विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' ३०१ म अंक ०१ जुलाइ २०२० (वर्ष १३ मास १५१ अंक ३०१) 'विदेह' ३०१ म अंक ०१ जुलाइ २०२० (वर्ष १३ मास १५१ अंक ३०१) ऐ अंकमे अछि:- १. गजेन्द्र ठाकुर- संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली ऐच्छिक विषय हेतु सामिग्री (FOR UPSC-BPSC EXAMS- GENERAL STUDIES AND MAITHILI OPTIONAL SUBJECTS) २. गद्य २.१.रबीन्द्र नारायण मिश्र- धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर २.२.अरुण लाल दास-बीहनि कथा/ लघुकथा २.३.आभा झा- ५टा बीहनि कथा २.४.आशीष अनचिन्हार- मिथिला-मैथिलीक प्रारंभिक Apps ३. पद्य ३.१.जयंती कुमारी- गजल ३.२.कल्पना झा-अम्मा ३.३.आशीष नीरज- कोरोना ३.४.आभा झा- श्रमिक Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव Join Videha googlegroups १. गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली ऐच्छिक विषय हेतु सामिग्री (FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) -BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- GENERAL STUDIES AND MAITHILI OPTIONAL SUBJECTS) रिसोर्स सेन्टर मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि। इग्नू BMAF-001 मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. UPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS भाषापाक पहिने मिथिला मैथिलीक सामान्य जानकारी लेल एहि पोथी सभकेँ पढ़ू:- राधाकृष्ण चौधरी मिथिलाक इतिहास A Survey of Maithili Literature THE POLITICAL AND CULTURALHERITAGE OF MITHILA फेर ऐ मनलग्गू पोथीकेँ सेहो पढ़ू:- केदारनाथ चौधरी अबारा नहितन https://www.youtube.com/channel/UC4abVKqMj2pDWIAkXiOHp7A (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर २. गद्य २.१.रबीन्द्र नारायण मिश्र- धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर २.२.अरुण लाल दास-बीहनि कथा/ लघुकथा २.३.आभा झा- ५टा बीहनि कथा २.४.आशीष अनचिन्हार- मिथिला-मैथिलीक प्रारंभिक Apps रबीन्द्र नारायण मिश्र- धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर लजकोटर (प्रवासीक जीवनपर आधारित) (पहिल खेप) समर्पण समस्त प्रवासी मैथिलकेँ! गाम-घरसँ फटकी रहितहुँ , जिनकर मोनसदिखन ओतहि टाङलरहैत छनि। रबीन्द्र दू आखर ई उपन्यास कोनो व्यक्ति विशेषक जीवनपर आधारित नहि अछि। एहिमे लेल गेल नाम, ठाम ओ कथानक सभ काल्पनिक थिक। तथापि जौँ ककरो नाम मिलि रहल अछि तँ एकरा एकटा मात्र संयोग बूझल जाए । हम अपन पत्नी श्रीमती आशा मिश्रक आभारी छी, जे एहि उपन्यासक पाण्डुलीपिकेँ रचना होइत काल अनेको रचनात्मक सुझाव देलीह जाहिसँ उपन्यासमे गुणात्मक सुधार भेल। एहि हेतु ओ प्रशंसाक पात्र छथि। हमर विद्वान मित्र डाक्टर विनय कुमार चौधरी (पिंडारुछ) क अमूल्य सुझाव समय-समय पर भेटैत रहल अछि । हमर अनन्य मित्र श्री ओम प्रकाश सपरा,श्री मदन मोहन सिन्हा, एवम् श्री संजीव सिन्हा हमरा लिखबाक हेतु निरंतर उत्साहित करैत रहलाह। हिनकासभकेँ हार्दिक धन्यवाद । आशा अछि जे पाठक लोकनिकेँ ई पुस्तक पसिन पड़तनि। रबीन्द्र नारायण मिश्र लजकोटर १ हमरगामअछिश्रीपुर। एकसमयमे श्रीपुर आओर एकर आस-पास खाजपुर, इहपुर, भोजौलनामी गाम सभ छल। खेतीबारीसँ लए कए माल जालक पैकारी धरिमे एकर जोड़ नहि छल। गाम-गामसँ लोक सभ मालजालक मेलामे एतए अबैत छलाह। समय पल्टी लेलक। सालक-साल रौदीसँ गाम –घरमे लोकक हालत दिन-प्रतिदिन खराप होइत गेल। जीविकाक छोट-मोट साधन सभ सेहो लुप्तप्राय भए गेल। दोकान सभ ग्राहकक बिना बंद भए गेल। क्रमशः हालत बेकाबू होइत चल गेल। लोकक गामसँ पड़ाहि लागि गेल। गामसँ कैगोटे दिल्ली, पंजाब, गुजरात, मुम्बइ चलि गेल। देखिते-देखिते गामक-गाम भम्म पड़ि रहल छल। बूढ़ आ बच्चा छोड़ि किओ कतहु नहि देखाइत। हमरो घरक हालत दिन-प्रतिदिन लचरल जा रहल छल। हम कैबेर गामसँ निकलबाक प्रयास केलहुँ। मुदा माए नहि मानथि, कानए लागथि । एक दिन ओसारापर ओ चिंतामग्न बैसल छलीह। कारण बुझि रहल छलिऐक मुदा समाधान आब ओहि गाममे नहि रहि गेल रहैक। हमर गामक कैगोटे दिल्लीमे रहथि। खाजपुरक हमर सहपाठी किशुन सेहो दिल्लिएमे काज करथि। आस-पाससँ किछु गोटे दिल्ली जाइत रहए। हम बहुत मोसकिलसँ माएकेँ मन ओलहुँ आ ओकरे सभक संगे दिल्ली बिदा भए गेलहुँ। जेना-तेना टीकसक हेतु टाकाक जोगार केलहुँ आ बिदा भए गेलहुँ। गामेमे टीसन छलैक। माए पछोड़ धेने टीसन धरि चलि आएलि। जहन ट्रेनपर बैसि गेलहुँ आ ट्रेन सीटीपर सीटी देबए लागल तँ हमर माएकेँ नहि रहल गेलैक। ओ भोकासी पारि कए कानए लागलि । आस-पास ठाढ़ लोकसभक ध्यान हमरासभ पर जाइ मुदा अफरा-तफरीक माहौलमे ककरो बेसी खोज-खबरि लेबाक समय नहि रहैक ।जाबे ट्रेन खुजल नहि,माए ट्रेनक खिड़की लग ठाढ़ि भेल तरह-तरहसँ अपन आ हमर मोनकेँ मनबैत रहलि । हम साधारण किलासक डिब्बामे कातक सीटपर बैसि गेल रही । उठि नहि सकैत छलहुँ कारण बहुत मोसकिलसँ पछड़ा-पछड़ीकए ओहिमे घुसिआएल रही आ एक्के संगे जेना लोकक हुजुम ओहि डिब्बामे पैसि गेल रहए। कहुना कए हमरा कातबला सीट भेटिगेल रहए आ ओकरा बकोटने बैसल रही । ट्रेनसीटीपरसीटीमारिरहलछल।ओकरगोलकाचक्कासभघुमएलागल।हमतैओमाएकदिसतकैतरही।ओहीसमयमेबुझाएलजेनाकिओजोर-जोरसँहमरनामलएचिकरिरहलअछि। मुदा सीटीकतेजअबाजमेओदबिगेलैक।जाबेकिछुबुझितऐक,देखितिऐकताबेट्रेनप्लेटफार्मछोड़िचुकलछल।हमर सभटा ध्यान माएपर छल । ओबड़ीकाल धरि ओतहि आगू बढ़ैत ट्रेनकेँ देखैत रहलि । हमहुँ ओमहरे तकैत रहलहुँ। किछुए कालमे सभ किछु अदृश्य भए गेल । ट्रेनकेँ खुजिगेलासँ यात्रीसभकेँ उसास भेलैक । ओहुना दिल्ली जाएबला ट्रेनमे सभदिन भीड़ रहैतछैक मुदा ओहिदिन किछु बेसिए लोक ठसल रहैक । एकहु इंच जगह खाली नहि रहैक। शौचालयधरिमे लोकसभ बैसि गेल छल । ऊपरसँ ई ट्रेन छल-जनसाधारण ,जेहने नाम तेहने काज । दरभंगासँ दिल्ली पहुँचएमे दू दिन लागि जाइत छलैक। एहि ट्रेनक विशेषता इएह छलैक जे कम किरायामे बिना आरक्षणोकेँ लोक जेना-तेनादिल्ली चल जाइत छल। जहिएमोनहोअए,जानहाथमेलिअआट्रेनमेबैसिदिल्लीबिदाभएजाउ। जै दिने जाइक ,कोनो अगुताइ कथीके रहतैक? दिल्ली मे ने काजक ,ने रहबाक कोनो ठेकान रहैक ।भने ट्रेनमे बैसल रहैत छल,किछु समय ओहुना कटि जाइत छलैक । जकरा बेसी अगुताइ रहैक से ओहि ट्रेनमे बैसबे नहि करए । कोनो आओर जोगाड़करैत। ट्रेन जौं-जौं आगा बढ़ि रहल छल माएक कनैत ,झर-जर नोर बहैत मुँह वारंबार ध्यानमे अबैत रहल । थोड़बेकालमेट्रेनदरभंगाटीसन पहुँचिगेल।प्लेटफार्मपरट्रेनकेँरुकितहिँचढ़नाहरयात्रीसभमेजबरदस्तधक्का-मुक्कीहोबएलागल। लगैतछलजेनासौंसेदरभंगाएही ट्रेनसँजाएत।ताबते एकटा महिला जोर-जोरसँ चिकरए लागलि । ओकरा एना हाकरोस करैत देखिकए लोकसभ अकचका गेल । की भेलैक? सभ इएह सबाल एक-दोसरसँ पुछि रहल छल कि ओ महिला अपने स्पष्ट केलकैक- “ओ बाबू सभ! लुटि गेलहुँ ।" "की भेल?"-एकटा यात्री पुछलकैक ।ओ अपन नुआ दिस इसारा कए रहल छलि । ओकर जाँघ लग चीरा लागल रहैक । जाँघमे गिरहबना कए ओ किछु टाका रखने छलि । ट्रेनमे चढ़ैत काल ओकरा चारूकातसँ तेना ने घेरि लेलकैक जे ओकरा ससरब मोसकिल रहैक । ट्रेन खुजबाक समय लगीच छल । यात्रीसभ कहुना कए ट्रेनमे घुसिएबाक फिराकमे छल । एही माहौलक फएदा उठबैत जेबकट्टाक गिरोह ओकर डाँरलग ब्लेडमारि कए टाका निकालि लेने रहैक। से बात कहि-कहि ओ कनैत जा रहल छलि। जाबे किओ किछु कहतैक,बुझतैक जेबकट्टा गिरोहक बीस-पचीस आदमी धराधर ट्रेनसँ कुदि गेल । ओहिमे बच्चा,बूढ़,जवान पुरुख,मौगीसभ रहए । ओसभअपनहुलिआतेहन बनओने रहए जेना सही मानेमे यात्रापर निकलल छल । ककरो हाथमे मोटरी,किओ पेटी, तँ किओ जनमौटी बच्चाकेँ लदने प्लेटफार्मपर ट्रेनक आगमनक प्रतीक्षा कए रहल छल । ट्रेन अएलाक बाद ओ सभ डिब्बाक मुँहथरिकेँ घेरि लेलक आ तेहन कए देलक जे कोनो यात्रीकेँ डिब्बामे पैसब पराभव भए गेलैक । एहनसन लगलैक जेना ओहोसभ यात्री अछि आ अनके जकाँ ट्रेनमे चढ़बाक प्रयास कए रहल अछि । डिब्बामे मुँहथरिएपर तेहनने कए देने रहैक जे आन यात्रीसभकेँ सभगति भए गेलैक । ओही अफरा-तफरीक फएदा उठबैत ओ ओहि महिलाकेँ चारूकातसँ घेरनेरहल आ सीटपर पहुँचैत-पहुँचैत हाथ साफ कए देलकैक । ओकरासभकेँगेटपरधक्क-मुक्कीकरैतहमहुँदेखनेरहिऐकमुदाईनहिसोचिसकलहुँजेईसभजेबकट्टीकरएहेतुव्यग्रअछि। ओमहर ओहि महिलाकेँ रहि-रहि कए चिकरब-भोकरब बंदे नहि होइक ।सौंसे डिब्बामे विचित्र माहौल बनि गेलैक । सभकेँ जिज्ञासा होइक जे ओकरा बारेमे जानकारी होइ जे आखिर ओ के अछि,किओ ओकरासंगे छैक कि एसगरे अछि मुदा अपन सीट छोड़बाक साहस ककरो नहि होइक ,कारण जँ एकबेर सीटपर सँ उठि गेलहुँ तँ दोबारा ओ सीट भेटबाक कोनो उमीद नहि कए सकैत छलहुँ कारण चारूकात ठाढ़यात्रीसभधपाएलछलैक। डिब्बामे चुट्टी ससरबाक जगह नहि रहैक । ट्रेन नहूँ-नहूँआगा बढ़ि रहल छल । ओहि महिलाक कष्टदेखिकए हमरा नहि रहल गेल । ताबे डिब्बाक महौलो कनी शांत भए गेल छल । हम पुछलिऐक-" की सभ छल ओहिमे?" " हे भगवान! नहि पुछू ।सभटा ओहीमे छल, गहना, टाका आ..."-से बजिते -बजिते ओ फेरसँ बफारि तोड़ए लागलि। बड़ मोसकिल हालत छलैक । कनीक सहानुभूति भेटितहि ओ हमरा लग सहटि कए आबि गेलीह । हमर लगीचमे एकटा अधबयसू यात्री बैसल छलाह।हुनका आग्रह केलिअनि जे कनी घुसकि जाथि आ ओ मानिओ गेलाह । ट्रेन क्रमशः गति धेने जा रहल छल । कनीकालमे समस्तीपुर आबि गेल । ट्रेनकेँ आगा बढ़बाक हेतु सिगनल नहि भेटि रहल छलैक । ओतए किछु नित्यप्रति आबए-जाएबला यात्रीसभ उतरलाह तँ किछुगोटे फेर धक्का-मुक्की कए ओही डिब्बामे पैसबाक फिराकमे छलाह ताबे किछु यात्रीसभ डिव्वाक गेटकेँ बंद कए ओहीठाम ठाढ़ भए गेलाह जाहिसँ किओनव यात्री अंदर नहि पैसि सकए । ओ ट्रेन दू घंटा समस्तीपुर जंक्सनक प्लेटफार्म संख्या तीनपर ठाढ़ रहल । लाइने नहि दैक ।हमरा लगमे बैसलि ओहि महिलाक एकटा टिनही पेटी सीटक नीचामे राखल रहैक । रहि-रहि कए ओकरा ओमहर ध्यान चलि जाइक । डिब्बामे एहन हालत नहि रहैक जे ओ अपन पेटीकेँ लगीचमे कतहुँ लए आनए। ओकर दुविधा बढ़िते जा रहल छलैक । आखिर हम पुछलिऐक-" की बात छैक ? ओमहर किछु राखल अछि की ?" बहुत संकोचपूर्वक ओ बजलि-" एकटा टिनही पेटी सीटक नीचामे धए देने छिऐक । बाँचल-खूचल समान ओहीमे अछि । कहुना ओकरा एमहर अनितहुँ से जोगारे नहि बुझा रहल अछि ।" "कनी काल थम्हू ।ट्रेन खुजए दिऔक। तखन प्रयास कएल जेतैक ।" हमर बात सुनि कए ओकरा बहुत संतोख भेलैक। मुदा ट्रेन खुजितैक तखन ने?दू घंटासँ ठामहि ठाढ़ छल । आखिर ट्रेन सीटी मारलक । लगलैक जे आब ट्रेन खुजत । ताबतेमे ट्रेन सड़कए लागल । प्लेटफार्मसँ फटकी होइतेँ ओकर गति बढ़ए लगलैक ।यात्रीसभमे प्रशन्नता छलैक जे आखिर ई ट्रेन ससरल तँ। एतेक कालक बात पहिलबेर ओहि महिलाकेँ मोन हल्लुक देखलिऐक ,साइत एहिलेल जे आब ओकर पेटी बँचि जेतैक। हम सीटपर बैसल यात्रीकेँ ओकर नीचामे राखल पेटीकेँ आगा बढ़ेबाक हेतु इसारा केलिऐक । मुदा ओ टस सँ मस नहि भेल । बहुत मोसकिलसँ हम आगा ससरलहुँ आ सीटक नीचा हाथ दए ओहि टिनही पेटीकेँ घिचलहुँ । पता नहि ओहिमे की राखल छलैक? ओ तँ लोहोसँ बेसी भारी लागि रहल छल । कहुना-कहुना कए ओकरा अपन सीटपर अनलहुँ । से देखि ओहि महिलाक मुँह प्रशन्नतासँ लाल भए गेलैक । ओकरा अपन पेटीभेटि गेलैक सएह कोन कम । हमर व्यवहारसँ ओ बहुत प्रशन्न छलीह । कै बेर हमरा दिस टकटकी लगौने देखिअनि मुदा ने हम किछु पुछिअनि आ ने ओ किछु कहथि । देखबा-सुनबामे ओ रमनगर छलीह ।गोर-नार,बड़ी-बड़ी आँखि,सोटल देह,लगैक जेना कोनो संभ्रांत घरक महिला छथि । तखना एना साधारण किलासमे किएक यात्रा कए रहल छथि, ओहो एसगरे? बहुत रास प्रश्न हमरा मोनमे आबि रहल छल । जखन हम किछु नहिए बजलहुँ तँ ओएह टोकलीह-"अहाँकतए जेबैक?" "हमरा अपनो से नहि बूझल अछि मुदा दिल्लीधरि तँ जेबे करबैक।" "तकरबाद?" "भगवान मालिक।" हमर बात सुनि कए ओ अकचकागेलीह । मुदा ओकरा एकटा अपरिचित व्यक्तिसँ एकतरफा आओर किछु पुछबाक साहस नहि भेलैक । ओ चुप रहि गेलि । चुप हमहु रही मुदा मोने -मोन बहुत रास प्रश्नसभ उठैत रहल । कहुनाकए ट्रेन पटना टीसन पहुँचल । ओतए बहुत रास यात्रीसभ उतरि गेलाह ।डिब्बामे कनी उसास भेलैक । भेल जे आगूक यात्रा नीकसँ कटि जाएत । मुदा ई हालत बहुत काल नहि रहल । फौजीसभक हुजुम कतौसँ आबिकए हमरेसभक डिब्बामे घुसिआ गेल । ककरो साहस नहि भेलैक जे टोकारा दैत । सभक हाथमे हथिआर छलैक आ ओ सभ कतहु काजपर रबाना छल । एहन हालतमे किओ की बाजैत?सभ चुपचाप रहि गेल । आब जे डिब्बामे हाल भेल से पुछु नहि । ट्रेनमे फौजीसभक हेठीसँ आओर यात्रीसभक हाल-बेहाल छल । ओहि महिलाकेँ ओसभ घेरि लेने छल । ओ घुसकैत-घुसकैत हमरासँ सटैत गेलि ।आओर कोनो रस्तो नहि रहैक ।टीसनपर ओकर दहिना हाथपर झक दए इजोत पड़लैक। ओहिमे ओकर नाम लिखल छल-मालती । ट्रेन आठ घंटा देरीसँ चलि रहल छल । रातिक समय छल।मुसराधार बरखा भए रहल छल ।तथापि ट्रेन चलि रहल छल ।यात्रीसभ औंघाइत-पौंघाइत एक-दोसरपर खसैतआगू बढ़ि रहल छल । कै बेर केनादनि लागि रहल छल ।जेना-तेना ट्रेन आगा बढ़ि रहल अछि से सोचि-सोचि यात्रीगण प्रशन्न होइत छलाह । कखनो -ने- कखनो तँ पहुँचबे करत । मुदाबात एतबेपर नहि रूकल ।बड़ीकालक बाद डिब्बाक गेटपर सँएकटा यात्री चिकरल - "आहिरे बा! ट्रेनतँ ठाढ़े अछि ।" "ठीके ई तँ बीचबाधमे आबि कए रुकि गेल अछि"- दोसरगोटे बाजल । गेटपर ठाढ़ यात्रीसभ हुलकल ।चारूकात अन्हार गुज्ज, किछु नहि देखारहल छल।ऊपरसँ बरखा से जोर पकरने छल ।एकटा फौजी कहुनाकए बाहर मुड़ी केलक आ बाहर देखितेचिकरि ऊठल- " जुलुम भए गेल,ट्रेनकइंजनतँजाचुकलअछि ।" "एहनो कहीं भेलैकअछि?"- तेसरगोटे बाजल। "नहि विश्वास होइत छह तँ अपने देखि लएह ।" ओहोयात्री फौजी छल । कहुना कए मुड़ी बाहर केलक आ आगा-पाछादेखि ओहो ओहिना चिकरल- "सही कहि रहल छथि,ट्रेनकइंजन तँ चलि गेल।" औ बाबू! एतबा बात सुनितहि सौंसेडिब्बामे अफरा-तफरी मचि गेल ।ट्रेनक अगिला भाग चलि गेल रहैकआ पछिला डिब्बासभ ससरैत-ससरैत थोड़ेकालक बादलाइनपर ठाढ़ भए गेल। रातिक समय,ऊपरसँ मुसराधार बरखा होइत ,ककरो किछु अंदाज नहि लगलैक । (अनुवर्तते) - रबीन्द्र नारायण मिश्र, पिताक नाम : स्वर्गीय सूर्य नारायण मिश्र, माताक नाम :स्वर्गीया दयाकाशी देवी, बएस : ६५ बर्ख, पैतृक ग्राम : अड़ेर डीह, मातृक : सिन्घिआ ड्योढ़ी वृति : योजना आयोगक उप सचिवक पदसँ सेवा निवृत्त भेलाक बाद वर्तमानमे दिल्लीमे स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट।शिक्षा : चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालयसँ बी.एस-सी. भौतिकी विज्ञानमे प्रतिष्ठा : दिल्ली विश्वविद्यालयसँ विधि स्नातक। प्रकाशित कृति : १.‘भोरसँ साँझ धरि’ (आत्म कथा), २.‘प्रसंगवश’(निवंध), ३.‘स्वर्ग एतहि अछि’(यात्रा प्रसंग), ४.‘फसाद’ (कथा संग्रह)५.‘नमस्तस्यै’ (उपन्यास) ६.’विविध प्रसंग’ (निबंध संग्रह), ७. ‘महराज’ (उपन्यास) ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। अरुण लाल दास बीहनि कथा/ लघुकथा १ बीहनि कथा लहास बारहो मास मधबनी बाली सब दिन भोरे अपन मरद के गरियबिते हाक दैत उठबै छलै । रोगढुकोना अखन तोरी सुतले हय।ई कोनो काम के नइ हय ।बज्जर खसौ ,कहाँ स हमरा माथे सटि गेल ।डेरे डेरे खेनाइ बनबैत केहुना क प्रतिपाल करै छी। ढेनमा ढेनमी के खाली जनमाब' अबैत हय । दुमहला पर स अकानैत सब दिन हमर कान पाकि जाइत रहय ।कैल की जाय ।कते बेर समझा क थाकि गेलिऐ ।भल लोकक बस्ती मे ई गारि गरौबलि नै करय ।मुदा फजूल ।ओकरा ताहि स कोनो फर्क नहि परैक । आइ किछु ताले मात्रा नै बुझा रहल छल ।पहर रातिए स सब मायधी हाकरोस करैत कानि रहल छलै ।कोरौना बेमारी स परिछना के सांस थमि गेल रहय । मधुबनी बाली निरुत्तर भेलि लहास के बेर बेर निहारि रहल छलै । २ कर्म प्रधान विश्व करि राखा राजस्थानी लोक लघु कथा अफवाह धिआन भंग करैत अछि ।आओर लोक एकर चंगुल मे फंसि नीक स बेजाय पर उतरि जाइत छथि । स्थिर भ सोचि तखन जे निष्कर्ष बहराइत अछि ओ ठोस एवं कारगर होइछ ।सबकेँ अपन कर्म एवं दुनू हाथ पर भरोसा हेबाक चाही । एहि संदर्भ मे एक राजस्थानी कथा याद अबैए । मिथिला मे जेना ज्यौतिषी सब बले पाबनि तिहार दू दिना भ' जाइयै आ हम सब एकहि गाम मे एकादशी वा रबि शनि किंवा छठि पाबनि तक दू दिना मनबय लगैत छी तहिना राजस्थान मे सेहो ज्यौतिषी सभक बहुत चलाचलती अछि ।एहि संदर्भ मे एक पिहानी एना अछि जे :- एक गाम मे एकटा ज्यौतिषी भविष्यवाणी केलनि जे आबय बला बारह साल तक गाम मे पानि नहि बरिसत । देखा देखी आओरो ज्यौतिषी सब हुआँ हुआँ करैत पाछू लागि गेलाह ।बाबा जैह कहलखिन से सबा सोलह आना सच सब मानि लेलनि ।किछु नीको ज्यौतिषी सब पोथि पतरा देखब उचित नहि बुझलनि ।ओहो सब गलत दिशा मे चलायमान भ गेलाह । चारुभर हाहाकार मचि गेल छल । सब किसान ,वास्तुकार बनियाँ बेकाल सब बेकाबू होइत गाम छोड़बाक निर्णय करैत भागब शुरु केलनि ।देखा देखी गामक गाम खाली होमय लागल ।कोहराम मचि गेल ।पाइन नहि बरिसत तं अन्न केना उपजत ।आ अन्न बिना लोक भूखे मरि जैत ।बिकट परिस्थिति सामने आबि गेल ।सब पराय लागल । एक गरीब किसान मेहनती छल ।किछु समय के लेल ओकरा घर मे अनाज पाइन सेहो छलै ।अपन मेहनति बले खराप दिनक हेतु समान सब बँचा क रखैत छल ।सात दिन तक ओ ठंढा दिमाग स सोचैत रहल , सोचैत रहल ।कखनो कोदारि खुरपी के सरिया क रखैत छल ,कखनो हर फार के दलानक ओरियानी मे सैंत अबैत छल ,तं कखनो बड़द के चुचकारैत ,कानैत ओकरा संगे नोर बहाबय लगैत छल ।कखनो अपन कुक्कुर स लिपटि जाइत असहज भ जाइत छल ।कौखन अपन घर के देखि देखि ओकर आँखि स अश्रुधार बहय लगैत छलैक । ओकर पत्नी ई सब देखि देखि दुखी भ घरक सब मांटिक बर्तन सब जमा करैत पुनः माटि मे विसर्जन हेतु सोचय लगली । एकदिन राति मे पत्नी कहलखिन जे नाहक मे फिरेशान नहि होउ ।जखन ज्यौतिषी जी गाम छोड़ि जाय लगता तखन हमहूँ सब हुनकें पाछू लागि जायब । जाहि विधि रखिहें राम ताहि विधि रहब । बेरि फरहक फूरब एकरे कहैत छैक ।आब किसान के किछु किछु बात समझि मे आबय लगलैक । ओ अपन हर फार सरियौलक ,बड़द जोति कय खेत चल गेल आ हर जोतय लागल ।रौद बहुत तिख आ बसात बंद रहैक ।पाइन कें तं दूर दूर धरि पता नै रहैक ।घामे पसेने किसान के चाँव आबक नौबत भ गेलैक ।ओ थकथका क बैसय लागल छल ।ओकर शरीर आब जबाब देबय लागल छलैक । ताबत मे ओकरा ऊपर सँ मेघराज चलल जा रहल छलथि।ओ पानिक प्रबंध मे जी जान स जुटल रहथि । घाम मे नहायल अशोथकित भेल किसान मेघ स बिलमि जेबाक हेतु मने मन याचना केलक जे किछु समय के लेल ओ छाया प्रदान करथि ।रौद बहुत तिख छलै आ बेचारा किसान पाइन बेतरे लहालोट भ गेल रहय । मेघराज के दया लागि गेलनि ।ओ किछु कालक हेतु रुकि किसान स प्रश्न केलनि ," तों केहन मुरुख छह ,सुनलह नहि जे आब बारह बर्ख तक पृथ्वी पर पानि नहि हेतह आ तों सपरिवार मारल जयबह ।सब किओ एकमुहरी भागि रहल छै आ तों एहि रौद मे फिरेशान होइत डटल छह । किसान बाजल मुदा ओ ज्यौतिषी ? मेघराज के आश्चर्य भेलनि जे किसान तं ठीके कहि रहल ।ओ फेनो किसान के हिदायत दैत कहलनि जे ओ अपन आ परिवारक चिंता करय ।दोसराक बात पर धिआन नै धरय ।किसानक फिरेशानी स द्रवित होइत मेघराज ठहरि गेल छला ओहो बिदा हेबाक मंशा जतौलनि आ फेनो एहि प्रश्नक उत्तर दैक हेतु किसान स कहलनि जे ओ कियैक अपन एवं अपन परिवारक जान जोखिम मे द रहल छल ? बेचारा किसान अपन खेत जोतय मे मगन होइत बाजल ," की कहैत छी भाइ मेघराज ! बारहो बरिस पर जँ घूरि आयब तं इएह खेत जोतब ।जँ एखन एकरा हम छोड़ि दैत छी तं हम खेत जोतब बिसरि जायब एवं बड़द सब जंगल परा जैत ।सब अपन अपन काज बिसरि जैत ।हमर पत्नी माटिक घैल बासन बनौनाइ वा रखनाइ बिसरि जेती ।हम सब पाइन कोना पीयब ।घर सब ढहि ढनमना क जंगल भ जैत ।अस्तु हम अपन कामकाज करब नहि छोड़ब ,जे ईश्वर करता से सहर्ष स्वीकार अछि हमरा सबकें ।हमरा अपन मेहनति पर पूरा भरोस अछि आओर हमर पत्नी कें हमरा पर । मेघराज सब बात बहुत धिआन स सुनि रहल छलथि ।ओहो सोचय पर विवश भ गेला ।हुनको भेलन्हि जे कहीं बारह बर्ख मे ओहो ने पृथ्वी पर जल बरिसायब बिसरि जाइथ ।ओ तत्काल अपने आप के नियंत्रित करैत जल बरिसायब प्रारंभ केलनि आओर किसान के आभार प्रगट केलनि जे अफवाह पर धिआन नहि देलक आओर अपन काम पर डटल रहल । अपन कर्म पर एवं अपन दुनू हाथ पर जे भरोसा करैत अछि दरअसल संसार मे वैह सफल होइत अछि ।अस्तु सबकेँ अपन कर्म करबाक चाही। गीताक निचोर यैह अछि । झमाझम बरखा स खेत सब पनिया गेल रहय ।गाम मे खुशी पसरि गेल छल । लोक सब गाम आपस होमय लागल रहय ।ज्यौतिषी सभक मुँह अपना सन भ गेल छल । ३ गाछ बिरिछ सँ प्रेम बीहनि कथा आइ भोरे भोर ने ओ किछु बाजि रहल छथि ,ने हमहीं किछु पूछि रहलियनि ।आखिर ई चुप्पी भीतरे भीतर करैला सन अक्कत तीत भेल अछि । ई मनहूस घरी मे आखिर हमहीं टोकलयनि ,"ई खुड़पी के काज भोरे भोर परि गेलए । ओ गोंहछैत बजली ," अनेरे के सब काज मे बक ठैंठैं नहि करु ।आइ छुट्टी छै ,तं कथी केर धरफरी ।भोजन कनी देर स बनतै ।हम अपनो मन के काज किछु करब तं अहाँ के ओइ मे कोन उजूर अछि ।अहाँ के लिखाइ पढाई मे हम कोनो बाधा नहि पहुँचबैत छी । अहाँकें अपन कविता, पिहानी लिखब जरुरी बुझाइत यै ,तहिना हमरो अपन बागवानी तं करय दिअह । अहाँ जनै छिऐ बागवानी स हमरा कते लगाव अछि । ओ खुरपी स इलाहाबादी लतामक गाछ कोरियबैत बाजय लगली ,ई लतामक गाछ आब फरय बला भेलै ।एकरा पोसैत पोसैत एतेक टा केलहुँ । धूरा मांटि नितः पानि सं धो आँचर सँ पोछैत छी ।कतेको बेर खाद पानि सेहो देलिऐ । आब फड़य बला भेल । अहाँ की जाने गेलियै ,गाछ -बिरिछ हमरा कत्ते पसीन अछि । एकर हरिअरी देखि हमर मन खनहन,शीतल आ शांत रहैत अछि । आइ दू बरख सँ अपन धीयापुता जकाँ सेबलहुँ अछि । गाछो बिरिछ पौश मानैत छै, पौश ! कनी एकदिन पाइनो जे पटा दितिऐक । फरतै फुलेतै तं बड नीक लागत ।कैल धैल पर जय जगरनाथ ।" हुँह..... हम मने मन सोचय लगलौं वंशो बढयबा मे तं अहिना सिनेह आओर मेहनति के खाद पाइन देमय पड़ैत छैक । हम हुनकर हाथ स' खुड़पी लैत प्रेम सँ गाछ के जैड़ि कोरियबैत पानि पटाबय लगलौं । ४ दर्शन बीहनि कथा रे मनटुनमा ! कत' गेल छलैं भोरे भोर ।आइ एको बेर तोहर दर्शन नै भेल । उँह ! अहूँ हद केली मालिक ।दर्शन नै कहू ,हमरा कोनादुन लगैत हय ।कहू ने जे भेट नै भेल ।दर्शन न , अपने आप मे बड गहींर शब्द हय । ...अएँ ...। तोरा एतेक बूझय आबि गेलौ । ... त नै ।आब कहिया बुझबै यौ सर । ...अच्छा ,बता ने दर्शन माने । ...आइ सोमबारी छलै ने। हम भोलाबाबा के जल चढाबे कपलेश्वर गेल रहली य ,बुझली ।खूम प्रेम स' जल चढेली। मंदिर तखनी खाली मिलल । बाबा हमरा मने मन दर्शन देलथिन्ह ।हमरा तं हुनकर प्रेम ,भक्ति आ आस्था मे बिसबास हबे ।आओर इहय तीनों जब एकसाथ मिलैत हय त' बाबा के असली रुप के दर्शन मने मन हो जाइत हय । हम त' आइ नेहाल भ' गेली मालिक । अँय से ...।अगिला सोमबारी मे हमरो संगे ल' चलिहैं तरगरे । ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आभा झा ५ टा बीहनि कथा १ साम्राज्य "एक कप चाह क्यो देत,से नञि।सभ खाइ-पिबै अछि,मौज उड़बै अछि आ एम्हर क्यो बिसरियो क' नञि तकै अछि!हे भगवान,भरि जीवन एतेक अरजि क' रखलहुं आ आइ ई मुंहतक्की!" "कनियें काल पहिंने त' चाह पीने छलथि।आब की चाहक टोंटी लगौने रहिऔन मुंह में?" "एना कियै चिकरै छी?एक कप चाह आरो द' देबै त' किछु बिगड़ि जायत?नोकर-चाकरक सामने तमाशा लगबै छी!" "अच्छा,तमाशा नञि नीक लगैय' अहां कें?परंच जखन अहांक बाप भरल दलान पर हमर भायक अपमान करैत छलखिन,तखन त' अहां कें कोनो समस्या नञि भेल!तखनो नञि भेल,जखन बुढ़ीक चेन हेरा गेल छलनि,त' नोकर सं पहिंने हमर समानक तलाशी भेल छल,कियैकि दरिद्र घरक बेटी हम कतौ नैहर नञि द' अबियै किछु!" "अहां गड़ल मुर्दा उखाड़िते रहब?बिसरब नञि?" "अहांक सम्बल भेटल रहितय,त' बिसरियो गेल रहितौं,मुदा?"एक टा पैघ सांस खींचि पुनः कर्कश स्वर मे- "आब ई साम्राज्य हमर अछि,न अहांक,न एहि बुढ़ीक।चैन भ' जीबू,बेशी टोका- टोकी जुनि करू,से कहि देलहुं।" २ भरोस नीहारिका आ नीरजक विवाह दू मासक बाद होमय बला छनि।नीरज छुट्टी पर आयल छलाह आ नीहारिकाक मां -बाबू सं अनुमति लय बाहर आयल छथि-"चलू, सिनेमा चलै छी।" "नञि,घ'र पर दू घंटा लेल कहि क' एलियै आ"… "फोन क' देबैन, कोनो दोसरा संग आयल छी"-दर्प भरल स्वर। "नञि,दू घंटा त' दू घंटा।" "अहांक मोन मे कोनो उत्तेजना, कोनो पुलक नञि बुझा रहल अछि।लगैय' जेना विवश भय आयल होइ!" "हमरा एना घुमबा-फिरबाक हिस्सक नञि अछि, तैं ओतेक सहज नञि छी हम।दोसर,दू मासक बाद विवाह हयब निश्चित अछि त' एतेक अधैर्य कथीक?" "अधैर्यक कोन गप? कोनो अशिष्टता केलहुं हम?"-रोषपूर्ण स्वर। नञि,न केलहुं,न क' सकै छी।हम कराटे मे ब्लैक बेल्ट छी।" "ओहहो,अहां भावी पति सं गप क' रहल छी,किं वा कोनो लफंगा सं?" "जहिया पति होयब,हमर भाषा दोसर पायब।" "कोना विश्वास करी?" "करहिं पड़त,जं अपन माता-पिताक चयन पर भरोस अछि,त' निराशा नञि हाथ लागत।" ३ नाटक "सुनू,आइ धरि नञि जतौलहुं अपन अधिकार, नञि टोका-टोकी कैलहुं अहांक व्यवहारक,कियैकि अपन सभहक विवाह नञि, समझौता छल।अपना भरि हमर प्रयास रहल सुकान्त संग कोनो अन्याय नञि होमय,हमरा आ सुनिधि संग संबंधक असहजताक बोध नञि होमय ओकरा। प्रकटत: बुझाइतो अछि ओ हमरा सुनिधि सं कम नञि मानै अछि। मुदा अहां कहियो अपन हृदय पैघ क' सुनिधिक माथ पर पिता जकां हाथ नञि ध' सकलहुं।ओ अहांक आ सुकान्तक दिस सतृष्ण तकैत रहल , मुदा अहां नजरि फेरैत रहलहुं। मुदा आब ओकर विवाहक गप छै, अलग-थलग बैसला सं काज नञि चलत।गप -शप मे सक्रिय भाग लेब' पड़त,से कहि देलहुं।" "एकरा धमकी बूझी?" "पत्नीक अधिकारक बदौलति गप मनबा सकी,ई त' सत्य नहिंए ,तखन जे बूझी।ई नाटक कर' पड़त अहां कें।" "ओना हमर व्यवहार एहन नञि रहल जे अहां विश्वास क' सकी, मुदा पहिल बेर ई मानि लिय' जे हम नाटक नञि करब,सत्ते सुनिधिक बाप बनि निर्णय करब…" ४ भय "कत' जाइ छी नीरू?" "बाहर"" "बाहर माने? "मां,सभटा काज क' देलहुं अछि,दवाइ सिरमा लग राखि देने छी।काज बाली आबि गेल अछि,भरि दिन संग रहबे करत,त' एतेक पूछ गछ कियै?" "हम मां छी,हमरा सत्त गप कहै मे कोनो दिक्कत?" "कहने छलहुं मां सभ सं पहिंने अहीं कें। मुदा अहांकें हमर खुशी सं बेशी अपन इज्जति पसिन छल।आ कि ई भय रहल होयत जे कमाउ बेटी हाथ सं नञि बहरा जाय। तैं आत्मघातक धमकी दय हमरा बन्दी बना रखलहुं।आब त' कोनो भय नञि अछि न?पचास बरखक वयस मे केओ अहांक बेटीक बाट नञि तकैत होयत,से बूझल अछि न?जं,सेहो होयत,त' अहांक बेटा जकां हम नञि छोड़ब अहां कें,एतबा विश्वास राखू।अहां प्राण छूटै धरि देखैत रहू अपन बेटीक बेरंग जीवन, कौमार्य आ वैधव्य दूनू।" ५ विमोचन अजय बाबू जन- कल्याण- पार्टीक सचिव छथि। लगातार दस बरख धरि मेहनति करैत -करैत एकटा सामान्य कार्यकर्ता सं एत' धरि पहुंचलाह। पदक सहचरी होइत छैक प्रतिष्ठा!सभ छोट-पैघ कार्यक्रम मे निमंत्रण स्वाभाविक।कतेको साहित्यकार सम्मेलन मे हुनकहिं हाथे फीता काटल जाइ आ पुस्तकक विमोचन होइ। जाहि तरहें साग -भांटा जकां किताब छपै,ताहि सं हिनका बुझेलनि जे ई कोनो कठिन काज नञि छै! हमहूं कियै नञि एकटा किताब छपबा ली? एक दिन अपन घर पर बजौलखिन हाइस्कूलक अपन हिन्दी- अध्यापक कें। किछु गुपचुप मंत्रणा केलनि आ आदरसहित हुनका अपन गाड़ी सं घर पहुंचबा देलखिन! आइ अजयबाबूक पुस्तकक विमोचन छनि, बहुत गण्य- मान्य लोक सभ उपस्थित छथि,पार्टीक पैघ नेता सभ सेहो। किन्तु अजयबाबूक विनम्रता त' देखू- एतेक पैघ लोकसभक अछैत विमोचन लेल बजौलनि अपन गुरु कें।हुनक चरण-स्पर्श करैत बजलाह - "हमरा हिनकहिं सं साहित्यिक प्रेरणा भेटल,हिनकहिं आशीषक बदौलति अहां सभ हमरा चिन्है छी,मान -दान करैत छी! तैं ई पुस्तक "साहित्य में शुचिता" हम हिनके समर्पित कयने छियनि। जय -जय भेल। -आभा झा, प्रवक्ता संस्कृत, गार्गी सर्वोदय कन्या विद्यालय ग्रीनपार्क नई दिल्ली ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आशीष अनचिन्हार मिथिला-मैथिलीक प्रारंभिक Apps App शब्द application केर छोट रूप छै। कंप्यूटर लेल software ओकर application छै आ एहि application मे Web browsers, e-mail programs, word processors, games आदि अबै छै। ई application सभ inbuilt (पहिनेसँ) रहैत छै जखन कि काज ओ सुविधाक हिसाबसँ अहाँ बाहरी application सेहो डाउनलोड कऽ सकैत छी। विकासक संग-संग मोबाइलकेँ सेहो कंप्यूटर जकाँ बनाएल गेलै। ऐतिहासिक दृष्टिकोणसँ IBM Simon दुनियाँक पहिल स्मार्ट फोन छै जे कि August 1994 मे लांच भेल रहै। स्मार्ट फोन ओ भेल जे बहुउद्येशीय हो मने फोन अलावे आर बहुत रास काज (वर्तमानमे ठीक कंप्यूटरे जकाँ)। एकर बाद क्रममे Nokia 9000 Communicator (१९९६) एलै आ 1999 मे Qualcomm नामक कम्पनी pdQ Smartphone" नामसँ निकालक जे कि CDMA आ Palm OS (Palm आपरेटिंग सिस्टम)सँ चलै छल ई टचस्क्रीन बला फोन छल आ वस्तुतः आजुक टचस्क्रीनक माए-बाप। १९९९ मे जपानक NTT DoCoMo नाम कम्पनी i-mode नामक मोबाइल इंटरनेट लांच केलक जे कि ओहि समयमे सभसँ बेसी स्फडसँ चलैत छल। एकर बाद २००० मे Ericsson R380, फरवरी २००१ मे Kyocera 6035, जून २००१ मे Nokia 9210 Communicator, २००२ मे Treo 180 नाम स्मार्ट फोन सभ एलै। पहिल बेसी केपिसटी बला टचस्क्रीन फोन LG Prada छल जे कि दिसम्बर २००६ मे आएल। जनवरी २००७ मे एप्पल पहिल iPhone अनलक। जेना कंप्यूटर लेल कोनो ने कोनो आपरेटिंग सिस्टम (अधिकत विंडोज) तेनाहिते स्मार्टफोन लेल सेहो आपरेटिंग सिस्टम चाही। embedded systems, PenPoint OS, Magic Cap OS आदि बहुत OS समेत वर्तमान समय अधिकांशतः दू OS पर सिमटल अछि पहिल iPhone OS (6, March 2008) आ दोसर Android । एप्पल द्वारा पहिल iPhone OS 6, March 2008 मे लांच भेलै जखन कि Android सेहो सितम्बर २००८ मे लांच भेल, Android गूगल द्वारा संचालित अछि । एहि दू केर अतिरिक्त विंडोज मोबाइल आपरेटिंग सिस्टम सेहो नीक अछि जे कि माइक्रोसाफ्ट द्वारा संचालित अछि। भारतक पहिल Android स्मार्ट फोन HTC Magic छल जे कि July 2009 मे लांच भेल। भरतक पहिल iPhone " iPhone 3G" छल जे कि २००८ मे लांच भेल। आ एहि स्मार्टफोन सभ बहुत रास सुविधा तँ छलैहे संगे-संग ओकरा आर स्मार्ट बनेबाक लेल बाहरी application (App) जोड़ए लागल। आ ई App सभ मोबाइल कम्पनी द्वारा सेहो बनाएल जाइत छै आ आन साफ्टवेयर कम्पनी द्वारा सेहो। नीक App भेलासँ कमाइ सेहो नीक होइत छै आ यूजरकेँ सुविधा भेटैत छैक। प्रायः सभ सेवा देबए बला कम्पनी अपन-अपन App बनबेने छै। App सभ तरहक भेटत। स्मार्टफोनक बढ़त मिथिलामे सेहो भेलै आ सभ अपन-अपन काजक हिसाबसँ किछु मिथिला-मैथिल-मैथिलीसँ संबंधित App सेहो बनेलक। उपल्बध आँकड़ासँ देखल जाए तँ २०१३ मे पहिल App बनल जे कि मिथिला-मैथिल-मैथिलीसँ संबंधित छल। निच्चामे ई लिस्ट देल जा रहल अछि-- 1) Songs for Mithila (apkdotin, apkdotin@gmail.com) Released Date-18 Feb 2013 2) Maithili Talking Dictionary (Khandbahale.com, support@ Khandbahale.com) Released Date- 8 Oct 2013 3) Maithili to English Dictionary ((Khandbahale.com, support@ Khandbahale.com) Released Date- 8 Oct 2013 4) Mithilanchal Fm ( I tech Nepal, account@itechnepal.com) Released Date-24 Nov 2015 ई Mithilanchal Fm द्वारा बनबाएल गेल छै। 5) Maithili Jindabaad (ACApp studio) Released Date- 10 Jan 2016 6) English To Maithili Dictionary (VB Nexcod, vbnexcod@gmail.com) Released Date- 18 May 2016 7) Maithili Patra (JCApp Studio- 1st online Panchang, JCAppStudio.asist@gmail.com) Released Date- 19 August 2016 8) English to Maithili Dictionary (Best 2017 translator App, rudrap775@gmail.com), Released Date- 16 Sep 2016 9) English To Maithili Dictionary (Translate app, dp0591240@gmail.com) Released Date- 19 Oct 2016 10) English to Maithili Dictionary (Live radio Music , manishapandav52@gmail.com) Released Date-20 Oct 2016 11) Maithili Bible (audio) ( LuongOolong, huuluongvip682@gmail.com) Released Date-1 Nov 2016 12) English to Maithili Dictionary (XW infotech, piyushmakwana3666@gmail.com) Released Date- 20 Nov 2016 13) Maithili Dictionary ofline (Daily Apps, dailyapps@yahoo.com) Released Date- 21 Jan 2017 14) Mithilakshar (JC App) Released Date- 15 March 2017 15) Maithili Talk (Bright logical) Released Date- 31 March 2017 16) Maithili Music (Bright logical, florajha@gmail.com) Released Date- 31 May 2017 17) Maithili Video (SparkZeal Technologies pvt ltd, jksah05@gmail.com) Released Date- 11 July 2017 18) Maithili Bible (LCI apps, maithilibible@gmail.com), Released Date-25 sep 2017 19) Maithili Songs-Maithili Videos (Developer- Devaguru Bruhaspati App) Released Date- 10 Dec-2017 20) Maithili Shadi Vivah (Noblers career Map classes pvt ltd, amitjha07@gmail.com) Released Date-26 Dec 2017 21) Maithili video songs: Maithili video Gane (full entertainment video, fenil.sharmaa002@gmail.com) Released Date- 7 Feb 2018 22) Maithili Vivah- Matrimonial App (SKS infotech , contact@mithilavivah.com) Released Date-3 March 2018 23) Maithili Fakra (Megamaind lab , Megamaindlabworks@gmail.com, Chennai) Released Date-23 March 2018 24) Maithili Song Video: Maithili Bhajan ( Mihir Nayak – mihirnayak@gmail.com), Released Date-16 May 2018 25) English to Maithili Dictionary (Best 2018 Apps, best2018apps@gmail.com) Released Date-20 June 2018 26) Maithili Panchang (Roshan choudhary, roshanchoudhry@hotmail.com) Released Date-9 Sep 2018 27) Maithili Sundar Kand (Roshan choudhary ) Released Date- 23 Sep 2018 28) Mithila Jansamvad (WoZoo Technology, editor@mithilajansamvad.com) Released Date-10 Dec 2018 29) Maithili Video status Songs-2019 (Tradevend, contact@ Tradevend.com) Released Date-12 Dec 2018 30) Maithili Panchang (Roshan choudhary ) Released Date-12 Dec 2018 31) Maithili Video Songs HD (Sajeevsapp, sajeevsaapps@Gmail.com) Released Date-23 Jan 2019 32) Being Maithili (ACApp) Released Date- 6 Feb 2019 33) Maithili Sangam:Family matchmaking & Matrimony (People Interactive, care@sangam.com) Released Date- 30 March 2019 34) Maithili Hospitals (MEngage , engage@mengage.in) Released Date-21 May 2019 35) Maithili status Video (Alisha ,alishaadnan05@gmail.com) Released Date-19 June 2019 36) Maithil matrimony for maithil brides and grooms (communitymatrimony.com) Released Date-24 June 2019 37) Maithili Movies (Rameen, rameenraheel918@gmail.com) Released Date-27 June 2019 38) Maithili Geet (Thegauravmishra,officialgauravmishra@gmail.com) Released Date- 7 Sep 2019 एकर अतिरिक्त बहुत रास नवमे बनल हएत वा हमरा नजरिसँ छुटि गेल हएत ताहि लेल अहाँ सभहक सहयोग चाही आ उम्मेद अछि जे सहयोग भेटत हमरा। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.जयंती कुमारी- गजल ३.२.कल्पना झा-अम्मा ३.३.आशीष नीरज- कोरोना ३.४.आभा झा- श्रमिक जयंती कुमारी गजल बिनु पीड़ा नै प्रेम असल छै सोना छै आगि सँ निकसल छै
बौसि रहल छी अन्हरोखेसँ मीत हम्मर आइ रूसल छै
केओ त' जा क' कहि दे हुनका मोनमे हुनक रूप बसल छै
कहब कोना नै कहब कोना कंठेमे ई बात फँसल छै
चलत कोना क' हम्मर जीवन कर्मक सिक्का बहुत घँसल छै
हाथ धरत के अइ ठाँ ककरो सभक सभ एत' स्वयं खसल छै
(बहरे मीर-22222222 सब पांतिमे।) ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। कल्पना झा अम्मा झूड़ीये में लेपटायल ओ मुंह, सांस सं देह के लेने झैंप, अतृप्त मनोकामना सं हहाइत फुफुआइत आंखि, आशा लगेने मोन बेचैन, दिवस भ गेल नहि आयल कोनो खुशी, बेचैन राइतक अर्थहीन भेल कलंकित मोन, बितैत दिन के लोढि पर पिसैत उलझन, अते सुंदर नाम मुद्दा व्यर्थ, इ झुड़ी उम्रक पड़ाव नहि थिक, बितल समयक नय कोनो प्रमाण, चुपेचाप इ सचाई पर नय करु कोनो भ्रम, इ विपदा के नहि उगैल पाबिक गम, अपना स्वार्थ द्वारे मनुक्ख कते करैत प्रपंच, हे गे अम्मा तोरा छव नमन, हे गे अम्मा तोरा छव नमन। -कल्पना झा, बोकारो, झारखंड ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आशीष नीरज कोरोना सामाजिक दूरी बनाउ हे मित्रगण, नभ,जल, पहाड़, तथा तराई में। "संक्रमण स बचाव" अछि हथियार, "कोरोना "स वैश्विक लड़ाई में ।। सबके डस रहल अछि ई दानव, अमीर-गरीब ओ राजा-दीन हो। बड़को बड़का देश नय बच पायल, अमेरिका, ईरान या चीन हो।। मानव जीवन स अमूल्य किछ नय, बेर बेर अपन हाथ के शुद्ध करु। मन के वश में राखिकर घर में रहु, दृढ़संकल्पित भ क स्वयं स युद्ध करु।। पैघ पैघ संकट झेललकय अछि मानव, इ कोरोना के सेहो हम हरायब। आई अगर हम-सब संभल गेलहु, त काल्हि हमर बच्चा मुस्कुरायत।। -आशीष नीरज, चार्टर्ड एकाउंटेंट ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आभा झा श्रमिक हम श्रमिक अहां केर सेवा मे, खटिते रहैत छी आठ याम भरि पेट भेटौ भोजन हमरो, नञि रहौ अस्थि पर मात्र चाम नञि भरल पेट,तन नञि झंपैल,तजलहुं हम बेबस तखन गाम नञि आलस सं संबंध हमर ,सन्मार्ग तेजल नञि कोनो ठाम। ई सगर देश हम्मर बुझकय, बहरयलहुं वृत्तिक हेतु मुदा श्रम कौशल सं टाका अर्जल, अपमानक भाग भेटल हमरा । नञि किंतु गाम छूटल कौखन, जड़ि हमर रहल गृह राज्य सदा सुख- दुख पावनि आ तिहार स्मृति में संरक्षित रहल सदा । हम आइ किंतु सब राज्यक हित, बनि गेल समस्या भारी छी अर्जनक बाट छूटल सबहक, की करी, सदाशय - कामी छी दायित्व ककर, जाहि नगरक हित नींवक पाथर हम रखने छी वा ओकर जतए हम जन्म लेल, रक्तक संबंध निभौने छी। अछि भेल घमर्थन एतेक देखि मन अतिशय व्याकुल भेल प्रभो ! हम मानव नञि समता भोगी सब मानल प्रगतिक बाट विभो! हम मात्र एक संख्या ,भावक,संवेदन मरु मे झुलसै छी साधन हीन छलहुं सब दिन ,आइ रोन-बोन मे भटकै छी। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 111 ८) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 १०) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १३) विदेह सम्मान विशेषाक- २००म अक १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १४) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आमंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी VIDEHA 209th issue विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of original work.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् (c)२००४-२०२०. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2020 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA
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