विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' २९५ म अंक ०१ अप्रैल २०२० (वर्ष १३ मास १४८ अंक २९५) 'विदेह' २९५ म अंक ०१ अप्रैल २०२० (वर्ष १३ मास १४८ अंक २९५) ऐ अंकमे अछि:- १. प्रदीप पुष्पक दू टा गजल २. उमेश मण्डल-- जगदीश प्रसाद मण्डलक अर्द्धांगिनी कथा संग्रह ३. आशीष अनचिन्हारक एकटा गजल ४. जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा- हारलचेहराजीतलरूप प्रदीप पुष्प गजल- १ पाखड़ि तऽरक मचान मोन पड़ि गेल खपड़ा बला दलान मोन पड़ि गेल तोहर हमर पिरीत भेल अनघोल पीठक पड़ल निशान मोन पड़ि गेल तोरा रसिक निहारि बाजि देलक ई भादव बहय बलान मोन पड़ि गेल भुखले दिवस खटैत फेर बीतल तँ गामक अपन नवान्न मोन पड़ि गेल तोरे भऽजिनगियो कटैत ई ‘पुष्प’ जातिक मुदा सिमान मोन पड़ि गेल (221212121221सभ पाँतिमे,तेसर शेरक पहिल पाँतिक अन्तमे दीर्घकेँ ह्रस्व मानबाक छूट लेल गेल अछि) गजल- २ नइ बरछी नइ भाला राखू अपन मूँह पर ताला राखू चरि- चरि महल केर घऽर बना कऽ नइ रस्ता नइ नाला राखू जा विदेश बड़ मौज उड़बियौ खाता-बऽही दिवाला राखू खोलू अनकर कच्चा चिट्ठा झाँपि अपन घोटाला राखू शासनमे नइ अन्तर बेसी बरु लल्लू वा लाला राखू खूब निहारू कञ्चन-काया मुदा हाथमे माला राखू (22222222सभ पाँतिमे।बहरे-मीर) उमेश मण्डल जगदीश प्रसाद मण्डलक अर्द्धांगिनी कथा संग्रह (2013) : ‘अर्द्धांगिनी’ बीस गोट कथाक संकलन अछि। एहि पोथीक पहिल संस्करण, 2013 ईस्वीमे श्रुति प्रकाशन- नई दिल्लीसँ प्रकाशित भेल अछि। प्रसिद्ध कथाकार श्री दुर्गानन्द मण्डलजीक द्वारा एहि पोथीक लोकार्पण, ‘सगर राति दीप जरय’क80म कथा गोष्ठी- मानिक राम-बैजनाथ बजाज धर्मशाला, निर्मली, (सुपौल),मे 30.11.2013क भेल अछि। एहि पोथीक कथा सभमे नोकरिहाराक जीवनक संत्रास, परिश्रमी कृषकक उल्लास, सांस्कृतिक पावनि-तिहारमे पैसल अन्धविश्वासक, ग्राम्य जीवनमे जातीय व्यवसायक महत्व, क्रमश: टुटैत सम्बन्ध-बन्ध, सामाजिक जीवनक विभिन्न समस्या तथा ओकर समाधानक बाट आदिक सूक्ष्म विश्लेषण लोकमंगलक कामना देखबामे अबैत अछि। एहि संग्रहक आमुखकार डॉ. योगानन्द झा छथि। डॉ. योगानन्द झा हिनका विषयमे कहैत छथिन- “युगीन समस्या ओ समस्याक कारण एवम् तकर समाधानक प्रति चिन्तनशीलता हिनक वस्तु-विन्यासकेँ प्रेरक-प्रभावकारी बनौने रहलनि अछि जाहिमे परम्परित कथाधाराक आदर्शोन्मुख यथार्थवादी दृष्टिकोण स्पष्ट रूपेँ प्रस्फुटित देखि पड़ैछ। मिथिलाक लोकजीवनक उत्थानक प्रति सम्वेदनात्मक अभिव्यक्ति कौशलक कारणे मण्डलजीक कथा सभ हिनका आधुनिक कथाकार लोकनिक अग्रिम पंक्तिमे ठाढ़ कऽ देलकनि अछि।” वर्तमानमे चारिम संस्करण उपलब्ध अछि। चारिम संस्करण, पल्लवी प्रकाशन- निर्मली (सुपौल) सँ प्रकाशित भेल अछि। ‘गामक जिनगी’ पोथीक बाद कथाविधामे मण्डलजीक ई तेसर पोथी छियनि। एहि पोथीमे 20 गोट कथा अछि। जकर विवरण क्रमानुसार कथाक शीर्षक, शब्द संख्या सहित निम्नांकित अछि- 1. दोहरी मारि- शब्द संख्या : 1368 2. केना जीब? - शब्द संख्या : 1039 3. नवान- शब्द संख्या : 2306 4. तिलासंक्रान्तिक लाइ- शब्द संख्या : 2056 5. भाइक सिनेह- शब्द संख्या : 1201 6. प्रेमी- शब्द संख्या : 2526 7. बपौती सम्पैत- शब्द संख्या : 2350 8. डंका- शब्द संख्या : 2401 9. संगी- शब्द संख्या : 1849 10. ठकहरबा- शब्द संख्या : 2349 11. अतहतह- शब्द संख्या : 2486 12. अर्द्धांगिनी- शब्द संख्या : 3057 13. ऑपरेशन- शब्द संख्या : 1616 14. धर्मनाथ- शब्द संख्या : 1968 15. सरोजनी- शब्द संख्या : 1810 16. सुभद्रा- शब्द संख्या : 1922 17. सोनमाकाका- शब्द संख्या : 1572 18. दोती बिआह- शब्द संख्या : 1822 19. पड़ाइन- शब्द संख्या : 1970, 20. केतौ नै- शब्द संख्या : 1203 ‘दोहरी मारि’, एहि कथामे अवकाश प्राप्त प्रोफेसर गुलाबक मनोविश्लेषण भेल अछि। प्रो. गुलाब कतेको वर्षसँ चीनी रोग तथा ब्लड-प्रेसरसँ ग्रस्त छथि। गामक सभ सम्पतिक संग घर-घराड़ी सहित बेचि शहरमे पति-पत्नी एकाकी रहैत छथि। बेटा-पुतोहु परदेशमे रहैत छन्हि। हिनकालोकनिक सुधि लेनिहार परिवारमे कियो ने छन्हि। शहरी जीवनक चाकचिक्यसँ सम्मोहित भऽ प्रो. गुलाब शहरी जीवनकेँ अपनौलन्हि। शुरूमे तँ बड्ड नीक लगलन्हि मुदापछाति जखन शहरी वातावारणक भान भेलन्हि, चोरी-डकैती, लूट-पाट, अपहरण, गन्दगी आदि समस्यासँ ग्रस्त शहरी वातावरणसँ रू-ब-रू भेलाह तखन ग्राम्य जीवनक सौहार्दपूर्ण वातावरणक प्रति आकर्षण जगलन्हि। जखन पुत्र द्वारा ई समाद भेटैत छन्हि जे पौत्रक मुड़न घरपर नहि भऽ कऽ वैष्णो देवीमे होएतनि, जइ लेल हुनकोलोकनिकेँ ओहीठाम एबाक आमंत्रण भेटैत छन्हि आ ओ अपनाकेँ अशक्य बुझैत छथि। टुटल स्वरमे गुलाबबाबू बजैत छथि- “मोबाइल छोड़ि असिरवादो केना दऽ सकब। तीन दिनसँ बजारमे करफू लागल अछि। सिपाहीसँ सड़क भरल अछि। एहेन स्थितिमे घरसँ केना निकलब?” ‘नवान’,ई कथा अर्द्धांगिनी नामक पोथीमे तेसर स्थानपर अछि। नवान कथामे परिश्रमी कृषकक गाथा आएल अछि। अपन परिश्रमक बलेँ अपन भाग्यक निर्माण करैत अछि। एहि कथामे मिथिलाक लोक जीवनक विभिन्न खण्डचित्र उपस्थित कएल गेल अछि यथा वृक्ष-लतादिक पहिल फड़ देवताकेँ चढ़ायब, गाए बिआएलापर महादेवकेँ दूधसँ अभिषेक करब आदि। ग्राम्य जीवनमे पसरैत जातीय ओ साम्प्रदायिक विद्वेष दिस सेहो एहिमे संकेत कएल गेल अछि। मुदा एहि कथामे मिथिलाक लोकजीवनक आर्थिक स्थितिकेँ बदहाल करएबला जइ समस्यापर विशेष दृष्टिनिक्षेप कएल गेल अछि, से थिक बाढ़िक समस्या। एहि समस्याक कारणे मिथिलाक ग्राम्य जीवनक आर्थिक व्यवस्था अस्त-व्यस्त भऽ जाइत अछि। तथापि एहि कथाक नायक आधुनिक वैज्ञानिक पद्धति अपनाए नव किस्मक धान उगबय लगैत अछि, तीमन-तरकारीक नगदी फसिल उपजाबय लगैत अछि आ नूतन नस्लक माल-जाल पोसि अपन जीवनकेँ खुशहाल बना लैत अछि। ‘नवान’ कथाक विश्लेषणक क्रममे आमुखकार कहैत छथि- “वस्तुत: एहि वैज्ञानिक पद्धति द्वारा मिथिलाक कृषकक जीवन समुन्नति भऽ सकैत अछि, से संदेश देब कथाकारक उद्देश्य छन्हि।” ‘तिलासंक्रान्तिक लाइ’,एहि कथाक माध्यमसँ ग्राम्यजीवनमे पसरल अन्धविश्वासपर प्रहार कएल गेल अछि। तिलासंक्रान्ति एकटा एहन पावनि थिक जे मिथिलाक घर-घरमे मनाओल जाइत अछि। एहि दिनसँ सूर्य उत्तरायण भऽ जाइत छथि आ क्रमश: शीत ऋृतु वसन्त आ गृष्म दिस बढ़य लगैत अछि। मुदा एहि पर्वक प्रसाद ग्रहण करबाक हेतु प्रात: स्नान जरूरी बूझल जाइत छैक। मिथिलामे ई अपवाद सेहो पसरल छैक जे एहि दिन जे कियो भोरे नदी वा पोखरिमे डूब दैत छथि हुनका नदी-देवता तत्काले लाइ धरा दैत छथिन। एही अपवादपर विश्वास कऽ गोपाल नामक एकटा नेना बारहे बजे रातिमे नदीमे डूम देबए चल जाइत अछि आ ठंढसँ ग्रस्त भऽ जाइत अछि। एहि कथाक मादे आमुखकार लिखैत छथि- “ग्राम्यजीवनक अन्धविश्वासी समाजकेँ एहि कथाक माध्यमसँ ई संदेश देल गेल अछि जे वस्तुत: ई पावनि प्रकृति-परिवर्त्तनपर आधारित अछि आ एहिमे बिनु पाखण्ड कयने लोककेँ अपन सामर्थ्यक अनुसार समैपर स्नान करबाक चाही, नहि कि अन्धविष्वासमे पड़ि रोगग्रस्त भऽ जएबाक चाही।” ‘भाइक सिनेह’,कथामे शिष्टदेव आ विचारनाथ दुनू भँइ एक दोसराक प्रति अगाध श्रद्धा, भक्ति ओ बन्धुत्वक भाव रखैत छथि मुदा देयादिनी लोकनिक बीच खट-पटसँ परिवारमे भिन्न-भिनाउज भऽ जाइत छन्हि। भिन्न-भिनाउजक मूलमे अर्थसत्तापर कबजा रहैत अछि। मुदा जखन दुनूक मनमे परस्पर प्रेमक भाव जगैत छन्हि तँ दुनू एकदोसराक दु:ख बँटबाक हेतु तत्पर भऽ जाइत छथि। आमुखकार लिखैत छथि- “भाइक सिनेह कथामे कृषक जीवनमे पारस्परिक सहयोग, सद्भाव ओ शक्तिक अनुकूल श्रमपर आधारित संयुक्त परिवारक उपयोगिताक परम्परित अनुगायन देखि पड़ैछ।” आशीष अनचिन्हार गजल भुज्जा चिखना ताड़ी आ पासी चाही हमरा तड़िखाना चाही लबनी चाही हुनका भेटनि बड़का बड़का इनाम बस हमरा छोट छीन बदनामी चाही हम बोर भ' गेलहुँ चिक्कन चुनमुन खुशीसँ हमरा किछु लेढ़ाएल उदासी चाही तों ल' ले दछिनामे पूरा दुनियाँ मुदा हमरा खाली हुनकर जजमानी चाही खाली पहनावा बदलल छै इच्छा नै हुनका राजा आ हमरा दासी चाही सभ पाँतिमे 222-222-222-22 मात्राक्रम अछि। दू टा अलग अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि। जगदीश प्रसाद मण्डल हारलचेहराजीतलरूप तीससालकबादविचारदेवकेँछलानन्दसँआइझंझारपुरकोर्टमेभेँटभेलैन।रजिष्ट्रीऑफिसककाजसँविचारदेवकोर्टआएलछला।रजिष्ट्रीऑफिसअनुमण्डलकार्यालयकपरिसरेमेअछि।एकगोरेकजमीनकसनाकबनैकखियालसँविचारदेवरजिष्ट्रीऑफिसआएलछलाआएन.जी.ओ.ककाजसँछलानन्दआएलछला। दस्तावेजलिखेलापछाइतऑफिसमेदस्तावेजपेशकेलापरदेवनमुंशीविचारदेवकसंगपानखाइलेपूबारिभागपीपरकगाछकनिच्चॉंमेजेपानकदोकानअछितैठामठाढ़रहैथकिछलानन्दपरनजैरपड़लैन।ओना, दुनूगोरेकचेहराकरूपबदललरहबेकरैनजइसँछलानन्दकेँदेखलापछातियोविचारदेवधकमकेला।धकमकाइतविचारदेवकमनमेउठलैनजेपानकदोकानपरपानखाइलेठाढ़छी, जँकहींछलानन्ददेखनेनेहोथितखनमने-मनकीसोचता।तीसबर्खकरीबसँभेँटनहिभेलाअछितैबीचचेहराकरंग-रूपसेहोथोड़ेबदैलगेलछैन, मुदातइसँपूर्वकेहेनघनिष्ठतादुनूगोरेकछलजेएकठामगप-सप्पकरैककोनबातजेएकथारीमेकेतादिनखेनौंछी।एकविचारकसभदिनमानेहाइस्कूलसँलऽकऽतीसबर्खपूर्वधरिरहबेकएलछी।पानकदोकानपरठाढ़छीतैठामतँअपनईदायित्वबनितेअछिजेछलानन्दकेँसेहोपानखाइलेशोरपाड़िऐन।मुदास्पष्टरूपमेनहिचीन्हिविचारदेवधकमकारहलछला।माथककेशजहिनाछलानन्दककारीसँउज्जरदप-दपभऽगेलछैनतहिनाऐगलादॉंतटुटनेमुँहकरूपसेहोबदैलियेगेलछैन, तँएविचारदेवधकमकाइछला।ओना, अनचिन्हारकेँपरिचयकिकोनोकाजेवाकोनोविचारेकिछुपुछबअसानअछि।मुदाचिन्हारकेँअनचिन्हार-परिचयपुछबकेहेनहएत? जँकहींउन्टाकऽकहिदैथजे‘अहाँबड़कालोकभऽगेलौंतँएहमरासन-सनछोटलोककेँथोड़ेचिन्हब’तखनअपनमुँहकेहेनहएत..! मुदालगलेफेरविचारदेवकमनमेउठलैनजेजँचिन्हारबुझिकहबैनजे‘छलानन्दभायपानखाइलेआबह’आजँछलानन्दनहिहोथिआदोसरऑंखिगुरेड़कऽकहएजेतूँबड़पानबलाजेहमरापानखाइलेशोरपाड़ैछह, तखनतँ..! असमंजसमेविचारदेवपड़लेछलाकिमुंशीजीकेँमानेदेवनमुंशीकेँरजिष्ट्रीऑफिसकचपरासीलगमेआबिकहलकैन- “मुंशीजी, कागजमेमानेदस्तावेजमेजमीनकनक्शाछुटिगेलअछिसेबड़ाबाबूबजौलैनअछि।” चपरासीकबातसुनिदेवनमुंशीजखनअपनऊपरकाजेबीमेदेखलैनतँकागजमेबनौलनक्शाभेटगेलैनजेधोखासँदस्तावेजमेलगाएबछुटिगेलछेलैन।तैबीचविचारदेवछलानन्देपरनजैररखनेछलामुदाअखनतकभॉंजपरनहियेँचढ़लछेलैनजेछलानन्देछैथआकिआन।मुदासंजोगबनलजेछलानन्दअपनेलच्छेदारशैलीमेदोसरकेँकिछुकहएलगला।चेहराकरंग-रूपसँजेछलानन्दअखनतकविचारदेवकचीन्हमेनहिआएलछेलैनओशब्दशैलीकमाध्यमसँचीन्हिमेआबिगेलैन।वएहशब्द.., वएहशैली.., ओहीमुहसँजहिनामकैकलाबाजकाँखापैड़सँउड़ि-उड़िछिड़ियालगैएतहिनाछलानन्दकछिड़ियाएलजइसँविचारदेवकबिसवासुमनमानिगेलैनजेछलानन्दनिश्चितछीया। छलानन्दकगपकक्रमजखनविरामपरपहुँचलकिविचारदेवशोरपाड़ैतबजला- “छलाभाय, पहिनेपानखाउपछाइतगप-सप्पहोइतरहतै।” जहिनाविचारदेवछलानन्दकेँदेखलापछातियोएकनजैरमेचीन्हिनहिसकलातहिनाछलानन्दोविचारदेवकेँनहिचिन्हलकैन।जइसँमुँहउठाकऽतँतकलैनमुदा‘हँ-हूँ’किछुनेबजला।छलानन्दकेँधकमकाइतदेखविचारदेवदोहरबैतबजला- “हमछीविचारदेव।” तैबीचदेवनमुंशीचपरासीकसंगऑफिसदिसविदाहोइतबजला- “विचारभाय, पानकपाइअहाँदोकानदारकेँनहिदेबइ।” ‘पाइनहिदेबइ’सुनिविचारदेवकमनमेउठलैनजेमुंशीजीअपनाजेबीसँथोड़ेदेताओतँचाह-पानतककहिसाबखरीदबालसँजोड़िकऽलइयेलइछैथमुदादेखौआएतेइमानदारतँबनबेकरैछैथजेपानोपार्टीकेँमानेरजिष्ट्रीसँसम्बन्धितकेँअपनेदिससँखुआबैछिऐन।जइसँविचारदेवकमनमेभेलैनजेकहिऐनजेपाइ-पाइकहिसाबतँअहाँजोड़िकऽपार्टीसँलइयेलइछी, तखन...।मुदालगलेफेरभेलैनजेअनेरेएहेनबातबाजिअपेक्षामेमानेसम्बन्धमेखटासपैदाकरबनीकनहि, तँएचुपेरहला।देवनमुंशीऑफिसदिसबढ़िगेला।तैबीचछलानन्दसेहोपानकदोकानपरआबिगेला। कोर्ट-कचहरीकहोटलबलाहुअएआकिचाह-पानकदोकानबला, बुझियेजाइए।ओना, विचारदेवकेँतीसबर्खसँछलानन्दसोझा-सोझीसँभेँटनहिभेलछेलैनमुदाएक-दोसराकविषयमेआन-आनसूत्रसँजानकारीतँहोइतेरहैछेलैनजइसँछलानन्दकपरोक्षदिनकमानेभेँटनहिभेलाबीचकजानकारीदुनूकबीचहोइतेरहैन।जइसँविचारदेवकमनमेठहकियेरहलछेलैनजेछलानन्दकेतए-सँ-केतएउनटैत-पुनटैतपहुँचगेलछैथमुदातेकरमिसियोभरिग्लानिमनमेछैनआकिहेहर-थेथरजकाँघोरिकऽसभपीबगेलछैथ..! छलानन्दकविकृतचेहराविचारदेवकमानसमेबनियेँगेलछेलैनमुदामनबजैसँमनाहीकेलकैनजेअनेरेकिछुबाजबनवविवादकेँठाढकरबहएत।हमराबजनेयएहनेहएतजेजेतबोसम्बन्धअछितहूमेखललपड़त।मुदालाभकीहएत? ‘लाभकीहएत’परविचारअबैत-अबैतविचारदेवकेँअपनेमनमेटकरेलैनजेगलतकेँगलतमुँहपरकहबेउचितहएत।तैबीचछलानन्दसेहोपान-जर्दाखाएकबेरपीकसेहोफेकचुकलछला।छलानन्दबजला- “विचारदेवभाय, तीसबर्खकगप-सप्पपछुआएलअछिचलूकेतौचाहकदोकानपरबैसचाहोपीबआगप-सप्पसेहोकरब।” अपनमनकभीतरजेविचारदेवकेँछलानन्दकक्रियादेखक्रोधकतरंगउठिरहलछेलैनओकरासंयमितकरैतबजला- “छलानन्दभाय, रजिष्ट्री-काजेऑफिसआएलछीतैठामजँअपनेगप-सप्पमेकेतौबोहियाजाएबतँअनेरेसभदोखीबनौता।” बजैकक्रममेविचारदेवतँबाजिगेलामुदामनमेईबातनाचियेरहलछेलैनजेजे-जेकर्मछलानन्दकेलैनअछिसेसभबातमुँहपरकहिदेबअपनमानवीयभारउतारबसेहोहएत।भारउतारबभेलमनुखकअपनमानवीयकर्तव्य।जँसोझहामेकियोनीककिअधलाकऽरहलाअछिआअपनऑंखिचुप-चापदेखैतरहैएसेहोनीकनहियेँभेल।नीककेँनीकआअधलाकेँअधलाकहैलेसेहोमुँहबनलअछि, खालीखेबे-पीबेटालेतँनहिबनलअछि।छलानन्दसँभरिमनगपकरैकविचारविचारदेवकमनमेजागिगेलैन।दोहरबैतविचारदेवबजला- “छलाभाय, गप-सप्पकरैकमनअपनोअछिमुदाबीचककोनोएहेनजोगारकऽलेबजइसँदुनूभैयारीभरिमनविचारकऽसकीओबेसीनीकहएततँएपहिनेरजिष्ट्रीऑफिसचलिमुंशीजीकेँजानकारीदऽदिऐनजेजँऑफिसककाजअगुआएलहुअएतँपहिनेसएहकरालिअ, पछाइतदुनूभैयारीनिचेनसँगपकरब।नहिजँऑफिसककाजमेबिलमहएततँबीचमेगप-सप्पकरैकसमयभेटियेजाएत।” गपे-सप्पकबेवसायीछलानन्दबनियेँगेलछैथतँएसहमतहोइमेकोनोबाधाबीचमेनहियेँछेलैन।छलानन्दबजला- “बड़-बढ़ियाँचलू, पानितँकोनोपनिबट्टेबहैएकिने।माने, काजतँअपनेरस्तासँनेचलत।” ओना, विचारदेवकेँमनमेएकटाबातबेर-बेरखटकएलगलैनजेछलानन्दकेँटोकब, चूकभेल।अनुमण्डलकार्यालयकिअपनदरबज्जाछीजेकियोएलातँमान-अपमानकविचारलोककरत।ईतँअनुमण्डलकार्यलयछी, भरिअनुमण्डलकलोकअपना-अपनाकाजेअपना-अपनाऑफिसअबैछैथ।मनपरजोरदेलैनतँविचारदेवकेँभानभेलैनजेजहिनातीसबर्खसँछलानन्दनहिभेटलछलातहिनाबुझितौंजेआइयोनहिभेँटभेला।विचारोविचारकतँईदुनियॉंछीहे।मनुखकरंग-रूपने, मानेऊपरकारंग-रूपकिएनेपुरबतेहुअएमुदाभीतुरकारंग-रूपकृति-विहीनअछिसेहोकेनानइकहलजाएत।दुनियॉंकदूरूपअछिए।जखनेदूरूपअछितखनेनेसभकिछुदूरंगकहेबेकरत।जेकियोछलानन्दकभीतुरकारूपचिन्हैबलाछैथओजँछलानन्दकसंगदेखतातँमनेमनहमराकीबुझता।मुदाहाथीसनचारिपैरबलासेहोजखनहूसिसकैएतखनमनुखतँसहजेदूपैरबलाअछि।तहूमेमाइटिकतरमेजँगाड़लरहैततँकनीसक्कतोआसोझो-साझरहैतमुदासेहोनेअछि, अछिसोलहन्नीमाइटिकऊपरेमेतरबा-बलेठाढ़..! रजिष्ट्रीऑफिसकमुहेँपरदेवनमुंशीभेँटभऽगेलैन।देवनमुंशीकेँरजिष्ट्रीऑफिसमेअपनखासपहचानछैन।चपरासीसँहाकिमधरिदेवनमुंशीकेँइमानदारोआसोझमतियोबुझितेछैनजइसँसबहकमनमेअसीमआदरोआसिनेहोबनलेछैन।यएहछीमनुखकचरित्रबल, जेमनुखकधरोहरसम्पैतसेहोछीहे।देवनमुंशीकेँविचारदेवकहखिन- “मुंशीजी! एकटापुरानअपेछितभेँटभऽगेलाअछिदुनूगोरेकबीचबहुतदिनकगप-सप्पपछुआएलअछि।जँऑफिसककाजहुअएतँपहिनेसएहकरैतनिचेनसँगप-सप्पकरबनहिजँऑफिसककाजमेबिलमहएततँपहिनेदुनूभैयारीकेतौबैसगपे-सप्पकऽलइतौं?” अपनचरित्रकबलदेवनमुंशीकेँरहनेबेकतीत्वकबलकबिसवासमनमेछैन्हे।बजला- “विचारभाय, साढ़ेचारिबजेतकऑफिसचलैए।पनरहमिनटककाजअछितँएअहाँकेँसबाचारियोबजेतकरहलासँकाजचलियेसकैए।” ओना, छलानन्दकमनमेअपनविचारकदशा-दिशाछेलैनआविचारदेवकमनमेअप्पन, तँएकेतएबैसकऽगप-सप्पकरबतइमेविचारभिन्नतादुनूकबीचछेलैन्हे।छलानन्दकमनमेछेलैनजेचाहकदोकानपरदस-पाँचगोरेरहबेकरैछैथ, तइबीचविचारदेवकेँमुड़ियबैमेबेसीबाधानहियेँहएततँएचाहकदोकानपरचाहकबहन्नेअपनोविचारससारिलेब।मुदाविचारदेवकजहिनामनुखकइमानढहनेआक्रोशकतरंगउठैतरहैएतहिनाउठिरहलछेलैन।जइसँआगूमेदुनूकदिशादेखरहलछला।अपनमनकबातउझैलछलानन्दकमुँहपरथुकबछेलैनमुदातइलेओहनस्थानपरबैसगप-सप्पकरबनीकबुझैथजैठामदुइयेगोरेहोइथकिएकतँबेसीलोकमेविचारकरूपेबदैलजाइएजइसँविवादअगुआविचारमेमोड़आनिदइए...।विचारदेवबजला- “छलाभाय, केतएबैसगप-सप्पकरब?” छलानन्दबजला- “ईहोकोनोकिबड़भारीविचारकबातभेल, कोट-कचहरीमेचाहकदोकानतँसभसँबढ़ियाँअछिए।” ओना, छलानन्दकधुर्तइपरविचारदेवकमनभरमैछेलैनजइसँआक्रोशकलहैररसे-रसेजगजियारेभेलजारहलछेलैनमुदातेकरागनगुआइरसॉंपजकाँ, मानेजहिनागनगुआइरसॉंपअपनओहनविषकेँजेगहुमनसाँपकेँखाकऽपचासकैएतहिनापचबैतमिरमिराइतबजला- “छलाभाय, जखनतीसबर्खकगप-सप्पबॉंकीअछितखनओइबीचमेनीक-बेजाएसभरंगकनेगपोअछिआकाजोअछि, तेकराजँदुइयेभैयारीमेसुनबसेबेसीनीकहएत।तँएदछिनवारिकातजेपीपरकगाछअछि, तैठामबैसगप-सप्पकरबबेसीनीकहएत।” जेविचारविचारदेवकमनमेछेलैनतैठामछलानन्दकनजैरपहुँचबेनेकेलैनतँएसहमतहोइतबजला- “चलू, पानोतँअखनेखेलौंहेन।जाबेमुँहकपानसठतताबेगपो-सप्पभइयेजाएत।” पीपरकगाछकनिच्चॉंबैसतेजेनाऑक्सीजनभरलहवाकसाँसविचारदेवकसगरशरीरलेलकैनतहिनाप्राणवायुतेजभऽगेलैनजइसँप्रणशक्तिउमैकउठलैन।एकान्तदेखआकिअपनबेवसायदेखछलानन्दबजैकक्रमबनौलैनआकिकीसेतँओजानैथमुदाबैसतेबजला- “विचारभाय, कोट-कचहरीकजँकोनोकाजहुअएतँकहब।अपनेऑफिसबुझू, हाथकहाथकाजहएत।” छलानन्दकबातसुनिविचारदेवकमनछिलैकउठलैन।छिलैकतेमनमेपूर्वकृत्तजगलैन।पूर्वकृत्तईजेजखनकौलेजमेदुनूगोरेमानेछलानन्दोआअपनोपढ़ैछेलौंतहियेकजीवनकघटनाछी।जातिप्रमाण-पत्रआआयप्रमाण-पत्रककाजसँजखनअहीठामदुनूगोरेआएलरहीआसातदिनदौड़-बरहाकेलापछातियोकाजनहिभेलछेलएतखनकीनौबतभेलछल..! भरिसकछलानन्दसभबिसैरगेल।विचारदेवअपनशान्त-चित्तचेतनविचारदैतबजला- “छलाभाय, सत्तैरसालकअजादीकपछातियोजँसरकारीकार्यालयअपननहिभेलतखनअजादीकीभेटल।” ओना, विचारदेवअपनमनकअनुकूलविचारसेहोरखलैनमुदाचौक-चौराहापरबैसनिहारछलानन्दविचारकगम्भीरतानहिबुझिबजला- “ऐठाम, जेतेकअफसरसँलऽकऽचपरासीतकछैथसभअपनेलोकछैथतँएअपनाकाजमेकेतौरोक-टोकथोड़ेहएत।” मनकविचारबदलैतविचारदेवबजला- “देस-कोसककीहाल-चालअछिछलाभाय?” जेनामनकजन-जागृतविचारछलानन्दकछेलैनतहिनानमहरछड़पानछड़पैतबजला- “अखनधरिकजीवनकसभसँअनुकूलपरिस्थितिदेशकबनिगेलअछि।” छलानन्दकमुँहकअनुकूलपरिस्थितिसुनिविचारदेवकमनविचारकदुनियॉंमेचकभौरलेलकैन।चकभौरईलेलकैनजेदेशकएहेनपरिस्थितिबनिगेलअछिजेसबहकहाथककाजछीनारहलअछि, लोककबेकारीबढ़िरहलअछिआछलानन्दबाजिरहलछैथजेअनुकूलपरिस्थितिअछि! विचारकदूरीदेखविचारदेवमनपरजोरदेलैनतँबुझिपड़लैनजेजहिनाछलानन्दशुरूमेभाषाकजालपसारिनेतागिरीशुरूकेलैनभरिसकओचालिअखनोधरिओहिनाधेनेछैन!! वएहलच्छेदारभाषणगमैआभाषासँकोसोदूर..! जइजन-गणकेँजगाअपनजीवनआशासनसत्तासँअवगतकराएबअछितेकराभाषाकमुखारीबान्हितेनादूरकऽदेबजेअपनवास्तविकोदूरीसँदूरहटादेब।तैबीचहाथकघड़ीपरविचारदेवकनजैरगेलैन।लगिचाएलसमयदेखमानेरजिष्ट्रीऑफिसक, अपनविचारकेँलगिचियबैतविचारदेवबजला- “छलाभाय, छोड़ूदेश-दुनियॉंकबातअपनजीवनकहाल-चालकहू?” अपनजीवनकहाल-चाल-देसुनिछलानन्दकमनओहिनाकोढ़ियासँबतियागेलैनजेनागाछमेकोढ़ी-सँ-बातीहोइए।छलानन्दकेँएकाएकजेनाजीवनककोनोशुभसन्देशभेटगेलहोनितहिनाबजला- “विचारदेवभाय, अपनदेशअपनसमाजअदौसँधर्मकरस्तापकैड़जहिनादुनियॉंमेअपनहस्तीबरकराररखैतआबिरहलअछितहिनानेआजुकपरिवेशमेसेहोअनिवार्यभइयेगेलअछि।” छलानन्दकविचारसुनिविचारदेवकमनमेजेनातीनदिससँतीनटागोलाकचोटएक्केबरेलगिगेलहोनितहिनाभेलैन।तीनचोटकमानेभेलसत्ता, समाजिकविचारधाराआसमाजकनेतृत्वकरैबलाकनेत-गिरी।तीनूविचारविचारदेवकमनमेओहिनाघोर-मट्ठाकऽदेलकैनजेनाजूड़शीतलपाबैनदिनधिया-पुताडोह-डाबरवामरैतपोखैरकमाटि-पानिकेँगीलथालबनादइए।मुदाविचारकलम्बाइ-चौड़ाइआसमैयकसंकीर्णताकबीचसामंजसकरैतविचारदेवबजला- “भायछला, सभदिनसँछल-प्रपंचछलि-छलिदुधमुँहजन-गणकेँछलैतछिछलबैतअनलकअछिआअखनो, मानेएक्कैसमोसदीमेसहएकऽरहलअछि।वाहरेजुगआवाहरेजुगकधर्मआवाहरेजुगनिर्माणकर्त्ता..!” बिच्चेमेछलानन्दबजला- “सेकीविचारभाय?” विचारदेवबजला- “दुनूगोरेसंगेनेएक्केकौलेजसँइतिहासविषयमेऑनर्सकसंगबी.ए. पासकेनेछी।” छलानन्दबजला- “हँ, कनियेँपैरबीहमरासुतरलतँएअहाँसँपाँचनम्बरबेसीहमराऑनर्समेआबिगेलमुदाअहाँहमरासँबेसीमेहनतकरैछेलौंसेकेनासोझामेनकारब।” विचारदेव- “ओइबातकेँछोड़ू! जेकराजेमनमानैएसेसेकरैए।ईतँबुझलेअछिनेजेसमाजिकगुलामीसँलऽकऽदेशधरिहजारोबर्खसँगुलामरहलअछि?” मुड़ीडोलबैतछलानन्दबजला- “हँ।” विचारदेव- “देशकजन-गणसशक्तछलतँएगुलामरहलआकिआनो-आनकारणसभगुलामीकतेहेनपोषकछलजेबान्हि-छान्हिओकरागुलामबनौनेरहल?” विचारदेवकबातसुनिछलानन्दठमकला।छलानन्दकेँठमैकतेविचारदेवकमनमेउठलैनजेजेतबेसमयअछितहीमेसभबातकिएनेछलानन्दकेँमुँहपरकहिथूकिदिऐ।मुँहपरथुकैककारणविचारदेवकमनमेजोर-सोरसँईउठिगेलछेलैनजेधर्मनिर्पेक्षसमाजकचर्चजेदिन-रातिकरैछलाओआइसम्प्रादायिकताकआड़मेअपनाकेँजीतलरूपदेखरहलाअछि..! विचारदेवबजला- “भाय! आबसमयलगिचागेलहतँएबैसारकेँविसर्जनकरैतउपसंहारसुनिलाएह- आध्यात्मवादीजहिनाअध्यात्मकेँआगूमेठाढ़करैतअध-आत्मीबनिजन-गणकेँछलिरहलअछितहिनातोंहूकऽरहलछह।” विचारदेवकविचारजेनाछलानन्दकहृदयकेँछलनीबनादेलकतहिनाछलानन्दछल-छलाउठला।छलछलाइतछलानन्दकमुहसँबकारफुटबबन्नभऽगेल। एकतरफाविचारदेवबजला- “छलाभाय, जहिनाअपनइतिहासगौरवशालीअछितहिनागौरवशालीइतिहासभंगीमानेइतिहासकेँभंगकरैबलासेहोरहलअछि।जहिनागौरवशालीआध्यात्मिकविचाररहलअछितहिनाआध्यात्मिकधाराकेँधाराशायीकरैबलाकगौरवशालीइतिहाससेहोरहलअछितँएअखनएतबे।सबाचारिबाजिगेल।जइकाजेआएलछीसेनेप्रमुखभेल।” शब्दसंख्या : 2255, तिथि : 25 फरवरी 2020 Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव Join Videha googlegroups विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 111 ८) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 १०) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १३) विदेह सम्मान विशेषाक- २००म अक १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १४) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आमंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी VIDEHA 209th issue विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of original work.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् (c)२००४-२०२०. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2020 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA
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