VIDEHA — Issue 284 / अंक २८४

Publication: VIDEHA · Issue: 284
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विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' २८४ म अंक १५ अक्टूबर २०१९ (वर्ष १२ मास १४२ अंक २८४) 'विदेह' २८४ म अंक १५ अक्टूबर २०१९ (वर्ष १२ मास १४२ अंक २८४) ऐ अंकमे अछि:- १. प्रदीप पुष्पक दू टा गजल २. उमेश मण्डल-- जगदीश प्रसाद मण्डलक नाट्य कृतिक संक्षिप्त परिचय ३. आशीष अनचिन्हारक एकटा गजल ४. जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा- सिकियानेता प्रदीप पुष्प गजल- १ भाषा भिन्ने भिन्न बजै छै ई कोन गाम छै केओ केकरो नै चिन्है छै ई कोन गाम छै नै तरुआ तिलकोर नै दही चूड़ा गमकि रहल गन्ध चाउमिनकेर अबै छै ई कोन गाम छै नै सोहर नै लगनी आ छै नै नचारीक धुन सगरो मात्र डीजे बजै छै ई कोन गाम छै बूढ़माए बापकेँ कोन बेटा रखतै संगे धुर! सभ सबहक मूँह तकै छै ई कोन गाम छै सून छै दलान आ भकोभम्म भेल आँगन घर चढ़िकऽसोफा कुक्कुर हँसै छै ई कोन गाम छै (2222222222222सभ पाँतिमे।दूटा अलग अलग ह्रस्वकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि) गजल- २ दीप सभटा मिझा गेलै तोहर मिलनक आस केर तैयो भरि कऽरखने छी टाड़ा अपन विश्वास केर फूँकैत रहै जे हेमनि धरि शंख जनवादी भेल आइ ओ नटुआ भेल छै सोझामे किछु खास केर नव रहै व्यापार हमर सुगन्धकेर शिकारी रही बूझि गुलाब चूमि लेलौं तेँ ठोर हम पलास केर जे सोझा साष्टांग करै पान करै चरणोदककेँ पीठ पाछू ओ गाबै खिस्सा हमर उपहास केर भेँट अन्तिम कऽले आबो प्राण छूटि जेतैक हमर जा रहल पुष्प साड़ा सपना लेने रनिवास केर (22222222222222सभ पाँतिमे, दूटा अलग अलग ह्रस्वकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि) उमेश मण्डल जगदीश प्रसाद मण्डलक नाट्य कृतिक संक्षिप्त परिचय नाटक/एकांकी विधामे मण्डलजीक उपलब्ध पोथीसभ छन्हि- 1. मिथिलाकबेटी (2009), 2. कम्प्रोमाइज (2013), 3. झमेलियाबिआह (2013), 4. रत्नाकरडकैत (2013), 5. स्वयंवर (2013), 6. पंचवटी (2013), 7. कल्याणी (2015), 8. सतमाए (2015), 9. समझौता (2015), 10. तामकतमघैल (2015), 11. बीरांगना (2015) सभ पोथीक सामान्य परिचय क्रमश: निम्नांकित अछि- 1. मिथिलाकबेटी (2009): ‘मिथिलाक बेटी’ मण्डलजीक पहिल नाट्य कृति छियनि। नाटककार एहि पोथीक लेखन 2005 इस्वीसँ पूर्वहि कयने छथि। 2009 इस्वीमे श्रुति प्रकाशन, दिल्लीसँ जखन किछु पोथीक प्रकाशन भेलन्हि, जाहिमे प्रस्तुत नाटकक पोथी सेहो प्रकाशित भेल रहन्हि। ओही समयमे मण्डलजी अपन एक उपन्यासक ‘अप्पन बात’ शीर्षकक मध्य लिखने छथि- “मौलाइलगाछकफूल 2004 ईस्‍वीमेलिखलपहिलउपन्यासछी।अखनधरिपाँचटाउपन्यासआकिछुकथा, लघुकथा, नाटकसभअछि।छपबैकजेमजबूरीबहुतोरचनाकारकेँछैन‍सेहमरोरहल।मुदातइसँलिखैकक्रमनैटुटल।” प्रस्तुत नाटक ‘मिथिलाक बेटी’क पहिल संस्करण 2009 इस्वीमे ‘श्रुति प्रकाशन’, न्यू राजेन्द्र नगर, नई दिल्ली- 110008 सँ प्रकाशित भेल छन्हि। वर्तमानमे तेसर संस्करण ‘पल्लवी प्रकाशन’, तुलसीभवन, जे.एल.नेहरूमार्ग, वार्डनं. 06, निर्मली, जिला- सुपौल, बिहार :847452 सँ प्रकाशित छन्हि। प्रस्तुत नाट्य कृतिक लोकार्पण दिनांक 03.04.2010क जनकपुर (नेपाल) मे आयोजित ‘सगर राति दीप जरय’क 69म कथा गोष्ठीमे प्रसिद्ध रचनाकार डॉ. राजेन्द्र ‘विमल’, प्रसिद्ध भाषाविद्, डॉ. रामवतारयादव, डॉ. रामानन्द झा ‘रमण’, श्री राजाराम सिंह ‘राठौर’तथा मंचस्थ अन्य विद्वान लोकनिक बीच भेल अछि। नाटककारक समर्पण भाव विराट रूपमे अंकित भेल अछि। निम्नांकित हुनक समर्पण भावकेँ देखल जाए- “मिथिलाक वृन्‍दावनसँ लऽ कऽ बालुक ढेरपर बैसल फुलबाड़ी लगौनिहार तथा नव विहान अननिहारलेल...।” ई पोथी समर्पित अछि। हिन्दी साहित्य जगतमे प्रसिद्ध नाटककार श्री रामेश्वर प्रेम ‘मिथिलाक बेटी’क नाटकक आमुखमे लिखने छथि- “प्रस्तुतनाटकसमस्याप्रधानअछि।मैथिलसमाजआवृहतरूपमेभारतीयसमाजमेजाति-पातितँछइहे, निष्ठावानकर्मनाथअपनबेटीकबिआहबिनुदहेजककरतातइक्रममेदीर्घकथोपकथनकमाध्यमसँईदेखौलगेलअछि। ईनाटकपठनीयभऽसकैछइ।विशेषताईछैजेईनाटकअपनसमाजमेपसरलकुरीतिपरआँगुररखैतअछि।” प्रस्तुत नाटकक सन्दर्भमे द्वितीय आमुखकार श्री रामजी प्रसाद मण्डल, अवकाश प्राप्त पुस्तकालयाध्यक्ष, निर्मली महाविद्यालय निर्मली,क मनतव्य- “श्रीजगदीशप्रसादमंडलजीकमिथिलाकबेटीनाटकपढ़ल, ऐमेआधुनिकसमाजिकसमस्‍याकश्रीमंडलजीद्वारानीकचित्रणभेलअछि।आइसमाजदहेजकबिमारीसँग्रस्तअछि।एकरानवजीवनप्रदानकेनाइसभव्यक्तिकदायित्वअछि।मात्रकर्मनाथेनहि, ऐसमस्‍यासँलड़बाककाजसभलोककसमाजिकधर्मअछि। लेखकअपनभावनाकेँअभिव्यक्तिमात्रकेनेछैथ।दिशास्वयंसमाजकेँतकबाकअछि।कथामूलतःमिथिलाकधरतीकउपजअछि।आईखालीमिथिलाकनहि, भारतवर्षकसमस्‍याअछि।नाटकविधामेईकमजोरभलेँदेखापड़एमुदाकथोपकथनसमाजिकविरुपताकेँनिरुपितकरबामेसक्षमअछि।” नाटककार श्री जगदीश प्रसाद मण्डल ‘मिथिलाक बेटी’क शीर्षक अन्तर्गत सम्बन्धित भाव-भूमिकेँ व्यक्त करबाक हेतु 9 गोट पुरुष तथा 5 गोट स्त्री पात्रकेँ माध्यम बनौलन्हि अछि। ओ पात्रसभ अछि- 1. कर्मनाथ (प्रशासनिकअफसर), 2. सोमनाथ (कर्मनाथकपिता), 3. रामविलास (सेवानिवृत्तिमिस्त्री), 4. विकास (सेवानिवृत्तिशिक्षक), 5. नूनू (कर्मनाथकभाए), 6. लालबाबू (कर्मनाथकभाए), 7. श्रीचन (किसान), 8. फुलेसर (कर्मनाथकबेटा), 9. राधेश्याम (बोनिहार), 10. चमेली (कर्मनाथकपत्नी), 11. आशा (कर्मनाथकमाए), 12. माधुरी (रामविलासकपत्नी), 13. चम्पा (कर्मनाथकबेटी), 14. जुही (कर्मनाथकबेटी) 2. कम्प्रोमाइज (2013): श्री जगदीश प्रसाद मण्डलजीक एहि नाटकक पहिल संस्करण 2013 इस्वीमे ‘श्रुति प्रकाशन’, न्यू राजेन्द्र नगर, नई दिल्ली- 110008 सँ प्रकाशित भेल छन्हि।पछाति ‘पल्लवी प्रकाशन’, तुलसीभवन, जे.एल.नेहरूमार्ग, वार्डनं. 06, निर्मली, जिला- सुपौल, बिहार :847452 सँ सेहो अग्रिम संस्करण प्रकाशित छन्हि। प्रस्तुत नाट्य कृतिक लोकार्पण श्री उमेश मण्डलक संयोजकत्वमे आयोजित ‘सगर राति दीप जरय’क 80म कथा गोष्ठी, निर्मली (सुपौल)मे दिनांक 30.11.2013क डॉ. अशोक अविचल तथा डॉ. रामाशीष सिंहजीक अध्यक्षतामे, अधिवक्ता श्रीरामप्रवेशमण्डल, नाटककार तथा मंचस्थ अन्यान्य विद्वान सभक बीच भेल अछि। कम्प्रोमाइज नाटकमे नाटककार अपन भाव-भूमिकेँ निम्नांकित पात्रसभक माध्यमसँ व्यक्त कएलनि कयने छथि- (1) नसीवलाल- किसानकअगुआ, 65 वर्ष (2) सुकदेव- बटाइकिसान (बटेदार) 64 वर्ष (3) मनचन- बटेदार, 40 वर्ष (4) सोमन- बटेदार, 45 वर्ष (5) रघुवीर- तीमन-तरकारीउपजौनिहार, 45 वर्ष (6) रामरूप- बटेदार, 44 वर्ष (7) कर्मदेव- बी.ए. पासयुवक (8) प्रो. कृष्णदेव- 50-55 वर्ष (9) दिनेश- मैट्रि‍ककछात्र (10) शिवशंकर- एजेन्ट (बोरिंग-दमकल) (11) घनश्याम- बैंकमैनेजर (12) बहादुर- नोकर (13) मनमोहन- इंजीनियर (14) सन्तोष- एग्रीकल्चरग्रेजुएट (15) डॉ. रघुनाथ- सेवानिवृतडॉक्टर, 60 वर्ष (16) अनुराधा- डॉ. रघुनाथकपत्नी, 58 वर्ष (17) सुधा- कृष्णदेवकबेटी।हाइस्कूलकछात्रा (18) शान्ती- पंचायतमुखिया, 25 वर्ष (19) आभा- शिक्षि‍का, 22 वर्ष (20) सोनिया- सुकदेवकपत्नी, 60 वर्ष 3. झमेलियाबिआह (2013): प्रस्तुत नाटकक पहिल संस्करण 2013 इस्वीमे ‘श्रुति प्रकाशन’, न्यू राजेन्द्र नगर, नई दिल्ली- 110008 सँ प्रकाशित भेल छन्हि।वर्तमानमे ‘पल्लवी प्रकाशन’, तुलसीभवन, जे.एल.नेहरूमार्ग, वार्डनं. 06, निर्मली, जिला- सुपौल, बिहार :847452 सँ सेहो प्रकाशित छन्हि। प्रस्तुत नाटकक लोकार्पण ‘सगर राति दीप जरय’क 80म कथा गोष्ठी, निर्मली (सुपौल)मे अधिवक्ता श्रीवीरेन्दकुमारयादव, नाटककार तथा मंचस्थ अन्यान्य विद्वान सभक बीच दिनांक 30.11.2013कडॉ. अशोक अविचलजीक अध्यक्षतामे भेल अछि। झमेलियाबिआह नाटकमे नाटककार अपन भाव-भूमिकेँ व्यक्त करबाक हेतु निम्नांकित पात्रसभकेँ माध्यम बनौलन्हि अछि- 1. भागेसर, 2. झमेलिया, 3. यशोधर, 4. राजदेव, 5. श्याम, 6. कृष्णानन्द, 7. बालगोविन्द, 8. राधेश्याम, 9. घटकभाय, 10. रूपलाल, 11. गरीबलाल, 12. धीरजलाल, 13. पान-सातबच्‍चा, 14. सुशीला, 15. दायरानी,16. घटकभाइपत्नी, 17. सुनीता प्रसिद्ध नाटककार श्री रवि भूषण पाठकजी एहि नाटकक प्रसंगलिखने छथि- “झमेलियाबिआह’नाटकअपनऔपन्‍यासिकविस्‍तारआकाव्‍यात्‍मकदृष्टिसँपरिपूर्ण।जगदीश प्रसाद मण्डलजीसमकालीनविश्वआगद्यकपारस्‍परिकतासँनीकजकाँपरिचितछैथ, तँएहिनकरसम्पूर्णरचना-संसारमेसमकालीनताकवैभवपसरलअछि, जेतेवैचारिक, ओतबेरूपगत।समकालीनताकप्रतिहिनकरझुकाव‘झमेलियाबिआह’कएकटाविशेषस्‍वरूपदइछइ।बारहसालकनेनाकबिआहकओरियाओनकरैतमाए-बापकचित्रजेतेहँसबैछैक, माएकबिमारीओतबेसुन्न। लेखककरचनासंसारमेकाल-देवतालेलविशेषजगह, तँएईनाटकप्रहसनकप्रारंभिकरूपगुणदेखाबितोकिछुआरअछि।पहिलदृश्यमेसुशीलाकहैछथिन‘राजादैवककोनठेकान...’, ‘अगरदुरभाखापड़तैतँसुभाखाकिएनेपड़ैछै...।’ आराजा, दैवककर्तव्‍यकप्रतिईउदासीनताकअनुभवसमस्‍तआस्तिकताआभाग्‍यवादिताकेँखंडितकरैए। सभनाटकमेभरतमुनिकेँखोजनाइजरूरीनै, ओनाउत्‍साहीविवेचकअर्थ-प्रकृति, कार्यावस्थाआसंधिकखोजकरबेकरता, आकोनोतत्‍वनैमिलतैनतँचिकडि़उठता। यद्यपिलेखककउद्देश्यस्‍पष्टअछि।शास्‍त्रीयरूढ़िजेना- नान्‍दीपाठ, मंगलाचरण, प्रस्‍तावना, भरतवाक्‍यकप्रतिलेखककोनोआकर्षणनैदेखबैछथिन।एतबेनैपाश्चात्यनाट्यसिद्धांतकेँहूबहू–देकसी–खोजएबलाकेँआलससेहोलगतैन।तँए‘झमेलियाबिआह’ नाटकमेस्‍टीरियोटाईपसंघर्षदेखबाकइच्‍छुकभायलोकैनकनेकबचिबचाकेचलब।विसंगतिआसमस्‍यानाटककफार्मूलाकेँनाटकमेखोजएबलाकेँसेहोझमेलाबुझासकैछैन‍,किएकतँलेखककोनोफार्मूलाकेँस्‍वीकारिकऽनैलिखैछथिन।” 4. रत्नाकरडकैत (2013): प्रस्तुत पोथीश्री जगदीश प्रसाद मण्डलजीक चारिम नाट्य कृति छियनि। एहि पोथीक पहिल संस्करण 2013 इस्वीमे ‘श्रुति प्रकाशन’, न्यू राजेन्द्र नगर, नई दिल्ली- 110008 सँ प्रकाशित भेल छन्हि।पछाति ‘पल्लवी प्रकाशन’, तुलसीभवन, जे.एल.नेहरूमार्ग, वार्डनं. 06, निर्मली, जिला- सुपौल, बिहार :847452 सँ सेहो अग्रिम संस्करण प्रकाशित छन्हि। प्रस्तुत नाटकक लोकार्पण श्री उमेश मण्डलक संयोजकत्वमे आयोजित ‘सगर राति दीप जरय’क 80म कथा गोष्ठी, निर्मली (सुपौल)मे डॉ. रामाशीष सिंह आ डॉ. अशोक अविचलजीक संयुक्त अध्यक्षतामेकिसलय कृष्ण, नाटककार तथा मंचस्थ अन्यान्य विद्वान सभक बीच दिनांक 30.11.2013क भेल अछि। नाटककार श्री जगदीश प्रसाद मण्डलजी अपन ‘रत्नाकर डकैत’ सम्बन्धि भाव-भूमिकेँ निम्नांकित पात्रसभक माध्यमसँ व्यक्त कएलनि अछि- 1. रत्नाकर, 2. महेश, 3. सुरेश, 4. गणेश, 5. भजनलाल, 6. मिसरलाल, 7. रमणलाल, 8. मोजेलाल, 9. बर्बरी, 10. सुग्रीव, 11. हनुमान, 12. अध्यक्ष, 13. शबरी, 14. हरेलही, 15. बिसरलीही 5. स्वयंवर (2013): ‘श्रुति प्रकाशन’, न्यू राजेन्द्र नगर, नई दिल्ली- 110008 सँ प्रस्तुत नाटकक पहिल संस्करण 2013 इस्वीमे प्रकाशित भेल अछि।वर्तमानमे ‘पल्लवी प्रकाशन’, तुलसीभवन, जे.एल.नेहरूमार्ग, वार्डनं. 06, निर्मली, जिला- सुपौल, बिहार :847452 सँ सेहो प्रकाशित अछि। प्रस्तुत पोथीक लोकार्पण‘सगर राति दीप जरय’क 80म कथा गोष्ठी, निर्मली (सुपौल)क मंचपर श्रीशम्भुसौरभ, नाटककार तथा मंचस्थ अन्यान्य विद्वान सभक बीच लोकार्पण कराओल गेल अछि। उक्त आयोजन श्री उमेश मण्डलक संयोजकत्वमे आयोजित छल, जकर अध्यक्षता डॉ. रामाशीष सिंह आ डॉ. अशोक अविचलजीक संयुक्त कयने छलाह। स्वयंवर नाटकमे श्री जगदीश प्रसाद मण्डलजी अपन भाव-भूमिकेँ व्यक्त करबाक हेतु निम्नांकित पात्रसभकेँ माध्यम बनौलन्हि अछि- 1. मकशूदन, 2. सोनेलाल, 3. सिंहेश्वर, 4. रूपलाल, 5. जीयालाल, 6. सोहनलाल, 7. रौदी, 8. मोहनलाल, 9. किशोर, 10. बुधनी, 11. रूक्‍मि‍णी, 12. सुशीला 6. पंचवटी (2013): श्री जगदीश प्रसाद मण्डलजीक एहि नाटकक पहिल संस्करण 2013 इस्वीमे ‘श्रुति प्रकाशन’, न्यू राजेन्द्र नगर, नई दिल्ली- 110008 सँ प्रकाशित भेल छन्हि।पछाति ‘पल्लवी प्रकाशन’, तुलसीभवन, जे.एल.नेहरूमार्ग, वार्डनं. 06, निर्मली, जिला- सुपौल, बिहार :847452 सँ सेहो अग्रिम संस्करण प्रकाशित छन्हि। श्री जगदीश प्रसाद मण्डलक प्रस्तुत नाट्य कृति- ‘पंचवटी’क लोकार्पण श्री उमेश मण्डलक संयोजकत्वमे आयोजित ‘सगर राति दीप जरय’क 80म कथा गोष्ठीमे प्रसिद्ध साहित्यकार श्रीराजदेवमण्डल, नाटककार तथा मंचस्थ अन्यान्य विद्वान सभक बीच भेल अछि। उक्त आयोजन मानिकराम-बैजनाथबजाजधर्मशाला, सुभाषचौक, निर्मली (सुपौल)मे दिनांक- 30.11.2013क आयोजित भेल छल, जकर अध्यक्षता डॉ. अशोक अविचल तथा डॉ. रामाशीष सिंहजी कयने छलाह। 7. कल्याणी (2017): एहि पोथीक पहिलसंस्करण 2013 इस्वीमे एकांकी संचयनक पोथीमे संकलित कय श्रुति प्रकाशनसँ प्रकाशित भेल अछि।पछाति पल्लवीप्रकाशन, तुलसीभवन, जे.एल.नेहरूमार्ग, वार्डनं. 06, निर्मली, जिला- सुपौल, बिहार : 847452 सँ 2017 इस्वीमे प्रकाशितभेल। श्री जगदीश प्रसाद मण्डल प्रस्तुत एकांकीकेँ कुल 9 गोट पात्र, यथा- 1. जेलर, 2. चन्‍द्रनाथ, 3. अनन्तकुमार, 4. सूर्यदेव, 5. निष्‍कान्त, 6. क्षितिजदेव, 7. कल्याणी, 8. प्रतिज्ञा, 9. शान्ति केर माध्यमसँ लिखने छथि। 8. सतमाए (2017): प्रस्तुत पोथी- ‘सतमाए’क पहिल संस्करण 2013 इस्वीमे पल्लवीप्रकाशन, तुलसीभवन, जे.एल.नेहरूमार्ग, वार्डनं. 06, निर्मली, जिला- सुपौल, बिहारसँ2017 इस्वीमे प्रकाशितअछि। नाटककार प्रस्तुत ‘सतमाए’ एकांकीमे उक्त पात्रसभक समायोजन कयने छथि- 1. बुद्धि‍धारी, 2. बिपैतबाबू, 3. पुलकित, 4. चिन्तामणि, 5. शिवकुमार, 6. सुलक्षणी, 7. सावित्री, 8. खजुरिया, 9. तेतरी 9. समझौता (2017): पोथीक पहिलसंस्करण 2013 इस्वीमे एकांकी संचयनक पोथीमे संकलित कय श्रुति प्रकाशनसँ प्रकाशित भेल अछि।पछाति पल्लवीप्रकाशन, तुलसीभवन, जे.एल.नेहरूमार्ग, वार्डनं. 06, निर्मली, जिला- सुपौल, बिहार : 847452 सँ 2017 इस्वीमे प्रकाशितभेल। श्री जगदीश प्रसाद मण्डल प्रस्तुत एकांकीकेँ निम्नांकित पात्रसभक माध्यमसँ लिखने छथि- 1. श्याम, 2. सुकान्‍त, 3. फुलेसर, 4. कुसेसर, 5. मुनेसर, 6. रौदी, 7. अनुप, 8. झोली, 9. रूपनी, 10. रेखा 10. तामकतमघैल (2017): पोथीक पहिलसंस्करण 2013 इस्वीमे एकांकी संचयनक पोथीमे संकलित कय श्रुति प्रकाशनसँ प्रकाशित भेल अछि।पछाति पल्लवीप्रकाशन, तुलसीभवन, जे.एल.नेहरूमार्ग, वार्डनं. 06, निर्मली, जिला- सुपौल, बिहार : 847452 सँ 2017 इस्वीमे प्रकाशितभेल। तामक तमघैल एकांकीमे श्री जगदीश प्रसाद मण्डलजी अपन भाव-भूमिकेँ व्यक्त करबाक हेतु निम्नांकित पात्रसभकेँ माध्यम बनौलन्हि अछि- 1. तेतरी, 2. रविन्द्र, 3. चन्द्रदेव, 4. सुनरलाल, 5. रागिणी, 6. बलाटवाली, 7. पीपरावाली, 8. अनुराधा 11. बीरांगना (2017): पोथीक पहिलसंस्करण 2013 इस्वीमे एकांकी संचयनक पोथीमे संकलित कय श्रुति प्रकाशनसँ प्रकाशित भेल अछि।पछाति पल्लवीप्रकाशन, तुलसीभवन, जे.एल.नेहरूमार्ग, वार्डनं. 06, निर्मली, जिला- सुपौल, बिहार : 847452 सँ 2017 इस्वीमे प्रकाशितभेल। श्रीजगदीशप्रसादमण्डलप्रस्तुतएकांकीकेँनिम्नांकितपात्रसभकमाध्यमसँलिखनेछथि- 1. सोनमाकाका, 2. चेथरू, 3. जुगेसर, 4. अयोधी, 5. जीवन, 6. रूपनी, 7. कुशेसरी, 8. कोशिला आशीष अनचिन्हार गजल विषवंदन युगधर्म छै परिवर्तन युगधर्म छै जइमे खेने रोग हो से बरतन युगधर्म छै खाली अपने टा रही से कतरन युगधर्म छै खाली चाहथि मीठ रस मधुगुंजन युगधर्म छै बिन करने कल्याण नै गठबंधन युगधर्म छै सभ पाँतिमे 222-2212 मात्राक्रम अछि। जगदीश प्रसाद मण्डल सिकियानेता आइभोँटछी।भिनसरसातेबजेसँघर-अँगनासँलऽकऽभोँटकबुथधरिलोकोकआवाजाहीआचुनावीगहमा-गहमीहुअलगल।अस्सीबर्खकसुधनीदादीअपनअँगनेसँगरियाबएलगली- “जोरेटिकजरौना! तोराकहियोनीकनइहेतौ।” एतेबाततँबुझलेछलजेसातबजेसँभोँटखसबशुरूभऽजाएत।बुथदिसनहिजा, गामदिसविदाभेलौं।बुथदिसनहिजाइकमनऐदुआरेनइभेलजेचुनावमेपुलिसकबेवस्थाभरपुरअछि।केताखेपभोरसँमानेतीनबजेभोरेसँपुलिसकगाड़ीगाममेचक्करकाटिचुकलअछि।जहिनाएकदिसपुलिसकगाड़ीचक्करकाटिचुकलअछितहिनागामकनेतोसभकेताखेपगाममेघुमिचुकलअछि।तहीकालरविन्दरभायकेँबुथदिससँअबैतदेखलयैन।मनमेजहिनाउत्साहबुझिपड़लतहिनाहतोत्साहसेहोबुझिपड़ल।मुदातइसँहमराकोनमतलब।ई‘उत्साह-हतोत्साह’हुनकरअपनमामलाछिऐन।हुनकेटानहि, सबहकअपन-अपनमामलाछीहेजेजिनगीमेकेनाउत्साहितभऽजीबवाहतोत्साहितभऽजीब...। लगमेअबितेरविन्दरभायकेँपुछलयैन- “भाय, बुथदिससँअबैछी?” जहिनापुछलयैनतहिनारविन्दरोभायबजला- “हँ।” सातसँसमयऊपरभऽचुकलछल।सातबजेसँभोँटखसबशुरूहएतसेबुझलरहबेकरए।बजलौं- “भोँटखसाकऽअबैछी?” हमरबातसुनिरविन्दरभायकनीकालचुपेरहला।फेरकीफुरलैनकीनहि, बजला- “नइअखनभोँटकहाँखसेलौंहेन।लोककभीड़दुनूबुथपरअछिए।जहिनाकतारलागलभोँटखसौनिहारकभीड़अछितहिनागौंआँ-घरुआसिखौनिहारकभीड़सेहोअछि।तैसंगऐबुथसँओइबुथपरपुलिसकगाड़ीकदौड़ौ-दौड़ीसेहोअछिए।” ओना, रविन्दरभायकोनोराजनीतिकदलकलोकनइछैथमुदाअपनदलनहिछैनसेहोबातनहियेँअछि।अपनदलऐलोभहेबनौनेछैथजेजखनमनुखछी, समाजिकप्राणीछीतखनमनुखआजानवरकबीचभेदोतँयएहनेअछि।तँएसमाजकबीचेनेबासकरैकअछितइलेतँलोककसमूहकसंगरहैपड़त।लोकेकसमूहनेसमाजोछी।अहीलोभकदुआरेरविन्दरभायसमाजमेसक्रियछैथ।सभरंगकलोकसमाजमेअछिएतँएसभधन्धीलोकरविन्दरभायछथिए।केकरोबिआह-दानकलेन-देनकप्रश्नहोइकिश्राद्धमेपंचदान-विरखोक्रिया-कर्मकप्रश्नहोइआकिकेकरोदुनूबेकतीकबीचकमतभेदकप्रश्नहोइरविन्दरभायकेनाओइबीचनइपड़ता। पार्लियामेन्टकचुनावछी।देशकभागकफैसलाहएत।ओना, कोनो-कोनोराज्यमेविधानसभाकचुनावसेहोछीआखुदरो-खानिक्षेत्रकचुनावसेहोछीहे।मुदाअपनाऐठामसेकमअछि।मात्रपार्लियामेन्टकचुनावछी।मुँहदेखमुंगबापरसनिहाररविन्दरभायछथिए, तँएमनमेभेलजेजँभोँटकविषयमेपुछबैनतँअनेरेवेचारेगामकझगड़ामेओझराजेता।असगररविन्दरेभायकीकीकरता।मात्रिकदिससँकोनोपार्टीकसनेसममियौतभाएपठौनेहेतैनतँसासुरदिससँसारकिनकोसनेसपठौनहिहेतैन।तेतबेनहि, जाइतिकमैनजनकफरमानभीनेहेतैनआसंगी-साथीकभिन्ने।मुदासभकिछुरहितोरविन्दरभायइमानदारलोककगिनतीमेगनलजाइतेछैथ।नवकाकम्प्युटरकहिसाबतँनहिपढ़लैनअछिमुदादेशीहिसाबपढ़नेएतेतँबुझितेछैथजेगामकइमानदारीकतराजूपाइ-कौड़ीकछी, जेकरडण्टीकेतौहाथीकनॉंगैरजकाँबनिगेलअछितँकेतौपूछकट्टीबकरीजकाँसेहोअछिए।अहीबीचनेरविन्दरभायकेँरहबाकोछैन।ओना, रविन्दरभायदुनूरंगकलोकछथिए।मानेईजेकेकरो-लेहाथीकनॉंगैरजकाँछैथ, तँकेकरो-लेपूछकट्टीबकरीजकाँसेहोछथिए।तँएकहबजेरविन्दरभायओहनबकलेल-ढहलेलजकाँछैथजेअपनअसथिरविचारराजनीतिकप्रतिनहिबनासकैछैथसेहोबातनहियेँअछि।बनाइयोतँसकितेछैथमुदातइमेबाधोछैन्हे।बाधाईछैनजेपार्लियामेन्टकक्षेत्रनमहररहनेअधिकतरनेताकघर–चुनावलड़निहार–कनेदूर-दूरछैन्हेजइसँपहिले-पहिलबेरनामोसुनैछैथ, मुदादू-तीनटानेतालगकरहनेचिन्हो-परिचयआउचितो-उपकारहोइतेछैन।तँएजँरविन्दरभायअपनअ-असथिरविचारअपनेजीवनआअपनजीवनकउदेसकेँदेखैतजँराजनीतिकविचारानुसारअसथिरोकरतातइमेबाधाईछैनजेचिन्हरबोनेताआउपकारियोनेताचुनावे-चुनावअपनदलबदैललइछैन, जइसँरविन्दरभाइकपार्टीसेहोबदैलजाइतेछैन...।रविन्दरभायकेँपुछलयैन- “भाय, भोँटखसबएकखनजाएब?” रविन्दरभायबजला- “आबएक्केबेरछअ-बजेसाँझमेजाएब।छअबजेतकभोँटअपनाऐठामछी।” रविन्दरभाइक‘छअ-बजे’सुनिबजागेल- “आनठामकदोसरसमयअछि?” रविन्दरभायबजला- “अखनऔगुताएलछीतँएबेसीगप-सप्पनइकरब।एकेटागपबुझिलएहजेकेतौचारिबजेतकआकेतौतीनियेँबजेतकभोँटखसत।” मनमेभेलजेपुछिऐन, एनाकिए? जइप्रशासनकेँसातबजेसँचारिबजेतकभोँटकरबैकशक्तिअछिओदूघन्टाआरोकिएनेकरासकैए।फेरभेलजेभऽसकैएओइसभबुथपरभोँटेकमखसैतहोइ।अपनोमनकहलकजेअखनसँजेतेभोँटखसतओतेतँसंख्यामेपतराइतेजाएत, अन्त-अन्तहोइतपतराइयेजाएत।आनेकाजजकाँलगलेभऽजाएत।आगूबढ़लौंतँसुधनीदादीकेँरस्तापरबैसलयत्र-कुत्रगरियबैतदेखलिऐन।मनमेभेलजेआइदेशकमहापर्वकशुभदिनछी, तखनअस्सीबर्खकसुधनीदादीकिएगारिपढ़िअपनोअशुभदिनआसुननिहारोकअशुभदिनबनारहलीअछि? सेनहितँपुछिऐलइछिऐन।मुदालगलेमनमेभेलरस्तापरछीजँकहींतइबिच्चेमेपुलिसकगाड़ीआबिगेलतँअनेरेलफड़ामेपड़िजाएब।मुदामनमेखुटखुटीपकैड़ियेलेलकजेभोरे-भोरसुधनीदादीकेँकीभऽगेलैनजेएनागरियबैछथिन? आगूतकलौंतँबीस-पचीसलग्गीहटलरूपनीभौजीकेँदेखलयैन।मनमानिगेलजेरूपनीभौजीलगसभभाँजलगिजाएत।आगूबढ़ि, रूपनीभौजीलगपहुँचतेबजलौं- “भौजी, दादीकिएभोरे-भोरबताहिजकाँरस्तापरबैसगरियबैछथिन?” ‘बताहि’सुनिविचारमेविरामदैतरूपनीभौजीबजली- “बौआ, दूहजाररूपैआलेटरीनबनबैकनाओंपरआपॉंचहजारघरकनाओंपरसिकियानेताठकिलेलकै, वएहभोरेनजैरपड़लैनकिगरियौनाइशुरूकेलखिन।” ‘सिकियानेता’बुझबेनेकेलौं, ओनागाममेतीनटासिकियापहलमानोआसिकियाखलिफोअछिमुदासिकियानेतोअछिसेभौजीएमुहेँसुनलौं।लगलेमनमेईहोभेलजेभरिसकसिक्की-मौनीककारोबारदुआरेलोक‘सिकियानेता’कहैतहोइ।बजलौं- “भौजी, केसभअपनागाममे‘सिकियानेता’छैथ?” एक्केबेरनकमाइनकरैतभौजीबजली- “ओइछौड़ासभकेँनइदेखैछिऐजेमौगीजकाँझोंटोबढ़ौनेअछिआतैपरसँमोछो-दाढ़ीसभदिनकटबैएआमौगियेकसलवार-जम्फरजकाँपइज्जमोआकुरतोपहीरिलइएआअँगने-अँगनेभेलघुरैए।” भौजीकबातआरोसुनैकमनहोइछलमुदाभोँटकदिनछी, आइयोतँलोकबुझहजेहमरोगिनतीसरकारबनबैमेभइयेरहलअछि।बजलौं- “भौजी, अनेरेनेसुधनीदादीबताहिभेलछैथ।ओतँभागमन्तछैथजेएहनोठक-फुसियाहकदुनियाँमेअस्सीबर्खकउमेरमेगरियेबोतँकरितेछैथ।” हमरबातसुनिभौजीमुस्कियेली।मुदाबजलीकिछुने। शब्दसंख्या : 1023, तिथि : मजदूरदिवस, 2019 Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव Join Videha googlegroups विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf          Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf       12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक,  १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf       Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf         21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010        Videha_01_10_2010_Tirhuta             67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010        Videha_15_11_2010_Tirhuta             70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010        Videha_15_12_2010_Tirhuta           72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011        Videha_01_03_2011_Tirhuta           77 ७) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012        Videha_01_08_2012_Tirhuta           111 ८) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013        Videha_15_03_2013_Tirhuta           126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013        Videha_15_11_2013_Tirhuta           142 १०) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १३) विदेह सम्मान विशेषा‍क- २००म अ‍क १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अ‍क १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १४) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आम‍ंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी VIDEHA 209th issue विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन  नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक  बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of original work.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् (c)२००४-२०१९. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम वि‍लास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत।  एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2019 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA

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