VIDEHA — Issue 297 / अंक २९७

Publication: VIDEHA · Issue: 297
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विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' २९७ म अंक ०१ मई २०२० (वर्ष १३ मास १४९ अंक २९७) 'विदेह' २९७ म अंक ०१ मई २०२० (वर्ष १३ मास १४९ अंक २९७) ऐ अंकमे अछि:- १. प्रदीप पुष्पक दू टा गजल २. उमेश मण्डल-- जगदीश प्रसाद मण्डलक ‘रहै जोकर परिवार’मे परिवर्तनक स्वर ३. आशीष अनचिन्हारक एकटा गजल प्रदीप पुष्प गजल- १ टूटल लेल की रितुराज हूसल लेल की रितुराज हमरा आँखि नोरे नोर दूखल लेल की रितुराज की नब गाछ की नब फूल सूखल लेल की रितुराज पचकल गाल पाकल केश चूकल लेल की रितुराज यौवन गान कोना हैत भूखल लेल की रितुराज (2221 2221 सभ पाँतिमे) गजल- २ राति छोट मुदा पिहानी नमहर केने जो रंगि मुँह -कान किरदानी नमहर केने जो तोरा उड़ीस मारैले कहने रहियौ हम उनटे तूँ मच्छरदानी नमहर केने जो संगतमे सुर कोनो विवादी लगौ तोरा तँगबैयाक ससरफानी नमहर केने जो भोँटक चन्दा भेटैत रहौ सभ दिस तेँ तूँ बेचि कऽतगमा जजमानी नमहर केने जो तूँ गाँधीकेँ फूल- माला सेहो चढ़ा आ गोड्से पर खर्चा- पानी नमहर केने जो (222222222222, बहरे-मीर) उमेश मण्डल जगदीश प्रसाद मण्डलक ‘रहै जोकर परिवार’मे परिवर्तनक स्वर रहै जोकर परिवार (2020) :एहि पोथीमे संग्रहित कथासभक लेखन 12 मार्च 2020 सँ 20 अप्रैल 2020 धरिक समयावधिमे कथाकार कयने छथि। ‘रहै जोकर परिवार’ कथा संग्रहकेँ पल्लवी प्रकाशन, तुलसीभवन, जे.एल.नेहरूमार्ग, वार्डनं. 06, निर्मली, जिला- सुपौलसँ प्रकाशित कराओल गेल अछि। उक्त पोथीमे संग्रहित सभ कथाक संक्षिप्त विवरण- कथाक शीर्षक, शब्द संख्याआलेखन तिथिनिम्नांकित अछि- 1. दहिबरी- शब्द संख्या : 2560, तिथि : 12 मार्च 2020 2. सघन बन- शब्द संख्या : 2697, तिथि : 17 मार्च 2020 3. हुसैत लोक- शब्द संख्या : 2602, तिथि : 23 मार्च 2020 4. हुसि गेलौं- शब्द संख्या : 2574, तिथि : 28 मार्च 2020 5. झूठक झालि- शब्द संख्या : 2352, तिथि : 01 अप्रैल 2020 6. दुष्टपन- शब्द संख्या : 2317, तिथि : 06 अप्रैल 2020 7. रहै जोकर परिवार- शब्द संख्या : 2297, तिथि : 15 अप्रैल 2020 8. परिपक्व निरलज- शब्द संख्या : 2232, तिथि : 20 अप्रैल 2020 क्रमश: सभ कथाक इंगित परिवर्तनक स्वर निम्नांकित अछि- 1.‘दहिबरी’,कथामे चैतक रान्हल बैशाखमे खेबाक जे परम्परा अपना एहिठाम अदौसँ आबि रहल अछि, तकर गुण-दोषक चर्च कथाकार कएलनि अछि। पूर्वमे जखन अविकसित लोकक अविकसित समाज छल, ताहि समयमे एहि परम्पराक चलैन शुरू भेल। मुदा आजुक समय आधुनिक अछि, जकरा वैज्ञानिक युग सेहो कहल जाइछ। वैज्ञानिक युगमे कोनहुँ वस्तुकेँ व्यवहारिक कसौटीपर देखल जाइत अछि, अर्थात् कोनहु चीजक नीक-बेजाकेँ देखब, वैज्ञानिक दृष्टिकोण सेहो कहबैत अछि। अत: वैज्ञानिक दृष्टिऍं बाइस-तेबाइस भोजनकेँ शरीरक लेल अहितकर मानल गेल अछि। वएह अहितएहि कथाक मूलमे अछि जे परिवर्तनक स्वर बनि गुंजित भेल अछि। 2. ‘सघन बन’,कथामे मनुक्खक अविकसित अवस्थासँ विकसित अवस्था लेल परिवर्तित स्वरक गूंज अछि। जेना-जेना मनुक्खमे जिनगीक विकासक सघनता बढ़ैए, तेना-तेना मनुक्ख साधारण जीवनसँ विशिष्ट जीवनक लेल अग्रसर होइत, विशिष्ट जीवन प्राप्त करैए। ओना, साधारणसँ विशिष्ट बनबाक जे प्रक्रिया अछि ओ सरपट नहि अछि, ओहिमे अनेको अवरोध सेहो अबैत छैक, जकरा प्रस्तुत कथामे नीक जकाँ कथाकार व्यक्त कयने छथि। निष्कर्षत: मनुक्खक साधारण-सँ-विशिष्ट जीवनक जे परिवर्तित स्वरुप अछि ओ एहि कथामे प्रदर्शित भेल अछि। 3. ‘हुसैत लोक’,कथाकेँ कथाकार वैज्ञानिक दृष्टिकोणसँ लिखलन्हि अछि। एखन धरि जे परिवार वा समाज रूढ़िवादी विचारसँ ग्रस्त चालिमे चलैत आबि रहल अछि, जाहिसँ परिवारक संग समाजक नोकसान सेहो होइत रहलैक, तकरा प्रस्तुत कथामे चित्रण करैत आजुक जे परिवेश अछि ताहि परिवेशक अनुकूल कोना परिवार आ समाजक गठन होयतताहि दिशामे कथाकार परिवर्तनक इशारा करैत कहलन्हि अछि- “कानून केहनो मोट-मोट किताबक किए ने हुअए जे ‘वयस्क भेला पछाइत अर्थात् अठारह बरख पुरला पछाइत, अपन-अपन विचारक मालिक सभ होइए, एहि लेल दोसरकेँ एतराज नइ हेबा चाही। मुदा की समाजोमे सएह अछि?” 4.‘हुसि गेलौं’,कथामे कथाकार जीवनक वर्णन करैत कहलन्हि अछि जे जीवन जीवन थिक। जीवनमे सम-विषम परिस्थिति अबैत रहैत छैक। जाहिसँ जीवन प्रभावित होइते अछि। आर्थिक, सामाजिक, वैचारिक अनेकहु रंगक परिवर्तन जीवनमे होइत अछि। जेहेन परिस्थिति जीवनमे अबैए तेहने विचार आ व्यवहार सेहो बदैलते अछि। एही बिम्बकेँ पकड़ि प्रस्तुत कथामे जागेसर चर्च कएलनि अछि। जागेसर गरीबीक चलते अर्थात् आर्थिक मजबूरी भेलाक कारणे गामसँ दिल्ली गेलाह। किछु समयक पछाति पुन: गाम आबि गामहिमे रहैक विचार मोनमे रोपि लेलन्हि। जुगेसरक जीवनमे जे परिवर्तन भेल वएह एहि कथाक मूलमे अछि जकरा वैचारिक परिवर्तन कहल जा सकैछ। 5. ‘झूठक झालि’,कथाक माध्यमसँ कथाकार एकटा महत्वपूर्ण विचार दिसि इंगित कएलनि अछि। ओ विचार थिक जे आदियेकालसँ अर्थात् वैदिके युगसँ अपना एहिठाम सत्यकेँ छिपेबाक मनोवृत्ति विद्वत समाजक बीच रहल अछि। नारद, कालिदास, मण्डन मिश्र आ तुलसीदासकेँ आधार बना हुनका सभक प्रति जे झूठक प्रतिपादन होइत आबि रहल अछि तकरा चिह्नित करैत कथाकार ओहि झूठक जगह सत्यकेँ कोना स्थापित कएल जाए, ताहि दिशामे अपन विचार रखैत यथोचित परिवर्तनक स्वरकेँ इंगित कएलनि अछि। जाधरि समाजमे झूठक वर्चस्व बनल रहत ताधरि सत्यक संग अन्याय होइत रहत। जकर प्रभाव समाजक विचारधारापर पड़ैत रहत। 6. ‘दुष्टपन’,कथाक माध्यमसँ कथाकार समाजक ओहि मनोवृत्तिकेँ गहराइसँ पकड़ि अपन विचार प्रतिपादित कएलनि अछि जाहिमे दुष्टपनक क्रिया-कलापसँ इष्टपन प्रभावित होइत रहल अछि। आइये नहि, आदिये-कालसँ समाजमे एक दिसि जहिना इष्टपनक विचारधारा रहल अछि तहिना दोसर दिसि दुष्टपनक विचारधारा सेहो रहल अछि। दुष्टपनक जगह इष्टपन कोना स्थापित होयत, ताहि दिशामे कथाकार मण्डलजी गम्भीर चिन्तन-मननक संग महत्वपूर्ण परिवर्तनक विचार व्यक्त कएलनि अछि। ओ कहैत छथि जे जाबत धरि मनुक्खक संस्कारमे परतंत्र पकड़ने रहत ताबत धरि स्वतंत्र विचार दबल रहत जाहिसँ स्वतंत्र रूपे कियो अपन जीवन-यापन नहियेँ कय पाओत। 7. ‘रहै जोकर परिवार’,कथामे यात्राक वृतान्त अछि। एहि कथाक माध्यमसँ कथाकार मिथिलाक समस्त समाजक ओहि मनोवृत्तिकेँ गहराइसँ पकड़ि प्रतिपादित कएलनि अछि जे मैथिल समाजक कोढ़-करेजकेँ खोखरि-खोखरि सभ दिनसँ खाइत रहल अछि। ओहि मनोवृत्तिसँ कोना समाजक इष्ट हएत, एही परिवर्तनक संग कथाक प्रारूप तैयार कएलनि अछि। कोना समाज अशान्तिसँ शान्तिक बाटपर औताह, कथाक मूल बिन्दु यएह थिक। 8. ‘परिपक्व निरलज’,कथामे कथाकार समाजक ओहि वर्गक लोकक जिक्र कएलनि अछि जे दोहरी चरित्र बना समाजमे अपनाकेँ ठाढ़ कयने छथि। ओहन लोकक विचार आ कार्य दुनूकेँ ताहि रूपेँ प्रतिपादित कएलनि अछि जाहिसँ परिवर्तनक दिशा केर रेखांकन भेल अछि। ओहन दोहरी चरित्रक लोक समाजक वैचारिक धरातलपर ताहि रूपेँ पसरल अछि जाहिसँ समाज दिनानुदिन कमजोर होइत अपन वास्तविक शक्तिसँ दूर भऽ गेल आ जेहो किछु बाँचल अछि सेहो दिनानुदिन क्षीण होइत जा रहल अछि। फलाफल समाजक अस्तित्व दिनानुदिन विकृत होइत जा रहल अछि। आशीष अनचिन्हार गजल झाँपल गेलै सत्य वचन बारल गेलै सत्य वचन भोरे एलै औफिसमे थाकल गेलै सत्य वचन चारू कातक योजनासँ छाँटल गेलै सत्य वचन झुट्ठा सभहँक पौतीमे साँठल गेलै सत्य वचन ब्रह्मस्थानक वेदीपर आनल गेलै सत्य वचन सभ पाँतिमे मात्राक्रम 22-22-22-2 अछि। दू टा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि। Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव Join Videha googlegroups विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf          Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf       12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक,  १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf       Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf         21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010        Videha_01_10_2010_Tirhuta             67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010        Videha_15_11_2010_Tirhuta             70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010        Videha_15_12_2010_Tirhuta           72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011        Videha_01_03_2011_Tirhuta           77 ७) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012        Videha_01_08_2012_Tirhuta           111 ८) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013        Videha_15_03_2013_Tirhuta           126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013        Videha_15_11_2013_Tirhuta           142 १०) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १३) विदेह सम्मान विशेषा‍क- २००म अ‍क १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अ‍क १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १४) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आम‍ंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी VIDEHA 209th issue विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन  नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक  बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of original work.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् (c)२००४-२०२०. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम वि‍लास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत।  एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2020 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA

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