VIDEHA — Issue 302 / अंक ३०२

Publication: VIDEHA · Issue: 302
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विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' ३०२ म अंक १५ जुलाइ २०२० (वर्ष १३ मास १५१ अंक ३०२) 'विदेह' ३०२ म अंक १५ जुलाइ २०२० (वर्ष १३ मास १५१ अंक ३०२) ऐ अंकमे अछि:- १. गजेन्द्र ठाकुर- संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली ऐच्छिक विषय हेतु सामिग्री (FOR UPSC-BPSC EXAMS- GENERAL STUDIES AND MAITHILI OPTIONAL SUBJECTS) २. गद्य २.१.रबीन्द्र नारायण मिश्र- धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर (दोसर खेप) २. २.आभा झा- स्वार्थक रंग २. ३.आशीष अनचिन्हार- सोशल मीडिया आ मैथिल ३. पद्य ३.१.बाबा बैद्यनाथ-२ टा गजल ३.२.कल्पना झा-साओन ३. ३.आभा झा-मतिविशेख Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव Join Videha googlegroups १. गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली ऐच्छिक विषय हेतु सामिग्री (FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) -BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- GENERAL STUDIES AND MAITHILI OPTIONAL SUBJECTS) रिसोर्स सेन्टर मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि। इग्नू BMAF-001 मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. UPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी. BPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS भाषापाक ENGLISH MAITHILI COMPUTER DICTIONARY MAITHILI ENGLISH DICTIONARY MAITHILI BOOKS/ PICTURE-AUDIO-VIDEO ARCHIVE पहिने मिथिला मैथिलीक सामान्य जानकारी लेल एहि पोथी सभकेँ पढ़ू:- राधाकृष्ण चौधरी मिथिलाक इतिहास A Survey of Maithili Literature THE POLITICAL AND CULTURALHERITAGE OF MITHILA फेर एहि मनलग्गू पोथीकेँ सेहो पढ़ू:- केदारनाथ चौधरी अबारा नहितन कुमार पवन (साभार अंतिका) पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) https://www.youtube.com/channel/UC4abVKqMj2pDWIAkXiOHp7A (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर २. गद्य २.१.रबीन्द्र नारायण मिश्र- धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर (दोसर खेप) २. २.आभा झा- स्वार्थक रंग २. ३.आशीष अनचिन्हार- सोशल मीडिया आ मैथिल रबीन्द्र नारायण मिश्र- धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर लजकोटर (प्रवासीक जीवनपर आधारित) (दोसर खेप) -2- कनीके आगू गाजिआबाद टीसन रहैक । ट्रेनक इंजिन आ अगिला डिब्बासभ  ओहिठाम रूकल। हमरसभक डिब्बा सभसँ अन्तमे छलैक । ससरैत-ससरैत हमरसभक डिब्बा गाजिआबादसँ पहिने बनल मानवरहित गुमतीलग ठाढ़ भए गेल।ताबे फरीछ भए गेल छल । बरखा सेहो रुकि गेल छल ।कतेको यात्री ओतहि उतरि टीसन दिस चलि गेलाह । हम मालतीकेँ तकैत रहलहुँ मुदा ओ कतहुँ नहि देखेलीह । हम आश्चर्यचकित रही जे आखिर ओ कतए गेलीह। हमरा असोथकित देखि एकटा यात्री कहलक-" भाइ कथी दुबिधामे पड़ल छी । आब ई डिब्बा कतहु नहि जाएत । एकरा छोड़ने कुशल ।" "ऐँ! तखन दिल्ली कोना जाएब?" "पहिने उतरब तखनने कतहु जाएब । सौंसे डिब्बा खाली भए गेलैक आ अहाँ एसगरे बैसल छी ।" "से तँ सत्ते"-हम कहलिऐक । असलमे हमर मोनतँ मालती लए कए आशंकित रहए, मुदा कइए की सकैत छलहुँ? हारि कए हमहु ओहिडिब्बासँ उतरि गेलहुँ आ पैरे -पैरे टीसनपर पहुँचलहुँ। ओहिठाम ट्रेन लागल छल मुदा कखन खुजततकर कोनो ठेकान नहि । दिल्ली गेनिहार बहुत रास यात्रीसभ ओहिमे बैसल रहथि। हमहु कुनु डिब्बामे घुसिआ गेलहुँ । कनीकालमे ट्रेन खुजल ।नई दिल्ली टीसनसँ पहिने आबि कए सिगनल नहि भेटबाक कारण फेर ठाढ़भए गेल । यात्रीसभके हालत बहुत पातर भए गेल छल। छत्तीस घंटाक जगह साठि घंटामे ट्रेन आखिर नई दिल्ली टिसन पहुँचल । यात्रीसभकेँ जान-मे-जान आएल। हमहु ट्रेनसँ उतरि प्लेटफार्मपर ठाढ़ रही कि कोम्हरोसँ चिन्हल आबाज आएल- "गोविंद " हम मुड़ी पाछा केलहुँ तँ देखैत छि जे किशुन ठाढ़ अछि। जेना ककरो प्रतीक्षा कए रहल अछि । हम पुछलिऐक-" टीसनपर की कए रहल छह?" हमर घरनीएही ट्रेनसँ आबि रहल छथि । ट्रेनतँआबिगेलमुदाओ कतहुँ देखा नहि रहल छथि ।" किशुनसंगे हम  सौंसे ट्रेन ताकि लेलहुँ मुदा ओकर घरनीक कतहु पता नहि चललैक । ओकर हालत पातर भेल जाइत छल।ओकरा साहस दैत हम कहलिऐक -" तोहर घरनीक संगे किओ आओर छलनिकि नहि ?" "किओ नहि छलैक भाइ । गाममे हमर माएसंगे झंझट भए गेलैक आ एकाएक बिना कोनो पूर्व सूचनाकेँ गामसँ बिदा भए गेलि । बादमे हमर सार खबरि केलक जे एना-एना बात। कम-सँ-कम नीकसँ टिकटक ओरिआन तँ कएलैत, सेहो नहि केलक । जहिना-तहिना एहि ट्रेनमे बैसि गेलि । सौंसे ताकि लेलहुँ, कतहुँ ओकर कोनो ठेकान नहि बुझा रहल अछि । ताबतेमे एकटा रेलवे पुलिस डंडा भजैतओहिठाम आएल । किशुन अपन दुखनामा ओकरा कहए लागल। पुलिस ओकरा लेने-लेने अपन बूथपर चल गेलैक । ओकरा संगे-संगे हमहुँ ओतए पहुँचलहुँ । पुलिस बीटपर पहुँचतहि एकटा आओर पुलिस ओतए आबि गेल । दुनूगोटे किशुनसँ प्रश्नपर- प्रश्न पुछए लागल जेना ओ कोनो पैघ अपराधी होअए । हमरा ऊपरसेहो ओकरसभक बक्र दृष्टि बुझाए । एक तँ तीन दिनसँ रस्ताक झमारल आ ताहिपरसँ ई एकटा नवका फसाद ।पुलिससभक हेठी देखैत बनैत छल । ओसभ लगातार बेउरेब सबाल -जबाब करैत रहल जाहिसँ तंग भए किशुन ठोह पारि कए कानए लागल । "बेसी नाटक नहि करह । तोहर पत्नी एहि ट्रेनमे चढ़ल तकर कोनो सबूत छह?" " ओ तँ बिना टिकटेकेँ चढ़ि गेल रहए । रस्तामे टीटी बाबूसँ टिकट बनओने रहए ।" ओकरा बेसी कनैत देखि कए दोसर पुलिस कनीक हल्लुक पड़ल । ओ कहलकैक-"तोरा लगमे हुनकर कोनो फोटो छह?" किशुन अपन पाकिटमे हाथ देलक । ओकरा जेबीमे अपन घरनीक एकटा फोटो रहैक। ओ निकालि कए हमरेहाथमे देलक । फोटो देखि कए हम अबाक रहि गेलहुँ । ई तँ ओएह छथि। हम पुछलिऐक जे हुनकर नाम की छनि? "मालती"-किशुनबाजल। आब तँ बात पक्का भएगेल जे हमरासंगे यात्रा केनिहारि ओकर घरनिएछलीह । हमरा सकपकाइत देखि पुलिसकेँ सक भएगेलैक ।ओ चट दए हमरा पुछैत अछि -"बात की अछि? सच-सच बाजह ?" हम पुलिसकेँ सभटा बात खोंइचा छोड़ाकए कहि देलीऐक । मुदा से हमरेपर भारी पड़ल।ओकरासभकेँ सक रहैक जे जरूर हमही किछु केलिऐक । लएह आबकी करू? लाख बुझबिऐक जे हम तँ अपने परेसान छी मुदा ओकरा सभपर कोनो असरिनहि भए रहल छलैक।ओ सभ  बेर-बेर एतबे बात कहैक- "जखन ओ महिला तोरे लग बैसल रहए तँ तोरापताकिएकनहि चललह? ओ अचानक कतए चलि गेलि आ जँ कोनो कारणसँ चलिए गेलि तँ आपस किएक नहि आएलि?" "रस्तामे बहुत बरखाहोइत रहैक । ऊपरसँ हमर सभहक डिब्बासे ट्रेनसँ हटि गेल रहैक। रातिभरिकजगरनासँ हमर आँखि लागि गेल । ओही बीचमे ओ कतहु चलिगेलीह, कतए गेली, किएक गेली किछु नहि कहलीह, ने हम किछु बुझि सकलिऐक।"-अपना भरि हम पुलिसकेँ आश्वस्त करबाक बहुत प्रयास केलहुँ मुदा ढ़ाक के तीन पात । बात फेर घुमि-फीरि कए ओतहि पहुँचि जाइत छल । हमर हालत तँ देखए जोगर भए गेल छल ।एक तँ कै दिनसँ ट्रेनमे दुर्गति भेल रहए, ऊपरसँ ई दुर्घटना ।मोने-मोन कालीमाइकेँ गोहरबैत रहलहुँ।पुलिसकेँ तँ कहुना किछु समाधान करक रहैक । ओ सभ हमरा हथकरी लगओलक आ हाजतिमे बंद कए देलक। एकयुगक बाद हमरा किशुनसँ भेंट भेल रहए । मोने-मोन हम कतेक खुश होइत रही जे किओ तँ भेटल । मुदा घटनाक्रम एहन रुखि लेत से तँ सपनोमे नहि सोचल जा सकैत छल। हमर परेसानीक हेतु किशुन कतहुसँ जिम्मेबार नहि छल । ओ तँ अपने चिंतामे छल । मुदा कएल की जाए जाहिसँ पुलिसिआ चक्रव्यूहसँ जान बाँचए? किशुन आ हम एकहिसंगे इसकूल जाइत रही । गामसँ चारि कोसपर  इसकूल रहैक । नित्य-प्रति पैरे आएब-जाएब । रस्तामे कै गामक कैटा विद्यार्थी संग भए जाइक । गप्प-सप्प करैत हमसभ इसकूल पहुँचि जाइ । समय कोनाबितैक,पतो नहि चलैक। हम आगा नहि पढ़ि सकलहुँ ।घरक परिस्थितिसँ लाचार भए गामेमे रहि गेलहुँ । कहुना कए कै बेरे मैट्रिक पास केलहुँ । खेती बारीमे लागि गेलहुँ । जे कनी-मनी पढ़ने रहीसेहो क्रमशः बिसराइत गेल । मालती आ कुसुम सहोदर बहिन रहथि। हुनकर सभक पैतृक गाम भोजौल हमर गामसँ सटले छल । मुदा ओ सभ कहिओ अपन गाममे नहि रहलीह। हुनक पिता कोलकातामे रेलवेमे टीटीइ रहथि। भरि जिनगी किरायाक मकानमे रहलथि। बगए-बानीसँ लगितए जे बंगालिए छथि। मुदा मोनमे अपन माटि-पानिक मोह सभ दिन बनल रहलनि।  गाम अबैत-जाइत रहलाह। कुसुम तेजगर रहथि।ओ सभ दिन नीक करैत गेलीह।कालेजक पढ़ाइ हेतु बादमे दिल्ली आबि गेलीह आ तकर बाद दिल्लिएमे रहि गेलीह। ओ बिआहो अपन रुचिसँ दिल्लीएमे केलीह।मालती बिआहसँ पहिने गाम अएलीह। हुनकर बिआह हमर इसकुलिआ संगी किशुनसँ भेलनि। किशुन दिल्ली रहए लागल रहथि मुदा मालती गामेपर रहथि। किशुनक घरक हालत ठीक-ठाक रहैक । ओ कालेजमे नाम लिखओलक । बीए पास केलक। सरकारी नौकरीसभक बहुत प्रयास केलक । कै बेर साक्षात्कारो भेलैक मुदा फुस्स..। हारिकए एकटा मंदिरपर पुजारीक काज धए लेलक । ओहीठाम एकटा छोटछीन कोठरीमे रहितो छल । एहन हालत नहि रहैक जे परिवार संगे  राखि सकए । तेँ मालतीकैँ गामेमे रखने छलैक । अपनाभरि  बहुत प्रयास करैत छल जेसभगोटे गाममे  नीकसँ रहए । मुदा सासु-पुतहुमे खटपट होइते रहलैक आ तकरे परिणति भेल जे मालती एकसरे विना कोनो पूर्व सूचनाकेँ घर छोड़ि कए दिल्ली बिदा भए गेलि । पुलिस हाजतिमे  हमराबंद देखि कए किशुन बहुत दुखी रहए मुदा ओहो तत्काल किछु नहि कए सकल । राति भए गेल छल । हारि कए ओ अपन डेरा आपस चलिगेल । हम रातिभरि हाजतिएमे पड़ल रहलहुँ । पुलिसोक हाथमे किछु नहि रहैक । ओकरा हमर बातसँ हमरे पर सक होइत गेलैक । गलती हमरे छल । पुलिस लग ओतेक बाजैकनहि छल मुदाजे हेबाक छल से भए गेल छल। रातिभरि औंघाइत हाजतिमे बंद रहलहुँ । भोर भेने  हमरा कनीक पलखति भेटल । पुलिससभक काज बदललैक। ओ दुनू गोटे रतुका काज खतम कए कागज-पत्र दए चल गेल।ताबे विजय सेहो आबि गेल रहथि ।ओथानेदार छलाह । ओकारी-कारी करड़ल मोछ,गोर-नार छः फीटक बेस नमगर-पोरगर व्यक्ति छलाह । हमरा देखि कए ओ गुम्म पड़ि गेलाह। एकटा पुलिस केँ पुछलखिन -"हाजतिमे के बंद  अछि?" "कहि नहि सरकार! हम तँ अखने अपनेक संगे अएलहुँ अछि ।" "थानाक डायरी आनह ।" "जी सरकार!" आओर ओ पुलिस सभटा कागज-पत्तर विजयकेँ आनि कए दए देलक।विजयकागजसभ देखलाकबाद पुछलथि- " अहाँ एहि चक्करमे कोना फँसि गेलहुँ?" "हमरा किछु नहि फुराएल ।राति भरिक दुर्गति आट्रेनक झमारल छलहुँए । जोर-जोरसँ कानए लगलहुँ । "कानलासँ की होएत? सभ बात सच-सच बाजह ।"-विजयकेँ हम सभबात कहि देलिऐक । हमरा दुनूगोटेक गप्प चलिए रहल छल कि एकटा पुलिस टिनहा पेटी लेने हाजिर भेल। ओकरा देखितहि विजय पुछलकैक-" ई पेटी कतए भेटलह?" पुलिस बाजल-"सरकार ई पेटी गाज़िआबाद गुमतीलग ठाढ़ डिब्बामे सीटक नीचामे रेलवे पुलिसके भेटलैक ।ओएहसभ एकरा लए कए एहिठाम आएल अछि ।" "ओकरा सभकेँ बजाबह ।" "जे आज्ञा सरकार ।" से कहि ओ पुलिस दुनू रेलवे पुलिसकेँ ओहिठाम लेने आएल । ओकरासभके देखितहि विजय कड़क आवाजमे कहलकैक-" ई ककर पेटी छैक?" "कहि नहि सरकार! कोनो यात्रीक लगैत अछि ।" "एकरा खोलह।" विजयक हुकुम पाबि थानाक पुलिस ओहि पेटीकेँ खोललक । ओहिमेएकटा पाथरक सिलौट आ किछु कपड़ा-लत्ता रहैक । ऐकटा नीकसँ फ्रेम कएल किशुन आ ओकर घरनीक फोटो रहैक । फ्रेमक नीचामे आर्ट गैलरीमधुबनी छापल रहैक ।फोटोकेँ देखितहिँविजय पुछलकैक-" तूँ सभ मधुबनीक छह ? जी सरकार!"-हम कहलिऐक । "हमहु ओमहरेक छी । " से सूनि मोन हल्लुक भेल ।विजय ओहि फोटोकेँ अपन कब्जा मे लैत कहलक-" एहि पेटीमे जे समानसभ अछि तकर सूची बनाबह । गप्प-सप्प चलिए रहल छल कि किशुन पहुँचल। ओकर हालत बहुत गड़बड़ लागि रहल छल । रातिभरि ओ सुति नहि सकल । घरनीक कोनो समाचार नहि भेटलैक ।ऊपरसँ हमरो लए कए ओ बहुत परेसान छल । विजय ओकरा देखिते एकबेर  फेरसँ फोटोक मिलान केलक। बात साफ भए गेल जे ओ पेटी मालतिएक छल। तखन ओ कतए गेलि आ ककरा संगे गेलि? स्वेच्छासँ गेलीह कि कुनु दुर्घटना भए गेल ? विजयकेँ मोनमे ई प्रश्नसभ घुमि रहल छल ।सभ बातकेँ ध्यानमे रखैत ओकरा विश्वास भए गेलैक जे हम निर्दोषछी आ एहि कांडमे हमर कोनो हाथनहि अछि । ओ पुलिसकेँ बजओलक आ कहलकैक -" हाजतिसँ एहि आदमीकेँ निकालि दहक ।एकर कोनो गलती नहि बुझाइत अछि ।” ओकर आदेश होइतहि हमरा हाजतिसँ बाहर कए देलक । एतेक जल्दी हमर मामलाक तफसिआ भए जाएत से हम नहि सोचने रही मुदा धन कही एहि विजयकेँ । ओकरा मोनमे कतहु-ने-कतहु दर्द बाँचल रहैक-अपन लोकक प्रति सिनेह जगलैक जे ओकर व्यवहारमे सद्यः देखा रहल छल । (अनुवर्तते) - रबीन्द्र नारायण मिश्र, पिताक नाम : स्वर्गीय सूर्य नारायण मिश्र, माताक नाम :स्वर्गीया दयाकाशी देवी, बएस : ६५ बर्ख, पैतृक ग्राम : अड़ेर डीह, मातृक : सिन्घिआ ड्योढ़ी वृति : योजना आयोगक उप सचिवक पदसँ सेवा निवृत्त भेलाक बाद वर्तमानमे दिल्लीमे स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट।शिक्षा : चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालयसँ बी.एस-सी. भौतिकी विज्ञानमे प्रतिष्ठा : दिल्ली विश्वविद्यालयसँ विधि स्नातक। प्रकाशित कृति : १.‘भोरसँ साँझ धरि’ (आत्म कथा), २.‘प्रसंगवश’(निवंध), ३.‘स्वर्ग एतहि अछि’(यात्रा प्रसंग), ४.‘फसाद’ (कथा संग्रह)५.‘नमस्तस्यै’ (उपन्यास) ६.’विविध प्रसंग’ (निबंध संग्रह), ७. ‘महराज’ (उपन्यास) ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आभा झा स्वार्थक रंग एकटा सफल -व्यक्ति मे जे सब गुण हयबाक चाही, से सब छलनि आनंद बाबू मे। उच्च शिक्षा, खूब नीक नौकरी, इज्जति सं जीबा जोग पाइ- आर की चाही? मुदा भाग्य किछु एहन रंग देखौलकनि, जे जीवनक एहि सान्ध्य- काल मे पूर्णत: एसकर छथि।पत्नी बीच मंझधार मे संग छोड़ि देलखिन आ पुत्रक विदेश- प्रवास हिनका पूर्णतः एकाकी क' देलकनि।संग- समाज कें कहियो मोजर  देबे नञि केलखिन,त' वृद्धावस्था मे गाम जैबाक साहस सेहो नञि भेलनि।तखन बहुत सोचि -विचारि कय अपन एकाकी ,अभिशप्त जीवन बितब' लेल शरण लेने छथि नगरक एहि लब्धप्रतिष्ठ वृद्धाश्रम मे। ओना जं देखल जाय त'  कोनो कष्ट नहिं छनि एतय- भोजनक समुचित -व्यवस्था, नियमित चिकित्सकीय- परीक्षणक सुविधा, गपशप करबा लेल सेवानिवृत्त मित्रगण।स्वयं कें एतुका वातावरण सं सामंजस्य बैसब' मे प्राय:  सफल भ' गेल छलाह आनन्द बाबू,तखनहिं एहि वृद्धाश्रम मे एक टा वृद्धाक आगमन भेलै।ओकर आंखि सं निरंतर बहैत नोर वृद्धाश्रम में रहनिहारक अंत:स्थल के जेना चीरि देने हो। एक बेर साहस कय आनन्द बाबू गेलाह ओहि वृद्धा लग  बोल -भरोस दै लेल- " की करबै मैडम ,धिया- पुताक व्यस्त रहने  अपना सभ सन वृद्धक  रहबा लेल  ई कोनो  अधलाह जगह नञि छैक‌।सब गोटा परस्पर गपशप कय समय काटि लेब एत'।" तखने   खूब जोर सं चिकरि कय बाजि उठलीह ओ महिला- "नञि सर !हम संतानक व्यस्तताक कारण नञि, वंचनाक कारण  एहि स्थिति मे छी। हमरा तकर घाव चैन नञि लेब' दैत अछि। बेटा  पढ़' लेल विदेश गेल, ओत्तहि नोकरी आ विवाह कय बसि गेल। साल -दू साल मे एक बेर चेहरा देखा  जाइत  अछि, हं, प्रतिमास मनीऑर्डर कय  अपन दायित्व सं  मुक्ति पाबि लैत अछि। पतिक मृत्युक बाद एक बेर कहलियै भारत आबि बसै लेल त'  कहलक- जाहि सुख -सुविधाक अभ्यस्त हम आ  हमर धिया -पुता भ' गेल अछि,ओ  सभ छाड़ि एत' बसब संभव नञि, हम बीच-बीच मे अबैत- जाइत  रहबौ।एत'  सुनीता आ ओझा त' छथुन्हे देख' सुन' लेल,तोरा   कोनो दिक्कत नञि  हेतौ।ई कहि हमर सभ दायित्वक भार सुनीता पर राखि ओ निश्चिंत भ' गेल। आ सुनीता -हमर बेटी- जकरा पर हम पूर्णत:  निर्भर  छलियै,ओ ओझा संग मिलि नञि जानि कोन- कोन कागज पर दस्तखत लय पहिने  बैंक मे जमा  सभ पूंजी अपना अकाउंट मे ट्रांसफर करौलक,फेर  गामक जमीन -जथा बेचलक , अन्त  मे हमर अंतिम अवलंब दिल्लीक मकान बेचि  हमरा  एत'  पटकि देलक।पतिक मृत्युक सालभरिक भीतर  हमर ई दशा भ' गेल!शुरू मे त' हमरा विश्वासे नञि भेल जे अपन कोखिक सन्तान लेल हम भार भ'  जेबै!जखन हम उलहन देलियै त' कहलक- "मां,ई जिम्मेदारी भैयाक छनि, हम कतेक दिन तोहर भार उठेबौ, तोहर ओझा तमसाइ छथुन।" ओ बिसरि गेल जे  जेना निशांत कें बोर्डिंग मे राखि पढ़ौलियै,तहिना ओकरो। निशांत त' विदेश गेलाक बाद कोनो मदति नञि लेलक मुदा एकर धियापुता सभक पालन- पोषण सं ल' क'  परिवारक सभ खर्च- बर्च एखन धरि हमहीं करैत एलियै!हम कतेक दिन जिबितहुं, मुइलाक   बाद सभटा ओकरे होइतै, मुदा ओतबो धीरज नञि रहलै! बेटा के फोन केलियै त' कहलक-"चिंता नै कर, तोरा सब सुविधा  भेंटि जेतौ,हम वृद्धाश्रमक नामें पाइ पठा देल करबौ।" आब अहीं कहू-की हमर आंखिक  प्रतीक्षा समाप्त भ' जायत ओकर पठाओल मनीआर्डर सं? की अहां सभक संग रहला सं पुत्रीक ओ स्वार्थपूर्ण व्यवहार बिसरि जायत? लोक फुसिये कहै छै जे बेटी मायक हिरदयक छाया होइ छैक,नञि यौ, सब एक्के रंग ,स्वार्थक रंग सं रंगल। -आभा झा, प्रवक्ता संस्कृत, गार्गी सर्वोदय कन्या विद्यालय ग्रीनपार्क नई दिल्ली ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आशीष अनचिन्हार सोशल मीडिया आ मैथिली

जियोसिटीजक साइटसँ होइत मैथिली इंटरनेटपर सोशल मीडियाक सहारे बढ़ल। कोना बढ़ल से जनबाक लेल विदेहक अंक 230 (15/7/2017)मे हमर आलेख "कतेक रास बात" इंटरनेटपर मैथिलीक पहिल उपस्थिति नै अछि" केर शीर्षकसँ प्रकाशित भेल से देखू। ई सोशल मीडिया की थिक आ कतेक प्रकारक होइत छै से जानी-- ओना तँ सोशल मीडियाक बहुत परिभाषा छै मुदा से तकनीकी छै। हम एकरा गामक चंडालचौकड़ी माध्यमे परिभाषित करब। चंडालचौकड़ीमे की होइ छै किछु लोकक समूह अपन-अपन ठेकनाएल जगहपर जाइत छै आ विभिन्न तरहक क्रियाकलाप करै छै। ई क्रियाकलाप ज्ञान, हँसी-मजाक, मारि-पीट सभ तहहक होइत छै। केखनो काल एक-एक काज लेल अलग-अलग चंडालचौकड़ी होइत छै तँ केखनो काल एकै चंडालचौकड़ीमे सभ क्रिया भऽ जाइत छै। गौरसँ देखियौ चंडालचौकड़ी लेल तीन अनिवार्य तत्व छै, लोक, निश्चित जगह आ लोककेँ अएबाक लेल प्रेरक। आधुनिक समयमे "लोककेँ अएबाक लेल प्रेरक" तत्व इंटरनेटमे बदलि गेलै आ इंटरनेटपर सेहो निश्चित जगह बना देल गेलै लोक लेल। लोकक जेहन प्रवृति तेहने-तेहन जगह। कुल मिला कऽ ओहन चंडालचौकड़ी जे कि इंटरनेटक माध्यमसँ कोनो निश्चित साइटपर होमए लागए तँ ओकरा सोशल मीडिया कहल जाइत छै। ओना मैथिलीमे चंडालचौकड़ी निगेटिभ अर्थमे प्रयोग होइत छै मुदा हम जोर दऽ कऽ कहब जे चंडालचौकरीमे किुछए देर सही ज्ञानक बात सेहो होइत छै, समाजक भलाइ केर बात सेहो होइत छै। सोशल मीडियाक किछु विभिन्न रूप निच्चा देल जा रहल अछि-- 1) Social networks - ई विभिन्न तरीकासँ लोककेँ जोड़बाक लेल बनै छै जेना- Facebook, Twitter, LinkedIn एहूमे LinkedIn मात्र प्रोफेशनल लोक सभ लेल छै से चाहे प्रोफेशन बहुत प्रकारक भऽ सकैए। समान्यतः नौकरीपेशा आ बेपारी LinkedIn पर बेसी रहै छथि। Twitter नेता ओ राजनीतिक ओ समाजिक संगठन लेल बेसी प्रयोग होइए तँ Facebook केँ सभ जनता जनार्दन अपना अनुकूल पाबै छथि तँइ अपना देशमे Facebook हदसँ बेसी लोकप्रिय छै। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए। 2) Media sharing networks — ई विभिन्न तरीकासँ फोटो, आडियो ओ भडियो सार्वजनिक करबाक सुविधा दै छै जेना- Instagram, Snapchat, YouTube, soundcloud आदि। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए। 3) Discussion forums — ई विभिन्न तरीकासँ लोकक बीच तर्क करबाक, प्रश्न करबाक, उत्तर देबाक सुविधा दै छै जेना- reddit, Quora, Digg आदि। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए। 4) Bookmarking and content curation networks — ई विभिन्न तरीकासँ कोनो टेकस्ट वा पी.डी.एफकेँ सुरक्षित करबाक सुविधा दै छै जेना - Pinterest, Flipboard आदि। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए। 5) Consumer review networks — ई विभिन्न तरीकासँ बेपार ओ ग्राहकक रुचि-अरुचि जनबाक सुविधा दै छै जेना- Yelp, Zomato, TripAdvisor आदि। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए। 6) Blogging and publishing networks — ई विभिन्न तरीकासँ कोनो टेक्सटकेँ आनलाइन प्रकाशित करबाक सुविधा दै छै जेना- blogger, WordPress, Tumblr, Medium आदि। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए। 7) Interest-based networks — ई विभिन्न तरीकासँ लोककेँ अपन वयक्तिगत रुचि-अरुचिकेँ सार्वजनिक करबाक सुविधा दै छै जेना - Goodreads, Houzz, Last.fm आदि। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए। 8) Social shopping networks—Shop online ई विभिन्न तरीकासँ लोककेँ कोनो वस्तु आनलाइन किनबाक-बेचबाक सुविधा दै छै जेना - Polyvore, Etsy, Fancy आदि। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए। 9) Sharing economy networks—Trade goods and services ई विभिन्न तरीकासँ अर्थव्यवस्था ओ विभिन्न सेवा संबंधी जानकारी देबाक सुविधा दै छै जेना - Airbnb, Uber, Taskrabbit आदि। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए। 10) Anonymous social networks— ई विभिन्न तरीकासँ लोककेँ अपन पहिचान नुका कऽ कोनो विषयपर संवाद करबाक सुविधा दै छै जेना- Whisper, Ask.fm, After School आदि। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए। आब किछु एहम सोशल मीडियाक विवेचना देखी जकर महत्व मैथिली लेल बेसी अछि-- फेसबुक आ मैथिली 2004 मे फेसबुक केर शुरूआत भेल आ लगभग 2008सँ फेसबुकपर मैथिली आएल (आएल मने साहित्य ओ भाषाक रूपमे)। कहबाक मतलब जे लगभग 2008सँ मैथिल सभ खुलि कऽ बिना कोनो संकोचकेँ फेसबुकपर मैथिली भाषाक प्रयोग शुरू केलाह। सभ चीजक दुरूपयोग होइ छै आ फेसबुकक सेहो भेलै। तथापि ओइ दुरूपयोगक अलावे मैथिलीक संदर्भमे बहुत रास उपयोगी बात भेलै फेसबुकपर। प्राप्त जानकारीक अनुसारें 7 July 2008 केँ विदेहक फेसबुक भर्सन (फेसबुक ग्रुप केर रूपमे) विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका केर नामसँ एलै जकरा एहि लिंकपर देखि सकै छी-https://www.facebook.com/groups/10299304978/ एहि ग्रुपक पहिल पोस्टक लिंक अछि-https://www.facebook.com/groups/10299304978/permalink/428765254978/ बादमे एहि ग्रुपक सभ पोस्टकेँ विदेहक दोसर आ बेसी उन्नत ग्रुपमे परिवर्तित कऽ देल गेलै जकरा एहि लिंकपर देखि सकै छी-- https://www.facebook.com/groups/videha/ ई बदलाव लगभग 2010-11मे भेलै। इंटरनेटपर पहिल उपस्थिति कोन अछि तेहने सन तथ्यहीन बहस फेसबुकपर सेहो चलल जे "फेसबुकपर मैथिलीक पहिल ग्रुप कोन?"। मुदा पहिनेहें जकाँ सभ गोटा अपन-अपन ग्रुपक पहिल हेबाक दाबी बिना कोनो लिंककेँ करैत रहलाह। विदेह सदिखन प्रमाण प्रस्तुत करैत रहल अछि। एहि ठाम सेहो लिंक देल गेल अछि। तँइ एखन धरिक प्रमाणक आधारपर ई मानबामे कोनो संकोच नै जे ग्रुप केर रूपमे विदेहक ग्रुप फेसबुपर मैथिलीक पहिल उपस्थिति अछि। निच्चा किछु एहन तथ्य देल जा रहल अछि जाहिसँ मैथिलीक संदर्भमे फेसबुकक उपयोगिता साबित हएत--- फेसबुक, भाषा आ साहित्य फेसबुक मैथिली भाषा आ साहित्य लेल बहुत योगदान केलक। बिना कोनो स्कूल गेने, बिना कोनो कोंचिंग गेने जतेक लोक एहिठाम मैथिली सिखलाह तकर गिनती नै। जँ सच पूछी तँ मैथिली आंदोलनकारी सभ जे स्कूल वा कालेजमे मैथिली पढ़ाइ लेल अनेरे मारि करै छथि ताहिसँ नीक जे ओ ओतबे समयमे फेसबुकपर मैथिली लिखबा लेल लोककेँ प्रोत्साहत करथि तँ बेसी नीक रिज्लट निकलत। ओना हमरा ई मानबामे संकोच नै जे स्कूल वा कालेजमे कोनो भाषाक पढ़ाइ केर एकटा अलग महत्व होइत छैक।निच्चा किछु एहन तथ्य देल जा रहल अछि जाहिसँ मैथिलीक संदर्भमे फेसबुकक उपयोगिता साबित हएत--- 1) मैथिली भाषाक लिखित प्रयोग--- फेसबुकपर मैथिली लिखनाइ एकटा स्टेटस सिंबल बनि गेल आ शिक्षित-अशिक्षित, नेता-जनता, स्त्री-पुरुष सभ गोटा बिना कोनो वर्तनीकेँ वा कोनो गलतीकेँ चिन्ता केने मैथिली लिखला जाहिसँ मैथिली लिखए बला संख्या बढ़ल आ ई मैथिलीक भविष्य बहुत नीक रहत। फेसबुकपर साहित्य केर संदर्भमे विदेहक फेसबुक भर्सन बहुत रास काज केलक। एहि भर्सन द्वारा नव-नव लेखककेँ प्रोत्साहन भेटल जकर प्रभाव निकट भविष्यमे देखबामे आएत। 2) मैथिलीमे स्त्री लेखिकाक संख्या-- मैथिली लेल ई बहुत नीक जे फेसबुक मैथिली स्त्री लेल ओहन साधन बनि गेल जिनकर बोलकेँ बहुत रास कुच्रकमे फँसा कऽ राखि देने छल ई समाज। आजुक स्त्री कोनो बातक परबाह केने बिना अपन भावनाकेँ फेसबुकपर परसि रहल छथि। आ तइसँ मैथिलीमे नव-नव अध्याय-अनुभव जुड़ि रहल अछि। 3) मैथिली दलित साहित्य केर प्रचारक-- फेसबुकक माध्यमे भारत-नेपाल मिला कऽ जतेक मैथिलीक दलित लेखक, विचारक एलाह ततेक मात्र सिद्ध सरहपादे कालमे छल मने मैथिलीक एकदम शुरूआती समयमे। लगभग हजार सालसँ मैथिलीक समाजिक ताना-बानाकेँ जे तोड़ने छल तकरा फेसबुक तोड़ि देलक आ सही अर्थमे "मैथिल समाज" केर निर्माणमे सहयोग देलक। फेसबुक आ समाज

फेसबुक आ फेसबुक ग्रुपसँ किछु लेखक बंधु तमसाएल रहै छथि। हुनक तामसक कारण ई जे लोक हुनकर कथित गंभीर रचनापर धियान नै दऽ फालतूक फोटो, बात आदिपर बेसी सक्रिय रहै छथि। ताहूमे जखन कियो कोनो घास-पात, तर-तरकारी, गाछ-बिरिछक फोटो दऽ पूछै छै-ई की छै आ ताहिपर हजारो लोकक लाइक-कमेंट आ से देखि लेखक सभ तखने जरि कऽ छाउर भऽ जाइत छथि। हुनका बुझाइ छनि जे हमर एतेक गंभीर विचार नष्ट भेल जा रहल अछि आ लोक सभ फालतू काजमे लागल अछि। मुदा एहन लेखक सभकेँ फेसबुकक उद्येश्ये नै बूझल छनि। वस्तुतः फेसबुकक जन्म एही सभ लेल भेल छै जाहिसँ लोक एक-दोसरसँ जुड़ल रहै। बादमे किछु प्रबुद्ध एकर उपयोग साहित्य-संगीत-राजनीति एवं अन्य काज लेल करए लगलै। लेखक सभकेँ धैर्य राखि एहि माध्यमकेँ लेखन लेल सार्थक बनबए पड़तनि आ तखन संभव जे साहित्यो केर दिन घुरतै। ओना घास-पात, तर-तरकारी, गाछ-बिरिछक फोटो लेल हमर विचार अछि जे ई ओहन लोक सभ लेल उपयोगी जे कि गाम-घरसँ कटि गेल छथि। आ फेसबुकपर एहन संख्या लाखोमें अछि तँइ एहन पोस्ट सभपर बेसी सक्रियता रहै छै। कहियो काल किछु वस्तुक संदर्भमे हमरो जानकारी बढ़ि जाइए एहन-एहन पोस्टसँ से हम स्वीकारै छी।  हम मात्र हिंट देलहुँ एहि विषयपर कोनो समाजशास्त्री काज करथि तँ नीक विवेचना भऽ सकैए। फेसबुकसँ समाजिक संगठन हेबामे सुविधा भेलैए से चाहे ओ कोनो पाबनि-तिहारक संदर्भमे हो वा कि बाढ़ि-अकाल वा आन कोनो परस्थितिमे। बहुतो एहनो घटनाक सबूत अछि जाहिमे कोनो हेड़ाएल लोक अपन परिवारक लोक फेसबुकक कारण भेटलै। फेसबुकपर एक मिनटमे कोनो समाद हजार ठाम पसरि जाइत छै।

फेसबुक आ धर्म

फेसबुक मिथिलाक अपन निज ओ खाँटी पाबनि तिहार लेल अमृतक समान काज केलक अछि। बड़का पाबनि जेना दुर्गापूजा, होली, दिवाली, छठि आदिक शुभकामना तँ प्रचलित छल मुदा एहि माध्यमसँ हैप्पी तिलासंक्रांति, हैप्पी जूड़शीतल, हैप्पी जितिया, हैप्पी चौरचन, हैप्पी भरदुतिया आदि बेसी प्रचलित भेल। एकर अतिरिक्त मिथिलामे पसरल उपासक आगू सेहो हैप्पी लागए लागल। मिथिलाक एकटा बहुत बड़का वर्ग (गैर-ब्राह्मण ओ कायस्थ) सेहो अपन-अपन पूजाक लऽ कऽ फेसबुकक प्रयोग कऽ रहल छथि आ ई आरो नीक बात भेलै। निश्चित तौरपर मिथिलाक पछुआएल पाबनि-तिहार फेसबुक ओ अन्य प्लेटफार्म पाबि मजबूत भेल अछि। किछु एहन पाबनि जे कि व्यक्तिगत होइत छै जेना कोजगरा, मधुश्रावणी, भुँइया बाबाक पूजा आदिक कायाकल्प सेहो भऽ रहल अछि एहि माध्यमसँ। धर्मक एहि रूपसँ मैथिलीक गीत विधा बेसी लाभ उठेलक। जाहि पाबनि सभहक गीत प्राचीने कालसँ नै केर बराबरि होइत छल ताहू पाबनि सभहक गीत आब बहुतक संख्यामे भेटत। अप्रैल २०१६ मे फेसबुक लाइभ हेबाक सुविधा देलकै मने अहाँ अपन भीडियो रूपमे कोनो बात सेहो कहि सकैत छी। ई सुविधा आन विषय लेल जेहन हो मुदा मैथिली गीत-संगीत लेल अमृतक समान काज केलक। लोक अपन-अपन लाइभ प्रस्तुति दऽ अपन प्रतिभाकेँ समाजक सामने राखि देलखनि। जकर प्रत्यक्ष लाभ एहि विधाकेँ भेटि रहल छै।

फेसबुक आ राजनीति

जखने समाज छै तहने राजनीति हेबे करतै से चाहे कोनो स्तरक किए ने हो। आइ स्थिति ई छै जे देशक हरेक नेता ओ पार्टीक सोशल मीडिया प्रभारी छै। आ एहि लेल भारी-भरकम खर्च प्रस्तावित करै जाइए एहि प्रोफेशन केर लोक सभ। भारतमे भारतक चुनाव प्रचार जमीनपर कम आ सोशल मीडियापर बेसी होइत छै। आ एहिसँ कोनो नेताक हारि-जीतक समीकरण सेहो तय होइत छै। २००८ मे अमेरिकामे बराक ओबामा अपन चुनाव केर प्रबंधन सोशल मीडियामे सेहो करबेलाह आ जितलाह ताही तर्जपर २०१४ मे भारतक प्रधानमंत्री चुनाव भाजपा सोशल मीडिया द्वारा लड़लक आ ओहि चुनावमे जीतल आ तकर बाद भारतक सभ राजनैतिक दल अपन-अपन पक्ष फेसबुकपर राखए लागल ताहूमे एखन धरि भाजपे आगू अछि। एहिसँ पहिने भारतेमे अन्ना हजारे द्वारा २०११ मे कएल गेल अनशन सेहो फेसबुकक कारणे पसरल आ ओहि आंदोलनसँ किछु नीक नेता जेना अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया आदि निकललाह। फेसबुक राजनीतिकेँ पलटियो दैत छै। २०१० मे मिश्र (इजिप्ट) मात्र फेसबुकक सहारासँ अपन भ्रष्ट ओ निरंकुश शासनकेँ खत्म केलक एकरा Egyptian revolution of 2011 केर नामसँ जानल जाइत छै। विश्वक हरेक कोनामे अपन अवाज उठेबाक लेल फेसबुक आ सुलभ साधन छै।

फेसबुक आ बेपार

विज्ञापन लेल फेसबुक लेल नीक साधन अछि आ बेपार तँ मुख्यतः विज्ञापनेपर टिकल अछि। जहाँ आन माध्यमसँ विज्ञापन लेल पाइ खर्चा करए पड़ैत छै ततए फेसबुक ओ अन्य सोशल मीडियासँ अपेक्षाकृत नमहर सर्किलमे अहाँ अपन चीजकेँ राखि सकैत छी। प्रायः हरेक कम्पनी केर सोशल मीडिया एकांउट छै जतए ओ अपन नव वस्तु, स्कीम आदिक विवरण दै छै।   एकर अतिरिक्त आनो विषयमे फेसबुक सहायक भेल। आ एहने एकटा विषय अछि मजाकिया फोटो, मीम, कार्टून आदि। फेसबुकपर मैथिलीमे लिखल आ मैथिलसँ संबंधित मजाकिया फोटो, मीम, कार्टून बहुत आएल आ आबिए रहल अछि। इंटरनेटपर मैथिली लेखकक उपर पहिल बेर एडिट कएल फोटो (मजाकिया, मीम, कार्टून) एकै संगे तीन टा लेखक गजेन्द्र ठाकुर, आशीष अनचिन्हार ओ उमेश मंडलपर एलै जे विकास ठाकोर नामक एक फेक आइडी 2011 मे बनेने रहै। जे ओहि समयमे फेसबुकपर एक्टिभ रहथि से जनैत हेता जे विकास ठाकोर दू मासमे मिथिला राज्य बना देबाक दावा केने रहै। फोटो दऽ रहल छी। अपनेपर हँसि कऽ अपन नाम इतिहासमे पहिल हेबाक घुसिया रहल छी। ई कार्टून बनबए बला लोक कार्टूने धरि नै रहलाह हरेक पाबनि-तिहारपर ओकर अनुकूल फोटोशाप सेहो करए लगलाह जे कि आकर्षक छल आ पाबनि-तिहारकेँ एकटा नव रंग देलक।  

ई छल सकारात्मक पक्ष मुदा एकर अतिरिक्त किछु नकारात्मक तत्व सेहो छै आ ई तँ संसारक नियमे छै जे कोनो वस्तुमे गुण-अवगुण दूनू रहैत छै।

फेसबुकपर मैथिलीक किछु प्रसिद्ध ग्रुप आ एकर काज --- 1) विदेहक फेसबुक भर्सन https://www.facebook.com/groups/videha/, एहि ग्रुप मुख्य एडमिन गजेन्द्र ठाकुर छथि। एहिठाम हम विदेहक फेसबुक भर्सन केर किछु काज संक्षिप्त रूपें देखा रहल छी A) विदेह फेसबुक ग्रुपपर सभसँ पहिल काज मैथिली हाइकू केर अछि। गजेन्द्र ठाकुर पहिने हाइकू केर आलेख देलखिन तकर बाद हरेक दिन एकटा गाछक वा कोनो फोटो द' क' हाइकू लिखबाक आग्रह  करै छलखिन। एकर प्रभाव तेहन तेहन भेलै जे सभसँ पहिने मैथिलीमे हाइकू केर लेखकमे अभूतपूर्व वृद्धि देखल गेल जाहिमे सुनील कुमार झा, मिहिर झा, ओमप्रकाश झा, इरा मल्लिक, शिव कुमार झा, ज्योति सुनीत चौधरी, अमित मिश्र, चंदन कुमार झा, मुन्नाजी, रामविलास साहु सहित एहि पाँतिक लेखक सेहो सम्मलित छथि। 2008सँ मैथिली हाइकू केर ब्लाग सेहो अछि जाहि ठाम विदेहक फेसबुक भर्सनसँ हाइकू केर संग्रह कएल गेल अछि। ई ब्लाग एहि पतापर देखल जा सकैए http://maithili-haiku.blogspot.in/ B) फेसबुकक माध्यमसँ विदेह मैथिलीक वर्तनी ओ मानकता लेल नीक प्रयास केने अछि आ तही कारणसँ कमसँ कम इंटरनेटपर सुदूर नेपालसँ लए कऽ दरंभगाक मैथिली एकसमान भेल अछि (ईहो धातव्य जे किछु जबरदस्ती बला मानकता बला विद्वान सभ एखनो कृत्रिम मैथिलीकेँ पकड़ने छथि)। विदेहक एहि मानक भाषाक लेखककेँ "विदेह भाषा पाक" नाम देल गेलै जे कि विदेह पोथी डाउनलोडपर सेहो उपल्बध अछि। C) विदेहक फेसबुक भर्सनपर जतेक नाटक संबंधी रचना आएल तकरा विदेह मैथिली नाट्य उत्सव नामक ब्लागपर राखल गेल अछि। विदेह ग्रुपक सहयोगसँ लगातार चनौरागंजमे विदेह नाट्य उत्सवक आयोजन भेल अछि जे कि मैथिलीमे समानांतर नाट्य अवधाणाकेँ मजगूत केलक। D) विदेहक फेसबुक भर्सन मैथिली बीहनि कथाक लगातार सहयोगी बनल रहल। एहि ठाम देल गेल आ प्रोत्साहित भेल बीहनिकथाकारकेँ मैथिली बीहनिकथा ब्लागपर राखल गेल जकरा एहि लिंकपर देखल जा सकैए http://vihanikatha.blogspot.in/ E) विदेह ग्रुपपर आएल प्रमुख कविताकेँ मैथिली कविता नामक ब्लागपर राखल गेल अछि जकरा http://maithili-kavita.blogspot.in/ लिंकपर देखल जा सकैए। लगभग 400सँ उपर कविताक संकलन अछि। F) विदेह ग्रुपपर आएल प्रमुख कथाकेँ मैथिली कथा नामक ब्लागपर राखल गेल अछि जकरा http://maithili-katha.blogspot.in/ लिंकपर जा क' देखि सकै छी। G) विदेह ग्रुपपर आएल प्रमुख आलोचना, समीक्षा आदिकेँ मैथिली कथा नामक ब्लागपर राखल गेल अछि जकरा http://maithili-samalochna.blogspot.in/ लिंकपर जा क' देखि सकै छी। 2) मिनाप MINAP(Mithila Natyakala Parishad) https://www.facebook.com/groups/258380252004/ एडमिन, सुनील कुमार मल्लिक, प्रवेश मल्लिक।, 3) मैथिली गजल भंडार, https://www.facebook.com/groups/mghajal/ एडमिन कुंदन कुमार कर्ण 4) मिथिलांगन ("MITHILANGAN" - A Literary, Social and Cultural Organisation),  https://www.facebook.com/groups/mithilangan/, एडमिन आनंद रंजन 5) घटकैती झारखंड मिथिला मंच https://www.facebook.com/groups/226653764434000/, घटकैती झारखण्ड मिथिला मंचक शुरुआत 26 नवम्बर 16 के झारखण्ड मिथिला मंच के स्वयंसेवक भाई सुजीत झा जी केलथि। वर्तमान एडमिन निशा झा एवं सुजीत झा छथि। एहि ग्रुप द्वारा पहिल विवाहक समाचार मई 17 मे प्राप्त भेल जे संपन्न भेल छल बोकारोमे, तकर बादसँ एखन धरि 40 गोटे समाचार देने छथि जे हम्मर पुत्र-पुत्री के विवाह एहि घटकैती ग्रुप द्वारा भेल, विवाह त बहुतो होइ ये ग्रुपक माध्यमे लेकिन ग्रुप मे सुचना बहुतो कम गोटे देइ छैथ, खैर कोनो बात नै हम सब निःस्वार्थ अप्पन कार्य में लागल छी, वर्तमानमे एहि ग्रुपमे 3000 सँ ऊपर बायोडाटा राखल अछि। 6) धूआ धजा https://www.facebook.com/groups/dhuadhaja/ (एडमिन परमेश्वर कापड़ि, कुमार भाष्कर), 7) समदिया https://www.facebook.com/groups/samadiya/ (प्रियंका झा, पूनम मंडल), 8)  विदेह नाट्य उत्सव (https://www.facebook.com/groups/136683676426547/?ref=group_browse_new) एडमिन बेचन ठाकुर, 9)  मैथिली थियेटर (https://www.facebook.com/groups/MAITHILIRANGMANCH/) एडमिन आशुतोष अभिज्ञ, 10) अछिंजल (https://www.facebook.com/groups/achhinjal/) एडमिन पवन झा, 11) नेना भुटका (https://www.facebook.com/groups/101930576873357/) एडमिन देवाशुं वत्स, एकर अतिरिक्तो बहुत रास ग्रुप अछि जकरा जोड़ल जा सकैए। २०१४ केर बादसँ फेसबुक ग्रुपक एकटा ट्रेंड देखबामे आएल जे एडमिन कोनो पोस्ट एप्रूभ करबाक काज अपना हाथमे लऽ लै छथि आ सौंसे हल्ला केने फीरै छथि जे हमर ग्रुपमे साफ-सुथरा पोस्ट अबैए मुदा ई बात निश्चित जे एहन पोस्टमे बेमतलब पोस्ट बेसी अबैत छै। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.बाबा बैद्यनाथ-२ टा गजल ३.२.कल्पना झा-साओन ३. ३.आभा झा-मतिविशेख बाबा बैद्यनाथ २ टा गजल ॐ १ 1 2 2     1 2 2     1 2 2     1 2 2 जखन  भेष   देखत  तखन  दान  भेटत करब  काज  उत्तम  सदति  मान  भेटत हृदय  शुद्ध  राखब  बनत  विश्व  अप्पन रहत  द्वेष  जखनहि  अपन आन भेटत जतऽ नम्रता अछि  ततऽ काज ससरय जखन बुद्धि सीखब सकल ज्ञान भेटत करी  बात  कखनहुँ  बचन  मीठ राखी गलत  बात  बाजब  तँ  अपमान भेटत रहत  रौब  हरदम  डरत लोक सज्जन मुदा  टेढ़  लोकक  सदति  शान भेटत जखन  माय  बापक करब खूब सेवा घरेमे   अहाँकेँ    तँ   भगवान   भेटत (ध्यातव्य--एक्कोटा मात्रापतन नहि) २ 1 2 2     1 2 2    1 2 2    1 2 2 सदति   छन्द   सुन्दर   गढ़ल  जा  रहल  छै गजल   रोज   नीके   कहल  जा   रहल  छै कनै    घोघ   तरमे    घरक    जे    बहुरिया कियै   धार   नोरक  बहल   जा   रहल   छै पढ़लि    खूब    नारी    मुदा   लाज   भारी कते  दर्द   निशिदिन  सहल  जा  रहल  छै अखन नीक लोकक गुजर अछि असम्भव अपन  लोकसँ  ओ  ठकल  जा  रहल  छै करै   छल   कुचेष्टा   सदति  आन  के  जे बढ़ल  पाप   तँ  ओ  जहल  जा  रहल छै महल  गीत  गजलक  बनल  पैघ *बाबा* उपेक्षित पड़ल ओ  ढहल  जा  रहल  छै ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। कल्पना झा साओन बाड़ी झाड़ी खीलल फुलवारी, साओन आयल सोहावन मास, चलली धीया सब माया संग, बोला मनाबयेक सुनकर धाम, कृपा दृष्टि से करु महादेव, अन्न धन लक्ष्मी हमर धाम, सीथक सिन्दुर बनल रहै, पूर्ण करु हे कृपा निधान, मंडार पुष्प सं श्रृंगार करब हम, पंच गव्य स करब स्नान, बेलपत्र अर्पित हम करब, स्वीकार करु हे कृपा निधान, बडु दुख दिन आ दुर्दिन देखलवं, कते सहू से कृपा निधान, जगत के स्वामी कहबैका छी, दीन दुखी के करु कल्याण, करु निवास कहां कतौ जा, पर्वत आ या पाथर में, सदि खन हमर हृदय बिराजैथ, हे बाघम्बर कृपा निधान। -कल्पना झा, बोकारो, झारखंड ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आभा झा मतिविशेख अहल भोर सॅं सुनिते चिक- चिक, भेल मोन मम अतिशय घोर सगर घोंघाओज पकड़ि छीपि केॅं ,मूलक नञि अछि  कतहु छोर। जड़ि जॅं  पकड़ब संभव अछि जे, अपनो वसनक दाग देखाइ कात करोटे चलथि विज्ञ  तैं, झॅंपने अप्पन चरण -बेमाइ। लाभ लोभ केर लिलसा उर मे,  मुंह पर नि:स्पृहता केर खोल निज- पर हेतु तराजू भिन्ने, सुनू सत्य केर अगबे ढोल। भारति- सेवक से त्रिपुंड धय, भावथि सदति वैभवक मोल भद्रजनक भूषा धय मंचे, चिकरि शब्द केॅ करथि अमोल। बहुत माछ छै एहि तड़ाग मे ,काल्हि देबै भिनसरबे बोर महाजाल रातिए दय बड़का घरक भोज मे माछक झोर। हन्त, मलाहक परिजन भूखल, अनयक तम पसरल घनघोर एहि घावक मरहम नञि कवि लग, हिय मे पीड़ा केर हिलकोर। ई चकमक संसार भ्रमित कय रहल अज्ञ केॅं ओरे सॅं अबल अनाश्रित सीदित सबतरि, सबलक परिचिति जोरे सॅं। जॅं क्यो बिसरल -भटकल सरिपहुॅं सत्यक पथ संधान करथि लोक कहै जनि बूड़ि,छलाह ई मतिविशेष त' कोरे सॅं। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf          Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf       12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक,  १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf       Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf         21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010        Videha_01_10_2010_Tirhuta             67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010        Videha_15_11_2010_Tirhuta             70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010        Videha_15_12_2010_Tirhuta           72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011        Videha_01_03_2011_Tirhuta           77 ७) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012        Videha_01_08_2012_Tirhuta           111 ८) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013        Videha_15_03_2013_Tirhuta           126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013        Videha_15_11_2013_Tirhuta           142 १०) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १३) विदेह सम्मान विशेषा‍क- २००म अ‍क १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अ‍क १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १४) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आम‍ंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी VIDEHA 209th issue विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन  नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक  बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of original work.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् (c)२००४-२०२०. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम वि‍लास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत।  एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2020 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA

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