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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 1
ISSN 2229-547X VIDEHA 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत8बर २०१८ (वष> ११ मास १२९ अंक २५७ )
िव दे ह िवदेह Videha িবেদহ http://www.videha.co.in िवदेह Eथम मैिथली पािKक ई पिMका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह Eथम मैिथली पािKक ई पिMका नव अंक देखबाक लेल पृR सभकT िरUेश कए देखू।
ऐ अंकमे अिछ:- १. संपादकीय संदेश
२. ग^ २.१.१.आशीष अनिचaहार- िहंदी िफcमी गीतमे बहर-१ २. राकेश Eेमचad ‘पीसी’- लघुकथा- दशरथ िकसानकT डुबौलक लखन ठेकेदार ३. डॉ. योगेad पाठक‘िवयोगी’- उपaयास- हमर गाम (आगp) २.२.१.नारायण यादव- इमानदार चोर २. डॉ. बचेsर झाक २ टा आलेख २.३.रबीad नारायण िमv- तीनटा आलेख, दूटा लघुकथा आ उपaयास नमxतxयै (आगp) २.४.जगदीश Eसाद म{डल - पंगु आ आमक गाछी (उपaयास) धारावािहक आ दूटा लघुकथ
३. पद ◌्य ३.१. नaद िवलास राय - िकछु किवता ३.२.किव Eीतम कुमार िनषादक िकछु किवत◌ा ३.३.र◌ामिवलास साहु- िकछु किवत◌ा
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३.४.१.अनुवादक डॉ. िशवकुमार Eसादक िकछु अनुिदत काय (मूल रजनी छाबड़ा- िहaदी) २.किव डॉ. िशवकुमार Eसादक िकछु किवत◌ा
४.१.बालान कृते-डॉ. शिशधर कुमर "िवदेह "- ।। xव . अटल िबहारी वाजपेयीजी - एकटा मैिथलक सादर , िवन vजिल ।।
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२. ग^ २.१.१.आशीष अनिचaहार- िहंदी िफcमी गीतमे बहर-१ २. राकेश Eेमचad ‘पीसी’- लघुकथा- दशरथ िकसानकT डुबौलक लखन ठेकेदार ३. डॉ. योगेad पाठक‘िवयोगी’- उपaयास- हमर गाम (आगp)
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२.२.१.नारायण यादव- इमानदार चोर २. डॉ. बचेsर झाक २ टा आलेख २.३.रबीad नारायण िमv- तीनटा आलेख, दूटा लघुकथा आ उपaयास नमxतxयै (आगp) २.४.जगदीश Eसाद म{डल - पंगु आ आमक गाछी (उपaयास) धारावािहक आ दूटा लघुकथा १.आशीष अनिचaहार - िहंदी िफcमी गीतमे बहर -१ २. राकेश Eेमचad ‘पीसी’- लघुकथा- दशरथ िकसानकT डुबौलक लखन ठेकेदार ३. डॉ. योगेad पाठक ‘िवयोगी’- उपaयास - हमर गाम (आगp) १ आशीष अनिचaहार िहंदी िफcमी गीतमे बहर -१
गजलक मतलामे जे रदीफ-कािफया बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नममे ई कोनो जरी नै छै। एकै नममे अ नेको कािफया लेल जा सकैए। अलग- अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो अलग भ' सकैए संगेसंग नमक शेरमे िबनु कािफयाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत नममे गजले जकp एकै बहरक िनवह कएल गेल अिछ।मैिथलीमे बहुत लोक गजलक िनयमतँ निहए जानै छिथ आ तािहपरसँ कु तक> करै छिथ जे िफcमी गीत िबना कोनो िनयमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पिहल जे नम लेल बहरअिनवाय> नै छै आ जािहमे छै तकर िववरण हम एिह ठाम द' रहल छी---------- ------- 1 "तेरे यार का आसरा चाहता हूँ" ओना अंेजी किवतासँ Eभािवत उदू>क किवताकT सेहो नमे कहल जाइत छै मुदा उदू>क Eाचीन नम सभमे से हो बहरक पालन कएल जाइत
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छलै। उदाहरण लेल सािहरलुिधयानवीजीक ई नम देखू जे िक "धूल का फूल" नामक िफcममे िफcमाएल गेल छै जािहमे रा जेad कुमार ओ माला िसaहाजी नायक ओ नाियकाक पमे छिथ। एिह नम केर बहर122 122 122 122 अिछ आ ई हरेक पpितमे िनमाहल गेल अिछ। सािहर जते िफcम लेल Eिस छिथ तािहसँ बेसी उदू> शाइरी लेल सेहो। वxतुतः उदू> शाइरी आ िफcमी गीतमे अंतर नैकएल जाइत छै तँइ Eिस िफcमी पटकथा लेखक ओ गीतकार जावेद अतर िफcमक अितिरत उ दू>क सािहय अकादेमी लेल सेहो हकदार मानल जाइत छिथ (2013 मे "लावा" नामक पोथी लेल)। मैिथलीमे तँ सभ कामरेड ¡ितकारी छ िथ की किह सकै छी। तँ पढ़ू ई नम आ देखू एकर बहर--
तेरे यार का आसरा चाहता हूँ वफ़ा कर रहा हूँ वफ़ा चाहता हूँ
हसीनो से अहद-ए-वफ़ा चाहते हो बड़े नासमझ हो ये या चाहते हो
तेरे नम> बालॲ म¥ तारे सजा के तेरे शोख कदमॲ म¥ किलय िबछा के मुह¦बत का छोटा सा मिaदर बना के तुझे रात िदन पूजना चाहता हूँ,
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ज़रा सोच लो िदल लगाने से पहले िक खोना भी पड़ता है पाने के पहले इजाज़त तो ले लो ज़माने से पहले िक तुम हुxन को पूजना चाहते हो,
कहp तक िजय¥ तेरी उcफ़त के मारे गुज़रती नहॴ िज़aदगी िबन सहारे बहुत हो चुके दूर रहकर इशारे तुझे पास से देखना चाहता हूँ,
मुह¦बत की दु©मन है सारी खुदाई मुह¦बत की तक़दीर म¥ है जुदाई जो सुनते नहॴ ह« िदलॲ की दुहाई उaहॴ से मुझे मpगना चाहते हो,
दुप¬े के कोने को मुँह म¥ दबा के ज़रा देख लो इस तरफ़ मुxकुरा के मुझे लूट लो मेरे नज़दीक आ के िक म« मौत से खेलना चाहता हूँ,
गलत सारे दाव¥ गलत सारी कसम¥ िनभ¥गी यहp कैसे उcफ़त िक रxम¥
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यहp िज़aदगी है िरवाज़ॲ के बस म¥ िरवाज़ॲ को तुम तोड़ना चाहते हो,
िरवाज़ॲ की परवाह ना रxमॲ का डर है तेरी आँख के फ़ैसले पे नज़र है बला से अगर राxता पुख>तर है म« इस हाथ को थामना चाहता हूँ,
2 “सजन रे झूठ मत बोलो, खुदा के पास जाना है"
शैल¥dजी ®ारा िलखल आ िफcम "तीसरी कसम"मे राज कपूरजीक उपर िफcमाएल ई नम देखू। ई नम िन गु>ण अिछ। एिह नमक बहर 1222 1222 1222 1222 अिछ। एिह नममेमहल श¦दक बहर उदू> श¦द "शहर" केर िहसाबसँ अिछ। शैल¥dजी िफcमी गीतक अितिरत अपन मास>वादी गीत लेल सेहो Eिस छिथ आ हुनक मास>वादी गीत आधुिनक गीतसेहो अिछ आ बहरमे सेहो। तँ देखू शैल¥dजीक ई नम आ ओकर ब हर। मैिथलीक जे गजलकार ई सोचै छिथ जे बहरसँ गेयता खम भ' जाइत छै ितनका लेल ई िवशेष पसँ अिछ--
सजन रे झूठ मत बोलो, खुदा के पास जाना है न हाथी है ना घोड़ा है, वहp पैदल ही जाना है
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तु8हारे महल चौबारे, यहॴ रह जाएंगे सारे अकड़ िकस बात की यारे ये सर िफर भी झुकाना है
भला कीजै भला होगा, बुरा कीजै बुरा होगा बही िलख िलख के या होगा, यहॴ सब कुछ चुकाना है
लड़कपन खेल म¥ खोया, जवानी नॴद भर सोया बुढ़ापा देख कर रोया, वही िकxसा पुराना है
(सजन रे झू 1222 ठ मत बोलो, 1222 खुदा के पा 1222 स जाना है 1222 न हाथी है 1222 ना घोड़ा है, 1222 वहp पैदल 1222 ही जाना है 1222) 3 "तेरी याद िदल से भुलाने चला हूँ"
सािहर लुिधयानवी ®ारा िलखल नम "तेरे यार का आसरा चाहता हूँ" केर बहर 122 122 122 122 छै से पिछला पोxटमे तती ®ारा देखने रही। आइ अही बहरमे शैल¥dजीक िलखलनम देखा रहल छी । ई "हिरयाली और राxता" नामक िफcममे मनोज कुमार ओ माला िसaहापर िफcमाएल गेल छै। माMा िनधरणमे उदू> ओ िहंदीक िनयम लागल छै---
तेरी याद िदल से भुलाने चला हूँ के खुद अपनी हxती िमटाने चला हूँ
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घटाओं तु8ह¥ साथ देना पड़ेगा म« िफर आज आंसू बहाने चला हूँ
कभी िजस जगह वाब देखे थे म«ने वहीँ खाक़ अपनी उड़ाने चला हूँ
गम-ए-इ©क ले, फूंक दे मेरा दामन म« अपनी लगी यूं, बुझाने चला हूँ
(तेरी या 122 द िदल से 122 भुलाने 122 चला हूँ 122 के खुद अप 122 नी हxती 122 िमटाने 122 चला हूँ 122) २ राकेश Eेमचad ‘पीसी’ लघुकथा- दशरथ िकसानकT डुबौलक लखन ठेकेदार
लखन ठेकेदारक पिरवार अंेजक गुलामी जंजीरमे रहल सीमापारसँ पीनीक कारोबार करबाक बाxते मधेसक जलसरमे अएल बहुतबेसी िदन नभइ भेल रहे । हु°ाक लोलीमे खैनीकT डpठसँ बनल पीनी रािख धुमपान करयवाला सामaत आ स8प± िकसानक संया िधरेिधरे पैर पसारैत समयमे कैयन पिरवार अंगे्रजक हुकुमत सँ बचवाक लेल जलसर होएत आन गामशहरसभमे घर®ार बनाइव ¦यापार करय लागल छलिथ पीिनकT । नािरयलक खोपरैयाकT सुखा ओिहमे पािन भरल जाएत छल आ ओिह िभतरमे एक हावा पइसयवाला नली बनाएल जाएत छल । ओिह नलीके मुहमे एकटा लकडीकT पाइप राखल रहैत । मािटक लोलीमे गोइठाक आिगसँगे पीनी रािख हु°ाक मजा लेल जायत छल । दशरथ िकसान जलसरक किनक उदार सामaतमे िगनती होइत छलाह । ओ जनमजदूरसभक लेल अलगे हु°ाकT ¦यबxथा सेहो क’ देने रहिथ । भोर , दूपहर आ सँिझयाके गुर>र, गुर>रक हु°ाक आवाज सुनल जा सकैत छलै । लखनक माय दैिनक दशरथक घरसँ पीनी द’ बदलामे धान लजाकT पिरवार चलबै छली । सय िब²हा खेतीहर जमीन, भखारी, जMतM अ±पात । टोलपरोसक िधयापूता ओिहठाम चोरानुकी खेल खेलवाक लेल दशरथकT खिरहान आ भखारीक दौडधुप लगबैत छल । जखन लखनक माय दशरथके तुलना
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Mेतायुगक राजा दशरथ सँ करैत छल त लखनकT चेहरा देखय लायक रहैत छल, िपसँ लाल । डमरस अमधुर जकp । राणासभ राजकाजक लेल मधेशमे कर असुली करवाक बाxते अंेजक सेहो िवsासक पाM बना जा सकवाक बाxते मधेशीया जेहन चेहरा िमलयवालाकT ठेकेदार बना मालगुजारी असुलबाक लेल ठे°ा बaदोबxतीमे दैत छलिथ । ओसभ कर असुलीकT लेल िदनरात खटैत छल आ कर नइ बुझाववालाके मालजाल खोइल ल’ जाएत छल । मालगुजारी असुल करवाला ठेकेदार लठैत आ धकिरया रखैत छल । तेल िपयल किरया किरया बpसक लाठी रखैत छल ओसभ । मालगुजारी असुली करवा लेल अंेजक गुलामी करहल अपन भिगनमानसभके जलसरमे बोलावाके सु³ क’ देलक । लखन सेहो भिगनमान रहिथ । फरक इहे रहे जे ठेकेदारक बाप पिहने मधेशमे जंगल फरानी करय बाxते जलसरमे एक दूिदन रिहजाय । समयमे कर बुझाव वाला सामaती िकसान दशरथक जमीन कोना क¦जा होएत ओिह योजनामे परोसीराम ठेकेदार िदनराित मेहनत करिथ । योजना अनुसार पिहला अ±पातक डकैती करवा लेल सेन खनय वाला काजमे लखनके लगाएल गेल । ओ दुइए िदनमे सेन खिन देलक । ह´ाक´ा लठैतके स8प± आ सामaत िकसान दशरथक घरके कोनाकोना मालुम रहे । जिमनिभतर सँ बनायल जाएवाला राxताके सेन कहल जाइत छैक । दशरथसँ पिहने सेहो हिरराम, राधव, िसताराम, िमठु, नथुनीसिहतक स8प± िकसानक घरमे डकैती करबा चुकल रहे । डकैत अंेजक गुलाम देशसँ आएल िवदेशी रहल वात राणाक जनµल िरपोट> तयार क’ दैत छल । ओिह वापत जनरल ठेकेदारसँ दाम आ दमडी पवैत छल । पहिरयाको धाकध8की आ कर असुली कर’ वाला ठेकेदारक डकैती सँ बजीसंघक बिनमा समुदाय गिरब बनैत गेल । बजीसंघक बिनमा समूदाय ओ छलिथ िजनकर पुवज>के जनेउ तोडल गेल रहे । युकम> छोिड ¦यापार यवसायमे लागल समूदायके सतयुगी राजा अपन हरवाहा चरवाहा सँ जनेउ तो¶वौने रहिथ । स8प± दशरथ िकसानक घरमे तीन बेर सेन खिन डकैती भगेल छलैक । समय पर कर चुता नइ कयने कारणे आधा जिमन अथत पचास िब²हा खेत पर कर असुली करयवाला ठेकेदार परोसीराम क¦जा कयने छल । सेन राय एवं दरभंगा महाराजक समयमे लोिहया पैसा द’ क’ सरफी कारोबार सँ ज8मा भेल पुख·ली असफ¸ सेहो डकैत लगेल छलैक । अंेजक क¦जा रहल KेMके नजिदक दोसर देशके जलसरमे नेपाली सेनाक एक टुकुडी रखवाक पM जनµल धिर अएलावाद कर असुली करयवाला ठेकेदारसँग छलफल कायल गेल । परोसीराम अपन लठैत लखनसँ बात क’ सेनाक लेल जमीन उपल¦ध करौला पर बसीसके ³पमे प°ी घर देवाक आsासन देने छल । साथे सेनाक रासन ठे°ा देवाक Eि¡या आगू बढादेलक । दशरथकT जानकीपुर जाएवाला डगरक नाके पर रहल जमीन क¦जा करवाक परोसीराम र लखन बनाचुकल छल । िकएक त सैिनक जमीनक बदला िकछ सोनाक िस°ा देवाक बाचा कयने रहैक । लखन पुरान िहत भेल नाटक क ’ दशरथके घर पहुँच रासन ठे°ाप¬ामे बनवाक आह कयलक । रासन ठे°ामे बहुत रास आमद होवाक लालच सेहो देखौलक। लेखनदासी करय सकवाक Kमता बराबरके पढाई कयला बाबजुद ऐहन जालझेलक बात सँ दशरथ अलग रहलवालमे दशरथ छलिथ । जेनतेन दथरथ ठे°ाप¬ामे लखनकT साथ देवाक सहमत भेल । साथे एकटा शत> रखलक जे किहयो ओ थाना, ¦यारेक आ सैिनक कहp नइ जाएव । अिह शत>मे दुनुगोट सतEितशत सहमित भेलावाद ठे°ाक
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धरौटीवाxते नाके परके जिमन धरौटीमे देवाक आह अिxवकार करय नइ सकल । तीन मिहनाकबाद ठे°ामे िलखत शत> बमोिजम रासन आपूत¸ नइ कसकवाक आरोप लतबैत धरौटीमे रहल जमीनकT डाक पर चढावल देल जानकारी दशरथके देलगेल । लेखनदासीधिरकT पढाई कयलावादो राजकाजक बहुत बात नबुझने दशरथ राजाधिर िबaती पM हुलाक सँ पठौलक मुदा वो सरकार धिर पहँच सँ पिहनही चोरी भगेल । अaततः नाके परके जमीन पर सेना क¦जा क अपन ¦यारेक खडा कयलक आ िधरे िधरे ओिहठाम रहल दशरथके बीस िब²हा जमीन पर सेना अºयासके नाम पर क¦जा कलेलक । दशरथसँ किहयो राजमाग> बनाब त किहयो शहर बसएवाक नाम पर बpिक रहल स8पूण> जमीन क¦जा करावमे परोसीराम आ लखन सफल भेल । जलसरमे रहल राजxथानी आ राजकाजक कर असुली करयवाला ठेकेदारक जमीनमे िदन दुगुना रात चौगुना करवाक काजमे सरकारी लोकसभ सेहो साथ देलक । सय िब²हा जमीन राखयवाला दशरथ िधरेिधरे स8प±ता सँ िवप±तामे पिरणत भगेलिथ । नवनागिरक आ शासककT चालबाजी सँ चौघरा हवेली सेहो बेचके िxथतीमे पहुँचा देलगेल । एक बरषके बाद अंेस अपन शासन छोिड भािग गेल । िकछ समयक बाद जलसर आ जनकपुरीमे EजातaM आएवगेल । मुदा िवप± भेल दशरथ बालब»चाके भोजनक ¦यबxथा करय लेल स8पूण> पिरवार िवहार िबxथािपत भगेलाह । छोटमोट रोजगार क’ अपन आ पिरवारकT गुजारा चलाब लागल समय पिरवत>न भेल । दशरथक बेटा, पोता धिनक बिनगेल । आब ओकरासभके नेपाली बनवाक मन होइछिन । मुदा जालसाजक दूिनयामे ओसभ फेर सँ नइ परय चािह छिथ । अखनो हुनकसभक घरमे सेन र शाहकािलन राजाक भोजपा आ कागजकT फाइल सनु°ीमे राखल अिछ । पिरचयः पूरा नामःराकेश Eसाद चौधरी जलेsर नगरपािलका ६ पMकार एवं अनुसaधानकत Eकािशत ◌ः िखचडी किवता संह एवं फुटकर कथा, किवता, लेख । अEकािशत ◌ः फुलगाछ किवता संह
३ डॉ. योगेad पाठक ‘िवयोगी’ उपaयास - हमर गाम (आगp)
11. राजा-रानी हमरा गाममे एकटा एलाह राजा। आ हमरे गामक पुMी भऽगेलिखन हुनकर रानी। एतए िहनक मूल नाम, जaम ितिथ आिदसँ हमरा सबक¥ सरोकार निह अिछ, माM िहनक अ¾ुत चिरM लीख रहल छी जे
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िहनका दूनूकT वाxतिवक अथ>मे हमरा गामक पूय राजा-रानीक पमे xथािपत कऽदेलक आ इलाकाक अaय गाम सबमे सेहो िहनकर याित बहुत पसरल। राजा तऽजिहना नाम तिहना हुनक िवशाल शरीर आ उदा चिरM। हुनकर चिरMक Eशंसा सुिन बहुतो कुमािर कaया अपन भा²य अजमौलिन मुदा राजाकT तऽएकेटा पिस± पड़लिन। भऽगेल राजा आ रानीमे Eेम। से एहन Eेम जे लोककT िवsासे निह होइ। बूढ़ पुरान सब बाजए लगलाह- “हौ, ई कोनो साधारण Eेमी-युगल निह छिथ, जर कोनो देव अंश छिथ। गामक ई उरदाियव जे िहनका दूनूक रKा करए।” बस, तिहना भेल। िहनकर आवास बनाओल गेल, सब तरहक सुख सुिवधाक इaतजाम कएल गेल। पार बpिट गौआँ सब िहनकर भोजन पठबए लागल। जिहया जकर पार होइ ओ अपनाकT धaय बूझए जे आइ ओकरे अ±-पािनसँराजा-रानी तृत भेलाह। राजा-रानी एक दोसराक लेल Eाण दैत। रानी तऽअपनाकT अित भा²यशाली बूझिथ जे सब िकछु होइतो हुनकर कोनो सौितन निह छलिन। बहुतो लोक Eयास केलक जे एको नजिर राजा अaय कaयापर दऽदेिथ मुदा बेकार। राजा तऽरानीक Eित समिप>त छलाह। आब हुनका एहन आमतृित भेलिन जे ककरो अनका िदस तकबो निह करिथ। जेना िक Eकृितक िनयम िछऐक, राजा-रानीक Eेमक फल भेल हुनकर तीन पुM आ एक पुMी। पुM लोकिन जेना जेना पैघ होइत गेलाह, अपन अपन यवसाय स8हारलिन। बिच गेलिखन पुMी। ओहो तीवÀ गितए बढ़ए लगलिखन। रानीकT िचaता भेलिन एकर िबयाह कोना करौतीह। किहयो िबयाह निह करौलिन। अपने तऽतेहन राजकुमारक Eेममे फँसलीह जे िबयाहक EÁे निह उठलैक। मुदा बेटी? रानीकT डर छलिन जे जवान बेटीकT देिख कतहु राजाक मोन डोिल ने जािन। मुदा राजा अपनिह अपनाकT स8हारने रहलाह। ऋतुमासक समय पर बेटीकT पु³षक जरित भेलैक। ओ ए8हर-आ8हर तकलक। कतए जाएत? ओकरा माए-बापक Eेमक िखxसा तऽबूझल निह छलैक। ओ लागल ओही पु³षक चा कात च°र काटए जे सबसँ लगमे ओकरा भेटलैक। ओ िबसिर गेल जे ओ पु³ष ओकर जaमदाता छलैक। पु³ष अथत हमरा गामक राजा अपनाकT बहुत स8हारलिन मुदा भावीकT के रोिक सकलए? ओ नवयुवतीक चािलमे फँिसए गेलाह। ओकरा शरीरसँ उठैत मादक गaध हुनका मदम कऽदेलक। हुनक संयमक बाaह टुिट गेलिन। नवयुवतीक काम-िपपासा तृत भेलैक। ई दृ©य रानीसँ नुकाएल निह रहलैक। रानी बजली िकछु निह मुदा बहुत दुखी जर भेलीह। ई घटना हमरा सबकT देखल अिछ जे ओही राित रानी मिर गेलीह। राजा अपनाकT दोषी मानए लगलाह। एिह नवयुवतीकT अपन दोसर रानीक पमे ओ xवीकार निहए कऽसकलाह आ एक मासक भीतरे शोकसँ डूबल ओहो शरीर याग केलिन। राजा-रानीक एिह अमर Eेमक िखxसा इलाकाक आनो गाममे लोक सबकT बूझल छैक। q
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 12
जारी....
ऐ रचनापर अपन मंतय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। १. नारायण यादव - इमानदार चोर २. डॉ. बचेsर झाक २ टा आलेख १ नारायण यादव इमानदार चोर चोर-चोर मिसयौत भाय। दूटा चोर एक पैघ यापारीक घरमे चोरी करबाक हेतु पहुँचल। दुनू चोरक नाम पनमा आओर मखना छल। दुनू चोरी करवाक कलामे िनपुण छल। कतबो सतक> घरक मािलक िकयैक निह होिथ। मुदा जखन पनमा, मखनाक िवचार ओिह मािलकक घरमे चोरी करवाक हेतैक तँ चोरी कइये लैत छल। ओिह इलाकाक सवसँ पैघ यापारी छल। ओकर नाम करोड़ीमल छलैक। पनमा, मखना करोड़ीमलक घरमे चोरी करवाक लेल पहुँचल। जखन करोड़ी मलक पहरेदार सुित रहल तखन िनशा भाग राितमे पनमा मखना यापारीक घरमे स¥ध काटय लागल, स¥ध काटल भय गेल। तखन मखना स¥घमे अपन दुनू पैर दय स¥घक जॉंच कयलक। पैरसँ सस¥घक अिगला भागक जॉंच कय, पुन: पैर वाहर कयलक। जखन ई बुझुना गेलैक जे आब घरमे पैइसवामे कोनो बाधा निह होयत। तखन ओ स¥घक वाटे घरमे पैइसवाक Eयास करय लागल। जखन ओ पूरा िसर स¥घमे देलक आिक देबाल नीचा धिस गेल। मखना देबालक तरमे दवा कय मिर गेल। पनमा कतबो Eयास कयलक जे मखनाकT िखंची ली से निह भय सकल। अaतमे भोर भय गेल। पनमा दोसर िदन राजाक ओतय जा कय नािलश कयलक, राजाक ओतय फद> वयान ई देलक जे राित हम सभ करोड़ी मलक घरमे चोरी करबाक हेतु गेल रही। हमर संगी स¥घ कटलक आ ओिहमे Eवेश करबाक हेतु घुसल आिक देबाल धिस गेल आ हमर िनदÆश संगी मारल गेल। मािलक करोड़ी मलक कमजोर देबालक कारणT हमर संगी मारल गेल। हम सभ जावत चोरी निह कयलहु तावत तक तँ िनदÆषे छलहुँ। चोरोक एक अजीब दुिनया होइत छैक। राजाक बुिसँ चोरक बुि पैघ होइत अिछ। राजा पनमाक फद> वयान (नािलशी) कT xवीकार कयलक। राजा चोकर नािलशीकT सुनवाई शु करय लगलैaह। राजा िसपाहीकT हुकुम देलैaह जे ओिह यापारीकT एतए उपिxथत क। िसपाही राजाक आदेशानुसार ओिह यापारीकT aयायालयमे बजाओल गेल। राजा यापारीसँ पुछलिथaह- “सेठजी, अहॉंक मकानक िदवाल कमजोर िकयैक छल जे एकटा िनदÆष चोर स¥घमे दवा कय मिर गेल?” यापारी वाजल-
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 13
“सरकार, चोर िनदÆष कोना छल?” तािहपर राजा बजलाह- “जावत चोर चोिर निह कयने छल तावत तँ ओ िनदÆषे छल। चोरीक वादे ने ओ दोषी होइताह। चोर मिर गेल अहॉंक िदवालक कमजोरक कारणT तT हेतु अहॉंकT फpसीक सजा भेट रहल अिछ।” यापारी बजलाह- “सरकार, एिहमे हम कोनो दोषी भेलहु। हम तँ अपने मकान निह वनौने छलहुँ। मकान तँ राजिमxMी वनौने छल।” राजा बजलाह- “हँ, अहॉं दोषी निह छी, एिहमे राजिमxMी दोषी अिछ। िसपाहीकT आदेश देलैaह जे यापारीकT छोिड़ िदयौक आ ओकरा बदलामे राज िमxMीकT फpसी दय देल जाए।” राजाक हुकुम सुिन िसपाही यापारीकT बरी कय देलक। आ राजिमxMीकT पकिड़ राजाक दरवारमे उपिxथत कयलक। राजा बजला- “राज िमxMी अहॉं केहेने िदवाल जोड़लहु जे एकटा िनदÆष चोर िदवालमे दिव मिर गेल। िदवाल कमजोर जोड़लाक जूम>मे अहॉंकT फpसी भेटल।” राजिमxMी बजलाह- “सरकार एिहमे हमर कोन दोष। हम तँ राजिमxMी िथकहु। गारा (मशाला) बनेनाई काम तँ हमर काज निह अिछ। हमर लेवर जे मशाला बना कय हमरा देत तकरे सने हम जोड़व। मशाला कमजोर बना कऽ दयलक तT िदवाल कमजोर भऽ गेल। एिहमे तँ हम िनदÆष छी। सरकार हमरा सन िनदÆष लोककT फpसी दय कोन लाभ। फpसी तँ दोषीकT देबाक चाही।” राजा बजलाह- “ई राजिमxMी ठीके कहैत छिथ। राजिमxMीकT छोईर दहक आ ओिह मजदूरकT फpसी पड़वाक चाही।” िसपाही लोकिन राजिमxMीकT छोइड़ देलक आ ओिह मजदूरकT पकिड़ अनलक। राजा, मजदूरकT सामने बजौलक। राजा राजिमxMीक बदला ओिह मजदूरकT फpसीक सजा सुनौलक। मजदूर अपन सफाईमे बाजल- “सरकार, एिहमे हमर कोनो दोष निह, िकयैक तँ जखन हम मशाला (गारा) िसम¥ट-वालु) मे पािन िमला रहल छलहु तखन हमरा पाछॉंमे एकटा हाथी भरिक हमरा तरफ दौबल तँ पािन गाड़ा (मशाला)मे अिधक पिड़ गेल। तT महशाला गीला भय गेल आ तT िदवाल कमजोर भय गेल।” राजा मजदुरक बात सुिन हाथीक महाउथकT बजाबक आदेश देलैaह। तुरंत िसपाही हाथीक महाउथकT बजौलक। आ आदेश पािरत कयलक जे मजदूरकT माफ कय हाथीक महाउथकT फpसी देल जा सकैत अिछ।
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हाथीक महाउथकT फासी देल जा सकैत अिछ। हाथीक महाउथकT अपन सफाई देबाक लेल कहल गेल। हाथीक महाउथ अपन सफाईमे बाजल- “सरकार एिहमे हमर कोन दोष। हम हाथी लय कऽ आिब रहल छलहु तािह बीच एकटा मिहला झुनझूना बाला जेवर पिहर पिहर हाथीक वगलमे आयल। हाथी कंगनक आवाज सुिन भरिक गेल तँ एिहमे हम कतय दोषी भेलहु।” राजाकT महाउथक बात ठीक बुझैल। महाउथ िनदÆष सािवत भेल। आब महाउथक बदला ओिह मिहलाकT दोषी मानलक। ओिह मिहलाकT िसपाही राजाक दरवारमे उपिxथत कयलक। मिहलासँ अपन सफाई देबाक आदेश भेल।मिहला बाजिल- “सरकार, एिहमे हमर कोन दोष। हम जे गहना पिहरने छलहु से तँ अपने निह बनौने छलहु। ओ तँ हम बाजारक सोनारसँ खरीने छलहु। ई गलती तँ सोनारक छैक जे एहेन झुनझुनावाला गहना िकयैक बनौलक। जे हम ओकरासँ खरीद कय पिहरलहु। ओ एहेन गहना निह वनौतिथ तँ हम झुनझुनावाला गहना निह खरीदतहु आ निह पिहिरतहु। जँ ई गहना हम निह पिहरतहु तँ हाथी निह भिरकैत ने गाड़ामे अिधक पािन पिड़तैक आ ने सेठजीक िदवाल कमजोर होइतैक।” राजा ओिह मिहलाक वयानसँ सaतुÇ भेलाह। सैिनककT आदेश देलिथaह जे एहे मिहलाकT बरी कय देल जाय आ एकरा बदलामे गहना बनौिनहार सोनारकT फpसी देल जाय। तुरत सैिनक सोनारक खोजमे लािग गेल। गिहना बनौिनहार सोनारकT पकिड़ लौलक। राजाक सामने हािजर कैल गेलैक। सोनारसँ राजा सफाई देबाक लेल कहलक। सोनारकT अपन बचावमे कोनो जवाब निह फुरैलैaह। राजाक सामने सोनार दोषी सािवत भेल। राजा सोनारकT फpिसक सजा सुना देलैaह। एिह तरहे जcलादकT सूिचत कयल गेल जे सोनारकT फpसीपर लटका दे िकयैक तँ राजाक आदेश छलै जे हयाक बदला हयासँ लेल जाय। जcलाद सोनारकT लय फpसीक फaदा ओकरा गद>नमे लगौलक आ रxसीकT ऊपर तरफ िखिचलक। संयोग नीक छल जे बार-बार फpसीक फaदा सोनारक गद>नमे लगाओल जाय आ जहॉं ऊपर िखंचल जाय तँ फpसीक फaदा सोनारक गद>नमे सँ िनकिल जाय। िकछु देर ई िसलिसला जारी रहल मुदा सोनारक गद>नमे फpसीक फaदा निह िटकल। जcलाद राजाक समीप पहुँचल तँ कहलक- “सरकार, एिह सोनारक गद>नमे फpसीक फaदा काम निह करैत अिछ। राजाक आदेश भेल मोट गद>न वालाकT पकिड़ ला आ ओकरा फpसी दय दिहन।” आब दू गोट िसपाही मोटका गद>न वलाकT खोजमे लािग गेल। िकछु दूर गयलाक वाद एकटा मaदिरपर बाबाजी चेला जकर गद>न बड़ मोट छल तकरा पकिड़ लय गेल। बाबाजी चेला आ चेला गु³ िकछु िदन पूव>मे ओिह मिaदरपर दोसर देशसँ आएल छल। चेलाक कथन छलैक ओ अपन गु³कT कहलिथaह जे अपना सभ ब>मान मिaदरपर चलू िकयैक तँ ओिह राजमे टके सेर भॉंजी आ टके सेर खाजा छैक। सxता मधुर
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खरीद ओ दुनू गु³-चेला खाय लागल। य^िप गु³जी ओिह मिaदरपर जयबासँ रोकलक। मुदा चेलाक िजÉपर ओहो राजी भय गेल छलाह। आब गु³जी एकटा तरकीव सोचलक। ओ चेलाकT कानमे िकछु कहलैaह। कहलैaह- “जखन तोहरा गद>नमे फpसीक फंदा लगौतुaह तखन हम तोहरा गद>नसँ फpसीक फaदा हम अपना गद>नमे लगा लेव। जखन हम फpसीक फaदा लगवय लाव तखन हमरा गद>नमे सँ फpसीक फaदा िनकािल अपना गद>नमे लगा िलहअ। ई िशलिशला तावत धिर चलय िदहक जावत राजा निह पहुँच जािथ।” राजाक िसपाही गु³जीक चेलाकT पकिड़ राजाक दरवारमे उपिxथत कयलक। चेलाक संग गु³ सेहो दरवारमे उपिxथत भेलाह। राजाक हुमक आधारपर चेला जकर गद>न वड़ मोट छल फpसीक ततपर लय गेल आ फpसीक फaदा ओकरा गद>नमे लगाओल गेल। एक, दू, तीनक आवाजक संग रxसी िखंचत आिक गु³ दौिड़ कऽ ओिह ततपर पहुँच गेलाह। चेलाक गद>नसँ फॉंिसक फaदा अपना गद>नमे लगा लेलक आ िसपाहीकT कहलक हमरा फॉंसी िदअ, एकरा छोइर िदयौ। िसपाही सैह करय लागल। मुदा पूव> िनयोिजत काय>¡मक अनुसार गु³-चेला बेरा-बेरी गु³क गद>िनसँ चेला आ चेलाक गद>िनसँ गु³ फॉंसीक फaदा अपना गद>िनमे लगावक हेतु Eयासरत रहय लगलाह। एिह बातक सूचना िसपाही राजाकT देलैaह। राजा xवयं आिव एिह गु³-चेलाक कारनामाकT देखलैaह। ओ िसपाहीकT आदेश देलैaह जे फॉंसीक Eि¡या तावत बaद क जावत हम अिगला आदेश पािरत निह करी। राजा ओिह दुनू ग³-चेलाकT अपना लग बजौलैaह। आ गु³सँ पुछलैaह जे अहॉं दुनू यित एना िकयैक फॉंसीपर झुलबाक हेतु तपर छी। गु³ राजाकT कानमे कहलक जे सरकार अखन एहेन मुहुत> छैक जे फॉंसी फaदापर झूिल जाइत ओ इad लोकक राजा होयत तT हम चाहैत छी जे हम फॉंसीपर झूिल आ जािहसँ इadलोकक राज बनी औ चेला एिह मम>कT जानैत छिथ तT ओ इad लोकक राजा बनबाक आकKा करैत छैथ। तT अपने िनण>य कय दीअ जे के इad लोकक राजा वनवाक यो²यता रखैत छिथ। राजा सोचलक जे एिह छोट-छीन रायक राजसँ बिढ़या जे हमहॴ ने िकयैक इad लोकक राजा बनी। ओ िसपाहीकT आदेश देलैaह जे एिह दुनू गु³-चेलाकT छोिड़ एिह नीक मुहुय>मे हमरे फॉंसी फaदापर झुला दे। िसपाही एिह दुनू गु³-चेलाकT बकिस देलक आ राजाकT फॉंसीक फaदापर झुला देलक। गु³-चेला राम-राम करैत अपना देश भािग कऽ चिल अयलाह।
२ डॉ. बचेsर झाक २ टा आलेख मैिथलीक िवकासमे नेपालक योगदान सaदभ> बोध- मैिथली सािहयक उपिक जनमानसक हृदयसँ भेल अिछ तT एिहठाम जनमानसक हेतु मनोरंजक गीत काय ओ नाटकक Eधानता रहल अिछ। एिह कारणT मैिथली सािहयक िवकासधारा िमिथलिहटामे निह Eवािहत भेल Eयुत् िमिथलाक अितिरत एकर Eधानधारा उर नेपालमे एवम् दोसर
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पुवÊचल Eदेशमे Eवािहत भेल। जहp तक वाxतिवकता छैक नेपाल आ िमिथलाक स8बaध सदा-सव>दासँ आिब रहल अिछ। कणट् वंशीय राजा हिर िसंह देव मुसलमान आततायी गयासुÉीन तुगलकसँ परािजत भऽ िमिथलासँ भािग नेपाल गेला ओतिह रायक xथापना कएल। िमिथलाक िव®ान लोकिन सेहो अपनाकT असुरिKत बुिझ नेपालेमे आvय लेलिन। नेपालक तकालीन राजा लोकिन मैिथल िव®ावनक बड़ स8मान कएलिन। ओिहठामक राजा संगीत आ नाटकक िवशेष Eेमी छलाह। कला मम>Ë मैिथल िव®ान अपना संग अनेको िवषय-वxतुक पा{डुिलिप लेने गेल छलाह तT हुनका सभक समादृत हएब उिचते छल। संगीतसँ पिरपूण> मैिथली नाटकक रचना नेपालक तकालीन राजा लोकिनक अविधमे मैिथल िव®ान ®ारा भेल। यैह कारण जे नेपाल मैिथला िव®ान आ भाषाक केad भऽ गेल रहए। नेपालमे मैिथली भाषाकT राजकीय भाषा माaयता भेिट गेल छलै। मुय भाषाक पमे मैिथली गनल जाइत छल। सािहयक हरेक िवधा एिहठाम अनुEािणत भेल। एहुखन नेपालक तराई KेMमे मैिथली भाषी कए िमिथलाक संxकृितक xपÇ Eभाव देखल जाइत अिछ। ‘नाÌयम् रसामक कायम्’ काय KेM तँ आरो चमकृत भेल। खास कऽ हृदय कायक भरपूर सामी नेपालमे ओिरआओल अिछ। सातम् आठम् शता¦दीक वौगानसँ लऽ कऽ जे ¡म नेपालक धरतीपर मैिथलीक िवकास हेतु चिल पड़ल छलैक ओ मÍय कालमे आिब अित समृ अवxथामे देखल जाइ अिछ। म.म. हर Eसाद शाxMी 1916 ई.मे िस सािहयक अaवेषण नेपाल मÍय कएल, जेकरा बंगला भाषाक Eाचीनतम सािहय आिन वौगान ओ दोहाक नामसँ Eकािशत कएल। योितरीsर ठाकुरक ‘वण>रÏाकर’नेपालिहमे Eात भेल। िव^ापितक Eमािणक पदावली एतु°े देन िथक। कणट् वंशीय राजालोकिनक संग मcलवंशीय राजा लोकिन सेहो मैिथली सािहयक अनaय Eेमी छलाह। देखल जाइछ जे जय िxथत मcलसँ लऽ कऽ रंिजत मcल धिर एतए मैिथलीक सवÊगीण िवकास कएल। मcलकालीन मैिथली सािहयमे गीत तथा नाटकक Eधानता रहल अिछ। गीत काय भित Eधान अिछ। भतपुर (भात गpव)क राजा भूपतीad मcल (1687-1731) ई. रायकाल िवÑणु, िशव आ भवानी आिदपरक शतश: मैिथली गीतक रचना कएने छलाह। एिहठामक रिचत मैिथली गीतपर महाकिव िव^ापितक रचनाक पूण> Eभाव अिछ। भाषा पिरमािज>त एवम् सुलिलत देखल जाइछ- “हे देिव!शरण राखूभवानी, तुअ पद कमल Óमर मोर मानस जनम जनम ईहो मानी। भूतीad मल नृप ईहो गाओल जय िगिरजा पित xवामी।।” िमिथलाक िछ±-िभ± भाषा, सािहयक आकारकT सुरिKत स8वि>त नेपालेक राजवंश ®ारा भेल। एहुखन नेपालक लाइवÀेरीमे अमूcय aथ ओ दुल>भ ंथ सभ ठेकनाओल अिछ जे जीण>वxथाकT Eात कएने अिछ।
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िवs सािहयक पयलोचन कएलासँ xपÇ भऽ जाइछ जे सािहयक समxत Eभेदमे नाटकक xथान अित महवपूण> अिछ। संxकृतक आचाय> लोकिन कायेषुनाटकम् र8य8क अaतग>त नाटककT अनेक िवषयक दृिÇए रमणीय किह एकर सयतापर मोहर लगा देलिaह। नाटकमे अनुकरणामक अिभनय दृ©यमान होइछ तT एकरा पक कहल जाइछ। उaमेष युगक Eमुख नाटक केad भतपुर बनेपा कािaतपुर अिछ। हिर िसंहदेवक नेपाल आगमनसँ इितहासमे नाना Eकारक पिरव>न भेल तथा नेपाल आ िमिथलाक अनेक Eकारक स8बaध भऽ गेलैक। हिर िसंह देवक मृयुक पÔात् हुनक पुM मान िसंह देव तथा ©याम िसंह देव नेपालमे राय कएलिaह। ©याम िसंह देव नेपालमे राय कएलिaह। ©याम िसंह देवक कaयाक िववाह िमिथलामे भेल। एकर फल ई भेल जे मैिथल िव®ानक आदर सकार नेपालक राजदरवार एवम् अaय िविशÇ समाजमे बराबर होइत रहल। बादमे नेपालक मcलवंशी राजाक पािरवािरक स8बaध सेहो िमिथलामे भेल। एिहसँ िमिथलाक भाषाक Eभाव नेपालपर नीक जकp पड़ल। िमिथलासँ िविशÇ िव®ान,पि{डत, किव, धम>शाxMी, संगीतË सभ नेपाल जाय लगलाह। िमिथलामे हुनका लोकिनक संरKणक सेहो कोनो यवxथा मुसलमान सविहक िनरंतर आ¡मणसँ निह रिह गेल। इहए कारण भेल जे मैिथल िव®ान लोकिन िमिथलासँ मैिथली नाटकक बीज नेपाल लऽ गेलाह। मैिथली नाटकक जaम वxतुत: िमिथलामे भेल मुदा िवकास नेपालमे। नेपालमे मैिथली नाटकक िवकासक संKेपत: िनÕिलखत कारण भेल- (क) पारxववत¸ KेM होएबाक कारण िमिथला आ नेपालक सxकृितक स8बaध बरोविर अिछ। (ख) नेपाल सभ िदन िहaदूराय रहल आ िमिथलामे सेहो िहaदूवक Eित मोह। नेपालक राजा एिहठामक िव®ान ओ पि{डतक स8मान कएलिaह। (ग) नेपालक मcलवंश ओ िमिथलाक कण>ट् वंशक रत स8बaध दूनू KेMक िनवासीमे, भाषा आ संxकृितकT आओर िनकट अनवामे सहमत भेला। (घ) मुसलमानी आ¡मणक कारणT एिह भू-भागक िव®ान आ पि{डत नेपाल जाय xवxथ िच भए सकलाह। (ङ) हिर िसंह देव एतए 1324 ई. गमासुÉीन तुलकसँ परािजत भए नेपालमे भात गpवक िनकट अपन राय xथािपत कएलिaह जे पpच पीढ़ी धिर चलल। एिह कण>ट शासन कालमे किव सािहयकारक पयत आदर भेल। (च) मcलवंशक राजा सभ सेहो मैिथल िव®ान, पि{डत, किव संगीतË आिदकT स8मािनत करैत छलाह आ वसवाक हेतु पयत भूिम आ स8पि देलिaह। (छ) मcलवंशक शासनकालमे मैिथली नेपालक राज भाषा भए गेल तथा मैिथलीकT िवकिसत होएबाक अवसर भेटल। (ज) इितहास साKी अिछ जे मुसलमानी Eभुवमे नाटक निह िवकिसत भेल। िहaदू राय नेपाल तकर नीक वातावरण Exतुत कएलक।
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 18
(झ) नाटकक िवषय-वxतु नेपाल आ िमिथलाक Eचिलत कथाक आधारपर लेल गेल। मcलवंशक राजा जय िxथत मcल xवयं बड़ कलािEय छलाह। िहनक समय 1394 ई. धिर कहल जाइछ। िहनक पÔात् मKमcल (1474) ई. धिर नेपालमे मैिथली नाटकक रचनाक कोनो पुÇ Eमाण निह भेटैछ। मKमcलक पÔात् नेपाल तीन भागमे िवभत भऽ गेल आ तीनटा राजधानी भात गpव,बिनकपुर तथा कािaतपुर आ लिलत पाटन आ काठमा{डू xथािपत भेल। एिह तीनू रावंशक राजा लोकिन xवयं नाटकार छला तथा ओ लोकिन किव एवम् नाटककारकT Evय देलिaह। िविभ± अवसरपर नाटकक अिभनयक आयोजन करबैत छलाह। नाटककT रचिनहारकT Eोसाहन दैत छलाह। भाग गpव शाखामे िवs मcलक समय (1533) मे नाटकक बहुत िवकास भेल। Eिस नाटक ‘िव^ा िवलाप’क रचना ओही समयमे भेल। एिह नाटकक अनुवाद भारतेaदु हिरÔad सेहो ‘िव^ा िवलाप’नाम िवधा सुaदर नामसँ कएल। जगयोित>मcल (1618-1833) रायकालमे मैिथली नाटक खूब िवकिसत भेल। िहनक रायकालमे मुिदत कुवलमs वंशमिणक िलखलिaह। हर गौरी िववाह एवम् कुंज िवहारी नाटक सेहो कम Eिसि निह पओलक। िहनक पौM जगEकाश मcलक समयमे छौटा मैिथली नाटक िलखल गेल। उषाहरण, नलीय नाटकम्, पािरजात हरण, पाव>ती हरण, मलय गिaधनी एवम् मदन चिरM। सुमित िनता िमM मcल xवयं एक पैघ नाटककार छलाह जिनक िलखल आठ गोट नाटक भेटैत अिछ। िहनक पुM भुपतीad मcल xवयं किव छलाह जिनका समय चौदहटा रचना भेल रंिजत मcलक समयमे तँ चरम सीमापर नाटकक रचना पहुँच गेल छल ई मcल वंशक अिaतम राजा छलाह। 1921 ईxवीमे मcलवंशक अिaतम राजा रंिजत मcलक समयमे (1921) मैिथली नाटक रचना एक Eमुख बात िथक। नेपालमे शहवंशक उदय आ एकीकरणक पÔात् भाषाक नामपर गौण काज लेल अिछ। गोरखा बोलीक Eभावमे पिड़ मैिथली तँ लग-भग मेटाय गेल। खाली नाच, गीत कतहु-कतहु लेखन आिदमे एकर प सुरिKत रहलैक। राणाकालीन नेपाल भाषा सािहयक हेतु अaधकारक युगक पमे मानल जाइत अिछ। मैिथलीक अवxथा तँ नेपालमे िवचारणीय रहल। 2007 सालक मुित राणा शासनसँ आ बादमे 2017 साल धिर उथल-पुथलक समय होएबाक कारणT मैिथलीक िवकास हेतु नेपालमे कोनो ठोस काज निह भऽ सकल। 2014-16 सालमे एकटा ‘नव जागरण’ पMक एक माM अंकक Eकाशन संतोष िदया सकैत अिछ। 1960 ई.क बाद कनेक िxथरता तँ आएल मुदा सरकारी संरKणक अभावमे गत 30 वष>मे जतेक सािहियक काज होएबाक चाही ओ निह भऽ सकल। कोनो सािहयानुरागी आ िपपासु मोनकT आ अहलािदत करएबला सामीक अभाव सदैव खटकैत रहल तथािप एिह अविधमे जे िकछु भऽ सकल अिछ तकर सािहयक िवधागत लेखा-जोखा कएल जा सकैछ। आधुिनक काल : मÍयकालीन मैिथली सािहयक जएटा उपलि¦ध अिछ से आधार xतभक पमे मानल जाइछ। मुदा नेपालमे मैिथली सािहयक स8पूण> काज 1960 ई.क बादे भेल जकरा हमरा लोकिन आधुिनक कालक Eारंभ मािन कऽ चलैत छी। एिहसँ पूव> पचासेक दशकमे पं. सुaदर झा शाxMी अपन मूल जaम xथान दरभंगासँ मैिथली लेखकक पT Eितिनिधव करैत छलाह। गलीक कुकुर आिद एखनो दरबार नै खुजलैए सन रचना करैत छलाह।
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 19
पं. जीवनाथ झा सेहो अपन Eवaध काय आिद रचनासँ EितिRत भऽ चुकल छलाह। वxतुत: जनकपुरमे पं. जीवनाथक Eवेश एतु°ा वातावरणमे सािहयक Eित अनुराग जगौलक आ ओ सािहयक गु³जीक पमे सव>M चिच>त भेलाह। डॉ. धीरेad सािठक बाद जनकपुरमे आधुिनक मैिथलीक शुआत कएलिaह। ओ एिहसँ पूव> मैिथली लेखकक पमे EितिRत भऽ गेल छलाह। 1962 ई.मे Eो. Eफुcल कुमार िसंह मौन नेपालक मैिथली सिहयक इितहास िलखलिaह, जािहमे Eाचीन सािहयक पमे चच भेल अिछ ओतेक आधुिनक कालक सािहय हcलुक Eतीत भेल अिछ। तT िहनकासँ तुलनामक दृिÇए डॉ. जयकाaत िमvक इितहास लेखन vेRतर अिछ। पिहल कारण तँ एक दशकमे सािहय लेखन ओतेक समृ निह छल। दोसर सूचनागत Mुिट सेहो Eफूcल िसंहकT भेलिaह। आब तँ तीन दशकमे िकछु-िकछु एहन रचना सभ भेल अिछ जकरा आंगुरपर गनल जा सकैत अिछ। Eवaध कायमे पं. रमाकाaत झाक ‘यथा’डॉ. धीरेadक ‘िMपु{ड’पं. मथुरानaद चौधरी माथुरक ख{ड काय ‘Mीशूली’Eमुख अिछ। मुतक कायमे डॉ. धीरेadक ‘ह«गरमे टpगल कोट’कणा भरल ई गीत हमर’राम भरोस कापिड़ Óमरक ब± कोठरीमे औनाइत धुँआ, निह आब निह,मोमक िपघलैत अधर, अप±-अनिचaहार, िवनोद चad झाक ‘कृषक बाला, पं. शुभ नारायण झाक ‘यंMणा’, पं. सुरेश झाक मैिथली रस कलश काय Eमुख कृित देखना जाइछ। पं. झा मैिथली गीता सेहो िलखने छिथ। चad शेखर झा शेखरक ‘हम नेपाल हमर नेपाली’किवता संह आएल अिछ। अनुवाद िवधा : नेपालक कितपय सािहयकार िविभ± रचनाक अनुवाद मैिथली भाषामे कएलिन अिछ, जे हुनक मैिथली Eेमक Eतीक िथक। यदुवंश लाल चad सतरी िजलाक ितलाठी ामवासी ®ारा ‘उसैको लािग’क चॉंदनी साहक रचनाकT लोकेsर यिथत, पं. कृÑणा Eसाद उपाÍयायक ®ारा िव^ापितक पदावलीक, डॉ. धीरेadक ‘उमर खैयानक’महाकिव भनुभतक रामायण मैिथलीमे अनुवाद कऽ वdीनायण वम अ¾ुत कएल अिछ। Eकाशनक बाटपर अिछ पं. सूय>काaत झाक मेघदूतक, डॉ. रमेश ®ारा सात जापानी कथा अनुवाद मैिथलीमे चमकारी Eयास िथक। कथा-उपaयास आ साKाकार िवधा : वxतुत: नेपालमे मैिथली कथाक KेMमे सेहो नीक काज भेल अिछ। िकछु Eितब कथाकारक संह एखन धिर समK निह भेल अिछ तT छुछु± लगैत अिछ। एखन धिर Eात कथा संहमे डॉ. धीरेadक ‘कूहेश आ िकरण’, ‘पझाइत धूरक आिग’,‘शतपा आ मनु’ राम भरोस कापिड़ Óमरक तोरा संगे जयवो रे कुजवा, रेवती रमण लालक ‘पाधवनिह एलाहमधुपुरसँ’ Eमुख अिछ। डॉ. धीरेadक स8पादनमे नेपालक Eितिनिध गcप संह, Eो. सुरेad लाभक संपादनमे नेपालीय मैिथलीक उकृÇ गcप Eकािशत भेल अिछ। उपaयास : एिह िवधामे ©यामाझाक ‘िबनु माइक बेटी’, कुमरकाaतक ‘सेहaता’क अितिरत ए8हर डॉ. धीरेadक भो³कवा, कादो कोयला, ठुमुिक चल,पाठककT सेतोष दैत अिछ। साKाकार : साKाकार िवधामे रेवती रमण लालक साKाकार एक माM पोथी अिछ, ओना एिह KेMमे राम भरोस कापिड़क नीक काज सभ भेल अिछ। जकरा अनतग>त अvेय, केदारनाथ यिथत, िवजय मcल, मातृका Eसाद कोइरालाक साKाकार खूब चिच>त भेल अिछ।
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 20
नाटक : एिह िवधामे आधुिनक नाटककारमे महेad मलंिगया लेखनमे िभड़ल छिथ। Eारंिभक रचना ‘ल×मण रेखा खि{डत’, जुआएल कन-कनी, ओकरा आंगनक बारह मासा, टूटल तागक एकटा छोर, एककी संह हुनक Eमुख पुxतकाकार छिaह। काठक लोक िफलहाल चचमे आएल अिछ। ‘देहपर कोठी खसा िदअ’आलुक बोरी सन बहुतो रेिडयो पक ओ िलखने छिथ। एककी लेखकक पमे डॉ. धीरेad, राम भरोस कापिड़, डॉ. ल×मण शाxMी, ©याम सुaदर शिश,ललनक Eमुख xथान अिछ। िनवaध समालोचना तथा संxमरण : एिह िवधामे Eो. Øज िकशोर ठाकुरक अÍययन ओ िववेचन छोिड़ आन रचना पुxतकाकार पमे निह आिब रहल अिछ। ओना, डॉ. धीरेadक सािहय स8बaधी, Óमरक लोक संxकृित स8बaधी, डॉ. िवमलाक सािहय स8बaधी महेad मलंिगयाक, रेवती रमण लालक राजेad िकशोरक िविवध सामियक िनबaध सभ Eकािशत भेल अिछ। याMा संxमरण : एिह िवधामे राम भरोस कापिड़ Óमरक अयaत महवपूण> रचना आएल अिछ। Eो. Eफुcल कुमार िसंह मौनक, रेवती रमण, ©याम शिश सेहो एक िदस संल²न छिथ। समालोचना संहमे राम भरोस कापिड़ Óमरक स8पादनमे नेपालक मैिथली पMकािरता आएल अिछ। पM सािहय : 2025 सालसँ Eार8भ भेल नेपालक सामियक संकलन युग आब एकटा ठोस प लऽ चुकल अिछ। Eो. Eफुcल कुमार िसंह ‘मौन’क स8पादनमे मैिथली िवराटनगरसँ डॉ. हिरदेव िमvक स8पादनमे ईजोत काठमडूसँ, पं. सुaदर झा शाxMीक स8पादनमे फूल-पात काठमडूसँ, वाणीक िहलकोर जनकपुरसँ संगिह दुिवधान एतिहसँ ए8हर 2019 सँ राम भरोस कापिड़क स8पादनमे गाम-घर सातािहक िनरaतर Eकािशत भऽ रहल अिछ। अच>ना ®ैमािसक गत 16 वष>सँ Eकाशन आ ‘ऑंजुर’ आब मािसक पमे Eकािशत भऽ रहल अिछ। नेपाली भाषी सािहयकार ®ारा मैिथली सािहय सेवामे डॉ. कृÑणा Eसाद उपाÍयायक नाम आदरसँ लेल जा सकैछ। ओना, िहनके भाइ डॉ. ल×मण शाxMी तँ अ¾ुत काज कएलिन अिछ। ई अपन दू गोट पोथी दऽ एक धम> काय युिधRीर महाकाय आ दोसर धीकताम् गीत काय। रामेsर Eसाद अयल ®ारा रिचत िशव- मधुक भा²य रेखा नामक कथा काय देिख पड़ैत अिछ। फुटकर रचनामे मनुवÀाजकी, केवेर िधिमरे, जगदीश िधिमरे आिद Eमुख छिथ। उपसंहार वा िनण>यामक िबaदु : एिह तरहT िविभ± िवधामे गत तीस वष>सँ भेल िवकासक प रेखा पूण> संतोष तँ निहयT दैत अिछ माM आशा टा जगबैत अिछ। िवकासक संभावना नीक छैक। अवसर पािब िच°न काज कऽ सकैछ। नेपालमे संवैधािनक राजतंMक अaतग>त पूण> EजातंMक बहाली भेलासँ भाषा िवकासक गित अपना ढंगसँ संचािलत कएल जा सकैछ। राजकीय EËा EितRानसँ सरकार‘मैिथली िवभाग’ खोललक अिछ जािहसँ िकछु महवपूण> रचना सभक Eकाशन होएब स8भव िथक। खास कऽ मैिथली सािहयक इितहास, श¦द कोषओ िवधागत संह Eमुख रहत। तिहना अनुसंधानक हेतु िव®त वृितक संभावना सेहो छैक जािहसँ सरकारी वा नीज पुxट सामीमे सुरिKत मैिथलीक पुरना महवपूण> पा{डूिलिपक उार कएल जा सकैछ। स8पूण> मैिथली संसारक हेतु अपन रचनासँ योगदान पहुँचेबाक लेल एिहठामक सािहयकार तcलीन छिथ। अxतु...। q
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 21
मैिथली सािहयक अवदान िमिथला भाषा रामायण चaदा झा किववर मैिथली सािहयाकाशक चad िथकाह। मैिथली सािहयकT अपन शीतल योसनाक अमर वरदान देलिaह। इएह कारण िथक जे ओ मैिथलीक महान् किवक पमे समादृत होइत आधुिनक मैिथली सािहयक जनक मानल जाइत छिथ। वxतुत:िव^ापितक पÔात् इएहटा किव भेलाह जे मातृभाषाक वाxतिवक महव बूिझ ओकर िवकासक िदशामे EयÏशील भेलाह। उ±ैसम शता¦दीमे पुन: कवीsरे जनभाषाकT काय भाषाक पमे मि{डत कैलिaह तथा अपन सशत लेखनीसँ अनवरत सािहय सृिÇमे योगदान दैत मातृवाणीक अच>नामे सुवण> वणवलीक उपहार चढ़बैत रहलाह। िहनक वहुमुखी Eितभा, Eगाढ़ पाि{डय, सािहयक िच, पुरातव-Eेम एवम् दीघ> जीवन िविवध EकारT मैिथली सािहयक स8व>नमे सहायक िस भेल। िहनक जaम सन् 1931 ई.मे सतमी वृहxपितकT दिड़भंगा िजलाक िप{डाछ गाममे भेल छल। Eारि8भक िशKा मातृक बड़ गpव सहरसा िजलामे भेल। बादमे संxकृतक उ»च िशKाक हेतु पिवM नगरी काशी गेलाह। काशीसँ Eयागत भेलापर पाि{डयक अितिरत हुनक किवव शितक यशोवcलरी चतुिद>क पसरए लागल। बाcयकालिहसँ Eितभापूण> Eतीत भेलाह। िमिथला भाषा रामायणक मूल Eेरक xव. महाराज ल×मीsर िसंह छलाह। मातृभाषा मैिथलीमे धम> ंथक अभाव खटकलैaह। चaदा झा िशवक समिप>त भत छलाह। िशवक िEय राम तT भित भावना हुनक सािहयक कृितक िवधा िथक। मातृभूिम ओ मातृभाषा Eेमक पुÑपाÙिल दय ओ अपन काय देवताक अच>ना कैलिaह। एिह दृिÇए िमिथला भाषा रामायण हुनक सविधक Eिस िEय कीि> िथक। चaदा झाक नामोcलेख माMसँ िहनक रामायणक उÚोष होइछ। aथक नाम करणेसँ िमिथला-मैिथलीक Eित किवक सहज अनुरागक पिरचय भेटैत अिछ। Eाय: ई शौभा²य कोनो आन ंथकT निह हएत जेकर Eयेक श¦दपर िव®त म{डली िवचार कएने हो तथा जे पाि{डयक कसौटीपर पिरशु Eमािणत भेल हो। रामायण भारतीय वाङमय केर आदश> कृित िथक। देशक चािरिMक आदश>कT अनुEािणत करबाक लेल राम चिरतक अवतार मैिथलीमे आव©यक छल। वxतुत: जािह सxकृितक संघष>क युगमे चaदा झाक आिव>भाव भेल छल तकर ई अिनवाय> Eिति¡या छल। कवीsरक एिह कृितक कT सव> Eथम महा कायो हैबाक सौभा²य Eात छैक। चad किव जिहना कायामकतामे बाcमीिक तिहना रचना करबामे Eमुख। चaदा झाकT युग जागरणक Eतीक मानल जाइछ। ओना तँ िमिथला भाषा रामायणक मूलाधार िथक अÍयाम रामायण मुदा अटूट vाक कारणT मौिलकताक िनवहमे Mुिट निह होए देल अिछ। िवशेष कय िमिथलाक वण>न, ल×मण- परसुराम स8वाद, लंका दाह वण>न, राम अंगद-स8वाद आिद कतेक xथल अिछ जतए किवक मौिलक Eितभा xफुट भेल अिछ, तथा मनोरम िस भेल अिछ। विभ± रसक Eयोग लेल राम कथाक महव सवÆपिर अिछ तिहना भाव Eकाशनक ¡ममे िविवध अलंकारक Eयोगसँ ओ एकर कला पKकT समृ बनौने छिथ। एतए
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xपÇ अिछ जे रामायण मूलत: भित काय िथक। िमिथलाक गौरवक गुणगान निह िबसरलाह अिछ रामक मुँह कहबैत छिथ- “सय ितरहुित यËभूिम पु{य देिनहािर, शाxMकT बजैत बेर कीर बैिस डािर-डािर।” पुन: सीताक चिरतक Eसंगमे ओ एिह िवषयकT निह िबसरल छिथ जे सीता िमिथलाक बेटी छलीह। सीता xवयं कहलैaह- “जनक जनक जननी अविन, रघुनaदन Eाणेश देवर ल×मण हमर छिथ, नैहर िमिथलादेश।” एकर भाषा ओ शैली माधुय> जन साधारणकT आकृÇ कएलक। ओ शीÛिह िव®ानसँ लऽ कऽअिशिKत समाज मÍय ई िEय भए गेल। एिह गंथक अÍययनसँ मैिथली िव®ानकT अपन मातृभाषाक गौरव ओ गंभीरताक Ëान भेलिaह। एिह ¡ममे देखब जे अशोक बािटकाक विaदनी सीताकT अपन िवप± जीवनसँ िवशेष कठोर बचन कहबाक भनxताप छिaह जे मनो वेदना िवगिलत भए उठल अिछ- हे रघुनाथ! अनाथ जकp दश कंठकपूरी हम आइिल छी िसंहक Mास महावनमे,हिर नीक समान हेराय छी।
ऐ रचनापर अपन मंतय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रबीad नारायण िम v- तीनटा आलेख , दूटा लघुकथा आ उपaयास नमxतxयै (आगp)
रबीad नारायण िमv रबीad नारायण िमvक तीिनटा आलेख घरेलू िहंसा अिधिनयम, 2005 घरेलू िहंसाकी िथक ?
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आमतौर पर घरेलू िहंसा माM घरमे मािर-पीट बुझल जाइत अिछ।सही मानेमे बािलकाक अरमानकT दबा देब, घरक अंदर पिरवारक सदx य ®ारा रोज-रोज मानिसक Eताड़ना देब,तामसमे ओकर परसल भोजन फTिक देब, ओकरा संगे गार-मािर करब, ओकर इ»छाक िव³ ओकर पढ़ाइ रोिक देब, सेहो घरेलू िहंसाक प अिछ। एकर अलावा यौन उ पीड़न सेहो भारी िहंसा अिछ, जािह हेतु आम तौरपर दूरक िर© तेदार वा पड़ोसक लोग िज8 मेदार होइत अिछ। एहनमे जखन बािलका िवरोध करैत अिछ, तँ बदनामीक हवाला दए ओकर मुँहबंद कए देल जाइत अिछ। एिह तरहक Eतारणा नैहर, सासुर सभठाम होइत अिछ। घरेलू िहंसापािरवािरक स8बaधक पिरपे×यमे एहन यवहार ओ स8बaधसँ जुड़ल अिछ जे अपन जीवन संगीपर अिधकार जताबए एवम् मनमाना िनयंMण करबाक हेतु कएल जाइत अिछ। Eताड़ना मनोवैËािनक, शारीिरक, भावामक, आिथ>क, िकछु भए सकैत अिछ। घरेलू िहंसा िववािहत िकंवा आपसी सहमितसँ Eेम स8बaधसँ जुड़लजोड़ी, ककरो संगे भए सकैत अिछ। घरेलू िहंसाक कारण की िथक? घरेलू िहंसाक Eारंभ तखने होइत अिछ जखन बािलका अपने माए-बापसँ िखलौना मगैत अिछ। हमर समाज ओकरा ने±ेसँकमजोर बनबैत अिछ। जखन बेटा छोट रहैत अिछ, तँ हम ओकरा हाथमे बैट-बाल वा x पोट>स क सामान दैत छी, जािहसँ ओ शारीिरक आओर मानिसक पसँ मजगूत बनैत अिछ। मुदा बािलकाक खेलक हेतु गु¶डा-गुि़डया वा चूc हा बत>न बला खेलौना देल जाइत अिछ जािहसँ ओ शारीिरक आओर मानिसक पसँ कमजोर होइत चिल जाइत अिछ। एकर संगे भावनामे भिसआएल चल जाइत अिछ। अब बािलका जेना- जेना पैघ होइत अिछ घरक पाबंदी आओर समाजक यातना ओकरापर हावी होइत चिल जाइत अिछ। दा8पय जीवनमे घरेलू िहंसाक कारण हीन भावना, ईÑय, ¡ोधपर िनयंMणक अभाव,जीवनसंगीसँ िशKा िकंवा सामािजक पिरवेशमे aयोन होएब िकछु भए सकैत अिछ। घरेलू िहंसा अिधिनयम, 2005 िकएक लागू करए पड़ल? घरेलू िहंसाक अनिगनत घटना हमर देशमे होइत अिछ, मुदा महज सौ-पचास दज> होइत अिछ, ओहो चरम पर पहुँचलाक बाद। कतेकोठाम बािलकासभ सpझक बाद घरक अपेKा सड़कपर अंजान लोकसंग रहब यादा सुरिKत अिछ कारण घरमे अपन लोक ®ारा बेसी दुघ>टना, हया आओर िहंसा करबाक संभावना रहैत अिछ, बािलका जखन रxता पर बहराइत अिछ, तँ ओकरा पता निह होइछ िक शहरकचकाचॱधमे ओकरा संगे कखन कोनठाम छेड़खानी भए जाएत। बात अगर गामक करी तँ बािलका सु± रxता पर जएबासँ डराइत अिछ मुदा ओिह डरक की करी, जकर जिड़ घरक अंदर होइत अिछ आओर बािलकाक संगे पैघ होइत अिछ। ओिह डरक की करी जे ओकरा जनिमते ओकर माथामे बैिस जाइत अिछ आओर आधा िजनगी धिर रहैत अिछ। घरेलू िहंसा क बात करैत काल ऑनर िकिलंगक घटनासभकT फराक निह कए सकैत छी। ऑनर िकिलंगक जिड़ असलमे घरेलू िहंसा अिछ। िकएक तँ कोनो माए-बाप, भाए, काका कखनो सेहो अपनी बेटी वा बिहनके, सोझे मािर निह देत, ओिहसँ पूव> नाना Eकारक यातना ओकरा देल जाइत अिछ। एकटा सियकीय गणनाक अनुसार : (i) िनय चािरटा मिहला, एकटा पु³ष, आओर पpचटा ब»चा घरेलू िहंसाक कारण अकाल मृयुक िशकार भए जाइत छिथ। (ii) अपन जीवन कालमे Eयेक चािरटामेसँ एकटा मिहला घेरलू िहंसाक िशकार भए जाइत छिथ।
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(iii) २०-२४ बख>क मिहलाक उपर घरेलू िहंसाक सभसँ बेसी खतरा रहैत अिछ। घरेलू िहंसा अिधिनयम 2005 xMीक सुरKा, ओ xMीक अिधकारक अिधक Eभावी ढंगसँ लागू करबाक हेतु आनल गेल। एिह अिधिनयमकT पािरत करएसँ पिहने कानूनी िxथित की छल?
(i) घरेलू िहंसा कानूनमे कोनो xपÇ माaयता निह छल, (ii) (आईपीसी की 498 ए) क तहत घरेलू िहंसाक संपूण> अवधारणा िववािहत xMीपर कएल गेल ¡ूरताक धिर सीिमत छल, (iii) दुखसंतत बिहन, माए, बेटी वा अिववािहत xMी एिहमे सािमल निह छल, (iv) Eतािड़त भेलापर िववािहत xMीकT सीिमत िवकcप छल: तलाक लए िलअए वा धारा 498 ए क अनुसार मोकदमा करए, घरेलू िहंसा दू Eकारक होइत अिछःआपरािधक आओर गैर-आपरािधक: आपरािधक घरेलू िहंसा: िबना सहमितकT शारीिरक संपक> जेना यौन उपीड़न, लात मारब, अनाव©यक पछोड़कए भयभीत करब, कंयूटर हैिकंग, आपरािधक अलगाव गैर-आपरािधक घरेलू िहंसा: िमM वा आन सामािजक सरोकारीसँ संपक> बािधत करब, टेलीफोनक संपक> निह होमए देब, घरेलू िहंसा कानूनक तहत कोनो पीिड़त मिहलाजे अपरािधक संगे रहैत छिथ, एिह कानूनक अनुसार मोकदमा कए सकैत छिथ। घरेलू िहंसाक सबसँ खराब Eभाव ओिह पिरवारक छोट ब»चासभ पर होइत छैक।ब»चा वातावरणक उपज होइत छिथ, एहने ब»चा बादमे जाकए घरेलू िहंसा करैत छिथ वा ओकर िशकार भए जाइत छिथ। घरेलू िहंसा अिधिनयमक धारा२ (यु): घरेलू िहंसा अिधिनयमक धारा२ (यु)क तहत माM पु³ष अपराधीक िखलाफ कार>बाइक Eावधानके असंबैधािनक घोिषत करैत सुEीम कोट> aयायमूित> कुिरयन जोसेफ और रोिहंटन एफ नरीमनपीठ िनण>य देलक जे एिह कानूनक तहत मिहला अपराधीकक िखलाफ सेहो मोकदमा चिल सकैत अिछ।माननीय aयायाधीश लोकिनक कहब छिन: “xMीगणक िखलाफ कतेकोबेर िxMए सािजसक तहत काजकए घरेलू िहंसामे सािमल होइत छिथ, तT एिह कानूनक उपरोत धारा कानूनक मूल उÉये©यसँ भुितआ गेल लगैत अिछ, तT ओकरा कानूनसँ हटा देल जाइत अिछ।” घरेलू िहंसा कानूनक तहत केना मदित लेल जा सकैत अिछ?
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(१) कोनो Eकारक िहंसासँ वचाव हेतु आदेश Eात करब, (२) िनवास करबाक अिधकारक हेतु आदेश Eात करब, (३) मौिdक राहत (४) िहरासतमे लेब (५) Kितपूित>क हेतु आदेश (६) अaतिरम आओर एकपKीय आदेश सुरेश बनाम जयबीर (२००९): सुरेश बनाम जयबीर (२००९)क मामलामे aयायलय ई आदेश देलक जे घरेलू िहंसा कानूनक धारा 12 कउपखंड (1) कतहत आवेदनक िनपटारा करैत अaतिरम आदेशमे aयाियक दंडािधकारी गुजाराक हेतु अaतिरम राहत दए सकैत अिछ। Eथम vणी aयाियक दंडािधकारी वा महानगर दंडािधकारीक ओतए िसकाइत कएल जा सकैत अिछ: (१) जतए दोषी यित रहैत हो, (२) जतए अपराध कएल गेल होइक, (३) जतय Eतािड़त यित रहैत हो, aयाियक दंडािधकारीक समK िसकाइतक िनपटान: पीड़त यित संरKण अिधकारी, पुिलस िकंवा सेवा Eदाता (कcयाण अिधकारी)क मदित लए सकैत छिथ। िहनका लोकिनक कत>य अिछ जे पीड़त यितक ज³री माग>दश>न करिथ एवम् aयायलय ®ारा देल गेल मौिdक Kितपूित>क आदेशक पालन सुिनिÔत कराबिथ। संरKण अिधकारीक दाियव अिछजे वो Eतािड़त यितक िसकाइतक घरेलू िहंसा Eितवेदन (DIR)तैयारकए aयायालयकT उपल¦ध कराबए।संगिहँ Eतािड़त यितकT सेवा Eदाताक वारेमे उिचत माग>दश>न दैक जािहसँ ओ ओिह कानूनी सुिवधाक लाभ उठा सकए।सेवा Eदाता कोनो कंपनी, मिहलाक कcयाण हेतु काय>रत गैर सरकारी संगठन, भए सकैत अिछ।सेवा Eदाताक ई कत>य िथक जे Eतािड़त यितकT कानूनमे िनिहत ओकर अिधकारक बारेमे जानकारी देिथ एवम् कानूनी उपचार लेबाकक हेतु उिचत वxथा करएमे ओकरा मदित करिथ। पुिलसक कत>य िथक जे ओ Eतािड़त यितकT संरKण अिधकारी एवम् सेवा Eदाताक बारेमे जानकारी देिथ। संगिहँ भारतीय दंड संिहताक अनुKेद ४९८ (अ) मे Eात अिधकारक जानकारी सेहो देिथ। aयाियक दंडािधकारीक समK पीिड़ता ®ारा िसकाइत Eात भेलाक तीनिदनक भीतर मामलामे सुनबाइक तािरख तय होएत।aयायालयसँ समन भेटलाक दूिदनक भीतर संरKण अिधकारी तकर जानकारी EितवादीकT देत। EितवादीकT देल गेल समनक संग घरेलू िहंसा कानूनक धारा 12 कउपखंड (३)क तहत िसकाइतक Eितिलिप सेहो देल जाएत।Eितवादी ®ारासे Eात भेलाक बादे एकतरफा सुनबाइ भए सकैत अिछ आ xथाइ अaतिरम आदेश कएल जा सकैत अिछ। ज³री बुझलापर aयायलय एकतरफा सुनबाइ कए अaतिरम आदेश दए सकैत छिथ। aयाियक दंडािधकारी ६० िदनक भीतर एहन िसकाइतक िनपटान करताह। हुनकर आदेशक िखलाफ स8बिaधत पK ३० िदनक भीतर सेशन कोट>मे अपील दाएर कए सकैत छिथ।
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Eितवादी ®ारा संरKण आदेश िकंवा अaतिरम संरKण आदेशक पालन निह करब संËेय एवम् गैर जमनती अपराधक vणीमे अबैत अिछ। हुनका तािह कारणसँ एक साल धिर जेल िकंवा बीस हजार ³पया जुमना भए सकैत अिछ। जॱ संरKण अिधकारी दंडािधकारी ®ारा देल गेल आदेशक पालन करबामे िबना कोनो वािजब कारणके आनाकानी करैत छिथ तँ हुनको एिह तरहक दंड देल जा सकैत अिछ, मुदा तािह हेतु िवभागीय अिधकारीकT पूव> अनुमित आव©यक िथक। पीिड़त यितकT संयुत पिरवारक साझी िनवासमे रहबाक हेतु aयायलय िनवास करबाक आदेश दए सकैत अिछ भले ओिह घरमेEितवादीक िहxसा होइक वा निह होइक। एस आर बतरा एवम् अaय बनाम vीमती त³ना बतराक मामलामे उ»चतम aयायालय ई फैसला देलक जे घरेलू िहंसा अिधिनयमक धारा १७ (१) क अनुसार Eतािड़त मिहला माM साझी आवासमे रहबाक हकदारभए सकैत अिछ।साझी आवासक माने पित ®ारा कीनल िकंवा िकरायापर लेलगेल घर अिछ वा एहन साझी घर अिछ जािहमे पितक िहxसा होइक। कहक माने जे जािह घरमे ओकर पितकT कानूनी अिधकार निह छैक तािहमे Eतािड़त यितकT रहबाक अिधकार aयायलय एिह कानूनक तहत निह दए सकैत अिछ। घरेलू िहंसा रोकबाक समाधान : घरेलू िहंसा रोकबाक एकटा समाधान ई भए सकैत अिछ जे पित aयाियक दंडािधकारीक समK शपथ-पM देिथ जे ओ आगा अपन पÏीक संग स8मानपूण> यवहार करताह,एहनिकछु निह करताह जािहसँ ओकरा कोनो Eकारक यंMणासँ फेर गुजरए पड़ैक, तकर संपूिÇमे अपन संपिकT गारंटी देिथ जािहसँ घरेलू िहंसाक पुनरावृित भेलापर ओकरा ज¦त कए लेल जाएत। उपसंहार आपसी स8बaध Eेम, आदर, ईमाaदारी, एवम भावुक लगावसँ सराबोर हेबाक चाही। आपसी अिवsाससँ िहंसा ओदुराचर बढै़त अिछ, एहन दंपित िनरंतर आशंकाxत रहैत छिथ जािहसँ जीवन नक> भए जाइत अिछ। जीवनक ई कटुसय अिछ जे अहp दोसरकT निह बदिल सकैत छी, हम अपनेटाकT बदिल सकैत छी।कमसँ कम एतबातँ कइए सकैत छी जे जािहस8बaधमे लजित निह रिह गेल अिछ, जतए अिवsासक पराकाRा पहुँिच गेल अिछ, ओतए फसाद बढे़नाइ छोिड़कानून स8मत तरीका अितआर करी। मिहला संगठन िसफ> जागकता पैदा कए सकैत अिछ, पुिलस िसफ> उ पीड़न करएबलाकT जेल पठा सकैत अिछ, कोट> िसफ> a याय दए सकैत अिछ, एिहमे सँ कोनो अहpक घरक हालत ठीक निह कए सकैत अिछ, घरमे पैिस िनय-Eितक समxयाक समाधान निह कए सकैत अिछ। अxतु िसफ> सोच बदलक जरत अिछ। जीवनक दुखमय पिरिxथितसँ हािर निह मािन नव ओ सुंदर जीवन िजबाक हेतु सचेÇ रहैत िपिड़त यितकT ई िवsास बनओने रहक चाही जे सुंदर समय आविहँबला अिछ, अएबे करत।q
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िगरÞतारीओ जमानत कोनो-ने-कोनो झंझिटमे निहओ चाहैत कए बेर लोक फँिस जाइत अिछ। केबेर िनदÆष लोकक िखलाफ झूठ-फूसके मामला बना देल जाइत अिछजािहमे पुिलसके घाल-मेल सेहो भए जाइक से भारी बात निह।टेलेिवजनकT गाम-गाम पसिर गेलासँ अपराधक नव-नव xवप गामो-घरमे फैिलरहल अिछ।कैटा कानूनो एहन भए गेल अिछजे िबना गलितओकT कैबेर लोक जहलधिर पहुँिच जाइत छिथएहन पिरिxथितमे लोकके जहल ओ जमानतसँ स8बिaधत कानूनक जानकारी बहुत आव©यक भए गेल अिछ जािहसँ यथ>क फसादसँ बिच सकिथआ जरी भेलापर समाधान कए अपन जीवन ओ इजितक रKा करिथ। कैटा कनून एहन अिछ जािहमे पुिलस मामला दािखल होइते अिभयुतकT िगरÞतार कएसकैत अिछ।उदाहरणxवप भारतीय दणड संिहताक धारा ४९८ (ए)क तहत कएलगेल मोकदमामे अिभयुतक हालत बहुत पातर भए जाइत छल। ओकरा सभसँ पिहने पुिलस िगरÞतार करैत छल, तखन आर िकछु। बहुत रास मामलामे देखल गेल जे कएल गेल िसकाइत झूट छल, कोट>मे साबूतक आधारपर सािबत निह भेल, अिभयुत बरी भए गेल, मुदा ताबित ओकर सभ दशा भए जाइत छल, ओकर इजितकमिटयामेट भए जाइत छल। उ»चतम aयायलय एिह बातक संËान लैित िदशा-िनदµश जारी कएसुिनिÔत करबाक Eयास केलक जे िनदÆश लोकके एहन मामलामे वेबजह िगरÞतारी निह होइक। संिवधानक धारा २२ क अनुसारपुिलस ®ारा िगरÞतार कएल गेल यितकT अिधकार अिछजे ओ िगरÞतारीक कारण जानए, जॱ िगरÞतारी वारंटक आधारपर भेल अिछतँ ओकरा वारंट देखाओल जाए, वकील वा िनकट स8बaधीकT संपक> कए सकए।ओकरा िगरÞतारीक चौवीस घंटाक भीतर मिजÑßेटक स8मुखउपिxथत करब ज³री िथक। ओकरा इहो बताएब ज³री ितक जे ओ जमानतपर छोड़ल जा सकैत अिछिक निह। िगरÞतार कएलगेल यितकT हथकड़ीलगाएब : ऊ»चतम aयायलयक िदशा िनदµशक अनुसार िगरÞतार कएलगेल यितकT हथकड़ीलगाबएसँ बचबाक चाही, कारण एहन यित सजाआÞता निह होइत छिथ। हथकड़ीक Eयोग अपवािदकपिरिxथितमे तखने कएल जाएजखन िकअिभयुत िहंसक हो, पुिलसक िगरÞतसँ भािग जेबाक संभावना होइक, िकंवा आमहयापर उता³ हो। सीआरपीसीक धारा ७४क अधीनपुिलस अिभयुतकT िगरÞतार करबाक हेतु घरमे घुिसकए ओकरा पकिड़ सकैतअिछ, तािहलेल ज³री भेलापर घरकिखड़कीकT तोिड़सकैत अिछ। कोनो यितकT िगरÞतार केलाकबादेओकर तलाशी कएल जा सकैत अिछ, पिहने निह। जॱ िगरÞतार कएल गेल यित मिहला छिथ तखन मिहले पुिलस ई काज कए सकैत अिछ। मिहलाक िगरÞतारी हेतुउ»चतम aयायलय ®ारा जारी कएलगेलिदशािनदµश : उ»चतम aयायलय ®ारा जारी कएलगेल माग>दश>नक अनुसार सामाaयतः कोनो मिहलाकT सpझक बाद आ भोर हेबासँ पिहने िगरÞतार निह कएल जाएत। जॱ ततबे आव©यक भए जाइक आ राितयेमे मिहलाक िगरÞतारी जरी होइक, भोरधिर ³कब कानूनक अनुपालन हेतु िद°ित भए जेबाक संभावना Eवल होइक, तखन मिजÑßेटक पूव> अनुमित लए एव8मिहला पुिलस
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®ारा ई काज कएल जाएत। िगरÞतारीक बाद जॱ मिहलाकT तलाशी करब जरी होइक तखन ई काज मिहला पुिलस ®ारा कराओल जेबाक चाही।पुिलस हाजितमे मिहलाकT अलग राखबाक चाहीजॱ मिहलाक हेतु अलग हाजित निह होइक तखन ओकरा अलग कोठरीमे राखल जेबाक चाही। िवना वारंटकT िगरÞतारीः आपरािधक Eि¡या संिहता1 9 73क धारा 41क अनुसार पुिलस कोनो यितकT िनÕिलिखत पिरिxथितमे िबना वारंटकT िगरÞतार कए सकैत अिछ: (१) जखन ओ कोनो संËेय अपराध केने हो, (२) कोनो पुिलस अिधकारीकT कत>य िनव>हनमे यवधान ठाढ़ केने होइक, (३) ओकर घरसँ कोनो चोरीक माल पकड़ल गेल होइक, (४) कानूनी िहरासतसँ मिटआ रहल हो, (५) सेना, वायु सेना, जलसेनासँ भािग आएल हो, (६) जॱ ओकरा अपराधी घोिषत कएल गेल हो, (७) जॱ ओ अºयxत अपराधी अिछ, (८) जॱ ओकरापर संËेय अपराध करबाक शक छैक, (९) जॱ aयायलय ®ारा छोड़ल गेल अपराधी aयायलयक शत>क अनुपालन निह करैत अिछ, कैटा आओरएहन कानूनसभअिछ जािह िसकाइत भेलापर पुिलसकT अिभयुतकTिगरÞतार करबाक अजxM अिधकार भए जाइत अिछ। संËेय अपराध की िथक ? संËेय अपराधमे पुिलस िबना कोट> आदेशकT अिभयुतकT िगरÞतार कए सकैत अिछ।हया, वलाकार, चोरी, राÑßdोह, सन अपराधक मामला एिह vेणीमे अबैत अिछ। असंËेय अपराध की िथक ? असंËेय अपराध क मामलामे कोट>क आदेश भेलाक बादे ककरो िगरÞतार कएल जा सकैत अिछ। जॱ अिभयुत पुिलसक िगरÞतसँ भागवाक Eयास करैत अिछ, तँ ओकरा पुिलस उपयुत वल Eयोग कए पकिड़ सकैत अिछ, परंतु वलक अनाव©यक Eयोगसँ पुिलसकT बचबाक चाही।मुदा आव©यक भेलापर पुिलस जानोलए सकैत अिछ, वशतµ ओकर अपराध मृयुदंड देबए जोगर होइक। अिम जमानत :
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अिम जमानतदेबाक अिधकारउ»च aयायलय वा सेशन कोट>कT अिछ।अिम जमानत हेतु आवेदन िनचला कोट>मे निह कएल जा सकैत अिछ।अिम जमानत देबाकाल aयायलय सुिनिÔत करैत अिछ जे आवेदक मामलाक िववेचनामे विछत सहयोग करताह, देश छोिड़ बाहर निह चिल जेताह, कोनो गवाह वा सबूतकT Eभािवत निह करताह।आवेदककT जॱ आशंका होइक जे ओकरा कोनो मामलामे फँसाकए िगरÞतार कएल जा सकैत अिछतँ ओ उिचत aयायालयकT अिम जमानत हेतु आवेदन कए सकैत छिथ। अिम जमानत ताबते धिरक हेतु देल जेबाक चाही जाधिर चालान कोट>मे Eिषत निह कएल गेल अिछ, तकर बाद अिभयुतकT िनयिमत जमानत हेतु स8बिaधत aयायलयमे आवेदन देबाक चाही (सजलुÉीन अ¦दुल समद शेखबनाम राय महाराÑß) aयायक तकाजा िथक जे अिम जमानत देबासँ पूव> िवरोधी पKकT aयायलय नोिटस जारी करए जािहसँ अिभयुत गलत जानकािर दए िकंवा विछत जानकारीकT दबाकए अिम जमानत निह लए सकए (बालचंद जैन बनाम मÍय Eदेश) जमानती वारंट : िगरÞतारीक वारंटकोनो कोट>क पीठासीन अिधकारी ®ारा िलिखत पमे जारी कएल जाइत अिछ।ओिहमे xपÇ पसँ ई िलखल हेबाक चाही जे कानूनकक कोन धाराक अनुसार ओकर िगरÞतारीक वारंट जारी कएल गेल अिछ, ओकरा किहआ आ कखन ओिह कोट>मे हािजर हेबाक छैक।ओिह आदेशमे इहो िलखल रहत जे ओकरा उिचत जमानात देला पर एिह शत>संगिगरÞतारीसँ छूट देल जाइत अिछ जे ओ िनयत िदन/िनयत समय पर कोट>मे हािजर भए जाएत, तािह हेतु एकटा िनिÔत रकमक बॱड सेहोओकरादेबए पड़ैतअिछ, एकािधक यितकक जमानात सेहो दबए पिड़ सकैत अिछ। गैर जमानती वारंट : गैर जमानती वारंटमे पुिलस अिभयुतकT िगरÞतार कए स8बिaधत कोट>मे हािजर करैत अिछ, तकर बादे ओकर जमानत पर छोड़वाक आवेदनपर कोट> िवचारकरत।कोनो मामलामे जमानत पर अिभयुतकT िरहा करबासँ पूव> कोट>कT मामलाक गंभीर छानबीन कएल जाइत अिछ, कोट> ई सुिनिÔत करए चाहैत अिछ जे जमानतपर छोिड़देलाक बाद ओ aयाियक EकृयाकT Eभािवत निह करए, ज³रत भिर मामलाक अनुसंधानमे सहयोगकरए, गवाहसभकT तोड़बाक Eयास निह करए।संगिह ओकर इितहास एवम् चिरMक िवषयमे सेहो जानकारी लेबाक Eयोजन होइत अिछ जािहसँ बाहर गेलाकबाद ओ समाजक हेतु समxया निह भए जाए। सेशन कोट>वा उ»च aयायालयसँ जमानत : जॱ अिभयुत एहन अपराध केलक अिछ जािहमे मृयुदंड वा आजaमकारावासक Eावधान िथक, तखन ओकरा जमानत सेशन कोट>वा उ»च aयायालयसँ भेटत, तािहसँ िनचला कोट>सँ निह। aयायलयकT जमानत देबाक समय बहुत सावधानीपूव>क िवचारकरबाक Eयोजन अिछ कारण अपराध िस होयबासँ पूवµ ककरो जहलमे सड़ादेब मानवीय अिधकारक सरासर उcलंघन िथक मुदा संगिह समाजके यापकिहतकT Íयान राखब सेहो जरी अिछ, जे ओ यित बाहर आिबकए एहन ने कए देिथ जे कोनो आन यितक स8मानओ जीवन पर संकट उप± भए जाइक। उपसंहार
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 30
संिवधानक अनुKेद २१ एवम २२ क तहत Eात मौिलक अिधकारक रKाक हेतु आव©यक अिछ जे बेबजह ककरो xवतंMता पर आघात निह होइक, लोक िनवध अपन जीवनक रKा कए सकए। िगरÞतारी िनÔय एिह संवैधािनक अिधकारकT स^ः सीिमते निह करैत अिछ अिपतु हण लगा दैत अिछ। मुदा ककरो xवतंMता एिह हद धिर निह भए सकैत अिछ जे कोनो िनदÆष आदमीक िजनाइ किठन कए दैक, िकंबा कोनो अपराधी बेटछु¬ भेल घुमैत रहए।अxतु, पुिलस एवम् aयायालयकT एकटा संतुिलत ³िख रािख Eयेक मामलामे नीर- Kीर िववेक रखैत काज करक चाही जािहसँ कोनो िनदÆष यितकT िफरसान निह होबए पड़ैक आ दोषी खुcला निह घुमैत रहए।िनÔय ई संतुलन बनाएव एकटा किठन काज िथक मुदा समxत कानून ओ aयायालय एिह Eयासमे लागल रहैत अिछ।q
सूचनाक अिधकार भारतक संिवधानक अनुKेद १९ मे िनिहत मौिलक अिधकारसँ भारतक नागिरककT सूचनाक अिधकार Eात अिछ। तािह अिधकारकT Eात करबाक यवxथा सूचनाक अिधकार अिधिनयम, 2005 क अaतग>त कएल गेल। सूचनाक अिधकार अिधिनयम, 2005 Eयेक नागिरककT ई अिधकार दैत अिछ जे ओ सरकारसँ ओकर काजक बारेमे जानकारी मिग सकैत अिछ। एिह तरह¥ आब भारत सेहो िवsक ओिह ६० देशमे सािमल भए गेल अिछ जे अपन नागिरककT सूचनाक अिधकार Eदान कए पारदश¸, जवाबदेह एवम् सुशासन xथािपत करबाक चाक-चौबंद यवxथा केने अिछ। केadीय सूचना आयोग सूचनाक अिधकार अिधिनयम, 2005 मे ई यवxथा कएल गेल अिछ जे केad सरकार ®ारा एक केadीय सूचना आयोगक गठन कएल जाएत जािहमे एक मुय सूचना आयुत एवम् अिधक सँ अिधक दसटा केadीय सूचना आयुत होएत। मुय सूचना आयुत एवम् अaय सूचना आयुतक िनयुितक हेतु एकटा सिमित गिठत होएत जकर अÍयK EधानमंMी एवम् लोकसभामे िवपKक नेता एवम् EधानमंMी ®ारा मनोनीत केadीय मंMीमंडलक एकटा मंMी एकर सदxय हेताह। एकर अितिरत Eयेक रायमे राय सूचना आयोग अलगसँ गिठत कएल जाइत अिछ। जॱ कोनो केadीय लोक सूचना अिधकारी िबना कोनो वािजब कारणसँ सूचनाक हेतु आवेदन निह लैत अिछ, िकंवा वpिछत सूचना देबएमे आना-कानी करैत अिछ, िकंवा जािन-बूिझ कए गलत वा अधूरा जानकारी दैत अिछ, वा सूचना नÇ कए देल गेल अिछ तँ केadीय सूचना आयोग सूचनाक अिधकार अिधिनयम, 2005 क अनुKेद ७ (१) अaतग>त ओकरा िखलाफ
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 31
स8बिaधत िवभागकT अनुशासनामक कारवाई करबाक आदेश दए सकैत अिछ। एहन पिरिxथितमे आयोग स8बिaधत दोषी अिधकारीकT सूचना देबाक िदन धिर २५० टाका Eितिदनक िहसाबसँ पचीस हजार टाका धिर जुमना लागा सकैत अिछ। आयोगक समK िसकाइत सोझे दािखल कएल जा सकैत अिछ ? जॱ हँ, तँ कोन आधारपर ? िनÕिलिखत पिरिxथितमे सूचनाक अिधकार अिधिनयम, 2005 क धारा १८ क अaतग>त आयोगक समK सोझे िसकाइत दािखल कएल जा सकैत अिछ:- (क) जॱ ओ ओिह कारणसँ अनुरोध Exतुत करबाक हेतु असमथ> रहल अिछ, िक ओिह अिधिनयमक अधीन एहन अिधकारीक िनयुित निह कएल गेल अिछ वा केadीय सहायक लोक सूचना अिधकारी ओिह अिधिनयमक अधीन सूचना वा अपीलक हेतु धारा 19 क उपधारा (1) म¥ िविनिद>Ç केadीय लोक सूचना अिधकारी वा येR अिधकारीकT पठेबाक हेतु xवीकार करबासँ मना कए देलक अिछ; (ख) जॱ ओकरा ओिह अिधिनयमक अधीन अनुरोध कएल गेल कोनो जानकारी धिर पहुंचएसँ मना कएल गेल अिछ; (ग) जॱ ओकरा ओिह अिधिनयमक अधीन िविनिद>Ç समय-सीमाक भीतर सूचनाक हेतु वा सूचना धिर पहुँचक हेतु अनुरोधक उर निह देल गेल अिछ; (घ) जॱ ओकरासँ ओहन फ़ीसक रकमक संदाय करबाक हेतु अपेKा कएल गेल अिछ, जे ओ अनुिचत बुझैत अिछ; (ङ) जॱ ओ िवsास करैत अिछ िक ओकरा ओिह अिधिनयमक अधीन अपूण>, Óिमत करएबला वा िमáया सूचना देल गेल अिछ; आओर (च) ओिह अिधिनयमक अधीन अिभलेखक हेतु अनुरोध करबाक हेतु वा ओकरा Eात करबासँ स8बिaधत कोनो अaय िवषयक स8बaधमे। सूचनाक अिधकारक तहत सरकारी िवभाग, सरकारी सहायतासँ चलएबला गैर सरकारी संगठन, वा िशKण संxथानसँ जानकारी Eात कएल जा सकैत अिछ। सूचनाक अिधकार अिधिनयम, 2005 धारा 2 (एच) क तहत लोक Eािधकरण अथवा साव>जिनक संxथाक लग उपल¦ध सूचनाक मग कए सकैत अिछ। साव>जिनक संxथासभमे संिवधान ®ारा xथािपत या गिठत, संसद या कोनो राय िवधाियकाक कानून ®ारा xथािपत वा गिठत, केad वा राय सरकारक कोनो अिधसूचना वा आदेशक ®ारा xथािपत वा गिठत, राय व केad सरकारक xवािमव बला, ओकरा ®ारा िनयंिMत वा पयत माMामे सरकारी धन पाबएबला िनकाय सभ, गैर सरकारी संगठन व िनजी KेMक िनकाय जे सरकारक ®ारा EयK वा अEयK पसँ िवपोिषत अिछ, सािमल अिछ। आवेदक ®ारा सूचनाक अिधकारक उपयोग करैत केहन जानकारी मगल जा सकैत अिछ ? १. कोनो सरकारी दxताबेजक Eित मिग सकैत छी। २.कोनो सरकारी दxताबेजक जpच कए सकैत छी। ३. कोनो सरकारी काजकT जpिच सकैत छी। ४. कोनो सरकारी काजमे Eयुत बxतुक Eमािणत नमूना मिग सकैत छी।
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 32
एिह कनूनक तहत अहp कोनो जानकारी हािसल कए सकैत छी जेनािक : कोनो सड़ककT बनाबएमे सरकार कतेक खच> केलक, EधानमMीक रहन- सहन पर कएल गेल खच>,राÑßपित भवनमे कएल गेल खच>, कोनो सरकारी योजना पर कएल गेल खच>, पंचायत ®ारा कोनो योजनामे कएल गेल यय वा कोनो Eकारक अaय जानकारी वा ओिहसँ स8बिaधत दxतावेजक छायाEित मगल जाए सकैत अिछ। सूचनाक अिधकार अिधिनयम, 2005 क अनुKेद ६ (२) अaतग>त आवेदकसँ ई निह पूछल जा सकैत अिछ जे ओ सूचना िकएक मिग रहल छिथ। संगिह यितगत िववरण, आय, पैन नंबर, िविभ± पैरामीटरक तहत िवशेषËक यितगत पैनल ®ारा देल गेल Eातक, संपिक िरटन> आओर संपिक िववरण, आकलन िरपोट>,मेिडकल िरपोट>, ब«क खातॲका िववरण, Eािधकरणसँ xपÇीकरण मंगैत EÁ निह पूछल जा सकैत अिछ। सूचनाक अिधकारक KेMमे निह आवएबला िवभाग : –कोनो खुिफया एज¥सीक ओहन जानकारी, जकरा साव>जिनक भेलासँ देशक सुरKा आओर अखंडताकT खतरा हो – दोसर देशक संग भारतसँ जुड़ल मामला – थड> पाट¸ यानी िनजी संxथान स8बaधी जानकारी जे सरकारक पास उपल¦ध अिछ ओिह संxथाक जानकारीकT स8बिaधत सरकारी िवभागक माफ>त हािसल कएल जा सकैत अिछ। xवेKासँ जानकारी Eकािशत कएल जाएत : सूचनाक अिधकार अिधिनयम, 2005 क अनुKेद ४ (बी) अaतग>त Eयेक सरकारी िवभाग अपन िवभागसँ स8बिaधत अिधकसँ अिधक जानकारी xवेKासँ िवभागक वेवसाइटपर Eकािशत करत। अaयथा भारतक कोनो नागिरक सूचनाक अिधकारक तहत अनुKेद ६क तहत आवेदन दए सूचना Eात कए सकैत छिथ। सूचनाक अिधकारक तहत आवेदन कोना कएल जाएत ? सूचनाक अिधकारक तहत आवेदनक हेतु कोनो िनिÔत EपM निह अिछ। सादा कागज पर अपन आवेदन िलिख कए विछत जानकारी मगल जा सकैत अिछ। आवेदन शुcकक भुगतान कोना कएल जाएत ? सूचनाक अिधकारक तहत आवेदन करबाक हेतु केad सरकारक अधीन आबएबला मंMालय िवभागसँ जानकारी Eात करबाक हेतु दसटाकाक शुcक लगैत अिछ जकर भूगतान पोxटल आड>र, ब«क ãाÞट, ®ारा कएल जा सकैत अिछ। राय सरकार सभ अलग- अलग शुcक रखने अिछ। आरटीआइ ऑन लाइन आवेदक सूचनाक अिधकार अिधिनयम, 2005 क अaतग>त सूचना Eात करबाक हेतु, सूचनाक अिधकार (आरटीआई) ऑनलाइन पोट>लक माÍयम https://rtionline.gov.in.सँ केadीय मंMालय/ िवभागसँ एवम् “ऑनलाइन सूचनामे उिcलिखत अaय केadीय लोक EािधकरणकT अनुरोध कए सकैत छिथ।”
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आरटीआई िनयम, 2012 क अनुसार गरीबी रेखासँ नीचाक लोककT आरटीआई शुcकक भुगतान करबाक आव©यकता निह अिछ। तथािप, बीपीएल आवेदककT अपन आवेदनक संग- संग एिह स8बaधमे, उपयुत सरकार ®ारा जारी Eमाण-पMक एक Eित संल²न करब ज³री अिछ। Eथम अपीलीय EािधकारीकT अपील करबाक हेतु, आवेदककT आरटीआई ऑनलाइन पोट>लमे “सबिमट फxट> अपील”नामक िवकcपक चयन करए पड़त आओर सामने आबए बला फाम>कT भरए पड़त। Eथम अपीलकT दायर करबाक हेतु मूल आवेदनक पंजीकरण संया आओर ई-मेल आईडीक आव©यकता पड़ैत अिछ। आरटीआई अिधिनयमक अनुसार, Eथम अपीलक हेतु कोनो शुcक निह देबाक अिछ। ऑनलाइन दायर आरटीआई आवेदन या Eथम अपीलक िxथित/ जवाब “िxथित” पर िलक कए आवेदक ®ारा देखल जाए सकैत अिछ। सूचना के देत ? Eयेक सरकारी िवभागमे एकािधक लोक सूचना अिधकारी/सहायक लोक सूचना अिधकारी िनयुत कएल जाइत छिथ िजनकर जानकारी स8बिaधत िवभागक वेबसाइट िकंबा सूचना प¬ वा िवभागमे पूछ-ताछ कए Eात कएल जा सकैत अिछ। लोक सूचना अिधकारी/सहायक लोक सूचना अिधकारी िवभागक हेतु सूचनाक अिधकारक अधीन कएल गेल आवेदन Eात करैत छिथ, ओकरा स8बिaधत अिधकारीकT पठाए सूचना संकिलत करैत छिथ एवम् िनयत समय (आवेदन केलाक वाद एक मासक अधीन, कोनो- कोनो मामलामे ४५ िदन) मे जानकारी आवेदककT पहुँचवैत छिथ। सूचनाक अिधकार अिधिनयम, 2005 क अनुKेद ६(३) अaतग>त जॱ मगल गेल सूचना आंिशक वा पूण> पसँ कोनो दोसर लोक Eािधकरणसँ स8बिaधत अिछ तँ आवेदन Eात केिनहार लोक Eािधकरण ओकरा संिविधत लोक EािधकरणकT पpच िदनक भीतर xथानाaतिरत कए सकैत अिछ। तकर सूचना आवेदककT सेहो देल जाएत। Eथम अपील सूचनाक अिधकार अिधिनयम, 2005 क अनुKेद १९ (१) अaतग>त Eयेक सरकारी िवभाग ओिह अिधकारीक नाम अिधसूिचत करत जकरा लग Eथम अपील कएल जा सकैत अिछ। जॱ आवेदककT तीस िदनक भीतर जबाब निह भेटैत छैक, िकंबा भेटल जबाब अपूण> वा Óामक छैक तँ आवेदक तीस िदनक भीतर Eथम अपीलीए अिधकारीक ओतए अपील कए सकैत अिछ। एिह हेतु ओकरा फेरसँ फीस निह देबए पड़तैक। ि®तीय अपील Eथम अपीलीय Eािधकारीक ®ारा देल गेल िनण>यसँ जॱ आवेदक संतुÇ निह छिथ तँ ओ ि®तीय अपीलीय Eािधकारी (राय सूचना आयोग िकंवा केadीय सूचना आयोग)कT ि®तीय अपील कए सकैत छिथ। Íयान रहए जे एजन कोनो अपीलक समय सीमा ९० िदन अिछ। सूचनाक अिधकार अिधिनयम, 2005 क अनुKेद २३ अaतग>त कोनो aयायालय ताधिर कोनो मामला निह सूनत जाधिर Eथम अपील ि®तीय अपील/ क Eकृया पूरा निह भेल अिछ। उ»चतम aयायलयक िकछु महवपूण> िनण>य : उ»चतम aयायलय हालमे िसवील अपील संया ६१५९-६१६२(२०१३)मे संघ लोक सेवा आयोग बनाम अ²नेश कुमार एवम् अaयक (CIVIL APPEAL NO.(s).6159-6162 OF 2013
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मामलामे xपÇ केलक अिछ जे अनग>ल, अनावxयक एवम् अयवहािरक सूचनाक मग कए सरकारी िवभागकT एतेक िफरसान निह कएल जा सैत अिछ जे सरकारक अिधकश समय ओिह सूचनाकT उपल¦ध करेबामे एिह हद तक नÇ भए जाइक जे रचनामक/सकारामक काज केनाइ पराभव भए जाए। उ»चतम aयायालयक aयायमुित> आदश> कुमार गोयल एवम् aयायमुित> उदय उमेश लिलतक पीठ ®ारा २० माच> २०१८क एनजीओ कॉमन कॉजक यािचकाक िनxतारण करैत फैसला देलक अिछ जे कोनो हालतमे पचासटा टकासँ बेसी शुcक निह लेल जा सकैत अिछ। एकर अितिरत जॱ कोनो दxतावेजक Eितिलिपक मग कएल जाइत अिछ तँ Eित पृR पpच टका अितिरत शुcक लेल जा सकैत अिछ। ई आदेश उ»च aयायालय, िवधान सभा आओर अaय सरकारी आओर xवाय िनकाय सिहत सभ संxथापर बाÍयकारी होएत जे सूचना का अिधकार अिधिनयम, 2005 क अaतग>त अबैत अिछ। उ»चतम aयायलय हालमे िसवील अपील संया ९०१७(२०१३) थालपलम सहकारी ब«क एवम् अaय बनाम् केराल राय एवम् अaय (मामलामे xपÇ केलक अिछ जे सहकारी सिमित सभ सूचनाक अिधकार अिधिनयम, 2005 क अaतग>त निह अबैत अिछ। सूचना अिधकार कानून xपÇताक आव©यकता: सूचना अिधकार कानूनक सविधक महवपूण> पहलू लोक Eािधकरणक मुÉा पर xपÇताक आव©यकता अिछ। सूचनाक अिधकारमे अखनो कैटा Mुिट अिछ, जेना सरकारी अिधकारी ®ारा जबाब देबाक हेतु भारी भरकम फीसक मग कए देब, आवेदनकT एिह िवभागसँ ओिह िवभाग xथानाaतिरक करैत रहब, सािमल अिछ। Eथम अपील िवभागेकक अिधकारीक समK कएल जाइत अिछ जािहसँ मामलामे कोनो नव बात निह भए पबैत अिछ। समाaयतः ओ पिहने लेल गेल िनण>यक पुिÇ कए दैत छिथ। तकर बाद दोसर आ अिaतम अपील राय वा केadीय सूचना आयोगक समK करबाक Eावधान अिछ। मुदा समxया अिछ जे ओिहठाम आवेदनक भरमार अिछ आ िनण>य लेबामे बहुत समय लािग जाइत अिछ जािहसँ कैबेर गलत लोक बँिच जाइत अिछ। सरकारकT बहुत रास मामलामे सूचना निह देबाक छूट भेिट जाइत अिछ। कानूनक एिह Eावधानक कतेको मामलामे दुपयोग होइत अिछ। कोनो-ने- कोनो बहाना बनाए सूचना निह देबाक Eयास होइत रहल अिछ। हलािक आयोग एहन मामलामे बहुत सत ³िख रखैत अिछ आ दोषी अिधकारीकT जुमना सेहो लगबैत अिछ।मुदा तैँ की? िवलंब तँ भैए जाइत अिछ। फेरसभ लोक ओतेक धैय> पूव>क लागलो निह रिह पबैत छिथ। जे होउ, सूचनाक अिधकार कानूनकT बिन गेलासँ भारतक नागिरककT सरकारी काम-काजक जानकारी लेब आसान भए गेल अिछ। कतेको तरहक जरी सेवामे िनण>यमे पारदिश>ता आएल अिछ। बहुत तरहक कदाचारक मामला सभ पकड़ल गेल अिछ। सरकारी अिधकारी गलत काज करबामे डराइत छिथ। कतेको मंMी धिरकT इिxतफा दबए पड़लिन अिछ। िनÔय एिह कनूनसँ आम नागिरकक महव वढ़ल अिछ। मुदा िद°ित एिह बातक अिछ जे एखनो बहुत रास नागिरक एिह कानूनक जानकारीसँ वंिचत छिथ। तािह हेतु ज³री अिछ जे एकर पयत Eचार होइक। सूचना लेबाक आ आवेदन करबाक EकृयाकT आओर सरल बनाओल जाइक।q २५ .०३ .२०१८
रबीad नारयण िमvक
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दूटा लघुकथा जीबी तँ की की ने देखी ! लोक की की ने देखलक। मुदा दू-चािर बख>सँ जे सभ गाममे भए रहल छल से एकदम अEयािशत छलैक। नव-नव गुलंजर िनय उठैत रहैक। रिब िदन हाट लगल रहैक। सभ पु³ष हाट करए गेल रहए। अण बाबू सपिरवार गाम आएल छलाह। हुनकर भाए मोहन बाबू बेस अगरिजत छलाह। मैिßक उतीण> केने छलाह। ओना, खेत-पथार बहुत तँ निह रहिन मुदा गुजर होयबामे कोनो िद°त निह होइक। गाम घरक झगड़ा फिड़छाबएमे ओxताद छलाह मुदा अपना घरक झगड़ा निह फिड़छा पबैत छलाह। घरवाली ब¶ड तेज छलिखन। गोर-नार दप-दप। बी.ए. केने छलिखन। िपता गरीब मुदा िववेकी छलिखन। हुनकर एक माM कaया छलिखन शीला, िजनक िबआह मोहन बाबूसँ भेल छलिन। मुदा िबआहक बाद हुनका लोकिनक आaतिरक मतभेद बढ़ले चल जाइत छलिन। एिह बातसँ शीला बड़ दुखी ओ उदास रहैत छलीह। अण बाबू बहुत िदनक बाद आएल छलाह। दूनू भाए आपसमे गप-सप करैत छलाह िक यो xMीगण िरसापर आएल आ ओकरा संगे दोसर xMीगण घरसँ बहराएल आ िरसापर बैस चुपे चिल गेलिथ। िकछु कालक बाद मोहन बाबू आँगन गेलाह तँ घरक िजंजीर बaद छल। आँगन सु±। कतहुँ यो निह। मोहन बाबू गु8म। ने हुनका आगा सुझिन आ ने पाछा। की करी,की निह करी िकछु फुराइते ने छलिन। ¡मशः ई गप सौसे गाम पसिर गेल। ई घटना कोनो नव निह छल। एक मास पिहने एकटा एहने घटना भेल जे पूरा इलाकाकT झकझोिड़ देलक। पूरबिरया गामवाली बड़ सािवक छली। दुरागमनसँ पिहने िबधबा भए गेल छलीह। तिहआसँ आइ धिर सात बख> बीित गेल। मुदा कतहुँ हुनक चच निह भेल। िनय Eात: चािरये बजे उिठ जाइत छली। गामक सभ लोक सूतले रहए िक अaहिरएमे नहा-सोना कए पूजा-पाठ करए लगैत छलीह। स8पूण> शरीर तेजमय। मुदा िकछु िदनसँ दद> दद>क िसकाइत करैत छलीह। लोककT होइक जे पेटमे अcसर भए गेलिन अिछ। लाजे ओ िकछु बजिथन निह। अaततोगवा पढ़ुआ काका निह मानलिखन। हुनका जबरदxती अxपताल लए गेलिखन। डाटर अxपतालमे भत¸ कए देलकिन। ओकरा भत¸ करा कए पढ़ुआ काका िकछु पैसा-कौड़ी जोगार करए गाम आपस अएलाह। Eात:काल अxपताल पहुँचला तँ रोगीक
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 36
कतहुँ पे निह। पता निह रोगी केतए चल गेलीह। सॱसे इलाकामे एिह बातक गद> पिड़ गेल। ओना तँ गाम-घरक लोक बेस नेम-टेमबला। मुदा बेसीलोकक मोन िसआह। यो ककरोसँ कम निह मुदा भीतरे-भीतर सभकT घून पकड़ने। मुदा इलाकामे ए°े िबहािड़। xMीगण सभ घोघ उठाबए लेल बेहाल। बेटा सभक िपताक कुंजी िछनए लेल बेहाल। पुतोहु सभ सासुक ग¬ा पकड़ए लेल बेहाल। घरे-घरे िभ±क हाबा से जोरगर बहल अिछ जे बयन परसैत-परसैत सभ परेशान। घरे-घर कै-कै गोट चूäा भए गेलैक अिछ। खैर ! ई तँ जे भेलैकसे भेलैक। मुदा सभसँ आÔय> ओिह िदन भेल जहन पु³षोम बाबूक घरवाली हनहनायल थाना पहुँिच गेलैक। ओकरा देखए लेल चौगामका हजारो लोक जमा भए गेल। करमान लागल लोक आ तैयो दनदनाइत दरोगाजीक ऑिफसमे Eवेश कए गेल। दरोगाजी पुिलसकT आदेश देलिखनजे भीड़कT भगा दौक आ अपने ओिह कaयाक इजहार लेबए लगलाह। सँए-बहुमे ग8भीर मतभेद भए गेल छलैक। घरवाली किन°ो रौ सहए वाली निह छलैक। बाते-बातमे दूनू यितमे मािर -पीट भए गेलैक। घरवाली थानामे आिब कए एफआइआर कए देलकैक- “हमारा जान का खतरा है। ” तकर बाद ओ िरसा पकिड़ मधुबनी चल गेिल। बहुत िदनक बाद सुनल गेल जे ओ कतहुँ आनठाम िबआह कए लेलक अिछ। गाममे ओझा-गुनी आ भगैतक चच अखनो जोर पकड़ने छल। फुदरक घरवालीकT हाथक चाटी चलैत छलैक आ कनेक-मनेक मंM-तंM सेहो ओ जनैत छल। मुदा एिह बेर अÇमीक िदन बेस ताल भए गेलैक। ओकर घरवाली साफे बकए लगलैक। खुिल कए देवी खेलाए लगलैक। गाम-गामक भगता आएल। मुदा ककरो बुते देवी निह पकड़मे अएलैक। गाममे ओिह िदन पछवािर गामक ओझाजी आएल छलाह। हुनको तंMे-मंM बेस जोरगर छलिन। दौड़ल-दौड़ल लोक हुनका बजौने आएल। ओझाजी अएलाह। अनुRान भिर राित भेलैक। देवी बa हेबे निह करैक। अaततोगवा भो³कबा राितमे आिब कए ओ देवी पकड़मे अएलैक। गटागट बाजए लगलैक- “एक मास धिर अनुRान कर। ई कर , ओ कर , निह तँ सॱसे गामकT पीस कए धए देबौक। ” इयािद-इयािद...।
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 37
औ बाबू! आब तँ सॱसे गॱआ ओझाजीक अनुनय-िवनय करए लागल। ओझाजी अपन भाव बढ़बए लगलाह - “हमरा तँ ओतए जेबाक अिछ। ई करबाक अिछ , ओ करबाक अिछ। हम परसू जेबे करब। ए°ो िदन निह िक सकैत छी। ” ब¶ड मोसिकलसँ ओ कलाह। िनय सpझसँ देवीक अनुRान घरमे शु होइक आ भोर धिर चलैत रहैक। ओिह अनुRानक दौरान ओतए ककरो आएब मनाही छलैक। देवी रिह-रिह कए गरजै- “सभकT देखबौ। एक-एककT देखबौ.. !” फूहर बाबू बाहर दरबाजापर सभ सुनैत रहिथ आ देवीक आराधना करैत-करैत औंघा जािथ। ओमहर ओझाजी अनुRानमे लीन। अनुRानक अिaतम िदन छल। िन :श¦द राित। ओझाजी आ फूहरक घरवाली अनुRानमे लीन। सभ यो औंघाइत छल। एही समयमे दूनू देवी-देवता एकाएक गाएब। गामसँ पूब िदस सड़क छलैक। से पकड़ने-पकड़ने ने जािन कतए चल गेल। भोर भेने गाममे फेर एकटा गुलंजर छुिट गेल। गाममे आब की की ने अिछ। इंजीिनयर , Eोफेसर आ बीए-एमए केर तँ गपे जाए िदअ। गामक लोक बेस टेिटयाह। एकदम िनयमसँ रहब आ िनयमसँ जीब। भोरे उिठ कए सुतबाक काल धिर मंMो»चार करैत रहताह। गरीबक घर कोनो अधलाह काज भेल निह िक ओकरा च¬े बािर देताह। मुदा धिनक लेल सातटा खूनो माफ। Eोफेसर साहेबकT घरवालीसँ निह पटलिन। तलाकक मोकदमा भए गेल। घरक लोकमे सँ यो किनयpक पKधर निह भेलैक। तलाक पास भए गेलैक। Eोफेसर साहेब धराक दए दोसर िबआह केलाह। ओिहसँ ब»चो भेलिन ओ ओिह ब»चाकT िवआहो भए गेलैक। सोिचयौक समय कतए-सँ-कतए पहुँिच गेल। जीबी तँ की की ने देखी ! ¦
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तुषारपात सभागाछीसँ बरक िसाaत िलखाकए आिब गेल छलैक। सॱसे गाम हँगामा भए गेलैक। हीराबाबूक बेटीक िबआह आइ.ए.एस. अिधकारीसँ हेतैक। िपता हो तँ एहन। लाख पैआ ितलक लगलैक। हीराक िपता शीतल बाबू नामी ठीकेदार छलाह। एक माM सaतान एक बेटी छलिखन। कतेको बरखसँ बरक खोजमे िभरल छलाह मुदा कतहुँ िकछु कमी तँ कतहुँ िकछु...। ओिह िदन पुरबािर गाम िदस िबदा भेल छलाह िक रxतामे अकxमात िकछु गोटेसँ पिरचय भए गेलिन। वएह सभ ओिह बरक पिरचय देलकिन। बर जिहना देखैत सु±र तिहना सौ8य xवभाव। शीतल बाबू तय कए लेलाह जे जान रहए िक जाए मुदा ई काज करक अिछ। अaतोगवा एक लाख टकापर गप गेल। पadह जुलाईक िदन सेहो िनिÔत भेल। बड़ उसाहसँ िबआहक िविध सभ पूण> भेल ओ शीतल बाबूक ओिहठामसँ चौगामा लोककT हकार देल गेल। हीरा बाबू नीिलमाक िबआहक चच> इलाका भिरमे पसिर गेल। जकरे देखू सएह ओिह िबआहक चच> करैत छल। िबआहक चािर-पpच िदनक बाद हीरा बाबू आइ.ए.एस.क EिशKण करए चल गेलाह। बेस मौज कटलैक ओिह EिशKणमे। हीरा बाबू गोरनार ओ अतीव सुaदर छलाह। हुनक यितवमे आकष>ण छलिन। बेस मौजी लोक छलाह एवम् िवचारसँ अयाधुिनक। आइ.ए.एस.क EिशKण करैत-करैत ओ दुिनयpसँ पूण> पिरिचत भए गेल छलाह। EिशKण समात भेलापर हुनकर पदxथापन लखनउ भेलिन। हीराबाबूक परा¡म िदन दुगु±ा ओ राित चौगु±ा बिढ़ते जा रहल छल। नीिलमाक पालन- पोषण संयत वातावरणमे भेल छल। ठीकेदार साहेब य^िप सुखी स8प± लोक छलाह , मुदा xवभावसँ अितशय संयत। िधया-पुतापर हुनके संxकारक छाप छल। नीिलमा जिहना देखैत सुaदर छलीह , xवभावो ओिहना मधुर। िबआहसँ साल भिर पूवµ वो xनातकक परीKा Eथम vेणीमे उीण> केने छलीह। िबआहक बादसँ हुनका अपूव> Eश±ता छलिन। य^िप वो सभ काज पूव>वते करैत छलीह। मुदा मोन सिदखन हुनकेपर टगल रहिन। ओमहर हीराबाबू भोग-िवलासमे नीिलमाकT िबसिर गेलाह। Eयोजने कोन छलिन जे वो नीिलमा हेतु य होइतिथ।
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नीिलमाक आँिख िचर EतीKासँ असोथिकत भए गेल छलिन। एक िदन अपन माएकT संग कए हीराबाबूक डेरापर xवयं पहुँच गेलीह। डेरापर पहुँिचते ओतएसँ एकटा बेस सुaदिरकT बाहर जाइत देिख हुनकर माथा ठनकलिन। हीराबाबू ओकरे संग कोठरीसँ बहराएल छलाह। नीिलमाकT देख वो गु8म पिड़ गेलाह। फेर बजलाह- “हलो!नीिलमाजी। आउ , आउ। हम तँ अहॴक EतीKा कए रहल छलहुँ। ” िकछु िदन हीराबाबूकT नीिलमाक संग खूब नीक लगलिन। िकaतु मासक धक लिगते हीराबाबूक पुरना आदित सभ पछोड़ करए लगलिन। िकछु िदन नीिलमा चुप रहलीह , िकaतु जहन मामला हदसँ बाहर भए गेल तँ वो सोचलीह जे हीराबाबूकT बुझाएल जाए। “अहp एतेक राित धिर कतए रहैत छी?” “कतहुँ रहैत छी तािहसँ अहpकT मतलब ?” “जर मतलव अिछ ! आिखर हम अहpक अÊिगनी िथकहुँ। अहpक सुख-दुखमे हाथ बटायब हमर हक ओ कत>य अिछ। ” नीिलमा सेहो तावमे आिब गेल छलीह। बाते-बातमे हीराबाबू शराबक नशामे धुत एक चाटी चला देलिखन। नीिलमा ओतिह पसरल ओछाओनपर जा खसलीह। हीरा बाबू दोसर कोठरीमे जाए िकदिन बजैत आराम करए लगलाह। ओिह िदनसँ जे दूनू गोटेमे शाxMाथ> शुआत भेल से अिवरल चिलते रहल। घरक वातावरण कलहसँ नक> भए गेल छल। नीिलमा हीराबाबूकT सुधारक हेतु कृतसंकcप छलीह ओ हीरा बाबू सेहो अपने रxतापर चलबाक हेतु अड़ल रहलाह। िनरaतर तनाव ओ कलहमे रहलासँ नीिलमाक xवाxáय खसए लगलिन। ओ एक मास धिर लगातार वरसँ पीिड़त रहलीह। नीिलमाक िवमारीक खविर ठीकेदार बाबूक कान धिर पहुँचल। पिहने तँ हुनका िवsासे निह भेलिन मुदा जखन हुनका नीिलमाक पM Eात भेलिन तँ ओ गुम रिह गेलाह। तेजxवी, चंचल ओ सतत Eश± रहए वाली नीिलमा पीयर , िनxतेज ओ शुÑक पिड़ गेल छलीह। फटिकयेसँ अपन िपताकT अबैत देिख जान-मे-जान आिब गेलिन। ओ दौड़लीह आ अपन िपतासँ xनेहवश सिट गेलीह। ठीकेदार साहेबकT अvुपात होमए लगलिन। हीराबाबूक कार सेहो संयोगसँ ओिह समयमे बाहरसँ आएल एवम् ओहीठाम ठहरल।
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बाप-बेटीक एिह मधुर िमलनक कोनो Eभाव हीराबाबूपर निह पड़ल आओर वो ससुरकT िबना गोर लगने अपन िनवास िxथत कायलयमे दनदनाइत चल गेलाह। ठीकेदार साहेब बुजुग> छलाह। हीरा बाबूक रंग-ढंग ओ नीिलमाक िनxतेज देहकT देिख ओ िxथितकT तुरaत बुिझ गेलाह। मोनमे भयंकर ¡ोध होमए लगलिन। मुदा अपन आवेगकT बेस मोसिकलसँ रोकलाह। फेर नीिलमाक संगे हुनकर कोठरीमे चिल गेलाह। पता निह , कतेक काल धिर ठीकेदार साहेब नीिलमाक संगे बैसल रहलाह। xनेह िमिvत अपन गपसँ हुनका सुखी करैत रहलाह। एिह गप सभसँ नीिलमाकT Eयत मानिसक िवvाम भेलिन। वो सुित रहलीह। ठीकेदार साहेब पता निह , की की सोचैत रहलाह ? भोरे आठे बजे ओ ओिहठाम पहुँचल रहिथ। दुपहिरयाक एक बािज रहल मुदा हीरा बाबू अखन धिर ससुरक पुछािर निह केलाह। नीिलमाक संग भोजन कए ठीकेदार साहेब xवयं हीरा बाबूसँ भTट करए गेलाह। हीरा बाबू अपन आवासीय कायलयमे फाइलक बीच डूबल छलाह। ठीकेदार साहेब हुनका देिख िठठिक गेलाह। मुदा हीरा बाबू अिवचल रिह हुनक ितरxकार करैत रहलिखन। नीिलमा आगू बढ़ैत कहलिखन- “बाबूजी, अएलाह अिछ। ” हीरा बाबू ठीकेदार साहेबकT इसारा कए बैसबाक आह कएलिन। ठीकेदार साहेब पुछलिखन- “की हाल अिछ ?” “ठीके। कोना अएलहुँ?” हीरा बाबू बािज उठलाह। “ओिहना शहरमे िकछु काज छल। सोचलहुँ अहुँसँ भTट केनिह चली। ” नीिलमाकT अपन िपताक उपेKा निह सहल गेलिन। ओ तमतमाइत अपन िपताकT िघचने ओिहठामसँ उिठ गेलीह। हीरा बाबू पुन: फाइलमे डुिव गेलाह। गाड़ी मधुबनी टीशनपर आिब गेल छलैक। नीिलमाकT औंघी लािग रहल छलिन। ठीकेदार साहेब उठौलिखन-
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“ उठू नीसू उठू। मधुबनी आिब गेल। ” नीिलमा थाकल , झमार लउतरलीह। िनxतेज , उसाहहीन , नीिलमाक ए°ा जॱ-जॱ गाम िदिस बढ़ए लागल , नीिलमाकT भूतकालक दृ©य सभ मोन पड़ए लगलिन। कतेक दुला छली ओ। गामक लोक सभ जे यो ओमहरसँ गुजरए , नीिलमा िदस तिकते रिह जाए। जेहने सजन तेहने सुaदिर। xवभाव ओ गुणक अपूव> समaवय। िपताक एकलौता सaतान। ठीकेदार साहेब जे िकछु कमेलाह तकर Eेरणा नीिलमेक छल। कतेक गरीब छलाह वो। नीिलमा ल×मी बिन कए आएल छिल हुनका ओतए। नीिलमाक जaम होइतिह ओ बढ़ए लगलाह। मुदा आइ संगे- संग ए°ापर चलैत-चलैत ओहो गुम छलाह। िकछु कालमे गाम आिब गेल। ठीकेदार साहेब ओ नीिलमा एकपेिरया रxतापर अपन घर िदस बढ़ैत गेलाह। लगैत छलैन जेना हुनकर सभ आशापर तुषारपात भए गेल हो। ¦
रबीad नारायण िमvक नमxतxयै आगp... ३२ . गाम अिबतिहं ओकरा पुÑपाक समाचार भेटलैक। पुÑपा माxटर साहेबक नवजागरण मंचक सदxयता लए लेने छिल। बेटा राजकुमारक उवादी सोचक Eगितशील िवचारमंचक मूध>aय नेता छलैक मुदा ओ माxटर साहेबक इमाaदार छिबसँ Eभािवत रहए। फेर दुनू गोटे संगे मनोरोगी अxपताल कpकेमे साल भिर समय िबतौने छल। बादमे डाटर भेद खोललक जे दुनू xवxथे छल। ककरो िदमाग खराप निह रहैक। मानिसक अवसादक कारण यवहार गड़बड़ा गेल रहैक। जे होइक, मुदा घरेमे वैचािरक मतभेद ओहो माएक संग राजकुमारक हेतु एकटा किठन पिरिxथित जर उप± कए देने छल। तकर समाधान हेतु राजकुमार माxटर साहेब ओिहठाम पहुँचल। माxटर साहेब राजकुमारकT देिख बहुत Eश± भेलाह। राजकुमार सभटा बात माxटर साहेबकT कहलकिन। आिखर ओ हुनकर िव^ाथ¸ रिह चुकल छल। माxटर साहेबक कोनो बात काटए जोगर निह होइत छलैक। ओजनाधार पाट¸क ³िखसँ असहमत छलाह। कारण ओकरामे वैचािरक इमाaदारीक अभाव रहैक। मुदा Eगितशील िवचारमंचक सेहो समथ>न निह कए
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सकैत छलाह। कारण उवादसँ िफरंगीक लोहा लेब स8भव निह छल। सामािजक पिरव>न तँ माxटर साहेबक मूलमंM छलिन। सैािaतक पसँ राजकुमार माxटर साहेबसँ सहमत छल। मुदा एकर कायaवयन कोनो होएत। कारण ओकरा गुटमे आधा आदमी तँ भूतपूव> डकैत छल जे गाहे-बगाहे ओकर संग भए गेल छल। डकैती आब छोिड़ देने छल मुदा अतीत ओकरा सभक पछोड़ कए रहल छल। एिह सभक समाधान हेतु माxटरे साहेब िवचार देलिखन जे अ³णसँ भTट कए एहन लोक सभकT आम माफी िदआबक Eयास कएल जाए जािहसँ ओ सभ खुिलकए राÑßक मुयधारासँ जुिड़ सकए। राजकुमारकT ई िवचार बहुत नीक बुझेलैक। माxटर साहेबक संग कए अ³णक डाक बंगला िदस िवदा भए गेल। मोन भेल जे एक बेर अ³णसँ भTट कएल जाए। ब»चाक दोxतछल, हमर नैहरक छल, तT िजËासा xवभािवक। हुनका कहिलअिन तँ सहष> तैयार भए गेलाह। हम सभ िबना कोनो पूव> सूचनाकT दिड़भंगा कलटरक डेरापर पहुँच गेलहुँ। ओिह डेराक प-रंग देिखकए लगैक जे कोनो पैघ आदमी ओतए आिब गेल छी। कतेको नोकर-चाकर सभ लागल छल। फुल, फलहरीसँ भरल छल। कतेको गोटे कलटर साहेबसँ भTट करए आएल रहिथ। मुदा पीए जहॉं हमर नाम कहलकै ओ तुरaत अपने बाहर आिब गेलाह आओर हमरा देिखते बहुत Eश± भेलाह। हम सभ अaदर अितिथ कKमे बैिसले रही िक माxटर साहेब, राजकुमारक ओिहठाम आगमनक सूचना भेटल। अ³ण हुनकर िव^ाथ¸ रिह चुकल अिछ। राजकुमार तँ xकूिलया संगी रहैक। अ³णकT जहॉं खबिर भेटलैक, तुरaत ओकरो सभकT ओहीठाम बजा अनलक। तीनटा xकूिलआ संगी, हम, अ³ण आओर राजकुमार माxटर साहेबक संगे एकåा भए गेल रही। सभक बहुत खाितर भेल। ओकर अंेजी पÏी एंगल जरी काजसँ पटना गेल रहैक। सॱसे डेरा खािलए छल। गप-सपक ¡ममे माxटर साहेब Eगितशील िवचारमंचक चच केलिथ। ओ जहॉं से बात शु केलिथ तँ अ³ण टोकलकिन जे अहॉं तँ नव जागरण मंच बनौने छी। फेर Eगितशील िवचारमंचसँ की लेना-देना? तािहपर माxटर साहेब कहलिखन जे दुनू संxथा अलग-अलग काज कए रहल अिछ। दुनूक उÉे©यमे कोनो बेसी अaतर निह छैक। हम सभ आपसमे िमिल कए िफरंगीसँ संघष> करए चाहैत छी। मुदा एिहमे िद°त आिब रहल अिछ। तािहपर अ³ण हुनका दुनू गोटेकT दोसर कोठरीमे लए गेल आओर सभ बात िवxतारसँ सुिन कहलक जे हम िफरंगीसँ Eगितशील िवचारमंचक काय>क सभपरसँ पुरना केस सभ हटा लेबाक अनुशंसा कए देबैक मुदा भिवÑयमे िहंसाक रxता छोड़ए पड़तैक। सभकT िलिखत शपथपM देबए पड़तैक जे ओ सभ आगा एिह तरहक काज निह करत। माxटर साहेब आओर राजकुमार तुरaत एिह बातमे सहमित दए देलिथ। एिहसँ नीक Exताव भइए की सकैत छल? गप-सपक बाद ओ सभ हमर कोठरीमे आिब गेलाह। ताबे हम सभ चाह-जलखै कए लेने रही। कनीकाल आरामो केने रही। माxटर साहेब अितशय Eश± रहिथ। राजकुमार सेहो आsxत छल। सभ अपन-अपन जगहपर
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बैिस आगूक कार>बाइक योजना बना रहल छलाह िक यो धरफराएल अaदर आएल। ओ राजकुमारक हाथमे एकटा पुज¸ देलक। राजकुमार ओकरा पिढ़ िचिaतत भए गेल। सभ पूछए लगलैक- “की भेल?” माxटर साहेबकT सेहो िचaता होमए लगलिन। राजकुमारक माए पुÑपा बहुत दुिखत छलैक। जखन राजकुमार गामसँ िवदा भेल रहए तखनो ओकर हालत ठीक निह रहैक। ओ माxटर साहेबक संगे चो¬े गाम िवदा भए गेल। हम सभ ओतिह अटिक गेलहुँ। कारण नीकसँ गप करक इ»छा छल। एक युगक बाद ओकरासँ भTट भेल छल। xकूिलआ संगी तँ छलहे, हमर िपितऔतो छल आओर से ओकर यवहारमे लिKत भए रहल छल। हमरा सभ अ³णक सकारसँ बहुत Eश± रही। सभ तरहक सुिवधासँ स8प± ओिह डेरामे अभाव छल तँ ओकर पिहल पÏीक जे तमसाकए िकंवा आ¡ोशमे डेरा छोिड़ नैहर चिल गेल रहिथन। भोर होइते हमरा लोकिनक हेतु गरम-गरम चाह आिब गेल। सिक>ट हाउसक िडलस कोठरीमे हम दुनू गोटे रही। लगए जेना दोसर देश पहुँिच गेल छी। कतए गामक पिरवेश, कहॉं कलटरक आवासक स8प± पिरसर ओ सुसजत सिक>ट हाउस। कनीकालमे अ³ण अपने आएल। सभ गोटे संगे चाह पीलहुँ। चाह पीबैतकाल गप-सपक ¡ममे िधया- पुताक चच> xवाभािवकसँ भेलैक। ब»चा सभक, खास कए बेटी सभक पढ़ाइ लए कए हम बहुत िचaतामे रही। अ³णक उदारताक वण>न लोकक मुहT सुनैत रिहऐक। से स^: तखन देखिलऐक जखन ओ तुरaत ब»चासभक पढ़ाइक िज8मा उठा लेलक। सरकार िदससँ बहुत रास छाMवृि अबैत छलैक आओर एमहर-ओमहर भए जाइत छलैक। अ³णक एिह आsासनसँ मोन Eश± भए गेल। फेर आओर-आओर Eकरण सभपर गप होमए लागल। हम सभ भोरे जे बैसलहुँ से ९ बािज गेल। अ³णकT कायलय जेबाक रहैक। पिहनेसँ तय कैटा बैसारमे से जेबाक रहैक। जाइत-जाइत अपन पिहल पÏी उमाक चच> कए गेल आओर आह केलक जे ओकरा मनाओल जाए। अ³ण ओकरो अपना ओिहठाम राखबाक हेतु तैयार छल। उमाक नैहर हाजीपुर लग नवगाम हमर सभक गामसँ फटकी रहैक तथािप ओकरा आsासन दए हम सभ गाम िवदा भेलहुँ। समxया जिटल तँ भइए गेल रहैक। उमाक नैहर बेस धनाæय छलैक। ओ सभ कोनो मामलामे अ³णसँ उ±ैस निह रहैक, बीसे रहैक। उमाक भाए सभ बड़का-बड़का पदपर रहैक। बाप धनीक ओ EितिRत जमॴदार रहिथन। तखने मोतीपुर ¶योढ़ीमे अ³णसन बरसँ बेटीक िबआह केलिथ। मुदा समय बलवान होइत अिछ। लोक सोचैत अिछ िकछु, भए जाइत छैक िकछु। ओमहर गाम पहुँचतिहं राजकुमारक मोन कोनादन भए गेल। जेना िकछु असगुन घिटत भए गेल हो। पोखिरक लग पहुँचले छल िक रमुआ भेटलैक। ओकरा देिखते भोकासी पािड़ कए कानए लगलैक रमुआ। कनैत- कनैत बाजल- “मालिकन निह रहलीह…।”
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एतबा कहैत-कहैत ओ फेरसँ कानए लागल, राजकुमारसँ लपिट गेल। की-की कहैत रहल। राजकुमार तँ अपने अबाक रहए, एना असमयमे माए चिल जेिथन से निह सोिच सकल रहए। मुदा भावी...। राजकुमारक कनैत-कनैत ऑंिख लाल भए गेल। जमीनपर Eाणहीन, िन:श¦द, अचल पड़ल ओकर माए तुलसी चौरा लग उर मुहT राखल छलीह। चा³कातसँ लोक सभ घेरने छलाह। राजकुमार द{डवत भए हुनका Eणाम करबक हेतु उत भेल आओर ठामिह खिस पड़ल। q
३३ . अ³ण कायलय गेल मुदा ओकर मोनमे कािäसँ आइ धिर भेल घटना¡म बेर-बेर मोनमे घुमैत रहलैक। यो ई निह सोिच सकैत छल जे माxटर साहेब सन नीक लोकक िखलाफ जासूसी चलैत हो। मुदा सत सएह रहैक। अंेजक राज रहैक। जे यो देश भत छल ओकरा सभपर िफरंगीक व¡ दृिÇ रहैक। लोककT पता होइक निह होइक मुदा ओकर िहसाब-िकताब िफरंगीक ओिहठाम राखल जाइत छल। के कतए गेल,ककरा ककरासँ भTट केलक- सभ बातक जानकारी ओकरा रहैत छल। कायलयमे Eगितशील िवचार मंच एवम् नव जागरण मंच सिहत अaय एहन संिचका सभ मंगओलक। संिचका देिख ओ दंग रिह गेल। आÔय> लगलैक जे एतेक असय खबिर सभ कोना आओर ककरा माÍयमसँ अबैत रहल। एताबत ई बुझा गेलैक जे माxटर साहेबक बातपर अमल करैत तथाकिथत िवdोही सभकT माफी देब आसान निह छलैक। मुदा ओ Eयास करैत रहल। िकछु िदनक बाद फेर घुमैत िफरैत हम सभ अ³णक डेरापर पहुँचलहुँ। एिह बेर हमर चा ब»चा संगे छल। तीनू बेटीक कालेजमे नाम िलखाबक छलैक। एिह बातक चच> होइतिह अ³ण तुरaत अपन पीएकT घ{टी दए बजओलक आओर आदेश देलक जे तीनू ब»चाक नाम पटना कालेजमे िलखा देल जाए एवम् तीनूक रहबाक ओ अaय खचक Eबaध हेतु पयत छाMवृित xवीकृत सेहो कए देल जाए। आिखर तँ ओ िजलाक कलटर छल। तीनू बेटीक नाम पटना कालेजमे िलखा गेल। छाMावासमे रहबाक यवxथा भए गेल एवम् मािसक छाMवृिक पिहल अिम भूगतान सेहो भए गेल। हमरा उमीदसँ बेसी मदित अ³णसँ भेटल। ओकरा हृदयसँ धaयवाद दैत हमसभ दोसर िदन गाम आपस िवदा होइत रही। अ³ण उमाक हाल चाल पूछए लागल। हम सभ हाजीपुर लग िxथत नवगाम जाए उमासँ भTट कए आएल रही, मुदा ओिहठाम भेल बातकT कहबाक िह8मत निह भए रहल छल। मुदा अ³ण तँ तेज आदमी छल। ओ हमरा लोकिनक भाव भंिगमासँ सभ बात अिखआिस लेलक आओर एतबे आह केलक जे एकबेर ओकरा उमासँ भTट करबा दैक, कारण यितगत xतरसँ ओ एिहमे सफल निह भए सकल छल। एमहर हम सभ गाम पहुँचले छलहुँ िक माxटर साहेब, राजकुमारक शीÛे एक हेबाक समाचार भेटल। माxटर साहेब ओ राजकुमारक वैचािरक मतभेद पिरिxथितजaय कारणसँ कम भेल जा रहल छलिन। ओ सभ तँ
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जनाधार पाट¸क मुिखआ चेतनसँ सेहो गप करए चाहैत छलाह। उÉे©य ई छल जे समxत राÑßवादी शित एक भए िफरंगीकT देशक बाहर करए। देश xवतंM होएत तँ सभ रxता अपने खुजत। पराधीन सपनहुँ सुख नाही। से बात आब सभक मोनमे धिस गेल छलैक। पिहनहुँ ई बात सभ जनैत छल, मानैत छल, मुदा आपसी मताaतरक नफा िफरंगी सभ उठबैत रहल। िफरंगी सभकT जासूसी खबिर भेिट गेलैक जे राÑßवादीसभ एक भए रहल अिछ। ओकरा सभहक हेतु ई कोनो शुभ समाचार निह छल। सभ विरR अिधकारी सभक बैसार भेल। िवचार रहैक जे जनाधार पाट¸क Eगितशीलमंचसँ फराके रखबाक Eयास होइक। तािह लेल माxटर साहेब ओ राजकुमारक एकटाकT Eोसािहत कएल जाए। तािहपर अ³ण अपन बात रखैत जोर देलक जे ई तखने स8भव होएत जखन िक ओकरा सभक िखलाफ मोकदमा सभ आपस लेल जाए। कहक मतलब जे आम माफीक एलान कए देल जाए। सभ अ³णक Exताव मािन गेल। िकछुए िदनमे माxटर साहेब ओ राजकुमारकT अ³णक कायलयसँ बजाओल गेल आओर सरकारी एलानक िचåी देल गेल जािहमे Eगितशील िवचार मंच एवम् नव जागरण मंचक काय>काक नाम तमाम मोकदमा सभसँ हटा देल गेल। ओकरा सभकT आम माफी दए देल गेल। िडगिडिगआ िपिट कए एिह बातक एलान गाम-गाम कए देल गेल। िनÔय ई माxटर साहेब ओ राजकुमारक हेतु बहुत नीक िदन छल। पिरप¬ामे ओकर सभहक नारा लािग रहल छल। हमरा लोकिन अपन गामसँ िसमिरआ मास करए गेल रही। गाम-गामक लोक सभ ओिहठाम एक मास गंगाक कछारमे ट¥ट खसाए भोरे-भोर गंगा xनान कए पूजा पाठ करैत अिछ। नव नव लोकसँ पिरचयक अवसर भेटैत छैक। गाम घरक िचaतासँ िकछु िदनक हेतु मुित भए जाइत अिछ। ओिह माघ मेलामे नवगामक लोक सभ सेहो रहैक। हमर नैहरक लोक सेहो रहैक। सभक आपसमे ¡मश: भTट-घॉंट होइत होइत बात खुजलैक जे उमा सेहो मास करए आएल छिथ। हम एक िदन असगरे हुनकर बासा िदस गेलहुँ। संयोगसँ ओ बाहर िनकिलते रहिथ। नवगाम लोकक डेरा दूरेसँ यो देखा देने रहए। हमरा हुनका एकबेर भTट भेल रहए, मुदा ए°िह बेरमे कतेक गप कएल जाइत। अपना भिर बुझाबक Eयास केने रिहऐक। एिहबेर एसगिर पािब िवxतारसँ गप भेल। उमाक संग अaयाय तँ भेले रहैक। ओ चुपचाप से सिह जाएवाली निह रहिथ। हुनकामे दृढ़ता ओ िनRा भरल छल। सय ओ aयायक हेतु ओ कोनो हद धिर लिड़ सकैत छलीह। हुनकर इएह यितव तँ अ³णक डरक कारण छल। ओ जनैत छल जे उमा Eितकार करतीह। एही भयसँ िसत भए ओ िकछु बीचक रxता िनकालबाक Eयासमे छल। मुदा उमा तँ एकदम एिह पार वा ओिहपारक तैयारीमे छिल। ओकर तक>क आगू हम िकछु निह किह सकिलऐक। अ³ण गलती तँ केनिह रहए। q
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आममाफीक एलानमे भजनानaददास उफ> गरम िसंहक नाम सेहो रहैक। ई शुभ समाचार देबए माxटर साहेब राजकुमारक संग कए xवयं देबए गेलाह। ई तँ एकटा बहाना रहैक, असलमे हुनका सभक इ»छा रहिन जे भजनानaददासजी महराजसँ भTट कए xवतंMता आaदोलनकT आग बढ़ाबक जोगार कएल जाए। िकछु आिथ>क मदितक सेहो Eयोजन रहिन। भजनानaददासक यश चाकात पसिर गेल छल। देशक कोन-कोनसँ भतगण ओिह आvममे आिब शािaत लाभ करैत छलाह। भजनानaदजीक यितव ओ चिरM िदन Eित िदन चमिक रहल छल। लोकसँ xवे»छासँ Eात अकूत धनक उपयोग ओ जन कcयाणमे करैत छल। ओकर आvममे अÍयामक यवहािरक xव³प देखबामे अबैत छल। आvममे रहिनहार िबधवा सभ पूण> सुरिKत ओ आनaदमे रहैत छलीह। दू सएसँ बेसीए िबधवाक पालन पोषण हुनकर आvममे होइत छल। वृaदावनेमे निह अिपतु चाकात भजनानaददासक आvमक यश छल। भजनानaददास भजन करैत-करैत वxतुत: संत भए गेल छलाह। संगिह िवशु राÑßवादी िवचारक छलाह। िफरंगी सभकT हुनकर बढ़ैत Eतापसँ डर होइत छलैक। तT हुनका केसमे फसाबए चाहलक मुदा सयक िवजय भेल। ओ ई बात बुझैत रहिथ। दोसर िदन सpझमे माxटर साहेब ओ राजकुमार आvम पहुँचलह। ओिह समय आvममे आरती चलैत रहैक। भजनानaदजी इशारासँ िहनका सभकT ओतिह ³कबाक हेतु कहलिखन। आvमक आरती तँ नामी छल। स«कड़ो संत, महामा, गृहxथ, िबधवा सभ मगन भए आरती करिथ ओ राधे! राधे!क भजन सेहो। हारमोिनयम, ढोल, झाइलक संग सूरदासक भजन सुिन तँ कतेको भतगण भाव िवèल भए नृय करए लगैत छलाह। करीब डेढ़, घaटा भिर ई काय>¡म चलल। तकर बाद Eसाद िवतरण भेल। हमरो सभकT Eसाद भेटल। Eसाद अित xवािदÇ होइत छल। होइत छल जे खाइते रही। आरतीक बाद भजनानaदजी हमरा सभकT अपन कKमे बजा लेलिथ आओर सभ बात Íयानसँ सुनलिथ। ओ एिह बातसँ बहुत Eश± भेलिथ जे हुनका एवम् आvममे हुनका संगे रहिनहार हुनकरचेला सभपर सँ पुरनका मोकदमा सभ सरकार आपस लए लेलक। माxटर साहेब बात आगू बढ़बैत कहलिखन जे xवतंMता आaदोलनमे गित देबाक काज छैक। आपसी संगठन मजगूत कए िफरंगी सरकारपर आ¡मणक Eयोजन छैक। तािह हेतु ओ सभ Eगितशील िवचार मंच ओ जनजागरण मंचक िवलय करए चाहैत छिथ। Eयास तँ ईहो भए रहल अिछ जे जनाधार पाट¸क सेहो सािमल कए समxत जनशितकT संगिठत कएल जाए मुदा जनाधार पाट¸बला सभ आगा- पाछा कए रहल छल। ओकरा सभमे असलमे सही नेतृवक अभाव छल। भजनानaददास एिह बात सभसँ बहुत Eश± भेलाह जे xवतंMता आaदोलन आब गित पकिड़ रहल अिछ। अपना तरफसँ ओ सभ Eकारसँ सहयोगक आsासन देलाह। तय ईहो भेल जे एकमास बाद दिड़भंगामे एकटा स8मेलन कएल जाएत जािहमे Eगितशील िवचार मंच ओ जनजागरण मंचक आपसी िवलय भए जाएत।
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ऐ रचनापर अपन म ◌ंतय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। जगदीश Eसाद म{डल - पंगु आ आमक गाछी (उपaयास ) धारावािहक आ दूटा लघुकथा १ जगदीश Eसाद म{डलक पंगु उपaयाससँ... 7. देश xवतंM भेला पछाइत, जमीनक लड़ाइ सॱसे देशमे पसैर गेल। 1947 इxवीसँ पूव> जिहना एकमुरही लड़ाइ अंगरेजी शासनक िखलाफ उठल छल तिहना xवतंM भेला पछाइतदेशमे जमीनक लड़ाइ पसैर गेल। लड़ाइ केना ने पसरैत, आिखर कृिष Eधान देशो तँ छीहे िकने। िबनोवा भावेक नेतृवमे भूदानी आaदोलन शु भेल। आaदोलनक नारा छल- जमीनबला अपन कुल जमीनक छठम िहxसा xवे»छासँ दान करैथ। ओ जमीन खेतीपर जीवन बसर करैबला भूिमहीनक बीच देल जाए। ओना, जमीनक लड़ाइ दू पमे चलल।पिहल, जमीनबलासँ बकाxत जमीन खेती करैबला बँटेदारकT देल जाए, आ दोसर भूदानमे Eात जमीनक बँटबारा सेहो हुअए। भूदानकT यË पमे xथािपत कएल गेल। खेत ओहन स8पैत छी, जइमे एक धुर-आध-धुर लेल खून-खराबी, मािर-पीट गामे-गाम होइते आिब रहल छल। हजारो मुकदमा जिहना कोट>मे फँसल छल तिहना हजारो भूिमहीन सेहो कानूनी िशकंजामे फँिस जहल जाइत-अबैत रहला। ओना, गाम-गामक संग िजला आ राय xतरपर सेहो भूदान किमटी बनलछल, तैसंग सरकारी कायलय सेहो बनल, मुदा जइ ढंगसँ भूदानी नारा छल तेकर ठीक िवपरीत ओकर कायaवयन हुअ लगल। लेन-देनक अ¶डा सरकािरयो कायलय आ भूदािनयो किमटी बिन गेल। जेकर पिरणाम हुअ लगल जे एक-एक जमीनक सबूत [i] तीन-तीन, चािर-चािर आदमीकT भेटए लगल। एक िदस जमीन देिनहार दाता अपन जमीन छोड़ए निह चाहै छल, तँ दोसर िदस Eातकतक बीच सबूत लऽ कऽ तेहेन ओझरी लािग गेलजे गामे-गाम लड़ाइ फँिस गेल। भूदान किमटीक जे सदxय लोकैन छला ओहो आिगमे घी दइक काज करबे केलैन। ओना, गामे-गाम िकछु एहेन दाता सेहो छेलाहे जे अपन देल जमीन, अपना िवचारसँ भूिमहीनकT सुपुदÆ केलैन आ अपने हाथे दखल-क¦जा सेहो करबा देलिखन। मुदा एहेन लोक ए°ी-दु°ी भेला। गाम-समाजक जेहेन समxया जमीनक छल ओइ अनुपातमे पॉंच-दस Eितशत एहेन भेल। छठम िहxसा, जमीनदान करैमे सेहो एकपता निह रहल। हथ-उठाइ भीख जकp छठम िहxसाक जगह माM िकछु जमीनक नाम-पMटा दऽ देलिखन। सेहो ओहन जमीन देलिखन जे उपजाउ भूिम निह छल। चौर-चpचर, परती-परpत जमीन छल। ओना, गाम-गाममे गरीबकT माM जमीन उपजबैयेक समxया निह, बसो-बासक समxया सेहो छल। गामक चौथाइ आवादी ओहन छल, जेकरा घर बaहैक अपन घरािरयो ने छेलइ। गामे-गाम तँ निह, मुदा िकछु गाम िमला-िमला खादी भ{डार सेहो बनल। गाम-गामक समाजक िकछु जाित िवशेष ओहन छल जे खादी कपड़ा बुनै छल। खादी भ{डार ओकरा क»चा माल [ii] दइ छेलै आ ओकरासँ बुनल कपड़ा कीनै छल। ओना, कपड़ा बुनैक लूिर माM िकछु जाित-िवशेषकT छल, एकर [iii] समाजीकरण नइ भेल छल, जइसँ िकछु जाित-िवशेषक बीच
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उ^ोग सीिमत भऽ गेल। कपड़ा बनबैक जे क»चा माल छेलै ओ जाितक बaधन तोिड़ अिधकश जाितक बेवसाय जर बनल छल, मुदा वएह बेवसाय आगू बिढ़ते कपड़ा बुनब समािजक बaधनमे फँिस गेल छल। तहूमे खास कऽ मुिxलम जाितक बीच ‘जोलहा आ धुिनया’क बेवसाय बुझए जाए लगल। िहaदू-मुसलमानक बीच समाज बनले अिछ। िहaदू ऐ बेवसायकT निह अपनौलक। मुसलमानोक बीच सैयो जाित अिछ। ओइ सैयो जाितमे माM दू जाित- जोलहा-धुिनयाक रोजगार माM बिन कऽ रिह गेल। जोलहा-धुिनया सभ गाममे अिछसेहो बात निहयT अिछ। िकछु-िकछु खास गाममे अिछ। तहूमे पिरवारक संयाक िहसाबसँ सेहो ठेकान निहयT अिछ। जइसँ सभ गामक जोलहा-धुिनयाक बेवसायो निहयT बनल। जइ-जइ गामक जोलहा- धुिनयाक रोजगार कपड़ा बुनब निह छल, ओ सभ अपन-अपन आन-आन रोजगार जीवकोपाज>न लेल करबे करै छल। गाम-गामक खादी भ{डार भूदानी सबहक अ¶डा बिन गेल। माने ई जे भूदान किमटीक जे सदxय सभ छला, ओ सभ खािदये भ{डारमे खाइ-पीबैसँ लऽ कऽ अपन डेरा रखै छला आ खािदये भ{डारक वxM सेहो Eात करै छला। जइसँ एकाएकी खादी भ{डार टुटए लगल, अaतो-अaत सभ टुिट गेल। गाम-गामक एकटा बेवसाय मिर गेल। खादी भ{डारकT टुटने जिहना कपड़ा बुनकरक रोजगार गेल तिहना सूत कटिनहारक रोजगार सेहो मरबे कएल। एक तँ ओिहना गाम-गाममे बेरोजगारी पसरल छल, तैपर एकटा आरो बिढ़ गेल। ओना, िमिथलचलमे अनेको साधन कल-कारखानाक लेल मौजूद अिछ मुदा साधन रिहतो कल-कारखानाक अभाव रहबे कएल। ठाम-ठीम चीनीक िमलआ धानसँ चाउर बनबैक िमलटा माM छल। ओना, लघु उ^ोगक पमे सेरसो-तोरीसँ तेल बनबैक संग कुिशयारसँ गुड़ बनबैक हथकघ[iv ] पमे सेहो छल, मुदा ओहो वृहत् पमे निह छल। चीनी िमल सेहो सालो भिर निहयT चलै छल, सालक माM छह मास चलै छल। छह मास ब± रहै छल, जइसँ िमलमे काज करैबला vिमक सबहक बीच ईहो समxया[v] छेलैहे। ओना, कहैले बैसारीक समय vिमककT आधा वेतन देल जाइ छेलै, मुदा ओहूमे अनेको काबट छेलइ। ओहो िनयिमत पसँ निहयT चलै छल। गाम-गाममेनगदी खेतीक पमे कुिशयारक फिसल छल, मुदा कुिशयारो तँ सभ खेतमे निहयT उपजैए। नीचरस खेत, जइमे पािन बसैए तइमे कुिशयारक खेती निहयT होइए। कुिशयारक खेती-ले ऊँचरस जमीन चाही। जे सभ गाममे निहयT अिछ। ओना, जैठाम-जैठाम चीनी िमल बैसौल गेल ओ कुिशयार उपजैबला जमीन देख-देख बैसौल गेल, मुदा िमलसँ दूर-दूर हटलो गाम सबहक िकसान, नगदी खेती बुिझ कुिशयारक खेती थोड़-थाड़ करबे करै छला। गामक खेतसँ िमल तक कुिशयार पहुँचबैक साधन रेलोक माल गाड़ी छल आ बैल गाड़ी सेहो छल। रेलक xटेशने-xटेशन िमलक राटन बनल छेलइ। जैठाम इलाकाक िकसान बैलगाड़ीसँ कुिशयार पहुँचबै छला। ओना,कुिशयारक रेट िमलक जेते रहै छल तइमे ढुलाइ खच> सेहो ओही मूcयमे कटौती होइ छेलै, जइसँ xथानीय िकसान आ दूरक िकसानक दरमे अaतर होइते छल। तहूमे नगद कारोबार सेहो निहयT होइत छल। कुिशयारोक खेती करैमे िकसानकT अनेको समxया छेलैaहे। एक तँ सीजनल फिसल रहने एकेबेर सभ िकसानक कुिशयार तैयार होइ छेलैन, जे समयपर निह कटने वजनमे कमी अबै छल, तैसंग िमलक जेतेक Kमता, कुिशयार पेरैक छल तेही अनुकूल कुिशयारक पुज[vi] भेटै छेलै जइसँ िकसानकT अबै-जाइक समxया छेलैaहे। तेकर पछाितयो नगदा-नगदी कारोबार निहयT छल। मासक-मास,सालक-साल िकसानक कुिशयारक दाम पछुआइत छल, जइसँ कुिशयार उपजौला पछाितयो समयपर िकसान अपन पाइसँ काज निह कऽ पबै छला। ओना, जइ िमलकT जेतेक कुिशयारसँ चीनी बनबैक Kमता छल, ओ ओतबे ने पेरत। जँ िकसान बेसी खेती केलैन तँ ओिहना खेतमे रिह जाइ छेलैन, जइसँ खेती अनिबसबासू बनैत गेल आ िमलो ब± हुअ लगल। q श¦द संया : 911, ितिथ : 30 मई 2018 जारी....
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 49
[i] कानूनी अिधकार [ii] सूत [iii] कपड़ा बनबैकT [iv] िबनु इंिजनक [v] माने छह मास बैसारीक समxया [vi] राटनपर कुिशयार आबैक आदेश पM आमक गाछी आर8भ... 1. बीस जून। ओना, बीस जून गोटे साल शु जेठमे पड़ैए तँ गोटे साल उतार जेठमे, तैसंग कोनो-कोनो साल अखाढ़क शुमे सेहो पिड़ते अिछमुदा से निह, ऐ साल ‘बीस जून’ उतार जेठमे पड़ल। सताहसँ बेसी बैरसाइत [i]कT सेहो भइये गेल छल...। बीघा भिरक देवचadक गाछी-कलममे तीनटा आमक गाछ भरखैर पकैत, बॉंकी सात-गाछमे गोिट-पëरा आ शेषमे कोनो- कोनोमे बोनाइत तँ कोनो-कोनोमे अखन िख»चे सुआदक रंग पकड़ने। ओना, Eेमनगरक िकसान आन गामक िकसानसँ कनी बुिधगरो आ vमगरो[ii] नइ छैथ सेहो केना नइ कहल जाए। Eेमनगरक चाकातक जे गाम सभ अिछ, जेना- रामपुर, कृÑणपुर, महमदपुर आ dपुरइयािदगामक िकसान सभ जे कलम-गाछी लगबै छैथ, तइमे कलमी आम हुअ िक सरही, जामुन हुअ िक बैर, बेल हुअ िक बरहर,शीशो हुअ िक गमहाइर, सभ िकयो सहरगंजा रोपै छैथ, मुदा Eेमनगरक िकसान सभ जे गाछी-कलम लगौने छैथ आिक लगबै छैथ ओ एकदम कतारबaदी पमे। कतारबaदीक माने ई जे कलमी आमक कलममे जिहना कलमी आम छोिड़दोसर ने कोनो आमे गाछ आ ने बेखे-बुिनयािदक। बेख-बुनायािद भेल लकड़ी उपयोगी वृK। ओना, कलिमयो आम सइयो रंगक अपन गुण-धम>बला अिछए, तँए एक गुणक िमलान आ एक धम>क िमलान ओहूमे बेसी नीक होइत अिछ। िकएक तँ ओकर सभ िकछु एक पे चलैए आ से नइ रहने जिहना बहुधम¸कT एकठाम भेने होइए तिहना केतौ नहाइकाल झगड़ा तँ केतौ खाइकाल झगड़ा, केतौ चाहक झगड़ा तँ केतौ अनचाहक झगड़ा होइतो अिछ आ अरबेधलो रिहते अिछ। अरबेधब भेल- आिगयो आ खढ़-पातसँ लऽ कऽ ठहुरी-चेरा धिरक सुखाएल जरनोकT एकठाम रािख देब, भलT िकए ने कनी-कनी हटाइये कऽ रखलॱ आ पूरबा-पछबा हवामे ऊिड़-पुिर एकठाम भऽ सुनैग कऽ पजैर जाइते अिछ। खाएर.., Eेमनगरक िकसान vेR िकसान छिथयो आ मानलो जाइते छैथ। इलाकामे जखन कखनो आमक गाछी-कलम वा बेख-बुिनयािदक चच> केतौ होइए तँ Eेमनगरक चच> जिहना होइए तिहना रामपुरोक चच> होइते अिछ मुदा से Eेमनगरक िवपरीत िदशामे। िवपरीत िदशा भेल- जिहना भगवान रामक नाम शुभ रिहतो गaदा-सँ-गaदा वxतु देख ‘राम-राम’ किह गबाही रिख दइ िछऐन, जिहना मृयुक बिरयातीमे ‘राम-नाम सत् छी’ कहैत असमसानक पार लगबै छी तिहना ने जुआन-जहानक बिरयातीमे
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 50
रसगुcला खाइत-खाइत राम-धाम सेहो पार लगबैबते छी। खाएर जे छी से छी, सभ नीके छी आ सभ अधले छीमुदा सभ िकयो तँ छीहे िकने। पनरह जूनकT कौलेजमे गरमी छु¬ी भेल, ओना िकछु गोरे एकरा ‘अमैया छु¬ी’ आ िकछु गोरे ‘ीÑमावकाश’ सेहो किहते छैथ मुदा जाए िदयौ ऐ बातकT, बात तँ बाते छी, अपना मनक मौजी बहुकT कहलॱ भौजीआ लोको लग अपन िनल>जताक नाच नचैत रहलॱ। भाय,पÏी पÏी छैथ िकने, ओ तँ जिहना जीवन संिगनी भेली, अÊिगनी भेली तिहनाEेिमका सेहो भेबे केली, मुदा तैठाम जँ िकयो िदन-राित टी.भी.मे खेले वा िसनेमे देखती तँ देखौथ आ अपन कम>क समय िवधाताक हाथमे दऽ दौथ..! गरमी छु¬ी होइते धीरेad सोझे गाम आिब गेल। बीस जूनकT जगमोही सेहो आम खाइक बह±े अपन मातृक पहुँचल। धीरेad आ जगमोही पटनेमे रिह पटने कौलेजमे बी.ए. फाइनल इयरमे पिढ़तो अिछ आ ए°े िवषय दुनूक रहने संग-संग िकलासोमे आ Ìयूटोिरयलमे सेहो एक-दोसरकT देखतो अिछए। मुदा जिहना जेनरल लासमे तिहना Ìयूटोिरयल लासमे सेहो दुनूक बैइसैक Ø¥च अलग-अगल अिछए। जइसँ लगक गपो-सप किहयो िकए हएत। ओना, अखन तक ने धीरेad अपन अंगीत जगमोहीकT बुझैत आ ने जगमोहीए धीरेadकT बुझैए। तेहेन जुग-जमाना आिब गेल अिछ जे ने िकयो नामक टाइिटलसँ केकरो परेख सकैए आ ने जाित-पpिजसँ, केकरा एते छु¬ी छै जे अनेरेक रमझौआमे लागल रहत। नव पीढ़ीक लोक खेलाड़ी आ िसनेमा-कलाकार सबहक नामधुन करत आिक अपन बाप-पु³खाक..! कोन मतलब ओकरा छै जे अपन बाप-पु³खाक वंश आ जीवनकT िबिटया अपन वंशक इितहासक संग देश-दुिनयpक इितहासकT बुझत। मुदा ईहो तँ बात सबहक सोझेमे अिछ जे जे जेते िजनगीक रस पीबए चाहैए ओ ओते बेचैन सेहो भेले जाइए। ओना, समाजशाxM िवषयक जेनरल लासमे पचाससँ ऊपर िव^ाथ¸ अिछ, मुदा शिनयT-शिन जे Ìयूटोिरयल लास चलैए ओ उनटा पाठक, तँए ओ लास माM पान-सातटा िव^ाथ¸ करैए बॉंकी अिधकश मैिटनी शो िसनेमा देखैए वा िकछु गोरे घुिम- िफर शहरे-बजार देखैए। मैिटनी शो िसनेमा देखैक कारण िटकटक कaशेसन सेहो अिछए। उनटा पाठ जे Ìयूटोिरयल लासमे होइए ओ ई होइए जे आन िदन– माने सोमसँ शु¡ धिर िशKक जे पढ़बै छैथ ओकर उर ओइ लासमे िव^ाथ¸सँ लेल जाइए। आइक पिरवेशमे–माने िशKण संxथानक पिरवेशमे, Ìयूटोिरयल लासक नामो भिरसक छाM सभ नइ बुझैत हएत– जखन कौलेजमे पढ़ाइये निह भऽ रहल अिछ तखन ओकर उर की भेटत। Ìयूटोिरयल लासक पान-सातटा िव^ाथ¸मे जिहना धीरेadक तिहना जगमोहीक उपिxथित अिनवाय> पसँ रहैए। बॉंकी पान-सातक बीच नव-पुरान होइत रहैए। सभ िशKकक अलग-अलग सताहमे Ìयूटोिरयल लास होइ छैन, तँए ऐ बातकT िशKक सभ निह बुिझ पबै छैथ। ओना, छाMो सभमे िकछु गोरेक स8बaध िशKको सभ संग छैaहे, तँए अपन-अपन Ìयूटोिरयलमे अपन-अपन पिरिचत छाM रिहते छैन जइसँ नव-पुरान हएब सोभािवके अिछ। जिहना धीरेad अपनाकT ओते स°त बना लास पहुँचै छल जे जे िकछु िशKक पुछतातइमे जे पढ़ौने छैथ ओकर अितिरत अपनो िवचार राखब, तिहना जगमोही सेहो अपन तैयारीक संग लास पहुँचै छल। ओना,Ìयूटोिरयल लासमे कम िव^ाथ¸ रहने आगूक जे दुनू Ø¥च बैसैक अिछ, तहीपर दिहना भागक Ø¥चपर धीरेad बैसैत आ बामा भागक Ø¥चपर जगमोही। समयक िमलानी दुनूकT रxतोक िमलानी करबैत आ Ìयूटोिरयल लासक सेहो। माने भेल एक गाड़ी पकड़ैले जिहना दूटा याMी अपन िनधिरत समयपर घरसँ िवदा होइ छैथ जइसँ रxतामे गप-सप भलT निहयì होइत हौनु मुदा मुँह-िमलानी तँ होइते छैन। कहैकालमे भलT सभ किह दइ िछऐ जे शरीरक पpच इadीमे जिहना मुँह भेल, आँिख भेल तिहना कानो भेल। मुदा की तीनूक जीवन ि¡या ए°ेरंग अिछ? मुँहमे मुंगबाक सुआदसँ लऽ कऽ तेतैरक खट-मीठ आ नीमक तीतपन तकक रस भेटते अिछ, जखन िक आँिख सोझे देखैबला भेल। नीक-सँ-नीक आ अधला-सँ-अधला देख-देख ऑंिख कखनो कािन-कािन नोरो चुबबैए तँ कखनो िमरचाइक कड़ुपनसँ पािनयì तँ बहैबते अिछ। मुदा कान तँ काने छी, खा-पीब कऽ रस चुसैक कोन बात जे आँिख जकp ने देिखये सकैए आ ने मुँह जकॉं सुआदे पािब सकैए, लऽ दऽ कऽ हवामे उड़ल नीक-बेजाएकT खाली सुिनटा सकैए। जइसँ, जिहना बिहरा अपने ताले नचैए तिहना नाच करत। मुदा ऐ सभसँ कोन मतलब धीरेadेकT आिक जगमोहीए-कT छइ। दुनू गोरे कौलेजमे पढ़ैए, कौलेिजया संगी किहयौ आिक लासक संगी,एक-दोसरक छी। अåारह बख>क उमेर सेहो दुनू टिपये गेल अिछ, िकए ने खुिल कऽ खेलाएत। मुदा से निह, दुनू अपन-अपन सीमाक बीच अनुबaध अिछ। ओना, दुनूक EÁोर दुनू तँ सुिनते अिछ, तैसंग िशKक
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सेहो Ìयूटोिरयल लासमे सुनै छिथन जइसँ एक-दोसरक अÍययनक गहराइ सेहो एक-दोसर बुिझये रहल अिछ। ओना, लासमे िशKक िनधिरत पाíय¡ममे जे पोथी िनधिरत अिछ ओकरे आधार बना पढ़बै छैथ मुदा िशKको तँ िशKके ने भेला। िकयो जेतबो िसलेबशमे अिछ तेतबो ने पढ़बै छैथ आ िकयो िकयो एहनो तँ छिथए जे ओिरकासँ घी परसै छैथ। ‘ओिरकासँ घी परसब’क माने भेल िसलेबशसँ अितिरतो पढ़ाएब, हुनका कोन मतलब छैन जे दािलक सुआद रहल िक मेटाएल। ओ तँ िसलेबशक कोन बात जे दुिनयॉंक िसलेबश आगूमे रिखये दइ छैथ। िशKकेक अनुकरण ने िशKाथ¸ करत। ओहो ने वएह बुझत। भलT िकए ने ओ िशKकक पठनकT िनिण>त करए जे जिहना िशKक जुग-îÇा छैथ तिहना जुग-dÇो तँ होइते छैथ। तँए िशKािथ>योकT तिहना ने िजनगीक बाट भेटत। ओना, िशKको अपन िसखपनसँ सीिखये नेने छैथ जे Ìयूटोिरयल लासमे अनेरे जे माथक बोझ बढ़ाएब (माथक बोझ बढ़ाएब भेल- एक-एक छाMसँ EÁ पुछब) तइसँ नीक जे प«तालीस िमनटक घaटीमे दस िमनट रीब-रीबेमे गेलबँचल प«तीस िमनट, से निह तँ एक-एक छाM-छाMासँ EÁ पुिछ समय ससािर लेब। जे लाभ धीरेadोकT आ जगमोहीकT सेहो भेिटये जाए। जिहना कहल जाइए जे करत-करत अºयाससँ जड़-मूढ़ सेहो सुजान भइये जाइए। मनुख तँ सहजे मनुख छी, अ±-खाइबला आ पािन पीबैबला। घोड़ा घास खाइए तखन तँ एते िहिहआइए, मनुख तँ सहजे मनुख छी जेकर सभ जीव-जaतुसँ अितिरत गुण भेल हँसब। Ìयूटोिरयल लासक िशKक भेला EÁक, धीरेad आ जगमोही भेल उर देिनहार। बpकी सभ िशKकोक भाषण आ िव^ािथ>योक ‘उर-भाषण’ सुनिनहार भेल। तँए खुलल वा झpपल भेल िनण>यक। िकए अनेरे कोनो पKमे ठाढ़ हएत। िकए ओ EÁक EÁ अëेजत आ िकए ओकर जवाबदेह बनत। सभ ने सुिवधानुसार जीबए चाहैए। जखन अवसर भेटल तखन वएह सभ िकए छोिड़ देत। अपन उरमे जिहना िशKकक भाषण िसलेबशकT अित¡मण करै छेलैन तिहना धीरेadो आ जगमोहीओ उर दइते छल। तेकरा िशKक लोकैन, Ìयूटोिरयल लासक िवषय किह परीKामे िलखैसँ परहेज करैक सलाह दुनूकT दैत लास अaत करै छला। दुिनयpमे Eेमोक अपन रंग-प छइ। सात अरब लोकमे जगमोहीक जेहेन प धीरेad देख रहल छल ओहन प धीरेadक जगमोही निह देख पेब रहल छल। दुनूक अपन-अपन नजिरयो आ दृिÇकोणो छेलैहे। मुदा Ìयूटोिरयल लासक जे िसख (अÍययन) छल ओ दुनूकT जर नव िसखपन (अÍययनशीलता) िदस बढ़ौलक, जइसँ एक-दोसरक बीच, िभ± दृिÇ रिहतो आकिष>त करबे करै छल। ओना, आकष>णोक अपन गुण-धम> अिछ। कोनो आकष>ण ओहन होइए जइमे िवकष>णो समान पमे संगे चलैए आ कोनो एहनो आकष>ण अिछए जइमे िवकष>णक माMा कम रहने हेराएल-हेराएल सन रहैए। जइसँ आकष>णे-आकष>ण बुिझ पड़ैए। तिहना िवकष>णोक तँ छइहे जे बेसी माMामे भेने आकष>णकT दािब दइए। जखन लोहा सन िनज¸व धातुक चु8बकीय आकष>ण ओहन होइए जे अपना सन-सन भतलोहोकT अपना संगमे रंिग अपन गुण-धम>सँ भिरये दइए। भलT ओ ओतबेकालक िकए ने होउजेतेकाल चुमकलोहमे सिट अपनो चु8बकवमे िकए ने बदैल गेल हुअए। खाएर जेतए जे होइ से तेतए हुअए। अजगर सन सpपो जखन अपन नजैरक कनखी आ मुँहक सूसकारीसँ आन सpपकT लगमे आिन भKे िकए ने कऽ लैत हुअए मुदा तइसँ कोन मतलब धीरेadकT आिक जगमोहीएकT अिछ। अखन तँ िजनगीक एको टपान दुनूमे सँ एको ने टिप सकल अिछ, तखन िजनगीक टपानक बाते केना बुझत। जिहना धीरेadक मनमे जगमोहीक Eित िजËासा जागल तिहना जगमोहीकT सेहो धीरेadक Eित जागल। एक रxताक राही–माने एक िवषयक िव^ाथ¸–भेने दुनूक मनमे एते तँ िजËासा जिगये चुकल अिछ जे जखन दुनू गोरे एक कौलेजक एक लासमे पढ़ै छी तखन बुिधयो-Ëान ने एकरंग हुअए। एकर माने ईहो निह जे आनसँ बेसी नइ हुअए, आ ने यएह माने हएत जे आनसँ क8मो नइ हुअए। एक xथानक याMीक बीच एहेन कोनो सीमा थोड़े अिछ जे सभकT ए°ेरंग चलए पड़त। कौलेजोमे तँ तिहना होइते छै जे िकयो Eथम vेणीमे उतीण> होइए, िकयो दोसर vेणीमे आ िकयो तेसर vेणीमे। मुदा िजनगीक अÍयेता अपन िजनगीक अÍयाय ओहीठामसँ शु करैक चेÇा करै छैथ जैठाम मजगूत नीवक जरत अिछ। औझुके नीवपर
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 52
ने कािä ठाढ़ हएत। तँए, भिवसवेा भलT जे हुअए मुदा भिवसक िनमता नइ छी सेहो केना नइ कहल जाएत। औझुके रोपल गाछ ने कािä फल देत। धीरेadो आ जगमोहीयो एक-दोसरक जीवन पिरचय गुत पसँ भॉंज लगबए लगल। मुदा दुनूक Eितबिaधत बाट, Eितबिaधत ऐ मानेमे जे जानकारी पबैमे कहॴ सीमोलंघन ने भऽ जाए, नइ तँ जगहँसी हएत। एक तँ पटनामे ने धीरेadकT बेसी िचaह-पहचीनक लोक आ ने जगमोहीएकT। ओना, कौलेजो आ हाइयो xकूल, सइयो-हजारो अपिरिचत चेहराक पिरिचत करबैक गड़ छीहे, मुदा पिरचय-पात करैक जगह तँ छी निह, छी तँ पढ़ै-िलखैक जगह। जेकर अपन िनधिरत सीमा-सरहद अिछ। तँए, एक िसमानक बीच रिह िकयो अपनाकT पार-घाट लगैबतो अिछ आ लगबौ चाहैए। धीरेadकT िपता-पुMक बीच जे सीमा अिछ तइमे जिहना िपता जीबेad छिथन तिहना पुM धीरेadो अिछ। माने ई जे अनेको ि¡या-कलापक बीच िपता-पुMक जीवन अिछए। मुदा अखन से निह। अखन एतबे जे जेतेक उिचत खच> िव^ाथ¸क छल ओ धीरेad जिहना िनमािह रहल अिछ तिहना जीबेad सेहो अपन पुMक िहसाबसँ अपन माहवारी खचÆ आ xवतंMतो देब िनमािह रहल छैथ। मुदा ऐ सीमाक बीच धीरेad अपन कोस>क िकताब िसलेबशक अनुसार िपताक पाइसँ कीिन नेने छल मुदा िशKकक मुहसँ अनेको अaय िकताबक नाओं सुिन मन तँ उछटबे कएल। जइसँ धीरेad Eितिदन एक घaटा कौलेजक रीिडंग ममे बैस नव-नव पोथी पढ़ैत रहल अिछ। कौलेजक रीिडंग म, पुxतकालय आ कायलय तीनू कोठरी ए°े मकानमे जुड़ल अिछ। तीनूक बीचक देवालमे शीशा लागल अिछ जइसँ एक दोसर कोठरीकT नीक जकॉं देखल जाइए। धीरेad रीिडंग ममे कुस¸पर बैस टेबुलपर तीन-चािरटा िकताब रिख एकटाकT उनटा रहल छल, तहीकाल जगमोही पुxतकालयक पैछला िकताब जमा करैत ऐगला लइले आलमारी देखए लगल। ओना, पुxतकालयक सभ पोथी रिजÇरमे अंिकत ऐछे मुदा ओ दोसर िव^ाथ¸ देख रहल छल। नमगर-चौड़गर रीिडंग मक कोठरी, दज>नो आलमारी िकताबसँ सजल अिछए। एकसँ दू आलमारी Eित िवषयक िकताबसँ सजौल फुटा-फुटा लगौल अिछ। बीचमे बइसैले कुरसीक संग टेबुल सेहो लगले अिछ। जइसँ िबनु बँटवारा केनहुँ बैइसैक जगह बँटाइये गेल अिछ। माने ई जे आलमारीक लगेमे िकयो बैस कऽ पढ़बकT नीक बुझबे करैए। धीरेad अपन समयानुसार रीिडंग ममे िकताब सभ टेबुलपर रिख कलमसँ कॉपीमे िलख पुन: िकताब उनटबैत रहए। पुxतकालयक आलमारीमे जगमोही िकताब खोिज रहल छल। पुxतकालयो आ रीिडंगो मक आलमारी हाथ-हाथ भिरक दूरीमे सजल अिछ। पुxतकालयक दुनू आलमारी खोिल जगमोही िकताब खोिज रहल छल आ दोसर िदस धीरेad दुनू आलमारी खोिल िकताब िनकािल टेबुल सजौने छल। दू आलमारीक बीचक जे जगह अिछ ओइ बीच होइत जगमोही धीरेadकT देख रहल छल। तही बीच पुxतकालयक िकछु िकताब गड़बड़ भऽ गेल रहै तेकर कहाकही ऑिफसमे उठल। मुदा िकताब तँ िकताब छी, आिगयोमे जरैबला, पािनयोमे गलैबला आ िदबारो-िद8मककT खाइबला, तैठाम अनेरेक ने कहा-कही भेल। खाएर.., जेकरा माए-बाप जaम दइए से तँ माए- बापकT िबसैर जाइए, ई तँकौलेजक पुxतकालयक िकताब छी, एकर के माए-बाप छै! अनेरे के एते आलमारीकT उधेसत। ओना, देवालक बीच शीशा लगल रहने जिहना जगमोही पुxतकालयमे ब± अिछ तिहना रीिडंग पमे धीरेadो ब±े अिछ मुदा देख रहल छल दुनू एक-दोसरकT। ओना, अखन तकक तरपेसकी जानकारीमे जिहना जगमोही अपन मामा गामक धीरेadकT बुझैत तिहना धीरेadो अपना गामक भिगनी जगमोहीकT बुझैत। मुदा अखन धिर एको िदन बात-चीत निह भेल। पुxतकालयक कायलयमे कहा-कही भेने सबहक िधयान ओइ िदस भेल आ जगमोहीक िधयान धीरेad िदस भेल। शुमे जगमोही मोट-मोट िकताब धीरेadक टेबुलपर राखल देख थोड़ेक सहमल जर मुदा एते तँ आम-शित जिगये गेल छेलै जे धीरेad मामा गामक छी। चाहे तँ नाना दािखलमे हुअए वा मामा दािखलमे वा भाइक दािखलमे, मुदा अंगीत तँ छीहे। जँ सेहो नइ छी तैयो एक कौलेजक एक लासक आ एक िवषयक संगी तँ भेबे कएल। जखन ए°े िवषयक संगी छी तखन जीवनक ि¡यो-कलाप तँ ए°ेरंग ने हएत। केना कोयलाखानक vिमक अपनाकT लेबर लास किह एकठाम बैसार-उसार करैए। केना खेतक धान रोपिनहार धनरोपिनया कहबैए। कहॉं केतौ मद>-औरतक भेद छइ। एक िदस मातृकक
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 53
स8बaध, दोसर िदस कौलेजक स8बaध अिछए, तैसंग एक उमेरक िसयान सेहो दुनू गोरे छीहे। तखन गप-सप करैमे बाधा की? चोरनुकबा Eेममे कोनो दम होइए, ओ तँ चोर सबहक ि¡या भेल। Eेम तँ साव>भॱम अिछ।िवचारक Eेम, बेवहारक Eेम, िजनगी जीबैक Eेमइयािद, जे लोकचोरा-नुका कऽ िकए करत। दू आलमारीक बीचक रxता देने शीशाक देवाल पार करैत जगमोही धीरेadक अनुकरण करए लगल। धीरेad जिहना िकताबमे ऑंिख गािड़, समुdी हीरा जकॉं पpित खोिज कॉपीमे नोट कए रहल छल, तेकर हू-ब-हू फोटोाफी जगमोही अपन बुिधक डायरीमे उतारए लगल। दस िमनटक फोटोाफीक रील जगमोही मनमे गिढ़ नेने छल। संजोग भेल, पॉंच बािज गेल। आब सभ िकछु बaद हएत। जगमोहीकT दूटा िकताब लेबाक छेलै जे इसू करा चुकल छल। धीरेad आलमारीमे िकताब रिख कॉपी नेने बाहर िनकलल। ओना, लोको पतराएले छलइ। माM दू गोरे कौलेजक xटाफ आ चािर-पॉंचटा िव^ाथ¸ अिछ। पुxतकालयक सीढ़ीसँ िन»चp उतैरते जिहना धीरेadक नजैर िखर जगमोहीपर िछछलल तिहना जगमोहीक नजैर सेहो धीरेadपर िछछलए लगल। ओना, दुनूकT अपन-अपन नैितक अनुशासनक िवचार मनमे दौिड़ये रहल छल। अही गुन-धुनमे दुनू िबना िकछु बजने-भुकने कौलेजक अिaतम गेट लग पहुँच गेल। चौब¬ी जगह, तँए के िकमहर जाएत तेकर जानकारी दुनूकT अपन-अपन। ओना, एहेन कोनो Eितकूल मौसम निहयT अिछ जे दुनूक बीच गप-सप नइ भऽ सकैए।मुदा ामीण पिरवेशक उपज दुनू, माने दुनूक जaम गाम देहातमेभेनेदुनूक मनमे गाम गमैया स8बaध सेहो बिनयT गेल अिछ। तँए दुनूक बीच िकछु ओझरौठ अिछए। जे ने जगमोही बुिझ सकल अिछ जे धीरेadक संग कोन तरहक स8बaध मािन बाजल जाए, आ ने धीरेadे से बुिझ रहल अिछ। तैसंग दुनूक मनमे ईहो बेवधान छैहे जे अपनासँ उमेरमे जेठ मानल जाए वा छोट। तेकर कारण दुनूक अपन- अपन अिछ। धीरेadक मनमे नचै छै- जखन दुनू गोरे कौलेजक एक लासमे पढ़ै छीतखन ई मािन लेब जे जगमोहीक उ हमरासँ कम हेतैई तँ बालबोधक िवचार भेल! िकएक तँ जेतेक समय हमरा ‘अ-आ’ सँ अबैमे अखन धिर लागल तेते तँ जगमोहीकT सेहो लगल हेबे करत, तखन छोट मानल जाए वा पैघ? आइ जँ कौलेजमे एको लास आगू-पाछू रिहतॱ तखन तँ एकटा देखौआ सीमा भेटैत, जिहना कोनो गामक जमीनक नापी लेल पैछला सवµक कोनो पहचान भेटला बाद अमीनकT कोनो खेतक आिड़-मेड़ बनबैमे असान होइए तिहना। मुदा धीरेadक मनमे एकटा िवचार उठल। उठल ई जे जइ गाममे बािढ़क कारणे वा भुमकमक कारणे िसमानक पहचान मेटा गेल रहैए तँ ओइ सीमाकT पकड़ै तँ दोसर गामक िसमानक सहारा लेले जाइए। जगहमोही जखन अपन पैछला इितहास िदस नजैर िखरौलक तँ साफ-साफ देखए लगल जे जिहया पॉंच बख>क रही तिहये बाबा लोअर Eाइमरी xकूलमे नाओं िलखा देलैन, तिहयासँ ने किहयो फेल केलॱ आ ने कोनो लासे फािन कऽ टपलॱ।मनमे उठलै- तिहना ने धीरेadोकT भेल हएत। बीचमे मातृकक स8बaध सेहो अिछ, जँ नानाक स8बaधमे हएत आ तखन जँ भैयारीक स8बaधे बाजबईहो तँ नीक निहयT हएत। आ तहूमे जँमाए बुझती तखन तँ ओहो गनजन करबे करती..! ओना, धीरेadोक मन सकताइये रहल छल जे अनजान-सुनजान महाकcयाण। गप-सपक पछाइत जखन स8बaधक असल पिरचय हएत तखन अपन िवचारकT सुधािर लेब। तिहना जगमोहीक मन सेहो रसे-रसे ओहन सीमापर पहुँच गेल। तँए दुनूकT मुँह खोलैक अनुकूल मौसम बिन गेल। एक तँ ओहुना जखन संगे-संग पढ़ै छी तखन बजा-भुकी करैमे कोन एहेन पहाड़े आिक समुdे बीचमे बाधक अिछ। गेटपर पहुँच धीरेad जगमोही िदस तकलक। ओना, जगमोही सेहो धीरेadे िदस तािक रहल छल।दुनूक ऑंिख मीिल गेल। ऑंिख िमिलते दुनूक मुँह टुिxकयाएल। जिहना पा-कलश वा फूल-फलक टुसी चिलते अपन सुगaध िनकालए लगैए तिहना दुनूक मनसँ िनकलए लगल...। जगमोही बाजल- “डेरा केतए रखने छी?” जिहना जगमोही बाजल तिहना धीरेad उर देलक- “ऐठामसँ साए मीटर हएत।”
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धीरेadक बात सुिन जगमोही घड़ी देखलक। पॉंच बािज कऽ पॉंच िमनट भेल छेलइ। मने-मन अपन समयक अँटकार लगौलक तँ बुिझ पड़लै आधा घaटा समय बीचमे खाली अिछ। जगमोहीक ऐगला समयक सीमा िनधिरत छेलै, िकएक तँ सिचवालयमे जगमोहीक िपता- गोिवaद काय>रत छिथन जे िनय छअ-पौने छअ बजे तक डेरा अबै छिथन। िपताजीकT अबैसँ पिहनिह जगमोही अपन कौलेजक काज िनवटा डेरा पहुँच जाइए। तैबीच जगमोहीक माइयो बजारक काज कऽ आिब जाइ छिथन। जगमोही बाजल- “रxते-रxते चिल कऽ अपन डेरा देखा िदअ। दोसर िदन समय पेलापर आगूक िकछु गप-सप करब।” सोäोअना जगमोहीक बात निह सुिन धीरेad िब»चेमे बाजल- “चलू, संगे-संग चलबो क आ अहॉं अपनो डेराक जानकारी िदअ।” साइए मीटरपर धीरेadक डेरा, गपे-सपमे दुनू गोरे पहुँच गेल। डेरा लग ठाढ़ होइत धीरेad असमंजसमे पिड़ गेल। असमंजस ई जे शहर-बजार छी। ऐठाम सभ तरहक Eितयोिगता अिछ! मुदा लगले मनमे उिठ गेलै जे अखन िव^ाथ¸ जीवनमे छी, तँए अखन व>मानक िवचार करब अिछ निह िक भिवसक। धीरेad बाजल- “डेरामे चाह-ताह तँ नइ बनबै छी मुदा जलखैक ओिरयान तँ रिहते अिछ, चलू पिहने जलखै कऽ लेबतखन जाएब।” ओना, दुनूक मन गवाही दइते रहै जे कौलेजसँ लऽ कऽ गाम धिरक स8बaध अिछए, तखन खेबे-पीबेमे कोन हज>...। जगमोही बाजल- “डेरा तँ भीतर जा कऽ देख लेब मुदा जलखै नइ करब। बेसीसँ बेसी एक िगलास पािन पीब लेब।” दुनू गोरे कोठरीमे पहुँचल। कोठरीमे कुरसी निह, छोट-Kीण कोठरीमे धीरेadक पूण> िजनगी समटल अिछ। ए°े चौकीपर बैस धीरेad बाजल- “गाममे ऐबेर आम खूब फड़ल अिछ, अमैया छु¬ी हेबे करत...।” जगमोही बाजल- “अहॉंक घर Eेमनगर छी आ हमरो...।” ‘हमरो’ सँ आगp निह बिढ़ जगमोही चुप भऽ गेल। अपन गामक नाओं सुिन धीरेad बाजल- “अहूँक मातृक तँ Eेमनगरे ने छी?” जगमोही- “आइ एतबेपर रहए िदयौ। पनरह जूनसँ अमैया छु¬ी भऽ रहल अिछ, माइयो नैहर जेती, हुनके संग बीस जूनकT अहॉंक गाम पहुँच जाएब।” मुxकी दैत धीरेad बाजल- “हमरा गाम पहुँचब आिक अपन मातृक?” जगमोही- “अहॉं जे बुिझऐ...।” q श¦द संया : 3068, ितिथ : 10 अगxत 2018
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 55
जारी....
[i] बटसािवMी [ii] मेहनत करैबला
२ जगदीश Eसाद म{डल दूटा लघुकथा िकयो ने पुछैए एकतीस साल नोकरी केलाक बाद रामानaद भाय घुिम कऽ गाम एला। एकतीस सालक बीच ए.एस.पी. सँ लऽ कऽ चािर मास आइ.जी.क पद सेहो सुशोिभत केने छला। तैबीच ऑिफसक कम>चारी जर बुझैन जे िखिशयाह अफसर छैथ तँए काजमे कोताही केने िबगड़बो करता आ भऽ सकैए जे लाल कलम चला देता तँ नोकिरयोमे जड़ब हेबे करत। िकछु गोरे इमानदार सेहो बुिझते छेलैन। पचीस िदस8बरकT रामानaद भाय सेवा िनवृ भेला आ अपन प¥शनक सभ काज स8हािर दस जनवरीकT डेराक सभ वxतु जात नेने पÏीक संग गाम आिब गेला। तेसर िदन माने बारह जनवरीकT, िभनसुरका चाह पीब रामानaद भाय अपन ऐगला[i] िजनगीक िवषयमे गौर करए लगला। तही बीच पÏी- सुलेखा सेहो कोठरीसँ िनकैल दरबजापर पहुँचली। पÏीपर नजैर पिड़ते रामानaद भाय बजला- “गामक िकयो ने पूछ करैए..!” ओना, सुलेखाक जे बीतल िजनगी छेलैन ओ तँ अफसर पिरवारक रहैन तँए कोनो बात वा कोनो बेवहारकT देखै-बुझैक तरीका अपन बिन गेल छेलैन। जइ अनुकूल ओ बजली- “अखन दुइये िदन एना भेल अिछ तइमे केना ई बुिझ गेिलऐ?” अपन समझसँ सुलेखा बाजल छेली, मुदा सेवा िनवृिसँ पूव>क िवचार िजनगीक अनुकूल जिहना रहैए तिहना सेवा िनवृिक पछाइत मृयुक स8भावनासँ Eभािवत भेने जीवन-मृयुक बीचक स8भावनाक सं¡मण भेने अनुकूल िवचार सेहो Eभािवत होइते अिछ। जइसँ िवचारमे िकछु-ने-िकछु सं¡मण होइते अिछ। हेबो केना ने करत, जीता-िजनगी लोक दोसरक सहारा बनैए आ मृयुक आगमन देख लोक दोसराक सहारा चािहते अिछ। तँए रामानaद भाइक िवचार पÏीक िवचारसँ सहमेलू निह भऽ सहखेलू जकpबुिझ पड़लैन। मुदा समxया िकछु हुअ आिक केहनो हुअ ओ तँ समxयाxत लोककT भोगै-िवचारै पड़ैए। रामानaद भायकT पÏीक िवचारमे जे आसरस भेटक चाही से नइ भेटने मन थोड़ेक िनरस जकp भइये गेलैन। मुदा जे िवचार रामानaद भाइक मनमे पनैप गेल छेलैन ओकर प¥पीकT ओतै रोिक, मनकT दोसर िदस बहटारैत बजला- “जइ िदन गामसँ नोकरी करए िवदा भेल रही ओ िदन आ आइ जखन नोकरी छुटला पछाइत गाम एलॱ हेन तइमे केतेक अaतर आिब गेल अिछ से अनुमान करै िछऐ?” पितक बात सुिन सुलेखा थोड़ेक िसरिसरेली जर मुदा िकछु लोकक एहेन सोभाव होइते अिछ जे जिहना खुशी रहलापर बोली-वाणीकxवर रहल तिहना नाखुशी भेलापर सेहो ओिहना रहल। सुलेखो तिहना अपन मुँह ब± कऽ लेली, िकछु बजली निह। भऽ सकैए जे मने-मन गुड़-चाउर फpकए लगल होइथ। ल×मणपुर गाममे पिहल-पिहल आइ.पी.एस. रामानaद भाय भेला। ओना, पढ़ै-िलखैक िखयालसँ ल×मणपुर बहुत पछुआएल अिछ। सोäोअना िबनु पढ़ल-िलखल गाम निहयT अिछ मुदा जनसंयाक चौथाइयोसँ कम जरे अिछ। पनरह-सँ-बीस Eितशत साKर पु³ख वग> आ दू-सँ-पpच Eितशत मिहला वग> साKर अिछ। रामानaद भाय िव^ाथ¸ए जीवनमे ल×मणपुरक वातावरणसँ अलग भऽ मािMकक वातावरणमे जा पढ़ला, बढ़ला आ पालल-पोसल गेला, जैठाम पढ़ाइ-िलखाइक औसत अिधक अिछ आ तहूमे खासकए रामानaद भाइक मामा-नानाक पिरवार तँ आरो बेसी अगुआएल छेलैन। रामानaद भाइक मामाक पिरवारमे ई सातम पीढ़ी चिल रहल छैन जे पढ़ै- िलखैक धारासँ नीक जकp जुड़ल अिछ। माने अKर-बोध आ अÍययन बोधक सातम पीढ़ीक न8बरपर रामानaद भाइक मामा सभ भेलिखन। मामक चािर भpइक भैयारी छैन। जे चा चािर िदशाक अÍययेता। िकएक तँ हुनक िपता- रघुनaदन बाबाक अपन खास सोच रहैन। रघुनaदन बाबाक अपन खास सोच पिरवारक िखयालसँ रहल होिन वा समाजक जरतक िखयालसँ जे चा बेटा– पलाल, भूपलाल, दुखलाल आ सुखलाल–कT चािर िदशाक अÍययन िदस झुकौलैन, जइसँ
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एकटा बेटा िकसानी Ëान, दोसर मशीनी Ëान, तेसर िचिकसा आ चािरम वकालत िदस बढ़ला। िकछु िदनक पछाइत चािरम बेटा- सुखलाल िजला जज बनला। वएह वातावरण रामानaदकT भेटल छेलैन जइसँ आइ.पी.एस. बनला। ओना, ल×मणपुरक अपन धरतीक उपज, माने िशKाक दौरमे एक गोरे मैिßक पास किर कोसी Eोजेटक िकरानी, दोसर मैिßक पास लोअर Eाइमरी िव^ालयमे िशKा िमM आ तेसर बेकती बी.ए. पास केला पछाइत बेरोजगारे रिह गेल। वएह कलकासँ िदcली तक घुिम-फीिर नोकरी नइ भेने सिठया-किठया कऽ बी.एल.मे नाओं िलखौलक आ वकील बिन झंझारपुर कोट>मे काय>रत अिछ। बpकी गामक लोक छोट-मोट बेपारक संग खेती-िगरहxती करैए। तँए की गाममे स8प±ता निह अिछ सेहो निहयT कहल जा सकैए। झोरे छाप डॉटर िकए ने हुअए मुदा ल×मणपुरक डॉटर तँ वएह छी िकने। जेकरा काजमे समाजक िबसवास छइ। भगवान र»छ रखथुन ल×मणपुरवासीकT जे टाटा हॉxपीटल ब8बई आ आयुवµद संxथान िदcलीक मुँह निह देखए पड़इ। िकयो सुखे थोड़े जाइए। दमकल-बोिरंगसँ लऽ कऽ ßेटर धिरक िमxMी, िबजलीक मैकेिनकक संग मोबाइलक मैकेिनक सेहो ल×मणपुरमे अिछए। तौला-कराही बनबैबला माने बरतन-बासनक सृजनकक पमे कु8हार-पि{डत सेहो अिछए। दुग xथानक दुग माताक संग Øï xथानक रेमaतक संग घोड़ो गढ़बे करैए। तिहना केबाड़-चौकैठक संग चौकी आ सजल-धजन पलंग धिरक सृजेता कम>कार कलाकार ल×मणपुरमे निह अिछसेहो केना नइ कहल जाए। तिहना कpच-कड़चीसँ कpच बpसक फुलडालीसँ लऽ कऽ पनडालीक संग पतडालीक [ii] अितिरत डाला-धनडाला तकक िनमणक नइ अिछ सेहो केना नइ कहल जाएत। जइ गाममे सभ कथुक स8प±ता रहत तइ गामकT जँ स8प± नइ कहबै तँ ओइ गामक तौहीनक संग बेइमानी सेहो भेबे कएल िकने। मुदा से बात निह, गॱओं आ अनगॱओं सभ ल×मणपुरकT स8प± समाज मािनते अिछ। जँ से नइ मानैत अिछ तँ िकयो अनगॱऑं िकए अपन बेटी-बेटाक संग भाइयो-बिहनक िबआह ल×मणपुरमे करैए। िकनका मनमे एहेन इ»छा नइ रहै छैन जे अपन बिहन वा बेटीक िजनगी नीक जकp निह चलए। ओना, िजनिगयो-िजनगीमे अaतर होइते अिछ। ए°े गाममे एक पिरवारक िजनगी खाइ-पीबैसँ लऽ कऽ कपड़ा-ला, घर-दुआिरक संग पढ़ै-िलखै तक स8प± रहैए आ ओहीठाम माने बगलेमे, दोसरकT केकरो पढ़ै-िलखैक खच> नइ जुटै छै तँ केकरो रहैक नीक घर निह छइ। तिहना केकरो कपड़ा-लाक अभाव अिछ तँ केकरो खेबा-पीबाक। मुदा िकछु अिछ, गाम तँ सबहक िछऐaहे। सभकT अपन-अपन अिधकारो आ कत>यो छैaहे। तइमे जे जेहेन िवचारक छैथ ओ ओइ अनुकूल अपन पिरवारक िसरजनो-Eितपाल करै छैथ आ नÇो-संहार किरते छैथ। आइसँ बतीस बख> पूव> रामानaद भाय जखन आइ.पी.एस. क8पीट केलैनतँगामक जेते बुझै-सुझैबला लोक छला सभ खुशीसँ झूिम उठल छला। िकनको झुमैक खुशी छेलैन जे गाम समाजक लोक उिठ कऽ सा तक पहुँचला, तँ िकनको खुशी जे गाममे कोनो भीड़-कुभीड़ पड़त तेकर रKक गोबरधन धारी कृÑण जकp अवतार लइये लेलैन। िकनको मनमे खुशी ऐ दुआरे रहैन जे देखा-देखी दुिनयp चलैए, जखने एक गोरे धरतीसँ उिठ अकास छुिब लेलैन तखने दोसरो-तेसरेा छुबे करत। आ िकनको मनमे ई आशा छेलैन जे िबनु पढ़ल-िलखलकT ने नोकरी[iii] नइ भेटैए आिक नइ भेटत मुदा ओइ संग पढ़लो-िलखल जे टौआएल िफरैए कमसँ कम आब ओकरा सबहक बेरा पार हेबे करत। जखन एते पैघ िडी रामानaद भाय हpिसल केलैन तखने ने पैघ पदक Eाित सेहो हेबे करतैनजइसँ दबल-कुचललकT लाभ हेबे करत। रामानaद भाइक िपता जनकनaद साधारण पpच बीघा जोत जमीनक िगरहxथ, िजनका अपन होश-हवास एते निह जे रामानaद भाइक पदक गिरमाकT बुिझतैथ मुदा सासुरक जे पिरवार रहैन ओइसँ िकछु-ने-िकछु अंकैत तँ जर छेलाहे। बेटाक िडीक खुशीमे समाजे नािच उठल छल जइसँ जनकनaद सेहो झूिम उठला। बेटाक EितRाक खुशीमे जनकनaद समाजक संग कुटु8बो-पिरवारकT भोज खुएबाक िवचार मनमे रोिप लेलैन। ßेिनंग स8प± केला पछाइत रामानaद भाय गाम एला। परसू जुआइन करए जेता। बीचमे कािä भिर समय अिछ। जनकनaदकT भोज करैक अवसर भेटलैन। ओना,रामानaद भाय पनरह िदन पिहनिह अपन काय>¡मक जानकारी िपताकT दए देने रहैन। भोजो तँ भोज छी, अपन-अपन गुण-धम> तँ ओकरो छइहे। िबआहक भोज बिरयातीक भोज भेलजइमे दू समाजक बीच मनुख-मनुखक काaहक िमलानीक संग लड़का-लड़कीक िबआह होइत अिछ।तँए ऐ भोजमे रxसा-कxसी सोभािवक अिछ, जइसँ खेबा-पीबाक ओहन प पकड़बे करत। िकए ने लोक (बिरयाती) बाजत जे जिहना अँिठयाहा रसगुcला छल तिहना लालमोहनो आ डलनामे सेहो डलडेक छॱक पड़ल छेलइ। मुदा ओहीठाम vाधक भोजक महाम बदैल जाइए। बदलबो केना ने करत, जैठाम मृत-आमाकT xवग>-नक>क भागी बनैक EÁ अिछतैठामक पंच जँ भोजमे तीमन-तरकारीक पिरचय करए लगत तखन अनेरे ने भोजखौक सभ भेल-गेलमे ओइ आमाकT नक> पठौत। मुदा जनकनaदक भोज तँ से छेलैन निह, ओ तँ रामानaद भायकT शुभकामनाक छेलैन। तँए ऐठाम जँ भोज खाइबला शुभकामना छोिड़ अड़कच-बथुआ बाजत से की ल×मणपुरक लोक बेकूफ अिछ। एते खुशी तँ सबहक मनमे छेलैaहे जे गामक धरतीसँ अकास टेकै धिरक खा8ही गाममे बिन ठाढ़ भेला अिछ। तेसर िदन चािर बजे रामानaद गामसँ िवदा हेता। दुपहरक पछाितयेसँ समाजक एका-एकी लोक शुभकामनाक संग रामानaदकT अिरयातै-ले आबए लगला। ओना,काजुल लोक जँ चािर बजे याMा करता तँ ओइसँ पनरह िमनट पिहने तैयारी करैमे लगता आ समयसँ पpच िमनट पिहने पहुँचैक पिरयास करता, मुदा अकाजुल तँ बेरक चािर बजेक याMा-ले भोरेसँ िसंगार-पेटार निह करत तँ ओकरा-ले ओ याMाक सगुन की भेल। मुदा से निह, रामानaद भाय ßेिनंग कऽ चुकल छला, काज करैक ढंगमे नवपन आिब गेल छेलैन। दुपहरक पछाितयेसँ समाजक शुभेझुकT देख-देख अपन याMा मन पड़ए लगलैन। मुदा ओ तँ चािर बजे हएत। तँए खुला देहक संग रामानaद अपन शुभिचaतकक शुभकामना हण कऽ रहल छला। समाजो तँ समाज छी, जखन बेिटयोकT लोक धान, हरदी आ दूिभक खॲइछ भिर िवदा करैत तखन बेटा तँ सहजे बेटा छी, तहूमे ओहन बेटा जे धरतीसँ उिठ अकासक सॲगर बिन ठाढ़ अिछ, तँए िकयो नववxM तँ िकयो बटखरचा, भाड़ा लेल नगद- नारायण सेहो अरपनक संग अिप>त कइये रहल छेलैन। घरसँ िनकलैकाल रामानaद भाय घर-जनसँ लऽ कऽ गाम-जन तक शुभेKुक पमे देख रहला अिछ। सबहक सेवा सबहक कcयाण मनमे नािच रहल छेलैन। सीमा टपबैत जिहना रामकT अयोÍयावासी अिरयातलकैन तिहना रामानaद भायकT ल×मणपुरवासी अपन गामक सीमान धिर अिरयाइत देने रहैन। पान खेला पछाइत रामानaद भाय पÏीकT सोर पाड़लैन। ओना, सुलेखाक मन भीतरे-भीतर थौआ भऽ गेल रहैन, मुदा पदक अिaतम सीढ़ीक रोब तँ अ>मृतो जीिवत छेलैaहे। लगमे अिबते सुलेखा बजली- “िकए एना डकबािह केलॱ?” पÏीक श¦दक xवाद जेना रामानaद भायकT कड़ुआएल बुिझ पड़लैन मुदा जिहना चढ़aत धारक वेग आ उतरaत धारक वेगक गित बदैल जाइ छै तिहना रामानaद भायकT हुअ लगलैन। मुदा एकटा नमहर िजनगीक भुत भोग तँ बिनयT गेल छलातँए सोचैयो-िवचारैक आ बुझबो-सुझबोक नजैर तँ बिनयT गेल छेलैन। बजला-
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“दुिनयpमे हमरा-ले अहp सँ लगक दोसर िकयो ने अिछ, तँए अहpकT एकटा बात कहए चाहै छी।” दर-दरसँ गुजरल रामानaद भाइक मन अनुभूितक संग अनुभव कऽ नेने छेलैन जे िजगनीमे चूक जर भेल, जँ से निह भेल तँ एकतीस बख> पूव>क समाज आइ िकए कुद-प चेहरा देख भटैक गेल? पितक किcपत भाव बुिझ सुलेखा अपन गु³वक भाव जगबैत पुछलकैन- “की कहए चाहै छी?” िविxमत होइत रामानaद भाय बजला- “पदक मदमे समाजक संग भारी चूक भेल!” सुलेखा बजली- “की चूक भेल?” रामानaद भाय बजला- “मन बोिझल अिछ, कािä कहब।” q श¦द संया : 1584, ितिथ : 9 जुलाई 2018
केकरो िकयो ने एक तँ ओहुना मधुबनी जाइसँ पिहने पÏीसँ खूब र°ा-टोकी भेल। र°ा-टोकीक कारण छल एकटा मुकदमा। र°ा-टोकी होइत-होइत रका-टोकहुअ लगल। आ ओहो एते बिढ़ गेल जे दुनू परानी दू िदस भऽ गेलॱ। माने ई जे पÏी बजली- “हमरा एहेन ठpठ महॴस आिक ठpठ गाए पोसैक जरत नइ अिछ जे भिर िदन ओकरा पाछू लागल रहू आ दूधक बेरमे फूल सुँघा देत।” एक मानेमे पÏीक िवचार जँचल। जँचल ई जे गाए आिक महॴस िकयो पोसैए धनक उगाही बुिझ।ओ भलT कम दुधगैर हुअए आिक बेसी ई दीगर बात भेल। मुदा साफे िकछु ने हुअए ई तँ कनी कठाइन भइये गेल। मुदा पÏी बाजल छेली एकटा केसक उदाहरणमे। आइसँ तीस बख> पिहने गाममे दू गोरेक झगड़ाक पनचैतीमे पंच बिन गेलॱ। ले बङौर!गुर केतौ आ पह केतौ पिड़ गेल! जइ झगड़े पनचैतीमे गेल रही ओकर चच> पंच सभकT अबै दुआरे पछुआएले छल तइसँ पिहने गामक दोसर गप उखैड़ गेल। जेते गोरे पनचैतीमे पहुँचल रही तहीमे दू पाट¸ बिन गेल। दू पाट¸ जँ िवचारे धिर रहैत तखन तँ कोनो बात निह। गाम-घरमे एना होइते छइ। कोनो घटना गाममे िकए ने हुअए, जहp-तहp दू गोरे–चािर गोरेक बीच कहा-कही होइते अिछ, भलT ओइ कहा-कहीक कोनो कारगर पिरणाम नइ िनकलौ। मुदा एतए से निह भेल। दुनू पाट¸क बीच हाथा-बpही होइत थापर-मु°ा चिल गेल। धरमागती जँ पुछी तँ मािर बेसी हमरे पाट¸ माने हम जइ पाट¸मे रही सएह सभ खेलक। मुदा बेकतीगत पमे हम बेसी हाथ चलेलॱ, हाथ िक चलेलॱ जे दुनू हाथमे ऑंगुरक मु°ा बािaह बेसुमार चलेलॱ जइसँ एक गोरेकT बेसी चोट लिग गेलै, वएह केस कऽ देलक, सएह केस आइ तीस बख>सँ लड़ैत आिब रहल छी। लड़ैत की आिब रहल छी, मधुबनी जाइ-अबै छी। किहयो हािकम निह, तँ किहयो पेशकारक ðड़ताल, किहयो वकीलक विहÑकार, तँ किहयो चपरासीक हड़तालक दुआरे कोट> लगबे ने कएल, जइसँ तारीक-पर-तारीक होइत-होइत आइ तीसम बरख बीित रहल अिछ। मासे-मास तारीक भेने पिरवारक अिनवाय> खच>मे, माने मासक बजटमे केसक खच> साए पैआ जोड़ाइये गेल अिछ। ओना, पिरवारमे पpच-दस, पचीस-पचास पैआक केते काज खिग जाइए से बरदास करैत आिब रहल छी। पÏीक EÁक उर देब जरी छेलएहे। जँ से निह देब तखन तँ पÏीक संग हारबे ने भेल। आ जखने घरमे पÏीक जीत हएत तखने ने पु³ख-जुइितक घर मौगी-जुइितक भऽ जाएत वा पु³खाह घर मौिगयाह भऽ जाएत। आ जँ से हएत तँ गाम-समाजक मुँह रोिक देबै, कहबे करत िकने- ‘फcलॉं घर मौिगयाहक घर छी।’ मनमे कोनो ताले-मेल नइ बैइसए। पछाइत घाल-मेल करैत बजलॱ- “केस-मोकदमाक हाल अहp थोड़बे बुझबैओ इजतक लड़ाइ छी, िबनु लड़ने केकरो इजत होइ छइ।” आमक गाछक सराइर हुअए आिक लीक फॲकगर मुड़ी, ओकरा तोिड़ देने जिहना मुिड़ये बदैल जाइए तिहना भेल। पÏी बजली- “हमरा ऐ केससँ कोनो मतलब नइ अिछ, सात गोरे फँसल अिछ, जे गित ओइ छबोकT हेतै से हमरो हएत।” बजैक ¡ममे तँ पÏीक िवचार नीक छेलैaहे। िकएक तँ सि8मिलत पिरवार ने छी। दुनू गोरे िमिल कऽ ने ठाढ़ो केने छी आ आगू मुहT चलाइयो रहल छी। मुदा जँ केसक पैरवी छोिड़ देबै तखन तँ अनेरे गैर-हािजरीमे वारंट हएत, ज¦ती-कुक¸ हएत! आजँ कहॴ पुरान केस बुिझ हािकम फैसले िलिख देलैनतखन तँ सजो भऽ सकैए। तैकाल मे हमर साती पिÏयो पूिर पौती आिक अपने पुरए पड़त? ओना, एते चलाकी दुनू परानीक गप-सपमे कइये नेने छेलॱ जे पÏीकT बेतुकार उर निह दए, कहने रिहऐन जे मधुबनीसँ ऐ बेरक तारीक केने अबै छी, तखन िनचेनसँ दुनू परानी िवचािर लेब।
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अपने मधुबनीए-मे रही। जेठुआ लगन जखन एहेन अिछ, तखन फगुआ मासक फागुनक लगन केहेन भेल छल से सभकT बुझले अिछ। अपना बुझल नइ छल जे औझुका लगन अपनो लगल अिछ, तँए थोड़े िनचेन रहबे करी। आठ-नअ बजे राितमे जखन घरपर पहुँचलॱ तँ देखिलऐ जे सॱसे अaहार पसरल अिछ। घरमे एकोटा मनुख निह। गुण अिछ जे गाए-महॴस नइ पोसने छी, एकटा जँ पीिलया कुा अिछयो तँ ओकरा-ले समाजे खुजल अिछ। ओना, जखन दरबजापर पएर देलॱ तखन ओ दरबजाक आगूमे अaहारेमे बैसल छल। हािर-थािक िनण>य केलॱ जे अनका भरोसे लोक केते िदन जीब सकैए, से नै तँ भेल ते चािरटा रोटी बनाएब अिछ। अनेरे तीमन-तरकारी बनबैक भpजमे की पड़ब से नै तँ जखन अपने उपजौल तरकारी अिछ, तखन िकए ने ओकरा उसैिनये वा पकाइये कऽ पुÇगरसँ चहटगर स±ा बना ली। एते करब कोन असाध भेल। तेसर िदन हहाएल-फुहाएल पÏी िधया-पुताक संग नेने पहुँचली। बजलॱ- “लगन कटबए केतए गेल छेलॱ?” पÏी बजली- “बिहनक बेटीक सासुर। िबआह छेलइ।” मनक िवचारकT मनेमे दािब, मुँह ब± कऽ लेलॱ। िकएक तँ मनमे आिब गेल- ‘च-र-र-अ सरोकारे करहर मौसा।’ q श¦द संया : 718, ितिथ : 11 जुलाई 2018
[i] अबैबला [ii] पत-पिथया [iii] सरकारी नोकरी
ऐ रचनापर अपन मंतय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।
३. प^ ३.१. नaद िवलास राय - िकछु किवता ३.२.किव Eीतम कुमार िनषादक िकछु किवत◌ा ३.३.र◌ामिवलास साहु- िकछु किवत◌ा ३.४.१.अनुवादक डॉ. िशवकुमार Eसादक िकछु अनुिदत काय (मूल रजनी छाबड़ा- िहaदी) २.किव डॉ. िशवकुमार Eसादक िकछु किवत◌ा नaद िवलास राय
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अछैत पुM िनपुM पेट पीठमे सटल कपड़ा ठाम-ठाम फटल केश-दाढ़ी बढ़ल डॉंर सेहो झुकल गाल पचकल ऑंिख धँसल िबनु ठ¥ग नइ होइत रहैन चलल छातीक हार झक-झक देखाइत देह कँपैत दमाक रोगी जकॉं हँफैत अँगने-अँगने भीख मंगैत मुहसँ कहैत मिलकाइन िकछ दअ िदयौ िनपुतराहाकT मास-दू मासपर अबैत आ यएह बात बजैत...।
हम जलखै खा, खेलॱ पान आ जाइत रही दलान तखने ओ देिढ़यापर आएल आ देलक अवाज मिलकाइन िकछु दअ िदयौ िनपुतराहाकT।
तैपर हमर पÏी बजली ऐ िभखमंगाकT किन°ो
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निह होइ छै लाज से निह होइ छै जे करतै केकरो कोनो काज।
पÏीक बात सुिन हम िभखमंगा िदस तािक देखलॱ ओकर काया ओकर देह-दशा देख लागल हमरा बड़ माया।
हमरा मनमे भेल िकए निह सुिनऐ िभखमंगाक बेथा अपनाकT िनपुतराहा िकए कहैत अिछ की छै ओकर जीवनक कथा।
की वाxतवमे नै छै ओकरा बेटा आिक छै ऐमे कोनो राज?
हम ओकरा दलानपर लऽ गेलॱ बड़ आदरसँ जलखै करेलॱ पछाइत ओकरासँ पुछिलऐ ‘बाबा, अहॉं अपनाकT िकए कहै छी िनपुतराहा की नइ अिछ अहॉंकT बेटा?
हमर बात सुिन ओकरा ऑंिखसँ िगरए लगल दहो-बहो नोर।
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बाबा जुिन कानू कनलासँ निह हएत समxयाक िनदान ई कहैत आरो देिलऐ बोल-भरोष हमरा बातसँ भेलै ओकरा बड़ संतोष।
बौआ चािर बेटा रामकT एको निह काम-कT बौआ रहमर नाम छी राम परसाद आ घर अिछ लदिनयॉं जिहये पÏी मरल हमर तिहये अaहार भऽ गेल हमर सॱसे दुिनयॉं बौआ हमरो छल चािरटा जमीन-जथा बेच सभकT पढ़ेलॱ पढ़ा-िलखा कऽ मनुख बनेलॱ चा बेटा नौकरी करैए सभ अपन पिरवारक संग बाहरे रहैए मुदा हमरा िकयो ने देखैए मान िदन पिहने ओ भगवानक घर चल गेली मुदा हमरा भीख मगऽ लेल छोिड़ गेली।
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बौआ, जेठका बेटा अपन सासुक मृयुपर केलक रसगुcला-लालमोहनक भोज मुदा माए-बापक निह किहयो केलक खोज।
दोसर बेटा सािरक िबआहमे लाख टाक खच> किर केलक कaयादान मुदा ओहो निह किहयो देलक हमरा सभपर िधयान तेसर बेटा अपना सारकT पूनामे एमबीए पढ़बै छै सुनै िछऐ दस हजार टका मासे-मास पठबै छै सभसँ छोटका बेटा अिछ पÏीक बड़का भत हमरा जे िचि¬यो िलखैत सेहो ने भेटलै वत। सासु-ससुरकT संगे रािख करैत अिछ पितपाल ए8हर बाप भीख मंगै छै तेकर निह छै किन°ो िखयाल।
हम पुछिलऐ की अहॉंकT नै अिछ बेटी तैपर ओ बाजल बेटी अिछ वएह तँ केलक
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माइक ि¡या-कम> भगवान नीक करथुन ओकरा ओकरे भेलै सभसँ पैघ धम>।
फेर पुछिलऐ- बेटीए ओइठाम िकए चिल जा रहै छी गामे-गाम भीख िकए टहैल-टहैल मंगै छी?
तैपर ओ बाजल- बेटीक दुआिरपर रहबकT हम कखनो नै बुझै छी नीक तइसँ बिढ़यॉं गुजर करै छी मिग-चॉंिग भीख।
ऐ रचनापर अपन मंतय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। किवEीतम कुमार िनषादक िकछु किव ता हाय भूक8प माऽए गै बाप रौ सुनैत देखलॱ मचैत छल हड़क8प थड़ थड़ गूंजैत धरती िहलल िचकरल जन भूक8प तन मन थड़ थड़ हमरो कpपल डँरल िदल िदमाग। नेना भुटका जिन पु³खकT
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देखल भागम-भाग।।
हमहूँ थकमक करैत सोची हेहिर क जाऊ। जpघो कpपैत िथर निह होअए कोन सहारा पाऊ।।
िकछु िमनटेपर लोक हकिमत¥ सकप°ी संग बाजल के°र घर िगड़लै बाजै ने कालच¡ छल साजल।।
केओ कहिथ जे ह8मर औरदा निहं छल एखन पूरल। मृयुकालकT मुँहसँ जेना देह Eाण अिछ धूड़ल।।
आइ शिनचरा ह खेलैछल देश िवदेशमे सगरो। अपने हाल यथामे हकमैत सुइध कहp छल केकरो।।
बेरा-बेरी देखैत रहलॱ सभ मोबाइलमे भॴड़ल। घर-कुटुमैताक िजËासामे अपxयpत टहलल िफड़ल।।
केओ बाजए सन चॱतीस ईxवीसँ भूक8प छल बड़का। कहए केओ फेर िहललै धरती लगतै कहुँ दड़°ा।।
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 65
बूढ़ पुरान कहिथ हे बौआ भािग कऽ कऽ जएबह। सभतिर एहनेहालबनल छै नव बुइध कोन लएबह।।
िदन भिर गुनधुन भय आशंका जनमन भेल हेह। िकछु निहं फूरए अcलाह ईsर हे दैबा िकछु क।।
टीभी रेिडयोक समाचार संग जनजीवन भऽ गेल बेहाल। अखबारोक सुख¸मे दाण तहस-नहस देखल नेपाल।।
िहलल िहमालय केर िहम ख{डो काठमा{डूकT फूटल कपार। ित¦बत चीन भूटान औ यूपी कpपल रिह-रिह बंग-िबहार।।
एवरेxटक पव>त आरोही बेस कै8पमे िचकिर मरल। िहम ख{डक च¬ान िपघिलते पैघ Eलयसँ रहय अड़ल।।
धरहारा मीनार नौ मंिजला काठमा{डूकT कुतुब मीनार। िगरल धड़ाम ओ जमीaदोज भऽ झहुड़ा होइते लागल िकनार।।
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मिaदर-म{डप कोठा-सोफा दरकैत िगरैत मलवा भेल। मलवा संगे स«कड़ो मुद Eलय कालकT बलवा भेल।।
एिह घटना केर हाल बखानै नासा केर वैËािनकगण। सात दशमलव नौ िरटर संग घटना च¡सँ िससकए मन।।
भेल चौक±ा िवs िमMजन भारत अमरीका चीन सकल रैxयू ऑपरेशन रत भारत देखा देलक सहयोग अकल।।
भू-वैËािनक आंिक बतौलक िवमुख EकृितकT देखल कोप। मानव अपनेिह Eलय पुकारल त« धमकए भूक8प Eकोप।।
Eीतम गोहरए िवsमाaयवर ²लोबल वॉिम>ंग हड़पैए। आपदा-िवपदा धरती कोइखसँ भू-तापीय dव तड़पैए।। ¦
िवकासक द8भ हम िवकास कऽ रहल छी मुदा ñास भऽ रहल अिछ। ई, िवसंगितकT मानय कT
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यश-अपयश के लऽ रहल अिछ। की..! हम अिहना िवकास कऽ रहल छी? सभ देखैछ कालच¡ युग चापक Eभावसँ Eाकृितक पराभव औ Eभाव सेहो आजुक िपछल²गू जकp सिदखन चटपटाएल, धड़फड़ाएल... कखनॲ अलसाएल, तँ कखनो महुराएल... ह8मर xवाथ>क बलैया लऽ रहल अिछ। ई, िवसंगितकT जानय के..? यश-अपयश के? लऽ रहल अिछ की..? अिहना हम िवकास कऽ रहल छी?
हम, उसास कऽ रहल छी मुदा खटास भऽ रहल अिछ। ई, िवसंगितकT मानय के? उपकार-जनसेवा िसनेह आ म8मत जानए के आई-माई, िमिन सासुक, स8मत मानए के गोतनी सौितन ननिद निटिनयp देिख पड़ोिसन जरए डिकिनयp गौरवे आaहर गृिहणी किनयp उकटा प«ची सभ कऽ रहल अिछ की..? एहने हम िवकास कऽ रहल छी..? हम, उसास कऽ रहल छी मुदा खास भऽ रहल अिछ..! जिहना, चान-सु³जक हणसँ पसरल अaहार तिहना, अaधिवsासक चौपाइरमे कहाली बनल पिरवार सरकारी संहणक पंजीमे अिछ दज>
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ढोवैत, रोवैत रहए लोग िजनगी भिर कज>... जािहसँ फलय-फूलय... छल-Eपंचक राजनीित... फूइस, प¥च, गलबैिहया धेने गाम-घरमे रीत-कुरीित Ëानक मिaदर इसकुल जज>र दसगरजा घर सभटा गड़बर जय अaहरा िडठरा बमकै चतुर चलाको चुगला चमकै दpव-पTच दोगलई कT दलाली औनी पथारी सभ दऽ रहल अिछ तैँ नT हम िवकासक Eयास कऽ रहल छी मुदा सव>ास भऽ रहल अिछ ई िवसंगित कT मानए के? ई िवसगितकT जानए के? कीऽऽऽ एहने हम िवकास कऽ रहल छी? जे सव>ास औ ñास भऽ रहल अिछ?
ऐ रचनापर अपन मंतय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। राम िवलास साहुक िकछु किवता
मनक मोिल तन-मनकT केतबो धोलॱ
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 69
छुटल निह किहयो मनक मोिल तीथ>क पू{य बहुत कमेलॱ नदी, कु{डमे xनानो भेल तन रंगेलॱ मन रमेलॱ तैयो ने छुटल मनक मोिल तन-मनक मोिल रहए खरकटल कुिपत मन जे छेलाए बेकल तखने एकटा युित भेटल गॲता लगा सािहय पढ़लॱ Ëान पी गंगामे डुमकी लगेलॱ िमिथला धामक तीरपेखन केलॱ गामे-गाम भरल छला िव®ान जे करै छला जगतकT Ëानवान दूर कऽ देलैन मनक कलेश िबनु जप-तप केनिह हमरा तन-मन िनम>ल भऽ गेल तखने छुिट गेल मनक मोिल। q
तृÑणा तृÑणाक तृित जलसँ होइए अ±सँ िमटैए पेटक भूख दूध फल मेवा काया पोसैए औषिध करैए दुख दूर हीरा-मोती छी धनक भूख मनक तृÑणा किहयो ने िमटैए मरने जाइए संगे ि¡या-कलाप सयक सौिर पतालमे होइए यश xवग> धिर पसरैए सभ िकछु छोिड़ सुरधाम जाइए मुदा कम>-कुकम> दुनू संगे रहैए निह बpटैए अपनो िकयो
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 70
अधम¸ फलहीन वृK सन सुकम¸ अमृत सभ िदन पीबैए अËान अaहिरया राित होइए Ëान पूनमक चान कहबैए लोभ पापक असली खान छी सय जीवनक Eाण होइए धनक तृÑणा जंजाल बनैए तृÑणा मृगतृÑणा बिन कऽ लोभीकT लइए Kणमे Eाण तृÑणाक तृित xवगÆमे नै होइए भटैक जीव नरक भोगैए संतोखसँ परमानaदक सुख भेटैए। q बेटी बेटी देख िकए झखै छी नै छी बेटी अिभशाप यौ िदन बहुड़लै सभ बेटीकT घरमे हेतै ल×मी समान यौ माइयो बापक मित सुधरलै सरकारो दइ छै िधयान यौ बेटा-बेटीमे फक> नै रहतै अिधकार लेतै समान यौ िशKा पािब दहेज िमटतै बढ़तै समाजक मान यौ बेटी बचाउ केर नारा लगै छै हेतै सरxवतीक घरमे बास यौ जनक नaदनी सीता बिन कऽ देशक रखती मान यौ ए°ैसम सदी बेटीक युग एलै बनतै देशक नव इितहास यौ देशक बेटी देवी xवपा जगत केर करत कcयाण यौ
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उपेिKत भऽ बेटी जान गमेती केना हेतै सृिÇक िनमण यौ दुिखत भऽ किव कहै छैथ बचाउ बेटीक जान-मान यौ बेटी देख िकए झखै छी नै छी बेटी अिभशाप यौ।q
वसंतक गीत आएल वसaत कोइली कुहकैए मधु बरसैए चहुओर हे मह-मह महुआ रस टपकैए आमक मजरसँ मधु बरसैए हे पूरबा-पिछया मxती मारैए गुंजैत Óमरा मन भरमाबैए हे खग कलख वसaत गीत गाबए तोड़ीक फूलसँ खेत करैए सृंगार हे आएल वसaत कोइली कुहकैए मधु बरसैए चहुओर हे...।
सखी-सहेली बिगया घुमैए कली िखल करैए सृंगार हे मातल मधुकर तडव करैए िरतुराज बpटैए पुÑप पराग हे मनक िपयाससँ करेज जरैए िपया िबनु मन तरसैए हे वसaत बनल अिछ िचचोर जखन केकरापर करब सृंगार हे आएल वसaत कोइली कुहकैए मधु बरसैए चहुओर हे। q
केकरा लेल महगी घूसखोरीसँ चैन उड़ल
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दहेजसँ समाज दबल टुटल भेद-भावक बीच िजनगी मरल लूट हया अपहरण होइत रहल ई देश केकरा लेल बनल।
धम>क नामपर क¬रपंथी लड़ल जाित-पाितमे समाज बँटल धनीक-गरीबक बीच खािध बढ़ल काज िबनु मजदुर मिर रहल ई देश केकरा लेल बनल।
देशक मािलक नेता, अिधकारी बनल काला धनमे बेहाल नेहाल रहल खान खजाना कारखाना हुनके सटल गरीबक बेटा शहीद होइत रहल ई देश केकरा लेल बनल।
पािन िबनु खेत परती पड़ल घर छोिड़ िकसान परदेश खटल सुखले नहर टुटले पड़ल सुभाष, भगत, चadशेखर, गpधी
केकरा ले बिलदान पड़ल। गरीबक नाओंपर योजना बनल िशKा xवाxथमे घुन लगल मािट-पािन दवाइमे जहर घोरल धरासँ अ8बर धिर इंसान बदलल ई देश केकरा लेल बनल। q
धम>क उपदेश की भेल
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जेतए इंसानक काितल इंसाने होइए तेतए धम>क उपदेश की भेल-ए िववेक अिववेकक ®aदमे फँसल-ए सूर तुलसी कबीर मीराकT िबसैर गेल नीित उपदेश वेद पुराण शाxM जेना किलयुगमे तर पिड़ गेल-ए जेतए इंसानक काितल इंसाने होइए तेतए धम>क उपदेश की भेल-ए।
सजन संत महंथ तपसी बिन कऽ वन पव>तमे नुकाएल िफरैए रावण रामपाल, गुरिमत िसंह राम रहीम नारी संग अयाचारक रास नचैए चा युगमे किलयुग भारी पडल-ए धम>क आिड़क पाछू इंसानो शैतान जेतए इंसानक काितल इंसाने होइए तेतए धम>क उपदेश की भेल-ए।
जेतए माय मातृभाषा पछुआएल-ए दहेजक खाितर बेटी जीिबते जरैए अपन कलंक लोक गंगामे धोइए देवी देवताक पूजा सभ िदन करैए वल धन Ëानक वरदान मंगैए तेतए इंसानक इंसान िकए मरल-ए जेतए इंसानक इमान इंसाने होइए तेतए धम>क उपदेश की भेल-ए। q
जीिबते जी मरै छी
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की कहूँ सखी िपयाक िवयोगमे जुआनी जरबै छी जीिबते जी मरै छी।
चढ़ल यौवन ढरल जाइए जेना सौन भादोमे मेघो ने देखाइए।
निह पड़ल बू± िझिसयो ने पड़ैए धरती िपयासे धधैक जरैए।
बू±-बू± लेल बेकल Eाण ितयागने जाइए तिहना हमर मन िपयासे िपया िबनु जरैए।
आशक बाट तकै छी आँिख तािक िनरािर िहया हािर बैसल छी आँिखसँ नोर झरैए।
उमरल यौवन मनमे लहैर मारैए तन मनक आिग सहजे सहल नै जाइए।
दुिनयpक नजैर बदलल लगैए लोक देख-देख कऽ नजैर-मे-नजैर लड़बैए।
मजधारमे िजनगी दलदलमे फँसल-ए
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भिवÑयक बाट अaहाराएले सन लगैए।
िपयाक सनेस बाटे हेराएल-ए केना कटत िदन-राित सॱसे देह आिग लगल-ए।
केकरा देख जीअब दुिनयp अaहार लगैए की कहूँ सखी कहल निह जाइए जुआनी जरबै छी जीिबते जी मरै छी।। q
माघक जाड़- 2 बाप रौ बाप माघक जाड़ गलेलक हाड़ छुबैए Eाण लेत जान ओस-कुहेसमे धरती डुमल िचड़ै चुनमुन खॲतामे सुटकल कहुना बँचबैए अपन जान िबलसँ िनकैल फणधारी सभ मुँह पटैक-पटैक तेजैए Eाण जीब जaतु सभ िठठुर रहल-ए सुटकल पड़ल-ए अवहमे अिछ
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सभक जान कनकनी चलैए काल समान सु³ज-चानक दश>नो ने होइए िदन-राित अिछ ए°े समान पािन छुबै छी देह िसहरैए कान ठिर गिल कटैए देहक ईयॉं कpटो-कpट होइए संकटमे अिछ जान केना बँचाएब Eाण एहेन जाड़ िजनगीमे देखलॱ बुढ़ो-पुरान सभ अ¾ुते कहैए केतेकोकT लेलक Kणेमे Eाण कलपैत मुहT सभ िकयो कहैए भगवानो दुख दइए बाप रौ बाप माघक जाड़। q
िकसानक मजबुरी बाप रौ बाप, केना जीअब आब रौदे बसाते खेत खटै छी अदहे पेट खाए सुतै छी
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दुखे पकैड़ लेलॱ खाट रौदी-दाहीसँ लड़ैत महगीक मािर सहैत शोगमे कुहरैत माथ ठोकैत रहै छी कजमे डुमल छी दुखे-दुख सहै छी िजनगी ढहैत कोसीक धारमे बहै छी चौप¬ भेल खेती िधया-पुा िबलैट गेल जीवन तबाह भेल मजदुिरयो ने भेटैए मजबुरीमे परदेश खटै छी पढ़लो-िलखल िवदेश रहैए गाम-समाजकT के देखत केना बँचत गामक इजत िकसानी िजनगी दुखदायी भेल के सुधारत िकसानक समxया सॱगरपर सरकार चलैए कमीशनपर योजना बनैए पूजीपितक खेल होइए कृिष काज नै सुधरल आइ धिर ओकरे िबगाड़ैमे सभ िभड़ल-ए उपजासँ लगता बेसी नै उिचत बजार िमलैए अधम जीवन जीबै छी आमहया करैले सोचै छी केतेक दुख सहब िजनगी धिर की दुखे सहैले जनमल छी आब आगूक जीवन हािर चुकल छी डुिम मरैले मजबूर छी। q
बैशाखक िवष
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चैत िबतल बैशाख चढ़ल मुरझल फूल सुखल पात बpसक पात सेहो झड़ल घास सुिख मरल पड़ल चौर-चॉंचर सुिख फटल खा-डबरा मरता पड़ल धार नदी सेहो सुखल खेतमे दरािर दरकल चढ़ल गम¸ दुख बढ़ल तबधल धरती तबा समान िचड़ै-चुनमुन पािन खोजैले वौआए रहल-ए कोसक कोस पोखैर-इनार पिहने सुखल पतालक पािन तर पड़ल पािन िबनु जीवन केना चलत Mाससँ सभक मन तरसैए बैशाखक िवष चढ़ले जाइए केना बँचत जीवक जान सभ खोजैए पािनए-पािन Eदूिषत धरती अपने दुखी अिछ बैशाखक रौद उगलैए िवष सभकT लेत अखने Eाण। q
कोसीक कहर आएल कोसीक कहर पसैर गेल बािढ़क पािन िविलन भऽ गेल गाम-घर निह बँचल नाम-िनशान मिच रहल कोसीक कोहराम देखते भॉंिस गेल ब»चा-बेद गाए-महॴसक गेल जान अपन जान बँचबै खाितर लपैक पकड़लॱ मोटका गाछ तैपर लपटल फणधारी
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फुफकार काटैत करैए पहरेदारी देखते हमर Eाण उिड़ गेल मुदा दयावान बनेलक शरणधारी मानवसँ ओ सpप िहतकारी Eाण नै लऽ रKा केलक संगे केतेक िदन-राित िबतल नीचामे अथाह बािढ़क पािन ऊपर बहै छल बखक झॉंट जाड़क मारल भूखक हारल मौतक मुँहमे फँसल रहूँ भूखले Eाण टगै छेलॱ केतेक िदनक भूखल कोसी लाखक लाख जान खाए गेल हमरो हाथ छुिट गेल गाछसँ धब दए गीरलॱ बािढ़क पािन सभ िदनक लेल कोसीमे समाए गेलॱ। q
केकरापर करब vृंगार अपन घर छोिड़ िपया िकए गेलॱ जािन परदेश मनमे बढ़ेलॱ कतेक कलेश मुदा नै देलॱ बोल भरोष मन हमर अपचंग होइए रिह-रिह करेज डोलैए िसनेह िबनु देह हहरैए िजनगी बनल-ए दुखक पहाड़ की वैरणी केलक अहॉंक िशकार िबनु अहॉं केकरापर करब हम vृंगार।
पात जकp तन-मन डोलैए धीर मन अधीर होइए सबूरक बाaह ढिह गीरैए Eेम िवरहमे जरै-मरै छी अबगरहमे अिछ हमर जान
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जगतमे देखै छी शैताने शैतान आशक बाट लगैए सुनशान िजनगी बनल अिछ बीरान आब केते करब आओर इंतजार िबनु अहॉं केकरापर करब हम vृंगार।
अछैते औ³दे दुख सहै छी चढ़ल उमेर ढहल जाइए केतेक करब अहॉंसँ परहेज केकरा लगाएब हम करेज िन:सaतान छी मन वौआइए बाट देखैत भेल छी िनराश जेना फूलसँ तूिब गेल पराग दोसर देख कऽ अबलट जोड़ैए Eेम रोगक हम छी िशकार िबनु अहp केकरापर करब हम vृंगार। q
करमक खेल देखू भाइ करमक खेल िकयो बेचए नून तेल अमीर करैए कठखेल गरीबसँ नै रहल मेल केकरो रोिटयोपर ने तेल अखनो बेवxथा अिछ गरमेल िकयो खेलैए होरी खेल देखू भाइ करमक खेल।
अखनो धिर खेती नै सुधरल मजदूर सभटा पलायन भेल राम भरोसे जनता जीबैए िहंसक करैए िहंसाक खेल नीित-कुनीितक बीचिबचौआमे गरीब जनता िपसाए गेल
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समाजसँ सरकार बेमुख भेल देखू भाइ करमक खेल।
िशKाक नाओंपर ठगी होइए िशKालयमे होटल खुिज गेल पढ़ै बेरमे खेलैए गदहाक खेल िधया-पुाक करम फुिट गेल xवाxáय सेवा अिछ नाओं लेल अxपतालसँ भरोस उिठ गेल देखू भाइ करमक खेल।
देिखयौ देशमे नोटक खेल एकरे बलपर भìट कीनैए गदहाक माथपर ताज शोभैए िव®तजनकT राखैए कात मूखसन धृÑßराÇ सुतल रहैए जनताक खून िबका रहल-ए जनतंMक पिरभाषा बदैल गेल देखू भाइ करमक खेल।
खेत सुिख फाटल पड़ल-ए पािन िबनु खेतमे फसल जरैए पेट खाितर पेटबोिनया मरैए गरीबक समxया बढ़ले जाइए समाजक लोक िछिड़या रहल-ए सरकारी तंM जेना फेल भेल-ए देशक िवकास अधूरे रिह गेल देखू भाइ करमक खेल।। q
भीखमंगनी भीखमंगनीकT देख कऽ
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छगुaतामे पिड़ गेलॱ िचरखल चेथरीमे सुटकल अंग झलकैत देखलॱ हाड़-पpजर सुखल फुरकल केश आँिख धँसल मुँहपर फुफरी पड़ल मुदा बीसी चमकैत ठ¥गासँ कुकुर भगबैत भूख िपयाससँ तड़पैत कुहरैत पथपर बढ़ैत हाथमे पचकल टीनही बाटी आशमे हाथ आगू केने खाइले िकछु भीख मगैत डेिढ़यापर ठाढ़ भऽ बेर-बेर जोर-सँ बजैत कने खाइले िकछु दीअ हमर बेटी बेचनी रोटी-चटनी दैत बजली बैस खा कऽ पािन पीब लीअ दलानमे हम बैसले-बैसल देखलॱ नयन िनरािर भीखमंगनी रहए लचार बुिझ पड़ल नीके घर-खनदानक पुछिलऐ िकयेक भेल ई हाल भीखमंगनी डबकल आँिखकT ऑंचारसँ पोछैत बजली- निह छी कुलKणी, छी कमसुतनी मुदा दहेजक खाितर पीट-पीट हमरा केलक ई हाल िनRुर पितकT दया-धम> नइ-ए सासु-ससुरकT नै अिछ लाज सभ िदन मारैए घूसा-लात के पोछत हमरा नोरकT कखनो िनपुMी-कुलKणी कहैए लाठी मािरसँ देह तोड़ैए
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घरसँ भगबैए सpझ-िवहान बड़ गंजन सहैत रहलॱ मुदा मरब तँ नइए असान जाधैर अिछ घटमे Eाण िभखो मिग राखै छी मान सु³जकT हाथ जोिड़ कहै छी केकरो नइ िदहक एहेन Ëान सासु-ससुर पितदेवकT दीहक सुमित-सòËान हमरो बँचाबह इजत Eाण। ऐ रचनापर अपन मंतय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। १.अनुवादक डॉ. िशवकुमार Eसादक िकछु अनुिदत काय (मूल रजनी छाबड़ा- िहaदी) २. किव डॉ. िशवकुमार Eसादक िकछु किवता
१ अनुवादक डॉ. िशवकुमार Eसादक िकछु अनुिदत काय (मूल रजनी छाबड़ा- िहaदी) (PAGHALAIT HIMKHAND Maithili translation of ‘PaighalteHimkhand’ An Anthology of Hindi Poems by Rajni Chhabra from H indi into Maithili by Dr. Sheo Kumar Prasad.) ई केहेन नाता ई केहेन नाता अिछ खुशी अहpकT भेटैत अिछ खोइछ हमर भिर जाइत अिछ।
करोट जखन अहp घुमै छी हमर सुख हेरा जाइत अिछ।
चोट अहpकT लगए
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नोर हमर आँिखमे डबडबा जाइत अिछ।
अहpक आँिखमे नोर छल -छलाइसँ पिहनिह अपन िपपनीमे समेटबाक मन होइत अिछ।
अ¬खेल करैत लहैरमे िकएक अहpक छिव अभरऽलगैत अिछ।
चुपे-चाप मौसम गुनगुनाए लगैत अिछ अहpक xमृित हमरामे बिस जाइत अिछ।
कानमे िमठगर घaटी सन बाजए लगैत अिछ जखन अहpक बोलक जादू पसरैत अिछ।
िजनगीक आधा खाली जाम आधा भरल नजैर अबैत अिछ।
अनाम स8बaधकT नाम देबए -मे श¦दो भ{डार खाली भऽ जाइत अिछ।
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अहॴ कहू ने अहpसँ ई केहेन नाता अिछ ? q
मनक पखे आकुल नैन याकुल बाट अलोिपत होइत आिड़ -धूर ,
िKितजकT छुबाक आस अतृत िपयास।
तबधल रेिगxतानमे सौनक बात नेहक मेघकT बरसब िजनगीक भीजब ,
छô सपना फुजल आँिखक छल।
मनक पखे केर पpिख कतरब यएह अिछ यथाथ> केर धरातल। q
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कचोट अधखड़ु िजनगीक चोट एना िजनगीमे सिaहया रहल अिछ ,
जेना किरया राितक गाढ़ रोशनाइ नोरोसँ निह धुआ रहल हो। q
xमृित अहpक गु8मी अहpक आँिखक िजèासँ अनकहलो बात कथा बिन जाइत अिछ।
नहुसँ छुिब कऽ बात फुला जाइत अिछ अधफुलल किलकाकT ओ छुअब िजनगीक मxती बिन जाइ छै।
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अहpक गमक लऽ कऽ अबैत अिछ वात ओ Kण बिन जाइ छै िजनगीक xमृित। q
आसक िचड़ै मन तँ आसक िचड़ै छै एकरा िकए बाaहै छी कैदी बनैले मनुषक देह की कम अिछ ? q
२ किव डॉ. िशवकुमार Eसादक िकछु किवता भोग हम जे भोिग रहल छी ओकरे भािख रहल छी फाग िदयारी ओ अगहन केर काितक सन हम कािट रहल छी िजनगीक सभ मनोरथ नोरक तरे आँिक रहल छी। q
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जाड़ सॱसे िदन अिगयािसये बीतल राितक कोन िठकाना क8मर तोसक सँ तँ नीक छल नारे-पुआर िबछाना कहुना कऽ जार सँ बpची टोपीसँ नीक छल गpती।
मनक मन जरना िनत जड़ए तैयो जाड़ निह मानए कतबो देह पर कपड़ा लादी तैयो जाड़ निह भागए कोना क जाड़ सँ बpची टोपीसँ नीक छल गpती।
गाए महॴस थैर पर कpपय गुदरा क8मर ओढ़ने गाछ पर िचड़ए िवकालक मारल देऽह लोल सटौने सबहक िचaता भारी टोपीसँ नीक छल गpती। q
कनकनी छुटै छै बोखार सबहक िकछ निह फुरैत छै िदनोमे छै राित जकp कन कनी बढ़ले जै छै। छुटै छै... ।
बूढ़ ब»चा खेaहरामे तैयो कँप कँपैत छै मालजालक कोना के कहत केहेन ओकर हाल छै। छुटै छै... ।
घरसँ बाहर सगरे तन मन कँपैत छै हेतए अनथ> एिह बेर तेहने आब बुझैत छै।
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छुटै छै बोखार सबहक िकछु नै फुरैत छै। q
िरजcट नाच गान आ शान सपटिह बाबू सभ मशगूल पढै िलखैमे लालबुझकर छोड़लक सभ इxकूल।
छोड़लक सभ इxकूल ने जानै पोिथयोकेर ओ नाम तीन तीन बेर परीKा देलक भेटय ने िरजcटमे नाम।
भेटय ने िरजcटमे नाम मxटरबा सभ ए°े छै कोनो िबषयमे न8बर दस से ऊपर नै छै। q
िजनगीक झमेला िजनगीक मेला आब खेला लगैत अिछ आिग िक पािन हो झमेला लगैत अिछ। िकनका की कही िकनका लग बैठी काम िनÑकाम बेकामे लगैत अिछ िजनगीक .... ।
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जड़ैत छै पुआर तँ लपकै छै धधरा मन जखन जड़ै तँ देह जाएछै पझहा नोरक ठेकान कोन कखन पघैल जाए देह मन दुनु आब बेकाबू लगैत अिछ। िजनगीक .... ।
पढ़लहुँ जे गुनलहुँ अिछ एखनहुँ सहोदर भाइये बिहन सन नेहगर आ पोरगर ओकरे बदोलैत िजनगी खेपाइत अिछ ऊँच नीच टेढ़ -मेढ़ ए°े लगैत अिछ िजनगीक .... । q
गाम छूटल फेर आइ गाम छूटल। नैत छल नाितन छल सु²गा सन मेना सन बेटी छल बेटा छल आँगन बनल कचबिचया मचान छल आइ ओ बथान छुटल फेर आइ गाम छूटल।
नार पुआर संग गोरहा गोरह±ी मोट पातर ठािढ सँ घूरा बना कऽ हँसैत खेलाइत छलहुँ सभ िकछ आइ छूटल फेर आइ गाम छूटल।
जाड़ संग ठाहÆ छलै रोटी संग सागो छलै
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मारा संग मआ रोटी दूध संग छाäी छलै चलैत खन नैत नाितन संग नोरक टघार छूटल फेर आइ गाम छूटल। q
िछितर -िबितर कन कन मन संग घुमलहुँ सगरो कन कनाइत छल देह मन निह मानय तैयो घुिम घुिम आबी पुरने गेह मन अपचंक रहै अिछ सिदखन केतए हेराएल नेह।
सभ िदन सभ केर मन पुरेलहुँ बिन -बिन अदराक मेघ अaत समय आब आिसनक मेघ सन िछितर -िबितर भेल गेह। q
जाितक छाऊर छौरक ढेरीमे तकैत रहलहुँ अपन आदर
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सनमान ई जनैत कहp छेिलऐ छाऊर छाऊरे रहैत छै। पािन सुिखते उड़ए लगै छै। कतबो जल िकएक ने िछटल जाय।
आिखर ई जाितक छाउर कतेक िदन अिहना उिड़या-उिड़या सभ िकछु झॉंपैत रहतइ ! q
ईहो तँ िजनगीए छै जखन देखैत छी िजनगीक ओल झोल मोल तोल ऊँच नीच अपन कT आन सन आन कT समग सन अपनेमे ट¥ढ़ लाख दू लाख पर छpटैत बड़पन तँ देख देख कखनो हँसैत समाज बीच कहुना जीिब लैत छी अपनेमे सिaहयाइत ईहो तँ जीनगीए छै। q
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गामक बात ई मौसम अिछ कतेक नीक धाMी फरल बैगन फरल आलू उखरब अिछ नजीक कुरथी दािलक पुछू ने बात अपना गामक राखी आश की कहू अपन गामक बात।
बथुआ संग खेसारी साग मटर पालक भेल भकरार धिनया आ धाMी केर चटनी नबका चौरक मीठगर भात की कहूँ अपन गामक बात।
िडcली ब8बई बड़का नगर अपना गामक सुटकल डगर बड़का नगर आब धरऽ दौड़ए अपने गामक रािख आश की कहूँ अपन गामक बात
कोबी-मूड़ -मटर केर िछ8मी खेत -खेतमे हँसैत गु8मी कन -कन सागक संग सोहनगर लागए केहन सु±र गात की कहूँ अपन गामक बात। ऐ रचनापर अपन मंतय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। िवदेह नूतन अंक बालान कृते िवदेह मैिथली मानक भाषा आ मैिथली भाषा स8पादन पाíय¡म भाषापाक
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 94
डॉ. शिशधर कुमर "िवदेह " ।। xव . अटल िबहारी वाजपेयीजी - एकटा मैिथलक सादर , िवन vजिल ।। छलाह मंMी - Eधान, बात अपना जगह । राजस8मान - मान - दान, अपना जगह । हम छी मैिथल, हमर मनमे हुिनकर xथान, राजनीितसँ अलग, थीक अपना जगह ।। दल - खेमा - िवपK - पK, अपना जगह । छाप छोड़ल xपÇ नीक, अपना जगह । हम छी मैिथली अिकõचन, हमर नोरपर, Íयान देलिaह, से बात दीव, अपना जगह ।। भेलै सॱसे िबकास सpच, अपना जगह । तकनीकीक बताह नpच, अपना जगह । हम छी िमिथला, आँचरक फाटल नुआ, सीिब देलिaह ओ, भाव से, अपना जगह ।।
ऐ रचनापर अपन मंतय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।
िवदेहक िकछु िवशेषक :- १) हाइकू िवशेषक १२ म अंक , १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल िवशेषक २१ म अंक , १ नव8बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tir huta.pdf 21.pdf ३) िवहिन कथा िवशेषक ६७ म अंक , १ अटूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67
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४) बाल सािहय िवशेषक ७० म अंक , १५ नव8बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक िवशेषक ७२ म अंक १५ िदस8बर २०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी िवशेषक ७७म अंक ०१ माच> २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_T irhuta 77 ७) बाल गजल िवशेषक िवदेहक अंक १११ म अंक , १ अगxत २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 11 1 ८) भित गजल िवशेषक १२६ म अंक , १५ माच> २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समीKा िवशेषक १४२ म, अंक १५ नव8बर २०१३ Videh a_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 १० ) काशीकत िमv मधुप िवशेषक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरिवaद ठाकुर िवशेषक १८९ म अंक १ नव8बर २०१५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश चad ठाकुर अिनल िवशेषक १९१ म अंक १ िदस8बर २०१५ Videha_01_12_2015 १३ ) िवदेह स8मान िवशेषाक- २००म अक १५ अEैल २०१६ / २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016
Videha_01_07_2016
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१४ ) मैिथली सी.डी./ अcबम गीत संगीत िवशेषक - २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंिMत रचनापर आम ंिMत आलोचकक िटपणीक शृंखला १. कािमनीक पच टा किवता आ ओइपर मधुकाaत झाक िटपणी VIDEHA 209th issue िवदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 जगदीश Eसाद म{डल जीक ६५ टा पोथीक नव संxकरण िवदेहक २३३ सँ २५० धिरक अंकमे धारावािहक Eकाशन नीचpक िलंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018
Videha_01 _05_2018
Videha_15_04_2018
Vid eha_01_04_2018
Videha_15_03_2018
Videha_01_03_2018
Videha_15_02_2018
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Videha_15_09_2017
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िवदेह ई -पिMकाक बीछल रचनाक संग - मैिथलीक सव>vेR रचनाक एकटा समानाaतर संकलन िवदेह :सदेह :२ (मैिथली Eबaध -िनबaध -समालोचना २००९ -१० ) िवदेह :सदेह :३ (मैिथली प^ २००९ -१० )
िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com
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िवदेह :सदेह :४ (मैिथली कथा २००९ -१० ) िवदेह मैिथली िवहिन कथा [ िवदेह सदेह ५ ] िवदेह मैिथली लघुकथा [ िवदेह सदेह ६ ] िवदेह मैिथली प^ [ िवदेह सदेह ७ ] िवदेह मैिथली नाÌय उसव [ िवदेह सदेह ८ ] िवदेह मैिथली िशशु उसव [ िवदेह सदेह ९ ] िवदेह मैिथली Eबaध -िनबaध -समालोचना [ िवदेह सदेह १० ] The readers of English translations of Maithili Nove l "sahasrabadhani " and verse collection "sahasrabdik chau par par " has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili . Therefore the Author has started translating his Maithili works i n English himself . After these translations are complete these would be the of ficial translations authorised by the Author of original work .-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha -pothi/ Maithili Books can be purch ased from: http://www.amazon.in/ For the first time Maithili books can be read on ki ndle e -readers. Buy Maithili Books in Kindle format (courtesy Videha) from amazo n kindle stores, these e books are delivered worldwi de wirelessly: - http://www.amazon.com/ िवदेह स8मान : स8मान-सूची
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५७ म अंक ०१ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५७ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 99
मैिथली सािहय आaदोलन (c)2004-18. सविधकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अिछ ततऽ संपादकाधीन। िवदेह- Eथममैिथली पािKक ई-पिMका ISSN 2229-547X VIDEHA स8पादक: गजेad ठाकुर। सह-स8पादक: उमेश मंडल। सहायक स8पादक: राम िव लास साहु, नaद िवलास राय, सaदीप कुमार साफी आ मु±ाजी (मनोज कुमार कण>)। स8पादक- नाटक-रंगमंच-चलिचM- बेचन ठाकुर। स8पादक- सूचना-स8पक>-समाद- पूनम मंडल। स8पादक- अनुवाद िवभाग- िवनीत उपल।
रचनाकार अपन मौिलक आ अEकािशत रचना (जकर मौिलकताक संपूण > उरदाियव लेखक गणक मÍय छिaह) editorial.staff.videha@gmail.com कT मेल अटैचम े{टक पमे .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉमµटमे पठा सकै छिथ। रचनाक संग रचनाकार अपन संिKत पिर चयआ अपन xकैन कएल गेल फोटो पठेता, से आशा करै छी। रचनाक अंतमे टाइप रहए, जे ई रचन ा मौिलक अिछ, आ पिहल Eकाशनक हेतु िवदेह (पािKक) ई पिMकाकT देल जा रहलअिछ। एतऽ Eकािशत रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संहक लोकिनक लगमे रहतिaह, माM एकर Eथम Eकाशनक/ िEंट-वेब आकइवक/ आकइवक अनुवादक आ आकइवक ई-E काशन/ िEंट-Eकाशनक अिधकार ऐ ई-पिMकाकT छै, आ से हािन-लाभ रिहत आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयcटीक/ पािरvिमकक Eावधान नै छै। तT रॉयcटीक/ पािरvिमकक इ»छुक िवदेहसँ नै जुड़िथ, से आह। ऐ ई पिMकाकT vीमित ल×मीठाकुर ®ारा मासक ०१ आ १५ ितिथकT ई Eकािशत कएल जाइत अिछ। (c) 2004-18 सविधकार सुरिKत। िवदेहमे Eकािशत सभटा रचना आ आकइवक सविधकार रचनाकार आ संहक लगमे छिaह। ५ जुलाई २००४ कThttp://gajendrathakur.blogspot.com/2 004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसिरक गाछ”- मैिथली जालवृसँ Eार8भ इंटरनेटपर मैिथलीक Eथम उपिxथितक याMा “’िवदेह’- Eथम मैिथली पािKक ई पिMका” धिर पहुँचल अिछ,जे http://www. videha.co.in/ पर ई Eकािशत होइत अिछ। आब “भालसिरक गाछ”जालवृ 'िवदेह' ई-पिMकाक Eवताक संग मैिथली भाषाक जालवृक एीगेटरक पमे Eयुत भऽ रहल अिछ। िवदेह ई-पिMका ISSN 2229-547X VIDEHA िसिरxतु