VIDEHA — Issue 261 / अंक २६१

Publication: VIDEHA · Issue: 261
Open original PDF at Internet Archive

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 1

ISSN 2229-547X VIDEHA 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव6बर २०१८ (वष< ११ मास १३१ अंक २६१ )

िव दे ह िवदेह Videha িবেদহ http://www.videha.co.in िवदेह Dथम मैिथली पािJक ई पिLका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह Dथम मैिथली पािJक ई पिLका नव अंक देखबाक लेल पृP सभकR िरSेश कए देखू।

ऐ अंकमे अिछ:- अंक देखबाक लेल पृP सभकR िरSेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA.

२. ग\ २.१.Dणव झा- चनमा (लघुकथा) २.२.देवेश झा- िहbदू िववाह :एक समीJा २.३.डॉ कैलाश कुमार िमe-फकड़ाक संग याLा करैत मैिथलानीकमनोदशाक: मानवशाkLीय िववेचना २.४.१. आशीष अनिचbहार- िहंदी िफnमी गीतमे बहर-४ २. मोहनराज "गगन"- बीहिनकथा

३. पद ◌्य ३.१. राकेश कण<- सृजन ३.२.१.Dभाष अिकंचन- महाकिव लाल दास २. कुमोद रंजन चौधरी ३.३.१.इbvकाbत लाल- कwा तोर अंगना २.संतोष कुमार राय 'बटोही' -दू टा किवता ३.४. जगदीश चbv ठाकुर ’अिनल’- १ टा गीत आ २७ टा गजल

४.१.बालान| कृते-जगदीश चbv ठाकुर ‘अिनल ’ आ आशीष अनिचbहारक बाल गजल

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 2

Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. िवदेहक पुरान अंक आ ऑिडयो/ वीिडयो/ पोथी/ िचLकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीच„क िलंक पर जाउ।

VIDEHA ARCHIVE िवदेह आक‡इव

Join official Videha facebook group.

Join Vid eha googlegroups

Follow Official Videha Twitter to view regular Videha Live Broadcasts through Periscope .

िवदेह जालवृक िडसकसन फोरमपर जाउ। २. ग\ Magazine िवदेह Dथम मैिथली पािJक ई पिLका नव अंक देखबाक लेल पृP सभकR िरSेश कए देखू। २. ग\

२.१.Dणव झा- चनमा (लघुकथा) २.२.देवेश झा- िहbदू िववाह :एक समीJा २.३.डॉ कैलाश कुमार िमe-फकड़ाक संग याLा करैत मैिथलानीकमनोदशाक: मानवशाkLीय िववेचना २.४.१. आशीष अनिचbहार- िहंदी िफnमी गीतमे बहर-४ २. मोहनराज "गगन"- बीहिनकथा Dणव झा चनमा (लघुकथा)

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 3

सुधीर बाबू एकटा सहृदय, कम<ठ आ सफल आपीएस ऑिफसर छलाह. डीआईजी के पद से िरटायर भेला के बाद ओ राजनीित म आिब गेल छलाह. अपन सेवा के एकटा पैघ िहkसा िबहार म िबतेला के बाद ओ िबहार िवधान सभा म िवधायक आ फेर िबहार सरकार म मंLी सेहो बनलाह. एकबेर कोनो सरकारी काज सं चंडीगढ़ गेनाइ भेलैन, संगिह पाट’ के कोनो काय<“म सेहो छल.

िदन भिर के काय<“म से थाकल-ठेिहआयल सुधीर बाबू स|झ काल म जखन गेkट हाउस के अपन कमरा म सुkताईत छलाह तखने अद<ली िहनका लग आिब के एकटा िविजिटंग काड< दैत कहलक जे eीमान कोई आपसे िमलने की बहुत िजद कर रहा है, नाम चनमा बता रहा है और कह रहा है की आपके िबहार के बेगूसराय िजला से है और आपसे पुराना जान पहचान है. ओ काड< पढ़ल लगलाह...चंv Dकाश यैह नाम िलखल छल काड< पर आ नीचा कोनो ढाबा के पता. ब–ड मोन पाडला के बादो िहनका ऐ नाम के कोनो लोक मोन नै पड़लै, थकनी से मोनो अलसायाल छल. एक मोन त भेलै जे किह दी जे हम नै भट क सकै छी अखन. मुदा फेर नै जािन की फुरेलैन जे ओ बजलाह जे अ—छा बजेने आबह ओकरा.

िकछ काल म अद<ली ४५-४६ वष<क एकटा लोक के संग नेने आयल. सुधीर बाबू ओकर चेहरो देख के कतबो मोन पाड़ला पर िचbह नै पेलिखन तखन ओ अपन पिरचय देत सुधीर बाबू के अपन समJ साJात देख ख़ुशी के मारल काने लागल छल. 'चनमा' उफ़< चv Dकाश से सुधीर बाबू के कोनो िवशेष जान-पहचान या स6बbध छल एहन कोनो बात नै छलै. मुदा दुनू के बीच स6बbध जोड़ बला करीब २५-२६ बरष पुरान एकटा घटना छल. सुधीर बाबू के आँिखक आगा ओ घटना“म आब एकटा िसनेमा जेक„ चल लागल: बात करीब प—चीस-छœबीस बरष पिहने के छल जखन सुधीर बाबू बेगूसराय िजला म पदkथािपत छलाह. एकिदन जखन सुधीर बाबू गंगा िदयारा एिरया म पुिलस के िकछ जवान के संग छापामारी क के वापस लखीसराय िजला मुयालय घुरैत छलाह त रkता म हुंकार जीप ख़राब भ गेलैन. ओ एकटा भयंकर बरसाती राित छल. कौ कोनो सुिवधा नै. kवाइत गाडी ठीक होय के संभावना भोर होय से पिहने िकžहुँ नै छल. तािह दुआरे ई ऑड<र केलिखन जे रािL िवeाम ए6हरे कतौ कैल जाय. अkतु बगल के गाम म िकछ घर सं खाट मंगवा क ई सब एकटा िकसान के पैघ सन दालान पर आराम करै लागलाह. पैघ पुिलस अ अफसर के एकटा अलगे Ÿतबा होय छैक आ  ामीण समाज म एहन सन अिधकारी के इ¡जातो ततबे होइत छैक. kवाइत एकटा  ामीण आिब िहनका पुछलकैन जे सर एकटा छौरा अह„के देह-हाथ ज„ते चाहैत अिछ. थाकल त छलाहे, झट द हं किह देलिखन. िहनका हँ कहते एकटा उनइस-बीस बष<क छौरा आिब के िहनकर देह- हाथ ज„ते लागल छल. नाम पुछला पर अ¢पन नाम ओ बतेने छल जे सर नाम त ओना चंv Dकाश अिछ मुदा लोक चनमा-चनमा कहैत अिछ.

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 4

किन काल ज„तेला मातर जखन सुधीर बाबू के देह िकछु हnलुक बुझेलैन तखन ओ चनमा से पुछलिखन जे तॲ एिह िगरहत के एतय काज करै छहक की? ओ कहलक "नै सरकार हमरा अह„ सं िकछु कह के छल तािह से अवसर देखल मातर पैरवी लगा अह„ समJ एलहुँ अिछ. हम मैि¥क पास छी, आ ब–ड िनक िवरहा गािब लैत छी, ए6हर-आ6हार, मेला-ठेला म अपन कला के Dदश<न क के िकछु रोजी-रोटी कमा लैत छी. अह„ सुनबै हमर गाओल गीत?" सुधीर बाबू के हँ, कहला पर ओ लगभग आधा-पौना घंटा भिर िबरहा गािब-गािब के सुनेलकैन. चनमा के आवाज म सिरपहुँ ब–ड दद< आ बुलंदी छल. kवाइत गीत सुनैत-सुनैत सुधीर बाबू के कोरह फािट गेलैन, नै त पुिलस क आँिख म किहं एिहना नोर आबै! एहन गुणी कलाकार सं देह-हाथ जँताबैत आब सुधीर बाबू के मोने-मोन §लािन होमय लागल छल, आ ओ गीत सुनैत-सुनैत उिठ बैसला आ ओकरा कहलिखन जे "तोहर गीत म ब–ड बुलंदी आ दद< छह. आई कतेको िदन बाद तॲ हमरा कना देलह अिछ. कह, तोरा की इनाम दी चनमा?" िकछ काल सोचला उर ओ बाजल "सरकार ग„व म एकटा बाबू साहेब छै. हमर बाबू एकबेर ओकरा से िकछु टाका उधार नेने छलाह. मुदा बाबू साहेब के सुईद क जाल म ओ एहन ओझरेला जे बाबू साहेब के –योढ़ी पर १० बरष तक बेगार खटला, खटैत-खटैत बेचारे kवग< चिल गेला मुदा हुनका मुइलो मातर, बाबू साहेब के कज< नै ख़तम भेल. बाबू साहेब चाहैत छलाह जे बाबू के बाद आब हम ओकरा –योढ़ी पर बेगार खटी. हम गाम-गमाइत घुिम-घुिम िवरहा गािब िकछ आमदनी करैत छी, जॱ िहनका एतय बेगार खटती त पेट कोना क भिरितयै. तािह सं हम िहनकर बेगार करय से मना क देिलयै. बस यैह बात िहनका लािग गेलैन आ इ हमरा पर लािग गेल छैथ. िपछला िकछु मास सं हमरा िखलाफ थाना म चोर-डकैती आ लूट-पाट के कइएक टा फुइस केस दज< करा देल गेल अिछ, तिहया स हम मारल-मारल िफिर रहल छी. एकटा हरमुिनया माkटरजी छैथ ओ अह„ के िवषय म बतेलैथ तखन हम ब–ड िह6मत क क आ पैरवी लगा अह„ सोझा उपिkथत भेलहुँ अिछ, आब अह„ स एतबे गोहराबै छी जे हमरा संगे इbसाफ क देल जाउ सरकार" इ कहैत ओ सुधीर बाबू के पैर धर लगलै. सुधीर बाबू ओकरा पकड़ैत कहलिखन जे हम अह„क ©यथा सुनल, आ आªkत करै छी जे भोरे-भोर हम एिह मामला के देखबै.

भोरे लोकल थाना पर जा क सुधीर बाबू चनमा के िखलाफ दायर सबटा मािमला के िरपोट< मँगबा के देखलिखन. पुिलिसया «ान आ आ अनुभव के बले िरपोट< पढले सं लगाओल आरोप सब झूठ छैक से बुझह म कोनो भ|गट नै रहलैन. िकएिक घटना kथल सब फराक-फराक आ बेस दुरी पर छल मुदा केस के गवाह सब ओिह बाबू साहेब के पिरवार के लोक आ नौकर-चाकर सब छल. चनमा स चोरी आ लूट के कोनो सामानो नै बरामद भेल छल. िरपोट< के वृहत्त िनिरJण के बाद सुधीर बाबू थाना इंचाज< के केस ख़तम करै के आदेश देलिखन. चनमा के इ सुिन क आँिख म ख़ुशी के नोर आिब गेल छल.

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 5

सुधीर बाबू के चेहरा पर संतोषDद मुkकी छलैbह. ओ चनमा से कहलिखन जे आब तॲ आजाद छह, जे मोन से कर लेल.

ऐ पर चनमा बाजल, "सर, एतेक भेला के बाद जँ हम एिह एिरया म रिह गेिल त बेसी िदन तक िज़ंदा नहॴ बचब. त® आब हम िनयाएर लेलहुँ अिछ जे आब हम पंजाब चिल जायब. जीब त ओिह िकछु मजूरी क के कमा-खा लेब. सुधीर बाबू के जेबी म जे िकछु टाका छल से ओकरा हाथ के दैत कहलिखन जे रािख ले, बाट म काज ऐतौ, िकछु सहृदय गॱआ सब सेहो चbदा क के ओकरा िकछ क®चा द देने छल.

समय के संगे सुधीर बाबू के kमृित म ऐ घटना पर पद‡ पिर गेल छलै य. आई बष¯-बष< बाद चनमा स भट भेला पर ओ kमृित फेर ताजा भ गेल छल. जखन चंvDकाश सुधीर बाबू के गोर लागय लेल झुके लागल त ओ ओकरा किस क पकड़ैत गला लगाबैत कहलिखन नै-नै एहन जुलुम फेर नै, अह„ सन कलाकार से एकबेर फेर पैर छुआब के पाप नै करब हम. एक अथ< म त अह„ हमर गु°ओ छी, िकएिक किरयर के शु°आती समय म अिहं स हमरा «ान भटल जे पुिलस आ अदालत म इbसाफ तखन तक संभव नै अिछ जा धिर अिधकारी सब लग एकटा संवेदनशील ±दय नै होय आ िरपोट< आ गवाह से इतर सेहो िकछ बात भ सकै अिछ इ महसूस कर के इ—छा-शि²त नै होय.

गरा लगैत ओ सुधीर बाबू के भिर प|झ के ध नेने छल. ख़ुशी के मारल ओकरा आँिख से नोर ढब-ढब चुबै लागल छल. किनक काल बाद मोन िkथर भेला पर ओ बतेलक जे दस साल धिर एकटा रेkटोरट म मजूरी केला के बाद ओ एतय अपन एकटा छोट िछन होटल(ढाबा) खोिल नेने अिछ आ कैटिरंग के काज करैत अिछ. अपने एिरया के एकटा लड़की से िबयाहो केलक आ ओकरा दू टा ब—चो छै एकटा कॉलेज म पढ़ैत अिछ आ एकटा kकुल म. ओ कहै लागल जे ओकर पिरवार िहनका हरदम याद करैत छैन आ एकबेर भट करै छैयत छल.

अkतु "आई राित के भोजन तखत तोरे घर पर हैतैक" सुधीर बाबू के इ बात कहैत दुनू के चेहरा पर एकबार फेर सुखद मुkकान आिब गेल छल, जेना िदन भैर के याLा के बाद स|झुक पहर आमक झॲझेर म आिद³य एकबेर फेर लािलमा बीछेने होइथ! -

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 6

Dणव झा रा´¥ीय परीJा बोड<,नयी िदnली

ऐ रचनापर अपन मंत©य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। देवेश झा िहbदू िववाह :एक समीJा

Dमुख िवचार िवंदु : 1॰िववाह 2॰ कत<©य 3॰ यौवनक आवेग 4॰ «ान 5॰ Dितkपध‡क संवेग 6॰आदश< संबंध 30 जून 2018 के दैिनक जागरण पL िववाहक अदभूत दश<न करौलक । िकछू घंटाक िववाहक िविध नवोढ़ा कbयाक (नाियकाक) सम  kव—¼bद अिkत³वक शूbयक धरातल पर आनबा मे सJम भऽ जाइत अछ । कतऽ नवयौवनक िनि¾bत आ मkत जीवन आऔर कतऽ अपर पJक क<©यक कारख़ाना । प¿ी एवं गृिहणीक जीवन कोनो घरक आबालबृÀद घरम पधारल प¿ी Ÿपी बहूकदेिख परमानंदक अनुभूित करैत बजै छैिथ- आब की ? कोन िचंता ? घरमे नव किनया आिबये गेल छैथ, सब काज करबे करती आ सब भार सहबे करती, चलू िमठाई खाऊ आ खुशी मनाउ। िकbतु एतिहसॅ असंतुलनक आ<नादमुखिरत होइत अिछ जे कbया यौवनक आवेगमे «ान एवं Dितkपध‡क संवेग संबलसॅ अनुkयूत उ—चपदाक|Jाक संग “सुपर वुमेन “ बनवाक कामनासॅ kफुिरत आर kपंिदत होइत रहैत छैिथ ओ प¿ी तथा गृिहणीके दािय³वसॅ दिबक आहत होइत अपना जीवनके िधwारय लागैत छिथ । जखनिक हमरा सभक मÀय िकयो एहेन दुखद भाव निह रखैत छिथ । ते आवÄयक बुझना जाइत अिछ जे पित-प¿ीक आदश< संबंधके बुझबाक लेल िववाह एवं िववाह िविध केर पुरातन-नूतन Ÿपके बुझल-बुझाओल जाय।यथा- िहbदू िववाह धम<मे िववहके एक Dकारक संkकार मानल गेल अिछ, जकरा दा6प³य जीवनक उरदािय³व कहल जा सकैत अिछ। अbय धम<क अनुसारे िववाहके पित-प¿ीक बीच एक Dकारक समझौता सेहो किहतॅ उिचते। ओना िववाह एक समझौता त िथिकए, मुदा िववाहोपर|त पित-प¿ीक संबंध मे अि§नके साJी मािनके सात फेरा लगाबैत छी जे हम सदा दुनू साथ रहब, मुदा आजुक जमाना िकछु और अिछ। हम अि§नके साJी मािन पिवL बंधनमे त बंिध जाइत िछ मुदा समयके बदलैत “ममे िकछू िदनमे एिह पिवL संबंधक िनव<हन करयमे आजुक युवावग< (युवक-युवती) के िकछु उकŸ बुिझ पड़ैत अिछ। वैिदक कालमे िववाह संkकार एक मह³³वपूण< संkकार मानल गेल अिछ । ऐिह संkकार मे kवागत- स³कार, िववाहक उÅोष, वkLािद उपहार, वर- वधुक Dित«ा,कbयादान, गु¢तदान, दहेज, पािण हण,  ंिथ बंधन, िववाहक िवशेष य«, सात-पिर“मा, िशलारोहण, Æुव आ सूय<क दश<नक, शपथ आªासन आिद ि“यासॅ िनवृ होमय पड़ैत अिछ । िहbदू धम<मे गृहkथ जीवन मनु´य के दािय³व िनव<हणक यो§य बनबाक एक माग< थीक, जािहमे शारीिरक, मानिसक आ आिथ<क पिरप²वताक «ान होइत अिछ । एिह “ममअनेक विरP ©यि²त, गु°जन, कुटु6ब संबंधी सबसॅ धम<, पुजा-पाठ, देवताक आवाहन, अनुPान करयबाक «ान Dा¢त होइत अिछ ।

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 7

ओना तॅ िववाह आठ Dकारसॅ स6पž होइत अिछ। 1॰ ÇाÈ िववाह :- सुयो§य वरसॅ कbयाक िववाह िबना कोनो दान दहेजक करबाक Dथा दुनू पJक सहमित सॅ होएब ÇाÈ िववाह कहाबैत अिछ । 2॰ दैव िववाह :- कोनो सेवाक भावसॅ िकछू मूnय लऽ क पिहने अपन कbयाके दानमे दैत ¼िथbह ई दैिववाह भेल। 3॰आष< िववाह :- ओना तॅ ई िववाह पिहने कbयादान बदला गौदानक °पमे होइत छल। पिहने पुLीक िववाहक लेल वर पJ गायक दान करैत छलाह। एकरे आष< िववाह कहैत छी। 4॰ Dजाप³य िववाह :- मैिथल संDदायमे कbयाक िववाह दोसर वग<क वरसॅ करा देव Dाजाप³य िववाह कहबैत अिछ । 5॰ गंधव< िववाह :- दुनू पJक सहमितसॅ कोनो रीित िरवाजक अनदेखी करैत वर- कbयाक िववाहके गंधव< िववाह कहल जाइत अिछ। एकरा ई युगमे Dेम िववाह सेहो कहैत छी । जेना :- दू´यbत-शकुbतलाक िववाह गंधव< िववाह कहल गेल िजनक पुL भरत भेलाह। हुनके नाम पर हमर देशक नाम पड़ल भारत । 6॰ असुर िववाह :- व<मान सामयमे िववाहक जे Dथा चलैत अिछ, ओकरा असुर िववाह कही तॅ कोनो हज< निह । ज़ोर जबरदkती भगाक दान काय<क दहेजक िबना िववाह असुर िववाह कहबैत अिछ । 7॰ राJस िववाह :- कbयाक सहमितक िबना िववाह करब राJस िववाह कहबैत अिछ । 8॰ िपशाच िववाह :- कbयाक मदहोसक अवkथामे वा वरक िकछू नशाक अवkथा मे िकछू खुआके लऽ जा के िववाह कराएब िपशाच िववाह कहबैतअिछ । भारतीय स|kकृितक अनुसार िववाह कोनो शारीिरक आ सामािजक अनुबंध माL निह अिछ अिपतु दूनूक दा6प³य जीवनक एक eेP आÀयाि³मक साधनाक °पमे दश‡ओल गेल अिछ । ठीके कहल गेल अिछ :- “धbयो गृहkथाeम: ”। िमथालमे पिहने सॅ िववाहक Dथा अनेक दृिÊकोणसॅ देवताक आवहानक उपराbत अि§नदेवके साJी °पमे संकnप आिद करक व°ण देवसॅ कृपालाभक बड़ अदृÊ फल होएत अिछ अिह दुनू शि²तके एक िहएबाक एक गंभीर बात आय< िववाहमे राखल गेल छल । िववाहक संबंधमे आय<यूगसॅ प¿ीक िदिशसॅ पितक शतायु होयबाक Dाथ<ना आ पितक िदशसॅ अिभž दा6प³य Dेम Dाथ<ना कएल गेल अिछ जेना । राघवेbvे यथा सीता िवनीता काÄयपे यथा । पावके च यथा kवाहा तथा ³वं मिय भ<िह । आिद आिद (धम<िव«ान,पृ0156) एिहDकार जेना रामक Dित सीताक कÄयपके Dित िवनताके, अि§नक Dित kवाहाक, िदलीपक Dित सुदिJणाक, वासुदेवक Dित देवकीक, अगkतक Dित लोपमुvाक, अिLक Dित अनुसूइयाक, यमदि§नक Dित रेणुकाक आ eीक़ृ´णक Dित °ि²मणीक पिवL Dेम छलैbह ओएह Dेम आजुक वर कbया मे मधुर Dेम जीवनक ई Dाथ<ना आय< िववाह कालसॅ अिछ जे एिह युगमे संभव निह बुझाबैत अिछ । एतय हमर मंत©य अिछ जे िववाह एक पित प¿ीक बीच परkपर िवªासक एक समझौता तॅ िथिकए संगे- संग एक Dकारक क<©य सेहो थीक जे िववाहोपराbत ©यि²तक जीवन शैलीमे कतेक Dकारक उतार-

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 8

चढाव अबैत अिछ जािह मÀय मनु´य जीवन गाड़ीक दूनुपिहयाक सदृश घुमैत ई िजनगी सुख-दुखक अनुभव करैत िबतैत अिछ । िववाहक िवषयमे िकछू िमलल-जुलल तÌय युि²तसंगत बुिझ पड़ैत अिछ। यथा – जे पिहने एक दोसरसॅ आनिठया (अनिचbह) पुन: “मश: एक दोसर पर आिeत , उरोर सॱसे (संपूण< ) िजनिगक संग , शनैह-शनैह परkपर अिभž अपनामे, एक उदा आनंदयु²त मधुर kपश< , अकkमात् अपनामे °Ê नोक- झॲक, उ—चावच मित पर चलैत बढ़ैत िवरि²त-, िवभेद-तलाकक िकनार तक। कतहु िजद आ कतहु मानक अहम भाव , तथािप रकम-रकम दुनु िनकट सूLमे बbहैत एक पु´प माल, इ मधुर अ«ातसॅ «ातक िदशामे , चलैत Dाणाbत पय<bत समय साÀय याLा , किनया वरक इ कटु मधुर संबंध कखनहु, अचार कखनहु ित²त चटनी तॅ संगिह मधुर , रसायनक शाही भोग कखनहु लावÎय कखनहु नीम, सब कीछु िमली भौितक जगतक °प पिरणत होइत अिछ । का©यक नवरश °िचर भोगमे, दु:खहुमे आनंद, परमानंद जािहमे ©या¢त , दुखज जीवनक सुख ।

पुन : िववाह थीक एक आश िवªास िमलनमे आनंद , समाजमे जीवनक समप<ण , भल हो ओिह नवोढ़ा नािर केर , जे आनक लेल अपनाके ³यािग देलैथ, अपना लेलैथ, सव<था अनिभ«के , अपना आँचर मे समा लेलैथ। तािहना धbय छैथ ओ पु°ष िसंह, जे नवागता अनिचbहािर अबला पर , kनेिहल िवªास करैत अपना घर धरा,

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 9

सम  ऐªय< आ kवयंके सौिप देलैथ , आओर की कहू-वाह रे िववाह, आह रे िववाह ।

-देवेश झा DाÀयापक, मैिथली िवभाग एन0 डी0 कॉलेज, रामबाग , पुिण<या ।

ऐ रचनापर अपन मंत©य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। डॉ कैलाश कुमार िम e फकड़ाक संग याLा करैत मैिथलानीकमनोदशाक : मानवशाkLीय िववेचना डॉ कैलाश कुमार िमe [1] लोकक सँसार अनंत महासागर जक„ अिछ। लोक जखन िमिथलाक लोक हो अथवा मैिथिलक लोक हो तऽ एकर िवkतार कnपना सँ बाहर भऽ जाइत छैक। िमिथलाक लोकक जिड़ छिथ मैिथलानी। हुनक जीवन आइओ लोक सँ छिन, लोक सँगे छिन। आजुक भौितक आ वैिªक समाज मे सेहो मैिथलानी लोक कR धेने छिथ: लोक मैिथलानी सँ बढैत अिछ, मैिथलानी लोकक गित सँग गितमान छिथ। गित मुदा िदशाहीन निह अिछ। गित एहेन अिछ जे जिड़सँ जुड़ल अिछ। ओकरा उड़ब, घुमब, दौड़ब, बाहर-भीतर करब नीक लगैत छैक मुदा ओ अbततः अपन जिड़ लग बेर-बेर आिब जाइत अिछ। ठीक ओिहना जेना Dवासी िचरै एक वष< मे 40,000 िकलोमीटर अपन पािरिkथितकी सँ दूर उड़ला, घुमला आ Dवास केलाक बाद पुनः अपन भूिम अथ‡त मूल पािरिkथितकी मे आिब जाइत अिछ।ओिहना जेना सूरदास (1478 – 1573) केर जहाजक िचरै बेर-बेर उड़लाक बाद जहाज पर अबैत रहैत अिछ: “जैसे उिड़ जहाज कौ पंछी पुिन जहाज पै आबै” िमिथलाक अथवा आजुक वैिªक युग मे मैिथलक लोकक Dथा, पर6परा, खान-पान, िबध-बेबहार, गीत-नाद, अनुPान, पूजा-पाठ, वÒत-पाबिन, िखkसा-िपहानी, फकड़ा, सब िकछु अिधक|शतया मैिथलानी बचा कऽ रखने छिथ। ताहू समय मे जिहया हुनका पढबाक kवतंLता पु°ष जक„ निह छलिन अथवा नाम माL मिहला कR छलिन तिहयो इ सब लोक पर6परा कR अपन भावना – Dेम, िवरह, वेदना, कÊ, यातना, «ान, उÓेग, शोषण, दोहन, आिथ<क िबपžता, पु°षक उ³पात, आिद – ©य²त करबाक पिœलक kपेस केर Ÿप मे ©यवहार करैत छलीह। ओ kपेस एहेन kपेस छल जािह मे िहनकालोकिन कR अपन कÌय ©य²त करबाक kवछंदता छलिन, बिnक एखनो छिन। पु°षक कोनो दखलbदाज़ी ओिह kपेस पर निह छलैक आ ने आइओ छैक।इ बात किन गंभीर िलखा गेल आ मानवािधकार सँ शुŸ होइत नारी kवतंLता, नारीवाद आ kLी िवषयक अÀययन, िववेचन िदस टघिर गेल। बात अनेड़े बहुत पैघ kव°प लऽ सकैत अिछ। ओना एिह बात पर मंथन आ घमथ<न केर

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 10

ज°रत अपन मैिथल समाज मे अिछ लेिकन तािहलेल इ ¢लेटफाम< हमरा उिचत निह लािग रहल अिछ। तखन की हो? िकछु निह, बात कR लोकक जा त मनःिkथित मे रािख आगा बिढ़ जाइ। जखन अध<जा ित सँ पूण< जा ित िदस Àयान जेतिन तऽ अिह पर िवचार शुŸ हएत। िवचारक घमथ<न असगरे नारी निह करती, पु°ष सेहो ओिह भाव, इितहास, िपतृसा³मक समाजक सँरचना आ ओिह सँरचना मे कालक अनुŸप पिरवत<न आिद लेल उदार हेताह आ kLी-पु°ख दूनू िमिल जीवनक गाड़ीक दू पिहया बिन एकर स6यक िनदान िदस अ सर हेताह। बात पर अबैत छी जे कोना लोकक एक िवधा फकड़ाक माÀयम सँ मैिथलानी अपन सब तरहक मनोभाव कR अदौ सँ ©य²त करैत आिब रहल छिथ। फकड़ा कR ‘कहबी’, ‘लोकोि²त’ सेहो कहल जाइत छैक। सबसँ पिहने इहो जानब आवÄयक जे फकड़ा’क अथ< की भेल? एकर कोनो सव<माbय पिरभाषा सेहो भऽ सकैत अिछ की? सव<माbय पिरभाषा अिछ तऽ मैिथली लोक सँसारक फकड़ा ओिह वैिªक पिरभाषा सँग कतऽ धिर चिल पेबा मे सJम अिछ? फकड़ा ख|टी लोकक वkतु िथक – लोकक उि²त अथ‡त “लोकोि²त”। लोकक कहब अथ‡त “कहबी”। लोक पुरान फकड़ा कR सहेजने रहैत अिछ आ नवक िनम‡ण करैत ओकरा ठोसगर आधार दैत रहैत अिछ जािह सँ आजुक गढ़ल फकड़ा भिव´य मे साव<भौिमक बिन सकय।सँkकृत मे “लोकोि²त” अलंकारक एक भेद सेहो मानल गेल अिछ। अं ेजी मे फकड़ा अथवा लोकोि²त कR Proverb कहल जाइत छैक। तािह «ाने अं जी Proverb केर पिरभाषा िकछु अिह तरह करैत अिछ: “A proverb is a saying without an author.” एकर अथ< भेल फकड़ा एहेन उि²त अिछ जकर कोनो रचनाकार निह होइत छिथ। मैिथली लोक मे ©या¢त फकड़ा कR देखला सँ इ «ात होइत अिछ जे मैिथिलक फकड़ा अपन kव°प मे एिह सँ अिधक ©यापक अिछ। हमरालोकिन अनेक एहनो फकड़ाक Dयोग करैत छी जकर रचनाकारक नाम हमरा सबकR «ात रहैत अिछ: गोनू झा, िव\ापित (1352-1448), तुलसीदास (1511-1623), मीराबाई (1498-1557), कबीरदास (1398- ?) आिद। रामचिरतमानस सँ अनेक दोहा क िमिथला आ िमिथला सँ बाहर फकड़ा’क Ÿप मे ©यवहार होइत अिछ। जेना िक “यह„ न लागै राउर माया” अथवा “लंका िनिसचर िनकर िनवासा यह„ कह„ स¡जन केर बासा” इ दूनू तुलसीदासक रामचिरतमानस सँ लेल गेल अिछ।

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 11

अिह तरह “पु°खक निह िवªासे” “एकसर तारा िकयो निह देख िलखल कुमास अमंगल लेख” “भनिह िव\ापित सुनू हे सुनयना सब बेटी सासुर जािथ” महाकिव िव\ापितक रिचत पद सँ लेल गेल अिछ। िकछु फकड़ा गाम िवशेष आ kथान िवशेष मे Dचिलत होइत अिछ। ओिह फकड़ाक िनम‡ण मे गामक कोनो िवशेष घटना अथवा ओिह घटना सँग ©यि²त िवशेषक नाम जुड़ल रहैत अिछ। उदाहरण लेल मधुबनी िजलाक अरेड़ गाम मे 55 वष< पिहने नाथ बाबू नामक एक आशु किव आ सभालोचन भेलाह। ओ अपन D³यु³पžमित लेल िवयात छलाह। ओ िकछु-िकछु एहेन पदक रचना केलिन जे फकड़ा बिन गेल। सब फकड़ा हुनक नाम सँ जानल जाइत अिछ। नाथ बाबू कR तीन बीघा खेत छलिन। एकबेर ओ अपना खेत मे मौथा घास उखाड़ैत छलाह। बाट चलैत गामक लोक पुिछ देलकिbह: गामक लोक: “नाथ! की करैत छी?” नाथ: “नाथ बाबू छिथ काल िगरहkत तीन बीघा केर जोता सबहक खेत मे धान उपजैत अिछ नाथक खेत मे मौथा” तिहया सँ इ फकड़ा DिसÔ भऽ गेल: “सबहक खेत मे धान उपजैत अिछ नाथक खेत मे मौथा”

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 12

अिह तरह िमिथलाक अिधक|श गाम मे िकछु ने िकछु लोक भेल छिथ जे फकड़ा िनम‡ण केने छिथ आ ओ फकड़ा गाम मे Dचिलतं अिछ। ओिह फकड़ा सँग ओकर िनम‡ता सेहो गामक लोकक कंठ मे रचल बसल छिथ। उदाहरण हमरा लग अनंत अिछ मुदा िवषय सँ िवषय|तर निह होई तािहं आगा बढब ज°री। वृहद् िहंदी कोश मे लोकोि²त केर पिरभाषा किन िवkतार सँ भेटैत अिछ: “िविभž Dकार के अनुभवॲ, पौरािणक तथा ऐितहािसक ©यि²तयॲ एवं कथाओं, Dाकृितक िनयमॲ और लोक िवªासॲ आिद पर आधािरत चुटीली, सारगिभ<त, सँिJ¢त, लोकDचिलत ऐसी उि²तयॲ को लोकोि²त कहते ह®, िजनका Dयोग िकसी बात िक पुिÊ, िवरोध, सीख तथा भिव´य-कथन आिद के िलए िकया जाता है।” एिह सँ एक बात िदस kपÊ सँकेत इ भेटैत अिछ जे हमरा लोकिन अपन िमिथला मे उपलœध फकड़ा के देखैत एक kथानीय अथवा काजक पिरभाषा बना ली। इ पिरभाषा हम अपन «ान, मानवशाkL, लोकिव\ा (फोकलोर) मे DिशJण आ िमिथला सँ Dा¢त फकड़ाक सँचयन आ ओकर सँरचना के आधार पर गढ़बाक य¿ कऽ रहल छी: “मैिथली फकड़ा जकरा लोकोि²त सेहो कहल जा सकैत अिछ, लोकक Óारा Dचिलत एहेन कथन अिछ जे पौरािणक कथा,  bथ, धम<शाkLक दृÊाbत, घटना िवशेष सँ िवकिसत िशJा, हास, पिरहास, मनोभाव, दुःख- दद<, Dेम, अपन³व, िलंग भेद, जातीय अथवा सामुदाियक kवाभाव आ गुण, छोभ, वैरा§य, उदासी भाव, Dकृित सँ तारत6य, जिड़सँ जुड़ाव, पूव<ज सँ िसनेह, «ानक सँचरण, आिद भाव ©य²त कएल जाइत अिछ।” फकड़ा कR kव°प कR अगर गंभीर बिन देखी तऽ kपÊ हएत जे फकड़ा’क उÔरण देमय बला लोक ओिह सँग ©यि²त अथवा पिरिkथित कRओिहना सीब लैत अिछ जेना कोनो मिहला सुई मे ताग घुसा ओिह सँ कोनो वkतु अथवा कलाक िनम‡ण करैत अिछ। तीनू – सुई, ताग आ वkL – आपस मे एना गुथा जाइत अिछ जे तीनूक अलग-अलग अिkत³व ताकब दु´कर। तीनूक सम  अिkत³व सँ कला बनैत छैक। सएह भेल फकड़ा। फकड़ा क एकाएक उमडल मनोदशाक स6Dेषण सेहो कहल जा सकैत अिछ जािह मे स6Dेषण कR अिधक Dमािणक आ Dभावो³पादक बनेबा लेल उÔरणक मदित लेल जाइत छैक। किन फकड़ा केर kव°प आ ओकर अनेक Ÿप पर िवचार सेहो करक चाही। िमिथला मे ©या¢त फकड़ा कR kव°प आ उपलœधता देखैत कहल जा सकैत अिछ जे फकड़ा कR चािर भाग मे िवभ²त कएल जा सकैत अिछ: (क) वैिªक फकड़ा (ख) अिखल भारतीय kव°पक फकड़ा (ग) िमिथलाक फकड़ा (घ) kथानीय फकड़ा आब किन उपव<िण<त फकड़ाक kव°प पर िवचार करैत छी।

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 13

(क)वैिªक फकड़ा वैिªक फकड़ा, जेना िक नाम सँ kपÊ अिछ, एहेन फकड़ा भेल जे समkत िवª मे Dचिलत अिछ। अिह तरहक फकड़ाक Dयोग मैिथली मे मूल फकड़ा कR अनुवाद कए होइत अिछ। उदाहरण हेतु: Rome was not built in a day। -“रोमक िनम‡ण एक िदन मे निह भेल” Child is the father of a man।- ब—चा पैघ लोकक िपता होइत अिछ Necessity is the mother of invention।- “आवÄयकता अिव´कारक जननी होइत अिछ”। वैिªक फकड़ा अपन वैिªक kवभावक कारणे आ स|kकृितक आदान-Dदानक कारणे मैिथली आ आन भाषा आ सँkकृित मे सदैव Dयु²त होइत रहल अिछ। लोकक िविभž देश मे Õमण, दोसर देश आ सँkकृितक मÀय आदान-Dदान, सािह³य आ भाषाक अÀययन आिद एकर फैलाव आ ©यवहारक कारण बनैत छैक। (ख) अिखल भारतीय kव°पक फकड़ा अिह तरहक फकड़ा समkत भारत आ ताहू मे िहंदी बहुल JेL मे Dयु²त होइत अिछ। िमिथला मे सेहो ओकर मूल Ÿप मे एकर Dयोग होइत अिछ। कखनोकल भाषाक अनुवाद सेहो कऽ देल जाइत छैक। िकछु उदाहरण देखैत छी आ ओकर िववेचना करैत छी: ना राधा को नौ मन घी होगा ना राधा नाचेगी – निह राधा के नौ मोन घी हेतिन ने राधा नचती। ऊंट के मुँह मे जीरा – “ऊंटक मुँह मे जीरक फोड़न” ऊपर के उदाहरण मे मूल िहंदी फकड़ा के मैिथली मे अनुिदत कए कहल गेल अिछ। आब दोसर देखू: “लेना देना कुछ नही मुहœबत एक चीज़ है।” “का वष‡ जब नदी सुखाने/ समय चुक पुिन ²या पछताने” “किबरा खरा बाजार मे िलए लुकाठी हाथ/ जो घर ज़ारे आपना चले हमारे साथ” “ढ़ाई आखर Dेम का पढ़े सो पिÎडत होय” “बड़े िमया तो बड़े िमया/ छोटे िमया सुभानअnलाह” “िमया की जुी िमया का सर”

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 14

उपरो²त सब फकड़ा अपन भाषा आ ओकर सँkकार सँग िमिथला मे अबैत अिछ। मैिथली भाषी एकर Dयोग अपन भाषा आ ©यवहार मे एकर मूल Ÿप मे िबना कोनो जोड़-तोर केने, िबना कोनो अनुवाद कR करैत छिथ आ एकर भाव सेहो िबना कोनो झंझट कR kपÊ होइत जाइत छैक। अिखल भारतीय फकड़ा मे कोनो भाषा जेना मगही, भोजपुरी, नेपाली, बंगाली, अवधी, उदू< आिदक फकड़ा आिब सकैत अिछ। अिखल भारतीय कहक अथ< िहंदी माL निह लागक चाही।

(ग) िमिथलाक फकड़ा िमिथलाक फकड़ा कहब कR ता³पय< भेल जे कोनो फकड़ा जे समkत िमिथला JेL मे बाजल जाइत अिछ (ओ देवघर, सँथाल परगना, दुमका, भागलपुर, मुंगेर सँ लऽ कऽ नेपालक मैिथली भाषी JेL धिर पसरल लोकक फकड़ा), ©यवहिरत होइत अिछ से फकड़ा। इ फकड़ा सब कमोवेश एक kव°पक अिछ। अिहमे य\िप एक बातक स6भावना भऽ सकैत अिछ जे िकछु फकड़ा जे अिखल िमिथलाक kवभावक अथवा Dकृित कR अिछ तकर सँचयन सब मैिथली भाषी JेL सँ लोक पर6परा सँ िलिखत पर6परा मे निह भेल हो। अगर से निह भेल अिछ तऽ मैिथली सािह³य आ सँkकृित के शोधकम’ एवं सािह³यजीवी लोकिन एिह बात कR गंभीरता सँ लेिथ आ समkत िमिथला JेL सँ लोक पर6परा मे ©या¢त फकड़ा सबहक सँचयन कए ओकर सँरचना आ ©यवहार पर शोध करिथ। (घ) kथानीय फकड़ा kथानीय फकड़ा ओ फकड़ा भेल जे कोनो िवशेष गाम अथवा ओकर अगल-बगल मे कोनो घटना िवशेष, अथवा कोनो ©यि²त िवशेष Óारा रचल गेल हो आ ओिह परोपÖा मे लोक ©यवहार मे Dचिलत हो। kथानीय फकड़ा के स6बbध मे एक बात कहब अिनवाय< जे कालक याLा सँग नहु-नहु मह³वपूण< फकड़ा िकछु समयक बाद अिखल िमिथला आ बाद मे अिखल भारतीय आ कखनो काल अंितम डेग फानैत वैिªक फकड़ा सेहो बिन जाइत अिछ। kथानीय फकड़ा केर उदाहरण शुŸ मे देल गेल अिछ तािह एकरा फेरो सँ देमाक दरकार निह अिछ। अिह तरह दू बात एक सामाbय पाठक लेल kपÊ भऽ गेल: · पिहल, फकड़ा की अिछ, एकर पिरभाषा िवशेषŸप सँ मैिथली भाषा आ सँkकृितक सbदभ< मे की होबक चाही। · दोसर, मैिथली सँkकृित मे Dचिलत फकड़ा के कतेक eेणी मे ब|टी देखल जा सकैत अिछ। आब अिह Dारि6भक जानकारीक बाद अिह लेख कR आ³मा अथ‡त फकड़ा Óारा मानवी या मैिथलानी के मनोदशाक स6Dेषण कोना होइत अिछ। कोना ओ सब अपन मोनक भाव, उतार-चढ़ाव, नीक-अधलाह, Dेम, वेदना, िवरह, सामािजक िkथित, उमंग, दुःख, आिथ<क िबपžता, आिद क ©य²त करैत छिथ। ©य²त करब

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 15

एक बात भेल आ ओिह अिभ©यि²त क बुझब आ ओकरा सँग आ³मसात करब दोसर बात। इ दूनू बात अगर मैिथली फकड़ा आ नारी मनोदशा के देखब तऽ भेटत। भाव अिधक|श अवkथा मे एकक अथवा ©यि²त िवशेषक निह अिपतु समkत नारी समाज लेल, तऽ कखनोकाल एक वग< िवशेषक नारी समाज लेल होइत अिछ। समाजक सँरचना जे आइ तीवÒ गित सँ बदिल रहल अिछ तािह मे सामािजक-स|kकृितक-इितहािसक आ जडर िडkकोस< कR Àयान मे रखैत अिह िवषय पर गहन शोधक दरकार अिछ। हम अपन सीिमत «ान आ साधन कR िहसाब सँ अिह पर िकछु िलखबाक य¿ कऽ रहल छी। िलखबा सँ पिहने इ kपÊ कऽ देनाइ आवÄयक जे समाज बदिल रहल अिछ। पिरवत<न अपन गित पकिड़ रहल अिछ। पिरवत<न सँग मैिथल मानिशकता सेहो बदिल रहल अिछ। लोक बेटा बेटीक िवभेद कम कऽ रहल छिथ। सब JेL मे आन समाज जक„ िमिथलाक िधया सेहो Dगितक पथ पर साधल डेग दऽ रहिल छिथ। हालिह मे िमिथलाक एक बेटी भारतीय वायु सेना मे पायलट कR Ÿप मे चयिनत भेलीह अिछ। हुनकर चयन पर समkत मैिथल समाज अपना आपकR गव‡िbवत अनुभव कऽ रहल अिछ। ओिह िधया कRचाŸ िदस सँ शुभकामना भेिट रहल छिन। इ घटना बदलैत मनःिkथितक पिरचायक अिछ। एकर अथ< इहो निह जे सब िकछु ठीक भऽ गेल अिछ। िवª समुदायक बाते छोड़ी दी, भारतवष< मे सेहो हम सब बहुत समुदाय, समाज, वग< आ रा¡य सँ नारी सँचेतना, िवकास मे एखनो बहुत पछुआएल छी। समाजक सँरचना देखला सँ एहेन सन लगैत अिछ जे समाज माL बेटा लेल बनल अिछ। ककरो अनेक बेटा भेलैक तऽ ओ भागवंत आ एकर िबपरीत िकनको अनेक बेटी भेलिन तऽ ब–ड अधलाह। अिह िkथित मे समाज ओिह बेटी सभक तुलना िपलुआ सँ करैत कहैत अिछ जे फल| िkLगन अथवा पु°ख कR “खद- खद बेटी” छिन।kमरणीय तÌय इ अिछ जे खद-खद शœद िपलुआ लेल कएल जाइत अिछ। बातक अंत अतए निह होइत अिछ। स6मर गीत जे बेटीक िबआह सँ पिहने गाएल जाइत अिछ मे माय अपन ©यथा बतबैत कहैत छिथ, ‘बहुत भऽ गेल कोनो ढंगक बर निह भेट रहल अिछ। बेटीक जbम पहाड़ भऽ गेल! की करी िक निह?’ बेटी मायक दुःख सँ vिवत होइत अपन नारी होबाक अवkथा सँ प¾ाताप करैत गीत आ फकड़ा कR मादे कहैत छिथ ‘माय, अनेड़े हमरा जbम किथलेल देलहुँ? अिह सँ बिढय„ तऽ इ रहैत जे हमरा अथ‡त बेटीक जbम सँ पिहने चालीस पचास मरीच बुिक कऽ खा िलतहुँ जकर झ|स सँ बेटी गभ<िह मे तुिब जाइत आ िजनगी भिर लेल िधयाक सँताप सँ मुि²त अह„कR भेट जाइत! “किथ लए आहे अ6मा िधयाक जनम देल खैतहुँमिरच पचास मिरचक झ„स सँ िधया दूिर जैतय छुिट जाइत िधयाक सँताप”

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 16

समाज एिह मानिशकता मे जीबैत अिछ जे बेटी घर मे अिधक भेलाक अथ< भेल धनक Jय आ ल×मीक Dkथान। एक फकड़ा मे अिह बातक kपÊ Dमाण भेटैत अिछ: “िवD टहलुआ मेष धन या बेटीके बाढ़ी ताहू सँ धन निह घटए कŸ पैघ सँ रािड” इ फकड़ा Dमाणक सँग डंकाक चोट पर कहैत अिछ जे Çा6हणक बालक कR नौकर टहल िटकोरा करक हेतु राखब सँ, छागर-बकरी पोसला सँ आ बेटीक सँया बढ़ला सँ धनक Jित होइत अिछ; तकर बादो अगर स6पित ब|िच गेल तऽ अपना सँ पैघ हैिसयत केर लोक सँ लड़ाई ठािन िलय, स6पित बरबाद भऽ जेबे टा करत। फकड़ाक िववेचना सँ लगैत अिछ जे बेटी कR लोक िसनेह करैत अिछ, मुदा बेटी कोिख मे अबैक तकर कामना निह करैत अिछ। भले बेटीक सुरJा िघबही घैल जक„ कएल गेल होइक मुदा ओकर ¢यार आ दुलार बेटा जक„ केल जाइत छैक। अथ< भेल, बेटा अिधक मह³वपूण<। अbयथा, बेटी कR बेटी जक„ दुलार िकएक निह? “घीबक घैला जक„ पोसलहु गे बेटी बेटा जक„ कएल दुलार” िमिथला मे कोनो मिहला लेल बेटाक कामना अतेक Dबल होइत छैक, तकर उर देब किठन। एक िचरै बहुत का°िणक kवर उ³पž करैत रहैत अिछ। ओिह िचरै कR स6बbध मे Dचिलत माbयता इ छैक जे कोनो जbम मे ओ िचरै एक मानवी छिल। ओकरा अनेक बेटा होइत गेलैक आ सब मरल गेलैक जखन िक जतेक बेटी भेलैक सब िजल गेलैक। जखन ओ मिहला मरिलतऽ बहुत िदन धिर ओकर आ³मा बेटा लेल भटकैत रहलैक बाद मे ओकर kव°प बदिल गेलैक आ ओ िचरै बिन जनम लेलक। एखनो ओकरा पूव< जbमक बात सब kमरण छैक तािहं ओ का°िणक kवर मे अपन ©यथा कथा कहैत रहैत अिछ: “टी टी टी ितसी तेल बेटा भेल मिर मिर गेल बेटी भेल जीब जीब गेल”

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 17

अगर वै«ािनक दृिÊकोण सँ उपलœध फकड़ा सबहक िववेचन कएल जाय तऽ पता चलैत अिछ जे फकड़ा त³कालीन समाजक दप<ण अिछ; समाजक ऐितहािसक दkतावेज अिछ। अिहबातक पुिÊ िनÙिलिखत फकड़ा सँ होइत अिछ: “जनक नगर सँ चलली हे सीता अ6मा देलिन रोदना पसार के मोरा सीता लए बिसया जोगेतै के मुख करत दुलार” इ फकड़ा जेना भw सँ लोकक आँिख खोलैत हो! इ कहैत अिछ जे ताज़ा, त¢पत भोजन खेबाक अिधकारी बेटा अिछ, आँिठ, बिसया भोजन बेटीक भाग मे िलखल रहैत अिछ। बेटी जखन िबआह कR बाद सासुर जा रहिल अिछ तऽ माय कनैत सोचैत छिथ, ‘आब सासुर मे हमर बेटी लेल इ बिसयो अž कR जोगा’क राखत आ के एकर गाल पकिड़ दुलार करतैक?’ इ फकड़ा बहुत पैघ याLा लेल चिल पड़ैत अिछ। लड़की मायक िचंता एिह फकड़ा मादे देखू। ओ कहैत छिथ जे आब हुनका बेटी लेल इ बिसयो भोजन ओकर सासुर मे कR रखतैक? कR ओकरा सँ Dेम सँ बजतैक? यएह सब सोिच-सोिच मायक छाती बेर-बेर फािट रहल छिन।इ फकड़ा बतबैत अिछ जे कोना लड़की सासुर जाइते देरी उरदािय³वक भार सँ दबा जाइत अिछ। इ फकड़ा देखन मे छोटन लगे/ घाव करे गंभीर जक„ अिछ। एक आर फकड़ा ऊपर विण<त फकड़ाक अथ< kपkट करैत अिछ आ बेटीक िबआह भेलाक बाद सासुर गेला पर की िkथित होइत छैक तकर खाका खीचैत छैक: “जब डािर चलल ससुर घर देस घरक चालिन होयबो हे” अथ< इ भेल जे आइ धिर जे िधया नैहर मे सुकुमािर छलीह से आब दोसर देस दोसर लोक मे जा रहिल छिथ, ओतय िहनकर की गित हएत! काज करैत-करैत आ लोकक बात सुनैत-सुनैत अपिसयात रहतीह। मोन चालिन जक„ अनेक खंड मे िवखिbडत भऽ जेतिन। मतलब, इ फकड़ा भिव´यक यातना िदस इशारा करैत अिछ। िमिथलाक नारी एक िविचL मनोदशा आ पिरवेश मे जीबैत छलीह। िकछुके जीवन मे पिरवत<न आिब रहल छिन अिधक|श एखनो िपता, ¡येP Õाता, eेP एवं अिभभावक पर आिeत छिथ अथवा हुनक िनण<य कR बलधकेल kवीकार करबा लेल िववश छिथ। आ¾य<क बात इ छैक जे लड़की कR कहेन लड़का चाही आ ओकरा मोन मे की बात घुिम रहल छैक तकर वण<न सेहो गीतगाइन सब अपन गीत आ फकड़ाक माÀयम सँ बजैत छिथ:

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 18

“जखन चलला बाबा वर ताकय आगा भए °ि²मणी ठािर हे कर जोिड़ िमनती करै छी यौ बाबा सुनू बाबा िमनती हमार यौ जुिन बाबा ताकब चोर चंडाल के जुिन आनब तपसी िभखािर यौ” नाियका अपना लेल अपन eेP सँ एक सामाbय बर जे िसनेहक अथ< जनैत होिथ कR आक|Jा रखैत छिथ। हुनका चोर, चंडाल, लु—चा- लफंगा अथवा कोनो नंग धरंग साधू सbयासी निह चािहयिन।इ फकड़ा एक मिहलाक दासताक जीबैत साJी अिछ। फकड़ा पढ़ैत चलू आ समाजक गढ़िन देखैत चलू। फकड़ा एक-एक तह खोलैत चलत। िkथित इ भऽ जाइत अिछ जे कोनो मिहला अिगला जनम मे फेरो मिहला निह बनए चाहैत छिथ। िदनकर दीनानाथ सँ िनहोरा करैत कहैत छिथ जे आब किहयो हुनका ितिरया अथ‡त नारी Ÿप मे जbम निह देिथ: “बेर-बेर अरजलॱ हे दीनानाथ दीनानाथ ितिरया जनम जुिन देहु” िपLसा³मक समाज अपन मायाजाल मे तेना ने िkLगन कR फंसा लेने अिछ जे ओ सब छरपट- छरपट तऽ करैत रहैत छिथ, मुदा ओिह मायाजाल के तोिड़ कह„ पबैत छिथ! समाज सु§गा जक„ रटा देने छिन, रिट लेने छिथ: “बेटी ससुरे नीक की सरगे नीक” फेर की सब मैिथलानी इ मािन लैत छिथ जे कोनो िवषम पिरिkथित हो, Dताड़ना हो, शोषण हो, पित सौितन लऽ अबैथ, भोजन स6मान भले ने भेटए, कोनो िkथित मे सासुर निह छोड़ी आ नैहर के तऽ चचÚ बेकार! बेटीक डाला नैहर सँ सासुर लेल उठैत अिछ आ सासुर सँ बेटीक लाशक डोली उठक चाही। फेरो एकरा समािजक सँरचना सँगे जोिड़ देल जाइत अिछ। िबआह होइते देरी नैहर मे बेटीक अिधकार समा¢त आ भाउजक वच<kव Dार6भ। अगर िबआहिल आ सासुर बसैत बेटी नैहर मे िकछु दखल देलिन तऽ इ अमाbय। फकड़ा एकरा एिह तरह Dमािणत करैत अिछ: “घर आँगन भौजी के छल छल करिथ ननदो”

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 19

अथ< kपÊ भेल आब जे बेटी िबआह सँ पूव< िपताक घर पर अपन अिधकार बुझैत रहैत छलीह से हुनकर निह अिपतु हुनक भाउजक भऽ चुकल छिन। ओ अिधकारहीन भऽ चुकिल छिथ। कोनो पु°ख ज अिह बातक अनुभव करए चाहैत छिथ तऽ एकबेर इ कnपना माL कऽ लेिथ जे िबआहक बाद एकाएक हुनका स6पित सँ बेदखली कऽ देल जाइत छिन, सामािजक ©यवहार मे ओ िन´कािसत भऽ जाइत छिथ। फेर कहेन अवkथा मे रिह सकैत छिथ। इ कnपना माL हमरा सबके कÊकारी लगैत अिछ आ तकरा एखनो धिर मैिथलानी जीब रहिल छिथ से कतेक दुखक बात! आ अिह बातक भान फकड़ा कोना खोिलकऽ kपÊ करैत कहैत अिछ। एक अवkथा एहेन होइत छैक जखन एक मिहला अपना आपकR असहाय पबैत अिछ आ लगैत छैक जे सब सँkथा, सामािजक मय‡दा, िबआह-दान, कुल-पिलवार सब िकछु बेकार छैक! लोक अनेड़े मायाक बंधन मे बbहा जाइत अिछ! इ सोच कखन होइत छैक? तखन जखन ओ Dसवक वेदना सँ लहालोट भेल इमहर- ओ6हर ओंघिरया मारैत रहैत अिछ। तखन ओकरा लगैत छैक जे अिह सँ बिढय„ ओ िबआह निह केने रहैत आ िपता-िपतामाहक घर मे जीवन भिर कुमािर बनल रहैत: “किथलेल बाबा िबयाहलिन देलिन ससुर घर रे ललना रे रिहतहुँ बारी कुमािर दरद निह जिनतॱ रे” अनेड़े बाबा हमर िबआह करा ससुर घर भेज देलिन। नीक रहैत जे कुमािर भेल नैहर मे रिहतहुँ। कम सँ कम अिह DचÎड दद< सँ बंिच तऽ जैतहुँ! िमिथलाक सब िkLगन अपना आपम सीता देखैत छिथ। हुनका सबके लगैत छिन जे सीता सँगे रामक ©यवहार उिचत निह रहलिन। अतेक कोमल सीता कR कोना कठोर भेल राम नाना तरहक यातना देलाह! एहेन राम सँग िबआहक की लाभ? िजनगी भिर सीता कR सुख कह„ भेटलिन: “राम िबयाहने कोन फल भेल सीता जbम अकारथ गेल” आ अbततः सीता कR राम धोबी कR कहला पर तखन घर सँ भगा देलिथन जखन सीता रघुकुलक कुल दीपक कR जbम देबा लेल गभ< सँ छलीह! एहनो कहॴ कतौ भेलैक अिछ: “राम िबयाहने कोन फल भेल सीताक जbम िबयोगे गेल” बात अतए समा¢त निह होइत अिछ। कहल जाइत अिछ जे जखन सीता वेदनाक अिधकता सँ भिर गेलीह आ राम हुनका बाnमीिक आeम सँ लव कुशक सँग अयोÀया चलबा लेल िजद ठािन देलिथन तऽ सीता पुिछ देलिथन: “हमर अयोÀया मे आब िक Dयोजन, हमरा तऽ अह„ िनकािल देने छी?”

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 20

एिह बात पर राम उर दैत छिथन: “अह„क िबना हमर अªमेध य« सँभव निह अिछ।” सीता: “फेर एखन धिर अह„ कोना करैत रही अªमेध य«?” राम: “अह„क कोनो उदेस हमरा लग निह छल। हम मािन लेने रही जे अह„क िनधन भऽ चुकल अिछ। एहेन अवkथा मे शाkL इ िवधान दैत अिछ जे यजमान सोनाक प¿ी बना य« पर बैस सकैत अिछ। हम सएह कएल। सोनाक सीता बना अªमेध य«क वेदी पर बैसल रही।” रामक इ बात सुिनतिह सीताक करेज फािट गेलिन। आँखी नोरा गेलिन। भेलिन, ‘रामो सन पित अतेक मतलबी भऽ सकैत छिथ!’ भावावेश मे अबैत सीता बािज उठलीह: “एकर मतलब इ भेल जे अह„ हमरा अपन य«क लोभे अयोÀया लऽ जेबा चाहैत छी?” राम चुप रहला। सीता फेरो बजलीह: “एकर अथ< तखन इ भेल जे अह„क य« मे हमही वाधक छी?” राम एखनो चुपे छलाह। आब सीता िनण<य दैत बजलीह: “ठीक छैक, हम अह„क समkयाक तुरत समाधान करैत छी।” राम किन गंभीर तऽ भेलाह मुदा मौन भेल रहलाह। सीता धरती माता िदस हाथ जोिड़ बैस गेलीह आ िनवेदन केलिन: “हे धरती म„! अिहंक कोिख सँ हमर जbम भेल अिछ। हम आब अिधक वेदना निह बरदाÄत कऽ सकैत छी। अह„ आब हमर उपाय त³Jण कŸ। फाटू! एखन फाटू! अतए फाटू! हमरा अपन कोरा मे सुता िलय। आब हम अिह लोक सँ उिब गेल छी!” वनदेवी सीताक गोहार धरती माता तुरत kवीकार केलिन। धरती मे तुरत दरार पिर गेलैक। जाबेत राम सीता कR रोकैथ तावेत सीता धरती मे Dवेश कऽ गेलीह। धरतीक पुLी धरती मे िवलीन भऽ गेलीह। धरती पुनः यथावत भऽ गेलीह। एखनो जखन कोनो मैिथलानी कÊ सँ भिर जाइत छिथ तऽ एकाएक हुनका मुँह सँ िनकिल पड़ैत छिन: “फाटू हे धरती”। से किहते ओ सीताक िमिनएचर भऽ जाइत छिथ। फकड़ा Dकृित सँ उÔिरत सेहो होइत अिछ। कखनोकाल जखन िkLगन अपन सँतान आ पित सँ तंग भऽ जाइत छिथ तऽ अपन तुलना काकोर सँ करैत छिथ। तिहना जेना अनेक ब—चा सबके जbम दैत काल काकोर अपन जान गमा दैत अिछ तिहना मैिथलानी सब बाल-ब—चा, पित आ पिरवार लेल अपन शरीर आ इ—छा कR गला लैत छिथ। दुखक भार बढ़ला पर बािज उठैत छिथ: “क़कोरबा िबयान क़कोरबै खाय”

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 21

मिहला मनक मनोदशा नहुँ-नहुँ अनेक तरहR फकड़ा माद Dवािहत होइत रहैत अिछ। दुख मे, सुख मे, आनंदाितरेक मे, वेदनाक सघनता मे मैिथलानी kवतःkफूत< होइत अपन पिरिkथित कR कोनो ने कोनो फकड़ा सँ जोिड़ लैत छिथ। तथाकिथत िनÙ जाित अथवा समुदायक लोक सँ ओना तऽ तथाकिथत उ—च वग<क लोक सामािजक मेल िमलापक दूरी रखैत छिथ अथवा सीिमत अवkथा मे करैत छिथ लेिकन जखन Dहसन अथवा मजाक Dदिश<त करबाक होइत छिन तऽ ओिह समाजक kLी सँ साि6पयक आक|Jा रखैत छिथ आ मय‡दाक अित“मण करबा मे सेहो सँकोच निह करैत छिथ। मिहला सेहो बुईझ लैत छिथ जे पु°खक इ—छा आ आक|Jा की छिन। जखन पु°ख मय‡दा कR ³याग करैत छिथ तऽहुनका इहो भान निह रहैत छिन जे ओ मिहला िहनका गाम अथवा समाजक Dचिलत मानदÎड पर भाउज,भावहु, पुतोहु अथवा की हेतिन! अिह Jण ओ िkLगण हुनका भाऊज सन लगैत छिन जकर बहुत मुंहतोड़ जवाब फकड़ा दैत अिछ: 'रारक बहु सबहक भौजी"

अिह दशा कR देखैत िव\ापितक एक पद Äमरण अबैत अिछ जािह मे अkपृÄय सुžिर युवतीक पित िबदेस गेल छैक, सासु बिहर तऽछैके, ओकर आँिख मे रतॱधी सेहो भेल छैक। ओना तऽसमाजक उ—च जाितक उ—च लोक, पु°ख ओकर देह सँ सटब पाप बुझैत छिथ लेिकन राित मे वएह पु°ख ओिह कािमनी सँग अपन काम िपपासा शाbत करबा लेल उताहुल छिथ, ओिह Jण लेल ओ मिहला हुनक सजाित भऽजाइत छिन: "अिधयन कर अपराधहुँ साित पु°ख महते सब हमर सजाित"

महाकिव िव\ापित आगा बढ़ैत कहैत छिथ: "भनिह िव\पित एिह रस गाब उिकतहुँ अबला भाव जगाब"

िव\ापित तऽअतेक आगा बढ़ैत ई तक बािज लैत छिथ जे लोक अनेड़े हुनका रिसक किव कहैत छिन, Dेमक-eृंगार, िमलन-अिभसार आ रिति“या कR किव कहैत छिन; असली रस तऽओ शोिषत आ अथ<हीन युवतीक दुखक बयान करब छिन। ओ अबलाक भाव कR Dदिश<त करए बला किव छिथ: "भनिह िव\ापित एिह रस गाब उिकतहुँ अबला भाव जगाब"

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 22

कखनोकाल िkथित एहेन भऽजाइत अिछ जे दद< आ भावना³मक शोषण आ दोहन सँ जखन मैिथलानी भिर जाइत छिथ, िह6मत जखन जवाब देमय लगैत छिन,माथ जखन िभžाय लगैत छिन, तखन ओ अपन भड़ास िनकलैत बजैत छिथ: "नहुँ नहुँ मुती तऽसž-सž उठय"

उपरो²त फकड़ा Dदिश<त करैत अिछ जे जखन चा° िदस सँ मोनमे नाना तरहक Óbद चलैत रहैत छिन, शोषणक अिधकता एकठाम ढ़ेर भेल जाइत छिन, एक िनि¾त अविधक बाद ओ अपन भड़ास िनकािल लैत छिथ। ओ कतऽकरतीह। लोकपटल पर लोक धारणाक हेतु। सएह करैत छिथ। एक अवkथा एहेन होइत अिछ जखन िकयोक अपन बैभव कR बारे मे अनेड़े बखान करैत छिथ, तािह Jण िकछु घोर स³यवादी मिहला कR अनेड़े फुइसक बड़ाई अथवा पदबड़ाई अनसोह„त लगैत छिन। बात जखन बहुत आगा बिढ़ जाइत छैक तऽबािज उठैत छिथ: "ग„री कहलक पटोर पिहरने रही आँिख कहलक सÛे रही"

उपरो²त फकड़ा यथाथ< आ फेकब मे अंतर kपÊ करैत अिछ। नारी मानिशकताक यथाथ< आ किnपत मानिशकता केर Óbद kपÊ करैत अिछ। एक सँ दोसरक पिरkपध‡क िववेचन करैत अिछ, समाजक मानिशकता देखबैत अिछ।

कोनो मिहला (अथवा िवशेष अवkथा मे पुŸष) जखन ©यथ<क शोर आ अनघोल करैत छिथ, अपन कृ³य (अथवा कुकृ³य) कR झपबाक य¿ मे नीक अथवा भv मिहला कR दोख तकैत छिथ तऽउिचतव²ता kवभावक मैिथलानी हुनका पर तंज कसैत बािज उठैत छिथ: "बट हगनी ने लजाय उपराग देमय जाय"

गुनमंती मैिथलानी नारीक मह³व नीक जक„ बुझैत छिथ। हुनका «ात छिन जे मायक भूिमका माL माय िनभा सकैत छिथ। िपता अथ‡त पु°ष तऽमतलबी होइत अिछ, भमरा होइत अिछ। पु°ख कR सँतित सँग प¿ी सेहो चाही। मिहला कR सँतित आगा िकछु निह। कोनो तरहक बात भेला पर पु°ख लेल िनÙिलिखत फकड़ा पढ़ल जाइत अिछ:

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 23

"माय मुइने बाप िपितया" अथ< भेल मायक मरैत मातर िपताक ©यवहार सँतानक Dित बदिल जाइत छिन। िपता दोसर प¿ी केर जोगार मे लािग जाइत छिथ। िपता कतबो क°णाशील होिथ मायक kथान लेब असँभव छिन। एक फकड़ा देखु तऽअथ< kपÊ भऽजायत:

"जे मायक दूध सँ निह हएत से बापक आंड़ चटने कतऽहएत"

ई फकड़ा जखन कखनो सुनैत छी तऽ िहंदी िसनेमाक एक गीत kवतः Äमरण आिब जाइत अिछ: "बाप का जगह म„ ले सकती है म„ की जगह बाप ले नही सकता लोरी दे नहॴ सकता सो जा सो जा" बेटी सामाbयतया मायक गुण आ बेटा िपताक गुण आ kवभाव िकछु ने िकछु kवतः  हण करैत अिछ। एकर Dमाण िनÙिलिखत फकड़ा सँ भेटैत अिछ: "माय गुण धी िपता गुण घोर निह िकछुओ तऽथोड़बो थोड़"

दोसर फकड़ा माय आ बेटीक बात करैत कहैत अिछ जे मायक गुण बेटी सहजे  हण करैत अिछ:

"भनिह िव\ापित ब„सक टोटी जकर जेहन माय तकर तेहेन बेटी"

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 24

आब पु°खक बारी अबैत अिछ आ फकड़ा कहैत अिछ जे जिहना मायक गुण बेटी करैत छिथ तिहना बापक गुण बेटा  हण करैत छिथ: "भनिह िव\ापित ब„सक टोटा जकर जेहन बाप तकर तेहेन बेटा"

मिहलाक़R जतेक अिधकार अपन पित पर रहैत छिन ततेक पुL अथवा पुLी पर निह। पितक स6पित आ टाका पर हुनका पूण< अिधकार, सव<L kवतंLता रहैत छिन,ने रोक ने टोक। लेिकन बेटाक स6पित आ रािश पर मायक अिधकार एकाएक जेना सीिमत भऽजाइत छिन। अिह बातक पुिÊ िनÙिलिखत फकड़ा सँ होइत अिछ: "सइय| राज अ° राज बेटा राज मुहतककी"

िपतृसा³मक समाजक सँरचना लोकक मोन मे ई धारणा kथािपत कऽदेने अिछ जे बेटी आ बेटीक लोक - पित आ पुL - आन होइत अिछ, अपन निह। यएह बात फकड़ा सेहो kथािपत करैत अिछ। िनÙिलिखत फकड़ा देखला सँ ई बात नीक जक„ फ़िरछा जाइत अिछ: "धी, जमैÜया भिगना ई तीनू ने अपना"

मैिथलानी सेहो सहज मोन सँ एकरा kवीकार कऽलैत छिथ। वैधवयक जीवन बहुत दुःखद होइत रहल अिछ। महादेब बर, भंिगया िभखारी Dवृिक वर सदैव मैिथलानी कR िवशेष Ÿप सँ ÇाÈण बािलका कR भेटैत रहलिथbह अिछ। बेमेल िबआह एखनो कतौ-कतौ दृिÊगोचर होइत अिछ। हालिह मे हम एक िववाह मे गेल रही। लड़की बहुत सुbदिर, देहगिर, कटगर, देखनूत रहैक। लड़का किन दब। ऊपर सँ एक हाथ मे किन समkया। राित भिर कतेक बेर िkLगण सब चािर पंि²त केर गीत गबैत रहली आ प¾ाताप करैत रहलिन। गीतक दू पंि²त हमरा जीवन भिर लेल kमरण भऽगेल जे फकड़ा जक„ ©यवहिरत होइत रहैक: "लोहा मे जिड़ गेल सोना

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 25

हम िजबै कोना" «ात©य इ जे अतए लोहा बर आ सोना किनया छैक। Dसँग िवधवाक छल। चलू अिह िदशा मे चच< करैत छी। वैध©यक िkथित बहुत खराप होइत छल। अगर इ घटना ÇाÈण अथवा कण< कायkथ अथवा आन उ—च वग< मे होइत छल तऽ िkथित भयावह भऽ जाइत छल। बारह, तेरह, पbvह वष<क लड़की िवधवा कतेक ठाम भऽ जाइत छिल। िवधवा होइतिह पुनिव<वाहक तऽ कnपनो निह कएल जा सकैत छल, उपर सँ ओिह लड़कीक सब सुख-िसंगार, नीक भोजन आिद छीना जाइत छलैक। कतेक ठाम तऽ िवधवा कR अं ेजी दबाई तक  हण करबाक आज़ादी निह छलैक। ओकरा सुगिधत तेल, साबुन, आिदक ©यवहार करब पर Dितबंध लािग जाइत छैक। ओ केश िवbयास निह कऽ सकैत अिछ, नव ©याहल बर किनयाक चुमान करब तऽ दूर, ओकरा लग ठाढ़ तक निह भऽ सकैत अिछ। जेिहना Dथम स|झ मे असगर तारा देखब अशुभक ल×ण अिछ तिहना तऽ िवधवा सेहो आब असगर तारा बिन गेल छिथ! समkत हाहाकार मचल अिछ। यएह िkथित कR देखैत िव\ापित िलखैत छिथ: “असगर तारा केओ निह देख अमंगल लेख”

िवधबा पर Dितबंधक झड़ी लािग जाइत छिन। ¢याज-लहसुन, माछ-म|स के पुछैत अिछ गिरÊ भोजन तक करबाक आज़ादी निह रहैत छिन। हुनक जीवनक ऋतुच“ जेना एक रंगाह भऽ जाइत छिन जािह मे सब ठाम दुखक डंका बजैत रहैत छैक! िनÙिलिखत फकड़ा के देखला सँ िkथित kपÊ भऽ जाइत छैक:

“िवधवा घर मे सभ िदन भादब िनरधन घर मे काितक राजा घर मे सभिदन अगहन फागुन घर अिहबाितक”

अिह तरहक िवपिक सामना करैत िवधवाक करेज करािह उठैत छैक। कुहेस फािट कानए लगैत अिछ। आ भगवान सँ कहैत छिन कोन पापक कÊ ओ भोिग रहल अिछ? ओ अपन वेदना ककरा कहतैक: “हे भगवान कोन कसूर िवधना भेल बाम कहब दुःख ककरा सँ”

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 26

एकर िवपरीत पु°ख लेल कोनो Dितबंध निह। प¿ीक िनधन भेलाक बाद ओ सब िकछु खा सकैत अिछ। फेरो िबआह कऽ सकैत अिछ। प¿ी मरलैक तऽ की भेलैक! फेर दोसर िबआह भऽ जेतैक। दोसरो प¿ी मिर गेलैक तऽ िचंताक कोनो Dयोजन निह, फेरो िबआह भऽ जेतैक! प¿ीक िkथित अखरा नोनक ढेप सन होइत छैक – खिस पड़ल तऽ उठा िलय: “नोनक ढेप खसल उठा लेब” अित वृिÊ आ अनावृिÊ सँ िमिथला अदौ सँ परेशान रहैत आिब रहल अिछ। लोक भूखे रहैत छल। िkLगणक दशा तऽ आरो दयनीय छलिन। ओ बाहर जा निह सकैत छलीह। भीख कोना मंगती? कखनो कुअž, कखनो साग पात, कतेक स|झ उपास करैत जीवन चलबैत छलीह। अिह तरहक िkथितक िवभ³सता दश‡ रहल अिछ िनÙिलिखत फकड़ा: “िबपि जािन के आनल बजाय अिरपन के चाउर गेली िचबाय” िkथितक गंभीरता देखू। घर मे िkLगन नाना तरहक कÊ सहैत रहैत छिथ। अतेक खाराप िkथित भऽ जाइत छिन जे अिरपन लेल जे चाउर राखल छिन सेहो िचबा जाइत छिथ। कोनो मिहला कR अगर िकयोक अनेड़े मजाक अथवा तंग करैत छिन आ हुनका लग काजक, मूलŸप सँ गृहकाय<क तऽ ओ बािज उठैत छिथ: “घरबला सँ फुरसत ने देओर म„गए चु6मा” बाल िववाह एक समय मे बहुत पैघ समkया बिन गेलैक। बेमेल िववाह जेना पसिर रहल छलैक। तकर िववरण कोना फकड़ा दैत अिछ से देखू: “ितिरया तेरह, मरद अठारह कbयाक चमकए आँिख, िबआह होअय तमाम छौड़ी बेर-बेर देखए अएना” एक फकड़ा इ इंिगत करैत अिछ जे कोना मिहला कुअž खा अपन Dाणक रJा करैत छिथ आ कोना बूढ़ सँ िबआह कए िबआहक पितया छोड़ा लैत छिथ: “गुडा-खुÞी खेलॱ उपास भंग भेल

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 27

बूढ़ िबआहलक कुमािर पद गेल” बेमेल िववाहक पिरिणित नीक निह होइत छैक। िkLगन जीवन पय<bत ओिह वेदना आ सामािजक उपहासक पाL भऽ जाइत छिथ। अनेड़े हुनका सँ पैघ उमेिर कR लोक- kLी आ पु°ख सब हुनका जेठ किह अपमािनत करैत छिन।एहने मनोदशाक िचLण िनÙिलिखत फकड़ा मे देखाएल गेल अिछ: “हम निह बूिढ गे हम निह बूिढ बूढबा िबआहलक त हम बूिढ” अथ< kपÊ अिछ, ओ मिहला बूिढ निह छिथ, पिरिkथित जािह करणे हुनक िववाह बुढ़बा सँ भऽ गेल छिन तािहं ओ बूिढ छिथ। उपरो²त फकड़ा नारी मनोदशाक ओिह िवशेष अवkथाक गूढ़ मनोवै«ािनक स6Dेषण छैक। नारी मनोदशाक अनेक परत होइत छैक। अपन कÊक स6Dेषण एक मिहला लोक माL मे लोक ©यवहार माL सँ कऽ सकैत छलीह। लोक ©यवहार हुनका लेल œलैकबोड< छलिन। ओ माL हुनक kपेस छलिन। मिहला लोक आ िकछु पु°ष ब—चा माL हुनक eोता। वेदनाक अिधकता सँ जखन करेजक कुहेस फाटैत छिन तऽ kLीक द§धल छाती सँ eाप िनकलैत छिन: “जे मोरा खेलिन खीिरया पुिरया ितनको होइहनु नाश” आर ओ की कऽ सकैत छलीह। हुनका लगैत छिन जे पु°खक एहने कुकृ³य, अहँकार, िनरंकुश ©यवहार सँ संसार मे अकाल, महामारी आिद भऽ रहल अिछ। इ बात लोक सँ कखनोकाल मैिथली सािह³य मे सेहो अपन kथान बना लैत अिछ। बै\नाथ िमe “याLी” आ काशीक|त िमe “मधुप”क रचना मे लोक जेना चिढ़ कऽ बजैत हो! लोक भाव सािह³यक Dबल पJ बिन उठैत अिछ। याLीक कलम नोर आ शोिणतक धार बहबए लगैत अिछ। नारी आ िवधवा मनोदशा मे जेना ओ तह धिर घुइस जाइत छिथ। एक-दू-सौ-सैकड़ा कR पुछैत अिछ, हजारक हज़ार िवधवा हुनक माथ पर अपन ©यथा लेने सवार भऽ जाइत छिन। “िबलाप” किवता मे याLी स³यक अbवेषण करैत किवता िलखैत छिथ। यथाथ< चार चिढ़ बाजय लगैत अिछ। कR निह कनैत अिछ! पाठक, समाज आ किव सब बहाबैत अिछ नोरक धार: “िवधवा हमरे सन हज़ारक हज़ार बहौने जा रहिल अिछ नोरक धार ओिह मे ई मुलुक डूिब ब° जाय ओिहमे लोक-वेद भिसया ब° जाय

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 28

अगड़ाही लगौब° बß खसौ एहेन जाित पर ब° धसना धसौ भूक6प हौक ब° फटो धरती म„ िमिथले रिहये क’ की करती!” याLी निह °कैत छिथ दोसर-तेसर-चािरम िववाह करयबला बूढ़बा बर सब पर कलम उठा लैत छिथ। अ§गब सामािजक कुरीित पर Dहार करैत रहैत छिथ। नारी शोषण कR पाठक हेतु पढबाक साम ी बनबैत छिथ। हुनक दोसर किवता “बूढा वर” सेहो एकर Dमाण अिछ। मुदा िkLगन अपन बात ताबेत धिर लोक पटल माL पर करैत रहलिन। जिमbदारक शोषण सँ तंग भेल बुचनीक Dितिनिध बिन अपन अमर रचना “घसल अठžी” मे मधुप बुचनीक मुँह सँ कहा लैत छिथ जे शोषण आ अbयाय कR चलते जगत मे भऽ रहल अिछ अकाल। इ लोकक अिभ©यि²त निह तऽ की भेल? घसल अठžी केर बुचनी डरल ज°र रहैत छैक लेिकन अपन बात आ eाप दुनू ©य²त करैत अिछ: आहा! देह तोिड़ क’ कएल काज सुपथो न बोिन अिछ भेटी रहल त जगमे ई पड़लै अकाल उठिबतिहं डेग लागए अbहार मिर जाएब एतइ ककरा कहबै? िहत ²यो ने हमर अनुिचतॲ पैघ जनके शोभा भगवान आह!” मधुप नारी शोषण कR देखैत छिथ, अनुभव करैत छिथ, अपन ±दय मे ओिह पिरिkथित कR आ³मसात करैत छिथ, आ कलम हुनका िkLगणक kपोकपस<न बना दैत छिन। किवता बिन पड़ैत अिछ।

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 29

मैिथली लोक पर6परा मे फकड़ा अनंत अिछ – िवपुल िनिध जक„। कतबो तािक लेब तैओ बहुत रिहये जाएत। लेिकन लोक ©यवहार मे ताकब तऽ कोनो िनरथ<क निह लागत। इ भेल फकड़ाक Dयोजन आ उपयोिगता। जखन मिहला कोनो वेदना सँ vिवत होइत छिथ आ हुनक बात िकयोक निह बुझैत छिन तऽ अनायास बािज उठैत छिथ: “गुड़क मािर धोकड़े बुझैत अिछ” इ फकड़ा कतेक साथ<क छैक तकर अनुभूित या तऽ मिहला कऽ सकैत छिथ अbयथा ओ जे नजदीक सँ ओिह वेदनाक D³यJदश’ रहल अिछ। िकछु एिह तरहक भाव िनÙिलिखत फकड़ा मे कहल गेल छैक: “समाठक माइर उखैरे बुझैत छै” kमरण इहो राखब ज°री जे सब भाव अधलाहे निह होइत छैक। मनोदशा Dेमक सेहो होइत छैक। लोक जखन अिधक उिधयाइत अिछ तऽ कहल जाइत छैक: “िटटही टेकल पहाड़” अथ< भेल अपन औकात सँ अिधक ने बाजी ने करी। कतेकबेर पित प¿ी अथवा िकयोक आर अपन kवयम कR जीवन आ Dेम अथवा ©यवkथा मे अतेक लीन भऽ जाइत छिथ जे हुनका दोसरक जीवन अथवा सामािजक मय‡दा केर भान ख³म भऽ जाइत छिन। एहन लोक लेल िनÙ फकड़ा कतेक सटीक होइत छैक: “हम सुनरी की िपया सुनरी गामक लोक बनरा बनरी” उदाहरण अनेक अिछ – बहुत अ«ात आ कतेको «ात। सबहक समावेश केनाइ पहाड़ सन लगैत अिछ। एिह पर गंभीर काज करक दरकार छैक। इ िवषय अनंत महासागर जक„ अिछ। अिह पर सािह³यक अितिर²त समाजशाkL, मनोिव«ान, नारीवाद िव«ानं, मानवािधकार, मानवशाkL, राजनीितशाkL, इितहास आिदक शोधकम’ के िविभž उदेÄय आ पिरकnपना संग काज करक चाही। इ एक अलग संसारक रचना कऽ सकैत अिछ। हमर आलेख कR अनंत महासागर मे खसल िकछु बुंद माL मानल जा सकैत अिछ जकर समय पड़ला पर अपन उपयोग भऽ सकैत अिछ।

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 30

सbदभ<: िमe, कैलाश कुमार (2017). “मैिथली लोकगीतमे नारी-दुद<शाक िचLण”, घर-बाहर , वष< 17, अंक 61, जुलाइ-िसत6बर: 11-17. िमe, कैलाश कुमार (2018). “िमिथलाम अथ‡त लोक सँkकृित: एक पिरचय” तीरभुि²त , वष< 1, अंक 1, जुलाइ-िसत6बर: 29-35। िमe, पंचानन (2017). “मैिथली लोकोि²तमे kLी-जीवन”, घर-बाहर , वष< 17, अंक 61, जुलाइ-िसत6बर: 18-20. वम‡, रामचbv (2009). लोकभारती बृहत् Dामािणक िहbदी कोश . िदnली: लोकभारती Dकाशन. याLी, बै\नाथ िमe (--). “िबलाप”, किवता कोश : kavitakosh.org याLी, बै\नाथ िमe (--). “बूढ़ा वर”, किवता कोश : kavitakosh.org मधुप, काशीक|त िमe (---) “घसल अठžी”: गजेbv ठाकुरक सँ किवता भेटल

[1] डॉ कैलाश कुमार िमe मानवशाkL, समाजशाkL, मानवािधकार, फोकलोर(लोकिव\ा) आ कला इितहास कR िविभž पJ पर kवतंL लेखन करैत छिथ; अं ेजी, मैिथली आ िहंदी तीनू भाषा मे िलखैत छिथ। भारत सरकार कR kवाkÌय आ पिरवार कnयाण मbLालय[Department of Population Genetics and Human Development (PGHD), National Institute of Health and Family Welfare]; संkकृित मbLालय [Indira Gandhi National Centre for the Arts], अंतर‡´¥ीय संगठन[South-South Solidarity; Society for Health Education and Learning Package (HELP); UNESCO; UNDP; READ Global ] आिद मे 27 वष< सँ िबिभž शोधपरक आ तÌयपरक काज करबाक अनुभव छिन। यूिनविस<टी ऑफ़ नेÇाkका (The University of Nebraska), जयपी यूिनविस<टी ऑफ़ टेâोलॉजी (Jaypee University of Information Technology), एिमट ी

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 31

यूिनविस<टी (Amity University),िkवनबन< यूिनविस<टी ऑफ़ टेâोलॉजी(Swinburne University of Technology), गु° गोिबंद िसंह इbvDkथ यूिनविस<टी (Guru Gobind Singh Indraprastha University) केर बहुत रास अकादिमक आशोध काज मे संल§न छलाह। िहनक लगाव भारतक लोक कला, मूत< आ अमूत< कला,  ा6य आ आिदवासी जीवन, सामािजक पािरिkथितकी आ जीवन तंL, जडर िडkकोस<, मानवािधकार, सामािजक िवकास, संkकृित के अनेक पJ, इितहास आ सािह³य सँ छिन।स6Dित Çैनकोठी आ आर.आइ.आर.के.सी.एल.आर.सी. केर चेयरमैन छिथ आ िकछु संkथा सभक kवतंL कंसnटसी करैत छिथ. डॉ िमe मैिथली-भोजपुरी अकादमी िदnली कR सदkय सेहो छिथ। िहनक स6पक<: Dr. Kailash Kumar Mishra, Chairman- Brainkothi; B-2/333, Tara N agar, Old Palam Road, Kakrola, Sector 15, Dwarka, New Delhi 110078. Mob: +918076208498, Email: kailashkmishra@gmail.com

ऐ रचनापर अपन म ◌ंत©य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। १. आशीष अनिचbहार - िहंदी िफnमी गीतमे बहर -४ २. मोहनराज "गगन "- बीहिनकथा १ आशीष अनिचbहार िहंदी िफnमी गीतमे बहर -४ गजलक मतलामे जे रदीफ-कािफया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा न¡ममे ई कोनो जŸरी नै छै। एकै न¡ममे अनेको कािफया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो अलग भ' सकैए संगे-संग न¡मक शेरमे िबनु कािफयाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत न¡ममे गजले जक„ एकै बहरक िनव‡ह कएल गेल अिछ। मैिथलीमे बहुत लोक गजलक िनयम तँ निहए जानै छिथ आ तािहपरसँ कुतक< करै छिथ जे िफnमी गीत िबना कोनो िनयमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पिहल जे न¡म लेल बहर अिनवाय< नै छै आ जािहमे छै तकर िववरण हम एिह ठाम द' रहल छी----------------- १ "शराबी" िफnम केर ई न¡म जे िक िकशोर कुमारजी Óारा गाएल गेल अिछ। न¡म िलखने छिथ Dकाश मेहारा। संगीतकार छिथ ब¢पी लािहड़ी। ई िफnम 1984 मे िरलीज भेलै। एिहमे अिमताभ ब—चन, जयाDदा आिद कलाकार छलिथ।

मंिज़लॲ पे आ के लुटते, ह® िदलॲ के कारव„ किÄतय„ सािहल पे अ²सर, डूबती है ¢यार की

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 32

मंिज़ल अपनी जगह ह®, राkते अपनी जगह जब कदम ही साथ ना दे, तो मुसािफर ²या करे यूं तो है हमदद< भी और हमसफ़र भी है मेरा बढ़ के कोई हाथ ना दे, िदल भला िफर ²या करे

डूबने वाले को ितनके का सहारा ही बहुत िदल बहल जाए फ़क़त इतना इशारा ही बहुत इतने पर भी आसम| वाला िगरा दे िबजिलय„ कोई बतला दे ज़रा ये डूबता िफर ²या करे

¢यार करना जुम< है तो, जुम< हमसे हो गया कािबले माफी हुआ, करते नहॴ ऐसे गुनाह तंगिदल है ये जह| और संगिदल मेरा सनम ²या करे जोशे जुनूं और हौसला िफर ²या करे

एिह न¡मक सभ प„ितक माLा“म 2122 2122 2122 212 अिछ। बहुत काल शाइर गजल वा न¡मसँ पिहने माहौल बनेबाक लेल एकटा आन शेर दैत छै ओना ई अिनवाय< नै छै। एिह न¡मसँ पिहने एकटा शेर "मंिज़लॲ पे आ के लुटते, ह® िदलॲ के कारव„" (एहू शेरमे इएह बहर छै) माहौल बनेबाक लेल देल गेल छै। एकर त²ती उदू< िहंदी िनयमपर कएल गेल अिछ। उदू<मे "और" शœदक माLा िनध‡रण दू तरीकासँ कएल जाइत छै "और मने 21" आ "औ मने 2"। एिह न¡मक संगे आन न¡म लेल ई मोन राखू। जŸरी नै जे ई िनयम मैिथली लेल सेहो सही हएत।अंितम बंदक दोसर प„ितक अंितम शœद अिछ "गुनाह" जािहमे एकटा लघु अितिर²त अिछ। ई छूट उदू< गजलक संग मैिथली गजलमे सेहो अिछ। २ "मदहोश" िफnम केर ई न¡म जे िक तलत महमदूजी Óारा गाएल गेल अिछ। न¡म िलखने छिथ राजा महदी अली खान। संगीतकार छिथ मदन मोहन। ई िफnम 1951 मे िरलीज भेलै। एिहमे मनहर (देसाइ), मीना कुमारी आिद कलाकार छलिथ।

मेरी याद म तुम न आँसू बहाना न जी को जलाना, मुझे भूल जाना समझना के था एक सपना सुहाना वो गुज़रा ज़माना, मुझे भूल जाना

जुदा मेरी मँिज़ल, जुदा तेरी राह िमलगी न अब तेरी-मेरी िनगाह

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 33

मुझे तेरी दुिनया से है दूर जाना

ये रो-रो के कहता है टूटा हुआ िदल नहॴ हूँ म® तेरी मोहœबत के कािबल मेरा नाम तक अपने लब पे न लाना न जी को जलाना, मुझे भूल जाना

एिह न¡मक सभ प„ितक माLा“म 122 122 122 122 अिछ। एकर त²ती उदू< िहंदी िनयमपर कएल गेल अिछ। ई बहर संkकृतमे सेहो भुजंगDयात (माLा“म 122+122+122+122) केर नामसँ छै। उदू<मे एकरा “बहरे मोतकािरब मोस6मन सािलम” कहल जाइत छै। एिह बहरपर बहुत नीक रचना अनेक भाषामे रचल गेल छै। Dसंगवश एिहठाम हम गोkवामी तुलसीदास जीक ई रचना (°vाÊकम्) द' रहल छी.............

नमामीशमीशान िनव‡णŸपं िवभुं ©यापकं ÇÈवेदkवŸपम् | िनजं िनगु<णं िनिव<कnपं िनरीहं िचदाकाशमाकाशवासं भजेङहम् ||१||

एिह °vाÊकम् केर छंद भुजंगDयात अिछ। एकरा एना देखू.. नमामी 122 शमीशा 122 न िनव‡ 122 णŸपं 122 आन प„ित सभकR एनािहते देिख सकैत छी। हमरा Óारा िलखल एिह िसरीजमे तेरे ¢यार का आसरा चाहता हूँ, तेरी याद िदल से भुलाने चला हूँ, बहुत देर से दर पे आँख लगी थी सन न¡म एही बहरपर अिछ। ३ "िखलौना" िफnम केर ई न¡म जे िक लता मंगेशकरजी Óारा गाएल गेल अिछ। न¡म िलखने छिथ राजा आनंद बशी। संगीतकार छिथ ल×मीक|त ¢यारे लाल। ई िफnम 1970 मे िरलीज भेलै। एिहमे संजीव कुमार, मुमताज, िजतेbv, शLुç िसbहा आिद कलाकार छलिथ। ई िफnम गुलशन नंदाजीक उपbयासपर आधािरत अिछ।

अगर िदलबर की °सवाई हम मंजूर हो जाये सनम तू बेवफ़ा के नाम से मशहूर हो जाये

हम फ़ुस<त नहॴ िमलती कभी आँसू बहाने से कई ग़म पास आ बैठे तेरे एक दूर जाने से अगर तू पास आ जाये तो हर ग़म दूर हो जाये

वफ़ा का वाkता देकर मुहœबत आज रोती है

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 34

न ऐसे खेल इस िदल से ये नाज़ुक चीज़ होती है ज़रा सी ठेस लग जाये तो शीशा चूर हो जाये

तेरे रंगीन हॲठॲ को कमल कहने से डरते ह® तेरी इस बे°ख़ी पे हम ग़ज़ल कहने से डरते ह® कहॴ ऐसा न हो तू और भी मग़Ÿर हो जाये

एिह न¡मक सभ प„ितक माLा“म 1222 1222 1222 1222 अिछ। एकर त²ती उदू< िहंदी िनयमपर कएल गेल अिछ। उदू<मे दू दीघ<क बीच बला संयु²ताJरकR एकटा लघु मािन लेबाक छूट सेहो छै मुदा ई मैिथली सिहत आन आधुिनक भारतीय भाषामे निह भेटत। एिह न¡मकR सुनलाक बाद सेहो बुिझ सकबै जे "ए" केर उ—चारण "इ" मने "एक" केर उ—चारण "इक" जक„ छै आ ई उदू<क िविशÊता छै।

२ मोहनराज "गगन " बीहिनकथा "हिरयाणा पंजाबमे फेर अिह बेर कोट< रबािस फोरबाक समय सीमा िनदÚिशत कएने छैक कथी लँ कीन रहल छह?" राजेश अपन दोस राजू सँ। "िपछला बरख सेहो िदnली मे बž कएने रहैक मुदा कहा मानै छैक लोक" "कथी लोक मानते होली मे इकोéडली होली! िदयावाती मे शुÅ बसात केर नाम पर िबन रबािसक िदयावाती अिकल सभटा िहbदू पर छजै आिक आआरो कतौ..? "हँ होऊ िवयाह मुरन िहंदुkतान पािकkतान केर मैच उपनयन सभमे ठीक मुदा िदयावाती मे «ान तखन की कहूँ" "kवkथ हवामे स|स लेब' के नR चाहइ छैक मुदा माL िदयावाती मे रोिक..? रबािसक कारखाना बž क' न दौऊ" "चलु छोड़ू नR कीनब कोट<क आदेश छैक मुदा पराली जरा शुÔ हवा ब„टबाक Dयास सेहो kवीकार नR" "से बž ने हेतैए नाक रगिड़ मैिर जाऊ" उदास होइित दुनूगोटे मुँह हप कएने बैिस गेल।

ऐ रचनापर अपन मंत©य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 35

३. प\ ३.१. राकेश कण<- सृजन ३.२.१.Dभाष अिकंचन- महाकिव लाल दास २. कुमोद रंजन चौधरी ३.३.१.इbvकाbत लाल- कwा तोर अंगना २.संतोष कुमार राय 'बटोही' -दू टा किवता ३.४. जगदीश चbv ठाकुर ’अिनल’- १ टा गीत आ २७ टा गजल राकेश कण< सृजन अपन लेखनीक संग एकसिर संवेदना साझी करैत अह| िबसिर जाइत छी सभटा कटु वृिÊ आ लोक-बेद

अंितम अÀयाय धिर पहुँचबा लेल िलखैत छी अह| िचर अ\तन भूिमका

िबसिर जाइत छी िबड6बनाक अनु“म िकएक िक अह| अeुक kयाही सँ रंग भर' चाहै छी सम  वेदना-Dसंग आ पाL मे

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 36

अह| ईहो त' नै िबसिर सकैत छी जे िचर पुरातन कथा सँ फराक होइते सगरो होइछ जज<र परंपराक व“ दृिÊ

मुदा जँ अह| रच' चाहै छी धवल पिरवेश तँ तािह लेल एकटा पारदश’ आरेख खॴच' पड़त ओझरायल रेखाक समान|तर ...

ऐ रचनापर अपन मंत©य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। १.Dभाष अिकंचन - महाकिव लाल दास २. कुमोद रंजन चौधरी

उठु मैिथल चलु मैिथल १ Dभाष अिकंचन महाकिव _लाल _दास महाकिव पंिडत लाल दास वीरे-तारालाही खडौआ-वास

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 37

मैिथली-सािह³यक आकाश-दीप आइओ फहराईत उ—चाकाश

जbम-काल अठारह सौ छ¢पन मैिथली-“„ितक पडल अिरपन कुशा -बुिÔक अ दश’ सपूत िखलल आंगन दास बचकन

संkकृत फारसी मैिथलीक जानकार महाराज दरभंगाक िDय पेशकार Dशासिनक कौशल म Dवीणतम «ान Dितभाक अëुत अवतार

सािह³य-सृजनक' कएल भंडारण रमेªर-चिरत जानकी-रामायण चÎडी-चिरत सािवLी-स³यवान kLी-िशJा सम अतुल का©यायन

उžैस सौ एकैस म महाDयाण ओिह महामानव के कोिट-Dणाम अिकंचन कलमस' उ—चभावयु²त कायkथ-ऋिषक शत-शत स6मान २ कुमोद रंजन चौधरी

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 38

उठु मैिथल चलु मैिथल

उठु मैिथल चलु मैिथल पाìचजbय के Dयोग कŸ हुंकार भŸ शंखनाद स अपना लेल अपने िकछ काज कŸ िमिथला के गौरब गाथा जूनी खाली बखान कŸ इितहास बैन गेला मैिथल कनी अपन इितहास पढू जनक बाबा कैन रहल छैथ देख िमिथला के दूरदाशा कोना मैिथल िवषैर रहल छैथ अपन बोली अपन िमठगर भाषा उठु मैिथल चलु मैिथल ...... .....…...... िमिथला लेल ज मैिथल नई बजता अजु<न बैन ज गाÎडीव नई धरता कलजुग छी ई सुइन िलय यौ मैिथल अहा के लेल िक कोनो कृ´ण ओता संघ म शि²त कलयुग के गुण छै ई बुझबै लेल िक अहा के गौतम ओता

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 39

उठु मैिथल चलु मैिथल .....

गाम घर सब खाली भ गेल खेत खिलहान सब गाछी भ गेल टुकुर टुकुर बाट तकैत छैथ बड़की काकी बुड़बा काका गप करै लेल लोग तकैत छैथ िनत्य एwे चच< करइ छैथ सब स पुछिथन किहया ओता बड़का बौवा आर नुनु ब—चा

उठु मैिथल चलु मैिथल ..... िनमी के िमिथला िमिथ के िमिथला नेतागण एकरा नोइच खेला जेकरे देखु बुिधयारे बढ़ छैथ चैर गोटे नई कखनो एक संग रहै छैथ िनज kवाथ< म सब डूइब जीबैत छैथ अपने स अपने सब लैर मंरै छैथ उठु मैिथल चलु मैिथल .... ...........

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 40

जाही ठाम Dगट भेली सीता मैया हमहू सब त छी जbमॲटी वैदेहीया पेट रोटी लेल बौख रहल छी बैन क सब परदेिशया भैया गामक आम काकी बला गाछी बढ़ मोन होइ अइछ जै हाटक गाछी गाम स दूर िक कोनो जीब रहल छी मोन मैर क बुझु त कैन रहल छी उठु मैिथल चलु मैिथल - कुमोद रंजन चौधरी  ाम- िवîगर Dखंड- पंडौल िजला - मधुबनी

ऐ रचनापर अपन मंत©य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। १.इbvकाbत लाल- कwा तोर अंगना २.संतोष कुमार राय 'बटोही' -दू टा किवता १ इbvकाbत लाल कwा तोर अंगना कwा तोर अंगना, म„छ गम गम करौ 2 तोर अंगना।

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 41

रेहु बुआर िछयह आ की भूžा 2 खुएबह पड़ोिसया के 2 फल दुना कwा तोर अंगना...................

दुनू बापूत िमिल बैसल म|झ अंगना 2 हमर ताड़ी हौ 2 तोहर िचखना... कwा तोर अंगना.............

खेने िपने मkत रहऽ बनल भोकना 2 औिथन काकी तं 2 खइयह बेलना... कwा तोर अंगना... म„छ गम गम करौ तोर अंगना। २ संतोष कुमार राय 'बटोही' -दू टा किवता

१ कनफुkसी िबगाड़लक घर

मोन होइए की कŸ की बनाउ की धŸ देह कँपैए थर<-थर< कनफुkसी िबगाड़लक घर

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 42

माए गै कोना बसब सासुर तरकाई भेलै मँहग मँहग भेलै एkनो-पाउडर कनफुkसी िबगाड़लक घर

खाता खोला क कोनहु फैदा निह भेल जे टका आयल से गेल सासु लड़ैत अिछ स„झ-िवहंसर कनफुkसी िबगाड़लक घर

ननिद मुँह फूलौने रहैत अिछ नीक िनकुत सभ अपने खैए मारै लेल छुटैए देवर कनफुkसी िबगाड़लक घर

अतेक पढ़ौल®ह आई ए-बी ए आब चुïी िनपबैत अिछ पथाबैए गोबर

कनफुkसी िबगाड़लक घर

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 43

िपया कमैए परदेश इ जबानी मे आिग लगलै के बुझतै दरिदया हमर कनफुkसी िबगाड़लक घर

२ नौकरी

मोन निह होइए नौकरी कŸ हम कमैत छी दोसर खाइए एको टा टाका निह बचैए घरवाली एतेक रास कहैए

देवता-िपतर पूजलहुँ बाबाधाम क„विरया बिन गेलहुँ िदन दूना राित चौगुना सरकारी अफसर करैत अिछ जोड़-घटाव-गुणा

निह पढ़लहुँ तकर साफल भोगैत छै िदnली,मुंबई,पंजाब खटैत छी

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 44

हम कमैत छी त® हम नौकर उ हीरो कहाबैत अिछ हम जोकर

कारखाना मे काज कके टी बी भेल गुटखा खाके क®सर भेल दोसर कR◌ँ नौकरी कके खून पािन भेल की कहू, की की निह भेल

इ बड़का मकान मे हमरो िहkसा छै इ ब®कक टाका मे हमरो िहkसा छै इ कारखाना म हमरो िहkसा छै इ गाड़ी मे हमरो िहkसा छै

यौ उ\ोगपित मजदूरी निह, हमरा िहkसा चाही बिड़ हम सहलहुँ अह„ केर मािर-गािर बिड़ भेलै नौकर-मािलक केर खेल

संतोष कुमार राय 'बटोही'  ाम-मंगरौना

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 45

पोkट-गोनौली Dखंड-अंधराठाढ़ी अनुमंडल-झंझारपुर िजला-मधुबनी िबहार-847401

ऐ रचनापर अपन मंत©य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। जगदीश चbv ठाकुर ’अिनल ’ १ टा गीत आ २७ टा गजल १ गीत छागर कटैत रहलै कनैत कलपैत रहलै भगवती Dसž भ’ गेलीह लोक सभ बुझैत रहलै |

पर6पराक मंचपर ह³याक खेल बाघकेर बिल किहयो ने देल गेल

ढोल-िपपही बजैत रहलै आ नटुआ नचैत रहलै भगवती Dसž भ’ गेलीह लोक सभ बुझैत रहलै |

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 46

स³य आ अिहंसाक «ान मौन भेल भिर ग„ तमाशा देखैछ ठाढ़ भेल

िलधुर जे बहैत रहलै बखरा लगैत रहलै भगवती Dसž भ’ गेलीह लोक सभ बुझैत रहलै |

कहलिन जे बुÔ, महावीर आिबक’ सुतलोमे सिदखन रहू जािगक’

िहंसा जे होइत रहलै िवपदा अनैत रहलै भगवतीक आँिखकेर नोर ²यो निह देखैत रहलै|

माउसक Dसाद मािन लेल हष<मे िवषाद सािन देल

धरती फटैत रहलै ¥ेन पलटैत रहलै नभमे ई ©या¢त ची³कार

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 47

मौत बिन अबैत रहलै | गजल १ क„ट हटयबामे लागल छी बाट बनयबामे लागल छी

आठ बजै छै सभ सूतल छै साफ़ करयबामे लागल छी

काज कनी किरयौ यौ बौआ ढोल बजयबामे लागल छी

लोक लगा देने छै झगडा आिग िमझयबामे लागल छी

भाइ कनी अनको िदस तिकयौ पाइ कमयबामे लागल छी

छ„ह कमल जाइछ धरतीपर गाछ लगयबामे लागल छी

पाप बहुत बढलै दुिनयामे Dेम बढयबामे लागल छी

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 48

माLा “म : 22222221 कौआक कौआ किह देल बूझू बड़का गलती भेल

एके घरमे सबहक बास नै ककरो ककरोमे मेल

मरला बहुतो जन महगीसँ आ हुनकर वेतन बिढ गेल

जुिन पूछू बौआ हमरासँ दािल कते िदन खेना भेल

सोचै छी जीवन की थीक सीढी आ स„पक बस खेल

धीया पूता िबनु ई महल हमराले’ बूझू अिछ जेल (चािरम शेरक दोसर प„ितमे दूटा लघुक दीघ< मानबाक छूट लेल गेल अिछ)

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 49

३ माLा “म : 21-12-222 नोर गरम पीबै छी भा§य अपन लीखै छी

टीक अपन नोचै छी माथ अपन पीटै छी

सोर कŸ ककरा हम ठोर अपन सीबै छी

गाछ बनत बड़का ई बीज ई जे छीटै छी

जोर घटल जाइत अिछ ब„स जक„ लीबै छी

बाउ अह„ करबै की सभक पता टीपै छी

गीत गजल सीखू ने गािर िकए सीखै छी (चािरम शेरक दोसर प|ितमे

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 50

एक टा दीघ<क लघु मानबाक छूट लेल गेल अिछ )

४ माLा “म : 2121-22-221 बात एक लागू सभ ठाम चोर और साधू सभ ठाम

काज काल पाछू रहताह भोज बेर आगू सभ ठाम

पाप थीक म„गब ककरोसँ से िधयान राखू सभ ठाम

बूढ-सूढ भूखल ने रहिथ घूिर-फीिर ताकू सभ ठाम

बात-बात पर जुिन तमसाउ मीठ-मीठ बाजू सभ ठाम

Dेम थीक बड़का उपहार बेर-बेर ब„टू सभ ठाम

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 51

िकछु िलखबाले’ िकछु पढबाले’ सिदखन ताकू िकछु करबाले’

चानो आकाशक कहइत अिछ शीतलता सभठ„ बँटबाले’

²यो जाइत अिछ ²यो अबइत अिछ िनत नव-नव पथपर चलबाले’

देखल दुिनयामे सभ नाटक िकछु हँसबाले’ िकछु कनबाले’

फूलो सभ िदन नव-नव फूलय जीवनमे क°णा भरबाले’ ६ फ„ड़ बािbहक ’ सोझ बाटपर चलबाले’ बु—ची छिथ तैयार समयसँ लड़बाले’

मिहषासुरले’ आइ kवयं दुग‡ बनती मु²त धराक बलतकारसँ करबाले’

हे सीते जुिन kवण<-मृगाकेर लोभ कŸ घूिम रहल मारीच अह„क ठकबाले’

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 52

अ¢पन लछुमन-रेखाक चीbहू सभ²यो आयल अिछ रावण सीताक हरबाले’

केहेन भेषमे क’-क’ अिछ रावण चलू चलैछी आ³म -िनरीJण करबाले’ ७ रास रचलक ई दुिनया, हमर दुिनया गीत गजलक ई दुिनया, हमर दुिनया

श|ित तकलक ई दुिनया, हमर दुिनया फूल कमलक ई दुिनया, हमर दुिनया

लोक सूतल जे छल भ|ग खाक’ बहुत नाक दबलक ई दुिनया, हमर दुिनया

लोक जागल जे छल नाचमे बाझल नाम गनलक ई दुिनया, हमर दुिनया

लोक टूटल जे छल भीड़मे छूटल तािक अनलक ई दुिनया, हमर दुिनया

लोक करजामे डूबल हजारो जत’

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 53

हाल जनलक ई दुिनया, हमर दुिनया

लोक भागल जे छल Ÿिस कय गामसं नेह बँटलक ई दुिनया, हमर दुिनया ( माLा-“म : 21222-221222) (तेसर शेरमे दू टा लघुक दीघ< मानल गेल) 01.01.2018 ८ गजलक धुिनमे मातल छी ओ बूझै छिथ पागल छी

सत सबहक मुंहपर कहलॱ त भिर गामक बारल छी

बािढक लूटल छी अपने हम रौदीके मारल छी

ऐ खेलाके यैह िनयम सभ जीतल सभ हारल छी

अपनिहक हम निह जनलॱ कोना कहबै जागल छी

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 54

सीखै छी िकछु-िकछु सिदखन निह हम बाटक थाकल छी

ई डोरी Dेमक डोरी जैमे हम सभ बाbहल छी

एकिह आमक कतरा हम ईªर लग निह ब„टल छी

(माLा-“म : 2222222) (चािरम शेरमे दू टा लघुक दीघ< मानल गेल) ९ एे बात सुनतै के एे तूर धुनतै के

एे पािन बिहतै नै एे तूर धुनतै के

ई रkता त सबहक छै एे तूर धुनतै के एे मूस के मारत एे भूर मुनतै के एे माछ के पकड़त

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 55

एे जाल बूनतै के एे रास पढतै के पिढ़यो लै त गुनतै के १० दीनता अिशJा और अbहार अिछ िमिथलामे अनिगनती नोरक टघार अिछ िमिथलामे

गाम बहुत अिछ िबला गेल कोसीक बािढ़मे अनिगनती सूखल इनार अिछ िमिथलामे

अïुआ मडुआ आ िबस„ढ एखनहु खेबाले’ सुतबाले’ एखनहु पुआर अिछ िमिथलामे

गाम छोिड़क’ लोक भगैए िदnली मुंबई िकछुए अनार लाखो िबमार अिछ िमिथलामे

कतेक योजना शािपत एखनहु जह|-तह| एखनहु रामक इंितजार अिछ िमिथलामे

कोन कृ´ण किहया एिथन से के जानय दुख केर गोबध<न पहाड़ अिछ अिछ िमिथलामे ११ िदन के िदन बजबोमे छै बड़का झंझट

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 56

और चु¢प रहबोमे छै बड़का झंझट

कहिथ िपता भिर राित पािनमे ठाढ़ रहू एे दुख सहबोमे छै बड़का झंझट

सबहक तील चाउर खा’ सोचिथ नेताजी प|च साल बहबोमे छै बड़का झंझट

ओ पि—छमक पूब कहिथ अहूँ ‘हं’ किहयौ संग हुनक चलबोमे छै बड़का झंझट

दान दिJणा जप तप दंड-Dणाम कŸ कतहु िश´य बनबोमे छै बड़का झंझट

सभ चाहै छिथ घर बिनतै िकछु नव ढंगक आ पुरना ढñबोमे छै बड़का झंझट

बहर कािफया और रदीफ िमलान कŸ भाइ गजल कहबोमे छै बड़का झंझट

( माLा “म :2222 2222 222) दू टा अलग-अलग लघुक एक दीघ< मानल गेल अिछ. १२

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 57

अपन नाम पिरचय आ घर ³यािगक’ हम कहू की सोचै छी एत’ आिबक’ हम

सभठ„ अह„केर संगे छी हमहूँ आब जायब कतयसं कतय भािगक’ हम

ओ सभ गाछ ब’रक सुखा गेल असमय त सुkताएब जा कय कतय थािकक’ हम

सत बात बाजी से होइछ िसहbता से चुप छी अह„ केर मुंह तािकक’ हम

सपनेमे देखल करब हम अह„क िनकिल जाएब भोरे गजल गािबक’ हम

(माLा “म : 2222 2222 22) दू टा अलग-अलग लघुक एक दीघ< मानल गेल अिछ |

१३ फुनगीपरसं खसलाक बाद और हाथ-पैर टुटलाक बाद लोक मुरती बनाओत अह|केर िचतापर चढलाक बाद

िकयो नै करत अह„क कहल मुदा फूल चढ़ाएत मुरतीपर ²यो लािग जाएत मुरती तोडबामे मुरती बनलाक बाद

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 58

के चीbहत आब अह„ जी एम छलहुँ आ िक डी जी एम लोक भ’ जाइए  ाहक िक मरीज कुरसीसं उतरलाक बाद

बड़ी काल धिर एसगरमे करैत रही साहोर ! साहोर !! भाइ आब मोन लगैए हnलुक तूफानसं गुजरलाक बाद

सुख भेिट सकैए िकछु कालले’ पहाड़पर अथवा जंगलमे मुदा आनbद भेटत अपन गाम अपन घ’र पहुँचलाक बाद

गम-गम कर’ लगैछै सभटा घ’र आंगन टोल गाम आ शहर गाछी सभ लाग’ लगैछै सोहनगर आम मजरलाक बाद

सजबैत रहू अपनाक सभिदन पिवLताक आभूषणसं गाछी सभ लाग’ लगैछै बड भुतािह आम झखडलाक बाद

िवधान छै किनय„क लेल महफाक ओहारक आ कहारक गजलहु बनैछ गजल कािफया आ बहरमे उतरलाक बाद

(माLा “म : 2222 2222 2222 2222) दूटा अलग-अलग लघुक एक दीघ< मानल गेल अिछ | 22.10.2018 १४ बथान हमर नै छी, दलान हमर नै छी

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 59

ई दस कोठलीके मकान हमर नै छी

पदबी हमर ओगरबाह एिह गाछीक खेत खोपड़ी और मचान हमर नै छी

लोकक लहासपर फुनगीपर चढ़बाले’ लुी लगबैत ई परान हमर नै छी

बलतकार ह³या तलाक आ मोकिदमा ई िविध हमर नै छी िवधान हमर नै छी

पुL िबना मोJक कहैत हो असंभव त शाkL हमर नै छी, पुराण हमर नै छी

माLा-“म : 2222 2222 222 दू टा लघु क एक दीघ< मानल गेल अिछ | १५ बेर-बेर बौआ खसै छी िकए अह„ धडफडायल चलै छी िकए

अह„ चु¢प र’हू कोनो बात नै अह„ राितक िदन कहै छी िकए

‘सरस’‘चbvमिण’िक ‘रवीbv’क सुनाउ

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 60

अह„ भोजपूरी गबै छी िकए

छुिब कान देखू हकमै िकए छी कौआके पाछ„ भगै छी िकए

सूतल जे मन अिछ तकरा जगाबी अनकासं तुलना करै छी िकए

संतान छी हम परमा³माकेर तखन मृ³युसं हम डरै छी िकए (माLा “म :222222222) 1.दूटा अलग-अलग लघुक एक दीघ< मानल गेल अिछ | 2.प|चम शेरमे ‘जे’आ ‘सं’ क “मशः लघु आ दीघ<मे िगनती कैल गेल अिछ | १६ लोक दौगल जा रहल अिछ सòयताक िबहािड़मे गाम छूटल जा रहल अिछ सòयताक िबहािड़मे

ठाढ के िदन रहत ई चार बालुक भीतपर खेत खूनल जा रहल अिछ सòयताक िबहािड़मे

शहरमे की सड़कपर की अपन घ’रिहमे एखन

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 61

लोक लूटल जा रहल अिछ सòयताक िबहािड़मे

eÔा क°णा और ममता स’भ िकछु सभठ„ कमल पाइ चूनल जा रहल अिछ सòयताक िबहािड़मे

संkकृित पिड़ गेल आइ उ²खिड़ समाठक बीचमे Dेम कूटल जा रहल अिछ सòयताक िबहािड़मे ( माLा “म : 2222 2222 2222 2) दूटा अलग-अलग लघुक एक दीघ< मानल गेल अिछ |

१७ रंग-िवरंगक सभ फुलवारी नीक लगैए दुÄमन-दुÄमनमे भैयारी नीक लगैए

नीक लगै छिन हुनकाई ितलकोरक तड़ुआ हमरा अिरकॲचक तरकारी नीक लगैए

सबहक जीवनमे आनंदक सपना देखी िलखबा आ पढबाक बीमारी नीक लगैए

निह सोहायल हमरा किहयो चौका-छwा हमरा गीत-गजल संग यारी नीक लगैए १८

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 62

एना करब हम ओना करब आ धन कहुना हम जमा करब

सभटा संगे नेने जायब त जुिन पूछू से कोना करब

kवयंसं लड़बै जीतब दुिनया से पाइ पैरबी िबना करब

सबहक सोझ„ मूंह दुसै छी की की सभ आग„ अह„ करब

लगा कबाछु कहै छिथ झा जी हे यौ ठाकुरजी Jमा करब

सभ पंिडत छिथ सभ बूझै छिथ सैह पाएब जे जेना करब

िपपही-ढोल बजाकय अनलॱ की आब कना कय िबदा करब ( माLा “म :2222 2222) दूटा अलग-अलग लघुक एक दीघ< मानल गेल अिछ | १९

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 63

कोनो गाछक छाहिर तकबाक संkकार नै अिछ एखने कतहु पसिरक’ सूित रहबाक िबचार नै अिछ

पिहल कत<©य अिछ अपन तन-मनक ठीक राखब हमरा अखन बीमार पडबाक अिधकार नै अिछ

लदै छी “ोध काम लोभ मोह आ अहंकारसं कोनो अkपतालमे एिह सबहक उपचार नै अिछ

सबहक हाथमे छै kमाट< फोन बेटा छै हािकम गाममे आब लोहार सोनार िक कहार नै अिछ

देिखते-देिखते खाली जगह भ’ जाइ छै पंचमहला सुरिJत आब कोनो खेत-पथार नै अिछ

हम तािक रहल छी सभ kLीमे देवी आ पु°षमे देवता हमरा और कोनो तीथ<मे घुमबाक िनयार नै अिछ

एकटा पहलवान आ हजारटा पैर घीच’बला एनामे कोनो समाजक उÔार नै अिछ

कतहु िकयो छीिन नै सकैए हमर सुख-संपि असलमे हमर kथायी पता ई संसार नै अिछ २०

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 64

माLा “म : 2 2 2 2 2 2 2 2 2 2 2 2 2 2 2 2 अ«ानताक और अbयायक एतेक कथा गढ़ैत काल बहुत कानल हेताह ©यासजी महाभारत रचैत काल

जरैत रिह गेल लोभ आ अहंकारक आिगमे जीवनभिर दुय¯धन िकछु निह ल’ जा सकल संगे दुिनयासं चलैत काल

हम सभ लीखैत रहैत छी अपन भा§य अपन सोचसं सिदखन vौपदी निह सोचलिन ई बात दुय¯धनपर हंसैत काल

मंगनीमे भेटल ई स6मान एतेक महग िसÔ हैत से निह बुझलिन कण< अंग देशक मुकुट धारण करैत काल

निह द’ सकलीह अपन संतान सभक सदाचारक आशीष ग|धारी मिर गेल छलीह आँिखपर पÖी बbहैत काल

अपमानक बदला उिचत छल आ³म«ानक शkLक उपयोग चुिक गेलाह गु°वर अपन िश´यसं गु°दिJणा मंगैत काल

उठौने एलाह तीन-तीनटा राजकुमारीक काशीसं पु°ष-िसंह बिन गेल छलाह िबलाइ घरमे कुकुर भुकैत काल

DतीJा होइत रहैत अिछ शंख घड़ीघbटा आ Dसादक

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 65

सभ रहैत अिछ सूतल स³य नारायणक कथा सुनैत काल

अbहड़ उजािड़ दैत अिछ कते घर तोिड़ दैत अिछ कते गाछ िधया-पुताक नीक लगै छै गाछीमे िटकुला िबछैत काल

फूलो तोड़ब िथक बलतकार गाछक संगे से के मानत ढोल-िपपही बजबैत रहै छी हम सभ छागर कटैत काल

स³यकेर अवहेलना हिर लैत अिछ आ³माक सुख आ शािbत से नै बुझलिन देवी कुंती िशशुक धारमे छोड़ैत काल

२१ बाघ जक| लोक आ हुराड़ जक| लोक गाम-गाम भेटता िसयार जक| लोक

जह|-तह| पोखिर-इनार जक| लोक सागर नदी आओर धार जक| लोक

खािध जक| लोक िकछु आिर जक| लोक देखने छी नार आ पुआर जक| लोक

सभठ„ करिथ मोल-भाव नाप-तौल भेिट जेता हाट आ बजार जक| लोक

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 66

Ÿसलक बॱसय भूखलक नोतय जामुन लताम कुिसयार जक| लोक

गंगाक ज’ल-सन िकछु लोक भेटला भेटला िहमालय पहाड़ जक| लोक

लोकेले’ जीबय आ लोकेले’ जान देत गदा गुलाब हरिसंगार जक| लोक ( सरल वािण<क बहर/ वण<-14 )

२२ गीत लीिख-लीिखक’ गजल लीिख-लीिखक’ ह’म मौन भेल छी नोरेमे भीिज-भीिजक’

लोकेक देिख-देिख Dेम हम करैत छी लोकक ठकैत छी लोकेक देिख-देिखक’

संkकृितक ऊपर सòयता सवार भेल óलैट हम िकनैत छी खेत बेिच-बेिचक’

²यो ख़ुशीसं जान दैत अिछ मातृभूिमले’ ²यो मगन रहैए देशेक लूिट–लूिटक’

स³यक पराजय ‘अस³यमेव जयते’

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 67

घोषणा करैछ िकयो ताल ठोिक-ठोिकक’

एना िकए ओना िकए एहेन िकये भेलै राित-िदन झकैत छी यैह सोिच-सोिचक’ (सरल वािण<क बहर/ वण<-15 )

२३ अहंकारमे सिदखन छी अह„ कंस छी रावण छी

अह„ बात सबहक काटी अहॴ बाउ दुरजोधन छी

महावीर मनभावन छी अह„ राम आ लछुमन छी

अह„ चु¢प रिह जाइत छी महाधीर मनमोहन छी

जते दृÄय अिछ दुिनयामे महाभारतक जीवन छी

हमर मोन नीपल आंगन अह„ ओिहमे अिरपन छी

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 68

अबै राित आ िदन अिहना कते नीक आयोजन छी

( सभ प|ितमे माLा “म-1221-2222) २४ हुनका सोझ„ िलबल ने भेल ‘Dेम करैछी’ कहल ने भेल

हमरा मोनक चैन चोरेलॱ मुदा अह„क जहल ने भेल

छलै अशरफी ओै गाडल हमरा जैठ„ रहल ने भेल

केश माथमे जते,तते दुःख गन’ चाहलॱ गनल ने भेल

ठोिह पािड़क’िकयो कनै छल घ’र बंद क’ पडल ने भेल

नोरिहसं िलखने छलीह ओ िचôी हमरा पढल ने भेल

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 69

िबना बहरके प\ ‘अिनल’ किवता भेलै गजल ने भेल

(सरल वािण<क बहर/वण<-11 ) २५ युÔ कŸ जुिन शोक कŸ हे अजु<न जुिन सोच कŸ

धम<JेL कु°JेLमे छी पापक तीÇ िवरोध कŸ

िमL िकयो नै शLु िकयो नै बुिझयौ और संतोष कŸ

जीतू भोगू सुख धरतीक अथवा kवग<क भोग कŸ

अह„ आतमा अिवनाशी छी तन आ मोनक योग कŸ

स³य और श|ितक जय हो नूतन िन³य Dयोग कŸ

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 70

जय हो जय हो पिवLता आउ एखन उÅोष कŸ

(सरल वािण<क बहर/वण<-10 ) २६ वेद-पुराणक मिहमा सभटा बूझल अिछ मुदा लोक हमरे करतबसं Ÿसल अिछ

राित आ िदन ओझराएल रहै छी हम जैमे इहो जाल त अपनिह हाथक बूनल अिछ

भूिम-भवन गहना-गुिडया एफ डी सभटा सोिच रहल छी की अरजल की लूटल अिछ

±दय कहैए ई अbहार हटतै एकिदन सपता-िवपताकेर कथा सभ सूनल अिछ

जे जागल अिछ ओकरा खाितर भिर दुिनया ‘अिनल’ ओकर की जे सपनेमे डूबल अिछ

(सरल वािण<क बहर/वण<-17) २७ रावणकेर संहार केलॱ अपने मनमे

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 71

रामक हम दश<न कयने छी जीवनमे

पढबा-िलखबामे आनंद अबैत रहल मोन रमल नै कतौ और िकछु अज<नमे

दूर रहैत एलॱ सभिदन चौका-छwासं लागल रहलॱ शœदक सागर-मंथनमे

माए बाबू दादी दादा नानी नाना मामी मामा सभ ²यो छिथ हमरा संगे शुभ िचंतनमे

कोना िबसरबै राित िदसंबर सोलहके शाप सुनै छी िनरभयाक ओइ “ंदनमे (सरल वािण<क बहर/वण<-16)

ऐ रचनापर अपन मंत©य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। िवदेह नूतन अंक बालान| कृते िवदेह मैिथली मानक भाषा आ मैिथली भाषा स6पादन पाõय“म भाषापाक

जगदीश चbv ठाकुर ‘अिनल’ आ आशीष अनिचbहारक बाल गजल १ जगदीश चbv ठाकुर ‘अिनल ’ बाल गजल

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 72

ह6मर Dाण समान अिछ जगमग िहbदुkतान अिछ

िहbदू मुिkलम िस²ख इसाइ आँिख नाक मुंह कान अिछ

हमरे ई गु° ंथ गीता बाइिबल आ कुरान अिछ

ई दुिनया आंगन हमरे कहने वेद-पुराण अिछ

ई धरती मैया सबहक सभले’ सू°ज चान अिछ

हमरे सभले’ पािन-हवा मकै गहुम आ धान अिछ

स³य, अिहंसा और क°णा ई ह6मर पहचान अिछ (सरल वािण<क बहर/ वण<-10)

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 73

आशीष अनिचbहार बाल गजल बाल गजल

केहन काहन ढ़ुलढ़ुिलया ब—चा फेकल फाकल फुलफुिलया ब—चा

ढ़ुनमुन ढ़ुनमुन गुलगुिलया ब—चा हुलबुल हुलबुल हुलबुिलया ब—चा

छन छन कूदै थुलथुिलया ब—चा सिदखन बूलै बुलबुिलया ब—चा

छै इ6हर उ6हर िक6हर िक6हर चुलबुल चुलबुल चुलबुिलया ब—चा

की नवका आ की पुरना पुरना चीbहै सभकR भुलभुिलया ब—चा

सभ प„ितमे 222-222-222 माLा“म अिछ। सुझाव सादर आमंिLत अिछ।

ऐ रचनापर अपन मंत©य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।

िवदेहक िकछु िवशेष|क :- १) हाइकू िवशेष|क १२ म अंक , १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 74

२) गजल िवशेष|क २१ म अंक , १ नव6बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21 .pdf ३) िवहिन कथा िवशेष|क ६७ म अंक , १ अ²टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल सािह³य िवशेष|क ७० म अंक , १५ नव6बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक िवशेष|क ७२ म अंक १५ िदस6बर २०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी िवशेष|क ७७म अंक ०१ माच< २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) बाल गजल िवशेष|क िवदेहक अंक १११ म अंक , १ अगkत २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 11 1 ८) भि²त गजल िव शेष|क १२६ म अंक , १५ माच< २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समीJा िवशेष|क १४२ म, अंक १५ नव6बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 १० ) काशीक|त िमe मधुप िवशेष|क १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरिवbद ठाकुर िवशेष|क १८९ म अंक १ नव6बर २०१५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश चbv ठाकुर अिनल िवशेष|क १९१ म अंक १ िदस6बर २०१५

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 75

Videha_01_12_2015 १३ ) िवदेह स6मान िवशेषाक- २००म अक १५ अDैल २०१६ / २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016

Videha_01_07_2016

१४ ) मैिथली सी.डी./ अnबम गीत संगीत िवशेष|क - २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01 _2017 लेखकसं आमंिLत रचनापर आम ंिLत आलोचकक िट¢पणीक शृंखला १. कािमनीक प|च टा किवता आ ओइपर मधुकाbत झाक िट¢पणी VIDEHA 209th issue िवदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 जगदीश Dसाद मÎडल जीक ६५ टा पोथीक नव संkकरण िवदेहक २३३ सँ २५० धिरक अंकमे धारावािहक Dकाशन नीच„क िलंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018

Videha_01_05_2018

Videha_15_04_2018

Videha_01_04_2018

Videha_15_03_2018

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 76

Videha_01_03_2018

Videha_15_02_2018

Videha_01_02_2018

Videha_15_01_2018

Videha_01_01_2018

Videha_15_12_2017

Videha_01_12_2017

Videha_15_11_2017

Videha_01_11_2017

Videha_15_10_2017

Videha_01_10_2017

Videha_15_09_2017

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 77

Videha_01_09_2017

िवदेह ई -पिLकाक बीछल रचनाक संग - मैिथलीक सव<eेP रचनाक एकटा समानाbतर संकलन िवदेह :सदेह :२ (मैिथली Dबbध -िनबbध -समालोचना २००९ -१० ) िवदेह :सदेह :३ (मैिथली प\ २००९ -१० ) िवदेह :सदेह :४ (मैिथली कथा २००९ -१० ) िवदेह मैिथली िवहिन कथा [ िवदेह सदेह ५ ] िवदेह मैिथली लघुकथा [ िवदेह सदेह ६ ] िवदेह मैिथली प\ [ िवदेह सदेह ७ ] िवदेह मैिथली नाöय उ³सव [ िवदेह सदेह ८ ] िवदेह मैिथली िशशु उ³सव [ िवदेह सदेह ९ ] िवदेह मैिथली Dबbध -िनबbध -समालोचना [ िवदेह सदेह १० ] The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par " has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Theref ore the Author has started translating his Maithili works i n English himself . After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of original work .-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha -pothi/ Maithili Books can be purchased from: http://www.amazon.in/ For the first time Maithili books can be read on kindle e -readers. Buy Maithili Books in Kindle format (courtesy Videha) from amazon kindle stores, these e books are delivered worldwide wirelessly: - http://www.amazon.com/

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 78

िवदेह स6मान : स6मान-सूची

अपन मंत©य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।

िवदेह

मैिथली सािह³य आbदोलन (c)2004-18. सव‡िधकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अिछ ततऽ संपादकाधीन। िवदेह- Dथममैिथली पािJक ई-पिLका ISSN 2229-547X VIDEH A स6पादक: गजेbv ठाकुर। सह-स6पादक: उमेश मंडल। सहायक स6पादक: राम िव लास साहु, नbद िवलास राय, सbदीप कुमार साफी आ मुžाजी (मनोज कुमार कण<)। स6पादक- नाटक-रंगमंच-चलिचL- बेचन ठाकुर। स6पादक- सूचना-स6पक<-समाद- पूनम मंडल। स6पादक- अनुवाद िवभाग- िवनीत उ³पल।

रचनाकार अपन मौिलक आ अDकािशत रचना (जकर मौिलकताक संपूण< उरदािय³व लेखक गणक मÀय छिbह) editorial.staff.videha@gmail.com कR मेल अटैचमेÎटक Ÿपमे .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉमÚटमे पठा सकै छिथ। रचनाक संग रचनाकार अपन संिJ¢त पिरचयआ अपन kकैन कएल गेल फोटो पठेता, से आशा करै छी। रचनाक अंतमे टाइप रहए, जे ई रचना मौिलक अिछ, आ पिहल Dकाशनक हेतु िवदेह (पािJक) ई पिLकाकR देल जा रहलअिछ। एतऽ Dकािशत रचना सभक कॉपीराइट लेखक/सं हक‡ लोकिनक लगमे रहतिbह, माL एकर Dथम Dकाशनक/ िDंट-वेब आक‡इवक/ आक‡इवक अनुवादक आ आक‡इवक ई-Dकाशन/ िDंट-Dकाशनक अिधकार ऐ ई-पिLकाकR छै, आ से हािन-लाभ रिहत आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयnटीक/ पािरeिमकक Dावधान नै छै। तR रॉयnटीक/ पािरeिमकक इ—छुक िवदेहसँ नै जुड़िथ, से आ ह। ऐ ई पिLकाकR eीमित ल×मीठाकुर Óारा मासक ०१ आ १५ ितिथकR ई Dकािशत कएल जाइत अिछ। (c) 2004-18 सव‡िधकार सुरिJत। िवदेहमे Dकािशत सभटा रचना आ आक‡इवक सव‡िधकार रचनाकार आ सं हक‡ लगमे छिbह। ५ जुलाई २००४ कRhttp://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसिरक गाछ”- मैिथली जालवृसँ Dार6भ इंटरनेटपर मैिथलीक Dथम उपिkथितक याLा “’िवदेह’- Dथम मैिथली पािJक ई पिLका” धिर पहुँचल अिछ,जे http://www.videha.co.in/ पर ई Dकािशत होइत अिछ। आब “भालसिरक गाछ”जालवृ 'िवदेह' ई-पिLकाक Dव²ताक संग मैिथली भाषाक जालवृक ए ीगेटरक Ÿपमे Dयु²त भऽ रहल अिछ। िवदेह ई-पिLका ISSN 2229-547X VIDEHA

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

   Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ ) मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA 79

िसिÔरkतु