विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' ३०४ म अंक १५ अगस्त २०२० (वर्ष १३ मास १५२ अंक ३०४) 'विदेह' ३०४ म अंक १५ अगस्त २०२० (वर्ष १३ मास १५२ अंक ३०४) ऐ अंकमे अछि:- १. गजेन्द्र ठाकुर- संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली ऐच्छिक विषय हेतु सामिग्री (FOR UPSC-BPSC EXAMS- GENERAL STUDIES AND MAITHILI OPTIONAL SUBJECTS) २. गद्य २.१.रबीन्द्र नारायण मिश्र- धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर (चारिम खेप) २.२.प्रियंवदा तारा झा- दूटा बीहनि कथा २.३.कंचन कंठ- मुक्ति २.४.१.प्रभाष अकिंचन- २टा बीहनि कथा २. विन्देश्वर ठाकुर - २ टा बीहनि कथा ३. मुन्ना जी- बीहनि कथा ४. नबोनारायण मिश्रजीक रचना- प्रस्तुति आशीष अनचिन्हार (दोसर खेप) ३. पद्य ३.१.प्रियंवदा तारा झा- मोन होइछ ३.२.कंचन कंठ- अजगुत बुचिया ३.३.१. प्रभाष_अकिंचन- दूटा कविता २. संतोष कुमार राय ’बटोही'- आउट इनकम ३. आशीष अनचिन्हार- २ टा गजल ३.४.आभा झा-कृष्ण केर माहात्म्य Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव Join Videha googlegroups १. गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली ऐच्छिक विषय हेतु सामिग्री (FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) -BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- GENERAL STUDIES AND MAITHILI OPTIONAL SUBJECTS) रिसोर्स सेन्टर सुभाष चन्द्र यादव राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि। इग्नू BMAF-001 मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. UPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी. BPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS भाषापाक ENGLISH MAITHILI COMPUTER DICTIONARY MAITHILI ENGLISH DICTIONARY MAITHILI BOOKS/ PICTURE-AUDIO-VIDEO ARCHIVE डॉ. ललिता झा मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली पहिने मिथिला मैथिलीक सामान्य जानकारी लेल एहि पोथी सभकेँ पढ़ू:- राधाकृष्ण चौधरी मिथिलाक इतिहास A Survey of Maithili Literature THE POLITICAL AND CULTURALHERITAGE OF MITHILA फेर एहि मनलग्गू पोथीकेँ सेहो पढ़ू:- केदारनाथ चौधरी अबारा नहितन कुमार पवन (साभार अंतिका) पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) डॉ बचेश्वर झा B_JHA_Nibhand_Nikunj.pdf डॉ. देवशंकर नवीन Adhunik_Sahityak_Paridrishya.pdf अणिमा सिंह Shishu_Geet_Khel_Anima_Singh.pdf शिव कुमार झा "टिल्लू" अंशु-समालोचना रामदेव झा सव्यसाची (अभिनन्दन ग्रन्थ) आनन्द मिश्र (सौजन्य श्री रमानन्द झा "रमण") मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण प्रेमशंकर सिंह मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) डॉ. रमण झा मैथिली काव्यमे अलङ्कार अलङ्कार-भास्कर भिन्न-अभिन्न डॉ. रमानन्द झा 'रमण' हिआओल याेगेन्द्र पाठक वियाेगी विज्ञानक बतकही दुर्गानन्द मण्डल संचयिका रामलोचन ठाकुर मैथिली लोककथा https://www.youtube.com/channel/UC4abVKqMj2pDWIAkXiOHp7A (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर २. गद्य २.१.रबीन्द्र नारायण मिश्र- धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर (चारिम खेप) २.२.प्रियंवदा तारा झा- दूटा बीहनि कथा २.३.कंचन कंठ- मुक्ति २.४.१.प्रभाष अकिंचन- २टा बीहनि कथा २. विन्देश्वर ठाकुर - २ टा बीहनि कथा ३. मुन्ना जी- बीहनि कथा ४. नबोनारायण मिश्रजीक रचना- प्रस्तुति आशीष अनचिन्हार (दोसर खेप) रबीन्द्र नारायण मिश्र- धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर लजकोटर (प्रवासीक जीवनपर आधारित) (चारिम खेप) -4- सुनने रहिऐक जे दिल्ली राजधानी छैक । एहिठाम कोनो भेद-भाव नहि होइत अछि । मुदा सभ फूसि बुझा रहल अछि । एहिठाम तँ गामोसँ बेसी खराप हाल लगैत अछि । जकरे देखू सएह-“ऐ बिहारी! कहि कए बजाओतजेना ओ अपने इंगलैंडमे रहनिहार हो । एहन बात नहि छैक जे ओकरासभमे सभ बीसे छैक तैओ ओ सभ भारी तँ पड़िते अछि । एक दिन किशुन हमरा मालतीक संगे फुसुर-फुसुर करैत देखि लेलक । ओकरा पहिनहिसँ तरह-तरहक सक रहबे करैक । ओहिमे इजाफा भेलैक । रातिमे जखन सुतबाक समय होइक तँ ओ दुनूगोटे कोठरी मे चल जाइत आ हम मंदिरेमे सुति जाइ । मुदा कै राति हमरा हल्लासँ निन्न टुटि जाइत छल । ओ दुनूगोटे दूपहर रातिमे चिकरा-भोकरी करए लागए। मुदा हम कइए की सकैत छलहुँ? सकक कोन इलाज छैक ? “आखिर बात की छैक । एकरासभकेँ दूपहर रातिमे एना झगड़ा किएक भए रहल छैक?” केबार लग कान सटाकए सुनए लगलिऐक । ओकरसभक गप्प-सप्प सुनिकए अबाक रहि गेलहुँ । " अहाँ दिन-राति गोविंद संगे सटल रहैत छी । एहिबातक कोन ठेकान जे ई बच्चा ककर अछि?"-किशुन बाजल । "अहाँ निर्लज्ज छी । एहन सोचैत अहाँकेँ भगवानोक डर नहि भेल । हमरातँ अहाँ दुर्दषा करिते छी मुदा एकटानिर्दोष व्यक्तिकपर एहन लांछन लगेबासँ अहाँकेँ कनीको संकोच नहि भेल?"-मालती बजलीह । "चुप रहू । हम सभ बुझैत छी । हम अहाँ केँ कहिआ नीक लगलहुँ?तथापि हम बहैत रहलहुँ । मुदा आब तँ बात हदसँ आगा भए गेल अछि ?" "अहाँक माथा गड़बड़ा गेल अछि । आओर किछु नहि भेल अछि?" दुनूगोटेमे बात बढ़िते गेल । किछुकालक बाद मालती जोरसँ केबारमे धक्का मारलक आ बड़बड़ाइतबाहर भए गेलि । हम कनीके फटकी रही । पुछलिऐक-"की भेलैक?" "सभटा तोरे चलते भए रहल अछि आ पुछि रहल छह जे की भेल? -किशुन बाजल। " आब किछु भए जाएत हम एकरा संगे नहि रहब ।"-से बाजि मालती डेग आगा केलक। अहाँ दुनूगोटेमे जँ हमरा लेल झंझटि भए रहल अछि तँ हम भोरे एहिठामसँ अपन डेरा फराक कए लेब मुदा अहाँसभ एना नहि करू।" " जे अनर्थ करबाक छलह से केलह । आब किएक नहि जेबह?" "हम किछुनहिकेलहुँ? तोहर अपने मोन भसिआ रहल छह ।"-हम कहलिऐक। " अपनो जाह आ हिनकोलेने जाह । खाथि भीम आ हगथि सकुनी । " हम मालतीकेँ बहुत आग्रह केलिऐक जे दूपहर रातिमे कतहुँ गेनाइ ठीक नहि हेतैक । भोर होबए देथि । मुदा ओ किशुनकसंगे किन्नो रहए हेतु तैयार नहि छलि।कहुना कए भोर भेल। रातुक बात चारूकात पसरि गेल । लोकक सहानुभूति मालतीक संग छल मुदा सभ सँ बेसी पराभव तँ हमर छल । ने ओतए रहि सकैत छलहुँ ने ओहि हालतमे मालतीकेँ छोड़ि सकैत छलहुँ । बात मंदिरक व्यवस्थापक धरि गेल । ओ सभ आपसमे बैसारी कए किशुनकेँ पुजारी काजसँ आ मंदिरसँ बेदखल करबाक निर्णय केलथि । किशुनकेँ ओहि मंदिरपरसँ ओकर व्वस्थापकसभ हटा देलकैक । आब की होएत? ने हमरा कोनो ठेकान छल ने किशुनकेँ ।ओकर काज आ घर दुनू चल जाइत रहलैक । हमरो रहबाक समस्या भए गेल । काज तँ हमरा विजय धरा देने रहए। नोएडामे कोनो कारखानामे लेबर सुपरवाइजरक काज रहैक । गुजर जोगर पाइ भेटि जाइत छल । मकानक किराया नहि लगैत छल। भोजनोक व्यवस्था किशुनक संगे छल,तेँ कम खर्चामे गुजर भए जाइत छल । किछु टाका सभ मास मनीआर्डर सेहो माएकेँ कए दैत छलिऐक ।गाममे माए मनीआर्डरक प्रतीक्षा करैत रहैत छलथि । कै बेर ओकरा पहुँचएमे मासदिनसँ बेसिए लागि जाइक। अखबारमे खबरि आएल रहए जे मनीआर्डरक पाइके रस्तेमे कै बेर गोलमाल कए लेल जाइत अछि । बाहरे दिमाग! बिना कोनो खर्चाकेँ ओ सभ ओहि पैसासँ मासभरि सूदि लगा कए नीक उपार्जन कए लैत छल । लोककेँ मनीआर्डर तँ भेटिए जाइत छलैक, कनी देरिएसँ सही।मनीआर्डर भेटिते माएक फोन अबैत छल जाहिसँ हमर सभ दुख हरा जाइत छल । माए आशीर्वादक बरखा कए दैत छलि। मंदिर छुटिगेलासँ किशुनके हालत पातर तँ भइए गेलैक, हमरो व्यवस्था गड़बड़ा गेल । किशुनसंगे ओकर घरनी छलैक । ओकरा मालतीपर सदरिकाल सक होइत रहैत छलैक । ऊपरसँ जहिआसँ ट्रेनमे ओ कांड भेलैक,किशुनके मोनमेमालतीक प्रति दुबिधा तँ भइए गेल रहैक । यद्यपि ओकर एतबे दोषरहैक जे ओ बिना सोच-विचारकेँ गाममे सासुसँ झगड़ा कए भागि कए बिना टिकटकेँ ट्रेनमे चढ़ि कए अपन घरबला लग अबैत रहए मुदा रस्तामे एतेक तरहक बात भए जेतैक से ओ कीजाने गेलैक ? मुदा सेसभ भेलैक। थाना-पुलिस धरि बात चलि गेलैक। सालो मोकदमा चलैत रहलैक मुदा ककरो किछुनहि भेलैक । सभ बदमास निफिकिर घुमि रहल छल। ककर ठठ्ठा छैक जे ओकरासभकेँ टोकारा देत? जे से करत, से भोगत। कहबी छैक जे गेलहुँ नेपाल आ कपारगेल संगे । हम दिल्ली आएल रही जीविका हेतु आ एहिठाम तरह-तरहक धसना धसैत देखि मोन उद्वेलित होइत रहैत छल । मुदा विकल्प तँ किछु छल नहि ? अस्तु,भोरे हम मालती आ किशुनकेँ ओही हालमे छोड़ि मंदिरपरसँ बिदा भए गेलहुँ । जाइत काल मोन भेल जे किशुनकेँ बुझबिऐक,किछु कहिऐक मुदा फेर की भेल,की नहि चोट्टे बिदा भए गेलहुँ । हम सोचलहुँ जे जाबे हम मालती लग रहब ओकर मोसकिल बढ़िते रहत । भए सकैत अछि जे हमरा फटकी भेलासँ ओ सभ आपसमे सलटि लिअए । हाथमे पेटी,पीठपर झोड़ा लटकेने बिदा भए गेलहुँ । (अनुवर्तते) - रबीन्द्र नारायण मिश्र, पिताक नाम : स्वर्गीय सूर्य नारायण मिश्र, माताक नाम : स्वर्गीया दयाकाशी देवी, बएस : ६६ बर्ख, पैतृक ग्राम : अड़ेर डीह, मातृक : सिन्घिआ ड्योढ़ी, वृति : भारत सरकारक उप सचिव (सेवा निवृत्त)/ स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, दिल्ली(सेवा निवृत्त), शिक्षा : चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालयसँ बी.एस-सी. भौतिक विज्ञानमे प्रतिष्ठा : दिल्ली विश्वविद्यालयसँ विधि स्नातक प्रकाशित कृति : मैथिलीमे:- १. ‘भोरसँ साँझ धरि’ (आत्म कथा), २. ‘प्रसंगवश’ (निवंध), ३. ‘स्वर्ग एतहि अछि’ (यात्रा प्रसंग), ४. ‘फसाद’ (कथा संग्रह) ५. `नमस्तस्यै’ (उपन्यास) ६. विविध प्रसंग (निवंध ) ७.महराज(उपन्यास) ८.लजकोटर(उपन्यास)९.सीमाक ओहि पार(उपन्यास)१०.समाधान(निवंध संग्रह) ११.मातृभूमि(उपन्यास)१२.स्वप्नलोक(उपन्यास)१३.शंखनाद(उपन्यास)१४.इएह थिक जीवन(संस्मरण) In English:- 1.The Lost House (Collection of short stories), 2.Life is an art हिन्दी में – १.न्याय की गुहार(उपन्यास) (उपरोक्त पोथीसभ pothi.com, amazon.com आओर www.flipcart.com पर सँ कीनल जा सकैत अछि) इमेल : mishrarn@gmail.com ब्लोग : mishrarn.blogspot.com Mobile -9968502767 एमजोनक लेखक पृष्ठ : amazon.com/author/rnmishra ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। प्रियंवदा तारा झा दूटा बीहनि कथा १ स्वाभिमान एना सिद्धांतवादी भेला सऽ काज नहिं चलैत छैक दयानाथ बाबू ।हमरा बुझने तऽ अकारणे अहां एतेक नीक कथा छोड़ि रहल छी । एहन कोन अजगुत गप्प कहलैथ विमल बाबू अहां सऽ ___ ई तऽ होइते छैक ।बेटाक बाप छथि __ किछु तऽ मोन मनोरथ हयबे करतैन्ह । भगवतीक कृपा सऽ अहूं एतेक असमर्थ नहिं छी। हम तऽ यैह कहब ,हुनकर सबहक गप्प मानि लियऽ ।बेटी बाप के एतेक ऐंठी उचित नहिं । गप्पक तीव्र स्वर स्वर सुनि दामिनी बहरैलीह । की भेलै ,सब ठीक नऽ? कहां भौजी ,भाई साहेब मना कऽ कऽ आबि गेलाह । अहीं बुझबियौन ,बेटीक भविष्यक संग खेलि रहल छथि । दीर्घ नि:श्वास लैत बजलीह दामिनी __ कोनो बात नहिं ,जे अखनहुं अप्पन बेटा केर विवाहक मूल्य चाहैत छथि ,ओहन परिवार मे संबंध भेले सऽ बेटीक भविष्य खराब होइतैक ।हमरा गर्व अछि जे ओकर पिता कथा अस्वीकार कऽ संपूर्ण नारी जाति केर स्वाभिमानक रक्षा कैलन्हि । २ की बुझबै तामसे लहालोट भेल अनिल के पानि केर गिलास पकड़बैत , बुझबैत बजलीह अनीता __ कियैक एतेक परेशान होइत छी?सब लोक सब रंग होइत छैक । अरे अहां लेल बड्ड आसान अछि ,ई बजनाइ ।अहां की बुझबै कतेक तनाव होइत छैक आफिस मे । मैनेजमेंट किछु सुनऽ बूझऽ लेल तैयार नहिं होइत छैक आ इम्हरका लोक के काज सऽ बचबाक सै टा बहाना । बीच में पिसा कऽ रहि गेल छी हम । अस्तु कहुना रतुका खेनाइ सम्पन्न भेल ।सब समेटि कऽ अनीता बिछाओन पर अयलीह तऽ अनिल फोंफ काटि रहल छलाह ।आइ बड्ड तनावपूर्ण दिन छलैन्ह स्कूल में अनीता के ,सोचने रहथि जे कनी अनिल सऽ शेयर करब ।मुदा? ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। कंचन कंठ मुक्ति मौसीमांकें नोर त जेना लगैत अछि कि सावनसं प्रतिस्पर्धा केने अछि।आई दू दिन भ गेल सुधा - सुधा कहिकय अश्रु छन्हि कि रुक'कें नामे नहि। बेचारी सुधाकें अनाथक नाथ भ' मौसी जिनगी भरि पोसलखिन्ह, विवाह दान सभ भेल। बेचारी जान अरोपिक' सासुरलोक क सेवा केलक।तखन बड्ड मान होइत छल।मुदा जें कि पता चललैन्हि कि ओ जन्मजाते एकटा किडनीकें संग आयल छथि,तकर किनको पता नहि छल,बिना कोनो बातक विचार केने ओकरा मौसीमां लग पहुँचा गेलखिन्ह। मौसी कतबो कहलखिन्ह आन ठाम सलाह लेलहुं,एहि सौं कोनो दायित्वमें अंतर नहि अबैत अछि, के कानबात देनिहार।ओ सभ तऽ धोखासं तलाकोके कागत सैन करा लेलखिन्ह। मौसी हबोढेकार कनैत,ओकर कष्टकें मोन पारैत,सुधाकें मोनेमोन आशीष देलन्हि,"जो आब चैन सौं रहिहें, ई सरसमाज तोरा जोग नहि छलौ।" ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। १.प्रभाष अकिंचन- २टा बीहनि कथा २. विन्देश्वर ठाकुर - २ टा बीहनि कथा ३. मुन्ना जी- बीहनि कथा ४. नबोनारायण मिश्रजीक रचना- प्रस्तुति आशीष अनचिन्हार (दोसर खेप) १ प्रभाष अकिंचन- २टा बीहनि कथा १. रिलीफ मिथिला में बाढ़िक भयावह संकट ओ परिस्थितिक आंकलन व सर्वे करबाक लेल विश्व बैंकक टीम आएल.. घूमैत घूमैत ओ सभ एकमी पुल पर रूकल.. ओतय ओ देखलक जे लोकसभ पन्नी टांगि टांगि रहि रहल छै.. कतहुँ धिया पुता भूक्खे लोहछैत ओंघराइत त' कतहुँ बूढ़बा सभ पेटकूनियां देने पड़ल... सर्वेयर सभ आश्चर्यचकित कि एतेक पाई बाढ़िक हेतु विश्व बैंक स' आएल से की भ' गेलै... एगो अधबैसू सन लोक खैनी चूनबैत बैसल छल.. ओकरा स' सर्वेयर पूछलकै... कक्का हो, तोरा सभके सरकार दिसस' कोनो रिलीफ आ कि मदद भेटबो कयल छ'.. माने सरकार किछ करै छ' तोरा सभ लेल... ... खैनीक नोंईंस झारैत ओ बाजल.. यौ बाऊ, ई बिहार छै, आ ओहू में मिथिला.. एतय सरकार किछ नहिं करै छै... सभटा अपने करय पडै छै.... की बुझलियै....? ओ सभ जेना एकदम सकपका गेलै... २. जतरा .... माँ गे.... माँ.... आई हमर स्कालरशिप के इम्तिहान अछि... दरभंगा जेबाक अछि... कनी जल्दी खेनाई दिहैं..... राजू बाजल.... रौ बौआ घर में त' किछ छैहे नञ... त' जल्दी कोना हेतौ.... किछ सोंचैत माय कहलखिन.... ठहर देखै छियै... खोंईच बला धान सभके मिलाक' कूटि क' तोरा जोकर भात बना' दै छियौ .... आ काल्हि बथुआक साग तोड़िक' अनने छिये, तकर झोर आ दूटा अल्लू हेबाक चाही, तेकर चोखा.... ..... माने साग भात आ चोखा.... लेकिन तोंहि कहैत रही जे साग आ चोखा खाय सं जतरा भगैंठ जाईत छै.... ..... मायक आंखि डबडबा' गेलई ....आंचरि सं नोर पोछैत बजलीह.... रौ बौआ, मोन पवित्र रहतौ आ लगन रहतौ त' भगवान अपनें जतरा बना देथुन.....दु:ख में भगवानें पर भरोस......... ....... राजू बकर-बकर मायक मुंह ताकय लागल..... २ विन्देश्वर ठाकुर - २ टा बीहनि कथा १ न्याय स्कूल जाइत काल एकटा लडकीके ओहे गामक मुखियाके बेटा अपना हबसके सिकार बना लेलक । इ घट्ना सुनलाक बाद स्कुलिया छौडासभ ओकरा बड पिटलक । एहि घटनास हुनकर बाबुजीके अपन पगरी खस्बाक भान भेलै आ अपन बेटाक करतुतपर पर्दा देबाक लेल पञ्चायत नै करबाक घोषणा कयलक । मुखियाके एहन पक्षपात देखि पुरा समाज मिलिक एक निर्णय कयलक जे न्याय आखिर न्याय होइछै । आ सबके साथ उचित न्याय होएब आबश्यक छैक चाहे ओ राजा होए या प्रजा । ते पञ्चायत होएबाक चाही तथा दोसीके कर्म अनुसारके उचित सजाय भेटबाक चाही । समाजक आगु मुखियाक कोनो बस नै चललै । ओ पञ्चायत करबाक लेल विवश भ गेल । दोसर दिन भोरे पञ्चायत बैसल आ उचित न्याय भेल । २ छुवाछुत --- गामबाली! ये गामबाली! जुलुम भऽ गेलै! --- जा कि भेलै बड़की दिदी? बड़ फिरसान बुझाइछी! --- ओह! कि कहूं बहुरिया? ओ राम्फल,राहुल आ नितेसबा छलै ने आइसोलेसनमे भर्ना भेल?मरिगेलै तिनू।सबकें लास डोजरसँ गारिदेलकै।आसपास ककरो नइँ आब देलकै --- हे भगवान! जुग परिवर्तनसंगे लोक त छुवाछुत उठौने जाइ छल मुदा ई प्रकृतिए केहन महामारी लाबिदेलकै कोरोना।लोक विवशतेमे फेरसँ छुवाछुत करए लगलै। --- सएह देखियौ न कनियां! जित्ता छलै त सदिखन समाज आ देश लेल समर्पित रहै छलै मुदा मरलाक बाद दाहो-ससंकार नसीब नइँ भेलै।अपन-अपन भाग, करम...... -विन्देश्वर ठाकुर, धनुषा-नेपाल, हाल: कतार. ३ मुन्ना जी बीहनि कथा- हिक -- नै मारू-पिटू कियो,हाथ जोड़ै छी,आब नै आयब एम्हर।--हाक्रोश करैत पिन्टुआ -- गै मए गै, बचा दही,छोड़ा दही,पड़ा जेतै। -- गै किरणियां,तोरा सनक हिया के टुकड़ी के जे कोन्टा -फड़का हुलुक- बुलुक ,आ बाट-घाट रोका-टोकी केलकौ से बाप-भए कोना बर्दाश्त करतौ,चुप्प! जो अपने कोठरीमे। -- गै मए,जेना हम तोहर हिया के टुकड़ी तहिना ओहो हमर हिया में सन्हिएल बुझ। --चुप्प अलगी,त'तों एना उथर-पाथर तें होइछें जे ओकरा पर तोहर हिक गड़ि गेल छौ। - गै मए , हिक गड़ल टा नै,लुतुक लागि गेल सन बुझ।ओकरा बिनु रहब मोश्किल । -- कते दिनक असरा ? -- "माथा नुआं भ' जेतै तहन थोड़े उंच- नीच " ४ नबोनारायण मिश्रजीक रचना- प्रस्तुति आशीष अनचिन्हार (दोसर खेप) विदेहक पछिला अंकमे हम कोलकाताक नबोनारायण मिश्रजीक एकटा रचना प्रस्तुत केने छलहुँ आ हुनका कलकत्ताक साहित्यमे फिलर कहने छलहुँ। बहुत संभव जे फिलर शब्द नीक नै होइक मुदा करबे की करबै जे सत्य छै से सत्ये रहतै। आन ठामसँ लिखल विवेचना तँ छोड़ू कलकत्तेसँ लिखल साहित्य केर कोनो विवेचनामे हिनकर नाम नै भेटत। हिनके किए आनो लोक जेना गंगा झा, सुरेंद्र ठाकुर आदिक नाम साहित्य बला खंडमे नै भेटत। ई पाँति सभ पढ़िते किछु लोक एक-दू लेखक रेफरेंस देता जाहिमे हिनकर सभहक नाम रंगमंचसँ जुड़ल भेटत मुदा हमर उद्येश्य साहित्य अछि। तँ आइ फेर नबोनारायण मिश्रजीक ई रचना पढ़ू -आशीष अनचिन्हार पृथ्वीक भार
भाइ अपन जीवनक व्यथा-कथा लिखबा लेल छी बाध्य कतबो सम्हर कऽ चलैत छी दुर्घटना घटिते छै जेना सत्तापक्षक नियति अछि घोटाला की एकरा नहि रोकल जा सकैछ?
भाइ समाजे नहि साहित्य-संस्कृति सेहो सुरक्षित अछि परंच रहि सकत कते दिन तकरे अछि चिन्ता साल दू साल लहलहयलाक पश्चात एना किए भऽ जाइत अछि निष्प्राण मैथिली संस्था?
भाइ हमरा लोकनिक संग विडम्बना अछि लोक बिसरि जाइत अछि अपन पूर्वजक योगदान महत्वाकांक्षी लोक कुर्सीक लोभमे केठर अछि बिठुआ लगबैत अछि छिटकी स्वार्थपूर्तिक हेतु छिद्रान्वेषण भऽ गेल अछि मैथिलक चरिताभिधान
भाइ कृतघ्नकेँ कथमपि नै करी उपरकार हम छी ठकायल कतेको बेर आ अहाँ तँ हमरहुँसँ बेसी मोने अछि सभ बात तँइ मर्यादाक रक्षा करैत तोड़बाक लेल ओहि कृतघ्न सभहक चक्रव्यूह उताहुल छी हम भस्म करबाक लेल ओहि भस्मासुरक जे दैत रहल अछि लोक माथ हाथ
भाइ बेर-बेर ठकेलाक पश्चातो मोनसँ कहाँ हटैत अछि सेवा-भाव सेवामे समर्पित जीवने अछि धन्य अन्यथा जीवनक की अर्थ? पृथ्वीक भार
(मूल प्रकाशन- मिथिला दर्शन जनवरी-मार्च २००४। मूल प्रकाशनमे छोट-छोट पाँति देल गेल रहै। हम ओहन पाँति सभकेँ एक ठाम जोड़ि देलहुँ जे कि एक वाक्य बनैत छल) ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.प्रियंवदा तारा झा- मोन होइछ ३.२.कंचन कंठ- अजगुत बुचिया ३.३.१. प्रभाष_अकिंचन- दूटा कविता २. संतोष कुमार राय ’बटोही'- आउट इनकम ३. आशीष अनचिन्हार- २ टा गजल ३.४.आभा झा-कृष्ण केर माहात्म्य प्रियंवदा तारा झा मोन होइछ मोन होइछ,विचरितहु नभ में ,पबितहुं अनंत सीमा निरखितहुं प्रक्रृतिक सौंदर्य अबाध सुनितहुं मधुर कलरव ,सरिताक अव्यक्त छन्द पढितहुं मोनक पोथी निर्द्वन्द । मोन होइछ, स्वत्व ,स्नेहक करी निवेश सहज भेटय निज प्राप्य नहि सदिखन कर्तव्यक भार हमर कौखन भेटय अधिकारो के आनन्द। मोन होइछ निर्द्वन्द्व रहितहुं साजितहुं कल्पनाक मोहक डाला सुखद स्वप्नक दूभि धान रखितहुं आत्मविश्वास ,सफलताक पान मखान । मोन होइछ धरित्रीक सौन्दर्य देखितहुं सुनितहुं विहगक मधुर कलरव सागरक उद्दाम वीचि नर्तन सरिताक शान्त गतिमय छन्द । मोन होइछ नहिं रहैत कोनो तनाव कोनो ओझराव सहज समतल चलय ई जीवन रहय मुदित सदिखन मन उपवन मोन होइछ लिखितहुं संघर्षक हम उपसंहार करितहुं उल्लासक कानन में हमहूं विहार स्वप्न जीबितहुं,बांचितहुं सुखक उदगार करितहुं नयन उन्मीलित पथ विस्तार ।। मोन होइछ,नहि रहय कत्तहु विभेद स्नेहक सरिता बहय अमन्द नहि शिशु कोनो सूतय भूखल भेटय सहज शिक्षा केर अधिकार। मोन होइछ,होमय शासन रामराज्य किन्तु , मैथिली नहिं भोगथि ओ भाग्य नहिं, अग्निपरीक्षा केर अपमान सहज सुरक्षित होमय स्त्री केर सम्मान ।। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। कंचन कंठ अजगुत बुचिया दुलरी मुनिया पहिरने पैजनिया डोलैयाआंगन में मचबै रुनझुनिया जानि नहि कोना भ गेली सियान पढ़ब - गुनबमे लागल धियान पढ़य लगलीह ओ गणित ओ विज्ञान चतुराईसं काटल सभके कान मोन में छल देशभक्ति क उफान भेल चयन ओ उड़ाबय विमान डरि जो रे अभगला अक्खज शैतान नहि तऽ मिटा जेतौ सभटा निसान बुझिहैं नहि तों विपन्न ओ करुण माँ भारती क छथि ई दुलरी सियान धन्य ओ माता पिता छथि भागमान जनिका घर एली सिया सुकुमारी मिटाबय कुल ओ देशक अपमान रहलीह ओ लय नव अवतार कतेक दिन राखब अहाँ झमारि दियौ कनि सिनेह दुलारक संग विश्वास छूबि लेतीह आसमान औ फंद काटिकय लौतीह नवका विहान। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। १. प्रभाष_अकिंचन- दूटा कविता २. संतोष कुमार राय ’बटोही'- आउट इनकम ३. आशीष अनचिन्हार- २ टा गजल १ प्रभाष_अकिंचन- दूटा कविता १ पंच राम_दीप ********************* राम-अर्थक प्रतीक पंचदीप अटल आर्यावर्त आत्मदीप्त रामराजक आदर्श-संकल्पना चतुर्दिक सुख-शांति स्थापना प्रजा-जन हो भयमुक्त प्रसन्न ऐहन शासनक मंगलकामना पहिल दीपक मंगल पुनीत राम-अर्थक प्रतीक पंचदीप दोसर-दीप राम-सम मर्यादा पुरूषोत्तम बनला सुखदाता सत्य-कर्म धर्मनिष्ठ-आचरण आत्मशुद्धि आ जीवन-सादा सकल जगत जे गाबै गीत राम-अर्थक प्रतीक पंचदीप तेसर-दीप नेतृत्व-अद्वितीय वंचित-शोषित के सर्वप्रिये सकल समाजक आदर-पात्र विश्वास-सहयोग-शक्ति त्रिये आत्मविश्वासक हो दीप्त-रीत राम-अर्थक प्रतीक पंचदीप चारिम-दीप राम-शौर्य-बल आमजनक साहसी पगदल जलधि लांघि लंकेश-वधक परम पराक्रमक पुष्टि-प्रबल स्थापित जन-मानसक जीत राम-अर्थक प्रतीक पंचदीप पंचम-दीप लोकतांत्रिक-राम उचित-राय के दैत सम्मान जनमत लोकमत सर्वोत्तम जन-अनुमतिस' सिद्धकाम प्रजा प्रजापति हो राजहित राम-अर्थक प्रतीक पंचदीप २. पावस मिलन रिमझिम पावस मदिराएल सांझमें मनमोहक छवि अभरि रहल भीजल वसन तन प्रियवर जेना कामदेव नभ उतरि रहल नहूं-नहूं चुप्पे-चुप्पे ससरैत अएला दलान पर पसरल-मुस्की मधुर-मुख जेना इन्द्रधनु चमकय गाम पर पट खोलिते भेल दरस-परस वृष्टि मोती-सम झहरि रहल सत्कारक उमंग चरम हिय खा' रहल हिचकोल छल सुधि-बुधि तन-वसनक नहिं कनिको अंग-अंग करैत किलोल छल नूपुर रूनझून खन-खन कंचिका रति-मदन मत्त बरसि रहल कतेक दिवस पर प्रियतम-दर्शन सोलहो-श्रृंगारक आस पूर्ण सकल मनोरथ प्रेम-प्रवाह संग तृप्ति जेना मरूपात्रक बूंद आजु अनाथ सनाथ बनल ई जेना वृंदावन गमकि रहल २ संतोष कुमार राय ' बटोही ' आउट इनकम बड़ि नीक गप थिक इ घूस लेल जाउ सभ कियो दिन देखारे डाका छियैक बेलॉक पर नवका रोजगार। ऊपर सँ नीचा धरि सभ मिलि बाँटि कs खाएत छथि गरीबक हिस्सा लाभार्थी केँ खाता मे छेद भेलन्हि। मनरेगा सँ मुखिया मालामाल वृद्धा पेंशन मे सेंध लागल जीविका कर्मी लागल छथि जोर-शोर सँ आउट इनकम केर बाजार भेलै गरम। बीडीओ,सीओ सभ हिस्सेदार छथि फलि-फूलि रहल छै गोरखधंधा कान मे रूई आओर तेल डालि कs कुंभकर्ण निद्रा मे सुतल छथि देशक प्रधान। संतोष कुमार राय ' बटोही ', ग्राम-मंगरौना, पोस्ट-गोनौली, थाना- अंधराठाढ़ी, जिला-मधुबनी ३. आशीष अनचिन्हार २ टा गजल १ छै अमीरक दिक्कत हीरा सोन दिक्कत आ गरीबक दिक्कत माँड़े नोन दिक्कत
कोना पुरतै सिंदूर सभ इच्छा लेल रहतै किछु इच्छा कुमारि तँ कोन दिक्कत
हमहूँ मानि लेलहुँ ओहो मानि लेलक अइ दुनियाँमे देह दिक्कत मोन दिक्कत
किनको खातिर ई कर्जो भेलै तगमा किनको खातिर सबूत बला लोन दिक्कत
बिना जनने बिना बुझने उल्टा प्रभाव छै तांत्रिक सभ लग जोग दिक्कत टोन दिक्कत
सभ पाँतिमे 222-222-222-22 मात्राक्रम अछि। दू अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि। ई बहरे मीर अछि। २ गहुमन बली अजगर गली धामन बली साँखर गली
नेहक धनी जाइत रहल आँचर गली काजर गली
बगुला भगत भेटल बहुत बाहर गली भीतर गली
कोना चलब अतबे कहू हिनकर गली हुनकर गली
आएल रहथिन देवतो पापक महल पामर गली
सभ पाँतिमे मात्राक्रम 2212-2212 अछि (बहरे रजज मोरब्बा (दू) सालिम वा बहरे रजज सालिम चारिरुक्नी)। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आभा झा कृष्ण केर माहात्म्य थमल जग केर काम- कौतुक स्तब्ध भेल कारी निशा घनघोर वृष्टिक संग चहुं दिशि घेरने कारी घटा जखन अनयक ,कृष्ण कर्मक भ' चुकल अतिचार छल संत्रास सं जग मुक्ति पाबय, केशव एला ल' नव दिशा ।। रूप- गुण- कर्मक त्रिवेणी बहि चलल ब्रज देश मे प्रेम- भक्तिक विमल सरिता बहल अनुपम वेश में। उद्देश्य नञि विस्मृत कथंचित् ललित- लीला- भेस मे आसक्त सन छवि, वस्तुतः ओ नञि बन्हायल घेर में।। राज्य केर नञि लालसा, आशा न बहुमानक कतौ कर्म निष्कामक प्रवर्तन सगर जग,बस लक्ष्य छल राधिका वा गोपिदल केर ध्रुव समर्पण दीर्घतम साधना संपूर्ण जखनहिं, कृष्ण तत्क्षण प्राप्य छल।। स्पर्श करइछ कृष्ण केर माहात्म्य मीरा -गीत मे मुग्ध करइछ भाव चैतन्यक समर्पित नृत्य मे बाल लीला अति मनोरम आह! सूरक छंद मे ललित ललाम पदक छटा जयदेव केर संगीत मे। आइयो हे कृष्ण! दारुण दशा भारत देश केर आधि-व्याधि,द्विधा,संशय,जाल पसरल विकृति केर विनय,कातर सुता द्रुपदक सुनि, प्रभो!पुनि अबियौ! काटि अन्यायीक मस्तक धर्मध्वजा फहराबियौ ! ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 111 ८) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 १०) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १३) विदेह सम्मान विशेषाक- २००म अक १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १४) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आमंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी VIDEHA 209th issue विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of original work.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् (c)२००४-२०२०. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2020 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA
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