विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' २८९ म अंक ०१ जनवरी २०२० (वर्ष १३ मास १४५ अंक २८९) 'विदेह' २८९ म अंक ०१ जनवरी २०२० (वर्ष १३ मास १४५ अंक २८९) ऐ अंकमे अछि:- १. प्रदीप पुष्पक दू टा गजल २. उमेश मण्डल-- जगदीश प्रसाद मण्डलक विचारोत्तेजक गद्यांश ३. आशीष अनचिन्हारक एकटा गजल ४. जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा- गामकआशाटुटिगेल प्रदीप पुष्प गजल- १ अनठौने छी मुदा अनजान नै छी घरैये लोक छी मेहमान नै छी अहाँक मुँह देखि मूँगबा बूझल अछि चुप्प भेल छी तेँ कि निष्प्राण नै छी अहाँक कहलासँ राति- दिन नै हेतै अहूँ डिबिये छी कुनु दिनमान नै छी सुविधाक हिसाबसँ मानक नै रचियौ यौ अहूँ सभ दिनक पहलवान नै छी ओ नै डूबत जे हेलब जनैत छै अहाँ खत्ताक पानि छी बलान नै छी (बहरे- मीर) गजल- २ के सुनेतै गरीबक गान कह के बढेतै गुदड़िया शान कह मोसि बेसी तँउजरे छै तहन पाठ हेतै केना करिछान कह गीत गिरहत बला सुनलौं बहुत बालचनमाक निज अभिमान कह जेहने छै घँसल आ की सही तूँ अठन्नीक निज सम्मान कह देलकै नाम कवि कोकिल बना ओइ उगनाक तूँ गुणगान कह लेकलम हाथ चल संगे निकल पुष्प मिथिलाक नव अभियान कह (2122122212सभ पाँतिमे) उमेश मण्डल जगदीश प्रसाद मण्डलक विचारोत्तेजक गद्यांश जन्म : 5 जुलाई 1947, बेरमा, जिला- मधुबनी (बिहार), शिक्षा : एम.ए. द्वय (हिन्दी, राजनीतिशास्त्र), जीविकोपार्जन : कृषि (मुख्यत: तरकारीखेती), रूचि : 2001 तकसमाजसेवा (रूढ़िएवम्सामन्तीव्यवहारकखिलाफलड़ाइ, केस-मोकदमा, जहलयात्रा) पछाइतसाहित्यलेखन।नाटक, एकांकी, गीत, काव्य, कथा, उपन्यासइत्यादि–साहित्यकमौलिकविधामेअनवरतलेखन।करीब 100 पोथीकलेखन/प्रकाशन।सम्मान/पुरस्कार : ‘विदेहसम्मान’, ‘विदेहभाषासम्मान’, ‘टैगोरलिटिरेचरएवार्ड’, ‘वैदेहसम्मान’, ‘यात्रीसम्मान’, ‘विदेहबालसाहित्यपुरस्कार’, ‘कौशिकीसाहित्यसम्मान’तथास्व. बाबूसाहेवचौधरीसम्मानोपाधिसँसम्मानित/पुरस्कृत। हिनक रचना कौशलक सन्दर्भमे कतेको विद्वजन कहैत छथि जे मण्डलजीफुसियाँहीक रचनाकार नहि छथि, हिनक एक-एक वाक्य महत्वपूर्ण होइत छन्हि। एहि तरहक रचना कौशल कोनहुँ रचनाकारमे तखनहि आबि सकैछ जखन मांसा-वाचा ओ कर्मणाक सतह एक हो...। अत: प्रस्तुत कय रहलहुँ हेन हुनक विभिन्न पोथीसँ संकलित गद्यांश- जहिनामिथिलाकउत्तरवरियासीमापर्वतश्रृंखलासँ भरलअछिजैबीचहिमालयपर्वतसनपर्वतोअछिआकैलाशसनभूमिसेहोअछिए, तैबीचमानसरोवरसनसरोवरोनइअछिसेहोकेनानइकहलजाएत।तहिनादच्छिनीसीमाकनदीकसमूहकबीचगंगासनपवित्रनदीसेहोअछि।जैबीचसुलतानगंज, सिमरियाघाटसनअनेको पवित्रघाट- सेहोअछिए। सभकिछुरहितोसीतापुरगामकेँदुश्मनकडरनइहोइछै, सेहोबातनहियेँअछि।कोसी-कमलाकबीचबलागामकेँतँएतेडरछइहेकिनेजेजँकहींकूदि-फानिकऽकोसीएआकिकमलेचलिऔतआगामकमाटिकेँकाटिअपनघरबनागामकबासकेँउपटादेत, ईडरतँबनलेअछि। तहिनामौसमोकडरतँबनलेअछिकिनेजेउग्ररूपछोड़िओहनमरियलेरूपबनालिअएजइसँअकालेपड़िजाए, जँसेभेलतखनतँगाछ-बिरीछकसंगमाछो-कौछआगाइयो-महींसनेपियासेपरानतियागएलगत।मुदातैयोहमरासभकेँएतेकआत्मबलतँअछिएजेज्ञानबलकसंगकर्मबलसँसेहोहमसभअपन-अपनआत्मबलकरक्षाकरितेछी।तँए, आन-आनगामकअपेक्षाहमसभअपनाकेँसबलबुझिनिर्भयछीहे।निर्भीकबनिअपनगामकरूप-रंगकेँसजौनहिछी।सजेनौंकिएनेरहब? जइपानिकगतिसभदिनाअछिओजँखिसियाकऽरूसबोकरततँएकसालरूसत, चाहेदूसालआकितीनसालरूसतसएहने, मुदाहमसभतँबारहसालकरूसलकेँबौसैकलूरिरखनेछी।ओहिनानहिनेगामकनाओंसीतापुरअछि..! मिथिलांचलोतँमिथिलांचलेनेथिक।जहिना कुशाग्रबुधिकलोकअनुकूलपरिस्थितिभेटनेनीक-सँ-नीकविद्वता, नीक-सँ-नीककलाकारिता, नीक-सँ-नीकटेकनोलॉजीआनीक-सँ-नीकजिनगीकपारखीबनैएतहिनानेनीक-सँ-नीकभोगवादियोआनीक-सँ-नीकजोगवादियोबनितेअछि। अपनासबहकमिथिलावएहनेछीजेजइपत्नीकेँसहयोगी-संगीबुझैछीओइपत्नीकेँपरिवारिककोनोक्रिया-कलापकभारनइपड़ैन, तँएभानसकरैलेभनसिया, पानिभरैलेपनिभरनी, कपड़ा-लत्तासँलऽकऽघरकनिपाइ-पोताइतकअनकेसिरे-हाथेहोइ।मुदासेनहि, ओहनोमिथिलांचलतँअछिएजैठामबेटा-पुतोहुअपनपाछूसँअबैतखनदानीपरिवारमेपिताकअनुसरणकरैतसहयोगीबनितिल-तिल, कण-कणकअनुभवकअभ्यासकरैततिले-तिल, कणे-कणअबैबलाकाल्हुकअनुकूलबनबैतअपनभविसकेँअनुकूलतामेपीअबैत, निर्माणकरैतआगूबढ़ैए। मिथिलांचलसभदिनसँधार-धुरकइलाकारहबेकएल अछि।दर्जनोधारमिथिलांचलकबीचअछिए।ओहूधार- धूरमेसभधारकगति-विधिएक्केरंगसेहोनहियेँअछि। किछुधारएहेनअछिजेबेसीकाट-खोंटकरैएआ किछुएहेनअछिजेबहैततँअछिसालोभरि मुदासमटलगतिये।तैसंगमरल धारसेहोअछिए। मरलधारकमानेभेल, ओहनधारजेबरसातमेतँकिछुदिनबोहितोअछिमुदारहैएसभदिनसुखले।जइसँनेओइजमीनमेउपजा-बाड़ीहोइएआनेउपयोगककोनोदोसरेकाज।तैसंगमाटिकरूपमेसेहोदुभाग्यरहलअछिजेउपजाउमाटिमानेउर्वरशक्तिबलाखेतकमाटिभँसिगेलआओकराऊपरदोखराबाउलभरिगेल। कोसी-कमलानदीकउपद्रवसबहकसोझमेछेलैहे।ओकरोरोक-थामकलेलमिथिलाककिसानउठिकऽठाढ़भेला।कोसीनदीकेँदुनूभागसँबान्हिओइपानिकउपयोगसिंचाइ-लेकरैकयोजनाबनल।बान्हकसंगफाटकबलापुलोआनहरोकयोजनाबनल।तैसंगबिजलीउत्पादनलेलडैमबनबैकअवाजसेहोउठलेछल।ओना, देशनव-नवस्वतंत्रभेलेछल।जइसँदेशवासीमेस्वतंत्रताकउत्साहसेहोबनलेछेलैन।कोसीनदीकदुनूतटबन्धबनबैलेएकाएकजन-सैलावउमैड़गेल।मानेजन-आन्दोलनकरूपमेसहयोगभेल।गाम-गामसँलोकअपनश्रमदानकरैलेपहुँचल।बान्होबनल, नेपालसीमाकबीचफाटकबलापुलोबनल।सबहकमनमेबिसवासभेलजेदुनूदेशकजमीनकसिंचाइहएत।मुदाआइलक-धकसाठिबर्खबीतलोपरकोसीनहरकयोजनाककीगतिअछि, ओसबहकबीचअछिए।देशकअजादीकलड़ाइमेजेपीढ़ीबलिदानदेलैनहुनकरआइतेसरपीढ़ीगुजैररहलअछि, गाम-घरछोड़ि-छोड़िओसभपड़ाइनकएरहलाअछि। किसानीसभ्यताजेअपनाऐठामशुरूसँचलिआबि रहलछल, मशीनएनेओबदलल।बदललकमानेईनहिजेचित-सँ-पटभऽगेलआकिपटसँचित, बल्किओइमेथोड़ेकतोड़-जोड़भेल, जेकरासंक्रमणसेहोकहिसकैछी।तैसंगविचारमेविकासकसंगविघटनोभेल। विघटनकअनेककारणमेएकईहोभेलजेजैठामकिसानीजिनगी-लेपानिकजेतेकजरूरतअछि, ओतेकमशीन-लेनइअछि।तैसंगबर्खाकपानिखेतकजिनगीकेँजेशक्तिदइए, ओइशक्तिकओतेखगतामशीनकेँनइछै, तँएबरखा-मौसमउद्योगजगतकलेल–मानेमशीनकसंगवेपारलेल–जेतेकनीकअछितइसँबेसीअवरोधकबनिअधलासेहोअछिए।देशकबहुसंख्यकअवादीकिसानीजिनगीधारणकेनेजेआबिरहलछला, मशीनभेनेओइमेटूटआएल।गामकश्रमशक्तिशहरदिसबढ़ल, जइसँशहरकविकासजइगतियेभेल, ठीकओकरविपरीतग्रामीणशक्तिकेँहटनेगामकभेल।मनकधारणामेसेहोघटी-बढ़ीभेल।जैठामसमयपरबरखानइभेनेहोम-यज्ञकसंगओझाइ-भगताइसेहोहोइछलओआबनइरहल।ओना, खेती-लेपानिकजरूरतमशीनसेहोपुरबएलगल, जइसँरौदीकप्रकोपमेथोड़ेकघटबीसेहोभेल।धार-धुरकपानि, जेछिड़ियाएलचलैछल, छहर-नहरभेनेओहूमेकनीकबदलावएबेकएल, जेनीक-बेजाएदुनूहोइतेअछि।आइहमसभटुटैतकिसानीसभ्यताआउदयहोइतमशीनीसभ्यताकबीचठाढ़छी, सेबुझिनेआगूदिसताकब? लोककमन-बुधिकेँईपकैड़नेनेअछिजेशहर बजारमेओहिनालोककेँमुँह-मंगाभेटैए।ओना, जीवन यापनकरैकसाधनगामकअपेक्षाशहर-बजारमेबेसी भइयेगेलअछि।हजारोरंगककारोबारपसरल अछिए, जेगाममेनइअछि...। प्रश्नउठैतअछि, कीगामकेँओहिनातरमुहाँछोड़ि देबै आकिपितृभूमि, मातृभूमि, मिथिलाभूमिबुझिविचारिकिछुकरबोकरबै? कीखिखिरकफलकलनाँगैरजकाँसोझेफलकलछीआकिलुक्खीकनाँगैरजकाँसुर्राइतोछी? खाएरजेछी, जेतएछी, मौजसँछी, नीकछी। हमसभकिसानछी, माटि-पानिकबीचबसलधरतीपरओहनजीवबनिमाटि-पानिसँबनलोछीआमाटिये-पानिपरजीवोकरैछी।सालभरिकचक्रमेकिछुदिनपानिधरतीकनिच्चाँमेरहैएआकिछुदिनधरतीकऊपरोमेसेहोपसैरजाइए।माने, किछुदिनपानिकछातीपरचढ़िमाटिसवारीकसैएआकिछुदिनमाटिकछातीपरचढ़िपानिसवारीकसैए।बरसातकसमयबाढ़ि-बर्खासँधरतीकऊपरपानिपसरलरहैएआरौदीपाबिपानिकेँतरकरैतमाटिऊपररहैए।मुदादुनूमेजहिनाउपजशक्तिछैतहिनासंहारशक्तिसेहोछइहे।जइरूपकसंगमदुनूकबीचजखनहोइएओइरूपकजीवधारीकजन्महोइएजइसँधरतीकशोभा-सुन्दरनिखारैए।गाछ-बिरीछबलाशोभा-सुन्दरगामहुअएआकिदहाइत-भँसियाइतउजरल-उपटलगाम, ओइमेमाल-जालसँलऽकऽगाछ-बिरीछकसंगलोको-वेदआचिड़ैयो-चुनमुनीरहबेकरत।तइमेजहिनाचिड़ै-चुनमुनीआकिमाल-जालकेम्हरोमटिबसूअछिआकेम्हरोपनिबसू, तहिनानेमनुखोकसंगअछि, जेमनुखककाजोआबुधियो-विचारमेदेखलजासकैए।खाएरजेअछि, जेतएअछि, तेकरातेतैरहएदियौ, अपनासभअप्पनविचारकरू...। पानिपतालमेबसैए, हवाअकासमेआअपनासभ बीचमेधरतीपरछी।जरूरतदुनूकअछि, जहिनापानिपीलाकपछातियेजीबसकैछीतहिनाबिनुहवोकतँनहियेँजीबसकैछी।तँए, जरूरतदुनूकअछिए।मुदासेदुनूसमुचित ढंगेकेनापेबब, ईतँअपनेसभनेविचारबै..? जइगाछ-बिरीछ, माल-जालआलोक-वेदपेबजेधरतीजेहेनसुसम्पन्नबनलओओतेकनीकभेलआजइमेजेतेकउजारअछिओओतेकश्रीहीनअछि। धरतीपरचाहेजेकोनहुगाछे-बिरीछआकिअन्ने-तरकारी लगबैछी, सभकेँअपन-अपनसिररूपमेऐधरतीसँशक्तिलइकशक्तिछै, ओओतेमेपसैरअपनदुनियाँगढ़िलइए। तँएईकहबजेमिरचाइगाछकेँताड़कगाछबनैकइच्छा नइछै, सेनहि! सेछइहे।मुदाजइदेहमेजेतबे शक्तिरहतैतेतबेदूरनेपसैरसकत। जहिनाकोनोअन्नकसिर (जड़ि) छहओंगरीगहींरधरिकनमी (जलशक्ति) पीबअपनजीवनठाढ़केनेअछि, आकोनोकोनोहाथ-भरिगहींरधरिकरसपीबजीवनकदुनियाँगढ़नेअछि।ओना, मेवालालकेँअपनासंगअपनगामकेँआअपनइलाकाकेँजइनजरियेचिन्हबाचाही, सेनहिचिन्हसकला, तइमेकनीकमीछेलैन।मुदादूसालकरौदीमेवालालकजिनगीकहालकेँदूहाथगहराइदिसनइधकेललकसेहोबातनहि, मुदाओअलगभेल।ओना, समाजिकोरूपमेकिछु-ने-किछुधकलेबेकएल।मिथिलांचलछी, सभअयाचीएमिश्रनइहेता।मुदातँएकिहुनकोपान-सालककिसालसालकआकिबारहसालकरौदीआफाटल-फाटलमेघकबोरा-बोरेपानिउझलबसँभेँटनहिभेलहेतैन, सेहोतँनहियेँकहलजासकैए।तँए, ओकेनागाछ-बिरीछसँसम्पन्नधरतीकरक्षाकरैछलाआकेनाकेलैन..? खाएर, आयाचीजेकेलैन, जेतबेकेलैनमुदाअपनविचारकजिनगीकघोड़ाकेँनमहरजिनगीनहिदेलैनसेहोतँनहियेँकहलजासकैए। जमीनकनीकउपयोगभेनेनेसम्पैतकनीकसुखभेटै छइ।जँओकरउपयोगेनेहएततँमाटिकधरतीमाटि छोड़िसोनाकथोड़ेभऽजाएत।हँ, उपयोगकेला पछातिमाटियोसोनाबनैछइ। तैठामकादम्बरीकहटलविचारईजेखेतबेचिबैंकमेरखनेनिश्चितआमदनीपरपहुँचजाएबतइहिसाबसँपरिवारचलत।नेहाथमैलआनेपएरमैलहएत।धारकमहारटुटितेदूतरहकधारानिरमितभइयेजाइए।एकजेमुख्यधाराओकरजगहबनापेटमेसमटैएतँदोसरोएहेनऐछेजेअपनाधारामेआरोधफारपैदाकऽदोसरदिसरेड़ैए।ओना, अखनधरिदुनूपरानीकबीचकेतेकोदिनएहेनप्रश्नपरमतभेदहोइतरहलैन।समझौतौहोइतरहलैन,मुदाकादम्बरीकआइकप्रश्नरामरूपबाबूकेँकिछुदोसरदिशामेमोड़िदेलकैन।रंग-बिरंगकप्रश्नमनमेउचड़एलगलैन।कीअपनसमाजटुटिगेल? आकिअपनजिनगीटुटिगेल? एकराकीमानलजाए? माए-बापकसेवाइतिहासशास्त्र-पुराणकपन्नाकपाछूपड़िगेल? ऐउमेरमेकेकरआशा..? कहू! जेमिथिलांचलकभूमिओहनसक्कत-सक्कतगाछ- बिरीछकेँपेटमेसमेटनेअछिजेकरतख्तामेबन्दूककगोलीनैछेदसकैए, ओहनगाछजेप्रकृतिकरंगकसंगओहन-ओहनफलोदइएजेकरतुलनाकोनोआनभूमिनैकऽसकैए, तैठामजँलोककएहेन धारणाबनिजाएजेपनरह-बीससालकखेतीएकबेरपूजी लगौलासँभऽजाएत, बाँकीसालनिगरानीभरि, तखन खेतबलाक हाथमेपनरह-बीसबरख धरिकाजकीरहल? रामरूपबाबूकविचारसुनिफुसनकाकाजेनामनकलोकसँआगूबढ़िसंकल्पितलोकपहुँचगेला।समाजकेँअपनगाम-समाजकविचारअपनाढंगसँकरएपड़तै।मुदासेओहिनाकरतैआकिसमाजकनीक-अधलाकविचारकरैतकरत। कोनगामएहेनअछिजइ गाममेशिक्षाकमदमेगैर सरकारीसँलऽकऽसरकारीधरिकरोड़ोमेनहिचलिरहलअछि, मुदाशिक्षाकस्तरकीअछि...। “भैया, दुनियाँकिछुहौउआगिलगौ, पाथरखसौमुदा मनुखअपनेजिनगीकजवाबदेहहोइए।एक्केगाछकएक डारिमेबाँझीलगलासँबँझियाजाइछै, तँदोसरचुट्टियाजाइछइ।मुदाएकरमानेईनइनेजेओकरामेफड़ैकशक्तिनैछइ।फड़बोकरैए! कियोकिछुकरैएकरह, जहिनाअखनधरिजिनगीमेकोनोलेन-देननैभेल, भाए-भैयारीजकाँरहलौं तहिनाजीताजिनगीरहब।अहाँजेठभायतुल्य छीजेकहब, करैलेतैयारछी।” खुशीलालकबातसुनितपेसरोकहृदयपरसाएलआमजकाँपलपलकरएलगलैन,बजला- “बौआ, अपनागाममेचारिमेलकजमीनअछि।बाड़ी-घराड़ी, भीठ, मध्यमधनहरआचौर।एकगामकरहितोचारितरहकदामछइ।कारणोछैउपजाआउपयोगक।घराड़ीकजमीनऊँचगरहोइएजइसँघरबनबैककाजमेअबैए।भीठसीमानपरभेल।घरोबनौलजासकैतमुदाघरनैबननेउपजो-बाड़ीहोइतआबागो-बगीचालगौलजाइत।मध्यमधनहरमेसिरिफअन्नेउपजैतअछि।जखनकिनीचजमीनभेनेचौरीकमहतसभसँकमहोइछइ।कारणछैजेबेसीबर्खाभेनेवाबाढ़िएनेओकरफसलदहा-भँसियाजाइतअछि।चौरमेनेपानिकउपजहोइतआनेउपराड़िक।ओना, जँओकरामुँह-कानबनापानिकवस्तुउपजौलजाएतँओहोओहनेमूल्यवानहएतजेहेनदोसरहोइत।ओहोधरतीएछी, बनौलापरसभतरहकबनिसकैए।” जहिनासघनबोनमेलोकहेराजाइएजइसँकेम्हरोबढ़ैक साहसेनेहोइतमुदाबिनानिकलनेजानोबँचैकसम्भावना नहिरहैततहिनातपेसरोकेँभेलैन।ओझराएलमन संगी-सहयोगीताकएलगलैन। संगीतँजरूरअछिमुदादूतरहक।पहिलओहनजेजीवनकएकरस्ताबुझिअपनोकल्याणबुझैएआदोसरअछिदोसराककान्हपरबन्दूकरखिचलबैबला।..सोचैत-विचारैततपेसरकनजैरपरतीनटासंगीपड़लैनपहिलसमाजकसहयोग, मानेगौंआँकसहयोगआदोसरबैंकआतेसरसरकारीसहयोग।समाजमेजाति-समप्रदायऐरूपेपसैरगेलअछिजइमेकेकरोकल्याणहोएबकठिनअछि।सभअपनेतालेबेतालअछि।नेएकदोसरकेँसोहाइतआनेनीकदेखएचाहैत।तहिनाबैंकोकअछि।उचितसूदिपरकर्जलइमेदौड़-बड़हाआखर्चएतेपड़िजाइतअछिजइसँलोककमनटुटिजाइछइ।सरकारीमदैतमात्रदिखाबाअछि।जहिनाकनैतधिया-पुताकेँमाए-बापरासि-रासिकलोभदेखाचुपकरैततहिनासरकारियोअनुदानकस्थितिअछि। ..फेरतपेसरओझरागेला।प्रश्नउठलैन,कीकएलजाए? अपनोतँदूतरहकपूजीअछि।पहिलश्रमआदोसरधन।नगदनैअछि।मुदाखेततँअछि।जहिनाखेतबेचमाइकसेवाआदुनूबच्चाकेँपाललौं-पोसलौंतहिनाकिछुआरोबेचलेब।जँकिछुजमीनकमबोकरततँओतेउपजोबढ़त...। राजशाहीअन्तभयनेरसीदकमाध्यमसँऔना-पौना दाममेजमीनबीकएलागल।बकास्तजमीनकलड़ाइगाम-गाममेशुरूभेल।एकजबरदसभूखण्डमेबटाइदारी आन्दोलन- ‘जेजमीनकेँजोते-कोड़ेओजमीनक मालिकछी’कनाराअकासमेउठल। धरतीअपनजीवन-लेबलिमंगैछैथ,सेभेल।सिकमीबटाइककानूनबनिलागूभेल।जेतएबटेदारतैयारभेलओतएबटाइदारीहकभेटल।जेतएतैयारनैभेलओतएअखनोलटकलेअछि।आमजमीनसभपरदसनामासंस्थासभठाढ़हुअलगल।स्कूल, अस्पतालबनएलगल।मनुखकमूलसमस्यादिसजनमानसकनजैरदौड़ल।जइसँतियाग-भावनाकजन्मभेल।लोअरप्राइमरीस्कूलसँलऽकऽमिड्ल, हाइस्कूलधरिबनएलगल।गोटि-पँगराकौलेजोबनल।सरकारोकधियानशिक्षादिसबढ़ल, जइसँपढ़ै-लिखैकवातावरणबनएलगल।तैबीचभूदानआन्दोलनसेहोशुरूभेल।दानकेँधरमबुझिजमीनदानहुअलगल। गाम-गाममेभूदानकमिटीकगठनभेल।मुदा जइ गाममे ओ कमिटीसक्रियभऽकाजकेलकओहिगामकजमीन भूमिहीनकबीचआएल, मुदाजाहिगाममेसक्रियरूपमेकाज नहिभेलओहि सभठामलड़ाइकअखड़ाहाबनलअछि। भूदान आन्दोलकउदेस‘देशकछठमहिस्साजमीन भूमिहीनकबीच आबए’ अखनोसरकारचारि डिसमिलबास-भूमिदइकशक्ति नहिरखनेअछि। गामकलोककपड़ाइनभेनेगाममेरहिखेतीकेनिहारकेँस्वर्ण-अवसरभेटल।जमीनोकरूपबदलल।प्रतिष्ठाकवस्तुबुझलजाइबलाजमीनरूपैआमेबदैलगेल।बैंककसूदिकहिसाबसँजमीनकउपजाबुझलजाएलगल।उपजाकअदहाबलाबँटाइदारीप्रथाढीलभेल।मनखप, पट्टा, मनहुन्डाइत्यादिकजन्मभेल।पनरहकिलोकट्ठाधानकउपजाआदस-सँ-पनरहकिलोकट्ठागहुमकउपजाबँटाएलगल। कोसीनहरआनव-नवसड़कबननेचौक-चौराहाकसंग-संगबोनिहारकेँकाजोबढ़ल।मुआबजाकरूपैआसेहोसहायकभेल।शिक्षामित्रकबहालीकसंगएन.एच.डब्लू. सेहोकिछुमदैतकेलक।सड़कबननेगाड़ी-सवारीकधन्धासेहोजन्मलेलक। मिथिलांचलमेएकनववर्गकजन्मभेल, किसानवर्ग।मुदाऐवर्गकक्षेत्रछिड़ियाएलअछि। हरित-क्रान्तिएलासँजमीनकभाग्यचमकल।मुदाजाहि रूपमे चमकबाकचाहीताहिरूपमेनहि।जौंएकरूपमेचमकैततँजहिनाकहियोमिथिलादुनियाँकगुरुमानलजाइतछलतहिनापुन:प्रतिष्ठितभऽजाइत मुदा ताहिमेकमीअछि। देशमेअखनोकमक्षेत्रअछिजाहिमेमिथिलांचलएतेइंजीनियर, डॉक्टर, वैज्ञानिक, साहित्यकारइत्यादिअछि।दुर्भाग्यईजेओलोकैनमिथिलाछोड़िदुनियाँभरिमेछिड़ियाएलछथि।बाध्यतोछैन,नेकल-कारखानाअछिजेइंजीनियरओइमेकाजकरता, आनेस्वास्थ-लेसमुचितजगहअछिजइमेडॉक्टरअपनअँटावेशकरता।नेविज्ञानकशोधसंस्थाअछिजाहिमेवैज्ञानिकअपनचमत्कारदेखौताआनेपढ़ै-लिखैकसमुचितबेवस्थाअछिजइमेसाहित्यकारअपन प्रतिभाकेँनिखारता। गंगाब्रह्मपुत्रमैदानीइलाकारहैतमिथिलांचलअनेकोनदीसँसकबेधलअछि।नदियोओहन-ओहनउपद्रवीअछिजेइलाकाकइलाकाकेँसदिकालरूपबिगाड़ितेरहैए।लोककजिनगीएहेनदुब्बरबनिगेलअछिजेजएहलोकैनमिथिलांचलमेठाढ़छैथओधैनवादकपात्रछैथ। जातिगतपेशाबदैलजाति-बेवस्थाकेँढीलजरूर कएलकमुदाराजनीतिककुचक्रसमाजमेनवसमस्याक रूपमेठाढ़भऽविकासकेँबाधितकऽरहलअछि।अनेकहुतरहकनव-नव बाधाउपस्थितभऽरहलअछि।मुदा तेँकीमिथिलामरूभूमिभऽगेलजेकर्मयोगीपैदा करबछोड़िदेलक? नहि.!कथमपिनहि। सम्मिलितरूपमेतँनहि, मुदाछिट-फुटरूपमेएहनो-एहनोकिसानछैथजेलाखआफत-आसमानीसँमुकाबलाकरैतसोनाकस्तम्भबनिचमैकरहलाअछि।निश्चितक्षेत्रतँनिर्धारितनैकएलजासकैए, किएकतँसीमा-विहीनअछि, मुदाऐबातकेँनकारलोनहियेँजासकैएजेखेतमेओतेधानउपजारहलाअछिजेजापानसँमुकाबलाकरैलेठाढ़छैथ।तहिनागहुमो, दालियोकआफलोकअछि।अखनोहजारोट्रकआमबाहरजाइए।एकइलाकाकतरकारीदोसरइलाकाजाइए।हजारोट्रकमसालाआन-आनराज्यजाइए।एकइलाकाकदूधदोसर-तेसरइलाकाधरिबिकाइतअछि। अखनधरिकअनौपचारिकबैसकजेसमाजमेहोइतरहलअछिओप्रोफेसरदयाबाबूआपूर्वप्रोफेसरकमलबाबूकेँएलासँऔपचारिकरूपमेबदलएलगल।कालीस्थानपहुँचतेकमलबाबूबजला- “अखनधरिकसमाजक, गाम-गामक, इतिहासहराएलअछि, ओकरापहिनेपकड़ू।तँएजरूरीअछिजेएकटारजिष्टरकीनिलिखितरूपमेकाजकरू।” कमलबाबूकबातसुनिमंगलसोचलैनजेलगलेरजिष्टरकेतएसँआनब, सेनइतँआइकबैसककागतकपन्नेपरकऽनिचेनसँरजिष्टरआनिओइपरलिखिदेबइ।तेकरकारणमनमेनचैतरहैनजेदुनूगोरे, दयोबाबूआकमलोबाबू, बेसीकालअँटकतानहि, जोरोकेनाकरबैन।जँजोरोकरबैनतँपट-देकहिदेताजेगाम-समाजअहाँकछी, अपनाढंगसँचलाउ।मुदागामक लोकतेहेनगँरि-मुराहअछिजेधर्मेककाजस्कूलोआमाइयो- बापकसेवाकेँकहताआअपनेभरिदिनबैसझूठ-फूसमेसमय बर्बादकऽसमाजकेँतनो-भगनकरैतरहता।अन्यायकअखाड़ा समाजबनिगेलअछि।एहेनपरिस्थितमेखाली‘समाजिक न्यायिक’ नारादेलासँसमाजसुधैरजाएत..? मुस्कीदैतमंगलप्रोफेसरदयाबाबूकेँकहलखिन- “श्रीमान्, अपनेतँचारिसालपढ़ौनेछीतँएअपनेपरअधिकारअछिजेजेनैबुझैछीओअखनोपुछिसकैछी।मुदाबाबाकेँकिछुपुछैकअधिकारतँनैअछि।भलेँओअपनेहमरामनकसभसबालकजवाबदऽदैथ।” मंगलकपेटकबातजेनाकमलबाबूबुझितेरहैथतहिनाबड़बड़ाएलगला- “रौतुकाघटनासुनिहृदयपाथरपरखसलऐनाजकाँचूर-चूरभऽगेलअछि। ...आँखिकनोरपोछैत- “मुदादोखकेकरलगौलजाएत।किछुदोखीअहूँसभछीजेबादमेकहब। अखनएतबेकहबजेकालचक्रकेँरोकबअसाननहि। ईकालचक्रछल।तँएप्राश्चितकऽलेबजरूरीअछि।दूमिनटसभउठिहुनकालोकैनकक्षतिकस्मरणकऽलिअ। रजिष्टरकपहिलपाँतिमेशोकप्रस्तावलिखि काजकेँआगूबढ़ाउ। शोकव्यक्तकऽबैसतेकमलबाबूपुछलखिन- “समितिकेतेगोरेकबनौनेछेलौं?” “एक्कैसगोरेक?” “एकतरहकअछि।अखनकेतेगोरेछी?” “एगारहगोरे।” “आरोगोरे?” “दूगोरेहराएलेछैथ,एगारहगोरेहाजिरेछी, आठगोरेदोसर-दोसरजरूरीकाजमेलगलछैथ।” “हूँ, रौतुकाझाँटतँसभकेँझँटनहिहेतैन।” कहिएकाएककिछुसोचैतपुन: बजला- “बाउमंगलआअनुजदयाबाबू, जहिनाहमखुशीसँजीवन-यापनकऽरहलछी, तहिनाचाहबजेअहूँसभजीबी, ओहूसँनीकजिनगीकबाटबनाआगूकपीढ़ि-लेदिऐ।” कमलबाबूबजितेरहैथआकिनेंगरोआबौनोएक्केबेरबाजल- “जहिनादयाकक्कापढ़लछैथतहिनामंगलोकौलेजकसीढ़िहोइतकोठरीतकपहुँचलछैथ,मुदाहमसभतँजिनगीभरिकोदारियेकिलासमेपढ़ैतरहलौंतँए...।” ठहाकामारिउठिकऽठाढ़होइतप्रोफेसरकमलनाथसमितिकेँसम्बोधितकरैतबजला- “नेंगराआबौकूकेँहमरबधाइ।जेअपनसीमादेखलक।बाउनेंगरआबौकू, बधाइऐदुआरेदुनूगोरेकेँदेलौंजेसमाजकजबरदससमस्याकजड़िपकड़लौं।अपनासमाजमेईभारीसमस्याअछिजेकियोअपनेसीमा-सरहदनैबुझएचाहैछैथ, अपनासमाजमेईभारीसमस्याअछिजेकियो अपनहिसीमा-सरहदनहिबुझएचाहैछथि,तखनओधारकरेतजकाँचलैतसमयसँकोनाजुटिसकता? जहिनापानिकरेतमेठाढ़भेनेअपनोजानअवग्रहमेरहैछैजेरेतमेखसि, भँसियाकऽकहींमरिनेजाइ।तैठामजँकियोदस-बीससेरकमोटरीमाथपररखनेहुअए, ओकरगतिओइरेतपरकेहेनहेतइ? तँएजहिनाअट्टालिकाबनबैकालसभसँपहिनेईंटाकेँदेखलेलजाइछै, जँसेनइदेखलजाएततँनकटेरहीपरजहिनासभलट्टूहोइएतहिनानेहएत। कमलबाबूबजितेरहैथआकिदुनूगोरे, नेंगराआबौकाआँखिमेआँखिमिलाहँसएलगल।आँखिउठासभापरसभनजैरदौगौलैन।कियोगम्भीरतँकियोमुँहबाबिबुझैकपरियासकरैत।मुदादुनूकहँसीहँसादेलकैन।मनपड़लैनहुगलीनदी।अपनाइलाकाकजेतेधारअछिओउत्तरसँदच्छिन-मुहेँबहैएभलेँगंगाकओइकातकदच्छिनेसँउत्तर-मुहेँबहैतहुअए।मुदाहुगली, जेसमुद्रसँजुड़लअछि, सोलहघन्टाएकदिसा-सँ-दोसरदिसामेबहैएआआठघन्टाविपरीतदिसामे।तहिनाबाबाकआत्माआकोदारिककिलासमेपढ़निहारकआत्मा, मिलिकऽशिवलिंगसदृशनवपरमात्माकमन्दिरबनारहलाअछि। “कोनोजाति, पंथआकिसंस्कृतिकअधारहोइछै जिनगी।जिनगीकअधारहोइछैमनुखकबुधि, विचार आकर्म।जखनेमनुखअपनसुपतकर्मसँजिनगीठाढ़करैए तखनेधर्म, संस्कृति, विचारआआचारसभकिछुबदैल, सहीमनुखकनिर्माणकरैए।जेकराहममहामानव, धर्मात्माआउच्चकोटिकमनुखबुझैछी, जे मिथिलांचलमेक्षीणभऽरहलअछि! ओना, सोलहन्नीमरलनइअछिमुदादबाइत-दबाइतदुब्बरभऽगेलअछि। मिथिलाकजेमूलबासीछैथहुनकासभकेँअभिजातवर्गवाकहीतँपरजीवीवर्णवाबाहरीलोकआबिसभकिछुकेँबदैलएहेनसमाजिकढाँचामेढालिदेलकैनजेअदौसँअबैतसंस्कृतिकेँदाबिअभिजात-संस्कृतिकेँबढ़ादेनेअछि। जिनगीकसच्चाइकेँदाबिबनौआजिनगीमेबदैलदेनेअछि।जइसँलोककजिनगीवास्तविकतासँहटिवौआगेलअछि।ओना, निर्मूलनष्टनैभेलअछिमुदाएतेकक्षीणजरूरभऽगेलजेनीक-अधलाकेँबेराएबकठिनअछि।हमसभमनुखकेँमनुखबुझैछी।नेकियोकारीअछिआनेकियोगोर।मुदाजिनगीकढाँचाएहेनबनिगेलअछिजेस्पष्टरूपमेएक-दोसरसँपैघआछोटबनिगेलअछिआबनलोजारहलअछि। ओना, देखबैतँबुझिपड़तजेसभएकदोसरसँपैघआएक-दोसरसँछोटअछि।मगरमकड़ाजकाँअपनेपेटसँसूतनिकालिअपनेसँजालबुनि, ओइमेसभओझरागेलछैथ।” आइकजेएकाकीपरिवारबनिगेलअछि, ओकुम्हारक घराड़ीजकाँभऽगेलअछि।जहिनाकुम्हारकघराड़ीबेसीदिनधरिअसथिरनैरहैततहिनाभऽरहलअछि।बाप-माएकेतौ, बेटा-पुतोहुकेतौआधिया-पुताकेतौरहएलगलअछि।मानवीयसिनेहनष्टभऽरहलअछि। सभजनैछीजेकाँचबरतनजकाँमनुखहोइए।कखनकीऐशरीरमेभऽजाएततेकरकोनोगारंटीनहि।स्वस्थअवस्थामेतँमनुखकेतौरहिजीबसकैएमुदाअस्वस्थकअवस्थामेतँसेनइभऽसकैतअछि।तखनकेहेनकष्टकरजिनगीमनुखकसामनेउपस्थितभऽजाइछइ।तोहूपरतँनजैरदिअपड़त।” कोनसुखकपाछूबेहालछीसेबुझिएनेरहलछी। टी.भी. घरमेअछिमुदादेखैकसमयनइभेटैए।खाइलेबैसै छीतँचिड़ैजकाँदू-चारिकौरखाइत-खाइतमनउड़िजाइए, जेफल्लाँकेँसमयदेनेछिऐ, नैजाएबतँआमदनीकमिजाएत।तहिनासुतैयोमेहोइए।मुदाएतेफ्रिसानीकलाभकीभेटैएतँसिरिफपाइ।कीपाइएजिनगीछी..?” महेन्द्रकबदललविचारसुनि, मुस्कियाइतसुबुधबजला- “भाय, पाइजिनगीचलबैकमात्रसाधनछी, नइकिजिनगी। पाइकभीतरएतेपैघदुर्विचारछिपलअछिजेमनुखकेँ कुकर्मीबनादइए।कुकर्मीबनलापरमनुषत्वसमाप्तभऽजाइछइ।जइसँचीन-पहचीनसेहोसमाप्तभऽजाइछइ।तेतबेनहि, अपराधिकवृत्तिसेहोपनपएलगैछइ। अपराधिकवृत्तिमनुखमेएलापरपैघ-सँ-पैघअपराधमेस्वत: धकलाजाइए।तँएअपनजिनगीकेँदेखैतपरिवारआसमाजकजिनगीदेखबजिनगीछी।ओना, मनुखमात्रकसेवा-लेसेहोसदिखनतत्पररहकचाही, जहाँधरिभऽसकए, करबोकरी।मुदाकर्मकदुनियाँबड़कठिनअछि।एतेककठिनअछिजेकर्मठ-सँ-कर्मठलोकरस्तेमेथाकिजाइछैथ।मुदाओथाकबहारबनहि, जीतबछी।जेसमाजरूपीगाछमौलागेलअछिओइजड़िमेतामि-कोरि-पटाकऽनवजिनगीदेबाकअछि।जइसँओअनवरतफुलाइतरहत।ऐकाजमेअपनाकेँसमरपितकऽदेबाकअछि।” आशीष अनचिन्हार गजल कागजमे सुधार छलै फाइलमे बहार छलै केहन बेबहार छलै कनियों नै विचार छलै टूटल बस पगार छलै सरकारो लचार छलै किश्ती भरि कऽ आबि रहल जीवनमे उधार छलै बनि चिन्हार खूब फँसल अनचिन्हार पार छलै सभ पाँतिमे 22-212-112 मात्राक्रम अछि। जगदीश प्रसाद मण्डल गामकआशाटुटिगेल तीनसाल–तीनबैच–बिलमसँकौलेजकपरीक्षाचलैतदेखअप्पनक्लाससमाप्तभेलापछाइतदरभंगासँगामआबिगेलौं।डेराकहिसाब-बाड़ीकसंगदोकानो-दौड़ीकहिसाब-बाड़ीआसंगी-साथीसँजेकिताबोआनोटोकलेन-देनछलसेसभफरिछाकऽगामआबिगेलछेलौं। गामएलाकपरातभनेअसगरेदरबज्जाकओसारककोठरीमेबैसलअपनजिनगीकविचारकरएलगलौंजेआगूकीकरैकअछि।तीनसालकपछाइतपरीक्षाहएत, ताबतअपननोकरीकआयुसेहोसमाप्तभऽजाएत।एकतँओहुनाआइ.ए.मेएकबरख, बी.ए.मेदूबरख, नियमितपरीक्षानैभेनेतीनबरखसमयचलिगेल, तैपरएम.ए. करैत-करैततीनबरखआरोचलिजाएत।उमेरकसंगनोकरीसेहोचलिजाएत, किएतँनोकरीकजेआयुनिर्धारितअछिओपारकऽजाएत।विचित्रस्थितिमेजीवनपड़ियेगेलअछि..! मनमेरंग-बिरंगकविचारचलियेरहलछलकिअपनेमनमेउठल- ‘केकराकहबैआकेपुरौत, अपनजिनगीछीतँएअपनेनेसोच-विचारकरैयेपड़त।’एकटाकिहमहींटाछीजेएहेनसमस्यामेपड़लछीआकिहमरासन-सनहजारोविद्यार्थीअछि।हजारोकिजेपूरायुनिवर्सिटीए-मेसभअछि। एकतँओहुनापढ़ैमेमननइलगैए, किएतँनिसचितसमयरहनेनेनीकजकाँ–जमिकऽ–परीक्षाकतैयारीकरितौं, समयपरपरीक्षाहोइत, नीकजकाँपासकरितौं...।सेतँअछिनहि, आइजेयादकरबओकिछुएदिनकपछाइतबिसैरजाएब, फेरओहिना-क-ओहिनारहिजाएब..! आगूदिसकरस्तादेखीतँसेहोमरियाएलेबुझिपड़ए।अखुनकातँसहजेदूसालसँएम.ए.कक्लासकेलौं, परीक्षाककोनोठेकाननेअछिजेकहियाहएतकहियानहि।तइबीचमेजकथकभेलबैसलोरहबनीकनहियेँहएत।कोनोगरकिम्हरोदेखियेनेपेबरहलछेलौं...। ओना, पढ़ै-लिखैकनाओंपरमाइयो-बाबूअखनधरिमुँहबन्नेरखनेछैथ।आनजकाँभरिदिनकहा-कहीनहियेँहोइए, मुदाअपनोतँआबसियानभेलौं, बिआहो-दुरागमनभइयेगेल, जइसँपरिवारसेहोबढ़ियेगेलअछि...। विचारकधक्काजेनामनमेजोरसँलागल।धक्कालगितेबर्खाकपानिवाखत्ता-खुत्तीकवापोखैरकपानिमेजहिनाकोनोचिड़ैनहाकऽपाँखिकपानिझाड़ितेउड़ैकउपक्रमकरैएतहिनामनमेउठलजेजखनमनुखकशक्लमेछीतखनदेह-हाथमारि–निष्क्रियबनि–जीबोतँजीवननहियेँछी, तँएपहिनेजीवनकेँचिन्ह-जानिकऽपकड़ैकअछि, नहितँजहिनासभवौआइ-ढहनाइएतहिनावौआएब-ढहनाएब...। वौआएब-ढहनाएब..! जँस्कूल-कौलेजनइदेखनेरहितौंतखनजँवौऐतौंतँथोड़ेक्षम्यसेहोछलमुदाआइबाइसमबरखछीअखनतकस्कूले-कौलेजमेजीवनबीतलआतखनजँअपनोजीबै-जोकरलूरि-बुधिनइभेलतइमेकेकरदोख..? मनविसाइन-विसाइनहुअलगल।अनायासग्लानिसेहोमनमेउपकल।ग्लानिउपैकतेमनतुरुछहोइतविचारदेलकजेकेकरोकिछुनेकहबै, खालीमाए-बाबूकेँकहबैनजेतीनसालपरीक्षाहोइमेदेरीअछि, तैबीचएकबेरकोलकातासँभऽअबैछी।जँकोनोजोगारनोकरीकलागिगेलतँबड़बढ़ियाँ, नहितँतीनबरखकहुनाबितबैकअछिए।भेलतँपरीक्षादइलेछहमासकड़कड़ाकऽमेहनतकरब, पार-घाटलगियेजाएत। मनमेकोलकाताअबितेधीरेन्द्रभायपरनजैरगेल।करीबपनरहबर्खसँधीरेन्द्रभायकोलकातामेरहिरहलाअछि।गामसँजहियागेलातहियासँआइधरिएकोबेरगामनहिएला।सुनैछीजेओइठामओमानेकोलकातेमेधीरेन्द्रभाय, कमा-खटाकऽजीबै-जोकरओकाइतपरिवारमेसेहोबनालेलैनआएतेविचारमनमेअखनोरखनहिछैथजेगामकजेकियोहुनकाऐठामजाइछैथतँजहाँधरिभऽपबैछैनतहाँधरिरहैयो, खाइयो-पीबैकआनोकरियोकगरलगैबतेछैथ।मनमानिगेलजेकाल्हिगामसँकोलकाताकलेलविदाभऽजाएब।खेतसँपिताजीआबिदरबज्जापरबैसबेकेलाकिकहलयैन- “बाबू, परीक्षाहोइमेतीनसालअखनबाँकीअछि, तँएमनमेहोइएजेकलकत्ताजाइ।” जहिनाकहलयैनतहिनापिताजीचुपचापसुनिलेलैन, मुदालगलेकिछुबजलानहि।मने-मनजेनाकिछुसोचए-विचारएलगलाआकिकीसेतँओजानैथमुदाकनियेँकालकपछाइतबजला- “आबतँतोहूँजवानभेलह, पढ़ल-लिखलसेहोछहे, तैबीचजँपुछलहतँयएहनेकहबहजेअपना-लेतँअपनेनेसोचबह।” ओना, अपनाजनैतपिताजीबातकउत्तरदेबामेकसैरनइरखलैनमुदाखुलियोकऽतँनहियेँकहलैनजेकोलकाताजाएबजीवनकलेलनीकहएतकिअधला।मुदासंजोगबनल, तैबीचमाइयोदरबज्जापरपहुँचली। माएकेँदेखतेमनमेभेलजखनपिताजीकआगूअपनविचाररखिचुकलछीतखनवएहनेमाइयोकेँकहथिन।मुदालगलेईहोभेलजँकहींपिताजीनहिकहथिनतखनकीकरब? ओना, तैबीचअपनमुँहसोल्हन्नीबन्नेरखलौं। जहिनाअपनमुँहबन्नछलतहिनापिताजीसेहोअपनमुँहबन्नेरखनेछला, जइसँचुपा-चुपीपसरलेछल।अपनचुपीतोड़ैतबजलौं- “माए, परीक्षामेतीनबरखदेरीअछि, तैबीचएकबेरकलकत्तासँभऽअबितौं।” ओना, अपनेइशारामेबाजलछेलौंमानेईजे‘नोकरीकरएकोलकाताजाएब’आकि‘घुमि-फिरिकऽचलिआएब’सेस्पष्टनहिछल।माएबजली- “बौआ, समय-सालदेखतेछहकजेबेकता-बेकतीकखर्चबढ़नेपरिवारकखर्चकेतेकबढ़िगेलअछि, एकरापुराएबतँपरिवारे-लोककनेकाजभेल।मुदाबेटा-बेटीकप्रतिमातो-पिताकदायित्वतँएतेकअछिएजेजीवनकएकखाड़ी–सीढ़ी–टपाकऽछोड़ियै, मानेईजेजिनगीकचारिअवस्थामेपहिलअवस्थामानेभेलजेपढ़ा-लिखा, बिआह-दानकरादिऐ।जइसँमनमेएतेबिसवासतँबनियेँजाइएजेअपनदायित्वकनिर्वहननीकजकाँपूर्तिभऽगेल।” बजलौं- “माए, कौलेजकपढ़ाइनेपुरिगेलमुदापरीक्षाहोइमेतीनसालसमयआरोलागत, तइबीचकजेखालीसमयअछितइमेकलकत्ताजाएचाहैछी।” अपनजवाबदेहीकभारहटबैतमाएबजली- “अखनतँखरिहाँनकमेहकखुट्टाजकाँबापजीवितेछथुन, हुनकासँपुछिलहुन।” दुनूदिसकछिड़ियाएलविचारसमटाकऽएकठामभऽगेल।ओना, अपनाजनैतअपनोविचारस्पष्टनहियेँकेनेछेलौंजेपढ़ाइयककीकरब।तैबीचपिताजीबजला- “एक-एकछनसमैयकमोलअछि, तँएहरछनकेँसहीउपयोगकरबेबुधिमत्ताभेल।जखनेकियोबुधिमत्तासँजिनगीकगाड़ीखिंचएलगैएतखनेओकरजिनगीकगाड़ीपटरीपरचलएलगैछइ।” एतेतँअपनोबुझितेछीजेपढ़ाइ-लिखाइकपछाइतलोकपरिवारकभरण-पोषणलेलउद्यमीबनितेअछि, तखनतँभेलजेघरमेरहि–स्वावलम्बीजीवनकरस्तापकैड़–भरण-पोषणकरीआकिघरसँबाहरजाकऽ...।ओना, घरोआबाहरोकबीचदोहरीप्रश्नअछिए।पहिलईजेगामोमेरहिलोकदोसरकनोकरीवाचाकरीकरैएआबाहरमेसेहोकरितेअछि।पाँचटामहानगरदेशमेमानलजाइए।तइमेकोलकातासभसँपुरानोआसभसँनम्हरोअछिए।मुदापाँचोमहानगरएकदेशकमहानगररहितोपाँचोमहानगरकजीवनशैली–मानेमनुखकेँजीबैकदिशा–भिन्न-भिन्नअछिए।एहेनभिन्न-भिन्नजीवनशैलीपाँचोमहानगरे-टाकअछिसेहोबातनहियेँअछि, गाम-गाम, घर-घरकबीचसेहोअछिए।मुदासेअखननहि।अखनएतबेजेपिताजीकस्पष्टविचारनहिबुझि, बजलौं- “कीकहैछी।अहाँककीविचारअछि?” ‘कहैक’मानेभेलआदेश, आ‘विचार’कमानेभेलसुझावदेब।दुनूदूतरहकअछि। ..जहिनामाएअपनभारहटबैतपिताजीपरथोपलैनतहिनापिताजीअपनभारसमाजपरथोपैतबजला- “बौआ, गाममेसृष्टगरलोकआनन्दभायछैथ, ओतोहरजेठपित्तीएभेलखुनतँएहुनकोसँएकबेरपुछिलहुन।अपनामनमेसभदिनसँअछिजेगरीबीकिअमीरीधनसँअछि, समाजमेजेतेविद्याकआगमनहएततेतेअविद्या-विद्याकबीचरग्गड़-झग्गड़होइतबदलावहएत, मानेपरिवर्त्तनहएत।” बजलौं- “बड़बढ़ियाँ।” सभदिनसाँझूपहरमेआनन्दकाकाअपनभरिदिनकजिनगीउसारिनिचेनसँगप-सप्पकरैतआबिरहलाअछि।यएहसोचिगहबरियाकहालीजहिनाअपननीकहोइदुआरेदिनगरे-साँझमेडालीलगबैएतहिनाअपनोमनमेभेलजेपहिलुकेसॉंझमेगेलासँएतेतँहेबेकरतकिनेजेजँगप-सप्पकरैकनम्बर-सिस्टमरखनेहेतातँअगुआएलनम्बररहत। आनन्दकक्काकऐठामपहुँचलौं।आनन्दकाकाचाहपीबपानखाइछला।हमरादेखतेआनन्दकाकाबजला- “बौआ, पानतोंहूँखेबहकिने?” आनन्दकक्काकबातसुनिमनसकुचागेल।सकुचाइतेविचारउठलजेचाहकजोड़ीपानछीहे, मुदाआनन्दकाकाजखनचाहपीबलेलैनतेकरपछाइतपहुँचलौं, तँएचाहछोड़िपानकआग्रहकेलैनतँउचितेकेलैन...। मनपाछूदिसउनैटगेल।मनकेँउनैटतेनजैरपानपरगेल।अदौसँपानकप्रशस्तिरहलअछि, मुदासमाजककेतेकलोकपानखाइछैथ? अखनधरियएहनेहोइतआबिरहलअछिजेसमाजककिछुगनल-गुथललोकखाइछला, आबहुनकोऐगलापीढ़ीदाँतटुटैदुआरेआकिरंगाइदुआरेकिकीसेतँओबुझता, मुदापानखाएबछोड़ियेरहलाअछि।ओना, अखनोमिथिलाकगाममेएहेनआचार-विचारबनलेअछिजेकोनोअमल–चाह-पान, खैनी-बीड़ी, सिगरेटइत्यादि–अपनासँश्रेष्ठजनलगशिष्टजनखाइ-पीबैसँपरहेजकरितेछैथ।बजलौं- “काका, पाननइखाइछी।” ठीके, पानखाइतोनइछीजेबजैकक्रममेसेहोबजाइयेगेल, मुदालगलेमनपलैटकहलक- फूल-फल-पानसँअपनाऐठामपूजाहोइतआबिरहलअछि, अपनोहोइए, तैठामपान...। पानपरसँआनन्दकाकाधियानहटबैतबजला- “बौआ! कीपरिवारकहाल-चालअछि?” निधोखबजलौं- “काका, एम.ए.कपढ़ाइतँसम्पन्नभऽगेल, मुदापरीक्षातीनसालपछुआएलअछि।तैबीचकलकत्ताजेबाकविचारभऽरहलअछि।” विचारकअन्तिमकड़ीकेँकनीकपैचबजलौं।किएतँअपनोबुझलअछिएजेबुधिमान-लेइशाराकाफी।भलेँविचारकधारमेकिएनेअपनमनभँसियाइतहोइन...।मुदाआनन्दकाकाकेँसेनइभेलैन।बजला- “बौआ, गामकविकसितरूपशहरछी।अपनासभगाममेछीजेअविकसितअवस्थामेअछि।सभआगूबढ़एचाहैए, वएहइच्छाभेलजीवनकविकासकलीलसा।गाम-समाजकलोककसंगशहरो-बजारकलोककेँसदैतआगूबढ़ैकइच्छासभकेँरहितेअछि।तँएगामसँशहरदिसबढ़ैकहजारोबाटअछि, तैठामहमकेनाकहिसकैछिअजेतोरा-लेकोनबाटनीकहएत।तोंहूअपनामनमेऐबातकेँरखिविचारकरिहहआहमहूँकरब।परसूसाँझमेदुनूगोरेविचारैतनिर्णयकऽलेब।” ओना, आनन्दकाकाअपनाजनैतकिछुबाँकीनहियेँरखलैनमुदाअपनाबुझिपड़लजेजीवनकनमहरजालकाकाआगूमेपसारिदेलैन।परसुकासमयदेलैन, अपनजाइकविचारकौल्हुकेबनानेनेछी, तँएनीककीहएत..? दुविधामेपहिलमनकेँधकियबैतदोसरमनबाजल- ‘आनन्दकाकामुखौटीनेकिछुकहता, मुदाकाल्हिजँकलकत्ताविदाभऽजाएबतँपरसूसॉंझमेपहुँचलरहब, जेकराऑंखियोसँदेखबआमनोसँविचारब।’ मनकउद्वेग–कोलकाताजेबाकइच्छा–एतेउग्रभऽगेलजेभोरकेगाड़ीपकैड़विदाभऽगेलौं।घरसँबाहरनोकरीकरएजेबाकालएकनोरप्राय: सभकनैछैथ, कानबकपाछूसबहकअपन-अपनमनकमनारहैछैन, मुदाहमरासेनइभेल।मनकउग्रतासँविचारेभ्रमितभऽगेलकिकी, नोरबहबैकगरेनेभेटल। दोसरदिनकरीबअढ़ाइबजेगाड़ीहाबड़ास्टेशनपहुँचादेलक।स्टेशनसँबाहरहोइतेकोलकाताकचैतमासकरौदसँभेँटभऽगेल।मुदारौद-बसातकअनेरेपरवाहकीकरब।भाड़ा-भुड़ीजोकरपाइ-कौड़ीअछिए, तँएजैठामकलक्ष्यबनाविदाभेलछी, पहिनेतैठामपहुँचबाकअछि।टेम्पूपकैड़विदाभेलौं। तीनबच्चा–मानेएकलड़की, दूलड़का–आदूपरानीमिलापाँचगोरेकपरिवारधीरेन्द्रभायकेँछैन।टेम्पूसँहमहूँपहुँचलौंआधीरेन्द्रभायसेहोऑफिससँपहुँचला।घामे-पसीनेतर-बत्तरभेल।चीन-पहचीनकदोहरीबाटअछि, जँचेहरा-मोहरासँचिन्हगेलातैयोबड़बढ़ियाँआजँसेनइचिन्हलैनतँअपनगाम-घरकपरिचयदेबैन।मुदासेसभ, किछुनेभेल।बगए-वाणिसँआकिचेहरा-मोहरासँधीरेन्द्रभायचिन्हलैनकिकीसेओजानैथमुदानजैरपड़ितेबजला- “चलूभीतरचलू।” आगूगेटखोलैतबाजलछला, तैबीचअपनोगोड़लागबपछुआएलेछल, किएतँटेम्पूबलाकभाड़ादइमेओझरागेलछेलौं।तहूमेतेहेनविसाइनबातटेम्पूबलाबाजलजेकहैसँ...।‘भिखमंगादेशक’कहिदेनेछलटेम्पूबला, तइसँमनकविसविसीउठलेछल। टेम्पूबलाकेँविदाकरैतबजलौं- “भायगोड़लगैछी।” तइबीचमेअनुमानसँ, मानेगामकहालकदौड़ानजेमनमेएकटागामपैदाहोइए, तइसँधीरेन्द्रभायचिन्हनेनेछला। बैठकखानामेपहुँचतेधीरेन्द्रभायपहिनेपंखासबहकबटनदबाकऽहवाकेलैनआनलपरजाइसँपहिनहिपुछलैन- “बौआ! गामकअखनकीस्थितिअछि?” अखनतकअपनोस्थितिबुझैकअवगैतअपनेनइभेलअछि, तैठामगामकस्थितिबुझबधिया-पुताकखेलथोड़ेछी।मुदासंजोगबनल, भौजीपहिनेपानिदऽगेलीपछाइतचाह-बिस्कुटसेहोदऽगेली।आनदिनसँकनीबेसीएभूखअपनोलगियेगेलछल।मनशान्तभेल।बजलौं- “धीरन्द्रभाय, अहाँऐठामगृहबनागृहबासूभऽगेलिऐ..!” अपनेजखनअपनविचारदिसतकैछीतँसोझबातबुझिपड़ैए।कोलकातावाबाहरकेतौ- गृहबनलापछाइतगृहबासूलोकबनियेँजाइए।रहबनइरहबओअलगअछि। ..‘गृहबासू’सुनिधीरेन्द्रभाइकमनपानिजकाँद्रवितभऽगेलैन।बजला- “बौआ, गाममेजखनगृहविहीनभऽगेलौंतखनकेतौ-ने-केतौगृहबनाजीवन-जापनकरबेकअछिकिने।” धीरेन्द्रभाइकहृदयकबातजेनाअपनोहृदयमेपैसगेल।जहिनानीकविचारमनमेपैसनेनीकजीवनदइएतहिनानेअधलोविचारपैसनेअधलाजीवनदइतेअछि।अपनेमनमानिगेल, धीरेन्द्रभाइकविचारकेँसोल्होअनेटाकिएकहबैन।मुदाअपनेईनइबुझलछलजेधीरेन्द्रभायगाममेगृहविहीनभेलाकेना..! मनकवेगमेबजागेल- “भाय, गाममेकेनागृहविहीनभेलिऐ?” संजोगएहेनबनिगेलछलजेपाँचोपरानीधीरेन्द्रभायछला।दुनूपरानी–मानेधीरेन्द्रोभायआभौजियो–कआँखिमेनोरढबढबागेलैन। दुनूपरानीकआँखिमेढबढ़बाएलनोरदेखअपनोमनअपनेधिकारएलगलजेएहेनबातकिएबजलौं।मुदालगलेमनशान्तभऽगेलआविचारउठलजेजाधैरकिनकोदुखककारणनइबुझबताधैरबुझबकीभेल।रेडियो-अखबारमेसदैतकालदेखते-सुनितेरहैछी, फल्लाँठामएतेलोकमुइलआचिल्लाँठामएतेलोकठनकातरमेपड़लआकिधारमेडुमल।तइसँकोनोविचारकबीजनइनेउगत..! उस्सरखेतकबीआजकाँअंकुरकअंकुरेकिएनेसुखिजाएमुदाअंकुरणशक्तितँअपनचालिपकैड़चलबेकरैए। हमरबातसुनिधीरेन्द्रभायधड़फड़ेलानहि, पत्नीकेँकहलखिन- “गामकअभ्यागतकअभ्यागतीआबअहाँसबहकभेल।अखनदूठामकाजकरबबाँकीअछि, पछाइतनिचेनसँभरिरातिगामकगप-सप्पकरैतरहब।” अनकाजकाँअपनानइभेल, मानेईजेधीरेन्द्रभायअपनेअभ्यागतीकसीमाकउल्लंघनकेलैनअछि, तँएअपनअपमानभेल।जिज्ञासाजगलजेचारि-चारिघन्टाड्यूटीपूराकऽएलाअछिआदूठामआरोबाँकीछैन! मनठमकलतँएचुपेरहलौं। चाहपीबधीरेन्द्रभायचलिगेला।भौजीकेँपुछलयैन- “भायसाहैबकआमदनीकेहेनछैन?” जेनासोचल-विचारलउत्तरभौजीकमनमेछेलैनतहिनाबजली- “खटनीकहिसाबसँआमदनीकमछैनमुदापरिवारतँतेहीपरनेठाढ़अछि।अपनचारिकोठरीकमकानोबनालेलौं।रोजी-रोजगार-लेतँकलकत्तासनशहरछीहे।” विचारकआवेगमेबजलौं- “नीकलगैए?” हमरबातकेँमजाकमेउड़बैतभौजीबजली- “तरुआ-तरकारीटाखाएबबिसैरगेलौंबाँकीसबकिछुनीकेअछि।ताबेअहाँबच्चासबहकसंगखेलाउ।हमभानसकरएजाइछी।” आठबजेसाँझ, दुनूभैयारीएकठामबैसगामकगपशुरूकेलौं।धीरेन्द्रभाइकमनमेजेनापहिलुकेनम्बरमेपहिलुकाबातमनमेगड़लछेलैनतहिनाबजला- “बौआ, तूँतँअखनधरिकौलेजतककशिक्षालेलजिनगीबितौलहअछि।” बिच्चेमेबजागेल- “हँ।” धीरेन्द्रभायबजला- “अपनपंचायतिकचौहद्दीबुझलछह?” झुठेकेनाकहितिऐनजेबुझलअछि, कहलयैन- “नइ!” धीरेन्द्रभायबजला- “हमरोआतोरो- दुनूगोरेकघरएक्केपंचायतमेअछि।हमरकोसीधारसँलगपड़ैए, तोहरबेसीहटलछहमानेउपरारिदिसछह।सत-सतबेरकोसीधारमेबाढ़िअबितोछलआअखनोअबैएजइसँसमुच्चागामआठ-दसमासधरिपानिमेजलोदीपरहएलगल, तखनकीकरितौं?” कोनोउत्तरनहिसुझि, मनमारिबजलौं- “भायसाहैब, चिड़ैयोजखनगाछपरचारिटाठौहरीकघरबनाजीवनगुदसकइयेलइए, तखनतँ..!” शब्दसंख्या : 2338, तिथि : 24 जुलाई 2019 Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव Join Videha googlegroups विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 111 ८) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 १०) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १३) विदेह सम्मान विशेषाक- २००म अक १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १४) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आमंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी VIDEHA 209th issue विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of original work.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् (c)२००४-२०२०. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2020 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA
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