VIDEHA — Issue 267 / अंक २६७

Publication: VIDEHA · Issue: 267
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िव दे ह िवदेह Videha িবেদহ http://www.videha.co.in िवदेह थम मैिथली पािक ई पिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal   

   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) 'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरब री २०१९ (वष १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) ऐ अंकमे अिछ:- १. संपादकीय संदेश

२. ग' २.१.डॉ. कैलाश कुमार िम- -पि.डताइन -(लघुकथा) २.२.4णव झा-दोसर िबयाह (लघुकथा) २.३.रबी89 नारायण िम- - ३ टा िनब8ध २.४.आशीष अनिच8हार - िहंदी िफ>मी गीतमे बहर -५

३. पद ◌्य ३.१. नीलमाधव चौधरीक 56 टा किवता (4Eतुित आशीष अनिच8हार ) ३.२.संतोष कुमार राय 'बटोही' दू-टा किवता ३.३.रामदेव 4साद म.डल ’झाHदार ’- िकछु झाH ३.४. रामिवलास साहु- िकछु टनका

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िवदेह जालवृwक िडसकसन फोरमपर

संपादकीय मैिथली सािहxयमे सािहिxयक yzाचार िवदेह शु{आतेसँ पुरEकारक राजनीितपर ल अिछ। कोनो िवषयपर नीक जकk करबाक एकटा नीक तरीका छै जे ओिह िवदेह "सािहिxयक yzाचार िवशेष€क िनकालबाक घोषणा कऽ रहल अिछ। क yzाचार तँ तेहन िवषय अिछ जािहपर कदािचते िकयो कलम चलेता ए। ओना इ‚छा िहसाबƒ काज भेल तखन फरवरीमे ई 4कािशत भऽ जाएत त राखए बलापाठक, आलोचक, लेखक सभसँ िन‚चा बला िवषयपर आलेख 1.सािहxय, कला एवं सरकारी अकादमीः (क) पुरEकारक राजनीित http://www.videha.co.in िवदेह थम मैिथली पािक ई पिका Videha Ist Maithili Fortnightly   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ Join Videha googlegroups Twitter to view regular Videha Live Broadcasts फोरमपर जाउ। yzाचार गह-गहमे पसरल छै जकर िविवध तरीका आ िविवध {प राजनीितपर चोट करैत आिब रहल अिछ जकरिकछु साथक पिरणाम फोकस ओिह िवषय केर िवशेष€क िनकािल िदयौ।पुरEकारक राजनीितपर िवशेष€क " अिछ। मैिथलीमे कोनो िवषयक िवशेष€क लेल नीक आलेखककमी चलेता कारण भिवयमे हुनकर नाम पुरEकार किट सकैए तँइ जाएत आ निह तँ समय बिढ़यो सकैए। िनभक, साहसी आलेख आमंिhत अिछ-- अकादमीः - Videha Ist Maithili Fortnightly अंक २६ ७) Live Broadcasts {प छै। पिरणाम आब देखबामे आिब रह राजनीितपर चोट करबाक लेल आलेखककमी रहैत अिछ आ सािहिxय एिह िवशेष€कमे देरीभऽ सकै आ तयाxमक {पƒ अपन बा

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) (ख) सरकारी अकादेमीमे पैसबाक गैर-लोकत€िhक िवधान (ग) सwागुट आ अकादमी केर काजक तौर-तरीका घ) सरकारी सwाक छ‘ िवरोधमे उपजल ताxकािलक समान€तर सwाक कायप’ित (1985सँ एखन धिर) ङ) अकादेमी पुरEकारमे पाइ फै–टरः िमथक वा यथाथ 2.˜यि–तगत सािहxय संEथान आ पुरEकारक राजनीित 3.4काशन जगतमे पसरल yzाचार आ लेखक 4. मैिथलीक छ‘ लेखक संगठन आ ओकर पदािधकारी सभहँक आचरण 5.मैिथली िवभागमे पसरल सािहिxयक yzाचारक िविवध {पः- (क) पा›यœम (ख) अययन-अयापन (ग) िनयुि–त 6. सािहिxयक पhकािरता, िर˜यू, मंच, माला, माइक आ लोकापणक खेल-तमाशा 7.लेखक सभहँक ज8म-मरण शताŸदी केर चुनाव , कैलƒडरवाद आ तकरा पाछूक राजनीित 8.दिलत एवं लेिखका सभहँक संगे भेद-भाव आ ओकर शोषणक िविवध तरीका

पाठकीय आशीष अनिच8हार पिछला िकछु समयसँ िवदेहपर देवेश झाजीक  पिढ़ रहल छी। नीक लागल। आगुओ हुनकर रचनाक  पढ़ैत रहब से उ¡मेद अिछ। अंक २५९ मे संतोष कुमार राय "बटोही" जीक किवता पिढ़ लागल जे भिवयमे ई बहुत दूर धिर जेता। आगुओ एबाक चाही िहनक रचना िवदेहक िकछु िवशेष€क :- १) हाइकू िवशेष€क १२ म अंक , १५ जून २००८

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल िवशेष€क २१ म अंक , १ नव¡बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) िवहिन कथा िवशेष€क ६७ म अंक , १ अ–टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल सािहxय िवशेष€क ७० म अंक , १५ नव¡बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक िवशेष€क ७२ म अंक १५ िदस¡बर २०१० Vid eha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी िवशेष€क ७७म अंक ०१ माच २०११ Videh a_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) बाल गजल िवशेष€क िवदेहक अंक १११ म अंक , १ अगEत २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 11 1 ८) भि–त गजल िवशेष€क १२६ म अंक , १५ माच २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समी¥ा िवशेष€क १४२ म, अंक १५ नव¡बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 १० ) काशीक€त िम- मधुप िवशेष€क १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरिव8द ठाकुर िवशेष€क १८९ म अंक १ नव¡बर २०१५ Videha_01_11_2015

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) १२) जगदीश च89 ठाकुर अिनल िवशेष€क १९१ म अंक १ िदस¡बर २०१५ Videha_01_12_2015 १३ ) िवदेह स¡मान िवशेषाक- २००म अक १५ अ4ैल २०१६ / २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016

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१४ ) मैिथली सी.डी./ अ>बम गीत संगीत िवशेष€क - २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंिhत रचनापर आम ंिhत आलोचकक िट¦पणीक शृंखला १. कािमनीक प€च टा किवता आ ओइपर मधुका8त झाक िट¦पणी VIDEHA 209th issue िवदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 जगदीश 4साद म.डल जीक ६५ टा पोथीक नव संEकरण िवदेहक २३३ सँ २५० धिरक अंकमे धारावािहक 4काशन नीचkक िलंकपर पढ़ू:-

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) Videha_15_03_2018

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७)

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िवदेह ई -पिhकाक बीछल रचनाक संग - मैिथलीक सव-े§ रचनाक एकटा समाना8तर संकलन िवदेह :सदेह :२ (मैिथली 4ब8ध -िनब8ध -समालोचना २००९ -१० ) िवदेह :सदेह :३ (मैिथली प' २००९ -१० ) िवदेह :सदेह :४ (मैिथली कथा २००९ -१० ) िवदेह मैिथली िवहिन कथा [ िवदेह सदेह ५ ] िवदेह मैिथली लघुकथा [ िवदेह सदेह ६ ] िवदेह मैिथली प' [ िवदेह सदेह ७ ] िवदेह मैिथली नाªय उxसव [ िवदेह सदेह ८ ] िवदेह मैिथली िशशु उxसव [ िवदेह सदेह ९ ] िवदेह मैिथली 4ब8ध -िनब8ध -समालोचना [ िवदेह सदेह १० ] The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par " has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has star ted translating his Maithili works in English himself . After these translations are complete these would be the offici al translations authorised by the Author of original work .-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha -pothi/

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) Maithili Books can be purchased from: http://www.amazon.in/ For the first time Maithili books can be r ead on kindle e -readers. Buy Maithili Books in Kindle format (courtesy Videha) from amazon kindle stores, these e books are delivered worldwide wirelessly: - http://www.amazon.com/ िवदेह स¡मान : स¡मान-सूची

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२. ग'

२.१.डॉ. कैलाश कुमार िम- -पि.डताइन -(लघुकथा) २.२.4णव झा-दोसर िबयाह (लघुकथा) २.३.रबी89 नारायण िम- - ३ टा िनब8ध २.४.आशीष अनिच8हार - िहंदी िफ>मी गीतमे बहर -५

डॉ. कैलाश कुमार िम- पि.डताइन (लघुकथा)

राघबक मोबाइल केर घंटी बािज उठलिन।देखैत छिथ जटा फ़ोन कऽ रहल छिन। फोन उठा हेलो कहलिथन। ओमहर सँ जोश मे मुदा एक अ˜य–त पीड़ा सँ भरल शŸद: “हर हर महादेब राघब जी। सब समाचार नीक ने?” राघब: “हर हर महादेब! कहल जाओ। जय महाकाल?” जटा: “सब िकछु चिल रहल अिछ। िजनगी जीब रहल छी। कािµ हरे कृणक दोसर बरखी छिन। अहk सँ बहुत नेह रखैत छलीह।सोचल नौत दऽ दी।”

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) राघब: “ओह! दू बरख भऽ गेलिन अनुराधा क  अिह न¶र काया क  xयािग अन¶र जगत मे 4वेश केना! समय कोना दौड़ल चलल जा रहल छैक?” जटा: “हk राघब जी। अहk क  की कहू, अहk Eवयं िव·ान छी। सब बात बुझैत िछयैक। आचाय मदन सेहो सुतले रिह गेलाह!िबसरे सभी बारी-बारी!” राघब: “सही कहैत छी। यएह छैक संसार। लोक जनैत अिछ जे ओकरा चिल जएबाक छैक तथािप झूठ- फ़रेब मे, अपन आन मे लागल रहैत अिछ। छोड़ू इ बात सब। हम कािµ अव¸य आिब जाएब।” इ कहैत राघब फोन कािट देलिथन। आब राघब जटा आ अनुराधाक दुिनया मे, ओिह छोट सन संसारक इितहास मे चल गेलाह। समयजेना घूमए लगलिन.....

जटाक ज8म 4थम पुhक {प मे एक महादिर9 मैिथल ¹ाºण पिरवार मे भेलिन। नामक अितिर–त ओिह पिरवार मे कोनो संEकार ¹ाºण बला निह रहैक - ने माता िपताक िश¥ा, ने पिरवारक संEकार, ने गामक नाम आ ने कूलक िवचार। जटाक िपता आ माताक बीच एकैसवरखक अंतर रहिन। जटाक िपता भोला 4च.ड मूख आ भूिमहीन। लोकक मिहस पोिसया रखैत छलाह। पैतीसबरखक भऽ गेल रहिथ। सब बेर चानन काजर लगा ललका धोती आ कुरताक सँग पाग दोप»ा धारण कय सौराठ सभागाछी जाइत छलाह। टुकटुकी लगेने रहैत छलाह जे कोनो क8यागत ओकरा िदस देखतैक। मुदा सब बेकार। ऊपर सँ मुँह कान सेहो दैवक देल। ब½ कारी चाम, उचगर दkत, तमाकुल आ पान सँ दkत मे ख¾ठी पड़ल, आँिख धसल, िरछ सन पूरा देह मे केस, कान पर िवशेष झमटगर ठाढ़ भेल रोआँ, चेड़ा जकk हाथ, हाथ मे खुरपी, हkसू आ कोदािर चलबैत-चलबैत ठेला पड़ल, पैर मे बेमाय फाटल, लेढाएल मोटका धोती सँ मिहसक गंध अबैत भोला कोनो {प सँ ¹ाºण निह लगैत छलाह। गामक संEकार ई जे िबना गािर क  दू पुHख िनको बात निह कऽसकैत छल। भोला भला अपवाद कोना रिहतिथ खूब गािरक 4योग करैत छलाह। लगातार सात बरख सँ भोला तैयार भऽसौराठ सभा शु’क समय मे जाइत छलाह आ टकटकी लगेने बैसल रहैत छलाह मुदा दुभpÀय ई जे िबयाहक बात क  पुछैत अिछ हुनका िदस कोनो क8यागत देिखतो निह छलिन। अंततः सभा समा¦त भेला पर भोला िनराश मोन सँ वापस गाम आिब जाइत छलाह। एिहबेर भोलाक बूढ़ िपता ठािन लेलाह जे चाहे जेना होइक़ भोलाक िबआह अिह शु’ मे अव¸य करा देिथ8ह। िकयोक किह देलकिन जे नीरस झा बहुत नीक दलाल छिथ। भोलो सँअधलाह बरक िबआह करा चुकल छिथ। मुदा नीरस झा िबना टका क  कोनो काज निह करैत छिथ। एिहबेर सभा लागब सँ बीस िदन पिहने भोलाक िपता नीरस झा क  अपन घर बजा अनलाह। बकाएन मिहसक शु’ दूध मे चाह बना भोलाक माय एक फुलही िगलास मे नीरस क  आ छोटकी बाटी मे भोलाक िपता क  देलिथन। नीरस क  आर की चाही। मोन 4फुि>लत भऽगेलैक। जाड़क समय मुँह सँ फूिक-फूिक चाह सुरकय लागल। नीरस क  होइक़ जेना चाह निह अमृत िपब रहल हो! ओमहर भोलाक िपता आ माय नीरस िदस एक लाचार याचक बिन अशाक िकरण जगेने तािक रहल छलिथन। जखन आधा चाह सुरका गेलैक तऽनीरस बािज उठल: नीरस : "हk बौकू काका! की कहऽचाहैत रही?"।

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) बौकू काका: "बौआ, पिहने चाह िपब लीय फेर ग¦प करैत छी। अहk कोनो आन थोड़े ने छी!"

नीरस चुपचाप चाह पीबय लागल। चाह सूरकला बाद नीरस फेरो बाजल: "हk बौका का, कहू की कहए चाहैत छी?" बौकू काका चुपे रहलिन। भोलाक माय आँिख सँ गरम-गरम नोर चुअबैत बजली: "बौआ नीरस, अहk सब सन िदयामानी लोक क  अछैते हमर भोलबा कुमारे रिह जाय!" नीरस: "की कहैत छी काकी, ई एहेन अपाटक अिछ जे अपन नाम तक निह बािज पबैत अिछ। ओिह िदन चौक पर एक घटक नाम पुिछ देलकैक। ई बृजबोध चौधरी क  --जीबोध चौधरी किह देलकैक। ओतय सब आदमी हँसै लगलैक। एकर िबआह किन झंझट बला चीज़ छैक।"

बौकू काका: "हौ नीरस िकछु करह। एकर िबआह हमरा िजबैत भऽजएबाक चाही। सब िकछु तऽसुईद मे चिल गेल, आठ कÃा बँसिब»ी आ कलम रिह गेल अिछ। तकरे बेिच एकर िबआह करा देबैक। गरीबक िमहनती बेटा छैक। लोकक मिहस पोसतैक, खेत बटाई करतैक आ अपन जीबन चला लेतैक।" बौकू काका क  मुँह सँ ई बात सुिनते देरी नीरस मोने-मोन 4सÄ भऽ गेल। ओकरा भऽ गेलैक जे आब ओकरा भोलाक िबआहक दलाली मे नीक पाई भेिट जेतैक। नीरस : "बौकू कÅा, िकछु ने िकछु तऽकरय पड़त। आहkक  जमीन िबका जाएत तकर दुख हमरा की अहk सँ कम हएत। मुदा दोसर कोनो उपाय निह। खैर! बेटा सँ संपिw भऽजाइत छैक, संपित सँ बेटा निह होइत छैक। की पता भोला क  एहेन संतान िवधाता दऽदेिथन जे पkच दस िबघा जमीन िकन दैक, पÅा मकान बना दैक, पैसा सँ घर भिर जाइक।"

भोलाक माय आ िपता मुड़ी गोतने नीरस केर बात सुनैत रहलिन। जतेक अंितम टुकड़ी जमीन िबका जएबाक दद निह भेलिन ओिह सँ अिधक अिह बातक आश जगलिन जे भोलाक िबआह भऽजएतैक आ ओकर घर बिस जएतैक।

नीरस िकछु सोचैत बाजल: "बौकू काका, एक तऽभोला क  किह िदयौक जे ई लोकक  अपन नाम बृजवोध चैधरी क  बदला भोला चौधरी कहैक। ई शŸद सहज छैक। एिह मे बात निह लगतैक। आ पkच सात िदनक भीतर हमरा लेल िकछु टका क  Ÿयोत कऽिदय जे हम बगलक गामक छेदी झा क  जाकऽपिहने सँ दऽअएबैक। छेदी झा अगर हk किह देलक तऽबात पÅा। ओ एहन लोक अिछ जे ¹ºाक िलखल लेख मेटा सकैत अिछ।"

ओ कहैत नीरस अपन घर िदस िबदा भेल। बौकू का, भोलाक माए आ भोला क  िबआहक आश जगलैकछ कोउ काहू मगन कोउ काहू मगन।

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) भोलाक पिरवार अिहमे मगन जे भोलाक िबआह भऽजेतैक। जमीन तऽ हाथक मैल छैक। नीरस अिह मे मगन जे भोलाक िबआह मे ओकरा नीक दलाली भेट जेतैक। बौकू काका दोसरे िदन गामक महाजन सँ दू सए टाका अपन कलम क  नाम पर अगता लए नीरस क  दऽदेलिथन। नीरस ओिह मे सँ एक सए अपने रािख लेलक आ एक सए छेदी झा क  दऽअएलैक। छेदी झा जोगार मे लािग गेल। तकैत-तकैत छेदी झा क  एक क8यागत एहन भेट गेलैक जकर तेरह बरखक बेटी रहैक। छेदी आ नीरस ओिह क8यागत क  समझा बुझा भोला सँ िबआह लेल मना लेलक। ओना पिहने तऽभोलाक बगै देख क8यागत किन िबदिक गेलैक मुदा छेदी आ नीरस अपन रचल मायाजाल मे ओकरा फँसा लेलकैक।

अिह तरहे पैतीस बरखक भोलाक िबआह सभा गाछी मे पिहने िदन फाइनल भऽ गेलैक। भोलाक किनया गोदा गोर अततह मुदा मरिग>ली जकk िखयाएल। देह अÄक मारल रहैक। घर मे भिर पोख अÄ क  पुछैत अिछ कुअÄ तक निह भेटैक। सोझे साले दुरागमन भेलैक। भोलाक माय अपन मरिग>ली पुतहु लेल बहुत उदार। दरबÆजा पर पोिसये सही चािर-चािर लगहैर मिहस रहैक। दूध दही केर कोनो कमी निह। गोदाक पूरा नाम रहैक गोदावरी मुदा लोक ¦यार सँ गोदा जे कहनाइ शु{ केलकैक से गोदा रिह गेलैक। से जे हो। गोदा सासुर मे भिर पेट भोजन करैत छिल। सासू किहयो कोनो तरहक कमी निह देलूिथन। सोझे साले गोदाक देह िचÅन भऽ गेलैक। चाम चमिक उठलैक। बेर सन पयोधिर नीक भोजन आ भोलाक नेहक उxपात सँ समतोलो सँ नमहर भऽ गेलैक। अचानकअतेक पिरवतन आिब गेलैक गोदाक शरीर मे जकर िकयोक क>पनो निह कऽ सकैत छल। गोदा भोलाक दुिनया बदिल देलकैक। बोलीक मधुर तऽगोदा नैहरे सँ छिल। घर मे खूब काज धंधा करिथ। सास ससुरक सेवा मे कोनो कमी निह। भोलाक माए दरबÆजाक काज जेना गोबर सँ िचपड़ी पारब, दरबÆजा िनपब, मिहसक थान साफ़ करब, अÄ सब फटकब, सुखाएब आिद करिथ आ गोदा घर आंगन साफ़ करब, िनपब, भानस करब, सासु सँग धान कुटब, दािल दरडब आ पूजा पाठ करिथ। दुनू मे किहयो कोनो तरहक फसाद निह भेलिन। भोला तऽ अपन गोदा क  सदैव माथ पर रखैत छलाह। समयक चÅी चलैत रहलैक। गोदा सोलहम चढ़ैत गभवती भऽगेलीह। नौ मासक बाद एक बेटा भेलिन। भोलाक बेटाक मुँह कान नाक तऽ नीक रहैक मुदा चामक रंग भोलो सँ िसयाह। मुँह आयताकार। मुदा भोला, गोदा, भोलाक माता िपता ख़ुशी सँ बताह। एक मिहला जतले िजभे बािज देलकैक “ब‚चा किन कारी छैक”। भोलाक माय झट दिन किह देलिथन: “रह िदयौक, बेटा छैक ने। मुँह कान सोझ छैक ने। घीबक लडडू टेढो नीक। हमर वंश बिच गेल। महादेब खूब कऽ औरदा देिथन आ काया िनरोग रहैक। आर की चाही।

ब‚चा चूँिक भोलाक माय कलना बाबा सँ मंगने छलीह तािह ओकर नाम राखल गेलैक मंगेश चौधरी। मंगेश क  घुरमल घुरमल जटा बला केश रहैक तािहं गाम घरक लोक जटा किह स¡बोिधत करए लगलैक। मंगेश कतौ िबला गेलैक आ जटा नाम जगिजयार भऽ गेलैक।

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) भोला पिर-म करैत रहलाह।जटा क  दबाई बीरो लेल नगद टाका के दरकार भेलैक। लोक सब सँ पÉच उधार शु{ भेलैक। आठे मासक बाद गोदाक  पुनः गभ ठहिर गेलैक। फेरो बेटा भेलैक। हालkिक तकर छह बरख धिर गोदा क  कोनो सँतान निह भेलिन। अिह बीच भोलाक िपता अथpत् बौकू काकाक िनधन भऽ गेलिन। भोला पर कजp आरो बिढ गेलिन। दूनू बेटा जटा आ सxयवÊत सरकारी बेिसक Eकूल मे जाईत रहल। नहुँ-नहुँ अÄ पािनक िदÅत शु{ भेलैक कारण भोला लोकक कज अÄ बेिच सधेबाक जोगर लगेने छलाह। अही बीच ककरो सँ पता चललैक जे महिष रमेश योगी कानपुरमे तीन बरख लेल अख.ड यË करताह। तािह लेल ¹ाºण कुमार चाही। ब‚चा सभक  रहनाइ खेनाइ मुफ़्त उपर सँ गुHकुल मे नामो िलखा देल जेतैक। िकछु टाका सेहो भेटतै। गोदा भले दिर9 पिरवार सँ छलीह मुदा िश¥ाक 4ित साक€¥ छलीह। भोला क  कहलिथन: “बुझलॱ, अपने सब िदÅत मे छी। दुनू भाई क  भिर पेट अÄो ठीक सँ निह दऽ पबैत छी वEh पोथीक चरचे छोिड़ िदयौक। बिढयk रहत जे दुनूक कानपुररमेश जोगी क  आ-म पठा देबैक। भिर पेट भोजन, देह झkपक वEh आ पढ़बाक जोगार तऽ भऽ जेतैक। अपन सभक जीवन कटैत रहत।”

भोला बात गंभीर भेल सुनैत रहला आ अंितम िनणय इ लेलिन जे जटा आ सxयवÊत क  िद>ली पठा देिथन। सएह भेलैक।

जटा आ सxयवÊत दुनू भाई महिष रमेश योगीक आ-म कानपुर आिब गेल। पिहल बेर शेब देखलक। पिहल बेर पनीर ककरा कहैत छैक से बुझलक। गेHआ शुy वEh भेटलैक। भोरे Eनान पूजा, वैिदक म8hक समवेत पाठ आ तकर बाद फल आ भिर िगलास छालीयु–त दूध। िदनमे रोटी, भात, दािल, तरकारी, सलाद,आचार, दही, िमठाई; राित कऽ रोटी, दािल तरकारी। सुतए सँ पिहने दूध।सँEकृत ˜याकरण, वेद पाठ, कमका.डक िश¥ा िवÎयात गु{क देखरेख मे। दू हजार िव'ाथ मे दुनू भाई जेना घुिल िमल गेल। वेद पाठ सँ कंठ खुिज गेलैक। ˜याकरणक सूh िजÏा पर चिढ़ गेलैक। जखन एक बरख मे गाम गेल तऽ गोदा अपन दुनू ¹ाºण कुमारक मुखाकृत देिख अचि¡भत भऽ गेलीह। सासु तुरत िहंग, सॱस िमरचाई आ नोन झड़का दुनूपौhक नजिर उतािर लेलिन। डर इ रहिन जे कखनोकल अपनो लोकक नजिर लािग जाइत छैक!

िनxय वेद पाठ केलाह सँ दुनू भाई केर कंठ फूिट गेलैक। Eवरक स8धान नीक भऽगेलैक। गेयता 4खर भऽगेलैक। दु बरख मे जेना पिरप–व भऽगेल होइक। दुनू भाई आब œमशः बारह आ दस बरखक भऽगेल। सब िकछु नीक रहैक। इमहर गोदा क  फेरो एक बेटा आ एक बेटी भऽगेलिन।

एकाएक रमेश योगीक आ-म मे यË आ पढ़ाई ब8द भऽगेलैक। आब की हो? ओिह मे अिधक€श िव'ाथ िमिथला आ उwराखंड सँ अित िनधन पिरवार सँ रहैक। माता िपता लग कोनो उपाय निह। िकयोक कोनो फै–Ðी तऽ िकयोक कोनो आन मजदूरी शु{ केलक। िकछु नीक िव'ाथ सबहक नाम€कन कानपुर आ अगल बगल केर सँEकृत िव'ालय (महािव'ालय) मे भऽगेलैक। ओहने िव'ाथक हƒज मे जटा आ सxयवÊत Ñल। िमिथलेक एक गुHजी अपन 4भुxव सँ दुनूक नाम€कन एक सँEकृत िव'ालय मे करा देलिथन। ओिह िव'ालय

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) मे छाh सभक  दुनू सkझ भिर पेट रोटी दािल भोजन भेटैक। खोराकी अगल बगल क  सेठ साहूकार सब धमक नाम पर दान मे दैक। किहयो काल तरकारी आ खीर िमठाई सेहो िवशेष लोकक कृपा सँ भेट जाइक। लोक सभ िव'ालय क  छाh सभक  ¹ाºण भोजन,पूजा पाठ लेल सेहो बजबैक। अिह मे नीक िनकुत भोजनक अलावा वEh, वतन आ नगद सेहो हािसल भऽजाइक। ई दुनू भाई अपन पैसा बचा माय क  पठाबय लागल। कजp सँ किन आिफ़यत होमय लगलैक। दुनू भाई पढ़ैत रहल। पढ़ाई मे नीक करैत रहल। जटा किन मुँहक जोर Ñल आ सxयवÊत किन मृदुभाषी मुदा ग¡भीर आ चुEत चालाक लोक। देखैत-देखैत जटा अठारह बरखक भऽगेलैक। ओकर दाई अथpत भोलाक माय िजबैत छलिथन। एकिदन भोला सँ अिर गेलिथन: "हौ बौआ, बाप तऽपोता सबहक उपनैनो निह देख सकलथुन, हमरा कम सँ कम जटा क  िबआह करा ओकर किनया देखा दएह! मरलाउwर तोहर िपता भेटता तऽकिह देबिन जे एहन अिछ अहkक पोताक किनया!" ई कहैत ओिह बूढ़ीक धसल आँिख सँ नोर मािट पर टप-टप खसए लगलैक।

भोला तुरत अनमोल माEटर लग अंतदÒशी लेने पहुँच गेलाह। बजलाह, "माहटर साहेब, हमर माय आई एक कचोटक बात बािज देलक। ऊपर सँ ओकर नोर थमहक नामे निह लऽ रहल अिछ। कहैत अिछ जे आब बहुत िदन निह जीत। मरए सँ पिहने जटाक किनया देखऽचाहैत अिछ। किन अहk एक िचÃी मे सब बात जटा क  िलख ओकरा जनतब दऽिदयौक। " भोलाक हाथ सँ अंतदÒशी अपन हाथ मे लैत अनमोल माEटर सब बात िचÃी मे जटा लेल िलख देलिथन। िचÃी भेटला पर जटा िबआह लेल तैयार भऽगेलैक। तीन मासक भीतर जटाक िबआह अपना सँ दू बरख छोट लड़की सँ भऽगेलैक। सोझे साले दुरागमन सेहो भऽगेलैक।

जटाक किनयाक नाम रहैक अनुराधा। लंबाई मे जटा सँ लगभग बराबर। रंग सामिर, देह गदरायल। नािगन सन लट, डोका जकk आँिख, छरगर नोकगर पतरगर नाक, गEसल-गEसल छोट-छोट दूध जकk चमकैत दkत, व¥क वयस Ëाने किनक अिधके उभार, नािरकेर तेल सँ गूथल जुड़ा, रंग िबरंगी नुआ मे अधकटी आंगी आ कखनोकाल पारदश आंगी सँ छटकैत ओकर कसल पयोधिर देखार लगैक एना जेना सब बंधन तोिड़ बाहर आिब जेतैक! जटातऽअपन रसगर किनयाक काया केर 4ेम आ ओकर नेह मे बताह भऽगेल। कखनो ओ अनुराधा क  छोिड़ कतौ जएबाक नामे निह लैत Ñल। मासे िदन पर कानपुर सँ गाम आिब जाइत Ñल।

अनुराधा एक नंबर के खेलािड़। रंग रभसक बात आ िवधान जटा सँ अिधक बुझैत छिल। कतेक िœया 4ितिœया आ खेलक गूढ़ िनयम आ 4योग बुझल रहैक अनुराधा क । िबआहक बाद ओिह मे उwरोwर वृि’ होइत गेलैक। पिरणाम ई भेलैक जे अनुराधा िबना जटा क  कानपुर मे मोने निह लगैक। जटा आचायक अंितम परी¥ाक बाद अनुराधा क  कानपुर अनबाक उपœम करए लागल। पंिडताई सँ नीक कमाई भऽजाइत रहैक। त€िह ई िचंता निह रहैक जे अनुराधा क  कोना रखते की खेतैक, की खुएतैक। अनुराधा ओना तऽकिनया बिन आयिल छिल मुदा जेठ आ कमौआ बेटाक पÓीक होबाक़ कारणे लजव8ती सासु गोदाक लेल सासुओ सँ पैघ बिन गेल छिल। सबिदन जटा एक िचÃी अनुराधा क  िलखैक आ सबराित अनुराधा ओकर

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) उwर िलखैक। बेचारा भोला सबिदन डाकघर िचÃी ख़सेबा लेल अनुराधाक चरबाह जकk जाइत छलाह आ डािकया हुनकाजटाक िचÃी थमहा दैत रहिन। अिह बेर िपतृप¥ मे जे जटा गाम अएलैक से अनुराधा क  गभ ठहिर गेलैक। जखन जटाकानपुर गेल तऽडेढ़ मासक बाद ओकरा अनुराधाक िचÃी सँ ई जानकारी भेटलैक। अनुराधा चाहैत छिल जे ओकर ब‚चा कानपुर मे होइक़ आ जखन ब‚चा होइक़ तऽजटा ओकरा बगल मे रहैक। मुदा िवधनाक िवधान िकछु आरे िलखल रहैक।

एक िदन घनघोर अ8हिरया राित मे कोनो उप9वी लोक एक िव'ाथक हxया कऽदेलकैक। आब की हो? पुिलस पर दबाब पड़लैक जे कोनो घराने खुिनया अपराधी क  चौबीस घंटाक भीतर जेहेल मे डािल देबाक छैक।

जटाक मुँहजोर भेनाइ काल भऽगेलैक। ऊपर सँ िव'ालय मे गुHजी सबमे गुटबाजी चलैत रहैक। जटा जािह गुHक गुट मे छल से गुHजी कतौ बाहर गेल छलाह आ हुनकर 4ित·ं·ी अिह बातक लाभ उठबैत जटाक नाम पुिलस मे िलखा देलकैक। फेर की अध रािh मे पुिलस जटा क  िहरासत मे लऽलेलकैक। भिर राित थाना मे यातना दैत रहलैक। लाठी, ब8दूकक कुंडा आ घुसा सँ पीटैत रहलैक। नाना तरहक यातना। थड िडÔीक सब यातनाक 4योग पुिलस जटा पर तेना केलकैक जेना जटा बहुत कुÎयात आतंकवादी अथवा िœिमनल हो। जटा दैिहक आ मानिशक यातना सं टूटी गेल। अिह यातना सँ मृxयुद.ड नीक इ सोचैत अंततः जटा अपन जानक िच8ता मे ई गिछ लेलकैक जे वएह खूनी छैक। वएह ओिह िव'ाथ क  मारलकैक। सब ओकरे ¦लोिटंग रहैक। पुिलस क  भेलैक जे ओकरा बहुत पैघ कामयावी हाथ लािग गेलैक। सब बात कागत पर िलखा भोला सँ हEता¥र लऽ लेलकैक। दोसरे िदन पुिलस ओकरा हाजत मे लऽगेलैक। मिजEÐेट लग सेहो भोला पुिलस केर भय सँ अपन गुनाह Eवीकार कऽ लेलकैक।4जातंhक अमानवीय तंh मे एक िनदÕष दोषी बिन गेलैक आ दोषी खु>ला स€ढ जकk घुमैत रहलैक! जखन अनुराधा क  पता लगलैक तऽबेचारी बेहोश भऽ गेिल। घर मे मातम वातावरण भऽगेलैक। अनुराधा छिल पुरखािह। िह¡मत रखलक। क़मर किस लेलक। िनणय लेलक जे कानपुर जा अपन पित क  िनदÕष सािबत करत। लोक मनो केलकैक मुदा अपन िनणय पर रणच.डी जकk ओ दृढ़ छिल। दोसरे िदन िबना कोनो आर¥ण क  जनरल िटकट सँ अनुराधा अपन एक प89हवषय देओर सँग कानपुर लेल रेलगाड़ी मे बैस रहिल। अनुराधाक माथ पर एक दैिवक आभा छलिक रहल छलैक।

अनुराधाकानपुर आिब अपन देओर सxयवÊत सँग जटाक िनदÕष होमाक लड़ाई लड़ऽलागिल। ई दुनू देओर भाउज लेल महाभारतक धम यु’ सँ कम निह छलैक। छह मास जेहेल मे रहलाक बाद जटा जमानत पर बाहर आिब गेल। अिह बीच कानपुर मे अनुराधा एक सु8दर सन पुhीक ज8म देलकैक। जटा जेहेल सँ बाहर अिबते मातर बताह जकk करऽलागल। अनुराधा य'िप िवचिलत निह भेिल। लागिल रहल। सxयवÊत पढ़ाई आ धनाजन एकै सÖे करैत रहल। समयक सुई घुमैत रहलैक। जेना अ8हारक बाद इजोत होइत छैक

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) तिहना एहन समय एलैक जे असली खूनी पकड़ा गेलैक आ जटा सकुशल अिह केश सँ मु–त भऽगेल। मु–त भेलाक़ बाद आचायक परी¥ा पास केलक।

एक िदन एक नव मंिदर केर भगवानक 4ाण 4ित§ा मे एक गुHजी सँग जटा सहायक पि.डत बिन कमका.ड करबा हेतु गेल। मनोयोगपूवक सब काजक सँचालन मे गुHजी क  मदित केलकिन। गुHजी बहुत 4भािवत भेलाह। बाद मे जटा क  ओही मि8दरक मुÎय पुजारी बना देलिथन। जटा मंिदर मे पूजा पाठ मे लीन भऽ गेल।

एकबेर उÆजैनक महाकाल मंिदर गेल छल जटा। ओतय केर छटा, भEम आरती, पूजाक प’ित जेना ओकर मोन मे बिस गेलैक। महाकालक अन8य भ–त भऽगेल जटा। अन8त बेर अपन यजमान सबहक पूजा पाठ आ अ8य तरहक सँक>प ओिह 4€गण मे करोलक। िनतिहं जटा सkझ मे भkगक गोला खाइत छल। अपन मि8दर केर 4Eतर मूित क  नीक सँ सजबैत छल। नीक करैत Ñल।मि8दरक गभगृह मे बेH पहर िशविलंग लग कतेक काल सुतल रहैत Ñल। िशविलंग सँग एना लगैत छलैक जेना जटा जीिवत मनुख सँग वातpलाप करैत हो! लोक क  आEथा नहुँ नहुँ जटा िदस बढ़ल गेलैक। अिह मंिदर पर अबैत देरी जटा नामक ˜यि–त समा¦त भऽगेल आ महाकाल पि.डत शा¶त भऽ गेल। समEत ¥ेh मे लोक ओकरा महाकाल पि.डत जी किह सँबोिधत करैक। ई ¥ेh बिनया लोकक रहैक त€िह जटाक भाव किन अिधक भऽगेलैक। मिहला सबमे जटाक œेज किनक अिधके रहैक।

एक मिहला तऽअतेक 4भािवत भऽगेलैक जे जटाक पÓी अनुराधा क  ई शंका होमय लगलैक जे जटा आ ओिह मिहलाक बीच िकछु ने िकछु बात ज{र छैक। िकछु लोकक जे अपना आपक  4xय¥दश बैतबैत Ñल केर दावा रहैक जे मंिदर के भीतर पाछा बला घर मे अ8हार मे ओिह मिहला सँग जटा िकछु करैत रहैक। सxय की रहैक से रामिह जानिथ मुदा एिह सब बात सँ अनुराधा किन अिधके साक€¥ भऽगेिल। जटा पर चौकसी बिढ़ गेलैक। जटाक भाई आब मु¡बई चिल गेलैक। ओहो मुहगर लोक रहैक। वेदक उ‚चारण बिढयk रहैक। एक मंिदर अपने सँ बना ओकर मठाधीश भऽगेल। यजमान सेहो नीक सँÎया मे बना लेलक। जीवन चलैत रहलैक। जटा जखने खुिनया केश सँ बरी भऽगेल सxय˜Êयक िववाह सेहो भोला अथpत ओकर िपता करा देलिथन। अंितम िनणय य'िप एिहबेर जटाक रहैक।

अनुराधा आब दोपहर मे जटा लग बैसय लागिल। ओ मिहला जे जटा पर लाइन मारय सेहो आब किन डरे मे रहैक। जटा पkच भाई भऽगेल। जटाक अंितम भाई ओकर बेटी आ बड़का बेटा सँ सेहो छोट रहैक। अिह बात सँ अनुराधा अपन सासु ससुर सँ तमसाएल रहैत छिल मुदा की कऽसकैत छिल?

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) सxयवÊत छोिड़ सब भाई जटा लग आिब गेलैक। एक बिहनक िबआह सेहो भऽगेलैक।गाम पर जटा आ सxयवÊत दुनू भाई िमल कऽ पÅा घर बना लेलक, पkच छह बीघा जमीन िकन लेलक। आिथक िEथित नीक भऽगेलैक।

कानपुर मे एक िबक़ट समEया - अतय पंिडताई वृिw मे लागल मैिथल ¹ाºण सब यजमानक डरे या तऽमाछ माउस निह खाइत छिथ अथवा चोरा नुका कऽखाइत छिथ। कानपुरक लोक, िवशेष {प सँ बिनया, माड़वारी, पंजाबी आिद यएह सोचैत अिछ जे पि.डत कहॴ म€साहारी भेलैक अिछ! पि.डत छिथ तऽशाकाहारी हेबे करताह। आ अिह सोच मे मारल जाइत छिथ पि.डत कम मे सँलÀन िमिथलाक कमका.डी। बेचारा जटा आ ओकर किनया दुनू 4ाणी एक नंबर केर माछिग’ मुदा अपना घर मे निह खा सकैत Ñल आ ने बना सकैत Ñल। जोगार ई रहैक जे एक आदमी जे ओकर दूरक सँबंधी रहैक ओ अपन घर मे बनाबैक आ दस बजे राित क  बाद जटाक घर पर दऽअबैक। जखन सब सूित रहैक तखन जटाक पूरा पिरवार चुपचाप माछ खेलाक बाद राितये मे क€ट कुस बाहर फƒक आबय, घर मे सƒट, अगरबwी जड़ा सब गंध (मैिथल सुग8ध पढ़िथ!) समा¦त कऽदैक। ई किन झंझट बला काज रहैक तािहं मास िदन मे मुि¸कल सँ एक या दू िदन अिह तरहक Ÿयोत करबैत छल जटा।

अनुराधा छिल ओिह पिरवार सँ जतय पुHख, ताहू मे कमौआ पुHख क  बहुत स¡मान भेटैत छैक। स¡मानक पिरक>पना उटपट€ग जकk रहैत छैक। पुHखक भोजन सामा8य सदEय सँ िविशz रहैत छैक। ओकर पिहरब, ओढब, चलब, ओकर ओछायन िबछायन सब िकछु मे अंतर। जटा लेल सेहो एहने ˜यवEथा अनुराधा केने छिल। घर मे सब लोक लेल रोटी तरकारी अथवा भात दािल एक सामा8य तरकारी बनैक। जटा लेल एक अलग सँ तरकारी अथवा भुिजया अथवा चटनी बनैक। छिलगर दूधक दही अिनवाय रहैक। जटाक वEh 4ितिदन धोल जाइक, आयरन होइक़। सब तरह  जटा क  देखला सँ घर मे ओकर िविशz होबाक़ बात Eपz भऽजाइक।

अनुराधा बुिधयािर बØड। सब िदन जटाक भोजन केलाक बाद जटा बला थाड़ी मे भोजन करैत छिल। जटाअनुराधा लेल सब समान छोिड़ दैत छलैक। बासन मे जे किन मिन बkचल रहैत छलैक सेहो अनुराधा अंत मे खा लैत छिल।

अनुराधा क  एक बातक बहुत तामस रहैक। ओकरा ओिह ठामक लोक - बाल, वृ’, िEhगण, पुHख सब िकयोक पंिडताइन किह स¡बोिधत करैक। अिह बात पर अनुराधाक सृंग चिढ़ जाइक। मुदा छिल लाचार। अनुराधा ओना बहुत रोम€िटक 4कृित क  मिहला छिल। आरो अनेक बात रहैक जािह पर अनुराधा क  तामस चढ़ैक। एक बेर िपतृप¥क समय मे एक आदमी एलैक आ बहुत समान अपन मृत िपताक नाम पर ओिह ितिथ कऽ दान केलकैक। समान सँग पैसा सेहो दान केलकैक। अंत मे ओ आदमी अपन झोड़ा सँ बीड़ीक दू गठरी

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) िनकािल जटा िदस बढ़ैत बजलैक: "महाकाल पंिडतजी, हमर िपता बीड़ी िपबैत छलाह। हम 4ितवष हुनक नाम पर िपतृप¥ मे अ8य सामÔी सँग बीड़ी सेहो दान करैत छी।" ओकर बात पर जटा हर-हर महादेब कहैत बीड़ी ओकर हाथ सँ लऽलैत छलैक मुदा अनुराधा तामसे भेर भऽजाइक। एकबेर अनुराधा राघब सँ मजाक मे कहलकि8ह:"कहू राघब जी, ई कोनो बात भेलैक जे लोक सब माता िपताक नाम पर िपतृप¥ मे बीड़ी िसगरेट दान करैत अिछ। ऊपर सँ तक अनमोल। कहत, हमर िपता पीबैत छलाह तािहं चढ़ा रहल छी। भाई िपता दा{ िपबैत छलाह तऽ अहk दा{ दान करब? िपता लड़की सँग सुतैत छलाह तऽअहk लड़की दान करब? बजरखसुआ निहतन! अनेड़े क  चोचला ठाढ़ केने अिछ! तँग आिब चुकलछी!"

राघब चुEकी लैत कहिथन: "चलू ने, अिह सँ तऽफायदा अिछ ने आहkक ! आ लड़की दान केलकैक तऽ अहkक पि.डत जी क !” अनुराधा: "कपार फायदा! लोक हँसैत रहैत अिछ। ककरा लग बेच जाउ? लोक हंसत। सब बीड़ी िसगरेट क  फƒिक दैत छी। रहल लड़की बला बात तऽ पि.डत जी खूब आनंिदत हेताह। एकरंगाह चीज़ सँ नव चीजक रस भेटतिन। मुदा से हम थोड़े ने होमऽ देबिन!”

जीवन चिल रहल छलैक। जटा आ अनुराधा क  एक बेटी आ दू बेटा रहैक। दोसर बेटा भेलाक़ बाद अनुराधा नशबंदी क  ऑपेरशन करा लेलिन। अपन सौ8दयक 4दशन मे अनुराधा बहुत साक€¥ रहैत छिल। हमेशा चमक दमक मे मातिल। देह किहयो झुर निहं भेलैक। कसल-कसल आंगी, नािगन जकk जुड़ा आ चलबाक अंदाज अनुराधा क  गजगािमनी बनेने रहैक। अगर पंिडताइन क  तगमा निहं भेटल रिहतैक तऽकतेक आदमी लाइन मारैत रिहतैक! मारऽबला एखनो की Hकैक! तािह पर सँ काितल बिन बड़का-बड़का आँिख सँ ताकब एहेन चीज़ रहैक अनुराधा क  जे बूढॲ लोक क  जुआन बना दैक।

अनुराधा नख िशख िसंगार करैक। ओकरा बुझल रहैक जे जीवन मे Ehी पुHख क  सब सुख करक चाही। अनुराधा बुझैक जे केिल पुHख क  बाि8ह कऽ रखबाक सवÕwम य8h छैक। ओकरा बूझल रहैक जे उदासीन पुHख क  सेहो एक चतुर मिहला अपन सॱदय, उभार आ उwेजना सँ 4ाण आिन सकैत अिछ। ओकरा बुझल रहैक जे अगर पुHखक मोन निहयो छैक तऽ सयािन आ खेलिल नारी अपन क8त क  शरीर मे काम Æवालाक आिग फूँिक सकैत अिछ। ओकरा काम िœया मे लीन कऽसकैत अिछ।

अनुराधा केिल िœया क  खेलब कहैक। पता निह ई सोनहाएल देसी ख€टी शŸद अनुराधा कतऽसँ सीखने छिल? अपन िकछु खाश मिहला सँग जखन बात करैत छिल तऽखेल शŸदक 4योग करैत छिल अनुराधा। एकबेर एक नव Ehी क  जे अनुराधा क  दूरक स¡ब8ध मे ननिद लगतैक अनुराधा पुिछ देलकैक: " अहkक तऽटटका िबआह भेल अिछ। कतेक बेर खेल करैत छी?"

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) बेचारी नव ˜याहिल नािर, कानपुर मे रहिल, कानपुर मे पढ़िल, निह बुिझ सकलैक अनुराधाक बातक अथ। मुँह भकुएने ठाढ़ रहलैक। जखन अनुराधा क  लगलैक जे ओकर बातक आसय ओ लड़की निह बुईझ सकलैक तऽअपन बwीसी देखबैत बाजिल: "दूर अलूिर निहतन! एकरो माने निह बुझलौ अहk! हम आब खोइल कऽकिह दैत छी। हम पुछैत रही जे घरबला सँग कतेक बेर "ओ" करैत छी?" अनुराधाक बात पर लाजे लाल भेल नाियका मुँह झपैत घर िदस भािग गेलैक।

अनुराधा दkत देखबैत िनतराइत फेरो ओकरा पाछा-पाछा जाइत पकिड़ लैक आ कहैक: "अरे, अिह मे लाजक कोन बात! हम की कोनो कतौ बाजब? हम तऽई जानय चाहैत छी जे अहk सब एक दोसर क  कतेक चाहैत छी, कतेक सँतुz करैत छी। आिखर ई काज तऽ भगवानक देन छिन। क  निह खेल करैत अिछ से कहू?अिह सँसारक वृि’ Ehी पुHखक खेले सँ होइत छैक।" अनुराधाक बातक Eपzीकरण सँ ओिह नवŸयाहता क  िह¡मत बढलैक। लÆजा भाव किन ितरोिहत भेलैक। उमंग किन जगलैक। Ehी पुHखक केिल पर किन िजËासा बिढ़ गेलैक। अनुराधा क  सँबोिधत करैत बजलैक: "हमर छोड़ू। पिहने अपन कहू जे अहk सब जखन िबआह भेल तखन कतेक बेर खेल करैत रही?" अनुराधा पकठोस भेल खुजल कामायनी बनैत बाजिल: "हम सब तऽ ओही मे मगन भऽगेल रही। की िदन आ की राित। सदैव ओकरे जोगार, ओकरे 4योजन। कतेक बेर होइक़ तकर कोनो िगनती निह। कखनो अपन मोन निह रहैत Ñल तऽपित महोदय क  मोनक र¥ाथ ओिह 4िœया मे लािग जाइत रही। से जे होइक़ मुदा एिह आनंदक कोनो बरनेका निह।"

आब नवŸयाहता किन सलÆज बनल उwर देलकैक: "हमरो सबहक िEथित अिहंक सन अिछ। कखन िदन आ राित पते निह चलैत अिछ। कतेक राित एिह चÅर मे भोजनॲ निह बना पबैत छी।"

अनुराधा: "बाह, ई भेल ने बात!"

नाियका: "लेिकन हमरा सँ अिधक हमर पितदेवक यान अिह िदस रहैत छिन। कतेक बेर हम हािर मािन लैत छी। कतेक बेर थािक जाइत छी।"

समय चलैत रहलैक। ब‚चा सब बढ़ैत रहलैक मुदा अनुराधा आ जटाक 4ेम िनत नूतन होइत रहलैक। जँ- जँ बयस बढ़ल गेलैक दुनूक़ मय 4ेमक सघनता बढ़ल गेलैक।

एक बात किन गड़बड़ भऽगेलैक। जखन जटा मडर केश मे फ़सलैक त€िह ¥ण अनुराधा गभवती रहैक। ओिह समाचार सँ अनेक तरहक शंका, भय आिद सँ ओकर मोन िचि8तत रहैक। तकर असर ई पड़लैक जे

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) दुनूक पिहल सँतान बेटी किन मंद भऽगेलैक। जखन बेटी अठारह बरखक भेलैक जटा ओकर िबआह करा देलकैक। िबआह मे नीक जकk ठका गेलैक।

ख़ैर, िबआह भेलैक तऽब‚चो भऽगेलैक। बेटा रहैक। जटा आ अनुराधा नाना नानी बिन गेल। समय कट लगलैक। नाित सदैव नाना नानी लग रहैक। जटा क बेटी िकछु कोस शु{ केलकैक जािह सँ अपन पैर पर ठाढ़ होइक़। दोसर ब‚चा निह करतैक तकरो िनणय लऽलेलकैक।

जटाक दुनू बेटा पढ़य मे ठीक निह रहलैक। बड़का कहुना बारहवॴ केलाक बाद कोनो कंपनी मƒ छोट मोट नौकरी शु{ केलकैक। छोटका 4ाइवेट कॉलेज सँ इंजीिनयिरंग केलाक बाद बैसल रहैक। ओना कानपुर मे दुनु बेटा लेल मकान, नीक स¡पित िकन देलकैक जटा।

अिह बीच एकाएक एक चमxकार भेलैक। एक बेर भागवत कथा सुिन ततेक ने िवभोर भेलैक अनुराधा जे शु’ शाकाहारी भऽगेलैक। गला मे तुलसीक माला धारण कऽ लेलकैक। सदैव हरे कृण हरे कृण भजैक। ओकरा भगवान मे, भगवत भजन मे िचत लािग गेलैक। ¦याज, लहसुन सब िकछु सहष xयािग देलकैक।

जटा अपने तऽ शाकाहारी निह भेल मुदा अनुराधा लेल कोनो ˜यवधान निह ठाढ़ केलकैक। समय चलैत रहलैक। अनुराधा लेल जटा एक कार सेहो िकन देलकैक।

एकिदन कार सँ जटा आ अनुराधा हिर·ार जाइत Ñल। नाित सेहो सँग रहैक। मय राEता मे कारक बैलƒस गड़बड़ा गेलैक। कार एक बेर उलिट कऽ फेरो ठीक भऽ गेलैक। कार पर सँ अनुराधा आ ओकर नाित खिस पड़लैक। अनुराधाक कपार फुइट गेलैक। नाित ओतिहं दम तोिड़ देलकैक। महा अनथ भऽगेलैक। लोकक सहायता सँ जटा अपन पÓी अनुराधा क  एक अEपताल लऽ गेलैक। बहुत खून चढलैक। ऑपरेशन भेलैक। घाव ठीक भऽगेलैक मुदा वाक बंद भऽगेलैक।

अनुराधा अपन मुँह सँ खेनाइ ब8द कऽदेलकैक। नली लगा िलि–वड वEतु देल जाइक। जटा अपन सब िकछु छोिड़ अनुराधाक सेवा मे लागल रहल। छह मासक बाद अनुराधा उठइ बैसय लगलैक। मुदा याददा¸त वापस निह एलैक। वाक सेहो बंदे रहलैक। ककरो निहं िच8हैक। कोनो उचाबच निह। कोनो सुिध निह। सब कम होइक़ मुदा पता निह चलैक। अंत मे जटा जेठ बेटाक िबआह करा लेलक। पुतहु आिब गेलैक मुदा अनुराधा क  कोनो 4गित निहं भेलैक। इमहर अपन पुतहु क  समEया सँ 9िवत भेल भोला अÄ पािन छोिड़ देलिन। एक बरखक बाद भोला िबरासी बरखक अवEथा मे अिह सँसार क  छोिड़ देलाह।

भोलाक -ा’ कम भेलाक़ दस िदनक बाद एक िदन अनुराधाक हालत देिख जटा छोट नैना जकk ठोिह पािर काने लागल। एकाएक बािज उठल: "हे महाकाल, हे केशब! कतेक परी¥ा लऽरहल छी! हरे कृण आब

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) लाचार छिथ। िहनका मुि–त िदयौन!" ई कहैत जटा अपना हाथे एक मंhक जाप करैत गंगाजलक चािर बू8द अनुराधा क  मुँह मे डािल देलकैक। राित क  ठीक एगारह बजे एक िहचकी उठलैक आ अनुराधा गोलोक लेल िबदा भऽगेिल। जटा अंितम नोर ख़सा बेटा क  कमक तैयारी मे लगा देलकैक। एक अयाय समा¦त भऽगेलैक। महाकालक आराधना मे एखनो लागल अिछ जटा। शायद िजनगी मे फेरो हेतैक कोनो करामाती घटना। हर-हर महादेबक Eवर सँ अनघोल भेल रहैत छैक मि8दरक 4€गण। ओिह िननाद मे जेना अबैत रहैत छैक अनुराधाक Eवर - ओकर गीत, भजन, हरे कृणक नाम, ओकर 4ेमक अलाप,ओकर चूड़ीक खनखन, ओकर पाजेबक Hनझुन, ओकर 4ाती आ सkझक भि–तमय गान, ओकरबटगमनीक हु>लिसततान। ओह, कतऽछी भगबान!

ऐ रचनापर अपन मंत˜य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। 4णव झा दोसर िबयाह (लघुकथा)

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िवनय कkची कामाकोिट चाइ>ड ÐEट सं डीएनबी पीिडयािЖस आ एफएनबी पीिडयािÐक हीमेटोलॉजी (िशशुरोग िवशेषË) क के सहरसा मƒ नबे-नबे 4ैि–टस शु{ केने छलाह. कkची कामाकोिट चाइ>ड ÐEट सन जानल- मानल संEथान सं िशशुरोग मƒ िवशेषËता आ फेलोिशप हािसल केला के बाद कइएक महानगरीय कॉपÕरेट अEपताल मƒ िहनका Æवाइन कर के मौक़ा भेटल छल, मुदा िवनय एमबीबीएस करै काल ई िनयारने छलाह जे डॉ–टरी मƒ िवशेषËता हािसल केला के बाद गाम घुिर औता आ सहरसा मƒ अपन ि–लिनक खोिल के 4ैि–टस करिथन. हुनका बुझल छल जे एही ठाम िवशेषË डॉ–टर जे नैितकता के साथ 4ैि–टस करै, केर कमी छै आ तÉ इहो िव¶ास छलै8ह जे एक बार जिम गेला मातर िहनकर 4ैि–टस िनक चलतƒ.

नबे-नबे ि–लिनक फुजले छल तािह दुआरे एखन रोगी-मरीज क¡मे आबै छलै8ह ि–लिनक पर. बेसी मरीज सब गरीब-गुरबा आ Ôामीण पिरवेश बाला सब छल. मयम आ उ‚च वग एखन धैर या त डॉ–टर िवनय के ि–लिनक आ योÀयता से अनिभË छलाह आ नै त हुनकर छोट-छीन ि–लिनक आ हुनका, पिहने सं Eथािपत डॉ–टर के मुकाबला मƒ Eवीकारने नै छलाह.

एहने सन मƒ एकटा मयम वगय जोड़ा अपन दू मासू ब‚चा के ल क िहनका ि–लिनक पर आबय लागल छलाह, आ फेर िहनका सब सं िवनय के लंबा नाता बैन गेल छल. गोर-नार किनयk आ लंबा-तगड़ा बर.

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) यादवजी अपने त एकदम मॉडल सन लागै छलाह. दुनू के कहkिदन लव मैरेज छल. यादवजी अपने िबि>डंग मटेिरयल के कारोबार करै छलाह आ किनयk बÉक मƒ –लक छलीह. सिदखन अपन ब‚चा ल के दुनू बेि–त संगे आबै छलाह. दुनू बØड खुशिमजाज छलाह आ िवनय के बहुत आदरो करैत छलाह.

दुनू लगभग तीन बरष धैर अपन ब‚चा के ल क िहनका ि–लिनक पर आबैत रहल छलिखन मुदा तै के बाद लगभग दू बरष से िहनका ि–लिनक पर नै आयल छलिखन. िहनका होय छल जे कदािचत ब‚चा EवEथ हेतैक या भ सकैअिछ जे ओ सब जगह या डॉ–टर बदैल नेने होइथ.

मुदा एक िदन ब‚चा के माय एकसरे ब‚चा के नेने िहनका ि–लिनक पर पहुँचिल. आबैत मातर िवनय पुछलिखन "अरे वाह! एwेक िदन बाद एलहुँ अिछ! की हाल चाल छैक?" "जी सब ठीके ठाक छै." हँसैत ओ बाजिल, मुदा हुनका चेहरा पर ओ खुशिमजाजी नै देखल जे पिहने देखना मƒ आबै छल. "और, यादव जी के की हाल चाल? कत छैथ आई कैµ?"

िकछ काल मौन रहला के बाद ओ बात बदलैत बाजिल जे "सर एकरा चािर िदन सं बोखार लािग रहल छै."

िवनय के अंदाज लािग गेल छल जे हुनकर बात के जानी-बुिझ के अनदेखल क देल गेल छल, Eवाइत ओहो ई बात के अंिठया क ब‚चा के Ðीटमƒट करै लागल छलाह.

"सर यादव जी आ हम अलग भ गेल छी."

ई सुनैत 4ेिEœ¦शन िलखैत िवनय के कलम Hिक गेल छल.

"ओह! मुदा से िकएक? " िवनय पुछलिखन.

"सर ओ बØड तमसाय छलाह हमरा पर, बात-बात पर िचिचयेनाइ आदित बिन गेल छल हुनकर. काज-धंधा सेहो बंदे सन क देने छलाह ऊपर से हम काज पर जाय छलहुँ ताहु मƒ शक करै लागल छलाह."

ई सब सुनैत िवनय अपन भावना पर संयम राखैत एकटा 4ोफेशनल डॉ–टर जेका दवाई िलिख रहल छलाह. िकये त पिहल त ई, जे ओ एखन धिर मािमला के एकै टा प¥ सुनने छलाह आ दोसर जे ओ मिहला िहनका से कोनो सलाह नै म€गने छलीह.

"ई दवाई सब ब‚चा के खुआिबयौ आ तीन िदन बाद फेर से देखा लेब. साधारण वायरल बोखार लािग रहल अिछ, तÉ घबरेबा के किनयॲ नै छैक." एतेक किह िवनय चुप भ गेल छलाह

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) मुदा जखन ओ उिठ क जाय लागल छलीह त िबन म€गने सलाह नै दै के अपन िस’€त पर िवनय के िनयंhण नै रहलैन आ एwेक भिर किह देने छलाह जे "एकबेर अहk दुनू के हमरो से पुछबाक चाही छल या कोनो मनोवैËािनक कंस>टƒट स सलाह ल लै के चाही छल, ख़ास क के ब‚चा के भिवय के लेल."

"सर, आब त जे होय के छल से भ गेल. कोट मƒ सेहो मामला िनबटै बला अिछ. ¡युचुअल िडवोस भेट जेतैक."

२-३ िदन बाद यादवजी सेहो ि–लिनक पर एलाह. एकसरे.

"सर हमर ब‚चा आयल छल की अपन माय संगे?"

"हँ आयल छलीह, मुदा अहk के की भेल अिछ, बØड कमजोर लािग रहल छी?" यादवजी के 4Úक जवाब मƒ हुनकर देह-दसा देखैत िवनय जवाबक संग ई सवाल केने छलाह.

"सर, हमर िकडनी खराप भ गेल अिछ, डायिलिसस पर छी. हमर ब‚चा केहेन छै आ ओकरा की भेलै य " "ब‚चा ठीक य, साधारण वायरल बोखार छै २-४ िदन मƒ ठीक भ जेतै. अहk दुनू के बीच की भेल? कwेक िनक लागय छलहुँ दुनू एक संगे." िवनय बजलाह.

"सर ऐ सब मƒ हमरे गलती छल, िपछला दू साल सं हम ओकरा संगे बØड खराप ˜यवहार करै लागल छिलयै, बात-बात पर िचिचयाइत छलहुँ, एक बेर त हाथो उठा देने छिलये, तािह से ओ घर छोिड़ के चैल गेल छलीह."

"िववाह के कwेक समय भेल छल?"

"सर, छह साल भ गेल छल."

"आ अहk किहया से एना करै लागल छलहुँ?"

"सर दू-एक साल से पता नै हमरा एwेक तामस िकएक उठै लागल छल."

"शायद अहk के बीपी बहुत िदन सँ हाई भेल छल" िवनय बाजलाह

"हमरा पता नै छल, एक बेर Eटोन आ इंफे–शन भेल छल."

"भ सकै अिछ जे अहk हाई बीपी आ यूिरया बढ़ला के चलते िखिसयाह भ गेल हेबै."

"भ सकै अिछ सर, ई त करीब सात महीना पािहले तकलीफ भेल छल तखन पता लागल जे िœएटाइन ८ भ गेल अिछ."

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७)

" आ ओ अहk स किहया अलग भेली?"

"करीब एक साल पिहने"

"हुनका पता छैन ई सब ग¦प?"

"नै सर, आब की फ़ायदा हुनका बताबय के. ओ अपन िजनगी िनक से जीबैथ आ हमर ब‚चा बस ठीक से रहै आर हमरा िकछ नै चािह.ओहुना ओ शायद दोसर िबयाह क रहल छिथन आ संग रिहतहु कोन हुनका हमर परवािह रिहतैन." यादवजी बाजला

"डॉ–टर अपनेक िकडनी के िवषय मƒ की कहै छैथ?"

"सर Ѐस¦ल€ट के लेल कहल गेल अिछ, ता धिर डायिलिसस" अपन दयनीय पिरिEथित के बावजूद यादवजी पूणत: संयत, दृढ आ श€तिचत भ जवाब देने जा रहल छलाह.

"Ѐस¦ल€ट करवा पेबै?" िवनय पुछलिखन.

" सर दू भाई अिछ हमरा, दुÄू पिहनहे िभÄ भ गेल अिछ, माय बूढ़सूढ़ अिछ. तथािप छोट भाय त िकडनी देबय चाहै छल मुदा हुनकर किनयk आ सासुरक लोक सब कÄारोहैट मचा देने अिछ, अEतु आब ओहो नै द सकत."

ऐ तरहे ओ लंबा-चौड़ा, हÃा-कÃा नौजवान के जीवन िवनय िवनय अपना सामने ऐ तरहे बदलैत देखलिखन

िकछ देर आर ग¦प केलाक बात ओ चल गेल छल.

तीन िदन बाद हुनकर किनयk ब‚चा के ल क फेर आयल छलीह. ब‚चा ठीक छल.

"सर एकटा बात पूछी?" िचरपिरिचत चहचहाट के संग ओ बाजिल

हँ हँ िकएक नै पुछू. "हम यिद दोसर िबयाह क लेब त हमर ब‚चा के िदमाग पर खराप 4भाव त नै पड़तैक?"

ऐ बातक उwर िवनय बहुत ज>दी आ संि¥¦त मƒ द क बचै चाहै छलाह. अEतु बजलाह "ई त बहुत रास बात पर िनभर करत पिहल त ई जे जकरा सं अहk िववाह करबै ओकर ऐ ब‚चा के 4ित की ˜यवहार रहैत छैक, िकएक भ सकै अिछ जे अहkक ब‚चा कइएक महीना या साल भिर हुनका बाप के {प मƒ नै देख पाबै. यादवजी के िकछ खबर अिछ अहkके?" संि¥¦त उwर दैत िवनय ई 4Ú केने छलाह.

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) "नै बस िकयौ कहै छल जे दा{ पी पी के कमजोर भ गेल अिछ." ओ बाजिल "एहन बात नै छैक, अहkक पता होबाक चाहीए छल जे हुनकर दुनू िकडनी खराप भ गेल अिछ, िपÑला छः मास सं ओ डायिलिसस पर जीब रहल छैथ. आ जखन अहk दुनू संग छलहुँ हमरा लगै अिछ जे तखने सं हुनकर िकडनी के िशकायत 4ायमरी फेज मƒ छल आ है बीपी आ शारीिरक बदलाव के कारणे ओ एहन िखिसयाह भ गेल छलाह आ काज-धंधा पर यान नै दैत छलाह." िवनय बाजल छलिखन.

ई सब ग¦प सुिन के यादवजी के किनयk के मुंह अवाक भ गेल छल.

िवनय के हुनकर चेहरा पर बनैत बीतल समय मƒ घटल घटना सब के तीवÊ Ûलैशबैक के अंदाज लागय लागल छल. जेना कोनो 4ोजे–टर पर कोनो िफ>म के िरपीट क देल गेल होय आ िœिटक ओकर सीन सब के नब दृिzकोण आ ˜याÎया के संग देख रहल होय.

फेर फ़टाफ़ट ओ उठली आ ब‚चा आ इलाजक फ़ाइल लय ओ बाहर चल गेली. कदािचत ओ अपन मोनक भीतरी भाव के िवनय तक नै पहुँच दैत चाहै छलीह, शायद ओ अपन ˜यथा ककरो नै बतबै चाहे छलीह.

अब िवनय अपन कुस पर पाछk धिस गेल छलाह आ अिगला मरीज के आबय के इंतज़ार करैत सोचे लागल छलाह जे ˜यथÒ ओ हुनका ई सब ग¦प बता देलिखन. बेचारी कतेक खुश छलीह. दोसर िबयाह करै वाली छलीह, किरतिथ त अपन नव िजनगी के तलाश किरतिथ, हमर ऐ मƒ की जाय छल...आिद..आिद....

ऐ घटना के करीब तीन महीना बीत गेल छल. एक िदन अचानक से ओ दुनू बेि–त फेर अपन ब‚चा संगे िवनय के ि–लिनक पर उपिEथत छलाह. पिहलुके िचर-पिरिचत अंदाज मƒ ओ बाजिल...

"सर प89हम िदन िहनकर रीनल Ѐस¦ल€ट करवा रहल छी"

"अरे वाह, डोनर भƒट गेल?" उxसाह आ ख़ुशी िमि-त भाव स िवनय पुछलिखन

"जी, सर हमर सभटा ज€च भ गेल अिछ, िकडनी मैच क गेल छै" ओ बजली.

ऐ पर यादवजी बाजला "जी सर ई िकडनी द रहल छैथ हमरा".

"दोसर िबयाह क रहल छिथन ई.......हमरा सं" किनयk के िखिसयाब के अंदाज मƒ यादव जी बाजल छलाह. 4ेम, ख़ुशी आ उमंग के चमक हुनकर आँिख मƒ साफ़ देखल जा सकै छल.

आई िवनय सेहो अपना आप मƒ बहुत संतुिz के अनुभव क रहल छलाह...सोिच रहल छलाह जे मनु–खक केहन केहन ˜यवहार होइत अिछ....

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) -4णव झा राÐीय परी¥ा बोड,नयी िद>ली ऐ र चनापर अपन मंत˜य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रबी89 नारायण िम- - ३ टा िनब8ध अश€तEय कुतः सुखम् जीवनमे सभ िकछु भेटलाक बादो कखनहुँ काल लोकक मोन होइत रहैत अिछ जे कोनो एहन ठाम चली जािहसँ मोन िनचैन भए जाए, सभ िकछु िबसिर िकछु िदन शाि8त सँ िबताबीआ झंझिटसभक  कात कए दी। कखनो-कखनो िचज वEतुसभ˜यथ लागए लगैत छैक, होइत छैक जे कहुना ओिहसभसँ िपंड छोड़ाबी िकंवा िकछु एहन कए ली जे िनिÜंत रही। से िकएक होइत छैक? सबिदन हमसब अपन धीया-पुताक सुख-सुिबधाक हेतु काज करैत रहैत छी। समाजमे, अपन लोक- बेदक बीचमे मान-स¡मान हो, हमरा -े§ बुझल जाए,अनकासँ हम सेसर रही, एही लफड़ा सभमे जीवनक मू>यवान समय चिल जाइत अिछ आ अ8तमे हाथ अबैत अिछ फोकला। मनु–खक मोहवंधन ततेक मजगूत होइत अिछ जे ओ अ8त-अ8त धिर ओकरे फkसमे फँसल मेिहआ बड़द जकk बहैत रिह जाइत अिछ आओर एकिदन मुÃी ब8हने एिह दुिनयkसँ 4Eथान कए दैत अिछ। सभ िकछु ठामिहँ रिह जाइत अिछ।–यो एकर अपवाद निह रहैत अिछ। आया है सो जाएगा, राजा-रंक फकीर। एक िसंघासन चिढ़ चले, एक बंधे जंजीर।। एकबेर एकटा मिहलाक  लकबा मािर देलकै। ओ अEपतालमे भत रहिथ। बाजल निह होिन। कै िदनक 4यासक बाद हुनका कनी-मनी होश भेल। कहुनाक मुँहसँ आवाज फुटलैक। होश होइतिह पिहल बात ओ इएह बाजल जे सूिद वसूलल गेल िक निह? सोिचयौ, जे टाकासँ केहन मोह छलेक ओकरा! जान जाए पर छलैक, अEपतालक आपिwकालीन िवभागमे भत छल, हैथ-पैर सुÄ भेल छलैक, मोसिकलसँ कहुनाक आवाज फुटलैक तँ सभसँ पिहने की बाजल? इएह िथक माया। ई जिनतो जे सभटा एतिहँ रिह जाएत, लोक अ8त- अ8त धिर टाका बटोरबामे, लूट-खसोटमे लागल रहैत अिछ। तखन शाि8त कतएसँ होएत? एकटा राजाक महल लग एकटा लोहार िदन-राित खट-खट करैत रहल छल। राजा एिह बातसँ तंग भए गेलाह। कोनो उपायसँ चाहिथ जे एिह खट-खटीक  बंद कराबी। एक िदन ओ ओिह लोहारक  बजओलिथ।लोहार डरा गेल। ओकरा निह बूझएमे अबैक जे ओकरासँ कोन अपराध भेल जे ओकरा राजा बजा रहल छिथ। खैर! ओ राजासँ भ ट करए पहुँचल। ओकरा देिखते राजा कहलिखन जे तोरा जतेक टाका चाही से लए लएह मुदा ई खटर-पटर बंद करह। राजाक बात काटत के? ओ राजासँ यथेz टाका लेलक आ ओिह िदनसँ अपन काज केनाइ बंद कए देलक। काज बंद तँ कए देलक मुदा ओकरा तिहआसँ िनÄे निह होइक। की करए? कतेको राित करोट बदलैत बीित गेलैक। एिहसँ ओ ततेक तंग भए गेल जे होइक जे जान चिल जाएत। हािर कए ओ राजाक

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) ओतए दौड़ल गेल आ जे टाका लेने छल से आपस कए 4ाथना करए लागल जे ओकरा अपन काज फेरसँ शुH करबाक आËा देल जाइक। राजा छगुंतामे पिड़ गेलाह। पुछलिखन जे बात की िथक, ओ िकएक टाका आपस कए रहल अिछ? लोहार कहलकैक-“सरकार! जिहआसँ काज छोड़लहुँ, हमर सुख चैन हरा गेल। हमरा माफ कएल जाए, हम अपन पिहलका जीवन जीबए चाहैत छी। ओहीसँ हमरा शाि8त भए सकैत अिछ।” राजा ओकर समEया बूिझ गेलाह आ ओकर बात मािनलेलाह। तकर4ातेसँ ओ लोहार अपन काज शुH केलक। ओिह राित ओ बहुत चैनसँ सुतल। फेरसँ वएह ठक-ठकी सुिन कए राजा बहुत जोरसँ हँसलाह। ई कथा बहुत लोकक  बूझले होएत, मुदा एिहमे बहुत गंभीर िश¥ा भरल अिछ। धन-संपिwसँसुख चैन निह भेिट सकैत अिछ। लोभ-लालचसँ निह, अनकर हक मािर लेलासँ निह अिपतु पिर-मपूवक उपािजत धनसँ जीवन-यापन केनेसँ मोनमे शाि8त भेिट सकैत अिछ। समEया अिछ जे लोकसभ सभ िकछु बूिझतो एतेक िफरसान िकएक रहैत अिछ जखन िक –यो से चाहैत निह अिछ? कारण सहजे ताकल जा सकैत अिछ। अिधक€श ˜यि–त अनकर सुखसँ दुखी रहैत छिथ। ओ िकएक बिढ़ रहल अिछ, ओकर मकान हमरासँ पैघ िकएक छैक, ओकर ब‚चा कतहुँ पढ़लकैक अिछ, ओ सभतँ सभ िदन हमरासभसँ दव रहल आब कतएसँ पैघ भए जाएत? एहीठाम हम मािर खाइत छी। जँ हम सकाराxमक सोच-िबचार राखी, अनको उपलि˜धसँ 4शÄ हेबाक भाव राखी तँ िनÜय हमरा 4शÄ हेबाक बेसी अवसर भेिट सकैत अिछ। छै ने सत बात? नाि8हटा जीवनक  के कोना िबताबए चाहैत अिछ से बात बहुत हद धिर ओकरेपर िनभर करैत अिछ। समयतँ बीितए जाएत चाहे जेना बीता िलअ,हँिसकए बीता िलअ चाहे कािन कए। असलमे कोनो घटना िवशेष ककरा पर केहन 4भाव करत से ओकर 4वृितपर िनभर करैत अिछ। ई ओिहना भेल जेना एकटा िगलासमे आधा पािन भरल अिछ तँ –यो कहत जे आधा पािन खतम भए गेल, तँ –यो कहत जे एखन तँ आधा पािन बkचले अिछ, िचंता कथीक? एकटा अपन मकान बनलासँ कतेक खुशी होइत छैक। तिहना जँ अनको मकानसँ हमखुश हेबाक 4वृित िवकिसत कए ली तँ िनxय-िनरंतर 4शÄताक वरखा होइत रहत एिहमे किनको शंका निह। चमक-दमकमे रहिनहार अनेको लोकक  देखलासँकै बेिर मोनमे होइत छैक जे ई बहुत भाÀयवान अिछ, बेसमौजमे जीिव रहल अिछ। मुदा ई बात कै बेिर कपोल-क>पना सािबत होइत अिछ। कतेको िफ>मी कलाकार आxमहxया करैत छिथ। जॱ धन-संपिw, ओ सामािजक 4ित§ासँ लोक सुखी रहैत तँ वएह सभ रिहतिथ। मुदा से असिलयतमे निह अिछ। लोक िदन-राित पूजा-पाठ करैत रहैत अिछ, कथी लेल? जािहसँ मनोकामना पूरा होअए, पिरणाम होइत अिछ जेपूजा किरतो काल हम श€त निह रिह पबैत छी। हम गाममे कै बेिर पूजा करैत काल लोकक  िचकड़ैत-भोकरैत देखने छी, महादेवपर जलढ़री करैत काल अनका -ाप दैतसुनने छी, आकबुला-पkती करैत तँ के-के ने देखने होएत। जखनमाथमे एतेक ओझर लए कए पूजा-पाठ कएल जाएत तँशाि8त कोना भेिट सकत? भेटत-अहीँ कहू? इएह िथकैक समEयाक जिड़।

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) य'िप आयु बिढ़ते जाइत अिछ, लोकक मोह घिटते निह अिछ। सभिकछु हमरे भए जाएत से कतहुँ संभव होइक! ई जीवन अपूणतासँ भरल अिछ। सभ िकछु निह भेिट सकैत अिछ। तखन मज अहkक अिछ जे हाय! हाय!करैत रही िकंवा जे िकछु अिदzसँ भेटल तकरा सहष Eवीकार कए संतुz रही। ई बात तँ बूिझ गेिलऐक जे शाि8तसँ रही, एकर बहुत नफा छैक, मुदा शाि8त 4ा¦त कोना भए सकैत अिछ? तािह हेतु की कएल जाए? की निह कएल जाए? असलमेउपदेश देलासँ िकंबा िकताबमे पिढ़ लेलासँ शाि8त 4ा¦त निह कएल जा सकैत अिछ। ई तँ जीवन कला िथक एवम् िनरंतर अÝयासेसँ 4ा¦त कएल जा सकैत अिछ। तथािप िकछु बात मोटा-मोटी जँ यानमे राखल जाए तँ बहुत रास झंझिटसँ बँचल जा सकैत अिछ आओर ओही अनुपातमे श€त जीवन िबताओल जा सकैत अिछ।मोनमे संतोखक भाव एवम् अनाव¸यक 4ितEपधpसँ बचबाक चाही। आव¸यकताक  सीिमत करबाक चाही। आय ओ ˜ययमे संतुलन हेबाक चाही आ सभसँ ज{री अिछ जे मोनमे लोक क>याणकारी भावना िवकिसत करबाक चाही। जे बात अपना नीक निह लगैत अिछ, से अनका संग निह करी।अनकर उपलि˜धसँ ओिहना 4शÄ होइ जेना अपनसँ। अनकर िनंदासँ बची। पिरवारमे सभक उिचत महxव दी। खाली अपने बात चलओिनहारक  अ8ततोगxवा िनराशा हाथ लगैत अिछ। शाि8तक हेतु ज{री िथक जे मन क>याणकारी िवचारसँ ओत-4ोत हो। दोसरक िहतकारी भावना हो। जिहना हम अपन 4गित चाहैत छी, तिहना अनको लेल सोिचऐक।से सभ जॱ हमर मोनमे रहत तँ िनÜय हम शाि8त ओ आनंदक अनुभव कए सकैत छी।तखने सुखी रिह सकैत छी। गीतामे कहल गेल अिछ जे जकर शाि8त निह तकरा सुख कतए? नािEत बुि’रयु–तEय न चायु–तEय भावना। न चाभावयत: शाि8तरश€तEय कुत: सुखम्।।q

सफलताक रहEय एिह दुिनयkमे –यो एहन लोक निह भेटताह जे अपन अधलाह चाहैत होिथ, अिपतु सभ एही 4यासमे लागल रहैत छिथ जे संसारक अिधक सँ अिधक सुख-सुिवधा हमराभेटए, सभ मनोकामना पूराहोअए, बाल-ब‚चा सुखी रहए। एही 4यासमे हमसभ िनरंतर लागल रहैत छी।एिहमे िकछु गलत निहछैक मुदा समEया तखन होइत अिछ जखन सभ 4यास केलाक बादो मनोवkिछत फल निह भेटैत अिछ।एिह पिरिEथितमे कतेको गोटे िनराश भए जाइत छिथ, 4यास छोिड़ दैत छिथ आ कतेकोबेर अनुिचत रEता सेहो अिÎतयार कए लैत छिथ। कै बेर एहन होइत अिछ जे हम कोनो काजमे बखÕसँ लागल रहैत छी आ जखन लßय एकदम लगीच रहैत अिछ तँ थािक कए, िनराश भए अपन 4यासक  िसिथल कए दैत छी िकंबा आधा-अधूरा छोिड़ दैत छी।पिरणाम अनुकूल कोना होएत?से निह होइत अिछ, तँ िवधाताक  दोख देबए लगैत छी। दुिनयkमे Æयादातर

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) असफल लोक आxम-िचंतन करबाक बजाए अपन असफलताक  हेतु दोसरक  िज¡मेदार ठहराबए लगैत छिथ। मुदा तािहसँ की होएत? कोनो 4कारक काजक सफलताक हेतु ज{री अिछ जे हमर समEत शि–तक रचनाxमक उपयोग हो, एकिह संगे दसठाम हाथ देलासँ िकछु निह भए सकैत अिछ। कखनो िकछु, कखनो िकछु जँ करैत रहब तँ बानर बला हाल भए जाएत जे जाही डािरपर जाइत अिछ ओकरा दोसर डािर बेिस हिरयर लागए लगैत अिछ।एकरा लोक कहैत अिछ-बनरकूद।कहबाक ताxपय अिछ जे सबसँ पिहने अपन गंत˜यक िनधpरण करबाक चाही आ तकर बाद संपूण शि–तसँ ओकरा 4ा¦त करबाक 4यास करबाक चाही। एकटा बात तँ तय अिछ जे सफलताक कोनो लघुपथ निह भए सकैत अिछ। आइधिर जे –यो ˜यि–त सफल आदमीमे सुमार कएल जाइत छिथ ितनक िजनगीसँ ई बात बुझल जा सकैत अिछ।अपना देशक भूतपूव राÐपित कलाम साहेब अखबार बेिच कए पेट भरैतछलाह।वतमान 4धानमंhी -ी नरे89 मोदीमहोदय नेÄामे चाह बेचैत छलाह।एतेक िवपÄता अछैत ओ सभअि·तीय कोना भए गेलाह? ई सोचबाक िवषय िथक। एहन कम लोक होइत छिथ जे सुिवधाक अंबारमे जनिमओकए पैघ-पैघ काज कए यशEवी होइत छिथ। पैघ उ'े¸य जँ रखने छी तँ तािह 4ा¦त करबाक हेतु तेहने सघन 4यासो चाही।अजुन जकk सभिकछु िबसिर माh पं¥ीक आँिखपर यान कƒि9त हेबाक चाही आ जँ भीम भाइ जकk एकिहबेर सभ िकछु देखए लागब तखन की भेटत? फोकला! महान उपलिŸधक हेतु तेहने कड़गर मेहनित करए पड़ैत अिछ।तेहने दृढ़ संक>पक संग िदन-राित एक करए पड़ैत छैक।एहन निह भए सकैत अिछ जे ह>लुक पिर-मसँ उxकृz उपलि˜ध भए जाइक। अंÔेजीमे एकटा कहाबत छैक जे “If wish be the horses, poor ride the first” कहक माने जँ इ‚छे केलासँ होइक तँ गरीबे सबसँ पिहने घोड़ाचढ़ए।इ‚छाक संग-संग 4यÓो तेहने घनघोर हेबाक चाही। जेठक दुपहिरआमे जखन रौदसँ मोन आकुल भए जाइत अिछ तखन होइत छैक जे कहुना गाछक छाहिड़मे चली।जखन िपआससँ मोन बेकल भए जाइत अिछ तखन इ‚छा होइत छैक जे हे भगवान! कहुना कतहुँसँ पािन भेटए। तखन लोक ई निह देखए लगैत अिछ जे पािन डबड़ाक अिछ िक गंगाजल।केहनोपािन अमृत लगैत अिछ।तिहना जीवनक संघषक तिपससँ मोन जखन ˜याकुल भए जाइत अिछ तँ लोक थाकल- ठेिहआएल किह उठैत अिछः” हे भगवान! आब अहॴ पार लगाउ”! संघषक समयमे भगवानपर िव¶ास बड़का शि–त दैत अिछ। काज करैत रहू आ फलक िचंता हुनका पर छोिड़ िदअ, इएह बात भगवान गीतामे बारंबार कहने छिथ। एिह काज करबाक शि–त बढ़ैत अिछ। कने-मने असफलतासँ िनराशा निह होइत छैक आ अ8ततः सफलता तँ भेिटते अिछ। मनु–खकमोनमे परमाxमाक बास होइत अिछ। त  जँ ओ सही 4यास करए तँ िकछुदुलभ निह रिह सकैत अिछ। तािह हेित ज{री िथक जे ल¥यक 4ित पूण समपण होइक। आधा-अधुरा मोनसँ कएलगेल 4याससँ िसि’ निह भए सकैत अिछ। ई बात अ–सर देखल गेल अिछ जे हम उwमसँ उwम फल चाहैत छी, जकरा ककरो लग िकछुनीक छैक से हमरा लग िकएक निह रहत? हमसबसँ औअल िकएक निह रहब? से सभतँ ठीक, मुदा जखन 4यास करबाक ग¦प होइत अिछ तँ हम पाछा रिह जाइत छी।

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) रामकृण परमहंससँ एकबेर –यो पुछलकिन जे भगवानक दशनकोना होएत? ओ ओिह ˜यि–तक  पािनमे डूबा देलिखन आ पुछलिखन जे आबकी चाही? ओ िचिचआए लागल-िकछु निह चाही, बस हमरा पािनसँ िनकालु। ओकरा तुरंतपािनसँ िनकालल गेल। पािनसँ बाहर अिबतिहँ ओकरा कहलिखन जे जिहना पािनमे डुिब गेलाकबाद तोरा खालीपािनसँ बाहर हेबाक इ‚छा रिह गेलह आओरिकछु निह सुझाह तिहना जखन भगवानक  4ा¦त करबाक हेतु एकाÔ हेबह तँ ओहो भेिट जेथुन।एहने िखEसा एकल˜यक अिछ। गुH 9ोणाचाय·ारा िश¥ा निह देबाक िनणयसँ आहत ओ गुHक 4ितमा बैसाए िदन-राित साधना करए लगलाह आ अपन लßयक  पािब तेहन िनपुण धनुधर भए गेलाह जे 9ोणाचायÕ घबरा गेलाह आ ओकरासँ अंगूठा म€गबाक नीचता कए गेलाह। सफलताक कुंजी िथक, आxमिव¶ास। Eवामी रामतीथ एकबेर घोर जंगलसँ जाइत रहिथ िक एकटा बाघ हुनका सामने आिब गेल। मुदा ओ िबना िबचिलत भेनिह ओिह बाघक आँिखमे घुरैत रहलाह आ बाघ अपन रEता बदिल लेलक।Eवामीजीक आxमिव¶ाससँ बाघोक  रEता बदिल लेबाक हेतु िववश कए देलक।जॱ हमरा िव¶ास अिछ जे हम ई काज कए सकैत छी तँ बुिझ िलअए काज हेबे करत।देर-सवेर भए सकैत अिछ, मुदा होएत। मानव जब जोर लगाता है, पxथर पानी हो जाता है। जीवनमे सफल आदमीमे एकटा गुण सभठाम देखबामे आएत जे एहन लोकक Hिख सकाराxमक होइत अिछ, ओ दोसरक  टंगिघ‚चु निह करैत छिथ, अिपतु अपन समEत शि–तसँ लßयक  4¦त करबाक हेतु लागल रहैत छिथ।असफलतासँ ओ िनराश भए बैिस निह जाइत छिथ अिपतु आओर जोरसँ काजमे लािग जाइत छिथ।एहने दृढ़ सं–लपी ˜यि–त किठन सँ किठन काजक  सरल बना लैत छिथ आओर सफलताक पराका§ाक  4ा¦त करैत छिथ।q

मनः पूतं समाचरेत जीवनमे बहुतरास अि4य, अHिचकर घटनासब घटैत रहैत अिछ।कतेको बेर ऐहन घटना घिटत भए जाइत अिछ जे मनु–खक  िहला कए रािख दैत अिछ मुदा एहने समयमे संEकार ओ Ëानक परी¥ा होइत अिछ। तकर अभावमे ˜यथासँ िवचिलत लोक गलत रEता पकिड़ लैत छिथ आ कै बेर अनथ कए बैसैत छिथ।हालमे िद>लीक बुरारीमे घिटत लोमहषक घटना समEत जागHक ˜यि–तक  िहला कए रािख देलक।ऐकिहटा पिरवारक एगारह गोटे दूपहर राितमे फkसी लगा कए मिर गेलाह। सभगोटे एकदम EवEथ छलाह। पिरवार आिथकHपसँ समृ’ छल। राजEथानसँ बीस-बाइस साल पिहने िद>ली आिब कए ठीक- ठाकहालतमे छलाह।पर8तु की भेल जे पूरा-क-पूरा पिरवार Eवयं फkसीक फंदाबना झुिल गेल? जkच-पड़तालमे ई बात आिब रहल अिछ जे ओ सभ तंh-मंhक चÅरमे पिड़ गेल छलाह। हुनकासभक  ई अंधिव¶ास छल

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) जे एिह तरह  मरलासँ हुनका सभक  मुि–त भए जाएत।किह निह सxय की छल मुदा भेल तँ अनथÒ। सभतरह  जूड़ल-अटल पिरवार सदा-सवदाक हेतु नz भए गेल आ सेहो धमक नामपर। त  मनु–खक  चाही जे आँिख खोिल कए राखिथ। ककरो बातपर िबना सोचने-िबचारने िव¶ास निह करिथ। सोचएबला बात िथक जे फkसी लगा कए मिर गेलासँ मुि–त कतएसँ भेटत। एहन सु8दर जीवनक  ˜यथमे गमा देब मूखता निह तँ की िथक? आँिख मूिनकए ककरो चेला भए जाएब कोनो िहसाबेउिचत निह अिछ। आई कािµ बहुत रास ढ़ॲगी बाबा सभ धमक नामपर लोकक  ठकैत देखल जाइत छिथ। ककरो बातक  िबना सोच-िवचारक  निह मानक चाही। अपन माथा जHर लगाबक चाही।कहब छैक जे मनः पूतं समाचरेत। जखन अपन मोन मािन जाए तखने कोनो काज करी। अपन जीवन-यापन करबा जोग वुि’ भगवान सभक  देने छिथ।तकर सही उपयोग कएल जाए तँ बहुत रास दुघटना सँ बचल जा सकैत अिछ। कहक माने जे अंधभ–त निह हेबाक चाही। बहुत रास लोकसभ िफरसान भए बाबा सभहक चÅरमे पिड़ जाइत छिथ। एहन बाबा सभक आइ- कािµ कमी निह अिछ।जतिहँ देखू, जटा-जूटधारी बाबा तृशूल चमकबैत भेिट जएताह।हुनका सभसँ बिचकए रही एहीमे क>याण अिछ। कारण ओ धन-धम सभ पर हाथ फेर दैत छिथ।कै बेर तँ जानोसँ लोक हाथ धो लैत छिथ। सोचएबला बात अिछ जे कै बेर पढ़ल-िलखल लोको एहन बाबा सभक चÅरमे पिड़ जाइत छिथ।तकर की कारण? असलमे जखन लोक वाEतिवकताक  निह Eवीकार करैत छिथ िकंबा पिरिEथितसँ ताल-मेल निह बैसा पबैत छिथ, तखने एहन मानिसकता जोड़ मारैत अिछ आ गलत-सलत काज लोक करए लगैत अिछ। कहल जाइत अिछ जे जँ अपना मोनक हो तँ नीक, जँ अपना मोनक िखलाफ भए जाऐ तँ आओर नीक।कारण जे अपना मोनक निह भेल से बुझु जे भगवानक मोनक छिन िकंवा हुनकर आदेश छिन, से बुिझ आगतक  Eवीकार करैत आगा बिढ़ जाउ।जीवनमे नीक बेजाए होइत रहैत अिछ। –यो एहन ˜यि–त निह भेटत जे सभ िदन नीके देखने होिथ। नीक-बेजाए समयक  साहस पूवक झेलैत जे चलैत रिह जाइत छिथ, बीच रEतामे थािक कए,हािर कए काजक  आधा-अधूरा छोिड़ निह दैत छिथ,वएह कीित करैत छिथ,यशक भागी होइत छिथ। सही रEतापर चलिनहार ˜यि–तक  बहुत याचना होइत अिछ। ब‚चामे हमरासभ सxय हिरÜ89क नाटक देखने रही। केहन,केहन िदÅितसँ हुनका सामना करए पड़ल। एकटा 4िस’ राजा सxयक र¥ा करैत-करैत िभखमंगा भए गेलाह।ई हालत भए गेलिन जे पुh रोिहतक मृत लहासक  जड़ेबाक हेतु कोनो ˜योत निह गेलिन।ऐहन दा{ण दुख भगवान ककरो निह देिथ।मुदा ओ सxयक मागपर अिडग रहलाह आ अ8ततोगxवा िवजयी भेलाह। कहक माने जे जीवनमू>यक र¥ाक हेतु जँ कzो सहए पड़ए तँ अगुतेबाक निह चाही, अिपतु दृढ़तापूवक 8यायक माग पड़ चलैत रहबाक चाही। अपना देश-समाजमे कमे एहन लोक होइत छिथ िजनकासभ िकछु बनल-बनाएल भेिट जाइत छिन।अिधक€श लोकक  सभ िकछु हेतु संघष करए पढैत छिन।जीवनक मूलभूत आब¸यकता जेना आवास, िश¥ा, EवाEय हेतु सेहो मोसिकल रहैत अिछ। अिधक€श लोक तँ संघष करतिह जनमैत छिथ आ ओही हालमे दुिनयkसँ चिल जाइत छिथ। िकछु एहनो लोक छिथ िजनका भगवान ततेक दए देने छिथ जे

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) फुराइते निह छिन जे की करी? एहन लोकक  िववेकसँ काजलेबाक 4योजन अिछ। जँ सही ˜यि–तक हाथमे संपदा आिब जाइत अिछ तँ ओ बहुत कयाणकारी भए सकैत अिछ, हजारो, लाखोक तायदादमे जHरतमंद, दुखी, ओ आतलोकक जीवनक  बदिल सकैत अिछ, मुदा से होइक तखन ने? लोकसभ अपने धिर सीिमत रिह जाइत छिथ आ तखन कहताह जे मोनमे शाि8त निह अिछ,िफरसान छी, आिद, आिद। जHरी एिह बातक अिछ जे पिरिEथितसँ तालमेल बैसा कए चली।जािह बातपर अपन बश निह अिछ तकरा Eवीकार करी एवम् जीवनमे आशावादी Hिख राखी। सभसँ जHरी अिछ जे ई¶रमे िव¶ास राखी।भगवानक घरमे देर अिछ अ8हेर निह अिछ। अEतु, धैयपूवक कत˜य कमक  करैत रहब तँ देर-सवेर जHर सफलता भेटत।एिह बातक  यानमे रखैत जीवन याhाक  यथासाय शाि8तपूण ढ़गसँ िबताबक चाही। जीवनमे सही दृिzकोण एवम्आशावादी Hिख रखलासँ बहुत रास संकटसँ बचल जा सकैत अिछ, कमसँ कम ढ़ॲगीबाबाक चÅरसँ तँ जHरे बचब।अEतु,सबसँ जHरी अिछ जे हमर बुि’ शु’ होअए जािहसँ हमसभ नीक-बेजाएक िबचार करैत जीवन याhाक  मयpदापूवक िबतासकी। दृिzपूतं 8यसेxपादं वEhपूतं िपबेÆजलम्। शाEhपूतं वदे·ा–यं मनः पूतं समाचरेत् ॥ -चाण–य नीित qqq

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आशीष अनिच8हार - िहंदी िफ>मी गीतमे बहर-5

गजलक मतलामे जे रदीफ-कािफया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नÆममे ई कोनो ज{री नै छै। एकै नÆममे अनेको कािफया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो अलग भ' सकैए संगे-संग नÆमक शेरमे िबनु कािफयाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत नÆममे गजले जकk एकै बहरक िनवpह कएल गेल अिछ। मैिथलीमे बहुत लोक गजलक िनयम तँ निहए जानै छिथ आ तािहपरसँ कुतक करै छिथ जे िफ>मी गीत िबना कोनो िनयमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पिहल जे नÆम लेल बहर अिनवाय नै छै आ जािहमे छै तकर िववरण हम एिह ठाम द' रहल छी-----------------

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७)

1 "िखलौना" िफ>म केर ई नÆम जे िक मुह¡मद रफीजी ·ारा गाएल गेल अिछ। नÆम िलखने छिथ आनंद बÎशी। संगीतकार छिथ लßमीक€त ¦यारे लाल। ई िफ>म 1970 मे िरलीज भेलै। एिहमे संजीव कुमार, मुमताज, िजते89, शhुá िस8हा आिद कलाकार छलिथ। ई िफ>म गुलशन नंदाजीक उप8यासपर आधािरत अिछ।

तेरी शादी पे दूँ तुझको तोâफ़ा मÉ –या पेश करता हूँ िदल एक टूटा हुआ

खुश रहे तू सदा ये दुआ है मेरी बेवफ़ा ही सही िदलHबा है मेरी

जा मÉ तनहा रहूँ तुझको महिफ़ल िमले डूबने दे मुझे तुझको सािहल िमले आज मरज़ी यही, नाख़ुदा है मेरी

उã भर ये मेरे िदल को तड़पाएगा ददÒ िदल अब मेरे साथ ही जाएगा मौत ही आिख़री बस दवा है मेरी

एिह नÆमक सभ पkितक माhाœम 212 212 212 212 अिछ। एकर त–ती उदू िहंदी िनयमपर कएल गेल अिछ। बहुत काल शाइर गजल वा नÆमसँ पिहने माहौल बनेबाक लेल एकटा आन शेर दैत छै ओना ई अिनवाय नै छै। एिह नÆमसँ पिहने एकटा शेर "तेरी शादी पे दूँ तुझको तोहफ़ा मÉ –या" माहौल बनेबाक लेल देल गेल छै। समा8यतः दीघक बाद बला "ए" केर उ‚चारण लघु भ' जाइत छै आ मैिथलीमे सेहो एकर हम िEथितनुसार लघु मानबाक िसफािरश केने छी।

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७)

िखलौना" िफ>म केर ई नÆम जे िक मुह¡मद रफीजी ·ारा गाएल गेल अिछ। नÆम िलखने छिथ आनंद बÎशी। संगीतकार छिथ लßमीक€त ¦यारे लाल। ई िफ>म 1970 मे िरलीज भेलै। एिहमे संजीव कुमार, मुमताज, िजते89, शhुá िस8हा आिद कलाकार छलिथ। ई िफ>म गुलशन नंदाजीक उप8यासपर आधािरत अिछ।

िखलौना जानकर तुम तो, मेरा िदल तोड़ जाते हो मुझे इस, हाल मƒ िकसके सहारे छोड़ जाते हो

मेरे िदल से ना लो बदला ज़माने भर की बातॲ का ठहर जाओ सुनो मेहमान हूँ मÉ चँद रातॲ का चले जाना अभी से िकस िलये मुह मोड़ जाते हो

िगला तुमसे नहॴ कोई, मगर अफ़सोस थोड़ा है के िजस ग़म ने मेरा दामन बड़ी मुि¸कल से छोड़ा है उसी ग़म से मेरा िफर आज िर¸ता जोड़ जाते हो

खुदा का वाEता देकर मनालूँ दूर हूँ लेिकन तु¡हारा राEता मÉ रोक लूँ मजबूर हूँ लेिकन के मÉ चल भी नहॴ सकता हूँ और तुम दौड़ जाते हो

एिह नÆमक सभ पkितक माhाœम 1222 1222 1222 1222अिछ। एकर त–ती उदू िहंदी िनयमपर कएल गेल अिछ। उदूमे दू दीघक बीच बला संयु–ता¥रक  एकटा लघु मािन लेबाक छूट सेहो छै मुदा ई मैिथली सिहत आन आधुिनक भारतीय भाषामे निह भेटत। उदूमे "और" शŸदक माhा िनधpरण दू तरीकासँ कएल जाइत छै "और मने 21" आ "औ मने 2"। एिह नÆमक संगे आन नÆम लेल ई मोन राखू। उदूमे "शŸदक बीच बला "ह" केर उ‚चारण पिहल शŸदमे मीिल क' ओकरा दीघ बना दैत छै जेना िक "लहिर" केर उ‚चारण "लैर" सन आिद, "मƒहँदी" केर उ‚चारण तेहने भ' जाइत अिछ। ज{री नै जे ई िनयम मैिथली लेल सेहो सही हएत।

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) 3 "शि–त" िफ>म केर ई नÆम जे िक लता मंगेशकरजी ·ारा गाएल गेल अिछ। नÆम िलखने छिथ आनंद बÎशी। संगीतकार छिथ आर.डी.बमन। ई िफ>म Sept 22, 1982 मे िरलीज भेलै। एिहमे अिमताभ ब‚चन, िEमता पािटल, िदलीप कुमार, राखी आिद कलाकार छलिथ।

हमƒ बस ये पता है वो बहुत ही खूबसूरत है िलफ़ाफ़े के िलये लेिकन पते की भी ज़{रत है

( एिह दू पkितक माhाœम अिछ 1222 1222 1222 1222)

हम ने सनम को ख़त िलखा, ख़त मƒ िलखा ऐ िदलHबा, िदल की गली शहरे वफा

(एिह Eथायीक माhाœम अिछ 2212 2212 2212)

पीपल का ये पwा नहॴ, काग़ज़ का ये टुकड़ा नहॴ इस िदल के ये अरमान हÉ, इस मƒ हमारी जान है ऐसा ग़ज़ब हो जाये ना रEते मƒ ये खो जाये ना हम ने बड़ी ताक़ीद की, डाला इसे जब डाक मƒ ये डाक बाबू से कहा हम ने सनम को खत िलखा

बरसॲ जबाबे यार का, देखा िकये हम राEता एक िदन वो ख़त वापस िमला और डािकये ने ये कहा इस डाकखाने मƒ नहॴ, सारे ज़माने मƒ नहॴ कोई सनम इस नाम का कोई गली इस नाम की कोई शहर इस नाम का हम ने सनम को खत िलखा

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) (उपरक दूनू अंतराक माhाœम 2212 2212 2212 2212 अिछ) एिह नÆमक ई िवशेषता जे एिहमे "शहर" शŸदक िगनती िहंदी जकk कएल गेल छै अ8यथा उदूमे शहर केर माhा दीघ लघु होइत छै। एकर त–ती उदू िहंदी िनयमपर कएल गेल अिछ।

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३. प' ३.१. नीलमाधव चौधरीक 56 टा किवता (4Eतुित आशीष अनिच8हार) ३.२.संतोष कुमार राय 'बटोही' दू-टा किवता ३.३.रामदेव 4साद म.डल ’झाHदार’- िकछु झाH ३.४. रामिवलास साहु- िकछु टनका नीलमाधव चौधरीक 56 टा किवता (4Eतुित आशीष अनिच8हार ) िवदेह ·ारा संचािलत "आमंिhत रचनापर आमंिhत आलोचकक िट¦पणी" शृंखलाक दोसर भागक घोषणा िवदेहक 218 अंकमे भेल छल जािहमे आमंिhत किव छलाह नीलमाधव चौधरीजी एवं आमंिhत आलोचक छलाह कैलाश कुमार िम-जी। किवता आिब गेल मुदा िट¦पणी िकछु कारणवश निह आएल। अंततः किवक 56 टा किवता देल जा रहल अिछ। नीलमाधवजीक किवता यदा-कदा 4कािशत होइत रहल अिछ जखन िक लीखै छिथ बहुत िदनसँ। मैिथलीमे तँ एहन रेवाज रहलैक अिछ जे जँ पिरवारमे िकयो सािहxयकार भऽ गेल तँ पूरा पिरवार अनुिचत {पƒ ठ¦पा लागल सािहxयकार भऽ जाइत अिछ। ओना एिह रेवाजक  तोड़बाक सेहो 4यास भेल अिछ जकर दृz€त 4ो. हिरमोहन झा पुh जनादन झा जनसीदन आ राजमोहन झा पुh 4ो. हिरमोहन झा केर उदाहरणमे भेटत। जँ नव उदाहरण देखी तँ ई रेवाज तोड़बाक साहस नीलमाधव चौधरी पुh राजकमल चौधरी केलाह अिछ। आ से अही बातसँ बुझा जाइत अिछ जे राजकमल चौधरीजीक घर देखबाक बहÄे संEमरण िलखए बला आ राजकमलजीक पोथीक संपादन कए कऽ संपादक बनल लोक सभ सेहो नीलमाधवजीक  आगू अनबामे असफल भऽ गेला आब से एकर कारण जे हो मुदा एकटा पाठकक तौरपर ई œेिडट हम नीलेमाधवजीक  देबिन जे ओ माh राजकमलजीक पुh हेबाक कारणे अनुिचत लाभ लेबासँ अपनाक  कात कऽ लेलाह। एिहठाम नीलमाधवजीक 56 टा किवता 4Eतुत करैत ईहो हम कहब जे पिहल बेर एिह किवक एतेक रास किवता एकै संगे 4कािशत भऽ रहल अिछ। एिहसँ पाठक आ समी¥क दूनूक  सुभीता

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) हेतिन। पाठक आ समी¥क दूनू लग एिह बारल किवक किवताक 4वृित ओ 4कृित एकै बेरमे बुझबामे एतिन। तँ आउ रसाEवादन करी एिह किवता सभहँक---

1 ई उपराग के सुनत? हम सब कतेक अभागल छी अि8तम दशन तक निह कऽ सकलहुँ ओिह दादी के जे निह जािन कतेक राित िबना नॴद बीता देने होयतीह एतबिह लेल िक हमर नॴदमे िबá निह हो ई दद हमरे निह आजुक सभ पोता -पोतीक दद अिछ मुदा कएल की जाय दादी रहैत छिथ कोनो कEबा कोनो गkवमे कोनो अपन -कोनो आनक छkवमे पोता-पोती एडीलेड,िबEबेन,वॉिशंगटन,िEवªज़रलÉड बØड मुि¸कल घुिर आयब अ¦पन लÉड कएक टा काज जे छि8ह बØड जHरी निह करता तऽ जेतिन ई नौकरी केहेन ई मंदा के युग छै से सभ बुझले छि8ह पुनः कहk आिब हेतिन,सभ सुझले छि8ह

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) बउआ आ बॉबी के पढ़ाई साफ भऽ जयति8ह िश¥क के बात िक िब'ािथयो बोिकयति8ह एक तऽ ओनािहये एतय िनæ बुझल जाइत छिथ जे अबैत रहैत छि8ह सेहो कहएमे धकाइत छिथ पता निह किहया धिर ई धाक छुटति8ह काश ई कारी चमड़ी िहनको उÆजर होइति8ह दादी के लेल कोना िधया पुता क जीवन बरबाद करी बीतल कािµ लेल आब' बला कािµ कोना खराब करी मुदा एकटा संशय जीवए निह दैत छि8ह दादी ओहो बनितह से सोिच डर होइत छि8ह दादी के तँ सब अपने छलि8ह देशमे ह¡मर िक होयत निह जािन एिह िवदेशमे | 2 जँ भेलहुँ पथyz सब तिर बात अिधकार के कत˜य नz िनमूल 8यायक आस तँ सब करैत अिछ कानून बनल अिछ शूल सxय 8याय के बाटपर चलब कखनहुँ कहk रहल आसान जँ भेलहुँ पथyz तँ

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) फेर समाजक कतऽ क>याण सब धम केर मूलमे एक माh परोपकार एक दोसरसँ जुड़ल रही होइत रहय सपना साकार मुदा एिह वैचािरक अकाल अ8हारमे िधया पुताक पढ़ाइ िक नून रोटीक जोगारमे लोक-वेद , गाम घर दुिनयk समाज िबसरल छी उिचत अनुिचतक िवचार xयािग धमक मागसँ उतरल छी एहनमे िजनगीक मम कोना बkचल रहत िबना सxय 8यायक  धम कोना बkचल रहत 3 हम तऽ ठीके छी:सwे ? हम सब एतेक कोना बदिल सकैत छी जेना बदिल गेल छी

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) कोनो आकषण निह कोनो 4ितरोध निह जे जेहन करता से तेहन भोगता बØड संतुz,बØड सहज बाप- भाय मीिल कऽ बिहन- बेटी संग नौ वष तक अEसी सालक संत सोलह साल कऽ क8या मुदा हमर खून निह खौलैत अिछ अपनापर नजर दौड़बैत छी पिहनेसँ बेसी सश–त भऽ गेल छी बेसी बुि’मान (समय आ अनुभवक  देखैत, ओना तँ) आ बेसी गुदकर मुदा पिहनेसँ बेसी असंतुz असुरि¥त अपमािनत

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) निह फरछाइत अिछ 4गितक पथपर छी िक अवनितक पथपर ? 4 घनघोर अ8हिरया जे बीित रहल तािहपर तँ कोने गरे निह िदन बीतलक  कोना बजा लैत छी सजल अिछ महल रंग िवरंगक 4काशसँ च89मा अचंिभत छिथ मनु–खक 4याससँ आँिखक पदp निह िकए हटा लैत छी राित घनघोर अ8हिरया लोक सजा लैत अिछ सुख दुख िबसिर दीवालीक मजा लैत अिछ दूर कतऽ अहk अपनाक बझा लैत छी हएत तँ वएह

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) जे एखन तक भेलै सुHज डुबल राित भेल सुHज उगलै भोर भेलै राित िदनमे एना िकए िमला दैत छी । 5 संयोग ककरासँ 4ेम ई कहेन िवयोग अिछ हमर िजनगीक ई केहन संयोग अिछ जकरासँ Eनेह करी ओकरेसँ होइत संहार अिछ जकरासँ रहल िवमुख ओकरेसँ उ’ार अिछ 6 आर कतेक दूर भऽ सकैत अिछ बाहरक हवा िकछ दूिषत होमय िकछ लोक अ¦è Eवाथ लेल ˜यिथत होमय

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) मुदा िबन 4यासे की िकछुओ भेटत जे अिछ िक सेहो बkचल रहत ऐना जे िखड़की केबाड़ बंद केने रहब हवा आ रोशनीपर पैब8द लगेने रहब कहूँ कतेक िदन हम सब सही सकैत छी आर कतेक दूर तक रही सकैत छी? की इ‚छा अिछ कतय छी उलझल जागल छी िक छी अहk सुतल कतय जेबाक अिछ कतय जा रहल छी मोनमे की अिछ की सुना रहल छी अहk दैत छी Ëान पोथीक  जे पोथी हम फािड़ चुकल छी

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) संEकारक पाठ पढा कऽ हमरा िकए अहk मािर रहल छी हम मैिथल आब िकछ निह बुझब अ¦पन िमिथला लेल हम जुझब बØड चुप रहलहुँ आब निहं रहब बØड िदन सहलहु आब निहं सहब 7 नव एिहना पनपत अिछ तँ सब अंग सुरि¥त एना िकएक अपंग भेल छी भरलहुँ तँ कतेक रंग िजनगीमे एना िकएक बेरंग भेल छी की िहत की बेजाय कहk िकछु Eपz तकैत रहलहुँ मृग मिरिचका भगैत रहलहुँ सरपट आब देश दुिनयkक

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) हाल देिख एना िकएक दंग भेल छी नव एिहना पनपत पुरानक  झरए पड़तै झहिर कऽ जेहन बीया खसत तेहने ने पौध बनत अपने रोपल गाछ अिछ तखन एिह छkहसँ एना िकएक तंग भेल छी 8 नव पिरभाषा गिढ़ सकय िलखल तँ जाइत अिछ मुदा एहन कहk जे लोकक  पढ़ब िसखिबतइ जे पढ़ल छै तािहपर दृढ िनÜय रहब िसखिबतइ सबक  लेल सब

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) एना िकए कुÅुर बानर अपने बेगरते अिछ भेल िव¶ आ8हर सामने की परो¥ लोकक स¡मान कहk जे भंगिठ गेल तकर कतहुँ िनदान कहk िलखल गेल लोक लेल िक अपना लेल निह हमर 4Ú मुदा ई लेखनी निह रोिक सकल समाजक पतन िनिÜते जे लोक निह िकछुओ पिढ़ सकल िनज Eवाथक पिरिधसँ बाहर निह िनकिल सकल चलू होय 4यास जे बेसीसँ बेसी लोक पिढ़ सकय िजनगीक सुंदर सन नव पिरभाषा गिढ़ सकय ।

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) 9 मोनक तृणा लगातार चािर िदनसँ बरसैत पािन अक‚छ भऽ गेल अिछ मोन ओना बािरसक मनभावन द़ृ¸य बØड नीक लगैत छैक मुदा कखन जखन पेटक भूखसँ मोन ˜यिथत निह हो जखन कोनो घावसँ देह पीिड़त निह हो जखन नव तHिण संग यौवन उमड़ल हो मोनमे उ>लास होमय जेब भरल हो मुदा एखन अिह अकलबेलामे जतय नून रोटी जुटेबाक समEयामे 4ितभाक एक-एक टा काठी जड़बए पड़ैत छैक

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) जतय रोज बापक बीमारी मायक फाटल साड़ी बिहन-बेटीक बढैत उã चाH कातसँ घेरने रहैत हो कोना िलखी सकैत छी अपन 4ेयसी पÓीक हृदय सागरक अथाह 4ेम वणन जीवन-आनंद के सूßम पिवh दशन जतय फूल बनबासँ पिहने झहिर जाइत अिछ कोमल-कोमल कोढी वॄ¥ बनबासँ पिहने सुखा जाइत अिछ 4ेमक गाछ कोना लीिख सकैत छी -ृंगारक किवता, 4ेमक गीत ओना जाड़क उ8मु–त राित बØड ि4यगर देहक पोर पोरमे जागृत करैत अिछ कामोवासनाक आिग जगा दैत अिछ अंतमनमे नुकायल मनलÀगु दैxयक

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) मुदा भवनाक लहिर तोिड़ दैत अिछ यथाथक œूर बोध कkपी कलम हाथसँ छुिट जाइत अिछ यथाथ किवक क>पनाक सीमा नkिघ जाइत अिछ चािर जोड़ी आँिख टुकुर टुकुर हमरे देिख रहल छल हम चुप- चाप घरसँ बहरा जाइत छी कोनो जोगार, कोनो ˜यवEथामे भीजल तीतल अवEथामे अपूण किवता अपूणÒ रिह जाइत अिछ मोन क तृणा ¦यासल, हारल, थाकल, िनराश मोनिहमे दिब जाइत अिछ | 10 एखन तक तँ अिछ ई दवाई अिछ िक गरल ई तँ समय बताएत मुदा ई िनिÜत जे िदन बीतल निह लौिट पाएत एखन तक तँ छी

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) लाइनमे लागल डर अिछ जे लाइन निह िबगिड़ जाय एखन तक तँ अिछ भूख ¦यास जागल डर अिछ जे भूख ¦यासे निह मिर जाय 11 सएह टा बात कोना भऽ सकैत

हम सब बØड नीचk धिस गेल छी आ भगवान बØड उपर चिल गेलाह निह भजन सुनैत छिथ निह आँिखक नोर देखैत छिथ ठीके कलयुगमे आिब भगवानो बदिल गेलाह , ततेक ज>दी वातावरण िक 4योजन बदिल जाइत अिछ उपराग दैत-दैत गािर, 4ाथनामे बदिल जाइत अिछ तखन किथ लेल एतेक ˜यÔता तखन किथक एतेक 4सÄता तँ की हम सभ मािटक मुHत बिन

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) पड़ल रही ब{ िकछु होइक दुिनयkमे क¡बल ओिढ सुतल रही भगवान दूर निह बØड लग आिब गेल छिथ िœया कलापक फल तुरंत दऽ दैत छिथ कहk कोनो एहन नीक कम छल जे नीक भाÀय भऽ सकैत हमरे जे जे नीक लागय सएह टा बात कोना भऽ सकैत | 12 कते कम अिछ

yममे अिछ िजनगी िक िजनिगये yम अिछ सब तिर पसरल अिछ अनथ केर ठहाकाक गूँज देख िलअ सबहक आँिख मुदा नोराएल अिछ

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) कतेक िदन बीत गेल एक छनक मुEकी लेल हँसीक लेल ठीके ई िजनगी कते कम अिछ 13 बजट के Ýयु की

ई सावन के घटा ई मन भावन छटा िबहुँिस िबहुिस डािर-पात गाछक  डोला रहल गाछक ˜याकुल मोन मुसलाधार बरसात देिख जिड़क  आजमा रहल डkड़ भिर डुबल गाछ ! फल-फूलसँ भरल गाछ | किहयासँ लाल िकला ओिहना ठाड़ अिछ देखलक कतेको 4धानमंhी कतेको 4धानमंhीक

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) अनेकानेक बेर बदलल {प पिरिEथितजनक {प किहयो कोनो राÆय मुÎय मुëा तँ किहयो कोनो , किहयो साउथक चचp तँ किहयो िसफ नोथ ईEट किहयो िश¥ा किहयो ˜यापार किहयो कलाधन किहयो yzाचार बात तँ कहलहुँ बØड नीक छोट मोट नौकरीक लेल इ8टर˜यू की ? जखन परी¥ा इंटर˜यू लेबहे पड़त तखन िश¥ा के बजट के Ýयु की ? िश¥ा आ EवाEय ई दुनू सेवा िसफ सरकारी हो निह कोनो जाित धमक भेद निह गरीबी अमीरीक फक निह कोसÒमे कतहुँ कोनो िविवधता िश¥ा ˜यापार निह निह िश¥क ˜यापारी हो निह डा–टर सा¥ात यमराज निह रोग कोनो महामारी हो िश¥ाक अथ पाइ कमाबय नै

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) बनब संEकारी हो मोदी जी एिह शािपत शहरी जीवनमे चमक दमक मkलमेÐोक कृिhम ितलEममे ओझरा गेल अिछ मनु–ख तािहपर ई एहन झमठगर बरसात राजीव ग€धीक "करƒगे, करƒगे" एखन तक रƒिगते अिछ ई आ¶ासनक हिरयरी तँ ठीक मुदा एतेक निह जे गिल जाय उxकंठा उxसवक बीच देखब कत˜य मयpदा निह िबसिर जाय |

14 दीपसँ अ8हार

दीपसँ दीप नेसल जा सकैत अिछ दीपसँ अ8हार िमटाओल जा सकैत अिछ दीपसँ इजोत आनल जा सकैत अिछ

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) मुदा ई अ8हारसँ दीप जड़ेबाक कोिशश ई अ8हारसँ अ8हार भगेबाक कोिशश एिह धुआँमे तँ दीवालीक इजोतो बेकार दीया तँ नेसलहुँ आँिख खुलबा लय कहk तैयार | मोनमे जोशे निह सजल अिछ घर संसार जेबमे िखëी निह िवदा भेलहुँ हाट बाजार िबना यु’े सीमापर िनxय शहीद होइत जवान हवामे 4दूषण मुि¸कल अिछ बचनाय 4ाण |

15 निह रहल हँसबा, कनबाक समय

किहया खुिलक हँसल रही निह याद अिछ खूब जोर दैत छी िदमागपर

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) कहk याद अबैत अिछ कोनो खुशीक बात भेले निह हो, से तँ निह सवा करोड़ लोकक देश तीन सौ पैसठ िदनमे तीन सएसँ बेिस पाबिन-ितहार समाज पिरवार सेहो कम झमटगर निह राÐीय िक सामािजक िक ˜यवसाियक कतेक तरहक मनमोहक कायœम कतेक Ÿयाह दान, ज8मिदनक सुअवसर कहk खुिलक हँिस पयलहुँ मोनमे ई िवचार चिलते छल िक तखने मोनमे नव 4Ú उठल खुिलक कानल किहया रही कएक टा एहेन घटना भेल जे हृदयक  अxयिधक चोट देलक जुआन, ब‚चा, िहत-पिरिचतक मृxयु देखबा, भोगबा लेल िववश भेलहुँ रोज सीमापर जवान तँ खेत देिख िकसान शहीद होइत देिख सुिन मोन आœोिशत भेल

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) दू-चािर बूँद नोरो टपकल खुिल कऽ कािन कहk सकलहुँ बुझाइए आब निह रहल हँसबा, कनबाक समय आब निह रहल कोनो बातक हष-िवषाद, िचंता िक िवEमय 16 मोन छोट कऽ दैत अिछ

जिहना जिहना रंग चढैत छै तिहना तिहना उतरय छै ई दुिनयkमे िस’ बात जे जे फड़य से झहरय छै तखन ई रEता तँ अपने चूनल अिछ आब गडल कkट तऽ मk मोन पड़ैत अिछ निह गाउ फगुआ निह कोनो रंग लगाउ एिह गीत एिह रंगसँ

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) गामक गमक अबैत अिछ निह जािन िकएक ई पाबिन ितहािर मोन छोट कऽ दैत अिछ खुशीक एहन सन मौकापर मोन वेदनासँ भिर दैत अिछ असगरे बुझाइत छी अिछ भरल घर आँगन आब की हष िवषाद निह रंग कोनो एिह आनन अिछ बुझल निह छै कwो खुशी मुदा छी हम 4ती¥ामे पिरणाम तँ बुझल अिछ लागल छी परी¥ामे 17 मk िकछु निह बाजल

मोन होइत अिछ पड़ा जाइ , भािग जाइ मुदा कतऽ आ िकएक एहने सन िEथितमे मायक कोरासँ ि4य कहk िकछु रहैत छैक

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) एखनो याद अिछ एक-एक शŸद एिहना बाप भागैत भागैत चिलये गेलखुन तहूँ भािग जेबह तँ भािग जा हमर की जकर देहिरपर रहबय िघिसयाक फेिकए देत याद अबैत अिछ किहयो मkक जेवर लऽ कऽ भािग गेल छलहुँ ब¡बई मुदा निह साहस भेल देखिबतअइ कोनो सोनारक  4ाते भेने लौिट कऽ आिब गेल रही मk िकछ निह बाजल निह तमसायल निह किनयो आँिख नोरेलै दुिनयkक सातम आÜयसँ कम निह मk हमर एहने छल | 18

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) गाम गाम िथक

भारतक कोनो गाम हो एक िदन एिहना पहुँिच गेल रही गािजयाबादक समीप रावणक गाम िवशरख आ राजेश पायलटक गाम वेदपुरा क¡पलेन िभिजट छल संगमे क¡पनीक इंिजनीयर, ìाइवर, गाडी शमp जी जतबे कुशल िकसान ततबे कुशल ˜यापारी बात फिरयने निह फिरयबय –लेम पचास के पkचो मुनािसब निह शमp जीक मृदुल Eवभाव , सxकार Eवागत देिख ई तँ िनिÜत जे शमpजीक नुकसान निह होइन मुदा अपन 4ित§ा आ क¡पनीक 4ित िन§ा सेहो देखनाय ज{री छल अंतत: सब बात ठीके रहल

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) मुदा जे मूलता: आकिषत कयलक ओ छल Ôामीण समाज एखनो Ôामीण समाजमे पदp अिछ 4ेम अिछ अ¥र बोध भने नही होय मुदा बचल संEकार अिछ ज िबगड़ल अिछ िकछुओ तँ ओ सरकारी संEथा िक सरकार अिछ चािर पkच घंटाक बीच जािह तरहक पिरवेश देखलहुँ गाम घरसँ हजारो मील दूर िमिथले सन कोनो देश देखलहुँ िकछु बात ज{र अजगुत जे इंिजिनयर िस8हा जीक  पिसÄ नै कुमार-वार छिथ एतिन राितमे िनÄ नै मौगी सब मुँह तँ झपने छल मुदा छाती उघार छलैक ˜यवहारमे शालीनता बोली लÃमार छलैक बहुत िकछ अ8तर होइतहुँ

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) िमिथलेक कोनो गाम सन लाल काकीक अँगना फढुँआ काकाक मचान सन कएक बेर कदीमा साबुत िक कदीमाक फूल त{आ लेल लऽ गेल छी याद आबैत छल Eकूल ई तँ छल उजड़ल 4देशक उजड़ल कोनो गाम अपन िमिथला तँ Eवग अिछ ओिहना ने कहाइत अिछ ई िमिथला धाम तखन बात पिहलुका आब कहूँ कोना रहत गाम की शहर अपने निह पेट रहैत अिछ पेटक संग कएक टा जुड़ल घ ट रहैत अिछ 19 रहल अिछ रौदी-दाही अ8हार आ इजोत ज{री तँ दुनू अिछ

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) जखन जकर 4योजन तखन से भेटत कोना राित केर िदन केलहुँ िदन केर राित आब समयानुसार सु{ज चान उगत कोना खेत-खिरहान छूटल कलम बाग िनपwा अँगना दलान छूटल खxम भेल पोखिर खwा आब हवा पािनक  संर¥ण, शुि’करण चाही दुिनयk तँ ओिहना के ओिहना अिछ सब िदने रहल अिछ रौदी-दाही तखन एना िकएक एको बेर मुँहपर मुEकी निह अबैत अिछ छोट छोट बातपर लोक कते पैघ पैघ लड़ाइ लड़ैत अिछ | 20 मk मने मिहषी

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) जखन जखन ठेस लगैत अिछ मोन पडैत अिछ मk मk मने मिहषी मk मने िमिथला मk माने तारा मk मने शीतला मk मने गंगा मोन भेल चंगा मk के चरणसँ पिवh आर िकछु कहk मk िबन दुिनयkमे सुख कतहुँ कहk | 21 पैघ-पैघ लßय अिछ

जे कz छल से तँ रिहये गेल झुÃे फुसलेबाक कोिशश करैत अिछ कखनहुँ ए¡हर तँ कखनहुँ ओ¡हर टहलेने अिछ

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) अनेरे अजमेबाक कोिशश करैत अिछ जंग लागल छै सwा जजर छै भेल त8h चाही पारदिशता डेगे-डेग भरल षØयंh सब चोर संसदमे मुलुर-मुलुर तकैत अिछ शाहक शाह जोड़ी िक िकयो आने फसैत अिछ पैघ लßय छै कने कz बरदा¸त क{ ऊँच-नीच छोडू एकताक बात क{ मामला गंभीर छै िनxय बुझेबाक कोिशश करैत अिछ 22 नमन क{ संEकृित संEकारक 

आजुक नेना नेनपन िबसरल माय बापसँ रहत िछटकल-िछटकल वजन बराबर बEता उघय

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) मय रािh तक तैयो निह ना उघय डर मैडमक करेजमे पसरल निह रहय जागल निह रहय सूतल बंद क{ एिह िश¥ा ˜यापारक  नमन क{ संसकृित संEकारक  23 ककर दोष?

अ8हिरया राितक एिह शू8य बेलामे किहयो ज8म लेने छलाह कारी कृपा िनधान कृण पाछा देखैत छी बस हमर पदिचíक Eवर कतेक आगू आिब गेल छी िक लौटब संभव ? आगू अथाह दुगम बाट हमारा असगरे पार करए पड़त एिह गँहीर सागरक  एकटा आमक गाछपर नजर जाइत अिछ आह केहन मधुगंध बरसा रहल छल पल-िछन लेल मोन भाविवÏल भऽ गेल पर8तु हवाक तीवÊ झॲखासँ खिस पड़ल बहुत रास आã मÆजर

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) आह वएह खसल मÆजर तँ निह हम सwे कते œूर अिछ 4कृित ना ना नािह नािह ? ककर दोष? ओकर वा>यपन के की ई हवाक झॲखा के निह सोिच पबैत छी हम हमर दोष की युगक 4वाहक  ? 24 दीप चाहे कतहुँ जरय

िजनगी ककरा कहैछ िजनगीक माने की लोक उजड़ल सभ ठामसँ हमहॴ अहk निह उजड़ल छी मुदा फक अिछ जेना हम सब बसल रही की तिहना आनो आन बसल छल ? पिरवतन जीवनक मूल अिछ सामयवानक लेल समय सदैव अनुकूल अिछ मुदा ई सामय

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) ककरो संग कतेक िदन बालपन,जुआनी आ वृ’ावEथा जिहना सxय तिहना îुवसxय जे अि8तम सkस तक अ¦è भाषा , अ¦पन मkिट पािन अ¦è लोक-वेद अपने अिछ हk एतबा ज{र जे िवकासक भीषण छ‘ मानवताक  झँपने अिछ होइक सि¡मिलत 4यास जे िमिथला मैिथली बkचल रहय इजोत सब तिर हेबाक चाही दीप चाहे कतहुँ जरय |

25 ओकर जीवन

राित अ8हार अिछ मायाक संचारसँ सवh ई 4चार अिछ लोकलाजसँ वंिचत हमर ई ˜यापार अिछ

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) लोक जे कहय हमर जीबाक आधार अिछ नइ चाहैत करैत छी िनxय पाप अिछ जीवन हमर बनल अिभशाप निह जािन ककर ई पड़ल -ाप यैह जीवन अिछ यैह दुख:संताप

26 बीच मुहान छोिड़ कऽ

आँिख लगले छल ओ कहलिन भोर भऽ गेल नाम सुनतिह भोरक मोन घोर भऽ गेल एना िकएक जे राितए राित नीक लगैत अिछ बीच मुहान छोिड़क

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) कोन कात ठीक लगैत अिछ सब तिर पसिर रहल अिछ आिग आ मोम भेल जा रहल छी आक€¥ाक बजार गरम जेब नरम {कब िक झूकब कहk ककरो मंजूर पाछू लागल आिग अिछ बस उड़ल जा रहल छी | 27 निह अ¦पन निह आन क{

एखन तक तँ बात, माh जोड़ए केर कएल गेल तखन तँ ई हाल घरोमे िबलायल छी* आ तोड़ब तँ तोड़ब की

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) लोक अपने टूटल अिछ बीझो केर बाटमे निह कतहु ¹ाºण भूखल अिछ उनटे िनमंhण भेल पराभव छय छू»ीक बात माने नौकरी ताकब छै अंश भिर ओिह योगदानक स¡मान क{ मk मैिथली बसिथ हृदयमे निह अ¦पन नहॴ आन क{ (*दरभंगो, सहरसामे लोक मैिथली नहॴ बजैत अिछ) 28 िकछु एिहना बीतैत अिछ

िकएक निह बुझैत छी मधु-ावणी, पंचमी िकएक निह बुझैत छी छोिड़ िकछु लßमी िकएक निह डर बािढ , भूकंपसँ

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) िकएक निह डर भय , आतंकसँ िकएक निह डर आक धथूरसँ िकएक निह डर देवता िपतरसँ िकएक तँ हमरा फुरसित निह िजनगीक बबालसँ जीिवका की चकारी की पािरवािरक जंजालसँ िकछु एहन सन िजनिगक िहसाब-िकताब ˜यथमे ˜यEत रहू जबरदEत तनावÔEत रहू िदन रित एक केने छी मुदा िबन ककरो से नेने निह कोनो महीना बीतैत अिछ छोड़ू की सूनब बहुत लोकक िजनगी िकछु एिहना बीतैत अिछ |

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) 29 निह पछािड़ सकलहुँ िनÄ भूखक 

खूब बुझैत छी िकएक िनत िदन बढैत जाइत अिछ चपलता , िकएक निह पूण भेल हमर सेह8ता कहk किहयो खुिल कऽ िजनगीक भार स¡हािर सकलहुँ िनÄेमे सब Eवè जिर कऽ खाक भेल , खूजल आँिखयो कहk किनयॲ िनहािर सकलहुँ । िजनगीक असंÎय {प लोको रंग िवरंगक  कोनो रंगमे निह मुदा अपनाक  िनखािर सकलहुँ जे भेटल से {चल निह जे {चल से पचल निह अपने िनÄ भूखक

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) निह पछािड़ सकलहुँ 30

मk मैिथली अहkक 

कोना िबसिर सकैत छी मk मैिथली अहkक  कतहुँ जे िकयो भेटैए अहkक  निह गेल देखल छॱड़ा भूखल भािग एलहुँ परदेश भेट गेल नमहर झोरा जे निह भरैत अिछ किहयो हम गदहा घोड़ा मुदा तँइ िक, मk मैिथली अहkक  िबसरब कतए जाएब फेर कहू मk जँ फेर हम खसब हk दुःख अिछ जे भेटल हमरा िश¥ा संEकार निह भेिट रहल िधया पुताक  ओ सुदृढ़ आधार निह बुिझ रहल अिछ ओ अहkक मिहमा उðगार निह जािन िकएक निह भेल अहkक 4चार 4सार एिह दोषक 4ायिÜत कहू मk कोना की कएल जाय जे जेना जािह मजबूरी िबसिर अहkक  बैसल छिथ हुनका घर बजायल जाय |

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) 31 लोक परेशाने टा भेटत

तीवÊ गितसँ भागल जा रहल अिछ समय निह पकिड़ पबैत छी जीवनक सुर ताल लय पिरवतन तँ संसारक शा¶त िनयम अिछ ई {कत से तँ संभव निह मुदा साथक बीतय से िकए निह भ रहल अिछ रात अ8हार िदन अ8हार भोर सkझ कहk भऽ रहल अिछ िकएक मोनमे बात जे माh नुकसाने टा भेटत िज¡हरे कदम बढ़ाएब लोक परेशान टा भेटत िकएक निह मोनमे आस जे सभ िबहुँसैत भेटत िकएक निह ई िव¶ास जे लोक बाट तिकते भेटत लोक िनमल अिछ िमिथलाक 4ेम सxकार बचल अिछ मk मैिथली के कृपासँ लोक लाज बचल अिछ मूल मुëा मुदा जे पलायन रोकब कोना जे िबसरल छिथ कुल-शील हुनका टोकब कोना छुटतिह कहता कहू िकछु अपराध भेल जीिब रहल छी

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) की ई निह िव¶ास भेल कोना बुझता की किहयिन िकएक नोयडा सन बंजर जमीन सोन भेल अिछ अथतंhक चœ˜यूहमे फँिस 4ितभा मोन भेल अिछ 32 मोन परतािर रहल छी

बात एतबे सw जे सभ झुÃे घूिम रहल अिछ नीक िक बेजाय जे बुझायल अ¦पन तकरे चूिम रहल छी मुदा एिह छन िकछ भेल पिरवतन बØड ज>दी बदिल गेल आन आ अ¦पन कतेक स¡ब8ध लु¦त भेल कतेक नव गढल गेल ओिह लु¦त स¡ब8धक  एिह गढ़ल नव {पसँ िजनगी स¡हािर रहल छी हिरयर पीअर बातसँ मोनक  परतािर रहल छी | 33

ग¦प

अ8हारमे अ8हारक ग¦प हमर अ8हारसँ हुनकर अ8हार बेिस घनगर

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) बेिस ि4यगर अ8हारमे होइत अिछ नाना तरहक घटनाœम अ8हारमे होइत अिछ पैघसँ पैघ पराœम एहन उदारता एहन समानता कतहुँ निह केहनो पुरान गु{ केहनो नव िशय सबहक सामने एके रंगक दृ¸य सबके एकेटा दुःख कोना एिह अ8हारमे माh अपने लेल अपने टा लेल इजोत आनल जाय ई¶रसँ िक सृिzसँ अपन सुर¥ा माh अपने टा सुर¥ा मkगल जाय कोनो दिधिच ,कोनो कण कोनो भीमक अराधनामे लागल अिछ िव¶ कोनो न कोनो साधनामे मुदा आब ओ दिधिच िक दानवीर कण कहk मानव धममे िव¶ास होय आब से वण कहk ?

34 कहैत तँ छलैए ई िव¶ अ¦पन

आिखर ई हाल िकएक

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) िपछला िकछु समयमे जिहना घृिणत लोकक संÎया बढ़ल अिछ तिहना नीक लोक धन 4ित§ाक लोभमे खराब बनबा लेल बेचैन भेल छिथ ढीठपन तँ देिखयौन जे सबक  बुझल बात पिरणाम कोनो हाले नीक निह सेहो िवकासक नामपर नीक भऽ जाइत अिछ जाती धमक बात छोड़ू सब घर बkटल अिछ मि8दर-मिEजद तँ चमिक दमिक रहल गीता-कुरान नाथल अिछ भूकंप hासदीसँ पार पेबाक कोिशशमे नेपाल ओह, तािहपर आब ई बबाल मोन भेल उ·ेिलत अिछ एहन Ëान , एहन 4गित कहू कतए केर रिह गेलहुँ कहैत तँ छलैए ई िव¶ अ¦पन घरक तँ निह अ¦पन रिह सकलहुँ?

35 भरोसपर जीिब लीअ

Eवाद िजनगीक देखू आब बदिल गेल अिछ माउस छोिड़ िदयौ आर सोिनत पीब लीअ महीना दू महीनामे

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) एक िदन बनत रोटी भात बkकी िदन गोलीक भरोसपर जीब लीअ जँ चाही मॅाल मैÐो िपÆजा बगरक िजनगी तँ बेसी निह एतबा क{ मोनक  मािर लीअ मूँहक  सीिब लीअ

36 पाथरपर बसंत

आयल बसंत मुदा भेल कहk कz केर अंत िछिड़आयल डेग डेगपर ओिहना अिछ बाधा अन8त कोनो बातक असिर निह एहनो कतहुँ भेलैए पाथरपर कहूँ बसंत एलैए Ëान-बोध कुंिठत तािक रहल छी मेवा सब तिर तकैत छी मkक  अिछ िबसिर गेल सेवा एिह हालमे ककरो संपूण सुख भेटलैए पाथरपर कहूँ बसंत कतहुँ एलैए फूल बनबाक कहk सेह8ता बचल अिछ गाछ कािट 4गितक सड़क बनै सभक इ‚छा बनल अिछ क>पनाक सागरमे नव नव कमल फुलाइए

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) पाथरपर कहूँ बसंत कतहुँ एलैए अिछ उपजल मधुबन बस कkट कूस भारी काल कोठरीमे बंद गरीबक सोहारी कहk ओकर चूिµसँ एखन धधरा उठलैए पाथरपर कहूँ कतहुँ बसंत एलैए चाही बसंत तँ भाय गाछ फूल बन पडत िबसिर कुड़हिर टƒगारी मÆजरसँ देह भरए पड़त फूलक िजनगीमे कहूँ कतहुँ कािµ भेलैए पाथरपर कहूँ कतहुँ बसंत एलैए 37 कहk ओ मनु–ख

िकछुए दूर तक जेहन चाहैत अिछ तेहन बाट चुनैत अिछ मुदा िकछुए दूर तक फेर कहk बाट िक िजनगी अ¦पन रहैत अिछ सोन बेिच मािट खयबा लेल होइछ िववश फेर कहk ओ मनु–ख कहूँ मनु–ख रहैत अिछ

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) 38 आँचर तर सहेज

मुंडे मुंडे मितरिभÄा िदन राित आफत भेल दूना आब आफते के भाÀय मािन बैसल छी कोरो तक जाड़ कऽ खएबामे निह संकोच हाल सुधरत से िनÜय जािन बैसल छी िबहारक नामपर िमिथलाक ब’ भेल मैिथल सब नेता भेला लोक करब’ भेल सƒÐलमे लिलत बाबूक छिव छल महान छलल गेला अपनेसँ िविधक छल िवधान मुÎय म8hी िम-ाजी मैिथलसँ भरल िबधान सभा मधुबनी दरभंगा छुिट गेल िबसिर गेल लोक सौराठ सभा तकर बादक तँ फेर पूछू नै केहेन ने केहेन क€ड भेल िबकाय लागल पटना Eटेशन ¶ेतिनशा उफ बkबी हxयाक€ड भेल लिलत बाबू छोिड़ निह िकयो देलिन िमिथलापर यान भोट लेल बस िमिथला 4ेम पाग पहिर शु{ करिथ अिभयान िमिथलाक  अिछ मैिथले िबसरल निह आनक  िमिथलासँ परहेज बेटे xयागिथ बूढ मायक

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) जे रखलिन आँचर तर सहेज |

39 काजर भरल नयनक  देखू

काजर भरल नयनक  देखू िक देखू पूिणमाक च8दा देखब पीठ पाछु िकयो करय ने िन8दा कारण ऐखन देशक गरामे लागल छैक फkसीक फ8दा झंडा फहराबैत देशक राजनेता राÐ-गान गबैत भुखल ¦यासल जनता बुझैत निह पुरल Eवतंhताक सेहंता नेताजीक संग तँ देबहे पड़त देश समाजक तँ वएह छिथ भाÀय िनयंता ितरंगा जे 4तीक अिछ Eवाधीनताक  ओकर हिरयर आ केसिरया रंग तँ ओिहना गाढ़ अिछ मुदा उÆजर रंगक आगू जेना िकयो ठाढ़ अिछ सwे गौर किरयौ वएह yzाचार अिछ जतैक दबबैत छी ततबे बढ़ल जाइए मौनमे उठैत अिछ िवचार देशक लेल करी िकछु काज Eवीकार मुदा धरमक सेवक छी क{ कोना अxयाचार मुदा आब जंगमे आबय पड़त सुतल धरतीक  जगाबए पड़त दुz दानवक पराजय लेल उठबए पड़त कटार पाबय लेल िनज अिधकार

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) अपने अपन हंता

सहजतासँ निह िकएक िकछुओ मोन Eवीकार करैत अिछ िकएक बुझाइए सबके संग सब, बस ˜यापार करैत अिछ बात एक एक टा गंभीर मुँहपर गजब केर िच8ता हृदय ततबे बहीर अिछ बनल अपने अपन हंता करत ई कलम की जँ सामने तHआिर अिछ िनयम तँ सब नीके कहूँ के मानए लय तैयार अिछ अड़सठ साल पिहने िकछु एहन सन संरचना भेल िव·ान, भ9-जन भेला कात मूख लठैतक व8दना भेल कत˜यक माh बात रहल अिधकार भेल िनपwा के छिथ ई अ8वेषक ई केहेन अिभयंता

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) अ¦पन के अपने संहार करैत अिछ सहजतासँ निह िकएक िकछुओ मोन Eवीकार करैत अिछ 41

दोसर गाल बढ़ायब

दुःख निह होइत अिछ जखन कोनो आई ए एस िक आई पी एस कोनो बेईमान yz देश9ोही नेता-मंhीसँ थापर खाइत अिछ दुःख निह होइत अिछ जखन कोनो कनल लेिÛटनƒट कोनो जवानक  िहEसा खा पचा लैत अिछ दुःख निह होइत अिछ जखन कोनो देश9ोही नेता, कैिबनट मंhी राÐिपता ग€धीक  गिरयबैत अिछ कारण हम सब ग€धीक  मोन निह राख चाहैत छी गkधी जीक मृxयु आजाद भारतक पिहल िहंसा छल तँ शाEhी जीक मृxयु पिहल षडयंh

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) इि8दरा तक अबैत अबैत तँ गkधी जी बस वोट की नोट लेल कहk हुनक मागपर चलबाक भेल 4यास गkधीजीक च¸मा िकयो लऽ सकैत अिछ गkधीजीक चरखा िकयो लऽ सकैत अिछ मुदा गkधीजीक  गाल पायब आसान निह एक गाल पर लागल चोट छनमे िबसिर दोसर गाल बढ़ायब आसान निह।

42 टूिट चुकल छी

हम सब टूिट निह रहल छी टूिट चुकल छी वैह टा करैत छी जे सरकार चाहैत अिछ गाम घर दुिनया समाज 4ेम-घृणा, लोक-लाज लोक वेद टोल पिरवार रीित िरवाज पव ितहार सब छूिट चुकल अिछ सwा वग बुझैत अिछ हम सब िकछ एहेन ब8हनमे बि8ह जाइत छी जे तोिड़ निह सकैत छी

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) मोह-माया िहत-अिहत लोक-परलोक वाय-िपw छोिड़ निह सकैत छी एहेन ई शासन सwाक गु¦त षड़यंh िक हम सब आलासी , Eवाथ नपुंसक भेल जा रहल छी कतहुँ कोनो 4ितरोधक आवज निह जँ अइछो तँ समवेत निह हजारॲ ,लाखो , करोड़ोक भीड़मे सब एसकर आ एसकर तँ वृहEपितयो झूठ |

43 अहk निह Hिक सकब

निह जनैत छी अपन अिधकार निह मkगैत छी हम अहkसँ 8याय बस एतबै 4ाथना अिछ हमर दोष बतौने जाऊ िजनगी बØड छोट होइत छैक सेहो निह िनÜय कखन मौत आxमसात कऽ लेत िकछ बुझल निह िकछ देखल निह ओना तँ जीबाक इ‚छा तिहये मिर गेल जिहया अEवीकारलक अहkक हृदय हमर 4ेमातुर मोनक  मुदा उ¡मीद अिछ अहk लौिट आयब समय निह अिछ िकछु छन Hिक कऽ पाछु मुिड़ कऽ देखबाक अहk ˜यEत छी

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) हमरा संग िजनगी बेकार निह करए चाहैत छी हम बुझैत छी निह बुझैत अिछ िजनगीक िपपासा लोक दुिनयk समाज हमर अहkक िववशता अहk निह Hिक सकब मुजरा के तानपर वे¸याक गानपर शराबक दुकानपर अहk लौिट आयब िमिथलाक आनपर एिह टूटल मचानपर ढलान लैत दलानपर गामक सीमानपर।

44

हमरा चाही इलाज

कहैत अिछ युवा राÐक  िबगड़ल लोकतंh यौ नेताजी अहkके चाही काज हमरा चाही इलाज बात कहू बनत तँ बनत कोना अहkक  चाही Eवराज

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) हमर अिछ सवसमाज बात कहू िनभत तँ िनभत कोना भेल छलहुँ जखन Eवतंh भेटल छलै जनताक  उwम िश¥ा EवाEयक िन:शु>क सुिवधा जीवन तिहयो किठन छल छल तखनो दुिवधा मुदा आEथा आ िव¶ास 4ेम, अपनxव बनल छल दूर रिहतो लोक गाम-घर लोक-वेदसँ जुड़ल छल Ôामीण की शहरी िशि¥त लोक संEकारी होइत छल आम जनताक  लेल 4िति§त लोक सरकारी होइत छल िकछुए िदन बाद मुदा बजार तेना हावी भऽ गेल िश¥ा, EवाEय की

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) लोकक िजनाइ भारी भऽ गेल सwाक  रोकबाक चाही मुदा से कहk भेल अपने सबहक चिरhहीनतासँ सwा अपने खेल भऽ गेल 45 यh तh सवh

कz होइत छैक ककरा आ िकए होइत छैक ककरा बुझबाक चाही आ समय ककरा ककरा बुझा दैत छैक आदमी आ आदमीमे एतेक फक िकए एकटा लूटै छै दुिनयk एकटा लुटा दैत छैक चुप रहैत छी तँ आxमा कािन जाइत अिछ िकछ बजा गेल तँ

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) िजनगी िवपरीत भऽ जाइत अिछ िबन बातेक लोक बात बना दैत छैक आब निह साहस निह ओ पै{ख अिछ बkचल यh तh सवh िचंताक बछ अिछ गkथल हाल ऐहनमे कोनो इ‚छा ˜यथा होइत छैक निह भरोस क{ किनयो निह िवरोध क{ किनयो िजनगीक िकछु एहने सन कथा होइत छैक 46 जुिन क{ खट-पट मोन भिरयाइत अिछ

जतैक सोचैत छी मोन ओतबे बौआइत अिछ कलम Hिक जाइत अिछ

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) किवताक लीक टुिट जाइत अिछ मोनमे उठल भावना कऽ लहर-गित Hिक जाइत अिछ जुिन क{ खट-पट मोन भिरयाइत अिछ कतेक जतनसँ िलखल दू पkित आइ दूनू पkित िवयोगक दू पोथी बुझाइत अिछ अहkक शृंगारमे छलहुँ कखन लीन हम ओिह समयक  ताकमे राित बीित जाइत अिछ जुिन क{ खट-पट मोन भिरयाइत अिछ आपसक झंझट छल अपनिह स¡हािर लीतहुँ कोना मोन मानलक सभ छोिड़ चल जाइत छी छनिहमे तोिड़ मान -मयpदाक सभ धनुष िववेक छोिड़ िबना पूँछ पशु बिन जाइत छी हमर अ-ु-पूण आँिख बाट तिकते रिह जाइत अिछ जुिन क{ खट-पट मोन भिरयाइत अिछ देखू ई जीवन छै सुख दुःख केर संगम सुखक अनुभूित िबना दुःखक  निह होइत अिछ एना जे मानव दुःखसँ पड़ाइत घूरत िजनगीक बृâत Ëान ओकरा कहk होइत अिछ भीजेबै तखन ना सूखत , सूखल तँ टटाइत अिछ जुिन क{ खट-पट मोन भिरयाइत अिछ 47

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) लोके बदलै

साल बदलल हाल बदलत सोचैत तँ सब साल छी हम िक बदलब लोके बदलै ततबे लेल बेहाल छी िनयमे िनxय धँिस रहल छी डेग डेगपर फँिस रहल छी बढल अिछ –लेष भेटैत अिछ उपदेश सब कहैत अिछ हम की करबै अपने ओझराएल महाजाल छी रामक  पढलहुँ कृण के पढलहुँ गीता बाइिबल

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) कुरान उलटलहुँ सबतिर लीखल एÅे भाषा जीवन िक 4कृित ई¶रक देल अमू>य धन नz करबा लेल हम सब Eवयं बनल महाकाल छी

48 मम िबसिर गेल छी

रोज िकछु ने िकछु हेड़ाइत अिछ रोज िकछु ने िकछु भेटैत अिछ जे हेड़ाएल सेहो निह अ¦पन जे भेटल ओहो निह अ¦पन मुदा एिह हेड़ेनाइ आ भेटनाइमे

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) जे समय बीतैत अिछ से िनत€त अ¦पन मुदा ओहो कतेक अ¦पन नीक बीतय एिह से बेसी की चाहब सहेजब की आ सहेिज कऽ राखब की तखन, निह किनयो निह निह भिसयाल छी ? निह हेरायल छी ? निह भुितयाल छी ? किह कमक 4ितफल कम िबसिर गेल छी सkस तँ चलैत अिछ जीवनक मम िबसिर गेल छी जतेक सहन करब तकेक कz भोगब जनता जनादन जागू 4ितरोध 4ितकार क{ ˜यथक निह ˜यथ के जय जयकार क{

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) इितहास कलंिकत हैत जँ आबहुँ मोन रहब दुिनयk निह पुछत जँ अपने घरमे गौण रहब िमिथला की मैिथल ताधिर बचल रहत जाबत जीबैत रहती भाषा अ¦è मैिथली एतबा 4यास होय जे मातृभाषाक Æयोित निह ¥ीण होय हरेक मैिथल नेना बुझय िक होइछ िटकला कोइली |

49 एतबे अनुसंधान चाही

छूिब कऽ देिखयौ ई पाथर,पाथरे रहत िवरह, दुख, िचंता िक सुख शाि8त सेहंताक आखर निह भऽ सकत आब निह कोनो अिह>या

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) राम अहkक 4ती¥ामे आब निह कोनो सीताक {िच वनवास िक अिÀन परी¥ामे आब निह एिह दुिनयkक  उिचत-अनुिचतक Ëान चाही कोनो 4यÓे पैसा झहरै बस एतबे अनुसंधान चाही |

50 आजुक िदनचयp

आइ िलखू तँ िलखू िक मोन अिछ उदास भोरसँ सkझ धिर रहल अिछ उपास भोरे भोर वो कहलिन मुिनयk परल अिछ बीमार देखेबैय नै डॉ–टरसँ करबैय नै कोनो उपचार मनोहरक  सेहो देलकिन Eकूलसँ िनकािल पोिथ निह छि8ह, जेहो छलि8ह सेहो लेला फािड़ िधया –पुता के निह अिछ अहkक  कोनो परवािह मुदा भिर िदनमे पीयब दस बेर कऽ चाह अहkक संग मुि¸कल अिछ आब हमर िनवpह स¡हा{ अ¦पन घर ·ार ब{ कऽ िदयौ सुØडाह कहिलयिन हुनका जे एतेक जुिन तमसाऊ अहk भगवानपर भरोस कऽ भोजन-भात बनाऊ अहk

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) डॉ–टर साहबक  छी हम तावत चूµापर एक बेर चाय चढाउ अहk कहलि8ह ओ, हमरा संग जुिन क{ बकवास बुझलहुँ चललहुँ खेलेयबा लेल ताश बØड धम केने छलहुँ, जे भेटल अहkक संग हे भगवान उठा िलअ पुिर गेल िजनगीक सब आस हम कहिलयि8ह यथाथ मुदा बुझलयि8ह ओ ˜यंÀय एकरा डेहरी पर ठाढ़ भऽ करए लगली झगड़ा हाल हमर देिख िमh सभ मुEकाइत छल िकछु ने बुझाइत छल िEथित अ¦पन कहब ककरा सwे हमरा सन लोकक ई केहेन मजबूरी छैक एक टा पाय निह हजार टा ज{री छैक 51 पसरल बादल

देहक दद,मोन निह बुझल रहल मोहमे डुबल सिदखन ˜याकुल सिदखन उलझल

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) आर कहk िकछ सूझल अपने करेजक  भुिज-भुिज खाय की सीझल की पाकल नोर नयनक  घोिर घोिर पीबी रहल आxमा ¦यासल एसगर सुतल रही पलंगपर देखलहु सब िकछु भीजल दूर िछटिक गेल चान गगनसँ सब तिर पसरल बादल 52 टघार

िचनवारसँ टघरल िपठारक टघार जखन खूनक धार बुझाए लागय पडोसीक आxमघाती ˜यवहारसँ साकार जखन अ¦पन हार बुझाय लागय बजारसँ

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) कीनल उधारक हिथयार जखन अ¦è कपार बुझाए लागय बुिझ लीअय धम िवलु¦त भऽ रहल अिछ िबना धम बगदादी िक ओसामा तँ संभव मुदा असंभव अिछ िववेकानंद िक टैगोर भेटब | 53

थाह िजनगीक

टूटल डंटीक कपमे राखल दू घॲट चाह निह जािन कखनसँ सेरा रहल छल जेना हमर िजनगी एक घॲट चाह िजनगीक थाह 54 आxमाक हनन

बसात पुरबा बहय िक पछबा बहय ई Hिक Hिक चलय िक िनरंतर चलय

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) घर हमर अहk तक पहुँचैत कहk अिछ रोिक लैत अिछ बाटेमे बड़का बड़का महल जािहमे इमहरसँ उमहर घुमरैत रहैत अिछ कहू करब की लऽ कऽ ई भोर जे रातुक अ8हारसँ अिछ बेसी कठोर निह गाएल जाएत 4ाती लागल अिछ दkती बौक बताह बनल बस टुक टुक तकैत छी हँिस िलअय बाउ आइ देिख हमर िEथित हम अहkक भिवय देिख कािनयो निह पबैत छी । यौ उिठ कऽ ठाढ होउ देिखयौ केहन इजोत छै आिब रहल अिछ केकटा सुHज चान अकास ई आओत अपने आँगन अपने िमिथलामे देखब िलखत नव इितहास नव िनमpण क {प रेखा अिछ बिन रहल सबहक मोनमे जे एखन तक बनैत छल बाध बन कोनो कोनमे परदेशीक दंश कतेक िदन सहन करत पेटक Æवालाक श€ित लेल

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) कतेक िदन आxमाक हनन करत ।

55 श€ित बनल हाहाकार अिछ

4ीत तँ सब िदनसँ Eवाथक 4तीक िथक , की िनक की बेजाय सब भाÀयक िÐक िथक समयक संग सब िकछु सब िदन बदलैत रहल रीित-िरवाज,पाप -धम समयानुकुल बदलैत रहल सब िदन िलखल गेल िनक-िनक Ô8थ सब िदन होइत रहला एकसँ एक महान संत तखन पाप कोना एतेक बिढ़ गेल सxय चढ़ल फ€सी झूठ गëी चिढ़ गेल अथतंhक चœ˜यूहमे हताश आदमी बेिहसाब फँसैत गेल सुख , संतुिz आ सुर¥ाक आसमे मौनक श€ित िबसिर गेल सुख कतऽ,सुख किथ के ? देहक  ,पेटक  की मोनक  की ¥िणक सुख की सवकािलक की धािमक की चमxकािरक संतुिz , ओह ज{रीसँ ज{री काज

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) निह क पबैत छी कहk छनो भिर लय अ¦पन आकलन करैत छी सुर¥ाक बात तँ केनाय आब बेकार अिछ घर बाहर आतंक मचल श€ित बनल हाहाकार अिछ |

56

हमरा लेल : ह¡मर गाम

गkव आब हमरा लेल वीरान भऽ गेल ह¡मर गाम हमरा लेल मिर गेल बाबा मुइला भेल सब काज गामेमे िपता मुइला भेल सब काज गामेमे मुदा दादी आ मkक  निह गाम देखा सकलहुँ गामक मkिट पािनक  निह कज चुका सकलहुँ निह बुिझ सकलहुँ कोना की भेल मुदा सिरपहुँ गाम ह¡मर बहुत दूर छूिट गेल

(4Eतुित आशीष अनिच8हार )

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) संतोष कुमार राय 'बटोही' दू-टा किवता 1.दिलत छी हम बेवEथा क  मारल सभ िदन सँ दुxकारल अखनो अछूत बनौने छिथ- दिलत छी हम ।

डोम कहावित छी। सूप-डगरी-कोिनया-चंगेरा, डाला,मेघंबर आिद बनावित छी। िश¥ा मे अखनो िपछड़ल छी।

चमकार छी हम। मरलाहा माल-जाल क  उठावित छी। चामक कारोवार हमर बिन गएल अिछ िजनगी नरक।

रजक छी हम। कपड़ा धोनै हमर काज हगनी-मूतनी क  बास सँ नाक फािट रहल अिछ।

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) 4हरी हम सभक सभ {पे िपछड़ल दुसाध छी हम। दिलत छी हम।

कानून सँ की हेतै ? िकछु हमर दोख िकछु बेवEथा क  िकछु हमर लोकिन क ।

कतेक िदन धिर चलतै- एना सुतला सँ राEता देल जाउ नीक सँ हमरो जीबअ िदअ ।

2.अबोध नेना

हँिस रहल अिछ खिस रहल अिछ कोमल काया छि8ह छिथ भाषािवहीन अबोध नेना ।

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७)

िगरैत-परैत चलैत छिथ हाथक इशारा सँ सभ िकछु कहैत छिथ इ लेब,ओ लेब,सभ िकछु लेब सभ िकछु हुनका चािहयै8ह।

पी-पी लेताह मम लेताह सुगा,कौवा,िप>ला आिद चािहयै8ह खाय लेल हुनका पिहने चािहयै8ह ।

दूध-िमसरी हुनका चािहयै8ह ओ निह खायब,इ खायब घुिम-घुिम क' खेताह खाय सँ बेसी िछिड़येताह ।

नोर बिह रहल छि8ह िजë केने छिथ ओ¡हर जायब 'पा,हुनकर जे¡हर गेलिथ8ह इ नेना क  निह पता 'पा' आब निह औतै8ह।

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७)

संतोष कुमार राय 'बटोही' Ôाम-मंगरौना पोEट-गोनौली 4खंड-अंधराठाढ़ी अनुमंडल-झंझारपुर िजला-मधुबनी िबहार-847401

ऐ रचनापर अपन मंत˜य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रामदेव 4साद म.डल ’झाHदार ’ झा{- मान नै केकर मन मानै छै केकर मन मानै अपमान।। अपनाबू सभ जीव जगतक  पूरत अहूँक  ई अरमान।। गीत- िश¥ाक बौछार लागल छै घर-घर पढ़ाइ-िलखाइ छै।-2 बड़ी सरम केर बात आबो लोकसँ लोक छुबाइ छै।।-2

केकर लहु केकरासँ कम छै सभ लहुमे एके दम छै।-2 -’ा और िसनेहमे सबहक बड़बैर हक देखाइ छै।।-2

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) बड़ी...।

जेकरा नै जीवनक आधार की बुझतै मानव अिधकार।-2 ऊँच नीचक हिथयार उठा कऽ जगसँ लड़ै लड़ाइ छै।।-2 बड़ी...।

मानवताक शासन मानू सभ मानवक  बड़बैर जानु।-2 जीबैक हक छै सभक  बड़बैर अ8 धोक  ई देखाइ छै।-2 बड़ी...। q

3. झा{- काि> हक  के देखलकै बाबू काि> हक किर¸मा बड़ा महान।। काि> ह हाथमे हेतै ख¦ पर आ की करब अहk कंचन दान।। गीत- आब की कड़ी हम सामने खड़ा सवाल छै।-2 जीनगी भेल दबाल छै ना।।-2

जँ फँिस जाइ छै ई मशला की करबै होइ नै फैसला।-2

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) ऐ सँ वंिचत नै िकयो राजा रंक कंगाल छै। जी...।

भेटल समयसँ नै जवाब क> लर बिन जाइ छै नबाब।-2 या खोिज गलत हल जीनगी करै हलाल छै। जी...।

हल लालच केलक सवाल िजनगी फँिस गेल ओझड़ी जाल।-2 आब के छोड़तै केकरो कहk मजाल छै।-2 जी...।

उwर समय चाहै छै कम जीयब या की घेरत जम र¥ा क{ िवधाता मौत िजनगी के सवाल छै। जी...।

खोजै समय रहैत सच उwर िबरला छै जगमे ई पुwर। दुख से पाबै, िजनगी तेकर बबाल छै। जी...।

ऐ रचनापर अपन मंत˜य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रामिवलास साहु- िकछु टनका

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) Ëानक खान समाजक दपण सािहxय अिछ अमृतक खजाना पिढ़ बनू िव·ान

-े§ सािहxय सागरसँ गहॴर गॲता लगाऊ िजनगी बदलत भेटत आxम Ëान

भाषा Ëानक जननी कमभूिम देशक मान जनगण क>याण िवकासक िनमpण

मधुर भाषा सभक मन जीत उ‚च आसन स¡मान िदयाबैए दुखसँ बँचबैए

मनक मैल िवचार बदलैए समाज देश दुनूक  िबगाड़ैए मन रोग बढ़ा कऽ

मनक मैल छिबक  िबगाड़ैए जनिहत नै Eवाथ बनबैए

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) कुबाट चलबैए

अमृत वाणी जनिहत करैए नदीक पािन शीतल, निह हािन पोखैर राखै मान

ज8मदातासँ पालनकwp पैघ मारैबलासँ बँचबैबला -े§ ज8मभूिमसँ के छी?

माता कुमाता किहयो ने होइए िपता पुhक हxयारा नै होइए कहै छैथ िव·ान

कमयोगीक  भोगी िनवल किह जॲक बिन कऽ हकमारी करैए उ8टे नक भेजैए

-मशीलक  लोक हीन बुझैए िहEसा लूिट कऽ भोगी जोगी खाइए Eवाथ िस’ करैए

पिर-मक मोल अनमोल छै

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) नै िबकै तौल जे जानैए ई मोल से जन Ëानी होय

दुख सहैले गरीब जनमैए सुख भोगैले भोगी ठग महंथ ितयागी संत अिछ

असल स8त जनिहत करैए सुर, तुलसी कबीर, रैयदास चा{ युगक दास

सxयक वािण नै होइए उवािण हेतै कुवािण धमक  हेतै हािन बिढ़ जेतै अËान

बाट बटोही संग िमिल चलैए एक थकैए दोसर अिछ थीर के होइए अधीर

चोर किहयो इजोत नै सहैए भोगी किहयो दुख निह सकैए के भोगत ई दुख?

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७)

मनक शाि8त सािहxयसँ भेटैए राÐ िनमpण समाज क>याण-ले Ëानी बkटैए Ëान

असल 4ेम सािहxयसँ किरयौ Ëान बढ़त समाज सुधरत सुख शाि8त भेटत

िबनु बजने लोक बुझत केना जँ बाजै छी तँ होइए नकीहािन उ8टे जाइए जान

बरसु मेघ एिह बाग-बोनमे पािनक hास बेसी बिन गेल-ए खेत सुिख जरैए

{सल मेघ मन निह मानए मानत केना जखैन बरसत तखने ने िब¶ास

मेध देख मन हिरया गेल जे गरजत

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) से बरसत निह केना बँचत 4ाण

जे गरजैए से निह बरसैए चु¦पे रहने खेत बाग जरैए ¦यासे लोक मरैए

लोक कहैए इंसान पxथरसँ कम नै अिछ अखनो तँ िववेक बुझू मरले अिछ

कहै लेल तँ िववेक मरल-ए मुदा कठोर इंसान जगलासँ आतंक तँ बढ़ैए

िकए इंसान लूट हxया करैए रावण कंस बिन खून पीबैए इमान की कहैए?

एते िन§ुर मनुख िकए भेल दु¸मन बिन मनुखे मनुखक हxयारा बिन गेल

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७)

धरती डोिल कािन-कािन कहैए सभ डरल साम8तक जिड़मे आतंक जनमल

जवाब देतै सहए तँ दोषी छै चु¦पी सधने मुँह सीने रहै छै दीन दुख सहै छै

जे जनमल एक िदन मरत िकए होइए लोभी EवीथÒ अधीर जगत अिछ धीर

सोच बदैल नेक इंसान बनु िघनौना काज छोिड़ क>याण क{ हेतै नव िनमpण

सxयक बाट चलए जँ इंसान आगू बढ़ैत आिग निह पकत निह पािन सड़त

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) कमक  छोिड़ लोक धम खोजैए भवलोकमे भगवान खोजैए नक भोग भोगैए

हारल िदल थाकल तन मन अकैर गेल िजनगी अगहए जगत छुिट गेल

मनक मैल नै छुटल तीथसँ Eवग खोजैमे मरणासन भेल कw˜यक खेलमे

मोह ब8धन फँिस वौआए गेलॱ बाट भुिल कऽ लßयहीन बनलॱ आड¡बर देख कऽ

ठगक मेला पाख.डीक दोकान सÆजन जन पाप कीनै-बेचैए पु.य-पापक खान

अपन बात लोक दािब रखैए अपन दुख अपनेसँ िसरैज

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) ओझरा कऽ मरैए

Eवग किह कऽ गामक  लजबैए निह सुिवधा सड़क िबजलीक खेती पछा{ अिछ

गाम छोिड़ कऽ परदेिशया बिन खटैए लोक गाममे नै उ'ोग पेटक समEया-ए

सभक पेट भरैबला मरैए भुखले पेट िधया-पुता िबलैट अनाथ बनल-ए

कहै लेल तँ रीढ़ अिछ िकसान मुदा जीवन देखू बेवEथा खेल खेती चौप» भेल

उwम खेती कहैबला नै िकयो साधनहीन खेतीक काज भारी माथ पीटै िकसान

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७)

मिर जीिब कऽ िकसान खेती करै खा गेल रौदी िधया-पुता कनैए भुखै सॉंझ-िवहान

केना बँचत इÆजत आ आब{ निह सुर¥ा िदन अपहरण राित हxया होइए

देश अजाद मुदा खेती उ'ोग नै सुधरल नै भेटल सुिव'ा की करत िवधाता

गामक गाम खाए सुते बलान बालुक ढेर उड़बै आसमान केना बँचत 4ाण

कोसी बलान कमलामे उफान एलै तूफान भँिसया गेल गाम मरल Eवािभमान

िवकराल छै कोसीक बािढ़-पािन पेटे समेलै

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) गाम-घर-दलान लाखक गेल जान

कोसी hासदी िवकराल िनमम त€डव नृxय महाकाल बनल धोइ पोिछ खेलक

लूटेरा सभ िमिल माल खेलक शोषण हxया नारीजनक  भेल ब‚चा दहए गेल

धनक ¥ित जनक मित गेल देखैबला नै डुिम मरल ब‚चा गाम भेल िनपwा

4कृित किह चेतबैए लोकक  अचरज नै 4दूिषत धरती जहर उगलैए

देख 4कृित चेतावनी दइए धरती पािन हवा 4दूिषत भऽ संकट छै जीवक

पावस रीतु

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   'िवदेह ' २६ ७ म अंक ०१ फरबरी २०१९ (वषᭅ १२ मास १३ ४ अंक २६ ७) अमाबस राित छी मेघ बरसै बािढ़मे डुमैत छी के बँचेतै हमरा

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