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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५८ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 222 9-547X VIDEHA 1
ISSN 2229-547X VIDEHA 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत7बर २०१८ (वष= ११ मास १२९ अंक २५८ )
िव दे ह िवदेह Videha িবেদহ http://www.videha.co.in िवदेह Dथम मैिथली पािJक ई पिLका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह Dथम मैिथली पािJक ई पिLका नव अंक देखबाक लेल पृQ सभकS िरTेश कए देखू।
ऐ अंकमे अिछ:- १. संपादकीय संदेश
२. ग] २.१.१.देवेश झा-१.िह_दू िववाह :एक समीJा २.‘दू-पL’ उप_यासक िवcलेषणाeमक अfययन २. आशीष अनिच_हार- िहंदी िफjमी गीतमे बहर- २ ३. डॉ. योगे_o पाठक ‘िवयोगी’- उप_यास- हमर गाम (आगq) २.२.१. नारायण यादव- भाय-बिहन २. डॉ. बचेrर झा-मैिथली सािहeयमे यदुनाथ झा ‘यदुवरक देन ३. राजदेव मuडल- वापसी (एकvकी) २.३.रबी_o नारायण िमw- तीनटा आलेख, दूटा लघुकथा आ उप_यास नम{त{यै (आगq) २.४.जगदीश Dसाद मuडल- पंगु (उप_यास) धारावािहक आ दूटा लघुकथा
३. पद ◌्य ३.१. न_द िवलास राय - िकछु किवता
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३.२.किव Dीतम कुमार िनषादक िकछु किवत◌ा ३.३.र◌ामिवलास साहु- िकछु किवत◌ा ३.४.१.अनुवादक डॉ. िशवकुमार Dसादक िकछु अनुिदत काय (मूल रजनी छाबड़ा- िह_दी) २.किव डॉ. िशवकुमार Dसादक िकछु किवत◌ा
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२.१.१.देवेश झा-१.िह_दू िववाह :एक समीJा २.‘दू-पL’ उप_यासक िवcलेषणाeमक अfययन २. आशीष अनिच_हार- िहंदी िफjमी गीतमे बहर- २ ३. डॉ. योगे_o पाठक ‘िवयोगी’- उप_यास- हमर गाम (आगq)
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२.२.१. नारायण यादव- भाय-बिहन २. डॉ. बचेrर झा-मैिथली सािहeयमे यदुनाथ झा ‘यदुवरक देन ३. राजदेव मuडल- वापसी (एकvकी) २.३.रबी_o नारायण िमw- तीनटा आलेख, दूटा लघुकथा आ उप_यास नम{त{यै (आगq) २.४.जगदीश Dसाद मuडल- पंगु (उप_यास) धारावािहक आ दूटा लघुकथा १.देवेश झा-१.िह_दू िववाह :एक समीJा २.‘दू-पL’ उप_यासक िवcलेषणाeमक अfययन २. आशीष अनिच_हार- िहंदी िफjमी गीतमे बहर-२ ३. डॉ. योगे_o पाठक ‘िवयोगी’- उप_यास- हमर गाम (आगq) १ देवेश झा-१.िह_दू िववाह :एक समीJा २.‘दू-पL ’ उप_यासक िवcलेषणाeमक अfययन िह_दू िववाह :एक समीJा Dमुख िवचार िवंदु : 1॰िववाह 2॰ कत=य 3॰ यौवनक आवेग 4॰ ान 5॰ Dित{पधक संवेग 6॰आदश= संबंध 30 जून 2018 के दैिनक जागरण पL िववाहक अदभूत दश=न करौलक । िकछू घंटाक िववाहक िविध नवोढ़ा क_याक (नाियकाक) सम {व_द अि{तeवक शू_यक धरातल पर आनबा मे सJम भऽ जाइत अछ । कतऽ नवयौवनक िनि _त आ म{त जीवन आऔर कत अपर पJक क=यक कारख़ाना । प£ी एवं गृिहणीक जीवन कोनो घरक आबालबृfद घर पधारल प£ी ¤पी बहूकदेिख परमानंदक अनुभूित करैत बजै छैिथ- आब की ? कोन िचंता ? घरमे नव किनया आिबये गेल छैथ, सब काज करबे करती आ सब सहबे करती, चलू िमठाई खाऊ आ खुशी मनाउ। िक_तु एतिहसॅ असंतुलनक आ=नादमुखिरत होइत अिछ जे क_या यौवनक आवेगमे ान एवं Dित{पधक संवेग संबलसॅ अनु{यूत उचपदाकvJाक संग “सुपर वुमेन “ बनवाक कामनासॅ {फुिरत आर {पंिदत होदत रहैत छैिथ ओ प£ी तथा गृिहणीके दाियeवसॅ दिबक आहत होइत अपना जीवनके िधªारय लागैत छिथ । जाखनािक हमरा सभक मfय िकयो एहेन दुखद भाव निह रखैत छिथ । ते आवcयक बुझना जाइत अिछ जे पित-प£ीक आदश= संबंधके बुझबाक लेल िववाह एवं िववाह िविध केर पुरातन-नूतन ¤पके बुझल-बुझाओल जाय।यथा- िह_दू िववाह धमम= िववहके एक Dकरण सं{कार मानल गेल अिछ, जकरा दा7पeय जीवनक उरदाियeव कहल जा सकैत अिछ। अ_य धिम=क अनुसारे िववािहके पित-प£ीक बीच एक Dकरण समझौता सेहो किहत उिचते।
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ओना िववाह एक समझौता त िथिकए, मुदा िववाहोपरvत पित-प£ीक संबंध मे अि«नके साJी मनीके सात फेरा लेगाबैत छी जे हम सदा दुनू साथ रहब, मुदा अजुक जमाना िकछू और अिछ। हम अि«नके साJी मानी पिवL बंधनमे त बंधी जइत िछ मुदा समयके बदलैत ¬ममे िकछू िदनमे एिह पिवL संबंध िनवरहन करयमे आजुक युवाती-युवक के िकछू उक¤ बुिझ पड़ैत अिछ। वैिदक कालमे िववाह सं{कार एक महeeवपूण= सं{कार मानल गेल अिछ । ऐिह सं{कार मे {वागत- सeकार, िववाहक उोष, व{Lािद उपहार, वर- वधुक Dिता,क_यादान, गु®तदान, दहेज, पािणहण, ंिथ बंधन, िववाहक िवशेष य, सात-पिर¬मा, िशलारोहण, ¯ुव आ सूय=क दस=नक, शपथ आrासन आिद ि¬यासॅ िनवृ होमय पड़ैत अिछ । िह_दू धम=मे गृह{थ जीवन मानु°य के दाियeव िनव=हाणक यो«य बनबाक एक माग= थीक, जािहमे शारीिरक, मानिसक आ आिथ=क पिरप±वताक ान होइत अिछ । एिह ¬ममअनेक विरQ यि±त, गु²जन, कुटु7ब संबंधी सबसॅ धम=, पुजा-पाठ, देवेताक आवाहन, अनुQान करायबाक ान Dा®त होइत अिछ । ओना तॅ िववाह आठ Dकारसॅ स7प³ होइत अिछ। 1॰ ´ाµ िववाह :- सुयो«य वरसॅ क_याक िववाह िबना कोनो दान दहेजक करबाक Dथा दुनू पJक सहमित सॅ होएब ´ाµ िववाह कहाबैत अिछ । 2॰ दैव िववाह :- कोनो सेवाक भावसॅ िकछू मूjय लऽ क पिहने अपन क_याके दानमे दैत िथ_ह ई दैिववाह भेल। 3॰आष= िववाह :- ओना तॅ ई िववाह पिहने क_यादान बदला गौदानक ²पमे होइत छल। पिहने पुिLक िववाहक लेल वर पJ गायक दान करैत छलाह। एकरे आष= िववाह कहैत छी। 4॰ Dजापeय िववाह :- मैिथल संDदायमे क_याक िववाह दोसर वाग=क वारसॅ करा देव Dाजापeय िववाह कहाबैत अिछ । 5॰ गंधव= िववाह :- दुनू पJक सहमितसॅ कोनो रीित िरवाजक अनदेखी करैत वर- क_याक िववाहके गंधव= िववाह कहल जाइत अिछ। एकरा ई युगमे Dेम िववाह सेहो कहैत छी । जेना :- दू°य_त-शकु_तलाक िववाह गंधव= कहल गेल िजनक पुL भरत भेलाह। हुनके नाम पर हमर देश पड़ ल भारत । 6॰ असुर िववाह :- व=मान सामयमे िववाहक जे Dथा चलैत अिछ, ओकरा असुर िववाह कही तॅ कोनो हज= निह । ज़ोर जबरद{ती भगाक दान काय=क दहेजक िबना िववाह असुर िववाह कहाबैत अिछ । 7॰ राJस िववाह :- क_याक सहमितक िबना िववाह करब राJस िववाह कहाबैत अिछ । 8॰ िपशाच िववाह :- क_याक मदहोसक अव{थामे वा वरक िकछू नशाक अव{था मे िकछू खुआके लऽ जा के िववाह कराएब िपशाच िववाह कहाबैत
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अिछ । भारतीय सv{कृितक अनुसार िववाह कोनो शारीिरक आ सामािजक अनुबंध माL निह अिछ अिपतु दूनूक दा7पeय जीवानेक एक wेQ आfयािeमक साधनाक ²पमे दशओल गेल अिछ । ठीके कहल गेल अिछ :- “ध_यो गृह{थाwम: ”। िमथालमे पिहने सॅ िववाहक Dथा अनेक दृि¸कोणसॅ देवताक आवहानक उपरा_त अि«नदेवके साJी ²पमे संकjप आिद करक व²ण देवसॅ कृपालाभक बड़ अदृ¸ फल होएत अिछ अिह दुनू शि±तके एक िहएबाक एक गंभीर बात आय= िववाहमे राखल गेल छल । िववाहक संबंधमे आय=यूगसॅ प£ीक िदिशसॅ पितक शतायु होयबाक Dाथ=ना आ पितक िदशसॅ अिभ³ दा7पeय Dेम Dाथ=ना कएल गेल अिछ जेना । राघवे_oे यथा सीता िवनीता काcयपे यथा । पावके च यथा {वाहा तथा eवं मिय भ=िह । आिद आिद (धम=िवान,पृ0156) एिहDकार जेना रामक Dित सीताक कcयपके Dित िवनताके, अि«नक Dित {वाहाक, िदलीपक Dित सुदिJणाक, वासुदेवक Dित देवकीक, अग{तक Dित लोपमुoाक, अिLक Dित अनुसूइयाक, यमदि«नक Dित रेणुकाक आ wीक़ृ°णक Dित ²ि±मणीक पिवL Dेम छलै_ह ओएह Dेम आजूक वर क_या मे मधुर Dेम जीवनक ई Dाथ=ना आय= िववाह कालसॅ अिछ जे एिह युगमे संभव निह बुझाबैत अिछ । एतय हमर मंतय अिछ जे िववाह एक पित प£ीक बीच पर{पर िवrासक एक समझौता तॅ िथकीए संगे- संग एक Dकारक क=य सेहो थीक जे िववाहोपरा_त यि±तक जीवन शैिलमे कतेक Dकारक उतार- चढाव अबैत अिछ जािह मfय मनु°य जीवन गाड़ीक दुनू पिहयाक सदृश घुमैत ई िजनगी सुख-दुखक अनुभव करैत िबतैत अिछ । िववाहक िवषयमे िकछू िमलल-जुलल त»य युि±तसंगत बुिझ पड़ैत अिछ। यथा – जे पिहने एक दोसरसॅ आनिठया (अनिच_ह) पुन: ¬मश: एक दोसर पर आिwत , उरोर सॱसे (संपूण= ) िजनिगक संग , शनैह-शनैह पर{पर अिभ³ अपनामे,
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एक उदा आनंदयु±त मधुर {पश= , अक{मात् अपनामे ²¸ नोक- झॲक, उचावच मित पर चलैत बढ़ैत िवरि±त-, िवभेद-तलाकक िकनार तक। कतहु िजद आ कतहु मानक अहम भाव , तथािप रकम-रकम दुनु िनकट सुLमे ब_हैत एक पु°प माल, इ मधुर अातसॅ ातक िदशामे , चलैत Dाणा_त पय=_त समय साfय याLा , किनया वरक इ कटु मधुर संबंध कखनहु, अचार कखनहु ित±त चटनी तॅ संगही मधुर , रसायनक शाही भोग कखनहु लावuय कखनहु नीम, सब कीछु िमली भौितक जगतक ²प पिरणत होइत अिछ । कायक नवरश ²िचर भोगमे, दु:खहुमे आनंद, परमानंद जािहमे या®त , दुखज जीवनक सुख ।
पुन : िववाह थीक एक आश िवrास िमलनमे आनंद , समाजमे जीवनक समप=ण , भल हो ओिह नवोढ़ा नािर केर , जे अचानक लेल अपनाके eयािग देलैथ,
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अपना लेलैथ, सव=था अनिभके , अपना ॲ◌ाचर मे समा लेलैथ। तािहना ध_य छैथ ओ पु²ष िसंह, जे नवागता अनिच_हािर अबला पर , {नेिहल िवrास करैत अपना गर धरा, सम ऐrय= आ {वयंके सौिप देलैथ , आओर की कहू-वाह रे िववाह, आह रे िववाह ।
देवेश झा Dाfयापक, मैिथली िवभाग एन0 डी0 कॉलेज, रामबाग , पुिण=या । 2
‘दू-पL’ उप_यासक िवcलेषणाeमक अfययन पLाeमक शैली म िलखल गेल एवं 1969 ई0 म सािहeय अकादमी ¿ारा पुर{कृत कएल गेल ‘दू-पL’ उप_यास उपे_oनाथ झा ‘यास’ क िवषय तथा िशjप दुनू दृि°तएँ अeयंत महeवपूण= लघु उप_यास िथक एिह उप_यास म दुई गोट मिहलाक दुई टा पL अिछ जािहम एक पL भारतीय मिहला wीमित इ_दु देवी नौ वष= सॅअमेिरका म रहैत अपन {वामी कँ िलखने छिथ ओ पिहल पL िथक । एकर अंेजी अनुवादक Dितिलिप इ_दु देवी क मिमयौत भाई रमेश छिथ । रमेश सेहो िकछू वष= पूव= {वयं अमेिरका चिल गेल छलाह ओ अपन पLक संग पठा दैत छिथ_ह । ओ दोसर मिहला जे इ_दु देवी के हुनक पLक उर दैत छिथ_ह से िथक अमेिरका िनवासी जेिसका अमेिरका मे इ_दु देवी क पित सुरे_o क संगी रहिथ । आ ई िथक एही उप_यासक दोसर पL । एिह
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उप_यासक सभ सँ पैघ िवशेषता िथक पLक माfयम सँ दू सं{कृितक िववेचना दुनू पLम दुनू देशक सÁयता, सv{कृित ओ सं{कार आिद साकार भ उठल अिछ । पा ाeय सv{कृितक Dितमूित= जेिसका कोन ¤पँ आपन पL म अपन सv{कृितक कएने छिथ से वण=नीय अिछ । ओ अपने सv{कृितक अनु¤प पL िलखने छिथ । तिह लेल एिह पLक िनÂ अंश o¸य िथक {वािमक लग रहला सँ सुख चैन Dाय: छैक , परंतु ब_धनॱ तँ कम नहॴ । आ ई त fयान म रखक िथक जे जतै कतहु रही, अपन माययदा {वतंLता बड़ िDय अिछ । ओिह पर आधार होयब हमरा आिद हुनक काज त हुनको हमर काज, नहॴ तँ हुनक तरवा चटैत, नौकरानी भेली िकए रहिथ_ह? ई िथक पा ाeय सं{कृितक झलक । मुदा भारतीय सv{कृितक िवशेषता िथक जे िकछू भ जेतैक मुदा भारतीय नारी अपन पित कँ सवÄपिर बूिझते रहत जकर उदारहण िथक इ_दु देवी ¿ारा िलखल गेल पLक अ_तक िव]ापितक पद । जकरा दोहराबैत इ_दु देवी पL कँ समा®त करै छंिय । पित ¿ारा एतेक गलती केएलाक बादो हुनका ¿ारा एतेक अपमान, अeयाचार सहलाक बादो हुनका ¿ारा एतेक अपमान, अeयाचार सहलाक बादो हुनको पर कोनो दोष निहं लागल । अपन माथ पर सभ दोष लड कर पित कँ जुग-जुग िजवाक हेतु कामना करैत छिथ । एिहठाम इ_दु देवी ¿ारा िलखल पLक िकछु अंश o¸य अिछ – “युग-युग िजबयु बसयु लाख कोस, हमर अभाग, हुनक निह दोष ।“ एिह उप_यासक महeव ओ िवशेषता कँ Dितपािदत करैत डॉ0 दुगनाथ झा wीश िलखने छिथ- “एिह उप_यासक महeव अिछ मैिथिल उप_यास-JेL मे पLाeमक । रचना Dणालीक नवDयोग एवं नवीन व{तु-िवषय हणक दृि¸ सँ । उप_यासकर इ_दु , सुरेन जेिसका एवं रमेश चािर गोट माL पाLक वृता_त-D{तुत कए बड़ कौशलक संग दुई सं{कृितक तुलनाeमक िववेचना कएल अिछ,िवशेषतः भारतीय ओ प ाeय दृि¸कोण म {Lीगणक सामािजक ओ मानिसक ि{थित ओ आदेश म की अ_तर छेक, तकरा {प¸ करैत अ_तत: भारतीय ललनाक शालीनताक ओ wेQताक बड़ सजीव Dितपादन भेल अिछ | मानिसक¿_द ओ संघष=क सूÇम ओ कलाeमक आकलन एिह उप_यासक Dमुख िवशेषता िथक | दू पL उप_यासक ममेके बुझबाक हेतु उप_यासक Dकृित एवं ओकर Dयोजनके बुझब आवcयक ते एिह Dसंगे अंगरेजीक उप_यासक Dिसfद समालोचक समरसेट मqमक कथन o¸य िथक – “I think it an abuse to use novel as pulpit or plat form, and I believe readers are misguided when they suppose they can thus easil y acquire knowledge.it
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would be fine If we could swallow the powder of pro fitable information made palatable by the jam of fiction.” डॉ० अमरेश पाठक एिह उप_यासक Dसंग िलखने छिय-साधारणतः मैिथलीक उप_यासकार लोकिन अपन सीिमत अनुभव एंव उप_यास कलाक हेतु अपेिJत ानक अभावक कारणे ओिह पJक िचLणॲ निह कए सकलाह अिछ जकर िचLण दू पLम संभव भए सकल अिछ | चािर गोट माL पाL पर स7पूण= वृतvत आधािरत अिछ | ओ पाL छिय -इ_दु देवी ,सुरे_o जेिसका एवं रमेश |िभ³-िभ³ पिरि{थितम एिह पाL सभके रािख मानिसक ¿_द एवं संघष=क िचLण ¿ारा जे िचL यास जी अंिकत कएल अिछ से सeयानु¤प भेल अिछ | संघष=िहक ि{थितमे पाLक चिरLमे िनखार आिब सकैत आ अिछ |जेिसका , रमेश एवं सुरे_oक यि±तeवक िचLण जे कएल गेल अिछ से Dशंसनीय अिछ | एिह करणवश अपन सं{कृित,सÁयता ओ आचरण िवrमे सवÄपिर अिछ| तिह से अपन देशक अनेकताओ म एकताक देश कहल जाइत अिछ | व{तुतः ई उप_यास दुनू देशक सं{कृित क दश=बैत भारतीय ललनाक शालीनता ओ wेQता क बड संजीव ओ कलाeमक ढंग स उपि{थित करैत अिछ |‘दू पL ‘ पLाeमक शैलीमे िलखल गेल एक सफल उप_यास िथक |
देवेश झा एन० डी० कॉलेज रामबाग ,पूिण=या Dाfयापक (मैिथली िवभाग )
संदभ= 1. दू-पL , पृ0-84 2. तथैव , पृ0-45
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3. मैिथली सािहeयक इितहास-wीश , पृ0-353 4. मैिथली उप_यासक आलोचनाeमक आfययन पृ0-172 २ आशीष अनिच_हार िहंदी िफjमी गीतमे बहर-२ गजलक मतलामे जे रदीफ-कािफया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नÉममे ई कोनो ज¤री नै छै। एकै नÉममे अनेको कािफया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो अलग भ' सकैए संगे-संग नÉमक शेरमे िबनु कािफयाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत नÉममे गजले जकq एकै बहरक िनवह कएल गेल अिछ। मैिथलीमे बहुत लोक गजलक िनयम तँ निहए जानै छिथ आ तािहपरसँ कुतक= करै छिथ जे िफjमी गीत िबना कोनो िनयमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पिहल जे नÉम लेल बहर अिनवाय= नै छै आ जािहमे छै तकर िववरण हम एिह ठाम द' रहल छी----------------- 1 हसन कमालजीक िलखल आ "िनकाह" िफjम केर ई नÉम जकर बहर 2122 2122 212 अिछ। माLा िनधरणमे उदू= ओ िहंदीक िनयम लागल छै। (ओना तेसर शेरक दोसर पqितक शËद "शायद" केर माLा¬म 21 करबाक लेल एकरा शाÌद मानल गेल छै) आन नÉमक अपेJा एकर शेर सभमे िविवधता अिछ तँइ हम एकरा गजल कहब बेसी उिचत बुझैत छी। िदल के अरमv आँसुओं म बह गए हम वफ़ा करके भी तनहा रह गए िज़ंदगी एक ®यास बनकर रह गयी ®यार के िक़{से अधूरे रह गए शायद उनका आख़री हो यह िसतम हर िसतम यह सोचकर हम सह गए ख़ुद को भी हमने िमटा डाला मगर फ़ा{ले जो दरिमयq थे रह गए एिह नÉमक तेसे शेर बहुत मा²क अिछ। शेरमे विण=त "िसतम" शËद िकछु भ' सकैत छै। ई Dेमक िसतम सेहो हेतै तँ यव{थाक िक दैवक िसतम सेहो भ' सकैए। िफjम देिख क' एकरा माL Dेमी Dेिमका लेल बूझए बला लोक अबोध छिथ से हम साफ साफ कहब। 2
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५८ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 222 9-547X VIDEHA 11
राजे_o कृ°णजीक िलखल आ "खानदान" िफjम केर ई नÉम जकर बहर 2122 2122 212 अिछ। माLा िनधरणमे उदू= ओ िहंदीक िनयम लागल छै। कल चमन था आज इक सहरा हुआ देखते ही देखते ये ±या हुआ मुझको बरबादी का कोई ग़म नहॴ ग़म है बरबादी का ±यॲ चच हुआ एक छोटा सा था मेरा आिशयq आज ितनके से अलग ितनका हुआ सोचता हूँ अपने घर को देखकर हो न हो ये है िमरा देखा हुआ देखने वालॲ ने देखा है धुआँ िकसने देखा िदल िमरा जलता हुआ (कल चमन था 2122 आज इक सह 2122 रा हुआ 212 देखते ही 2122 देखते ये 2122 ±या हुआ 2122) 3 "तवायफ" िफjम केर ई नÉम जे िक आशा भॲसले ¿ारा गाएल गेल अिछ। नÉम िलखने छिथ हसन कमाल। संगीतकार छिथ रिव। ई िफjम 1985 मे िरलीज भेलै। एिहमे अशोक कुमार, ॠिष कपूर, रित अि«नहोLी,पूनम िढ़jलन आिद कलाकार छलिथ। बहुत देर से दर पे आँख लगी थी हुज़ुर आते-आते बहुत देर कर दी मसीहा मेरे तूने बीमार-ए-ग़म की दवा लाते-लाते बहुत देर कर दी मुहËबत के दो बोल सुनने न पाए वफ़ाओं के दो फूल चुनने न पाए तुझे भी हमारी तम³ा थी ज़ािलम बताते-बताते बहुत देर कर दी कोई पल म दम तोड़ दगी मुराद िबखर जाएँगी मेरी ख़्वाबॲ की याद सदा सुनते-सुनते ख़बर लेते-लेते पता पाते-पाते बहुत देर कर दी एिह नÉमक सभ पqितक माLा¬म 122 122 122 122 अिछ। एिह नÉमक पिहल शेरक दोसर पqितमे आएल "हुजुर" शËदक सही ¤प "हुजूर" अिछ मुदा बहर िनवह लेल "हुजुर" उचारण लेल गेल छै। ओनाहुतो ई नÉम छै। जािहमे बहुत नीक जकq बहरक िनवह भेल छै। एिह नÉमक ई शेर बहुDयोगी अिछ........
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मसीहा मेरे तूने बीमार-ए-ग़म की दवा लाते-लाते बहुत देर कर दी ई शेर जतबे सvसािरक Dेम लेल छै ततबे राजनीितक यं«य सेहो छै। घरक कोनो सद{यक उपराग सेहो ई शेर भ' सकैए।
३ डॉ. योगे_o पाठक ‘िवयोगी’ उप_यास - हमर गाम (आगq)
िनवेदन व_धुवर जगदीश Dसाद मuडलक आह जे 24 माच= 2018कS आयोिजत ‘सगर राित दीप जरय’ लेल हम एकटा बाल उप_यास ज¤र लीखी जकर िवमोचन ओतए कएल जाएत। हम पिहनिह किह देने छिलएिन जे िकछु िनजी य{तताक कारण हम एिह आयोजनमे सशरीर उपि{थत निह भऽसकब। बाल उप_यासक एकटा खाका िदमागमे तैयारो कएल मुदा आकि{मक च¬यूहमे फँिस गेलासँ ओ तैयार निह भऽसकल। माL दू िदन बचल छल जखन दोसरे िकछु फुरा गेल आ चािर पqती लीख बैसलहुँ। जे अिछ, अपनेक समJ अिछ। एकरा उप_यास कहबै, उप_यािसका, कथा आ िक गामक लेखा-जोखा से िनण=य अपनिह करबै। अeयjप समयमे िच. उमेश मuडल एकरा पु{तकाकार बना िवमोचन लेल तैयार केलिन तािह लेल हुनक आभारी छी।
योगे_o पाठक ‘िवयोगी’ कलका, 21 माच= 2018
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५८ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 222 9-547X VIDEHA 13
1. हमरो गाम िमिथले मे छै हम कोनो पढ़ल-िलखल लोक निह छी, अिपतु यिद किहयै जे हमरा गाममे एकटा कS छोिड़ िकयो पढ़ल िलखल निह अिछ तऽबेसी उिचत होएत। घीच-घqिच कए कहुना दशमा पास केलहुँ आ चल गेलहुँ िदjली रोजगारक खोजमे। शु²एमे बुझा गेल जे एतए अपनाकS दशमा पास कहलासँ लाभ निह नोकसाने अिछ त एिह बातकS नुका रखलहुँ आ जे काज हाथमे आएल से धरैत करैत गेलहुँ। अवसर देखैत काज छोड़ैत पकड़ैत कहुना दस साल बाद लगलहुँ टे7पू चलबए। ताबत गाम िदश सेहो सड़क सब सुधिर रहल छलैक, फोर-लेन बनब शु¤ भऽगेल रहै तऽसोचलहुँ जे गामे घुिर चली, ओतिह टे7पू चलाएब। कने कमो कमाइ हैत तऽबेिसए लागत कारण गाममे कमसँ कम िदjलीक सड़लाहा बसातसँ Lाण भेटत। कतबो िकछु महग होउ, गाममे एखनहु बसात साफे छैक आ Tी सेहो कारण एखन तक ओिहपर कोनो मािलक हक निह जतौलक अिछ। हमर नीक िक खराप लित बूझू एतबे जे भोरमे तीन टाकाक एकटा अखबार कीन लैत छी आ टे7पूपर जखन बैसल रहैत छी तखन ओकरा पढ़ैत रहैत छी। एक िदन एहने अखबारमे पढ़ल जे िमिथलामे नवका चलन एलैक अिछ अपना अपना गामक महान िवभूितक वण=न करैत िकताब िलखब। िकछु एहने िकताब बजारसँ कीन अनलहुँ। देखलहुँतऽहषÄ भेल आ तािहसँ बेसी इ°यÄ आ «लािन भेल। हष= एिह लऽकए जे पिहल बेर बुझलहुँ िमिथलामे एहन महान िवभूित सब भेलाह आ इ°य आ «लािन एिह लेल जे हमरा अपन गाममे एहन कोनो िवभूित िकएक निह भेलाह। हमरा िच_ता भेल- की से हमरा गाम मे कोनो िवभूित निह भेला? िकछु बूढ़ पुरान सँ गप कएल। एक गोटे पूिछ देलिन- “खाली पढ़ले लीखल लोक िवभूित होइ छै की?” हम सोचए लगलहुँ। ठीके, से रिहतै तऽ िसनेमा {टार आ िक िखलाड़ी सब क िकयो िच_हबे निह किरतै। हमरा बुझा गेल जे आन गामक िवभूित सन तऽ निह,तैयो एतेक ज¤र जे हमरा गामक िवभूित सब एक िहसाब कतबो िविचL रहथु मुदा ओहो लोकिन अपना समय मे गामक नाम कोनो तरह उजागर करबे केलिन । सेह_ता भेल जे हमहूँ अपना गामक बारेमे िकछु लीखी। मुदा की लीखब? िलखबाक लुिरयो तऽनिह भेल। तैयो हम ठािन लेल जे िलखबे करब। िवभूित लोकिन जे छलाह, जेहन छलाह, भेलाह तऽिमिथलेक सुपुL/सुपुLी ने। आ हमरो गाम जेहने अिछ, अिछ तऽओही मािटपर कमला बलान कोशीसँ घेराएल, रौदी दाही भोगैत अिशJा आ गरीबीमे उबडुब करैत। त हम िन य कएल जे िहनका लोकिनक कीित=क गाथा लीखल जाए।एखुनका युगे िवापन आ Dचारक िछऐ, से गामक नुकाएल िछिड़आएल र£ सबकS बहार करबाक चाही। हम गौआँ भऽकए यिद निह िलखबिन तऽअनगौआँकS कोन मतलब छैक? ओना तऽिल{ट पैघ बिन गेल मुदा हम बहुत पुरान लोककS पिहने छqिट कए माL दसटाक वण=न एतए D{तुत करए जा रहल छी। एिहमे पिहल नौटा छिथ हमरा गामक नवर£ आ दसम भेलाह िविश¸ अितिथ
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र£। आशा करैत छी गौआँ लोकिन हमर एिह Dयासक Dशंसा करबे करताह। यिद िकछु अनगौआँ मैिथल समाजकS हमर गामक एको गोटेक कीित= नीक लगलिन तऽहमर Dयास खूबे सफल बूझल जाएत। निह तऽकमसँ कम िकछु िलिखत तऽरिहए जाएत जे एखनुक बूढ़ पुरानक िदवंगत भऽगेलाक बाद नवका पु{तकS पूव=जक यशक िकछु ान देतैक। हमर िलखल व{तु सबकS मिटकोरबा गामक िमिडल {कूलक हेडमा{टर साहेब बहुत कटलिन छँटलिन आ शुÐ केलिन तािह लेल हुनका बहुत ध_यवाद। िबना हुनकर सहयोग के ई अपने सबकS पढ़बा यो«य निहए भेल रहैत।हम अपना गामक िवभूितक फोटो निह छािप रहल छी। एकर कारण अपने सब पूरा पु{तक पढ़लाक बाद बुिझए जेबैक।
िवनीत
रामलाल परदेशी (गामक एक उeसाही युवक) गाम : खकपितया डाकघर:मिटकोरबा िजला : मधुबनी।
2. बीए मूल नाम : राम िकसुन िसंह िपताक नाम : अजब लाल महतो ज_म ितिथ : 1 जनवरी 1940। ई हुनकर सिट=िफकेटमे िलखल छिन, मुदा हुनक िपताक अनुसार ओ तीन चािर बरख जेठ ज¤रे छिथ। जखन ओ मिटकोरबा गामक िमिडल {कूलमे नाम िलखौलिन तऽहेडमा{टरकS जे बूिझ पड़लै से लीख देलकै। हुनकर ज_म तऽभरदुितया िदन भेल छलिन। िशJा: यथा नाम, माने ओ बी.ए. पास छिथ। ओ गौरवसँ एखनहुँ लोककS सुनबै छिथन जे मैिÑक, आइ.ए. आ बी.ए.मे लगातार ओ तृतीय wेणीमे पास केलिन। संगिह मैिÑकमे दू बेर, आइ.ए.मे तीन बेर आ बी.ए.मे चािर बेर फेल केलिन। उपलिËध : हुनक सबसँ पैघ उपलिËध छिन हमरा गामक पिहल आ एखन तक के अि_तम ेजुएट भेनाइ। पिछला करीब पचास बरखसँ एिह रेकॉड=कS पकड़ने छिथ। ओहू पुरान जमानामे ेजुएट भैयो कए हुनका जखन दस साल तक कतहु नोकरी निह भेलिन तखन ओ हािर कए पु{तैनी काज, खेती,मे लािग गेलाह।
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एहन निह जे से कतहु नोकरी निह भेलिन। पुिण=यामे एक ठाम हाइ {कूलमे अfयापक भेलाह मुदा पिहले िदनक िहनक पढ़ाइ देिख कए ओतुका िव]ाथÒ सबकS िहनक यो«यताक बेस अ_दाज लािग गेलैक आ ओ सब हड़तालपर बैिस गेल। एमहर सqझमे िहनका जे मछर कटलक से बोखार भऽगेलिन। दोसर िदन {कूल जाइ के काजे निह पड़लिन। कहुना एक ह®तापर गाम घुिर एलाह। िव]ाथÒ सबकS िवचारल बात िवचारले रिह गेलैक। फेर दोसर बेर एहन यो«य िशJकसँ भSट निहए भेलिन हुनका सबकS। {व{थ भेलाक बाद ओ िनयारलिन जे मा{टरी हुनका बुते पार निह लगतिन। चल गेलाह कलका भाग अजमबै लेल।कलकामे एखनहु बीए पैघ यो«यता बूझल जाइत छलैक। ओना जािह समय बीए बीए केलिन तािह समय िबहारक परीJा पÐितक चच आन आन ठाम शु¤ भऽगेल छलैक आ िकछु लोक िबहारी बीएकS ओकर उिचत हक देबा लेल तैयार निह छल। कलकामे मिटकोरबा गामक एक गोटे कोनो सेठक Óाइवर छल। ओ िहनक पैरवी केलक सेठ लग। िकछु बेिसए बढ़ा चढ़ा कए किह देलकै सेठकS। फल ई भेल जे सेठ िहनका िबना कोनो पूछताछ के अपना गÔीपर मनेजर बना देलकिन। ई बहुत खुसी भेलाह। मुदा भा«यकS िकछु दोसरे र{ता देखेबाक छलैक। तेसर िदन सेठक एकटा िमL आिब गेल आ ओकरा अनुपि{थितमे ओिहना िहनका संग गपसप करए लागल। ओकरा मोनमे कोनो दुभव निह छलैक मुदा सम{या छल घेघ कतहु नुकाएल रहए ! सेठक िमLकS बीएक असली िघबही बीए हेबापर कने स_देह भऽगेलै आ एकर चच ओ सqझमे अपना िमL लग केलक। अिगला िदन जखन बीए गÔीपर बैसलाह तखन सेठ आिब कए हुनका पिछला तीन िदनक िहसाब िकताब पूिछ बैसल। बीए घबरा गेलाह। ओना ओ कोनो गड़बड़ी निह केने छलिखन मुदा िहनका ई बात िसखले निह छलिन जे यिद िकओ िहसाब िकताब पूछत तऽउर कोना देल जाए। एखन तक ओ खाली िकताबी DÖक उर रटैत आएल छलाह। यावहािरक काजक उर देब िसखबे निह केलिन। से एतए ओ गड़बड़ा गेलाह। फल जे ओही िदन दुपहिरयामे गामक गाड़ी धेलिन। एिहना ओ पटना, िदjली मु7बइ आिद कतेको छोट पैघ शहरमे सेहो भा«य अजमौलिन मुदा भा«य तऽहुनका गाम घीचऽचाहैत छलिन से पुिण=या रहओ िक पटना,लखनउ िक लुिधयाना, सब ठाम कोनो ने कोनो एहन पिरि{थित भइए गेलिन जे दू चािर िदनसँ बेसी निह िटक सकलाह। बीए सॱसेसँ बौआ कए गाममे खेती करए लगलाह। खेतीमे खूब नाम कमौलिन। दस िकलो के मूर आ सात िकलो के बैगन हुनके खेतमे उपजल छलिन। हमरा गाममे गुलाब आ गदा फूलक खेती हुनके शु¤ कएल िछएिन। एखन हमर गाम एकर नीक यवसाय कऽरहल अिछ। आब तऽदेखादेखी अगल बगलक गाम सबमे सेहो फूलक नीक खेती भऽरहलै अिछ। एिह Dयास लेल हुनका गामक पंचायतसँ िवशेष पुर{कार भेटलिन। बीएक सबसँ पैघ उपलिËध भेलिन गामक लोककS {कूली आ कौलेिजया पढ़ाइक Dित अिवrास करौनाइ। तकर बाद िकयो अपना धीया-पूताकS {कूल कौलेज निह पठौलक। माL साJर बनै लेल मिटकोरबाक िमिडल {कूल तक। हमहू जे दशमा पास केलहुँ से एही कारण स7भव भेल जे बाबूजी गुजिर गेला आ माएकS हम किहयो ई बूझऽनिह देिलयै जे हम कतए जाइ छी आ की करै छी। दस साल तक िविभ³ शहर सबमे घुमैत ठोकर खाइत बीएकS िकछु नीक बुिÐ तऽभैए गेलिन। एकर उपयोग ओ केलिन गाममे झगड़लगौनाक ¤पमे। हुनकर िवशेषता अिछ जे हुनका संग जे लोक पqचो िमनट
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बैिस गेल आ हुनकर देल एक िखjली पान खा लेलक ओ अपना िदयादी आ िक पािरवािरक झगड़ामे ज¤र फँसत। आ ओिह झगड़ाक पंचैतीमे बीए ज¤रे रहता। बेसी झगड़ा गामक पंचैतीसँ उपर निहए जाइ छैक। िकछुए एहन घटना भेलैक जे बीए बादमे स7हािर निह सकला आ मोकदमा भऽगेलै। कतबो मqजल ओझा गुणी रहथु, िकछु भूत हुनको हाथसँ छुिटए जाइ छिन ने। तिहना बूझू। हमरा गामक सीमामे जे चा¤ कातक चािर पqच गामक लोकक जमीन जाल छैक ओहो सब एिह झगड़लगौना Dेतक चªरमे फँिसये जाइत अिछ। सबकS बूझल छैक जे बीए संग बैसनाइ आ हुनकर पान खेनाइ माने भेल कपारपर दुरमितया सवार। मुदा कहq िकयो बिच पबैत अिछ? बीएक मधुर स7भाषणक आगू सब फेल। बीए एिह लूिड़सँ कोनो कमाइ निह करैत छिथ, ई तऽमाL हुनकर मनोरंजन िछएिन। एहन उदार चिरLक लोक परोप×ामे निह भेटत। एिह िकताब िलखबाक ¬म मे एक िदन हम पूिछ देिलएिन- “एखन तक कतेक लोकक बीच झगड़ा लगा देने हेबै?” ओ तऽ सबटा लीख कए रखने छला। एकटा पैघ िल{ट हमरा आगू पसािर देलिन। हम चिकत भऽ गेलहुँ। बीए तऽ नारदोक कान कटलिन मुदा िकनको बूझल निह। ज¤र एकरा एक बेर िगनीज बुक अथवा िलमका बुक मे छपबैक कोिशश करबाक चाही। से भऽ गेला सँ अहॴ कहू हमर गाम अपना िजला आ िक Dदेश मे नाम करत की निह? q
3. खुरचन ठाकुर मूल नाम : िकसुनलाल ठाकुर, DिसिÐ खुरचन ठाकुर िपताक नाम : ितरिपत ठाकुर ज_म ितिथ : अात मृeयु: सन उनैस सौ सतासी सालक बािढ़मे उपलिËध : खुरचन ठाकुरक DिसिÐ खुरचने लऽकए भेल। हुनका लेल अ{तूरा बेकार छल। अनेरे लोक टाका खच करत। ओ खुरचनकS िपजा लैत छलाह आ केहनो बढ़ल केस-दाढ़ी रहओ, कािट दैत छलाह।ओहीसँ नह सेहो कािट दैत छलाह। जखन केश छँटबैक Dचलन बढ़लै तखन खुरचन ठाकुर अपन ओही औजारसँ केश छqटब सेहो शु¤ केलिन। केशमे ककबा सटा दैत छलिखन आ ओिह उपरसँ खुरचन चला दैत छलिखन। देखिनहारकS चकचो_ही लािग जाइ छलिन जे िबना कØची के केश कोना एतेक सु_दर छँटा जाइत छलैक।
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आ केहनो फोरा-फु_सी रहओ खुरचन ठाकुरक डाकदरीक आगू सब जेना सरडर कऽदैत छल। फोराक डाकदर ¤पमे खुरचन ठाकुर परोप×े निह दश कोसमे नामी छलाह। किहयो कए तऽहुनका दूरापर लोकक लाइन लािग जाइत छल। खुरचन ठाकुरक खुरचनक {पश= होइतिह लोककS आरामक बोध होमए लगै छलै। बीए जखन एक बेर कोनो शहरसँ घुरलाह तऽखुरचन ठाकुर हुनका देखलक ओतुका सैलूनमे केश छँटेने। बीएकS एखनहुँ मोन छिन खुरचन ठाकुरक हुथान। आ ओिह ‘अलूिर’ नािपतक लेल Dयोग कएल गेल अपशËद सब जे बीए हमरा सुना तऽदेलिन मुदा िलखबासँ मना कऽदेलिन। पूरा गाममे खुरचन ठाकुर एकसर, सॱसे गाम हुनकर जजमान। मुदा माL एकटा औजार, खुरचन, आ गाम नेहाल। एहन छलाह र£ हमर खुरचन ठाकुर। q
4. टहलू दास मूलनाम : िसयाराममuडल िपताक नाम : जगदेव मuडल ज_मितिथ : अात मृeयु: अकालकवष= (स7भवतःउनैससौिछयासिठ) उपलिËध : टहलूटहलैततऽकमेछलाहमुदाहुनकचािलमेबड़काबड़काहािरजाइतछल।बूढ़लोकसबिख{साकहैतछिथ जेएकबेरककरोसारसाइिकलपरचिढ़कएहमरागामएलाह।हुनकरगामकरीबसात-आठकोस (एखुनकालोकलेलबूझूचौबीस- पचीसिकलोमीटर) दूर।साइिकल ओिह समय ककरो ककरो रहैत छलै, हमरा गाममे ककरो निह छलै से बूझू सॱसे गाम जमा भऽगेल साइिकल देखबा लेल। टहलूहुनकापूिछदेलिखन- “कतेकसमयलागलसाइिकलसँहमरागामअबैमे?” ओगव=सँबजलाह- “इएहगोटेकघंटाबूिझिलअऽ।” ओहो अ_दाजे बजलाह कारण हाथमे घड़ी तऽछलिन निह आ ने टहलूएकS बूझल छलिन जे एक घंटा कतेक समय होइत छैक।टहलूहुनकादूसैतबजलाह- “एतेककालमेतऽहमपएरेचलजाएबआघुिरकएचलोआएब, आयिदइ_तजामकएलरहततऽअहqकघरपरभोजनोकऽलेब ।”
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सारकSभेलिनजेअनगौआँबूिझकनेडॴगहँकैतछिथ।ओहुनालोक गाममे आएल ककरोसारकसंगहँसीमजाककऽलैतेछल।एहनोकतहुभेलैएजेलोकसाइिकलसँदूनोसँबेसीचिललेत? मुदाएकरफिरछौहिटको नाहोअए?ओजमानातऽमोबाइलटेलीफोनकछलैनिहजेतुरेईककरोखबिरकऽिदतिथनगाममेजँचैलेलजेसेमेटहलूओिहगामप हुँचलाहिकनिह। योजनाबनलजेबड़कीपोखिरकचा¤कातदूनूगोटेघुमता।सारसाइिकलसँआटहलूपएरे।पोखिरक चा¤ कात र{ता साइिकलो चलबै लेल नीके छलैक। जेना िक ओिह समय सब ठाम रहैत छलै, किचए मुदा समतल आ पीटल-पाटल। जतेकतेजअपनचिलसकिथसेचलथु।यिदटहलूसेमेबड़तेजचलैतछिथतऽचªरलगबैमेकमेसमयलगतिन।ओचªरलगबैत रहताहजाबतसारमहोदयसाइिकलसँएकचªरपूरानिहकऽलेिथ।यिदसारेमहोदयपिहनेएकचªरलगालेताहतऽओहोताबततक चªरलगबैतरहताजाबतटहलूएकचªरपूरानिहकऽलेिथ।अ_तमेजेजतेकबेसीचªरलगौनेरहतसेततेकसौटाकाजीतत।माने भेलजेएकचªरकेसमयमेयिदिकयोदूचªरलगालेततऽएक चªर बेसी भेलैक तािह लेल एकसौ²पैयाजीतत।यिदआधाचªरबेसीलगाओततऽपचास²पैयाजीतत।एिहसँकमभेलापरदूनूकSबरोबिरएबूझलजाएत।
गौआँजमाभऽगेलदेखबालेल।सारकबिहनोकSकहलगेलिनहुनकेपJमेरहैलेलजेकोनोतरहकबेइमानीकगुंजाइसनिहरहै। खेलाशु¤भेल।जतेकताकतछलिनततेकपैिडलमेलगबैतसारमहोदयसाइिकलदौड़ेलिन।मुदाटहलूतऽिनपा।जाबतओएक मोहारटपिथताबतटहलूएकचªरपूराकऽलेलिन।साइिकलआपएरेदौड़चलैतरहल।अ_तमेसारमहोदयपूरेतीनसौटाकाहािरगे लाह। ओजेहमरागामसँपड़ेलासेफेरघुिरकएकिहयोनिहएएला।टहलूदासकएिहगुणकजानकारीगामोमेबहुतोलोककSनिहछलैक ।आबतऽिहनकरगुणकबखानसबतिरहोमएलागल।डाकिवभागिहनकादौड़हाकनोकरीदेबालेलतैयारभऽगेलआएिहआशयकेिच Ùीसेहोिहनकापठादेलकिन।मुदाईअ{वीकारकऽदेलिखन। “उम खेती, मfयम बान, अधमचाकरी, भीखिनदान” बलाफकराजेरटनेरहिथ।ओकोनोदशामेचाकरीनिहकरताह। निहए केलिन। एहनमहानछलाहटहलूदास। q
5. िचलमसॲट भाइ मूलनाम : केवलराउत िपताकनाम : बनारसीराउत ज_म ितिथ : अात
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मृeयु: करीबचालीससालपिहने। उपलिËध : नामगुणकाजछलिनहुनकर।िचलमसॲटनामेपड़लिनजखनहुनकािचलमसँबीतभिरधधराउठएलगलै।गामै कगजेरीसाहुकअिभ³िमL।गजेरीसाहुगाजाबेचिथआिचलमसॲटकीनिथआतािहपरसॲटलगाबिथ।सॲटलगबैमेिकछुगोटेआरसं गदैतछलिखनमुदाओसबहमरासंकलनलेलमहeवपूण=निहछिथ। एकबेरगाममेदूटाबबाजीएला।ईदूनूएकन7बरकेगँजेरी।ओ बरकी पोखिरक पाकिर गाछ तर अपन आसन जमा लेलिन। एकटा गौआँकS चेला मुड़लिन, ओिह िदनक बुतातीक जोगार सेहो केलिन आ िचलम लेल गाजाक जोगार सेहो। अपनामे म{त ई दूनू लगलाह िचलम सॲटए। िकछु गौआँ िहनक िचलमक सॲट देिख रहल छल। अित साधारण ¤प ई सब सॲट लगा रहल छलाह। ओ िट®पणी कैए देलक- “अहq दूनूसँ नीक तऽहमर गौआँ िचलम धुकैत अिछ, ओकर नामे पिड़ गेलैक िचलमसॲट भाइ।” बबाजी सबकS लगलिन जे गौआँ सब िहनकर िन_दा कऽरहल छिन। ओ िचलमसॲटकS बजबै लेल कहलिखन। िचलमसॲट बजाओल गेलाह। फोकट के गाजा आ तकर सॲट – ई बात सोिचए कए ओ मुिदत भेल छलाह। तैयो अपन गुणकS नुकबैत बबाजी दूनूकS िटटकारी देलिखन नीकसँ सॲट लगबै लेल। ओ सब पूरा दम लगा कए सॲट िखचलिन तऽएक बेर कने दू-तीन आँगुर धिर धधरा उपर उठलैक। िचलमसॲट िवनÚ भाव अपन िचलम सुनगौलिन आ लगला सॲट खीचए। जेना जेना गाल धँसैत गेलिन तेना तेना धधरा उपर उठैत गेलै। अ_तमे पूरे हाथ भिर धधरा उिठ गेलै। एहन चमeकार तऽपिहने कोनो गौआँ निह देखने छल। बबाजी सब तऽचिकत आ डराएल। ओिहमे एक गोटे दोसरकS कहलिखन- “एकरा चेला बना लेब ठीक रहत।” िचलमसॲटकS गाजा चिढ़ गेल छलिन। ओ उनटे ओिह बबाजीकS भिर पqज कऽधेलिन आ बजलाह- “रौ सार, िचलम सॲटैक लूिर तऽछौके निह, हमरेपर गु²आइ करमे? हमरा चेला बनेमे? ढहलेल निह तन। चल, आइसँ तो दूनू हमर चेला बिन जो आ हमर नोकर जकq काज कर। सqझुक पहर हम तोरा दूनूकS िचलम सॲटैक लूिर िसखाएल करबौ।” आब तऽदूनू बबाजीक बोलती ब_द। कहुना अपनाकS छोड़ा कए ओ दूनू नाङिर सुटकबैत गामसँ भगलाह। िचलमसॲट भाइ अपना काजमे अि¿तीय छलाह। इलाकामे करीब दस गामक बीच हुनकासँ हाथ िमलबै बला िकयो निह भेल छल। q
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6. नªू पहलमान मूल नाम : परमेसर यादव िपताक नाम : शीतल यादव ज_म ितिथ : अात मृeयु: सन उनैस सौ बेरासी साल उपलिËध : नªू कने निकआइत छलाह बजबामे त ई नाम भेलिन। हुनका हनुमानजीक सराप आ आशीवद छलिन जे कोनो कुcती खेलामे पिहल दू बेर तोरा हारए पड़तौ। जखन तॲ दू बेर हािर जेमे तखन तेसर बेर केहनो पहलमानसँ िभरमे, िजतबे करमे, से ओ साJात भीमे िकएक निह आिब जाथु। बूिझ ले हम अपनिह तोरा शरीरमे Dवेश कऽजेबौ। ई बात ककरहु निह बूझल छलैक हुनकर बाबूजीकS छोिड़। साधारण िभड़_तमे हािर-जीत चिलते रहैत छलैक। लोक एतेक ठेकान निहए करैत छल जे कोना दू बेर हारलाक बाद नªू िनि ते तेसर बेर जीत जाइते छिथ। एक बेर दरभंगा राजक पोसुआ कैलू पहलमान हमरा गाम िदससँ जाइत छला। हुनका गुमान जे पूरा िजलामे हुनकासँ हाथ िभरबै बला िकयो निह छिन। ई गप तािह िदनक छी जिहया मधुबनी िजला निह बनल छलै आ दरभंगे िजलाक सविडिवजन छलै। हमरा गाममे िकयो अगी छॱड़ा हुनका िटटकािर देलक जे गामक नªू पहलमानसँ एक बेर हाथ िभरा लेिथ। पिहने तऽओ अपन DितQा बूिझ एकरा अनठबए चाहलाह मुदा गौआँक िजदपर अखाड़ामे उतिर गेला। नªू सेहो उतरला आ हनुमानजीकS {मरण केलिन। खेला शु² भेल। कैलू आ नªू अखाड़ामे चªिघ=³ी कटैत आ एक दोसरापर दाओ बजारैक चे¸ामे लागल। िकयो दोसराक देहमे सिट निह रहल छल। आ िक नªू िकछु केलिन आ Jणेमे कैलू िचत, नªू हुनका छातीपर सवार। लोक अकचकाएले रिह गेल। तालीपर ताली परए लागल। कैलूकS िकछु बुझाइये निह रहल छलिन जे की भेलै, कोना भेलै, कोन दाओ लगलै जकर ओ स7हार निह कऽसकला। दूनू पहलमान उठलाह, देह झाड़लिन, हाथ िमलौलिन आ अपन अपन ग_तय िदस िवदा भेला। नªू जीत गेलाह मुदा हुनका एकर कोनो गुमान निह छलिन। हुनका बूझल छलिन जे अिगला दू कुcती हुनका हारबाक छिन। ओ अपनाकS किहयो महान निह कहलिन, ई हुनकर नÚता छलिन। q
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7. पिuडतजी मूल नाम : राधाकृ°ण िमw िपताक नाम : लÇमण िमw ज_म ितिथ : उनैस सौ पचास सालक फगुआ िदन। उपलिËध : हमरा गामक एकमाL ´ाµण पुरोिहत पिरवार, पिuडतजी खाली नामेसँ पिuडत छिथ। िहसाब औंठा छापे रिह गेला। भिर गामक जजमिनका स7हारै लेल भािगनकS बजा अनलिन। अपने ओकरा संग खाली नॲत खेबा लेल जाइ छिथ। मुदा पिuडतजी अि¿तीय भैए गेलाह। ई भेल हुनक अÜुत गुणक कारण। ओ मिहंसलेट भऽगेला। महॴसपर बैसल बाधे बाध बौआइत रहबामे ओ ककरो कान कािट सकैत छिथ। बचिहंसँ ओ महॴसपर जे चढ़ए लगलाह से एखन तक कइए रहल छिथ। महॴसे पोसब हुनक मुÝय यवसाय भेलिन। एकटा ´ाµण कुलमे ज_म लइयो कए ओ कोनो यादव पिरवारसँ बेसी दूधक यापार केलिन आ ओिहना कोनो यादव पिरवारसँ बेसी पािन दूधमे िमलबैत रहला। तैयो िहनक दूधक िब¬ी कम निह भेल। महॴसक खरीद िब¬ी केलिन, ओकर दवाइ दा¤ सेहो बुझैत छिथ आ सब तरह महॴसक िवशेष ¤प इलाकामे DिसÐ छिथ। िहनका Dसाद कतेक महॴस क Dाण बचलै। Ëलॉक के मवेसी डाकदर सेहो िहनकर ानक Dशंसा करैत छिन। पिuडतजी एकटा आर गुण लेल DिसÐ छिथ– आशीवद देबाक िहनक शËदकोष िबjकुल अलग अिछ। ‘जीबू जागू ढनढन पादू’ तऽ िहनकर तिकया कलाम अिछ मुदा जखन िकयो कोनो तरहक छोट पैघ गलती कऽ बैसैत अिछ तखन िहनक मुह सँ बहराएल शËद िवrक कोनो कोष मे भेटऽ बला निह। आ सुनिनहार केहनो मोट चामक बनल रहओ, कान मूनिह पड़ैत छैक। ओ आशीवद-वष लोकक धैय=क परीJा सेहो लैत छैक। आ जे कने अधीर भेल तकरा तऽ भूलुिuठत भेनिह कjयाण। महॴसक संग संग ई गायक यापार सेहो करैत छिथ। गाय दरबÉजापर पोसैत कमे छिथ, खाली खरीद िब¬ीक काज हाटपर करैत छिथ। मिटकोरबा गामक हाटपर मरदुआिर कैल गाय स{त दामपर कीनैत छिथ, ओकरा दस िदन नीक जकq खुआ िपआ कए आ जिहना आइकािल लोक केश रंगैत अिछ तिहना नवका तरीकासँ रंग चढ़ा कए कारी गायक ¤पमे दु³ा-ितगु³ा दाममे बेिच लैत छिथ। बेचबा काल fयान रखैत छिथ जे ाहक बेस दूरक इलाकासँ रहए। लग पासक ाहककS ओ कारी गाय निह बेचैत छिथ। एक दू बेर गौआँकS सर स7ब_धीक मारफत सुनबामे एलै जे मासे िदनक भीतर गायक रंग बदलए लगलै। मुदा ई िशकाएित सीधे पिuडतजी लग िकयो निह पहुँचेलक। आशीवद-वष मे िभजबाक डर जे रहैत छैक। एखन तक पिuडतजी बेदाग अपन यवसायमे लागल छिथ। q
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8. ल7बोदर मूल नाम : दिरo नारायण झा िपताक नाम : पलटू झा ज_म ितिथ : अात मृeयु: पqच वष= पिहने उपलिËध : ल7बोदर नाम गुण पैघ उदर बला छलाह। हमहूँ देखने िछऐिन हुनकर शरीर। कuठसँ डqड़क बीच माL एक ितहाइमे छाती आ दू ितहाइमे ल7ब उदर। से कोनो पैघ धोिध फूटल निह, सपाट। आइ कािल हीरो सब िस±सपैक चमकबैत रहैत अिछ मुदा ल7बोदरकS छातीआ पqजरक सबटा हाड़ लोक सौ मीटर दूरोसँ गिन सकैत छल। हुनका बुझलो निह छलिन जे ई शारीिरक सौQवक िवशेषता िछऐ। वृिएँ ल7बोदर मरणोपरा_तक सं{कार करबैत छलिखन।आ पोखिरपर भोजन करब हुनक एिह वृिक अंश छल। मुदा एक बेरक िख{सा जे बूढ़ लोक कहैत छिथ से अÜुत छल। ल7बोदर अपन जजमिनकामे कोनो गाम गेल छलाह। ओतए चूरा-दही भोज छलैक। इ_तजाम तऽठीके छलैक मुदा िहनका सबिहक भोजन बेर िकछु कुयव{थाक कारण दही कने कम पिड़ गेलै कारण पोखिर पर सामान िहसाबे सँ पठाओल गेल छलै। ल7बोदर लगलाह अखरा चूरा फqकए। जाबत घरवारी दहीक यव{था केलिन ताबत ई करीब पqच सेर चूरा सधा देलिखन। आब हाल ई छल जे जाबत दही आबए ताबत िहनका पातमे चूरा सिध जाए, ई छुछे दही सुड़किथ आ तकर बाद फेर अखरा चूरा फqकिथ। ई अपना दूनू कात मािटपर चे_ह दऽकए आन लोककS उिठ जेबाक संकेत देलिखन आ अपने खाइते रहलाह। जखन करीब एक बोरा अखरा चूरा आ चािर तौला दही सधा देलिन तखन घरवारी हाथ जोिड़ कए ठाढ़ भऽगेलिखन। तैयो ई ढकार निहए लेलिन मुदा पिरि{थितकS बूिझ घरवारीकS किह देलिखन- “अहq पार उतिर गेलहुँ, हम आब तृ®त छी।” एतबा किह ओ उिठ कए हाथ धोलिन, पान सुपारी लेलिन आ दस िकलोमीटर टहलैत टहलैत गाम आिब गेलाह। िकयो कखनहु हुनकर पेट उठल िक फूलल निह देखलक। अिगला िदन ल7बोदर फेर कोनो भोज खेबा लेल तैयार। िहनके भोजन देिख ने िकयो फकड़ा बनौने छल – पqच पसेरी अखरा चूरा, दही छqछ भिर जलखै जकरा की हैत चटने पाभिर जोड़न? ऊँटक मुहमे जीरक फोड़न !
हमरा अपना गाममे हुनका के खुअिबतए? मुदा ओ पिरि{थितकS बुझैत छलिखन आ गामक भोजमे किहयो छूटल घोड़ा जकq यवहार निह केलिन। हमरा गाममे िकएक ककरो बूझल रहतैक जे िगनीज बुकमे हुनकर नाम रेकॉड=मे िलखिबतए। हमसब एिह गौरवसँ चूिक गेलहुँ त हम िनयारल जे अपन संकलनमे हुनकर चच ज¤र करब।
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9. नटवर लाल मूल नाम : जय_त कुमार लाल दास िपताक नाम : िशव मोहन दास ज_म ितिथ : सन उनैस सौ अठतालीस के चौरचन िदन उपलिËध : नटवर लालक िपता अjप वयसमे मिर गेलिखन। माताक एकमाL स_तान ई गामक िबगड़ल छॱड़ा सब के संगितमे फँिस गेलाह। य]िप हमरा गाममे बीएक असफलताक बाद सब गािज=यन अपन िधयापूताकS {कूल जेबासँ परहेज करबए लागल मुदा जय_त कुमार लाल दास {कूल गेला जिहना िक िहनका टोलक िकछु आर बचा सब करैत छल। कहुना अठमा तक घुसकला तकर बाद हाथ उठा देलिन। बचिहंसँ िहनकामे िवशेष लूिर छलिन लोककS ठकबाक। पिहने तऽबहुत िदन तक माएकS ठकलिन आ मिटकोरबा गामक हाटपर िझjली कचरी बतासा लÞडू खाइत रहलाह। तकर बाद अनकोपर अपन मंLक Dयोग केलिन। ल7बोदरक िपितयौतकS जजमिनकामे भेटल रंगल धोती सब ई कामित टोलक लोककS िकना दैत छलिखन, बेसी दामपर जे तोरा रंगक खच बिच गेलहु, आ धोती बलाकS किह दैत छलिखन जे रंगल धोती िकयो निह कीनत, ओ तऽध_य कहू जे हम एक गोटेकS फुसला कए राजी केलहुँ। धोती बेचिनहार किहयो निह बुझलिन जे के िकनलक आ कीनिनहार किहयो निह बुझलिन जे ककर धोती ई िकनलक। एही तरहS पुरना िकताब िव]ाथÒसँ लऽ कए ओकरा नवका भाव बेचिथ । एिह यवसायमे िहनका नीक आमदनी होमए लागल। अपने ई लील िटनोपाल देल नीक धोती गंजी पिहरए लगलाह। एिह बीच िकशोर वयसमे Dवेश किरते िहनक आदित सब िबगड़ए लागल। ई सुनसान गाछी िबरछी आ पटुआ कुिसयारक खेतमे िशकार करए लगलाह। हाथमे पाइ रिहतिह छलिन से िशकार भेिटए जाइ छलिन। सब गाममे सब तरहक लोक होइ छै आ हमरो गाम एिहसँ बचल निहए छल। मुदा जखन एक गोटेकS िकछु भऽगेलै आ ओकर बाप िहनका तंग करए लागल िबयाह कऽलेबा लेल तखन ई पिहल बेर डरा कए गामसँ भािग गेला। छओ मास बाद घुरला तऽमाएकS सब बात बुझबामे आिब गेल छलिन। ओ बेचारी नीक र{ता धेलिन आ िहनकर िबयाह करा देलिखन। नटवर लाल प£ीमे रिम गेला। साले साल पुL र£क बरखा होमए लागल। तेरह साल पुरैत पुरैत िहनका लग छोट पैघ तेरहटा बचा छल– एकछाहा पुिjलंग। घरमे जगह तऽनिहए छलिन, बुतातोपर आफत आिब गेलिन। ताबत माताराम उपरक र{ता धेलिन आ ई लगला पु{तैनी जायदादकS बेिच गुजर चलबए।
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एिह बीच िहनकर भा«य जागल जखन मािLकक एक गोटे बØक मनेजर बिन कए राजनगर एलिखन। िहनकर दुद=शा देिख ओिह बेचाराकS दया लािग गेलै आ िहनका बØकमे चपरासीक नोकरी भेिट गेलिन। आब की छल? राित िदन िहनका आßनसँ माछक सुग_ध उठए लागल। बØकमे पहुिच नटवर लालकS अपन असली ¤प देखेबाक अवसर भेिट गेलिन। हमरा गामसँ राजनगर दस िकलोमीटर। ताबत ने रोड नीक भेल छलै आ ने टे7पूक चलन भेल छलै। ई लोककS फुिसया फुिसया बØकमे खाता खोलबौलिन आ तकर बाद ओकरा सबकS लघु बचत योजनासँ जोिर िनeय सqझमे एकटकही दुटकही, जकरा जेहन जुड़ै, से जमा करए लगला। पासबुक बिन गेलै मुदा सबटा पासबुक ई अपनिह संग राखिथ। लोककS िवrासमे लेने। ज¤रित पड़लापर सौ पचास उधार सेहो दऽदैत छलिखन ई किह जे बØकसँ लोन भेटलहु। लोक लोन सधबए लागल आ अिगला िक{त उठबए लागल। एिह बीच ई गामक संिचत टाका िनजी काजमे लगाबए लगला। पासबुकपर िकछु चढ़ै निह। लोककS िकछु बुझबामे अबै निह। Dायः पqच साल तक ई खेला चलैत रहल। िकयो यिद किहयो पासबुकक चचÄ करए तऽई बह³ा बना देिथ जे बØकमे राखल छै। दश िकलोमीटर िबना कोनो साधन के चिल कए जाएब किठन छलै आ लोक अनठा दैत छल। एक बेर ककरो बेटीक िबयाह लेल पqच हजार टाका िनकासी करबाक ज¤रित भेलै। ओकरा िहसाब जतेक टाका ओ जमा करैत गेल छल ओिहसँ पqच हजार ज¤रे उठाओल जा सकैत छलै। नटवर लाल िकछु िदन टालमटोर करैत रहला। मुदा बेटी बला कते िदन मािनतए? अ_तमे हािर कए ओ एक िदन पहुँिच गेल राजनगर बØक। तकर बाद जे हेबाक छलैक सएह भेलै। सबटा भेद खुिज गेलै आ बेटी बलाक खातामे माL अढ़ाइ सौ टाका भेटलै। गामक Dायः सब के टाका डुबलै। सब अपन कपार पीट कए रिह गेल। नटवर लालपर िवभागीय कारवाइ भेलिन, ओ जेल गेला। एिह बीच तेरह पुL सेहो बढ़ैत गेलिखन आ सॱसे भारतमे िछिड़या गेलिखन। हुनका लोकिनक लेल बापक पापक बीच गाममे रहब किठन भऽगेलिन। प£ी सेहो अ{व{थ रहए लगलिखन आ करीब चािर सालक बाद {वग= गेलीह। पेरोलपर आिब नटवर लाल प£ीक सं{कार केलिन। करीब सात साल जेलमे सरलाक बाद ओ गाम घुरला। मुदा हुनका मुखरापर कोनो «लािनक भाव किहयो निह एलिन। एखन गामे रहैत छिथ आ बेटा सबहक पठाओल टाकापर गुजर करैत छिथ। कोिशश तऽओ एखनहु करैत छिथ लोककS ठकबाक, पुरान आदित जे छिन, मुदा आब लोक िहनका चीि_ह गेल अिछ से िहनका निह सुतरै छिन। q
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10. झलकी देवी मूल नाम : अात, सब िदन लोक ओकरा एही नामसँ जनैत छैक। िपताक नाम : रतन सदाए ज_म ितिथ : ठीकसँ निह बूझल मुदा हमर समवय{के अिछ झलकी। उपलिËध : झलकी अपन माए-बापक एकमाL स_तान। बचेसँ कने गौरवाह। किहयो कोनो समवय{क छॱड़ाकS गुदानलक निह। िबयाह भेलाक बाद एतिह रिह गेल। पित घर-जमाए बिन गेलिखन। झलकी सु³िर अिछ एखनहु। जखन ओ यौवनक देहिरपर डेग देलक तखन गाममे बहुतोकS मोन डोललै। कसल देह, सुगिठत बqिह आ यौवनक अ_य सब लJणसँ यु±त जखन ओ अàर भाव बाध िदस जाइत छल तखन हमरा उमेरक छॱड़ा सब ओकर पछोड़ धऽलैत छल। ओकरा लेल धन सन। एक बेर चौरमे रहमतबा कने नजदीक आिब गेलै, झलकी पाछू घूिम ओकरा तेहन चाट मारलकै जे ओ ठामिह खिस पड़ल, दqती लािग गेलै। तकर बादसँ हमरो सबकS बूझल भऽगेल आ झलकी अपनहुँ आr{त भेल जे िकयो ओकरा देहमे िभरबाक साहस निहए करतै। हम जखन िदjली चिल गेलहुँ तखनुक घटना िथक। झलकी एकसिरये छल घरमे। एिह बातक फाएदा उठा मिटकोरबा गामक भूतपूव= मुिखयाक बेटा अपन एकटा उÔंड संगीक संग ओकरा घरमे Dवेश केलक बलाeकारक उ]ेcयसँ। मुदा चल गेल यमलोक। झलकी किचया हqसूसँ दूनूकS दू टुकड़ी कऽदेलकै आ घरेमे गािर देलकै। ओतबे निह, शोिणत लगले कपड़ामे राितएमे हqसू हाथमे लेनिह सॱसे टोलमे िचकिर कए किह देलकै जे िकयो यिद गवाही देतै तऽओकरो यमलोक जाए पड़तैक। तकर बाद पोखिरमे नहा लेलक, हqसू धोलक आ आिब कए िनि _त भऽकए सूित रहल। ओकर एिह धमकीसँ कानूनक काज तऽ²िकतै निह। अिगला िदन थाना पुिलस ओकरा ओिह ठाम पहुँिच गेलै। झलकी घरसँ बहराएल तऽगरदिनमे सातटा किचया हqसूक माला पिहरने। एहन रौo ¤प तऽपुिलसो किहयो निह देखने छल। दूनू पुिलस दरोगाक पाछू सुटिक गेल जेना मरखाहा सqढ़कS अबैत देिख छोट बचा माएक पाछू सुटिक जाइत अिछ। ककरो िह7मते निह होइ ओकरा लग जेतै, आ िक घरमे िकछु सच= करतै। दरोगा ओकरा पुछलकै- “तॲ राितमे ककरो खून केलही?” झलकी िनडर भाव उर देलक- “एखन तऽदुइएटा कS कटलइयैए, जँ छॱड़ा सब आबहु निह सीखत तऽदू सैइयोकS कािट देबै एही किचया हqसूसँ। जकरा जे करबाक छैक से कऽिलअए। हम ने कतहु जेबै आ ने ककरो अपना देहमे हाथ लगबए देबइ।” दरोगा मुिcकलमे पिड़ गेल। ओ दूटा िसपाही लेने आएल छल जे खूनीकS हथकड़ी लगा कए िघचने आओत थाना, जेना ओ सब िदनसँ करैत आएल छल। एहन काली माइसँ भSट हेतै तकर सपनोमे कोनो अ_दाज निह छलै। एकेटा उपाय छलै जे मिहला पुिलस बजाओल जाए निह तऽई मौगी की कऽबैसत से निह जािन।
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दरोगा हेड±वाट=रकS फोन लगेलक आ ओतिह बैसल रहल, झलकी चल गेल आßन अपन काज करै लेल। ककरो िह7मत निह भेलै ओकरा आßन ढुकै के। करीब तीन घंटाक बाद मधुबनीसँ जीपपर सवार चािरटा मिहला पुिलस एलै। ओ सब जखन झलकीकS हथकड़ी लगा पकड़ै लेल गेलै, झलकी ओकरो सबकS डqिट देलकै आ हाथ तेना ने झटिक देलकै जे एकटा मिहला पुिलस खिसए पड़ल। ओ बेपरवािह ओिह चा¤सँ पुछलकै- “तॲ सब मौगी छ ने। कह जे यिद राितमे िकयो तोहर इÉजत लूटै लेल तोरा लग पहुँचतौ तऽकी करबही? अपन बचाव करमे, ओकरा पाठ पढ़ेमे िक उतान भऽकए पिड़ रहमे?” सब सकदम। ककरो कोनो जबाबे निह फुरा रहल छलै झलकीक DÖक। जबाब फुरेबो करतै तऽकोन भाषामे झलकीकS उर देतै? बड़ी कालक नाटक के बाद झलकी अपनिह मोने थाना िवदा भेल। िकयो ओकरा देहमे निहए िभड़लै। आगू आगू झलकी, ओिहना सातो किचया हqसूक हँसुली पिहरने, केश खूजल, उिड़याइत, आ पाछू दरोगा िसपाही आ िकछु गौआँ सब। िजनकर बेटा कटलिन ितनका लोक एखन तक कतहु निह देखलक। झलकी हाजतमे ब_द भेल, फेर मधुबनी पठा देल गेल। मोकदमा चललै मुदा सरकारी ओकील कोनो तरहक साÇय जुटेबामे असमथ= रहलाह। पूरा गाम झलकीक समथ=नमे जुिट गेल। छओ मासक बाद झलकी बरी भेल आ गाम घुिर आएल। पिछला पंचायत चुनावमे झलकी िनिव=रोध सरपंच चूनल गेल। आब ओ Ëलॉकपर आ इलाकामे झलकी देवी नामे DिसिÐ पािब रहल अिछ। एखन गामक पंचैतीपर ओकर रौo ¤पक Dभाव झलकैत रहैत छैक। फल ई जे अपराधो कम भेलैए। हम सब लािग गेल छी Dयास मे जे अिगला िवधान सभा चुनाव मे झलकी क एमएलए बना पटना पठाबी । हमरा सबहक िवधानसभा JेL अनुसूिचत जाित लेल आरिJत छैके । Ëलॉक पर ओकर लोकिDयता देखैत ई लÇय अस7भव निह बुझाइत अिछ । ओ अपनहुँ एिह िदस fयान देलक अिछ आ िकछु पढ़ब लीखब शु¤ केलक अिछ। गामक लोकक कहब छैक जे झलकी साधारण मिहला निह, कालीक अवतार अिछ। जखन ई मरत तखन एकरा सारापर काली मंिदर बनाओल जाएत। q
11. राजा-रानी
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हमरा गाममे एकटा एलाह राजा। आ हमरे गामक पुLी भऽगेलिखन हुनकर रानी। एतए िहनक मूल नाम, ज_म ितिथ आिदसँ हमरा सबक सरोकार निह अिछ, माL िहनक अÜुत चिरL लीख रहल छी जे िहनका दूनूकS वा{तिवक अथ=मे हमरा गामक पूÉय राजा-रानीक ¤पमे {थािपत कऽदेलक आ इलाकाक अ_य गाम सबमे सेहो िहनकर Ýयाित बहुत पसरल। राजा तऽजिहना नाम तिहना हुनक िवशाल शरीर आ उदा चिरL। हुनकर चिरLक Dशंसा सुिन बहुतो कुमािर क_या अपन भा«य अजमौलिन मुदा राजाकS तऽएकेटा पिस³ पड़लिन। भऽगेल राजा आ रानीमे Dेम। से एहन Dेम जे लोककS िवrासे निह होइ। बूढ़ पुरान सब बाजए लगलाह- “हौ, ई कोनो साधारण Dेमी-युगल निह छिथ, ज¤र कोनो देव अंश छिथ। गामक ई उरदाियeव जे िहनका दूनूक रJा करए।” बस, तिहना भेल। िहनकर आवास बनाओल गेल, सब तरहक सुख सुिवधाक इ_तजाम कएल गेल। पार बqिट गौआँ सब िहनकर भोजन पठबए लागल। जिहया जकर पार होइ ओ अपनाकS ध_य बूझए जे आइ ओकरे अ³-पािनसँराजा-रानी तृ®त भेलाह। राजा-रानी एक दोसराक लेल Dाण दैत। रानी तऽअपनाकS अित भा«यशाली बूझिथ जे सब िकछु होइतो हुनकर कोनो सौितन निह छलिन। बहुतो लोक Dयास केलक जे एको नजिर राजा अ_य क_यापर दऽदेिथ मुदा बेकार। राजा तऽरानीक Dित समिप=त छलाह। आब हुनका एहन आeमतृि®त भेलिन जे ककरो अनका िदस तकबो निह करिथ। जेना िक Dकृितक िनयम िछऐक, राजा-रानीक Dेमक फल भेल हुनकर तीन पुL आ एक पुLी। पुL लोकिन जेना जेना पैघ होइत गेलाह, अपन अपन यवसाय स7हारलिन। बिच गेलिखन पुLी। ओहो तीवá गितए बढ़ए लगलिखन। रानीकS िच_ता भेलिन एकर िबयाह कोना करौतीह। किहयो िबयाह निह करौलिन। अपने तऽतेहन राजकुमारक Dेममे फँसलीह जे िबयाहक DÖे निह उठलैक। मुदा बेटी? रानीकS डर छलिन जे जवान बेटीकS देिख कतहु राजाक मोन डोिल ने जािन। मुदा राजा अपनिह अपनाकS स7हारने रहलाह। ऋतुमासक समय पर बेटीकS पु²षक ज¤रित भेलैक। ओ ए7हर-आ7हर तकलक। कतए जाएत? ओकरा माए-बापक Dेमक िख{सा तऽबूझल निह छलैक। ओ लागल ओही पु²षक चा¤ कात चªर काटए जे सबसँ लगमे ओकरा भेटलैक। ओ िबसिर गेल जे ओ पु²ष ओकर ज_मदाता छलैक। पु²ष अथत हमरा गामक राजा अपनाकS बहुत स7हारलिन मुदा भावीकS के रोिक सकलए? ओ नवयुवतीक चािलमे फँिसए गेलाह। ओकरा शरीरसँ उठैत मादक ग_ध हुनका मदम कऽदेलक। हुनक संयमक बा_ह टुिट गेलिन। नवयुवतीक काम-िपपासा तृ®त भेलैक। ई दृcय रानीसँ नुकाएल निह रहलैक। रानी बजली िकछु निह मुदा बहुत दुखी ज¤र भेलीह। ई घटना हमरा सबकS देखल अिछ जे ओही राित रानी मिर गेलीह। राजा अपनाकS दोषी मानए लगलाह। एिह नवयुवतीकS अपन दोसर रानीक ¤पमे ओ {वीकार निहए कऽसकलाह आ एक मासक भीतरे शोकसँ डूबल ओहो शरीर eयाग केलिन।
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राजा-रानीक एिह अमर Dेमक िख{सा इलाकाक आनो गाममे लोक सबकS बूझल छैक। q
12. अ_तमे एखनुक समय जकq यिद पिहने िरयिलटी शो के Dचार भेल रिहतै आ हमरा गामक लोककS िकछु बूझल रिहतैक तऽ खुरचन ठाकुर आिचलमसॲट भाइ ज¤रे {टेजपर िसनेमा {टारक सामने अपन करतब देखा कए इनाम लूटने रिहतिथ। तिहना जँ ओिलि7पक आ अ_य खेल महोeसव सबमे भाग लेबाक अवसर भेटल रिहतै आ िक मैराथनक Dचार भेल रिहतैक तऽके टहलू दासकS हरा सकैत छल? आइ िमjखा िसंहक बदला टहलू दासक नाम लोक जिपतए। हमरा गामक नामे ओिलि7पक मेडल रिहतए। ल7बोदरक भोजनक खोराक ज¤रे िगनीज बुक ऑफ वjड= रेकॉड=मे िलखा गेल रिहतै। िबग बॉस सन शो लेल बीए अित उपयु±त यि±त होइतिथ, सब Dितभागीमे झगड़ा लगा अपने जीत जइतिथ। यिद िकयो ढंगसँ पैरवी केने रिहतै तऽहुनका सरकारक कृिष पिuडत पुर{कार सेहो भेिट जइतिन। पिuडतजीक आशीव=चनक शËदकोष यिद छिप गेल रिहतिन तऽ ज¤रे अपने सब हमरा गामक एिह िवभूितसँ पिरिचत भऽ गेल रिहतहुँ। छपेबाक Dयासमे लागल छी। ईहो अि¿तीये होएत से हमरा िवrास अिछ। फूलन देवीक ओतेक नाम भेलै मुदा हमरा बुझने साहसमे ओ झलकीक पासß निहए होइतए। झलकी एखन अिछए आ ओकरा बहुत नाम कमेबाक छैक। हमहूँ एिहमे ओकर मदितमे लािग गेल छी। जे समय बीत गेल से समय तऽघुराओल जेतै निह, वत=मानकS तऽसुधारी। जिहया झलकी एमएलए बिन जाएत तिहया हमर खकपितया गामक नाम अपनिह देश मे सबतिर Dचािरत भऽ जेतै। आब अपने सब बुिझए गेल हेबै जे हमरा गामक एिह र£ सभक फोटो िकएक निह देल गेल। िदवंगत लोक सबकS फोटो अिबतै कतए सँ? िविभ³ कारणसँ बीए, नटवर लाल आ पिuडतजी फोटो निह िखचौलिन। झलकीक फोटो तऽ छैक मुदा एखन ओ फोटो छपबए निह चाहैत अिछ। ओकर लÇय पैघ छै। फूलन देवीपर िसनेमा बनलै तऽ झलकी पर िकएक निह? जखन झलकी एमएलए बिन जाएत तखन अपनिह ओ ई काज कऽ लेत। ओकरो पूण= इछा छैक जे गामक नाम उजागर होअए। एकर तैयारी लेल ओकर जतेक Dोाम होइत छैक तकर भीिडयो बना कए हम सब रखने जाइ छी। हमरा आशा अिछ जे किहयो ओकर उपयोग झलकीपर िसनेमा बनौिनहार करबे करता। जारी....
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१. नारायण यादव - भाय-बिहन २. डॉ. बचेrर झा-मैिथली सािहeयमे यदुनाथ झा ‘यदुवरक देन ३. राजदेव मuडल- वापसी (एकvकी) १ नारायण यादव भाय-बिहन मगध देशक राजा व²णदेव छलाह। ओ महान Dतापी, योÐा, वीर , नीित-िनपुण , कुशल Dशासक आ Dजा पालक राजा छलाह। व²णदेवक _याय िDयता आ कला कौशलक Dसंशा दूर-दूर तक फैलल छल। राजाक िवयाह महान िवदुषी आ सु³िर राजकुमारीक संग भेल छल। राजकुमारी दोसर देशक राजा अ²णदेवक जेQपुLी छलिथ_ह। ¤प-रंग आहार-यवहार एतेक नीक छलख् जे राजा-प£ी Dित समिप=त छलाह। िवयाहो बड़ धू-धामसँ भेल छल। बहुत िदन धिर दा7पeय जीवनक िनव=हन करैत एक पुL आ एक पुLी र£क Dाि®त भेलै_ह। पुLक नाम िशवधर आ पुLीक नाम गायLी छल। िशवधर जेठ आ गायLी छोट छलीह। राजा व²णदेवक लार-®यार आ मायक वाeसjय Dेमसँ िशवधर आ गायLी पिरलािलत होइत रहलाह। राजा दुनू स_तानकS िशJा हण करयवाक हेतु यो«य िशJकक सािनfयमे दय देने छलिथ_ह। समयक गित ससरैत रहल। राजा िकछु आवcयक कायथ= राÉयसँ बाहर गेल छलाह। रानी अपन रिनवासमे पलंगपर सुतल छलीह। तावत् देखैत छिथ जे मकानक भेिटलेटरपर जे खाली जगह छलैक , ओिहपर एकटा बगड़ा आ बगरनी खॲता लगाकय सुखपूव=क जीवन यितत करै छल। दुनू पि-प£ीमे बड़ Dेम छल। वगरनी गभ=वती छलीह। दू-चािर िदन वाद ओ अंडा देलक। अंडा जुएलाक बाद बचा सेहो भेलैक। बगरा आ बगरनी अपना बचाकS चॲचसँ खाना खुआवैत छल। कोनो दुघ=ना बस बगरनीक िनधन भय गेलैक। आब बगरा दोसर शादी कय दोसर बगरनीकS अपना घर (खॲता)मे अनलक। बगरनी जखन नव घरमे अयलीह तँ पूव=सँ पािलत बचाकS देखलक। बचाकS देिखते बगरनी ई°यसँ जरय लगलीह। एका_त पािव ओ गराक बचाकS चॲचसँ नॴचा िगरा देलक। ई दृcय देिख रानी याकुल रहय लगलीह। बड़ िचंितत रहय लगलीह। सिदखन मनमे सोचिथ जे एिह िजËबगीक कोनो ठेकान निह। जँ कहॴ हमरो िनधन भय जाए तँ हमरो वाल-बचाक संग एिह Dकारक घटना न घिटत भऽ जाए। एिह हालतमे रानी सोचलक जे ई बात राजाकS किह राजासँ Dिता करावी जे हमरा मुइलाक बाद ओ दोसर िवयाह निह करिथ।
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राजाकS बाहरसँ अयलाक बाद रानी सभ बात राजासँ किह सुनौलै_ह। आ ओहो राजासँ Dिता करौलै_ह जे जँ हमरा िकछु भय जाय तँ अहॉं दोसर िवयाह निह करब। राजा रानीक बात सुिन अचंिभत भय गेलाह। राजा बजलाह- “अहॉं ई अशुभ बात िकयैक बजैत छी। ” रानी बजली- “एिह िजनगीक कोन ठेकान। ” काल¬ममे समय िबतैत गेल। समयक Dवाहमे बहुतो पिरव=न भेल। रानी महामारीक Dकोपमे पिड़ गेलीह। डा±टर इलाज करय लगलाह।मुदा ईrरक मजÒक आगा ककरो िकछु निह चलैत अिछ। हदीशक एक पॉंित अिछ- लाइलाही इjलाह महमदे रसूjलाह। ईrरक मजÒक वगैर एकटा पो निह िहलैत अिछ। आ रानी तेहेन ¤सान ने ¤सलीह जे बौसव किठन भय गेल। wाÐ कम= स7प³ भेल। राजा अपन Dिताक अनुसारे िववाह करब मनसँ िनकािल देने छलाह। साल-दू-सालक वाद कुटु7ब , महामंLी आ शुभ िच_तकक आह पर राजा िववाह करवाक हेतु िवचार करय लगलाह। लोक सभक कथन छल जे राजाक राजपाट िवना रारा-रानीक चलौनाइ अस7भव अिछ। राजाक मन डोिल गेलै_ह आ ओ शादी कय लेलैथ। याहीसँ सगही वेशी दुला¤ होइत अिछ। राजाक सगही िकिनया रानीक िर±त पदकS भरलैथ। रानी अपन काम काज स7यलै_ह। िवाही किनयॉंक बाल-बचाक Dित मनिह मन ई°यक भाव राखय लगलैि_ह। राजा बुिÐमा छलाह। ओ अपन पुL िशवधरकS िशJा Dदान करवाक लेल कोनो नीक {कूलक छाLावासमे रखबा देने छलिथ_ह। संयोगसँ िव]ालय िकछु िदनक लेल ब_द भेल छल। तS िशवधर छाLावाससँ घर आिव गेल छल। एक िदनक बात छलैक। िशवधर गे_द खेलाइत छल। गे_द उछिल कऽ राजाक आंगनमे रानीक गोदमे आिव खसल। िशवधर दौगल अयलाह आ अपन सौतेली मॉंक गोदसँ गे_द लय पड़ेलाह। रानी नौकरानीसँ पुछलिथ_ह जे ई वालक के छल जेकरा ऐतेक िह7मत भेलैक जे हमरा गोदीसँ गे_द लय लेल। नौकरानी बाजिल- “मालिकन ई बचा अिहंक सौतेला बेटा अिछ आ एकटा बेटी सेहो अिछ। ”
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रानी ई°यसँ अिभभूत भय दु:खी रहय लगलीह। हमेशा यैह सोचिथ जे राजा अपना बाद एकरे राज पाट देिथ_ह। हमरासँ जनमल पुLकS राजा निह बनौिथ_ह। ई धृतरा°Ñ जकॉं पुL मोहमे पिड़ गेलीह। िदनानुिदन रानी ¤«न रहय लगलीह। कतेक डॉ±टर-वै] आबय लगलाह आ इलाज करय लगलाह। मुदा दवाईक कोनो Dभाव रानीपर निह पड़लै_ह। राजा सेहो दु:खी रहय लगलाह। राजा आब अिधक समय रानीपर देमय लगलिथ_ह। रानीकS कोनो रोग रहत तखन ने दवा-दा¤सँ ठीक हेतै_ह। राजा रानीसँ बार-बार पुछिथ_ह जे अहॉं कोना ठीक होयब। रानी राजासँ Dिता करौलै_ह तकर बाद कहलै_ह जे हमरा िशवधरक कोढ़-कलेजी आिन िदअ। तखन वीमारी ठीक होयत। राजा Dिता कय चुकल छलाह। त िववश भय जjलादकS आदेश देलै_ह जे िशवधरकS जंगलमे घुमयवाक हेतु लऽ जाऊ आ ओकरा मािर ओकर कोढ़-कलेजी नेने आऊ। एमहर िशवधरक बिहन अपन सौतेली मॉंक मनोदशाकS भािप चुकल छलीह। गायLी राजा-रानीक स7वादसँ अवगत छलीह तS ओ मायक बगहना-जेवर आ िकछु ¤पया-पैसा लय जjलादक पाछू-पाछू जंगल पहुँचलीह। िशवधरक बिहन कहय लगलिथ_ह जे यौ जjलाद भाई लोकिन हमर माय अहॉं सभकS कतेक मानैत छलीह। अहॉं लोकिन जे धन स7पित लेब से लीअ आ हमरा भाईकS छोिड़ दीऔ_ह। हमरा सौतेली मायकS कोनो वीमारी निह छैक। ओर हमरा भाईकS मारबाक ®लान अिछ। तS अहॉं लोकिन कोनो जानवरक कोढ़-कलेजी लय लीअ आ हमरा सौतली मायकS दय देबै_ह आ कहबै_ह जे ई िशवधरक कोढ़-कलेजी अिछ। गायLीक बात सुिन पिहने तँ जjलाद लोकिन नाकर-कुकर केलै_ह। मुदा बादमे धनक लोभसँ लोिभत भय िशवधरकS एिह शत=पर छोड़वाक हेतु तeपर भेलाह जे ई किहयो अपना देश घुिम कऽ निह आबिथ। िशवधर दुनू भाए-बिहनकS ई शत= मानय पड़लै_ह। आ गहना-जेवर ¤पया पैसा लय िशवधरक जान बकैस देल गेल। िशवधर अपन देशकS छोिड़ दोसर देश चल गेलाह। आ िशवधरक बिहन गायLी घुिम कऽ राज दरवारमे आिव रहय लगलीह। एमहर चvडाल लोकिन कोनो जानवरकS मािर , ओकर कोढ़-कलेजी लय रानीकS दय देलिन। रानी बड़ खुश भेलीह। ओेमहर िशवधर अपन देश छोिड़ दोसर देश चल गेलाह। राजदरवारमे जा राजा सेवा- सुwुषामे रहय लगलाह। राजा बेटा छलाहे बड़ पैघ सं{कारी सेहो छलाह। राजा िन:स_तान छलाह। तS िशवधरकS अपना बेटा जकॉं मानय लगलाह। िशवधरकS उच िशJा देबाक
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५८ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 222 9-547X VIDEHA 32
यव{था कयलै_ह। िकछुए िदनमे िशवधर सव=गुण स7प³ भय गेलाह। राजा सेहो वृÐ भय गेलाह। िशवधर मे राÉयोिचत गुण देिख राजा हुनका अपन उरािधकारी िनयु±त कय संयास धारण कय लेलिथ। एमहर राजा व²णदेव सगही प£ीक संग िमिल राजपाट चलबय लगलाह। व²णदेवक प£ी राजाकS अपन पिरणय लीलामे जकरने रहली। राजा हर हमेशा प£ीक जी-हुजुरीमे लागल रहैत छलाह। गंगा दशहराक िदन छल। गंगा {नानक बहाना बना कय अपन संतौली बेटी गायLीकS संग लय गंगाकात अयलीह। दुनू माय-बेटी गंगामे {नान करय लगलीह। रानीक िनयतमे खॲट छल। ओकर गायLीक Dित ई°यक भाव जािग उठल। आ रानी गंगाक तेज धारामे गायLीक धकेल देलक। गायLी गंगामे दहा गेलीह। रानी कानैत-िखझैत घर अयलीह। िकछु दुरक बाद राजा िशवधर राÉय पड़ैत छल। संयोग नीक छल। िशवधर िकछु सैिनककS लय िशकार खेलवाक Dयोजनाथ= गंगाक िकनारमे आयल छलाह। िशवधर गंगामे भिसयैत विचयाकS देिख िसपाहीकS आदेश कयलाह जे एकरा गंगासँ ऊD कर। िसपाही भिसयाइत गायLीकS ऊपर कयलक। गायLी िन=व{L भय गेल छलीह। राजा ओिह िन=व{L क_याकS अपन चादर पिहरा अपना दरवारमे बिहकरनीक ¤पमे रािख लेलिथ_ह। गायLी अपना भाइकS पहचािन गेलिथ_ह। ओ सोचय लगलीह जे ई तँ हमर भाई िशवधर िथकाह। राजा िशवधरोकS गायLीक Dित िवशेष {नेह रहैत छल। एक समयक बात छल। राजा िशवधरक राÉयमे बड़ पैघ मेला लागल छल। राजा ओिह मेलामे भाग लेबाक हेतु चललाह। ओ बिहकरनी लग जाकय पुछलिथ_ह- “गैबिहकरनी, मेलासँ तोरा लेल की नेने अयवौ से कह। ” विहकरनी बजलीह- “मािलक , हमरा वा{ते एक काठक बनल हंस नेने आयब। ” राजा िशवधर अपना राÉयक सभसँ पैघ मेलाक उाटन कय बहुतो रास रस-समान खरीद बिहकरनीक हेतु काठक बनल हंस सेहो खरीदलै_ह। निह जािन जे बिहकरनीक Dित राजाक {नेह अनायासे िकयैक बिढ़ गेल छल। राजा गायLीमे अपन बिहनक ¤प देखैत छल। आ अपन बिहनहुसँ अिधक fयान रखैत छलाह।
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संfयाक समय जखन राजा िशवधर घर पहुँचलाह तखन िकछु समानक संग काठक बनल हंस सेहो बिहकरनीकS देलिथ_ह। गायLीक शयन कJ बहरधारामे छल। जखन िनिश भाग राित भय जाइत छल , सभ िकयो सुित रहैत छल तखन बिहकरनी काठक बनल हंसकS अपना सामनेमे राखिथ आ संगिह सूप आ वारहिन सेहो राखिथ। सभ व{तुकS सामने रािख वाजिथ- “हे हौ हंस , ई सूप वारहिन िछयैक की निह ?” हंस बाजिथ- “हँ तँ हँ। ” विहकरनी बाजिथ- “ई राजा हमर भाई िशवधर िथकाह की निह ?” काठक बनल हंस- “हँ तँ हँ। ” बिहकरनी- “हमरा भाईकS जjलाद मारबाक हेतु जंगल लय गेल की निह ?” हंस- “हँ तँ हँ। ” एिह Dकारे बिहकरनी अपन यितत घटना हंसकS सुनाबिथ आ हंस सभ क¤ण कथामे हुँहकारी भरिथ। नोकर-चाकर , सर-िसपाही आ खुिपया िवभाग राजाकS कहलिथ_ह जे सरकार बिहकरनीकS अपने की खरीद देलयि_ह जे भिर राित हँ मे हँ करैत रहैत अिछ। सभक िन_द हमराम कय दैत अिछ। राजा Dतापी आ सं{कारी छलाह। ओ एक राित जखन सभिकयो गाड़ी िनoामे छल तखन अपना शयन कJसँ उिठ बिहकरनीक बहर धाराक ओठमे आिब ठाढ़ भय गेलाह।
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राजा िशवधर बिहकरनीक सभ बात सुनय लगलाह। विहकरनी सूप , वारहिन काठक हंसक सामनेमे रािख बाजिल- “हे हौ हंस , ई सूप वारहिन िछऐक की निह ?” हंस बाजल- “हँ तँ हँ। ” बिहकरनी- “ई राजा िशवधर हमर भाई िथकैक की निह ?” हंस- “हँ तँ हँ। ” बिहकरनी- “हम एक भाई आ एक बिहन िथकहु की निह ?” हंस- “हँ तँ हँ। ” बिहकरनी- “हमर अपन माय बचपनेमे मिर गेली की निह ?” हंस- “हँ तँ हँ। ” बिहकरनी- “हमर बाबूजी दोसर िवयाह कयलै_ह की निह ?” हंस-
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“हँ तँ हँ। ” बिहकनी- “हमर भाई गे_द खेलाइत छलाह की निह ?” हंस- “हँ तँ हँ। ” बिहकरनी- “गे_द उछिल कऽ हमरा सौतेली मायक गोदीमे चल गेल की निह ?” हंस- “हँ तँ हँ। ” बिहकरनी- “जjलादक माfयमे हमरा भायक कोढ़-कलेजी लेवाक लेल कहलक की निह ?” हँस- “हँ तँ हँ। ” बिहकरनी- “हमर भाई हमरा गंगासँ छािन वाहर लौलै_ह की निह ?” हंस- “हँ तँ हँ। ” विहकरनीक मुँसँ ई शËद सुिन राज िशवधर िवäल भय गायLीक गद=िन पकिड़ कानय लगलाह आ गायLी सेहो गलामे गला लगा कानय लगलीह। राजा िशवधरक खुिपया िवभागक पदािधकारी जे राजाक पाछॉं राजाक गित िविधपर नजिर रखवाक हेतु छपल छलाह। ओ तुरत महामंLीकS व{तु ि{थित सँ जानकारी करौलै_ह।
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महामंLी दौगल राजाक समीप आिव राजा आ गायLीकS बोल-भरोस दैत दुनूकS रिनवामे लय गेलाह।
२ डॉ. बचेrर झा मैिथली सािहeयमे यदुनाथ झा ‘यदुवरक देन सहरसा िजलाक Dाचीन लेखक वा किव लोकिनक िव{तृत पिरचय Dा®त करबाक साधन निह अिछ। य]िप हुनका लोकिनक रचना अिधकvशत: Dकािशत होइ त छल ‘िमिथला मोद ’मे पर_तु कोनो सािहeयकार अपन पिरचयक Dसंगमे निह िलखैत छलाह। यदुनाथ झा ‘यदुवर ’मैिथली भाषा एवम् सािहeयक िवकासक लेल ‘मोद युग ’मे जे कोनो अनवरत सािहeय रचना करैत रहलाह तािहमे सँ एक Dमुख यि±त रहिथ ‘यदुवर ’सहरसा िजलाक मुरहो गामक वासी, िशJे सं{कृतक िव¿ान डाक-तार िवभागमे जीिवकाप³ रहिथ। िमिथला मोदक एक सश±त लेखक आ यापक अथ=मे जातीय िहत िच_तक छलाह। िहनक ज_म अनुमानत: 1888 ई. तथा मृeयु 1932 ई.मे भेलि_ह। मोदक ज_मिहसँ िहनक रचना उपलËध भेल छल। डॉ. जयका_त िमw िहनक Dसंगमे कहैत छिथ- ‘Enthusiasm for Maithili unbound, Very few well Parallel to him’ मैिथली सािहeयमे गीतक जे एकटा सश±त पर7परा अिछ तािह ¬ममे यदुवरजी बहुत गीतक रचना कएने छिथ। ओकर िवषय व{तु Dितपादन करबाक शैली आिदमे पिरव=न कऽ देलि_ह। गीतहुमे हुनक नव दृि¸कोणक अिभयि±त भेल अिछ। गीतक अितिर±त अनेको किवता, कैकटा िनव_ध िमिथलाक एक जिटल सम{या, वैवािहक सम{याकS D{तुत करैत कथा आिद Dकािशत छिन। िहनक िवचारधारा कतेक Dगितशील एवम् आधुिनक छलिन से {प¸ ¤पS अिभय±त भेल अिछ। मैिथलीक रा°Ñीय गीतक संकलन मैिथली िगतvजलीक भूिमकामे संकलन एवम् Dकाशन कय यदुवरजी एकटा नव िदशाक संकेत कयलि_ह जकर ऐितहािसक महeव छैक। भूिमकामे {प¸ कहने छिथ : ान wृंगािरक स7ब_धी किवता पराकाQा धिर पहुँिच गेल अिछ आब रा°Ñीय िवषयक किवता पराकाQा धिर पहुँचेबाक अिछ। आब रा°Ñीय िवषयक
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किवताक Dकाशन होयब परमावcयक अिछ। एिहसँ िसÐ होइछ जे मैिथलहुमे रा¸ीय भावना एवम् आधुिनक िवचारधाराक Dादुभव होमए लागल। शंकरक िववाह नामक गjप , Dभात Dभा, मैिथलीक आरतीनव युगक लोकिनसँ। गृ°म ऋृतु वण=न åमर आिद कायरचना तथा वस_त आिद िनव_ध Dकािशत छिन जकर उjलेख आगq कयल जाय। मैिथली समाजक यापक ¤पS िहत िच_तक िमिथला, मैिथल आ मैिथलीक उ³ितक हेतु सतत संघष=शील। यदुवरजी कतहु कतहु परंपराक पालन किरतहु िवषय-व{तु एवम् िशjप दूहूमे नवीनता आिन देलिन। देश भि±त भावनाकS {प¸ ¤पS मुखिरत कयने छिथ। सव= Dथम D{तुत अिछ िहनक िकछु गीत। {वभािवक धािम=क Dवृिक रहबाक कारणS भि±त गीतक रचना करब {वाभािवक। थोड़ शËदमे हृदयक भि±तभाव अिभयि±त करैत- ‘दुगक व_दना : जय जय दुगæ, दुिरत िनवारणी, भव भय हािरणी िरपु संहािरणी, जन सुख कारीिण तारीिण , वढ़ु तनु धािरणी जगदुपकारीिण , िशव संग सतत िवहारीिण , जय नारायणी नरक िनवारीिण यदुवर अधम उधारीिण।। तीनटा गीतमे चuडीक व_दना कयने छिथ। जािहमे देश भि±तक भावनाक जे अिभयि±त भेल अिछ से पqतीएसँ {प¸ होइछ। “िमिथलाक मान राखू भारतमे चuडी, एरहु सभ पाप हो रामा।। ” दोसर गीतमे भगवतीकS उपराग दैत छिथ_ह जे जािह भूिमसँ अहq ज_म लेलहुँ तकरे आइ दुद=शा अिछ आ से अहq देखैत छी। िवषम व{तु एवम् िवचारधारामे कतेक आधुिनकता छलिन तकर उदाहरण अिछ- “मैिथलीक आतÒ नामक किवता। ” एिहमे मैिथली अपन स_तानकS क¤ण {वरS अपन दुद=शा दूर करबाक लेल कहैत छिथ_ह। िमिथला िशिJत समाजकS जे अपनाकS DवुÐ मानैत
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छलाह िह_दीए िDय छलै_ह। हुनका लोकिनपर ने अंेजक मातृभाषाक Dेमक Dभाव आ ने बंगालक नव जागरणक। अपने घरमे अपन मातृभाषा छोिड़ िह_दीक भ±त बिन अपनाकS गौरवाि_वत बुझिनहार मैिथल छलाह। {वदेश , {व भाषा, {वजाितसँ िवमुख मैिथल सन दोसर जाित भिरसके छल होएत। तS ओहन DवुÐ मैिथलक हेतु- “की अपराध हमर अिछ कहु-कहु िमिथलाक सपूत सुजान। भए रहलहुँ अिछ पतन दृि¸ सॱ हम अवनत दुिद=न खिरहान।। चूिभ-चूिभ मुख हमिह िसखाओल बाजब माय-बाप अिछ। िवलरै छी सभ हमर आई िकए हा ओ अहq लोकिन Dेमािदया।। ताकू ऑंिख उठाय कनेको िथकहुँ मैिथली माय अहqक। खैने लात िफरै छी घर-घर , कोनहुँ िविधए जीवन रािख।। दोसर किवता अिछ ‘नवयुवक लोकिनसँ नÚ िनवेदन ’ किव नवयुवक लोकिनसँ आह करैत छिथ जे ओ लोकिन आल{य छोिड़ भाषा, जाितक िवकासक लेल किटवÐ भय जािथ तािह हेतु केओ उपहासो जौ करए तँ करए िदयौ। हँसय देिख य]िप केओ अहqकS हँसय िदयौ मिर पोख , देश , जाित ओ धम= हेतु िनज िकछु तँ समय बँचाउ , कोनहु िविध देशक सेवाकS सबथल राम जँचाउ। सािहयमे åमरक चच उeयिधक होइत रहल। åमरक गुंजन कानकS तृ®त मनिह करओ , मुदा ओकर {वभाव िन_दनीय मानल जाइछ। लोभी, मुदा यदुवरजी ¤पS उदार चिरL यि±तवक संग तुलना कएल। एिह मा_यताक खuडन कय नव दृि¸कोणक {थापना कयलि_ह अिछ। हुनक मते åमर कपटी निह अिछ ओ तँ गुणक अ_वेषण करैत रहैछ। एक फूलसँ दोसर फूलपर जायब गुणक अ_वेषण करब िथक। समाजहुमे गुणवान यि±तक आदर होबक चाही। गुणवान यि±तक गुण ाहकक अभाव निह। “कारी देिख åमर सब तोहर , करइत छिथ उपहास ,
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कपटी ¤प कहै छिथ सब और दैत अिछ Lास। कारी ¤प िविचL य]िप तो िक_तु सकल गुण Ýयात् गुिणए जन करइत छिथ जगमे गुणी जनक स7मान। ” जिहना åमर चिच= तिहना कोइली आदृत। ऋृतुराज वस_तक वण=न। वस_तक आगमन संदेश बाहक कामदेवक एक शस±त सैिनक िथक कोइली। परंच यदुवरजी एहू मा_यताकS खिuडत कय जागरणक दूतमानलि_ह अिछ। एकटा ओ कोइलीसँ भारतवासीक पार{पिरक ई°य, ¿ेषकS य±त करैत कहैत छिथ_ह। “सुमिर सुमिर तोहरा हे कोिकल , नयन नीर विरसाबै, भा«यहीन भारतवासीकS जनु किहयो िवसराउ। सभकS बचन सुनाय िहतक पुिन वैर , िवरोध हैटाउ। ” िवषय-व{तुमे नवीनता अनवाक ¬ममे उपेिJत तुछ व{तुक वण=न कय एकटा नव िदशाक सूL पात कयलिन। उjलू, रेलबे {टेशनक िसंगनल , मोिसयानी,कुकुर आिदपर काय रचना करब िहनक मौिलकताक पिरचायक िथक। उदाहरण {व¤प- मोिसयानी : “शाि_त भरल छुए जे मोिसयानी, तोहर गुणकS सभ केओ मानी, कलमक मािर खाइओ ढेिर , तथािप दैत छ मिस Dितवेिर। ” एिह DकारS यदुवरजीक काय रचनाकS सव=L कोनो ने कोनो Dकारक मौिलकता, नवीनता अिछए। {वदेश , {वभाषा आ सभ जाितक िहत िच_तन , ओकर उ³ितक हेतु अथक Dय£ करब संगिह ओकर अिधकार Dाि®तक लेल संघष=शील रहब Dधान उÔेcय छल। िमिथला, मैिथल एवम् मैिथलीक लेल कतेक Dेम छलिन तकर उदाहरण {व¤प चािरटा पqती- “सूनू औ ब_धुगण eयागू ई िवषधर िन_दकS क=य पालनमे लागू, भजु मातु पद अरिव_दकS
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गqिथ एकताक सूLमे, िहनका जगाउ सब िमिल कए , िनज देश िमिथला, जाित मैिथल , मातृ भाषा मैिथली...।” अ{तु शुभम्...। 3.
वापसी
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राजदेव मuडल
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पjलवी Dकाशन िनम=ली
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दाम : `50/- सविधकार सुरिJत ©wी राजदेव मuडल पिहल सं{ क रण :2018
Dकाशक : पjलवी Dकाशन तुलसी भवन, जे.एल.नेह¤ माग=, वाड= नं. 06, िनम=ली, िजला-सुपौल, िबहार: 847452
वेबसाइट :http://pallavipublication.blogspot.com ई-मेल : pallavi.publication.nirmali@gmail.com मोबाइल :8539043668, 9931654742
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िD_ट : मानव आट=, िनम=ली (सुपौल) आवरण :wीमती पुनम मuडल, िनम=ली (सुपौल) िपन : 847452
WAAPSI One-Act Play by Sh. Rajdeo Mandal.
ऐ पोथीक सविधकार सुरिJत अिछ। कqपीराइटधारकक िलिखतअनुमितक िबना पोथीककोनो अंशक छाया Dित एवं िरकॉिडंग सिहत इले± Ñॉिनकअथवा यvिLक, कोनो माfयमसँअथवा ानक संहण वा पुनD=योगक Dणाली ¿ाराकोनो ¤पमेपुन²eपािदत अथवा संचािरत-Dसािरतनिह कएल जा सकैत अिछ।
सािहeयसँ िसनेह रखिनहार सुधीजनकS सादर समिप=त।
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५८ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 222 9-547X VIDEHA 44
पाL पिरचय -
1. पितलाल - (दहेजक लोभी बेकती) 2. लुतीचन - (पितलालक ामीण) 3. कंतलाल - (पितलालक बेटा) 4. च_देसर - (पितलालक समधी) 5. फूलोदाय - (कंतलालक प£ी आ च_देसरक बेटी) 6. सुखबा- (च_देसरक बेटा) 7. घॲघाय - (च_देसरक ामीण) 8. चटपिटया- (च_देसरक ामीण) 8.
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अंकDार7भ
Dथ म दृcय {थान- पितलालक दुआिर। समय- िदन। लुतीचनक Dवेश
लुतीचन- (जोरसँ आवाज दैत अिछ।) काकाऽऽऽयौ काकाऽ ऽ। अँगनामे िछऐ यौ। एने आऊ कनी। (पितलाल भीतरसँ िनकलैत अिछ।)
पितलाल- िकए एते जोरसँ हjला करै छँह। बाज ने की बात िछऐ।
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लुतीचन- कािà सॉंझमे हाट गेल छेलॱ। अहq समधीक भाय भेटल छल। समधी बेमार अिछ। ओ कहलक भSट करबाक लेल।
पितलाल- धुर , की भSट करबै। िबयाहमे जे दहेजक ¤पैआ बॉंकी रिह गेलै से अखनी तक निह देलक। दू गोरेक सोझामे गछौटी केने छल।
लुतीचन- छोिड़ दहक आब ओइ ग®पकS। कहिबयो छै- भेल िबआह आब करब की।
पितलाल- केना छोिड़ देबइ। ऐ कारणे तँ अँगनामे माए बेटा दुनू िमिल कऽ हमरासँ लड़ैत रहैए।
लुतीचन- ओतए जेबहक तब ने कोनो बातो हेतह।
पितलाल- तहूँ चल ने लुतीचन। दुनू गोरे रहबै तँ ग®पो चलबैमे ठीक रहतै।
लुतीचन- ठीके छै। हमहूँ जाएब। ओनएसँ बजारक काजो केने आएब। अहqआऊ हम तैयार रहब। q (कहैत लुतीचन D{थान करैत अिछ।) सीन Óाप।
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दोसर दृcय-
समय- िदन {थान- (पितलालक समधी–च_देसरक घर।
(पितलाल आ लुतीचनक Dवेश) लुतीचन- दुआिरपर तँ कोय निह अिछ। (अँगनासँ कनबाक {वर आिब रहल अिछ।)
पितलाल- (कान लगा कऽ सुनैत अिछ) यौ समधीजी छी यौ। अँगनासँ िनकलू ने। हम दुआिरपर ठाढ़ छी। (कनबाक {वर मिÐम भऽ जाइत अिछ। च_देसरक जेठ बेटा सुखबा ऑंिख पोछैत िनकलैत अिछ।)
सुखबा- आऊ बाबू, अँगने आऊ। बाबूजी निह रहला। चिल गेला {वग=। आब हुनकासँ भSट निह होएत।
पितलाल- ओह ! जुलुम भऽ गेलइ। की भेल छेलै?
सुखबा- (कनैत {वरमे) िकछो निह भेल रहै। दू-तीन िदनसँ बेाखार लगै छेलै। आइ एकाएक छातीमे दरद उठलै आ जाबे सचेत भऽ कऽ असपताल लऽ जैतॱ ताबे पराने छुिट गेलइ।
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पितलाल- अछा सबुर करह। कनलासँ िकछ निह हेतह। की करबहक , भगवानकS इएह मंजूर छेलइ। होनीकS िकयो निह रोिक सकैत अिछ। धरतीपर एतबे िदनक दाना-पानी िलखल छेलैन। धीरज तँ बा_है पड़तह।
सुखबा- हँ, से तँ ठीके। आब दोसर उपाये कोन छइ। मुदा पिहनेसँ एहेन बातक किनयé शंका निह छेलइ।
पितलाल- हौ, एहेन मृeयु तँ सभसँ नीक। िकनको सेवो-टहलक अवसर निह भेटलैन।
सुखबा- ई तँ दोसर बात भेल बाबू। मुदा अचानक जे कोनो भिरगर भार कपारपर पिड़ जाइ छै तँ...।
पितलाल- शाि_तसँ काज करबहक तँ सब चीजक रा{ता लिग जेतइ।
सुखबा- चलू बाबू। अहq सभ लहाश लग बैसब। ओइठाम िकयो नइ छइ। दाह- सं{कारक लेल हमरा कतेक चीजक इि_तजाम करए जाए पड़त।
पितलाल- चलह। (सुखबा आगू आ पाछूसँ पितलाल आर लुतीचन िवदा होइत अिछ।) q सीन Óॉप।
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दृcय- तीन
समय- िदन। {थान- च_देसरक घरक एक भाग
(चौकीपर च_देसरक लहाश अिछ। एकटा औरितया ओइठाम बैसल अिछ। सुखबा, पितलाल आ लुतीचनक Dवेश। (पितलालकS देखते औरितया नोर पोछैत िवदा भऽ जाइत अिछ।)
सुखबा- अहq सभ अहीठाम बैसू आ हमरा लकड़ीक इि_तजाम करैले जाए िदअ। (कहैत िवदा भऽ जाइत अिछ। पितलाल माथपर हाथ दऽ एक कातमे बैस जाइत अिछ।)
लुतीचन- मन िकएक दुिखत करै छी। बुढ़ छेलैथ नीके भेलैन जे मिर गेला।
पितलाल- से तँ ठीके कहै छी। मुदा प£ी आ बेटाकS की जवाब देबै? ओ तँ हमरे िदस हुड़कान मारै छइ।
लुतीचन- की हुड़कान मारैए ? पितलाल- धुर तूँ की बुझबीही। गुड़क मािर तँ धोकड़े बुझै छइ। प£ी कहैत रहैए जे लेाककS केते दहेज देलकै। मुदा अहqकS ठिक लेल। गछलो टका निह देलक। अहq बुड़बक छी। मु²ख छी। लुतीचन- अछा, सुनू एकटा बात कहै छी।
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पितलाल- कह ने रौ। कोनो उपाय लगा ने।
लुतीचन- समधीक कान िदस देखै िछऐ। (लहाश िदस इशारा करैत) दुनू कानमे सोनाक कनौसी अिछ िनकािल कऽ जेबीमे रिख िलअ। िकयो ऐठाम निह छै जे देखबो करत।
पितलाल- बात तँ तूँ ठीके कहै छँह मुदा बुिझ जेतौ तब की हएत ? लुतीचन- ऐठाम आइ केतेक लेाक एतै आ जेतइ। ओइमे की पता चलतै जे के लेलक। आ जँ बेसी डर बुझाइत अिछ तँ अपना गामे िदस चिल देबइ।
पितलाल- ठीके कहै छँह। इएह अि_तम उपाय अिछ। (उिठ कऽ समधीक लहाश लग जाइत अिछ।) q सीन Óॉप।
दृcय- चािर
समय- िदन। {थान- चौबिटया।
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(पितलाल आ लुतीचन लफड़ल चौबिटया लग पहुँच गेल अिछ। पाछूसँ सुखबा अपना दूटा गॱऑं घॲघाय आ चटपिटयाक संगे Dवेश करैत अिछ।)
सुखबा- (हjला करैत) यौ बाबूऽऽऽ। कनी ठाढ़ रहू। (पितलाल आ लुतीचन ठाढ़ होइत अिछ)
घॲघाय- (हकमैत) यौ िकएक भागल जाइ छी?
पितलाल- भागल कहq जाइ छी। हम तँ गाम जाइ छेलॱ।
घॲघाय- गाम िकएक जाइ िछऐ ?
पितलाल- जाइ छी गामपर सँ बेटा-पुतौहकS भेज देबइ। ओ सभ एता तँ दाह-सं{कारमे भागो लेता।
चटपिटया- अहqक घरपर समाद भेज देने छी। ओ सभ अिबते हेता। अहq परेशान निह होउ।
पितलाल- परेशान केना निह हएब। दूटा माल-जाल अिछ। घर-अँगनाकS सुनहट छोड़नाय नीक बात हेतइ। हम जाइ छी।
चटपिटया- एकटा ग®प सुिन िलअ समधीजी तब जाएब।
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पितलाल- जjदी कहू।
चटपिटया- केना कहब , किहतो अनोन सन लगैत अिछ आ निह कहब सेहो निह बनतै।
पितलाल- सोझ मुहS कहू ने। जे कहैक अिछ।
चटपिटया- देिखयौ, अहq ई निह सोचबै जे कोनो आरोप लगबै छी। ओना, कर-कुटमैतीमे एहेन बात बाजब अनुिचते होइ छइ। मुदा जँ निह बाजी तँ आरो अनुिचत। स_देह आ शंकाकS साफ कऽ ली, सएह उम होइ छइ।
घॲघाय- तूँ तँ तेतेक ग®पकS घुमा-िफरी करै छहक जे एिहसँ नीक हमरा बाजए दएह।
पितला- हँ-हँ, अहॴ बाजू।
घॲघाय- यौ समधीजी, लहाश लग अहॴ बैसल छेलॱ। तखनी ओइठाम िकयो निह छेलै। सोनाक कनौसी कानमे निह छइ। अँगनाक {Lीगण सभ बजैए जे समधीक कानक कानौसी अहॴ िनकािल लेिलऐ। (पितलाल चु®पी साधने ठाढ़ अिछ।)
चटपिटया- चुप रहने काज निह चलत समधीजी। सोनाक कनौसी छेलै तँए पुछै छी। अहqकS एना निह करबाक चाही।
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पितलाल- ठीके कहै छी। हमरा एना निह करबाक चाही। मुदा समधीजी जे हमरा संगे केलक से हुनका करबाक चाही? (पितलालक बेटा कंतलाल आ पुतौह फूलोदाय Dवेश करैत अिछ।)
चटपिटया- ओ तँ बेचारे {वग= चिल गेला। ओ अहq संगे की केने छला?
पितलाल- अखनी तक दहेजक ¤पैआ जे गछौटी केने छल से बॉंकीए अिछ। ओना, अपने तँ दुिनयSसँ चिल गेला। मुदा ओ ¤पैआ हमरा के देत ?
चटपिटया- ओ! तँए ओकरा बदलामे कानक कनौसी घॴच लेिलऐ।
पितलाल- तँ की किरतॱ। प£ी आ बेटा कहैत अिछ जे अहq मु²ख छी। िबआहमे ठका गेलॱ। अहq मनुख निह छी।
कंतलाल- बाबूजी, अहq एतेक नीचा िगर जाएब से पता निह छल।
फूलोदाय- (पित कंतलाल िदस तकैत) अहqक बाबूजी पिकया आदमी अिछ। जीयतक तँ बाते छोड़ू, मुइलोसँ सूइद समेत तसील लैत अिछ।
कंतलाल- हुनकर सेानाक कनौसी अपास कऽ िदयौ। आब ऐ िवषयमे हम किहयो निह बजब।
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पितलाल- ठीके छै, जखन तोरो वएह िवचार छौ तँ वापस कऽ दइ िछऐ। (पितलाल सोनाक कनौसी सुखबाक हाथमे दैत अिछ।)
घॲघाय- अछा, आब सब ग®प छोड़ू। चलै चलू, दाह सं{कारमे।
पितलाल- आब कोन मुहS ओइठाम जाएब। सोना तँ हम वापस कऽ देलॱ। मुदा हमर DितQाक वापसी तँ निह भऽ सकैत अिछ।
फूलोदाय- िच_ता निह क¤ बाबूजी। अहq चलू। हमर घर-पिलवार िछऐ। हम सब बात स7हािर लेबइ।
कंतलाल- बाबूजी, अहq तँ िघनेबे केलॱ। सासुरमे हमरो िघना देलॱ।
पितलाल- देिखयौ, जेकरा लेल कानलॱ, तेकरा ऑंिखमे नोरे निह। आब ऐठाम हम ठाढ़ निह रिह सकै छी। (तेजीसँ D{थान) q सीन Óॉप।
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ऐ रचनापर अपन मंतय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रबी_o नारायण िम w- तीनटा आलेख , दूटा लघुकथा आ उप_यास नम{त{यै (आगq)
रबी_o नारायण िमw रबी_o नारायण िमwक तीिनटा आलेख
संपि ह{तvतरण संपि ह{तvतरणअिधिनयम , 1882 १ जुलाइ १८८२सँ लागू भेल।संपि ह{तvतरण अिधिनयम {वैिछक ह{तvतरण- िब¬ी, ब_हक (भरना), उपहार, अदला- बदली, चाज=पर लागू होइत अिछ।िवरासात, िदवािलआपन, जती, _यायलयक आदेशक अनुपालन हेतु,, वा इJा पL ¿ारा कानूनक अनुपालनक हेतु कएल गेल संपिक ह{ता_तरणपरसंपि ह{तvतरण अिधिनयमलागू निह होइत अिछ। ±यो अपन संपि िकएक बेचैत अिछ? पैसाक Dयोजन भेला पर-जगजािहर जबाब अिछ।बेचएबलाकS उिचत पैसा भेिट जाइक आओर िकननाहरकS सही सलामत संपि जेना जमीन, मकान, êलैट, भेिटजाइक जािहपर िकननाहर िनवध ¤पसँ मािलकाना हक Dा®त कए सकए, ओकर {वेJा एवम् कानून स7मत तरीकासँ ओकर ऊपभोग कए सकए।एहन निह होइक जे कीननाहर सभटा पैसा दए दैक मुदा कीनल गेल संपिपर ±यो आन अपन हक लए ठाढ भए जाइक, िकंबा बलपूब=क ओिह संपिपर कजा बनओने रहए।कएबेर एहनो होइत अिछजे एकिहटा संपि कैगोटाक हाथे बेिच देल गेल हो िकंवा ओिह संपिपर बØक वा कोनो आओर यि±तक कज होइक आओर ओिह तरे ओ संपि ब_हक पड़ल हो।तािह हेतु ई आवcयक अिछ जे कोनो संपि कीनबासँ पूव= ¬ेता उिचत पूछताछ कए सुिनि त कए लेिथजे ओिह संपिपर कोनो लफड़ातँ निह अिछ। संपिक ह{ता_तरणक समयमूलतः िनÂिलिखत बातक fयान राखब ज¤री िथकः १.बेचनाहरकS ओिह संपिपर पूण= कानूनी अिधकार हेबाक चाही, तािह हेतु ओकरासँ संपिक मूल द{ताबेजक मvग ज¤र करबाक चाही, माL फोटोकqपी देिखकए सौदा निह तय कए लेबाक चाही। २.सब-रिज°Ñारक कायलयसँ एिह बातक पªाजानकारी लेबाक चाहीजे ओ संपि भरना/ब_हकतँ निह अिछ।
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३.सब-रिज°Ñारक कायलयसँ एिह बातक एिह बातक जानकारी सेहो लेबाक चाहीजे ओ संपि कहॴ पिहने ककरो हाथे बेिच देल गेल तँ निह अिछ? ४.एिह बातक जानकारी लेबाक चाहीजे बेचनाहर ओिह संपिकS कतएसँआ केना Dा®त केलक, तािह द{ताबेजकS देिख कए सुिनि त करबाक चाही जे बेचनाहर सही आदमीसँ ओ संपि कीनने अिछ, माने जे जकरासँ ओ ओिह संपिकS कीनलक तकर ओकरा बेचबाक पूण= अिधकार रहैक िक निह, अ_यथा कािà भेने ±यो सामने आिब कए किह सकैत अिछजे ओिह संपिमे हमरो िह{सा छल, तकरा ±यो आन कोना बेिच देलक? एहन निह हो जे पैसा खचÄ केलाक बाद लफड़ा भए जाए। कोनो संपि कीनबासँ पिहने की करबाक चाही? १. पिहने ई पता करी जे ओ संपि बेचनहारकS कतएसँ Dा®त भेल? की ओ ओकरा कानून एवम् द{ताबेजकअनुसार अिधकार Dा®त यि±तसँ कीनने अिछ? तािह हेतु िव¬यक अनुवंधक बजा®ता िनवंधन (सेल डीडक िनबंधन) भेल अिछ िक निह? तकर Dमाण{व¤प द{ताबेज देखल जाए। २. बेचनहारकओिह संपिपर कजा अिछ के निह? ३. ओिह संपिकS ब_हक रािख कज= तँ निह लेल गेल अिछ, जँ लेल गेल अिछ तँ कज=क आपसी भेल िक निह, ४. संपिक उपर कोनो टै±सबqकी तँ निह अिछ? ५. जॱ संपि {वअिज=त निह अिछ तँ ओिहमे आनो लोकक िह{सा छैक िक बेचनहारएसगरे ओकर हकदार अिछ, ६. संपिक दािखल खािरज बेचिनहारक नामे अिछ िक निह, ७. संपिक वा{तिवक नापीक अनुसार ओकर रकबा द{तावेजमे देल गेल िववरणसँ मेल खाइत अिछ िक निह? संपि बेचिनहारक ओिह संपिपर अिधकार सुिनि त कएलेलाक बाद कीननाहर एवम् बेचिनहार आपसमे एकटा सहमित पL पर ह{ताJर करताह।ओिहमे ¬य िव¬यक सभटा शत= िलखल जाएत, जेना संपिक मूjय, भूगतानक शत=।उिचत मूjयक {टvप पLपरसहमित पL पर बेचनाहर िकननाहरक अितिर±त दूटा गवाहक ह{ताJर होएब ज¤री िथक। कोनो संपिक ह{ता_तरण हेतु िनवंधनसँ पूव= ओिह राÉयमे लागू कानूनक तहत सटvप पेपर लेब आवcयकिथक।आइ- कािà {टvप पेपर आनलाइन भेिट जाइत अिछ।तािह हेतु आनलाइन भूगतान कए ओकरजानकारी आनलाइन {टvप पेपर िव¬ेताकS देब ज¤री िथक। पेमटक सूचना Dा®त होइते ओिह सुिवधाके_o ¿ारा {टvप पेपरकS आनलाइन िनकािललेल जाइत अिछ।एिह तरहे आसानीसँ भारी मूjयक {टvप पेपरकS Dा®त कएल जा सकैत अिछ। {टvप Þयुटीक गणना हेतु बेचल जा रहल संपिक सिक=ल रेटक आधार पर कएल जाइत अिछ।जॱ जमीनपर मकान सेहो बनल अिछ तँ ओकर अलग-अलग गणना कएल जाइत अिछ। िव¬य मूjय, सरकारी सिक=ल रेटदुनूमे जे Éयादा होएत तािह िहसाबसँ {टvप Þयुटी लागत। तकर अलाबा िनवंधन शुjक सेहो अलगसँ देबए पड़ैत अिछ।जॱ सिक=ल रेटक िहसाबसँ उिचत {टvप Þयुटी निह देल जाइत अिछतँ िनवंधन खािरज भए सकैत अिछ। मुÝतारनामा(power of attorney) : मुÝतारनामा/वकालतनामा (पावर आफ अटनÒ)क आधारपर कएल गेल संपिक ह{ताना_तरण :
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माननीय उचतम _यायलय सूरज लै7प एवम् इ_ड{Ñीज बनाम हिरयाणा सरकार एवम् अ_यक मामलामे िनण=य देलक अिछ जे मुÝतारनामा (पावर आफ अटनÒ)क आधारपर संपिक ह{ताना_तरण गैरकानूनी िथक।मुÝतारनामा (पावर आफ अटनÒ) मूलतः िनकट स7ब_धीजेना िपता, पुL, प£ी वा खास िमLक पJमे एिह हेतु कएल जा सकैत अिछजे संपिकमािलक कोनो खास वजहसँ ओिह संपिक¬य िव¬यक िनवंधनमेउपि{थत निह भए सकैत अिछ, (जेना िक ±यो िवदेशमे हो ) (R.V. Raveendran, A.K. Patnaik, H.L. Gokhale IN THE SUPREME COURT OF INDIA CIVIL APPELLATE JURISDICTION SPECIAL LEAVE PETITION (C) NO.13917 OF 2009) िनवंधनक समय कीननाहर, बेचनाहरक अलाबा दूटा गवाहक उपि{थित ज¤री अिछ। ओिह गबाहक ह{ताJरकबाला (सेल डीड) पर ज¤री िथक। संपिक ¬य िव¬यक िनवंधनक समयमे कोनो कारणसँ बेचिनहार िकंवा कीननाहर {वयं उपि{थत निह भए सकैत अिछ तँ कोनो स7ब_धी वा िमLकS उिचत मुÝतारनामा(power of attorney) दए ई काज करावोल जा सकैत अिछ। जॱ िव¬य मूjय पचास लाखसँ बेसी अिछ तँ कीननाहरक ई कत=य अिछ जे िव¬य मूjयक एक Dितशत कािट कए उिचत चालान DपL ¿ारा आयकर िवभागमे आनलाइन वा बैकमे जमा कए देिथ अ_यथा ओ आयकर िवभागक चपेटमे आिबसकैत छिथ। एिह तरहS काटल गेल टाका आयकर िवभाग ¿ारा आयकर िरटन= भरलापर कुल देय आयकरमे िम_हा कए देल जाइत अिछ। सेल डीडक मसौदा : सेल डीडक मसौदा तैयार करबामे Dचुर सावधानी राखब ज¤री िथक। ओिहमे संपिक चौहÔी, रकबा, खाता नंबर, खेसरा नंबर, सिहत ओकर पूब=क मािलकक वण=न हेबाक चाही।िव¬यमूjय सिहत वेचिनहार एवम् कीननाहरक िववरण हेबाक चाही।बेचिनहार ¿ारा {प¸ घोषणा हेबाक चाही जे ओ ओिह संपिक पूण= मािलक अिछ, जे ओिह पर कोनो आन यि±तक अिधकार निह अिछ, जे कोनो तरहक कानूनी िववाद ओिह संपिपर निह अिछ, जे ओ संपिपर कोनो कज= निह बqकी अिछ, आिद, आिद। सेलडीडमे इहो िलखल जेबाक चाही जे ओ संपि बेचिनहारक {वअिज=त अिछ, जॱ से निह अिछ आओर ओ संपि संयु±त पिरवारक पु{तैनीसंपिक िह{सा अिछ तखन ओकरा िदयादी बटबाराकसंगे ई Dमाण देबाक चाही जे ओ संपि ओकरे िह{साक अिछ आओर ओिहपर कोनो आन पिटदारक हक निह छैक।जॱ ओिहमे आनो पिटदारक िह{सा सािमल छैक, तखन ओिह संपिक िव¬य पL (सेल डीड) पर सभ पिटदारक द{तखत ज¤री अिछ आ_यथा भिव°यमे ओिहपर कानूनी झंझिट भए सकैत अिछ।सेलडीड (िव¬य पL)क िनवंधनक बाद कीननाहर ¿ारा बेचिनहारकS िव¬य मूjयक पूरा भूगतानक बादेसेलडीड (िव¬य पL) कीननाहरकS देलजाइत अिछ। जमीन-मकानक ¬य िव¬य सामा_यतः कमे काल होइत अिछ जािहमे जीवन भिरक कमाओल धन लािग जाइत अिछ। तS ज¤री अिछ जे ई काज पूण= सावधानीक संगे कएल जाए। कागज-पर ठीकसँ बनाओल जाए आ कीनल संपिक कजा ठीकसँ लेल जाए जािहसँ बादमे कोनो Dकारक झंझिटमे निह पड़ी।q
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५८ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 222 9-547X VIDEHA 58
¬ाि_तदूत : कबीरदास ओिह युगमे जखन धािम=क क×रवाद चमÄeकष=पर छल, जखनिक जाित-पाितक भेदबाव समाजक मा_यता Dा®त केनिह छल संगिह सम{त िविध-िवधानकS Dाभािवत केने छल,कबीर दास एकिहबेर िवoोहक िवगुल बजा देलाह! ओिह युगमे जखन उच जाितक लोकक संपूण= समाज पर वच={व छलैक, जखन धािम=क, सामािजक एवम् आिथ=क शि±त पूण=तः िकछु यि±तक हाथमे िसमटल छल, -कबीरदास बािज उठलाहः एक बूंद एक मल-मूतर, एक चाम एक गूदा। एक जाितसे सव उपना, कौन वाभन कौन सूदा।। यि±त-यि±तमे भेदभाव करब कबीरदासकS एकदम पिसन निह छलिन। एिह दृि¸सँदेखल जाए तँ ओ भि±तकालक महान सा7यवादीछलाह।मानव-मानवमे िवभेद उतप³ करएबला धम=, अ_धिवrास वो वाï आडंवरक Dित जतेक कठोर ²िखकबीरदास अपनओलिन ततेक िकओ निह अपना सकल।हुनकर कहब छलिन जे मानव माL एकिह ईrरक अंशअिछ। Dकृित सभकS एकरंग वनओने अिछ, सभक सोिनत एकिह रंग अिछ, तखन ई िवभेद िकएक? एकै पवन एक ही पानी, करी रसोई _यारी जानी। माटी सूँ माटी लै पोती, लागी कहौ कहq धूँ छोती।। कबीरदासकS जाित िवभेद एªोरी पिसन निह छलिन।ज_मभिर ओ पाखंड, सामािजक अ_याय, जातीय िव¿ेष, एवम् आिथ=क शोषणक िवरोधमे लड़ैत रहलाह।वाभन, शुoक कथे कोन ओ तँ िह_दू, मुसलमानक िवभेदकS सेहो {वीकार निह करैत छलाह। जॱ तूँ वाभन वभनी जाया, तौ आन बाट है ±यो निह आया। जॱ तूँ तुरक तुरकनी जाया, तौ भीतर खतना ±यो न कराया।। कबीरदास उपदेशकवा पुजारी निह छलाह।जीिवकाक हेतु वो जुàाक धंधा करैत छलाह, जकरा सामािजक धरातलपर पैघ काज निह मानल जाइत छलैक।{वयं कपड़ा बूनब एवम् दोसर हेतु मजूरीकए कपड़ा बूनबामे अ_तर छैक।कबीरदास कोनो मािलकक काज निह करैत छलाह।ओ गृह उ]ोगक {वािभमानक रJा करैत पेट भरैत छलाह।ओ अपन यवसायमे ततेक रिम गेल छलाह जे हुनक कायमे सदित ओही Dकारक व{तुसभक वण=न अिछ।एवम् Dकारेण वसायजिनत DितQाक सेहो हुनका कोनो परवाह निह छलिन। ओ सगव= कहलाहः
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५८ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 222 9-547X VIDEHA 59
जाित जुलाहा मित को धीर, हरिष-हरिष गुण रमै कबीर। मेरे राम की अभै पद नगरी, कहे कबीर जुलाहा। तू वाभन मØ कासी का जुलाहा।। कबीर दास मौिलक िवचारक छलाह।धम=क वा{तिवक ताeपय=कS ओ बुझलाह आओर साधारण जनता धिर ओकरेभाषामे तकरा रखलाह।तािह हेतु हुनका कोनो दुग=ित वqकी निह रहलिन।Dाणोक रJा किठन भए गेलिन।परंतु ओ िनभ=यतापूव=क अपन िवचारपर अिडग रहलाह। तeकालीन समाजक िकछुशि±तशाली लोक कबीरदासक Dवल िवरोध कएलक। तS कबीरदासकS कहए पड़लिनः किबरा खड़ा बजारमे, िलआ लकुिट हाथ। जो घर जारे आपना, धरै हमारे साथ।। तमाम िवरोधक बाबजूद कबीरदास ¤कलाह निह, अपन िवचार लए कए आगू बढ़ैत रहलाह एवम् समयक कसौटीपर सही उतरलाह। भ±त कबीरक ई अनुभव छलिन जे शा{L मयदाक संग संDदाय िनQा जुड़ल होइत अिछ।शा{L एवम् संDदायक सीमानमे रिह कए मानव माLक हेतु भि±तक सव=सुलभ पथ D{तुत निह कएल जा सकैत अिछ।भि±तपथक दूटा महान अवरोधिथक-शा{L एवम् संDदाय जे भि±त भावनाकS सरल सहज रहए निह दैत अिछ।कबीर सहजमे आ{था रखैत छलाह। हुनक लगाव कोनो Dकारक²िढ़ एवम् अ_ध मयदासँ निह छलिन।अनुभवकक तराजूपर त»य एवम् सeयकS परिख कए हण eयाग करब हुनकर जीवन¬म छलिन। धािम=क अ_धिवrास एवम् ढ़ॲगकS ओ Dवल िवरोधी छलाह। कंकड़ पाथर जोिड़ कए मि{जद िदओ बनाय। ता चिढ़ मुjला बvग देइ ±या बिहरो भयो खुदाइ।। संगिह ओ इहो कहलाहः पाथर पूजे हिर िमले तé मØ पूजूँ पहाड़। तासे तो चªी भली िपसे खाय संसार।। Dखर मानवतावादी कबीर धािम=क DपंचकS चुनौती देलाह। िनभÒक एवम् तट{थ भावसँ ओ समाजमे विढ़ रहल ढ़ॲगक िवरोध केलाह- यह सब झुठी बंदगी, िबरथा पंच नबाज। सqचै मारै झुिठ पिड़, काजी करै अकाज।। करसे तो माला जपै, िहरदै बहै डमडूल। पग तो पालामे िगरया, भजण लागी सूल।। जप-तप संजम पूजा अरचा, जोितग जग बौराना।
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५८ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 222 9-547X VIDEHA 60
कागद िलिख-िलिख जगद भूलाना, मन ही मन न समाना।। कबीरदास युग िनमता छलाह। ओ पारंपिरक लीकसँ हिट कए समाजकS एकटा ¬vितक माग=पर अनलाह।गरीब- धनीक, ´ाµण-शूo, आिदक बीचमे वग= सम_वयक सहज माग= D{तुत केलाह।मानवतावादक Dचार कए धम=क वा{तिवक अथ=कS लोक बूझए, तकर Dयास केलाह।ओ अपन सम{त जीवनकS परोपकार एवम् मानव कjयाणमे लगा देलाह। मानवमाLक क¸ िनवारणक हेतु ओ िचंितत रहैत छलाह। सुिखआ सब संसारहै, खाबे अ² सोबै। दुिखआ दास कबीर है, जागे अ² रोबे।। अ{तु, ई तय अिछ जे कबीरदास संत आ किव तँ छलाहे सभसँ बिढ़कए ओ ¬ाि_तकारी छलाह।सम{त समाजमे ओ एकटा नवचेतना आनए चाहैत छलाह।वग= िवभेदकS न¸कए समाजमे मानवतावादक {थापनाचाहैत छलाह।ईrर एक छिथ, मनु±ख एक अिछ, िवभेद मानव िनिम=त अिछ-से हुनकर मंLवा±य छल। समाजक ि{थिततँ तेहने छल जे ईrरक केबार िकछुए लोक हेतु खुजैत छल।तेहन समाजमे ताल ठोिक अपनिवचार किह देब एवम् ओकरा यवहारमे आनब एकटा ¬ाि_त निह तँ की छल ?Dयोजन अिछ समाजमे एहने यि±तeवकS, जे हमरा लोकिनकS वत=मान सामािजक अ_L¿ंदसँ मुि±त दए सकए।q
मकर सं¬vित मकर सं¬ाि_त स7 पूण= भारत ओ नेपालमे सव=L कोनो-ने-कोनो Dकारसँ मनाओल जाइत अिछ। पौष मासमे जखन सूय= मकर रािशमे अबैत छिथ तखने ई पाविन मनाओल जाइत अिछ। Dितवष= मकर सं¬ाि_त १४ वा १५ जनबरीकS पड़ैत अिछ। तिमलनाडूमे मकर सं¬ाि_तकS ‘पॲगल’ कहल जाइत अिछ। कनटक, केरल एवम् आँ¯Dदेशमे एकरा सं¬ाि_तये कहल जाइत अिछ। पंजाब आ हिरयाणामे ‘लोहड़ी’ कहल जाइत अिछ एवम् एक िदन पिहने अथत् १३ जनबरीकS मनाओल जाइत अिछ। उर Dदेशमे एकरा मूलत: दानक पाविनक ¤पमे मनाओल जाइत अिछ। Dयागमे Dितवष= १४ जनबरीसँ माघमेला Dारंभ होइत अिछ। माघ मेलाक Dथम { नान १४ जनबरीसँ Dारंभ भए कए अि_तम { नान िशवरािLकS होइत अिछ। महारा° Ñमे
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५८ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 222 9-547X VIDEHA 61
एिह िदन िववािहत मिहला अपन पिहल सं¬ाि_तपर तूर-तेल वा नून अ_ य सुहािगनकS दइ छिथ। बंगालमे एिह िदन { नानक बाद ितल दान करबाक Dथा अिछ। एिह अवसरपर गंगासागरमे Dितवष= िवशाल मेला लगैत अिछ। असममे मकर सं¬ाि_तकS ‘माघ-िवहू’ अथबा ‘भोगाली िवहू’क नामसँ जानल जाइत अिछ। राज{ थानमे एिह पव=पर सुहािगन मिहला अपन सासुकS िवयिन दए आशीवद Dा®त करैत छिथ। संगे कोनो सौभा«य सूचक व{ तुकS चौदहक संÝ यामे पूजन एवम् संकjप कए चौदहटा ´ाµणकS दान दइ छिथ। मकर सं¬ाि_तक माf यमसँ भारतीय सÁ यता एवम् सं{ कृितक िविवध ¤पमे आभास होइत अिछ। एहेन धारणा अिछ जे मकर सं¬ाि_तक िदन शुÐ घी एवम् क7 बलक दान केलासँ मोJक Dाि®त होइत अिछ। माघे मासे महादेव: यो दा{ पित वृहक7 वलम् स भु±e वा सकलान भोगान अ_ ते माJ Dा®पित।। पुराणक अनुसार मकर सं¬ाि_तक पव= वáµा, िव° णु, महेश, गणेश, आधशि±त आ सूय=क आराधना एवम् उपासनाक पावन वáत अिछ जे तंL-मंL-आe माकS शि± त Dदान करैत अिछ। संत-महिष= लोकिनक अनुसार एकर Dभावसँ Dाणीक आe मा शुÐ होइत अिछ, संकjप शि± त बढ़ैत अिछ, ान तंतु िवकिसत होइत अिछ। मकर सं¬ाि_त अही चेतनाकS िवकिसत करएबला पाविन अिछ। ई स7 पूण= भारतमे कोनो-ने-कोनो ¤पे मनाओल जाइत अिछ। पुराणक अनुसार मकर सं¬ाि_तक िदन सूय= अपन पुL शिनक घर एक मासक हेतु जाइत छिथ, कारण मकर रािशक { वामी शिन छिथ। य]िप É योितषीय दृि¸सँ सूय= आ शिनक ताल-मेल संभव निह अिछ, तथािप एिह िदन सूय= { वयं अपन पुLक घर जाइत छिथ। पुराणमे आजुक िदन िपता पुLक स7 ब_ धमे िनकटताक Dारंभक ¤पमे देखल जाइत अिछ। मकर सं¬ाि_तक िदन गंगाकS पृ» वीपर आनएबला भगीरथ अपन पूव=जक तप=ण केने छलाह। हुनक तप=ण { वीकार केलाक बाद एही िदन गंगा समुoमे िमिल गेल रहिथ। तँए एिह िदन गंगा सागरमे मेला लगैत अिछ। िव° णु धम=सूLक अनुसार िपतरक आe माक शाि_तक हेतु एवम् अपन { वा{ थवÐ=न ओ सबहक कjयाणक हेतु ितलक Dयोग पुu यदायक एवम् फलदायक होइत अिछ। ितल-जलसँ { नान करब, ‘ितल’क दान करब, ितलसँ बनल भोजन, जलमे ितल अप=ण, ितलक आहुित एवम् ितलक उवटन लगाएब। एिह िदन भगवान िव° णु असुरक अ_त कए युÐ समािजक घोषणा केने छलाह। ओ राJस सबहक मुड़ीकS मंदार पव=तमे दबा देने रहिथ। एतदथ= एिह िदनकS अशुभ एवम् नकाराe मकताकS समा®त करबाक िदनक ¤पमे देखल जाइत अिछ। सूय=क उरायण भेलाबाद देवता लोकिन वáµ मुहु=त उपासनाक पुuयकाल Dारंभ होइत अिछ। एिह कालकS परा-अपरा िवधाक Dाि®त काल कहल जाइत अिछ। साधनाक हेतु एकरा िसिÐकाल सेहो कहल जाइत अिछ। एिह समयमे देव Dित° ठा, गृह िनमण, यकम= आिद पिवL काज कएल जाइत अिछ। रामायण कालसँ भारतीय पL-पिLकामे दैिनक सूयÄपारायणक Dचलन अिछ। रामचिरतमानसमे भगवान राम ¿ारा गुÞडी उड़ेबाक काय=क उj लेख सेहो अिछ। मकर सं¬ाि_तक वण=न वािj मकी रामायणमे सेहो भेल अिछ। राजा भगीरथ सूय=वंशी छलाह। ओ भगीरथ तप-साधनाक ¿ारा पापनािशनी गंगाकS पृ» वीपर आिन अपन पूव=जक उÐार केने छलाह। राजा भगीरथ अपन पूव=जक गंगाजल, अJत,ितलसँ wाÐ-तप=ण केने छलाह। तिहआसँ मकर सं¬ाि_तक { नान आ मकर सं¬ाि_तक wाÐ-तप=णक परंपरा चिल रहल अिछ।
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किपल मुिनक आwमपर मकर सं¬ाि_तक िदन मq गंगाक पदाप=ण भेल छल। पावन गंगाजलक { पश= माLसँ राजा भगीरथक पूव=जकS { वग= Dाि®त भेलिन। किपल मुिन वरदान दैत बजलाह- “मातृ गंगे िLकाल तक लोक सबहक पापनाश करतीह एवम् भ± तजनक सात पुcतकS मुि±त एवम् मोJ Dदान करतीह। गंगाजलक { पश=, पान, { नान ओ दश=न सभ पुu यदायक फल Dदान करत।” सूय=क सातम िकरण भारतवष=मे आfयािe मक उ³ितक Dेरणादायी अिछ। सातम िकरणक Dभाव भारतवष=मे गंगा-जमुनाक मf य अिधक समय तक रहैत अिछ। एिह भौगोिलक ि{थितक कारण हिर¿ार आ Dयागमे माघमेलाक आयोजन होइत अिछ। िपतृतुj य भगवान भा{ कर दिJणायनसँ उरायणमे जाइत काल उजमयी Dकाश पृ» वीपर वष करैत छिथ। अतुj य शि± त wोत Dकृित राितकS छोट एवम् िदनकS पैघ करए लगैत छिथ। पृ» वीमाता उदर{ थ आनाजकS पकबए लगैत छिथ। चा¤ तरफ शुभे-शुभ होइत रहैत अिछ। एहेन अÜुत समयमे मकर सं¬ाि_तक पव= मनाओल जाइत अिछ। स¬ाि_तक िदन पंजाबमे ‘लोहड़ी’क नामसँ मनाओल जाइत अिछ। पंजाबक अितिर± त ई पाविन िहमाचल Dदेश, हिरयाणा, दिJणी उर Dदेश आ ज7 मू काc मीरमे सेहो धूम-धामसँ मनाओल जाइत अिछ। पारंपिरक तौरपर ‘लोहड़ी’ फसलक रोपनी आ ओकर कटनीसँ जुड़ल एक िवशेष पाविन अिछ। एिह िदन वॉंनफायर जकq आिगक ओलाव जरा कए ओकर चा¤कात नृeय कएल जाइत अिछ। बालक सभ भvगड़ा, वािलका सभ िगÐा नृeय करैत छिथ। लोहड़ीक आलावक आसपास लोक एकÙा भए दुj ला-भÙी Dशंसामे गायन करैत छिथ। केतेको गोटेक मा_ यता अिछ जे ‘लोहड़ी’ शË द लोई (सत कबीरक प£ी) सँ उeप³ भेल मुदा अनेक लोक एकरा ितलोड़ीसँ उeप³ मानै छिथ, जे बादमे लोहाड़ी भए गेल। लोहड़ीक ऐितहािसक स_ दभ= सु_ दरी-मुंदरी नामक दूटा अनाथ क_ या छली। ओकर काका ओकर िववाह निह करए चाहैत छल अिपतु ओकरा राजाकS भSट कए देबए चाहैत छल। ओही समयमे हुj ला भ×ी नामक एकटा उफqइट छौड़ाकS नीकठाम िबआह कए देलक। वएह उफqइट वरपJकS िबआहक हेतु मनाओलक आ जंगलमे आिग जरा कए दुनू क_ यqक िबआह करओलक। कहल जाइत अिछ जे दुj ला शगुनक ¤पमे गुड़ देलक। भावाथ= जे उफqइट होइतो दुj ला भ×ी िनध=न वािलका सबहक क_ यqदान केलक एवम् ओकरा अपन कªाक अe याचारसँ बँचओलक। लोहड़ीक िदन बचा सभ दुj ला भ×ीक स7 मानमे गीत गबैत घरे-घर घुमैत अिछ। बचा सभकS िमठाइ एवम् अ_ य व{ तु सभ दैत अिछ। जँ कोनो पिरवारमे कोनो खास अवसर जेना बचाक ज_ म, िववाह आिद अिछ तँ लोहड़ी आर धूम- धामसँ मनाओल जाइत अिछ। सिरसवक साग आ मकईक रोटी खास कए एिह अवसरपर बनाओल जाइत अिछ। तािमलनाडूमे एिह समय ‘पॲगल’ मनाओल जाइत अिछ। Dचूर माLामे अ³क उपजापर भगवान सूय=कS ध_ यवाद ापन हेतु पाविनक आयोजन कएल जाइत अिछ। तािमलनाडूक अलावा पुडुचेड़ी, wीलंका, िवr भिरमे पसरल तिमल लोकिन एकरा मनबैत छिथ। ओइ पॲगलमे चािर िदन तक–माने १४ सँ १६ जनवरी तक–मनाओल जाइत अिछ। इ_ o देवताक स7 मानमे पिहल िदन भोगी उe सव मनाओल जाइत अिछ। पॲगल दोसर िदन मािटक वत=नमे दूधमे चाउर पका कए खीर भगवान सूय=कS आन-आन व{ तु संगे चढाओल जाइत अिछ। एिह अवसरपर घरक आगूमे कोलम (अपना ओइठामक अिरपन जकq) बनाओल जाइत अिछ। पॲगलक तेसर िदन मÙू पॲगल कहल जाइत अिछ। एिह िदन गायकS नाना Dकारसँ सजा कए ओकरा पॲगल खुआएल जाइत अिछ। चािरम िदन क_तुम पॲगल कहल जाइत अिछ। घरक मिहला सभ { नानसँ पूव= हरिदक पातपर िमठाइ, चाउर, कुिसयार हरिद आिद रािख कए अपन भाय लोकिनक कjयाण कामना करैत छिथ।
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भाइक हेतु हरिद, चून, चाउरक पािनसँ आरती करैत छिथ आ ई पािन घरक आगूमे बनल कोलमपर िछड़िक देल जाइत अिछ। जj लीक×ू म×ू पॲगल िदन पॲगल पव=क एक िह{ साक ¤पमे खेलल जाइत अिछ। एिह लेल ामीण सभ पिहनेसँ सqढ़कS खुआ-िपआ कए तैयार केने रहैत छिथ। एिहमे मूलत: केतेको गामक मि_ दरक सqढ़ (कोिवल कालइ-तिमल नाम) भाग लैत अिछ। जj लीक×ूक तीन अंग होइत अिछ : वािट म_ जू िवरा×ू, वेली िवरा×ू आ वाटम ग_ जु िवरा×ू। वािट म_ जु िवरा×ूमे सqढ़कS जे यि±त िकछु दूरीपर िकछु समय तक रोिक लइ छिथ, से िवजेता होइ छिथ। वेली िवरा×ूमे सqढ़कS खाली मैदानमे छोिड़ देल जाइत अिछ आ लोक ओकरा िनयंLणमे करबाक Dयास करैत अिछ। वाटम म_ जुिवरा×ूमे सqढ़कS नमगर र{ सीसँ बाि_ ह देल जाइत अिछ, आ िखलाड़ी सभ ओकरा िनयंिLत करबाक Dयास करैत छिथ। स7 पूण= देश जकq िमिथलvचलमे सेहो मकर सं¬ाि_तक पव= मनाओल जाइत अिछ। गाम-घरमे एकरा ितला सं¬vित सेहो कहल जाइत अिछ। अंेजी नया सालक ई पिहल पाविन होइत अिछ। लोकक घरमे नव अ³ भेल रहैत अिछ। पिहनिहसँ लोक चूड़ा कुटा कए एिह पाविनक तैयारी केने रहैए। अपना एिहठाम माघ मासकS अeय_त पिवL मास मानल जाइत अिछ। बूढ़-बूढ़ मिहला सभ भोरे-भोर जाड़-ठाढ़कS िबसरैत पोखिरमे डुबकी लगबै छिथ। गाममे कएटा मसोमात, वृÐा सभकS थर-थर कँपैत { नान करैत देखैत छिलएिन। सभसँ मनोरंजक दृc य तँ तखन होइत छल, जखन ओ सभ महादेवक माथपर जल ढाड़ैतकाल गाम-घरक सभटा झगड़ा सोझराबएमे लागल रहैत छली। जानह हे महादेव! हमरा पेटमे िकछु निह अिछ। हमर मोन गंगासन िनम=ल अिछ मुदा एहेन अe याचारक िनपटान तूँहॴ किरयह। ..पता निह, महादेव सुिनतो छलिखन की निह। मुदा हमरा ई सभ सुिन कए ज¤र वकोर लागल रहैत छल। बचामे पाविन सभ अÜुत आन_ दक िवषय रहैत छल। सभसँ सरल ओ आन_ ददायी होइत छल ितला सं¬vित। भोरे- भोर पोखिरमे जा कए डुबकी लगाउ। माइक हाथे ितल-चाउर खाउ। ितल-चाउर खुअबित काल माए पुछिथ- “ितले-ितले बहब की निह?” तािहपर किहअिन- “खूब बहब।” िवध समा®त। तकरबाद चुरलाइ, ितलबा इe यािद भिर मोन खाउ...। कएक िदन पिहनिहसँ चुरलाइ, ितलबा (ितललाइ) आ लाइ (मुरहीक लाइ) बनेबाक काय=¬म Dारंभ भए जाइत छल। घरक वातावरण चुरलाइक सुग_ धसँ पिरपूण=। एिह पाविनमे सभसँ िवशेषता ई अिछ पाविनक सामी बिन गेल तँ ओकरा लेल बेसी DतीJा निह करए पड़ैत अिछ। िदनमे वáाµण भोजन होइत छल। वáाµण िकयो आसे-पासक लोक होइत छलाह,कारण भिर गाममे भोजे रहैत छल। ब×ा भिर-भिर घी िखचिड़मे देल जाइत। संगे तरह-तरह केर पकवान सभ सेहो रहैत छल। हमरा गाममे िकछु गोटे ओइठाम ितला सं¬ाि_तमे िजलेबी बनैत छल। भोजमे िखचिड़क संग िजलेबी खेबाक बचा सभकS अÜुत उe साह रहैत छल। िखचिड़मे ततेक Dचूर माLामे घी रहैत छल जे भोजनक बाद हाथ साफ-साफ धोनाइ किठन। पाविनक कएक िदन बादो धिर चूरालाइ आ ितलबाक आन_ द भेटैत रहैत छल। एिह पाविनमे चूड़ा, दही, खेबाक सेहो परंपरा अिछ। चूरा-दहीक वण=न करैत ख×र कका कहलिखन जे जखन पातपर चूड़ाक संग आम, धाLीक अँचार ओ तरकारी परसल जाइत अिछ तँ बुझू जे अ_ हिरया आिब गेल। तकर बाद जखन दही
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५८ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 222 9-547X VIDEHA 64
परसाएल तँ बुझू जे इजोिरया। जेना पातपर च_ oमा उतिर गेलाह। ऊपरसँ जँ मधुर रािख देल जाए ओ कौर पेटमे गेल तँ पुछू निह। पुरा सोिनत ठuढा जाइत अिछ आ आe मा तृ®त भए जाइत अिछ। िमिथलvचलमे एिह पव=कS मनेबाक अÜुत परंपरा अिछ। चुरलाइ खाउ, चुरा-दही खाउ, िखचिड़ खाउ, जे खाउ, जखन खाउ...। व{ तुत: ई आन_ दक पव= िथक जे कोनो-ने-कोनो ¤पे स7 पूण= भारतपवष=मे मनाओल जाइत अिछ। सूय=क तेजक मकर सं¬ाि_तसँ जिहना बढ़ैत रहैत अिछ, तिहना सभ लोक-वेदक सुख बढ़ैत रहए, सएह एिह पाविनक f येय िथक।
रबी_o नारयण िमwक दूटा लघुकथा पढ़ू पूत चuडी समय एक गितसँ आगा बढ़ल जा रहल अिछ। मुदा हम-अहq ओकर Dवाहमे किह निह कतए पहुँिच जाइत छी। जेना कोनो तेज धारमे छोट-मोट कतेको व{तु {वत: दहाइत कहq- सँ-कहq पहुँिच जाइत अिछ , वएह हाल एिह िजनगीक अिछ। “अहq की केलहुँ? घूरतर बैसल Dाय: िनeय सqझमे गामक कैटा बूढ़सभ आपसमे चच करैत छलाह। ” ±यो िकछु, ±यो िकछु कहैत। ग®प-स®प िबबादक ²प धरैत आ अ_ततोगeवा किहओ काल झंझटोक संभावना भए जाइत। सभसँ ढीठ ओ दबंग ठीठरकका पहलमान वो अपढ़ छलाह आ ओिह घूरक महिफलमे डंकाक चोटपर किहतिथ- “पढ़ू पूत चuडी जासे चले हuडी। ” स]: लाभमे पूण= आ{था छलिन। भोरमे बचा मिहष चरौलक आ स qझमे एक डाबा गरम-गरम दूध। एिहसँ नीक शा{L की भए सकैत छल ? सभ पढ़ाइ-िलखाइ यथ=। किहआ पढ़त आ किहआ कमाएत.. ? मुदा, ओहीठाम हीरा कªाक {वर एकदम दोसर रंग छल। िधया- पुता पढ़त तँ िवचारवान होएत आ सुखी रहत।
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५८ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 222 9-547X VIDEHA 65
गाममे ओिह घूरक चच चिच=त छल। दूनू गोटासँ सqझमे जँ बैिसतिथ तँ अपन-अपन दश=नक अनुसार ज¤र बिजतिथ आ पिरणाममे िववाद होइत। ठीठरकका दबंग ओ लठैत छलाह। जबरद{त खेती-पथारी रहिन। िधया-पुता सभ बेस मोट-सॲट आ लंठ। सभ खेतीमे लागल रहैत छल। पिरवार सुखी छल। हुनका तुलनामे हीरा कªाक हालत पातर छल। िधया-पुता सभ {कूल-कॉलेजमे पिढ़ रहल छल। खेती-पथारी कोनो खास निह। तS कखनो काल ठीठर कªाक कथन ठीक बुझाइत छलिन। मुदा दूनू गोटे अपन-अपन िवचारपर दृढ़ छलाह। हीरा ककाकS अपन िधया-पुताक बड़ आशा छलिन। आ तS अपन स7पूण= शि±तसँ िधया- पुताकS िशJा यव{थामे लागल रहैत छलाह। समय िबतैत गेल आ हुनकर सभ नेना सभ पिढ़-िलिख यथायो«य नीक-नीक {थानपर पहुँचलाह। ओमहर ठीठरक गृह{ती िदन-Dित-िदन गड़बड़ाइत गेल। वृÐाव{थाक जोर पकिड़तिह पुL सभ आपसमे लड़ैत रहैत छलाह। बात िबगड़ैत देिख वो सभकS फराक-फराक कए देलिखन। जमीन-जथा बँिट गेल। बीस बख=क बाद आइ ने हीरा बाबू छिथ आ ने ठीठरकका। मुदा सुनबामे बहुत िकछु आएल। ठीठरकका बड़ क¸मे मिर गेलाह। बेटा सभ खेत-पथार बेिच लेलक आ पेट पोसबाक हेतु गामसँ पड़ा गेल। हीरा बाबू सेहो सुखी निह भए सकलाह। िधया-पुता सभ पढ़लक-िलखलक ज¤र मुदा सभ अपनामे य{त। ककरो बूढ़ाक यथापर सोचबाक समय , इछा ओ साम»य= निह भेलैक। ±यो कलका तँ ±यो बंबई। पqचो बेटा पqचटा शहर धेने छलाह। सुनबामे ईहो आएल जे मिझला बेटा लखनउमे मकान बना लेलक अिछ। हीरा बाबू ओिहना एसगर टकटक तकैत िबदा भए गेलाह। ओिह {कूलमे मौलाना-जोलहाक बेटा सेहो हमरा सभहक संगे पढ़ैत छल। पढ़एमे सामा_य छल मुदा अeय_त सÉजन वो संवेदनशील। कै िदन गामसँ {कूल जाइत काल वो भेिट जाइत। मुदा वो {कूल िनयिमत निह जाइत छल। कै िदन बाधमे ओकरा हम सभ हर जोतैत देिखयैक। हँिसयो लागय आ दुखो भए जाए। किहओ काल ओकर िपता सेहो भेिट जाइत , एकटा आहक संग- “बौआ , माहटर साहेब बाबूसँ किह देबै जे हमर बचबा आज नै जाएत।”
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पुिछऐक- “िकए ?” तकर जवाबमे पनिपआइ गमछामे ब_हने हर जेातइत अपन बेटा िदिस इसारा करैत। कै िदन हमरा संगे वो {कूल जाइत। र{तामे भSट भए जाइत छल। गमछामे पqच-छहटा िकताब ओ िकछु कॉपी ब_हने हमरा देखैत घरेसँ आबाज दैत- “हमहँ चलब। ठाढ़े रहब। ” आबाज सुिन कए हम-सभ पाकरी गाछक तरमे सु{ताए लगैत छलहुँ। {कूल पहुँिच सभसँ पिछलका सीटपर वो बैिस जाइत छल। आ कै िदन तँ सभ घuटीमे मािर खाइत रहैत छल। िबना कोनो आ¬ोश आ Dितकृयाक कै िदन किहितऐक- “एना मािर िकएक खाइत रहैत छह ! नीकसँ पढ़ाइ करह। ” मुदा वो हमर-सभहक बात सुिन िकछु-िकछु अकाðय तक= दए दैत छल। बहुत िदनक बाद ओकरा एक िदन चौकपर िर±सा लगौने देखिलयैक। हमरा देिख ओकरा उeसाह भेलैक। Dाय: ओकरा भेलैक जे ई याLीपर ओकरा िबशेष अिधकार छैक। एक बेर हमरा मोन भेल जे ओही िर±सासँ चली मुदा आeमा िसहिर गेल। हमर वो सहपाठी िर±सा चलाओत आ हम ओिहपर बैसल रहब। आ हम कात भए गेल रही। िकछुए कालक बाद ओकर बूढ़ िपता एक गñर कपड़ा लेने आएल। Dाय: हमरा निह िचि_ह सकल। ओिह िर±सापर गñर रािख बाप-बेटा िमिल कए बीड़ी पीबए लागल। समयक एतेक अ_तरालक बादो बाप-बेटाक {नेह बनल छल। हमरे सभहक संगे िकछु विरQ िव]ा थÒ सभ सेहो {कूल जाइत छलाह। जािहमे सँ कै गोटा मैिÑकमे चािर-पqच बेर फेल कए ¬ाि_तकारी भए गेल छलाह। गाममे छोटका लोक सभकS संगिठत कएक ओ सभ महा उपoव ठाढ़ कए देने छल। कैटा पैघ गृह{थक हर-जन ब_द भए गेल छल। पिनभरनी सभ आँगनमे काज निह करत आ भिरआ भार लए कए निह जाएत। जकर घर जािह जमीनपर छैक से तकर हेतैक। ई हेतै वो हेतै आ भए कए रहतै। िदन राित गाममे घोल-फचªा होइत रहैत...।
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सभसँ बड़का आफद बड़का मािलककS भेल रहिन। वो एकदम िचंितत भए गेल रहिथ। िदन-राित हुनका ओिहठाम भuडारा चलैत रहैत छल। इलाकाक पहलमान ओ लंठक जमघट रहैत छल। समय बीतलाक संग-संग वो ¬ाि_तकारी सभ शा_त भए गेलाह। अिधकvश कतहुँ-कतहुँ चाकरी कए रहल छलाह आ एकाधटा अकाल मृeयुक सेहो िशकार भए गेलाह। बड़ीकाल बैसल इएह सभ सोचैत रही िक िदनेश भाए भेट भए गेलाह। ओ हीरा बाबूक जेठ भाितज छलाह आ अंतकालमे वएह बेचारेक सेवा केने रहिथ। हीरा बाबूक छोट पुL टुना हमर सहपाठी छलाह। हुनके Dित ग®प होमए लागल। कहलाह जे वो तँ बहुत िदनसँ लंदनमे रहैत अिछ। बड़का हािकम भए गेल अिछ आ बहुत रास पैसा कमाइत अिछ। मुदा कै बख=सँ गाम निह आएल अिछ। पुछिलयिन- “हीराबाबूक काजमे आएल रहिथ की निह ?” “निह आएल रहिथ। ” छगु_तामे पिड़ गेलहुँ। पुछलऐक- “िकएक ?” “किह निह !मुदा मृeयुसँ दू-तीन बख= पूव= आएल छलाह। गाम डोिल गेल रहए। जाइत काल बहुत रास टाका िपताकS दैत रहिथन मुदा ओ निह लेलिखन। ” िबचेमे चॱकैत पुछल- “कारण ?” “कहq दिन कहलिखन जे ई पैसा अहॴ राखू। काज आओत। जािह पैसाक कारण अहq एतेक दूर चिल गेलहुँ, गाम-घर ,माए-बाप ओ सभ िकछु eयाग कए देलहुँ तािह पैसाकS यथ= हमरापर िकएक न¸ कए रहल छी। टुना तिहआसँ घुिर कए गाम निह अएलाह। ” “मुदा ठीठर ककाकS की भेल ?”
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“ की कहूँ!सभ बेटा घर छोिड़ पड़ा गेल। करबो की किरतैक। गामपर िकछु निह बqचल रहैक। असगर ठीठर कका कािह कटैत रहैत छलाह। जेठकी पुतोहु थोड़-बहुत सेवा कए दैत छलिखन। ” एक बेर फेर ठीठर कका भीमकाय ओ हुनक आ®त वा±य मोन पिड़ गेल- “पढ़ू पूत चuडी, जा से चलए हuडी। ” शरीरमे बड़ थाकान बुिझ पड़ैत छल , किह निह कखन नी³ आिब गेल। ¦
मुÝयमंLीक {वò “की करी िकछु फुरा निह रहल अिछ.. ! Dेसबला सभ पाछू पिड़ गेल अिछ। जतए जाउ ओतिह ई सभ पहुँिच जाएत। ” मुÝयमंLीजी बािज उठलाह। पुन: अपन Dेस सिचवकS बजौलिखन- “िम{टर िसंह। अहq एकटा िवि®त अखबारमे Dकािशत करबा िदयौक जे Dेसक आदमी मुÝयमंLीसँ स7बि_धत ओही समाचारकS Dकािशत कराबिथ जे हुनकर सरकारी कारोबारसँ स7बÐ होइक आ जकरा छापब जनताक हेतु िनता_त आवcयक होइक। संगिह ईहो समाचार Dकािशत करबाओल जाए जे हमर यि±तगत कृया कलाप छापए बला समाचार पL ओ सभ यि±तक िव¤Ð कार=वाई कएल जाएत। ” उरमे Dेस सिचव बािज उठलाह- “ठीक सर। Dेस बला सभकS किह निह की भए गेल छैक ? एकरा सभकS सबक सीखेनाइ बेस ज¤री िथक। हम आइए ई िवि®त Dकािशत करबा दैत िछयैक। ”
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“ हद भए गेल !किह निह , Dेसबला सभकS की भए गेलैक अिछ। ” अहॴ कहू अपना सभमे बिलदान देबाक तँ पुरान Dथा छैक आ तािह बातकS लए कए Dेसबला सभ छािप देलकै अिछ आ सॱसे देशमे हरिवड़Ä मिच गेल। जे ितवारीजी अपन कुसÒ बचएबाक हेतु छागरक सोिनतसँ {नान कएलिन अिछ। लगैत अिछ जे Dेसबला सभकS सबक सीखबिह पड़त। मुदा कोना? कािà एिह िवषयपर िब{तारसँ िवचार-िवमश= कएल जएतैक। “मैडम। Dेस िवल तँ अहॴक आासँ लगाओल गेल। ” मुदा जािह तरहक िवरोध एकर भए रहल अिछ से तँ अDeयािशत अिछ। लगैत अिछ हमरा नव मुÝयमंLीक िनयुि±त करिह पड़त। ” “हम तँ अहqक शरणमे सिदखन रहलहुँ अिछ। कही तँ एिह िवलकS आपस लए ली?” “एकर बादो हम ई आrासन निह दए सकैत छी। फेर ग®प कएल जेतैक। ” -±यो मिहला {वर एतबा किह कए टेलीफोन कािट देने छल। एकर बादे माननीय भूतपूव= मुÝयमंLीजीक िन³ उपिट गेलिन। सभटा बीतल ग®प सीनेमाक रील जकq सपनामे देखार भए रहल छलिन। असलमे हुनकर कुसÒसँ हटब एकटा तेहन मािम=क Dसंग छल जे हुनका िनरंतर ओझरौने रहैत छल। ओना जिहआसँ ओ मुÝयमंLी भेलाह तिहएसँ हुनका भयावह {वò सभ आबए लागल छलिन। िवपJी दलक नाकेब_दी मजबूत भए गेल छलिन आ सादलमे सेहो कै गूट भए गेल छल मुदा साहसक बले ओ आगा बढ़ैत जाइत छलाह। अक{मात गाड़ीक पिहया धसैत देखलिन तँ वो ओकरा उखारबाक कोनो कम Dयास केलिन से बात निह , मुदा भावी Dवल। कणÄक रथ तँ एिहना धिस गेल रहिन। बेस सं¬मण कालमे ओ जहq ने आगू बढ़लाह िक रथक पिहआ धसए लागल। ठीक एकदम वएह हाल माननीय भूतपूव= मुÝयमंLीजीकS भेलिन। भए सकैए जे हमर ग®प अहqकS तीत लगैत हो। अपने लोकिन भावुक निह होइ। माननीय भू.पू. मुÝयमंLीजी कुसÒ बचएबाक हेतु कोन कुकम= छोड़लाह ? कहबी छैक जे ने दौड़ चली ने ठेिस खसी। मुदा मुÝयमंLीजीकS ई ग®प के बुझेतिन। ओिह िदन अखबार पढ़ैत छिलयैक तँ एकटा बेस नमगर अपील पढ़लहुँ। धूत=ताक चरम सीमा छल। मैिथलीमे समाचार पL िनकालताह।
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यौ महामहोपाfयायजी। अपनेकS ई बुिÐ िकछु िदन पूव= िकएक निह भेल ? की अहq जनताकS ओतेक मुख= बुिझ रहल िछयैक जे अहq ओकरा भुितएने िफिरऐक। एकदम निह। आब जमाना बदललै। खैर ! देर अएलहुँ दु²{त अएलहुँ। मुदा ई तँ कहू जे ओिह समाचार पLमे की की खबिर छपतैक ? मुÝयमंLी पदक पुन: Dाि®तक हेतु जँ अहq कोनो य करबैक तँ ओकरा Dमुखतासँ छपबैक वा निह ? आशा अिछ जे एिह बेर ओ समाचार मैिथलीमे Dकािशत समाचार पLक मुÝय पृQपर अपने छापब। ओिह िदन गाममे बैसार रहैक। नवतुिरआ सभ मैिथलीक Dचार-Dसारक हेतु बेस आ_दोलन केने छलाह। माननीय भू.पू. मुÝयमंLीजी Dमुख व±ता छलाह। वो बाजक लेल ठाढ़े छलाह िक ±यो दौड़ल आएल। कहलक- “िदjलीसँ फोन आएल अिछ। ” ओ मंचपरसँ धड़फड़ाइत उतरए लगलाह ओ एही ¬ममे लूढ़िकयो गेलाह। फेर वएह नारी {वर। फेर वएह हतDभ भू.पू. मुÝयमंLी...। एमहर बैसारीमे हjला छलैकजे भू.पू. मुÝयमंLीजी िकछु महeवपूण= घोषणा करताह। स7भवत: ओिह अDeयािशत फोनक कारणसँ बैसारक कय=वाहीपर ग7भीर Dभाव पड़ल आ बैसार साधारण भाषणक बाद {थिगत भए गेल। ओिह िदनुका बैसारक बाद भू.पू. मुÝयमंLीजी बहुत िदन धिर चुप रहलाह। पिछला मिहना मुÝय पृQपर समाचार छपल छल। ओकर िकछु महeवपूण= अंश D{तुत अिछ-
िदनvक २ मई सन् १९७६ आइ मुकुल पटना अएलाह। परम स_तोष अिछ जे हम हुनका Dश³ कए सकलहुँ। ओना हमर Dित¿_दी लोकिन हमरापर लागल छिथ मुदा जाधिर मुकुल हमरापर निह िवगरताह ताधिर ±यो िकछु निह कए सकैत छिथ। तS हुनका Dश³ करबाक हेतु जान लगा दी।
िदनvक १२ िसद7बर १९८१
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मैिथलीक अिधकार हेतु िकछु मैिथल आएल छलाह। आिखर मैिथलीक की महeव अिछ ? हमरा ई सभ तँ एकदम नीक निह लगैत अिछ , मुदा कएल की जाए। यि±तगत हमरा मैिथल , मैिथलीसँ कोनो लगाव निह अिछ। हँ, जँ ±यो अपन स7ब_धी होिथ वा दो{त-मिहम होिथ तँ ितनका नीक-सँ-नीक पद िदआबी आ मदितओ करी। मैिथली, मैिथली िचिचएलासँ की होएत ?
१४ अ±टुबर १९८२ िबहार बेस िववादा{पद राÉय अिछ। मोन तँ होइए जे एिह पदकS छोिड़ जा कए आराम करी, वा पुन: अपन पिहलुका पेशामे लािग जाइ। मुदा एतेक आमदनी छैक एिह काजमे जे अ_यथा सातो ज_ममे निह भए सकैत अिछ। Dेसबला सभ पाछू पिड़ गेल अिछ। की करी बुझा निह रहल अिछ ?
१ जनवरी १९८४ देखा चाही नव बख= की की रंग लबैत अिछ। मुÝयमंLी पदसँ हटलाक बाद तीवá वैरा«य भए रहल अिछ। खने मोन करैत अिछ जे राजनीितसँ स_यास लए ली। खने मन करैत अिछ जे ‘यु¿ाय कृत िन य ’क पुनरावृि कए दी। एकटा उपाय सुिझ रहल अिछ। मैिथलीक Dचारमे पदयाLा िकछु सÉजन चला रहल छिथ। हुनके संग धरी। गामे-गाम मैिथलीक नामे हमरो Dचार भइए जाएत। सुनबामे आएल अिछ जे दिड़भंगा लग एकटा बड़ िसÐ तvिLक छिथ। हुनकोसँ िकछु परामश= करब। आगा जगद7बाक ईछा।
कैिदनसँ थाकल-झमारल भू.पू. मुÝयमंLीजी ओिह िदन दुपहिरयामे कनेके आँिख मुनने छलाह िक सपनाए लगलाह। साJात् मिहषासुर मिद=नी का लए घुिम रहल छलीह। शLुक संहार करैत छलीह। नवका मुÝयमंLीक नाशक हेतु षडयंL जोर-सोरसँ चिल रहल छल। जतिह देखू ततिह भू.पू. मुÝयमंLीजीक {वागतमे {वागत¿ार सभ बनल छल। मैिथलीक Dचार खूब भेलैक। भू.पू. मुÝयमंLीजीक नामक नगारा चा¤कात बािज रहल अिछ। चुनाव घोषणा भए गेलैक। बड़का-बड़का उ]ोगपित सभ अपन भिव°यक आशापर पय ®त च_दा दए रहल छिथ।
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एिह सबहक पिरणामो बहरेलैक आ हम पुन मुÝयमंLी भए गेलहुँ। सपथ हण समारोहमे िकछु मैिथल सभ उपoव करए चाहैत छलाह िक पुिलस लाठीचाज= कए देलक...। एतबिहमे भू्.पू. मुÝयमंLीजी सपनेमे गरजए लगलाह िक हुनक नी³ खुिज गेल। उठलाह तँ वएह रामा वएह खटोला। पुनमु=िषकोभव। ¦ १६ अग{त १९८४ रबी_o नाराय ण िमwक नम{त{यै आगq... ३५ . जाबे अ²णओ एडली ल_दनमे पढ़ाइ-िलखाइ करैत रहए ताबे दुनू गोटे दू देह आओर एक आeमा छल। अ²ण सोचैक तँ एडली बजैक। एडली सोचैक तँ अ²ण बजैक। दुनूक दो{ती से परमान चढ़ल जे दोसर सभकS इ°य होमए लगलैक। ±यो-±यो चौल करैक जे ई दुनू कहॴ आपसेमे ने िबआह कए िलअए। जाधिर ओ सभ संगे रहल िदन राितक कोनो पता निह चलैक। दुनू संगे पढ़ए, संगे टहलए आओर संगे खाए य]िप दुनूकS छाLावासमे अलग-अलग कोठरी रहैक मुदा बेसी काल दुनू एªेठाम रहए। Dेमक पराकाQा कहल जाए तँ हज= निह। मुदा एकर सभक Dेमक बीचमे आिब गेलैक एंगल। एंगल एडलीक िमL छलैक। ओ एडलीक िशJको रहैक। मुदा तािहसँ की? पा ाeय सं{कृितमे ई सभ चलैत छल। अ²णक एडलीक संग घिन¸ताक कारण एंगलक अ²णो लग उठब बैसब होइते छल। देखए सुनएमे अ²ण आकष=क छलहे संगिह ओकर Dितभाक चच= सगरे कालेजमे छल। एक िदन एडली ओ एंगल िपकिनक मनाबए ल_दनक लगीचक झील जा रहल छल। एंगल कहलकै जे अ²णोकS संग कए लेल जाए। एडली ई D{ताव अ²ण लग रखलक तँ ओ सहष= तैयार भए गेल। तीनू झीलक कातमे बैसल छल। जाड़क समयमे हjलुक रौद ओकरा सभपर पिड़ रहल छल। झीलक चा¤कात अÐ=न«न जोड़ी सभ अपना-आपमे म{त छल। ±यो ककरो देखत से होश निह रहए। एहन मनमोहक ओ उेजक वातावरणमे एडली, एंगल ओ अ²ण एक दोसरकS देिख रहल छल। एंगलकS की फुरेलैक जे ओ अ²णकS हाथ धए िखचलक आओर चलैत गेल। एडली देिखते रिह गेल। तिहआसँ अ²णक एंगलसँ आकष=ण बिढ़ते गेल। सqझमे एडली, एंगलमे कहा-सुनी भेलैक। मुदा एंगल अपन िजÔपर अिड़ गेलैक। ओ
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अ²णक Dित अपन आकष=णक आगू िकछु निह सोिच सकल। एडली ओकर पुरान दो{त रहैक, मुदा सेहो पाछु रिह गेलैक। एडली बाजी हािर चुकल छल। एडली बुिधयार छल। ओ बातकS बतंगर बनबएमे िवrास निह करैत छल। अ{तु ि{थितसँ समझौता करैत ओ अ²णसँ अपन िमLता बनओने रहल। एंगलसँ िवचार करएमे सेहो कोनो लाभ निह छलैक। तS सभ चुपचाप सिह गेल। तकर लाभ ओकरा भेलैक। गाहे-बगाहे एंगल ओकरो fयान रखैत रहल। एवम् Dकारेण अ²ण, एडली आओर एंगलक ितकड़ी बिन गेल, ताबे ओिहना रहल जाबे अ²ण ल_दनमे रहए। अ²ण Dशासकीय सेवामे उीण= भए गेल छल। तकर बाद ओकरा अपन देश आपस अयबाक रहैक। एंगल संगिह जयबाक हेतु िजÔ कए देलकै। एडली सेहो एिह हेतु अ²णकS बुझओलक। अ_तगोगeवा अ²ण ओ एंगल संगिह दिड़भंगा आएल। एडली ओतिह रिह गेल। q ३६ . पूव= िनधिरत काय=¬मक अनुसार दिड़भंगामे Dगितशील जागरण मंच ओ जनजागरण मंचक रा°Ñीय काय=कािरणीक स7मेलन बजाओल गेल। देश भिरसँ ात-अात करीब पqचसए Dितिनिधभाग लए रहल छलाह। दिड़भंगाक राज मैदान टटक शहर बिन गेल छल। कतहु लाल, कतहु हिरअर झंडा फहरा रहल छल। रा°Ñभि±तसँ भरल ओज{वी गीत सभ बजाओल जा रहल छल। एिह वातावरणमे रिह-रिह कए तरह-तरहक सूचना Dसािरत भए रहल छल। जनाधार पाटÒक सेहो आमंिLत कएल गेल छल। पर_तु ओ सभ एिहमे भाग ली, निह ली से दुिबधामे रिह गेलाह। {वतंLताक लड़ाइ एकजुट भए लड़ब ई तँ नीक बात रहैक, मुदा नेतुeवक सम{या ओझड़ाएल रहैक। अ_ततोगeवा तय भेल जे ओ सभ िफलहाल यथावतक ि{थितमे रहत। माने अपन अलग आि{तeव बनओने रहत। मुदा जनाधार पाटÒक नव िनविचत मुिखआ चेतन यि±तगत {तरपर आएल छल। ओकरा संगे दू-चािर गोटे आओर आिब गेल रहए। काय=¬म Dार7भ होइते बंदे मातरम्-क नारासँ धरतीसँ आकाश एक भए गेल। सभ एक {वरसँ “सुजलv सुफलv मलयज शीतलाम्” गबैत गबैत भाव िवभार भए गेल। तकर बाद राजकुमार िव{तारसँ रा°Ñीय पिरदृ°यक वण=न करैत दुनू मंचक अंद²नी ि{थितक चच केलाह आओर घोषणा केलाह जे आइसँ दुनू मंचक िवलय भय गेल अिछ। आब एिह मंचक नाम रा°Ñवादी दल रहत। एतबे बात ओ कहने छल िक उमा अपन संगे १५-२० टा मिहलाक संगे नारा लगबैत मंच धिर पहुँच गेिल। हुनका सभक हाथमे प× छल जािहपर मोट-मोट आखरमे िलखल छल- “{Lीक स7मान िबना {वतंLताक ग®प िनरथ=क िथक।”
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उमाकS एिह तरहS आओर मिहला सभक संगे एिह तरहS आ¬मण देिख सभ सकदम भए गेलाह। बैसारक काय=वाही ²िक गेल। जे जेना छल, तिहना रिह गेल। लगलैक जेना स7पूण= वातावरणकS लकबा मािर देने हो। राजकुमार ओ मा{टर साहेबकS िकछु फुरेबे निह करिन। बैसारमे भाग लैत अिधकvश लोक उमाक समथ=नमे बाजए लगलाह। ओिहमेसँ िकछु गोटे तँ उमा लग आिब ओकरे संगे नारा लगबएलगलाह। आब की होएत? मा{टर साहेब {वयं उिठ कए उमा लग गेलाह। जन भावनाक आदर करैत उमाकS मंचपर लए अनलिखन। तकर बादे बैसारक काय=वाही Dार7भ भेल। चा¤कातसँ लोक उमाक समथ=नमे आिब गेल आओर आह करए लागल जे उमाकS नवोिदत रा°Ñवादी दलक अfयJा बनाएल जाए। मा{टर साहेब, राजकुमार उमासँ मंLणा कए हुनका रा°Ñवादी दलक अfयJ चूिन लेल गेल। ‘उमा देवीक जय’ सँ वातावरण गुंजायमान भए गेल। रा°Ñवादी दलक गठनसँ जनाधार पाटÒमे आपसी िसरफुटौअल बिढ़ गेल। पाटÒ कतेको गुटमे बँिट गेल छल। पाटÒमे िकछु गोटे रा°Ñवादी दलक संगे िवलएकपJधर रहिथ। एिहसँ {वतंLता आ_दोलन Dखर होइत। मुदा पाटÒक बूढ़ नेता सभ चाहिथ जे यथावत बनाओल रहए देल जाए कारण ओ सभ अपन अपन कुसÒकS संकटमे निह देबए चाहिथ। उमाकS रा°Ñवादी पाटÒक अfयJा बनबाक समाचार अ²णकS जासूसक माfयमसँ भेटलैक। ओ अeय_त िवचिलत भए गेल। उमाक एिह तरहक Dितकृयाक ओकरा आशा निह छल। महौलकS गड़बड़ाइत देिख अ²ण एंगलक संगे िकछु िदनक हेतु ल_दन सरकारी याLापर चिल गेलाह। हमर माए दुिखत पिड़ गेल छल। ओकरा असगरमे बहुत िदªत भए रहल छलैक। तS िकछु िदनक हेतु हम अपन नैहर गेलहुँ जािहसँ माएकS सेवाक अवसर भेटए। एक युगक बाद हम नैहर गेल रही। हमरा देिखते हमर माए बहुत Dश³ भेल। लगलैक जेना तुर_त ठीक भए गेल। टन-टन बाजए लागिल। असलमे ओ एकाकीपनसँ उिब गेल छिल। फेर िदआदसभ सेहो तंग करिन। स7पिमे िह{सा निह दैक जािहसँ ओ बहुत दुखी छिल। हमर अपन िपी सेहो गुजिर गेलाह। हुनका तीनटा बेटीए रहिन। अ{तु, हमर सभक सम{त स7पिकS हमर िपितऔत काका हरिप लेबए चाहैत छल। माएक {वा{थ ठीक भेल। ओमहर हमरा सासुरसँ िवदािगरीक हेतु समाद आिब गेल छल। मासो िदन नैहरमे निह भेल छल। मुदा कै बेर िवदागरीक हेतु आदमी आिब चुकल। अ_तमे ओ {वयं आिब गेलाह आओर हम सासुर िवदा भए गेलहुँ। q
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“वृ_दावन िबहारी लाल की जय।” िनरंतर भजन, कीत=न ओ Dवचनमे तjलीन भजनान_ददासजी महराज अfयािeमक पराकाQापर पहुँच गेल रहिथ। एकिह जीवनमे यि±तeवक एहन ¤पातंरण कमे सूनएमे अबैत अिछ। िक_तु ज_म-ज_मक सं{कार जेार मारैत अिछ। जीवनक कतेको रह{य अिछ जकर गिणतीय याÝया अस7भव। पर_तु स]: सeय इएह छल जे एकटा डकैत गरम िसंह महान कृ°णभ±त भए गेलाह। ततबे निह लोक कjयाण हेतु सव={व, सम{त साम»य=कS अिप=त कए देने छलाह। जिहना ओिह आwममे धनक बख होइत छल तिहना ओिह पैसाक जन कjयाण हेतु खच= कए देल जाइत छल। कहबी छैक : “पानी बाढ़े नावमे, घरमे बाढ़े दाम दोनो हाथ उिलिचये, एही सयानो काम।” एिह कथानकक भजनान_दजी महराज एकटा जीव_त उदाहरण छलाह। अपना लेल िकछु निह। “तेरा तुझको अप=ण” कS चिरताथ= करैत छलाह, अपन आwममानव जाितक कjयाण हेतु उपलËध कए देने छलाह। आwममे तँ भजन िकत=न चिलते रहैत छल। भuडारा चिलते रहैत छल। भ±तगण सभ मृदंग, ढोलक, पखावज ओ झािल बजाए कृ°ण नाम संिकत=न किरते रहैत छलाह। सम{त वातावरण ततेक धािम=क ओ भावनापूण= रहैत छल जे ओिहठाम अएिनहार कोनो, केहनो यि±त शाि_तक अनुभव करैत छल। मुदा भजनान_दजी एतबेपर निह ठहरल छलाह। ओ अपन रा°Ñक Dित कत=यसँ सेहो सचेत छलाह। हुनकर कहब छलिन जे जाधिर भारतमाता परतंLताक बेड़ीसँ जकड़ल छिथ, ताधिर {वगÄ यथ= िथक। मुि±तक कामना अ_याय िथक। “के बोले मा तुिम अबले...।” निह, निह, भारत माता अवला कदािप निह भए सकैत छिथ। कोिट, कोिट हुनक संतान हुनक DितQा ओ {वतंLताक रJा हेतु {व={व eयाग करए हेतु कृतसंकjप अिछ। देश {वतंL भए कए रहत। “भारत माताक जय! व_दे मातरम्”- इएह किह हुनकर Dवचनक अ_त होइत छल। रा°Ñवादी दलक आिथ=क सम{याक समाधान तँ भजनान_ददासजी महराजक आwमक माfयमसँ भए जाइत छल। महराजजीक एकटा भ±तक दिड़भंगामे तीन महलक भवन छलैक। ओ तीनू महल भजनान_दजी Dेरणासँ रा°Ñवादी दलकS दान कए देलक। {वयं दुनू यि±त िदन-राित रा°Ñ सेवामे लािग गेल। िफरंगी सभ एक िहसाबे िहिल गेल छल। ओकरा सभकS रा°Ñवादी दलक बढ़ैत शि±तसँ ततेक याकुलता भेलैक, ततेक भय भए भेलैक जे इÉजितसँ देश छोड़बाक र{ता ताकय लागल। q
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अ²ण एंगल केर संग ल_दन हवाइ अÞडापर पहुँचले छल िक एडली हवाइ अÞडापर पहुँच गेल। लगैत छल जेना ओ बहुत िदनसँ एिह अवसरक DितJामे छल। ओकर फाटल- फाटल हिरअर ऑंिख बहुत िकछु किह रहल छल। हवाइ अÞडासँ अ²ण ओ एंगल विहग=मन ¿ारपर एडलीक {वागतसँ अिभभूत छलाह। अ²ण सरकारी काजसँ जोगार लगाए ल_दन गेल छल। ओिहठाम आवास सिहत आओर आवcयक सुख- सुिवधाक Dब_ध छल। ओसभ ओतिह जेबाक हेतु उ]त छल पर_तु एडली अिड़ गेल। ओकर बात काटबओकरा सभक बसमे निह छल। अ{तु, ओ सभ एडलीक बात मािन ओकर घर िदिस िवदा भेल। अ²ण लेल ओकर घर नव निह छल। ल_दन Dवासक दौरान ओ सभ कतेको िदन ओतए रहल छल। अबैत जाइत छल। एक िहसाबे ओ सभ ओकर पािरवािरक िमL भए गेल छल। ल_दन पहुँिच अ²णकS उसास तँ भेलैक। कमसँ कम उमाक घात-Dितघातसँ ताeकािलक राहत भेटलैक। संगे पुरान दो{त सभसँ भSट-घॉंट होइत रहलैक। ओकरा सभक संगे िबताओल मधुर, {नेिहल समयकS पुन: स]: जीबाक अवसर भेटलैक। सरकारी काम काज तँ बहाना छल। एक िदन एडलीक ओिहठाम रिह अ²ण सरकारी अितिथ गृहमे चिल आएल। एंगल ओ एडली ओतिह रहल। ई दुनू तँ पुरान दा{त छल। बहुत िदनक बाद एकठाम भेल छल। लगलै जेना िबडÄ उिठ गेल। दुनूकS ग®पक अ_ते निह होइक। ग®पेटाक बात रिहतए तँ कोनो बात निह। लगबे निह करैक जे अ²ण ओकरे संगे आिब कए कतहुँ आनठाम ²िक एंगलक DतीJा कए रहल अिछ। आिखर ल_दन, ल_दन छैक। ओिहठामक अ_मु±त वातावरणमे बढ़ल, पढ़ल एंगल ककरो हेतु बा_हल छेकल कतेक रिह सिकतैक? एहनमे तँ अ²ण {वयं सोिच सकैत छलाह। मुदा भावी Dवल। जे हेबाक छल से भेल। दुखक बात तँ ई छल जे एहूकात गाड़ी िघिसर-िफिसर करैत छल। ओिहकात तँ स]: उमा गरिज रहल छलैक। अ²ण सचमुचमे बेचारा भए गेल छल। कहबी ठीके छै- ‘ने दौिड़ चली, ने ठिस खसी।’ एक स®ताह बहुत निह होइत छैक। देिखते देिखते शिन, रिब आिब जाइत छैक। पqच िदनका खटैनी दू िदनका स®ताहा_त अवकाशमे गिल जाइत छैक। अ²ण सेहो पqच िदन ल_दनक सरकारी काजमे य{त रहल मुदा शु¬क सqझ अएलापर माथ ठनकलै। आब की कएल जाए? एंगलक अएबाक ग®प कोन, फोनो निह केलकै। ओ तँ एडली संगे तेना कए रिम गेलैक जे आगा- पाछा िकछुक सुिध निह रहलैक। अ²ण जखन एडलीक ओतए पहुँचल तँ पता लगलैक जे ओ सभ ल_दनसँ बाहर चिल गेल अिछ। कतए गेल से घरक लोक ने अपना मोने िकछु कहलकै आ ने अ²ण पुछलक। ओिहठामक समाजमे बेसी खोध-बेधक पर7परा निह छैक। बहुत रास बात यि±तगत रिह जाइत अिछ। अ²ण गु7म छल। ओकरा एिह बातकS आब आभास भए रहल छलैक जे अपन सभक मािट-पािनमे ज_मल, पोसाएल पु²खक िबआहक एहन कjपना रहैत छैक जािहमे ओकर {Lी आज_म ओकरा Dित िनQावान रहैक, ओ जे चाहए सएह करैक, मुदा ई तँ ल_दन छै। से बात बहुत िबलंबसँ बुझए आिब रहल छलैक। एडली ओ एंगल {कूटरपर ल_दनसँ करीब चालीस िकलोमीटर दूर एकटा िरजाट=मे ठहरए हेतु जा रहल छल िक एकटा तेज गितसँ चलैत कार ओकरा टªर मािर देलकै। टªर ततेक जबरद{त छल जे {कूटर पचरा भए
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गेल। हेडली ओहीठाम कै पलटी खेलक मुदा कोनो बेसी चोट निह लगलैक। पर_तु एंगल हवामे कै फीट ऊँचाइ धिर फेका गेल आओर धरामसँ नीचा बीच सड़कपर खसल। ई तँ संयोग छलैक जे पाछुसँ अबैत दोसर कारक वाहन चालक एकाएक ´ेक लए लेलक निह तँ ओतिह ओ टुकड़ी-टुकड़ी भए जाइत। एिह दुघ=टनामे एंगलक दिहना जॉंघक हÞडी टुिट गेल छलैक। कनी- मनी चोट तँ सॱसे देहमे छलैक। एडलीक हालत सेहो ठीक निह छलैक। ¬मश: दुनू पैर फुिल गेलैक जािहसँ चलबामे असोकय= होइत छलैक। कहुना कए {थानीय पुिलस एकरा सभकS ल_दनक DितिQत अ{पतालमे भतÒ करओलक। अ²णकS सेहो पुिलस ¿ारा सूचना भेटल। ओ तुर_त अ{पताल पहुँचल। ओ एंगलक हालत देिख दुखी भए गेल। जाबे एंगल अ{पतालमे रहल ताबे ओहो ओतिह रहल। मुदा तकर बादक िच_तासँ ओ य रहए लागल। शु¤मे अ²णक काय=¬म छलैक जे ओ तीन-चािर मासमे अपन देश आपस आिब जाएत। मुदा गाम-घरसँ जे समाचार सभ भेटैक आओर जािह DकारS उमा उसँ उतर भए रहल छिल, ओकर मोन बेचैन भए जाइक, कोनो समाधान निह फुराइक। संयोग एहन भेलैक जे अंेजसभकS खुिफआ िरपोट= भेटलै जे अ²णकS िहतमे निह छल। ओकरा सभकS अ²णक गित-िविधपर स_देह भए गेल छलैक। तS ओकरा कम-सँ-कम साल भिरक हेतु ल_दनमे रहबाक आदेश कए देलक। सरकारी आदेश छलैक, तS अ²णकS कोनो िवकjपो निह रहैक। ओकर मोन िनर_तर अपन गाम-घरपर टvगल रहैत छलैक। तथािप ओ अपना आपकS ल_दनमे य{त कए लेलक। िदन भिर काय=लयमे समय बीित जाइत छल। सqझ कए समय िबताबक हेतु एतए बहुत जोगार सभ छलैक। एंगल अ{पतालसँ छुिट कए अ²णक डेरापर अएलैक। मुदा ओकरा नीकसँ चलल निह होइक। डा±टरक परामश=क अनुसार ओकरा िफिजओिथरैपीक Dयोजन रहैक। सभ सुिवधा आसे-पासमे उपलËध छल। मुदा घरमे बैसल-बैसल ओ तंग भए रहल छिल। कोनो उपायो निह रहैक। अ²ण कायलय चिल जाइक। िदन भिर ओ एसगिर कहुनाक समय िबताबिथ। एिहना एक िदन ओ उदासघरमे िकछु पिढ़ रहल छिल िक एडलीक फोन आएल। एंगल ओकरा तुर_त आबए हेतु आह केलक। एडली िबना िवल7ब केने ओतए आिब गेल। िदनभिर दुनू गोटाकS ग®प-स®पमे समय कोना बीित गेल सेपता निह चलल। सqझमे ओ अपन घर आपस जेबाक इछा य±त केलक। ताबत अ²ण सेहो आिब गेल रहए। अ²ण ओ एंगल दुनू गोटे ततेक आह केलकै जे ओ ओहीठाम रिह गेल। एंगल, एडली संगे तेहन तjलीन भए जाइक जे अ²णकS करए हेतु िकछु रिहए निह जाइक। कखनहुँक ओहो ग®पमे लािर देबाक Dयास करैक मुदा ओकरा सभक हेतु धिनसन। q
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५८ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 222 9-547X VIDEHA 78
३९ . अ²ण ल_दन चिल गेल से समाचार हमरा सभकS खबािसनीक माfयमसँ भेटल। एिह बेर ओ बहुत िदनपर आएल छिल। ग®प-स®पक ¬ममे कहए लागिल जे हमर माए स7पिमे बँटबारा हेतु बहुत हjला केलकै। मुदा हमर िपितऔत काका टस सँ मस निह होइत छैक। ओकर कहब जे बेटीक िबआह भइए गेल। तखन अहॉंकS खोिरसक अितिर±त िकछुके अिधकार निह अिछ। कतेको बेर बैसार भेलैक। पंचसभ सेहो ओकरे संग भए गेलैक। बहुत रास स7पि तँ ओ अपना नामे करा चुकल छल। ई बात सभ जखन हुनकर कानमे गेलिन तँ दिड़भंगामे मोकदमा कए देलाह। दिड़भंगाक नामी ओिकल मोना बाबू हमर सभक केस लिड़ रहल छलाह। कोट=सँ नोिटस जारी भेल। हमर िपितऔत काकाकS िदआद सभ बहुत कहलकै। अनततोगeवा ओ पसीजल आओर पqच बीघा जमीन हमरा माएकS देबाक हेतु तैयार भए गेल। ओ एिह D{तावकS मािन लेलाह। जतए हम सिर बीघाक उरािधकारी रिहतहुँ कतए माL पqच बीघापर समझौता करए पड़ल। कोनो िवकjपो निह छलैक। कानूने तेहने छलैक। समय बीतैत देरी निह होइत अिछ। देिखते-देिखते हमर बचा सभ जबान भए गेल। तीनू बेटीक पढ़ाइ पूरा भए गेल। ओ सभ अपन अपन ¤िचक िवषयमे एमए पास कए चुकल छिल। एकमाL पुL सेहो इंजीिनयिरंगमे पढ़ैत छल। एकरा सभक पढ़ाइ-िलखाइमे अ²णक ग7भीर योगदान छलैक। आिथ=क िच_ता तँ किहओ होमए निह देलक। पिढ़-िलिख तँ गेल मुदा आब की कएल जाए। ई सम{या िवकट छल। कारण ओिह समयमे बेटीक पढ़ाइ- िलखाइ िबरलैके ±यो करैत छल। से हम सभ केलहुँ आओर जेना-तेना पार लािग गेल। मुदा भिव°यक संघष= आओर Dवल लगैत छल। इएह सभ सोचैत रही िक हमर तीनू बेटी गाम आएल। ओकरा सभकS देिख मोन गदगद भए गेल। सभक यि±तeवमे अÜुत चमक छलैक। आeमिवrाससँ भरल छल। िव]ासँ ओकरा सभकS बहुत आeमशि±त Dा®त भए गेलैक आओर ओ सभ जीवनमे िकछु {थान बनबए हेतु कृतसंकjप लगैत छिल। जिहयासँ रा°Ñवादी दल बनल, जनाधार पाटÒक जनाधार तेजीसँ खसिक रहल छल। रा°Ñवादी दलक कमान उमाक हाथमे पिड़ते चा¤कातक {Lीगण खास कए मfयवगÒय पिरवारक, ओिह दलसँ जुड़ए लागिल। लगैक जेना देशमे ¬ाि_त आिब गेल अिछ। िशJा निह, पािरवािरक स7पिमे िह{सा निह, घरसँ बाहरो िनकलबाक पिरि{थित निह, आिखर एिह बातक Dितकार तँ भेनिह रहैक। अ{तु, अवसर भेिटते एक िदस तँ “ब_देमातम्”केर नारा लगैत तँ दोसर िदस {Lी स7मानक रJाक चच सेहो जोर पकड़ने जाइत छल। िफरंगी सभ एिह बातसँ िचि_तत छल। ओकरा सभकS िकछु फुरेबे निह करैक जे एिह पिरि{थितसँ कोनो िनपटी। तखन ओ सभ सोचलक जे जनाधार पाटÒक मदित लए आपसेमे उठापटक कराओल गेल।
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५८ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 222 9-547X VIDEHA 79
जिहआसँ चेतन जनाधार पाटÒक अfयJ भेल छल, ओकर िफरंगी सभसँ पिहल भSट-धॉंट रहैक। मुदा िफरंगीसभ ओकरा Dभावमे निह आिन सकल। रा°Ñवादी दलक Dभावसँ हमर तीनू बेटी- हीरा, वाणी ओ गंगा Dभािवत छलीह। देश ओ समाजक हेतु िकछु करबाक इछा हुनका सभकS उ¿ेिलत कएने छल। उच िशJा Dा®त कए ओ समाजक दुद=शाकS बेसी नीकसँ बुझैत छलीह। अ{तु, ओ सभ सभ काजकS पाछु कए उमाक संग भए गेलीह। रा°Ñवादी दलक सि¬य सद{यता हण कए गाम-गाममे घूमए लगलीह। आब उमा एसगिर निह छलीह। छोट, पैघ, जवान, बूढ़ सभ ओकरा संग दए रहल छलैक। असलमे गाम- गाममे पसरल एिह अ_यायसँ मुि±तपाबक एकटा अवसर आिब गेल छल। जतिह देखू “ब_दे मातरम्” केर नारा लािग रहल अिछ। भारत- माताक जयगान भए रहल अिछ। एकिह {वरमे समाजमे युग-युगसँ पसरल वैमन{यता,भोदभाव, शोषणक िव²Ð आ¬ोश सेहो तीवáतर भए रहल अिछ। ±यो-±यो कहैत छल जे समाजकS िबखिuडत करबाक ई िफरंगी सभक नव हथकंडा अिछ। रा°Ñवादी दलमे मिहलाक पैठसँ सभसँ बेसी Dश³ता भजनान_ददासजीकS भेलिन। हजारो सालसँ यातनापूण= जीवन जीबए हेतु िववश {LीगणकS अिभयि±त एकटा साधन भए गेल छल रा°Ñवादी दल। जखन कखनो नव Dयोग होइत अिछ, चाहे ओ सही हो, गलत हो, जे हो, ओकर िवरोध, Dितरोध होइते अिछ। मुदा ओहो िवकासक एकटा पदचापे बुझबाक चाही। अ_ततोगeवा मनु±खक Dयास सफल होइते अिछ। से निह होइत तँ मनु±खक िवकास निह भए सकैत अिछ। आिदकालसँ लोक पिरि{थितसँ संघष= केलक आओर आगा बढ़ल अिछ। भजनान_ददासजी भि±त, अfयाeम ओ रा°Ñवादक Dखर óवजवाहक भए गेल छलाह। गाम घरमे भए रहल सामािजक, राजनीितक घटना¬मसँ आwममे अएिनहार लोकक माfयमसँ ओ पूण= अवगत छलाह। हुनकर एिह उदारताक लाभ रा°Ñवादी आ_दोलनकS भेिट रहल छल। एही बात सभकS fयानमे रखैत रा°Ñवादी दलक अिगला बैसार वृ_दावनमे करबाक िनण=य भेल। q
ऐ रचनापर अपन म ◌ंतय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। जगदीश Dसाद मuडल - पंगु (उप_यास ) धारावािहक आ दूटा लघुकथा १ जगदीश Dसाद मuडलक पंगु उप_याससँ...
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५८ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 222 9-547X VIDEHA 80
8. बीसम शदीक छठम दशकक अि_तम समयमे, माने करीब 1958 इ{वीमे कोसी नदीमे फाटकबला पुलनेपालक सीमामे भारत सरकार बनौलक। कोसीक दुनू कात, माने उरे-दिछने कोसी बहैए, पूबो आ पिछमो बा_ह सेहो बनल। कोसी पुलक संग-संग, पिछमी आ पूवÒ मुÝय नहर बनबैमे सेहो हाथ लगौल गेल। तैबीच 1958 इ{वीमे कोसीमे बािढ़ आएल। ओना, बरखो बेसी भेल छेलैजइसँ कोसीक बा_ह कतेकोठाम टुिट गेल। इलाकाक फसल जे दहाएल से तँ दहेबे कएल जे गाम-गामक घरो-दुआर खसलआइनार-पोखैर सेहो भराएल-भोथाएल। तेतबे निह, धारो जैठाम बहै छल तइसँ थोड़ेक पिछम घुसकल। केते गाम ओहन छल जइमे कोसीक बािढ़ नइ अबै छल, तोहू सभ गाममे बािढ़ आबए लगल। तैसंग ईहो भेल जे ओ बा_ह साले- साल केतौ-ने-केतौ टुटौ लगल आ ओ इलाका दहाइत रहल। कोसीक जे पूवÒ आ पिछमी मुÝय नहर छल, जइसँ शाखा नहर सभ बनैक योजना छेलै, ओइ सभ जमीनक सवæक काज सेहो हुअ लगल। माने नहर बनैक, नापी-जोखी शु¤ भेल। मुदा ने अखन तक मुÝय नहरे पूण= ¤पेण बिन सकल छल आ ने शाखा नहर सभमे हाथे लािग सकल। बीसमी शदीक सातम दशक चिढ़ते, माने 1962 इ{वीमे चीनक संग भारतक सीमा-िववाद लऽ कऽ लड़ाइ भऽ गेल। जे देशक अथ= बेव{थाकS आरो चरमरा देलक। तैसंग गाम-गाममे अफवाह पसरल जे अनेको ह एकठाम भऽ गेल,जइसँ जबरदस हािन मनुखो आ मालो-जालकS हएत। गाम-गामक देवालयमे अ¸याम, कीत=न, नवाहक संग सबा मास,अढ़ाइ मासक कीत=नक संग य-जाप सेहो हुअ लगल। सीतापुरमे सेहो सबा मासक कीत=न ठकुरबाड़ीमे भेल। मुदा समय बीतैत गेल कोनो तरहक दैवी Dकोप तेहेन निहयS भेल। 1967 इ{वीमे जबरदस रौदी भेल। अखन तक देश अ³क मामलामे आeम-िनभ=र निह बनल छल। आन-आन देशसँ अ³क आयात होइत रहइ। 1967 इ{वीक रौदी चािर सालक भेल। जइसँ केतेको पोखैरक संग इनारोक पािन सुिख गेल। जइसँ खेतीक संग पीबैक पािनक सम{या सेहो उपि{थत भऽ गेल। सीतापुरमे एकटा बड़की पोखैर अिछ,जेकर पिनझाउसँ लऽ कऽ िभuडा सिहत बाबन बीघाक अिछ। िकंवदि_त अिछ जे ओ पोखैर दØतक खुनल छी। गामक जे आन पोखैर आ इनार छल, ओ तँ सुिखये गेल जे ओइ बड़की पोखैरक पािन सेहो सटैक कऽ पqच कÙापर चिल गेल, जइमे माL भिर ठेहुन पािन बँचल। तहूमे तेतेक गािद छल जे पािन तक पहुँचब किठन छेलइ। अ³-पािनक बेतरे केतेको मालो-जाल मरल आ लोको मरबे कएल। गाम-गामक जमीन ओिहना परती-परqत बिन गेल। उपजा-बाड़ीक कोनो ठेकान निह रहल। अ_तमे गामक लोक ओइ बड़की पोखैरसँ िबसqढ़ खुिन-खुिन आिन-आिन उसैन-उसैन खा-खा कऽ Dाण बँचौलक। सरकारक दोसर पंचवषÒय योजनामे दरभंगा-लहेिरयासरायमे अ{पताल बनल। जइसँ दुनू तरहक लाभ आमजनकS भेल। जिहना िबमारीक इलाजक सुिवधा भेल तिहना डॉ±टरी पढ़ाइ भेने नव-नव डॉ±टरक िनमण सेहो हुअ लगल। ओना, जइ िहसाबसँ दुनूक ज¤रत छल, माने डॉ±टरो आ िबमारीक इलाजोक, तेतेक पूित= तँ निहयS भेलमुदा िकछु तँ भेबे कएल। 1942 इ{वीमे जे देशक जन-आ_दोलन अंगरेजी शासनक िखलाफ उठल ओ अपन चरम सीमापर पहुँच गेल। अंगरेजी शासनक िखलाफक संग-संग अंगरेजी व{तुक [i] सेहो विह°कार भेल। ओइ समय इंगलØडक
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मेनचे¸रक कपड़ा उ]ोग दुिनयqमे बहुत आगू छल। भारत सन िवशाल देशक िवरोध भेने इंगलØडक कपड़ा उ]ोगकS जबरदस धªा लगल। ठीक ओकर िवपरीत देशक हथकघकS अ वसर भेटल, जइसँ गाम-गाममे सूत काटैक संग-संग कपड़ा बुनैक रोजगारकS नीक मौका भेटल। जमी_दारी उ_मूलनसँ खेतक मालगुजारी जमी_दारक हाथसँ िनकैल िबहार सरकारक हाथ आएल। अपन- अपन जमी_दारीक चाज= दइमे जमी_दार सभ सेहो रंग-रंगक अरंगा लगा-लगा देरी करबे केलैन। मुदा जे भेलसे भेल, जमीनक मालगुजारी िबहार सरकारक हाथ एबे कएल। ओना, गाम-गामक सभ जमीनक मालगुजारी एकरंग निहयS छल, मुदा कम िक बेसी तँ छेलैहे। कम-बेसीक माने भेल जे जे जमीन ´µोर, िशवोर वा अ_य कोनो कारणे मालगुजारीसँ मु±त छल, ओहू जमीनक मालगुजारी टै±स ¤पमे तँ निह मुदा ‘शेष’ ¤पमे लागए लगल। ओना, ‘शेष’ नाम-माLे ¤पमे छल। टै±सक अितिर±त जे टै±स लगैत रहै, शेष माLओतबे छल। िबहार सरकारक कम=चारीक माfयमसँ मालगुजारी असुलल जाए लगल। गामक िकसान सभ जमीनक िनलामीसँ बँचैक नमहर सqस लेलक। ओना, अंगरेजक समयमे–1888 इ{वीसँ 1903 इ{वीकबीच–जमीनक सवæ भेल छल, जइ आधारपर अखन तक जमीनक िहसाब-िकताब चलैत आिब रहल छल, ओइमे अनेको रंगक ओझरी लगले जा रहल छल। माने ई जे िकछु ओझरी[ii] सवæक पिहनेसँ आिबये रहल छल तेकर अितिर±तो अनेको रंगक नव-नव ओझरी उिठ-उिठ ठाढ़ भेल। तँए,सवæक ज¤रत भेल। बीसम शदीक सातम दशकमे जमीनक सवæक काज शु¤ भेल। गाम-गाममे सवæक पिहल सीढ़ीक काज िकcतवार ¤पमे शु¤ भेल। मुदा िकcतवार करैबला कम=चारी जे आएल ओ भीतरे-भीतर तेहेन हवा बनौलक जे गामक लोक,जमीनबला सभ ऑंिख मुइन कऽ अपन-अपन खेतक न±शा बढ़बैले ओकरा घूस िदअ लगल। जइसँ सवæ की हएत जे पैसाक खेल शु¤ भेल, जइसँ गाम-गाममे आरो िववाद फँिस गेल। 1967 इ{वीक रौदी आमजनसँ लऽ कऽ सरकारोकS कृिषक लेल पािनक की ज¤रत अिछ, तइ िदस िधयान िखंचलक। ओना, अखन धिरक िकसानक सं{कारमे िसंचाइक कृिLम बेव{थाक Dित ओ आकष=ण निह आएल छल, जेकर ज¤रत छेलइ। मुदा रौदी से अनलक। ओना, कोसी नहरक चच= िकसानक कान तक ज¤र पहुँच गेल छेलै मुदा ओइ ¤पमे निह, जइ ¤पक खगता छेलइ। कोसीक पिछमी मुÝय नहर जे छल, ओकर खुनाइयो समुिचत ढंगसँ नइ भेने,अखनो धिर ओिहना लटकले छल। तैबीच िवदेशी[iii] सहायतासँ {टेट बोिरंग गाड़ैक योजना बनल। ओइ बोिरंगक ओहन पाइप आ इंिजन अिछ जे हजारो बीघा खेतक िसंचाइ कइये सकैए। ओना, बोिरंग तेहेन इंिजनसँ गाड़ल जाइ छेलै जे एªे िदनमे माने आठसँ दस घ_टामे बोिरंग गड़ा जाइत रहइ। मुदा जइ इंिजनसँ पािन िनकालल जाइत ओ िबजली चािलत छल। जे िबजली केतौ छेलैहे निह, आ कनी-मनी जँ छेलैहो, से बहुत कम माLामे छल, जइसँ बोिरंगक इंिजन चलब किठन छेलइ। तेकर अितिर±त बोिरंगक पािनक लेल नाला चाहै छल, से केतौ बनबे ने कएल। जँ केतौ-केतौ कनी-मनी बनबो कएल तँ तेहेन घिटया काज भेल जे ढिह-ढुिह गेल। एक तँ ओहुना लोक बुझैए जे सरकारी काज आ जेठुआ गरेक [iv ] कोनो भरोस निह। से भेबो कएल। दज=नो बोिरंग गामे-गाम गड़ाएल मुदा िसंचाइ केतौ ने भेल।
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सरकारोक नजैर जखन रौदीपर पड़ल तँ ओहो बोिरंग गड़बैक योजना बनौलक। बØकक माfयमसँ एक- ितहाइ,एक-चौथाइसिËसडीपरबोिरंगक पाइपो आ पािन िनकालैबला प7पसेटोक बेव{था करौलक। केतौ-केतौ गोिट-पंगरा गड़ेबो कएल, मुदा जेते ज¤रत छलसे निहयS भेल। 1967 इ{वीमे आम चुनाव भेल। ई चािरम आम चुनाव छल। पिहल 1952 इ{वीमे, दोसर 1957 इ{वीमे, तेसर 1962 इ{वीमे भेल छेलै आ चािरम 1967 इ{वीमे।¬मश: के_oमे सरकार बनल पिहल DधानमंLी पिuडत जवारलाल नेह¤, दोसर- लाल बहादुर शा{Lी, ओना, िकछु िदनक लेल गुलजारीलाल न_दा सेहो DधानमंLी बनला, आ तेकर बादक DधानमंLी पदपर आिसन भेली इि_दरा गqधी। चािरम आम चुनावमे िबहारक शासन बदलल। ओना, के_oमे कqेसी शासन रहबे कएल मुदा िबहारमे कqेस िवराधी सरकार बनल। ओना, कएटाआनो-आनो राÉयमे कqेसी सरकार बदलबे कएल। कqेस छोिड़ सभ पाटÒ िमिल िबहारो सरकार बनौलक। नव सरकार बिनते िबहार सरकारक 33 सूLी काय=¬म बनल। मैिÑकमे अंगरेजी िवषयकS उठौल गेल। मैिÑक तकक िशJा सेहो Tी कएल गेल। तेकर अितिर±तो काय=¬म सभ छल मुदा सरकारमे जिहना एक िदस वामपंथी शािमल छल तिहना दोसर िदस दिछणपंथी सेहो रहबे कएल। दुनूक बीच तेना िववाद फँसल जे अठारह मास बीतैत-बीतैत सरकार टुिट मfयाविध चुनाव भेल। 1971 इ{वीमे पािक{तानमे सेहो चुनाव भेल। ओइ चुनावमे प ूवÒयो आ पिछिमयो पािक{तानक बीच लड़ाइ फँसल। पिछमी पािक{तान कcमीर, पंजाबआराज{थान किट कऽ बनल छल, आ बंगालसँ किट कऽ पूवÒ पािक{तान बनल रहइ। ओना, अजादीसँ पूव= 1947 इ{वी तक भारत देश जेतेटा छल तइमे पािक{तान कटने कमी एबे कएल। जे एकटा देश छल ओ दूटा बिन तीन टुकड़ी भऽ गेल। ओना, 1931 इ{वीमे, अंगरेजीए शासनमेबम सेहो अलग भेल, जे भारतेक पूवÒ भाग छल। पछाइत िसिªम जे िक एकटा छोट देश छल ओ भारतमे िमलबो केबे कएल। इि_दराजीक नेतृeवमे के_o सरकार छल, ओ पूवÒ पािक{तानकS संग देलैन। ओना, चािर सालसँ जे रौदी आिब रहल छल ओ 1971 इ{वीमे सालो भिर बरखा भेने समा®त स ेहो भेल। जिहना भारत पूवÒ पािक{तानकS मदैत केलक तिहना अमेिरका पिछमी पािक{तानकS केलक। अमेिरका शि±तशाली देश छेलैहे। जेकरासँ मुकाबला करब किठन छेलइ। सोिवयत संघ सेहो शै_य-शि±तमे शि±तशाली भइये गेल छल। इि_दराजी सोिवयत संघसँ शै_य-सि_ध केलैन। सोिवयत संघक सहायतासँ लड़ाइ जमगर भेल। अ_तो-अ_त बंगला देश {वतंL देशक ¤पमे ज_म लेलक। पािक{तान दू टुकड़ीमे िवभािजत भऽ पािक{तान, बंगलादेशक नाओंसँ दू देश बिन गेल। अखन तक, माने 1971 इ{वी तकभारत जे अमेिरकासँ अ³क [v ] आयात करैत आिब रहल छल, तेकरा अमेिरका रोिक देलक। जइसँ पेटक सम{या अपना देशमे उठबे कएल। जइ सभ देशमे अमेिरका अ³क िनयत करै छल ओ सभ देश अमेिरकाक Dभावमे रहै, तँए ऐगला मुँहराबिनकोनो देशसँ अ³क आयात करब किठन छेलैहे। सोिवयत संघ सेहो अ³क उपजमे ओतेक सश±त निहयS छल जेते आन-आन शि±तमे छल। ओना, सोिवयत संघ ठuढ देश अिछ, तहू कारणे ओइठाम अ³क उपज कम होइ छल। खास कऽ साइबेिरयाक जे भाग सोिवयत संघमे छल ओइ भागमे तीन माससँ नअ मास तक जमीन बफ=मे डुमल रहै छल, जइसँ ओइठाम कृिष काय=मे बाधा छेलैहे।
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५८ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 222 9-547X VIDEHA 83
भारतमे अनेको राÉय अिछ आ सभ राÉयक अपन-अपन सम{या अिछ। िकछु राÉय एहेन अिछ जइमे बरखो कम होइ छै आ मािटयो उपजाउ निहयS अिछ। तिहना िकछु राÉय एहनो अिछ जैठाम अिधक बरखो भेने ओइठामक पैदावार सीिमत भऽ गेल अिछ। तैसंग िकछु राÉयमे खाइबला अ³क उपज तँ कम होइए मुदा तेलहन, कपास इeयािदक उपज अिधक होइए। सभ िकछु होइतो िकछु राÉय एहनो तँ छेलैहे जे अपन भरण- पोषण करैत आनो-आन राÉयकS अ³ दइ छल। पंजाब राÉय, जैठाम मािटयो ओहन उव=र शि±तबला निह अिछ आ बरखो कम होइ छै, मुदा ओइठाम एहेन कृिLम बेव{था[vi ] केने छल जइसँ अपेJाकृत नीक पैदावार छेलइ। आजुक िबहारक न±शा तँ बदैल गेल अिछ मुदा जखन उर िबहार आ दिछन िबहार छल, माने िबहार आ झारखuड िमला कऽ जखन एक राÉय छलतखन उर िबहार जिहना धार-धुरसँ भरल छल, जइसँ दािहयो होइते अिछ,तिहना दिछन िबहार पहाड़, खानसँ सेहो भरल छल जइसँ कृिष JेL कम रहने कृिषक पैदावार कम रहबे करए। िमिथलvचल सिहत उर िबहारमे धार-धुर तँ अिछए मुदा कृिLम बेव{था–नहर, बोिरंग–क तँअभाव अिछए,जइसँ ऐठामक कृिष-काय= अनिबसवासू बनले अिछ। रौदी-दाहीक खेल साले-साल चिलते अिछ। जइसँ अपना ऐठाम कृिष काय= पंगु बनल अिछ। अखन धिरक जे कृिष बेव{था अपना ऐठाम रहल ओ Dाचीन पÐितक अनुकूल रहल। जइसँ उपजक माLा िनÂसँ िनÂतर {तरमे रहल। देशक सोझा जखन अ³क सम{या उिठ कऽ ठाढ़ भेल तखन के_oो सरकार आ राÉयो सरकारक नजैर कृिष िदस उठल। ओना, अनेको रंगक अ³क खेती-बाड़ीक लेल अनुकूल JेL िबहार छीहे मुदा उपजाक जे रेिशयो हेबा चाही से निहयS छल। सरकारक नजैर उठने िकसानकS रंग-रंगक सहायताक सुिवधा भेटल। पूसा, ढोली, सबौर इeयािद जगहमे कृिष फाम= सेहो बनल, जैठाम कृिषक पढ़ाइक संग-संग अनुस_धान सेहो हुअ लगल। जइसँ अ³क नीक-नीक बीजक अनुस_धान भेल, जे पर7परासँ अबैत पैदावारमे धªा मारलक। माने डेिढ़या-दोबर-तेबर उपजाक बढ़ोरी भेल। जइ खेतमे कची मन कÙा उपजै छल, तइमे तीन-तीन, चिर-चिर पªी मनक उपज हुअ लगल। तैसंग कोसी नहरक लाटमे आनो-आन नहरक खुनाइ हुअ लगल जइसँ खेतक िसंचाइ होइत। बØकक माfयमसँ एक-ितहाइ, चौथाइ अनुदािनत ¤पमे बोिरंग-प7पसेट लॉनक माfयमसँ िकसानकS भेटए लगल। जइसँ गाम-गाममे िकछु बोिरंग भेने उपजमे िकछु-ने-िकछु बढ़ोरी सेहो भेबे कएल। अखन धिर जइ खेतमे माL छाउर-गोबर देल जाइत छल,रसायिनक खादक Dयोग निह भेल छल, तइ सभ खेतमे रसायिनक खादक संग- संग गोबर-घास-पातसँ िनिम=त जैिवक खाद सेहो पड़ए लगल। तेतबे निह, िकसानकS जैिवक खाद बनाएबो िसखौल गेल। अखन धिर जे सरकारी िवभागमे कृिष िवभाग मृतDाय छल ओइमे जान फूकल गेल। Ëलॉकमे कृिष िवभागक अलग कायलय बनल। गाम-गाममे कृिष िवभागक कम=चारीक [vii ] बहाली भेल, जेकरा माfयमसँ गामक िकसानकS नव तकनीकक जानकारी देल जाए लगल। Ëलॉक {तरपर सरकारी कृिष फाम= सेहो {थािपत भेल। सरकारी माfयमसँ िकसानकS खाद-बीज, कृिष-यंL अनुदािनत दरपर कज= ¤पमे सेहो भेटए लगल। पूसा, ढोली,सबौर फाम=क माfयमसँ अ³क संग तीमनो-तरकारी आ फलो-फलहरीक बीजक संग गाछ सेहो उपलËध करौल जाए लगल।
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‘जय-जवान, जय िकसान’क नारा देशमे बहल। अखन धिरक जइ िकसानक शकल-सूरत िबगैर गेल छल ओइ िकसानमे नव उeसाह जगल, कृिष पैदावार बढ़ल, देश अ³क मामलामे आeम-िनभ=र भेल। आeम-िनभ=र भोजनक मामलामे ज¤र भेल मुदा कृिष पैदावारमे पंगुपन बनले रहल। जैठाम कृिष आधािरत माने कृिष पैदावारसँ पØतालीस Dितशतसँ अिधक कचा माल कारखानाकS भेटै छै, ओ उपज ठमकले रिह गेल। जइसँ कल-कारखानाक िवकास िबहारमे नइ भेल। ओना, जिहना एक िदस Dगितक िदशामे देशक शि±त बढ़ल तिहना समाजक िकछु लोक ओकर िवरोध निह केलैन सेहो बात निहयS अिछ। रंग-रंगक अफवाह सभ उठबे कएल जइसँ Dगितमे बाधा नइ भेल सेहो निहयS कहल जा सकैए। अ_ध-िबसवास आ ¤िढ़वादी िवचार सेहो जिम कऽ िवरोध करबे केलक। q शËद संÝया : 1945, ितिथ : 4 जून 2018 जारी....
[i] इंगलØडक समानक [ii] जमीनक बीच सम{या [iii] चेको{लोवािकया [iv] जेठक बखक मेघक [v] गहुम, बाजरा [vi] नहर, बोिरंग आ भखड़ा-नvगल डैमसँ िसचाइक बेव{था [vii] भी.एल.डËjयू.क
२ जगदीश Dसाद मuडल दूटा लघुकथा गपक िपयाहुल लोक
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५८ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 222 9-547X VIDEHA 85
दीनब_धु काकाकS आइ अिगल«गी केसक फैसलाक तारीख िछऐन। ओना, केस पचीस साल पिहलुका िछऐन, जइसँ पØतीस मुÔालहमे पqचकS मिर गेने तीस गोरे जीिवत छैथ। कािà सqझेमे सभ िकयो िवचािर लेलैन जे सभ काज छोिड़ िभनसरे समयपर तैयार भऽ सभ िकयो संगे साइिकलसँ मधुबनी चलब। सेशन कोट=क केस छी तँए अपना सभ िदससँ कोनो िनयम भंग करबाक निह अिछ, जँ कोटæ वा मुÔैये िदससँ कोनो गड़बड़-सड़बड़ हएत तँ ओकरा आगू फिरछा लेब। जखन िवचारसँ Dेम केने छी तखन डरैक कोन बात अिछ। कोट=-कचहरी हुअ िक थाना-बहाना आिक क{टडी-जहल, सभठाम जाइले तैयार छीहे। हरे-हरे सभ िकयो–माने तीसो मुÔालह, एक जुटताक पिरचय देलैन। ओना, जिहया केस भेल वा केससँ पिहने जे कारण भेल तहू समयमे सभ िकयो एकजुटताक पिरचय दइये देने छेलिखन मुदा पचीस साल जे बीचमे समय बीतल, तैबीच कोनो तेहेन काजे निह भेल जइमे एकजुटताक परीJा होइत। एकर माने ईहो निह जे पØतीसो डरसँ देह-हाथ समेट लेलैन। समािजक {तरक जे काज छल ओ काज बीचमे चलल तँए परीJाक घड़ी उपि{थत नइ भेल। मुदा समािजक बदलावक जे Dि¬या अिछ तइमे तँ परीJा होइते आिब रहल अिछ। खेला-पीला पछाइत जखनदीनब_धु काका ओछाइनपर पड़ला आ िन_oाक आगमन हुअ लगलैन तखन िच_eय मनमे काàुक काज िधयानमे जगैत एलैन। िधयानमे जिगते नजैर िछटैक कौàुका केसपर गेलैन। उिठ कऽ बैइसैत प£ीकS सोर पािड़ बजला- “कनी ए7हर आएब।” ‘कनी एमहर आएब’ सुिनते Dेमलता अकचकेली। िकएक तँ दीनब_धु काकाकS ओछाइनपर गेला आधा घ_टा भऽ गेल छेलैन। पिरवारक लोक सभ बुिझते छैन जे जिहना काज लग पहुँचते काजमे हाथ लगा दइ छैथ तिहना ओछाइनपर पहुँचते िन_oासँ त_oा होइत िनिनया देवीक कोरामे पहुँच जाइ छैथ, तँए अिधक-सँ- अिधक पqच िमनट समयक दूरी जागल आ सुतलक बीच िहनका लगै छैन। ओना, Dेमलता अखन तक ओछाइनपर निह गेल छेली िकएक तँ मरदा-मरदीकS खुएला- पीएला पछाितये ने {Lीगण सभ खेबो-पीबो करै छैथ आ बरतन-बासन धोइत-उसारैत एक-सबा घ_टा बीचमे लिगये जाइ छैन। अकचकाइत Dेमलताक मनमे भेलैन जे भिरसक िकछु सपना देखलैन तँए एहेन अवाज मुहसँ िनकललैन। तथािप शा_त-चीत भऽ Dेमलता बजली- “कनी हाथ लागल अिछ, अबै छी।” योजनाबÐ ढंगसँ िवचारैत दीनब_धु काका िवचािर नेने छला जे पिरवार हुअ आिक समाज, अपन जवाबदेहीक जे काज अिछ ओ अगुआ कऽ चलबे ने इमानदारीक पिरचय दइए। प£ीकS लगमे अिबते दीनब_धु काका बजला- “दस बजेसँ कोट-कचहरी खुजैए तइसँ पिहने एक घ_टाक र{ता सेहो टपब अिछ, तँए साढ़े आठ बजे अहq भोजनक Dब_ध किर लेब। जलखै नइ करब, एकेबेर खाइये कऽ घरसँ िनकलब।” ओना, Dेमलता गपक िपयाहुल लोक छैथ तँए िकछु गप-स®पकS आगू बढ़बैक िवचारसँ केसक िवषयमे खोर-चाल करब मनमे जगबे केलैन मुदा बरतन-बासनकS उसारब आ पितकS सुतैमे बाधा उपि{थत करब िवचारकS रोिक देलकैन। तँए, Dेमलता एतबे बजली- “बड़बिढ़यq।” प£ीक मुहसँ ‘बड़बिढ़यq’ सुिन अपन गोटीकS सहपर चलैत देख दीनब_धु कªाक योजना अि_तम चरणमे पहुँच गेलैन। काजक अि_तम सqस लैत िवचारलैन जे चािर बजे भोरे ओछाइन छोिड़ पिहने संगी-साथीकS जना देब अिछ। पछाइत अपन िनeय-कम= िदस बढ़ैक अिछ। िकएक तँ सबहक अपन-अपन िनeय-कम= अिछ तइमे जेते समय लगैए ओ तँ सभकS लगबे करत, तँए जँ पिहने अपन िनeयकम= िदस बढ़ब तँ हो-न-हो केकरो नीन समयपर नइ टुटइ। अि_तम िनण=य मनमे जिगते िनिनयq देवीक लगौल टौहकीमे दीनब_धु काका फँिस गेला। जिहना सुतैक अि_तम बेलामे चािर बजे भोरे उठैक बेल दीनब_धु काका रोिप लेलैन तिहना चािर बजे ऑंिख खुिज गेलैन। ऑंिख खुिजते घड़ीपर नजैर िदअ लगलैथ िक देवाल घड़ीक घ_टी टनटनाए लगल। जेकरा गिन दीनब_धु काका जखन धड़ीपर नजैर िखरौलैन तँ ठीक चािर बिज रहल छल। ओछाइनसँ उिठते अपना संग तीसक जमानतदारक संग एक साथ कचहरीमे उपि{थत हेबाक छेलैन। मनमे कने शंका जगलैन जे अपना देवाल घड़ी अिछ तँए समयक गवाही बिन गेल, मुदा जेकरा घड़ी नइ होइ ओ तँ सुतले रिह जाएत। जखने एक गोरेकS िबलम हएत तखने तीसो िबलमबे करत। से नै तँ दोसरो-तेसरोकS उठा िदऐ जे ओहो सभ उिठ कऽ अपन-अपन काजमे लिग जाएत। मनमे काज अिबते काजक ¤पकS िनहारए लगला। अपना छोिड़ उनतीस आदमी अिछ जेकरा घरे-घर सबहक ऐठाम जा-जा कऽ जगाएब अिछ, ऐमे जँ पँच- पँचो िमनट समय लागत तखन तँ पqच िमनट कम अढ़ाइ घ_टा समय लिग जाएत! तहूमे कोट-कचहरीक काज छी, िबनु पाइये चलत निह, जँ कहॴ केकरो पाइक ओिरयान निह भेल होइ तखन तँ आरो काजमे काज जनिमये जाएत िकने, जइसँ आरो बेसी समयक नोकसान हएत। अढ़ाइ घ_टा समय िनकलला पछाइत जँ अपने अपन िनeय-कम= िदस बढ़ब तखन तँ अपने सभसँ पछुआ जाएब। यएह ने िवपरीत पिरणामक िवपरीत ि¬या भेल, से नै तँ काजकS सघन ¤पमे करैक अिछ। सघन ¤प भेल, एक गोरेकS उठेलॱ, उठला पछाइत दू गोरे भेलॱ, दुनू गोरे दू गोरेकS उठौला पछाइ चा¤ गोरे चािर िदस भऽ गेलॱ। जइसँ आठ भऽ जाएब, आठसँ सोलह भऽ जाएब, जइसँ पनरह-बीस िमनटमे सभ जिग जाएत। दस बजे कचहरीमे हािजर हेबाक अिछ तइ बीचक जे काज अिछ ओइमे जँ एक-एको िमनटक बचत करैत चलब तँ पनरह-बीस िमनट पुिरये जाएत। घरसँ जे सोिच दीनब_धु काका िनकलला, र{तामे तइ सोचमे अशोच जगलैन। अशोच ई जगलैन जे कोट-कचहरीक काज छी, मधुबनी पहुँचते पिहने मुंिशयो आ वकीलो साहैबसँ भSट करब अिछ, पछाइत कोट=-ऑिफसक सेहो पता लगाएब अिछ जे ब_द रहत िक खुजल रहत। खुजलोमे जज साहैब उपि{थत हेता िक निहइeयािद-इeयािद अनेको काज दीनब_धु कªाक नजैरपर आिब गेलैन। सभ जुित-भqित लगबैत घरपर अबैत-अबैत आठ बिज गेलैन। माने चािर घ_टा समय बीत गेलैन। ओना, अपन िनeयो-कमÄ आ चाहो-ताहो र{ते-र{ते पार-घाट लिग गेल छेलैन। घरपर अिबते दीनब_धु काकाकS नहाइसँ पिहने िवचार उठलैन जे गामक चौहÔी ने बाि_ह लेलॱमुदाघरक की हाल अिछ सेहो तँ जानबे अिछ। ऑंगन पहुँच, प£ीकS अछ®पे पुछलिखन- “भानसक की हाल अिछ?” तरकारी कटैकाल DेमलताकS बामा हाथक ऑंगुरमे थोड़ेक किट गेल छेलैन तँए मन पीड़ासँ पीड़ाएल रहैन। बजली-
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“हाल की रहत, बेहाल अिछ!” प£ीक तामसकS दीनब_धु काका आँिक निह सकला। ऑंकबो असान निहयS छेलैन, िकएक तँ दरबÉजा िदसक मुहसँ ऑंगन Dवेश केने छला आ ऑंगन िदसक र{ता िदस घुिम Dेमलता मुड़ी गॲित बैस कटल ऑंगुरकS दिहना हाथक ऑंगुरसँ दािब कऽ पकड़ने छेली। ओना, प£ीक मुहसँ सुनल ‘बेहाल’ शËदक दोसर माने दीनब_धु कªाक मनमे उिठ गेल छेलैन जे भिरसक कोनो कारणे भानसमे गड़बड़ भेल अिछ। सहटैत दीनब_धु काका प£ी िदस बढ़ला। ओना, कªाक मनमे तेहेन उमकी उिठ गेल रहैन जे जिहना कोनो Dेमी अपन DेिमकाकS सात अरब लोकमे सभसँ नीक ¤प देखैए तिहना आन_दसँ आ_दोलन कएल आ_दोलनीक तेहेन ¤प पकैड़ नेने छेलैन जे दुिनयqक कोनो दोसर सम{या आिक दोसर काज हवा जकq उिड़याइत बुिझ पड़ै छेलैन। आध ल«गा हटलेसँ देखलैन जे प£ी बामा हाथक कटल ऑंगुरकS दिहना हाथक ऑंगुरसँ किस कऽ दािब खून रोकने छैथ। धरतीपर पसरल खून, ऑंचरसँ ऑंगुर दािब कऽ पकड़ने DेमलताकS िबजलोका जकq िबजकल मुँह देख एकाएक दीनब_धु कªाक मनमे िवचारयुÐ ठाढ़ भऽ गेलैन। एक िदस अपन िजनगीक ओ समय जे सेशन केसक जजमे_टक िदन छी, एिहठाम भा«यक पलटा-पलटी हएत तँए कोट=मे उपि{थित भऽ डटैक लेल तैयार रहबअिछ आदोसर िदस प£ीक कटल ऑंगुरक इलाज नइ कराएब तँ हो-न-हो लोहासँ कटल छैन, कहॴएक िबमारीमे दोसर िबमारी ने ठाढ़ भऽ जाए..! िबमारीमे िबमारी जगने जिहना प£ीकS मरैक स7भावना दीनब_धु काकाकS बुिझ पड़लैन तिहना कोट=मे अनुपि{थत भेने अपनो मृeयु नजैरपर एबे केलैन। कोट=सँ लऽ कऽ बाहर तकक लोक कहबे करत जे जाबे ओ अपराधी निह अिछ ताबे कोट=सँ नुकाएल िकए..? दीनब_धु कªाक मन ओझरीमे ओझराए लगलैन। मुदा लगले मनमे िनिण=त िवचार जगलैन। पिहल, जीवन तखन ने िजनगी। अखन अपन मृeयुक परवाह करब आिक अनकर? एक तँ ओहुना जँ परवाह-परवाहक अ_तर काजक वजनसँ नापल जाइए...। नव ऊजक संग दीनब_धु काका िवचारकS रोिक बजला- “केना ऑंगुर कटल?” Dेमलता बजली- “तरकारी-ले बैगन बनबै छेिलऐतहीकाल नवटोलवाली किनयq धड़फड़ाएल आिब बाजल।” समयक संकीण=ताकS देखैत दीनब_धु काका िबचेमे बजला- “की बाजल?” “बाजल जे झंझारपुर लग एन.एच.पर एकटा चिर-चिकया गाड़ी उनैट गेलै तइमे एकटा खूब मोटगर-डटगर मौगी चªा-तरमे मुँह बािब मिर गेल।” प£ीक बात सुिन दीनब_धु कªाक मन मािन गेलैन जे प£ीक मन उछैट कऽ ओमहर चिल गेल हेतैन जइसँ बैगनक संग-संग अपनो ऑंगुर कािट लेली। बजला- “बैगन काटैकाल ने ऑंगुर कटल। तइसँ पिहलुका िवहीत तैयार भेल अिछ िकने?” मुड़ी डोलबैत Dेमलता बजली- “हँ, भात-दािल तँ बिन गेल मुदा तरकारी नइ बनल।” मने-मन दीनब_धु काकाकS काम-चलाउ संतोख भइये गेलैन। िबहुसैत बजला- “अहq सन सन जँ गपक िपयाहुल लोक [i] रहत तँ लोकक [ii] उपकार सभ िदन होइते रहतैन।” बजैक ¬ममे दीनब_धु काका बािज तँ गेला मुदा लगले मन िबचड़ैत िवचार देलकैन जे समाजक बीच कम=क िजनगीक संग गपोक िजनगी बिन गेल अिछ। काज आ गपक बीच नमहर दूरी बिन गेल अिछ। जे बनब सोभािवको अिछ। जिहना एक छोरपर मिहला िदन-राित अपन दुख-ध_धाक पाछू बेहाल अिछ तिहना दोसर छोरपर ईहो तँ अिछए जे मिहला जगतमे की ओहन मिहला नइ छैथ िजनका िजनगीक हर काजक लेल नोकर-चाकर निह छैन। तखन तँ Dेमलता ओहन छैथ िजनका बीच-िबचाउमे देख सकै छी। Dेमलता बजली- “आब की करब?” दीनब_धु काका बजला- “िकछु ने करब। सभ काज र{तासँ होइ छै, र{तासँ करब। संगी कऽ दइ छी, डॉ±टर ऐठाम जा कऽ पिहने प×ी ब_हबा दवाइ लऽ िलअ। हम अपनेसँ परोिस कऽ खा लेब।” q शËद संÝया : 1420, ितिथ : 13 जुलाई 2018
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५८ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 222 9-547X VIDEHA 87
उदय-Dलय िवदेशसँ पी.एच-डी.क िडी पािब धरणीधर गाम पहुँचला। गाममे पएर दइते गामक बात मन पड़ए लगलैन- यएह गाम छी, जैठाम सात पु{तसँ बास अिछ आ आगूओ केतेक िदन धिर बसले रहब। मुदा लगले समािजक पिरवेश सोझामे आिब धमकलैन। धमकलैन ई जे जिहना अपन ज_म ऐ सुखपुरमे भेलतिहनाबचामे पालन-पोषण सेहो भेल, पछाइत गामेक {कूलमे िशJा पेबा लेल िपताजी नाओं िलखा देलैन। दस बख= धिर गामक {कूलमे पिढ़ पड़ोसी गामक हाइ {कूलमे नाओं िलखेलॱ आ हाइ {कूल टपला पछाइत दरभंगा कौलेजमे नाओं िलखा एम.ए. पास केलॱ। पढ़ैक अपन िजासा आ पिरवारक सहयोग पेब िवदेशसँ िवशेषताक िडी सेहो उपािज=त केलॱ। डॉ±टर वा आन Dोफेसर जकq तँ निहयS भेल जे िकछु िदन नोकरी केला पछाइत िवदेश गेलॱ। नोकरी करैसँ पिहने िवदेशसँ िडी हqिसल केलॱ, आब नोकरी करब। ‘आब नोकरी करब’ वाणीमे अबैत-अबैत धरणीधरक अपनो िजनगीक बािन उबािनसँ सुबािन हुअ लगलैन। उबािन-सुबािनक बीच बाटपर धरणीधरक मन ठमकए लगलैन। एक िदस पूव=क सात पु{तसँ गाममे बासभूिम रहल आ आगूक तँ िनि त ठेकानो निहयS अिछ जे केतेक िदन रहत। िनि त ठेकान ऐ दुआरे निह जे समािजक पिरवेश एहेन बिन गेल अिछ जे पढ़लो-िलखल आ िबनु पढ़लो-िलखल लोक अपन बाप-दादाक ज_मभूिम छोिड़-छोिड़ अनतए बसए लगला अिछ, तँए गाम उपैट गेल सेहो तँ निहयS कहल जा सकैए। अखनो ओहन गाम अिछए जे अनेको पु{तसँ बास करैत अनेको पिरवारक वंश आिबयो रहल अिछ आ आगूओ केतेक पु{त धिर बसबे करत...। एकाएक धरणीधरक िवचारक यारमे लपट उठलैन। लपट ई उठलैन जे गाम छोिड़ जे िकयो बहराइ छैथ तेकर हजारो कारण अिछ, से अखन निह, अखन एतबे जे जे अपन गामकS चीि_ह गामसँ बहराइ छैथ वा िबना ची_हने गामसँ बहराइ छैथ। जँ गाम चीि_ह बहरेता तँ गामो ज¤र ची_हतैन आ जँ गामकS िबनु ची_हने जे बहराइत हेता, तँ हुनका संग गामे िकए चीि_ह-पहची_ह रखतैन? ...ऐठाम आिब धरणीधरक वैचािरक यारक लपट सेहो लपटए लगलैन। ओना, धरणीधरक सोभावो अ_वेषी बिन गेल छैन। मुदा अ_वेिषयोक तँ अपन संसार छै,आगूमे जे संसार ठाढ़ अिछ तोहूसँ िकछु लइ छैथ आ अपन जे संसार [iii] िनरमै छैन तोहूसँ उपािज=त करै छैथ...। दुनू संसारक बीचक िJितजपर लटकल धरणीधर ने ऊपर चिढ़ रहल छला आ ने िनचS उतरल होइन। एक िदस गाम-समाजक िवराट ¤प, जे ¤प यशोदा मØयाकS कृ°ण अपन बालपनेमे देखौने रहिथन आ दोसर ओ िवराट ¤प जे महाानी-महापिuडतक संग दुयÄधनक दरबारमे देखौने छेलैथ, दुनूक बीचक जे हजारो योजनक दूरी अिछ तइ दलदलमे धरणीधर फँिस गेला। ओना, अनजान सुनजान महाकjयाण सेहो होइते अिछ मुदा ओ जीवन-मृeयुक बीचक बाट छी िकने तँए, थोड़ेक किठन, थोड़ेक उकड़ू आ थोड़ेक भारीक संग जबदाहो अिछए। गाम िदस उनैट कऽ जखन धरणीधर देखए लगला तँ बुिझ पड़लैन जे नवतुिरया छौड़ा सभसँ जँ िकछु बुझए चाहब आ पुछबै तँ ओकरा बकछुहुल लगतै। तेकर कारणो अिछ। आजुक जे नवसृजन भऽ रहल अिछ ओ ठीक िवपरीत िदशामे अिछ, जइसँ ओ लगले कहत जे फjलॉं गु²आइ करए चाहैए। ओना, एकर दोसरो पJ अिछ, जँ अहq पिरवारसँ समाज धिरक बचाक बीच बालपन ¤पमे रिम िकछु पुछबै तँ ओ एहनो बहुत बात सोझामे रिख दइए जेकर नqगैर पकैड़ अहq नगिरयबैत ओकर मुँह धिरक पिरचय पेब सकै छी। ओना, उÚक कारणे वा उिदत ानक कारणे धरणीधर ने आगू सोझ [iv ] बाट देख रहल छला आ ने मनिवचार पाछू सहैट रहल छेलैन। हराएल-भोिथयाएल बाटपर ठाढ़ बटोही जकq धरणीधर चा¤ िदस चकोना भऽ भऽ देखए लगला। मुदा के7हर मुहS बढ़ब से िन य कइये ने पािब रहला अिछ। ओना, धरणीधरक मनक बीच {प¸ ¤पमे िवचार जिग चुकल छेलैन जे जिहना कोनो भूिमक [v ] लेल मनुखक खगता अिछ तिहना मनुखोक लेल भूिमक खगता सेहो अिछए। ओना, खाली मनुखे माLकS निह, आनो-आनो जीव-ज_तुक लेल भूिमक खगता अिछए। मुदा ओकरा ने िच_तन शि±त छै आ ने सोचन ि¬या...। इितहासक िव]ाथÒ रहने धरणीधरकS एतेक तँ मनमे छै_हे जे केना-केना राज-पाटक छीना-झपटी दुिनयqमे होइत आिब रहल अिछ आ कोन-कोन ¤प [vi ]क देश दुिनयqमे बनल-बसल अिछ। मुदा िकए अिछ आ िकए भेल से बुिझये ने पेब रहल छला। खाएर.., अ_वेषी मन धरणीधरक बिनयS गेल छेलैन तँए देखल संग मन िकछु दूर िबनु-देखलोक आगू िदस दौिड़ये जाइ छेलैन। मुदा जेतएसँ सुनसान बुिझ पड़ैन तेतए-सँ घुिम जाइ छला। आगू िदस जखन नजैर उठैन तँ देख पड़ैन जे दुिनयqक जनिनहार िवशेष रिहतो अपन गाम-घरक इितहास जिनते ने छी। ओना, एहेन दुभ«य िमिथलावासीकS शु¤हेसँ रहलैन जे अfयािeमक ¤पमे िमिथलाक पिरचय भेलैन मुदा वैािनक ¤पमे निह भेलैन अिछ जइसँ ान रिहतो सानसँ दूर छिथए। िकएक तँ ानक पाछू िवान अबैए आ िवानक पाछू सान अबैए...। लगले मन िपघैल कऽ मोमबत भऽ गेलैन। मोमबत होइते धरणीधरक मन िबचड़ए लगलैन- अखन तक िव]ाथÒक िजनगी रहल, एक अfयेताक ¤पमे गुजैर रहल छी, जँ केतौ Dोफेसर भेल रिहतॱ तखन िकछु पदक मदो रहैत मुदा से तँ अिछ निह। िकए ने अपन गामेक बुढ़-पुरानसँ अपन गामक इितहासक पता लगाबी। ाने तँ एहेन गुण छी जे केकरोसँ िकयो िछपबैत निह अिछ। ई दीगर भेल जे ानोमे Jलान किहयौ आिक चोरान आिक बलान सेहो अिछए जे एक-दोसरकS छिलतो अिछ, चोरोिबतो अिछआछीनतो अिछए। मुदा जैठाम तीनू संगे अिछ, तैठाम तँ थोड़ेक भिरगर भइये जाइए। अ_वेशी सोभाव रहने धरणीधरकSिनण=य करैमे िसर- संकोच निह होइन। िनण=य कऽ लेला जे गाममे ने िकयो दोस छैथ आ ने दुcमन, सभ गॱऑं भेला तँए िकनको ऐठाम जा कऽ पुछब (बुझब) सँ िहचकब निह। सभठाम जाएब आ सभसँ गामक पुरान गित-िविधसँ लऽ कऽ आजुक गित-िविध तक जानैक कोिशश करब। जेतेक भेटत तेतेक अपन अनुसंधान भेल जे निह भेटत ओ ऐगला पीढ़ी-ले रहत। दोसर िदन धरणीधर गामक जे सभसँ बुढ़ बड़गद बाबा छला ितनका ऐठाम पहुँचला। बड़गद बाबा एक जोड़ बकरी लऽ कऽ चरबैत रहैथ। अपने बड़क गाछक िनचॉंक छाहैरमे बैसल आ बकरी बाधमे चरैत रहैन। धरणीधर पहुँचते बजला-
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५८ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 222 9-547X VIDEHA 88
“बाबा, अहॴसँ िकछु बुझैक अिछ?” ओना, पिहने बकरी चरबाह बड़गद बाबाकS अनसॲहqत लगलैन जे हमरा सन बुिड़वानसँ एकटा नवजुगक बुिधयार लोक की पुछत..! मुदा अपन उमेरक लेहाज करैत बड़गद बाबा बजला- “बाउ, बकरी चरवाह सन लोककS बुइिधक ओकाइितये केते रहै छै जे िकछु पुछब, मुदा जएह रहै छै ओइसँ जँ दोसरकS उपकार हएत तँ ऐसँ पैघ कीित=ये की हएत आ दाने की हएत।” धरणीधर बजला- “बाबा, अहq तँ अ{सी बख=सँ ऊपर चिढ़ गेल छी, तँए अ{सी बख=क िदन-राितक घटना तँ गामक देखल-सुनल अिछए।” बड़गद बाबा बजला- “बौआ, जेते देखलॱ आ जेते गुणलॱ ओते जँ मन रिखतॱ से ओहन चौरगर बुइिधक बखारी थोड़े अिछ। मुदा तैयो नइ सोलह अना तँ सोलह पाइयो बरबैर नइ अिछसेहो निहयS कहल जा सकैए।” धरणीधर- “आब तँ उमेरक िहसाबसँ ऐसँ भारी, माने बकरी चरवािहसँ भारी काजो निहयS कएल हएत, तखन तँ जीवन-ले िकछु करब आवcयक अिछए।” धरणीधरक िवचारमे जेना बड़गद बाबाकS अमृत भेट गेल होिन तिहना मन ितरिपत [vii ] भेलैन। िबहुसैत बजला- “बौआ, अहq नव पीढ़ीक लोक छी, अखन दुिनयqमे पएरे रखलॱ अिछ, नीक जकq भिरसक रोपाएलो हएत िक निह से तँ हमरा नइ बुझल अिछ।” बड़गद बाबाक िवचारमे धरणीधरकS की भेटलैन से तँ असल धरणीधरे बुझता, मुदा मुँहक रोहानी कहए लगलैन जे जेना सजमिनक िसर भेट गेल होइन। लंकामे राम-रावणक लड़ाइमे मेघनादक वाणे जखन लÇमण मुरछेला तखन जीबैक लेल माL िसर सजमिनयेक खगता पड़ल रहैन, जे हनुमान सुमेर पव=त उठा कऽ आिन पुरौलकैन। पएर रोपैक बात सुिन धरणीधर बजला- “बाबा, पएर रोपैसँ पिहने जगह-जमीन चाही िकनेआतेकरो पिहने ची_हब तखन ने ओइपर अजमा कऽ पएर रोपब।” ओना, धरणीधर जइ ¤पे बुझए चाहै छला तइ ¤पे तँ बड़गद बाबा नइ बुझा सकै छेलैन, मुदा एते तँ मनुखक सोभावमे रिहते अिछ जे दस-पqच छोिड़सØकड़ामेनबे-पनचानबेटा ओहन लोक तँ छिथए जे DÖ बुझैथ वा नइ बुझैथ मुदा िकछु-ने-िकछु जवाब देबे करता, भलS ओ DÖक उर होउ वा नइ होउ, DÖसँ मेल खाउ वा नइ खाउ...। मुदा एते तँ धरणीधरक अ_वेशी सोभाव मािनयS गेल छेलैन जे जँ कोनो िवचारक छाहé-छूँह देख लेब तँ ओइसँ अनुमान कइये सकै छी जे पहाड़क छॉंह छी आिक गाछ-िबरीछक,तँए धरणीधरक मन Dमुिदत भइये गेल छेलैन। बड़गद बाबा बजला- “बौआ, आइ दस बख=सँ बकरी चरवािह करै छीजइसँ दुनू परानीक दुनू सqझक बुतातक जोगार भऽ जाइए।ओना, बेटा-पुतोहु सेहो अिछ मुदा ओकरा तँ अपने तेतेक डािर-पात भऽ गेल छै जे िदन-राित हेरान रहैए। बाल-बचा अवोध छै, ओ िकयqने गेल जे उपाज=न केकरा कहै छै आ एकर की खगता लोककS छै, मुदा हमर तँ धॉंगल िजनगी अिछतँए बातकS बुझै छी।” बड़गद बाबाक कम=ठता सुिन धरणीधर बजला- “बाबा, ईहो तँ लोक कहै छै जे ‘बड़ रे बालकएक समाना’ माने जिहना बचा तिहना वृÐ दुनू एके रंग भेला।” बड़गद बाबा बजला- “बाउ, एके मुहS लोक केकरो गािरयो पढ़ैए आ केकरो आिसरवचन सेहो दइए, मुदा दुनू एक थोड़े भेल। बचा िजनगी (मनुखक) पूव= पJ भेल, वृÐ उर पJ भेल, तँए दुनूकS एक थोड़े मानल जा सकैए।” धरणीधर बजला- “बाबा, बकरी चरवािहसँ पिहने की करै छेिलऐ?” मु{की दैत बड़गद बाबा बजला- “महराइ गबै छेलॱ। भिर-भिर राित अपने ढोलको बजबी आ महराइयसँ लोककS जगेबो किरऐ, मुदा गाम िदस जखन नजैर उठा तकै छीतँ अपनासँ पुरान [viii ] कहq केकरो देखै िछऐ। अखन जेतेक लोक गाममे अिछ, ओकर जनम हमरा आगूमे भेल छइ।” धरणीधर बजला- “अपन मन केहेन कहैए?” बड़गद बाबा- “मन की कहत, िजनगी जीबैमे किहयो अभाव भेल जे मन िकछु कहत आिक उपराग देत। उपरागक भागी तँ ओ अिछजे परजीवी अिछ, वा जे अनका भरोसे जीबैए।” बड़गद बाबाक बात सुिन धरणीधरकS जेना मन D{फुिटत भऽ गेलैन तिहना सोलह³ी मु{कान दैत बजला- “वाह!” ‘वाह’ सुिन बड़गद बाबा फुिट पड़ला-
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“गामक मािट-पािनक उदय-Dलय केना भेल आ केना होइए, गामक उदय-Dलय केना होइए, मनुखक उदय-Dलय केना भेल आ केना भऽ रहल अिछ। तिहना दुिनयéक उदय-Dलय केहेन अिछ आ केहेन हएत, एते बात बुझैक ने खगता अिछ वाउ आ ने बुिझये पएब। तखन तँ..?” धरणीधरक मन जेना भिर गेल होिन तिहना बजला- “बाबा, चाह पीबैक बेर भऽ गेल अिछ, अखन जाइ छी।” बड़गद बाबा- “बाउ, नव पीढ़ीक कत-धत अहॴ सभ छी, हमरो सभपर िधयान राखब।” q शËद संÝया : 1574, ितिथ : 15 जुलाई 2018
[i] प£ी [ii] पितक [iii] सोचन ि¬या [iv] {प¸ [v] ज_मभूिमसँ लऽ कऽ बासभूिम माने देशक [vi] भौगौिलक [vii] तृि®त [viii] उमेरक िहसाबसँ, उमेरगर
ऐ रचनापर अपन मंतय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।
३. प] ३.१. न_द िवलास राय - िकछु किवता ३.२.किव Dीतम कुमार िनषादक िकछु किवत◌ा ३.३.र◌ामिवलास साहु- िकछु किवत◌ा ३.४.१.अनुवादक डॉ. िशवकुमार Dसादक िकछु अनुिदत काय (मूल रजनी छाबड़ा- िह_दी) २.किव डॉ. िशवकुमार Dसादक िकछु किवत◌ा
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न_द िवलास राय
सभसँ पैघ माए -बाप सुनू यौ बाबू, सुनू यौ भैया सुनू लगा कऽ िधयान यौ माए-बापसँ पैघ नइ अिछ िकयो तीनू लोकमे आन यौ।
माएकS बुझू माता पारबती िपता शंकर भगवान यौ पएर छुिब दुनूकS किरयौ सुित-उिठ कऽ Dणाम यौ।
नअ मास धिर अपन पेटमे माए अहqकS रखलैन यौ अहq खाितर, अपन सुख-सुिवधा िदस घुिरयो कऽ ने तकलैन यौ िपताक कोरामे केलॱ पैखाना तेकर ने कोनो ठेकान यौ माए बापसँ पैघ नइ अिछ िकयो तीनू लोकमे...।
क_ हपर लऽ कऽ िपता अहqकS समूचा गाम घुमबए यौ माए अहqकS गोदीमे लऽ कऽ लोरी गािब सुनबए यौ अहqकS नीक भोजन भेटए से हरदम रखलैन िधयान यौ
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अहqक िजनगी नीक बनए केलैन नइ किहयो आराम यौ माए बापसँ पैघ नइ अिछ िकयो तीनू लोकमे...।
गरीब रिहतो माए-बाप अहqक क_ वटमे नाओं िलखौलैन यौ अपन माथपर चाउर-दािल सभ हो{ टलमे पहुँचेलैन यौ माए अहqक गहना बेचलैन िपता बेचलैन जमीन यौ बेटा हमर हािकम बनतै हेतै हमर सुिदन यौ िजनगीमे किहयो यौ बाबू करब नइ एहेन काज यौ माए-पाक माथ झूकत आओर भऽ जाए अपमान यौ हुनका सभकS आशा बड़ छैन आओर पूव=क काज करब सभ करब समाजक िवकास यौ करबैन रौशननाम हुनक अहq आओर बढ़ेबैन शान यौ अहूँकS भेटत स7 मान यौ माए-बापसँ पैघ नइ अिछ िकयो तीनू लोकमे...।
दस लाख टकाक दहेज बुड़ौिलऐ अपने पिसनक किनयq अनिलऐ तैयो केलैन कबूल यौ केतबो बड़का गलती करैथ ओ सभ
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५८ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 222 9-547X VIDEHA 92
देबैन नइ किहयो तूल यौ माएकS बुझब माता जानकी िपताकS भगवान राम यौ माए-बापसँ पैघ नइ अिछ िकयो तीनू लोकमे...।
माए-बाप जखन अथबल भऽ जाइथ भऽ जाइथ जखन लाचार यौ हुनका सबहक भार उठेबैन बिन कऽ wवण कुमार यौ पुरा करबैन हुनक मनोरथ देखेबैन चा¤ धाम यौ माए-बापसँ पैघ नइ अिछ िकयो तीनू लोकमे...।
सेवासँ बिढ़ कऽ नइ कोनो वáत अिछ आ ने धािम=क अनु° ठान यौ तीनू लोकमे सभसँ पैघ माए-बाप आओर छिथन बड़ महान यौ माए-बापसँ पैघ नइ अिछ िकयो तीनू लोकमे...। q
इि_दरा आवास एक िदन मुिखयाजीक चमचा एलैथ ओ हमरासँ हाथ िमलौलैथ
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हम हुनका कुसÒपर बेसौलयैन ®योर दुधक चाह िपयौलयैन खैनीमे चुन िमलेलॱ अपनो खेलॱ हुनको िखयेलॱ खैनी खा कऽ ओ बजला अपना असंवाक भेद खेललाह।
बड़ मोसिकलसँ मुिखयाकS मनेलॱ हेन अहॉंक नाओं हुनका डायरीमे िलखेलॱ हेन ओ कहॉं मानै छला अहॉंकS कहॉं जानै छला जँ करेबाक हुअए काम तँ जjदी क¤ इ_तजाम जुिन क¤ सोच-िवचार लाउ टका पॉंच हजार निह तँ दोसरो अिछ तैयार मुदा अहॉं अपन छी खास अहॉंपर अिछ पूरा िबसवास िदयाएब अहॉंकS इि_दरा आवास की यौ अहॉंकS निह लागल हमर बात रास। ऐ बकलेल बिन जाएत मोफतमे अहॉंकS मकान भऽ जाएत िधया-पुताक कjयाण समाजमे बिढ़ जाएत अहॉंक मान अहॉं बुझब एकरा अपन शन जँ हमर ग®प अहॉंकS कनीको पसन अिछ तँ जjदी क¤ भैया िकएत समय च_द अिछ। निह तँ बादमे बड़ पचताएब आ हमर िदमाग खाएब
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मुदा हम की िकछु कऽ सकब अहॉंकS की िकछु दऽ सकब।
आिखर हम चमचाजीक बातमे एलॱ महाजन लÇमी भैयाक ओइठाम गेलॱ हम केिलऐन हुनकासँ अज= यौ महाजन िदअ हमरा पॉंच हजार टका कज= लऽ िलअ कागजपर औंठा िनशान मुदा टाका क¤ जjदी भुगतान।
ई िलअ ¤पैआ क¤ अपन काम समयेपर आपस करब निह तँ भऽ जाएत अहॉंक महॴस नीलाम।
हम देिलऐन चमचाजीकS टका पॉंच हजार ओ मु{की दैत भऽ गेला फटफिटयापर सवार हम केतेको बेर Ëलॉकक चªर लगेलॱ मुदा आइ धिर इि_दरा आवासक रािश निह पौलॱ।
Ëलॉक दौड़ैत-दौड़ैत हमर च®पल िघसल ओमहर महाजनक टाका आपस करबाक समय बीतल हम चमचाजीसँ कहलयैन अपना बोलीमे साए मन िमwी घोरलयैन यौ नेताजीअ³तादा, बड़का बौआ कृपाकय आपस कऽ िदअ हमर पॉंच हजार ढौआ मुदा ओ करए लगला टाल-मटोल िकएक तँ हुनकर नेित छेलैन, करब पॉंच हजार टाका गोल हम सोचलॱ जे हमरा ठकलक आ हमर महॴस नीलाम करौलक ओकरो िबगािड़ िदऐन खेल
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आ चमचाजीकS पहुँचए िदऐन जेल मुदा हम ई काज निह किर सकलॱ चमचाजीसँ लड़ाइ निह लिड़ पेलॱ िकएक तँ आजादीक 72म बख=क बादो हमरा जकॉं गरीब असहाय अनाथ छै जिबक चमचाजीकS माथपर एम.एल.ए; एम.पी.क हाथ छै आिखर हमर महॴस भऽ गेल नीलाम निह बिन सकल हमर मकान िबगड़ल हमर सभ काम दुख बेिच कऽ करै छेलॱ गुजर आब जीरी रोपैले करै छी पंजाब D{थान।
ऐ रचनापर अपन मंतय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। किवDीतम कुमार िनषादक िकछु किव ता याLीक {मृित हे साकेती जनकिव बाबा याLीजी िलयऽ {नेह सुमन। मोन पड़ल अिछ अपनेक Dितभा तØ अनुरागी भेल सुजन।। हे साकेती जनकिव बाबा...।।
संत कबीरक अ±खरता लऽ फªर भऽ घुमलॱ सगरो
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िमिथलासँ िसंहल लंकाधिर याLी भेलॱ काशीनगरो सा7यवाद ¬ाि_तक वाणीसँ कायकथा कए देल सृजन मोन पड़ल अिछ अपनेक... हे साकेती जन किव बाबा...।।
गाम-कुरीत औ घर-चुàी संग िवधवा-िवलापक दरद कहल साक सनकीसँ िनभ=य भऽ अपनेक लेखनी मरद रहल तØ कायाथÒ Dीतम अच=ए िनवसू यौ बाबा अ_तम=न। मोन पड़ल अिछ अपनेक... हे साकेती जनकिव बाबा...।। ¦
अमर शहीदक wÐvजली भारत िमिथलाक रा°Ñपूतसँ मयिदत माऽए मैिथली... अमर शहीद िवकास िमwकS अिछ अिप=त wÐvजली।। रईमा गाम समाजक गिरमा गौरवसँ िकछु सीखली... अमर शहीद िवकास िमwकS अिप=त अिछ wÐvजली।। 0।।
एहने सन शत सापूत सैिनक िमिथलाक धरती दैत रहल
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इितहास भूगोल मैिथल पूतसँ घटना वृि कहैत रहल कणट तुरक मोगिलया युÐक िमिथला योÐाक रीत ली... अमर शहीद िवकास िमwकS कए अिप=त wÐvजली।। 1।।
हजारो बिरससँ िमिथलाक आभा असलान ओइनवार रण पसरल कामेrर वंशज कीि=िसंह औ िशविसंह धिर यश पसरल क_दपÒघाट युÐक गाथा मैिथल शहीदक सीखली अमर शहीद िवकास िमwकS अिप=त क¤ wÐvजली।।2।।
तिहना नवयुग काल संगोरए िमिथला वीर सपूतन कS रा°Ñ धम= औ ज_मभूिम धिर सहजल सैिनक कम=णकS मातृ कुिJकS नमनए Dीतम शहीद कीि=यश िलखली अमर शहीद िवकास िमwकS दैत रहब wÐvजली...।। 3।। ¦
सार बिहनोई (हँ{सी-चौल) सार : सुसुसुसु... सुिनयौ पाहुन... दीदीक कहब संगे जाहुन
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पड़लहुँ अपनेक पाला, अंगरेजीक ´ॉदर इनलॉ छी दु³ू जीजा-साला...।। 0।।
बहनोई : स-स-स-सड़बे... हेहरई करब... अहqक दीदी सँ हम लड़ब... अहq छी गड़बड़ झाला... अंगरेजीक ´ादर इन लॉ छी... दु³ू जीजा-साला...।। 1।।
चाइल-कुचाइल िकयऽएदेखबै छी, अàड़ असटाइलमे, हेjलो वेjलो ओके थرयू कहै छी मोबाइलमे...।। बुझलॱ अपने छी बड़ कािबल क7®यूटर िस{टमछी। ह7मर लाइफकS बेस िमिन{टर केर अपने क{टम छी।।
सार : तØ एिह सारकनामे हे पाहुन बिहन क¤ केवाला... अंगरेजीक ´ॉदर इन लॉ छी दु³ू जीजा-साला।।2।।
बहनोई : शहर-बजारक नेना छी मुदा भऽ गेलहुँ बुरहाठी। टीवी-टेबलेट-लैपटॉप फेसबुक सँ बनलॱ किव-काठी।।
सार : धऽुिर केहन बुड़बक छी अहq माऽए-बाप शान िगनएलॱ नामी-गामीक स_तान भऽ कऽ
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पुरखोकS नाम िघनएलॱ।।
बहनोई : पुरखा-माऽए-बाप केर जुिन ऊकटू मुँहपर लगबू ताला अंगरेजीक ´ॉदरइन लॉ छी दुनू जीजा साला...।। 3।।
सार : हँसी-मजाक केर अिछ िरवाज तØ पाहुन हम हुeथै छी। सरहोइज-साइरक बत गड़हीमे, अहq सिदखन कुeथै छी।।
बहनोई : लाजे हम सकद7म भऽ सभकS देल-फजहैतो सुनै छी। सासुरक मौजक मeथा-पची गुण-अवगुणकS गुनै छी।।
सार : चिलयौ-भोजन करए पाहुन गमकए िचकेन मसाला अंगरेजीक ´ॉदरइन लॉ छी दु³ू जीजा साला...।। 4।। ¦
आहत अग{त भारत देशक धरती क²िणत शहीदा÷ली दऽ Dणमए ह{त। धुजाितरंगा दुलरैत बाजए अिछ एखनो आहत अग{त।।
चहुँिदिश गूंजए प_oह अग{त
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नेना-भुटका संग-लोक य{त आजाद िह_द भए रहल L{त {वारथ सह-सह देखैछ म{त तØ अिछ आहत प_oहअग{त आहत अग{त आहत अग{त...।। 0।।
अिछ जन Dितिनिध मौका पर{त। भारत िमिथला अिछ अ{त-य{त।। सा सेवक खुशहाल म{त। कोन भ¸ पितक अिछ वरद ह{त।। आहत अग{त आहत अग{त...।। 0।।
िकछु संिवधान सुख अिछ िनर{त मयिदत अिछ-िफरका पर{त िकए, आतंकी िदन-िदन Dश{त रा°ÑीयताकS देवए िशक{त...।। 0।।
आशाक ितरंगा कोिट ह{त झuडोोलन भए रहल स{त औ, सव= धम= समभाव प{त हाय, रा°Ñ पव= केर उदय-अ{त आहत अग{त आहत अग{त...।। 0।।
ऐ रचनापर अपन मंतय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। राम िवलास साहुक िकछु किवता
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हमरा मोन पड़ैए बचामे बादशाह जकq घुमै छेलॱ चौरी-चqचरमे कड़हड़ खुिन भैँट तोिड़ खाइ छेलॱ बाड़ी-झाड़ी घुिम-घुिम कऽ पकल ितलकोर भुटका तोिड़-तोिड़ खाए झुमै छेलॱ आम-लताम बरहर कटहर बैर तोिड़ हम खाइ छेलॱ िबनु धिन-िफकीरक रहै छेलॱ सभ िकछु हमरा मोन पड़ैए।
नाच देखै आ महराइ सुनैले जाइ छेलॱ हम कोसो दूर सलहेश, हàा¤दल, िबहला गोपीचन, राजा कुंबर-वृजवान िभखारी ठाकुरक िवदेिशया नाच राित-राित जिग देखै छेलॱ धम=राज, दीनाभदरी, लोिरक-मिनयारक महराय संगी सगे सुनैत छेलॱ नाचैत-गबैत घर अबै छेलॱ ओिहना सभटा हमरा मोन पड़ैए।
मुदा अखैन कौàुक बरद जकq िदन-राित पिरwम करैत रहै छी िजनगीक गाड़ी Jणे-Jणे आगू कहुना बढ़बैत चलै छी पिरवारक बोझ पहाड़सँ भारी माथपर लऽ मिरतो सहै छी कखनो नइए दम मारैक पलखैत जे घुिम देखब दुिनयॉं-दारी ई बनल अिछ सिदखन लचारी तैयो ने भेल अखनो समझदारी हराएल हमरा बेवहार पुcतैनी िमिथलाक रीित-िरवाज सं{कृित
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अखनो ओ िदन रिह-रिह कऽ सभटा हमरा मोन पड़ैए। q
अनजनुआँ भोरक पहर उिठ कऽ जखने गेलॱ पोखिरक कात करीनसँ पािन भिर-भिर गहुम पटबै छेलॱ एका_त माघक कुहेस केने अ_हार िकछु दूरेक अबाज कान पािथ जनमौटी बचाक सुनलॱ करीनक पािन करीनेमे छोिड़ अबाज अकानैत खोजैत बढ़ैत पहुँचलॱ पोखिरक दोसर महार झाड़ी-झंखारमे घास-पातपर राखल लहुआएल जनमौटी लाल जननी छोिड़ भेल रहए िन®पता जे बुझना गेल छी अनजनुऑं केहेन िनQुर छल ओ माता माइक धम=-कम= छोिड़ ओ केलक कुकम= जािन अंजािन मुदा बचा देखते हमरा मोनमे उपजल दया धम=क भाव बचा उठा कऽ कोरामे लेलॱ झटसँ लेलॱ हृदय सटाए ओढ़नासँ झॉंिप जाड़सँ बँचबैत हिष=त मनसँ अनलॱ अपना घर अबाज देलॱ घरवाली पहुँचल दरबÉजापर आिब कहए लगली गहुमक पटौनी छोिड़ अहॉं िकएक एलॱ घर जािन-Dािण कहलॱ हम छेलॱ िन:सं_तान सभ कहै छेलए िनपुतराहा मुदा भगवान बनला दयावान
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आब बनलॱ हम पुLवान पािल पोिस कऽ बनाउ महान इहए करत वंशक कjयाण अनजनुऑं बचा नै कहतै एकरा धम=क माए बाप छै जेकरा। q
धरतीक बोझ देश Dेम, मातृ-िपतृ भि±त जे नर निह कऽ सकल ओ मानव नै दानव छी धरतीक बोझ समान छी।
जे करैए जन-जनसँ Dेम से नर देव समान छी जे दुिखयाकS दुख हरैए ओ साJात भगवान छी।
जे दोसरकS दुख दइए वएह नर रावण-कंस छी जे दुख सिह सुख बँटैए ओ मानव नै महामानव छी।
जे अपने सुखमे बेहाल रहैए वएह नरकक भोग भोगैए जे भुखलकS रोटी नै दइए से मानव केना कहा सकैए।
जे मातृ, मातृभूिम, मातृभाषाक सेवा जीवनमे निह कऽ सकैए से इंसान निह, शैतान कहाइए तेकरा केना {वग=कसुख भेट सकैए।
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जे सभ िदन देशकS लूिट खेलक तेकरा धरती केना समाए सकत गरीबक हक जे मािर खेलक वएह धरतीपर मलेछ बनल।
जे सभ िदन अनके खेलक अपन किहयो दोसरकS नै देलक ओकर िजनगी अकारथ भेल धरतीक बोझ बढ़बैत गेल। । q
हरबाहाक िजनगी जाड़क समय ठीठुरैत खाटपर दुबकल पड़ल रहए फाटल चÔैरमे सोचैत रहए कखन हएत भोर गाए बरदकS खुआ जाएब खेत मुदा जाड़सँ कॉंपैत रहए सॱसे देह ओस-कुहेससँ झqपल छल धरती संतोख बाि_ह सोचलक जाएब खेत जाड़क ठंढसँ देह झुलैत देख थोकरा बुटी ओिल धुरा जरा कऽ देह सेकलक जखन भेल गरम फुरफुरा उिठ हर जोतए लगल खेत जेातबाक तँ बहुत रहए मुदा उघारे देह ठिर भऽ गेल शरद मािलकक डरसँ केना खोलत बरद िच_ता रहै घरक, की खाएत िधया-पुता हूबा बाि_ह खेत जोतैत रहल भूखसँ लूी िछटैक अ_हार लगैत रहए एक तँ जाड़क मारल देहक हारल भूखसँ लगैए आब िनकलत Dाण भोरसँ दुपहर भेल, बेर खसल तखन जलखै लऽ मािलक पहुँचला खेत बजला- एतबे खेत भोरसँ जोतलS जलखै खाए सभ खेत जोइत िदहक हरबाहा दुखीत मने कुहरैत बाजल
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भूखे मरब जखन {वग= पहुँचब तखने जोइत देब सभटा खेत। q
माछ हम छी जाितक माछ नै िबगाड़ै छी िकनको तैयो तड़पा मारै छी पोखैर-नदीक कात सभ िमिल कऽ हमरा जाितकS करै छी जािन िवनाश हम िनcछल जीव छी सभक करै छी उपकार मुदा िनQुर भऽ मािर खाइ छी केतेक िनद=यी बिन कऽ हमर िजनगी उजािर रहल छी हम पािनक जीव छी धरतीक अिधकारी अहॴ छी की मजबूरी अिछ अहॉं सभकS हमर वंश उजारै छी
केना बुझब दयावान छी की जीव जीवक हeयारा छी िववेकशील छी मुदा िनदÄषक संघारा छी अखनो चेतु सीखू अपनो जीब आ आनोकS जीबैक अिधकार िदयौ हमरो जाितपर उपकार किरयौ दया धम=क मान रिखयौ आब हम िकछु नै कहब अपने िववेकसँ िलअ काज हम छी जाितक माछ।
ऐ रचनापर अपन मंतय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।
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१.अनुवादक डॉ. िशवकुमार Dसादक िकछु अनुिदत काय (मूल रजनी छाबड़ा- िह_दी) २. किव डॉ. िशवकुमार Dसादक िकछु किवता
१ अनुवादक डॉ. िशवकुमार Dसादक िकछु अनुिदत काय (मूल रजनी छाबड़ा- िह_दी) (PAGHALAIT HIMKHAND Maithili translation of ‘PaighalteHimkhand’ An Anthology of Hindi Poems by Rajni Chhabra from Hindi into Maithili by Dr. Sheo Kumar Prasad.) सqसक संग खनकै कंगना छनकै पायल ओझरल केश िछतरल काजर।
टुटल -फुटल सqसक हलचल धरतीक िपयास मेघक तरपब।
रौद सोहनगर कुनमुनाइत सन ओकर छुअब।
एक आँचमे पघलए तन -मन।
सपना बिन गेल
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सपनौती जीवन।
सqस -सqस संग बहब िबनु कहने सभ कहब। q
चच ओ संसार हमर निह भऽ सकैत अिछ जेतए अहqक गमक निह हो अहqक {मृित निह हो, चच निह होजेतए अहqकS ओ सभा हमरा अनसोहqत लगैए। q
िदगंतक नजीक िदगंतक नजीक करै छी हमर उमेद
जेतए दू संसार िमिलयो कऽ निह िमलै छइ।
अपूण= अिछ आस अपूण= अिछ िमलन केर आह आब तँ फूल फुलाइयो कऽ
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निह फुलैत छै फुलाएलो-फुलाएल निह लगैए। q
केहेन उपराग लाल जागल आँिख पैछला राितक करोट रािLक जागरण किहयो खतम निह होमए बला सैर।
िवयोगिनक यएह अमाबसक भा«य छै िकनकासँ िशकाइत केहेन उपराग .. ! q
सुख -दुख समय केर अ_हारसँ जुिन डेराउ हे मन।
मेघक अि_तम छोरपर
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Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५८ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 222 9-547X VIDEHA 109
चमकैत िबजुिरक अहq अ_दािज कऽ क¤ अपन नाप -जोख।
जखन िनकसै छै गुनगुनाइत रौद ठरल बसातक पछाइत ओकर मृदुल -मृदुल {पश=सँ फुलवारीक कोण -कोण अबाद भऽ जाइ छइ।
सुख आ दुखकS संगे-संग सहैमे जीवनक सहजता छै।
कqटक नमहर बाट पारे कऽ क ने गुलाब शानसँ महकै छइ। q
आन जािह आँिखमे िहलैत रहै छल सपना आब ओहू आँिखमे बस िबराने-बीरान नजैर अबैए।
देखै छी जखन
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पूव=कािलक छिब हमरा अपनिहमे आन देखैत अिछ। q
कारण ओ पुछै छिथ चुप रहै छी िकए ठोर गु7मे रहल नोर छलैक जाइए।
की िदऐ हम जवाब सबाल दुिनयqक सुिन जखन िजनगीए हमर सबाल बिन कऽ रिह गेल -ए। q
सतरंगा आन_द सभ ऋृतुमे फुटपाथपर ठाढ़ ओ कqच उमेरक नेना बेचैत अिछ सतरंगा बेलुन आ िछिड़याबैत अिछ आन_द केर रंग।
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न_हिकरबा सभ कुदैत अिछ नाि_हटा हाथमे पकड़ने बेलुन।
बेलुन ओकरो ललचाबै छै मुदा ओ किहयो अपनो लेल कीिन पौत ?
गरीबी अिभशाप छै सतरंगा सपनाकS चुरमचूर करए -बला।
ओकरा बचेबाक छै एक -एक गोट कØचा आनए लेल बेराम माइयक दबाइ।
छोट भाइयक लेल एक कपटी दूध सभ िदन पुड़ेबाक छै अपनाकS तँ बस काममे खटेबाक छै।
एिह सोचमे डुमल ओकरासँ िकछु कीिन कऽ बेलुन पकड़ा दइ िछऐ ओकर नाि_हटा हाथमे ई छोट -छीन उपहार।
ओकर िबमल मुँहपर चमकलै आन_द
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हमरो दैत अिछ ओ सतरंगा आन_दक अभास। q
अहqक थाती हम जोगा कऽ राखब अपन देशक खाितर पै²खक थाती अहq जे हमरा नाम कऽ गेलॱ।
मुि{कया कऽ सहब सभ समय केर धाह देशभि±तक मनसूबा ने किहयो हएत कम।
बिलदानक फूल देलॱ जे अहq आँचरमे ओकर गमकसँ गमकतै हमर बतन।
हमहॴ जीजाबाई हमहॴ अमर िसंह राठौड़क छी माए लोरी केर बदला कहबै बेटाकS हम बिलदानक कथा।
जँ फेर कोनो आफत एतै देशक मािनपर
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आ मंगतै जँ बिलदान देशक मािन लेल कऽ देबै हँसैत -हँसैत अपन दुल²आ बिलदान।
जे जान दइ छिथ देशक लेल ओ छोिड़ जाइ छिथ बिलदानक िच_हासी जइपर चिल कऽ अJुuण रखै छिथ नवतुिरया मु±त रा°Ñ , मु±त संसार। q
िबसबासक मूित= सभ शहरक सभ गलीमे िकछ Dाथ=ना-घर आ मिuडल होइत छै जेतए लोक अपन -अपन िबसबासक मूित= बना दैत छिथ , अपन -अपन बेवहार आ चलैनसँ ओकरा सजा लइ छिथ।
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शेष संसारक धरम -करमसँ फेर ओ अजान भऽ जाइ छिथ।
नहुँ-नहुँ ओ एना हेरा लइ छिथ सतही Dाथ=नामे, अपन धरमकS ओ अपन इमानसँ पटेबाक बदला रंिग दइ छिथ हुनक लेहुसँ जे हुनक धरमसँ इतर छैन।
िबसबासक मूित= बनबैत -बनबैत हुनका पतो ने चलै छैन िक ओ अपनिह कखन मूित= बिन जाइ छिथ। q
२ किव डॉ. िशवकुमार Dसादक िकछु किवता
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बौआइत मनुज हृदयक गहन गहवरमे आत= ¬_दनक {वर भरल अिछ मनुज मनुजकS दुतकारैए सिदखन द{युकS अिभन_दन करैत अिछ। मनुऑं िकए बौआइत रहैत अिछ।
अगम अिछ ई सृि¸क रचना िदनकर तँ उिगते रहतइ िक_तु ई िनि त हुनका संगे िनत अ_हारो संगे रहैत अिछ। मनुआँ... ।
जँ इजोिरयाक संग पुिण=मा तँ अ_हिरया संग अमाव{या जनमसँ िजनगी जॱ जुड़ल तँ मृeयु कहq फराक रहैत अिछ। मनुआँ... ।
जग संगे जन -जन अिछ जुड़ल नेहक भूखल जग टौआइत अिछ अपन आन आ जाित -पाित संग मनुआँ िकए बौआइत रहैत अिछ। मनुऑं िकए बौआइत रहैत अिछ। q
झूठ झूठक ओढ़ना झूठेक िबछौना खेनाए पीनए झुñे, झूठक सभतैर हाट लागल छै ऑंिखयो भऽ गेल झुñे।
हम छी झूठ झूठ अिछ दुिनयq
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काज बेपार अिछ झुñे, िकनको निह छैन महल अटारी आँिख मुनैत सभ झुñे।।
झुñे सभ उपछै छिथ पोखैर अपिसयvत छिथ झुñे, झूठक हाट सqचो भेल झुñे गु² गॲसvइ सभ झुñे।।
सeय करम आ सeय िवचार िबनु िजनगी सबहक झुñे, अपन करम अपने सभ भोगब निह हमर बात ई झुñे। q
भातक थारी गमिक रहल गामक फुलवारी मेघक कृपा रहल शुभकारी।
चननचूर तुलसीफूल गमकए धानक एिहबेर भरल बखारी।
रोम रोम सुख पािब रहल छै भूख सुतत एिहबेर गोरथारी।
गाम दलान सुहावन शुभकर सबहक आगू भातक थारी।
उसना भात साग बथुआ केर अjलुक चोखा अिछ सुखकारी।
लाल चटनी धिनया केर पा
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खाइत रहू भिर भिर सभ थारी। q
मधुर Dात जागू हे मधुर Dात। पु°प कS पराग धएल मधुकर कS करैत याद फुलैत छए पािब िकरण सु²ज दऽ रहल धािह कण कण {पंिदत छै पािब क अिहंक राग। जागू हे मधुर Dात। q
जुग -पु²ष जुग पु²ष बाते निह करमे होइत छैक।
गाए चरबऽ बला सभ िकसुनमे निह भऽ जाएत छैक तािह लेल गोबरधन सेहो उठबऽ पड़ैत छैक।
राखऽ परैत छै गीताक ान लड़ऽ पड़ैत छै
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गाuडीवधारी संग रथवाह बिन भी°म oोण कृपाचाय= आ अrथामा संग आ वंश बचेबा लेल जेQ åाता कण= संग।
मारए पड़ै छै {वकS एकटा दोसर वंशकS बचेबा लेल नव रा°Ñ केर िनमण आर नव धम=क {थापना लेल। शकुनी सन चिरLकS कुो निह पुछै छै। q
दीप दीप नेसलहुँ बुची दीपे सन तँ अहूँ छी अपनाकS जरा कऽ एिह आँगनमे इजोत कऽ ओिह आँगन तक अपनाकS जारैत तन मन Éयोितत करैत रहलहुँ एिह कुलसँ ओिह कुल तक आइसँ निह अदौ कालसँ..! ऐ रचनापर अपन मंतय editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।
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िवदेहक िकछु िवशेषvक :- १) हाइकू िवशेषvक १२ म अंक , १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल िव शेषvक २१ म अंक , १ नव7बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) िवहिन कथा िवशेषvक ६७ म अंक , १ अ±टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_20 10_Tirhuta 67 ४) बाल सािहeय िवशेषvक ७० म अंक , १५ नव7बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक िवशेषvक ७२ म अंक १५ िदस7बर २०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी िवशेषvक ७७म अंक ०१ माच= २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) बाल गजल िवशेषvक िवदेहक अंक १११ म अंक , १ अग{त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 11 1 ८) भि±त गजल िवशेषvक १२६ म अंक , १५ माच= २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समीJा िवशेषvक १४२ म, अंक १५ नव7बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 १० ) काशीकvत िमw मधुप िवशेषvक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015
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११) अरिव_द ठाकुर िवशेषvक १८९ म अंक १ नव7बर २०१५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश च_o ठाकुर अिन ल िवशेषvक १९१ म अंक १ िदस7बर २०१५ Videha_01_12_2015 १३ ) िवदेह स7मान िवशेषाक- २००म अक १५ अDैल २०१६ / २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016
Videha_01_07_2016
१४ ) मैिथली सी.डी./ अjबम गीत संगीत िवशेषvक - २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंिLत रचनापर आम ंिLत आलोचकक िट®पणीक शृंखला १. कािमनीक पvच टा किवता आ ओइपर मधुका_त झाक िट®पणी VIDEHA 209th issue िवदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 जगदीश Dसाद मuडल जीक ६५ टा पोथीक नव सं{करण िवदेहक २३३ सँ २५० धिरक अंकमे धारावािहक Dकाशन नीचqक िलंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018
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Videha_15_09_2017
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िवदेह ई -पिLकाक बीछल रचनाक संग - मैिथलीक सव=wेQ रचनाक एकटा समाना_तर संकलन िवदेह :सदेह :२ (मैिथली Dब_ध -िनब_ध -समालोचना २००९ -१० ) िवदेह :सदेह :३ (मैिथली प] २००९ -१० ) िवदेह :सदेह :४ (मैिथली कथा २००९ -१० ) िवदेह मैिथली िवहिन कथा [ िवदेह सदेह ५ ] िवदेह मैिथली लघुकथा [ िवदेह सदेह ६ ] िवदेह मैिथली प] [ िवदेह सदेह ७ ] िवदेह मैिथली नाðय उeसव [ िवदेह सदेह ८ ] िवदेह मैिथली िशशु उeसव [ िव देह सदेह ९ ] िवदेह मैिथली Dब_ध -िनब_ध -समालोचना [ िवदेह सदेह १० ] The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par " has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himse lf . After these translations are complete these would be the offici al translations authorised by the Author of original work .-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.goo gle.com/a/videha.com/videha -pothi/ Maithili Books can be purchased from: http://www.amazon.in/
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मैिथली सािहeय आ_दोलन (c)2004-18. सविधकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अिछ ततऽ संपादकाधीन। िवदेह- Dथममैिथली पािJक ई-पिLका ISSN 2229-547X VIDEH A स7पादक: गजे_o ठाकुर। सह-स7पादक: उमेश मंडल। सहायक स7पादक: राम िव लास साहु, न_द िवलास राय, स_दीप कुमार साफी आ मु³ाजी (मनोज कुमार कण=)। स7पादक- नाटक-रंगमंच-चलिचL- बेचन ठाकुर। स7पादक- सूचना-स7पक=-समाद- पूनम मंडल। स7पादक- अनुवाद िवभाग- िवनीत उeपल।
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५ जुलाई २००४ कShttp://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसिरक गाछ”- मैिथली जालवृसँ Dार7भ इंटरनेटपर मैिथलीक Dथम उपि{थितक याLा “’िवदेह’- Dथम मैिथली पािJक ई पिLका” धिर पहुँचल अिछ,जे http://www. videha.co.in/ पर ई Dकािशत होइत अिछ। आब “भालसिरक गाछ”जालवृ 'िवदेह' ई-पिLकाक Dव±ताक संग मैिथली भाषाक जालवृक एीगेटरक ¤पमे Dयु±त भऽ रहल अिछ। िवदेह ई-पिLका ISSN 2 229-547X VIDEHA िसिÐर{तु