विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' २९९ म अंक ०१ जून २०२० (वर्ष १३ मास १५० अंक २९९) 'विदेह' २९९ म अंक ०१ जून २०२० (वर्ष १३ मास १५० अंक २९९) ऐ अंकमे अछि:- १. प्रदीप पुष्पक दू टा गजल २. रबीन्द्र नारायण मिश्र –किछु निबन्ध १. प्रदीप पुष्पक दू टा गजल गजल- १ के की कहलक की कहू के की ठकलक की कहू हमरो उजरे रंग छऽल के की दगलक की कहू भेलै साधू आब सभ के की चिखलक की कहू माया बड़का पैघ ई के की रचलक की कहू अखनो नै छी पास हम के की जँचलक की कहू (2222212सभ पाँतिमे) गजल- २ गप्प उठतै तँपहुँचबे करतै मेघ लगतै तँबरसबे करतै ओकरा रोकि सकत नै केओ गीत रचतै तँपरसबे करतै पाप आ पुण्य कथी नइ बूझै भूख लगतै तँभटकबे करतै छै अभिव्यक्तिक हक सभकेँतेँ दम्म फुलतै तँखखसबे करतै छै उमेरक गलती चालिक नइ डाँड़ हिलतै तँलचकबे करतै (2122 112222 सभ पाँतिमे) २. रबीन्द्र नारायण मिश्र –किछु निबन्ध रबीन्द्र नारायण मिश्र पिताक नाम : स्वर्गीय सूर्य नारायण मिश्र माताक नाम :स्वर्गीया दयाकाशी देवी बएस : ६५ बर्ख पैतृक ग्राम : अड़ेर डीह मातृक : सिन्घिआ ड्योढ़ी वृति : योजना आयोगक उप सचिवक पदसँ सेवा निवृत्त भेलाक बाद वर्तमानमे दिल्लीमे स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट। शिक्षा : चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालयसँ बी.एस-सी. भौतिकी विज्ञानमे प्रतिष्ठा : दिल्ली विश्वविद्यालयसँ विधि स्नातक। प्रकाशित कृति : १.‘भोरसँ साँझ धरि’ (आत्म कथा), २.‘प्रसंगवश’(निवंध), ३.‘स्वर्ग एतहि अछि’(यात्रा प्रसंग), ४.‘फसाद’ (कथा संग्रह)५.‘नमस्तस्यै’ (उपन्यास) ६.’विविध प्रसंग’ (निबंध संग्रह), ७. ‘महराज’ (उपन्यास) (उपरोक्त पोथीसभक e-versionpothi.com आओर amazon.com परसँ Printed Version ऑनलाइन क्रय हेतु उपलब्ध अछि।) १. अखबारमानेटाइमपास कैबेरलोककहताह-"हौ!अखबारपढ़नेकोनोपेटभरैतछैक?" पेटभरौककिनहिमुदामोनतँभरितेछैक।फेरहमसभतँसामाजिकप्राणीछी।लग-पासमेरहनिहारलोककसुख-सुविधाकध्यानराखबआविपत्तिमेसंगेठाढ़होएबबहुतजरूरीहोइतअछि।सेतँतखनेहोएतजखनहमअपना-आपकेँसमाजसँजोड़िकएराखी।ताहिहेतुअखबारएकटाबहुतसशक्तमाध्यमसाबितभएसकैतअछि। अखबारकसबसँपैघफाएदाईथिकजेअहाँनित्यभिरे-भोरकिछुनवघटनासँजुड़िजाइतछी।नित्यप्रतिदेश-परदेशमेभएरहलपरिवर्तनसँअवगतहोइतछी।ततबेनहि, लग-पासकबहुतराससुविधा-असुविधासँपरिचितहोइतरहैतछी।बहुतलोककतँईस्थितिअछिजेजँभोरेउठिकएभफाइतचाहकचुस्कीकसंगअखबारकचासनीनहिभेटतनितँबुझूबोखारलागिजेतनि।घरसँबाहरभएअखबारकआगमनकप्रतीक्षाकरएलगताह।अखबारपढ़िलेलाकबादएकटासंतुष्टिकभावमोनमेअबैतअछि।प्रायःभोरुकाएकघंटासमयचाहकसंगेअखबारपढ़बामेनीकसँबीतिजाइतअछि। भोरुकाअखबारमानेटाइमपास।जौँभोरमेअखबारआबएमेविलंबभेलतँकैगोटेपरेसानीबढ़िजाइतछनि।कैगोटेअखबारबलाकबाटतकैत-तकैतबाहरनिकलिजाइतछथि।अखबारबलाकेँफोनपरफोनहोबएलगैतअछि।ओहोतँमनुक्खेअछि।कहिओबिमारपड़िसकैतअछि,जरूरीकाजआबिसकैतछैक।कारणकिछुभएसकैतछैकमुदाएहननहिभएसकैतअछिजेओकहिओछुट्टीलेबेनहिकरए।मुदाअखबारकचस्कातेहनहोइतअछिजेलोकएक्कोदिनओकरबिनारहिएनहिसकैतअछि।बेचैनभएजाइतअछि।एकरेकहलजाइतअछिअमल।भोरमेअखबारपढ़बसेहोएकटाअमलेथिकजकरचस्काकोनोनिसासँकमनहिहोइतअछि। अखबारककुनपन्नाकेसबसँपहिनेउलटओताहओहुनकररूचिआस्वभावपरनिर्भरकरैतअछि।हमराकार्यालयमेएकटाकर्मचारीअखबारपढ़एकालसबसँपहिनेबिचलकापन्नापढ़ैतछलाहजाहिमेजिलाभरिमेभेलखून-खराबाकसमाचारभरलरहैतछल।तहिनाजौँकिओक्रिकेटप्रेमीछथितँओसभसँपहिनेखेलसमाचारपढ़ताह।राजनीतिमेरूचिरखनहारलोकप्रथमपृष्ठसभसँपहिनेपढ़ताह। तकरबाददुनिआभरिकराजनीतिकगप्पकरताहजेनाकिसभटा जिम्मेबारीहुनकेमाथपरहोनि । अखबारकअभावओकरउपस्थितिसँबेसीलक्षितहोइतअछि।जौँकोनोकारणसँकहिओअखबारनहिआएलतँभोरेसँमूडखरापहोएबस्वभाविक।चाहतँआबिगेलमुदाअखबारबिनाचाहककोनआनंदरहिगेल'-सेमोनमेहोइतरहैतअछि।कैगोटातँअखबारआनबाकहेतुदिन-रातिएककएदैतछथि।जौँकिओमधुबनीवादरभंगाजारहलछथितँहुनकाअखबारअनबाकभारदेथिनजेघुरतीमेअखबारलेनेआएब।सोचएबलागप्पथिकजेआखिरअखबारकएतेकप्रयोजनकिएकरहैतछैक?किछुतँएहनबातहेतैकजेअखबारमंगाएबआपढ़बएतेकमहत्वपूर्णभएगेलअछि। असलमेअखबारमेएकहिसंगेबहुतरासलोककआवश्यकताकपूर्तिहोइतअछि।जकरानौकरीचाहीसेनव-नवरिक्तिकसूचनादेखिअपनदर्खास्तलगासकैतछथि।जिनकाबिआहकरबाकछनिहुनकोलेलओहिमेविज्ञापनदेखलजासकैतअछि।परीक्षाकपरिणामसेहोओहिमेपढ़लजासकैतअछि।गाम-घरकसमाचारतँभेटिएजाइतछैक। अखबारनियमितपढ़बाकफाएदाजगजाहिरअछि।थोड़बेकालमेदुनिआभरिकचहलकदमीपतालागिजाइतअछि,सेहोबिनाकोनोविशेषप्रयासक।ओनाआइ-काल्हिसमचारकमाध्यममेबहुतरासइजाफाभेलअछि।मोबाइलफोन,दूरदर्शन,,घर-घरपसरिगेलअछि।कहिसकैतछीतखनअखबारकेँकेपुछैतअछि?मुदासेबातनहिअछि।कतबोकिछुभेलैकअछि,मुदाअखबारकबिक्रीबढ़बेकएलअछि।तकरकीकारण? एकटाप्रमुखकारणथिकजेअखबारमेपाठककहाथमेरहैतछैकजेकोनसमाचारकतबाकालधरिपढ़लजाए।चाहथितँओप्रमुखपाँतिसभपढ़िकएअखबारकपन्नापलटिदेथिनहिजँकोनोसमाचारबेसीरुचिगरकिंवाउपयोगीबुझेलनितँओकरपाँति-पाँतिपढ़िजाउ,मर्जीपाठकक।मुदादूरदर्शनमेसेबातनहिरहैतअछि।जहाँसमाचारदेखएलागबकिप्रचारकशृंखलाशुरुहोएत।लिअहऔबाबू!रिमोटहाथमेलएचैनेलसभबदलैतरहूमुदाबातओतबेभेटत। सबचैनेलबलासेसीखा-बुद्धीकेनेरहैतअछिजेसभठामविज्ञापनएकहिसंगेहोइतरहैतअछि।हारिकएदर्शकबैसिजाइतछथिआजएह-सएहदेखैतरहिजाइतछथि।मुदाअखबारमेसेबातनहिहोइतअछि।लोकअपनरुचिकहिसाबसँनिर्णयकएसकैतछथिजेकीपढ़ीआकीनहि।ककरानीकसँपढ़ीआककरमुख्यपाँतिपढ़िकएआगूबढ़िजाइ।कहकमानेजेनियंत्रणपढ़एबलाकहाथमेरहैतअछि।मुदाअखबारोकेँअपनसीमानछैक।एकतँओएक-दूदिनपुरानसमाचारछपैतअछि।कारणजाबेसमाचारछपतैकआलोककहाथमेपहँचतैकताबेतँओबसिआभएजाइतअछि।अस्तु,कैबेरसंवेदनशीलसमाचारकेँसद्यःदेखबाकहेतुदूरदर्शनकजबाबनहिअछि।घरेबैसलचंद्रमाकधरातलपरछंद्रयानकगतिविधिदेखू,मोनहोअएतँसंसदकार्यवाहीदेखू।ईकाजअखबारसँतँनहिएभएसकैतअछि।तथापि,अखबारकअपनमहत्वछैकआरहबेकरतैक। २ बेनामी संपत्ति कानून बहुधाईदेखलजाइतअछिजेकदाचारकएबहुतरासधन -संपत्तिसंग्रहकरएबलाव्यक्तिअपनाकेँकानूनीदाव-पेवचसँबचेबाकहेतुतरह-तरहकव्योंतकएलैतछथि।परिणामहोइतअछिजेसरकारीव्यवस्थाएहनलोकककिछुनहिबिगारिपबैतअछि।एहनलोकसमाजमेपूर्णसम्मानकसंगमोंछपरतावदैतजीवन-यापनेटानहिकरैतछथिअपितुदोसरकेँछोटकहबाककोनोअवसरहाथसँनहिजाइतछथि।एहनेलोककोनोसामाजिकधार्मिककाजमेसबसँबेसीचंदादैतछथि,माए-बापकश्राद्धमेजबारकेकहएपूरापरिपट्टाकेँभोजखुअबैछथि।कोनोमंदिरबनेबाकहोइक,वापूरानमंदिरकेँजीर्णोद्धारकरकहोइक तँओसभसँबेसीटाकाचंदादएअपनाकेँसम्मानितकरैतछथि।मुदासबालअछिजेएतेकटाकाहुनकाअबैतछनिकतएसँ? जाहिरबातअछिजेकोनो-ने-कोनबैमान-सैतानीकेनहिएतेकधनभएसकैतअछि,खासकएनौकरीपेशाबलालोककेँजकरदरमाहाबान्हलछैक,अकूतसंपत्तिकतएसँभएसकैछ,मुदाकैगोटाकेँसेभएजाइतछैक।कैबेरएहनसमाचारपढ़ैतछीजेकाजचपरासीककएरहलअछिआकरोड़ोंकेँमकान,सोनाकगहना,आदि-आदिजमाकेनेरहैतअछि।निश्चयएहनलोककसंख्याकमहोइतअछिमुदाहोइतेअछिसेकोना?कानूनीप्रकृयाकेँओसभकोनोपरबाहनहिकरैतअपनकाजमेलागलरहैतछथिआजँकहिओछापापड़लतखनभोम्हारनिकलैतअछि।ओव्यक्तिजहलजाइतछथि,नौकरीसँहटाओलजाइतछथि,मुदाएहनमामिलाकमेहोइतअछि।ओहोसामान्यतःविभागमे अन्तर्विरोधककारणेहोइतअछि।सरकारएहिसमस्याकेँकोनाकीकरए-ताहिविषयपर चिंतनहोइतरहलआहालेमेनिर्णयलेलगेलजेबेनामीसंपत्तिकानून१९८८केँसंशोधितकएएकरा फेरसँपरिभाषितकएलजाएसंगहि एहनव्यक्तिकबेनामीसंपत्तिकेँजब्तकरबाकएवम्अपराधसिद्धभेलापर ओकरापर्याप्तदंडदेबाकव्यवस्था सेहोएहसंशोधित कानूनकमार्फतकएलगेल। जाहिसंपत्तिकहेतुटाकाकिओदैतछथिआसंपत्तिककागजमेनाओँककरोआनकजेनाबेटा,भाए,बहिनआदिककिंवानौकर-चाकरवाकिओविश्वस्तलोककरहैछतँओकराबेनामीसंपत्तिकहलजाइतअछि।जेव्यक्तिसेकरैछतिनकाबेनामीदारकहलजाइछ।सबालअछिजेकिओएनाकिएककरैछ? असलमेईकाजसभओएहकरैछजिनकाबैमानीककमाइरहैतछनि।ओअपनआयकस्रोतनहिबतबैतछथिआटैक्ससेहोबचाजाइतछथि।उदाहरणस्वरूप,कैबेरसरकारीअधिकारीकदाचारकएअकूतधनजमाकएलैतछथि।विभागीयजाँचमेपकड़ाथिनहिताहिहेतुकागजमेपत्नी,बेटावाककरोअनकरनाओँदेनेरहैतछथि।आबजेकानूनमेसंशोधनभेलअछितकरबादएहनबैमानलोकसभकेँबचनाइमोसकिलभएगेलअछि।संपत्तिसंगेओकरआयकस्रोतजँस्पष्टनहिहोइतअछितँसरकारएहनसंपत्तिकेँजव्तकएसकैतअछि,संगहिओहिव्यक्तिकेँदंडितसेहोकएलजासकैतअछि। बेनामीलेनदेन (निषेध) संशोधनअधिनियम, 2016 लागूभेलाकबादएहनलोकपरकारबाइआसानभेलअछिजेअनकरनामेसंपत्तिकक्रय-विक्रयकरैतछथि।एहिकानूनकेँलागूभेलाकबादजौँकिओबेनामीदारबेनामीसंपत्तिकेँओकरअसलीमालिककनामेबेचैतअछितँसंपत्तिकओहस्तांतरणखारिजभएजाएत।संशोधितकानूनकअनुसारबेनामीसंपत्तिअर्जितकेनिहारकेँसातसालधरिकजहलआबेनामीसंपत्तिकबाजारमूल्यकचौथाइजुर्मानाकरूपमेदेबएपड़िसकैतअछि।कोनोगलतजानकारीवादस्तावेजदेलापरपाँचसालधरिसश्रमकारावासआसंपत्तिकदसप्रतिशतधरिजुर्मानाभएसकैतअछि।हिनदुअभिवाजितपरिवारककर्त्ताद्वारापरिवारकसदस्यहेतुकीनलगेलसंपत्ति,कोनोट्रस्टआदिहेतुओकरप्रवंधककनाओँसँलेलगेलसंपत्तिएहिकानूनकप्रावधानसँमुक्तराखलगेलअछि,मुदाताहिहेतुईजरुरीअछिजेलेन-देनकहेतुआमदनीकस्रोतज्ञातहोइ। बेनामीसंपत्तिमेसामान्यतःअवैधरूपसँकमाएलटाकालगाओलजाइतअछिजाहिसँओकराकरनहिदेबएपड़ैकआओकरअनैतिकधनोपार्जनपरलोककवासरकारकध्याननहिजाइक।ईकाजओसभबहुतसावधानीसँआफर्जीकागजातबनाकएकरैतछथि।तैँएहनलोककेँपकड़नाइबहुतकठिनकाजअछि।बेनामीसंपत्तिकक्रय-विक्रयकेनिहारव्यक्तिकेँतकनाइआओकरापरआवश्यककानूनीकार्रवाईकेनाइमोसकिलकाजसाबितभएरहलअछि।ताहिहेतुआबईविचारभएरहलअछिजेसंपत्तिकक्रय-विक्रयकसमस्तप्रकृयासँआधारसंख्याकेँजोड़लजाए।ताहिसँसंपत्तिकअसलीमालिककपतालागिजाएत।जौँसंपत्तिबेनामीअछितँतकरजानकारीसेहोभेटत।मानिलिअजेकिओअपननौकर-चाकरकनाओँसँसंपत्तिकलिखा-पढ़ीकरैतछथितँओकरनाओँधरदएपकड़ाजाएत।तखनइहोपतालगाएबआसानभएजाएतजेओकराओहिसंपत्तिकीनबाकहेतुटाकाकेदेलक,ओकरआयकश्रोतकीअछि? एहिकानूनकबनलाकबादसंपत्तिकलेनदेनमेपार्दर्शिताआएत।गलततरीकासँउपार्जितसंपत्तिकेँनुकाएबवाककरोआनकनाओँमेकागजबनाकएटैक्सकचोरीकरबमोसकिलभएजाएत।संगहिअसलीमालिककनाओँमेसंपत्तिकनिवंधनभेलासँहेराफेरीकसंभावनाकमत।निश्चयईकानूनरियलएस्टेटक्षेत्रमेसमग्रआत्मविश्वासमेसुधारदिसएकटाप्रगतिगामीप्रयासअछि। यद्यपिबेनामीसंपत्तिकानूनकधारमजगूतकएदेलगेलअछिमुदाअसलसमस्यातँईअछिजेबेनामीसंपत्तिकअसलीमालिककजानकारीकिओनहिदेबएचाहैतअछि।किओएहिझमेलामेकिएकपड़त? विभागसँजानकारीदेनिहारकनाओँपतालगाकएबदमाससभओकरजानोलएसकैतअछि।एहिडरसँकिओजानकारीनहिदैतअछि।एहिपरिस्थितिसँबँचबाकहेतुसरकारजानकारीदेनिहारकेँएककड़ोरधरिइनामदेबाकघोषणासेहोकेलकअछि। हालेमे आयकर विभाग द्वारा देलगेल जानकारीक अनुसार बेनामी लेनदेन(निषेध)अधिनियममे नबंबर २०१६मे भेल संशोधनकबाद लगभग सात हजार करोढ़क बेनामी संपत्ति जब्त कएल गेल अछि । एहिसँ ई अनुमान लगाओल जा सकैत अछि जे बेनामी संपत्तिक मालिकसभ एखनो कानूनी प्रकृयासँ बचि रहल छथि। तकर मूल कारण बेनामी संपत्तिक पता लगाएब थिक ।जमीन -जायदादक रेकार्ड ऐखनधरि सही तरहसँ उपलव्धो नहि अछि । ताहि हेतु जरूरी अछि जे सभटा रेकार्डक कम्युटरीकरण कएल जाए ।भ्रष्टाचारपर तखने अंकुश लागि सकैत अछि जखन कि चल-अचल संपत्तिक छानबीन आसान होइ । बेनामी संपत्तिसँ संवंधित मामलामे ई देखल गेल अछि जे सामान्यतः एहने लोक आयकर विभागक चाङुरमेफँसैत अछि जे कोनो घपला-गोटालामे फँसि गेल हो ।बेनामी संपत्तिसँ जुड़ल तमाम लोक राजनीति आ नौकरशाहीमे उच्च स्थान रखैत छथि आ जेना-तेना अपन नाजायज धनकेँ बेनामी संपत्तिक रूपमे ठेकाना लगाबएमे सफल रहैत छथि । बेनामी लेनदेन(निषेध)अधिनियाम २०१६मे न्यायाधिकरणक स्थापनाक प्रावधान अछि जे एखन धरि कागजेमे समेटल अछि जाहि कारणसँ बेनामी संपत्तिसँ जुड़ल मामलाक शीघ्रतासँ सुनबाइ नहि भए पबैत अछि।ऐखनएखनएहन मामलाक सुनबाइ मनी लांड्रींग निरोधककानून संबंधी प्राधिकरण करैत हछि जे पहिनहिसँ बहुत व्यस्त अछि । ३ बिहार शराबबंदी कानून भारतीय संविधानक धारा ४७मे वर्णितनीति निर्देशक सिद्धांतक अनुसार राज्य पूर्ण मद्यनिषेधक हेतु प्रयास करत जाहिसँ लोकक जीवनस्तरमे सुधार होएत । यद्यपि संविधानक ई धारा बाध्यकारी नहि अछि तथापि एतबा तँ स्पष्ट अछि जे मद्य निषेध किंवा एही तरहक कोनो कानून संविधानक उपरोक्त भावनाक अनुकूल अछि ।मुदा व्यवहारिक कारणसँ देशक अधिकांश भागमे एहन कोनो कानून आइधरि लागू नहि भेल । बिहारमे सेहो ई कानून बहुत विलंबसँ सन्२०१६मे लागू भेल । मुदा जे कानून बनल से बहुत खोंचाह भए गेल । अपराध आ दंडमे संतुलन नहिरहि गेल । ई बात नहि छैक जे एहि कानून बनलाक बाद किछु फाएदा नहि भेलैक । सरेआम शराब पीनाइ वा नशा करब कम जरूर भेलैक ,मुदा आन-आन समस्यासभ ततेक भए गेलैकजे थोड़बे दिनमे ई कानून एकटा भार भए गेल । बिहारेमे नहि अपितु सौंसे देशमे एहन कतेको लोक अछि जे शराबक चलते अपन परिवारक भरण-पोषण नीकसँ नहि कए पबैत अछि। शराब वा कोनो प्रकारक नशा केनिहार व्यक्ति तकर जोगार करबाक हेतु कोनो हद धरि जा सकैत अछि । ओकरा शराब चाही चाहे जेना होइ । कतेको बेर ई देखल जाइत अछि जे जँ नशेरी वा शराबीकेँ नशा करबासँ केओ रोकैत अछि तँ ओ हिंसक भए जाइत अछि ,विरोध केनिहार पारिवारिक सदस्यक हत्या पर्यंत कए दैत अछि । शराबक नशामे नशेरीसभ अपन घरमे झगड़ा करैत रहैतअछि,अपशब्द तँ बजिते रहैत अछि। एहिसभसँ पारिवारिक माहौल खराप भए जाइत अछि । नेनासभक पढ़ाइ-लिखाइ चौपट भए जाइत छैक,ओकरसभक विकासपर प्रतिकूल प्रभाव पड़ैत अछि ।हमर अधीनस्त एकटा कर्मचारी अपन खिस्सा कहलाह जे हुनकर पिता बहुत अधिक शराबक सेवन करैत छलाह । नशा चढ़ि गेलाक बाद ओ बेकाबू भए सभकेँ तंग करैत रहैत छलाह । एकदिन साँझमे ओ परीक्षाक तैयारी करैत छलाह । हुनकर पिता आबि कए भूगोल पढ़बए लगलखिन जखन कि काल्हि भेने इतिहासक परीक्षा हेबाक रहैक । ओ डरे किछु नहि बाजि सकलाह आ परीक्षामे ओही विषयमे असफल भए गेलाह जाहि कारणसँ हुनकर एकसाल बरबाद भए गेलनि । दिल्लीमे हम एहन कैकटा परिवारकेँ उजरैत देखलिऐक । कैक बेर तँ शराबी/ नशेरीक मृत्यु भेलाक बाद परिवार बेसी सुरक्षित आ सुखी भए जाइत अछि। ई बात सर्वविदित अछि जे शराब वा कोनो मादक बस्तुक अभ्यस्त लोककेँ नशाक जोगार चाही चाहे ताहि हेतु ओकरा जे करए पड़ैक। कतेको रिक्सा चालक,मजदूर, वा छोटमोट नौकरी केनिहार लोक नशाक चक्करमे अपन कमाइक अधिकाँश हिस्सा नशा सेवनमे खर्च कए लैत अछि । परिणामतः ओकर घरक स्थिति सदिखन गड़बड़ाएल रहैत अछि । नेनासभ बिलटल रहैत अछि । नशेरीसभक घरक माहौल ततेक विषाक्त भेल रहैत अछि जे ओहिमे के कखन मरि जाएत तकर कोनो ठेकान नहि । कैकबेर तँ विषाक्त शराब पीबि पचासो लोक एकहिठाम सुतले रहि जाइत अछि ।नशा करब गरीबे नहि अपितु ककरो लेल खराप होइत अछि । कैकबेर देखल जाइत अछि जे नशा कए कार चलओनिहार भयंकर दुर्घटनाक शिकार भए जाइत अछि । एहनमे कैकबेर तँ पूरा परिवारे सुडाह भए जाइत अछि । अस्तु,शराब वा अन्यकोनो प्रकारक नशाक नियंत्रण करबाक कोनो प्रयास स्तुत्य अछि । समाजक एहि स्थितिसँ उबारबाक हेतु बिहार सरकार सन् २०१६मे शराबबंदी कानून लागू केलक । कानून बनि गेल आ लागूओ भए गेल । मुदा एकर प्रावधानसभ आवश्यकतासँ बेसीप्रतिशोधी छल । परिणामस्वरुप, लोकसभ शराबक क्रय-विक्रय नुका कए करए लागल । एकबेर हम मधुबनीमे रिक्सापर जाइत रही । ओहि समयमे शराबबंदी कानून बिहारमे लागले रहैक । रिक्साबलाकेँ ओहि कानूनक बारे मे पुछलिऐक । ओ कहलक-“जकरा पीबाक आदति छैक से तँ पीबे करत चाहे ओकरा जे करए पड़ैक । पहिने दस रुपयामे जतेक तारी भेटि जाइत छलैक आब तकर आधा चारिगुना दामपर भेटैत छैक आ नशेरीसभ सेहो कीनैत अछि ,पीबैत अछि।” बिहार शराबबंदी कानून २०१६क धारा ३७क मुताबिक जे केओ कतहु शराब पीबैत अछि वा कोनो नशा करैत अछि वा कतहु निशा केने पकड़ल जाइत अछि तँ ओकरा कमसँ कम पाँच साल आ बेसी सँ बेसी सात सालक जहलक संगे कम सँ कम एक लाख आ बेसी सँ बेसीदस लाखक जुर्माना कएल जा सकैत अछि । तहिना जौँ केओ शराब पीबि कए वा कोनो निशा कए झंझट करैत अछि किंवा हिंसा करैत अछि, अपन घर वा बाहर शराब पीबाक हेतु उत्साहित करैत अछि,स्वीकृति दैत अछि,शराबी लोकनिकेँ अपना घरमे जमा करैत अछि तँओकरा कमसँ कम दस साल आ बेसी सँ बेसी आजन्म जहल आ एक लाख सँ लए कए दस लाख धरि जुर्माना कएल जा सकैत अछि। सन्२०१६मे शराबबंदी कानूनलागू भेलाक बाद तीन सालमे एक लाख सड़सठि हजार आदमी पकड़ल गेल आ बाबन लाख दू हजार अस्सी लीटर शराब जब्त कएल गेल । सबाल ई अछि जे एतेक मात्रामे शराब बनैत कोना अछिआओकरा एकठामसँ दोसर ठाम कोना पहुँचाएल जाइत अछि जखन कि एतेक सख्त कानून पूरा बिहार राज्यपर लागू अछि?एहनो सुनबामे अबैत अछि जेकैकबेर जब्त कएल गेल शराबकेँ पुलिस स्वयं चोरा कए राखि लैत अछि । कैमूर नामक स्थानपरजखनएहने घटना पकड़ल गेल तँ पुलिस कहलक जे मूस शराब पीबि गेल । शराबबंदी कानूनक तहत नार्थ बंगाल स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन बनाम बिहार सरकारक मामिलाक सुनबाइ करैत बिहार सरकारक खिलाफ बहुत सख्त टिप्पणी करैत पटना उच्च न्यायालयकहलथि जे बिहार पुलिस आँखि मूनि कए काज कए रहल अछि आ निर्दोष जनताकेँ बिहार शराबबंदी कानूनक तहत परेसान कएल जाइत अछि ।उपरोक्त मामिलामे बेगुसरायक नार्थ बंगाल स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशनक बस पुलिसएहि लेल जब्त कए लेलक जे ओहिमे एकटा यात्रीक संगमे शराबक बोतल पाओल गेल रहैक । माननीय उच्च न्यायालयक कहब रहनि जे चूँकि बस सरकारी छलैक तेँ ओकरा एना सोझे जब्त नहि करबाक चाहैत छलैक अपितु पुलिसकेँ कुर्कीक प्रकृया करबाक चाही ।पुलिस द्वारा एहि कानूनक तहत कएल जा रहल ज्यादितीक उदाहरण दैत कोर्ट कहलथि जे एकटा बैंक अधिकारी नोएडासँ बंगाल बदली भेलापर अपन घरक समानसभ परिवहन कंपनीक ट्रक द्वारा पठओने छलाह। ओहि ट्रकमे आनो लोकसभक सामान रहैक । पुलिसकेँ ओहि ट्रकमे शराबक बोतल भेटलैक । तकरबाद पुलिस पूरा ट्रकक समानसभ जब्त कए लेलक । परिणामस्वरुप,बैंक अधिकारीकेँ बिना कोनो गलती केनहि बहुत परेसानी भए गेलैक । एहन उदाहरण सभक चर्च करैत कोर्ट कहलथि जे पुलिस बिहार शराबबंदी कानूनक लोकसभकेँ आँखि मूनि कए जहल पठा दैत अछि । जहलसभ एहन लोकसभसँ भरि गेल अछि । कोर्टमे मोकदमाक संख्या बढ़िते जा रहल अछि । पुलिस कार्रवाइकरबासँ पूर्व जँ माथा लगाबए तँ बहुत रास परेसानीसँ लोक बँचि सकैतअछि । बिहार शराबबंदी कानूनक अधीनजहलमे बंद बेसी लोक समाजक निम्न वर्गक छल। जहलमे बंद रहलासँ ओकरसभक परिवारक पालन-पोषण मोसकिल भए गेल । जनता त्राहि माम करए लागल । तकर बाद बिहार सरकार केन्द्र सरकारक अनुमतिसँ आममाफीयोजना आनि बहुत रास कैदीसभकेँ जहलसँ छोड़ि देलकैक । कहक माने जे बिहार शरबबंदी कानूनक दुरुपयोग ततेक भेल जे सरकारकेँ स्वयं ओहि कानूनमे संशोधन करए पड़लैक । न्यायालयसभमे निरंतर बढ़ि रहल केससभक कारण पटना न्यायालय बिहार सरकारसँ पुछबाक हेतु वाध्य भेल जे आखिर दू लाख सड़सठि हजार शराबंदीसँ संबंधित मामिलाकेँ कोना खतम कएला जाएत? कोर्टमे जज एवम् अन्य जरूरी सुबिधाक अभावकेँ देखैत ई एकटा गंभीर समस्या भएगेल अछि ।सितम्बर २०१९ धरि मात्र २६२९ एहन मामिलाक निष्पादन भए सकल छलजखन कि लाखों केस कोर्टसभमे अखनोलंवित अछि । किछुगोटे बिहार शराबबंदी कानूनकेँ पटना उच्च न्यायालयमे चुनौती देलक । उच्च न्यायलय पटना एहि कानूनकेँ निरस्त कए देलक । एहि निर्णयक खिलाफ बिहार सरकार उच्चतम न्यायालयमे अपील केलक । उच्चतम न्यायालय बिहार सरकारक अपीलपर पटना उच्च न्यायालयक आदेशपर रोक लगा देलक । शराबबंदी कानूनक उल्लंघनक मामिलासभ लाखोंमे कोर्टसभमे लंवित अछि । कोर्ट सेहो परेसान अछि । जनता तँ परेसान छलहे । समाजक गरीब लोकसभकेँ एहि कानूनक प्रावधानसँप्रताणना बढ़ि गेलैक ।लोकसभ थाना-पुलिस,कोट-कचहरीक चक्करमे पड़ल रहैत छल । एहिबातसभक जानकारी बिहार सरकारकेँ भेलैक । उपरोक्त कानूनक कैकटा प्रावधानकेँ सन्२०१८मे बिहार सरकार बदलि देलक जाहिसँ लोकके परेसानी कम होइक । असलमे सन्२०१६क कानून ततेक कठोर छल जे लोकसभ परेसान भए गेल ।संगहि एहि कानूनक दुरूपयोगक सिकाइति सेहो सरकारकेँ प्राप्त भेलैक । ताहिसभ बातकेँ ध्यानमे रखैत एहि कानूनमे निम्नलिखित महत्वपुर्ण संशोधन कएल गेल- १.शराब पीबैत पकड़ल गेल व्यक्तिकेँ थानासँ जमानत भेटि सकैत छैक । २.पहिल बेर शराब पीबाक अपराधमे पकड़ल गेल व्यक्ति पचास हजार जुर्माना दए छुटि सकैत अछि । मुदा जुर्माना नहि देला पर तीन मासक कारावास हेतैक । ३.जौँ दोसर बेर केओ शराब पीबैत पकड़ल जाइत अछि तँ ओकरा एक लाख जुर्माना वा एक सालक जहलक दंड हेतैक । ४.शराब पीबैत पकड़ल गेल व्यक्तिक संपति जब्त करबाक प्रावधानकेँ समाप्त कए देल गेल अछि । मुदा शराबकेँ अपन घर वा गाड़ीमे संग्रह करए बला व्यक्तिकेँ कोनो छूट नहि देल गेल अछि । ५.सामुहिक दंडक प्रावधानकेँ समाप्त कए देल गेल अछि । ६.शराब पीबैत पकड़ल गेल व्यक्तिकेँ जिला बदर करबाक प्रावधानकेँ समाप्त कए देल गेल अछि । ७.सन् २०१६मे लागूभेल शराबबंदी कानूनक अनुसार जौँ केओ शराबक संग्रह केने पकड़ल जाइत अछि तँ ओकर परिवारक सदस्य(पत्नी,पति आ आश्रित संतान)केँ सेहो अपराधिक मामिला कएल जा सकैत अछि । संगहि मकान मालिककेँ खिलाफ सेहो अपराधिक मोकदमा कएल जा सकैत अछि । कानूनी प्रावधानक अनुसार अपराध साबित भेला पर कम सँ कम दस सा धरि जहल आ एकलाख जुर्माना कएल जाएत ।पारिवारिक सदस्य किंबा मकान मालिककेँ एहि तरहेँ प्रताड़ित करब भारतीय संविधानक धारा १४ एवम् २१क उल्लंघनहोइत छल ।उपरोक्त कानूनमे २०१८मे कएल गेल संशोधन द्वारा उपरोक्त प्रावधानकेँ हटा देल गेल अछि। ८.जौँ केओ शराब बनबैत पहिल बेर पकड़ल जाइत अछि तँ ओकरा दू साल धरिजहल हेतैक । मुदा दोबाराईगलती केलापर कमसँ कम दस सालक जहल हेतैक । ९.कोनो मकानमे शराब भेटलापर पहिलुका कानूनमे पूरा मकान सील करबाक प्रावधान छल । संशोधनक बाद आब मात्र ओहि कोठरी मात्रकेँ सील कएल जाएत जतए शराब राखल छल । १०.विषाक्त शराब पिलापर भेल मृत्युपर संबंधित दोषी व्यक्तिकेँ फाँसी देबाक प्रावधान कएल गेल अछि । बिहार सरकार शराबबंदी कानूनक उल्लंघनक सिकाइत हेतु टालफ्री फोन संख्या १५५४५ वा १८००३४५६२६८ पर कएल जा सकैत अछि । सिकाइति केनिहारक नाम गोपनीय राखल जाइत अछि । सिकाइति प्राप्त भेलापरओकरा संबंधित पुलिस अधिकारीकेँ कार्रवाइ हेतु अग्रेषित करैत अछि । पुलिससँ प्राप्त जानकारी/ प्रतिवेदनसँ सिकाइत केनिहार व्यक्तिकेँ अवगत कराओल जाइत अछि । जौँ ओ कएल गेल कार्रवाइसँ संतुष्ट नहि अछि तँ ओकर आग्रहपर दोबाराजाँच सेहो कएल जा सकैतअछि । बिहारक अतिरिक्त गुजरात,मिजोराम,नागालैंड आ केन्द्र शासित क्षेत्र लक्षद्वीपमे पहिनेसँ शराबबंदी कानून लागू अछि । मुदा कतहु एहन अव्यवहारिक कानून नहि बनल,ने कतहु कानून बनलाक बाद एतेक उठा-पटक भेल। ओहिराज्यसभमे शराबबंदी कानून लागू भेलासँ लोक शराब पीनाइ छोड़ि देलक से नहि कहल जा सकैत अछि । एहू राज्यसभमेकैकठाम शराबजेना-तेना बिकाइते अछिआ लोक पीबिते अछि । गुजरातमे तँ शराब तरकारी जकाँ घरे-घर पहुँचा देल जाइत अछि। कानून बनओनाइ एकटा बात थिक आ ओकरा लागू भेनाइ दोसर बात । एक सँ एक कानून बनि कए ब्यर्थ साबितभए चुकल अछि । बिआहमे दहेज देबा-लेबाक विरुद्ध कानून कहिआसँ बनल अछि मुदा ई सभ केओ जनैत अछि जे व्यवहारमे एकर बिना साइते कोनो बिआह होइत होइक । जतए सोझा-सोझी टाका नहिओ लेल जाइत अछि ओतहु आन-आन तरहें कन्यापक्षसँ उगाही होइते अछि । कहबाक माने जे सामाजिक क्षेत्रमे सुधार हेतु कानूनक अतिरिक्त चरित्र एवम् व्यक्तित्व निर्माण बहुत जरूरी अछि । तखने समाजमे सुधार भए सकैत अछि,तखने शराबसँ मुक्ति भए सकैत अछि । कैक बेर एहनो देखल जाइत अछि जे शराबीक संतान शराब छुबितो नहि अछि।दिन-राति पारिवारिक कलह देखैत-देखैत एहन नेनाक मोनमे कतहु-ने-कतहु शराब वा अन्य कोनो प्रकारक नशाक घृणा भए जाइत अछि। तकर कैक बेर सकारात्मक प्रतिकृयास्वरुप ओसभ शराबसँ जीवनभरि फटकी रहैत अछि।परिस्थितिवश ओकर व्यक्तित्वमे शराब वा कोनो अन्य निशाक प्रति एकटा अरुचि भए जाइत अछि । एहि बातमे कोनो संदेह नहि अछिजे शराब पीनाइ अधलाह थिक मुदा एकर आदति छोड़ेनाइ पहाड़चढ़ब थिक । जे होइक मुदा कानून बनि गेलासँ एकटा अवरोध तँ भइए गेलैक अछि । आशा अछि जे लोक एहि कानूनक जन कल्याणक भावना बुझैत सरकारकेँआवश्यक सहयोग देताह जाहिसँ एकर उद्देश्यपूर्ति संभव होअत । लेखकःरबीन्द्र नारायण मिश्र Email:mishrarn@gmail.com 26.02.2020 ४ ४ गया गेल रही बहुत दिन सँ माएक बारंबार सपना अबैत रहैत छल।एहि सपना सभक रहस्य नहि बुझा रहल छल।तथापि मोनमे भेलजे गया चली,पिणडदानक बड़ महत्व सुनैत छी।ओहिठामपिणडदान केला पर पितरसभ मुक्त भए जाइत छथि।मुक्त भेल पितरसभ अपन वंशजकें आशीर्वाद दैत छथि जाहिसँ सभककल्याण होइत अछि।पंडितजीसँ गप्प कए गया जेबाक दिन तकौलहुँ।विचार विमर्षक बाद फरबरीक अन्तमे ,२५ फरबरीकेँ जेबाक कार्यक्रम बनल,आपसी २८ फरबरीक।तिन मास पूर्बे रेल टिकटक आरक्षण करौलहुँ। क्रमशः गया जेबाक समय लगीच आबि रहल छल।चिन्ता रहए जे कोना की करी।कखनो काल होइत जे एखन स्थगितकए दी।फेर भेल जे जखन कार्यक्रम बना लेने छी तँ ई काज कइए लेल जाए।पण्डितजीसँ परामर्श कए चीज-वस्तुक ओरिआनमे लागि गेलहुँ।मुदा सभसँ चिन्ता छल पणडासभसँ कोना निपटल जाएत? सुनैतरही जे ओहिठाम टीशनेपरसँ पणडाक आदमीसभ घेर-बार शुरु कए दैत अछि।गयामे रहबाक चिंता सेहो होइत छल।संयोगसँ ओहि दिन हमर मित्र मिसरजी भेटि गेलाह।ओ पहिने गया पिंडदान हेतु गेल रहथि।हुनकर परिचित पंडा आ एकटा महापात्रजीक फोन नंबर भेटल।ओ अपनो स्तरसँ पंडाजीसँ एवम् महापात्रजीसँ गप्प कए हमर काज हल्लुक कए देलाह। महापात्रजीसँ गप्प भेल तँ सभसँ पहिने ओ कहलाह जे दिन उपयुक्त नहि अछि,पितृपक्षक समय फगुआक बाद हेतैक,तकरबाद कोनो दिनक टिकट लए सुचित करु।हम कहलिअनि जे हम तँ चारि माससँ दिन तकौने छी। "के दिन तकलाह अछि?हमरा गप्प कराउ।“ आब कि करी?दिन तकनिहार पंडितजीविद्वान छथि,समय दए दिन तकलथि,ताहि हिसाबे टिकट लेने छी।आब जखन जेबाक समय लगीच आबि गेल तँ दोसरे बात सुनि रहल छी।पंडितजीसँ फेर गप्प कए सभ बात कहलिअनि।ओ अपन निर्णय पर दृढ़ छलाह,दिन सही अछि,महापात्र की कहताह।हमरा हुनकर बातमे दम बुजाएल। ओ निश्चय सही दिन तकने हेताह। महापात्रजीकेँ फोन कए कहलिअनि जे हमर कार्यक्रम तयअछि,दिन सही छैक,अपने ओहि दिनक हिसाबसँ उपलव्ध भए सकब कि नहि से कहू।असलमे हुनका पहिने सँ किछु काज गछल रहनि,ओ ई अवसर सेहो नहि जाए देवए चाहथि।जखन बुझा गेलनि जे हम अपन कार्यक्रम पर अड़ि गेल छी,तँ ओ तैयार भए गेलाह।कहलाह जे हुनका २६ फरबरीक उपनायन करेबाक छनि,तें २६क रातिमे गयेमे रहताह आ सभटा काज नीकसँ करा देताह।कहलाह : “चिन्ता नहि करु।सभटा भए जेतैक । “ समान सभक सूची ओ लिखा देलाह।ओहि सूचीमे ततेक तरहक अंट-बंट सभ चीज-बस्तुक नाम छलजे एकट्ठा करबबहुत कठिनबूझाएल।तैँसमानसभ आनबाक भार हुनके दए हम निश्चिन्तभेलहुँ।समान सभक वाजिब दाम देबाक आश्वासन हम देलिहनि।ओ सहर्ष ताहि हेतु तैयार भए गेलाह।तकरबाद हम अपन तैयारीक अनुसार बिदा भए गेलहुँ।ओहिसँ पहिने महापात्रजी कैबेर फोन कए आश्वस्त होइत रहलाह जे हमर कार्यक्रम पक्का अछि, ओहिमे कोनो परिवर्तन नहि भेलअछि,जे निश्चित तिथिक हमसभ ओतए पहुँचि रहल छी,जे हुनकासँ भोरे भेँट होएत। गयासँ पंडाजीक सेहो फोन आएल।ओ हमर कार्यक्रमक बारेमे आश्वस्त होमए चाहैत छलाह।हम कतए ठहरब सेहो जानए चाहैत छलाह।इहो कहलाह जे रहबाक व्यवस्था हुनकेओहिठम भए सकैत अछि।मुदा जखन ओ एहि बातसँ आश्वस्त भए गेलाहजे हम हुनकेसँ संपर्क करब तखन निश्चिन्त भएगेलाह।संगहि कहलाह जे टीशनपर पहुँचते हुनकासँ संपर्क कएल जाएत जाहिसँ कोनो आओर पंडाक आदमी तंग नहि करत आओर हुनकर आदमी ओतहिसँ हमरा होटल लएआनत।हम अपन रहबाक व्यवस्था होटलमे केने रही।ताहि हेतु पहिनहिसँ आनलाइन आरक्षण करौने रही।हम पंडाजी ओहिठामनहि रहए चाहैत रही कारण ओतएपताने केहन की होएत,से मोनमे शंका रहए। २५ फरबरी २०१८क साँझमे भुवनेश्वर राजधानीसँ हम आ हमर श्रीमतीजी गया विदा भेलहुँ।ओहिसँ पूर्व होटलमे फोनकए सूचना दए देल जे हमसभ भोरे पाँच बजे होटल पहुँचब।तदनुकूल हमरा सभलेल व्यवस्था कएल जाए।रस्ता भरि खाइत-पिबैत हमसभ यात्राक आनंन्द लैत रहलहुँ।सासारामक लगमे ट्रेन छलैक कि एकटा सहयात्री चिचिआ उटलाह जे गया आबयबला अछि।कैटा यात्री हुनक डाक सुनि उठि कए समान लए गेट पर आबि गेलाह।रातिक समय छलैक,क्यो जोखिम नहि उठाबए चाहए,कारण गयामे ट्रेन चारि बाजि कए बीसमिनटपर पहुँचक छल,आ जौँ राति मे सुतागेल,सुतले रहि गेलहुँ,तहन तँ गेल महिष पानिेमे परड़ु समेत।एहि चक्करमे चारि-पाँचबेर गेट धरि गेलहुँ आ आपस सीट पर अएलहुँ।अन्ततोगत्वा लगभगएक घंटा बाद ट्रेन गया टीशनपर पहुँचल। हम सभ भोरे गया टीशनपर पहुँच गेल रही।होटल ग्रैंड पैलेस टिशनसँ सटले छल।ततबे लग रहैक जे टीशनपर होइत उद्घोषणा होटलमे सुनाइत छल।होटलमे पहुँचि हमरा लोकनि थोरेकाल विश्राम कएल।नित्यक्रमसँ निवृत भए बैसले छलहुँकि पंडाजीक फोन आएल।होटलक पता पुछलाह।थोरे कालक बाद ओ होटल पहुँचि हमरसभक हाल-चाल लेलाह,आ सभ तरहे निश्चिंत रहबाक हेतु कहलाह।महापात्रजीकेरातिमे अएबाक कार्यक्रम रहनि ।महापात्रजी बारंबार फोनपर कहैतरहलाह जे एकभुक्त कए लेब।केस कटा लेब।हमसभ समान लए रातिए पहुँच जाएब।काल्हिसँ पिण्डदान होएत। ओहिदिन,माने २६ फरबरीक उपयोग हमरा लोकनि वोधगया देखएमे केलहुँ।गयासँ बोधगया जेबाक हेतु टेम्पू200 टाकामे भेटल।गयासँ बोधगयाक दूरी करीब-करीब १३ किलोमीटर अछि।रस्ताक हालत खस्ता अछि।लगबे नहि करत जे अन्तर्राष्ट्रीय महत्वक तीर्थस्थान जा रहल छी। गया शहरक हाल मधुबनी,दड़िभंगे जकाँ अछि।नाला सभ नर्कक प्रतिरूप भेल,वातावरण दुर्गंधसँ भरल।होइतजे कतए आबि गेलहुँ।करीब आधाघंटामे टेम्पु बोधगया मंदिरलग पहुँच गेल।कनिके काल पैरे चलि हमसभ मंदिर लग बनल मालखानामे पहुँच गेलहुँ।ओहिठाम मोबाइल फोन सभ जमा करब अनिवार्य,कारण सेसभ लए मंदिरक अन्दर नहि जा सकैत छी।मोबाइल फोन जमा कए हमसभ कनिके आगू बढ़लहुँकि एकटा टेम्पूबला सौंसे बोधगया घूमाबक प्रस्ताव देलक,२०० टाकामे। हमसभ मानि गेलहुँ आ ओहि टेम्पूसँ आस-पासक वोध मंदिरसभ देखए निकललहुँ। भूटान,तिब्बत,चीन,बर्मा,श्रीलंका,वियतनाम,थाइलैंड,जापान,थाइलैण्ड आदि अनेको देश,बुद्धक अनुयायी संगठन सभ अपन-अपन बुद्धक मठ बनौने छथि।ओहिमे भव्य बुद्धक प्रतिमा स्थापितअछि।कैटा मंदिर तँ अत्यंत शोभनीय थीक।मुदा बाहर ढाकक तीन पात।सड़क सभ खण्डहर भए रहल अछि।लगबे नहि करत जे एतेकप्रमुख स्थानमे घुमि रहल छी।आश्चर्यक बात जे एतेक महत्वक स्थानक एहन उपेक्षा भेल अछि ?टेम्पोबला काते-काते सभठाम घुमा-फिरा हमरासभकेँ महाबोधि मंदिर लग उतारि देलक।मोबाइल पहिने जमा कए देने रहिऐक,तेँ फोटो नहि खीचि सकलहुँ। महाबोधि मंदिरमे जाइत काल हाथक बैगक जाँच भेल।ओहिमे चार्जर,हेडफोन छलैक।कतबो कहलिऐक जे ओकरासबकेँ रहए दैक,मुदा नहि मानलक,गेट पर असबारसिपाही अड़ि गेल।हारिकए दोबारा ई बस्तुसभ जमा करए गेलहुँ।तकरबादे मंदिरक परिसरमे प्रवेश भए सकलहुँ ।मंदिरक मुहथर लग एक गोटा नवका दसटकही,बीसटकही,नोटसभक गड्डी बेसी पैसा लए कए विदेशी सभके दैत देखलहुँ।आगा बढ़ला पर विदेशी तीर्थयात्री सभक भरमार देखाएल।आगन्तुक वौद्धसभक हेतु प्रसाद भिक्षापात्रमे देबाक ओरिआन भए रहल छल।अन्दर मंदिर मे ठाम -ठाम विदेशी वौद्धसभ ध्यान कए रहल छलाह।मंदिरमे अपूर्व शांति छल।एकटा गोर-नार विदेशी महिला सूतल वा ध्यानस्थ छलीह।लगैत छल जेना कोनो मुरूत पड़ल अछि।गर्भगृहमे अपार शान्ति छल।अगल-बगलमेवौद्धसभ माला फेरि रहल छलाह।ओहिठाम दर्शनकए हमसभ आपस आबि गेलहुँ।मोबाइल छोड़ौलहुँ।फेर टेम्पो पकड़लहुँ,आ आपस गया टीशन लग स्थित होटलमे आबि गेलहुँ। प्रातःकाल नित्यकर्मसँ निवृत भए महापात्रजीकेँ फोनलगाओल।हमरा उमीद चल जे ओ रातिएमे आबि कए पंडाजी ओतए ठहरल हेताह,जेनाकि पहिने कहने रहथि।मुदा ओ तँ ट्रेनेमे छलाह। "जहनाबाद पहुँचि गेल छी।ट्रेन लेट भए गेलैक, नहि तँ पहुँचि गेल रहितहुँ।दू घंटामे आबि जाएब।चिंता नहि करब।हम सभ समान लए कए आबि रहल छी।" महापात्रजीकेँ विलंब होइत देखि दू-तिनबेर फोन केलिअनि। ओ तँ ट्रेनमे बैसल रहथि,बेर-बेर कहथि: “आब लगे अछि।सभटा भए जेतैक।चिंता नहि करब।दू दिनमे सभटा काज भए जेतैक। " आखिर ओ दूटा झोरामे समान सभ लए ९ बजे सोझे हमर होटल पहुँच गेलाह।मोन आश्वस्त भेल जे आब काज भए जाएत।नित्यकर्मसँ निवृतभए महापात्रजी हमरासभक संगे पंडाजीक ओतए बिदा भेलाह।पंडाजीक ओतए हेतु टेम्पु कएल। सड़कपर उतरि पाँच मिनट पैरे चललाक बाद हुनकर घर आएल।मधुबनी,दड़िभंगा जिलाक लोकसभक इएह पंडा छथि,से ओ कहलाह।निसान झंडापर माछक,दड़िभंगा महराजक देल।गलीक एक तरफ पुरना घर छैक,जे दड़िभंगा महाराज बनौने रहथि। तकर ठीक सामने नव पक्का घर बनल अछि,जाहि मे यात्री लोकनिक ठहरबाक इंतजाम अछि।नीकसँ बनल ओ सुविधापूर्ण कोठरीसभ अछि।से देखि भेल जे एतहुँ रहि सकैत छलहुँ।मुदा मुख्य रस्तासँ बहुत चलए पड़ैत छैक,फेर ओही वातावरणमे दिन-राति रहू।होटलमे चलि गेलाक बाद एकटा नवीनताक अनुभव होइत छल। सभसँ पहिने पंडाजीसँ आज्ञा लेल गेल।ताहि हेतु हुनकर पैर पूजल जाइत अछि।किछु संकल्प कएल जाइत अछि,जे एतेक ने एतेक दान,दक्षिणा करब।तखन ओ आशीर्वाद दैत काज करबाक स्वीकृति दैत छथि।हमसभ आगा बढ़ैत छी।पंडाजी बएसमे हमरासँ बहुत छोट छलाह,तेँ कनी कोनादनि लागल।बादमे महापात्रजीकेँ ई गप्प कहलिअनि।कहलाह जे एहिठामक अधिकारी इएह थिकाह,हिनके चलत,आदि,आदि। पंडाजीसँ आज्ञालए हमरा लोकनि फल्गु नदीक कछारपर पहुँचैत छी।ओतए छोटसन महादवक मंदिर छल।सामनेमे खालि स्थान देखि कर्म शुरु भेल।पिण्डदानहेतु हमर श्रीमतीजी गोल- गोल पिण्ड बनौलथिजतेक पुरखासभ ज्ञात,अज्ञात मोन पड़ैत गेलाह सभकेँ लेल पिण्डदान देलहुँ।जतेक काल हम पिण्डदान करैत रहलहुँ ततेक काल एकटा बुढ़िया आ दूटा छौड़ा मिलि ओतए हल्ला करैत रहल।ओकरा लेल धनि-सन।ततेक हल्ला करैत गेल जे मंत्रो सूनब पराभव रहैत छल।महापात्रजी कहलाह : “अहिसबपर ध्यान नहि दिऔक, काजमे लागल रहू।ई सभ एहीठामक वासी छैक।“ पिण्डदानक बाद पिण्डकेँ फल्गु नदीमे पानि देखि कए फेखबाक हेतु हमर श्रीमतीजी आगु बढ़लीह।कहल गेलनि जे फल्गु नदी मे चलल एक-एक डेग आश्वमेध यज्ञक बरोबरि होइत आछि।फल्गु नदी तँ रेतसँ भरल अछि।कहि नहि एकरा नदी किएक कहल जा रहल अछि।कोनो समयमे भए सकैत हछि ई नदी रहल होएत,मुदा आब तँ निट्ठाह रेतसँभरल अछि।बहुत आगुगेलाक बाद कनिक पानि छल जे बालुमे खधिआ कए निकलल छल,ओतहि पिण्ड फेकि ओ लौटि गेलीह।अगल-बगल ठाढ़ छौड़ासभ आओर ओ बुढ़िआ पैसा मांगए लागल आ जाबत लेलक नहि चुप्प नहि भेल।महापात्रजी आपना छोरि ककरो पैसा देल जाए ताहि हेतु तैयार नहि छलाह,मुदा कोनो उपाय नहि छल,ओकरा सभके किछु,किछु दए जान छोरा हमसभ ओतएसँ आगु बढ़ि सकलहुँ। ओहिठामसँ आगा जएबाक हेतु भरिदिनक बास्ते २५० टाकामे एकटा टेम्पू महापात्रजी ठीक केलाह।टेम्पूबला बेस जोसिला आदमी छल।बीच-बीचमे बेस मनोरंजक मुद्रा बनाए तरह-तरहक गप्प-सप्प करैत बढ़ैत रहल।कनीकालमे हमसभ प्रेतशिला पर आबि गेल रही।ओतए पहिने घाटपर पिण्डदान भेल।ओहिसँ सटल पोखरि कही,ताल कही ,जे कही,छल जे नर्कक दोसर रूप लगैत छल।ओहिमेसँ जललएपिण्डदानहोएत से सोचिएक रोँआ ठाढ़ भए गेल।खैर! जे करबाक छल से छल ।ओहिमे सँ जल आनल गेल।कतेको गोटे आस-पास पिण्डदान करैत छलाह।हुनका स्थानीय लोकसभ पैसा लेल कोनो कर्म बाँकी नहि रखने छल।पाई नहि देबै आ पिण्डदान करब,भए नहि सकैत अछि।हमसभ जखनओतए पिण्डदानकए लेलहुँ तँ एकटा बेस मजगूतगर,कारी भुसुंड लोक आबि पैसा देबाक आग्रह करए लागल जे महापात्रजीकेँ पसिन्न नहि रहनि।ओहिबातसँ ओ व्यक्ति महापात्रजीकेँ गरिआबएलागल,बात बढ़ए लागल,महापात्रजी सेहो किछु कहलखिन।ओहो चुप्प नहि रहल।महापात्रजीक गट्टा धेलक आ गरजए लागलः "आब तूँ अबिअह झाजी!अगिलाबेर सँ टपए नहि देबह।आदि, आदि। “ बातबिगड़ैत देखि हमसभ जल्दीसँ ओकरा एकसए टाका दए जान छोड़ौलहुँ।हमसभ तँ पहिनेसँ ओकरा पैसा देबए हेतु मोन बनौने रही,कारण ओकरा दोसर सभक संगे फसादकरैत हम देखैत रही मुदा महापात्रजी रोकैत रहलाह,तकर फलो ओ भोगलाह।कनी-मनी धक्का-मुक्की तँ भेबे केलनि।ओहो पाछा नहि रहल रहथि। तकरबाद हम सभ प्रेत शिला दिस बढ़लहुँ। चारिसए सीढ़ी चढ़ए पड़त,ताहि हेतु पालकी सेहो उपलव्धछल।दोसर विकल्प छल जे बीस सीढ़ीक बाद एकटा छोटसन स्थान छल।ओतए महादेवक मंदिर सेहो बनल छल।ओतए कै गोटा पिण्डदान करैत छल।महापात्रजीक सलाहपर हमसभ दोसर विकल्प चुनि ओतहिँ पिण्डदान करबाक निर्णय कएल।जगह साफ चल।बैसबाक हेतु आसनी सेहो भेटि गेल।ओहिठामक पण्डाजी सरलव्यक्ति बुझेलाह।चैनसँ पिण्डदान भेल।कनिके हटिकए एकटा परिवारकेँ हवन करैत देखलहुँ।महापात्रजी कहलाह जे ओहि महिलाकेँ प्रेतबाधासँ मुक्ति दिआबक हेतु होम भए रहल छल़ । पिण्डकेँ फेकबाक हेतु तएस्थानपर पहिने सँ एकटा बंगाली अधबएसू लोक अपन बेटाक अकाल मृत्युक बाद ओकर फोटोके ओतए राखि किछु- किछु कए रहल छलाह।पण्डाजी दूसए टाका देबाक आग्रह पर अड़ल छलाह,जेकर बाद ओहि मृतव्यक्तिकेँ प्रेतयोनिसँ मुक्ति भए जएतेक।ओ अपन गरीबीक बारंबार हबाला दैत एकसए टाकासँ आगा नहि बढ़ रहल छलाह,अन्तमे डेढ़सए टाकामे बात तए बेल।मंत्र पढ़ि ओहि फोटो पर फूल चढ़ौलथि।कतेक क्रूड़ छल ओ दृश्य,की कहू? तकर बादे हमसभ ओतए पिण्ड रखलहुँ। टाका दए जल्दीए ओतएसँ खसकलहुँ।लगेमे पीपड़क गाछक जड़मे बहुत रास मृत व्यक्तिसभक फोटो टांगल छल।महापात्रजी चिकरलाहः "जल्दी बिना पाछा तकने आगा निकलि जाउ“। सएह कएल।प्रेतशिलासँ उतरि हमरा लोकनि नीचामे भोजनालयमे बैसलहुँ।महापात्रजीकेँ भूख लागि गेल छलनि ।ओ भोजन करताह।हमसभ राबरी खाएब। सभगोटे चाह पीब।सेसभ बिचारि हमसभ ओतए बैसलहुँ।महापात्रजी भरिपोख भोजन केलाह,फेर पावभरि खोआ सेहो देलखिन।हमहुँसभ खोआ खेबामे पाछा नहि रहलहुँ,कारण भूख जोर मारि रहल छल।भोजन तँ नहि कए सकैत छलहुँ कारण अखन आओर ठाम पिण्डदान देबाक छल।महापात्रजीके गया महात्म्यपर एकटा पोथी किनबाक हेतु एकटा बच्चा कतेक गोहरौलक,मुदा ओ नहि मानथि।हारिकए ओ एकसएसँ दाम घटबैत-घतबैत बीसटका पर आनि देलक ,तैओ ओ अपन बातपर अड़ल रहथि। "धुर्र,ई की लेब, बेकार थीक।" अन्तमे हमरे दया आबि गेल आ हुनकासँ नुकाकए बीसटकामे गया महात्म्य कीनि लेलहुँ।भोजन करितहिँ महापात्रजीकेँ फुर्ती आबि गेल।हमसभ तुरंत टेम्पूसँ रामशिलाक हेतु विदा भए गेलहुँ।पहिने रामशिला घाटपर आ तकरबाद उपरमे बनल मंदिरमे पिणडदान भेल।तालाबक हालत पर नहिए चर्च करी सएह नीक।उपर मंदिरपर कनिके चढ़लाक बाद पिण्डदेबाक स्थान भेटि गेल आ ओतहिँ पिन्डदान देल गेल। एकरबाद काकबलिकेँ पिण्ड दैत हमसभ गोटे टीशन रोड स्थित होटल पहुँच गेलहुँ।महापात्रजी संगमेछलाह।ओ जे समानसभ अनने रहथि तकेर गोट-गोटक दाम जोड़ि दए हुनकासँ ओहि दिनक हेतु छुट्टी लेल।ओ पंडाजी ओहिठाम रहए हेतु चलि गेलाह।काल्हि अंतमे ब्राह्मण भोजन हेतु पंडाजीकेँ कहलिअनि।कहलजाइत अछिजे गयामे एकटा ब्राह्मण भोजन करेलापर एक हजारक फल होइत आछि।हम एगारहटाब्राह्मण भोजनक व्यवस्ता करबाक भार हुनका देलहुँ,तकर खर्चा प्रात भेने हम हुनका देलिअनि। प्रेतशिला लगकहोटलमे जे खोआ खेने रही,से डेरा अएलाक बाद रंग देखबए लागल।ताबरतोर पेट झड़ए लागल।संगमे दबाइ छल,से खेलहुँ।कहुनाक मामला सम्हरल।दिनभरिक धमाचौकड़ीक बाद आब आराम जरूरी छल,से कएल। प्रातभेने हमसभ विष्णुपाद मंदिर विदा भेलहुँ। महापात्रजी ओतए पहिने पहुँचि गेल रहथि। “पहिने घाटपर पिण्ड पड़त, तकर बादे विष्णुपाद मंदिरमे” । महापात्रजी बजलाह।हमसभ ओतए पहुँचलहुँ। पोखरिक कातमे बैसि पिण्डदानक काज शुरु भेल।एक-दूटा युवक ओतए ठाढ़ रहथि।जहन पोखरिमे पिण्ड फेकि हमसभ जेबाक हेतु उठलहुँ कि ओ तीन गोटे भए गेल रहथि आ पैसाक मांग भेल। ” ओकरासभकेँ किछु नहि देबाक छैक" महापात्रजी कहैत रहलाह।से सुनि ओ सभ हुनका गरिआबए लागल,मारि करए पर उतारू भए गेल।महापात्रजी सेहो गरमाए लगलाह।तावत एकटा क्यो स्थानीय व्यक्ति अएलाह।ओ हमरासभकेँ ओतएसँ घसकबामे मदति केलाह।ओ युवकसभ महापात्रकेँ गाढ़ि पढ़ैत रहल। तकरबाद पैरे-पैरे हमसभ विष्णुपाद मंदिर पहुँचलहुँ।ओतए बेस गहमा-गहमी छल।बड़काटा मंदिर,ततबे पैघ ओकर प्रागण।निचा उतरब तँ बालुसँ भड़ल फल्गु नदी।बालुए-बालुए हमसभ फल्गु नदीकेँ टपि गेलहुँ।ओकर दोसर छोड़पर सीताकुंड थीक।कहबी छैक जे भगवान राम अपन पिता दसरथके पिंडदान हेतु ओतहि आएल रहथि।पिण्डदानक चीज-वस्तुक ओरिआओन हेतु गेल रहथि कि सीताजी मंत्रपढ़ि दसरथकेँ बजा लेलखिन।सीताजी की करितथि?कहलखिन जे राम तँ पिण्डदानक चीज-वस्तुक ओरिआओन हेतु गेल छथि।मुदा दसरथ कहलखिन जे आबतँ हम आबि गेल छी।तखन सीताजी स्वयं बालुएसँ पिण्डदान केलीह।ओहिठाम सीताजीक नाम पर छोटसन मंदिर अछि जाहिमे दसरथक हाथ बनल अछि।फल्गु नदीमे ओहिठाम कैगोटे पिण्डदानकरैत रहथि।ओतए दूटा पंडितमे दक्षिणा हेतु झगड़ा होइत रहलनि।हमसभ पिण्डदानमे लागल रहलहुँ।महापात्रजी हमर श्रीमतीजीकेँ चीज-वस्तु,गहना,टाका दान करबाक हेतु प्ररित केलाह।से सबयथासाध्य भेलनि।हुनकर कहबाक हिसाबे हमसभ समान सभ लए गेल रही।पिन्डदानक बाद उपर मंदिरमे दर्शनकए ,पिण्ड चढ़ाए हमसभ फेर बालुए- बालुए विष्णुपाद मंदिर लग पहुँच गेलहुँ। फल्गु नदीमे पानि नहि अछि।मुदा जँतीन-चारि हाथ गहीँर कएल जाए तँ पानि भेटि जाइत छैक।तेहन कूप दू-तीन ठाम बनाओल देखाएल।यत्र-तत्र लोकसभ पिण्डदान करैत छलाह।उपर अएलाक बाद महापात्रजीकेँ चाहक तलब अएलनि।चाह आनए हमसभ उपर गेलहुँ।ताबते एकटा मुर्दाके"राम नाम सत्य है" कहैत लोकसभ ओहिठाम रखलक।किछु विध-विधान सभ केलक।तकरबाद ओकरा अन्तिम संस्कार हेतु फल्गुक कछारपर लएगेल।हमसभचाह पिबैत ई सभ देखैत रहलहुँ।तकरबाद एक कप चाह महापात्रजीक हेतु अनलहुँ।चाह पीवि ओ टनगर भेलाह।हमसभ आगाक काज हेतु विष्णुपाद मंदिरमे पहुँचलहुँ। विष्णुपाद मंदिरमे देशक विभिन्न भागसँ तीर्थयात्रीसभ आएल रहथि।करीब पचास गोटे तँ आंध्र प्रदेशक रहथि।ओहिना बहुत रास वंगालीसभ सेहो देखेलाह।सभ गोटे पिण्डदानमे लागल रहथि।स्थानीय पंडा जोर-सोरसँ मंत्र पढ़बएमे लागल रहथि।आंध्रासँ आएल तीर्थयात्रीसभ बहुत अनुशासित रहथि।मंदिरमे ओकर द्वार पर ठाढ़भए बड़ीकाल हुनकासभके मंदिरक पंडाजी मंत्र पढ़बैत रहलनि,ओसभ पढ़ैत रहलाह।तकरबाद सभ दस-दस टका दैत गेलाहआ पंडाजी बेरा-बेरी सभकेँ मंदिरमे प्रवेश करबैत रहलाह।बिना टाका देने एक्को गोटे अन्दर नहि जा सकैत छल।ओ मंदिरक मुहथर छेकने ठाढ़ छलाह।ओहिठाम ततेक हल्ला होइत रहल जे हमरा महापात्रजीक कहल मंत्रसभ सुनबामे आ सुनि बजबामे बहुत दिक्कतिहोइत रहलकहुना-कहुना कए पिण्डदान समाप्त भेल। “मंदिर बंद भए जाएत, जल्दी करू।" महापात्रजी बारंबार चेतावथि।हमसभ धरफराइतमंदिरक गर्भगृहमे पहुँचलहुँ।मंदिरक गर्भगृहमे बहुत लोक छल।अन्दर जाएब,आ मुर्तिलग जाएब पराभव छल।कहुना कए ठेलमठेला करैत ओतए पहुँचलहुँ।ओहिठाम एकटा पंडाजी पहिनेसँ एकगोटेसँ पैसा लए झंझट कए रहल छलाह।ओकरासँ जखन बात फरिछाएल तखन हमरा पर ध्यान गेलनि।ओ पींड चढ़एबाक हमर प्रयासपर हुंकार भरैत महापात्रपर बिगड़लाह। “एतए तोहर नहि चलतह।ई हमर जगह अछि। “ ओ पैसा तए करए चाहैत छलाह,महापात्र किछु मामुली रकमदेबाक हेतु कहैत छलाह।एहि बातसँ ओ बहुत तामसमे छलाह कि कोनो दोसर जजमानक फोन आबि गेल,ओ एकदमसँ फोन करैत बाहरभगलाह,कारण ओहिठाम ततेक हल्ला होइत रहैक जे किछु नहि सुनाइ पड़ि रहल छल।बाहर मंदिरक गेटपर ओ गप्प करैत रहलाह आ हमसभ पिंड चढ़ाए ओतएसँ,हुनका सामनेसँ,निकलि गेलहुँ।हुनका किछु नहि हाथ लागल।ओहिठामसँ हमसभ दक्षिणाग्निपद पहुँचलहुँ।ओतए पिंडदान दए हमसभ वैतरणी पहुँचलहुँ।ओहिठामक पोखरि आने पोखरिसभ जेना नर्क लगैत छल।ओतहुँ ओहिनापिंडदान भेल। सभसँ अन्तमे पिंडदान भेल अक्षयवटपर। अक्षयबटपरबैसि पैघ बरक गाछ अछि।ओहि गाछक जड़िमे बहुतरास लालडोरा,पीअर कपड़ा,सभक गेँठी कएल अछि।ओहि गाछक छाहरिमे हम पिण्डदान केलहुँ।पिण्डकेँ गाछक जड़िमे फेकि ओहिठामसँ बिदा भेलहु।पंडाजीके पहिने फोनकए देने रहिअनि जे आब हमसभ घंटाभरिमे पहुँचिरहल छी।ओहिठामसँ हमसभ मंगला भगवतीक दर्शन कएल।मंगला भगवतीक दर्शनकए बाहर निकलल रही की बहुत रास भीखमंगासभ पैसा मांगए लागल।हम किछु दसटकिआ निकालि देबए लगलिऐक।एतबेमे भिखमंगाक पथार लागि गेल।एक डेग आगा बढ़ब मोसकिल भए रहल छल।कनिक आगा बढी आ जोरसँ किछु टाका फेकि दिऐक जाहिसँ फेर कनिक आगा बढी। बहुत मोसकिलसँ टेम्पूधरि पहुँच सकलहुँ। तैओ ओ सभ घेरने छल।फेर जूमाकए किछु दसटकही एहि हिसाबसँ फेकलहुँ जाहिसँ टाका लुझबाक चक्करमे ओसभ कनी फटकी होमए आ टेम्पू आगा बढ़ि सकए।टेम्पू आगा बढ़ैत अछि,तथापि किछुवच्चा बहुत दूर धरि पछोड़ धेने अछि : "बाबा !हमरा किछु नहि भेल। “ फेर किछु टाका निकालैत छी,ओकरासभकेँ किछु- किछु कए दैत छिऐक।ताबे टेम्पूबला आगा बढ़ि गेल।तकरबाद ठोकले पंडाजीक ओतए पहुँचलहुँ।भरिदिन मंत्र पढैत,पढैत मुँहमे सपटी लगैत छल।भूख से लागि गेल छल।मुदा अखन एकटा महत्वपूर्ण प्रकरण बाँचल छल।तकरा पुरा करबाक हेतु हमसभ पंडाजीक ओतए पहुँचि गेल रही। पंडाजीक ओतए पहुँचैत छी।ओहिठाम पहिनेसँ सभटा इंतजाम भेल अछि।सज्जादानक हेतु सभटा बस्तु एकटा कोठरीमे राखल अछि।पंडाजी अपने एहि काजक हेतु अबैत छथि।हम पहिने गछल टाका देबाक गप्प दोहरबैत छी।तकरबाद सज्जा दान कएल गेल।एहिठाम एकटा गप्प कहब जरुरी बुझा रहल अछि जे सभ समानकेँ एकहिबेरमेमंत्र पढ़ि दान कए देल गेल।श्राद्धमे एक-एक बस्तुक हेतु अलग-अलग मंत्र पढ़ाओल जाइत छल।ओ बहुत श्रमसाध्य एवम् उबाउ तरीका छल।सज्जा दानकबाद पंडाजी कहला जे गयामे एकटा ब्राहमण आनठामक एक हजारक बरोबरि फलदायी होइत अछि,से कहू कतेक ब्राहमणक भोजन हेतु दान करब।एकटा ब्राहमण हेतु यथोचित टाका अलगसँ गछलिअनि।अन्तमे फूलक मालासँ हमर दूनू व्यक्तिक हाथ बान्हैत कहलाह जे एकर तोड़ाइ हेतु किछु अलगसँ कहिऔक,सेहो गछलिऐक,तखने ओहिठामक विधसभ पूरा भेल।हुनका प्रणाम कए चैनसँ बैसलहुँ।पण्डाजीक ओहिठाम आगन्तुकसभक बहुत नीकसँ हिसाब राखल जाइत अछि।सभक नाम-गाम,पता,गया अएबाक तिथि लिखल जाइत अछि।गाम-गामक अलग-अलग पृष्ठ अछि।हमरा गाम पछिला सए सालमे गया गेनिहारक सूची ओ देखेलाह।बहुत नीक लागल।ओहिमे अपन गामक कतेको गोटेक नाम देखल।ई अपना-आपमे एकटा इतिहास छल। ताबत ब्राहमणसभ आबि गेल छलाह।पंडाजी कहलाह जे संयोग नीक अछिजे एगारहटा ब्राहमण पुरि गेल अन्यथा एहिठाम से कठिन रहैत अछि।भोजनक सामग्री तैयार छल।भरिपोख ब्राहमणसभ भोजन केलाह।तकरबाद सभ गोटेकेँ किछुकए दक्षिणा देल गेल।एहि प्रकारे गयामे पिणडदानक कार्यक्रम विधिवत संपन्न भेल।पंडाजी के गछल टाका देलहुँ।ब्राहमण भोजनमे भेल खर्चाक हिसाब भेल,से गोट-गोट कए चुकता केलहुँ।महापात्रजीकेँ दक्षिणा देलहुँ।हुनकर आपसीक हेतु यात्रा व्यय अलगसँ देलहुँ। ओसभ प्रशन्न देखेलाह। मोनमे एकटा बरका संतोख भेल।मूलतः माताक स्वर्गवाससँ व्याकुल हृदयकेँ कनि शान्ति भेटल।प्रेतशिलापर जखन तरह -तरहसँ मातृ ऋणसँ उरिनहेबाक हेतु पिण्डदानदेल जाइत छलतँ कानबाक मोन भए रहल छल।की कोनो पिण्डदानसँ माताक ऋणसँ उरिन भए सकैत छी ?नहि भए सकैत छी।तथापि ई अपन धर्मक विधान छैक।गयामे पिणडदानसँ पूर्वजक आत्मा मुक्त भए जाइत छथि।एहि विश्वास ओ श्रद्धासँ हम ओतए गेल रही आ दू दिन धरि ठाम-ठामघुमि-घुमि पिण्डदान करैत रहलहुँ।प्रार्थना करैत रहलहुँ जे माता सहित हमर सभ पूर्वजक आत्माकेँ मुक्ति होनि। अपन धर्ममे आस्था रखनिहार विश्व भरिसँ लोकसभ एतए पिण्डदान करए अबैत छथि।मुदा ओहिठामक व्यवस्था खासकए पोखरिसभक खास्ता हाल देखि कए निराशा होइत छैक।अन्तर्राष्ट्रीय महत्वक एहि स्थानकउचित देख-भाल नहि भए रहल अछि।ओहुसँ चिन्ताक बात थीक सबठाम पैसाक वर्चस्व।जे से पैसाक खातिर तंग करैत अछि।शुरुसँ अन्तधरि ई समस्या बनल रहल।एकर की समाधान होएत?एतबा जरूरी लगैत अछि जे शान्तिपूर्ण महौलमे लोक श्रद्धापूर्वक अपन पूर्वजक आराधना कए सकथि,से व्यवस्था होइक।मुदा बिलाड़िक गरामे घण्टी बान्हत के?? रबीन्द्र नारायण मिश्र M:9968502767 लेखक परिचय नाम :रबीन्द्र नारायण मिश्र पिताक नाम :स्वर्गीय सूर्य नारायण मिश्र माताक नाम :स्वर्गीया दयाकाशी देवी बएस :६५ बर्ख पैतृक ग्राम :अड़ेर डीह मातृक :सिन्घिआ ड्योढ़ी वृति :योजना आयोगक उप सचिवक पदसँ सेवा निवृत्त भेलाक बाद वर्तमानमे दिल्लीमे स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट शिक्षा: चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालयसँ बी.एस-सी. भौतिकीविज्ञानमे प्रतिष्ठा: दिल्ली विश्वविद्यालयसँ विधि स्नातक प्रकाशित कृति:१.‘भोरसँ साँझ धरि’ (आत्म कथा), २.‘प्रसंगवश’(निवंध),३. ‘स्वर्ग एतहि अछि’(यात्रा प्रसंग), ४.‘फसाद’(कथा संग्रह) सम्पर्क :फोन ०१२० २३४३५६३ इमेल :mishrarn@gmail.com ब्लोग :mishrarn.blogspot.com एमजोन क लेखक पृष्ठ : (Author Page URL)amazon.com/author/rnmishra पता: House No: C 42, NSG SAS Ltd, Black Cat Enclave Pocket No: 6 Builders Area Greater Noida District: Gautam Buddha Nagar UP: 201315 ५ गाममे हैजा कै बेर जखन असगरमे रहैत छी तँ मोन गाम पहुँच जाइत अछि । ओना बूझल जाए तँ पछिला छिआलिस सालसँ हमसभ गामसँ नौकरी करबाक क्रममे बाहरे रहैत छी । कहिओ -काल गाहे -बगाहे गाम गेलहुँ । शुरुमे बेसी काल जाइत रही । जौं-जौं समय बितैत गेल ,गाम जएबाक क्रम मद्धिम पड़ैत गेल । मुदा कैटा बीतल घटनासभ अखनो मोनमे ओहिना घुमैत रहैत अछि जेना कि ओ एखने भेल हो ।ओहने घटनासभमे सँ एकटा अछि गाममे हैजा होएब । हम सभ जखन इसकुलिआ विद्यार्थी रही ,बात तखनेक अछि । ओहिसमयमेइलाजक तेहन सुविधा नहि रहैक । ब्लाकक तरफसँ बड़का सुइआ जँ दए देल गेल तँ बुझू जे एतत्तहभए गेल । कै बेर ओ सुइआसभ सामुदायिक केन्द्र वा कोनो तेहने सार्वजनिक स्थानसभमे छिड़आइत राखल रहैत छल । बेस नमगर होइत छल ओ सुई । जँ गाम-घरमे हैजा फैलि गेल तँ सरकारी लोकसभ गामक चक्कर लगबितथि आ सुइआ देबाक कार्यक्रमहोइत। कहि नहि ओहिसँ की प्रभाव होइक? पहिनेगाम-घरमेहैजाहोइतेरहैतछल।ईबिमारीबहुततेजीसँसौंसेपसरिजाइतछल।एकर कोनोसटीक इलाजनहि रहैक।डाक्टरीसुविधानदारदछल।बहुतभेलतँलगपासककोनोझोलाछापडाक्टरबजाओलजाइतछलाहआरोगीकेँपानिछढ़ाओलजाइतछल।कहिनहिओहिपानिमेकीसभरहैतछल?किओ-किओठीकोभएजाइतछल।सभभगवानेकभरोसेचलैतछल।हमजखननेन्नारहीतँहमरागाममेदूबेरहैजाबिमारीभेलछल।सौंसेगाममेहड़बिड़रोमचिगेलरहए।ओहिसमयमेएमबीबीएसडाक्टरहमरा गाममेनहिछल।धकजरीसँएकटाएलएमपीडाक्टरबजाओलजाथि।रिक्सापरछढ़लहाथमेछोटसनबैगआदेहपरलटकैतआलाकसमगजखनओककरोओहिठामअबितथितँलगपासकलोकइएहअनुमानकरैतछलजेककरोआब-तबहेतैक।तहिनाजँमधुबनीबाटाचौकपरसँसड़ल,सुखाएलसमतोलाआनिकएजौंकोनोव्यक्तिकेँदेलगेलनितँलोकइएहबूझएजेअंतिमेहालतहेतनि।आजँमधुबनीकसमतोलाकसंगेधकजरीकआलाबलाडाक्टरसेहो बजाओलगेलाहतँबुझूजेजल्दिएटिकटकटत। धकजरीसँएलएमपीडाक्टरकआएबतँबड़काबातहोइतछलैक।ओनाछोट-मोटरोगकहेतुकिंवासुइआदेबाकहेतुगामकलगीचमेरहनिहारबंगालीडाक्टरअबैतछलाह।बंगालीडाक्टरलगएकटासाइकिलरहैतछलनिजेफटकिए-सँटिपो-टिपोकरैतरहैतछल।बंगालीजकाँओमैथिलिओबजैतछलाह।कहिओकालहाटपरहमहुनकाचीलमकसोटालगबैतसेहोदेखिअनि।जेहोइकमुदाएकटाडाक्टरकरूपमेहुनकालग-पासमेलोकजनैतछल,मानैतछल। गामेकस्वर्गीयकुमारचंद्रडाक्टरसेहोबजाओलजाइतछलाह।हुनकरअड़ेरहाटपरदबाइकदोकानसेहोछलनिजेआबहुनकरपुत्रआहमरइसकुलिआसंगीहरिहरजीचलबैतछथि।स्वर्गीयकुमारचंदकेँगाममेबहुतइज्जतिरहनि।लोकहुनकाआदरपूर्वकव्यवहारकरैतछल।कैबेरहमरमाएदुखितभएजाइतछलीहतँओअबैतछलाह।हुनकरदेलदबाइसँओठीकभएजाइतछलीह।हमरामोनपड़ैतअछिजेएकबेरहमरमोनखरापरहए।हुनकेसँदबाइलेनेरही।कतबोकहलिअनिओदबाइकदामनहिलेलाह।कहलाह-" “अहाँविद्यार्थीछी, मोनसँ पढ़ू, इएह हमरदामभेल।" बाह! कतेकउदारसोचकलोकछलाहओ! ओसभगाममेरोगीसभकेँसुइआदेथिनतँलगैकजेनाकतेकभारीइलाज भएगेलैक।सुइआकेँस्पीरीटसँधोदेलजाइकआएकहिटासिरिंजकहिनहिकतेकगोटेकेँघोपलजाइक।आबकसमयमेंतँलोकहाकरोसकरएलागैत।कहैतजेएहितरहकसुइआसँबहुतराससंक्रामकरोगभएजाएत।मुदाताहिसमयकबातरहैक।भएसकैतअछिजेलोककखूनबेसीशुद्धरहलहोइकआकीमहजसंयोगेछल।एहनसुइआलगेलाकबादकिओमरलवादुखितभएगेलसेकहिओसुनबामेनहिआएल।तेँओठीकेचलिरहलछल। गाममेपहिलबेरहैजाभेलरहएतँबहुतछोटरही।कैगोटाकेँपकड़लकैक। ओहिबेरहमरमाएकेसेहोहैजाभएगेलरहैक।बाबूजीकैबेरडाक्टरकेबजाबथि।धकजरीबलाडाक्टरपानिचढ़ओनेरहथि।हमरबाबा(स्वर्गीयश्रीशरणमिश्र) बहुतदुखीरहथि।कैबेरआङनआबिकएमाएकहाल-चाललेथि।परिवारमेसभबहुतचिंतितरहथि।रच्छभेलजेओठीकभएगेलीह।मुदाओहिबेरसभसँजेदुखदघटनाभेलसेछलएकटाअत्यंतसुंदरयुवककहैजासँमृत्युहोएब।हुनकरपिताकओएकलौतापुत्रछलाह।देखबामेगौरवर्ण,नमगर-पोरगरआआकर्षकव्यक्तित्व।हुनकरहालेमेविआहभेलछल,द्विरागमनोनहिभेलरहए।किछुदिनपूर्वगाममेनवाहभेलरहैक।नवाहकसमाप्तिबेलाकबादभगवानकेँसौंसेगाओँघुमाओलगेलरहैक।ताहिसंगेआुगए-आगुओहोरहथि।खिल-खिलहँसैत,गोर-नारहुनकाहमदेखनेरहीजेअखनहुँओहिनामोनपड़ैतअछि।दुर्भाग्यवश,ओहैजाकचपेटमेआबिगेलाह।एहिसँहुनकरपिता(जिनकासभशर्माजीकहैतछल)सभदिनहेतुअनाथभएगेलाह।तकरबादहमकहिओहुनकाहँसैतनहिदेखलिअनि। जखनकखनोहमराओघटनामोनपड़ैतअछि,हमबहुतदुखीभएजाइतछी।शर्माजीविद्वानव्यक्तिछलाह।काशीसँसंस्कृतपढ़नेरहथि।बहुतविनम्रस्वभावकछलाह।सौंसेदेबालपरलाल-लालआखरमेसंस्कृतकश्लोकसभलिखनेरहैतछलाह।गाममेककरोदिनतकेबाकहोइकतँहुनकालगजाथि।हमहुकैबेरहुनकाओहिठामदिनतकेबाकहेतुजाइतछलहुँ।भगवानकपरमभक्तआबहुतनिष्ठावानलोकछलाह।तथापिएहनबज्रहुनकापरकिएकखसलसेनहिकही?एकहिसाबेओपरिवारसभदिनहेतुशापितरहिगेल। गाममेहैजाकदोसरघटनाभेलछलसन्१९६८ईमे।हमओहिसमयमेआर.के.कालेज,मधुबनीमेप्री.-साइंसमेपढ़ैतरही।गामसँलोकसभमासकरएसिमरिआगेलरहथि।ओतहिहैजाफैलगेलरहए।हमरगामकएकटामहिलाकेँहैजापटि गेलनि।ओओहीहालतमेगामआबिगेलीह।तकरबादतँगाममेकैगोटेकेँहैजाभेलैक।नवकापोखरिपरबसलपरिवारमेसँएकगोटेकेँसेहोहैजाभेलनि।सौंसेगाममेहरकंपमचिगेलछल।सभसँदिक्कतएहिबातलएकएरहैकजेउचितइलाजगाममेउपलव्धनहिरहैक।बहुततँपानिचढ़ादेलजाइक।लोकसभअपनाभागेजीबए,मरए।सरकारकदिससँएतबेहोइकजेसभकेँनमकासुइआलगादेलजाइक। ओहिबेरकहैजामेहमरपितिऔतभाएजीवछभाइ(स्वर्गीयजीवनाथमिश्र)केसेहोहैजाभएगेलनि।हमराओहिनामोनपढ़ैतअछिजेतीन-चारिबजेरातिएमेबच्चाकाका(स्वर्गीयउदयकान्तमिश्र) हमरबाबूजीकेँउठओनेरहथि।हमरिनिन्नसेहो टुटिगेलरहए।छठिपावनिकखरनाओहीदिनभेलरहए।बाबूजीतुरंतेरिक्सासँधकजरीबलाडाक्टरकेँबजाअननेरहथि।हुनकापानिचढ़ाओलगेल।मुदाहुनकाकोनोफैदानहिहोअए।ओडाक्टरकैबेरअएलथि-गेलथि।पानिचढ़ाकएचलिजाथि।अंतमेदोसरदिनभोरेसेहोओआएलरहथि।मुदाथोड़बेकालकबादहुनकरदेहांतभएगेल।तकरबादजेदृष्यभेलतकरवर्णनकरबकठिनकाजथिक।हमरपित्ती(बच्चाकाका) आकाकीकहालतबेहालरहए।हुनकरओएकमात्रसंतानरहथि।बिआह भएगेलरहनि।तकरसालभरिकभीतरेईदुर्घटनाभएगेलरहए।छठिकभोरकाअर्घहेबाकरहैक।ओमहरकलममेगाछकाटलजाइतरहए।बड़कीकलममेहुनकासंस्कारदेलगेल।वच्चाकाकाअड़िगेलखिनजे आगिओएहदेताह।सोचलजासकैतअछिजेहुनकापरकतेकभारीबज्रखसल।एकटापरिवारसभदिनकहेतुनष्टभएगेल। जीवछभाइछ:हाथकबेसकरगरजवानछलाह।दुखितहोएबासँएकसाँझपहिनेअखारापरव्यायामकेनेछलाह।साँझमेहमहुनवकापोखरिपरहुनासंगेरही।ओहिठामसेहोएकगोटेकेँहैजाभएगेलरहनि।भोरहोइतेओएनाहेजाकचपेटमेपड़िजेताहसेनहिसोचिसकैतछलहुँ।मुदासएहभेल।हमरकाकीभरिरातिभगवतीकलगआबिकएछातीपिटैतरहिगेलीह।किछुसुनबाइनहिभेलनि।हुनकरएकमात्रसंतानभोरहोइतेएहिदुनिआसँचलि गेलथि ।बहुतभारीअन्यायभेल।एहिघटनाकपचाससालभएगेलमुदाअखनहुहमओहिबारेमेसोचैतछीतँसोचितेरहिजाइतछी।कैबेरहोइतअछिजेहुनकादरभंगालएजेबाकचाहैतछल।ओतएसाइतहुनकरजानबँचिजइतनि।कहिनहिसेप्रयासकिएकनहिभेल?भएसकैतअछिजेओतेकजागरुकतानहिरहैकवाकीभेलेकसेनहिकहिमुदापरिणामबहुतदुखदभेल। एहिघटनाकबादहमरकाकाआकाकीदुनूगोटेकदुखकअंतनहिछल।सौंसेगामभम्मपड़िरहलछल।कतेकोगोटेआबि-आबिसंवेदनाप्रकटकरैतरहलाह।हमराअखनोकाकाजीकओवेसुधपड़लदृष्यमोनपड़ैतरहैतअछि।दुखआसंतापसँओततेकपरेसानरहथिजेलोढ़ालएमकानकेँढ़ाहएलागथि।सबगुम्मछल।काकाजीअध्यात्मिकप्रवृतिकलोकछलाह।बादमेओकैबेरतीर्थाटनपड़चलिगेलाह।क्रमशःभगवान मेलीनभएगेलाह।अपनेदरबाजापरहनुमानजीकछोटसनमंदिरबनओलथिआदिन-रातिहुनकेचाकरीमेलागलरहथि।एहिसँहुनकरमोनक्रमशःशांतभेल।मुदाकाकीतँओहिनाविक्षिप्तेरहिगेलीह।ओकरबादकहिओफेरसामान्यनहिभएसकलीह।आबओसभएहिदुनिआमेनहिछथि।आशाकरैतछी,हुनकासभकआत्माकेँभगवानअपनशरणदेनेहेथिन। गाममेभेलहैजाकआक्रमणसभदिनकहेतुएकटासंतापछोड़िगेल।दूटापरिवारसभदिनकहेतुबर्बादभएगेल।दूटानवविवाहिताआजीवनवैधव्यकदंशभोगैतरहलीह।हुनकालोकनिकसमस्तपरिवारहाकरोसकरैतरहिगेल।मुदाईतँविधाताकडांगछल।केकीकरैत?सभविवशछल।आइओओहिघटनासभकस्मरणसँमोनमेआपारकष्टभएजाइतअछि।तखनतँजीवनछैक,कतहुकिछुघटनासँवशीभूतभएठहरिनहिजाइतअछि ,चलितेरहैतअछि।कालचक्रआगाबढ़ितेअछि,बढ़ितेरहत।चिकित्साविज्ञानकविकासओउपलव्धताककारणआशाकरैतछीजेआबएहनघटनानहिघटत। ६ डॉ. जयकान्त मिश्र (संस्मरण) सन् १९७८ इस्वीक जनवरी मासमे दिल्लीसँ स्थानांतरण भए हम इलाहाबाद गेल रही। ओहि समय प्रथम बेर डॉ. जयकान्त मिश्रजी सँ हुनकर तीरभूक्ति, सर पीसी वनर्जी रोड स्थित घरमे भेँट भेल। बिना कोनो पूर्व परिचय रहितहुँ ओ सभकाज छोड़ि हमरासँ भेँट केलाह। एकटा मैथिलकेँ हमर डेरा तकबाक हेतु कहलखिन। ओतहिसँ हमर हुनका संग परिचय ओ सम्पर्कक क्रम प्रारंभ भेल जे अन्त धरि चलैत रहल। जखन-कखनो हम हुनकर डेरापर जाइतँ ओ सभकाज छोड़ि हमरासँ अत्यन्त अपनत्व भावसँ गप्प करथि। अपनेटा नहि, अपितु हुनक पत्नी, ओ संगे रहनिहार परिवारक अन्य लोकनि सभ सेहो ओहिना गप्प-सप्पमे संग देथि। जलखै, चाह, पान तँ हेबे करइ। ओही क्रममे कतेको गणमान्य मैथिल लोकनिसँ हुनकर डेरापर भेँट भेल। हुनकर अध्ययन, अध्यापन, लेखन सबहक अवलोकन करबाक अद्भुत अवसर भेटल। कए दिन हुनका संगे इलाहाबाद विश्वविद्यालयक अंग्रेजी विभाग गेलहुँ, जाहिठाम ओ अंग्रेजी विभागक अध्यक्षक पदपर कार्यरत छलाह। इलाहाबादमे रहनिहार मैथिल समाज डॉ. जयकान्त मिश्रसँ पूर्ण परिचित छलाह। अधिकांश मैथिल सभसँ हुनकर व्यक्तिगत सम्पर्क छलनि। प्रत्येक साल विद्यापति समारोह मनाओल जाइत छल। डॉक्टर जयकान्त मिश्र ओहिमे अवश्यमेव रहैत छलाह। हुनकर डेरापर निरन्तर मैथिलीक विकास केना हो, तकर चर्चा होइत रहैत छल। ओ सदिखन बाजथि- “मैथिलीमे लिखल करू। मैथिलीक हेतु काज करू।” संगे मैथिलीक हेतु कएल गेल अपन अनवरत संघर्षक चर्चा सेहो होइत, जाहिसँ मैथिली विकास यात्राक साक्षात अनुभव होइत छल। मैथिली भाषाकेँ बिहार लोक सेवा आयोगमे हटा देल गेल रहइ। तकरा पुनश्च आपस अनबामे, मैथिलीकेँ बच्चा सबहक शिक्षाक अनिवार्य माध्यम बनेबाक हेतु ओ कहि नहि, कतेको बर्ष संघर्ष करैत रहलाह आ अन्ततोगत्वा अपन प्रयासमे सफल रहलाह। मैथिलीक विकास हेतु ओ गाम-गाम घुमैत रहलाह। ततबे नहि, जतए कतहु मैथिलीक चर्चा होइत आकि कोनो कार्यक्रम होइत तँ ओहिमे डॉ. जयकान्त मिश्रजी अबस्से भाग लेथि। आयु बढ़लासँ नाना प्रकारक स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या रहैत छलनि। हुनका कतेको साल पूर्व पेसमेकर लागल छल तथापि जँ कतहु मैथिलीक कार्यक्रममे हुनका बजाओल जाइत, तँ ओ अवश्य जाथि। परिवारक लोक चिन्तित भए जाइत छलखिन। एकबेर हम इलाहाबादसँ पटना जाइत रही। स्लीपरमे हमर आरक्षण छल। डॉक्टर जयकान्त मिश्रजी केँ देखलहुँ। ओहिना ठाढ़, बिना सीटेक यात्रा कए रहल छलाह। बहुत आग्रह केलापर ओ हमर सीट लेबाक हेतु तैयार भेलाह। कहथि जे ओ अहिना चलि जेताह। ई छल हुनकर उत्साह- मैथिली कार्यक्रमे भाग लेबाक। ओहि दिन पटनामे कोनो मैथिली कार्यक्रममे भाग लेबाक हेतु जाइत छलाह। डॉ. जयकान्त मिश्रजीक भाषा ओ व्यवहारमे अद्भुत मधुरता छल। कखनो नहि लगैत जे एतेक पैघ विद्वानसँ गप्प कए रहल छी। जे जेहने स्तरक लोक रहैत, तेकरा संग तेहने भए गप्प करितथि, पूरा घ्यान देथि, घरक सदस्य जकाँ ओकर पूर्ण स्वागत करथि। घरक प्रथम तलपर हुनकर पुस्तकालय छल। ओहिमे बैस कए ओ अध्ययन, लेखन करैत रहैत छलाह। इलाहाबादसँ एकटा लघुकायमैथिली पत्रिकाक सम्पादन सेहो करै छलाह। हुनकर नाति, भातिज सभ ओहि पत्रिकाक मैथिल लोकनिमे वितरणक व्यवस्था करथि। कहिओ कालहमरो ओहि काजमे ओ लगा लैत छलाह। माघ मासमे प्रयागमे संगमतर पर ओ सपरिवार मास करैत छलाह। मिथिलाक प्रसिद्ध माछबला झण्डा मैथिल पण्डा सबहक पहिचान अछि। ओहि झण्डाकेँ देखि कए जयकान्त बाबू डेराक ठेकान लागि जाइत छल। दिल्ली चलि अएलाक बहुत दिनबादनवम्बर २००७ इस्वीमे हम इलाहाबाद गेल रही। हुनकर डेरापर गेलहुँ। परन्तु, ओ काशी मास करए चल गेल रहथि। हुनकासँ भेँट नहि भए सकल। हुनकर डेरापर हुनकर नाति, एवं परिवारक अन्य सदस्य सभ छलाह। डेरा उदास-उदास लगैत छल। परिवारमे कएटा दुर्घटना भए गेल छल। किछु साल पूर्व हुनक ज्येष्ठ पुत्र डा. रूद्रकान्त मिश्रक आकस्मिक असामयिक निधन भए गेल छल। आओर कएटा गप्प-सप्प...। एहि सबहक आभास घरमे भए रहल छल। किछुकाल बैसला बाद हम सभ ओतए-सँ अपन स्मृतिकेँ पुनश्च जगा कए ओहिठामसँ विदा भए गेलहुँ। डॉक्टर साहेबसँ भेँट नहि भए सकलताहिबातक मोनमे बहुत कचोट होइत रहल । डॉक्टर जयकान्त मिश्रजीक पिता महामहोपाध्याय डॉ. उमेश मिश्रक बर्षी बहुत यत्न पूर्वक मनाओल जाइत छल। ओहिमे डॉक्टर साहेब ओतए हम (जाधरि इलाहाबादमे रहलहुँ) नियमित आमंत्रित होइत छलहुँ। हुनकर सम्पूर्ण परिवार अत्यन्त मनोयोग पूर्वक ब्राह्मण भोजनक व्यवस्था करैत रहलाह। नाना प्रकारक भोजनक व्यंजन सबहक स्मरणे मात्रसँ मोन आनन्दित भए जाइत अछि। भोजनक संग-संग कतेको गप्प-सप्प मैथिल लोकनिसँ ओहि अवसरपर भेँट भए जाइत छल। इलाहाबादमे गप्प-सप्पक क्रममे ओ मैथिलीकेँ साहित्य अकादेमीमे मान्यताक सम्बन्धमे हुनक कएल गेल प्रयासक वर्णन करथि। ओहि हेतु ओ दिल्लीमे तत्कालिन प्रधान मंत्री द्वारा मैथिली पोथीक प्रदर्शनीमे भाग लेब, दिल्लीक उपराज्यपाल स्व. आदित्यनाथ झाजीक प्राप्त समर्थन एवं सहयोगक चर्चा सेहो करैत छलाह। एकबेर हम डॉ. शुभद्र झाजीक संग इलाहाबादमे डॉ. जयकान्त मिश्रजीक ओहिठाम जाइत रही। रस्तामे डॉ. जयकान्त मिश्रजीक मैथिलीक प्रति अनुराग ओ मैथिलीक विकास हेतु संघर्षक प्रशंसा करैत डॉ. शुभद्र झा कहलाह- “मिथिलामे डॉ. जयकान्त मिश्रक एवं हुनक पूर्वज लोकनिक अद्भुत योगदान अछि।” संगे ईहो कहलाह- “एहन बहुत कम परिवार भेटत जाहिमे लगातार छह पुश्त सरस्वतीक एहन आर्शीवाद प्राप्त रहल हो।” ओ दिल्ली आबथि तँ हमरा सूचित करथि। कतेको बेर तँ ओ हमरे ओतए ठहरैत छलाह। कए बेर हवाइ यात्रासँ उतरि लबनचूस बच्चा सबहक लेल नेने अबैत छलाह। जाधरि ओ डेरापर रहथि, निरन्तर मैथिली सम्बन्धी चर्चा होइत रहैत। मैथिली आन्दोलनक संघर्ष यात्रा आओर अनेकानेक लोकनिक योगदानक चर्चा सेहो होइत। एकबेर ओ (डॉ. जयकान्त मिश्र) दिल्लीमे यूजीसीकमैथिलीक प्रश्न पत्र बनबए खातिर आएल रहथि। संगमे स्व. सुमनजी एवं डॉ. नवीन बाबू सेहो रहथिन। ओ तीनू गोटे हमर आग्रहपर पुष्पबिहार, दिल्ली स्थित हमर आवासपर अएलाह आ एकसंग हुनका सभकेँ भोजन करेबाक सौभाग्य प्राप्त भेल। ओहि अवसरकेँ स्मरण करैत अखनो रोमांचित भए जाइत छी। तीनू गोटेक एकट्ठे हमरा ओतए आएब आओर हुनकर वार्तालाप सुनि मोन आनन्दित भए गेल। आनन्दितो केना ने होइत, डॉ. सुमनजी एवं डॉ. नवीन बाबू सी.एम. कौलेज- दरभंगामे हमरा मैथिली पढ़ओने रहथि। डॉ. मिश्रजी अत्यन्त समाजिक व्यक्ति छलाह। इलाहाबाद किंवा बाहरोक मैथिल लोकनिकेँ व्यक्तिगत स्तरपर ओ मदति करैत छलाह। नयाकटरा, इलाहाबाद स्थित हमर डेरापर कएक बेर पएरे चलि आबथि। कतेको मैथिल विद्यार्थी सभकेँ ओ अपना ओहिठाम राखि कए हुनकर शिक्षामे सहायता करैत छलाह। इलाहाबाद विश्वविद्यालयक अंग्रेजी विभागक अध्यक्ष पद हेतु हुनका बहुत विरोधक सामना करए पड़ल छलनि।ताहि खातिर ओ इलाहाबाद उच्च न्यायालयमे केस सेहो केने रहथिन। अन्तोगत्वा हुनकर विजय भेल, आ ओ अंग्रेजी विभागाध्यक्ष भेलाह। हुनकर विरोधी सबहक कहब रहैक जे ओ मैथिलीमे लिखैत छथि। हुनकर पी.एच-डी.क विषय ‘मैथिली भाषाक इतिहास’ छल तखन ओ अंग्रेजी विभागक अध्यक्ष केना भए सकैत छथि? जयकान्त बाबू दिल्ली आएल रहथि। तहिया हुनकर पोती रोहिनीमे रहैत छलखिन।। हुनकासँ भेँट करबाक रहनि। हमरा संगे चलए कहलनि। बसपर ठाढ़े हम दुनू गोटे रोहिनी विदा भएलहुँ। इलाहाबादसँ एकटा पोटरी अनने रहथि। तेकरा उपहार स्वरूप अपन पोतीकेँ देलखिन। किछु कालक बाद हम सभ ओहिठामसँ आपस भए गेलहुँ। ओहि पोतीक बिआह दिल्लीएमे भेलनि एवं बिआहक हकार हमरा देबाक हेतु डॉ. रूद्रकान्त मिश्र (कन्याँक पिता) स्वयं आएल रहथि। हम बिआहक अवसरपर गेलो रही। बिआहमे डाक्टर साहेबक सभ भाए आएल रहथिन। कोनो प्रकारक दहेज नहि लेल गेल छल। डॉक्टर साहेब दहेज रूपी लेन-देनक खिलाफ छलाह एवं एकरा मिथिलाक संस्कृतिक प्रतिकूल कहथि। डॉक्टर जयकान्त मिश्रजीक पिता महामहोपाध्याय- डॉ. उमेश मिश्रक बनाओल मकानमे डॉक्टर साहेब एवं हुनकर भैयारी लोकनि सेहो रहैत छलखिन।। सभसँ शुरूबला हिस्सामे डॉक्टर साहेब रहथि आ तकर बाद बलामे आर भाए सभ। डॉक्टर साहेबक व्यक्तिगत जीवनमे, परिवारोमे भोजन आ रहन-सहनमे मिथिलाक संस्कृतिक अमिट छाप छल। मकानक ओसारपर माछक मूर्ति लटकल, सदैव झूलैत रहैत छल। घरमे भोजन बनबएकाल देहपर वस्त्र नहि रहक चाही। ब्राह्मण भोजनकाल परसनिहार आ भोजन केनिहार गंजी, कमीज नहि पहिरथि। भोजनमे पियाजु-लहसुन नहि पड़ए। जखन कखनो ओ बाहर यात्रापर जाथि तँ अपन नियम सबहक पालन कठोरतासँ करथि। बाहरमे बेसीकाल चुरा-दहीसँ काज चलबथि। इलाहाबादमे रहितहुँ ओ गामसँ सम्पर्क बनओने रहथि आ सभ साल मास-दू मास गाम जा कए रहथि। गामसँ लौटैत काल सभ ग्रामीणक ओहिठाम जा कए भेँट करथि एवं पुनश्च गाम अएबाक इच्छा रखैत सभसँ विदा लेथि। एहि क्रममे किछु साल पूर्व ओ गाम गेल रहथि, ओतहि बहुत जोरसँ बिमार पड़ि गेलाह। हृदयाघातभए गेल रहनि। ओहिठामसँ लोक सभ उठा-पुठा कए दरभंगा अनलकनि। दरभंगामे थोड़ेक सुधार भेला पछाइत इलाहाबाद आपस अएलाह। इलाहाबादमे हुनकर मासो इलाज चलल। बहुत मुश्किलसँ हुनकर जान बॉंचल। बिमारीसँ उठलाक बाद एक दिन फोनपर गप्प भेल रहए। बहुत दुखी बुझाइत रहथि। अबल भए गेल रहथि, तथापि मैथिलीक विकासमे अभिरूचि बनल छलनि आ ओहि विषयमे गप्प करैत रहलाह। मैथिलीक विकासक हेतु डॉ. मिश्रजीक अद्भुत योगदान अछि। संविधानक अष्टम अनुसूचीमे मैथिलीकेँ शामिल करबाक हेतु ओ कतेको साल प्रयास करैत रहलाह। अन्ततोगत्वा हुनकर ईहो स्वपन्न साकार भेल एवं मैथिलीकेँ संविधानक अष्टम् सूचीमे शामिल कएल गेल। इलाहाबाद विश्वविद्यालयसँ सेवा निवृत्त भए ओ मध्यप्रदेशमे चित्रकुट स्थित ग्रामीण विश्वविद्यालयमे विभागाध्यक्ष भेलाह। ओहिठाम ओ कएक साल धरि रहि संस्थानक शिक्षण व्यवस्थाकेँ उत्कृष्ट बनेबामे संलग्न रहलाह। नानाजी देसमुख विश्वविद्यालयक उपकुलपति रहथि। देसमुखजी डॉ. मिश्रक कार्यसँ अतिशय प्रभावित रहथि। हुनकर इच्छा रहनि जे डॉ. मिश्र ओतए बनल रहथि परन्तु मैथिलीक काजमे विशेष रूचि ओ व्यस्तताक कारणेँ ओ विश्वविद्यालयक काजसँ त्याग-पत्र दऽ देलनि। डॉक्टर मिश्र अत्यन्त अध्ययनशील व्यक्ति छलाह। रातिमे जखन-तखन ओ उठि जाथि आ पढ़ए लागथि। हुनकर स्वास्थ्यक चिन्तासँ फिरसान भए परिवारक लोक कएक बेर आपत्ति करथि जे एतेक परिश्रम नहि करथि, मुदा ओ अपन कार्यक्रममे अनवरत लागल रहैत छलाह। मैथिलीक नाम सुनिते जेना हुनका स्फुर्ति आबि जाइत छल। पेसमेकर लगलाक बादो ओ मैथिलीक आन्दोलनक हेतु समर्पित रहलाह आ जतए कतहु हुनका एहि काजे बजाओल जानि तँ ओ सहर्ष जाथि। २००८ इस्वीमे, नव वर्षक आगमनक अवसरपर हम हुनका नव वर्षक मंगल कामना पत्र पठौने रहिएनि। तकर जवाबमे ओ पोस्टकार्ड लिखने रहथि जाहिमे थर-थर कँपैत हाथसँ लिखल गेल अक्षर ओ हस्ताक्षर देखि हुनक एहू अवस्थामे सकृयताक प्रमाण भेटल। तकर बाद लगभग साल भरि कोनो सम्पर्क नहि रहल। जनवरी (२००९) मे एक दिन डॉ. धनाकर ठाकुरजी पत्र इन्टरनेट पर पढ़ल, जाहिमे डॉक्टर मिश्रक प्रयागमे मासक दौड़ान निधनक समाचार छल। कतेको बेर ओहि समाचारकेँ पढ़लहुँ। मैथिलीक एकटा अनन्य सेवकक चिर संघर्षक बाद देहावसान भए गेल छल। मिथिलाक गाम-गाममे शोक सभा मनाओल गेल। श्रर्द्धांजलि देनिहार लोक सबहक हुनक प्रति सिनेह अवर्णनीय छल। डॉ. जयकान्त मिश्र अपने-आपमे मिथिलाक इतिहास छलाह। मिथिलाक कोनो एहन गाम नहि होएत जतए ओ मैथिली कार्यक्रमक हेतु नहि गेल होथि। विद्यापति समारोह हो, किंवा मैथिलीकेँ संविधानक अष्टम सूचीमे शामिल करबाक हेतु आयोजित आन्दोलन हो, वा मैथिलीकेँ शिक्षाक अनिवार्य माध्यम बनेबाक प्रयास हो, सभठाम हुनकर नाम अबिते छल एवम् ओ व्यक्तिगत रूपसँ सभ कार्यक्रमे भाग लइते छलाह। जखन-कखनो ओ भेटितथि, मैथिलीमे लिखबाक हेतु प्रेरित करबे करथि, मैथिलीक सम्मानक हेतु कएल जा रहल प्रयासक चर्चा करितथि, सभ काजपर मैथिलीसँ जुड़ल आन्दोलनकेँ प्राथमिकता देबे करथि। मैथिलीक एहि अनन्य सेवकक कतेक उपकार अछि तकर वर्णन असंभव।हुनक साहृदयता, वाणीक मधुरता एवं अपनत्व सदिखन मोन पड़ैत रहत आ मोन रहत हुनका संग बिताओल गेल अद्भुत क्षण। ओ आब नहि छथि, मुदा कोटि-कोटि मैथिलक हृदयमे ओ सदिखन विद्यमान छथि आरहताह। ७ मकानमालिकआकिरायादार आइ-काल्हिक युगमे लोकक ठेकान निरंतर बदलैत रहैत अछि । नौकरी पेशाक लोकक बदली होइत रहैत अछि । व्यापारीसभ सेहो अपन शहर बदलैत रहैत छथि । गाम-घरक लोक सेहो आस-पासक शहरमे अपन घर बना लेने छथि । जिनकासभकेँ भगवान बेसी संपदा देने छथिनसे सभकै-कैटा घर बनेने रहैत छथि। जाहिर छैक कि फाजिल घरक ओ की करताह,किराया लगेताह वा बंद रखताह । घरकेँ बंद रखनाइ सेहो कोनो लाभकर समाधान नहि अछि ,तथापि किछुगोटे किरायादारक संगे झंझटमे नहि पड़ए चाहैत छथि आ घरकेँ बहुत-बहुत दिन धरि खालिए छोड़ि दैत छथि । ई बात सही अछि जे कै बेर किरायादारक संगे मकान खाली करेबाक हेतु ,किंवा किराया वसूलीमे दिक्कति भए जाइत अछि मुदा तकर माने तँ ई नहि जे सदिखन सएह होइत रहत । फेर अहाँ जहन गाम-घर छोड़िकए बाहर जाएब तँ किरायाक मकान चाहबे करी,अपन मकान कतए-कतए बनबैत रहब । किरायाक मकान भेटैत रहए आ दुनू पक्षकेँ ठीकसँ समय बितनि ताही उद्यश्यसँ देशभरिमे किराया नियंत्रण कानून बनल अछि आ लागुओ अछि । मकानमालिकआकिरायेदारकबीचमेसमस्याबहुतपुरानअछि।समस्याकजड़िमेमकानकअभावआबढ़ैतकिरायाअछि।मकानमालिकचाहैतरहैतछथिजेहुनकरकिरायाबढ़ैतरहनिआजखनओचाहथिमकानखालीभएजानि।कहकमानेजेएहननहिहोइकजेकिराएदारमकानपरअबैधकब्जाकएलिअए,किरायासेहोनहिदिअए।मुदाकिरायदारकसमस्यासेहोमानबीयदृष्टिसँदेखबबहुतजरूरीअछि।मकानमालिकबेर-बेरजँमकानकालीकरबैतरहताहतँओकरानानाप्रकारकसमस्याहोएबस्वभाविक।बच्चासभकइसकूल,अपनकार्यालयआबढ़ैतखर्छासभमेतालमेलबैसाएबमोसकिलभएजाइतअछि।कानूनएहिसमस्यासभकेँसमाधानकरैतबीचकरस्तानिकालबाकप्रयासकरैतअछि।मुदाकैबेरईसंभवनहिभएपबैतअछि।दुनूपक्षएक-दोसरसँसामंजस्यनहिबैसापबैतछथिआमोकदमाबाजीधरिबातचलिजाइतअछि।जँमकानमालिकदबंगअछितँजबरदस्तीसेहोकरैतअछि।बदमासकेँलगाकएकिरायेदारकसमानकैबेरबाहरफेकिदेलजाइतअछि,आदि,आदि। महानगरजेनाकोलकाता,मुम्बइ,दिल्लीमेहालतआओरबहुतखराबअछि।कैटाकिरायेदारमुख्यव्यापारिकस्थानमेपाँच-दसरुपयाकिरायादैतछथि आपचासोसालसँअड़लछथि,मकानखालीनहिकएरहलछथि।मकानकहालतजर्जरभएचुकलअछि।मकानमालिकमोकदमाठोकनेछथि।मुदातैँकी? किरायेदारसभआपसमेसंगठनबनाकएतकरप्रतिवादकरैतरहैतछथि,मुदामकान खालीहेबाककोनोसंभावना नहिलगैतअछि।जौँओमकानसभआइ-काल्हिकिरायापरलेलजाएततँकिरायालाखोमेभएसकैतअछि।उदाहरणस्वरुपजँकनाटप्लेसदिल्लीककोनोदोकानसाबिककिरायापरचलिरहलअछितँकिओकिएकखालीकरत?जँओओहिठामकिरायापरमकानवादोकानआबलेबएजाएततँकिरायाकतेकबढ़िजाएत,सोचबोमोसकिलअछि।आनोमहानगरसभमेतेहनेहालतअछि।अस्तु,मकानमालिकसभकचिंतासेहोवाजिबअछि।आखिरलोकसंपत्तिकेँएहिलेलतँनहिकीनलकजेओकराएहितरहकघनचक्करमेगमा देलजाए? मुदाउपायकीअछि? जीवनमेभोजन,वस्त्र,आवासमौलिकआवश्यकतामानलजाइतअछि।भोजन.वस्त्रकबादरहएलेलघरतँचाहबेकरी।लोकोपुछैतअछिजेअपनेककोनगामघरभेल? मानेजेघरआदमीकपरिचयथिक।ग्रामीणपरिवेशमेतँअखनोघरमानेअपनघरबूझलजाइतछैक,कारणओहिठामकिरायाकमकाननेउपलव्धहोइतअछिआनेलोकलैतअछि।गाममेलोककपुस्तक-पुस्तगुजरिजाइतछैक।एकहिठामलोकजीवनभरिरहिजाइतअछि।पहिलुकासमयमेईबातसहीछलैक।मुदाआबपरिस्थितिबदलिगेलअछि।पढ़ाइ-लिखाइ,नौकरी,व्यापारहेतुलोकगाम-घरसँबाहरहोइतछथि।ईसंभवनहिथिकजेसभशहरमेअहाँअपनघरबनेनेफिरी।तैँकिरायापरमकानलेबजरुरीभएजाइतअछि। छोटशहरमेकिरायाकमकानआशानीसँभेटिजाइतअछि,किरायासेहोकमहोइतछैकआमकानमालिकजखन-तखनखालीकरएसेहोनहिकहैतछैक।मुदापैघशहरमेखासकएमहानगरमेहालतदोसरअछि।मुम्बइमेतँईहालअछिजेएकहिकोठरीमेकतेकोगोटेकहुनाककिरायापरगुजरकरैतछथि।ऊपरसँमकानमालिककेँपगड़ीसेहोदिऔक,मासे-मासेकिरायातँचाहबेकरी।रहि-रहिकएमकानमालिकदुलत्तीमारितेरहत,जाहिसँअहाँईनहिबिसरिजाइजेमकानकिरायापरलेलगेलअछिआकिछुदिनकबादखाली करहिपड़त।अस्तु,किरायेदारकहालतकैबेरबहुतचिंताजनकभएजाइतअछि।मुदासमाधानकीअछि? सभआदमीमकाननहिकीनिसकैतछथि।किरायापरमकानलेनाइएकटामजबूरीरहैतछैक।एहिविषयमेकतेकोबेरन्यायलयमेमामिलाकएलगेल।एहिविषयपरउच्चतमन्यायलयपर्यंतकतेकोफैसलादेलक।ओहिसभसँकिछुसुधारोभेलैकअछि। मकानमालिकआकिरायादारमेझंझटसामान्यतःहोइतेछैकदूइएटाबातलेल:-१.किरायाबढ़बएहेतु,२.मकानखालीकरेबाकहेतु।आओरछोट-मोटसमस्यासभसेहोभएसकैतछैकजेनामकानकेँमरम्मतिकेनाइ,किरायाबकिऔताभएगेनाइ,आदि-आदि।एहिसमस्यासभसँनिपटएहेतुदुनूपक्षमकानकिरायापरलेबए-देबएसँपहिनहिआपसमेकिरायाकएकरारनामाबनबैतछथि।जौँलीजकअवधिसालभरिसँकमअछितँओकरानिवंधितकरबाकजरुरीनहिअछिअन्यथाएकरनिवंधनसब-रजिष्ट्रारकओहिठामकराएबकानूनीबाध्यताअछि।जौँकिरायाकएकरारनामाबनलअछितँलीजकतयअवधिमेकिरायाकओहिमकानकसभविषय-वस्तुतकरेअनुसारचलतचाहेओकिरायाबढ़ेबाकगप्पहोइक,मकानखालीकरेबाकगप्पहोइकवाकिरायाकभुगतानकरबहोइक।जँकिरायाकएकरारनामानहिबनलअछि,किंवालीजकअवधिबीतिगेलअछितँमकानमालिकआकिरायेदारकबीचमेस्थानीयसरकारद्वाराबनाओलगेलकिरायानियंत्रणकानूनकअनुसारविवादकनिर्णयहोएत। किरायेदारकहेतुईबहुतजरुरीअछिजेओतयकिरायासमयसँमकानमालिककेँदैतरहथि।किरायानहिदेनाइएअपना-आपमेमकानखालीकरेबाकहेतुप्रयाप्तकारणभएसकैतअछि।यदिमकानमालिककिरायानहिलैतछथितँकिरायामुद्रादेशसँपठाओलजासकैतअछि।यदिसेहोसंभवनहिहोइतअछितँकिरायानियंत्रणअधिकारीकओहिठामआवेदनदएकिरायाजमाकरादेबाकचाही।सामान्यतःएहनपरिस्थितितखनेहोइतअछिजखनकिमकानमालिकमकानखालीकराबएचाहैतछथि। जँमकानमालिकआकिरायेदारकविवादआपसमेनहिसोझराइतअछितँदुनूमेसँकिओकिरायानियंत्रणअधिकारीकपासआवेदनदएअपनसमस्याराखिसकैतछथि।उदाहरणस्वरुप,जँमकानमालिकमकानखालीकरबएचाहैतछथितँतकरकारणदैतमकानखालीकरबासकैतछथ।सामान्यतःमकानखालीकरेबाकहेतुप्रमुखकारणमेकिरायानहिदेब,मकानमालिककेँस्वयंमकानकआवश्यकताभएसकैतअछि।जँकिरायेदारकेँअपनमकानछनि तँकिरायाकमकानकालीकरेबाकओमजगूतआधारबनिजाइतअछि।मकानमालिककिरायानिर्धारणकहेतुसेहोओतहिअर्जीदएसकैतछथि। देशभरिमेसभराज्यअपन-अपनकिरायानियंत्रणकानूनबनओनेअछि।कैटाराज्यमेऐहिकानूनकअधीनआबएबलामकानककिरायाकसीमातयकएलअछि।संगहिराज्यवाकेन्द्रसरकार,स्थानीयनिकायकमकानसभसेहोएहिकानूनसँबाहरअछि।कैटाराज्यमेनवनिर्मितमकानकिंवाधर्मार्थकार्यरतसंस्थाकमकानसेहोएहिकानूनकअधिकारक्षेत्रसँबाहरराखलगेलअछि।विभिन्नराज्यककानूनमेसमरूपताहोइकजाहिसँईकानूनसर्वग्राहीभएसकएआसामान्यलोकएकरसुविधासरलतासँलएसकए,ताहिहेतु१९९२मेसंसदद्वारामॉडलकिरायानियंत्रणकानूनपासकएलगेलजेसबराज्यकलेलछल।मॉडलअधिनियममेकिरायेदारीकविरासतपरमौजूदाप्रावधानमेसँकिछुकेँसंशोधितकरबाकप्रस्तावछलआओरकिरायाकएकटासीमासेहोनिर्धारितकएलगेलजाहिसँबेसीभेलापरकिरायानियंत्रणलागूनहिहोएत।तकरबाददिल्लीमेओहिआधारपर१९९७मेकानूनबनबोकएलजेस्थानीयव्यापारीवर्गकविरोधककारणलागूनहिकएलगेल। मकानमालिककआकिरायेदारकबीचसंवंधमधुररहएआकोनोमतभेदभेलापरसुगमतासँतकरसमाधानभएजाएताहिहेतिईआवश्यकअछिजेदुनूपक्षमकानकेँकिरायादारीप्रारंभहेबासँपहिनेस्पष्टप्रावधानकसंगेकिरायाकलीजएग्रीमेन्ट( किरायाकएकरारनामा)उचितमूल्यकस्टांपपेपरपरहस्ताक्षरितकरथि।ओहिमेसभबातजेनाकिरायाकतेकहोएत,मकानकतेकदिनकिरायापररहत,मकानकमरम्मतिकेनाकीहएत, मकानकहिआखालीकरएपड़त,स्पषटतासँलिखलरहए।जौँसालभरिसँअधिकहेतुकिरयापरमकानलेलजाइतअछितँएकरारनामाकनिवंधनसेहोकराएबजरुरीअछि।एहिमेदुनूपक्षकेँहितकसमाधानभएजाइतअछि।अस्तु,मकानकिरायालेबएवादेबएसँपूरवउपरोक्तबातसभकेँध्यानमेरखैतकानूनसम्मतकिरायाकएकरारनामाबनालेबाकचाहीआतकरअनुवंधकेँदुनूपक्षकेँपालनकरैतरहकचाहीजाहिसँसुख-शांतिबनलरहए। ईसभबातजँठीकसँकएलगेलअछितँमकानकेँकिरायापरदेबामेकोनोहर्जानहिछैक। ८ कार्यस्थानपरयौन उत्पीड़न देशक लगभग आधाजनसंख्यामहिलाअछि।कोनोदेशअपनआधाजनसंख्याकेँमुख्यधारामेसामिलकेनेबिनासमुचितविकासनहिकएसकैतअछि।निश्चयसमयकसंगबदलैतपरिवेशमेमहिलासशक्तीकरणकआवाजजोरसोरसँउठैतरहलअछितथापिव्यवहारमे ओबातनहिआबि सकलजेहमरसंविधानकनिर्मातासमानताकअधिकारकव्यवस्थाकरैतकाल सोचनेहोएताह।तकरकतेकोकारणभएसकैतअछि।शिक्षासँलएकएनौकरीधरिमेभेदभावहोइतरहलअछि।कैठामतँएकहिकाजकरबाकहेतुमहिलाकर्मचारीकेँकमवेतनदेलजाइतरहलअछि।एहितरहकतमामअसुविधाकअछैतमहिलालोकनिजँकाजकरितोछथितँकार्यस्थानपरतरह-तरहकपरेसानीहोइतरहलअछि।तकरसिकाइतोहोइतरहलअछि।मुदाकानूनमेएहनकोनोव्यवस्थापहिनेनहिछलजेमहिलाकयौनउत्पीड़नकमामिलाकेँअपराधकश्रेणीमेराखैतआएहनपरेसानीककानूनीनिवारणकहेतुभारतीयदंडसंहिता1860कधारा354एकमात्रविकल्परहिजाइतछल।3 अप्रैल, 2013 सँलागूआपराधिककानूनसंशोधनअधिनियम 2013 कद्वाराभारतीयदंडसंहितामेधारा 354A,354B,354C, आ354D जोड़लगेलअछिजाहिसँयौनअपराधकेँअलगश्रेणीमेराखितकरव्याख्यातँकएलेगेलअछिसंगहितकराहेतुतीनसँसातसालधरिकजहलआजुर्मानाकदंडदेलजासकैतअछि। माननीयउच्चतमन्यायलयद्वाराविशाखाबनामराजस्थानराज्य ((JT 1997 (7) SC 384),कमामलामेकामकाजीमहिलाककार्यस्थानपरयौनउत्पीड़नरोकबाकहेतुआदोषीव्यक्तिकेँदंडितकरबाकहेतुविस्तृतदिशानिर्देशजारीकेलक।तकरबादेसाल2013 मेंकार्यस्थलपरमहिलाकयौनउत्पीड़नअधिनियमकेँसंसदद्वारापारितकएलगेलछल।जाहिसंस्थामेदससँअधिकलोककाजकरैछओकरापरईअधिनियमलागूहोइतअछि।ई कानूनकार्यस्थलपरमहिलाकयौनउत्पीड़नकेँअवैधघोषितकेलकअछि।यौनउत्पीड़नकेविभिन्नप्रकारकेँचिह्नितकेलकअछि, आकार्यस्थलपरयौनउत्पीड़नकस्थितिमेसिकाइतआतकरनिवारणकरबाकव्यवस्थाकेलकअछि।एहिकानूनमेनिस्तारणकहेतुजरूरीनहिअछिजेमहिलाओहीठामकाजकरैतहोजतएएहनघटनाभेल।कार्यस्थलकोनोकार्यालय/दफ्तरभएसकैछ,चाहेओ निजीसंस्थानहोवासरकारी। माननीय उच्चतम न्यायलय विशाखा बनाम राजस्थान राज्य ((JT 1997 (7) SC 384),क मामलामे कामकाजी महिलाक कार्यस्थानपरयौन उत्पीड़न रोकबाक हेतु आ दोषी व्यक्तिकेँ दंडित करबाक हेतु निम्नलिखित दिशानिर्देश जारी केलक- नियोक्ताकेँईकानूनीदायित्वअछिजेकार्यस्थानपरकोनोकामकाजीमहिलाकेँयौनउत्पीड़नसँवचाओलजाएआ जँएहनघटनाभइएजाइतअछितँतकरउचितनिदानकरबाकएवम्दोषीव्यक्तिकेँदंडितकरबाकत्वरितआसहीव्यवस्थाकरए।ताहिहेतुयौनउत्पीड़नकनिम्नलिखितव्याख्या कएलगेल- १.शारीरिकसंपर्कआछेड़खानी, २.यौनसंपर्कहेतुआग्रह, ३.कामुकगप्प-सप्प, ४.अश्लीलतापूर्णचित्रआदिकप्रदर्शन, ५.कोनोप्रकारकशारीरिक, मौखिकवागैरमौखिकव्यवहार, आंतरिक सिकाइतसमिति: कार्यस्थलपरमहिलाओंकेयौनउत्पीड़न (निवारण, निषेध, औरनिवारण) अधिनियम, 2013कधारा4केतहतप्रत्येकनियोक्ताकेँईकानूनीदायित्वअछि जेओअपनाओहिठामआंतरिकसिकाइतसमितिकगठनकरए।दसवाएहिसँअधिककर्मचारीकेँकाजपररखनिहारमालिकनियोक्ताएहिकानूनीदायित्वकनिर्वाहकरबाकहेतुवाध्यछथिअन्यथाहुनकापचासहजारधरिजुर्मानाकएलजासकैतअछि।कानूनमेइहोप्रावधानअछिजेप्रत्येकजिलामेएकटास्थानीय सिकाइतसमितिकगटनकएलजाएत।जतएकतहुआंतरिकसिकाइतसमितिनहिअछिवानहिगठितकएलजासकैतअछिओहिठामकार्यरतमहिलाएहितरहकसिकाइतस्थानीयसिकाइतसमितिकसमक्षकएसकैतछथि। आंतरिकसिकाइतसमितिमेनिम्नलिखितव्यक्तिसामिलकएलजाएत- १. वरिष्ठस्तरपरकार्यरतमहिलापीठासीनअधिकारीहेतीह, २.दूटाएहनकर्मचारीजिनकाकानूनकजानकारीहोनिआजेसामाजिककार्यकरबाकहेतुप्रतिवद्धहोथि, ३.गैरसरकारीसंगठनकप्रतिनिधि एहिसमितिककमसँकमआधासदस्यमहिलाहेतीहआएकरअध्यक्षसेहोमहिलेभएसकैतछथि।कानूनमेइहोप्रावधानअछिजेकिओसदस्यतीनसालसँबेसीएकरसदस्यनहिरहताह। स्थानीयसिकाइतसमितिः स्थानीयसिकाइतसमितिमेनिम्नलिखितपरिस्थितिमेसिकाइतकएलजाएत- १.जखनसिकाइतनियोक्ताकखिलापकएलजाएत, २.जखनदससँकमकर्मचारीहेबाककारणओहिसंस्थामेआंतरिकसिकाइतसमितिकगठननहिभएसकैतअछि, ३.घरेलुनौकरद्वाराकएलगेलसिकाइत, स्थानीयसिकाइतसमितिकसंरचना निम्नलिखितहोएतः- १.सामाजिकक्षेत्रमेकाजकेनिहारिएहनमहिलाजेमहिलाककल्याणहेतुप्रतिवद्धहोथिअध्यक्षभएसकैतछथि, २.ब्लाकतहसील,तालुका,नगरपालिकामेकार्यरतमहिलाकर्मचारीसदस्यभएसकैतछथि, ३.महिलाककल्याणकाजमेरूचिरखनाहरिएहनदूटामहिलाजिनकाकार्यक्षेत्रमेयौनउत्पीड़नकगहनजानकारीहोनिसदस्यभएसकैतछथि, ४.जिलास्तरपरसमाजकल्याणवामहिलाएवम्वालविकासककाजसँजुड़लअधिकारीपदेनसदस्यहेतीह, सिकाइतकरबाकसमयसीमाः एहिकानूनकतहतसिकाइतघटितघटनाकतीनमहिनाकभीतरेहेबाकचाही।जँएकहिसंगेकैटाघटनाभेलअछितँएहिअवधिकगणनाएहिप्रकारकअंतिमघटनाघटितहेबाकतिथिसँहोएत।जँआंतरिकसिकाइतसमितिकेँलगैछजेपीड़ितमहिलाबाजिबकारणसँसमयपरसिकाइतनहिकएसकलतँएहिअवधिकेँआओरतीनमहिनाधरिबढ़ाओलजासकैतअछि,मुदाताहिसँबेसीएकरानहिबढ़ाओलजाएत।कहकमानेजेपीड़िताकेँचाहीजेएहिसमयसीमाकभीतरलिखितसिकाइतआंतरिकसिकाइतसमितिसँकरए। सिकाइतकेकरत? सामान्यतःपीड़ितव्यक्तितयसमयसीमाकभीतरसंबंधितसमितिकसमक्षलिखितसिकाइतकरतीह।जौँपीड़ितशारीरिकरूपसँसिकाइतकरबामेसक्षमनहिअछितँओकरबदलामेओकरसंबंधी,मित्रवासहकर्मीसिकाइतकएसकैतअछि।घटनाकजानकारीरखनिहारकिओउपरोक्तव्यक्तिसभकसंगेसिकाइतकएसकैतअछि।जँपीड़ितव्यक्तिकमृत्युभएगेलहोइकतँओहिघटनाकजानकारीरखनिहारकिओव्यक्तिओकरउत्तराधिकारीकसहमतिसँसिकाइतकएसकैतअछि। अंतरिमआदेश आंतरिक सिकाइतसमितिकद्वाराजाँचकक्रममेअंतरिमआदेशदएदुनूपक्षमेसँककरोदोसरकार्यालयमेस्थानान्तरितकएसकैतअछि,पीड़ितमहिलाकेँतीनमहिनाधरिछुट्टीदएसकैतअछि,पीड़ितमहिलाकेँओकराआओरतंगनहिकएलजासकएताहिहेतुउचितव्यवस्थाकएसकैतअछि आंतरिकसिकाइतसमितिमामलाकदुनूपक्षकआपसीसहमतिसँसमाधानकअवसरदएसकैतअछिमुदा ओहिमेटाकाकलेन-देनकगप्पनहिहोइक।मुदाजँसेसंभवनहिहोइतअछितँ९०दिनकभीतरसमितिसिकाइतकजाँचकएअपनप्रतिवेदननियोक्ताकेँदेतजाहिआधारपरसिकाइतसावितभेलापरआरोपितव्यक्तिपरविभागीयनियमानुसारआसेनहिभेलापरनिम्नलिखितकारवाइनियोक्ताकएसकैतछथि- लिखितमाफी चेतावनी पदोन्नति/प्रमोशनयावेतनवृद्धिरोकब परामर्शयासामुदायिकसेवाकव्यवस्थाकरब नौकरीसँनिकालिदेब जौँजाँच-पड़तालकबादसमितिकेँईपताचलैतअछिजेसिकाइतझूठअछितँसिकाइतकेनहारि महिलाक खिलाफविभागीयकारवाइकअनुशंसा कएसकैतअछिजाहिकेँतहतओकराचेतावनी,लिखितमाफी,पदोन्नतिरोकबवानौकरीसँनिकालबाककारबाइकएलजासकैत अछि। उपरोक्तकानूनकधारा१३कअनुसारजाँचसमितिप्रारंभिकजाँचमेजौँसिकाइतकेँप्रथमदृष्टयासहीपबैतअछितँएकारअनुशासनसमितिकेँविस्तृतजाँचकहेतुपठाओलजाएत।मेधाकोतवालकमामलामेमाननीयउच्चतमन्यायलयईव्यवस्थादेलकअछिजेजाँचसमितिकरिपोर्ट अंतिममानलजाएतआताहिआधारपरउचितअनुशासनात्मककार्रवाई कएलजाएत। सरकारीविभागमेउपरोक्तकानूनीव्यवस्थाकेँलागूकरबाकपर्याप्ततंत्रविकसितकएलगेलअछिमुदाअखनहुनिजीक्षेत्रमेएकराठीकढ़ंगसँलागूकरबाकहेतुसक्रियताकअभावअछिजाहिसँअपूर्णीयक्षतिभएरहलअछि।भारतीयसंविधानद्वाराप्राप्तसमानताकअधिकारककीमानेरहिजाइतअछिजखनकिदेशकआधामहिलाआवादीअपनआस्तित्वओसम्मानकरक्षानहिकएसकए? कार्यस्थानमेमहिलाकर्मचारीकसंगयौनदुर्व्यवहारकेँरोकबाकहेतुमाननीयउच्चतमन्यायलयकदिशानिर्देशआसंसदद्वारापारितकानूनकअछैतमहिलाकर्मचारीसभकएहिप्रकारकसमस्याकअंतनहिभएसकलतँतकरकारणमूलतःहमरालोकनिकसमाजकपितृसत्तात्मकसामाजिकसंरचनाआताहिसँउत्पन्नपुरुषश्रेष्ठताकभावअछि।अस्तु,एहिसमस्याकनिदानकहेतुजरूरीअछिजेपुरुषकमोनमेमहिलाकप्रतिसम्मानकभावनाहो।जेदेशहजारोंबर्खसँनारीशक्तिकप्रतिरूपदुर्गामाताकआराधनाकरैतरहलअछिताहिठामसेभावहोएबकोनोकठिननहिहेबाकचाही। ९ डा० सुभद्र झा इलाकाक चर्चित व्यक्तित्व छलाह-डा० सुभद्र झा । धोती,मिरजइ सन कुर्ता पहिरने अत्यन्त सरल,साधारण लिबासमे डाक्टर साहेब अड़ेर हाट चौकपर बरोबरि देका जएतथि । गप्प-सप्पमे ओ अपन बिचार अति स्पष्टतासँ रखैत छलाह ।ताहि क्रममे जौं कने-मने विवादो भए गेल किंवा क्यो कटाक्षो कए देलक दँ कोनो बात नहि। मिथिलेटा नहि,अपितु समस्त भारतवर्षमे तत्कालीन विद्वान लोकनिमे हुनकर प्रतिष्ठा छलनि ।हुनकर विषयमे किछु कहब आ लिखब कठिन काज अछि तथापि स्मरणमे किछु घटना अछि जे लिखि रहल छी । घटनासन्१९६५-६६ई०कथिक।नवतुरियासभगाममेएकटापुस्तकालयस्थापितकरएचाहैतचलाह।किछुदिनकप्रयासकवादकिछुपोथी,किछुपैसाचंदा भेल।किछुआलमारीसेहोबनाओलगेल।तकरबादभेलैकजेओकरउद्घाटनकएलजाए।उद्घाटनकेकरताह? आपसीविचार-विमर्शकबादडा०सुभद्रझाकनामपरआमसहमतिभेल।डा०सुभद्रझाकिछुदिनपूर्वसेवानिवृतभएगामेरहएलागलछलाह।आयदा-कदाहमरगामकचौकपरअबैत-जाइतदेखाजाइतछलाह।उद्घाटनकार्यक्रममेडा०सुभद्रझाकेँसेहोकिछुकहबाकआग्रहकएलगेल।बहुतदुराग्रहकएलापरओबजबाकहेतुतैयारभेलाह।संक्षिप्तभाषणकक्रममेओकहलनिजेएहिइलाकामेअनुसंधानकहेतुपर्याप्तसामग्रीयत्र-तत्रपसरलअछि।ओकरासभकेँएहनपुस्कालयमेसुरक्षितराखलजासकैतअछि।संगहिकबीरदासपरउपलव्धसामग्रीकउल्लेखकरैतओकहलाहजेएहिबातकप्रमाणअछिजेकबीरदासमैथिलछलाहआमैथिलीमेकतेकोरचनाकएलनिअछि। १९७३ई०मेलगभगएकमासडा०सुभद्रझाकराँचीस्थितआवासपररही।तखनओयोगदासतसंगविद्यालयकप्राचार्यरहथि ।ओहीपरिसरमेप्राचार्यकनिवासमेओरहैतछलाह।हुनकासंगे परिवारकआरसदस्यनहिछल।घरककाजकरबाकहेतुएकटानौकरछल।भोजनओस्वयंबनबैतछलाह। प्रातःकालभात-दालि-आलूकसन्नाबनाबथि।रातुकभोजनकव्यवस्थासेहोतखनेकएलेथि।रातिमेबेसीकालआँटाकचोकरकेँदूधमेउसनिकएखाइतदेखिअनि।रातिमेसूतबासँपूर्वओनियमितरूपसँपढ़ैतछलाह।साँझमेतिन-चारिगोटेबैसिकएशास्त्रचर्चाकरैतछलाह।एकदिनसाँझमेडाक्टरसाहेबकसंगकतहुजाइतरही।रिक्साबलासबजतेकपाइमांगै,सेदेबाकहेतुओतैयारनहिहोथि।रिक्सातकैत-तकैतअन्ततःसौंसेरास्ताबितिगेल। एकदिनएहिनासंगेटहलैतरहीतँसाईबाबाकचर्चाउठल।ओहुनकरबहुतप्रशंसाकरथिआकहथिजेसाईबाबासरिपहुँसिद्धपुरुषछथिजकरहुनकाप्रत्यक्षअनुभवतखनभेलरहनिजखनओबाबाकआश्रममेसिरडीगेलरहथि।कहलाहजेआश्रममेहुनकापहुँचतेदेरीबाबाहुनकरमोनकप्रश्नकउत्तरदेबयलगलखिन।आरोकएकटाप्रसंगसभओसुनओलथि। योगदासतसंगमहाविद्यालयनवेबनलछल।डाक्टरसाहेबपूर्णतत्परतासँओहिविद्यालयकविकासमेलागलरहैतछलाह।परिसरमेआश्रमकआबासहोइतछल।चारूकातगाछसभकबीचमेबनलभाषणमंडपसभ।ओहीपरिसरमेएकदिसआश्रमछलजाहिमेएकदिनमाँआनन्दमयीआयलरहथि।हमडाक्टरसाहेबकसंगेओतएरही।माँआनन्दमयीकअबितहिपूराहाँलमेशांतिपसरिगेल।ओकिछुबजलीनहि।चुपचापसभगोटेध्यानकेलक।कोनोभाषणबाजीनहिभेल। एकदिनडाक्टरसाहेबकडेरापरआंगनमेठाढ़रही।हमरादेखिडाक्टरसाहेबगंभीरभएगेलाहआकहलाजेनीकसँपहिरल-ओढ़लकरह।जीवनमेसफलताकहेतुएहिसभकेँबहुतमहत्वअछि।ताहीक्रममेकहलाहजेएहीकारणेओकएकबेरउच्चपदसभकचयनमेपछड़िगेलाहयद्यपिओपदकहेतुपूर्णयोग्यरहथि। डाक्टरसाहेबकदोसरपुत्रभास्करजीइलाहाबादविश्वविद्यालयमेजर्मनभाषाकव्याख्याताछलाह।हुनकरडेरापरडाक्टरसाहेबअबैत -जाइतरहैतछलाह।सन्१९८३ई०कगप्पअछि।एकदिनहमहुनकादुनूगोटेकेँनोतदेनेरहिअनि।दुनूगोटेकोनोकारणसँआगा-पाछाभएगेलाह।डा०झापहिनेचललरहथि।भाष्करजीपाछूचललाहआडेरापरपहुँचिकएबहुतपरेशानीमेरहथिजेआखिरओकतएचलिगेलाह।हमसभगोटेहुनकाताकएलगलहुँ।कतहुनजरिनहिआबथि।रातुकसमयछल।भोजनमेविलंबभएरहलछल।ताबतथोड़ेकालकबादमकानकनीचासँओजोर-जोरसँहमरनामलएकएचिकरिरहलछलाह।हमरासभकेँजानमेजानआएल।पतालागलजेओहमरडेरातकैत-तकैतधोबीघाटचलिगेलरहथि।हमरमकानमालिकधोबीछलआतकरेअनुमानमेओधोबीघाटचलिगेलछलाह। डाक्टरसाहेबअतिअध्ययनशीलछलाह।जखनकखनोफुरसतिमेरहितथितँअध्ययनकरएलगितथि।एकदिनप्रातःएगारहबजेइलाहाबादमेभाष्करजीकडेरापरगेलहुँ।डाक्टरसाहेबओतहिरहथि।कहलाहजेहमएगारहघंटासँनिरन्तरपढ़िरहलछी।मैथिलीमेशव्दकोशकनिर्माणमेलागलछलाह।एकदिनहमडाक्टरसाहेबकसंगेइलाहाबादमेकतहुँजाइतरही।रस्तामेपुछलिअनिजेभगवानछथिकिनहि? ओउत्तरदेलनिजेईकहबतँकठिनअछिजेभगवानछथिकिनहिपरन्तुजौँभगवानछथितँबहुतबइमानछथि,कारणदैतओकैटाउदाहरणदेलनि।जेनापेटमेबच्चाकिएकमरिजाइतछैक?आखिरओजन्मसँपूर्वेकीगलतीकेलक?आजौँगलतीकेलकतँजनमिकएओकराभोगए।गप्पकक्रममेओकहलाहजेसम्प्रतिजीबैतलोकमेबिहारमेसंस्कृतकसभसँपैघविद्वानछथि। साहित्यअकादमीकतत्कालीनअध्यक्षडा०सुनीतिकुमारचटर्जीकओबहुतप्रशंसाकरथिआकहतिजेहमरालेलओभगवानेछलाह।डाक्टरसाहेबकसंगेएकदिनटहलैतरही।गप्पकक्रममेओअपनप्रवासकदौरानभेलदूगोटघटनाकचर्चाकएलनि।डाक्टरसाहेबट्रेनसँकतहुँजाइतरहथि।कोनोटीसनपरगाड़ीरूकलतँडाक्टरसर्वपल्लीराधाकृष्ननओहिमेसवारभेलाह।डाक्टरसर्वपल्लीराधाकृष्ननबैसबाकहेतुघुसबाकहेतुकहलखिन।डाक्टरसुभद्रझाअड़िगेलाहएवम्डाक्टरसर्वपल्लीराधाकृष्ननकेँजगहनहिदेलखिन।राँचीमेगप्पकक्रममेएकदिनडाक्टरसाहेबकहलाहजेओपुस्तकालयमेनौकरीकरैतरहथि।ओहीक्रममेहुनकासँजेश्रष्ठपदपरअधिकारीछलाहसेहुनकासँकिछुगलतकाजकराबएचाहैतछलाह।ओसेकरबाकहेतुसहमतनहिभेलाह।ताहिसँकुपितभएकएओअधिकारहिनकाबहुततंग करैतछलनि।डाक्टरसाहेबकेँपतारहनिजेओअधिकारीगलतकाजकरैतअछि।चुपचापओकरगलतकाजबलाकागजातकप्रतिलिपिओरखैतगेलाह।पुस्तककक्रय-विक्रयमेओअधिकारीबहुतहेरा-फेरीकेनेछलाह,जकरकागजीसबूतडाक्टरझालगछलनि।बादमेएहिबातकआरोपभेलएवम्जाँचकबादओ अधिकारीदोषीसाबितभेल।अपनाकेँबचाबकहेतुओचाहलकजेपुस्तकालयकेँजेक्षतिभेलरहैकसेआपसकरीमुदाओकरपरिवारकलोकपैसाआपसनहिकएलक।एहिबातसभसँदुखीओभयभीतभए ओआत्महत्याकएलेलक। डाक्टरझासँजेकनी-मनीहमरासंपर्कभेलओकरासंयोगकहिसकैतछी।बच्चेसँहमहुनकरनामसुनैतरही।सौँसेइलाकामेओचर्चाकविषयरहथिआछोटसँपैघलोककसंपर्कमेसहजतासँअबैतछलाह।ओधुनकपक्काछलाह।जाहिकाजमेलागिजाथितकरापूर्णकरबाकहेतुप्राण-प्रणसँजुटिजाथि।हुनकाअपनगाममेगाछसबरोपबाकइच्छारहनि।कहिनहि,कतए-कतएसँआनिकएसालकसालओआमकगाछरोपैतरहलाह। हुनकप्रतिभाओविद्वताकवर्णनकरबाककोनोआवश्यकतानहिबुझारहलअछि।आडम्वररहितजीवनशैलीएवम्अतिशयसहजव्यवहारकसंगस्पष्टवादिताकलेलओसभदिनमोनपड़ताह।धोती-कुर्तापहिरने,पैरेखेतक आरिए-आरिएचलैत-चलैतपतानहिओनिरन्तरकोनचिंतनमेध्यानमग्नरहैतछलाह।अपनमौलिकताएवम्अपनबातकेँदृढ़तासँरखबाकलेलओसभदिनमोनपड़ैतरहताह। १० वकालतनामा जँअहाँकेँकोटकचहरीकचक्करपड़लअछितँवकालतनामाकबारेमेअवश्यसुननेहोएबकारणबिनावकालतनामाकेँकोनोओकीलअहाँकमोकदमाकोर्टमेलड़िएनहिसकैतअछि।जहाँकोनोमोकदमालड़बाक उद्यश्यसँलोककोर्टबिदाभेलतँपहिलस्टापओकीलकदरबाजापरहोइतअछि।ओकीलसाहबेमोछपरहाथदैतछथि जेचलूएकटाआओरमोअक्किलफँसल।ओकरबोकीकरताह? हुनकरतँओएहपेशाछनि।बिलारिजँमूससँ दोस्तीकएलेततँजीबतकोना? खाएतकी? सएहबातएतहुँलागूहोइतअछि।सामान्यतःईदेखबामेअबैतअछिजेजँअहाँओकीललगचलगेलहुँतँओअहाँकेँमोकदमालड़बाकहेतुततेकउत्साहितकएदेताहजेहोएतजेगामघुरएसँपहिनहिमोकदमाफाइलकेनहिजाइ।मोअक्किलकेँअपनाकाबूमेलेबाकहेतुओकिलसाहेबझटदएओकलातनामापरदस्तखतकरओताहआकिछुफीससेहोचाहबेकरी।तकरबादअहाँघुमैतरहूहुनकापाछू-पाछू। कैबेरमोअक्किलनहिबुझैतछथिजेओकुन-कुनकागजपरदस्तखतकएओकिलकेँदएरहलछथि।ओना एतेकविश्वासतँओकिलपरकरैपड़ैतछैक।एहनकागजसभमेवकालतनामातँजरूररहैतअछि।ओकलातनामामोअक्किलवाओकरअधिकृतप्रतिनिधिद्वाराओकराएबजमेकोर्टमेओहिमामलाकपैरबीकरबाकआज्ञापत्रथिक।एकरामोख्तारनामावाओकीलपत्रसेहोकहलजाइतअछि। ओकालतनामामेनिम्नलिखितबातहोएबजरुरीथिकः- १. ओकालतनामानिष्पादनकतारिख, २.केसकनाओँजाहिहेतुओकालतनामाबनाओलजाइतअछि, ३.कोर्टकनाओँजाहिहेतुओकालतनामाबनाओलजाइतअछि, ४.अधिवक्तानियुक्तकेनिहारपार्टीकनाम, ५.ओकिलकनाओँआपता, ६.केससंख्याआकेसकशीर्षक, ७.अधिवक्ताकेँदेलगेलशक्ति / निर्णयलेबाकअधिकार, ८.पार्टीआअधिवक्ताकहस्ताक्षर, ओकालतनामाकमार्फतओकिलकेँबहुतरासअधिकारप्राप्तभएजाइतअछि।मोअक्किलकेँओकालतनामापरदस्तखतकरएसँपहिनेओकराबहुतध्यानसँपढ़बाकचाहीआजेअधिकारओओकीलकेँनहिदेबएचाहैतअछितकराहटादेबाकचाही।समझौताकरबाकअधिकार,ओकिलनियुक्तकरबाकअधिकार,पैसालेबाकअधिकारदेलासँकैबेरबहतक्षतिहेबाकसंभावनाभएसकैतअछि। ओकालतनामाकेसलड़निहरव्यक्तिस्वयंवाओकराद्वाराअधिकृतव्यक्तिहस्ताक्षरकएसकैतअछि।पार्टीकएबजमेव्यापारवाव्वसायकरएबलाव्यक्तिसेहोओकालतनामापरहस्ताक्षरकएसकैतछथि।जौँकोनोमामलामेकैगोटेसामिलछथितँसभगोटेसंयुक्तरूपसँएकाधिकओकिलकेँओकालतनामादएसकैतछथि। माननीयउच्चतमन्यायालयउदयसंकरत्रीयारबनामरामकलेश्वरप्रसादसिंहएवम्अन्य(2005(11) TMI-436 SC)कमामलामेओकालतनामाकसंवंधमेविस्तृतमार्गदर्शनजारीकरैतस्पष्टकेलकअछिजेकोनोमामलामेओकालतनामाबहुतसावधानीकसंगबनाओलजेबाकचाहीआकोर्टकरजिष्ट्रीकेँईचाहीजेसुनिश्चितकरएजेओकालतनामासहीअछिअन्यथाओकराशुरुएमेरोकिदेबाकचाहीजाहिसँआगूपरेसानीनहिहोइ।एकबेरओकालतनामापरसंवंधितव्यक्तिद्वाराहस्ताक्षरभएगेलाकबादओकरातयअवधिमेमामलासँसंवंधितअन्यकागजातकसंगेकोर्टमेजमाकएलजाएत।तकरबादबिनान्यायालयकमंजूरीकेँमोअक्किलवाओकिलवकालतनामाकेँखारिजनहिकएसकैतछथि।जँदुनूपक्षमेसँकिओमरिजाइतछतिछथिवासंवंधितमोकदमाककोर्टद्वारानिस्तारणभएजाइतअछितँओकालतनामास्वतःखारिजभएजाएत। माननीयउच्चतमन्यायालयकरामप्पय्याबनामशुभम्माएवम्अन्य(1947)2 MLJ 580मामलामेओकीलद्वाराओकालतनामामेबिनास्पष्टप्रावधानकेँकेसमेसमझौताकरबाकविषयपरआदेशदेलक।अस्तु,ईस्पष्टहोइतअछिजेकोनोमोकदमामेमओअक्कलद्वाराओकालतनामापरदस्तखतकरबबहुतमहत्वपूर्णकाजअछिआतकराबहुतसावधानीसँओकरापढ़िकएकरबाकचाही।मुदासामान्यतःलोकआँखिमूनिकएओहिपरहस्ताक्षरकएदैतछथि।कैबेरओकरपरिणामप्रतिकूलभएजाइतअछिखासकएजखनकिसंवंधितओकिलतकरदुरुपयोगपरउतारूभएजाए।मोअक्कीलकेँतकरअनुमानोनहिभएपबैतछनिआजखनसेहोइतछनिताबेकोर्टमेमामिलाबहुतआगूभएगेलरहैतअछि। Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव Join Videha googlegroups विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 111 ८) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 १०) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १३) विदेह सम्मान विशेषाक- २००म अक १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १४) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आमंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी VIDEHA 209th issue विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of original work.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् (c)२००४-२०२०. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2020 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA
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