VIDEHA — Issue 303 / अंक ३०३

Publication: VIDEHA · Issue: 303
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विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' ३०३ म अंक ०१ अगस्त २०२० (वर्ष १३ मास १५२ अंक ३०३) 'विदेह' ३०३ म अंक ०१ अगस्त २०२० (वर्ष १३ मास १५२ अंक ३०३) ऐ अंकमे अछि:- १. गजेन्द्र ठाकुर- संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली ऐच्छिक विषय हेतु सामिग्री (FOR UPSC-BPSC EXAMS- GENERAL STUDIES AND MAITHILI OPTIONAL SUBJECTS) २. गद्य २.१.रबीन्द्र नारायण मिश्र- धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर (तेसर खेप) २.२.संतोष राय-गाम २.३.नबोनारायण मिश्र- एहनो होइत छै २.४.आशीष अनचिन्हार- यूट्यूब आ मैथिली ३. पद्य ३.१.आनन्द दास- नींद आबि जाइत अछि ३.२.बाबा वैद्यनाथ- गजल Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव Join Videha googlegroups १. गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली ऐच्छिक विषय हेतु सामिग्री (FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) -BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- GENERAL STUDIES AND MAITHILI OPTIONAL SUBJECTS) रिसोर्स सेन्टर सुभाष चन्द्र यादव राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि। इग्नू BMAF-001 मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. UPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी. BPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS भाषापाक ENGLISH MAITHILI COMPUTER DICTIONARY MAITHILI ENGLISH DICTIONARY MAITHILI BOOKS/ PICTURE-AUDIO-VIDEO ARCHIVE पहिने मिथिला मैथिलीक सामान्य जानकारी लेल एहि पोथी सभकेँ पढ़ू:- राधाकृष्ण चौधरी मिथिलाक इतिहास A Survey of Maithili Literature THE POLITICAL AND CULTURALHERITAGE OF MITHILA फेर एहि मनलग्गू पोथीकेँ सेहो पढ़ू:- केदारनाथ चौधरी अबारा नहितन कुमार पवन (साभार अंतिका) पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) https://www.youtube.com/channel/UC4abVKqMj2pDWIAkXiOHp7A (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर २. गद्य २.१.रबीन्द्र नारायण मिश्र- धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर (तेसर खेप) २.२.संतोष राय-गाम २.३.नबोनारायण मिश्र- एहनो होइत छै २.४.आशीष अनचिन्हार- यूट्यूब आ मैथिली रबीन्द्र नारायण मिश्र- धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर लजकोटर (प्रवासीक जीवनपर आधारित) (तेसर खेप) -3- थानामे मालतीक चंपत भए जेबाक रपट लिखा गेल । आओर भइए की सकैत छल? हम हाजतिसँ छुटि गेलहुँ । किशुनसंगे बिदा भेलहुँ । जाइत-जाइत विजय कहलक -" हमर मोबाइल नंबर लिखि लिअ। कोनो बात होइ तँ संपर्क करब ।" "बात तँ भेले छैक । आब एहिसँ बेसी की हेतैक?"-हम कहलिऐक। विजय हमर मुँह देखैत रहि गेल । हम किशुनकसंगे ओकर डेरा पहुँचलहुँ । डेरा की छल,मंदिरक पछुअतिमे कहुना कए एकटा कोठरी बना देने रहैक। ऊपरमे एसबेस्टसकचार बनाओल गेल रहैक ।एसगर व्यक्तिक लेल पर्याप्त रहैक। हमसभ  डेरामे पैर रखने छलहुँ कि विजयक फोन आएल-" नीक समाचार अछि ।" "की भेलैक?" "मालती भेटि गेलथि " "कतए भेटलथि?" “थाना आउ, सभ टा बात फोनेपर कए लेब? हमसभ चोट्टे बस पकड़लहुँ । किशुनक मोन हल्लुक लगैत छल । हमरो चिंता कम भेल। ओ कतए भेटलखिन से सभ जानबाक जिज्ञासा बढ़ल जाइत छल । थाना पहुँचतहि देखैत छी जे मालती विजय लग बैसल छथि । हुनकर सभ किछु अस्त-व्यस्त छल । लगैत छल जेना ओ बाघक चाङुरसँ छुटि कए आएल होथि । हमरा दुनूगोटेकेँ देखिते ओ ठोह पारि कए कानए लगलीह। किशुनकेँ रहल नहि गेलैक । ओहो व्याकुल छल । हमरा किछु फुरेबे नहि करए जे की कएल जाए । मुदा एहिबातक संतोख छल जे मालती भेटि गेलीह । विजय हमरासभकेँ देखिते कहए लागल -" बहुत मोसकिलसँ हिनकर जान बाँचल ।  दूटा बदमास हिनका जीपपर बैसेने जा रहल छल कि ई हल्ला केलनि । रोडपर गस्त लगबैत पुलिस पाछा-पाछा भागल । हालत बिगड़ैत देखि ओ सभ हिनका बीच सड़कमे उतारि कए भागि गेल ।" ने हमरा ने किशुनकेँ किछु पुछबाक साहस भेल । मालतीक अस्त-व्यस्त हालत अपने सभ किछु कहि रहल छल । किशुनकेँ बाक हरण भए गेल छलैक । थानामे पत्रकार,टीभी चैनेलबलासभकढ़बाहि लागि गेल। नेतासभ तरह-तरहक गाड़ीमे अंगरक्षकसभक संगे थाना पहुँचए लगलाह । देखिते- देखिते थानामे मीस्स पड़ि रहल छल । थानामे लोकक करमान लगैत देखि कए विजयकेँ मालतीकेँ पुलिसक जीपमे अस्पताल मेडिकल टेस्टक हतु पठा देलकैक । दुनू कात दू-दूटाक महिला पुलिस आ अगिला सीटपर एकटा मोंछबला पुलिस बंदुक तनने बैसल छल जेना कतेक भारी काज केने होअए? हम आ किशुन पछिला सीटपर बैसल रही ।सरकारी अस्पतालमे मालतीक डाक्टरी जाँच भेल । जाँचमे सभठीकेआएल।संभवतः बदमाससभकयोजनामे पुलिस किछु भांगठ कए देलक । की कहल जाए? महानगरीक हेतु ई कोनो एहि तरहक एसगर घटना नहि छल । बढ़ैत दबाबक कारण अस्पतालोक हेतु समस्या ठाढ़ भए गेल रहैक । हालतकेँ काबू करबाक हेतु पुलिस मंदिरपर पहुँचि गेल। ओहिठाम किशुनकेँ तरह-तरहक प्रलोभन देलक । मुदा ओ अड़ि गेल जे आओरकिछु नहि चाही ,बस अपराधीकेँ पकड़ल जाए आ सजा देल जाए । कनीकालमे विजय स्वयं पहुँचि गेलाह आ कहलाह जे  हालत बहुत खराप भए रहल अछि । हमरा देखि कहए लगलाह॒-"कनी अहूँ बुझबिऔन । हमरा ऊपर विश्वास करू। हम बदमाससभकेँ छोड़बैक नहि । कनीक समय दिअ ।" "हमरासभसँ की चाहैत छी?’’ "बस एतबे कहि दिऔक जे पुलिस ठीक काज कए रहल अछि ।" “हमरा एहिमे कोनो दिक्कत नहि बुझाइत अछि, कहि दहक ।"-हम किशुन केँ कहलिऐक। ओ हमरबात मानि लेलक। एतबेमे ओहिठाम मेडिआक हुजुम पहुँचि गेल । सभ ओकरासँ तरह-तरहसँ प्रश्नसभ पुछए लागल ।विजय हमरा दुनूगोटेकेँ अपन कारमे बैसा ओहिठामसँ लेने चल गेल ।थानामे किशुन सभ लग कहलक जे ओ पुलिसक प्रयाससँ संतुष्ट अछि । बस एतबे बाजिकए ओ कात भए गेल । विजय हमरासभ सँ प्रशन्न छल । हमसभ थानेमे रही कि एकटा पुलिसक जीप आएल । विजय सही साबित भेल।बदमाससभ पकड़ल गेल । बदमाससभसँ पूछताछमे पता लागल जे मालती चलती ट्रेनमे शौचालयमे गेल रहथि आ बाहर होइतकाल गलतीसँ लगीचक दोसर डिब्बादिस चलि गेलीह । ताबतेमे ओ पछिलका डिब्बा ट्रेनसँ छुटि गेल रहैक । डिब्बामे जाइते ओ अकचका गेलि । ओकरा लगपास बैसल बदमाससभ गोलिआ लेलक आ की केलक की नहि जे ओ एहि हालमे पहुँचि गेलि । (अनुवर्तते) - रबीन्द्र नारायण मिश्र, पिताक नाम : स्वर्गीय सूर्य नारायण मिश्र, माताक नाम :स्वर्गीया दयाकाशी देवी, बएस : ६५ बर्ख, पैतृक ग्राम : अड़ेर डीह, मातृक : सिन्घिआ ड्योढ़ी वृति : योजना आयोगक उप सचिवक पदसँ सेवा निवृत्त भेलाक बाद वर्तमानमे दिल्लीमे स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट।शिक्षा : चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालयसँ बी.एस-सी. भौतिकी विज्ञानमे प्रतिष्ठा : दिल्ली विश्वविद्यालयसँ विधि स्नातक। प्रकाशित कृति : १.‘भोरसँ साँझ धरि’ (आत्म कथा), २.‘प्रसंगवश’(निवंध), ३.‘स्वर्ग एतहि अछि’(यात्रा प्रसंग), ४.‘फसाद’ (कथा संग्रह)५.‘नमस्तस्यै’ (उपन्यास) ६.’विविध प्रसंग’ (निबंध संग्रह), ७. ‘महराज’ (उपन्यास) ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। संतोष राय गाम गामक बीचि टोल मे किछु लोकनि हरदम खेलथि छथि ताश। उ दलान ताश खेलेवाक गृह बनि गेल छै। जखन परदेशी सभ गाम वापिस अबैत छथि तँ ओइ दलान केँ दिनभरि ओगरने रहति छथि। सुनबा मे आयल जे इ दलान बड़ि पुरान छै। गामक आदि दलान। हम नान्हिटा सँ देखि रहल छियैए अइ दलान पर ताश खेलनिहार भरल रहैत छथि। जलखै खेलाक बाद एकटा टीम ताशक अजमाइस करs लागैत छथि। फेर ओइ टीम मे सँ किछु लोकनि खेल-खेल कs बाहरि भs जाएत छथि आओर किछु दोसर लोकनि टीम मे जुड़ैत जाएत छथि। जेनानी सभ जलखै बना कs माल जाल केँ काज मे भीर जाएत छथि। इ मरद लोकनि ताश खेलैत-खेलैत निशीभाग राति मे घर जाएत छथि। इ दलान कतेक इतिहास लिखलकै। गाम केँ दुभाग मे बाँटि कs किछु लोकनि अपन उल्लू सीधा कएलाथि। अइ दलान पर ओइ सँ किछु फर्क नहि पड़लै । गामक इतिहास बड़ि नीक नहि रहलै। लक्ष्मी बाबा के मर्डर सँ लकs राजेश्वर मास्टर साहब के मर्डर धरि कतेक छोट सँ छोट आओर नम्हर सँ नम्हर कुकर्म भेलै। सभ इ गाम पचा लेलकै। इ गामक एकता कहल जाए वा गामक कमजोरी। गाम सँ सामंती सोच गायब नहि भेलै अखन धरि। बुझना नहि जायत जे भारत एकटा लोकतांत्रिक देश छियैए।  गरीबक हाल ओहिना छै। मुखिया आओर वार्ड मेम्बर बदैल गेलै, परञ्च गामक हाल ओहिना छै। सरकारी योजना मे लूट-खसोट बरकरारे छै। राजद केँ जंगल राजक बाद सुशासन बाबू केँ पन्द्रह साल सेहो बीत रहल छै, परञ्च गाम ओहिना केँ ओहिना छै। जन वितरण प्रणाली केँँ दुकान पर धांधली जारी छै। रजिस्टर मे डीलर गेहूँ, चावल आदि केँ वजन किछु आओर लिखैत छथि आओर राशन कार्ड धारक केँ अनाज किछु आओर दैत छथिन्ह। अर्थात्  डीलर राशन कम दैत छथिन्ह आओर कार्ड धारक सँ साइन बेसी पर कराबैत छथिन्ह। गरीब केँ अनाज पर डीलरक डाका पूरा बिहार मे छै मने। मनरेगा मे लूटिस भ रहल छै। मुखिया आओर हुनकर चमचा लूटि कs खा रहल छथि। इ खेल ऊपर सँ नीचा धरि पदाधिकारी सभ मिलि कs  क रहल छथि। सरकारक सभटा योजना अइ प्रकारेण  सफलिभूत भs रहल छै। ताश केँ पत्ता जँका रंग बदलि रहल अछि गाम। जिनका पक्का घर छन्हि हुनका प्रधानमंत्री आवासक लाभ भेट रहल छन्हि। इ बिहारक सच्चाई छियैए। आवासीय सहायक मिलि कs सरकारी खजाना केँ लूटि रहल छै। गरीब ओहिना गरीब छथि। भरि गामक लोकनि बौक भs गेल छथिन्ह। मुखिया केँ विरूद्ध चुँइ नहि बाजि सकैत छथि। मुखिया गुंडा पालने छथि। पाँच-छह टा बेरोजगार छौड़ा पालने छथि। तकर डर देखा कs सभहक मुख चुप कs दैत छथिन्ह। यद्यपि इ खेल कतेक दिन धरि चलतै। अगिला बरख चुनाव छियैए आओर जनता आब फेर हिनका भोट नहि देतिन्ह। इ भरि पंचायत मे जनता बाजि रहल छै। " हिनका की भेलन्हि ?", बमबम वीरू सँ पुछल्थिन्ह। " सुनबा मे आयल जे तोहर माय केँ कैंसर भs गेल छन्हि ।" , बासु बजलाह। "हँ, ठीके सुनलियैए काका ।" ,वीरू प्रत्युत्तर देलथिन्ह। "इलाज करौहलक, कि नहि ?" "काका, हाथ मे फुटी कौड़ी नहि अछि तँ कतs सँ इलाज करौबै ।" "लॉकडाउन मे सभ किछु बरबाद भs गेल।" सभ जगह लॉकडाउन मे लूटिस भs रहल छै। बिहार मे विकास केँ नाम पर नेता-चमचा मिलि कs लूटि रहल छै।" हँ, तूँ ठीके कहैत छिही ।", बासु बजलाह। बाबा नीलकंठ चौक पर चारिटा दोकान खुलि गेलैए। लॉकडाउन मे जिनगी केँ पटरी पर लाबै केँ इ जतन भs रहल छै। मखनपुरा पर सेहो स्नैक्स केँ दोकान खुलि गेलैए। नीक गप इ अछि जे सभ लोकनि  स्वरोजगार केँ ऊपर ध्यान द रहल छथिन्ह। प्रमीला देवी आइ गुजैर गेलीह। मंगरौना संकल्प सेवा संस्थान आओर ग्रामीण केँ सहयोग सँ वीरू माय केँ पटना में इलाज करौलथि ,परञ्च कैंसर प्रमीला देवी केँ जान लकs छोड़लकै। आइ पस्टन वाला पुरोहित गरूड़ पुरान के वाचन कs रहल छथिन्ह। रामदाय देवी अपन सास-ससुर के उधेसने छै।दलान पर किछु मेहमान बैसल छथिन्ह ,परञ्च  ओ लोकनि तकर परवाह नहि करैत गुहाँ-गिज्जरि करवा मे लागल छथि। "निपुत्तरे रहमे।" "तोरा पुरखा के कर मे हगबौ।" "देखै नहि छी सौतिन, नांगर भेल छैं।" " जेना हम दुख कटै छियैए ओहिना तोहर माय कटतौ।" "सौतिन बेसी बजलैं तs आब एकटा अलंग तोड़ि देबौ।" इएह दुनिया छियैए गामक। गामक लोकनि सभ बौरा गेल छथि। लॉकडाउन तबाह कs देलकै।इस्कुलिया सभ भरि दिन तेलिया कलम मे खेलैत रहैत छथि। पढ़ाई-लिखाई सभ चौपट भ गेलै। कोरोन सभ केँ जिनगी मे खलबली लैब देने छै। तै परसँ बाढ़ि आबि गेल छै। मालथस के थ्योरी  काज कs रहल छै। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। नबोनारायण मिश्र एहनो होइत छै कलकत्तामे बहुत रास साहित्यकार भेलाह मुदा कार्यक्रममे बहुतो एहन साहित्यकार अपन प्रस्तुति दै छथि जिनका लोक स्थानीय साहित्यकार बूझै छथि आ अपना-आपकेँ महत्वपूर्ण बूझए बला साहित्यकार सभ हिनका सभकेँ मात्र फिलर बूझै छथि। फिलर मने कोनो कार्यक्रममे महत्वपूर्ण साहित्यकारक मंचपर आबएमे जतेक समय लगतै ताहि समयमे दर्शक-श्रोताकेँ जेबासँ रोकए बला साहित्यकार। साहित्यिक समाज फिलरकेँ महत्व नै दै छै मुदा हमरा जनैत फिलरे टा मात्र सुच्चा साहित्यकार होइत छथि कारण हुनका कोनो संस्था, कोनो मंचक, कोनो स्मारिकाक लाज बचेबाक रहैत छनि आ ताहि बदलामे हुनका ने पुरस्कार चाही आ ने थपड़ी। ओना जँ साहित्यकार समाज एहि फिलर सभहक आलोचना करतथि तँ निश्चित तौरपर ई सभ स्थापित साहित्यकार भऽ सकै छलाह जखन कि हिनकर सभहक रचनामे सभ तत्व अछि। बस खाली साहेब सभहक कृपादृष्टि नै भेटलनि। आइ एहने एकटा साहित्यकार नबोनारायण मिश्रजीक एकटा रचना देखू। भविष्यमे हम कलकत्ताक ओहन सभ रचनाकारक रचना प्रस्तुत करब जे साहित्यमे कतहुँ नै छथि (संकलन-आशीष अनचिन्हार) मोहनजी बड़ सहज आ सोझमतिया लोक। समाजिक कार्यमे सदिखन तैयार मुदा तामस नाकेपर, ताहि कारणे हुनके दोसर नाम दुर्वासा ऋषि सेहो कहल जाइत छल आ लोक घबड़ाइते गप्प करय। लोकक मूँहसँ सुनने छलाह जे सिनेमा मनोरंजनक नीक साधान छै मुदा अवसरे नै भेटनि। एक दिन अपन समवयस्क राघवजीसँ मोनक बात फरिच्छा कऽ कहलनि। राघवजीक कहलखिन जे काल्हिये रवि छै हमरो छुट्टी रहत काल्हि भोजनक पश्चात तैयार रहब मधुबनी चलबाक हेतु। मोहनजीकेँ उत्सुकतासँ रातिमे निन्न नै भेलनि। प्रातःकाल भोजनोपरांत दुनू गोटे मधुबनी पहुँचलाह। सिनेमाक टिकट लऽ शंकर टॅाकीजमे धड़फड़ायले प्रवेश केलन्हि ताधरि तेसर दृश्य चलि रहल छलैक। अन्हारमे अपन-अपन सीट हथोड़ैत पहुँचलाह आ सीट पकड़लाह। दसे मिनट केर बाद मोहनजी बजलाह जे चलू-चलू बुझलियै। धुर... जो एहने होइत छैक? राघवजी बुझेलखिन जे बड़ नीक भऽ रहल छै तखन अगुताइ किए जाइ छी? अहींकेँ मोन लागल छल तखन एना की बात भेल? फेर गप्प ओहिठाम ठमकि गेल। थोड़बे कालक बाद इन्टरभेलमे हॅाल प्रकाशसँ जगमगा उठल। तखन राघवजीकेँ बुझबामे एलनि जे मोहनजी एतेक काल धरि यातना सहलनि। असलमे फोल्डिंगबला कुर्सीक सीट उपर उठा कऽ राखल छलैक। जेना-जेना लोक आएल कुर्सीकेँ नीचा खसा कऽ बैसैत गेल मुदा अन्हार रहबाक अनभिज्ञ मोहनजी कुर्सीक दूनू बाँहिपर शरीरक भार दऽ मुर्गी जकाँ लटकल छलाह। तखन राघवजी कहलखिन जे सिनेमा एहने नै एहनो होइत छै।

(मूल प्रकाशन-कर्णामृत जनवरी-जून २०१९) ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आशीष अनचिन्हार यूट्यूब आ मैथिली फरवरी 2005मे यूट्यूब केर स्थापना भेल आ नवम्बर 2006 एकरा गूगल कीनि लेलकै। T- series भारतक पहिल यूट्यूब चैनल अछि जे कि 13 March 2006 मे शुरू भेल https://www.youtube.com/user/tseries/about मुदा एहिपर पहिल भीडियो 23 Dec 2010 मे देल गेलै। मैथिली हिसाबसँ हिसाबसँ देखी तँ  https://www.youtube.com/user/vijay7701 नामसँ 3 Feb 2007 केँ एकटा चैनल शुरू भेलै जाहिमे शारदा सिन्हाजीक गाएल एकै गीतक दूटा भीडियो अछि आ पहिल भीडियो 3 Jun 2007 केँ देल गेलै। ई गीत मैथिलीक अछि मुदा ओकरापर लेभल भोजपुरीक लागएल गेल छै आ तकर एकमात्र कारण जे ई गीत सभ मैथिल ब्राह्मणक विधि-बेबहारमे नै अबैत छै मुदा आन मैथिल जातिमे बजैत छै। तेनाहिते gopal yadav केर नामसँ एकटा चैनल छै https://www.youtube.com/channel/UCIr9OhghzI9iG4mby69KB3w  जाहिपर 12 Feb 2007 केँ दू टा मैथिली आ 13 Feb 2007 केँ एकटा भोजपुरी भीडयो देल गेलै। अंशुमान सिन्हा (शारदा सिन्हाजीक पुत्र) 11 Jan 2008 मे अपन चैनल लेलाह https://www.youtube.com/user/mranshumansinha/about जाहिमे पहिल भीडियो 2010 मे देल गेलै सेहो आन-आन भाषाक, किछु मैथिली गीत तीन-चारि सालक बाद देल गेलै। गजेन्द्र ठाकुर अपन चैनल 10 Apr 2008 मे लेलाह https://www.youtube.com/user/ggajendra71/about जाहिपर 27 Apr 2008 केँ पहिल भीडियो एलै। एकर तुरंते बाद Jun 2008 केँ रजनी पल्लवीजीक चैनल आएल https://www.youtube.com/user/rajnipallavi/about जाहिपर पहिल भीडियो 20 Jul 2008 केँ एलै। आ एहि तीनक बाद मैथिली चैनलक संख्यामे बहुत वृद्धि भेल हम अपनो चैनल 22 Aug 2009 केँ लेलहुँ https://www.youtube.com/user/ashishanchinhar/about मुदा एहिपर भीडयो हम सात बर्ख बाद देलहुँ। धीरेन्द्र प्रेमर्षि जीक चैनल https://www.youtube.com/user/premarshi/about 8 Jun 2010 केँ आएल आ पहिल भीडियो 1 Sep 2010 केँ देल गेल। वर्तमान समयमे भीडियोक माध्यमसँ काज करबाक यूट्यूब केर बहुत पैघ सहारा छै। भीडियो शूट कए कऽ यूट्यूबपर अपलोड करू आ अपन बात सभ धरि पहुँचाबू। ई हरेक तरहँक भीडियो लेल छै। चाहे राजनीतिक हो कि समाजिक कि साहित्यिक कि कैरियरक। जीवनक हरेक क्षेत्रसँ संबंधित भीडियो भेटि जाएत एहिठाम। बेसी लोकप्रिय भेलापर ओहि भीडियोसँ अर्थोपार्जन सेहो होइत छै। 2010 केर बाद जँ हम मैथिली यूट्यूब चैनल केर गिनती करए लागी तखन सभ काज छोड़ए पड़त। मुदा जे नीक ओ प्रमुख अछि ताहिमेसँ किछु प्रमुख नाम एना अछि (उपरक नाम छोड़ि ई लिस्ट अछि कारण उपर ओकर चर्चा भेले अछि)— 1) मिथिलांचल गीत 2) मैथिली टी.भी 3) गंगा मैथिली 4) अपन मैथिली 5) नीलम मैथिली लोक गीत 6) मिथिला मिरर 7) मधुर मिथिला एहि केर अतिरिक्त JHM News केर नामसँ एकटा नीक चैनल आएल अछि जे कि मैथिलीक अतिरिक्त हिंदीमे सेहो मैथिल-मिथिला-मैथिलीसँ संबंधित तथ्य सभ लग पहुँचाबै छथि। JHM News एकटा नीक प्रयास अछि। एकर प्रभाव निकट भविष्यमे देखबामे आएत। एकर अतिरिक्त आरो बहुत रास नीक-नीक चैनल सेहो अछि जकर नाम जोड़ल जा सकैए। एहि बीचमे हम फेसबुकपर जानए चाहलहुँ चैनल सभकेँ बारेमे तँ प्रणव झाजी सूचना देलाह जे ओ २००७मे यूट्यूबपर रजनी पल्लवीजीक चैनलसँ गीत सुनने छलाह बादमे रजनीजी सूचना देलीह जे ओ २००६मे चैनल बनेने छलीह मुदा ओकरा हटा कऽ २००८ मे नव बनेलीह। फेसबुक पोस्टक फोटो देल जा रहल अछि। (एहि लेखमे बहुत रास पुरान चैनल प्रणवजीक सहायतासँ भेटल अछि) पाठकीय: १ विदेह के 301 एवं 302अम अंक मे गजेन्द्र ठाकुर जी द्वारा यूपीएसी के तैयारी लेल जे सामाग्री उपलब्ध कराओल गेल अछि से आशा करैत छी जे मैथिली विषय से तैयारी करय बला छात्र सभ लेल उपयोगी सिद्ध हेतैक। आ आन पाठक सभ लेल सेहो ई रिफ्रेशिंग कंटेन्ट छैक। 301म अंक मे आशीष अनचिन्हार के लेख मैथिली एप के विषय मे बढ़िया जानकारी दै छैक, तै रुचिगर लागल। मैथिली भाषा के टूल्स के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अनबाक शुरुआती प्रयास सब के संकलित करबाक प्रयास सराहनीय अछि। ऐ लेख मे पहिल एप के समय 2013 डेल गेल छैक।  मुदा एकटा प्रश्न हमारा मोन मे ठाढ़ भ जाय अछि जे एप के मतलब कि एतय वेब बेस्ड एप्लिकेशन वा मोबाइल आधारित एप्लिकेशन टा छैक आ कि विंडोज आ लायनक्स पर चलय बला आन आन सॉफ्टवेयर टूल सेहो छैक? यदि एप से मतलब आन सॉफ्टवेयर टूल सेहो छैक तखन हम संशोधन करय चाहब जे मैथिली भाषा संबन्धित टूल डिवैलप करई के काज तत्कालीन भारत सरकार द्वारा उपरोक्त समय से बहुत पहिने शुरू क देल गेल छलई। आ सी-डेक द्वारा 2009 मे मैथिली भाषा से संबन्धित किछ टूल  विंडोज आ लयनक्स प्लेटफॉर्म के लेल डिवैलप क लेल गेल छल। आ जे सॉफ्टवेयर तत्कालीन सरकार द्वारा सीडी के माध्यम से जनता के मुफ्त मे उपलब्ध कराओल गेल छल। हमहू ओ सीडी मंगेने रही, यद्यपि ओकर कोनो खास उपयोग नै क सकाल रही, आ नै हम समीक्षा क रहल छी जे ओय समय के अनुसार ओ टूल सब कटेक उपयोगी छल। ऐ लेखे हम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सेहो कै बेर चर्चा केने रही कि मैथिली भाषा के लेल एप विकास के काज पूर्व सरकार मे शुरू भ गेल छल मुदा कतेक इफेक्टिव ऐ पर बहस भ सकई अछि आ सरकारी प्रयास के बावजूद ओय समय मे ई बेसिआई लोक तक किए नै पहुंचलई  ऐ बात पर सेहो चर्चा भ सकई अछि। ओ सीडी हमरा लग हेरा गेल छल तै साक्ष्य नै छल, मुदा खोजला पर ओ सीडी भेंट गेल आ ओकरा हम गूगल ड्राइव पर डाउनलोड लेल ध देने छी जेकर लिंक अछि : https://drive.google.com/drive/folders/1YNCbyJk7FQWA32ESrlDZT3Kj57Z348Pm?usp=sharing मैथिली विषय पर काज आ शोध करई बला विद्वान लोक सब चाहैथ त ई टूल्स/एप के परीक्षण आ आई पर शोध क सकई छाईठ। 302अम अंक मे सेहो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर निक लेख लिखल गेल अछि। बाबा बैद्यनाथ के गजल रुचिगर लागल। आन कथा सब सेहो निक छल। आगामी अंक के लेल शुभकामना। प्रणव कुमार झा २ स्वार्थ क रंग- एक सार गर्भित, संक्षिप्त लघु कथा । वास्तविकता क संग अमानवीयता क एक अपूर्व रंग । समाज में ऐहनो उदाहरण छै । की , एकरा एक मानसिक विमारी वा विकृति क संज्ञा देल जा सकैछ ? गजेंद्र चौधरी ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.आनन्द दास- नींद आबि जाइत अछि ३.२.बाबा वैद्यनाथ- गजल आनन्द दास- नींद आबि जाइत अछि नींद आबि जाइत अछि आइ भोरमे, ख़ूब तमसा-पित्ता क', गाम फोन केने छल, सपना छल आ सपनेमे, बहुतेक बात-कथा कहने छल। सबके जे बनौलक, आब सबसँ भीख मांगि रहल छै, आब त' गामों-घरके, गाममे, मोन नहि लागि रहल छै। कहै छल…, अहांके सपरिवार गाम एला, दसेक साल भ' गेल, निपैत अंगनाके खुरैवला बौआ, एतेक सियनगर भ' गेल। तुलसी चौड़ामेदीप आ असोरामे बिनु शीशा लालटेन टांगल छै, मड़वाखुट्टा, चारक रंगल मुठ्ठी, साबेडोरीसँ, अखनों बान्हल छै। राखल लार-पुआर दलानपर आ अंगनामे धान मिरल छै, नेबो, अनार, धातरीम, अररनेबा, सबटा सरि-सरि गिरल छै। आम-मौह आ ख़िरीयपुरिया गाछ, सबटा गामेमे राखल छै, किछु काज गामोंसँ करु, मड़वा-दलानके आस लागल छै। असोराके जत्ता आ ढेकी, सबदिन एकदोसर स', लड़ाई ठानै छै, लोरहि-सिलौटके देखियौ, उखरि-समाटक, एक्कोटा बात नहि मानै छै। अंगनामे कौवा कुचरययए आ दलानपर तितली आब'अ लागयछै, जखन अहां, सपरिवार गाम आबै छी, धियापुताके ख़ूब मोन लागय छै। अगर, अखनों अप्पन गाममे, अस्पतालक चिंता नै करबै, फेर, सेवानिवृत्त भेला बाद, गाममे सुखक दिन कोना कटबै। की करब, हम अहां भोज गाममे, आब परदेशेमे पार्टी भ' जाइत अछि, फुर्सत त' हमरो अछि गामक लेल..., मुदा..., जखन पेट भरि जाइत अछि, त' नींद आबि जाइत अछि...। -       आनन्द दास, "बाबाअंगना", नवानी, 29.06.2020 ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। बाबा वैद्यनाथ- गजल गजल पहिल  गुरु  मायकेँ  बूझी हुनक  सभ बातकेँ मानी प्रथम  पूजन  करी  हुनके  तखन जे काज से ठानी रखै   छलि  ध्यान  पेटोमे  जनम देलनि  पुनः सेवा कते ओ कष्ट छलि सहने कहै सभ बात छथि नानी लगै अछि लाज हमरा बड़ पड़ै अछि मोन बदमासी करी  हम  तंग  माताकेँ  तखन छल खूब मनमानी कते  ओ  कष्ट सहि  पालन  करै छलि दुःखकें सहितो पढ़ाकेँ  उच्च   शिक्षा   धरि  बनौलनि  पुत्रकेँ ज्ञानी मुदा ओ रोगमे जकड़ल कनै छथि खाटपर सूतलि इलाजो  खूब  करबै  छी लगै अछि बैसिकऽ कानी जखन अवहेलना मायक करय जे पुत्र अछि पापी तखन  उद्धार  नहि  ओकर  कतेको पैघ  हो दानी ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf          Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf       12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक,  १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf       Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf         21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010        Videha_01_10_2010_Tirhuta             67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010        Videha_15_11_2010_Tirhuta             70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010        Videha_15_12_2010_Tirhuta           72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011        Videha_01_03_2011_Tirhuta           77 ७) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012        Videha_01_08_2012_Tirhuta           111 ८) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013        Videha_15_03_2013_Tirhuta           126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013        Videha_15_11_2013_Tirhuta           142 १०) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १३) विदेह सम्मान विशेषा‍क- २००म अ‍क १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अ‍क १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १४) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आम‍ंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी VIDEHA 209th issue विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन  नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक  बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of original work.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् (c)२००४-२०२०. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम वि‍लास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत।  एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2020 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA

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