VIDEHA — Issue 290 / अंक २९०

Publication: VIDEHA · Issue: 290
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विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' २९० म अंक १५ जनवरी २०२० (वर्ष १३ मास १४५ अंक २९०) 'विदेह' २९० म अंक १५ जनवरी २०२० (वर्ष १३ मास १४५ अंक २९०) ऐ अंकमे अछि:- १. प्रदीप पुष्पक दू टा गजल २. उमेश मण्डल-- जगदीश प्रसाद मण्डलक विचारोत्तेजक गद्यांश-२ ३. आशीष अनचिन्हारक एकटा गजल ४. जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा- आबइज्जतनइबँचत प्रदीप पुष्प गजल- १ टाटक घर छी बिहाड़ि सुनि डेरायल छी गगनक चान छी इजोरसँ चोटायल छी नै आदर नै सत्कार नै कुशल पूछै पैघ लोकक दरबारमे चलि आएल छी सगरो वैर आ हिंसा छै प्रपञ्च हँसैत अपनहिँ घरमे रहितो हम औनाएल छी शत्रुक गप्प पर चलितौं तँपहुँचल रहितौं मित्रक बाट धऽचललौं तेँ भुतिआएल छी पछता रोपल भाग्यक नै ई दोष हमर माघी फूल रही जेठमे फुलाएल छी (बहरे-मीर) गजल- २ कने हिन्दू कने मुसलमानक देश लड़ैत दियाद जकाँ भगवानक देश हरियर छै जाति धरम नस्लक खेती उपटि गेलै सुच्चा इंसानक देश प्राण अखनो भात बिनु छूटै तैयो केस छेनाक लड़ै मिष्ठान्नक देश सुनतै के सगरो हिचुकी जौं उठतै छै कान बिनु आरती अजानक देश पुरना गेलै टोपी-टीका तँआब आत्मा बेचि दै वेद पुराणक देश (2222222222 सभ पाँतिमे। बहरे मीर) उमेश मण्डल जगदीश प्रसाद मण्डलक विचारोत्तेजक गद्यांश-२ जगदीशप्रसादमण्डलकरचना-संसारसँ विचारोत्तेजकपद्यांश जन्म : 5 जुलाई 1947, बेरमा, जिला- मधुबनी (बिहार), शिक्षा : एम.ए. द्वय (हिन्दी, राजनीतिशास्त्र), जीवि‍कोपार्जन : कृषि (मुख्यत: तरकारीखेती), रूचि : 2001 तकसमाजसेवा (रूढ़िएवम्सामन्तीव्यवहारकखिलाफलड़ाइ, केस-मोकदमा, जहलयात्रा) पछाइतसाहित्यलेखन।नाटक, एकांकी, गीत, काव्य, कथा, उपन्यासइत्यादि–साहित्यकमौलिकविधामेअनवरतलेखन।करीब 100 पोथीकलेखन/प्रकाशन।सम्मान/पुरस्कार : ‘विदेहसम्मान’, ‘विदेहभाषासम्मान’, ‘टैगोरलिटिरेचरएवार्ड’, ‘वैदेहसम्‍मान’, ‘यात्रीसम्मान’, ‘विदेहबालसाहित्यपुरस्कार’, ‘कौशिकीसाहित्यसम्मान’तथास्व. बाबूसाहेवचौधरीसम्मानोपाधिसँसम्मानित/पुरस्कृत। एखन धरि मण्डलजीक जे कोनहुँ पोथी पद्य विधामे प्रकाशित छन्हि ताहि सभ पोथीसँ प्रस्तुत अछि विचारोत्तेजक/भावोत्तेजक पद्यांश- सभदिनकमला-कोसीडुमलौं अन्हर-बिहाड़ि, दानो-दुखसहलौं कानि-खीज‍संगे-संगरहलौं। किसान-बोनिहारकवंशगढ़ि धरती-अकासकबीचखेलेलौं। आबोबुझियोमिथिलाकेहेन अहींकहूभायमिथिलाकेहेन? अहींकहूभाय...। इन्द्रधनुषी अकास, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 57 गामकमाटिकजँदशाएहेन मिथिलाराजकेहेनहेतइ। बाहरे-बाहरकसुसकारीसँ गहुमनकबीखकेनाझड़तै। विचारइमानककेकराकहबै खोलिदेखूमातृकोष। अपने-आपप्रश्नपुछि विचारकरूसम्हारिहोश। रहसा चौरी, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 20 पुरनाकेँपुराणकहि-कहि नवकाचालिसिखबैतएलौं। धर्मसनातनकहि-कहि अर्थ-जालफेकैतएलौं। इचनापोठीछानि-छानि डेलीवाइडेलीभरलौं। गुबदीमारिबिहुसै‍‍छी मनकनैत, हँसैततन कठहँसीहँसिहँसैछी। अपनेपरहँसैछी। इन्द्रधनुषी अकास, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 36 वाण-वाणिचेत-अचेत चाल-चालिचलबएलगलै बीचमानबनिबि‍चमानि नीर-छीरमिलबएलगलै। दूध-पानिमिलबएलगलै। दूध-पानिमिलबएलगलै। सत-चित...। कामधेनु, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 11 पएरपञ्जपबितेपबैत पैजन‍चाहकरैए। तहिनाचाहिचेतकुण्‍ड धारणजिनगीकरैए। काया-मायासंगसदए मिलिसंगजिनगीपबैए शिवसदृशसीमासिरैज‍ राति-दिनकरूपधड़ैए। राति-दिन, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 13 सुखलेमेसभपिछैड़रहलछै मुँह-कानसभतोड़िरहलछै। सुखलेमेसभपिछैड़रहलछै। सुखलजानिजेतइपएररोपै काह-कूहसभतेतइजमलछै। सुखलेमेसभपिछैड़रहलछै मुँह-कानसभतोड़िरहलछै। सुखलेमेसभ...। तीन जेठ एगारहम माघ, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 17 नजैर-नजैरमेतफरकाभैया सभदिनहोइतएलैए। कहियोनावपरगाड़ी तँकहियोनावचढ़ैतएलैए। नजैर-नजैरमेतफरकाभैया सभदिनहोइतएलैए। नजैर-नजैरमे...। अकास गंगा, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 07 गालकसि‍तारबना-बना राग-पुराणकस्वरसाधैछी। राग-तानमिला-मिला वेद-पुराणगबैछी वेद-भेद, भेद-वेद आँखिमुइनदेखैछी। मुनले-मुनलतरआँखिये सुरतदेखझखैछी अपनेपरहँसैछी। अपनेपर...। इन्द्रधनुषी अकास, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 37 राँड़कानएअहिवातीकानए तैसंगबर-कुमारिकानएजेना। रोजगारकानएबेरोजगारकानए हिबडि‍बकरैतसरकारकानएतेना। बेरोजगारसँदेशभरलछै बौसबिनाकंगालबनलछै। तैबीचरोजगारेहेराएल तमसगीरतमाशादेख‍‍रहलछै। राति-दिन, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 21 जहिनाबारहदिनबजैछै तहिनानेरातियोकहैछै। बीच-बिचौबलिबीछि-बेड़ा दुनूमेसमतूलभरैछै। दुनूमेसमतूलभरैछै। जहिनाबारहदिनबजैछै। तहिनानेरातियोकहैछै। जहिनाबारह...। कामधेनु, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 19 शीलाशीलदेखि-देखि हंस‍कानिकहैतएलैए। एकशीलश्रृंगचढ़ि-चढ़ि दोसरश्रृंगारबनैतएलैए। शीलाशीलदेखि-देखि हंसकानि...। चढ़िश्रृंगगढ़िधनुखी अकाससिरबेधैतएलैए। हंसराजराजहंसरमैक सिरश्रृंगारसजैतएलैए। शीलाशीलदेखि-देखि हंसकानि...। गीतांजलि, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 09 चेतु, आबोचेतु, जेदिनबीतल सेदिनबीतल। उठाआँखिआगूबढ़त तखनेपएबभविष्य-फल। तखनेपएब...। रहसा चौरी, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 24 आइयेनहि, सबदिनेसबदिन जिगनीकखेलबाड़होइतएलैए। केतौजाति-जतियारेतँकेतौ धर्म-सम्प्रदायधड़ैतएलैए। भेदकभेदियाभेदभेदि दानव-मानवलुटैतएलैए। केतौधनधर्मकहितँकेतौ धन-धर्मात्माबनैतएलैए। इज्जतकेँधनधर्मकहि धर्मइज्जतलुटैतएलैए। संगजिनगीखेलहोइतएलैए। मन मथन, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 07 अनुकूल-प्रतिकूलबनैकपाछू उठिजिनगीजीवनदेखैछै। जीवनजीवजीनबनैले संघर्षजिनगीकरएपड़ैछै। संघर्षजिनगी...। चुनौती, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 07 अपनाबलेजहियाजीअब बलगरजिनगीतहियापेबब। अपनकल-बलजहियाअपने तहियाअप-अपनजीवनपेबब। तहियाअप-अपनजीवन...। बलोकीओहिनाअबैछै बुधि-कलसिरजएपड़ैछइ। बुधिकलसिरसीरपकैड़ सिरचढ़िकहएलगैछइ। सिरचढ़िकहए...। सतबेध, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 07 दीनकदिनकेनाकऽघुरतै मनकहाँकहियोमानैछै। रतुकेकाजेदिनोगमाकऽ ‍ बढ़तीकहाँबढ़िपाबैछै। बढ़तीकहाँबढ़िपबैछै। दीनकदिनकेनाकऽघुरतै मनकहाँकहियोमानैछै। दीनकदिनकेना...। तीन जेठ एगारहम माघ, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 19 सात्त्विकभावउगैओतएछै जेतएसात्त्विकभूमिउर्वरछै। हवा-पानिजेतएसात्त्विकछै तेतएभावलहलहाइतरहैछै। जेतएदोसरहवाचलैतहो मटियाएलपानिकधारबहैतहो चसगर, चटगरबोलजेतएनित तेतएकेनासात्त्विकभावजगैतहो। तेतएकेनासात्त्विकभावजगैतहो। इन्द्रधनुषी अकास, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 43 केकरोसाँझकेकरोभोर केकरोउदयकेकरोअस्‍त दिनकअस्‍तसाँझअगर रातिकतँउदइएछी। बारहेघण्‍टादिनोचलैछै तेतबेटानेरातियोहोइछै। एकबराबररहितोरहैत दूरंगकिएबनलछै? राति-दिन, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 17 रचिदुनियाँबुधिबुधियार नियामकदुनियाँबनैतएलैए। समाजसुधारककहिकेतौ निरमातासमाजकहैतएलैए। जेगरजेतएगरपकड़लक गरपकैड़गरियबैतएलैए। भाषा-भाषीकवक्ताबनि-बनि सुनताकेँसुनबैतएलैए। जिनगीसंगखेलैतएलैए। मन मथन, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 08 सुखलधरतीजेतएपड़लछै झल-फलनजैरतेतएतकैछै। झलफलझल-अन्हारबनि झलझलाएलमहजालफेकैछै। झलझलाएलमहजालफेकैछै। सुखलेमेसभपिछैड़रहलछै मुँह-कानसभतोड़िरहलछै। सुखलेमेसभ...। तीन जेठ एगारहम माघ, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 17 रंग-बि‍रंगकरूपगढ़ि-गढ़ि रंग-बि‍रंगकचालिचलैत। रंग-बि‍रंगकमंत्रणादऽदऽ शब्दमात्रसात्त्विकरहैत। जखनेमनकलशैतसात्त्विक किछुओनइकठिनरहिपबैत। सात्त्विकशान्त्वनासदिखन शान्त-चित्तसात्त्विकबनैत शान्त-चित्त...। इन्द्रधनुषी अकास, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 43 असंख्यकोटिजीबजीवात्मा दुनियॉंबीचबसैतएलैए। डाक-डकिमानवमानवकेँ कृपा-कृपालुकभेटैतएलैए। अपनेऑंखियेसभकिछुदेखै नजैर-नजरानादैतएलैए। मानव-दानवजानबमनकेँ मनमानबमथैतएलैए। खेलजिनगीकरचैतएलैए। मन मथन, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 08 जाधैरगुणनैअबैतमनुजमे ताधैरमनुजमनुरहैए। ऐबतेगुण, फल-फूलजहिना नाओंअपनधड़बएलगैए। जाधैरफूलमहकनैपाबे कोढ़ी-वातीकहबैतरहैए। तहिनानेमानवोकबीचमानव मानवमनुखकहबैतरहैए। चुनौती, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 09 जुगक-जुगजहिनापरशासन रचि-रचिइतिहासधड़ैतएलौं। मन-मनतरमनमनुज संग-संगदुनूसंगी गुल-गुलामकहाइतएलौं। संगे-संगदुनूसंगी गुल-गुलामकहाइतएलौं। सपनोमेकहियोनेदेखल अज-आजादीबुझिकहॉंपेलौं। अज-आजादी...। मन मथन, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 09 समाजकबीचहमआकि हमराबीचसमाजबसैछइ। कियोअपनाकेँकहिसमाज शील-सुशीलसमाजकहबैछइ। शील-सुशीलसमाजकहबैछइ। तँएकीकुशीलो-शील अपनाकेँअनभुआरकहैछै कुशील-सुशीलबीचकुवेद हाथससारि-ससारिकहैछइ। हाथससारि-ससारिकहैछइ। सतबेध, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 09-10 बहैलबहीलबहिलाकहैछै आशहमरकहियोनैकरिहह फुलकैत-फलकैतढेनु-ढेनुआरक तोड़िआशतेकरोरहिहह। तोड़िआशतेकरोरहिहह। बहैलबहीलबहिलाकहैछै आशहमरकहियोनैकरिहह कामधेनु, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 22 केकरोगारिसुगारिबनि-बनि केकरोगारिकुगारिबनैछइ। सुगारि-कुगारिबीचबुधियारि बीचो-बीचहँसैतचलैछइ। बीचो-बीचहँसैत...। जहिनाधारधैड़धरि तहिनाजिनगीजीतधड़ैछइ। कुबाटि-सुबाटिकबीचमानि मने-मनमतलचलैछइ। मने-मनमतलचलैछइ। अकास गंगा, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 10 अन्हरजालफरिच्‍छमानि भोरभुरुकबासुर्जकहैछै। अन्ह-अन्हसागरओन्हओन्हि ओन्हाचालिचलैतरहैछै। ओन्हचालिचलैतरहैछै। सुखलेमेसभपिछैड़रहलछै मुँह-कानसभतोड़िरहलछै। सुखलेमेसभ...। तीन जेठ एगारहम माघ, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 17-18 रंगसियाहीरोशनाइबनि रेहे-रेहसियाहघोड़ाएलछै। भाव-अभावकुभावबनि-बनि गीतप्रेमलिखाएलरहैछै। रंगसियाहीरोशनाइबनि रेहे-रेह...। गीतांजलि, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 11 आनक-आनकेँकीकहबै अप्पन-अपनेदेखैतरहैछी समाजकबीचसमाजरहितो थाहकहॉंथहिथाहिपबैछी। कखनोसमाजोसँसम्पन्नसमाज सुरसासनमुँहदेखैतरहैछी। कखनोकौछोसँकपचल बिनुमुहेँकसमाजदेखैतरहैछी। देखटराटकपड़लरहैछी। देखटराटक...। मन मथन, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 12 लजलजबिजीबनि-बनि लजे-लजविरहाइतगेलौं। कहियोविरहवेदबुझि तँकहियोविरहेरसागेलौं मीतयौ, लाजेमेटागेलौं। रसल-भसलपछुआपछाइत उनैटपछुआतालदेखलौं। अपनहालबेहालबुझि आनकखुश-हालदेखलौं। देख-देखलाजेपड़ागेलौं लाजेमेटागेलौं...। सतबेध, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 11 चलरेजीवनचलितेचल। संगीबनितूँसंगेचल जौवनचलजुआनीचल जिनगानीसंगमर्दगानीचल चिन्तनसंगचिणमयचल। चलरेजीवनचलितेचल। इन्द्रधनुषी अकास, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 23 हरिअन्तहरिकथाअनन्ता हँसिगीतभागवतगबैछै। हेरिशक्तिशक्तिहरीक बाघचढ़िभगवतीकहैछै। बाघचढ़िभगवतीकहैछै। दुनियाँकजेहनेमंचमंचबै तेहनेनेरंगमंचोबनैछै। दुनियाँकजेहने...। तीन जेठ एगारहम माघ, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 48 हेसुर्जतोड़ेपुछैछिअ? ऊपररहितूँकिएबनौनेछह एनादोहरीबेवहार। अपनरश्मि‍आगूबढ़बैमे धरतीकेँकिएकेनेअन्‍हार। केनारोकितोरादइछह वन-उपवनओजंगल। आसलगौनेधरतियोबैसल करैछहकिएमंगल-अमंगल। राति-दिन, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 27 चिड़ैसभजहिनागाछकऊपर खोंताबनबैएअपनेलोले। तहिनानेअपनोभऽसकत लुइर-बुइधअपनेबले। निर्णायकदौड़आबिरहल अछिनिर्णायकमोड़। मोड़मोड़िघुमाएबनइजाधैर पएबकेनाथोड़ो-थोड़। स्वतंत्रदेशकस्वतंत्रजनकेँ गहिएकराधड़एपड़त। यएहछीसोचै-विचारैक जीबैलेलड़एपड़त। जीबैलेलड़ए...। रहसा चौरी, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 35-36 भाव-अभावकुभावबनि-बनि गीतप्रेमलिखाइतरहैछै। रंगसियाहीरोशनाइबनि-बनि रेहे-रेह...। गीतांजलि, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 12 कहियोदिवानिशादाबि-दाबि तँकहियोछातीफाड़िनिशाकहैए। भलेँजाठिजठियाजेठ तँएकिनिशाकरपाछूहटैए। तँएकिनिशाकर...। राति-दिनएकबट्टबटिया दिन-रातिनाओंधड़ैतरहैए। कहियोविषुवतरेखमध्य तँकहियोमकरकहबैतरहैए। तँकहियोमकर...। चुनौती, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 08 हलचलजिनगीहलैस-कलैश हर-हरिचालिचलैछै। बीर्तमानभविसकहि-सुनि भूत-बंगलासजबैछै। मीतयौ, भूत-बंगलासजबैछै। हलचलजिनगीहलैस-कलैश हर-हरिचालिचलैछै। हलचल...। कामधेनु, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 24 जेहेनमुँहतेहेनहँसी सभदिनहँसैतएलैए। मुँहकजेहेनगढ़ैन-मढ़ैन तेहनेतानभरैतएलैए। जेहेनमुँह...। जाधैरडोरनैबनि-बनि घाससाबेकहबैतएलैए। बनितेडोरीसमेट-बटोरि गृहवानकहबैतएलैए। गिरहबानकहबैतएलैए। जेहेनमुँह...। तीन जेठ एगारहम माघ, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 56 ग्रहनक्षत्रसभटाचलैछै सूर्जतरेगनसेहोचलैछै दोहरीबाटपकैड़‍चान अन्‍हार-इजोतकबीचचलैछै। देखा-देखीचलितेचल। चलरेजीवनचलितेचल। इन्द्रधनुषी अकास, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 23 टकटकताकतकैछीहेमइए आहाँकिएआँखिमुननेछी। गड़-गड़गालगबैछीमइए तखैनकिएकानखोलनेछी। तखैनकिएकानखोलनेछी। टकटकताकतकैछीहेमइए आहाँकिएआँखिमुननेछी। टकटक...। कामधेनु, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 25 मनकडायरीलिखएबैसलौं उपहारकडायरीनिकाललौं। रंग-रूपदेखडायरीक ऊपरे-ऊपरेभसएलगलौं। भसैत-भसैत-भसैत मनकबातबिसरएलगलौं। छपलफूलगुलाबकली बिहिया-बिहियादेखएलगलौं। सुर-सुरकरैतसुरसुरीआबि नाकरछोरखिचएलगलौं। राति-दिन, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 85 नवपथकअनुकूलपथिककेँ सहीसवारीसुपथ-पथचाही। तहिनाखुशीखुदखुदबैले मुस्‍कीसजलशब्दकविताचाही। उपयोगीनव-नववस्तुक जोड़ि-जाड़िछिहलैतडगरचाही। हेराएलरसिकप्रेमी-ले बेराएलभावकविताचाही। बेराएलभावतहिएसजैत जहिएभेटैतछिड़ियाएलभंडार। चुनि-चुनिचुनियाचुनैबिते नुकाएलपबैतशब्द-संसार। रहसा चौरी, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 38 जखनेमनमणिकबन तखनेविचरणधारबहैछइ। धारकधारधड़िधैड़धए धैर्यधीरजधीरबनैछइ। धैर्यधीरजधीर...। अकास गंगा, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 10 अपनेहाथकखेलमीतयौ अपनेहाथखेल। संगे-संगदुनूचलैए। इजोत-अन्हारबनैतरहैए। हँसि-हँसिकानि-कानि पटका-पटकीकरैतरहैए। एकेगाछकडारिछी दुनूसुफल-कुफलफड़ैतरहैए। रसरंगसुआदगढ़ि-गढ़ि तीत-मीठबनबैतरहैए। अपनेहाथकखेलमीतयौ संगे-संगखेलैतरहैए। सतबेध, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 24 केकेकरहितकेकेकरमुद्दै दिन-रातिदेखैतरहैछी। गरदेनपकैड़‍जेकानएकलपए पकैड़‍गरदेनतोड़ैतदेखैछी। किछुनेबुझैछी। सतबेध, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 30 इच्छुक-इच्छितइच्छाबनि-बनि मनमानवमोहैतएलैए। मोहकमोहैनमोहि-मोहि नीक-अधलामनबनैतएलैए। कोण-धारपकैड़इच्छितइच्छा धार-धारामनबनैतएलैए। झील, सरोवरपर्वतचढ़ि-चढ़ि पयोनिधि-पर्वतसिरजैतएलैए अप्पन-अप्पनसीम-सीमागढ़ि पर्वतबीचसागरकहबैतएलैए। पवैतबीच...। मन मथन, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 18 अपनसभकिछुउपटा-बिलटा मिथिलाकजय-जयकारकरैछी। भाषासाहित्यककथेकी नमगर-चौड़गरभागवतबचैछी। पकड़ैमुसबाखाएयुनूसबा दिन-रातिकलीलाचलैए। चुनौती, जगदीश प्रसाद मण्डल, पृष्ठ संख्या- 14 आशीष अनचिन्हार गजल सपनाइत रहलहुँ हम डेराइत रहलहुँ हम मँजाइत रहल एड़ी चिकनाइत रहलहुँ हम जते जे सुनेलक से पतिआइत रहलहुँ हम अइ हाथसँ ओइ हाथ बदलाइत रहलहुँ हम हुनकर मोनक बाकस सैंताइत रहलहुँ हम इम्हर उम्हर सभठाँ उसनाइत रहलहुँ हम चुप्पे अनचिन्हारसँ बतिआइत रहलहुँ हम सभ पाँतिमे 22-22-22 मात्राक्रम अछि। दूटा अलग अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि। जगदीश प्रसाद मण्डल आबइज्जतनइबँचत भुमकमकघरजहिनाजापानछीतहिनाबाढ़िकघरमिथिलांचलसेहोछीहे।मिथिलांचलकपुबरियाछोरमानेपूबकसीमासँपछबरियाछोरकपच्छिमकसीमाकबीचउत्तरे-दछिनेबीस-पचीसटाधारअछि। धारकतीनरूपअछि।पहिलजेबारहोमासबहैए, दोसरजेअखाढ़-सौनसँबहबशुरूकरैएआअगहन-पूसधरिबन्नहोइएआकिछुधारसोल्होअनामरनेभेनेपानिकआमदनीपरबहबोकरैएआनइभेनेनहियोँबहैए।खाएरजेअछिसेअछिए, सभदिनसँअबैतरहलअछिआआगुओरहबेकरत। जहिनाऋृषि-मुनीकजीवनरहलैनअछितहिनाधारोसबहकअछिए।विश्वकर्मा, विश्वामित्रसनजहिनारिसियाहऋृषिभेलातहिनाकमला-कोसीसनरिसियाहधारसेहोअछिए।तँएकहबजेसभधारेआकिऋृषिये-मुनीसभएक्केरंगभेलासेहोनहियेँकहलजासकैए।वाल्मीकि, गौतमजहिनाशान्तसोभावकशान्तचित्तऋृषिभेलातहिनावागमतीआबिहुलसेहोअछिए।वागमतीतँगौतमजकाँशान्तचित्तजीवन-यापनअखनोधरिकइयेरहलअछि, जँसेनइकऽरहलअछितँसी.एम. कौलेजकविद्यार्थीरहैछैथधारकपछबरियामहारकछात्रावासमेआसभदिनपढ़एअबैछैथपुबरियामहारककौलेजमे...।मुदाबलानतँसेनइछी, कखनोकमलाकसंगमिलिगामक-गामकेँउजाड़िलगबैएतँकखनोभुतहीकसंगभूतबनिगामक-गामककेँबलुआहसेहोबनैबतेअछि...। ऐसालकपहिलबाढ़िकआइएकैसमदिनछी।गामअखनोपानिसँझलैकरहलअछिआआमकगाछीकआमकगाछसभअपनबगवारकेँसोरपाड़ि-पाड़िबाजियेरहलअछिजेभाय, अनरनेबा, दारीम, नेबोकसंगकटहर, मुनगा, शीशोतँअपनप्राणतियागकरबेकेलक, ऐगलानम्बरमेहमहींसभछी, तँए...। मुदाकेसुनतओइगाछ-वृक्षकबात।आजँसुनबोकरततँकइयेकीसकैए..? गामकरूपअखनोओहनेअछिजहिनामरुभूमिइलाकामेकोसक-कोसचमकैतदोखराबाउलपरगोटि-पङ्गराझाड़-झुड़कगाछजकाँगोटि-पङ्गराघरो-ऑंगनदेखपड़ैततहिनाअपनोगामकदशाबनलअछि।पाँचकोससुखलमाटिकबाटपरचलैमेजेतेथकानहोइएओत्तेकोसभरिपानिकबीचचललासँहुऐएलगलअछि।गामकसभबान्ह-सड़कपरठेहुनसँऊपरपानिचढ़िगेलअछि। भिनसुरकासमय, करीबसातबजैतरहइ।चाहपीबअढ़ाइहत्थीहाथमेलेलौंआगामदिसविदाभेलौं।दरबज्जापरसँनिच्चाँउतैरतेरहीकिमनमेउठलजेदिनमेएकबेरजरूरसौंसेगाम–सौंसेगामकमानेभेलजेमहर-जेमहरलोकबसलअछितेमहर-तेमहर–टहलैछी, मुदाअखनतकदुखबाकाकाऐठामनइगेलौंअछि। ओना, दुखबोकक्काकघरगामकलागियेमेछैनमुदाबीचमेटोलआदुखबाकक्काकघरकबीचएकटापतरकीधारबहनेगामसँदुखबाकाकाकटलछैथ।ओना, धारपतरकियेछीमुदाऐबेरकबाढ़िओइधारकेँतेहेनमुँह-कानबनादेलकजेगामकसम्बन्धेतोड़िदेलक। रस्तापरअबितेमने-मनहियबएलगलौं।एकटाडेंगीनाहसिंगहारआभैंट-मलकोकातोड़ैलेरूपलालरखनेअछि।अगमपानिकधारमेअखनोअगमपानिअछिए।बिनुनाहेओइपारमानेदुखबाकाकाऐठामनहियेँजासकैछी...। जहिनाजगरनथियायात्रीगामे-गामचलैत, गीतगबैत, भीखमंगैतजगरनाथपहुँचियेजाइएतहिनारूपलालऐठामविदाभेलौं। ओना, नाहकप्रतिरूपलालझनकाहलोकअछि, केकरोअपननाहपरचढ़ैककोनबातजेछुबौनेदइए, मुदाबाढ़िमेजखनविषधरगहुमनोमरैडरेअपनबीखोबिसैरविषहरबनिजाइए.., तहिनाबाढ़िऐलापछाइतऐबेररूपलालोकभेल। देखतेरूपलालबाजल- “भायसाहैब! एतेबाढ़िआएलमुदाअहाँकेँकहियोडेंगीनाहपरझिलहोरिनइखेलेलौं!” ओना, बाढ़िमेझिलहोरिखेलबसुनिदेहभुटुकगेलमानेडरे, मुदामनमेकमो-कमआशातँबनलेछलजेरूपलालझिलहोरिखेलेनिहारछी, जेसंगीभेल।बजलौं- “आइतेहीभाँजमेआएलछी।चलहकनेदुखबाकक्काकभेँटकरयैन।” डेंगीनाहपरपतरकीधारपारकरैतदुखबाकाकाऐठामपहुँचलौं।दुखबाकक्काकचिन्तादेखसमोहलगिगेल..! एकदिसदेखिऐनघर-अँगनामेपानिभरलछैनआदोसरदिसखुट्टापरचारिटागाए-महींससेहोछैन।गहुमकभुसीपानिमेसड़िगेलैन, नारकटालभँसियागेलैन, घासकखेतमेभरिछातीपानिलगिगेनेऊहोसभटागलियेगेलैन।मुदातैयोदुखबाकाकाअपनजिनगीकेँसमेटएकविचारकबाटपकैड़बटोहीबनिजीवनयात्राकइयेरहलछैथ। डेंगीनाहसँउतैरहमदुखबाकक्काकदरबज्जापरगेलौंआरूपलालनाहकेँसम्हारिएकटाखुट्टामेबान्हलक।घरो-अँगनामेपानिकवेगचलियेरहलछेलइ।ओना, दरबज्जाकऊपरमेपानिनहिछेलैन, मुदागठुलाआभुसकाँरदेनेपानिबहितेछेलैन।अँगनाकमुँहबान्हि, अँगनोआअँगनाकचारूघरोबँचौनेछला...। मुहसँकिछुनेबजलौं, किएतँएहेनसमयमेकेहेनप्रणाम-पातीहेबाचाहीसेनइबुझलछलतँएदुनूहाथजोड़िचुपे-चापप्रणामकेलिऐन।मुदाबाहरेदुखबाकाका! अपनमुँहकहँसीसँहमरोहँसबैककोशिशभरपूरकइयेरहलछला।अधखिल्लूफूलजकाँअधखिललहँसीहँसैतबजला- “बौआ! घर-अँगना, बाल-बच्चाबँचलछहकिने?” दुखबाकक्काकगतिसँअपनगतिकनीनीकअछि, तैपरसँदुखबेकाकाआरोनीकककामनाकरैतबाजलछला, तँएमनकतसल्लीआरोसक्कतभेल।कहलयैन- “काका, परिवारककीकहबजेगामककोनबातपरोपट्टेएकबटभेलअछि।केतेलोककजानगेबोकएलअछिआजाइयो-जाइयोपरअछिए।तैठामजेहेनगतिकजीवनहेबाचाहीतइमेनीकछी।” हमरामुँहक‘नीक’सुनिआकिअपनविचारधाराकप्रवाहकनीकबुझिदुखबाकाकाबजैछलासेनहिबुझिपेबरहलछेलौं।किएतँएतेअपनोबुझलेअछिजेदुखबाकक्काकजेहनेखेती-बाड़ीसघनछैनतेहनेपरिवारोसघनछैन्हे, तैठामजँएहेनसमयमेअपनाकेँसुरक्षितरखनेछैथईबलिहारीतँछैन्हे।बीस-बाइसगोरेकओहनपरिवारदुखबाकक्काकछैनजइमेछहमासकबच्चासँअस्सीबर्खकबुढ़माएतकछैन्हे। दुखबाकाकाबजला- “बौआ, चाहनइपीयेबह! घरमेनेचाहपत्तीअछिआनेचीनी।” दुखबाकक्काकबातसुनिअधेपरसँविचारकेँरोकैतबजलौं- “काका, चाहपीबियेकऽविदाभेलछेलौं, तँएचाह-ताहकलटारमछोड़िदियौ।किछुबुझै-सीखैलेएलौंहेन।” हमरबातसुनितेदुखबाकक्काकनजैरजेनापरिवारदिसबढ़िगेलैन।बजला- “जहिनारंग-रंगकपरिवारोअछि–जनसंख्याकहिसाबे–तहिनारंग-रंगकसमस्योतँअछिए।कहैलेबाढ़िआएलजेसभबुझैए, मुदासभकेँएक्केरंगतबाहियोआबेरबादियोथोड़ेभेलअछि।” ओना, अपनेअखनतकयएहबुझैछेलौंजेबाढ़िआएल, खेतकजजातदहाएल, केतेलोककघरोखसलआअन-पानिसेहोदहेबोकएलआसड़बोकएलअछि।मुदा, दुखबाकक्काकबिटियाएलबातसुनिमनचौंकल।चौंकलईजेखुदरासमस्यातँछीनहिजेकियोकेकरोमददगारोहएत, ऐठामतँसामूहिकसमस्याअछि, तहूमेसबहकएकरंगसेहोनहियेँअछि...। अपनाकेँनिरुत्तरबुझिबजलौं- “काका, अपनेतँचारिमपनदेखरहलछी, तँएजेते..?” ओना, बजलौंलाभरे-जीभरमानेजीदाबियेकऽ, मुदादुखबाकाकाबुझिगेला।जहिनाराजाहुअकिरंकसभकेँ‘अ-आ’सँअक्षरार्जनहोइए, तहिनाओबिटियाकऽबिटगरहासुनबैतबजला- “देशस्वतंत्रभेलापछाइतकोसीकपहिलउनाड़ी 1954 ई.मेभेल।जइबेररस्ताकातमेमानेजैठाम-जैठामपानिकखसानभेलतैठाम-तैठाममोइनफुटिगेल।खालीरस्तेकातटामेनहि, जै-जैठामऊँचगरपरसँपाइनिकवेगकखसानभेल, तै-तैठाममोइनफुटल।इलाकामेहजारोमोइनफुटिगेल।” दुखबाकक्काकबातसुनिदेहभुटभुटाएल, मुहसँअनायासनिकलल- “बापरे..!” जहिनाआश्चर्यजनकसभकिछुलोककेँआश्चर्जितकरैएतहिनाभेल, जेदुखबाकाकाबुझिगेला। जहिनाएकविचारकपछाइतदोहराकऽकियोदोसरविचारसोझामेरखैएतहिनादुखबाकाकाबजला- “देशकअजादीकदौड़शुरूभऽगेलछल।अंग्रेजीशासनद्वाराकेतेकोगामजरौलोजाचुकलछलआजरौलोजाइछल, केतेकोदेशभक्तगोलीकशिकारभऽचुकलछलाआशिकारीबनिशिकारबनैलेतैयारसेहोछला, केतेकोदशभक्तजहलोमेछलाआजहलजाइयो-लेतैयारछला, केतेकोदेशभक्तकालापानीकसजाभोगैलेगेलोछलाआजाइयो-लेतैयारछला।केतेमातृभूमिसिनेहीदेशभक्तफाँसियोपरचढ़िचुकलछलाआचढ़ैले (फाँसीपर) कफनबान्हितैयारोछला...।” दुखबाकक्काकबातसुनिमनमेजेनाकोनोशक्तिकआगमनभेलतहिनाबुझिपड़ल।सम-विषमकबीचमनजेनाथकथकागेल।बजलौं- “कठिनपरिस्थितिरहलहएत..!” ओना, जेतेबातदुखबाकक्काकमुहेँसुननेछलौंतइआधारपरबाजलछेलौं, मुदादुखबाकक्काकनजैरमेआरो-आरोसमस्यानाचिरहलछेलैन।बजला- “बौआ, अपनामिथिलांचलमेदूसाल, तीनसालपरसाल-दूसालकरौदीतँसबदिनसँहोइतेआबिरहलअछि, तँएऐठामकवासीरौदीझेलैकअभ्यस्ततँभइयेगेलछैथ। 1942 इस्वीमेबंगालकजेअकालभेलओतँदेशेनहि, बुझहकजेदुनियाँकेँहिलादेनेछल।लाखोलोकअन्न-पानिबेतरेमरलछला।” तैबीचश्यामाकाकी–दुखबाकक्काकपत्नी–आँगनसँनिकैलदरबज्जापरपहुँचली।काकीकेँदेखतेबजलौं- “काकी! सतासीइस्वीमेजेहेनबाढ़िआएलछलतेहनेबाढ़िअहूबेरआएलअछि..!” अपनाजनैतश्यामाकाकीसँबुझएचाहैछेलौंजेहुनकरअनुभवकीछैन।मुदाकाकीकिछुनहिबाजिसोझेमुड़ीडोलामानिलेलैन। 1987 इस्वीकबाढ़िकनाओंसुनितेदुखबाकाकाबाजएलगला- “बौआ, एकबाढ़िकप्रभावकेतेपड़ैए?” दुखबाकक्काकबातसुनिमनठर्रागेलजेजैठामगाम-गामकखेतीमराजाइए, घर-दुआरखसिपड़ैए, माल-जालदहेबो-भँसिएबोकरैएआमरबोकरैए, गाछ-बिरीछसुखबोकरैएआभँसबोकरैएतैठामकिछुबाजबकठिनतँअछिए।मुदाजँकिछुबाजबनहितखनअपनोमनकहिसाबकेनाबुझिसकब।आजखनअपनोमनकहिसाबनहिबुझिपएबतखनअनकरकेनाबुझबै? ओना, बाजबोभरिगरअछिए, किएकतँअन्दाजसँबाजबआहिसाबजोड़िकऽबाजब, दूरंगहेबेकरत।तैयोबजलौं- “बहुतप्रभावपड़ल, काका..!” दुखबाकाकाबजला- “‘बहुत’कहनेआकि‘कम’कहनेकोनोप्रश्नकउत्तरनइभेल।भेलएतबेजेकम-बेसीकखालीअन्दाजभेल।ओना, सोल्होअनाठीक-ठीकउत्तरताकबकठिनअछिएमुदा...।” ‘मुदा’कहिदुखबाकाकाकेँरूकितेबजलौं- “काका, अपनेप्रौढअनुभवीलोकभेलिऐ, अपनेलोकनिकअन्दाजोबहुतहदतकसहीहेबेकरत।कमअनुभवीवाअनाड़ी-धुनाड़ीकअन्दाजमेनेअन्तरहएत।” मुड़ीडोलबैतदुखबाकाकाबजला- “हँ! सेतँहेबेकरत।मुदाएक-एकडारि-पातकविचारजँअनाड़ियो-धुनाड़ीकरततँओअनुभवियेजकाँबहुतहदतकसहीहेबेकरतकिने।” दुखबाकक्काकविचारमनमेजँचल, बजलौं- “डारि-पातकेँकेनाबुझबजेआमकगाछकडारिकबीचमेजामुनकगाछकडारिअछिवाजामुनकगाछकडारि-पातकबीचआमकडारि-पातअछि?” मुस्कीदैतविचारकेँस्वीकारैतदुखबाकाकाबजला- “बौआ, जेहेनबाढ़िअपनासभकेँअछिएहेनबाढ़िकप्रभावकमसँकमपाँचबरखपड़त, तैबीचजँदोहरागेलमानेदोहराकऽएहनेबाढ़िआबिगेल, तेकरहिसाबछोड़िकऽ, सालभरिकपछाइतओइपरिवारकभोजनपैछलास्थितिकबराबरीमेऔत, किएतँअन्नकउपजकअपनसीमोआसमैयोअछिए।” दुखबाकक्काकविचारमनमेतेनागरलजेविसविसाउठल।विसविसाइककारणभेलजेअखनतकअपनेईबातकिएनेबुझैछेलौं..! बजलौं- “काका, हमरासनलोककेँपुरैमेतहूसँबेसीसमयलागत।किएकतँपोखरिकसभमाछभँसिगेल।महारेठीककरैमेछहमाससँबेसीसमयलागत।तैपरअण्डासँजीराआजीरासँखेबा-जोकरबढ़ैमेसालटपियेजाएत।” दुखबाकाकाबजला- “अपनाऐठामकलोकघरबनबैकअभ्यस्तभऽगेलछैथ, साले-सालजँनहियोँबनौतातँछारबोजरूरेकरता।तँएदूसालमेघरकओरियानभऽसकैए।” दुखबाकक्काकविचारखालीजँचबेनइकएल, मनमेचुभिसेहोगेल।तैबीचदुखबाकक्काकदुनूबेटीदरबज्जापरपहुँचली।दुनूतरा-ऊपरी।तरा-ऊपरीभेलजेउमेरसँपैघआशरीरककाँतिकहिसाबसँछोट, आउमेरसँछोटजँकाँतिकहिसाबसँपैघभेल।दुनूबेटीदिसइशाराकरैतदुखबाकाकाबजला- “तोंहीकहहजेएहेनस्थितिमेकीकरबै? तीनसालसँबिआहकरैलेऔनारहलछी, तैबीचएहेनसमस्याभेलअछि..!” बेटी-बिआहकचर्चसुनिश्यामाकाकीबजली- “हमरासन-सनलोककइज्जतआबनइबँचत।” बजैत-बजैतश्यामाकाकीकआँखिनोरसँढबढबागेलैन, आँचरसँआँखिकनोरपोछिहमरापरसँनजैरउठादुखबाकाकापरदेलखिन। पत्नीकनजैरमिलितेदुखबाकाकाजेनाहुनकमातृसिनेहपढ़िलेलैनतहिनाबजला- “पुरुख-नारीकबीचजेसृजनशक्तिअछिओइशक्तिकसंजोगस्वरुपविवाहकबन्धनसमाजमेकल्याणकारीनियमकरूपमेप्रचलितभेलजेकरा..!” ओना, दुखबाकक्काकविचारनीकजकाँनहिबुझिपेलौंमुदाजेतबेबुझलौंतइमेइज्जतकप्रश्नकेतौनेबुझिपड़ल।प्राकृतिकसामान्यनियमबुझिपड़ल, जेमनुखकसृष्टिकएकप्रक्रियाभेल।जेअखनतकबुझिनहिपेनेछेलौं। नवविचारमनमेजगितेनव-नवविचारकअनेकोपोनगीमनमेउठएलगल।वैवाहिकसम्बन्धमेगाम-समाजकनजैरआप्राकृतिकनियमकनजैरमेअन्तरबुझिपड़एलगल।बजलौं- “काका, अपनेजेकहलिऐसेआसमाजकचलैनमेजेअछितइदुनूमेतँ..?” हमरविचारसोल्होअनाजेनादुखबाकाकामानिलेलैनतहिनाविचारकेँआगूबढ़बैतबजला- “बौआ, हमर-तोहरमानेमनुखकजेक्रमिकविकासअछिओकहैकढंगबेढंगअछि, किएतँजखनपरिवारआवंशकहिसाबसँतकबहकतखनजेसिराभेटतहओमनुखकक्रमिकविकाससँअन्तररखैए।” दुखबाकक्काकविचारनीकजकाँनहिबुझिपेलौं, मुदामनमेबुझैकजिज्ञासातेतेकउग्रभऽगेलजेअपनेमुहेँबजागेल- “सेकेनाकाका?” दुखबाकाकाबजला- “परिवारआवंशकहिसाबआगूदिसबढ़ैक, मानेजेतेपरपहुँचलअछि, तइसँआगूकअछिआबेकतीकहिसाबजन्मसँमृत्युधरिकअछि।मानेअपनेआपमेपूर्णअछि।” दुखबाकक्काकबातकनी-मनीबुझबोकेलौंआकनी-मनीनहियोँबुझलौंमुदातइबिच्चेमेरूपलालबाजल- “सुशीलभाय, एकटामाछबलाकेँमाछपहुँचेबाकसमयभऽगेल।” अपनविचारकेँविसर्जनकरैतदुखबाकाकाबजला- “बौआ, बेटी-बिआहकजेसमस्याअपनाऐठामअछि, जेकराइज्जतमानलजाइए, ओइइज्जतकेँबनबैकरस्तामेअनेकोविघ्न-बाधासमाजस्वयंठाढ़केनेअछि, ओनापरिस्थितिसेहोसहयोगीबनलअछिए।अखनतोहूँजाह।रूपलालकेँदोसरठामजेबाकछइ।समयभेटततेदोसरदिनआगूकविचारकरब।” शब्दसंख्या : 2046, तिथि : 28 जुलाई 2019 Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव Join Videha googlegroups विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf          Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf       12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक,  १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf       Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf         21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010        Videha_01_10_2010_Tirhuta             67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010        Videha_15_11_2010_Tirhuta             70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010        Videha_15_12_2010_Tirhuta           72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011        Videha_01_03_2011_Tirhuta           77 ७) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012        Videha_01_08_2012_Tirhuta           111 ८) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013        Videha_15_03_2013_Tirhuta           126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013        Videha_15_11_2013_Tirhuta           142 १०) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १३) विदेह सम्मान विशेषा‍क- २००म अ‍क १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अ‍क १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १४) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आम‍ंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी VIDEHA 209th issue विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन  नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक  बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of original work.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् (c)२००४-२०२०. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम वि‍लास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत।  एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2020 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA

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