विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' ३०५ म अंक ०१ सितम्बर २०२० (वर्ष १३ मास १५३ अंक ३०५) ऐ अंकमे अछि:- १. गजेन्द्र ठाकुर- संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली ऐच्छिक विषय हेतु सामिग्री (FOR UPSC-BPSC EXAMS- GENERAL STUDIES AND MAITHILI OPTIONAL SUBJECTS) २. गद्य २.१.रबीन्द्र नारायण मिश्र- धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर (५ म खेप) २.२.प्रियंवदा तारा झा- दूटा बीहनि कथा २.३.प्रणव झा- की छै 'डीएनबी' आ की लाभ छै "डीएनबी इन डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल प्रोग्राम" क २.४.आशीष अनचिन्हार- मैथिलीमे इंटरनेट ३. पद्य ३.१.प्रियंवदा तारा झा- व्यूह ३.२. नबोनारायण मिश्रजीक कविता बिडम्बना ३.३.आभा झा-व्यथा Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव Join Videha googlegroups १. गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल मैथिली ऐच्छिक विषय हेतु सामिग्री (FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) -BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- GENERAL STUDIES AND MAITHILI OPTIONAL SUBJECTS) रिसोर्स सेन्टर सुभाष चन्द्र यादव राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि। इग्नू BMAF-001 मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. UPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी. BPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS भाषापाक ENGLISH MAITHILI COMPUTER DICTIONARY MAITHILI ENGLISH DICTIONARY MAITHILI BOOKS/ PICTURE-AUDIO-VIDEO ARCHIVE डॉ. ललिता झा मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली पहिने मिथिला मैथिलीक सामान्य जानकारी लेल एहि पोथी सभकेँ पढ़ू:- राधाकृष्ण चौधरी मिथिलाक इतिहास A Survey of Maithili Literature THE POLITICAL AND CULTURALHERITAGE OF MITHILA फेर एहि मनलग्गू पोथीकेँ सेहो पढ़ू:- केदारनाथ चौधरी अबारा नहितन कुमार पवन (साभार अंतिका) पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) डॉ बचेश्वर झा B_JHA_Nibhand_Nikunj.pdf डॉ. देवशंकर नवीन Adhunik_Sahityak_Paridrishya.pdf अणिमा सिंह Shishu_Geet_Khel_Anima_Singh.pdf शिव कुमार झा "टिल्लू" अंशु-समालोचना रामदेव झा सव्यसाची (अभिनन्दन ग्रन्थ) आनन्द मिश्र (सौजन्य श्री रमानन्द झा "रमण") मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण प्रेमशंकर सिंह मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) डॉ. रमण झा मैथिली काव्यमे अलङ्कार अलङ्कार-भास्कर भिन्न-अभिन्न डॉ. रमानन्द झा 'रमण' हिआओल याेगेन्द्र पाठक वियाेगी विज्ञानक बतकही दुर्गानन्द मण्डल संचयिका रामलोचन ठाकुर मैथिली लोककथा https://www.youtube.com/channel/UC4abVKqMj2pDWIAkXiOHp7A (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर २. गद्य २.१.रबीन्द्र नारायण मिश्र- धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर (५ म खेप) २.२.प्रियंवदा तारा झा- दूटा बीहनि कथा २.३.प्रणव झा- की छै 'डीएनबी' आ की लाभ छै "डीएनबी इन डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल प्रोग्राम" क २.४.आशीष अनचिन्हार- मैथिलीमे इंटरनेट रबीन्द्र नारायण मिश्र- धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर लजकोटर (प्रवासीक जीवनपर आधारित) (५ म खेप) -5- हमरा चलि गेलाक बाद मालती आ किशुनमे फेर बाताबाती भेलैक ।किओ तेसर ओतए नहि छल । तेँ के ककरा सम्हारैत? किशुनक मंदिरक काज आडेरा दुनू छुटि गेल रहैक । मालतीकेँ नहि बूझल रहैक जे दिल्ली आबि कए ओ एहन घनचक्करमे पड़ि जाएत ।मालती पेटी उठओलक आ बिदा भेल ।किशुनके जेना करेंट लागि गेलैक । ओकराबूझल रहैक जे मालती जे ठानि लैत अछि से कइएकए रहैत अछि । किशुन कहलकैक-" हमरासँ लगैत अछि बड़ गलती भेल। अहाँ जे दंडदेब से मंजूर अछि मुदा एसगर एना नहि जाउ। ई दिल्ली छैक । चारूकात राक्षससभ घुमि रहल छैक।" “हमरा लेल तँ जेहने घर तेहने बाहर । जहिआसँ हम एतए अएलहुँ अहाँ किछु ने किछु उपराग लएठाढ़ रहैत छी । अहाँकेँ किनिको ई बात सोचएमे नहि अबैत अछि जे जे किछु भेल वा नहि भेल ताहिमे हमर की दोख छल?अहाँ गोविंदपर सक करैत रहलहुँ । परिणाम की भेल? ओहो चलि गेल । अहाँक काजो छुटि गेल?डेरासे छुटि गेल ? आब जहन सभकिछु चल गेल तँ अहाँकेँ होश भए रहल अछि ।" किशुन मालतीक पैरपर खसि पड़ल । बहुत नेहोड़ा केलक । मालती स्वयं दुविधामे रहए। संतान होनहारीरहैक । एहन हालतमे दिल्लीसन महानगरमे ओ एसगरि कतए जाइत? ओ ठोह पाड़ि कए कानए लागलि। मालतीकेँ एना कनैत देखि किशुनक कोढ़ फाटि गेलैक । किछु नहि फुराइक । समस्या मात्र मालतीकेँ लए कए नहि छल ।ओकर काज छुटि गेल छलैक।मंदिरक व्यवस्थापक ओकरा दोबारा रखबाक हेतु तैयार नहि छलैक । आब की करए? बहुत कहला-सुनलाक बाद ओसभ एक सप्ताहक समय देलकैक । मोनमे कनीक उसास भेलैक। घरमे काल्हिए साँझसँ भानस नहि भेल रहैक। दुनू व्यक्ति भूखसँ लहालोट छल । जेबीमे हाथ देलक। दसटा टाका भेटलैक। ओ मालतीकेँ कहि चौकपरहक दोकानपरसँ किछु जलखैक ओरिआनकरए गेल । किशुन चौकपर सिंघारा कीनि रहल छल । दोकानदार गरम-गरम सिंघारा छानि रहल छल । ताबे ओ चाह पीबि रहल छल । ताबतेमे दूगोटे ओही बेंचपर बैसल । ओ दुनू आदमी बेस नमगर-पोरगर छल । कारी घनगर मोछ, हाथमे डंटा आ माथमे हरियर टोपी पहिरने छल।चाहक संगे गप्प-सप्प कए रहल छल। " एतेक जल्दीमे आदमीसभक जोगार कोना हेतैक?"- पहिल आदमी कहलकैक । "कतेक आदमी चाही? -दोसर पुछलकैक । "कमसँ कम पचासगोटे चाही।" “कतेक पाइ देतैक?" " जे तूँ कहबहक सएह हेतैक ।" “ठीक छैक।काल्हि पचासगोटे हाजिर भए जेतैक । " ओकर सभहक गप्प सुनि किशुन कहलकैक-" हमरो राखि लिअ । हमरा काजक बहुत जरूरी अछि।" " कोनो हर्जनहि । काल्हि एतहि आबि जाह ।संगे चलब।” किशुनक नाम आ मोबाइल नंबर लिखलक, आओर किछु-किछु पुछलकैक ।मोबाइलसँ फोटो खीच लेलकैक आ तत्काल काज चलबए हेतु बिन मंगने दूसए टाका सेहो देलकैक । किशुन तुरंत ओहि टाकाकेँ जेबीमे रखलक आ सिंघारा लए डेरा दिस बिदा भेल ।ओ सभ कारमे बैसल आ फुर्र भए गेल। दूसाँझसँ घरमे भानस नहि भेल रहैक । ऊपरसँ दिन-राति कलह । एहनमे मालती जीविए रहल छलि सएह आश्चर्य । मुदा बहुत किछु चमत्कार होइत रहैतछैक। से भेलैक । मालती सिंघारा खेलथि । घैलमेसँ पानि ढ़ारि पीबि बैसले छली की प्रसव पीड़ा प्रारंभ भए गेलैक। किशुन सिंघारा मुँहमे देनहि छल। कहुनाकए ओकरा घोंटलक आ मालती दिस दौड़ल । जाबे ओ किछु बुझितए,किछु करितए, ताबे एकटा टेल्हक कानबाक आबाज सौंसे पसरि गेल ।हे भगवान! आब कोना की होएत? एकर रक्षा केना होएत? किशुनकमोन व्याकुल भए गेलैक ।एकदिस पिता बनबाक आत्मिख सुख तँ दोसर दिस ओहिठामक विषम परिस्थिति । कहबी छैक जे जकरा भगवान बचओनिहार छथि तकरा किओ की करत । एहन परिस्थितिमे ओहिठाम कतहुँसँ एकटा बुढ़िआ मंदिरमे पूजा करए आएलि ।ओ वच्चाक कानब सुनि पूजा छोड़ि चोट्टे ओतए पहुँचि गेलि ।ओ भरिदिन ओतहिरहि गेलैक आ दिनभरि ओकरासभक सेवा करैत रहलैक ।साँझमे जेबासँ पहिने किछु जड़ी-बुटी सेहो देलकैक ।ओ के छलि,कतएसँ आएलि किछु नहि कहल जा सकैत अछि,मुदा ओकरसभकतँ जाने बचा गेलैक । फेर ओ कहिओ नहि देखेलैक। पता नहि ओ जड़ीमे कोन शक्ति छलैकजे रातिए भरिमे मालतीमे अद्भुत शक्तिक संचार भेलैक । भोरे उठितहि अपन बच्चाकेँ दुलार करैत ओकर प्रशन्नताक अंते नहि छल ।ओ स्वयं बच्चाक सभ टा नेरकम केलक । दूध पिओलक । आ बेर-बेर ओकर मुँह देखैत रहलि । किशुनसे पिता बनबाक आनंदमे होइक जे की करी की नहि । मुदा भविष्यक चिंता रहि-रहि कए ओकरा मोनमे घुमरैत रहैत छल । मालती ओहिजनमौटी बच्चाकेँ किशुनक हाथमे दैत कहि नहि कतेक खुश रहए । मुदा किशुन चुप रहैक । " अहाँ एतेक चिंतामे किएक छी?" "भगवान एतेक सुंदर बच्चा देलथि, पता नहि एकर गुजर कोना हेतैक?" " जे भगवान जन्म देलखिन अछि सएह सभटा ओरिआनोकरथिन । अहाँ एतेक नहि सोचू ।"-से कहि मालती हँसए लागलि । दुनूगोटेमे गप्प-सप्प भइए रहल छलैक कि किओ बजबए अएलैक । "चाहक दोकानपर मालिक बजा रहल छथि ।"-ओ बाजल । "की बात छैक?"-हम पुछलिऐक । काल्हि काज लेल गप्प भेल छल ने । " "ओ! ठीकेकहलह । हम तँ साफे बिसरि गेल रही ।" जनमौटी नेनाआओकर माएकेँ छोड़ि किशुन ओहि आदमीक संगे बिदा भेल । जाइत-जाइत मालतीकेँ कहि गेलैक-"चिंता नहि करब । काल्हि एकटा काज गछि लेने रहिऐक । किछु टको देने रहए । तेँ गेनाइ जरुरी अछि । साँझ धरिआपसआबि जाएब ।" “ठीक छैक " से कहि मालती ओकरा जाइत बड़ी काल धरि देखैत रहलि । किशुन ओमहर गेल आ ओ जनमौटी नेना जोर-जोरसँ कानए लगलैक । कतबो मालती बौसबाक प्रयास केलक ओ चुप्पे नहि होइक ।बहुत मोसकिलसँ कनैत-कनैत ओ सुति गेलैक। (अनुवर्तते) - रबीन्द्र नारायण मिश्र, पिताक नाम : स्वर्गीय सूर्य नारायण मिश्र, माताक नाम : स्वर्गीया दयाकाशी देवी, बएस : ६६ बर्ख, पैतृक ग्राम : अड़ेर डीह, मातृक : सिन्घिआ ड्योढ़ी, वृति : भारत सरकारक उप सचिव (सेवा निवृत्त)/ स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, दिल्ली(सेवा निवृत्त), शिक्षा : चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालयसँ बी.एस-सी. भौतिक विज्ञानमे प्रतिष्ठा : दिल्ली विश्वविद्यालयसँ विधि स्नातक प्रकाशित कृति : मैथिलीमे:- १. ‘भोरसँ साँझ धरि’ (आत्म कथा), २. ‘प्रसंगवश’ (निवंध), ३. ‘स्वर्ग एतहि अछि’ (यात्रा प्रसंग), ४. ‘फसाद’ (कथा संग्रह) ५. `नमस्तस्यै’ (उपन्यास) ६. विविध प्रसंग (निवंध ) ७.महराज(उपन्यास) ८.लजकोटर(उपन्यास)९.सीमाक ओहि पार(उपन्यास)१०.समाधान(निवंध संग्रह) ११.मातृभूमि(उपन्यास)१२.स्वप्नलोक(उपन्यास)१३.शंखनाद(उपन्यास)१४.इएह थिक जीवन(संस्मरण) In English:- 1.The Lost House (Collection of short stories), 2.Life is an art हिन्दी में – १.न्याय की गुहार(उपन्यास) (उपरोक्त पोथीसभ pothi.com, amazon.com आओर www.flipcart.com पर सँ कीनल जा सकैत अछि) इमेल : mishrarn@gmail.com ब्लोग : mishrarn.blogspot.com Mobile -9968502767 एमजोनक लेखक पृष्ठ : amazon.com/author/rnmishra ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। प्रियंवदा तारा झा दूटा बीहनि कथा १ पर उपदेश कुशल बहुतेरे वाचस्पति बाबू नबका चालि-चलनके प्रबल विरोधी छलाह। खासकऽ कऽ स्त्रीगणक संबंधमे हुनक नियम विशेष छलैन्ह। धाख एहन जे कोनो बेटी पुतहु हुनका सोझा पड़बासऽ बचबाक युक्ति ताकैत रहैत छलीह। सौंसे गाम केर सेंसर बोर्ड छथि श्रीमान।
आइयो दलानपर भातिज केर क्लास चलि रहल छलैन्ह ,कनियांके बुझा दियौन ,शील ,संस्कार बुझथि , ई मुगलिया सलवार सूट कोना सासुरमे पहिरबाक साहस भेलैन्ह , कनिक्को लाज धाखक छूति नहिं छैन्ह। गाड़ीक आवाज सऽ गप्पक क्रम बाधित भऽ गेलैन्ह ,पलटि कऽ देखै छथि , बेटा पुतहु छथिन्ह। नीता एकदम माडर्न वेशमे , आबि कऽ चरण स्पर्श कैलखिन्ह __ बाबूजी ठीक छथिन्ह न ? सौभाग्यवती भव __ एहि सऽ बेशी किछु बजबाक साहस नहिं भेलैन्ह। सत्ये , पर उपदेश कुशल बहुतेरे। २ सम्मान एहन कोन गप्प भऽ गेलै जे अहां एनाउठिकऽआबिगेलहुं।एक्को रत्ती शिष्टाचारक ज्ञान नहिं अछि की अहांके ? की सोचैत हेती मामी ? सुधाके ई आश छलैन्ह जे सलिल आबिकऽ अप्पन परिवारक अनर्गल गप्पक विरोध करताह।मुदा ई की ? ओ तऽ हमरे दोषी मानि रहल छथि।हमर मान-सम्मान ,हमर माता – पिता केर स्वाभिमानक तमाशा बनैत चुपचाप देखैत रहलाह। कोनो संवेदना नहिं , उनटे हमरे संस्कारपर प्रश्नचिह्न ? नहिं ,एकर प्रतिकार तऽ करहे पड़त। अपनाके संयमित करैत बजलीह ,देखू आइ चुपचाप आबि गेलहुं ,आगू अप्पन माता-पिताक संबंधमे किछु अनर्गल नहिं सुनब। यदि सम्मान चाही, तऽ सम्मान देब सेहो सीखू। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। प्रणव झा क ीछै 'डीएनबी' आ की लाभ छै "डीएनबी इन डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल प्रोग्राम" क एक बेर एकटा मैथिल सज्जन, जे पेशासे पत्रकार छैथ, कोनो वाद-विवादके क्रममे हमरा कहलैथ जे, जे विभागमे अहाँ कार्यरत छी ओत प्रयास किएक नै करैत छी मैथिलीके विकासके लेल। ई सुनि हमरा मोने मोन हँसियो लागल आ ई भान भेल जे जखन पत्रकार भ क हिनका डीएनबीके विषयमे जानकारी नै छईन्ह त बहुतो गोटे हेथिन जिनका एन बी ई आ डी एन बी के विषयमे जनतब नै हेतइन। किएकि ई समय सूचनाके छियइ आ चिकित्सा शिक्षाके संबंधमे सेहो लोक सबमे जागरूकता आ जनतब हेबाक चाहिए अस्तु मोनमे आयल की किएक नै ऐ विषयमे किछु मौलिक जानकारीपर किछ लिखल जाय, दसोटा नवलोकके त ऐ से जनतब हेबे करत ! 1975के सालमे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी देशमे स्वास्थ्य-व्यवस्थामे सुधार आ विशेषज्ञ चिकित्सकके कमी कोना दूर होय ऐ लेल एकटा कमिटीके गठन केने छलीह। कमिटी अध्ययनक के रिपोर्ट देने छलईय जे जै संख्यामे देशमे विशेषज्ञ चिकित्सकके आवश्यकता छैक तकर पूर्ति खाली मेडिकल कॉलेजसे केनाइ मुश्किल। ताहि लेल जौं देशमे स्थित बहुत रास सरकारी आ प्राइवेट अस्पताल आ चिकित्सा संस्थान जैमे पीजी विशेषज्ञ प्रशिक्षण लेल आवश्यक इन्फ्रा आ विशेषज्ञ सलाहकार डॉक्टर मौजूद होय ओहो सब ठाम किएक नै ट्रेनिंग शुरूकके पीजी विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार कैल जाय। मुदा एहेन सक्षम अस्पताल/ चिकित्सा संस्थानके चिन्हइ, ओकरा मान्यता दै, ओतयके ट्रेनिंग व्यवस्थाके लेल मानक तय करई एवं देखरेख करईके आदेश भरिमे एकटा उच्च आसमान स्तरके परीक्षा लेबैके लेल एकटा संस्थानके आवश्यकता छल। एही रिपोर्टके आधारपर तत्कालीन सरकार द्वारा ई सब काजके लेल राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (एन बी ई) के गठन कैल गेल छल जे 1982मे स्वतंत्ररूपसे भारत सरकारके स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याणमंत्रालयके अंतर्गत एकटा स्वायत्त संस्थानके रूपमे अस्तित्वमे आयल। एन बी ई सक्षम अस्पताल/ चिकित्स ासंस्थान सबके चिन्हित क के ओकरा विभिन्न विशिष्टतामे पीज ी ट्रेनिंगके लेल मान्यता देबय लागल ई आ 3 वर्षके ट्रेनिंगके उपरांत राष्ट्रीय स्तरपर आयोजित विविध परीक्षा पास करईबला डाक्टर सबके डी एन बी (डिप्लोमैट ऑफ नैशनल बोर्ड) के डिग्री देबई लगलई।डी एन बी डिग्री भारतीय चिकित्सा अधिनियम 1956 (आई एम सी एक्ट 1956) के प्रथम अनुसूचीमे स्थित भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त स्नातकोत्तर/ पोस्ट डॉक्टरल डिग्री छैक, जे चिकित्सा विश्वविद्यालय द्वारा समकक्ष विशिष्टतामे प्रदान एमडी/ एमएस/ डीएम/ एमसीएच डिग्रीके समकक्ष छैक। डी एन बी नाम अमेरिकामे देल जायबला डिप्लोमैट ऑफ अमेरिकन बोर्डके तर्जपर राखल गेल छैक। लेहमेनके भाषामे जौं एकरा बुझईके प्रयत्न करी त एकरा एनाहु बुझल जा सकई अछि जे जेना एम बी ए (फायनेंस) आ सी ए / सी डबल्यू ए लेखा/ वित्तके क्षेत्रमे समकक्ष डिग्री छैक, जेना बी ई/ बी टेक आ ए एम आई ई टी ई इंजीनियरिंगके क्षेत्रमे समकक्ष डिग्री छैक तहिना आधुनिक चिकित्सा विज्ञानके क्षेत्रमे देशमे एम डी/ एम एस आ डी एम/ एम सी एच के समकक्ष डी एन बी (ब्रॉड स्पेशल्टी) आ डी एन बी( सुपर स्पेशल्टी डिग्री) छैक। एम बी ए, बीई/ बी टेक, एमडी/ एमएस/ डीएम/ एम सी एच आदि डिग्री यूनिवर्सिटी सिस्टमके द्वारा देल जाइत छैक त सीए आ डी एन बी डिग्री भारत सरकारके अंतर्गत स्वायत-्तसंस्थान अर्थात क्रमशः आईसीएआई आ एनबीई द्वार ादेल जाइत छैक।अहुमे अहांके समनता देख लेल भेंटत।जेना देखईत हेब ई जे देशमे अलग-अलग यूनिवर्सिटीमे पढ़ाईके स्तर अलग-अलग होइत छैक आ परिणाम स्वरूप कोनो एम बी ए त बहुत तेज होइत छैक आ कोनो कोनो बज्र ढ़ोल, नामके डिग्री बला मुदा सीए जे कियौ केने होइत छै तकरा लग विषयके एकटा स्तरीय ज्ञान रहिते छैक किए त सीए अखिल-भारतीय स्तरपर एकटा उच्च आ समान स्तरके परीक्षा पास केलाके बाद बनैत छैक। तहिना स्नातकोत्तर मेडिकल डिग्रीके क्षेत्रमे अलग-अलग यूनिवर्सिटी/कॉलेजसे पास एमडी/ एमएस डॉक्टरमे कियौ बहुत जानकारो डॉक्टर भेट सकई अछि आ कियौ बाज्र भकलोल सेहो, मुदा डी एन बी बलामे एकटा स्तरीय क्लीनिकल स्किल भेटबे करत किएकि डीएनबी डिग्री अखिल भारतीय स्तरके उच्च मानकबला परीक्षा पास केलाके बाद भेटई छैक आ सीएहे जेकाँ एकरो पास केनाइ एमडी/ एमएस से बेसी कठिन होइत छै। वर्तमानमे एन बी ई 83 टा ब्रॉड आ सुपर-स्पेशल्टी विषयमे डीएनबी आ एफ़एनबी कोर्स चला रहल अछि जे देशभरिके 500 से बेसी अस्पताल आ चिकित्सा-संस्थानमे चलि रहल अछि। की छै “डीएनबी इन डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल” कार्यक्रम देशके बहुते राज्य सबमे स्तानकोत्तर मेडिकल स्पेशलिष्ट आ ओकर पढ़ाईलेल सीटके कमी दूर करय खातिर आ विशेषज्ञ डॉक्टरके क्षेत्रीय स्तरपर एकटा पूल बनाब खातिर केंद्रसरकार राष्ट्रीय परीक्षा बोर्डके संग मिलके ई कार्यक्रम 2013मे शुरूकेलक आ वर्तमान सरकार एकरा आगा बढ़ाबके लेल कृत संकल्प अछि। ऐ कार्यक्रमके तहत राज्य-सरकार, केंद्र-सरकार, लोकल सरकारके अंतर्गत आबयबला 200बेड से बेसी बिस्तरबला टर्सरी केयर अस्पतालमे डीएनबी पाठ्यक्रम शुरू कैल जा रहल छैक। ऐ योजनाके प्रमुख ध्येय छैक: o जिला अस्पतालमे उपलब्ध इन्फ़्रास्ट्रक्चर एवं क्लिनिकल संसाधनोंके उपयोग स्नातकोत्तर विशेषज्ञताके प्रशिक्षणमे करैत विशेषज्ञके नवपूल तैयार केनाइ जे क्षेत्रीय स्वास्थ्य-व्यवस्था के लेल उपयोगी होय, क्षेत्रके परिस्थितिके अनुसार प्रशिक्षित होय, आ क्षेत्र विशेषके मरीज आ बीमारीके बेसी निकसे बूझ िसकई। o ऐ प्रकारके पीजी पाठ्यक्रम चलेलासे ऐ तरहक सरकारी टर्सरी केयर अस्पताल सबमे इन्फ्रास्ट्रक्चर आ क्लीनिकल संसाधनके गुणवत्तामे सुधार हेतई। o ऐ योजनासे राज्य-स्तरपर कम खर्चमे स्नातकोत्तर चिकित्सा विशेषज्ञके प्रशिक्षणके संभावना बनैत छैक आ ऐ प्रकारे चिकित्सकके कार्यकौशलके सेहो विकासके संभावना बढ़इत छै। o अकादमिक प्रशिक्षण व्यवस्थासे ऐ प्रकारके अस्पताल सबमे चिकित्सक सबके भर्ती आ ओकरा सबसे सेवा लेबेके प्रक्रिया सेहो सरल भ जाइत छैक किएक िप्रशिक्षणके लोभे कनिष्ठ चिकित्सक सब अस्पतालमे उपलब्ध रहईत छै। o ऐ प्रयाससे ऐ अस्पताल सबमे चिकित्सक आ हुनकर सेवाके एकीकृत करमे सेहो सुविधा भेटई छै। o नव आ पुरान (इन-सर्विस) एम बी बी एस चिकित्सक सबके सेहो (जिनका आनठाम सीट नै भेंट पाबि रहल छै) पीजी करयके अवसर उपलब्ध होई छैक। o पीजी प्रशिक्षणके लेल माइग्रेट होमयबला चिकित्सक सबके क्षेत्रमे घूरयके संभावना कम रहई छैक मुदा क्षेत्रीय अस्पतालमे प्रशिक्षण प्राप्त चिकित्सकके क्षेत्रमे सेवा दैके संभावना बेसी। अस्तु ऐ प्रकारके कार्यक्रमसे बिहार सन राज्यमे विशेषज्ञ चिकित्सकक कमी दूर करयमे सहायता भेटयके संभावना देखल जा सकई अछि। ऐ क्रायक्रमके सबसे पहिने लाभ उठाबय बल ाराज्य पश्चिम-बंगाल छल, तदुपरान्त कर्नाटक आ तमिलनाडु आ धीरे-धीरे देशके अन्य कई-एक राज्यमे ई कार्यक्रम पसरि रहल अछि। अफसोस कि ऐ योजनाके लाभ लेबेमे सेहो आपण बिहार पछुआयल छल, आ एन बी ई के कते कप्रयास, बिहार-सरकारके संग कतेक वर्कशॉपके बाद बिहार सरकार अपन किछ अस्पताल/ मेडिकल कॉलेजमे ई पाठ्यक्रम शुरू करयके आवेदन केलकय जे एखन मान्यता भेटेके प्रक्रियामे अछि। आशा कैल जा सकई अछि जे जल्दीए ई परियोजना राज्यमे विकसित होय आ क्षेत्रके स्वास्थ्य-व्यवस्थाके सुधारमे सहायक होय। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आशीष अनचिन्हार- मैथिलीमे इंटरनेट अंक 230 (15/7/2017)मे "कतेक रास बात" इंटरनेटपर मैथिलीक पहिल उपस्थिति नै अछि" केर शीर्षकसँ आलेख प्रकाशित भेल वएह आलेख फेरो हम एहि अंकमे दऽ रहल छी। एहि बीचमे मैथिली वेबपत्रिकारिताक अलग-अलग काजपर हमर आनो आलेख प्रकाशित भेल अछि तँइ हम ई पुरना आलेख दऽ रहल छी जाहिसँ पाठक मैथिली वेबपत्रिकारिताक जड़िसँ फेरो अवगत हेताह । एहि अंकमे शीर्षक बदलि देने छी हम आ पद्मनाभजीक संग भेल फेसबुक बहसकेँ सेहो हम जोड़ि देलहुँ अछि जाहिसँ पाठक ई बुझि सकताह जे आखिर मैथिलीमे कोना साहित्यिक बैमानी होइत छै। (आशीष अनचिन्हार) मैथिलीमे इंटरनेट मैथिलीमे इंटरनेटसँ हमर मतलब अछि जे इंटरनेट मैथिली भाषामे कहिया आ कोना आएल। इंटरनेटसँ मिथिला-मैथिली-मैथिलकेँ कोना प्रभावित केलक आदि-आदि। ओइसँ पहिने एक बेर “मैथिली वेब पत्रिकारिताक प्रारंभिक स्वरूप”केँ हम संक्षिप्त रूपें एहि ठाम राखि रहल छी। आन तथ्य देबासँ पहिने हम याहूसिटीज / ब्लागरसँ संबंधित किछु घोषणा देखा रहल छी जे कि याहूसिटीज / ब्लागर केर आफिसियल पेजसँ लेल गेल अछि आ एकरा कियो गलथोथी वा कुतर्कसँ गलत साबित नै कऽ सकै छथि। तँ देखू निच्चाक तथ्य- 1) 1999मे याहूसिटीज (Yahoo! GeoCities) चालू भेलै आ 2001मे प्रोफिट नै हेबाक कारणे एकरा लगभग बंद कऽ देल गेलै (फ्री एकांउट बला सभकेँ स्टेप बाइ स्टेप बंद कएल गेलै) मैथिलीक पहिल इंटरनेटीय उपस्थिति जे कि भालसरिक गाछ नामसँ सन 2000 सँ याहूसिटीजपर छल तकरो एकांउट बंद भऽ गेलै (जँ कियो चाहता तँ एकर रेकार्ड याहूसँ मँगबा सकै छथि, ओना एकर चांस कम कारण आर्काइभ खत्म भऽ गेल छै)। एकर बादमे 2009सँ याहूसिटीज अमेरिका समेत सभ देशसँ अपन पेड सर्भिस सेहो हटा लेलक आ आब मात्र जापानमे एखन एकर सर्विस बाँचल छै। ई तँ बहुत पहिनेक बात छै हाल-फिलहाल (2014)मे सभ गोटा आरकुटकेँ बंद होइत देखने हेबै। आरकुटपर जिनकर-जिनकर प्रोफाइल रहए से आब नै भेटि सकैए। हँ जे आर्कइभ बना लेने हेता से फाइल रूपमे अपन डाटा रखने हेता। याहूसिटीज केर विकिपीडिया वा आन संदर्भसँ हमर तथ्यकेँ जाँचल जा सकैए। 2) May 01, 2008सँ ब्लागर फ्यूचर पोस्ट केर सुविधा देलकै जकरा एहि लिंकपर देखि सकै छी https://blogger.googleblog.com/2008/05/blogger-now-schedules-future-dated.html एहि सुविधासँ लोक पोस्टकेँ ड्राफ्टमे भविष्यक तारीख संग राखि दै छथिन आ ओ पोस्ट नियत तारीखमे अपने-आप पोस्ट भऽ जाइत छै। एहि फीचरमे जे कैलेंडर देल गेल छै तकरे सहायतासँ आजुक पोस्टकेँ दू साल पाछूक तारीखमे लऽ जा सकै छी तेनाहिते दू साल पहिनुक पोस्टकेँ आजुक तारीखमे आनि सकै छी मुदा ई मात्र पोस्टक तारीख वा सालमे हेड़ा-फेरी कऽ सकै छी कोनो पोस्टक URL केर तारीख,महीना वा सालमे नै। URL बला तारीख,महीना वा साल वएह रहतै जहिया पोस्ट प्रकाशित भेल रहै। 3) December 10, 2008सँ ब्लागर दूटा ब्लाग केर मर्जिंग मने जोड़ि देबाक सुविधा देलकै एकरा एहि लिंकपर देखि सकै छी https://blogger.googleblog.com/2008/12/your-blog-your-data.html एहि सुविधासँ लोक अपन अलग-अलग ब्लागकेँ एकठाम जोड़ि सकै छलाह। 4) February 03, 2010सँ ब्लागर पेज शुरू करबाक सुविधा देलकै एकरा एहि लिंकपर देखि सकै छी https://blogger.googleblog.com/2010/02/create-pages-in-blogger.html एहि सुविधासँ लोक अपन ब्लागक विभिन्न सूचना पाठक लग दै छथि। पेज बनेलापर खाली अक्षर वा अक्षर-अंकक लिंक बनै छै मुदा तारीख,महीना वा सालनै रहै छै। 5) July 17, 2012सँ ब्लागर कस्टम लिंक बनेबाक सुविधा देलकै जकरा एहि लिंकपर देखि सकै छी https://blogger.googleblog.com/2012/07/customize-your-posts-with-permalinks.html कस्टम लिंक मने अहाँ अपना मोनक हिसाबें कोनो पोस्टक URL बना सकै छी मुदा URLमे पोस्टक प्रकाशन दिन बला तारीख,महीना वा साल रहत। पोस्टक ओरिजिनल पोस्ट डेट वा पोस्टक साल नै बदलल जा सकैए जकरा अहाँ सभ एहि लिंकपर देखि सकै छी http://blogger-hints-and-tips.blogspot.in/2009/12/changing-date-for-post.html उपरक तथ्य सभकेँ नीक जकाँ अहाँ सभ मोन राखू आ निच्चा देल गेल मैथिलीक आरंभिक ब्लाग / वेबसाइट सभहँक पहिल पोस्ट आ ओकर तारीख सभकेँ अहाँ अपने जाँचू जाहिसँ ई स्पष्ट हएत जे कोन पत्रिका पहिल अछि आ के दोसर। एहि अंतर्गत हम छह टा ब्लाग / वेबसाइट राखब 1) भालसरिक गाछ (याहू सिटीज आ ब्लागर दूनू बला), 2) पल्लवमिथिला 3) समदिया, 4) अपन मिथिला, 5) प्रकरांतर, 6) कतेक रास बात आगू बढ़बासँ पहिने ई कहि दी जे एहि पाँचो ब्लागमे तीन टा एहन लिंक अछि जकर आर्काइभ उपल्बध नै अछि मुदा चर्चा हम सभ लिंक केर करब चाहे ओकर आर्काइभ हो या नै हो। आर्काइभ नै हेबाक मततलब ई नै छै जे कोनो चीजक अस्तित्वकेँ नकारि देल जाए। भालसरिक गाछ गजेन्द्र ठाकुर जी याहूसिटीजपर बहुत रास मैथिलीक साइट बनेने छलाह मुदा ताहिमेसँ "भालसरिक गाछ" केर लिंक (जे सन 2000 सँ याहूसिटीजपर छल) बाँचल अछि। एकर लिंक http://www.geocities.com/bhalsarik-gachh/ अछि। याहूसिटीज पर ई बंद भेलाक बाद 5 जुलाई 2004केँ एही नामसँ ब्लागरपर सेहो गजेन्द्र ठाकुर द्वारा ब्लाग बनाएल गेल आ जनवरी 2009मे एकरा विदेहक संग जोड़ि देल गेलै आ आब ई http://www.videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर आर्काइभ सहित अछि। एहिठाम मोन राखब जरूरी जे याहूसिटीज बला ब्लाग केर आर्काइभ उपल्ब्ध नै अछि। पल्लवमिथिला पल्लवमिथिला नामक वेबसाइट जे कि 2059 माघे संक्रान्ति- (2003 जनवरीमे) धीरेन्द्र प्रेमर्षिजी द्वारा बनाएल गेल। एकर लिंक अछि- www.pallavmithila.mainpage.net वर्तमानमे ई वेबसाइट बंद अछि। एहि वेबसाइट केर मूल पेज www.mainpage.net सेहो याहूजियो सिटीज जकाँ बंद भऽ गेलै। संगे-संग एहू वेबसाइट केर आर्काइभ उपल्बध नै अछि। विनय कुमार कसजू केर नेपाली पोथी "सूचना प्रविधिको शक्ति र नेपालमा यसको उपयोग" जे कि सितंबर 2003 मे प्रकाशित भेलै तकर पृष्ठ 155 पर "पल्लवमिथिलाक चर्चा छै। समदिया ईहो ब्लाग गजेन्द्र ठाकुर जी द्वारा 9 अगस्त 2004मे बनाएल गेल छल समादक वास्ते मुदा पहिल पोस्टक बाद लगभग चारि साल ई बंद रहल फेर 2008सँ एकर प्रकाशन शुरू भेल आ फेर-आस्ते-आस्ते 2015 धरि चलैत रहल। एहि ब्लागक पहिल पोस्टक लिंक अछि- http://esamaad.blogspot.in/2004/08/blog-post.html अपन मिथिला मिथिलासँ संबंधित (साहित्य नै) विवरण लेल प्रणव झा "अपन मिथिला" नामसँ 2004 मे साइट बनेने छलाह मुदा बेवसाइट प्रदाता बंद भऽ गेल। एकर लिंक एना अछि 1asphost.com/aapanmithila ई कोन मासमे शुरू भेल तकर विवरण नै अछि कारण एहू बेवसाइटक आर्काइभ नै बाँचल अछि। एकर भाषा अंग्रेजी रहल हएत कारण प्रणवजी सूचित केलथि जे एहिमे देवनागरी लिपिमे किछु नै छल। प्रकरांतर एहि ब्लागक पहिल पोस्ट 12 फरवरी , 2005 केँ अछि जकर लिंक http://prakarantar.blogspot.in/2005/02/blog-post.html अछि। ई ब्लाग किनका द्वारा बनाएल गेल से अज्ञात अछि मुदा कमेंट सभसँ पता चलैए जे कोनो ठाकुरजी छथि (शायद विजय ठाकुर जिनक मैथिली दर्पण, तात्काल आदि ब्लाग सेहो छनि)। जे हो मुदा एकर लिंकसँ एहि ब्लागक तारीख पता चलि रहल अछि। मात्र दू टा पोस्टक बाद ई ब्लाग बंद भऽ गेल मने ओहिपर पोस्ट एनाइ बंद भऽ गेल। एहि ब्लागक अंतिम पोस्ट 19 फरवरी , 2005मे आएल। कतेक रास बात कतेक रास बातक मूल लिंक http://vidyapati.blogspot.com/ अछि (आब एकर पता http://www.vidyapati.org/ अछि मुदा दूनू लिंकसँ खुजैत छै)। एहि ब्लाग 5टा संचालक छथि--आदि यायावर (मूल नाम: पद्मनाभ मिश्र), केशव कर्ण, राजीव रँजन लाल, कुन्दन कुमार मल्लिक आ सुभाष चन्द्र। कतेक रास बात नामक ब्लाग केर सभसँ पहिल पोस्ट जे देखा रहल अछि (देखू चित्र- 1, चित्र सभ निच्चा अछि) ताहिमे झोल-झाल छै। एकर URLमे http://www.vidyapati.org/2013/07/blog-post_28.html देखा रहल छै (देखू चित्र-1 केर उपर घेरामे) मतलब ई पोस्ट 2013 केर जुलाइ मासमे भेल छै। मुदा एकर प्रकाशन केर तारीख July 01,1999 तारीख देखा रहल छै (देखू चित्र-1 केर नीचा घेरामे)। आ एहि पोस्टसँ पहिने आरो कोनो पोस्ट नै छै से न्यूअर पोस्ट देखलासँ पता चलि जाइत छै। एहि पोस्टक बाद जे पोस्ट अछि से सूचनाक रूपमे अछि आ तकर URL http://www.vidyapati.org/2005/08/blog-post.html अछि (देखू चित्र- 2) मने ई पोस्ट 2005 केर अगस्त मासमे भेल अछि (देखू चित्र-2 केर उपर घेरामे) मुदा फेर एहूक प्रकाशन तिथिमे गड़बड़ी कएल गेल अछि आ प्रकाशन तारीखकेँ November 28, 2004 बना देल गेल अछि (देखू चित्र-1 केर नीचा घेरामे)। एहि पोस्टक बाद बला जे पोस्ट अछि तकर URL http://www.vidyapati.org/2005/09/blog-post.html अछि मने ई पोस्ट 2005 केर सितंबर मासमे प्रकाशित भेल आ एकर प्रकाशन तारीख September 02, 2005 अछि मने एखन धरिमे इएह पोस्ट सही अछि (देखू चित्र- 3)। सितंबर 2005 केर बाद जुलाइ 2006मे पोस्ट भेल जकर URL अछि http://www.vidyapati.org/2006/07/blog-post.html आ एकर प्रकाशन तारीख अछि July 12, 2006 एहि आ एकर बाद बला पोस्टक URL आ प्रकाशन तारीख मीलै छै। जे गड़बड़ी छै से पहिलुक दूटा टामे आ से मात्र इतिहासमे गलत तरीकासँ पहिल स्थान बनेबाक लेल। जँ कतेक रास बातक एहि चारि टा पोस्टक तारीखकेँ सजाएल जाए तँ ई निश्चित भऽ जाइ छै जे एहि ब्लागक पहिल पोस्ट 1 अगस्तसँ लए कऽ 31 अगस्त धरिक बीचमे भेल छै (सुविधा लेल अगस्त-2005 नाम हम देलहुँ)। एकटा आर रोचक तथ्य ई जे कतेक रास बात केर परिचय (पेज रूपमे, देखू चित्र-4)मे एहि ब्लागक संचालक लीखै छथि "प्रिय पाठकगण;एहि ब्लोगऽक शुरुआत हम 2004 मे केलहुँ. ताबय धरि हमरा जानकारी मे मैथिली भाषा इन्टरनेट पर नहि छलए"। ई कोन जानकारीक दाबी भेलै। 2003मे प्रिंट पोथीमे पल्लवमिथिला बारेमे लिखाएल छै तखन आर हिनका कोन जानकारी चाही। भऽ सकैए जे संचालक सभ कहथि जे पल्लवमिथिला नेपालक अछि मुदा मैथिली तँ नेपालोमे छै आ ओनाहुतो इंटरनेटक कोन देश हेतै। इंग्लैंडमे चलि रहल मैथिलीक वेबसाइट वा ब्लागकेँ मैथिली भाषाक कहल जेतै या इंग्लैडक भाषाक। भऽ सकैए जे संचालक सभ कहथि जे हम ब्लाग 2004मे बनेलहुँ मुदा ओकर पहिल पोस्ट अगस्त 2005मे भेल मुदा एहन दाबी तँ कियो कऽ सकैए। सभसँ पहिने तँ हमहीं दाबी करब जे हमर ब्लाग "अनचिन्हार आखर" 1999मे बनल मुदा ओकर पहिल पोस्ट 11 अप्रैल 2008केँ भेल। मुदा वास्तविक रूपें हम जानै छियै जे ई तर्क नै मात्र बकथोथी हेतै। कतेक रास बात दिसम्बर 2013 धरि चलैत रहल ओहि केर बाद ओहिपर कोनो सक्रियता नै अछि। एहि ब्लागक संस्थापक कुमार पद्मनाभजीक प्रोफाइलसँ ज्ञात होइए जे ओ इंटरनेटक माहिर छथि आ हुनकर शिक्षा-दीक्षा ओही क्षेत्रमे भेल छनि तँइ ई मानब असंभव जे कुमार पद्मनाभजी एहन काज केने हेता। तखन बँचल हुनक सहयोगीगण। मुदा एकटा संचालक ओ संपादकक तौरपर नैतिक रूपसँ स्वीकार करहे पड़तिन जे हुनकर सहयोगीगण तथ्यकेँ तो़ड़ि मरोड़ि कऽ गलत काज केलथि। गजेन्द्र ठाकुर अपन पोथी "कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक" (संस्करण 2009)मे एकटा आलेख देला जकर शीर्षक छै " भाषा आ प्रौद्यौगिकी (संगगणक, छायाकंन, कुंजीपटल, टंकण तकनीक) अंतर्जालपर मैथिली आ विश्वव्यापी अंतर्जालपर लेखन आ ई प्रकाशन" जे कि बादमे अंतिका पत्रिकाक अंतर्जाल विशेषांकमे "अंतर्जाल आ मैथिली" नामसँ सेहो प्रकाशित भेलै (संयुक्तांक रूपमे अक्टूबर-दिसम्बर 2009, जनवरी-मार्च 2010)। एहि आलेखमे गजेन्द्रजी "भालसरिक गाछ" संबंधमे चर्चा केने छथि जाहि के बाद भ्रम पोसए बला "पहिल" लोक सभहँक भ्रम टूटल आ तकरे फलस्वरूप ओ सभ गलत तथ्य प्रकाशित केलाह जे हम एतेक सालमे शुरू केने रही तँ हम ओतेक सालमे शुरू केने रही। ठाकुरजीक ई आलेख ओहि समयमे पहिल ओहन आलेख रहै जाहिमे अंतर्जालक संबंधमे विस्तारसँ चर्चा रहै एते धरि जे बिना कोनो सर्टिफिकेट लेने अपनासँ कोना वेबसाइट बना सकै छी तकरो विधि ओहि आलेखमे छै। पाठक ई आलेख हुनक पोथी वा अंतिका पत्रिकाक "अंतर्जाल विशेषांक"मे पढ़ि सकै छथि। मैथिलीमे सभ ई मानै छथि जे हम जहियासँ काज शुरू केलहुँ सएह पहिल भेल। इतिहासमे तकनाइ, अध्ययन केनाइ हुनका पसंद नहि छनि (एकटा टटका उदाहरण हमरा भेटल जे एक वेबसाइट जे कि अगस्त 2012सँ चालू भेल हुनक दावा छनि जे हम अपन वेबसाइटपर पहिल बेर साक्षात्कार शृंखला चालू केलहुँ जे कमसँ कम कोनो वेब पत्रिकामे नै छल। आब देखू जे समदिया अक्टूबर 2011सँ "हम पुछैत छी" नामक साक्षात्कार शृंखला चलेलक आ एहिमे कुल सत्तावनसँ बेसी व्यक्तित्वक साक्षात्कार प्रस्तुत कएल गेल अछि। आब कहू पहिनेसँ के चला रहल अछि। एही ठाम अध्ययनक जरूरति पड़ै छै। बिना पढ़ने आ जनने पहिल केर बीमारी पोसने मैथिलीक सेवक सभ बहुत पसरल छथि)। हम पुछैत छी शीर्षक सभ साक्षात्कार एहि लिंकपर पढ़ि सकै छी- http://esamaad.blogspot.in/p/blog-page_22.html एतेक देखेलाक बाद हम "कतेक रास बात" केर संचालक सभसँ पूछए चाहैत छी जे जँ प्रकाशने तारीखकेँ मानक बूझी तखन मैथिली किएक ओ हिंदी आ भारतक पहिल ब्लाग हेबाक दाबी किए नै कऽ रहल छथि। हिंदीक पहिल ब्लाग "9-2-11" अछि जे कि आलोक कुमार जी 21 अप्रैल 2003 के शुरू केने छलाह। कतेक रास बातक तँ प्रकाशन तिथिक हिसाबसँ "9-2-11"सँ चारि साल पुरान अछि तखन "कतेक रास बात" केर संचालक सभ क्लेम करथु भारतक पहिल ब्लाग हेबाक। मुदा "कतेक रास बात" केर संचालक सभ नै कऽ सकताह कारण हुनका बूझल छनि अपन बैमानीक बारेमे। "कतेक रास बात" केर संचालक सभ किछु ओहन नवसिखुआ सभकेँ बड़गला सकै छथि के मात्र एकांउटिंग उद्येश्यक संग कंप्यूटर चलबै छथि मुदा जे कंप्यूटरसँ नीक जकाँ परिचित छथि तिनका ओ कोना बड़गला सकै छथि। हम एहि लेखक माध्यमे "कतेक रास बात" केर संचालक सभकेँ चुनौती दै छियनि जे प्रकाशन तारीखक हिसाबसँ ओ अपन ब्लागकेँ भारतक पहिल ब्लाग घोषित करबाबथि आ से केलासँ ओ मैथिलिओक पहिल ब्लागर बनि जेता। एहि बीच 2018 मे फेसबुकपर हमरा ओ पद्मनाभजी बीच एही बात लऽ कऽ बहस भेल जकरा एहि लिंकपर देखल जा सकैए-- https://www.facebook.com/sanjeev.mithilakinkar/posts/10214777761532420 एहि बहसमे पद्मनाभजीक कहब रहनि जे जहिया हम ब्लाग चालू केने रही तहिया हमरा नै बूझल छल जे आनो कोनो ब्लाग वा साइट छै तँइ हमरे ब्लागकेँ पहिल मानल जाए। ई तर्क कतेक उचित से तँ पाठके कहता मुदा हम एहिठाम परिशिष्ट-1मे ओहि बहसक मुख्य अंश दऽ रहल छी। उपरक तथ्य सभसँ पता चलल हएत जे इंटरनेटपर -- 1) भालसरिक गाछ (याहू सिटीज) 2000सँ अछि जकर लिंक http://www.geocities.com/bhalsarik-gachh/ अछि। 2) पल्लवमिथिला 2003सँ अछि जकर लिंक www.pallavmithila.mainpage.net अछि। 3) समदिया 2004सँ अछि जकर लिंक http://esamaad.blogspot.in/2004/ अछि। 4) अपन मिथिला 2004 सँ अछि जकर लिंक http://1asphost.com/aapanmithila अछि 5) प्रकरांतर 12 फरवरी, 2005 केँ अछि जकर लिंक http://prakarantar.blogspot.in/2005/02/blog-post.html अछि। 6) कतेक रास बात अगस्त-2005सँ अछि जकर लिंक http://www.vidyapati.org/2005/08/blog-post.html अछि। जँ भाषाक हिसाबें "अपन मिथिला"केँ छोड़ियो दी तैयो ई निश्चित रूपेण कहल जा सकैए जे भालसरिक गाछ (याहू सिटीज) बला इंटरनेटपर मैथिलीक पहिल उपस्थिति अछि। तकर बाद पल्लवमिथिलाक स्थान दोसर अछि। समदियाक स्थान तेसर अछि। प्रकरांतर केर स्थान चारिम अछि। आ अंतमे कतेक रास बात केर पाँचम स्थान अछि। बहुत संभव अछि जे इंटरनेटक अथाह दुनियाँ केर किछु तथ्य हमरासँ छुटि गेल हो तँइ जँ अहाँ सभ ओकर सूचना दऽ एहि लेखकेँ परिमार्जन करेबै तँ ई भविष्य आ इतिहास दूनू लेल नीक रहतै। आशा अछि जे कोनो गलती दिस निधोख भऽ अहाँ सभ सुझाव देब। परिशिष्ट-1 चित्र सभ निच्चा अछि- पद्मनाभजीक संग भेल बहसक मुख्य अंश-- संजीव मिथिलाकिङ्कर 1 October 2018 · 🔴 इंटरनेट पर मैथिली... ■ www.videha.co.in ■ 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Kumar Padmanabh सबसँ पहिल वेबसाइट एतेक पाछु में Ashish Anchinhar कोन सभसँ पहिल साइट अछि Ashish Anchinhar की भेल प्रकाशजी Prakash Jha, जँ तारीखे बदलि लोक अपन साइटकेँ पहिल घोषित कऽ सकै छथि तँ हमहीं किए पाछू रहू। देखियौ मैथिलीक पहिल साइट "अनचिन्हार आखर" जे 1999 सँ शुरू भेल..... Kumar Padmanabh ई त' बहुत नीक गप्प जे 2003 सँ पहिने देवनागरी लिखबाक लेल कोनो टूल बनलो नइँ छल. हिंदीक पहिल ब्लाग 2003क पूर्वार्ध मे आएल छल. नवम्बर 2003 मे हम http://vidyapati.blogspot.com बनेलहुँ. नवम्बर 2003 मे Dhanakar Thakur खड़गपूर आएल छलाह. हुनका लेल दोसर वेबसाइट 2004 मे बनेलहुँ. 2003 सँ 2005 धरि हमर वेबसाइट'क अलावा हमरा कोनो दोसर नइँ देखा पड़ल. भ' सकैत छैक हम ताकि नइँ सकलहुँ. अपने गलती मानैत छी. 2005-2007 धरि एकोटा साहित्यिक वेबसाइट नइँ छल. ओना 10-15 टा आन वेबसाइट सब छल. 2009-2011 धरि बहुत वेबसाइट आएल. ओकर बाद हम अपन हाथ पाएर समेटि लेलहुँ. VIDYAPATI.ORG कतेक रास बात कतेक रास बात Ashish Anchinhar श्रीमान् जी अहाँ ठीके नै ताकि सकलहुँ नै तँ बहुत रास भेटल रहैत लिंक दऽ रहल छी लेख पढ़ि लेब आ तकर बाद हमर तर्क कटबाक प्रयास करब--- https://sites.google.com/.../videha/Home/Videha230.pdf...
लेख केर नाम अछि "कतेक रास बात" इंटरनेटपर मैथिलीक पहिल उपस्थिति नै अछि" उम्मेद अछि पढ़ि कऽ हमर तर्क काटब Kumar Padmanabh 1999 सँ दोसर मैथिलीक वेबसाइट छल, ई त बहुत बढियाँ. मुदा हमर उत्सुकता अछि जे जखन देवनागरीक कोनो टूले नइँ बनल छल तखन देवनागरी मे कोनो पोस्ट होएत छल. ओहि जमाना मे वेबसाइट बनेनाय बहुत कठिन छल. जिनका वेबसाइट बनबए आबैत छलनि लाखोँ मे कमबैत छलाह. गुगल 2003 मे ब्लोगर शुरु केलक. ओहि सँ पहिने नहि छल. Kumar Padmanabh गुगल साइट आ गुगल ब्लाग 2003 सँ पहिने नहि छल. Kumar Padmanabhhttps://en.wikipedia.org/wiki/Blogger_(service) EN.WIKIPEDIA.ORG Blogger (service) - Wikipedia Blogger (service) - Wikipedia Kumar Padmanabh हमरा मानबा मे कोनो आपत्ति नहि जे अहाँक आकि कोनो आन वेबसाइट 2003 सँ पहिने छल. कनि तर्क सँगत जानकारी दैतहुँ त' हमहुँ लोक सबकेँ कहितहुँ. ई त' बहुत नीक गप्प हेतैक जे 1999 सँ मैथिलीक वेबसाइट छल. Ashish Anchinhar श्रीमान् तामसे आन्हर नै होउ। उपर हम लेखक लिंक देने छी से तँ पहिने पढ़ू ने, तकर बाद तर्क करब Ashish Anchinhar Kumar Padmanabh हम पढिए के लिखने छी. मुदा जखन गुगल ब्लाग 2003 मे बनेने अछि आ गुगल . साइट 2008 मे बनेने अछि ओहि सँ पहिने कोना सम्भव अछि. एतबी कहबाक अछि. https://en.wikipedia.org/wiki/Google_Sites EN.WIKIPEDIA.ORG Google Sites - Wikipedia Google Sites - Wikipedia Ashish Anchinhar सिरिमान जी, विदेहक 230म अंकमे जे आलेख हम लिंकमे देने छी से पढ़ू आ तकर बाद अपन तर्क दियौ Kumar Padmanabh 2003-2004 मे हम धनाकर ठाकूर लेल geocities पर बनेने छलहुँ. 1 Ashish Anchinhar बनेने हेबै मुदा ओहिसँ पहिने 2000 कियो आर बना लेने रहै, धीरेन्द्र प्रेमर्षि सेहो 2003 जनवरीमे बनेने रहथि से नेपाली वेब पत्रिकापर लिखाएल पोथीमे सेहो उल्लेख छै, ओ पोथी सेहो 2003 मे प्रकाशित भेलै तखन अहाँक साइट कोना पहिल भेल, पूरा पढ़ू आ तकर बाद तर्क दियौ Kumar Padmanabh वएह त' कहैत छी. भ' सकैत छैक किओ बनौने हेताह. हमर जानकारी मे नइँ होएत. 2003 जनवरी मे तकनीकी रुपेँ सम्भव छलए. यूनिकोड आबि गेल छलए. मुदा 1999 मे तकनीकी रुपेँ सम्भव नहि छल. हँ अग्रेजी मे मैथिलीक बहुत साइट छल. Ashish Anchinhar सरकार लगैए हमर लेख नै पढ़लहुँ आ खाली एहिठामक हमर कमेंट पढ़ि रहल छी। लेख पढ़ू। पूर्ण रूपेन साबित भऽ गेल छै जे अपनेक साइट (कतेक रास बात) मैथिलीक पहिल साइट नै अछि, जँ आगू बात बढ़ेकाक हो तँ ओहि आलेखमे जे हमर आपत्ति अछि तकरा तर्कसँ खारिज करू Kumar Padmanabh अहाँ त' स्क्रीन शाट देने छीयै जे अहाँक ब्लोग 1999 सँ अछि. मुदा गुगल 2003 मे ब्लागर बनेने अछि. गुगल साइट सेहो 2008 मे बनल अछि. कोना मानि ली. हिंदीक पहिल ब्लाग सेहो 2002-2003 मे बनल छल. हमर दिमाग एहि सँ बेसी नहि लागि रहल अछि. मुदा हमरा स्वीकार करबा मे कोनो अशौकर्य नहि अछि. हमरा बड्ड नीक लागत जँ बुझि मे आबए जे 2003 सँ पहिने कोनो वेबसाइट छल. ओना अहाँ पहिल बेर कतेक रास बात केँ 2008 मे डिसकवर केलहुँ. अहाँक टिप्पणी हमर ईमेल मे एखन धरि सुरक्षित अछि. Ashish Anchinhar कतेक बुझाबी अहाँ के..। अहाँ एहि लिंकपर जा कऽ लेख किए ने पढ़ै छी https://sites.google.com/.../videha/Home/Videha230.pdf...
रहलै हमर कमेंटक गप्प तँ भाषा बुझबामे एखन अहाँ अपरिपक्व छी। पहिने देल लिंकपर जा कऽ लेख पढ़ू Kumar Padmanabh जी की करबै, हम ठीके अपरिपक्व छी. नहि बुझि मे आबि रहल अछि. तकनीकी गप्प आओर बेसी नहि बुझि मे आबि रहल अछि. इएह उपसँहार भेल एतेक गप्प आ तर्कक. रहय दियौ. हम पहिने कहि देने छलहुँ जे हमरा स्वीकार करबा मे कोनो आपत्ति नइँ. स्वीकार केलहुँ. Ashish Anchinhar अहाँ लेख पढ़ू तकर बाद तर्क करू आ हमर तर्ककेँ खारिज करू Ashish Anchinhar संजीव सिन्हा संजीव मिथिलाकिङ्कर जी हम अहाँसँ आग्रह करैत छी जे अहाँ एहि लिंकपर जा कऽ लेख पढ़ू आ तकर बाद कुमार साहेबजीकेँ कहियौन https://sites.google.com/.../videha/Home/Videha230.pdf...
कुमार साहेब पता नै लेख पढ़बामे किए संकोच कऽ रहल छथि। Dhanakar Thakur 18.1.2004 Kharagpur W.B. Maithili Padmnabh came at station for making website of AMP Ashish Anchinhar अरे भाइ जे 2000 मे साइट बनलै से पहिल हेतै कि 2004 बला, उपरमे लिंक देल गेल अछि हमर लेखकेँ मात्र तर्कसँ खारिज करू Ashish Anchinhar Dhanakar Thakurhttps://sites.google.com/.../videha/Home/Videha230.pdf... एहि लिंकपर जा कऽ हमर लेख पढ़ू आ ओकर तर्ककेँ काटू Dhanakar Thakur dekhk prayas kayl. sankshep me likak chahee je kee bat. Kono lekh me Introduction aa summary and conclusion hoit chhai- ham kichhu minut me confise bhelanhu. Dhanakar Thakur Padmnabh Maithilipremi chhathi aa mithilavasi b ahut din chalelah . Dhanakar Thakur Maithiliee me hamar 1973 k science artcle(Vishanu: Vish va Nav Jibank nirman) Viruses k oopar BSC(Hons) standard k Ranchi College magzine 1973 m,e chhapal chhal(aab uplabdh nahi) ek prati bhetal achhal se kinko lkag chali gel. Ashish Anchinhar मैथिलीप्रेमी छथि ताहिमे केकरा संदेह छै मुदा तँइ हुनक 2005 मे बनाओल साइट पहिल भऽ जेतै आ 2000 बला नै से कोना मानल जाएत। लेख नीकसँ पढ़बै तँ कोनो दिक्कत नै रहत Dhanakar Thakur Maithileek kaj karait rahu- bi9na sochne je ham pahile. Hamra sab din ee batr uthait achhi_ Mithila rajya sangharsh samiti 8.1.1995 k banaulanhu ham_ aab kiyo claim karit chhathi 1985 me o.. Ashish Anchinhar ई महान उपदेश पद्मनाभ बाबूकेँ दियौन वएह जबरदस्ती आफन तोड़ने छथि Dhanakar Thakur Ham Maithilik kaj me ona 1992 s chee aa CHHOT RAJYA Vikas lel awashyak 20.9.1992 k Ranchee express daily me chhapal achhi. takar baad lagatar chee. Ashish Anchinhar जे क्लेम करै छथि तिनकासँ सबूत माँगू जेना हम पद्मनाभजीसँ माँगि रहल छियनि Dhanakar Thakur Ashish Anchinhar Padmnabh swaym IT expert chhathi. Ashish Anchinhar ई कोन तर्क भेल? मने आइ.टी एक्सपर्ट भेलासँ ई मानि लेल जेतै जे ओ पहिल साइट बनेने छथि। की अहाँ मानै छी जे पद्मनाभजी विश्वक पहिल आ अंतिम आइ.टी एक्सपर्ट छथि ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.प्रियंवदा तारा झा- व्यूह ३.२.नबोनारायण मिश्रजीक कविता बिडम्बना ३. ३.आभा झा-व्यथा प्रियंवदा तारा झा व्यूह बहुत दिन सऽ ओझरायल छी मोनक व्यूहमे चेतनाक जलधिमे , भावक जंजालमे नहि कोनो एकपरिया अछि भेटैत सोझ कौखन सगरो बाटे बुझाइछ अबूझ।
सत्य लगैत अछि फुसियाही गप्प आदर्श जेना विक्षिप्तक प्रलाप नैतिकता अछि बनल विषहीन सर्पक पर्याय कतऽ भुतलायल मनुष्यक सहज औदार्य ?
अनन्त लालसा संग्रह केर ,पदलिप्साके नहि कोनो छोर विषय वासना भेल प्रबल , अहंकारके नहि कोनो ओर नेतागण छथि अनुपम अभिनेता,जनदुख सऽ नहि कोनो नाता अति प्रिय बाजब ,निज-गुण गायब , नहि लोकक कोनो चिन्ता।
धर्म , अध्यात्मके नवीन परिभाषा अछि लिखा रहल मूल-तत्व उपेक्षित , कलेवर अछि चमकि रहल जनमानस जेना अन्धानुकरणक कामी भऽ रहल कृष्णपक्षक अन्हार सबतरि भेल प्रचंड प्रबल।। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। नबोनारायण मिश्रजीक कविता बिडम्बना
धोबीक कुकूर सन घर के नै घाट के। थाहि-थाहि चलबाक अछि अनचिन्हार बाटके। जकरा लेल कनलहुँ तकरे आँखि नोर नहि जीवन संघर्षमय हमर दुखक ओर नहि चोर बाजए जोरसँ अभरैत डेग-डेगपर। प्रबुद्ध लोकक चुप्पी, प्रश्नचिह्न अछि दरेगापर। जरलपर नून छिटब, धर्मनिरपेक्षताक नामपर। दोषारोपण उचित नै, सेनाक सम्मानपर। घर के भेदिया लंका डाह, देखू आइ सीमानपर। पाथर फेकैत देशद्रोही, सेनाक जवानपर। सेनाक मनोबल अछि, उच्च अकासपर। राजनीति गर्म भेल, शहीदक लहासपर। नबोनारायण के विनती, देशद्रोही हो दंडित। सद्भावक बलपर हो वापसी कश्मीरी पंडित। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आभा झा व्यथा गौर वर्ण पर मुग्धमना कवि लिखथि अपूर्व रूप गाथा रचि- रचि अवयव, गसि- गसि उपमा रचथि रतिक मनहर काया। सौ गुण सुंदरताक फराके, दुग्ध- धवल छवि एक्के दिश तुला मध्य नापब जं दूहू, पायब गोरे कें अहां बीस।। कृष्ण- वर्ण तैंयों न उपेक्षित, गेलनि कवि केर ओत्तहु ध्यान लावण्यो बेशी कृष्णे मे, मादक नयन सेहो अभिराम। प्रेमक सघन तीव्रता मारुक, नायिकाक पद देलनि ललाम अंग-यष्टि सुषमा सुमनोहर,भ्रू- कटाक्ष छनि मार समान ।। कहू अहीं की रही उपेक्षित ,हम गोधूम -वर्ण बाला ? नव-रस केर बुन्नो सं वंचित, शुष्क हमर नयनक हाला! कतबो रुचिर गढ़नि देहक हो, प्रभा आननक हो विमला आंखि आम केर फांक, नासिका शुक सम, दंतपंक्ति धवला। कोन अपराध कयल हम कवि प्रति,रहलाह सदा कियै ओ रुष्ट कविक न्याय बस शब्दे टा मे,घोर उपेक्षा हमर अदृष्ट।। गुरुदेवक आह्वान सुनैते ,तीन काव्य रचलनि कवि गुप्त युगक उपेक्षित व्यथा हमर की पाओत शब्द, रहत वा सुप्त? २७.८.२०२० ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक, १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 111 ८) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 ९) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 १०) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 ११) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १२) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १३) विदेह सम्मान विशेषाक- २००म अक १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अक १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १४) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आमंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी VIDEHA 209th issue विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ] विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ] विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of original work.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् (c)२००४-२०२०. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2020 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' ३०५ म अंक ०१ सितम्बर २०२० (वर्ष १३ मास १५३ अंक ३०५)
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