VIDEHA — Issue 294 / अंक २९४

Publication: VIDEHA · Issue: 294
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विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' २९४ म अंक १५ मार्च २०२० (वर्ष १३ मास १४७ अंक २९४) 'विदेह' २९४ म अंक १५ मार्च २०२० (वर्ष १३ मास १४७ अंक २९४) ऐ अंकमे अछि:- १. प्रदीप पुष्पक दू टा गजल २. उमेश मण्डल-- जगदीशप्रसादमण्डलजीक‘सुभिमानीजिनगी’ ३. आशीष अनचिन्हारक एकटा गजल ४. जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा- काजकरोप प्रदीप पुष्प गजल- १ मूँह फेर लोक जहन जाए लगलै छै भाषण बेकार बुझाए लगलै घर मन्दिरक सटले बना लेलक जे सदिखन ‘अच्छे दिन’सपनाए लगलै रोग सेहो सिखलक राजनीति आब बैद्य बदलल तँचोट दुखाए लगलै पुल बनेबाक जहन भेल ओरियान नदी देलक धोखा सुखाए लगलै ओना तँहेमनि धरि निकम्मा छल ओ खादी पहिरि ठीके कमाए लगलै (2222222222- बहरे-मीर) गजल- २ भेँट ओ अन्हारमे इयाद छौ ने गप्प ओ पूआरमे इयाद छौ ने कोन ईस्वी कोन साल कोन मास हम तूँ एलियै देखारमे इयाद छौ ने बन्द भेलौ आन जान आब सगरो गार्जनक फटकारमे इयाद छौ ने कऽबहाना मन्दिरक अबै छलेँ तूँ नवसँ नव सिंगारमे इयाद छौ ने ठाढ़ तोहर बाट ताकिते रहल के साँझ धरि पछुआड़मे इयाद छौ ने (212221212122सभ पाँतिमे) उमेश मण्डल जगदीशप्रसादमण्डलजीक‘सुभिमानीजिनगी’ ‘सुभिमानीजिनगी’श्रीजगदीशप्रसादमण्डलजीकरचितकथाकेरपोथीकनाओंथिक।एहिपोथीमेकुलआठगोटकथासंकलितअछि।सभकथामेमनुक्खकजीवनमेहोइतनिरन्तर-परिवर्तकेँरेखांकितकरैतओकरयथार्थकेँसमेटिओहिमेव्यवहारिकदृष्टिएनीक-बेजाकेँसेहोबिलगाओलगेलअछि।तथाओहिपरिवर्तितस्वरूपमेआधुनिकपरिवर्तनकआवश्यकताकेँनिरूपितकरैतस्वाभिमानीजीवनकव्यवहारिकपक्षकेँउजागरकएलगेलअछि।संग्रहकसभकथाकसार-संक्षेपक्रमश: निम्नांकितअछि।मुदाताहिसँपूर्वसंग्रहकपहिलकथा- ‘केकरा-लेकेलौं’ सँलऽकऽअन्तिमकथा‘आशापरपानिफेरागेल’धरिकलेखन-क्रमओलेखन-तिथिधरिकविवरणपरदृष्टिपातकएलजाए- 1. केकरा-लेकेलौं- शब्दसंख्या : 2649, तिथि : 23 जनवरी 2018 2. स्वाभिमानीजिनगी- शब्दसंख्या : 2767, तिथि : 28 जनवरी 2018 3. बाबाकबाग-बगिया- शब्दसंख्या : 3089, तिथि : 3 फरवरी 2018 4. अब-तब- शब्दसंख्या : 2076, तिथि : 7 फरवरी 2018 5. अगिलह- शब्दसंख्या : 2472, तिथि : 11 फरवरी 2018 6. कुकुरपन- शब्दसंख्या : 2229, तिथि : 28 फरवरी 2018 7. हेराएलजिनगी- शब्दसंख्या : 3107, तिथि : 5 मार्च 2018 8. आशापरपानिफेरगेल- शब्दसंख्या : 2447, तिथि : 9 मार्च 2018 रचनाकरबाकसन्दर्भमेएकमान्यताअछिजेकोनहुँरचनाकबिम्बअनायासअबैछ।अत: ओनियमितओनिर्धारितसमयककार्यनहिथिक।मुदाप्रस्तुतरचनाकनियमितलेखनसँउपरोक्तमान्यताकमजोरबुझनाजाइतअछि।प्रस्तुतपोथी 23 जनवरी 2018 सँ 9 मार्च 2018 धरिकबीचलिखलगेलअछि।नियमितलेखन, ताहूमेकथाविधाकलेखनसँसद्य: ओहनमान्यतापरप्रश्नचिह्नितहोइतअछि।हँ, ‘विषय-बिम्बकखनहुँ-कखनहुँआकहियोकालअबैतछैक’, एहेनमान्यताव्यक्तिगतभऽसकैछ।ईचीजरचनाकारनिर्भरकएसकैतअछि।उपरोक्तसभकथाकेरसार-संक्षेपनिम्नांकितअछि- ‘केकरा-लेकेलौं’, जाड़कमासमेघूरतरबैसलव्यक्तिसबहकबीचआपसीवार्त्तालापसँएहिकथाकप्रारम्भहोइतअछि।ओहिवार्त्तालापमेक्रमश: गामक-समाजकसंगमौसमकचर्चाहोइतअछि, ताहिक्रममेभोगीलालभाइकगप्पसेहोउठैतछन्हि।भोगीलालभायआयुर्वेदिकडॉक्टरछथि।स्वयंआयुर्वेदिकडॉक्टररहलोपरान्तभोगीलालभायअपनस्वास्थ्यनीकनहिराखिपबैतछथि।ततबेनहि, जहिनाअपनस्वास्थ्यकेँभोलीलालभायठीकनहिराखिपौलन्हितहिनाहुनकपरिवारसेहोछिड़ियागेलन्हि।ओना, आजुकपरिवेशमेअधिकतरपरिवारकसंरचनाबिगड़लेबुझिपड़ैछ।माए-बापकतौ, बेटापुतोहुकतौ...। भोगीलालभाइकभरल-पुरलपरिवार, सभतरहेँसम्पन्नपरिवार, मानेबेटा-पुतोहु, बेटी-जमाएरहितहुआइहुनकसेवालेललगमेएकमात्रपत्नीटाछथिन।भोगीलालभाइकपत्नी- सुमित्रा, अन्तधरिसहचारिणीरहैतछथिन।एहनास्थितिकेँदेखैतकिसुनआसिंहेश्वरभोगीलालभाइकमृत्युकेँनीकमानैतछथिन।सिंहेश्वरभायकिसुनकेँकहलखिन- “किसुन, जेनाभोगीभायआयुर्वेदशास्त्रपढ़नेछलातेनाअपनआयुकेँसंयमितनहिरखिसकलाह!” सिंहेश्वरभाइक‘च्यू-च्यू’सुनिलेखककहलकनि- “आयुर्वेदकीकोनोमुखौटीशिक्षापद्धतिछी, ओतँगीताजकाँजिनगीकक्रियाकपद्धतिछीकिने।तैठाम..?” बिच्चेमेसिंहेश्वरभायबजलाह- “जिनगीकपद्धतितँजीता-जिनगी-लेअछि, आबओकराछोड़ह।जहिनासमाजकनापी-जोखीओकरजिनगीकबेवहारमेअछितहिनानेपरिवारिकजिनगीमेबेकतीकसेहोअछि।तइमेभोगीभायकेँकोताहीभेलैन।” वास्तवमेप्रत्येकव्यक्तिकेँअपनसद्गतिलेलजीवनकक्रिया-कलापपरनजरिदेबआवश्यक, जौंक्रिया-कलापकेँठीकनहिकएलजाएततँजीवनमेओहिनाहूसआओतजहिनाभोगीलालभाइकजीवनमेएलन्हि। ‘सुभिमानीजिनगी’कथामेश्यामाएकटाएहनकिशोरअछिजकरामेकिन्नरहेबाकलक्षणप्रकटहोइतछैक।ओकरखेल-कूद, पसन्द-नापसन्दअपनाउमेरकआनबच्चाजकाँनहिरहनेसमाजकलोकबुझएलगैतअछि।समाजओकराकिन्नरपरिवारमेसौंपिदेबयचाहैए।परम्पराकप्रभावसँश्यामाकमाएसेहोओकरविरोधमेरहैतछथिन।मुदाओकरपिता- जीवनकाका, श्यामाकेँअपनापैरपरठाढ़करबायोग्यशिक्षादेबाकआआत्मनिर्भरबनेबाकप्रणलैतबजैतछथि- “परिवारआकिसमाजएकदिसजुटिआगूमेकिएनेठाढ़हुअएमुदाएक्कोइंचपाछूअपनविचारसँनइघुसकब।” पतिकप्रणदेखिअन्तत: मंगलीकाकीसेहोश्यामाकसंगतँभऽजाइतछथिमुदाहुनकमोनझुझुआइतेरहैतछन्हि।कारणसमाजकबान्ह-छान्हकेँजेदेखैतआबिरहलछथि।स्थिति-परिस्थितिकेँदेखैतजीवनकाकाकेँएकाकएकपुरुषार्थजगलन्हिआरामायण, महाभारतकचर्चाकरैतबजलाह- “जेसमस्याअपनापरिवारमेउपस्थितभऽगेलअछिओखालीअपनेपरिवार-टामेभेलआकिआइयेभेलअछिआपहिनेनइभेलहएतसेकेनाबुझैछिऐ? सभदिनहोइतआबिरहलअछिआआगूओहोइतरहत।महादेवकेँसेहोअर्द्धनारीश्वरकहलजाइछैन।जखनेअर्द्धनारीश्वरतखनेनेसन्तानविहीन! कार्तिकआगणेशतँतखनभेलैनजखनमहादेवआपार्वतीदुनूदूछला।मुदाजखनदुनूसटिएकभेलातखनकोनोसन्ताननइनेभेलैन।तँएकीहुनकादेववंशसँकियोहटादेलकैनआकिहटादेतैन?” मुदातैयोमंगलीकाकीकमोनजेहनमजगूतीएबकचाहीसेनहिआबिपबैतछन्हि।ताहिपरपत्नीकेँबुझबैतजीवनकाकाकहलखिन- “ओसभ–जेठाढ़छलसे–केसभछल?जेपुरुख-नारीकबीचकअछि।जेकराशखा-सन्ताननइहएत।जखनरामचन्द्रजी, लक्ष्मणआसीताकसंगघुमिकऽअयोध्याकआड़िपरपहुँचलातखनवएहसभदुनूभाँइकगट्टापकैड़कहलकैनजे‘अहाँहमराकिएनेविदाइदेलौं? जइआशामेअहींजकाँचौदहबर्खहमहूँसभटपलाखेलौं?” उपरोक्तबातसुनिमंगलीकाकीकमनआशरीरजेनाशान्तभऽगेलनि, सहमतभेलीह।रणभूमिकसंगीपेबजीवनकाकाउत्साहितहोइतबजलाह- “श्यामाहमरसन्तानछी।अपनाजीबैतओकराभीखमाँगैतदेखब, कीओहनलाजकविचारलोकअपनेनइकरत।दुनियाँएकदिसभऽजाए, मुदा...।जाबेधरिश्यामापढ़एचाहत, समांगबुझिसहयोगदेबइ।जहियाओपढ़ाइछोड़ततहियाअपनाआँखिकसोझमेओकरामनोनुकूलजीबैकसाधनबनादेबइ।अपनापैरपरठाढ़कऽसमाजकओहनमनुखबनादेबैजेअपनश्रमसँअपनसुभिमानीजिनगीबनाजीबतआओकररक्षाकरैतरहत।” समाजमेकिन्नरकप्रतिबनलरूढ़िवादीसोचकेँएहिकथामेदेखारकरैतभेलअछिआओहिसोचकेँखण्डितकएएकआदर्शपिताककर्त्तव्यकेँसेहोदेखाओलगेलअछि। ‘बाबाकबाग-बगिया’, एकटाभूमिहीननिर्धनअनाथबालककेरकथाथिक।बालकगोबरधनदासगाम-समाजसँअलगभऽगोकुलदासकस्थानमेरहबाकलेलहुनकालगपहुँचअपनबातकहलकन्हिजेगुरु-गोसाँइ, अपनेकदरबारमेहमचौकीदारबनिरहएचाहैतछी। अपनानियमानुसारगोकुलदासकहलकन्हि- “बेरागी! अखनअहाँकबालपनअछि।तँए, पुरनिकपातपरकपानिजहिनागोलीबनि-बनिगुड़कैतरहैएआजेतेकालपातपररहलतेतबेकालओअपनस्वच्छरूपरहिचमकैतरहैएमुदापातसँनिच्चाँहोइतेओकराधरतीसोंखिनिपत्ताकऽदइछै, तहिनाअखनअहाँकअवस्थाअछि।तँएअपननियमकेँजँअपनेरक्षाकरैकभारउठाबीतखनकिछुभऽसकैए।” मुड़ीडोलबैतगोबरधनस्वीकारकरैतअछिजेस्थानकजेनियमहएततकराहमसोल्होअनाअंगीकारकरब।गोकुलदासपुछलथिन- “बाउ, दुनियाँमेबहुतलोकोछैथआबहुतरंगकव्रतोअछि!तँए...।” बालमनगोबरधनदासव्रतकेँनहिबुझिअर्थपुछैतअछि, ताहिपरमहात्माजीव्रतकअर्थबतबैतछथिन- “कियोझूठनइबजैकव्रतलइछैथतँकियोझूठेकठीकेदारीकरैछैथ, कियोचोरिकेँअधलाबुझिपरहेजकरैकव्रतलइछैथआकियोचोरिकेँखनदानीपेशाबुझिपरम्पराकनिर्वाहसेहोकरैछैथ।” विभिन्नतरहकसोच-विचारकरैतगोबरधनदासअन्तत: गोकूलदासकचेलाबनिअपनजीवनबिताबएलगैतअछि।समयबीतैतगेल।गोकुलदासकमृत्युकपछातिओइठकुरबाड़ीकमुख्यकर्त्तासेहोबनिजाइतअछि।अपनजीवनकअन्तिमपड़ावदेखिगोबरधनदास 10 कट्ठामेअपनपसिनकरंग-बिरंगकफल-फूलकगाछलगबैतअछि।धीरे-धीरेओगाछसभबोनबनिजाइछ।आब, जखनगोबरधनदासअपनेजीवितनहिछथि, तखनहुनकलगाओलगाछ-वृक्षसुखिरहलछन्हि। ‘अब-तब’, कथामेविभिन्नतरहकतीमन-तरकारीकबदलैतसामाजिकव्यवहारपरआपससँविचारहोइतअछि।भोज-भातमेअदौरीकमेटाइतजिनगीसँसमाजमे (तरकारीकसमाजमे) दुखकमाहौलअछि।विभिन्नतरहकतरकारीकनामबलापात्रसबहकबीचवर्त्तमानसामाजिकस्थिति-परिस्थितकेँचर्चाहोइतअछि।आपसमेविचारहोइतअछि।पछातिसभकियोअपन-अपनभूमिकाकेँचिह्नितकरैए।ताहिबीचआरो-आरोतरकारीसभकउपस्थितिहोइतअछि।गप-गपचलबाककारणेँपताचलैएजेअदौड़ीबाबाअब-तममेछथि, मानेअदौड़ीबाबामरणासन्नछथि। खान-पीनकजेपरम्पराअछिताहिमेअदौड़ीबाबाप्रमुखअंगछथि।कोनहुँभोज-भातबिनुअदौड़ीकसम्पन्ननहिहोइतछल।मुदाआजुकसमयमेअदौड़ीकप्रासंगिकताखत्मभेलजारहलछैक।आबलोकओकरमहत्वकमकएनेजारहलअछि।बैगनलालकसंगअदौड़ीबाबाकपुरानयारीरहलछन्हि! मुदाआबओहोखत्महेबाककगारपरअछि। ‘अगिलह’, कथामेपक्षधरकाकाअपननोकरीसँसेवानिवृतभऽखेती-बाड़ीआफल-फूलकदेख-रेखकरैतछथि।मुनीलालहुनकपिसियौतभायअछि।मुनीलालअपनपत्नीकमृत्युकपश्चातपचपनवर्षकअवस्थामेदोसरविवाहकरयचाहैतअछि।पक्षधरकाकाकेँईबातअनसोहॉंतलगैतछन्हि।अनसोहाँतएहिदुआरेलगलन्हिजेमुनीलालकेँदूटाबेटाछैन, दुनूपढ़ि-लिखिपरिवारकसंगबाहररहैएआपैंतीसवर्षकजेठबेटीविधवाभऽअपनेऐठामरहैतछैक।जेकरासखा-सन्ताननहिछैक।ओना, बेटीकेँवैधव्यभेलापछातिमुनीलालअपनोआगामो-समाजककतेकोव्यक्तिसावित्रीकेँदोसरविवाहकरयलेलकहबोकेलखिनमुदाओएक्केहिठामसभकेँकहलकन्हि- “सृष्टि-कर्ताजेभोगउठालेलैन, तइभोगकपाछूआबनइपड़ब।दुनियाँबड़ीटाअछि।भीख-दुखमांगिगुजरकरबमुदादोसरपुरुखकमुँहनइदेखब।” एहिनास्थितिमे, मुनीलालकजिद्दपक्षधरकाकाकेँअगिलहजकाँबुझिपड़ैतछन्हि।पक्षधरकाकामुनीलालकेँओकरविधवाबेटीसावित्रीकउदाहरणदैतएकपिताककर्तव्यपरविचारकरबाकलेलआग्रहकरैतछथि। ‘कुकुरपन’, कथामेकहलगेलअछिजेकोनहुँकाजलेलपहिनेस्वयंपात्रहोमएपड़ैतछैकतखनलोकओहिकाजकयोग्यहोइतछथि।कथाकमुख्यपात्रअपनाबुझनेसमाजकपंचबनबाकउपक्रमकरैतछथि।हुनकामनमेछन्हिजेहमसमाजमेप्रतिष्ठाबनाबी, लोकहमरापंचैतीमेपंचमानय, इज्जतकरए।मुदास्वयंअपनपत्नीकपक्षलैतएकटाझगड़ामेगारा-गारीकरएलगैतछथि।जखनकिझगड़ाककारणबुझलोनेरहैतछन्हि।पछातिएहिबातकअखिहासभेलापरबड़ीचालाकीसँअपनाऊपरपंचैतीबैसबाकनौबतकेँखत्मकरैतछथि..! अन्तत: सोहनभाइकमुहसँईसुनएपड़ैतछन्हि- “भनेपनचैतीटरिगेल।मुदातोरासंगभैयारीकसम्बन्धअछितँएकहिदइछिअजेएहेन-एहेनकुकुरपनचालिछोड़ह।नहितँसमाजमेकहियोमुँहउठाकऽताकलनइहेतह।” ‘हेराएलजिनगी’, एकओहनलोकककथाथिकजेनियमितरूपेअपनकार्यकेँसम्पादनकरैतअपनजिनगीसँबहुतउम्मीदतँरखैतछथि, मुदातेहनभऽनहिपबैतछन्हि।हीराननसुभ्यस्तकिसानकपढ़ुआबेटाछथि।हीराननबी.एस-सी. धरिपढ़िपबैतछथिमुदाकोनहुँनोकरीनहिभऽपबैतछन्हि।देखिते-देखितेहुनकबेटा-बेटीसेहोबालिगभऽजाइतछन्हि।अपनपैतृक, साढ़ेतीनबीघाजमीनकबदौलतिहीराननअपनबेटीककन्यादानकरबआबेटाकेँएम.बी.ए. कराएबअसम्भवलगैतछन्हि।हीराननकेँअपनजिनगीहेराएलसनलगैतछन्हि। ‘आशापरपानिफेरगेल’, एहिकथामेललितनामकपढ़ल-लिखलकिसानचर्चभेलअछि।ललितकपरिचयकथाकारकशब्दमे- “बी.ए. पासकेलापछाइतललितभायकिसानीजीवनधारणकेलाह।ओना, आन-आनजकाँललितभाइकमनमेकहियोनोकरी-चाकरीनइएलैन, जइसँपढ़ैकक्रममेकहियोमनमेईनइजगलैनजेधुरफन्दाचालिपकैड़नीकरिजल्टपाबी।धुरफन्दाचालिभेल- नोकरीकहिसाबेपैरबी-पैगामसँपरीक्षाकरिजल्टकजोगारबैसाएब।ललितभाइकमनमेबच्चेसँएहेनविचारजमिकऽघरकएलेलकैनजेज्ञान-लेपढ़ैछी।ओना, सभज्ञाने-लेपढ़बोवालिखबोकरैछैथ।तँए, ललितभायनेकहियोट्यूशनकभीरगेलाआनेनोट-चन्द्रिकाकभाँजमेपड़ला।सभदिनमौलिककिताबकीनिपढ़लैन।” ललितउच्चशिक्षाप्राप्तकएकिसानी-जीवनओकिसानी-कर्मसँप्रेमकरैतमनलगाकऽखेती-बाड़ीकरैतछथि।खेतीकरबकेँललितअपनधर्मबुझैतछथि।बेसीआमदनीप्राप्तकरबालेलएहिबेरिसूर्जमुखीकखेतीकरैतछथि।समुच्चाखेतमेसूर्यमुखीलहलहाउठैतअछि।मुदाचिड़ै-चुनमुनीकप्रकोपततेकबढ़िजाइतअछिजेफसिलबरबादभऽजाइतअछि।ललितचिन्तितभऽरहयलगैतछथि।हुनकाअपनाभाग्यपरकतेकोप्रश्नउठयलगैतछन्हि। मिथिलाककिसानकेँभाग्यपरनिर्भररहबाकप्रमाणएहिरेखांकितभेलकरैतअछि। उमेशमण्डल शोधार्थी, बी.आर.ए.बी.यू. मुजफ्फरपुर आशीष अनचिन्हार गजल आँखि हमर दास हुनक अदना नै खास हुनक आब खरिहान संगे छै पूरा चास हुनक धेलकनि हाट बजार मोश्किल उगरास हुनक ऐठाँ दुइए टा सच आस हमर आस हुनक एना केने कहियो नै हेतनि बास हुनक सभ पाँतिमे 22-22-22 मात्राक्रम अछि। दू टा अलग अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि। जगदीश प्रसाद मण्डल काजकरोप जिनगीकतीनहीसउमेरमेदूहीसजखनबीतचुकलतखनमनमेकनीहोशआएल।होशोओहिनानइआएल, आएलएनाजेजहिनापहाड़कऊपरसँओंघराएलकोनोपाथरकटुकड़ाधरतीछुबैसँपहिनहिकोनोगाछकजड़िमेअड़ैकजाइएजइसँनिच्चाँगुड़कबतँबन्नभऽजाइछैमुदाअपनस्थानसँतेतेकनिच्चॉंगुड़ैकगेलरहैएजेअपनरंग-रूपबेदरंगभऽगेलरहैछइ।होशअबितेजहिनादुरघटनासँअचेतदुरचरीकेँहोशअबैछैआअपनदशा-दिशादेखअपनअधमरूशक्तिकेँअपनेजगबएलगैए; तहिनाअपनहोशकेँजगबएलगलौं।होशकेँजगितेबाबामोनपड़ला।ओना, जेतेआयुपूर्वजिनगीकहोइएतइमेएकचौथाइजिनगीबॉंकीएरहैन; तइबिच्चेमेबाबामरिगेला, मुदासेमुइलादुरघटनामे।बसकयात्राकरैतरहैथ, धारकपुलपरजखनबसचढ़लकिपुलेटुटिगेलैआबसधारमेखसिपड़ल।बरसातीधार, कोणे-कानीभरलेछल, तीनदिनकपछाइतबसकेँऊपरकएलगेलजइमेबाबोरहैथ।बाबामोनपड़ैककारणईभेलजेजहिनामृत्युकरस्तापकड़निहारमृत्युभुवनदिसबढ़ैतजाइएजइसँमृत्युकदेवी-देवताकेँदर्शनढहल-ढुहलमन्दिरसभमेहुअलगैछैनतहिनाबाबासेहोमोनपड़ला।बाबामोनपड़ितेजेनामनचनकल।चनकलईजेजेतेकदिनबाबाकऊपरमेपरिवारकभाररहलैनतेतेकदिनकजिनगी। पढ़ल-लिखल–स्कूलीशिक्षा–कमरहितोबाबाबेवहारिकजिनगीमेसम्पन्नछला।मोनपड़ितेदोसरमनधक्कादेलकजेपरिवारतँवएहछी, बीचमेपिताजीकजेपरिवारिकजीवनरहलैनतइमेबाबाकजीवनककिछुजीवित-अंशरहबोकेलैनआकिछुनष्टोभेलैन।तहिनाकिछुमृत्यु-अंशसेहोपरिवारमेघुसल।घुसबोसोभाविकछेलैहे, किएतँसमाजिकपरिवेशमेसमाजकप्रभावबाल-बोधसँलऽकऽसियान-चेतनपरपड़ितेअछि।तैसंगईहोछेलैनजेखानदानीबन्धन–बान्ह–सेहोजीवनकेँघेरनहिछेलैन।खानदानीबन्धनकमानेभेलजेआइधरिकजेअपनाऐठामक (दुनियॉंकनहि) जीवनरहलओपराधीनरहलजइसँस्वतंत्र-सोच, स्वतंत्रउद्यमआस्वतंत्रविचारव्यक्तकरैकअवसरेनहिभेटलअछि।सीमाबन्धजीवनकबीचलोकअपनजीवनधारणकरैतआबिरहलछैथ। देशकआजादीकझण्डालालकिलापरलहराइतेदेशकमाटि-पानिसँलऽकऽमनुखकसोच-विचारकसंगचालि-ढालिमेसेहोलहराउठल।जइसँकिछुकौलेज, स्कूलसँलऽकऽअस्पतालहोइतसरकारीबेवस्था-लेसंस्थासभजागिउठल।स्कूल-कौलेजबढ़नेहमहूँबी.ए. पासकऽलेलौं।जइदिनबी.ए. पासकेलौंतइसँपहिनेमात्रतीनगोरेगाममेबी.ए. पासकेनेछला।चारिमअपनेभेलौं।बुधि-बलेकिविचार-बलेआकिसमाजिकहवाकबलेअपनेमनजागैतकहलक- “हाइस्कूलकमैट्रिकहोउआकिकौलेजकबी.ए.-एम.ए.; जहिनाकिलासपहिलसँपॉंचमस्थानधरिकविद्यार्थीअपनाकेँप्रथमश्रेणीकबुझितेअछितहिनासमाजमेहमहूँचारिमेस्थानकभेलौंकिने, तखनकिएनेशीर्षकयोग्यअपनाकेँमानब।” मनकविचारजिनगीककथापढ़बशुरूकेलक।जाबेतकहाइस्कूलकआठमाकिलासतकमेपढ़ैतरहीताबेमाता-पिताकअढ़ौलकाजबुझिमनसँपढ़ैतरहलौं।तँएकहबजेदुर्गापूजामेसिंगहारकफूलबीछएभोरमेनइजाइआकिआमकगाछीसँटिकुलाबीछ-बीछआमील-लेनइआनीआकिपाकलआमपरगोलबाहिनइकरी; सेबातनहि, सेसभकरितेरही।तेतबेनहि, जुड़शीतलदिनबेरुपहरशिकारखेलैलेसंगी-तुरीयाकसंगजेबेकरी।सेमोटा-मोटीनढ़िया-खिखिरक...। नौमाकिलासमेअबितेस्कूलकसिलेवशोआगूबढ़ल।नव-नवविषयसभसँसेहोभेँटभेलआओहनोविषयसभसँभेँटभेलजेहेनलोअरप्राइमरीस्कूलमेमास्टरसाहैबपढ़बैछला।मनमानिगेलजेअखनजँपढ़ाइछोड़िकेतौनोकरीकरएजाएबतँलोअरप्राइमरीस्कूलमेशिक्षककरूपमेनोकरीहेबेकरत।मनहॅंसैतबाजल- “किताबोदेखकऽछोट-छोटबच्चाकेँपढ़ासकैछी, मुदाअपनगात–शरीरकविकसितरूप–तँतेहेनअखनअछिजेनेकियोमोजरदेतआनेगुदानत।तहूमेतेहेननवकातूरकधिया-पुतासभजुन्नाजकॉंऐंठलभऽगेलअछिजेउनटाकऽमारियेकरएलगत।” मनकविचारसँमने-मनविचारनेमनमेनवविचारजगल।नवविचारईजगलजेपानिमेजेतेकचीनीघोरबतेतेकबेसीनेमीठहएत।नोकरीकरैकएतेअगुताइयेकथीकअछि।मैट्रिकपासकऽलेबतखनमिड्लस्कूलतककशिक्षकबनैकयोग्यताभऽजाएत; ईतँआरोनेआगूबढ़बभेल। मैट्रिकपासकेलापछाइतपढ़ैकविचारमेआरोजिज्ञासाजगल।कौलेजमेनाओंलिखेलौं।नीकरिजल्टरहनेशिक्षको–प्रोफेसरसाहैबकनजैरमे–आविद्यार्थियोकबीचआदररहबेकएल।ऑनर्सकविद्यार्थीरहबेकरी।दुनियॉंदिसनजैरसेहोबढ़ल।अखनतककजेज्ञानयात्रारहलओएकसीमापरआनिकऽठाढ़कऽदेलक।ऑनर्सकसंगबी.ए. पासकेलौं। बेरोजगारीकदौड़मे–बेरोजगारीकमानेऐठामसिर्फशिक्षाविभागकनोकरीसँअछि–चारिसालगुजैरगेल।अखनतकजेमनमेछलजेहाइस्कूलकशिक्षकबनिजीवनबिताएब, ओइपरपानिहेरागेल।मनटुटिगेलजेशिक्षकनहिबनिपाएब।पढ़ल-लिखलसँलऽकऽबिनुपढ़लो-लिखलशहर-बजारदिसभागियेरहलअछि।अपनोमनशहरदिसभगबाकविचारदऽदेलक। शिक्षाविभागमेनोकरीनइभेनेमनहतास्भइयेगेलछल।अखनतककिसानपरिवारसँजुड़लरहलौं, मुदाकिसानीकाजककोनोलूरिनइभेल।समाजिकपरिवेशओहनबनिगेलअछिजेपरोछमेअहॉंकोनोकाजकिएनेकरीमुदासोझहामेएतेतँनिमाहएपड़ैएजेखेतीबिनुपढ़ल-लिखललोकककाजछी।हरकेनाजोतब..! कोदारिकेनापाड़ब..!! समाजोकलोकतानामारितेअछि।अहीसबहकबीचजिनगीकदूहीससमयबीतगेल। बाबाआबाबाकजिनगीकसंगतुरियादिसनजैरउठल।एकतँगामकजानकारियोकमेअछि, किएतँदेखतेछीएकदिसपित्तीकेँभातीज‘फल्लामा’आदोसरदिसभातीजकेँपित्ती‘फल्लॉंबौआ’कहैए।अपनेएतेबुझैनइछीजेबुझबसमाजकसम्बन्धकेनाबनलअछि।मनपड़लाज्ञानचनकाका। ज्ञानचनकाकाकेँबेसीकालबाबाकसंगदेखैछेलिऐन।बच्चाउमेरकबातछीतँएबेसीनहियेँबुझलअछिजेकोनतरहकसम्बन्धदुनूगोरेकबीचरहैन।मनमेजेनाउत्साहजगल।उत्साहईजगलजेजहिनाकिताबडुप्लीकेटहोइएतहिनानेसमाजकलोकोडुप्लीकेटअछिए, मुदातेहीबीचनेऑरिजनल–मौलीक–सेहोअछिए..! ज्ञानचनकाकापरनजैरनाचएलगल।गाममेसभसँनमहरसंयुक्तपरिवारअखनहुनकेटाछैन।परिवारकबीचसभकेँसभसँअनन्यसिनेहआअनन्यप्रेमोछैन्हे।एक-दोसराकबीचजहिनाआदर-भावछैनतहिनाबेवहारोछैन्हे।ओना, रौदीकिदाहीसँजहिनासौंसेगामककिसानप्रभावितहोइएतहिनाज्ञानचनकाकासेहोप्रभावितहोइतेछैथमुदाअप्पनसोच-विचारआक्रिया-कलापरहनेअनकाजकॉंछातीपीट-पीटकानैतँनहियेँछैथ।सदिकालअपनोआअपनपरिवारोजनकेँक्रियाशीलरखनहिरहैछैथ, जइसँअनकासँभिन्नपरिवारिकजीवनज्ञानचनकक्काकछैन। मने-मनविचारकेलौंजेअनेरेजेअखनतकअपनपुस्तैनीकाजछोड़िवौआइतरहलौंओबहुतभारीचूकभेल।समाजमेसभकिहमरेजकॉंपढ़ल-लिखलअछि; तखनओसभकेनाअपनपरिवारकनिमरजनाकरैतचलिरहलाअछि।बच्चासभकेँपढ़ैबतेछैथ, बिआह-दानकसंगअपनोजीवन-यापनकइयेरहलछैथ...।मनमेईहोहुअएजेजेकाजआइधरिकपूर्वजकरैतएलाआपरिवारचलबैतएला, ओकरानहिपकैड़अनेरेनोकरी-चाकरीकरैकमनबनेलौं..! मनमेनीकोविचारउठलआअधलोविचारउठियेरहलछल।तहीकालपत्नीकेँदेखलयैनजेमाझिलबेटापरजोर-जोरसँऑंगनमेबिगैड़रहलछैथ।यत्र-कुत्रबाजिरहलछैथ।ज्ञानचनबाबाकबातपरसँधियानपरिवारपरचलिआएल। ऑंगनपहुँचपत्नीकेँकहलयैन- “अनेरेकिएएतेआगि-अङोराभेलछी?” बच्चापरबिगड़बछोड़िपत्नीउनटेखौंझाइतबजली- “सभटाकेँदुइरअहॉंकेलिऐआहमरेकहैछीजेआगि-अङोराभेलछी..!” ओना, तामसमेपत्नीजइरूपमेबाजलहोथिमुदामाथमेकोनोभारीचोटलगनेजहिनामाथाझनझनाउठैएआचेतनाकलोपसेहोहुअलगैछै; तेनानइभेलमुदाबातकचोटतेहेनलागलजेमनतिलमिलागेल, अखनतकजेपरिवारिकधारारहल, जेपिताजीतकबहैतआबिरहलछल, ओहमरालगआबिएनाकिएलड़खड़ागेलजेजइपरिवारिमेहमबी.ए. पासकेलौं, पिताजीकसमयमेतँपढ़ै-लिखैकबेवस्थेकमछलतँएओस्कूल-कौलेजकशिक्षानहिपेबसकला, मुदाघरपरजेबाबापढ़ौनेरहैनओतेशिक्षातँछेलैन्हे, जइसँओनीकजकॉंपरिवारचलबैतएला, मुदाआइओइपरिवारमेबच्चाकेँस्कूलजाइलेमाएकेँबिगड़एपड़िरहलछैन...।ओना, अपनेडपैटकऽकिछुकहैकसाहसनेपत्नियेँकेँआनेबच्चेपरभऽरहलछलकिएतँएजहिनापत्नीकेँतहिनाधियो-पुतोसभकेँरंग-रंगकखगताकपूर्तिनहिकेनेपरिवारकसभझुट्ठाबुझियेरहलअछि; तँएकिएओहमराबातकबिसवासेकरतआकिबातकेँमोजरेदैत...।सोझामेसभकिछुदेखरहलछेलौंमुदाकिछुबजैकसाहसेनेभऽरहलछल।ओना, अपनेऐबातसभकेँबुझियेरहलछीजेकियोनिहत्थाकइयेकीसकैए।भेलतँछीनिहत्थासन।अपनापरग्लानियोँहुअएजेएहेनहट्ठा-कट्ठादेहरखिकोढ़िभेलजिनगीबीतारहलछी।मुदासेपहिनेनइबुझैछेलौं, जहियासँदुनियॉंकठोकरखाजिनगीकहरणसँहारलअपनाकेँबुझएलगलौंतहियासँहोशमेकने-मनेसुधारभेलअछिमुदाओहोअखनतेतेककमजोरअछिजेअनकरकोनबात; अपनोसभविचारपरनजैरनहियेँजारहलअछि। ओना, पत्नीकिछुबाजिनहिरहलछेलीमुदाहुनकरनजैरदेखअपनाबुझिपड़िरहलछलजेजँओबाघआकिसिंहरहितैथतँसोझेचीबाकऽखाजइतैथ।मुदाकइयेकीसकैछी।हारलनटुआकेँझुटकाबीछबछोड़िदुनियॉंमेरहियेकीजाइए।पूर्वजन्मक–जिनगीकपूर्वअवस्थाक–कमाइकभोगतँलोककेँभोगएपड़ैछै, सेसोचिमनकेँथतमारिरखनेरही...।कनैतबेटाकेँपुछलिऐ- “बौआ, स्कूलकिएनेजाइछहजेमाएएतेबिगड़ैछथुन..!” ओना, कानबछोड़िसुशीलहम्मरबातसुनएलगलमुदाबातअन्तहोइतेपुन: कानएलगल।दोहराकऽपुछलिऐ- “कनितेरहबहतखनतोहरदुख-बेथाकेनाबुझबह?” दू-तीनहिचकीमारिकानबबन्नकरैतसुशीलबाजल- “फीससमयपरनइदेलिऐतँएमास्टरसाहैबकहलैनजेकाल्हिसँइस्कूलनइअबिहेँ।” सुशीलकबातसुनिछातीथर-थराएलगल, देहमेकम्पन्नआबएलगलमुदाकिछुबजैकसाहसनहिभेल।एकदिसबेटाकपक्षलऽकऽजँपत्नीपरबजितौंतँओचोटेउन्टाअपनजिनगीभरिकइतिहासकपन्नाउन्टाचौंसैठोअनादोखीबनादइतैथ।एकाएकजागलमनमेजेनासदिकालजागहोइतरहैएतहिनाभेल।मनमेउठल; जहिनापोखैरमेसीढ़ीनुमाघाटहौआकिघरक (मकानक) सीढ़ीनुमाबाटहोइ, ओतँडेगे-डेगचलएपड़ैए, जइसँघाटोआघरकबाटोकनापकसंगअपनोनापभइयेजाइए।मुदासपाटधरतीपरदिन-रातिचललाकपछातियोकोनोनापनहिअछि।तहिनानेजिनगियोकबाटअछि।एकभेलउपार्जनसूत्र, दोसरभेलसदुपयोगसूत्र।अप्पनजिनगीजेनाअपनेमनकऐनामेझलकएलगलतहिनाबुझिपड़ल।जहिनाजीवनकघटनाजीवनकेँसंकल्पितबनबैएतहिनासम्मिलित–पत्नियोँआबेटोकेँ–उत्तरदैतबजलौं- “अहॉं, पतिकरूपमेजेअखनतकदेखैतएलौंअछिसेनइनिमाहनेहमदोखीछी, मुदाओहनदोखीनइछीजेअहॉंकेँकष्टदेलौंआअपनेमौजकेलौं।ओबिसैरजाउ।बौआ, पिताकरूपमेजेहमरासँनहिपूर्तिभेलहुअ, ओअभावेनहिभेलह, मुदातोरासंगहमराप्रेम-भावनहिअछिसेबातनहि।काल्हितोराइस्कूलकफीसकपाइदेबह।” बजैकक्रममेतँबाजिगेलौं, मुदालगलेफेरअपनमनकहलकजेबेटाकेँतुष्टिभलेँभेटगेलहौ, मुदापत्नीकेँसेथोड़ेभेटलहेतैन।प्रश्नोतँप्रश्नछी।चौबिसोघन्टाकदिन-रातिमेपति-पत्नीकरूपमेगप-सप्पकरैतबितैबतेछीमुदाजीवनकदशा-दिशाकिअछिओदुनियॉंकसंगकेनासंग-संगचलत, परिवारकपहचानकेनाबनततइबुझै-करैमेकेतेकसमयलगबैछी? जाबेतकपरिवारकपहचाननहिबनत; ताबेतकसमाजकपहचानकेनाबनिसकत।मुदापरिवारकजेरूप-रेखाबनिचुकलअछिओतँसोल्होअनासमाजकसंगघटितभइयेरहलअछिजेमुण्डे-मुण्डेविचारकभिन्नताबढ़िरहलअछि।परिवारकपहचानतँपरिवारकविचारधाराकसंगचलैए, तैठामपति-पत्नीकबीचसेहोएतेकदूरीबनिगेलअछिजेहरकाज (परिवारिक) मेदुनूकबीचबाधाठाढ़होइतेअछि।एकगोरे‘हँ’कहबैदोसर‘नहि।’एहेनपरिस्थितिमेकेनाचलिपाएब...।जखनकिबिआहकसमयसासुरजेबाकाल–मानेविदाहोइकाल–एकदिसमाता-पितासँलऽकऽसमाजोकलोकरामबनामिथिलाकगीतगबैतजनकपुर (सासुर) विदाकरैछैथ; तँदोसरदिसजनकपुरक–मानेसासुरक–सासु-ससुरकसंगसमाजोकदाइ-माइकसंगगणमान्य–ऋृषि-मुनी–लोकनिकआसिरवचनसेहोभेटतेअछिजे‘सीता-राम’बनिदुनूजीवनबासकरत...। वौआइतमनकेँ; जहिनाकृष्णपॉंचोघोड़ाकमुखारीएक्केबेरकाबूमेकरैत, खिंचलैनतहिनाअपनोवौआइतमनकेँखिंचैतदोसरमनकहलक- “बुड़िवानकहीं-के! एतबोनेहोशभेलैनअछिजेविचारसँपत्नीकेँकाबूमेरखता।” एकाएकमनबदैलगेल।जहिनाबेंटछुट्टुखुरपीहँसुआवाकोनोऔजारेक (अस्त्रक) कोनोमोलमानेकाजकआगूनहिरहिजाइतअछि; तहिनानेअपनोभेलछी।जखनपहिल-पहिलबेरदुनूपरानीकभेँटसासुरमेभेलतखनअपरिचितरहितो, मनमेएक-दोसरकजिनगीकप्रतिकेतेसिनेहजागलछल, जीवनकचक्रमेओजेमहरभँसिगेलहुअए, मुदाअपरिचितकसंगकेतेसिनेहआजीवनकप्रतिआकर्षणबढ़िगेलछल; मुदाआइओसभजेनाविर्ड़ोकभौकमेउधियागेल।नेपत्नीकओरूप-रंगरहलआनेचेहरासोझमेरहलआनेओसिनेह-भावरहल।आइजँओसिनेहआसिनेहिलकर्तव्यओहनपेनेरहितौंतखननेसेहोइत, सेतँभेलनहि..! पानिमिललमक्खनजकॉंमनघोर-घोरभइयेरहलछल।मुदाएतेतँहोशआबियेगेलजेसिनेहसँजहिनादुनियॉंसिनेहिलबनैएतहिनाकुसिनेहसँदुनियॉंदूरसेहोहटितेअछि।मनबेकाबूजकॉंउधियाएलगल; मुदादोसरजेहोशगरमनछलओउधियाएलमनकेँकाबूकरैतअपनआइसँनवजीवनकनाओंलैतबाजल- “जखनेजागीतखनेपरातहोइए।नाओंलैत, जेसमयबीतगेल; ओबीतगेल, मुदाजेबँचलअछिओकराहमसभकिएनेसंगीबनिमानेविचारोआकाजोमेसंगभऽअपनपरिवारोआअपनोपरिचयदुनियॉंकेँदिऐ।” पत्नीकभीतरकमनभलेँजरलकिएनेहोनुमुदातत्कालओसहमली।सहैमतेबजली- “ऐमेमानेविचारोआकाजोमेहमथोड़ेकहियोबाधकभेलौंअछि।जहिनाअहॉंबुझैछीजेनीकमनुखबनिजीबीतहिनानेहमरोइच्छाअछि।” ओना, नेपत्नीएआकिअपनेअखनधरिबुझिपेनेछेलौंजेसोल्होअनाअपनेदोखटानहिअछि, समाजोआपरिवेशोकदोखअछि।जेहोशजगितेबुझएलगलौं।मुदाजखनकनी-मनीबुझएलगलौंतइसँपहिनेजिनगीएससैरकऽतेतेकनिच्चॉंउतैरगेलजेअपनोबुझिपड़िरहलअछि; मनुखकगतिनहिरहल...। कौल्हुकाफीसकआशासुनिबेटोससैरगेलछलआभानस-भातपछुएनेपत्नियोँअकछारहलछेली।बजलौं- “जेभेलसेभेल, आगूएहेननइहुअएतैपरअखनेसँधियानरखू।” बजैकक्रममेबाजिगेलौं, मुदालगलेमनमेउठलजेअधला-सँ-अधलाकाजकिएनेहुअए; मुदाकेनिहारओकराथोड़ेअधलाबुझिकरैए।ओतँनीकबुझिकरैए, भलेँफलकिएनेअधलाहोउ।ओतँविचारस्रोतपर–मानेजैठामसँविचारधारानिकलैएतैपर–निर्भरकरैएजेहम्मरविचारधाराकस्रोतकीअछि।एकमुखीअछिकिपँचमुखीआकिगोमुखीअछि।जहिनारूद्राक्षहोइएतहिनानेमनुखोकअछि।तखन? तखनतँयएहनेसुगम-सरलआसुचित्यसुकर्मकदिशाहएतजेएक-दोसराकपूर्णजिनगीपरपूर्णरूपेणदृष्टिपातकरैतचली।अपनविचारमेपुन: विचारजोड़ैतबजलौं- “जहिनाधिया-पुतामानेअप्पनबाल-बच्चामानेबेटा-बेटी, सम्मिलितसम्पैतअछि, तहिनानेपरिवारकसेरो-सम्पैतसेहोअछिए, यएहनेभेलदुनूगोरेकजीवनकमिश्रितरूप।तँएएकदोसरपरसदिकालधियानराखबसिर्फजरूरियेनहिअनिवार्यसेहोअछिए, तँएअखनेसँतत्परभऽकऽधियानरखैकअछि।” ओना, पहिलुकागप-सप्पकक्रमजेदुनूगोरेकमानेपति-पत्नीकबीचकरहलतइसँजेनानवबातपत्नीकेँभेटलहोनितहिनामने-मनसुहकारि, मुस्कुराइतबजली- “भेलतँअहॉंबाहरसँघरधरिसम्हारू; हमघरसँपरिवारधरिसम्हारैछी।अपनातँखेतो-पथारअछि, जेकरानइछै, ओकेनाहँसैतपरिवारचलबैए।” पत्नीकविचारसुनिअपनोमनकनीजिराएल।बजलौं- “अहॉंदुनूमाए-बेटाकझमेलमेबरदागेलौं।ज्ञानचनकाकासँभेँटकरएविदाभेलरही।” पत्नीबजली- “आबेकीभेलअछिजाउ, भेँटकेनेअबियौन।” आनदिनजेनाकेतौविदाहोइछेलौंमानेघरसँबाहर, आमनमेजेविचारचलैछलओप्रवाहितजकॉंनहिछल, किएतँकोनोवस्तुएआकिविचारेकिएनेहौ; मनमेबेर-बेरउठैतरहैछलजेजेकरा-लेवस्तुकीनबवाआनबओमनसँखुशहएतकिनइहएत।मुदाआइसेनहिभऽरहलअछि।जहिनाखढ़कएक-एकटुकड़ियेकिएनेहुअए, मुदाजँबेकतीगतोजीवनमेआपरिवारोमेअबैतरहततँओबेक्तियोआपरिवारोसमपन्नतादिसबढ़बेकरत। घरसँनिकैलतेजेनाजबदाहपरिवारसँ, अवकासभेटगेलहुअएतहिनामनपरपितहुअलगल।ज्ञानचनकक्काकपरिवारमनमेनाचिउठल।केतेकसुन्दरपरिवारज्ञानचनकक्काकछैन।जहिनाधाराप्रवाहजकॉंविद्या–सरस्वती–बहिरहलछैनतहिनानेसेर-सम्पैतिकलक्ष्मियोँछैन।परिवारमेनेकिनकोकखनोमनमलिनहोइछैन, आनेकखनोरक्का-टोकी। ज्ञानचनकक्काकदरबज्जाकआगूपहुँचतेदेखलौंजेकेतौसँआबिज्ञानचनकाकाकुरतानिकालिओसारकचौकीपररखिरहलाअछि।मनमेखुशीभेलजेभनेकनीपछुआइयेकऽएलौं।दरबज्जाकलगपहुँचतेप्रणामकरैतबजलौं- “काका, गोड़लगैछी।” ऑंखिउठाकऽज्ञानचनकाकातकलैनतँबुझिपड़लजेकाजकबोझसँभरिसकतड़-बत्तरभेलछैथ।चेहराउदासमुदामुँहकरूपहँसमुखे...। हमरादेखतेज्ञानचनकाकाचिन्हगेलाजेजोगिनदरछी।असिरवाददैतबजला- “नीकेरहहजोगी..!” असिरवादसुनिएकमनमेभेलजेअप्पनजीवनकबातपुछिऐन, मुदाअप्पनबातकहैसँपहिनेजँदोसराकबातसुनीआपछाइतअपनबातबाजीतँओबेसीप्रभावशालीहोइए।तँएचुपेरहलौं। ज्ञानचनकाकाबजला- “जोगी, तेहेनविर्ड़ोस्कूल-कौलेजमेउठिगेलअछिजेएकतँपनरह-सोलहबर्खसँदुनूबेटाकौलेजमेपेटबान्हिकाजकरैछल; ओहोबन्नेभऽगेल।तीनदिनसँदुनूबेकारभेलदरबज्जापरबैसलअछि।ओकरेसभ-लेकाजरोपैकजोगारमेगेलछेलौं।” शब्दसंख्या : 2679, तिथि : 21 दिसम्बर 2019 Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव Join Videha googlegroups विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf          Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf       12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक,  १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf       Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf         21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010        Videha_01_10_2010_Tirhuta             67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010        Videha_15_11_2010_Tirhuta             70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010        Videha_15_12_2010_Tirhuta           72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011        Videha_01_03_2011_Tirhuta           77 ७) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012        Videha_01_08_2012_Tirhuta           111 ८) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013        Videha_15_03_2013_Tirhuta           126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013        Videha_15_11_2013_Tirhuta           142 १०) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १३) विदेह सम्मान विशेषा‍क- २००म अ‍क १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अ‍क १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १४) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आम‍ंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी VIDEHA 209th issue विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन  नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक  बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of original work.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् (c)२००४-२०२०. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम वि‍लास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत।  एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2020 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA

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