VIDEHA — Issue 256 / अंक २५६

Publication: VIDEHA · Issue: 256
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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५६ म अंक १५ अग᭭त २०१८ (वषᭅ ११ मास १२८ अंक २५६ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 1

ISSN 2229-547X VIDEHA 'िवदेह ' २५६ म अंक १५ अग6त २०१८ (वष< ११ मास १२८ अंक २५६ )

िव दे ह िवदेह Videha িবেদহ http://www.videha.co.in िवदेह Cथम मैिथली पािIक ई पिKका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह Cथम मैिथली पािIक ई पिKका नव अंक देखबाक लेल पृQ सभकS िरUेश कए देखू। ऐ अंकमे अिछ:- १. संपादकीय संदेश

अंक देखबाक लेल पृQ सभकS िरUेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA.

ऐ अंकमे अिछ:- १. संपादकीय संदेश

२. ग^ २.१.डॉ. योगेbc पाठक ‘िवयोगी’-उपbयास- हमर गाम (आगi) २.२.१.नारायण यादव- नसीहत २. डॉ. बचेlर झाक २ टा आलेख २.३.रबीbc नारायण िमp- तीनटा आलेख, दूटा लघुकथा आ उपbयास नम6त6यै (आगi) २.४.जगदीश Cसाद मvडल - पंगु (उपbयास )- आगi आ दूटा लघुकथा

३. पद ◌्य ३.१. १. राहुल झा "आर .जे." -बटगवनी २. आशीष अनिचbहार - दू टा गज ल ३.२.किव Cीतम कुमार िनषादक िकछु किव त◌ा

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३.३.राकेश Cेमचbc‘पीसी’-हाइक◌ू ३.४.१.अनुवादक डॉ. िशवकुमार Cसादक िकछु अनुिदत का{य (मूल रजनी छाबड़ा- िहbदी) २.किव डॉ. िशवकुमार Cसादक िकछु क िवता

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२. ग^ २.१.डॉ. योगेbc पाठक ‘िवयोगी’-उपbयास- हमर गाम (आगi) २.२.१.नारायण यादव- नसीहत २. डॉ. बचेlर झाक २ टा आलेख

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२.३.रबीbc नारायण िमp- तीनटा आलेख, दूटा लघुकथा आ उपbयास नम6त6यै (आगi) २.४.जगदीश Cसाद मvडल- पंगु (उपbयास)- आगi आ दूटा लघुकथा डॉ. योगेbc पाठक ‘िवयोगी’ उपbयास - हमर गाम (आगi)

10. झलकी देवी मूल नाम : अŽात, सब िदन लोक ओकरा एही नामसँ जनैत छैक। िपताक नाम : रतन सदाए जbम ितिथ : ठीकसँ निह बूझल मुदा हमर समवय6के अिछ झलकी। उपलि‘ध : झलकी अपन माए-बापक एकमाK सbतान। ब“चेसँ कने गौरवाह। किहयो कोनो समवय6क छॱड़ाकS गुदानलक निह। िबयाह भेलाक बाद एतिह रिह गेल। पित घर-जमाए बिन गेलिखन। झलकी सु–िर अिछ एखनहु। जखन ओ यौवनक देहिरपर डेग देलक तखन गाममे बहुतोकS मोन डोललै। कसल देह, सुगिठत बiिह आ यौवनक अbय सब लIणसँ यु—त जखन ओ अ˜र भाव™ बाध िदस जाइत छल तखन हमरा उमेरक छॱड़ा सब ओकर पछोड़ धऽलैत छल। ओकरा लेल धन सन। एक बेर चौरमे रहमतबा कने नजदीक आिब गेलै, झलकी पाछू घूिम ओकरा तेहन चाट मारलकै जे ओ ठामिह खिस पड़ल, दiती लािग गेलै। तकर बादसँ हमरो सबकS बूझल भऽगेल आ झलकी अपनहुँ आl6त भेल जे िकयो ओकरा देहमे िभरबाक साहस निहए करतै। हम जखन िद›ली चिल गेलहुँ तखनुक घटना िथक। झलकी एकसिरये छल घरमे। एिह बातक फाएदा उठा मिटकोरबा गामक भूतपूव< मुिखयाक बेटा अपन एकटा उœंड संगीक संग ओकरा घरमे Cवेश केलक बलाकारक उ^ेžयसँ। मुदा चल गेल यमलोक। झलकी किचया हiसूसँ दूनूकS दू टुकड़ी कऽदेलकै आ घरेमे गािर देलकै। ओतबे निह, शोिणत लगले कपड़ामे राितएमे हiसू हाथमे लेनिह सॱसे टोलमे िचकिर कए किह देलकै जे िकयो यिद गवाही देतै तऽओकरो यमलोक जाए पड़तैक। तकर बाद पोखिरमे नहा लेलक, हiसू धोलक आ आिब कए िनिŸbत भऽकए सूित रहल। ओकर एिह धमकीसँ कानूनक काज तऽ िकतै निह। अिगला िदन थाना पुिलस ओकरा ओिह ठाम पहुँिच गेलै। झलकी घरसँ बहराएल तऽगरदिनमे सातटा किचया हiसूक माला पिहरने। एहन रौc ¡प

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तऽपुिलसो किहयो निह देखने छल। दूनू पुिलस दरोगाक पाछू सुटिक गेल जेना मरखाहा सiढ़कS अबैत देिख छोट ब“चा माएक पाछू सुटिक जाइत अिछ। ककरो िह£मते निह होइ ओकरा लग जेतै, आ िक घरमे िकछु सच< करतै। दरोगा ओकरा पुछलकै- “तॲ राितमे ककरो खून केलही?” झलकी िनडर भाव™ उ‹र देलक- “एखन तऽदुइएटा कS कटलइयैए, जँ छॱड़ा सब आबहु निह सीखत तऽदू सैइयोकS कािट देबै एही किचया हiसूसँ। जकरा जे करबाक छैक से कऽिलअए। हम ने कतहु जेबै आ ने ककरो अपना देहमे हाथ लगबए देबइ।” दरोगा मुिžकलमे पिड़ गेल। ओ दूटा िसपाही लेने आएल छल जे खूनीकS हथकड़ी लगा कए िघचने आओत थाना, जेना ओ सब िदनसँ करैत आएल छल। एहन काली माइसँ भSट हेतै तकर सपनोमे कोनो अbदाज निह छलै। एकेटा उपाय छलै जे मिहला पुिलस बजाओल जाए निह तऽई मौगी की कऽबैसत से निह जािन। दरोगा हेड—वाट<रकS फोन लगेलक आ ओतिह बैसल रहल, झलकी चल गेल आ¨न अपन काज करै लेल। ककरो िह£मत निह भेलै ओकरा आ¨न ढुकै के। करीब तीन घंटाक बाद मधुबनीसँ जीपपर सवार चािरटा मिहला पुिलस एलै। ओ सब जखन झलकीकS हथकड़ी लगा पकड़ै लेल गेलै, झलकी ओकरो सबकS डiिट देलकै आ हाथ तेना ने झटिक देलकै जे एकटा मिहला पुिलस खिसए पड़ल। ओ बेपरवािह ओिह चा¡सँ पुछलकै- “तॲ सब मौगी छ™ ने। कह जे यिद राितमे िकयो तोहर इªजत लूटै लेल तोरा लग पहुँचतौ तऽकी करबही? अपन बचाव करमे, ओकरा पाठ पढ़ेमे िक उतान भऽकए पिड़ रहमे?” सब सकदम। ककरो कोनो जबाबे निह फुरा रहल छलै झलकीक C«क। जबाब फुरेबो करतै तऽकोन भाषामे झलकीकS उ‹र देतै? बड़ी कालक नाटक के बाद झलकी अपनिह मोने थाना िवदा भेल। िकयो ओकरा देहमे निहए िभड़लै। आगू आगू झलकी, ओिहना सातो किचया हiसूक हँसुली पिहरने, केश खूजल, उिड़याइत, आ पाछू दरोगा िसपाही आ िकछु गौआँ सब। िजनकर बेटा कटलिन ितनका लोक एखन तक कतहु निह देखलक। झलकी हाजतमे बbद भेल, फेर मधुबनी पठा देल गेल। मोकदमा चललै मुदा सरकारी ओकील कोनो तरहक सा¬य जुटेबामे असमथ< रहलाह। पूरा गाम झलकीक समथ<नमे जुिट गेल। छओ मासक बाद झलकी बरी भेल आ गाम घुिर आएल। पिछला पंचायत चुनावमे झलकी िनिव<रोध सरपंच चूनल गेल। आब ओ ‘लॉकपर आ इलाकामे झलकी देवी नामे Cिसि­ पािब रहल अिछ। एखन गामक पंचैतीपर ओकर रौc ¡पक Cभाव झलकैत रहैत छैक। फल ई जे अपराधो कम भेलैए। हम सब लािग गेल छी Cयास मे जे अिगला िवधान सभा चुनाव मे झलकी क™ एमएलए बना पटना पठाबी । हमरा सबहक िवधानसभा IेK अनुसूिचत जाित लेल आरिIत छैके । ‘लॉक पर ओकर लोकिCयता

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देखैत ई ल¬य अस£भव निह बुझाइत अिछ । ओ अपनहुँ एिह िदस ®यान देलक अिछ आ िकछु पढ़ब लीखब शु¡ केलक अिछ। गामक लोकक कहब छैक जे झलकी साधारण मिहला निह, कालीक अवतार अिछ। जखन ई मरत तखन एकरा सारापर काली मंिदर बनाओल जाएत।

q जारी.... ऐ रचनापर अपन मंत{य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। १. नारायण यादव - नसीहत २. डॉ. बचेlर झाक २ टा आलेख १ नारायण यादव नसीहत राधाक बेटाक िवयाह बड़ धूम-धामसँ भेल छल। राधाक छोट वेटा मनीष पढ़ऽ–िलखऽमे बड़ तेज छल। मै²ीकक परीIामे सव³“च 6थान Cा´त कयने छल। µमागत इbटर, वैचलमे सेहो नीक 6थान Cा´त कयलैbह। मनीषकS नीक नौकरी भेट गेलैbह। आब हुनक माय राधा देवी {याकुल रहय लगलीह। जे कखन मनी¶Žक शादी करावी। मनीष िववाह समीपेक गiवक िगरधारी बाबू जे शहरमे रहैत छलाह। िगरधारी बाबूक प·ी सुिमKा देवी पैघ िवचारवान मिहला छलीह। किहयो सुिमKा वाणीसँ केकरो क¸ निह भेल हेतिbह। िहनक िस­ाbत छलैbह जे कम खाऊ, गम खाऊ, कम बाजू, जे बाजू नािप-तौिल कऽ बाजू। िहनका कवीर साहेव ओ वाणी हमशा िदमागमे नचैत रहैत छल जे वाणी ‘ऐसी बोिलए मन का आपा खोय। औरन को शीतल करे, आपहु शीतल होय।’ सुिमKाजीक कथन छल जे खुशी बाटनैसँ दू गुना वापस अबैत अिछ आओर कनेक याग कयलासँ बहुकS पूरा घरपर राज भय जाइत अिछ। एिह Cकारक िवचार सिदखन सुिमKाक मानस पटलपर नचैत रहैत छल। तS मुह›लावासीपर ओकर राज चलैत छल। सभक िवचारी सुिमKे छल। सुिमKा देवीकS एकटा बेटी छल। जेकर नाम ¡पम छलैक। ¡पम सभ िदन शहरे-वाजारमे रहल िकयैक तँ हुनक िपताजी शहरेमे नौकरी करैत छल। ¡पम पढऽ–िलखऽमे तेज छलीह। शहरक हवा-पािन लागल छल। मुदा मायक निसहतकS सिदखन याद रखने छल। ¡पम जखन 20-22 वष<क भेलीह तखन सुिमKा देवीकS िवयाहक लेल उड़ी-िवरी लािग गेलैbह। जखन तखन यपमक बापकS खोिधयबै लगलीह। लड़का वाला सभ लड़की देखवाक लेल आबय लागल। िवयाहक दर£यान कतेको लड़का वाला लड़की देखक वा6ते आयल। कतेककS लड़की निह पिसन भेलैbह तँ कतेककS

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घर निह पिसन भेलैbह। एक-दू साल बहुतो खोज-बीन कैल गेल। तखन एकटा सं»ाbत पिरवारक लड़का जे सरकारी नौकरी करैत छल। तकरा संग िवयाह ठीक भेल आ िवयाह शहरेमे भेल। बाराती वाला गामक छल। िवयाह राधाक बेटा मनीषक संग स£प– भेल। ¡पम जे शहरक वातावरणमे पलैल-पोसैल छल। ¡पम जे कॉलेजमे नाना Cकारक Cितयोिगतामे भाग लैत छल आ Cाइज Cा´त करैत छल। अखवारक कूपन कािट ओकरा पेपरक फाम¼टपर सािट, अखवार वालाकS भेटैत छल। अहूमे ओकरा व< pे¸ पुर6कार भेटलैक। आब ओ सोचय लागल जे एहेने-एहने क£पेिटशनमे Cाइज िजतलहुँ। अिभनय कय पुर6कार हॉंिसल कय ली। जे शहरमे रहय वाली ओ आब गाम-घरक आबो हवामे रहय लगलीह। ¡पम धीरे-धीरे अपनाकS गामक रंगमे धुलय लगलीह। ओकरा अपन मायक निसहत याद छलैक जे ‘खुशी वॉिट तँ दुगुना वापस होइत अिछ’ आ जँ सासुरमे कनेक याग करी तँ पूरे घरपर राज कय ली। ओ सोचैत छलीह जे जेहेन बहय बयार पठी ओ£हरे ओरी। तS ने िवयाहमे 51 प›ला साड़ी जे मैके मे भेटल छल। तािहमे सँ नीक-नीक साड़ी आधासँ अिधक सासु, ननिद िनकािल लेलक मुदा ओ िकछु निह बजलीह। कयैक तँ ओकरा माय सुिमKा देवी ओकर बाजऽ सँ रोकलक। ससुरािरक रंगमे रंगा गेल। से आब ओकरो एिह बातक पता निह चलल। ¡पमक तुिरयाक एकटा ओकर ननिद रहिथbह। जकर शादी-िवयाह निह भेल छल। ओकरा संग हंसी- मजाक करैत, घरक सभ काम करैत समय गुजैर रहैत छल। ननिद सेहो भाउजकS सभ काममे भरपुर मददमे लागल रहैत छलीह। सासुक सेवा सव³पिर छल। सासु राधा अपन काम-धाममे म½न रहैत छलीह। पिरवारक वातावरण 6वग³सँ बिढ़ कऽ भय गेलैक। पिरवारक हालत एहेन भय गेल जे कोन काज कोना भय जाइत छल से ककरो पता निह लगैत छल। राधा देवी बेटी आ पुतहुक संग खूब नीक जकॉं घुिल िमली गेल छलीह। ओकरा सभक संग ओहो दैत छलीह। सभ िकयो खूब हिस मजाक करैत रहैत छल आ खूब जोड़- जोड़सँ ठह¾ा दय हसैत छलीह। ¡पमक ससुर पुरान िवचारधाराक छलाह। तS ठहाका सुिन दरबाजापर सँ खराम पटपटबैत आंगन अबैत छलाह। तँ सभ ठहाका बbद भय जाइत छल। अंगना अबैत देरी दुनू ननिद- भौज िन:श‘द भय जाइत छलीह। ओ ससुरकS अिवतिहदेरी ¡पम माथापर नुआ लय चटदय पैर छूिब गोर लािग लैत छलिथbह। एिहपर ससुर महराजक तामस, सहानुभूितमे बदैल जाइत छल। आ पुन: चाह पीब दरवाजापर आिब जाइत छलाह। घरमे पुतोहु अयलापर हरसठे आंगन जायव उिचत निह बुझना जाइत छल। बुढ़-पुरानकS िद¾त भय जाइत छैक। ग´पो-श´पो करत तँ ककरा संग जँ प·ी जीिवत रहैत छिbह तँ ओकरा संग सुख-दुख बॉंिट लैत छिथ। िजनका प·ी निह छिbह ओकर जीवन तँ पहाड़ भय जाइत छैक। मिहला अपन बेटी-पुतोहु संग जीवन नीक जकॉं िवता लैत छिथ। मुदा बुड़हाक जीवन पहाड़ भय जाइत अिछ। जँ बेसी घर-आंगन कयलक तँ नाना Cकारक अवलट लागय लगैत छैक। एिह Cकारे ¡पम अपन निसहतसँ पूरा पिरवारकS अपना क‘जामे कय लेलक। िकछु िदनक वाद ¡पमक पित जे सरकारी नौकरी शहरमे करैत छलाह, ओ ¡पमकS शहर लय जेवाक जोगारमे छलाह। घरक सभ पिरवारकS एिह बातक जानकारी भय गेलैक। सासु मॉं राधा देवी, ननिद िपंकीआ िCया सेहो उदास भय गेलीह। ¡पम ओकरा सभकS उदास देिख ओकरो सभकS अपना साथ चलवाक आ¿ह केलकिbह। सभक मन भीतरसँ छेबे छल। सभ िकयो शहर आिव गेलीह। मनीष समयसँ ऑिफस जाइत छलाह आ ऑिफससँ

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समयपर अबैत छलाह। आब हुनका ने कोनो खाइक िचbता आ ने िरिफन िचbता रहैत छलैbह। समयसँ सभ िकछु भेिट जाइत छलैbह। मनीषकS ऑिफस जेवाक बाद सासु-बहु आ ननद-भौजाईक Cेम देिख अरोिसया- परोिसया आŸय< चिकत रहैत छलीह। अरोस-परोसक मिहला सभ ¡पमक खूब Cसंशा करय लागल। ¡पम अपन Cशंसा सुिन आर अिधक Cेमसँ सासु-ननिदकS मान-दान करय लगैत छलीह। ¡पकS अपन मायक नसीहत हर हमेशा याद रहैत छल जे खुशी बॉंटलासँ दुगुना भय जाइत अिछ आ कनेक याग कयलासँ पूरा घरपर राज भय जाइत अिछ। तS केनो Àेस जे ¡पमक ननिदकS पिहरा दैत छलिथbह या खरीद दैत छलिथbह। सासु मॉंकS अपन नीक साड़ी पिहरऽ लेल दैत छलिथbह आ बाजार घुमा दैत छलिथbह। सासु ननद अित Cस– रहैत छलिथbह। सास-ननिदक मन मुतािवक 6वािद¸ भोजन वनबैत छलीह। िवना-सासुसँ पुछने ओ कोनो काज निह करैत छलीह। किहयो किहयो ¡पमक Cित मनीष अपन माय आ बिहनकS िचढ़बैत बाजैत छलाह िक माय ई ¡पम जादूगरनी छौ। तोरो सभपर जादू ने कऽ दौ से संभिर कऽ रिहयै। जादूक च¾रमे निह पिड़ जइयैह। ई कहैत सभ िकयो हसै लगैत दल। एिह तरहS ¡पम सभक िदल जीित नेने छल। एिह Cकारे सभक िदन खुशी पूव<क िवतय लागल। आब ¡पमक ननदक िवयाहक चच… होमय लागल। िपंकीक शादी एकटा सं»ाbत पिरवारमे ठीक भेल। दुलहा कोनो नीक पदपर पद6थािपत छलाह। िपंकीक शदीमे ¡पमक भूिमका बिढ़या रहल। राधा देवी ¡पमकS अपना गलासँ लगबैत बजलीह जे बेटी भगवानक घरमे पूव< जbममे नीक कम< कयने छलहु जािह कारणे अहॉं सन पुतहु भेटल। ईlर सभकS एहेने बहु देिथbह। एतबे कहलासँ ¡पमकS होइत छलैbह जे हमरा पूरा सÁाªय भेट गेल आ सासुक पैर घुिब ¡पम बाजैत छलीह जे माय अहॉं सन सासु सभ बहुकS भेटै से हम भगवानसँ Cाथ<ना करैत छी। िपंकीक िवदाईक समय ¡पम बहुत कानल आ ओकरा आशÂवाद देलक िक भवान करै जे तोरो सासु एहेने होतहुन। िपंकीक िवयाहक वाद ¡पमकS मन निह लागय लगलैक तँ िदनमे कैक बेर फोनसँ हाल-चाल पुछैत रहैत छलीह। शु¡-शु¡मे तँ सभ िकछु ठीक ठŽक रहल। शु¡मे िपंकी सासु, ननद आ पिरवारक सभ सद6यक तारीफ करैत रहैत छल। िकछु िमनक वाद जखन ¡पम, िपंकीसँ बात करिथ तँ िपंकीक नजिरया बदलल देखलक। िपंकी ससुरालक सभ सद6यक िशकायत करैत रहल। िपंकीक माय यानी ¡पमक ससु िपंकीकS मोबाइलपर फुटानी वाला बात िसखबैत रहैत छलीह। जािहसँ ओकर 6वभाव िवगिर गेल छल। पिरवारमे एक दोसरासँ ताल मेल, सामज6य निह रहल। पिरवारमे धीरे-धीरे कलहक पदाप<ण भय पिरवार टूिट गेल। ¡पम जखन िपंकीसँ स£वाद करिथ तँ िपंकी भाषा िवगरले जकॉं बुझाइन। िपंकी वाजिथ- “भाभी, सभ अहॴ जकॉं निह भय सकैत अिछ।” िपंकी घमंडी भय गेलीह। ओकरा हािकमक घरवाली होयवाक घमंड छल। ¡पम अपन माय वाली बात निसयत िपंकीकS कहैत छल- “िपंकी, खुशी वॉंटलासँ दुगुना होइत छैक आ थोरेक याग कयलासँ बहुकS पूरे घरपर राज भय जाइत छैक। तँ अहॉं एिह मूल मंKसँ पिरवारकS एक कय चलू।”

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मुदा िपंकीक माय ओकरा पृथक-पृथक ढंगसँ घर फुटयवाक मंK दैत छलिथbह तँ ओकर िपंकीक िनयतमे खोट आिव गेल छल। तS घर नरक बिन गेल छलैक। एक िदन ¡पम चाह लय सासु राधा देवीकS देबाक हेतु आिक रहल छलीह। जेना बुझना गेलैbह जे सासु मॉं फोनसँ ग´प कय रहल अिछ। ¡पम दरवाजाक ओरमे ठाढ़ भय सभ बात सुनय लगलीह। शायद सासुकS िपंकीसँ बात भय रहल छल। राधा देवी अपना बेटी िपंकीकS िसखबैत छलीह जे तॲ अपन सासुकS वाहर घुमयवाक हेतु निह लऽ जैहे। जखन तू आ जमाय बाबू एक साथ रिह एक-दोसराकS समझ। ननिद आिक सासुकS ने अपना संग कतौ लय जो आ ने ओकरा अपना संग बैसा कऽ खाइक लेल दही। तोहर भाभी तँ सुधगर मिहला छौक ओकरा सन निह बनबाक Cयास किरहS। ¡पम चाहक ²े लय मने-मन सोचैत छली जे हमर सासु हमरा बेवकूफ आ सुधगर बुझैत अिछ। ¡पम चाहक ²ेसँ चाह सासु-मॉं कS दैत बाजिल- “िकनकासँ ग´प करैत छलिखbह?” राधा िमरिमराइत बाजिल- “िपंकीसँ।” ¡पम अपन सासुक िकरदानी देख नेने छल।सॉंझू पहर जखन ¡पमक घरवला मनीषजी घर पर अयलाह, तखन सभ बात हुनका कहलिथbह। दुनू Cाणी िवचार कयलैbह जे रिव िदन िपंकीक घर जाकय सभ पिरवारकS िमला-जुला िदयैक आ सासु-मॉंकS सेहो सभझा बुझा िदयैक। राधाकS मनीष बहुत बुझौलक आ ओकरा अपना गलतीक एहसास करौलक। रिव िदन ¡पम आ मनीष िपंकीक घरपर पहुँचल। मनीष ¡पमक नसीहत कS दोहरावैत िपंकीकS समझौलक जे खुशी बॉंटलासँ दुगुना होइत छैक आ कनेक याग कयलासँ पूरे पिरवारपर राज भय जाइत छैक। एिह िस­ाbतपर चलबाक निसहत दय िपरवारक सभ सद6यकS िमला देलैbह। सभक बीच जे दू बोला छल से समा´त करा पुन: शामे िपंकी कS अपन मायक नसीहतक पालन करबाक आ¿ह करैत घर आिब गेल।

२ डॉ. बचेlर झाक २ टा आलेख डॉ. बचेlर झाक दूटा आलेख

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५६ म अंक १५ अग᭭त २०१८ (वषᭅ ११ मास १२८ अंक २५६ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 9

एकैसम शता‘दीक Cारंभ जनवृि­मे भारत Cथम आ चीन दोसर Cाय: कहल जाइत अिछ जे ‘बहुलोका: दोषा:’ भारतक िवशाल जनसंÄया आ एकर लगातार वृि­क गित एक समÅूा बिन सभसँ भयावह आ िव6फोटक िस­ भेल अिछ। जतए भारतक हेतु सव<माbय िसर दद< एवम् गहॴर िचbतनक िवषय बिन गेल अिछ, ओतए इएह सम6या भारतमे गरीबी, वेरोजगारी, कुपोषण संगिह भूिम िवखvडन एवम् अपखvडनक सम6याकS िदनानुिदन अित शोचनीय ि6थितमे पहुँचा देलक अिछ। एतबे निह, भारत जनािध—यक सीमापर आिब गेल अिछ। ई जनािधकय पिछला दू दशा‘दीक आिथ<क िवकासक सुखद CयासकS पकािर देलक अिछ। गरीबी आ बेकारीक सम6या एकरे Æारा प›लिवत भऽ रहल अिछ। खेदक संग कहए पड़ैत अिछ जे एक ओर तँ भारी जनसंÄया हमरा सभक गरीबीकS बढ़ा रहल अिछ तँ दोसर ओर गरीबी सेहो जनसंÄयामे वृि­ कऽ रहल अिछ। जोसेफ डी. का6²ो अपन Cिस­ पोथी ‘Geognaphy of hunger’ मे चीन, जापान आ भारतक उदाहरण C6तुत करैत एहन िवचार Cगट कएल अिछ। 1981 क जनगणनाक अनुसार भारतक जन संÄया अड़सिठ करोड़कS पार कऽ गेल अिछ। जािहमे आसाम, ज£मू एवम् कžमीरक जनसंÄया शािमल निह अिछ। एक करोड़ चािलस लाख मानबक वृि­ Cित वष< भारतमे भऽ रहल अिछ। देखल जाइछ जे आ6²ेिलयाक IेKफल भारतक IेKफलसँ दोबरसँ अिधक अिछ। एखन तक भारत चीनक बाद संसारमे सव…िधक जनसंÄयाबला देश अिछ। संसारक कुलजन संÄयाक 15 Cितशत भाग भारतमे रहैत अिछ। जखन संसारक कुल IेKफलक अढ़ाइ Cितशत भू-भाग माK एकरा Cा´त छैक। तS जॱ भारतक ई जन संÄया अपन व‹<मान अढ़ाइ Cितशतक दरसँ बढ़ैत गेल तँ वॴसवी शता‘दीक अbत तक एक अरबक जनसंÄयाकS छूिब लेत। सन् 1831 इ6वीक बादसँ भारतक जन संÄयामे जे वृि­ आरंभ भेल अिछ ओकर गितकS देखैत भारतक आजादीक बाद 6वतंK भारतक आिथ<क िवकासक योजनामे सत<कता बरतल गेल। इएह कारण भेल जे सन् 1952 ई.मे पिरवार िनयोजन नीितकS सरकारी काय<µमक ¡पमे अपनाओल गेल आ िवlक पिहल देश छल जे अपन आिथ<क िवकासक योजनामे पिरवार िनयोजनकS 6थान देलक। एकर बावजूदो एिह काय<- µमक Cित उदासी देखल गेल जे क¸Cद िवषय िथक। य^िप Cथम आ िÆतीय पंचवषÂय योजनामे पiच करोड़ पÉसिठ लाख टाकाक Æारा एकर संगठन कएल गेल जािहमे शोध, संचार एवम् केbc आ राªय सरकारक अbतग<त िचिकसा सेवा Cदान करैत राखल गेल। समय-समयपर जनगणना देशमे भेलासँ सरकार आ समाजकS जगाओलक। तS तेजीसँ एिह ओर Cयास चलल। गभ< िनरोधक Cचार-Cसार शु¡ भेल। तेसर योजनामे 25 करोड़क लागत आयल। एिह तरहS बीचक तीन वािष<क योजनामे पिरवार िनयोजनकS‘King fin of the plan’ मानल गेल। संगिह काय<µमकS Cय…´त रािश Æारा Time bound एवम् Target oriented क ¡पमे अपनाओल गेल। भारतक चतुथ< योजनामे बहुत अिधक Cाथिमकता देल गेल। एिह काय<µमपर 315 करोड़ टाका खच< कएल गेल तथािप bयून सफलता भेटल। पiचमी योजना 516 करोड़ टाकाक आवंटन कऽ जbम दरकS 35-

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30 Cित हजार कम करबाक ल¬य राखल गेल जेकरा हेतु वb®याकरण हेतु C6तुत भेल नर-नारीकS तकरा चbc िक6मक Cलोभन देल गेल। एतए तक जे छठवॴ सातवॴ योजनामे तँ »ूण हया गभ<-पात आिदक वैध करार कऽ देल गेल। जइसँ जनसंÄयाक वृि­मे Ìास आबए। सन् 1974 ई.मे िवl जनसंÄया िनयंKण स£मेलन ¡मािनयॉंक राजधानी बुखारे6टमे भेल। भारतक ताकालीन पिरवार िनयोजन मंKी डॉ. कण< िसंह ओिह स£मेलनमे बाजल छलाह जे िवlक गरीबी तखने दूर होयत जखन िवlक जनसंÄयामे कमी आओत। भारतमे जनसंÄयाकS िनयंिKत करबाक संक›पकS दोहरबैत 6व: Cधान मंKी इिbदरा गiधीक बीस-सूKी काय<µमकS पिरवार िनयोजनपर िवशेष जोर देल गेल। पiचम योजनामे Minimum needs programme क अbतग<त 6वा6Íय, पिरवार िनयोजन एवम् पौि¸क आहारकS एक संग िवकिसत करबाक Cयास कएल गेल। एिह समेिकत योजना Æारा बाल-मृयुकS कम कऽ संगिह माताकS 6वा6थ बनाकए कम ब“चा उप– करबाक Cवृि‹कS जगाओल गेल। सरकार Æारा सव³‹म गभ<-िनरोधक दवाइकS उपल‘ध करएबाक Cयास जारी राखल गेल अिछ। एतबे निह, कमसँ कम मू›यपर हरेक ठाम गभ< िनरोध उपल‘ध करेबाक {यव6था कएल गेल अिछ। गरीब देशमे एिह काय<-µमक अbतग<त वb®याकरणक हेतु आिथ<क Cलोभन सेहो देल जाय रहल अिछ। जनसंÄया वृि­मे 80 Cितशत देहातक योगदान रहैछ। जकरा हेतु रेिडयो, िसनेमा, टेलीिवजन आिद Æारा Cचार-Cसारसँ देहाती नर-नारीकS िनयोजन करएबाक हेतु अbमूख कएल गेल अिछ। ऐं ई 6वीकार निह काएल जा सकैछ। जे भारतमे पिरवार-िनयोजन काय<-µम पूण< ¡पेण असफल रहल, मुदा एतेक Cय·क बावजूदो जनसंÄयाक वृि­ िदनानुिदन चौगु–ा होइत जाए रहल अिछ तS लऽ कऽ ई कहल जाए रहल अिछ जे अणु िव6फोट ओतेक खतरनाक निह जतेक जनसंÄयाक वृि­ िव6फोट भऽ सकैछ। आइ जनसंÄयाक वृि­मे संसारक सा£यवादी देश चीन अपन जनसंÄयाकS िनयोिजत करबामे कमाल हािसल कएलक अिछ। हमरो सभकS एिहसँ Cेरणा लेबाक चाही। 1953 ई.मे चीन अपन िवकासक अिभ– अंगक ¡पमे पिरवार-िनयोजन लागू कएलक। एिह काय<-µमक अbतग<त देरसँ िववाह, ब“चाक जन£मे अbतराल संगिह अिbतम ¡पसँ दू ब“चाक ल¬य जन तÎिKक अिधकार कायम कऽ देलक। एतए तक जे िववाहक संगिह Contraceptative क Cयोग करबाक Cेरणा देल गेल। तेतबे निह, मुÏतमे Contraceptives क िवतरण करा कए जनसंÄयामे Ìास आनबाक महती Cयास कएलक अिछ। नव िववािहत द£पितक हेतु अिनवाय< िनयम लागू कएने अिछ जे Contraceptives क Cयोग ओ लोकिन करए। एतबे निह, बूढ़-बुढ़ानुस Æरा सामािजक सभामे युवक युवतीक ®यान एकर लाभक ओर आकृ¸ करोओल जाइछ। ई काय<-µम चीनमे {यि—तकS छोट पिरवार राखक ओर सराहनीय काय< कएलक अिछ। छोट पिरवारक CवृितकS जगेबामे सरकारक Æारा उठाओल गेल कानूनी Cयास कम महवपूण< निह अिछ। पिस­ अथ< शा6Kी J.Myrdalसेहो Asian drama मे चीनमे सरकार Æारा एिह IेKमे उठाओल गेल कानूनी Cयासक चच… कएलिbह अिछ। जकरा हेतु सरकार एक Grash family planning programme अपनौलक अिछ तािक 2000 ई. तक ¡सक

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समान जनवृि­ शूbय Cितशत तक लाओल जाय सकैछ। आब ओिहठाम दू ब“चाक बदलामे एक ब“चाबला पिरवारक {यि—तकS वेतनमे वृि­ आवासीय सुिवधा, संगिह प™शन आिदमे सुिवधाक Cलोभन देल अिछ। दोसर ओर एक ब“चाक बादसँ वेतनमे आंिशक दरसँ कटौती तथा अbय सुिवधासँ वंिचत कऽ देबाक िनयम लागू कऽ देल गेल छैक। एिह तरहS चीन अपन जनसंÄयाक वृि­ गितमे 1975 ई.मे 25 Cितशत Cित हजारसँ 1979 ई.मे 18 Cितशत q

पु6तक समीIा साकेतानbदक ‘गण-नायक’ Cाचीन पर£पराक अनु¡प सािहयक ...... IेKमे कथाक रचना अवाध् ¡पसँ भऽ रहल अिछ। हष<क िवषय अिछ जे मानव मोनक िचरसंपोिषत अिभलाषा आइ सािहयक अनुभूित आ िववेचनक ¡पमे फलीभूत भऽ रहल अिछ। मैिथलीमे लघुकथाक िवकास जतेक तीवÐगितसँ भेलैक तािहमे लघुकथाकS लोक िCय बनेबाक pेय 6व. हिरमोहन झाकS छिbह। आधुिनक सािहयक सव<तोभावेन गुण स£प–ता भारतीय अbय कोनो भाषा सािहयक समकIताकS मैिथलीक कथा Cा´त करैछ। कथा, समय काल िसिमत पिरवेशक दृि¸ए क¸ सा®य अिछ तँ संगिह महवपूण< यथेQ। इएह एक एहन िवधा अिछ जे िदन-Cित-िदन Cगितक ओर अ¿सर, गितशील आ उ­<मुख अिछ। ‘गणनायक’क कथाकार साकेतानbदजी िवलIण Cितभा पु ष छिथ जे अपन सार6वत साधनासँ िहbदी आ मैिथली सािहयमे अIय कीित<, अशेष गौरव आ िन6सी अथ<व‹ासँ pीमंत कएलिbह अिछ। िविभ– पK- पिKका सभमे Cकािशत रचना सभकS कलािवद्, समीIक आ िवचारक िनल…ज भावसँ सराहलिbह अिछ। िवÆान, कथा मम<Ž सभ िहनक कथाकS सािहयक pेQ उपलि‘ध मािन कऽ खुलेआम 6वीकृतमे अिवचल हाथ उठाकए सािहय अकादेमी Æारा पुर6कृत भेलापर सो›लास समथ<न कएलिbह अिछ। ‘गणनायक’क कथा मानव जीवनक िवसंगितक ठोस धरातलपर ठाढ़ अिछ। कथाकारक मूल चेतना, Cगितशील आ िवचारो‹ेजक अिछ। युग सापेI आ लोक जीवनक एहन शा6वत िचK अिछ जे सािहयमे अिव6मरणीय तँ रहबे करत संगिह भावी पीिढ़क हेतु Cितक ओर उनमुख होएबामे आममंथन करक हेतु िववश करैत रहत। समीIक लोकिनक दृि¸मे कथा जे हो मुदा हमरा दृि¸मे कथा सुग िचKकS अपना ‘अलबम’मे समेिट कऽ चिल रहल अिछ। जे आबएबला युगक ओर ऑंगुर उठाकए संकेत सेहो करत। हम पबैत छी लेखकक भावना एच.जी वे›सक भावनासँ अनुCािणत अिछ। ओना तँ ‘गणनायक’क कथानक

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सेहो जनजीवनक एक गोट नव पIकS समI अनलक अिछ। धरातलपर गित लएबाक हेतु ग^िहक मंद-चंचल चरण चलबए पड़ैछ। तS उपयोिगताक दृि¸सँ ई ग^क युग कहबैछ। कथा कहबाक सुनबाक Cवृि‹ लोकक रागामक स£बbध समानाbतर चलैत आिब रहल अिछ, तS कथाकS Cागैितहािसक कालसँ pृंखलाब­ करबाक Cयास कएल जाइत रहल अिछ। 6प¸त: कथा आदश<वादक खvडहरसँ बहार भऽ यथाथ<क खिड़हान िदस बिढ़ रहल अिछ। सव…िधक महवपूण< रचना ‘गणनायक’मे वेरोजगारी, आिथ<क िवप–ता, शोषण, चोर बाजारी, दमनामक Cवृि‹ एवम् नोकरशाहीक यथाथ< िचKण अिछ। मुÄयत: िशिIत वग<क मोह भंगएवम् ओकर िनरीहता आ पीउ़ासँ जुड़ल संघष<क कथा कहैत अिछ। कामाÄया ओिहसँ Cबल संघष< करैत एक 6वािभमानी युवक अिछ। एिहठामक लेखक कामाÄयाकS ‘उपµम’ कथा केर मुÄय पावक ¡पमे उपि6थत कऽ आदश< 6थािपत कएलिन अिछ, िकएक तँ िवप–ताक पीड़ा झेलैत ओ कालक चारण निह बनैत अिछ। एिह कथामे जीवनक स£मानजनक संक›प अिछ। ‘आलुक िवमा’कथामे Cशासन तंKक िवकरालताक दु6साहिसक Cितरोध कृषक Cितिनिध जय मंगल, रामशरण आ रहमतु›ला Æारा देखल गेल अिछ। एतबे निह, Cदश<नपर उता¡ आµोिशत कृषक आ कृषक Cितिनिधपर पुिलस Æारा लाठी गोली तक चलाओल जाइछ, जािहसँ कृषक CितिनिधकS जानसँ हाथ धोमए पड़ैछ। कथामे CजातंKक माखौल, Kुिटपूण< {यव6थाक िज£मेवार पदािधकारीक िवषद िवण<न करबामे लेखक िनिभ<क एवम् िन6संकोच देखल गेलाह अिछ। ‘कचोट’ कथामे जीवनक न½न सय Cितभािसत होइछ। जकर मुÄय पाK बौआ झा छिथ। जॱ एिह कथामे एकओर भारतीय स£मताक िनम<म हया भेल अिछ तँ दोसर ओर मोनीक अ{य—त Cेमक पीड़ा पाठककS 6पिbछत करैत अिछ। ‘एक डेग आगू’ कथामे सामbतवादीक खूनी पंजासँ धाइल रामजीक कु¡प िचKण अिछ। सामbती सbतापसँ सbतरत जवान बेटी गुलिबयाक ठानल िववाह निह कऽ कज…सँ मु—त होएबाक Cयास ओकर अि¿म सोचकS समI अनलक अिछ। ई कथा पाठककS अितसंवेदनशील बनबैत अिछ। ‘पकड़ िवयाह’कथामे सम सामियक िवcुप सं6कृितक सबाक िचKण अिछ। अभाव¿6त मैिथलक पुKी उÁक सीमा टिप कए अिभभावककS िवचार शूbय बना दैछ जकर कारण दहेज Cथाक िवक›प ¡पमे ‘पकड़ िवयाह’शु¡ए भेल अिछ। कथाकार कथामे धड़फरा कऽ रोचक आ भाव Cधान होइतहुँ सम6याक समाधानक हेतु अ›पकालीन, असौकय< गुझना जाइछ। कथाक परायणसँ कथा अध बिटयेमे पाठककS छोिड़ दैछ जािहसँ पूण< तृि´त निह होइछ। अिगला कथा ‘आब भेटने की’मे नारीक संवेदनाक सbत´त ¡प भौितक सुखक िनरसता, Cेम, 6नेह, दया, सहानुभूितसँ िर—त मम…bतक पीड़ाक अिभ{यि—त अिछ। ई एकटा सरल सहज रोमÎिटक कथा अिछ जे बड़ रोचक शैलीमे आगi बढ़ैत अिछ। आ अbतमे आिब सम¿ ¡पमे एकटा िवलIण Cभाव छोिड़ जाइत अिछ। ........ भव Cवvता एवम् मधुबर िवbयास एिह रोमÎिटक कथाक िविश¸ गुण अिछ। लेखक एिह कथामे मiजल मनोिवžलेषक Cतीत होइत छिथ। ‘िKवेणी समाहार’सामािजक बोधसँ जुड़ल कथा अिछ। कथाक मुÄय पाK िभखारी साहु स£पूण< कथामे चिच<त भेल छिथ। अथक Cयास, pमसा®य जीवन,साहस आ समयसँ जुझैत िनध<न लोक पूण< धनवान होइत

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अिछ, ओकर स£प–तासँ सीिदत गामक डाही दु¸ पंचैती करिनहार रामेlार बाबूआ िशवजी िसंह अपन Cपंचक चपेटमे आिन िभखारीक समटल आ समृ­ पिरवारकS कहलपूण< बना दैत देखल जाइत छिथ। तेसर सा£यवादक दोहाइ देिनहार दिरc फूल झा िभखारीक दोहन गाहे-वगाहे करैत कथामे देखल जाइछ। ई कथा एकिह संग अनेक िवषय व6तु, {यि—त आ तस£बbधी घटनाक व6तुत: समाहार बुझाएल मुदा मुÄय तीन पिरि6थित आ पिरवेशक िदशा बोध करबैत अिछ। कथा अपना-आपमे िवड़ल अिछ। िवसंगित आ समाजक छÒकS उघािर कऽ पाठकक समI रािख दैछ। ‘मचकल खुÓा’लोकोि—तक आधार लए िलखल गेल कथा अिछ। खास कऽ अनमेल िववाहक कारणS उप– पिरि6थितक बोध कथा अिछ। मचकल खुÓासँ तापय< अिछ कमजोर पितसँ। कथाकारक कमाल जॱ- जॱ आगi बढ़ैत अिछ पाठककS कौतुहलपूण< बनबैत रहैछ। कथा मुÄय पाKक ¡पमे कजरैलावाली गोिर-नािर सुडौल, सुनमनी आ ता¡णक तेजसँ Iीिजत मुÄयमvडलवाली छिथ, जिनक िववाह दूबर-पातर, कारी खेड़नाठ आ झiमर मुँह संगिह िवकृत बगेवािन रेलक खलासीसँ होइत कथामे देखाओल गेल अिछ। नपुंसक पितक कारणS तेरह वष< धिर दागल सiढ िन:सbतान कजरैलावाली लोकक बीच बiझी कहबए लगैछ। जखन बद…6त निह भेलैक तँ दाबल मोन िवक›पक ओर आकृ¸ भेलै। जिहना पािन पिनबट ढूिढ लैछ तिहना बगलक पड़ोसी पाचो मनगर, बलगर,सुडौल सुbदर युवक भेिट गेलासँ रमबामे भiगठ निह भेलै। कथाक रोचकता आरो बढ़ैत अिछ जखन कजरैलावाली एक सुbदर बालकक जbम दऽ अपना संग पितक दोषसँ मु—त होइछ। एिह तरहS कथामे देखल जाइछ जे एक दोषसँ मु—त होइत अिछ तँ लोकापचार आ कुचच…क आब स^: भाजन बनैत अिछ। खुजल मुँहकS ओ बbद कऽ निह सकैत छल िकएक तँ ओकर खुÓा मचकल रहै। अिbतम िन¶कष<पर पहुँचैत पाठक आकष<णक कारणS अचाएल रहैछ। हृदयपर 6थायी Cभावक अनुभव करैछ। ‘गणनायक’अिbतम कथा िचbतनीय, रोचक, समयानुकूल बदलैत राजनीितक पिरदृžयक सटीक िचKण अिछ। एिह कथाक मुÄय पाK नरेबाबू सामbती गुण¿ाही छिथ। चुनावमे छल-बल-कलसँ जीतैत छिथ। वएह एकर गणनायक िथकाह। अपन आधार सीढ़ी छीतन दासकS िबसिर जाइत छिथ। छीतन दास हिरजनक माइनजन (मुिखया) अपन हािनयÔकS ताकपर रािख िहनका चुनावमे एड़ी-चोटी एक कऽ दैत अिछ, चािर कÕा जमीनक Kासदीक कारणS ओ िड›ली अ–जल तेिज कोनहुना जाइत अिछ। ओतए िव6फािरत आँिखसँ नरेबाबूकS ढूिढ़ िहनका राजकीय आवासपर पहुँचैत अिछ, दुलभ< भSट जखन होइत छैक तँ सुख-सुbदरीक अठखेल कएिनहार, नरेबाबू छीतन दासक {यथाकS सुनबाक बदला डॉंट-फटकारसँ नकािर कऽ दैत छिथ। एिह तरहS कथामे छीतन दासक अवहेलना हैब, अनभुआर, अनपढ़ मैिथल छीतन दासक िद›लीसँ आपसीक गुंजाइश कथामे निह हैब पाठककS संदेहक सीमामे बाbहैत अिछ। कथा िशIाCद संग-संग वत<मान समयक गणनायकक रंग बदलैत चिरKक Cvट िचK कथा िथक। सम6त कथाक परायणसँ सु6प¸ Cतीत होइछ जे समाजवाद, सा£यवाद वत<मानकालीन सÎ6कृितक पिरवेश, राजनैितक संरचना आिथ<क पिरि6थितक ठोस धरातलपर आधािरत एहन शा6वत भावनासँ जनमानसकS अवगत करौलिbह अिछ जे संजीिवनी बुिट बिनकए Cगितशील सािहयकारक हेतु आदश< उपि6थत करैत अिछ।

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िहनका रचनामे यथाथ<वाद निह अिपतु यथाथ< अिछ। िहनक पाK का›पिनक भऽ सकैए, मुदा क›पनाशीलताक कायामे कटुजीभ लगाओल गेल अिछ तथािप µािbतकारी आ यथाथ<मयी छिbह। संगिह संग व‹<मान समयक चोट, बढ़ैत सÖयताक रंग, जमानाक µुर थापड़ आ सम¿ जीवनक कटु-मधु अनुभवकS िववेकक तराजूपर तौिल कऽ उकेरल गेल अिछ। भाषाक सहजता, िश›पगत वैिश¶×य िहनक कथाक अपन फराक पहचान बना दैत अिछ। कथाक कलामकता पाठकक अbत6थलकS छुिब लैत अिछ। िमिथला मैिथलक मानदvडकS नव-नव सौवण Cितभासँ मढ़बाक महनीय गुण साकेतानbदजीमे पाओल जाइछ। िन¶पI भावS 6वीकार करए पड़ैछ जे शvय-žयामल सधन आ¿हुज लोक कलाक आव<जक स£पदासँ संरिIत कोसी, कमला, गvडकी आ वागमतीक पावन जलसँ अिभिसंिचत एवम् िविभ– वन स£पदासँ आ“छािदत िमिथला भूिम जतेक pीस£प– रहल अिछ, Cितभाक दृि¸ए सेहो एिह IेKक Cित6पध कतहु होअए से अनुपम जकर साकेतानbदजी CयI Cमाण 6व¡प छिथ। अपन Cितभाक Cकाश िव6तृत कऽ Cाचीन कथाकारसँ सव<था िभ– कथाक रचना कएल अिछ। भाव, भाषा, संवेदनशीलता आ स£Cेषणीयताक संग भाव सं¿हण अिभ{यि—तक दृि¸सँ यथाथ<कS कथा व6तुसँ जोड़बाक दु6साहस कथा कलाकS नव आयाम देलक अिछ। कथा कमÂक हेतु एक आदश<क उप6थापना िथक। साकेतानbद जीक रचनाक एिह िविश¸ताक आकलन C6तुत करब सला®य निह अिपतु तÍयकथन अिछ। एकिह श‘दमे िहनका शला®य तँ अनाआसे उपल‘ध भेल छिन। तथा6तु।। q

ऐ रचनापर अपन मंत{य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रबीbc नारायण िम p- तीनटा आलेख , दूटा लघुकथा आ उपbयास नम6त6यै (आगi)

रबीbc नारायण िमp रबीbc नारायण िमpक तीिनटा आलेख-

गया गेल रही

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बहुत िदन सँ माएक बारंबार सपना अबैत रहैत छल। एिह सपना सभक रह6य निह बुझा रहल छल। तथािप मोनमे भेलजे गया चली, िपणडदानक बड़ महव सुनैत छी। ओिहठामिपणडदान केला पर िपतरसभ मु—त भए जाइत छिथ।मु—त भेल िपतरसभ अपन वंशजक™ आशीव…द दैत छिथ जािहसँ सभकक›याण होइत अिछ।पंिडतजीसँ ग´प कए गया जेबाक िदन तकौलहुँ।िवचार िवमष<क बाद फरबरीक अbतमे, २५ फरबरीकS जेबाक काय<µम बनल, आपसी २८ फरबरीक।ितन मास पूब¼ रेल िटकटक आरIण करौलहुँ। µमशः गया जेबाक समय लगीच आिब रहल छल।िचbता रहए जे कोना की करी।कखनो काल होइत जे एखन 6थिगतकए दी।फेर भेल जे जखन काय<µम बना लेने छी तँ ई काज कइए लेल जाए।पिvडतजीसँ परामश< कए चीज-व6तुक ओिरआनमे लािग गेलहुँ।मुदा सभसँ िचbता छल पणडासभसँ कोना िनपटल जाएत? सुनैतरही जे ओिहठाम टीशनेपरसँ पणडाक आदमीसभ घेर-बार शु  कए दैत अिछ।गयामे रहबाक िचंता सेहो होइत छल।संयोगसँ ओिह िदन हमर िमK िमसरजी भेिट गेलाह।ओ पिहने गया िपंडदान हेतु गेल रहिथ।हुनकर पिरिचत पंडा आ एकटा महापाKजीक फोन नंबर भेटल।ओ अपनो 6तरसँ पंडाजीसँ एवम् महापाKजीसँ ग´प कए हमर काज ह›लुक कए देलाह। महापाKजीसँ ग´प भेल तँ सभसँ पिहने ओ कहलाह जे िदन उपयु—त निह अिछ, िपतृपIक समय फगुआक बाद हेतैक, तकरबाद कोनो िदनक िटकट लए सुिचत क ।हम कहिलअिन जे हम तँ चािर माससँ िदन तकओने छी। “के िदन तकलाह अिछ?हमरा ग´प कराउ।” आब िक करी? िदन तकिनहार पंिडतजीिवÆान छिथ, समय दए िदन तकलिथ, तािह िहसाबे िटकट लेने छी।आब जखन जेबाक समय लगीच आिब गेल तँ दोसरे बात सुिन रहल छी।पंिडतजीसँ फेर ग´प कए सभ बात कहिलअिन।ओ अपन िनण<य पर दृढ़ छलाह, िदन सही अिछ, महापाK की कहताह।हमरा हुनकर बातमे दम बुजाएल। ओ िनŸय सही िदन तकने हेताह। महापाKजीकS फोन कए कहिलअिन जे हमर काय<µम तय अिछ, िदन सही छैक, अपने ओिह िदनक िहसाबसँ उपल{ध भए सकब िक निह से कहू।असलमे हुनका पिहने सँ िकछु काज गछल रहिन, ओ ई अवसर सेहो निह जाए देवए चाहिथ।जखन बुझा गेलिन जे हम अपन काय<µम पर अिड़ गेल छी, तँ ओ तैयार भए गेलाह।कहलाह जे हुनका २६ फरबरीक उपनायन करेबाक छिन, त™ २६क राितमे गयेमे रहताह आ सभटा काज नीकसँ करा देताह।कहलाह : “िचbता निह क । सभटा भए जेतैक।” ओ समान सभक सूची िलखा देलाह। ओिह सूचीमे ततेक तरहक अंट-बंट सभ चीज-ब6तुक नाम छलजे एकÕा करबबहुत किठनबूझाएल। तैँसमानसभ आनबाक भार हुनके दए हम िनिŸbतभेलहुँ। समान सभक वािजब दाम देबाक आlासन हम देिलहिन। ओ सहष< तािह हेतु तैयार भए गेलाह। तकरबाद हम अपन तैयारीक अनुसार िबदा भए गेलहुँ।ओिहसँ पिहने महापाKजी कैबेर फोन कए आl6त होइत रहलाह जे हमर काय<µम प¾ा अिछ, ओिहमे कोनो पिरवत<न निह भेल अिछ, जे िनिŸत ितिथक हमसभ ओतए पहुँिच रहल छी, जे हुनकासँ भोरे भSट होएत। गयासँ पंडाजीक सेहो फोन आएल।ओ हमर काय<µमक बारेमे आl6त होमए चाहैत छलाह।हम कतए ठहरब सेहो जानए चाहैत छलाह।इहो कहलाह जे रहबाक {यव6था हुनकेओिहठम भए सकैत अिछ।मुदा जखन ओ एिह बातसँ आl6त भए गेलाहजे हम हुनकेसँ संपक< करब तखन िनिŸbत भएगेलाह। संगिह कहलाह जे टीशनपर पहुँचते हुनकासँ संपक< कएल जाएत जािहसँ कोनो आओर पंडाक आदमी तंग निह करत आओर हुनकर आदमी ओतिहसँ हमरा होटल लएआनत।हम अपन रहबाक {यव6था होटलमे केने रही।तािह हेतु पिहनिहसँ आनलाइन आरIण करओने रही।हम पंडाजी ओिहठामनिह रहए चाहैत रही कारण ओतएपताने केहन की होएत, से मोनमे शंका रहए।

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२५ फरबरी २०१८क सiझमे भुवनेlर राजधानीसँ हम आ हमर pीमतीजी गया िवदा भेलहुँ। ओिहसँ पूव< होटलमे फोनकए सूचना दए देल जे हमसभ भोरे पiच बजे होटल पहुँचब।तदनुकूल हमरा सभलेल {यव6था कएल जाए।र6ता भिर खाइत-िपबैत हमसभ याKाक आनंbद लैत रहलहुँ।सासारामक लगमे ²ेन छलैक िक एकटा सहयाKी िचिचआ उटलाह जे गया आबयबला अिछ।कैटा याKी हुनक डाक सुिन उिठ कए समान लए गेट पर आिब गेलाह।राितक समय छलैक, —यो जोिखम निह उठाबए चाहए, कारण गयामे ²ेन चािर बािज कए बीसिमनटपर पहुँचक छल, आ जौँ राित मे सुतागेल, सुतले रिह गेलहुँ, तहन तँ गेल मिहंस पािनमे परड़ु समेत।एिह च¾रमे चािर-पiचबेर गेट धिर गेलहुँ आ आपस सीट पर अएलहुँ। अbततोगवा लगभगएक घंटा बाद ²ेन गया टीशनपर पहुँचल। हम सभ भोरे गया टीशनपर पहुँच गेल रही।होटल ¿Éड पैलेस िटशनसँ सटले छल।ततबे लग रहैक जे टीशनपर होइत उÙोषणा होटलमे सुनाइत छल।होटलमे पहुँिच हमरा लोकिन थोरेकाल िवpाम कएल।िनयµमसँ िनवृत भए बैसले छलहुँिक पंडाजीक फोन आएल।होटलक पता पुछलाह।थोरे कालक बाद ओ होटल पहुँिच हमरसभक हाल-चाल लेलाह, आ सभ तरहे िनिŸंत रहबाक हेतु कहलाह।महापाKजीकेराितमे अएबाक काय<µम रहिन। महापाKजी बारंबार फोनपर कहैतरहलाह जे एकभु—त कए लेब।केस कटा लेब।हमसभ समान लए राितए पहुँच जाएब।काि˜सँ िपvडदान होएत। ओिहिदन, माने २६ फरबरीक उपयोग हमरा लोकिन वोधगया देखएमे केलहुँ।गयासँ बोधगया जेबाक हेतु टे£पू 200 टाकामे भेटल।गयासँ बोधगयाक दूरी करीब-करीब १३ िकलोमीटर अिछ।र6ताक हालत ख6ता अिछ।लगबे निह करत जे अbतर…¶²ीय महवक तीथ<6थान जा रहल छी। गया शहरक हाल मधुबनी, दिड़भंगे जकi अिछ।नाला सभ नक<क Cित¡प भेल, वातावरण दुग<ंधसँ भरल।होइतजे कतए आिब गेलहुँ।करीब आधाघंटामे टे£पु बोधगया मिbदर लग पहुँच गेल।किनके काल पैरे चिल हमसभ मिbदर लग बनल मालखानामे पहुँच गेलहुँ।ओिहठाम मोबाइल फोन सभ जमा करब अिनवाय<, कारण सेसभ लए मिbदरक अbदर निह जा सकैत छी।मोबाइल फोन जमा कए हमसभ किनके आगू बढ़लहुँिक एकटा टे£पूबला सॱसे बोधगया घूमाबक C6ताव देलक, २०० टाकामे। हमसभ मािन गेलहुँ आ ओिह टे£पूसँ आस-पासक वोध मिbदरसभ देखए िनकललहुँ। भूटान, ित‘बत, चीन, बम…, pीलंका, िवयतनाम, थाइलÉड, जापान, थाइलैvड आिद अनेको देश, बु­क अनुयायी संगठन सभ अपन-अपन बु­क मठ बनओने छिथ।ओिहमे भ{य बु­क Cितमा 6थािपतअिछ। कैटामिbदर तँ अयंत शोभनीय िथक।मुदा बाहर ढाकक तीन पात।सड़क सभ खvडहर भए रहल अिछ।लगबे निह करत जे एतेकCमुख 6थानमे घुिम रहल छी। आŸय<क बात जे एतेक महवक 6थानक एहन उपेIा भेल अिछ? टे£पोबला काते-काते सभठाम घुमा-िफरा हमरासभकS महाबोिध मिbदर लग उतािर देलक।मोबाइल पिहने जमा कए देने रिहऐक, तS फोटो निह खीिच सकलहुँ। महाबोिध मिbदरमे जाइत काल हाथक बैगक जiच भेल।ओिहमे चाज<र, हेडफोन छलैक।कतबो कहिलऐक जे ओकरासबकS रहए दैक, मुदा निह मानलक, गेट पर असबारिसपाही अिड़ गेल।हािरकए दोबारा ई ब6तुसभ जमा करए गेलहुँ।तकरबादे मिbदरक पिरसरमे Cवेश भए सकलहुँ।मिbदरक मुहथर लग एक गोटा नवका दसटकही, बीसटकही, नोटसभक गÚडी बेसी पैसा लए कए िवदेशी सभके दैत देखलहुँ।आगा बढ़ला पर िवदेशी तीथ<याKी सभक भरमार देखाएल। आगbतुक वौ­सभक हेतु Cसाद िभIापाKमे देबाक ओिरआन भए रहल छल।अbदर मिbदरमे ठाम-ठाम िवदेशी वौ­सभ ®यान कए रहल छलाह।मिbदरमे अपूव< शािbत छल। एकटा गोर-नार िवदेशी मिहला सूतल वा ®यान6थ छलीह।लगैत छल जेना कोनो मु¡त पड़ल अिछ। गभ<गृहमे अपार शािbत छल।अगल-बगलमेवौ­सभ माला फेिर रहल छलाह। ओिहठाम दश<नकए हमसभ आपस आिब गेलहुँ।मोबाइल छोड़ौलहुँ।फेर टे£पो पकड़लहुँ, आ आपस गया टीशन लग ि6थत होटलमे आिब गेलहुँ। Cातःकाल िनयकम<सँ िनवृत भए महापाKजीकS फोनलगाओल।हमरा उमीद चल जे ओ राितएमे आिब कए पंडाजी ओतए ठहरल हेताह, जेनािक पिहने कहने रहिथ।मुदा ओ तँ ²ेनेमे छलाह।

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“जहनाबाद पहुँिच गेल छी।²ेन लेट भए गेलैक, निह तँ पहुँिच गेल रिहतहुँ।दू घंटामे आिब जाएब।िचंता निह करब।हम सभ समान लए कए आिब रहल छी।” महापाKजीकS िवलंब होइत देिख दू-ितनबेर फोन केिलअिन। ओ तँ ²ेनमे बैसल रहिथ, बेर-बेर कहिथ: “आब लगे अिछ।सभटा भए जेतैक।िचंता निह करब। दू िदनमे सभटा काज भए जेतैक।” आिखर ओ दूटा झोरामे समान सभ लए ९ बजे सोझे हमर होटल पहुँच गेलाह।मोन आl6त भेल जे आब काज भए जाएत। िनयकम<सँ िनवृतभए महापाKजी हमरासभक संगे पंडाजीक ओतए िबदा भेलाह।पंडाजीक ओतए हेतु टे£पु कएल। सड़कपर उतिर पiच िमनट पैरे चललाक बाद हुनकर घर आएल।मधुबनी, दिड़भंगा िजलाक लोकसभक इएह पंडा छिथ, से ओ कहलाह।िनसान झंडापर माछक, दिड़भंगा महराजक देल।गलीक एक तरफ पुरना घर छैक, जे दिड़भंगा महाराज बनओने रहिथ। तकर ठीक सामने नव प¾ा घर बनल अिछ, जािह मे याKी लोकिनक ठहरबाक इंतजाम अिछ।नीकसँ बनल ओ सुिवधापूण< कोठरीसभ अिछ।से देिख भेल जे एतहुँ रिह सकैत छलहुँ।मुदा मुÄय र6तासँ बहुत चलए पड़ैत छैक, फेर ओही वातावरणमे िदन-राित रहू।होटलमे चिल गेलाक बाद एकटा नवीनताक अनुभव होइत छल। सभसँ पिहने पंडाजीसँ आŽा लेल गेल।तािह हेतु हुनकर पैर पूजल जाइत अिछ।िकछु संक›प कएल जाइत अिछ, जे एतेक ने एतेक दान, दिIणा करब।तखन ओ आशीव…द दैत काज करबाक 6वीकृित दैत छिथ।हमसभ आगा बढ़ैत छी।पंडाजी बएसमे हमरासँ बहुत छोट छलाह, तS कनी कोनादिन लागल।बादमे महापाKजीकS ई ग´प कहिलअिन।कहलाह जे एिहठामक अिधकारी इएह िथकाह, िहनके चलत, आिद, आिद। पंडाजीसँ आŽा लए हमरा लोकिन फ›गु नदीक कछारपर पहुँचैत छी।ओतए छोटसन महादवक मिbदर छल।सामनेमे खािल 6थानदेिख कम< शु  भेल।िपvडदानहेतु हमर pीमतीजी गोल- गोल िपvड बनौलिथजतेक पुरखासभ Žात, अŽात मोन पड़ैत गेलाह सभकS लेल िपvडदान देलहुँ।जतेक काल हम िपvडदान करैत रहलहुँ ततेक काल एकटा बुिढ़या आ दूटा छौड़ा िमिल ओतए ह›ला करैत रहल।ओकरा लेल धिन-सन।ततेक ह›ला करैत गेल जे मंKो सूनब पराभव रहैत छल।महापाKजी कहलाह : “अिहसबपर ®यान निह िदऔक, काजमे लागल रहू।ई सभ एहीठामक वासी छैक।” िपvडदानक बाद िपvडकS फ›गु नदीमे पािन देिख कए फेखबाक हेतु हमर pीमतीजी आगु बढ़लीह।कहल गेलिन जे फ›गु नदी मे चलल एक-एक डेग आlमेध यŽक बरोबिर होइत आिछ।फ›गु नदी तँ रेतसँ भरल अिछ।किह निह एकरा नदी िकएक कहल जा रहल अिछ।कोनो समयमे भए सकैत अिछ ई नदी रहल होएत, मुदा आब तँ िनÕाह रेतसँ भरल अिछ।बहुत आगुगेलाक बाद किनक पािन छल जे बालुमे खिधआ कए िनकलल छल, ओतिह िपvड फेिक ओ लौिट गेलीह।अगल-बगल ठाढ़ छौड़ासभ आओर ओ बुिढ़आ पैसा मÎगए लागल आ जाबत लेलक निह चु´प निह भेल।महापाKजी आपना छोिर ककरो पैसा देल जाए तािह हेतु तैयार निह छलाह, मुदा कोनो उपाय निह छल, ओकरा सभके िकछु, िकछु दए जान छोरा हमसभ ओतएसँ आगु बिढ़ सकलहुँ। ओिहठामसँ आगा जएबाक हेतु भिरिदनक बा6ते २५० टाकामे एकटा टे£पू महापाKजी ठीक केलाह।टे£पूबला बेस जोिसला आदमी छल।बीच-बीचमे बेस मनोरंजक मुcा बनाए तरह-तरहक ग´प-स´प करैत बढ़ैत रहल।कनीकालमे हमसभ Cेतिशला पर आिब गेल रही।ओतए पिहने घाटपर िपvडदान भेल। ओिहसँ सटल पोखिर कही, ताल कही, जे कही, छल जे नक<क दोसर ¡प लगैत छल।ओिहमेसँ जललए िपvडदानहोएत से सोिचएक रÔआ ठाढ़ भए गेल।खैर! जे करबाक छल से छल।ओिहमे सँ जल आनल गेल।कतेको गोटे आस-पास िपvडदान करैत छलाह।हुनका 6थानीय लोकसभ पैसा लेल कोनो कम< बiकी निह रखने छल।पाई निह देबै आ िपvडदान करब, भए निह सकैत अिछ।हमसभ जखनओतए िपvडदानकए लेलहुँ

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तँ एकटा बेस मजगूतगर, कारी भुसुंड लोक आिब पैसा देबाक आ¿ह करए लागल जे महापाKजीकS पिस– निह रहिन।ओिहबातसँ ओ {यि—त महापाKजीकS गिरआबएलागल, बात बढ़ए लागल, महापाKजी सेहो िकछु कहलिखन। ओहो चु´प निह रहल। महापाKजीक गÓा धेलक आ गरजए लागलः “आब तूँ अिबअह झाजी! अिगलाबेर सँ टपए निह देबह।आिद, आिद।” बातिबगड़ैत देिख हमसभ ज›दीसँ ओकरा एकसए टाका दए जान छोड़ौलहुँ।हमसभ तँ पिहनेसँ ओकरा पैसा देबए हेतु मोन बनओने रही, कारण ओकरा दोसर सभक संगेफसादकरैत हम देखैत रही मुदा महापाKजी रोकैत रहलाह, तकर फलो ओ भोगलाह। कनी-मनी ध¾ा-मु¾ी तँ भेबे केलिन। ओहो पाछा निह रहल रहिथ। तकरबाद हम सभ Cेत िशला िदस बढ़लहुँ। चािरसए सीढ़ी चढ़ए पड़त, तािह हेतु पालकी सेहो उपल{धछल।दोसर िवक›प छल जे बीस सीढ़ीक बाद एकटा छोटसन 6थान छल।ओतए महादेवक मिbदर सेहो बनल छल।ओतए कैगोटा िपvडदान करैत छल।महापाKजीक सलाहपर हमसभ दोसर िवक›प चुिन ओतिहँ िपvडदान करबाक िनण<य कएल।जगह साफ चल।बैसबाक हेतु आसनी सेहो भेिट गेल।ओिहठामक पvडाजी सरल{यि—त बुझेलाह।चैनसँ िपvडदान भेल।किनके हिटकए एकटा पिरवारकS हवन करैत देखलहुँ।महापाKजी कहलाह जे ओिह मिहलाकS Cेतबाधासँ मुि—त िदआबक हेतु होम भए रहल छल़। िपvडकS फेकबाक हेतु तए6थानपर पिहने सँ एकटा बंगाली अधबएसू लोक अपन बेटाक अकाल मृयुक बाद ओकर फोटोके ओतए रािख िकछु- िकछु कए रहल छलाह।पvडाजी दूसए टाका देबाक आ¿ह पर अड़ल छलाह, जेकर बाद ओिह मृत{यि—तकS Cेतयोिनसँ मुि—त भए जएतेक।ओ अपन गरीबीक बारंबार हबाला दैत एकसए टाकासँ आगा निह बढ़ रहल छलाह,अbतमे डेढ़सए टाकामे बात तए बेल।मंK पिढ़ ओिह फोटो पर फूल चढ़ौलिथ।कतेक µूड़ छल ओ दृžय, की कहू? तकर बादे हमसभ ओतए िपvड रखलहुँ। टाका दए ज›दीए ओतएसँ खसकलहुँ।लगेमे पीपड़क गाछक जड़मे बहुत रास मृत {यि—तसभक फोटो टÎगल छल।महापाKजी िचकरलाहः “ज›दी िबना पाछा तकने आगा िनकिल जाउ।” सएह कएल।Cेतिशलासँ उतिर हमरा लोकिन नीचामे भोजनालयमे बैसलहुँ।महापाKजीकS भूख लािग गेल छलिन।ओ भोजन करताह।हमसभ राबरी खाएब। सभगोटे चाह पीब।सेसभ िबचािर हमसभ ओतए बैसलहुँ।महापाKजी भिरपोख भोजन केलाह, फेर पावभिर खोआ सेहो देलिखन।हमहुँसभ खोआ खेबामे पाछा निह रहलहुँ, कारण भूख जोर मािर रहल छल।भोजन तँ निह कए सकैत छलहुँ कारण अखन आओर ठाम िपvडदान देबाक छल।महापाKजीके गया महा£यपर एकटा पोथी िकनबाक हेतु एकटा ब“चा कतेक गोहरओलक, मुदा ओ निह मानिथ।हािरकए ओ एकसएसँ दाम घटबैत-घतबैत बीसटका पर आिन देलक, तैओ ओ अपन बातपर अड़ल रहिथ। “धुर<, ई की लेब, बेकार िथक।” अbतमे हमरे दया आिब गेल आ हुनकासँ नुकाकए बीसटकामे गया महा£य कीिन लेलहुँ। भोजन किरतिहँ महापाKजीकS फुत आिब गेल।हमसभ तुरंत टे£पूसँ रामिशलाक हेतु िवदा भए गेलहुँ। पिहने रामिशला घाटपर आ तकरबाद उपरमे बनल मिbदरमे िपvडदान भेल।तालाबक हालत पर निहए चच< करी सएह नीक।उपर मिbदरपर किनके चढ़लाक बाद िपvडदेबाक 6थान भेिट गेल आ ओतिहँ िपbडदान देल गेल। एकरबाद काकबिलकS िपvड दैत हमसभ गोटे टीशन रोड ि6थत होटल पहुँच गेलहुँ।महापाKजी संगमे छलाह।ओ जे समानसभ अनने रहिथ तकेर गोट-गोटक दाम जोिड़ दए हुनकासँ ओिह िदनक हेतु छुÓी लेल।ओ पंडाजी ओिहठाम रहए हेतु

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चिल गेलाह।काि˜ अbतमे ÝाÞण भोजन हेतु पंडाजीकS कहिलअिन।कहलजाइत अिछजे गयामे एकटा ÝाÞण भोजन करेलापर एक हजारक फल होइत आिछ।हम एगारहटाÝाÞण भोजनक {यव6ता करबाक भार हुनका देलहुँ, तकर खच… Cात भेने हम हुनका देिलअिन। Cेतिशला लगकहोटलमे जे खोआ खेने रही, से डेरा अएलाक बाद रंग देखबए लागल।ताबरतोर पेट झड़ए लागल।संगमे दबाइ छल, से खेलहुँ।कहुनाक मामला स£हरल।िदनभिरक धमाचौकड़ीक बाद आब आराम ज¡री छल, से कएल। Cातभेने हमसभ िव¶णुपाद मिbदर िवदा भेलहुँ। महापाKजी ओतए पिहने पहुँिच गेल रहिथ। “पिहने घाटपर िपvड पड़त, तकर बादे िव¶णुपाद मिbदरमे” महापाKजी बजलाह।हमसभ ओतए पहुँचलहुँ। पोखिरक कातमे बैिस िपvडदानक काज शु  भेल।एक-दूटा युवक ओतए ठाढ़ रहिथ।जहन पोखिरमे िपvड फेिक हमसभ जेबाक हेतु उठलहुँ िक ओ तीन गोटे भए गेल रहिथ आ पैसाक मÎग भेल। “ओकरा सभकS िकछु निह देबाक छैक” महापाKजी कहैत रहलाह।से सुिन ओ सभ हुनका गिरआबए लागल, मािर करए पर उता¡ भए गेल।महापाKजी सेहो गरमाए लगलाह।तावत एकटा —यो 6थानीय {यि—त अएलाह।ओ हमरासभकS ओतएसँ घसकबामे मदित केलाह।ओ युवकसभ महापाKकS गािढ़ पढ़ैत रहल। तकरबाद पैरे-पैरे हमसभ िव¶णुपाद मिbदर पहुँचलहुँ।ओतए बेस गहमा-गहमी छल।बड़काटा मिbदर, ततबे पैघ ओकर Cागण।िनचा उतरब तँ बालुसँ भड़ल फ›गु नदी।बालुए-बालुए हमसभ फ›गु नदीकS टिप गेलहुँ।ओकर दोसर छोड़पर सीताकुंड िथक।कहबी छैक जे भगवान राम अपन िपता दसरथके िपंडदान हेतु ओतिह आएल रहिथ।िपvडदानक चीज-व6तुक ओिरआओन हेतु गेल रहिथ िक सीताजी मंKपिढ़ दसरथकS बजा लेलिखन।सीताजी की किरतिथ? कहलिखन जे राम तँ िपvडदानक चीज-व6तुक ओिरआओन हेतु गेल छिथ।मुदा दसरथ कहलिखन जे आबतँ हम आिब गेल छी।तखन सीताजी 6वयं बालुएसँ िपvडदान केलीह।ओिहठाम सीताजीक नाम पर छोटसन मिbदर अिछ जािहमे दसरथक हाथ बनल अिछ।फ›गु नदीमे ओिहठाम कैगोटे िपvडदानकरैत रहिथ।ओतए दूटा पंिडतमे दिIणा हेतु झगड़ा होइत रहलिन।हमसभ िपvडदानमे लागल रहलहुँ।महापाKजी हमर pीमतीजीकS चीज-व6तु, गहना, टाका दान करबाक हेतु Cिरत केलाह।से सबयथासा®य भेलिन।हुनकर कहबाक िहसाबे हमसभ समान सभ लए गेल रही।िपbडदानक बाद उपर मिbदरमे दश<नकए, िपvड चढ़ाए हमसभ फेर बालुए- बालुए िव¶णुपाद मिbदर लग पहुँच गेलहुँ। फ›गु नदीमे पािन निह अिछ।मुदा जँतीन-चािर हाथ गहीँर कएल जाए तँ पािन भेिट जाइत छैक।तेहन कूप दू-तीन ठाम बनाओल देखाएल।यK-तK लोकसभ िपvडदान करैत छलाह।उपर अएलाक बाद महापाKजीकS चाहक तलब अएलिन।चाह आनए हमसभ उपर गेलहुँ।ताबते एकटा मुद…के “राम नाम सय है” कहैत लोकसभ ओिहठाम रखलक।िकछु िवध-िवधान सभ केलक।तकरबाद ओकरा अिbतम सं6कार हेतु फ›गुक कछारपर लएगेल। हमसभ चाह िपबैत ई सभ देखैत रहलहुँ।तकरबाद एक कप चाह महापाKजीक हेतु अनलहुँ।चाह पीिव ओ टनगर भेलाह।हमसभ आगाक काज हेतु िव¶णुपाद मिbदरमे पहुँचलहुँ। िव¶णुपाद मिbदरमे देशक िविभ– भागसँ तीथ<याKीसभ आएल रहिथ।करीब पचास गोटे तँ आंß Cदेशक रहिथ।ओिहना बहुत रास वंगालीसभ सेहो देखेलाह।सभ गोटे िपvडदानमे लागल रहिथ। 6थानीय पंडा जोर-सोरसँ मंK पढ़बएमे लागल रहिथ। आंßासँ आएल तीथ<याKीसभ बहुत अनुशािसत रहिथ।मिbदरमे ओकर Æार पर ठाढ़भए बड़ीकाल हुनकासभके मिbदरक पंडाजी मंK पढ़बैत रहलिन, ओसभ पढ़ैत रहलाह।तकरबाद सभ दस-दस टका दैत गेलाहआ पंडाजी बेरा-बेरी सभकS मिbदरमे

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Cवेश करबैत रहलाह।िबना टाका देने ए¾ो गोटे अbदर निह जा सकैत छल।ओ मिbदरक मुहथर छेकने ठाढ़ छलाह।ओिहठाम ततेक ह›ला होइत रहल जे हमरा महापाKजीक कहल मंKसभ सुनबामे आ सुिन बजबामे बहुत िद¾ितहोइत रहलकहुना-कहुना कए िपvडदान समा´त भेल। “मिbदर बंद भए जाएत, ज›दी क¡।” महापाKजी बारंबार चेताविथ।हमसभ धरफराइतमिbदरक गभ<गृहमे पहुँचलहुँ।मिbदरक गभ<गृहमे बहुत लोक छल।अbदर जाएब, आ मुित<लग जाएब पराभव छल।कहुना कए ठेलमठेला करैत ओतए पहुँचलहुँ।ओिहठाम एकटा पंडाजी पिहनेसँ एकगोटेसँ पैसा लए झंझट कए रहल छलाह।ओकरासँ जखन बात फिरछाएल तखन हमरा पर ®यान गेलिन।ओ पॴड चढ़एबाक हमर Cयासपर हुंकार भरैत महापाKपर िबगड़लाह। “एतए तोहर निह चलतह।ई हमर जगह अिछ।” ओ पैसा तए करए चाहैत छलाह, महापाK िकछु मामुली रकमदेबाक हेतु कहैत छलाह।एिह बातसँ ओ बहुत तामसमे छलाह िक कोनो दोसर जजमानक फोन आिब गेल, ओ एकदमसँ फोन करैत बाहरभगलाह, कारण ओिहठाम ततेक ह›ला होइत रहैक जे िकछु निह सुनाइ पिड़ रहल छल।बाहर मिbदरक गेटपर ओ ग´प करैत रहलाह आ हमसभ िपंड चढ़ाए ओतएसँ, हुनका सामनेसँ, िनकिल गेलहुँ। हुनका िकछु निह हाथ लागल। ओिहठामसँ हमसभ दिIणाि½नपद पहुँचलहुँ।ओतए िपंडदान दए हमसभ वैतरणी पहुँचलहुँ।ओिहठामक पोखिर आने पोखिरसभ जेना नक< लगैत छल।ओतहुँ ओिहना िपंडदान भेल। सभसँ अbतमे िपंडदान भेल अIयवटपर। अIयबटपरबेस पैघ बरक गाछ अिछ।ओिह गाछक जिड़मे बहुतरास लालडोरा, पीअर कपड़ा, सभक गSठी कएल अिछ।ओिह गाछक छाहिरमे हम िपvडदान केलहुँ।िपvडकS गाछक जिड़मे फेिक ओिहठामसँ िबदा भेलहु।पंडाजीके पिहने फोनकए देने रिहअिन जे आब हमसभ घंटाभिरमे पहुँिचरहल छी।ओिहठामसँ हमसभ मंगला भगवतीक दश<न कएल।मंगला भगवतीक दश<नकए बाहर िनकलल रही की बहुत रास भीखमंगासभ पैसा मÎगए लागल।हम िकछु दसटिकआ िनकािल देबए लगिलऐक।एतबेमे िभखमंगाक पथार लािग गेल।एक डेग आगा बढ़ब मोसिकल भए रहल छल।किनक आगा बढी आ जोरसँ िकछु टाका फेिक िदऐक जािहसँ फेर किनक आगा बढी। बहुत मोसिकलसँ टे£पूधिर पहुँच सकलहुँ। तैओ ओ सभ घेरने छल।फेर जुमाकए िकछु दसटकही एिह िहसाबसँ फेकलहुँ जािहसँ टाका लुझबाक च¾रमे ओसभ कनी फटकी होमए आ टे£पू आगा बिढ़ सकए।टे£पू आगा बढ़ैत अिछ, तथािप िकछुव“चा बहुत दूर धिर पछोड़ धेने अिछ : “बाबा!हमरा िकछु निह भेल।” फेर िकछु टाका िनकालैत छी, ओकरासभकS िकछु- िकछु कए दैत िछऐक।ताबे टे£पूबला आगा बिढ़ गेल। तकरबाद ठोकले पंडाजीक ओतए पहुँचलहुँ।भिरिदन मंK पढैत, पढैत मुँहमे सपटी लगैत छल।भूख से लािग गेल छल।मुदा अखन एकटा महवपूण< Cकरण बiचल छल।तकरा पुरा करबाक हेतु हमसभ पंडाजीक ओतए पहुँिच गेल रही। पंडाजीक ओतए पहुँचैत छी।ओिहठाम पिहनेसँ सभटा इंतजाम भेल अिछ।सªजादानक हेतु सभटा ब6तु एकटा कोठरीमे राखल अिछ।पंडाजी अपने एिह काजक हेतु अबैत छिथ।हम पिहने गछल टाका देबाक ग´प दोहरबैत छी।तकरबाद सªजा दान कएल गेल।एिहठाम एकटा ग´प कहब ज री बुझा रहल अिछ जे सभ समानकS एकिहबेरमेमंK पिढ़ दान कए देल गेल।pा­मे एक-एक ब6तुक हेतु अलग-अलग मंK पढ़ाओल जाइत छल।ओ बहुत pमसा®य एवम् उबाउ तरीका छल।सªजा दानकबाद पंडाजी कहलाह जे गयामे एकटा Ýाहमण आनठामक एक हजारक बरोबिर फलदायी होइत अिछ, से कहू कतेक Ýाहमणक भोजन हेतु दान करब।एकटा Ýाहमण हेतु यथोिचत टाका अलगसँ गछिलअिन।अbतमे फूलक मालासँ हमर दुनू {यि—तक हाथ बाbहैत कहलाह जे एकर तोड़ाइ हेतु िकछु अलगसँ किहऔक, सेहो गछिलऐक, तखने ओिहठामक िवधसभ पूरा

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भेल।हुनका Cणाम कए चैनसँ बैसलहुँ।पvडाजीक ओिहठाम आगbतुकसभक बहुत नीकसँ िहसाब राखल जाइत अिछ।सभक नाम-गाम, पता, गया अएबाक ितिथ िलखल जाइत अिछ।गाम-गामक अलग-अलग पृQ अिछ।हमरा गाम पिछला सए सालमे गया गेिनहारक सूची ओ देखेलाह।बहुत नीक लागल। ओिहमे अपन गामक कतेको गोटेक नाम देखल।ई अपना-आपमे एकटा इितहास छल। ताबत Ýाहमणसभ आिब गेल छलाह।पंडाजी कहलाह जे संयोग नीक अिछजे एगारहटा Ýाहमण पुिर गेल अbयथा एिहठाम से किठन रहैत अिछ।भोजनक साम¿ी तैयार छल।भिरपोख Ýाहमणसभ भोजन केलाह।तकरबाद सभ गोटेकS िकछुकए दिIणा देल गेल।एिह Cकारे गयामे िपणडदानक काय<µम िविधवत संप– भेल। पंडाजी के गछल टाका देलहुँ।Ýाहमण भोजनमे भेल खच…क िहसाब भेल, से गोट- गोट कए चुकता केलहुँ।महापाKजीकS दिIणा देलहुँ।हुनकर आपसीक हेतु याKा {यय अलगसँ देलहुँ। ओसभ Cश– देखेलाह। मोनमे एकटा बरका संतोख भेल।मूलतः माताक 6वग<वाससँ {याकुल हृदयकS किन शािbत भेटल।Cेतिशलापर जखन तरह-तरहसँ मातृ ऋणसँ उिरनहेबाक हेतु िपvडदानदेल जाइत छलतँ कानबाक मोन भए रहल छल।की कोनो िपvडदानसँ माताक ऋणसँ उिरन भए सकैत छी? निह भए सकैत छी।तथािप ई अपन धम<क िवधान छैक।गयामे िपणडदानसँ पूव<जक आमा मु—त भए जाइत छिथ।एिह िवlास ओ p­ासँ हम ओतए गेल रही आ दू िदन धिर ठाम- ठाम घुिम-घुिम िपvडदान करैत रहलहुँ।Cाथ<ना करैत रहलहुँ जे माता सिहत हमर सभ पूव<जक आमाकS मुि—त होिन। अपन धम<मे आ6था रखिनहार िवl भिरसँ लोकसभ एतए िपvडदान करए अबैत छिथ।मुदा ओिहठामक {यव6था खासकए पोखिरसभक खा6ता हाल देिख कए िनराशा होइत छैक।अbतर…¶²ीय महवक एिह 6थानकउिचत देख-भाल निह भए रहल अिछ।ओहुसँ िचbताक बात िथक सबठाम पैसाक वच<6व।जे से पैसाक खाितर तंग करैत अिछ।शु सँ अbतधिर ई सम6या बनल रहल।एकर की समाधान होएत? एतबा ज¡री लगैत अिछ जे शािbतपूण< महौलमे लोक p­ापूव<क अपन पूव<जक आराधना कए सकिथ, से {यव6था होइक।मुदा िबलािड़क गरामे घvटी बाbहत के?? q

िबधवा िवआह

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समाजक माbयता, िविध-िवधान एवम् लोक {यवहार समय साIेप अिछ। जे बात-िवचार पचास सय साल पिहने अिनवाय< चलैत छल से आइ-काि˜ जँ लोक करए तँ ह6या6पद भए जाएत। पिहने बाल िवआह आम बात छल। बेटीकS जनिमते जँ माए-बापकS कथुक िचbता होइक तँ ओकर िवआहक। कहुना कए िवआह भए जाइक आ माए-बाप गंगा नहा लेिथ। सोचल जा सकैत अिछ जे समाजमे बेटीक ि6थित कतेक दयनीय छल..! ई बात सभ जनैत छिथ जे 6Kीक िबना पु ष कतएसँ आएत। जे आइ ककरो बेटी छैक सैह काि˜ ककरो 6Kी, ककरो माए बनतै। तथिप लोकमे अखनहुँ बेटाक Cित मोह कम निह भए रहल अिछ। पिहने कतेको गोटा बेटाक च¾रमे आठ-नौ सbतान कए लैत छलाह। िलंग आधािरत एिह भेद-भावकS कम करबाक िकंवा जिड़सँ दु 6त करबाक िनरbतर Cयास होइत रहल। एक समय छल जखन पितकS मरलाक बाद ओकर प·ीकS ओकरे संगे जरा देल जाइत छल िकंवा वो 6वयं जिर जाइत छल। समाज ओकरा सतीक ¡पमे मिहमा मिvडत करैत छल। ओकर िचतापर सती मिbदर बना देल जाइत छल। सोचल जा सकैत अिछ जे वो कतेक µूड़ Cथा छल। एकटा 6व6थ जीबbत {यि—तकS जरा कए एिह लेल मािर देल जाइत छल वा वो 6वयं मिर जाइत छल जे ओकर पितक देहावसान भए गेल, जािह लेल वो कोनो Cकारसँ दोषी निह छल। मरनाइ, िजनाइ ककरो हाथमे निह छैक। ई एकटा संयोग होइत अिछ मुदा तकर एतेक दुखद् पिरणाम होइत छल से सोिचयो कए रॲआ ठाढ़ भए जाइत अिछ। एकटा िवदेशी पय<टक जखन अपन देश घुमैत रहिथ तँ संयोगसँ žमशान घाटपर एकटा मुद…कS लए जाइत देखलिथ। मुद… संगे ओकर प·ी िचकरैत-भोकरैत žमशान धिर संगे गेल। लोक सभ तमासा देखैत रहल आर वो पितक लहासक संगे जारिनसँ लािद देल गेल। जोर-जोरसँ ढोल बजा-बजा कीत<न करए लागल जािहमे ओिह जीिवत मिहलाक क¡ण µंदन दिब कए गुम रिह गेलैक आ थोड़बेकालमे ओहो पितक लहासक संगे छाउर भए गेल। (ई सÉकड़ो साल पूव<क िथक एवम् एकर वण<न Beyond the seas–माइकल एच. फीसर Æारा स£पािदत–पु6तकमे अिछ) एिह तरहक घटना ओिह समयमे आम बात छल। 6Kीगण सभ अपन िनयित बुिझ एकरा 6वीकार करैत छलीह। Cिस­ समाज सुधारक राजाराम मोहन रायक एिहपर ®यान गेल आ वो िÝिटश सरकारसँ गोहार कए एिह सामािजक कु ितकS बbद करौलाह। समाजमे िवधवाक ि6थित बेटीक ि6थितसँ जुड़ल अिछ। जँ बेटी पढ़तै, िलखतै, बेटा जकi ओकरो अवसर भेटतै तँ ओहो ककरोसँ पाछा निह रहत। आइ-काि˜ एिहमे िकछु पिरवत<न भेल अिछ। लोक बेटीकS 6कूल-कालेज पठा रहल अिछ। डा—टर, इिbजनीयर, अफसर सभ िकछु बेटीओ बिन रहल अिछ। कानूनमे पिरबत<न भेल अिछ। पैिKक स£पि‹मे बेटा ओ बेटीक हक बरोबिर भए गेल अिछ। घरेलू िहंसा कानूनक तहक कोनो मिहलाकS शारीिरक, मानिसक यातना निह देल जा सकैत अिछ। दहेज लेब देब गैर कानूनी भए गेल अिछ। C« ई उठैत अिछ जे एतेक रास कानूनसँ लैस भारतीय मिहला की सभ तरहS अिधकार स£प–, सुरिIत ओ CितिQापूण< जीवन-यापन करबाक ि6थितमे आिब गेल छिथ? ई सोिचये कए कलम ठाढ़ भए जाइत अिछ। समाजमे बेटीक ि6थितमे सुधार मूलत: शहरी IेK धिर सीिमत अिछ। गाम-घरक हाल मोटा-मोटी ओहने अिछ। अपना ओिहठाम िशIाक 6तर तेहन गड़बड़ायल अिछ जे जँ —यो 6कूल-कालेज जाइतो छिथ, िकंवा िड¿ीओ हािसल कए लैत छिथ तैयो हुनका कोनो रोजगार भेिट सकत से संदेहा6पद। जँ आिथ<क िनभ<रता बनल रहत, स£पि‹क अिधकार माK कानूनक िकताबे तक सीिमत रिह गेल तँ बेटी कोना बढ़त? जािह समाजमे बेटीकS िशIाक समान अवसर भेटल, पैिKक स£पि‹मे अिधकार भेटल ओिहठामक मिहला िनिŸत ¡पसँ सभ तरह™ आगा भए गेलीह। एिहमे केरल राªयक चच… कएल जा सकैत अिछ। पुरना समयमे (आ िकछु हद तक अखनहुँ) िवधवा होइते जेना ओकरापर िवपि‹क पहाड़ टुिट जाइत छल। तकालीन समाजक सम6त माbयता, िबध, {यवहार ओकरा

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५६ म अंक १५ अग᭭त २०१८ (वषᭅ ११ मास १२८ अंक २५६ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 23

अपमािनते निह करैत छल, अिपतु अशुभ बुझैत छल। केस कटा िलअ, नीक- नीकुत खाउ निह, साधारण कपड़ा पिह¡, उपास-पर-उपास करैत रहू। तेतबे निह, कोनो शुभकाजमे आगा निह रहू। आिखर ओकर की दोष रहैक जकर दंड ओकरा समाज दैत छलैक? लगैत अिछ, समाजक पुरोधा सभ असुरIा भावसँ ततेक ¿6त रहिथ जे हुनका आगा-पाछा िकछु आओर सोचेबे निह करिन। कतेको ठाम तँ नविलग िबधवा भए जाइत छिल आ आजीवन धोर क¸ एवम् िवपि‹मे जीवन-यापन करैत छलीह। गरीबी, सामािजक Cताड़नासँ तंग भए कतेको िबधवा गाम-घर छोिड़ वृbदावन िकंवा आन-आन तीथ< शरण धए लैत छलीह। अखनो हजारोक संÄयामे वृbदावनमे िबधवा सभ पड़ल छिथ। भारतक उ“चतम bयायालय हुनका सभक ि6थितपर िवचार केने छल। सुलभ इbटरनेशनल Æारा हुनका सभ लेल िकछु क›याणकारी योजना सभ सुनबामे आएल छल। मुदा ई सभ ऊँटक मुँहमे जीरक फोरन िथक। ज¡री तँ ई अिछ जे सम6याक जिड़मे जाए ओकरा समूल न¸ कएल जाए। आिखर पु ष िबधुर भेलापर िवआह करैत छिथ की निह? तिहना मिहलोकS ई अिधकार समाज 6वीकृत हेबाक चाही। य^िप यK, तK सव<K मिहला सश—तीकरणक चच< होइत रहैत अिछ, तथािप {यवहािरकतामे संकट अिछए। जँ दुभ…½यवश —यो िबधवा भए जाइत छिथ तँ अखनो हुनका नाना Cकारक यातना, सामािजक Cताड़ना भोगए पड़ैछ। अ6तु, ई िवचारणीय िथक जे िबधवा लोकिनक ि6थितमे गुणामक सुधार हेतु हुनकर पुनिव<वाहक {यव6था हो। एिहमे सभसँ बाधक िवआहसँ जुड़ल खच… एवम् जातीय 6वािभमान अिछ। मुदा ई िवचारणीय C« िथक जे समाजक कोनो {यव6था जँ एक िनद³ष जीवनकS क¸मय केने रहैत अिछ तँ ओकरामे संशोधन िकएक निह हेबाक चाही? ओना, कतेको जाितमे िबधवा िवआह पिहनिहसँ चलनमे अिछ। कतेको मिहला एिहसँ एकटा नूतन जीवन जीबाक अवसर Cा´त करैत छिथ। मुदा िकछु जाित िवशेषमे अखनो एकरा पािरवािरक CितQासँ जोिड़ कए देखल जाइत अिछ। आिखर, ओ CितQाक जे गित होइत अिछ, तािहपर चच…क आवžयकता निह अिछ। एहन िबधवा जकरा सbतानो निह छैक, एकरा {यथ< िनQाक नामपर लगातार क¸ सहैत रहए, जीवनक सम6त सुख, स£पदासँ वंिचत रहए से कहi तक जायज अिछ? कतेको समाजमे ई {यव6था अिछ जे िबधवाकS ओही पिरवारक अिववािहत भाए िकंवा सम{य6क स£बbधीसँ िवआह कए देल जाइत अिछ। िनिŸत ¡पसँ वो सभ बेसी {यवहािरक एवम् वुिधआर लोक छिथ। मुदा जँ सेहो स£भव निह होइक तखन तँ पिरवारक वय6क सद6यकS आगा आिब ओिह मिहलाक जीवनमे पुन: 6थािपत करबामे सहयोग करिथ आ सुयो½य,सही {यि—तसँ िवआह करबामे सहयोग करिथ। जँ िबधवाकS सbतान छैक तखन पुनिव<वाहसँ िद¾ित भए सकैत छैक मुदा एहनो पिरि6थितमे ओिह ब“चा सभक संगे िबधवाकS 6वीकार करब सव³‹म समाधान भए सकैत अिछ। हम एकबेर यूरोप गेल रही तँ हमर सभक वाहन चालक अपन पिरवारक चच… करैत कहए लगलाह जे हुनकर 6Kीक ई दोसर िवआह छिन। पिहल िवआहसँ दूटा सbतान छिन। हुनकासँ िववादक बाद एकटा सbतान छिन। एवम् Cकारेण वो तीनटा सbतानक िपता छिथ आ सभक भरण-पोषण सहष< एवम् समाbय ¡पसँ करैत छिथ। िवदेशमे ई आम बात अिछ। ओिहठाम िवआह िव“छेद जिहना होइत अिछ तिहना पुनिव<वाह सेहो भए जाइत अिछ। फेर अिधकÎश मिहला पु ष ओिह ि6थित हेतु तैयारो एिह मानेमे रहैत छिथ जे आिथ<क िनभ<रता सामाbयत: निह रहैत अिछ। ईहो बुझय जोगर ग´प अिछ जे ओकर सभक समाजक मू›य अिछ जे ओकर सभक समाजक एवम् पािरवािरक संरचना अलग अिछ। अपन भारतीय मू›यक रIा करैत एवम् पिरवारक संरचनाकS कोनो तरह™ िबना दुबर केने िवशेष पिरि6थितमे सामािजक सामंज6यक {यब6था ज¡री अिछ जािहसँ संयोगवश जँ —यो िबधवा भए जाइत अिछ तँ हुनका तरह- तरहक क¸सँ बचाऔल जा सकए आ हुनक भावी जीवनकS सुखद कएल जा सकए।

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ओना अपने देशक कतेको राªयमे िबधवा िवआह आम बात भए गेल अिछ। अपनो समाजमे िकछु जाित िवशेषमे एकरा लोक अखनो ढो रहल अिछ जखन िक कतेको जाितमे पिहनहुँसँ ई {यब6था रहल अिछ। अ6तु, एिह कुCथाक कोनो मजगूत धािम<क पI निह लगैत अिछ। ई एकटा जाित िवशेषक िकंवा वग< िवशेषक अहंसँ पोिषत सामािजक अिभशाप िथक जकर सुधारपर सभक ®यान जा रहल अिछ, मुदा {यबहारमे अखनो 6वीकाय< निह अिछ। एहन निह अिछ जे िबधवा िवआह होइते निह अिछ, गाहे-वगाहे उ“च वगÂय मैिथलोमे ई भए जाइत अिछ मुदा अखनो ई एकटा 6वभािवक, सव<माbय चलनक ¡प निह लेने अिछ, जािह कारण™ कतेको कम वयसक कbया जीवनक सम6त सुख, सुिबधासँ वंिचत रिह दुखमय जीवन बीतेबाक हेतु िववश छिथ। िकछु एहन घटना सभ देखएमे आएल जतए पिरि6थितवश पितक देहाbत भए गेलाक बाद हुनके पिरवारक लोक िवआहक {यब6था केलाह आ आइ वो एकटा सुखी पिरवािरक जीवन जीिब रहल छिथ। पूव< पितसँ जे सbतान छलैक ओकरो नीकसँ पालन-पोषण भए रहल अिछ। नव िवआहमे सेहो सbतान भेलैक। हमर कहबाक तापय< अिछ जे सभ िकछुकS हठाते धम<-कम<सँ जोिड़ कए मनु—खक जीबन नक< कए देब कतहुँसँ उिचत निह अिछ। गाम-गाममे एहन दृžय देखएमे अबैत रहल अिछ जे अपने लोक िबधवाक शोषण करैत छिथ। कतेकठाम तँ ओकर हया तक भए गेल। ओकर स£पि‹ अपने लोक लुिट लेलक वा ठिग लेलक आ जखन ओकरा Cयोजन भेलैक तँ सभ कात भए गेल। तथाकिथत मय…दाक उ›लंघन जखन आम बात भए गेल हो, तािह मय…दाकS {यथ< होइत रहब सव<था अनुिचत। पािरवािरक जीवन हेतु, भारतीय मू›यक रIा हेतु, वैवािहक जीवनक महवकS कमतर निह आँकल जाए सकैत अिछ। परbतु ओकर आधार मजगूत बनल रहैक तािह हेतु सोचमे पिरवत<न ज¡री अिछ। पूरा दुिनयi बदिल रहल अिछ। इbटरनेट, मोबाइल, टेलीवीजन, फेसबुक, áा×सअप सॱसे दुिनयiकS एक आँगन (Global Village) मे पिरवित<त कए देलक अिछ। एिह पिरवत<नसँ —यो बiचल निह रिह सकैत अिछ। गाम-गाम वएह टेलीवीजन, वएह गीत नाद, वएह सीनेमा चलैत अिछ। 6वाभािवक अिछ जे गामोक िधया-पुतामे आधुिनकताक मानिसकता उप– होइक। एकरा एकदमसँ छोड़लो निह जा सकैत अिछ। अ6तु,आधुिनकताक िबहािड़मे सभटा उिड़या जाए ओिहसँ पूव¼ हमरा लोकिन 6वत: 6वभािवक ¡पसँ पिरि6थितजbय कारणसँ िबधवा भेल मिहलाकS पुनव…स हेतु, ओकर स£मानपूण< जीवन-यापन हेतु सोचबाक चाही। समाज जे गितशील होइत अिछ, जे बदलैत पिरवेशसँ सामंज6य 6थािपत करबाक हेतु Cय·शील रहैत अिछ, सैह िटकैत अिछ। ओकरे िवकास होइत अिछ। जँ से निह भेल तँ अपने बनाओल िनयम, कानून वो मय…दाक बोझसँ 6वत: चरमरा जाइत अिछ। ज¡री अिछ जे समयक संग तादा£य 6थािपत कए हम सभ नूतन िवचारकS सहष< 6वीकार करी ओ Cगितक पथपर आगा बढ़ी।q

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उपभो—ता संरIण कानून १९८६ उपभो—ता संरIण कानून १९८६क मूल उœेžय िजला, राªय एवम् रा¶²ीय 6तर पर अध<bयाियक सं6थाक 6थापना करब अिछ जािहसँ उपभो—ता िवबादकS शीâ ओ विरत समाधान भए जाइ। ई सं6था bयायक नैसिग<ंक िस­Îतक आधारपर मामलाक औिचयक ®यान रखैत उपभो—ताकS उिचत Iितपूित<क आदेश दए सकैत अिछ। एकर आदेश निह मानलापर उिचत दंड देल जा सकैत अिछ। उपभो—ता संरIण कानून १९८६ ¿ाहककS अपन िसकाइतक िनपटान करबाक एकटा वैकि›पक समाधान Cदान करैत अिछ मुदा तािहसँ कानूनमे Cा´त अbय bयायलयमे मोकदमा करबाक अिधकार समा´त निह भए जाइत अिछ। जौँ अbय bयायालयमे ई िसकाइत सुनल जा चुकल अिछ तैयो एिह कानूननक अनुसार उिचत फोरममे िसकाइत कएल जा सकैत अिछ। (धनबीर िसंघ बनाम हुडको, २०१२ (५) एसएलटी ३५) एिह कानून क धारा ९क अनुसार राªय सरकार उपभो—ता िवबादक िनपटान हेतु िजला एवम् Cाbतीय 6तर पर िजला फोरम आओर राªय आयोगक गठन करत, संगिह केbc सरकार रा¶²ीय आयोगक गठन करत। िजला फोरम मे िजला जज रहल, काय<रत िजला जज, िकंवा िजला जजक यो½यता रखिनहार {यि—त अ®यI भय सकैत छिथ। ओिहमे दूटा आओर सद6य हेताह, जािहमे एकटा मिहलाक होएब ज¡री। राªय आयोगक अ®यI उ“च bयायालयक काय<रत वा सेवा िनवृत bयायाधीश होइत छिथ। एकर अितिर—त दू वा अिधक सद6य सेहो होइत छिथ, जािहमे एकटा मिहलाक होएब ज¡री। रा¶²ीय आयोगक अ®यI उ“चतम bयायालयक काय<रत वा सेवा िनवृत bयायाधीश होइत छिथ। एकर अितिर—त चािर वा अिधक सद6य सेहो होएत छिथ। सद6य बनबाक हेतु बएस 35 सँ कम निह हेबाक चाही, यो½यता 6नातक, एवम् अथ< शा6K, कानून, वािणªय, लेखÎकन, उ^ोग, जनसेवा, वा Cशासनमे दस बख<क अनुभव होएब ज¡री िथक। िजला फोरममे एहन िसकाइत कएल जाएत जािहमे संदिभ<त व6तुक मू›य वा आपेिIत Iितपूित<क मू›य २० लाख टाकासँ बेसी निह होएत। जॱ कीनल गेल ब6तुक मू›य िकंवा Iितपूित< २० लाखसँ बेसी एवम् एक करोड़ सँ कम अिछ तँ िसकाइत स£बिbधत राªयक आयोगक ओतए करए पड़त। ताहूसँ बेसी दामक ब6तुक हेतु िकंवा Iितपूित< हेतु रा¶²ीय आयोगक ओिह ठाम िसकाइत करब ज¡री िथक। एिह तरहक कोनो िसकाइत स£बिbधत घटनाक दू सालक अधीन करब ज री िथक, परंतु स£बिbधत फोरम/ आयोग िलिखत कारण दए वािजब मामलामे एिह समय सीमामे छूट दए सकैत अिछ। उपभो—ता कानूनक तहत स£बिbधत उपभो—ता, वा उपभो—ताक िहतक रIाक हेतु काज केिनहार माbयताCा´त संगठन वा एकािधक उपभो—ता (जतए बहुत रास ऊपभो—ताक एकरंगाहे िसकाइत होइक), वा राªय िकंवा केbc सरकार 6वतः िक£वा Cभािवत ऊपभो—ताकक िहतरIाक हेतु िसकाइत कए सकैत छिथ। िजला फोरम/राªय आयोग/रा¶²ीय आयोगक ओतए िसकाइत करबाक हेतु िनध…िरत शु›क: िजला फोरम व6तु/सेवा/Iितपूित<क कुल दाम लागत शु›क

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एक लाख धिर (जे गरीबी रेखासँ नीचा छिथ) िकछु निह एक लाख धिर (जे गरीबी रेखासँ उपर छिथ) एक सए टाका एक लाखसँ उपर ओ पiच लाख धिर दू सए टाका पiच लाखसँ उपर ओ दस लाख धिर चािर सए टाका दस लाखसँ उपर ओ बीस लाख धिर पiच सए टाका राªय आयोग बीस लाखसँ उपर ओ पचास लाख धिर दू हजार टाका पचास लाखसँ उपर ओ एक करोड़ धिर चािर हजार टाका रा¶²ीय आयोग एक करोड़ सँ उपर पiच हजार टाका (उपभो—ता संरIण िवधेयक, २०१८क अनुसार िजला फोरम/ राªय आयोग/ रा¶²ीय आयोगक आिथ<क अिधकार IेK बढ़ा कए µमशः एक करोड़, दस करोड़, आ तािहसँ उपर करबाक िबचार अिछ)। िजला फोरम Æारा िसकाइतक िनपटान: िसकाइत Cा´त केलाक २१ िदनक भीतर िसकाइतक CितकS िजला फोरम CितवादीकS पठाओत। Cितवादी अिधकसँ अिधक ४५ िदनक भीतर ओकर जबाब देताह अbयथा िजला फोरम एकतरफा उपल{ध सबूत ओ कागजातक आधारपर मामलाकS तय कए सकैत अिछ। वादी वा CितवादीकS वकील राखबाक ज रत निह होइत अिछ। ओ 6वयं िकंवा कोनो Cितिनिध Æारा अपन बात फोरममे रािख सकैत छिथ। िजला फोरमकS काय<वाहीकS ई किह चुनौती निह देल जा सकैत अिछ जे मामलामे नैसिग<क bयायक िस­Îतक पालन निह भेल अिछ। जौँ उिचत जiच पड़ताल एवम् C6तुत सबूतक आधारपर िजला फोरम वादीक िसकाइतसँ सहमत भए जाइत अिछ तँ ओ CितवादीकS ओिह ब6तुकS ठीक करबाक आदेश दए सकैत अिछ, नव ब6तु देबाक हेतु किह सकैत अिछ, वा ओकर मू›य आपस करबाक हेतु, िकंवा Cितवादीक लापरवाहीसँ िसकाइतकत…कS भेल क¸ वा Iितक Iितपूित< करबाक हेतु िनण<य दए सकैत अिछ। िजला फोरम िसकाइतकत…कS Cितवादी Æारा देल गेल सेवाकS दोषपूण< सािबत भेलाक ि6थितमे उिचत Iितपूित< देबाक आदेश दए सकैत अिछ। संगिह वािजब मामलामे दंडामक Iितपूित<क आदेश सेहो कए सकैत अिछ।

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Cितवादीक लापरवाहीक कारण िसकाइतकत…कS भेल Iित वा अवघातक हेतु िजला फोरम Iितपूित<क आदेश दए सकैत अिछ। (एस.के.लकोिटआ बनाम नेशनल इन6योर™स कंपनी िलिमटेड) Iितपूित<क हेतु िसकाइतकत…कS सािबत करब ज¡री अिछ जे Cितवादी Æारा देल गेल सेवामे Kुिटक संग- संग ओकर लापरवाही सेहो छल, जौँ से निह छल तखन Iितपूित<क मÎग खािरज भए जाएत (िनदेशक, एच.आइ.इ.टी बनाम अिनल कुमार गु´ता, १९९४ (१) सीपीआर १८२ )। उपभो—ता फोरम अbतिरम आदेश निह दए सकैत अिछ। अपील जौँ कोनो पI िजला फोरमक आदेशसँ संतु¸ निह अिछ तँ ओ तीस िदनक भीतर राªय आयोगमे िनध…िरत CपKमे अपील कए सकैत छिथ। मुदा जँ िजला फोरम आिथ<क Iितपूित< िकंवा दंडक आदेश देने अिछ तँ ओिह आदेशकS चुनौती देबासँ पूव< ओिह रकमक आधा वा पचीस हजार जे कम होइक, जमा करए पड़त। मामलाक िनपटान हेतु राªय आयोग मोटामोटी िजला फोरमक प­ित एवम् Cकृयाक अनुसरण करैत अिछ। जौँ कोनो पI राªय आयोगक आदेशसँ संतु¸ निह अिछ तँ ओ तीस िदनक भीतर रा¶²ीय आयोगमे िनध…िरत CपKमे अपील कए सकैत छिथ। मुदा जँ राªय आयोग आिथ<क Iितपूित< िकंवा दंडक आदेश देने अिछ तँ ओिह आदेशकS चुनौती देबासँ पूव< ओिह रकमक आधा वा पÉतीसहजार जे कम होइक, जमा करए पड़त। जौँ कोनो पI रा¶²ीय आयोगक आदेशसँ संतु¸ निह अिछ तँ ओ तीस िदनक भीतर उ“चतम bयायलयमे िनध…िरत CपKमे अपील कए सकैत छिथ।मुदा जँ रा¶²ीय आयोग आिथ<क Iितपूित< िकंवा दंडक आदेश देने अिछ तँ ओिह आदेशकS चुनौती देबासँ पूव< ओिह रकमक आधा वा पचास हजार जे कम होइक, जमा करए पड़त। राªय आयोग, रा¶²ीय आयोग न‘बे िदनक भीतर ओकरा समI कएल गेल अपीलक िनपटान कए देत, मामलाक सुनबाइक दौरान सामाbयतः 6थगन निह देल जाएत। जॱ न‘बे िदनमे फैसला निह भए पबैत अिछ तँ तकर कारण िलिखत ¡पमे देल जाएत। िजला फोरम / राªय आयोग/रा¶²ीय आयोग Æारा देल गेल िनण<यकS जौँ तय समय सीमाक भीतर अपील निह कएल जाइत अिछ तँ ओ िनण<य अिbतम भए जाएत। िसकाइतकत…क आवेदनपर िकंवा 6वयं राªय आयोग कोनो िजला फरममे चिल रहल मामलाकS दोसर िजला फोरममे पठा सकैत अिछ। ¿ाहकक कत<{य : ¿ाहकक कत<{य अिछ जे ओ कीनएबला ब6तुक बारेमे उिचत जानकारी Cा´त करए, ओकर गुणव‹ा बारेमे 6वयं जiच पड़ताल करए एवम् दोकानदारक बातपर आँिख मूिनकए िवlास निह करए अिपतु व6तु िवशेषपर बनल चेbह जेना आइएसओ आिदकS नीकसँ ठेकािन लेिथ। देश भिरमे करीब पiचसए 6वयंसेवी संगठन उपभो—ता संरIणक हेतु काज कए रहल छिथ। ¿ाहककS उिचत सलाह देबाक हेतु एवम् ओकर वािजब िहतक रIाक हेतु एहन संगठनसभ सकृय योगदान करैत छिथ। ¿ाहक ज¡री भेलापर िहनका लोकिनक मदित लए सकैत छिथ।q

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५६ म अंक १५ अग᭭त २०१८ (वषᭅ ११ मास १२८ अंक २५६ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 28

रबीbc नारयण िमpक दूटा लघुकथा असगुन गाम-घरमे कतेको Cकारक असगुन सभ Cिस­ अिछ। जेना —यो याKापर िबदा हो आ निढ़या र6ता बiमासँ दायi कािट िदए , िकंवा —यो िबदा होइत काल पाछासँ टोिक िदए। बुढ़बा बाबाकS एिह सभहक बेस िवचार छलिन। जँ घरक —यो िबदा होइत आ कतहु —यो छीक दैत तँ ओ ‘िचरंजीवी भव:’ अवžय किहतिथ। तिहना आओर-आओर अपशकुन जँ होइतैक तँ ओकर िनवारण कए िलतिथ। ओिह िदन गाममे हाट लागल रहैक। तीमन-तरकारी सभटा हाटेपर सँ कीनल जाइत छलिन। ओहुना हाट िदनक ओ िनयमसँओतए पहुँचैत छलाह। रिवक िदन छलैक। हाट जएबाक तैयारी ओ दुइए बजेसँ Cार£भ कए देने छलाह। जहi चािर डेग आगा बढ़ैत िक एक ने एकटा अपसगुन भए जािन। एवम् Cकारेण चािर बािज गेल। सूय…6त करीब छल। हािर कए ओ ब™त घुमबैत िबदा भेलाह। किनके आगा बढ़लाह िक मुनेसरा सामनेमे पिड़ गेलिन “Cणाम पंडीतजी!” –बाजल मुनेसरा। “नीके रह ”- मुनेसराकS आशÂवाद दैत पिडतजी आगा बढ़लाह। मोने-मोन किह निह की की घुनघुना रहल छलाह। मुनेसराकS एकेटा आँिख छलैक। गाममे दाहाक िदन मािर भए गेल रहैक। बेस फनैत छल ओ। लाठी लेने फािन गेल छल। ताबतमे —यो ओकरे िनशाना बना कए एकटा सीसाक बोतल फेकलकै। ओकर सॱसे आँिख लहु-लुहाम भए गेल रहैक। ओही घटनाक बाद ओ असगुन भए छल। Cाय: सएह सभ सोचैत पिvडतजी आगा बढ़लाह।

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५६ म अंक १५ अग᭭त २०१८ (वषᭅ ११ मास १२८ अंक २५६ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 29

हाटपर बेस भीड़ छलैक। तीमन-तरकारीक भरमार छल। मुदा पिvडतजीक आदित छलिन जे कोनो चीज ओ ठोिक-ठोिक कए किरतिथ। बीच बजारमे सजमिनक दाम मोलबित- मोलबित पहुँचलाह िक चािर गोटेमे एक िदससँ धु¾ा मारैक आ चािर गोटे दोसर िदससँ। सामनेसँ दू-तीन गोटे हi-हॉं करैत पिvडतजीक रIा करए आिब गेलाह। ध¾ा-धु¾ी खतम भेल तँ पिvडतजी आगा बढ़लाह। सजमिनक दाम मोलेलिन आ भाव पिट गेलापर जेबीसँ पैसा िनकालए लगलाह िक अबाक रिह गेलाह। जेबी नदारद। पिvडतजी ठोह पािर कए कानए लगलाह। सॱसे ई खबिर िबजलौका जकi पसिर गेल। पिvडतजी माथा हाथ देने घर आपस अएलाह। तिहआसँ ओ असगुनक डरे छीह कटने िफरिथ। पिvडतजीकS तीनटा कbया छलिन। Cथम कbयाक कbयादान ठीक भए गेल छलिन। नीक कुल-शीलक बर रहैक। अगहनक पुिण<माक िबआह तय भेलिन।बरक हाथ उठएबाक हेतु िबदा होइत छलाह िक िकयो तराक दए छॴकलक। छॴक...छॴक...छीक...। हुनकर माथामे ई छॴक घुमए लगलिन। पिvडतजीक टÎग एकाएक गितहीन भए गेलिन ओ आगा बढ़ए हेतु एकदम तैयार निह छलाह। सॱसे गामक लोक करमान लािग गेल छल। पिvडतजी गुम। िकछु बजबे निह करिथ। तेहन शुभ मुहु‹< छल जे छॴकक चच³ करब असगुन लगिन। लोक सभकS िकछु फुराइक निह जे आिखर बात की भेल। अखने तँ पिvडतजी टप-टप बजैत छलाह.. ! गाम भिरक लोक पिvडतजीकS घेिर लेलकिन। “पिvडतजी की भेल ?” मुदा ओ तैयो गु£म। अbततोगवा लोक हुनका उठा-पुठा कए डा—टरक ओिहठाम लए गेल। ओतए डा—टर हुनकर अव6था देिख गंभीर भए गेलाह आ कहलिखन जे हुनका ग£भीर भावनामक अवधात भेलिन अिछ। ताकािलक उपचारक हेतु जहi ओ सूई देबए लगलाह िक पिvडतजीकS निह रिह भेलिनओ गिरयबैत ओिहठामसँ गामपर भगलाह। ताबत भोरक चािर बािज गेल छल।बरक ओिहठाम जएबाक काय<µम रœ भए गेल। ठीके असगुन भए गेलिन , तािह िदनसँ पिvडतजी असगुनसँ बÚड डरािथ। ओिह िदन हुनकर मिझली बेटीक तिहना आँिख बड़ फरकए लगलिन। पिvडतजी एकदम अपिसयiत भए गेलाह। अबžय कोनो गड़बड़ी होमए जा रहल अिछ। ओ अपन बेटीकS तुरbत अपना लग बैसा लेलिथ िक ताबतेमे एकटा िगरिगट हुनकर बायॉं हाथपर खसल। पिvडतजी ठामिह फानलाह। पैरमे खराम छलिन। दरबªजा बेस ऊँच

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५६ म अंक १५ अग᭭त २०१८ (वषᭅ ११ मास १२८ अंक २५६ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 30

छलैक। दलानपर ठामिह िचतंग भए गेलाह। बायi पैरक हÚडी टुिट गेल छलिन। पिvडतजी बाप-बाप िचिचआए लगलाह। सभ गोटे हुनका लािद कए अ6पताल लए गेल। लाख Cयासक बाबजूद ओ हÚडी निह जुटल। पिvडतजी जbम भिरक हेतु नiगर भए गेलाह। तिहआसँ पिvडतजी िनय भोरे उठैत देरी भगवानकS गुहािर देिथ- “हे भगवान ! असुगनसँ जान बचायब। ” मुदा भावी Cवल होइत छैक। होइत वएह छैक जे हेबाक रहैत छैक। एकादशीक िदन छलैक। महादेवक दश<न करए जाइत छलाह। झलफल होइत छलैक। ताबतमे एकटा निढ़या वामाकातसँ आएल आ सामने बाटे दायiकात गुजिर गेल। पिvडतजी ठामिह खसलाह। “हे महादेव !आब अहॴ Cाणक रखा क¡। ” कहैत-कहैत पिvडतजी वेहोश जकi भए गेलाह। बोएकहुँ डेग घुसकए हेतु तैयार निह छलाह। आ ने घुसकबाक हुनकामे तागित रिह गेल छलिन। पिvडतजीकS फेर किह निह कहiसँ िह£मत अएलिन। ओ चोटे पाछा घुमलाह। तािह बीच एक बेर फेर वएह निढ़या वायiसँ दिहना भेल। पिvडतजी ओिह निढ़याकS गिरयबैत ,नiगर टiगे दौड़ैत , खसैत-पड़ैत घर िदस बढ़ए लगलाह। बीच-बीचमे ओिह निढ़याकS कहैत- “ई सरबा, निह जीबए देत। एकर हम की िबगारने छिलऐक से निह जािन !” ताबतेमे मुिखयाजी पोखिर िदिससँ आपस अबैत छलाह। पुिछ बैसलिखन- “की भेल पिvडतजी?” “की कहू की भेल। कहबी छैक जे गेलहुँ नेपाल आ कम< गेल संगे। सएह पिर अिछ हमर। एकादशीक िदन छलैक। सोचलहुँ जे महादेवक दश<न करी। आधा र6तासँ जहi आगा बढ़लहुँ िक औ बाबू!ई चvडाल निढ़या र6ता कािट देलक। ” ओिहसँ पिहने की मुिखयाजी िकछु बिजतिथ , पिvडतजी धराम दए खसलाह। मुिखयाजी िचकरलाह। अगल-बगलसँ सेहो लोक सभ दौड़ल। पिvडतजीकS उठा-पुठा कए दरबाजापर रािख देलक। लोक सभ पुछिन- “की भेल ?”

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मुदा ओ अप6यiत आकाश िदिस तकैत रिह गेलाह। असगुन , असगुने होइत अिछ। तS ने लोक सगुन करैत िफरैत रहैत अिछ। पिvडतजी भोर होइतिह पिनभरनीकS बजौलिखन आ आदेश देलिखन जे आइसँ िनय Cात: काल ओ एक घैल पािन भिर कए दरबाजापर रािख देल करए , जािहसँ हुनक िदन नीक जेना किट जािन। पिनभरनी हुनकर आŽाकS िसरोधाय< कएलक आ िनय हुनकर सामनेमे बेस बड़का घैलमे पािन भिर-भिर राखए लागिल। एक िदन अbहरोखे पिनभरनी पािन भिर कए रािख गेल। ओकरा गहुँमक कटनी करबाक छलैक। पिvडतजी उिठ जहi चािर डेग आगा बढ़लाह िक वोिह घैलसँ टकरा चा¡नाल िच‹ भए खिस पड़लाह। चा¡ कातसँ लोक सभ दौड़ल। मुदा मिvडतजी िकछु निह बजलाह। आब ओ चु´पे रहबाक सपथ खा लेने छलाह। समय िवपरीत भए गेल छलिन आ सगुनो असगुन भए गेल छलिन। ¦

गाम गाममे बहुत गोटे अनिचbहार भए गेल छल। िधया-पुता सभ जे धिरया पहीरने घुमैत रहैत छल , से सभ फुिट कए जबान भए गेल छल आ बुढ़-पुरान लोक µमश: िबदा भए रहल छलाह। µिमक िकbतु अनवरत पिरवत<न Cकृि‹क िनयमक पराµमसँ सभ Cभािवत छल। लोचन बाबा, ितला बाबू, बुिढ़या काकी सभ एक-एक कए चल गेलाह। बहुत कम पुरना लोक बँिच गेल छल। मुदा ई ग´प हमरे िकएक एतेक पिड़छायल बुझा रहल छल। गाममे बहुत लोक अिछ। सभक समI ई घटना भेलैक अिछ आ होइत रहलैक अिछ। Cाय: समयक अbतरालक कारण बारह बख<क अविधक कारण हमरा बेसी अbतर बुझा रहल अिछ। छोटो-छोटो घटना सभ एकटा आकार ¿हण कए लेने अिछ। पोखिरक भीड़पर बैसल हम इएह सभ सोिच रहल छलहुँ, गामसँ बहुत िकछु िनप‹ा भए गेल छल। दुपहर राितमे गुलचनमा चौकीदारक जबरद6त आबाज-

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“ जगले रहब। यौ ऽऽऽ। ” दुपहिरया राितमे घरे-घर घुिम जाइत छल। आ िचकरैत- “फ›लi बाबू छी औऽऽऽ। ” भो कबा उगैत िKकvठ बाबाक परातीक 6वर सॱसे गामकS भोर हेबाक सूचना दैत आ िकछु कालक बाद बाद झमा झम , झमाझम , टन-टन टनटन घड़ी-घvटा सुनबामे अबैत। मिbदरपर बाबा भगवानक आरती किरतिथ। भोरे-भोर सभ िठठुरैत मिbदरसँ बाहर होइतिथ। फेर भोर भेल छल। मुदा १२ बख<क अbतराल छल। हम ओिहना ओही पोखरीक भीड़पर गेल रही। की भए गेल ? सात बािज गेल। घड़ी- घvटाक 6वर निह , Cातीक एकहुटा आखर निह सुनायल। चौकीदारक कतहुँ कोनो पता निह। जे पोखिर हिरयर कंचन पािनसँ भरल रहैत छल सएह उजारसन लगैत छल। इएह सभ सोिच रहल छलहुँ िक बड़ी जोरसँ ह›ला भेल। जएह-सएह चौक िदस दौग रहल छल। कै गोटासँ पुछिलऐक। —यो िकछु कहबा लेल तैयार निह छल। ककरा फुस<ित छलैक। सभ अफिसयiत ..! ह›ला जोर पकड़ने जा रहल छल। ताबे देखबामे आएल जे १५ -२० गोटे लाठी-भाला लेने गरजैत आगi बिढ़ रहल छलाह। ओमहरसँ मरर कका अएलाह। “की भेलैक मरर क¾ा?” “लड़ाई भए गेलैक अिछ। कै िदनसँ तनातनी छलैक , मुदा आइ फैसला भए कए रहत। ” “मुदा झगड़ाक कारण ?” - हम पुछिलऐक। अहi बाबू बाहर रहैत छी। अहi की बुझबैक। अिहठामक हवा िविचK अिछ। अनीनमा क बेटा गोवध<न बाबूक CौKक काज निह गछलक। बसिक गोवध<न बाबू पुरनका अबाज देलिखन। छौड़ा अिर गेल। लाठी पकिड़ लेलक। तािहपर ओ िकछु बजलाह- “िक छौड़ा लेने लाठी मािर देलक। ओिह िदनसँ समा बbहा रहल अिछ।”

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ओ बािजए रहल छलाह िक ठiय- ठiयक आबाज भेल। किनके कालमे थानामे तीनटा लाश पड़ल छल। लोक जहi-तहi भािग रहल छल। दू-तीन िदन धिर एकरे चच… होइत रहल। गामक बहुत रास जबान सभ भािग गेल। कहi दिन बहुत गोटेपर वारbट भए गेल छलैक। सiझ भए गेल छल। गामसँ बहुत रास लोक भािग गेल छल। मिbदरपर एसगर बैसल रही िक मरर कका पहुँचलाह। “की बाबू, िकएक गुम-सुम छी?” “आउ , मरर कका। ” मरर कका बैसलाह। गामक एकटा वृ­तम लोकमेसँ अवशेष मरर कका ओिह गाममे बहुत िकछु देखलाह आ किह निह की की आओर देखताह। “आओर गामक की हाल ?” “गामक की हाल रहत। समय बहुत बदिल गेल। आब तँ हमरा लोकिन चलबे करी ओहीमे क›याण। ” “िधया-पुता की कए रहल छिथ ?” “सभ कमाइ छिथ। सबहक पिरवार फराक-फराक छिन। ” “अहi ककरा संगे छी?” “ककरा संगे रहब ? हम तँ पेvडुलम भए गेल छी। एक-एक मासक पार लगैत अिछ। जिहआसँ अहiक काकी 6वग<वासी भेलीह तिहआ िघघरी कािट रहल छी। आँिखमे मोितआिबbद भए गेल अिछ। सiझ पिरतिह अbहार भए जाइत अिछ। फेर ग´प होएत। ” ई बजैत-बजैत ओ उिठ गेलाह। १२ बख< पिहनिह मरर ककाक समय मोन पिड़ रहल छल। गामक CितिQत लोकमेसँ छलाह। सभ बालक Cितभाशाली एवम् होनहार। सiझे-सiझ िनय ओिह मिbदरपर कीत<न होइत छल आ मरर कका अवžय ओिहमे रिहतिथ।

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किनक काल आओर बैसल रहलहुँ। आठ-दसटा अधवयसू सबहक ह›ला बुझाएल। सड़कपर सभ गिरअबैत आगा बिढ़ रहल छल। सभ तारी पीिब कए बु‹। काते-कात गामपर पहुँचलहुँ। मोन थाकल लािग रहल छल। सुित रहलहुँ। भोर भेने पोखिर िदिस जाइत रही। गामक अिbतम छोरपर पiच-सातटा छोट-छोट खोपड़ी ओिहना-क-ओिहना छल। अपिरवित<त। कतेक गोटे धिनक भेल ,कतेक गरीब भए कए गामसँ िबलिट गेल मुदा वो सभ ओिहना-क-ओिहना बiसक बासन बनेबामे त›लीन छल। ओकर ब“चा सभ उघारे पड़ल छल। इएह सभ सोिच रहल छलहुँ िक फोकना डोम हमरा देखलक। चीलमक सॲट लगा कए खॲखैत बािज उठल- “पिरणाम मािलक , किहआ अिलयै?” “तीन िदन भए गेलैक। “ आ हम आगा बिढ़ गेलहुँ। पोखिर िदिससँ आिब 6नान-®यान कएल। मधुबनी जेबाक छल। किनके आगा बढ़ल छलहुँ िक फूटरक माएक कनबाक आबाज सुनलहुँ। खोपड़ी तर बैसल कािन-कािन िकछु किह रहल छलीह। हमरा देिख सोर पािर लेलीह। “की भेल काकी? िकएक कािन रहल छी?” “की कहूँ, अपना घरक बात बजैत संकोच होइत अिछ। तीन सiझसँ घरमे िकछु निह भेल अिछ। हमरा लोकिन दूनू गोटे फराक छी। मािलकसँ दसटा टका मंगिलअिन तँ गरिज उठलाह। ” ई कहैत-कहैत ओ ठोह पािर कए कानए लगलीह। हमरा निह रिह भेल। हुनका Cणाम कए आगा बिढ़ गेलहुँ। हे भगवान ! की भए गेल एिह गामकS? मनु¶यता जेना भािग गेल। जतै देखू उलटे हबा बिह रहल छल। िर—सासँ मधुबनी जाइत रही। इएह सभ सोचैत-सोचैत िन– पिर गेल। िर—सा आर.के.कालेजसँ आगा छल। एतबेमे ितलक भाए नजिर पड़लाह। मुदा टोकबाक साहस निह भेल। किह निह की की आओर सुनए पड़ए। िदन भिर मधुबनीमे रहलहुँ। सiझ भए रहल छल। मुदा गाम जयबाक साहस निह भए रहल छल।

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दू िदन धिर मधुबिनयेमे रिह गेलहुँ। सiझमे टहलैत काल मिbदर गेल रही। भगवतीक दश<न कएल। घाटपर बैसल रही। सiझो उ‹र िदिस बड़ नीक घर सभ नजिरमे आिब रहल छल। मोन भेल घुमी। आगा बढ़लहुँ। सु–र-सु–र सुसिªजत घर। पीच रोड। 6²ीट लाइट। छोटी पटना लािग रहल छल। बारह साल पूव< ओिहठाम ख‹ा छल। बािढ़क समयमे समुc भए जाइत छल वो जगह। चा¡कातक गामसँ pीमान लेाकिनक जमघट भए गेल छल ओिहठाम। संयोगसँ अपना गामक देबन बाबू नजिरमे अएलाह। घरक दरबªजासँ िनकिल रहल छलाह। किह उठलाह- “किहआ अएलह ?” कहिलयिन- “चािर-पiच िदन भेल। ” ग´प आगा बढ़ए लागल। कहलाह- “की कहैत छह ? आब गाम रहए-जोकर निह रहल। तँए एहीठाम एकटा छोट-छीन घर बना लेलहुँ। कोठरीसँ बड़की भौजी आबाज देलीह- “ठाढ़ िकएक छी? अहiक तँ अपन घर अिछ। ” घरमे Cवेश किरतिह छगुbतामे पिड़ गेलहुँ।सोफासेट - टीभी, डाइिनंग टेबुल .. की की निह छल। ग´प-स´प होइत रहल। चाह-जलखै सभ भेल। ग´पक µममे पुछिलअिbह- “मरर ककाकS एतिह िकएक निह रािख लैत िछऐन ?” तर-दए बािज उठलीह- “हुनका गाम छुिटते निह छिन ! की करी?”

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५६ म अंक १५ अग᭭त २०१८ (वषᭅ ११ मास १२८ अंक २५६ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 36

मरर ककाक ªये¸ पुK देबन बड़ Cितभाशाली छलाह। मुदा एक युगक अbतराल िपता पुKकS धारक दू कातपर रािख देने छल। राितक आठ बािज गेल छल। हम हुनका सभसँ िबदा लए पुन: मधुबनीक डेरापर चल गेलहुँ। र6ता भिर अपन गाम आ काली मिbदरक आगूक ख‹ामे भेल एक युगक अbतरालक पिरवत<न मोनमे बेर-बेर अबैत रहल। गामकS की भए गेल ? हे भगबान ! कोन भूत एकरा धए लेलक ? लोक एना िकएक कए रहल अिछ ? काली मिbदरक चभ“चा छोटी पटना भए गेल। गाम एना िकएक रिह गेल। गाम माने की? संघष<, शोषण , ई¶य…, Æेषक अितवाद। छुÓी समा´त भए रहल छल। रेलगाड़ीपर िबदा भेलहुँ। अपन संघष< 6थली िदिस- जिहठामसँ दूरीक कारण चbcमाक धरातल जकi अपन गाम सु–रलागए लगैत अिछ। ¦

रबीbc नारायण िमpक नम6त6यै आगi... २६ . हमर माए राितमे अकर-बकर सपना देखलक। भोरे ओकरा हमर िचbता ततेक जोर धेलकै जे तुरंत खबािसनीकS चंगेरा भिर कए िवदा केलक। खबािसनी सiझधिर हमर सासुर पहुँचिल। ओकरा देिखतिह हमरा लागए जेना 6वग< भेिट गेल। नैहर चीजे सएह होइत अिछ। कनीक आl6त भेलाक बाद ओ अपन िख6सा सभ शु¡ केलक। माए, कका सभक समाचार सुिन मोन ह›लुक भेल। तकर बाद आओर लोकक समाचार कहए µममे अ णक ग´प उिठ गेल। तर< दए खबािसनी मुँह फेिर लेलक। िछआ, िछआ करए लागिल। िकछु बुझबे निह किरऐक जे की भेलैक? िकएक ई बुिढ़आ एना कए रहल अिछ। बात खुजैत-खुजैत कहलक जे ओ तँ अं¿ेज मेम साहेबक संगे रहए लागल अिछ। मेम साहेब इंगलैvडसँ आिब कए कल—टरीमे बैिस गेलैक। ओकरा देिखतिहं अ णक पिहल घरवालीक देहमे आिग लािग गेल। ओ अ णक दस हजार फªझैत केलक। मोटा-चॲटा बbहलक आओर गाड़ीपर चिढ़ गेल। अ णक िख6सा आगू बढ़बैत खबािसनी कहए लागल जे अ णक अं¿ेजनीसँ िबआह निह करए चाहए। ओ तँ माK रंग-रभस करैत छलाह। मुदा पैर जहन कादोमे पड़त तँ कतए धिर धिस जाएत तकर कोन ठेकान।

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५६ म अंक १५ अग᭭त २०१८ (वषᭅ ११ मास १२८ अंक २५६ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 37

अ णक संग पढ़ाइ-िलखाइ केिनहार बेसी अं¿ेज छल। ओिह समयमे Cशासकीय सेवा परीIा अं¿ेजे धिर सीिमत रहैक। बादमे —यो- —यो अपनो देशक लोक ओिहमे सफल भेलाह। एक- सँ- एक पैघ लोक ओ सभ बिन गेलाह। वएह परीIा तँ अ णो पास केलक। तS ओकरा झूस कथीक कहल जेतैक। रहल अं¿ेजनीक ग´प से तँ ओकर गड़ामे पिड़ गेलैक आओर तेना कए फँसा लेलकै जे हटने निह हटलैक। मुदा ईहो स‹े जे कोनो ए¾े िदने तँ ई सभ होइत निह छैक। ओ िज£मेदार आदमी छल, पिरवारबला लोक छल, स£हिर जेबाक चाहैकछल। कतहु-ने-कतहु ओकरो घालमेल तँ रहले होएत। ‘के जानेसीयाराम गित’ से किह खबािसनी जोरसँ सiस छोड़लक। असलमे अ णक िवदेशमे पढ़ाइक µममे एडली नामक युवकसँ दो6ती भए गेलैक। एडली लbदनक रहिनहार छल। ओहो Cशासकीय सेवाक तैयारी करैत छल। ओकर एंगलसँ पिहनिहसँ दो6ती रहैक। एंगल ओिहठाम अं¿ेजीक िशIक छिल। µमश: तीनू एकÕे घूमए-िफरए लागल। लbदनमे पढ़ाइ ओ तकर बाद Cितयोिगता परीIाक तैयारीमे रमणक, एंगल ओ एडलीक संग तेहन जबरद6त ितकड़ी बनल जे देखैत बनए। जखन कखनहुँ घूमए जाए तँ तीनू संगे। जखन खान-पान होइत तँ तीनू संगे। जखन कोनो िवषयपर पिरचच… होएत तँ तीनू संगे। देखएबला सभ सकदम रहए। ओना ओिह सभ देशमे ओहू समयमे ई सभकोनो तेहन ग´प निह होइत छलैक। अपना सभक समाज जखन घोघ तनने घुिम रहल छल, तखनो अं¿ेज सभ अपन 6KीगणकS समानताक अिधकार दैत छल। िशIा, {यबसाय ओ नौकरीमे बरोबिरक हक भेटैत छलैक। िबआहक मामलामे अपन जीवन संगी चुनबाक अिधकार छलैक। मूल, गोK, जाित िबबाद ककरो जीबनपर भारी निह पड़ैत छलैक। हमरा लोकिन अपन सं6कार वा सं6कृितपर जतेक घमंड कए ली मुदा जे दुग<ितसँ अपना ओिहठामक 6Kीगण गुजरलीह से कदािप Cशंसनीय निह कहल जाएत। q

२७ . खबािसनी गाम चल गेिल। खबािसनीकS चिल गेलाक बाद कै िदन धिर ओकरेपर ®यान लागल रहल। गामसँ बहुत रास लोक तीथ< हेतु वृbदावन जाइत रहए। हमर इ“छा सेहो भेल जे घुिम आबी। घरमे एिह बातपर चच< भेलैक। सभक सहमित बनलैक। हमर सासु,हम आओर ओ सभ गोटे वृbदावनक याKापर िवदा भए गेलहुँ। गामपर िधया-पुता रिह गेल आओर ससुर रिह गेलाह। गामसँ बहुत रास लोक एकÕे वृbदावनक याKापर िनकलल छल, तS एिह याKाक आनbद अåुत छल। लगै छल जेना छोट-छीन गाम संगे चिल रहल छल। तीथ< करब तँ बहाना होइत अिछ। असलमे तँ घुमनाइ मूल काज रहैत छैक।

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²ेनक िड‘बामे साधारण दज…मे सभ गोटे सबार छल। काठक पÕाक फॉंक सभमे अजोध उड़ीस सभ भरल छल। सभक देहक खून ओ पीबैत छल। पैरसँ माथ धिर सभकS चक‹ा भए गेलैक। ककरो राित भिर िन– निह भेल। सभ िमिल कीत<न करए लागल जािहसँ ²ेनक िड‘बाक वातावरण भि—तमय बिन गेल। लगैत छल जेना ओ ²ेनक िड‘बा निह अिपतु वृbदावनक कोनो मिbदर होइक। लगभग ३६ घbटाक बाद हमसभ वृbदावन पहुँचलहुँ। ओिहठामक तँ महौले अलग छल। जकरे देखू, राधे! राधे।!कहैत भेटए। िर—साबला सामने आिब जाइत तँ घvटी बजाबक एबजमे राधे! राधे! कहए लागत। वएह हाल टमटमबलाक, िकंवा कोनो दोकानबलाकS, कोनो समान िकनए जाउ आओर जँ ओकरा खुदरा निह छैक, तँ राधे! राधे!करए लागत। यK, तK अनेकानेक मिbदर भरल छल। धम<शालाक पiित लागल छल। र6तामे अिहना हम सभ चलैत रही िक भजनानbददासजीक आpम देखाएल। ओिहठाम अखvड भजन चिल रहल छल। मिbदरक सटले धम<शाला छल। हम सभ ओिहठाम ठहरलहुँ। Cात भेने हम सभ भजनानbददासजीक Cवचन सुनए गेलहुँ। बीच-बीचमे िकत<नीऑं सभ तेहन नीक 6वरमे भजन गबैक जे सभ सुिध हरा जाइक। हमर ®यान बेिर-बेिर भजनानbददासपर चल जाइत छल। हमरा लागए जेना ओ गरम िसंह अिछ। नेनामे ओ हमरा संगे पढ़ैत छल। कै िदन हम सभ कबÚडी संगे खेलाइत छलहुँ। मुदा ई निह बुझाइत छल जे ओ एतेकटा पहुँचल संत केना भए गेल? Cवचन, भजन समा´त भेलापर महामाजीकS Cणाम कए हम सभ डेरा आपस जेबाक हेतु तपर रही िक ओ हमरा अबाज देलाह। एसगर देिख हाल-चाल पुछैत आ¿ह केलाह जे हुनकर पिरचय ककरो निह कहल जाए। मोन भेल जे पुिछऐक जे ओ एिहठाम एिह¡पमे िकएक अिछ? मुदा आओर लोक सभ आिब गेलैक, तS आगा बिढ़ गेलहुँ। वृbदावन िबहारी लाल की जय! जतए जाउ लोक राधे! राधे! करैत रहैत छल। वृbदावनक ई िवशेषता िथक। स£पूण< वातावरण कृ¶णमय भेल रहैत अिछ। हम सभ १५ िदन वृbदावनमे ओिह आpममे रहलहुँ। िदन भिर यK-तK »मण होइक। मिbदर सभमे pीकृ¶णक दश<न होइक। भbडारा तँ होइते रहैत छलैक। हमरा नैहरक िकछु लोक सेहो वृbदावन आएल छल। संयोगवश एक िदन Cवचन सुनैत काल भेिट गेल। गाम घरक लोक भेिट जाएब ओहो परदेशमे, आनbददायी होइते अिछ। ग´प-स´पक µममे गरम िसंहक चच… होमए लागल। हम ओकरा कहिलऐक जे ई महामा तँ गरम िसंहे छिथ। तखन ओकरो सभक भक टुटलैक। सभ एक 6वरसँ बािज उठल- “गरम िसंह!” आ िक भजनानbददासजीक लोकसभ चा¡ कातसँ हमरा सभकS घेिर लेलक आओर ओिहठामसँ उठबाक संकेत केलक। हम बुिझ गेिलऐक जे बड़का गलती भए गेल। गरम िसंहक नाम निह लेबाक छल।

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हमरा लोकिन वृbदावनसँ ²ेनसँ लौिट रहल छलहुँ िक राितमे िन– पिड़ गेल। भोर भए रहल छल। आसपासक कै गोटा ह›ला करए लागल। दिड़भंगा टीशन आबएबला छल। हमहूँ सभ अपन मोटा-चोटा बbहलहुँ। सभ ²ेनक दिड़भंगा पहुँचबाक CतीIा करए लागल। मुदा ²ेन लहेिरआसराय गुमतीसँ किनक पिहने  कलै से घbटा भिर  कले रिह गेलैक। सभ आपस अपन-अपन सीटपर बैिस गेल। ओहीµममे मा6टर साहेबक एकटा गॱआ हुनका िचbहलकिन। ओ मूँगेरसँ आिब रहल छल। सम6तीपुरमे ओही िड‘बामे चढ़ल छल। मुदा ततेक लोक ठूसल रहैक जे ओतएसँ ठाढ़े आिब रहल छल। ग´प-स´पक µममे मा6टर साहेबक चच< उिठ गेल। ओकरा सभ बात बूझल छलैक। ईहो बूझल छलैक जे मा6टर साहेब पूण< 6व6थ भए गाम आपस आिब गेलाह अिछ। मुदा पु¶पाक हालतसँ ओहो िचिbतत छल। बात िकछु आओर होइत ओिहसँ पिहने ²ेन खुिज गेल। फेर अफरातफरीक महौल भए गेल। कनीके कालमे ²ेन दिड़भंगा पहुँच गेल। q

२८ . गाम अिबतिहं पता लागल जे गाममे कतेक तरहक नव घटना सभ घिटत भेल। मासे िदनमे की-की भए गेल? वृbदावनसँ आनल Cसाद लोक सभमे बॉंटल गेल। ओहीµमे अबैत जाइत लोक सभ कहए लागल जे गाममे मा6टर साहेब बैसार केने छलाह। ओ नव जागरण मंचक नामसँ एकटा नव पाट बना लेने छलाह। एिहमंचक कोनो पुरना पाटÂसभसँ कोनो मतलब निह रहतैक। एकर सभक कहक छलैक जे समाजमे सभ —यो बरोबिर अिछ। सभ जाित एक अिछ, पु ख-6Kीक कोनो भेदभाव निह। सभ िमिल कए रहए, िमिल कए जीिवकोपाज<न करए। 6वतंKता आbदोलन ओ सामािजक पिरवत<न दुनू ज¡री अिछ, दुनू भेटबाक चाही, मुदा शािbतपूण< ढंगसँ। नीक ल¬यक Cाि´तक हिथआरो नीक हेबाक चाही। ओ सभ वैचािरक दृि¸सँ बु­क समीप छल। म®य माग<सँ, शािbतपूण< असहयोग आbदोलन चलबएमे िवlास करैत छल। क¡णा,, Cेम ओ याग ओकर मूलमंK छल। मा6टर साहेब हमरा ने–ेसँ मानैत छलाह। हमरो हुनकासँ िसनेह रहबे करए। हमरा अनुपि6थितमे ओ हमर सासुरमे बैसार केने रहिथ। बैसार भेलाक बाद हमरासँ भSट करए अएलिथ मुदा हम तँ वृbदावनमे रही। हमर ससुरसँ पिरचय भेलिन। ओ यथे¸ चbदा देलिखन। मान-स£मान केलिखन। मा6टर साहेब अपन गाम लौिट गेलाक बाद िकछु गोटेकS पु¶पाक सुिध लेबाक हेतु Cेिरत केलाह। ओकर एकमाK पुK राजकुमार पुिलस िहरासतमे छल। तS समाजक कत<{य बनैत छल जे िकछु करए। मा6टर साहेबक फूककअसर भेल। ततेक असर भेल जे ओिह सiझमे दू गोटे पय…´त ¡पैआ-पैसाक संगे कiके िवदा भए गेलाह। ओिहमे तँ एकटा छल मा6टर साहेबक पुK िकशोर आओर दोसर राजकुमारक िपितऔत हिरनbदन। राितभिर बसमे जागल-जागल हिरनbदन ओ िकशेर रॉंची पहुँचल। ओिहठामसँ िर—सा कए कiके अ6पताल पहुँचएमे बेस मस¾त करए पड़लैक। रiची (कiके) मनोिचिकसालय पहुँिच ओ सभ गु£म पिड़ गेल।

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अ6पतालक अधीIकसँ भSट केलाक बाद पता लागल जे एहन कतेको मिहला मरीज छिथ जे सालोसँ ठीक भए गेल छिथ, मुदा हुनका अपन पिरवारक लोक कोनो सुिध निह लए रहल छिथ। ककरो सामािजक CितQाक डर छैक तँ िकओ स£पि‹मे संभािवत बँटबारासँ बचए हेतु अपन 6व6थ लोककS छोिड़ देने अिछ। अ6पतालमे घुमैत काल जखन पु¶पाक सामने आएल तँ ई देिख आŸय<मे पिड़ गेल जे ओ हिरनbदनकS तुरंत िचिbह गेलैक। अिपतु िकछु ग´पो केलकै। गोर लगलापर आशीव…दो देलकै। मा6टरक पुK िकशोर अपन पिरचय देलकै तँ तुरंत मा6टरक हाल-चाल पूछए लगलैक। हिरनbदनकS अ6पताल अएलासँ एवम् आl6त कएलासँ पु¶पाक गाम आपस जएबाक इ“छा Cवल भए गेल। ओकरा डा—टर पूण< 6व6थ घोिषत कए देलक संगिह खबरदार केलक जे एकरा कोनो तरहक मानिसक क¸ निह होइक से ®यान राखल जाए। तकर बाद पु¶पा ओकरा सभक संगे गाम िवदा भए गेल। र6तामे पु¶पा कiकेक मानिसक अ6पतालक अनुभवक चच… करैत रहल। ताªजुब ई लगैक जे जखन राजकुमार अपने गेलैक तँ ओकर हालत ठीक निह रहैक। मुदा हिरनbदनकS देिखते ओकर माथा सही िदशामे पलिट गेलैक। ओ सभ िकछु बूझए लगलैक, सभकS िचbहए लगलैक, सभसँ अपन बात कहए लगलैक। डा—टर बेसी बात सोचबासँ, बेसी बजबासँ मना केने रहैक तथािप ओ बिजते जाइक आओर सेहो एकदम तािक<क एवम् Cासंिगक। स£भवत: हिरनbदनक आब-भगत एवम् 6नेहामक {यवहार ओकर अbतग<गमे धसल पीड़ाकS शाbत कए देलकै। हिरनbदन उदारवादी ओ शाbत िवचारक लोक छल। अपनिपतासँ एकदम अलग। ओकरा पता चिल गेल रहैक जे ओकर बाप ओकरा संगे कतेक अयाचार केने छल। ओ अिह बातक Iितपूित< तँ निह कए सकैत छल मुदा आगू जे सही स£भव रहैक से ओ करक हेतु कृतसंक›प छल। ओकरामे ई नैितकता आनएमे मा6टर साहेबक सेहो योगदान छलिन। मा6टर साहेब िनयिमत ओकरा अपन सािवक िवचारसँ Cभािवत करैत रहलाह। हुनके Æारा उसािहत केलापर ओ पु¶पा माने अपन काकीकS आनए कiके अ6पताल पहुँचल छल। सहयोगक हेतु मा6टर साहेबक पुK िकशोर संगे छल। मुदा सभकS एिह बातक िचbता रहैक जे जँ ओकरा राजकुमारक पुिलस Æारा िगरÏतारीक समाचार भेटतै तँ फेर ने कहॴ ओकर माथा घसिक जाइक। तS ओ सभ तरह-तरहक बहाना बनबैत रहलैक। र6ता भिर ओ अपन पुKक हाल-चाल पुछैत रहलैक आओर कहुनाक हिरनbदन टरकाबैतरहल। मुदा कखनो ने कखनो ओ सही बात तँ बुझबे करतैक। बात मा6टर साहेबकS कान धिर गेलिन। पु¶पा आिब रहल छिथ, 6व6थ भए गेल छिथ, तािह बातसँ ओ बहुत Cश– रहिथ। मुदा राजकुमार लए ओहो िचbता¿6त रहिथ। 6वयं आिब गेलाह पु¶पाक हाल-चाल लेबए। पु¶पा िकछुए काल पूव< गाम आएल छिल। अिबते मा6टर साहेबकS देिख बहुत Cश– भेलीह। मा6टर साहेब िकशोर ओ हिरनbदनसँ सभ हाल-चाल लेलिथ। ओ िह£मती छलाह। भगवानमे िवlास रहिन। सोचलाह जे सही बात पु¶पाकS किहए देल जाए। से ओ किह देलिखन। राजकुमारक समाचारसँ ओ कनी िचिbतत भेिल मुदा एिह बातसँ ओकरा बहुत संतोख भेलैक जे ओ जीिवत अिछ, 6व6थ अिछ आओर देशक, समाजक िहतमे काज कए रहल अिछ।

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एक युगक बाद पु¶पाअपन गाम आएल छिल। सभ बात बदिल गेल रहैक। मुदा हिरनbदन तँ कमाल कए गेलैक। पु¶पा मा6टर साहेब ओ गामक सम6त लोकक समI ओ अपन िपताक कुकृय हेतु Iमायाचना केलक संगिह घोषणा केलक जे ओ पु¶पा आओर राजकुमारक संपि‹ गोट-गोटक आपस कए देत। ओतबे निह, अपन संपि‹क आधा िह6सा CायिŸत 6व¡प समाज क›याण हेतु मा6टर साहेब Æारा 6थािपत नव जागरण मंचकS दान कए देत। चा¡कातसँ थपड़ीक अबाज आिब रहल छल। सभ ओकर अपन िवचारक Cशंसा कए रहल छल। पु¶पा आl6त भए सुनैत रहिल। q २९ . बहुत िदन बाद एिह बेर जखन खबािसनी अएलैक तँ चंगेरामे चीज-व6तु ओ सनेस भरल रहैक। से सभ रािख आl6त भेिल। फेर ग´पक µममे वृbदावनमे जिड़ गरओने जा रहल भजनानbददासजीक चच< करैत कहलक जे गाममे ओकर चा¡कात Cशंसा भए रहल छैक। आस-पास गामक जे —यो ओतए जाइत अिछ तकरा बेस 6वागत होइत अिछ। भोजनसँ लए रहनाइ धिरक स£पण< {यव6था ओकरे तरफसँ होइत छैक। संगिह िकछु जेबीमे सेहो धए दैत छैक। ततबे धिर निह। इलाकाक जतेक िबधबा सभ छलैक सभ ओकरा आpममे ढबािह लािग गेल अिछ। सुनबामे आएल जे ओिह आpममे दू सएसँ बेसी िबधवा रहैत छैक। भजनानbददासजीक आpमक चच< चा¡कात होमए लगलैक। मुदा आpमक िनवासी सभ जतेक लोक ततेक तरहक ग´प होइत छलैक। मुदा सामाbयत: लोकक ®यान भजन कीत<नमे लागल रहैक। Cगितशील िवचारमंचक स£पक< लगातार एिह आpमसँ बनल रहैक। भजनानbदजी ओकरा सभकS Cचूर आिथ<क मदित करैत छलिखन। संगिह संकटक समयमे ओकर काय<क‹… सभ भेख बदिल कए कीत<न मvडलीमे सािमल भए जाइत छल। ककरो किनको संदेह निह होइत छलैक। भजनानbदजीक आpमक यश बिढ़ते जा रहल छल। चा¡कातक भ—त सभ आिब कए अपन सव<6व दान कए आpमवासी भए रहल छल। सभ हुनकर िदन-राित जयगान करैत रहैत छल। राजकुमारक पुिलस िहरासत बढ़ाबएसँ जज मना कए देलक। कारण ओकरा िखलाफमे पुिलसक पास िकछु सबूत निह रहैक। असलमे ओकर ओिह बम िव6फोटमे कोनो संिल´तता निह रहैक। पुिलस महज संदेहपर ओकरा धए नेने रहैक। आिखर बम िब6फोट केलक के? तकर िकछु समाधान पुिलस निह कए पािब रहल छल। जज Cगितशील िवचारमंचसँ Cितबbध सेहो समा´त कए देलक। राजकुमार जहलसँ छुिट अपन गाम आएल तँ चा¡कात गद< पिड़ गेल। मधुबनीसँ गामधिर लोकक करमान लािग गेल। लोक ओकरा फूलमालासँ लािद देलकै। जीपपर आगा-आगा ओ, पाछा-पाछा Cगितशील िवचार मंचक काय<क‹… सभ उसाहमे नारा लगबैत आिब रहल छल।

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गाम पहुँचतिह मा6टर साहेब भेटलिखन। ओ राजकुमारक बाइªजत िरहाइसँ बहुत Cश– रहिथ। राजकुमारकS ओकर घर धिर अिरआित मा6टर साहेब कतहु बैसारमे चल गेलाह। खबािसनी अपन गाम घुिर गेिल। िधया-पुता आओर पिरवारमे आब हम ततेक ओझरा गेल रही जे सासुरे हमर सव<6व भए गेल। एिहठामक मािट-पािनसँ µमश: िसनेह बिढ़ते गेल। हमर िधया-पुता सभ छेटगर भए गेल। बेटी सभहक िबआहक समय आिब गेल छल। ओिह समयमे बेटीक माने ओकर िबआह छल। िबआह भए गेल आओर बापक गड़ासँ बुझु उतरी टुिट गेल। पढ़ाइ-िलखाइसँ कोनो मतलब निह। िचÕी-पतरी जोगर भए गेल तँ बुझु परÎगत भए गेल। जािह िमिथलामे सीताक साIात् आिवभ…व भेल। जतए गागÂ, भारती सन िवदुषी भेलीह, ततए ई की भए गेल। सामािजक परंपराकS कतए लकबा मािर देलक जे 6Kीगण सभ घोघे ओढ़ने सासुर आएल, आओर घोघे तनने उपर चिल गेल। आओर एिह बातकS बहुत गौरब पूव<क बखान कएल जाइक। ई सभ सोिच मोनमे छगुbता होइत छल, अपराधबोध होइत छल। हम निह पिढ़ सकलहुँ कोनो बात निह, मुदा अपन बेटीसभक िशIाक कोनो {यॲत कोना होएत से सिदखनमोनकS िचिbतत केने रहैत छल। गाममे बेटीकS पढ़ेबाक रेबाजे निह रहैक। तथािप जे स£भव भेलैक, Cयास कएिलऐक। पढ़ए िलखएमे तेजगर सभ रहैक। अवसर भेिटते आगू बढ़ए लगलैक। हमरा तँ तीनटा बेटी छलैक। एकटा बेटो छल। कुल िमलाकए चािरटा संतान छल। ससुरक पिरpमसँ उपजा-बारी ठीक भए जाइत छल जािहसँ गुजर भए जाइक अbयथा हुनकर दरमाहासँ तँ बाहिरओ खच… निह चलैत। q

३० . गाममे रामलीला सालमे एकबेर अवžय अबैत छल। वएह मनोरंजनक Cमुख साधन छल। रेिडयो, टेलीवीजनक तँ नामो-िनशान निह छल। फोन िकओ सुनने धिर निह छल। पो6ट ऑिफससँ डाकपीन िचÕी लए अनैत छल तँ चा¡कात लोक एकÕा भए जाइत छल। िचÕी िलखनाहर आओर पढ़नाहरक संÄया बहुत सीिमत छल। तS ने जखन हरखूक घरवालीक ओतए िचÕी अबैक तँ सॱसे गाम िचÕी लए घुमैत रिह जाइत छल तँ मोसिकलसँ िकओ िचÕी पिढ़तैक। ओ िचÕी की होइत छल। बस हरखू Æारा ओकर प·ी (बरहरबावाली)क बारंवार चेतौनी छल जे ओकर माएकS तंग निह कएल जाइक। “बरहरबावाली को खबरदार! माता राम को Cणाम! िक तुम चला आओ। अलीपुर Æार से- पलटन राउत।” बेिर-बेिर अपन माएकS अपना लग बजाबै आओर बरहरबावालीकSखबरदार करैक जे ओकरा माएकS नीकसँ राखल जाए, तंग निह कएल जाए। जिहआ किहओ हरखू गाम अबैत माए लेल नुआ, ओढ़ना अबžय आनैत।

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बरहरबावालीक हेतु सेहो सभ िकछु आनैत। सभ िधया-पुताक हेतु िकछु-ने-िकछु आनैत। मुदा हरखू माए ओकरा अिबते कान फूकए लागैक। बस, शु¡ होइक बरहरबावालीक मािर-गािर। ई µम चिलते रहैक। कखनो मानैक, कखनो पीटैक। ओ दुनूकS Cश– रखबाक Cयासमे ककरो सbतु¸ निह कए पबैत छल। जाबे गाम रहए हमरा सभक ओिहठाम िनयिमत अिबतए, घरक काज कए दैत। तरह, तरहक परदेशक ग´प- स´प सुनबैत। ताªजुब बात ई जे ओ हरदम हँसैत रहैत। एकबेर अिहना कमाकए गाम आिब रहल छल िक स6ता सेाना कीनबाक एबजमे सभटा टाका ²ेनमे ठिक लेलकैक। मुदा हरखू छल िदलदार। जाबे गाममे रहैत हरहरऔने रहैत। चीलम पीबाक आदी छल से सiझकए सौटा लगा अबैत छल। गाममे चीलम पीबए हेतु कै गोटे धारक कातमे एकÕा होइत छलाह। जाबे गाम रहए ईहो ओतए ज¡रसँ हािजरी लगाबैत। गामसँ अलीपुर Æार जाइत काल हमरा ऑंगन अवžय अबैत छल। सभकS पैर छुिब Cणाम कए C6थान कए जाइत। जाइत-जाइत अपन लोकसँ फटकी हेबाक दरेग फटैक। कािन कए कहैत- “मलकािन! अहॴ पर सभके छोिड़ कए जा रहल छी।” उपाये की रहैक। गाम-घरमे आब गुजर होइत निह छल। जाबे से होइत छल, ताबे तँ कतहु निह गेल। अपन िगरहथक सपिरवार सेवामे लागल रहल। मुदा समय बलवान होइत छैक। सभ िकछु बदिल गेलैक। हरखूक आधा मोन अलीपुर Æार आओर आधा गाममे रहैत छलैक। बहुत अछता-पछता कए ओ परदेश िवदा भए गेल। हरखूकS परदेश गेला मास िदन भेल हेतैक िक एक िदन बरहरबावाली जोर-जोरसँ दहािड़ पािड़ रहल छिल। चा¡कातसँ लोक जमा भए गेलैक। कतबो लोक पुछैक िकछु बजबे निह करैक। छातीमे जोरसँ मु¾ा मारैत आओर कहैत- “गड़ा किट गेल। औ बाबू सभ। गड़ा किट गेल।” अिहसँ आगा िकछु निह। लोककS िकछु बुझेबे निह करैक। लोकक करमान लािग गेल। बरहरबावाली दहािड़ पािर रहल छिल। गामक लोक सभ तरह-तरहक अनुमान लगाबए। “कहॴ पलटनमाकS तँ ने िकछु भए गेलैक? आिक नैहरमे िकछु उनट घिट गेलैक?” तरह-तरहक कबाइत लोक करैत रहल। मुदा बरहरबावालीक हाकरोस करबाक रह6य निह बुझएमे आएल। ई धमाचौकरी चिलए रहल छल िक अँगनासँ बाहर एकटा बॉंसक चॲगा भेटलैक। —यो ओकरा बरहरबावाली लग उठौने आएल। चोगा देिखते बरहरबावाली बकए लगलैक- “एहीमे पiच सए टाका रखने छलहुँ। सभटा टाकामे घून लािग गेल, औ बाबूसभ!” खुंडी, खुंडी काटल टाकाक बुकनी बिन गेल छल।आब लोक बुझलक जे ओ एतेक िकएक छाती पीिट रहल छिल। मुदा आब भइए की सकैत छल? जे Iित हेबाक छलै से भए गेलैक। आब ओ लौिट थोड़े आएत।

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चा¡कातसँ सभ ओकरा बुझाबक Cयास केलक। मुदा ओ कनैत-कनैत थािक कए िन¶Cाण सन भए ऑंगनमे टिग गेल। लोक सभ एक-एक कए ससिर गेल। एिह तरहक हृदय िवदारक दृžयक कोनो समाधान गाम-घरमे निह छल। एक तँ गरीब-गुरबा लग टाका रिहते ने छलैक। आओर जँ कतहुसँ िकछु आमदनी भेबो कएल तँ ओ कज…क सुिद सधबएमे चल जाइत छलैक। सभकS एिह बातक छगुbता लगैक जे बरहरबावालीकS एतेक टाका कतएसँ आएल? बहुत िदनक बादमे गाममे रामलीला पाट आएल छल। अगहनी बीित गेल रहैक। सभक घर-ऑंगन अ–- पािनसँ भरल रहैक। घरे-घर हकार दए गेलैक। महादेव मिbदर लग राम लीला पाटÂक ट™ट लागल छल। िधया- पुता सभ एिह बातसँ अितशय Cश– छल। गाममे रामलीलाक आयोजन उसव जकi मनाओल जाइत छल। ओकर सभहक खेबा-पीबाक {यव6था गामक लोक सभ करैत छल। तािह हेतु रामलीलाक मंचपर लोककS भगवानकS माला पिहराबक हेतु आवाहन कएल जाइत छल। जे भगवानकS माला पिहरिबतिथ हुनके एक िदनका मvडलीक भोजनक {यव6था करक होइत छलिन। मंचसँ हुनकर नामक एलान होइत छल। लोक सभ हुनकर जयकारा लगबैत छल। आओर तकर बादे रामलीलाक काय<µम Cार£भ होइक। सiझ पिड़ते लोक रामलीला देखए िवदा होइत आस-पासक िधया-पुता सभ आगा बैसबाक हेतु पिहनिहसँ तैयारी केने रहिथ। लोकक संÄया बिढ़ते जाइत छल। रामलीलाक बीच-बीचमे तरह-तरहक हा6यक मंचन होइत छल जािहसँ लोकक मोन लगैक। कखनहुँ काल िफ›मी गीत सेहो लोकक फरमाइसपर गाओल जाइत छल। करीब मास भिर चलएबला एिह आयोजने लोकक अbत राªयािभषेकसँ होइत छल। भगवानकS घरे-घर घुमाओल जाइत छल। लोक सभ यथा सा®य टाका, अ–-पािन चढ़ाबैत छलाह। q

३१ . ओिह साल कृ¶णा¸मीक अवसरपर आpममे उसव भेल। से तेहन भेल जे देखएबला रहैक। लगैक जेना सम6त वृbदावन उमिर पड़ल अिछ। गबैआ सभ कृ¶ण भजनक से सुर-तान धेलक जे सभक हृदय ओ मोन कृ¶णमय भए गेल। भजनानbददासजी महराजक जय! कीत<न मvडली महराजजीक पाछा-पाछा गबैत-नचैत चिल रहल छल। सभक गाल अबीरसँ झक-झक, लाल टुह-टुह कए रहल छल। मृदंग, ढोल, झाइल ओ नगाराक 6वरक संग भजन गायक पंि—तब­ चिल रहल छलाह। एहन भारी उसव तँ िबरलैके देखएमे अबैत छल। आpमवासी दूसएसँ अिधक िबधवा सभ एक6वरमे भजन करैत, नचैत, गबैत पाछा, पाछा चिल रहल छिल।

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एवम् Cकारेण सम6त वृbदावनक पिर»मण कए जखन सiझमे भजनानbदजी सदल-बल आpम आपस अएलाह तँ Cश–ता ओ िवजयक दप<सँ हुनकर मुख मvडल Cात:कालीन भगवान भा6कर सन रि—तम आभासँ ओत्-Cोत् लािग रहल छल। ताबतेमे आpमवासी चेला, चेलीसभ जोरसँ िचकरल- “भजनानbददास महराजक जय!” ई एकटा महज संयोगे रहैक जे ओिह समय हम सभ सेहो वृbदावन गेल रही। बहुत िदनसँ भजनानbददास माने गरम िसंहक िकछु समाचार निह बुझाइत छल। खबािसनी गाम आएल तँ ओकरो िकछु समाद निह रहैक। बहुत िदनसँ कतहु बहराएलोनिह रही, से मोन उिब गेल रहए। तँ सभ गोटेकS िवचार भेलैक जे चली तीथ< घूिम आबी। एिहबेर हमर सासु गामे रिह गेली। कारण िकओ-ने-िकओ तँ ओतए ब“चा सभक देख-रेख हेतु चाही। अ6तु, हम दुनू {यि—त, हमर ससुर आओर गामक तीनटा मसोमात सभ संगे िवदा भेलहुँ। खबािसनीकS सेहो संग लए लेिलऐक जािहसँ र6तामे आओर ओहूठाम मदित करत। मदित ओ की करत? वृbदावन पहुँचते दुिखत पिड़ गेल। आब तँ पिहने ओकर इलाज कराउ। ताहीµममे सभक िवचार भेलैक जे भजनाbद दासेक मदित लेल जाए परbतु ओिहठाम तँ जबरद6त उसवक महौल छल। के ककरा पुछैए? तथािप हमसभ ओही आpममे डेरा लेलहुँ। संयोगसँ बगलेमे एकटाबैद रहिथ। ओ िकछु जड़ी-बुटी देलिथ जािहसँ खबािसनी शीß नीक भए गेल। भजनानbददासकS देिख कए के कहत जे ई वएह–गरम िसंह िथक। नाकपर ठढ़का चानन, िKपुंड, िपअरका व6K, राधे-राधे िलखल दोशाला सिदखन ओढ़ने चलैत तँ राधे, बजैत तँ राधे, हँसैत तँ राधे! राधे! की कमाल छैक? समय ओ पिरि6थित जे निह कए दैक। हमरा लोकिनकS देख भजनानbददास (उफ< गरम िसंह) तुरbत अपन चेलाकS पठओलक आओर समाद िदओलक जे सiझमे िनचैनसँ ग´प-स´प करब। ओिहना गाम आपस निह चल जािथ। 6कूिलआ संगी छल। सbतक वगए से धए लेने छल। 6प¸त: ककरो अिहत करैत निह देखाइत छल। अ6तु, सभहक िवचार भेलैक जे सiझमे ओकर भSट कएल जाए। सiझ पिड़ते दूटा चेला हमरा सभकS संग कए भजनानbददासजी महराज लग लए गेल। हमरा सभ िक दvडवत होइतहुँ- जे पिहने वएह हाथ जोिड़ ठाढ़ भए गेल। कुशल-Iेम पुछलक। मसोमात सभक पिरचय पाती भेलैक। ओकरा पता रहैक जे काि˜ भेने हम सभ काशीक हेतु C6थान कए जाएब। हमरा लोकिनक बहुत मान- दान भेल। यथे¸ िवदाइ भेटल आओर अबैत रहबाक आमंKण सेहो। भजनानbददासक िवनीत {यवहार देिख पाथरो पािन भए जाइत। हम सभ तँ मनु—खे रही। फेर हम तँ ओकर 6कूिलआ संगी रिहऐक। मसोमात सभकS सेहो ओकर {यवहार नीक लािग गेलिन। ओ सभ िकछु िदन आओर ओिह आpममे रहबाक हेतु तैयार भए गेलीह। तािह बातसँ भजनानbददासजी अयbत Cश– भेलाह। चेला सभकS हुनका सभक उिचत देख-रेख करबाक आदेश देलिखन। हमसभ पूव< िनध…िरत काय<µमसँ काशी िवदा भए गेलहुँ। काशी, Cयाग होइत हम सभ गाम आपस अएलहुँ आओर खबािसनी ओ£हरेसँ गाम चिल गेिल। गाम जाइत काल दिड़भंगा टीशनपर ओ हमरा असगर पािब कानमे कहलक जे भजनानbददास ओकरा िचbहलकै। गाम-घरक

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हाल-चाल पुछैत रहैक आओर अबैत काल भिर ऑंजुर चानीक िस¾ा पकड़ा देलकैक। कहलकैक जे एकरासँ अपन घर बािbह िलअह। गॱवा, घ आ जे जतए देखेलैक सभकS ओ अपना भिर 6वागत केलक। ककरो उपेIा निह होमए देलकैक। भजनानंद दासकS िचिbह तँ हमहुँ गेल रिहऐक मुदा हमरा ओकरासँ िकछु लेबाक मोन निह केलक। अपना भिर ओ बहुत आ¿ह कएलक। जे छै, मुदा एतबा तँ तए रहैक जे ओ भगवानक शरणागत भए गेल रहए। जटा जूट बढ़ा लेने रहएिक बिढ़ गेल रहैक। मुदा गाम घरक लोककS किनको उपेIा निह करैक। q

ऐ रचनापर अपन म ◌ंत{य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। जगदीश Cसाद मvडल - पंगु (उपbयास )- आगi आ दूटा लघुकथा १ जगदीश Cसाद मvडलक पंगु उपbयाससँ... 6. जखनसँ देवचरण अपन पोताकS कहलैन जे ‘बौआ, सiझू पहर, पिरवारक सभ एकठाम बैस आगूक िवचार करब’ तखनसँ िहनका मनमे बेर-बेर वएह C« घुिरयाए रहल छैन जे पिरवारमे जिहना अवोध-अनाड़ी[i] हिरचरण अिछ, तिहना तँ आनो-आन अिछए, मुदा पिरवारक भार तँ ओकरे सबहक ऊपर ने पड़त। तँए केतेक भार कोन ¡पे केकरा देल जाए, तेकर िनण<य करब साधारण बात निहयS अिछ। मुदा नइ रिहतो भार तँ ओकरे देब अिछ। ओना, अखन अपनो जीबै छी आ िपता-माताक संग दादीसेहो हिरचरणक सोझामे छइहे,जइसँ कोनो काज जँ ग गर बुिझयो पड़तै तँ दोसर-तेसरसँ पुिछ ओइ काजकS सही ढंगसँ कएलो तँ जाइए सकैए। जैठाम से निह रहैए तैठाम ने काजक सफलतामे िकछु-ने-िकछु गड़बड़ी होइक स£भावना सेहो रिहते अिछ। ओना, मनुखक समािजक जीवन ओहन अिछए जेकर जीवन धार [ii] समाजक धार होइत Cवािहत होइए जइसँ देखैक, जनैक आ करैक स£भावना सेहो रिहते अिछ। हँ, जैठाम समािजक जीवन नइ रहल, माने बेकतीगत जीवनधाराक धार ओइसँ िभ– रहल तैठाम बेकती औआ-वौआ जाइते अिछ। मुदा जैठाम बेकतीक जीवन धार समािजक जीवbत धाराक संग Cवािहत होइए, तैठाम तँ िकछु-ने-िकछु िसखबो आ स£हरैयोक उपाय रिहते छइ।

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जिहना देवचरणक मनअपन पोताकभिवसक िदशा िनध…िरत करैमे ओझराएल छेलैन तिहना हिरचरणक मनमे सेहो बेर-बेर C« उिठ रहल छल जे बाबा की कहता, की पुछता आिक की करैले कहता।खाएर जे कहता मुदा बुझब तँ सुनला पछाितये ने आ बुझला पछाितये ने ओकरा स£हारबोक कोिशश करब। िबनु बुझल आिक िबनु िवचारल काज करैमे िकछु-ने-िकछु ओहन िवè-बाधा एलापर सम6यामे लोक पिड़ते अिछ। जिहना नव जगह, माने िबनु देखल-जानल जगह वा िबनु बुझल-जानल काज, नव लोकक लेल अbहराएल जकi रिहते अिछ, मुदा वएह काज सफलतापूव<क केला पछाइत जीवन-शि—तमे तीवÐतो तँ अिबते अिछ। िदन बीतल। ओना, देवचरण अपन प·ीसँ आ पुतोहक बीच पिरवािरक आन-आन गप-स´प करैथ, मुदा सॱझुका बात- िवचार करैक योजना अखन तक दुनूमे सँ िकनको ने देवचरणे कहने छेलिखन आ ने हिरचरणे कहने छेलैन। तँए हिरचरणक दािदयो आ माइयोक मनमे कोनो िवचारक िबbदु उठबे ने कएल छेलैन। ओना, जखन सभ ए¾े पिरवारमे छीआ पिरवारेक िजनगीक बातो अिछ, जे िकछु-ने-िकछु सभकS बुझलो छैbहे, तैबीच सॱझुका बैसारक जानकािरयो देब ओते महत् निहयS रखैए, जेते आनक संग रहैए। िजनगीक नीक-बेजाए बातो आ काजोक तँ िकछु-ने-िकछु जानकारी रहने सुगमसँ िवचारोकS िबकछाएब आ काजोकS फिरछाएब सहायक होइते अिछ। मुदा ऐठाम तँ से निह अिछ। ऐठाम तँ पिरवािरके िवचारो छी आ काजो छीहे। हँ, जँ कोनो नव काजे आिक नव िवचारे रहैत तखन सामाbय िजनगीसँ[iii] हटलो रहैत जइसँ िकछु-ने-िकछु नीक- बेजाइक स£भावना रहबो करैत, मुदा सेहो तँ निहयS अिछ। सiझक आगमन भेला पछाितयो, ने देवचरणेक मनमे कोनो तरहक उथल-पुथल छेलैन आ ने पिरवारक आने-आन जनक बीच। सासु-पुतोहुकS बुझले ने छेलैन तँए हुनका दुनूक मनमेउथल-पुथलक कोनो स£भावनो िकए रिहतैन। देवचरण तँ सहजे पिरवारमे सहयोगीक ¡पमे पोतापर नजैर गड़ौनिह छला तँए िहनका मनमे कोनो तरहक मिलनता िकए रिहतैन। हँ, हिरचरणक मनमे िकछु-ने-िकछु उथल-पुथल ज¡र छल। बाबा की कहता की निह..! बख…क पािनक बुलबुला जकi हिरचरणक मनमे िवचार उठबो करै छेलै आ अपने फुिट-फुिट मेटेबो करै छेलइ। अपन िनध…िरत समयक िहसाबसँ िकछु पिहनिह देवचरण दरबªजापर बैस मने-मन िवचारए लगला जे कोन ¡पे हिरचरणकS बुझौल जाए। ओना, पिरवार सभमे एहनो होइते अिछ जे जे पिरवारक िसरजन [iv ] रहला ओ सबहक काजकS ऑंिक- ऑंिक फुटा-फुटा सभकS करैले किहते छैथ, जइसँ पिरवारक सि£मिलत काज रिहतो एक-दोसराक बीच दूरी रिहते अिछ, माने ई जे सभकS सभ काज निहयÔ बुझल रहल। ओना, एहेन भेलासँ एकटा एहेन िवचार जिगते अिछ जे आनक काज निह बुझल रहने दोसरक मनमे उिठ जाइए जे हमहॴटा काज करै छी आ दोसर-तेसर बैसले रहैए, तँए पिरवारक जँ सभकS सबहक काजक जानकारी रहल तँ सबहक मनमे एहेन िवचारक आगमन भइये जाइए जे सभ अपन-अपन काजक पाछू लागल छैथ, जइसँ िकनको मनमे काज नइ करैक शंकाक आगमन निहयS होइए। तैसंग ईहो लाभ तँ होइते अिछ जे पिरवारक सभ काज सबहक नजिरयोपर रहल आ केकरो बैसल रहैक शंका नइ रहने सबहक Cित सबहक मनमे Cेमो बढ़ल। देवचरण ई सोिच काजक िनध…िरत समयसँ पिहने काजक पाछू लिग गेला जे जँ कोनो काज करैसँ पिहने ओइ काजक भूत-भिवसपर नजैर दौड़ा देब तँ ओइ काजकS सफल होइक बेसी स£भावना बिनयS जाइए। जँ से नइ भेल तँ काजक बहुतो िबbदुगप-स´पक µममे नजैरपर निहयÔ चढ़ैए, जइसँ िवचार केला पछाितयो िकछु-ने-िकछु िबbदु छुटल रिह गेने काजमे कमी होइते अिछ। देवचरणकS दरबªजापर बैसल देख हिरचरण सेहो आिब कऽ बैसल। मुदा बाजल िकछु ने। हिरचरणकS चुपचाप बैसल देख देवचरणक मनमे जगलैन जे जखन दुनू गोरे काज करैक µममे उपि6थत भइये गेल छी, तखन जँ चुपचाप समयकS िनकलए िदऐ सेहो नीक निहयS हएत। देवचरण बजला- “बौआ, जखन दुनू गोरे काजक िवचार करैले एकठाम बैस गेलॱ तखन माइयो आ दािदयोकS बजा लहुन।” बाबाक आदेशमे िबना िकछु जोड़-घटाउ केने हिरचरण ऑंगन जा दािदयो आ माइयोकS कहलक। ओना, ओहो दुनू गोरे िबना िकछु बजने-भुकने हिरचरणक संगे दरबªजापर पहुँचली। राधाचरण सेहो पिरवारक Cमुखजनक सीढ़ीपर छलतँए ओकरो

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५६ म अंक १५ अग᭭त २०१८ (वषᭅ ११ मास १२८ अंक २५६ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 48

रहब अिनवाय< होइतै मुदा ऊिह नइ रहने पिरवारक गौण-पाK बिन गेल अिछ। होइतो अिहना छै जे जइ पिरवारमे जे जन जेहेन ऊिहगर रहल ओ अपन ऊिहक िहसाबसँ पिरवारक िµयामे ओ‹े संल½न भइये जाइए। तीनू गोरेकS देख देवचरण बजला- “बौआ, जइ पिरवारमे अपना सभ छीओ पिरवार ए¾े गोरेक निह, सबहक छी। तँए सभकS अपना-अपना उिकितये ऐ िवचारकS नीक जकi मनमे रोिप अपना-अपनाकS ओइमे संल½न रखबाके चाही। जँ से नइ हएत तँ िकछु गोरेकS काजो आ जवाबदेिहयोमे उदासीनता औत आ िकछु गोरे जे अपन पिरवारकS अपन बुिझ सेवा करत ओ दोसरसँ अपनाकS महपूण< बुझबे करत। तँए सबहक बीच सबहक काजक जानकारी रहब ज¡री अिछ।” ओना, हिरचरण अिछ तेरहे-चौदह बख<क, मुदा देवचरणक िवचारकS नीक जकi बुिझ गेल। बाजल- “बाबा, ई तँ भेल वैचािरक IेKक बात, मुदा बेवहािरक IेK तँ ऐसँ अलगो भऽ सकैए िकने?” हिरचरणक िवचार सुिन अपन सहमत जतबैत देवचरण मुड़ी डोलबैत बजला- “बेस बात बौआ कहलह। पिरवार तँ काजक धुरी बना कऽ ने चलैए। तेही सबहक िवचार करैले ने कहने छेिलयह जे सभ िकयो एकठाम बैस एक मतक र6तासँ पिरवारकS आगू िदस बढ़ाएब।” देवचरणक िवचार सुिन हुनक प·ी–िसंहेसरी बजली- “हम दुनू सासु-पुतोहु 6Kीगणे भेलॱ, केतबो हएब तँ अपन घरे-अँगना आ खेते-पथार धिर हएब। तिहना हिरचरण सेहो बाले-बोध भेल। राधाचरणक कोनो ठेकाने ने अिछ जे ओ की अिछ आ की करत।” प·ीक िवचार सुिन देवचरण मु6की भरैत मुड़ी डोला-डोला मने-मन िवचारए लगला। प·ीक िवचार से˜ोअना सत् अिछ, मुदा सत् रिहतो सो˜ोअना उिचत केना कहल जाएत? हँ, जइ पिरवारमे पु ख जीिवत रहला, माने पु ख Cधान पिरवारमे एहेन िवचार स£भव भइयो सकैए, मुदा जइ पिरवारमे पु ख नइ रहला तइ पिरवारमे तँ मिहलेक ने Cधानता हएत। तैठाम िहनक िवचार केना स£भव भऽ सकत। मुदा अखन तँ गाम-समाजक िवचार करए निह बैसल छी, अखन तँ माK अपन पिरवारक िवचार करए बैसल छी, तँए अखन तँ पु खे Cधान पिरवार भेल। नीक हएत जे पिहने अपन पिरवारक भूतक जानकारी संIेपमे सभकS िदऐ। जिहना कोनो धारक उéगम 6थलसँबीचक Cवािहत होइत धाराक धार अिbतम कोनो अगम धारे वा समुcेमे समािहत होइए तिहना ने पिरवारोक अिछ। ओना, पहाड़क दोसर ¡प अिछ। ओ धरतीपर उठल रहैए, जेकरा चोटीपर चढ़ैमे बहुत अिघक भीरो होइए, मुदा ओइठामसँ पुन: िन“चi उतरैमे, माने धरतीपर अबैमे, चढ़ाइ काल जेहेन मेहनत भेल रहत तेहेन ढलानपर ढलकैत उतरैमे भीर निहयS होइए। जखन िक र6ता दुनूक चढ़ैयो आ उतरैयोक ए¾े रहैए। मुदा ऐठाम तँ पिरवारक िवचार करैक अिछ। पिरवारक र6ता धारो आ पहाड़ोसँ िभ– अिछए। िकए तँ धारे-पहाड़ जकi पिरवारोक गित-िविध तँ अिछ निह। ऐठाम मनुखक बीचक र6ता अिछ। जइमे समािजक पिरवेशक संग शासकीय पिरवेश सेहो अिछ। शासन तंKक अनुकूल पिरवारक पिरवेश बनैए। जँ शासन-तंK पिरवार पIी रहल तँ सुगम रहल आ जँ शासन-तंK Cितकूल रहल तँ िवपरीत पिरवेश बिनते अिछ। खाएर जे अिछ जेतए अिछ से तेतए रहह। ऐठाम तँ अपन बाप-दादाक िनरमौल पिरवार अिछ, जेकर अपन इितहास अिछ। मुि6कयाइत देवचरण प·ी िदस देखैत बजला- “अहiक िवचार तँ नीक अिछए मुदा जखन सभ िकयो मनुखवंशक मनुख छी, तखन देह-हाथ छीपलासँ थोड़े हएत।” बजैक µममे देवचरण बािज तँ गेला मुदा लगले मनमे उठए लगलैन जे अनेरे कोन िवचार िदस भँिस गेलॱ। अखन तँ हिरचरणकS पिरवारक Cमुख क‹…क ¡पमे ठाढ़ करैक अिछ...। िब“चेमे हिरचरण बाजल- “बाबा, अखन जइ िवचारे सभ िकयो एकठाम बैसलॱ हेन, पिहने ओकर िवचार क¡, पछाइत समय रहलापर आरो-आरो बात-िवचार करब। ने िकयो आन छी आ ने आइये भिर समयो अिछ।”

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५६ म अंक १५ अग᭭त २०१८ (वषᭅ ११ मास १२८ अंक २५६ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 49

ओना, हिरचरणक िवचारसँ दादीक मनमे कनी कुवाथ ज¡र भेलैन। कुवाथक कारण छेलैन अपन िवचारपर सँ नजैर हटाएब,मुदा बाल-बोध हिरचरणकS बुिझ मुँह ब–े रखली। जे बात देवचरण बुिझ गेला। मुदा ओइ िवचारकS पुन: जागृत निह करैत अपन पिरवारक िवचार उठबैत बजला- “बौआ हिर, सािठ बख<क पिरवािरको िजनगीक आ शासनोक चढ़ाव-उतारक अनुभव अिछ, जे तोरा नइ छह। तँए, संIेपमे पिहने ओ िवचार भूिमका ¡पमे जािन लेबबेसी नीक हेतह।” जिहना असिथर भेल पोखैरक पािनमे आ Cवािहत होइत धारक पािनमे हेलैक अलग-अलग लूिरक ज¡रत होइ छै, माने पोखैरक हेलब जकi धारमे हेलब तँ डुिमये जाएब। िकएक तँ Cवािहत होइत धारक धारामे हेल कऽ पार करैमे दोहरी सावधानीक ज¡रत होइ छइ। पिहल, धारक धारेमे ने भँिस जाए, आ दोसर पार करब तँ अिछए। जे पोखैरमे नइ होइए। पोखैरमे माK एकटा सावधानीक खगता रहैए, एक महारसँ दोसर महारपर जाएब। हिरचरण बाजल- “बाबा, पिरवारक जे पैछला धारा रहलमाने इितहास, ओ तँ आब भूत बिन चुकल अिछ, ओकरा तँ वत<मानक नजैरसँ निहयS देखल जा सकैए, मुदा जिहना वत<मान भूतपर ठाढ़ अिछ आ भिवस िदस बढ़ैले िहयािस रहल अिछ, तिहना ने ओकरा मजगूतीक संग पकड़ैयोक अिछए।” ओना, पिरवारमे हिरचरण बाले-बोधक pेणीमे अिछमुदा यएह बाल-बोध ने भिवसमे पिरवारक मेह ¡पमे ठाढ़ हएत। जिहना िभनसुरका सु ज देख लोक अनुमान करैए जे आजुक िदन केहेन हएत तिहना हिरचरणक बातकS सीमÎिकत करैत देवचरण बजला- “बौआ हिर, पिरवारमे दू रंगक सद6य होइए, पिहल पु ख आ दोसर मिहला। अखन तक जे अपना सबहक पिरवारक धारा रहल,ओइमे जिहना पु खक लेल घर-बहार जाइ-अबैले, करै-धड़ैले सगतैर खुजल रहैए तिहना मिहलाक लेल सगतैर तँ बbधन लगले अिछ। पु खक अछैत जँ मिहला पिरवारसँ िनकैल पिरवािरक िµया-कलाप करैयो चाहती तँ पिरवारक संग समाजोक लोक ऑंगुर बतेबे करतैन।” िब“चेमे हिरचरण बाजल- “एकरा के काटत! एहेन तँ सभ िदन होइते आिब रहल अिछ!” पैछला िवचारकS देवचरण सो˜ोअना कबुल लेलैन, मुदा भूतक कबुल कएल िवचारकS भिवसमे केना कबुलनामा बनौल जाए,ऐठाम आिब अँटैक गेला। देवचरण एक िदस जखन पाछू िदस िहया कऽ देखए लगैथ तँ साफ देखा पड़ैन जे पिरवारक जे पैिKक स£पैत अिछओ तँ न¸ भऽ गेल छल, मुदा पिरवेश एहेन बनल जे ओ पैछला पीिढ़क अरजल स£पैत पुन: पिरवारमे जुिड़ गेल। तिहना आइ धिरक जे समािजक राज-स‹ा रहल ओ गुलामीक रहल, माने िवदेशी शासनक, जे मिटयामेट भऽ पुन: 6वतंK ¡पमे जीिवत भऽ गेल। मुदा अपन जे िजनगी रहल तइमे आ आगूक जे हिरचरणक िजनगी हएत ऐमे िवपरीत स£बbध अिछए। तँए, पैछला िजनगीकS इितहासक प–ामे समैट ऐगला िजनगीक ने िदशा बोध करब ज¡री अिछ...। देवचरण बजला- “बौआ हिर, अखन धिरक जे पिरवारक इितहास रहल ओ पंगुक ¡पमे रहल। माने जेहेन िजनगीमे लेाक 6व“छbद सiस लैत िबचड़ैएसे तँ निहयS रहल। तैयो अपन सािठ सालक िजनगी किट गेल। मुदा आब जखन अपना िदस तकै छीतँ बुिझ पड़ैए जे देहमे ओहन शि—त निह अिछजेकर उपयोग करैत पिरवारक गाड़ीकS आगू मुहS ससारब, तँए जाबे जीबै छीताबे जहi धिर स£भव हएत से तँ करबे करब, मुदा...।” ‘मुदा’ किह देवचरणकS चुप होइत देख हिरचरण उसुक होइत बाजल- “तखन?” देवचरण बजला-

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“तखन यएह जे पिरवारक जे पंगुपन रहल ओकरा पूित< करैत, ओइ पंगुपनकS मेटबैतजिहना िचड़ै अकासमे 6व“छbद जीवनक सiस लैत उड़ैए तिहना पिरवारोकS बनाएब छह।” देवचरणक िवचार सुिन जेना सभिकयो[v] पंगुपनक ग£भीरताकS बुिझ गेल तिहना सभ सभ िदस नजैर दौड़बैत, ग£भीर होइतचुपचाप उिठ-उिठ अपन-अपन जीवन-िµया िदस बढ़ए लगल। q श‘द संÄया : 1853, ितिथ : 30 मई 2018 जारी....

[i] पिरवािरक िजनगी - ले [ii] मनुखक िजनगीक िµया [iii] गितशी िजनगीसँ [iv] pेQजन [v] प·ी, पुतोहु, आ पोता

जारी.... २

जगदीश Cसाद मvडल दूटा लघुकथा- ‘मानसरोवर याKा’, ‘करतब ’

मानसरोवर याKा पिरवारक सात भiइक भैयारीमे वैŽािनक भाय–माने जीतनलाल भाय– जेठ छैथ, जे िदस£बरमे सेवा िनवृि‹ भऽ भाभा शोध सं6थानसँ गाम आिब गेला। ब“चेसँ Cखर बुिधक रहने जीतनलाल भाय गामक 6कूलसँ एम.एस-सी.तक Cथम 6थान पबैत रहला। ओना,शु¡मे माने हाइ 6कूलसँ कौलेज धिर मनमे यएह िवचार रोपने छला जे एम.एस-सी.क पछाइत कौलेजमे

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नोकरी करब, Cोफेसर बनब। मुदा एम.एस-सी.क िरज›ट िनकैलते भाभा शोध सं6थानमे भेकेbसी भेल, जीतनलाल भाय अ´लाइ केलैन आ सले—ट भऽ गेला। अड़तीस बख<क सेवाक पछाइत वैŽािनकजी 5 िदस£बरकS सं6थानसँ सेवा िनवृि‹ भेला। जुलाई मासक पिहल स´ताह, आcा नIK काि˜ये समा´त भेल। सालक अखन तकक जे मौसम रहल माने बरसातक, ओ अिनिŸत रहल। अिनिŸत भेल जे ऐगला समय माने बरसातक केहेन हएत तेकर अनुमान ठीक-ठीक नइ लागब। जिहना िभनसुरका सुज< देखलासँ लोक अनुमान तँ कइये लइ छैथ जे औझुका िदन केहेन हएत। तिहना सालक तीनू मौसमक सेहो अिछ। तीन मौसम भेल जाड़, गरमी आ बरसात। कोनो मौसमक, पूव< पI माने चािर मासक मौसममे शु¡क जे एक-सवा मास होइए, ओकर सीख-लीख पकैड़ लोक अनुमान लगा लइ छैथ जे मौसमक ऐगला ¡प केहेन हएत, से नइ भेल। िकए तँ अखन तक जे समय बीतल छल ओ ने रौिदयाहेक आभास दइ छल आ ने तेहेन िवकराल बरसातेक। शु¡ जेठमे एकटा नमहर बरखा भेल जइसँ िकसान सभ अपन गरमाधानक बीआसँ लऽ कऽ अगहनी-धानक बीआ तक पािड़ लेलैन। ओना,बीआ पाड़ला पछाइत केते गोरेक मुहसँ िनकलल छेलैन जे ऐबेरक समय सवारी हएत जइसँ मौसमो आ समयो नीक रहत। जखन मौसम नीक रहत तखन उपजा-बाड़ी सेहो नीक हेबे करत। संजोगवश जेठ मासक बीच-बीचमे दूटा हाली बरखा भेबो कएल, जइसँ धानक बीआक उपज नीक रहल। शु¡ अखाढ़मे माने आcा नIKक पिहल िदन नीक बरखा भेल, जइसँ तीन- चािर िदन धुरझार धनरोपनी चलल, एक चौथाइसँ बेसी खेत अबाद भऽ गेल। मुदा पोखैर-झiखैर निह भरल तइसँ केते गोरेक अनुमान ईहो हुअ लगल छेलैन जे जँ आcामे भूिम भरल निह तखन रौिदयाहे समय मानल जाएत। ओना, ढेनुआर नIK सभ पछुआएले अिछ, तँए पािनसँ भूिम भरैक स£भावना समा´ते भऽ गेल सेहो निहयS कहल जा सकैए। आcा नIKक उतारमे सेहो एकटा बरखा भेल जइसँ दू िदन रोपनी चलल, मुदा पोखैर-झॉंखैर खालीक-खािलये रिह गेल। आcाक शु¡क बरखामे जेतेक पािन पोखैरमे बेिसयाएल छल ओ तेरह िदनक जेठुआ रौदमे सुिख कऽ किमयाइये गेल। ओना, आम-जामुनक सुभर पैदावार भेबे कएल अिछ। रेिडयोओ-अखबारो सभसँ मान सरोवरक महामक भरपूर Cचार शु¡ भेल। गाम-घरक लोक तँ क£मो मुदा महनथानो सबहक आ शहरो-बजारक लोक सभ आकिष<त भेबे केला। मानसरोवर जेबा-ले सभ तरहक सुिवधो भइये गेल अिछ। ओना, हवाई जहाजसँ लऽ कऽ हेलीके´टरआिकचिरचिकया गाड़ी सबहक र6ताक बाबजूदो पएरे सेहो चलइ पड़ैए। मुदा से लोकक मनसँ घसैक गेल अिछ। घसकबो केना ने करत, जैठामक िवचारमे माघ सन जाड़क समयकS एक िदन बीतने लोकक मनमे िबसवास जिगते अिछ जे ‘गेल माघ उनतीस िदन बiकी’, तैठाम जँ आधासँ बेसी र6ताक सवारीक सुिवधा मानसरोवरक लेल भइये गेल अिछ।तँए, धापे-धाप पहुँचब असान भइये गेल अिछ...। जीतनलाल भाय मनमे रोिप लेलैन जे ऐबेर मान सरोबरक याKा करबे करब। दूरक याKा अिछ तँए जँ एकटा संगी भऽ जाएत तँ ओ नीक रहत। सातो भiइक भैयारीमे जीतनलाल भाय लगा पiच भiइ बाहरे-बाहर नोकरी करै छैथ, खाली हम दुनू भiइ माने हम आ जीवनलाल भाय गाममे रहै छी। हमर कोनो िहसाबे ने अिछ, सातो भiइमे सभसँ छोट रहने छबो पढ़ल-िलखल भाइयो आ वृ­ िपताजी सेहो पढ़बै-िलखबैपर िधयान नै देलैन, अनठा देलैन, जइसँ नामो-गाम आ िकताबो पढ़ब तँ सीख लेलॱ, मुदा गीता-भागवत पढ़ैक लूिर निह भेल। ओना, धरमागती पुछी तँ हुनका सबहक दोख निहयS छैन। िकए तँ अधबेसूए अव6थामे माइयो मिर गेली आ िपताजी सेहो िबमारीक फेड़मे पिड़ गेला जइसँ हमरा पढ़ै-िलखैपर िधयान निह दऽ सकला। ओना, जेठ भाए सभ सIम छला जइसँ पढ़ा-िलखा सिकते छला मुदा ओ सभ कान-बात ऐ दुआरे नइ देलैन जे जखन सभ भiइ नोकरी किरते छी, नीक कमाइ अिछए तखन घरक ओगरवािहयो-ले आ मातो-िपताक टहल-िटकोरा-ले तँ आदमी चाहबे करी, तइले भने भैयारीमे सातम भाय- सेवालाल अिछए। जखन नोकरी-चाकरी निहयS करैक छै तखन अनेरे िकए पनरह-बीस बरख तक 6कूल-कौलेज धॉंगत...। तँए हम बौक-बकलेल रिहये गेलॱ। ओना, हमरा सन ढेरो लोक गामोमे अिछ आ देशोमे अिछए। दुिनयiक तँ कोनो िहसाबे निह। ओना, जँ बुिधमान आ बौक-बकलेलक जनगणना ठीकसँ हुअए तँ एकोअना लोक बुिधमानक pेणीमे नइ औत, पनरहअनासँ बेसीए हमरे सन-सन लोकक अिछ।

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परसू वैŽािनक भाय मानसरोवरक याKापर िनकलता। दूरक याKा, तँए एकटा संगीक खगता छैbहे। ओना, अखन तक बहुतो याKा वैŽािनक भाय कऽ चुकल छैथआ सेदेशक संग दुिनयÔक, मुदा तइ सभ याKामे प·ी संग दइ छेलैन। मुदा ऐ याKामे जीतनलाल भाय प·ीकS संग निह लऽ जाए चाहै छैथ। नइ लऽ जाइक िवचारक पाछू कारण छैन जे एक तँ उमेरोक िहसाबसँ, दोसर अपन तँ फुहराम शरीरो छैन आ सभ िदन जे लोहा-ल¾ड़क बीच काज केलैन तइसँ देहमे ताकतो छैbहे। मुदा भौजी तँ भिर िदन डेरामे रिह खेबो-पीबो खूब करै छेली आ टी.बी., क£´यूटरक खेल देखैत-देखैत अथबलो भइये गेल छैथ, माने केतेको िबमारी सेहो पोिस नेने छैथ तँए वैŽािनक भायक मनमे शंका छैन जे जँ प·ीकS संग करब तँ अपन मदत िक हएत जे अपने भिर िदन िहनकर टहल-िटकारो करए पड़त, तँए निहयS लऽ जाएब नीक। हमरा, ओना हमर नाओंएसेवालाल छी मुदा आब ओते ऊिहये ने रहल जे मानसरोवर सन र6ताकS पार करब। ओहन-ओहन र6ताक ठेकाने रहत, आिक िदशÎसे नइ लागत सेहो ठीक अिछ। तँए, जाइने कऽ वैŽािनक भाय हमरा निह कहलैन। हँ, मैझला भाय–जीवनलाल भायजे गामेमे रिह िव^ालयमे नोकरी करै छैथ। माने गामसँ कोस भिरपर िव^ालय छैन। तहूमे सं6कृत महािव^ालय,जेकर की ि6थित अिछ से केकरोसँ छीपलो निहयS अिछ। िव^ाथÂसँ बेसी िशIके छैथ। जीवनलाल भाय अपनउपि6थित बना, एक-आध घbटा संगी सभसँ गप-स´प करै छैथ आ घुिम कऽ अबै छैथ। यएह हुनकर सभिदना ¡िटंग छैन। Cोफेसरक दरमाहा सेहो पिबते छैथ जइसँ पिरवारोक भरण-पोषण नीक जकi होइते छैन। तँए, जीवनलाल भाय बेसी उपयु—त रहतैन। वैŽािनक भायकS सेहो जीवनलाल उपयु—त संगी बुिझ पड़लैन। जीवनलालकS लगमे बजा वैŽािनक जीतनलाल भाय कहलिखन- “बौआ, मानसरोवर जाइक िवचार मनमे बहुत िदनसँ अिछ मुदा समय नइ पबै छेलॱ, तँए निह गेल भेल। ऐबेर समय पेलॱ हेन,जेबाक िवचार भऽ गेल। दूरक याKा छी तँए जँ दुनू भiइ संगे चलब तँ नीक रहत।” मानसरोवरक जे आ®यािमक पिरचय अिछ ओ जीवनलाल भाय जनै छैथ, तँए जेबाक कोनो तेहेन िजŽासा मनमे निह जगलैन। ओना, नवकबिरये उमेरमे माने तीसे-ब‹ीस बख<क अव6थामे जीवनलाल भाय मानसरोवरक याKासँ भऽ आएल छैथ जइसँ र6ताक दुग<मता अखनो ओिहना मनमे नचै छैन। मुदा वैŽािनक भाइक मनमे िकए एहेन िवचार ऐ उमेरमे एलैन ओ मने- मन जीवनलाल भाय िवचारए लगला। मानसरोवरक एहेन र6ता अिछ जैठाम जेबा-ले केतबो गाड़ी-सवारीक सुिवधा िकए ने भेल मुदा पएरे तँ ओहन र6ता चलै पड़त जइमे माघो मासक शीतलहरीक जाड़सँ बेसी जाड़ अिछ। तेतबे निह, र6तो तेहेन उभर-खाभर अिछ जे केतए िपछैड़ कऽ खसब आिक ठSस लागत तेकरो ठीक निहयS अिछ। ओहन जगहपर जँ जीतनलाल भायकS जेबाके छेलैन तँ ओइ उमेरमे जइतैथ जइ उमेरमे सभ िकछु बरदास करैक शि—त देहमे छेलैन। आब जखन बुढ़ भेला हेन, सािठ बख<क उमेर भेलैन हेन तखन मानसरोवर जाइले तैयार भेला हेन। एकरा नेनमैत कहब की निह? मरै बेरमे जँ बुिधक बखारीए माथमे घॲिसया जेतैन तँ ओकरा लइये कऽ की करता? जाबे िनयार-भास करता तइ िब“चेमे जँ बखारी टुिट कऽ खिस पड़तैन तखन? तहूमे र6तेमे जँ केतौ मिर-हिर गेला तखन तँ सेहो ने पेब सकता जे पबैक िवचार मनमे जोर मारने छैन! मुदा जेठ भाय होइक नाते की बाजब से तँ िवचार जीवनलाल भाइक मनमे उिठये गेल छेलैन। ओना, मन िनिण<त छेलैन जे कोनो हालतमे जेबाक निह अिछ। मुदा जेठ भाय तँ िपता तु›य होइ छैथ, आदेशो नइ मानब सेहो केहेन हएत। तँए मुँह ब– केने जीवनलाल भाय मने-मन िवचारैत वैŽािनक भाइक आगूमे ठाढ़ छला। जीवनलाल भायकS गुम-सुम ठाढ़ भेल देख वैŽािनक भाय दोहरबैत बजला- “बौआ, िकछु हँ-हूँ निह बजलह?” ओना वैŽािनको भायकS जीवनलालक गु£मीक माने लिगते छेलैन, मुदा नइ बजैक माने निहयS भेल सेहो केना मानल जाए। तिहना जीवनो भाइक मनमे छेलैbहे जे नइ जाएब िक जाएबसे तँ िकछु ने बजलॱ हेन। ओना, जीवन भाय मने-मन ईहो सोिच रहल छला जे एहेन-एहेन लोहा-ल¾ड़क बीच रहैबलाकS झूठ बािज ठकलो जा सकैए, मुदा छैथ तँ जेठ भाय, जँ बुिझ जेता तखन अनेरे चान जकi मनमे पहाड़क किरया ध‘बा बैस जेतैन। से निह तँ पिहने गÉची माछ जकi थालमे नुकाइक कोिशश करी, जँ सुतैर गेल तँ बड़बिढ़यi, निह तँ दोसर र6ता धड़ब...। जीवनलाल भाय बजला-

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“भाय साहैब!अखाढ़ मास चिल रहल अिछ, गु  पूिण<मा आगूमे अिछ, केते Cेम आ मेहनतसँ आमक कलम लगौने छीसे तँ बुझले अिछ। देखते िछऐ जे जिहना राइर, तिहना फैजली, तिहना मोहर ठाकुर अिछ आ तिहना अÁपाली सेहो बोनाएल अव6थामे तरतर करैए, एकरा सभकS छोिड़ जाएब नीक हएत।” जीवनलाल भाइक िवचारमे वैŽािनक भाय जेना बिह गेला तिहना बोिहयाइत बजला- “मानसरोवर जाइमे बर बेसी तँ पनरह िदन लागत, तैबीच की सभ आम सिठये जाएतजे मन छह-पiच करै छह?” ओना, जीवनलाल भाइक मनमे उिठ चुकल छेलैन जे वैŽािनक भाय भौितक िवŽान जनै छैथ, मुदा जीवन िवŽान हमरा जकi थोड़े जनै छैथ जे हमर बात बुझता। भावातुर भऽ जीवनलाल भाय बजला- “भाय साहैब, C« जँ आमे खाएबक रहैत तखन अहiक िवचार सो˜ोअना मानै-जोकर छल। िकए तँ अखन गाछेमे आम लागल अिछ। जँ आठ िदनक पछाइत तोड़लो जाएत तैयो पनरह िदन आरो रहबे करत। मुदा से बात तँ अिछ निह।” अपन िवचारकS खिvडत होइत देख वैŽािनक भाय पुछलकैन- “तखन की अिछ?” जीवनलाल भाइक मन मािन लेलकैन जे C«क ने उ‹र देब अिछ। जेठ भाय रिहतो तँ C«क‹¼ ने भेला। आêािदत भऽ जीवनलाल भाय बजला- “भाय साहैब, जिहना वृbदावनमे कृ¶णक परोछ भेने रािधका सभ िवरहाए लगै छेली, तइसँ की कम Cेम हमर आमो आ आमक गाछोक Cित अिछ।” जीवनलाल भाइक िवचारमे वैŽािनक भाय वौआ गेला। पुन: C« केलैन- “से की?” सोलह–ी गोटी लाल होइत देख जीवनलाल भाय बजला- “जिहयासँ आमक पीपही रोपलॱ तिहयेसँ िसनेहक संग Cेमो आमो आ आमक गािछयो संग बिन गेल अिछ। गाछक संग जुआन हािर गेल छी जे जाबे अपने जीबैत रहब ताबे तोरो जीबैत रखबौ! अपने मानसरोवर जाएब, जइमेकमसँ कम पनरह िदन लागतआ तइ िब“चेमेजँ चोरे-चहार चोरा कऽ आम तोिड़ िलअए तखन ओकर रIा कऽ सकिलऐ? जखन चीजे िवरहा जाएत तखन ओकरा संग जे Cेमक वादा केने िछऐ से रहत?” भौितक जुगक भौितकवादी वैŽािनक भाय- िजनक Žान सेवा िनवृि‹क पछाइत जखन िवŽानक ¡पमे लतड़लैन तखन सŽानक बाट हुनका मनमे उठलैन। सेवा िनवृि‹क माने काजसँ मु—त, अथ…त् हाथसँ काज चिल गेल वा छीना गेल। काजुल लोककS जखन हाथक काज छीना जाइए तखन अबैबला िजनगी मृतCाय बिन जाइए।तँए, ओ अपना-जोकर काजक पाछू वौआए लिगते अिछ। सएह वैŽािनक भायकS भेलैन। एक िदस Žान एते Cखर भऽ गेलैन जे दुिनयiक खोजी बिन गेला। दोसर िदस अपन ŽानकS िवŽानक िदशामे बढ़ौलैनआतेसर िदस िवŽान, समाज आ शा6Kक बीचक खािधमे तेना पड़ला जे मन बबलाकऽ मानसरोवरक याKाक लहैरमे हेलए चािह रहल छैन। गिणतक गणना करैबला वैŽािनक भाय जीवन, समाज आ दुिनयiक जखन गणना करए लगै छैथ तँ िहसाबे गड़बड़ा जाइ छैन। जइसँ कोन िहसाबकS सही मानी आ कोन िहसाबकS गलत, अही गलत- सहीक बीच मन फँिस गेल छैन। अbतत: जेकर एकेटा उपाय सुिझ रहल छैन जे अपन ऑंिखक देखलकS सही मानब। तँए मानसरोवरक याKा मनमे गहॴर तक धँिस गेल छैन...। वैŽािनक भाय बजला- “बौआ जीवन, जेते आम नोकसान हेतह ततेक दाम हम दए देबह।” वैŽािनक भाइक िवचार सुिन जीवनलाल भायकS अपन िवचारक र6ता कटैत बुिझ पड़लैन। मने-मन गर अँटबए लगला जे आब की करब। मुदा लगले एकटा जुि—त फुरलैन। फुरलैन ई जे वैŽािनक भाय िक मानसरोवरकS शीतल, कोमल, पिवK हृदय ¡पी सरोवर थोड़े बुिझ रहला अिछ ओ तँ एकटा भौगौिलक 6थान बुिझ रहला अिछ। ओकरा देखबकS काज बुिझ रहला अिछ। काजकS तँ काजेसँ रोकल जा सकैए। से निह तँ ओहने ज‘बर काज जँ आगूमे िदऐन तँ ज¡र मन मािन

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जेतैन आ अपन छुÓी भऽ जाएत। जखने अपन छुÓी हएत तखने ने दुनू गोरे छुÓा भऽ जाएब आ अपना-अपना मने अपन काज स£हारब, पछाइत अपन िवचारता जे केना करब...। जीवनलाल भाय बजला- “भायसाहैब, अहi जखन गाम आएलो ने रही तिहयेक काज आगूमे िसरचढ़ भऽ गेल अिछ, की ओकरा छोिड़ देब उिचत हएत?” वैŽािनक भाइक मन कनी ठमकलैन। बजला- “ओ तँ काज-काजपर िनभ<र अिछ। काजोक तँ अपन माप-तौल अिछ। नमहर [i] काजक आगू छोट काजकS कम वजन भेल।” जीवनलाल भाइक मनमे खुशी उपैक गेलैन। ओ मने-मन बुिझ गेला जे जिहना सत् बातल‹ी जकi लतड़ल रहैए तिहना बहानाक लेल झूठोक ल‹ी तँ अिछए। मुदा ठiिह-पठiिह झूठोक ल‹ीकS लताड़बसँ नीक जे सामनजस करैत लताड़ी। जीवनलाल भाय बजला- “भाय साहैब, अपनेक संग पूरैमे कनी असोकज< भऽ रहल अिछ। ने तँ एक संग दू-दूटा महतपूण< कत<{य अिछ तेकरासँ मुँह मोड़ब आिक मुँह घोकचाएब नीक थोड़े भेल?” नीकक संग अधलो तँ लगले रहैए, वैŽािनक भाय सेहो िजनगी भिर यएह ने तक< करैत िस­ाbत मनमे रोपने छैथजे कोनो व6तुक साIेप-िनरपेI दुनू होइए। यएह िवचार मनमे जिग गेलैन। बजला- “एकरा के नीक कहत?” ‘एकरा के नीक कहत’ सुिनते बािढ़क पािनक पािहपर चढ़ल रोहु माछ जकi जीवनलालकS बुिझ पड़लैन। मु6की दैत बजला- “भाय साहैब, िजनगीक कोनो ठेकान अिछ जे केते िदन सेवा करैक मौका भेटत। तखन तँ भेल जे जखने सेवा करैक गर लागए िक ओकरा करैत चली, िनमाहैत चलीमुदातइमे अपना थोड़ेक खiच भऽ रहल अिछ।” वैŽािनक भाय बजला- “बौआ, की खiच भऽ रहलह हेन?” मनकS मसोसैत मुहकS िचकुिरयबैत जीवनलाल भाय बजला- “भाय साहैब, छह मास पिहलुके बात छी, एके िदस£बरकS अपना सािरकS ऑपरेशन करबए डा—टर ऐठाम गेल रही। पेटक भीतरक ऑपरेशन रहइ। िबमारीक नाओं िबसैर गेल छी। तेते भीड़ ओइ डा—टर ऐठाम देखिलऐ, जे की कहूँ। छह-छह मासक न£बर लगैए। िहनकर न£बर चािरम िदनक छैन, आब अहॴ जे कहब से करब।” वैŽािनक भाइक मन मािन गेलैन जे अपने ने घर-दुआर, गाम-समाज छोिड़ बाहर रहलॱ, मुदा जीवनलाल तँ सभ िदन गामेमे रिह आिथ<को उपारजन केलक आ समाजक सेवो केलक। तँए, ओकरो अपन जीवनो छै आ जीवनक गितिविधयो तँ छइहे। वैŽािनक भाइक मनमे धiइ-दे खसलैन- केकरो जीवनमे बाधा उप– करब सभसँ पैघ अपराध छी। तहूमे जँ ऐ सालक (माने जनवरीक पछाितक) काज रहैत तँ ओकरो आगूओ बढ़ाएल जा सकै छल, जेना लोक सराधक (pाधक)भोजो आ िकिरयो-कम< बरखी िदन-ले रिख लइए। मुदा ई तँ जीवन-मृयुसँ जुड़ल अिछ। ओना, जीवन-मृयुसँ जुड़ल अनेको C« जुड़ल अिछ। मुदा जीवनक Cित लोकोक तँ अपन-अपन नजैर अिछए। जिहना करोड़ो-अरबो लोक अिछ तिहना करोड़ो-अरबो नजैर सेहो अिछए। िकयो पािनसँ ह›लुक हवाकS आ िकयो मािटसँ ह›लुक पािनकS तँ िकयो पाथरसँ ह›लुक मािटकS बुझैए। मुदा अपन-अपन जगहपर सभ भािरयो अिछ ह›लुको अिछए। पािनक जँ समुc छी, माने पािनयS समुc छी तिहना पाथरेक पहाड़ो छी, माने पहाड़े पाथरो छीहे। तही बीच नेझंझटो अिछ आ िमलान सेहो अिछए। अUीकाक जंगल किहयौ िक सहाराक म¡भूिम किहयौ आिक रामवन किहयौ िक वृbदावनक कृ¶णवन, सबहक बीच तँ जीवन चिलये रहल अिछ..! वैŽािनक भाय

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५६ म अंक १५ अग᭭त २०१८ (वषᭅ ११ मास १२८ अंक २५६ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 55

अपन िवचारक अि6तवकS असिथर कइये ने पेब रहल छैथ। मनक ओजकS शरीरक ओजसँ मेल-िमलाप भइये ने रहल छैन। असोथिकत होइत वैŽािनक भाय बजला- “बौआ, मनमे जखन रोिप नेने छी जे मानसरोवर जेबे करब तखन तँ भेल जे एकटा संगी रहने कने नीक होइ छइ।” वैŽािनक भाइक सहमैत िवचार देख जीवनलाल भाय बजला- “भाय साहैब, {यि—तगत हमर खगता नइ ने अिछ, संगी चाही, तइले अहi िचbता जुिन क¡। अखने हम गाम िदस जाइ छी,मानसरोवर चलैक हरिवड़³ कऽ देबइ। पु ख-पातर जँ संगी निहयÔ हेता तैयो दसटा जनीजाित संगी हेबे करती।” ओना, जीवनलाल भाइक िवचार सुिन वैŽािनक भाइक मन जुड़ेलैन, मुदा शंका ईहो भेलैन जे जँ दसटा जनीजाित संगी भऽ जाएत तखन दसोक िहसाब-बारी लगबैमे दस गुणा काज बिढ़ये जाएत...। सामंजस करैत वैŽािनक भाय बजला- “जँ दसटा भऽ जािथ तखन तँ सव³‹म भेल। निह तँ एकोटा जँ भऽ जािथ तैयो एक मानसरोवर िक जे सइयो मानसरोवर जाएब असान भऽ जाएत िकने।” जीवनलाल भाय बजला- “भाय साहैब, हम ते असगरे गेल रही, कहi केतौ िभयौन लागल?” ‘िभयौन’ सुिन वैŽािनक भाइक मन सुरखुरेलैन। सुरखुराइते मनमे उठलैन- नारदजीकS कोन संगी छेलैन जे चौदहो भुवन आ तीनू लोक घुमै छला..? नारदजीक घुमब मनमे अिबते वैŽािनक जीतन भाइक चेहरापर 6वीकारोि—तक भाव झलकए लगलैन। जेकरा देखते जीवनलाल भाय बजला- “अहi अपन तैयारी ठीक राखू संगी भेटबे करत। जखन चोरोकS संगी भेटै छै, झूठो बजिनहारकS संगी भेटै छै तखन सौध (शु­) कS िकए ने संगी भेटत।” q श‘द संÄया : 2576, ितिथ : 31 जुलाई 2018

करतब सौन मासक पंचमी। भोरेसँ बाला-सुबाला िचकैन मािटक खोभारसँ मािट आनए िवदा भेल। सबहक हाथमे एक-एकटा डोमराउ पिथया, जइमे छोट-पैघ चिर-चिरटा मौनी साजल, िकएक तँकुल पiच बासनक मािटक थु£हा बनौत। पiचो बासनक मािटकS 6व“छ पिवK जलसँ एकठाम सािन पiचटा थु£हा बनौल जाएत। ओना, समय िनसिचत नइ रहने िकयो खोभार जाइक तैयारी करैत, तँ िकयो र6तामे जेबो करैत आ िकयो-िकयो खोभारमे मािट खुिन-खुिन अपन-अपन पिथया-मौनीमे सजेबो करैत, तँ िकयो बासन भिर-भिर घरमुहÔ अबैत। संजोग नीक रहल जे ऐबेरक मौना पंचिमयो आ सोमवारी वÐतक सोमो ए¾े िदन पड़ल। काि˜ रिब छल, सौन मासक पिहल रिब, तँए बाबा िवदेlरसँ लऽ कऽ कुशेlर बाबाक संग बैजनाथ बाबाक मिbदरमे सेहो भिरपोख जलढरी भेल छल। ओना, जे सभ बैजनाथ आिक कुशेlर बाबा ऐठाम गेल छला ओ सभ तँ र6तेमे छला मुदा जे सभ चvडेlर, िवदेlरआिकराजेlर इयािद–लगक 6थान गेल छला ओ सभ काि˜ये घुिम-घुिम घर पहुँचला। आ

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५६ म अंक १५ अग᭭त २०१८ (वषᭅ ११ मास १२८ अंक २५६ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 56

गाममे जे अजनबी बाबा छैथ ओ तँ गामेमे छैथ, तँए िकिरण उगैसँ पिहनिह बहुत लोक जलढार कऽ आिब अपन-अपन जीवनक िµयाक वृि‹मे लिग चुकल छला। दुखमोचन बाबाकS ऐ सभसँ–माने पंचमीक थु£हा, सोमवारी वÐत आ सौनक पिहल रिबसँ कोन मतलब छैन। ओ अपन िकसानी िजनगीकS संगी बना संगे-संग चिल रहल छैथ। ओना, जमीनक छोट िकसान छैथ- सीमÎत िकसान, मुदा जनसंÄयामे नमहर पिरवार रहने जिहना दुखमोचन बाबाकS अपन पिरवार भिरगर बुिझ पड़ै छैन तिहना ह›लुको बुिझये पड़ै छैन। िकएक तँ दुखमोचन बाबाक 6प¸ सोच छैन जे मधुबनी िजलाक जमीन िक कोनो राज6थानक जमीन थोड़े छी जे पचास-पचास बीघामे लोक सेरसोए-तोरीक खेती करत। एक तँ िमिथलाक मािट तहूमे मधुबनी िजलाक, ऐठाम तँ एक धुरक खेतीसँ मस›ला आ पiच कÕाक खेतीसँ सालो भिरक तेलक पुरती एक पिरवारमे भऽ जाइ छै, तैठाम जँ राज6थाने आिक गुजराते लोकक सेहbता करब से सोहाbत थोड़े हएत। िकछु छी तँ िमिथलाक अंग मधुबनी िजला छी िकने। मस›ला आिक तेल पीब लोक कए िदन जीब सकैए, जीबैले तँ अ–-पान चाही। सेरसो-तोरी खैहन थोड़े छी, ओ तँ तेलहन छी। खाएर जे छी, जेकर छी से अपन जानह, दुखमोचन बाबाकS कोन मतलब छैन। एक तँ िकसानी िजनगी छैन तहूमे छोट आँट-पेटक, मुदा जे छैन से छैन, एते तँ आमशि—त छैbहे िकने जे जैठाम एक-सबा कÕा जमीन आ एकटा गाए पोिस लोक गु आpम बना सकैए तैठाम तँ दुखमोचन बाबाकS बहुत छैन। िकयो केकरो देखॱस करत तइसँ पिहने ने मनमे दुनूक ऑंट-पेट–अपनो आ देखॱसो केिनहारक–सेहो अजमा लेत। समयक िहसाबसँ दुखमोचन बाबा काज करए अपन खेत िदस िवदा भेला। आठ बजेक समय, चौबीस वषÂय रेहना दुखमोचन बाबाक ऐठाम पहुँचल। भुलनी दादी ऑंगनेमे छेली। रेहनाकS देख भुलनी दादीक देह िसहैर उठलैन। मने-मन भगवानकS कोसैत िवलाप केली- ‘एहने तोहर िकरदानी छह जे वेचारीक िदन हेिर लेलहक..!’ मुदा मुहसँ िकछु ने बजली। ऑंगनक मुँह लग रेहना ठाढ़ भेल आधा मुँह झँपने आ आधा उघारने बाजल- “दादी, हम िहनके शरणमे एिलऐन हेन।” ‘शरण’क माने तँ भुलनी दादी बुिझ निह पेली मुदा ‘एिलऐन हेन’ बुिझ लगले बजली- “की?” ओना, भुलनी दादी अपन मनक लोक छिथए। अवगुण एतबे छैन जे दुख हुअ िक सुख, लगले िबसैर जाइ छैथ। िबसरबो की िबसरना जकi िबसरै छैथ, सो˜ोअना िबसैर जाइ छैथ माने केतबो मन पािड़ कहबैन तैयो ने मन पड़ै छैन। जे अपने तँ निह मुदा पिरवारोक सभ बुझै छैन आ टोलो-पड़ोसक। तँए, िजनका भुलनी दादीसँ काज रहल ओ कvठपर सवार भऽ अपन काज अगुआ लइते छैथ। ओना, भुलनी दादीक िनिव<कार मन छैन, तँए जे िकयो कोनो काजे अबै छैथ ओ अपने तनदेही भऽ पिहने अपन काज हिथया लइ छैथ, मुदा जे पछुएला ओ िबसरनमे उसरन भइये जेता। भुलनी दादीक मुहसँ ‘की’ सुिन रेहनाक मनक पiिख िनरमए-फरकए लगल। िनरैम कऽ फरैकते रेहनाक मन चकभौर िलअ लगल। एकाएक रेहना अपन सो˜ोअना मुँह उघािर बाजल- “दादी, िहनका रामझुमनीक खेती छैन।” िब“चेमे भुलनी दादी हड़बड़ाइत पुछलिखन- “तीमन-ले लेबह?” ओना, भुलनी दादीक बात सुिन रेहनाक मन मुि6कयाएल, मुदा मुँह दािब बजली- “नइ दादी, रोजगार करब तइले।” ‘रोजगार’ सुिन भुलनी दादी अपनाकS कारोबारी निह मािन बजली- “अखने बाबा खेत गेलखुन हेन, चलह हम कहबैन।” ओना, दुखमोचन बाबाक नाओं सुिन रेहना सहमल ज¡र मुदा भुलनी दादीक बात सुिन िनधोख भऽ संगे िवदा भेल।

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५६ म अंक १५ अग᭭त २०१८ (वषᭅ ११ मास १२८ अंक २५६ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 57

पiच कÕा बरसाती रामिझमनी-खेती दुखमोचन बाबा केने छैथ। ओना, समयक िकरदानीसँ खेती समयपर केलो पछाइत पनरह िदन पछुआ गेल छैन। बरसाती रामिझमनीकS समयपर पािनक िपयास लगै छै िकने, से बरखा नइ भेने बािढ़मे कमी आिब गेल छेलैन। मुदा राित भिरक हेराएल राहीकS जखने भोरक भु कबाक भास होइए तखने ने ओकर चान चनैक-चनैक चमकौ लगैए से दुखमोचन बाबाकS भइये गेल छैन। खेतक बीचमे ठाढ़ दुखमोचन बाबा अपनो खेती िहया रहल छला आ ओइ सभ िकसानपर मने-मन गरमा सेहो रहल छला जे जेसभ िसमाbत िकसान अिछ। जँ ओकर खेत ऊँचरस छै तँ पािनक ओिरयान किर कऽ बरहमिसया खेती पकैड़ बरहमिसया िकसान बिन जेबा चाही। तइले तरकारी खेती सेहो अिछ आ फलो- फलहरीक संग पानोक खेती कएले जा सकैए आ निह जँ गहॴर खेत अिछ तँ माछ-मखान इयािद करी। से सभ निह किर जँ पैघ िकसानक [ii] देखॱस करब तखन तबाही हेबे करत, जिहना खंजनकS हंसक चािल पकड़ने होइ छइ। तहीकाल खेतक आिड़पर अबैत पि·यÔ आ रेहनोकS दुखमोचन बाबा देखलैन। देखते खेतसँ िनकैल आिड़पर आिब बैसला। फिर¾ेसँभुलनी दादी दुखमोचन बाबाकS कहली- “अहॴक काज किनयाकS छै, तँए भSट करए आएल अिछ।” झॉंपल-तोपल भुलनी दादीक बात सुिन दुखमोचन बाबा झँपले-तोपल बजला- “केहेन काज?” काजो तँ काज छी, एकर िक कोनो आिड़-मेड़ अिछ। जँ ऐछो तँ कोिशकbहाक बलुआहा मािटक आिड़ जकiअिछ, जे केतौ पएरे-पएर उिड़ जाइए, तँ केतौ पािनमे डुमल खेत जकi पएरे-पएर तेना िकचैड़ जाइए जे कदबा-कदबा भेल रहैए, तँ केतौ िजनगीक धुरी बिन सेहो चलैए आ केतौ ग´पक काज बिन मुहS-मुँह टहलैत रहैए। खाएर जे जेतए अिछसेतेतए रहअ, ऐठाम भुलनी दादी, रेहना आ दुखमोचन बाबाक बीचक बात अिछ। जिहना नचार आवेदक अपन आवेदनक अज नचारक संग भोलाबाबाक दरबारमे नचारी गािब-गािब मजÂक लेल लगबैए तिहना रेहना अपन अज पेश करैत दुखमोचन बाबाकS कहलकैन- “बाबा!िहनके दरबारमे आएल िछऐन, शरण दैथ वा भगा दैथ।” महादेवी वम…क ‘ठुकरा दो या ´यार करो’ जकi रेहनाक बात सुिन दुखमोचन बाबाक मन चकराए लगलैन। चकराइत मनमे िवचार उठलैन- बीस-पचीस बख<क औरतक मॉंग छी। अखन तक एतबो ने बुिझ पेब रहलॱ हेन जे गामक छी आ आिक आन गामक,तैबीच कोन सीमापर ठाढ़ भऽ िकछु बाजब..? तइिब“चेमे भुलनी दादीक मनकS सेहो रेहनाक बेथा-कथा ध¾ा मारलकैन। ध¾ा लिगते धिकयाएल भुलनी दादी पितकS कहलिखन- “वेचारी दैवक डiगसँ चुर-चुर भेल अिछ तँए अपना ऐठाम आएल अिछ।” ‘दैवक डॉंग’ सुिन दुखमोचन बाबाक मनमे जेना अ6सी मनक बोझ पिड़ गेलैन। पड़बो केना ने किरतैन। दैवक डiग छी, कोन दैवक डiग छी, से की कोनो एकेटा दैव छैथ। अपना सबहक िहसाबे चौरासी लाख देव छैथ आ समुcकातबला[iii] सबहक िहसाबे करोड़मे एकटा कम। मनकS असिथर करैत दुखमोचन बाबा िवचारए लगला जे ¡इयiक िवचौिलया[iv ] जकi देव कोनोमे िछिड़याएल अिछ तँ कोनोमे जोिगया अंडी जकi ए¾ेठाम घोिदयाएल अिछ, तैठाम िकछु भiज पबैले बीचलाकS िनकािल धुिन-धुिन कऽ पीर बना पिहने टौकरी आिक चरखामे काटब तखने ने सूत बनत, जइसँ डोरो बनाएब आ डोरासँ व6Kो बनाएब, तिहना ओही सूतसँ ने जनेउओ बनाएब आ जनेउ धारक सेहो बनाएब। जने-जन ने बहुजन आ ओही बहुजनमे ने इ¸ो जन आ अिनQो जनक बास अिछ। समगम होइत दुखमोचन बाबा रेहनाकS कहलैन- “अखन तक नीक जकi अहॉंकS चीिbह निह पेलॱ, तँए पिहने अपन पिरचय कहू पछाइत जे कहैक हुअए से कहब।” जिहना शरीरमे कोनो घा-घोस रहने ओइमे चोट लगलासँ बेसी दद< होइ छैतिहना दरदाएल मनमे सेहो होइए मुदा यएह छी मनुखक िववेकजेकरा बले लोक िवचािर लइए जे िजनगीक सुगम बाट की छी आ दुग<म बाट की छी। मुदा पोखिरक पािनमे जिहना समाढ़सँ कमल धिरक पैदाइस होइए तिहना केचली-कुमहीक निह होइए सेहो केना नइ कहल जाएत जे पािनक ऊपरे-ऊपर अपन िसर पसािर भकरार गाछ बिन कमलो फूलसँ नमहर डंटीक बीच फूल फुला नइ चमकैए...।

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असमंजसमे पड़ल दुखमोचन बाबाकS देख रेहनाक ऑंिखमे नोर भिर आएल। नोरसँ ढबकल नयन ªयोित रेहनाक बकार हरण कए रहल छल। मुदा िजनगीक {याधाक वाणसँ बेधल हंस जकi हुकरैत रेहना बाजल- “बाबा!अपन घर तँ आिग लिग जिरये गेल, मुदा पिरवारो[v] आ समाजोक मुँह देख सभ सहैले तैयार छी, मुदा..?” जिहना कोनो कथा-कहानीमे कथाकार वा कहानीकार अपन कथा वा कहानीक पूवëसेमे कथा वा कहानीक मम<कS धम< बुिझ Cितपािदत कए दइ छैथ जइसँ पाठक पिवK मम<क पिरणाम बुझैले उसुक भऽ उठैए तिहना दुखमोचन बाबा उसुक भेल जा रहल छला मुदा मनेमे जखन तन-मन जागए लगैन िक िजनगीक खािधमे िवचार लसैक जाइन, जइसँ अपन मनक उéगार {य—त निह कए पबैथ। होइते अिहना छै जे मम<भेदी वाणक गित जेतेक गाढ़ िसयाहीक रंगसँ िलखलापर रोशनदार होइए ओते घिटया किहयौ िक उड़bती िसयाहीसँ िलखलापर थोड़े रोशनदार होइए। तँएदुखमोचन बाबा रेहनाक िजनगीक संग जुड़ल बाधापर नजैर अँटकौने अपनाकS संयिमत करैत रेहनाक ‘मुदा’कS पकैड़ बजला- “मुदा की?” अखन तक बाबाक p­ाक िवचारे रेहना अपन मुँहपर जे साड़ीक कोर रखने छल, तेकरा हटबैक िवचार करए लगली िक िब“चेमे दुखमोचन बाबाक नजैर पड़लैन। रेहनाक चेहराक मरचुही ¡प देख दुखमोचन बाबा िसहैर गेला। मनमे उठलैन, बाप रे! ऐ उमेर मे जँ चेहराक ¡प एहेन कुद¡प भऽ जाएत तखन ऐ िजनगीक रंग केहेन हएत? मुदा हजारो-लाखो िजनगीक ¡प िनहारिनहार दुखमोचन बाबाक मनक िसहरन एकाएक कमए लगलैन। िकएक तँ दुिनयÔक िक कोनो ओर-छोर अिछ, ओ तँ अनbत अिछ। ओही अनbतमे ने आनbदसँ आनbदकS पकैड़ कऽ आनबो अिछ मुदा से तँ बाधा[vi] उपि6थित भेला पछाितये हएत, जे लगले भiजोपर चढ़ब तँ किठन अिछ। मनकS समटैत दुखमोचन बाबा िपयासल बेटोही जकi रेहनाक ऑंिखपर अपन आँिखक ªयोित फेकलैन। दुखमोचन बाबाक आँिखक ªयोित पिबते रेहनाक आँिखमे पािन पिड़ गेल। पािन पिड़ते गुलावक कली जकi रेहनाक हृदय कलैश उठल- “बाबा!गामक तँ यएह सभ ने िसरगर छैथ, िहनके सबहक िसरक परसादे ने हमहूँ सभ िजनगीक दश<न करब।” रेहनाक िवचार जेना दुखमोचन बाबाक िवचारकS बेध देलकैन। बेधल िवचारमे दुखमोचन बाबाक मन गबाही देलकैन जे एका-एकी पुछब नीक नइ हएत, िकए तँ बेिथत मनक िवचार करब कखन िथत रहत आ कखन बेिथत भऽ जाएत तेकर कोनो ठीक निह अिछ तँए िकए ने अ˜ा-¡दलक महाराइ जकi रेहनो-िजनगीक महराइ सुिन ली। मुदा तइले नीक हएत जे सोझे िकए ने पुिछऐ जे अपना मनमे जे अिछ से बािज चलू, पछाइत जे स£भव हएत तेकर जवाब देब आ जे स£भव निह हएत सेहो ठॉंिह-पठॉंिह किह देब। दुखमोचन बाबा बजला- “पिहने अहॉं अपन सभ बात सुना िदअ, पछाइत बुझल...।” रेहना िदल खोिल बाजए लगली- “बाबा, गाममे सभकS बुझल छैन जे रेहनाक घरबला राजरोग [vii] सँ मरल। नइ उपाय भेल जे इलाज करैबतॱ।” पितक मृयुक चच< सुिन दुखमोचन बाबाक मन चॱकलैन। ओना, हाथमे´लाि6टकक चूड़ी देख सेहो निह परखने छला जे रेहना िवधबा अिछ। लाहक चूड़ी ने लोक फोिड़ लइए, जे फुटैबला होइ छइ मुदा जे फुटैबला नइ अिछ से केना फोड़त। मुदा ई भiज लिग गेलैन जे रेहना गामेक छी...।दुखमोचन बाबा बजला- “मुँह ब– नइ क¡, जे बजैक अिछ से बािज जाउ।” जेना सुखमे अनेको संगी अपने-आप भेटै छै तेना दुखमे थोड़े भेटै छै, जे भेटबो करै छै ओइमे अदहासँ बेसी हँसैबला[viii]रहै छै आ अदहासँ बहुत कम हँसबैबला...। रेहना बाजल-

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“बाबा, जखन घरबला जीबै छल तखन दुनू परानी िमिल घर-सँ-बाहर धिरक काज स£हािर लइ छेलॱ, जइसँ तीनटा िधयो-पूतो पोसाइ छल आ अपनो दुनू परानीक गुजर चलै छल, मुदा घरबलाकS मुइने दुख दोहरा गेल..!” रेहनाक बात सुिन दुखमोचन बाबाकS जेना हृदयक उ¶म सiस िनकललैन। बजला- “अखन तक केना खेपैत एलॱ?” दुखमोचन बाबाक C« सुिन रेहना थरथराए लगल, मुदा मनकS स¾त करैत बाजल- “बाबा, िहनकासँ लाथ करबैन से ओहन लाथी हम नइ छी। सुख लोक िबसैर जाइ छै मुदा दुख ओिहना मन रहै छइ। पिहनॱ घरबलाक संग िचमनीक ìटो- पजेबो उघै छेलॱ आ खेतो-पथारक काज करै छेलॱ, तेतबे निहघर-जोड़ैयामे सेहो िमसितरी सभक संग ìटो-मस›लो उघै छेलॱ, मुदा ओकरा सबहक चािल-चलैन देख मन मािन गेल जे ऐठाम आब बास नइ हएत।” िब“चेमे दुखमोचन बाबा बजला- “तब?” रेहना- “जे िदन बीत गेल ओ तँ किट गेल मुदा आगूक िजनगी समयक संग चलएसएह ने िहनका कहबैन?” दुखमोचन बाबा बजला- “अपना खेत अिछ, जँ गुजर करै-जोकर [ix ] दऽ दी तइसँ पार-घाट लागत?” रेहना बाजल- “जिहना करख–ामे कोनो सामान बनैमे केतेको आइटम काज होइ छै, आ सभ आइटमक काज सभ तरहक किरbदासँ लेल जाइ छैतिहना ने खेितयो अिछ।” रेहनाक बात सुिन दुखमोचन बाबाक मन मािन गेलैन जे खेतसँ पिहने उपजा हएत तखन ने ओकर िनकास समाजक बीच हएत,तइले तँ एक आइटम काज भेल खेत उपजाएबआदोसर भेल उपजा कऽ बेचब। असग आ वेचारी केना स£हािर पौत। मुदा ईहो तँ अिछए जे केकरो सोझे मुँहक असीरवाद देने तँ मुँहमे मुंगबा नइ भेटै छै, तइले हनुमानजी जकi नइ मुगरदन तँ मुगिरयो भiजिह पड़त...। दुखमोचन बाबा बजला- “अपन की मन अिछ?” ‘अपन मन’ सुिनतेरेहना िवि6मत भऽ गेल। िवि6मत होइते रेहना बदलए लगल। आब ओ रेहना निह, जे पिहने छल। आब रेहना अ­<नारीlर बनए लगली। पु षवक Cवेश रेहनाक तन-मनमे हुअ लगल। रेहना बजली- “बाबा, जाबे लोक जीबैए ताबैये ने धरम-करम िनमाहैए। अखन ते हमहूँ तीनू ब“चाक माए बिन जीिवते छी, तँए अपन करतब िनमाहबे ने अिछ।” दुखमोचनो बाबाक मनक पट जेना खुिज गेलैन, बजला- “पiच कÕा रामिझगुिनक खेती अिछ, अधा-अधाकS पािह लगा जँ तोड़ब तँ सभ िदन करख–े जकi िनकलत। ओकरा बेच कऽ जेतेसँ पिरवार चलत से रिख लेब, बiकी हमरा दऽ देब।” दुखमोचन बाबाक बात सुिन रेहना मुि6कया उठली। q श‘द संÄया : 2132, ितिथ : 04 अग6त 2018

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[i] भारी [ii] अिधक जमीनबलाक [iii] ऊिन-कुिट- िKपुरा [iv] बीचक बीआ [v] बाल-ब“चा [vi] िजनगीमे बाधा [vii] राजरोग भेल किठन िबमारी, भारी िबमारी [viii] केकरो क¸सँ हँसैबला [ix] गुजरकमाने दुनू, ओते काजो आ ओते आमदिनयÔ

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३. प^ ३.१. १. राहुल झा "आर .जे." -बटगवनी २. आशीष अनिचbहार - दू टा गज ल ३.२.किव Cीतम कुमार िनषादक िकछु किवत◌ा ३.३.राकेश Cेमचbc‘पीसी’-हाइक◌ू ३.४.१.अनुवादक डॉ. िशवकुमार Cसादक िकछु अनुिदत का{य (मूल रजनी छाबड़ा- िहbदी) २.किव डॉ. िशवकुमार Cसादक िकछु किवत◌ा १. राहुल झा "आर .जे." -बटगवनी२. आशीष अनिचbहार - दू टा गजल १ राहुल झा "आर .जे." -बटगवनी

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५६ म अंक १५ अग᭭त २०१८ (वषᭅ ११ मास १२८ अंक २५६ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 61

कदम पर बैसल माधव रे देखत बृज के नारी मंद मंद बंसी फुकत रे नाचत गुणमित नारी

लाज भाव यागल रे िबसरल नव साड़ी फसल कदम पर आँचर रे फाटल नव साड़ी

हरी मंद मुसकाबय रे देिख फाटल नव साड़ी रोकल कbहैया जखन बंसी रे साड़ी देखल सब नारी

साड़ी देख सब िबगरल रे घर जायत कोना सब नारी कहल गोिवbद जुइन ड  रे हे बृज के नारी

आज अमावस िदन म™ रे तोहे नय रहब उघारी एहन अमावस होयत रे दािमनी िगरत अbहारी

िलखत राहुल दूय पद रे सुनु गुणमित नारी हरी संग िकछु डर नहॴ रे इहे गोवध<न िगरधारी

२ आशीष अनिचbहार दू टा गजल

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1

हुनका लेल िसंदुर एलै हमरा लेल जहर देखू नेह कोना भेलै हमरा लेल जहर

अमिरत एकरा हम कोना ने मानू कहू से अपने हाथ™ देने गेलै हमरा लेल जहर

जीवन धारने छै जहरक कज… तइँ तँ सखी बहुते देर धिर घुिरएलै हमरा लेल जहर

िख6सा सुिन कऽ िकछु ने बजलै चु´पे रहलै तखन बहुते कनलै आ पछतेलै हमरा लेल जहर

मोनक बात कहने रिहयै अपना लोकसँ आ अनिचbहार सेहो लेलै हमरा लेल जहर

सभ पiितमे 2221-22-22-2221-12 माKाµम अिछ। दोसर आ चािरम शेरक दूनू पiितमे एक-एकटा दीघ<कS लघु मानबाक छूट लेल गेल अिछ।

2

मोन सभहँक अचंिभत छलै चोर ऐठाम मंिडत छलै

काज हुनकर िबलंिबत मुदा साज तँ cुतिबलंिबत छलै

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हाथ जोड़ल बहुत भेिट गेल मोन सभहँक िवखंिडत छलै

ठोर केनाहुतो चुप रहल तÍय रखबासँ वंिचत छलै

दुख बला पiितमे देिख िलअ सुख बहुत रास टंिकत छलै

दद< बiटब सहज नै बंधु दद< मोनक अखंिडत छलै

सभ पiितमे 2122-122-12 माKाµम अिछ। तेसर शेरक पिहल पiितक अंितम लघु छूटक तौरपर अिछ।

ऐ रचनापर अपन मंत{य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। किवCीतम कुमार िनषादक िकछु किव ता

िकछु किवता

हँसनी-खेलनी हँसनी-खेलनी आगु आऊ कननी-िखजनी पाछु जाऊ।

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िमिथलाक िचbता यागैत मैिथल नव आशा केर दीप जराऊ।। हँसनी खेलनी...।

घर-आँगन दुअरा सुथड़ कए गॱआँ-गॲिधयाक मीत बनू नेना-भुटकाक नव िजनगी लेल करम योगी pमजीत बनू Žानी गुणी सपूत जनक भऽ गामे गाम उपदेश सुनाऊ।। हँसनी-खेलनी...।

िशIा औ सं6कारक रIण दाियवक संग क‹<{य क¡। दा¡ नशा दहेज कुवृि‹कS यािग लोक दुभ…½य ह¡।। तिहना बाल-िववाह कु¿ह केर काल¿ाससँ गाम बचाऊ।। हँसनी-खेलनी...।

राजनीितकS धरम-करम संग िवl देश औ Cाbत चलए मुदा दु¸पितकS कटुनीित नवतुरकS सौभा½य छलए तािहसँ ई¶य… Æेष औ लालचसँ भटकल नव पीढ़ीकS बँचाऊ हँसनी-खेलनी...।

एखनुक धरम धकेलू सbतक अजब-गजब लीला चमकल यŽ समारोह उसव मंचसँ

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भजन Cवचनमे छल छमकल िजनगी लोक िनयमरत Cीतम ढॲगसँ घर-कुटु£ब बचाऊ हँसनी-खेलनी...। ¦

िह6सा-बखड़ा अजब-गजब भेल िह6सा-बखड़ा सुख लपकए सभ दु:ख दए ककरा बुझनुकहो सभ देखबए नखरा सiच नै मानत बूझत फकरा...।। 0।।

िजनगीक हँसी-खुशी भेल ह£मर pम-दु:ख भोगिथ माऽए बाप ब£मर शौक-सेहbताक सेज आड£बर मरम-दरद सभ जानै िदग£बर दु:ख जोगिथ जS pम पूजक छिथ- 2 तेकरे सेज िबछाओन अखरा...।। 1।।

लोक-समाजोक रीितअजब भेल Žान धरम िवपरीत तरफ गेल करमयोगी सbतन अपयश लेल कलह कुचाइल गाम-घर भिर गेल गाइर गर{वैल माइर मर{वैल- 2 छाड़लकपटीक ज›ला-मकड़ा...।। 2।।

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५६ म अंक १५ अग᭭त २०१८ (वषᭅ ११ मास १२८ अंक २५६ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 66

करमचारी-हािकम आओर नेता चोरनु¾ी कए घूस कमेता कोट<-कचहरी-थाना-संड़ेता बेबस जनकS क¸ बढ़ेता छल-बल देखैत Cीतमकलपए- 2 नेता-Cशासनसेवत ककरा...।। 3।। ¦

हम नारी छी..! हम नारी छी..! सुकुमारी छी, सुखकारी छी...। मातृशि—त जगसृि¸ संिगनी लोक-पु ष-pम Cण ´यारी छी...। हम नारी...।। 0।।

वेद-पुराण-उपिनषद ¿ंथ सभ आिद शि—त अकानैए ऋृिष-मुनी-किव-सािहय सापूत हमरो सुयश बखानैए सािवKी-अनुसूया-अह›या सीता सन दुिखयारी छी...। हम नारी...।। 1।।

इितहास औ भूगोल वृि‹ संग जननी जbमभूिम हम छी अ­<नारीlरकS हम अंिशनी ममत िKवेणीक संगम छी Cणय पव< संग वामा उव<शी जकi दैव मनोहारी छी...। हम नारी...।। 2।।

युग पिरवेश समाज बदिलतS

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हमरो नव नव ¡प देलक ल¬मीवाई-पÒावती कS आभा कीि‹< कु¡प केलक सािवKीवाइफूले रिजया- बेगम इिbदरा ´यारी छी...। हम नारी...।। 3।।

Žान-िवŽानसँ हमहूँ सजलहुँ गागÂ-मैKेयी भारती भऽ एलॱ नभ साकेतीिन-क›पना Cण लऽ सफल सुनीतािविलय£स भेलॱ िन पमापाvडेय एवरे6ट यािKणी केर Cण पालनहारी छी...। हम नारी...।। 4।।

एखनुक युग केर केहन सराप अिछ गामे-गाम सनकी बमकए िनशाखोर दा¡ लए उमकए दहेजक दैय सेहो रमकए तÉ माऽए केर गभ<िहमे बेटीक »ूण पलैत लाचारी छी... हम नारी...।। 5।।

एिह युगमे 6Kी-ि6तवक मय…दा अिछ िघना रहल चकरचाइल छिलया धनपित जन िवŽापन तन बना रहल Cीतम कलम बखानए नारीक Cण pम दुिनयiदारी छी... हम नारी...।। 6।। ¦

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हमरा के मारलक गै? माऽए गै..! हमरा के मारलक गै?? तोहर कोइखक »ूण 6व¡पे िवधना जे अनलक गै... माऽए गै हमरा के मारलक... कएलS शौक-सेहbताक खेला बनलॱ पापक हमहॴ झमेला दु–ू पराणीक दुम<ित कोप सँ गरभ जँचा हमरे सँ डेरेला सुन िनQुर द£पित स£भोगी दुर<! कोन पापी जँचलक गै... माऽए गै हमरा के मारलक गै...।। 1।।

तॲ जेना अएलS हमहूँ अिबतॱ तोरे जकi एिह लोककS देिखतॱ ÝÞाvडकS सृि¸क साधन भऽ हमहूँ जुग-जग गुण यश पिबतॱ बेटी-बुिझ उपचार बह–े CाणकS िछनलक गैऽऽ माऽए गै... हमरा के मारलक गै...।। 2।।

देख िदन-िदन हम घटल जाइ छी दहेज तराजूपर जोखाइ छी। चतुर बिधक बाजहु निह दैए अ“छैित औरदे हम जिर जाइ छी कiचे उमेरमे दvड समाने

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कोना कऽ िबयाहलक गै माऽए गै हमरा के मालक गै...।। 3।।

समझ-िसखावए देश-सुशासन लोक पूत शुभिचbतक भाषण कहै Cीतम स£ह¡ जगवासी कbयाक अि6तव अिछ मरणास– ठोिह पारैए गभ<क बेटी िवधना पठौलक गै माऽए गै हमरा के...।। 4।। ¦

ओ, के छिथbह? ओ, के छिथbह कने हमरो िचbहऽ तँ िदयऽ ओ, िकछु किह रहल छिथ से हमरो सुनऽ तँ िदयऽ हुनकर ग´प दू ट´पी शाbतिच‹सँ गुनऽ तँ िदयऽ ओ के छिथbह...।। 0।।

हुनक मोनमे िकछु भड़iस छिbह एिह लोकक सं6कारसँ जे, गॱआँ-समाज, घर-पिरवार वा िरžतेदार संगे सिदखन धम< स£Cदाय 6वाथ< ई¶य… Æेष आओर िवषकु£भी कलश लऽ जीवन यŽकS िव¶षाह बनाबऽमे अगुआ बनैए

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तÉ- हुनक भड़iस अनुिचत निह तÉ िहनक सहयोगमे अल“छा लोक सभकS िबढ़नी-िबसिपपरी जकi हमरो कनS बीbहऽ िदयऽ ओ, के छिथbह हमरो िचbह िदयऽ... ओ, के छिथbह...।। 1।।

लागैए जेना, हुनका मोनमे बहुतो संक›प अिछ जे, आगत भिव¶यक साथ<क िवक›प अिछ हुनकर योजनामे सेवा.... 6नेह... सहयोग... वा सिह¶णुताक... कम³bमुखी.... समप<ण भाव अिछ आवऽ वाला पीढ़ीक लेल Cागैितहािसक अयनामे गुणामक काय< कौशलक Cितिब£ब अिछ तÉ, फुसराहैट जुिन क¡ आ एका¿ होऊ हुनकर दूट´पीपर हे यौ, देखू नS हमरो मोन उमकैत अिछ जे, “योÓिहं हुनकर अनुगामी बिन जाइ हुनके जकi... एिह देश समाजक संवेदना औ तृषा हेतु

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संजीवनी रस तवकS रोिगयाहा शासक Cशासक वा चु´पा लोकक लेल Kासदीक तृषा रसकS कलजुगहा-कौलहापर िरbहऽ िदयऽ ओ, के छिथbह कने हमरो िचbहऽ िदयऽ...।। ओ, के छिथbह...।। 2।। ¦

ऐ रचनापर अपन मंत{य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। राकेश Cेमचbc ‘पीसी’ पीसीके पiच हाइकु

सासुर घर सîीवनक गाछ अनूना पािन

अं¿ेजी बैध छागर भोग िलला घरैया रोग

Cेमक मोह िशवजी बम भोला उलट फेर

जय pी राम संसार लेनदेन भोजन गृह

हारक भोज

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जीत िप‹ लडाई जन िवधान

पिरचयः पूरा नामःराकेश Cसाद चौधरी जलेlर नगरपािलका ६ पKकार एवं अनुसbधानकत… Cकािशत ◌ः िखचडी किवता सं¿ह एवं फुटकर कथा, किवता, लेख । अCकािशत ◌ः फुलगाछ किवता सं¿ह

ऐ रचनापर अपन मंत{य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। १.अनुवादक डॉ. िशवकुमार Cसादक िकछु अनुिदत का{य (मूल रजनी छाबड़ा- िहbदी) २. किव डॉ. िशवकुमार Cसादक िकछु किवता

१ अनुवादक डॉ. िशवकुमार Cसादक िकछु अनुिदत का{य (मूल रजनी छाबड़ा- िहbदी) (PAGHALAIT HIMKHAND Maithili translation of ‘PaighalteHimkhand’ An Anthology of Hindi Poems by Rajni Chhabra from Hindi into Maithili by Dr. Sheo Kumar Prasad.)

केहेन भटकब सगर धरणीक सभ कोण आइ ने काि˜ फुलेबे करतै तखन कiटबला बाटसँ

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िकएक भटकब ?

सुनै छी कiटोमे छै फूल फुलेबाक चलैन। q

बेमन िजनगी अचानक जखन लागए लगए बेमन िजनगी, ठमैक जाय एकाएक उ›लास , तँ बुिझ ली हम बिन रहल छी कथा।

बीतल कथा बनैसँ नीक अिछ इbcधनुषक अिbतम कोरसँ लाल रंग लऽ िजनगीकS पुिन आसक रंगमे रंिग आयास आ िबसबासक दीप बािर ली। q

िहमखंड पघलै छै बरफक पहाड़

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िठठुरलो िसनेहकS, मधुआएल िबसबासक रौद तँ दऽ कऽ देिखयौ! q

ई केहन स‹ैर कखनहुँ तऽ नेहक दू बु– दऽ जाएत छै िसbधु सन तोष।

कखनहुँ समुcो िपयास निह मेटा पबैत छै।

नै जािन िपयासक ई केहन स‹ैर आ नाता छै! q

ब– ठोर ब–ो ठोरक सेहेा अपन िजáा होइत छै गोट -गोट िख6सा आँिखये किह दैत छै।

ई बुिझ सकैत अिछ एसगरे नेहसँ भरल हृदय

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सगर संसार एिह बातसँ अनिभŽ रहैत छै। q

केना िबसैर सकै छी? हम िबसैर सकै छी हुनका जे हमरा संग हमर सुखमे साझी भऽ ठह¾ा लगौने छिथ।

मुदा हम िक–हुँ िबसैर सकै छी हुनका जे हमर दुखक संग िबनु कहने नोर बहेने छिथ ? q

घरक पाग वृ­जन छिथ घरक पाग के नकारत एिह सयकS कोनो टा सÖय समाज।

ओ छिथ घर -आँगनक बरक गाछ , सुकुमार लतासन भिवषक खारही

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हुनकेसँ लटपटाइत पािब सकैत अिछ अधार बढ़ौने रिह सकैत छिथ िललसा।

अनुभवक बोझ अितभारी तहूसँ दोहरी भेल छैन डiर।

िकछु कड़ू िकछु खटगर िमठगर अनुभव दोहराबैत चुप भऽ सोनसन रौदमे लैत खुमारी।

अनुभवक ओ खान संजोगने टकटकी लगा तािक रहल छिथ अपन िह6सा केर िवरानी।

पुतोहु बेटा केर सभ िकछु भेटैन घर -बाहर संग िकÓी-पाटी ब“चा पढ़ैले जाइ छैन पाठशाला वा हो6टलमे तैयो डर एकाbत बासमे िबगािड़ देतैन ई दादा-दादी।

घरक अbहिरया कोणमे समेटल खाट -पलंग सन आकुल -{याकुल मनक िकनका सुनेता बेथा।

सं6कार निह घरक बात ई केना िनकालता बाहर वृ­ाpमसं बiचल छिथ ओ

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बँचबैत घरक लाज।

अपननिह घर अवहेिलत आइ अिछ घरक ऊँचका पाग।

जेठ नागिरक िदवसपर बेटा-पुतोहुक संग पािब मान केर मंच Iण भिरक खुशी पािब , पुिन सिbहया जाइ छिथ अपन िह6साक कोणमे बिन िबतलाहा काि˜।

िबतलाहा काि˜ आ आजुक आइ जँ िमिल सकए एकसंग िवकासक बाटपर बिढ़ सकैत अिछ अपन समाज। q

खेलौना सन हे भगवान ! सभ घरमे खेलौना सन ब“चा िदयौ आ ब“चे सन खेलौना।

सुखक नीन

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आ िबछौना सेहो िदयौ नेहक छiह तैसंग सु–र सपना िदयौ।

िकल -िकलाइत रहए िखल -िखलाइत रहए आँिखमे ने किहयो नोर भरए िदयौ। q

घर आओर मकान जािह नगरमे हमर घर हमरा जतए तेज आ दाना भेटल वएह हमरा लेल 6वग< सन असरा अिछ।

जािह शहरमे हमर मकान आ जीबाक समान ओतिह जीबाक सुख आ एसग आ िजनगीक ठेकान अिछ। q

एहेन कोन जीयब

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एहेन कोन जीयब िक जीयब एकटा लचारी लगए।

िकएक ने करी एहेन िकछु काज िक हमरा मुइला पछाइत ई संसार हमरा िबनु अधखड़ू लगए। q

बहए िदयौ िजनगीकS दश<नक फेिरमे जुिन ओझराउ िवचारकS श‘दक मकड़जालमे जुिन ओझराउ चािलकS।

बहए िदयौ िजनगीकS िवमल अबाध धार सन कहए िदयौ मनकS भाव सोझ सहज किवता सन। q २ किव डॉ. िशवकुमार Cसादक िकछु किवता मनोरथ सभ िदन बीतल िजनका संगे ओ सभ कोसो दूर बसैथ

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५६ म अंक १५ अग᭭त २०१८ (वषᭅ ११ मास १२८ अंक २५६ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 80

मन रिहतो हम पहँच ने पाबी मनमे बलू नजीक रहैथ।

ओ िदन आब फेर घूिर ने औतै नेहक फiस अिछ कूिह रहल जे जतए छी चाहैत छी औिहना —यो कतबो बलु दूर रहिथ। q

वेलेनटाईनक बात जेहने तÔ छS तेहने स™ए छौ दुनू छS बुड़बक , सभ कोइ वेलेनटाईन मनेलकै तÔ रहलS अलबÓ।

एकटा कोढ़ही तोिड़ कऽ लऽ आन सiएक दिहन हाथ , किहहैन हे´पी वेलेनटाईनजी बुझलिहन खÌकÓ। q

बसंत आबए बसंत गाबए बसंत मन मधुकर कS फुसलाबए बसंत अिलकुल उड़ैत गाबैत बसंत िटकुिलक पiिखपर उड़ैत बसंत आबए बसंत ... ।

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आमक प›लव लागल बसंत मधुमािछक मन उड़बैत बसंत सिरसबक हँसैत िपयर िपयर फूलोक संग िहलसैत बसंत आबए बसंत ... ।

हिष<त बसंत पुलिकत बसंत प›लव प›लव मंजिरत बसंत हिरयर -िपयर धरणी जननी सबके मनमे िसहकैत बसंत आबए बसंत गाबए बसंत। q

बसंती भोर बसंती भोर िसहकैत ठोर गाबैत अिछ नाचैत अिछ ता िध–ा ता िध–ा िध– िध–ा मनक मोर। q

कम<क बाट चल रे मनुआँ कम<क बाट कम< िबना िकछु िमलए ने जगमे कम¼ िबकतए जगकेर हाट।

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५६ म अंक १५ अग᭭त २०१८ (वषᭅ ११ मास १२८ अंक २५६ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 82

सु जो चान िन‹हुँ उगए बाट बटोही तिहना हमहूँ िकएक ने पकड़ी बाट। चल रे मनुऑं... ।

रोग िबयािद िन‹ लगले रहतए झगड़ो-झंझट लगले रहतै हम िकएक बैठब िबन काज। चल रे मनुऑं... ।

कम¼सँ संसार चलै छै चुÓी िपपरी जीवो-जbतू सभ चलै छै करमे बाट चल रे मनुऑं कम<क बाट ... । q

िबसबास शरम भरमसँ जीिब ली कलयुग अिछ अितकाल

िबना केने िकछु िमलत की केने भेटत त‹काल।

खूब गुलछड़… उड़ा लेलहुँ जा छल तन मे शि—त , तीन पनक आब अbत अिछ करबाक अिछ आब भि—त।

हम छी Cेमी Cेम केर Cेम िबना सभ सून

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टाका कÉचा की करब ऑंिख लेब जब मुइन।

करजा लऽ कऽ निह मरी मन मे अिछ अिभलाष। पiच लोक िमिल जािर देत अिछ एतबा िबसवास। q

थकावैट रतुका जागल नीनक मातल एखनहु भासैत देह नव वष<मे नव -नव िचbतन नव -नव देखल भेष।

राजनीित केर कपट कोरमे —यो निह रहता चैन के अिछ गु  के अिछ चेला िकनको अिछ निह मािन।

बहुत किठन अिछ लंगर झंगर झुझुआएल अिछ मऽन बात करब आब निह अिछ स£भव थािक गेल सभ तन। q

गुलाब लाल -िपयर देह संग मनमे उमंग छौ वाह रे गुलाब तोहर केहन सुगंध छौ।

कiटसँ देह भरल तैयो हँसैत छS

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केहन छौ मन सु–र सभ िकयो चाहैत छौ। वाह रे... ।

हावाक संग संग झूमैत रह अिहना शीत रौद वात घाम तोरा लेल एक छौ। वाह रे... ।

तोरा सन मन धन केकरा िमलैत छै तोरा तँ देख देख दुिनयi ललैत छौ। वाह रे... ।

अिहना तँ मनुषोक िजनगी िमलैत छै सुख दुखक पाटमे सभ ओझराएल छौ वाह रे गुलाब तोहर केहन सुगंध छौ। q

अपन िचbहल रेह अ´पन गेह िसनेहक मेह घुप अbहिरयोमे भेिटये जाइत छैक। q

अगहन पूष कखनहुँ अगहन कखनहु पूष भेल नेवान फेर भेल पुषॱठ कखनहुँ चूड़ा गूड़ िवशेष कखनहूँ बिगया लाई सनेस मन हुए तँ पिबतो जाउ निह तँ िदनक िदन

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जलखै खाउ। q

जुआिनक बोखार सiझ भेल ओझल भेल जहादोक म6तूल संगिह छै डुमए लेल सुरजो अbहारमे, सभ िकछ डुिम जेतै सiझक िवलासमे जेना जाइ छै डुिम सभ िकछु जुआिनक बोखारमे। q

ऐ रचनापर अपन मंत{य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।

आगiक अंक

िवदेह Æारा संचािलत "आमंिKत रचनापर आमंिKत आलोचकक िट´पणी" शृंखलाक दोसर भागक घोषणा कएल जा रहल अिछ। दोसर भागमे अइ बेर नीलमाधव चौधरी जीक रचना आमंिKत कएल जा रहल अिछ आ नीलमाधवजीक रचना ओ रचनाधिम<तापर िट´पणी करबा लेल कैलाश कुमार िमpजीकS आमंिKत कएल जा रहल छिन। रचनाकारक रचना ओ आलोचकक आलोचना जखने आिब जाएत ओकर अिगला अंकमे ई Cकािशत कएल जाएत।

अइ शृंखलाक पिहल भाग कािमनीजीक रचनापर छल आ िट´पणीकत… मधुकÎत झाजी छलाह।

जेना की सभ गोटा जनै छी जे िवदेह २०१५ मे तीन टा िवशेषÎक तीन सािहयकारपर Cकािशत केलक जकर मापदंड छल सालमे दूटा िवशेषÎक जीिवत सािहयकारक उपर रहत जइमे एकटा ६०-७० वा ओइसँ बेसी सालक सािहयकार रहता तँ दोसर ४०-५० सालक ( मैिथली सािहयकार मने भारत आ नेपाल

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दूनूक)। ऐ µममे अरिवbद ठाकुर ओ जगदीश चंc ठाकुर "अिनल"जीपर िवशेषÎक िनकिल चुकल अिछ। आगूक िवशेषÎक िकनकापर हुअए तइ लेल एक मास पिहनेसँ पाठकक सुझाव मiगल गेल छल। पाठकक सुझाव आएल आ ओइ सुझाव अंतग<त िवदेहक िकछु अिगला िवशेषÎक परमेlर कापिड़, वीरेbc मि›लक आ कमला चौधरी पर रहत। हमर सबहक Cयास रहत जे ई िवशेषÎक सभ २०१८ मे Cकािशत हुअए मुदा ई रचनाक उपल‘धतापर िनभ<र करत। मने रचनाक उपल‘धताक िहसाबसँ समए ऊपर-िन“चा भऽ सकैए। सभ गोटासँ आ¿ह जे ओ अपन-अपन रचना editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा दी।

िवदेहक िकछु िवशेषÎक :- १) हाइकू िवशेषÎक १२ म अंक , १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल िवशेषÎक २१ म अंक , १ नव£बर २००८ Vid eha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) िवहिन कथा िवशेषÎक ६७ म अंक , १ अ—टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल सािहय िवशेषÎक ७० म अंक , १५ नव£बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक िवशेषÎक ७२ म अंक १५ िदस£बर २०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी िवशेषÎक ७७म अंक ०१ माच< २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) बाल गजल िवशेषÎक िवदेहक अंक १११ म अंक , १ अग6त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 11 1 ८) भि—त गजल िवशेषÎक १२६ म अंक , १५ माच< २०१३

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५६ म अंक १५ अग᭭त २०१८ (वषᭅ ११ मास १२८ अंक २५६ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 87

Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 ९) गजल आलोचना-समालोच ना-समीIा िवशेषÎक १४२ म, अंक १५ नव£बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 १० ) काशीकÎत िमp मधुप िवशेषÎक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरिवbद ठाकुर िवशेषÎक १८९ म अंक १ नव£बर २०१५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश चbc ठाकुर अिनल िवशेषÎक १९१ म अंक १ िदस£बर २०१५ Vid eha_01_12_2015 १३ ) िवदेह स£मान िवशेषाक- २००म अक १५ अCैल २०१६ / २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016

Videha_01_07_2016

१४ ) मैिथली सी.डी./ अ›बम गीत संगीत िवशेषÎक - २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंिKत रचनापर आम ंिKत आलोचकक िट´पणीक शृंखला १. कािमनीक पÎच टा किवता आ ओइपर मधुकाbत झाक िट´पणी VIDEHA 209th issue िवदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 जगदीश Cसाद मvडल जीक ६५ टा पोथीक नव सं6करण िवदेहक २३३ सँ २५० धिरक अंकमे धारावािहक Cकाशन नीचiक िलंकपर पढ़ू:-

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   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५६ म अंक १५ अग᭭त २०१८ (वषᭅ ११ मास १२८ अंक २५६ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 88

Videha_15_05_2018

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Videha_15_04_2018

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Videha_15_03_2018

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Videha_01_01_2018

Videha_15_12_2017

Videha_01_12_2017

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Videha_01_11_2017

Videha_15_10_2017

Videha_01_10_2017

Videha_15_09_2017

Videha_01_09_2017

िवदेह ई -पिKकाक बीछल रचनाक संग - मैिथलीक सव<pेQ रचनाक एकटा समानाbतर संकलन िवदेह :सदेह :२ (मैिथली Cबbध -िनबbध -समालोचना २००९ -१० ) िवदेह :सदेह :३ (मैिथली प^ २००९ -१० ) िवदेह :सदेह :४ (मैिथली कथा २००९ -१० ) िवदेह मैिथली िवहिन कथा [ िवदेह सदेह ५ ] िवदेह मैिथली लघुकथा [ िवदेह सदेह ६ ] िवदेह मैिथली प^ [ िवदेह सदेह ७ ] िवदेह मैिथली ना×य उसव [ िवदेह सदेह ८ ] िवदेह मैिथली िशशु उसव [ िवदेह सदेह ९ ] िवदेह मैिथली Cबbध -िनबbध -समालोचना [ िवदेह सदेह १० ]

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The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par " has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuan ces of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself . After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of original work .-Editor Maithili Books ca n be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha -pothi/ Maithili Books can be purchased from: http://www.amazon.in/ For the first time Maithili books can be read on kindle e -readers. Buy Maithili Books in Kindle format (courtesy Videha) from amazon kindle stores, these e books are delivered worldwide wirelessly: - http://www.amazon.com/ िवदेह स£मान: स£मान-सूची

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िवदेह

मैिथली सािहय आbदोलन (c)2004-18. सव…िधकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अिछ ततऽ संपादकाधीन। िवदेह- Cथममैिथली पािIक ई-पिKका ISSN 2229-547X VIDEH A स£पादक: गजेbc ठाकुर। सह-स£पादक: उमेश मंडल। सहायक स£पादक: राम िव लास साहु, नbद िवलास राय, सbदीप कुमार साफी आ मु–ाजी (मनोज कुमार कण<)। स£पादक- नाटक-रंगमंच-चलिचK- बेचन ठाकुर। स£पादक- सूचना-स£पक<-समाद- पूनम मंडल। स£पादक- अनुवाद िवभाग- िवनीत उपल।

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रचनाकार अपन मौिलक आ अCकािशत रचना (जकर मौिलकताक संपूण< उ‹रदाियव लेखक गणक म®य छिbह) editorial.staff.videha@gmail.com कS मेल अटैचमेvटक ¡पमे .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉम¼टमे पठा सकै छिथ। रचनाक संग रचनाकार अपन संिI´त पिरचयआ अपन 6कैन कएल गेल फोटो पठेता, से आशा करै छी। रचनाक अंतमे टाइप रहए, जे ई रचना मौिलक अिछ, आ पिहल Cकाशनक हेतु िवदेह (पािIक) ई पिKकाकS देल जा रहलअिछ। एतऽ Cकािशत रचना सभक कॉपीराइट लेखक/सं¿हक‹… लोकिनक लगमे रहतिbह, माK एकर Cथम Cकाशनक/ िCंट-वेब आक…इवक/ आक…इवक अनुवादक आ आक…इवक ई-Cकाशन/ िCंट-Cकाशनक अिधकार ऐ ई-पिKकाकS छै, आ से हािन-लाभ रिहत आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊय›टीक/ पािरpिमकक Cावधान नै छै। तS रॉय›टीक/ पािरpिमकक इ“छुक िवदेहसँ नै जुड़िथ, से आ¿ह। ऐ ई पिKकाकS pीमित ल¬मीठाकुर Æारा मासक ०१ आ १५ ितिथकS ई Cकािशत कएल जाइत अिछ। (c) 2004-18 सव…िधकार सुरिIत। िवदेहमे Cकािशत सभटा रचना आ आक…इवक सव…िधकार रचनाकार आ सं¿हक‹… लगमे छिbह। ५ जुलाई २००४ कShttp://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसिरक गाछ”- मैिथली जालवृ‹सँ Cार£भ इंटरनेटपर मैिथलीक Cथम उपि6थितक याKा “’िवदेह’- Cथम मैिथली पािIक ई पिKका” धिर पहुँचल अिछ,जे http://www.videha.co.in/ पर ई Cकािशत होइत अिछ। आब “भालसिरक गाछ”जालवृ‹ 'िवदेह' ई-पिKकाक Cव—ताक संग मैिथली भाषाक जालवृ‹क ए¿ीगेटरक ¡पमे Cयु—त भऽ रहल अिछ। िवदेह ई-पिKका ISSN 2 229-547X VIDEHA िसि­र6तु