VIDEHA — Issue 296 / अंक २९६

Publication: VIDEHA · Issue: 296
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विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' २९६ म अंक १५ अप्रैल २०२० (वर्ष १३ मास १४८ अंक २९६) 'विदेह' २९६ म अंक १५ अप्रैल २०२० (वर्ष १३ मास १४८ अंक २९६) ऐ अंकमे अछि:- १. प्रदीप पुष्पक दू टा गजल २. उमेश मण्डल-- जगदीश प्रसाद मण्डलक ‘मुड़ियाएल घर’ ३. आशीष अनचिन्हारक एकटा गजल ४. जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा- अग्नि-परीछा/ रहैजोकरपरिवार/ परिपक्वनिरलज प्रदीप पुष्प गजल- १ आँखि बजलै ओकर की ठोर बजलै जहिया बजलै से बहुत जोर बजलै चान गगनक लगै छै झुझुआन किए देखि तोरा ई मन चकोर बजलै इज्जति कृष्णक सोझा लुटलै हम्मर कलपैत पाँचालीक पटोर बजलै मुँह कानसँ लागल ओ शरीफ जेना मुदा लोक नाम ओकर चोर बजलै बर्गर पिज्जा शहरमे भेटत बहुत हम नइ भेटब मुदा तिलकोर बजलै (2222222222सभ पाँतिमे।दूटा अलग अलग ह्रस्वकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि) गजल- २ साँझ रही हम पराती रही हम तोहर कबूला पाती रही हम तूँ मूँड़ी झुका बेदी तऽर छलेँ अक्षत छिटैत बराती रही हम आइ अन्हरिया नाम हमर अछि सुन कहियो दियाबाती रही हम सुरूज घोंटि देवता नइ बनलौं छी बानरे उत्पाती रही हम हमरा मतलब छऽल एक तोरेसँ नइ समाजक अवघाती रही हम ओ पोथी फाड़ि फेंक देलेँ की जाहिमे पहिलुक पाँती रही हम (222222222 सभ पाँतिमे, बहरे-मीर) उमेश मण्डल जगदीश प्रसाद मण्डलक ‘मुड़ियाएल घर’ मुड़ियाएल घर (2016) :एहि पोथीमे संग्रहित कथासभक लेखन 6 सितम्बर 2016 सँ 28 नवम्बर 2016 धरिक समयावधिमे कथाकार कयने छथि। ‘मुड़ियाएल घर’ कथा संग्रहक पहिल संस्करण 2016 इस्वीमे पल्लवी प्रकाशन, तुलसीभवन, जे.एल.नेहरूमार्ग, वार्डनं. 06, निर्मली, जिला- सुपौलसँ प्रकाशित भेल अछि। एहि पोथीक लोकार्पण दिनांक 31.12.2016क श्री अजय कुमार दास ‘पिन्टु’जीक संयोजकत्वमे आयोजित ‘सगर राति दीप जरय’क 92म कथा गोष्ठी- नवानी (मधुबनी)मे मंचपर उपस्थित समस्त साहित्यकार एवम् साहित्य प्रेमीगणक द्वारा सामुहिक रूपे भेल अछि। उक्त पोथीमे संग्रहित सभ कथाक संक्षिप्त विवरण- कथाक शीर्षक, शब्द संख्याआलेखन तिथिनिम्नांकित अछि- 1. बगदल गाम- शब्द संख्या :2405, तिथि : 6 सितम्बर 2016 2. बत्तीसोअना- शब्द संख्या :890, तिथि : 8 सितम्बर 2016 3. कचहरिया रोग- शब्द संख्या :1651, तिथि : 12 सितम्बर 2016 4. दिन घटि गेल- शब्द संख्या :2425, तिथि : 5 अक्‍टुबर 2016 5. मुड़ियाएल घर- शब्द संख्या :2352, तिथि : 11 अक्‍टुबर 2016 6. गामक सुरता- शब्द संख्या :2265, तिथि : 19 अक्‍टुबर 2016 7. खतियाएल घर- शब्द संख्या :2057, तिथि : 09 नवम्बर 2016 8. बात-कथा सुनौलक- शब्द संख्या :1889, तिथि : 15 नवम्बर 2016 9. अनका बेर ओंघी- शब्द संख्या :2233, तिथि : 20 नवम्बर 2016 10. देव उठान- शब्द संख्या :2297, तिथि : 24 नवम्बर 2016 11. नमहर घरक चोरि- शब्द संख्या :2397, तिथि : 28 नवम्बर 2016 बगदल गाम’,कथा ‘मुड़ियाएल घर’क पहिल रचना थिक। समाजमे व्याप्त रूढ़िवादी सोच ओ अन्धविश्वाससँ जकड़ल समाजक चित्रकेँ प्रस्तुत करैत अछि। समाजक ओहन व्यक्ति तथा सोचकेँ रेखांकित करैत अछि जे मिथिलाक किसानी-आत्मनिर्भर संस्कृतिकेँ कमजोर करैत रहल अछि। प्रस्तुत कथाक पात्र- घुरनकेँ देखि ओहि चीजकेँ अकानल जा सकैछ। घुरन, मनहि-मन सोचने छलजे पढ़ाइ समाप्त कएला बाद नोकरी नहि करब। जतेक अपन खेत-पथार अछि, बपौती सम्पति अछि ओहिमे रमि अपन परिवारकेँ ठाढ़ राखब। मुदा से नहि भऽ सकलैक। कारण, कोनहुँ चीजकेँ जाधरि अनुकूल परिस्थित नहि भेटैछ ताधरि ओकर विकास कोना सम्भव भऽ पाओत? ई शाश्वत सत्य थिक। खाएर.., पढ़ल-लिखल घुरन जखन खेतमे पहुँचला कि रंग-बिरंगक कुटि-चौल समाजमे चलए लागल..! खेती-किसानीक विरूद्ध मिथिलामे जे सामाजिक वातावरण रहल ओ किनकहुसँ छिपल नहि अछि। उदाहरणक रूपमे किसानक जिनगी आ खेती-बाड़ीक स्थिति सबहक सोझमे अछिए। ओना, वैचारिक दौरमे अपना एहिठाम कृषि संस्कृतिकेँ बहुत ऊपर मानि लेल गेल अछि। मुदा व्यवहारिक स्थिति ठीक विपरीत अछि। घुरनकेँ छीतन कहलकन्हि- “अहाँ तँ पढ़ल-लिखल छी, अहूँ जखन घासे छिलबै तखन हमरा सन मुरुख आ अहाँ सन पढ़ल-लिखलमे की अन्तर भेल?” खेती-किसानीक संग गाम-घरकेँ छोड़ि घुरन परदेस चलि जाइत अछि। छीतनक बात घुरनकेँ अपना प्रभावमे आखिर लऽ कोना लैत अछि? ई विचारणीय थिक। ‘बत्तीसोअना’,एक पढ़ल-लिखल यात्री गाय-घी लऽ कऽ कुशेश्वर स्थान विदा होइत छथि। ओहिठाम पहुँचए लेल नाहपर चढ़ि कोसी धार टपए पड़ैत छैक। नाहपर बैसल ओ यात्री आ मल्लाह दुइए व्यक्ति रहैत छथि। यात्री पुछलखिन खेबैयाकेँ- “भैया, तूँ फिजियोलोजी जनै छह?” खेबैया बाजल जे ‘नहि जनै छी’, ताहिपर यात्री कहलकनि, तखन तोहर 25 प्रतिशत जिनगी पानिमे चलि गेलह। ..एहिना आरो-आरो ओहन प्रश्न यात्री पुछैत रहल जाहिसँ ओ वेचारे अवगत नहि छल। यात्री कहैत-कहैत 75 प्रतिशत धरि कहि देलकैक जे तोहर जिनगी बेकार भऽ पानिमे चलि गेलह। किछुकालक बाद मौसमक रूखि बगदने नाहक स्थिति बिगड़ए लागल। खेबैया बाजल- “भाय साहैब, तैयार भऽ जाउ, हेलए अबैए?” यात्रीक मुहसँ ‘नहि’ सुनि खेबैया पुन: बाजल- “भाय साहैब, जिनगीक धार उकड़ू-सुकड़ू दुनू चलैए। हम तँ बारहेअना डुमब, मुदा अहाँ बत्तीसोअना डुमब! किए तँ अहाँकेँ पढ़ैओमे बहुत खर्च भेल अछि!!” एहि तरहेँ ‘बत्तीसोअना’ कथा बेस मार्मिक चित्र प्रस्तुत करैत ओहि मानसिकताक विरूद्ध ठाढ़ होइत अछि जे ज्ञानक अर्थकेँ अनर्थ करैत हीनभावनासँ ग्रस्त छथि। ‘कचहरिया रोग’, एहि कथामे मुख्यत: तीन गोट पात्रक चर्च अछि। पहिल श्रीकान्त, दोसर गौरी आ तेसर कथाकार। कथाकार अपनहुँ एक पात्र छथि। श्रीकान्त हालहिमे मोटर साइकिल किनलक ओकरे ड्राइवरियो लाइसेंस आ गाड़ियोक लाइसेंस बनेबाक छेलै, वएह पुरान कचहरिया बुझि हिनका लग (कथाकार लग) आबि कहलकनि जे कनी मधुबनी चलू। मधुबनीमे हिनकर एक संगी कोर्टमे मुंशीक काज करैत छथिन। जनिक नाओं अछि गौरी। कथाकारकेँ गौरी मोन पड़ैत छथिन। मोन पड़िते हुनकापर तामस चढ़ि जाइत छन्हि। तीस वर्ष पहिने गौरी आ कथाकार समेत गामक 28-30 व्यक्ति जमीनक आन्दोलनमे भाग लेने छलाह। ओहि समय गाम-गाममे जमीनक लड़ाइ चलि रहल छल। ईहो सभ जमीनक हेतु लड़ाइ लड़ला केस-मुकदमा चलल। ताहि क्रममे गौरी संकल्पित भेल छलाह जे गामहिमे रहि खेती करब। मुदा कोर्टक दौड़-बड़हासँ लिखै-पढ़ैक लूरि भऽ गेलन्हि आ ओ (गौरी) मुंशीक काज करय लगलाह। यएह सभ चीज कथाकारक स्मृतिमे आबि गेने मोने-मन तामसो उठि जाइत छन्हि। मुदा एक तँ श्रीकान्त भातिज छथिनआ दोसर विवाहमे दहेज नहि लेबक विचार सेहो हिनकर मानि लेने रहनि। दुनू व्यक्ति मधुबनी जा गौरीसँ भेँट कए काज करबैत छथि। आ सॉंझ धरि घुमि कऽ घर आबि जाइत छथि। ‘मुड़ियाएल घर’, उदयपुर गामक जागेश्वर काका आ रमणी काकीक बीचक ई कथा थिक। वाणीश्वरी भगवतीक दर्शनक हेतु दुनू परानी विदा होइत छथि। संगहि उदयपुरक आरो किछु लोक वाणीश्वरी भगवतीक दर्शनक संगबे भऽ जाइत छन्हि। सबा रूपैआ दक्षिणा दए जागेश्वर काका फुटे अपना दुनू परानी लेल एकटा कोठरी भाड़ापर लैत छथि। राति भरि रूकि भोरे स्नान कएडाली सजा भगवतीक पूजा करैत छथि। फलाहार कएला बाद गाम अबैत छथि। कथाक सामान्य पाठ यएह थिक। मुदा कथाक उद्देश्य बेस व्यापक अछि। वाणीश्वरी भगवतीक भक्त वएह छथि जनिक वाणीमे विवेक छन्हि, जनिक स्वर कर्मसँ बान्हल छन्हि। ई चीज कथामे तखन स्पष्ट होइत अछि जखन जागेश्वर काकाकेँरमणी काकी पुछलकन्हि जे गामेक कए गोटे संगे जाए चाहैत अछि वाणीश्वरी भगवतीक स्थान। ताहिपर जागेश्वर काका अपन विचार व्यक्त करैत छथि ओहिमे वाणीश्वरी भगवतीक महात्म्यसँ झलैक उठैत अछि। ओ कहैत छथि- “कहैले तँ सभ (गौंआँ) वाणीश्वरी भगवतीक दर्शन करय जेता मुदा घरसँ बाहर धरिक जे बोली-वाणीक रूप बना नेने छैथ, से की अपने वाणीश्वरी भगवतीक दर्शन करता, ओ तँ अप्पन दर्शन भगवतीकेँ देथिन। मुदा जे हौउ, एके गाममे सभ रहै छी, मुदा...।” आशीष अनचिन्हार गजल माला बैसल तड़िखानामे ठोपो ढ़ूकल तड़िखानामे चिखना देखि कऽ लबनी देखि कऽ पंडित नाचल तड़िखानामे पूरा दुनियाँमे मरि गेलै जीवन बाँचल तड़िखानामे चानन घसलहुँ ठाँओ निपलहुँ हारो गाँथल तड़िखानामे बड़ दिनक बाद अनचिन्हारो अपने लागल तड़िखानामे सभ पाँतिमे 22-22-22-22 मात्राक्रम अछि। दू टा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि। जगदीश प्रसाद मण्डल अग्नि-परीछा/ रहैजोकरपरिवार/ परिपक्वनिरलज अग्नि-परीछा एक-सबामाससँसुधीरनहिभेटलछलतँएमनमेबेर-बेरउठिरहलछलजेभरिसकसुधीरओहनकाजसभमेफँसिगेलअछिजइसँअवकाशनहिभेटनेनहिआएलअछि।जँसेनहिरहैततँजहिनासभदिनवानइसभदिनतँतेसरादिनपरभेँटभइयेजाइछलतहिनानेहोइत।लगलेमनमेविचारआगूबढ़ल।आगूबढ़ितेविचारजगलजेजखनसुधीरकसंगभैयारीकसम्बन्धसमाजमेअछितखनतँजहिनाअपनपरिवारतहिनानेसुधीरोकपरिवारभेल।आबकिओजुग-जमानारहलजेराहड़िकखेतीहोइतरहैजेआँखिसँलोकदेखतोछलआमुहसँखाइतोछल।तेतबेनहि, आमीलदेलरोड़ियाएलदालिवारोड़ियाएलउसनाखा-खाढकैरकऽबजितोछलजे‘भैयारीआदियादीराहड़िकदालिजकाँजेतेकगलैएतेतेकओइमेबेसीसुआदहोइछै..!’ आबतँलोकभैयारीसँआगूबढ़िमाए-बापकेँजहिनाबीरानबुझएलगलअछितहिनागर्भ-गर्भितबच्चाकेँसेहोबुझियेरहलअछि; बुझबेटानहिकरैएअपनइश्ककचलैतकइयोरहलेअछि।खाएरजेअछि, जेतएअछिसेतेतएअछितेतुक्कालोकअपनमालाअपनेगरदैनमेपहिरह।दुनियॉंकिहमरेठीकेदारीमेचलिरहलअछिजेओभरसियरआकिइंजीनियरहिसाबमाँगत।अपनतनअछि, तनमेअपनमनअछि, मनमेसंकल्पअछिसंकल्पमेधारणअछिधारणमेजीवनअछि, जीवनमेजिनगीअछिजेकरासभअपन-अपनसीमा-रेखाखींचजीवरहलेअछि। एकाएकमनकइच्छाप्रवलभेल।कहबजेइच्छाकिकोनोनीकभाववावस्तुछीजेअनेरेमनमेउठलआओकरापाछूदौड़गेलौं? मुदानहि, इच्छोमे‘कुइच्छा’सेहोरहैएआ‘सुइच्छा’सेहोरहितेअछि।भाय, जखनएकसमाजमे–मानेएकगाममे–भैयारीरूपमेसुधीरअछितखनजँओकोनोकारणेनहिआबिभेँटकऽसकलतँअपनेकिएनेसुधीरेऐठामपहुँचसमय-सालकसमाचारबुझी..! मनमानिगेलजेसुधीरसँभेँटकरबऔझुकाजिनगीकपहिलकर्मभेल। चाहनइपीनेरहीकिएतँसुतिकऽउठलेरही, ओनामनमेबिसवासअछिएजेजखनेसुधीरऐठामजाएबआकिसुनीतिसभकाजछोड़िहमरेआगत-भागतमेजहिनासभदिनसँलगैतआबिरहलीहेनतहिनालागिजेती, तँएओइठामपहुँचबेदेरीअछि, चाहभेटियेजाएत।मुदाअपनाऐठामकचाहकसमयसँपाँचमिनटआगूबढ़िगेलछल, पछुआएलकाजदेखपुराइयेकऽनिकलबनेकर्तव्यभेल।संजोगबनलपत्नीचाहनेनेपहुँचबजली- “चुल्हिसुनगैमेकनीदेरीभऽगेलतँए...।” एकतँपाँचेमिनटकबिलमसमय, दोसरजखनपत्नीअपनेमुहेँकबुललेलीतखनअनेरेमनगरमापत्नीकेँकिछुकहिऐनसेहोकेहेनहएत।चाहपीबैत-पीबैतमनमेजागिगेलजेपत्नीकेँकहिदिऐनजे‘सुधीरबहुतदिनसँभेँटनहिभेलअछितँएपहिनेकनीओकरासँभेँटकेनेअबैछी।’मुदाअपनेमनमनाहीकेलकजेऐलेपत्नीसँपुछैकआकिआदेशलइकखगताकोनअछि।अपनोजीवनकक्रियाअछिआहुनकोअपनजीवन-क्रियाछैन्हे।मानेजखनपरिवारमेकाजकविभाजितरेखास्पष्टअछितखनओकिएहमरापुछिकऽकिछुकरतीआकिहमहींहुनकापुछिकरी।बेकतीगतजीवनकअपन-अपनकाजअछिएजेकरास्वतंत्रभऽनिमाहैकअछिजइसँपरिवारकपायामजगूतबनलरहत।रहलओहनकाजजेदुनूकबीचसम्मिलितरूपमेअछि।मुदातेकरोतँकरैसँपहिनहि–मानेकाजमेहाथलगबैसँपूर्वेदुनूबेकती‘करबकविचाररेखा’खींचअपन-अपनक्षमतानुसारहाथलगाएब।यएहनेस्वतंत्रजिनगीकपरिवारिकडायग्रामभेल।जँसेनहिभेलआकाजकबँटवाराकरिकरैकजिम्मादेलाकपछातियोजँबेर-बेरखोंचारनचलततँयएहनेपरतंत्रताकपहिलआधारभेल।पत्नीहोथिआकिबाले-बच्चाकिनकोकाजकजिम्मादेलापछाइतकाजकनिर्धारितसमयपुरलापरकाजकजानकारीलेबएकगार्जनकदायित्वसेहोभेल, मुदाकाजकबीचमेटोका-टोकीकरबभलेँचरियाएबोकिएनेकहलजाएमुदाकाजकबीचबाधाउपस्थितकरबनहिभेलसेहोतँनहियेँमानलजासकैए।ओना, पत्नियोँओहनअभ्यस्तनहियेँछैथजेआन-आनकपत्नीजकाँअगुरबारेतगेदाकरैतपुछतीजेकेतएजाएबवाकीकरबवाफल्लाँकाजकरू। चाहपीबअपनेसुधीरसँभेँटकरएविदाभेलौंआपत्नीअपनघरककाजमेलागिगेली।रस्ताचढ़ितेमनमेसुधीरकप्रतिरंग-बिरंगकअनेकोप्रश्नउठिगेल।उठबोकेनानेकरैत, कोनोकाजकरैसँपहिनेजँएकाग्रभऽओइकाजकरूपो-रेखाआहानियो-लाभविचारिलीतँओइकाजकसफलताकशत-प्रतिशतजँनहियोँतँपनचानबे-छियानबेप्रतिशतआशाबनितेअछि।भेलतँकोनोकाजकसंकल्पलेलापछाइतओइकाजमेतन-मन-धनकसहयोगलैतकरबेनेकाजकबफादारियोभेलआकर्मकारीककर्मकारोभेलौं।जँसेनहिजीवनबनासकलौंतँअकासकफुलवारीसँफूललोढ़िअकासदेवकेँपूजबेनेहएत। सुधीरकप्रतिजेरंग-बिरंगकविचारजगलतइमेरंगकविचारबेसीआबिरंगकविचारकमजगल।ओनाजीवनकाँचसूतजकाँहोइतेअछिजेकखनोमसैककऽभसैकसकैएमुदातेकरोसम्भावनासभठामनहियेँअछि, किएतँओनिर्भरकरैएजीवनकसूत्रधारपर।जेहेनसूत्रधाररहैएतेहनेसूतकेँनेसुतियबैतअपनजीवन-जालबुनैए।सुधीरकप्रतिविचारजगलजेभरिसकसुधीरजीवनककोनोउकड़ूकाजमेओझरागेलअछिजइसँभेँटनहिभऽरहलअछि..! मुदालगलेमनमर्दनकरैतकहलकजेसुधीरकिकोनोअनाड़ीखेलाड़अछिजेअमतीकाँटकझाड़मेवामकड़जालमेओझराजाएत।ओतँजिवनीखेलाड़अछिजेजीवनकेँरत्ती-मासासँतौलअपनकाजकेँखण्ड-खण्डकरैतघरकठाठजकाँएक-एककोरो-बातीकेँसुतियाकऽबान्हिताधैरगीरहनहिदइएजाधैरमनककल्पनाभोरकसपनाबनिसाकारनहिहोइए।विचारआगूबढ़िसुधीरकदोसरअंगदिसबढ़ियेरहलछलकिपाछूसँअबैतसुधीरकछोटभाए- बिसवासलालपरनजैरपड़ल।बिसवासलालपरनजैरपड़ितेडेगठामहिरूकिगेल।मनमेउठलईतँनीकअवसरअछिजेपाछूसँअबैतबिसवासलालसँसुधीरकजानकारीलैतसुधीरलगतकपहुँचब..! चारिलग्गाबिसवासलालपाछूएछलकिपुछलिऐ- “बौआ, भोरे-भोरकेतौअन्तएसँअबैछह?” बिसवासलालबाजल- “आनगामसँतँनहिमुदादछिनवाइरटोलकाजेगेलछेलौं, सएहघुमलौंहेन।” ओना, बीस-बाइसबर्खकबिसवासलालअछिमुदासभदिनसँजेबच्चाबुझैतऐलिऐसेअखनोबुझितेछी।बच्चेमेनेकियोअपनजिनगीकेँबचिया-बाँचिआगूदिसबढ़ैए।जहिनारंग-बिरंगकवस्तुसँदुनियाँभरलअछितहिनानेरंग-बिरंगकविचारोभरमैएमानेभ्रमणकरैएआओहीबीचनेबच्चोआसियानोअपनभरमैतविचारकेँपकैड़चलितेअछि।मुदासेनहि, बच्चारहितोबिसवासलालकेँअपनजीवनकमान-दण्डछइ।किनकासंगकेहेनसम्बन्धअछिआओइसम्बन्धकेँसम्बन्धितबनिकेनानिमरजनाकरैकअछिसेबिसवासलालकेँअछिए।पुछलिऐ- “बौआ, भायसाहैबगाममेछथुनकीनहि?” पुछैककारणछलजेसुधीरअपनेतँडॉक्टरऐठामअपनाकाजेकमजाइए, किएतँओशरीरआआत्माकसम्बन्धएकसूत्रमेबन्हनेरहए, दुनूकजोगक्रियाबनलरहएतइलेसतत्सचेष्टरहितेअछि।मुदागामोतँगामछीएकदिसज्ञानवानसँभरलअछितँदोसरदिसदर्जनोअज्ञानवानकसृजनोप्रतिदिनभइयेरहलअछिआअज्ञानियोमहाअज्ञानीदिससेहोबढ़ितेअछि।जखनेअज्ञानज्ञानबीचआज्ञानअज्ञानकबीचबसततखनेबेर-बेरउट-पटाँगनइहएतसेहोबातनहियेँअछि।तँएअनके-अनकेकाजेमानेआने-आनककाजेसुधीरमहिनामेतीन-चारिबेरलहेरियासरायअस्पतालोआडॉक्टरोऐठामजाइतेअछि।बिसवासलालबाजल- “हँ!” बिसवासलालकमुहसँ‘हँ’सुनिसुधीरसँभेँटहेबाकआशाकबिसवासतँजगियेगेलमुदातैसंगईहोआशाजागलजेकिएनेबिसवासेलालसँभाँजलगालीजेअखनकोनकाजकधुमसाहीमेसुधीरपड़लअछिजेमास-सबा-माससँभेँटनहिभेल।मुदालगलेमनकविचारमेसुधारभेलजेजेकाजआँखिसँदेखैबलाअछिसेभाँजजँअधा-छिधालगियोजाएततैयोमनकभीतरकजेकाज–मानसिकवाभाविक–अछितेकरभाँजथोड़ेलागत।ओना, ऐविचारसँमनपाछूहटएलगलमुदादोसरविचारजोरमारलकजेएहनोतँसम्भवभइयेसकैएजेएकपरिवारकसहोदरभैयारीकबातछी, जँपरिवारजनमिलिकोनोकाजकनिस्पादनकरैतहुअएतखनतँसोल्होअनाभाँजपरचढ़ैकसम्भावनाबनितेअछि।तैबीचसंगे-संगमानेअपनोआबिसवासोलालकिछुडेगआगूबढ़ियेगेलछेलौं।सामंजसकरैतबजलौं- “बौआ, परिवारकसमाचारबढ़ियाँछहकिने?” जहिनापीतमरूलोकअपनकाजमेअन्न-पानिछोड़िजी-जानगमौनेरहैएतहिनाविचारवानोनेअपनविचारकपाछूजी-जानलगेलाकपछातियोदोसरकेँकिछुनहिकहिताधैरआनकसहयोगकआशानहिकरैएजाधैरअपनसफलताकआशाजागृतावस्थामेरहैछै।एक्केपाँतिमेबिसवासलालउत्तरदेलक- “हँ, सभबढ़ियाँअछि।” ओना, बिसवासलालकबातसुनिमनमेएतेबिसवासतँबनियेँगेलजेसुधीरआँगे-समाँगनीकअछि।मुदानीकजखनअछितखनएतेदिनकबीचभेँटकिएनेभेल? मनमेदोसर-तेसरविचारजागएलगल।एकतँबिसवासलालकेँबच्चाबुझैछीजेपरिवारकसभबातबुझितोनेहएत।मुदासुधीरतँसेनहिछीओतँपरिवारकमेहथानछी; मानेघरकसंचालकछी।एहनोतँसम्भवअछिएजेपरिवारजनसँसुधीरबेकता-बेकतीओतबेसम्बन्धबनाचलैतहुअएजेतेसम्बन्धसँओसम्बन्धितहुअए।लगलेमनमेभेलजेपाइ-पाइकजोड़-जोगभेनेरूपैआबनिजाइए, पजेबा-पजेबाकजोड़-जोगसँघरबनिजाइएतहिनाजँगप-सप्पकक्रममेकिछुनव-नवविचारभेटैतजाएततँओहीजोड़-जोगसँनेसभअनुमानोलगियेजाएत।भेलतँजँअधो-छिधोसहीअनुमानभेटगेलतँबाँकीजहिनाकुम्हारकाँचमाइटिकबरतनगढ़िपक्काकऽबनालइएतहिनाअपनोमनकेँमनापक्काबनालेब।मुदासेसभविचाररस्तेमेगड़बड़ागेल।गड़बड़ाएलईजेथोड़ेबेआगूबढ़लापछाइतबिसवासलालबाजल- “भायसाहैब! हमदोसरोकाजेनिकललछी, ऐठामसँदोसरदिसकरस्ताधड़ब।” एतेकालजेमनमेछलजेरस्तामेसुधीरकसम्बन्धमेबिसवासलालसँसभसमाचारकभाँजलगिजाएतसेनइभेल।बजलौं- “जखनकाजेसंकल्पितछहतखनतोराथोड़ेकहबहजेसंगे-संगघरपरतकचलह।” बिसवासलालबिच्चेमेबाजल- “भायसाहैब, भैयाघरेपरछैथपहुँचतेभेँटभऽजेता।” कहिबिसवासलालअपनरस्ताकटलकआअपनेआगूबढ़लौं।असगरबटोहीकमनमेजहिनारस्ता-पेड़ाकरंग-रंगवस्तुदेखरंग-रंगकविचारजगैएतहिनाअपनोभेल।अपनेपरशंकाहुअलगलजेसुधीरकेँकहींहमरेसँनेतँकिछुभऽगेलैजइक्रोधेआएब-जाएबछोड़लकवाहमरविचारककारीपनदेख-देखराक्षसबुझिमुँहदेखबकेँअशुभबुझैए।आगूओबढ़ीआमनमेईहोहुअएजेघुमिजाइ।मुदाबटोहीकघुमबाकठौरजहिनाकोनोचौक-चौराहावाअपनगन्तव्यजगहपरपहुँचलापछाइतहोइएतेनातँअपनेकिछुनहिभेल, नेचौके-चौराहाबीचमेअछिजेचाह-पानखा-पीबघुमिजाएबआनेअपनगन्तव्येजगहपरपहुँचलौंजेघुमितौं।अधरस्तासँघुमनेअनेरेनेलोककहतजेमतिछिन्नूअछि।ओना, डेगरसे-रसेआगूएदिसबढ़ैतरहएमुदामनकघुरियानसेहोचारूदिसघुमैतरहल।कीकरी, कीनइकरीसेकिछुफुरियेनेरहलछल। अपनदरबज्जाकआगूमेसुधीरकेँठाढ़देखमनकसभविष-विषादएकाएकतरपड़िगेल।तैबीचसुधीरेआगूसँबाजल- “गोड़लगैछीभायसाहैब! किमहर-किमहरसवारीचललैहेन?” जहिनाभनसियाएक्केदाबियेचुल्हिपरचढ़लअनेकोबरतनकेँलाड़ै-चाड़ैएतहिनासुधीरकविचारबुझिपड़ल।मुदाकिछुअछितँभाएतुल्यअछितँएअपनाकेँसंयमितकरैतबजलौं- “बौआ, तोरासँभेँटभेनाबहुतदिनभऽगेलछलतँएमनउबियएलगल।तोरेसँभेँटकरएएलौंअछि।” सुधीरबाजल- “भायसाहैब, हमतँदोहरीफेड़मेपड़िगेलछीतँएसमैयकअभावदुआरेअहाँऐठामनइजाहोइछल, काल्हिसँकनीनिचेनभेलौंहेन।आइविचारकरैछेलौंजेअहाँसँभेँटकरी।” दरबज्जाकचौकीपरबैसबैतसुधीरआँगनजापत्नीकेँचाहबनबएकहिलोटामेपानिनेनेदरबज्जापरपहुँचलगमेबैसल।ओना, सुधीरकबातसुनिमनमानियेँगेलछलजेसुधीरकाजमेओेझरेनेभेँटनहिहोइछल, तँएदोसरजेतेककारणमनमेछलसभटाअपनेनिर्मूलभेनेमनेमेसमाप्तभऽगेल।तैबीचसुधीरकजेठकीबेटीसुकृत्तियाचाहनेनेदरबज्जापरपहुँचल।बेटीकहाथसँचाहलऽसुधीरहमरोहाथमेधरौलकआअपनोलेलक।दुनूगोरेचाहपीबएलगलौं।अधाचाहगिलासकसठिगेलमुदागप-सप्पकिछुउठबेनेकएल।पुछलिऐ- “केहेनदोहरीकाजमेफँसिगेलछेलहसुधीर?” गाममेजँकियोहमराचिन्हैएतँसुधीरचिन्हैए, मानेकोनकदरकलोकहमछीसेसभथोड़ेचिन्हैए।चीन-पहचीनदैतसुधीरबाजल- “भायसाहैब, गाममेरहितोअहाँजकाँगामसँहमहटलनइनेछी।समाजमेछी, समाजिकलोकभेनेअनेकोकाजसमाजकसिरचढ़रहितेअछि।पैछलादूमासकबीचगाममेकीसभभेलअछिसेनीकजकाँअहाँकेँबुझलअछि?” बजलौं- “नइ!” ओना, सुधीरकविचारकप्रवाहमेमुहसँ‘नइ’निकैलगेलमुदापाछूउनैटतकलौंतँबुझिपड़लजेधोखामे‘नइ’कहागेल।गामेछीहजारोलोकअछिहजारोरंगककाजअछि।तइमेभलेँसभकाजनइबुझलहुअएमुदाकिछुनेबुझलअछिसेतँधोखामेकहेबेकएलकिने।ओना, पैछलादूमाससँअधासँबेसीसमयगामसँबाहरेरहलौंतँएमुहसँ‘नइ’निकैलगेल। सुधीरगम्भीरहोइतबाजल- “भायसाहैब, पैछलाडेढ़मासकसभवृतान्तकहिदइछी।” सुधीरकमुहसँ‘पैछलाडेढ़मासकवृतान्तकहिदइछी’सुनिमनहलैसगेलजेबीचमेजेतेकदिनसँसुधीरनइभेटलछलसेसभबातकभॉंजबुझियेलेब।सामंजसकरैतबजलौं- “सुधीर, जहिनातोराघर-बाहरककाजसदिकालरहैछहतेनातँअपनानइअछिमुदादूगोरेकभेँटकबीचदुनूकसमैयोकमिलानीतँचाहबेकरी, भरिसकदुनूगोरेकबीचसहएभेलतँएएतेदिनकबादभेँटभेल।” दुनूगोरेकबीचविचारकवातावरणबनियेँगेल।सुधीरबाजल- “भायसाहैब, वृन्दावनसँएकटाव्यासजीएला।टोलकलोकसभविचारकेलैनजेसातदिनभागवतकथाहुअए।लगलेसूरेसभभारउठालेलैन।संजोगएहेनभेलजेगामकभागवतकथानहिभऽटोलकभऽगेल।मानेसमाजकनहिभऽएकजाइतिकभागवतभऽगेल।जइसँआनटोलमानेआनजातिकटोलमेजानकारीनइदेलगेल।अहूँछुटिगेलौं।” ओना, दुनूगोरेमेमानेहमराआसुधीरकबीचविचारकएकरूपतारहनेकाजोकएकरूपताअछिएमुदाऐठामओहनविचारफँसिगेलजइसँसुधीरहमरोसँदूरभऽगेल।ओभेलजेआनटोलकमानेआनजातिकजँकिनकोएकबेकतीकेँभागवतसुनैकहकारदेलजेतैनतँदोसरोकेँकिएनेदेलजेतैन।बजलौं- “जेसमयबीतलआओइमेजँकिछुभूल-चूकवागलतीभेलओकरतँप्रायश्चितेउपायअछि।नइतँमनमेसड़ैनकरत।खाएरजेभेलसेनीकेभेल।” हमरबातसुनिसुधीरकमनकबोझजेनाउतैरगेलहोइतहिनाबुझिपड़ल।सुधीरबाजल- “जहिनाटोलकसभमानेटोलकसभपरिवारएकमुँहरीभऽभागवतकथासुनैकदिशामेअगुएलातहिनाअन्तो-अन्ततकमानेसातोदिनधरिबनलरहला; जेटोलककहियौआकिसमाजकपैघउपलब्धितँभेबेकएल।” नीककेँनीकआअधलाकेँअधलाजखनसामुहिकरूपमेधड़ततखननेओधाराकरूपमेधारणकरैतधारबनिधड़धड़ाइतबहत।बजलौं- “वाह! वाह!! नीकउपलब्धिभेल।” ‘नीकउपलब्धि’सुनिसुधीरकमनजेनाविसाइनहुअलगलैतहिनाबुझिपड़ल।सुधीरकविसविसाएलमनदेखअपनोमनमेजेनाविसविसीउठएलगल।दोहराकऽबजलौं- “बौआसुधीर, नीकेमेअधलोछीपलअछिआअधलेमेनीकोनेछीपलअछि, तँएसातोदिनकसम्पूर्णबातकहऽजेकेना-केनाभेल।” ‘भागवतकथाकसातोदिनकबातकहऽ’सुनिआकि‘सम्पूर्णबात’सुनिसुधीरकमनजेनाबदलल।जइसँमनकविषादमेकम-कमीआएल।बाजल- “भायसाहैब, जहिनाटोलकसमाजएकमुँहरीविचारकेलैनतहिनाएकमुँहरीबेवस्थोकेलैनजइसँजहिनाभागवतकथाकसंकल्पलेलगेलतहिनाविसर्जनेतकनिमहबोकएल।” सुधीरकविचारसुनिमनमेभेलजेजँसातोदिनकवृतान्तसुनएलगबतखनतँसातदिनलगिजाएत।किएतँबेवस्थासँप्रवचनधरिदोहरीरूपमेचललअछिएतँएनीकहएतजेसंक्षेपेमेकिएनेसुनी।बजलौं- “सुधीरसभबातजेफरिछाकऽकहबहओतेसुनैकसमयनहिअछि।तँएमुख्य-मुख्यबातटाकहऽ।” सुधीरोजेनाबुझिगेल।बाजल- “भायसाहैब, जखनेव्यासजीसंकल्पकसंगआसनपरबैसमुँहखोललैनकिपहिलशब्द‘सज्जनवृन्द’निकललैन।” अनायासमुहसँनिकैलगेल- “वाह..!” एकतँवृन्दावनसँआएलव्यासजीतैपरसज्जनवृन्द, मानेभद्रसमूह, भद्रसमाजसँजखनकथाप्रारम्भकेलैनतखनजरूरसुपथदिशाकबोधसेहोकरेबेकरता।सुनैलेउत्सुकताआरोबढ़िगेल।सुधीरकआँखिपरआँखिगाड़िअपनजिज्ञासाजगेलौं।सुधीरोबुझिगेल।बाजल- “भायसाहैब, अपनवचनशुरूकरैसँपहिनेतीनटासंकल्पसुननिहारसभसँसामुहिकरूपेकरौलगेल।” पुछलिऐ- “तीनसंकल्पमेकीसभछल?” सुधीरबाजल- “पहिलछलजे‘झूठनइबाजी’, दोसरछल‘केकरोअधलानइकरी’आतेसरछल‘मनुख-मनुखकएकजातिअछितँएकोनोमनुखकेँअधलावानीचनइबुझी।” तीनूसंकल्पसुनिमुहसँनिकैलगेल- “अतिउत्तमसंकल्पछल..!” बजैकक्रममे‘अतिउत्तम’बजातँगेलमुदाजखनपाछूउनैटतकलौंतखनबुझिपड़लजेएहेनसंकल्पकिधिया-पुताकखेलछी।यएहदू-मुहाँरूपनेसमाजोआसमाजकबीचमनुखोकबीचएतेदूरीबनौनेअछिजेएकदिसजहिनाकियोराजाअछितँदोसरदिसरंकसेहोअछि।तहिनाएकदिसकियोमालिकअछितँदोसरदिसकियोनोकरोअछि।इत्यादि-इत्यादिअनेकोदूरीमनुख-मनुखकबीचआइयेनहिआदिएसँहोइतआबिरहलअछि...।‘अतिउत्तम’सुनिसुधीरकमनमेखुशीनहिविषाक्तउत्पन्नभऽगेल।विषाक्तउत्पन्नहोइककारणभेलैजेबेवहारिकजिनगीसँपरिचितसुधीरकेँऐबीचकसमयमेआरोनवसिरासँबेवहारकपरिचयभेलइ।सुधीरबाजल- “भायसाहैब, संकल्पलेनाआइमासदिनभऽगेलमुदा..?” एतेबाततँबुझलेछलजेगामकसमाजकेँवृन्दावनकव्यासजीतीनटासंकल्पकरौलैन, मुदा‘मुदा’कहिसुधीरचुपकिएभेल।कोनोएहेनविचारजरूरबीचमेअछिजइखट-देसुधीर‘मुदा’कहिचुपभऽगेल।बजलौं- “मुदाकीसुधीर?” ‘मुदाकी’सुनिसुधीरआँखिउठाआँखिपरदेलक।सुधीरकआँखिकरूपदेखअपनोमनथकथकागेल।बुझिपड़लसुधीरकनयनज्योतिमेअसीमवेदनाकलहैरउफैनरहलछै, मुदाओवेदनाहनुमानकपसेनाजकाँखसाएतकेतएसेजगहेनेदेखरहलअछि।सुधीरबाजल- “भायसाहैब, कोनोविचारकेँउचितमहतओइठामभेटैछै, जैठामउचितसुननिहारआउचितकरतोहोइथ।उचितसुननिहारओभेलाजेविचारकमर्मकेँबुझिमर्माहतहोइतभूमिकमर्मकेँअपनाबैथ।सेमासदिनकबीचकियोनेरहला।आइसंयोगेकिसुसंजोगेअपनेकदर्शनभेल, तँए..?” ‘तँए’कहिसुधीरचुपभऽगेल।बीचमेजेकिछुबाजलछलओतँसामान्यविचारबनिसमाजमेचलियेरहलअछि।मुदाओइसँप्रभावितभऽकेतेलोकप्रभावकबनलछैथ? सबहकमुहसँसदिकालनिकैलतेछैनजे‘झूठबाजबपापछी!’ पापेनेनर्ककरस्तापकड़ानर्कमेधकेलैएमुदाइमानदारीसँकेतेकलोकएकरनिमरजनाकरैछैथ? जहिनाधिया-पुतागीतगाबि-गाबिकहैएजे‘शिकारीऔत, जालबिछौत, दानादेत, लोभसँओइमेफँसीनहि।’मुदामुँहकबातमुहेँमेरहैएआफँसिजाइएसभ।तहिनानेसमाजोकलोककमुँहमेअछि।गुरुबनिसभगुरुआइकरितेछैथजेझूठबाजबपापछी, चोइरकरबपापछी, कुदृष्टिसँकेकरोदेखबपापछी..! मुदाबेवहारमेकेतेकसहीअछिओकेकरोसँछीपलोतँनहियेँअछि।बजलौं- “तँएकीसुधीर?” सुधीरबाजल- “भायसाहैब, जेसभतीनूसंकल्पलेनेछलातइमेएकोगोरेअपनसंकल्पपरठाढ़नहिरहलाजइसँसमाजमेनेकोनोनवदिशा-बोधभेलआनेसमाजकविचारेवाकाजेमेसुधारभेलअछि।तँएअपनोबुझैछीजेसमाजकपाँचहजाररूपैआमानेभागवतकथामेभेलखर्चअनेरेपानिमेफेकागेल..!” बजलौं- “सुधीर, अहीलेएतेव्यग्रछह।समाजसागरोसँगहींरआगम्भीरअछि।सागरतँपाइनिकसमूहस्थलछीजेकरानेबुधिछैआनेविवेकमुदासमाजतँसेनहिछी।समाजचरिटंगासँलऽकऽबुधि-विवेकबलाकसेहोछीहे।तँएनेकहलजाइएजे‘कियोकरैआप-लेमाए-लेनेबाप-ले।’जखनअपन-अपनजीवनोआअपन-अपनजीवनकफलोकमालिकसभछीहे, तखनअपनेकर्मकभोगनेसभकेँमलिकपनादइए।” अपनाजनैतसमाजमेजेसान्त्वनाकविचारचलैनमेअछितइअनुकूलसुधीरकेँसेहोसान्त्वनादेलिऐमुदातइविचारमेसुधीरकेँकीभेटलसेतँवएहबुझैतहएतमुदाअपनाबुझिपड़लजेमनप्रफुल्लितजरूरभेलैजइसँमन्द-मन्दमुस्कीसुधीरकमुहसँजरूरमुसैकरहलअछि।सुधीरबाजल- “भायसाहैब! ठीकेसमाजमेकहलजाइएजे‘दुनियाँमेकियोकेकरोनेछी!’ तखनतँ..?” बजलौं- “तखनकी?” सुधीरबाजल- “जीवनकदिशाकसंकल्पअराधि, साधनाकरैतजीवन-यापनकरैतचली।अहीतीनूसंकल्पमेअपनअग्नि-परीक्षणसेहोसीताजकाँभइयेरहलअछि।” बजलौं- “सएह..!” सुधीरबाजल- “हँसएह।” शब्दसंख्या : 3097, तिथि : 01 मार्च 2020 रहैजोकरपरिवार बैशाखमास।भोरे-भोररघुनीभायपहुँचला।अपनोसुतिकऽउठलेरही।रघुनीभायकेँदेखतेबजलौं- “भायसाहैब, भोरे-भोरकिमहरसवारीनिकललअछि?” रघुनीभायबजला- “राधेश्याम, तोरेसँभेँटकरएएलौंहेन..!” काल्हिसाँझोमेरघुनीभायभेटलछला, मुदाकिछुकहलैननहितँएमनमेतारतम्यहुअलगलजेजँकोनोतेहेनकाजरहितैनतँसाँझेमेकहनेरहितैथमुदासाँझमेकिछुकहलैननहिआरातिमेकोनएहेनबातभऽगेलैनजेभोरे-भोरआबिगेलाहेन! बजलौं- “किए?” रघुनीभायबजला- “राधेश्याम, अदहाजिनगीबीतगेलमुदाअखनतककोलकातानहिदेखलौंहेन।रातिमेएकाएकमनमेउठलजेदेखते-देखतेलोककजिनगीबीतजाइएमुदादुनियोकेँदेखनहिपबैए।” रघुनीभाइकविचारसुनिमनमेभेलजेरघुनीभायठीकेकहैछथि।अपनोउमेरदिसतकलौंतँबुझिपड़लजेखालीरघुनीएभाइकअदहाउमेरनहिबितलैन, अपनोतँबीतियेगेलअछि।अपनोनेकहियोकोलकातागेलौंहेन।ऐठामएकटाप्रश्नअछिएजे‘अदहाउमेर’केकराकहबै? जन्मकठेकानतँअछिजेफल्लॉंकजन्मफल्लॉंदिनभेलमुदामृत्युकतँठेकाननहियेँअछिजेकेकहियामरततखनअदहाउमेरकेकराकहबै? कियोबीसेबर्खमेमरिजाइए, कियोपचासबर्खमेमरैएतँकियोएहनोतँअछिएजेसाएबरखबीतलापछाइतमरैए।गामेमेदेखैछीजेघुरनबाबाएकसाएपाँचबर्खमेमुइला, मनोहरबाबाएकसाएएक्कैसबर्खमेमुइला।तैबीचअदहाउमेरमानेअदहाजिनगीकेकराकहब! ओना, अपनाऐठामसाएबर्खकेँपूर्णजिनगीमानलगेलअछिमुदामरै-जीबैककोनोबिसवासूआधारनहियेँअछि। रघुनीभायसालभरिकजेठछथि।जइसँअपनजिनगीकअनुमानकेनेछेलौं।अपनेनेकहियोस्कूलदेखलौंजेउमेरकप्रमाणितसर्टिफिकेटरहतआनेजन्मककोनोटिप्पैणअछिजइसँउमेरकठेकानपबितौं, मुदारघुनीभायकेँसेनहिछैन, कौलेजतकपढ़नेछैथ, जइसँप्रमाणितसर्टिफिकेटोछैन्हे। जहिनाअपनबिसवाससभसँबेसीरघुनीभायपरअछितहिनारघुनीभायकेँसेहोहमरापरछैन।रघुनीभाइकमुँहकबातजे‘दुनियाकेँनहिदेखपबैए’अपनमनकेँहिलौलक।हिलौलकईजेअखनतकदुनियाँकेँओतबेटाबुझैछीजेतेदूरघुमल-फिरलछी।ओना, लोककमुहेँ‘कोलकाता’सुनितेआबिरहलछीमुदाकोलकाताछीकी, सेनेकहियोमनमेविचारेउठलआनेबुझैकजिज्ञासेभेल।बजलौं- “बढ़ियाँविचारअछि।देखते-देखतेलोककजिनगीबीतजाइए, नेकिछुकऽपबैएआनेदेखपबैए।” ओना, अपनकीविचारअछिसेस्पष्टनहियेँभेलमुदारघुनीभाइकमनमेजेनाबिसवासजगलैन।बजला- “राधेश्याम, तोरासँभेँटअहीदुआरेकरएएलौंजेदूरकसफरअछि।असगर-दुसगरजाएबनीकनहि, तँएतोरोकहएएलियहजेतोहूँचलह।” अपनेतँकिछुबुझल-गमलअछिनहिजेकेतेखर्चहएतआकेतेसमयलागत।तँएबजलौं- “भायसाहैब, संगपुरैमेकोनोहर्जनहि, मुदाखर्च-बर्चकेनाकिपड़तआसमयकेतेलगत?” रघुनीभायसभबातपुहुपलालसँभँजियानेनेछलातँएबुझलछेलैन।रघुनीभायबजला- “कोनोकिहाथी-घोड़ाकीनबजेबहुतखर्चहएत।भेलतँगाड़ी-सवारीकभाड़ा-भुड़ीआखाएब-पीबमेजेपड़त, तेतबेनेखर्चहएत।” अपनाजनैतछाँह-छुँहमेरघुनीभायबाजिचुकलछलामुदाअपनेअन्दाजनहिकएपेलौंजेभाड़ा-भुड़ीमेकेतेखर्चहएतआखाइ-पीबैमेकेतेखर्चहएत।बजलौं- “भाय, अहूँकोलकातानहिगेलछी, तँएठीक-ठीकनहिबुझलहएत।तहूमेखालीकोलकातागेनाइयेटारहैततखनदोसरबातहोइतमुदाजखनदेखै-सुनैलेजाइछीतखनकेतेसमयलगतआकेतेखर्चहएतआजइस्थानपरजाएब, तइठामककिछुसनेसनहिआनब, सेहोकेहेनहएत।तँएएकटाअनुमानकऽलेबकिने।” स्वीकारकरैतरघुनीभायबजला- “राधेश्याम, कोलकाताखालीमहानगरेटानहिनेछीजेबजारेटाअछि।बजारकअतिरिक्तो, जेकोलकातासँबाहरअछि, दर्शनीयजगहसभअछि, ओहोनेदेखनेआएब।” हूँहकारीभरैतबजलौं- “ठीकेकिने।गामेकनहि, परोपट्टेककेतेकोलोककोलकातामेनोकरियोकरैछैथआअपनपरिवारोरखनेछैथ, मुदाअपनासभतँसेनहिछी, देखै-सुनैलेजाएबआदेख-सुनिकऽघुमिआएब।तँए, ओत्तेओरियानकेनहिनेजाएबजेकेतौकोनोबाधाउपस्थितनहिहुअए।” मने-मनविचारिरघुनीभायबजला- “राधेश्याम, जँठीक-ठीकबुझलरहैततँठीक-ठीककहिदैतियहमुदासेनहिअछि।मानिलएहजेएकमाससमयलागतआएकहजाररूपैआखर्चहएत।” बैशाख-जेठकसमयछीखेती-पथारीअखनकोनोअछिएनहितँएसमैयकतँकोनोबातेनहि।तैबीचपरसूबारहसाएमेखस्सीबेचनेछेलौं, सेरूपैआहाथमेछेलए-हे।कहलयैन- “ठीकअछिभाय, जखनविदाहोइ, हमहूँतैयारछी।” तैबीचपत्नीचाहबनादरबज्जापरआबिगेली।पत्नीकहाथसँचाहकदुनूकपलैतएकहाथकरघुनीभायदिसबढ़ैलौंआएकहाथकअपनेरखलौं।ओना, पत्नीसुनिनेनेछेली- ‘जखनविदाहएब, हमहूँतैयारछी’तँएऐगलाबातसुनैलेछोटडेगेआँगनघुमली।मुदातैबीचनेअपनेकिछुबजलौंआनेरघुनीएभायकिछुबजला।ओना, अपनमनमानिगेलजेपत्नीऐगलागपसुनैदुआरेडेगछोटकएआँगनदिसबढ़िरहलीअछि, तँएअपनेपाशाबदलैतबजलौं- “भायसाहैब, चाहनीकबनलकिने?” कर्ताकमनतँकर्मपररहितेअछितहूमेचर्चकऽदेनेछेलौं।रघुनीभायपाशाकेँआरोछिड़ियबैतबजला- “धु: चाहोकेँलोकसुआदि-सुआदिपीबैए।आबतँचाहपानियेजकाँलोककेताबेरदिनमेपीबैएतेकरकोनोठेकानछै।” पत्नीताबेअढ़भऽगेली, मानेअँगनापहुँचगेली।बजलौं- “रघुनीभाय, खेबो-पीबोकओरियानकरब?” रघुनीभायबजला- “हमसभबातपुहुपलालसँबुझिनेनेछी।खाइ-पीबैककिछुनेओरियानकरैकअछि, खालीअपनजेदेहककपड़ापहिरैबलाअछिबसतेतबे।कोलकाताजाएबकिने, जैठामअपनादेशककोनबातजेअपनमधुबनी-झंझारपुरमेजेखाइ-पीबैकसमानकदामअछितेकरअदहादाममेओतएभेटैए।तँएजैठामएतेकसस्ताअछितैठामअनेरेगामसँकिएकिछुनेनेजाएब।” बजलौं- “तखनतँएकगोरेकखर्चमे, मानेजेतेखर्चमधुबनी-झंझारपुरमेएकबेकतीकेँखाइ-पीबैमेहोइए, तेतेमेदुनूगोरेकेँकोलकातामेभऽजाएत।” रघुनीभायबजला- “तेहनेसनबुझह।” बजलौं- “बड़बढ़ियाँ।घरसँकहियानिकलब?” रघुनीभायबजला- “परिवारछीकिने, किछु-ने-किछुसदिकालहोइतेरहैए।तँए, जखननियारिलेलौंतखनबेसीसमयलगबैकथोड़ेअछि।काल्हिभोरेविदाभऽजाएब।” बजलौं- “आइभरिदिनसमयअछि।कपड़ो-लत्ताखींचलेबआकाजोसभकेँगर-गुरलगालेब।” दोसरदिनभोरेदुनूगोरेगाड़ीपकड़एविदाभेलौं।ओना, अपनास्टेशनसँडायरेक्टगाड़ीकोलकाताकनहियेँअछिमुदादरभंगासँअछिए।दरभंगा-हाबड़ाकजेगाड़ीअछिओदरभंगेसँखुजैए, भीड़ो-भड़क्काबेसीनहियेँछलतहूमेरिजर्वटिकटबनौनेछेलौं। ओना, भीड़-भड़क्कागाड़ीमेबेसीनहिछलमुदाजगहकहिसाबेयात्रीतँछेलैहे।दुनूगोरेकजगहएक्केठामभेल।बगलमेआन-आनयात्रीसभछला।संजोगएहेनभेलजेदूटाबंगालीयात्रीसेहोबगलमेबैसला।गाड़ीजखनदरभंगासँखुजलतँओदुनूबंगालीयात्रीहिन्दीमेगप-सप्पशुरूकेलैन।बुझिपड़लजेदुनूबेपारीछैथ।अपन-अपनवेपारकसम्बन्धमेगप-सप्पकरएलगला।ओना, दुनूअपरिचित, एक-दोसरकेँनहिचिन्हैत, मुदाकिछुसमैयकपछाइतदुनूहिन्दीछोड़िबंगलामेगप-सप्पकरएलगला।जाबेतकहिन्दीमेगप-सप्पकरैतरहलाताबेतकतँकिछुबुझितोछेलौंमुदाजखनबंगलामेगप-सप्पकरएलगलातखनसँकिछुनेबुझिपेलौं।बंगलामेगप-सप्पसुनिरघुनीभायकेँकानलगफुसफुसाकऽकहलयैन- “भाय, ईदुनूडिब्बामेमारिफँसौत।देखैछिऐकेहेनबढ़ियाँहिन्दीमेसभ्यजकाँआप-आपकप्रयोगकरैछलआआब‘तुमि-तुमि’- तुम-तामकेनाइशुरूकेलक!” अपनाजनैतहमऐदुआरेबजलौंजेअपनाऐठामदेखैछीजेपहिनेलोकमैथिलीमेगप-सप्पशुरूकरैएआरक्का-टोकीकरैतहिन्दीमेपहुँचझगड़ा-झंझट, मारि-पीटकरएलगैए।मनमेसहएभेल।तँएरघुनीभायकेँकहनेछेलिऐन।रघुनीभायबंगलाभाषाआबंगालीकसम्बन्धकेँबुझैछैथ, बजला- “राधेश्याम, यएहबंगालीभाषाकशक्तिआबंगभूमिकखासगुणछीजेजखनेएक-दोसरकेँबंगवासीबुझिजाइछैथतखनेआनभाषाकेँछोड़िअपनमातृभाषामेबाजएलगैछैथ।जइसँअपनामेअपनत्वबढ़एलगैछैन।” रघुनीभाइकविचारउन्टाबुझिपड़ल।उनटाईजेअपनाऐठामजेबच्चोआकिसियानेमैथिलीसँअलगहटिहिन्दीवाअंग्रेजीमेबजैछथितँहुनकालोकबेसीबुद्धिमानबुझैछैन, आबंगालीमेतेकरउन्टाअछि।तँएकनीछगुन्ताजरूरलगल।बजलौं- “सेकीभाय?” विचारकेँसोझरबैतरघुनीभायबजला- “राधेश्याम, बंगलाभाषाआबंगलासाहित्यजेएतेसशक्तअछिएकरयएहकारणअछिजेबंगालकलोकअपनमातृभूमि-मातृभाषाकेँहृदयसँबेसीआदरकरैछैथ।जेअपनाऐठामनहिअछि।बजैकक्रममेअपनाऐठामकलोकजेतेकबढ़ा-चढ़ाकऽबाजिलैथमुदाबेवहारमेठीकएकरविपरीतअछि।” रघुनीभाइकविचारकेँगहराइसँतँनहिबुझिपेलौंमुदाएतेकतँबिसवासरघुनीभायपरबनलेअछिजेओठक-फुसियाहनहिछैथ, तँएझूठ-फूसनहियेँकहता।तहीबीचगाड़ीसमस्तीपुरपहुँचगेल।मकैकओरहाबेचनिहारबोगीमेपहुँचल।पाँचरूपैयेबाइलबेचैछल।ओहोदुनूमानेदुनूबंगालीयात्रीसेहोदूटाबाइललेलैनआरघुनीभायसेहोदूटाबाइललेलैथ।अखनतकनेरघुनीएभायहुनकासभसँमानेबंगालीभायसभसँकिछुपुछनेछेलखिनआनेवएहसभरघुनीभायकेँकिछुपुछलकैन।मुदासमस्तीपुरकमकै-ओरहादुनूगोरेकेँलगअनलकैन।एकगोरेमानेएकटाबंगालीयात्रीरघुनीभायदिसघुमिबजला- “अच्छाहै!” ओना, रघुनीभायबुझिगेलछलाजेदुनूबंगालीछैथआअपनोबंगालेजारहलछीतँएकिछुजानकारीकरबआवश्यकअछिए।ओतँविचारेकआदान-प्रदानसँबेसीनीकहएत।रघुनियोभायअपनभाषाकमहतकेँबढ़बैतबजला- “मिथिलाकमुख्यसनेसछी।ऐइलाकामे, मानेसमस्तीपुरइलाकामेमकैकअनेकोढंगकभोज्यविन्यासबनैए।जइमेओरहोएकविन्यासछी।” ओना, मैथिलीभाषाकेँओदुनूबंगालीनीकजकाँजानिजाइछलामुदाबजैमेकनीबंगलाकगन्धआबियेजाइछेलैन।ओहोदुनूअधखिज्जूमैथिलीमेगप-सप्परघुनीभाइकसंगकरएलगला।एकबेकतीमैथिलीभाषा-साहित्यआमिथिलाक्षरलिपिकजानकारसेहोछला।ओबंगलालिपिआमिथिलाक्षरलिपिकसम्बन्धमेसेहोबजला।किछुआगूबढ़लापछाइतमानेजखनगाड़ीसिमरियापुलटपिगेलतखनरघुनीभायरवीन्द्रनाथटैगोरकसाहित्यआसंगीतकचर्चउठौलैन।रवीन्द्रसाहित्यकचर्चउठितेओबंगालीबजला- “जहिनाहिन्दीसाहित्यजगतमेतुलसीकरामायणआतुलसीदासकेँमहानसँमहानतमस्थापररामचन्द्रशुक्लपहुँचेलैनतहिनाकबीरदासकजनभाषाआजनविचारकेँरवीन्द्रनाथपहुँचेलैन।” अपनेतँसाहित्यआसाहित्यकारकविषयमेकिछुबुझलनहिअछितँएचुप्पेरहलौं।मुदारघुनीभायसाहित्यकनीकजानकारछैथतँएदुनूगोरेकबीचगप-सप्पहुअलगलैन।किछुकालकपछाइतरघुनीभायबजला- “हमहूँदुनूगोरेबंगालेजारहलछी।ओना, जीवनमेपहिलबेरजारहलछी, तँएनीकजकाँबुझल-गमलनहियेँअछि।अपनेकनेबंगालकविषयमेकिछुजानकारीदऽदिअजेघुमै-फिरैमेसुविधाहएत।” ओबजला- “बंगालकचौराईतँकम्मेअछिमुदानमतीबहुतबेसीअछि।दच्छिनमेबंगालकखाड़ीसँलऽकऽउत्तरमेहिमालयतकअछि।जइसँअनेकोधारो-धुरआजलवायुसेहोअछिए।” रघुनीभायबजला- “नोकरी-चाकरीकरैकखियालसँतँबंगालनहियेँजारहलछी, देखै-सुनैकखियालसँजारहलछी।ओना, रवीन्द्रबाबूआशान्तिनिकेतनकसम्बन्धमेकिछु-किछुकिताबीजानकारीजरूरअछिमुदाकहियोगेलनहिछी।” शान्तिनिकेतनकनाओंसुनितेओ, बंगालीभायजेनाफुटिपड़ला।धुरझारशान्तिनिकेतनकप्रशंसाकरैतबाजएलगला।जइसँरघुनीभाइकमनमेसेहोशान्तिनिकेतनकप्रतिआकर्षणबढ़एलगलैन।रघुनीभायबजला- “शान्तिनिकेतनजाएबकेना?” ओबजला- “ईगाड़ीमानेजइमेचढ़लछी, हाबड़ापहुँचादेत।बंगालकदूटाजक्शनएहेनअछि, हाबड़ाआसियालदह, जैठामसँबंगालकसभजगहकलोकलगाड़ीभेटैए।हाबड़ासँअनेकोगाड़ीशान्तिनिकेतनकअछि।” रघुनीभायबजला- “हाबड़ाशान्तिनिकेतनकबीचकेतौदोसरगाड़ीनइनेबदलएपड़ैछै?” ओबजला- “बीचमेकेतौनेगाड़ीबदलएपड़त।चारि-पाँचघन्टाकरस्ताअछि।सोझहेहाबड़ासँशान्तिनिकेतनपहुँचजाएब।” बारहबजेरातिमेहाबड़ास्टेशनपहुँचलौं।ओना, लोककआवाजाहीतेतेकजेरातिबुझियेनेपेबरहलछेलौंमुदाघड़ीमेबारहबाजिरहलछल।स्टेशनेकप्लेटफार्मपरदुनूगोरेजाजीमबिछासुतिरहलौं।चारिबजेभोरेउठिअपननित्य-कर्मसँनिवृतिहोइतचाहपीलौं।छहबाजिगेल।गाड़ीकटिकटलेलौं।साढ़ेछहबजेमेशान्तिनिकेतनकगाड़ीखुजत।गाड़ीमेबैसलौं।गाड़ीमेबैसतेरघुनीभायशान्तिनिकेतनकविषयमेजानकारीदिअलगला।ओना, आनो-आनबहुतयात्रीशान्तिनिकेतनजाइछलाजइमेकिछुदेखनिहारोछलाआकिछुकेँअपनघरोछेलैनआकिछुकारोबारियोछला। साढ़ेबारहबजेगाड़ीशान्तिनिकेतनपहुँचल।दुनूगोरेप्लेटफार्मेपरनहेलौं, नहेलापछाइतरोडेपरमानेफुटपाथेकदोकानमेजाकऽखेलौं।सचमुचबुझिपड़लजेबंगालकहोटलअपनाऐठामकहोटलसँसस्ताअछि।छबेरूपैआमेदुनूगोरेभरिपेटखेलौं।ओना, खेनाइ-खेलापछाइतअपनमनअसविसकरएलगलमुदारघुनीभायकहलाजेजखनदेखै-सुनैलेआएलछी, तखनजँअरामेकपाछूसमयलगाएबसेनीकनहि।एकगोरेकेँरघुनीभायपुछिशान्तिनिकेतनकजानकारीलेलैन।दुनूगोरेविदाभेलौं। रवीन्द्रबाबूकबनौलशान्तिनिकेतनआरेलबेस्टेशनकबीचआदिवासीसबहकघर।ओना, देखैमेओसभकारीछलमुदाजेहनेसोझ-सपटविचारसँतेहनेबेवहारसँसेहोछल।दुनूगोरेशान्तिनिकेतनकविश्वभारतीमहाविद्यालयकेँफरिक्केसँदेखलौंतँबुझिपड़लजेसचमुचहमसभशान्तिवनकशान्तनिकेतनमेपहुँचगेलछी।आगूबढ़लौंतँएकटाचिन्हारचेहराआगूमेदेखपड़ला।हमतँहुनकापरधियाननहिदेलिऐनमुदारघुनीभायटकटकीलगाहुनकादेखएलगलखिन।ओहोरघुनीभायकेँनिग्हारिबजला- “अहाँसभमैथिलछी?” मैथिलीभाषातीनूगोरेकबीचसम्बन्धबढ़ौलक।रघुनीभायकहलकैन- “हँ.!” ‘हँ’सुनितेजेनाहुनकाबिसवासबढ़िगेलैन, बजला- “अहाँकेँकने-मनेचिन्हैछी..!” रघुनीभायबजला- “अहूँकेँकने-मनेचीन्हिरहलछीमुदानीकजकाँमननहिपड़िरहलरहलौंहेन।” ओबेकतीबजला- “पहिनेचाहकदोकानपरचलू, चाहोपीबआपरिचय-पातसेहोकरब।” सएहभेल।तीनूगोरेचाहकदोकानमेगेलौं।चाहककपहाथमेलइतेओबजला- “अहाँकघरचैनपुरछी?” रघुनीभायबजला- “हँ।” ‘हँ’सुनितेमुस्कियाइतओबजला- “हमरनाओंशान्तिनाथछी।हमरोघरचैनपुरेछी।आइसँतीसबरखपूर्वहमपरिवारकझड़-झमेलसँआजीजभऽगामसँपड़ागेलौं।अपनबपौतीकसभसम्पैतहुनकेसभकेँमानेभाइयेसभकेँछोड़िदेलिऐन।आऐठामआबिविश्वभारतीककार्यालयमेनोकरीशुरूकेलौं।ओना, सोझेऐठामनहिपहुँचगेलौं।एकटाबंगालीशिक्षककसंगकलकत्तासँएलौं।नमहरइतिहासअछि।ओअखननहिकहब।” चाहपीलाकपछाइतशान्तिनाथअपनकार्यालयपहुँचला।हमहूँदुनूगोरेसंगेरहिऐन।कार्यालयमेबड़ाबाबूसँकहिहमरादुनूगोरेकेँघुमबए-फिरबएलगला।नमगर-चौड़गरविश्वभारतीकआँट-पेट, तँएघुमैत-फिरैतसाँझकसातबाजिगेल।पछाइतसंगेशान्तिनाथअपनडेरापरअनलैन। चारिटाबाल-बच्चाकसंगदुनूपरानीशान्तिनाथरहैछैथ।अपनगाम-समाजकेँलंका–रावणकलंका–सदृशमानिशान्तिनाथबजला- “बौआरघुनी, रावणक-लंकोसँबदत्तरअपनसमाजअछि।केकरोकियोशान्तिसँजीबएनहिदिअचाहैए।जहियासँऐठामएलौंतहियासँबिलकुलशान्तिसँजीरहलछी।” रघुनीभायबजला- “अपनोगामतँमिथिलेकगामछीने।” शान्तिनाथबजला- “हँ, सेमानैछी! मुदाजेबेवहारपक्षअपनागामकअछि, ओतँ..?” विचारकेँआगूनहिबढ़बैतरघुनीभायबजला- “हमहूँदुनूभैयारीदेखै-सुनैकखियालसँआएलछी।” शान्तिनाथबजला- “शान्तिनिकेतनतँदेखियेलेलिऐ, काल्हिसुन्दरवनसेहोदेखादेब।” शब्दसंख्या : 2297, तिथि : 15 अप्रैल 2020 परिपक्वनिरलज सूर्यास्तकसमयभऽगेलरहैमुदासूर्यडुमलनहिछल।अपनौंबाड़ीसँकाजकएनित्यकर्मदिसजेबाकविचारकइयेरहलछेलौंकिमनसुखआएलआबाजल- “रजनीकान्तभाय, बुधियारभायजहलसँएलाअछिसेचलूकनेजिज्ञासाकऽलिऐन।” बुधियारकनाओंसुनितेदेहजेनासिहैरउठल।सौंसेदेहकरूइयाँठाढ़भऽगेल।ओना, अपनोबुझलछलजेपरसूसाँझमेबुधियारजहलसँआएल, मुदामनमेतेतेघृणाओकराप्रतिअछिजेमनभिन-भिनागेल।केकरजिज्ञासाकरएजाएब।ओना, जिज्ञासाकरबअधलाविचारनहियेँछीमुदाजिज्ञासोकतँअपनमहतछइहे।आइजँकियोजनसेवावाअपनेकोनोएहेनवृत्तिकेलापछाइतजहलगेलरहैतजइसँअपनेवाजनमानसेकभलाइकविचारनिहितरहैततँओइजिज्ञासाकअपनमहतहोइत, मुदाजेसेनहिभऽलुचपन्नीककारणेजहलसँआएलअछि, तेकरजँजिज्ञासाकरएजाएबतँतेकरस्पष्टमानेहोइएजेअपनोओहने-ओहनेलुचपन्नीकसमर्थकछी।जेअपनविचारकठीकविपरीतबातभेल।बजलौं- “मनसुख, तूँजखनबुधियारकजिज्ञासाकरएविदाभेलछहतेजाह, मुदाहमनइजेबह।” मनसुखसमाजकओहनलोक, जेकराअपनकोनोवैचारिकदिशानहि।कीनीकआकीअधलातेकरविचारकरैकनेजरूरतेछैआनेसेबुझबेकरैए।समाजकदेखा-देखीकअनुकूलअपनोचलैएआओहीविचारानुसारहमरोआबिकहलक।अपनतँविचारोअछिआविचारकअनुकूलचलैकदिशासेहोअछि, तँएओहन-ओहनकाजकेँअधलाबुझिपरहेजकेनहिछी। समाजमेबुधियारकपरिवारसम्पन्नपरिवारमानलोजाइएआअछियो।सम्पन्नऐखियालसँजेजेकरापचासबीघासँऊपरअखनोजमीनछै।चारिभाँइकभैयारीमेभिनौजभेलापछातियोसोमनाथकअमलदारीमे, मानेबुधियारकपितासोमनाथकेँचारिसाएबीघासँऊपरजमीनछेलैन।ओना, जमीन्दारीनहिछेलैन, जमीन्दारीकमानेभेलरैयतसँजमीनकमालगुजारीलेब।सोमनाथकेँसेनहिरहैनमुदारूपैयोकआधानो-चाउरकमहाजनीतँछेलैन्हे।अन्नकडेढ़ियाचलैछेलैन।एकमनसँडेढ़मनसूदि-सवाइचलैछेलैन।जइसँकेतेलोककजमीनकर्जातरेसोमनाथकेँभेलछेलैन।अपनामुइलापछातिसोमनाथकचारूबेटामेभिन-भिनौजभऽगेल।ओना, किछुजमीनएक-दोसरभैयारीमेबेइमानियोभेलैनआअपनाभैयारीमेमुकदमावाजीसेहोभेलैन।जइसँबहुतजमीनबिकबोकेलैन।खाएरजेभेलैनमुदापचास-पचासबीघाअखनोभैयारीकमाथपरजमीनछैन्हे। बुधियारचालू-पुरजालोक।सभपार्टीमानेराजनीतिकपार्टीसँसाँठ-गाँठरखनहिअछि।जखनजेहेनहवाबहलतखनतइपार्टीकसंगभऽगेलौंआअपनाउल्लूसीधाकरैतरहलौं, यएहचरित्रबुधियारकरहल।महाजनीसोल्होअना, मानेसूदि-सवाइसमाप्तभऽगेलैन। सरकारीयोजनानुसार, बैंकराष्ट्रीयकरणभेलापछाइतमानेजखनइन्दिराजीप्रधानमंत्रीछेलीतखनजेबैंकसभराष्ट्रीयकरणभेल, तेकरपछाइतआमजनकेँसेहोबैंककसुविधाप्राप्तभेल।ओना, शत-प्रतिशतलोककेँसुविधानहिभेटलैन।तेकरकारणबैंककअपनआर्थिकस्थितिसेहोछेलैमुदाकिछुलोककेँसुविधाभेटबेकेलैन।ओहीसुविधानुसारबुधियारपाँचगोरेकेँअगुआमानेपाँचटासाधारणकिसानकेँअगुआबैंकसँलोनदियौलैन।आपाँचोअनपढ़लोकजइसँअपनेलिखै-पढ़ैकलूरिनहिछेलैन।अँगुठाकनिशानेसँकाजकरैछला।बैंककमैनेजरसँसाँठ-गाँठकरैतपाँचोगोटेकेँलोनमंजूरीकरौलैन।मुदालोनलोनीकेँमानेकर्जनेनिहारकेँप्राप्तनहिभेलैन।ओरूपैआबुधियारअपनेउठालेलैन।सालभरिकपछाइतजखनबैंकककर्जकतगेदापाँचोकेँभेलैन, तखनचारिगोरेकेँजेमुँहदुब्बरछला, हुनकाउनटा-सीधाबुझाबुधियारचुपकेनेरहलामुदासिंहेश्वरचकितभेल। सिंहेश्वरकबहनोइसेहोचालू-पुरजालोक।हुनकाजाकऽसिंहेश्वरसभबातकहलैनजेमहींसपोसैकनामपरतीसहजाररूपैआबैंकसँलोनकलेलदरखास्तदेलिऐ।केतेदौड़-बरहाकेलापछातियोलोननहिभेटल।जेसालभरिपहिलुकाबातछी।ऐसालमानेएकसालकबादतीसहजारमूरआओकरसूदलगापैंतीसहजाररूपैआकर्जकतगेदाकनोटिशभेलअछि। सिंहेश्वरकबातसुनिरघुवीरपुछलखिन- “अपनेबैंकसँरूपैआउठेनेछेलौंआकिकियोदोसराइतिकहाथेकारोबारकेनेछेलौं?” तैपरसिंहेश्वरकहलखिन- “बुधियारकहथौटीकारोबारकेनेछेलौं।आइ-काल्हि, आइ-काल्हिकरैतजखनतीनमासबीतगेल।ताबेखेतीकसमयसेहोआबिगेलछल, हारि-थाकिकऽछोड़िदेलिऐ।” सिंहेश्वरकबातसुनिरघुवीरबुझिगेलाजेएहेन-एहेनविचौलियासभएहेन-धन्धाकरितेअछि।रघुवीरसिंहेश्वरकेँसंगकेनेबैंकपरगेला।बैंककमैनेजरकेँनोटिशदेखबैतकहलखिनजेसिंहेश्वरभैंसकलोनलेलदरखास्तजरूरकेनेछलामुदाअन्तो-अन्तहुनकालोनप्राप्तनहिभेलैन। बैंककमैनेजरसभकागजातमिलबैतकहलखिन- “हमकिछुनहिकएसकैछी।तहूमेतीनियेमासएनाभेलअछि, नीकजकाँसभकिछुबुझलोनेअछि।” रघुवीरपुछलखिन- “तखनकीउपायहएत?” मैनेजररस्ताबतबैतकहलखिन- “शिकायतिकएकटादरखास्तबैंकोमेदऽदियौ।जइसँहमतत्कालतकेदाकरबरोकिदेबआअहाँआगूबढ़िजिलाकजेबैंकअछि, जिनकाअधीनऐसभबैंकककारोबारअछि, एकटादरखास्तहुनकालगदियौ।जँकोनोतेहेनजानकारलोकहोथितँहुनकासंगकऽलेब।” बैंककमैनेजरकविचारानुसाररघुवीरसएहकरैतकहलखिन- “ठीकछैसर, हमअपनेसक्षमछी, किनकोजरूरतहमरानहिअछि।” कहिरघुवीरघरपरआबिविचारलैनजेअनेरेतेसर-चारिमकभाँजमेकीपड़ब।अगरबैंककजिलाऑफिसजँनहिकिछुकरततँसोझेन्यायालयमेकेसकरब।यएहविचारिरघुवीरजिलाकबैंकपहुँचला।बैंककमैनेजरपंजाबीछला।रघुवीरअपनसभबातसरदारजीकेँकहलखिन।सरदारजी, तेसरदिनकसमयबनाग्रामीणबैंककशाखामेपहुँचला।रजिष्टरदेखबुझिगेलाजेबैंककमैनेजरआविचौलियाकसाँठ-गाँठसँएहेनघटनाभेलअछि।बैंककमैनेजरतँअपनकागजीमिलानीएहेनहिसाबसँकेनेजेपकड़मेनहिआबिरहलछलामुदाबुधियारतँपकड़मेआबिगेल।ओहीकारबाइमेबुधियारजहलगेलछल।जइमेलोनकआधामानेपनरहहजाररूपैआजमाकरौलाकपछाइतन्यायालयसँ, दसदिनजहलमेरहलापछाइतजमानतभेलछल। हमरबातसुनिमनसुखबाजल- “भायसाहैब, अहाँनहिजाएबतॅंनहिजाउ, मुदासमाजकहैसियतसँहमजाइछी।” बजलौं- “तोराजेबासँथोड़ेमनाहीकरैछिअ।” अदहाघन्टाकपछाइतमनसुखपुन: आएल।अबितेबाजल- “रजनीकान्तभाय, पहुँचतेबुधियारभायअहींकचर्चउठौलैन।” बजलौं- “पहिनेईकहहजेबुधियारकमनकेहेनबुझिपड़लह।” मनसुखबाजल- “मिसियोभरिमनमलिननहिबुझिपड़ल।” बजलौं- “जखनओइठाम, बुधियारकऐठामगेलहतखनआरोकेसभछला?” मनसुखबाजल- “आरकियोनेछला।जाइतेबुधियारकेँपुछलयैनजेकोनलफड़ामेपड़िगेलौं।कहलैन- हौ, जिनगीमेअहिनाहोइछै।जखनपुरुखबनिधरतीपरजनमनेनेछीतखनकेस-फौदारीआकिजहल-हिरासतकडरकरब।जँसेकरबतखनएकोदिनजीबसकैछी।” मनसुखमुँहकबातसुनिमनमेउठलजेकहिऐ, ऐधरतीपरनिरलजोककीकमीअछि..! मुदाफेरअपनेमनकहलकजेवेचारामनसुखमुँहदुब्बरलोकअछि, एकराकहियेकऽकीहएत।आइजँबुधियारसोझामेरहैततँकिछुकहबोकरितिऐ।बजलौं- “हमराविषयमेबुधियारकीसभकहलखुन?” मनसुखबाजल- “ओबजलाजेगामकसभजिज्ञासाकरएआएलमुदारजनीकान्तअखनतकनहिआएलअछि।” बुधियारकविचारसुनिमनतामसेशृंगचढ़िगेल।एकदिसहुअएजेपहिनेदसटागारिदिऐ, दोसरदिसईहोहुअएजेगारियेपढ़बमुदासुनततँनहि।तँएअनेरेगारियेपढ़िकऽकीहएत।फेरमनमेभेलजेजखनबुधियारमनसुखकसोझामेहमरचर्चकेलकसेबड़बढ़ियाँआहमजँमनसुखकसोझामेदसटाबातकहबैसेबड़अधला।मनमेअबितेपुन: क्रोधकदोसरतोरमनमेउठिगेल।जेना-जेनातामसउग्रहोइतगेलतेना-तेनादेहमेथरथरीसेहोतेजहुअलगल।बजलौं- “मनसुख, बुधियारहमरके, तीनमेकितेरहमे।धनीकबापकबेटाछीतँरहह, तइसँहमराकोनमतलबअछि।आइतककहियोएकसेरकिएकटकामांगएगेलिऐ।” बिच्चेमेमनसुखबाजल- “भायसाहैब, एनाजेउक्टा-पैंचीकरबतँअनेरेझंझटहएत।जइझंझटसँलाभकिछुनेआनोकसानढेरीहएत।” मनसुखकबातसुनिमियादआरोगरमागेल।बजलौं- “झगड़ा-झंझटकडरकरबतखनमुँहउठौलहएत।मुँहउठबैलेसभकिछुकरएपड़ैछै।तोराबुझलहेतहकिनइबुझलहेतह।भऽसकैएजेसुननोहेबहतँबिसैरगेलहेबह।” बिच्चेमेमनसुखबाजल- “कनीमनपाड़िदिअ।जखनेमनपाड़िदेबतखनेमनपड़िजाएत।” बजलौं- “पाँचसालपहिलुकाघटनामनपाड़ह।सुननेरहकनेजेमाइनरएरीगेशनमेनोकरीकबहालीलेदस-बाहरगोरेसँबीस-बीसहजाररूपैआबुधियारनेनेरहइ।नेकेकरोनोकरीभेलैआनेकेकरोरूपैयेघुमबैलेतैयारभेल।” मनसुखबाजल- “हँ, अदहा-छिदहातँमनोअछिमुदाअदहा-छिदहाबिसरियोगेलौं।ओहीरूपैआलेनेरूपलालआगौरीशंकरबुधियारकेँचौराहापरपकैड़कऽकहनेरहैजेजँतोराबुतेनोकरीनइदियौलभेलहतँहमररूपैआसूदिलगाकऽलाबह।नहितँएकोडेगआगूससरऽनहिदेबह।” बजलौं- “हँ!” मनसुखबाजल- “हँ! हँ! आबमनपड़ल।सौंसेगामकलोकजेबैसकऽपनचैतीकेनेरहैथ।” बजलौं- “हँ।देखनेरहकनेजेगाममेकियोबुधियारकजमानतदारहोइलेतैयारनहिभेला।तेहनेनिरलज-पतीतबुधियरबाअछि।ईतँरच्छरहलजेदीनानाथकाकाअपनासिरसभदोखउठबैतजानबँचौलखिन।नहितँओहीदिनतेहेनमरम्मतदुनूगोरेकऽदइतैनजेपुस्त-पुस्ताइनधरिबुधियारकेँनीकजकाँमोनरहितैन।” दुनूगोरेकमानेहमराआमनसुखकबीचगप-सप्पहोइतेछलकिगिरिधारीलालपहुँचल।गिरिधारीलालकेँपहुँचतेबजलौं- “कीहाल-चालगिरिधारी?” गिरिधारीलालबाजल- “भायसाहैब, अहींसँएकटाविचारपुछएएलौंहेन।” बजलौं- “केहेनविचार?” गिरिधारीलालबाजल- “भायसाहैब, काल्हिसँकेतेगोरेकहलैनहेनजेबुधियारजहलसँएलाहेनतँएजिज्ञासाकऽलहुन।” बजलौं- “ऐमेहमकिविचारदेबह।अपनजेमनहुअसेकरह।” गिरिधारीलालबाजल- “भायसाहैब, अपनासभएकविचारकलोकछी, जखनकोनोविचारकरैकहोइएतखनअहींसँनेपुछिलइछी।जँअपनामनेकरैकरहैततँकेनेरहितौंकिने।” गिरिधारीलालकविचारसुनिमने-मनविचारकेलौंजेपहिनेगिरिधारीएलालकमनकविचारकिएनेबुझिली।बजलौं- “अपनकीविचारहोइछह?” गिरिधारीलालबाजल- “भायसाहैब, जँअपनासंगनीकबेवहारबुधियारकरहैततँकनीसोचबो-विचारबोकरितौंमुदामनअछिकिनहिजेस्कूललगहकजेपँचकठबाखेतअछि, ओइखेतकबेचनामादाम-दीगरहमरासँकेनेरहए।अदहारूपैआसेहोदऽदेलिऐआपछाइतडाकपरचढ़ाओइखेतकेँदोबरदाममेजागेसरकहाथेबेचलेलक।अपनेजेरूपैआदेनेरहिऐओछहमासतकघिसियौरकटाकऽदेलक।” ओना, ईबातअपनोबुझलोछलआमनोछल, मुदादुनूकबीचबीचकसम्बन्धदुआरेबजलौं- “कनी-कनीमनोअछिमुदानीकजकाँमोननहिपड़िरहलअछि।” गिरिधारीलालबाजल- “आठ-दसबरखतँभइयेगेलअछि, भरिसकतेँबिसैररहलछी।” बातकेँआरोमटियबैतबजलौं- “हौगिरिधारीभाय, देखतेछहकजेकेतेधनचक्करमेसदिकालपड़लरहैछी, तँएभरिसकमनसँउतैरगेल।” गिरिधारीलालबाजल- “भायसाहैब, बुधियारकबेटीकदुरागमनरहइ।हाथमेपाइ-कौड़ीनइरहैजेकाजसम्हारैत।हमराकहलकजेगिरिधरभाय, स्कूललगहकखेतबेचब।तोराखेतकआड़ियेमेअछि, लऽलएह।आठहजाररूपैयेकट्ठाकहिसाबसँचालीसहजारदामभेल।कहलिऐजेकाल्हियेरजिष्ट्रीऑफिसचलह, ओतइसभरूपैओदऽदेबहआतोहूँरजिष्ट्रीकऽदिहह।” बजलौं- “आबकनी-कनीबातमनपड़लजाइए।” गिरिधारीलालबाजल- “तइपरओकहलकजेपाँचमेदिनबेटीकदुरागमनछी।बुझितेछहकजेबेटीकदुरागमनमेकेतेकजोगारकरएपड़ैछै।तँएअखनरजिष्ट्रीऑफिसजेबाकपलखैतनहिअछि।तहूमेबीचकदूदिनऑफिसबन्नोरहइ।अपनोमनमेभेलजेबेटी-जातितँसमाजकहोइए, तँएबीसहजाररूपैआलगलेदऽदेलिऐ।बेटीकदुरागमनभेलापछाइतजखनरजिष्ट्रीकरैलेबुधियारकेँकहलिऐतखनतीन-तेरहदेखबएलगल।जमीनकेँडाकपरचढ़ादेलक।सहएछीओबुधियरबा।” बजलौं- “जमीनककीभेल?” गिरिधारीलालबाजल- “कीहएत।डाककभीरनहिगेलौं।जमीनकडाककमानेजमीनेमात्रकडाकनइनेहोइए।समाजमेदुश्मनियोबढ़ैछैकिने।” जेतेबातगिरिधारीलालबाजलओतँअपनोबुझलेरहए, मुदासात-आठबरखपहिलुकाबातरहैतँएअनठाकऽबाजलछेलौं।बजलौं- “खाएर, जेजहियाभेलसेतहियाभेल।औझुकाकीविचारछहसेबाजह?” जहिनाबरखाभेलापरकोनोसुखलधारमेखेत-पथारकपानिएनेधाराबनिबहएलगैएआपाछूसँपहाड़कपानिकसंगगाम-घरकखेत-पथारकपानिमिलिपाछूसँआबिधारकधाराकेँप्रवलबनादइएजइसँधारकपेटउफानपरउठिजाइएतहिनागिरिधारीलालकविचारमेउफानउठिगेल।बाजल- “भायसाहैब, अपनासमाजमेयएहसभसँपैघकमजोरीअछिजेलगलेलोककोनोबातकेँबिसैरजाइए।जइसँसमाजकगति-विधिकमजोरहोइत-होइतएतेकमजोरबनिगेलअछिजेअपनकोनोचीन्हि-पहचिन्हरहियेनहिगेलछइ।” गिरिधारीलालकविचारमेसहदैतबजलौं- “तखनकीकरैकविचारछह?” गिरिधारीलालबाजल- “अपनविचारअछिजेजिज्ञासाकरएनहिजाएब।” अपनजानबँचबैतबजलौं- “जखनअपनविचारनइजेबाकछहतखननइजाह।गाममेकेकरोकोइमालिकछीजेनइजेबहतेकियोगामसँउजारिदेतह।” गिरिधारीलालकेँजेनासहभेटलैतहिनाबाजल- “भायसाहैब, जइमनुखकेँआइननहिआजइबरदकेँपाइननहिओहोकोनोमनुखेभेलआकिबरदेभेल।” गिरिधारीलालकविचारसुनिहँसीलगिगेल।मुदाहँसीकेँदाबिबजलौं- “गिरिधारीभाय, अपनासमाजकसभसँपैघदुर्बलतायएहछीजेजइसमाजकपेटमेएतेप्रवलशक्तिअछिजइसँकिछुकएसकैए, ओसमाजओहनमरलपड़लअछिजेजेकराकोनोगतिगुद्दानहिछइ।” ओना, गिरिधारीलालकमनमेबुधियारकप्रतिआगिधधैकरहलछेलै, मुदाऐठामतँओछलनहिजेओइआगिकेँआरोधधकबैत।तैयोअपनमनकआक्रोशकेँआक्रोशितकरैतगिरिधारीलालबाजल- “भायसाहैब, जँसमाजमेएकरूपतारहैततँओहन-ओहननिरलज-पतीतकेँबीचचौराहापरठाढ़कएसमाजमुँहपरथुकैत।मुदासमाजोतँतेहेनबनिगेलअछिजेकेकेकराथुकत।” बजलौं- “गिरिधरभाय, देखतेछहकजेसमाजोबिनुडोराडोरिकमनुखजकाँबनिगेलअछि।तखनतँअपनइज्जत-आबरूबँचबैतमनुखबनिजीबलीयएहसभसँपैघउपलब्धिभेल।” हमरबातजेनागिरिधारीलालकेँजँचलतहिनाबाजल- “ठीकेकहलौं, भायसहाएब।” बजलौं- “आबकीकरबह?” गिरिधारीलालबाजल- “कियोअपनजीवनकअपनेमालिकछी।ओना, समाजमेरंग-बिरंगकदुष्टसेहोअछि, मुदाओइदुष्टकबीचअपनविचारआबेवहारकेँजहाँधरिसम्भवहुएतहाँधरिरक्षाकरैतजीवनजीबली, यएहनेभेलमनुक्खकसभसँपैघमनुखपना।” बजलौं- “हँ, सेतँभेबेकएल।” गिरिधारीलालबाजल- “ऐभागकसुर्जओइभागकिएनेउगै, मुदाअपनविचारकेँकोनोहालतमेबदैलनहिसकैछी।नइजाएबबुधियरबाकजिज्ञासाकरए, जाइछीअपनघर।” बजलौं- “जाह।” शब्दसंख्या : 2232, तिथि : 20 अप्रैल 2020 Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव Join Videha googlegroups विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf          Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf       12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक,  १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf       Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf         21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010        Videha_01_10_2010_Tirhuta             67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010        Videha_15_11_2010_Tirhuta             70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010        Videha_15_12_2010_Tirhuta           72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011        Videha_01_03_2011_Tirhuta           77 ७) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012        Videha_01_08_2012_Tirhuta           111 ८) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013        Videha_15_03_2013_Tirhuta           126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013        Videha_15_11_2013_Tirhuta           142 १०) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १३) विदेह सम्मान विशेषा‍क- २००म अ‍क १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अ‍क १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १४) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आम‍ंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी VIDEHA 209th issue विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन  नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक  बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of original work.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् (c)२००४-२०२०. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम वि‍लास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत।  एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2020 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA

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