VIDEHA — Issue 255 / अंक २५५

Publication: VIDEHA · Issue: 255
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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५५ म अंक ०१ अग᭭त २०१८ (वषᭅ ११ मास १२८ अंक २५५ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 1

ISSN 2229-547X VIDEHA 'िवदेह ' २५५ म अंक ०१ अग6त २०१८ (वष; ११ मास १२८ अंक २५५ )

िव दे ह िवदेह Videha িবেদহ http://www.videha.co.in िवदेह Bथम मैिथली पािHक ई पिJका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह Bथम मैिथली पािHक ई पिJका नव अंक देखबाक लेल पृP सभकR िरTेश कए देखू। ऐ अंकमे अिछ:- १. संपादकीय संदेश

२. ग\ २.१.िमिथलेश िस]हा "दाथवासी" (िमिसदा)- बीहिन कथा- िपयार २.२.१.नारायण यादव- Bेमक आँसु २. डॉ. बचेfर झाक आलेख- क]यादानक भीषण सम6याक कारण २.३.१.रबी]i नारायण िमj- तीनटा आलेख, दूटा लघुकथा आ उप]यास नम6त6यै (आगo) २. डॉ. योगे]i पाठक ’िवयोगी’- उप]यास- हमर गाम (पिहल खेप) २.४.जगदीश Bसाद मuडल- पंगु (उप]यास)- आगo आ दूटा लघुकथा

३. पद ◌्य ३.१. १. राहुल कुमार चौधरी- हेलैत Bाण २. आशीष अनिच]हार - दू टा गज ल ३.२.१. किवBीतम कुमार िनषादक िकछु किवता २. िमिसदा- "6मृित शेष" ३.३.रिवभूषण पाठक- दूटा किवता ३.४.१.अनुवादक डॉ. िशवकुमार Bसादक िकछु अनुिदत काzय (मूल रजनी छाबड़ा- िह]दी) २.किव डॉ. िशवकुमार Bसादक िकछु किवत◌ा

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२. ग\ २.१.िमिथलेश िस]हा "दाथवासी" (िमिसदा)- बीहिन कथा- िपयार २.२.१.नारायण यादव- Bेमक आँसु २. डॉ. बचेfर झाक आलेख- क]यादानक भीषण सम6याक कारण २.३.१.रबी]i नारायण िमj- तीनटा आलेख, दूटा लघुकथा आ उप]यास नम6त6यै (आगo) २. डॉ. योगे]i पाठक ’िवयोगी’- उप]यास- हमर गाम (पिहल खेप) २.४.जगदीश Bसाद मuडल- पंगु (उप]यास)- आगo आ दूटा लघुकथा

िमिथलेश िस]हा "दाथवासी" ( िमिसदा) बीहिन कथा िपयार ''की गै, की हाल छौ ?''

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''मर टिटवा, आई फुरैलौ यै, जिहया कहिलयौ, अŽपन बाबू क हमर बाबू लग भेजहॴ तखन त' बकोड़ लािग गेलौ.....आई, पूछै से केना ?'' ''आंय गै, हमर बाबू जेतौ तोहर बाबू लग ? निह, निह.... हम लड़का बाला छी, हम कोना क' बाबू के तोहर बाबू लग भेिजयौ ? अŽपन बाबू के हमर बाबू लग भेज, हम बाित सहािर लेबौ !'' ''आिह....आिह..... आंय रौ, हम गेल छिलयौ तोरा लग कहै लेल,जे हम तोरा सं िपयार करैत िछयौ ?'' ''एह, ई जेना िकछुए ने केलकै.... आंय गै, मनोजवा केर िवयाह मे एतेक िनहािर िनहािर िकएक देिख क हँसैत रह“ ?'' ''अ”छा.... ओिह िदन ? रौ, ओिह िदन, तोहर पैजामा केर डोरी िन”चा लटकैत रहौ त“.'' ''हे गै, एतेक ने बोन, ओिह िदन तॲ आम'क बारी मे नै कहने छल“ िक हम तोरा नीक लागै िछयौ ?'' ''आंय रे, मनसू—खा, नीक लागै केर मतलब भेलै िक हम तोरा सं िपयार करै लगिलयौह ?'' ''िठ˜े छै तोरा हमरा सं िपयार निह छौ, तखन हम जाइत िछयौ !'' किह राजेश चल'लागल. ''ऐ, राजेश केमहर जाता है , ई िपयार का खेल खेला के हमको बुड़बक बनाता है, बूिझ लो, हम तोहर पoछा किहयो छोड़गे....िपयार मे नाटक करै छ“ ?'' किह कान' लागल. ''हेह तोरा की बूिझ पड़ता है िक तोरा हम निह बुझता है, हम तोहर िबनु रिह सकता है..... हम तोरा बहुत िपयार करता है जी.....? बजैत राजेश ओकर हाथ पकिड़ लेलक. -"िमिसदा" (िमिथलेश िस]हा "दाथवासी") मोह™ला/पो6ट : लšमीसागर, िजला : दिड़भंगा.

ऐ रचनापर अपन मंतzय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। १. नारायण यादव - Bेमक आँसु २. डॉ. बचेfर झाक आलेख - क]यादानक भीषण सम6याक कारण आ

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१ नारायण यादव Bेमक ऑंसु बात ओिह समयक िथक। जखन रामू काकाकR तेसर बेटीक ज]म भेल छलै]ह। हम भोरमे टहलवाक शौकीन छी। भोरे उिठ जखन दू-तीन िकलोमीटरसँ टहिल वावस भेल रही तँ देखै छी जे राम काका माथपर हाथ नेने, मुँह लटकौने बैसल छिथ। हम तँ पिहने बड़ आœय;चिकत भेलहु। जे रामू काका एकटा हसमुख चेहराआ मजिकयल छलाह। गाम भिरक लोक सभ हुनकासँ खुश रहै छल िकएक तँ ओ कहनो आफद-िवपत आ मुिसवतमे पड़ल लेाकककR हसबैत रहै छलाह। से आई मनहुस िकयैक भेल छिथ? हम िहनकर िचनताकR भॉंिप निह सकलहु। मुदा एकाएक पुिछ देबैक सेहो नीक निह बुझना जाइत छल। िकयैक तँ जखन ओ भेटत छलाह तँ कहैत छलाह जे मौरिनंग-वाकसँ आिब गेलहु। कहु तँ 6टेशन कय डेग भेल। 6टेशनकR नपबाक भार रामू काका हमरेपर छै जे अहॉं कहै छी। तँ ककरापर छैक भोरे उिठ 6टेशनपर च˜र अहॉं दैत छी आ नपबाक भार हमरापर रहत। सुवहमे टहलवाक मजा दोसर छैक रामू काका। आ हमहॴटा थोरे टहलै छी। हमर िमJ लोकिन अपन घरवालीक संग टहलैत छिथ। आर जे अकेले रहैत छिथ हमरा संग जाइत छिथ जेना सय नारायण बाबू, जय नरायण बाबू, राजवीर बाबू, बड़ा बाबू, लाइवžेिरयन साहेव, दीपकजी, िवजय बाबू, युगेfर बाबू। सुवहक मौरिनंग वाक् सँ बड़ लाभ होयत छैक। रामू काका जकरा कोनो तरहक Ÿलड Bेसर छैक, मधुमेह , थाइराइड छैक, िडBेशन छैक, आिद-आिद सभ िवमारीक दवाई छैक मॉंरिनंग वाक। आ जकरा कोनो बीमारी निह छैक तकरा लेल तँ सोनामे सुग]ध भय जाइत छैक। ओिह आदमीकR जावत टहलैत रहत तावत् कोनो बीमारी भैये निह सकैत अिछ। रामू काका जखन भेिट जाइत छलाह तँ एिह Bकारक गŽप-सप हंसी-मजाक होइत छल। मुदा आजुक माहौल अजीव छल। रामू काकाक िचि]तत मुiा देिख हम हुनका नजदीकमे बैिस रहलहु आ कहलहु- “रामू काका कने तबाकू खुऔ।” रामू काका चून-तबाकू दैत बजलाह- “हौ तो तँ तबाकू निह खाइत छलह। किहयासँ खाय लगलह?” िहनक िचि]तत मुiा भंग भेल। हम बजलहु- “रामू काका से तँ ठीके कहलहु। हम तँ तवाकू निह खाइत छी। मुदा अहॉंक उदास मुiा देिख, हमहु िचंितत भय गेल छलहु। अहॉंक िचितंत आ उदासी मुiा देिख ओिह मुiाकR भंग करवाक हेतु चून-तबाकूसँ बात शु£ कयलहु।” हम चुनौटीसँ तबाकू िनकािल ओिहमे चून दय लगवय लगलहु। आ रामू काकाकR दैत बजलहु- “रामू काका, सभ ठीक-ठाक अिछ की निह?”

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“की ठीक रहत फेर बेिटये भेल।” हमरा हंसी लाइग गेल आ हम खुब जोरसँ हसैत बजलहु- “रामू काका, अहॉं बड़ भा¤यशाली लोक छी। जे तीनटा बेटी भेल। साHात लšमी-सर6वती आ पाव;तीक ज]म अहॉं ओिहठाम भेल अिछ। हम एिहशीक अवसरपर अहॉंकR मुवारक दैत छी। एिहमे दु:खी होयबाक कोनो B¥े निह अिछ। बेटी एहेन सुख िथक, जकरापर ईfर मेहरवान छिथ, ओकरे बेटी होइत अिछ।” बेटी 6Jी अिछ, बेटी नारी अिछ, बेटी फुलवारी अिछ, बेटी दप;ण आ दश;न अिछ। बेटी सीता अिछ, बेटी सािवJी अिछ, बेटी माता अिछ, बेटीविलदानक गाथा अिछ, बेटी jमद् भागवत गीता अिछ, बेटी अिछ तँ संसारमे सभ सुख भेटत। माय-पावक जे सेवा बेटी करत ओ बेटा कथमिप निह करत। तR, बेटी भेल तािह लेल अपने एतेक दुखी छी? रामू काका हमरापर खौझाइत बजलाह- “यौ मा6टर साहेब, अहूँ हमरासँ मजाक करैत छी, हमरा खौझा रहल छी। अहॉंकR होइत अिछ की हम बेटी जनमावऽ बाला मशीन छी। देखू मंगलाकR ओ केहेन मिरयल अिछ आ ओकरा दू-दूटा बेटे छैक। हमर ई तेसर बेटी अिछ। सभ हमर मजाक उड़बैत होयत। आब हम एिह समाजमे मुँह देखयवाक निह रिह सकलहु। हमरा बेटीसँ बड़ नफरत भय गेल अिछ। आओर हमरा तीन-तीनटा बेिटये अिछ।” रामू काका अहॉंकR बेटीसँ िकयैक एतेक नफरत भय गेल अिछ। बेटी निह रहत तँ एिह संसारक jृि§ कोनो होयत। यिह बेटीसँ नफरत अिछ तँ िवयाह िकयैक कयलहु। बेटीसँ नफरत अिछ तूं मायक कोखसँ जनम िकयैक लेलहुँ मॉंओ तँ बेटीक £प िथक। रामू काका, ओ आब युग-जमाना निह अिछ जे बेटी समाजक कोढ़ बनत। बेटीक उँचाई आब बेटासँ बेसी छैक। कोन एहेन िवधा अिछ जािहमे बेटी, बेटासँ कम छैक से देखू तँ बेटा जखन जबान होयत तँ की करत की निह से िकयो निह जानैत अिछ। जुआरी राखी, zयिभचारी, लू”चा, लपट आिद भय सकैत अिछ। बेटी किहयो शरावी, जुआरी, चोर, डकैत निह भय सकैत अिछ। देखू जे डकैती, लूट, अपहरण बेटे निह करैत अिछ। पैघ-पैघ लोकक जेना- पैघ हाकीम, मंJी, िवधायक आ स©सद बेटा लूट, डकैती, अपहरणक अंजाम दय रहल अिछ। तR बेटीकR पोसू- पालू आ िशिHत बनाउ। एकटा बेटी िशिHत होयत तँ एकटा पिरवार िशिHत होयत। आ एकटा बेटा िशिHत होयत तँ माJ एकटा पुªष िशिHत होयत। रामू काका, अहँ अपन िच]ताकR यागू आ बेटा-बेटीमे फक; निह राखू। देखैत निह िछऐक जे शिशका]त बाबक बेटी यू.पी.एस.सी. परीHामे तेसर 6थान BाŽत कयलक अिद। एै यौ रामू काका, अपना गाममे बेटाक कमी छैक कहo ककरो बेटा एहेन पद BाŽत कयलक अिछ। रामू काका जे मनहूस छलाह से आब मन हुलसगर भेलै]ह। ओ मनोयोगसँ तीनू बेटीक लालन-पालन आ समुिचत िशHाक zयव6था केलै]ह। िकछु िदनक उपरा]त तीनू बेटीक पढ़ाई-िलखाई चलय लागल। तीनू बेटीक नाम सीता, गीता आ सािवJी छल। पढ़य-िलखयमे तीनॲ एकपर एक छल। पिहल बेटी सीता पी.पी.एस.सी. कपीट कयलै]ह। दोसर बेटी- गीता डॉ—टर भेलीह आ तेसर सेवा करय लगलीह। तीनू बेटीक िवयाह-शादी यो¤य बरसँ िवनु दान-दहेजेक भय गेल।

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रामू काकाक तीनू बेटीक शादीमे हम गेल छलहुँ। आई रामू काकाक खुशी देिख हम कहिलयै]ह- “रामू काका, जािह िदन तेसर बेटीक ज]म भेल छल तािह िदन अहॉं कतेक उदास रही। आब कहू जे बेटा पैघ आिक बेटी?आई एिह परोप«ामे अहॉंक परचम फहरा रहल अिछ की निह? माय-बाप, बाल- ब”चाकR ज]म दैत छैक। मुदा भा¤यक िनम†ण ओकर कŒ;zय करैत छैक।” रामू काका हमरा आगo हाथ जोिड़ ठाढ़ भऽ बजलाह- “बौआ तोहरे बोल भरोसपर हम िजंदा छी, एिहमे तोहर बड़ पैघ योगदान छल।” रामू काकाक ऑंिखसँ Bेमक अjु बहै लगलै]ह। q

२ डॉ. बचेfर झाक आलेख

क]यादानक भीषण सम6याक कारण म­य िमिथल©चलमे वैवािहक परपराक पालन आइसँ अनुमानत: सय वष;क ...... दोसर रीितसँ होइत छल। तािह समयक हेतु ई रीित-रेवाज िहतकर रहल होएत, मुदा तकर Bभाव बादक मैिथल स]तानपर तािह तरहR पड़ल जे एखनहुँ तकर छाप अिमट अिछ। ओनातँ क]यादानक सम6या Bाय: सभ िदनसँ एक कठीन सम6या रहल अिछ। समयानुसारे भलR ओकर £प पिरविŒ;त होइत गेल हो...। महाकिव िव\ापित अपन ‘पुªष-परीHा’मे एही सम6याक स]दभ; चचच† कएलि]ह- “क]या ककरा दी?पुªषकR?” पुªष शŸदक Bयोग ओ िविश§ अथ;मे कएने छिथ। अ]यथा सभ पुªषाकार िथकाह। वीर, ­यय;वान, िव¯ान आ वुि°मान, चािरटा पुªषक लHण होइछ,एकर अभाव जकरामे छैक से पूँछ हीन पशु िथक। तR क]याक िववाह पुªषसँ हो। खास कऽ क]यादानक सम6या आजुक सम6यासँ िभ± होएबाक कारण ओिह समयमे जनसं²या कम आ भूिम अिधक रहलोपर स]तo भूिमसँ भरण-पोषण सहजिह भऽ जाइत छल। आजुक अपेHा आव³यकता कम आ उपभोगक पदाथ´ पिरमािज;त निह। िवµान अपन Bभाव ओतेक निह देखओने छल। आइ तँ िवµान िमिथलाक कथे कोन सपूण; धरतीक देश लोक, सं6कृितकR जोिड़ देलक अिछ। तR ओिह समयमे िमिथलाक लोकक उि—त छल- “उŒम खेती, म­यम वाण।

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िनिष° चाकरी, भीख िनदान।।” अथ†त् खेतीकR उŒम, zयापारकR म­यम, चाकरी वा नौकरीकR िनषेध तथा भीख म©गव सभसँ नीच कम; मानल जाइत छल। इएह कारण छल जे एिहठाम कहल जाइत अिछ- “कर खेती घरही भला।” कहबाक तापय; घरेमे रहू, खेती क£ अमोधमंJ छल। एतबे निह, ओिह समयक हेतु अिधक स]तानवान होएब मा]य छलैक। िकएक तँ Bाकृितक Bकोपक कारण जनािध आ निह होमए पबैत छल, जािहसँ जन सं²याक वृि§क ऊपर अंकुश 6वत: लािग जाइत छल। एतए तक जे पिरवारक कोन कथा? गामक गाम जनशू]य भऽ जाइत छल। तR अिधक स]तानबला लोक पुuयवाण कहबैत छलाह। बेटा निह रहलापर बेटीक स]तान वंशक टेक रखैत छल.........। काल-·मे बेटी ............ होपरा]त जमीन-जथा दऽ घरेमे राखब पिरपाटी चलल जे ‘कनेदानी’ कहबैत छल। कनेदानी राखब BितPाक बात बुझल गेल। कनेदानीक स]तान भिगनमान कहबैत छिथ। जिनक पुªषा कनेदानी रखलि]ह से डीही कहबैत छिथ। कनेदानीक स]तान डीही पHक परम भ—त होइत छलाह। िबना दरमाहाक नोकर ई भिगनमान होिथ, संगिह डीहीक कृपाक©Hी सेहो। तR जनहासक कारण निह बुझाइत छल। कनेदानीक Bित Bाय: भलमानुष होइत छलाह, जे बादमे िबकौआक नामसँ जानल गेलाह। िबकौआक स]दभ; िकछु चच† : हिर िसंह देव महाराजक ¯ारा प¸ी-Bव]ध कएल गेल। एिहसँ मैिथल- वžा¹णक प¸ीकृत भेलापर jेणी बनल। ओिहमे योग, jोJभ्, भलमानुष Bभृितक उदय भेल। प¸ीक अनुसार जे िनº jेणीकR BाŽत कएलि]ह ओिहमे सँ िकछु सप± zयि—त उ”च jेणीक वžा¹णसँ सब]ध कए सव; साधारणक दृि§मे BितPा हािसल करबाक चे§ा कएलि]ह। एतए तक जे िनº jेणीक वžा¹ण पैघसँ पैघ जमॴदार रिहतहुँ ओिह BितPाकR BाŽत निह कए सकैत छलाह। फलत: अथ; अपन Bभाव देखओलक अ]तरालमे एक बाट Bश6त भऽ गेल जे िनºो jेणीक »ा¹ण वैवािहक सब]ध ¯ारा अपनाकR ऊपर उठा सकैछ। 6प§ अिछ कनेदानी राखब एिह प¸ी-Bथाक कारणे चलाउल गेल। सुखी सप± लोक एिह सुिवधाक उपयोग करए लगलाह। उŒरोŒर देखा-देखीमे एक तरहक उपरॱझक ि6थित उप± भऽ गेल। िक]तु, ओिहकालक मा]यताक कारणR एहन बहुत कम लोक छलाह जे िनº jेणीक लोकसँ सब]ध करए चाहैत छलाह। फल ई भेल जे एिह अ™पसं²याक वžा¹णक म©ग बिढ़ गेल। एिह वग;क लोककR समाज तेहन ने टीकासनपर चढ़ा देलक जे सभ zयाहकR माJ पेशा बनाए लेलक। इएह वग; िबकौआ कहाओल अथ†त् जे िबकिथ। िव·यबला पदाथ;सँ ई वग; िभ± छलाह। पूण; मू™य देलहुँ स]तo ·य कएिनहारक जूितमे ई निह रहिथ। ई िबकौआ िबकिथ माJ िववाहक हेतु। िववाहोपरा]त ई पूण; 6वतंJ रहिथ। ने 6Jीक Bितदाियव आ ने स]तानक Bित 6नेह। मतलब रहि]ह केवल िवदाइसँ कोनोटा Jुिट सासुरमे भेलापर £िख एहन तँ साधारण बात रहि]ह, अपन स]तानक ज]मक सब]धमे ½ामक Bचार कऽ देबामे संकोच निह करिथ। एहन तरहक द]त कथा व¾मीझाक आिदक सब]धमे Bचिलत अिछ। िबकौआक लHण : ई िबकौआ आजुक तुलनामे कम निहिक]तु, मुiा मोचन हजार-लाख जँ निह निह करैत छलाह तँ दान जैतुक ....... सँ लेिथ। जािह क]यासँ िववाह होइ]ह तकर पालनक भारसँ मु—त रहबे

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करिथ, संगिह अलाबा ऊपरसँ िहनक धाक कड़गर रहि]ह। उŒम भोजन, व6J आ ढेउवा िवदाइक £पमे भेिट जाइि]ह। एतए तक जे बाप-पुªषा वा नीज रीन-कज† लेल सेहो सासुरेसँ चुकाएब उÀे³य रहि]ह। सालमे एक-आध बेर सासुर जािथ तािह सहवाससँ जे स]तान उप± होइि]ह वएह कनेदानीक वा डीहीक उपलिŸध बूझल जाइत छल। ई िबकौआ आकम;uय जीवनक अÁयासी भऽ गेल छलाह। ...... िकछु निह माJ पेट पोशव उÀे³य रहि]ह। तबाकू, भ©गक पूण; अÁयासी रहिथ। शरीिरक चे§ा िघनौन बनौने रहिथ। चािल-ढािल पूण; असÁय जेकo रहैत छलि]ह। माथमे चानन-ठोप लगौने रहिथ। पैरक वेमाय िवदरल ठोर नमरल पेट चुबैत कनेरक टारी रिथ तथािप एहनो अj° £प भेलापर महग रहिथ, िकएक तँ प¸ीक Bमाण पJ भेटल रहि]ह। तR क]या पH िहनक £प, गुण वैभवक मू™य©कन निह कऽ सोन सन क]याकR ढग संग बाि]ह दैत छल। बादमे ई िबकौआ वदु-िववाही होमए लगला, जािहसँ मैिथल वž¹णमे क]यादानक मु²य सम6या छल। बहुिववाहक सम6या िबकौआ ¯ारा केवल उप± भेल से निह आओरो कारण भऽ सकैछ,जेना राजकुलक संसग;सँ वžा¹णमे कुBथा अएबाक संभावना। पिहने वžा¹ण तपी, यागी होिथ िक]तु मंJी अथवा राजपुरोिहत भेलापर देखाउससँ बहु िववाहक अÁयासी भेलाह। िकएक तँ राजभवनमे रािनक अितिर—त सु]दरीक झुuड िनवास करैत छल। परÂच, मैिथलक ई िबकौआ वग; अथ;क लोभसँ िनº कुलमे प”चीस-तीस 6Jीसँ िववाह करैत छलाह। एतबे निह, ³मशानघाट जेबासँ पूव´ िववाह कऽ लैत छलाह। जँ Bथम 6JीकR घर अिनतो छलाह तँ शेषकR नैहरेमे छोिड़ दैत छलाह। इएह जीवन िनव†हक उŒ साधन छलि]ह। एिह बहु िववाहक BथाकR तोड़बाक चे§ा Žयारेलाल मुंशी 1870 ई.मे कएने छलाह। हुनका आ]दोलन जोर-शोरसँ चलल छल। ओिह पिरBेšयमे 1878 ई.मे ितरहुतमे 54 िबकौआ वžा¹ण मृयुसँ 665 6Jी िवधवा भेल छल जािहमे अिधक©श युवतीमे छल। एतए तक जे मधुबनी िजलाक कोइलख िनवासी एक िबकौआ 50 वष;क आयु तक 35 िववाह कऽ नेने छलाह। सन् 1875 ई. दरभंगा जखन सविडिवजन बनल तँ ताकालीन पदािधकारी मेटलाक आदेश कएल जे Žयारे लाल मुंशीक आ]दोलनक अनुसार बहु िववाह ब]द हो। एिह तरहR िबकौआ ¯ारा बहु िववाहक सम6या उप± भेल से कही वा िमिथलाक लोक ¯ारा बनाओल गेल। £िढ़वादी िवचारक कारण क]याक भिवÈयक समीHा निह कऽ अपन उŒरदाियवकR समािŽतक बहानामे िबकौआक ठॲठमे क]या बा]हब िथक। बंगालक कुलीन Bथा सेहो िमिथलाक िबकौआ Bथाक समान छल। वाड; (Ward) महोदयक अिभलेखसँ पता चलैत अिछ जे वंगपराक उदय च]iकR 65 6Jी छलि]ह, कुशदाक राम िकंकरकR 72 6Jीसँ िववाह रहि]ह। एक एहनो घटना भेटैत अिछ जे दुगलीक रामच]i मुखजÊकR 32 6Jी रहै]ह आ वो 65 वष;क अव6थाकR पार कएने छलाह, दैवात् यšमाक िशकार भऽ गेलाह, मृयुक िनिœतता जािन बालक कहलिथ]ह- “दीन भावसँ बाबूजी अपने तँ मरैत छी घरमे एको चुटकी अ± निह अिछ, एहन हालतमे jा°ो कोना होएत?” िपता िकछु गंभीर भऽ िनहसंकोच भऽ कहलिथ]ह- “अिवलब नव गोपाल चटजÊक 9 वषÊय क]यासँ हमर िववाहक zयव6था क£, िकछु िदन पूव; B6ताव आएल छल, एखनो ओ क]या अिववािहते अिछ।”

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पुJ सवाद पठा कए 250 £पैया पर बात िनिœत कएलिथ]ह। िववाहक 9 मासक अÁयंतरे रामच]i मुखजÊक मृयु भऽ गेलि]ह। एिह तरहR ओ अपन jा°क इ]तजाम िववाहे ¯ारा पूरा कए मुइलाह। ई सभ छल बहु िववाहक कुपिरणाम! िववाह सन पिवJ रेवाजकR दुिषत करब समाजक कुचािल कहू वा कलंक। िबकौआ ¯ारा िववािहत क]याक जीवन झoकी :एिह Bथाक Bकोप तँ तेहन छल जे बूढ़, बकनेर, अकम;uय वरक संग त£णीक िववाह एक Bकारक िवडवना कहल जा सकैछ। अनेको कोम ल©गी जीवनक सोलहम वस]तक पिहने िवधवा भऽ कठीन जीवन जीबाक अÁयासी होइत गेल। राजा राम मोहन रायक शती-Bथा उ]मूलनसँ अनेको िवधवा वा बूढ़क 6Jी काम िपपासावश कुिसत कम;क भाजन भेल। एतबे निह, िबकौआ ¯ारा िववािहत िकशोरी िपताक घरमे आजीवन थोपल रहलासँ कुमाग; गामी भऽ जाइत छल। एिहसँ दा£ण ि6थित ई भेल जे मैिथलक दिरi समुदाय िबकौआक वंशधर एखनो अिछ। िह]दू6तानक अिधक©श शहरमे भनिसया, भीमंगा वा ताË नीच कम;मे Bवृत मैिथल »ा¹ण िबकौआक स]तान िथकाह। इहए कारण अिछ जे िमिथलेŒर Bा]तमे िमथलाक कु²याितक कुचे§ा लोक करैत अिछ। आब िबकौआ Bथाक अ]तो आव³यक छल। िबकौआ Bथाक अ]त कहू वा िवक™प दहेज Bथाक आरंभक कारण - अंÌेजी िशHाक Bचार-Bसारसँ लोक नैितक 6तर ऊपर उठए लागल। िवµान िवकाल भेल। वैµािनक आिवÈकारसँ लोक जीवनमे आमूल पिरवŒ;न होमए लागल। िचिकसा िवµान Bाकृितक BकोपकR रोिक देलक। जनÍास निह भेलासँ जनवृि° अवाध गितमे होमए लागल। 6वाधीनताक कारणR जन जीवन उ°;गामी होइत गेल। तR आब कनेदानी राखब आ ओकर स]तानक भार उठाएब असौकज; भऽ गेल। िशिHत समुदायमे वैचािरक ·ाि]त आएल तR पुरना Bथा, £िढ़वािदता, कुलीन Bथा वा िबकौआक समूल न§ करब आव³यक Bतीत भेल। अनमेल िववाह, वृ° िववाह, बाल िववाहक परपराकR ....... अपन वैभवक अंश नगद £पमे दऽ क]याक िववाह कराएबक पिरपाटी शु£ भऽ गेल। दहेजक दा£ण 6व£प : जिहना िबकौआक jेणी छल तिहना िशिHत वग;क माप दuड कायम भेल zयव6था £पमे। डा—टर, इंजीिनयर, ओभरिसयर,टेकनीिसयन ........ jेणी सरकारी सेवक Bथम, ि¯तीय तथा तृतीय jेणी ओ चतुथ;वगÊय गैर सरकारी सेवकक संगिह िशHण सं6थाक सेवक jेणी कायम भेल। आब की छल वरक िव·ी उपयु;—त आधारपर होमए लागल। बरदहटा जकo वरक हाट सेहो लागल रहैछ जेन सौराठक सभा गाछी। जािह क]याक िपताकR जेहन उपाय रहैछ तेहन jेणीक वरकR खरीद कऽ िववाह करबैत छिथ। िदनानुिदन दहेजक Bकोप बढ़ले जाय रहल अिछ। एिह दहेजक दा£ण £प तँ ई भेल जे गरीब कुमार वž¹ण जे अयो¤य अिछ ओ अिववािहते मरैत अिछ। अनेको उदाहरण भेटैत अिछ। िबकौआ Bथामे एहन बात निह भेल रहए। खैर! दहेज-Bथामे सšमक संग िववाह करायब युग-धम; मानल गेल अिछ, मुदा दहेजक िवकराल £प सामने अिछ। िबकौआ £सैत छल तँ ओ मनौती कएलापर मािन जाइत छल, िक]तु ई दहेज-Bथाक िशिHत वग; तँ £सलापर 6Jीक जान लऽ लैत अिछ। एतबे निह, क]याक अपमान, ितर6कार ओ अवहेलना करब 6वाभािवक होइछ। मनोनुकूल िवदाइ वा दहेजक रािशमे कमी भेलापर सासु, ससुरक संग आगत zयवहार तककऽ दैत छिथ। पिहलुका िबकौआ म©ग, तमाकू खाइत छल तँ आजुक वर मिदरा,िसगरेट, चरस ओ ....... अÁयासी होइत अिछ। िबकौआ एक आध बेर सासुर अबैत छल, मुदा आजुक ई िबकौआ सालो भिर

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सासुरे रहबाक आकंHी अिछ। अ]तर िसफ; एतबाटा जे िबकौआक 6Jी िपतेघरमे रहैत छल जािहसँ मय†िदत छल, मुदा एखनुका वरक 6Jी संगिह रहैत अिछ, िक]तु एिह पढ़लाहीक शील,6वभाव रहन-सहन चािल-ढािल वातावरणक कारणR िवकृत भऽ जाइछ। अिधक©श 6Jी तँ शीलहरणक िशकार भऽ जाइत अिछ। कोना बूझब जे िबकौआ Bथाक अ]त भेल? आजुक ई दहेज Bथा तँ ओकरोसँ िविभ± £पमे सामने आएल अिछ। आजुक दहेज Bथाक कारणR क]याक िपताक धम;, धन ओ इÎजत सभ नीलाम भऽ जाइत अिछ। पाईक अभावमे क]याक िपता बोझ तरहक दूिभ जकo िपअरगात कृशकाय भऽ समय कािट रहल अिछ। कतबो £प-गुणसँ यु—त क]या छि]ह,मुदा पाईक अभावमे हुनक िपताकR केओ मोजर निह दऽ सकैछ। पैसाक िपशाची लोक यो¤य-अयो¤य क]याक सीमाकR सि]द¤ध कऽ देने अिछ। अनेको िपता-पुJीकR िशिHत करैत छिथ, तािक हुनका बेटाबला दहेजमे छूट देताह मुदा से सभव निह। यो¤य वर क]याक वरण करिथ से ²याल केओ निह करैत छिथ जािहसँ िनम;ल दापय जीवन नशीव होएब कठीन भऽ गेल अिछ। एकर Bितफल की होएत? मैिथल समाजक jृंखला टूिट जायत, आिथ;क िवषमता सामािजक ज]म देत। एक िदिस जँ क]या पH बालक भीत जकo ढहल जाय रहल अिछ तँ दोसर िदिस वरक पH मनोरϵक पूल िबनु िसमे]ट-बालुक जोड़बामे त™लीन अिछ। किहया धिर ई दहेजक दाहसँ स]तŽत रहत से निह जािन। दहेजक कारण अिववािहत क]याक जीवन झoकी : दहेजक दद;नाक असिर तेहन तरहR पिड़ रहल अिछ जे अिधक©श स½ा]त पिरवारक क]याक कौमाय; अव6था िववाहक पितHेमे समाŽत भऽ जाइछ। एतए तक जे यौवनकालमे नारकीय अव6थाक अनुभव करैत अिछ। Bाय: बेटीबला ओ बेटाबला दूनूक समH ई सम6या उप± छि]ह।केओ एिहसँ मु—त निह छिथ मुदा टाका गनाएब आ गानबकR आइ मय†दाक िवषय जानल जाइत अिछ। जे जतेक टाका गनबैत छिथ ओ ओतेक गव´ि—तसँ समाजकR बुझबैत छिथ, संगिह जे गनैत छिथ से अŽपन बड़Žपनक िवशद् वण;न करैत छिथ। सभसँ खेदक िवषय तँ ई जे गरीब लोक जे बेटीक Bित ताका लैत अिछ वा छल, तकरा लोक बेटी बेचबा कहैत छल। घृणाक दृि§सँ देखैत छल, आइ ओकर उनटा हवा बिह गेल अिछ। बेटा बेचिनहारकR लोक बेटा बेचबा निह किह समाजमे उ”चासन दैत अिछ जािहसँ बेटाक िववाह टाका लऽ कए करबामे गौरवाि]वत होइत अिछ। ई समाजक लोकक िवचारहीनता निह तँ आर की? एिहसँ िन]दनीय बात आइ की होएत? तखन तुलसीक पoित 6मरण भऽ जाइछ- “समरथकR निह दोष गोसाË।” अथ†त् पैघ लोककR दोषी निह कहल जाइछ। ओइ दहेजक पृPपोषक समाज पैघे लेाक छिथ तR एकर उ]मूलन सभव कोना? निह जािन िबकौआक जगह दहेज आएल आ ई किहया धिर लोककR िखहारैत रहत? आइ तँ आइ तँ अिधक©श ललना अभावी िपताक छातीपर दुग;म पहाड़ बिन बैसिल अिछ। कतेक तँ िववाह सूJमे बा]हलोपर भा¤यपर झखैत अिछ। मनोनुकूल घर-वरक अभवमे संघष;रत जीवन िबता रहल अिछ। सुख सुिवधामे पलल बािलका पितक घरमे गंजन, दुzयव;हार, zयं¤यपूण; वाक् वाणसँ िव° होइत रहैछ जकर कारण होइछ लेन-देनक गड़वरी, दान जैतुकमे मनचाही व6तुक आपूिŒ;मे कमी। एतबे निह दहेजक उपरा]त विरयातक िविश§ सेवा निह भेलासँ वा कोनो तरहक िवघटन भेलापर क]याकR सासुरमे पित ¯ारा वा

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पितक घरक लोक ¯ारा अमय†िदत zयवहार कएल जाइछ। कतेकठाम तँ क]याक हया कऽ देल जाइछ आ निह तँ क]या 6वयं आम हया कऽ लैत अिछ। सभक मूलमे दहेजे अिछ जे क]याक िपताकR िववश कऽ दैछ, िववशताक कारण होइछ izयाभाव, अथ†भाव। कोजागरा, जड़ाडरक संग-संग साल भिर तक वžा¹ण समाजमे बेटीबलाक तनोतरी ढील भऽ जाइछ तR िववाहसँ िवध भारी कहल जाइछ। दहेज -Bथाक उ]मूलनक उपाय - य\िप वŒ;मान सरकार दहेज लेिनहार ओ देिनहार दुनूकR कठोर दuड देबाक अ­यादेश जारी कएल अिछ, मुदा ई नैितक पतनबला लोक एखनहुँ कबल ओिढ़ कऽ घी पीबएबला बात रखने अिछ। सरकारक ऑंिखमे तँ गद† दैते अिछ संगिह समाजोकR उ™लू बना रहल अिछ। लेन-देन कऽ लइए। गुŽत £पसँ तािक हम आदश; £पमे कुटमैती कएल अिछ। तR सरकारक ¯ारा एकर उ]मूलन कथमिप सभव निह। एकरा लेल वैचािरक ·ाि]त चाही,समाजक हरेक zयि—तक नैितक समथ;न चाही। ई एक कलंकपूण; रेवाज िथक जतए पाइपर दू आजीवन िमिल कए रहए बला जीव तकर Bेमक आकलन पाइपर हो। िनœय एिह तरहक समाजकR कलंिकत समाज घोिषत कएल जाय जतए टाकाक आधारपर दापय सब]ध बनाओल जाइछ। एक शŸदमे कहए पड़त जे िववाहक पिवJताकR तखने कायम राखल जायत जखन हरेक वग;क लोक आमगत िवचार कऽ िववेकपूण; िनण;य लेिथ। आडवरपूण; िववाह Bि·याक संग दहेजक िवकृत पिरपाटीक िवरोध करिथ। भिवÈयक जननी सृि§क संरचना करिनहािर आजुक क]या काि¾ पूण; अिभशŽत भए जाएत। यJ नाय; व6तु पूÎय]ते, रम]ते तJ देवता। मनु6मृितक ई वा—य सव;था अमा]य भऽ जाएत आ एक िदन हमरा लोकिनकR अवनितक महान गत;मे लऽ कए चल जायत!q

ऐ रचनापर अपन मंतzय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। १.रबी]i नारायण िम j- तीनटा आलेख , दूटा लघुकथा आ उप]यास नम6त6यै (आगo) २. डॉ. योगे]i पाठक ’िवयोगी’- उप]यास - हमर गाम (पिहल खेप ) १ रबी]i नारायण िमj तीिनटा आलेख डॉ. जयका]त िमj (सं6मरण)

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सन्१९७८ इ6 वीक जनवरी मासमे िद™ लीसँ 6 था]तर भए हम इलाहाबाद गेल रही। ओिह समय Bथम बेर डॉ. जयका]त िमjजी सँ हुनकर तीभूि— त, सर पीसी वनजÊरोडि6थत घरमे भRट भेल। िबना कोनो पूव; पिरचय रिहतॱ ओ सभ काज छोिड़ हमरासँ भRट केला।एकटा मैिथलकR हमर डेरा तकबाक हेतु कहलिखन। ओतिहसँ हमर हुनका संग पिरचय ओ स पक;क ·म Bारंभ भेल जे अ]त धिर चलैत रहल। जखन-कखनो हम हुनकर डेरापरजाइतँ ओ सभ काज छोिड़ हमरासँ अय]त अपन व भावसँ गŽप करिथ। अपनेटा निह, अिपतु हुनक पÒी, ओ संगे रहिनहार पिरवारक अ] य लोकिन सभ सेहो ओिहना गŽप- सŽपमे संग देिथ। जलखै, चाह, पान तँ हेबे करइ। ओही ·ममे कतेको गणमा] य मैिथल लोकिनसँ हुनकर डेरापर भRट भेल। हुनकर अ­ ययन, अ­यापन, लेखन सबहक अवलोकन करबाक अÓुत अवसर भेटल। कए िदन हुनका संगे इलाहाबाद िवfिव\ालयक अंÌेजी िवभाग गेलहु, जािहठाम ओ अंÌेजी िवभा गक अ­ यHक पदपर काय;रत छलाह। इलाहाबादमे रहिनहार मैिथल समाज डॉ. जयका]त िमjसँ पूण; पिरिचत छलाह। अिधक©श मैिथल सभसँ हुनकर zयि—तगत स पक; छलिन। B येक साल िव\ापित समारोहमनाओलजाइत छल। डॉ— टर जयका]त िमj ओिहमे अव³ यमेव रहैत छलाह। हुनकर डेरापर िनर]तर मैिथलीक िवकास केना हो, तकर चच† होइत रहैत छल। ओ सिदखन बजैथ- “मैिथलीमे िलखल क£। मैिथलीक हेतु काज क£।” संगे मैिथलीक हेतु कएल गेल अपन अनवरत संघष;क चच† सेहो होइत, जािहसँ मैिथली िवकास याJाक साHातअनुभव होइत छल। मैिथली भाषाकR िबहार लोक सेवा आयोगमे हटा देल गेल रहइ। तकरा पुन³ च आपस अनबामे, मैिथलीकR ब”चा सबहक िशHाक अिनवाय; मा­ यम बनेबाक हेतु ओ किह निह, कतेको बष; संघष; करैत रहलाह आ अ]ततोग वा अपन Bयासमे सफल रहलाह। मैिथलीक िवकास हेतु ओ गाम-गाम घुमैत रहलाह। ततबे निह,जतए कतहु मैिथलीक चच† होइत आिक कोनो काय;·म होइत तँ ओिहमे डॉ. जयका]त िमjजी अब6 से भाग लेिथ। आयु बढ़लासँ नाना Bकारक 6 वा6 Ï य स ब] धी सम6 या रहैत छलिन। हुनका कतेको साल पूव; पेसमेकर लागल छलतथािप जँ कतहु मैिथलीक काय;·ममे हुनका बजाओल जाइत, तँ ओ अब6 स जािथ। पिरवारक लोक िचि]तत भए जाइत छलिखन। एकबेर हम इलाहाबादसँ पटना जाइत रही। 6 लीपरमे हमर आरHण छल। डॉ— टर जयका]त िमjजी कR देखलहुँ। ओिहना ठाढ़, िबना सीटेक याJा कए रहल छलाह। बहुत आÌह केलापर ओ हमर सीट लेबाक हेतु तैयार भेलाह। कहिथ जे ओ अिहना चिल जेता। ई छल हुनकर उ साह- मैिथली काय;·मे भाग लेबाक। ओिह िदन पटनामे कोनो मैिथली काय;·ममे भाग लेबाक हेतु जाइत छलाह।

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डॉ. जयका]त िमjजीक भाषा ओ zयवहारमे अÓुत मधुरता छल। कखनो निह लगैत जे एतेक पैघ िव¯ानसँ गŽप कए रहल छी। जे जेहने 6 तरक लोक रहैत,तेकरा संग तेहने भए गŽप किरतिथ। पूरा Ô यान देिथ।घरक सद6 य जकo ओकर पूण; 6 वागत करिथ। घरक Bथम तलपर हुनकर पु6 तकालय छल। ओिहमे बैस कए ओ अ­ ययन, लेखन करैतरहैतछलाह। इलाहाबादसँ लघुकाय एकटा मैिथली पिJकाक स पादन सेहो करै छलाह। हुनकर नाित, भाितज सभ ओिह पिJकाक मैिथल लोकिनमे िवतरणक zयव6था करिथ। एकाध बेर हमरो ओिह काजमे ओ लगा लैत छलाह। माघ मासमे Bयागमे संगमतर पर ओ सपिरवार मास करैत छलाह। िमिथलाक Bिस° माछबला झu डा मैिथल पu डा सबहक पिहचान अिछ। ओिह झu डाकR देिख कए जयका]त बाबू डेराक ठेकान लािग जाइत छल। नवबर २००७ इ6 वीमे हम इलाहाबाद गेल रही। हुनकर डेरापर गेलहु। पर] तु ओ काशी मास करए चल गेल रहिथ। हुनकासँ भRट निह भए सकल। हुनकर डेरापर हुनकर नाित, एवम् पिरवारक अ] य सद6 य सभ छलाह। डेरा उदास-उदास लगैत छल। पिरवारमे कएटा दुघ;टना भए गेल छल। िकछु साल पूव; हुनक Î येÈ ठ पुJ डा. £iका]त िमjक आकि6 मक असामियक िनधन भए गेल छल। आओर कएटा गŽप-सŽप...। एिह सबहक आभास घरमे भए रहल छल। िकछुकाल बैसला बाद हम सभ ओतए-सँ अपन 6 मृितकR पुनœ जगा कए ओिहठामसँ िवदा भए गेलहु। डॉ— टर साहेबसँ भRट निह भए सकल। डॉ— टर जयका]त िमjजीक िपता महामहोपा­याय डॉ. उमेश िमjक बषÊ बहुत यÒ पूव;कमनाओलजाइत छल। ओिहमे डॉ— टर साहेब ओतए हम (जाधिर इलाहाबादमे रहलहुँ) िनयिमत आमंिJत होइतछलहुँ। हुनकर स पूण; पिरवार अय]त मनोयोग पूव;क »ा¹ण भोजनक zयव6था करैत रहलाह। नाना Bकारक भोजनक z यंजन सबहक 6 मरणे माJसँ मन आनि] दत भए जाइत अिछ। भोजनक संग-संग कतेको गŽप-सŽप मैिथल लोकिनसँ ओिह अवसरपर भRट भए जाइत छल। इलाहाबादमे गŽप-सŽपक ·ममे ओ मैिथलीकR सािहय अकादेमीमे मा] यताक स ब] धमे हुनक कएल गेल Bयासक वण;न करिथ। ओिह हेतु ओ िद™ लीमे त कािलन Bधान मंJी ¯ारा मैिथली पोथीक Bदश;नीमे भाग लेब, िद™ लीक उपराÎ यपाल 6 व. आिदयनाथ झाजीक BाŽत समथ;न एवम् सहयोगक चच† सेहो करैत छलाह। एकबेर हम डॉ. शुभi झाजीक संग इलाहाबादमे डॉ. जयका]त िमjजीक ओिहठाम जाइत रही। र6 तामे डॉ. जयका]त िमjजीक मैिथलीक Bित अनुराग ओ मैिथलीक िवकास हेतु संघष;क Bशंसा करैत डॉ. शुभi झा कहलाह- “िमिथलामे डॉ. जयका]त िमjक एवम् हुनक पूव;ज लोकिनक अÓुत योगदान अिछ।” संगे ईहो कहलाह- “एहन बहुत कम पिरवार भेटत जािहमे लगातार छह पु³त सर6 वतीक एहन आशÊवाद BाŽत रहल हो।”

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५५ म अंक ०१ अग᭭त २०१८ (वषᭅ ११ मास १२८ अंक २५५ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 14

ओ िद™ ली आबिथ तँ हमरा सूिचत करिथ। कतेको बेर तँ ओ हमरे ओतए ठहरैत छलाह। कए बेर हवाइ याJासँ उतिर लबनचूस ब”चा सबहक लेल नेने अबैत छलाह। जाधिर ओ डेरापर रहिथ, िनर]तर मैिथली स ब] धी चच† होइत रहैत। मैिथली आ] दोलनक संघष; याJा आओर अनेकानेक लोकिनक योगदानक चच† सेहो होइत। एकबेर ओ (डॉ. जयका]त िमj) िद™ लीमे मैिथलीक B³ न पJ बनबए खाितर आएल रहिथ। संगमे 6 व. सुमनजी एवम् डॉ. नवीन बाबू सेहो रहिथन। ओ तीनू गोटेहमर आÌहपर पुÈ पिबहार, िद™ ली ि6थत हमर आवासपर अएला आ एकसंग हुनका सभकR भोजन करेबाक सौभा¤य BाŽत भेल। ओिह अवसरकR 6 मरण करैत अखनो रोम©िचत भएजाइतछी। तीनू गोटेक एकÕे हमरा ओतए आएब आओर हुनकर वात†लाप सुिन मोन आनि]दत भए गेल। आनि] दतो केना ने होइत, डॉ. सुमनजी एवम् डॉ. नवीन बाबू सी.एम. कौलेज- दरभंगामे हमरा मैिथली पढ़ौने रहिथ। डॉ. िमjजी अय]त समािजकzयि—तछलाह। इलाहाबाद िकंवा बाहरोक मैिथल लोकिनकR zयि—तगत 6 तरपर ओ मदित करैत छलाह। नयाकटरा, इलाहाबाद ि6थत हमर डेरापर कएक बेर पएरे चिल आबिथ। कतेको मैिथल िव\ाथÊ सभकR ओ अपना ओिहठाम रािख कए हुनकर िशHामेसहायता करैत छलाह। इलाहाबाद िवfिव\ालयक अंÌेजी िवभागक अ­ यH पद हेतु हुनका बहुत िवरोधक सामना करए पड़ल छलिन।तािहखाितर ओ इलाहाबाद उ” च ] यायालयमे केस सेहो केने रहिथन। अ] तोग वा हुनकर िवजय भेल, आ ओ अंÌेजी िवभागा­ यH भेलाह। हुनकर िवरोधी सबहक कहब रहैक जे ओ मैिथलीमे िलखै छिथ। हुनकर पी.एच-डी.क िवषय ‘मैिथली भाषाक इितहास’ छल तखन ओ अंÌेजी िवभागक अ­ यH केना भए सकै छिथ? जयका]त बाबू िद™ ली आएल रहिथ। तिहया हुनकर पोती रोिहनीमे रहैत छलिखन।। हुनकासँ भRट करबाक रहिन। हमरा संगे चलए कहलिन। बसपर ठाढ़े हम दुनू गोटेरोिहनी िवदा भेलॱ। इलाहाबादसँ एकटा पोटरी अनने रहिथ। तेकरा उपहार 6 व£प अपन पोतीकR देलिखन। िकछु कालक बाद हम सभ ओिहठामसँ आपस भए गेलहु। ओिह पोतीक िबआह िद™ लीएमेभेलिनएवम् िबआहक हकार हमरा देबाक हेतु डॉ. £iका]त िमj (क] यoक िपता) 6 वयं आएल रहिथ। हम िबआहक अवसरपर गेलो रही। िबआहमे डा—टर साहेबक सभ भाए आएल रहिथन। कोनो Bकारक दहेज निह लेल गेल छल। डॉ— टर साहेब दहेज £पी लेन-देनक िखलाफ छलाह एवम् एकरा िमिथलाक सं6 कृितक Bितकूल कहिथ। डॉ— टर जयका]त िमjजीक िपता महामहोपा­याय- डॉ. उमेश िमjक बनाओल मकानमे डॉ— टर साहेब एवम् हुनकर भैयारी लोकिन सेहोरहैतछलिखन।। सभसँ शु£बला िह6 सामे डॉ— टर साहेब रहिथ आ तकर बादबलामे आर भाए सभ। डॉ— टर साहेबक zयि—तगत जीवनमे, पिरवारोमे भोजन आ रहन-सहनमे िमिथलाक सं6 कृितक अिमट छाप छल। मकानक ओसारपर माछक मूित; लटकल,सदैव झूलैतरहैतछल। घरमे भोजन बनबएकाल देहपर व6 J

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निह रहक चाही। »ा¹ण भोजनकाल परसिनहार आ भोजन केिनहार गंजी, कमीज निह पिहरिथ। भोजनमे िपयाजु-लहसुन निह पड़ए। जखन कखनो ओ बाहर याJापर जािथ तँ अपन िनयम सबहक पालन कठोरतासँ करिथ। बाहरमे बेसीकाल चुरा-दहीसँ काज चलबिथ। इलाहाबादमे रिहतो ओ गामसँ स पक; बनओने रहिथ आ सभ साल मास-दू मास गाम जा कए रहिथ। गामसँ लौटैतकाल सभ Ìामीणक ओिहठाम जा कए भRट करिथ एवम् पुनœ गाम एबाक इ”छा रखैत सभसँ िवदा लेिथ। एिह ·ममे िकछु साल पूव; ओ गाम गेल रहिथ, ओतिह बहुत जोरसँ िबमार पिड़ गेला। हट; अटैक भए गेल रहिन। ओिहठामसँ लोक सभ उठा-पुठा कए दरभंगाअनलकिन।दरभंगामे थोड़ेक सुधार भेला पछाइत इलाहाबाद आपस अएला। इलाहाबादमे हुनकर मासो इलाज चलल। बहुत मुि³ कलसँ हुनकर जान बॉंचल। िबमारीसँ उठलाक बाद एक िदन फोनपर गŽप भेल रहए। बहुत दुखी बुझाइत रहिथ। अबल भए गेल रहिथ, तथािप मैिथलीक िवकासमे अिभ£िच बनल छलिन आ ओिह िवषयमे गŽप करैत रहलाह। मैिथलीक िवकासक हेतु डॉ. िमjजीक अÓुत योगदान अिछ। संिवधानक अ§म अनुसूचीमे मैिथलीकR सािमल करबाक हेतु ओ कतेको साल Bयास करैत रहलाह। अ]ततोग वा हुनकर ईहो 6वप± साकार भेल एवम् मैिथलीकR संिवधानक अÈ टम् सूचीमे सािमल कएल गेल। इलाहाबाद िवfिव\ालयसँ सेवा िनवृŒ भए ओ म­ यBदेशमे िचJकुट ि6थत Ìामीण िवfिव\ालयमे िवभागा­ यH भेलाह। ओिहठाम ओ कएक साल धिर रिह सं6 थानक िशHण zयव6थाकR उ कृÈ ट बनेबामे संल¤ न रहलाह। नानाजी देसमुख िवfिव\ालयक उपकुलपित रहिथ। देसम ुखजी डॉ. िमjक काय;सँ अितशय Bभािवत रहिथ। हुनकर इ”छा रहिन जे डॉ. िमj ओतए बनल रहिथ पर] तु मैिथलीक काजमे िवशेष £िच ओ z य6 तताक कारणR ओ िवfिव\ालयक काजसँ  याग-पJ दए देलिन। डॉ— टर िमj अय]त अ­ ययनशीलzयि—तछलाह। राितमे जखन-तखन ओ उिठ जािथ आ पढ़ल लागिथ। हुनकर 6 वा6 Ï यक िच] तासँ िफरसान भए पिरवारक लोक कएक बेर आपिŒ करिथ जे एतेक पिरjम निह करिथ, मुदा ओ अपन काय;·ममे अनवरत लागल रहैत छलाह। मैिथलीक नाम सुिनते जेना हुनका 6 फुित; आिब जाइत छल। पेसमेकर लगलाक बादो ओ मैिथलीक आ] दोलनक हेतु समिप;त रहलाह आ जतए कतहु हुनकाएिह काजे बजाओल जािन तँ ओ सहष; जािथ। २००८ इ6 वीमे, नव वष;क आगमनक अवसरपर हम हुनका नव वष;क मंगल कामना पJ पठौनेरिहएिन। तकर जवाबमे ओ पो6 टकाड; िलखने रहिथ जािहमे थर-थर कँपैत हाथसँ िलखल गेल अHर ओ ह6 ताHर देिख हुनक एहू अव6थामे सकृयताक Bमाण भेटल। तकर बाद लगभग साल भिर कोनो स पक; निह रहल। जनवरी (२००९) मे एक िदन डॉ. धनाकर ठाकुरजी पJ इ] टरनेटपर पढ़ल, जािहमे डॉ— टर िमjक Bयागमे मासक दौड़ान िनधनक समाचार छल। कतेको बेर ओिह समाचारकR पढ़ल। मैिथलीक एकटा अन]य सेवकक िचर संघष;क बाद देहावसान भए गेल छल। िमिथलाक गाम-गाममे शोक सभामनाओलगेल। j°Öजिल देिनहार लोक सबहक हुनक Bित िसनेह अवण;नीय छल।

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डॉ. जयका]त िमj अपने-आपमे िमिथलाक इितहास छलाह। िमिथलाक कोनो एहन गाम निह हएत जतए ओ मैिथली काय;·मक हेतु निह गेल होिथ। िव\ापित समारोह हो, िकंवा मैिथलीकR संिवधानक अ§म सूचीमे सािमल करबाक हेतु आयोिजत आ] दोलन हो, वा मैिथलीकR िशHाक अिनवाय; मा­ यम बनेबाक Bयास हो, सभठाम हुनकर नाम अिबते छल एवम्ओ zयि—तगत £पसँ सभ काय;·मे भाग लइते छलाह। जखन-कखनो ओ भेिटतिथ, मैिथलीमे िलखबाक हेतु Bेिरत करबे करिथ, मैिथलीक स मानक हेतु कएल जा रहल Bयासक चच† किरतिथ, सभ काजपर मैिथलीसँ जुड़ल आ] दोलनकR Bाथिमकता देबे करिथ। मैिथलीक एिह अन] य सेवकक कतेक उपकार अिछ तकर वण;न असंभव। हुनक साहृदयता, वाणीक मधुरता एवम् अपनव सिदखन मोन पड़ैत रहत आ मोन रहतहुनका संग िबतौल गेल अÓुत Hण। ओ आब निह छिथ, मुदा कोिट-कोिट मैिथलक हृदयमे ओ सिदखन िव\मान छिथ ओ रहताह। q

पं. परमान]द झा (एक सम6मरण) लोक एिह दुिनयoमे अबैत अिछ, चिल जाइत अिछ मुदा ओकर कएल काज ओकरा िजबैतरखैत अिछ।कतेको zयि—त एिह संसारमे एहने भेलाह अिछ जे अपन संघष;सँ अपनजीवनमे एकटा नव दृ§ा]तउपि6थत केलाह आ हुनका गेलाक बादो लोकसभ हुनक कृितवक चच; कए गौरवक अनुभव करैत छिथ।एहने लोक छलाह हमर Ìामीण-6वगÊयपिuडत परमान]द झा।

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हमसब जखन नेने रही तँ हुनका कतेको बेर पैरे अबैत-जाइत देिखअिन।पैरे चलब ओिह समयमे कोनो अजगुतक गŽप निह छलैक। मुदा ओ पैरे-पैरे मुज×फरपुर साHाकर देबए चिल जाइत छलाह। लौिट कए ओिहना दन-दन करैत रहैत छलाह।किहओ हुनका बैसल, आराम करैत निह देखिलअिन। िदन-राित ओ िकछु- ने-िकछु करैत भेटताह।zयथ; आडंवर िकंवा Bदश;न करबामे हुनका कोनो ªिच निह छल।सॱसे दुिनयo जँ िखलाफ भए जाए आ हुनका लगतिन जे ओ सहीपर छिथ तँ ओ अपन िनœयपर अिडग रहैत छलाह। सत कहल जाए तँ एहन कम;ठ लोक िबरलैके देखएमे अबैत अिछ।खेत कोरब, धान रोपब, धान काटब, दाउुन करब सँ लए कए इसकूलमे मा6टरी करब फेर िव\ाथÊसभकRØयुशन करब, ततबे निह पंिडताइ करब, सभटा काज ओ एकसुरे करैत रहैत छलाह।हमसभ जखन नेना रही तँ हुनके घरक पाछा »ह 6थानमे हमर सभक इ6कूल छल। ओतए हमसभ पढ़ए जाइत छलहुँ।कै िदन पािन पीबाक हेतु हुनका ओिहठाम आिब जाइत छलहुँ।जखनकखनो ओतए जइतहुँ ओ िनरंतर काजमे zय6त रहैत छलाह।छोट-छीन फूसक घरमे अपन साधनामे लागल रहैत छलाह। कोनो काज करबासँ हुनका परहेज निह छल। लोक की कहत से हुनका सुनबाकसमय निह छल।जे अपना ठीक बुझाइन से ओ करिथ, जकरा जे मोन हो से कहैतरहए। “हाथी चलए बजार, कुŒा भुकए हजार।” जीवन भिर ओ घोर संघष; करैत रहलाह। कठोर पिरjम ओ िमतिzयतासँ गामक आस-पास िच˜नजमीन-जाएदाद बनओलिन। अड़ेरचौकपर सेहो बहुत कीमती जमीन ओ कीनलिथ।सुनबामे आएल जे अÕारह बीघा जमीन ओ अपना जीवनमे मेहनित एवम् इमा]दारीसँ कीनलिथ।एतबे निह जािहठाम एकटा मामूली फूसक घर छल ओतिह पता निह कतेको कोठरीक घर बना देलिथ। ओिहठाम गेलापर अहoकR चा£ कातघरे- घर देखएमे आएत।गाम-घरमे जकरा पोखिरआ-पाटन कहैत छैक, ताही तरहक हुनकर Ìामीण आवास अिछ।आ से सभटा मेहनितसँ केलाह, कोनो ककरो वइमानी निह, अिपतु अपन िव\ा ओ वुि°सँ िनर]तर समाजकR सेवा करैत उपाज;न केलाह।ओ िनÕाह कम;योगी छलाह।कखनो बैसलनिह रिहतिथ। कोदािर पारवसँ लए कए इसकूलक मा6टरी भावसँ ओ जीवन पय;]त करैत रहलाह। अगहन मासमेमाथपर धानक बोझा लदने सीताराम - सीताराम कहैत डेगार दैत अपन धानक खेतसँ खिरहान धिर अबैत - जाइत हम हुनका देिखअिन । जकरा जे बाजक होइक सेबाजए, हुनका लेल धिनसन। ओ खाली धने अिज;त करैत रहलाह से बात निह, अिपतु घनघोर संघष; कएिव\ोपाज;न सेहो केलाह। कतेको िवषयमे आचाय; केलाह।फेर अंÌेजी मा­यमसँ सेहो उ”च िशHा BाŽत केलिन। बहुत िदन धिर रिहका उ”च िव\ालयमे सं6कृतक िशHक रहलाह आ Bधाना­यापकक पद धिर Bो±ित BाŽत केलिन। धम; ओ अ­यामक सेहो हुनका बहुत नीक जानकारी छलिन।कतेकोठाम धािम;क सभा सभमे Bवचन सेहो करैत छलाह। दिड़भंगामे संत-समागममे Bवचन करैत हमहुँ हुनका सुनने रही।ओिह समयमे हम ओतए सी० एम० कालेजमे पढ़ैत रही। कतेको िदन हमसभ हुनका साइकलपर इंटा ब]हने, आ 6वयं ओकरा गुरकबैत पैरे-पैरे चलैत देिखअिन।किहओ सीमे]टक बोरा, किहओ बाउल, किहओ इंटा ओही साइिकल पर ढ़ो-ढ़ोक ओ प˜ा मकान

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बना लेलिथ। एहन धुनकR प˜ा, कम;कीट ओ संक™पक धनी zयि—त िडिवआ लए कए तकनहुँ निह भेिट सकत। zयि—तगत जीवनमे कैबेर हुनका Bितकूल पिरि6थितक सामना करए पड़ल, तथािप ओ धैय;पूव;क जीवनयाJामे लागल रहलाह।आस-पासक गामक बहुत रास लोक हुनकार अ­यािमक चेला छल।हुनकासँ मंJ लेने छल।हुनका Bित j°ाक भाव रखैत छल आ हुनक मृयुसँ बहुत दुखी भेल छल। आब ओ एिह दुिनयoमे निह छिथ। िखछु साल पूव; एकाएक हुनकर िकडनी खराप भए गेल।मास िदनक भीतरे ओमाच; २०१४मे चिल गेलाह। ओिह समय हुनकर बएस अ6सीसँ उपरे रहल होएत। मृयुसँ िकछुमास पूवÙ हमगाम गेल रही तँ हुनकासँ भट भेल रहए। ओ पूण;तः 6व6थ लगैत छलाह।अिपतु बरी काल धिर अ­यािमक िवषयपर अपन मंतzय दैत रहलाह। हमर माएसँ सेहो गŽप करैत रहलाह। तकर िकछुए िदनक बाद हुनक मृयुक समाचार भेटल।आœय;मे पिड़़गेलहुँ। हुनक देहावसानसँ गामेक निह अिपतु परोप«ाकR एकटा अपूणÊय Hित भेल। कम;ठताएवम् सफल संघष;क एहन जीवंत उदाहरण भेटब बहुत मोसिकल काज अिछ। हुनका हमर शत-शत Bणाम! q

िमिथलाक सं6कृित बहुत पिहने िमिथलाक नाम िवदेह छल आओर ओिहमे वत;मान िमिथला, वैशाली, कतेको राÎयसभ सािमल छल। चािरम वा पoचम शताzदीमे ई िमिथला िकंवा तीरभुि—तक नाम Ìहण कएलक। मुगल साÜाÎयक काल मे एकर एकटा भाग (उŒर िदिससँ)नेपालक राजाक अधीन चल गेल। शेष भाग ितरहुत कहल जाइत छल। िमिथलाBा]तक zया²या जे िÌअरसन महोदय केलिन अिछ, तदनुसार एकर HेJफल लगभग तीस हजार वग;मील अिछ आओर एिहमे िवहार राÎयक मुज×फरपुर, िसतामढ़ी, वैशाली, दरभंगा, मधुबनी, सम6तीपुर, सहष†, उŒर मुंगेर, उŒरी भागलपुर, आओर पुिण†क िकछु भाग सािमल अिछ संगे नेपालक रौताहट, सरलाही, सŽतरी, मोहातारी, आओर मोरंग िजला ओिहमे अवैत अिछ। िमिथलाक वत;मानक दिरiता आओर भूतकालक ऐfय;मे कोनो साय निह अिछ। सन् १९३४ ई०क भूकंपक बाद एिहठामक लोकक ि6थित आओर खराव भए गेल छलैक आओर भूकंपक कारणे ओिहठामक आबोहवापर सेहो Bितकूल Bभाव पड़ल। आलसी आओर खोचoह 6वभावक कारण एिहठामक लोक संBित क§मे छिथ, मुदा Bाचीनमे ई ि6थित निह छल। लोक Bश±िचŒ समय िबतबैत छल आओर धने-जने पूरल रहए। BयाŽत सुख-सुिवधाक उपलzधक संग लोकक ­यान कला ओ सं6कृितक िवकासपर जाएब 6वबािवक अिछ आ तR ई कोनो आœय; निह िथक जे लोक पय†Žत सािहियक ओ सज;नामक Bितभाक पिरचय देलक। Bाचीन कालसँ िमिथलाक Bशि6तक आधार िव¯ता रहल अिछ। षड़दश;नमेसँ चािरटा दश;न, ]याय, वैशेिषक, िमम©सा आओर स©²यक रचनाकार लोकिन ·मशःगौतम, करणाद, जैिमनी ओ किपल

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िमिथलेमे भेलाह। मुगल आ·मण कालमे आचार-िवचार शुि°पर ­यान देव आव³यक भए गेल तR म­यकालमे नzय ]याय, पूव; िमम©सा आओर 6मृित िनवंध रचनापर बेसी तुल देल गेल। िमिथलाक BितPा बाहरक िव¯ान लोकिनमे बनल रहए तR ओतए कतेको Bकारक पदवी िव¯ान लोकिनकR देबाक Bथा चलल, मुदा ओिह हेतु बहुत —ली§ परीHा होइत छल-जेना िक ³लाका परीHा, उपा­याय, महामहोपा­याय आिद। िमिथलाक Bाचीनमे िवदेह राजाक BितPाक आधार हुनक µान एवम् िव¯ते छल। तिहना महेश ठाकुर ओ ख©डववंशीय अ]य राजा लोकिन एवम् अ]य िव\ा अनुरागी भेलाह आ िमिथलाक कीित; बढ़एबाक हेतु सभ तरहR Bयास कएलिन ओ तदनुकूले BितPो BाŽत कएलिन। िमिथलाक सोिनतमे भगौती जानकीक अंश सव;J िवराजमान अिछ। घर-घरमे पसरल गोसाउिनक िशर भगवतीक आराधना 6थल अिछ। Bयेक शुभ अवसरपर भगवतीक वंदना गएबाक Bथा िमिथलाक सं6कार भए गेल अिछ। िव\ापितक वंदना “जय जय भैरिव असुर भयाउिन , पशुपित भािवनी माया”,िमिथलाक राÈÝगानक तु™य अिछ। यJ-तJ पसरल भगवतीक िस°पीठ जेना उ”चैठ, उÌतारा आिद शि—तक आराधनाक साथ;कताकR Bमािणत करैत छिथ। उ”चैठक कालीक कृपासँ कालीदास मूख;सँ एकटा महान िव¯ान भए गेलाह। कहबी अिछ जे ओ तेहने मूख; छलाह जे भदवािरक झर-झर पािन बहैत कालमे भगवतीक मुँहमे किरखा लेपए लगलाह जािहसँ Bस± भए भगवती हुनका वरदान देलिथन। िमिथलाक िJपुंडकसंग लालठोप ओ चाननक उ­व;पुणड करबाक परंपराक अथ; ओकर शा—त, वैÈणव ओ शैव संBदायमे सम]वय 6थािपत करब छल। Bित वष; हजारक हजार कमरथुआ वै\नाथधाम जाए महादेवकR गंगाजल ढ़ािर अवैत छिथ। संगे गाम-गाम बनल महादेवक मि]दर िशवक Bित आ6थाकR Bमािणत करैत अिछ। “कखन हरब दुख मोर हे भोलानाथ” गबैत- गबैत कतेको भ—त लोकिनकR अjुपात भए जाइत छिन। एतबा होइतो शालीÌामक £पमे भगवान िवÈणुक पूजा सगरे िमिथलामे पसरल अिछ। तुलसी चढ़ाय चरणामृत लए भोजन Ìहण करैत छिथ। जँ गंभीरतासँ कहल जाएतँ िमिथलाक मािट-पािनमे अ­याम कुिट-कुिट कए भरल अिछ। ज]मसँ मरण धिर िह]दू धम;शा6Jमे जतबा सं6कार कएल जाइत अिछ से मैिथल लोकिन बड़ धािम;क भावनासँ िनÈपािदत करैत छिथ। समाजशा6Jीय दृि§कोणसँ सेहो िमिथलाक मुड़न, उपनायन ओ िवआहक परंपरा समाजक िविभ± घटकमे सम]वय ओ धािम;क भावनाक अÁयुदयक हेतु अितशय महवपूण; कहल जा सकैत अिछ। भारत भिरमे िमिथलाक िवआहक परंपरा अपनामे िविचJताक हेतु Bिस° अिछ। बख;क बख;धिर पसरल अनेकानेक Bकारक पव; ओ योहार िमिथलामे िवआहक अिनवाय; अंग िथक। िवआह होइते चतुथÊ, चªचन, मधुjावणी, कोजागरा, िवदाइ, पुछारी, नागपंचमी ओ ि¯रागमनक अवसरपर नाना Bकारक भार पठएवाक परंपराकR लोक आबो ओिहना लदने चिल आिव रहल अिछ जेना अÞारहम शताzदीमे रहल होएत। एिह दृि§कोणसँ िमिथलाक लोक अखनो पछरले छिथ। दहेजक Bथा तेहन सं·ामक ओ घातक भए गेल अिछ जे िजनका दू-तीन टा बेटी होि]ह ितनका दिरi बनबासँ भगवाने रHा कए सकैत छिथ। आव³यकता एिह बातक अिछ जे िमिथलामे क]यालोकिनक Bित जे अ]याय भए रहल अिछ से आबो बंद होइक। बोराक आम आ घरक किनआमे भेद करब क िठन िथक।

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एिह सब]धमे सौराठसभा ओ ओकर परंपरागत इितहासक वण;न करब उिचत होएत।ई भारतवष;मे अपना-आपमे एकमाJ सं6था िथक जे िबना कोनो राजकीय ह6तHेपकR Bितवष; दस हजार मैिथल वžहमण लोकिनक िवआह-सब]ध 6थािपत करबाक आधार बनैत अिछ। एिहठाम एक िनिœत अविधमे करीब लाख वžहमण जमा होइत छिथ। सौराठसभाक 6थापना करीब सए साल पूव; भेल छल। ओतए पंिजकार लोकनो होइत छिथ जे क]यापHकR िस°ा]त दैत छिथन। ओकराअ6वजन -पJ सेहो कहल जाइत अिछ। िनयमानुसार सात पीढ़ी पाछा देखला संता पंजकार ई BमाणपJ दैत छिथ जे सबि]धत वर ओ क]या पHमे सब]ध भए सकैत अिछ। य\िप ई zयव6था वंश परंपराक BितPा ओ शु°ता वनयबाक हेतु कएल गेल, मुदा एकर जिड़मे पंजी zयव6था छल जे १३१० ई०मे महाराजा हिरिसंघ ¯ारा चलाओल गेल। एिह zयव6थाक अनुसार िमिथलाक वžाहमण लोकिनकR चािरभागमे बoटल गेलाह। (१) jोिJय, (२) योग, (३) पंजीव°, (४) जयबार। Bथम तीन कोिटक वžाहमण भलमानस कहल जाइत छलाह आ अि]तम याने जयबार लोकिन कुलशीलक िहसाबे छोट वžाहमण कहल गेलाह। सौराठ साभामे बैसबाक 6थान ओिह िहसाबे िनणÊत भेल छल। ऐिह Bथामे सबसँ बड़का दोष ई छल जे भलमानुष लोकिनक सामािजक BितPा बहुत बिढ़ गेल आ ओ लोकिन —यो सए —यो पचास एनाकए िवआह सब]ध 6थािपत करए लगलाह। कतेकठामतँ इहो सुनबामे अबैत छलजे भलमानुष लोकिनकR िवआह केलाकबाद दोहराकए सासुर जेबाक समय ओ 6मृित निह रहैत छलिन। िविभ± Bकारक पoिज रखिनहार लोकक मूलक संग गाम िवशेष वा zयि—तिवशेषक नाम जोड़ल रहैत अिछ। जेना-महादेव ठाकुर पoिज, शीलानाथ झा पoिज आिद। य\िप आब एिह परंपराक कोनो सामािजक महव निह रिह गेल अिछ तथािप पंिजकारलोकिन एकर भÈमावशेषकR उठओने िफिर रहल छिथ कारण ओिहसँ हुनका लोकिनक जीिवका चलैत छिन। आबक िमिथलाक पoिज िथक-इ]जीिनयर, डा—टर, Bोफेसर ओ खूब धिनक लोक। कोनो ठामक सं6कृितपर ओके िलिप ओ भाखाक बड़ Bभाव होइत अिछ। िमिथलाक भाखा मैिथलीकR अपन िलिप ितरहुता िकंबा िमिथलाHर कहल जाइत अिछ। दुभ†¤यक बात िथक जे मैिथलीमे देवनागरी िलिपक Bयोग संग ओकर मौिलक िलिपक Bयोगमे Bचूर Íास भेल। एतबा धिर जे िमिथलाHरमे िलखा-पढ़ी करएबला लोक आंगुरपर गनलेसँ भेिट सकैत छिथ। मैिथली भाखामे सािहयक Bयेकिवधापर काज भेल अिछ। Bाचीनकालसँ आइ धिर कतेको िव¯ान लोकिन अपन कलमक जोड़सँ एिह भाखाकR कृताथ; कएलिन अिछ। चय†पदमे दाश;िनक तथा धािम;क मा]यताकR लौिकक £पमे B6तुत करबाक चे§ा कएल गेल अिछ। एकर पद सभमे चौबीस Bकारक राग- रािगनी सभक Bयोग भेल अिछ। Îयोितिर6वरक वण;रÒाकर, धत;समागम ओ पंचशायकक मैिथली भाखाकR अपूव; योगदान अिछ। वण;रÒाकरक ई िवशेषता िथक जे हमरा लोकिनक आ\ Ìंथ होइतो ई ग\मे िलखल अिछ जखन िक आन-आन भाखाक आिदÌंथ प\मे अिछ। म­यकालमे मैिथली सािहयक युग Bवत;क भेलाह िव\ापित जे सं6कृत, अवह«, ओ मैिथली भाखामे कतेको सोरिह रचना कए अमर भए गेलाह। गाम-गाम पसरल िव\ापितक सोहर, समदाउन, वटगबनी ओ नाना Bकारक भि—त गीत अखनो हुनकर सािहियक 6वªपकR ओिहना जीिवत रखने अिछ जे चािर-पoच सए बख; पूब; रहल होएत। िव\ापितक बाद गोिव]ददास

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झा, उमापित,मनबोध, लोचन, हष;नात झा धिर अपूव; शृंखला चलल जािहमे िव\ापित सािहयक शृजनामक छाप सतित पिरलिHत भेल। चंदा झाकR आधुिनक युगक Bवत;क मानल जाइत अिछ। ओ बहुमुखी zयि—तवक लोक छलाह। िहनक सात गोट Bकािशत Ìंथ भेटैत अिछ तथा पoच गोट एहनो Ìंथसभक उ™लेख भेटैत अिछ जे अBकािशत अिछ। िहनक Bकािशत Ìंथक नाम िथक- (१) िमिथलाभाषा रामायण, (२) गीित सुधा, (३) महेषवाणी, (४) अिह™या चिरत नाटक (५) चंi प\ावली, (६) लšमीfर िवलास, ( ७) िव\ापितक पुªष परीHाक ग\-प\मय अनुवाद। िहनक अBकािशत रचना अिछ- (१) गीत सŽतशती, (२) मूलÌाम िवचार, (३) छ]दोÌ]थ, (४) वाताzहान, (५) रसकौमदी। िव\ापितकR जँ मैिथली सािहयक सूय; कहल जाए तँ िनœय चंदा झा ओिह सािहयमे च]iमाक 6थान BाŽत करबाक यो¤य छिथ। च]दा झाक बाद जीवन झा, म.म.परमेfर झा व²सी, रघुनं]दन द ास, म.म.मुरलीधर झा, जनाद;न झा जनसीदन, ओ लालदासक नाम Bमुख सािहयकारक £पमे अिव6मरणीय अिछ। लाल दास क रिचत रमेfर चिरत रामायणमे सीताक मिहमा बेसी 6थान पओने अिछ अथ†त ई शि—तक Bधानता देलिन अिछ जे िमिथलाक परंपरा ओ सं6कृितकक अनुकूल अिछ। महाकाzयक HेJमे सीताराम झाक अव चिरत, बiीनाथ झाक एकावली पिरणय, मधुपजीक राधा िवरह,तंJनाथ झाक झाक कीचक वदओ कृÈणचिरत, सुमनजीक BितBदा 6वतः 6मरण भए जाइत अिछ। एकरे संगे अंÌेजी, संसकृत ओ मैिथली सािहयक Bकाuड िव¯ान होइतो मैिथली सािहयकR गौरवाि]वत करबामे डा. रमानाथ झा ओ डा. जयक©त िमjक नाम 6वण†Hरसँ िलखए जोगर अिछ। हा6यरसावतार Bो० हिरमोहन झाक कृितसँ मैिथली भाखाक कोष भरल-पूरल अिछ। ओ अपन उप]यास क]यादान एवम् ि¯रागमनक मा­यमसँ िमिथलाक कुBथापर अपूव; चोट कएलिन। ख«रककाक तंग, Bणय देवता, रमगशाला, चच;री, आिदक रचनासँ ओ मैिथली सािहयमे अमर भए गेलाह अिछ। डा. शैले]i मोहन झा, क©शीनाथ झा िकरण, jी वै\नाथ मेj ‘याJी’क सेहो अपन-अपन योगदान अिछ।याJीजी अपन सायवादी िवचारक पुि§ करैत बहुत रास ओजि6व ओ ·ाि]तकारी िवचारसँ पूण; रचना कएलिन। उदाहरण6व£प- अगड़ही लगउ बª वà खसौ, एहन जाितपर धसना धसौ, भूकंप होउ क फटौक धरती, मo िमिथले रिह कए की करती? डा. सुभi झाक 'फारमेसन आफ मैिथली िलटरेचर ”, 'िह6टोिरकल Ìामर आफ मैिथली ओ Bवास ,हुनक तीनटा पोथी मैिथली सािहयके Bाण BितPा देबएमे अि¯तीय योगदानक £पमे अिव6मरणीय अिछ। आधुिनक कालमे िमिथला िमिहरक संपादकगण एिह Bकारे 6प§ अिछ जे सo6कृितक दृि§ए िमिथलाक मािट-पािन बड़ हिरअर अिछ। मुदा दुभ†¤यक बात ई िथक जे आल6य िकंवा Bमादवश हमरालोकिन अपने सo6कृितक उपलिzधकR िबसिर रहल छी। 6व० राजेfर झा, योगान]द झा, 6व. च]iनाथ िमj, राजकमल चौधरी, लिलत, ओ रमान]द रेणु, jी सोमदेव आिद कतेको लेखक लोकिन ओ किव लोकिन मैिथली

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सािहयकR िह§-पु§ करबामे सहायक िस° भेलाह अिछ। एही ·ममे िपलखवाड़वासी गंगेश गुंजनक चच; सेहो उिचत अिछ जे अपन कथासंÌह- “अ]हार इजोत” ओ किवता संÌह” हम एकटा िमÏया पिरचय”क हेतु Bिस° छिथ। एकर अलावा िहनक रेिडओ ªपक “जय सोमदेव” jोतालोकिनकR कतेक आनंिदत कएलक अिछ से वण;न करब किठन िथक। एिह Bकारे 6प§ अिछ जे सo6कृितक दृि§ए “िमिथलाक मािट-पािन बड़ हिरअर अिछ। मुदा दुभ†¤यक बात ई िथक जे आल6य िकंवा Bमादवश हमरालोकिन अपने सo6कृितक उपलिzधकR िबसिर रहल छी। “बारीक पटुआ तीत” जे कहल गेल अिछ से सगरे िमिथलामे Bयु—त अिछ। सीकॴसँ नीक-नीक बासन बनाएब वा उपनायन, िबआह ओ आन-आन शुभ अवसरपर सु]दर-सु]दर कढ़ाइ करब िमिथलामे हजारक हजार वख;सँ Bचिलत अिछ। गाम-गाम एकसँ एक कलाकार एिह कलाके जीिवत रखने रहलाह मुदा एकर महव लोक तखन बुझलक जखन िक हजारक हजार सं²यामे एिह व6तुसभक म©ग िकछु वख; पूव;सँ िवदेशीसभ करए लगलाह। जािह िमिथलाक ­वजा ]यायशा6Jमे देशभिर मे फहराइत रहल, जतएक गायक लोकिन देशभिरक राज पिरवारमे संमानक पाJ छलाह ओ कलाक दृि§सँजे सव;J समाननीय छल ओहीठाम लोक भिर जाढ़मे घूरतर ओ गमÊमे पीपड़क छहिड़मे गŽप मािर-मािर दिरiाक सेवन करैत सब तरहR Hीणशि—त भए रहल छिथ से िच]ताक बात अव³य अिछ मुदा एकर अथ; ई कदािप निह जे हम अपन आमिवfासकR पिरयाग कए दी आ अ]धाधु]ध आन-आन सo6कृितक ऐब सभकR अपना जीवनमे Bjय दी। q

(१४ अग6त १९८३ क िमिथला िमिहरमे Bकािशत )

रबी]i नारयण िमjक दूटा लघुकथा फसाद भोरसँ सoझ धिर ओ टीशनपर BतीHा करैत रहल। जतेक बेर गाड़ी अबैक ओ सचे§ भए जाइत छल। आबए बला लोक सभ िदस टकटकी लगौने रहैत छल। मुदा सभ बेर ओकरा िनराशेहोमए पड़ैक। सoझमे ओ थाकल-झमारल गाम लौटल तँ देखलक जे पलटनमाक घरवाली ओ पलटनाक माएमे मचल छलैक।लगैक जेना गंभीर िववाद भए गेलैक अिछ। आँगन आएल। मुदा दूनूमे सँ —यो सुनए लेल तैयार निह छलैक। मामला बढ़ैत देिख ओ गरजल। मुदा बेकार। दूनू आपसमे एक-दोसरक गड़ा गािट देबाक िनœय कए चूकल छल। रमुआकR निह रिह भेलैक। ओ उठौलक लाठी आ पलटनमा माएकR लगलैक सटाक, सटाक। पलटनमाक माए गिरयबैत भागल।

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मामला शा]त भेलैक। आइ तीन सoझसँ घरमे —यो निह खेने छलैक। पलटनमाक अबाइ छलैक आ तR ओ टीशन गेल छल। एमहर पलटनमा घरवाली मािलकक आँगनमे काज कए आएल छलैक। अबैत काल मालिकनी िकछु देने छलिखन तकरे बटवारा करैत-करैत सासु-पुतोहुमे िववाद पसिर गेल छलैक। साल भिरसँ पलटनमा बाहर छलैक। जिहआसँ गाम छोड़लकै तिहआसँ आइ धिर कोनो खोज-खबिर निह आएल छलैक। गामक बहुत लोक कला]तरमे भोज करैत छलैक आ ओिहठामसँ सभ मास —यो ने —यो अिबते रहैत छलैक। ओकरे सभसँ पलटनमाक समाचार गाममे पहुँचैत रहैक। पूरबािर टोलक कए गोटा पिछला मास आएल छलैक आ ओकरा िदया पलटनमा समाद देने रहैक जे आगा मास पुिण;मा िदन गाम आएत। मुदा निह अएलैक। एिह बातक अंदेशा रहैक रमुआकR। टीशनसँ घुरैतकाल ओ बड़ अछता-पछता रहल छल। एही गुन-धुनमे गाम आएले छल रमुआ िक घरक गरम वातावरणमे आओर गरमा गेल। पलटनमा माएकR तामसपर नीक मािर पिड़ गेल छलैक आ ओ मािर खा कए पता निह कतए िनपŒा भए गेिल। रमुआक कतेको पु6त ओही गाममे गुजर केने छल। मुदा पलटनमा गामक सीमान न©िघ देलकै। पलटनमाक एिह काजसँ मािलक सभ बड़ अBश± भेल रहैक। मुदा ओ ककरो निह सुनलक। माए जाए काल बड़ कनैत रहैक। मुदा की कए सकैत छलैक। पलटनमा कलकŒा पहुँचते देरी काज शु£ कए देलक। आमदनी नीक होइक। मुदा रखबाक लूिर निह रहैक। संगी-साथी सभ आगत-भागत कए ओकरासँ सभटा पैसा खच; करा लैक। एक िदन ओिह मीलमे आ]दोलन भेलैक। मजदूर सभ मािलकक अयाचारक िखलाफ अबाज उठौलक। ओिह आवाजक पलटनमाक मोनपर बेस Bितकृया भेल रहैक। पलटनमा लोककR नारा लगबैत देिख िचकिर उठल- “नहॴ चलेगी, नहॴ चलेगी, यह बैमानी नहॴ चलेगी।” पूरा मीलमे तालाब]दी भए गेलैक। मजदूर सभ मील मािलकक घरक घेरा कए देलक। मीलक मािलक लाख Bयास केलक मुदा पलटनमा टससँ मस निह भेलैक। मीलक गेटपर एक सएसँ अिधक मजदूरक संग अनशनपर बैस गेलैक। आ]दोलन तीवžतर होइत गेलैक। अ]ततोगवा पलटनमा िगर×तार भए गेल। ओकर संगी सभ सेहो जहल गेल। नारा लगैत रहलैक- “नहॴ चलेगी, नहॴ चलेगी...।” ई सभ घटना अनायास भए गेल छलैक। पलटनमा तR अपन रोजी-रोटीक कमाइमे लागल छल। मुदा ओकर सोिनत किह निह िकएक एकाएक खौल उठलैक। पलटनमा जहल गेल मुदा जेना एिह घटनासँ ओकर सं6कारमे अBयािशत पिरवत;न आिब गेल छलैक। गामक वातावरणमे रहैत रहैत ओ मौन सभ Bकारक Bतारणा ओ अ]याय सहैत रहल। मुदा एिह घटनासँ जेना

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ओकर अ]तरामाक Îवालामुखी फुिट पड़ल छलैक। Îवालामुखी जे संघष;क आिगसँ अ]यायकR जरा देबए चाहैत छल। जािह िदन ओकरा जयबाक BोÌाम छलैक ओिह िदन ओ पकड़ल गेल। जहलमे एका]तमे ओकरा किह निह की की फुराइत रहलैक। रमुआक टुटल खोपरी आ चा£कात गामक मािलक सभहक बड़का-बड़का दलान। पिuडतजीक बड़का दलान। दनानक अगवासमे बैसार होइक। सoझक सoझ गामक सभ BितिPत zयि—त सभ अबैत छलाह आ अपन-अपन िवचार zय—त करैत छलाह। लहना-तकादा सेहो ओतिह होइत छलैक। बुधिदन छलैक गाममे हाट लागल छलैक। पिuडतजीक ओिहठामबैसार भेल। पूरा गामक लोक जमा भेल छल। रमुआ ओतए बुधन बाबूक िकछु कज;छलिन। ओही कज;कR सधएबाक हेतु बैसार छलैक। पँच लोकिन ई फैसला केलिन जे रमुआ अपन घराड़ी बुधन बाबूक नामे कए देिथ आ पलटनमा हुनका ओिहठाम चरबाही करए। कारण जे घराड़ीक मु™यसँ माJ मूर सधैत छलैक आ सूदक तरीमे ओ चरवाही करत। एिह िनण;यक संग ओिह िदन बैसार खतम भए गेल। रमुआ आँगन पहुँचले हेताह िक पलटनमाक माए देहिरयेपर भेटलिन आ समाचार पुिछ गरजए लागिल- “निह जािन ई सभ की की करत? गे दाइ !गे दाइ !हमर घराड़ी एकरा सभ निह देखल जाइत छैक।” मुदा िकछु ने चललैक। दोसर िदन रमुआ बेनीप«ी जा कए अपन घराड़ी बुधन बाबूक नामे रिजÈÝी कए देलिखन। रिजÈÝी घरसँ िनकलैत हुनका होिन जेना आँिखक िडहा —यो बहार कए लेने हो। सगतिर अ]हारे अ]हार। सoझ पड़ैत-पड़ैत रमुआ गाम पहुँचल। मुदा एतबेसँ बुधन बाबूक मोन निह भरलिन। पलटनमाकR खबिर देबए लगलिखन जे तोरा हमरा ओतए काज करए पड़तौक। हँिस कए कर आ िक कािन कए कर। पलटनमाक मोनकR ई सभ असहज लगलैक ओ दोसर िदन दुपहर राितमे चुŽपे-चाप गामसँ पड़ाएल। पलटनमा जहलमे पड़ल-पड़ल ई सभ सोचैत रहल मोन कहैक- “छोड़ पलटनमा ई र6ता। कमो खो। की राखल छैक फसादमे। आिखर हमरा लोकिनक कै पु6त तँ एिहना बीित गेल। सभ अपन चैनसँ िजनगी कटलक। फेर ई आफद िकएक।” दोसर मोन कहैक- “निह, निह लड़ पलटनमा लड़। संघष; केनिहसँ पिरवत;न हेतैक। आिखर अपने लेल लोक निह जीबैत अिछ। भिवÈयक हेतु भावी पीढ़ीक हेतु आधारिशला तँ वत;माने पीढ़ी तैयार करैत अिछ िकने।” इएह सभ सोचैत रहए िक जेलर साहेब आिब गेलिखन आ ओकर िचंतन ·म टुिट गेलैक...।

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जेलमे सात िदन िबता चूकल छल पलटनमा। मीलक मािलक मीलमे तालाबंदी कए देलक आ संगे मीलमे काज केिनहार नवका कम;चारी सभकR छँटनी सेहो कए देलक। ई सभ समाचार पलटनमाकR जेलेमे भेटैत रहैत छलैक। ओिह िदन रातुक बारह बािज रहल छलैक। जेलर पहरेदार फॲफ कािट रहल छल। पलटनमा आ ओकर दूटा संगी जेलक चाहरदीवारी फािन गेल। जेलमे खतराक घuटी बाजए लागल। मुदा पलटनमा ओ ओकर संगी नदारद। कतहुँ ओकर थाह पता निह चललैक। पलटनमा दौड़ैत गेल, दौड़ैत गेल आ बहुत दूर एकटा अµात जगहमे जा कए अचेत खिस पड़ल। ओकर दूनू संगी ओकर पछोर देने ओतए पहुँचलैक। दुपहर छलैक। बारह घ]टा लगातार दौड़ैत रहलाक बाद तीनू गोटे असोथिकत भए गेल छल। पलटनमा अचेत छल आ ओकर दूनूटा संगी गमछीसँ ओकरा हवा करैत छलैक। संघष;, संघष;, संघष;। पलटनमा अपढ़ छल। गरीब छल। मुदा हालतसँ लड़ए चाहैत छल। ओकर सभसँ बड़का अपराध इएह छलैक। गाममे ओकरा सन-सन कतेको मजदूर ओिह हालातसँ गुजिरकए िनयितसँ सामंज6य कए चूकल छल। मुदा ओ निह सिह सकल। तR गाम छोड़ए पड़लैक। शहरमे पुनœ ओकरा असह भए गेलैक। यातना, शोषण ओ Bतारणाक िखलाफ नारा लगा देलकैक। मुदा आब कतए जाएत! गाम छुटलैक, तँ शहर आएल। शहरसँ पड़ा कए जंगल आएल। आब कतए जाए। की करए। खैर! अखन तँ ई सभ सोचबाक समय निह छलैक। चेतनतासँ क§क अनुभूित होइत छैक। तकरो अखन ओकरामे अभाव भए गेल छलैक। ओअचेत पड़ल छल। ओकर दूनू संगी ओकरा गमछासँ हवा करैत रहलैक। िदन लुक-झुक कए रहल छलैक। पलटनमा सुगबुगेलै। पलटनमाक संगी सभ खुश भेल। कनी-मनी कछमछ कएलाक बाद पलटनमा फुरफुरा कए उिठ गेल जेना िकछु भेबे निह कएल रहैक। पलटनमा ओिह राित जंगलेमे िबतौलक। चा£कात जंगलक भयानक जानवर सभक आवाज अबैत रहल। भोरहोमए पड़ छलैक। पलटनमा गंभीर िच]तनमे लीन छल। की गरीबक हार-काठ पाथरक बनल होइत छैक? निह, तखन ओकरापर जनिमते समाज एहन कठोर िकएक होइत छैक। एक-एक पल जीवनक हेतु संघष;मे बीत जाइत छैक। की संसारक सौ]दय;क आन]द लेबाक ओकरा कोनो अिधकार निह? जीबाक हेतु BयÒ करैत-करैत ओ मृयु िदस अÌसर भए जाइत अिछ। इएह िछऐक गरीबक जीवनवृत..? इएह सभ सोच-िवचारमे ओ छल िक कनेक दूरपर पुिलसक जीप अबैत ओकरा नजिर अएलैक। एक बेर पुन: पलटनमा अपन संगी सभक संगे भागल। मील मािलक पलटनमाक पकड़बाक हेतु पुिलसकR जेब गरम कए देने छलैक आ पुिलस ओकरा पाछू हाथ धो कए पिड़ गेल छल। पलटनमा भािगते जा रहल छल। मुदा जंगलकR चा£कातसँ घेर लेल गेल छलैक। पलटनमा ओ ओकर संगी पकड़ल गेल। पकड़लाक बाद ओकर हाथ पाछू कए बाि]ह देल गेलैक। थानामे पलटनमाकR एकटा घरमे एसगर ब]द कए देल गेलैक। Bात भेने ओिह घरसँ पलटनमाक लाश िनकललैक। किह निह राित भिर ओकरा की की यातना देल गेलैक। पलटनमा आब एकटा मुद† छल।

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पो6टमाट;म िरपोट;क अनुसार ओकर मृयु जंगलमे कोनो जहरीला जानवरक कटलासँ भेलैक। Bात:काल अखबारमे छिप गेलैक- “भगोरा कैदीक लाश जंगलसँ आनल गेल।” पलटनमाक िपता ओिह राित सूित निह सकल छल। Bात: काल ओकरा एकटा तार भेटलैक। “पलटनमा जंगलमे जानवरक Bकोपसँ मिर गेल। लाश लए जाउ।” पलटनमाक िपता सु± पिड़ गेल। शू]यतामे ओकर आँिख देखैत रिह गेलैक। पलटनमाक माए एक बेर फेर िचिचआ उठलैक आ तुर]त शा]त भए गेलैक। एक िदस पलटनमाक माए आ दोसर िदस पलटनमाक िपता िन6तŸध, चुप, चेतना िवहीन पड़ल रहल। गामक लोक कनीकाल तमासा देखलक आ अपन-अपन काजमे लािग गेल। —यो-—यो कहैत रहैक- “पलटनमा अनेरे फसाद केलक। गाममे एतेक गोटे गुजर करैत अिछ, मिर जाइत अिछ। गरीबो बहुत अिछ मुदा एना उजाहिट तँ ओकरे ने छलैक आ तकर फलो तँ वएह भोगत।” ¦

पुनिम;लन ओकरामे Bितभाक कतहुँसँ अभाव निह छलैक। पूरा गाम ओकर यशगान करबाक लेल तपर छलैक। नीक, सु]दर, सुशील आ मेघावी छल अ£ण। माए और बापक कोनो 6मृित ओकरा निह छलैक। जीबनक Bयेक डेग ओ लिड़ कए आगा बढ़ल छल। अपमानक अलावा समाजसँ ओकरा िकछु Bितदान निह भेटल छलैक मुदा ओ ओकरे, Bेरणाक आधार बना जीबनमे िवजयjी BाŽत करबाक हेतु कृतसंकि™पत छल। ओकर ज]मसँ लए कए अखन धिर जतेक घटना घटल छलैक सभ 6वयंमे एकटा वृता]त छल। Bितभा जेना ओकरा Bकृितसँ पुर6कारक £पमे भेटल होइक। ब”चेसँ छाJवृिŒ ओकरा भेटए लगलैक। िशHक लोकिन एक पृP पढ़ाविथ तँ ओ दू पृP 6वयं पिढ़ लैत छल। ओकर Bितभासँ सभ —यो दंग रहैत छलाह। य\िप ओकरा र6ता देखौिनहार —यो निह छलैक, ओ 6वयं जेना सभ िकछु जनैत हो, की करक चाही,ककरासँ की बाजक चाही आ की करी जािहसँ आबएबला समय नीक हो से ओकरा खूब नीकसँ बूझल छलैक। हाई 6कूलक परीHा Bथम jेणीसँ उतीण; केलक आ पूरा राÎयमे Bथम 6थान ओकरा BाŽत भेलैक।

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कालेजक िशHा BाŽत करबाक Bबल आकंHा ओकरा छलैक मुदा आिथ;क पिरि6थित अित दुखद छलैक। गामपर घराड़ीटा बoटल छलैक। माए, बाप,भाए, बिहन ककरो कोनो सहारा निह छलैक। थाकल, ठेिहआएल, ओ दिरभंगा महराजक राजधानीक महल सभमे घुिम रहल छल। पैरमे पनही निह, देहपर एकटा नीक कपड़ा निह, मुदा अपनापर तेज,6वभावमे सौयता ओ zयवहारक नÜता अनेरे लोकक ­यान ओकरापर आकृ§ कए लैत छल। संयोगसँ चौधरीजी िर—सासँ उतरलाह। अ£ण हुनका नम6कार केलक। अ£णक Bितभाशाली मुखमuडल देिख ओ चिकत भए गेलाह। चौधरीजीक िधया-पुताकR पढ़एबाक काज ओकरा भेिट गेलैक। हुनकासँ ÎयेP स]तान उिम;ला नवम् वग;मे पिढ़ रहल छलीह। देखयमे खूब सु]दिर, 6वभावसँ िवनÜ ओ Bितभामे अि¯तीय। उिम;लाकR देिखतिह अ£णकR ठकिवदरो लािग गेलैक। जेना पूव; ज]मक संगी रहल हो। उिम;लाक पढ़ाइमे अÓुत Bगित भेलैक। अ£ण सेहो Bश±िचŒ अपन गाड़ी आगा पढ़बए लागल। मुदा एक िदन बड़ िविचJ घटना घटलैक। अ£णक सभटा 6वâ देिखते-देिखतेमे भंग भए गेलैक। उिम;ला 6कूल गेलैक आ ओिहठामसँ लौिटतिहँ दद;-दद; कए िचिचआए लगलैक। कतेको ओझा-गुनी, डा—टर-वै\ अएलैक मुदा ओकरा कोनो सुधार निह भेलैक। हालत बदतर होइत गेलैक आ ओ Bात: होइत-होइत िनÈBाण भए गेल। सॱसे गद; चिढ़ गेल। दुभ†¤य ओकरा ओतहुँ संग निह छोड़लकै। उिम;लाक आकि6मक िनधनसँ ओकर सपना सभ िछ±-िभ± भए गेलैक। अ£णकR आब एकहुँ िदन ओतए रहब असभव भए रहल छलैक। ओ चुप-चाप ओतएसँ खसकल। पैरे-पैरे दिड़भंगासँ सम6तीपुरक र6तामे ओ बहुत दूर आगा आिब गेल छल। पाकरीक गाछतर छाहिरमे बैसल। कuठ जिर रहल छलैक। कतहु पािनक दश;न निह छलैक। थािकयो नीक जेना गेले छल। बैसल िक आँिख लािग गेलैक। सुतले-सुतल ओ 6वग; लोकक पिर½मण कए रहल छल। उिम;ला अय]त Bश± मुiामे ओकरा नम6कार कए रहल छलैक। “आ अ£ण तॲ। बãड नीक छR तूँ। तोरे तािक रहल िछयौक। जिहआसँ एतए एलहुँ एकहु िदन चैन निह अिछ। िदन-राित बस तोरे तािक रहल छी। आ ज™दी आ। देख हम कतेक परेशान छी। देख हमर कuठ जिर रहल अिछ। हमर हृदयक िपयास कuठ तक पहुँच रहल अिछ। एक िगलास पािन दे। अ£ण पािन दे। कनी सुन।” किह निह ओ की की कहैत रिह गेलैक। अ£ण िकछु निह बजलैक आ ·मशः ओनेपŒा भए गेल। अ£णक िन± सेहो उचिट गेलैक। मुदा ताधिर िकछु निह रिह गेल छलैक। अ£णक अ]तम;नमे िदन-राित ई सपना घुमैत रहैत छल। उिम;लाक 6नेिहल zयवहारक अिमट छाप ओकर हृदयसँ मेटने निह मेटा रहल छल। सएह सभ गुन-धुनमे ओ आगा बढ़ैत रहल। सम6तीपुर टीशन बहुत करीब आिब गेल छलैक। रेलगाड़ीक चलबाक आबाज कान तक पहुँिच रहल छलैक। िमिथला ए—सBेस लागल छलैक। दौड़ल दौड़ल ओ टीकस कीनलक आ गाड़ीमे कहुनाक ठूसा गेल। गाड़ी िझक-िझक करैत छलैक। एक कदम आगा बढ़ैक, दू कदम पाछा बढ़ैक आ ठामिह ठाढ़ भए जाइक। आगू घुसकैत-घुसकैत गाड़ी £िक गेलैक। äाइभर साहेब चाह पीबैत छलैक िक गाड; साहेब हरी झंडी

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देखौलकै आ गाड़ी 6पीड धए लेलकैक। छक-छक-छक...। अ£णकR बैसबाक जगह भेिट गेल रहैक। बगलमे एकटा मिहला सहयाJी ओकर, दूटा ब”चा, एकटा अधबयसू पु£ष आ किह ने के के सभ..? कलकŒा जाएबला गाड़ीक समय िवशेषता ओिह गाड़ीमे छलैक। आधासँ आिधक याJी नौकरीक खोजमे महानगरीक Bयाण कए रहल छलाह। बरौनी ज—सनसँ गाड़ी आगा बिढ़ गेल छलैक। ओकरा फेर आँिख लािग गेल छलैक। फेर आिब गेलैक उिम;ला। एिह बेर आओर zयिथत आओर अिधक क£ण 6वरमे िनवेदन करैत एक तरफा अपन मोनक बात ओ कहैत गेलैक। “अ£ण। अ£ण। हम निह रिह सकब। हम निह रिह सकब एसगर अ£ण। देख हमर की हाल भेल अिछ। देहक आभा झूस पिड़ रहल अिछ। अ£ण चल, हमरे गाम चल, मुदा...। मुदा...। मुदा...।” गाड़ी सरपट आगा बढ़ैत गेल। आसनसोल 6टेशन करीब आिब गेल छल। गाड़ी टीशनपर £कल आ बहुत रास याJीक चढ़ब ओ उतरब सुिन ओकर िन± उचिट गेलैक। सपना एक बेर फेर सपना भए गेलैक। दोसर िदन सoझमे ओ कलकŒा शहर पहुँिच गेल। मुदा र6ताक सपना ओकर माथासँ हिट निह रहल छलैक। कलकŒा शहरक नाम बड़ सुनने छल। मुदा कतए जाए? ककरा ताकए? कुनु ठौर ठेकान निह रहैक। आगा बढ़ल जाए। चा£कात बंगला भाखाक सोर। चलैत-चलैत थािक गेल। ताबतमे उिम;लाक आबाज ओकर कानमे पहुँचलैक। अ£ण अकचका गेल- “ई तँ उिम;ला लािग रहल अिछ!” आœय;चिकत ओ ऊपर ताकए लागल। िकछु देखा निह रहल छलैक। ताबतमे फेर वएह आबाज- “डरा निह। हमहॴ छी- उिम;ला, तोहर िचंर पिरिचत संगीनी। देख हम कतेक परेशान छी। तोरा पाछू- पाछू िबहािर जकo गाड़ीक संगे आिब रहल छी। मुदा घबरो निह। आिखर हम तोहर िव\ाथÊ िछयौक ने। ले दस हजार टाका। एिहसँ काज चल जेतौक ने? बाज! बजैत िकएक निह छR?” अ£ण अपन आगामे नोटक पुिलंदा सभ देिख कए गुम रिह गेल। फेर वएह आबाज- “उठा। ज™दी उठा। लु”चा, बदमास आिब रहल छौक। अ”छा तँ हम जा रहल छी।” अ£ण झट दए टाकाकR फoड़मे रािख लेलक। रािखते देरी मनमे उठलै- एतेक रास टाका कतएसँ अनलक उिम;ला? नाना Bकारक B¥ अ£णक मनमे उभिर रहल छलैक। संगे डरो भए रहल छलैक। मुदा पासमे टाका आिब गेलासँ िहमत सेहो बिढ़ गेल छलैक। एतेक आसानीसँ ओकर आिथ;क सम6याक समाधान भए जेतैक से ओ सपनोमे निह सोचने छल। ट©ग तेज ओ मोन सु6त भए रहल छलैक। आगामे एकटा होटल नजिर अएलैक। होटलक कोठरी नबर पoचमे ओ डेरा ललेक। बेस थािक गेल छल। िवjाम करबाक तीवž आव³यकता छलैक। कपड़ा-लŒा खोललक। हाथ-पैर धोलक। घंटी बजबैत नौकर दौड़लैक। मीनू हाथमे दए देलकै आ िकछु-िकछु पूछए लगलैक। मुदा बंगला बजैक। अ£ण िकछु निह बुझलकै।

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नोकरबा तमसा कए चल गेल। अ£ण 6नान कएलक आ कपड़ा-लŒा पहीिर किह निह कतेक गाढ़ िन±मे सुित रहल। उिम;ला फेर हािजर। अ£णकR भेलैक जेना —यो ओकरा उठौने चल जाइत होइक। ओ चुप-चाप सन देिख रहल हो। बहुत दूर एकटा झीलक कातमे ओकरा रािख देलकै। बहुत काल धिर ओ सभ किह निह की की गŽप सप करैत रहल। ओ कहैत रहलैक- “अ£ण, तूँ बड़ नीक लोक छR। तोहर 6मृित एक Hणक लेल हमर मोनसँ निह जाइत अिछ। सून, एकटा काज करऽ। हमरे संगे चल। तोरा सभ िकछु भेटतौक।” पता निह आओर की की ओ कहैत रहलैक...। भोर होमए पड़ छलैक। अ£णक आँिख खुजलैक तँ ओ आœय;चिकत भए गेल। ओकर कोठरीमे उिम;लाक वएह व6J राखल छलैक जे ओ मरबासँ िकछु पूव; पिहरने छल। वोिह व6JकR ओ हटौलक तँ आओर आœय;चिकत भए गेल। बहुत रास हीरा-जबाहरात ओतए राखल छलैक। अ£ण परेशान छल जे ई सभ की भए रहल छल। देिखते-देिखते अ£ण कड़ोर पित भए गेल छल। सभ सामानकR ओ सावधानीसँ रखलक आ चुप-चाप होटलसँ B6थान कए गेल। मास-दू-मासक अ]दरमे ओ एकटा नीक होटलक मािलक भए गेल। दस-बीस नोकर-चाकर ओकर आगा-पाछा करैत छलैक। Bितिदन हजारो टाका कमाइ ओ करैत छल। छह मासक भीतरेमे ओ गाममे १० बीघा जमीन कीनलक आ इलाकाक संमप± zयि—तक £पमे BितिPत भए गेल। अ£णक समय देिखते-देिखते साफ बदिल गेलैक मुदा ओकरा खूब नीक जकo एकर रह6य बूझल छलैक। ओ जखन कखनो एका]त होइत िक उिम;लाक छाया ओकर सामनेमे उपि6थत भए जएतैक। अ6त- zय6त,भाव िवåल, उिम;लाक आकष;क मुiामे आåान देिख अ£ण 6तŸध रिह जाइत छल...। ओिह िदन अ£णसँ निह रहल गेलैक आ पूिछ बैसलैक- “उिम;ला, एतेक परेशान िकएक छR? हम तोरा संगे कोना भए सकैत छी? हम जीिवत छी। तॲ शरीर मु—त छR। हमरा तँ शरीर चाही।” उिम;ला ई गŽप बड़ ­यानसँ सुनलकै। ओ बेर-बेर बजैत रहलैक- “हमरा तँ शरीर चाही। हमरा तँ शरीर चाही।” आ ठहाका मािर कए हँसय लगलैक। अ£ण डरा गेल। उिम;ला ओतएसँ गाएब भए गेलैक।

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अ£णक िबआह एकटा संप± पिरवारक सु]दिर क]यासँ भए गेलिन। किनयoक ि¯रागमन बेस धूम-धामसँ िबआहक ९ िदनक भीतरे संप± भेलैक। पूरा भरल-पूरल पिरवारमे आिब ओ किनयo बेस Bश± छल। राितमे अ£ण जखन ओकरासँ भRट करए गेलाह तँ ओकर आबाजमे आœय;जनक पिरवत;न देिख दंग रिह गेलाह। ओ किनयo हँसल आ हँिसते रहल- “निह िच]हलॱ हमरा..! हम छी उिम;ला। अहoक पुरान संगीनी। अहo तँ हमरा िबसिर गेलहुँ मुदा हम अहoकR निह िबसिर सकलहुँ। हमरा शरीर निह अिछ आ अहoकR तँ शरीर चाही। मुदा अहoई गŽप निह बुझलहुँ जे शरीर सीिमत अिछ। मोनक कोनो सीमान निह अिछ। छोड़ू ई Hुi शरीरकR। आउ। अएबे क£। मौन भए जाउ।” गाममे सॱसे ह™ला भए गेलैक। अ£णक शरीर चेतना शू]य पड़ल छल। नव किनयo ओकरा देिख-देिख कािन रहल छलीह। कतेको डागडर, वै\, ओझा, गुनी आँगनमे पथिरया देने छलाह। मुदा अ£ण निह उठल। ओ मौन भए गेल छल। शरीरक सीमानसँ ऊपर उिठ गेल छल। उिम;ला अ£णक मोन एकाकार भए गेल।

रबी]i नारायण िमjक नम6त6यै आगo... १६ . Bगितशील मंचक काय;कत† सभ ओना छल देशभ—त, समाजक िहतकारी िवचार रखैत छल, सॱसे पसरल अ]याय, शोषण, भेद-िवभेदकR समाŽत कए समता मूलक zयव6था 6थािपत करए चाहैत छल, मुदा ओकरा सभकR साधन सीिमत छलैक। सामा]य आदमी धिर पहुँचबाक अवसर कम छलैक कारण िफरंगीओकरा सभक पाछा हाथ धो कए पड़ल छल। झूठ-फूस मोकदमामे नाम धए देब, तरह-तरहसँ Bतािरत करब आम बात छल। जनाधार पाटÊक लोक सेहो Bगितशील मंचक िवरोधी छल। तकर मूल कारण आपसी Bित¯ंिदता तँ छलहे, सै°ाि]तक मतभेद सेहो छल। मुदा ओकरो सभकR कतहुँ-ने-कतहुँ एिह बातक एहसास रहैक जे Bगितशील मंचक युवक, युवती सभ राÈÝभ—त अिछ, भनेओकर र6ता फराक होइक। ओनातँ बने-बने भटकैत, समाजमे आतंक, लूट-पाट करैत जीबैत छल डकैतक िगरोह। मुदा ओहो सभ कतहु-ने-कतहु सताओल गेल छल। अ]यायक मा]य एवम् कानूनी Bितकार निह कए सकल छल, तR हिथयार उठा लेने छल। कतेको हया, लूटपाटक घटना सभमे सािमल छल। जािहर छैक जे कानून ओकरा सभक

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पाछा पड़ल छलैक। कखन के पकड़ाएत, के जीत के मरत तकर कोनो ठेकान निह छल। एक िहसाबे जान हाथमे रािखएकए ओ सभ रहैत छल। मोछा ठाकुरक मृयुक बाद गरम िसंह ओिह डकैतिगरोहक सरगना भेल। नामे गरम िसंह रहैक। सोचल जा सकैत अिछ जे ओ केहनरहल होएत। इलाकामे डकैतीक घटना बढ़ए लागल। संगे Bगितशील मंचक गितिविध सेहो गाम-गाम पसरए लागल। िफरंगीसभक सूचना तंJकR ई बात निह बुझाइक जे आिखर एकरा सभकR आिथ;क मदित कतएसँ आिब रहल अिछ। Bगितशील मंच िफरंगी ओ जनाधार पाटÊक नेता दुनूक हेतु संकट भए गेल छल। तकर मूल कारण छलैक जे ओ सभ भाषणमे कम आओर विरत कारबाइमे बेसी िवfा स रखैत छल। Bगितशील मंचक मिहला काय;कत† सभ िफरंगीसभक नाकमे दम कए देने छिल कारण ओ सभ आसानीसँ घरे-घर घुिसआ जाइत आओर ज£री संवाद कतएसँ कतए पहुँिच जाइत। ओकरा आगू िफरंगीसभक सूचना तंJ पछिड़ गेल छल। मा6टर साहेब ओ पुÈपा जखन कखनो गŽप करिथ तँ लोक गुम पिड़ जाए। कोनो Bकारसँ मानिसक असंतुलनक संकेत निह बुझाइक। देखनाहर, सुननाहर सभ गुम पिड़ जाइत छल। बताहोक कतेको Bकार होइत छैक तािह बातपर लोककR िवचार करबाक उŒम अवसर छलैक- ई दुनू गोटा। एक िदन मा6टर साहेब पुÈपाकR संकेत कए भाषण करए लगलाह। हुनका कहबाक तापय; जे पुÈपाकR अपन हक छोड़क निह चाही। आब जखन ओकरा अपन एक माJ संतान आपस भेिट गेलैक अिछ आओर ओ सश—त अिछ, तँ अपन सपिŒकR िदयाद-बादसँ मु—त करा लेबाक चाही। मुदा पुÈपा िकछु बजबे निह करैक। ओकरा अ]तम;नमे डर पैसल रहैक से हटबे निह करैक। मा6टर साहेब ओकरा बेिर-बेिर सुनबिथ : अिधकार खो कर बैठ रहना, यह महा दुÈकम; है। ]यायाथ; अपने ब]धु को भी, दuड देना धम; है। पर]तु पुÈपा अपन बेटाकR िकछु निह कहैत। ओकरा डर हेाइक जे कहॴ ओकरा एकमाJ संतान फेर ने िबला जाइक। यएह सभ सोचैत सोचैत ओ फेर अपन पुरान समयमे लौिट जाइत। िकछु, िकछु बड़बड़ाइत आओर गुम भए जाइत। डकैत सभक सरगना गरम िसंह हमरे गामक छल। ई बात तँ तखन खूजल जखन िक एक िदन Bगितशील मंचक जंगलमे बैसार भए रहल छल। गरम िसंह अपन दल-बलक संगे ओिह ठामसँ गुजिर रहल छल। Bगितशीलमंचक बैसार देिख ओ सभ कात भए ओकर सभक बातसभ सुनलक। ओकरा रामकुमार िच]हएमे आिब गेलैक। ब”चामे दुनू गोटे गामक 6कूलमे पढ़ैत छल। हमहूँ ओही 6कूलमे पढ़ैत रही। मा6टर साहेबकR ओ सभ धर दए िचि]ह गेल। गरम िसंहक भRट रामकुमारसँ भेलैक तँ दुनू गोटेक आन]दक वण;न निह छल। दुनू दलक लोक सभ छगु]तामे पिड़ गेल।

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१७ . राम कुमार आओर गरम िसंहक आपसी दो6ती बिढ़ते गेलैक। एिहसँ Bगितशील मंचक आओर लोक सभ गरम िसंह एवम् ओकर संगी सभक सपक;मे आएल। एक िहसाबे गरम िसंहक गुट Bगितशील मंचक सद6य बिन गेल छल मुदा खुिल कए एिह बातकR Bकट करबासँ सभ परहेज करए, कारण जँ बात खुिजतैक तँ Bगितशीलमंचक जनतामे सÓावना घटतैक। ओ सभ अराजकतावादी तँ कहिबते अिछ, डकैतक सहयोगी हेबाक कारण सामािजक ओ कानूनी £पसँ Bतािड़तो कएल जाएत। मुदा िभतिरआ सपक; दुनू गुटमे बिढ़ते गेल। मा6टर साहेब एवम् पुÈपा सन-सन कतेको लोकक शरण6थली छल Bगितशील मंच। एिह कारणसँ ओकरा सभकR समाजमे सहयोग बिढ़ रहल छल। जनमानसमे ओकर सभक मानवताबादी छिब बिन रहल छल जे जनाधार पाटÊक लोक सभकR बेचैनीक कारण छलैक। मुदा ओकरा सभकR Bगितशीलमंचक तोड़ निह भेिट रहल छल। रामकुमारक सम6या माJ ओकर माएटा निह छलैक। मा6टर साहेबक देखभाल सेहो ओकरे करए पड़ैक। आओर कतेको असहाय, असमथ; लोक सभ ओकरा सभक सं6थासँ जुिड़ गेल रहैक। ओिहमे िकछु गोटे तँ ओकरा सभक संगे रहैक, िकछु गोटे यJ-तJ पसरल रहैक आओर मौका-कुमौका अबैत जाइत रहैक। य\िप समाजमे सती Bथा ªिक गेल रहैक, तथािप गाहे-बगाहे एहन Bसंग सुनएमे अबैत। लोक तखनहुँ ओकरा मिहमामिuडत करबासँ पाछा निह रहैत। मुदा एहन घटना सभ आब अपबाद भए गेल रहैक। लेिकन सम6याक ई अ]त निह छल अिपतु अिधक©श मामलामे ई नव-नव सम6या सभक Bारभ छल। समाजमे िवधबा सभ जीबैत लहाश छिल। कोनो अिधकार निह। जँ बेटा भेल तखन तँ पािरवािरक सपिŒमे ओकरा िह6सा भेिट सकैत छलैक, अ]यथा ओहो नदारद। िवधबा माए िकंवा ओकर बेटीकR पािरवािरक सपिŒमे माJ जीवन िनव†ह यो¤य खोिरसक अिधकारी बूझल जाइक। एक िहसाबे तँ अ]यायक पराकाPा रहैक। बेटा, बेटीमे ज]मजात भेदभावकR धािम;क, सामािजक एवम् कानूनी मा]यता रहैक। तR बेटीकR जनिमते कतेको ओिहठाम उदासी भए जाइत छल। Bगितशील मंच समाजमे मिहलाक पराभवसँ िचि]तत छल। ओिह काजकR आगा बढ़ाबए हेतु समाजमे जनचेतना आनबाक हेतु ओ सभ BयÒशीलो छल मुदा पिरणाम अपेHाकृत िनराशाजनक छलैक कारण समाजक अिधक©श लोक धिर ओकरा सभक पहुँचे निह रहैक। लोक सभ सीिमत 6वाथ; एवम् सहज Bवृितक कारण कोनो तरहक नव Bयोग करएसँ बचैत छल। जे िकओ सुरखुरेबो करिथ ितनका ततेक झंझट होमए लगलिन जे आगा —यो एहन Bयास करएसँ बचैत छल। मा6टर साहेबक उदाहरण सामने छल। एकटा एकदम िनद´ष आदमीक सयानाश भए गेल छल। ओकर पिरवार तहस-नहस भए गेल छल आओर कम;HेJ, जे गामक पाठशाला छल, तकरा न§ कए देल गेल छल। एिहसँ ककरो की लाभ भेल? मुदा से सभ सोचबाक ने ककरो फुरसित रहैक आओर ने Bयोजन बुझाइक। एकाध गोटा जे सप± छल से अपन सपिŒक रHामे लागल रहैत छल आओर शेष अपन जीवन बचबएमे िनरंतर

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एिह Bयासमे जे कहुना एकहु सoझ भोजन होइक आओर जान बॉंिच जाइक। एिह सभ िवषयपर Bगितशीलमंचक रामकुमार ओ डकैत सभक सरगना गरम िसंहकR बीचमे कतेको बेर गरमागरम बहस होइत रहैत छलैक। िनद´ष आदमीक लूटपाट, हया कए ओकर धन-सपिŒ हरण कए लेब कोनो तरहR वािजब बात निह लगैत छल। एही िब]दुपर दुनू गोटेमे कै बेर मता]तर टकरावक £प धए लैत छल। बात बढ़ैत देिख दुनू िदसक लोक सभ थोड़ थाह लगा दैक आओर सभ अपन-अपन काजमे चल जाइक। मा6टर साहेबक घरमे डकैती एवम् ओकर पÒीक डकैत सभ ¯ारा हयाक गŽप राजकुमारकR निह िबसराइक। रिह-रिह कए ओकर मोनक कचोट गŽप-सŽप लिHत होइत छल। मुदा ओकरा ई निह बूझल छल जे एिह कुकृयक नायक गरमिसंह आओर ओकर गुटक लोक छल। एिह घटनासँ गरमिसंह सेहो दुखी छल। असलमे ओ सभ मा6टर साहेबक ओिहठाम धोखासँ पहुँिच गेल रहए। ओकर सभक लšय ओही गामक जिम]दार हिरहर राय छलै। ओ मा6टर साहेबक पड़ोसी छल। डकैत सभ हिरहर रायक घर िदस बिढ़ए रहल छल िक मा6टरक घरसँ ओकर जवान होइत बेटा टाच;क लाइट बारलक। ह™ला सुिन ओ घरसँ बहराए लागल। डकैतक सरगना गरम िसंह ओकरा चेतओलकै जे भािग जो। मुदा ओ ह™ला करए लागल। ताबतेमे मा6टरक पÒी घरसँ बाहर भेलिखन। बेटाकR ओझराइत देिख ओहो िचकरए-भोकरए लगलीह। डकैत सभ एिह बातसँ िफरसान भए गोली चला देलक। मा6टरक पÒी ठामिह रिह गेलीह। Bात भेने डकैतक सरगनाकR जखन सभ बातक अिखआस भेलैक तँ बहुत दुखी भेल मुदा आब की? मा6टरक सव;6व न§ भए गेल रहैक। Bगितशील मंचक लोक सभ आपसी चच†मे एिह घटनाक उ™लेख किरते छल। संगिह डकैतक िगरोहसँ फराके रहबाक चच† सेहो करैत छल। मुदा कहबी छैक जे मजबूरी जे ने करा िदऐ। ओकर सभ आिथ;क तंगी बढ़ल जाइत रहैक। सामाजमे जनाधार पाटÊ लोकक वच;6व बढ़ल जाइक। सरकारो ओकरे संग दए दैत कारण Bगितशील मंचक उÌ ªिखसँ ओ सभ बेहतर िवक™प बुझाइत छलैक। अंततोगवा डकैत सभक Bगितशील मंचमे िबलए भए गेल। एिह हेतु रामकुमार ओ गरम िसंहक आपसी सपक; बहुत कारगर सािबत भेल। ई तय भेल जे डकैत िगरोहक सद6य आब ओतबे डकैती करताह जािहसँ Bगितशीलमंचक आिथ;क आव³यकताक पूित; भए सकए। ओहो िफरंगी ¯ारा संचािलत सरकारी ब“क, रेलबेक वा साव;जिनक सपिŒ सभकR मूलत: ठेकाना लगाओल जाएत। शेष समयमे समाजमे Bगितशील मंचक गितिविधपर ­यान देल जाएत। Bगितशील मंचक संशोिधत नाम Bगितशील िवचारमंच भए गेल। एकर मूल उÀे³य सामािजक पिरवत;नक संग देशकR अंÌेजक चंगुलसँ मु—त कराएब छल। एिहमे सभसँ बाधक जनाधार पाटÊक टोपीधारी नेता सभ छलिथ जे ओकरा परा6त करए हेतु अंÌेजो सभसँ गुप-चुप बैसारकरएसँ परहेज निह रखैत छलाह। मुखमे राम बगलमे छुड़ी। मुदा Bगितशील िवचार मंच एकर िकछु परवाह केनिहिबना अपन काजमे लागल रहैत छल। q

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१८ . ि¯रागमनक बाद दॲगामे बेस चीज-ब6तु हमरा नैहरसँ आएल छल। हम एकबेर फेरसँ अपन सासु- ससुरक चास-बासपर िबराजमान भए गेल रही। लोक सभक आबाजाही तँ लगले रहैक। हमर नैहरसँ खबासनी मासमे दूबेर अव6से आिब जाइत छल जािहसँ हमरा ओिहठामक समाचार सभ भेिट जाइत छल। नैहरक चच† होइक आओर नोर निह खसए से भइए निह सकैत अिछ। माए कोना अिछ? क˜ा कोना छिथ? कोनो अिछ हमर संगी-साथी। 6कूिलआ िव\ाथÊ सभक तँ िवशेष िजµासा रिहते छल कारण किनके िदनका ने±ाक सुखद 6मृितमे ओकर पैघ 6थान छल। ओतए िनय िकछु काल हम 6वतंJतापूव;क अपन संगी सभक संगे गŽप करी, खेल धूप करी। आब सुनै छी जे 6कूल टुिट गेल। मा6टर साहेब बताह भए गाम छोिड़ देलिन। क˜ा िनयBित भ©ग खाए ओिहना अलम6त रहैत छिथ। हमर दॲगाक थोड़बे िदनक बादहमर सासुर डीहगामामे अिगल¤गी भेलैक। बहुत रास घर सभ जिर कए खाक भए गेल। बोराक बोरा अ± पािन 6वाहा भए गेल। बखारी सभसँ तँ किह निह कतेक िदन धिर धुँआ उठैत रहल। सॱसे गामक लोक यJ-तJ शरण लेने छल। ओिह समयमे सरकारी सहायता नाममाJक होइत छलैक। िवदेशी सभक हुकुमत छलैक जे 6थानीय चापलूस सभक मदितसँ देशकR सालॲसँ गुलाम बनौने छल। अिगल¤गीक बाद जनाधार पाटÊ ओ Bगितशील िवचारमंचक काय;कŒ† सभक गाममे कैप खसल छल। ओ सभ यथासा­य लोक सभक क§कR कम करबाक Bयास भेल। एही ·ममे पिहल बेर हमरा रामकुमार ओ गरमिसंहसँ भRट भेल। ओ सभ डीहगामा अिबतिह हमर खोज केलक आओर भRट होइतिह बड़ Bश± भेल। ओकरा सभक 6वागतमे कोनो कसिर निह रहल। हमर सासु ससुर ओहनो हालतमे ओकरा सभक पय†Žत ­यान रखलिथ। एिह बातसँ ओहो सभ बहुत Bश± रहिथ जे हमर नैहरक लोक सभ हाल-चाल लेबए आएल अिछ। गŽप सभक दौरान आओर-आओर संगी सभक चच† 6वाभािवक छल। ओतेक रास िव\ाथÊमेसँ बूधन काकाक पुJ रमणकचच† जोर-सेारसँ भेल कारण ओ बहुत पढ़ाइ केलक। ततबे निह, ओ िवदेशमे परीHा सभ पास कए कल—टर भए गेल छल। आओर कोनो िव\ाथÊक एहन भिवÈय निह बनलैक। गामक 6कूल ब]द भए गेलाक बाद बेसी िव\ाथÊ तँ पढ़ाइ छोिड़ खेती-बारीमे लािग गेल छल। मुदा रमण पढ़ए हेतु गाम छोिड़ दिड़भंगा चल गेल। पढ़ाइमे औवल आबए लागल। तR घरक लोक सभ ओकरा पटना पठाए देलिखन। ओहीठामसँ आगाक र6ता खूजल। Bितयोिगता परीHा देबए ल]दन चल गेल। तकर बाद कल—टर बिन गेल। ओिह समयमे कल—टर बनब अपना देशक लोकक हेतु भारी बात छलैक। अंÌेजी पढ़ाइ करब सभक बसक बात निह छल। फेर कल—टर बनए हेतु तँ िवदेशमे अंÌेज सभ ¯ारा संचािलत Bशासकीय सेवा परीHा पासकरब बहुत दुªह काज छल। अंÌेजक अधीन काज करए हेतु कतेको गोटे तैयारो निह होिथ। एहने

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समय साल रहैक जे राÈÝभ—त सभ Bशासकीय सेवा पास केलाक बादो ओकरा याग कए राÈÝीय आ]दोलनसँ जुिड़ गेलाह। ई मामूली याग निह छल। रमणक एिह सफलतासँ सॱसे िजला-जबार गौरवाि]वत भेल। देश भिरमे इनल-िगनल लोक सभमे ओकर नाम अबैत छल। एिह बातसँ कोनो बापकR फ· भए सकैत छलैक। बूधन ककाक तँ पैर जमीनपर ªकबे निह करिन। ओ हमर िपितऔत कका छलाह। हमर बाबा हुनकर िपताक सहोदर भाए रहिथन। मुदा खानदानमे िशHा ओ पदमे ओ औअल आिब गेल रहिथ। सभ ठाम हुनके चच; होइत रहैत छल। रामकुमार ओ गरमिसंह अपन संगी सभक संगे राित भिर डीहगामामे काज करैत आओर भोर होइते िनपŒा भए जाइत। लोक सभ ओकर सभहक अनुÌिहत भए गेल छल। जकरे देखू, सभक मुहR ओकरा सभक Bशंसा सुनएमे अबैत। मुदा —यो ओकर सभक नाम निह जानैत। बुझैत-बुझैत लोक एतबे बुझलक जे ओ सभ Bगितशील िवचार मंचक काय;कत† अिछ। आओर िकछु निह। िनय नव ढवमे ओ सभ Bकट होइत। गाममे ओकर सभक यश पसिर गेल। हम तँ एतबे बातसँ खुश रही जे हमर नैहरक लोक बेरपर काज आएल। हमरे घरक निह अिपतु कोनो-ने-कोनो £पे पुरा गामक मदित केलक। आओर कोनो अपेHा निह रखलक। Bाय: हमरा छोिड़ —यो ओकर सभक नाम-गाम धिर निह बुिझ सकल। हमर िधया-पुताक संगी सभ एहन नीक काज केलक तािह बातसँ हम आन]दमे रही। रमणक समाचार सुिन सेहो बहुत खुशी भेल। मुदा एिह बातसँअखनो दुख होअए जे हम निह पिढ़ सकलहुँ। q

१९ . Bगितशील िवचार मंचक बैसारमे सभक मत रहैक जे मा6टर साहेब, पुÈपा ओ एहने आन-आन लोक सभकR मािनसक 6वा6थ लाभक हेतु BयÒ कयल जाय। तािह हेतु हुनका सभकR मानिसक िचिकसालय, कoके (रॉंची) लए जयबाक काय;·म छल। सभक ई सोच छलैक जे एहन Bतािड़त, दुखी आमा सभकR सहायता करब मानवीय कत;zय िथक। देशक 6वतंJतासँ बेसी ज£री िथक जे ओिहमे रहिनहार लोक मनु—खक जीवन जीबए। एही मुÀापर ई सभ जनाधार पाटÊक पछािड़ रहल छल। कारण ओ सभ तँ खाली उपरे-झापरे काज करए। बैसार, भाषणबाजीसँ लोककR जोशा तँ दैक मुदा जािह घरमे चुि¾ निह फुकाइत छल से िक जानैत 6वतंJताक 6वाद। आिथ;क परतंJता मनु—खक सव;6व हरण कए लैत अिछ चाहे ओ जकरा ¯ारा आओर जािह 6तरपर हो। अंÌेज चल जेतैक तँ —यो दोसर ठाढ़ भए जेतैक। शोषणमु—त, समतामूलक, सम]वयवादी समाजक 6थापना होएत तखनिह 6वतंJताक लाभ समाजक दिलत, शोिषत वग; धिर पहुँच सकत अ]यथा ओकर सपूण; लाभ बलगर वग; सोिख लेत। से कहब छलैक ओकरा सभक।

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Bगितशील िवचार मंचक जन क™याणकारी काय;·मक तहत मा6टर साहेब, पुÈपाकR कoकेक मनोिचिकसालयमे भतÊ कराओल गेल। िकछु आओर एहने लोक सभकR ओतए आनल गेल। जािन बुिझ कए ओकर सभक नाम लोककR निह बताओल गेल कारण ओकरा सभक पाछा िफरंगीसभहाथ धो कए पड़ल छल आओर ताहीसँ ओ सभ ततेक उपीिड़त होइत गेल जे अपन-अपन माथपर सँ िनयंJण खतम कए लेलक। आओर भए गेल आजाद…। कतेक दुखद पिरि6थित रहैक तकर वण;न सुिन —यो उ¯ेिलत भए सकैत छल। उ¯ेिलत मा6टरो भेलाह, पुÈपा सेहो भेली आओर कतेको एहने उ¯ेिलत होइत-होइत कoके पहुँच जाइत गेल। रामकुमार 6वयं हुनका सभकR दूटा आओर संगी सभक संगे कoके मानिसक रेागी अ6पताल कoकेमे भतÊ करओलक। ओिहठामसँ लौटएमे कै िदन लािग गेलैक। रामकुमार आपस अपन अãडापर आिब रहल छल िक डकैतक िगरोह सभपर िफरंगीसभक बढ़ैत चोटक समाचार भेटलैक। जिहआसँ रमण ओिह िजलाक कल—टर भेलैक एहन लोक सभक पराभव भए गेल छल। य\िप ओ रमणकR नीकसँ जनैत छल मुदा ओकरा भRट करबासँ कोनो लाभ निह लगैत छल कारण ओ आिखर छल तँ िफरंगीसभकनौकर। ओकरे आदेशपर चलैत छल। ओना िकछु मामलामे रमण समाजमे यश BाŽत केने छल। चोरी-चकारी लूट-पाट सभ ओकरा अएलाक बाद बहुत कम भए गेल छल। मुदा तकर लाभ तँ समाजक स½ा]त वग; धिर सीिमत रिह गेलैक। जकरा िकछु छलैहे निह, तकर की लुटेतैक? तR ओकर Bयास एकभगाहे रिह गेल छल। अंÌेजक अफसर रहैत ओ आओर कइए की सकैत छल? जिहआसँ रमण ओिह िजलामे आएल गरम िसंह ओ ओकर गुटक लोक हालत पातर भए गेल छल। q

२० . खबािसनीक आबाजाही लागले रहैक। तािह मा­यमसँ नैहरक आओर आस-पासक घटना ·मसभ हमरा पता लगैत रहैत छल। मा6टर साहेब आओर पुÈपाकR कoकेमे भतÊ केलाक समाचार सेहो खबािसनीक मा­यमसँ भेटल। आओर गŽप सभ होइते रहैक िक लागल जेना धरती जोर-जोरसँ हीिल रहल अिछ। सभ भूकप- भूकप बजैत घर छोिड़ पड़ाएल। मुदा भागैत कतए? भयानक गुड़गुड़ीक आबाजक संग लगैक जेना पृÏवी फािट जाएत। जमीनपर ठाढ़ रहब पराभव छल।—यो खु«ा पकड़ने ठाढ़ छल तँ —यो िकछु। माल-जाल सभ िचकिड़ भोकिर रहल छल। कुकुर सभ पिहनिहसँ भुकए लागल छल।

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कतेको घर ढनमनाए खिस पड़ल। कतेकोमे दरािर पिड़ गेलैक। अ±-पािन चीज-व6तु सभ बब†द भए गेलैक। कतेको गोटे घायल भए गेल। कतेकोक हार-पoजर टुिट गेलैक। के ककरा सहारत? कतहु पैर रखबाक जगह निह रहैक। ओिह िदन पिहल बेर डीहगामामे घरसँ दरबाजा िदिस हम आएल रही। किनआ, पुतरा सभ भागली। घरक घर 6वाहा भए गेल। थोड़बे कालमे पृÏवीक ई गित भए गेल छल। जकरा सहारएमे सालो लािग गेल। गामक गाम उजिर गेल। हम ताबे सासुरमे पुरान भए गेल रही। तीनटा िधया-पुता सभकR सहारक छल। वयोवृ° सासु, ससुरक देखभालक हुनको देखबाक छल। मुदा घर उसिर गेल छल। सरकारी सहायता मुँहगर लोक धिर सीिमत छल। Bगितशील िवचार मंच ओ जनाधार पाटÊक लोक सभ गामे गाम घुिम- घुिम लोकक मदितक Bयास करैत छल मुदा कारगर मदित तँ गरम िसंह आओर ओकर गुटक आओर आओर लोक सभ केलक जकर नामो —यो निह जनैत छल। कहबी छैक जे किलयुगमे नीक क£ तैओ अधलाह होइत अिछ। सएह पिर भेलैक गरम िसंह आओर ओकर गुटक लोक सभकR। लोक सभक उपकार तँ ओ सभ िदन केलक मुदा गाहे-बगाहे ओकर भेद खुिज गेलैक। समाचार िजलाक कल—टरक कान धिर गेलैक। खुिफआ तंJ तँ कतेको सालसँ एकर सभहक गितिबिधक टोह लैत रहैत छल। अपना भिर पकड़बाक BयÒ सेहो करैत रहैत छल। मुदा गरम िसंहक जनतामे बहुत समथ;न रहैक। गरीब गुरबा सभक हेतु तँ ओ भगवाने छल। तR जखन कखनो आपिŒकाल होइक, एकरा सभकR 6थानीय लोक सभ घरे-घर नुका लैत छल। बादमे ओ सभ अपन काजमे पिरबत;न आनए चाहलक, ओही उÀे³यसँ ओ सभ Bगितशील िवचार मंचसँ आबाजाही केलक। मुदा रमणकR अएलाक बादसँ दृÈये बदिल गेलैक। रामकुमारकR रमणकR सपक; रहैक। आिखर ओकर ने±ेक दो6त छलैक। मुदा गरम िसंहक सही पहचान देबएमे ओहो डरैत छल। ओकरा डर रहैक जे रमण बड़ स²त आदमी अिछ। अंÌेजक अधीन काज करैत अिछ। तR ओकरा जँ गरमिसंहक पता चिल गेलैक तँ ओ ओकरा छोड़त निह। एक िदन तँ गरम िसंह पकड़ाइत- पकड़ाइत बॉंचल। ओ आब अपन जीवनक िदसा बदलए चाहैत छल मुदा हालत ओकरा संग निह दए रहल छलैक। कहबी छैक जे मनु—खक पिछला कम; ओकरा पछोड़ करैत छैक। सएह ओकरोपर लागू छल। एकराित ओकर सभक बासापर एकाएक पुिलस छापा मारलक। दुनू कातसँ फायिरंगक आवाज आबैत रहल। एक बेर तँ ह™ला भए गेलैक जे गरम िसंह मारल गेल। पुिलस ज¥ मनाबए लागल मुदा सय बात ई छल जे ओ जान बचाए भागएमे सफल रहल। q

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२१ . पिहने अिगल¤गी, फेर भूकप दुनू िमिल कए गामक लोक सभक रीढ़ तोिड़ देलक। लोकक घर न§ भए गेल। घरमे राखल चीज, व6तु सभ 6वाहा भए गेल। बखारी सभ ढनमनाए खिस पड़ल। लोकक संग रिह गेल माJ अपन पिरवार। मुदा ओकर भरण-पोषण एकटा जबरद6त सम6या छल। एहन िवषम पिरि6थितमे हमर माए टैर गाड़ी भिर-भिर सामान सभ पठओलक। एिहसँ पिरवारकR कतेक उपकार भेल तकर वण;न निह। ओही समयमे हमर नैहरसँ खबासनी सेहो आएल छिल। ओकरा अएलासँ एकटा अपूव; आन]द हमरा होइत छल। बुझाइत छल जेना हम एक बेर फेर अपन नैहर पहुँिच गेलहुँ। माएक समाचारसँ Bारभ भए गŽपक अनबरैत jृँखला पता निह कतए कतए पहुँिच जाइत। ओिहमे मा6टर साहेब, पुÈपा, रमण, रामकुमार आओर गरम िसंहक तँ कतेको बेर चच; होइत। ई गŽप-सŽप होइते छल िक खबािसनी गुम भए गेल। लाख कोिशश किरऐक, ओकरा िघघरी लगलैकसे लगले रिह गेल। बहुत मोसिकलसँ ओकरा अबाज लौटलैक। कतेको बेर पुछलाक बाद ओ बािज सकल जे गरम िसंह गुटक अिधक©श डकैत मारल गेल जे बॉंचल से पकिड़ लेल गेल। मुदा गरम िसंह 6वयं चपत अिछ। “जीिवतो अिछ िक निह?” तकर ओ िकछु जवाब निह दए सकल छिल। “ई सभ कोना भेलै?” –हम पुछिलऐक। “नवका कल—टर हाथ धो कए एकरा सभक पाछा पिड़ गेलैक।” –खबािसनी कहलक। ओओर कतेक तरहक गŽप भेल रहैक। मुदा गरम िसंहक पराभवक समाचार सुिन ब”चाक बात सभ मोन पड़ए लागल। ओकर घरक हालत बहुत खराब रहैक। ओ तथािप 6कूल अबैत छल। खेल-धूपमे औवल छल। मुदा पढ़ाइमे मोन निह लगैक। मा6टर साहेब लाख बुझिबतिथ ओकरापर कोनो असर निह होइक। बहुत िदन धिर गरम िसंहकR रह6यमय ढंगसँ गायब भए जेबाक चच; इलाका भिरमे होइत रहल। जकरा जे फुराइक से किहतिथ। िकछु गोटेक िहसाबेओहो पुिलस संगे मुठभेड़मे हताहत भए गेल। मुदा िफरंगीसभ आf6त रहैक जे ओ जीिबते अिछ। तािह बातकR 6थानीय समाचार पJ Bमुखतासँ छपने छल। मुदा ओ गेल कतए? हमर नैहरक लोक सभ ·मश: फेरसँ अपन-अपन खेती-बाड़ीमे जुिट गेल रहिथ। सप± गाम छल। य\िप अिगल¤गी आओर तकर बाद भेल भूकपसँ बहुत Hित भेल रहैक, तथािप लोक सभ अपन मेहनितक बदौलत फेरसँ ठाढ़ भए गेल।

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िधया-पुता सभ छेटगर भए गेल छल। ओकर सभक उपनायनक काय;·म बनल। सभ कुटुबकR आमंिJत कएल गेल। हमर माए नाना Bकारक उपहार पठओलक। मास िदन धिर तरह-तरहक िवध-िवधान होइत रहल। उपनयनक िदन नाच गानक सेहो Bब]ध छल। दरबाजापर सािमआना लागल छल। गाम भिरक लोक गीत-नादक आन]द लैत रहलाह। भोज- भात तँ भेबे कएल। सभसँ मनोरंजक दृÈय तखन भेल जखन एकटा पाहुन टेबुल घड़ीकR चोरा कए अपन धोती तरमे रखने छलाह। ओ कनी िदमागसँ िहलल सेहो रहिथ। घड़ीमे एलाम; भरल रहैक। ओ जोर-जोरसँ घनघनाए लागल। चा£कातक लोक एकÕा भए गेल। लोक सभमे ठहाका पिड़ गेल। हराएल घड़ी भेिट गेल। मुदा ओ पाहुनजे भगलाह से घुिर निह अएलाह। उपयनक पाहुन सभ ·मश: अपन-अपन गाम आपस चिल गेलाह। सभक यथासभव िवदाइ कएल गेल। भोजक ततेक सामÌी बॉंचल छल जे गाम भिर बएन परसल गेल। लोक सभ खाइत-खाइत तंग भए गेल। भोरे-भोर बªआ सभ सं­याब]धन करैत छलाह। पिuडतजी िनय भोरे आिब कए ओकर zयव6था करिथ। गीत-नाद तँ कतेको िदन धिर चलैत रहल। राितक समयमे पोखिरक भीड़पर जाए बªआ सिहत कतेको लोक की-की िबध सभ केलाह। सय नारायण भगवानक पूजा भेल। तकर बाद उपनायनक Bकृया सप± भेल। हमर नैहरसँ आएल खबािसनी सेहो आपस जाए चाहैत छल। ओकरा एकाध िदन रोिक लेिलऐक जािहसँ गŽप-सŽप कए सकी। काजसभसँ चैन भए खबािसनीकR बैसाए नैहरक समाचार सुनए लगलहुँ। ओही ·ममे गामक कैटा नव- नव समाचार भेटल। कैटा िवधबा सभ गाम-घर छोिड़ वृ]दावन चिल गेलीह। पिरवारमे समावेश निह भेलिन। ओिह समयमे िवधबाक दुग;ित कोनो नव बात निह छल। ककरो पित मिर गेल तािहमे ओकर की दोष? मुदा से बात समाज ओ कानूनकR बुझाइक तखन ने?एक तँ ओकर पित चल जाइक, तािह संगे सव;6व 6वाहा! पिहने तँ देहोमे आिग फूिक दैक आओर ह™ला कए दैक जे सती भए गेलैक। तकर बाद ओकरा देवीक दज† BाŽत होइक। ओकर छाउरपर सती मि]दर बना दैक आओर चैन भए जाए। ·मश: सती Bथापर रोक लागल। िवधबा अपन जान तँ बचओलक मुदा कोन कीमतपर? ई सभ B¥ हमरा मोनकR उ¯ेिलत कए दैत छल। ई सभ सोचैत-सोचैत ­यान माएपर चिल गेल। कनैत देिख खबािसन सेहो कानए लागिल। थोड़बेकालमेसभ सामा]य भए गेल। ओ आपस हमर नैहर िदस िवदा भेिल आओर हम अपन काजमे zय6त भए गेलहुँ। q

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२२ . गरम िसंह दलक एतेक ज™दी पराभव भए जेतैक से सरकारो निह सोचने छल। मुदा गरम िसंह 6वयं निह पकड़ाएल रहैक।तािह लए कए सरकारी zयव6थाक िच]ता तँ रहबे करैक। ओ सभ रने-बने गरम िसंहकR तकैत रहल आओर ·मश: ढील पिड़ गेल। डकैतक गुट कमजोर भए गेल छलैक। सरकारी अिधकारी सभकR िनिœ]त हेबाक सेहो कारण छल। असलमे बचल डकैत सभ Bगितशील िवचार मंच धए लेने छल आओर ओकर आिथ;क पHकR मजगूत करएमे Bयु—त होइत छल। तािहसँ Bगितशील मंचकR जनाधार पाटÊकR ट˜र देबामेआसानी भए गेलैक। गाम- गाममे Bगितशील िवचार मंचक समथ;क लोक भए गेल छल। सि·य सद6यक सं²या सेहो बिढ़ते जा रहल छल। गरम िसंह पुिलसक िगर×तसँ भािग सोझे वृ]दावन पहुँिच गेल। ओिहठाम एकटा मि]दरक 6थापना कए ओकर मठाधीश भए गेल। ओकरा संगे चािरटा डकैत सभ सेहो भागएमे सफल भेल छल। ओहो सभ अपन- अपन चोला बदललक आओर स]यासी भए गेल। गेªआव6J पिहरने कृÈणक भ—त 6व©ग धेने िदन राित ओ सभ अपन नव कलेवरमे िनिœ]त भए वृ]दावनवासी भए गेल। —यो ओकरासभक पिछलका जीवनक िजµासा निह केलक। गरम िसंह अपना संगे पय†Žत धन अनने छल जािहसँ वृ]दावनमे शीè 6थािपत भए गेल। 6थानमे भzय मि]दर, अितिथ गृह सिहत सभ Bकारक सुिवधा भिर गेल। ·मश: ओकर चेला सभक सं²या बिढ़ते गेल। ओिहमे तँ कतेको यJ-तJसँ आएल िवधबा सभ छलीह िजनका सभकR कहुना कए रहबाक एकटा ठौर तँ चाही, से ओतए भेिट गेलिन। एिह Bकार गरम िसंह भजनान]ददासक नामसँ Bिस° भए गेलाह। भजनान]ददास जखन Bवचन दैत छलाह तँ चा£कात ओकर चेला सभ मuडपमे पसिर जाइत छल। िकछु गोटे काते-कात ठाढ़ भए जाइत छल। Bवचन,भजनक बीच-बीचमे ओ सभ ततेक मगन भए कीत;न करैत, नृयक नाना Bकारक भंिगमा करैत, जे लगैत जेना भजनान]ददास साHात कृÈण होिथ। पीअर व6J, पीअर चानन, सॱसे कृÈणे कृÈण। एिह वगएसँ ओ स]त समाजमे अपन 6थानतँ बनाइए लेलक संगिह भूतकालक कुकाuड सभसँ िनवृित सेहो भए गेल। ओकरा शा6Jक कोनो µान तँ छलैक निह, मुदा आग]तुक भ—त सभ अपनेमे ततेक िफरसान रहैत छल जे िबना िकछु सोचने िवचारने भजनान]ददासक पैरपर खसैत छल आओर क™याणक हेतु, नाना Bकारक क§ सभसँ मुि—तक हेतु हुनकर Bाथ;ना करैत रहैत छल। ओिह ·ममे कतेको भ—त तँ अपन धन-सपिŒ धिर दान कए हुनकर प˜ा चेला बिन गेल छल।

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२३ . अिगला बेर खबािसनी ज™दीए चंगेरा लए आिब गेिल। ओकरा माए ततेक ने कहलकै जे ओहो तैयार भए गेिल। उठेलक चंगेरा आओर हमर सासुर िदस िवदा भेिल। ओकरा अखन आबक इ”छा निह रहैक, कारण ओकर बेटी नैहर आएल रहैक आओर कए िदनसँ नाितक पेट झड़ैत रहैक। पoच वष;क नाितक संगे ओ िदन-राित Bश± रहैत छिल। ओकर अ6व6थतासँ खबािसनीकR िद˜त भए गेल छलैक। मुदा हमर माए निह मानलकै आओर नाितकR गामक डा—टरसँ इलाजोमे मदित कए देलकै। खबािसनीकR अिबते हमरा बहुत Bश±ता होइत छल। नैहरक सभ समाचार तँ ओ दैते छल, संगिह एहूठामक गितिविध सभमे ओ बहुत £िच लैत छल। एिह बेर ओकरा ज™दी अएबाक कारण छल जे माए एकटा खराप सपना देखलक। ओ राितएमे जोर-जोरसँ िचकरए-भोकरए लागिल। सॱसे ऑंगन लोक भिर गेल। सभ एतबे पुछैक जे एतेक राितमे हुनका की भए गेलिन? भेल-तेल तँ िकछु निह रहैक मुदा सपनाकR ओ सच बुिझ लेने छिल। सपना की देखलक से ककरो कहबे निह कहैक। खबािसनी हमर नैहरक िख6सा सुनबैत-सुनबैत रमणक चच† करए लागिल। ओ कल—टर भेलाक बाद गाम कमे काल जाइत छल। बेसी काल दिड़भंगेसँ घुिर जाइत छल। तथािप पैघ लोकमे सभक अनायसे £िच भए जाइत छैक। खबािसनीक मुहR रमणक नाम खिसते हमर उसुकता बिढ़ गेल। की बात भेलैक जे एिह बेर ई अिबते रमणक चच; कए रहल अिछ? हमरा उसुक देिख खबिसनी पिरछेलक जे रमणक घरवाली ओकरा छोिड़ देलक। कारण पूछलापर ओ िकछु बिजतेनिह छल। बहुत Bयास केलापर ओकर मुँह खूजल। कहॉं दिन रमण जखन इंगल“डमे पढ़ाइ करैत रहए तँ ओिहठाम एकटा मेम साहेबसँ लकड़ी लािग गेलैक। से ततेक परमान चढ़लैकजे रमण चच;मे जा कए पूजा-पाठ कए लेलक। ओइ अंÌेजिनऑंकR पता निह चलए देलकै जे रमणक िबआह पिहनिहसँ भेल अिछमुदा ओहो अ]हरा गेल रहैक। ऑंिख मुिन देलकै। रमण कल—टरीक परीHा पास कए अपन देश लौटए लागल तँ ओहो पछोड़ धए लेलकै। कतबो Bयास केलक जे ओ ओतिह रिह जाए, से ओ टस सँ मस निह भेलैक। रमणक तँ िसटीपीटी गुम भए गेलैक। अपना ओिहठाम अंÌेजिनआँकR लए कोना जाइत? की ओकर पिहल पÒी ई बद†6त करत? कृघ]ता तँ ओ कइए चुकल छल। ओकरा इंगल“ड जेबाक खच† ससुर अपन खेत बेिच कए केने रहिथ। दू साल धिर मासक मास ओ इंगल“ड टाका पठबैत रहलाह। संगिह अपन बेटी ओ नाित,नाितनक भरण-पोषण करैत रहलाह, एिह उमीदमे जे जमाए बड़का हािकमभए जेिथन तँ बेटीक सुख- सुिवधा, मान-समानक पराकाPा भए जाएत। अपन संतानक सुख के निह चाहैत अिछ? तािह लेल जँ कनेक क§ो होइक तँ लोक सिह जाइत अिछ।

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मुदा रमण तँ सभटा पर पािन फेिर देलाह। िसगरेट, िसगार ओ िवदेशी दा£क संग अंÌेजी भाषी किनआक च6का पिड़ गेिलन। आब तँ वएह सभ हुनकर िजनगी भए गेल अिछ। भोरेसँ तरह-तरहक नशाक सेवन करैत अंÌेजनी संगे रंग-रभस करैत रहैत छिथ। किह निह कल—टरीक काज कोना करैत छिथ? मुदा काजमे ओ प˜ा रहिथ। अंÌेजक 6वामी भ—त रहिथ। तािहसँ अंÌेज पÒीओ लए अनने रहिथ। एिह बातसँ तँ अंÌेज सभ बेहद Bश± भेल रहए। गाहे-बगाहे हुनक अंÌेज पÒी (एंगल) सँ सपक´ ओ सभ करैत रहैत छल। अंÌेजकR आओर चािहऐ की? ओ सभ िपÕू, अ]धभ—त अिधकारी तकैत छल जे सुख, सुिवधा ओ सोनाक टुकड़ीक लालचमे अपनिह देश ओ धम;सँ दगाबाजीकए सकैत छल आओर किरतो छल, रमण ओकर सबहक फम†मे एकदम िफट कए गेल छल। उपरसँ अंÌेिजनीक आिन कए सोनामे सुग]ध कए लेने छल। ई बात निह छैक जे अंÌेज सरकार ओकरापर ऑंिख मूिन िवfास क ए लेने छलैक। ओकरो चा£कात जासूस लागल रहैत छलैक। एिह बातक ओकरा प˜ा सबूत तखन भेटल जखन Bगितशील िवचार मंचक नायक रामकुमारक ओकरा घर अएलाक तुर]त बाद कमी¥र साहेबक फोन आिब गेलैक। ततबे निह ओकरासँ िव6तृत आ²या सेहो म©गल गेल। रमणकR जवाब दैत-दैत पराभव भए गेल छल। खबािसनीक मुहR एतेक रास गŽप सुिन हम पिहल बेर छगु]तामे पिड़ गेल रही। खबािसनी कतेक िदन रिहतए? ओकरा अपन काज सभ मोन पड़ए लगैक आओर तखनसँ आपस हेबाक Ÿयॲतमे लािग जाइत। ओ जखन गाम जाए लागिल तँ रमणक पिरवारक की कोना भेलैक, तकर सभटा जानकारी अिगला बेर आनए हेतु किह ओकरा िवदा कएल। खबािसनीक आबाजाही बनल रहलासँ हमरा तँ मोन लािगए जाइत छल, हमर माएकR बड़का उसास होइक। नाि]हटा ब”चासँ हम जबान भए गेलहुँ, मुदा माएक हेतु तँ जेना दुधपीबे रही। सही कहल गेल अिछ माए, माए होइत अिछ..! मुदा हमर माएक तँ हम एकमाJ आश रिहऐक आओर सेहो कनीकेटामे ओकरासँ फराक एकदम नव लोकक संग सासुर बसए लागल रिहऐक। ·मश: सासुर घरे लागए लगलैक। जुड़ल अटल घर रहैक। जमीन-जालसँ नीक उपजा भए जाइक। िदन कोना बीित जाइक से पतो निह चलैक। पिरवारमे नव-नव ब”चा सभ अबैत गेल। बेटा, बेटी सभसँ घर भिर गेल। हमर ससुर एिह बातसँ बहुत खुश रहिथ। q

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ओिह समयमे 6वतंJता आ]दोलन जोड़ पकड़ने छल। गामे-गाम लोक िफरंगीसभक िखलाफ नारा लगबैत छल। कोनो इलाकामे जनाधार पाटÊक बच;6व तँ कतहु Bगितशी िवचार मंचक। गरम िसंह गुटक डकैत सभ जे जीिबत रिह गेल से अिधक©श Bगितशील िवचार मंचमे सि·य भए गेल तँ िकछु गोटे वृ]दावन बासी भए भजनान]ददासजी महराजक सेवक भए बेस मोट-सॲट भए गेल। नाना Bकारक चानन-ितलक, गरामे तरह-तरहक £iाH ओ हाथ-सँ-पैर धिर सुसÎजित पीताबरी पिहरने ओकर सभक शोभा तँ देखैत बनैत छल। िदन भिर ओकर सभक आjममे एक तरफ िकत;न तँ दोसर तरफ भ]डारा चलैत रहैत छलैक। िशÈयक सं²यामे िनर]तर वृि° भए रहल छलैक। आjममे पैसा,£पैआ तँ जेना झहरैत छल। गनबाक पलखित निह रहैक। तR चािरटा मु6टंड ओिह टाका सभक देखभालमे मु6तैद छल। आjमकधनबल, जनबलक लगातार होइत वृि°सँ भजनान]ददासजी िनर]तर आन]दमे रहैत छलाह। साHात कृÈणक 6व£पमे जखन ओ भ—तक समH उपि6थत होइतिथ तँ आjमवासी िवधबा भ—तगण सभकR तँ भि—तकÎवारभाटा उिठ जाइत छलिन। कतेको भाव िवåल भए नृय करए लागिथ। कतेको भजन करए लागिथ। ककरो-ककरो तँ जेना भजनान]द 6वामीमे साHात् कृÈणक दश;न होमए लागए आओर ओ सभ हुनकर पैरपर दंडवत खिस पड़ैत। झािल-मृदंग, ढोलक संग कृÈणक रासलीलाक अनुपम दृÈय देखए हेतु कतए-कतएसँ भ—त सभ आिब जाइत छलाह। एिह Bकारक भि—तरसमे सराबोर लोककR माथाक कोन काज? ओ सभ अ]धभ—त भए गेल छल। भजनान]ददासक हेतु सव;6व तन, मन, धन अिप;त छल। आिखर, सभकR मुि—त तँ चाहबे करी। भवजालसँ दूर हिट कए 6वग;क ¯ार खुिज रहल छलैक। तािह पथकR चिलते-चिलते भ—त सभ अपन धन ओ सम6त सपदा 6वत: अप;ण करबाक हेतु आतुर भए गेल छल। आब तँ बस एकटा आदेशहोइक आओर ओ सभ अपन नगद, गहना, जमीन, जायदाद, सभ भजनान]द 6वामीकR समिप;त करए लागल। मुदा भजनान]दजी तँ कथुमे हाथो निह लगबैत छलाह। सभकाज हुनकर मु6टंड सभक माफ;त भए जाइत छल। बहिरआ सभ बुिझ निह रहल छल जे आिखर भए की रहल छल? Bगितशील िवचार मंचक िकछु काय;कत†सँ जनाधार पाटÊक लोक सभसँ कोनो-कोनो बातपर बाद-िववाद होइते रहैत छल। पिहने तँ ई बात गाहे-बगाहे होइत छल मुदा िकछु िदनसँ एकर र×तार बिढ़ गेल छल। जनाधार पाटÊक नेतृवक िच]ता बढ़लजा रहल छल मुदा ओ सभ िकछु कए निह पािब रहल छलाह। हािर कए ओ सभ Bगितशील िवचार मंचक संग बैसार केलाह। उÀे³य ई जे गŽप-सŽपसँ सम6यासभक समाधान कएल जाए। जनाधार पाटÊक नेता सभ अपना भिर सभ कोिशश केलाह मुदा Bगितशील मंचक लोक एिह बातपर अिड़ गेल जे 6वतंJतासँ बेसी ज£री सामािजक पिरवत;न िथक। शोषण मु—त समाजक िबना

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6वतंJताक लाभ िकछु गोटे धिर रिह जाएत। अिधक©श ओिहना रिह जाएत। गप-सŽप होइते छल िक आसपासमे जोरदार धमाका भेलैक। अफरा-तफरीक महौलमे के कतए गेल, ककर की हराएल, ककर जान गेल, के मिर गेल िकछु निह बुझाएल। के सािजस केलक तकर िकछु अनुमान निह लािग रहल छल। जनाधार पाटÊबला सभ Bगितशीलमंचपर आरोप लगा रहल छल जखन िक ओ सभ अपनाकR िनद´ष कहैत छल। —यो-—यो कहैक जे एिहमे िफरंगीजासूसक हाथ भए सकैत अिछ। q

२५ . अचानक भेल िब6फोट ततेक सश—त छल जे आस-पासक मकान सभ िहिल गेल। कैटाक िखड़की, केबाड़क शीशा चूर-चूर भए गेलैक। जनाधार पाटÊक Bा]तीय Bमुख सिहत कैटा 6थानीय नेता खूनसँ लतपथ पड़ल छलाह। Bगितशील िवचारमंचक काय;कŒ† सभ सेहो घायल रहिथ मुदा अपेHाकृत कम। संयोगवश राजकुमारकR दिहना पैरमे मामूली चोट आएल छल। ओकरा Bाथिमक इलाजक बाद अ6पतालसँ छु«ी भए गेलैक। गभीर £पसँ घायल सभकR अ6पतालमे भŒÊ कएल गेल। ओिहमे जनाधार पाटÊक Bा]तीय Bमुखक हालत बहुत गभीर छल। देश-िवदेशमे ई समाचार पसिर गेल। िफरंगी सभकR मौका भेटलैक। आनन-फाननमे Bगितशील िवचार मंचपर Bितबंध लगा देल गेल। ओकर काय;कŒ† सभकR िहरासतमे लए लेल गेल। मुि³कलसँ राजकुमार बँिच कए भागल। असलमे िफरंगी सभ बहुत िदनसँ Bगितशील िवचारमंचसँ तमसाएल छल। कखन ओ सभ सरकारी असहयोगक बाबजूद तेजीसँ देश भिरमे पसिर रहल छल। िफरंगी सभकR ओ चुनौती दए रहल छल। रॉंची मनोिचिकसालयमे भतÊक बादसँ —यो मा6टर साहेब वा पुÈपाक हाल-चाल लेबए निह गेल। ओ सभ जीबए, मरए तकर ककरो िच]ता निह। ओिहठाम एहेन सैकड़ो एहन मनोरोगी छलाह जे आब 6व6थ भए गेल रहिथ मुदा हुनकर पिरवार अपना ओिहठाम निह लए जािथ। ओकर सपिŒकR हरण कए िनिœनत भए गेल रहिथ। मनोरोगी अ6पताल कoकेक ि6थित भयाबह छल। —यो रोगी बड़बड़ा रहल अिछ तँ िकओ गुम पड़ल अिछ। —यो-—यो बहुत आ·मक छल। मनु—ख देिखतिहं िचकड़ए लगैत छल। सभ जानवर जकo जीिब रहल छल। िब6फोटक बाद राजकुमार अ6पतालसँ घसकल। देखलकै जे पुिलस ओकर गुटक लोकसभकR तािक रहल अिछ। कै गोटा पकड़ल गेल छल। ओ जान-बेजान ओिहठामसँ भागल आओर घुिर निह तकलक।

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राते-राती बस पकिड़ रॉंची पहुँच गेल। ओतएसँ कoके मनोिचिकसालय पहुँचल। ओतए पहुँचतिह अपन माएकR ताकए लागल। पुÈपाक हालत ठीक निह छल। मा6टर साहेब पूण; 6व6थ भए गेल रहिथ। राजकुमारकR देिखतिह िचि]ह गेलिखन। भाव िवåल भए कानए लगलाह। ज™दीसँ ज™दी घर आपस जाए चाहैत छलाह। अ6पताल Bशासनसँ गŽप कए रामकुमार हुनका ओिहठामसँ छु«ी करओलक। मा6टर साहेबक गाम िवदा कए राजकुमार माएक िजµासामे फेर अ6पताल पहुँचले छल िक पुिलसकR कतहुँसँ ओकर हवा लािग गेलैक पुिलस ओकरा तकैत-तकैत रॉंची पहुँच गेल छल। पुिलसकR पछोड़ करैत देिख ओ भागबाक Bयास केलक मुदा पुिलस चा£कातसँ घेिर लेलकै। ओ भािग निह सकल। पकड़ा गेल। राजकुमार पुिलसकR बहुत हाथ-पैर जोड़लक जे ओकर माए अ6पतालमे भतÊ अिछ। ओकर हालत ठीक निह अिछ, मुदा ओ सभ िकछु निह सुनलकै। थोड़कालमे राजकुमारकR लए पुिलस अµात 6थान िदस चिल गेल। मा6टर साहेब बहुत िदनक बाद अपन गाम पहुँचलाह। िकछु गोटे तँ हुनका िचि]हओ निह सकल। आकार, Bकार सभ बदिल गेल छल। कृÈणकाय, दप-दप करैत मुखारिवंद ओ तेज6वी संभाषणसँ ओ अखनहुँ लोककR Bभािवत कए लेने छलाह। थोड़बे कालमे सॱसे गामक लोक जमा भए गेल। मा6टर साहेब सभसँ ततेक नीकसँ गŽप-सŽप केलिथ जे लगबे निह करैक जे ओ कoकेसँ इलाज कए लौटलाह अिछ। मुदा िकछु लोककR अखनो िच]ता होइक जे कहॴ ओ दोबारा ओही हालमे ने पहुँिच जािथ। तािह हेतु ओ सभ शु£एसँ सावधान भए गेल। ओ सभ मा6टर साहेबक शुभिच]तक एवम् िनकट सब]धी छलाह। अ6तु, एिह बातक हेतु सचे§ रहिथ जे हुनका कोनो Bकारसँ मानिसक दबाब निह पड़िन। मा6टर साहेब जखन अपन घर आपस अएलाह तँ कनी काल तँ गुम पिड़ गेलाह। फेर आगू बढ़लाह। घरसँ एकटा युवक बहराएल। ओकरा देिखते मा6टर साहेब िचकिर उठलाह- “िकशोर!तूँ कतए छलह एतेक िदन?” मा6टर साहेबक िहसाबे तँ ओ डकैतक िगरोह ¯ारा मारल गेल। माएक संगे डकैत सभ ओकरो मािर देलक। मुदा —यो एिह बातपर ­यान निह दए सकल जे घटना 6थलसँ माJ मा6टर साहेबक पÒीक लहास भेटल छल। िकशोर तँ कतहुँ िनपŒा भए गेल छल। भेलैक ई जे डकैत सभ धोखासँ पिरि6थितवश मा6टर साहेबक घरमे फसाद कए देलक। जाबे ओकरा सभकR हालत काबूमे अएलैक, मा6टर साहेबक पÒी तँ दुिनऑंसँ जा चुकल छिल। मुदा िकशोर बचल छल। ओकर चोट बहिरआ छलैक। डकैत सभ ओकरा उठौने-पुठौने सरकारी अ6पताल लग छोिड़ देलक। संयोग रहैक जे ओिहठामसँ अ6पतालक डा—टर जाइत रहए। ओ ओकरा उठा-पुठा कए अ6पतालमे भतÊ कए देलक। ओ मामूली इलाजक बाद बिच गेल। जीिब तँ गेल मुदा ओकरा िकछु मोन निह पड़ैक। 6मृित Hय भए गेल रहैक। एिह ि6थितमे ओ अ6पताल छोिड़ कतहु चिल गेल।

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२ डॉ. योगे]i पाठक ‘िवयोगी’ उप]यास - हमर गाम

8. लबोदर मूल नाम : दिरi नारायण झा िपताक नाम : पलटू झा ज]म ितिथ : अµात मृयु: पoच वष; पिहने उपलिŸध : लबोदर नाम गुण पैघ उदर बला छलाह। हमहूँ देखने िछऐिन हुनकर शरीर। कuठसँ डoड़क बीच माJ एक ितहाइमे छाती आ दू ितहाइमे लब उदर। से कोनो पैघ धोिध फूटल निह, सपाट। आइ कािल हीरो सब िस—सपैक चमकबैत रहैत अिछ मुदा लबोदरकR छातीआ पoजरक सबटा हाड़ लोक सौ मीटर दूरोसँ गिन सकैत छल। हुनका बुझलो निह छलिन जे ई शारीिरक सौPवक िवशेषता िछऐ। वृिŒएँ लबोदर मरणोपरा]तक सं6कार करबैत छलिखन।आ पोखिरपर भोजन करब हुनक एिह वृिŒक अंश छल। मुदा एक बेरक िख6सा जे बूढ़ लोक कहैत छिथ से अÓुत छल। लबोदर अपन जजमिनकामे कोनो गाम गेल छलाह। ओतए चूरा-दही भोज छलैक। इ]तजाम तऽठीके छलैक मुदा िहनका सबिहक भोजन बेर िकछु कुzयव6थाक कारण दही कने कम पिड़ गेलै कारण पोखिर पर सामान िहसाबे सँ पठाओल गेल छलै। लबोदर लगलाह अखरा चूरा फoकए। जाबत घरवारी दहीक zयव6था केलिन ताबत ई करीब पoच सेर चूरा सधा देलिखन। आब हाल ई छल जे जाबत दही आबए ताबत िहनका पातमे चूरा सिध जाए, ई छु”छे दही सुड़किथ आ तकर बाद फेर अखरा चूरा फoकिथ। ई अपना दूनू कात मािटपर चे]ह दऽकए आन लोककR उिठ जेबाक संकेत देलिखन आ अपने खाइते रहलाह। जखन करीब एक बोरा अखरा चूरा आ चािर तौला दही सधा देलिन तखन घरवारी हाथ जोिड़ कए ठाढ़ भऽगेलिखन। तैयो ई ढकार निहए लेलिन मुदा पिरि6थितकR बूिझ घरवारीकR किह देलिखन- “अहo पार उतिर गेलहुँ, हम आब तृŽत छी।”

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एतबा किह ओ उिठ कए हाथ धोलिन, पान सुपारी लेलिन आ दस िकलोमीटर टहलैत टहलैत गाम आिब गेलाह। िकयो कखनहु हुनकर पेट उठल िक फूलल निह देखलक। अिगला िदन लबोदर फेर कोनो भोज खेबा लेल तैयार। िहनके भोजन देिख ने िकयो फकड़ा बनौने छल – पoच पसेरी अखरा चूरा, दही छoछ भिर जलखै जकरा की हैत चटने पाभिर जोड़न? ऊँटक मुहमे जीरक फोड़न !

हमरा अपना गाममे हुनका के खुअिबतए? मुदा ओ पिरि6थितकR बुझैत छलिखन आ गामक भोजमे किहयो छूटल घोड़ा जकo zयवहार निह केलिन। हमरा गाममे िकएक ककरो बूझल रहतैक जे िगनीज बुकमे हुनकर नाम रेकॉड;मे िलखिबतए। हमसब एिह गौरवसँ चूिक गेलहुँ त हम िनयारल जे अपन संकलनमे हुनकर चच† ज£र करब। q

9. नटवर लाल मूल नाम : जय]त कुमार लाल दास िपताक नाम : िशव मोहन दास ज]म ितिथ : सन उनैस सौ अठतालीस के चौरचन िदन उपलिŸध : नटवर लालक िपता अ™प वयसमे मिर गेलिखन। माताक एकमाJ स]तान ई गामक िबगड़ल छॱड़ा सब के संगितमे फँिस गेलाह। य\िप हमरा गाममे बीएक असफलताक बाद सब गािज;यन अपन िधयापूताकR 6कूल जेबासँ परहेज करबए लागल मुदा जय]त कुमार लाल दास 6कूल गेला जिहना िक िहनका टोलक िकछु आर ब”चा सब करैत छल। कहुना अठमा तक घुसकला तकर बाद हाथ उठा देलिन। ब”चिहंसँ िहनकामे िवशेष लूिर छलिन लोककR ठकबाक। पिहने तऽबहुत िदन तक माएकR ठकलिन आ मिटकोरबा गामक हाटपर िझ™ली कचरी बतासा लãडू खाइत रहलाह। तकर बाद अनकोपर अपन मंJक Bयोग केलिन। लबोदरक िपितयौतकR जजमिनकामे भेटल रंगल धोती सब ई कामित टोलक लोककR िकना दैत छलिखन, बेसी दामपर जे तोरा रंगक खच† बिच गेलहु, आ धोती बलाकR किह दैत छलिखन जे रंगल धोती िकयो निह कीनत, ओ तऽध]य कहू जे हम एक गोटेकR फुसला कए राजी केलहुँ। धोती बेचिनहार किहयो निह बुझलिन जे के िकनलक आ कीनिनहार किहयो निह बुझलिन जे ककर धोती ई िकनलक। एही

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तरहR पुरना िकताब िव\ाथÊसँ लऽ कए ओकरा नवका भाव बेचिथ। एिह zयवसायमे िहनका नीक आमदनी होमए लागल। अपने ई लील िटनोपाल देल नीक धोती गंजी पिहरए लगलाह। एिह बीच िकशोर वयसमे Bवेश किरते िहनक आदित सब िबगड़ए लागल। ई सुनसान गाछी िबरछी आ पटुआ कुिसयारक खेतमे िशकार करए लगलाह। हाथमे पाइ रिहतिह छलिन से िशकार भेिटए जाइ छलिन। सब गाममे सब तरहक लोक होइ छै आ हमरो गाम एिहसँ बचल निहए छल। मुदा जखन एक गोटेकR िकछु भऽगेलै आ ओकर बाप िहनका तंग करए लागल िबयाह कऽलेबा लेल तखन ई पिहल बेर डरा कए गामसँ भािग गेला। छओ मास बाद घुरला तऽमाएकR सब बात बुझबामे आिब गेल छलिन। ओ बेचारी नीक र6ता धेलिन आ िहनकर िबयाह करा देलिखन। नटवर लाल पÒीमे रिम गेला। साले साल पुJ रÒक बरखा होमए लागल। तेरह साल पुरैत पुरैत िहनका लग छोट पैघ तेरहटा ब”चा छल– एकछाहा पुि™लंग। घरमे जगह तऽनिहए छलिन, बुतातोपर आफत आिब गेलिन। ताबत माताराम उपरक र6ता धेलिन आ ई लगला पु6तैनी जायदादकR बेिच गुजर चलबए। एिह बीच िहनकर भा¤य जागल जखन मािJकक एक गोटे ब“क मनेजर बिन कए राजनगर एलिखन। िहनकर दुद;शा देिख ओिह बेचाराकR दया लािग गेलै आ िहनका ब“कमे चपरासीक नोकरी भेिट गेलिन। आब की छल? राित िदन िहनका आéनसँ माछक सुग]ध उठए लागल। ब“कमे पहुिच नटवर लालकR अपन असली £प देखेबाक अवसर भेिट गेलिन। हमरा गामसँ राजनगर दस िकलोमीटर। ताबत ने रोड नीक भेल छलै आ ने टेपूक चलन भेल छलै। ई लोककR फुिसया फुिसया ब“कमे खाता खोलबौलिन आ तकर बाद ओकरा सबकR लघु बचत योजनासँ जोिर िनय सoझमे एकटकही दुटकही, जकरा जेहन जुड़ै, से जमा करए लगला। पासबुक बिन गेलै मुदा सबटा पासबुक ई अपनिह संग राखिथ। लोककR िवfासमे लेने। ज£रित पड़लापर सौ पचास उधार सेहो दऽदैत छलिखन ई किह जे ब“कसँ लोन भेटलहु। लोक लोन सधबए लागल आ अिगला िक6त उठबए लागल। एिह बीच ई गामक संिचत टाका िनजी काजमे लगाबए लगला। पासबुकपर िकछु चढ़ै निह। लोककR िकछु बुझबामे अबै निह। Bायः पoच साल तक ई खेला चलैत रहल। िकयो यिद किहयो पासबुकक चच´ करए तऽई बह±ा बना देिथ जे ब“कमे राखल छै। दश िकलोमीटर िबना कोनो साधन के चिल कए जाएब किठन छलै आ लोक अनठा दैत छल। एक बेर ककरो बेटीक िबयाह लेल पoच हजार टाका िनकासी करबाक ज£रित भेलै। ओकरा िहसाब जतेक टाका ओ जमा करैत गेल छल ओिहसँ पoच हजार ज£रे उठाओल जा सकैत छलै। नटवर लाल िकछु िदन टालमटोर करैत रहला। मुदा बेटी बला कते िदन मािनतए? अ]तमे हािर कए ओ एक िदन पहुँिच गेल राजनगर ब“क।

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५५ म अंक ०१ अग᭭त २०१८ (वषᭅ ११ मास १२८ अंक २५५ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 49

तकर बाद जे हेबाक छलैक सएह भेलै। सबटा भेद खुिज गेलै आ बेटी बलाक खातामे माJ अढ़ाइ सौ टाका भेटलै। गामक Bायः सब के टाका डुबलै। सब अपन कपार पीट कए रिह गेल। नटवर लालपर िवभागीय कारवाइ भेलिन, ओ जेल गेला। एिह बीच तेरह पुJ सेहो बढ़ैत गेलिखन आ सॱसे भारतमे िछिड़या गेलिखन। हुनका लोकिनक लेल बापक पापक बीच गाममे रहब किठन भऽगेलिन। पÒी सेहो अ6व6थ रहए लगलिखन आ करीब चािर सालक बाद 6वग; गेलीह। पेरोलपर आिब नटवर लाल पÒीक सं6कार केलिन। करीब सात साल जेलमे सरलाक बाद ओ गाम घुरला। मुदा हुनका मुखरापर कोनो ¤लािनक भाव किहयो निह एलिन। एखन गामे रहैत छिथ आ बेटा सबहक पठाओल टाकापर गुजर करैत छिथ। कोिशश तऽओ एखनहु करैत छिथ लोककR ठकबाक, पुरान आदित जे छिन, मुदा आब लोक िहनका चीि]ह गेल अिछ से िहनका निह सुतरै छिन। q जारी.... ऐ रचनापर अपन म ◌ंतzय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। जगदीश Bसाद मuडल - पंगु (उप]यास )- आगo आ दूटा लघुकथा १ जगदीश Bसाद मuडलक पंगु उप]याससँ... 5. प]iह अग6त 1947 इ6वीकएलालिकलापर 6वतंJ देशक ितरंगा झuडा फहरा गेल। 30 जनवरी 1948 इ6वीकए गoधीजीक मृयु गोली लगलासँ भऽ गेलैन। 26 जनवरी 1950 इ6वीकए देशक अपन संिवधान लागू भऽ गेल। 1952 इ6वीमे लोको सभा आ राÎयक िवधान सभा-ले सेहो चुनाव भऽ गेल। 1952 इ6वीक आम चुनाव देशक ऐितहािसक चुनाव छल। ऐितहािसक ऐ मानेमे जे जेतेटा देश भारत आइ अिछ ओतेटा भारत शासनक दृि§सँ पिहने नइ छल। राजा-रजबारसँ लऽ कऽ जमी]दार, महंथानासँ देश भरल छल। िकसानक देश भारत रिहतो िकसानक मूल पूजी [i] राजा-रजबारसँ लऽ कऽ महंथाना-जमी]दार धिरक हाथमे घेराएल छल।

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५५ म अंक ०१ अग᭭त २०१८ (वषᭅ ११ मास १२८ अंक २५५ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 50

ओना, लोक सभाक चुनावमे जिहना देशक शासन (के]i शासन) कoÌेस सरकारक हाथ आएल तिहना राÎयक शासन सेहो कoÌेसक हाथमे आएल। मुदा के]iोमे आ राÎयोमे एकछाहा कoÌेसेक Bितिनिधटा निह पहुँचला, अनेको राजनीितक पाटÊक Bितिनिध सभ पहुँचल छला। िद™लीक शासनमे जिहना पिuडत जवाहरलाल नेह£क नेतृवमे कoÌेसी सरकार बनल, तिहना अनेको पाटÊक बीच कयुिन§ पाटÊक Bितिनिध सेहो िवरोधी दलक नेतृवमे ठाढ़ भेला। कoÌेस पाटÊक अलाबे आन सभ पाटÊसँ बेसी कयुिन§ पाटÊक Bितिनिध छला। चुनावसँ पूव; सभ पाटÊ अपन-अपन घोषणा पJक मा­यमसँ अपन-अपन काय;·म िनध†िरत कऽ नेने छल। देशोक बीच आ राÎयो सभक बीच समािजक-आिथ;क िवषमता तँ छेलैहे। कोनो-कोनो राÎय औ\ोिगक HेJमे अगुआ िजनगीक मूल सम6याक समाधानमे सेहो अगुआ गेल छल, जइसँ ओइठाम रोजगारसँ लऽ कऽ 6वा6Ïय, िशHा आिद सभ िकछु अगुआ गेल छेलइ। मुदा अिधक©श राÎय पछुआएल छल। पछुआएबो ए˜े रंगक निह छल, रंग-िबरंगक छल। कोनो राÎय अपन जमीनकR[ii] Bगितक पटरीपर चढ़ा नेने छल, तँ कोनो राÎय पाछुए मुहR ससैर रहल छल। केरल-बंगालक संग आनो-आनो राÎय सभ अपन अथ; बेव6थाकR पटरीपर चढ़बए लगल छल। ओना, अपन िबहारो तइमे पाछू निह छल। घराड़ीक जमीनकR[iii] बेलगान करबा चुकल छल। बका6त जमीनक आ]दोलन सेहो िमिथल©चलमे जिम कऽ भेल। मुदा बका6त जमीन तँ ओ जमीन ने भेल जेकरा अंÌेज बहादुर सवÙ-सेटलमे]टसँ 1903 इ6वीमे फाइनल केने छल। मुदा तँए िक पु6त-पु6ताइनसँ लोक खेती करैत नइ आिब रहल छला, सेहो बात तँ निहयR छल। मुदा हुनका सबहक लेल जमीनक कोनो अिधकार पJ नइ छेलैन, तँए ओ सभ बँटेदारक £पमे अपनाकR बुझै छला। जमीन उपजबैत रहला, अगो- जनारसँ लऽ कऽ अिधया-बॉंट बॉंटैत खेतबलाकR अपन कज;क सुिद-सबाइ चुकबैत खाली हाथे घर घुमैत रहला। तँए एहेन खेितहर लेल नव िसरासँ बटाइ कानूनक ज£रत भेल। ओना, िकछु पिरवारकR बेलगान घराड़ी छेलैन मुदा हुनको सबहक घराड़ीक लूट-पाट होइते रहैन। ओना, बेलगान घराड़ीपर रहिनहार आ खेत उपजौिनहारक नाओंसँ ‘िसकमी बँटाइ’क खितयान सवÙमे बिन चुकल छल मुदा तेकर अितिर—तो आधासँ बेसीए बँटेदार छुटलो छलाहे। िमिथल©चलक सायवादी पाटÊ अपन चुनावी घोषणा पJमे अपन सम6या-समाधानक B6ताव रिख चुकल छल, खेतीक लेल मािट मूल पूजी छीहे। िलिखतसँ मौिखक धिर अपन मूल सम6या जेना- भूिमहीनकR बासभूिम, खेत उपजौिनहारकR िसकमीक बटाइक अिधकार, अिधक जमीन रखिनहार जमी]दार- महंथानाकR भूिम हदब]दीक [iv ] भीतर आनब आ ओकर शेष जमीन उपजौिनहारक हाथमे देबइयािद।तैसंगपीबैसँ लऽ कऽ खेत पटबै धिरक पािनक बेव6था, अइलेकोसी नहिरक संग गाम-गाममे पसरल पोखैिरक जे सम6या सभ छल तेकर समाधान साव;जिनक £पमे हुअए, इयािद-इयािद। ऐ सभ सम6याक समाधानक लेल सायवादी पाटÊ उिठ कऽ ठाढ़ भेल। िमिथल©चलक सौभा¤य रहल जे ऐठाम महान-महान साधक लोकिनक आवाजाही सिदकाल होइत रहल। खाली आबाजािहये टा निह भेल, ओ सभ िमिथल©चलकR अपन कम;भूिम बना जीवन भिर सेवा करैत रहला। सन् 1955 मे िवनोबा भावे झंझारपुर एला। नमहर सभाभेल छेलैन।अखन जे थानासँ पि”छम औ\ोिगक HेJक £पमे देखै छी, ओइ समय ओ नमहर िफ™ड छल, जैपर फुटबॉल सेहो खेलल जाइत छल, ओही िफ™डपर सभा भेल छल। भूदान आ]दोलनक £पमे जमीनक आ]दोलन िवनोबाजी ठाढ़ केलैन। हुनक मoग रहैन अपन जमीनक छबम् िह6सा जमीन दान क£।

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५५ म अंक ०१ अग᭭त २०१८ (वषᭅ ११ मास १२८ अंक २५५ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 51

एक िदस तेल©गनाक सश6J लड़ाइ जारी छल आ दोसर िदस भूदानी आ]दोलन शु£ भेल।ऐ आ]दोलनमे Bेम-पूव;क 6वे”छासँ अपन जमीन दान कएल जाइ छल। गाम-गाममे भूदान किमटीक गठन भेल छल। पिरवारक £पमे जिहना जीिवकाक लेल खेत आ खेतीक सम6या छल तिहना गाम-समाजक £पमे सेहो अनेको सम6या छल। एक िदस नव 6वतंJ देश, दोसर िदस धरतीसँ अकास धिर अनेको सम6या सबहक सोझामे उपि6थत भेल। गाममे एक िदस जिहना पेटक सम6या छल तिहना दोसर िदस व6J, आवास, िशHा आ िचिकसाक सम6या सेहो छल। गाम-गाममे हैजा, चेचक, मलेिरया इयािद अनेको सं·ामक बेमारीक Bकोप होइत रहै छल। जइसँ अनेको लोक मरै छला। ने पढ़ाइ-िलखाइक लेल िव\ालय छल आ ने बेमारीक लेल िचिकसा सुिवधा। तैबीच अ]ध-िबसवास तेना पसरल जे मनुखकR समुिचत िदशा िदस बढ़ए निह दैत छल। अ]हार घर सoपे-सoप सदृश वातावरण बनल छल। राÎयो सरकार आ के]iो सरकारक बीच अपन-अपन एहेन-एहेन सम6या सभ छल जे अथ†भावमे िकछु कइये निह पेब रहल छल। ओना, अथ†भाव सेहो छल मुदा मूल अभाव छल कुशल केिनहारक। िमिथल©चल सभ िदनसँ धार-धुरक इलाका रहबे कएल अिछ। दज;नो धार िमिथल©चलक बीच अिछए। ओहू धार-धूरमे सभ धारक गित-िविध ए˜े रंग सेहो निहयR अिछ। िकछु धार एहेन अिछजे बेसी काट-खॲट करैए आ िकछु एहेन अिछ जे बहैत तँ अिछ सालो भिर मुदा समटल गितये। तैसंग मरल धार सेहो अिछए। मरल धारक माने भेल,ओहन धार जे बरसातमे तँ िकछु िदन बोिहतो अिछमुदा रहैए सभ िदन सुखले। जइसँ ने ओइ जमीनमे उपजा-बाड़ी होइए आ ने उपयोगक कोनो दोसरे काज। तैसंग मािटक £पमे सेहो दुभा¤य रहल अिछ जे उपजाउ मािट माने उव;र शि—तबला खेतक मािट भँिस गेल आ ओकरा ऊपर दोखरा बाउल भिर गेल। कोसी-कमला नदीक उपiव सबहक सोझमे छेलैहे। ओकरो रोक-थामक लेल िमिथलाक िकसान उिठ कऽ ठाढ़ भेला। कोसी नदीकR दुनू भागसँ बाि]ह ओइ पािनक उपयोग िसंचाइ-ले करैक योजना बनल। बा]हक संग फाटकबला पुलो आ नहरोक योजना बनल। तैसंग िबजली उपादन लेल डैम बनबैक अवाज सेहो उठले छल। ओना, देश नव-नव 6वतंJ भेले छल। जइसँ देशवासीमे 6वतंJताक उसाह सेहो बनले छेलैन। कोसी नदीक दुनू तटब]ध बनबैले एकाएक जन-सैलाव उमैड़ गेल। माने जन-आ]दोलनक £पमे सहयोग भेल। गाम- गामसँ लोक अपन jमदान करैले पहुँचल। बा]हो बनल, नेपाल सीमाक बीच फाटकबला पुलो बनल।सबहक मनमे िबसवास भेल जे दुनू देशक जमीनक िसंचाइ हएत। मुदा आइ लक-धक सािठ बख; बीतलोपर कोसी नहरक योजनाक की गित अिछ, ओ सबहक बीच अिछए। देशक अजादीक लड़ाइमे जे पीढ़ी बिलदान देलैन हुनकर आइ तेसर पीढ़ी गुजैर रहल अिछ, गाम-घर छोिड़-छोिड़ ओ सभ पड़ाइन कए रहला अिछ। जिहना अपना देशमे अंगरेजी शासनक िव£° 1935 इ6वीक पछाइत जन-आ]दोलन उÌ भेल छल तिहना दुिनयoक बीच सेहो यु° जारी छल, जेकरा ि¯तीय िवf यु°क £पमे जनै छी। दू भागमे बँिट दुि नयoक बीच जबरदस लड़ाइ फँिस चुकल छल। पिहल िवf यु°क भु—तभोगी जम;नी भऽ चुकल छल। 1917 इ6वीमे £समे सायवादी पाटÊक बीच सŒा आिब चुकल छल। दोसर िवfयु°मे एक िदस सायवादी देश आ दोसर िदस साÜाÎयवादी देशक समूह आमने-सामने भऽ चुकल छल।

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ओना, दुिनयoक इितहास लड़ाइयेक घटनासँ भरल अिछ, मुदा अखन धिरक जे लड़ाइ–दू देशक बीच– रहल ओ एक िवचारक किहयौ आिक एकधाराक, बीच रहल। िकएक तँ ए˜े िवचारधाराक शासन-तंJ अपन- अपन बजार-ले लड़ल छल। मुदा ि¯तीय िवf यु°, जेकरा शीत यु° सेहो कहै िछऐ, ओ वैचािरक £पमेलड़ाइ भेल। ि¯तीय िवf यु° समाŽत भेला पछाइत नव-नव केतेको देश सा यवादी शासन अंगीकार कऽ लेलक। तीस िसतबर 1949 इ6वीकए माओसे तुंगक नेतृवमे चीन सेहो सायवादी शासन अंगीकार कऽ लेलक। जे देश ओहू समयमे दुिनयoमे सभसँ अिधक जनसं²याबला देश छल। ि¯तीय िवf यु°सँ पूव; दुिनयoक अनेको देश साÜाÎयवादी द ेशक उपिनवेश छल। अपन देश [v] सेहो छेलैहे। ओइ सभ साÜाÎयवादी देशक ए˜ेटा मनसा छेलै जे उपिनवेश देशक लूट-खसोट कऽ अपने समृ°शाली बनल रही। आम-जनक जीवनसँ कोनो मतलब निह छल, मनुखक िजनगी जानवारोक िजनगीसँ बŒर बनले छल। ओही बŒर देशमे अपनो सभ छेलॱ। ि¯तीय िवf यु°मे िकछु साÜाÎयवादी देश प6त भेल आ सायवादी देश- सोिवयत संघ सेहो सभ तरहR जज;र भऽ गेल। मुदा िकछु भेल, तैयो सोिवयत संघक आम-अवाम अपन देशक सŒा कायम रखलैन। दुिनयoक जन-गण अपन अि6तवकR[vi] सेहो िच]हलैन। जइसँ यु° समाŽत भेला पछाितयो देश-देशक भीतर जन-आ]दोलन सेहो जोड़ पकड़लक। दुिनयoक बीच दुनू िवचारधारा–माने पूजीवादी-साÜाÎयवादी आ समाजवादी-सायवादी–अपना-अपना गितये बढ़ए लगल। एका-एकी केतेको देश साÜाÎयवादी जालसँ िनकैल सायवादी िवचारधाराक अनुकूल अपन Bगितक बाट 6वयं बनबए लगल। जइसँ दज;नो देश सायवादी बेव6था अपनौलक। अपना सभ एिशया महादेशमे छी। जे आन सभ महादेशसँ सघन अवादीबला महादेश अिछ। चीनमे सायवादी शासन 6थािपत भेला पछाइत, िवयतनाममे सायवादी आ]दोलन जोर पकड़लक। ओना, छोट-छीन देश िवयतनामो अिछ आ कोिरया सेहो अिछ, मुदा दुनूमे जबरदस लड़ाइ साÜाÎयवादी देशक संग फँसल। कोिरया बँटा कऽ दू भाग भऽ दू देश बिन गेल। मुदा िवयतनाम बँटाएल तँ निह, मुदा आइ धिरक दुिनयoक ऐितहािसक लड़ाइमे सभसँ अिधक िदन तक लड़ैबला देशमे अपन Bथम 6थान तँ बनौनिह अिछ। िवयतनाम लक-धक 34 बख; धिर लगातार लड़ैत रहल। हो-ची-िम]हक नेतृवमे िवयतनामक यु° भेल छल। बम-बा£दक Bभाव िवयतनामक एक-एक इंच जमीनक उव;राशि—तकR न§ कऽ देलक। मुदा सायवादी शासन बिनते ओइठामक जन-गणदेशभ—त सभ अपन-अपन पूण; शि—त लगा देशकR समृ°शाली आ उ±तशील बनेबे केलैन। देवचरण जिहना अपना ऑंिखये देशक शासनक उतार-चढ़ाव देखने छला तिहना अपन पिरवारक उतार-चढ़ाव सेहो देखते आिब रहल छला। 1920 इ6वीसँ पूव; जे देशक अजादीक आ]दोलन छल ओ शु£आती अव6थामे छल, तँए आम जन-गण तक निह पहुँचल छल। मुदा गoधीजीक जे चपारण सयाÌह भेलैन, तइ िदनसँ देशक जन-गणक बीच नव शि—त पैदा लेलक। 1917 इ6वीमे गoधीजी चपारण आएल छला। 6प§ मुÀा हुनकर छेलैन। मुÀा छेलैन जमी]दारक शोषण। केना जमीन आ जमीनक उपजाक लूटक संग आरो-आरोकेतेको लूट धनीक वग;[vii]गरीबक करै छल, से िवचार साव;जिनक मंचपर उठल। ओना, ओइसँ पूव; अंगरेजी नीलहा वेपारी जमीनक छीना-झपटी केना करै छल से बात नीलक कोठीक इद;-िगद;क िकसान खूब नीक जकo जिनते छला मुदा ओ शोषण सीिमत दायरामे छल, तँए कम लोकक नजैर ओइ िदस बढ़ल।

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नीलक उपजाक लेल अ±क उपजसँ अिधक उव;र शि—तबला जमीन चाही। एक बेर जइ खेतमे नीलक खेती भऽ जाइ छल, ओ खेत चािर-पoच बख;क लेल उ6सर जकo भऽ जाइ छल। तेपटाक िहसाबसँ िकसानक खेत नीलहा वेपारी लइ छल। तेपटाक माने भेल जे जँ छह कÕाक कोला अिछ तँ ओइमे माJ दू कÕामे पिहल साल नीलक खेती करबै छल। लक-धक दू बख; एक खेपक नीलक फसलमे समय लगै छेलइ। मुदा से आ]दोलनसँ पूव;िह, माने 1920 इ6वीसँ पूव;िह समाŽत भऽ गेल छल। नीलक खेतीसँ लऽ कऽ िसकमी, भाउली इयािद जमीनक िनलामी तक देवचरण देख चुकल छला। अपनो पूव;जक जमीन केना िनलाम भेलैन सेहो िपताक मुहR सुननिह छला। तैसंग अपने केना पुन: अपन पूव;जक जमीन आपस करौलैन सेहो बुझले छेलैन। अपन पिरवािरक अि6तवकR जीबैत देख देवचरणक मनमे जिहना खुशी होइत रहैन तिहना अपन ऐगला पीढ़ी- अिकंचन राधाचरणकR देख दुख सेहो होइते छेलैन। राधाचरणकR कमाइ-खटाइक कोनो ऊिह निह छल। ओना, देवचरण अपना जनैत राधाचरणकR सुधारैक कम पिरयास निह केलैन मुदा मनुखक सोभावो तँ सोभाव छी। जइ अनुकूल लोक अपन िजनगी सेहो बनैबते अिछ। गाममे केतौ कीत;न, अ§याम, नवाह होइत छल तँ माता-िपताकR िबनु कहनॱ राधाचरण ओइठाम पहुँच जाइ छल। खाइ-पीबैक बेव6था सेहो रिहते छेलइ। ओहीठाम रिह खेबो-पीबो करै छल। तिहना केतौ नाचे भेल आिक भोजे-भ]डाराभेल तँराधाचरण चुपचाप, माने पिरवारमे िबना केकरो िकछु कहने ओतए चिल जाइ छल। भलR ओकरा अधला नजिरये सेहो देखल जा सकैए मुदा से तँ अिछ निह। देवचरणकR लाख कोिशश केला पछाितयो राधाचरणमे कोनो सुधार निह भेल। माने राधाचरणकR ने jम करैक बोध भेल आ ने jम- जीिवक µाने भेल। ओना, देवचरण अपन पिरवारो आ अपन कारोबारक संचालन अपना िवचारे किरते छला जइसँ कोनो वैचािरक बेवधान निहयR होइ छेलैन मुदा पिरवारक बीच मनुखक िजनगी तँ नदीक धारा सदृश Bवािहत होइते रहैए, तइमे िकछु बाधा तँ देवचरणक नजिरक सोझमे पिड़ते छेलैन। पड़बो केना ने किरतैन? मनुख धरतीपर बहैत धार थोड़े छी, ओ तँ चेतनशील जीवनक धार छी। जइसँ चेतनशील मनुखक चेतनापर Bभाव पड़ब सोभािवके छल। ओहुना देखै छी जे धार सभमे जखन धाराक म­य बाउल भिर जाइए– माने पािनक बहावक बीच बाउल जमा भऽ जाइए–तखन पािनक धाराकR रोिकते अिछ, जइसँ धाराक Bवाह ठमैक दोसर-तेसर िदस मुँह बना बहए लगैए, तिहना ने मनुखोक वंशगत िवचारक Bवाहमे jमहीनता एलासँ िदशाहीनता अिबते अिछ। तँए देवचरणकR िचि]तत हएब सोभािवके छेलैन। संयोग बनल, जिहना एक िदस देशक शासन िवदेशीसँ 6वदेशीक हाथ आएल तिहना अपन पूव;जक अरजल जमीनक अिधकार सेहो दोसराक हाथसँ देवचरणक अपना हाथ एलैन। 6वतंJ देशक 6वतंJ िकसानक £पमे देवचरण अपनाकR देखए लगला। भलR राधाचरणक ि6थितसँ सेहो ऐगला पीढ़ीक भिवसक िच]ता सोभािवके £पमे होइ छेलैन। ओना, हिरचरण सेहो तेरह-चौदह बख;क भइये गेल छल, मुदा जइ पिरवारमे िपता, बाबा, परबाबा जीिवत रहै छैथ तइ पिरवारमे तेरह-चौदह बख;बलाकR लोक ब”चे बुझैए, जेकर अव6थाकR खाइ-खेलाइबला सेहो मानले जाइए, मुदा से सभ पिरवारमे नइ होइए। एहनो पिरवार सभ अिछए जइमे पैछला पीढ़ीकR असमाियक मृयु भेलापर वा कोनो कारणे िपता-बाबाक छाया हटलापर पिरवारक भार ब”चापर पिड़ते अिछ। जइसँ खाइ-खेलाइक 6थान पिरवारकिच]तो-िफिकर आ भारी-भारी काजक बोझ सेहो कoच उमेरबला ब”चाक िसरपर चिढ़ते अिछ। ओना, हिरचरणकR गात [viii]देख देवचरणक मनमे एते आशा बनले छेलैन जे भीरो-कुभीरक भार पोता उठाइये सकैए मुदा से ओकरा संग अ]याय-अनुिचत भेबे कएल। जैठाम

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५५ म अंक ०१ अग᭭त २०१८ (वषᭅ ११ मास १२८ अंक २५५ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 54

िवक™प रहैए तैठाम तँ संक™पक धरो सेहो गितमान रिहते अिछ, मुदा जैठाम िवक™पे निह,तैठाम तँ धारामे थोड़-थाड़ £काबट होइते अिछ। खाएर, ई माJ एकटा देवचरणेक संग हएत सेहो बात निहयR अिछ। ओना, देवचरणक जे सम6या छैन ओ आनसँ थोड़ेक सटलो छैन आ थोड़ेक हटलो छै]हे। सटै-क माने भेल जे जइ पिरवारमे बाबा, िपता आ पुJ- तीनू पीढ़ीक तीनू जीिवत छैथ। तिहना हटल ऐ दुआरे छैन जे देवचरण अपने उमरदार भऽ गेला अिछ, जइसँ समरथाइक सामथ;क ओ £प दुब;ल भइये गेल छैन, जइमे किठन शारीिरक jम करै छला। तिहना दोसर पीढ़ीमे राधाचरण जीिवत रिहतो jमचोर भेने jमहीन भइये गेल अिछ। मुदा पिरवार तँ पिरवार छी। ओकर अपन िनयिमत ि·या छै, जइ बलपर ओ ठाढ़ भऽ आगू मुहR बढ़ैए। िभनसुरका उखड़ाहाक आठ बजेक समय। पिरवारक पतराएल काज, माने खेती-बाड़ीक काज नइ रहने,देवचरणकR िनसिच]ती रहबे करैन। ओना, माल-जालक सेवा-काज आगूमे छेलै]हेमुदा जे समय खेती-बाड़ीक छेलैन,ओइमे कमी ऐने काज पतराएले छेलैन। दरबÎजाक ओसारक चौकीपर बैस देवचरण चाह पीब नेने छला। तहीकाल हिरचरणकR ऑंगनसँ िनकलैत देखलैन। देखते हिरचरणकR शोर पाड़ैत बजला- “बौआ, एमहर आबह।” बाबाक बात सुिन हिरचरण लगमे आिब चौकीपर बैसैत बाजल- “की कहलॱ, बाबा?” हिरचरणक बात सुिन देवचरणक मन जेना पतालसँ उिड़ अकासमे पहुँच गेल होिन तिहना भेलैन। मुदा उमेरो [ix ] तँ उमेर छी, ओकरो अपन गुण-धम; अिछए। तहूमे देवचरण इमानदारीसँ अखन तक पिरवारक गाड़ीक जुआ िखंचैत आएल छैथ, तँए असिथर िचते बजला- “बौआ, अखन तक पिरवारक भार अपन िसर सिजगाड़ीक जुआमे[x] क]हा लगा िखंचैत एलॱ, मुदा आब ओ सामथ; निह रहल जेकर खगता पिरवारकR अिछ। तँए...।” ‘तँए’ किह देवचरण चुप भऽ गेला। मुदा हिरचरणक मनमे िजµासा उपैिकये गेल। हिरचरण बाजल- “बाबा?” ‘बाबा’कअितिर—त हिरचरण िकछु ने बाजल। मुदा हिरचरणक मनक छीपल िवचार देवचरणक मनकR हॱर देलकैन। जइसँ रंग-रंगक िवचार, संक™प-िवक™पक संग उठए लगलैन, जइसँ नवाकुंर पोताकR की किहतैथ आ की नइ किहतैथ, तइ िब”चेमे देवचरणक मन फँिस गेलैन। मुदा लगले देवचरणक मनमे उपकलैन जे िजनगीक कोनो ठेकान थोड़े अिछ, ओ तँ बेठेकान अिछ। अखनो मिर सकै छी आ पचीस-पचास बख; जीिवयो सकै छी। तखन तँ बीचमे एकटा सम6या उपि6थत भइये गेल अिछ, जे जइ £पे पिरवारकR हमर jमक खगता छै तेकरा पुरबैमे आब अपन दैिहक शि—तक अभावक कारणे िकछु-िकछु बाधा उपि6थत हेबे करत। मुदा हिरचरण सन नव शि—तक [xi] उदय तँ पिरवारमे भइये गेल अिछ, एकरा जँ सही ढंगसँ उपयोग करब तँ कोनो तरहक बाधा पिरवारमे उपि6थत निह हएत। देवचरण बजला-

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“बौआ, अखन तँ काजक बेर अिछ तँए अखन एतबे राखह। सoझू पहर जखन दुिनयoदारीसँ िनचेन हएब तखन सभ िकयो- तोहूँ, तोहर माइयो आ दािदयो एकठाम बैस िवचािर लेब जे आगू केना चलैक अिछ। जिहना ह™लुकसँ भारी[xii] काज पिरवारक म­य अिछ तिहना नव-पीढ़ीसँ पुरान पीढ़ी धिर सेहो सभ छीहे।” हिरचरण बाजल- “से तँ छीहे। मुदा अहo िकछु भेिलऐ तैयो तँ धान-गहुम दौन करैबला खोहक जोतल बरद जकo मेहौता छीहे। जेना-जेना खोहपर अहo घुमबै तेना-तेना ने अहॴक लागल बीचलो आ पैटक बरद जकo हमहूँ सभ घुमबै।” मु6की दैत देवचरण बजला- “अखुनका िवचारकR कानपर रिखहह। सoझूपहर सभ एकठाम बैस कोनो-ने-कोनो र6ता िनकािलये लेब।” q शŸद सं²या : 2492, ितिथ : 27 मई 2018 जारी....

[i] जमीन [ii] खेतकR [iii] बासभूिमकR [iv] बीस बीघाक भीतर [v] भारत [vi] मनुखक िजनगीकR [vii] जमी]दार वग; [viii] शरीरक रंग - £प [ix] मनुखक अव6था [x ]ऐगला भागमे

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[xi] दैिहक शि—त [xii] शारीिरक jमक िखयालसँ

२ जगदीश Bसाद मuडल दूटा लघुकथा- jी जगदीश Bसाद मuडलक दूटा लघुकथा ‘भारीपन भार बिन गेल’, ‘Bवल इ”छा’

भारीपन भार बिन गेल िजनगीक आधा उमेर [i] बीतला पछाइत पचास बख;क चेतनाननकR अपन चेतन-शि—त बदैल गेलैन। चेतन शि—त बदलने सोचनो-शि—त आ ि·यो-शि—त बदैल गेलैन। जइसँ चेतनानन अपने-आपमे समािहत भऽ गेला। जेठ मासक बेªका तीन बजेक समय, दरबÎजापर बैसल चेतनाननक मन अपन िजनगीक समीHा करए लगलैन। समीHाक दौड़मे िवचार फुटलैन- “भारीपन भार बिन गेल..!” चेतनाननक मनसँ फुिट कऽ िवचार बहरेबे कएल छेलैन िक पÒी- बुिधवािदनी चाह नेने दरबÎजापर पहुँचली। ओना, सभ िदनक चाह पीबैक अÁयास चेतनाननकR सभ रंगक छैन। माने गरमी मासमे तीन बजे, म­यमास– आिसन-काितक आ फागुन–मे अढ़ाइ बजे आ जाड़क मासमे दू बजे बेªका चाह पीब चेतनानन दोसर उखड़ाहक काजमे लगै छैथ। अÁयासक िहसाबसँ चाह पीबैक इ”छा समयपर जिगते छेलैन मुदा चाह पीबैसँ पिहने जे बदलल िजनगीक िवचारक मथन मनमे उिठ गेल छेलैन तइसँ चेतनाननक मन थोड़ेक ओझरा गेल रहैन। माने, चाह पीबैक जेतेक इ”छा आन िदन रहै छेलैन तइमे आइ थोड़ेक कमी आिब गेल छेलैन। चाह पीबैक इ”छा कमने पÒीसँ गप करैक इ”छा सेहो किम गेल छेलैन जइसँ आगूमे ठाढ़ पÒीपर एक नजैर िखरा चुपचाप चाहक िगलास देखए लगला। ओना, अपन बुइिधक ओकाितये बुिधवािदनीक मनमेिवचार जिग गेल छेलैन जे भिरसक पित कोनो िच]तामे पिड़ गेल छैथ तँए जेहेन मन उछटगर हेबा चाही से निह छैन। फेर भेलैन जे िकए ने पुिछये िलऐन जे मन खसल देखै छी। मुदा फेर भेलैन जे खसलो मनक (गभीर £पमे) तँ अपन-अपन िदशा होइते अिछ।

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माने ई जे एक खसब भेल जे कोनो संकटकR दूर करैले ओकर समधानल र6ता खोजैमे खसैए आ दोसर होइए जे नीक िजनगी पेबा-ले भिवसक बाट समधािन कऽ खोजबमे सेहो मन खसबे करैए। लगले बुिधवािदनीकR भेलैन जे जखन िकछु बािज निह रहल छैथ तखन अनेरे मधुमाछी-छŒामे गोला मािर कटाएब नीक निह। तँए, अपन जे अखुनका काज अिछ पिहने तेकरा मुसतािजसँ कऽ ली। जँ कोनो दुखो-तकलीफ मनमे हेतैन तँ ए˜ेबेर िबढ़नी जकo थोड़े हनहना उठता...। चाहक िगलास चेतनाननक आगूमे रिख बुिधवािदनी पान आनए ऑंगन िवदा भेली। जे काज चेतनाननकR सेहो सभ िदनक बुझले छैन। चाह-पान पीला-खेला पछाइत जिहना चेतनानन अपन जीबनपट खोलए अपन िवचारधारा िदस िवदा भेलातिहना बुिधवािदनी सेहो अपन जीवनघट पार करए अपना घाट िदस िवदा भेली। समु±त पिरवारक जे घट-घटवािर होइए ओ जिहना चेतनाननकR बुझल छैन तिहना बुिधवािदनीकR सेहो बुझले छैन। ओ बुझब भेल जे पिरवारक सभ जनकR अपन-अपन शि—तक अनुकूल पिरवारक ि·या-कलापमे लागल रहब। जिहना कोनो घरमे अपन-अपन जगहपर व6तु-जात स“त कऽ राखल रहैए जइसँ एक-दोसरमे टकराइक सभावना नइ रहै छै, तिहना पिरवारमे मनुखोक अिछए। जे िकछु िदन पूव; तक चेतनाननक पिरवारमे नइ छेलैन मुदा आब से बात नइ रहलैन। आब पिरवारक सभ िकयो अपन-अपन पिरवािरक दाियव बुिझ रहल छैन जइसँ एक- दोसराक बीच अढ़बै-चढ़बैक र6ता ब± भऽ गेलैन। ओना, बुिधवािदनी अँगनाक काज िदस िवदा भऽ गेली मुदा पितक खसल चेहराक £प देख मनमे िवचार जिगये गेल छेलैन जे मन िकए मिलन छैन? अ°Öिगनी होइक नाते दुिनयoमे जँ िकयो लग [ii] छैन तँ ओ हमहॴ ने िछऐन। जाधैर हमर सब]ध निह बनल छल, माता-िपता जीबैत रहिथन ताधैर ओ दुनू गोरे छेलैन, मुदा हुनका दुनूक परोछ भेने आ हमरा एने तँ सब]धमे बदलाव एबे कएल। मुदा जखन मनमे कोनो तरहक पिरवािरक उलझन आिब गेल होिन तखन जँ हमरा िकछु निह किह मने-मन बेिथत बनल रहता सेहो तँ नीक निहयR भेल। िवचार अिबते बुिधवािदनीक मनमे दोसर िवचार टपैक पड़लैन। ओ टपकलैन ई जे जँ पिरवािरक उलझन निहयR रहल होिन, समािजक वा बेकतीगते कोनो रहल होिन, तखन जँ िकछु निहयR कहलैन तँ ओ उिचते केलैन। उिचत अनुिचतक बीच बुिधवािदनीक िवचार समुिचत होइते अपन काजमे लिग गेली। पÒीकR लगसँ हिटते चेतनाननक मनक जेना िन:सoस छुटलैन। िन:सoस छुिटते मनमे उपकलैन जे भने पÒी लगसँ हिट गेली। लगमे रिहतैथ तँ िवचारमे बाधा उपि6थत किरतैथ। एका]त होइते चेतनाननक मन साक©च भऽ सजगलैन। सजिगते अपन बीतल िजनगीपर नजैर िनछोह दौड़लैन। की जीवन छल, की सोच-िवचार छल आ आइ [iii] की अिछ? आब तँ सोझ जीवन देख रहल छी जे दुिनयoमे जेतेक मनुख छैथ ओ सभ ने चािह रहला अिछ जे सोझ जीवन भेटए। मुदा सोझ जीवन-ले सोझ µानक खगता अिछ िकने,जेकर BािŽत भेला पछाितये ने िकयो सुखसँ सुखी बनैत आ अपन 6वतंJ £पमे शासनसूJ अपनबैत िजनगीक धारमे बहए लगैए। ऐठाम शासनसूJक माने भेल, िजनका िकनको िजनगीमे सफलता भेटल छैन हुनका मनमे ईहो तँ जिगये जाइ छैन जे असफल िजनगी जीिनहारकR सही िदशा देखबैत सही बाटपर आिन, कखनो आगूसँ बoिह पकैड़ आगू मुहRक िवचारक बाट धराबी तँ कखनो ख”चा-खु”चीमे

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लसकैत देख पाछूसँ बल लगा आगू मुहR ठेलैक पिरयास सेहो करी। जइसँ जे िवचार सूJ बनैए वएह भेल शासनसूJ। जखने मनुखक िजनगीमे Bकािशत मन 6वतंJ बाटक शासनसूJ पकैड़ चलए लगैए तखने ओ सफल िजनगीक आन]दसँ आनि]दत सेहो हेबे करैए। जे चेतनाननकR आधा िजनगी िबतला पछाइत भेलैन। मुदा आधा िजनगी जे िबतल छेलैन ओ सो¾ोअना उनटल छेलैन जेकर पछाड़सँ अखनो पछिड़ये रहला अिछ। अखन धिर जे समाजक बीच मनुखक िनम†ण भऽ रहल अिछ ओ समािजक बेव6थाक अनुकूल भऽ रहल अिछ जइमे शासन बेव6थाक भरपूर Bभाव सेहो पिड़ते अिछ। खाएर जे अिछमुदा ई तँ हर जीवनमे अिछए जे पिरवारसँ समाज धिर अपन भारीपन [iv ] बनल रहए। जे चेतनाननकR सेहो छेलै]हे। कौलेज तकक पढ़ाइ छोड़ला पछाइत चेतनानन 6वतंJ िजनगी धारण करैक िखयालसँ नोकरी िदस निह तकलैन। ओना, अपनो पिरवािरक सपैत ओतेक छेलै]हे जे एक पिरवारक जीवन-यापनक कोन बात जे तीिनयí-चािर पिरवारक जीवन-यापन भइये सकैत छल, जँ समुिचत ढंगसँ समुिचत jमक उपयोग किरतैथ, मुदा समािजको पिरवेश तँ पिरवेश छीहे। एके-दुइये चेतनानन समाजक बीच सेवाक £पमे िबआह-दान, jा°-मुड़नक संग पूजा-पाठमे आगू बढ़ए लगला। जइसँ िकछु-िकछु समाजक बीच जन-मतो आ जन-संघो बिनयR गेल छेलैन। जखने जनमत, जनसंघ बनत तखने राजसŒाक िशकारी सभ अपना-अपनीकR हिथयाबए चािहते अिछ। शुªहमे तँ चेतनानन अबूझ-अबोध जकo छला, तँए ए˜े पHक बीच पहुँचला मुदा कनी ऑंिख-पॉंिख भेने आब दोसरो-तेसरोसँ सब]ध बनबए लगला अिछ। जइसँ भीतरे-भीतर भलR बहु£िपया बिन रहल होिथ मुदा ऊपरसँ (देखौआ) तँ समाजक अगुआएल लोक भइये गेला िकने। जँए अगुएला तँए सबहक बीच पूछ सेहो भेलैन। तहूमे मनुखक पूछ। ओना, जानवरक पूछ भलR माछी-म”छड़ रोमैबला िकए ने हुअए मुदा मनुखक पूछ तँ से निहयR छी, मनुखक पूछ तँ मनुखकR भिरयेबे करैए। जखने मनुख अपन भारीपन देखैए तखने ने अपन िजनगीक सफलताक भान ओकरा होइ छइ। जे पिबते मनुख सुरसा (रामायिणक) जकo हनुमानसँ दोबर £प अपन देखैबते अिछ। पचास बख; िबतला पछाइत चेतनाननक िवचारमे जिहना बदलाव एलैन तिहना सोचै-बुझैमे सेहो एलैन जइसँ जीवन प°ित सेहो बदिलये रहल छेलैन। ओना, चेतनानन गामक चौकपर सoझ-भोर चाह पीबैक बह±े सभ िदन जाइ छैथ जइसँ भिर िदनक गामसँ दुिनयo तकक उड़]ती समाचार सoझू पहरकR भेट जाइ छैन आ भिर राितक समाचार भोरमे भेिटये जाइ छैन। समाचारकR समाचार जकo चेतनानन एकहरफी सुिन लइ छैथमुदाओइपर अपन कोनो टीका-िटŽपणी वा राय-िवचार नइ दइ छिथन। तेकर कारण ई अिछ जे ओ नीक जकo बुझए लगल छैथ जे जिहना रेिडयो- अखबारक उड़]ती समाचारकR आरो उड़]ती आ फुड़]ती-सुड़]तीकR आरो फुड़]ती-सुड़]ती समाचार बना बँिटते अिछ। जइसँ ओकर असिलयत £प झँपाइये जाइ छै, तँए टीका-िटŽपणी माJ बातकR बतंगर बनाएब छोिड़ आर िकछु ने रहैए। मुदा समाजक धारासँ अपन मुहí ब± कए राखब तँ उिचत निहयR भेल। जेकरा पुड़बैले चेतनानन चौकक उड़]ती समाचारक नoगैर पकैड़ नेङिड़यबैत घटनाकR घिटत बेकती लग पहुँच अपन िवचार रखए लगला अिछ। आइ भोरमे जखन चेतनानन चौकपर पहुँचला िक एक गोरे चाहक िगलास आगू बढ़ा देलकैन। चाह देख चेतनानन बुिझ गेला जे भिरसक कोनो काजक भार ऊपर औत। मुदा िबनु कहने मािनयí लेब तँ उिचत

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निहयR हएत। चाहो पीबए लगला आ ऑंिख उठा-उठा ओकरोपर नचबौ लगला जे मुहसँ की िनकलै छैन। आधा िगलास चाह जखन चेतनाननक ससैर कऽ पेटमे चिल गेलैन तखन राधारमण बाजल- “चेतन भाय, अहॉंसँ एकटा भारी काज अिछ..!” काज तँ काज भेल, मुदा ‘भारी काज’ की भेल? िबनु बुझने चेतनानन बजला- “काज तँ काज भेलओ भारी की हएत?” राधारमणक मन मािन गेलैन जे काज हेबे करत। बाजल- “भाय साहैब, इuटरमे बेटा फेल भऽ गेल हेन, िदन-राित घरमे पेटकान लािध कनैत रहैए, तीिनयR िदनमे मरैमान भऽ गेलअिछ ने िकछु खाइए आ ने पीबैए। से कनी युिनवरिस;टीक काज सि™टया िदअ।” चेतनानन- “ब”चा पढ़ैमे केहेन अिछ?” राधारमण- “हाइ 6कूलमे सब िदन फ6ट करैत रहल। मैिÝकमे सेहो सŒैर Bितशतसँ बेसीए नबर आएल छेलइ।” राधारमणक बात सुिन चेतनानन बजला- “अ”छा..!” मदनानन सेहो चाहेक दोकानपर छल। चेतनाननक मुहसँ ‘अ”छा’सुिन अपन नबर लगबैत बाजल- “चेतन भाय, हाइ कोट;क काज हमरो बजैर गेल अिछ।” चेतनानन पुछलिखन- “की?” मदनानन- “दुनू भैयारीमे जमीनक िववाद अिछ, िडि6Ýक कोट;मे केस चलै छल, एकतरफा जजमे]ट भऽ गेल,सैह...।” गŽपक ·ममे चेतनानन ‘अ”छा’ तँ किह देलिखन मुदा जखन चाहक दोकानसँ घरमुहॉं भेला तखन आइ धिरक िजनगी चेतनाननक नजैरपर नचलैन। अपन पैछला पचास सालक िजनगी ओहन िदशाहीन भऽ गेल जे टुिट-टुिट खिस-खिस ओतेक नीचo खिस पड़ल जे ओकरा सहािर कऽ आजुक सीमापर आनब किठन भऽ गेल अिछ।कहुना-कहुना अपन िजनगीकR समयक पटरीपर चढ़ा चलबए चाहै छी, सएह ने पार लिग रहल अिछ। तैठाम अनकर काज सहारब तँ आरो जपाल भइये जाएत। अपना िदस जखन तकै छी तखन बुिझ पड़ैए जे ओतेक अधला वृिŒयो आ िवचारो अपना अपन जीवनक गाड़ी दौड़ेलॱ जे नक;क अÕाइसो भोगक अिधकारी बिन गेल छी, तेकरा पुराएब आ िक..? घरपर पहुँचते तेचनाननक नजैर बुिधवािदनीपर पड़लैन। ओना, बुिधवािदिनयí चेतनेननक र6ता तकै छेली। नजैर पिड़ चेतनानन बजला- “भारीपन भार बिन गेल अिछ।” अपने बोझक तर दबाएल पितक बात सुिन बुिधवािदनी िकछु ने बजली।

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q शŸद सं²या : 1471, ितिथ : 21 जुलाई 2018

[i] साए बख;क आधारपर [ii] नजदीक [iii] पचास बख;क पछाितक [iv] गुªआइ वा गुªव

Bवल इ”छा अदहा जेठ बीत गेल छल। आन सालसँ िभ± ऐ सालक जेठक रोहानी अिछ। आन साल जेना बरखा नइ होइ छल तइसँ गमÊक Bकोप िवशेष रहै छल, से ऐ साल निह अिछ। समय-समयपर तीनटा िबहिड़या बरखा भेल, जइसँ जेठ रिहतो फागुन जकo खुशनुमा समय बनल। ओना, बरखा तीिनए-टा भेल, मुदा अकासमे वादल बेसी काल उमड़ैत-घुमड़ैत रहल, जइसँ ने बेसी रौदक ताप बढ़ल आ ने लूए चलल। आन साल जेना लोक दस बजैत-बजैत खेत-पथार,बाध-बोनसँ घरपर चिल अबै छल से ऐबेर निह अिछ। नहाइ-बेर तक लोक बाध-बोनक काजमे जुटल रहैए। गामक रोहानी सेहो आन सालसँ नीक अिछ। जिहना बैशाखा तीमन-तरकारीसँ बाध लहलहा रहल अिछ तिहना गरमा मकइ, धान आ खेरही सेहो बाधकR हिरयर-कचोर केनिह अिछ। तैसंग आम-जामुन सेहो तेना लुधकी लािग फड़ल अिछ जे गाछी-िबरछीसँ अबैक मन निह होइए। केते सालक पछाइत ऐबेर एहेन आम फड़ल अिछ। जिहना आमक फड़ी अिछ तिहना जामुनोक अिछए। तहूमे गामक जे िकसान सभ छैथ, ओ ओहेन अनुभवी छैथ जे जिहना चुिन-चुिन आमक गाछी-कलम लगौने छैथ तिहना जामुनो-गुलजामुन लगौनिह छैथ। जइसँ गुल-जामुनक सं²या बेसी अिछ। गृह6ताjममे सरही-कलमी दुनूक खगतो अिछए। जिहना खाइ- पीबैले नीक-नीक कलमी आमक खगता अिछ तिहना जरण-मरणमे सरही आमक गाछक खगता सेहो अिछए। Bाचीन गाम रहने जिहना गाछी-कलमसँ सप± अिछ तिहना बेख-बुिनयािदसँ सेहो सप± अिछए। बेख- बुिनयािद भेल- नीक-नीक सुकाठ लकड़ीक गाछक संग बoस-बँसबािर सेहो। जीवनमे जिहना खाइ-पीबैले आम- जामुन,लताम-बेल इयािद सभ रंगक फलक खगता होइए तिहना घर-घरहट करैले नीक लकिड़यो आ बoसोक खगता अिछए।

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ओना, पुरानो-पुरान गाममे अ]तर अिछ। िकछु गाम एहेन अिछ जे कमला-कोसीक, चपेटमे पिड़ केता बेर उपटल अिछआ केता बेर बसल अिछ, मुदा हमर गाम से नइ अिछ। धार-धुरमे केबल एकटा चिरमसुआ धार अिछ जे बख†क पािन पीबते फुलाइए आ बख†क अ]त होइत-होइत सटकए लगैए जे काितक बीतैत-बीतैत सुिख जाइए। ओना, गामक जेतेक जमीन धारक पेटमे अिछओइमे कोनो उपजा-बाड़ी निहयR होइए, तइसँ एते नोकसान तँ गामक अिछए, मुदा एते तँ न×फो अिछए जे कमो बरखा भेने आन-आन गामक पािन उठा कऽ धार अनैए आ गामक पोखिरयो आ चौिरयो सभकR भिर दइए जइसँ पािनक सोलह±ी खगता तँ निह, मुदा अदहा-िछदहा तँ पूरा होइते अिछ। तहूमे धारक पेट तेहेन उथराह अिछ जे तीिनयí-चािर हाथ पािन मोटाइते ऊपर फेकए लगैए। जइसँ खेतो सभ पिनआइए आ पोखैर-झoखैर सेहो भिर जाइए। तेतबे निह, कमला-कोसीक Bकोप निह रहने गामक गािछयो-कलम आ खेतो-पथारक ऑंिड़-मेड़ नीक अिछए। साए-साए बख;क जिहना शीशोक गाछसँ गाम भरल अिछ तिहना साए-साए बख;क आमोक गाछ आ बoसोक बँसवािर अिछए। सुकाठ लकड़ीमे शीशोओक अपन महत अिछए। महत ई जे जिहना घरक खु«ा- खाही मजगूत होइए तिहना घरक ऊपरका भागमे तड़क, धरैन, मानी थहक £पमे सेहो अिछए। तैसंग घरक बीचला भागमे केबाड़-चौकैठक संग सुतै-बैसैले चौिकयो-कुरसीक पूित; केनिह अिछ। ऐबेर जिहना उपजा-बाड़ी, कलम-गाछी लहलहा रहल अिछ तिहना लगनो[iv]क धुमसाही अिछ। अपनो मुड़नक नौत-हकार मािJकसँ आएल अिछ। परसू मिमयौत भाइक बेटाक मुड़न छी, कपड़ो-लŒा आ नौत- पुराइक चीजो-वौस कीनए झंझारपुर गेल छेलॱ। बजारो आ हाटोक काज छल। ऐगला हाट रिब िदन होएत, जइसँ काज नइ चलैत, तँए बुधेक हाट करए झंझारपुर गेल छेलॱ। झंझारपुरसँ चीज-वौस कीिन घरपर आिब साइिकलसँ उतैर चीज-वौस उतािरते रही िक हंसराज काकाकR खेत िदससँ अबैत देखलयैन। र6ते कातमे घरो अिछ आ दरबÎजाक £िख सेहो र6ते िदस अिछ। हंसराज काकाकR देखते कहलयैन- “काका, तमाकू खा िलअ तखन जाएब।” ओना, पौने एगारह बािज रहल छलजइसँ नहाइ-खाइ बेर भइये गेल छल, मुदा जखन सोझामे हंसराज काका पड़ला आ िकछु निह बिजतॱ से केहेन होइत। पान-सात िदनसँ भRटो निहयR भेल छला।तँए तमाकुलक बहाना बना बाजल छेलॱ। जिहना कहलयैन तिहना ओहो दरबÎजापर आिब बजला- “केतौ बाहर गेल छेलह, िकसुन?” बजलॱ- “हँ, झंझारपुर हाट गेल छेलॱ। परसुका मुड़नक नौत-हकार मािJकक अिछ। ओहीक चीज-वौस कीनए गेल छेलॱ।” तैबीच अपनो चीज-वौसकR अँगनामे रिख दरबÎजापर आिब तमाकुल चुनबैक ओिरयान करए लगलॱ। हंसराजो काका अपन हाथक कोदािर, खुरपीआहँसुआकR चौकीक िन”चoमे रिख बैसला। साइिकलसँ उतरल रही तँए पसेना चलैत रहए।ओना, समयमेघौन जकo छल तँए रौद मिड़याएल रहइ, मुदा तैयो मासक धमÙ गरमी िकछु छेलैहे। तमाकुल चुना काकाकR देिलऐन। ओहो तमाकुल मुँहमे लैत बजला-

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“ऐ बेरका लगन तँ देखै-जोकर अिछ!” लगनक चच; होइते बजलॱ- “ऐबेर कनाह-कोतर सभ उिठ जाएत। जेकरो सबहक िबआह पॱरकo नइ भेल तेकरो सबहक आ जे ऐबेर िबआह करै-जोकर भेलतेकर, सबहक िबआह भऽ जाएत।” ‘सबहक िबआह’ आिक ‘कनाह-कोतर’ सुिन हंसराज क˜ाक मन खुशी भऽ गेलैन। मु6की दैत बजला- “ई तँ बिढ़यo बात भेल िकने। जेतेक िधया-पुताक िबआह भऽ जाएत ओतेक माइयो-बाप अपन कज;सँ मु—त हेबे करत िकने।” बजलॱ- “से तँ माJ वएह माए-बाप ने जेकरा या तँ अि]तम िधया-पुताक िबआह हेतै वा जेकरा ए˜ेटा हेतइ, सएह ने अपन िधया-पुताक कज;सँ मु—त हएत, मुदा जेकरा जेरक-जेर िधया-पुता छै ओ केना मु—त हएत?” हंसराज काका बजला- “भलR सो¾±ी मु—त निहयR हएत, मुदा ओते तँ हेबे करत िकने जेते भार उतैर गेल रहतै। कज´-कज† आ चुि—तयो-मुि—तमे अ]तर तँ अिछए। िकयो सोलह±ी चुका मु—त होइए आ िकयो अदहा-िछदहा चुका अदहा- िछदहा मु—त होइए। तँए, जेते भार उतैर जेतै ओते जान तँ ह™लुक हेबे करतै िकने।” बजलॱ- “हँ, से तँ हेबे करत। मुदा तेहेन जुग-जमाना आिब गेल अिछ जे केहनो-केहनो पिरवार बेटीक िबआहमे िहल जाइए।” हंसराज काका बजला- “तइमे केकर दोख?” ‘केकर दोख’ सुिन मन ठमैक गेल। िकएक तँ ए˜े आदमी बेटाक िबआहमे राजा जकo बिन अिधक-सँ- अिधक सपैत बेटीबलासँ िलअ चाहैत अिछ आ वएह आदमी बेटीक िबआहमे दoत िचआिर बजैए जे समय बड़ खराप भऽ गेल अिछ। जइसँ गिरबाहाकR बेटीक िबआह करब पहाड़ोसँ भारी भऽ गेल अिछ...। बजलॱ- “दोख केकर रहत काका, दोख तँ सोलह±ी लोकेक अिछ। पिहनॱ ने िबआह होइ छल, कहo एते भारी लोककR बुिझ पड़ै छेलइ। पिरवारमे जिहना आन-आन काज चलै छल तिहना ने ·िमक ढंगे बेटा- बेटीक िबआहो चलै छेलइ।” तमाकुलक थूक फेकैत हंसराज काका बजला- “दोख सबहक अिछ। तखन तँ सभकR एते गड़ भेिटये जाइए जे समैये एहेन बिन गेल अिछ जे सभकR वा­य भऽ करए पड़ै छइ।” बजलॱ- “जेतए जे होइएसे तेतए हौ, मुदा ठनकाक अवाज सुिन लोक अपन जान बँचबैले अपने माथपर लइए, तिहना ने...।”

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िब”चेमे हंसराज काका बजला- “माथपर हाथ नेनिह की हएत, जेतए ठनकाकR खसैक छै तेतए खसबे करत िकने। माथपर हाथ िलअ तैयो आ नइ िलअ तैयो, जेतए ठनकाकR गड़ भेटतै तेतए खसबे करत िकने।” बजलॱ- “हँ!से तँ खसबे करत।मुदा...।” हंसराज काका बजला- “मुदा-तुदा िकछु ने।” बातकR बदलैत बजलॱ- “काका, ऐबेर तँ अहoक लšमी दिहन छैथ।” ‘लšमी दिहन’क माने भेल तीमन-तरकारीकR महग हएब। हंसराज काकाकR डेढ़ बीघा खेत छैन जइमे दस कÕा कलम-गाछी लगौने छैथ आ एक बीघा खेतमे बारहो मासक तीनू समैयक [iv] तरकारीक खेती करै छैथ जइसँ पिरवारक िनमरजना करैत, हाथो-मुÕी गरमा कऽ रिखते छैथ। तैसंग ईहो छैन जे तीन बीघा तीन- फिसला खेत छैन, जइमे फसल-च·क िमलानसँ खेती करै छैथ, जइसँ अ±क पूित; भइये जाइ छैन। खरीफक मौसममे तीनो बीघामे धानक खेती करै छैथ आ रŸबीक मौसममे दू बीघामे गहुम आ एक बीघामे दिलहन- तेलहनक खेती करै छैथ।ओना, अगता गहुमक खेती केने खेरही आ सुज;मुखीक खेती सेहो कइये लइ छैथ जइसँ तेते उपज भऽ जाइ छैन जे बेचबो-िबिकनबो किरते छैथ...। अपना जनैत हंसराज काकाकR बड़Žपनक बात कहलयैन मुदा मनमे जेना खेतीसँ िकछु तकलीफ रहल होिन तिहना मुँह िबजैक गेलैन। िबजकैत मुहR बजला- “िकसुन, जे इ”छा रोिप अखन तक िकसानी िजनगी िबतेलॱ से अखन तक पूित; नइ भेल, आ बुिझ पड़ैए जे ऐ िजनगीमे हेबो ने करत।” िजनगीक इ”छा आ ओकर पूित; नइ भेलासँ हंसराज काकाकR खेतीक िवषपनसँ मन िवसाइन-िवसाइन भइये गेल रहैन, तँए एहेन िवचार zय—त केने रहैथ। मुदा दरबÎजापर छैथ आ अपनो जँ ओहने बात बािज आरो िवसिवसी जगा िदऐन से केहेन होइत। तँए पाशाकR आस दैत बजलॱ- “काका, दुिनयo िकछु हौ आ देशे िकछु हुअ मुदा अहo तँ अपन िजनगीक बाजी मािरये नेने िछऐन!” अ6सी बख;सँ ऊपर हंसराज क˜ाक उमेर छैन मुदा सािठ बख; पूव; जे अपन पैिJक सपैतकR[iv] आधार बना खेती-बाड़ीकR धेलैन से अखनो धेनिह छैथ। जइसँ पिरवारक गुजर-बसरमे किहयो रीन-प“च नइ करए पड़लैन, आ ने ओइ भoजेमे पड़ला। जइ साल देश 6वतंJ भेल तही साल हंसराज काका मैिÝक पास किर कौलेजमे ढुकला जे देशक आजादीक चािर सालक पछाइत बी.ए. पास केलैन। हाइ 6कूलसँ पिहनिह जे देशक आजादीक लेल ितरंगा झuडा उठौलैन से आजाद भेला पछाितये रखलैन। ओना, पनरह अग6तकR साले- साल अखनो झuडा उठा देशवासीकR जगैबते छैथ, मुदा से केतेक जागल आ केतेक सुतल, से हंसराज काका जिनते छैथ।मुदा तैयो अपन 6वतंJ िवचारो आ 6वतंJ जीवनक लेल 6वतंJ पेशोक Bित समाजकR जगाइये रहला अिछ...। तैबीच हंसराज क˜ाक घड़ीपर नजैर चिल गेल। एगारह बािज रहल छल, अपनो ठंढाइये गेल

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छेलॱ जइसँ नहाइक िवचार मनमे उिठये रहल छल मुदा केना बिजतॱ जे काका अहूँकR नहाइक बेर उनहल जाइए आ हमरो बेर उनहल जाइए तँए अखन जाउ। हंसराज काका बजला- “िकसुन, आइ पचास बख;सँ कोसी नहैर लटकल अिछ। अरबो £पैआ सरकारी खजानसँ खच; भऽ चुकल अिछ,मुदा की लाभ नहैरसँ भेल अिछ से कोनो केकरोसँ िछपल अिछ। देखौआ सरकारो िकसान लेल लोहाक बोिरंग नŸबे Bितशत सिŸसडी दऽ कऽ गड़ौलक, मुदा तइसँ िकसानकR केते लाभ भेल से के नइ जनैए।” अपनो ई काज देखलो अिछए आ देखतो छीहेजे एकोटा बोिरंग काज नइ कऽ रहल अिछ। सबहक पाइप झझरी भऽ कऽ फुिट गेल, आ सभटा िनकमा भेल अिछ। बजलॱ- “हँ, से भइये गेल अिछ। मुदा लोको तँ लोके छी िकने काका, जेकरा सुिवधा भेटै छै सेहो आ जेकरा नइ भेटै सेहो,दुनू तँ एकरंगाहे अिछ। भलR तैबीच कमीशनखोर आिक घूसखोर िकएक ने उिठ-बैसल हुअए। मुदा िदन-राित दुनू नइ कानैए सेहो बात निहयR अिछ, किनते अिछ। मुदा बेवश लोक, बेवश िकसान करबे की करत।” हंसराज काका बजला- “तइसँ की अपना सभ अलग छी। आिक ओकरे सभ जकo नइ कानै छी।” बजलॱ- “से तँ छीहे, मुदा...।” हंसराज काका बजला- “मुदा-तुदा िकछु ने। हँसब आ कानब लोककR अपना हाथमे अिछ। जे कानबक िवचारसँ Ìिसत भऽ कनैक िकरदानी करत ओ कनबे करत िकने, मुदा जे हँसैक हंसक िवचारकR अगुआ कम; करत ओ हँसत नइ ते कानत। भलR नाटकक रंग-मंचपर िकछु लोक कननी पाJ बिन अिभनाइये करए, मुदा ओहो ने देखौआ कननी किनते अिछ।” बजा गेल- “हँ, से तँ अिछए। मुदा अहूँ...। ” ‘अहूँ’ सुिनते हंसराज काका बुिझ गेला जे हमरो दुखकR िकसुन ओिहना बुिझ रहल अिछ जेना अनकर दुखकR बुझैए। हँसबो-हँसब आ कानबो-कानबमे अ]तर तँ अिछए, जे ओइ अ]तरकR नइ जनैए ओ दोसर £पे कानबकR बुझैए आ जे ओइ अ]तरक मंJकR, माने अ]तरंग मंJणाकR जनैए ओकर कानबक सीमा दोसर होइत अिछ। हंसराज काका बजला- “िकसुन, नहाइ बेर भऽ गेल, तँए नीक जकo सभ बात अखन नइ करब, िकएक तँ जिहना कोनो रेलगाड़ीकR कोनो कारणे दू-चािर िमनट िवलम भेने एके 6टेशन निह, सभ 6टेशनमे िवलम होइते चिल जाइ छै, जइसँ ओकर पहुँचैक जे गनतzय 6थान रहल, ओइठाम समयपर निहयR पहुँचैए, तिहना ने मनुखोक अिछ।”

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अपना िवचारे हंसराज काका िबना कौमा-पूण; िवराम देने धुरझाड़ बािज गेला मुदा अपने बुझबे ने केलॱ, जइसँ मन झुझुआए लगल। मने-मन मनकR मजगूत केलॱ जे जे राम से राम, सभ बात हंसराज काकासँ बजाइये कऽ छोड़बैन। जिहना भौजेत नौतहारीकR खाइले नौत दइ छैथ आ पुिछ-पुिछ खुअबै छैथ तिहना अपन िवचार हंसराज काका हमर बदिरयाएल मेघकR बरदपनक लेल नौत दइए देलैन, तखन हमहॴ की ओहन बुिड़वान छी जे ओकरा सुर-वाण छोिड़ दुब†न बनाएब। फेर मनमे उठल जे नहाइक बेरमे जे िवलम हेतैन से अपना विण;क करनीसँ हेतैन आिक हमरा लरनीक चलैत हेतैन। अपनो कल परहक नहाएबमे देरी हएत, मुदा गंग-6नान तँ हेबे करत िकने। से निह तँ जिहना भगता अपना गहवरमे कारनीक भूतकR बकबैए तिहना अपनो िकए ने करी। बजलॱ- “काका, हमरा माJ एकटा फूलक काज छल आ अपने फूलक ढिकये आगूमे रिख देलॱ, तइमे से एकटा फूल चुिन कऽ िनकालब हमरे नानाक [iv] िदन छी, तँए अपने...।” हमर िवचार सुिन हंसराज क˜ाक मनमे हँसी उिठ गेलैन मुदा हँसबक जे दोसर £प अिछ, माने केकरो अ™ढ़रपनपर हँसब, बुिड़पना छोिड़ आरो की हएत। तँए अपन देखौआ हँसीकR िच]हौआ हँसीमे बदैल हंसराज काका बजला- “बौआिकसनु, तूँ बाजल छेलह जे अहॉंकR लšमी आिब गेली, से तूँ कोनो बाल-बोधक लड़कपन जकo निह, बेटपन जकo बजलह।तँए, पिहने ओ बुिझ लएह।” जिहना ढलानपर ऊपरसँ िन”चo उतरैमे पएर अपने आगू बढ़ए लगैए तिहना हंसराज क˜ाक िवचार सुिनते अपनो पएर बढ़ए लगल। बजा गेल- “से की काका?” हंसराज काका बजला- “देखह िकसुन, तोहर जे काकी छथुन से हमर िदन-राितक मािलक [iv] छैथ, जखने िवलमसँ दरबÎजापर पएर देब, तखने ओ जवाब-तलब करए लगती!तँए, धड़फड़मे कनी-मनी किह दइ िछअ बoकी दोसर िदन कहबह।” अपना मनमे बेसी-सँ-बेसी िजµासा जािग चुकल छल तँए हंसराज काकाकR िपंजरामे फँसबैत बजलॱ- “की बाल-बोध जकo बजलॱ काका?” हंसराज काका बजला- “लšयक र6ता पकैड़ चलबलšमीक आगमन भेल, आ लšयक सीमापर पहुँच जाएब लšमी पएब भेल, तइमे...।” अपन मनक मिनयo जेना सो¾ो आँिख खोिल बुझैले तैयार भऽ गेल छल, एकाएक बजा गेल- “से की भेल काका?” काका बजला-

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“बौआ िकसुन, की कहबह! अपन मन हारब नइ कबूल रहल अिछ मुदा दाबल ज£र बुिझ पिड़ रहल अिछ।” जेतेक ज™दी बुझैक िवचार जगल छल तेतेक बुझ पड़ाएल जाइ छल तइसँ मन िखनिखना लगल, तँए िब”चेमे बजाइयो गेल छल। मुदा से हंसराज काका बुिझ गेला। अपनोकR सहारैत आ हमरो सहारैत बजला- “बौआ, जिहना देशक रीढ़ िकसान छी तिहना ओइ रीढ़मे तेहेन घुन लिग गेल अिछ जे ने जीबए दए रहल अिछ आ ने मरए दए रहल अिछ! घड़ीक पेनडुलम जकo बीचमे लटका झूलबैए।” हंसराज क˜ाक गप सुिन मनमे हुअ लगल जे कृÈण जकo वृ]दावन आ राम जकo रामवनमे ने ते हंसराज काका बोिहया-भुतला रहला अिछजे एना ताशक गुलाम जकo तीन Žवाइ]ट बना बादशाहकR जीरो बना रहल छैथ! बजलॱ- “काका, नहाइ बेर भऽ गेल अिछ, से निह तँ अहीठाम नहा कऽ पिहने भोजन कऽ िलअ, पछाइत गप- सŽप हेतइ।” हंसराज काका बजला- “मुड़क«ीमे किह दइ िछअ, बीचमे टोक-टाक नइ किरहह। जँ कोनो बात बुझैमे नइ आबह तँ ओकरा मनेमे गािड़ कऽ रिखहह, दोसर िदन फिरछा देबह।” समथ;न करैत बजलॱ- “बेस िवचार केलॱ काका..!” हंसराज काका बजला- “िकसानी िजनगीमे ई पचािसयम बख; बीत रहल अिछ। मुदा अखनो तक ने अपना हाथ-जुितमे पािन आएल आ ने बीज आएल आ ने खेतीक करैक कला, जइसँ अपन मन िख± भऽ कािन रहल अिछ, निह िक पेट जरने कनै छी। खेत हमर आ बीज आन देशक, ई केतए तक उिचत अिछ! मनमे Bवल इ”छा छल जे सभ-कथुक बीज अपने बनाएब, मुदा से आइ तक नइ भेल। तँए मन झुझुआ कऽ कािन रहल अिछ।” हंसराज क˜ाक असल बात सुिन एकाएक जेना भ˜ खुिज गेल। q शŸद सं²या : 2301, ितिथ : 30 अBैल 2018

[1] साए बख;क आधारपर [1] नजदीक [1] पचास बख;क पछाितक [1] गुªआइ वा गुªव

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ऐ रचनापर अपन मंतzय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।

३. प\ ३.१. १. राहुल कुमार चौधरी- हेलैत Bाण २. आशीष अनिच]हार - दू टा गज ल ३.२.१. किवBीतम कुमार िनषादक िकछु किवता २. िमिसदा- "6मृित शेष" ३.३.रिवभूषण पाठक- दूटा किवता ३.४.१.अनुवादक डॉ. िशवकुमार Bसादक िकछु अनुिदत काzय (मूल रजनी छाबड़ा- िह]दी) २.किव डॉ. िशवकुमार Bसादक िकछु किवत◌ा १. राहुल कुमार चौधरी- हेलैत Bाण २. आशीष अनिच]हार - दू टा गजल १ राहुल कुमार चौधरी हेलैत Bाण शोिणतक पोखेर मे हम हेल रहल छी आ अहo, बाªदक महार पर बैिस माछ मािर रहल छी ।

बंसी कRत' बात छोड़ु अहo त महाजाल फेक

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रेहूँ, भाकुर जेना मािर रहल छी मनु—खक Bाण दुनू िवfशि—त केर बीच हमर अंगना, बेन गेल ऐछ सिझया खेत आ, कब;ला के मैदान ।

धू-धू कS जिर रहल य' हमर इितहास आ, सÁयता । लागल अिछ अहo कR आँिख पर अ]हारजािल, मुहँ पर जाबी, कान पर पद†।

नाक सेहो ब]द ऐछ की दुग;]ध ने लागेत य'।

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मनु—खक माउसक जे चाहुँिदश पसरल अिछ हमर माइयक शोिणत जे िपछला दस िदनसँ, जमल अिछ मािट पर इराक, लीिबया आ अफगािन6तान कR बाद हमर अंगना बनल अहo कR, यु° मैदान ।

भिसआएल िजनगी मे, जे िकछ शेष अिछ सब छी माJ, अवशेष जरल इितहासक आ सÁयता कR ।

मुदा परती ने रहत शोिणत सँ, भीजल मािट पर, नव कोपर िनकलट ।

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शोिणतक पोखेर हेलैत-हेलैत हम घाट पर पहुँचब आ तखन लेब बचल अवशेष आ शोिणतक एक-एक ठोपक सुइद जोिर िहसाब ।

-राहुल कुमार चौधरी ªiपुर, मधुबनी २ आशीष अनिच]हार दू टा गजल 1 चुपचाप देखब कपारमे चुपचाप चाहब कपारमे

ओ जे जे कहिथन सएह सभ चुपचाप मानब कपारमे

सपना अपन आँिख के बहुत चुपचाप डाहब कपारमे

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ई नोर हुनके हँसी सनक चुपचाप कानब कपारमे

देखा कऽ िलखलहुँ ई पoित आ चुपचाप मेटब कपारमे

सभ पoितमे 2212-212-12 माJा·म अिछ। दोसर आ चािरम शेरक पिहल पoितमे एकटा दीघ;कR लघु मािन लेबाक छूट लेल गेल छै।

2 हुनके िवकास जनता उदास

संसद बनलै चो«ा िनवास

अपने अथÊ अपने लहास

जेबी जानै

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हाटक हुलास

बूड़ल देशक दश;न झकास

सभ पoितमे 22-22 माJा·म अिछ। दू टा अलग-अलग लघुकR दीघ; मानबाक छूट लेल गेल अिछ।

ऐ रचनापर अपन मंतzय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। १. किवBीतम कुमार िनषादक िकछु किव ता २. िमिसदा- "6मृित शेष "

१ किवBीतम कुमार िनषादक िकछु किव ता

सुथड़ समाज पुरखा धरम माऽए-बापक पुन यौ सुथर समाज देल आिशष सगुन यौ पुरजन-पिरजन चेतबए यागु अवगुन यौ पुरखा धरम...।। 0।।

»¹ा िवधाता केर रचना-िवधान सभ सृि§-Bकृित संग युगच· काल नभ हमरे जकo आओर जीव ज]तु ज]मल »¹ाuडक घटनासँ तारा-Ìह हलचल

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धरती-आकाश देलक रीत-गीत धुन यौ सुथड़ समाज देल आिशष सगुन यौ पुरखा धरम...।। 1।।

जेहन समाज भेटल तहने हम बनलॱ िपतृज अÌज गुण करमो कR छनलॱ टोिलया-पड़ोिसयासँ लुइर-बुइध जनलॱ गॱआँ-संगितया संग धार-बoध फनलॱ गुª µानी िहत लग बनौलक िनपुण यौ सुथड़ समाज देल आिशष सगुन यौ पुरखा धरम...।। 2।।

आजुक युग सनकी सँ िच]ता बढ़बैए सुख-शौक नवतुर मन दुिवधा चढ़बैए दानव दहेज केर बेटी घटवैए दा£-तबाकू मीत-रोग पटवैए तैँ Bीतम बेकल भऽ करए गुनधुन यौ सुथड़ समाज देल आिशष सगुन यौ पुरखा धरम...।। 3।। ¦

सुनबै-गुनबै कहु jीमन की पढ़बै-सुनबै नीक बेजायकR कŒेक गुनबै देश-राज-गृह लोक लेल केहन नेता-मुिखया सरपंच चुनबै कहु jीमन की पढ़बै-सुनबै...।। 0।।

गाम-शहर-नर-नारीक िख6सा एखन अजब-गजब भऽ गेल

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अ”छे िदन औ सुशासन नारा जीएसटीक कोनटा धऽ लेल इसकुिलया या हािकम-मा6टर सभ बिनयौटी ऑिफस रिम गेल िशHा-सिमित संगवे संगे िह6सा बखरा कए जिम गेल कŒेक िदन धिर िशHाक अंिचया शमशानक घाटहुँ मे खुनबै कहु jीमन की पढ़बै-सुनबै।। 1।।

जनBितिनिध भऽ अजगुत लीला, बलाकार कए नाम करय मीिडया-कमÊ कलम दूतकR, गिरयैिवतR बदनाम करय संगिह गजब करै नव तुिरया बूढ़ पुरानकR दुकारए नव 6टाइलसँ छॱड़ा-छॱड़ी कलजुग-कपटसँ फुफकारए मोबाइल-इयर फोनक चलती बमकैत जीजे-िड6को सुनबै कहु jी मन की पढ़बै-सुनबै...।। 2।।

ए—खन µान-िवµान लड़ैए Ïयोरीक चोर बढ़ए िदन-िदन पैरवी-पाइसँ Bैि—टकल हँसए देखू परीHा केर दुिद;न कŽयूटर-इ]टरनेट उमकए ि6कलइिuडयाक Áयू-दुरिबन अलšये नवतुर चॱकैए पूब-पि”छम-उŒर दिHण त“ सहरैत-सहा£ युगकR Bलय काल आँइखेटा मुनबै

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कहु jीमन की पढ़बै-सुनबै...।। 3।।

आब सुनू बुिधयार jी मैिथल, लोककR बढ़ल-चढ़ल अिद]ता िमिथलाक शीलहरण भेल िदन-िदन, कानए युगक िनय]ता पुरखॱती-सं6कृित-म]हुआएल, सनकल शौख-सेह]ता िमिथला राÎयक सपना िससकए ठोिह पारैए बेगरता आश अगोड़ने Bीतम हकमए बÎजर खेतमे की सभ बुनबै कहु jीमन की पढ़बै-सुनबै...।। 4।। ¦

बुझवाक चाही ए—खन देखल गाम-गाम शहर-बजारो सभठाम मनु—ख सभ अपन ऐfय; देखबक फेरमे भेल जा रहल अिछ ·ूर उ\ाम... ओकरा सभकR सनकल संक™प अिछ, संगे, बहुत रास िवक™प अिछ, तािह लेल िकछु सोचवाक चाही, बुझनुककR तँ ई, बेसी बुझवाक चाही... से.., हमरो सभकR बुझवाक चाही... बुझनुककR तँ...।

सहठुल सुपातर सभकR सेाहनगर बैसार चाही बैसारक ज¤गहपर

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µान औ इमानक पैसार चाही एहने सोचकR अँगने दुअरे पोसवाक चाही बुझनुकजन कR तँ ई भाव पोसवाक चाही। से हमरो सभकR सोचवाक चाही।।

बूढ़क अनुभव गुम निह होअए नवतुिरया बेदम निहं होअए नारी-सशि—त वृि° वह±े... पुरखॱती सं6कार निह रोअए... नव घर उÞए तँ िकए ख6सए... पुरना घर देिख नवतुर हँ6सए... त“ जुग-जुगकR बाट-घाटपर... सहिर-सहिर कऽ चलबाक चाही... से हमरो सभकR ई बुझवाक चाही... बहुजन िहताय वा सुखाय संग सुख-शाि]तकR उपाय चाही... छोटका-बड़का भावकR यागैत सु”चा मैिथल समुदाय चाही... कहए ‘Bीतम’ किहयो िकए! गाम-घारमे आइ! चाही... से हमरा सभकR ई बुझवाक चाही।। ¦

२ िमिसदा "6मृित शेष "

बुढ़बा पाकिर,

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एखनो ठाढ़ अिह, गामक सीमान पर, उिग गेलैए आब, बोन-झार.... सप;क केचुआ फिहरा रहल, पाकिरक ठािढ़ पर ! निह अबैए आब एत', िकनको पन-िपयाय, निह मचैए एत', नेना-भुटका केर िकलोल, निह करैए िवjाम, आब कोनो पिथक, एिह पाकिर'क छ©ह तर !!

मरर पोखिर पर, अिह एखनो, िपपिर गाछ झमटगर, जािह त'र बनल छल, नीक सन चबूतरा, जेठ मासक दुपहिर मे, खेलै छिलयै ताश !

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एखन टूिट-फुिट गेलैए, बनल ओ चबूतरा, जत' होइत छल, स©झ खन बैसार, गामक पुरोधा, जानल मानल पंच, होइत छलाह खास !!

घरक किनय©-मिनय©, िनकसैत छलीह, लाब' ल' पािन, लेिकन, बुढ़-पुरान लेल, माथ पर रािख आंचर, दैत छलीह समान ! आधुिनकता केर, पिरवेश आब, ओिढ़ लेलक अिह गाम, बाबू जी,डैडी बनलाह, माय बिन गेलीह मॉम, देसी क कफन ओढ़ा क',

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करै छिथ अिभमान !!

रसगर मीठगर, िपयरगर, मैिथल बोली, सोनगर लागै छल कान, कोयली केर मधुर 6वर सं, गुंिजत होइत छल, सगर सकान !! अंगरेजी केर, लोभ मे यजल आब, देशज भाषा, मैिथली भाषी, कहब' मे, िकयैक बुझै छिथ, अŽपन अपमान ?

बेर-बेर, नजिरक आगू, घूम' लगैछ,

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गाम परहक, पाकिरक पेड़, पीपिर तर'क, बनल चबूतरा ! रिह गेल, आब "6मृित-शेष" !! - -"िमिसदा" (िमिथलेश िस]हा "दाथवासी") मोह™ला/पो6ट : लšमीसागर, िजला : दिड़भंगा.

ऐ रचनापर अपन मंतzय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रिवभूषण पाठक - दूटा किवता १ छौड़ा अजगुत कंŽ यूटर छै

लौत उदास परखैत पासंग वौआ HणेHण साइड बदलै छै ! क ते वाह ! आ क ते कमाल कहू बस तीन िमनट पिहले बीचोबीच रहै एक िमनट पिहले वाम भेलै िमनटे पंचर जाम भेलै दिहने छौड़ा गाम गेलै मतलब पूरा कलाकारी बीचोबीचक

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कŒे ज™दी गुट बदलै छै ! कोना के गुटिपट ? गुट तोड़ै छै छौड़ा अजगुत कंŽयूटर छै गुªओ संग नो”चा-नो”ची कोना-तीŒी िसंघीपताली खनेखन छौड़ा गुª बदलै छै !

२ महाकिव िव\ापित

युवाकिव िव\ापितक पु£षपरीHा किव सँ बेशी ओइ जुगक म©ग पु£षाथ; आ ओइ पौ£षक Bशंसा ओइ दरबार आ बूढ़रिसक समै केर छ] द तैयो ओइ किव के शJु साओन िबढ़नी के छ ता केओ िकताब चोराबै ,केओ प©ड़ुिलिप पोखिर मे फिक दै कतेको चेतावनी ,र6 तारोकी ,छीनाछोरी िव\ापित जानैत रहिथन िक पुरनका पोथी िबसरले सँ नवपोथीक आगमन पु£षपरीHा िलखै काल हुनकर बैठकी भरल रहै वेद-पुराण ,z याकरण ,] याय-6 मृितक Ìंथ सँ जयदेव ,वा 6 यायन आ भामहक भार सँ दाबल पािणनी आ िपंगलक बा] ह सँ िपसाइत क™ पैत युवाकिव सबसँ पिहले फकलिखन पुराण आ 6 मृित तखने Bकट भेलिखन कीित;लता आ कीित;पताका मुदा एखनो संतोष नइ ऐ कीित; के तु” छ बू◌ूझैत बि़ढ गेलिखन आगू किव िव\ापित

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फेर फकलिखन छंद-काz य आ दश;नक शतािधक पोथी फेकैतो काल Bणाम करैत ओइ पोथी सभ के महल आ बैठकी क  यािग आिब गेलिखन जन आ जनपदक म­ य जनपदक संगे-साथ िच] ह' लागलिखन जनमन तखने त' दुिख ह जनम भेल ,दुिख ह गमाओल ऐ दुख के गिमते उिदत भेलिखन महाकिव महाकिवक किवता राजा जनकक नइ आरिHत बस जनजनक लेल जइ किवताक छाती मे धुकधुकाइत रहै िमिथलाक ³ वास ई अमरिक वता तु£कक कागज पर िलखाइ सँ बेशी अमर भ' गेलै कोिटजनक Íदय मे ,र— त मे ,मािट मे

2 हयौ साहेब अह© के एखनो एहनेसन लागै िक िव\ापित बाभनक किव आ िव\ापित क िजयेने रहलेन बाभन सब अपनेने आ माथ पर चरहेने रहलेन बाभन सभ हयौ महराज िव\ापित त' भ' गेलिखन चा£ लोक सँ बाहर महराजक दरबार सँ पंिडतक चुटप©ित सँ शा6 Jाथ;क झूठ-अखाड़ा सॅ अहॉं नीक-हमहूं नीक सँ मुदा महाकिवक किवता जीयत रहलै माथ पर स हरल बोझक हुंकारी सँ काशी आ नेपालक z यापारी सँ जिहना िBय असोम आ बंग मे तिहना अराकान आ अंग मे महाकिव बरहैत गेलिखन महफा उठेने कहारक पदचाप संग मखान तोड़ैत मलाहक अलाप संग महाकिव आिग भ' गेलिखन अगहन-पूसक घूर मे

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महाकिव पाथर भ' गेलिखन दुसाधक दुख संग महाकिव गामबदर डोम-हलखोरक टोल-टापिर मे अधम£ महाकिव क आjय भेटलेन नारीजनक कंठ मे दुख आ कÈ टबोधक ज©ता-गीत बिन मुदु Bितशोधक उ— खि़ड-समाठ छंद मे महादुख पर लेपैत सोहरक लेप मे महाकिव जी गेलिखन िवषम-िववाहक z यं¤ य मे महाकिव जी गेलिखन बूढ़-िछनारक ललैठी धरबा लेल सभ पोथी-पतरा फेकैत पुन;जीिवत महाकिव बस £िक गेलिखन मैिथलानीक लोर संग यैह लोर शािलÌामी ,बागमती क भरैत कोशी ,गंडक क तोड़ैत सभ साल दहबै-दहाबै छै िमिथला के

ऐ रचनापर अपन मंतzय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। १.अनुवादक डॉ. िशवकुमार Bसादक िकछु अनुिदत काzय (मूल रजनी छाबड़ा- िह]दी) २. किव डॉ. िशवकुमार Bसादक िकछु किवता

१ अनुवादक डॉ. िशवकुमार Bसादक िकछु अनुिदत काzय (मूल रजनी छाबड़ा- िह]दी) (PAGHALAIT HIMKHAND Maithili translation of ‘PaighalteHimkhand’ An Anthology of Hindi Poems by Rajni Chhabra from H indi into Maithili by Dr. Sheo Kumar Prasad.)

कुहेस उदािसक पड़ल पपड़ी-पर-पपड़ी कोनो कुहेस निह

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जे छैट जेतए कोनो उÎजर िभनसरसँ।

ओ तँ एना घॲिसयाएल अिछ हमर करेजमे जे जएत हमरे संग। q

सoचक धरातल सपनाक संसारमे जीबैत छेलॱ हम निह छल कोनो सoचक धरातल अपन।

िजनगीक दहकैत दुपहिरयामे निह छल माथपर िसनेहक आँचर।

सरापल तबधल मन लेने सौनक बात लेल तरसै छल मन बातोमे छण छण भीजल छल नैन फूलो गरैत छल कoटे समान,

दुिनयoक मेलामे एसगर हकासल छल मन।

अहoक फेन घुिम आयब एतए सुनसान िजनगीमे हमर 6वण; िकिरण िनकसैत जेना छँिट गेल कुहेस गमकए लगल िजनगीमे चाननक सुवास।

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हमरा संग आब अिछ हमर खुशीक आँगन पoिख हम पसारी िकए पबैले असमान।

सoचक धरातल अिछ आब हमर पिहचान। q

एिह Bकार समय केर सागरक बालुसँ मुÕीमे बटोरल िकछु बालुक कण जे सटल अिछ हमर तरहथीक म­य ओही कणसँ सागरक अनुभूित संजोिग लइ छी।

एिह Bकार जीिब लइ छी िछण-िछण केर िजनगी। q

नेनपनक घुमब ठह˜ाक अहo झरना जे देलॱ हमर आँगनमे,

िकलकारीक कुँजनसँ

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मुिदत कएल घर-आँगन।

आभारी छी हे परमेसर एिह न]हकी देवदूतक लेल।

नाि]हटा ई िबरबा जे लहलहैत अिछ घर आँगनमे हमर बेटो केर ने]हपन घुिम आएल आँगनमे। q

मेलामे एसगर दृि§क अि]तम छोिर धैर जखन हमर आकुल आँिख अहoकR िहयाबैत अिछ

आ अहo जखन लगीचमे केतौ निह अभरै छी तँ आरो भीषण भऽ जाइत अिछ मेलामे एसगर भीड़ोमे भुितएल हेबाक भान!q

हमहुँ जीिब रहल छी यै बसात यौ वस]त हमरो हेबाक कने भान तँ कराऊ।

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सoस लऽ रहल छी हम मुदा जीिबत रहबाक िबसबास निह।

िजनगीक िबरोधमे ई जघ]य अपराध निह?

छणेमे जीिब लेब भिर जनम, हरेक सoसमे सरगमक 6वर हरेक कपनमे पायलकेर झनक रेशमी आँचरकR नहुसँ सरसराएब, आँिखसँ आँिखमे सभ िकछु किह देब, बे पoिखए अकासकR नािप लेब,

पूण;ताक अभास तँ सपने भऽ गेल। खाली पल पल, खाली िजनगी, िजनगी तँ बनबासे भऽ गेल।

सो]हगर 6मृितक फुलवारी कने फेनसँ महकाऊ यै बसात यौ वस]त हमरो हेबाक कने भान त कराऊ। q

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लहैर सoझक सघन धुइनमे सागर केर लहैर आ ध˜ा खाइत हमर देह आ मन। अहoक संग रहैत, मन अभासैत छल सागरमे सागर सन िव6तृत, अन]त सुख, भरल पुरल नेह।

समय केर िनPुर बाटपर अहo आब छी िजनगीक सीमाकेर ओिहपार। सoझक तरेगनमे, अहoक छिब देखै छी।

वएह सागर तँ आइयो छै ओिहने सoझक कुहेसो सघन लहैरमे ने हलचल सतहो अचंचले सन।

ि6थर समुi सन मनकेर गहनता खान अिछ अशाि]तक वैचािरक सघनता। q

मनक बजार टुिट कऽजुिड़यो जाइ तैयो दराइर देखाइत छै मनक बजारमे फेन निह ओ बौस

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िबकाइ छै! q

िजनगीसँ की चाहै छी हम िजनगीसँ की चाहै छी हम अपनो िकछु निह जनै छी िकछु करबाक लेने िललसा मनमे अधखªए िललसे जीबै छी। हम िजनगीसँ...।

होइए जखन मनमे िललसा बाटसँ हिट िकछु काम करी सं6कार नेह केर लोरीसँ ओिह िललसोकR सुतबैत जाइ छी। हम िजनगीसँ...।

सोन सन रौदसँ भरल अकास सोझहेमे अिछ मनक ब± अ]हिरया कोठलीमे तैयो हम सुटकल जाइ छी। हम िजनगीसँ...।

चाहै छी िव6तार िस]धु केर िजनगीमे सिरपहुँ कुँइयoक बग सन जीने जाइ छी। हम िजनगीसँ...।

चाहै छी नदी सन बेग हम िजनगीमे नोरोकR आँिखसँ निह टघरए दइ छी। हम िजनगीसँ...। िललसा अिछ जीती िजनगीक खेल

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टेकठीक मदैतसँ चलैत जाइ छी। हम िजनगीसँ...।

िकछु नीक करबाक िललसा लेने िकछु निह कऽ पेबाक कचोट लेने एिह अजब ¯]¯ केर हालैतमे ओिहना िजनगी जीने जाइ छी।

हम िजनगीसँ की चाहै छी हम अपनो िकछु निह जनै छी। q २ किव डॉ. िशवकुमार Bसादक िकछु किवता

आश िवहीन हास िवहीन अगिनत काज,एसगर कत† िभनसरसँ सoझ भूत बनल िभरल छी बेटी Øयूशन जेती चलू बु”ची।

बेटाकR बस छुिट रहल छै, एलहुँ ज™दी नहऊ, नहाए छी।

ज™दी आएब, छः बजे मीता ओिहठाम।

हम छी िपता हकासल िपयासल अपन संतितक लेल नट बनल नािच रहल छी आश वहीन हास िवहीन!q

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कुदीन हमर नगरमे Bेम रोग केर सभसँ नीक िनदान झट-दे दुनुकR बाि]ह कऽ कूटू िनकसै जावत Bाण।

सoझमे आरती भोर पराती गाबए छल अनुरागी, दुनु कहुना जान छोड़ा कऽ भागल संगिह काशी।

रजनी-सजनी केर गेलै जमाना राग-िवराग गरासी अथ;युग हाबी भेलए सुिदनपर कुिदन भेलए अिवनासी। q

जनमलकR निह समटल नेहक धार सुखायल मनसँ कम;क बाट निह परखल आ]हर भेल पिरवार समाज बीच जनमलकR निह समटल।

कामुक बनल िकशोर मूख; जन कम;-कुकम; निह परखल सभसँ दोषी हम अिभभावक धनक गव;मे भटकल। जनमलकR...।

एखनहु चेतु आँिखक काजर बिह ने जाए जे अटकल अ]त एकर नीक निह होएत मन हमर कहै परखल। जनमलकR निह समटल। q

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ठनकल फेर ठनका ठनकल फेर ठनका हाथ ध£ माथपर बचाउ जुिन अनका।

पथलक चोट खाए अपने चोटेलहुँ बरखाक पािनकR आिर कािट बहेलहुँ पािनमे डूबल लगए अहु बेरक लगता हाथ ध£ माथपर ठनकल फेर ठनका।

अपनेसँ सभ छै अपनाकR गछाड़ू अनका डुबए िदयौ अपनाकR सहा£, अपनापर िधयान िदयौ छोड़ू ने हुनका हाथ ध£ माथपर ठनकल फेर ठनका। q

िवरान िकयो अपन ने आन हएत संसारो िवरान सभसँ िमल कऽ रही अपन मनकR कही सभ िकछु रहत एतए भऽ कऽ जाएब िवरान। q

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मन निह लगैत अिछ मन निह लगैत अिछ ह™ला धुम धराक बीच अŽपन िक आन बीच शीत वात ताप बीच।

िसनेह हीन 6वाथ; बीच टुटैत सपना आ देखावटी हुलास बीच।

चतुिद;क क™मष आ अपनहुँ िवरान बीच जोगल िसनेहक मरैत थकान बीच।

तीत मीठ कटु कोमल राग ओ िवराग बीच Bाणो कuठगत अिछ मम;क कचोट बीच। q

सुमीता भोरे उठती बारहिनए हाथे बाल बोध केर िच]ता गेएली चुलही पोछैए तँ दूधक एलिन सुरता।

बौआकR 6कूल जेबाक छै अपनो आिपस जेता हoए हoए कऽ चाय बनौली

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बत;न राखल िछ«ा।

िनत िदन िहनकर य्एह अिछ जीबन अपना लेल निह िच]ता पित पुJ केर सेवा धमÙ जीली हमर सुमीता। q

अनसॲहoत देखा देखी जुिन करी बेिच लोक अª लाज होटल मोटल जहo तहo आँिठ कूठ भेल भाग।

जगतमे µानी हम छलहुँ कहैत अिछ इितहास आजुक पीढ़ी देिख कऽ िकनकासँ राखी आश।

सएमे पoच दस भेिट रहल जिनका अिछ िकछु िधयान गाम गाममे जoिच िलअ िकनका घर बoचल मान।

िलखब बाजब बहस करब िबन बाती िबन तेल िटम िटम िडिबया किह रहल निह अिछ संगी कोइ।

पुJ-िपता पिरवारमे क“चा भेल अिभशाप भाए भाएकR गीड़ रहल अपनिहसँ अिछ Jास। q

फगुआ सख सेह]ते एिल किनया फगुआ रंग खेलाएब भौरेसँ भoिग पीिब ओ पिटया पर ओंघराएल।

कहू तँ नीक केला ओ

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हमरो ि¯र केला ओ।

घरमे पाबैन निह छैन मतलब भंगबतहासँ संग ए˜े टoगे नाचल दुनू फेर भoगे भकुआएल।

कहू तँ नीक केला ओ हमरो ि¯र केला ओ। q

फागुन रस बरसए हो रस बरसए हो रस बरसए फगुआमे बलम घर आएल हो रस बरसए।

संगमे लौलिन नब नब साड़ी लाल िपयर िबच झलकै िकनारी नब नब रीत रचै बालम रस बरसए फगुआमे बलम...।

सिरपहुँ फाग मन भावन लागए आइ भवन मनभावन लागए मनक मनोरथ पूरल हो रस बरसए। फगुआमे बलम घर आएल हो रस बरसए। q

ऐ रचनापर अपन मंतzय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।

आगoक अंक

िवदेह ¯ारा संचािलत "आमंिJत रचनापर आमंिJत आलोचकक िटŽपणी" शृंखलाक दोसर भागक घोषणा कएल जा रहल अिछ। दोसर भागमे अइ बेर नीलमाधव चौधरी जीक रचना आमंिJत कएल जा रहल अिछ आ

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नीलमाधवजीक रचना ओ रचनाधिम;तापर िटŽपणी करबा लेल कैलाश कुमार िमjजीकR आमंिJत कएल जा रहल छिन। रचनाकारक रचना ओ आलोचकक आलोचना जखने आिब जाएत ओकर अिगला अंकमे ई Bकािशत कएल जाएत।

अइ शृंखलाक पिहल भाग कािमनीजीक रचनापर छल आ िटŽपणीकत† मधुक©त झाजी छलाह।

जेना की सभ गोटा जनै छी जे िवदेह २०१५ मे तीन टा िवशेष©क तीन सािहयकारपर Bकािशत केलक जकर मापदंड छल सालमे दूटा िवशेष©क जीिवत सािहयकारक उपर रहत जइमे एकटा ६०-७० वा ओइसँ बेसी सालक सािहयकार रहता तँ दोसर ४०-५० सालक ( मैिथली सािहयकार मने भारत आ नेपाल दूनूक)। ऐ ·ममे अरिव]द ठाकुर ओ जगदीश चंi ठाकुर "अिनल"जीपर िवशेष©क िनकिल चुकल अिछ। आगूक िवशेष©क िकनकापर हुअए तइ लेल एक मास पिहनेसँ पाठकक सुझाव मoगल गेल छल। पाठकक सुझाव आएल आ ओइ सुझाव अंतग;त िवदेहक िकछु अिगला िवशेष©क परमेfर कापिड़, वीरे]i मि™लक आ कमला चौधरी पर रहत। हमर सबहक Bयास रहत जे ई िवशेष©क सभ २०१८ मे Bकािशत हुअए मुदा ई रचनाक उपलŸधतापर िनभ;र करत। मने रचनाक उपलŸधताक िहसाबसँ समए ऊपर-िन”चा भऽ सकैए। सभ गोटासँ आÌह जे ओ अपन-अपन रचना editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा दी।

िवदेहक िकछु िवशेष©क :- १) हाइकू िवशेष©क १२ म अंक , १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल िवशेष©क २१ म अंक , १ नवबर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) िवहिन कथा िवशेष©क ६७ म अंक , १ अ—टूबर २०१० Videha _01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल सािहय िवशेष©क ७० म अंक , १५ नवबर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक िवशेष©क ७२ म अंक १५ िद सबर २०१०

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Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी िवशेष©क ७७म अंक ०१ माच; २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) बाल गजल िवशेष©क िवदेहक अंक १११ म अंक , १ अग6त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 11 1 ८) भि—त गजल िवशेष©क १२६ म अंक , १५ माच; २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समीHा िवशेष©क १४२ म, अंक १५ नवबर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 १० ) काशीक©त िमj मधुप िवशेष©क १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरिव]द ठाकुर िवशेष©क १८९ म अंक १ नवबर २० १५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश च]i ठाकुर अिनल िवशेष©क १९१ म अंक १ िदसबर २०१५ Videha_01_12_2015 १३ ) िवदेह समान िवशेषाक- २००म अक १५ अBैल २०१६ / २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Vide ha_15_04_2016

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१४ ) मैिथली सी.डी./ अ™बम गीत संगीत िवशेष©क - २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017

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लेखकसं आमंिJत रचनापर आम ंिJत आलोचकक िटŽपणीक शृंखला १. कािमनीक प©च टा किवता आ ओइपर मधुका]त झाक िटŽपणी VIDEHA 209th issue िवदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 जगदीश Bसाद मuडल जीक ६५ टा पोथीक नव सं6करण िवदेहक २३३ सँ २५० धिरक अंकमे धारावािहक Bकाशन नीचoक िलंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018

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िवदेह ई -पिJकाक बीछल रचनाक संग - मैिथलीक सव;jेP रचनाक एकटा समाना]तर संकलन िवदेह :सदेह :२ (मैिथली Bब]ध -िनब]ध -समालोचना २००९ -१० ) िवदेह :सदेह :३ (मैिथली प\ २००९ -१० ) िवदेह :सदेह :४ (मैिथली कथा २००९ -१० ) िवदेह मैिथली िवहिन कथा [ िवदेह सदेह ५ ] िवदेह मैिथली लघुकथा [ िवदेह सदेह ६ ]

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िवदेह मैिथली प\ [ िवदेह सदेह ७ ] िवदेह मैिथली नाØय उसव [ िवदेह सदेह ८ ] िवदेह मैिथली िशशु उसव [ िवदेह सदेह ९ ] िवदेह मैिथली Bब]ध -िनब]ध -समालोचना [ िवदेह सदेह १० ] The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par " has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself . After these translations are complete these would be the offici al translations authorised by th e Author of original work .-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha -pothi/ Maithili Books can be purchased from: http://www.amazon.in/ For the first time Maithili books can be read on kindle e -readers. Buy Maithili Books in Kindle format (courtesy Videha) from amazo n kindle stores, these e books are delivered worldwide wirelessly: - http://www.amazon.com/ िवदेह समान : समान-सूची

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िवदेह

मैिथली सािहय आ]दोलन

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(c)2004-18. सव†िधकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अिछ ततऽ संपादकाधीन। िवदेह- Bथममैिथली पािHक ई-पिJका ISSN 2229-547X VIDEHA सपादक: गजे]i ठाकुर। सह-सपादक: उमेश मंडल। सहायक सपादक: राम िव लास साहु, न]द िवलास राय, स]दीप कुमार साफी आ मु±ाजी (मनोज कुमार कण;)। सपादक- नाटक-रंगमंच-चलिचJ- बेचन ठाकुर। सपादक- सूचना-सपक;-समाद- पूनम मंडल। सपादक- अनुवाद िवभाग- िवनीत उपल। रचनाकार अपन मौिलक आ अBकािशत रचना (जकर मौिलकताक संपूण; उŒरदाियव लेखक गणक म­य छि]ह) editorial.staff.videha@gmail.com कR मेल अटैचमेuटक £पमे .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉमÙटमे पठा सकै छिथ। रचनाक संग रचनाकार अपन संिHŽत पिरचयआ अपन 6कैन कएल गेल फोटो पठेता, से आशा करै छी। रचनाक अंतमे टाइप रहए, जे ई रचना मौिलक अिछ, आ पिहल Bकाशनक हेतु िवदेह (पािHक) ई पिJकाकR देल जा रहलअिछ। एतऽ Bकािशत रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संÌहकŒ† लोकिनक लगमे रहति]ह, माJ एकर Bथम Bकाशनक/ िBंट-वेब आक†इवक/ आक†इवक अनुवादक आ आक†इवक ई-Bकाशन/ िBंट-Bकाशनक अिधकार ऐ ई-पिJकाकR छै, आ से हािन-लाभ रिहत आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊय™टीक/ पािरjिमकक Bावधान नै छै। तR रॉय™टीक/ पािरjिमकक इ”छुक िवदेहसँ नै जुड़िथ, से आÌह। ऐ ई पिJकाकR jीमित लšमीठाकुर ¯ारा मासक ०१ आ १५ ितिथकR ई Bकािशत कएल जाइत अिछ। (c) 2004-18 सव†िधकार सुरिHत। िवदेहमे Bकािशत सभटा रचना आ आक†इवक सव†िधकार रचनाकार आ संÌहकŒ† लगमे छि]ह। ५ जुलाई २००४ कRhttp://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसिरक गाछ”- मैिथली जालवृŒसँ Bारभ इंटरनेटपर मैिथलीक Bथम उपि6थितक याJा “’िवदेह’- Bथम मैिथली पािHक ई पिJका” धिर पहुँचल अिछ,जे http://www.videha.co.in/ पर ई Bकािशत होइत अिछ। आब “भालसिरक गाछ”जालवृŒ 'िवदेह' ई-पिJकाक Bव—ताक संग मैिथली भाषाक जालवृŒक एÌीगेटरक £पमे Bयु—त भऽ रहल अिछ। िवदेह ई-पिJका ISSN 2229-547X VIDEHA िसि°र6तु