विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' २७८ म अंक १५ जुलाइ २०१९ (वर्ष १२ मास १३९ अंक २७८) 'विदेह' २७८ म अंक १५ जुलाइ २०१९ (वर्ष १२ मास १३९ अंक २७८) ऐ अंकमे अछि:- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१.आशीष अनचिन्हार- हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-८ २.२.प्रणव झा-एन .पी.एस (लघुकथा) २.३.डॉ. बचेश्वर झा-संस्मरण २.४.पूनम झा-बीहनि कथा- 'कुर्सी' ३. पद्य ३.१. नन्द विलास राय- - धनवान ३. २.रामदेव प्रसाद मण्डल ’झारुदार’- झारु Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव Join Videha googlegroups २. गद्य २.१.आशीष अनचिन्हार- हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-८ २.२.प्रणव झा-एन .पी.एस (लघुकथा) २.३.डॉ. बचेश्वर झा-संस्मरण २.४.पूनम झा-बीहनि कथा- 'कुर्सी' आशीष अनचिन्हार हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-८ गजलक मतलामे जे रदीफ-काफिया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नज्ममे ई कोनो जरूरी नै छै। एकै नज्ममे अनेको काफिया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो अलग भ' सकैए संगे-संग नज्मक शेरमे बिनु काफियाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत नज्ममे गजले जकाँ एकै बहरक निर्वाह कएल गेल अछि। मैथिलीमे बहुत लोक गजलक नियम तँ नहिए जानै छथि आ ताहिपरसँ कुतर्क करै छथि जे फिल्मी गीत बिना कोनो नियमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पहिल जे नज्म लेल बहर अनिवार्य नै छै आ जाहिमे छै तकर विवरण हम एहि ठाम द' रहल छी----------------- 1 फिल्म "हाँ मैंने भी प्यार किया" केर ई नज्म जे कि उदित नारायण जी द्वारा गाएल गेल अछि। नज्म लिखने छथि समीर। संगीतकार छथि नदीम-श्रवण। ई फिल्म 2002 मे रिलीज भेलै। एहिमे अक्षय कुमार, करिश्मा कपूर, अभिषेक बच्चन आदि कलाकार छलथि। एहि नज्मक सभ पाँतिक मात्राक्रम 122-122-122-122 अछि। पूरा नज्म प्रेम-विरह आ गेयतासँ भरल अछि मुदा हरेक पाँतिमे बहरक पूरा पालन भेल छै।ई नज्म ओहन-ओहन लोकक मूँहपर थापर अछि जे कहै छथि जे बहरक पालनसँ कथ्य आ गेयता घटि जाइ छै। एहि नज्मक रुबाइ "तेरे माथे की बिंदिया चमकती रहे...." माहौल बनेबाक लेल देल गेल छै। संगे-संग नज्मक अंतिम पाँति "जा मैंने भी प्यार किया है" फिल्मी सिचुएशनकेँ देखेबाक लेल छै। तेरे माथे की बिंदिया चमकती रहे तेरे हाथों की मेंहदी महकती रहे तेरे जोड़े की रौनक सलामत रहे तेरी चूड़ी हमेशा खनकती रहे मुबारक हो तुम को ये शादी तुम्हारी सदा खुश रहो तुम दुआ है हमारी तुम्हारे कदम चूमे ये दुनिया सारी तुम्हारे लिए है बहारों के मौसम न आये कभी ज़िन्दगी में कोई गम हमारा है क्या यार हम है दिवाने हमारी तड़प तो कोई भी न जाने मिले ना तुम्हें इश्क़ में बेक़रारी के जन्मो के रिश्ते नहीं तोड़े जाते सफर में नहीं हमसफ़र छोड़े जाते न रस्मों रिवाजो को तुम भूल जाना जो ली है कसम तो इसे तुम निभाना के हमने तो तन्हा उमर है गुजारी जा मैंने भी प्यार किया है हाँ मैंने भी प्यार किया है एकर तक्ती उर्दू हिंदी नियमपर कएल गेल अछि। 2 फिल्म "बाबुल" केर ई नज्म जे कि तलत महमूद ओ शमशाद बेगम जी द्वारा गाएल गेल अछि। नज्म लिखने छथि शकील बदायूँनी। संगीतकार छथि नौशाद। ई फिल्म 1950 मे रिलीज भेलै। एहिमे दिलीप कुमार, नरगिस, सुलताना आदि कलाकार छलथि। एहि नज्मक सभ पाँतिक मात्राक्रम 22-22-22-22-22-22-2 अछि। पूरा नज्म प्रेम-विरह आ गेयतासँ भरल अछि मुदा हरेक पाँतिमे बहरक पूरा पालन भेल छै।ई नज्म ओहन-ओहन लोकक मूँहपर थापर अछि जे कहै छथि जे बहरक पालनसँ कथ्य आ गेयता घटि जाइ छै। मिलते ही आँखें दिल हुआ दीवाना किसी का अफ़साना मेरा बन गया, अफ़साना किसी का पूछो ना मोहब्बत का असर, हाय न पूछो दम भर में कोई हो गया, परवाना किसीका हँसते ही न आ जायें कहीं, आँखों में आँसू भरते ही छलक जाये ना, पैमाना किसीका एकर तक्ती उर्दू हिंदी नियमपर कएल गेल अछि। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। प्रणव झा एन .पी.एस (लघुकथा) सुनु, जल्दी से हमरा किछ खाय लेल द दिय, हमरा नटवर बौआ लग जेबा के अछि, एनपीएस खाता खोलाबय लेल" दोकान से घुरिते विनोद मिशर अपन कनियाँ अंजलि देवी से कहलखिन.
"एनपीएस! ई की होइत छै यौ?" अंजलि देवी प्रत्युत्तर में पुछलखिन.
ई पेंशन खाता होइत छै जै में लोक अपन कमाई के किछु हिस्सा जमा करैत रहै छै आ साइठ वर्षक भेला मातर ओहि जमा पाई से लोक के पेंशन भेटैत छै. ऐ में आन खाता से बेसी ब्याज सेहो भेटैत छै जै से पैसा तेजी से बढ़ैत छै
"ईह! तखन ऐ में की बुधियारी? जकरा फाजिल पाई होय तकरा लेल ई सब टिटम्भा भेल, हमरा सब के कमाई त सभटा खेनाइ-पिनाई दर-दवाई,धियापुता के पढ़ाई-लिखाई आ सर-कुटमैती में चलि जाय य त ई एनपीएस में पाई कत से देबै! धीया-पूता जे पढ़ि लिखि गेल त फेर बुरहारी में पेंशन के कोन काज पडत. आ फेर सरकारों त कहाँदिन वृद्धा पेंशन दैते छैक." प्रस्तावक प्रतिकार करैत अंजलि बजलीह.
विनोद आ अंजलि मिथिलाक एकटा गाम स पलायित भ क दिल्ली आयल छलैथ. पहिने गाम में विनोद अपन पैतृक जमीन पर खेती-बारी क के गुजर करै छलाह. मुदा दिनानुदिन खेती-बारी के हालत खरापे भेल जा रहल छल, आमदनी घटल जा रहल छल. एही बीच ३ टा धियापुता सेहो नमहर भेल जा रहल छल, जकर पढ़ाई-लिखाई दर-दवाई सेहो आब हिनका जोड़य परै छल. माय-बाबू के मुइला के बाद भैयारी सब सेहो भिन्न भ गेल छलाह. ऐ परिस्थिति में अंजलि हिनका पाछाँ पड़ि गेल छलीह जे ई खेती-बारी से गुजारा केनाइ मुश्किल य आ धियापुता के सेहो ई गामक विद्यालय में पढ़ाई-लिखाई ठीक से नै भ पाबि रहल अछि तैं चलु दिल्ली ओत्तहि मेहनत मजूरी करब आ ओत्तहि रहब, अपना गामक आ हमर नैहरक कतेको लोक ओतय गेलाह य आ आई सुख से रहैत छैथ. खेत-पथार के बटाई लगा दियौक. खेत पथार आब के बटाई लैत छै आ जे लैत छै सेहो किछ ढंगक उपजा बारी कहाँ दैत छै. मुदा खेत-पथार के मोह कहिया तक. भगवान् भरोसे ई सब छोरहे पड़ैत छै अंततोगत्वा अपन स्त्री के बात मानि के एकदिन सपरिवार विनोद मिश्र दिल्ली के बाट धेलाह.
मैथिल ब्राम्हणक लुचपुच देह छल स्वाइत विनोद कोनो फैक्ट्री में काज करय में नै सकलाह. अंततः हुनकर सासुर के एकटा लोक जे द्वारका के एकटा अपार्टमेंट में एकटा छोटछीन किराना दोकान चलबैत छलाह से कहलकैन जे हमर अपार्टमेंट में एकटा धोबी छल जे लोकक कपड़ा आइरन करैत छल ओ कतहु भागि गेलै य, त अहाँ कहि त ओत्तहि अहाँ के काज धरा दी. पहिले त भेलैन जे धोबी के काज कोना करब, मुदा मरता क्या न करता बला हिसाब छल. ओ काज शुरू केलाह. किछुए दिन में हुनकर दोकान चलि पड़ल छल. आब महीना के १५-२० हजार टाका कमा लेत छलाह. अंजलि सेहो एकटा अपार्टमेंट में २टा घर में भानस बनब वाली के काज पकरि नेने छलीह. आ ई सब पालम गाँव के एकटा कालोनी में किराया पर रहै लागल छलैथ. जिनगी ठीक ठाक कटै लगलै मुदा बचत के नाम पर हिनका सब लग ठनठन गोपाल छल. हिनके गाम के एकटा लड़का नटवर सेहो एही बीच में दिल्ली आयल छलाह पढ़ाई करै खातिर. कइएक बेर विनोद से कहने छल जे कक्का किछ बुढ़ारियो लेल बचाउ,एकटा एनपीएस खाता फोलि लिय. मुदा सदिखन विनोद हुनकर गप्प के हवा में उड़ा दैत छलाह.
ओहो! हमहुँ कहाँ खिस्सा के फ्लैशबैक में ल क चलि गेलहु अछि. हं, त अंजलि के प्रतिकार केर उत्तर दैत विनोद बजलाह जे सरकारी पेंशन के आशा लोक कहिया धरि राखत! आ ओहुना ओ एकदम से निदान लोक सब लेल थीक. हम किये मनाबि जे बुढ़ारी धरि हम निदान रही. आ रहल बात धीया-पूता के पढ़ि लिख जेबा के बाद बुढ़ारी के कोन चिंता करबाक, त यै, हमहु पहिने यैह सोचैत छलहुँ, मुदा आई हमरा संगे एकटा घटना जे भेल तकरा बाद हमर ज्ञान फुजि गेल अछि.
"एहेन की भेल अहाँ संगे आई? " अंजलि पुछलि
हे हम जै बाटे दोकान पर जाय छी, ओहि रस्ता में एकटा लालबत्ती पर सबदिन एकटा बुरहा गाड़ीवाला सब से भीख माँगैत रहैत छै. कपड़ा लत्ता आ वेशभूषा से ओ निक परिवारक लागैत छल, तैं हमरा मोन में डेली जिज्ञासा होइत छल जे कोन परिस्थिति भेल हेतै जे ई बूढ़ा के भीख मांग पड़ैत छैक. आई हमरा नै रहल गेल त हम बुरहा से पूछि बैसलहुँ जे कक्का की बात जे अहाँ के भीख मांगे परै ये.
ऐ पर ओ बुरहा कहै लागल जे ओ पहिने एकटा प्राइवेट नौकरी करैत छल. अपन बेटा के खूब मोन से पढ़ेलक -लिखेलक बेटा इंजिनियर बनि गेल. विवाह दान भेलै. फेर बेटा-पुतहु दुनू अमेरिका चलि गेल नौकरी करय लेल. बुरहि पहिनने स्वर्गवासी भ गेल छलीह. तैं बेचारे बुरहा एकसरे एतय रहि गेल छलाह. बाप-बेटा मिली के शुरुआती में द्वारका में एकटा छोट छीन फ़्लैट किनने छलाह ताहि में ओ एकसर रहैत छैथ. अपन सभटा कमाई ओ घर चलाब, बेटा-बेटी के पढाई विवाह आ ई घर में खर्च क देने रहथिन तैं एकाउंट पर कोनो पाई नै. पहिने बेटा बीच बीच में पाई भेज दैत छलैन्ह मुदा किछ मास पहिने कोनो बात पर बेटा संगे कहा-सुनी भ गेलै तकरा बाद बेटा फोन केनाइ छोड़ने छैन्ह आ पाई सेहो नै पठा रहल छैन्ह. अरोसी-पडोसी आब, के ककरा देखैत छै आ कत्तेक दिन! इहो अपन अपन ईड़ छोड़ि बेटा से बात नै केलाह. रहबाक कोनो चिन्ते नै मुदा खैबा लेल जे पाई चाहि ओहि लेल अपन ईड़ में ओ भीख मांगै लागलाह अछि.
हम हुनका कहलियैन जे कक्का अहाँ चाहि त एकटा उपाय क सकैत छी अहाँ ऐ मकान के किराया पर चढ़ा दियौ आ हमर कालोनी में सस्ता में किराया पर मकान ल के रहु आ जे पाई बचत तै में खेनाइ पिनाई भ जैत. जौ मोन बनै त हमरा कहब, हम मकान खोजि देब.
ई कहि हम आगा बढ़ि गेलहु मुदा हमरा बेर बेर हुनकर स्थिति मोन पड़ै लागल आ स्वाइत हम मोन बना नेने छी जे नटवर बौआ से कहि के ऑनलाइन एनपीएस एकाउंट खोलबा लेब, आ सब महीना में हजार-दू हजार-पांच सौ जैह हेतै से एनपीएस खाता में जमा करब. ई कहि विनोद भूजा के अंतिम कौर मुंह में घोंटि पानि पीबि के घर से बहरा गेलाह. इति. ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। डॉ. बचेश्वर झा संस्मरण अवकाश प्राप्त कएलोपरान्त हम बोझ तरक दूबि जकाँ पड़ल रही। साहित्यक अभिरुचि रहलोपरान्त किछु नहि लिखि-पढ़ि रहलहुँ। जे गद्य-पद्य रचना छल ओकरा सहेज कऽ रखने रही। श्री उमेश मण्डल एक चिकित्सक रूपमे हमरा ओहिठाम बजाओल गेला। हुनकर तजुरबा तेहन सटीक छल जे नवजात शिशुक काया-कल्प सावित भेल। तहियासँ हमरा परिवारमे हुनका डॉक्टरक रूपमे समादृत कएल गेल। एहि तरहेँ समय बितैत गेल। हुनकर पिताजी श्री जगदीश प्रसाद मण्डलजीक बहुत रास पोथी पढ़बाक अवसर सेहो भेटए लगल। क्रमश: सम्बन्ध बढ़ैत गेल। मैथिलीक एक ससक्त प्रहरी उमेशजी हमरासँ किछु निवन्ध ओ स्फूट कविताक मांग कएलन्हि। हम हुनका समर्पित कऽ अपनामे उत्साह ओ दबल स्फूर्णाक जाग्रत करबाक चेष्टामे छी। हम उमेशजीक दीर्घ जीवनक कामना करैत छियन्हि। अस्तु..! विगत जीवनक झाँकी- हम जखन नेना रही तँ बुढ़-पुरानक मुहसँ सुनैत रही जे हटनी गाम बड़ उपजाउ अछि। एहिठामक गाछी-बिरछी अति सघन छलैक। हमर पितामह बाबू प्रसाद झा वैष्णव धर्मक पालन करैत घरसँ फराक बुढ़िया पोखरिक महारपर कुटी वनाय रहथि। हुनक भोजन, माइनजन काका बनाबथि आ दुनू गोटए भोजन करथि। कालक्रमे हुनक अवसान भेलापर पिताजी चारि भाँइक भैयारी रहन्हि। खेतीक कार्य हमर पिताजी देखथि। माल-जालक कार्य पित्ती अनन्त झाक ऊपर संगहि जेष्ठ भाई उग्र मोहन झा मधुबनीमे अधिकांश समय बितबैत रहथि। हठात् कोसीक प्रकोप एहन भेल जे हटनीक रूप साफ बदलि गेल। ऊपजा-वारीक जगह काश-पटरेक बाहुलता सर्वत्र देखाए लगल। हमर मातृक भवानीपुर नरुआरमे स्व. वलदेव पाठकक तीन भाँइ भैयारीक बीच छल। मझिला नाना स्व. भुटकून पाठक अनन्य शिव भक्त छलाह। हुनकर सहृदयता हमरा मायक प्रति विशेष रहन्हि। हमरो बचपनक अधिकांश समय नरुआरेमे बितए। माम् स्व. राजकान्त पाठक ओ ममियौत दशरथ पाठक संगहि माम चुनचुन पाठक हमरा पिताजीक गृहस्तीमे महती योगदान रहन्हि। समय-समयपर हर-बरद ओ हरवाह पठाए खेतीमे मदैत करथि। संयोगवश, 1955 ई.मे कोसीक तटवन्ध बनल। हटनी प्रभृति इलाका पुनश्च जलमग्न भऽ गेल। पाँच वर्ष तक भूमि जलमग्न रहल। एहन स्थितिमे गाम-घरसँ लोक भागि कए कलकत्ता, जलपाईगुरी, दिनाजपुरइत्यादि जगहक भ्रमण कए रोजीक जोगारमे चल गेल। मोन अछि हटनीसँ प्रत्येक दिन 5 मीलक दूरी तय कए डेवढ़ हाई स्कूल अबैत रही। ओतहिसँ मैट्रिक प्रथम श्रेणीमे उत्तीर्ण भेलहुँ। आर्थिक स्थिति लचरल रहबे करए। पिताजी खेती-बारी कार्य आरम्भ कएलन्हि। हमहूँ गाम आबी तँ हमहूँ ओहि काज सभमे सहयोग करियन्हि। रामानन्द मिश्र भूगोलक शिक्षक कहलन्हि जे भूगोल विषय अबस्स राखू। राम कृष्ण महा महाविद्याल- मधुबनीमे भूगोल विषयक अंगीकार कएल। भूगोलमे प्रतिष्ठा तँ भेटल मुदा व्यर्थ भेल। स्नातक प्रतिष्ठा भेलापर नेपालक तराईमे एक हाई स्कूलमे शिक्षक भेलहुँ। तीन वर्ष धरि ओतए समय बिताउल। पश्चात् अपन मातृ भाषा- मैथिलीमे स्वतंत्र छात्रक रूपमे परीक्षा देलहुँ। हमरा सभक केओ मददगार नहि तँए स्व. रमानाथ झाजी द्वितीय वर्ग देलन्हि। मुदा मार्क 56% छल तँए जखन कमीशनमे उपस्थित भेलहुँ तँ स्व. गुरुवर बुद्धिधारी बाबूक आशीर्वाद ओ तात्कालीन एस. आर. अहमद चेयरमेन छलाह। हमरा अनेक तरहक प्रश्न पुछलन्हि आ हमर प्रश्नोत्तरसँ संतुष्ट भए हमर नाम सेवा अयोग द्वारा निर्मली कॉलेज निर्मली अग्रसारित कऽ देल गेल। स्व. रामसेवक सिंह तात्कालीन प्रधानाचार्य हमर नियुक्ति कऽ स्थायी हेतु अग्रसारित कऽ देलन्हि। 12 अगस्त 1972 ई. तक यथावत हमरालोकनि कार्यरत् रही। 1980 ई.मे तृतीय चरणमे डॉ. जग्रनाथ मिश्र मुख्य मंत्री रहथि ओ निर्मली कॉलेजकेँ सरकारी सूचीमे सामिल कऽ देलन्हि। तहियासँ हमरो लोकनिक आर्थिक स्थिति सुधरए लागल। 36 वर्ष धरि एहि महाविद्यालयमे सेवा देलहुँ। अन्तमे प्रधानाचार्यक कुरसीसँ 15 मार्च 2009 ई.मे अवकाश प्राप्त कएल। सम्प्रति कॉलेजमे अनवाक श्रेय प्रो. गोविन्द शरण सिंह ओ दिनेश प्रसाद सिंहकेँ छन्हि, जनिकर आभारी हम एखनहुँ छी। मैथिलीमे स्व. जय गोविन्द झा विभागाध्यक्ष रहथि। हमरा लोकनिक प्रयाससँ मैथिलीमे आनर्सक पढ़ाइ चालू भेल आ प्रथम बैचमे छह गोट छात्र मैथिलीमे प्रतिष्ठित भेला। बादमे जय गोविन्द झा प्रधानाचार्य भेला तँ मैथिलीक पूरा भार हमरा कान्हपर पड़ल। हम समय-समयपर आकाशवाणी दरभंगासँ सेहो 1982 ई.सँ साहित्यिक वार्तामे भाग लैत रहलहुँ। सर्व प्रथम जखन हमरा आकाशवाणी दरभंगासँ प्रसाणक हेतु बजाओल गेल तँ असमंजसमे पड़ि गेल रही। हठात् श्री चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’ जीक स्मरण भेल। हम निर्मलीसँ दरभंगा गेलहुँ। मिसर टोलमे हुनकर निवास स्थानक पता चलल। हम जाइत देरी हुनक चरण स्पर्श कएल। अह्लादित भए पूछलन्हि- अहाँक नाम-परिचय? हम कहलियन्हि- ‘बचेश्वर झा नाओं छी, निर्मली महाविद्यालयमे मैथिली विभागमे शिक्षक छी। हमरा आकाशवाणीसँ प्रसारणक हेतु पत्र प्राप्त भेल अछि। हम तँ कोरा कागज छी तँए अपनेसँ भेँट करए आएल छी। बड़ सिनेहसँ हमरा बैसा कए कहलन्हि जे समय निर्धारित रहैत छैक, तँए विषय-वस्तुक उद्घोष संक्षे9मे करब। कोशिश करब जे आवाज प्रष्ठ हुअए, घबड़ाएल सन नहि बुझना जाए। जाउ अहाँक प्रथम-प्रसारण थिक संतोष प्रद रहत...। हम हुनका ससिनेह नमन करैत निर्मली एलहुँ। हमर प्रसारण ठीक रहल। लगातार 16 वर्ष धरि आकाशवाणीसँ वार्ताकारक रूपमे हमर प्रसारण होइत रहल। साहित्यिक अभिरूचि एखनहुँ अछि। बोझ तरक दूबि जकाँ छलहुँ, संयोगसँ उमेश मण्डलजी हमरामे स्फूर्ति जगाओल आ हमर रचनाकेँ उजागर करबाक अथक श्रम कएल,फलाफल आइ अपने लोकनिक हाथमे ‘निवन्ध-निकुञ्ज’ अछि। संगहि काव्यक एक पोथी सेहो हिनका द्वारा मुद्रित भए रहल अछि। ‘निवन्ध-निकुञ्ज’अपनेक समक्ष अछिए तँए तत्सम्बन्धि किछु कहब आवश्यक नहि, अपनहि लोकनि ताहिपर विचार करब। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। पूनम झा बीहनि कथा 'कुर्सी' उपनयन क घर पाहुन परख सब आबि रहल छलखिन । दिनू बाबू ( जिनकर बच्चा के उपनयन छैन्ह ) 22 साल सं बाहरे रहै छैथ । गाम पर भाय सब रहै छथीन । आई त भरि दिन मड़बा पर सबटा बिध हेबाक छै । टेंट बला कुर्सी बाहर बेसी आर अंगना में कम लगा क चलि गेल । दिनू बाबू कछु घर सब सं कुर्सी निकालि क अंगना में लगा देलखिन । किछु देर में भैया एलखिन आर अप्पन कुर्सी बाहर देखि क बरबराइत--"ई कुर्सी के बाहर ध देलकै ?" से कहैत दुनू कुर्सी उठा क घर में राखि एलैथ । ई सब तमाशा दिनू के कनियां 'रानी' देखैत छलीह । ओ सोचs लगली 'जखन हम दुरागमन क कय आयल छलहुं त एहि घर क केहन स्थिति छलै । अही भैया के बेटी सब हक बियाह आर पाहुन सबहक स्वागत में हमर नैहरक कुर्सी, टेबुल एते तक की बेटी जमाय हमरे कमरा में रहै छलैन्ह । हमर सब टा फर्नीचर व्यवहार क कय तोड़ि देलैन । एतेक काज भेलै ठीको नै करेलैथ आर आई हमर बेटा के उपनयन में पाहुन के बैसs लेल कुर्सी सेहो देबय में तकलीफ छैन्ह । गौर करय बला बात ई छै जे भैया के स्लिप डिस्क के कारण एखन किछु उठेनाई मना सेहो छलैन । तखनो .... .. ..... । --पूनम झा कोटा राजस्थान परिचय :- रचनाकार:- पूनम झा पिता:- डा. उग्र नाथ मिश्र माता:- श्रीमती ऊषा मिश्र पति:- श्री दिनेश्वर झा वर्त्तमान :- कोटा (राजस्थान) शिक्षा :- बी.ए.(ऑनर्स), बी.एड साहित्यिक परिचय :- H for Hindi क पूर्व संपादक सम्मान : - 1. अमृत काव्य सम्मान, 2. विश्व हिंदी श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान, 3. नारी सागर सम्मान , 4. श्रेष्ठ शब्द शिल्पी सम्मान , 5. साहित्यपीडिया काव्य सम्मान 6. मुक्तक लोक भूषण सम्मान 7. साहित्य सागर सम्मान 8. वूमेन आवाज सम्मान 9. संपर्क काव्य सम्मान 10. शीर्षक साहित्य परिषद सम्मान 11. काव्य जौहरी सम्मान 12. साहित्यपीडिया काव्य ( माँ ) 2019 13. साहित्य संगम संस्थान 14. वूमेन आवाज सम्मान 2019 ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.नन्द विलास राय- - धनवान ३.2.रामदेव प्रसाद मण्डल ’झारुदार’- झारु नन्द विलास राय- धनवान धनवान हमरा गाममे छैथ एकटा धनवान ओ छैथ बड़ पैघ विचारवान। बुढ़ होथि वा होथि जुआन करै छैथ सभकेँ आदर-सम्मान अपनासँ पैघकेँ करै छैथ दुनू हाथ जोड़ि प्रणाम तँए तँ छथिन लक्ष्मीजी हुनकापर पूरा मेहरवान हमरा गाममे छैथ एकटा धनवान। हिन्दुक घरमे शादी रहए वा मुसलमानक घर निकाह बिना बजौलो जा कऽ दइ छैथ नीक सलाह तँए सभ करै छैन हुनक गुणक गान हमरा गाममे छैथ एकटा धनवान। बाग-बगीचा खेत-खरिहाँन पोखैर, गाड़ी, बंगला आलीशान जे बढ़ाबइ छैन हुनक शान मुदा हुनका कनिक्को नहि छैन अभिमान हमरा गाममे छैथ एकटा धनवान। उमेर भऽ गेलैन हेँ हुनकर साठि करैत रहै छैथ योगक संग सभटा अपन काम तँए लगै छथिन अखनो जवान हमरा गाममे छैथ एकटा धनवान। कखनो किनको नहि बजथिन बुराइ सत्य आओर अहिंसाक बड़ पैघ पुजारी यएह हिनक छिऐन धर्म आओर इमान हमरा गाममे छैथ एकटा धनवान। गाँधीजीक विचारधारा अपनौने छैथ छैथ पूरा सदाचारी बुद्धक दर्शन जनै छैथ छैथ पैघ परोपकारी रामायण आओर गीताक छैन हुनका पूरा ज्ञान तँए छैथ ओ निष्ठावान हमरा गाममे छैथ एकटा धनवान। देह तँ कारी छैन हुनकर मुदा दिलक छथिन साफ केतबो पैघ कियो अपराध करए हुनकर कऽ दइ छथिन माफ आनक धनकेँ समझै छैथ बिल्कुल ओ हराम हमरा गाममे छैथ एकटा धनवान। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रामदेव प्रसाद मण्डल ’झारुदार’ झारू- करू नइ तुलना पर बच्चासँ भरू नइ ओकरा हीनता बात। ऐसँ बच्चा कुण्ठित होइ छै और होइ छै मानसिक आधात।। गीत- कनी देखही दिनेश कनी सुनही सुरेश कनी मानही महेश।-2 माता अज्ञान बस फँसलै कलेश।-2 नैनाकेँ नहि स्कूल धरबै छै घरक अपन सभ काम करबै छइ।-2 अपने नैनाकेँ गला मोकै छै तेकर रक्षा केना करतै गणेश।-2 कनी...। बकड़ीमे भरि दिन गोली खेलै छै अपना जिनगीकेँ दुखमे ठेलै छै।-2 माताजी ओइपर किछ नहि बोलै छै यै मॉं केर नाम दियौ माता भुलेश।-2 कनी...। समयसँ नहि कहियो खाना बनै छै स्कूल समयमे बौआ रोजे कानै छै।-2 देखै नइ छी हमर हाथ लगल छै रौ बजरखसुआ ले ने परैस।-2 कनी...। आलस नहि माता आप भगबै छै पढ़ैबलासँ घास कटबै छै।-2 सभटा जे एहने नीपले रहतै के हेतै देशक भावी नरेश।-2 कनी...। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 111 ८) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 १०) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १३) विदेह सम्मान विशेषाक- २००म अक १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १४) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आमंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी VIDEHA 209th issue विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of original work.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् (c)२००४-२०१९. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2019 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA