विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' २९२ म अंक १५ फरबरी २०२० (वर्ष १३ मास १४६ अंक २९२) 'विदेह' २९२ म अंक १५ फरबरी २०२० (वर्ष १३ मास १४६ अंक २९२) ऐ अंकमे अछि:- १. प्रदीप पुष्पक दू टा गजल २. उमेश मण्डल-- जगदीश प्रसाद मण्डलक ‘बजन्ता-बुझन्ता’ ३. आशीष अनचिन्हारक एकटा गजल ४. जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा- बुढ़ापा प्रदीप पुष्प गजल- १ अजान बौक भसान बौक नचैत लाश मसान बौक मरैत गाछ मचान बौक सधैत पाय मिलान बौक खटैत लोक दलान बौक भरैत पेट थकान बौक बहैत गाम निशान बौक कटैत गाय बथान बौक बढ़ैत दाम निदान बौक जरैत खेत किसान बौक (12121सभ पाँतिमे) गजल- २ कने ध्यान एम्हर आनल जाए घामक जाति कोन मानल जाए छै छाल्ही-दूध धोधिबला लेल भूखल लेल सत्तु सानल जाए चन्दा-चुटकी फेरो बटोरबै हँ यौ तेँ कीर्तन ठानल जाए सभा मध्य जे उचित गप्प कहता हुनका पंचे नै मानल जाए छागर-बकरी देने छै धरना बाघ हमर नेता गानल जाए (222222222,बहरे मीर) उमेश मण्डल जगदीश प्रसाद मण्डलक ‘बजन्ता-बुझन्ता’ बजन्ता-बुझन्ता (2013) :प्रस्तुत पोथी कथाकारक द्वितीय बीहैन कथा-संग्रह थिक। एहि पोथीक पहिल संस्करण; श्रुति प्रकाशन, दिल्लीसँ 2013 ईस्वीमे प्रकाशित भेल अछि। 30.11.2013क शनि दिन 80म कथा गोष्ठी- निर्मलीमे अनुमण्डल पदाधिकारी श्री अरूण कुमार सिंहजीक, डॉ. बचेश्वर झा, डॉ. रामाशीष सिंह, प्रो. धीरेन्द्र कुमार, श्री रामजी प्रसाद मण्डल, डॉ. अशोक अविचल आदि विद्वानक संग कथाकार जगदीश प्रसाद मण्डलजीक समक्ष एहि पोथीक लोकार्पण भेल अछि। पछाति, पल्लवी प्रकाशन- निर्मली (सुपौल)सँ सेहो अग्रिम संस्करण प्रकाशित होइत रहल; वर्तमानमे चारिम संस्करण (2018) उपलब्ध अछि। प्रस्तुत संग्रहक प्रत्येक कथा अलग-अलग सामाजिक मुद्दाकेँ लए कऽ बुनल गेल अछि। आजुक परिवेशमे भऽ रहल सामाजिक परिवर्तन ओ उथल-पुथलकेँ एहि संग्रहक सभ कथा किछु-ने-किछु रेखांकित करैत अछि। कहल जा सकैछ,‘बजन्ता-बुझन्ता’ व्यक्तिगत ओ सामाजिक स्तरपर भऽ रहल उथल-पुथलक एकटा दस्तावेज थिक। एहि संग्रहमे 68 गोट बीहैन कथा (Seed Stories) आएल अछि। क्रमश: सभ कथाक शीर्षक निम्नांकित अछि- ‘कचोट’,‘काँच सूत’,‘बुधनी दादी’,‘खिलतोड़’,‘मुँह-कान’,‘अनदिना’,‘अपन काज’,‘दूरी’,‘पुरनी भौजी’,‘छुटि गेल’,‘काल्हि दिन’,‘अप्पन हारि’,‘कनफुसकी’,‘मुँहक बात मुहेँमे’,‘कनीटा बात’,‘गति-गुद्दा’,‘बिसवास’,‘कचहरिया भाय’,‘गोहाइर’,‘शिवजीक डाक-बाक्’,‘सोग’,‘पनचैती’,‘कनमन’,‘अजाति’,‘पटोर’,‘फुसियाह’,‘गति-मुक्ति’,‘चौकीदारी’,‘झगड़ाउ-झोटैला’,‘घबाह ट्यूशन’,‘दादी-माँ’,‘पटोटन’,‘मुसाइ पण्डित’,‘भरमे-सरम’,‘देखल दिन’,‘फज्झैत’,‘अकास दीप’,‘बुधि-बधिया’,‘पहाड़क बेथा’,‘उमकी’,‘बजन्ता-बुझन्ता’,‘चर्मरोग’,‘शंका’,‘ओसार’,‘छोटका काका’,‘सीमा-सरहद’,‘रमैत जोगी बोहैत पानि’,‘गंजन’,‘सजए’,‘घटक बाबा’,‘आने जकाँ’,‘दान-दछिना’,‘उड़हैड़’,‘मत्हानि’,‘मेकचो’,‘झुटका विदाइ’,‘मुँहक खतियान’,‘कोसलिया’,‘हूसि गेल’,‘पोखला कटहर’,‘सरही सौबजा’,‘तेरहो करम’,‘डुमैत जिनगी’,‘चोर-सिपाही’,‘दूधबला’,‘टाइपिस्ट’,‘समदाही’ आ अन्तिम कथा अछि- ‘बुढ़िया दादी।’ 20 गोट कथाक सामान्य अर्थ प्रस्तुत कएल जा रहल अछि। संग्रह पहिल कथा थिक‘कचोट’,एहि कथामे कथाकार स्वयं एक पात्र छथि आ दोसर पात्र छथि दिनेश। एहि कथामे मध्यम वर्गक मजबुरीकेँ हू-ब-हू देखाओल गेल अछि। ओहन परिवारमे पढ़बाक-लिखबाक इच्छा रहितो विद्यार्थीकेँ जीवन-यापन सम्बन्धी आन-आन काजक मजबूरीमे कोना बाझल रहए पड़ैत छैक, जाहि कारणे स्कूल नहि जा पबैत अछि।तकर नीक चित्रण एहि कथामे दिनेशक माध्यमसँ कथाकार कएलनि अछि। 2. ‘काँच सूत’, कथामे दू जातिक मित्रमे छोट-छीन बात लऽ कऽ आपसी मत-भिन्नताकेँ देखार करैत कथाकार एहि कथामे देखौलन्हि अछि जे एकठाम रहबाक कारणे दू जातिक लोकमे भिन्नता तँ अछि मुदा ओ काँच सूतमे बान्हल अछि जे कखनहुँ टुटि सकैए। 3. ‘बुधनी दादी’, कथामे कथाकार गामक बुढ़-बुजुर्गक दशाकेँ देखेबाक प्रयास कएलनि अछि। धिया-पुता बाहर कमा रहल छन्हि आ ओ बुढ़-बुजुर्ग सभ किछु अछैत असगरूआ जीवन जीबाक लेल अभिशप्त छथि। बुधनी दादी बजलीह- “बुच्ची, जीबैक मन होइए मुदा तेहेन-तेहेन आपैत-विपैत सभ अछि जे होइए तइसँ नीक भरमे-सरमे मरि जाइ।” 4. ‘खिलतोड़’,कथाक माध्यमसँ श्री जगदीश प्रसाद मण्डलजीसैद्धान्तिक ज्ञान ओ प्रायोगिक ज्ञानक बीचक अन्तरकेँ बुझेबाक प्रयास कएलनि अछि। संगहि आधुनिक शिक्षा आ ज्ञान प्राप्त केनिहार लोकमे प्रायोगिक ज्ञानक कमी कोन तरहेँ व्याप्त अछि तकरा सेहो एहि कथाक माध्यमसँ कथाकार चिह्नित कएलनि अछि। एहि कथामे दू गोट पात्र अछि- 1. दिनानाथ, 2. दयाकान्त। 5. ‘मुँह-कान’, कथामे आजुक आर्थिक युगमे कर्जाक चक्रव्यूहमे फँसैत लोकक दशाक वर्णन भेल अछि। सुनरलालआमनधन काका नामक पात्रक बीच एहि कथाकेँ गढ़ि कथाकार इशारा कएलनि अछि जे आर्थिक युगमे कर्जा लेब तँ आसान अछि, मुदा ओकरा वापस करब कठिन किएक भऽ जाइत अछि। 6. ‘अनदिना’, अनदिना कथा आजुक शिक्षा-व्यवस्थाक दुर्दशाक उद्धघाटित करैत अछि। एक तँ स्कूल सभ शिक्षक विहीन अछि आ जे शिक्षक छथियो, हुनकासँ पढ़ाइ-लिखाइसँ बेसी आन-आन काज लेल जाइत अछि, जाहिसँ पढ़ाइ-लिखाइ रसातलमे जा रहल अछि। चहुतरफा ह्रास एकर उदाहरण थिक। रामकिसुन आ अमरनाथ मास्टर साहैब, एहि दू पात्रक बीच कथाकेँ गढ़ल गेल अछि। रामकिसुन कहलकन्हि- “होउ, अहीं सबहक जुग-जमाना छी, जे काटब से काटि लिअ।” रामकिसुनक ‘काटब’ सुनि अमरनाथ अह्लादित होइत बजला- “ठीके ने अहाँ कहै छी। अपना सभकेँ जे सभसँ छोटका दिन अछि, ओइमे कथीक छुट्टी होइए से बुझल अछि?”, रामकिसुन बजलाह- “नहि।” मास्टर साहैब कहलखिन- “बड़ा दिनक!” 7. ‘अपन काज’, कथाकेँ भोला आ कपलेसर नामक दू पात्रक बीच गढ़ल गेल अछि। अपना एहिठामक खेती-बाड़ीक बदलैत परिदृश्यक जीवन्त वर्णन एहि कथामे कएल गेल अछि। किसान पारम्परिक खेती छोड़ि व्यवसायिक खेती दिसि बढ़ि तँ रहल अछि, बढ़ाओलो जा रहल छैक, नीक बात, मुदा ताहि लेल ज्ञानसँ वंचित रहबाक वा रखबाक स्थिति सेहो व्याप्त अछि। ताहू तरफ कथाकार इशारा कएलनि अछि। 8. ‘दूरी’, कथामे बाबा-आ पोताक बीच वार्तालापसँ पति-पत्नीक बीचक नाजुक सम्बन्धक झलक देखाओल गेल अछि। एहि कथामे ई बताओल गेल अछि जे दू अलग-अलग माहौलमे पलल-बढ़ल पुरुख आ स्त्री बीच एहन दूरी रहितो कोना एकहिठाम रहैत अछि। 9. ‘पुरनी भौजी’, एहि कथामे गामक जिनगीक बीच पोता-पोतीक संग एकटा दादी केर दुलार-मलाड़क वर्णन कथाकार कयने छथि। दादी लेल दस बर्खक पोताक प्रश्न- ‘मीरा माने की भेल, दाय’ सँकथाक अन्त होइत अछि। एहि प्रश्नक माध्यमसँ कथाकार इशारा कएलनि अछि जे कोना ज्ञानक सहजता प्रभावित भेल जा रहल अछि। 10. ‘छुटि गेल’, कथाकेँ सावित्रीआ काशीनाथ नामक पात्रक बीच कथाकार मण्डलजी गढ़ने छथि। एक दिसि तँ छोट बच्चीक बाल-सुलभ वार्त्ता छैक, जे अपन बाबा दिया लोकक बजनाइ अपना बाबाकेँ सुना रहल छै, तँ दोसर दिसि बाबाक आत्मज्ञानक वर्णन अछि जे गरियाएब छोड़ि देलखिन्ह। “अबै छेलौं तँ अहाँ-दे लोक सभ बजै छला जे ओ आब केकरो नै गरियबै छथिन।” …गारिक नाओं सुनि सावित्रीकेँ अनुकूल बनबैत काशीनाथ कहलखिन- “बुच्ची, केतेकेँ गरियाएब। अपने मुँह दुखा जाइए। छोड़ि देलिऐ तँए छुटि गेल।” 11. ‘काल्हि दिन’, कथामे कथाकारस्वयं दुनू परानी पात्र छथि। कथाकार एहि कथाक माध्यमसँई बतेबाक प्रयास कएलनि अछि जे छुद्र कारणेँ दूटा गाम अपनहि भीड़ जाइए, लड़ि जाइए। तकर फलाफल नुकसान होइत छैक, जे कतेको लोककेँ व्यक्तिगत आ सामाजिक स्तरपर सेहो भुगतए पड़ैत छैक। कथाकार पत्नीकेँ कहलखिन- “पैछला सालक भोँट दिन की भेलै से अखनो ने बुझै छी। एतबे देखै छी जे दुनू गामक बीच खूब मारि भेल। दुनू गामक लोक झोरा लऽ लऽ कोट-कचहरी करैए। चाहे जेकर गोटी लाल होइ तइसँ हमरा कोन मतलब। छगुन्तामे पड़ल छी जे मारि केलक कोइ, रोजी-रोटी हमर केना छीना गेल, एकठाम रहितो दुनू गामक आबा-जाही किए बन्न भऽ गेल? अपना खेत-पथार अछि जे अपने आगिए-पानियेँ निमहब!” 12. ‘अप्पन हारि’, कथामे कथाकार स्वयं पति-पत्नीक बीचक सम्बन्ध आ धिया-पुताक प्रति माए-बापक व्यवहारक वर्णन कयने छथि। कथाकार बहुत अल्पहि शब्दमे व्यवहारक पूर्ण विवरण प्रस्तुत कएलनि अछि। 32. ‘कनफुसकी’, कथामे गामक दू व्यक्तिक बीच दोस्ती आ ओहि दोस्तीमे नुकाएल अविश्वासकेँ रेखांकन भेल अछि। पहिल व्यक्ति सोहन नामक नवयुवक आ दोसर स्वयं कथाकार एहि कथाक पात्र रूपमे उपस्थित भेल छथि। जे दोस्तीमे नुकाएल नीक-बेजा केर छोट-छीन आलेख सदृश प्रस्तुत करबामे सफल भेल छथि। 13. ‘समदाही’,कथाक माध्यमसँ कथाकार दूटा पत्नी राखैबला लोकक केहन दुर्दशा होइत छै आ ओ कोना दॉंत तरक जीह जकॉं जीबैत अछि, तकर सटीक वर्णन करैत ओकरापर आक्षेप सेहो कएलनि अछि। 14. ‘मुँहक बात मुहेँमे’,कथामे दू गोट पात्र अछि पहिल- बहिरा माएआ दोसर घटक। कथाकार एहि कथामे एकटा माइक वारदुताकेँ देखेबाक प्रयास कएलनि अछि। संगहि गाम-घरमे अजीब आ अजगुत नाओं रखबाक प्रथा दिसि सेहो ध्यान आकृष्ट करयबाक भरपूर प्रयास कएलनि अछि। 15. ‘कनीटा बात’ कथामे विश्वासघातक परिणामकेँ रेखांकित कएल गेल अछि। कथाकार आ पढ़ुआ काका एहि कथाक पात्र छथि। बहुत कम शब्दमे पैघ गप्प रखबाक कलाक प्रदर्शन सेहो एहि कथामे कथाकार कएलनि अछि। 16. ‘गति-गुद्दा’, कथामे दू गोट पात्र अछि, पहिल सुखदेव आ दोसर खुशीलाल बाबा। ई कथा वर्तमान समयमे जे गामक किसानक दुर्दशाक अछि, तकर छोट-छीन दस्तावेज सदृश अछि। सोलह वर्षपर आएल सुखदेवकेँ अपन हाल-चाल खुशीलाल बाबा सुनबैत छथि- “बौआ, ऐठामक गिरहस्तकेँ कोनो गति-गुद्दा अछि। धार माटि दुइर कऽ देलक! कोसी नहर ठीकेदार खा गेल! मौनसूनी बर्खाकेँ रौदी खा गेल! की कहबह..!” एहि कथामे कथाकार ईहो कहबामे पाछू नहि रहला जे खेती-बाड़ी छोड़ि गामसँ शहर पलायन कए नौकरी-चाकरी करैबला लोक आर्थिक रूपेँ किसानसँ बेसी नीक स्थानपर छथि। 17. ‘बिसवास’, कथाक माध्यमसँ कथाकार सम्बन्धक बीचक माया आ ममताकेँ नीक रेखाचित्र खींचलनि अछि। एकटा डॉक्टर जे पूरा दुनियॉंक रोगीक ऑपरेशन करैत अछिओ अपन सखा-सम्बन्धीक ऑपरेशन नहि कए सकैत अछि, किएक तँ शल्य-क्रियाक दौरान माया आ ममताक कारणे छाती दहलि सकैत छन्हि। ई सन्देह डॉक्टर परमेसरकजेठ भाय भागेसरकेँ भेलनि तँए ओ अपन भाएसँ ऑपरेशन नहि करा दोसर डॉक्टरसँ करबौलनि। पुछलापर कहबो केलखिन- “बौआ, अहाँ साधारण श्रेणीक लोक नइ छी जे किछु कहि देब। दू रूपमे ज्ञान काज करै छइ। गुण आ निर्गुण। अहाँ छोट भाए छी, जखन पेट काटितौं तखन छाती दहैलियो सकै छल। मुदा देखैक जे भार देलौं से अही दुआरे जे अपन जेठ भाय बुझि नीकसँ तकतियान करब।” 18. ‘कचहरिया भाय’, कथामे दू गोट पात्र क्रमश: ‘कचहरिया भाय’ आ ‘नीरस’ नामक व्यक्तिक बीच जीवनक अन्तिम अवस्थामे गप्प-सप्प जीवनानुभवक साझा करबौलनि अछि। किछु लोक मोकदमाबाज होइत छथि से पूरा जिनगी ओहि मोकदमाबाजीमे बरबाद कऽ लैत छथि आ बाल-बच्चा सेहो एहि पाछाँ बरबाद भऽ जाइत छन्हि। जकर उदाहरण कचहरिया भाइकेँ बनबैत कथाकार सचेत कएलनि अछि जे कोनहु चीजक आदति नहि हेबक चाही, आदत पश्चातापक कारण होइछ।अत: आवश्यकता भरि मतलब राखक चाही। 19. ‘गोहाइर’, कथामे ‘भगत’क संग ‘कथाकार’ स्वयं एक पात्र छथि। अनुभवात्मक शैलीमे कथाक चित्र प्रस्तुत कए कथाकार देखौलनि अछि जे अन्ध-विश्वासक जालमे फँसल लोकक दशा केहन अछि। संगहि ओहि जालसँ निकलबाक छटपटाहट ओ संघर्षकेँ सेहो कथाकार रेखांकित कएल मुदा पूरा जतन कएलाक उपरान्तहुँ परिस्थितिवश लोक ओहि जालसँ निकलि नहि पबैत अछि, बल्कि उत्तरोत्तर ओहि जालमे ओझराएले रहि जाइत अछि। 20. ‘पनचैती’, कथामे आमजनक बेथा आ ओहि बेथाक मजा लैत सरकारी तंत्र आ राजनेताक खेलवाड़क नीक चित्रण एहि कथामे भेल अछि। प्रसिद्ध इन्दिरा आवास कार्यक्रममे सरकारी तंत्रक घूस-पेंचक सजीव चित्रण करैत कथाकार सोनेलाल बाबाकबेथाकेँ तखन सोझा अनलनि जखन प्रतिनिधि कहलकैन- “आइक युगमे बिना खुऔने-पीऔने काज चलै छइ?”ताहिपर सोनेलाल बाबा अपनाकेँ निहत्था बुझि बजलाह- “ई बात ओइ दिन किए ने कहलौं जइ दिन हमरो हाथमे भोँट छल।” आशीष अनचिन्हार गजल हम सुंदर कहबौ तों कचनार बुझि लिहें सुंदरतम कहने सिंगरहार बुझि लिहें परदा रहबे करतै संसारक कारण सैंतल कहने तों बेसम्हार बुझि लिहें शब्दसँ पता चलि जाइ छै के कहने छै हम विकास कहबौ तों सरकार बुझि लिहें मतलब अपन अराध्यसँ छै चाहे जे हो हम करेज कहबौ तों दरबार बुझि लिहें भोरका लाली बनि हाथ छूतौ तोरा हम कोंढ़ी बुझबौ तों भकरार बुझि लिहें संन्यास केर मतलब चरम आसक्ति छै हम समाधि कहबौ तों संसार बुझि लिहें आब जरूरी नै छै संबंध निमाहब अपना सन लगितो अनचिन्हार बुझि लिहें सभ पाँतिमे 222-222-222-22 मात्राक्रम अछि। दू टा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि। जगदीश प्रसाद मण्डल बुढ़ापा बुढ़ापाजिनगीकएकअवस्थाछी।जन्मलेलबच्चासमैयकसंगबढ़ैत, बालपन-सँ-ढेरपनआढेरपर-सँ-चेष्टगरहोइतवृद्धावस्थाप्राप्तकरैतदुनियाँसँविदाहोइछैथ।एहेनगति-विधिसिर्फमनुखेटा-कनहिदुनियाँकसभजीवो-जन्तुआचर-अचरवस्तुकसंगसेहोहोइतेअछि।तँएजन्मआमृत्युकेँलोकअकाट्बुझैछैथ।जेकरउदयहोइएओकरअस्तोहोइतेअछि।अकाट्बुझैकमानेईनहिजेसिर्फमानिलेलौं, मानीवानइमानीमुदाकालचक्रकक्रममेसेहेबेकरत।जँसत्यकेँमानिलीतँओज्ञानरूपीसोनाकसुगन्धभेलआजँनहिमानीतँओविचारकदुगन्धविचरणभेल।ईतँभेलजिनगी, मुदाऐजिनगीकबीचजीवनकअनेकोअवस्थाअछि। जीवनकमानेसिर्फदेहेटानहि, देहकभीतरदेहीसँलऽकऽमहिककमेहीधरिकचक्रसेहोअछि।अहीचक्रकेँकियोकृष्णजकाँसुदर्शनधारणकरैतमहाभारतरचैछैथतँकियोजम-जमराजकचक्रमेपड़िजमलोकरचैछैथ। खाएरजेजेरचैछैथमुदादुनियाँतँदुनियाँछीजेसभकथुसँभरल-पुरलअछिए, तखनतँजेजेहेनबिछनिहारसेतेहेनफल-पातलोढ़िजीवनअर्पणकसंगतर्पणकरनिहारसेहोछथिए।अहीदुनियॉंमेहमरोगामअछि।जेकरनाओं‘उचितपुर’छी।उचितपुरमेउचितलालबाबासनवृद्धलोकसेहोछथिए। अस्सीबर्खटपलउचितलालबाबाकदेहकचामसभढीलभऽकेतौ-केतौसमटलोछैनआकेतौ-केतौलटैकियोगेलैनअछि, मुदामनकजेकामनाकप्रवाहछैनओअखनोओहनेछैनजेअपनचढ़ैतजिनगीमेअर्जनकेनेछला। असलमेउचितलालबाबाअपनचढ़ैतजिनगीमेओहनकामनाकधारअपनबाबाकधारमेप्रवाहितहोइतअपनाजीवनकेँभक्तिरूपेपालनकरैतपिताकधारमेप्रवाहितहोइतरहलाजइसँसमैयकप्रभावओतेकनहिझिकझोरकऽसकलैनजेतेअनकादेखमेअबैए। अपनदैनंदिनकजिनगीककालक्रमेउचितलालबाबासमैपरगामकनाच-गानदेखैलेदरबज्जापरबैसलेछलाकिविलासबाबाकअर्ड़ाहैटसुनलैन।ओना, चोट-चाटसँथकुचाएलआकिसाँप-छुछुनरिकछुअललोकजेनाअर्ड़ाहैटमारैएतइसँभिन्नविलासबाबाकअर्ड़ाहैटबुझिपड़लैनमुदाउचितलालबाबास्पष्टनहिबुझिपेलाजेविलासभायकिएरस्तापरआबिअर्ड़ाहैटमारिरहलछैथ? स्पष्टकरैलेउचितलालबाबाकखनोकानठाढ़करैछलातँकखनोकानकपाछूहाथकबान्हबान्हिसुनएचाहैछला।कीबातछिऐजेदिनकअखनपहिलुकेपहर–मानेभिनसुरकेपहर–छीतखनएनाकिएविलासभायअर्ड़ाहैटमारिरहलाअछि..? अपनाजनैतउचितलालबाबाकेतबोसुनैकपरियासकेलैनमुदाविलासबाबाकमुँहकबातबाहरेरहलैनमानेअकानेरहलैन।तैबीचविलासबाबाडेगे-डेगससरैतउचितलालबाबादिसबढ़ैतआबिरहलछला।उचितलालबाबाकदरबज्जासँकनीफरिक्केरहैथ, मुदापहिलुकाअपेक्षाविलासबाबालगमेआबितड़कैतबजला- “चालिलोकअपनेबिगाड़िलेलकअछिआदोखीबनबैएघरकबुढ़-पुरानकेँ..!” विलासबाबाकसभबातउचितलालबाबासुनलैन।किछुबातनीकोबुझिपड़लैनआकिछुअधलोबुझिपड़लैन। परिवारमेजहिनाउचितलालबाबारहैछैथतहिनाविलासोबाबारहैछैथ।जहिनातीनपीढ़ीकपरिवारउचितलालबाबाकछैनतहिनातीनपीढ़ीकपरिवारविलासोबाबाकछैन्हे।उचितलालबाबाअपनाढंगकसम्बन्धपरिवारकजन-जनसँजोड़िनेनेछैथ, जखनकिविलासबाबाकेँसेनहिछैन, जन-जनकमन-मनमेखाधिबनलछैन।अपन-अपनविचारकबीचसभछैन, जइसँपरिवारिककोनोविचारधारापरिवारकछैन्हेनहि। तैबीचविलासबाबाउचितलालबाबाकसोझहामेपहुँचगेलछला।उचितलालबाबाकेँसोझमेदेखतेविलासबाबाओहिनाझपैटकऽबजलाजेनासभदोखउचितेलालबाबाकहोइन- “उचितभाय! घरकसभकहैएजेजहिनामुरहीपेटबिगाड़ैएतहिनाघरकबुड़हा-बुड़हीघरबिगाड़िरहलछैथ, सेएहेनकहबहोइ?” विलासबाबाकबातसुनिजनिजातिजकाँटप-देउचितलालबाबानइबजला।जनिजातिजकाँकमानेभेलजेकोनोबातसुनीवानइसुनी, बुझीवानइबुझीमुदाएकलाड़ैनचालिदेबेकरब।एकटाबातसुनिनेनेओइविचारवाओइकाजकसर्वांगरूपकेँथोड़ेबुझिपाएबजेधॉंइ-देआगूककड़ीजोड़िदेब।यएहविचारउचितलालबाबाकमुँहकेँरोकनेरहैनतँएतारतमकरैतमुँहबन्नेरखनेछला। एकतोड़बाजिविलासबाबाअपनकानठाढ़केनेरहलाजेउचितभायकीकहैछैथ।किछुबजतातखननेकोनोतोड़-जोड़लेलपूरकवाअनपूरकप्रश्नदोहराएब...।मुदासेतँउचितलालबाबाकेँचुपरहनेविलासबाबाकेँभेटियेनेरहलछेलैन।जइसँदेह-हाथतँथरथराइतरहैनमुदामुहसँकिछुबाजिनइरहलछला।तहीकाल, ओहीरस्तेअपनेकमरसाइरहँसुआ-खुरपीठीककरबएजाइतरही। ओना, एकउमेरियारहनेउचितलालबाबाआविलासबाबाकबीचबेसीकालएकठामबैसारोरहैछैन, गपो-सप्पहोइतेरहैछैन।कहियो-कालपोखरिकपानिमेटपबजकाँअसथिरेसँदुनूगोरेबीचकटपानटपिजाइछैथआकहियो-कालरक्का-टोकीकसंगकहा-कहीसेहोहोइतेरहैछैन, जेअपनोबुझलअछिआओहोदुनूगोरेअपन-अपनबुझितेछैथ।खाएर, जेजेबुझैतहोथिवाअपना-अपनामनेकरैतहोथिसेअपन-अपनजनता।जहिनाहुनकरसबहकमानेउचितलालबाबाआविलासबाबाकपरिवारिकजिनगीछैन, मानेतीनपीढ़ीकपरिवारछैन, तहिनानेअपनोचाहैछीजेहमरोएहनेझमटगरपरिवारहुअएजइमेसबहकमुँहमेहजारनामबनलरहत।मानेकियोभैया, कियोबौआ, कियोबाबूतँकियोबेटाइत्यादिजेपरिवारिकसम्बोधनअछितइसँसम्बोधितहोइतरहब। हाथमेहँसुआ-खुरपीनेनेकमरसाइरिकरस्तामेरही, तइबीचमेउचितलालबाबाकघरपड़ैछैनआओहीठामविलासबाबासेहोरहैथ।ओना, विलासबाबाकदेहककँपकँपीकमैत-कमैतथीरभऽगेलरहैनमुदापरशुरामजकाँमनमेआगिधधैकियेरहलछेलैन।जेचेहराकलक्षणसँअपनोबुझिपड़ल।मनभेलजेकनी-कालअँटैककऽदुनूकसूरपतालगालीजेदुनूगोरेकबीचककोनोबातछीआकिआन-तेसरक।मुदालगलेमनबदैलगेल। बदैलईगेलजेदुनूगोरेएकबतरियाछैथ, सभदिनकोनो-ने-कोनोकाजेवाविचारेबाता-बातीकरितेरहैछैथ, तइमेओझराएबनीकनहि।अनेरेअप्पनकाजपछुआजाएत। कहबजेजाबेलोककमुहेँगप-सप्पनइसुनबताबेगाम-घरकहाले-समाचारेकेनाबुझब? आजँसएहनहिबुझबतँअनेरेमनुखबनिदुनियॉंकजगहेकिएछेकनेछिऐ..! मुदालगलेउचितलालबाबाआविलासबाबाकमुँहकपैछलागप-सप्पमोनपड़ि-पड़िजाए।कहूजेजखनदुनूगोरेएकठामबैसगप-सप्पकरताजेअपनासभअट्ठाइसकौरसँबत्तीसकौरखाइछी, तखनमनकसंगपेटकतृप्तिसेहोनेहेबाचाही।तहिनाशौचकसमयवामुहेँ-कानधोइकालकेतेपानिकउपयोगकरी, तइपाछूदिनक-दिनआमहिनाकमहिनादुनूगोरेरग्गरघसकरैतमेहीसँमेहियबैतरहैछैथ।तइसँनीकनेअपनेभेलौंजेकौरे-कौरगनबसँनीककोनोकाजकेँरोकिखाइलेएलौंआखेलापछाइतपुन: ओइकाजमेलागिआगूबढ़बैतचलबकेँसमतुल्यमानैछी।अनेरेकौरे-कौरआकिलोक-किलोकेँजोड़ैकपाछूसमयकिएलगाएब।जखनशौचालयजाइछीवामुहेँ-कानधोइछीतखनशौचकस्थानपवित्रभऽजाएसएहनेभेलउचित, तइलेमगकवालोटाकनप्पा-नप्पीककोनखगता..! मुदासेभेलनहि।उचितलालबाबाशोरपाड़िबजला- “खुशीलाल, कनीएम्हरेअबिहह।” ओना, उचितलालबाबाकशोरपाड़बसुनिमनमेभेल- जखनअपनदरबज्जेपरउचितलालबाबाबैसलछैथतखनजँकोनोकाजेखगलैनतँअपनपरिवारकलोककेँनेशोरपाड़ितैथ, हमराकिएशोरपाड़लैन? फेरभेलजेभरिसकआगूमे–रस्तापर–देखलैनतँएशोरपाड़लैथ।मुदालगलेफेरईहोभेलजेउचितलालबाबाअपनपरिवारकेँएकबुझिअपनएकहिसाबकेलैनआदोसरविलासबाबाकेँबुझलैन।तँएदुनूगोरेकबीचकबातसुनैलेतेहालाबुझिजनुशोरपाड़लैनअछि। एकतँओहुनाउचितलालबाबाकेँआदरकदृष्टियेदेखियेरहलछिऐनतखनजँकोनोबेगरतेशोरपाड़लैनआनइजाआनाकानीकरबसेहोनीकनहियेँहएत।ससरलआगूबढ़ैतलगमेपहुँचबजलौं- “कमरसाइरिकरस्तामेछी, किएशोरपाड़लौं?” हाथकइशारासँसेहोआमुहोँसँउचितलालबाबाबजला- “बौआ, देखतेछहकजेजेहनेबुढ़विलासभायछैथतेहनेअपनोछी, दुनूगोरेपाकलेआमभेलौं, कखनछीआकखनटन-देचलिजाएब..! तूँनवतुरियाछह, अखनबहुतदिनजीबह।जँकहियोदुनूगोरेकबीचक–मानेहमराआविलासभाइकबीचक–गपउठततेकरसाक्षी-गवाहतोहींनेहेबह।” उचितलालबाबाकबातसुनिमनमेभेलजेकहिऐन- ‘तेहेनजुग-जमानाभऽगेलजेकेकरोगवाहआकिजमानतदारबनबजानकेँजोखिममेदेबभऽजाइए।’मुदाजँकियोकेकरोगवाहीवाजमानतदारनहिबनततखनदुनियॉंकेनाचलत! आकिदुनियॉंकगतिविधियेकेनाचलतै? मुदासेसभनहि, सभकथुकअपन-अपनजगहोहोइएआस्थानोतँहोइतेअछि।जहियेसँज्ञान-प्राणभेलतहियेसँउचितलालबाबाकेँजनैछिऐन।जखनपिताकअमलदारीमेछलातखनअप्पनजन्मोनेभेलछल, मुदाजखनअपनेपिताभेलातहियासँतँजनितेछिऐन, जेकोनरूपअप्पनपरिवारकेँ–ऐठामपरिवारकमानेलोककसंगपरिवारकक्रिया-कलापसँसेहोअछि–खत्तीदऽदऽउचितलालबाबाठाढ़केनेछैथ।जइसँपरिवारककाजो–परिवारकगति-विधिसँ–आपरिवारजनकबीचकेतेसुन्दरसम्बन्धबनिजीवितछैन।मुदासेतँविलासबाबाकेँछैननहि।दुनूगौंआँछिआ, दुनूकेँजनैछिऐन।तइबीचकबातछी, तँएकनीजबदाहतँहेबेकरत।ओना, मननिच्चॉंमुहेँसेहोससैररहलछलमुदाजहिनागीतमेलोकगबैछै- ‘जीवननयामिलेगाअन्तिमचितामेजलके’, तहिनाकेतौसँहूबाआएल।हूबाअबितेहुबियाइतबजलौं- “बाबा! अहाँसभसँहमकिकोनोबाहरछीजेसंगनइपूरब?” हमराबातसँउचितलालबाबाकेँकेतेकहूबाभेलैनआकिविलासेबाबाकेँकेहेनहूबाजगलैनसेतँओदुनूगोरेअप्पन-अप्पनमनेअपने-अपनेजनता, मुदाबातकेँआगूबढ़बैतउचितलालबाबाबिच्चेमेबजला- “विलासभाय, तामस-पीतमेजेएतेकालबजलौं, तेकराआबछोड़िदियौ।असलबातकीछीसेबाजू।ऐउमेरमेएनाआगि-अङ्गोराहएब, सेहोतँनीकनहियेँनेहएत।” उचितलालबाबाकशान्त्वनासँआकिपरिवारमेअप्पनफुलहररूपदेखएकाएकविलासबाबाशान्तभेलाआकिकिएशान्तभेलासेतँवएहजनता।मुदाऊपरसँकेतबोमनकेँबुझाशान्तिकेलैनतैयोबजैकक्रममेबजागेलैन- “उचितभाय, कीकहब! घरकलोकतेहेनचालिचलैनपकैड़अगराहीलगबैतरहैएजेएकोक्षणएकठामरहैकमननइहोइए।मुदाफेरसोचैछीजेअप्पनसौंसेजिनगीकबनौलपरिवारछी, तखनजँअपनेछोड़िदी, सेहोकेहेनहएत।” ओना, उचितलालबाबासंगीबुझिआकिएकउमेरियाबुझिहूँहकारीभरितेरहलखिन, मुदाअप्पनमनकछमछाएलगल।भाय! जेकोनोपरिवारकओझरौठकेँसोझरौठमेबदलबओतेकअसानअछिजेलगलेकिछुबाजिकऽपूरादेब।जहिनाहेमोपैथिकइलाजमेबेकतीकवर्त्तमानकसंगओकरवंशकइतिहासपरसेहोनजैरदेलजाइएतहिनानेपरिवारोमेबेकतीगत-समाजिकओझरीसभअछि।बजलौं- “बाबा, अहाँपहिनेअप्पनसभबातबाजिजाउतखनजँसमयबँचततँलगलेविचारकऽलेबआजँनइबँचततँसमयबनारखिलेब।नेउचितेलालबाबाकेतौपड़ाएलजाइछैथआनेअहींकेतौजारहलछी।हम्मरमोजरेकीअछि, एकहाकदेबकिदौड़लेचलिआएब।” ओना, विलासबाबाकमनकेँबुझबैतबाजलछेलौंमुदापरिवारमेकिछुएहेनबातकहिकऽनिकललछलाआकिपरिवारे-लोककिछुकहिदेनेछेलैनसेतँवएहजनतामुदासमैयकनाओंसुनिभड़कैतबजला- “एहेनपरिवारमेदोहराकऽथूकोफेकएनइजाएब।” हमराहरल-ने-फुरललगलेस्वरेबजलौं- “अप्पनपरिवारजखनथूकोफेकै-जोकरनइरहलतइमेदोखकेकरतकैछिऐ?” हमरबातकचोटजेनाविलासबाबाकेँलगलैनतहिनाठमकला।विलासबाबाकेँठमैकतेउचितलालबाबाचरियबैतकहलखिन- “भाय, कीबजैछेलौंजेलोक?” उचितलालबाबाकबातसुनिविलासबाबाचोटेपाछूमुहेँससैरबजला- “परिवारकलोकअपनचालिअपनेबिगाड़िलेलकअछिआजखनकोनोअवघातहोइछैतँहमरदोखलगबैतअपनेनिरदोखभऽजाइए।कहूईउचितभेल?” विलासबाबाकबातसुनिउचितलालबाबा‘हँ-हूँ’किछुनेबाजिरहलछला, मुदाअपनाभेलजेजखनविचारकउत्तर-प्रत्युत्तरनहिहएततखनविचारकअन्तकेनाहएत? बजलौं- “विलासबाबा! लोहाकसिक्कैड़हुअकिफुलकमाला, जहिनाएकएककजोड़भेलरहैएतहिनापरिवारोकबीचनेअछि।” हमरबातसुनिविलासबाबाकमनजेनानिच्चॉंमुहेँहहरलैनतहिनाबजला- “खुशीलाल, तोहरबातनीकजकाँनहिबुझिसकलौं, कनीदोहराकऽकहक।” विलासबाबाकमुँहकबात‘दोहराकऽकहक’सुनितेमनमेजवाबकजड़िभेटएलगल।बजलौं- “बाबा, एकटाबातअपनेमुहेँबाजूजेकोनोकाजवाकोनोविचारकबीचजखनपरिवारककिनकोसँतल-वितलहोइए, तखनअपनेएकवृद्धशब्दकप्रयोग, मानेश्रेष्ठजनकरूपमेदोसराकबातवाकाजकलूरिकेँमहत्दइछिऐआकिअपनजेटेढ़ो-टूढ़विचाररहलतहीपरअडिगभऽजाइछिऐ?” हमरबातसुनिविलासबाबाथकमकागेला, मुदाउचितलालबाबाजेनाबुझिगेलातहिनामुस्कीदिअलगला।ओना, विलासबाबाकइच्छारहैनजेउचितलालभायपक्षमेबाजैथ, जइसँअपनबँचाउहएत।मुदाउचितलालबाबाकमनमेरहैनजेजाबेअप्पनजवाबदेहीकबातलोकअपनेमुहेँनहिबाजतताबेमुहाँ-मुहींदोखकेनाबुझत? ओना, परिवारमेकोनोबच्चाएहेनमुँहसच्चभऽजाएजेमाए-बापवापरिवारककोनोआनेजनलगबजबेकमकरैए, ओकरपरिणामकेहेनभेटैए? जखनकिगप-सप्पकक्रममेओकरासज्जनोमेमहा-सज्जनबुझलजाइछैमुदापरिणामविपरीतहोइकसम्भावनाकीनइबनलरहैछै..? एकाएकमनमेबिहाड़िजकाँहूहूआकऽविचारआएल।विचारआएलजेजखनदुनूगोरेचलनपियारेछैथतखनबीचमेअपनेओहनघटियाछीजेघटिजाएब।जहिनादुनूगोरेमुँहबन्नरखनेछैथतहिनाअपनोकिएनेराखी।सएहकेलौं।चुप्पा-चुप्पीपसैरगेल। थोड़ेकालकपछाइत, अपनचुप्पीतोड़ैतउचितलालबाबाबजला- “विलासभाय, आबअपनासबहकऔरुदेकेतेकअछिजेअनेरेमरैयोबेरजस-अजसलेब।छोड़ूतामस-पीड़ाकेँ।केतौआनठामजाएबजेकोनोतरहकलाज-शरमहएत।अप्पनघरछीअप्पनपरिवारछी, जखनसभअपनेछीतखनअनेरेमान-रोखमनमेकथी-लेराखब।हँ! एतेभऽसकैएजेअखनतामसेमनपीड़ाएलअछि, अखनघरकअन्न-तीमनमेसुआदनइपाएब, जइसँभुखलेरहिजाएब।सेनहितँअखनएतैरहिजाउ, सॉंझदबाकऽअपनाऐठामचलिजाएब।” उचितलालबाबाकविचारअपनोनीकलागल, लगलेहाथविलासबाबाकेँहमहूँकहलयैन- “बाबा! सॉंझूपहरहमहूँआएब, चलबअहाँकेँघरपरपहुँचादेब।” शब्दसंख्या : २१२२, तिथि : १०नवम्बर२०१९ Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव Join Videha googlegroups विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 111 ८) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 १०) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १३) विदेह सम्मान विशेषाक- २००म अक १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १४) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आमंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी VIDEHA 209th issue विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of original work.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् (c)२००४-२०२०. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2020 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA
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