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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA 1
ISSN 2229-547X VIDEHA 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वष> ११ मास १२७ अंक २५४ )
िव दे ह िवदेह Videha িবেদহ http://www.videha.co.in िवदेह Eथम मैिथली पािJक ई पिLका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह Eथम मैिथली पािJक ई पिLका नव अंक देखबाक लेल पृR सभकT िरVेश कए देखू। ऐ अंकमे अिछ:- १. संपादकीय संदेश
२. ग_ २.१.१. िमिथलेश िस`हा "दाथवासी" (िमिसदा)- दू टा बीहिन कथा २. आशीष अनिच`हार- "इeक को िदल मg दे जगह अकबर" आ जगदीश चंh ठाकुर अिनल ३.कैलाश कुमार िमk- लघुकथा- बुिरराज २.१.१. नारायण यादव- गुnमैता-सpैता २. डॉ. बचेsर झाक दूटा आलेख- िव_ापितकालीन िमिथलाक कृिष आ िव_ापितक रचनामे िवरह वण>न◌ा २.३.१.रबी`h नारायण िमk- दूटा आलेख, दूटा लघुकथा आ उप`यास नमxतxयै (आगy) २. डॉ. योगे`h पाठक ’िवयोगी’- उप`यास- हमर गाम (पिहल खेप) २.४.जगदीश Eसाद म{डल- पंगु (उप`यास)- आगy आ दूटा लघुकथा
३. पद ◌्य ३.१. उमेश पासवान- किव ता ३.२.Eीतम कुमार िनषादक िकछु किवता ३.३.डॉ. िशवकुमार Eसाद- िकछु किवत◌ा ३.४.डॉ. िशवकुमार Eसादक िकछु अनुिदत का}य (रजनी छाबड़ाक मूल िह`दीसँ)
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२. ग_ २.१.१. िमिथलेश िस`हा "दाथवासी" (िमिसदा)- दू टा बीहिन कथा २. आशीष अनिच`हार- "इeक को िदल मg दे जगह अकबर" आ जगदीश चंh ठाकुर अिनल ३.कैलाश कुमार िमk- लघुकथा- बुिरराज २.१.१. नारायण यादव- गुnमैता-सpैता २. डॉ. बचेsर झाक दूटा आलेख- िव_ापितकालीन िमिथलाक कृिष आ िव_ापितक रचनामे िवरह वण>न◌ा २.३.१.रबी`h नारायण िमk- दूटा आलेख, दूटा लघुकथा आ उप`यास नमxतxयै (आगy) २. डॉ. योगे`h पाठक ’िवयोगी’- उप`यास- हमर गाम (पिहल खेप) २.४.जगदीश Eसाद म{डल- पंगु (उप`यास)- आगy आ दूटा लघुकथा १. िमिथलेश िस`हा "दाथवासी" ( िमिसदा)- दू टा बीहिन कथा २. आशीष अनिच`हार - "इeक को िदल मg दे जगह अकबर " आ जगदीश चंh ठाकुर अिनल ३.कैलाश कुमार िमk - लघुकथा- बुिरराज १ िमिथलेश िस`हा "दाथवासी" ( िमिसदा)
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दू टा बीहिन कथा (1) ज पलंग पर मृयु-सजया पर पड़ल बाबूजी'क गोरथािर मे हुनक पाएर रसे-रसे दािब रहल छलहुँ. बाबूजी, कसर सं पीिड़त छलाह. डागदर जवाब द' देलकै. इलाज मे कोनो कसिर निह छूटल. जतेक औकात छल, कएल. बाबूजी, आँिख मुिन दुगशतशती'क पाठ क' रहल छिथ आओर सभ'क आँिख सं नोर विह रहल छल. म त' जखन हम सभ बचे रही, xवग> िसधािर गेल छलिख`ह. िदमाग मे बाबूजी'क संग िबताओल सभटा पावैन चलिचL'क भित चिल रहल छल. होली हो वा जुड़शीतल, सरxवती पूजा हो वा दुग पूजा, िदवाली हो वा छिठ, सभटा पावैन-योहािर मे बाबूजी म'क रोल मे आिब, सप करैथ. आई, िदवाली आब' बाला छै.... बाबूजी,बीमार. राित भ' गेलैए. "बाबूजी, िकछु भोजन क' िलअ ने !" हम पाएर दबौबैत पुछिलयै`ह. ओ चुपचाप टुकुर-टुकुर हमरा सभ दीस नजिर घुमा क' देख' लगलाह. हमर त' करेज फाट' लागल,मुदा मोन थीर कएल. "िकछु खा िलअ बाबूजी." हम पुनः बजलॱह. "हौ, देखह बी पर फितंगा सभ कोना क' घुिम रहल छै ?" बाबूजी बजलाह. "की बी मुझा दॱ ?" "निह, निह... देखह ओ फितंगा सभ कg.... ओ सभ अपन पिरवार संगे कतेक खुश भ' नािच रहल छै !" बाबूजी बात कटैत बजलाह," फितंगा सभ'क पिरवार कg पता छै, जे काित>क मास'क आमावxया िदन तक ओकर सभ'क मृयु िनि¢त छै.... कोनो िवषाद निह, अपन मृयुक कतेक खुशी सं ज मना रहल छै.... आ तॲ सभ हमर मृयु लगीच देिख कािन रहल छह..... मृयु त' सय छै ओकर समान केनाइ हमर धम>....." बाबूजी संगिह हमहुं सभ फितंगा के बी पर नचैत देख' लगलहुँ.
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA 4
बाबूजी सेहो ठोर पर मुxकान पसौरने, ए¤े ट¤े फितंगा कg देखैत ओकर ज मे शािमल भ' गेलाह. (2) ¥ंद कािp सyझ मे अपन बेटा-बेटी संग छत पर बैसल छलहुं. बेटा, अ`तरxनातक क' Eितयोिगता आओर बेटी अं¦ेजी सं xनातकोर'क परीJा केर तैयारी क' रहल छिथ. चच'क दौरान, हम अपन िकछु िमL आओर संबंधी'क पिरवार'क चच क' कहिलयै`ह जे, "देखू, हुनकर बाल-बुची सभ घर-पिरवार'क नाम पुरे परोप§ा मे रोशन क' देलैथ.... हमहुं अपने सभ सं इएह आस लगौने छी....." लगले बेटा बाजल, "की हई छै, एतेक पढ़ला-िलखला सं....? एतेक पिढ़-िलिख, आईआईटी आओर अ`य कोनो पढ़ाई केलहुँ आ नोकरी भेटैछ बारह-तेरह हज़ार सं ...." "जे िदन-राित लगा, मेहनत करतै ओकरा सफलता अवxसे भgटतै. अह सभ कg पढबा मे मोने निह लगैए, तखन एहने बात फुरवे करत.... िदन-राित मोबाइल आओर फेसबुक....}हा«सएप केर िसवाय किहयो िकताबो केर दरस होइबो करैया....? खाली िदमाग शैतान केर.... " हम दमसाइत बजलहुँ. "पापा,अह बात बुझलहुँ ने, लागलहुँ डट', ओ की कह' चाहैए.... बुझु त' ?" बेटी बाजिलह. "की बाजत, ओ घम`डे फूलल अिह. परीJा मे एतेक नंबर मे पास ने कै गेल की बुझैए, की ओ राजे`hे Eसाद भे गेल...." हमर तामस बढ़' लागल. "पापा, अह सभ कg खाली पढ़ाई.... पढ़ाई.... पढ़ाई.... की एकरो अलावे आओर कोनो रxता निह अिह, जेकरा सं घर-पिरवार आओर समाज'क नाम बिढ़ सकै ?" बेटी बाजिलह. हम कनेक शत भ' ओकर बात सुन' लागलहुँ, "पापा, अह सब पुरना जमाना मे जीिव रहल छी आओर नवका सॲच पालने छी. हमर nिच डस मे छल.... अह बाज' लागलहुँ जे आई धिर हमर पिरवार मे ई निह भेलै,हम मोन मािर पढ़' लागलहुँ मुदा पढ़' मे ए¤ो री मोन निह लागल,फेल क' गेलहूं.... अह'क डरg, आई हम पीजी त' क' रहल छी, मुदा आगू की हेतै निह किह.....?" बजैत-बजैत ओ कान' लगलीह. "हमरा कोन आज़ादी भgटल.... ?
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मैि¬क धिर टीसन सं ओिह पार जेनाइ पर रोक.... बाजार जेनाइ पर रोक.... दोxत बनाव' सं रोक.... हमर मोन िकेट सं छल,खेल' सं रोक.... खाली,रोके-रोक.... अपन कोनो मज़® निह !" बेटा बाजल. "हम त' अहॴ सभ'क कैिरयरे वाxते ने केलहुँ. पिढ़-िलिख ऑिफसर बनब,त' अहॴ सभ'क EितRा ने बढ़त ?" "पापा,अह हमर निह, अपन EितRा देिख रहल छी. हमर कोनो इछा निह, अहॴ सभ'क थोपल इछा कg पूण> कर'क वाxते अपन इछा केर पूणहुित दैत आिव रहल छी.... ! अह सभ'क इछा पूण> अवxसे करब,मुदा आव' वाला भिव°य केर संग हम एना निह करब,ई हमर Eण अिह." बेटा बाजल आओर हुनक िवचार सं हमर बेटी सेहो सहमित छलीह. -िमिथलेश कुमार िस`हा अिधव±ता, मोह²ला/पोxट : ल³मीसागर, िजला : दिड़भंगा २ आशीष अनिच`हार "इeक को िदल मg दे जगह अकबर " आ जगदीश चंh ठाकुर अिनल
गजलमे बहर ओ }याकरण िवरोधी लोक सभ अिधकतर एिह शेरक बेसी उदाहरण दै छिथ (एिह शेरक बहुत पाठतर छै)
इeक को िदल मg दे जगह अकबर इ²म से शायरी नहॴ आती
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मने ओहन लोक सभकT कहनाम जे गजलमे खाली इ²म नै हेबाक चाही मुदा ई कतेक बड़का िवडंबना छै जे एहू शेरमे पूरा पूरी बहरक पालन भेल छै मने ईहो शेर इ²मक उपज अिछ। आब ई बात अलग जे िवरोधी सभकT बहर अिबते नै छिन तँ ओ एकरा गािन कोना सकताह। वाxतिवकता तँ ई छै जे हमर मैिथल "महान" गजलकार सभ अिभधामे बेसी बूझै छिथ आ तँइ एिह शेरक अथ>कT अिभधामे ल' लेने हेताह। जँ एिह शेरक तहमे जेबै तँ एकर अिभधा बला अथ>क अलावे अ`य अथ> सेहो छै जकरा एना }य±त कएल जा सकैए
इ²म को िदल मg दे जगह अकबर इeक से शायरी नहॴ आती
मने जँ खाली इ²मसँ शाइरी नै हेतै तँ खाली इeकोसँ शाइरी नै भ' सकैए। इएह एिह शेरक मूल बात छै। हरेक चीजमे संतुलन हेबाक चाही तखने ओ नीक का}य हएत। ई बात इ²म बला आ इeक बला दूनूकT नीक जकy बूझए पड़तिन अ`यथा दूनूक का}य बौके टा रहत। िनचा एिह शेरक बहर देखा रहल छी
इeक को 212 िदल मg दे 212 जगह अकबर 1222 इ²म से 212 शायरी 212 नहॴ आती 1222
आब एक बेर कने जगदीश चंh ठाकुरजीक एिह शेरकT देखू
बहरक ब`धन अिछ,हमरा आजाद क´ हम त गजल छी, हमरा नै बरबाद क´
एिह शेरकT पिढ़ते बहुतॲ बहर पीिड़त लोकक आह िनकिल गेल। मुदा ओिह पीिड़त लोक लग दृिµ छैने निह जे ओ देखता जे अिनल जीक एिह शेरमे सेहो बहर छै (22222222222)। गजलक सॱदय¶ इएह छै जे ओ अपन तवक िवरोध िनयमक भीतर करैत छै। से चाहे इ²मक Eसंग हो िक बहर बंधनक Eसंग। दूनू शेरक मंत}य इएह जे ने बेसी इ²मसँ शाइरी हएत आ ने बेसी इeकसँ। हमरा जतेक अनुभव अिछ तािह िहसाबसँ बेसी इ²म बला आ बेसी इeक बला लोक अनुपयोगी भ' जाइत छै। बेसी इ²म बलाकT पागल हेबाक खतरा बेसी रहैत छै तँ बेसी इeक बलाकT आवारा आ बदचलन होइत देरी नै लागै छै। आब अहy सभहँक अनुभव जे हो।
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३ कैलाश कुमार िमk लघुकथा बुिरराज राघब िवsिव_ालय केर छाLावासमे रहैत पीएचडी करैत छलाह।सँयोगसँ राघबक मिमयौत भाईक लड़का मुदा उमेरमे िमLवत सोहन राघब लग कॉिपिटिटव परीJा सबहक तैयारी लेल आयल छलिन। चािरएवष>क अंतर होबाक कारणे दूनूक बीच काका-भाितजक कम आ सँगतुिरया वतव अिधकछलिन। सोहन राघबक होxटलमे पाइल ऑन गेxटक ´पमे रहैतछलाह। सोहनयूिनविस>टीमे टुटपुंिजया नेता सब सँग घुमय लगलाह। राघबक भतीजा बुईझ लोककिन भाव ज´र दैत छलिन।
एकिदनसोहन स·ेिनभ>य राघब लग एलाह। िनभ>यिबहारककोनोयूिनविस>टीसँ इितहासमे बी ए केलाक बाद राघबक यूिनविस>टीमे Eाचीनइितहाससँ एम ए’मे नामकन लेने छलाह। िनभ>य राघब लग िवन¸तासँबैसलाह।
िनभ>य बीच-बीचमे राघब लग अबैत रहलिन। िनभ>य यूिनविस>टी केर एम ए Eीिवयस केर परीJामे बहुत खराप अंक अनलाह। िहनकमाता-िपता दूनू कोनो यूिनविस>टीमे Eोफेसर छलिथन। तकर फायदा उठबैतिनभ>य ओिह यूिनविस>टीसँ Eाचीन इितहाससँ एम ए कऽ लेलाह।मुबईमे कोना ने कोना िनभ>य एक सँxथानमेकला इितहास सँ एम ए’मे नामकन लऽ लेलाह। दू वष>क कोस> िनभ>यपyच वष>मे पूरा कएलाह।
िनभ>य छलाह भाºयक सढ़।माता िपताक असगnआ बेटा। दू बिहन पर एक भाई। जखन िहनक एम ए केर िरज²ट िनकलएबला छलिन तािह समय एक कला संxथानमे एक लाला जी लोचन लाल दासकT पकड़लाह। दासजी िहनके शहरकछलिथन िजनका िनभ>यक माय राखी बनहैत छलिथन। िनभ>य दास जीकT मामा कहैत हुनकर शरणमे नतमxतक छलाह। दास जी धुरफ`दी लगािनभ>य कT कला संxथानकक अिभलेखागारमे नौकरी लगा देलिथन।
एक वष>मे राघब सेहो कला संसथानमे आिब गेलाह। सँयोग एहेन जेिनभ>य आ राघबक िववाह एकै साल, एकै मास आ एकै िदन भेलिन। अंतर अतबे जे राघबकिववाह माता-िपता ¥ारे िनधिरत आ िनभ>यक िववाह Eेम नामक रोगक अंितमपिरणाम जािहमे अनेक भाभट, नाटक आिदक भूिमका Eबल।
िनभ>य केर जेठ बिहनक ननिद हेमा िनभ>यसँ नौ वरखक छोट मुदा पोखगर छलीह। हेमादूिधया गोड़ाईसँ गजब सुिर लगैत छलीह। दुबर पातर चमकैत चेहरा छलिन हेमाक। बड़की-बड़की आँिख, तेहने सु`दर ठोड़, घुरमल-घुरमल केश, छोट मुदा गxसल-गxसलिवकिसत आ Exफुिटत होइत वJ। िनतब य_िप ओतेक
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िवकिसत निह छलिन। िनतबक िवकिसत निह भेनाईक अथ> ई निहं जे हेमा आकष>ण, सौ`दय>मे कोनो तरहT कम छलीह।
हेमा सत पूछी तऽिनभ>य लग िखचा छलीह। तािहसँ की, सँबंधमे हेमा िनभ>यकT बिहनकननिद छलीह से िनभ>यकT पिरहासक अवसर दैत छलिन। एकबेर हेमा इंटरमीिडएट केरपरीJा देमय िनभ>य ओतय एलीह।िनभ>य हेमाक समीप आबय लगलाह।सामा`य हास-पिरहास नहुँ-नहुँ Eेममे पिरवित>त होमय लगलिन। बातक Eेमआब आँिख, भंिगमा आ मुhासँ होमय लगलिन। शु´मेहेमा ओतेक गभीर निहंछलीह लेिकन िनभ>य हुनको गभीर बना देलिथन। Eेम श»दक बाटसँ देहक सीमापर आिब गेल छल। दूनूकT बयसक अंतर समात भऽ गेलिन। जाड़क मासमे अपन सीरकमे घुसल हेमा पोथीक सामीय कम आ िनभ>यक हाथ, मुँह आ ने जािन कोन-कोन अंगकसामीय अिधक करय लगलीह। दूनूक जीवनमे एक अपूव> रस भेटनाई शु´ भेलिन।िकताबक पथ हेमाक सँग छोिड़ देलक आ आब Eेमक बाट िहनका दूनूकT अपना लगबजा लेने ¼ल।
एक िदनजखन हेमा अपन सीरकमे घुसल छलीह आ िनभ>यक हाथ हुनक अंगक िवशेष भाग िदस हलचलकऽ रहल छल तखन हेमा Eेमक रसमे डुबकी लगबैत किन अपन Eेमक EितसाकJ होइत बजलीह: "यौ िनभ>य ! अहy जे अतेक आगा बढ़ल जा रहल छी हमरा स·ेसे एक बात बुझल अिछ?" िनभ>यक हाथ एकाएक चहलकदमी छोिड़ देलक। किन िचि`तत होइत बजलाह:"से की?" हेमा: "यएह जे अहy अतेक आगा बढ़ल जा रहल छी। अहyक माता-िपता आ ओहूसँ आगा हमर भैया-भौजी अहy आ हमर िववाह लेल तैयार हेताह?" िनभ>य : "एक बात कहु।" हेमा: "पुछू"। िनभ>य : "देखु हेमा, अगर अहy तैयार छी तऽ बyकी काज हमरा पर छोिड़ िदय। हम सबकTसहािर लेब। हमरा बुझल अिछ जे एकर सबसँ पैघ िवरोध हमर बिहन आथ>त अहyकबड़की भौजी करतीह। लेिकन देखल जएतैक। हम अपन छोटकी बिहन आरती एवम बिहनोईकTमना लेब अपना िदस। ओकरे सबहक सहयोगसँ माय सेहो मािन जेतीह। एक बेर मायकहृदय पिसज गेलिन तऽ ओ हमर िपताकT सेहो तैयार कऽ लेतीह। हम अहyकTकोनो अवxथा मे असगर निह छोिड़ सकैत छी।" िनभ>यक हाथ बात करैत-करैत फेरोहेमाक सीरक िदस घुइस गेलिन आ अपन काज शु´ कऽ देलक। हेमाक शरीर आनंदक xपश>सँिसहरय लगलिन। Eेमक ताप केहेन होइत छैक तकर अनुभव हेमा आ िनभ>यसँ बिढयyके बुईझ सकैत छल? िनभ>यक हाथ चलैत रहल। कखनो जोर तऽ कखनो किन ह²लुक मुदाअनवरत। हेमाक पोर-पोर Eफ़ुि²लत। िबना कोनो }यवधान केने हेमा बािज उठलीह: "जनैत छी, हमर भैया चूंिक हमर बेमातर भाय छिथ, तिह कारणे सेहो ओ आ हमरभौजी हमर अहyक िववाह लेल तैयार निहं हेतिन। ओना हम अपन मायकT मना सकैतछी।" िनभ>य अपन हाथकT गितमान रखैत बजलाह: "देखूहेमा! अहyक भैया अहyक ने बेमातर छिथ, हमर तऽ अपन बिहनक पित छिथ। हम जनैतछी कोना हुनका सबकT मनाबी। अहy िचंता निहं कn।"
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आबिनभ>य हेमाक सीरकमे पूरा घुइस गेलाह। दूनू ओिह याLामे त²लीन भऽ गेलिन जािहमे पित-प¾ी भऽ जाइत अिछ।
एिह तरहे एिह तइसिदनक Eवासक अविधमेहेमा आिनभ>य एक दोसरक देहक आ मोनक Eीत आ Eेमक धारमे कतेक बेर डुबकी लगेलिनतकर कोनो िहसाबे निहं। उिचतो यएह। Eेमक कही माLा, सँ¿या अथवा घनवदेखल गेल अिछ?
जखनहेमा िनभ>यक शहरसँ वापस अपन गाम चिल गेलीह तऽिनभ>यकT राित काटब मुिeकल। हेमाकT सेहो िनभ>य िबना अपन जीवन पहाड़ बुझना जाइन।
अ`ततःिनभ>य िहमत करैत अपन छोट बिहन आ बिहनोईसँ बात कएलाह। हुनकर छोटकी बिहनतैयार भेलीह। मायकT बहुत Eेमसँ बतेलिन। माय मना कऽ देलिथन तऽ आरतीबजलीह:"अहy निह तैयार हएब तऽ भाईजी िकछु कऽ सकैत छिथ। घर यािग सकैत छिथ।"
िनभ>यकT माय आब तैयार भऽ गेलीह। अतबे निह ओ अपन पितकT सेहो मना लेलिन। िनभ>यकिपता एिह लेल मािन गेलाह जे िनभ>यसँ एक पैघ भाय सतरह बरखक भेलाक बाद मिरगेल छलिथन। कोनो माता िपताक लेल अिहसँ पैघ दुभºय की भऽ सकैत छलिन?
िनभ>यकT माता-िपता जखनअपन बेटी जमायसँ एिह बारे मे गप कएलाह तऽ ओदूनू अिºन¢ वायु¢। कतबो माय, छोटकी बिहन बिहनोई आ िपतामनेलिथन, ओ दूनू निहए तैयार भेलाह। आब की हो? कोना कऽ िमलन िवधना दूनूक़करतै रे की?
िनभ>यकT जखन कोनो उपाय निहं भेटलिन तऽ झटदिन मूसक दबाई आिन लेलाह। ओकरा घोिर पी गेलाह। सौभाºयसँ छोट बिहनोई देखलेलिथन। घरमे कोहराम मिच गेलिन। तुरत डॉ±टर लग लऽ गेलिन। बहुत उपायसँिनभ>यक Eाण बचाओल गेल। जखन िनभ>य ठीक भऽ गेलाह तऽ जेठ बिहन आ बिहनोई हुनकालग अबैत नोरायल मुँहै किह देलिथन: "अहyक Eेम जीतल। हमर िजद हािर गेल।" हेमाकT सेहो िनभ>यकT देखबा लेल गामसँ शहर बजाएल गेल छल। हेमाक आँिखकनैत-कनैत लाल भऽ गेल रहिन। िनभ>य केर माता िपताक चच> निह हो तऽ नीक। मुदाआब सब क²याणक पथ पर आिब गेल छलाह। अिह तरहT िनभ>य आ हेमाक िववाह सामा`य तरहT िबना कोनो दहेजक भेलिन। दूनू एक सँग जीवन जीबाक हेतु तैयार भेलाह। िववाहक िकछुए िदनक बाद िनभ>यकT नौकरी लािग गेलिन। घर पर कोनो कमी छलिन निह – माता-िपता दूनू Eोफेसर। िनभ>य अपन जीवन िजब रहल छलाह। सब तरहg सप।िनभ>य केर एक कमी छलिन। िहनक अं¦ेजी बहुत अधलाह। िहंदी य_िप बहुत नीक बजैत छलाह। िलिखयो नीक लैत छलाह। मुदा एक कुंठा पोिस लेने छलाह। कुंठा इ जे जँ िहंदीमे िलखता तऽ लोक इलीट, Âानी, मॉडन> निह बुझितन। एिह कुंठाक कोन
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उर? एक बात आरो, िनभ>य अं¦ेजी िसखबाक य¾ किहयो निह केलिन। ओना िव¥ान लोक बुझय तािह लेल बहुत साकJ रहैत छलाह।नाना तरहक xवग रचैत रहैत छलाह। बहुत तरहक पोथी जे कला, इितहास, हेिरटेज, सािहय, पुरातव, मीमशा, नाटक, आिद पर होइत छलैक तकरजोगार करैत छलाह आ अपन घर आ ऑिफसक रैकमे सजेने रहैत छलाह। लोक बुझ जे िनभ>य िव¥ान छिथ। ओिहमेसँ अिधकश पोथीक पyचो पा ओ किहयो निह पढलाह। पोथीक जोगार िनभ>य तीन तरहg करैत छलाह; पिहल, िकताबक दोकान अथवा पुxतक मेलासँ कीनकऽ, दोसर, िमL अथवा ककरो लग गेलाह तऽ पढबाक लाथे मिग कऽ, जे किहयो वापस निह करैत छलाह, आ तेसर, चोराकऽ।िनभ>य पोथी चोरीकT कोनो पाप अथवा दु°कम> निह बुझैत छलाह। हुनका िकयोक किह देने छलिन जे िद²ली यूिनविस>टी, पटना यूिनविस>टी आ कोलकाता यूिनविस>टी केरEोफेसर सब सेहो पोथी कखनो झोरामे, कखनो छामे तऽ कखनो कोनो आन चीज़मे चुपे चाप रािख पुxतकालय अथवा साव>जािनक xथानसँ लऽ जाइत छलाह। फेर की िनभ>य एकरा अपन मौिलक अिधकार मािन लेलिन। पोथी चोरी कतौ चोरी भेलैक अिछ! िक``हुँ निह।िनभ>य अिह तीन युि±तसँ िबपुल पोथीक xवामी भेल जा रहल छलाह।िनभ>य लग िकयोक पिहल बेर अबैत छल तऽ ओकरा लगैत छलैक जे कतेक महान पढ़ाकू आ िव¥ान लग आिब गेल अिछ!
िनभ>यकT कपड़ा पिहरक कोनो Âान निह छलिन। छलाह लेिकन कला संxथानमे ताई रंग-िवरंगक िविचL पिरधान पिहरैत रहैत छलाह। किहयो हदसँ अिधक पैघ कुरता आ पायजामा, तऽ कखनो िकछु।
आर जे हो लंगोटक बड़ जोरगर छलाह िनभ>य। जखन कला इितहाससँ एम ए करैत छलाह तऽ एक बेर गोवा, मुंबई, एलोरा, एलीफटा आिद xथान पर समxत िव_ािथ>क टोली सँग गेल छलाह। िहनक िवषय एहेन छल जािहमे तथाकिथत मॉडन>, इलीट आ नव धनाÄयक बेटी, प¾ी आिद समय िजयान करबा लेल नामाकन लऽ लैत छलीह। हुनका सबलेल शारीिरक अथवा यौन सुख बस ओिहना समय काटक एक युि±त माL छलिन। अगर िववाहसँ पूव> कोनो लड़की अथवा िववािहत नाियका कोनो पर पुnख सँग यौन सुखक Eाित कऽ लेलक तऽ एिहकT पाप पु`यसँ जोिरक देखब िहनका सबलेल पाप छलिन। इ Jिणक सुख छैक। भेल, Jिणक सुखक आनंद भेटल। दूनू Eेमक रससँ रसलािवत भेलिन। बात खम। एकरा िखचनाई अथवा एकर इितहासमे घुसनाई }यथ>। एहेन धुरंधर िवचारक मिहला आ नाियकािनभ>य सँग एम ए िशJा लैत छलीह।
ओिह मिहला म{डलमेसँ एक मिहला सौया जे सविर, सुंदिर छलीह। अित मॉडन> छलीह। िचिकसक माता- िपताक बेटी छलीह। कोनो तरहक Vेम अथवा व`धनसँ मु±त छलीह।सौयाक उरोज भरल सुराहीसँ एकौ री कम निह छलिन। गाल भरल-भरल, केश ओतेक पैघ निह िक`तु झमटगर, खूब कारी, कमर बहुत पातर, िनतब सुडौल, अतेक कलामक जे बुढो Eोफेसर सब एक बेर ओिह पर आँिख अवeय गड़ा दैत छलिन।लोक सौयाकT देिखते सपनाक अलौिकक सँसारमे भेर भऽ जाइत छल। नाना तरहक सोच उफान मारए लगैत छलैक। मुदा तुरते अपन अवxथा, पद, EितRाक भान होइते ओ वापस अपन िवÂक सँसारमे आिब जाइत छलाह।सौयाक सबसँ पैघ बात हुनकर सविर रंग आ वxLसँ अपना आपकT सजेबाक कला छल।सौयाकT देखलासँसविर नारी कतेक सु`दिर, कामुक, उेजक भऽ सकैत अिछ; कोना दुºधधवल
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नाियकाकT अपन सौ`दय>, वxL िव`यास, कनखी-मटकी, आ चामक पािन सँ पछािर सकैत अिछ, तकर िजवंत Eमाण भेटैत छल।
खैर िनभ>य अपन ¦ुपक लोक सबहक खूब Åयान रखैत छलाह।हुनकर एिह गुणक ¦ाहक सब छल। एक राित लड़का-लड़की सब बोन फायर केलक। सालक अंितम िदन आ नव वष>क Eथम िदन सबकT एक संग मनेबाक अवसर भेटलैक। की सब निह एलैक। मस-मिदरा-नृय-गीत-मxती-भयमु±त वातावरण। ने घरक लोकक धाख ने यूिनविस>टी केर Eोफेसरक िचंता – सव>त`L xवत`L। एक मािलनी माL जे ओना तऽ बहुत सु`दर छलीह मुदा बहुत सौय आ शालीन बनबाक अिभनय करैत छलीह। Eेमक बात तऽ सुनैत छलीह मुदा लजा भावक अिभनयमे िहनक उर निह। एकबेर भरत मोगा नामक xमाट>, सुंदर आ वैभवशाली युवक िहनक सौ`दय>सँ आकिष>त भेल िहनका िदस िमLताक हाथ बढ़बैत किह देलिथन: “हेलो! यू आर सो एंटरि±टव एंड »यूटीफुल गल>!”
मािलनी मोने-मोने Eस भेलीह मुदा भेलिन एकाएक कोना हy किह देिथन।झटदिन उर देलिथन: “हमरा एिह तरहक मजाक निह पिसन अिछ। हम किन दोसरे तरहक लोक छी।”
तावेत धिर भरत एक पेग ढािर नेने छलाह। केजुअल भेल बजलाह: “कम ऑन मािलनी! ज़माना कतऽसँ कतऽ चिल गेल आ अहy एखनो पंhहवॴ शदीक भारतक मानिशकतामे जीब रहिल छी।हमरालोकिन कला जगत केर लोक छी। अतए उ`मु±तता छैक। लोकक िवचार आ }यवहार ºलोबल छैक। िलवइन िरलेशनिशप आम बात छैक। आ अहy एहेन बात कहैत छी!” इ कहैत भरत बहुत Eेमसँ अपन हाथ मािलनीक का`ह पर रािख देलाह। मािलनी झटदिन हुनक हाथ हटबैत बजलीह: “माइंड योर िबज़नस भरत! हम सड़कछाप लड़की निह छी। जे केलहुँ से केलहुँ। भिव°यमे एिह घटनाक पुनरावृि निह हो से Åयान राखब।”
भरत बुइझ गेलाह जे मािलनी दोसरे होपलेस xटफ छिथ। इ िमÈयाक अहंकारमे जीबी रहिल छिथ।मोगा कोनो दोसर लड़की जे मxत भेल नृय करैत छलीह लग चल गेलाह। सौया टाइट जी`स आ शट> पिहरने छलीह। उेजक-आकष>क-मादक! ओिहराित िनभ>य बहुत उसािहत छलाह। मुदा ओिह ¦ुपमे दू मनुखझर छल: xLीगनमे मािलनी आ पुnखमे िनभ>य।िनभ>य आ मािलनी दूनूमे िकयोक मिदरापान निह करैत छलिन।मािलनी चािर डेग आगा छलीह – मस भJण सेहो निह करैत छलीह। वेचारा िनभ>य शीतल पेय केर दस बोतलक जोगार केने छलाह। जखन लोक हाथमे मिदराक िगलास लेने जाम हेरा रहल छल, िनभ>य ओकरे सबहक तालमे ताल शीतल पेय केर िगलाससँ कऽ रहल छलाह। हुनकोसँ अलग िसंगल पीस बनिल मािलनी एक कोनमे दोसरे दुिनयyमे िवचरण करैत शीतल पेयक चुसकी आधे मोने लऽ रहिल छलीह। काय>म चलैत रहलैक। िबना पीने लोक सबकT िपबैत आ झुमैत-गबैत देख िनभ>यकT शीतल पेयसँ रमक नशा आबए लािग गेलिन।िनभ>य मxत भेल गेलाह। जेना-जेना राित भेल जाइक तेना-तेना लोक xवतंL-उचkृंखल भेल गेल। xLी-पुnख, छोट-पैघक, xथानीयता आिदक दूरी खम भेल गेलैक।
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सौया बहुत कम चीज़क उपयोग अपन मूँह कानकT सु`दर बनेबाकलेल करैत छलीह। लेिकन काजर, मxकरा, िबंदी, साड़ी, सूट, शट> आिदक रँगकअनुकूल अथवा कं¬ाxटक झुमका अवeय धारण करैत छलीह जे हुनका िवशेष से±सी आआकष>क बनबैत छलिन। िहनक देखब आ ककरो िनहाराब बहुत माnक छल। ऊपरसँमु±तगी आ मxत छलीह सौया ।
सौयाकT देख िनभ>य सेहो मादक आ उेिजत भऽ गेलाह।सौया किन बेसी मूडमे छलीह। दोसर पैगकT बाद सौया जेना संतुलन समात करए लगलीह। देहकyपय लगलिन। ठोड़ लड़खड़ा गेलिन। माथ भारी भऽ गेलिन। कखनो की बाजिथ तऽ कखनोिकछु आरो। उ`मु±तता सेहो अपन रँग देखाबय लागल। सौयाक मxती बढ़लगेलिन। भाषाक }यथ> अनुशासनसँ ऊपर उठए लगलीह। बहुत बात सब जे नारीहोबाक कारण आ सामािजक मयदाकT कारण अपना पेटमे, आंतमे, माथमे,करेजमे दबेने रहैत छलीह से जोर-जोरसँ भयमु±त वातावरणमे बाजय लगलीह। सब यएहसोचैत रहल जे सौया अपन सहारमे निह छिथ, नशामे भेर छिथ तिह जे मोनमेअबैत छिथ से सब बजने जा रहिल छिथ। तािह राित सौया कT सात खून माफ़ छलिन।
बीच-बीचमे सौया साकJ भऽ जािथ। होिन, ई की कऽ रहिल छिथ! किनकबेकालमे फेरोम। पेग लेिकन निह थमलिन। जखन पच भऽ गेलिन तऽ रंग िवरंगक िवभस गािरबजनाई शु´ केलीह। आब हुनका लोक किह देकलि`ह जे बोतल खाली भऽ गेल छैक। राितबहुत भऽ गेल छैक। आब मिदराक सब दोकान ब`द भऽ गेल छैक। ई बात सुिन तामसे भेरभेिल सौया आयोजककT माए-बिहन लगा गािर पढ़ैत रहली। लोक सब मनिह मोन हँसैतरहल।
एिह बातसँ एक बात xपµ होइत अिछ जे हम सबसमाजक ठेकेदार बिन रहल छी। नारी xवतंLता एखनो दूरसँ भले जेलगैत हो, यथाथ>मे अºगब सपना जकy अिछ।
सौया सन नारी जखन उ`मु±त निह तऽ ककरा किह xवतंLताक अिधकारी। नारी मोनिशJा सँग अिधकार मनैत अिछ, xथान म·ैत अिछ, ओकरो बात पर लोक अमल करैकसे }यवxथा म·ैत अिछ, पुnखक सँग आ समकJ चलए चाहैत अिछ। सब तरहTxवछ`द रहए चाहैत अिछ। जिहना पुnख कतऽ जा रहल अिछ, की कऽ रहल अिछ, कखन खाइत अिछ, कतए आ कखन सुतैत अिछ से िकयोक पुछनाहर निह, तिहना तऽ xLीकT सेहो अपन जीवनक संचािलत करबाक सुिवधा, xवत`Lता भेटकचाही ने! से निह भेटलैक तऽ केहेन xवतंLता? तिहतऽ मिदराक नशासँ मातिलसौया िचिचया कऽ कहैत छिथ, "फक यू मेन! यूआर बुलिशट! डॲट चीटमी। केवल पाई देनाइ, नीक xकूलक िशJा, सुिवधासँ xवतंLता निह भेटैत छैक। असली xवतंLता अहyक िदमागमे नुकाएल रहैत अिछ। अहy कायर छी। घिटया छी।अहy डरपोक छी।अगर एक पुnख कोनो xLी संग देह बिट सकैत अिछ तऽ फेर xLी िकयैक निह? इ पाप पु{य सब पुnखक ढ़कोसला अिछ। कोनो मिहला िकयैक निह अपन मोनक आनंद अपन मोनक पुnखक संग उठा सकैत अिछ? चुितया...” सौया अतिहं निह थमहली। बहुत बात बजैत रहलिन। बहुत बात िलखब तऽ मयदा चकनाचूर भऽ जाएत।
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सौया भोजन मोनसँ निहं केलीह। थोड़ेक कालमे िनभ>य सौया केर हाथ पकिड़ हुनक घर िदस लऽगेलाह। सौया घर पहुंच गेलीह। िनभ>य सौयाकT हाथसँ पकिड़ हुनक बेड पर सुतेबाकEय¾ करए लगलाह। एिह Eियामे कतेक बेर िनभ>यक हाथ सौयाक उंतभरल पयोधिरसँ टकराएल। जतेक बेर xपश> होइक़ ततेक नीक लगैक। िनभ>यकT आबसेहो नशा लािग गेल छलैक। ई नशा मिदराक नशा निह, सौयाक सौ`दय>क नशा, सौयाकसे±सी शरीरक xपश>क नशा छलिन। पुnखक मोन,िनभ>य एक आध बेर नशामे धुत भेलसौयाकT सहारबाक बहाने जकिड़ कऽ धेलाह। लेिकन अपन नीक लोकक छिवक रJा करकजोगारमे िनभ>य िकछु निह कऽ पेलाह। आब किन सौया साकJ भेलीह। िनभ>य केरशरीरक ठोस बनावट हुनका नीक लगलिन। एक Jण लेल भेलिन, अगर अिह पुnखक सँगएखन अिभसार होइत अिछ तऽ मोन आ तन, आमा आ देह दूनू ितरिपत-ितरिपत भऽ सकैतअिछ। एकर बyिहक जकड़न हमरा बैकु{ठक आनंद दऽ सकैत अिछ! यैह सोचैत तुरत ए±टकेर मूडमे आिब गेलीह सौया । सौया िनभ>य केर झमटगर केश हाथमे बकुटैत बजली: "िनभ>य! साले एक बात बताओ?" िनभ>य: "की?" सौया : "अहy हमरा तािड़ रहल रही ने? जािन बुईझ कऽ अपन हाथ हमर Êा लग अनैत रही ने?" िनभ>य: "बकबास"। सौया : "सार तोरा हम देह तोिड़ देब। सबहक समJ चुमा लऽ लेब। चुपचाप सय xवीकार कn।" सौया बजैत रहली। िनभ>य चुपचाप सुनैत रहला।
सौया : "कम ऑन िनभ>य! अहy जुआन छी। हम जुआन छी। अगर अहyक मोन हमरा पर आिब गेल तऽ अिहमे की खरापी?" िनभ>य: "सौया माइंड योर लºवेज! की अँट शंट बजेने जा रहिल छी अहy? ई सब बात छोड़ू आ चुपचाप आब आँिख मुईन सुइत रहू।" सौया : "एकर मतलब की भेल? अगर हमर अधखुला वJ देिख अहyक मोन निहं केलक एकर अथ> ई भेल जे अहy नामद> छी!" "xटॉपिदस नॉनसgस!", िनभ>य िचिचया उठलाह। मुदा सौया लेल धन सन। सौया िनभ>यकTअंगाककॉलर पकिड़ अपना िदस िघचलिन। आब िनभ>य मूडमे आिब गेल छलाह। ताबर तोर चुमाकEहार करए लगलाह। कखनो अपना िदस िखंच लेिथ तऽ कखनो सौयाक गद>िन पकिड़ सौयाकदूनू ठोरक मÅय अपन जीभ डािल सौयाक जीभक मधु xपश> आ xवादसँ आनंिदत होइतरहलिन। सौया सेहो िवरोधक बदले और सहयोगे करैत गेलिथन। सौयाक दैहसँ मिदरा, सgट, आ Eकृितक िxLज`य सुग`ध आिब रहल छलिन। ओिह सुगंधक सब कतरा िनभ>यकT मादक बनेने जा रहल छलिन।
िनभ>य आवेगक अितरेकमे सौयाक सब वxL हटा देलिथन। सौया किन संकोच तऽ केलिन कारणसंकोच आ नारी एक दोसरक पूरक होइत अिछ। मुदा सौयाक मोनमे िनभ>य सँग देह बाटकततेक उ¦ वाला धधिक रहल छलिन जे किनकबे कालमे अपना आपकT िनभ>य लगसमिप>त कऽ देलीह। जखन सौया िनव>xL भऽ
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गेलीह तऽिनभ>य केर वxL अपने हाथेखोलय लगलीह। िनभ>य केर उेजना आ सौयाक सँग देह बyटब केर अिभलाषा सेहो उ¦भेल गेलिन।
सौया िनभ>यकअंितम वxL हटा रहल छलीह तऽ एकाएक िनभ>य केर जgटलमैन बला चिरL जािगउठलिन। िनभ>य सौयाकT झकझोिड़ देलाह। सौयाकT पते निह चिल पेलिन िक िनभ>य अचानकएहेन बेवहार किथलेल केलिन। कामक वरसँ धू-धू जिड़ रहिल छलीह सौया । तामस तऽअतेक भेलिन जे िनभ>य केर खून कऽ देतीह। इमहर िनभ>य िबना िकछु कहने सौयाक शरीर पर वxL रािख देलिथन। िनभ>यकमयदा, लजाभाव एकाएक जा¦त भऽ गेलिन। किह देलिथन: "निह सौया, हमरासँ ईसंभव निह अिछ। ई चिरL लंघन हम निह कऽ सकब। xटॉप इट। आई एम सॉरी। हम अपनमयदा िबसिर गेल रही।" कामक अिºनसँ जड़ैत सौया एकबेर शेरनी जकy िनभ>य पर गरजैत बजली: "तखन किथलेल अतेक आगा बढ़लहुँ? अहy मद> निहं छ¤ा छी। बहy...द एिहसँ पिहने जे हम तोरा ग----- पर लात मािर भगा दी तॲ अपने तुरत हमर घरसँ भाग ।" िनभ>य देह झारैत भािग गेलाह। राित भिर कोना समय सौया }यतीत केलिन से वैह बुईझ सकैत छलीह। वैह िनभ>य अपन प¾ी हेमा सँग बहुत रोमिटक छलाह। कामकलाक अनेक आसनकEयोग करैत छलाह। कखनो Eयोगक नाम पर xथािपत सीमाक अितमण सेहो करैतछलाह।िनभ>यकT दू बेटा भेलिन। दुनुक मÅय अंतर माL सवा बरखक। एक बेरराघबकT पता लगलिन जे िनभ>य केर किनया हेमा िवमार चिल रहल छिथन। हुनकर डyरमे दद> छिन। गभीर इलाज चिल रहल छिन। बादमे िनभ>य केर दोसर िमL जेराघबक िमL सेहो छलिथन आ िनभ>य सँग हुनकT सोसाइटीमे रहैत छलाह,राघबकTबतेलिखन जे िनभ>य केर प¾ी हेमा हुनकर प¾ीसँ कहलिथन जे िनभ>य पृRभागसँसंभोग करबाक िजद ठािन देलिथन। ओिहक ममे नश चिढ़ गेलिन। खैर! ई िनभ>य केरिनजी मामला छलिन। िनभ>य हमेशा कोनो नीक पढ़य बला केरसंगितमे रहबाक य¾ करैत छलाह। हुनकर एक िमL कोनो जोशी नामक छलिथन ।बहुत तेज, सु`दर। मुदा सबकम® आ एक नंबर केर Vॉड। चोरीक कलामे Eवीण।एकबेर जोशी महोदयकT लकऽिनभ>य राघब केर होxटलमे आिब गेल छलाह। राघबकT कतौ जेबाक रहिन। िनभ>यकT अपन घरक चाभी राघब दऽ देलिथन। बादमे जखन राघबअएलाह तऽ पता चललिन जे जोशी जी राघबक अनेक वxL, पोथी आिद चोराकऽ चिलगेल छलाह। हेमा, अथत िनभ>य केर प¾ी बहुतसxकृितक आ kृंगािरक xवभावक छलीह। अिधक काल नुआ »लाऊज पिहरैत छलीह।दूिधया गोड़ाई। एक तऽिनभ>यसँ नौ वरखक छोट ऊपरसँ बहुत छरहिर, दूभर पातर। कतेकसमय तऽिनभ>य आ हेमाक जोड़ी िवपरीत अथत िपता पुLी सँग लगैत छल। हेमा भोजन, संगीत, िमिथला िचLकला, योग, नृय सबमे Eयोग करए चाहैत छलीह। ओजीवनक संगीत देखय चाहैत छलीह। वxLकला केर नीक Âान छलिन िहनका। »यूटीपाल>र केर Âानमे पारंगत छलीह हेमा। एक आध बेर हेमा नौकरी करबाक य¾ केलीह मुदा िनभ>य तकर अनुमित निह देलिथन। हेमा ओना ई मनैत छलीह जे िनभ>य बहुत EवुË लोक छिथ।
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जािहयासँ राघब कला कला संसथान जॉइन कएलाह िनभ>य लेल वरदान भऽ गेलिन। अपन स·ी सबकTपीएचडी उपािधसँ िनभ>य बहुत उEेिरत भेलाह आ पीएचडी लेल कोनो यूिनविस>टीसँ पंजीयन लऽ लेलाह। समxया ई छलिन जे कोना िलखताह? अपने कोनो िxथितमेनिह िलखताह से बुझल छलिन। कतेक बेर राघबसँ EयJ आ परोJ ´पमे किहदेलिथन मुदा राघब टालैत रहलिथन। संयोगसँ िनभ>यकTमाता िपता राघबसँ पिरिचत छलिथन। एकबेर कोनो Eयोजनसँ राघब हुनका लगगेलाह। राितमे ओतए nकलाह। राितमे भोजनक बाद िनभ>यक िपता राघब लग दूनू हाथजोिड़ ठाढ़ भऽ गेलिथ`ह। राघब घोर आ¢य>मे पिर गेलाह। तखन िनभ>यकT िपताकहलिथन: "राघब, अहy हमर पुLतु²य छी। हम आ िनभ>यक माए अहyमे अपन पुLदेखैत छी। हम नौकरीसँ सेवािनवृत भऽ चुकल छी। हृदय रोगक रोगी छी। जीवनक कीभरोसा? ई िनभ>य नालायक अिछ। एकरा बूते पीएचडी एिह ज`म के कहैत अिछ, सातज`ममे निह हेतैक। अहy हमरा सबपर एक उपकार कn आ एकर पीएचडी िलख िदयौक।अहyक अिह योगदानकT हम जीवन पय>ंत निह िबसरब। " िनभ>यकमाय सेहो मौन भेल अपन आँिखसँ बहुत िकछु किह देने छलिथन। राघब उिठ गेलाह।िनभ>यक िपताक हाथ अपना हाथमे लैत बजलाह: "हमहुँ अहy सबमे अपन माता-िपताकछिव देखैत छी। ओना ई बहुत दु°कर काय> अिछ। िनभ>य िकछु तऽ करत निह, सब काजहमरे करय पड़त। लेिकन हम तीन मासमे पीएचडी थीिसस िलख दैत छी।" ई बात सुिन िनभ>यक माता-िपताक नेL एक दोसरे आभासँ चमिक उठलिन। राघब एक भारसँ दिब गेल छलाह। राघब कलाके`h आिब गेलाह। िनभ>यकT बजा सब साम¦ी अपना लग मंगा लेलाह।पीएचडी थीिसस िलखनाई राित-िदन शु´ केलिन।
अिह तरहT राघब तीन मासमे िनभ>य लेल पीएचडी िलख िनभ>य केर माता-िपताक भावनामक ऋणसँ उऋण भेलाह। िनभ>य पुरा थीिससमे पूण> िवराम के कहैत अिछ अध> िवराम तक निहं िलखलिन। ऊपरसँिनभ>यकT राघब कहलिथन जे अपन ध`यवाद Âापन िलख लेिथ।िनभ>य ओहू लेलतैयार निहं भेलाह। राघबक आगा अxL रािख देलिन। लाचार अपन माथक केश नोचैतराघब िनभ>य केर ध`यवाद Âापन सेहो िलखलिन। ओिहमे राघब जािन बुईझ कऽ अपननाम निहं िलखलाह। िवsास छलिन जे िनभ>य या तऽ xवयं िलख लेताह अ`यथा राघबकT कहिथन जे अहy अपन नाम िलख लीय। मुदा िनभ>य कृतÍ Eाणी छलाह। राघबकयोगदान हुनका लेल अतबे महवपूण> लगलिन जतेक योगदान एक हरबाहक कृिषकाय>कसंपादन मे। बि²क ओहू सँ कम। कारण हरबाहकT काजक बदला ओकर बोइन भेटैत छैक।
लेिकन िनभ>य अतबो ज´री निह बुझलिन जे राघबक EितकृतÂता अिप>त करिथ। ऊपरसँ अपन प¾ी मेधा, आ िहत िमL लग अपन Eशंसकपुल बनहैत रहला िनभ>य। संयोगसँ किनकबे िदनक बादिनभ>यक माता िपता िनभ>यसँ भेट करक हेतु िद²ली एलिथन। राघबकT जखन पतालगलिन तऽ राघब भेट करऽगेलाह। भेट होइतिहं िनभ>यक िपता बािज उठलिन: "कतेकआशीवद िदय
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अहyकT राघबजी! अगर अहy निह िलखबा लेल तैयार भेल रािहतॱ तऽसातो ज`ममे िनभ>य बूते पीएचडी थीिसस िलखल निह होयतैक।" राघब िवन¸तासँसब बात सुनैत रहला।
फेर िनभ>यकT िपता बजलाह: "लेिकन अहyक नाम कतौ ध`यवादमे निहं अिछ राघबजी?" राघब: "पता निह, शायद िनभ>य िबसिर गेल हेताह।" िनभ>यकिपता: "ई कोना भऽ सकैत अिछ? हमरा बुझल अिछ जे सपूण> थीिससमे िनभ>यक नामसेहो राघबजी िलखने छिथ। फेर िनभ>य नाम किथलेल निह देलाह?" िनभ>य सकपकाईत बजलाह: "हम पूछने रही। राघब जी निह िलखलाह।" िनभ>यक िपता कहलिथन: “अहy अपन अकम>{यता अहूमे Eदिश>त केलहुँ। अहyक हम िपता छी हमरा अिह बातक घोर दुःख अिछ।” िनभ>य मुड़ी गोतने बात सुनैत रहला। िकछु मासक बाद िनभ>य केर पीएचडी पूण> भऽ गेलिन। अवाड> भेिट गेलिन।िनभ>य आब डॉ िनभ>य भऽ गेल छलाह। एकबेर हेमासँ कोनो बात पर गप भेलिन तऽ राघबक प¾ी किह देलिथन जे राघब िनभ>य केर पीएचडी थीिसस िलखने छलाह।हेमा िनभ>यसँ पु¼लिन।िनभ>य चुप भऽ गेलाह।हेमा मुरझा गेलीह। पिहल बेर हेमाकTिनभ>यक प¾ी बनबा पर ºलािन भऽ रहल छलिन।“अहy हमरा एखन असगर छोिड़ िदय! बस।” अतेक कहैत हेमा अपन हाथ कपार पर धऽ लेलिन।िनभ>य िनरथ>क गंभीर बनल ओतएसँ दूर भऽ गेलाह। दोसर िदन िनभ>य एकबेर पुनः राघबसँ पुिछ देलिथन: “राघब! अहy अपन प¾ीकT बता देने छलयिन जे अहy हमर पीएचडी थेिसस िलखने रही?” राघबकT इ E जेना तामस चढ़ा देलकि`ह –“अहy की बुझैत छी! ओ हमर प¾ी छिथ हम हुनका निह सूिचत करबिन तऽ ककरा कहबै? अहy अतेक िनल>ज छी जे हमर नामक कतौ उ²लेख तक निह केलहुँ। अपन प¾ी हेमा लग अपन वैदुeयक बखान करैत छी। आ हम ओतेक मदित केलाक बादो चोर जकy रही! एहने बात छल तऽ अपनेसँ िलख िलतहुँ।” एकर बाद दूनू चुप भऽ गेलाह। खैर, िकछु िदनक बाद राघब नौकरीसँ यागपL दऽ देलाह।िनभ>यसँ मुि±त भेट गेलिन। समय चलैत रहलैक। पyच मासक भीतर एकिदन िनभ>य दस बजे राितमे कनैत फोनसँ सूिचत केलिथन जे िनभ>यक िपताक िनधन एकाएक हृदयगित थिह गेलासँ भऽ गेलिन। राघब बहुत दुखी भेलाह। जतबे दुःख अपन िपताक मृयु पर भेल छलिन ओतबे दद> तखनो भेलिन। एक बातक संतोष जnर भेलिन – नीक भेल िनभ>य केर पीएचडी भऽ गेलिन अ`यथा हुनक िपताक आमा भटकैत रिहतिन जे हुनक पुL कुमार िनभ>यसँ डॉ िनभ>य निह भऽ सकलाह! समयक च चलैत रहलैक। िकछु }यि±तगत िववशतासँ राघब नौकरीसँ यागपL दऽ देलिन। िनभ>य संxथyकT धेने रहलाह।सरकारी तंLमे जेना होइत छैक, होइत रहलैक। िनभ>यक तर¤ी हुनक पीएचडीक कारण होइत रहलिन। कुरता-जी`स पिहरने िनभ>य अपन देहक आ वxLक सEेषणसँ िव¥ान भेल रहैत छिथ। भीतरक िनभ>यकTके देखैत अिछ? ककरा लग समय छैक?
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नोट:इ कथा पुण>तः का²पिनक अिछ। एकर सब`ध कोनो जीिवत अथवा मृत }यि±त या संxथानसँ निह छैक।
ऐ रचनापर अपन मंत}य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। १. नारायण यादव - गुnमैता-सpैता २. डॉ. बचेsर झाक दूटा आलेख - िव_ापितकालीन िमिथलाक कृिष आ िव_ापितक रचनामे िवरह वण>न १ नारायण यादव गुnमैता-सpैता िमिथलाक िवभूित भुवनेsर Eसाद गुnमैताक ज`म 24 अEील 1930 ई.मे ¦ाम भविटयाही िजला सुपौलमे भेल छल। xव. िवहारी गुnमैता बड़ पैघ देश भ±त, ाि`तकारी, जुझा´, कम>ठ आ देशक Eित समिप>त वतंLता सेनानी छलाह। भुवनेsर गुnमैताक }यि±तव आ कृितव जानवाक लेल हुनक वंशावलीक जानकारी आवeयक अिछ। वंशी गुnमैता सोनाई गुnमैता िवहारी गुnमैता
नागेsर गुnमैता मोतीलाल गुnमैता
िवsनाथ गुnमैता कुशेsर गुnमैता
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राज कुमार गुnमैता राम कु. गुnमैता
राम नारायण गुnमैता देवनारायण गुnमैता
भुवेsर गुnमैता ल³मी ना. गुnमैता जयकृ°ण गुnमैता
xव. िवहारी गुnमैताक सुपुL रामनारायण गुnमैता और देवनारायण गुnमैता xवतंLताक आ`दोलनक िदवाना छल। राम नारायण गुnमैता कलका िवsिव_ालसँ बी.ए. पास कयने छलाह। िमिथलचलक Eथम xनातक छलाह। पढ़ाइक दरयान सुभाषच`h वोस, महामा गyधी आिद xवतंLता सेनानीसँ पहचान भेलै`ह। मश: राजे`h Eसाद आिद राजनेताक सभासँ अएलाह। बी.ए. पास कएलाक बाद ओ िवहार अएलाह आ गyधीजीक रचनामक काय>क Eचार-Eसारमे लािग गेलाह। ओिह अ`तरालमे (1939-1942) दरभंगा कॉं¦ेस किमटी आओर आय> समाजक मंLी पदकT सुशोिभत कयलै`ह। अपन िव¥ताक वलपर राम नारायण गुnमैता राम चिरL मानसक, अं¦ेजीमे अनुवाद (प_ानुवाद) कयलै`ह। दरभंगा महाराजक चीफ मैनेजर डेनबी साहेव ओिह अं¦ेजी अनुवाद राम चिरL मानसकT राम नारायण गुnमैताक मुँहसँ Eितिदन सुनय लगलाह। िमxटर डेनवी साहेव गुnमैताजीपर बड़ खुश छलाह। दरभंगा महाराजासँ पैरबी कय रामनारायण गुnमैताकT दरभंगा राजक िफ²ड इ`सपेि±टंग ऑिफसरक ´पमे बहाली करौलै`ह। मुदा िकछुए िदनक प¢ात् ओ ओिह पदसँ इxतीफा दय देलै`ह, िकयैक तँ राजक अिधकश कम>चारी सभ बड़ ѵ छल। ѵ कम>चारीक संग काम केनाई राम नारायण गुnमैताकT नीक निह लगलै`ह। ओ ओिह पदासँ इिxतफा दय का्रेसक पूण>कािलक काय>कक ´पमे समाजक सेवामे लािग गेलाह। एिह दौरान ओ िशJाक अिधकसँ अिधक Eचार Eसारक लेल पुxतकालय आ िव_ा आ िव_ालय खोलौलै`ह। ठाम-ठाम पुxतकालय आ िव_ालय खोलल गेल। ओिहठाम गरीब-गुरबा, मजदूर िकसान बैिस अÅययन करैत छल। एिह मे xव. xवनाम ध`य लिलत नारायण िमk, xव. eयाम नारायण िमk आ हुनक भाई लोकिन राम नारायण गुnमैताजीक िश°य बनलाह। भारत छोड़ो आ`दोलन शु´ भेलापर पूण> सियतासँ एिह काय>मे लािग गेलाह। सन् 1939 ई.मे रा°¬िपता महामा गyधीजीक भविटयाहीमे िवशाल सभाक आयोजन राम नारायण गुnमैता करौने छलाह। एिह सभमे हजारो हजार लेाक भाग लेलै`ह। सभक भोजनोक }यवxथा कयल गेलैक। राम नारायण गुnमैताक माताkी अपन हाथसँ चरखा ¥ारा सूत तैयार कऽ गyधीजीकT भTट केलै`ह। राम नारायण गुnमैताक सुपुL डा. भुवनेsर Eसाद गुnमैता जे 8-9 वष>क अवxथाक छलाह, ओ गyधीजीक xवागतमे ‘िवजय िवs ितरंगा यारा, झंडा ऊँचा रहे हमरा’ गीत गािव फूलक माला गद¶नमे पिहराबय लगलाह। कद-काठीमे छोट
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रहवाक कारणे हाथ गyधीजीक गरदिन तक निह पहुँच सकलै`ह । गyधीजी भुवनेsर गुnमैताजीकT गोदीमे उठा लेलै`ह आ गुnमैताजी गyधीजीकT माला पिहरा देलै`ह। सन् 1940 ई.मे राम गढ़मे का¦ेसक बैसार छल। राम नारायण गुnमैता कॉं¦ेसक जुझा´, कम>ठ आ समिप>त काय>क छलाह। तT दरभंगा तखन समxतीपुर, वेगुसराय आ मधुबनीक एक माL िजला छल। कॉं¦ेस िजला कमेटीक Eितिनिधक ´मे ओिह बैसारमे राम नारायण गुnमैतीजीकT भेजने छला। राम नारायण गुnमैता ओिह बैसारमे ससमय पहुँचलाह। ओिह बैसारमे देश भिरक कॉं¦ेसी नेता पहुँचल छलाह। महामा गyधीक अÅयJतामे बैसार भेल छल। एिह बैसारमे िनण>य भेल जे सुभाष च`h वोसक जगहपर प§ािम सीता रमैयाकT अÅयJ बनाओल जाय। राम नारायण गुnमैता एिह Exतावक िवरोध कयलै`ह आ ओ गyधीजीक खेमासँ बाहर भय नेताजीक खेमामे आिब गेलाह। राम नारायण गुnमैता xवावलबी, ाि`तकारी, `यायवादी, xपµवादी, सयवादी आ जुझा´ िव¥ान नेता छलाह। जमॴदार सेहो छलाह। िहनक िपता िवहारी गुnमैताक रग-रंगमे xवाधीनताक आ`दोलन समायल छल। िवहारी गुnमैताक िपता भाईलाल गुnमैताक सहयोगसँ कतेको गाममे जमीन खरीद कामत बनौने छलाह। जेना भविटयाही, गोिढ़यारी, मािलन बेलहा, सुºगाप§ी मिटयारी आिद। xवतंLता Eाितसँ पिहने कोसीक रेलवे पुल बरकरार छल। दरभंगासँ फारिवसगंज बीच छोटी रेलबे लाइन छल। दरभंगासँ फारिवसगंज रेल जाइत छलैक। 1942 ई.क आस-पास तेहेन ने भीषण बािढ़ आिब गेलैक जे कोसीक भीतर रेल लाइनकT तहस-नहस कय देलक आ िनम>लीसँ आगy रेलक सवारी ब`द भय गेल जे अखन धिर ब`दे अिछ। भविटयाही कामत सेहो तहस-नहस भय गेल। आब राम नारायण गुnमैताक रहनाइ गोिढ़यारी कामतपर भऽ गेल। ओिहठामसँ xवतंLता आ`दोलनक गित-िविध चलवय लगलाह। िहनक Eथम पुL भुवनेsर भुवनेsर गुnमैता िजनकर उ¸ तकरीवन 12 वष>क छलै`ह। अपन पुLकT पढ़यवाक लेल राम नारायण गुnमैता फुलपरासक अ`तग>त म.िव. हुलासप§ीमे नाम िलखा देलै`ह। नाम सतम वग>मे िलखल गेल। भुवनेsर गुnमैता ओिह िव_ालयमे पढ़य लगलाह। 1942 ई.क xवतंLता आ`दोलनमे जखन भुवनेsर Eसाद गुnमैता अपन िव_ालयमे एकटा नीक छाLक ´पमे ¿याित Eात कय चुकल छलाह। तखन एक िदन िहनक िपता राम नारायण गुnमैता हुलासप§ी मÅय िव_ालयपर पहुँचलाह आ भुवनेsर गुnमैतासँ कहलैन- “बौआ, एिह आ`दोलनमे पटनामे रा°¬ीय झंडा फिहरावयक दरयान 07 सात बचा शहीद भऽ गेल। आब आठममे तोहर बारी छल।” xवतंLताक िदवाना राम नारायण गुnमैता, जे भारतकT xवतंL करबाक हेतु अपना बेटाकT बिलदान देबाक लेल तैयार छल- के ओ कहलैन- “तो अपन िव_ालयक छाLक नेतृव करैत फुलपरास थानापर रा°¬ीय झंडा पहरावह। हम अपन एकटा बेटाकT भारत माताक लालक ´पमे विलदानक लेल सूपूद> कय रहल छी। गोली चलत तकर डर निह किरयहह।” ई बात 11 अगxत 1942 ई.क छल। 12 अगxतकT अपना िव_ालयक छाLक नेतृव करैत हाथमे झंडा लय भारत माताक जय-जयकार करैत फुलपरास थापर पहुँचलाह। हजारो-हजारक सं¿या छाL, नौजवान, िकसान, मजदूर आ इलाकाक ¦ामीण जनता सभ थानाकT घेरने छल। भुवनेsर E. गुnमैता
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हाथमे झंडा लय भारत माताक जय-जयकार करैत थानापर पहुँचलाह। थाना पहुँचैत देरी पुिलस भीड़कT िछिड़येबाक बाxते हवाइ फायिरंग करय लागल। जखन मंचपर चिढ़ भुवनेsर Eसाद गुnमैता झंडा फहरावय लागल तखन थानाक दरोगा ओिह बचापर गोली चलवय लागल। बचाकT कोनो परबाह निह छल। गोली चलैत रहल। दरोगा िनशाना बनौलक आ भुवनेsार Eसाद गुnमैताकT मारए लागल, तावत दरोगाक प¾ी जे सदृदय छली। ओ दरोगाक पैर छाि`ह लेलकिन आ दरोगाक िनशाना चुिक गेलैक जािहसँ ओ बचा गोलीक िशकार होमयसँ बॉंिच गेल। एिहठाम ई पॉंती चिरताथ> भेल- ‘जाके राखे साईयॉं मािर सके ने कोई’ उ¦ भीड़ दरोगापर टूिट पड़ल। ओ सभ दरोगाकT धमकी देवय लागल कहलक- जँ ई बचा अहॉंक गोलीसँ मरत तँ अहूँकT िनव>श कय देव। ÔÂीड़ भारत माता की जयक नारा देबय लागल। िxथित बड़ तनाव यु±त भऽ गेल। 12 अगxतकT झंडा फहरौल गेल आ तेरह अगxतकT थानामे आिग भुवनेsर Eसाद गुnमैताक नेतृवमे लगा देल गेल। 12 अगxत 1942 ई.कT भारतमे Eाय: सभ सरकारी संxथापर ितरंगा झंडा फहरौल गेल। जयनगर थानापर झंडा फहरावयमे जे गोली चलल। जािहमे नथुनी साह नामक युवक शहीद भऽ गेल। अखनो थानाक नजदीकक चौककT शहीद चौक कहल जाइत छैक। जकर xमारक शहीद चौकपर बनल छैक। फुलपरास थानापर गािग लगलाक बाद चा´ तरफ हाहाकार मचय लागल। भुवनेsर Eसाद गुnमैताकT अं¦ेज छौटे गुnमैता किह xमबोिधत करय लागल। आ छोटे गुnमैतापर शूट वारंट जारी भऽ गेल। म.िव. हुलासप§ीसँ भुवनेsर Eसाद गुnमैताक नाम कटा देल गेल। राम नारायण गुnमैतापर सेहो वार{ट भय गेल। आब राम ना. गुnमैता भूिमगत रिह आ`दोलनकT सिय रखलै`ह। मुदा राम नारायण एिह आपा-धापी आ नु¤ी- िछपीमे बीमार भय गेलाह। अं¦ेजी समान आ अं¦ेजी दवाईसँ ओ परहेज करय लगलाह। झंझारपुरमे एकटा डॉ±टर िहनक िमL रहिथ`ह। ओ हुनकर इलाज करैक लेल लालाियत रहलाह। मुदा ओ अं¦ेजी दवाईयो खेवाक लेल शपथ खेने रहैथ। तुलसीक पात, वाकसक पात, काली मीच> सgधा नून इयािद जड़ी-बुटी िमला कय काढ़ा बनाओल गेल। ओ काढ़ाक सेवन करय लगलाह। मुदा बीमारी ठीक निह भय सकलै`ह। बीमारी खतरनाक ´प धारण कय लेलक। ओ िमिथलाक िवभूित 20 अ±टूवर 1942 ई. कT वाइसी गढ़ी (सुपौल) मे 35 वष>क अवxथामे एिह लौिकक शरीर के यािग परलोक िसधार लाह। xवग>वासी होमयसँ पिहनिह अपन सुपुL kी भुवनेsर Eसाद गुnमैताकT तीन काय> करवाक हेतु आदेश देलै`ह। जे िनÕ अिछ- (1) बेटा, मदन मोहन मालवीय जीक िह`दू िवs िव_ालयसँ एम.ए. किरयहह। (2) मॉं कT तीथटन करा िदयहक। (3) पढ़ाई सप भेलाक वाद देश सेवामे लािग जइयह।
एहेन पिरिxथितमे भुवनेsर Eसाद गुnमैता िजनका अं¦ेज छोट गुnमैताक नामसँ सवोिधत करैत छलाह, िवचिलत निह भेलाह। दाह संxकार सप भेल। दाह-संxकारमे बहुत सं¿यामे आ`दोलनक काय>क भाग लेलै`ह। एिह घटनाक जानकरी अं¦ेजी फौजकT भय गेलै`ह। थानापर रा°¬ीय झ{डा आ थानामे आिग लगेलाक जूम>मे kी भुवनेsर Eसाद गुnमैताक (छोटे गुnमैता) नामसँ वार{ट जारी भेल छल ओिह समयमे छोटे गुnमैताक िगरÖतारी हेतु वार{ट लय अं¦ेजी फौज दरबाजापर आिब घर घेर लेलै`ह। ओिह समयमे संयोग नीक छल जे भुवनेsर Eसाद गुnमैता अपन चाचाक
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संग अिxथ कलश चुनबाक हेतु समीपिहक दाह संxकार xथलपर गेल छलाह। घर लोकक मारफते हुनका गुत सूचना देल गेलै`ह। सूचना िमलतिह ओ अिxथ लय चाचाक संग नेपाल भािग गेलाह। आ ओहरिहसँ िसमिरया जा अिxथ-कलशकT गंगामे Eवािहत कयलै`ह। ¦ामीण सभ दु:साहस कय िसपाही सभकT बड़ फटकारलै`ह। तथािप ूर िसपाही लोकिन हुनका घरमे आिग लगा देलक। ई का´िणक दृeय देिख इ`h भगवानक हृदय hिवत भय गेलै`ह। आ झमाझम वािरस होमय लागल। घर जरऽसँ बॉंिच गेल। िसपाही लेकिन िनरास भय वापस चिल गेलाह। राम नारायण गुnमैताक िनधनक प¢ात भुवनेsर Eसाद गुnमैताक अपन चाचा देवनारायण गुnमैता xवतंLता आ`दोलनमे सिय भूिमका िनभौलै`ह। आब एिह xवतंLताक आ`दोलनक नेतृव क खुटौना थानाक नहरी िनवासी xव. राम लषण सpैता भेलाह। राम लषण सpैता कम>ठ, सुयोºय, ाि`तकारी िनिभ>क, योितष शाxLक Âाता, िह`दी भाषी िव¥ान एवम् xपµ व±ता छलाह। आब राम लषण सpैताक नेतृवमे देव नारायण गुnमैता, सूय> नारायण िसंह, सुवोध झा, गुलावी सोनार, उपे`h िमk, यमूना िसंह, िजलवी खड़गाह आ सpैताजीक दुनू छोट भाई रामकृ°ण सpैता आ जयकृ°ण सpैता आ`दोलनकT सिय बनेबामे सहयोग करय लगलाह। राम लषण सpैताक वंशावलीक चच मुनासीव बुझना जाइछ। आमा सpैता आ परमामा सpैता दुनू भाई िसतहर बरहाक िनवासी छलाह। जे अखन सुपौल िजलामे पड़ैत अिछ। ओिह दुनू भाइक पास बहुत रास गाय (गोधन) छल। गायकT चरेवाक हेतु बहुत दूर-दूर तक चिल जाइत छलाह। गायक झु{ड जतय- जतय जाइत छल ओकरा पॉंछा ओकर मालीक आ चरवाहा अपन डेरा डािल रहैत छलाह। ओिह ममे आमाक सpैतका गाय खुटौना थानाक िसडुला गyव पहुँच गेल। घनगर जंगल रहलाक कारणT गाय सभ भिर वरसात एिहठाम ठहिर गेल। िसडुलासँ पूरब एकटा बड़ ऊँचगर जगह छलैक। वािढ़क पािन आ जाड़सँ बचवाक हेतु मालीक आमा सpैता आ ओकर नौकर सभ ओिह ऊँचगर जगहपर अपन xथायी िनवास xथान वनाकय रहय लगलाह। िकछु िदनक वाद जंगल आ परती भूिमकT उपजाऊ भूिम बना कय खेती वाड़ी करय लगलाह। गोधनसँ अिधक आमदनी होमय लगलैक। खेती नीक जकॉं करय लगलाह। खेतीसँ विढ़या जकॉं आमदनी होमय लगलैक। िकछु जमीन खरीद नीक जकॉं घर बनाकय रहय लगलाह। आमा सpैताक छोट भाए- परमामा सpैता जे िसतहर-बरहा (सुपौल) मे रहैत छलाह ओ िहनका लय जयवाक हेतु Eयास केलै`ह मुदा आमा सpैता वापस निह गेलाह। िसडुलासँ पूरब एकटा छोट नदी जे नहरक सदृeय छल ओकरिह नामपर एिह गामक नाम नहरी राखल गेल। व>मानमे ई गyव बड़ सुखी सप आ िव¥ानक वxती बिन गेल अिछ। एतय Eारिभक िशJासँ .......... िशJण संxथान अविxथत अिछ। Eाथिमक xवाxÈय के`h सेहो अिछ। आमा सpैताक एक माL पुL रघु सpैता भेलाह। आमा सpैता : वंशावली िनÕ अिछ-
आमा सpैता
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA 22
रघु सpैता फु×ी सpैता
लेpाई सpैता मन´पी सpैता
गुदर सpैता बचू सpैता बाबूलाल सpैता
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA 23
आब बाबू लाल सpैताक तीन सुपुL राम लषण सpैता राम कृ°ण सpैता, जयकृ°ण सpैतामे सभसँ जेठ भाई राम लषण सpैताकT एकटा िवशाल हाथी छल। तकरीवन 10 हाथक छलैक। ओकरा पैघ-पैघ दॉंत सेहो छलैक। हाथी पैघ देश भ±त आ xवामी भ±त सेहो छल। राम लषण सpैता दोसर बेटी जे दू सालक छल। एक िदन संÅयाक समय ओ बची हवेलीसँ िनकिल हाथीक घर चिल गेल छल। हाथी बा`हल छल। हाथी ओिह बचीकT सूढ़सँ उठा लेलक आ ओकरा झूलबय लागल। बची आस पािब सुित रहल। तखन हाथी बैिस रहल आ अपना दुनू अिगला जॉंघ बीचमे रािख सूढ़सँ झॉंिप देलक। बची हाथीक सायामे सूतल रहलीह। जखन हवेलीक अ`दर बचीक खोजवीन होमय लागल तँ ओ निह भेटलैक। चा´ तरफ खोज-पुछािर हाफय लागल। कतहु अता-पता निह लागल। पोखैर- इनारमे सेहो खोजल गेल। हवेलीक अØ कना-रोहट शु´ भय गेल। मुनहािर सॉंझ भय गेल छल। बचीक खोज-पुछािरक लेल बाड़ी-झाड़ी माल-जालक घरक तलासी भेल। सभ िकयो हािर-थािक कऽ सं¿या समय िनरास भय एक जगह जमा भेल। सॉंझ देमय लेल दीप,लालटेन वा िडिवया जराओल जाय लागल। ओिह समयमे िवजलीक सेवा निह छल। लोक सभ लालटेन युगमे जी रहल छल। अं¦ेजी शासनक अयाचार चरम सीमापर छल। ¦ामीण लोकिन पढ़नाइ-िलखनाईकT विह°कार करैत छल। हाथीक महाउथ हिथसार यानी हाथीक घर सॉंझ देबाक लेल गेल। सलाईसँ काठी िनकािल िडिवया जरौलक। महाउथ देखलक जे हाथी असमयमे बैसल िकएक अिछ? महाउथ तँ पिहने घवरेलाह। हाथीक लग पहुँचलाह। तँ देखैत छैथ जे हाथीक अिगला दुनू जॉंघक बीचमे बची सुतल अिछ आ हाथी अपन सूढ़सँ ओकरा झपने अिछ। जाड़क समय छल। बचीक देह गम> भऽ गेल छलैक। तँए ओ िनि¢`तसँ सुतल छलीह। महाउथ दौगल मालीक लग। मालीक मालीक एमहर आउ। िनरास भने सभ िकयो हाथसार िदस दौड़ल। मािलक हाथीकT बैसल देखलक, तँ ओ घवरेलाह जे हाथी असमयमे िकएक बैसल अिछ। मनिह-मन सेाचए लगलाह जे हाथी बीमार न भऽ गेल। महाउथ मालीककT देखौलक जे हाथी अपना जॉंघक बीच कोना कऽ बचीकT झपने अिछ। पिरवारक सभ सदxय देखलक सभ अचंिभत भय गेल। मालीक हाथीसँ बचीकT देबाक लेल आ¦ह केलै`ह। हाथी अपन सूढ़सँ बचीकT मािलकक राम लषण सpैताजीक गोदीमे दय देलक। सभक िनराश मन Eफुि²लत भय गेल। राम लषण सpैता हाथीकT निह बेचबाक Eण कयलै`ह। हाथी वफादार देशभ±त आ xवामीभ±त छल। एकर एक उदाहरण Exतुत कय रहल छी। राम लषण सpैता जे दरभंगा महाराजक ¥ारा जूरी पंच मनोिनत कएल गेल छलाह। गामक नजदीकमे अं¦ेजक कचहरी छल। ओतएसँ एकटा देवनजी राम लषण सलहैताकT पंचैती हेतु बजाबक लेल हाथीसँ आयल
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छल। राम लषण सpैता पंचैतीमे जयवाक हेतु तैयार होमय लगलाह। महाउथकT आदेश देलै`ह जे तॱ हाथीकT तैयार कर महाउथ हाथीक हौदा कसय लागल। राम लषण सpैता सेहो तैयार भेलाह। महाउथवार हाथी लय उपिxथत भेल। सpैताजी हाथीपर सवार भय पंचैती हेतु िवदा भेलाह। तावत देवानजी हाथीपर चिढ़ आगy बिढ़ चुकल छल। सpैताजी सोचए लगलाह जे ई देवानजी केहेन असय अिछ। हमरा चललाक बाद ओ पाछॉंसँ चिलतैथ। हुनका आम समानपर ठेस पहुँचलै`ह। ओ महाउथवारकT ईसारा देलैन जे हाथीकT जोड़सँ चलाउ। हाथी नमहर छल। पैघ-पैघ डेग दैत देवानजीक हाथीकT पकैड़ लेलिन। आगy एकटा नाला छल देवानक हाथी नाला टपए लागल। तखन राम लषण सpैता महाउथवारकT इशारा कय देलिन जे देवानक हाथीकT पाछॉंसँ दाइब दे। महाउथक ईशापर सpैताजीक हाथी पाछॉंसँ सूढ़सँ डॉंरपर जोरसँ चािप देलक। देवानक हाथी नgगराय लागल। पंचैती भेल। ओतयसँ सpैताजी घर अयलाह। देवानजीक हाथीक डॉंर टूिट गेलैक। एिह बातक जानकारी दरभंगा महाराजकT देल गेलैक जे राम लषण सpैताजीक हाथी दरभंगा महाराजक हाथीक डॉंर तोइर देलक। दरभंगा महाराज राम लषण सpैताकT दरभंगा बजौलक। राम लषण सpैता दरभंगा महाराजक ओय पहुँचलाह। महाराजाकT खबर पठाओल गेल। दरभंगा महाराज सpैताजीकT कहलिन जे अहॉंक हाथी बदमाश अिछ। हमरा कचहरी परहक हाथीक डॉंर तोइर देलक। सpैताजी अपन सफाई देलक जे अहॉं देखू सpैताजी हाथीकT कुहलिन जे पट होजा। हाथी लेट गेल। सpेताजी हाथीक दॉंतपर चिढ़ दोसर दॉंतकT पकैर हाथीक दॉंतपर चिढ़ गेलाह। दरभंगा महाराजा खुश भय सpैताजीकT अभय दान दय देलै`ह। ई दृeय महारानी कोठाक ऊपरसँ देिख रहल छलीह। ओ ऊपरसँ आदेश देलै`ह जे अहॉं ई हाथी हमरा दय दीअ। एिह बदलामे अहॉं चािरटा हाथी लय लीअ। महारानीक हठपर सpैताजी हाथी दय देलै`ह। जिहया सँ ई हाथी सpैताजीक घर छोड़लक, तिहयासँ सpैताजीक घरमे उड़ी-िवड़ी लािग गेलैक। एमहर राम नारायण गुnमेताक िनधनसँ जतेक xवतंLता आ`दोलनक ाि`तकारी लोकिन सभ छलाह, ओ राम लषण सpैताक ओतय रिह आ`दोलन करैत रहलाह। अं¦ेज सरकार एिह ाि`तकारी लोकिनकT गरÖतार करबाक मुिहम चला रहल छल। नहरी गामक िकछु असमािजक तव जकरा लाम लषण सलहैतासँ दुeमनी छल ओ अं¦ेज सरकारकT एिह बातक सूचना दय देलक। 1944 ईxवीक दीपावलीसँ एक िदन पिहनिहक लगभग 9 बजे रािLमे 8 xवतंLता सेनानी सवेरे भोजन कय सुतल छलाह। पहरापर देवनारायण गुnमैता छलाह। पॉंच सौ मीटर दूरिहसँ अं¦ेजी फौज टाच> देलक आ राम लषण सpैताक नाम लैत दरबाजापर अयबाक कोशीश कयलै`ह। मुदा देवनारायण गुnमैता हुनका सभ सामना करैत रहलाह। बादमे ओ ओतयसँ ब`दुकक साथ भािग गेलाह। सभ आ`दोलनकारी सेहो परा गेलाह। आंगनसँ पाछॉं दय बहरेवाक एकिहटा राxता छल। आ वगलमे ढेकी घर छलैक। ओिह ढेकी घरमे दू ाि`तकारी यमुना िसंह आ उपे`h िमk फँिस गेलाह। मुदा ओ दुनू घरक धरैनपर छुिप रहलाह। घरक तलासी होमय लागल। कतौ कोनो ाि`तकारी निह िमलल। सभ अं¦ेजी फौज दरबाजापर जमा भय गेल। राम लषण सpैता सभ िसपाही आ पुिलस अफसरकT ततेक ने डॉंट-डपट कयलक जे सभ पुिलस पािन-पािन भय गेल। मुदा गामक जे राम लषण सpैताक
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Eिति¥ि`द छलाह, जे अं¦ेजी फौजकT बजा कऽ अनने छलाह। ओिह आदमीसँ अं¦ेज अफसर पािन िपयेबाक आ¦ह केलै`ह। ओ आदमी लोटा लय ठेकी घरसँ पािन आनबाक हेतु गेलाह। धरैनपर बैसल ाि`तकारी ¥य हुनकासँ पुछलिन जे िसपाही सभ चिल गेल। ई सुिनतिह ओ EितपJी आबाज दय फौजकT बजौलक आ दुनू ाि`तकारीकT पकड़बा देलक। ओिह दुनूकT पकड़लाक बाद राम लषण सpैता, जय कृ°ण सpैता, िव`देsर सpैता, जीलेवी खड़गाहआ टीमू म{डलकT िगरÖतार कय जहल लऽ गेल। घरक सभ सामान लूटा गेल। घरक सभ सदxय घर छोिड़ भािग गेल। अंगेजी फौजक उपhव बढ़य लागल। घरमे जतेक वLन वासन, सोना-चा`दी, गहना जेवर छल सभ लूिट कऽ अं¦ेज आ गामक िवरोधी सेहो लऽ गेल। घरक तलासीमे राम लषण सpैताक एक माL पुL िवशेsर सpैताकT पकड़बाक हेतु एिड़-चोटी एक कय देलक। िवशेsर सpैता घर छोिड़ अपना मामा गाम गोईत परसाही चल गेल। िवरोधी लोकिन िवशेsर सpैताक रहबाक पता सेहो अं¦ेजी फौजकT बता देलक। अं¦ेजी फौज िवशेsर सpैताकT पकड़वाक हेतु परसाही पहुँचल। ओतयसँ ओ बाधे-बाघ पूरब तरफ भािग गेलाह। अं¦ेज िसपाही हुनका पकड़वाक हेतु खदेरऽ लागल। बाघमे एकटा हरवाहा हर जोतैत छल। अंगेज िसपाही हरवाहाकT जोड़सँ ह²ला कय िवशेsर सpैताकT पकड़बाक हेतु कहलक। हरवाहा िवशेsर सpैताकT पाछॉंसँ खदेरऽ लागल। आ हरवाहा िवशेsर सpैताकT धीमी आवाजमे कहलक बौआ अहॉं जोरसँ भागू। हम अहॉंकT खदेरवाक नाटक करब। हरवाहा डरे िवशेsर सpैताकT खदेरय लागल। आ ऊचगर मेड़पर ओंघरा कऽ िगरअ लागल। एिह तरहT िवशेsर सpैता भािग कय पुिलसक पछाड़सँ छुिट गेलाह। भागल-भागल अपन जेठ बिहनक ओतय पहुँचलाह। बिहनक दरवाजापर आइत देरी एकटा तेह²ला बाजल जे सpैता तँ अपने िवलिटये गेल आब एकरो िबलटौत। ई सुिनतिह िवशेsर सpैता जे आम समनक रJाथ> ओतय निह ´कलाह आ आगy बिढ़ गेलाह। िहनक जेठ बिहन जँ बुझलक तँ िवशेsर सpैताक पाछॉंसँ आवाज दय रोकलीह। मुदा सpैताजी वापस निह भेलाह। एिह Eकारे िवशेsर सpैता भागैत-भागैत कोसीक ओिह पार जा अपन मौसीक ओतय शरण लेलै`ह। एमर राम लषण सpैता सिहत तथाकिथत िगरÖतार }यि±तकT जेलमे डािल देल गेल। राम लषण सpैता जेलमे अनसन करय लगलाह। अठरहम िदन ओ शरीरकT यािग देलक। ुर अं¦ेज सpैताजीक लाशकT िहनक पिरजनकT निह दय सकल। िकछु िगरÖतार }यि±तपर मुकादमा चलय लागल। एिह Eकारे सpैताजीक पिरवार आ धन सपितक नाश भय गेल। xवतंLता आ`दोलनमे जे Jित राम लषण सpैता आ राम नारायण गुnमैताकT भेलै`ह ओ इितहासक पामे xवाण>Jरमे िलखवाक योºय अिछ। एमहर राम नारायण गुnमैताक सहोदर भाए देव नारायण गुnमैता जे िकछु िदन धिर जेलमे ब`द रहलाह, तकर बाद जेलक चाहरिदवारीकT फािन जेलसँ बाहर िनकिल अपन िपितयौत भाय जे बेगूसरायमे बकक नौकरी करैत छलाह, ओतय चिल गेलाह। भुवनेsर Eसाद गुnमैता अपन िपता राम नारायण गुnमैताक kाË- कम> सप कय बेगूसराय आगाक िशJा ¦हण करवाक लेल चल गेलाह। बेगूसरायमे दूटा उच िव_ालय छल एकटा बी.पी. उच िव_ालय आ दोसर जे.के. उच िव_ालय। बी.पी. उच िव_ालयक Eाचाय> नामकन निह लेलक। तखन नामकन हेतु जे.के. उच िव_ालय पहुँचलाह। ओतयक Eचाय> भुवनेsर Eसाद गुnमैता
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जीक जॉंच परीJा लेि`ह। 100 अंकक E पL देल गेल। परीJा स प भेल। 100 अंकमे 100 अंक गुnमैता जीकT Eात भेलै`ह। Eाचाय> िहनक Eितभा देिख गद-गद् भय गेलाह। नामकन भय गेल। जे.के. उच िव_ालयमे kी गुnमैतजी पढ़य लगलाह। गुnमैताजी बगूसरायमे पढ़बो करिथ आ रा°¬ीय xवयं सेवक संघक िशिवरमे सेहो भाग लैथ। िहनक चाचा जे जेलसँ भािग कऽ बेगूसराय चल गेल रहैथ ओ भुवनेsर Eसाद गुnमैतापर समसैल रहैत छलाह। िकएक तँ ओ आर.एस.एस. िशिवरमे भाग लेबाक हेतु जाइत छलाह। ओ ओिह िशिवरमे भाग लेबासँ सिदखन मना करैत छलै`ह। धीरे-धीरे भुवनेsर Eसाद गुnमैता रा°¬ीय xवयं सेवक संघक Eचारक बिन गेलाह। देश सेवामे लागल रहलाह। िपताक आÂाक पालन करैत काशी िह`दु िवs िव_ालयसँ एम.एक. पास कयलै`ह। माताकT तीथटन करौलै`ह। पÙ िवभूषण आचाय> हजारी Eसाद ि¥वेदीजीक संरJणमे शोध काय> सप कयलाह। बहुत रास पा..... सभ िलखलै`ह। िहनक शोधक िवeÂय छल ‘वण>र¾ाकरक ऐितहािसक पृिR भूिम।’ एिह तरहT गुरमैता-सpैता पिरवारक धन-सपित नµ भेलाक वादो xवतंLता Eाितमे अपन अहम भूिमका िनभौलै`ह। जे आइ धिर िमिथलचलक आन, वान और शान अिछ। २ डॉ. बचेsर झाक दूटा आलेख -
िव_ापितकालीन िमिथलाक कृिष जािह समयमे िव_ापितक आिव>भाव िमिथलामे भेल छल ओ संमणक काल छल। सामािजक िवkृंखलताक कारणT िकछु लेाक काज-ध`धा करबासँ मुँह मोड़ने छल। जे केओ काजुल, पिरkमी छलो ओहो .......मे पिर क>}यहीन जीवन िबतेिनहार भऽ गेल छल। िमिथलामे खेती आ पशुपालनक िसवाय दोसर जीिवकाक साधनो तँ निह छलैक। सीिमत साधनो अछैत खेती करनाइ असौकज> बुिझ िदनानुिदन आिथ>क दुव>लताक िशकार होइत रहल। इएह कारण भेलै जे एतुका लोकक आिथ>क अवxथा लचिड़ गेलैक। एतबे निह, िकछु लोक कृिषक उमेJा कऽ भीख मगब kेयxकर बुझए लागल। एहन लोककT समाज घृणाक दृिµसँ देखैत छल। तT एिह Eवृितक लोकक Åयान खेतीक ओर आकृµ करबाक िनिमत कहबी चिरताथ> भेल- “उम खेती मÅयम वाण, िनिषË चाकरी भीख िनदान।” तापय> ई जे खेती करब सभसँ उम मानल गेल। }यवसाय करब मÅयम। नौकरी करब अधम मानल गेल। सभसँ अधलाह- भीख मगब बुझल गेल। जहy तक नौकरीक गप छैक, आजुक समयमे नौकिरयेकT Eाथिमकता भेटल छैक। ओ भलT सप पिरवारक िकएक ने होिथ, नौकरी हेतु अपxयॉंत देखल जाइछ। एहनो समय छलैक जखन नौकरी कएिनहारकT समाजमे कुचच होइत रहैक। एिहसँ ईहो Âात होइछ जे आम िनभ>रताक िशJा देल जाइत छल।
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महा किव िव_ापित अपन रचना ‘िलखनावली’ आ ‘वष>कृय’मे िमिथलाक कृिषक बहुिविधवणत कहल अिछ। संगिह कृिषकT उपेJाक दृिµसँ देखिनहारकT एिह ओर आकिष>त करबा लेल अपना रचनामे िशव आ गौरीक माÅयमसँ उपदेश देल अिछ। िव_ापितक माL उ×ेeय अकम>{यताक अ`मूलन करब छल। “बेिर-बेिर अरे िशव मो तोय बोलो, िकिरणी किरअ मनलाई, िभिख मिगए पर गुण गौरव दूिरजाय, िनध>न जन बोिल सबे उपहासे, निह आद। अनुकपा। तोहg िशव पाओल आक-धतूर, एिह पाओल फूल चपा।।” भूिमक अिधकता आ जन सं¿याक `यूनताक कारण खेती अदिल-बदिल कऽ होइत छलैक। जािह खेतमे एिह वष> धान गृहxथ करैत छल, ओकरा परती छोड़ैत छल। ई करलासँ साल भिरमे खेतक ऊपज शि±त बिढ़ जाइत छलैक। भूिम तीन kेणीक मानल गेल छल। िव_ापितक समयमे पिहल kेणीमे गोचर, दोसर kेणीमे ऊपजाउ आ तेसर kेणीक वंजर। गोचर भूिममे अनेक Eकारक घास लगाओल जाइत छल जे पशुपालनक हेतु Eमुख छल। ई गोचर भूिम साधारण गाममे एक सय दंड, पैघ गाममे दुई सय दंड एवम् नगरमे चािर सय दंड छोड़ल जाइत छल। वंजर भूिमकT तोिड़ कऽ खेतीक योºय बनाओल जाइत छल। एहन भूिमकT िव_ापित खील भूिम कहलिख`ह। एहन Eकारक भूिममे खेती कएिनहार भू-xवामीकT सात वष> धिर ऊपजक आठम भाग दैत छल। तप¢ात् भू- xवामीक अनुसार उपजक xवामीवमे पिरव>न भऽ जाइत छलैक। एखनहुँ परती जमीनमे खेती कएिनहारकT सुिवधा देल जाइत छैक। एिह सुिवधाक समय िनधिरत निह छैक। जगह-जगहपर अ`तर देखल जाइत अिछ। ओिह समयक समाज दू वग>मे बँटल छल। एक वग> राजा महाराजाक साम`तािदक छल। एहन वग>क लोकक खेती-पथारी दूर-दूर धिर होइत छलिन। ओतए ओ लोकिनक खेती करबाक....... कमि`तक अथत् कमितयाकT रखैत छलाह। एकर अितिर±त आरो अिधकारी वग> ओकर काजक िनरीJण करबाक लेल राखल जाइत छल। समाजक दोसर वग> दिलत वग> छल जे xवयं अपन खेती करैत छल। एहन वग>कT खेतीमे अपन प¾ीसँ सेहो सहयोग भेटैत छलिन। खास कऽपशुक हेतु सभ Eकारक }यवxथा xLीगणे ¥ारा होइत छल। महादेवकT मैिथल होएबाक Eमाण कहक ईहो भऽ सकैछ। हुनक सासु मैना xपµ ´पसँ कहैत छिथ`ह- “हमर िधया जखन सासुर जयतीह तखन ओ घास कािट लौती आ बसहा चरौती।”
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA 28
खेती-परती हर एवम् कोदािरसँ ओहू समयमे कएल जाइत छल। हरक }यवहार िव_ापित सािहयक संगिह तकालीन सािहयमे सेहो कतेको xथलपर कएने छिथ। िव_ापित अपन वष> कृयमे हरक मुहु>क उ²लेख कएने छिथ। ओिह िदन बरदक िसंहमे म±खन गूड़ आिद रगड़ल जाइत छल। Eाय: ओिह िदन धनी- मनी }यि±त हरक-फारक आगूमे सोना लगबैत छल। िव_ापित कहैत छिथ सोन लगायब एक िवधान छल। एक तरहक कहबी छैक वा लोक धारणा जे पंचमीक मुहु>मे हर जोतबा काल जॱ बरद िचकार करए वा मेिमया तँ चािर गुणा उपज होएबाक संकेत भेटैछ। ओिह िदन पॉंच िसरोर जोतबाक िवधान छलैक। िव_ापितक िलखनावलीक एक पLमे हरक हेतु धुर`धर बरदक चच आयल अिछ। खगौट भेलापर गृहxथ एहन धुर`धर बरदकT ब`हकी रखैत छल। एिहसँ ओिह समयक समाजक लचरल अवxथाक पिरचय भेटैत अिछ। सप गृहxथ हरबाह खेत जोतबाक िनिमत रखैत छल। हरवाहीक अलाबा अ`यो काज हरबाहसँ करबैत छलाह। िव_ापितक एक प_मे उ²लेख आएल अिछ जे गौरी िशवसँ खेती करबाक लेल कहैत छिथ`ह, तखनुक ई पॉंित अिछ- “खटंग कािट हर हर जे बनािवअ, Lीशूल तोिड़ क´ फार। बसहा धुर`धर हर लए जोतीय, खेत खोला पहाड़।” धनी-मनी }यि±तक ओिहठाम कमितयाक ऊपर महम होइत छल जकरा िनरीJक समान पद होइत छलैक। कामत परक खेती-पथारीक सभ Eकारक खबिर कमितयासँ लैत रहैत छल। कोन खेतमे कोन तरहक अ उपजाओल जाय संगिह खेत कोना जोतल जाय, कोन खेतमे आिर ऊँच कए बा`हल जाय संगिह कोन खेतमे कतेक लागत लगाओल जाय इयािद इयािद तकर िजÂासा महतम कमितयासँ करैत छल। िव_ापितसँ पूव> मैिथली डाक आ घाघ भेल छलाह जिनका िमिथलाक कृिष काय>क उÚगेता कहल जाइछ। मै. डाककT Eकृितक गहन अÅयययन छलि`ह। एखनहुँ डाक वचनावलीक अनुसार िमिथलाक गृहxथ कृिष काय>क समीJा कऽ समेत भऽ जाइत छिथ। डाकक कहब छल- गृहxथ छोट-Jीण बरद निहयÛ राखिथ माL दुई गोट धुर`धर बरद कीिन खेती करिथ। अपन खेती भेलापर अनको खेतीक हेतु मंगनी देिथ। हुनक श»दमे- “नाटा बरद बेिच कए, दुई धुर`धर कीन, अपन खेती किर कए आनकT मंगनी दीन।” एतबे निह, ओ कहने छिथ खेतक उपजा जोतपर िनभ>र करैत अिछ। थोड़ के जोितए अिधक मइ अिवए, ऊँच के बाि`हए आिर।
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जॱ खेत तैयो निह उपजए तँ डाक के पिरएह गािर। एिह लेल िव_ापितकालीन ममहम कमितयाकT सलाह दैत छलाह जे हरसँ तैयार कएला बाद खेतकT कोदािरसँ साधब उम होइछ। िमिथलाक कृिषमे पयत वषक अभाव Eाग ऐितहािसक कालिहसँ रहल अिछ। मानसून एतुका हेतु जुआवाजी कहल गेल अिछ। िकएक तँ अित वृिµ अनावृिµ आ दुिभ>Jक िशकार एतुका गृहxथ होइत रहलाह अिछ। तT पटौनीक Eभाव समय-समय पर होइत छलैक। िव_ापित सािहयमे सेहो पटौनीक उ²लेख भेटैत अिछ। पटेबाक एक यंL िवशेषक चच कएने छिथ। यथा- रहट संxकृत अरधदृ आ Eाकृितक अरहÜ। एिह मंLसँ अहुखन इनारवा कूपसँ पािन बहार कएल जाइछ। एकर अितिर±त चर, चॉंचर, डबरा, खा आ पोखिरसँ करीन ¥ारा पटौनीक काज लेल जाइत छल। तकालीन राजा ¥ारा बड़का-बड़का पोखिर खुनाओल गेल छल।। िमिथलामे एहन अनेको पोखिर िव_मान अिछ, जकर सकल आब बदिल गेल छैक। एिह तरहक पोखिर रजोखोिर कहबैत छल। िकवदि`त छल जे दैय ¥ारा एहन िवशाल पोखिर खुनल गेल छल। िव_ापित तँ भाव नदीक उ²लेख कएने छिथ- गौरी जखन िशवसँ खेती करबाक आ¦ह कएलिन तँ िशव कहलिथ`ह- “सभ बात मानल मुदा पािनक अभाव भेलापर की होयत?तखन खेती तँ करब असौकज> होएत।” एिहपर गौरी उर देलिन- “पाटय सुसिर धारा।” एिहसँ Âात होइत अिछ जे तयुगीन िमिथलामे पटौनीक काज गंगानदीसँ कएल जाइत छल। ओिह समयक कृषकमे Eगाढ़ Eेम होइत छलिन। एक-दोसरक िहत िच`तनक संग अित आदरक भाव रखैत छलाह। खेतसँ उपज िनिव>Í ..... आब तT बाधक हेतु रखवार राखल जाइत छल। अहुखन िमिथलाक गाममे रखवार रखबाक Eथा अिछ। रखवारकT िवशेष अिधकार गृहxथक ¥ारा देल गेल छल। कहुखन ई रखवार खेतक पूण> उपजकT हिथया लैत छल जे िव_ापितक पदसँ Âात होइछ- “खेत कएल रखवारे, लूटल ठाकुर सेवा भोर।” यदा-कदा एहनो होइत छलैक जखन खेतीक समय बीित जाइत छल तखन वष होइत छल। जेकर िव_ापितक पदसँ पुिµ होइछ- “समय गेले मेघे विरसब, की दहु तT जलधार।” एहना िxथितमे वषक पािनकT रोकबाक हेतु खेतमे ऊँच आिर बा`हल जाइत छल तािक खेतसँ पािन ससिर निह जाय। िव_ापितक प_सँ संकेत भेटैछ-
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“गेला पीड़ िपरोधक की फल।” पुन: िव_ापित अपन रचनामे Eेम ´पी फूलक हेतु शीलक आिर बाि`ह मयदाक रJा कएने छिथ- “फूल एक फूलवािर लगाओल मुरािर, जतने पटओलि`ह सुवयन वािर। चौिदस वॉधिल सीलक आिर, जीव अवलवन क´ अवधािर।” एिहसँ ईहो Âात होइछ जे लोक भूिमकT छोट-छोट टुकड़ीमे बyिट खेती योºय बनबैत छल। िव_ापितक समयक कृषकक समxत उपजाक अक उ²लेख कतहु एकठाम निह भेटैत अिछ। तखन एतए मसूरी, राहिड़, सिरसो, ितल जौ आिदक अवeय उपादन होइत छलैक। जतेक Eकारक अक उ²लेख भेल अिछ ओ सभ अ िविभ अवसरपर िमिथलामे िविभ देवी देवताक Eसताक हेतु दान कएल जाइत छल। एकर सगोपग वण>न िव_ापितक ‘वष>कृय’मे भेटैत अिछ। अनुकूल समयसँ यथेµ उपज होइत छलैक। गृहxथी नीक हालतमे भेलासँ िमिथलाक लोक बाहर निह जा कऽ घरिह रहैत छल। कहबी छलै- “कर खेती घरही भला।” इएह कारण छल जे एतुका जनमानस वाÝ पिरवेशक अनुभवसँ वंिचत रहक। िव_ापितक पूव> जिहना गृहxथीसँ उदास लोक छल तिहना किवक रचनाक Eभावसँ गृहxथीक ओर झुकाव भेल छल। खेतीसँ उप अक उपयोग मोला }यवxथा ¥ारा चलैत छल। मोलाक अ`तग>त य-िवयक िवधान छल। एकरो उ²लेख िव_पितक िलखनावलीमे आयल अिछ। तौल-नापक }यवxथामे टंक और मानी पथी चलैत छल। 4 मानी एक टंक होइत छलैक। ओिह समयक 1 मानी आजुक 16 सेरक बरा-बर होइत छलैक। खेतसँ पयत धानक Eाि¦क Eमाण छलैक जे पैघ गृहxथ डेिढ़या वा सवाईपर कज लगबैत छलाह। कजक अदायगी अगहन मासमे नवका धान भेलापर होइत छलैक। िव_ापितक िलखनावलीमे कृिष सब`धी चच िवलJण ढंगसँ कएल गेल अिछ। अxतु...!
िव_ापितक रचनामे िवरह वण>न िव_ापित अपन वहुमुखी Eितभाक पिरचय अपन रचनामे देलि`ह अिछ, मुदा का}य Eितमाक वाxतिवक पिरचय सुनक िवरह गीतसँ होइत अिछ। Eेमक Eगाढ़ता संयोगमे निह िवयोगेमे होइत छैक। महाकिव राधाक िवरह-वेदनाक सजीव आ मम>xपश® वण>न कएलि`ह अिछ। जॱ सूर िवEलभ kृंगारमे गोपीक वेदनाक टीसकT
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Ñमर गीतक अ`तग>त उजागर कएलि`ह तँ िव_ापित सू³म दृिµसँ राधाक मनोदशाक िवछोहावxथाकT िवरह गीत ´पमे उजागर कएल अिछ। समयानुकूल िवरिहणीक िxथितक xवाभािवक वण>नमे िव_ापितक कलम माजल छि`ह। सािहय शाxLमे kृंगार रसकT रस राजक संÂा देल गेलैक अिछ। कमनीयताक कारणT अ`य सभ रससँ एकर xथान उच मानल गेलैक अिछ। किवक वण>नमे सयता रहबाक ....... ई सयता Eेम वण>नमे सविधक पाओल जाइत अिछ। Eेमक िचLणमे ‘िवरह’कT महवपूण> xथान देल जाइत छैक। िवरहक ¥ारा Eेमक Eगाढ़ताक पूण> पिरचय भेटैत छैक। िवरह ओ कसौटी िथक जािहपर Eेम सुवण>क परीJा होइत अिछ। एकर अिधकतामे Eेमी एवम् EेिमकाकT एक दोसराक Eित वाxतिवक भावावेश एवम् त`मयता होइत अिछ। िवरह Eेम जीवक एक मम>xपश® घटना िथक। एिहसँ Eेमक पिरपुिµ होइत अिछ। िवरह एक Eकारक पुट िथक। िबनु पुटे वxLपर रंग निह चढ़ैछ। सािहय-दप>णमे उ²लेख अिछ- “न िबना िवEलभेन संयोग: सुखमुते, कषािमते िह वxLादो भूयान राग: Eव¶त।” अथत् िबनु िवरहक Eेमक xवतंL सा निह। एही ´पT िबनु Eेमक िवरहक अिxतव निह। Eेमक अिºनकT Eजविलत करैछ िवरह-पवन, Eेमक अंकुरकT बढ़बैछ िवरह जल, Eेम दीपक वि>काकT उस कबैछ िवEलभ। िवरह-वेदना मधुममी होइछ। एिहमे ´दन एवम् आमोद सामने मािलत होइछ। संयोगक अवxथामे हृदयमे आशा एवम् िनराशाक ओतेक ¥`¥ निह होइत अिछ जतेक िवरहक अवxथामे। वरहमे वासनाक अ`धकार Eाय: लुत भए जाइत अिछ तथा Eेमक िवशुË अनुभूितमे िवरही डूिब जाइत अिछ। kृंगार तथा िवरहक एतेक महवकT जनैत िव_ापित अपनाकT ओिहसँ फराक कोना रिखतिथ? एिह िवरह वण>नक हेतु िव_ापितक लेखनी सेहो चलल आ चलबेटा निह कएल अिपतु अपना रचना शि±तक भाव एवम् अनुभूितक बलसँ सxत भारत वष>कT भाव-िवभोर कए देलक। िवरह-वण>नमे िव_ापित हृदयक अनेक भावकT िनरलंकािरक भाषामे रिख सरलतासँ िचिLत कएल अिछ जे ओ भाव सभ हृदय पटलपर xवभावत: अपन अिधकार xथािपत कए लैछ। िव_ापितकT महाकिव कहएबाक एक Eधन कारण ईहो िथक जे िवरह एवम् िवरहक प¢ात् िमलनक वण>नमे िहनकर xथान उचम रहल अिछ। एिह िमलनमे ओ जे अपन xवाभािवकता भवुकता सु`दर क²पना तथा प_ योजनामे कमनीयता देखाओल अिछ से एक महान किवए सँ सभव भए सकैछ। Eेम सूLमे ¦िथत नायक लोकिनक िचL हुनक का}यमे सहसा जीवनक ययलय Eदिश>त कए देलक। पं. जगाथ सािहय दप>णमे िवरह अथवा काम दशाक दश अवxथा कएल गेल अिछ- अिभलाषाि¢`ता xमृित गुण कथनो ¥ंग संEलाप उ`मादो }यािधज>ड़ता मृित िरित दशाLeय कामदशा अथत् xमरण, गुण-कथन, अिभलाषा, मूछ,}यािध, उ¥ेग, Eलाप, जड़ता, उ`माद एवम् मरण। एिह दस अवxथाक अितिर±तो अनेक भावक िचLण िव_ापितक कएलि`ह अिछ। िवरहक महवपर दृिµपात करैत िव_ापित िलखैत छिथ-
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“जेहन िवरह हो तेहन िसनेह।” Eेमक असली xवादक अनुभव िवरहेक अवxथामे वाxतिवक ´पसँ भेटैत अिछ। िव_ापितक िवरह }यिथता रािधका अनिभÂ छिथ। हुनका समीपमे निह छिथ`ह। राधा हुनक िवयोगमे शु¤ शीष सुमनक सदृeय धाराशािलनी छिथ। हुनक अkुEवाहसँ भूिम कद>मचु±त भए गेल अिछ। राधा ओिह थालबला भूिमपर लेटा रहली अिछ। हुनक सखी सभ कृ°णक आगमनक आsासन दैत छिथ`ह पर`तु ई आsासन िवरहिºनमे घीक काज करैत छि`ह। िहनक यौवन िवरहक वेदनासँ िदनानुिदन Jीण भए रहलि`ह अिछ। ..... हुनक }यथा अिधकतर भए जाइत छि`ह। िव_ापित राधाक हृदयक मनोवैÂािनक वण>न करैत छिथ- “अंकुर तपन ताप यिद जारब, िक करब वािरदमेहे, ई नव यौवन िवरह गमाएब िक करब से िपया ने हे। हिर हिर की इए दैव दुराशा, िस`धु िनकट यिद कंठ सुखाएब के दूर करत िपया सा।।” एिहठाम दृµा`त दए रािधका जे अपन हृदयक दुख रखलि`ह अिछ से सहृदय संवेध िथक। सहसा भावावेशमे आिब िवधाताकT ‘हिर-हिर की दए वैव दुराला’किह भस>ना करैत अिछ। एतए मधुमणी वेदनाक िचLण कएल गेल अिछ। सखीक सवादसँ जखन काज निह चलैत छि`ह तखन राधा xवम कृ°णकT रोकबाक Eयास करैत छिथ- “माधव तोहे जनु जाए िवदेशे हमरो रंग रभस लए जएबए लएवह कोन संदेशे, बनिह गमज क´ होइत दोसर मित िवसिर जएवए पित मोरा। हीरा मिण मािणक एको निह मगव फेर मगव पहु तोरा।।” एतए राधाक Eेमक अलौिकक रसाxवाद अिछ। तक>क अनुसार आदान-Eदान सेहो होएबाक चाही। रंग- रभसक Eित बदल की दए सकताह? ओ िथक कृ°णक Eेम। राधाक याचना। फेर मगव पहु तोरा, िन:xवाथ> Eेमक भाव xपµ ´पसँ Eदिश>त भेल अिछ। कृ°ण मथुरा Exथानक वातसँ सपूण> गोकुल शोका कुल भए गेल अिछ। सव>L अkुक Eवाह एवम् क´ण चीकार Eारभ भए गेल- अव मथुरापुर माधव गेल, गोकुल गोकुले उछलला क´णाक रोल नयन जले देख बहए िहलोल।
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राधा बहुत िदनसँ आशा लगौने छलीह जे कृ°ण औताह। अविधक अवसान भऽ गेल। बाट तकैत-तकैत ........... भए गेलि`ह। अ`तमे िनराश भऽ िवलाप करए लगलीह। लोचन धाम फेदायल हिर निह आएल रे, िशव-िशव िजवओ ने जाए आस अ´ झाएल रे। पिहने रािधका कृ°णक Eेमक के`h िव`दु छलीह। एखन सभटा िवपरीत भए गेलि`ह अिछ। तखन अपनाकT सॉंझक तारा बुझैत छिथ। जकर दश>न अशुभ होइछ, संगिह भादवक चौठीक चान अपन मुखकT बुझैत छिथ जकर द>न अशुभकारी मानल जाइछ- िवरहािºनमे दºध रािधकाक लेल ई जतबा आ¢चय>क िवषय भेल ओतबए लाजोक। िवरहािºनसँ जज>िरत राधाक हृदयक टीस xपµ अिछ- “की हम सॉंझक एकसिर तारा, भादवचौठीक शशी, इिथ दुहु झझ कओन मोर आना जे पदुहँिख न हेरिल।।” कािलदासक िeत अपना िवलापमे कहैत छि`ह- “मदनेन िवना कृतारित: Jण माL िकल जीिवतेितमे, वचनीय िमदं }यविxथतं रमणxवा मनुयािम।” य_िप। एतएव देखैत छी जे िव_ापित कािलदासहुक िवरह-वण>नसँ टिप जाइत छिथ। एतए िवरह वण>नमे किवक क²पनाक चातुयदश>नीय अिछ- “लोचन नीर तटिन िमर माने, ततिह कलामुिख करए सनाने। सरस मृणाल करहजप माली, अएिनस जप हिरनाम तो´नी।।” अथत् िवरिहणी रािधका नयनक अkुसँ नदीक िनमण कए ओहीमे xनान कए रहल अिछ, तापय> जे ततेक अkुपात भेलि`ह अिछ जे ओ नारीक ´पधारण कए लेलक अिछ। कृ°णक िमलनक आशा समात भए गेलापर नाियका राधा अपन सौ`दय>क याग करए लगलीह अिछ। माL शरीर एवम् xनेह बिच गेल छि`ह- “सरदक रसधार मुख ´िच सोपलक हिरन के लोचन लीला। केसपाल लए भामिर के सोपलक पाए मनोभव पीला।।” पावसकालीन िवरहो¥ेगक एकसँ एक उम प_ पदावलीमे पाओल जाइत अिछ। दु:खािभभूत राधाक क´ण `दन हृदय िवदारक एवम् क´णोपादक अिछ। एिह समयक Eयेक वxतु जे संयोगक अवxथामे आन`द दायक अिछ राधाक हृदयकT िवदीण> कए रहलि`ह अिछ। िEयतमक िवरहमे ओ सभ वxतु कµदायक छि`ह। सिख हे हमर दुखक निह ओर...।
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िव_ापित कह..... िदन राितया।। एिह पदक अJर अJरसँ मºन हृदयक हाहाकार Eित Åविनत भए रहल अिछ। दुखक आिग वालामुखी बिन फूिट पड़ल अिछ। हिर िबनु केसे गमाओल िदन राितयाक भावक किवता रवी`hनाथ सेहो िलखलि`ह अिछ- तुिम यिद नादाओ, करो अमाम हेला। केमन करे कारबे आमार एमन बादल बेला।। संxकृत सािहयमे एिह Eकारक अनेक वण>न अिछ- “इतो िवधु¥²ली िवलिसत िमत: केतिकतरो, xफुरÚग`ध Eोधजलद िननाद xफूिज>तिमत: इत: केिलीड़ा कलकलख: प³मल¥श कथं भाxय`तेते िवरह िदवसा: संमृतरसा:।।” राधाक Eेमक त`मयता एतेक बिढ़ गेल अिछ जे ओकर वश`त निह भए सकैत अिछ। ओ कृ°णक नाम लैत-लैत एतेक त`मय भए गेल छिथ जे ओ अपनाकT xवयं कृ°ण मानए लगैत छिथन तथा राधा-राधा जपए लगैत छिथ। तJणिह हुनका अपन वाxतिवक दशाक Âान भऽ जाइत छि`ह। तथा िवरहक तीवß वेदनासँ ओ आुल भए उठैत छिथ। अहुखन माधव-माधव रटइत राधा भेिल मधाई। भेल स`देह।। एतए Eेम पराकाRापर पहुँिच गेल अिछ। नाियका राधाक ´पमे सेहो तथा कृ°णक ´पमे सेहो दुनू अवxथामे मम>}यथा सहैत छिथ। एिह पदमे िव_ापित Eेमक त`मयताक एहन िचL उपिxथत करैत छिथ जे संसारक सपूण> सािहयमे अपन सभता निह रखैत अिछ। इिह Eकारसँ िवरहमे िमलन एवम् िमलनमे िवरहक वण>न िव_ापितिहक उकृ°ता िथक। िव_ापितक िवरह वण>न कएक िवशेषता ई अिछ जे हुनक नाियका िवरहमे रिहतहु अपन भाºयक दोष दैत छिथ नायकक निह। िहनक रािधका कुलवती ललना छिथ तT Eेममे जतेक बाधा, यातना आर जतेक }यथा सहैत जाइत छिथ हुनक Eेम सोना जकy ओतेक चमकैत जाइत छि`ह। xवàोमे ओ कृ°णकT कटुि±त निह कहैत छिथ। अपन कम>क दोष तथा िक करत नाए दैव भेलवाम। एिह Eकारे अिछ- “सिख किह कहब अपतोष, हमर अभाग िपयाक निह दोष।।” अ`तमे युग-युग जीवथु लख कोष हमर अभाग हुनक निह दोष।। िवरिहणीक िचLण कािलदासक श»दमे-
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA 35
“क²याण वुËैरथवा तवाणं न कामचारी मिमशंक नीय:। ममैव ज`मा`तर पातकान िवपाक िनxफूज>थुर: Eस³य।।” सीता सेहो पूण> ज`म पापकT अपन दुखक कारण मानैत छिथ। एक xथलपर तँ राधा िनराश लऽ मृयुक अिभलाषा करैत छिथ जे भावोपूण> अिछ- “आन करह िहय िविह कएल आन, अवहु न िनक सभ किठन परान।।” िव_ापितक िवरहमे Eकृितक उ×ीपन, ´पक िचLण kृंगार रसक xथायी भाव रितकT जा¦ह करबामे सफल भेल अिछ। जा¦तावxथामे तँ कृ°णसँ िमलन असभव अिछए, xवàहुमे नाियकाकT कृ°णसँ िमलन निह भऽ पबैत छि`ह। तT नीन निह होइत छि`ह- “सपनहुँ संगम पाओल, रंग बढ़ाओल रे से मोर िविह िवधटाओल नी`दओ हेरायल रे।।” िन`द होइति`ह कोना? ओ तँ िEयतक संग िवदेश चल गेलि`ह- “सपनेहु ितलाएक त`ह सॲ रंगे, िन`द िवदेसल ति`ह िपआ संगे।।” कािलदासक मिणी- ‘वंिहतxम िEयेित’किह कऽ पितक िवरहकT ........... करैत छिथ। िक`तु एतए काकक भाषासँ िEयतमक आगमनक EतीJा एवम् आकुलताकT नव जीवन देल गेल अिछ- “काक भाष िनज भाषहु रे, िपय आओत मोरा Jीर खीर........................ कनक कटोरा सोमे चलु.................. िपआ आओत मोरा।।” जखन िवरहक कµ असहय भऽ जाइत छि`ह तँ स`देश पाठवए चाहैत छिथ- “के पितया ले जाओत रे...। पास भेल साओन मास।” िव_ापित िवरहक सू³मसँ सू³म दशाकT देखलि`ह तथा ओिहसँ अपन हृदयक सब`ध xथािपत कएलि`ह। ई िवरहक Eयेक दशाक वण>नमे अनुभूित पJ सव>था ऊँच xतरक एवम् मनो¦ाही रहल अिछ। िव_ापित नायक-नाियका दुनूक िवरहक िचLण कएलि`ह मुदा xमरणीय जेहन आकष>क राधाक िवरह वण>न भेल अिछ तेहन कृ°णक निह यथा- “अइसन नागर अइसन नव नागिर अइसन सप मोर, राधा िबनु सब बाधा मािनए नयन तेिजअ नोर।।” वाxतवमे राधा एवम् कृ°णक Eेम ‘सागर सागरोपम्’िथक।
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िवरहमे सजनक Eेम आओरो अिधक िनखिर जा उठैत अिछ। िव_ापित xवयं िलखैत छिथ- “सुजनक Eेम हेम समतूल, द´इते कनक दुगुन होए मूल।। टुटइते निह टुट Eेम अáुत, ये सन बढ़ए मृणालक सूत।।” िव_ापितक िवरह वण>न िवs सािहयमे अपन xथान मूघ>`य बनौने अिछ। िहनक भाव Eारभमे लौिकक xतरक तथा वैयि±तक रहैत अिछ, िक`तु जखन गभीरताकT Eात करैत अिछ तखन अलौिकक, समिµ सूचक एवम् िवsक िनिध भए जाइत अिछ। भाव पJक संगिह संग िवरह वण>नमे िहनक कला पJक समावेश सेहो पूण> ´पसँ भेल अिछ। कलामकता कृिLम निह अिपतु xवाभािवक अिछ। अनुभूित }य±त करबामे सरलता अपनाओल गेल अिछ। श»द चयन, वाºवैदºध, एवम् सु`दर उि±तसँ िहनक वण>न अलंकृत एवम् िवभूिषत अिछ। कलापJक रसक पिरपाकमे सव>L सहायक भेल अिछ। एिह EकारT देखैत छी जे िव_ापित अ`य भाषाक िवरह-वण>नसँ अिधक उकृµ वण>न कएने छिथ। अ`य िवशेषताक संग भाव पJ kेR रिहतहु कलापJक उपेJा निह भेल अिछ। भावक गभीरताक अिभ}यि±तक मनो वैÂािनक ढंगसँ कएल गेल अिछ। िमिथलाक संxकृितक अनुपालन सव>L करैत िवरिहणीक श»द-श»दसँ वेदना िन:kृत भेल अिछ।
ऐ रचनापर अपन मंत}य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। १.रबी`h नारायण िम k- दूटा आलेख , दूटा लघुकथा आ उप`यास नमxतxयै (आगy) २. डॉ. योगे`h पाठक ’िवयोगी’- उप`यास - हमर गाम (पिहल खेप ) १ रबी`h नारायण िमk िविवध Eसंग पोथीसँ दूटा आलेख कलनाबला बाबा िमिथलचलमे रहिनहार सायदे िकओ एहन हेताह जे कलनाबला बाबाक नाम निह सुनने होिथ।अयंत साधारण िलवास मे िनरंतर Eस ओ कलना मे कतेको साल सँ रहैत छलाह।ओिह समयमे हम कालेजक
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िव_ाथ® रही।परीJा भए गेल रहए।गामपर खाली रही।नौकरी ताकबाक Eयासमे बहत िचंितत रही।मोन बेचैन रहैत छल।हमर िमL xवग®य िवुकत िमk(लाल बचा) बहुत आxथावान लोक छलाह। हुनकासंग कए पैरे दुनू गोटे कलना िवदा भेलहुँ। सुनने रिहऐक जे बाबा बहत िनयम िनRासँ रहैत छिथ। जॱ हुनका लेल िकछु Eसाद लए जा रहल छी तँ बहुत पिवLता पूव>क लए जेबाक रहैत छल।रxतामे यL-कुL निह हेबाक चाही, अ`यथा कहyदिन अिनµ भए जाइत छल। हम सभ तँ खाली हाथेजाइत रही तँ िच`ताक बात निह रहए। कलना बाबा कT दश>नहेतु पिहलबेर हम अपन िमL लालबचाक संगे गेल रही।रxताभिरपैरे-पैरे गप-सप करैत हम दुनू गोटे दूपहिरआमे ओिहठाम पहुँचलहुँ।बाबा नाि`हटा फूसक घरमे रहिथ।ओिहमे बyसक फ§क लागल छल।एक-दू गोटे आओर ओिहठाम बैसल रहिथ। बाबा अयंत सहज ´पमे सभसँ गप-सप करैत छलाह।गपक ममे ओ कहलाह – “एकटा सेठ एकबेर हुनका लग आएल आ कहलक जे भगवान झुठ छिथ। हम ओकरा कहिलऐक जे तÛही झुठ छैँ।" ओ कहिथजे हुनका लग लोक कबुला कए लैत अिछ आ ओकर अनुपालन निह करैत अिछ जािह कारणसँ ओकरा अिनµ होइत अिछ।कैटा भ±त हुनका लेल Eसाद अनैत छलाह। तािह काजमे बहुत संयम ओ xवछताक Eयोजन रहैत छल।बाबाक कहब रहिन जे जौँ ±यो हुनका हेतु अशुË बxतु अनैत अिछ तँ ओकरा अपने अिनµ भए जाइत अिछ। तािह Eसंगे ओ कैटा उदाहरणसभ देलिथ। कलनाबला बाबा सँ हमरा तीन बेर भTट भेल। दू बेर तँ हुनके कलना आkम पर आ एक बेर ओ हमरा ओिहठाम आएल रहिथ तखन। दुनू बेर कलना हम अपन िमL लालबचाक संगे पैरे गामसँ कलना गेल रही। एकबेर हम जखन बाबाक दश>नक हेतु गेलहुँ तँ रxतामे मोनमे भेल जे बाबाक एतेक नाम सुनैत िछअिन, िकछु स_ः देखितऐक। बाबाक ओतए हम दुनूगोटे पहुँचलहुँ तँ बाबा कहलाह जे आइ रिह जाह। हमसभ हुनकर आÂानुसार nिक गेलहुँ। राितमे सामनेक पोखिरक घाटपर हम सभ सुित गेलहुँ।अध>रािLमे देखैत छी जे एकटा बyस हीिल रहल अिछ आ ओकर फुनगीपर धोती सुखा रहल अिछ। डर भए गेल जे की बात छैक? उिठकए ठाढ़ भेले रही की देखैत छी जे लगेमे बाबा हँिस रहल छिथ आ हुनकर हाथमे धोती छिन।बाबा िकछु-िकछु कहबो केलाह। एकबेर हमर अनुज(सुरे`h नारायण िमk) बाबाकT अपना ओतए चलबाक हेतु आ¦ह केलिखन।बाबा मािन गेलाह। कारसँ बाबाक संगे हमहुँ रही।बाबाक िसपहसलारसब सेहो रहिथ।बाबा पिहने िगरजा xथान गेलाह। ओिहठाम माताक दश>न केलाह।फेर कार गाम िवदा भेल। गाम पहुँचलाक बाद ओ हमरा ओिहठाम चौकीपर बैसलाह।कोनो ओछाओन निह ओछबए देलिखन। अखरा चौकी पड़ बाबा पड़ल-बैसल रहलाह।ताबे तँ सॱसे गामक लोकक करमान लािग गेल।ततके भीड़ जमा भए गेल जे माइकसँ ओकरा शत कएल गेल।माइकेपर
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बाबा िकछु उपदेश देलाह।सभकT आशीवद देलिखन। हमर अनुज(सुरे`h नारायण िमk) कT आशीवद देलिखन जे तोरा बेटा होइ।से सय बेल।हुनका दूटा पुL तकर बाद ज`म लेलिखन।कतबो कहल गेलिन ओ िकछु निह खेलिथ आ थोड़ेकालक बाद कारसँ आपस चिल गेलाह। बाबाक देहपर माL एकटा धोती रहैत छल जकरा ओठेहुनधिर पिहरने रहैत छलाह। लोककT देिख कए ओ अáुत िनम>ल हँसी हँसैत छलाह। खेबाक कोनो िचंता निह रहैतछलिन।नाि`हटा खोपड़ीमे मािटपर बाबा पड़ल वा बैसल रहैत छलाह। ओतहुँ लोक अपन xवाथ>सँ आ`हर भेल हुनका तंग केने रहैत छल। “हौ बाबा!िकछु करहक ने...।” जखन बड़तंग कए दैन तँ कहिथ-"का कहली? की भैल?"। मुदा जकरा ओ बाक दए दैत छलाह से जnर उËार भए जाइत छल। बाबाक कहब रहैत छलिन जे जँ ±यो िकछु कबुला करैत छिथ तँ काज िसिË भेलापर ओकरा तुरंत पालन करक चाही अ`यथा अिनµ होइत अिछ। बाबाक आkममे कतेको गोटे रहैत छलाह वा अबैत-जाइत रहैत छलाह। ओिहठाम रहिनहार लोकसभ एकिह सyझ अपनेसँ राि`ह भोजन पबैत छलाह। जखन ओसभ बहुत गोहराबिथ तँ बाबा हँसैत किहतिथन – “ ठीक, बनाबभोजन”। भोजन जहन बिन कए तैयार भए जाए तखन बाबाक आÂा चाहै छल जािहसँ ओ सभ भोजन शुn करिथ। बाबा िकछु बजबे निह करिथ। लैह, आब तँ बड़का िवपि। भोजन पड़सल धैल अिछ आ बाबाक आदेशक EतीJा भए रहल अिछ। बाबाके ओ सभ गोहरा रहल छिथ।बाबा बड़छगु`तासँ हुनकासभकT देखिथ। जखन ओसभ बाबाकT आ¦ह करैत-करैत थािक जािथ तखन ओ किह िदतिथ- "शुn करह"।एिह तरहT बाबा हुनका लोकिनक धैय>क परीJा लैत छलाह।तकरबाद बाबा ओिहठाम बैसल ओकरासभकT खाइत देिख बहुत Eश होइत छलाह। बाबाक आkममे िकछु गोठे िनर`तर रहैत छलाह।िकछु गोटे अबैत जाइत रहैत छलाह। िखछुगोटेतँ माL पेट पोसबाक हेतु ओतएपड़ल रहैत छलाह। कैटा भ±त बाबा लेल कंबल वा आन-आन चीज-वxतु अिनतिथ।बाबा ओकरा छुिबतो निह छलाह। आस-पास रहिनहारसभ ओिह वxतुसभकT लुिझ लैत छलाह।बाबा आ¢य>चिकत भए देखैत रहैत छलाह। बाबाक दरबारमे पैघ सँ पैघ लोकसभ अबैत रहैत छलाह।जौँ बाबाकT इछानिह होिन तँ हुनकर पट खुिजते निह छल। जाबे बाबा जीबैत रहलाह, ओिह पिरप§ाक लोकक अपन आशीवदसँ क²याण करैत रहलाह। िबना कोनो लोभ लालच कT संपूण> जीवन ईsरक आराधनामे लगा देलाह।हुनक िनधनसँ एकटा महान संत एिह संसारसँ मु±त भए गेलाह संगिह बहुतरास लोकक मोनमे अथाह kËा छोिड़ गेलाह।हुनका शत-शत Eणाम!
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डॉ. सुभh झा (संxमरण) इलाकाक चिच>त }यि±तव छलाह-डा० सुभh झा। धोती, िमरजइ सन कुत पिहरने अय`त सरल, साधारण िलबासमे डा±टर साहेब अड़ेर हाट चौकपर बरोबिर देका जएतिथ। गप-सपमे ओ अपन िबचार अित xपµतासँ रखैत छलाह।तािह ममे जॱ कने-मने िववादो भए गेल िकंवा ±यो कटाJो कए देलक दँ कोनो बात निह। िमिथलेटा निह, अिपतु समxत भारतवष>मे तकालीन िव¥ान लोकिनमे हुनकर EितRा छलिन।हुनकर िवषयमे िकछु कहब आ िलखब किठन काज अिछ तथािप xमरणमे िकछु घटना अिछ जे िलिख रहल छी। घटना सन् १९६५-६६ ई०क िथक। नवतुिरयासभ गाममे एकटा पुxतकालय xथािपत करए चाहैत चलाह।िकछु िदनक Eयासक वाद िकछु पोथी, िकछु पैसाचंदा भेल।िकछु आलमारी सेहो बनाओल गेल।तकर बाद भेलैक जे ओकर उäाटन कएल जाए। उäाटन के करताह? आपसी िवचार- िवमश>क बाद डा० सुभh झाक नाम पर आम सहमित भेल।डा० सुभh झा िकछु िदन पूव>सेवा िनवृत भए गामे रहए लागल छलाह।आ यदा-कदा हमर गामक चौकपर अबैत-जाइत देखा जाइत छलाह। उäाटन काय>ममे डा० सुभh झाकT सेहो िकछु कहबाक आ¦हकएल गेल। बहुत दुरा¦ह कएलापर ओ बजबाक हेतु तैयार भेलाह। संिJत भाषणक ममे ओ कहलिन जे एिह इलाकामे अनुसंधानक हेतु पयत साम¦ी यL-तL पसरल अिछ।ओकरासभ कT एहन पुxकालयमे सुरिJत राखल जा सकैत अिछ।संगिह कबीरदासपर उपल}ध साम¦ीक उ²लेख करैत ओ कहलाह जे एिह बातक Eमाण अिछ जे कबीरदास मैिथल छलाह आ मैिथलीमे कतेको रचना कएलिन अिछ। १९७३ ई०मे लगभग एकमास डा० सुभh झाक रyची िxथत आवास पर रही। तखन ओ योगदा सतसंगिव_ालयक Eाचाय> रहिथ।ओही पिरसरमे Eाचाय>क िनवासमे ओ रहैत छलाह।हुनका संगे पिरवारक आर सदxय निह छल।घरक काज करबाक हेतु एकटा नौकर छल। भोजन ओ xवयं बनबैत छलाह। Eातःकाल भात-दािल-आलूक सा बनाबिथ। रातुक भोजनक }यवxथा सेहो तखने कए लेिथ।राितमे बेसी काल आँटाक चोकरकT दूधमे उसिन कए खाइत देिखअिन।राितमे सूतबासँ पूव> ओ िनयिमत ´पसँ पढ़ैत छलाह।सyझमे ितन-चािर गोटे बैिस कए शाxL चच करैत छलाह।एक िदन सyझमे डा±टर साहेबक संग कतहु जाइत रही।िर±साबला सब जतेक पाइ मगै, से देबाक हेतु ओ तैयार निह होिथ।िर±सातकैत-तकैत अ`ततः सॱसे राxता िबित गेल। एक िदन एिहना संगेटहलैत रहीतँ साईबाबाक चच उठल।ओ हुनकर बहुत Eशंसा करिथ आ कहिथ जे साईबाबा सिरपहुँ िसË पुnष छिथ जकर हुनका EयJ अनुभव तखन भेल रहिन जखन ओ बाबाक आkममे िसरडी गेल रहिथ। कहलाह जे आkममे हुनका पहुँचते देरी बाबा हुनकर मोनक Eक उर देबय लगलिखन।आरो कएकटा Eसंगसभ ओ सुनओलिथ। योगदा सतसंग महािव_ालय नवे बनल छल। डा±टर साहेब पूण> तपरतासँ ओिह िव_ालयक िवकासमे लागल रहैत छलाह। पिरसरमे आkमक आबास होइत छल। चा´कात गाछ सभक बीचमे बनल भाषण
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मंडपसभ।ओही पिरसरमे एकिदस आkम छल जािहमे एक िदन मy आन`दमयी आयल रहिथ।हम डा±टर साहेबक संगे ओतए रही।मy आन`दमयीक अिबतिह पूरा हyलमे शित पसिर गेल।ओ िकछु बजली निह।चुपचाप सभगोटे Åयान केलक।कोनो भाषणबाजी निह भेल। एकिदन डा±टर साहेबक डेरापर आंगनमे ठाढ़ रही। हमरा देिख डा±टर साहेब गंभीर भए गेलाह आ कहला जे नीकसँ पिहरल-ओढ़ल करह।जीवनमे सफलताक हेतु एिहसभकT बहुत महव अिछ।ताहीममे कहलाह जेएही कारणे ओ कएकबेर उच पदसभक चयनमे पछिड़ गेलाहय_िप ओ पदक हेतु पूण> योºय रहिथ। डा±टर साहेबक दोसर पुL भाxकरजी इलाहाबाद िवsिव_ालयमे जम>न भाषाक }या¿याता छलाह। हुनकर डेरापर डा±टर साहेब अबैत -जाइत रहैत छलाह। सन्१९८३ ई०क गप अिछ। एकिदन हम हुनका दुनू गोटेकT नोत देने रिहअिन। दुनूगोटे कोनो कारणसँ आगा-पाछा भए गेलाह। डा० झा पिहने चलल रहिथ। भा°करजी पाछू चललाह आ डेरापर पहुँिच कएबहुत परेशानीमे रहिथ जे आिखर ओ कतए चिल गेलाह। हमसभ गोटे हुनका ताकए लगलहुँ।कतहु नजिर निह आबिथ।रातुक समय छल।भोजनमे िवलंब भए रहल छल।ताबत थोड़े कालकबाद मकानक नीचासँ ओ जोर-जोरसँ हमर नाम लए कए िचकिर रहल छलाह।हमरा सभकT जानमे जान आएल।पता लागल जे ओ हमर डेरा तकैत-तकैत धोबी घाट चिल गेल रहिथ। हमर मकान मािलक धोबी छल आ तकरे अनुमानमे ओ धोबी घाट चिल गेल छलाह। डा±टर साहेब अित अÅययनशील छलाह। जखन कखनो फुरसितमे रिहतिथ तँअÅययन करएलिगतिथ। एकिदन Eातः एगारह बजे इलाहाबाद मे भा°करजीक डेरा पर गेलहुँ। डा±टर साहेब ओतिहरहिथ। कहलाह जे हम एगारह घंटासँ िनर`तर पिढ़ रहल छी।मैिथलीमे श}दकोशक िनमणमे लागल छलाह। एकिदन हम डा±टर साहेबक संगे इलाहाबादमे कतहुँ जाइत रही।रxतामे पुछिलअिन जे भगवान छिथ िक निह? ओउर देलिन जे ई कहब तँ किठन अिछ जे भगवान छिथ िक निह पर`तु जौँ भगवान छिथ तँ बहुत बइमान छिथ, कारण दैत ओ कैटा उदाहरण देलिन। जेना पेटमे बचािकएक मिर जाइत छैक? आिखर ओ ज`मसँ पूव¶ की गलती केलक?आ जौँ गलती केलक तँजनिम कए ओकरा भोगए।गपक ममे ओ कहलाह जे सEित जीबैत लोकमे िबहारमे संxकृतक सभसँ पैघ िव¥ान छिथ। सािहय अकादमीक तकालीन अÅयJ डा० सुनीित कुमार चटज®क ओ बहुत Eशंसा करिथ आ कहित जे हमरा लेल ओ भगवाने छलाह।डा±टर साहेबकसंगे एकिदन टहलैत रही।गपक ममे ओ अपन Eवासक दौरान भेल दू गोट घटनाक चच कएलिन। डा±टर साहेब ¬ेनसँ कतहुँ जाइत रहिथ।कोनो टीसनपर गाड़ी ´कल तँ डा±टर सव>प²ली राधाकृ°नन ओिहमे सवार भेलाह।डा±टर सव>प²ली राधाकृ°नन बैसबाक हेतु घुसबाक हेतु कहलिखन।डा±टर सुभh झा अिड़ गेलाह एवम् डा±टर सव>प²ली राधाकृ°नन कT जगह निह देलिखन।रyचीमे गपक ममे एकिदन डा±टर साहेब कहलाह जे ओ पुxतकालयमे नौकरी करैत रहिथ।ओही ममे हुनकासँ जे kR पदपर अिधकारी छलाहसे हुनकासँ िकछु गलत काज कराबए चाहैत छलाह।ओ से करबाक हेतु सहमत निह भेलाह। तािहसँ कुिपत भएकए ओ अिधकार िहनका बहुत तंग करैत छलिन।डा±टर साहेबकT पता रहिन जे ओ अिधकारी गलत काज करैत अिछ। चुपचाप ओकर गलत काज बला कागजातक
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA 41
Eितिलिप ओ रखैत गेलाह।पुxतकक य-िवय मे ओ अिधकारी बहुत हेरा-फेरी केने छलाह, जकर कागजी सबूत डा±टर झा लग छलिन।बादमे एिह बातक आरोप भेलएवम् जyचक बाद ओ अिधकारी दोषी सािबत भेल।अपनाकT बचाबक हेतु ओ चाहलक जेपुxतकालयकT जे Jित भेल रहैक से आपस करी मुदा ओकर पिरवारक लोक पैसा आपस निह कएलक।एिहबात सभसँ दुखी ओ भयभीत भए ओ आमहया कए लेलक। डा±टर झा सँ जे कनी-मनी हमरा संपक> भेल ओकरा संयोग किहसकैत छी। बचेसँ हम हुनकर नाम सुनैत रही।सौँसे इलाकामे ओचचक िवषय रहिथ आ छोटसँ पैघ लोकक संपक>मे सहजतासँ अबैत छलाह।ओ धुनक प¤ा छलाह।जािह काज मे लािग जािथतकरा पूण> करबाक हेतु Eाण-Eणसँ जुिट जािथ। हुनका अपन गाममे गाछ सब रोपबाक इछारहिन। किह निह, कतए-कतएसँ आिनकए सालक साल ओ आमक गाछ रोपैत रहलाह। हुनक Eितभा ओ िव¥ताक वण>न करबाक कोनो आवeयकता निह बुझा रहल अिछ।आडवर रिहत जीवन शैली एवम्अितशय सहज }यवहारक संग xपµवािदताक लेल ओ सभ िदन मोन पड़ताह। धोती-कुत पिहरने, पैरे खेतक आिरए-आिरएचलैत-चलैत पता निह ओ िनर`तर कोन िचंतनमे Åयानमºन रहैत छलाह। अपन मौिलकता एवम् अपन बातकT दृढ़तासँ रखबाक लेल ओ सभ िदन मोन पड़ैत रहताह।
रबी`h नारयण िमkक दूटा लघुकथा पंचैती जमाना कतए चल गेल मुदा गाम-घरक लोक अखनहुँ दू सौ बख> पाछा अिछ। लोककT अखनहुँ च`hमामे एकटा बुिढ़या चख कटैत देखाइत छैक। लोक अखनहुँ ¦हण लिगते xनान करए चल जाइत अिछ। िकएक तँ ओकरा छुित भए जाइत छैक। लोकक संxकार-संxकृित सेहो आधुिनक ओ पुरातनक ¥ंदक बीच चिल रहल अिछ। पुरना पीढ़ी आ आधुिनक लोकमे अखनहुँ बड़ अ`तर छैक। तT एकटा xवत: सव>L िव_मान तनाव कोनो Jण झगड़ाक ´प लए लैत अिछ। एही कारणसँ गाम-घरमे पंचैतीक जबरदxत गुंज़ाइश छैक। मुरली पyच भॉंइ छलाह। घरक िहसाब-िकताब eयाम रखैत छलिखन। मैि¬क तक पढ़ल छलिखन। बेस चलाक-चुxत। लगानीक असूल करबामे पारंगत। हुनकासँ छोट तीन भाए- मोहन, ´दल आ लखन। लखन कमे बएसमे िदवंगत भए गेला। हुनकर एक माL पुL जीवनकT िपी सभ पिहनिह फराक कए देलकिन। पyच बीघा जमीन िहxसामे पड़लिन। लगानी-िभरानी जे िकछुछलिन, सभटा eयाम बैमानी कए लेलिखन। शेष चा´ भाएमे शु´मे तँ खूब भेल छलिन मुदा िकछु िदनक बाद ´दलक xवग> बास भए गेलिन। हुनका माL तीिनटा क`या छलिन। तीनूक िबआह िपी सभ केलिखन। िबआह करएबाक ममे
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सभटा जमीन तीनू भाए अपना-अपना नामे करा लेलिन। मसोमातकT िकछु निह रिह गेल छलैक। गामक िकछु फनैत सभ ई गप मसोमातक कानमे दए देलकिन। मसोमात तँ ओिह िदनसँ अिगआ-बेताल छिथ। ए¤ो िदन एहन निह भेल जे हंगामा निह भेल। बुध िदन रहैक। गाममे हाट लगैत छलैक। गाम-गामक लोक हाटपर जमा छल। सरपंच साहेब उफ> पलटू बाबू िचकिर-िचकिर कए सैकड़ो लोककT जमा कए लेलिन। सभ गोटे तय कएल जे मसोमातक संगे बड़ भारी अ`याय भेलैक अिछ।पिरणामत: दोसर िदन तीन बजे सरपंच साहेबक दलानपर पंचैती करबाक िनण>य भेल। दोसर िदन दुपहिरयेसँ सॱसे गामक लोक सह-सह करए लागल। सरपंचक ओिहठाम बैसारी रहैक।बेर खसैत-खसैत सॱसे दरबाजा लोकसँ भिर गेल। अगल-बगलक गामक Eमुख-Eमुख लोक सभ सेहो बजाओल गेल छलाह। मुिखयाजी एखन धिर निह आएल छलाह तT ओिह टोलपर आदमी पठाओल गेल। चािर बजैत- बजैत लोकक करमान लािग गेल। सरपंच साहेब अपन xवागत भाषण कही या जे कही, Eारभ केलिन। मसोमात सेहो कोनटा लागल ठािढ़ छलीह। चा´ भाएकT कोनो फझित बyकी निह रहल। गाम-गामक पंच सभ सेहो ‘िछया-िछया’ कहय लगलिखन। मुदा eयाम बेस चलाक लोक छलाह। ओ मुिखयाकT राितयेमे पyच साए टाका दए अपना गुटमे कए लेने छलिखन। मुिखयाजी सरपंचपर कड़िक उठलाह- “ई अ`याय निह चलत। आिखर तीनटा जे क`यादान िपी सभ केलिखन तािहमे खच तँ अवeये भेल हेतैक। फेर मसोमात तँ असगर छिथ। जमीन लए कए करतीह की? बारह मोन खोिरश िहनका अवeय भेटक चाही। बाजू यौ eयाम बाबू, अपने एिहपर तैयार छी?” eयाम बाबू xवीकृितमे अपन मुड़ी िहला देलिखन। ई बात सरपंचकT एकदम निह ´चलैक। ओ बमकए लागल। संगे जे ओकर चािर-पyचटा लठैत सभ छलैक सेहो सभ बमकए लागल। जबाबमे चा´ भाए सेहो भोकरए लागल। सरपंचक दरबाजापर बेस हंगामा बजिड़ गेल। अ`ततोगवा ई िनण>य भेल जे दूनू गोटे एकादशी िदन पyच Eमुख-Eमुख }यि±तक समJ हिरवंशक पोथी उठा कए सपत खािथ आ ओहीसँ बात फिड़छा जाएत। Eात:काल सरपंच साहेबक ओिहठाम गाएक गोबरसँ ठyव कएल गेल। ओिहपर हिरवंशक पोथी राखल गेल। पyचो पंच बैसल रहिथ। eयाम मोने-मोन खुश छलाह। पता निह, कतेक बेर ओ एिहना हिरवंशक पोथी उठाए लोकक घर-घड़ारी घॲिट गेल रहिथ। हनहनाइत, फनफनाइत अएला आ हिरवंशक पोथी उठा लेलाह। पंच सभ तकैत रिह गेला। मसोमात ओहीठाम अचेत खिस पड़लीह। मसोमातकT बारह मोन खोिड़सक अिधकार माLक घोषणा पंच समुदाय कए देलक। पंचैती समात भए गेल। बुधन गामक मानल लठैत छलाह। परमा बाबू बी.डी.ओ. साहेबसँ एकटा चापा कलक }यवxथा करौने छलाह। कलक तीन-चौथाइ खच सरकारी मदितसँ भरल जएतैक। बुधन ओ परमा बाबूक घर सटले छल। कल कतए गाड़ल जाए तािह हेतु जबरदxत झगड़ा बजिर गेलैक। तय भेलै जे हीरा बाबूकT पंच मािन लेल
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जाए। ओ जे फैसला कए देिथन से मािन लेल जाए। हीरा बाबू EितिRत, पढ़ल-िलखल एवम् ओजxवी लोक छलाह। सपितक नीक संगह कएने छलाह। Eात: काल ओ घटना xथलक िनरीJण कएलाह। बुधन लठैत छल। कखनो ककरो गिरया सकैत छल। बेर-कुबेर ओ लाठी लए कए ठाढ़ो भए सकैत छल। परमा बाबू पढ़ल-िलखल सÔय ओ शा`त xवभावक लोक छलाह। पिरणामत: हीरा बाबू फैसला कए देलिन जे कल बुधनक घर लगक खाली xथानपर गाड़ल जाए। बुधन Eश भए गेलाह। परमा बाबू चुप, समाजक लोक चुप। सोमन बाबू कामरेड छिथ। गाममे कतहु ±यो कोनो गड़बड़ी करैत तँ ओ अवeय ओिहठाम पहुँिच जाइत छलाह। गरीब लोक हुनका अपन नेता मानैत छल। अमत टोलीक एकटा xLीगण अपन घरबलाकT छोिड़ कए िनपा भए गेल छिल। चािर-पyच िदनुका बाद सॱसे गाममे जबरदxत हंगामा भए गेल। शोभा बाबू ओिह मौगीक संग िनपा। मुदा एिह बेर कोनो पंचैती निह भेलैक। जे जतिह सुनलक ओ ओतिह गुमी लािद देलक। समरथकT निह दोष गोसाई स_: चिरताथ> भए गेल। जीबछ क अबाजमे बेस टीस छिन। लोक कहैत अिछ जे िहनकर िपता बड़ सुखी-सप छलिखन। मुदा देिखते-देिखते ओहने दिरh भए गेलिखन। ओिह घटनाक पाछू सेहो एकटा पंचैतीक हाथ छलैक। जीबछक िपताक kाËछलिन। गामक Eमुख-Eमुख लोकक बैसार भेलैक। जीबछ बाबू सन EिसË ओ धनीक लोकक kाËमे कमसँ कम जबार तँ खेबेक चाहैक छलैक। सएह भेलैक। चािर िदन धिर भोज होइते रहलैक। जीबछ एिह काजमे बीस हजार टका घरसँ िनकाललाह। दस हजार टका कज> लेबए पड़लिन। अम´ िदयादे छलिखन। धर दए िबना कोनो िहचकसँ हुनका पैसा दए देलक। काजक बाद कहलक- “कोनो बात ने। जखन पैसा हो तखन दए देब।” दू साल बीित गेल। जीबछक हालत िदन-िदन बर होइत गेल। तीन सालक बाद अम´ एकाएक चढ़ाइ कए देलक। ओकरा िहसाबे सूद सिहत ३५००० टाका कज> भए गेल छलैक। अम´अपन लठैत सभक सहायतासँ ओकर सभटा जमीन जोित लेलिखन। गाममे बेस बबंडर भेल। पंचैती बैसल। सॱसे गामक नीक लोक सभ जमा भेलाह। अम´क िवजय भेल। सभ पंच अम´क पJमे हाथ उठा देलिखन। अम´ सभ जमीन जोित लेलाह। सएह भेल पंचैती। जीबछओही पंचैतीक परातसँ फ¤र भए गेलाह। कहबी छैक जे पित-प¾ीक पंचैती निह करी। कारण किह निह, ओ कखन झगड़ा करत आ कखन एक भए जाएत। मुदा आइ-कािp एहनो कलाकार सभहक कमी निह अिछ जे दूनू }यि±तमे झगड़ा लगा कए मटरगxती करैत रहैत छिथ। बेरपर पंचैती सेहो कए दैत छिथ। बतहु िमसर एहने }यि±त िथकाह। पुवािर गामवाली बेस हरािह छलीह। दूनू }यि±तमे खटपट होइते रहैत छिन। ओिह िदन पुरवािर गामवाली कतहु हकार पुड़ए गेल छलीह, घुरैत-घुरैत अबेर भए गेल रहिन। घुमैत-िफरैत बतहु बाबू पहुँचलाह। पुरवािर गामवालीक घरबलाकT लोक खलीफा कहैत छल। खलीफा दरबाजापर गरमाएल छलाह। बतहु िमसरपुछलिखन- “की बात छैक? आइ बड़ गरमाएल लािग रहल छी?”
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एतबा ओ पुछलिखन की खलीफा अपन घरवालीकT एक हजार फझित करए लगलिखन। तािह पर बतहु िमसर टीप देलाह- “हँ बेस कहैत छी भाए। आइ-कािpक xLीगण सभ तँ एहने होइत छैक। हुनका तँ हम ज§ाक घरमे गप हकैत देखिलयिन अिछ।” एतबा गप बािज ओ ओतएसँ हिट गेलाह। थोड़ेक कालक बाद पुरवािर गामवाली लौटलीह। दूनू }यि±तमे महाभारत जे भेल से देखएबला छल। चा´कातसँ लेाक सभ दौड़ल आएल। पुरवािर गामवाली बजैत रिह गेलीह। अ`ततोगवा, खलीफेकT लोक उठा कए दोसरठाम लए गेल। दूनू }यि±त ओिह िदनसँ फराक-फराक रहए लगलाह। घरमे खान-पान ब`द। बतहु िमसर फेर उपिxथत भेलाह आ खलीफाकT कहलिखन- “भाइ! एिह तरहT केते िदन चलत? आपसमे बैसार कए िलअ आ मेल-जोलसँ समय िबताउ।” तय भेल जे कािp आठ बजे बैसार होएत। दोसर िदनबैसार भेल। दूनू }यि±त अपन-अपन पJ कहए लगलिखन। बहुत रास गप-सप भेलाक बाद बतहु िमसर ई तय कए देलिखन जे आइ िदनसँ खलीफा अपन घरवालीक गंजन निह करताह। तािह पर पुरवािर गामवाली कनखी मारलिखन। खलीफा मुँह तकैत रिह गेलाह। बतहु िमसर तमाकुल चुनबैत-चुनबैत थपरी मारलाह आ ओिहठामसँ घसिक गेलाह। गाम-घरमे पंचैती एिहना होइत अिछ। जकर लाठी तकर मिहष। ¦
मुिखआक चुनाव सyझ कए गाममे समाचार-पL आयवत> अबैत छलैक। गाम भिरक लोक चौकपर एकÜा भए जाइत छलैक। चाहक दू-तीन दोकानपर लोक भ-भ करैत रहैत छल भादो जकy। अखबार अबैक िक गामक पढ़ुआ सभ ओिहपर टुिट पड़ए। ओिह िदन अखबारमे सरकारक एकटा सूचना बहराएल रहैक जे राय भिरमे मुिखयाक चुनाव एक मासक भीतर सप भए जाएत। औ बाबू! ई समाचार िक आएल जे सॱसे गाममे जेना करे`ट लािग गेल। ओिह गाममे एकसँ एक सरगना लोक छलाह। धने-जने पिरपूण>। मोहन बाबू, पलटन बाबू, हीरा बाबू, झगड़ू बाबू आिद-आिद।मुिखया के बनए, सरपंच के बनए। िविभ गुटमे इएह घोल-फच¤ा शु´ भए गेल। सॱसे गाम ख{ड- ख{डमे बँटल छल। पूबाइ टोलक सरगना मोहन बाबू छलाह। पलटन बाबू ओ हीरा बाबू दिJणवाइ टोलक Eभावी लोक छलाह आ झगड़ू पछबाइ टोलक मानल लठैतमेसँ एक छलाह। उरवाइ टोलक ±यो नेता निह छल, कारण
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ओतए बेसी जन-बोिनहार रहैत छल आ अपनेमे ताड़ी पीब कए कटा-कटी करैत रहैत छल। ओकरा सभहक भगबान रोिटये छलैक। मािलक सभहक ओिहठाम जाए, जखन जे काज भेटैक से करए आ बोिन लए कए चल आबए। एमहर जिहआसँ चुनाव सभ होमए लगलैक अिछ ओहो सभ िकछु सुगबुगाएल ज´र अिछ, मुदा कोनो खास निह। किहओ काल बाहरसँ नेता सभ अबैत छैक तँ ओहू टोलमे चहल-पहल रहैत छैक। चा´ टोलमे झगड़ू बाबूकT बेस चलाचलती छैक। लाठीक बल छैक। पyचटा बेटा छिन। सभकT पहलमानीमे पारंगत कराओल गेल। बेस लठैत सभ छल पyचू बेटा। ओकरा सभहक डरे इलाका शा`त भए जाइत छल। तँए केहनो पढ़ल-िलखल लोककT झगड़ू बाबकT नमxकार करए पड़ैत छलैक। चुनावक समाचार पिबते झगड़ू बाबू बमकए लगलाह। Eात भेने हुनका टोलक सभ लठैत अपनामे बैसार केलक। मुिखया आ सरपंचक नामक फैसला तँ निह भए सकलैक मुदा एतबा तय भए गेल जे वत>मान मुिखया आ सरपंचकT अबeय हराबक अिछ। झगड़ू बाबू भोरे सात बजे नहा-सोना कए चौकपर पहुँचलाह आ बमकए लगलाह- “सभ चोर है, मुिखय चोर है। सरपंच चोर है, सभ को ठीक करेगा।” आिद आिद...। चा´कात भ-भ करैत लोक सभ जमा होमए लागल। “की बात छैक झगड़ू बाबू?”-िकओ ओिहमे सँ पुछलिखन। “की बात छै से तोरा सभकT कोना बुझेतह? एहन बैमान सरपंच आ मुिखया आइ धिर एिह इलाकामे निह भेल। किहओ गामबलाकT कोटाक चीनी ठीकसँ भेटलैक? एिह बेरक चुनावमे एिह बैमान सभकT हरेबाक अिछ..!” लोक अबैक, लोक जाइक मुदा झगड़ू बाबू भाषण ओिहना अनबरत चिलते रहिन। रेलगाड़ीक पिहया जकy घुरा-िफरा कए ओतिह पहुँिच जाइत छला : “इस बैमान सभको हराना है।” झगड़ू बाबूक भाषण चिल रहल छलिन िक ताबतेमे सरपंच साहेब घुमैत-िफरैत आिब गेलाह। चा´कातक लोक हुनका िदस तकैत छल। मुदा झगड़ूक भाषण यथावते चिल रहल छल। सरपंच साहेब एक-दू बेर झगड़ूकT बुझाबक Eयास केलिथ। ताबतेमे सरपंचक भाितज मुनमा पहुँच गेल। हाथमे बेस मोटगर एकटा लाठी छलैक। ओ ने आब देखलक ने ताव आ धराम-धराम दू लाठी मारलक झगड़ूकT। झगड़ू बाबू असगर पिड़ गेलाह। गिरयबैत गाम िदस दौड़लाह आ पyचो बेटाकT हॉंिक देलिखन। सॱसे चौकपर गरमा-गरमी भए गेल छलैक। झगड़ू बाबू मािर िबसिर फेरसँ गरजए लगलाह- “कहy भागा। आए सामने तो जानg।”
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झगड़ू बाबूक पyचो बेटा सेहो फराके गरजैत एवम् Eकारेण चुनाव अिभयान शु´ भेल। पच भरबाक समय करीब आिब रहल छल। घरे-घर गुटपची शु´ भए गेल। वत>मान मुिखया आ सरपंच बेस टकाबला लोक छलाह। कोनो कीमतपर चुनाव जीतबाक हेतु कृतसंक²प छलाह। मुदा नवतुिरआ सभ हुनकर िवरोधी छल। गामक आरो लोक सभ सेहो हुनका सभसँ स`तुµ निह छल। अ`ततोगवा पच भरबाक अि`तम िदन धिर मुिखया आ सरपंचक हेतु पyच-पyच गोट उमीदवार पच भरलिन। ओिहमेसँ मुिखयाक हेतु तीन आ सरपंचक हेतु दू गोटाक पच सही पाओल गेल। नवतुिरआक उमीदवार पलटू बाबू आ मोहन बाबू भेलाह। वत>मान मुिखया ओ सरपंच सेहो एक बेर फेर मैदानमे अड़ल छलाह। ओकर अलाबा उरवाइ टोलसँ गरीब लोक सभक उमीदवार बलचनमा सेहो अखाड़ामे उतरल छल। मुिखयाक चुनाव गाममे तूफान अनलक से कोनो नब बात निह छल। सभ बेर एिहना होइत छलैक। जिहआ किहओ चुनाव होइक तऽ लोक सभ एिहना घोल-फच¤ा करए लागय। मुदा एिह बेरक चुनावमे िवशेषता ई छलैक जे उरवाइ टोलक गरीब लोक सभ सेहो फॉंर ब`हने छलैक। बाहर-बाहरसँ नेता सभ अबैत दलैक। िनय ककरोने ककरो ओिहठाम बैसार अबeय होइतै। मतक िहसाबे आधासँ अिधक मत गरीबक छलैक आ जँ ओ सभ एक भए जाए तँ बलचनमाकT मुिखया बनबासँ िकयो निह रोिक सकैत छल। एिह बातक Eितिया आन तीनू टोलमे सेहो भेलैक। मुदा कोनो हालतमे वत>मान मुिखया चुनाव दंगलसँ हटए निह चाहैत छलाह आ नवतुिरआ सभ हुनका अपन नेता मानबाक लेल तैयार निह छल। एवम् Eकारेण संप वग>क मत दूठाम बँटब xवाभािवक भए गेल छलैक। मुदा बलचनमाक Eचार जोर पकड़ने छलैक। झगड़ू बाबूक हेतुxविण>म अवसर छल। खने बलचनमाक संगे घुिमतिथ तऽ खने पलटन बाबूक ओिहठाम आ खने वत>मान मुिखयाक ओतए। पच भरलाक बाद चुनाव िदन धिर झगड़ू बाबूक हेतु अगहन रहैतछलिन। हुनका ईहो कोनो ठेकान निह छलिन जे कखन कोन दलक संग भए जेताह। बड़का लोक सभहक मत दू ठाम बटबासँ रोकबाक हेतु सyझमे पूबाइ टोलमे बैसार भेल। ±यो िकछु बिजतिथ तािहसँ पिहने झगड़ू बाबू बमकए लगलाह। वत>मान मुिखयाकT एक हजार फझित कएल। अ`ततोगवा ई िनण>य लेल गेल जे नवतुिरआक उमीदवार पलटन बाबूक समथ>न करताह। सरपंचक पदक हेतु माL दूटा उमीदवार छलाह- मोहन बाबू आ वत>मान सरपंच नवत राय। नवत राय कमे पढ़ल- िलखल मुदा बेस फनैत लोक छलाह। कतहु िकछु होइतैक िक भदविरया बgग जकy टर>-टर> बाजए लिगतिथ। घर-घर झगड़ा लगेबामे ओxताद छलाह। जँ िकछु खच>-बच> कए िदयैक तँ पंचयतीमे फैसला अहyक पJमे सुिनि¢त कएल जा सकैत छल। जँ नीक-िनकुत भेिट जाि`ह तँ कतहुँ खा सकैत छलाह अ`यथा बेस नेम- टेमसँ रहैत छलाह। एिह सभ कारणसँ गामक लोक ओकरासँ एकदम ना-खुश छलैक। मुदा ±यो ओकरा नाराज निह करए चाहैत छलैक कारण ओ बेस फचyिर छल आ ककरहुँ कतहु बइजत कए सकैत छल।
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA 47
झगड़ू बाबू नवतुिरओपर िचकरए लगलाह। नवतुिरआ सभ सरपंचक हेतु मोहन बाबूकT समथ>न देबाक आsासन देलिखन। Eात भेने नवतुिरआ सभ इिकलाब, िज`दाबादक नारा दैत गाम भिरमे पलटन-मोहन िज`दाबादक xवर गुंिजत कए देलक। एमहर गरीब लोक सभ एकदम एक भए गेल छल। लाठी लए कए सभ करे कमान छल। एवम् Eकारेण सपµ लगइत छल जे मुिखया पदक हेतु बलचनमा आ सरपंचक हेतु मोहन बाबू चुनाव जीतताह। वत>मान मुिखया ओ सरपंचजी बेचैन छलाह। राितक बारह बजे झगड़ू बाबूक घर पहुँचलाह। दूनू गोटे झगड़ू बाबूक पैर पकड़लिखन। “झगड़ू बाबू, अपने हमरा सपोट क´।” “िकएक निह। हमर सपोट तँ सभिदन अहॴक संगे रहल अिछ।” “से तँ ठीके मुदा एिह बेर हालत बेसी गड़बड़ छैक।” फेर किह निह, दूनू गोटे की फुस-फुसेलाह। २००० टाकापर सौदा भए गेल। Eाते भेने झगड़ू बाबू चौकपर फेर गरजए लगलाह- “मुिखयाजीक जे िवरोध करत से हमर दुeमन। एहन मुिखया सरपंच तँ ने किहओ भेल छल आ ने होएत।” आिद आिद। सुननाहर सभ गुम। कािp चुनाव होएत। राित भिर गाममे धोल-फच¤ा होइत रहल। सभठाम काना-फुसी बेस जोर पकड़ने छल। पुxतकालयपर चुनाव दल आिब गेल छल। चािरटा पुिलस लाठीलेने सेहो गeत लगाबए लागल। पिहलुका चुनावमे उरवाइ टोलपर चुनावक मतदान के`hनिह होइत छलैक। मुदा एिह बेर गरीब लोक सभ बी.डी.ओ. साहेबक ओिहठाम धरनाधए देलक। एिह बेर उरवाइ टोलमे सेहो मतदान के`hबनल छलैक। झगड़ू बाबू आ हुनक बेटा सभ बेस मजगुतगर लाठी फनैत चुनाव मतदान के`hसभपर च¤र लगा रहल छलाह। पुवाइटोलक मतदान के`h पर नवतुिरआ सभ क»जा कए लेने छल। किसकए वोगस मतदान भए रहल छलैक। ई खबिर झगड़ू बाबूकT जहy भेटल िक ओ अपन लठैत बेटा सभकT संग कए ओतए पहुँचला आ पलटन एवम् मोहन बाबूकT धराम-धराम दू-दू लाठी लगाओल। पीठासीन पदािधकारी अकबका गेलाह। चा´ िदस हरिवरå मिच गेल। ओिह बीचमे झगड़ूक दूटा बेटा आगा बढ़ल आ सभटा मतपL छीिन जबरदxती मोहर मािर खसा कए खसिक गेल। मुदा एकर जबरदxत Eितिया उरवाइ टोलक मतदान के`h पर भेल। एक-एकटा मतपLपर बलचनमा अपने मोहर मािर कए खसौलक। कोनो दोसर उमीदवारक पोिलंग एजे`ट ओिहठाम निह िटिक सकल। बलचनमाक जीतब िनि¢त Eाय छलैक ओही मतदान के`h क, कारण आधासँ अिधक मत ओही
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टोलक छलैक। सरपंचक सभटा मत नवत रायकT भेटलैक। आन मतदान के`hसभपर सामा`य ´पसँ मतदान भेल आ कने-मने मत सभकT भेटलै। सyझमे मत गणना Eारभ भेल। बारह बजे राितमे जा कए चुनावक पिरणाम बहार भेलै। बलचनमा ओ नवत चुनाव जीित गेलाह। गरीब लोक सभ िवजयक खुशीमे म छल। नारा बुल`द होमए लागल- “जीत गया जी जीत गया, बलचन जीत गया।” पुबािर टोलसँ लए कए पछबािर टोलक सभ लोक स छल। ¦ रबी`h नारायण िमkक नमxतxयै आगy... ११ . एक िदन भोरे सॱसे गाममे हाक पिड़ रहल छल। भेलैक ई जे माxटर साहेब अपन घरसँ िनपा भए गेल छलाह। कािp सyझ धिर तँ कै गोटा हुनका ठामिह देखने रहिन। मुदा राता-राती की भेल? ककरा एहन दुeमनी भए गेल जे िवपिसँ आहत, बौक भेल ओिह }यि±तकT ओहू हालमे निह छोिड़ सकल। माxटर साहेबक अपन के छलैक? जेहो छलैक सेहो कात भए गेल। जािह }यि±तक सामÈय>पर िवपिक ¦हण लािग गेल हो तकर संग के पुरत आओर कथी लेल? थाना-पुिलसमे के जाइत? ओिहना माxटर साहेबक नाम आ`दोलनकारी सभक संगे सुमार होइत छल। कतेको तरहक फसादमे हुनकर नाम जाने-अनजाने अबैत रहैत छल। तेहन }यि±त हेतु अं¦ेजक पोसल पुिलस िकएक िकछु किरतैक। असलमे माxटरक माथा िहल गेल रहैक। पूण>कािलक बताह भए गेल रहिथ। ई कोनो एकाएक भेलैक से बात निह। मश: होइत एिह पिरवत>नकT ±यो बुिझ निह सकलैक आओर एक िदन जखन ओ Eच{ड बताह भए गाम छोिड़ कतहुँ चिल गेलाह तँ लोकक चचक िवषय भए गेलैक। चच¶टा, ±यो िकछु केलक निह। माxटर साहेबक ओिहठाम भेल डकैतीमे, आओर तकर िवरोध केलापर पिरवारक सदxयक हयामेमोछा ठाकुर िगरोहक हाथ छल। मोछा ठाकुर भने मिर गेल छल वा मािर देल गेल छल मुदा ओकर िगरोह अखनहुँ सिय छल। तूँ डािर-डािर, हम पात-पात से कहब छल डकैतक ओिह िगरोहक। िफरंगीसभ थािक गेल, िकछु निह कए सकल।
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असलमे डकैत बनबाक फै±¬ी छल ओिहठामक समाज। लोकमे बढ़ैत गरीबी, सामािजक उपीड़न, समाजक सप लोकक अयाचारक Eितकार करबामे असमथ> लोक सभ कतेको बेर एिह रxताकT अि¿तयार करैत छल आओर सदा, सव>दाक हेतु समाजक मू¿यधारासँ किट जाइत छल। एक िहसाबे शासन तंL मजगूत भेल शोषक तवक संवध>कबिन कए रिह गेल छल। गाम-घरमे कतेको लोक नक>क िजनगी जीबैत छल। जखन सेहो सभव निह होइत छल, िदन भिर खिट कए सyझमे िबना बोिन लेने एक छी§ा गािर-मािर संगे घर धिर िधया-पुता आओर प¾ीकT सहैत देखैत छल, तँ सोचल जाए सकैत अिछ जे ओकरा मोनमे की-की होइत रहल होएत? कहक माने जे सामािजक अ`तिव>रोध Eितकारक एकटा अिभ}यि±त छल डकैती। एकरा पाछु आिथ>क िवषमता मूल कारण छल। भए सकैए जे मोछा ठाकुरक िगरोहक लोक सभक एही तरहक समxया रहल हो। मुदाछल ओ सभ देश भ±त। ओिहमे सँ िकछु गोटे xवतंLता आ`दोलनसँ ´िच रखैत छल। गाहे-बगाहे जनाधार पाट®क समथ>क सभक िवचारसँ अवगत होइत रहैत छल। मुदा ओकरा सभकT ओ रxता पिसन निह छल। ाि`तकारी युवक सभसँ ओकरा मेल खाइत छलैक। ओकर सभक सोच रहैक जे जखन अं¦ेज बलपूव>क शासन कए रहल अिछ तखन ओकरा बलपूव>क िवरोध करब कतहुसँ गलत निह कहल जा सकैत अिछ। से सभ तँ अपना जगहपर जे रहैक से रहैक मुदा कतेको बेर िनदåष आदमी सेहो ओकर सभक चपेटमे आिब जाइत छल। वएह हाल भेल रहैक पु°पाक। पु°पाक पाछा डकैतक िगरोह एिह लेल पिड़ गेल रहैक जे ओ मोछा ठाकुरक िखलाफ मुखिवरी केने रहैक। ओकरा सभक मोछा ठाकुरक Eित बहुत समान रहैक। मोछा ठाकुर ओकर सभक एक िहसाबे माग> दश>क रहैक, सरगना तँ रहबे करैक। q
१२ . मोछा ठाकुरक िगरोह हाथ धो कए पु°पाक पाछु पड़ल छल। ओकरा सभकT पता लागल रहैक जे पु°पा माxटर साहेबक ओिहठाम अिछ, तT हुनका ओिहठाम ओ सभ चोट केने छल। पिरणाम तँ बूझले अिछ। पु°पा अपने अपिसऑंत छिल। ओकर बेटाक कोनो अता-पता निह रहैक। पैतृक सपि सभटा मोछा ठाकुर हरिप लेने रहैक। य_िप आब ओ जीिवत निह छल, मुदा ओकरिगरोहक भय तँ छलहे। तT ±यो पु°पाक संगे ठाढ़ होमए हेतु तैयार निह छल। पु°पा गाहे-बगाहे अपन गाम गेबो केली। मुदा ओिहठामक हालत देिख रिह निह सकलीह। िकछु गोटेकT हुनकासँ सहानुभूित रहैक। मुदा ओहो सभ डरे चुपे रिह गेल। पु°पा आपस हमरा ओिहठाम आिब गेलीह।
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पु°पा अपन सपि आपस Eात करबाक हेतु िचि`तत रहैत छिल। मुदा ओहूसँ बेसी िच`ता ओकरा अपन एकमाL बेटाक छलैक जकर कोनो अता-पता निह चिल सकलैक। जीिवतो छै की निह, सेहो निह पता। पु°पाकT िवsास रहैक जे ओकर बेटा सलामत छैक। कतए छैक, कोना छै की करैत छैक से तँ निह जनैत रहैक मुदा माएक हृदय बेिर-बेिर किह उठैत जे ओ िजबैत छै। से सोिच कए ओ आओर अहुिरआ काटए लगैत छिल। कखनो अपनापर, कखनो भाºयपर तामस होइत छलैक। समाधान िकछु फुराइत निह छलैक। ओकरा एिह बातक स`तोख छलैक जे मोछा ठाकुरक ठेकान लािग गेलैक। एिह बातक ओकरा किनको प¢ाताप निह रहैक जे ओ मोछा ठाकुरक लहास देिख केना ता{डव केने छिल। अिपतु ओकर हृदयमे तेहन धधरा अखनो उठैत छलैक जे गामक गाम सुçडाह भए जाइत। ओकर ऑंिखक Eच{ड वाला ±यो देिख निह पबैत छलैक। ओकर अ`तम>नक अशाि`त समुh जकy अथाह छलैक मुदा किहओ ने किहओ वार भाटा तँ अएनिह छलैक, से अएलैक। ओिह िदन दुपहिरआमे पु°पा असगरे असोरापर बैसिल छिल। एकाएक जेना ओकरा घुरमा उठलैक। ओ भागए लागिल। कतबो ±यो Eयास केलकै, ओ निह nकल। ततेक बेगसँ ओ आगा बढ़ल जे ककरो हाक धिर देबाक िहमित निह भेलैक। पु°पा भगैत गेली, अिवराम। बाप रे बाप! ई के छै?एना िकएक दौिड़ रहल अिछ? जैह देखलक से देिखते रिह गेल। अबाक, शू`य भेल देखैत रिह गेल। भगैत-भगैत एकटा पूलपर जा कए जोर-जोरसँ अ§ाहास करए। पगला माxटरकT पुलपर गॉंधी टोपी पिहरने देिखते िचिचआ उठल- “फेक एिह टोपीकT!एिहसँ िकछु निह हेतौ। पकड़ ई दिबला...।“पता निह की-की िचकरैत रहल। असगिर हाथमे दिबला लेने ओ माxटर िदस बढ़िल। “हे भगवान!आब की होएत? की भए गेलैक एिह बुिढ़याकT केहन बिढ़ऑं संच-मंच रहैत छलैक। आइ तँ ककरोिच`हओ निह रहल छैक।” अबैत-जाइत लोक बजैक। जाधिर ओ पूलपर ठािढ़ रहिल, लोक ओ रxता छोिड़ कात भए गेल। छगु`तासँ देखैत रहल। पूलक ओिह छोरपर पागल भेल माxटर आओर ओिह छोरपर दिबला लेने पु°पा। कहॴ पु°पा माxटरक हया निह कए दैक। कहॴ माxटर आम रJाथ> पु°पाक दिबला ओकरेपर ने चला दैक। लोक सभ बेचैन छल मुदा िकछु कए निह पािब रहल छल। पु°पाक र±त रंिजत नेLमे मु{डसँ आदािदत कालीक दश>न होइत छल। पु°पा आगा बढ़ल जा रहल छिल। माxटर एकटक ओकरा देखैत रहल। ओकरा भेलैक जेना असुर भयािवनी समxत दुµक संहार कए मु{डमाल धारण केने ओिहठाम स_: उपिxथत भए गेल छिथ। माxटरक आवेग देखैत बनैत छल। ओ वायुवेगसँ दौड़ल। पु°पाक आगा धराम दए द{डवत खिस पड़ल। आओर करवË Eाथ>नाकरैतरहल-
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“या देवी सव>भूतेषू शाि`त ´पेण संिxथता।नमxतxयै नमxतxयै नमxतxयै नमो नमः॥” एिह दृ°यकT ±यो देखलक, ±यो निह देखलक। जे निह देखलक से सभ की-की निह सुनलक। जे देखलक से की-की निह बजलक। ±यो कहैक साJात् काली सवार भए गेल छिथ। ±यो कहैक जे ओ िनéाह बतािह भए गेल अिछ। जतेक मनुखक, ततेक रंगक गप। पु°पा माxटरकT धाराशायी देखैत जेना िवचारमºन भए गेिल। फेर जोरसँ अÜाहास करए लागिल- “तॲ के छह?टोपीबला एहन भाभट िकएक धेने छ? अपन असली ´पमे आिबजो निह तँ चला देबौ दिबला।” ओ सचमुच दिबला आगा बढ़ौने छिल िक घोड़ापर सवार एकटा युवक ओकर हाथ पकिड़ लेलक।ओिह घुड़सबारक पाछा-पाछा पyचटा आओर घुड़सबार चिल रहल छल। ओसभ बेहद मजगूत छल। सभ गोटे अxL-शxLसँ सुसिजत छल। बीच-बीचमे “ब`दे मातरम्” केर जयघोष करैत आगा बिढ़ रहल छल िक पुलक बीचमे एहन दुद`त दृ°य देिख ठमिक गेल। पु°पाक हाथ संधानसँ पकिड़ ओ घुड़सबार घोड़ासँ उतिरगेल। पु°पा ओकरा देिखते िचकिर उठलैक- “के?” “हम छीराज कुमार, तोहर बेटा!” “निह, निह तॲ राज कुमार निह छ। ±यो छली हमर बेटाक नाम लए हमरा धोखा देबए चाहैत छ।” कतबो राज कुमार बुझाबक Eयास करैक ओ मानए हेतु तैयार निह छल। कतेको िदनसँ अपन बेटाक EतीJामे छिल आओर आइ जखन ओ स_: अकxमात ओकरा समुख ठाढ़ छैक तँ पु°पाक मित-गित सभ हरा गेल अिछ। मुदा राज कुमार अपन माएकT िचि`ह गेलैक। अनमन ओकरे सन माएक मुँह छलैक। ओ माएकT गोहरबैत रहल। पु°पा िकहुँमानबाक हेतु तैयार निह छलैक। ओकर ऑंिख अखनहुँ र±त रंिजत छलैक। हाथमे दिबला ओिहना छलैक, मुदा पैर ठमिक गेल छलैक। Eाय: अ`तम>नसँ कोनो êविन ओकरा सुनाइत छलैक- “ई तँ हमरे बेटा अिछ।” माएक ई दशा देिख राज कुमार के तँ जेना बë खिस पड़लैक। ओना, ओकरा कोनो उमीद निह रहैक जे ओकर माए जीिवत होएत। ओकरा अपनो जीिवत रहबाक कोनो सभावना निह रहैक मुदा कहबी छैक जे मारए-बलासँ िजयाबए-बलाक हाथ बेसी नमगर होइत छैक। गामसँ अपहरणकए लए जाइत काल मोछा ठाकुर ओकरा बीचमे पड़ैत धारमे धकिल देलकै। अ`हार गुज राितमे उफनैत धारक Eवाहमे ओ भिसआइत-भिसआइत काशी पहुँच गेल। ओिहठाम मलाह सभ महाजाल फेकने छल।
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA 52
ओिह महाजालमे ओ फँिस गेल। मलाह सभकT बहुत पैघ मyछकT फँिस जेबाक ततेक Eशता छलैक जे ओ सभ धराधर जाल खॴचए लागल। मुदा जखन ओिह महाजालमे पyच हाथक बेहोश मनु±ख भेटलैक तँ ओ सभ गुम रिह गेल। ±यो कहैक जे मुद छैक, फेरसँ दहा दही। मुदा एकटा बुढ़बा मलाह डा±टर बजा अनलकै। डा±टर गौर केलक तँ सyस चलैत बुझेलैक। ओ इएह ले वएह ले राज कुमारकT अxपताल लए भागल। ध कही ओकर EयासकT आओर राज कुमारक भाºयकT। तीन िदनक बाद ओ ऑंिख खोललकै। आगा-पाछा ±यो ओकर देखिनहार निह छल। दस िदनक लगातार इलाजक बाद ओकर जान तँ बािच गेल मुदा समxया छल जे आब ओ जाए तँ कतए। संयोगवश अxपतालमे एकटा ाि`तकारी गुटक युवकक इलाज चिल रहल छल। ओकर बेड सीट अगले बगल छल। इलाजक ममे ओकरा राज कुमारक िxथितक जानकारी भेलैक। ओ एिह बातक चच> अपन संगी-साथी सभसँ केलक। सभ गोटे ई िनण>य केलक जे राज कुमारकT अपने संगे नेने चली। दोसर िदन भने राज कुमार आओर ओकर अxपतालक पड़ोसी संगे संग अxपतालसँ छु§ी पािब अÂात xथान िदस िवदा भए गेल। राज कुमार लग कोनो दोसर िवक²पो निह रहैक। q
१३ . एमहर हमर ससुर अपन एक माL संतानक िबआह, कोजगराक बाद दुरागमनक EतीJामे िनय महादेवकT गोहरबैत रहैत छलाह। हमर सासुक िxथित तँ आओर खराप छलिन। एक-एकिदन गिन रहल छली। एिह बातक िकछु संÂान निह रहलिन जे हम माL १२ बख>क छलहुँ। एतेक छोट नेनाकT माएक कोरसँ फराक करब अ`याय होएत। ओतबे निह, हमर माए एकदम एसगिर भए जाएत। सभ अपने अपने समxयासँ िफरसान छल। ककर के सुनत? हमर सासुकT सेहो िकओ दोसर निह छलिन। पुतहु आिब जएबाक उमीदमे कतेको िदनसँ जीिब रहल छलीह। आिखर ओ समय आिबए गेल। हमर ससुर हमर नैहरमे हठ कए देलिखन। हमर िपी बड़ कानल। ओ िक कनलाह, कानल तँ हमर माए। एक माL संतानक िवयोगक अवeयभावी आशंकासँ Jत-िवJत अ`तम>न हाकरोस पािड़ रहल छल। कखनहुँ कानए, कखनहुँ िचकरए, भोकरए। हमर ससुर अिड़ गेल छलाह। ओिहसँ पूव> दू बेर िदन फेरा गेल छल। भोरसँ सyझ-धिर कारोहिट होइत रहैत। जखन कखनो खाएक अबैत, तखन कनबाक नवीन kृंखला Eारभ होइत। माएक हाल बेहाल छल। ओकर ज`म तँ जेना कानए हेतु भेल रहैक। जखने भरल जवानीमे हमर बाप गुजिर गेलिखन तखने ओकर सव>xव चिल गेलैक। सुखकछॉंहो कतहुसँ निह रिह गेलैक।
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हमर ज`मसँ जे कनेक आशा जगओलक सेहो आब हिट रहल छल। उपायो की छल? आखिर बेटी भए ज`म लेने छिलऐक। जँ भागक तेजगर रहैत तँ हम बेटा भए आएल रिहतहुँ। ओतेकटा राज-काजक मािलक होइतहुँ, माए-बापक वंशक रJा कए सिकतहुँ। मुदा एिहमे हमर की दोख? भगवानो मानव िनिम>त एिह देबारकT निह तोिड़ सकैत छलाह। जनिमते दू रंगक दुिनयॉं, दू रंगक रेबाज, दूरंगक कानून। आ¢य> ई जे ओ सभ अ`याय देिखतहुँ चुप रहैत छिथ। सभ िकछु जिनतहुँ अनजान बनल रहैत छिथ। ि¥रागमन हेबाक छलैक से भए गेल। ओिह समय हम तेरह बख>क बचा रही। बेसी चीज बुझबे निह कएिलऐक। नैहरसँ सासुर पहुँच गेलहुँ। हमर सासुक आन`दक तँ अ`ते निह छल। गाम-गाम बैन बँटैत रिह गेलीह। ±यो खाली हाथ निह गेल। गीत-नादसँ तँ समxत वातावरण कतेको िदन धिर आन`दक बख करैत रहल। हमरा सासुरमे ततेक मानदान भेल, सासु ततेक Åयान राखए लगलीह जे सभ िबसराए गेल। कखनो काल कए माएक उचाट जखन आबए, तँ कनाइत ज´र। से सुिन हमर ससुर हंगामा ठाढ़ कए देिथ। “कोनो कµ निह होिन िहनका।” सासु, ससुरक एहन िसनेह भगवान सभकT देथु। मुदा हमर नैहर तँ हराए गेल छल। माएसँ भTट होएब दुल>भ भए गेल छल। अपन xकूलक संगी सभ मोन पड़ैत रहैत छल। एक िदन हमर नैहरसँ खबािसन आएल। हमर माएकT बहुत मोन पड़ैत छिलऐक, तT िजÂासा हेतु, पठओलकै। खबािसनीसँ बहुत रास पता लागल। ईहो बुझिलऐक जे xकूल खिस पड़लैक, जे माxटर पागल भए गेलैक। आओर-आओर कतेको समाचार सभ भेटल। q
१४ . माxटर साहेबक समाचार सुिन हम छगु`तामे पिड़ गेल रही। रिह-रिह कए खबािसनीसँ हुनका बारेमे E करैत रहिलऐक। मुदा िकछु समीचीन उर निह भेटए। आिखर एहन सोझराएल सरल एवम् समािजक लोकक ई िxथित कोना भेल? पु°पा कोना दहािड़ कए माxटरक गॉंधी टोपी खसौलक, कोना माxटर ओकर पैरपर खिस पड़ल से सुिन तँ छगु`तामे पिड़ गेलहुँ। ई सभ तँ कोनो िखxसासँ बेसी चोटगर लगैत छल। जाबे ओ खबािसनी रहल हम ओकरा एिह बातसभकT खोद-बेद करैत रहलहुँ।
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खबािसनी आपस गाम आएिल। गामक रxतेमे माxटर देखा गेलैक। नंग धरंग, आधा धोती ओढ़ने, आधा पिहरने। कखनहुँ उजरा टोपी माथपर, कखनहुँ जमीनपर। बानरबला हाल भए गेल रहिन। तािहपर सँ रिह- रिह कए भाषण करए लागिथ। महामा गॉंधी, ितलक, गोखलेककर, ककर नाम लए जोर-जोरसँ भाषण करैत रहैत छल। जेना सॱसे xवतंLता आ`दोलनक छार-भार ओकरे माथपर होइक। महामा गधीक नाम लए ओ कै बेर उेिजत भए जाइत छल। ओकर भाषण सुिन ±यो छगु`तामे पिड़ जाइत। कतहुसँ कोनो दुिबधा निह बुझाइक। लगैक जेना ककरो आमा ओकरामे घुिसया गेल होइक। कनीकाल भाषण देलाक बाद फेर वएह ताल-पैतरा शु´ कए िदतिथ। एक िदन तँ दौड़ल-दौड़ल xकूलक खसल टाट सभकT सोझ करए लागल। हाथमे छड़ी लए जोर-जोरसँ चिटआ सभपर िबगड़ए लागल- “पढ़बे करोगे िक मरबो करोगे।” मुदा ने ओतए कोनो चिटआ छल आओर ने ±यो माxटर। “िनÜाह बता भए गेलाह।” सभ सएह कहैत आगू बिढ़ जाइत। ओिह िदन xकूलक सामनेक मैदानमे xवतंLता आ`दोलनसँ जुड़ल जनाधार पाट®क नेताक आगमन रहैक। Åविनिवxतारकसँ गाम-गाम लोक सभकT बैसारमे अएबाक हकार देल गेल। चािर बजेसँ बैसार रहैक। xवतंLताक हेतु लोकक मोन छटपट करैत छल। तT लोकक करमान लािग गेल। बैसार शु´ हेबाक छल। जनाधार पाट®क टोपीधारी नेता सभ आिब चुकल छल। “ब`दे मातरम्” केर नारा लािग रहल छल। सपूण> वातावरण देश भि±तक गीतसँ ओत-Eोत भए गेल छल। एतबेमे माxटर एकटा छोटसन माइक हाथमे लेने जोर-जोरसँ बाजए लागल। “जनाधार पाट® माL ढॲगीक जमावरा अिछ। समाजमे चा´कात अ`याय पसरल अिछ। xLी समाज अिधकार हीन भए नाना Eकारसँ शोिषत भए रहल अिछ। की होएत एहेन xवतंLता लए कए, जतए आधा आवादी अिशिJत, अिधकारहीन भए सिदखन अपन अिधकारक हेतु लड़ैत रिहतहुँ अनाथ रहैत अिछ?” जनाधार पाट®क नेता सभ ओिह िविJत }यि±तक भाषण सुिन गुम पिड़ गेलाह। लोक सभकT ठकिवदरो लािग गेलैक। आपसमे कानाफूसी Eारभ भए गेल। “ई िकहुँबताह निह अिछ।” माxटर जे माइक पकड़लक से पकड़ने रिह गेल। चुप हेबाक नामे ने िलअए। बैसारक आयोजक सभक सभ Eयास }यथ> सािबत भए रहल छल। माxटर अिड़ गेल छल जे जाधिर xकूल फेरसँ निह बनत ओ चुप निह होएत। िकहुँ बैसार निह होमए देत।
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एतबिहमे चािरटा मुxटंड कतहुँसँ आएल। सभ मोछ िपजा रहल छल। “जनाधार पाट®क जय”क नारा संग आगा बढ़ल आओर माxटरक माइक छीिन लेलक। िकओ ओकर नरेठी पकड़लक तँ िकओ ठामिह उठा कए लए भागल। बैसार चिल पड़ल। ाि`तकारी सभक अपन सोच छलैक। ओ सभ Eगितशील मंचक नामसँ काज करैत छल। ओकर सभक कहब छलैक जे xवतंLतासँ बेसी ज´री अिछ सामािजक पिरवत>न। ओ सभ कहैत छल जे राजनीितक xवतंLता जँ भेिटओ गेल, तैओ गरीब, मिहला ओ अ`य शोिषत वग>क उËार ताधिर निह होएत, जाबे शोषक }यि±त समूल नाश निह होएत, तािह हेतु चाहे भले िकछु अनट करए पड़ैक। तकर पाछा ओकर सभक अपन सोच छलैक। आिखर राजनीितक सा अपन वच>xवक xथापना हेतु बलEयोगक तँ किरते अिछ। सही की से तँ भिव°यक बात रहैक मुदा ओकरो समथ>क छलैक। युवक पुnष ओ xLी सभ ओकर संग छल। िफरंगीसभ हाथ धो कए ओकर सभक पाछा पड़ल रहैत छलैक। ाि`तकारी कही, Eगितशील मंचक काय>कत कही, ओ सभ अपन उ×ेeयक हेतु िकछु करबाक हेतु कृत संक²प छल। िदन-राित गबैत रहैत छल- “सरफरोशी की तमा, आज मेरे िदलमे है। देखना है जोर िकतना बाजुए काितलमे है।” जनाधार पाट®क लठैत सभ माxटरकT उठा-पुठा कए कात केनिह छल िक बैसार xथलपर घोड़ापर चढ़ल दन-दन करैत Eगितशील मंचक युवक लोकिन हबाइ फाइरॴग करैत पता निह कतएसँ टपिक पड़ल। बैसारमे पड़ािह लािग गेल। कनीकालमे पूरा मैदान खाली छल। सकड़ोक चपल, जुता, यL-तL खसल छल। Eगितशील मंचक युवक आगा बढ़ल। जनाधार पाट®क मंचासीन नेता सभकT चुनौती दैत फेर हबाइ फाइरॴग केलक। नेता सभ इएह ले वएह ले जान लए लए भागल। मुxटंड सभक हालत तँ कहए जोगर निह रिह गेल छल। िकछु पैसाक च¤रमे ओ सभ अपन आमाकT बेिच चुकल छल। Eगितशील मंचक युवकमे एकटा छल राज कुमार जे िकछु िदन अपन िविJत माएकT पुलपर सँ लए भागल छल। आइ माxटर साहेबकT ओही हालमे देख ओकरा निह रहल गेलैक। ओ िचकिर उठल। ततेक जोरसँ िचकड़ल जे लगलैक कोनो बम िबxफोट भए गेल होइक। ओ मोच{ड सभ जान लए भागल से घुिर निह तकलक। राज कुमार माxटर साहेबकT घोड़ापर बैसओलक आओर अपन संगी सभक संगे आगू बिढ़ गेल। ओिह िदनक घटनाक चच कतेको िदन धिर पिरप§ामे होइत रहलैक। ±यो कहैक जे जनाधार पाट®क िवचार सही अिछ तँ ±यो ‘Eगितशील मंच’क समथ>क भए जाइक। कुल िमला कए एकटा जबरदxत वैचािरक संघष>क वातावरण बिन गेल छल। Eगितशील मंचमे आधासँ बेसी मिहला सभ छलैक। कतहु-ने-कतहु कोनो अ`यायक Eितकार निह हेबाक कारणT िवhोही xवभावक भए गेल छलैक। अिधकश मिहला गरीब पिरवेशसँ अबैत छिल मुदा सप पिरवारक लोक सेहो छलीह। एकटा मिहला तँ eमसान घाटसँ Eाण बचा भागल रहैक। समाजक अयाचारक पराकाRा
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तँ तखन भए गेलैक जखन ओकरा जबरदxती ओ अिनJापूव>क सती करबाक हेतु eमसान घाट धिर पहुँचा अएलैक। मुदा की ने की भेलैक जे ओ जान-बेजान भगलैक। से तेहन भगलैक जे घुिर निह तकलकै। एहन जान-बेजान भगैत मिहलाकT ±यो Eगितशील मंचक काय>कत देखलकै। ओकरा मंचक डेरापर लए अनलकै। बिच गेलै। सभवत: ओकरा जीनाइ छलैक। मुदा कतेको लोक सतीक नामपर जीिवते डािह देल गेल। जेकरा संगे से निह भेलैक ओहो जीवन भिर वैध}यक पीड़ा सहैत रहली। नाना Eकारक यातना, अपमान सहैत चल गेली। य_िप सभ पुnष कोनो-ने-कोनो xLीक कोखसँ जनमैत अिछ, तथािप ओकर आिxतवपर ¦हण लागल रहैत अिछ। एिह सभ तरहक अ`यायक सामािजक Eितकार करए चाहैत छल Eगितशील मंच। मुदा सभसँ बड़का समxया रहैक अथ>क }यवxथा। तािह हेतु ओकरा सभकT कै बेर गैरकानूनी तरीका अि¿तयार करए पड़ैक। ओही ममे ओकरा सभक भTट-घॉंट समाजकक Eगितशील लोक सभसँ होइक मुदा Eगितशील मंचक सोचसँ कमे लोक सहमत होइक तथािप जानक डरे िकछु-ने-िकछु च`दा दए दैक। q
१५ . साल भिरक बाद हमर िवदागरी भेल। नैहरमे माए हमरा देिखते ततेक कानए लागिल जे सॱसे गामक xLीगण सभ जमा भए गेलैक। हमरो बहुत कनाए लागल। लोक सभ ओकरा बुझौलक। का-रेाहिट ब`द भेलाक बाद हमर हाल-चाल पुछए लागिल। सासुरमे हमरा सभ तरहT सुख छल से जािन माएकT बहुत Eशता भेलैक। लोक सभमे बैन बॉंटल गेल। सभ अपन-अपन घर गेल। हम अपन संगी सभक हाल-चाल पुछिलऐक। माए सभकT समाद देलकै। बेरा-बेरी सभ आिब कए हमर भTट कए गेल। मुदा माxटर साहेबक िकछु समाचार निह भेटए। सभ एतबे कहलक जे ओ बताह भए गेल छिथ। आब कतए छिथ, कोन हालमे छिथ से िनजगुत बात ±यो निह किह सकल। पु°पाक समाचार सेहो ओतबे बुझिलऐक जे ओ आब एिहठामसँ पता निह कतए चल गेल। ओकर उ¦ }यवहारक चच सेहो लोक केलक मुदा िफलहाल कोन ठाम अिछ, ओकर की हाल छैक, से ±यो निह किह सकल। अपन गाम अपने होइत छैक। लोक-बेद, खेत-पथार, पोखिर-इनार सभसँ अपनव भए जाइत छैक। तािह सभकT एकाएक छोिड़ बेटी सासुर जा बसैत अिछ। छैक ने मािम>क बात? हमर तँ बाते अलग रहैक। नाि`हटा बचाक िबआह कए हमर िपी िनि¢ंत भए गेलाह। मुदा हमर नेा तँ हरा गेल। नैहरसँ सासुरक रxतामे हम xवयं िकछु आओर भए गेल रही।बएसतँ ततबे रहए जे माएक ऑंचरसँ बाहर भए दरबाजा धिर जा सिकतहुँ, खेिलतहुँ, धुिपतहुँ। मुदा भाºय िनयंताकT से मंजूरो होइक तखन ने? साल भिरक बाद नैहर आएल रही। अपन संगी, साथी सभ एक-एक कए भTट भेल। तरह-तरहक िखxसा िपहानी सभ सुनैत-सुनैत िदन
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बीित जाइक। सyझ होइते माए घर लए आनिथ। िदन भिर जतेक घुिम सकी, जतेक गोटेसँ भTट भए सकए से करी। तािहमे कोनो ´काबट निह। एक िदन सभ बचा संगोर कए xकूल पहुँचलहुँ। टूटल, ढनमनाएल मािटक देबार सभ अवशेष पड़ल छल। एकटा िव_ाथ® निह। ±यो माxटर निह। हमर सभक िEय माxटर तँ बताहे भए गेल रहिथ। हम बचा रही, मुदा अिखयास अपन बएसक संगतुिरआ सभसँ बहुत बेसी छल। अपने बएसक िपितऔत सभकT xकूल जाइत देिखऐक, खेलैत देिखऐक, अपने आपमे ºलािन होमए लागैत। भगवानकT मोने-मोन उपराग देबए लिगअिन- “हे िवधाता!हमर कोन कसूर। अहॉं हमरा पुnष बनिबतहुँ तँ आइ हम अपन माए, बापक वािरस रिहतहुँ। अपन घर-घराड़ी, खेत-पथार सभक रJा कए सिकतहुँ। माL बेटी हेबाक चलते हमर सभ िकछु xवाहा भए गेल। हाथ मिलते रिह गेल हमर माए। िदयाद- बाद सभटा लूिट लेलक।” बात एतबेपर निह ठहरल। आगा कोनो िफरसानी निह होइक, तT ज²दीसँ िबआह-दान करए िनि¢`त भए गेल। बाह रे समाज। केहन-केहन कानून बना लेलक। अपने लोक जखन शLु भए जाइछ तँ रJा के करत? सएह सभ सोचैत रही िक हमर संगी सभ आिब गेल आओर हम खेल-धूपमे लािग गेलहुँ। बहुत िदनक बाद एतेक रास बचा सभक संगे उ`मु±त भए खेलेबाक अवसर Eात भेल छल। तT जी- जानसँ खेल-धूपमे लािग जाइ। दुपहिरआ खिसते तरह-तरहक खेल-धूप शु´ भए जाइत। आस-पासक बचा सभ जमा होइत आओर तेहन धमाचौकड़ी होइत जकर कोनो अ`त निह। बेसी ह²ला सुिन कै बेर हमर िपी िचकिर उिठतिथ मुदा हमरा देिखते सकदम भए जैतिथ। कतहु-ने-कतहु मोनमे ºलािन होमए लिगतिन। “एतेक कम बएसमे सासुर बसैत छैक। कनीक िदन लेल अएलैक अिछ। फेर सासुर चिल जाएत। किहआ आओत, निह आओत...।” से सभ सोिच ओ गुम पिड़ जाइत छलाह। अबाक रिह जाइत छलाह। ओिह िदन सyझमे गबैआ आएल छल। सॱसे गामक लोक ओकर गीत-नादक आन`द लए रहल छल। नचारी, भगवती गीतसँ Eारभ कए िव_ापितक कतेको गीत गओलक। िधया-पुताक संगे हमहूँ कतेक आनि`दत रही। मुदा हमर माए सोगाएल, असगरे घरेमे पड़ल रहिथ, कारण हमर िवदागरीक िदन मनबए सासुरसँ ±यो आिब गेल छल।
२ डॉ. योगे`h पाठक ‘िवयोगी’ उप`यास - हमर गाम
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1. हमरो गाम िमिथले मे छै हम कोनो पढ़ल-िलखल लोक निह छी, अिपतु यिद किहयै जे हमरा गाममे एकटा कT छोिड़ िकयो पढ़ल िलखल निह अिछ तऽबेसी उिचत होएत। घीच-घyिच कए कहुना दशमा पास केलहुँ आ चल गेलहुँ िद²ली रोजगारक खोजमे। शुnएमे बुझा गेल जे एतए अपनाकT दशमा पास कहलासँ लाभ निह नोकसाने अिछ तg एिह बातकT नुका रखलहुँ आ जे काज हाथमे आएल से धरैत करैत गेलहुँ। अवसर देखैत काज छोड़ैत पकड़ैत कहुना दस साल बाद लगलहुँ टेपू चलबए। ताबत गाम िदश सेहो सड़क सब सुधिर रहल छलैक, फोर-लेन बनब शु´ भऽगेल रहै तऽसोचलहुँ जे गामे घुिर चली, ओतिह टेपू चलाएब। कने कमो कमाइ हैत तऽबेिसए लागत कारण गाममे कमसँ कम िद²लीक सड़लाहा बसातसँ Lाण भेटत। कतबो िकछु महग होउ, गाममे एखनहु बसात साफे छैक आ Vी सेहो कारण एखन तक ओिहपर कोनो मािलक हक निह जतौलक अिछ। हमर नीक िक खराप लित बूझू एतबे जे भोरमे तीन टाकाक एकटा अखबार कीन लैत छी आ टेपूपर जखन बैसल रहैत छी तखन ओकरा पढ़ैत रहैत छी। एक िदन एहने अखबारमे पढ़ल जे िमिथलामे नवका चलन एलैक अिछ अपना अपना गामक महान िवभूितक वण>न करैत िकताब िलखब। िकछु एहने िकताब बजारसँ कीन अनलहुँ। देखलहुँतऽहषå भेल आ तािहसँ बेसी इ°यå आ ºलािन भेल। हष> एिह लऽकए जे पिहल बेर बुझलहुँ िमिथलामे एहन महान िवभूित सब भेलाह आ इ°य आ ºलािन एिह लेल जे हमरा अपन गाममे एहन कोनो िवभूित िकएक निह भेलाह। हमरा िच`ता भेल- की से हमरा गाम मे कोनो िवभूित निह भेला? िकछु बूढ़ पुरान सँ गप कएल। एक गोटे पूिछ देलिन- “खाली पढ़ले लीखल लोक िवभूित होइ छै की?” हम सोचए लगलहुँ। ठीके, से रिहतै तऽ िसनेमा xटार आ िक िखलाड़ी सब कg िकयो िच`हबे निह किरतै। हमरा बुझा गेल जे आन गामक िवभूित सन तऽ निह,तैयो एतेक ज´र जे हमरा गामक िवभूित सब एक िहसाबg कतबो िविचL रहथु मुदा ओहो लोकिन अपना समय मे गामक नाम कोनो तरहg उजागर करबे केलिन । सेह`ता भेल जे हमहूँ अपना गामक बारेमे िकछु लीखी। मुदा की लीखब? िलखबाक लुिरयो तऽनिह भेल। तैयो हम ठािन लेल जे िलखबे करब। िवभूित लोकिन जे छलाह, जेहन छलाह, भेलाह तऽिमिथलेक सुपुL/सुपुLी ने। आ हमरो गाम जेहने अिछ, अिछ तऽओही मािटपर कमला बलान कोशीसँ घेराएल, रौदी दाही भोगैत अिशJा आ गरीबीमे उबडुब करैत। तg हम िन¢य कएल जे िहनका लोकिनक कीित>क गाथा लीखल जाए।एखुनका युगे िवÂापन आ Eचारक िछऐ, से गामक नुकाएल िछिड़आएल र¾ सबकT बहार करबाक चाही। हम गौआँ भऽकए यिद निह िलखबिन तऽअनगौआँकT कोन मतलब छैक?
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA 59
ओना तऽिलxट पैघ बिन गेल मुदा हम बहुत पुरान लोककT पिहने छyिट कए माL दसटाक वण>न एतए Exतुत करए जा रहल छी। एिहमे पिहल नौटा छिथ हमरा गामक नवर¾ आ दसम भेलाह िविशµ अितिथ र¾। आशा करैत छी गौआँ लोकिन हमर एिह Eयासक Eशंसा करबे करताह। यिद िकछु अनगौआँ मैिथल समाजकT हमर गामक एको गोटेक कीित> नीक लगलिन तऽहमर Eयास खूबे सफल बूझल जाएत। निह तऽकमसँ कम िकछु िलिखत तऽरिहए जाएत जे एखनुक बूढ़ पुरानक िदवंगत भऽगेलाक बाद नवका पुxतकT पूव>जक यशक िकछु Âान देतैक। हमर िलखल वxतु सबकT मिटकोरबा गामक िमिडल xकूलक हेडमाxटर साहेब बहुत कटलिन छँटलिन आ शुË केलिन तािह लेल हुनका बहुत ध`यवाद। िबना हुनकर सहयोग के ई अपने सबकT पढ़बा योºय निहए भेल रहैत।हम अपना गामक िवभूितक फोटो निह छािप रहल छी। एकर कारण अपने सब पूरा पुxतक पढ़लाक बाद बुिझए जेबैक।
िवनीत
रामलाल परदेशी (गामक एक उसाही युवक) गाम : खकपितया डाकघर:मिटकोरबा िजला : मधुबनी ।
2. बीए मूल नाम : राम िकसुन िसंह िपताक नाम : अजब लाल महतो ज`म ितिथ : 1 जनवरी 1940। ई हुनकर सिट>िफकेटमे िलखल छिन, मुदा हुनक िपताक अनुसार ओ तीन चािर बरख जेठ ज´रे छिथ। जखन ओ मिटकोरबा गामक िमिडल xकूलमे नाम िलखौलिन तऽहेडमाxटरकT जे बूिझ पड़लै से लीख देलकै। हुनकर ज`म तऽभरदुितया िदन भेल छलिन।
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA 60
िशJा: यथा नाम, माने ओ बी.ए. पास छिथ। ओ गौरवसँ एखनहुँ लोककT सुनबै छिथन जे मैि¬क, आइ.ए. आ बी.ए.मे लगातार ओ तृतीय kेणीमे पास केलिन। संगिह मैि¬कमे दू बेर, आइ.ए.मे तीन बेर आ बी.ए.मे चािर बेर फेल केलिन। उपलि»ध : हुनक सबसँ पैघ उपलि»ध छिन हमरा गामक पिहल आ एखन तक के अि`तम ¦ेजुएट भेनाइ। पिछला करीब पचास बरखसँ एिह रेकॉड>कT पकड़ने छिथ। ओहू पुरान जमानामे ¦ेजुएट भैयो कए हुनका जखन दस साल तक कतहु नोकरी निह भेलिन तखन ओ हािर कए पुxतैनी काज, खेती,मे लािग गेलाह। एहन निह जे से कतहु नोकरी निह भेलिन। पुिण>यामे एक ठाम हाइ xकूलमे अÅयापक भेलाह मुदा पिहले िदनक िहनक पढ़ाइ देिख कए ओतुका िव_ाथ® सबकT िहनक योºयताक बेस अ`दाज लािग गेलैक आ ओ सब हड़तालपर बैिस गेल। एमहर सyझमे िहनका जे मछर कटलक से बोखार भऽगेलिन। दोसर िदन xकूल जाइ के काजे निह पड़लिन। कहुना एक हतापर गाम घुिर एलाह। िव_ाथ® सबकT िवचारल बात िवचारले रिह गेलैक। फेर दोसर बेर एहन योºय िशJकसँ भTट निहए भेलिन हुनका सबकT। xवxथ भेलाक बाद ओ िनयारलिन जे माxटरी हुनका बुते पार निह लगतिन। चल गेलाह कलका भाग अजमबै लेल।कलकामे एखनहु बीए पैघ योºयता बूझल जाइत छलैक। ओना जािह समय बीए बीए केलिन तािह समय िबहारक परीJा पËितक चच आन आन ठाम शु´ भऽगेल छलैक आ िकछु लोक िबहारी बीएकT ओकर उिचत हक देबा लेल तैयार निह छल। कलकामे मिटकोरबा गामक एक गोटे कोनो सेठक ìाइवर छल। ओ िहनक पैरवी केलक सेठ लग। िकछु बेिसए बढ़ा चढ़ा कए किह देलकै सेठकT। फल ई भेल जे सेठ िहनका िबना कोनो पूछताछ के अपना ग×ीपर मनेजर बना देलकिन। ई बहुत खुसी भेलाह। मुदा भाºयकT िकछु दोसरे रxता देखेबाक छलैक। तेसर िदन सेठक एकटा िमL आिब गेल आ ओकरा अनुपिxथितमे ओिहना िहनका संग गपसप करए लागल। ओकरा मोनमे कोनो दुभव निह छलैक मुदा समxया छल घेघ कतहु नुकाएल रहए ! सेठक िमLकT बीएक असली िघबही बीए हेबापर कने स`देह भऽगेलै आ एकर चच ओ सyझमे अपना िमL लग केलक। अिगला िदन जखन बीए ग×ीपर बैसलाह तखन सेठ आिब कए हुनका पिछला तीन िदनक िहसाब िकताब पूिछ बैसल। बीए घबरा गेलाह। ओना ओ कोनो गड़बड़ी निह केने छलिखन मुदा िहनका ई बात िसखले निह छलिन जे यिद िकओ िहसाब िकताब पूछत तऽउर कोना देल जाए। एखन तक ओ खाली िकताबी Eक उर रटैत आएल छलाह। }यावहािरक काजक उर देब िसखबे निह केलिन। से एतए ओ गड़बड़ा गेलाह। फल जे ओही िदन दुपहिरयामे गामक गाड़ी धेलिन। एिहना ओ पटना, िद²ली मुबइ आिद कतेको छोट पैघ शहरमे सेहो भाºय अजमौलिन मुदा भाºय तऽहुनका गाम घीचऽचाहैत छलिन से पुिण>या रहओ िक पटना,लखनउ िक लुिधयाना, सब ठाम कोनो ने कोनो एहन पिरिxथित भइए गेलिन जे दू चािर िदनसँ बेसी निह िटक सकलाह। बीए सॱसेसँ बौआ कए गाममे खेती करए लगलाह। खेतीमे खूब नाम कमौलिन। दस िकलो के मूर आ सात िकलो के बैगन हुनके खेतमे उपजल छलिन। हमरा गाममे गुलाब आ गgदा फूलक खेती हुनके शु´ कएल िछएिन। एखन हमर गाम एकर नीक }यवसाय कऽरहल अिछ। आब तऽदेखादेखी अगल बगलक गाम
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सबमे सेहो फूलक नीक खेती भऽरहलै अिछ। एिह Eयास लेल हुनका गामक पंचायतसँ िवशेष पुरxकार भेटलिन। बीएक सबसँ पैघ उपलि»ध भेलिन गामक लोककT xकूली आ कौलेिजया पढ़ाइक Eित अिवsास करौनाइ। तकर बाद िकयो अपना धीया-पूताकT xकूल कौलेज निह पठौलक। माL साJर बनै लेल मिटकोरबाक िमिडल xकूल तक। हमहू जे दशमा पास केलहुँ से एही कारण सभव भेल जे बाबूजी गुजिर गेला आ माएकT हम किहयो ई बूझऽनिह देिलयै जे हम कतए जाइ छी आ की करै छी। दस साल तक िविभ शहर सबमे घुमैत ठोकर खाइत बीएकT िकछु नीक बुिË तऽभैए गेलिन। एकर उपयोग ओ केलिन गाममे झगड़लगौनाक ´पमे। हुनकर िवशेषता अिछ जे हुनका संग जे लोक पyचो िमनट बैिस गेल आ हुनकर देल एक िख²ली पान खा लेलक ओ अपना िदयादी आ िक पािरवािरक झगड़ामे ज´र फँसत। आ ओिह झगड़ाक पंचैतीमे बीए ज´रे रहता। बेसी झगड़ा गामक पंचैतीसँ उपर निहए जाइ छैक। िकछुए एहन घटना भेलैक जे बीए बादमे सहािर निह सकला आ मोकदमा भऽगेलै। कतबो मyजल ओझा गुणी रहथु, िकछु भूत हुनको हाथसँ छुिटए जाइ छिन ने। तिहना बूझू। हमरा गामक सीमामे जे चा´ कातक चािर पyच गामक लोकक जमीन जाल छैक ओहो सब एिह झगड़लगौना Eेतक च¤रमे फँिसये जाइत अिछ। सबकT बूझल छैक जे बीए संग बैसनाइ आ हुनकर पान खेनाइ माने भेल कपारपर दुरमितया सवार। मुदा कहy िकयो बिच पबैत अिछ? बीएक मधुर सभाषणक आगू सब फेल। बीए एिह लूिड़सँ कोनो कमाइ निह करैत छिथ, ई तऽमाL हुनकर मनोरंजन िछएिन। एहन उदार चिरLक लोक परोप§ामे निह भेटत। एिह िकताब िलखबाक म मे एक िदन हम पूिछ देिलएिन- “एखन तक कतेक लोकक बीच झगड़ा लगा देने हेबै?” ओ तऽ सबटा लीख कए रखने छला। एकटा पैघ िलxट हमरा आगू पसािर देलिन। हम चिकत भऽ गेलहुँ। बीए तऽ नारदोक कान कटलिन मुदा िकनको बूझल निह। ज´र एकरा एक बेर िगनीज बुक अथवा िलमका बुक मे छपबैक कोिशश करबाक चाही। से भऽ गेला सँ अहॴ कहू हमर गाम अपना िजला आ िक Eदेश मे नाम करत की निह? q
3. खुरचन ठाकुर
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मूल नाम : िकसुनलाल ठाकुर, EिसिË खुरचन ठाकुर िपताक नाम : ितरिपत ठाकुर ज`म ितिथ : अÂात मृयु: सन उनैस सौ सतासी सालक बािढ़मे उपलि»ध : खुरचन ठाकुरक EिसिË खुरचने लऽकए भेल। हुनका लेल अxतूरा बेकार छल। अनेरे लोक टाका खच करत। ओ खुरचनकT िपजा लैत छलाह आ केहनो बढ़ल केस-दाढ़ी रहओ, कािट दैत छलाह।ओहीसँ नह सेहो कािट दैत छलाह। जखन केश छँटबैक Eचलन बढ़लै तखन खुरचन ठाकुर अपन ओही औजारसँ केश छyटब सेहो शु´ केलिन। केशमे ककबा सटा दैत छलिखन आ ओिह उपरसँ खुरचन चला दैत छलिखन। देखिनहारकT चकचो`ही लािग जाइ छलिन जे िबना कची के केश कोना एतेक सु`दर छँटा जाइत छलैक। आ केहनो फोरा-फु`सी रहओ खुरचन ठाकुरक डाकदरीक आगू सब जेना सरgडर कऽदैत छल। फोराक डाकदर ´पमे खुरचन ठाकुर परोप§े निह दश कोसमे नामी छलाह। किहयो कए तऽहुनका दूरापर लोकक लाइन लािग जाइत छल। खुरचन ठाकुरक खुरचनक xपश> होइतिह लोककT आरामक बोध होमए लगै छलै। बीए जखन एक बेर कोनो शहरसँ घुरलाह तऽखुरचन ठाकुर हुनका देखलक ओतुका सैलूनमे केश छँटेने। बीएकT एखनहुँ मोन छिन खुरचन ठाकुरक हुथान। आ ओिह ‘अलूिर’ नािपतक लेल Eयोग कएल गेल अपश»द सब जे बीए हमरा सुना तऽदेलिन मुदा िलखबासँ मना कऽदेलिन। पूरा गाममे खुरचन ठाकुर एकसर, सॱसे गाम हुनकर जजमान। मुदा माL एकटा औजार, खुरचन, आ गाम नेहाल। एहन छलाह र¾ हमर खुरचन ठाकुर। q
4. टहलू दास मूलनाम : िसयारामम{डल िपताक नाम : जगदेव म{डल ज`मितिथ : अÂात
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मृयु: अकालकवष> (सभवतःउनैससौिछयासिठ) उपलि»ध : टहलूटहलैततऽकमेछलाहमुदाहुनकचािलमेबड़काबड़काहािरजाइतछल।बूढ़लोकसबिखxसाकहैतछिथजे एकबेरककरोसारसाइिकलपरचिढ़कए हमरागामएलाह।हुनकरगामकरीबसात-आठकोस (एखुनकालोकलेलबूझूचौबीस-पचीसिकलोमीटर) दूर।साइिकल ओिह समय ककरो ककरो रहैत छलै, हमरा गाममे ककरो निह छलै से बूझू सॱसे गाम जमा भऽगेल साइिकल देखबा लेल। टहलूहुनकापूिछदेलिखन- “कतेकसमयलागलसाइिकलसँहमरागामअबैमे?” ओगव>सँबजलाह- “इएहगोटेकघंटाबूिझिलअऽ।” ओहो अ`दाजे बजलाह कारण हाथमे घड़ी तऽछलिन निह आ ने टहलूएकT बूझल छलिन जे एक घंटा कतेक समय होइत छैक।टहलूहुनकादूसैतबजलाह- “एतेककालमेतऽहमपएरेचलजाएबआघुिरकएचलोआएब, आयिदइ`तजामकएलरहततऽअहyकघरपरभोजनोकऽलेब। ” सारकTभेलिनजेअनगौआँबूिझकनेडॴगहँकैतछिथ।ओहुनालोक गाममे आएल ककरोसारकसंगहँसीमजाककऽलैतेछल।एहनोकतहुभेलैएजेलोकसाइिकलसँदूनोसँबेसीचिललेत? मुदाएकरफिरछौहिटको नाहोअए?ओजमानातऽमोबाइलटेलीफोनकछलैनिहजेतुरेईककरोखबिरकऽिदतिथनगाममेजँचैलेलजेसेमेटहलूओिहगामप हुँचलाहिकनिह। योजनाबनलजेबड़कीपोखिरकचा´कातदूनूगोटेघुमता।सारसाइिकलसँआटहलूपएरे।पोखिरक चा´ कात रxता साइिकलो चलबै लेल नीके छलैक। जेना िक ओिह समय सब ठाम रहैत छलै, किचए मुदा समतल आ पीटल-पाटल। जतेकतेजअपनचिलसकिथसेचलथु।यिदटहलूसेमेबड़तेजचलैतछिथतऽच¤रलगबैमेकमेसमयलगतिन।ओच¤रलगबैत रहताहजाबतसारमहोदय साइिकलसँएकच¤रपूरानिहकऽलेिथ।यिदसारेमहोदयपिहनेएकच¤रलगालेताहतऽओहोताबततकच¤रलगबैतरहता जाबतटहलूएकच¤र पूरानिहकऽलेिथ।अ`तमेजेजतेकबेसीच¤रलगौनेरहतसेततेकसौटाकाजीतत।मानेभेलजेएकच¤रकेसमयमेयिदिक योदूच¤रलगालेततऽएक च¤र बेसी भेलैक तािह लेल एकसौnपैयाजीतत।यिदआधाच¤रबेसीलगाओततऽपचासnपैयाजीतत।एिहसँकमभेलापरदूनूकTबरोबिरएबूझलजाएत।
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गौआँजमाभऽगेलदेखबालेल।सारकबिहनोकTकहलगेलिनहुनकेपJमेरहैलेलजेकोनोतरहकबेइमानीकगुंजाइसनिहरहै। खेलाशु´भेल।जतेकताकत छलिनततेकपैिडलमेलगबैतसारमहोदयसाइिकलदौड़ेलिन।मुदाटहलूतऽिनपा।जाबतओएकमोहारटपिथताबतटहलू एकच¤रपूराकऽलेलिन। साइिकलआपएरेदौड़चलैतरहल।अ`तमेसारमहोदयपूरेतीनसौटाकाहािरगेलाह। ओजेहमरागामसँपड़ेलासेफेरघुिरकएकिहयोनिहएएला।टहलूदासकएिहगुणकजानकारीगामोमेबहुतोलोककTनिहछलैक ।आबतऽिहनकरगुणक बखानसबतिरहोमएलागल।डाकिवभागिहनकादौड़हाकनोकरीदेबालेलतैयारभऽगेलआएिहआशयकेिचÜीसेहोिहनकाप ठादेलकिन।मुदाई अxवीकारकऽदेलिखन। “उम खेती, मÅयम बान, अधमचाकरी, भीखिनदान” बलाफकराजेरटनेरहिथ।ओकोनोदशामेचाकरीनिहकरताह। निहए केलिन। एहनमहानछलाहटहलूदास। q
5. िचलमसॲट भाइ मूलनाम : केवलराउत िपताकनाम : बनारसीराउत ज`म ितिथ : अÂात मृयु: करीबचालीससालपिहने। उपलि»ध : नामगुणकाजछलिनहुनकर।िचलमसॲटनामेपड़लिनजखनहुनकािचलमसँबीतभिरधधराउठएलगलै।गामै कगजेरीसाहुकअिभिमL।गजेरी
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साहुगाजाबेचिथआिचलमसॲटकीनिथआतािहपरसॲटलगाबिथ।सॲटलगबैमेिकछुगोटेआरसंगदैतछलिखनमुदाओसबह मरासंकलनलेल महवपूण>निहछिथ। एकबेरगाममेदूटाबबाजीएला।ईदूनूएकनबरकेगँजेरी।ओ बरकी पोखिरक पाकिर गाछ तर अपन आसन जमा लेलिन। एकटा गौआँकT चेला मुड़लिन, ओिह िदनक बुतातीक जोगार सेहो केलिन आ िचलम लेल गाजाक जोगार सेहो। अपनामे मxत ई दूनू लगलाह िचलम सॲटए। िकछु गौआँ िहनक िचलमक सॲट देिख रहल छल। अित साधारण ´पg ई सब सॲट लगा रहल छलाह। ओ िटपणी कैए देलक- “अहy दूनूसँ नीक तऽहमर गौआँ िचलम धुकैत अिछ, ओकर नामे पिड़ गेलैक िचलमसॲट भाइ।” बबाजी सबकT लगलिन जे गौआँ सब िहनकर िन`दा कऽरहल छिन। ओ िचलमसॲटकT बजबै लेल कहलिखन। िचलमसॲट बजाओल गेलाह। फोकट के गाजा आ तकर सॲट – ई बात सोिचए कए ओ मुिदत भेल छलाह। तैयो अपन गुणकT नुकबैत बबाजी दूनूकT िटटकारी देलिखन नीकसँ सॲट लगबै लेल। ओ सब पूरा दम लगा कए सॲट िखचलिन तऽएक बेर कने दू-तीन आँगुर धिर धधरा उपर उठलैक। िचलमसॲट िवन¸ भावg अपन िचलम सुनगौलिन आ लगला सॲट खीचए। जेना जेना गाल धँसैत गेलिन तेना तेना धधरा उपर उठैत गेलै। अ`तमे पूरे हाथ भिर धधरा उिठ गेलै। एहन चमकार तऽपिहने कोनो गौआँ निह देखने छल। बबाजी सब तऽचिकत आ डराएल। ओिहमे एक गोटे दोसरकT कहलिखन- “एकरा चेला बना लेब ठीक रहत।” िचलमसॲटकT गाजा चिढ़ गेल छलिन। ओ उनटे ओिह बबाजीकT भिर पyज कऽधेलिन आ बजलाह- “रौ सार, िचलम सॲटैक लूिर तऽछौके निह, हमरेपर गुnआइ करमे? हमरा चेला बनेमे? ढहलेल निह तन। चल, आइसँ तो दूनू हमर चेला बिन जो आ हमर नोकर जकy काज कर। सyझुक पहर हम तोरा दूनूकT िचलम सॲटैक लूिर िसखाएल करबौ।” आब तऽदूनू बबाजीक बोलती ब`द। कहुना अपनाकT छोड़ा कए ओ दूनू नाङिर सुटकबैत गामसँ भगलाह। िचलमसॲट भाइ अपना काजमे अि¥तीय छलाह। इलाकामे करीब दस गामक बीच हुनकासँ हाथ िमलबै बला िकयो निह भेल छल। q
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6. न¤ू पहलमान मूल नाम : परमेसर यादव िपताक नाम : शीतल यादव ज`म ितिथ : अÂात मृयु: सन उनैस सौ बेरासी साल उपलि»ध : न¤ू कने निकआइत छलाह बजबामे तg ई नाम भेलिन। हुनका हनुमानजीक सराप आ आशीवद छलिन जे कोनो कुeती खेलामे पिहल दू बेर तोरा हारए पड़तौ। जखन तॲ दू बेर हािर जेमे तखन तेसर बेर केहनो पहलमानसँ िभरमे, िजतबे करमे, से ओ साJात भीमे िकएक निह आिब जाथु। बूिझ ले हम अपनिह तोरा शरीरमे Eवेश कऽजेबौ। ई बात ककरहु निह बूझल छलैक हुनकर बाबूजीकT छोिड़। साधारण िभड़`तमे हािर-जीत चिलते रहैत छलैक। लोक एतेक ठेकान निहए करैत छल जे कोना दू बेर हारलाक बाद न¤ू िनि¢ते तेसर बेर जीत जाइते छिथ। एक बेर दरभंगा राजक पोसुआ कैलू पहलमान हमरा गाम िदससँ जाइत छला। हुनका गुमान जे पूरा िजलामे हुनकासँ हाथ िभरबै बला िकयो निह छिन। ई गप तािह िदनक छी जिहया मधुबनी िजला निह बनल छलै आ दरभंगे िजलाक सविडिवजन छलै। हमरा गाममे िकयो अगी छॱड़ा हुनका िटटकािर देलक जे गामक न¤ू पहलमानसँ एक बेर हाथ िभरा लेिथ। पिहने तऽओ अपन EितRा बूिझ एकरा अनठबए चाहलाह मुदा गौआँक िजदपर अखाड़ामे उतिर गेला। न¤ू सेहो उतरला आ हनुमानजीकT xमरण केलिन। खेला शुn भेल। कैलू आ न¤ू अखाड़ामे च¤िघ>ी कटैत आ एक दोसरापर दाओ बजारैक चेµामे लागल। िकयो दोसराक देहमे सिट निह रहल छल। आ िक न¤ू िकछु केलिन आ Jणेमे कैलू िचत, न¤ू हुनका छातीपर सवार। लोक अकचकाएले रिह गेल। तालीपर ताली परए लागल। कैलूकT िकछु बुझाइये निह रहल छलिन जे की भेलै, कोना भेलै, कोन दाओ लगलै जकर ओ सहार निह कऽसकला। दूनू पहलमान उठलाह, देह झाड़लिन, हाथ िमलौलिन आ अपन अपन ग`त}य िदस िवदा भेला। न¤ू जीत गेलाह मुदा हुनका एकर कोनो गुमान निह छलिन। हुनका बूझल छलिन जे अिगला दू कुeती हुनका हारबाक छिन। ओ अपनाकT किहयो महान निह कहलिन, ई हुनकर न¸ता छलिन।
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7. पि{डतजी मूल नाम : राधाकृ°ण िमk िपताक नाम : ल³मण िमk ज`म ितिथ : उनैस सौ पचास सालक फगुआ िदन। उपलि»ध : हमरा गामक एकमाL Êाîण पुरोिहत पिरवार, पि{डतजी खाली नामेसँ पि{डत छिथ। िहसाबg औंठा छापे रिह गेला। भिर गामक जजमिनका सहारै लेल भािगनकT बजा अनलिन। अपने ओकरा संग खाली नॲत खेबा लेल जाइ छिथ। मुदा पि{डतजी अि¥तीय भैए गेलाह। ई भेल हुनक अáुत गुणक कारण। ओ मिहंसलेट भऽगेला। महॴसपर बैसल बाधे बाध बौआइत रहबामे ओ ककरो कान कािट सकैत छिथ। बचिहंसँ ओ महॴसपर जे चढ़ए लगलाह से एखन तक कइए रहल छिथ। महॴसे पोसब हुनक मु¿य }यवसाय भेलिन। एकटा Êाîण कुलमे ज`म लइयो कए ओ कोनो यादव पिरवारसँ बेसी दूधक }यापार केलिन आ ओिहना कोनो यादव पिरवारसँ बेसी पािन दूधमे िमलबैत रहला। तैयो िहनक दूधक िबी कम निह भेल। महॴसक खरीद िबी केलिन, ओकर दवाइ दा´ सेहो बुझैत छिथ आ सब तरहg महॴसक िवशेषÂ ´पg इलाकामे EिसË छिथ। िहनका Eसादg कतेक महॴस कg Eाण बचलै। »लॉक के मवेसी डाकदर सेहो िहनकर Âानक Eशंसा करैत छिन। पि{डतजी एकटा आर गुण लेल EिसË छिथ– आशीवद देबाक िहनक श»दकोष िब²कुल अलग अिछ। ‘जीबू जागू ढनढन पादू’ तऽ िहनकर तिकया कलाम अिछ मुदा जखन िकयो कोनो तरहक छोट पैघ गलती कऽ बैसैत अिछ तखन िहनक मुह सँ बहराएल श»द िवsक कोनो कोष मे भेटऽ बला निह। आ सुनिनहार केहनो मोट चामक बनल रहओ, कान मूनिह पड़ैत छैक। ओ आशीवद-वष लोकक धैय>क परीJा सेहो लैत छैक। आ जे कने अधीर भेल तकरा तऽ भूलुि{ठत भेनिह क²याण। महॴसक संग संग ई गायक }यापार सेहो करैत छिथ। गाय दरबजापर पोसैत कमे छिथ, खाली खरीद िबीक काज हाटपर करैत छिथ। मिटकोरबा गामक हाटपर मरदुआिर कैल गाय सxत दामपर कीनैत छिथ, ओकरा दस िदन नीक जकy खुआ िपआ कए आ जिहना आइकािल लोक केश रंगैत अिछ तिहना नवका तरीकासँ रंग चढ़ा कए कारी गायक ´पमे दुा-ितगुा दाममे बेिच लैत छिथ। बेचबा काल Åयान रखैत छिथ
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जे ¦ाहक बेस दूरक इलाकासँ रहए। लग पासक ¦ाहककT ओ कारी गाय निह बेचैत छिथ। एक दू बेर गौआँकT सर सब`धीक मारफत सुनबामे एलै जे मासे िदनक भीतर गायक रंग बदलए लगलै। मुदा ई िशकाएित सीधे पि{डतजी लग िकयो निह पहुँचेलक। आशीवद-वष मे िभजबाक डर जे रहैत छैक। एखन तक पि{डतजी बेदाग अपन }यवसायमे लागल छिथ।
जारी....
ऐ रचनापर अपन म ◌ंत}य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। जगदीश Eसाद म{डल - पंगु (उप`यास )- आगy आ दूटा लघुकथा १ जगदीश Eसाद म{डलक पंगु उप`याससँ... 4. सीतापुर गामसँ लऽ कऽ िमिथलचल होइत सॱसे देशे xवतंL भेल।देशक जन-जनमे xवतंLताक जे खुशी होइ छै ओ खुशीक लहैर उठबे कएल।ओना, शासकक ´पमे अंगरेज सा छोड़लक, मुदा देशक जे अपन समxया हजारो बख>सँ जनमैत आिब रहल छल ओ तँ आरो जिटल भइये गेल छल। जइसँ आगू बढ़ैक बदला पाछूए मुहT देश ससैर रहल छल। तैसंग अंगरेज बहादुर िह`दु-मुसलमानक बीच भारत-पािकxतान बना नमहर झगड़ाक बीआ छीिटये देने छल। ओना, जँ देखल जाए तँ भारतक पिछमी सीमापर पिछमी पािकxतान भेल आ पूबसँ बंगाल किट पूव® पािकxतान भेल, जे समुhसँ सेहो सटल अिछए। ओ भूभाग पािकxतान देशक ´पमे भेल, मुदा ऐठामक समाज माने िमिथलचलक संग सीतापुरक समाज अदौसँ िह`दू-मुसलमान, ए¤े गाममे मि`दरो आ मिxजदो बना अपन पूजा-इबादत करैत आिबये रहल अिछ। धम>क नाओंपर जखन देशक िवभाजनो भेल आ नव देशक ´पमे सेहो xवतंL भऽ कऽ ठाढ़ भेल, तखन जातीय उ`माद नइ जगै सेहो तँ असभव निहयT अिछ, सभव अिछए। एक-दोसरकT एक दोसर कहैत रहबसँ िववादक जिड़ मोटाइते छल। जइसँ दुनूक बीच जहy-तहy मािर-पीिट, खून-खचरसँ लऽ कऽसपैितक संग इजत-आव´क लूट-पाट सेहो भेबो कएल आ अखन धिर होइतो आिबये रहल अिछ।
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देशक अजादीक लेल जे देशभ±त छला हुनका सबहक सोझामे देश xवतंL भेलासँ पूव> जेतेक समxया छेलैन तइसँ कतेको गुणा बेसी xवतंLता Eाितक पछाइत आगूमे एलैन। उजरल-उपटल, शोिषत-पीिड़त देशक बागडोर देशवासीक हाथमे एलैन। जइसँ सबहक िवचारमे ¥`¥ उठबे कएल। ओना, अजादीसँ पूव> वैचािरक िच`तनधाराक ओ ´प निह छल जइसँ समxयाक समाधान होएत। एकमुहरी किहयौ आिक एकसूLी, सभ आ`दोलनीक उदेस अंगरेजी शासनक िव´Ë छेलैन, तँए दोसर-तेसर समxया गौण पिड़ गेल छल, जे xवतंL भेला पछाइत Eमुखतासँ आगू आएल। आइक जे देश भारत छी, वएह अजादीक समय 1947 इxवीमे सेहो छल, िकसानेक देश भारत तिहयो कहबै छल आ आइयो कहबैए। भलT लोक अपन जमीन-जथा, गाम-घर छोिड़शहर-बजार िकए ने पकैड़ रहला अिछ। खाएर जे अिछ, मुदा एते तँ हमरा सभकT बुझए पड़त िकने जे औझुका जकy 1947 इxवीमे देशक जनसं¿या नइ छल मुदा तैयो खाएब-पीब नइ घटै छलसेहो केना नइ कहल जाएत। आन-आन देशसँ अ, कज>क ´पमे अबै छल आ हम सभ जनेर-गहुम खा-खा Eाण बँचबै छेलॱ। िकसानक दशा-िदशा देखाएबो आ सुघारबोमे xवामी सहजान`दजीक जबरदस भूिमका रहलैन। िकसानक समxयाकT ओ अित सु³म दृिµसँ देखै छला। सीतापुर गामक जे कy¦ेसी काय>क सभ छला, ओ सभ xवामीजीक भ±त रहिथन, जइसँ आन गामक अपेJा सीतापुरमे बकाxत जमीनक वापसी सफल ´पमे संचािलत भेल। ओना, गाममे वामपंथी िवचारधारा सेहो Eवल ´पमे रहबे करइ। जेकर Eमाण अखनो स_: सबहक सोझमे अिछए जे िमिथलचलेक आन-आन गाममे अखनो बास भूिमक समxया अिछ, मुदा सीतापुरमे से निह अिछ। ओना िकसानक जे िनÕ-कोिट होइए माने सीमा`त िकसानओ सीतापुरमेबेसी अिछ। िकसान पिरवारक जे नव पीढ़ीक लोक छैथ, ओ अपन-अपन खेतो-पथार आ घरो-दुआर छोिड़ शहर-बजारमे घर-दुआर बना रहए लगला अिछ। मुदा गामो तँ गाम छी, जिहना एक िदस जमीन छोड़िनहार छैथतिहना खेती केिनहारक अभाव सेहो भइये गेल अिछ। सइयो रंगक ओझरी जमीनक बीच ठाढ़ अिछए। एक िदस अजादीक िकछुए िदनक पछाइत गyधीजीक हया भेलैन तँ दोसर िदस देशक शासन-बेवxथा चलबैले संिवधान सभ सेहो बिन, काय>रत भेल। िकसानी-ले जिहना मािटक ज´रत अिछ तिहना पािनयÛक अिछए। पािनक साधन बनबैले पिछमी-पूव® कोसी नहरक चच> जोर-शोर चिलये रहल छल। तैसंग धार-धुरक बािढ़क बचाउ-ले धारकT घेरबोक ज´रत छेलैहे। तैसंग िसंचाइक ज´रत सेहो छेलैहे। बोिरंगसँ पतालक पािन ऊपर आिन खेतकT पटौल जाइए, ई लोक माL सुिनतेटा छल। वाxतिवक ´पमे केतौ छल निह। ओना, गाम- गाममे चरो-चyचर आ पोखिरयो-झॉंखैर अिछए मुदा ओइसँ िसंचाइक समुिचत बेवxथा हएब सभव निह छल। एक तँ गाम-गामक पोखैर कोसी-कमला धारमे कटबो कएल आ भथानो भेल, मुदा जइ गाममे निह भेल तहू गाममे छोट-छोट पोखैर रहने ओइमे ओते पािन जमा रिहतो ने छल जइसँ िसंचाइक पूित> सभव होइत। ओना, गाम-गाममे पोखैरबला, माने िजनकर पोखैर िछऐन ओ खेत पटबैक कोन बात जे लोककT नेहेबोमे रोक लगेने छल। िकछु गामक पोखैरमे नहाइ-ले घाट फुटा-फुटा बनौल गेल छल तँ िकछु गाममे िकछु जाइितक समुदायकT नहाइसँ रोकल जाइ छल। ओना, अÜारह ग{डा पोखैरबला सीतापुर गाममे िसफ> पyचेटा पोखैरओहन छल जइमे िकछु जाितकT नहाएबसँ रोक छेलइ। ओना, सहजान`द xवामीजीक छLछायामे गाम-
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गामक िकछु पोखैर साव>जिनक भऽ गेल,मुदा अिधकश गामक अिधकश पोखैर बचले रहल। ओना, जिहना मािट उपजाक बखारी छी तिहना पािनयÛ छीहे। मुदा से तँ समुिचत बेवxथा भेला पछाइत हएत। गुलामीसँ अजादीक सीमापर तँ देश ठाढ़ भेल मुदा हजारो रंगक अ`ध-िबसवासो आ ´िढ़वािदतो िच`तन धाराकT जकैड़ कऽ पकड़निह छल जइसँ नव िच`तनधारा बिनयT ने पेब रहल छल। हजारो बख>क िवदेशी शासनसँ Lxत समाज अखनो xवतंLताक महत बुिझये ने पेब रहल छल। जइसँ मनुखक िजनगीक आधार मजगूत होएत। जिहना िकसानी िजनगी अनिबसवासू छल तिहना आन-आन छोट-मोट ध`धोक छेलैहे। एक िदस जिहना गाम-समाजक िकछु चुनल-चानल लोक समाजक आधारकT मजगूत बनबैक िवचारक संग ियागत ´पमे सेहो िदन-राित एकब§ केने छला, तिहना अÂानक अ`धकारमे पसरल समाजकT अ`ध-िबसवासक अ`धकारे िदस समाज िवरोधी शि±त धकेल रहल छल, जइसँ देश आगू बढ़त आिक पाछू जाएत से िनण>य करब किठन छेलैहे। िकसानक दुभºय छेलैहे जे जे पािन कृिष लेल अमृत छी ओ मौनसूनपर िनभ>र छल। सालक माL तीन-चािर मास ओहन अिछ जइमे बरखो होइए आ बखक सभािवत मास सेहो मानल जाइए, मुदा मौनसूनोक एहेन िनसिचत ठेकान निहयT अिछ जे एते बरखा साले-साल हेबे करत। सभािवत बखसँ कोनो साल बेिसयो भऽ जाइए आ कोनो साल कमो होइए। तैबीच एहनो तँ होइते अिछ जे कोनो साल निहयÛ भेल। पैछला शता»दीक सबहक ऐितहािसक अनुभव लोककT छै`हे जे जिहना उनैसमी शता»दीमे पचीसटा रौदी भेल तिहना अठारमी शता»दीमे सेहो भेबे कएल। रौदी तँ रौदी छी, ओकरो िक कोनो ठेकान अिछ जे एे हएत िक एतबे हएत? एक मौसमक सेहो होइए आ दू-तीन-चािर-पyचक संग बारह बख>क सेहो भेबे कएल अिछ। बारह बख>क रौदीक अनुभव िमिथलचलक िमिथ मािलिनकT सेहो छै`हे। बुझले अिछ जे बारह बख>क रौदीक पछाइत सीताक ज`म भेलैन सेहो जखन जनकजी अपने हाथे हर पकैड़ जोतलैन, तखन। िकसानक लेल जिहना मािट पूजनीय सपदा अिछ, तिहना पािनयÛ अिछ। मुदा ओ तँ तखन पूय हएत जखन ओकर िविधवत् अराधना करब। मुदा ऐठाम से तँ छल निह। िमिथलचलमे अिनसिचत जीवन सभ जीब रहल छला जइसँ कोनो साल समुिचत बरखा भेने जिहना खुशहाली अबै छल तिहना समुिचत बरखा नइ भेने ओकर िवपरीत िxथित सेहो होइते छल। तैसंग समाजमे पसरल ´ढ़वादी िच`तनधारा भाºय-तकदीरकT अगुआ समाजक पछुआ पकैड़ सेहो पछुऐबते छल। माने नव चेतनाक उदयकT रोिकते छल। मनुखक िजनगीक एक-एक समxयाकT हजार-हजार रंगक िवचार तेना ओझरा देने छल जे अपनो जीवन-मरण लोक अपनेसँ नइ बुिझ रहल छला। बरखा नइ भेलतँए िकयो जटा-जटीनक नाच नािच-नािच बgगकT उखैरमे कुिट, ओहन लोकक ऑंगनमे फेकै छल, जेकर िगनती समाजमे झगड़ाउ लोकमे होइ छल। रौतुका घटना भोर होइते झगड़ा-लड़ाइक ´प लइ छल। तहूमे सामुिहक ´पसँ फेकल बgग, एकाकी पिरवारक बीच िववाद ठाढ़ होइते छल। तेतबे निह, बरखा नइ भेने पैघ-पैघ भगताइयो होइते छल आ जगो-जाप होइते छल। एक तँ उपजा नइ भेने लोकक घर खाली रहै छेलै जइसँ जीवन किठन छेलै, तैपर सँ पिरयात खच> सेहो होइते छेलइ। मािट-पािनक संग िकसानी िजनगी-ले नीक-नीक बीजक संग नीक-नीक लूिर [1]क ज´रत सेहो अिछए। कोनो देशक, मािट-पािन-खान-पहाड़ मूल उपािदत सपदा छी। ओनाऐ चा´क िहसाबे, माने मािट-पािन-खान-
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पहाड़सँ अपन देश बहुत सप अिछए। तहूमे िमिथलचल तँ आरो बेसी सप अिछ। िमिथलचलक जेहने मािट पिवL [2]अिछ तेहने पािन सेहो गुनगरक संग पिरयात सेहो अिछए। दज>नो नदी जिहना सालो भिर बहता अिछ, तिहना मौसमक अनुसारे बरखा सेहो होइते अिछ। दुिनयyक कोनो देश एहेन निह अिछ जेकर मािट एहेन उव>र होइ। जँ कोनो देशक मािट एहेन उव>र अिछयो तँ ओकर दोसर साधन ओहन नइ अिछ, जेहेन अपना सबहक अिछ। कृिषक पैदावार मौसमक अनुकूल सेहो होइते अिछ। तहूमे अपन देश आन-आन देशसँ बेसी नीक अिछ। िकएक तँ िकछु देश एहेन अिछ,जैठाम सालो भिर एकरंगाहे मौसम रहैए वा एकसँ आगू बिढ़ डेढ़-दू मौसमक होइए। माने ई जे कोनो देश सालो भिर ठ{ढे रहैए तँ कोनो देश सालो भिर गरमे रहैए। तहूसँ िविचL ई अिछ जे कोनो देशमे बरखा होइते ने छै, तँ कोनो देशमे सालो भिर बरखा होइए। जइ देशमे सभ साल, सालो भिर बरखे हएत तइ देशमे कृिष काय> केना हएत? मुदा ओइठाम Eकृितक अनुकूले पैदावार होइए। तथािप अखन धिर माने बीसमी सदीक पyचम-छठम दशक धिरक बीच जे िकसान देश भारतक िकसानी िजनगी रहल ओ आन बहुतो देशसँ पछुआएल रहल, जइसँ जे उपादन [3] हेबा चाही, से निह भऽ पबै छल। तेकर अनेको कारण छल। जिहना समुिचत जानकारक [4] अभाव छल तिहना समुिचत खेती करैक सबि`धत औजारक संग समुिचत बेवxथाक अभाव सेहो छेलैहे। जुग-जुगसँ अबैत जिहना कृिष औजार छल तिहना जुग-जुगसँ अबैत कृिष काय>क तकनीको छेलइ। बेवxथा ओहन छल निह जे समुिचत ढंगसँ कृिष संचािलत कएल जाइत। ओना,बेवxथाक एक निह दू िदशा अिछ, मुदा दुनू िदशा अ`धकारपूण¶ छल। जिहना नव सरकार गिठत भेनेसाइयो-हजारो रंगक नव-नव समxया उठैए, तिहना देशीसरकार गिठत भेने,तहूमे अंगरेजी हुकुमतक तुर`त पछाइत देश भिरमे अनेकानेक समxया आगूमे आएल। ओना, सरकारी तंLकT मजगूत आ कमजोर हेबाक सेहो कारण अिछ मुदा से अखन निह। अखन एतबे जे जैठाम पेटक [5] समxया िवकराल ´पमे मुँह बौने छल, तैठाम िजनगीक जे दोसर मूल आवeयकता छल तैपर िधयान केना जाएत? तहूमे अंगरेजी शासनक िखलाफ साधारण लड़ाइयो तँ निहयT भेल। कोनो दू देशक बीच लड़ाइ भेने जेकरा जमीनपर लड़ाइ होइए, ओकर अथ>बेवxथा कमजोर होइते अिछ। तँए सरकारी बेवxथा कमजोर छेलैहे जइसँ कृिष पंगु बनले रहल। ई भेल एक िदशा, दोसर िदशा अिछ समािजक बेवxथा। अपना देशक समािजक बेवxथा सेहो कृिष JेLक Eितकूले छल। समािजक ´पमे किहयो कृिषकT समुिचत ढंगसँ बेविxथत करैक िवचार समाजक मनमे उठबे ने कएल। ओना, सोpोअना निह उठल, सेहो निहयT कहल जा सकैए। गामक-गाम बीच जखन रौदी पसरैत छलतखन ओइ गाम होइत जे बहता धार सभ छेलै, ओकरा समािजक ´पमे बाि`ह [6] गामक खेत पटौल जाइ छल। मुदा तोहूमे जबरदस बाधा उपिxथत भेल। बाधा ई भेल जे िजनका जेतेक बेसी िसंचाइ होइतैन ितनकर सहयोग तेतेक कम भऽ जाइत छल। माने ई जे िजनकर खेत बेसी पटै छेलैन, जइसँ बेसी उपजा होइ छेलैन, ओ रौदी-दाहीक ताकमे रहै छला। ताकक कारण ई जे महगकT अो बेचलॱ आ सूिद-सबाइक संग ब`हकी-भरनाक लाभ सेहो उठेलॱ। मुदा मÅयम िकसानसँ लऽ कऽ सीमा`तो िकसान आ खेतमे काज केिनहार मजदूरोक दशा कमजोरे होइ छल। जइसँ जिहना कृिष JेL पंगु बनल छल तिहना खेतीपर जीवन धारण करैबला िकसानो-बोिनहार पंगु बनले छला। ओना, जएह साधन वा जएह सपदा छल ओकरो उपयोग समुिचत ढंगसँ कएले जा सकै छल। कमो साधनसँ नीक काज होइए आ बेिसयो साधन रहनॱजँकरैक इछा निह रहल तँिकछु ने होइए।
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA 72
नव सरकार गिठत भेला पछाितयो कृिष JेLकT अनदेखी कएल गेल, जइसँ अछैते साधनक [7] रहने पेटक भूख रहबे कएल। यएह देश छी जे 1971 इxवीक पछाइत भूखक [8] समxया मेटौलक से तँ उैस साए पचासो-बावनमे मेटाएल जा सकै छल। जे समxया भूत बिन देशकT पछुएने रहल। कृिष JेLमे िवशाल साधन मौजूद अिछ। जे ओिहना-क-ओिहना पंगु बनल रहल। ने पािनक उपयोग समुिचत ढंगसँ भेल आ ने मािटक भेल। दुिनयyक अनेको छोट-पैघ देश ओहन अिछ जे कृिष पैदाबारसँ सप आइये निह, बहुत पिहनिहसँ रहल अिछ। 1952 इxवीक चुनाव भेल। बहुत िकछु अिधकार आमजनकT देल जा चुकल छल, मुदा समािजक ढyचा ओइ अनुकूल नइ छल, तँए बेसी अिधकार-कत>}यक बोधो आ बेवहारो संिवधानक पेमे दबल रिह गेल। ओना, सॱसे देशमे चुनावक पËितकT अपना चुनाव भेल, मुदा नgगरा देशक नgगरी अजादीक जे होइ छै, सएह भेल। सीतापुर गाममे माL लोअरे Eाइमरी xकूलटा छल, आगूक निह छल। ओना, सीतापुरक बगलक गाम– रोिहतपुरमे िमिडल तकक पढ़ाइ होइ छल। ओहू गाममे हाइ xकूल निह छल। सीतोपुर आ रोिहतोपुरसँ दस कोस हिट न`दपुरमे हाइ xकूल छल, मुदा ओइठाम पढ़ैले छाLावासमे रहब ज´री छेलैहे। 1953 इxवीमे हिरचरण िमिडल पास केलक। ओना, देवचरण सेहो सािठ बख>क उमेर पार कइये चुकल छला जइसँ जेना पिहने काज-उदम करै छला तेना आब निहयT कएल होइ छेलैन। जेहनो खेती पिहने होइ छेलैन, तेहनो आब नइ भेने उपजा-बाड़ी सेहो कमए लगलैन। देवचरणक बेटा- राधाचरण अिकंचन छला। खेती करैक अपना कोनो ऊिह निह छेलैन आ जेहो छेलैन तहूमे देह चोरबै छला। देह चोराएब भेल काजसँ छॉंह काटब, माने नइ करब। राधाचरणक बेटा- हिरचरण सेहो तेरह-चौदह बख>क भइये गेल छल। साधनक अभावमे हिरचरण हाइ xकूलमे नाओं निह िलखा सकल। अपन िगरैत शि±तकT देखैत देवचरण हिरचरणकT कहलैन- “बौआ, आब हमर कोनो आशा नइ करह। तखन तँ खेती करैक जे लूिर अिछ, बेसी-सँ-बेसी ओ तोरा बुझा देबह।” हिरचरणक मनमे अखन तक नोकरी करैक कोनो िवचार निह उठल छल। उठबो केना करैत, एक तँ बेसी पढ़ल-िलखल निह, दोसर- गामक-गाम बेरोजगार युवकसँ भरल छल। बाबाक िवचार हिरचरण मािन बाजल- “बाबा, अपन काज हुअए आिक अनकर काज, केतौ तँ मेहनतेक फल भेटत। तहूमे जखन अपना खेत- पथार अिछतखन जँ नोकरी करए जाएब तँ अपन खेती-पथारी केना हएत?” हिरचरणक नव उिदत िवचारकT देवचरण नीक जकy िवचारलैन। जेते िवचारमे गभीरता अबैत जािन तेते मन मुिदतसँ Eमुिदत होइत वा फुिलतसँ Eफुिलत वा फिलत होइत बढ़ल जाइन। अपन पिरवारसँ पिरिचत करबैत देवचरण बजला-
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“बौआहिर, पूव>जक अरजल जे सपैत छह ओ बीचमे बोहा गेल छेलह, माने िनलाम भऽ गेल छल, ओकरा हम पुन: जीिवत करैत अपन बनेलॱ। गामेमे नजैर उठा कऽ देखह जे केते पिरवार अिछ जेकरा तीन बीघा खेत छइ। से तँ अपना भइये गेलह।” िबचेमे हिरचरण बाजल- “हँ, से तँ भइये गेल बाबा।” हिरचरणक िxथर होइत िवचारक वृJकT देवचरण आरो िसंिचत करैत बजला- “बौआहिर, अखन तूँ नव-उिदत सूय> जकy लौिहत लाल तँ निह मुदा पीिड़त िपरॱछ लालीक ´पमे ज´र छह,जेना-जेना समय आगू बढ़ैत जाएत, तेना-तेना लालीपन धबैत जेतह। तँए, अखन बेसी नइ कहबह। एकेटा अि`तम बात अिछ से पुिछ लइ िछअ।” िपपाशु पJी जकy हिरचरण बाजल- “की पुछए चाहै छी बाबा?” देवचरण बजला- “बौआ, मौिखक परीJा जकy पुछबेटा नइ करै िछअ। संकि²पत ´पमे पुछै िछअ। अपन समप>ण अपना-ले करबह आिक अनका-ले?” बाबाक िवचार सुिन हिरचरण बाजल- “बाबा, अखन अहy जीबै छीतखन हमर संक²प आिक िवक²पे की।” q श»द सं¿या : 2177, ितिथ : 24मई2018
[1] तकनीक [2] उव>र [3] उपज [4] कृिषकाय>क जानकार [5] भूखक [6] धारक पािनकT घेिर [7] कृिष सपदाक
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[8] पेटक
२ जगदीश Eसाद म{डल दूटा लघुकथा- ‘हािर -जीत ’, ‘बापक चलैत ’
हािर-जीत िवkामा`त समय। जीवन काका एका`त, एका¦ एकवनग बीच बैस सरयुग नदी तीरपर बैसल तुलसी बाबा जकy निह, आ ने काशी xथान पेब कबीर बाबा सदृश बि²कराहुल भाय आ याLी भाय सदृश जे सिदकाल अपन ओछाइन-िबछाइन समेट क`हेठ एक बनसँ दोसर बनक बीच िबचड़ैत अनेक िजनगीक ´प-रंग देखिनहार यायावर जकy देशक कोण-कोण तँ निह मुदा कोणे-काणी घुिम-घुिम सािठ बख>क िजनगी खपा चुकल छैथ। अपन बनल-बनौल िजनगीक कोण-कोणकT झॉंिक-झॉंिक देखैक पिरयास कऽ रहल छैथ। भाय, दुिनयyमे केकरा एते पलखैत छै जे अनकर िजनगीक पनचैती करैमे समय लगौत? पनचैितयो तँ पनचैती छीिकने जे िकओहुना- माने िबनु बुझलो कएल जाइए आ बुिझयो-गिम-सुगैम कऽ कएल जाइए। मुदा अपनो अपन दाियव तँ सभकT अिछए। जँ अपनो पनचैती अपने नइ कऽ लेब तँ तेहेन खचर दुिनयy अिछ जे दोखीकT िनरदोखी आ िनरदोखीकT दोखी बना बना अनेरे चौरासी लाखक मयभूिममे टहलबैत रहत। िकयो ऐ दुिनयyक भलT ने राजा छी आ ने रंक, मुदा अपन-अपन दुिनयyमे तँ सभ राजो छी आ रंको नइ छी से केना नइ कहबै। छुछे हाथे आ खािलये बुिधये ने इजोत-अ`हारक दुिनयyमे आएल छेलॱ। तखन तँ भेल जे ‘खेलॱ- पीलॱ धौलॱ हाथ, भाय तोरा-हमरा कोन साथ।’ जानह तू आ जानी हम, दुिनयy जनलक सेहो बड़बिढ़यy नइ जनलक सेहो बड़बिढ़यy..! िबना मिहमा जनने जँ मिहमावाने बिन जाएब सेहो बड़ बिढ़यy आ मिहमा (मिह+मॉं) मिहमावान बनब सेहो बड़बिढ़यy, आनी वा मानी सेहो बड़बिढ़यy आ नइ जानी सेहो आ नइ मानी सेहो अहyक बुिधपन भेल। िकयो अपना हाथीकT अंकुशसँ वश करए वा िकयो अपना हाथीकT काने छेद कनौसी पिहरा िदअए सेहो बड़बिढ़यy...। अपन िजनगीक पंचनामा िलखैत जीवन काका अपन गामक xकूल आरभसँ शु´ केलैन। जिहना पढ़ल- िलखल पिरवारक अि¦म बचा xवत: अपन अि¦म भाए-बिहनक अनुकरण करैत ओइ बचा सभ जकy निह जे xकूल जाइ दुआरे िकयो नारक टाल आ िकयो जिनजाितक बनौल तौला-खपटा पेकल गाड़ा[1]-गहबरक अढ़मे नुकाएत। मुदा िमिडल xकूल टपला पछाइत हाइ xकूलक Eवेश ¥ारपर जीवन क¤ाक पिरवारमे भुमकम भेल।
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चािर पीढ़ीसँ अबैत जीवन क¤ाक एक पुरिखयाह पिरवारमे िपताक मृयु तिहये भेलैन जिहया जीवन काका तीन बख>क छला। मुदा पिरवारक जे ´परंगक रोहाणी छल ओ एक समृËतम ´पमे छल। ओना, जीवन क¤ाक माइक उ¸ माL तेइस बरख छेलैन, जिहया ओ वैध}य िजनगीमे Eवेश केली। मुदा दू स`तानक (बेटाक) आशा भिवसक çयौढ़ीपर Eहरीक ´पमे आँिखक सोझ रहबे करैन। तैसंग दोसर आशा ईहो बनले छेलैन जे िसंहािसनीक (माने जीवन क¤ाक भाए) अपन खास मौसी िवÍवािसनी (सात भाए-बिहनमे सभसँ जेठ मृदुराशनी, बीचमे पyच भाए, सभसँ छोट िवÍवािसनी) िवÍवािसनी सेहो अही गाममे (माने जीवन क¤ाक गाममे) बसै छेली। सासुर एला साले भिरक पछाइत िवÍवािसनी वैध}य बिन अपन िजनगीक सािठ बरख िबनु स`ताने बीता चुकल छेली। मुदा माए सदृश िसंहािसनीक आगूमे ठाढ़ भेली। गोर-नार रंग, चौरस देह, मÅयम कद रहने भरल-पुरल शरीर िवÍवािसनीक। कसमीरा सोन जकy माथक सभ केश अपन समरथाइक रंग बदैल चुकल छेलैन। आिथ>क ´पे सप सेहो आ समािजक रीत-िरवाजक सेहो सप`ता छेलै`हे। तँए गामक अिधकश लोक ‘मैयy’ नामसँ सबोिधत करैत रहैन। जेकरा जीवन काका दुनू भyइ ‘नानी मैयy’ कहैत छेलैन। ओना, आजुक समाजक पिरवेशमे अबैत बदलाउसँ लोक-लाजमे òास भेल अिछ। मुदा जइ समािजक पिरवेशक चच> छी ओइ समाजमे लोक-लाज िन°कलुष िवशाल ´पमे जीव रहल छल। ओना, गाम समाजक बेवहारमे िविवधता रहने समाजक हर मनुखकT शुÑ िजनगी जीबैक धारणा सेहो अिछए। समुhे जकy समाज सेहो होइते अिछ, जइमे घॲघा-िसतुआक संग लाल-मोतीक बेवहार सेहो सभ िदनसँ आिबये रहल अिछ। मुदा समाजक जे मूल रीत-िरवाज अिछ सेहो कोनो-ने-कोनो ´पमे नइ जीिवत अिछ सेहो निहयT कहल जा सकैए। महजालक सूत जकy जँ कोनो टुटल अिछ तँ कोनो-ने-कोनो जोड़ल स¤त सेहो अिछए। िपताक मृयुक समय जीवन काका तीन बख>क आ जेठ भाय- उमेदलाल पyच बख>क छल। मनुखक ´पमे माने पिरवारमे जन सं¿याक िहसाबसँ सेहो जीवन क¤ाक पिरवार सप छेलै`हे। जीवन क¤ाक िपता- रघुवंशलाल दू भाए-बिहन। जेठ ´ि±मणी आ छोट रघुवंशलाल। ओना, समाजमे बाल-िबआहक चलैन रहने रघुवंशोलालक िबआह भऽ गेल छेलैन आ ´ि±मणीक िबआह सेहो भऽ गेल छल। चालीस बख> पूव> ´ि±मणीक सासुर-गाम कोसीक चपेटमे आिब गेल। शु´मे पyच-सात बेर सालमे बािढ़ गाममे आएब शु´ भऽ गेल। कोसी धारसँ पिछम िकसानपुर गाम! कोसी धारक झुकाव माने बािढ़क बहाव, पिछम ´िखये होमए लगल। शु´मे खेतक अ-पािनक Jित होइत रहल, पछाइत गाछ-िबरीछ सुखए लगल। जे िकसानपुर गाम गाछ-िबरीछसँ सु`दर वन सदृश छल ओ धीरे-धीरे सुिख-सुिख उजाड़ हुअ लगल। ओना, िकसानपुरमे जिहना जामब`तो फलक गाछ छलतिहना जामब`तो फूलो आ काठ-सुकाठक गाछ सेहो छेलैहे। तैसंग सु`दरे वन जकy च`दनसँ लऽ कऽ बगुरबोनी धिर सेहो छेलैहे। जनकक फुलवाड़ी-फलवाड़ी जकy फुलवाड़ी-फलवाड़ी सेहो छेलैहे। फलोमे आम-जामुन,लताम, बेल वनक संग खेतमे साले-साल उपजैत खीरा-गुरमीक संग फुइट-कyकैड़-तरभुज सेहो लुबैधते रहै छल। बारहो िवरिहणी अोक उपज सेहो होइते छल। कृिLम ´पमे खुनाएल पोखैर-इनारसँ सेहो िकसानपुर सप छेलैहे। दुखोक सीमा होइ छइ। जाबे धिर ´ि±मणी िकसानपुरमे बािढ़क EकोपकT अंगेज सकली ताबे धिर अपन पुखक घर-घराड़ी आ खेत-पथार दुखो कािट धेने रहली। मुदा जखन असहाज दुख हुअ लगलैन माने
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खेतक उपजाक संग खेतो किट-किट बहता धार बिन गेलैन आ घर-घराड़ी चौरी सदृश बिन गेलैन तेकर बाद दुनू परानी- ´ि±मणी अपन दुनू बेटाक संग–जे एकटा सात बख>क आ दोसर चािर बख>क छल–अपन गाम िकसानपुर छोिड़ देलैन। ओना, अपन चा´ घरो खिस (घारमे किट) पड़लैन, बीघा भिरक गाछी-कलम सेहो सुिख गेलैन। पनरह कÜाक पोखैर आ दलानक आगूक इनार सेहो कटानसँ नµ भऽ गेल छेलैन। एक तँ ओहुना बेटीक दरकार माता-िपताक संग अिछए, तहूमे िबपैितक मारल ´ि±मणी छेलीहे, अपन सासुर- िकसानपुर छोिड़चा´ परानी नैहर- लालपुर अबैक िवचार केली। ओना, ´ि±मणीक मनमे नैहरक बासक Eित आóाद रहैन मुदा पित- eयामलालक मनमे रहैन जे दुिनयyमे केतौ बास करी मुदा सासुरक गाममे निह बास करी। तँए दुनू परानीक िवचारक बीच कनी-मनी दूरी रहबे करैन। मुदा xवबस आ बेबसक सेहो अपन चास-बास होइते अिछ। मानेजिहना xवबसीक लेल चास-बास चाही तिहना चास-बास उजड़ने लोक बेवस भऽ xवबससँ बेवस भइये जाइए। ओना, बेवसक बीच केना xवबसी बिन जीवन धारण करब, ई दीगर बात भेल। जे मनुखक िबचड़ैत बुिधक बीच गोलानुमा[2] िववेकक बीच िबचड़ैत अिछ। ´ि±मणी सपिरवार िकसानपुर सँ लालपुर िवदा भेली। लालपुर गामक सीमापर पहुँचते ´ि±मणीकT बुकौर लिग गेलैन। बुकौर लगैक कारण भेलैन जे जे गाम, माने नैहर, सँ माइयो-बाप (मातो-िपता) आ सरो-समाज दुरागमनमे अिरयाित िवदा केलैन, सासुर (िकसानपुर) कT उजड़ने पुन: अही गाम (नैहर) क भेल। यएह सीमा (गामक सीमा) छी जैठाम जैठाम तक सभ अिरयाित िवदा केलैन। गामक सीमानपर एकटा पाखैर-गाछ रxते-कातमे अिछ। ओकरे छाहैरमे चा´ Eाणी ´ि±मणी बैस लालपुर गाम िदस देखए लगली। तही बीच लालपुरेक एक बेकती बजारसँ अबै छला। पाखैर-गाछ लग अिबते दुखमोचनो ´ि±मणीकT िच`हलैन आ ´ि±मणी सेहो दुखमोचनकT ची`हलक। चीि`हते ´ि±मणी फफैक-फफैक कानैत बाजल- “भैया हौ भैया, जइ गामसँ सभ िवदा कऽ देने छेलह आइ ओही गामक आशा भेल हौ भैया।” ओना, दुखमोचनकT बुझल जे िकसानपुर कोसी धारमे किट गेल तँए सभतूर ´ि±मणी लालपुर आएल अिछ। दुखमोचन बाजल- “बिहन, लोकेक आशा लोककT होइ छइ। तूँ ते सहजे अपन भाए-बापक ऐठाम एलT हेन। कान जुिन, चल हमरा संगे।” चा´ गोरे ´ि±मिणयो आ दुखमोचनो गाम िदस बढ़ल। ओना, एहेन पिरिxथितमे अनेको रxता अिछ, जेना ´ि±मणीकT अलगसँ बेवxथा करब। मुदा से निह भेल। भाए-बिहन जकy ´ि±मणीक पिरवार आ रघुवंशलालक पिरवार सिमिलत ´पमे रहए लगल। बाल- िबआहक चलैन रहने ´ि±मणीक दुनू बेटाक िबआह सेहो लालपुरेमे भेल। मुदा eयामलालक मन अपन पैतृक भूिमक नµक सोगसँ िदनानुिदन खसैत गेलैन। ओना, धन-सपैतकT गौण बुिझ मनुखकT अपन भिवसक िजनगीक पूजा-अच>ना करक चाही मुदा से तँ समझदारीमे समाएल अिछ जे िकयो-िकयो बुझबो करै छैथ आ िकयो-िकयो निहयÛ बुझै छैथ। eयामलाल सेहो निह बुिझ सकला। िकछु सालक पछाइत मिर गेला। ओना, धन-सपैतक संग पितक मृयु ´ि±मणीक मनकT सेहो धिकयबैत रहैन मुदा दुनू बेटा आ नैहरक पिरवार ´ि±मणीक मनक िवचारक टुटैत धारकT कोनो-ने-कोनो ´पमे बाि`ह-छेक रखने रहलैन।
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समय बीतल। ´ि±मणीक दुनू बेटाक दुरागमन सेहो भेलैन। भाइयो (रघुवंशलाल) जीिबते छेलैन। एक िदस पितक िबछोह तँ दोसर िदस भाइक संग बेटा-पुतोहुक सहारा, ´ि±मणीकT भेटबे केलैन। मुदा जिहना कोनो रोग शरीरमे ज`म लऽ नहु-नहु बढ़ैत जाइए, जेकर अ`त मृयुक ´पमे होइए तिहना ´ि±मणीकT सेहो भेलैन। लालपुर एला करीब पनरह बख>क पछाइत ´ि±मणी मिर गेली। अपन धम>क िहसाबसँ रघुवंशलाल घराड़ीक संग दस कÜा जोतसीम जमीन दुनू भािगनकT कीन देलिखन। चालीस बख>क पछाइत िकसानपुर गामसँ कोसी हटल। गामक खेत-पथार जगल माने उपजा-जोकर भेल। मुदा काश-पटेर-झौआ इयािदक वन सेहो xवत: लिग गेल। अपन बाप-दादाक खेत-पथार जगने दुनू भyइ- माने जीयालाल आ िसयालाल अपन गाम- िकसानपुर जा कऽ रहैक िवचार केलैन। मातृक- लालपुरसँचािर-पyच िदनक खाइ-पीबैक सामान लऽ जा कोदािरसँ खेत-पथार बनबए लगला। मास िदनक मेहनतसँ एक बीघा उपजाउ खेत बनौलैन। तैबीच मनेजर [3], झौआ आ काश-पटेरक एकटा रहैक घर सेहो बना नेने छला। दुनू भyइ- जीयालाल आ सीयालाल अपन पैतृक गाम चिल गेला। तइ समय जीवनलाल िमिडल xकूलसँ िनकैल हाइ xकूलमे Eवेश कऽ चुकल छला आ िपताक मुइना सेहो दस बख> भऽ चुकल छेलैन। जे पिरवार दस बेकतीसँ सप छल, माने सब तरहक (सभ उमेरक) रहने पिरवार नीक जकy चिल रहल छल, ओ एकाएक टुिट कऽ तीन बेकतीपर माने दुनू भyइ जीवन काका आ उमेदलाल क¤ाक संग िवधबा माएपर आिब अँटैक गेल। दोसर घटना (भुमकम) जीवन क¤ाक पिरवारमे ई भेलैन जे अपन पिरवािरक खेत ओते नइ रहैन जेतेक खेती पिरवारमे होइत आिब रहल छेलैन। सभ िदन एक जोड़ बरद रािख एक हरक खेती होइत रहलैन। आजुक पिरवेशमे खेतीक नव-नव तकनीक एने जिहना खेतक उपज बढ़ल तिहना खेतक काज सेहो बढ़ल। ओइ समय दसो बीधाक खेती असान छल िकएक तँ धानक खेती माL मु¿य फिसल छल बyकी फिसलक खेती ओहन नइ छल। गहुमक खेतीक वैÂािनक (आधुिनक) ´प निह पकड़ने छल। रासायिनक खाद आ नव-नव उपजशील बीआक चरचो निहयT छल। माL धानक खेती असानीसँ होइत रहइ। िबहिरया हाल [4] भेला पछाइत िकसान धानक बीआ पाड़ैत रहैथ, जे मास िदनसँ लऽ कऽ डेढ़-दू मास धिरक बीच रोपाउ रहै छल। तेकर अितिर±तो खड़ुहर (खौड़) बीआ खेतीसँ एक-डेढ़ मास आगू तक चलैत रहइ। र»बीक खेती जे काितकमे बाउग कएल जाइ छेलैओ खेतेमे छीटुआ बाउग होइ छेलइ। ओना, िकछु दिलहनक खेती जेना बदाम टोभुआ सेहो होइत छल आ जोता सेहो होइत छल। जइ साल मघाइर बरखा[5] होइत छलतइ साल र»बीक उपज नीक होइत छल आ जइ साल नइ होइत छलतइ साल दब होइत छल। लालपुर गाममे पाहीप§ीक (पाहीप§ी भेल अनगॱआँ) जमीन बेसी छल माने गामक तीन-चौथाइ जमीन पाहीप§ीक छल आ एक-चौथाइ गॱआँक। पाहीप§ीबला अपन हर-बरद नइ रखने छला जइसँ गॱआँ सभ अदहा-अदहीक दरे बँटाइ खेती करै छला। जीवन क¤ाक पिरवारमे सेहो चािर बीघा बँटाइ खेत छेलैन। संयोग बनल, देशक xवतंLताक िकछु िदन पूव>िह जमीनक अिधकार लेल उथल-पुथल शु´ भेल। अनगॱआँ सभ अपन-अपन आन गामक जमीन बेिच-बेिच अपना गाम िदस बढ़ला। लालपुरक जमीन सेहो िबकाएल,जे लालपुरेबला कीनलक। गॱआँक हाथ जमीन एने जीवन क¤ाक जे बँटाइ जमीन छेलैन ओ छुिट गेलैन जइसँ उपज अिधयापर चिल एलैन।
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA 78
िमिडल xकूलसँ टपला पछाइत जीवन काकाकT हाइ xकूल Eवेश करैक बीच पिरवारमे दुनू घटना भेल छेलैन। हाइ xकूलमे दृढ़ताक संग जीवन काका नाओं िलखौलैन जे एम.ए. तक ज´र पढ़ब। संजोग बिनयT गेल छेलैन जे घरसँ (लालपुरसँ) पyच-छह मीलक दूरीपर हाइ xकूलक संग बी.ए. तकक कौलेज सेहो खुिजये गेल छल। जीवन क¤ाक पिरवारमे जाबे तक दुनू िपिसयौत भाय रहै छेलैन ताबे तक खेतीक संग-संग नगद आमदनीक लेल महॴस पोसब सेहो छेलैन, जे िपिसयौत भायकT अपन गाम चिल गेने ओहो समात भऽ गेलैन। देशक अजादीक, माने उैस साए सािठ इxवीक लगभगक समय छी। अखन धिर [6]माने पैछला पीढ़ी तक लालपुरमे अं¦ेजी िशJा निह आएल छल...। मुदा संxकृत िशJाक िवकास भऽ चुकल छल। अजादीक बाद माने 1947 इxवीक बाद जे पीढ़ी माने ऐगला पीढ़ी िशJाक JेLमे बढ़ल ओ अं¦ेजी िशJाक माÅयमसँ बढ़ल, जइसँ बी.ए. तकक िड¦ीक Eवेश पौलक। अखन धिरक जे जीवन क¤ाक पिरवार रहलैन ओइमे जबरदस झमार पिड़ये चुकल छेलैन। मुदा तैयो एतेक आशा तँ जीवन क¤ाक मनमे रहबे करैन जे पिरवारक िहसाबसँ जमीनो अिछए। िकए तँ जे पिरवार दस गोरेक छेलैन ओ तीन गोरेपर आिब गेल रहैन, भलT ओ बाले-बोध आ िवधवेक िकए ने हुअए। िकसान जिहना सालक शु´हेमे माने खेती करैक समयसँ पूव>िह अपना मनमे जोड़ए लगै छैथ जे फ²लy खेतमे ई धान रोपबआफ²लy खेतमे ओ धान रोपब, चाहे गाछी-कलम लगौिनहार जिहना गाछ लगबैसँ पूव¶ मनमे रोिप लइ छैथ जे फ²लy-फ²लy आमक गाछ रोपब, चाहे कोनो बेपारी जिहना अपन कारोबार करैसँ पिहनिह मनमे रोिप लइ छैथ जे फ²लy-फ²लy वxतुक कारोबार करब तिहना ने लोअर Eाइमरी xकूल वा िमिडल xकूलक बचा सेहो अपनामे रोिपते अिछ जे डॉ±टरी पढ़ब, इंजीिनिरंग पढ़ब, वकालत पढ़ब इयािद-इयािद। अपन चढ़ैत-उतरैत पिरवारक िxथितकT जीवन काका तँ नीक जकy निह बुिझ पबै छला मुदा अपन िजनगीक िवचार तँ मनमे उिठते छेलैन। मनमे जािग चुकल छेलैन जे अखन तक गामक िशJाक ऊँचाइक सीमा बी.ए. तक रहल, ओकरा बढ़ा हम एम.ए. ज´र बनाएब। जखने पैघ घर बनबैक िवचार िकयो मनमे रोपै छैथ तखने नमहर घरािड़यो आ बेसी समचोक ओिरयानक पाछू लगबे करै छैथ। समािजक आ पिरवारक जीवनमे (माने जेहेन वातावरण, अथसंxकार) जइ पिरवारकT जेहेन वातावरण भेटैत अिछ माने Eितकूलोमे जेहेन Eितकूल आ अनुकूलोमे जेहेन अनुकूल ओही िहसाबसँ ने ओइ पिरवारक बचाक मनोदशा सेहो ओिह िदशा िदस नहु-नहु बिढ़ जाइ छइ। अदय साहस आ िबसवासक संग जीवन काका हाइ xकूलमे नाओं िलखेलैन। आइ धिरक माने xवतंLतासँ पूव> धिरक जे समािजक-पिरवािरक जीवन रहल ओ जीवनक रहxयसँ दूर हटैत गेल,जे परतंL शासनक हटबैक गुण छी, ओही अनुकूल उमेदलालक जीवन बिन गेल छेलैन जे िवभीषण- रावण सदृश जीवन क¤ाक पढ़ाइक बाधक बिन गेल छेलैन। भाय, दुख हुअए िक सुख, ओ तँ चाहे तरे-मुहT आिक ऊपरे-मुहT िकछु-ने-िकछु बढ़ैक अपन Eभाव तँ छोिड़ते अिछ। खाएर जे अिछ, जेतए अिछ से तेतए रहए। संजोग बनल, हाइ xकूल- जइमे मैि¬क तक पढ़ाइ होइ छल, ओ हायर सेके{डरी बिन गेल। तइसँ पिहने कौलेजमे जे दू साल आइ.ए. आ बी.ए.क छल ओ बदैल कऽ एक साल Eी बिन गेल आ बी.ए. घुसैक कऽ तीन सालक बिन गेल। ओना, ओइ समयमे मैि¬कोक आ ओइसँ ऊपरको ±लासक िरज²ट Eाय:
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA 79
आय>वत>आइि{डयन नेशन अखबारक माÅयमसँ िनकलै छल। xकूलक पिहल हायर सेके{डरी बैचक नीक िरज²ट भेने xकूलक संxथापको आ िशJकोक संग िव_ािथ>यो आ अिभभावकोक मनमे खुशीक लहैर उिठये गेल छल। हायर सेके{डरीसँ पास केला पछाइत जीवन काका कौलेजमे नाओं िलखौलैन। कौलेजक वातावरण अनुकूल निह रिहतौ, कौलेजक माहवारी फीसक छूट भेटबे केलैन। हायर सेके{डरीसँ पास केला पछाइत जीवन क¤ाक एडिमशन सोझे बी.ए. पाट> वनमे भेलैन। मंजील दूर निह, भाय! दुखसँ दुखाएल दुखी सुनू, जाग´कक जय िनसिचत अिछ, गमाए चुकैत सुतैबला। कौलेजक अÅययनमे जीवन काका मनसँ हािर गेला। हािर ई गेला जे जइ िवषयमे ´िच गिड़ चुकल छेलैन ओइ िवषयक पढ़ाइ ओइ कौलेजमे निह होइ छलजइ कौलेजमे पढ़ब सुिवधाजनक रहैन। जीवन काकाकT घरपरसँ िशJण संxथान पहुँच िशJा ¦हण करब अनुकूल छेलैन मुदा घर छोिड़, माने पिरवारसँ अलग भऽ िशJा ¦हण करब सोpोअना Eितकूल रहैन। तेकर अनेको कारणमे तीन कारण Eमुख छेलैन। पिहल, समािजक वातावरण एते िवषा±त अिछ जे जिहना मुँहपर बचाकTअिसरवाद देिनहार जे सुबुध हेबाक दइ छल ओ परोछमे सुबुध देख जरबो करै छल जइसँ समाजमे छोट-पैघक बीच आिग लगले छल।दोसर, जेठ भाइक चिरL एते िनÕसँ िनÕतर xतरमे पहुँच गेल छेलैन जे भौयारीक बीच वैचािरक सब`ध बनब असहज भऽ गेल छेलैन। तेसर, जइ पिरवारकT उठबैले (पिरवारेसँ समाज िनिम>त होइए) जीवन काका अपन शि±त समिप>त करए चाहै छला वएह नµ हेबाक कागारपर पहुँच चुकल छल तँए घर छोड़ब किठन छेलैन। ओना, जीवन काकाकT बी.ए.सँ आगू पढ़ैमे आिथ>क मजबूरी ओतेक नइ रहैन जेतेक वैचािरक। िकएक तँ माए अपन नैहरक गहना पढ़ैक पाछू गमबैले तैयार भऽ चुकल छेलैन। माइक मनमे सदैत यएह नचैत छेलैन जे पिढ़-िलिख बाल-बचा सुबोध बनैए जइसँ सुचािल पकैड़ सुशील बिन पिरवारक सान चमकबैए। माता- िपताक यएह िवचार ने पिरवारक भिवस िनमणक नीव गाड़ैत चलैए। जी-जॉंित जीवन काका Eाइवेटसँ अनास>क तैयारी करए लगला। दोसर कौलेजसँ परीJा देबाक आदेश युिनविस>टीसँ भेट गेलैन। बी.ए. आनस> Eात करैत िबनु कोनो लािग-लपेटक जीवन काका एम.ए.मे नाओं िलखा लेलैन। ओना, ओइ समयमे- माने छठम-सातम दशकमे सभ जनै छल जे हाइ xकूल जकy कौलेज नअ मास निह चिल माL छअ मास चलैए। जइसँ दू बख>क बाहरक िजनगी एक बख> भेल। तहूमे एक लखाइत निह। बीचो-बीच दुनू चलैत, माने पढ़ाइयो आ छुिटयो...। एम.ए.मे Eवेश करैसँ पिहनिह जीवन काका अपन िकसानी िजनगीकT मनमे रोिप नेने छला। तेकर कारण छल जे जीवन क¤ाक मनक मैलकT िवचार तेना धोइ देलकैन जे पिवL बनैत पिवLतम बिन चुकल रहैन जइसँ िवचार बिन गेल छेलैन जे जखन गूँह-मूत करैबला डॉ±टरकT समाजमे एते पूछ अिछ, लोहा-ल¤र करैबला इंजीिनयरकT एते पूछ अिछ तखन कृिष कम® बनब कोना अधला? तहूमे जखन कृिष फाम> बनबैले पैछले पुरखा एतेक अरैज गेल छैथ जे अपना िसफ> ओकरा करामाती चािल पकड़ा करामात करैक अिछ तखन...। जीवनक असीम सभावना तँ कृिषमे अिछए। तोहूमे ओहन गीित गाइन केतबो भोला बाबाक नचारी गौती आ रहती गाम छोिड़ आन गाममे, तखन जेहेन नचारीक उधारी हेतैन से तँ रामजीकT सेहो दशरथजी अपन पLमे जनाइये देने छेलिखन।
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एम.ए. करैसँ पिहने जीवन काका िवचािरये नेने छला नोकिरयोक अपन xतर छइ। से निह भेने तँ मनमे कुवाथ होइते छइ। कुवाथोकT तँ अपन Eभाव छइ। िकयो कुवाथकT हँिस-बािज उड़ा दइए आ िकयो कुवाथकT हँिसया हँिस हँसा पचन करैए। सािठ बख>क अपन िजनगीक अनुभवकT जीवन काका ओइ सीमापर आिन ठाढ़ कऽ लेला जैठामसँ पिरवारक अि¦म पीढ़ीक शु´आत होइए। अनायास मनमे एलैन जे अपन िजनगी तँ िजनगी जकy जीलॱ, अखनो महाभारतक अिभम`यु जकy मन बनले अिछ। मुदा अपनो दाियवक तँ सीमा अिछए। दुनू बेटा- पुतोहुपर नजैर बढ़लैन, बिढ़ते जिहना धानक अधपकू चासपर थारी फेकने िछछलए लगैए, पोखिरक पािनपर झुटका फेकने ऊपरे-ऊपर िछछलैत अपन गणत}य तक पहुँचैए तिहना जीवन क¤ाक मन बेटा-पुतोहुपर सँ िछछलैत पोता-पीतीपर पहुँच समुचा पिरवारपर िछछलए लगलैन। हार-जीतक बीच सीमापर ठाढ़ जीवन काका अपन िजनगीक समीJा कऽ रहल छैथ। मािरयो खेलॱ, जहलो गेलॱ,मारबो केिलऐ आ जहलो कटौिलऐ, यएह तँ िजनगी रहल। मुदा मािर िकए खेलॱ, जहल िकए गेलॱ आ मारिलऐ िकए आ जहल िकए केकरो कटौिलऐ..? ऐठाम आिब एकाएक िवचार ठमैक गेलैन। अमती कyटक झॲझ जिहना कyटक होइए तिहना तँ िबनु कyटोक झॲझ होइते अिछ। मुदा कोन झोझकT केना पार कएल जाइए, ऐठाम आिब जीवन क¤ाक मन िबहुसए लगलैन। जीवन क¤ाक िबहुँसैत मन एकाएक फुरेफुरेलैन। नीक-बेजए आ हार-जीत तँ जनगीक बीच धारक दुनू कछेर छी, तैबीच कyटक खरॲच लगबे करत िकने। अपन आगूक पीढ़ीक दुनू बेटापर नजैर उिठतेजीवन काकाकखनो ऊपर देखै छला तँ कखनो नजैर िनचॉं उतैर जाइ छेलैन। मनमे अनायास उठलैन- जइ पीढ़ीकT माने दुनू बेटाकT एक ब§ू धारक िदशामे बहाबैक छल ओ कहy भऽ सकल! की अनाड़ी कुहार जकy बरतन गढ़ैमे केतौ भूल भेल? जँ भूल भेल तँ ओही समय ने ओइ भूलकT सुधारैक समय छलमुदा से भेल कहy..? िजनगीक धारक बीच फुटैत मोिनक कारण जीवन क¤ाक मनमे नीक जकy िकछु आिबये ने रहल छेलैन। नजैर उठा जखन देखै छला तँ जेठ बेटा- सुशील आ छोट बेटा- कुशीलक बीच बुिझये ने पेब रहल छला जे दुनूक बीच एतेक दूरी केना बिन गेल? दूरी िसफ> वैचािरके निह, बेवहािरक सेहो बनबे कएल। अपन िजनगीक ियापर जखन जीवन काका नजैर दौड़बैथ तँ अपन भूल केतौ ने बुिझ पड़ैन। मुदा िबना भूल भेने एहेन पिरणाम िकए भेल? दुनू बेटाक बीच जखन माता-िपताक ´पमे सीमकन करए लगलातखन जीवन काकाकT अपन सीमापर नजैर पड़लैन। सीमापर नजैर पिड़ते अपन दुनू परानीक बीच जीवनक बाट जखन सोझामे पड़लैन तखन मन मािन गेलैन जे दुनू परानीक बीच बेवहािरको दूरी अिछआ वैचािरको दूरी िकछु-ने-िकछु निह अिछ सेहो कना नइ मानल जाएत। मुदा जैठाम सभ िकयो ऐ दुिनयyकT अपन बुिझ Ñमण करैए तखन िकछु-ने-िकछु Ñिमत भइये जाइए। हेबो िकए ने करत। जिहना बारह घ`टा धिर सुज> अकासमे उिग दुिनयy देखैक इजोत पसारैए तिहना िक अ`धकार अपन अ`ध पसािर बाहर घ`टा अ`हार नइ पसारैए? पसािरते अिछ। अही अ`हार-इजोतक बीच ने दुिनयyक याLी दुिनयyक Ñमण करैए। िवचारक दुिनयyमे भरमैत-भरमैत जीवन काका अपन जखन सीमकन केलैन तखन बुिझ पड़लैन जे अपन जे िजनगी अिछ ओकरा जँ दोखी वा हारल मानब तँ िनरदोखी वा जीतल सेहो मानए पड़त। दोसराक
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ऊपर जँ सोpोअना नजैर रािख देखैत रहब सेहो तँ सभव निहयT अिछ। अपनो तँ हाथ-पएर लऽ कऽ िकछु करैये-ले आएल छी। अ`तो-अ`त जीवन काका अपन िजनगीकT निहयT सोझरा पेला जे दोखी बिन जीबै छी आिक िनरदोखी बिन। माने ई जे हारल िजनगी जीला आिक जीतल िजनगी जीला। जखन दोख-िनरदोखक िनण>ये निह हएत तखन िजनगीक हार-जीत बुझब केना? q श»द सं¿या : 3191, ितिथ : 24जून2018
बापक चलैत सरकारी होहामे हमहूँ पुिलसक हाथ चिढ़ गेलॱ। ‘सरकारी होहा’क माने भेल जे रायमे शराब ब`दीक कानूनो बनल आ लागूओ भेल। ओना, बहुतो एहेन कानून बनले अिछ जइसँ जनिहतकT लाभ होएत, मुदा ओइ सभकT ठ{ढा वxतामे रिख देल गेल अिछ जइसँ िटिभका लागू भेने असरदार निहयTक बरबैर अिछ। खाएर जे अिछ मुदा अ`याियक Eित `याियक कानूनी बेवxथा निह अिछ सेहो केना नइ कहल जाएत। से तँ अिछए, भलT लाभ जे हौ वा लाभक बदला हािनयT भऽ जाउई दीगर बात भेल। ओना, शराबक कारोबार अपन बड़ नमहर निहयT अिछ मुदा तैयो दस-पनरह हजार मासक कमाइ भइये जाइए। अपने बनबै छी आ घरेपर बेचबो करै छी। ने केतौ जाइ-अबैक खगता होइए आ ने वेपारी जकy एजे`टे-एजgसीक ज´रत पड़ैए। छोट-मोट कारोबार रहने थानामे कमीशन तँ निह भरए पड़ैए मुदा किहयो काल रोहू माछे आिक मुग¶-मुग® नइ पहुँचाबए पड़ैए सेहो बात निहयT अिछ। तैसंग जँ थानाक िसपाहीए वा बड़े-बाबू आिक छोटे-बाबू, गाममे Eवेश करै छैथ तँ चाह-पानक खच> तँ होइते अिछ। ओना, सलामे-मालकीमे काज ससैर जाइते अिछ। अपना िवषयमे जखन िनचेनमे अपने िवचारए लगै छी तँ अपन पेशासँ घृणा होइते अिछ, मुदा पिरिxथितये ओहन बिन गेल अिछ जे मजबुरी किहयौ िक लाचारी, करए पिड़ये रहल अिछ। शु´मे, जिहया हाइ xकूलक बोड> परीJामे फेल केलॱ, तिहये पढ़ाइ िदससँ मन िभन-िभना गेल, तँए ने दोहरा कऽ बोड> परीJा देलॱ आ ने आगू पढ़ैक िवचारे मनमे रखलॱ। संजोग नीक बैसल जे जखन दसमामे पढ़ैत रही तखने िबआहो भऽ गेल। पढ़ल-िलखल लिड़काक ´पमे िबआह भेल। जँ से नइ भेल रहैत तँ जेना लड़की सभ पढ़ए लगल अिछ आ आई-ए-बी.ए. केला पछाइत िबआह करए लगल अिछ, तेनामे िबआहसँ छँटाइये जइतॱ, मुदा से माता-िपताक गुण-धरमे रछ रहल। पढ़ाइ छोड़ला पछाइत नेतािगरी शु´ केलॱ। माता-िपता जीबै छला, घर-पिरवारक कोनो धिन-िफिकर निहयT छल। दस बख>क अ`तरालमे पyचटा बेटी भेल। ओनाअपना मनमे तिहये, माने दूटा बेटी भेला पछाितये
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भेल जे समय-साल तेते खराप भऽ गेल अिछ जे एकोटा बेटीक िबआह करैमे माता-िपताक मुसरा ढील भइये जाइ छैन, तैठाम दूटा तँ सहजे ओकर दोबर भेल! मुदा से अपन िवचार नइ चलल, माता-िपताक िवचारक आगू अपन िवचारकT क{ठ मोिक बरदास केलॱ। ओना, मातो-िपता अपन िवचारमे संशोधन कइये नेने छला जे जखने पोता हएत तखने पिरवार िनयोजन करा देबइ। दोसर-तेसर पोताक आशा, दहेजक आमदनी दुआरे नइ राखब...। अपनो मनमे भेल जे कुल-खनदान बँचबैले तँ एकोटा बेटाक ज´रत अिछए। अही आशा-बाटीमे पyचटा बेटी भऽ गेल। मातो-िपता बुढ़ाइये गेला। ओना, सािठ बख>सँ अिधक उमेर नइ भेल छेलैन, मुदा हमरा सन-सन पिरवारमे तँ चािलस बख>क पछाितये लोक घपचािलस हुअ लगैए। जँ संजोगवश मृयु निहयÛ भेलैन तैयो रोगसँ रोगाइये जाइ छैथ। जइ सेवा करैमे बेटा-पुतोहुक दम खराइते अिछ। ओइ दम खराएबसँ नीक मिरये जाएब। मुइला पछाइत एतबे ने हएत जे कज-बज लऽ कऽ सराध करए पड़त, से तँ कोनो धरानी लोक पुराइये लइए। ओना, गाम-घर केतबो गरीब भेल अिछ तैयो पढ़ै-िलखै वा बर-बेमारीमे लोककT कज नइ भेटौ, मुदा माए-बापक सराध-ले कज भेटते अिछ। जँ से नइ भेटत तँ दसो िदनमे पँच-पँच हजार पंचकT भोज खुआएब पार लगत। तहूमे मरला-जरौला पछाइत चािर िदन तक सारा झॉंपल नइ जाइए, आ जाबे सारा निह झँपाएत ताबे सराधक िकिरये-कम> आिक भोजे-भातक िवचारे आिक ओिरयाने थोड़े कएल जाएत। मुइला पछाइत जिहना पाछूसँ चािर िदन किट जाइए तिहना तेरहा सराधमे चािर िदन आगूसँ सेहो किटये जाइए। माने दसम िदन नह-केश होइए, एगारम िदन पिहल सराध, बारहम िदन दोसर सराध, तेरहम िदन सयनारायण भगवानक पूजाक पछाितये ने मुि±त भेटैए। साले भिरक आगू-पाछू माइयो मिर गेली आ िपतो मिर गेला। सोpोअना पिरवारक भार माथपर आिब गेल। तइसँ पिहने प¾ी चेतौनी दऽ देने छेली जे एना जे नर-बहतर जकy, भिर िदन वौआइत रहै छी तइसँ बेटीक िबआह हएत आिक अपन गुजरो चलत। तहूमे आब लोक बेिटयोकT पढ़बए लगल अिछ, तैठाम अपने नइ पढ़ाएब से लोक नीक कहत...। मुदा तेकर कान-बात नइ देलॱ। एते तँ िबसवास बनले ने अिछ जे जे भगवान ज`म दऽ खाइले मुँह िचरलैन से अहारोक ओिरयान ने करता। ओना, थानो-पुिलसक दोख निहयT छेलैन िकएक तँ ओ अपना िवचारे आिब कऽ नइ पकड़ने छला, गामेक लोक सभ फँसैने छल। गामक लोक फँसौलक आिक अपन चािलये फँसलॱ से अखन तक भॉंजपर नइ चढ़ल अिछ। गॱआँकT िकए दोख देबैन, सरकारक कानूने कड़गर छल। पुिलसक िजला कायलयसँ तेहेन आदेश थानाक बड़ाबाबूकT एलैन जे नोकरी दॉवपर चिढ़ गेल छेलैन तहूमे िजलाक पुिलस सेहो आिब गेलैन। अपने तँ पकड़ा गेलॱ, मुदा घरवाली चौकस छिथये, ओ आहे-माहे, कानब-िखजब छोिड़ दा´ बनबैक सभ समचाकT िनपा कऽ लेलैन। जँ से नइ केने रिहतैथ तँ अनेरे मोटक संग अपनो जइतॱ। िसपाहीक हाथमे पड़ला पछाितयो ितनको भिर मन नइ घबड़ाएल। आ ने अनका जकy िसपाहीकT चकमा दऽ कऽ भगैयेक पिरयास केलॱ। िकए तँ िसपाही पकैड़ कऽ केतए लऽ जाएत- जहले ने, से तँ बुझले अिछ। कोनो िक आइये जाइ छी, आिक िनयमे अिछ जे शराबक कारोबारमे पकड़ाउ, तीस िदनक पछाइत अपने अपराध कबूल िलअ। लगले एक मासक सजाए हएत, से पुिरये गेल रहत, िनचेनसँ चिल आउ। तहूमे जँ टटका-टटकी दस-पyच िदनक जेल हुअए तँ ओ आरो बेसी नीक, िकएक तँ िबना आन-आन ऑिफसक कागजे केसक कारोबार निहयT बढ़ैए, तेकरा तैयार करैमे मास िदन समयो लिगये जाइए आ खचक संग पैरवीकारक समय सेहो लिग जाइए।
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA 83
संजोग तोहूसँ बेसी नीक भेल। ओ भेल जे तीन िदन पिहनिह एकटा गॱआँ-संगी सेहो जहल आएल छैथ। ओहो एला अही नवका कानूनमे। [7] ओना, धरमागती बात अिछ जे ओ [8] ने शराबक घ`धा करै छैथ आ ने पीबे करै छैथ,मुदा पीआकोसँ बेसी िनशy चढ़ल रहै छैन, से बात ज´र अिछ। केकरो गािर-कथा पढ़ब रोज-मरक काज छैन। कोनो बात की केतौ िछपल रहैए, काने-कान िनचy-ऊपर सगतैर पसिरये गेल छेलैन, जइसँ थानो कनखरल रहबे करैन। गड़पािब जिहना िबलाइ बाझपर झँपटैए, जेकरा लोक धोखासँ बाघ कहै छै सएह भेल। कनखैर कऽ थानाक बड़ाबाबू गोिव`दकT पकड़लैन। खाएर जे जेतए हुअए, अपने तँ अपन ने ओिरयान करब। रामप§ी जेल पहुँचलॱ। किहया केतए-सँ मधुबनी सि»डिवजनक जहल जे आँटा-च¤ीक घर छल, तइसँ नीक रामप§ी जहल अिछए। ऐठाम गेनो-तेनो खेलाइक जगह छइहे। मधुबनीक जहल तँ तेहेन छल जे लोक साइिकलो भिर ताव नइ चला सकैए। जहलक रxतेमे हम रही तखने गोिव`दकT जानकारी भेट गेलैन जे राधेeयाम सेहो आिब रहल अिछ, तँए ओहो कान ठाढ़ केने जे जखने जहलक गेटक फाटक टपत तखने ओकरा अपना संगे लऽ आनब आ अपने संग राखब, नइ तँ तेहेन केसमे आएल अिछ जे पर-पैखाना साफ करैसँ लऽ कऽ पािन भरब, झाडू देबक संग आरो-आरो जे काज अिछ, सभ करौत। ओना, गाममे गोिव`दक संग िवचारो आ समािजक बेवहारोमे सभ िदन खटपटे रहै छल मुदा जहल तँ जहल छी,ओइठाम गामक झगड़ा िकए रहत। जहलक गेट टिपते गोिव`दसँ भTट भऽ गेल। भTट होइते गोिव`द कहलैन- “राधेeयाम, बाहरक लोक जहलकT हौआ बनौने अिछ मुदा से सभ िकछु ने अिछ।” अपनो केते बेर जहल गेले छीतँए बुझल-गमल अिछए, मुदा तैयो मनमे कनी शंका होइते रहए जे पिहने ने एक मासक भीतरे छुिट कऽ आिब जाइ छेलॱ।मुदा अखन तँ से निह, कानूनो कड़गर बिन गेल अिछ तँए किहया छुटब किहया निह...।सएह िच`ता मनकT पकड़ने छल। फेर मनमे ईहो हुअए जे जखन जहल आिबये गेलॱ तखन डरबुक बिन कऽ रहब सेहो नीक निहयT हएत। जखने मुँह दु»बर जकy रहब तखने सभ भिर-भिर राित जँतेबे करत। ओना, जहलक िहसाब सेहो गाम-घरसँ उ`टा अिछए। जे जेहेन अपराध केने रहल ओकर पूछ ओही िहसाबसँ होइ छइ। ओना, शराबक कारोबारमे पिहल बेर जहल आएल छी। ऐसँ पिहने जे आएलो छेलॱ से नेतािगरीमे। किहयो कोसी नहर बनबैक सबाल लऽ कऽ, तँ किहयोभूिमहीनकT बासडीहक पचक सबालपर, तँ किहयो बटाइदारीक सबालपर,मुदा ऐबेर से निह, ऐबेर शराबक कारोबारीक ´पमे जहल आएल छी, तँए मनमे कनी अपनो ºलािन होइते अिछ। जिहना आन-आनकT जहलमे पिहल िदनक रौतुका भोजन नइ भेटैए तिहना अपनो नइ भेटल। मुदा गोिव`द एते सतरकी केलैन जे अपने खाना दोबरा कऽ लऽ अनलैन जइमे हमरो खाइले देलैन। खेनाइ खेला पछाइत जखन दुनू गॱआँ एकठाम ओछाइपर सुतैले गेलॱ, तखन गाम-घरक गप-सप चलए लगल। गोिव`दोकT बुझले छैन जे राधेeयाम दा´क कारोबार आइये निह, केतेको िदनसँ कऽ रहल अिछ, तँए जँ जहल आएल तँ उिचते आएल, मुदा हम तँ कारोबारक कोन गप जे पीबो ने करै छी। हँ, एते ज´र अिछ जे कनी-मनी अफीम खाइ छी। ओ तँ शराब छी निह। अपने बाड़ीमे पोxता-दानाक गाछ रोिप ओइसँ रस चुबा अफीम बना लइ
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA 84
छी आ वएह चौबीस घ`टामे दू बेर एक-एक केराउ-बरबैर खाइ छी आ चौबीसो घ`टा बम-बम करैत रहै छी...। गोिव`द बजला- “राधेeयाम, जेहेन सरकार आ`हर अिछ तेहने ओकर कानून सेहो आ`हर छइ!” गोिव`दक िवचारकT केना नइ समथ>न दैितऐन, एक तँ वेचारा साधु-स`त जकy अपन खेनाइ बyिट कऽ खुऔलैन,तैपर अपना लग सुतैक जगहक ओिरयान सेहो केलैन, तैठाम जे हम टटके िनमक-हराम भऽ जाइ से उिचत हएत। जहलक आन-आन कोठरीमे लोक पितयानी लगा कऽ दुनू िसरहौने–माने एक आदमी पूब िसरहौने तँ दोसर पिछम िसरहौने–सुतैए, तैठाम जँ एक िसरहौने सुतैबला जगह भेल से तँ गोिव`देक चलैत ने। तँए, सोिच-िवचािर कऽ बजलॱ- “गोिव`द भाय! सरकार की कोनो साधारण आ`हर अिछ, एकदम िनपट आ`हर अिछ।” गामक जे मनो-मिलन गोिव`दक संग छल से बुिझ पड़ल जे गोिव`द भिरसक िबसैर गेल। िबसैर गेल आिक छोिड़ देलक से तँ गोिव`द जानैथ, मुदा गॱआँक जे दाियव होइए तइमे िमिसयो भिर कसैर वेचारे निह रखलैन। िभनसरमे वाड>क गेट खुिजते कैदी सभ पैखाना िदस दौड़ैए। कैदीक अनुपातमे पैखाना जाइक बेवxथा कम अिछए। जइसँ हम पिहने जाएब, तँ हम पिहने जाएब, तइले पटका-पटकी हएब सोभािवके अिछ। ओना, अखन धिरक अपन आदत–पैखाना जाइक, वएह रहल जे जहलेमे िसखलॱ। ओ ई जे बाहरक लोक जकy जहलक लोककT थोड़े काज रहैए जे समयपर पुरबइ पड़तै। जइसँ समयपर पैखाना जाएब सेहो अिनवाय¶-´िटंगमे रहत। माने ई जे जहलक िहसाबसँ चलए पड़ैए। बाहर जकy ने कोनो काज रहल आ ने कोनो िच`ते रहल। जखन सएह अिछ तखन छोट-छीन काज-ले जे लोक भोरे-भोर पटका-पटकी करैए से तँ बुिड़बकीए भेल िकने। जखन बुझले-गमल बात अिछ जे नपासँ नािप जलखैयो भेटैए आ खेनाइयो भेटैए, तखन ओकरा संयिमत करब कोन बड़का भारी काज भेल। कोनो िक भोज खेलहा रहैए जे बेकाबू हएत। भेल तँ एकसँ डेढ़ घ`टाक पछाइत पैखाना कोठरी खालीए-खाली भऽ जाइए, तखन िनचेनसँ ने िकए लोक जाएत। जखन जहलेमे छी तखनो जँ िनचेनसँ अपन िकिरया-कम> नइ करब तखन गाम-घरमे कएल हएत। मुदा से आदत, जे शु´मे बनल ओ अखनो अिछए। अ`तर एतबे अिछ जे अपन िजनगीक िया- कलाप समैयक ´पT बना नेने छी। एहेन ´प बिनये गेल अिछ जइसँ ने जहलेमे कोनो बाधा होइए आ ने गामेमे कोनो बाधा होइए। जहलक गोदाममे बदाम सिठ गेल छल तँए चूड़े जलखै भेटल। राित भिरक िवkामक पछाइत मनो पोखिरक पािन जकy थीर भइये गेल छल। थीरो केना ने होइत, मनो तँ मािनयT लेलक जे जहलमे छी...। जलखैक चूड़ा देख बजलॱ- “गोिव`द भाय, जेतबे चूड़ा अिछ तेतबो जँ दिहयो रहैत तँ अपना इलाकाक लोक उपकैर-उपकैर जहलो अबैत आ ऐला पछाइत िनकलैले तैयारो ने होइत।”
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA 85
गोिव`द बुिझ गेला जे राधेeयाम ितरहुितया चूड़ा-दहीक बात बाजल हेन, तँए ओ कोनो काने-बात ने देलैन। अपनो मुँह अनेरे ब भऽ गेल। िकए तँ जेना श»द-वाण फेकलॱ तिहना जँ उरो अबैत तखन ने बात-कटौवैल होइत, से तँ भेल निह। गोिव`द भाय िधयाने ने देलैन जे िकछु बिजतैथ। चुपा-चुपी पसैर गेल। वाड>सँ कैदी सभ िनकैल-िनकैल अपन-अपन जीवन-घ`धामे लिग गेल छला। हमहूँ दुनू गोरे एकठाम बैसल रही। तही काल एक बेकती लोटा नेने कलपर जाइ छल। हुनका देखबैत गोिव`द भाय पुछलैन- “राधेeयाम, ओइ लोटाबलाकT िच`है छहक?” आँिख उठा हुनका िदस तकलॱ तँ चीि`हमे नइ एला, कहलयैन- “नइ।” गोिव`द भाय बजला- “तोरे अपेिछतक बेटा िछअ।” ‘अपेिछतक बेटा’सुिन मन चॱकल। चॱकते बजलॱ- “भाय, अहyसँ ओकरा िच`हा-पिरचय..?” गोिव`द बजला- “हँ, गामेसँ अिछ। ओकील साहैबक बेटा छैथ, सुलेमान नाओं िछऐन।” बजलॱ- “कोन ओकील साहैब?” गोिव`द बजला- “सुलतान साहैब।” ‘सुलतान साहैब’क नाओं सुिनते िवचारक संग मनो चकभौर लेलक। चकभौर ई जे सुलतान साहैबक संग नेतािगरीक सब`ध बहुत िदन धिर रहल। अखनो कनी-मनी ओ नेतािगरी किरते छैथ, हम सोलही छोिड़ देलॱ तइसँ भTटो-घyट किमये गेल। दोसर ईहो भेल जे ओ कोट>मे वकालत करै छैथ तँए हुनका दसटा गप- सप करैबला लोक लगमे रिहते छैन, हमरा से निहयT अिछ। तहूमे तेहेन ध`धा करै छी जे दोकानपर पीआक सभकT उपकैर-उपकैर कऽ पीऐबतो छी आ तहूमे सँ िकयो-िकयो पीब कऽ गीतो गबैए आ िकयो-िकयो गिरएबो करैए। कलपर सँ सुलेमान घुमल िक गोिव`द भाय शोर पाड़ैत कहलिखन- “सुलेमान, एमहर अिबहह।” जिहना गोिव`द भाय कहलिखन तिहना सुलेमान एला। अिबते गोिव`द भाय हमरा देखबैत सुलेमानकT कहलिखन- “तोरे िपताजीक संगी छथुन। दा´ कारोबारमे एला अिछ।”
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‘दा´ कारोबार’ सुिन अपना कनी लाजो भेल मुदा जँ दुइये गोरे रिहतौ तखन तँ उ`टा कऽ किहितऐन जे अफीमसँ की कड़गर हमर दा´ अिछ, मुदा तेहाला लग अिशµ जकy बाजबो नीक निहयT होएत, तँए चुपे रहलॱ। िपताजीक संगी सुिन सुलेमानक आँिख नोरसँ डबडबा गेलइ। नोर भरल नयना, नहुँए-नहुँए लिलया लगलै।लिलयाइत-लिलयाइत लाल भऽ गेलइ। मुदा बाजल िकछु ने। बजलॱ- “बौआ, की नाम भेल?” बाजल- “सुलेमान।” पुछिलऐ- “सुलतान साहैबक बेटा छी?” िपताक नाओं सुिनते सुलेमान फफैक-फफैक कऽ कानए लगल। कानब देख अपनो आँिख नोरसँ भिर गेल। मुदा बेटी-िवदागरी जकy जँ सभ कनिनहारे हएब तखन एक लोटा पािनयÛ सीमाकातमे बेटीकT के िपऔत..! अपन नोरकT धोतीक खूटसँ पोिछ मन स¤त केलॱ। सकताइते मुँह फुटल- “कननेसँ थोड़े िकछु हएत। िकए जहल एलॱ? केसक की हाल अिछ?” सुलेमानकT जेना कनी सबुर भेलइ। सबुरक कारण िपताक दोxतसँ िमलब छेलै आिक केसक कीड़ा बुझलक से तँ सुलेमाने जानए, मुदा अपना बुिझ पड़ल जे पािनमे डुमैतकT खढ़ोक सहारा देख वेचाराकT जनु जान बँचैक सभावना बुिझ पड़लै।हमरा मुँह िदस तकैत सुलेमान बाजल- “दोस चचा! मड>र केसमे आज`म सजाए भऽ गेल अिछ।” ‘मड>र केसमे आज`म सजाए भऽ गेल अिछ’ कानमे पिड़ते जेना माथा सु भऽ गेल। तरे-तर मन कलैप उठल, बाप रे एकर तँ िजनगीए िबलैट जेतइ! मुदा अखन सोचैये-िवचारै आिक िच`ते-मनन करैक समय थोड़े छी। अखन तँ गप-सप कऽ रहल छी तँए गप-सपक म पकैड़ ने िमत होइत चलब...। बजलॱ- “केहेन मड>र केस अिछ? अनठेकानी केतौ फँसौल गेल छी आिक सचमुच मड>र केने छी?” ‘सचमुच’ सुिन सुलेमान िसहैर गेल। िसहरैत अपन दोख टारैत बाजल- “दोस चचा, अहy लग झूठ केना बाजब, तहूमे गोिव`द चचा सेहो छैथ। िपताजीक कपारपर जेना शैतान सवार भऽ गेल छेलैन तिहना फरसा लऽ कऽ िनकैल गेला। हम चुपचाप देखैत रिहतॱ से नीक होइत। ओहीमे चचेरा भाइक मड>र भऽ गेल।” बजलॱ- “कनी सेिरया कऽ बाजू।” सुलेमान बाजल- “चचाजी, अपने पिरवारक चचेरा भाइक िहxसा हड़पैक िवचार िपताजीकT मनमे चिढ़ गेलैन।”
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सुलतान साहैबकT दू भैयारीमे सािठ बीघा जमीन छैन। जिहना िनचy पyचो बीघा जमीनबला–जेकर जन- बोिनहारक हाथे काज होइ छै, आ ऊपरक तँ ठेकाने ने अिछ–पिरवारक िधया-पुताकT भोगक चxकी लिग जाइ छै तिहना सुलतान साहैबकT सेहो चxकी लिग गेलैन। ओना, चिxकयो रंग-िबरंगक अिछए। केकरो जुआक चxकी, तँ केकरो बक-बैलgसक चxकी, केकरो खाइक चxकी, तँ केकरो पीबैक चxकी, तिहना केकरो मेला-ठेला देखैक चxकी, तँ केकरो र{डी-बेeया इयािद कोनो-ने-कोनो चxकी रिहते अिछ। मुदा सुलतान साहैबकT से एकाकी चxकी निह, जिहना सपैत बटोरैक चxकी तिहना वेeयालयक चxकी आ तिहना खाइयो-पीबैक चxकी सेहो लगले छेलैन। माने भेल जे मÅयम kेणीक पिरवारक िधया-पुताकT जिहना गोिट-प·रा चxकीमे मन चसैक जाइ छै तिहना hोपदीक पितक समूह जकy सुलतान साहैब भोगक चxकीमे चसैक गेला। जइसँ मानवीय सब`धक बोधक िवचार कुिवचारमे िवलीन भऽ गेलैन,जइसँ पिरवािरक वा समािजक सब`धक बोध मनसँ मेटा गेल छेलैन। जँ से रिहतैन तँ िपताक ओ गिरमा ज´र मनमे रिहतैन जे िपताक दाियव बनैए जे बेटा-बेटीक ऊपर ने अपन जीवनक एक पाइक रीन-पच रहए िदऐ आ ने पच-उधार केने रही। पिरवार चलैक िमक जे दाियव अिछ ओ सरपट रxते समगम भऽ सहारैत चली। खाएर जे जेतए अिछ से तेतइ ने फुलाएत- फड़त। बजलॱ- “बौआ, तोहरिबआह भेल छह?” सुलेमान- “हँ, दूटा बेटा-बेटी अिछ।” ठनका जकy मनमे खसल। खसल ई जे िपताक चलैत बेटा-पोता सबहक िजनगीक हया भऽ गेल..! पचीस बख>क औरतक (पुतोहुक) जिहना भेल तिहना सताइस बख>क बेटाक भेल, तैसंग दुनू पोता-पोतीकT के देखिनहार हएत। जे िपता अपने वकालत कऽ रहला अिछ, जीवनक अि`तम अवxथामे पहुँच गेल छैथ, अखन िडि°¬क कोट>क सजाकT हाइ कोट>मे अपील भेने, जमानत दए देने छैन, तिहना सुEीम कोट> तक हेबे करतैन जइसँ फyके-फyक अपने बँचल रिह िजनगीक अ`त करता, मुदा जइ बेटाक ऊपरमे हयाक पूण> दोष सािबत भऽ चुकल अिछ ओकर की गित हएत..! तोष-भरोस दैत बजलॱ- “की करबै, देखै नइ छी हमहूँ दा´क कारोबारमे जहल कािट रहल छी। सबहक देखिनहार भगवान छैथ। ओ की कोनो बेइमान छैथ जे अनका देखिथन आ अपना-सभकT नइ देखता।” सुलेमान बाजल- “अखन जाइ छी चचा। कनीकालमे फेर आएब।” q श»द सं¿या : 2606, ितिथ : 20अEैल2018
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[1] गाड़ा माने अशौच वxL फेकल [2] ठास वxतु [3] एक Eकारक गाछ [4] जेठमे अगता बरखा [5] जाड़क मासमे बरखा [6] 1947इxवी [7] शराब ब`दी [8] संगी
ऐ रचनापर अपन मंत}य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।
३. प_ ३.१. उमेश पासवान- किव त◌ा ३.२.Eीतम कुमार िनषादक िकछु किवता ३.३.डॉ. िशवकुमार Eसाद- िकछु किवत◌ा ३.४.डॉ. िशवकुमार Eसादक िकछु अनुिदत का}य (रजनी छाबड़ाक मूल िह`दीसँ) उमेश पासवान किवता ई की होइ छै थानापर रही हम सुखल रहए मोन शिन िदनक बात अिछ पyच बजे सािहय अकादेमीसँ
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA 89
आएल हमरा फोन
घर जाइ माइक पएर छुइब हम कहिलऐ- भेटल सािहय अकादेमी पुरxकार माए कहलकै- ई की होइ छइ अइमे पाइ लगै छइ आिक पाइ दइ छइ सभकT भेटै छइ ढौआ-कौरी तोरा भेटलौ पुरxकार!
जो रे कपर-ज´आ तोहर कामे रहै छौ बेकार केा सालसँ िडिबयाक सभटा तेल जरौलT हमरा मोन छैल जे तूँ डा±टर बिनतT रौदमे जरल देहक सौख-सेह`ता पुरा किरतT ब`हकी लागल खेत छोड़ैबतT मुँह-पेट बाि`ह तोरा पढ़ेिलयौ बिन गेलT चौकीदार आब हम ई की सुिन रहल छी ई की होइ छै सािहयकार सािहय अकादेमी पुरxकर..?
ऐ रचनापर अपन मंत}य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। Eीतम कुमार िनषादक िकछु किवता
गीतल
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA 90
आब अपनो मोन दैए उपराग किहयो-किहयो। इहलोक हाक पारए क´ याग किहयो-किहयो। िवषधर औ अजगरो सभ दुबकल छै गाम घरमे। 2। िनसबË सूइत कएलॱ रितजाग किहयो-किहयो।।
िनकहा िवचार ए±खन सुनए कहy केओ चाहए- 2 बूढ़ो-पुरान सुनबए खटराग किहयो-किहयो।। नवतुर कुसंगितसँ बेरथे बमैक बौड़ए- 2 आगत भिव°य आंकए दुरभाग किहयो-किहयो।। बुिधयारो गप गढ़ए गोRी सभामे अगबे- 2 xवारथ सेह`ते समटए िसरपाग किहयो-किहयो।।
िमिथला सपूत सह´ एखनो सुहरदे भावे- 2 तखने सुनाओत Eीतम अनुराग किहयो-किहयो। ¦
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गॱआँ-गीतल गॱआँ समाज बाजए कलजुग बेकार एलै। पुरखा सभहक कहबी सभटा देखार भेलै।। गॱआँ-समाज... समाज...
देवता बनैत सभ केओ मनु±खोसँ होइए ऊपर। पूजा नमाज देखबए िनकहा िवचार गेलै। पुरखा... गॱआँ...।
जिहँ-तिहँ देखै छी सनकी, ममत िसनेह कानए िबन बातो-के बतंगर अँगना-दुआर खेलै पुरखा... गॱआँ...।
नेतघ§ू नेता बिन कऽ जनताकT दैए धोखा करबए ठकुरसोहाती सपत उचार गेलै पुरखा... गॱआँ...।
सरकारो भऽ बेमातर दरखासो निह पढ़ैए घुसहा नदीमे उबडुब Eीतम पुकार हेलै...। पुरखा... गॱआँ...। ¦
हाय हौ िहतलग सॱसे गाम िहतारे तैयो खेत अफारे बेर-कुबेरक िहत लग मीता सभटा भेल देखारे सॱसे गाम िहतारे...।। तिहना िमिथलाक बुझनुक बाबू...। ऐंठैत जुग दुकारे...। सॱसे गाम िहतारे...।। 0।।
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA 92
एक तँ धरती िदन-िदन ´सए दोसर दैबो करए कमाल ताहुसँ बिढ़ कऽ नीित-धरम सभ मनु±खक िजनगी कएल बेहाल भूकप रौदी दाही संगे, बेढ़ब थाल िखचाड़े...। सॱसे गाम िहतारे...।। तिहना िमिथलाक...।। 1।।
टोला-टपड़ा भेल झंझिटया, जेना मरघिटया लागैए गाम उजिड़ते शहर पड़ाइए, पढुओ गामसँ भागैए बचल-खुचल िहतलºगुओ सिदखन, उपनेिह जूइत सुतारे...। सॱसे गाम िहतारे...। तिहना िमिथलाक...।। 2।।
Âान-िवÂानक अजबे सनकी नव उपम संग ऐंठैए मशीनक मोजर-मनु±खसँ बेसी लुइर-बुइध सभ बैठैए सोगे-िपे-सोचए Eीतम आलसी जनम बेकारे...। सॱसे गाम िहतारे...। तिहना िमिथलाक...।। 3।। ¦
सीखऽ तँऽ िदयऽ सुकीि>क हकारसँ हकमैत अएलहुँ िसनेह EसादोकT चीखऽ तँऽ िदयऽ सदितसँ जनल अिछ अहy कीि> यशकT वैहेए आचरण हमरो सीखऽ तँऽ िदयऽ
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA 93
कनेक ठाढ़ होइयौ औ छल छÙ संगे करम-Âान-गुण किनयो िलखऽ तँऽ िदयऽ अपन आचरण हमरो सीखऽ तँऽ िदयऽ...।। 0।।
अहyक सुख सिदखन िसहौलक-िसखौलक ताही लेल हमहूँ तँऽ पाछू लागल छी अहy दप> गौरव सँ खाहे केओ जरए मुदा हम सेह`ता केर संगे जागल छी कोना दप> ऐsय> एतेक ज²दी भेटल तेकर पgच-बुइधोकT ठीकऽ तँऽ दीयऽ सदितसँ जानल अिछ अहy कीित> यशकT वैहेए आचरण हमरो सीखऽ तँऽ िदयऽ...।। 1।।
अहy सभ तरहT सँ सुिवधा भोगै छी हमर कछमछीकT अहूँ िकिछयो बूझू अहyक बाल-बचा सनक हमरो नेनाक भवतव ममत xनेह आिशष दऽ जूझू।। नगर गाम बाजय अहूँ होइ छी िबकरी त हमरो खुशामद लऽ िबकऽ तँ िदयऽ सदितसँ जनल अिछ अहy कीि> यशकT वैहेए आचरण हमरो िसखऽ तँ िदयऽ...।। 2।। ¦
ईर घाट , वीर घाट आजुक समाज केर अजबे अिछ ठाठ बाट कखनो केओ ईर घाट कखनो केओ वीर घाट कमाल बवाल करै लोकतंL राज-पाट कखनो केओ...।। 0।।
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िशJा-संxकार सदित लट-पट करैए गोबर गणेश सभ अट-पट करैए जनी पुnख सेहो गुन-धुन करैए नवतुर बाऊर होइतT पिरजन डँटैए इरखे आ`हर लोक मरैए हाट-बाट कखनो केओ...।। 0।।
गणतंLक नारा लऽ सनकैए सा संसद िवधानक बखान अलबा शासन िवचौिलयाउड़ाहैए खा सामािजक xनेहभेल िदन-िदन िनपा हािकम-हुकुम सेहो मारए धोिबया पाट कखनो केओ...।। 0।।
हँसनी-खेलनी अँगना घरसँ हेराएल सहठुल सुपातर सभ दु:खसँ घेराएल अगीक ढीठपनसँ बुइधो पड़ाएल हेै की..? जुग-जगमे जनमित डेराएल सभतिर देखए Eीतम दुरकलह मार-काट कखनो केओ...।। 0।। ¦
खगता-बेगरता जीबै छी! तसुख-शाि`तकT, गाम-घरमे खगता अिछ। माऽए-बाप संगे, नेना-भुटकाक, सुख सौभाºय सेह`ता अिछ। दुयåगे दु:ख दूर करऽमे, बहुतो रास बेगरता अिछ। हमरेटा निहं हमरे जकy, सभकT एहन बेगरता अिछ।। पिहलुक गाम समाजमे सिदखन लोक लेहाज औ ममत रहल
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धरम-करम सभटा छल सुथड़ कुटुम सब`धीक xनेह सजल मुदा एखन तँ अजबे हाल अिछ अपxयyत करता-धरता अिछ।। दुयåगे दु:ख...। हमरेटा निहं...।। 0।।
पच उधार पिहलुका जकy कहy कहु आब भेटैए गौरबे-आ`हर मीत-पड़ोसी दु:ख-दुिवधा कहy मेटैए त कलजुगहा हाल सँ कलपैत टूटल मोनक छगु`ता अिछ। दुयåगे दु:ख...। हमरेटा निहं...।। 0।।
आजुक बूढ़-पुरान अवा¤े नवतुिरयाक सनकी देखए ओ¤र माऽए बाप सेहो गुमे पुरखॱती Eण फgकैए केहुना िजनगी खेपए Eीतम दैबेटा दु:खह अिछ दुयåगे दु:ख...। हमरेटा निहं...।। 0।। ¦
नीक -बेजाय जोड़ल हाथ अगोरल आशा, kी मन आगत Åयान देबै..। एखनुक युगवासी करतब सँ, kोता-पाठक Âान लेबै...।। हम कलजुगहा गप कहै छी
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सुिनयौ बुझनुक लोक सिदखन दyत िचयारैत कलजुग बyटए लोक मे शोक बुइधक बिधया लोके करैए दैए दैवक दोख बुझू तँ की नीक भेलैए कहू तँ की ठीक भेलैए हम कलजुगहा...।। 0।।
िदन-िदन अजगुत लीला ए±खन गाम-गाम मे िबहुँसैए पोथी-पतरा वेद-¦ंथ सभ बूढ़-पुरान संग कुहुँसैए ममहर-बपहर सभतिर देखल जनीपुnख सभ बहसैए नव घर उठए- पुरनका खxसए संग सेह`ता रबसैए नेकी धरम-करम-मरणास बकुआएल सुर लोक बुझू तँ की...। हम कलजुगहा...।। 1।।
ए±खन दा´ दहेजक चच जन-मनमे अिछ पसिर रहल वाह-वाह नीितश कहैत नारी आ`दोलन िदिश ससिर रहल खड़रा बढ़नी लैत बहुिरयो कहै दnपीबा रिहयौ हटल सहरत िधया-पूता िजनगी घर सुख-शाि`त लेल रहू अटल
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नशा मुि±त अिभयानमे सभकेयो दौिड़यौ पीिठयाठोक...। बुझू तँ की...। हम कलजुगहा...।। 2।।
शासन-मीिडयो खूब कराबए कलमदूत सँ ठकुर सोहाती नेता किवकाठी िपछलºगू छपबए अपन दभक पyती कलमकार Eीतम रचना अिछ सyच संविदया बिन उपाती अिहना लेखनी चिलते रहतै चाहे केकरो फाटौ छाती गाम-घर जनमंच सँ सyचक गप कहब िनËोख बुझू तँ की...। हम कलजुगहा...।। 3।। ¦
हम के? और की? हम के? की छलहुँ आओर की की भेलहुँ आब की होयब िकिछयो सुझाइए कहy। कोप धरती गगन, चान सुnजो िकरण Eाथ>ना औ भजन, िकछु बुझाइए कहy।। आब की होयब िकिछयो सुझाइए कहy...।। 0।।
इµ वा िशµ िविशµ कT फेरमे, राित-िदन सभ अपिशµ होइते गेलॱ Âान-िवÂान संÂानसँ घूिमते, ूर कालकT गाल Eिवµ भेलॱ
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA 98
सभ अपने बेगरतेसँ अ`हराय कT दोष दोसराकT दए कहिथ जानए जहy कोप धरती गगन.., Eाथ>ना औ भजन...।। 1।।
लोक सुधरल िक िबगड़ल से किह निञ सकी िदनो-िदन गाम उजड़ल िगरल सन लगल कािन कहए जनम डीह सापूत कय? xवाथ> सेजक शयनसँ ओ निहएँ जगल सभ तरहT Eदूिषत धरगन एखन ई कnण भाव Eीतमक बुझाबू अहy कोप धरती गगन.., Eाथ>ना औ भजन...।। 2।। ¦
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देख एलॱ हम पटना हलसल-फुलसल बसमे बैस कऽ पहुँिच गेलॱ हम पटना देख एलॱ हम पटना।
भिर रx ता हम उिड़ते गेलॱ राित क नीन भेल सपना केतबो गुहािर देव-गोसाओनकT मन पड़ैत छल फेकना देख एलॱ हम पटना।
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बाप जनम नै देखने छलॱ एहेन मनु± खक जंगल भोजे बेरमे पहुँिच गेल ओ पिप आहा घर-घुसना देख एलॱ हम पटना।
चोर-उचका डेग-डेगपर भीड़ देिख कऽ जी उड़ैत छल बाहर-भीतर जाएब किठन छल बेथाक नाओं अिछ पटना देख एलॱ हम पटना।
हुनकर बात कािट हम एलॱ बाल-बोधकT छोिड़ कऽ एलॱ नेताजी की बात बनौता मोन रहत ई घटना देख एलॱ हम पटना।
मन होइत अिछ उिड़ कखन हम पहुँची अपन सोहागक अँगना मेटा रहल अिछ झँपा रहल अिछ अपन हुलासक सपना देख एलॱ हम पटना। q
नेह
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भोरे भोर जँ आिग उठैत छै कोना मेटत िबनु पािनक मेह कोना कतहु Eेम उपजतै िकनका लग भेटत ओ नेह।
िजनगी भिर िसनेहक आसे गाछे गाछ घुिम एलहुँ एक-आधकT छोिड़ जँ पूछी बyझे बyझ बौएलहुँ।
िनम>ल मनकT िनम>ल एना ओिहमे ´प सलोना ओिह ´पकT पागल सुगना ताकए कोना कोना। q
िकनको ±यो निह भेल माया-मोह ममतामे फॉंसल िजनगी रहल हेराएल नीत-अनीत ने मानल किहयो ताहुसँ तोष निह भेल। जगतमे िकनको िकयो निह भेल।
िजनिगक जॲक सदैत लेहु पीलक िदन िदन मोटगर भेल देह सुखाएल पएर िनह तागैत िकनको कहल निह गेल जगत मे िकनको...।
नैन रहैत देखल निह िकछुओ kुितपथ करए ने काम चम> nिधर करए मनमानी कम¶ बैरी भेल जगतमे िकनको िकयो निह भेल। q
िपयास
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अपनिह मने धार उपछै छी कखनहुँ उड़ी अकाश ताल तलैया जंगल पव>त उड़ी पवनकT लाथ सगर जनम औनाएते िबत गेल तैयो ने मुइल िपयास। q
अमा केर छोिलका िछलैत अिछ सभ िदन अमा केर छोिलका राजनीित कूटनीित भेल जेना ओिरका।
सभटा मलाय खाएत िनतौ मुटाइत अिछ खुरचन आ छोलनीसँ िछलाएत कोना सभटा िछलैत अिछ...।
बकरी दुहैत छै पाठी मेिमयाइ छै अपन अपन पठ´ लेल औना रहल सभटा िछलैत अिछ...।
माइयेक पेटसँ सभ सीख एलै राजनीित राजनीित पढ़ुआ सभ
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धेने अिछ को`टा िछलैत अिछ सभ िदन...।
हे जगत गुn जन खॲिट कऽ एको टुक हमरो जँ दैितऐ पढ़ल िलखल राजनीित घुिम अिबतै सभटा। िछलैत अिछ सभ िदन अमा केर छोिलका। q
ओझराहैट करिचक ओझराहैट सन िजनिगक अिछ झंझैट एकटासँ छुटैत दोसरामे ओझराइत छी।
देह गेह नेह संग डूमैत आ थाहैत कखनहुँ अकाश खन बसाते उिड़ जाइत छी। एकटासँ छूटैत दोसरा...।
लोभ मोह सोग केर मिहमोकT जानैत मायाकेर फyसमे तैयो ब`हाइत छी एकटासँ छूटैत दोसरा...।
िजनगी उिड़ रहल बिन कऽ ककोहा तैयो नव खड़ही बिन
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जीबैले छटपटाइत छी एकटासँ छुटैत दोसरामे ओझराइत छी। ऐ रचनापर अपन मंत}य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। डॉ. िशवकुमार Eसादक िकछु अनुिदत का}य (रजनी छाबड़ाक मूल िह`दीसँ) (PAGHALAIT HIMKHAND Maithili translation of ‘PaighalteHimkhand’ An Anthology of Hindi Poems by Rajni Chhabra from H indi into Maithili by Dr. Sheo Kumar Prasad.) आजुक नारी आजुक जनानी अबला निह जे िबपैत पड़लापर टुटलाहा माला जकy िछिड़या जाइ छै।
आजुक जनानी सबला अिछ जकरा टुिटयो कऽ जुड़ब आ जोड़बाक कला बूझल छै। q
हम केतए छेलॱ हम जखन ओिहठाम रही तखनो ओतए निह रही।
अपनिह संसारक मेलामे
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA 104
हम हेरागेल रही निह जािन केतए रही।
पैघक गुणक नकल करैत छल हमर }यि±तवक अपहरण , हमर िनजव पपड़ी दर पपड़ी क»बरमे झँपाएत रहए आ हम अपन छीण होइत xवसँ िफरसान रही।
कyच उमेड़मे कनहाक बेगरता रहै छै।
अपन पैरपर ठाढ़ भेला पछाइत कनहा धऽ चलब अपन बेकूफी छैक।
सोनजूही सन पुनकब अपन Jमता रिहतहुँ दोसराक बले चलब िकए मािन लेने छल भाºय हमर।
िनःश»द बेथा आ नोरसँ
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA 105
धैरज रखिनहार जगतीक छाती पटा कऽ बरखो-बख>क पछाइत हम अँकुरलॱ अिछ आब मनमे संजोगने पुनकबाक इछा ।
झॱखरा जकy निह , हम चाहै छी नीर -िनिध सन पसार।
निह जीबए चाहै छी गुçडीक िजनगी, लेने अकासक पसार , जुिड़ कऽ सyचक धरासँ बनए चाहै छी अपन िजनगीक अपनिह अधार। q
िबसबास अहy अपनापर िबसबास राखू संसार अहyपर िबसबास करत पकड़ने रहू आसाक डोिर अहyक आस िनरास निह करत।
रौदसँ सुनगैत होए जे आँगन किहयो ने किहयो इसरक िकरपाक मेघ , छyह बिन एबे करतै।
कारी िसयाह राितकT
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छाती िचरबाक तागैत जइ िदयारीमे छै ओइ िदयारीकT अ`हरो िनरास निहएँ करतै।
अ`हरकT मुकैबला जे कऽ लइ छै मलाह हुनका िजबाक ढंग अपने आिब जाइ छै।
आस , िबसबास आ िहमतक जखन होइए छै िमलान तँ दुिनयyक कोनो कलेस निह रहै छै कलेस।
िबसरा जाइ छै पैछला झंझैटक समय।
बैस जाइ छै फेनसँ खुशीक घर।
िजनगी गाबए लगै छै राग आ मलार। q
मनक कनकौआ कनकौआ सन सौखीन मन लेने चुलबुलीक पहाड़ छूबए चाहैत अिछ
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सॱसे अकासक िबxतार।
पहाड़ , समुh , अटािरक िबxतार सन सभ झंझैटकT अि`ठयाबैत आगुए आगू पएर बढ़बैत अिछ।
िजनगीक थकाबैटकT मेटेबा लेल चाही मनक कनकौआ आ सपनाक अकास जािहमे मन भिर सकै िनधोख सतरंगा उड़ान।
मुदा िकए दी दोसराक हाथमे अपन डोइर ? छण छण लागल रहत शंकाक परेत कखन हम किट जाय कखन हम लुिट जाय ?
चुलबुलाहैट , चपलता नेने देखए मन क²पनाक एना, सyचक जमीनपर िटकल पएरे ने दइ छै िजनगीक अथ>। q
घर
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िसनेह आ आतमीयता जखन देबालक चार बिन जाइ छै।
वएह घर घर कहाइ छै। q
सुनसान जे छुिट जाइ छिथ एिह िजनगीक जेहलसँ पािब जाइ छिथ एकटा नब िजनगी।
बेजान तँ ओ रहै छिथ जे ओकर बादो िजबैत छिथ।
ने रहै छै कोनो उसाह ने उमंग रिह जाइ छै बस सुनसान , हरेक खुशीक छण सेहो कऽ जाइ छै उदास।
ऐ रचनापर अपन मंत}य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।
आगyक अंक
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िवदेह ¥ारा संचािलत "आमंिLत रचनापर आमंिLत आलोचकक िटपणी" शृंखलाक दोसर भागक घोषणा कएल जा रहल अिछ। दोसर भागमे अइ बेर नीलमाधव चौधरी जीक रचना आमंिLत कएल जा रहल अिछ आ नीलमाधवजीक रचना ओ रचनाधिम>तापर िटपणी करबा लेल कैलाश कुमार िमkजीकT आमंिLत कएल जा रहल छिन। रचनाकारक रचना ओ आलोचकक आलोचना जखने आिब जाएत ओकर अिगला अंकमे ई Eकािशत कएल जाएत।
अइ शृंखलाक पिहल भाग कािमनीजीक रचनापर छल आ िटपणीकत मधुकत झाजी छलाह।
जेना की सभ गोटा जनै छी जे िवदेह २०१५ मे तीन टा िवशेषक तीन सािहयकारपर Eकािशत केलक जकर मापदंड छल सालमे दूटा िवशेषक जीिवत सािहयकारक उपर रहत जइमे एकटा ६०-७० वा ओइसँ बेसी सालक सािहयकार रहता तँ दोसर ४०-५० सालक ( मैिथली सािहयकार मने भारत आ नेपाल दूनूक)। ऐ ममे अरिव`द ठाकुर ओ जगदीश चंh ठाकुर "अिनल"जीपर िवशेषक िनकिल चुकल अिछ। आगूक िवशेषक िकनकापर हुअए तइ लेल एक मास पिहनेसँ पाठकक सुझाव मyगल गेल छल। पाठकक सुझाव आएल आ ओइ सुझाव अंतग>त िवदेहक िकछु अिगला िवशेषक परमेsर कापिड़, वीरे`h मि²लक आ कमला चौधरी पर रहत। हमर सबहक Eयास रहत जे ई िवशेषक सभ २०१८ मे Eकािशत हुअए मुदा ई रचनाक उपल»धतापर िनभ>र करत। मने रचनाक उपल»धताक िहसाबसँ समए ऊपर-िनचा भऽ सकैए। सभ गोटासँ आ¦ह जे ओ अपन-अपन रचना editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा दी।
िवदेहक िकछु िवशेषक :- १) हाइकू िवशेषक १२ म अंक , १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल िवशेषक २१ म अंक , १ नवबर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) िवहिन कथा िवशेषक ६७ म अंक , १ अ±टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_T irhuta 67 ४) बाल सािहय िवशेषक ७० म अंक , १५ नवबर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70
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५) नाटक िवशेषक ७२ म अंक १५ िदसबर २०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी िवशेषक ७७म अंक ०१ माच> २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) बाल गजल िवशेषक िवदेहक अंक १११ म अंक , १ अगxत २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 11 1 ८) भि±त गजल िवशेषक १२६ म अंक , १५ माच> २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समीJा िवशेषक १४२ म, अंक १५ नवबर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 १० ) काशीकत िमk मधुप िवशेषक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरिव`द ठाकुर िवशेषक १८९ म अंक १ नवबर २०१५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश च`h ठाकुर अिनल िव शेषक १९१ म अंक १ िदसबर २०१५ Videha_01_12_2015 १३ ) िवदेह समान िवशेषाक- २००म अक १५ अEैल २०१६ / २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016
Videha_01_07_2016
१४ ) मैिथली सी.डी./ अ²बम गीत संगीत िवशेषक - २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७
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Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंिLत रचनापर आम ंिLत आलोचकक िटपणीक शृंखला १. कािमनीक पच टा किवता आ ओइपर मधुका`त झाक िटपणी VIDEHA 209th issue िवदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 जगदीश Eसाद म{डल जीक ६५ टा पोथीक नव संxकरण िवदेहक २३३ सँ २५० धिरक अंकमे धारावािहक Eकाशन नीचyक िलंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018
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Videha_15_04_2018
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िवदेह ई -पिLकाक बीछल रचनाक संग - मैिथलीक सव>kेR रचनाक एकटा समाना`तर संकलन िवदेह :सदेह :२ (मैिथली Eब`ध -िनब`ध -समालोचना २००९ -१० ) िवदेह :सदेह :३ (मैिथली प_ २००९ -१० ) िवदेह :सदेह :४ (मैिथली कथा २००९ -१० ) िवदेह मैिथली िवहिन कथा [ िवदेह सदेह ५ ]
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िवदेह मैिथली लघुकथा [ िवदेह सदेह ६ ] िवदेह मैिथली प_ [ िवदेह सदेह ७ ] िवदेह मैिथली ना«य उसव [ िवदेह सदेह ८ ] िवदेह मैिथली िशशु उसव [ िवदेह सदेह ९ ] िवदेह मैिथली Eब`ध -िनब`ध -समालोचना [ िवदेह सदेह १० ] The readers of English translations of Maithili No vel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par " has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works i n English himself . After these translations are complete these would be the offici al translations authorised by the Author of original work .-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google. com/a/videha.com/videha -pothi/ Maithili Books can be purchased from: http://www.amazon.in/ For the first time Maithili books can be read on ki ndle e -readers. Buy Maithili Books in Kindle format (courtesy Videha) fro m amazon kindle stores, these e books are delivered worldwide wirelessly: - http://www.amazon.com/ िवदेह समान : समान-सूची
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िवदेह
मैिथली सािहय आ`दोलन
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(c)2004-18. सविधकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अिछ ततऽ संपादकाधीन। िवदेह- Eथममैिथली पािJक ई-पिLका ISSN 2229-547X VIDEH A सपादक: गजे`h ठाकुर। सह-सपादक: उमेश मंडल। सहायक सपादक: राम िव लास साहु, न`द िवलास राय, स`दीप कुमार साफी आ मुाजी (मनोज कुमार कण>)। सपादक- नाटक-रंगमंच-चलिचL- बेचन ठाकुर। सपादक- सूचना-सपक>-समाद- पूनम मंडल। सपादक- अनुवाद िवभाग- िवनीत उपल। रचनाकार अपन मौिलक आ अEकािशत रचना (जकर मौिलकताक संपूण> उरदाियव लेखक गणक मÅय छि`ह) editorial.staff.videha@gmail.com कT मेल अटैचमे{टक ´पमे .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉम¶टमे पठा सकै छिथ। रचनाक संग रचनाकार अपन संिJत पिरचयआ अपन xकैन कएल गेल फोटो पठेता, से आशा करै छी। रचनाक अंतमे टाइप रहए, जे ई रचना मौिलक अिछ, आ पिहल Eकाशनक हेतु िवदेह (पािJक) ई पिLकाकT देल जा रहलअिछ। एतऽ Eकािशत रचना सभक कॉपीराइट लेखक/सं¦हक लोकिनक लगमे रहति`ह, माL एकर Eथम Eकाशनक/ िEंट-वेब आकइवक/ आकइवक अनुवादक आ आकइवक ई-Eकाशन/ िEंट-Eकाशनक अिधकार ऐ ई-पिLकाकT छै, आ से हािन-लाभ रिहत आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊय²टीक/ पािरkिमकक Eावधान नै छै। तT रॉय²टीक/ पािरkिमकक इछुक िवदेहसँ नै जुड़िथ, से आ¦ह। ऐ ई पिLकाकT kीमित ल³मीठाकुर ¥ारा मासक ०१ आ १५ ितिथकT ई Eकािशत कएल जाइत अिछ। (c) 2004-18 सविधकार सुरिJत। िवदेहमे Eकािशत सभटा रचना आ आकइवक सविधकार रचनाकार आ सं¦हक लगमे छि`ह। ५ जुलाई २००४ कThttp://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसिरक गाछ”- मैिथली जालवृसँ Eारभ इंटरनेटपर मैिथलीक Eथम उपिxथितक याLा “’िवदेह’- Eथम मैिथली पािJक ई पिLका” धिर पहुँचल अिछ,जे http://www.videha.co.in/ पर ई Eकािशत होइत अिछ। आब “भालसिरक गाछ”जालवृ 'िवदेह' ई-पिLकाक Eव±ताक संग मैिथली भाषाक जालवृक ए¦ीगेटरक ´पमे Eयु±त भऽ रहल अिछ। िवदेह ई-पिLका ISSN 2229-547X VIDEHA िसिËरxतु