ। पुछलयैन- “से की यौ लोचन दास?” लोचन दास बजला- “केते गाममे एहेन होइए जे नवका-नवका क‘पनी सभ गाममे टेbट-समेना पसाइर बड़का-बड़का करतब करए अबैए आ गामक लोककT ठिक-फुिसया हाथ मािर भािग जाइए।” िब¿चेमे बजा गेल- “से ते सिदकाल अखबार-रेिडयोमे सुिनते रहै छी।” लोचन दासकT जेना सह भेटलैन तिहना अपनाकT सिहयारैत बजला- “लगले सbत स‘मेलन समाdत भेल अिछ। गाममे महाय³ भेल, केते रंगक काज भेल, जइमे िकनकर की आएल छैन वा िकनकर की देनी-लेनी अिछ से जँ नीक जकs नइ फिरछा लेब आ जँ तइ िब¿चेमे गाम छोिड़ देबतखनतँ अनेरे ने बिकयौताबला सभ बजता जे फŒलs एक-न‘बर ठक अिछ।” ‘ठक’ तँ बुझल अिछ, माने ठकैबलाकT लोक ‘ठक’कहैए मुदा ‘एक न‘बर ठक’की भेल से बुझबे ने केलॱ। बजलॱ-

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“महाgमाजी, ठको एक न‘बर आ दू न‘बर होइए! ठक तँ सहजे ठक भेल, ओइमे एक-न‘बर-दू-न‘बर माने शुÇ-अशुÇ की भेल?” नव जागरण एने जिहना नव-नव अनेको रंगक जागरण हुअ लगैए तिहना लोचन दासकT सेहो भेलैन। ओना, लोचन दास गाम-घरसँ बहुत पिहनेसँ बहराए लगल छला। माने अÆाइस सालक स‘मेलनसँ पिहनिहसँ बाहर आएब-जाएब शुª केने छैथ। मुदा ऐ सालक स‘मेलनमे एकटा नव जागरण एलैन। ओ ई जे कबीर स‘Eदायक स‘मेलनक मंचपर लोचन दास सोêोअना अपन मातृभाषा माने मैिथलीक Eयोग केलैन। जे सुनलो छल आ बुझलो छल। लोचन दासकT बुझैमे आिब गेल छेलैन जे कबीर दास सधुÕड़ी भाषा–माने साधल भाषा–क Eयोग अपन भजन-कीत>नक संग रचनोमे केने छैथ। हजारी बाबू[2] सन çयोितषी कबीरकT भाषाक तानाशाह कहने छैन। तँए ओइ ग‘भीर रहtयकT जाधैर अपन मातृभाषामे मातृवत बाल-बोधकT नइ िसखौल जाएत ताधैर श¨द-जालमे लोक फँसल रिह जाएत िकने, तँए...। ओना, अखन धिर माने पैछला य³ धिर, लोचनो दास ओही अ´धातुक भाषामे बजैत आिब रहल छला आ अहू बेर स‘मेलनमे बहरबैया महाgमा सभ ओही धारमे डुमकी लगेबे केलैन। ठकक ठकपनक चच> करैत लोचन दास बजला- “एक न‘बर ठक भेल जे एक न‘बर काजक (य³क) बीच ठकैए आ दू न‘बर भेल जे ओइसँ िभ¹ अिछ, माने जे झूस-झास काज रहल ओइमे ठकैए।” ओना, मनमे उठल जे लोचन दासकT एक-न‘बर–दू-न‘बर काज सभकT िबलगा कऽ पुिछ िलऐन मुदा ओहो काजमे रहैथ तँए औगुताएल रहैथ आ अपनो काजमे रहने औगुताएले रही। मुदा जँ समुm tनान कएल लोक रtतामे भेट जािथ आ हुनकासँ टोको-चाली नइ करी सेहो केहेन होएत, तँए लोचन दासकT टोकने छेिलऐन। काजकT िछिपयबैत बजलॱ- “अपन मन खुशी भेल िकने लोचन दास?” बेरागी जकs लोचन दास बजला- “दुिनयð िक चुमक-लोहसँ कम अिछ। जेते दुिनयsकT छोड़बै ओते दुिनयs पकड़त।जिहना चुमक-लोह साधारण लोहमे कखनो मुड़ी िदससँ सिट जाइए तँ कखनो नाÄैर िदससँ तँ कखनो पएर िदससँ, तिहना ने दुिनयðक आकष>ण छीहे।” लोचन दासक िवचारमे ओतेक रस नइ भेटल जेतेक हुनकर देहक चुलबुली रहैन। तँए मन मधुआ गेबे कएल। मुtकी दैत बजलॱ- “से की यौ लोचन गॲसाइ?” अपन मनक िकछु समtया लोचन दासक छुटलैन तँ िकछु समtयाक फँसरी लिग गेलैन। से फँसलैन शारीिरक ªपसँ सेहो आ मानिसक ªपसँ सेहो। मुदा लोको-लाज तँ आँिखक पािन उतािरते अिछ। केना लोचन दास बजता जे अखन धिरक अपन शारीिरक ि¾या जे रहल अिछ, ओइमे सँ अदहासँ बेसी बदलैक समtया अिछ। तिहना अ´धातुक जे भाषा बजै छीतेकरो एकधातुक बनबए पड़त। निह तँ िजनगी ओझरा जाएतxयाकरणक धातुए-पाठमे। मुदा गामोमे तँ टोले-टोल भनडारोमे यएह अ´धातुक भाषाक Eयोग करैत आिब

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रहल छी। अपन मातृभाषा, माइक सदृश वाणी छी जे पािनमे पाथर जनमा मनुखक िनम„ण करै छैथ, मुदा ब¿चोक लेल तँ वएह ने भेली जे ब¿चा बुिझ निह पबैए। मुदा गामो तँ गाम छी, लगले लोचन दासकT अपन भाषामे बिजते कहतैन- भुसकौल महाgमा छैथ।तँए भुसकौलसँ तेज महाgमा बनैक बाट लोचन दासकT धड़ए पड़तैन, से बुिझये ने पेब रहल छला, मन उड़ल-उड़ल जकs भइये गेल छैन। लोचन दासक मन उड़ैक कारण भेल छेलैन जे जेते-दूरक अपन कम>भूिम बुिझ कम> कऽ रहल छी ओइमे भाषाक ªप बदलब। ओना, ई भाषाक ªप बदलब नइ भेल। िकएक तँ िवषयक ग‘भीर रसक अनुशीलन करबाक सभसँ नीक भाषा भेल मातृभाषा। मातृभाषाक माने एतबे नइ भेल जे मुँहक बोली छी। ओकर माने ईहो भेल जे मातृभाषाक मातृभूिम सेहो अिछ जइमे वtतुगत सेहो आ वtतुक रस-रहtयगत सेहो अिछए। जइसँ सहजे दुनूक बोध होइए। तँए मातृभाषा मातृवत् होइते अिछ। अही बीचमे लोचन दास,अमतीक कsटक झॱखरी जकs झँखुरीमे ओझरा गेल छला, जे कनी-मनी अपना आभास जकs बुिझ पड़ल। तँए तोष-भरोस दैत बजलॱ- “लोचन गॲसाइ, िजनगीए-कT तँ लोक संघष> कहैए। से की कोनो ओिहना कहैए, जखने िकयो अपन िववेकी बीआकT िवचारक खेतमे रोिप ओकरा गाछकT तािम-कोिर, पटबए-सॴचए लगैए आिक रंग-िबरंगक कीिड़यो- मकौड़ी आ रौदो-बसात ओकरा न´ करै पाछू लिग जाइ छइ। तँए, जँ रोपिनहार हािर मािन िलअए तँ वएह ने भेल रणभूिमसँ भागब।” अपना िवचारे बाजल छेलॱ जे यएह िवचार–माने अdपन बुझल िवचार–लोचन गॲसाइ सेहो बुझता मुदा से भेल निह। लोचन गॲसाइक मनमे रणभूिम चढ़ल रणी जकs अपन संकŒपक दृढ़ता जिग चुकल छेलैन तँए ओइ दृढ़ताकT अगुअबैत बजला- “भाय साहैब, िबनु संकŒपक मनुख ओहने जेहेन िबनु फूलक वा फलक लहटगर गाछ होइत अिछ, तँए...।” ‘तँए’ किह लोचन गॲसाइ ठमैक गेला।मुहसँ िनकालैक ¾ममे एकाएक ªिक जाएबएकर जªर िकछु कारण भइये सकैए। पुछलयैन- “तँए किह िकए ªिक गेलॱ?” लोचन गॲसाइ अपन बेवसी देखबैत बजला- “भाय साहैब, केतेक िदन एहेन अपनो मनमे भेल अिछ जे बािज कऽ केकरो िकछु गछिलऐ आ पूरा नइ पेिलऐ। लोकक तँ कथे कोन जे नगरक दशमीक डगरक ढोल जकs ढनढना जाइए आ करनी-धरनी िकछु रहबे ने करै छइ।” सएह अपनो ‘अपनो’ किह लोचन दास अपन संकिŒप िवचारकT मनेमे रिख मुँह ब¹ कऽ लेलैन। मनमे भेल जे भिरसक कोनो एहेन काज मनमे जªर छैन जेकर भारीपन देख घबरा रहल छैथ। तैसंग अपना मनमे ईहो भेल जे जाबे िकयो अपन िवचारकT दोसरा-आगू Eकट नइ करत ताबे काजक ªप मनमे बदिलयो सकैए। बदलैक अनेको रंगक पिरवेशो सभ अिछए। तँए कोनो संकिŒपत िवचार ताधैर मूत> ªपमे नइ उठैए जाधैर दोसराक आगू ओइ मूित>क ि¾या-कलापक ªप Eकट निह होइए। माने भेल, कोनो िवचारकT बेवहािरक ªप बनबैमे ओकर ªपकT नीक जकs सजबैक Eि¾याक िवचारक अदान-Eदान करैत एक सीमा िनध„रण करब...। बजलॱ-

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“लोचन गोसsइ, एना जँ िसदहाक चाउरकT मुड़ी-छोपा त‘मासँ नपबै तखन ते पिरवारमे केते लोक अधपेटे रिह जाएत।” जिहना मीठो दबाइ भारी रोगकT असानीसँ भगाइये दइए, तिहना ने मीठ वािणयो छी, मुदा ओकर िनशान धनुषपर ठीकसँ बैइसै। से भेल, भेल ई जे लोचन गॲसाइ ôõचारी जकs बजला- “भाय साहैब, ऐ बेर स‘मेलनसँ पिहने मनमे रोिप नेने छेलॱजे भनडारा-सँ-मंच धिर अपन मातृभाषा- मैथलीमे बाजब, से केलॱ।” लोचन गोसsइक िवचार सुिन मनमे खुशी भेल। बजलॱ- “ई तँ घीबोसँ िचÕन काज केलॱ!” ‘घीसँ िचÕन’सुिन लोचन गोसsइक उgसाह जेना दोबर ªपमे जगलैन। केना नइ जिगतैन, जँ कोनो एहेन अकाट िवचार िजनगीमे अकाट काजक ªप बेवहारमे अबैए ते यएह ने भेल बेवहािरक जीवन...। लोचन गोसsइ बजला- “सbत स‘मेलनक अिbतम िदनक घड़ीमे मंचपर अपन संकिŒपत िवचारकT उØोिषत करैत बजलॱ- आइ एकतीस माच>क संग गामक ऐ सालक अिbतम उgसव सेहो छी। आइ िदनसँ घर हुअए िक बाहर, अपन मातृभाषा- मैिथलीमे अपन िवचार xय°त करब।” लोचन गोसsइक संकिŒपत िवचार सुिन मन मुिtकयाए लगल। मुिtकयाइते कहलयैन- “लोचन गोसsइ, अनेरे जे आइ मोटका रtसासँ अपन िवचारकT बbहलॱसे जँ शुªहेसँ पतरको डोरीमे बbहैत आएल रिहतॱ ते आइ एहेन रtसाक जªरत थोड़े पड़ैत।” लोचन गोसsइक आgमबलक संग आgम³ान सेहो िछटैक चुकल छेलैन। बजला- “जिहना िजनगीक पाछू जीआलसँ मरने धार तक अिछतिहना ने आगूओ अिछ, मुदा जखन लंगोटा धारण कऽ लेलॱ तखन डुमी आिक मरी तेकर कोनो परवाह निह, जे हेतइ से देखल जेतइ।” लोचन गोसsइक चपचपी देख अपनो मन चपचपा उठल। बजलॱ- “लोचन गोसsइ! अपनो ते पैछला िजनगीक िकछु अनुभव करैत हेबइ?” Eशाbत िचŠ लोचन गोसsइ बजला- “भाय साहैब! असलमे हम अपने घरमे हेरा गेल छेलॱ..!” मनमे उठल- जखन अपने घरमे हेरा जाएबतखन रहब केतए! केतौ जँ रहबो करब तँ ओ हेराएले रहब िकने! फेर मनमे उठल- एना उट-पटsग बात लोचन दास बजला िकए? पुछलयैन- “से की?” लोचन गोसsइ बजला- “भाय साहैब, अपना मनमे होइ छेलए जे हमरा मैथली बजैक-िलखैक लूिर नइ अिछ। तँए, हहैर कऽ हेरा गेल छेलॱ।” q

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श¨द सं©या : 2814, ितिथ : 10अEैल2018

गेल माघ उ¹तीस िदन बsकी बbधुवर हम सभ ओही िमिथलाक बासी छी जे अपन कोिखसँ ओहेन मनुख पैदा करैत आएल छैथ जे अपन सुिधसँ समाजक Eवर सुिधमे सपृ°त होइत रहला अिछ। एहेन सुभावक बीज-बपन िमिथला सभ िदन करैत आिब रहल अिछ आ आगूओ करैत रहत। एहेन-एहेन सुिधजन सभ कालखiडमे होइत रहला अिछ जे सीमामे बँटल गाम समाजक बीच टहैल-टहैल पिरवारक संग आगत-भगतक सुिध रिखते आिब रहल छैथ। ओना, समाजक बीच रंग-िबरंगक कुधार सेहो सभ िदन पनपैत रहल अिछ आ अखनो पनैप रहल अिछ, जेकर अनेको कारण–दैवीसँ मानवीय धिर–रहल अिछ। मानवीय भेल हजारो बख> परतंL रहब।ओना, परतंLता सबहक नजैरमे आिबयो ने रहल छैन, तेकरो अनेको कारण अिछ। बाहरी शासकक बीच रहने, िमिथल®चलक जे जbमजात समािजक सरोकार रहल ओइमे रंग-िबरंगक िवघटन होइत रहल। जे परतंL बेवtथाक सोभािवक गुण होइ छइ। दोसर भेल, दैवी िवघटन। अनेको धार-धुरक बीच बसल िमिथलाक भूिम अिछए। धारो तँ धार छी, जिहना नीक लोहाक चÕू सुपारीक संग हाथक ओंगिरयो कािट दइए मुदा भतलोहक चÕू बुते हाथक ओंगरीक कोन गप जे धारपर चढ़ला पछाितयो सुपारी िछछैल कऽ कुिद उड़ैए। तिहना ने भूिममे बहैत धारो अिछ। ओहूमे कोनो-कोनो धार पिनबहो अिछ आ कोनो-कोनो पिनबाहाक संग अिगवाहो अिछए। भाय, धार छहक! तोरो बसैले तँ भूिम चाहबे करी, सएह ने। ई की भेल जे जिहना कोसी तिहना कमला गामक गामकT कािट-खोिट-उजािड़-पुजािड़ कऽ अपना पेटमे समा लइए आ मधुमाछीक ठीक िवपरीत- पाछूसँ बलुअबैत अबैए..! मधुमाछी भलT फूलक रस चुसैए मुदा ओ मधु ने उgसिज>त करैए। ओना, सभ धार ओहने अिछ सेहो तँ निहयT कहल जा सकैए। बागमती, ितलजुगा अपन हजारो बख>सँ ओही घर-घाराड़ीकT धेने आिबयो रहल अिछ आ अपन जलधाराकT सेहो बरकरार रखने अिछ। तैसंग, मौसमक चाल-चूल सेहो कम अिछ से केना नै कहल जाएत। अपना सबहक सौभा’य बुझू आिक दुभ„’य, समुmसँ बहुत हटल छी। हवा-िबहािड़क करामाती तँ समुmो छीहे िकने। िमिथल®चलक चौहöीमे जिहना पि¿छमसँ बलुआह इलाका भरल अिछ तिहना पूबसँ सेहो जंगल-झाड़ आ पहाड़क इलाका अिछए। खाली दि¿छनक जे समुm अिछ ओ ओतेक दूरपर अिछ जे अपना सभ िदस अबैत-अबैत ओकर पाबरे ढील भऽ जाइ छइ। रहल पूबसँ, कोणा-कोणी– तँ से जªर थोड़ेक Eभावी अिछ। तैसंग हजारो िकलो मीटर हटल सेहो अिछए। जेकरा बंगालक खाड़ी कहै िछऐ ओइसँ उठल जे हवा-िबहािड़ आिक पािन-पाथर रहल, ओकरा अपना सभ िदस अबैत-अबैत अदहोसँ बेसी शि°त Jीण भऽ जाइ छइ। जँ से नइ Jीण होइ छै तँ िकए असाममे अपना सभसँ दस गुणोसँ बेसी बरखा होइए आ अपना सभकT ओकर दश®सोसँ कम होइए। जँ ओते होइत तँ आम नइ खइतॱ सएह ने। िकएक तँ ओमहुरका आममे पकैसँ पिहने पीलुआ पकैड़ लइए, मुदा नािरयल आ सुपारीक धनीक तँ हेबे किरतॱ। जखने सुपारी जोड़ पकड़ैत तखने ने पानमे सtती अबैत। अपना सभकT आरो चाही की, भिर मुँह पान भेल, िजनगी पािनसँ भिर गेल! खाएर जे भेल, अपन-अपन तकदीर की मनुखेटा कT होइ छै आिक मािटयो-पािनकT होइते छइ...।

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मौनसुनक िहसाबसँ जिहना अपना सबहक मािटमे बारहो मास सृजन शि°त रहै छै तिहना जँ समुिचत ढंगसँ ओकरा बेविtथत कएल जाए तँ सचमुच िमिथलाक मािट-पािनमे ओहन उव>र शि°त अिछए जे सोनोसँ सोनम वtतु पैदा करत। पूबसँ अबैत मौनसुनी बरखा अपना ऐठाम म¥यम oेणीक भऽ जाइए, जेना-जेना पि¿छम जाइए तेना-तेना िनî होइत जाइए आ उŠर Eदेश टपैत-टपैत ओहो मेटा जाइए, जइसँ पि¿छमक राçय– पंजाब, राजtथान–बरखा िवहीन राçय भऽ जाइए। उŠरसँ िमिथल®चलक कोन बात जे सॱसे देशेक सीमा क«मीरसँ अªणाचल Eदेश तक पहाड़-जंगलसँ तेना घेराएल अिछ जे उŠरविरया कोनो आफत-असमानीक संभावनो ने अिछ। ऊपरक जे िकछु भेल ओकरा ऊपरे-ऊपर बुझू, िकए तँ ओ भेल देश-दुिनयsक जे आिड़-धुर अिछ से, मुदा िमिथल®चलक जे अdपन आिड़-धुर अिछ ओ िमिथलावासी छोिड़ दोसर बुिझयो केना पौत। हँ! ई जªर भऽ सकैए जे िमिथलाकT जानै-िचbहैले िमिथलामे बास करए पड़त। िबना से केने जँ मने-मन मनकT मनाइयो लेबतैयो चुकबे करत। िकएक तँ िमिथला की कोनो मािटये-पािनटा मे अिछ आिक मनुखसँ लऽ कऽ गाछ- िबरीछ, माल-जालआिचड़ै-चुनमुनी तकमे। आ सेहो की कोनो इ’गी-दु’गी अिछसे निह, अकास-सँ-पताल धिरमे पसरल अिछ। जँ से निह, तखन िकए लोक बजैए जे ‘िमिथल®चलक पतिलया पािन पतिलया मनुखक मनपोसक छी।’ िचड़ैयो-चुनमुनीमे देखते छी जे एक िदस जिहना सु’गा वेद-पाठ करैए तँ दोसर िदस ट²िटयाहा सु’गा टsइ-टsइ करैत लोकक सुज>मुखी-फूल उपटबैए। एकरा केना नकारल जाएत। ओना, मानै छी जे कागभुशुiडी सन महा³ानी कौओ अिछ, मुदा कारकौआ उपैट रहल अिछ, सुìडाह भऽ रहल अिछ, की एकरा नकाइर सकब? कोसी-धारक पािन भलT देखबोमे सौbदय>यु°त आ पीबैमे सेहो पोखिरआिन निह हुअए, मुदा तँए िक कमलो पािनकT सएह कहबै? एक तँ पsकसँ पँिकयाएल पािन, तैपर गािबस उtसर मािट तेना ने अपनामे घोिर लइए जे देखते मन मािन जाएत जे ई उसराह-नोनछराह सुआदक हेबे करत, भलT जखन कiठ सुिख कऽ Eाण उgसज>न करए लगए, तखन ओकरा पकैड़ कऽ रखै-खाितर एक-आध घðट ओहो पािन घॲिट लेब आव«यक भइये जाइए, निह तँ जेतेक परहेज हुअए ओतेक नीक। खाएर जे अिछ, ओ धार-धुर आ सु’गा- कौआ जानए, मुदा अपना सभ तँ अपन-सभ ने भेिलऐ, तँए अपनैतीक िवचार तँ करए पड़त िकने। गितक िहसाबसँ अपना ऐठाम [3] तीन रंगक मौसमक tप´ ªप देखैमे अबैए। ओ भेल, जाड़, गरमी आ बरसात। ऐ तीनू मौसमक बीच चािर-चािर मास अिछ। ओ चाª मास चािर रंगक, ि¾याक अनुसारे भइये जाइए। जेना, जाड़सँ गरमी धबैमे रसे-रसे जाड़ पाछू हटैत जाइए आ गरमी धबैत जाइए, जे बढ़ैत-बढ़ैत अपन Eचiड ªप धारण करैए। तिहना जाड़ो-बरसातक अिछए। ओना, अपना ऐठाम जिहना छह रीतुक चच> अिछ तिहना छह शाtLोक [4] तँ अिछए। मुदा तीन मौसमकT छह रीतुमे बbहनॱ तँ बेवधान रिहते अिछ। िकसानी िजनगीमे अ¹सँ लऽ कऽ फूल-फल तक आहार रहल अिछ। मुदा ओकर जे ि¾यागत जीवन अिछ ओहो तँ अपन अिछए। िकछु अ¹ो आ फूलो-फल कम िदनक अिछ माने कम िदनक फिसल, ओ तँ एक रीतु पकैड़ लेत मुदा जे चािर मास वा ओहूसँ बेसी िदनक अिछ, ओ केना पकड़त। तँए,ऐठाम हिर अनbत हिर कथा अनbताक िtथित अिछए। ओना, एक िदन-राित िमला चौबीस घbटामे बारह रंगक एक-रंगाह मौसम बुिझ पड़ैए मुदा ओहू दू घbटामे दू रंग नइ अिछ सेहो केना नइ कहल जाएत। तिहना ओहू एक घbटाक सािठ िमनटमे सािठ रंगक निह अिछ, सेहो केना नइ कहल जाएत। जखन एक-एक िमनटक अपन अलग अिtतgव रखने अिछ तखन िमनटक भीतर सािठ पलक िकए ने हएत। मुदा से सभ निह। दुिनयsक बीच जे अपना सभ बेछप छी, तेकर

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मूल कारणमे ईहो एकटा Eवल कारण रहल अिछए। जैठाम एकरंग मौसम–एक गितक मौसम–सालक िवशेष अंशमे रहततैठामक आ जैठाम दू-रंग, तीन-रंगक मौसम रहत तैठामक िजनगीमे अbतर एबे करत। जखने िजनगीमे अbतर औत तखने ओकर िजनगीक सभ ि¾यामे अbतर एबे करत। दुिनयsक अिधक®श देश अही एक-रंग, दू रंगक मौसमक बीच अिछ। मुदा िमिथलामे तीन रंगक मौसम अपन उŽसँ उŽतर ªप देखबैत रहल अिछ। जे तीनू- शीतलहरी, लूआ बािढ़क ªपमे िव_मान अिछ। एक िदन माघ बीत गेल। संयोग ऐ सालक एहेन रहल जे पूसक पूिण>मो आ सकरsितयो परसू एके िदन भेल। जइसँ बकेन महॴस जकs लगैमे मास कबैया-ìयोढ़ नइ भेल। कबैया-ìयोढ़क माने ई जे किहयो-किहयो जिहना महॴसक लगैक [5] समय अिनिÖत भऽ जाइए तिहना पूिण>मो-सकरsितयोकT दू िदन भेने मासोक गित-िविध कबैया-ìयोढ़ भइये जाइए। से ऐ साल नइ भेल, एके िदन पूिण>मोक िहसाबसँ आ सकरsितयोक िहसाबसँ पूसक अbत भेल। जखने एके िदन पूसक अbत भेल तखने माघक शुªआत सेहो एके-िदन ने हएत, सएह भेल। करीब चािर बजे बेका समय, जखन टहलै-बुलैले िनकलए लगलॱ िक धक्-दे मास मन पड़ल जे आइ माघक एक िदन बीत गेल, उ¹तीस िदन बीतैले बsकी अिछ। जिहना माघक पाला, तिहना जेठक रौद आ भदवािरक बािढ़ सेहो जनमारा छीहे..! तहूमे बुढ़-बुढ़ानुस आ बाल-बोधक लेल तँ सोलह¹ी दुक„ल..! मने-मन गाम-समाजक िहसाब िमलबए लगलॱ। पsच साए घरक बtतीमे आँगुरपर गनल सातटा ओहन बुढ़-बुढ़ानुस छैथ जे अtसी बख> पार कऽ चुकल छैथ। बsकी लोक ओकर िन¿चे छैथ। तँए हुनका सबहक खोजे-खबैर लेब ने मनुखक मनुखता भेल। खोज-खबैर लेबक माने भेलजे अबैबला दुक„लमे हुनका सबहक की िtथित हेतैन आ अखन की छैन। ओना, बालो-बोधक संग एहने पिरिtथित अिछ, मुदा बाल-बोधकT तँ माइयक आoय भेटैए, तँए जँ एकक एक आoयदाता भऽ गेल तँ ओ ओहेन समtया नइ भेल, जेहेन िबनु आoयदाताक आिoतक भेल। तहूमे समय एहेन आिबये गेल अिछ जे पिरवारमे बुढ़े-बुढ़ानुस पिरवारक गाड़ाक घेघ बिन जाइ छैथ, जइसँ पिरवारजनक मनक बीच एहेन िवचार जनिमये जाइए जे कखन ई घेघ [6] हटत जे िपiड छुटत। दुिनयsमे जीवनक लेल कोनो बाधा अिछ तँ ओ अिछ बुढ़ माता-िपताकT जीिवत रहब। खाएर जे अिछ, जेतए अिछ से तेतए रहअ। समाजमे जखन जbम नेने छी तखन समाजक दाियgव अपना ऊपर नइ अिछ सेहो केना नकारल जा सकैए। तहूमे हम सभ मैिथल छी। बाल-बोध भलT िकछु किह िदअए, मुदा िजनगीक आधार वेद छी आ वैिदक पÇितये ने अपना सबहक िजनगीक ि¾याक Eि¾या भेल, ई बुझैत केना िबसैर जाएब। चाह पीब, पान खाकऽ चöैर ओिढ़ गाम-समाज िदस िवदा होइसँ पिहने प÷ीकT कहलयैन- “गामे िदस जा रहल छी, तँए अबैक ठेकान िनसिचत निहयT अिछ, अहs सभ िकछु देखैत-सुनैत रहब।” प÷ीक मनमे की शंका भेलैन से तँ ओ जानैथ मुदा बजली िकछु ने।तइसँ अपना मनमे भेल जे भिरसक माघक जाड़ असगर काटब िहनका भारी बुिझ पिड़ रहल छैन, तँए थकथका रहली अिछ। नजैर उठा-उठा नखो-िशखक झॉंकी देखए लगलॱ आ िशखो-नखक। मुदा मनमे समाजक अtसी बख>सँ ऊपरक बुढ़- बुढ़ानुसक िजनगी नािचये रहल छल, तँए प÷ीक लटारम ओहन मने ने बनए िदअ चाहै छल जे हुनकर लाड़-

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झाड़क पाछू लिगतॱ। ओना, मनमे ईहो भेल जे भिरसक प÷ी चुपचाप आदेशक आशा तािक रहली अिछ..! तँए, िवचारकT समेटैत बजलॱ- “ओनातँ गाममे साते गोरे अtसी बख>सँ ऊपरक छैथ, मुदा अखन पिहने ªपनी दादीसँ भTट करब। िकएक तँ ओ सभसँ बुढ़, करीब नबे बख>क छैथ। ओना,अपनो पिरयास करब जे खाइ-पीबै राित धिर घुिमये जाएब, मुदा दुइयो-चािर घbटा ªपनी दादीक संग नइ िबताएब सेहो केहेन हएत।” प÷ीक मन सेहो एकाएक जेना पिघल गेलैनतिहना बजली- “हमरा िदससँ दादीकT कहबैन जे सतरहटा एकादशी आ उनैसटा भादवक रिब केने छी, तइमे सँ पsचटा एकादशी आ चािरटा रिब हम हुनका चढ़बै िछऐन,तँए नअ बख> आरो औरदाक गारंटी तँ भइये जेतैन।” प÷ीक मुँह-िमलानी करैत बजलॱ- “कािलदासक मेघदूतसँ की हम कम छीजे अहsक धम>क बाट रोकब। पिहल वाणी अहॴक समाद रहत। कुशल-छेमक पछाइत अपन िवचारक गप-सdप करब,मुदा तइ सभसँ पिहने अहॴक अज¼ पेश कऽ देब।” प÷ीक मन मुिtकया लगलैन, मुदा अपना शंका भऽ गेल जे प÷ी मजाक ने बुिझ गेली। प÷ीक संग हँसी-मजाक आन जकs निहयT होइए, मुदा नइ होइए सेहो केना नइ कहल जाएत। ओना, हँसी-चौल सम- स‘बbधीक बेवहार भेल मुदा आनो संग तँ लोक किरते छैथ। प÷ी चुपे रहली तइसँ बुिझ पड़ल जे आदेशक tवीकृित भेट गेल। िवदा भेलॱ। जेठुआ [7] छह बजेक सुज>क अकबाल जे रहैए तइसँ बहुत कम अकबाल चािर बजे माघक सुज>क भइये गेल छेलैन। सोêोअना डुमल नइ छला, मुदा डुमलेक िtथित बुिझ पड़ै छल। अपना घरसँ करीब बीस बीघा हटल ªपनी दादीक घर छैन। तँए, जाइमे बेसी देरी नइ लगल। ªपनी दादीक स‘प¹ पिरवार छैन। ओना, पित मिर चुकल छैन मुदा दूटा जिहना समकस बेटा छैन तिहना दुनू पुतोहुओ छैbहे। पोता-पोती, नाित-नाितनसँ सेहो पिरवार स‘प¹ छैbहे, तँए मनुखक दुख ªपनी दादीकT निहयT छैन। मनुखक दुख भेल- पिरवारमे मनुखक घटबी। मनुखक घटबी नइ रहने आिक अपन िजनगीक िनवृित ि¾या-कम>[8] रहने मन खुशी छैन की निह, से तँ ªपनीए दादी जनती मुदा दरबçजापर पहुँचला पछाइत देखलॱ जे माघ रिहतो देह-हाथ मािर पिरवारक िकयो बैसल निह छैथ, सभ अपन-अपन िदनक अिbतम काजकT स‘हािर कऽ उसारैमे लगल छैथ आ घूर पजािर ªपनी दादी कलपर हाथ-पएर धोइ छेली। जखने सरकारी बाbहसँ उतैर ªपनी दादीक दरबçजाक रtतापर एलॱ िक कलेपर सँ ªपनी दादी बजली- “बौआमोहन! ताबे घूर लग बैसह, हाथ-पएर धोने अबै छी।” लहरैत घूर देख अपन मन चपचपा गेल। जिहना िपयासल बेकतीक आगूमे पािन अिबतेआिकभूखल बेकतीक आगूमे भोजन अिबते, चाहेिज³ासु बेकतीक आगूमे ³ान अिबते मन चपचपा जाइए तिहना अपनो मन चपचपाएल। घूर लग चाª भाग पुआरक बीरबा पसारल। चािर आँगुर खड़ाइ आ बीत भिरक ल‘बाइ-चौड़ाइक बीरबा सभ छल। एकटा बीरबापर बैसलॱ। ओना, मनमे ईहो छल जे दादी दिहना भाग बैसैथआ अपने बामा

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भाग बैसब। मुदा से िहसाब िमलल निह,िकएक तँ घूरक चाªकात बीरबा पसरल छेलइआअसगरे बैसिनहार रही। सभ दिहने भेल आ सबहक-सभ बामे भेल। एकटा बीरबापर बैस सेिरया कऽ जखन घूर िदस हाथ बढ़ेलॱ िक ªपनी दादी सेहो पहुँचली। पहुँचते जेना बुिझ गेली तिहनाबीरबापर बैसते दादी बजली- “आन सालसँ ऐबेरक समय नीक अिछ।” ओना, ऐठाम आएले छी कुशल-छेम बुझैले, तैपर ªपनी दादी नीक समय अपने मुहT बजली, तँए नीक भेबे कएल। अपना मनमे िवचार छल जे माघ मास भेल जाड़क कड़कड़ौआ जुआन मास। पािनयð-पाथर बिनते अिछ। ओना, आन साल जकs शीतलहिरयो निहयT भेल, मुदा जाड़मे थोड़-थाड़ कमी भलT हुअए मुदा जाड़ अपन जवानीक ताल नइ देखा रहल अिछ, सेहो केना नइ कहल जाएत। करसी [9]क तेहेन घूर छलजे बुिझ पड़ल भिर राित दरबçजाकT गरम केने रहत। जखन भूखल लोकक घरमे जँ किनयð अ¹ रहल तैयो ओते कालक संतोष तँ ओकरा रिहते छै जे एते कालक अभाव नइ अिछ। घूर तँ सहजे माघक घूर छी, गाड़ीक एि°सडेbट जिहना सड़कपर होइए तिहना माघक जाड़क सड़कपर एि°सडेbट नइ होइए सेहो बात निहयT अिछ। पुरना द‘मोकT उखािड़ते अिछ आ देहो-हाथकT िन:चे´ बना जाम करैत िन»¾ीय सेहो बनैबते अिछ, जइसँ रंग-रंगक रोगो-िवयािधक सृजन होइत रहैए। ओना, घरपर सँ िनयािर कऽ आएले छी जे ªपनी दादीक हालो-चाल बुझब आ जँ कोनो तरहक असुिवधा हेतैन तेकरो िनमरजना करब। मुदा से सभ िकछु देखमे ऐबे ने कएल। अगुआ कऽ िकछु पुछबो केहेन होइए, तँएबेकतीगत ªपमे ªपनी दादीकT िकछु पुछबकT उिचत निह बुिझपिरवारेकT अगुआ बजलॱ- “दादी, अदहासँ बेसी जाड़क समय िनकिलये गेल, मुदा जनमारा जाड़ तँ पछुआएले अिछ। ब¿चा सभपर नजैर राखब।” ªपनी दादी बजली- “से तँ रखनिह छी। आन साल जकs ऐ साल शीतलहिरयो निहयT भेल। ओना, समयक कोनो ठेकान अिछ।भाइयो सकैए।” बजलॱ- “हँ, तँ समयक कोनो ठेकान निहयT अिछ, शीतलहरी भाइयो सकैए आ निहयð भऽ सकैए। ओना, शीतलहिरयोक कोनो ठेकान निहयT अिछ जे केहेन हएत केहेन निह। लोक तँ अपना जनैत Eितकारे करत िकने।” ªपनी दादी बजली- “ऐ बेरक माघ तँ माघ जकs बुिझयो ने पड़ैए। केते साल तँ अगहने-पूससँ तेना शीतलहरी लािध दइ छल जे माघमे घरसँ िनकलबो किठन भऽ जाइ छल। ओना, तीसो िदनक माघक शीतलहरीसँ बँचैक ओिरयान कइये नेने छी।” दादीक िवचार सुिन अपनो मन भँिसया गेल- “दादी, अहॴ सन-सन बुढ़-बुढ़ानुसक िदन पहाड़ जकs बिन जाइए।” ‘पहाड़ सन िदन’सुिन दादीक आgम-शि°त जगलैनतिहना मजगूत आgम बलेबजली-

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“बौआमनोहर! एकटा माघकT के कहए जे अtसीक लगभग माघ भोिग चुकल छी। किहयो कोनो ªइयs भगन नइ भेल। आब तँ सहजे जीबैक लूिर भऽ गेल। माने माघ कटैक लूिर भऽ गेल। तहूमे एक िदन माघ बीितये गेल। जिहना एक िदन बीतल, तिहना ने उ¹तीसो िदन, जे बsकी अिछ, सेहो बीतबे करत।” ªपनी दादीक िवचार-शि°त देख अपनो िवचार सÕत भेल। बजलॱ- “दादी, घूरक आिग देख जाइ-के ते मन नइ होइए, मुदा...।” ªपनी दादी बजली- “मनोहर, बेर-िबपैतमे मनकT सÕत बना कऽ राखी। िदन-मिहना-साल अिहना अबैत रहत आ जाइत रहत। जखन जेहेन समयसँ पाला पड़ए, तखन ओइ पालासँ अपन िनमरजना केना हएत, तैपर नजैर रािख अपन जीबैक लूिर बनाबी।” q श¨द सं©या : 2391, ितिथ : 15अEैल2018

[1] काजक तबाही [2] डॉ. हजारी Eसाद ि¸वेदी [3] िमिथल®चलमे [4] दश>नोक [5] दूध दुहैक [6] बुढ़-बुढ़ानुस [7] जेठ मासक [8] जीबैक िविध-बेवहार [9] गोबरक सुखाएल गोला।

ऐ रचनापर अपन म ◌ंतxय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। १. जगदीश Eसाद मiडल - पंगु (उपbयास )- आगs २.रबीbm नारायण िमo - नमtतtयै (उपbयास )- आगs

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१ जगदीश Eसाद मiडलक पंगु उपbयाससँ... 3. 1945 इtवी अबैत-अबैत गाम-गामक जे tकूलक िशJक सभ जहल चिल गेल छला जइसँ tकूल सभ ब¹ भऽ गेल,ओहो सभ जहलसँ िनकलला आ tकूलो सभ खुजल। ओना, ने सभ गाममे tकूलेछल आ नेसभ tकूलक िशJक जहले गेल छला। हँ, ई बात जªर छल जे अिधक®श tकूलक िशJक जहल गेल छला, बsकी डरे पड़ा कऽ घर धऽ नेने छला। घर धड़ैक कारण खाली अंगरेजी शासन ¸ारा चलौल गेल दमन च¾े निह छल, ओहूमे दू रंगक िवचारक छला। पिहल जे अंगरेजी शासनक समथ>क छला, तँए जनजागरणसँ डिर गेल छला आ दोसर ओहन िवचारक लोक छलाजे Eाचीन पÇितक िवचारसँEभािवत छला।ओ सभ पुरान िवचारसँ एतेक Eभािवत रहैथ जे अपनाकT माL एक िन»पJ गुतुŒय मानै छला, जइसँ देशक अजादीक आbदोलनसँ ओ सभ अपनाकT सोê¹ी अलग रखने रहला। मुदा िवषम पिरिtथित, माने लड़ाइ-दंगाक पिरिtथित देख अपन िजनगीक िवचारकT समेट अपनाकT सुरिJत रखैले tकूल छोिड़-छोिड़ घर धऽ चुकल छला। tकूल खुिजते दोसर-तेसर िशJक सभ आिब िशJण काय> संचािलत केलैन। सीतापुरक tकूलमे सेहो पढ़ौनी शुª भेल। पिहलुका tकूलक सभ कागज-पŠर ज¨त भऽ चुकल छल। िकएक तँ पिहलुका जे िशJक छला हुनकापर शासनmोहक अिभयोग लिग चुकल छेलैन जइसँ साल भिरसँ ऊपरे जहलोमे रहला। tकूल खुजला पछाइत पुन: िव_ाथ¼ सबहक नाम®कन भेल। देवचरण सेहो अपन पौL–हिरचरणक नाओं िलखा देलैन। ओना, ब¿चाकT केतेक उमेरमे िव_ालय पठौल जाए, Eाचीन पÇित की कहैए? मुदा तइ सभपर कोनो िवचार निह कएल गेल। िबना कोनो Eमाण पLे, िबना कोनो जbम-कुiडलीए िव_ाथ¼ सबहक नाम®कन भेल। पsच बख>क ब¿चासँ पनरह-बीस बख>क ब¿चा, जेकरा वौिÇक ªपमे अJर-बोध निह छल,सबहकEवेश tकूलमे भेल। पढ़ल-िलखल, िवचारवान िशJक भेने हुनका सबहक मन एतेक तँ मािनते रहैन जे समाजक EवुÇ अंग होइक कारणे देशक सेवा हमरो कत>xय भेल। तँए िबना कोनो भेद-भाव केने अिधक®श िशJक िव_ालयमे पढ़बैत रहैथ। ओना, समाजक बीच िव_ोपाज>नक लेल समािजक रोक-राक निह छल एकरो नकारल निहयT जा सकैए। िकछु शाtLीय ³ान एहेन तँ छेलैहे जेकरा मिहला आ ब¿चासँ परहेज मानल जाइ छल। ओना, भागवतकथा गाम-गाममे चलैत रहइ। जइ आसनपर बैस xयासजी [1] øुव-Eहलादक कथा सुनबैत रहिथनओही आसनपर ऋृिषकाक [2] कथा सेहो किहते रहिथन मुदा समाजक बीच जे चलैन छल, माने समाजक जे गित-िविध रहै तइमे खॲच-खरोच निह छलएकरो नकारल निहयT जा सकैए।िशJकक बीच सेहो जातीय बेवहारक Eभाव रहैनजइसँ िशJक िशJकक बीच सेहो िकछु-ने-िकछु दूरी बनले छल।

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 59

1945 इtवी बीतैत-बीतैत 1942 इtवीक जे तूफानी आbदोलन छल ओइमे िकछु नरमी आएल। अंगरेजो बहादुर महसूस कइये चुकल छल, जे आब शासन सŠा बँचाएब किठन अिछ।तँए सŠाक हtत®तरण करबे िवकŒप अिछ। जहलसँ आbदोनकारी सभकT िनकालल जाए लगल।गाम-गाममे जे गोरा-पŒटनक घोड़- दौड़ चिल रहल छल ओहो समटा कऽ केिbmत हुअ लगल। अपन देशक सŠा अपन देशवासीक हाथ औत जे अपना ढंगे चलौत। अखन धिरक जे देशक शासनक इितहास रहल ओ िसफ> अंगरेजीए शासनटा नइ रहल, ओइसँ पिहनॱ िवदेशी शासन रहल। मुदा से अखन निह, अखन एतबे जे मुगल शासनक पछाइत अंगरेजी शासन आएल। जिहना जेठ-अखाढ़मे रौदसँ जरल जमीनक जे धरतीसँ जुड़ल घास-पातक संग छोट-छोट जे गाछ-लŠी छलओहो सभ जिर-सुिख चुकल छल, मुदा वादलक बख„सँ धरती तेना िसंचाएल जे जरल-मरल, मौलाएल- टटाएल सभ गाछ-लŠी जिग-जिग कऽ ठाढ़ भेल। देशक अजादीसँ पिहने देशक जे-जे समtया छल ओ 1945 इtवीक पछाइत जखन देशक जन-गणक बीच िबसवास जगल जे आब अंगरेजी शासन टुटबे करत अपन शासन हेबे करत। िबसवास जिगते सबहक नजैर अपन-अपन िजनगीक बाधा-ªकाबटपर पड़लैन। पिहने िनज समtयाक िनदान आव«यक, लोकमे ऐ तरहक िवचार जिगते हजारो समtयाक उदय गाम-गामक समाजमे हुअ लगल। िकसानक देश भारत, िकसानक बेटा देशकT अंगरेजी शासनसँ मु°त कराअपन कŒयाणकारी रtता पकैड़ आगू मुहT चलता, तँए िकसानी लेल मािट-पािन, बीआ-बाइिलक संग खेती करैक लूिर सेहो चाही, तखने खेती अपना गितये संचािलत हएत।िदनानुिदन नव लूिरयो आ साधनो भेने उपाज>न बढ़बे करत, जइसँ देश शि°तशाली बनत। जखने देश शि°तशाली हएत तखने देशक लोक शि°तवान हेता। सबहक मनमे यएह आशो आ िबसवासो छेलैbहे। बकाtत जमीनक आbदोलन उिठ चुकल छल। मुदा ओइमे एकªपताक अभाव रहल। गाम-गामक समाज वैचािरक ªपमे सेहो आ बेवहािरक ªपमे सेहो बँटाएल रहला। खेतक मम>कT बुझिनहार जे िकसान छैथ ओ इंच-इंच भिर जमीनक उपािज>त शि°तकT नीकसँ बुझै छैथ, तँए ओहन िकसान निह छैथसेहो नइ निहयT कहल जाएत जे अपन खेतकT हगनार बना ªआबसँ बजै छैथ- ‘जँ हम हगनार नइ िदऐ तँ लोकक हगब ब¹ भऽ जाएत।’ अजादीक अिbतम दौड़ अबैत-अबैत देशक समtया दज>नो राजनीितक दल सेहो बनौलक। समtयाकT कोन ªपे समाधान कएल जाए, अिधक®श वेद-व°ता सभ िवचार किरते रहैथ। जइसँ पोखिरक जािठ लगक मािट उखािड़ पोखिरक पािनकT थािह लेता, ईहो तँ िवचारक JेLमे अिछए। बकाtत आbदोलन कोनो-कोनो गाममे शत-Eितशत सफल भेल आ कोनो गाममे िख¿चैड़ नइ भेल सेहो निहयT कहल जा सकैए। भेल दुनू। खाएर जे भेल, िकछु लोक अपना-अपना हाथे अपन-अपन भा’य सेहो िलखलैन आ िकछु गोरे या तँ िलखबे ने केलैन वा िलिख कऽ मेटा लेला। गाम-गामसँ जमीनबला िकसानक बेटा गाम छोिड़ बजार िदस भािगये रहला अिछ। अिधक®श लोक,चाहे ओ बुिÇजीवी पिरवारक हुअए वा मिसजीवी पिरवारक,चाहे ओ िकसान पिरवारक हुअए वा औ_ोिगक पिरवारक वा खेितहर-बोिनहारक पिरवारक, गाम-घरसँ पड़ा कऽ िकए बजारोbमुख भेल अिछ?

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 60

लाखो-करोड़ो जीव-जbतुक बीच मनुख सभसँ ऊपर िववेकवान जीव मानल जाइत अिछ, मानल निह जाइत अिछ वाtतवमे अिछयो। कहैक ¾ममे, जिहना मंचपर व°ता बजै छैथ जे बरद बहैले[3] आ िववेकवान कहैले जbमे नेने छैथ, तखन जँ से नइ हुअए तँ सेहो जुलुमे बात भेल। खाएर जे भेल, जिहना एक व°ताक िवचार ऊपर अिछ तिहना दोसरो व°ता तँ एहेन छिथए िजनक कहब छैन- ‘जहs बसी तँह सुbदर देशू। जिह Eितपालल सोइ नरेश।’ िवचारणीय EÜ तुलिसयो बाबाक छैbहे, भलT ओ िखिसया कऽ कहने होिथ वा भावसँ भिवत होइत Eेमाभावमे कहने होइथ। साढ़े तीन हाथक मनुखकT दुिनयs िदस देखैसँ पिहने अपन शकल-सूरत आन-आन जीव-जbतुक शकल- सूरतसँ भजाइर लेबा चाही। कहैकाल तँ किहये सकै िछऐ जे हाथी हुअए िक बाघ, भलT जंगलमे अपना शि°तये ओ राजा िकए ने बनल अिछ,मुदा अपना रहैक घर बनबैक लूिर ने हाथीकT छै आ ने बाघकT, मुदा मािटमे रहैबला मूसो आ िखिखरो-निढ़या ओहने अिछ सेहो केना कहल जाएत। बजार िदस गाम-घरक लोककT पड़ाइन करैक जªरत िकए पड़लैन? चाहे ओ कोसीक कछेरक लोक होिथ वा कमला-बागमतीककछेरमे रहैबला, की ओ सभ ई नइ जािन रहला अिछजे दुिनयsक समृिÇशाली शहर निदयेक कछेरेमे बसल अिछ। दुिनयsक बात छोड़ू, अपने िबहारक जे Eमुख शहर अिछ ओ केतए अिछ? सभ िकयो तँ यएह ने चाहै छी जे अिधक-सँ-अिधक शाbतिचŠसँ जीवन xयतीत अपनो करी, पिरवारो करए आ समाजोकT शािbत भेटौ। मुदा तइले की खगता अिछ आ केतए कोन रtता िकए बािधत अिछ, तैपर िवचार के करत?िवचारणीय िवषय अिछ जे केहेन जीवन चाही? जखने धरतीपर जbम लेलॱ, तखने भूख लगबे करत, जँ भूख निह मेटाएब तँ शरीर खसैत-खसैत खिस पड़बे करब। ओना अ¹ोसँ बेसी जªरत पािनक अिछआ तहूसँ बेसी खगता हवाक अिछ जे सsस लइ छी। मुदा ओ तँ Eकृित अपन अकवालसँ सॱसे दुिनयsकT भिर देने अिछ। ओना, अिछ पीबैक पािनयð आ भोजनो सामŽीकपैदा करैक मािटयो, मुदा ओइमे कनी मेहनतक जªरी पिड़ये जाइत अिछ। धरतीसँ अ¹ पैदा होइए आ िन¿चs पताल आ ऊपर अकाससँ पािन टभकैए। तइमे मनुखक अपन तर>दुत एते तँ बिढ़ये जाइए जे तइले इनार, चापाकल इgयािदक बेवtथा करए पड़ै छइ। ओना, अकासक पािन जिहना पिवL बेसी अिछ तिहना ओकर तर>दुत सेहो किठन अिछ, मुदा असाधे अिछ सेहो कहब उिचत निहयT हएत। जखन िक तीनू साधन भरपुर अिछए। तखन अ¹क अभाव िकए होइए? पािन दूिषत केना भऽ जाइए? वायु Eदूिषत िकए भऽ जाइए..? िववेकवान मनुख रिहतो िजनगीक मूल-भूत ढsचासँ ओझल भेल छी। ओना, ओझल होइमे सोê¹ी अपने दोख अिछ सेहो निहयð कहल जा सकैए। सव>िविदत अिछ जे कोनो ब¿चाक जbम अ³ानावtथामे होइते छै, जेकरा जीता-जीवनक सभ शि°तक बीज रिहतो ओहन शारीिरक अवtथा होइ छै जे कछुआक ब¿चा जकs निह जे पािनक ऊपर देने दौड़ैत गेलॱ आ अiडा खसबैत गेलॱ। ओइ अiडाक शि°त ओहन छै जे माए-बापक खोज निह करैए, खगतो नइ होइ छइ। लगले अपने फुिट ब¿चा भऽ जाइए। ब¿चा होइते दौड़ैक शि°त ओकरामे आिब जाइ छइ। दौड़ैक शि°त अिबते अपन जीवनक भार उठा लइए। मुदा केतबो कछुआक ब¿चा पिनगर िकए ने हुअए मुदा ओ अपन माइयो-बापकT कहs चीिbह पबैए? मनुख तँ से निह छी। एकरा माता-िपता पिरवारसँ लऽ कऽ समाज धिरक सहारा छइहे। मनुखक जीवनक लेल भोजन मूल छी। भोजनक उपराbत

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सúय समाजमे[4] जbम नेने जुगानुकूल वtLक आव«यकता दोसर आव«यकता भेल। जंगली जीव तँ मनुख आब रहल निह, आबक मनुख तँ बहुत ऊपर उिठ गेल अिछ। जइ अनुपातमे जीवन अिछ तही अनुपातक ने आवासो चाही, तिहना पढ़ाइ-िलखाइ,बर-बेमारीक इलाजक संग सािहgय-कला इgयािद सेहो सभ चाहबे करी। यएह भेल मनुखक िजनगीक ढsचा। अखन धिर जे अbधकार मनुख समाजक बीच xयाdत अिछ ओ Eकृितगत सेहो अिछ आ कृिLमगत सेहो। समाजमे ªढ़वादी िवचार, अbध-िबसवास जे पसरल अिछओ कृिLमगत अbधकारक भारी Ôोत छी। रंग-रंगक अbध-िबसवास पसरलो अिछ आ नव-नव िशरासँ पसारलो जाइते अिछ। अखन बेसी निह, अखन एतबे जे िमिथल®चलक म¥य जे दरभंगा-लहेिरयासरायमे tवाt­यक लेल अtपताल बनल आ ओइमे आधुिनक ढंगक इलाजक जे बेवtथा भेल, की ओकर िवरोध नइ भेल? खूब िवरोध भेल। गाम-घरक जेतेक ठक- फुिसयाह छल, सभ अपना-अपना ढंगे िवरोध केलक। तँए की आइक मनुख ओकरा अधला बुझत। जीवनक एक मूल-भूत आव«यकताक पूित> तँ भइये रहल अिछ। दुिनयsक बीच आजुक पिरवेशक िजनगी केहेन बनए?ई तँ िवचारणीय EÜ अिछए। अखन जेकरा शहर- बजार बुझै छी, ओइमे िजनगीक सभ मूल-भूत आव«यकताक साधन बिन गेल अिछ, जइसँ िजनगी असान भऽ गेल अिछ। मुदा सीतापुर सन-सन गाम जे िमिथल®चलमे हजारो अिछ, ओइमे िकछु ने अिछ!गामक िजनगी भारी बिन गेल अिछ।तँए अपन मातृभूिमकT ितयािग अपन शारीिरक मानिसक शि°तकT जगा अपन-अपन पिरवारक भरण-पोषण लेल एका-एकी सभ िकयो दुिनयsक कोण-कोणमे जा बिस रहला अिछ। वैचािरक ªपमे अखनो हम िमिथलाक ओ ªप देिखये रहल छी, जे अदौक िचbतनधाराक अनुकूल अिछ। तँए हम सभ आजुक िमिथलाक िचL®कन जँ नइ करब, तँ खाली जादू-टोना वा छू-मbतर किह देलासँ भए जाएतईस‘भव निह अिछ। हजार-लाख बरख पिहलुका सतजुग-Lेतासँ िनकैल आइ हम सभ एकैसम सदीमे पहुँच चुकल छी। बकाtत आbदोलन सीतापुरमे शत-Eितशत सफल भेल। शत-Eितशत सफल होइक पाछू दू कारण भेल। ने आन गाम जकs सतरह रंगक राजनीितक दल छल आ ने अजादीक आbदोलनमे सतरह रंगक िवचार। कsŽेस आ वामपंथी–माने पूजीवादी आ समाजवादी–माL दुइये िवचारधारा गाममे छल। जखने कsŽेस महािधवेशनसँ बकाtत जमीनक Etताव पास भेल तखने सीतापुरक दुनू दल िमिल आbदोलन ªपमे आbदोिलत भेल। जइसँ सफल भेल। ओना कsŽेसी काय>कŠ„ जे छला ओ tवामी सहजानbदजीक िवचारसँ Eभािवत छला आ अपनाकT tवामीजीक भ°त सेहो बुझै छला। सीतापुर गामक समाज सेहो देशकT कŒयाणक िदशामे एक कदम बढ़ाएब बुझलैन। तँए आन गाम जकs ने सुिद-सवाइबला महाजन उिठ कऽ ठाढ़ भेला आ ने भरना-बbहकीबला भरनदार वा बbहकीदार। तँए शािbतपूण> ढंगसँ बकाtत आbदोलन सीतापुरमे सफल भेल। मुदा बगलेक गाम ªि°मणीपुरमे गधिक¿चैन भऽ गेल। बीसमी शता¨दीक दोसर दशकमे[5] गsधीजी िबहार आिब चुकल छला।जमीनक िसtटम आ जमीbदारी शोषण सुनला पछाइत आएल छला। तइसँ पिहने 1880 इtवीमे कsŽेस पाट¼ िवदेशी ûूम ¸ारा बिन चुकल

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छल। जइक भीतर गsधीजी अपन काय> संचालन केलैन। 1925 इtवीमे वामपंथी पाट¼ सेहो देशमे बिन चुकल छल। 1927 इtवीमे सोसिलtट पाट¼ सेहो बिन गेल। ªि°मणीपुर गामक सौभा’य बुझी वा दुभ„’य वामपंथी[6] पाट¼ नइ बनल। वामपंथीक ªपमे समाजवादी[7] आ दि¿छनपंथीक ªपमे कsŽेस बनल। दुनूक आधार बदैल जातीय आधार बिन गेल। सभ तरहक–माने ओकाितक िहसाब,स‘पैितक िहसाब–लोक दुनू पाट¼मे िवभािजत भऽ गेला। ओना ªि°मणीपुरक आमजन सेहो अंगरेजी हुकूमतक िवरोधमे ठाढ़ भेल, मुदा नेतृgव रहल स‘पैतशाली लोकक हाथमे। बकाtत आbदोलन उिठते ªि°मणीपुरमे जातीय उbमाद उिठ कऽ ठाढ़ भेल। जइसँ जातीय सŠा जोड़ पकड़लक। देश tवतंL नइ भेल छल मुदा जातीय उbमादक केतेक रंगक िववाद गाममे ठाढ़ भइये गेल छल। मालगुजारीक लेल बैशाख-जेठ मासक रौदमे üटापर ठाढ़ करब सदृश केतेको घटना भऽ चुकल छल। छोट-छोट गŒतीमे पािनमे नहा घोरनक छŠा देहपर झािड़ चुकल गेल छल। गोला-लाठी भिर, भिर-भिर िदन रौदमे सजाए देल जा चुकल छल, वएह गाम छी ªि°मणीपुर। बकाtत जमीनक आbदोलनक हवा उिठते ªि°मणीपुरक सूिदखोर-महाजन उिठ-उिठ ठाढ़ भेल। जिहना कsŽेस जातीय आधारपर भीतरे-भीतर िवभािजत छल तिहना सोसिलtट पाट¼ सेहो भइये गेल छल। नरमदल- गरमदल कऽ कऽ कsŽेस आ सोसिलtट, Eजासोसिलtट, संयु°त सोसिलtट इgयािद इgयािद केतेको िवभाजन दुनूक बीच भऽ चुकल छल। बकाtत जमीनक आbदोलनसँ अगुआ गेल सूिदखोरी, महाजनी। ओना, दुनू पाट¼क बीच एहेन सेहो भेबे कएल जे एक-दोसरकT अँिखया-अँिखया माने जातीय आधारपर बकाtत जमीनक आbदोलन िछट-फुट ªपमे जªर जागल। मुदा ओ सामुिहक निह, राजनीितक दलक अनुकूल जागल। जे माL िवचारधाराक अनुकूल रहल, आbदोलनक अनुकूल निह। गामो तँ गाम छी। कोनो गाम एक जाइितक तँ अिछ निह, जे िकछु मुöापर एक भऽ चलबो करत। तहूमे ªि°मणीपुर तँ आरो अजीव अिछ। ऐ गाममे देवी-देवता, tथान-धम>शाला सभ िकछु बँटाएल अिछ। ªि°मणीपुरमे आठ कÆा जमीन दखल करैक EÜ उठल। गामक ई पिहल घटना छल। भेल ई जमीन दखल करैक EÜपर एक जाइितक शूमा बनल। कािê जमीनपर हर चढ़ौल जाएत। राितये भिरमे रंग-रंगक योजना गाममे बनए लगल। आठ बजे िभनसरमे हर चढ़ैक समय जे िनध„िरत छल, तइसँ पिहनिह, माने छबे बजेमे दू जाइितक बीच एहेन मािर फँिस गेल जे दुनू िदससँ लहासे नइ खसल, एक िदससँ एकटा आ दोसर िदससँ दूटा मरबो कएल। अंगरेजक लड़ाइमे तँ ªि°मणीपुरक एको गोरे जहल निह देखने छला मुदा साल भिर दुनू जाइितक लोक जहलेमे रहला, ईहो िहसाब तँ अजादीक आbदोलनेक अंग ने भेल। आिक नइ? q श¨द सं©या : 2092, ितिथ : 21मई2018

[1] भागवत बचिनहार

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[2] वैिदक िवदुषीक [3] हरजोतैले [4] िवकिसतसमाजमे [5] 1917 इtवी [6] क‘युिन´ [7] सोसिलtट

२ उपbयासकार रबीbm नारायण िमoक नमtतtयै उपbयाससँ... ६. जँ पु»पा निह रहैत तँ किह निह हमर की गित होइत? हमरा मािर देल जाइत िक कतहु कोनोठाम बेिच देल जाइत?की होइत तकर िकछु अनुमान करब किठन अिछ, कारण मोछा ठाकुर आओर ओकर संगी सभ तँ राJस छलहे। पैसा,ªपैआक आगू िकछु निह सुझाइक। मुदा िक हÔ भेलैक? कहॉं गेलै ओकर घमiड? अgयाचारक पाराकाRा कए ओ सभहक oाप लेने कहॉं टीिक सकल? मोछा ठाकुर छलहो आततायी। अपन सहोदर भाएक हgया कए देलक। ओकर जमीन-जाल सभ क¨जा कए लेलक। ततबेपर निह कल। ओकर प÷ी धिरकT निह छोड़लक। ओकर एकमाL संतान तँ की केलक तेकरा आइ धिर कोनो खोज-खबिर निह लगलैक। आिखर ओकरो अbत भेल। मुदा कतेको गोटेक िजनगी बब„द कए गेल। पु»पा तँ एकटा बानगी छिल। ओकर िनकटtथ छिल मुदा आन-आन कतेको लोक ओकर दु´तासँ िफरसान छल। हमहूँ ओिहमे सँ एकटा रही। पैसाक लालचमे हमर अपहरण कए लेलक। िफरौतीक म®ग जतेक फुरेलैक, ततेक बढ़ा देलक। मुदा ओही पापे तरे बब„द भए गेल। पैसा तँ हाथ निहए लगलैक। मुदा हमरा तबाह कए गेल। एकटा छोट-छीन ब¿चा मासो काल कोठरीमे बbद रहल। माएक एकमाLक आशाक िकरण िवलुdत भए गेल छिल। सोचक छल जे ओिह माएपर की गुजरल होएत? कोनो ओ जीिवत रिह गेल से आÖय> लगैत अिछ। मुदा समय सभ शि°त Eदान कए दैत अिछ। से निह होइतैक तँ पाiडव, mोपदीक अbयाय कोनो देिखते रिह जइतिथ,कोना उिचत समयक EतीJा कए सिकतिथ। हमरो माए सएह सभ िकछु-िकछु सोचैत समय कटने होएत। आिखर

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अपन नािbहटा संतानकT फेरसँ अपना लग देिख सकल। तकर सभटा oेय छलैक पु»पाक। पु»पाक इçजित हमरे घरमे निह अिपतु पिरप½ामे होमय लगलैक। लोक ओकरा बारेमे पूछताछ करए लगलैक। ओ के अिछ? कतएसँ आएिल? ओकर °यो सम®ग छैक की निह? तरह-तरहक िज³ासा लोकमे होएब tवाभािवक छलैक। मुदा ओकरा अखनो एतेक शि°त निह भेल छलैक जे िकछु Egयुतर कए सकए। आिखर हमर माए आगू आएिल। लोक सभहक िज³ासाकT शाbत करबाक हेतु ओ सभकT एकÆा केलक। माएक मुहT पु»पाक कथा सुिन लोक सभ जतबे अबाक छल ततबे Jु¨ध। अपना लोकक हाथे एहन अgयाचार होइत से लोक निह सोिच सकैत छल मुदा सएह भेल रहैक। यथ„थक धरातलपर अनुमान ओ तक>कT कोनो गुंजाइश निह रिह सकलैक। लोक सभ एक tवरसँ कहलक- “पु»पाक संग बहुत अbयाय भेलैक। मुदा Eितकार की भए सकैत छल?” सभक ¥यान पु»पा ओ ओकर कएल त®डवपर छलैक। हम उपेिJत जकs महसूस करए लगलहुँ। tकूल गेनाइ बbद भए गेल। घरमे कोनो मनोरंजनक साधन निह छल। रिह-रिह कए मोनमे बीतल बात सभ घूमए लगैत छल। जंगल महलमे िबताओल गेल एक-एक िदन पहाड़ सन िबतैत छल। मुदा आब तँ हम ओिहठामसँ tवतंL भए गेल रही। अपन घरमे रही। माए लगीचमे छिल, तथािप मोन Eश¹ निह छल तकर कारण tप´ िथक। हमर tकूल छुिट गेल छल। संगी-साथी सभसँ भTट-घॉंट छुिट गेल छल। हम एकदम एसगर पिड़ गेल रही। माएक अbतम>न तँ द’ध छलहे। ओ कतेक कए सकैत? जे कए सकैत से करए मुदा ओकर सीमान छलैक। हम कोनो बेटा तँ रही निह,जे ओ खेलाइ-धुपाइ लेल हमरा tवतंL छोिड़ दैत। फेर हमरा संगे तँ अEgयािशत दुघ>टनो भए गेल छल। नािbहटा बएसमे एतेक उठा-पटक निह हेबाक चाही। ने हमरा मोनपर एतेक बोझ रहक चाही। मुदा ओ समय आइ-कािê जकs निह रहैक। ब¿चोक अिधकारपर समाजक Eितबbध बहुत मजगूत रहैक। हम घुिर अएलहुँ, दानवक मुहसँ बँिच अएलहुँ से हमर tकूलमे सभकT बूझल रहैक। माtटर सभ अनुमान करए जे थोड़ेक िदनमे सभ िकछु सामाbय भए जाएत आओर हम फेरसँ tकूल आबए लागब। मास िदन जहन बीित गेल आओर हम tकूल निह गेलहुँ तँ एक िदन माtटर साहेब हमरा ओिहठाम अएलाह। हुनका गाममे सभ जनैत छलिन। हुनकर घर गामसँ सटले छलिन। नाम छलिन- शिशकाbत। ओ बहुत आदश>वादी िशJक छलाह। हमरा बहुत मानैत छलाह। हुनका बूझल रहिन जे हमरा बाप निह अिछ। तािह tथानक पूित> तँ स‘भव निह छल मुदा जे स‘भव छल से ओ करैत छलाह। हमर बाबूक अभावक पूित> करबाक साम­य> जँ ककरोमे छल तँ से हमर िशJासँ भए सकैत छल। से बात ओ बेिर-बेिर हमर भंगपीबा िपŠीकT कहिथन। मुदा ओिह िदन तँ अपन बात रखबाक जहॉं Eयास केलाह िक हमर िपŠी बमिक उठल- “हम अपन ब¿चाक भिव»य नीकसँ बुझैत छी। अहॉं के छी राय देबए बला?” माtटर साहेब अबाक रिह गेलाह। मुदा ओहो छलाह िसÇाbतक पÕा लोक। अपन बात tप´ करैत नारी िशJाक महgवपर अिड़ गेलाह। अपना ओिहठामक इितहासक गdप उठबैत गाग¼, भारतीसभक नाम गना

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गेलाह। ईहो किह गेलाह जे जँ िशJाक उिचत अवसर देल जाए तँ बेटी ककरोसँ कोनो मामलामे कमतर निह रहत। मुदा ओ समय आइ जकs निह छलैक। हमर िपŠीकT शिश बाबूक बात निह अड़घलैक। ओ िचकिर उठलाह- “अहॉं अपन सीमानमे रहू। हमरा अपन ब¿चा सभहक भिव»यक tवयं िचbता अिछ।” आब ओ की किरतिथ? माtटर साहेब खाली हाथ tकूल लौिट गेलाह। हमर कपारमे चौथासँ बेसी पढ़ाइ निह लीखल छल से सएह भेल। हम फेर tकूल निह जा सकलहुँ। q

७. फगुआक समय रहैक। गाम-घरमे सsझक फागक मधुर ¥विन गुंजायमान होइत छल। जगह-जगह लोक सभ डाफ,झाइल लए गबैत रहैत छल। Eकृित सेहो संग दए रहल छलैक। पीयर टुह-टुह सिरसवसँ खेत सभ पाटल छल। हवामे मनमोहक सुगbध पसिर रहल छल। एहन समयक tवागत स‘पूण> Eकृित कए रहल छल। ओमहर हमर िपŠी हमर िबआहक तैयारीमे िभड़ल छल। १२ बख>क कbयाक िबआह हेतु स‘पूण> शि°तसँ आतुर हमर िपŠी एकटा सुखी-स‘प¹ वर तािक लेने छलाह। हमर माए बहुत िवरोध कएलक। हमर बएसे की रहए? मुदा ओकर िकछु निह चलल। िबआह तय भए गेल। तकर समथ>नमे नाना तरहक तक> हमर िपŠी दैत रहलाह। हािर कए हमर माए िबआहक तैयारीमे लािग गेल। ओिह समयमे कम बएसक कbयाक िबआह कोनो नव गdप निह छलैक। तेरह बख> तँ आदश> मानल जाइत छल। ओिहसँ बेसीबएसभेलापर समाजमे िनbदा होइत छल। लोक-लाजक बहुत ¥यान कएल जाइत छल। िबआह की होइत छैक तकर िकछु ³ान निह छल। एतबा बुझाएल जे भोज-भात भए रहल छैक। उgसवक महौल रहैक। लोक-बेद सभ गाम-गामसँ आएल रहैक। तरह-तरहक िमठाइ, पकवानसँ घर भरल रहैक। हमरा माए खने दुलारकरए, खने कानए लागए। रिह-रिह कए ओकर छाती जेना फाटए लागए। नािbहटा ब¿चा सासुर चल जाएत, से सोिच कए जेना ओकरा बकोर लािग जाइक। मुदा सgय तँ सएह रहैक। हमर िबआहक समय आिब गेल रहैक। सsझ होइते बिरआतीक आगमनक EतीJा होमए लागल। ओिह समयमे आइ-कािê जकs बसक बस बिरआती जेबाक पर‘परा निह छलैक। पsचटा बिरआती अएलैक। तकरो बेसीए बूझल जाइक। गीत गाइन सभक मधुर संगीतसँ स‘पूण> वातावरण मंLमु’ध छल। बिरआतीक आब-भगतमे सॱसे गामक लोक लागल छल। हमर िपŠीक आनbदक कोनो सीमा निह छल। हमर माए एिह बातसँ Eश¹ छिलजे बर सुbदर, सुखी-स‘प¹ ओ सçजन xयि°त छल। एसगरे छल। भाए-बिहन निह छलैक। छोट-छीन पिरवार। पय„dत स‘पिŠ छलैक। तािहपर सँ बर पढ़लो रहैक। आब की चाही? बरकT पिरछन हेतु बजाओल गेल। बर देिख हमर माएक छाती जुड़ा गेलैक। अतीब सुbदर, गोर- नार, ठाढ़ नाक पैघ-पैघ ऑंिख, लगैक जेना कोनो देव लोकसँ आएल हो। एिह बातक ककरो ¥यान निह

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रहलैक जे एिह तइसबख>क बरक किनआ माL बारह बख>क छैक। कbयाक उçजवल भिव»यसँ सभ आशािbवत छल, Eश¹ छल। िबआहक िवध सभ आगा बढ़ल। ओमहर बिरआती सभक tवागत होइत रहल। कोनो वtतुक कसिर निह रहल। रहबो िकएक करतैक। ìयोढ़ीक कbयाक िबआह छलैक ने। दू िदन धिर बिरआतीक tवागत होइत रहल। कोनो चीजक कमी निह रहलैक। बिरआती सभ अितशय Eश¹ रहिथ। किनआकT देिख तँ मोन गदगद भए गेलिन। अतीव सुbदरी मुदा ने¹े। हमर ससुर तरह-तरहक गहना अनने छलाह। पैरसँ माथ धिर गहनासँ छािड़ देल गेल। दोसर िदन सायं काल बिरआती आपस गेल। सभकT यथोिचत िवदाइ देल गेल। पिरप½ामे ओिह िबआहक चच„ होइत रहल। सभ िकछु भेल मुदा हमरा िबआहक एतबे ¥यानमे रिह गेल जे खूब भोज-भात भेलइ। नीक-नीक गहना सभ आएल। कपड़ा-लŠाक तँ अ‘वार लािग गेल छल। बर की होइत छैक से बुझबाक तँ लूिर निह छल। सsझमे बिरआती चल गेलाक बाद घरक लोक सभ िनिÖंत भेल। बिरआती सभ पीअर-पीअर धोती पिहरने, काजर,चानन केने जेमहरे जािथ लोक टकटकी लगौने देखैत रहैत। हमर ससुर जाइत काल बहुत Eश¹ रहिथ। बहुत आशीव„द देलाह। q

८. हमर िबआहक समाचारसँ हमर माtटर साहेब (शिशकाbत बाबू) बहुत दुखी भेल रहिथ। य_िप ओ िकछु कए निह सकलाह मुदा चुdपो निह बैसलाह। बेिर-बेिर हमर िपŠीकT बुझेबाक Eय÷ केलाह। ओतबे निह, हमरो बुझबिथ। मुदा हमरा ओतेक लूिर कहॉं छल? हमर माए बेबस छल। ओकरा िचकड़बाक-भोकड़बाक आदित छलैक। तT °यो ओकर िवरोधक tवरकT ततेक महgव निह दैक। माtटर साहेबक अbतम>नमे एिह घटनाकT बहुत ग‘भीर चोट लागल छल। ओ Eगितवादी िवचारक Eखर xयि°तgवक लोक छलाह। ओ हािर मानए हेतु तैयार निह छलाह। ओिह िदनसँ गाम-गाम घुिम कए बेटी सभहक पJमे वातावरण बनाबए लगलाह। जे बेटी किहओ tकूल निह गेल छल, सेहो सब tकूल आबए लागल। माtटर साहेब इलाकामे चिच>त भए गेलाह। माtटर साहेबक Eयास कारगर होमए लागल। रहैक िक एकिदन कोनो ब¿चाकT tकूलमे सsप कािट लेलकै। सsपक जहर उतारबाक बहुत Eयास कएल गेल मुदा कोनो असर निह भेलैक। देिखते-देिखतेमे ओ ब¿चा मिर गेलैक। ओिह बिचआक आकिtमक मृgयुसँ गाममे कुहर>म मिच गेल। ओकर माए-बाप तँ tकूलपर धरना धए देलक। माtटर साहेब की कए सकैत छलाह? tकूलक जज>र घरमे पता निह कतेक िवषधर नुकाएल होइक। डरे लोक सभ अपन-अपन िधया- पुताकT tकूल पठौनाइ बbद करा देलक। tकूलक देबार सभ जज>र छल। भदवािरमे तँ सभ साल कोनो-ने-कोनो देबार खिस पड़ैत छल। फेर ओकरा कहुना कए ठाढ़ कएल जाइत छल। कतेको बेर एकर िसकाइित अिधकारी सभकT कएल गेल मुदा िकछु निह भेल। ढहल-ढनमनाइत खपरासँ छारल tकूलक भवनमे इलाकाक ब¿चा सभ कहुना कए पढ़ैत छल। मुदा सsप कािट लेबाक दुघ>टनाक बाद तँ tकूलमे परािह लािग गेलैक।

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tकूल बbद हेबाक िtथितमे पहुँच गेल। तीनटा िशJक आओर पsचटा िव_ाथ¼ रिह गेल रहैक। ओहो पsचटा िव_ाथ¼ िनयिमत निह अबैक। असलमे लोकमे िशJाक Eित ªझान निह छल। बेटीक tकूल गेनाइ तँ xयथ> लगैत छलैक। घरक काज केनाइ माए-बाप, भाएक सेवा केनाइ, िसलाइ-फराइ केनाइ ओकर मूल काज छल। एिह पिरिtथितमे पिरवत>न आनब आसान निह छलैक। बेटीक िबआह भए जाइक तँ वैतरणी पारभए गेल। माtटर साहेब माtटर कम, समाज सुधारक बेसी छलाह। देश गुलाम छल। तरह-तरहक Eितबbधसँ समाजक Eगित अबÇ छल। जातीय संघष>, धािम>क उbमाद चाªकात पसिर रहल छल। अंŽेज सभक कुचे´ासँ समाज खiड-खiड बँिट गेल छल। आपसी मतभेदक हवा दए शासन करैत रहब ओकर सभक मूल उöे«य छल। सरकारी नौकरी करैत सामािजक संघष>क िख बदलब माtटर साहेबकT किठन भए रहल छल। फेर ओ tकूल चिलओ निह रहल छल। िव_ाथ¼ अएबे निह करैक, ¾ोिट उपाय केलाक बादो tकूल भम पड़ैत छल। उŒटे अिभभावक सभ उपराग दैत रहैत छलैक। माtटर साहेब घरक सुखी-स‘प¹ लोक छलाह। जीवन-यापन हेतु माtटरीपर िनभ>र निह रहिथ। गॉंधीजीक उ¿च िवचारसँ Eभािवत रहिथ। समाजमे नव चेतना आनबाक हेतु कृत संकŒप छलाह। तT एक िदन माtटरीक नौकरीसँ gयागपL दए पूण>कािलक समाजसेवक बिन गेलाह। गद>िनमे झोड़ा, खादीक धोती, कुत„ पिहरने गाम-गाम अलख जगबए लगलाह। tवतंLता आbदोलनक िवहािड़ सॱसे बिह रहल छलैक। कतेकोरा»ëीय नेतासभ घूिम-घूिम रा»ë चेतनाकT जगेबाक Eयास करएमे लागल छलाह। माtटरो साहेब ओहीमे तन-मन-धनसँ लािग गेलाह। q

९. रा»ëीय tवतंLता आbदोलनमे भाग लेबए माtटर साहेब सॱसे देशक ±मण करए लगलाह। पैघ-पैघ नेता सभसँ पिरचय भेलिन। गामपर रहबाक, ओिहठामक खेत-पथार देखबाक अवसर कमे भेटिन। िदयादबाद सभ एिह अवसरक अनुिचत लाभ उठाबए लागल। हुनकर जजाितक िबदित करब आम बात भए गेल छल। माtटरी छुिट चुकल छल। खेती-पथारीसँ उपजा से निह भए रहल छल। तािहसँ पिरवार चलब समtया भए गेल छल। मुदा हुनकर उgसाह कम निह भए रहल छल। आिखर एकसँ एक रा»ëीय नेता सव>tव gयाग कए समाज सेवा कए रहल छलाह। से सभ बात तँ ठीक रहैक मुदा घरक खच„ कतएसँ चलत? ई समtया िदन-Eितिदन ग‘भीर भए रहल छल। माtटर साहेब गामसँ बाहर गेल रहिथ। गामपर हुनकर पिरवार छल। एक राित हुनकर घरमे डकैती भए गेल। घरक जे काजक वtतु छल से सभ गोट-गोट कए लूिट लेलक। गाममे ककरो िह‘मत निह भेलैक जे किनको िवरोध करैत। आओर जे केलक से केलक माtटर साहेबक प÷ीकT डsरपर ततेक चोट मारलक जे ओ भुजरी-भुजरी भए गेल छल। ओिह िदनसँ हुनकर पुL सेहो कतहु िबला गेल।

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Eात भने सॱसे गामक लोक करमान लागल छल। थाना-पुिलस सभ एकजुट भए गेल। माtटर साहेबक पिरवारसँ ककरा एतेक दु«मनी छलैक जे एहन बदला लेलकै? तरह-तरहक गdप सभ िदन भिर होइत रहलैक। पुिलस आएले छल िक माtटर साहेब सेहो घुमैत-िफरैत आपस गाम आिब गेलाह। घरक हालत देिख माtटर साहेब गु‘म पिड़ गेलाह। °यो िकछु बािज निह रहल छल। तािहसँ अbदेशा बढ़ैत गेिलन। घरमे जाइते िवभgस दृ»य देिखते धराम दए खसलाह। एिह दुघ>टनाक बाद जे माtटर साहेब गु‘म भेलाह से गु‘मे रिह गेलाह। कतबो कोिशश करिथ परbतु बजले निह होिन। डा°टर सभ नाना Eकारसँ Eयास केलक मुदा सभ बेअसर भए गेल। ओकर बादसँ माtटर साहेब असगर चुपचाप असोरापर बैसल रहैत छलाह। tवतंLता आनदोलनमे भाग लेबाक ¾ममे कतेको नीक लोक सभसँ हुनकर स‘पक> भेल रहिन। मुदा दुिद>नमे °यो साथ निह देलक। असगर गु‘म-सु‘म रहलाहसँ हुनकर माथ खसकैत गेलिन। िवचार ¾म गड़बड़ाए लगलिन। ¾मश: लोक सभकT िचbहबो निह करिथ। माtटर साहेबक ई िtथित देिख Žामीण सभ िचिbतत छलाह। मुदा समाधान िकछु फुराइन निह। डा°टर-बैद सभ xयथ> भए गेल। सभ आÖय> करए जे एतेक xयtत रहएबला माtटर साहेब केना एहेन भए गेलाह? q

१० . बिरआतीसँ गाम लौटलाक बाद हमर ससुरक खुशीक अbत निह छल। सॱसे गामकT भोज देल गेल। गीत-नादसँ समtत वातावरणमे आनbद पसिर रहल छल। जे °यो आबैत तकरा हमर ससुर ऑंजुर भिर-भिर मधुर देने िबना िवदा निह किरतिथ। आनbदोgवसक ई ¾म साल भिर कोनो-ने-कोनो तरहT चिलते रहल। गामक लोक सभ हमर ससुरक उgसाह, Eश¹ता देिख दंग रहिथ। चतुथ¼क भारसँ हमर सॱसे दरबाजा पाटल छल। रंग-िवरंगक मsछ करमान लागल छल। हमर माए तँ भार सभ देिख छगुbतामे पिड़ गेिल। “जªर एकर सासुर बहुत धनाþय अिछ। एतेक भार ओहो एहन सजल-धजल सबहक बसक बात निह िथक।” सभ हँसैत-बजैत छल। गाम भिर बैन परसल गेल। तखनहुँ मsछक सरबाक पिरिtथित भए गेल। अbततोगgवा जन, बिनहारमे बsचल-खूचल मsछ बॉंटल गेल। °यो खाली निह गेल। कहबी छैक जे चतुथ¼क उतारा होइत अिछ कोजागरा। कोजागरामे किनआ ओिहठामसँ बरक ओतए भार अएबाक छल। कोजागराक डाला ततेक नमहर छल जे ओकरा दस गोटे िमिलओ कए उठा निह पािब रहल छलाह। तरह-तरहक सsठ, तरह-तरहक मधुर, पकबान, पान, मखानसँ भरल, गज-गज करैत डाला जखन रtते-रtते आगू बढ़ैत छल तँ लोककT ठकिबदोर लािग जाइत छल। सभ एक दोसरसँ कानाफुसी करए लगैत छल। “कतएसँ एहन सजल-धजल डाला आिब रहल अिछ?िकनका ओिहठामक जाएत?”डालाक पाछा-पाछा अनिगिनत सं©यामे भार आओर ओकरा उघैत भिरआ सभक दृ»य देखैत बनैत छल।

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एतेक भारी डाला, एतेक सं©यामे भार जखन दरबाजापर पहुँचल तँ ओकर शोभा देखैत बनैत छल। कतेक भारमे तँ ततेक सामŽी राखल छल जे भिरआ सभकT रtता नापब पराभव छलैक। चािर डेग चलैत िक थािक जाइत। ओिह समयमे आइ-कािê जकs गाड़ी- छकरा तँ रहैक निह जे लोक समान सभ ëक वा गाड़ीमे लािद कए पहुँचा दैत। ओिह समय तँ भिरआ ओ भारक चला-चलती छलैक। जतेक भार गेल, ततेक सोहनगर गdप। भार सभ तँ पहुँच गेल मुदा समtया रहैक जे एतेक सामŽीक हेतैक की? खएबाक सामŽी जेना मधुर, केरा, दही,मॉंछतँ टीकैत निह। घरमे कतेक खच> होएत? अपन िदयाद सभकT तँ सबजाना नोते छलिन। तखन कएल की जाए? मsछक बड़का-बड़का मूरा, ओ खोरक-खोर दही न´ निह भए जाए तािह हेतु सॱसे गाममे घरे-घर बैनपरसल गेल। नौकर-चाकर,जन-बिनहार सबहक घरमsछ-मधुरसँ भिर गेलैक। इलाकाक EिसÇ नटुआ गीत गोिवbद गािब कए लोकक मनोरंजन करिथ। “धीर समीरे यमुना तीरे बसित बने बनमाली...।” लोक सभ Eश¹ भए नटुआक उपर टाकाक बख„ कए देिथ। कै िदन धिर चलएबला एिह नृgय काय>¾ममे के-के निह अएलाह। ि¸रागमनक हेतु कोनो जŒदी निह रहैक। ओिह समयमे तीन साल, पsचो सालक बाद ि¸रागमन होइक। मुदा हमर सासु अिड़ गेलिखन। साल भिरक भीतरे ि¸रागमन भए गेल। सोचल जा सकैत अिछ जे ओतेक कम बएससँ सासुर बसब केहन भेल होएत। हमर माए बहुत xयाकुल भेल रहिथ। हम तँ कनैत-कनैत धरती, आकाश एक कए देिलऐक। हमर िपŠी सेहो बहुत कानल रहिथ। ि¸रागमनक िदन मानएमे आनाकानी केलिखन मुदा हमर ससुर अिड़ गेलिथ। एतेक कम बएसमे किनआ बिन सासुरमे रहब किठन भए सकैत छलैक। मुदा हमर सासु बहुत नीक रहिथन। अपन बेटी जकs िदन-राित हमर देखभाल करिथन। मानदान तँ ततेक होइत छल जे थोड़बे िदनमे नैहर िबसरा गेल। सासुरमे एतेक स‘मान हेाइत छल जे हमरा नैहर जेबाक इ¿छा निह भेल। मुदा किहओ काल माए मोन पिड़ जाइत तँ कानए लागी आ िक हमर ससुर, सासुकT होिन जे कोना मनाबी, की कए दी। q

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३. प_ ३.१. उमेश पासवानक िकछु किव त◌ा ३.२.Eीतम कुमार िनषादक िकछु किवता ३.३.डॉ. िशवकुमार Eसाद- िकछु किवत◌ा

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३.४.डॉ. िशवकुमार Eसादक िकछु अनुिदत काxय (रजनी छाबड़ाक मूल िहbदीसँ) उमेश पासवानक िकछु किवता बताह वादल ऐ दुिनयासँ िर« ता तोिड़ देलॱ अहs दुखसँ िर« ता जोिड़ देलॱ अहs बताह वादल जकs घुमल िफड़ै छी हम निह जािन एना िकए केलॱ अहs की कमी छल हमरामे अb हारमे छोिड़ कऽ हमरा दोसराक घरकT इजोत केलॱ अहs किहयो िकछु केलॱ नइ वस अपना जकs मानै छेलॱ तैयो समुmक नोर आँिखसँ बहा देलॱ अहs खेललॱ हमर िजनगी आ खुनसँ होली जखन तेरह अ° टुबरकT हमर जनम िदन छल खुशीक समयपर सनेसमे कफन भTट देलॱ अहs िजनगीक ऐ युÇमे ओही कफनकT ओिढ़ कऽ जीिवत छी

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आस अखनो बsकी अिछ मुदा अहsक बेबफाइसँ लजाइ छी हम ऐ दुिनयासँ िर« ता...। ◌

घा फुलोपर नइ अिछ भरोस िबनु मौसमक फुलाइए ओ सावनकT अबैसँ पिहनिह केतेको रंग बदलैए ओ।

सभ भॱरासँ दोt ती अिछ हुनक सभ िकयोसँ िमलैए ओ मुदा अपन बना कऽ कsटसँ घाइल कऽ दैत अिछ ओ सभ भॱरा िशकाइत करैत अिछ हुनक िकए एहेन बेवफाइ चािल चलैए ओ हुअए केतौ और घा तँ बरदास कऽ लेब मुदा िदलमे कsट जकs गड़ैए ओ दवाइ करब मुदा दवाइ िमलैए कहs िकयो खुदासँ दुआ करैत अिछ िकयो िबसरए चाहैत अिछ िकयो पाबए चाहैत अिछ केकरा कहबै के पितयाएत िकयो सुनौ ने चाहैए िकएक तँ कोमल मौलाएल लगैए ओ

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फुलोपर नइ अिछ भरोस। ◌

िजö ई दुिनयsबला बेर-बेर देखौलक Eेमी सभकT अपन तागत िकए अिछ दुिनयsबलाकT Eेमी सभकT िदल दुखबैक आदत हम लैला-मजनू नइ छी जे हुनका छोिड़ देब हम तँ Eेमक आिगमे जरै छी पg थरक देवालोकT तोिड़ देब िकयो हुनका समझा िदयौ दुगो Eेम केिनहारक बीचमे निह आबए नै तँ हम हुनको दुिनयsमे आिग लगा देब शायद हुनका ई मालूम नै हम माथपर कफन बािb ह कऽ चलै छी अd पन Eेमक लेल जीबै-मरै छी जखन हम िजö कऽ देब d यारक ई दु« मनकT दुिनयासँ उठा देब ई दुिनयsबला बेर-बेर देखौलक...। ◌

सड़क हम सड़क छी

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िकछु बािज नइ सकै छी मुदा िकए लोक हमरा बदनाम करैए िकयो खुनक इलजाम लगबैए जखन िक अपने चलबैए गाड़ी-घोड़ा रेसमे आम लोककT कुचलैए।

हम सड़क छी िकछु बािज नइ सकै छी मुदा िकए लोक हमरा बदनाम करैए।

रखैत अिछ बािb ह कऽ बोडर-सीमा-सरहदसँ तखनो नै अिछ हमरा मुदा डर तँ ऐठामक नेता-ठीकेदारक ओ घोटाला कऽ लैत अिछ हमरा ऊपर खच> होइबला खरचा जे दैत अिछ ई देशक जनता।

हम सड़क छी िकछु बािज नै सकै छी मुदा िकए लोक हमरा बदनाम करैए सभ िकयो अिछ अd पन t वाथ>मे लीन सड़ल-गलल फेकैत अिछ अपने संग सेहत हमरो िबगाड़ैत अिछ कािट-छsिट कऽ हमरा आइर-खुड़पेिरया बनबैत अिछ

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हम सड़क...। ◌

मैिथली मैिथलक पहचान अिछ मैिथली t वर-लहरी भाषा िव« व भिरमे मधुसँ मीठ अिछ मैिथली जे भाषा भगवान oीरामकT नीक लागल हमर माइक बोली महान अिछ मैिथली जेतुÕा संt कृित देखैले देवो ललाइए ओ िमिथला महान अिछ मैिथली िव_ापित मi डन आयाची रहैथ ओतैक शान छी मैिथली। ◌

िबसैर जाउ जे भेल ओकरा िबसैर जाउ नसीबमे जे नइ छल अहsक ओकरा आब नइ बोलाउ पाछू घुिम कऽ नइ ताकू

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जे भेल ओकरा िबसैर जाउ।

किहयो काल एना होइत अिछ अगर पिड़ गेल िकनको Eेमक नशs तँ छsहो हुनका बोलबैत अिछ जे भेल ओकरा िबसैर जाउ।

िकनको भेटैत अिछ िकनको हेराइत अिछ दू Jनक िजनगी अिछ फेरो ओकर यािद अबैत अिछ। पाछू घूिम कऽ नइ ताकू जे भेल ओकरा िबसैर जाउ। ई जे देख रहल छी मुरदासँ पटल असमसान सभ िकछु छोिड़ आएल अिछ ई सभ इंसान पाछू घूिम कऽ नै ताकू जे भेल ओकरा िबसैर जाउ। ◌

िखt सा दुखमे डुिब कऽ भेटल हमरा एगो िकनार बेवफाइक जैपर बैस कऽ कनै छी हम कोसै छी हम अपने-अपनाकT खोजै छी हम ओइ िबतलाहा िदनकT जे िबतेने छेलॱ सहज भावसँ

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िशकाइत नइ अिछ हमरा बेवफा केर बेवफाइसँ मन पड़ैत अिछ हमरा िलखल ओइ िचÆीक प¹ा जइमे िलखने छिल ओ हमर नाओं अd पन लहूसँ िबसैर गेलॱ राितक जगनाइ इजोिरया राितमे चान देखैक बह¹े हुनकासँ िमलैले हुनक पाइजलक खनक सुिन कऽ जिग-जिग जागल रही पुरान भऽ गेल ओ सभ िखt सा अd पन Eेमक जइमे रहै छेलॱ दुनू गोरे ओ ªसनाइ ओ मनेनाइ चुपचाप िचÆी िलखनाइ आब सिदका, िबतलाहा िदन िदलमे छूरी बिन कऽ भॲकैए की भेटल हमरा? दुखे-दुख? ◌

फsसी कािŒ ह हमरा फsसी भेटतै की अहsकT ई बुझल अिछ अहs एगो बेवफा छी

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तइ खाितर अहsकT बजौने छी हमर नाओंसँ जे मेहदी लगौने छी अपन हाथमे ओकरा आइ हमर खूनसँ धोइक िदन आएल अिछ की अहsकT ई बुझल अिछ अही दुिनयsमे सभ Eेमी बहुत नीक होइत अिछ मुदा अहsकT मालून नइए आइ हम अहॴक d यारमे मौतकT गला लगौने छी की अहsकT बुझल अिछ हम िजb दा लहाश बनल छी अहsक बेवफाइसँ सsस हमर कखन चिल गेल नोर आ लहू एके संगे बोहेने छी ई अहsकT मन अिछ हम और अहs िमलल छेलॱ फुलक बिगयामे? मुदाआइ हमरा सुलीपर चढ़ेने छी नीकसँ देखू अहs अd पन सूरत जे अहsकT वफासँ बेवफा बनौने अिछ। ◌

गलती

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कखनो लग अबै छी अहs कखनो दूर चिल जाइ छी की गलती भेल हमरासँ िकए एहेन जुलुम अहs करै छी नीन हमर, चैन हमर सभ छीन लेलॱ अहs आँिख-सँ-आँिख िमला कऽ आब आँिख िकए चोरबै छी बेचैन भऽ जाइए ई िदल हमर जखन नाओं हम अd पन अहsक मुहसँ सुनै छी मन करैए आइए अd पन बना लूँ जीवन भिरक लेल मुदा सपना केकरो औरक अहs देखै छी। ◌

रोग चिल जाउ अहs हमरा अहsसँ नफरत अिछ Eेममे तँ लोक हँसैत अिछ मुदा अहs कनै छी चिल जाउ अहs मौसम जकs अहs बदैल गेलॱ अd पन जवानीक आ जानमाªख चािलसँ

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जेकर कोनो इलाज नइ अिछ ऊ रोग अहs दऽ गेलॱ चिल जाउ अहs अहsक ई बेवफाइक गम हम, सिह नै सकलॱ जहरक कोन जªरत हम तँ ओिहना मिर गेलॱ मन पाड़ू ओ िदन जे िबतेने छेलॱ संग-संग तैयो आइ हम नोरक जगह आँिखसँ लहू बहेने छी चिल जाउ अहs हमरा अहsसँ नफरत अिछ। ◌

बटोही अपने शहरमे हेरा गेल छी हम खोजैले िनकलल छी t वयं अपनाकT लऽ कऽ हाथमे िडिबया मुदा िटमिटमाइत इजोतक गरमीसँ जरल जा रहल छी हम बेखबर भऽ गेल छी ऐ शहरसँ बटोही सन लगै छी हम िकयो बता िदअ हमर घरक पता-ठेकान निह जािन केतएसँ केतए चिल कऽ, चिल एलॱ हम िबना कोनो मतलबक

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ऐ अb हार राितमे अइमे दोख अहsक नै दोख हमर अिछ पिरिt थितये एहेन चिल आएल अिछ हमर। ◌

हवा मनमौजी अिछ ई हवा स‘ हैर कऽ कहs चलैए ठोकर मारैए पहाड़मे निह जािन केतएसँ आएल ई हवा सनसनाइत-ऐंठैत ई हवा गरदा उड़बैत िनडर भेल चलैए लाज-शम>क परदा चेहरासँ हटा कऽ चलैए ई हवा ने कोनो दुख आ ने कोनो िचb ता छै जे‘ हरे बहड़ाइए ते‘ हरे हल-चल मचबैए डािर-डािरकT िहलबैए ई हवा। ◌

दोख मंिजल लगसँ घूिम आएल छी हम

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अपने िजनगीमे आिग लगा आएल छी हम जरै छी अही आिगमे अपनोपर दया नै अिछ हमरा केहेन परीJा अिछ हमर िजनगीक कोन दोख अिछ हमर ओ हँसैए हमर ई हाल देख कऽ िकयो हुनकासँ पुिछयौ बेवफा हम छी आिक छैथ ओ? ◌

गुमान दुखक नदीमे डूब लगबए लगलॱ चािहयो कऽ पार नै किर सकब ई दद> भरल याद सभ बेवफा यादक चीता सजबए लगलॱ अधूरा रिह गेल ओ कहानी जे िलखनै छेलॱ दुनू गोरे िमिल कऽ िन« छल Eेमक आब ई ऐना सsच बाजए लगल गुमानक Eेमक धुलमे िमलए लगल

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जे देने छल, िनशानी Eीतक सभ िचÆीक प¹ा आिगमे जराबए लगल लूिट कऽ हमर िजनगी खुशी ओ मनबए लगल यािद सभ िचb ताक, चादैर बिन कऽरिह गेल िजनगीक सभ आशा दुखक नदीमे डुबए लगल। ◌

लड़की मासुम सूरत हुनक कनैल, गुलाब जकs हँसी जेकरा चेहरापर झलकै छल ओ लड़की िकए उदास रहैए साउन मासमे सुनसान राितमे चान जखन वादलक संग लूका-िछिप करैत रहै छल नट-खट पिर सन चुपचाप नंगे पएरे हमरासँ िमलैले अबै छल ओ लड़की िकए उदास रहैए हुनक आँिखमे भरल नोर िकछु कहैए आब नजैर झूकल-झूकल हुनक रहैए

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जेना िकछु तेहेन हेराएल होइ सभ दुख डुबल दद> पीब कऽ नोरमे डुबल रहैए ओ लड़की िकए उदास रहैए कखनो ई हम सोचने नइ छेलॱ िकयो केकरो संग एते Eेम करैए समए िबत गेलाक बादो फेर वएह िदन अबैक इbतजार करैए जनु तँए ओ लड़की उदास रहैए। ◌

आदत जीयब केना हँसी तँ कोसो दूर चिल गेल आब नोर पीऐक आदत भऽ गेल भरोस केकरापर करी िदलमे रहिनहार काितल बिन गेल केकरासँ िदल लगाबी सुनरकी गेल िदल तोिड़ भिर दैत अिछ िदलमे ज© म ओ दोसरेक खुशी देख-देख हमरो जीबैक आदत भऽ गेल समु¿ चा राित ओनािहते चानकT देख-देख जगैक आदत भऽ गेल। ◌

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अनजान िकयो हमरा बजा रहल अिछ अही अनजान जगहपर अखन आधा राित िबत चुकल अिछ फेर केकरो कनैक अवाज सुना रहल अिछ ई केहेन सनसनाहट अिछ उç जर कपड़ा ओढ़ने िकयो परी जकs लगैए मुदा ओकर चेहरा ठीकसँ हम देखलॱ निह मन होइए लगसँ जा कऽ देखूँ मुदा हमर िदल कsिप रहल अिछ बस एगो शकल हमर मनमे आिब रहल अिछ ई के भऽ सकैए एहेन दृ« य, नै देखलॱ किहयो की केकरो मिर गेला बाद आg मा फेरसँ जीिबत लोक जकs हŒ ला कऽ सकैए फेर हँसैक अवाज आब कनी धुआँ जकs उठल हम देखैत रिह गेलॱ िकयो ओही जगहसँ उठल आ चलए लगल बस एÕे बात बजैत जा रहल अिछ अहs चिल आउ, अहs चिल आउ... आिखर ओ भऽ के सकैए?

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लोभ कनी कनीकऽ सभ अलग-अलग रहैए सभपर जेना कोनो आरोप रहैए ई देख फुलैए दम, मुँहगरहा सभकT दुतकारैत-िफड़ैत नजैर आिब रहलअिछ सभ घमi ड अिछ केकरो अd पन दादा-पुरखाक घरमे दुबकल रहैए सभ चुप-चाप बैसल रहैए गुज-गुज अनहिरया राितमे दौड़ैत-भागैत रहैए- अनेरे सुखक तलाशमे मेहनतसँ कोसो दूर रहैत अिछ मुदा लोभ भरल नजैरसँ। ◌

t वाथ¼ कोनो पुरान याद फेरसँ िदलमे उतैर आएत ई किहयो सोचनै नइ छेलॱ ओ िदन अखनो याद अिछ जे देखै छेलॱ

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फुलक िकयारीमे भँवरा फुलक संग अटखेल करैत रहै छल ओ िदन आ आइक िदनमे काफी फरक अिछ फुलक गाछमे फूल आब फूल निह रहल ओकर कोमलता कsटमे बदैल गेल बस गाछ कनी पुरान भऽ गेल आब कोनो भँवरा ओही गाछ लग नइ जाइए बुझना जाइए औझका मनुखे जकs ओहो t वाथ¼ भऽ गेल। ◌

किरछौन केतए हेरा गेल ओ याद ओ सभ आब राितमे सपनो देखब भुिल गेलॱ दूर चिल गेल जेना छोिड़ कऽ अd पन छॉंहो हमरासँ आशाक िनकलल िकरण डुिब गेल िपयासल हम रिह गेलॱ मनक समुm सुिख गेल घरक कोणमे दुबकल रहै छी कैदी जकs अपनो नइ िचb ह रहल छी समयक ऐना बदैल गेल ओ नीक समए किरछौन भऽ गेल

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पg थल भऽ गेल ओ छाती जइमे रहै छल ओ किहयो। ◌

एकबेर जंगलगे-जंगले जा रहल छेलॱ हम अहsकT खोजै-ले बदहबास बताह जकs गाछो सभ ªसल छल जे हमरासँ खबैर निह छल जे अहs केतौ और छी गाछक ªसनाइ भीतरे-भीतरे हमरा िहला रहल छल जेना ओ किह रहल जे यएह मनुख सभ तँ सावनक हमरासँ कोसो दूर केने अिछ शकल-सूरत तँ देखू आजुक दु« मन बिन कऽ बैठल अिछ दोख दऽ रहल अिछ हमरा आ िनकलल अिछ खोजैले ओकरा। ◌

सsच झगड़िनहारकT की पता हमर चुd पी किहयो रंग लाएत।

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िबना मतलबे उलैझ कऽ िबतौने अिछ अd पन समए हम तँ एक-एक पल िबतबै छी काजमे, नीक काजमे जे समैझ लेत ऐ रहt यकT समए-सुLकT ओ सभ दुख पार कऽ गेल ने दु« मनी केकरो संग भेल ने किहयो दुखमे केकरो आगू झुकए पड़ल कोमल-बेवहार हुनक िनशानी रहल सभसँ अिछ Eेम दोसर देख-देख कऽ जरैत-जरैत मरैत रहैए झूठ-झूठे रहत आ सsच-सsच रहत। ◌

यादमे अखनो डुिब जाइ छी हम मन पािड़ कऽ ओइ िदनकT जे हम िकयो सोचने नै छेलॱ की अहs हमरासँ केते दूर चिल जाएब Eेमक धागामे गुथल ई Eेमक मोती टूिट जाएत हमर जगैत आँिख अहsकT सपनामे देखैले तरैस जाएत िपजड़ाकT खुिलते देरी िचड़ै जकs उिड़ जाएत अहsक यादमे ई महल।

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जमाना यादक दीप िमझा देलॱ अहs हम भटकैत रहलॱ, पागल जकs डुिब गेलॱ िवयोगमे अहsक Eेममे िमलल नै िक¿ छो छुलॱ अहs खाली हाथ भेटल तोफामे बेवफाइ आ जखम मुदा देखाएब ई केना आब तँ जमानापर भरोस निह अिछ बस भेटैए िनशानीमे धोखा बेवफाइक दुख जे सिह कऽ जीबैए आिशक जे स‘ हैर जाए ओ जमाना। ◌

पछताएब आँइखो आब थािक चुकल अिछ कô सेहो मरना सन भऽ गेल यादो हुनक दफन भऽ जाएत अिb तम घड़ीमे कफन भऽ जाएत मेटा जाएत सभ िनशानी हम कहs

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फेर भेट सकब दर-दर ठोकर खाएब पछताएब आ नोर बहाएब फेर भेटत नइ ई समए के कहलक आइ हम छी तँ कािŒ ह अहs नइ। ◌

िचÆीक प¹ा यादमे डुबल रहैए ओ नजैर झुका कऽ चुप-चाप नोर बहबैए ओ डेग मानू ªिक गेल अिछ देखल बिरखो िबत गेल किहयो काल भTट-मुलाकात होइए िचÆीक प¹ामे, आ सपनामे खुजल आँिखसँ नजैर कहs अबैत अिछ ओ सभ सपना टूिट गेल बरखो िबत गेल िदलक हँसब आ खुशी िदलेमे दफन भऽ गेल नइ जािन हमरासँ िमलैसँ डरैए िकए ओ। ◌

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किवता जखमक देबालसँ अनहत मनसँ िनकलैए एगो अनजान श¨ द जेकरा अd पन भावनासँ जोित-कोिर कऽ बनबै छी किवता िकछु अd पन रहैत अिछ िकछु दोसराक श¨ द जे समाजक स¿ चाइकT देखबैत अिछ िकछु श¨ द तलवार सन धारदार रहैत अिछ िकछु मौध सन मीठ कोनो श¨ द भावनासँ दलमिलत रहैत अिछ जे पिढ़ कऽ िखt सा जकs कनबैत अिछ सभ श¨ दसँ अd पन िदलकT होइए भTट तँए कोनो श¨ द िदलकT झँकझौरैए आ िकछु समा जाइए सीनामे सादा कागत, कलम आ जखमसँ भऽ गेल दोt ती तइ दुआरे िलखै छी किवता। ◌

गामसँ िकयो लड़की चुप-चुप हमर घरक िखड़कीसँ

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िचÆी िलख कऽ फेकने अिछ के छल ओ लड़की िकयो नइ देखने अिछ जखन खोललॱ ओइ िचÆीकT िचÆीक ऊपरमे हमर नाओं िलखने अिछ एगो सुb दर सन गुलाबक फूल बना कऽ फुरसतमे Eेमक पैगाम िलखने अिछ घर केतए अिछ ओकर मालुम नइ। मुदा अही गामसँ िलखने अिछ अd पन कोमल हाथसँ Eेमक ढ़ाइ आखर भिर इतमीनानसँ िलखने अिछ अb तमे हमर Eसंसो केने अिछ नइ जािन कोन िर« ताअिछ हमर गजलकT ओ अd पन नोर िलखने अिछ िकयो लड़की चुप-चाप हमर घरक िखड़कीसँ िचÆी िलख कऽ फेकने अिछ। ◌

तरहg थी खुदासँ मँगने छेलॱ अहsकT िकए हमरा अलग कऽ देलक

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जीए देत कनी िजनगी हमरो कनैए कनी हमरा दया कऽ देने रहैत देख कऽ अहs हथेली ओहीपर हमर नाओं िलख देने रहैत खुदासँ मँगने छेलॱ अहsकT िकए हमरा अलग कऽ देलक, जइ िदन उठल अहsक िबआहक डोली ओही िदन हमरो जनाजा उठा देने रहैत हमहूँ जैतॱ संग-संग अहs अd पन सासुर जैतॱ आ हम भगवानक लग चिल गेल रिहतॱ िकए हमरा आइ अलग कऽ देलक पुिछतॱ हम ओइ भगवानसँ िकए परीJा लइए EेमीकT d यारमे िदल लगबैसँ पिहने कािट देने रहैत खुदासँ मँगने छेलॱ अहsकT िकए हमरा अलग कऽ देलक। ◌

डुबैत जे मँगने छेलॱ हम भगवानसँ से नइ भेटल हमरा डुबैत गेलॱ हम गम केर गहराइमे

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चीर कऽ सीना रािख देलॱ िदल, अd पन वएह पैरपर जरैत रहलॱ हम बेवफाइक रौदमे गली आ चौराहापर िबतल िदन आएल फेर तुफान जकs तोिड़ हमर िजनगीकT फेक देलक लबािरस लाश जकs भऽ गेलॱ हम जखन फेर मन पड़ल पुरना EेमीकT तब खोजने िफड़ै छी ताज-महल आ किôt तानमे हम तँ बस Eेम छी। ◌

तागत d यारक दु« मन छी ई दुिनयsबला हमरा िहनका लऽ जाए िदयौ कन-कनमे बसल अिछ d यार अहsक तखने हम िजb दा छी तइ दुआरे एकरा हमरा जराबए िदयौ d यारक दु« मन छी ई दुिनयsबला हमर आँिखसँ जे िगर रहल अिछ नोर अहs अपना-ले हमरा छोिड़ कऽ जाए िदअ हमर तागत अिछ Eेम अहs

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असर एकरा देखबए िदयौ d यारक दु« मन छी ई दुिनयsबला सुनै छी िखt सा हम लैला-मजनू-िसरी फरीहादक हँिस-हँिस कऽ मरए िदअ गम आ d यारमे तागत हमहूँ देख लइ छी क‘ ब© त ई तलवारमे Eेमीक फेर अजमौने अिछ हँसैत आइ सुलीपर चढ़ए िदअ d यारक दु« मन अिछ ई दुिनयsबला सभ जखमपर अहsक नाओं होएत सभ खूनक बु¹पर अहॴक नाओं होएत सभ Eेमीक लेल d यारक पैगाम होएत। ◌

हालत हेरा जाएब हम एक िदन छोिड़ कऽ जाए िदअ िनशानी अd पन फेर के जनलक किहयो आएब िमलैले हम ई वादा अिछ जवानीक दौड़त रग-रगमे रवानीक मुदा तखनो भुिल जाइ छी हम जखन लग अबै छी अहs ªिक जाइए नजैर अहsकT देखते की कªँ हम

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केकरा सुनावी ई िदलक िखt सा एतए लोक सभ मतलबी अिछ जखम िदलक केकरा देखाबी हम कनै छी सिदखन हम, पागल जकs लोक हँसैए हमरापर हम तँ कनै छी एतुÕा हालत देख कऽ।

ऐ रचनापर अपन मंतxय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। Eीतम कुमार िनषादक िकछु किवता

कŠऽ तकै छी? धाकर सन-सन मैिथल बाबू ढहैक सुिनतT हु‘मैर ढकै छी जुगक कलम अँड़पेना दैछ तT दुलकैत-दौड़ैत बैिस थकै छी गाम छोिड़ परदेशी बिनतT अपनेिहं मरजी खूब अँकै छी तT िमिथला आब सोर पाड़ैए एŠहु देखू ने कŠऽ तकै छी।। एतहुँ देखू ने... कतऽ तकै छी।। 0।।

जानल-मानल-पुरखा-िपहानी कहए गरोसैत दादी-नानी मूड़ैत-ममहर-जूड़ैत बपहर खेलैत-कुदैत हँसल जुआनी मुदा बथाएल-िमिथला-मिहमा

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भूत खेिल सभ झूठ बकै छी तT िमिथला..! सोर पाड़ैए...।। 1।।

वैह देिसल बयना अवह½ा बनल मैिथली भाषा-िमÆा सािहgय xयाकरणअदौसँ पढ़ैत भेल मनीषी ³ानक पÆा देव भाषा संtकृतो थुड़ाएल मैिथलीश बाजैत खूब ठकै छी तT िमिथला ‘आब सोर पड़ैए’ ...।। 2।।

ए°खन बुझनुकहो हकमैए अbवेषक बिन क¿छड़ कटैए अdपन मैिथली टूअर भेल अिछ जािह लेल िकए नैँ माइल फटैए कहैछ Eीतम सुनू मैिथल जन कोन सेहbताक घूर पकै छी तT िमिथला...। आब सोर पाड़ैए...।। 3।। ¦ आ_ाच>ना नवराL जगल, धूप-दीप सजल मॉं जगद‘बे सुर गीत भजल िवजया दशमीक दश¸ार खुजल नर-नारीक िहयहरिषत िबहुँसल। नवराL जगल धूप-दीप सजल....।

जुग धम> अधम>क ¸b¸ डगर जगवासी डरय सbतान नगर। कबुला-पाती मनसा रोपल जगतािरणी दर भगतन कुहसल

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िवजया दशमीक दश¸ार खुजल नवराL जगल...।

सिदखन कृपािशष दैत रहू जीवन सदगितकT स‘हािर अहूँ सृि´क सbतान पुकािर रहल असरा केर पोटरी खोिल कहल िवजयादशमीक दश¸ार खुजल नवराL जगल...। ¦

िदवसाtताच>ना अ‘बाक आभा पसरल सगरो भगत oी çयोित जलािव रहए..। तैयो कुमितजन अिछ अbहराएल कलिप सुता-सुत गािव कहए..। अ‘बाक आभा पसरल सगरो...।

िनिश िदन सुरगण मिहमा बखानए शूलेÃरी माऽए करए ±मण असुरिनकिbदनी काgयाियनीकT यश गाथा करए जगत oमण शु‘भ-िनशु‘भ मिहषासुर मिद>नी जया िवजया माऽए भािव रहए...। अ‘बाकआभा पसरल सगरो...।

छbदोि°त : नव दुग„ माऽए नाम जेकर अिछ, पार कहs केओ पाओल पाप िवनािशनी माऽए जगतािरणी,

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अ  ुत् ªप रचाओल शैलसुता ओ tकbद माता, माऽए चbm घiटा कहओली ôõचािरणी, कु»माiडा औ िसिÇदाLी यश पओली काgयाियनी कालरािL भऽ मैया, महागौरी जग भावए िवÃ धािरणी आिद शि°तनी,तीनहुँ लोक बचावए िसंहवािहनी-वै»णोदेवी सbतित हृदय धएली बिरख-बिरख कृपा आिशष संग िवजयादशमी लऽ अएली

धृत-वाती-कपू>र िनराजन सुमन समप>ण भगत करए कंचन थाल सजल मधुxयंजन भोग लगा वÅती माथ धरए लोक शोक संग कुहुसए Eीतम कªणालाप सुनािव रहए अ‘बाक आभा पसरल सगरो...। ¦

स®¥याच>ना दोहालाप : अनेक अनाथ सनाथहुँ होवए भगवती जागरण भि°तसँ..। शोक मेटाएब अ‘बे शरणमे िवनती करए म® शि°तसँ..।। केओ पूजए केओ भोग लगावए केओ संकŒपकT दोहरावए..। केओ पु»प®जली मधुमेवा दए केओ सुदीपसँ गोहरावए..।।

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कोरस (गुंजन) : oी मातु शरणम्.., oी अ‘बे शरणम्…।। माऽए केर मिbदरमे çयोित जराएब...। सॉंझ दऽ मंगल दीप सजाएब...। माऽए केर....।

अड़हुल.. संझा.. च‘पा.. चमेली जगद‘बा पग फूल चढ़ाएब..। माऽए केर...।

मनोकामना सbतान हृदयमे रिहयौ सहाय माऽए कोप Eलयमे..। धरम-करम किलयुग छिलया संग तमस-तामस केर युÇ िवजयमे... पिरऽ¾मारत.. वÅती नर-नारी सभ िमिल-िवजया ¥वज फहराएब..। माऽए केर मिbदरमे.. çयोत जराएब...।

छbदालाप : कूदए किवŠ छbद.. सनकए सवैया..। जय अ‘बे.. सुर-भगत.. जय हो गवैया।।

आऽऽऽ लाली लालT लालक मुखसँ.. मगन अिछ माऽएक लाल..। भूषण-किव िव_ापित-वर संग.. लखए-िबहारी लाल..।।

छbछ : जय अ‘बे जय हो लाल.. माऽए केर चुनर लाल भ°तक मृदंग-झाल सुरताल झमके..। ôõाणी ³ान लाल, वै»णोवरदान लाल गौरी-गणेश लाल बाल-चान बमके..।।

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िदशा-िद’पाल लाल.. अ‘बर भूचाल लाल मिहषासुर र‘भ लाल, काल भाल धमके..। दानव गुमान लाल, मंगला-मुtकान लाल काgयाियनी कŠा लाल, र°त लाल टपके..।। िसंहक नाखून लाल, राJस केर खून लाल «यामाकाली मुँह लाल,लाल जीभ लपके..। िनशा-«मशान लाल, त®िLक मशान लाल भैरव-Ãान जीभ लाल, भूंक काल झपके..। पूजा केर फूल लाल, संझा अड़हूल लाल गेbदा-गुलाब लाल, धुजा लाल चमके..।। दुग„क िLशूल लाल.. किलयुग कबूल लाल Eीतम बातुल लाल सुर-ताल रमके..।।

अbतरा : माऽए मंगला.. दरसन िदयऽ अनुखन असरा लगौने रहलॱ सिदखन..। अ‘बेक आगम िदxय çयोत संग िसंहवािहनी-गोहरावै भ°तन..।। माऽए आिशष लऽ.. कहए सुत Eीतम संकिŒपत िसंह संग खेलाएब..। माऽए केर मिbदरमे.. çयोत जराएब...।। ¦

िनशाच>ना दोहालाप : शुभनवराLक िवजयादशमी.. पव> मनोरम् जग िबहुँसल। जगतािरणी माऽएक लीला मिहमा गामेगाम gयोहार सजल।।

कोरस : आऽऽऽ... ऊँ _ौ.. दुगµ माऽए काली..।

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अहsक लीला अजब.. अ‘बे शेरावाली..।। ऊँ _ौ... दुगµ माऽए काली...।। हे माऽए खdपड़वाली जय-जय जोतावाली..। ऊँ _ौ...।

अbतरा : दानव कोपसँ देवता कानल इbm डरल-घबराएल। असुर र‘भ मिहषासुर बल कT कोपसँ सुर थर„एल..।। तप कए मिहषासुर ôõासँ ‘अमरggवक’ वर मॉंगल। ‘एवमtतु’वर देबऽए सँ पिहले, ôõाक मानस जागल।। बेटा सृि´क िनयमसँ ई कोना हेतै..? जे केओ जbम लेतै.. ओ तँ मरबे करतै..। तिखने अ‘बरसँ देव-िक¹र.. मारए लागल ताली..।। 1।। ऊँ _ौ...।।

अbतरा : ôõा वचन सुिनतT मिहषासुर.. िनजमन सोच बढ़ौलक। ‘कbयाकुमारी’ मारए हमरा.. छल मन बुइध बतौलक।। तब चतुरानन कहल ‘तथाtतु’ गगन पु»प बरसौलक। सुरगण-आिद शि°त समेटैत शव> शि°त िनरमौलक दरसए सुरलोक सीमा-योगमाया छाया। िदxय-शि°त दरसए.. जगद‘बेoी माया।। दैव दुbदुिभ ¥विन गुंजन, संग-Eगटल शेरावाली...। ऊँ _ौ...।। 2।।

छxयालाप : िशव शि°त ‘मुँह’िवषणु शि°त ‘कर’ ôõाशि°तसँ बनल चरण। धम>राज केर शि°त केश भेल

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चbmमाक शि°त ¸ै tतन।। पृ­वीक शि°त रचै िनत‘ब ¸ै जंघा रचलिन शि°त वण।। वसुकै शि°त हtत®गुली औ पाद®गुली देल शाि°त अªण।। सं¥याक शि°त देल दु¹ु भॱ वायुदेव ¸ै रचल oवण। दsत बनल Eजापितक शि°तसँ अि’न-शि°त-िLनेLनयन..।।

आयुधालाप : ôõा देलिन कमiडल माऽए केर िव»णु च¾ Eदान केलिन। शंकर देलिन िLशूल िपनाकी अि’न शि°तवाण देलिन।। शंख औ पाश वणजी देलिन इbmहु व  दऽ ¥यान केलिन। काल दiड यमराजो देलिन पव>त oृंखला िसंह देलिन।। रिव, रि«म दए रोम कूपमे çयोित शि°तनी माऽए दरसल। म®गिलक मिणमाला Eजापित दऽ भ°त आँजुर माऽए वर परसल।। अ‘बुज-र÷ oी कुडल-कंगन हँसुली नुपूरसँ माऽए सजल। पृ­वीक अंऊँठी-हार पिहर माऽए ‘रण-चiडी’ हुँकार भरल।।

अbतरा : रणमे राJस सबल माऽएसँ युÇो Eबल मिहषासुर जT मरल, माऽए केर जयगान बढ़ल।। रणमे राJस िवÛल माऽएसँ युÇो Eबल

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मिहषासुर जT मरल, माऽए केर जयगान बढ़ल।। माऽए िवजयाक यश गावए Eीतम जय-जय शेरावाली...। ऊँ धै...।। 3।। ¦

िव_ापित tमृित िव_ापित पव„गत oीमन दएलहुँ दश>न तँ कुशल कहू...। िमिथला आिशष दए हुकिर रहल जुिन tवारथ कोपमे घुसल रहू...।। दएलहुँ दश>नसँ तँ...।। 0।।

ितरहुत िमिथल®चल अपनेिहकT बाटो जोहए मbहुआएल जकs...। संtकार िगरल-लोक-लाज मरल डाही देखए कbहुआएल जकs...।। कुटनी-लुटनी सभ दुइस रहल बुिधयार छी तÝ सभ दुसल रहू...। िमिथला आिशष दए हुकिर रहल...।। 0।।

गॱआँरी िमतौरीक खटप½ी बाबाक िखtसा िखिसआएल छै। बेसुध अिछ पंचो-परमेसर जँिह-तँिह लेरहल िघिसयाएल छै, ªसना िवधना देल कोप करम अिभशािपत भऽ िकएँ ªसल रहू...। िमिथला आिशष दए हुकिर रहल...।। 0।।

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५३ म अंक ०१ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५३ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 105

हथटु½ा कुरसी हकैम कहए अिबयौ किन गाम अहs बौआ हेहªघर दरबçजा हुचकए शहरी सुख नाचए झमकौआ सुख रोगी पूत सेहbतेसँ बड़बेस नगरमे हुtसल रहूँ िमिथला आिशष दए हुकिर रहल...।। 0।।

डीह-डाबर मािटसँ नेह कª किहयो-किहयो बनु घरमुहs पोखैर गाछी देव थान कहए पावैन लाथे सेहो आऊ अहs Eीतम कर जोड़ए सुनू मैिथल शुभकाल अिछ तÝ निह हुtसल रहू िमिथला आिशष दए हुकिर रहल...।। 0।। ¦

वरद वसbत वरद वसbत सुमbत सुहावन tवागत मृदुकोिकल tवरकT िवहुँसल कुसुम सरस ऋृतु भावन मुिदत कएल भू अ‘बरकT वरद वसbत, सुमbत सुहावन...।। 0।।

धbय वसbत अनbत िदगbतक xयŽ बुलbत महbथक ªपT सुमनक सौरभ, लिलत पलाशक

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मधुकर मधुप जयbत सªपT oुित सुर सरगम राग िवरागिहं िपक पंचम सुर िपऊिपऊ गावए गीत-संगीत औ थाटक बाटिहं काफी वसbत बहार सुहावए सुbदिर छमकावए पग पैजिन फागुन सुिमरए ईÃर कT िवहुँसल कुसुम... वरद वसbत...।। 1।।

मदनोgसव मृदंग मंजीरन ड‘फक संग नचए रंगरिसया रित पित मदनक पंचवाण संग कामोbवेषी टेरय बँिसया युगoी किवजन जेिह वसbतक काxयाधार सँ tनात भएल िव_ापित çयोितरीÃर संगिह कािलदास ऋृतु रीत धएल आजु अहिन>श Eीतम अरचए िमिथला मैिथली सुर गहवरकT िबहुँसल कुसुम...। वरद वसbत...।। 2।। ¦

सरस वसbत बौरए वसbत कbत करय बरजोरी फनकैत फागुन धुन-गावैए होरी।। रंग-िवरंग अंग-ओढ़नी-ऑंचर संग उमकए उमंग तंग-भावैए गोरी।। बौरए....।

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युगबोध tनेहक संगितया संगोरए tवारथ िमतौरीकT स  ाव तोड़ए उgसव उड़ेिह लोक-लाज देह ओड़ए ड‘फा-जोगीरो आब जनमन झकोरए सनकए मंजीर-ढोल करए सीना-जोरी फनकैत फागुन धुन... बौरए वसbत कbत...।। 1।।

किवŠ : ऋृतुराज वसbत और मtत पवन फागुन मधु मासक रंग रमल कािमनी-भािमनी-मदनोgसव रत होलीक हुड़दंग केर संग जमल तणीक जौवन तकT पŒलव नव लिलत शु± रि°तम-हिरयर कलशल बैगनी अलसी-अड़हर तोड़ी-सिरसो पीयर-उçजर गहुमो केर शीष आशीष भरल सुखदा-वरदा धरती िबहुँसल सतरंगी छटा जँिह-तँिह हलचल खग दल कलरव जगती िनहुँछल पिपहाक पंचम सुरतान सजल संगीत थाट िहय ‘काफी’ हँसल मृदुराग ‘वसbत-बहार’ नवल सुरिभत गायन िहय मु’ध बसल आऽऽऽ... रंग-िवरंग अंग, ओढ़नी आँचर संग...। बौरए वसbत कbत...।

आहत अबीर कएल बे रंग-कुरंग सँ सीखल पहुनाई पवन रितपित अनंगसँ परसल पकवान रस पूछए Eसंगसँ

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दुबकए Eीतम िकए, होलीक हुड़दंगसँ बेसुर मनु°खोकT रंग संग...। ¦

ऐ रचनापर अपन मंतxय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। डॉ. िशवकुमार Eसादक िकछु किवता

भुमकम चािर िदवस ओ सगर यािमनी नीनक मातल भेल हताश िकनकहुँ कतहु Lास भेटए निह भुमकम भेल गरदिनक फsस।

कोना जीयब? की करत िवधाता? ³ान-िव³ान सभ भेल अथाह दरकल भीत िभयौन लगैत अिछ घरो बsचक निह अिछ आश भुमकम भेल...।

िकनको छुटल Eाण °यो बsचल °यो-°यो दुखे भेल बताह मनक बेथा िकनकासँ बsटी घरक-घर भऽ गेलै नाश भुमकम भेल...।

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धरतीक संग थरथर कsपइ गाछ-िबरीछ संग मानव जाित की हम केलहुँ की हम पेलहुँ िकनको निह बुझबाक अवकाश भुमकम भेल...।

दू-चािरक बात रहल निह हजारक-हजारकT लऽ गेल काल केतबो °यो कलोल कए थाकल बैठला थािक-हािर-कऽ आश भुमकम भेल...।

पाथरक नव जंगल बनाओल जानक Žाहक ओ बिन गेल सर-स‘पैत संग छीिन कए लऽ गेल जीवनक सभटा हास-िवलास भुमकम भेल गरदिनक फsस। q

दीप सगर राित हम दीप जरेलॱ तैयो घर अbहारे अिछ राित-राित भिर िदनक आशमे मन हमर ओझड़ाएले अिछ तैयो घर अbहारे अिछ।

तमसो मा çयोित>गमय केर पाठ सभ िनgय दोहराबैत अिछ

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तैयो िनgय इजोतक चाहमे एखनो सभ अbहाराएल अिछ तैयो घर अbहारे अिछ।

मैिथली संगे िमिथला जीतल देशक भाषामे नाम जुड़ल भाषा केर स‘मानो बढ़ने सबहक ऑंिख िकए मुनल अिछ तैयो घर अbहारे अिछ।

भाषा ओ सािहgयकT जे जन आगू आइ बढ़ाबै छिथ हमरा बुझने वएह छिथ मैिथल हुनके नाम आइ गाबक अिछ

राित-राित भिर िदनक आशमे मन हमर ओझड़ाएल अिछ सगर राित हम िदन जरेलॱ तैयो घर अbहारे अिछ।

मन पछताय कन-कन मािट कन-कन देह कन-कन पािन कनकन छै खेत अगली-बगली खेत पािट गेल ऊँचका पाटी भेल बलाय की करी नै करी मन पछताय।

हाथ-पएर केर ऑंगुर िठठुरल िछपली मानए निह ऑंगुरक बात खेतक आिड़पर राखल जलखै

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कौआ अलगे खेल-खेलाय की करी नै करी मन पछताय।

धानक बु½ी जिर गेल भोरे आिग-छय केर कोन उपाय िबनु पटौने खेत छोिड़ कऽ आिगक भॉंजमे कतए जाय की करी नै करी मन पछताय।

बड़ झंझिटया खेती-बाड़ी गहुमक खेती बड़ दुखदाय जाड़ै-जनमए जाड़े बाढ़य जाड़े मे ओ फरए-फुलाए की करी नै करी मन पछताय।

जाड़े-जड़ेलहुँ खेत भेल हिरयर धरती भेली परम सहाय पछबासँ जँ बsिच गेल तँ सभटा मेहनत जाएत भुलाय की करी नै करी मन पछताय।

सभ झूठ -फूसमे बाझल छी सभ झूठ-फूसमे बाझल छी िकयो अपन डीह निह ताकै छी।

अपन चास-बास छोिड़ सभ अनकर चास स‘हारै छी अपन गाम सुनसान लगैत अिछ

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अनकर गाम बसाबै छी सभ झूठ-फूसमे...।

अपन सहोदर दुआरपर अँटकल दोसर सहोदर ताकै छी गाम-गाम केर एÕे िखtसा दुआरो दीप निह बारै छी सभ झूठ-फूसमे...।

भाषा भेष बदैल रहल छै िनत-िनत नूतन िमिथला केर अपन भाषा िबसैर रहल छी आने भाषापर आिoत छी सभ झूठ-फूसमे...।

हािकम, अमला मील मजूर बिन जीबू जेतए जे काज िमलए अपन भूिम-भाषा निह िबसरी िमिथले केर अहs बेटा छी सभ झूठ-फूसमे बाझल छी। q

ऐ रचनापर अपन मंतxय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। डॉ. िशवकुमार Eसादक िकछु अनुिदत काxय (रजनी छाबड़ाक मूल िहbदीसँ) (PAGHALAIT HIMKHAND Maithili translation of ‘PaighalteHimkhand’ An Anthology of Hindi Poems by Rajni Chhabra from H indi into Maithili by Dr. Sheo Kumar Prasad.)

अकास भरल छै

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अकास भरल छै दहॲ-िदस बेकल छै निह जािन आइ Eाकृत कोन लीला करतै!

बेसुध बेसुिधक हालैतमे अपनाकT हम ओिहना बजबै छी जेना अहॴ बजाबैत होय हमरा।

निह जािन किहया जएत ई पगलपन होश हएत किहया। q

नारी जनानीकT माL जनानी िकए निह बुझल जाइ छै!

समाज tथािपत कऽ देलकै ओकरा लेल िजनगीक िकछु आदश> िकछु शत> ओकरा जे िनभौती ओ देबी कहौती।

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अपेJाक िसंघासनसँ उतिरते भऽ जेती पितता।

कखनो तँ देबी सन पूजलक कखनो पाएरक पनही बनौलक कखनो कठपुतरी सन मन मािफक नचौलक अपेJा एतेक ऊँच भऽ गेलइ जे जनानीक िजनगी ओछ भऽ गेलइ।

िकए निह मानै छी सभ ओ माL जनानी छी! सहज सरस सरलमैत स‘वेदनाक जननी आ सृि´क िसरजनहािर।

अपना मने िजबाक ओकरो अिधकार छै जनानी बस जनानी अिछ। q

एकटा हेराएल जनानी िशकाइत की अनकासँ अपने सभ छीिन लेलक हमरासँ हमर पिहचान।

बेटी पुतौह किनयs माए मे ओझराएल मेटा लेल

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हम अपनेसँ अपन पिहचान।

बाटपर जाइत कािê सोर पाड़लक संगी नेbहपनमे राखल छल जे हमर नाओं।

खुजए लागल तखन हमर tमृितक झरोखा रौदक चालैनमे िकिरणसँ िनकसल धुँआएल-धुँआएल नाओं।

हमहुँ किहयो हम छेलॱ माए-बापक फुदकी िचड़ै हास िवलाससँ भरल उड़ैत रही अँगना-घर गामक गलीसँ गामक िसमान धिर।

हमर अजादीक िखtसा पसैर गेल कsचक िकिरच सन गरए लगलैन अड़ोस पड़ोस संग सर-स‘बbधीकT हमर पसरल पsिखक अजादी।

नोचैले पsिख अजािदक हमर सु¹र सु¹र बह¹ासँ करौल गेल िबआह नेनपनेमे हमर।

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पढ़ब-िलखब सपना भेल हमरा पोêाएल गेल घरेक सेवामे मेवा भेटै छै, जाबत सुतल छल अपन पिहचानक इ¿छा ताबत िकछु बख> धिर रहलॱ िगरहtथीमे लीन।

ब¿चा अपन िजनगी आ पुष अपन काज संग पलखैत ने हुनका हमरा लेल एको छण।

पाकैत बाउल सन तपैए मन।

धधकैत मªभूिममे ढन-ढनाइत घैल सन मन हमर खाली अिछ िजनिगक मरीिचकामे तकै छी अपन पिहचान।

फŒलsक बेटी हम फŒलsक बहुिरया फŒलsक किनयs आ फŒलsक माए बिन हम गेलॱ हेराए।

िशकाइत की अनकासँ अपने सभ छीिन लेलक हमरासँ हमर पिहचान। q

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राजभाषा भुगतानक बेर बÝकमे कहल गेलइ नाओं

राजभाषा नाओं देिख भेटल मनकT अराम।

अहsसँ तँ देशोकT बढ़ल अिछ शान अहs िबनु रहने की होएत िहbदुtतानक पिहचान।

भुगतान लेबए काल जखन लगौलिन ओ औंठा िनशान झमान भऽ खसल मन भेलॱ मृयमान।

नाओं आ गुणक केतौ ने कोनो मेल िबधाता की केला केहन केला खेल।

मनमे लेने ओकर पढ़ेबाक अिभलाषा माए-बाप रखने हेतए नाओं रा»ëभाषा।

पिरिtथितयो राजभाषासँ केलकै मजाक

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अJरोक बोधसँ ओकरा केलकै फराक। q

िब_ाक बाट गबरा, धापू, िलछमी आ रामी पैघ पैघ डेग बढ़बैत पाठशालाक बाटपर बिढ़ रहल अिछ।

आइ बिहनजी िसखेती हsिसल-जोड़ जेकरा िसखला बुझला पछाइत बिनयsक चलाकी निह चलतै।

आखर ³ानसँ फैदे-फैदा बिनयsक जोर निह चलतैन जादा।

गबरा, धापू, िलछमी आ रामी आब तोरा सभसँ मनक बात किहयौ कहबौ िकए ने गामक सभ जनानी पढ़ए चाहै छै हमहॴ िकए अनपढ़ रहब?

चुलही पजारैत, दािल भात राbहैत िबजलोका जकs मनमे लौकैत अिछ धधकैत आिगकT िनहारैत सुनगैत मन नेने चुिêसँ कचका कोयला िनकािल देबालेपर ‘क’‘ख’‘ग’‘घ’ िलखने जाइ छी।

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सेbटरपर निह जा पबैछ तँ की अपन बेिटये सभकT गुª बनबैत धापली िब_ाक बाटपर बिढ़ रहल अिछ।

छौरमे सुनगैत िचनगी आहूत करैत िशJाक महाय³क हमरा गामक सभ जनाना महान य³मे आहूित दैत िब_ाक ठेकान पािब सुखद जीबनक बाटपर बिढ़ रहल अिछ।

ऐ रचनापर अपन मंतxय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।

आगsक अंक

िवदेह "नेपालक वत>मान मैिथली सािहgय" िवषयक िवशेष®क िनकालबाक नेयार केलक अिछ जकर संयोजक oी िदनेश यादव जी रहता। अइ िवशेष®कमे नेपालक वत>मान मैिथली सािहgय केर मूŒय®कन रहत। अइ िवशेष®क लेल सभ िवधाक आलोचना-समीJा-समालोचना आिद Etतािवत अिछ। समय-सीमा िकछु नै जिहया पूरा आलेख आिब जेतै तिहये, उ‘मेद अिछ िवदेहक ई Eयास दूनू पायापर एकटा पूल जªर बनाएत। िवदेह ¸ारा संचािलत "आमंिLत रचनापर आमंिLत आलोचकक िटdपणी" शृंखलाक दोसर भागक घोषणा कएल जा रहल अिछ। दोसर भागमे अइ बेर नीलमाधव चौधरी जीक रचना आमंिLत कएल जा रहल अिछ आ नीलमाधवजीक रचना ओ रचनाधिम>तापर िटdपणी करबा लेल कैलाश कुमार िमoजीकT आमंिLत कएल जा रहल छिन। दूनू गोटाकT औपचािरक सूचना जिŒदये पठाओल जाएत। रचनाकारक रचना ओ आलोचकक आलोचना जखने आिब जाएत ओकर अिगला अंकमे ई Eकािशत कएल जाएत।

अइ शृंखलाक पिहल भाग कािमनीजीक रचनापर छल आ िटdपणीकत„ मधुक®त झाजी छलाह।

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जेना की सभ गोटा जनै छी जे िवदेह २०१५ मे तीन टा िवशेष®क तीन सािहgयकारपर Eकािशत केलक जकर मापदंड छल सालमे दूटा िवशेष®क जीिवत सािहgयकारक उपर रहत जइमे एकटा ६०-७० वा ओइसँ बेसी सालक सािहgयकार रहता तँ दोसर ४०-५० सालक ( मैिथली सािहgयकार मने भारत आ नेपाल दूनूक)। ऐ ¾ममे अरिवbद ठाकुर ओ जगदीश चंm ठाकुर "अिनल"जीपर िवशेष®क िनकिल चुकल अिछ। आगूक िवशेष®क िकनकापर हुअए तइ लेल एक मास पिहनेसँ पाठकक सुझाव मsगल गेल छल। पाठकक सुझाव आएल आ ओइ सुझाव अंतग>त िवदेहक िकछु अिगला िवशेष®क परमेÃर कापिड़, वीरेbm मिŒलक आ कमला चौधरी पर रहत। हमर सबहक Eयास रहत जे ई िवशेष®क सभ २०१८ मे Eकािशत हुअए मुदा ई रचनाक उपल¨धतापर िनभ>र करत। मने रचनाक उपल¨धताक िहसाबसँ समए ऊपर-िन¿चा भऽ सकैए। सभ गोटासँ आŽह जे ओ अपन-अपन रचना editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा दी।

िवदेहक िकछु िवशेष®क :- १) हाइकू िवशेष®क १२ म अंक , १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल िवशेष®क २१ म अंक , १ नव‘बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) िवहिन कथा िवशेष®क ६७ म अंक , १ अ°टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल सािहgय िव शेष®क ७० म अंक , १५ नव‘बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक िवशेष®क ७२ म अंक १५ िदस‘बर २०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी िवशेष®क ७७म अंक ०१ माच> २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) बाल गजल िवशेष®क िवदेहक अंक १११ म अंक , १ अगtत २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 11 1

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८) भि°त गजल िवशेष®क १२६ म अंक , १५ माच> २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समीJा िवशेष®क १४२ म, अंक १५ नव‘बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 १० ) काशीक®त िमo मधुप िवशेष®क १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरिवbद ठाकुर िवशेष®क १८९ म अंक १ नव‘बर २०१५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश चbm ठाकुर अिनल िवशेष®क १९१ म अंक १ िदस‘बर २०१५ Videha_01_12_2015 १३ ) िवदेह स‘मान िवशेषाक- २००म अक १५ अEैल २०१६ / २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016

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१४ ) मैिथली सी.डी./ अŒबम गीत संगीत िवशेष®क - २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंिLत रचनापर आम ंिLत आलोचकक िटdपणीक शृंखला १. कािमनीक प®च टा किवता आ ओइपर मधुकाbत झाक िटdपणी VIDEHA 209th issue िवदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016

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जगदीश Eसाद मiडल जीक ६५ टा पोथीक नव संtकरण िवदेहक २३३ सँ २५० धिरक अंकमे धारावािहक Eकाशन नीचsक िलंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018

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िवदेह ई -पिLकाक बीछल रचनाक संग - मैिथलीक सव>oेR रचनाक एकटा समानाbतर संकलन िवदेह :सदेह :२ (मैिथली Eबbध -िनबbध -समालोचना २००९ -१० ) िवदेह :सदेह :३ (मैिथली प_ २००९ -१० ) िवदेह :सदेह :४ (मैिथली कथा २००९ -१० ) िवदेह मैिथली िवहिन कथा [ िवदेह सदेह ५ ] िवदेह मैिथली लघुकथा [ िवदेह सदेह ६ ] िवदेह मैिथली प_ [ िवदेह सदेह ७ ] िवदेह मैिथली नाíय उgसव [ िवदेह सदेह ८ ] िवदेह मैिथली िशशु उgसव [ िवदेह सदेह ९ ]

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िवदेह मैिथली Eबbध -िनबbध -समालोचना [ िवदेह सदेह १० ] The readers of English translations of Maithili Nove l "sahasrabadhani " and verse collection "sahasrabdik chaupar par " has intimated that the English translation has not been able to grasp th e nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself . After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of original work .-Editor Maithili Bo oks can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha -pothi/ Maithili Books can be purchased from: http://www.amazon.in/ For the first time Maithili books can be read on kindle e -readers. Buy Maithili Books in Kindle format (courtesy Videha) from amazo n kindle stores, these e books are delivered worldwide wirelessly: - http://www.amazon.com/ िवदेह स‘मान : स‘मान-सूची

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िवदेह

मैिथली सािहgय आbदोलन (c)2004-18. सव„िधकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अिछ ततऽ संपादकाधीन। िवदेह- Eथममैिथली पािJक ई-पिLका ISSN 2229-547X VIDEH A स‘पादक: गजेbm ठाकुर। सह-स‘पादक: उमेश मंडल। सहायक स‘पादक: राम िव लास साहु, नbद िवलास राय, सbदीप कुमार साफी आ मु¹ाजी (मनोज कुमार कण>)। स‘पादक- नाटक-रंगमंच-चलिचL- बेचन ठाकुर। स‘पादक- सूचना-स‘पक>-समाद- पूनम मंडल। स‘पादक- अनुवाद िवभाग- िवनीत उgपल।

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रचनाकार अपन मौिलक आ अEकािशत रचना (जकर मौिलकताक संपूण> उŠरदाियgव लेखक गणक म¥य छिbह) editorial.staff.videha@gmail.com कT मेल अटैचमेiटक ªपमे .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉमµटमे पठा सकै छिथ। रचनाक संग रचनाकार अपन संिJdत पिरचयआ अपन tकैन कएल गेल फोटो पठेता, से आशा करै छी। रचनाक अंतमे टाइप रहए, जे ई रचना मौिलक अिछ, आ पिहल Eकाशनक हेतु िवदेह (पािJक) ई पिLकाकT देल जा रहलअिछ। एतऽ Eकािशत रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संŽहकŠ„ लोकिनक लगमे रहतिbह, माL एकर Eथम Eकाशनक/ िEंट-वेब आक„इवक/ आक„इवक अनुवादक आ आक„इवक ई-Eकाशन/ िEंट-Eकाशनक अिधकार ऐ ई-पिLकाकT छै, आ से हािन-लाभ रिहत आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयŒटीक/ पािरoिमकक Eावधान नै छै। तT रॉयŒटीक/ पािरoिमकक इ¿छुक िवदेहसँ नै जुड़िथ, से आŽह। ऐ ई पिLकाकT oीमित लºमीठाकुर ¸ारा मासक ०१ आ १५ ितिथकT ई Eकािशत कएल जाइत अिछ। (c) 2004-18 सव„िधकार सुरिJत। िवदेहमे Eकािशत सभटा रचना आ आक„इवक सव„िधकार रचनाकार आ संŽहकŠ„ लगमे छिbह। ५ जुलाई २००४ कThttp://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसिरक गाछ”- मैिथली जालवृŠसँ Eार‘भ इंटरनेटपर मैिथलीक Eथम उपिtथितक याLा “’िवदेह’- Eथम मैिथली पािJक ई पिLका” धिर पहुँचल अिछ,जे http://www.videha.co.in/ पर ई Eकािशत होइत अिछ। आब “भालसिरक गाछ”जालवृŠ 'िवदेह' ई-पिLकाक Eव°ताक संग मैिथली भाषाक जालवृŠक एŽीगेटरक ªपमे Eयु°त भऽ रहल अिछ। िवदेह ई-पिLका ISSN 2229-547X VIDEHA िसिÇरtतु