VIDEHA — Issue 308 / अंक ३०८

Publication: VIDEHA · Issue: 308
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िव दे ह िवदेह Videha িবেদহ http://www.videha.co.in िवदेह थम मैिथली पािक ई पिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal   

   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

ISSN 2229-547X VIDEHA

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मानुषीिमह सं ृ ताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ$टूबर २०२० (वष+ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) ऐ अंकमे अिछ:-

१. गजे4 ठाकुर- संघ लोक सेवा आयोग/ िबहार लोक सेवा आयोगक परी9ा लेल मैिथली (अिनवाय+ आ ऐि:छक) आ आन ऐि:छक िवषय आ सामाय ;ान (अं<ेजी मा=यम) हेतु सािम<ी [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट- मैिथली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION P UBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONAL S AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] २. गW २.१ .इरा मिYलक- दूटा बीहिन कथा २. २. आशीष अनिचहार -दू टा गीतक चच\ उ:चारण केर आँगनमे २.३. डॉ ललन कुमार झा- म. म. राजनाथ िमc ओ ितिथ िनण+य : एक अ=ययन २. ४.ितरहुता िलिपक उeव आ िवकास- गजे4 ठाकुर- (भाग-२) २.५.गजे4 ठाकुर- मैिथली आ दोसर पुबिरया भाषाक बीचमे सgबध (बijला, असिमया आ ओिड़या) [यू.पी.एस.सी. िसलेबस, पm-१, भाग-“ए”, pम-५] २.६.डॉ. ललन कुमार झा-पं. तेजनाथ झा ओ संकार : एक समीक◌्षा २.७.िवtणु कात िमc- महादेवक कूटनीित २.८.डॉ. िचmलेखा- िमिथलामे पाविन-ितहार २.९.डॉ. िचmलेखा- िमिथलामे गीत नादक महव २.१०.रबी4 नारायण िमc- धारावािहक उपयास -लजकोटर (८म खेप)

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

ISSN 2229-547X VIDEHA

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मानुषीिमह सं ृ ताम् २.११.डॉ. अप+णा-नारी शwदक लेल िकछु xमुख शwदक िववेचना २.१२. दीपा झा- मैिथली आर बाल सािहय २.१३. योगे4 पाठक िवयोगी- नरक िवजय (धारावािहक बाल नाटक- पिहल खेप) २.१४. नद िवलास राय- बीहिन कथा- वािभमान २.१५. जगदीश xसादमyडल- लघुकथा- दिहबरी २.१६. जगदीश xसाद मyडल- आमक गाछी- धारावािहक उपयास (पिहल खेप) २.१७. गजे4 ठाकुर- गढ़-नािरकेल उपयास -mयीक पिहल उपयास "सह|शीष\ " क बाद दोसर उपयास- सहमद\ (पिहल खेप) २.१८. डॉ. ललन कुमार झा- म.म. उमापित ओ शुि} िनण+य २.१९.अनुपम रैना- याmीक ~यि$तव ओ कृितव २.२०.डॉ. ललन कुमार झा- पं. कुशेर कुमर ओ पव+ िनण+य: एक समी9ण २.२१. गजे4 ठाकुर- मैिथली आ िहदी/ बijला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- िबहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर िसिवल सेवा परी9ाक मैिथली (ऐि:छक) िवषय लेल २.२२. अनुपम रैना- याmीजीक मैिथली रचनामे समसामियक जीवनक अिभ~यि$त २.२३. डॉ. ललन कुमार झा- पुm ओ िपतृकम+ २.२४. डॉ. िचmलेखा- िमिथलाक पिरचय २.२५. डॉ. िचmलेखा-िमिथलाक भाषा एवं सािहत◌्य

३. पW ३.१.इरा मिYलक-३३ टा किवता आ गीत

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ३.२.इरा मिYलक- ५ टा शृंगार गजल ३.३. इरा मिYलक- २ टा बाल गजल ३.४.इरा मिYलक- ६ टा बाल गीत/ किवत ३.५.इरा मिYलक - ५ टा गजल आ तीन टा शेर ३.६.इरा मिYलक- ७ टा cृगार गीत ३.७.अशोक जे. दुलार- १ टा बाल-किवता ३.८. अशोक जे. दुलार- ७ टा किवता ३.९. िवtणु कात िमc- कुरसी ३.१०.आशीष अनिचहार- दू टा गजल ३.११. िxयंवदा तारा झा- उgमीदक आcय ३.१२.आनद दास- िचट◌्ठी ३.१३. कYपना झा- एकटा किवता ३.१४. डा िजयाउर रहमान जाफरी-आजाद ग़ज़ल

4.GAJENDRA THAKUR- RAJ DEO MANDAL - THE POET, THE NOVELIST - A PARALLEL HISTORY OF MAITHILI LITERATURE

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

१. गजे4 ठाकुर ........................................................................................................................ [संघ लोक सेवा आयोग / िबहार लोक सेवा आयोगक परी9ा लेल मैिथली (अिनवाय+ आ ऐि:छक ) आ आन ऐि:छक िवषय आ सामाय ;ान (अं<ेजी मा=यम ) हेतु सािम<ी] [एन .टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट -मैिथली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COM MISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS - MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GEN ERAL STUDIES (EN GLISH MEDIUM)] [FOR NTA -UGC -NET -MAITHILI ALSO] यू. पी. एस . सी. ( मेस ) २०२० ऑ£शनल : मैिथली सािहय िवषयक टेट सीरीज

यू.पी.एस.सी. क िxिलिमनरी परी9ा २०२० सgप¤ भऽ गेल अिछ। जे परी9ाथ¦ एिह परी9ामे उ§ीण+ करताह आ जँ मेसमे हुनकर ऑ£शनल िवषय मैिथली सािहय हेतिह तँ ओ एिह टेट-सीरीजमे सिgमिलत भऽ सकैत छिथ। टेट सीरीजक xारgभ िxिलgसक िरजYटक तकाल बाद होयत। टेट-सीरीजक उ§र िवWाथ¦ कैन कऽ editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकैत छिथ, जँ मेलसँ पठेबामे असोकज+ होइिह तँ ओ हमर ©ाªसएप नgबर 9560960721 पर सेहो x°ो§र पठा सकैत छिथ। संगमे ओ अपन िxिलgसक एडिमट काड+क कैन कएल कॉपी सेहो वेरीिफकेशन लेल पठाबिथ। परी9ामे सभ x°क उ§र निह देमय पड़ैत छैक मुदा जँ टेट सीरीजमे िवWाथ¦ सभ x°क उ§र देताह तँ हुनका लेल cेयकर रहतिह। िवदेहक सभ कीम जेक› ईहो पूण+तः िनःशुYक अिछ। - गजे4 ठाकुर [एन .टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट -मैिथली लेल / FOR NTA -UGC -NET -MAITHILI] NTA_UGC_NET_MAI THILI_01

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मानुषीिमह सं ृ ताम् NTA_UGC_NET_MAITHILI_02 NTA_UGC_NET_MAITHILI_03 (cी शgभु कुमार िसंह µारा संकिलत )

Videha e -Learning

MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL)

UPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS BPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS मैिथली x°पm - यू.पी.एस .सी. (ऐि:छक ) मैिथली x°पm - यू.पी.एस .सी. ( अिनवाय+) मैिथली x°पm - बी.पी.एस .सी.(ऐि:छक )

मैिथलीक वत+नी

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मानुषीिमह सं ृ ताम् १ भाषापाक २ मैिथलीक वत+नीमे पय\£त िविवधता अिछ। मुदा x°पm देखला उ§र एकर वत+नी इjनू BMAF001 सँ xेिरत बुझाइत अिछ, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा िदयौ, ततबे धिर पय\£त अिछ। यू.पी.एस.सी. क मैिथली (कgपलसरी) पेप र लेल सेहो ई पय\£त अिछ , से जे िवWाथ¦ मैिथली (कgपलसरी) पेपर लेने छिथ से एकर एकटा आर फाट-रीिडंग दोसर-उखड़ाहामे करिथ| IGNOU इjनू BMAF -001

............................ ............................................................................................

MAITHILI (OPTIONAL)

TOPIC 1 [Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा पिरवार म=य मैिथलीक थान/ मैिथली भाषाक उeव ओ िवकास (संकृत, xाकृत, अवह¸, मैिथली)] TOPIC 2 (Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates) TO PIC 3 (¹योितरीर, िवWापित आ गोिवददास िसलेबसमे छिथ आ रसमय किव चतुर चतुरभुज िवWापित कालीन किव छिथ। एतय समी9ा शृंखलाक xारgभ करबासँ पूव+ चाº गोटेक शwदावली नव शwदक पय\य संग देल जा रहल अिछ। नव आ पुरान शwदावलीक ;ानसँ ¹योितरीर, िवWापित आ

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मानुषीिमह सं ृ ताम् गोिवददासक x°ो§रमे धार आओत, संगिह शwदकोष बढ़लासँ ख›टी मैिथलीमे x°ो§र िलखबामे धाख आते- आते खतम होयत, लेखनीमे xवाह आयत आ सु:चा भावक अिभ~यि$त भय सकत।) TOPIC 4 (ब4ीनाथ झा शwदावली आ िमिथलाक कृिष -मय शwदावली) TOPIC 5 (वैYयू एडीशन - xथम पm - लोिरक गाथामे समाज ओ संकृित ) TOPIC 6 (वैYयू एडीशन - िµतीय पm - िवWापित ) TOPIC 7 (वैYयू एडीशन - िµतीय पm - पW समी9ा- बानगी) TOPIC 8 (वैYयू एडीशन - xथम पm - लोक गाथा नृय नाटक संगीत ) TOPIC 9 (वैYयू एडीशन - िµतीय पm - याmी) TOPIC 10 (वैYयू एडीशन - िµतीय पm - मैिथली रामायण ) TOPIC 11 (वैYयू एडीशन - िµतीय पm - मैिथ ली उपयास ) TOPIC 12 (वैYयू एडीशन - xथम पm - शwद िवचार ) TOPIC 13 (ितरहुता िलिपक उe व ओ िवकास ) TOPIC 14 (आधुिनक नाटकमे िचिmत िनध+नताक समया- शgभु कुमार िसंह )◌् TOPIC 15 (वातं»यो§र मैिथली कथामे सामािजक समरसता- अ¼ण कुमार िसंह ) TOPIC 16 (यू. पी.एस .सी. मैिथली xथम पmक परी9ाथ¦ हेतु उपयोगी संकलन , मैिथलीक xमुख उपभाषाक 9ेm आ ओकर xमुख िवशेषता, मैिथली सािहयक आिदकाल , मैिथली सािहयक काल -िनध\रण - शgभु कुमार िसंह ) TOPIC 17 (मैिथली आ दोसर पुबिरया भाषाक बीचमे सgबध (बijला, असिमया आ ओिड़या) [ यू.पी.एस .सी. िसलेबस , पm -१, भाग -“ए”, pम -५]) TOPIC 18 [मैिथली आ िहदी/ बijला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- िबहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस .सी.) केर िसिवल सेवा परी9ाक मैिथली (ऐि:छक ) िवषय लेल ]

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ..................................... ...................................................................................

GENERAL STUDIES (PRELIMINARY & MAINS)

GS (Pre)

TOPIC 1 ........... .............................................................................................................

GS (Mains)

.......................................................................................................................................... ...... NCERT -ENVIRONMENT CLASS XI -XII NCERT PDF I -XII TN BOARD PDF I -XII ALL INDIA RADIO ENGLISH NEWS ALL IN DIA RADIO NEWS ARCHIVE ALL INDIA RADIO TALKS AND CURRENT AFFAIRS

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मानुषीिमह सं ृ ताम् RAJYA SABHA TV NEWS DISCUSSIONS ................. .......................................................................................................

OTHER OPTIONALS

........................................................................................................................ IGNOU eGYANKOSH

........................................................................................................................ (अनुवत+ते) -गजे4 ठाकुर

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मानुषीिमह सं ृ ताम् २. गW २.१ .इरा मिYलक- दूटा बीहिन कथा २. २. आशीष अनिचहार -दू टा गीतक चच\ उ:चारण केर आँगनमे २.३. डॉ ललन कुमार झा- म. म. राजनाथ िमc ओ ितिथ िनण+य : एक अ=ययन २.४ .ितरहुता िलिपक उeव आ िवकास- गजे4 ठाकुर- (भाग-२) २.५.गजे4 ठाकुर- मैिथली आ दोसर पुबिरया भाषाक बीचमे सgबध (बijला, असिमया आ ओिड़या) [यू.पी.एस.सी. िसलेबस, पm-१, भाग-“ए”, pम-५] २.६.डॉ. ललन कुमार झा-पं. तेजनाथ झा ओ संकार : एक समीक◌्षा २.७.िवtणु कात िमc- महादेवक कूटनीित २.८.डॉ. िचmलेखा- िमिथलामे पाविन-ितहार २.९.डॉ. िचmलेखा- िमिथलामे गीत नादक महव २.१०.रबी4 नारायण िमc- धारावािहक उपयास -लजकोटर (८म खेप) २.११.डॉ. अप+णा-नारी शwदक लेल िकछु xमुख शwदक िववेचना २.१२. दीपा झा- मैिथली आर बाल सािहय २.१३. योगे4 पाठक िवयोगी- नरक िवजय (धारावािहक बाल नाटक- पिहल खेप) २.१४. नद िवलास राय- बीहिन कथा- वािभमान २.१५. जगदीश xसादमyडल- लघुकथा- दिहबरी २.१६. जगदीश xसाद मyडल- आमक गाछी- धारावािहक उपयास (पिहल खेप) २.१७. गजे4 ठाकुर- गढ़-नािरकेल उपयास -mयीक पिहल उपयास "सह|शीष\ " क बाद दोसर उपयास- सहमद\ (पिहल खेप)

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मानुषीिमह सं ृ ताम् इरा मिYलक दूटा बीहिन कथा १ असमंजस बाप रे!!!!!! एतेक भोकासी पािरके किथ ल ए कनैत छै ई छॱरी! अजगुत केने छै। निहं जािन सासुर बसबो करतै िक निहं।बेचारे बर के गृहथी ओ बसय देत िक निहं। सोनकाकी िचता मÀ पड़ल छली।बड़बड़ाइत छली।हुनकर बेटी शोभा के कािÁ दूरागमन के िदन छैन।सासुर संओ दू टा िदयौर आ पाहुन संगे एकटा खबास सेहो आएल अिछ। शोभा! पढ़ल िलखल सुिशि9त एकटा आधुिनक सुख सुिवधा आ माहौल मÀ बढ़ल लड़की अिछ।wयाह भेल छैन सुनील संग।सुनील नीक पोट पर कg£युटर इंजीिनयर छैथ। एखन एक स£ताह पिहने अमेिरका के कोनो बहुत नीक कंपनी से पोट ओफर भेल छैन।ओ संगे शोभा के ल क जेता।िबयाह के पिहने तय भैल छलैन जे शोभा अपन माटस+ के पढ़ाई जारी रखती।शोभा अिह िनण+य संओ अित xस¤ छलीह।मुदा ई िब:चे मÀ िबचमाईन भ गेल छल।सुनील कहलिखह जे एखन कनी िदन पढ़ाई थिगत क िदय फेर समय अनुकूल होयते परी9ा द देब।शोभा ई सुिन के ते एकदgमे संओ हकबका गेल छलैथ।एकाएक हुनकर अितव जेना िसमिट गेल छलैन ।एक ते माए बाप संओ दूर सेहो एतेक दूर िक जे देशक सीमा पार! दोसर पढ़नाइ थिगत करब ! सबटा पिरिथित एÂे बेर बजिर गेल शोभा के आगू।बेचारी छुिट -छुिट के अपन िववशता पर कानय मुदा की करौ नै करौ से उपाय निहं सूझाइन।बहुत असमंजस मÀ छलीह शोभा।हुनका िकनको संओ कोनो िशकायत निहं छलैन। मुदा मोनक कोनो कोन कचोिट रहल छलिह अपन अितव पर। नारीपन के अपे9ा क बोझ सॱ अंततः ओ दिब गेिल ।शायद भारतीय नारी सॱ इएह अपेि9त अिछ। ? २ पाहुन एलिखन

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् गै सोन बिहन! सोन बिहन! कतय छी तूँ! देखी! पाहुन आिब गेलखुन।िचकरते नैना बाहर भेली आ पाहुन के अटैची हाथ मÀ लैत पाहुन के घर अनलिखन।अटैची रािख तखन अपन पाहुन के पएर छूिब xणाम केलक।आब ताधिर घर के सब लोग जुिट गेल छलिखन।सब नैना के देिख हंसय लागल जे देखू बिहनदाइ के बतहपन।गै पाहुन के पिहने xणाम किरिथ िक ने।अटैची कतहु भागल जायत छलै?सब िकयो पाहुन संओ हाल चाल पूछय लगलैथ। पाहुनो अपन याmा वृतiत सुनबय लगला जे कोना कतेक मोिÄकल संओ दू िदन के छु¸ी िमलल।एतबे मेघर संओ Åे मÀ पािन आ पiच छ कप चाय बनाक नैना एली।पाहुन आ घर के सबलोग के चाय पानी देलैथ आ च¸ द अपन सोन बिहन लग दौड़ल गेली।गै सोनबिहन! तोरा बुझायत निहं छौ जे पाहुन एलिखन अिछ।देखय के मोन निहं करय छौ तोरा। हमरा ते खुशी संओ मोन गदगद भेल अिछ आ एकटा तूं छे िक नाम सुिनते पाहुन के घर मÀ नुकायल बैसल छी। सोनबिहन बाजिल; गै नैना! खुशी ते हमरो बहुत भेल ऐ।मुदा सामने कोना जाउ से लाज होइये। पएर उिठते निहं अिछ।बहुत हड़बड़ाहट भ रहल अिछ भीतर।की कº! धूर जो! एहनो कहॴ किनयi भेलैये।पढ़ल िलखल छÀ।कनी िदन मÀ आब कालेज मÀ ले$चर देबÀ।तिहयो ओिहना के ओिहना ! एकदम बु}ू छÈ तॲ। एतबा बािजते बािजते नैना फेर एक ले दू ले फुर+ भ गेली अपन पाहुन सब लग जाक फेर संओ ठाढ़।

-इरा मिYलक, िरलायंस <ीस टाउनिशप जामनगर गुजरात।

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

आशीष अनिचहार दू टा गीतक चच\ उ:चारण केर आँगनम ◌े दरभंगा घरानाक युवा गायक सिमत मिYलक अपन शाmीय ºप संगे जन लोक लेल िकछु गीत-संगीत सेहो xतुत केलाह। हम हुनक गाएल दू गीत सुनलहुँ आ ओिहपर हम अपन िवचार दऽ रहल छी। आगू कोनो बात कहबासँ पिहने किह दी जे हमर िट£पणीमे कोनो राग-भास, सुर-ताल केर चच\ नै रहत कारण ओकर ;ान हमरा अपने नै अिछ। तँइ माm िकछु साधारण बात सभ हम एिहठाम देब। मैिथलीमे 'आिब' शwद केर उ:चारण 'आइब' सेहो होइत छै मुदा एहन केखन हेतै से वा$य आ ओकर उWेÄयसँ संचािलत होइत छै। आ एहने िनयम मािट वा पािन लेल सेहो छै। हम पिहल गीत "जनम भूिम अिछ िमिथला" सुनलहुँ जािहमे "कनी आइब अपन नैहर िनहाº हे म›" गाएल गेल छै। मुदा एिह गीतक जे xकृित छै तािहमे 'आिब' केर उ:चारण सही हेतै आ गीतक वºपकÊ बेसी िनखारतै। एहने िदÂत एही गीतमे आएल शwद 'भिर' संगे भेल छै जािहमे गाएक एकरा 'भइर' ºपमे गािब देलिथ। गायक जँ किहो भिवtयमे एकरा गाबिथ तँ 'आइब' बदला 'आिब' 'भइर' बदला 'भिर' उ:चारण करिथ। एकटा रोचक बात एिह गीतमे 'दुआर' शwदक xयोग भेल छै जकर मूल वºप 'दुआिर' छै। गायक जिहया फेर गाबिथ एकरा एक बेर 'दुआइर' बना कऽ गाबिथ बहुत बेसी मधुरता एतै एिह गीतमे से हमरा िवास अिछ। ई नीक बात जे 'अिछ' केर उ:चारण सही ºपÀ कएल गेल अिछ। एही गीतक एकटा प›ितमे 'खविनहार' मुदा हमरा जनैत एकरा 'खेवनहार' ºपमे गाएल जेबाक चाही जािहसँ गीत सुनबामे आरो मधुर होइतै। ओना हम आनो गोटासँ आ<ह करबिन जे ओ सूनिथ कारण बहुत बेर कान सेहो धोखा दऽ दैत छै। एिह गीतकÊ पारंपिरक किह कऽ xचािरत कएल गेल अिछ मुदा हमरा जनैत ई गीत पारंपिरक नै अिछ आ अही कालखंडमे िकनको µारा िलखल गेल हएत आ से हमरा 'दीप बुझल' सन xयोगसँ बुझाइए। ई 'बुझल' साफे-साफ िहंदी केर नकल अिछ। ओना एिह बुझलमे गायक केर बेसी दोष नै कारण जे िलखल भेटलिन से गेलिथ। बहुत संभव जे 'आइब' बला xसंग गीत िलखए बलासँ जुड़ल हो मुदा गायकसँ सेहो एहन अपे9ा रिहते छै। सिमतजीसँ ई अपे9ा तँ रहबे करत जे ओ गीतकारक नाम खोिज कऽ लीखिथ। गीतक गुण-दोषपर चच\ होइते रहतै मुदा

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मानुषीिमह सं ृ ताम् गीतकारक नामक िहसा जºर भेटबाक चाही। एिह गीतक संगीत प9 नीक अिछ। िकछु अलग हिट कऽ अिछ आ सुनबामे सेहो नीक लगैत अिछ तैयो हमरा सिमतजीसँ ई अपे9ा अिछ जे ओ एहने संगीत िदस नै रहिथ। मैिथली संगीतमे एखन धिर नवाचारी xयोग नै भेलैए। िकछु गायक िगटार आ Ëम बला अपन संगीतकÊ नवाचारी किह दै छिथ मुदा ई तेहने बात भेल जेना िकयो ई दाबी करए जे हम जॴस पिहरने छी तँ हम धोती बलासँ बेसी आधुिनक आ xगितशील छी। मुदा सभ जानै छिथ जे आधुिनक ओ xगितशील िवचार लेल कपड़ा नै मानक छै तेनािहते नवाचारी संगीत लेल िगटार एवं Ëम मानक नै छै। हमर कहबाक मतलब ई नै जे िगटार-Ëम बला संगीत खराप छै मुदा िगटारे-Ëमसँ संगीत आधुिनक बनतै से बात नवाचार कम संगीतक संग ितकड़मबाजी बेसी छै। समय एहन ितकड़मी संगीतकÊ अपने-आप खािरज कऽ दैत छै आ संगीते िकए समय हरेक कलामे कएल गेल ितकड़मकÊ खािरज कऽ दैत छै। सिमतजीक गाएल ई पिहल गीत अह› सभ एिह िलंकपर जा कऽ सूिन सकै छी- https://youtu.be/eWP -fi0bBSM दोसर गीत िवWापित रिचत 'जय जय भैरिव' अिछ जकर संगीत प9 नीक अिछ। पिहलो गीतसँ बेसी नीक मुदा एिह गीतक उ:चारण नीक नै अिछ। एिह गीतमे गायक उ:चारणसँ हम िनराश भेलहुँ। एिह गीतसँ ई बुझाइत अिछ जे सिमतजीकÊ एखन मैिथली =विन आ उ:चारणपर िनयंmण करब बेसी आवÄयक छिन अयथा िहनक गीत साधारण लोकसँ किट जाएत। हमरा जनैत शाmीय आ लोक गीतमे बहुत रास अंतरक संग एकटा महवपूण+ अंतर ईहो छै जे शाmीय संगीतमे =विन बदला राग-तालक शु}ता ताकल जाइत छै जखन िक लोकगीतमे राग-तालक बदला शwदक उ:चारण ओ =विनक शु}ता बेसी ताकल जाइत छै (जँ हम गलत होइ तँ टोकी हमरा)। एिह तवपर हमरा ई गीत कमजोर लागल आ Ìमपूण+ सेहो। भिवtयमे लोक एहने गलत उ:चारणकÊ मानक मानए लागत कारण ओ कहत जे दरभंगा घरानाकÊ सुनने छी आ तािहमे एनािहते गेने छिथन। एिह तरहक गीतमे जे गंभीरताक अपे9ा छल से पूरा नै भेल। ई गीत एिह िलंकपर सूिन सकैत छी- https://youtu.be/Fx55V5n0l90 सम< ºपसँ देखी तँ उपरक दूनू गीतक संगीत प9 बेसी नीक अिछ आ उ:चारण प9 कमजोर। पिहल गीतक साउंड नीक अिछ तँ दोसर गीतक साउंड ओतेक साफ नै भेल अिछ। सिमतजीक जे अवाज छिन से xायः सभ तरहक मूडक गीत लेल उपयु$त छिन मुदा हमर मानब अिछ जे रोमiिटक, भजन ओ गजल लेल िहनक अवाज सव\िधक उपयु$त रहत। ~यि$तगत ºपसँ हम चाहब जे सिमतजी मैिथली गजलक गायनमे आबिथ। मैिथलीमे गजल गाियकी शूय अिछ तकरा सिमतजी नीक जक› भिर सकै छिथ। ऐ रचनापर अपन मंत~य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् डॉ ललन कुमार झा म. म. राजनाथ िमc ओ ितिथ िनण+य : एक अ=ययन म.म. राजनाथ िमc xणीत ‘ितिथ िनण+य:’ धम+शाm एवं ¹योितषशाmक समी9ामक उकृÐ कृित अिछ। एिहमे िवµान <थकार xितपदासँ लऽ कऽ अमावया धिरक कृयक सxमाण xितपादन कएलिह अिछ। िवशेष ºपसँ वºप िनºपण, सामाय पिरभाषा कथन, काल िवभाग xितपादन कृtणाÐमी वÑत िनºपण, नवराm िनण+य, रामनवमी िवÄलेषण, दीपावली, महािशवराmी, होिलकादहनािदक जे िववेचन कएल गेल अिछ से िनिÒत ºपेण सुधी पाठकक मानसकÊ xमुिदत कएिनहार अिछ। आब x° उठैत अिछ जे ‘ितिथ की थीक?’ अत् (गमने) इिथन् िवधानसँ पृषोदरािद सूmसँ वैकिYपक ङीप् xयय लगलासँ दीघ+ भऽ कऽ ितिथ शwद बनैत अिछ, जकर सामाय अथ+ होइछ च4िदवस। अथवा तन् (िवतारे) धातुसँ सेहो एकर िनtपि§ मानल जाइत अिछ। तदनुसारÊबढ़एवला अथवा 9य होमएवला च4कलाकÊ जे िवतािरत करएवला काल िवशेष ‘ितिथ’ कहबैत अिछ- “तंm ितिथ शwददतनोतेWतोिन+tप¤:। तनोित िवतार यित वध+मानi 9ीयमाणं वा,च4कला मेकi च कालिवशेष: सा ितिथ। यµायथो$त कलयातयत इित ितिथ:। तदु$तं िस}iत िशरोमणै तयते कलया यमातमा§ाितथय मृता:।” -कालमाधव पृ.- 92 एिह धारणाकÊ लÔय कऽ कद पुराणमे कहल गेल अिछ जे हे देिव! सोलह भागसँ िवभ$त भऽ कऽ अमाक नासँ पिरिचत जे महाकला अिछ, ओएह माया आओर परमा शरीर धारीक लेल शरीर धारण करैत अिछ। हे सुदर मुखवाली! अमावयासँ लऽ कऽ पूिण+मा धिर च4माक जे कला अिछ ओकरा ितिथकनामसँ अिभिहत कएल जाइत अिछ-

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मानुषीिमह सं ृ ताम् “अमाषोऽशभागेन देिवxो$ता महकला संिथतापरमा माया देिहनi देह धािरणी। अमािद पौण+मायत या एव शिशन: कला: ितिथयता समाÕयाता: षोडशैव वरानने।।” - कालमाधव पृ.- 92 ितिथ िनण+यकार पं. िमc <थारgभमे सव+xथम गणेश, भगवती, सरवती, िवtणु, महादेव आओर गु¼कÊ xणाम कएलिह अिछ- “न~वा ढुिtढं िगरं िवtणु िनबधृन् िगिरशं गु¼न। िpयते राजनाथेन ितिथण+य सं<ह:।।” <थकार ितिथकÊ अखyड िवशेषकाल कहलिह अिछ। िवtणुधम×§रक वचनकÊ उYलेख कऽ कालक िवशेषताक सेहो वण+न कएलिह अिछ। तदनुसार काल अनािद िनधन अिछ, ¼4 ओकर संकष+ण अिछ, सभ xाणीक कलना ‘नाश’ कऽ ओ काल नामसँ अिभिहत अिछ- “अनािदिनधन: कालो ¼4: संकष+ण: मृत:। कलानात् सव+भूतानi स काल: पिरकीि§+त:।।” सभ भूतक कष+णसँ ई संकष+ण आओर शमन कएलासँ ¼4नाम कीि§+त अिछ। अनािद िनधनक कारण ओ परमेर अिछ- “कप+णात् सव+भूतानi स तु संकष+ण मृत। सव+भूतशिमवा:च स¼4 पिरकीि§+त:।। अनािदिन धनवेन समहान् परमेर:।।” -कालमाधव पृ.- 16 पं. िमc सामाय पिरभाषामक तथा काल िवभाग xकरणमे सभ ितिथक िवशेषता तथा ओिह ितिथक कत+~यताक िवषयमे सेहो वण+न कएलिह अिछ। ितिथक ल9ण सेहो कहल गेल अिछ। तदनुसार ओकर तीन ल9ण खव+, दप+ ओ िहंसा अिछ- “खब× दप+तथा िहंसा िmिवधितिथ ल9णम्। धम\ धम+ व शादेव ितिथmेधा िववि9ता।।” -ितिथ िनण+य पृ. 03 अथ\त् खब+-साgय (सम ितिथ) विध+त होमएवला आओर िहंसा 9य यु$त तिथ कहबैत अिछ। ितिथक संदभ+मे ई बुझब आवÄयक अिछ जे xितपदासँ लऽ कऽ पूिण+मा अथवा अमावया पय+त प4ह ितिथ होइत

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मानुषीिमह सं ृ ताम् अिछ। नाड़ीसँ उ§र ितिथकÊ बािधत करैत अिछ। सभ xकारक ई वेध वÑतोपवासक दूषक अिछ तथा अ¼णोदय कािलक वेध वैtणवक लेल मानल गेल अिछ। एिह तिथ िनण+य <थक अ=ययनसँ ¹योितषशाmक ितिथक आन सiकेितक नामक सेहो पता लगैत अिछ। ई संभवत: शwदलाधवक लेल xयोगमे मनीषी लोकिन µारा आनल गेल छल होएत। एकरा अनुसारÊ िभ¤-िभ¤ ितिथक ¹येाितष शाmीय नाम एिह xकारÊ अिछ- पंचमी-वाण आओर नाग, दशमी- िदग् चतुद+शी भूत, िµतीया, तृतीया, चतुथ¦ आओर पंचमी- भुjमाितनjन,भुत-षØी, स£तमी-पyमुिन,अÐमी-नवमी-वसुरÙ, एकादशी यु$त µादशी-¼4ेण यु$ता µादशी, पंचमी यु$त षØी नागिवदा एकादशी िव} µादशी-¼4िव} िदवाकर, तृतीया चतुथ¦ युता- गौरी िवनायकोपेत, नवमी सिहता दशमी-सँ दुग\ दशमी। पंचमी दशमी पूिण+मा (अमावया) पूण\। एिह तरहÊ ितिथ िनण+य <थोपयोगी िवषय =यान देबाक योjय अिछ। सव+xथम नदा Ì4ोद शwद ककर ~यापक अिछ, ई सभ <थ िवषयवगमक लेल आवÄयक अिछ। एिह शwदकÊ एिह xकारÊ जानल जा सकैत अिछ- xितपदा षØी एकादशी- नदा िµतीया स£तमी µादशी- भ4ा तृतीया अÐमी mयोदशी- जया चतुथ¦ नवमी चुद+शी- िर$ता पंचमी दशमी पूिण+मा (अमावया)- पूण\ सामाय ितिथ िवषयक पिरभाषाक बाद ‘काल िवभाग’क िववेचन xतु कएल गेल अिछ। एिह pममे ओ ÚÛवैवत+ पुराणगत वचनक उYलेख कएलिह अिछ। तदनुसारÊ xात: चािर दyड पय+तक समय अ¼णोदयक अिछ। ई सयासीलोकिनक नानक समय अिछ, जखन सरोवरक जल गंगाजलक समान पिवm रहैत अिछ- “चत|ो घिटका xातर¼णोदय उ:चयते। यतीनi नानकालोऽयं गंगाgभ: सदृश: मृता।।” -ितिथ िनण+य पृ.- 06 xात: कालक बाद तीन दंड धिर संगव कहबैत अिछ, तीन मुहू§+ आगू धिर म=याÜ आओर ओकर बाद उपराÜ होइत अिछ। ओकर बाद तीन मुहू§+ पय+त सायंकाल होइत अिछ जािहमे cा} विज+त अिछ। ई रा9सी वेला कहबैत अिछ जे सभ कम+क लेल गिह+त समय मानल गेल अिछ। एकरा िमिथलामे ~यवहािरक भाषामे ‘गदहबेर’सेहो कहल जाइत अिछ। िदनक प4ह मुहू§+ मानल जाइत अिछ जािहमे आठम् भाग कुतपकाल तथा नवम् रोिहणी कहबैत अिछ। ई दुनू काल िपतरक लेल अ9य पुyयxद मानल जाइत अिछ-

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मानुषीिमह सं ृ ताम् “xात: कालो मुहू§Ýmीन् संगवतावदेव िह। मा=याÜनिmमुहू§+: यादपराÞतत: पर:। सायाÜिmमुहू§+: या:छा}ं तm न कारयेत्। रा9सी नाम सा वेला गिह+ता सव+कम+सु।। अßलोमुहू§\ िवÕयाता दशपंच च सव+दा। तmाÐमो मुहू§× य: स काल: कुतुप: मृत:।। रौिहणो नवम: xो$त: िपतृणामुभयं िहतम्।।” -ितिथ िनण+य पृ.- 07 िपतरक एकोिदÐ हेतु धम+शाmमे कुतपक अयिधक महव अिछ जे िदनक आठम मुहू§+ होइत अिछ, जािह समय सूय+ अपन छायामे xवेश कऽ खàगक तरह दृÄय होइत अिछ। िदनमे प4ह मुहू§+ होइत अिछ आओर आठम मुहू§+ कुतप अिछ। पं. राजनाथ िमc सेहो कुतप कालक उपथापन एिह ºपÊ कएलिह अिछ- “µौ यामौ घिटकायूनौ µौ यामो घिटकािधकौ। स काल: कुतुपो ;ेय: िपतृणi द§म9यम्।।” एिहठाम यामक अथ+ तीन घटा अिछ आओर घिटकाक अथ+ चौबीस िमनट अिछ। ओिहना पं. िमc सेहो ‘पूव\हणॲ वै देवानi म=यिदनं मनुtयानामपराहण: िपतृणाम्’वचनक पदथापन कऽ िदनकÊ तीन भागमे बॉंिट देने छिथ। िनबधकार एिह तरहÊ न9m (तारा) ‘दश+नात् न$तं (राित) xदोषोऽतमनादू=व+ घिटकाµिमtयते’ किह कऽ xदोषक पिरभाषा सेहो कएलिह अिछ। xदोश तथा राितक सgबधमे <थकार िमिथलेश शुभंकर ठाकुर तथा वध+मान उपा=यायक वचनक उYलेख कएलिह अिछ। तदनुसार उदयसँ दू घड़ी पूव+ xात: सं=या तथा सूय\तक बाद तीन घड़ी तक सायंकाल कहबैत अिछ। एिह तरहÊ सूय\तक तीन मुहू§+ धिर xदोष आओर तदनतर राितक उYलेख कएलिह अिछ- “उदयाxा$तनी स=या घटकाµय िमtयते। सायं सं=या िmघिटका अतादुपिर भावत:।। िmमुहू§+: xदोष: याद् भानावतंगते सित। तपरा रजनी xो$ता तm कम+ पिर~यजेत्।।” -ितिथ िनण+य पृ.- 08

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ‘xदोषो रजनीमुख:’वचन सेहो xचिलत अिछ। राितक बाद <थकार िनशाभागक उYलेख सेहो कएलिह अिछ। तदनुसार सूय\तक तीन घटा बीत गेलापर िनशा भाग आओर अड़तालीस िमनट आओर बीित गेलाक बाद राित िनशा भाग अिछ। एिह तरहÊ xात: संगव अधान अपराÜ xदोष राित िनशा भाग, अित िनशा भागक वण+न कऽ पं. िमc प9ीक प4ह ितिथक वण+न सेहो कएलिह अिछ। xितपदा िµतीय, तृतीया, चौठ, पंचमी, षØी, स£तमी, अÐमी, नवमी, दशमी एकादशी, µादशी, mयोदशी, चतुद+शी आओर पूिण+मा ई प4ह ितिथ अिछ मुदा कृtणप9मे प4हम् ितिथ अमावया कहबैत अिछ। xथम ितिथक ºपमे xितपत् वा xितपदाक नाम अबैत अिछ जकरा सgबधमे पूव+ ितिथसँ यु$तक <ाáताक अनुशंसा कएल गेल अिछ। ‘सा पूव+युता<ाá’एिहठाम <थकार पैठीनिसक वचनक उYलेख कएलिह अिछ- “पंचमी स£तमी चैव दशमी च mयोदशी। xितप¤मी चैव क§+~या सgमुखी ितिथ:।।” -ितिथ िनण+य पृ.- 19 सgमुखीक अथ+ सायाÜ ~यािपनी मानल गेल अिछ। मुदा आिन शु$ल xितपदाकÊ पÕयािपनी िकंवा िµतीयासँ यु$त रहबाक अनुशंसा कएल गेल अिछ। मुदा जँ अमावया यु$त xितपदाकÊ नवराmमे केओ कलश थापना करैत अिछ तँ ओिहमे देवी दुग\ शाप दऽ कऽ भtमशेष कऽ दैत अिछ- “यो मi पूजयते भ$तया िµतीया यi गुणािवताम्। xितप:छारदॴ ;ावा सोऽ°ुते सुखम9यम्।। यिद कुभ\âायु$त- xितप£थापनं मम। तमै शापायुतं दवा भमशेषं मम।।” -ितिथ िनण+य- पृ. 09 xथमा ितिथक बाद िµतीया ितिथक िनण+य करैत म.म. र¹जे िमc मृितकार पैठीनिस मृितक वचनोYलेख कएलिह अिछ जे तृतीयायु$त िµतीयाक <हणानुशंसा कएलिह अिछ। पैठीनिस युjम िनयमक अवलgबन कऽ परितिथयुत ितिथक अनुमोदन कएलिह अिछ- “एकादÄयÐमी पØी िµतीया च चतुद+शी। mयोदÄय£यमावाया उपोtया: यु: परािवता।।” -ितिथ िनण+य पृ. 11

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् तृतीया िनण+यक xसंगमे पं. िमc सव+xथम वैशाख शु$ल तृतीया िववेचन कएलिह अिछ। ई तृतीया उदय~यािपनी अनुशंिसत कएल गेल अिछ। एिह xसंगमे देवी पुराणक वचनोYलेख कएल गेल अिछ। एिह वचनक अनुसार पाव+ती िxया (तृतीया) सूय×दयक अपे9ा रखैत अिछ, ितिथ युjमताक कोनो बात निह- ‘युगाWावष+वृि}Ò स£तमी पाव+तीिxया। सूय×दयमपे9ते न तm ितिथयुjमता।।’ चौठ (चतुथ¦) गणेश चौठ मातृ िव}ा अथ\त् तृतीय वृ}ा xशत अिछ जँ म=याÜ ~यािपनी होअए तँ दोसर िदन (पंचमी यु$त) मे क§+~य अिछ- “चतुथ¦ गणनाथय मातृिव}ा xशयते। म=याÜ~यािपनी चेयापरतÒ परेऽहिन।।” पंचमी ितिथ पूव+युता <ाá अिछ। तÊ पं. र¹जे िमc ÚÛ पुराणक- ‘पंचमी च xकत+~या चतुथ¦ संिहता xभो’तथा हारीतक- ‘चतुथ¦ संयुता काय\ पंचमी परया न तु’वचनकÊ उ}ृत कऽ अपन मत~य ~य$त कएलिह अिछ। मुदा नागपंचमी षØी युता अनुशंिसत कएल गेल अिछ- ‘नागपंचमी तु परैव’ ÚÛवैव§+ पुराण सेहो षØी युता पंचमीक अनुशंसा कएलक अिछ- “पूव\हणे कृtणप9े तु नागतोषकरी ितिथ:। पंचमी तु xक§+~या षtßया यु$ता तु नारद।।” -ितिथ िनण+य- 17 अयm चतुथ¦युता क§+~य होइत अिछ। पं. र¹जे िमc कद षØी वÑतकÊ पूव+ यु$त ितिथसँ िविहत मानलिह अिछ। एिह लेल मृितकार विशØक वचनकÊ उ}ृत कएलिह अिछ- “कृtणाÐमी कदषØी िशवरािm चतुद+शी। एता: पूव+युता <ाáाितãयते पारणंचरेत्।।” एकर अितिर$त स£तमी युता <ाá अिछ। तÊ मृित समु:चयमे एिह सgबधमे कहल गेल अिछ- ‘षtßयÐमी अमावाया कृtणप9े चतुद+शी। एता: परयुता <ाáा: परा: पूवäण संयुता:।। ‘ष. योिरितयुjमात्’इयािद वचनसँ स£तमी षØी युता <हण करबाक योjय अिछ। स£तमी निह अÐमी यु$त निह स£तमीसँ यु$त अÐमी <ाá अिछ। षØयÐमी नागिव}ा इयािद पूव×$त मृितसँ एहन मत~य देल गेल अिछ। भिवtय पुराणक सेहो इएह वचन अिछ जे स£तमी षØी युता सएह <ाá अिछ निह िक अÐमी युता।

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् अÐमी निह स£तमी युता होएबाक चाही निह स£तमी सएह अÐमी युता होअए। अÐमी सव+दा नवमी युता <ाá अिछ- “तm नाÐमी स£तमीयु$ता स£तमी नाÐमीयुता। नवgया सå काय\ याæÐमी सव+दा बुधै:।।” -ितिथ िनण+य पृ.- 20 ÚÛवैव§+ पुराणक अनुसारÊ नवमी अÐमी िवµा करणीय अिछ। जँ वÑती फलक कामना करैत होअए, दशमी िव}ा कदािप निह करए- ‘अÐgया नवमीिव}ा क§+~या फलकािङ 9िभ:। न कुय\¤वमी तात दशgया तु कदाचन।।’ -ितिथ िनण+य, पृ.- 26 दशमी पूव+ वा बाद दुनू िदनमे िविहत काल ~यािपनी <ाá अिछ। एिह सgबधमे <ã;कार प9धर िमcक वचनक उYलेख कएलिह अिछ, जािहमे कहल गेल अिछ जे फलक कामना करएवला ~यि$त एकादशी िव} दशमी करए- “दशgयेकादशीिव}ा क§+वया फलकािङ 9िभ:। दशमी चैव क§+~या सदुग\ िµजस§म।।” -ितिथ िनण+य पृ.- 28 एकादशी उपवासिदमे µादशी युताक <ाáता अिछ। दशमी युता एकादशी किहयो निह कएल जाए। एिह लेल पं. र¹जे िमc xाचीन शाmीय वचनकÊ उ}ृत कएलिह अिछ जे- “एकादशी दशिव}ा गाधाय\ समुपोिषता। तया: पुmशतं नÐ तमातi पिरवज+येत्।।” -ितिथ िनण+य पृ.- 29 µादशी उपवासािदकÊ संभव भेलापर एकादशी युता <ाá अिछ। ‘º4ेण µाµशी’एिह युjम वा$यक अनरोधसँ तथा ‘कामिव}ो भविµिवtणु’एिह mयोदशी वृ}वक िनषेधक वचनसँ सेाहे mयोदशी िव}ा µादशी या¹य अिछ। शु$लप9ीय mयोदशी µादशी युता <ाá अिछ। एिह xसÀग पं. िमc एक शाmीय वचनक उ}रण देलिह अिछ- “पंचमी स£तमी चैव दशमी च mयोदशी। xितप¤वमी चैव क§+~या सgमुखी ितिथ:।।” तथा-

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् “कृtणाÐमी वृह§Yपा सािवmी वटपैmकी। कामmयोदशी रgभा उपोtया: पूव+संयुता:।।” तथा- “शु$ला mयोदशी रgभा नोपोtया परसंयुता:।।” शु$ल प9क चतुद+शी पूिण+मा युता <ाá अिछ। एिह सgबधमे चतुद+Äयाथ पूिण+मा, एकादÄयÐमी इयािद वचन समथ+क अिछ। एिह तरहÊ उदयक बाद तीन मुहू§+ धिर सेहो चतुद+शी रहलाक बाद पूिण+मा रहए तँ ओ <ाá अिछ। ई मुÕय ºपसँ अनत पूजाक लेल xासंिगक अिछ। भिवtय पुराणक वचनकÊ उ}ृत करैत पं. िमc xकारातरसँ अपन िवचार xतुत कएलिह अिछ। कद पुराण सेहो एिह उि$तक पुिÐ करैत अिछ- “कृtणप9ेऽÐमी चैव कृtणप9े चतुद+शी। पूव+िव}ा तु क§+~या परिव}ा न किहंिचत्।।” -काल माधव पृ.- 360 अमावया xितपदा यु$त <ाá अिछ। पैठीनिस xभृित मृितकार लोकिन ‘एकादÄयÐमी षØी अमावया चतुिथ+क। उपोtया: पर संयु$ता: परापूवäण संयुता:’ एिह वचनसँ पुÐ कएलिह अिछ। मुदा काि§+क अमावयाक अवसरपर लÔमीपूजा xदोष ~यािपनी <ाá अिछ। पं. र¹जे िमc एिह xसंगमे भिवtयो§र पुराणक वचनकÊ उ}ृत कएलिह अिछ- “xदोषे पूजयेçेवी पâहतi- हिरिxयाम्। तथा च xदोषसमये लÔमी पूजियवा यथािविध। Úाèान् भोजियवा तु भोजये:च बुभुि9तान्।।” -ितिथ िनण+य पृ.- 37 नान दानािदक िpया ‘उदय~यािपनी पूिण+मामे होइत अिछ, आन काज चतुद+शी युता <ाá अिछ- “चतुद+Äयाथ पूिण+मा’। फाYगुनी पूिण+मा” होिलका दाहक xसंग xदोष~यिपनी <ाá अिछ- “सायाÜे होिलकi कुय\त् पूव\हणे pीडनéवाम्। दीपं दWाxदोषे तु एष धम+: सनातन:।।” cावणी पूिण+मा उपाकम\िदक xसंग उदय कािलकी <हण योjय अिछ। भा4ी पूिण+मा ऋिष तप+ण आिद कम+मे उदय~यािपनी <ाá होइत अिछ। ईहो कहल गेल अिछ जे षØी, एकादशी, अमावया, स£तमी िव}ा अÐमी तथा परिव}ा पूिण+मा <ाá निह अिछ- “षØयेकादÄयामावाया पूव+िव}ा तथाÐमी। पूिण+मा परिव}ा तु नोपोtय ितिथ पंचकम्।”

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् -ितिथ िनण+य – 44 एवं xकारÊ म. म. राजनाथ िमc शु$लप9 एवं कृtणप9 दुनू ितिथक xितपदासँ पूिण+मा एवं अमावाया ितिथ धिरक समीचीन, संि9£त एवं वiछनीय वण+न कएलिह अिछ।

<ाम+पोट- रहुआ थाना- सौर बाजार िजला सहरसा, 852127

ऐ रचनापर अपन म ◌ंत~य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

गजे4 ठाकुर TOPIC:13 (संघ लोक सेवा आयोगक मैिथली ऐि:छक- पm-१, भाग-१, ६अम pमक िसलेबसक लेल) टॉिपक ०१ सँ १६ लेल जाउ एिह िलंकपर : http://videha.co.in/aboutme.htm ितरहुता िलिपक उeव आ िवकास - गजे4 ठाकुर भाग -२ ÚाÛी िलिपक पुबिरया xकारक मुÕय अिभलेख सभ अिछ- समु4गु£तक हिरषेन िलिखत xयाग xशित जे अशोकक तgभपर िलखल गेल छल, च4 गु£त-२ क उदयिगिर खोह लेख, कदगु£तक कौहम तgभ अिभलेख, च4गु£त-२ आ कुमारगु£त-१ क गढ़वा अिभलेख। ितरहुता िलिपक खोजमे हम सभ उ§र आ दि9णमे सँ उ§र भारतीय आ फेर उ§र भारतीयसँ उ§र-पूब िदस बढ़ब। उ§र आ दि9ण भारतक िलिपक जे अतर अिछ से “म” मे देखाइत अिछ। उ§र भारतक दुनू xकार माने पूब आ पि:छमक xकार श, ष, ल आ ह मे देखाइत अिछ। गु£त कालक अिभलेखक पूब xकारमे “ल” केर वाम अंग सोझे नीच› िदस झुकैत अिछ (उदाहरण जौगड़क फराक अिभलेख)। “ष” केर आधार चेह गोल बनाओल गेल आ िबचुलका चेहक माला सन बिन गेल। “ह” केर आधार चेह धिकया देल गेल आ एकर सुYफी उ=व\धरसँ जोिड़ देल गेल। कदगु£तक िभताड़ी तgभ अिभलेखे, ओना तँ भारतक पूबमे अिछ, मुदा ओिहमे उ§र भारतक पि:छम xकारक िलिपक xयोग भेल। कलाकार पि:छमसँ आओल हेताह तािह कारण सँ ई भेल होयत। फेर ईहो भेल जे उ§र भारतक ÚाÛीक पूब आ पि:छम xकारक सीमा रेखा पिरवित+त होइत रहल। क¤ौजपर अिधकारक लेल राtÅकूट, गुज+र-xितहार आ पाल राजवंशक बेच संघष+ मोटामोटी ७५०-१२०० ई. क म=य भेल। एिह तरा-उपरी यु}मे गुज+र-xितहार जखन बीस पड़लिथ तँ पछबिरया कलाकारक कलाकारी पूब िदस बढ़ल। तिहना पाल जखन बीस पड़लाह तखन पुबिरया कलाकार सभकÊ बेसी पि:छम धिर रोजगार भेटलिह। पछबिरया ÚाÛी नागरी बनल आ पुबिरया ÚाÛी ितरहुता, असमी, बijला आ ओिड़या। पुबिरया xकारक पि:छम आिर पाल साíा¹य, मगध आ िवदेह+वि¹ज िनध\िरत भेल। दसम शताwदी धिर नागरीक पुबिरया आिर बनारस िनध\िरत भऽ गेल आ ओ पूण+ ºपसँ पुबिरया ÚाÛीसँ फराक भऽ गेल।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् िघयासुçीन तुगलकक बाद िफरोजशाह तुगलक आpमणसँ ितरहुत सािहय आ कलाक 9ेmमे पछुआ गेल आ ओकर िलिपक बàड भारी नोकसान भेलै। ितरहुता िलिपक िवकास ओतिह ठमिक गेलै। िमिथलाक कण\ट वंशक। ¹योितरीर ठाकुरक वण+-रîाकरमे हरिसंहदेव नायक आिक राजा छलाह। १२९४ ई. मे जम आ १३०७ ई. मे राजिसंहासन। िघयासुçीन तुगलकसँ १३२४-२५ ई. मे हािरक बाद नेपाल पलायन केलिह। मुदा एिह हािरसँ पिहने िमिथलाक पïी-xबधक थापनाक ओ xयास केने रहिथ, ÚाÛण, कायथ आ 9िmय म=य । आिधकािरक थापक िनयु$य भेलाह मैिथल ÚाÛणक हेतु गुणाकर झा, कण+ कायथक लेल शंकरद§ आ 9िmयक हेतु िवजयद§। हरिसंहदेव नायदेवक वंशज छलाह, िमिथलाक पिyडत लोकिन १३२६ ई. मे पïी-xबधक वत+मान वºपक xारgभक िनण+य कएलिह। ओना तँ ओिह समयमे हरिसंहदेव िमिथलासँ पलायन कऽ गेल रहिथ तैयो हुनका सiकेितक ºपमे एकर संथापक मानल गेल। 9िmयक पïी तँ आब उपलwध निह अिछ मुदा ÚाÛण आ कण+ कायथक जे पïी उपलwध अिछ तकर िलिप माm ितरहुता अिछ आ २०म शताwदीक पïीक ितरहुता जे एिह पïी सभमे अिछ से १३२६ ई. (१४म शताwदीक) क पïीक ितरहुतासँ एÂो िमिसया िभ¤ निह अिछ। फॉyट बनलाक एकर िवकासक सीमा िबना ºप पिरवि§+त भेने असीम भऽ गेल अिछ आ एÂे ख›चामे कलाकार अपन कलाकारी देखा कऽ कएक िडजाइनबला अ9र िनिम+त कय सकैत छिथ। से ÚाÛीक िवकास भेल उ§री आ दि$खनी xकारमे। उ§रक xकार दू भागमे बँिट गेल, पुबिरया आ पछबिड़या। आ मोटा-मोटी १०म शताwदीमे पुबिरया िलिप पछबिरया िलिपसँ पूण+ ºपसँ िभ¤ भय गेल। पुबिरया िलिपक सीमा मगध, अंग आ ितरहुत िनध\िरत भेलै आ नागरी जे पछबिरया ÚाÛीक ºपमे गु£त साíा¹यक पतन धिर xयागोसँ पि:छम धिर सीिमत छल ८म शताwदीमे ई वाराणसी धिर पहुँिच गेल १२म शताwदीमे गंगाक दि9णमे मगधमे पछबिरया आ पुबिरया दुनू xकारक xयोग होमय लागल। मुदा गंगाक दि9णमे मगधसँ पूब पुबिरया xकार माm रहलै, आ गंगाक उ§रमे ितरहुतमे सेहो पुबिरये xकार माm रहलैक। मुिलम आpमणक बाद समत मगधमे पछबिरया xकार पसिर गेलैक मुदा १४म शताwदी धिर (उदाहरण महाबोिध मिदर गया) पुबिरया िलिपक xयोग एतऽ पूण+ºपसँ ब¤ भय गेलैक।। १३२६ ई. मे पïी िलखबाक xारgभ भेल आ तिहयासँ २०म शताwदी धिर ई ितरहुतामे िबना पिरवित+त भेने िलखाइत रहल आ ओकर ओही ºपमे फॉyट बिन गेलै (देखू गूगल बु$सपर िवदेह आक\इवक पïीक ११००० तालपm/ बसहा कागत अिभलेख, जे xारgभसँ २०म शताwदी धिरक अिछ, २०म शताwदीक अतमे पïी सेहो देवनागरीमे िलखल जाय लागल)। तँ ितरहुताक उeव आ िवकासक सीमा रेखा १३२६ ई. भेल

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मानुषीिमह सं ृ ताम् जखन ितरहुताक अितम ºप िनध\िरत भय गेल। पïीकारक नीक-अधलाह हतिलिपकÊ ितरहुता फॉyटक िविभ¤ िडजाइन माm मानल जा सकैत अिछ। एकर ई पिरणाम भेलै जे ितरहुतामे जे संकृत <ंथ िलखल जाइ छल, वा पाता चलै छल सेहो अपिरवित+त ºपमे २०म शताwदी धिर चलल। तुगलक आpमणसँ अिभलेख िलखिनहारक रोजगार खतम भऽ गेलिह आ जे िकयो बचलाह से तालपm आ बसहा कागतपर िलखल अिभलेखसँ िभ¤ लेखबाक 9मतासँ रिहत भय गेलाह। छापाखानाक xयोगक बाद आ यूनीकोडक अंकनक बाद आब िडजाइनक आपसमे िलिप पिरवत+न सन xयोग सgभव भय गेल। मैिथलीक अÐम सूचीमे गेलाक बाद संघ लोक सेवा आयोगक परी9ा आ सरकारी काय+मे मैिथलीक xयोग लेल के4 सरकार माm देवनागरीक अनुमित देने अिछ। पिहने देवनागरी, ितरहुता, बijला, तिमल आिद िलिपमे संकृत िलखाइत छलै, मुदा आब सरकार माm देवनागरीमे संकृत िलखबाक आदेश देलक अिछ। ओना िबहार-झारखyड आिदमे अखनो सiकेितक ºपमे कूल, कॉलेजक परी9ामे आ िबहार लोक सेवा आयोगक परी9ामे मैिथली अह› देवनागरी वा ितरहुतामे िलिख सकै छी। के4 सरकार संघ लोक सेवा आयोगक परी9ा आ अय काय+ लेल संकृत, िहदी, मैिथली, मराठी, कॲकणी, डोगरी, बोडो आ नेपाली कÊ देवनागरीमे; संथालीकÊ ओल-िचकी वा देवनागरीमे; िसधीकÊ अरबी वा देवनागरीमे; उदू+ आ काÄमीरीकÊ फारसी िलिपमे; मिणपुरी आ बijलाकÊ बijला िलिपमे िलखबाक आदेश देने अिछ। असमी, गुजराती, क¤ड़, मलयालम, ओिड़या, तिमल, तेलुगु अपन-अपन अही नमक िलिपमे िलखल जायत आ पंजाबी भाषा गु¼मुखी िलिपमे िलखल जायत। आब फेर ितरहुताक िवकास िदस घुमैत छी। गु£त साíा¹यक पतन धिर पुबिरया िलिपक आिर-धूिर xयागक लग-पासक इलाका रहय जे आठम शताwदीमे काशी पहुँिच गेलैक। १२म शताwदीसँ-१४म शताwदी धिर मगधमे पुबिरयो xकारक xचलन रहलै, जकर बाद ओिह इलाकामे माm नागरीक xचलन रहल। १४म शताwदीमे १३२६ मे पïी िलखेनाइ शुº भेल आ मुिलम आpमणक बाद ितरहुताक िवकास पूण+ ºपसँ ठमिक गेल आ ओ ओिह कालमे जािह ºपमे रहय तही ºपमे २०म शताwदी धिर रहल। ितरहुता िलिपक १३२६ ई. धिर pिमक िवकास आ अितम वºपक xाि£त अशोकक xयाग आ रामपुरवा, मिठआ, पहेिरया, िनjलीव, रािधया, सारनाथ तgभ लेख सभमे एकºपता अिछ, एकरा ÚाÛीक उ§रवत¦ उ§र-पूव¦ xकार कहल जा सकैत अिछ।

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् उ§र-पूव¦ xकारमे िकछु िवशेषता अिछ। “ख” केर नव ºप भेटबामे अबैत अिछ। बोधगयाक एकटा अिभलेखमे “ख” केर आधार िmभुजक आकारक अिछ। नव-मौय+ काल, जे अशोकक परवत¦ कालक अिछ, मे “च” मे दू टा घुमघुमौआ आकृित लgबवत रेखाक दुहू िदस बनैत अिछ, मुदा दुनू घुमाव एक आकारक निह अिछ, छोट-पैघ अिछ आ तािह कारणसँ वृ§ निह बिन पबैत अिछ। महाबोिध मिदरक रेिलंग- बु} पिरpमा- मे अिभलेख सभािछ जािह मे “य” आ “ज” उ§र भारतीय xकारक अिछ आ “ल” लटपटौआ अिछ। जौगड़क फराक पाथर-अिभलेखमे मुदा बàड लटपटाकÊ लेखल गेल अिछ जे बादमे पूव+ गु£त अिभलेख (४म-५म शताwदी) क पुबिरया xकारमे आर पुÐ भेल। जौगड़मे “ह” केर लटपटौआ xकार बादमे पुबिरया xकारमे देखल जाइत अिछ। उ§र -मौय+ कालक ÚाÛीक परवत¦ अ9र xकार दशरथक नागाजु+नी खोह अिभलेख उ§र-पूव¦ xकारक अिछ आ तकर बाद महाबोिध मिदरक रेिलंग (पिरpमा)क तgभ सभपर अिभलेखमे ई सेहो देखाइत अिछ। नागाजु+नी खोह अिभलेखक लटपटौआ “ल” दश+नीय अिछ। “श” कलसी अिभलेखसँ मेल खाइए आ पुबिरया घुमौआ “श”क ई पूव+ ºप अिछ (४म-५म शताwदी)। “स” सेहो पिरवित+त अिछ, उपरक नोकशी नमहर भऽ कनेक झुिक कऽ दोसर प›ित सनबनैत अिछ। महाबोिध मिदरक रेिलंग दशरथक नागाजु+नी खोहक५० बख+ बादक अिछ। एिहमे “क” कटार सनािछ, “ग” दू xकारक अिछ- लटपटौआ आ कोणाकार, “प” मे बेस पिरवत+न अिछ आ दूटा समकोण पÐ देखाइ दैत अिछ। “म” सेहो दू तरहक अिछ, पिहल xकारमे वृ§ नीच› आ अध+वृ§ ओकर ऊपर अिछ, दोसर xकारमे िmभुज नीच› आ समकोण ओकर ऊपर अिछ। “र” वp प›ितक ºपमे अिछ। “व” मे नीच› िदस वृ§क थान िmभुज लऽ लेने अिछ। “स” दू xकारक अिछ, पिहल वामिदस कने वp, िनचुलका नोकशी नीच› िदस आ दोसर मौय+काल सन जतय िनचुलका नोकशी कने नgहर रहैत छल। “ह” बàड लटपटौआ अिछ जे उ§र भारतक पूव¦ भागक ÚाÛीक वºप छल। सारानाथसँ xा£त अिभलेख (०१ ई.पू. सँ ०१ ई. धिर ) उ§र-पि:छमक (०१ ई.पू.-०२ ई.पू.) xकारसँ कोनो अतर निह अिछ। लgब रेखा कने छोट भेल अिछ, वp रेखा सभ कलाकारीककारण कोणीय भेल अिछ। जँ वर शwदक बीचमे अबैत अिछ तँ मौय+कालक कोणीय xकार लटपटौआ वºप लय लैत अिछ। कुषाण अिभलेख

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ÚाÛी िलिपक उ§र भारतीय xकारक पूव¦ xकार बोधगयाक महाबोिध गाछक नीच›मे राखल पाथरमे xा£त होइत अिछ। “प” केर उ=व\धर रेखा छोट भेल अिछ, “म” मे िनचुलका भागक िmभुज आकार पूव+ कुषाण वºपसन अिछ। “श” कोणीय अिछ आ एिहमे 9ैितज रेखा वाम लgबवत प›ितकÊ छू निह सकल अिछ। साहेत-माहेत क बोिधसवक आकृितपर लटपटौआ “ह” अिछ आ आनठाम कोणीय “ह”। “स” मे पछुलका भाग चाकर अिछ। “य” कखनो-काल अधोिलिखत अिछ आ एिहमे तीन फ›ड़ अिछ। गु£त युगक xारgभ (४म- ५म शताwदी) पूव+ xकार “ल”, “ह”, “ष” आ “स” मे पÐ अिछ। एिह कालक मुÕय अिभलेख सभ अिछ- समु4गु£तक xयाग तgभ xशित, च4गु£त-२ क उदयिगिर खोहािभलेख, च4गु£त-२ आ कुमारगु£त-१ क गढ़वा भiगल अिभलेख, कुमारगु£त-१ क धनैदाहा अनुदान-पm, कुमारगु£त-१ क मानकुँवर अिभलेख, कदगु£तक िबहार तgभ अिभलेख, भीमवम+नक कोसम आकृित अिभलेख आ कदगु£तक कौहम तgभ अिभलेख। िलिपक xकारक अतर कोना पकड़ी? उ§र भारतक xकार आ दि9ण भारतक xकार (नागरी सिहतमे) अतर “म” अ9रपर =यान देलासँ आ उ§र भारतक पूव¦ आ पिÒमी xकारमे “ष”, “ल” आ “ह” पर =यान देलासँ िलिपक कलाकारीमे िभ¤ता पकड़ाइत अिछ। ितरहुताक वºप एिह तरहÊ पूव¦ xकारसँ बहार भेल। “ल”-एकर वाम भाग सोझे-सोझ नीच› िदस खसैत अिछ। “ष” केर आधार कलाकार गोल बनेने छिथ आ कनिछयाह िबचुलका रेखासँ घुमाकय िमलेने छिथ। “ह” केर आधार थकुिच कऽ छोट कयल गेल अिछ आ ओकर नोकशी लgबवत रेखामे िमला कऽ वाम िदस घुमाओल गेल अिछ। “स” मे हरदम एकर वाम लgबवर रेखाक अतमे घुमाव रहैत अिछ, जे पिहने वp वा नोकशी सन रहैत छल। ई कुषाण कालक मथुरामे सेहो भेटल अिछ। समु4गु£तक xयाग तgभ xशित पूव+क xकारक मानक ºप अिछ। ितरहुता भारतीय िलिपक तंm िस}iत िबदु, िmकोण, वृ§ आ चतुtकोणक xयोगसँ कलाकार तंm-मंm कय सकल होिथ से सgभव निह मुदा ितरहुताक अ9रकÊ सुदर बनेबामे ओ अवÄय सफल भेलाह। ÚाÛीक उ§रवत¦ पूव+ xकार (५५० ई. सँ ११०० ई.)

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् बुहलर (बूलर) एिह कालक िलिपकÊ िस}मातृका कहैत छिथ। ५५० ई. -६५० ई. एिह कालक मुÕय अिभलेख सभ अिछ- नदनक अमौना अनुदान अिभलेख, िशवराजक पिटयाकेला अनुदान अिभलेख, अनतवम+नक बराबर खोह अिभलेख, अनतवम+नक नागाजु+नी खोह अिभलेख। मुÕय पिरवत+न जे ितरहुता िदस भेल ओ अिछ: -तीन फÊड़ बला “य”; -“घ”, “प”, “फ”, “ष”, “स” केर नीच› िदस समकोणीय xवृि§ संगे एिह सभ चेहमे दिहन िदस पु:छी वा लgब जे पछबिरया xकारमे िवकिसतभेल तकर अभाव। ६५० ई. सँ ७०० ई. -“अ” केर वाम अंगक उपरका भागक कनेक नमगर भय गेल क›टीक नोक (v अ9र) जक›, िनचुलका भाग वp बिन गेल आ माथपर ब¸म सन चेह अ}+िवराम सन “आ”- दोसर वpमे अतर अ}+िवराम सन, दिहन अंगक िनचुलका भागसँ जुड़ल “इ”- गु£त कालक िलिपक पिÒम xकार जे िबदु वा िनचुलका वृ§ सन छलै से पैघ वpमे िवकिसत भय गेल “उ”- िनचुलका भागक 9ैितज रेखा वpमे पिरवित+त भय गेल आ नमगर भय गेल आ अही ºपमे १०म शताwदी धिर रहल आ तखनजा कय अितम ºपसँ िवकिसत भेल “ओ”- नमगर अध+िवराम प›छा िदस चौरस भय गेल “क”- पिहल बेर वाम िदस सदैव घुमाव रहय लागल, ई घुमाव ११म शताwदीमे अध+वृ§ बिन गेल “ख”- अ9रक आधारमे िmभुज आकृित बनल फेर ई सोझ रेखा बनल आ फेर घुिम गेल, िmभुजक एक भुजा अध+वृ§ बिन गेल आ दोसर नमगर भय गेल आ वृ§क दुनू चापकÊ छूलक। “ग”- आधार रेखाक वpता xारिgभक गु£त कालिहसँ पुबिरया xकारमे देखाइ पड़य लागल छल। ६अम शताwदीक यशोधम+न अिभलेखक आधार रेखा वामिदस घुिम गेल आ दिहन िदस टेढ़ भय गेल आ दिहन लgबसँ यून कोण बनेलक। “ङ”- िनचुला दिहन िदसुका कोण यूनकोण बिन गेल आ लgबवत सोझ रेखा गोलाइ लय लेलक

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् “च”- गु£त कालक दुनू गोलाइ िmभुज बिन गेल जे “वी” आकार ऊपरमे लेलक, आधार रेखा वा िनचुलका रेखा वाम िदस कने नमगर भय गेल। “छ”- कोनो अतर निह। “ज”- पुबिरया xकारमे िनचुलका xारिgभक गु£त कालिहसँ 9ैितज आकार पÐ छल आब लgबवत रेखामे सेहो पÐ ºपसँ गोलाइ देखाइ पड़य लागल। िबचुलका नव 9ैितज ओतबी घुिम गेल जतेक िनचुलका आधार रेखा छल। उपरका 9ैितज रेखाक दिहन िदस “वी” आकार जुिड़ गेल। “ञ”- कनेक लटपटौआ “ट”- पछबिरया xकारसँ बेस अतर आिब गेल। खुजल गोलाइ आ “वी” आकृित ओिह गोलाइक उपरका भाग पर 9ैितज ºपमे रािख देल गेल। “घ”- आधार रेखाक गोलाइ xारिgभक गु£त कालक पुबिरया xकारमे देखाइ पड़य लागल छल, आब ई तीन फÊड़बला “य” सन बिन गेल। “ठ”- पूव+कालक मौय+ xकार अखनो xयु$त होइत रहल। “ड”- दूटा छोट गोलाइ बिन गेल। “ढ”- कोण गोलाइ लय लेलक। “ण”- आधार रेखा टेढ़ भय गेल आ ओ िनचुलका भागक दिहन िदस यून कोण बनेलक आ वाम नोकशी नमगर भय गेल। “त”- गु£त कालिहमे दिहन अंगक िनचुलका भाग नमगर भय गेल रहय, ई कने गोलाइ लय लेलक आ एकटा “वी” आकार ऊपरमे बिन गेल। “थ”- उपरका भाग चकराइ लय लेलक। “ध”- छोट चाप अ}+-वृ§ मे बदिल गेल।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् “न”- xारिgभक गुप कालक गोलाइ बला ºप बदिल कय आधुिनक नागरी ºप लय लेलक। गोलाइ मुÕय भागसँ फराक भय गेल आ मुÕय भागसँ एकटा छोट 9ैितज रेखासँ िमिल गेल आ कने छोट सेहो भय गेल। “प”- कनेक आर बेशी लटपटौआ आकार लेलक आ यून कोण आर पÐ भय गेल। “ब”- “ब” केर थान “व” लय लेलक। “भ”- “भ” आ “ह” केर बीच अतर खतम भय गेल, पछबिरया xकार मे ई पिहनिहये भय गेल छल। “म”- यून कोण आर तीÔण भय गेल आ तकर पिरणाम भेल जे दिहना अंग नीच› िदस बिढ़ गेल। “य”- “य” दू xकारक, पिहल दू फÊड़बला, एकर िनचुलका हीसमे यूनकोण बनैत अिछ आ दोसर xकारमे यूनकोण ओतेक पÐ निह अिछ मुदा दिहन भागक अंग नीच› िदस नमगर भऽ गेल अिछ। “र”- िनचुलका छोरपर “वी” वा तीरक आकृितक जे पिहलुÂा अिभलेख सभक पछबिरया xकारमे सेहो छल। ई “ड” केर छोट ºपसँ िमलानी खाइत अिछ। “ल” दू xकारक अिछ। पिहल xकारमे वाम अंगक वp वा नोकशी नीच› िदस नमगर भेल अिछ आ सभसँ नीच› जा कय किनये बाहर िदस वp ºप लैत अिछ । दोसर xकारमे वाम अंगक वpपर नोकशी अिछ जे नमगर भऽ कऽ नीच› जेबाक बदला आतिरक आकार लैत अिछ। ई मोटा-मोटी आजुक ितरहुता आ देवनागरी सन भऽ जाइत अिछ। “व”- एतय ओही तरहक पिरवत+न देखा पड़ैत अिछ जेना “ख” केर आधारमे िmभुज बनैत अिछ। िmभुजक दुनू भुजा वp बिन जाइत अिछ, तेसर नमगर भऽ जाइत अिछ। अ9र ऊपर “वी” आकार बनैत अिछ। “श”- अ9रक उपरका भाग पूव+ गु£त कालमे वp छल, आब जा कऽ उपरका भाग वpक ºप लैत अिछ, िनचुलका दिहन अंग ऊपर िदस नमगर भेल अिछ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् “ष”- ई तीन xकारक अिछ- पिहल xकारमे ºप विpत अिछ, दोसर xकारमे वp फॲक “वी” आकृितक ºप लैत अिछ, तेसर xकारमे “वी” आकृितक उपरका भाग फराक भऽ जाइत अिछ आ “वी” आकृित निह रिह जाइत अिछ (ई xकार भेटैत अिछ ६अम सँ ९अम शताwदीक उ§र-पूव¦ अिभलेख सभमे)। “ह”- अ9रक दिहन अंगमे वp आ नोकशीक नमगर होयब आ शीष+पर “वी” आकृित (ढबकल सन) आ अखिन धिरक 9ैितज आधार रेखा कने टेढ़ भऽ जाइत अिछ। आठम शताwदी एिह कालक मुÕय अिभलेख जािहमे ÚाÛीक उ§रकालक पुबिरया ºप फराक होइत अिछ- जीिवतगु£त २ केर देव-बान\क+ तgभ लेख, धम+पालक खलीलपुर अनुदान पm आ धम+पालक समयक बोधगया आकृित अिभलेख। मुÕय िबदु अिछ। वर- कोनो पिरवत+न निह भेल। क, ग, च, ज, ट, ठ, ड, द, ध, न, भ, म, य, ह- कोनो पिरवत+न निह भेल। ण- दिहन वp वा नोकशी नीच› िदस नमगर भेल। त- नीच› िदस नमगर भऽ गेल, िनचुलका छोरपर बàड छोट वp। “थ”- “वी” आकृितक छोरक नमगर भेलासँ उपरका भाग चकरगर भेल। “प” दू xकारक- पुरनका ºप जािहमे यूनकोण अखनो पÐ अिछ। नवका ºपमे यूनकोण उपिथत तँ अिछ मुदा पÐ निह अिछ आ एकर थान नीच› िदसुका दिहन लgब रेखा लऽ लेने अिछ। “ल”- यूनकोण बàड छोट भऽ गेल अिछआ दिहन लgब रेखा नीच› िदस चल गेल अिछ। “श”- ई दू xकारक अिछ। पूव+ ºप वp संग अिछ। बादक ºप ९अम शताwदीक िदघवा-दुभौली अनुदान सन अिछ। “ष”- वाम अंगक िनचुलका भाग लटपटौआ अिछ आ वाम भागक लgब सँ आग› चिल जाइत अिछ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् अफसड़ अिभलेखमे सभ ठाम दत “स” केर xयोग भेल अिछ।

धम+पालक बोधगया अिभलेख “श” तीन xकारक अिछ- पिहल xाचीन ºप जािहमे उपरका भाग गोलाइ लेने अिछ। बादक ºप िबन डyटाक अिछ। एकटा िबचुलका ºप अिछ जािहमे डyटा सन आकृित छै, मुदा ओ यूनकोणकÊ दि9ण उ=व\धर रेखाक बदलामे नीच›मे छुबैत अिछ। “ज” मे उपरका 9ैितज रेखा िबला जाइत अिछ आ “वी”आकृित ओकर बदलामे आिब जाइत अिछ। िबचुलका 9ैितज रेखा एकटा वp अिछ। “न” दू xकारक- पुरनका xकार फानी सन छल। आब ई गु£त आ ितरहुताक बीचबला आकार लऽ लैत अिछ। “ण”- आधार रेखा िबला जाइत अिछ। “ह”- िनचुलका िदसुका यूणकोण बेसी पÐ भऽ जाइत अिछ। धम+पालक बाद देवपालक अतग+त ितरहुत xदेश रहल। मुदा तकर बाद गुज+र-xितहार सíाट ितरहुत छीिन लेलिन, िब<हपाल -१ आ नारायणपाल क शासनकालमे। ÚाÛीक परवत¦ पुबिरया xकार (९अम शताwदी सी.ई.) एिह सभमे ई सभ मुÕय xकार अिछ: १.देवपालक मुंगेर अनुदान पm २.देवपालक समयक घोसरवा अिभलेख ३.नारायणपालक बादल तgभ अिभलेख ४.नारायणपालक िवtणुपाद मिदर अिभलेख ५.नारायणपालक भागलपुर अनुदानपm

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ६.महे4पालक िदघवा-दुभौली अनुदान-पm ७.महे4पालक रामा;ा अिभलेख

घोसरवा अिभलेख अ/आ- उपरका भाग अखनो पूण+ ºपसँ िवकिसत निह भेल अिछ। इ- दूटा वृ§ वा िबदु ऊपरमे आ काटबला वp नीच›मे। ई-समकोण िmभुजक ºप लऽ लेने अिछ। ख- अखनो वाम अंगक नीच› िदस “वी” आकृित लेनिहये अिछ। च- चकराइ बिढ़ गेल। ज- पुरातन ºप- िबचुलका 9ैितज रेखा कने नीच› िदस टेढ़ भेल आ िनचुलका 9ैितज रेखा एकटा छोट वpमे खतम होइत अिछ। ट/ ठ केर दिहन अंग निह देखाइ पड़ैत अिछ। ण- आधार रेखा पूरा-पूरी खतम भऽ गेल। थ- उपरका भाग चाकर भऽ गेल। द/ ध- िनचुलका रेखा नीच› िदस वp भऽ गेल अिछ। न- फानी सन पूर गु£त काल आ ितरहुताक बीचक ºप। फानी अ9रक मुÕय अंगसँ िवलग भऽ गेल। प- पुरातनºप नीचा िदस कोनो वpता निह। एकटा अिधक कोण आ एकटा नूनकोण बदलामे िनचुलका भागमे दूटा समकोण बिन जाइत अिछ। भ-नीच› िदस टेढ़

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् म- फानी अखनो निह बनल अिछ। य- यूनकोण चपा गेल अिछ आ ितरहुता वºप xा£त कऽ लेने अिछ। ल- आधाररेखा पूरा-पूरी दिब गेल अिछ। व- यूनकोणक बदलामे दिहन उ=व\धर सोझ रेखाक नमगर ºप आिब गेल। ष- उपरका रेखा टेढ़ भऽ गेल। स- आधार रेखा फेर 9ैितज भऽ गेल आ उपरका रेखा नीच› िदस टेढ़ भऽ गेल। ह- पुरातन ºप, यूनकोण अखनो दोसर िनचुलका रेखा निह बनल अिछ। िवtणुपद मिदर अिभलेख “इ” दू xकारक- पिहल xकारमे दूटा वृ§ ऊपरमे आ एकटा कटाव नीच›मे। दोसर xकारमे ऊपरमे एकटा छोट 9ैितज रेखा आ दूटा वृ§ नीच›मे। “ख” ितरहुताक आकारक ºप लऽ लेने अिछ। “घ” अखनो नीच›मे यूनकोण बनेने अिछ। “ट”- दिहन िदसुका उ=व\धर सोझ रेखा पूरा-पूरी िबला गेल। “ठ”- अखनो पुरने ºप अिछ। “प”- दू xकारक। पुरनका ºप जतऽ कोण अखनो अिछये। दोसर ºपमे ितरहुताक लटपटौआ ºप। “म”- आधार रेखा िवलु£त भऽ गेल। “श” आ “ष” क ºप फानीबला आ अखुनका ºपक बीचबला ºप लेने अिछ।

नारायणपालक भागलपुर अनुदान

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् अ/ आ- पूरापूरी ितरहुता ºप, एतय धिर जे छोटका रेखा जे दिहना लgब रेखाक अ}+िवराम ºपी कटावसँ िमलैत अिछ, नीच› िदस टेढ़ भेल अिछ। “उ”- एिहमे एकटा उपरका रेखा बनैत अिछ आ लgबºपी रेखावाम िदस वp भऽ जाइत अिछ। “क” केर िmभुज चाकर भऽ गेल अिछ। “ख” ितरहुता सन लटपटौआ भऽ गेल अिछ। “घ” मे यूनकोण खतम भऽ गेल आ ितरहुता केर आकार लऽ लेलक अिछ। “च”- उपरका भाग पातर भऽ गेल अिछ। “ज”- िबचुलका 9ैितज भाग दू टा सोझ रेखामे बदिल गेल अिछ आ अिधककोण बनबैत अिछ। “ट”- उपरका रेखाक दिहन छोरसँ नीच› िदस छोटका रेखा जाइत अिछ। “ण”- ितरहुता xाचीन ºप। दूटा छोट रेखा लgब सोझ रेखाक वाम िदस जा कऽ िमलैत अिछ। “त”- ई बदिल गेल अिछ, एिहमे एकटा उपरका रेखा आ एकटा लgब रेखा समकोण पर अिछ संगिह एकटा वp लgब रेखाक वाम िदस जुिड़ गेल अिछ, जेना नागरीमे अिछ। “थ”- ितरहुता सन उपरका वp खुिज गेल अिछ। “ध”- उपरा भाग खुिज गेल अिछ। “न”- पुरातन फानीबला ºप, फानी नीच› िदस झुकल। “प”- उपरका िदस पातर भेल। “फ”- उपरका कम चाकर भेल। “म”- सभºप फाने सन। “ल”- अितम ºपसँ आधार रेखा थकुचा गेल अिछ। “श”- सभ xकार फानी सन।

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् “ष”- पुरातन ºप, उपरका आ िनचुलका भाग बराबर, दोसर मे उपरका भाग कम चाकर। xितहार नरेश महे4पालक िदघवा-दुभौली अनुदान (गोपालगंज ) एिहमे पुबिरया xकारक िवशेषता भेटैत अिछ जेना च पतरा गेल, ज लटपटा गेल, थ- ितरहुताक पूव+ ºप बुझाइत अिछ, फानीबला “म” अिछ, “श”मे फानी लgब रेखासँ िम¹झर होइत अिछ, “ष” मे उपरका रेखा नीच› िदस टेढ़ होइत अिछ। ई अनुदान पूब आ पि:छमक िमिcत ºप xतुत करैत अिछ। १०म शताwदीमे पैघ साíा¹य सभ खतम होइत गेल आ तÊ अिभलेखो निहयेक बराबर अिछ। नालदा आकृित अिभलेख एिह कालक अिछ जािहमे “भ” केर पुरान ºप देखबामे अबैत अिछ। “श” केर परवत¦ ºप देखाइत अिछ। बोधगया केर आकृित पर अिभलेखमे सेहो भ केर पुरान ºप भेटैत अिछ आ श केर परवत¦ ºप सेहो। ख केर ºप ितरहुता सन अिछ। ितरहुता िलिपक िवकासक अितम चरण िकछु िलिप जे अखन धिर निह पढ़ जा सकल अिछ (१)- हड़£पा िलिप (२)- अलंकृत ÚाÛी, भारतकसभ भागमे छोट-छोट अिभलेख एिह िलिपमे अिछ, मोटा-मोटी नाम आ हता9र लेल xयु$त होइत छल। (३)- शंख िलिप- एकर अ9र सभ शंख सन अिछ तÊ एकर ई नामकरण भेल। ई सेहो मोटा-मोटी नाम आ हता9र लेल xयु$त होइत छल। ( कोÁुआ , मुजòफरपुरक अशोक तgभ (बसाढ़ तgभ ) मे जे तीनटा अिभलेख भेटल अिछ ओिह मे िकछु अ9र शंख िलिपक सेहो अिछ ।) (४)- ÚाÛी सन एकटा िलिप जे मािटक मोहर सभपर पूव+ भारतक च4केतुगढ़ आ तामलुकसँ भेटल्;अ अिछ। (५)- खरोØी सन दिहनसँ वाम िलखल जायवला एकटा िलिप जे अफगािनतानसँ भेटल अिछ। ितरहुताक िवकासक अितम चरण

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् िकछु अ9र पिहने ितरहुताक ºप लऽ लेलक तँ िकछु कने बाद। िकछु अिभलेखमे िकछु अ9रक xयोगे निह भेल। अनुलjनक-५ मे ितरहुता ºपक pिमक िथित देखाओल गेल अिछ। कैथी, ितwबती आ देवनागरी िलिप अही तरहÊ अपन वत+मान ºपमे आओल जे अनुलjनकमे देखाओल गेल अिछ। िकछु िवµान हष+व}+नक बादक समयमे ओकर ितरहुतक मंmी अजु+न µारा क¤ौजक राजा बनब आ ितwबतक बौ} याmी सभकÊ तंग करबाक चच\ केने छिथ आ xयु§रमे ितरहुत पर ितwबतक कwजाक चच\ करैत छिथ। आधुिनक िवµान ओिहपर शंका ~य$त करैत छिथ। ितwबतक राजनैितक xभुवपर तँ शंका अिछ मुदा सiकृितक ºपसँ िनó तãय ितwबतक वôयानक िमिथलामे उपिथित देखबैत अिछ। बौ} देवी तारा, वारी, समतीपुर, उ<तारा मिदर, मिहषी, सहरसा। मुसहरिनयi डीह- अंधरा ठाढ़ीसँ ३ िकलोमीटर पिÒम पटन गाम लग एकटा ऊंच डीह अिछ। बु}कालीन एकजिनय› कोठली, बौ}कालीन मूि§+, पाइ, ब§+नक टुकड़ी आ पजेबाक अवशेष एतए अिछ। बु}कालीन एकजिनय› कोठली नाहर भगवतीपुर भुवनेरी मिदर (मधुबनी) मे सेहो अिछ, xायः बौ} िभ9ु लोकिनक ई तपया थली होयत। फेर बौ} िस} सरहपाद जे िलखै छिथ- िसि}रथु मइ पढ़मे पिढ़अउ, मyड िपबतॲ िबसरउ एमइउ। ओ िसि}रतु आ एिह िवचार िक म›ड़ पीने बुि} मद होइत अिछ दुनूक चच+ करैत छिथ जािहसँ हुनकर बौ} धम+क मैिथल होयबाक xमाण भेटैत अिछ, हुनकर जे फोटो ितwबतसँ भेटैत अिछ ओिहमे हुनकर फोटोक नीच›मे ितwबती िलिपमे वण+न अिछ। ७म शताwदी आ बादक िकछु ितरहुता अिभलेख अÙाठाढी अिभलेख (cीधरदासक आंÙा-ठाढ़ी अिभलेख), मधुबनी, बु}मूित+ अिभलेख (कोथु+), िवtणुमूित+ अिभलेख (लदहो), १२म शताwदीक िसमरौनागढ़क ितरहुता पाथर-अिभलेख, १९म शतीक ÚÛपुरा िशलालेखमे ितरहुताक आदश+ ºप, मधुबनी िजलाक जमथिर गाम आ हÈठी बाली गामक बीचक गौरीशंकर थान, गौरी आ शõरक सिgमिलत मूि§+ आ एिह पर िमिथला9रमे िलखल पालवंशीय अिभलेख, िबदेर-मधुबनी िजलामे लोहनारोड टेशन लग िथत िशवधामक थापना महाराज माधविसंह कएलिह, तािह युगक ितरहुताक अिभलेख। मंदार पव+त-बiका िथत थलमे ितरहुताक गु£तवंशीय ७म् शताwदीक अिभलेख अिछ। पौरािणक कथामे समु4 मंथनक हेतु मंदारक xयोग भेल छल। िनकटमे बॱसीमे जैनक बारहम तीथ+ंकर वासुपू¹य नाथक दूटा मूि§+ अिछ, पैघ मूित+ लाल पाथरक अिछ तँ दोसर क›साक जकर सोझ› दूटा पदिचह अिछ। जैनक बारहम तीथ+ंकर वासुपू¹य नाथक जम चgपानगरमे आ िनव\ण एतिह भेल छलिह। बसैटी अिभलेख- पूिणय›मे cीनगर (िजला अरिरया) लग ितरहुताक ई अिभलेख िमिथलाक पिहल मिहला शासक रानी इ4ावतीक रा¹यकालक वण+न करैत अिछ। एकर आधार पर मदनेर िमc ’एक छलीह महारानी’ उपयास सेहो िलखने छिथ। बाइसी-बसैटी, अरिरया ितरहुता ताíपm- रानी इ4ावती (१७८४-१८०२) जे फूड-फॉर-वक+ आ अय

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् कYयाणकारी काय+क xारgभ कएलिह केर िमिथला9र अिभलेख एतए एकटा मिदरक ऊपरमे ताí-पmपर कीिलत अिछ, जे कारी रंग सँ पÀट कऽ देल गेल अिछ आ िशलालेख सन लगैत अिछ। जलज कुमार ितवारी आ एस. कृtणामूित+ २०१९ ई.मे xकािशत अपन आलेखमे िनó ितरहुता अिभलेख सभक वण+न दैत छिथ जे अखन धिर कोनो पोथीमे निह आयल छल। चेचर गाम (वैशाली) मे बु} मूित+पर अिभलेख भेटल अिछ जे ितरहुता िलिप आ संकृतमे अिछ (९अम शताwदी)। तारा मूित+, जगतपुर ब¼आरी (सुपौल) जे सहरसा gयूिजयममे राखल अिछ, ितरहुता िलिप आ संकृत भाषाक अिभलेख एततसँ भेटल अिछ (१० म शताwदीक)। तारा मूित+, दभैछा (वैशाली) मे ितरहुता िलिप आ संकृत भाषाक अिभलेख भेटल अिछ (१० म शताwदीक)। िपपरौिलया िवtणु आकृित (मूित+), दरभंगा, ितरहुता िलिप. संकृत भाषा (१०म शताwदी)। गाम- भ:छी (बहेरी लगक िजला दरभंगा, मधुबनीक भ:छीसँ िभ¤), ितरहुता िलिप, संकृत भाषा (१०म-११म शताwदी)। कyदाहा (सहरसा) क पाथर अिभलेख, ओइनवार कालक राजा नरिसgहदेवक आदेशसँ वंशधर ÚाÛण µारा (ितरहुता १५मशताwदी, भाषा संकृत)। मनसा आकृित (भैरवथान, मुजòफरपुर)- ितरहुता िलिप आ संकृत भाषामे िलखल अिभलेख (१५ म शताwदी)। बु} मूित+, कोथु+ दरभंगा, ितरहुता िलिप, संकृत भाषा (१०म शताwदी)। एकर अितिर$त ओ पिहल शताwदीक एकटा ÚाÛी अिभलेखक चच+ सेहो करैत छिथ [गाम पखौली िजला वैशाली (तgभ अिभलेख) (ÚाÛी िलिप, पिहल शताwदी)]। तीनटा अशोक तgभपर, जे कोÁुआ (मुजòफरपुर)मे भेटल अिछ, बादमे िकयो अिभलेख खिचत केने छिथ। ओिहमे दूटा अिभलेख ७म शताwदीक अिछ जे नागरी िलिप आ संकृत भाषामे अिछ आ तेसर ५म शताwदीक अिछ जे संकृत भाषामे आ ÚाÛी िलिपमे अिछ। कोÁुआ, मुजòफरपुरक अशोक तgभ (बसाढ़ तgभ) मे जे तीनटा अिभलेख भेटल अिछ ओिह मे िकछु अ9र शंख िलिपक सेहो अिछ, जे अखन धिर निह पढ़ल जा सकल अिछ। (जलज कुमार ितवारी, एस. कृtणामूित+, िमिथला भारती, भाग-६, अंक १-४, २०१९ ई. ) मादा अिभलेख, कमौली दानपm (िवWादेव कमौली xशित), गदाधर मिदर अिभलेख (गदाधर मठ गया), गंजम ताíपm, लोकनाथक दानपm, भागलपुर, मुंगेर आ नालदाक दानपm, बादल तgभ अिभलेख, िवºप सेनक मदनपाद दानपm, अशोकाचलक बोधगया अिभलेख, वYलालसेनक नैहाटी अिभलेख, ढाका अिभलेख (ढाका मूित+ अिभलेख), देवपारा xशित, अनुिलया आ सािहय पिरषद दानपm, भुवनेर, सुदरवन, वेलवा आ बोधगया अिभलेख pमसँ देवनागरी आ ितरहुताक बीचमे फ›क आिन देलक। उप संहार

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् तेसर शताwदी ई.पू. मौय+, दोसर आ पिहल शताwदी ई. पू. शुंग, पिहल सँ तेसर शताwदी शक/ कुषाण, चािरमसँ छअम शताwदी- गु£त, सातमसँ ९अम शताwदी िस}मातृका आ तकर बाद ितरहुता, एिह pममे ितरहुताक िवकास हम देिख सकैत छी। तंmक योगदानसँ आ ितwबती िलिपक xभावसँ ितरहुता अलंकृत भेल। िमिथला9रक उeव आ िवकास मे राजेर झा जी िकछु पुरातन तãयसँ अपनाकÊ दूर निह कऽ सकला, जेना ओ निह फिरछा सकला जे ÚÛी पूव+ पािणनी ~याकरणाचाय+ लोकिन µारा xयु$त होइत छल आ पािणनीक ~याकरणमे ओ अशु} भऽ गेल आ तखनसँ एकर नाम ÚाÛी भऽ गेल। ओ ÚाÛण लोकिन µारा xयु$त हेबाक कारणे ÚÛी नाम भेलपर िजिदयायल छिथ। हुनकर अवधारणा जे वैदेही िलिपसँ ÚाÛी (जकरा ओ ÚÛी िलखै छिथ) बहरायल सेहो Ìामक अिछ। िमिथलामे शंख िलिपमे सेहो छोट-छीन अिभलेख भेटल अिछ, जकर वण+न ऊपर कयल गेल अिछ, जे हड़£पा िलिप जेक› पढ़ल निह जा सकल अिछ आ ÚाÛीमे सेहो अिभलेख भेटल अिछ, से हुनकर कथन जे सोझे हड़£पासँ लोक िवदेह आयल िवदेघ माथवक संग (शतपथ ÚाÛण) आ एतऽ वैदेही िलिप शुº कऽ देलक, से माय निह अिछ। से सगर भारतमे जे परgपरा छल जे ÚाÛीमे पैघ अिभलेख िलखल जाइत छल आ नाम आ हता9र लेल शंख िलिपक xयोग कएल जाइत छल से िमिथलोमे भेटल अिछ। राजेर झा तंm-िस}iत आ एकर ितरहुता िलिपपर xभावक सेहो जºरित सँ बेशी xभाव देखेने छिथ, जखन िक ओकर xभाव िकछु सोझे आ िकछु ितwबती िलिपक मा=यमसँ पड़ल मुदा ओ ओिहसँ अलंकृत माm भेल। हुनकर ई कथन जे शwदकYप4ुममे देल िलखबाक प}ितसँ बijला िलिप निह वरन् माm िमिथला9र (ितरहुता) िलखल जा सकैत अिछ, सेहो Ìामक अिछ। बijला वा िमिथला9र वा ितwबती वा देवनागरी सभ ÚाÛीपर आधािरत अिछ आ ई एिह तरहÊ बूझल सा सकैत अिछ जे रोमन िलिपमे एकसँ एक फॉyट छै जे कखनो अह›कÊ अरबी सन बुझायत कखनो लटपटौआ, आ सभ एक दोसरामे पिरवत+नीय अिछ। शwदकYप4ुममे देल िविध ितरहुते निह बijलो लेल उपयु$त छल, छापाखाना एलाक बाद जेना रोमन पूण+ ºपसँ संयु$ता9र खतम कऽ लेलक तिहना बijला बहुत रास संयु$ता9रकÊ खतम कऽ लेलक। आ ओिह नवका ºपकÊ राजेर झा जी शwदकYप4ुमसँ जोड़बाक गलती केलिह। राजेर झाकÊ खरोØी िलिपक सgबधमे सेहो Ìम छिह। खरोØी दिहनसँ वाम िदस िलखल जाइत अिछ मुदा ई पूण+ ºपसँ भारतीय िलिप छल, वएह वर ~यंजन (कचटतप)। ÚाÛीसँ िकछु चेह कम भेलाक कारण, जखन अिभलेख xाकृतसँ संकृतमे िलखल जाय लागल, खरोØी संकृतक समासयु$त अिभलेखक लेखन लेल अनुपयु$त भऽ गेल आ खतम भऽ गेल आ कोनो भारतीय िलप एिहसँ बहार निह भऽ सकल। आधुिनक ितरहुताक ºपक िवकास नारायणपालक भागलपुर दानपm, cीच4 रामपालक दानपm, मिहपाल xथमक वनगढ़ दानपm, भोजवम+नक वेलवा दानपm, लÔमणसेनक तप+ण िनिध दानपm सँ िवकिसत होइत प9धर िमc कृत िवtणुपुराण आ १३२६ ई. सँ xा£त मैिथल ÚाÛण आ कण+ कायथक पïीमे आिब कऽ

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् समा£त भऽ जाइत अिछ। जे िकछु छोट-मोट पिरवत+न लेखकक ~यि$तगत लेखनीक कारण छल से छापाखाना एलाक बाद खतम भेल। रामलोचन शरण (१८८९-१९७१) ितरहुतामे मैिथलीक xकाशनक xारgभ केलिह।तकरा बाद कg£यूटर फॉyटमे एकºपता आिब गेल आ से सgभव भेल देवनागरी यूनीकोड (मंगल), बijला यूनीकोड (वृदा) आ तखन ितरहुता यूनीकोडकÊ आधार बनेलासँ। छापाखानामे िदÂित रहै, जे िकछु ºपकÊ ओतय छोड़य पड़ैत छलै, आ घॲघाउज होइत छल जे एिह ितरहुताकÊ सीिख कऽ पाyडुिलिप निह पढ़ल जा सकैए। कg£यूटरमे एÂे आधारपर िविभ¤ फॉyटक िनम\ण भेलासँ िविभ¤ फॉyट िविभ¤ तरहक लेखन ºपकÊ अंिकत करैत अिछ आ ओ सभ आपसमे पिरवत+नीय होइत अिछ। से सभ १३२६ ई. क बादक सभ तरहक पिरवत+न (संयु$ता9र सिहत), जे पिरवत+न निह वरन् लेखनक िविभ¤ टाइल छल, क समावेश आब सgभव भऽ गेल अिछ।

अनुलjनक १: कैथी िलिपमे मैिथलीक िकछु उदाहरण (साभार जीनोम मैिपंग आ जीिनयोलोिजकल मैिपंग, िमिथलाक पïी xबध भाग-१ आ २ , cुित xकाशन, २००८, २००९) अनुलjनक २: िमिथलाक कण+ कायथक ितरहुता िलिपमे िलखल िकछु पात (साभार मैिथल करण कायथक प›िजक सवä9ण- मेजर िवनोद िबहारी वम\, १९७३) अनुलjनक ३: लन+ िमिथला9र- गजे4 ठाकुर अनुलjनक ४: देवनागरी: ितwबती: ितरहुता अनुलjनक ५: ÚाÛीसँ ितरहुता धिर िलिपक िवकास अनुलjनक : १-२-३ िलंक अनुलjनक ४-५ िलंक (िवWाथ¦ लोकिन लेल िनदäश : अनुलjनकमे देल ÚाÛीसँ ितरहुता धिरक िवकासक सभ अ9रक xैि$टस करबाक आवÄयकता निह अिछ। एक वा दू अ9रक अöयास पय\£त अिछ। अनुलjनक-५ पर =यान देब बेशी जºरी अिछ। अिभलेख सभक िवतृत िववरण आ ितरहुता िदस िलिपक झुकाव िवतारमे देल गेल अिछ। अह› जािह िलिपक अनुलjनक ५ सँ अöयास करी ओतबे अपन नोटमे ओिह अिभलेखसँ सािम<ी उठाबी। सgपूण+ मोन रखनाइ निहये सgभव छैक निहये से जºरी छैक। ई आलेख साढ़े आठ हजार शwदक अिछ, अह› अपन सुिवधासँ एकर ६००- १००० शwदक नोट बना सकैत छी। ) ऐ रचनापर अपन मंत~य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् गजे4 ठाकुर मैिथली आ दोसर पुबिरया भाषाक बीचमे सgबध (बijला, असिमया आ ओिड़या) [ यू.पी.एस .सी. िसलेबस , पm - १, भाग -“ए”, pम -५] TOPIC-17 (टॉिपक ०१ सँ १६ लेल जाउ http://www.videha.co.in/aboutme.htm पर) १ मैिथली आ बijला मैिथली बijला अपने आपिन नै (निह) नय छी आिछ/ िछ काज काज इनार इनार करै (करैत) छी कोरेिछ गेल छलॱ (छलहुँ) िगयेिछलाम बाजू नै बोलबेन ना राहल रा¤ा की िक संगे शंगे

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मानुषीिमह सं ृ ताम् चाह चा दू टा दुटो ई सब एशब िसंघाड़ा िशङाड़ा कोन कोन हाथ हात अखन ऐखोन प›चटा प›चटा अ:छा आ:छा छिथ आछेन छी आिछ हुअय आछो कº कोºन चाही चाइ खोलै छी खुलिछ कोनो कोनो

बijला “अ” ओिड़या सन “ओ” उ:चिरत होइत अिछ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् मैिथली सन इ/ ई आ उ/ऊ केर ÷व-दीघ+ उ:चारणमे भेद निह अिछ आ ऐ मैिथलीमे अ+इ आ बijलामे ओ+ई उ:चिरत होइत अिछ। औ बijलामे ओ+उ उ:चिरत होइत अिछ। “न” आ “ण” केर उ:चारण बijलामे एके रङ होइत अिछ। मैिथलीमे “ण” केर उ:चारण कखनो काल “ड़” होइत अिछ (गणेश=गड़ेस)। व/ ब एके रङ “ब” (मैिथली जक›) सन उ:चिरत होइत अिछ। आिन मैिथलीमे िलखलो आ बाजलो “आिसन” जाइत अिछ मुदा बijलामे िलखल आिन आ बाजल आिÄशन जाइत अिछ। तिहना :- बijलामे एना िलखल जाइत अिछ बijलामे एना बाजल जाइत अिछ अवेषण अ¤ेशन ास शाश उ:úवास उ:छास अ9र अ$खोर पâ पçो िवमय िबÄशय उ¹जवल उ¹जल

फेर बijलामे एना िलखल आ फराकबाजल सेहो जाइत अिछ:-

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मानुषीिमह सं ृ ताम् बijलामे एना िलखल जाइत अिछ बijलामे एना बाजल जाइत अिछ संहा शंथा हान थान सुå शुथो असुå अशुथो

बijलामे कोनो शwद पर िवशेष बल देबाकलेल –-तो जोड़ल जाइत अिछ। बijलामे पूव+ िनिद+Ð वतु लेल xयु$त वतुवाचक सं;ा/ सव+नामक एकवचनमे –-टा –-िट आ बहुवचनमे –- गुलो, -गुिल जोड़ल जाइत अिछ। बijलामे संÕयावाचक शwदक संग –-टा, -िट, -टे, -टो जोड़ल जाइत अिछ मुदा –-गुलो, -गुिल केर xयोग निह होइत अिछ। बijलामे “संग” आ “लेल” सन अ~यय लेल सgबध िवभि$तक xयोग होइत अिछ जेना:- चायेर शंगे- चाहक संग आमार शंगे- हमरा संग आमार जो¤े- हमरा लेल बijलामे सव+नामक सgबधवाचक ºपबनेबा लेल सव+नामक ितय+क ºपमे –-देर जोड़ल जाइत अिछ। आमा-आमादेर-हमर आपना-आपनादेर-अह›क तोमा-तोमादेर- तोहर एना-एनादेर-िहनकर

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मानुषीिमह सं ृ ताम् व§+मान काल आ;ाथ+कक बाद –-ना xयोग जोर देबा लेल कयल जाइत अिछ। देखू ने- देखुन ना कोनो शwद पर बल देबा लेल मैिथलीमे िµव+एकार केर xयोग होइत अिछ जेना- कgमे, एÂे। बijलामे ई xभाव –-इ यु$त भेलासँ अबैत अिछ जेना-कमइ। मैिथलीमे “अिछ” केर नकारामक “निह अिछ” xयु$त होइत अिछ मुदा बijलामे “आछे” केर नकारामक लेल माm “नेइ” xयु$त होइत अिछ। अपूण+कािलक िpयाºप मे जँ धातु वरiत होइत अिछ तँ धातुक ितय+क ºपक संग कालवाची xयय –-:छ जोड़ल जाइत अिछ। जँ धातु ~यंजनात होइत अिछ तँ धातुक ितय+क ºपमे –-छ जोड़ल जाइत अिछ। कालवाचक xयय लगेलाक बाद पु¼षवाचक xयय जोड़ल जाइत अिछ। मैिथली बijला हम अबै छी आिम िफिरिछ हम जाइ छी आिम जाि:छ ओ सब आबै छिथ उिन िफरछेन अह› जाइ छी आपिन जा:छेन तूँ आबै छÊ तुिम िफरछो तूँ जाइ छÊ तुिम जा:छो ओ सब अबैत छिथ ितिन िफरछेन ओ सब जाइ छिथ ितिन जा:छेन ओ आबै छिथ शे िफरछे

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ओ जाइ छिथ शे जा:छे अह› अबैत छी आपिन िफरछेन अह› करैत छी आपिन कोरछेन

बijलामे एक xकारक असमािपका िpया होइत अिछ- िpयाक ितय+क ºपक। बादमे –-ते जोड़लासँ ई बनाओल जाइत अिछ। करय मे- कोरते (कोर+ते) जाइ मे- जेते (जा+ते) आबय मे- आशते (आश+ते) मैिथली सन बijलामे सेहो दू शwद वा वा$यकÊ जोड़बा लेल ओ, आर, एबं (मैिथलीमे एवं/ एवम्) केर xयोग होइत अिछ। बijलामे “ओ” केर xयोग “संग” केर अथ+मे सेहो होइत अिछ। हमहूँ- आिम ओ धातुक पाछ› पु¼षवाचक xयय लगा कय िpयाक सामाय व§+मान कालक ºप बिन जाइत अिछ। कर+इ= कोिर कर+एन= करेन कर+ओ= करो कर+इश= कोिरश कर+ए= करे। २ मैिथली आ असिमया

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मानुषीिमह सं ृ ताम् मैिथली जक› असिमयामे सेहो ÷व इ दीघ+ ई, आ ÷व उ दीघ+ ऊ केर उ:चारणमे कोनो खास अतर निह होइत अिछ। मुदा असिमया ऐ केर उ:चारण ओइ आ औ केर उ:चारण ओउ होइत अिछ। पिहल तँ मैिथलीसँ िभ¤ मुदा दोसर मैिथलीक समान। मैिथलीमे जेना “अ” बाजल जाइत अिछ असिमयामे तेना “आ” बाजल जाइत अिछ। असिमयाक “अ” केर उ:चारण मैिथलीमे निह अिछ। असिमया “च” आ “छ” मैिथलीक “स” सन बाजल जाइत अिछ। असिमयाक “ज” “झ” आ “य” मैिथलीक “ज” सन उ:चिरत होइत अिछ। मैिथलीमे सेहो बहुत ठाम “य” केर उ:चारण “ज” सन होइत अिछ। असिमयामे मूध+य आ दत दुनू दतमूलीय सन उ:चिरत होइत अिछ। ट. ठ, ड, ढ, ण, त, थ, द, ध, न एिह सभमे उ:चारणक दृिÐसँ कोनो अतर निह होइत अिछ, सभटा दतमूलीय सन उ:चिरत होइत अिछ। श, ष, स तीनू “स” सन उ:चिरत होइत अिछ। मैिथलीमे “ष” कखनो काल “ख” सन उ:चिरत होइत अिछ। मैिथलीमे सेहो “श” आ “स” “स” सन उ:चिरत होइत अिछ। “श” “ष” आ “स” “र” केर संग वा दू वरक बीचमे रहला पर एकटा तेसरे ढंगसँ उ:चिरत होइत अिछ, जकर समान मैिथलीमे कोनो उ:चारण निह अिछ। असिमयामे “जँ संयु$ता9रसँ शwदक अंत होइत अिछ तँ ओ अकारात उ:चिरत होइत अिछ। माने “ञ” केर उ:चारण “न” सन होइत अिछ। मैिथली असिमया ऐ (अइ) एइ चाह साह हमर मोर

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मानुषीिमह सं ृ ताम् किनय› पिरवार पिरवार संसार बहीन मनी जलखै/ जलपान जलपान दही दोइ नािरकेलक लàडू (लड़ू) नािरकलर लाº सुआद (सोआद) सोआद नीक (भल) भाल बेस (बàड) बेस खाउ खाओक िलअ लओक जाउ जाओक कº करक अपने आपुिन करबाक/ कº (करक) करक जएबाक (जाउ) जाओक अह› आहा धानक धानर

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मानुषीिमह सं ृ ताम् िदअ िदयक दे दे बाड़ीमे बाड़ीत औषध औसध नेबू (नेबो) नेमु कथा (गप) कथा एक बेर एबार दुइ दुइ चािर सािर मते (अनुसारे) मते लगाित लगत खेनाइ खा तूँ (पुरातन-तोइ) तोइ आइ-कािÁ आिजकािल करह कअ+ कतऽ कोत निह (नइँ) नाइ चाहक पात साह पात

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ब›स ब›ह नोकसान लोकसान बौतु बतु आनॱ (आनी) आनॱ करॱ (करी) करॱ िलखॱ (िलखू) िलखॱ एक बेर एबार आबह आह टाका-पाइ (पइसा) टका-पइसा के कोन पिरवार पिरयाल छौरा लोरा रखलॱ रािखसॲ र्◌ाित राित बजे बजात xायः xाय भाराक घर भाराघर डेढ़ हजार डेर हेजार

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मानुषीिमह सं ृ ताम् बेसी बेिस पचास पसास हाथी ह›ती हिरण हिरणा पोखिर पुखुिर

असिमयामे कोनो शwद पर जोर देबाले –-हे जोिड़ कऽ बाजल जाइत अिछ। असिमयामे –जनी mीिलंग वाचक xयय तँ –-जन पुिYलंग वाचक xयय अिछ। असिमयामे बहुवचन बनबै लेल तीन xकारक िवभि$त लगैत अिछ। “तुिम”, “तेओँ”, “आपुिन” क संग - लोक, तु:छाथ+बोधक िवशेtय पदक संग -बोर, “तइ”, “िस”, “एइ”, “ताइ” सव+नाम आ संबंधवाचक िवशेtय पदक संग “हÈत” क xयोग होइत अिछ। एकवचन बहुवचन तुिम तोमालोक आपुिन आपोनालोक तेओ तेओंलोक तइ तहँत िस िसहँत एइ एइहँत

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ताइ ताइहँत/ िसहँत लोरा लोराबोर िकताप िकतापबोर घर घरबोर

असिमयामे “ई”/“एकरा” लेल “एइ” आ “ओ”/”ओकरा” लेल “सेइ” xयु$त होइत अिछ। लागत/ पड़त लेल असिमयामे लािगब xयु$त होइत अिछ। असिमयामे x°वाचक वा$यमे जािह शwद पर बलदेबाक रहैत छैक ओिहमे –-नो जोड़ल जाइत छैक। धातुक संग –-ओवा जोिड़ कऽ भूतकाल वाचक िवशेषणक िनम\ण होइत अिछ। मूल धातुक संग –-आ जोिड़ कऽ िpयावाची सं;ा बनाओल जाइत अिछ । असिमयामे कम+वा:यक िÚया बनेबा लेल धातुमे –-आ जोिड़ कऽ आ फेर –-हय वा –-जाय केर xयोग कयल जाइत अिछ। मैिथली सन असिमयामे सेहो िpया कालक अनुसार बदलैत अिछ। ३ मैिथली आ ओिड़या िकछु िवशेष िट£पणी देल जा रहल अिछ जािहसँ मैिथली आ ओिड़याक बीचमे सgबध पÐ भऽ जायत। मैिथलीमे “ई” केर बदला ओिड़यामे “इए” xयु$त होइत अिछ, मुदा उ:चारण दुनू ठाम एÂे छैक, माm व§+नीमे अतर छैक। जेना रेघा कऽ हम सब “ई” बाजै छी सएह “इए” िछऐ। “तूँ जाह” हम सब कहै छी आ ओिड़यामे “तू जाऽ“ कहल जाइत अिछ। “तूँ जो” हम सब कहै छी आ ओिड़यामे “तुमे जाअ”, हमसब “अह› जाऊ” आ ओिड़यामे “आपण जाआतु” कहल जाइत अिछ। मैिथलीमे “अिछ” ओिड़यामे सेहो “अिछ” अिछ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् हमर केर xाचीन मैिथली ºप “मोर” (िपआ मोर बालक- िवWापित) अखनो ओिड़यामे गWमे “मोर” xयु$त होइत अिछ। “निह” केर बदला “नािहं” (न›ई) (मैिथलीमे सेहो एहेन उ:चारण होइत अिछ आ मैिथली पिmका अंितकामे नइँ िलखलो जाइत अिछ), “अपने” आ “अह›” केरबदला “आपण” xयु$त होइत अिछ जे मैिथलीक “अपने” सन अिछ। “छी” केर बदला “िछ” xयु$त होइत अिछ। “कोन” केर बदला “केउँ”, “कािÁ” केर बदला “कािल” आ “पीलक” केर बदला “िपइला” xयु$त होइत अिछ। “नै सुनलिन” केर बदला “शुिणलुिन”, एतय गिहंकी नजिरसँ देखब तँ पता लािग जायत जे नकारामक बनेबा लेल ओिड़यामे “िन” शwदक अतमे जोड़ल जाइत अिछ। ’कÊ’ केर बदला ’कु’ जेना ’रामकÊ’ केर बदला ’रामकु’ xयु$त होइत अिछ। “देल” केर बदला “देल” यएह xयु$त होइत अिछ। जेना अपने सभ भात “िसझ” गेल कहैत िछऐ, ओिड़यामे बरकल पािनक बदलामे “िसझापािण” कहल जाइत अिछ। “हएत” केर बदला “हेब”, “नै हएत” केर बदला “हेबिन” (िन जोिड़ कऽ नकारामक बनल)। अि<म/ अगारी केर बदलामे “आगº”, कराबय केर बदला किरबाकु, पड़त केर बदला पिड़ब, “देखने छह” केरबदला “देिखछ”, कतेक/ क§े केरबदला केते, जतेक/ ज§े केर बदला जेते xयु$त होइत अिछ। मैिथली केर “ओ” केर बदला ओिड़यामे “से” xयु$त होइत अिछ। मैिथलीमे “से” (जेना- से कहलक) कनेक िभ¤ अथ+मे मुदा मोटा-मोटी “फराक” केर अथ+मे xयु$त होइत अिछ। मैिथली ओिड़या जाइ छै जाउिछ

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मानुषीिमह सं ृ ताम् एकटा (गोटे) गोटे बुलब/ बुलनाइ बुिलबा दूटा िदटा कोन ठाम(कोन ठ›) केउँिठ जाइ छी जाउिछ देखै छी देिखिछ आउर के आउ िकए आबैले छिथह आिसछित मिर गेल मिरगला जाइ छै जाइिछ जेबै िजबे जायब िजिब छलै (छलय) िथला जैठाम (जइठाम, जइठ›) जेउँिठ दरमाहा दरमा गेल गले बैसा कय बसेइदइ करायब करेइबा

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् तोहर तiकर लागैछै लागुिछ करबै किरबेिन से काज से काम किर लेता किरनेब िकछु िकिछ दऽ देबै देइदेिब तऽ (तँ) त िदआयल जायत िदआिजब भौजी/ भाउज भाउज जलखै जळिखआ आउर (आओर) आउ चाह चा ओिड़यामे उ:चारण सेहो कनेक िभ¤ छैक, जेना “अ” केर उ:चारण “ओ” सन होइत छैक। जेना “समर” कÊ हम सभ समर पढ़ब मुदा ओिड़यामे एकरा पढ़ल जायत “सोमोरो”। “अ” लािग कय सभ ~यंजन हलत सँ पूण+ होइत अिछ से सभटा ~यंजनमे अ=ओ उ:चारण होयत। मैिथलीमे मनोज कÊ बाजल जाइत अिछ मनोजऽ, मुदा ओिड़यामे बाजल जायत मोनोजो। इ/ ई, उ/ ऊ- मैिथली आ ओिड़यामे एÂे रङ उ:चारण होइत अिछ। ऐ जेना मैिथलीमे अ+इ आ औ जेना अ+ऊ बाजल जाइत अिछ तिहना ओिड़यामे सेहो उ:चिरत होइत अिछ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ऋ मैिथलीमे “री” बाजल जाइत अिछ मुदा ओिड़यामे “¼” उ:चिरत होइत अिछ। कृप मैिथलीमे “pीप” पढ़ल जाइत अिछ आ ओिड़यामे “pुपो” उ:चिरत होइत अिछ। व ब सन उ:चिरत होइत अिछ दुनू भाषामे से मैिथलीमे ओ उ:चिरत होयत “ब” आ ओिड़यामे “बो”। मुदा िवदेशज शwदक उ:चारण ओिड़यामे सेहो हलत सन होइत अिछ आ “ओ” सन “अ” केर उ:चारण निह होइत अिछ। मैिथली सन “य” कÊ “ज” िकछु ठाम पढ़ल जाइत अिछ, से “यम” मैिथलीमे “जम” आ ओिड़यामे “जोमो” पढ़ल जाइत अिछ। शwदक xारgभमे जँ “ड” वा “ढ” अबैत अिछ तँ नीच›क िबदु दुनु भाषामे िवलु£त रहैत अिछ। मैिथली आ ओिड़या दुनूमे कचटतप केर प›चम अनुनािस$य अ9र (pमसँ ङ, ञ, ण, न, म) मे सँ माm न आ म सँ शwदक xारgभ सgभव अिछ। “9” मैिथलीमे “$छ” उ:चिरत होइत अिछ आ ओिड़यामे “ख” वा “Õय”। मराठी सन ओिड़यामे संकृतक “ळ” अखनो अिछ जे मैिथलीमे आब निह अिछ। “;” मैिथली आ ओिड़या दुनूमे “jय” उ:चिरत होइत अिछ। “स” मैिथलीमे “तस” मुदा ओिड़यामे (स् +च) उ:चिरत होइत अिछ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

डॉ. ललन कुमार झा पं. तेजनाथ झा ओ संकार : एक समी9ा

वातवमे िविधपूव+क संकार साधनसँ िद~य ;ान उप¤ कऽआमाकÊ परमामाक ºपमे xितिØते करब मुÕय संकार अिछ आओर मानव जीवनक साथ+कता सेहो एिहमे सि¤िहत अिछ। संकार शwद शwदत: वैिदक सािहयमे निह भेटैत अिछ। मुदा सgक संग कृ धातु तथा संकृत शwद बहुधा िमिल जाइत अिछ। ऋjवेद (5/76/2) मे संकृत शwद धम+ (बरतन)क लेल xयु$त भेल अिछ। जेना दुनू अिन पिवm मेल बरतनकÊ हािन निह पहुँचबैत अिछ। शतपथ ÚाÛण (1/1/4/10)मे आयल अिछ जे- ‘स इदं देवेgयो हिव: संकु¼ साधु संकृत संकुिव+येवैत दाह।’ पुन: अिछ (3/2/1/22) मे आएल अिछ जे- तमादु mी पुमiसं संकृते ितyडतöयेित अथ\त् mी कोनो संकृत (सुगिठत) घरमे ठाढ़ पु¼षक लग पहुँचैत अिछ। जैिमिनक (3/1/35) मे संकार शwद ‘उपनयन’क लेल xयु$त भेल अिछ। संकारसँ आमा-अत:करण शु} होइत अिछ। संकार मनुtयकÊ पाप आओर अ;ानसँ दूर रािख कऽ आचार-िवचार आओर ;ान-िव;ानसँ संयु$त करैत अिछ आओर ~यि$त काय+ िवशेषक लेल अहत\ xा£त करैत अिछ। एही लेल मीमiसाकार शबर संकार शwदक अथ+ बतबैत कहलिह अिछ जे- ‘संकारो नाम स भवित यिमन जाते पदाथ\ भवित योjय: कय िचदथ+यं- अथ\त संकार ओएह अिछ जािहसँ कोनो पदाथ+ वा ~यि$त कोनो काय+क लेल योjय भऽ जाइत अिछ। तmवाित+कक अनुसारÊ ‘योjयतi चादधाना: िpया संकारा इयु:यते’ अथ\त् संकार एहन िpया तथा रीित अिछ जे योjयता xदान करैत अिछ। ई संकार मुÕयत: दुइ xकारक होइत अिछ- (1) मलापनयन आओर (2) अितशयाधाना। कोनो दप+णपर पड़ल गरदा आिद

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मानुषीिमह सं ृ ताम् सामाय मलकÊ वmािदसँ पोछब, हटाएब वा व:छ करब मलापनयन अिछ आओर फेर जँ कोनो रंग वा तेजमय पदाथ+ µारा ओिह दप+णकÊ िवशेष चमकृत वा xकाशमय बनाएव ‘अितशयाधान’ कहबैत अिछ। दोसर शwदमे ओकरा हीनभावना, xितचरण वा गुणाधान संकार कहल जाइत अिछ। एिह तरहÊ संकार मानव जीवनक एक आवÄयक अंग अिछ जकरा िबनु ओ अपूण+ रिह जाइत अिछ। जेना जमसँ केओ शु4े रहैत अिछ, मुदा जखन ओकर कण+ वेधोपनयन संकार भऽ जाइत अिछ तखन ओ िµज भऽ जाइत अिछ। ‘जमना जायते शु4: संकारािüवज उ:यते। मातुय+द<े जायते िµतीय मौिïबधनात्। ÚाÛण9िmयिवशतमादेते िµजा: मृता:।। ‘िµज\यत इित िµज: िनव+चनमे इएह भाव गौण अिछ। एही भावनासँ xेिरत भऽ कऽ वीर िमmोदय संकारक पिरभाषा एिह xकारÊ देल गेल अिछ- ई एक िवल9ण दुइ xकारक अिछ- (1) जकरा µारा ~यि$त आन कम+ (जेना उपनयन संकार, वेदा=ययन आरgभ होइत अिछ) क अहत\ xा£त करैत अिछ तथा (2) दोष (जेना जातकम+ संकारसँ वीय+ एवं गभ\शयक दोष मोचन होइत अिछ) सँ मु$त भऽ जाइत अिछ। इएह कारण अिछ जे िहदू धम+शाm संकारकÊ मानव जीवनक वiछनीय निह अिपतु अपिरहाय+ अंग मानल अिछ। ई =यात~य अिछ जे संकार सेहो पु¼षक जीवनमे अिनवाय+ कहल गेल अिछ जतए मmपूव+क ओकर िनtपादन होइत अिछ। mी लोकिनक िववाह संकार माmक ओतेक महव जे मmपूव+क होइत अिछ। आन िpया तँ िबनु मmक सेहो भऽ सकैत अिछ। ‘तूtणीमेता: िpया mीणi िववाहतु समmक:। एता जातकम\िदका: िpया: mीणi तूtणी िवनैव मmैय+थाकालं काय\:। िववाह: पुन: समmक: काय+:।।- िमता9रा नवैता: कण+वेधातामयवज+ िpया: िmया: िववाहोमmततया: शू4यामmतोदयश।। -~यास मृित- 1/15-16 मृितकार हारीतक अनुसारÊ संकार दू कोिटमे िवभािजत अिछ- ÚाÛ आओर दैव। गभ\धानािद संकार जे माm धम+शाmमे विण+त अिछ, ÚाÛ कहल जाइत अिछ। पाक य; (पकाओल भोजनक आहुित) एवं सोमय; आिद जकरा संकार कहल जाइत अिछ। एिह तरहÊ िहदू ल ोकिनक बीच संकार घूिल-िमिल गेल अिछ। एकरा िबनु पूण+ता वा जीवनक साथ+कता निह अिछ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् संकारक संÕयाक िवषयमे मृितकार लोकिनमे मतभेद रहल अिछ। गौतम (8/14-24) चालीस संकारक वण+न कएलिह अिछ। वैरवानस अठारह शरीरक संकार गनाओल अिछ। ~यासक अनुसारÊ सोलह संकार अिछ ओ आइ एकरे मायता अिछ। मनु संÕयाक पिरगणना तँ निह कएलिह अिछ, मुदा कहलिह अिछ जे िनषेक (गभ\धान)सँ Äमशान धिर संकारक तरफ संकेत कएलिह अिछ- िनषेकािदÄमशानातो मmैय+योिदतो िविध:। तय शाmेऽिधकारोऽिमý;ेयो नायय कयिचत्।। -मनुमृित- 2/16 एिह संकारक उYलेख कऽ मनु इहो संकेत देलिह अिछ जे िµजेटा एिह धम+शाmक अिधकारी अिछ। एिह तरहÊ जीवनक xधान तव संकारक संÕयाक िवषयमे मतभेद अिछ। मुदा मृितकार ~यासक संÕया परक िवचार सव+था माय अिछ। िहनका µारा पिरगिणत सोलह संकार ई अिछ- (क) गभ\धान, (2) पुंसवन, (3) सीमतो¤यन, (4) जातकरण, (5) नामकरण, (6)िनtpमण, (7) अ¤xाशन, (8) वपन िpया, (9) कण+वेध, (10) xतोदेश (उपनयन), (11) वेदारgभ, (12) केशात (गोदान), (13) समावत+न (वेद नान), (14) िववाह, (15) िववाहािjन पिर<ह आओर (16) mेतािjन सं<ह। “गभ\धानं पुंसवनं सीमतनो जातकम+ च। नामिpयािनtpमणेऽ¤ाशनं वपन िpया। कण+िवधो वÑतादेशो वेदारgभ िpयािविध:। केशात: नानमुµाहो िववाहिjन पिर<ह:। mेतािjन सं<हÒेित संकारा: षोडशमृता:।।” ~यास मृित- 1/13-15 मानव जीवनमे एिह संकारक बड़ महव अिछ। एिह लेल मृितशाmक बाद िनबध <थमे सेहो एकर उपादेयताक वण+न कएल गेल अिछ। पं. तेजनाथ झा xणीत वाजसनेियनi िववाहािद संकार प}ितमे सेहो एिह संकारक वण+न कएल गेल अिछ। पं. तेजनाथ जनकYयाणक भावनासँ उ$त िनबंध <थक xणयन कएलिह। वाजसनेयी शाखावला ÚाÛण केवल िमिथले टा मे निह छिथ, एिह बुि}सँ ओ एिह <थक टीका सेहो िहदीमे िलखलिह जािहसँ ई अयत ~यापक भऽ गेल अिछ। संकारक xकारक सgबधमे जे मतवैिभ¤ होअए, मुदा <थकार माm तेरह संकारक आलो:य <थमे वण+न कएलिह अिछ। ई परgपरा िव¼} सव+xथम िववाहक वण+न कएलिह अिछ। उ$त <थमे विण+त संकारावली एिह तरहÊ अिछ- (1) िववाह (2) गभ\धान (3) पुंसवन (4) सीमmो¤यन (5) जातकम+ (6)

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मानुषीिमह सं ृ ताम् नामकरण (7) िनtpमण (8) अ¤xाशन (9) चूड़ाकरण (10) कण+वेध (11) उपनयन (12) वेदारgभ आओर (13) समावत+न। एिह <थमे कुल उ¤ैस िवभाग कएल गेल अिछ। सव+xथम िववाहक पूव+ िदन राितमे सीमत (सॲथ) आमmण आओर फेर िववाह िदन कयादानसँ पूव+ वरक आंगन अएलापर आदरभावसँ पूंगािद दानक वण+न कएल गेल अिछ। तदु§र अÐमंगला िविधक वण+न अिछ, जे वर सिहत आठ ÚाÛण लोकिनक µारा सgपािदत होइत अिछ। तेसर pममे मातृका पूजा- िविध आओर अनतर आöयुदियक cा} िविध विण+त अिछ। धम+शाmमे विण+त आन संकार सभक pमब} वण+न िकएक निह कएल गेल अिछ, एिह िवषयमे <थकार िकछु निह िलखलिह अिछ। धम+शाmानुमोिदत संकार pमक िवचार कऽ xितपादन कएल जाइत। एिह दृिÐएँ सव+xथम गभ\धान संकारपर िवमश+ xतुत कएल जाइत अिछ।

गभ\धान :- गभ\धान पिहल संकार कहल गेल अिछ। िविधपूव+क संकार यु$त गभ\धानसँ उ§म एवं योjय सतान उप¤ होइत अिछ। एिह संकारसँ वीय+ तथा गभ+ सgबधी दोष, पाप दूर होइत अिछ- “िनषेकािद बैिजकं चैनो गिभ+कं चापमृ¹यते। 9ेm संकार िसि}Ò गभ\धान फलं मृतम्।।” -मृित सं<ह

पुंसवन :- पुmक xाि£तक लेल धम+शाmमे पुंसवन संकारक िवधान कएल गेल अिछ। ‘गभ\द् भवे:च पुंसूते पुंव ºप xितपादनम्’ (मृित सं<ह) एिह वा$यक अनुसारÊ पुmोपि§क लेल पुंसवन संकारक क§+~यता वत: ;ात होइत अिछ। जखन गभ+ तीन मासक भऽ जाइत अिछ तखन पुंसवन संकारक िवधान कहल गेल अिछ। पं. तेजनाथ झा कहलिह अिछ जे पुंसवन संकार गभ+धारण माससँ दोसर अथवा तेसर मासमे करबाक चाही।

सीमतो¤यन :- गभ+क छठम वा आठम मासमे ई संकार कएल जाइत अिछ। गभ+क शुि}ए एिह संकारक आधार अिछ। एिह संकारक वण+न आलायन, शiखायन, िहरyयकेशीय, गोिभल, पारकरािद िविभ¤ गृá सूmमे कएल गेल अिछ। पं. तेजनाथ झा पारकरक मतक अनुसारÊ xथम गभ+मे एकर xासंिगकता कहलिह अिछ। कक×पा=याय दोसर गभ+मे सेहो एकर आवÄयकता पर जोर देलिह अिछ, मुदा पं. झाक कहब छिह जे

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मानुषीिमह सं ृ ताम् पारकरक िवचार सव+था माय अिछ आओर मृितकार हारीतक वचनक उYलेख कऽ पारकरक मतक पुिÐ सेहो कएलिह अिछ- “सकृ:च कृतसंकारा सीमतेन िµजिmय:। यं यं गभ+ xसूयते स सव+: संकृतो भवेत्।।” -वाजसनेियनाम्- पृ. 47

जातकम+ :- जातकम+ संकार अित xाचीन अिछ। तैि§रीय संिहता (21215/3-4) मे आएल अिछ जे जखन ककरो पुm उप¤ होइत अिछ तँ ओकरा बारह िविभ¤ पाmमे पाकल रोटी (पुरोडारा)क बिल वैानरकÊ देबाक चाही। बालकक जमहोइतिह ई संकार क§+~य अिछ। नाल:छेदनसँ पूव+ बालककÊ सोनाक शलाकासँ अथवा अनािमका आंगुरसँ मधु तथा घृत चटाओल जाइत अिछ। बालकक िपता अथवा आचाय+कÊ बालकक कान लग ओकर दीघ\युक लेल मmक पाठ करबाक चाही। पं. झा एकर pम सेहो िथर कएलिह अिछ- “ऊँ सजतु दशयायो गभ×जरायुणास यथाथं वायु रेजित तथा समु4 रजित एवायदशमायोऽ|जरायुणा सह।”

नामकरण :- एिह संकारक फल आयु तथा तेजक बृि} एवं लौिकक ~यवहारक िसि} कहल गेल अिछ- “आयुव+चोऽिभवृि}Ò िसि}~यवþतेतथा। नाम कम+ फलंवेत त समुिछÐं मनीिषिभ:।।” (मृित सं<ह) आचाय+ मनुक अनुसारÊ जमसँ दशम वा बारहम िदन ¹योितष शाmमे कहल गेल शुभ ितिथ, मुहू§+ आओर गुणयु$त न9mमे बालकक नामकरण संकार होइत अिछ। पं. झाक मन छिहजे दशम िदन (अशौचात) सूितकाकÊ उठा कऽ jयारहम अथवा आन िविहत िदनमे िपता µारा िशशुक नामकरण कएल जाए। ओ कहलिह अिछ जे सव+xथम मातृका पूजा आओर आöयुदियक कऽ ÚाÛण भोजन कराए कऽ ब:चाकÊ नान कराए नवीन वm पिहराए वययन कऽ पूव\िभमुख िशशुक दिहना कानमे ‘ऊँअमुक शम\िस’ एहन तीन बेिर कहिथ।

िनtpमण :-

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मानुषीिमह सं ृ ताम् मनुक अनुसारÊ नवजात िशशुकÊ सूय+क दश+नक लेल चािरम मासमे घरसँ िनकालबाक चाही- “चतुथä मािस क§+~यं िशशोिन+tpमणं गृहात्’ (2/34) पं. झा मनुक अनुºपे चािरम मासमे च4 तरानुकूल िदनमे ब:चा आिन कऽ सूय+क दश+न “ऊँ त:च9ुदäविहतं पुरता:छpमु:चरत्। पÄयेम शरद: शतं, जीवेम शरद: शतं, शृणुयाम शरद: शतं, xवÑवाम शरद: शतामदीना: Äयाम शरद: शतöयूयÒ शरद: शतात्” मmसँ करए।

अ¤xाशन :- एिह संकार µारा माताक गभ+मे मिलन भ9ण जय दोष बालकमे आिब जाइत अिछ, ओकर नाश भऽ जाइत अिछ। जखन बालक छ: सात मासक होइत अिछ आओर दॉंत िनकलए लगैत अिछ, पाचन शि$त xवल होवए लगैत अिछ तखन ई संकार कयल जाइत अिछ। पं. झाक अनुसारÊ ब:चाक बाजव पÐ करवाक कामनासँ माछ, वायुक कामनासँ कृकलासक वÑÛवच+सक नािटकाक, मiस एवं सभ फलक कामनासँ उपयु+$त सभ मiस खोएबाक चाही।

चूड़ाकरण :- आचाय+ मनुक अनुसारÊ सभ िµजाित बालकक चूड़ाकरण संकार वेदक अनुसार पिहल वा तेसर वष+मे करबाक चाही। पं. झा पÐ ºपसँ एिह कम+क समय िनध\िरत कएलिह अिछ जकरा अनुसारÊ वष\öयतर वा तेसर, पॉंचम वा उपनयनक संगे शु} समयमे सूय+क उ§रायण रहलापर शु$ल प9मे गु¼ शुpातािद दोष निह रहलापर िर$ता ितिथ (चॱठ, नवमी, चतुद+शी) छोिड़ कऽ सोम, बुध, गु¼, शुp मे सँ कोनो िदन िविहत न9m यु$त िविहत ितिथमे आचाय+ µारा करवाक चाही। कण+वेध :- पं. तेजनाथ झा धम+शाmानुमोिदत जमसँ तेसर अथवा पॉंचम वष+मे िविहत न9m तथा िविहत ितिथमे पूव\Ü समयमे िपता अथवा आन cेØ ~यि$त पूव\िभमुख बैिस कऽ कुमारक दिहना कानमे यजुवäद (25/21) क मm पढ़ए। तिहना दोसर मmसँ वामा कानक अिभमmण करबाक चाही। तदनतर कानक म=य भागकÊ देिख कऽ कानमे छेद कराबए।

उपनयन :- पं. झा गृá सूmक वचनकÊ आधार बना कऽ िलखलिह अिछ जे आठम वष+मे अथवा गभ\Ðम वष+मे ÚाÛणक उपनयन करबाक चाही। उिचत अविध धिर उपनयन निह भेलापर िµज वÑाय भऽ जाइत अिछ, जकर िनराकरणक लेल िवशेष य;क ~यवथा अिछ।

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

ISSN 2229-547X VIDEHA

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मानुषीिमह सं ृ ताम् वेदारgभ :- सूm <थक चच\ करैत <थकार कहलिह अिछ जे ओना तँ सूm <थकार लोकिन वेदारgभक समय िवशेषक सgबधमे िकछु निह िलखलिह अिछ, मुदा या;वY$यक कहब छिन जे गु¼ िशtयक उपनयन संकार कऽ ओकरा महाyयाहृितक संग वेद पढ़ावए आओर शौचक िनयमक िश9ा देअए- ‘उपनीय गु¼: िशtयं महा~याहृित पूव+कम्। वेदम=यापयेदेनं शौचाचारiÒ िश9येत्।। -या;. 2/15 समावत+न :- वेदारgभक पÒात् समावत+न कम+ कएल जाइत अिछ। िनयमानुसार िवWा=यययनक उपरात नान कम+ तथा गु¼ गृहसँ अबैत समयक संकार नान वा समावत+न कहल जाइत अिछ। या;वY$य सेहो समावत+नक एिह अथ+मे xयोग कएलिह अिछ। ओ कहलिह अिछ वेदा=ययन वा वÑतकÊ समा£त कऽ अथवा दुनू समा£त कऽ गु¼कÊ यथाशि$त दि9णा दऽ कऽ हुनक आ;ासँ समावत+न करए- “गु¼वे तुवरंदरवा नाया}ा तदनु;या। वेदं वÑतािन वा पारं नीवा हयुममेव वा।।” -या;. 1/51

<ाम+पो.- रहुआ थाना- सौर बाजार भाया- िसमरी विÕतयारपुर िजला सहरसा िपन- 852127

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

िवtणु कात िमc महादेवक कूटनीित

कालचp(कथा सं<हस ॅ) ------------------- शंकर बाबूक िसरमामे यमदूत ठाढ़ छल ।ओ िहनका कहिन -- 'चल हमरा संग'। --------- 'हम तोरासंगे िकएक जाएब?हम एखन जयबाक मूडमे निह छी ।तावत दोसरसभके देखहक ।के पठौलकह तोरा'? ------ 'देवािधदेव महादेव।तोहर समय भ' रहल छह ।हमरा ल'ग आना -कानी निह चलतहु।हमरा त' तोरा महादेवधिर पहुचयबाक अिछ ।तपÒात तोरा जे कोनो गलती बूिझ पड़ौ त' हुनकेस ॅ गप क' लीह' ।'यमदूत बाजल। शंकर बाबू x° कयलिन ----'फेर हमरा हुनका ल'गस ॅ घुमा क' पृãवी लोक तो◌ॅपहुचाए देबह ने '? ----- हमरा माm पहुचयबाक भार अिछ ।फेर के संग आिब क' मृयुलोक पहुचेतहु से महादेवस ॅ पूिछ िलयहुन ।िवदा होएबामे आब एक िमनट माm बा◌ॅकी छहु ।' िकछु 9णक पÒात यमदूत शंकर बाबूके नेने जाय महादेवल'ग सुपुद+ क' देलक ।आब ई महादेवक दाियव छलिन जे िचmगु£तस ॅ शंकर बाबूक जीवन भिरक िpया - कलापक गोपनीय िरपोट+ म ॅगबाबथु । शंकर बाबू महादेवस ॅ कहलिथन ---'अहा◌ॅ एहन बेकहल सयिदयाके हमरा ओतय िकएक पठौलहु◌ॅ ?एकरा जोरगरीक दाबी छैक ।हम कहिलयैक जे बादमे भÀट क' लेबिन , जबद+ती अनलक अिछ ।' महादेव िचmगु£तके बजाय पुछलिन-----'अहा◌ॅ शंकरक िpया-कलापक एकाउट िदअ ।' ---------'सरकार, ई जीवनमे पचह§िर परसेट झूठेटा बजलाह ।pोध ,गािर,वाथ+,इtय\,पराया mीक शील हरण,मोह आिदमे समय ~यतीत कयलिन ।अपनेक सॲझा सभटा िलखल िरपोट+ रािख रहल छी ।'ई किह िचmगु£त शंकर बाबूक िरपोट+ काड+ महादेवक सम9 रािख देलिन । महादेव शंकर बाबूके कहलिथन ---- 'अए◌ॅ औ, अहा◌ॅक त' पूरा रेकडä खराब अिछ।'

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ई सुिनतिह शंकर बाबूक देहमे आिग लेिस देलकिन ।ओ महादेवपर बमिक उठलाह ----' अहा◌ॅ किहयाके यायकत\ भेलहु ।नशामे सिदखन बु§ रहैत छी ।बेकहल तेहने छी जे वmक बदला बाघक छाल ठेहुनधिर पिहरैत छी ।मुंडमाल देिख हमरासभके घृणा होइत अिछ ,तकरा अहा◌ॅ गरदिनमे लटकौने रहैत छी ।इ4क आंिखमे मरछाउर छीटल रहिन जखन ओ अहा◌ॅक नाम देवािधदेव महादेव रखलिन ।अहा◌ॅसन बूिड़ न भूतो न भिवtयित।एहन लोक हमर याय की क' सकैत अिछ ?चलूं पालनकत\ िवtणु ल'ग ।' महादेव आ शंकर बाबू दूनू िवtणुक ओतय गेलाह ।महादेव शंकरक सभटा िकरदानी िवtणुके सुनाय देलिथन।शंकर बाबू सेहो िवtणुक सम9 महादेवक पूरा बिखया उधेड़ देलिन।कहलिथन ---'नशाबाज आ बताह कतहु पंचैितया होअए !' िवtणु शंकरक गपस ॅ सहमत भेलाह।मुदा हुनका िpया- कलाप के सही ठहरौलिन । -------' यौ िवtणु,हम अहा◌ॅ ल' ग अयलहु जे महादेवक िनण+यके अहा◌ॅ कÈिसल क' देबैक , मुदा अहा◌ॅ त' युग िजतलहु।एकटा घरवालीक खच\ जोड़बामे त' पुनः: xात लोकके होइत छै।अहा◌ॅ दू- दूटा िवआह कयने छी ।छलस ॅ कतेको हया केने छी ।एहन पापी हमर पंचैती की करताह ?अहा◌ॅ दूनूगोटे हमरासंग ÚÛा ल' ग चलू ।सृिÐकत\ त' वैह छिथ ने ।' शंकर बाबूक आ<हपर िवtणु आ महादेव ÚÛाक सम9 उपिथत भेलाह ।अपन- अपन प9 तीनूगोटेके रखबाक अवसर xदान कयलिन। महादेव आ िवtणुके जखन अपन प9 राखल भ' गेलिन त ' शंकर बाबू स ॅ ÚÛा आ<ह कयलिन ---- ' अहा◌ॅके अपना xसंग की कहबाक अिछ से कहू '। शंकर बाबू ---' औ ÚÛा जी ,हम अपनेक ओिहठाम एिह दूनूके इएह सोिच अनलहु जे अपनेल'ग हमरा याय भेटत ।िवtणु आ महादेव दूनूगोटे एक पेट क' नेने छिथ ।महादेव िचmगु£तके कनखी मािर क' हमर पृãवीलोकपरक की िहसाब - िकताब अिछ से म ॅगलिथन ।हम ई दा◌ॅव निह चलय देबिन ।िचmगु£त हमरा xसंग सभटा झूठक पुिलदा आिन क' रािख देलकिन ।महादेवसन कंगाल आ बताह कतहु चौरासी लाख योिनक जीवक मािलक होिथ ।नाक उ ॅच आ कान बुच ।ई त' सतत उनटे - फेरीमे लागल रहैत छिथ ।'

' अहा◌ॅक सभ गप बुझलहु ।अहा◌ॅ की कहय चाहैत छी?अहा◌ॅक अिभxाय हम निह बूिझ सकलहु ।' ÚÛा शंकर बाबूस ॅ कहलिथन । ------' निह, निह, अहा◌ॅ हमर सभ बात बूिझयो क' अनठा क ' पूिछ रहल छी । अहू◌ॅ िवtणु आ महादेवक प9 लेमय चाहैत िछयिन । िछलका छोड़ा क' हम सभ िकछु अहा◌ॅके कहलहु अिछ । तखन त ' चोर - चोर मिसयौत भायबला गप अिछ ।गलती हमर अिछ जे अहा◌ॅ ल'ग पंचैती कराबय अएलहु ।अहा◌ॅक नाम पा◌ॅच मुंह वला'पंचानन' सेहो अिछ ।सिरपहु तÀ अहा◌ॅक ई दशा अिछ। पृãवी लोकमे त ' एकटा मुहके भरल पार लिगते निह छैक आ वग+लोकमे अहा◌ॅक पा◌ॅचटा मुंह के के भरत ?एतय अहा◌ॅके सभ नीच बुझैत अिछ ।तािह दुआरे सहरजमीनिहपर लोक अहा◌ॅक पूजा करैत अित ।ओहो िवध - िवधानस ॅ निह ।एकिहबेिर जल ,फूल,

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मानुषीिमह सं ृ ताम् चानन, अ9त आिद अघ\मे ल' समिप+त क' दैत अित।अहा◌ॅ तीनूगोटे िमिल क' हमरा बापक िवआह आ िपितयाक सगाइ देखाबय चाहैत छी ।हम अहा◌ॅ तीनूगोटेक किहयो कोनो अधलाह निह कयलहु तैयो भÀड़ा - मिहिसक कािन हमरापर रखने छी।' शंकर बाबू अिjनÒ- वायुÒ होइत बमिक उठलाह। ÚÛाबजलाह----'यौ शंकर बाबू, िचmगु£तक गोपनीय िरपोट+ झूठ निह भ ' सकैत अिछ।पृãवीलोकपर अहा◌ॅक समय पूरा भ' जयबाक कारणे अहा◌ॅके एतय यमदूतक मा=यमस ॅ बजाय लेल गेल अित।एिहमे अधलाह की ?' ' यमदूत घर छोिड़ घुरमुिरया खेलबाय रहल छिथ ।झूठक जालमे फ ॅसाय धोिबया पाट मारय चाहैत छिथ।ई सोिचए शंकर बाबू गgभीर होइत कहलिन --- 'हम अहा◌ॅ तीनूमेस ॅ ककरो फैसला निह मानैत छी।अहा◌ॅ लोकिन मुंह देिख मुंडवा परसैत छी ।सूनू, इ4 त' सभहक राजा छिथ ।तीनूगोटे हुनकिह ल'ग चलूं।ओ त' सुिxम कोट+ िछयैक िक ने ।औ दूध आ पािन दूनूके बराक क ' देता ।' अततोगवा ÚÛा, िवtणुआ महादेव तीनूगोटे शंकर बाबूकसंग देवराज इ4 के सभामे पहुचलाह।इ4 एिह चा¼ गोटेकै अएबाक कारण पुछलिन।शंकर बाबू िवनतीपूव+क अपन प9 रखैत बािज उठलाह ---' हुजूर!महादेवा आदेशपर यमदूत हमरा जबद+ती पकिड़के ल' अनलक।हम कतबो कहैत रिह गेिलयैक जे एखन हमरा अमाशय उखिड़ गेल अिछ, िनराल पािन पेटस ॅ जाय रहल अिछ ।कने मोन ठीक होमय दैह त' हम अबैत छी ,मुदा के मानैत अिछ ।चyठ हमरा पकड़ने ल' गेल।फल भेल जे भिर बाट धोितअिहमे ततेक पािन चु¼िक गेलहु जे यm- तm धोती पीयर भ' गेल अिछ।कने पािनक बदोबत कतहुस ॅ करय कहिलयै सेहो निह कयलक।यमदूत त ' सा9ात चंडाल िथक।' इ4 समयाक गंभीरता देिख कहलिन ----' सूनू,यमदूत अपराध अवÄय कयलक अिछ ।ओकरा बाटमे पािनक जोगाड़ क' देबाक चाहैत छलैक ।अहा◌ॅके जािह समयमे अनबाक आदेश भैटल छलैक ओिह समय पर अहा◌ॅके लाएब आवÄयक छलैक तÀ अनलक ।शौचकलेल जलक इतजाम यमदूत निह कयलक तÀ सात बेरयमदूत कान पकिड़ क' उठा-बैसी करथु ।' शंकर बाबू एिह पंचैतीसं खुश निह भेलाह।ओ हाथ जोिड़ इ4के कहलिन--' अपने राजा छी ज ॅ हमर जी- जान बकिस दी त' िकछु बाजी ।' इ4 हुनका िनभ¦क भ' बाजय कहलिन। ----' हजूर, अपनेक यायसं हम संतुÐ निह भेलहु ।अरे थे हिर भजन को औटन लगे कपास ।हमरा त' अपने मुहे भरे खसाय देलहु।अहा◌ॅ त 'तेहने डाही छी जे सयवादी हिरÒ4के िवािमmक मा=यमस ॅ तेहन ने पÀचमे फ ॅसा देिलयिन जे हुनका जीवनभिर रन-बोनक पात तोड़य पड़लिन ।वृदावन आ मथुराक इलाकामे तेहन वष\ क' देिलयैक जे बािढ़क xलयस ॅ लोकके भगबाक बाट निह भेटैक।' शंकर बाबू उकिट क' हाथ क' देलिन --' सभ केओ दि9णेर काली ल'ग चलूं।ओ जे कहतीह से हम यािन लेब ।'

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् शंकर बाबू सबके नेने दि9णेर कालीकट सम9 उपिथत भेलाह ।सभटा वृ§ात हुनका सुनाया देलिन।दि9णेर काली ÚÛाके एकातमे बजाय कहलिथन ---' अहा◌ॅ घर छोिड़ए एतेक घुड़मुिड़या िकएक खेलाय रहल छी ।कने िदमागस ॅ काज िलंक ।अहा◌ॅ के छी कने सोचूं ।जे िकछु पृãवीलोकमे िहनकर कृय कैल छिन तािह आधार पर शंकर बाबूक देहपर कुशस ॅ जल छॴिट िहनका छोटकी चु¸ीमे पृãवीलोक पठाय िदअनु ।' ÚÛाके अपन xभुवक भान भेलिन। शंकर बाबू के झट कुशस ॅ जल छॴिट पृãवीलोक िवदा क' देलिन । 'ने ओ नगरी, ने ओ ठा◌ॅउ ।'

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मानुषीिमह सं ृ ताम् डॉ. िचmलेखा िमिथलामे पाविन -ितहार िमिथलाक सभ पाविन-ितहारक अपन-अपन िविशÐ महव छैक। एकरा पाछू कोनो ने कोनो संकारक सृजन अथवा ओकर िवकासक हेतु सiकृितक आधार सेहो रिहते अिछ। खास कऽ िमिथला तँ पाविन- ितहारक नैहरे अिछ। वष+क बारहो मास पाविन-ितहारक धgमक लोकक दुआिरपर होइतिहं रहैत छैक। हँ, एकबा धिर सय अिछ जे समयक pमानुसारÊ xयेक पाविनक अपन-अपन िवशेष महव छैक। एिहठामक मौसम, भौगोिलक पिरिथित, सामािजक संरचना ओ अवथा अवÄय धािम+क संकारक पिरवेशक संग जुिट कऽ एकर मह§ाकÊ आओर बढ़ा दैत अिछ। बानगीक ºपमे तीला-संpाितयेकÊ लेल जा सकैत अिछ। वाभािवक बात छैक जे जािह समयमे ई पाविन होइछ तािह समय धिर बाध-बोन आ खेत-खिरहानस ॅम्ं सभटा धान कटा कऽ xाय: घरमे आिब गेल रहैत अिछ। एिह समयमे की धि¤क, की गरीब, सभक घरमे धान-चाउर xाय: रिहते छैक। तÊ सभक घरमे हिरयरका नवका चूरा, नवका गूड़क भेली ओ लाइ-मुरहीक xचलन तँ नवा¤क ºपमे होइतिहं अिछ; संगिह लाइ, चुYलौर ओ ितलबामे नवा¤े जकॉं नवका गुड़क ~यवहार सेहो होइत अछथ्। इएह कारण िã;क जे तीला-संpाित सनक पाविनक मह§ा लोक-जी वनक एकटा महवपूण+ संकार-काय+क अंग बिन कऽ रिह गेल अिछ। तिहना जुड़शीतलक संकारकÊ सेहो िमिथलाक लोक जीवनक संग कम कऽ कऽ निहं ऑंकल जा सकैत अिछ। गाछमे नव पYलव अएलापर ई पाविन होइछ। पोखिर-इनार जकर उपयोग पूव+ कालिहंसँ िमिथलामे होइत रहल अिछ आ इनार पोखिर पतझड़क समयक झड़ल पातसँ अहर-िबहािड़ वा दािहक संयोगे भिर गेल रहैत अिछ। पािनमे ओ सिड़ जाएत तँ लोक भोजन ओ पीबाक िनिम§ ~यवहार कोनो करत?लोक

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मानुषीिमह सं ृ ताम् जुड़शीतलक मा=यमÊ ओकर सफाई, गामक गदगीसँ भरल गली-कु:ची आ सड़कक सफाई, एक चुड़ुक पािनक िनिम§ टुÂुर-टुÂुर तकैत गाछ वृ9कÊ जुड़बैक िनिम§ ओकर जिड़मे पािन दैत अिछ। एिह िदन नव रwबीसँ आएल जौ आ बदलामक सातु खएबाक पिरपाटी अिछ जािहसँ धातु पुÐ होइछ आ वष+ भिरक लेल पेटक हेतु कYयाणकारी। तÊ जुड़शीतलक मह§ा िमिथलाक लोकजीवनमे अयत महवपूण+ अिछ। मºभूिम ओ पहाड़मे रहिनहार लोक जतए धान आ बदामक ने तँ दाउन होइछ आ ने पीटल जाइछ से जुड़शीतल आ तीला- संpाितक मह§ा की बूझत? िमिथलाक लोककÊ छोिड़ दोसर ठामक लोक कोजागराक मह§ा की जािन सकत जतए मखाने निहं होइछ। मखान माm िमिथलाक सgपदा िथक। कोजागराक महवकÊ जतेक िमिथलावासी जािन सकैत अिछ ततेक दोसर निहं। कोजागरामे आएल मखान, केरा, दही आ िमठाईक भार ओ ओिह पूिण+मा राितक पचीसीक महव िमिथलेक धरतीक लोक जनैत अिछ आन ठामक लोककÊ ई नसीबेमे निह छैक। अपन सासुरमे बिहन नीक जकॉं छिथ वा निहं, हुनका कोनो कÐ तँ निहं छिह तकर लेखा-जोखा करबाक हेतु भरदुितया िमिथलेमे अिछ। तÊ िमिथलाक परgपरानुसार भाइक ई क§+~य अिछ जे कमसँ कम वष+मे एको बेर ओ अपन बहीनक खोज-खबिर लेिथ जे ओ कोन िथितमे छिथ आ बहीनोक ई क§+~य अिछ जे अपन हाल-चाल बुझबाक हेतु आएल भाइक वागत सकार करिथ तकर जीवत ºप िथक- भरदुितया पाविन। भरदुितयाक मह§ा आ तकर पाछूक अथ+ िमिथले जनैत अिछ आन निहं। तÊ िमिथलाक लोक जीवनमे भरदुितया पाविनक अयिधक मह§व अिछ। तÊ एकरा धािम+क महव दए लोक-जीवनसँ जोिड़ देल गेल जे समयानुpमे िमिथलाक लोक-जीवनक एकटा महवपूण+ अंग बिन कए रिह गेल अिछ। िमिथलाक xिस} पाविन मधुcावणीक मह§ा एिहठामक लोककÊ छोिड़ आनठामक लोक की बूझत। नव किनयॉं-वर xकृितक मह§ाकÊ जानिथ फूल लोिढ़ पूजन करिथ आ टेमी दािग एिह बातकÊ वीकार करिथ जे सभ दु:ख-सुखमे दुनू गोटे (पित-पîी) संगिह सहभागी रहब आ छोट-मोट कÐ दुनू गोटेक सुखमय दाgपय जीवनक बीच कोनो तरहक ~यवधान उपिथत निहं कऽ सकए। मधुcावणी सनक एहन पिस} पाविन आन कोनो समाजमे xचिलते निह अिछ तखन ओकर महव ओ की जानत? तीज किह कऽ िमिथले§र समाज िमिथलाक चौठच4क अनुकरण भलÊ ही कऽ िलअए िकतु चौठच4 (चौरचन) क जे मह§ा से िमिथले जनैत अछथ्। िबनु फल देखौने खाली हाथÊ च4माक दश+न वष+ भिरक हेतु रंग-िबरंगक कलंक अपना माथपर लेबाक Wोतक अिछ। दिलपूरी, िपड़ुिकया ओ मड़ड़ भङबाक महव आन समाज की बूझत? िमिथलाक लोक-जीवन कतबहु आिथ+क तंगीमे रहओ िकतु चौठ-च4क पाविनक

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मानुषीिमह सं ृ ताम् अवसरपर तँ नीक भोजन कज× लऽ कऽ करबे करत। तÊ चौठ-च4क धािम+क मह§ा िमिथलाक संग अयत महवपूण+ अिछ। िमिथलामे पाविन-ितहारक संÕया अिधक अिछ। एिह ठामक जनमानस बािढ़ आ रौदी सँ डूबल आ सुखाएल रहैत अिछ िकतु मुँह जीहक बड़ पातर होइछ तÊ ओकरा चहटगर चाही। तÊ पाविन-ितहारक नामपर कजä सही, कज+ लेबए पड़त तँ िक पाविन-ितहार निहं मनाओल जाएत- से कोनो हएत। ‘हौ बौआ! कतहुँसँ पÈचो उधारक ~यवथा करह छिठ आ चौड़चन पाविन छैक। अथ\त् कज+ िलअ आ पाविन कº, नीक नीकुत खएबाक हेतु। एखन पिछला कज+ सधबो निह कएल िक दोसर पाविन उपिथत भऽ गेल। अथ\त् कज+मे सालो भिरक कहॉं जम भिरक आ कतेको ठाम पुत-दर-पुत डूबल रहू। तÊ xाय: िमिथलावासीक कहब अिछ जे- “नान कृवा हिर जपेत भोजन कृवा जलं िपबेत mणं कृवा घृतं िपबेत यावत् जीबेत सुखं जीबेत्।।” अथ\त् कजäमे जमूआ कजäमे मिर जाउ िकतु पाविन ने तँ कमजोर हएत आ ने छुटबे करत। िमिथलाक आिथ+क दुद+शाक िकछु अंश धिर कारण एिह ठामक पाविन-ितहारक सेहो रहल होएत मुदा आब से बात निहं। िवकिसत संकारक संगिह आिथ+क िवकास सेहो पय\£त भऽ रहल अिछ। लोक समाजमे पिहनेसँ ‘बिढ़-चिढ़’ कऽ पाविन-ितहार मनएबामे ºिच लऽ रहल अिछ। हम ई निहं कहैत छी जे िमिथलाक परgपरागत संकार आ पाविन-ितहारक परgपरा बहुत सुदर अिछ, मुदा समयक संग चलैत ओिह सभ परgपरा सभमे पिरवत+न होएबाक चाही से भइये रहल अिछ। आब ने ओ वातावरण आ ने पिरिथित अिछ। ;ान-िव;ान बहुत बिढ़ गेल अिछ। िव दौिड़ रहल अिछ आगू िदिस कऽ तँ कमसँ कम हम डेगो-डेगो तँ ओकर पादू िवकास करब। सदभ+ सूची- 1. िमिथलाक पाविन-ितहार- मोिहनी झा 2. िमिथलाक वािष+क पाविन-ितहार- cीमती अंशु िमc 3. िमिथलाक पाविन-ितहार- बाबू गंगापित िसंह

सgपक+-

िव दे ह िवदेह Videha িবেদহ http://www.videha.co.in िवदेह थम मैिथली पािक ई पिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal   

   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् एसोिसएट xोफेसर मैिथली िवभाग यू.भी.के. कॉलेज, कड़ामा- आलमनगर बी.एन.मyडल िविवWालय, मधेपुरा

अपन मंत~य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् डॉ. िचmलेखा िमिथलामे गीत नादक महव मनुtयक जमक पूव+सँ मृयु पय+त अनेकानेक अवसरपर पाविन ओ उसव मनाओल जाइत अिछ आ से सभ गीतमय भेल रहैत अिछ, जािहमे ~यवहारजय भाव भेटैछ। गीतक संगिह संग अवसर िवशेषपर ~यवहारजय, अराधना एवं वंशक अिभवृि}जय पौरािणक कथा ओ वÑतािदक िवषय विण+त अिछ, जकर र9ा मैिथलानी लोकिन करैत आिब रहल छिथ। अवसर परक ~यवहािरक गीतक रसामाधुय+, तािह संगे जातीय गीतक रागाक धािम+क औ4ाय+क अितिर$त गीतक अनुपमेयतामे पौरािणक देवचिरm पÐत: दृिÐगोचर होइछ। गीतक µारा िपतरक मरण, देवी-देवताक अराधना, लौिकक आचार-िवचार ओ वैिदक परgपराक िविध- ~यवहारक िल9णता, तm-मmक मह§ा, िविध साम<ी सभक वतुजय ओ अवसरजय गुणक िवशेषता भेटैछ, जािहमे ~यि$तकÊ पिरवारसँ, पिरवारकÊ कुटुgब ओ आस-पड़ोसक समाजसँ व§+मान आनदमे सौहा4+ भाव पिरलि9त होइछ, ओ तÊ तदनुºपÊ सiकृितक र9ा सतत वत: िस}े िथक। ‘धम+पराणता, आनदकािरता, लौिककता, हृदय<ािहता, सामियकता, अवसरोपयोिगता ~यवहारपटुता कलािनपुणता आिद अनेकानेक जीवनोपयोगी ओ लोकोपयोगी मनोरम भावसाम<ी िमिथलाक िनम+ल पावन 9ेmक हरीितमा म=य ओ सामियक गीत सभमे पािब अनतत: ई बुझना जाइछ जेना संगीतक मा=यमे भाव साधनक संयोगसँ िचिmत कऽ व§+मानक वºपमे परgपरया अतीतकÊ सम9 आिन भिवtयक संकारकÊ चमकृत ओ उ¹जीिवत करैछ, जे वभावत: Äलाधनीय, पठनीय, मरणीय ओ तुय अिछ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् शाmक हेतु तँ xय9 मंm xमाण होइछ अिछ, िकतु िविध तँ परgपरासँ चलैत आिब रहल अिछ। ‘गीत आ कथा’जीवनक संग उपयु+पिर अिभिमिcत आ वºिपत अिछ। जतए िमिथला 9ेmक िविभ¤ थानीय िवशेषताक अत: वºपसँ पिरिचत होएबाक अवसर भेटत, ओतए िविभ¤ िविध ~यवहारसँ समानता ओ िभ¤ताक बोध सेहो होएत। अनेक जाितक सgपक+मे अएबाक अवसर भेटल। कोनो गॉंवमे कोनो जाितक xधानता ओ कोनोमे कोनो आन जाितक। मुदा सव+m एक बात दश+नीय अिछ आओर ओ अिछ एकर परपर सह  य भाव। एिह िविभ¤ जाितक फराक सािहय, संकार, िवचार, आदश+ आिदक अ=ययनमे सुिवधा पाओल। कथावाचक ओ गायक ºपमे यWिप mी पु¼ष दुहू भेटल ओ सेहो सभ अवथाक लोक, मुदा बालगीत, चकचदा गीत आिदक गायक xाय: बालक अिछ, गाथा गीतक गायक xाय: पौढ़, पु¼ष, होली, चैती, कजरी आिद उYलासक गीत युवक वग+क बीच बेसी लोकिxय अिछ। मिहलामे अवथाक िनयmणपर कककरो =यान निह अिछ। सभ अवथाक मिहला सोYलास लोकगीत गबैछ, कथा कहैछ ओ सुनैत अिछ। तखन सामियक लोकगीतमे िवशेषत: नव वयसक मिहला बेसी अिभºिच रखैत अिछ। गीतगाइिन दू xकारक भेटलीह- (1) सभक संग व िमला कऽ गओिनहािर आ (2) वतंm ºपसँ गओिनहािर। कोनो पाविनक अवसरपर सभक संग िमिलकऽ गएबाक ~यवहार अिछ। िकदु ~यावसाियक गाियका सेहो होइछ जे िविवध मiगिलक अवसरपर गीत गािब पािरcिमक लैत अिछ- यथा, व$खौ- बरवौनी, नट-नटी आ पमिरया आिद। एिह <ामीण mी-पु¼षमे अनेकानेक लोकक लग अपार सािहय वैभव अिछ। अिधकiश िनर9र वा माm साधारण सा9र रिहतहुँ cुित परgपरासँ सgपूण+ सािहयकÊ कंठा< कएलिह अिछ। सािहय कोशकÊ समृ} करबाक हेतु कोनो काय+ ~यापार छोड़ैत निह छिथ तथािप अपन काय+क बीच pमश: ई सािहय-भंडारी बिन जाइत छिथ। िमिथलामे परgपरासँ xचिलत ~यवहारसँ सgपृ$त बालक आ बािलका लोकिनक जमसँ िµरागमन पय+त सभ पाविनक पुनीत अवसर परक गीत पुरातन संकृितक वºपकÊ उजीिवत रखैत भिवtयक संकृित र9ामे सहा य बनैछ। अवसर परक ~यवहािरक गीतक जीनोपयोगी वºप, सौदय+, समय िवशेषक सामियक गीतक रसमाधुय+, तािह संगे जातीय गीतक रागामक धिम+क औदाय+क अितिर$त गीतक अनुपमेयतामे पौरािणक देव चिरm पÐत: दृिÐगोचर होइछ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् गीतिह µारा िपतरक मरण, देवी-देवताक आराधना, लौिकक आचार-िवचार ओ वैिदक परgपराक िविध- ~यवहारक िवल9णता, तm-मmक मह§ा, िविध साम<ी सभक वतुजय ओ अवसरजय गुणक िवशेषता भेटैछ, जािहमे ~यि$तकÊ पिरवारसँ, पिरवारकÊ कुटुgब ओ आस-पड़ोसक समाजसँ व§+मानक आनदमे सौहा4+ भाव पिरलि9त होइछ, वत: िस}े िथक। सतानक हेतु mी-पु¼षक आतिरक लालसा, साधना ओ दव-प  , गभ+वती जननीक आकुलपीड़ा पुmोपि§जय उYलास, सgबधी ओ पिरजनक परपर बधाई आ शुभकामना संग आनद िवभोर भए कतहु- सोहर गबैछ, तँ अ9रgभ काल भिवtयक आशामे रत, कखनहुँ मुyडन कराए नव संकार ओ िवशुि} करबएमे मjन, तँ पुन: उपनयनक सिविध संकारसँ ÚÛतव ;ानक xाि£त xिpया मे लागल ओ तिहना सृिÐक र9ाथ+ mी पु¼षक सामािजक गेठबधक वैवािहक कृितकम+ µारा कराबए मे डेग-‘डेगपर, घड़ी-घड़ीमे भावकÊ वर दए अिभ~यंिजत करैत अिछ। एिह xकारÊ जमक पूव+सँ लए मरण पय+त अनेकानेक अवसरपर पाविन ओ उसव मनाओल जाइछ आ से सभ गीतमय भेल रहैछ, जािहमे ~यवहारजय-भाव भेटैछ। गीतक संगिह संग अवसर िवशेषपर ~यवहारजय, आराधनाजय, उपदेशजय, िवमयजय सामािजक वºप र9ा एवं वंशक अिभवृि}जय पौरािणक कथा ओ वÑतािदक िवषय विण+त अिछ, जकर र9ा मिहला लोकिन करैत आिब रहल छिथ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

रबी4 नारायण िमc - धारावािहक उपयास -लजकोटर लजकोटर (xवासीक जीवनपर आधािरत) (८म खेप ) -8-

दोसरिदन स›झमे गाम पहुँचलहुँ । मोनमे बहुत िचंता रहए जे पता निह माएक की हाल होएत? बहुत िदनक बाद गाम आएल रही मुदा िकछु बदलल निह छल। सभिकछु ओिहनाक -ओिहना छल । हमरसभक घर गामक शु¼एमे अिछ । टेgपु सोझे हमर दनानपर ठाढ़ भेल । दनानपर िकओ निह छल । आगा बढ़लहुँ ।घरक ओसारापर सेहो िकओ निह छल । घरमे गेलहुँ तँ माए चौकीपर पड़ल छिल । हमरा देिखतिह उठबाक xयास केलीह मुदा उिठ निह सकलीह। बहुत कमजोर लगैत छलीह । मुदा होशमे छलीह । हाल-चाल पुछैत-पुछैत कानए लगलीह । हम पुछिलऐक-"की होइत छौक?" " की किहअह? असगर रहैत-रहैत मोन औँट भए गेल । बोखार से लगैत अिछ ।" "दबाइ निह खाइत छही?" " दबाइ के आिन दैत? िकओ निह फटकै छैक । आब गाम ओ गाम निह अिछ ।सभ अपन घरे-घरे बंद रहैत अिछ । ककरोसँ कोनो मतलब निह । पाबिन ितहारोमे सभ अपनेधिर सीिमत रहैत अिछ ।"

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मानुषीिमह सं ृ ताम् हम चो¸े बैदकÊ बजा अनलहुँ । गामक सभरोगीक इलाज ओएह करैत छलाह । माएक नारी देिखते कहलिखन –“िहनका कोनो िबमारी निह छिन । एसगर रहैत-रहैत ई हाल भए गेलिन। िकछु दबाइसभ दैत छी । दूसँ तीन िदनमे ठीक भए जेतीह ।" बैद जी जाइत-जाइत किह गेलाह-" िहनका आब असगर निह छोड़बिन ।" माएकआधा िबमारी तँ हमरा अएलेसँ ठीक भए गेलैक ।बैदजीक दबाइ सेहोबहुत फएदा केलकैक । माएक हालत pमशः ठीक होइत गेल । हमरा संगे रहलासँ ओकरा बहुत उसास भेलैक। लगबे निह करैक जे ओ एतेक दुिखत छिल । हम कतेक िदन गाममे रिहतहुँ । ओिहठाम िकछु जोगार निह रहैक । जथापात िबका गेल छल । जे कनीमनी ब›चल छल से िदआदबादसभ तेहन ओझरमे देने छलाह जे किहओ तफिसआनिह भए सकैत छल । तÊ िदYली तँ आपस जेबेक छल ,जिहआ जाइ । मुदा माएक की होएत? एिह िचंतासँ िन¤ निह होइत छल। गामक हालत आब ओहन निह छल । फगुआक समय छल । कतहुँ फाग निह,िकओ ककरोसँ भÀटघ›ट निह करैत देखाइत । सभ अपन-अपन दरबाजा पर बैसल समय िबतबैत छलाह । एकटा समय छल जे फगुआसँ प4ह िदन पिहनिह गीतनाद शु¼ भए जाइत छल । फगुआ िदनक तँ बाते छोड़ू । रंग-अबीरसँ सॱसे गामक लोक सराबोर रहैत छल । डाफपर नचैत -गबैत लोकसभ भेदभाव िबसिर घरे-घर घुिम जाइत छल । मुदा ई समय िथकैक। बदलैत रहब एकर वभावछैक । बहुत िकछु बदलल तिहना इहोसभ बदिल गेल । गामोसभ शहरक नकलमे लािग गेल । पिरणाम ने ई गाम रहल ने शहर बिन सकल । माएकÊ गाममे एसगर छोड़ब उिचत निह छल ।तखन तँ ओकरो संगे लेने चली सएहटा समाधान बुझाइत छल मुदा तािह हेतु ओकरा मनाएब मोसिकल काज छल । तथािप xयास करए लगलहुँ । माएकÊ कहिलऐक-" गामक हालत देिखए रहल िछही । एिहठाम गुजर होएब संभव निह अिछ ।शहर जाए पड़त । एहन हालतमे तोरा एसगर कोना छोिड़ िदऔक? " " से िकएक, गाममे एतेक लोक अिछ, तकर गुजर कोना होइत छैक? तोरो भए जेतह । गामे रहह ।"

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् हमरा जोरसँ हँसी लािग गेल । माएक लगमे ओकर बेटा रहैक एिहसँ नीकबात आओर की भए सकैत छैक? मुदा जीवन माm भावनासँ निह चिल सकैत छैक । गाममे आबछैहे की? ककरा लए कए रहत ? मुदा िदYली जेबाक हेतु माए तैयार निह होिथ । ई समयाक समाधान निह भए रहल छल । हम अपन माए-बापक असगर संतान छलहुँ । जे करक छल से हमरे । ककरोपर टािर निह सकैत छलहुँ। माए तँ माए होइत अिछ । जखन बहुतबेर बहुत आ<ह केिलऐक तँ ओ मािन गेल । फेर िबचार केलहुँ जे गाममे जे िकछु जमीन ब›चल अिछ से जौँ िबका जाइत तँ िदYलीमे छोटोछीन घर लए िलतहुँ जािहसँ मािसक िकराया देबएसँ िपंड छुिटजाइत । ककरो-ककरोसँ एिह िवषयमे ग£प केिलऐक । एकाधगोटे कनीमनी बातो केलाह । मुदा गाम तँ गामे होइत अिछ। केना-ने-केना हमर कÂा कÊ ई बात पता लगलिन । ओ दौड़ले हमरा दलानपर अएलाह आ िचकिर-िचकिर कहए लगलाह-"हमर बाप-िपतामहक चीज दोसर कीनत। भए निह सकैत अिछ । हम आइए,एहीठाम मिटआतेल ढ़ािर कए मिर जाएब ।औ बाबू! आब की होएत ? हमर माए बाहर अएलीह -"अह›कÊ ई बातसभके कहलक अिछ? एकर कोनो चच× निह छैक। अपन कान देखब िक कौवाके िखहारब ।' "से सभ हम निह जानी । एक तँ आब अह›क िहसा ब›चले कह› अिछ?आ जौँ हेबो करत से पिहने हमर होएत िक गौँआक? अहॴ कहू?’’ एकटा दोसरे झंझट शु¼ भए गेल । हम ओिह समय घरमे निह रही । कनीकालक बाद अएलहुँ तँ माए सभटा बात कहलक। आब की कएल जाए? मोने-मोन ई सबाल घुमए लागल। गामक बात बुिझ गेिलऐक । एिहठामसँ िकछु िनकालब मोसिकल काज िथक । दोसरिदन भोरे िबना ककरो िकछु कहने माएकÊ संग केलहुँ आ अहरौके िर$सासँ दरभंगािबदा भए गेलहुँ। दरभंगासँ िबहार संपक+ piितमे आर9ण छल । दुनूगोटे समयसँ अपन जगहपर बैिस गेलहुँ ।माएक मोन बहुत उदास छलैक । ओ िदन मोन पिड़ रहल छल जिहआ हमरा माए पिहलबेर िदYली िबदा केने रहए ।आइ हम ओकरो लए कए िदYली जा रहल छी। तथािप ओ उदास अिछ । अपन लोकवेद,गाम-घर छुटबाक कÐ ओकरा बौक बना देने रहैक । िकछु बािज निह रहल छिल । ताबे रेल सीटी मारलकैक । £लेटफाम+परसँ Åेन सड़िक रहल छल । माए चुपचाप अपन नोर पोिछ रहल छिल । जिहना -जिहना Åेनक पिहआघुिमरहल छल तिहना-तिहना माएक मोन दुखी होइत गेल। ककरा की किहितऐक ? ग£प-स£पमे ओकराओझरेबाक xयास करैत रहलहुँ । मुदा ओ ग£पो गामे घरक करैक? बातो सही

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मानुषीिमह सं ृ ताम् छैक । भिर िजनगी गाममे रहलैक ,ग£प कथीक करतैक? Åेन िसमिरआसँ गुजिर रहल छल। माएकÊ से कहिलऐक ।ओ मोनिह मोन गंगाकÊ xणाम केलक आ एकटा िसÂा जोरसँ गंगामे फेिक देलक । Åेन आगा ससिर गेल ।Åेनक पिहआ गुड़कैत गेल । हमसभ आगा बढ़ैत रहलहुँ । पिहलबेर िदYली जाइतकाल Åेनमे िबना आर9णकÊ पैिस गेल रही । तकर दुखद अनुभव अखनो मोन पड़ैत रहैत छल । Åेनमे याmीसँ बेसी हेम- छेमक फल सेहो भोगने रही । मालतीक xित ~यथ+ सहानुभूितक कारण कतेको परेसानीमे पिड़ गेल रही । तÊ एिहबेर अपनाभिर बहुतसतक+ रही । िटकट आर9ण करओने रही। ककरोसँ ग£प-स£प निह करी । मुदा तािहसँ की होएत? रेल तँ रेल िथक । कनीके कालमे एकटा नेताजी अपन िसपहसलारक संग आरि9त िडwबामे पैिस गेलाह । िनरंतरपान चबा रहल छलाह तÊ िकछु बाजल निह होिन । सभटा काज चेला-चपाटीसभ करिथ। बेस मोट-सोट छलाह । हुनकालेल नीचका शाियका चाही। जेनातेनाक एकटा याmीकÊ मनाओल गेल आ नेताजी िनचुका शाियकापर बैसलाह । चेला-चपाटीसभ पािन अनलक,चाह अनलक ,तरह-तरहसँ हुनकर सेवा करए लागल । ककरो सीट निह रहैक । तÊ दोसर याmीसभक जगह धिकअओने जा रहल छल । के बाजत आ के सुनत? सभ िकछुकबाद नेताजी सुतबाक दबाइ खेलिथ आ शाियकापर पसिर गेलाह । नेताजीक मुँहमे थूकभिर गेल छल । ओ पच दए पीक फेकलाह । िडwबामे mिहमाम मिच गेल ।सभटा थूक एकटा बूढ याmीक माथपर जा कए खसल । तकरबाद जे भेल से की कहू ?चाºकातसँ ओकर लोकबेद नेताजीकÊ गिरआबएलागल । ओकर चेला-चपाटीसभ फॲफ कािट रहल छल । जाबे-जाबे िकओ िकछु बुिझतए सभ नेताजीकÊ धै मारलक। नेताजी बाप-बाप कए रहल छलाह । उपरका शाियकापर फॲफ कािट रहल हुनकर चेलासभक िन¤ टुटलैक । मुदा ताबे तँ नेताजीक सभगित भए गेल छल । चलैत Åेनमे एहन घटना निह देखने छलहुँ । बहुत मोसिकलसँ मामला सgहरल । दोसर िदन दूपहरमे Åेन िदYली टीसन पर पहुँचल ।िदYली टीसन पर नेताजीक चेलाचपाटीसभ ओिह बुढ़बा आ ओकर लोकवेदसभकÊ घेिर लेलक आ गािर-मािर करए लागल। हम माएकÊ लेने कहुनाकए जान बचा कए ओतएसँ घसिक गेलहुँ ।

रबी4 नारायण िमc, िपताक नाम : वग¦य सूय+ नारायण िमc, माताक नाम : वग¦या दयाकाशी देवी, बएस : ६६ बख+, पैतृक <ाम : अड़ेर डीह, मातृक : िसिघआ àयोढ़ी, वृित : भारत सरकारक उप सिचव (सेवा िनवृ§)/ पेशल मेÅोपोिलटन मिजÅेट, िदYली(सेवा िनवृ§), िश9ा : च4धारी िमिथला महािवWालयसँ बी.एस-सी. भौितक िव;ानमे xितØा : िदYली िविवWालयसँ िविध नातक xकािशत कृित : मैिथलीमे:-

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मानुषीिमह सं ृ ताम् १. ‘भोरसँ स›झ धिर’ (आम कथा), २. ‘xसंगवश’ (िनवंध), ३. ‘वग+ एतिह अिछ’ (याmा xसंग), ४. ‘फसाद’ (कथा सं<ह) ५. `नमतयै’ (उपयास) ६. िविवध xसंग (िनवंध ) ७.महराज(उपयास) ८.लजकोटर(उपयास)९.सीमाक ओिह पार(उपयास)१०.समाधान(िनवंध सं<ह) ११.मातृभूिम(उपयास)१२.व  लोक(उपयास)१३.शंखनाद(उपयास)१४.इएह िथक जीवन(संमरण) In English:- 1.The Lost House (Collection of short stories), 2.Life is an art िहदी मÀ – १.याय की गुहार(उपयास) (उपरो$त पोथीसभ pothi.com, amazon.com आओर www.flipkart.com पर सँ कीनल जा सकैत अिछ) इमेल : mishrarn@gmail.com wलोग : mishrarn.blogspot.com एमजोनक लेखक पृØ : amazon.com/author/rnmishra

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

डॉ. अप+णा नारी शwदक लेल िकछु xमुख शwदक िववेचना

नारी- नारी शwद नृ अथवा नरसँ बनल अिछ। (नृ+अस+दीप= नारी। याक नारीकÊ ‘नृतू’सँ मानलिन अिछ। एिह िवशेषणक आधारपर mीकÊ नारी कहल गेल अिछ, मुदा ऋjवेदमे ‘नृ’क xयोग वीरताक काज करब दान देब तथा नेतृव करबाक अथ+मे भेल अिछ आ नर शwदक xयोग सेहो वीर दाता तथा नेताक अथ+मे xयु$त भेल अिछ। mीक नारी नाम सेहो एिह िवशेषताक कारण पड़ल होएत। ÚाÛण <थमे कतहु कतहु ‘नारी:’पाठ भेटैत अिछ मुदा सायणृक मतसँ नािरक भाव नरक उपकारकसँ अिछ। [1] वामा- mी सौदय+ताक कारणÊ वाम कहबैत अिछ। ‘वयित सौदय+म’। xितकूल बात कहलासँ सेहो ‘वामा’कहबैत अिछ। जेना- हक बदल। नहॴ, वामाक दुग+नाम सेहो अिछ। [2] अवला-‘अवला शwद नारीक शारीिरक संरचनाक =यानमे रािख xयोग कएल गेल अिछ। कारण पु¼ष जकॉं mीमे बल निह होइत अिछ। यWपित नारीक मानिसक उड़ानकÊ लोहा वैिदक ऋिष सेहो मानैत छलाह आ ओकरा वशमे करब असा=य मानैत छलाह। [3] सुदरी- सु+उद= िगYलकरब+डीप= सौदय+वती नारी एिह हेतु कहल जाइत अिछ जे जकरा देखलासँ माm पु¼षक हृदय िगYल भऽजाइत अिछ। िच§ 4िवत भऽ उठैत अिछ अथवा ‘सुØानुदयित इित नै¼$ता:।[4] वतुत: ‘सुदरी’शwद ऋjवेदक ‘सुनरी’शwदक िवकिसत ºप xतीत होइत अिछ। ऋjवेदमे उमाक लेल ‘सूनरी’शwदक xयोग भेल अिछ। [5] ‘सुनरी’क तापय+-शोभाशाली सुदी।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् xमदा- xमदक भाव होइत अिछ हष\ ‘xमद समदौ हष+ च।’अतवएब हिष+त, पुलिकत वभाव होवाक कारणे सेहो mीकÊ ‘xमदा’कहल गेल अिछ। अपन हाव-भावसँ पु¼षकÊ उ§ेिजत कऽ देब नैिसग+क िवशेषता होएवाक कारणÊ ओ xमदा कहवैत अिछ। ललना- ई शwद सेहो mीक एक मनोवै;ािनक प9कÊ xकट करैत अिछ। ओ मान करबाक िxय होइत छिथ- ºसैत छिथ। अतएव मािननी छिथ। मािननीक एकगोट आरो प9 होइत अिछ- ओ अिछ वािभमान आम-सgमानक भावना। ओकर सौदय+ गुण, काय+ आिद कोनोक xितकूल आलोचना ओकरा वाण जकॉं बेध दैत अिछ तÊ ओ मािननी भेल। मिहला- पू¹या होएवाक कारणÊ mीक नाम मिहला पड़ल। मå+इलत+आ= मिहला।मþक अथ+ होइत अिछ पूजा। उपयु+$त शwदक ~युपि§ नारीक सामाय वºपक अिभ~यंजना करैत अिछ। नारी सgबध िवशेषक Wोतक शwदक पिरचय अधोिलिखत अिछ- दूिहता- याकक अनुसार दुिहता शwदक ~युपि§- ‘दुिहता दुिह+ती, दूरेिहता’।[6] दुग\चाय+ एकरा पÐ करैत िलखैत छिथ दुिहता कारण ओ जतय कतहु देल जाइत छिथ ओकर वागत निह होइत अिछ, ओ सव+m दुकारल जाइत छिथ। [7] अथवा बेटीकÊ दूर चिल गेलापर िपताकÊ चैन भेटैत अिछ। याक दुिहता शwदकÊ ‘दूह’धातुसँ सेहो बनौलिन अिछ आ िपताकÊ xस¤ कए सिदखन िकछु ने िकछु धन लैत रहैत छिथ तÊ दुिहता भेला। वतुत: दुिहतृ शwद दुå-दुहना धातुसँ बनल अिछ, सgभवत: xाचीनकालमे कया अपन िपताक घर गाय दुहल करैत छलीह। फलत: हुनक नाम दुिहता पड़ल। जाया- mी ‘पîी’ºपक लेल जाया शwदक xयोग कएल गेल। ऐतरेय ÚÛणमे जायाक ~युपित एिह xकारÊ कयल गेल अिछ ‘तं¹जया जाया भवित यदयi जायते पुन:’। जाया एिह हेतु अिछ जे पु¼ष वयं ओिहमे पुmक ºपमे जम लैत अिछ। ऋjवेदमे जायाक xित अयत मधुर उæगार ~य$त कयल गेल अिछ। माता- वैयाकरण मातृ शwदकÊ मान+तृणसँ बनवैत छिथ। आ मातृ शwदक अथ+ ‘आदरणीय’अिछ। याकक मतसँ मातृक भाव ‘िनम\तृ’िनम\ण करयवाला जननी सेहो अिछ। मुदा ‘आिद युगसँ लय आइ धिर मानव जकरा असीम c}ा xकट करैत अिछ आ जािहसँ अजm अ9य नेह पबैत रहैत अिछ, ओ माm जमदाmी निह, ओ एिहसँ बहुत पैघ अिछ। ओकर थान वग+सँ सेहो उ:च आ गु¼सँ अिधक पू¹य होइत अिछ। माय सदैव माय होइत अिछ। वेदमे सेहो नारीक लेल कुलयानी, सíा;ी कYयाणी पुरिध, कुलपा आिद शwदक xचुर xयोग भेटैत अिछ। इ4ाणी, उषा, अिदित, इला, c}ािसनी, वाली, भारती, पृि°, वºणािन, आÕयािन वाक, दयावा पृãवी, राका आिद ºपमे वैिदक संिहताक नारीक दृिÐ पथमे अवतिरत होइत छिथ। mीक हेतु एक थानपर कहल गेल

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मानुषीिमह सं ृ ताम् अिछ। ‘शु}ा:’पूसा योिषतो यि;या इमा:’तथा हुनका पु¼षक हेतु अ, गायक हेतु िशव होयवाक बात कहल गेल अिछ। सहो§रंम पुरानारी, समनं चावग:छित’अथ\त् पिहले mी य; आयु}मे जाइत छलीह। हुनक पुm शmुहण छिथ। एक गोट थानपर mी कहैत छिथ हमरासँ अिधक केओ सौभाjयशािलनी निह छिथ वैिदक अ9 सू$तमे एकगोट जुआरीकÊ ओकर सासु डटैत अिछ आ पîी रोकैत अिछ। वेद कहैत अिछ ‘अनवया पितजुÐेवनारी’अथ\त् स:चिरmmी पितकÊ िxय होइत छिथ। अथ+वेद कहैत छिथ ‘जायापîेमधुमतीवाचंवदित’। वेदमे mीकÊ ÚÛ सेहो कहल गेल अिछ। तÊ वरदा वेदमाताकÊ वेदमे तुित कयल गेल अिछ। आचाय+ िxयवÑत तँ सरवतीकÊ िश9ािवभागक मंmी कहलिन अिछ। संिहतामे विण+त नारीक एिह उकृÐ ºपक छाया हमरा सिहतेतर वैिदक सािहय (ÚाÛण एवं उपिनषद्) मे xचुरतासँ उपलwध अिछ। ÚाÛण सािहयमे पîी तथा mी िवषयक अनेक सदभ+ xा£त होइत अिछ जािहसँ नारीलोकिनक गिरमा पिरलि9त होइत अिछ। नारीकÊ सािवmीक सं;ासँ समिलंगीकृत कयल गेल अिछ। mी सािवmी (जैठवÑा., 4/27/17)। गृहपिरवारमे ओकर xधानताकÊ वीकार कयल गेल अिछ। ऐतरेय ÚाÛण जायाकÊ गाईपय अिjनक¼पमे वीकार करैत अिछ- ‘जाया गाह+पयोिjन:’। (ए.Úा, 8/24) पîी पितक अ}Ýिगनी मानल गेल अिछ। संिहता एवं ÚाÛण सािहयक िवपरीत उपिनषदकालीन नारीलोकिनक समु¤त अवथाक पिरचय भेटैत अिछ। केनोपिनषद् मे हेमवती उमाक आ=यािमक ;ान, ÚाÛवािदनी, वाचकनवी गंग¦ आ मैmेयीक वण+ण ओकर आ  यािमक ;ानक पराकाØाकÊ सदभ+िशत करैत अिछ। मैmेयीक ई कथन जे ‘येनाहंनामृतायाम िकंकुय\म्’हुनक ;ान पराकाØाक िदjदश+न करैत अिछ। एिह काल िपता सेहो पंिडतापुmीक इ:छा करैत छलाह। उपिनषद् सािहयमे mीलोकिनक मातृव प9कÊ सेहो िचिmत कयल गेल अिछ। ऐतरेय उपिनषद् मे गभ+ धारण करयवाली mी ~यावियmी एवं भािवियत~या कहल गेल अिछ। एिहकालमे mीकÊ यWिप छायािधकारक पÐ ºपसँ वण+न निह कयल गेल अिछ, मुदा वृहदारyयक उपिनषद् मे सयास गमन करैत या;वYकय µा रा अपन भाय\कÊ िव§ िववरण करब हुनक पितक सgपितमे अिधकार होयवाक xमाण xतुत करैत अिछ। वैिनणी नारीक उदाहरण हमरा छदोjयमे (4/42/2) देखल जाइत अिछ। सूm सािहयकÊ अवलोकन कयला पर एिह युगमे mी लोकिनक थान xयेक दृिÐसँ समु¤त अवथाकÊ xा£त दृिÐगत होइत अिछ। आ िवWा सgप¤ होइत छलीह तथा िवWालयमे उपा=याय। आ

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मानुषीिमह सं ृ ताम् आचाय+हुपर xितिØत होइत छलीह। मैmेयी, बहवा, xािचतेयी, गाग¦, वाचकनवी, सुलभा आिद ऋिषकाकÊ ºपमे उिYलिखत छिथ। गोिभल गृहसूmमे mीलोकिनक उपनयन संकारक सेहो िनदäश अिछ (2/1/19) एतएव सूmकालमे mी िश9ा सु~यविथत ºपमे छल। ■ सgपक+- बालूघाट, बॉंध रोड, मुजòफरपुर

[1] आचाय+ सुरे4 झा ‘सुमन’ किवनवितका, मैिथली मिदर, राजकुमारगंज, दरंभंगा, 1984 [2] कण\मृत (जुलाई-िसतgबर, मृित िवशेषiक), 2000, कोलकाता [3] सgपादक िवजयनाथ ठाकुर, जयती, पृ- 131, चेतना सिमित, पटना, नवgबर- 2004 [4] तmैव [5] लालदास- रमेर चिरत िमिथला रामायण (बालकाyड), पृ- 4, पंचायत xेस, लहेिरयासराय, दरभंगा, सgवत 2011 [6] लालदास, रमेर चिरत िमिथला रामायण (पुtकरकाyड), पृ- 437, सािहय अकादेमी, नई िदYली, 1999 [7] डॉ. मुरलीधर झा- चदा झा ओ लालदास रामायण तुलनामक अ=ययन, पृ- 174, िमिथला िरसच+ सोसाइटी, लहेिरयासराय, दरभंगा, 2006

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मानुषीिमह सं ृ ताम् दीपा झा

मैिथ ली आर बाल सािहय

आइ संसार मे बहुत 9ेm मे थानीय 9ेm मे थानीय भाषा क अितव संकट मे छै। मैिथली भाषा अक्खन ओ ई िथित सऽ दूर छै मुदा संकट त छै ये। अिनयंिmत xवास आर xवासी जन µारा अपन मातृभाषा के अनायास याग देनाइ सबस ॅ xमुख कारण दश\यल जाइछ। िकतु ई एकटा मुÕया समया के सरलीकरण केनाइ छै। वतुतः एÂर कार+ण छै सश$त एवं मनोरम बाल सािहय क आभाव। जं ने¤ा- भुटका सभ कÊ रंग -िबरंगक कहानी िकताब उपलwध कराओल जाए आर िभ¤ xात ,देस आर जाित िकसा स पटल जन सािहय सहजता सऽ भेटै त भाषा वतः wयबहार मे रहतइ। ज◌ौ◌ँ लोक गीत ,किबता , xिसç फकरा सभ कहानी क ºप मे उपलwध रहतइ तऽ बड सरलता से मोन रहतइ आर दोसरो भाषा क ब:चा सभ संगे साझा कएल जेतइ आर एक टा धार जक› बह◌ैत रहतै। ऐ 9ेm मे बहुत शी ता सऽ आर गंभीरता सऽ काज के आवÄयकता छै।

नीतू कुमारी- मैिथली िचmकथा xीित ठाकुर -िवWापितक पु¼ष परी9ा xीित ठाकुर -िमिथलाक लोकदेवता xीित ठाकुर -गोनू झा आ आन मैिथली िचmकथा xीित ठाकुर -मैिथली िचmकथा देवiशु वस - नताशा

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मानुषीिमह सं ृ ताम् मैिथलीक ढेर रास बाल सािहय आ आन सािहय, संगे िमिथला आ मैिथलीपर मैिथली आ अं<ेजीमे ढेर रास पोथी  ी डाउनलोड लेल नीच›क िलंकपर उपलwध अिछ। http://videha.co.in/new_page_15.htm https://sites.google.com/a/videha.com/videha -pothi/

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

योगे4 पाठक िवयोगी नरक िवजय (एिह नाटकक एक संकरण हमर पोथी ‘िmनाटकम्’ मे छिप गेल अिछ। ओिह मे दृÄयक संÕया बहुत बेसी रहला सँ िकछु िनदäशक लोकिन एकर मंचन पर x° िचह लगौलिन। ओिह आलोचना कÀ =यान मे रखैत एकरा पिरविध+त कएल गेल। एकर बंगला अनुवाद cी नवीन चौधरी केलिन अिछ।- नाटककार)

पाm पिरचय मानव पाm — रमेश, सुरेश, अनुपम अिमत (वै;ािनक) पौरािणक पाm — ÚÛा, िवtणु, महेश, नारद, यमराज, िचmगु£त, दू यमदूत अंक 1 दृÄय 1 पद\ उठबा सँ पिहने नेपãय मे घोषणा होइत अिछ -- आजुक टटका खबिर सुनू। दुद\त बाहुबली रमेश आ सुरेश अपन शीष+ राजनीितक संर9क लोकिन कÀ जलसा मे बजाए बड़ी राित तक नाच गान भेलाक बाद बेहोसीक अवथा मे प›च गोटेक दनादन हया कऽ देलिन। तकर बाद कृिmम बुि} आ साइबोग+क 9ेm मे अतर\tÅीय Õयाितxा£त वै;ािनक अनुपम अिमतक अपहरण सेहो केलिन। पद\ उठैत अिछ। बीच मे उपर ट›गल अिछ एकटा िडिजटल िड£ले बोड+, जे एखन िवच -ऑफ अिछ। मंच पर एक कोन मे टेबुल पर कg£यूटर , इले$Åॉिनक यंm , िकछु Do -It -Yourself

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मानुषीिमह सं ृ ताम् (DIY) िकट , िकछु तार , सोYजिरंग आयरन , अय उपकरण आिद अत ~य त दशा मे राखल। दोसर कोन मे टेबुल पर अनेको शाm पुराणक मोट मोट पोथी सब सजाओल। मंचक बीच मे कने आगू िदश तीनटा कुस¦ राखल। कुस¦क सामने छोट टेबुल पर जलक बोतल आ िगलास। बीच बीच मे नेपãय मे जंगली जानवर सब के शwद सुनाइ पड़ैत अिछ। वै;ािनक अनुपम लीिपंग सूट पिहरने छिथ। वयस सािठक धक। चेहरा पर ओंघाएल आ थाकल हेबाक भाव। हुनका बहने रमेश आ सुरेशक xवेश। रमेश आ सुरेश दूनू xायः पचास - पचपनक वयस , बेस गठल शरीर , खाकी Ëेस , मुह गमछा सँ झ›पल , दूनूक हाथ मे िपतौल छिन। xकाश वै;ािनकक चेहरा पर फोकस रहैत अिछ आ जे ना जेना ओ मंच पर आगू अबैत छिथ , तेना तेना हुनका संग चलैत अिछ। मंचक बीच पहुँचला पर पूरा मंच xकािशत होइत अिछ। रमेश हुनकर बहन खोलैत छिथ। सुरेश हुनका एक िगलास जल पीबै लेल दैत छिन। दूनू अपन मुहक गमछा खोलैत छ िथ ) वै;ािनक (जल पीिब , घबराएल ) हमरा िकएक अपहरण केलहुँ ? सुरेश (कुस¦ िदस इसारा करैत ) पिहने आसन <हण कएल जाओ सर। (एक एक कए तीनू गोटे बैसैत छिथ , दूनू बाहुबली अपन िपतौल टेबुल पर रखैत छिथ। ) रमेश घबरेबाक कोनो बात निह सर, अपने आराम सँ बैिसयौ। अह› सँ ने कोनो िफरौती लेब आ ने कोनो तरहक कÐ देब। अह› तऽ हमरा सबहक पू¹य छी आ देशक गौरव। अह›क सुर9ा हमरो सब लेल बहुत जºरी अिछ। िकछु गप सप केलाक बाद अह› कÀ एखनिह आपस पहुँचा देब। नेपãय मे जंगली जानवर सबके शwद सुनाइ पड़ैत अिछ। वै;ािनक अ कानैत छिथ। वै;ािनक हम सब जंगल मे छी की ? सुरेश जी सर, एतए एकात मे अह› कÀ लऽ अनलहुँ माm अपन xोजे$ट बुझबै लेल। हमरा सबहक xिसि}ए तेहन भऽ गेल अिछ जे अह›क ऑिफस मे जाकए िविजिटंग काड+ देखा कए गप निह ने कऽ सकैत छलहुँ। तÀ अप हरणक नाटक करए पड़ल।

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् वै;ािनक (चेहरा पर शiत भाव अनैत ) एतए अह› सब कÀ पुिलसक डर निह अिछ ? एतेक पैघ कiड भेला पर पुिलस अह› सब कÀ चाº कात तिकते होएत ने। रमेश िचता निह सर। पुिलसकÀ रते देखल निह छैक आ यिद रता भेिटयो जेतैक तऽ आएल निहए पार लगतै। सुरेश रता पर पैघ गàढा बनाओल छैक जे हरदम पािन सँ भरल रहैत छैक। हम सब जखन आबऽ लगैत छी तऽ मोबाइल के िरमोट कÅोल µारा पािन उपछै लेल पgप चला दैत िछऐक। आिब गेला पर फेर ओिह मे पािन भिर जाइत छैक। बहुत सुरि9त छैक ई जगह सर। रमेश एकटा बात आर छैक सर जे अपने कÀ हमरा सबिहक िवषय मे आत करत। सुरेश पुिलस हमरा सब कÀ जीिवत अवथा मे किहयो निह पकिड़ सकत। यिद कोनो असावधानी सँ किहयो घेराइयो जाएब तऽ पुिलस कÀ मृत शरीरे भेटतैक। वै;ािनक ठीक छैक, जYदी अपन योजना कहल जाओ। रमेश देिखयौ सर, एतेक िदनक अपराध याmा मे हम सब बहुत पाप केलहुँ। एतेक तरहक पाप जकर वण+न शाm पु राण मे भेटबो निह करत। सुरेश हम सब एिह बीच शाm पुराण सबके अ=ययन सेहो केलहुँ, मृयु उपरात वग+ नरक भोगक जानकारी सेहो ले लहुँ। देिखयौ ओ पोथी सब (कोन िदस इंिगत करैत छिथ ) वै;ािनक (कने मुिकआइत ) अ:छा ! रमेश आइ हमरा दूनूक आमा कÀ अपूव+ शाित भेिट रहल अिछ जे ओिह प›चो पिपयाहा दुÐामा सब कÀ यमलोक पहुँचा देिलयैक। एही दुÐ राजनेता लोकिनक कारण हम सब अपरा धक संसार मे घुिसया गेलहुँ। हमरा सबके आपरािधक जीवन एतिह शेष होइत अिछ। वै;ािनक िकतु अह›क अपन कएल पापक दंड तऽ अहॴ सब भोगबै। राजनेता सबके हया सेहो एिह पापक कड़ी मे जोड़ा गेल ने। सुरेश पापक xायिÒ§ करबाक लेल हम दूनू िकछु अिभनव तरीका सोचने छी। एिह शरीरÀ तऽ अपराध छोिड़यो देला पर समाज हमरा दूनू कÀ वीकार निहए करत। आ फेर कानूनी xिpया सेहो छैक।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् रमेश ओही xोजे$टक लेल अपने सँ िवमश+ करबाक अिछ। सुरेश आब हम सब एक िवशेष अिभयान पर जाए चाहैत छी। एिह लेल हम सब अपना संग िकछु चीज लऽ जाए चाहैत छी जे एतुका वै;ािनक आिवtकारक अिभनव नमूना होइक। ओही लेल अह›क मदित चाही। हमर ई िल ट देिख लेल जाओ सर। (एकटा कागतक टुकड़ी हुनका दैत छिथ ) वै;ािनक (िलटक अ=ययन करैत ) समय आ खच+ दूनू बेस लागत। रमेश ओकर िचता निह। एकटा आर अनुरोध अिछ, एकरा देिखयौ सर (दोसर कागत बढ़बैत छिथ ।) वै;ािनक मुदा अह› सब बुतÀ कोना पार लागत ? सुरेश हम फीिज$स मे एम.एस- सी. छी आ हमर सहयोगी इले$Åॉिन$स इंजीिनयर छिथ। ई तऽ िनयितक दुÒp जे हम दूनू अपराध ज गत मे आिब गेलहुँ। निह तऽ कोन ठेकान आइ अहॴक xयोगशाला मे सहायक भेल काज करैत रिहतहुँ। रमेश समय िनकािल हम सब अह›क टीम µारा कएल जा रहल वै;ािनक अनुसंधान आ आिवtकारक जानकारी सेहो लैत रहलहुँ। इले$Åॉिन$स आ कg£यूटर सgबधी लूिर िबसरी निह तािह लेल िकछु िकछु करैत रहिलयैक (टेबुल िदस इंिगत करैत छ िथ ) वै;ािनक ठीक छैक, हम अह› सबहक अिभयान मे मदित करबाक स भिर कोिशश करब। आर िकछु ? सुरेश निह, खाली अह› सँ फेर कोना सgपक+ करी से बता िदअऽ। वै;ािनक बेस, ई िलअऽ हमर िवशेष कोड। (एकटा कागत पर िकछु लीिख कए दैत छिथ ) एिह µारा ÚÛiडक कोनो ज गह सँ माट+फोन सँ एकरा डायल कऽ सकैत िछऐक मुदा =यान राखब ई अनका हाथ निह पड़ैक कारण ई गु£त कोड िछऐक, एिह पर फोन टैिपंग लागू निह छैक। अह› दूनू हमरा फोटो लेबऽ िदअऽ, जे हम प िरचय लेल अपना िसटम मे देबैक। पिरचय निह भेटला पर िसटम कॉल वीकारे निह करत। रमेश एिह वेशभूषा मे फोटो जुिन लेल जाओ सर। हम दूनू अपन पिरचय आ फोटो कािल अपनेक xयोगशाला मे पठबा देब।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् वै;ािनक ठीक छैक। फोटो एलाक बादे हम िकछु काज आगू बढ़ा सकब। एतेक =यान राखू जे हमरा xयोगशाला मे एके बेर xवेश क ऽ सकब आ तकर बाद बाहरी संसार सँ कोनो सgपक+ निह रहत। मोबाइल आिद हम रखबा लेब। काज शेष भेलाक बादे बहरा सकब। मंजूर अिछ ? दूनू समवेत एकदम मंजूर। वै;ािनक दू स£ताहक समय िदअ ऽ। सुरेश बेस, आब चलू, अह› कÀ आपस पहुँचा दैत छी। (जाइत काल दूनू गोटे वै;ािनक कÀ पएर छूिब xणाम करैत अिछ )। (वै;ािनक आगू आगू आ रमेश , सुरेश हुनकर पाछू पाछू मंच सँ xथान , xकाश बंद। नेपãय मे दू गोटेक वर मे घोषणा) एक एखने खबिर आएल अिछ जे वै;ािनक अनुपम आपस आिब गेलाह। ओ xेस वात\ मे घोिषत केलिन जे हुनकर अपहरणक घटना पुिलसक कYपना छलैक। नेता सबहक हया सँ घबराएल पुिलस िबना िकछु बुझने एिह तरहक xचार केलक। राित मे हुनका िकछु अिभनव आइिडया आएल छलिन तकरे मंथन करबाक लेल ओ कने सबेरे टहलए चल गेल छलाह। दू वै;ािनक अनुपमक अिभनव आइिडया पर काय+ करबा लेल दू स£ताह बाद दूटा अंतिर9 वै;ािनक औिथन। ओ तीनू xायः दू तीन मास xयोगशालाक एकात मे रिह काज करताह। एिह अविध मे हुनका संग कोनो तरहक सgपक+ संभव निह होएत। एक xयोगशालाक सुर9ा बढ़ा देल गेलैक आ xशासनक सव×:च तर पर एकर सूचना सेहो पठा देल गेलैक। दू उड़ती खबिर इहो अिछ जे दूनू बाहुबली आपरािधक जीवन छोिड़ देलिन। आब शहर मे शiित रहत, से आशा कº । (अिगला अंकमे जारी)

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मानुषीिमह सं ृ ताम् नद िवलास राय वािभमान - बीहिन कथा डॉ. पंकजक बेटाक िबआहक कािÁ बहुभोज छल। आइ भोरेसँ सर-कुटुम आ धी-वासीन सभ अपन- अपन गामक बाट पकड़लैन। किनय›क संगे जे लोकिनय› सभ आएल रहैथ ओहो सभ अपन-अपन फटफिटयापर चिढ़ गाम जाइ गेला। िदनक चािर बजे-बे¼का पहर। डॉ. पंकज अपन पîी- अलकासँ कहलिखन- “कनी नीक कॉफी िपआउ। बड़ थकान बुझाइत अिछ।” किनयÊ कालक बाद अलका दू कप कॉफी नेने पित लग एली। एकटा कप पितक हाथमे देली आ दोसर कप अपने हाथमे लेली। दुनू पित-पîी बैस कऽ कॉफी पीबए लगली। कॉफी पीबैत डॉ. पंकज बजला- “सभ सर-कुटुम तँ एला मुदा वीणा दैया आ ओकर दुÁा नै एला। कहू तँ हमरा बेटाक िबआह फेरसँ हएत..!” तैपर पîी अलका कहलकैन- “वीणा दैयाक बेटीक िबआहमे अह› आिक हमहॴ गेल रिहऐ जे ओ सभ अिबतए।” डॉ. पंकज बजला- “हमरा समय नै भेटल तँए नै गेलॱ मुदा नौत पुराइ एगारह साए टका तँ पठाइये देने रिहऐ।” तैपर पîी अलका कहलकैन- “ओहो सभ अह›क बेटाक िबआहमे बाइस साए टका पठा देलखुन हेन। की बुझै िछऐ ओ सभ गरीब अिछ तँ दौड़ले औत। यौ सभकÊ अपन वािभमान छइ।” तैपर डॉ. पंकज िकछु ने बजला, मुदा हुनका मनमे भेलैन जे भिगनीक िबआहमे नै गेलॱ से हमरा सन नीक नै भेल।

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

जगदीश xसाद मyडल

दिहबरी (लघुकथा) तीन-चािर घटासँ गाममे हरिवड़× उठल छल मुदा अपने कोनो भनक निह बुिझ पेलॱ। हरिवड़× ई उठल छल जे ‘जसमत बाबा अब-तबमे छैथ!’तँए अितम दश+नक लेल सॱसे गाम गलो-गुल आ दौड़ो-बरहा लिग गेल छल। घटना तीन बजे बे¼का समैयक छी। भेल ई जे जसमत बाबाक पेटमे वायुक बढ़वािड़ भऽ गेलैन जइसँ मन तेना औल-बौल करए लगलैन जे लोकक बीच मरैक डर सबहक मनमे पैस गेल। जसमत बाबाक देहक शि$त सेहो जेना किम गेलैन तिहना ठाढ़ भेलमे खिस पड़ला। एक तँ पेटक जनमारा गैिटकक xकोप,तैपर बेधड़क खसने देहमे तेना चोट लिग गेलैन जे चेतन शि$तमे 9ीणता सेहो आिब गेलैन जइसँ एकाएकआँिख-मुँह दुनू ब¤ भऽ गेलैन।

तीन रंगक अवाज गाममे उिठ रहल छल। िकछु गोरे जसमत बाबाकÊ मृयु घोिषत करैत बजै छला जे ‘बाबा धोपचटेमे मिर गेला!’एकर पूरक िवचार सेहो जोड़ा रहल छल जे ‘बाबा सन धम\माकÊ अिहना मृयु होइए। मरैबेर सेवा-ले केकरो मुँहतÂी निह केलैन!’आिकछु गोरे जसमत बाबाकÊ अब-तबमे रिख बजै छला जे ‘बाबा अब-तबमे छैथ, माने कखन छैथ आ कखन निह छैथ तेकर कोनो ठेकान निह!’ मुदा िकछु गोरे अिड़- अिड़ बजै छला जे ‘बाबा जीिवत छैथ आ जीबे करता!’

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मानुषीिमह सं ृ ताम् अही तरहक िवचारक बीच रखवारीवाली आ दीपवालीक बीच अपन-अपन िवचारक चलैत कहा-कही सेहो शुº भेल। रखवारीवाली बाजल- “बाबाकअखन मरैबला उमेर थोड़े भेलैन अिछ जे मरता। देहमे रोग भेने मनमे बेचैनी आिब गेल छैन।” रखवारीवालीक बात सुिन दीपवाली बाजल- “बाबाकÊ आब लोकक कोन बात जे भगवानो निह बँचा सकतैन!” ओना, मरै-जीबैक बात जेते रखवारीवाली बुझै छैथ तेते दीपवाली निह बुझै छैथ। जइसँ अपन-अपन धरणा मरै-जीबैक मनमे बिनयÊ गेल छैन। ने रखवारीवाली अपना आँिखये बाबाकÊ लगसँ देखने छेली आ ने दीपेवाली, मुदा लोकक मुँहक सुनल बातसँ दुनूक कान तँ भिरयेगेल छेलैन जइसँ दुनूक मनमे अपन-अपन िबसवास सेहो बिन गेल छैन। जीवन-मृयुक िकरदानी देख रखवारीवालीक मनमे एहेन धारणा बनले छैन जे कुgहारक बरतन जक› लोकक›च मािटक बनल अिछ जे किनय धÂा-धुÂी लगने फुिट जाइए! तैपर केतेको गोरेक मुहसँ सेहो सुिन चुकल छैली जे बाबा अब-तबमे छैथ। तिहना दीपवालीकÊ सेहो अपन िवचारक धारणा मनमे बनल छैन। िवचारक धारणा ई जे जिहना ब:चा जम लइए, धीरे-धीरे समैयक संग बढ़ैत-बढ़ैत बुढ़ होइए आ बुढ़सँ जखन झुनकुट बुढ़ होइए तखन पाकल कोनो अ¤े वा फले जक› झुना कऽ अपने खिस पड़ैए; से तँ अखन जसमत बाबा निह भेल छैथ। जेकरा-जेकरा मुहÊ जसमत बाबाक समाचार दीपवाली सुनने छेली, ओ वएह सुनने छेली जे हवा-बसात लगने अिहना समैया रोग पकड़ैए आ समय पुरला पछाइत अपने छुिटयो जाइए। ओना,जसमत बाबाक मरैक सgभावना दीपवालीक मनसँ सोÁोअना मेटाएलो निहयÊ छेलैन, तखनमेटाएले जक› घँसा जºर गेल छेलैन जइसँ रखवारीए-वाली जक›दीपोवालीक मनमेअपन जीिवत वाण छेलैहे। ओना, रखवािरयोवाली आ दीपोवालीकÊगामक लोकबुिझते छैन जेिबनु जिड़-िसरक झगड़ाऊ मनुख छैथ। तँए िहनका दुनूक बीचकझगड़ाक फिरछौटमे तेसर अपन काज बरदा निहयÊ पड़ए चाहैए। मुदा आजुक माहौल दोसर रंग भेने, दुनू गोरेकबीच कहा-कही भेने अनेको लोक दुनूक बात सुिन जमो भेल आ फिरछबैले तैयार सेहो भेल। ओना, िबनु बजौले सभ छल, िकए तँ सभ जसमत बाबाक दश+न करए जा रहल अिछ। तइ बीचमे दुनू गोरेक कहा-कहा, बीच सड़केपर भेने, फिरछौटक पिरिथित बिन गेल। दीपवालीक बात सुिन रखवारीवाली बजली- “भगवानोक ठीकेदारी अहॴकÊ अिछ..!” िबना लगामक घोड़ा जक› दीपवाली हीनहीनाइत जवाब देलकैन-

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मानुषीिमह सं ृ ताम् “भगवान भगवान छैथ, लोकक कहाकहीमे ओ िकए औता, लोक बड़ बेसी हएत तँ भ$त बिन सकैए, उपासक बिन सकैए, तैठाम जे ई भगवानक दोख लगबै छिथन से िहनका अपना-सन भेलैन?” रखवािरयोवाली बेलगामक घोड़ा जक› हीहीयाइत बाजल- “अपना सन नइ भेल तँ की अह› सन भेल?” अपना सन भेल िक अह› सन भेल, तेकर अथ+ दीपवालीकÊ दोसरे लिग गेलैन। िकए तँ दीपवालीकÊ बुझल जे अyडी तेलक दीपक इजोत आँिखकÊ कड़ुअबैए मुदा गोटक तेल वा मिटया तेलक इजोत ओहन xकाश दइए जइसँ अहार दुिनय›कÊ लोक xकािशत देखैए। रखवारीवाली आ दीपवालीक बीचक जे गप-स£पक pम छल ओ अपने अगरब§ी जक› मसYला सठने िमझा गेल। सात बजे स›झक समय। कािÁये चैत सgप¤ भेल आ आइ बैशाख चढ़ल, तँए सात बजे स›झ रिहतोमाघक तेसर स›झ सन अहार निह छल, छल पिहल ओहन स›झ जक› जे सूय+ तँ पाट लऽ लेने छला मुदा अकासमे लाली िदने जक› पसरल छल। बे¼का समैयक काजक िबसरजन करबाक समय देख अपनो खेतसँ दरब¹जापर एबे कएल छेलॱ िक कानमे भनक लागल। मुदा तैयो अपन ऐगला xिpयाक भ›जक तैयारीमे जुटले रहलॱ। माने एक उखड़ाहा काजक िबसरजन आ दोसर काजक बीचक जे समय होइए तइसँ xवेश करैले जे लोक अपन तैयारी करैए, आ तैसंग िदनक िबसरजन आ राितक आगमन बीच जे अपन िनय िpया अिछ, तइमे लािग गेलॱ। कलपर (चापाकल) मुँह-हाथ धोइते रही िक पîी लगमे आिब बजली- “जसमत बाबानिह बँचता।” पîीक बात सुिन मन एकाएक हहरए लगल। हहरए ई लगल जे एकाएक जसमत बाबाकÊ की भऽ गेलैन जे पîी एहेन बात बजली। मुदा लगले फेर अपने मन कहलक जे पिहने जान तखन ने जहान। काजसँ आएले रही तँए देहोक थकान आ मनोक थकान भइये गेल छल। जइसँ ऐगला काज देख, सँझुका उखड़ाहाक काज देख मन असकताइते छल। तैबीच पîीक मुँहक समाचार-‘जसमत बाबा आब निह बँचता’, आरोमनकÊ मथएलगल। ओना, ऐगला काज पकड़ैक िज;ासा मनमे ओिहना उसुका रहल छल जे जीवन तँ कमä–काजे–ले मनुखकÊ xा£त भेल अिछ। जे (कम+) िजनगीक संग चलैत-चलैत जीवन मु$त करैए, तँए कम+ जखने जीवनसँ छुटल िक मृयु भेल। माने मुि$तक अवरोध भेल। जीवन मु$त तँ तखने ने भेटैए जखन जीवन भिरक काजक अितम सीमाक काज समा£त होइए...। मनमे नव-नव िवचार जगने मनक थकान तँ लगले मेटा गेल, मुदा देहक थकान कनी-मनी किम जºर रहल छल मुदा सोÁोअना मेटाएल निह छल। जेकरा मेटाएब जºरी छेलए-हे। िकए तँ जखने पैछला काजक थकान देहकÊ पकड़ने रहत तखने

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ऐगला काज करैक ओ उसाह निहयÊ औत, जइ उसाहक जºरत आगूक काज लेल होइत अिछ। काजोक अपन-अपन उसाह होइछै िकने। जे िकयो उसािहत भऽ अपन काज करै छैथ हुनका काजक सफलताक जेते आशा रहै छैन तेते अनउसािहत लोकक काजक निहयÊ होइ छैन। थोड़-थाड़ जे देहक थकान मनसँ छुिट देहकÊ पकड़ने छल, ओकरा मेटबैक िखयालसँ पîीकÊ कहलयैन- “जसमत बाबा ऐठाम जाएब, तइ बीचमे अह› जलखै-चाहक ओिरयान कº।” पîी आँगन िदस बढ़ली आ अपने ह›इ-ह›इ मुह -कान धोइत रही आ मने-मन िवचािरतो रही जे जसमत बाबाक समाचार तँ अपना पिरवारमे ने सुनलॱ, जे सतो भऽ सकैए आ फुिसयो भइये सकैए। ओना, कोनो उड़ती समाचार ने सोÁोअना सत होइए आ ने सोÁोअना अस§े होइए। ओइमे िकछु-ने-िकछु कमी-बेसी होइते अिछ। मुदा ई तँ भेल शतxितशत् िवचार। मुदा बीचमे, माने एक xितशतसँ लऽ कऽ िननानबे xितशत तकक िवचार दुनूक जोड़ुआ चिलते अिछ। माने ई जे कोनो िवचार–बात वा समाचार–िननानबे xितशत सत् रहल आ एक xितशत फुिस रहल। तिहना कोनो िननानबे xितशत फुिस रहल आ एक xितशत सत् रहल। ओना, तहूमे बुझब किठन निह अिछ। िकए तँ जेकर माmा बेसी रहल ओइ अनुकूल लोक अपन िवचार बना लइ छैथ। मुदा असल झमेल ओइठाम शुº होइए जैठाम कम माmाक दूरी रहैए, माने कोनो एकावन xितशत रहल आ कोनो उनचास xितशत। कहलो जाइए जे लंकामे जे बड़ छोट ओ उनचास हाथ..! भाय, िगनतीमे एक-सँ-उनचास सीढ़ी ऊपर भेल आ भेल सभसँ छोट, से केना भेल? िजनगीक िकयो िननानबे सीढ़ी चिढ़ गेला, एक सीढ़ी चढ़ैमे माने शत-xितशत जीवन धारण करैमे जँ कोनो कारणे निह चिढ़ सकला, तँ हुनका संग की याय हेबा चाही..? मुदा लगले मन फुिट बाजल- “परीछाक पिरणाम सेहो दू-िदिसया होइते अिछ, िकयो िन:चासँ xथम होइए तँ िकयो ऊपरसँ। एहनो तँ सgभव होइते अिछ।” मनक थकान हेट भेने आ देहक थकान मेटेने मन सोÁोअना फरहर भऽ गेल। तैबीच पîी जलखै नेने दरब¹जापर पहुँच चुकल छेली। अपनॱ लोटामे पािन लेलॱ आ दरब¹जा िदस बढ़लॱ। लग पहुँचते पîी जलखै चौकीपर रिख आँगन िदस बढ़ैत बजली- “चाहो लिगचाएले अिछ।” पîीक सूmव} काज देख अपनो मन सुितया लगल। सुितया ई लगल जे एक तँ गामक cेØजन जसमत बाबा छैथ, हुनकर समाचार िछऐन, तैठाम अपन की दाियव बनैए? झलफलाएलमे ने िवचार झलफलाइत अबैए, मुदा अकलवेरा समयमे से तँ निह होइए। आँिखक सोझमे जसमत बाबा छैथ, तखन अपने िकए िवचारैमे देरी लगैत। सएह भेल। जलखै नीक जक› सठलो नइ छल, पîी चाह अननॱ ने छेलीिकतइ िब:चेमे मन मािन गेल जे अपन पîीक मुहÊ अपना घरमे जसमत बाबाक सgबधमे सुनलॱ, हुनको तँ पिरवार

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् छैहे, तँए उिचत बनैए जे गामक लोकक बातक फेड़मे निह पिड़ हुनके ऐठाम जा बात बुिझऐ। देरीए सही मुदा ठौरपर तँ पहुँचब। पिहल स›झक xकाश समा£त भऽदोसर स›झक अहार पसैर चुकल छल। घर-घर दीप-बाती जिरयो रहल छल आ जरौलो जा रहल छल। चाह पीब पान खा जसमत बाबा ऐठाम िवदा भेलॱ। रातामे केते गोरे टोकबो केलैन जे अहारमे केतए जाइ छी, मुदा सभकÊ एÂे उ§र दैत- लगले अबै छी, कहैत रातामे केतौ ने ºकलॱ। जसमत बाबाक दरब¹जापर जाइसँ पिहने जसमत बाबाक मिमयौत भातीज पहुँच चुकल छलैन। भाय, समृ} पिरवारमे समृ}ताक जे-जे कारण अिछओइमे अित आवÄयक जे अिछ, पिहने ओकर भरपाइक बेवथा हेबा चाही िकने...। जसमत बाबाक मिमयौत भातीज िकसानी िजनगीसँ सभ िदन जुड़ल रहला तँए कृिष सgबिधत जे आवÄयक काज अिछ तेकरा सgहारैत मिमयौत भातीज अपन पिरवारक भार पîीकÊ सुमझा अपने जसमत बाबा-ऐठाम आएल छला।पिरवारक अिधकiश, खासकऽ पु¼ख वग+बाबाक संग लहेिरयासराय गेल रहिथन। हमरा देखतेसुबुधनाथ बजला-“आउ-आउ, भाय!” ओना, सुबुधनाथसँ एक-दू बेर भÊट भेल छल मुदा गप-स£प निह भेल छल, तँए चेहरासँ िचहै छेिलऐन मुदा गप-स£प निह भेने अनभुआर तँ रहबे करैथ। सुबुधनाथक बात सुिन मन पिरवारक बेवहारपर पहुँच गेल। यएह ने पिरवारक जीिवत संकृित भेल जे दोत होिथ िक दुÄमन, शुभिचतक होिथ िक अशुभिचतक, जँ दरब¹जापर पहुँच गेला तँ हुनका उíानुकूल अिभवादन करैत ऐगला गप-स£पक मुँह आदरपूव+क बना िदऐन। िवचारभेद, काजभेद अपन िवचार-बीच वा काजक बीच अिछ,तइलेअनोन-िबसनोन हएब नीक थोड़े हएत। ओना, सुबुधनाथक अिभवादन सुिन मनमे दू रंगक िवचार उठल। पिहल उठल जे सुबुधनाथक पिरचय नीक जक› बुिझ ली, आ दोसर उठल जे जइ काजे आएल छीपिहने से बुिझ ली। असमंजसमे पड़ल मने बजलॱ- “जसमत बाबाक की समाचार छैन?” सुबुधनाथ बजला- “एक डेढ़ घटा हमरो एना भेल अिछ, तइसँ पिहनिह चिरचिकया गाड़ीसँ समiग सभ लहेिरयासराय लऽ गेलैन, तँए आँिखक देखल तँ कोनो समाचार निह अिछ मुदा अिबते जे सुनलॱ से किह सकै छी।” सुबुधनाथक बात सुिन मनकÊ मनबए लगलॱ जे अखन तँ दूटा मुÕय आधार भेिटये रहल अिछ। पिहल, अपन पिरवािरक सgबधसँ सुबुधनाथ भातीज छिथन, दोसर, जखन हुनका दरब¹जापर बैस गप-स£प कऽ रहलॱ अिछतखन सत् छोिड़ झूठ केना हएत। बजलॱ-

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् “हँहँ, अहूँ तँ आने गामसँ आएल छी, तँए जँ घटा-दू-घटा देिरयोसँ एलॱ तँ ओ समैयेपर आएब भेल। तइ संग पिरवारक लोक भेने पिरवारेजन सभसँ ने जे सुनलॱ सएह कहब।” सुबुधनाथ बजला- “दुनू भ›इयो आ कािकयो संगे गेल छैथ, मुदा दुनू पुतोहुओ आ िधयो-पुता सभ अिछए। हुनके सभसँ जे सुनलॱ से कहै छी।” पिरवारक बात सुिन मन मािन गेल जे पिरवारक बात छी, तँए जे हएत से स›चे हएत। भाय, ऐठाम ई नइ बुझब जे पिरवारक माने पîी आ पिîयÊक आदेश भेल पिरवारक आदेश आ वृ}जन वा cेØजनक कान तक भलÊ ओ िवचार पहुँचए वा निह पहुँचए। ऐठाम पिरवारक माने बुझब जे जे पिरवारक जे धड़गत धारपकैड़ चलैएओकरा समयानुकूल बनबैत सिgमलत धार बना चलब...। बजलॱ- “हँ, हँ, अहूँ सएह ने किह सकै छी। जसमत बाबाक शरीरमे की भेलैन से आन थोड़े सोÁोअना बुिझ सकैए। ओ तँ अपनेटा बुिझ सकै छैथ।” सुबुधनाथ बजला- “अखन करीब आठ बजैत हएत। अढ़ाइ-तीन बजे बे¼पहर पेटमे दद+क xकोप भेलैन से तेते उ< भऽ गेलैन जे वेहोश भऽ खिस पड़ला।” वायुक xकोपसँ जसमत बाबा अचेत भेला, ई कोनो बड़ भारी रोग निह भेल। रोगक थाह पेिबते मन थेहगर भेल। बजलॱ- “जखनसँ सभिकयो लहेिरयासराय गेला तइ बीचक तँ कोनो समाचार नइ ने अिछ।” सुबुधनाथ बजला- “निह।” ‘निह’सुिनते बजलॱ- “अखन जाए िदअ। जँ गर भेटत तँ अखने हमहूँ जा कऽ भÊट करबैन।” उिठ कऽ िवदा भेलॱ। चैतक राहल लोक बाइस-तेबाइस बना बैशाखमे खेबे करै छैथ, भिरसक सहए ने असैर केलकैन..? मुदा लगले दोसर िवचार उिठ गेल जे खाइ-पीबैमे जसमत बाबा एकजु§ी लोक,अपन मनोनुकूलचलैबला लोक छैथ, तखन खाइ-पीबैमे कोनो गड़बड़ भेल हेतैन से सgभव निह अिछ, तखन की भेलैन? मुदा रोगक तँ सोÁोअना जानकार रोिगये भऽ सकै छैथ। जेना-जेना डेग घरमुह› बिढ़ रहल छल तेना-तेना मनमे अहार सेहो पसरल जा रहल छल। अपनो उमर आब ओहन नइ रहल जे अमाविसया सनक अहार राितमे भिर-भिर राित ओहन सड़कपर पैिडलबला साइिकलिबना इजोतमे चलबै छेलॱ, से आब थोड़े रहल। आब िक Åेyड Ëाइवरक ओ महत् रहल, आब तँ अनÅेyड पाछूसँ धÂा मािर Åेडक दोख लगा

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् अपनाकÊ Åेyड बनबैक Åेyड बिनयÊ गेल अिछ। मुदा डरे जँ राता चलबे छोिड़ देब तखन तँ घरेमे िदन-राित घुिरयाएल रहब..! िकछु फुिरये ने रहल छल जे की करी वा की निह करी। राितक दस बािज गेल। रंग- िबरंगक िवचार मनमे उिठये रहल छल। कखनो-कखनो ईहो उिठ जाइ छल जे जँ जसमत बाबा मिर गेला तँ अितम जीिवत दश+न निहयÊ भऽ पौत। कखनो ईहो हुअए जे एते राितमे लहेिरयासराय िवदा हएब आ रातामे िकछु अपने भऽ गेल तखन की हएत? असमंजसमे पड़ल मने िवचार केलॱ जे घटा-डेढ़-घटाक राता लहेिरयासराय अिछ, तैबीच जे जेबो करब आ ईहो भ›ज निह बुझल अिछ जे xाइवेटमे केतौ छैथ आिक सरकारी अपतालमे छैथ। से निह तँ साढ़े तीन बजे जे पिहल बस पटना-ले गामसँ खुजैए, तेकरा पकैड़ चिल जाएब। साढ़े चािर-प›च बजे दरभंगा पहुँचब। िदनक समय रहत कोनो-ने-कोनो भ›ज लिगये जाएत। प›च बजे भोरमे दरभंगा बस टेyडसँ टेgपू पकैड़ लहेिरयासराय िवदा भेलॱ। संजोग बनल, जसमत बाबाक छोट बेटा- देवकात चौकेपर भÊट भऽ गेला। पुछलयैन- “बाबाक की समाचार छैन?” देवकात बजला- “पेटमे गैसक xकोप छेलैन। अिबते डॉ$टर साहैब xितकार केलैन। थोड़बे कालक पछाइत मन हYलुक भऽ गेलैन। अखन नीक छैथ। आइये घुिमयो जाएब।” देवकातक बात सुिन मन मािन गेल जे एलहा साफल भेल। देवकातक संगे गेलॱ। जसमत बाबाकÊ देखते गोड़ लगलयैन। बैसलॱ। तइ बीच देवकातचाहो दोकानसँ अनलैन। दुनू गोरे चाहो पीबए लगलॱ आ गपो-स£प करए लगलॱ। कहलयैन- “बाबा!अह› तँ संयिमत लोक छी, तखन एना..?” जसमत बाबाक मन सोÁोअना शात रहैन। बजला- “बौआसुरेश, अपने मन धोखा देलक।” ‘अपने मन धोखा देलक’ सुिन अचिgभत भऽ गेलॱ जे ई की बाबा कहलैन..! शंका उठल। शंका ई उठल जे भिरसक जसमत बाबाक रोग अखनो ओिहना जीिवत छैन। मुदा खनहन मन देख ईहो शंका हुअए जे जँ मन नीक नइ रिहतैन तँ एते असिथर केना भेल रिहतैथ।कछमछ-कछमछ करबे किरतैथ। नीक हएत जे गप-स£पकÊ आगू बढ़ाबी, अपने सभ भ›ज लिग जाएत। पुछलयैन- “से की बाबा?” जसमत बाबा बजला- “बुझले छह जे परसुका राहल, माने चैतक राहलकािÁयो लोक खेलक आ केते गोरे आइयो बैशाखमे खाएत।”

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मानुषीिमह सं ृ ताम् बजलॱ- “हँ, से तँ खेबे करत!” जसमत बाबा बजला- “अही बीचमे ने मन धोखा देलक।” ‘मन धोखा देलक’जसमत बाबाक मुहसँ बेर-बेर िनकलै छेलैन, मुदा मन की धोखा देलकैन से बुिझये ने पेब रहल छेलॱ। तँए मन औना रहल छलजे जसमत बाबा बुिझ गेला। बुिझते मुकुराइत बजला- “बौआ सुरेश!अरबा चाउरक भात, रोड़गरसँ उलौल राहिरक दािल आ दही दऽ कऽ पुतोहु बरी बनौने छेली। खाइले जखन बैसलॱ तँ दिहवरी देख मन अतीतमे वौआ गेल।” बजलॱ- “की अतीतमे मन वौआ गेल?” जसमत बाबा बजला- “दिहवरी खेबामे तेतेक वािदÐ छल जे अपन जीवनक बीतल सुआद सभ मोन पिड़ गेल।” पुछलयैन- “की जीवनक बीतल सुआद सभ मोन पिड़ गेल?” जसमत बाबा बजला- “पिहल बेर सासुरमे दुरागमन िदन एहेन खेने रही, दोसर बेर समिधयौरमे खेने रही आ तेसर बेर संगीक संग संगी ऐठाम खेने रही।तही सभमे मन वौआ लगल। हाथकÊ मुँह देखले रहै, रसे-रसे तेते खुआ गेल जे बेसgहार भऽ गेल।” िकछु भ›जपर िवचार चिढ़ये रहल छल। बजलॱ- “खेबे एहेन छी जे लोक सभ िदन खाइए, तखन केना..?” अपन िवचार खोलैत जसमत बाबा बजला- “खेबेकाल मन वौआ अपन सासुरो, समिधयौरो आ दोसोक ऐठाम पहुँच गेल तँए बेठेकान भोजन भऽ गेल। घटा एके-डेढ़ेक पछाइत पेट तनए लगल। चीत गरे सुित पेटकÊ केतबो अराम देिलऐ, मुदा ¹वालामुखी जक›तरसँ गैसक बुमकला पेटमे छुटए लगल। उिठ कऽ ठाढ़ भेलॱ िक खिस पड़लॱ।” बजलॱ-

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मानुषीिमह सं ृ ताम् “अखन मन केहेन अिछ?” जसमत बाबा बजला- “आब सोÁोअना बुलद छी। डॉ$टर सहाएबक िहसाब-बारी देवकात कऽ लइए, पछाइत सभ संगे चलब।” बजलॱ- “बड़बिढ़य›।”

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मानुषीिमह सं ृ ताम् जगदीशxसाद मyडल

आमक गाछी (धारावािहक उपयास - पिहल खेप ) 1. बीस जून। माइक संग दुनू बिहन जगमोही xेमनगर पहुँचल। ओना, बीस जून गोटे साल शुº जेठमे पड़ैए तँ गोटे साल उतार जेठमे, तैसंग कोनो-कोनो साल अखाढ़क शुºमे सेहो पिड़ते अिछमुदा से निह, ऐ साल ‘बीस जून’ उतार जेठमे पड़ल। स£ताहसँ बेसी बैरसाइत [i]कÊ सेहो भइये गेल छल...। दस क ाक जीबे4क गाछी-कलममे तीनटा आमक गाछ भरखैर पकैत, बॉंकी सात-गाछमे गोिट-पéरा आ शेषमे कोनो-कोनोमे बोनाइत तँ कोनो-कोनोमे अखन िख:चे सुआदक रंग पकड़ने। ओना, xेमनगरक िकसान आन गामक िकसानसँ कनी बुिधगरो आ cमगरो[ii] नइ छैथ सेहो केना नइ कहल जाए। xेमनगरक चाºकातक जे गाम सभ अिछ, जेना- रामपुर, कृtणपुर, महमदपुर आ º4पुरइयािदगामक िकसान सभ जे कलम-गाछी लगबै छैथ, तइमे कलमी आम हुअ िक सरही, जामुन हुअ िक बैर, बेल हुअ िक बरहर, शीशो हुअ िक गमहाइर, सभ िकयो सहरगंजा रोपै छैथ, मुदा xेमनगरक िकसान सभ जे गाछी-कलम लगौने छैथ आिक लगबै छैथ ओ एकदम कतारबदी ºपमे। कतारबदीकमाने ई जे कलमी आमक कलममे जिहना कलमी आम छोिड़दोसर ने कोनो आमे गाछ आ ने बेखे-बुिनयािदक। बेख-बुनायािद भेल लकड़ी उपयोगी वृ9। ओना, कलिमयो आम सइयो रंगक अपन गुण-धम+बला अिछए, तँए एक गुणक िमलान आ एक धम+क िमलान ओहूमे बेसी नीक होइत अिछ। िकएक तँ ओकर सभ िकछु एक ºपे चलैए आ से नइ रहने जिहना बहुधम¦कÊ एकठाम भेने होइएजेकेतौ नहाइकाल झगड़ा तँ केतौ खाइकाल झगड़ा, केतौ चाहकझगड़ा तँ केतौ अनचाहक झगड़ा होइतो अिछ आ अरबेधलो रिहते अिछ। अरबेधब भेल- आिगयो आ खढ़-पातसँ लऽ कऽ ठहुरी-चेरा धिरक सुखाएल जरनोकÊ

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मानुषीिमह सं ृ ताम् एकठाम रािख देब, भलÊ िकए ने कनी-कनी हटाइये कऽ रखलॱ आ पूरबा-पछबा हवामे ऊिड़-पुिर एकठाम भऽ सुनैगकऽ पजैर जाइते अिछ। खाएर.., xेमनगरक िकसान cेØ िकसान छिथयो आ मानलो जाइते छैथ। इलाकामे जखन कखनो आमक गाछी-कलम वा बेख-बुिनयािदक चच+ केतौहोइए तँ xेमनगरक चच+ जिहना होइए तिहना रामपुरोक चच+ होइतेअिछ मुदा से xेमनगरक िवपरीत िदशामे। िवपरीत िदशा भेल-जिहना भगवान रामक नाम शुभ रिहतो गदा-सँ-गदा वतु देख ‘राम-राम’ किह गबाही रिख दइ िछऐन, जिहना मृयुक बिरयातीमे ‘राम- नाम सत् छी’ कहैत असमसानक पार लगबै छी तिहना ने जुआन-जहानक बिरयातीमे रसगुYला खाइत-खाइत राम-धाम सेहो पार लगबैबते छी। खाएर जे छी से छी, सभ नीके छी आ सभ अधले छीमुदा सभ िकयोतँ छीहे िकने। पनरह जूनकÊ कौलेजमे गरमी छु¸ी भेल, ओना िकछु गोरे एकरा ‘अमैया छु¸ी’ आ िकछु गोरे ‘<ीtमावकाश’ सेहो किहते छैथ मुदा जाए िदयौ ऐ बातकÊ, बात तँ बाते छी, अपना मनक मौजी बहुकÊ कहलॱ भौजीआ लोको लग अपन िनल+जताक नाच नचैत रहलॱ। भाय, पîी पîी छैथ िकने, ओ तँ जिहना जीवन संिगनीभेली, अ}Ýिगनी भेलीतिहनाxेिमका सेहो भेबे केली, मुदा तैठाम जँ िकयो िदन-राित टी.भी.मे खेले वा िसनेमे देखती तँ देखौथ आ अपन कम+क समय िवधाताक हाथमे दऽ दौथ..! गरमी छु¸ी होइते धीरे4 सोझे गाम आिब गेल। बीस जूनकÊ जगमोही सेहो आम खाइक बह¤े अपन मातृक पहुँचल। धीरे4 आ जगमोही पटनेमे रिह पटने कौलेजमे बी.ए. फाइनल इयरमे पिढ़तो अिछ आ एÂे िवषय दुनूक रहने संग-संग िकलासोमे आ ªयूटोिरयलमे सेहो एक-दोसरकÊ देखतो अिछए। मुदा जिहना जेनरल $लासमे तिहना ªयूटोिरयल $लासमे सेहो दुनूक बैइसैक ÚÀच अलग-अगल अिछए। जइसँ लगक गपो-स£प किहयो िकए हएत। ओना, अखन तक ने धीरे4 अपन अंगीत जगमोहीकÊ बुझैत आ ने जगमोहीएधीरे4कÊ बुझैए। तेहेन जुग-जमाना आिब गेल अिछ जे ने िकयो नामक टाइिटलसँ केकरो परेख सकैए आ ने जाित-प›िजसँ, केकरा एते छु¸ी छै जे अनेरेक रमझौआमे लागल रहत। नव पीढ़ीक लोक खेलाड़ी आ िसनेमा-कलाकार सबहक नामधुन करत आिक अपन बाप-पु¼खाक..! कोन मतलब ओकरा छै जे अपन बाप-पु¼खाक वंश आ जीवनकÊिबिटया अपन वंशक इितहासक संग देश-दुिनय›क इितहासकÊ बुझत। मुदा ईहो तँ बात सबहक सोझेमे अिछ जे जे जेते िजनगीक रस पीबए चाहैए ओ ओते बेचैन सेहो भेले जाइए। ओना, समाजशाm िवषयक जेनरल $लासमे पचाससँ ऊपर िवWाथ¦ अिछ, मुदा शिनयÊ-शिन जे ªयूटोिरयल $लास चलैए ओ उनटा पाठक, तँए ओ $लास माm पान-सातटा िवWाथ¦ करैए बॉंकी अिधकiश मैिटनी शो िसनेमा देखैए वा िकछु गोरे घुिम-िफर शहरे-बजार देखैए। मैिटनी शो िसनेमा देखैक कारण िटकटक कशेसन सेहो अिछए। उनटा पाठ जे ªयूटोिरयल $लासमे होइए ओ ई होइए जे आन िदन– माने

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् सोमसँ शुp धिर िश9क जे पढ़बै छैथ ओकर उ§र ओइ $लासमे िवWाथ¦सँ लेल जाइए। आइक पिरवेशमे– माने िश9ण संथानक पिरवेशमे,ªयूटोिरयल $लासक नामो भिरसक छाm सभ नइ बुझैत हएत–जखन कौलेजमे पढ़ाइये निह भऽ रहल अिछ तखन ओकर उ§र की भेटत। ªयूटोिरयल $लासक पान-सातटा िवWाथ¦मे जिहना धीरे4क तिहना जगमोहीक उपिथित अिनवाय+ ºपसँ रहैए। बॉंकी पान-सातक बीच नव-पुरान होइत रहैए। सभ िश9कक अलग-अलग स£ताहमे ªयूटोिरयल $लास होइ छैन, तँए ऐ बातकÊ िश9क सभ निह बुिझपबै छैथ। ओना, छाmो सभमे िकछु गोरेक सgबध िश9को सभ संग छैहे, तँए अपन-अपन ªयूटोिरयलमे अपन-अपन पिरिचत छाm रिहते छैन जइसँ नव-पुरान हएब सोभािवके अिछ। जिहना धीरे4 अपनाकÊ ओते सÂत बना $लास पहुँचै छल जे जे िकछु िश9क पुछतातइमे जे पढ़ौने छैथ ओकर अितिर$त अपनो िवचार राखब, तिहना जगमोही सेहो अपन तैयारीक संग $लास पहुँचै छल। ओना, ªयूटोिरयल $लासमे कम िवWाथ¦ रहने आगूक जे दुनू ÚÀच बैसैक अिछ, तहीपर दिहना भागक ÚÀचपर धीरे4 बैसैत आ बामा भागक ÚÀचपर जगमोही। समैयक िमलानी दुनूकÊ रतोक िमलानी करबैत आ ªयूटोिरयल $लासक सेहो। माने भेल एक गाड़ी पकड़ैले जिहना दूटा याmी अपन िनध\िरत समयपर घरसँिवदाहोइ छैथ जइसँ रतामे गप-स£प भलÊ निहय होइत हौनु मुदा मुँह-िमलानी तँ होइते छैन। कहैकालमे भलÊ सभ किह दइ िछऐ जे शरीरक प›च इ4ीमे जिहना मुँह भेल, आँिख भेल तिहना कानो भेल। मुदा की तीनूक जीवन िpया एÂेरंग अिछ? मुँहमे मुंगबाक सुआदसँ लऽ कऽ तेतैरक खट-मीठ आ नीमक तीतपन तकक रस भेटते अिछ, जखन िक आँिख सोझे देखैबला भेल। नीक-सँ-नीक आ अधला-सँ-अधला देख-देख आँिख कखनो कािन-कािन नोरो चुबबैए तँ कखनो िमरचाइक कड़ुपनसँ पािनय तँ बहैबते अिछ। मुदा कान तँ काने छी, खा-पीब कऽ रस चुसैक कोन बात जे आँिख जक› ने देिखये सकैए आ ने मुँह जक› सुआदे पािब सकैए,लऽ दऽ कऽ हवामे उड़ल नीक-बेजाएकÊ खालीसुिनटा सकैए। जइसँ, जिहना बिहरा अपने ताले नचैए तिहना नाच करत। मुदा ऐ सभसँ कोन मतलब धीरे4ेकÊ आिक जगमोहीए-कÊ छइ। दुनू गोरे कौलेजमे पढ़ैए, कौलेिजया संगी किहयौ आिक $लासक संगी, एक-दोसरक छी। अ ारह बख+क उमेर सेहो दुनू टिपये गेल अिछ, िकए ने खुिल कऽ खेलाएत। मुदा से निह, दुनू अपन-अपन सीमाक बीच अनुबध अिछ। ओना, दुनूक x°ो§र दुनू तँ सुिनते अिछ,तैसंग िश9क सेहो ªयूटोिरयल $लासमे सुनै छिथन जइसँ एक- दोसरक अ=ययनक गहराइ सेहो एक-दोसर बुिझये रहल अिछ। ओना, $लासमे िश9क िनध\िरत पाßयpममे जे पोथी िनध\िरत अिछ ओकरे आधार बना पढ़बै छैथ मुदा िश9को तँ िश9के ने भेला। िकयो जेतबो िसलेबशमे अिछ तेतबो ने पढ़बै छैथ आ िकयो िकयो एहनो तँ छिथए जे ओिरकासँ घी परसै छैथ। ‘ओिरकासँ घी परसब’क माने भेल िसलेबशसँ अितिर$तो पढ़ाएब, हुनका कोन मतलब छैन जे दािलक सुआद रहल िक मेटाएल। ओ तँ िसलेबशक कोन बात जे दुिनयॉंक िसलेबश आगूमे रिखये दइ छैथ। िश9केक अनुकरण ने

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् िश9ाथ¦ करत। ओहो ने वएह बुझत। भलÊ िकए ने ओ िश9ककपठनकÊ िनिण+त करए जे जिहना िश9क जुग- |Ðा छैथ तिहना जुग-4Ðो तँ होइते छैथ। तँएिश9ािथ+योकÊ तिहना ने िजनगीक बाट भेटत। ओना, िश9को अपन िसखपनसँ सीिखये नेने छैथ जे ªयूटोिरयल $लासमे अनेरे जे माथक बोझ बढ़ाएब (माथक बोझ बढ़ाएब भेल- एक-एक छाmसँ x° पुछब)तइसँ नीक जे पÈतालीस िमनटक घटीमे दस िमनट रीब-रीबेमे गेलबँचल पÈतीस िमनट, से निह तँ एक-एक छाm-छाmासँ x° पुिछ समय ससािर लेब। जे लाभ धीरे4ोकÊ आ जगमोहीकÊ सेहो भेिटये जाए। जिहना कहल जाइए जे करत-करत अöयाससँ जड़-मित सेहो सुजान भइये जाइए। मनुख तँ सहजे मनुख छी, अ¤-खाइबला आ पािन पीबैबला। घोड़ा घास खाइए तखन तँ एते िहिहआइए, मनुख तँ सहजे मनुख छी जेकर सभ जीव-जतुसँ अितिर$त गुण भेल हँसब। ªयूटोिरयल $लासक िश9क भेला x°क§\, धीरे4 आ जगमोही भेल उ§र देिनहार। ब›की सभ िश9कोक भाषण आ िवWािथ+योक ‘उ§र-भाषण’ सुनिनहार भेल। तँए खुलल वा झ›पल भेल िनण+यक§\। िकए अनेरे कोनो प9मे ठाढ़ हएत। िकए ओ x°क§\क x° अéेजत आ िकए ओकर जवाबदेह बनत। सभ ने सुिवधानुसार जीबए चाहैए। जखन अवसर भेटल तखन वएह सभ िकए छोिड़ देत। अपन उ§रमे जिहना िश9कक भाषण िसलेबशकÊ अितpमण करै छेलैन तिहना धीरे4ो आ जगमोहीओ उ§र दइते छल। तेकरा िश9क लोकैन, ªयूटोिरयल $लासक िवषय किह परी9ामे िलखैसँ परहेज करैक सलाह दुनूकÊ दैत $लास अत करै छला। दुिनय›मे xेमोक अपन रंग-ºप छइ। सात अरब लोकमे जगमोहीक जेहेन ºप धीरे4 देख रहल छल ओहन ºप धीरे4क जगमोही निह देख पेब रहल छल। दुनूक अपन-अपन नजिरयो आ दृिÐकोणो छेलैहे। मुदा ªयूटोिरयल $लासक जे िसख (अ=ययन)छल ओ दुनूकÊ जºर नव िसखपन (अ=ययनशीलता) िदस बढ़ौलक, जइसँ एक-दोसरक बीच, िभ¤ दृिÐ रिहतो आकिष+तकरबे करै छल। ओना, आकष+णोक अपन गुण-धम+ अिछ। कोनो आकष+ण ओहन होइए जइमे िवकष+णोसमान ºपमे संगे चलैए आ कोनो एहनो आकष+ण अिछए जइमे िवकष+णक माmा कम रहने हेराएल-हेराएल सन रहैए। जइसँ आकष+णे-आकष+ण बुिझ पड़ैए। तिहना िवकष+णोक तँ छइहे जे बेसी माmामे भेने आकष+णकÊ दािब दइए। जखन लोहा सन िनज¦व धातुक चुgबकीय आकष+ण ओहन होइए जे अपना सन-सन भतलोहोकÊ अपना संगमेरंिग अपन गुण-धम+सँ भिरये दइए। भलÊ ओ ओतबेकालक िकए ने होउजेतेकाल चुमकलोहमे सिट अपनो चुgबकवमे िकए ने बदैल गेल हुअए। खाएर जेतए जे होइ से तेतए हुअए। अजगर सन स›पो जखन अपन नजैरककनखी आ मुँहक सूसकारीसँ आन स›पकÊ लगमे आिन भ9े िकए ने कऽ लैत हुअए मुदा तइसँ कोन मतलब धीरे4कÊ आिक जगमोहीएकÊ अिछ। अखन तँ िजनगीक एको टपान दुनूमे सँ एको ने टिप सकल अिछ, तखन िजनगीक टपानक बाते केना बुझत।

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् जिहना धीरे4क मनमे जगमोहीक xित िज;ासा जागल तिहना जग मोहीकÊ सेहो धीरे4क xित जागल। एक रताक राही–माने एक िवषयक िवWाथ¦–भेने दुनूक मनमे एते तँ िज;ासा जिगये चुकल अिछ जे जखन दुनू गोरे एक कौलेजक एक $लासमे पढ़ै छी तखन बुिधयो-;ान ने एकरंग हुअए। एकर माने ईहो निह जे आनसँ बेसी नइ हुअए,आ ने यएह माने हएत जे आनसँ कgमो नइ हुअए। एक थानक याmीक बीच एहेन कोनो सीमा थोड़े अिछ जे सभकÊ एÂेरंग चलए पड़त। कौलेजोमे तँ तिहना होइते छै जे िकयो xथम cेणीमे उतीण+ होइए, िकयो दोसर cेणीमे आ िकयो तेसर cेणीमे। मुदा िजनगीक अ=येता अपन िजनगीक अ=याय ओहीठामसँ शुº करैक चेÐा करै छैथ जैठाम मजगूत नीवक जºरत अिछ। औझुके नीवपर ने कािÁ ठाढ़ हएत। तँए, भिवसवे§ा भलÊ जे हुअए मुदा भिवसक िनम\ता नइ छी सेहो केना नइ कहल जाएत। औझुके रोपल गाछ ने कािÁ फल देत। धीरे4ो आ जगमोहीयो एक-दोसरक जीवन पिरचय गु£त ºपसँ भॉंज लगबए लगल। मुदा दुनूक xितबिधत बाट, xितबिधत ऐ मानेमे जे जानकारी पबैमे कहॴ सीमोलंघन ने भऽ जाए,नइ तँ जगहँसी हएत। एक तँ पटनामे ने धीरे4कÊ बेसी िचह-पहचीनक लोक आ ने जगमोहीएकÊ। ओना, कौलेजो आ हाइयो कूल, सइयो-हजारो अपिरिचत चेहराक पिरिचत करबैक गर छीहे, मुदा पिरचय-पात करैक जगह तँ छी निह, छी तँ पढ़ै-िलखैक जगह। जेकर अपन िनध\िरत सीमा-सरहद अिछ।तँए, एक िसमानक बीच रिह िकयो अपनाकÊ पार-घाट लगैबतो अिछ आ लगबौ चाहैए। धीरे4कÊ िपता-पुmक बीच जे सीमा अिछ तइमे जिहना िपता जीबे4छिथन तिहना पुm धीरे4ो अिछ। माने ई जे अनेको िpया-कलापक बीच िपता-पुmक जीवन अिछए। मुदा अखन से निह। अखन एतबे जे जेतेक उिचत खच+ िवWाथ¦क छल ओ धीरे4 जिहना िनमािह रहल अिछ तिहना जीबे4सेहो अपन पुmक िहसाबसँअपन माहवारी खच× आ वतंmतो देब िनमािह रहल छैथ। मुदा ऐ सीमाक बीच धीरे4 अपन कोस+क िकताब िसलेबशक अनुसार िपताक पाइसँ कीिन नेने छल मुदा िश9कक मुहसँ अनेको अय िकताबक नाओं सुिन मन तँ उछटबे कएल। जइसँ धीरे4 xितिदन एक घटा कौलेजक रीिडंग ºममे बैस नव-नव पोथी पढ़ैतरहल अिछ। कौलेजक रीिडंग ºम, पुतकालय आ काय\लय तीनू कोठरी एÂे मकानमे जुड़ल अिछ। तीनूक बीचक देवालमे शीशा लागल अिछ जइसँ एक दोसर कोठरीकÊ नीक जक› देखल जाइए। धीरे4 रीिडंग ºममे कुस¦पर बैस टेबुलपर तीन-चािरटा िकताब रिख एकटाकÊ उनटा रहल छल, तहीकाल जगमोही पुतकालयक पैछलािकताब जमा करैत ऐगला लइले आलमारी देखए लगल। ओना, पुतकालयक सभ पोथी रिजÐरमे अंिकतऐछे मुदा ओदोसर िवWाथ¦ देख रहल छल। नमगर-चौड़गर रीिडंग ºमक कोठरी, दज+नो आलमारी िकताबसँ सजल अिछए। एकसँ दू आलमारी xित िवषयक िकताबसँ सजौल फुटा-फुटा लगौल अिछ। बीचमे बइसैले कुरसीक संग टेबुल सेहो लगले अिछ।

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् जइसँ िबनु बँटवारा केनहुँ बैइसैक जगह बँटाइये गेल अिछ। माने ई जे आलमारीक लगेमे िकयो बैस कऽ पढ़बकÊ नीक बुझबे करैए। धीरे4 अपन समयानुसार रीिडंग ºममे िकताब सभ टेबुलपर रिख कलमसँ कॉपीमे िलख पुन: िकताब उनटबैतरहए। पुतकालयक आलमारीमे जगमोही िकताब खोिज रहल छल। पुतकालयो आ रीिडंगो ºमक आलमारी हाथ-हाथ भिरक दूरीमे सजल अिछ। पुतकालयक दुनू आलमारी खोिल जगमोही िकताब खोिज रहल छल आ दोसर िदस धीरे4 दुनू आलमारी खोिल िकताब िनकािल टेबुल सजौने छल। दू आलमारीक बीचक जे जगह अिछ ओइ बीच होइत जगमोही धीरे4कÊ देख रहल छल। तही बीच पुतकालयक िकछु िकताब गड़बड़ भऽ गेल रहै तेकर कहाकही ऑिफसमे उठल। मुदा िकताब तँ िकताब छी, आिगयोमे जरैबला, पािनयोमे गलैबला आ िदबारो-िदgमककÊ खाइबला, तैठाम अनेरेक ने कहा-कही भेल। खाएर..,जेकरा माए-बाप जम दइए से तँ माए-बापकÊ िबसैर जाइए,ई तँकौलेजक पुतकालयक िकताब छी,एकरके माए-बाप छै!अनेरे के एते आलमारीकÊ उधेसत। ओना, देवालक बीच शीशा लगल रहने जिहना जगमोही पुतकालयमे ब¤ अिछ तिहना रीिडंग ºपमे धीरे4ोब¤े अिछ मुदा देख रहल छल दुनू एक-दोसरकÊ। ओना, अखन तकक तरपेसकी जानकारीमे जिहना जगमोही अपन मामा गामक धीरे4कÊ बुझैततिहना धीरे4ो अपना गामक भिगनी जगमोहीकÊ बुझैत। मुदा अखन धिर एको िदन बात-चीत निह भेल।..पुतकालयक काय\लयमे कहा-कही भेने सबहक िधयान ओइ िदस भेल आ जगमोहीक िधयान धीरे4 िदस भेल। शुºमे जगमोही मोट-मोट िकताब धीरे4क टेबुलपर राखल देख थोड़ेक सहमल जºर मुदा एते तँ आम-शि$त जिगये गेल छेलै जे धीरे4 मामा गामक छी। चाहे तँ नाना दािखलमे हुअए वा मामा दािखलमे वा भाइक दािखलमे, मुदा अंगीत तँ छीहे। जँ सेहो नइ छी तैयो एक कौलेजक एक $लासक आ एक िवषयक संगी तँ भेबे कएल। जखन एÂे िवषयक संगी छी तखन जीवनक िpयो-कलाप तँ एÂेरंग ने हएत। केना कोयलाखानक cिमक अपनाकÊ लेबर $लास किह एकठाम बैसार-उसार करैए। केना खेतक धान रोपिनहार धनरोपिनया कहबैए। कह› केतौ मद+-औरतक भेद छइ। एक िदस मातृकक सgबध, दोसर िदस कौलेजक सgबध अिछए, तैसंग एक उमेरक िसयान सेहो दुनू गोरेछीहे। तखन गप-स£प करैमे बाधा की? चोरनुकबा xेममे कोनो दम होइए, ओ तँ चोर सबहक िpयाभेल। xेम तँ साव+भॱम अिछ।िवचारक xेम, बेवहारक xेम, िजनगी जीबैक xेमइयािद, जे लोकचोरा-नुका कऽ िकए करत। दू आलमारीक बीचक रता देने शीशाक देवाल पार करैत जगमोही धीरे4क अनुकरण करए लगल। धीरे4 जिहना िकताबमे आँिख गािड़, समु4ी हीरा जक› प›ित खोिज कॉपीमे नोट कए रहल छल, तेकर हू-ब-हू फोटो<ाफी जगमोही अपन बुिधक डायरीमे उतारए लगल। दस िमनटक फोटो<ाफीक रील जगमोही मनमे गिढ़ नेने छल।

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् संजोग भेल, पॉंच बािज गेल। आब सभ िकछु बद हएत। जगमोहीकÊ दूटा िकताब लेबाक छेलै जे इसू करा चुकल छल।धीरे4 आलमारीमे िकताब रिख कॉपी नेने बाहर िनकलल। ओना, लोको पतराएले छलइ। माm दू गोरे कौलेजक टाफ आ चािर-पॉंचटा िवWाथ¦ अिछ। पुतकालयक सीढ़ीसँ िन:च› उतैरते जिहना धीरे4क नजैर िखर जगमोहीपर िछछलल तिहना जगमोहीक नजैर सेहो धीरे4पर िछछलए लगल। ओना, दुनूकÊ अपन-अपन नैितक अनुशासनक िवचार मनमे दौिड़ये रहल छल। अही गुन-धुनमे दुनू िबना िकछु बजने-भुकने कौलेजक अितम गेट लग पहुँच गेल। चौब¸ी जगह, तँए के िकमहर जाएत तेकर जानकारी दुनूकÊ अपन- अपन।ओना, एहेन कोनो xितकूल मौसम निहयÊ अिछ जे दुनूक बीच गप-स£प नइ भऽ सकैए।मुदा <ामीण पिरवेशक उपज दुनू, माने दुनूक जम गामदेहातमेभेनेदुनूक मनमे गामक गमैया सgबध सेहो बिनयÊ गेल अिछ।तँए दुनूक बीच िकछु ओझरौठअिछए। जे ने जगमोही बुिझ सकल अिछ जे धीरे4क संग कोन तरहक सgबध मािन बाजल जाए, आ ने धीरे4े से बुिझ रहल अिछ।तैसंग दुनूक मनमे ईहो बेवधानछैहे जे अपनासँ उमेरमे जेठ मानल जाए वा छोट। तेकर कारण दुनूक अपन-अपन अिछ। धीरे4क मनमे नचै छै- जखन दुनू गोरे कौलेजक एक $लासमे पढ़ै छीतखन ई मािन लेब जे जगमोहीक उí हमरासँ कम हेतैई तँ बालबोधक िवचार भेल!िकएक तँ जेतेक समय हमरा ‘अ-आ’ सँ अबैमे अखन धिर लागल तेते तँ जगमोहीकÊ सेहो लगल हेबे करत, तखन छोट मानल जाए वा पैघ? आइ जँ कौलेजमे एको $लास आगू-पाछू रिहतॱ तखन तँ एकटा देखौआ सीमा भेटैत, जिहना कोनो गामक जमीनक नापी लेल पैछला सवäक कोनो पहचान भेटला बाद अमीनकÊ कोनो खेतक आिड़-मेड़ बनबैमे असान होइए तिहना। मुदा धीरे4क मनमे एकटा िवचार उठल। उठल ई जे जइ गाममे बािढ़क कारणे वा भुमकमक कारणे िसमानक पहचान मेटा गेल रहैए तँ ओइ सीमाकÊ पकड़ै तँदोसर गामकिसमानकसहारा लेले जाइए। जगहमोही जखन अपन पैछला इितहास िदस नजैर िखरौलक तँसाफ-साफ देखए लगल जे जिहया पॉंच बख+क रही तिहये बाबा लोअर xाइमरी कूलमे नाओं िलखा देलैन, तिहयासँ ने किहयो फेल केलॱ आ ने कोनो $लासे फािन कऽ टपलॱ।मनमे उठलै- तिहना ने धीरे4ोकÊ भेल हएत। बीचमेमातृकक सgबध सेहो अिछ, जँ नानाक सgबधमे हएत आ तखन जँ भैयारीक सgबधे बाजबईहो तँ नीक निहयÊ हएत। आ तहूमे जँमाए बुझती तखन तँ ओहो गनजन करबे करती..! ओना, धीरे4ोक मन सकताइये रहल छल जे अनजान-सुनजान महाकYयाण। गप-स£पक पछाइत जखन सgबधक असल पिरचय हएत तखन अपन िवचारकÊ सुधािर लेब। तिहना जगमोहीक मन सेहो रसे-रसे ओहन सीमापर पहुँच गेल।तँए दुनूकÊ मुँह खोलैक अनुकूल मौसम बिन गेल। एक तँ ओहुना जखन संगे-संग पढ़ै छी तखन बजा-भुकी करैमे कोन एहेन पहाड़े आिक समु4े बीचमे बाधक अिछ।

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् गेटपर पहुँच धीरे4 जगमोही िदस तकलक। ओना, जगमोही सेहो धीरे4े िदस तािक रहल छल।दुनूक आँिख मीिल गेल। आँिख िमिलते दुनूक मुँह टुिकयाएल। जिहना प§ा-कलश वा फूल-फलक टुसी चिलते अपन सुगध िनकालए लगैए तिहना दुनूक मनसँ िनकलए लगल...। जगमोही बाजल- “डेरा केतए रखने छी?” जिहना जगमोही बाजल तिहना धीरे4 उ§र देलक- “ऐठामसँ साए मीटर हएत।” धीरे4क बात सुिन जगमोही घड़ी देखलक। पॉंच बािज कऽ पॉंच िमनट भेल छेलइ। मने-मन अपन समैयक अँटकार लगौलक तँ बुिझ पड़लै आधा घटा समय बीचमे खाली अिछ। जगमोहीक ऐगला समैयकसीमा िनध\िरत छेलै, िकएक तँ सिचवालयमेजगमोहीक िपता-रामलखन काय+रत छिथन जे िनय छअ-पौने छअ बजे तक डेरा अबै छिथन। िपताजीकÊ अबैसँ पिहनिह जगमोही अपन कौलेजक काज िनवटा डेरा पहुँच जाइए। तैबीच जगमोहीक माइयो बजारक काज कऽ आिब जाइ छिथन। जगमोही बाजल- “रते-रते चिल कऽ अपन डेरा देखा िदअ। दोसर िदन समय पेलापर आगूक िकछु गप-स£प करब।” सोÁोअना जगमोहीक बात निह सुिन धीरे4 िब:चेमे बाजल- “चलू, संगे-संग चलबो कº आ अह› अपनो डेराक जानकारी िदअ।” साइए मीटरपर धीरे4क डेरा, गपे-स£पमे दुनू गोरे पहुँच गेल। डेरा लग ठाढ़ होइत धीरे4 असमंजसमे पिड़ गेल। असमंजस ई जे शहर-बजार छी। ऐठाम सभ तरहक xितयोिगता अिछ! मुदा लगले मनमे उिठ गेलै जे अखन िवWाथ¦ जीवनमे छी, तँए अखन व§+मानक िवचार करब अिछ निह िक भिवसक। धीरे4 बाजल- “डेरामे चाह-ताह तँ नइ बनबै छी मुदा जलखैक ओिरयान तँ रिहते अिछ, चलू पिहने जलखै कऽ लेबतखन जाएब।” ओना, दुनूक मन गवाही दइतेरहै जे कौलेजसँ लऽ कऽ गाम धिरक सgबध अिछए, तखन खेबे-पीबेमे कोन हज+...। जगमोही बाजल- “डेरा तँ भीतर जा कऽ देख लेब मुदा जलखै नइ करब। बेसीसँ बेसी एक िगलास पािन पीब लेब।” दुनू गोरे कोठरीमे पहुँचल। कोठरीमे कुरसी निह, छोट-9ीणकोठरीमे धीरे4क पूण+ िजनगी समटल अिछ। एÂे चौकीपर बैस धीरे4 बाजल- “गाममे ऐबेर आम खूब फड़ल अिछ, अमैया छु¸ी हेबे करत...।”

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् जगमोही बाजल- “अह›क घर xेमनगर छी आ हमरो...।” ‘हमरो’ सँ आग› निह बिढ़ जगमोही चुप भऽ गेल। अपन गामक नाओं सुिन धीरे4 बाजल- “अहूँक मातृक तँ xेमनगरे ने छी?” जगमोही- “आइ एतबेपर रहए िदयौ। पनरह जूनसँ अमैया छु¸ी भऽ रहल अिछ, माइयो नैहर जेती, हुनके संग बीस जूनकÊ अह›क गाम पहुँच जाएब।” मुकी दैत धीरे4 बाजल- “हमरा गाम पहुँचब आिक अपन मातृक?” जगमोही- “अह› जे बुिझऐ...।”

[i] बटसािवmी [ii] मेहनत करैबला

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् गढ़-नािरकेल उपयास -mयीक पिहल उपयास "सह|शीष\ " क बाद दोसर उपयास गजे4 ठाकुर सहमद\ १ हमर नाम छी……… .. आ गाम “गढ़ नािरकेल ” गढ़-नािरकेल उपयास -mयीक पिहल उपयास "सह|शीष\ " क बाद दोसर उपयास गजे4 ठाकुर सहमद\ १ हमर नाम छी……… .. आ गाम “गढ़ नािरकेल ” शुp िदन ऑिफससँ दस बजे राितमे घुरलहुँ तँ डेरा पहुँिचते बेटी वागत केलक। बुझा गेल जे ºसल अिछ। पुछिलऐ की भेल तँ ओ मोन पाड़लक जे अझुका िसनेमा देखबाक xो<ाम छलै। हमर एिह जवाबपर िक देरी भऽ गेल अिछ, थाकल छी ओ सोफापर मुँह घुमा कऽ बैिस गेल आ कथुक उ§रे नै िदअए। किनय›कÊ कहिलयिह जे कािÁ िसनेमा चलै चलब से नै हेतै, ८-११ बला शो तँ खतम भऽ गेलै। ओ बेटीसँ पुिछ कऽ ओतिहयेसँ िचकिर कऽ कहलिह जे अह› अझुका xोिमस केने रिहऐ। हँ xॉिमस तँ केने

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् रिहऐ, तकरा पूरा तँ करैये पड़त। फेर मोन पड़ल जे सरकार नाइट शो देखेबाक अनुमित िथयेटर सभकÊ देने छै, से आइ कािÁ ११ सँ २ बजेक शो देिख सकै छी। बूक माइ शो साइटपर ऑनलाइन िटकट कटेलॱ आ से देिख बेटीक ¼सब खतम भेलै। बेटा, किनय› आ म› तीनू गोटे तैयार भऽ गेला आ िसनेमो जे पिड़ लागल से सनगर। सालमे एÂे दू टा तँ नीक िसनेमा बनै छै बॉलीवुडमे। दू बजे राितमे िसनेमा देिख कऽ घुिर रहल छी आिक गाड़ीक लाइट एकटा बड़का होिड+ंगपर पड़लै, आ ओहने बहुत रास होिड+ंग अबैत गेल। ओइ होिड+ंग सभपर रा¹यक मिहला मुÕयमंmीक कनी अगरायल सन अभयमु4ाबला फोटो छलै। ओना तँ बेटीसँ बेशी रिनंग कमेyÅी हमहॴ करै छै, रताक सभटा चीजक िवतृत िववरण दैत गाड़ी चलबै छी, कखनो काल जखन दुनू हाथ छोिड़ िखसा आगू बढ़बै िछऐ तँ ओ टोिकतो अिछ आ सड़कक सभटा कानून, रेड- लाइट, <ीन लाइट, जेÚा pॉिसंग, सभटा ओ बुझबऽ लगैए। मुदा ऐ होिड+ंग सभकÊ हम अनठा देिलऐ जे कहबै तँ उनटे सुना देत जे ई सभ हमरा बुझले अिछ। मुदा ऐबेर से नै भेल। शीसा खोिल कऽ ओ अचरजसँ हमरासँ पुछलक- “ई ककर फोटो िछऐ डैडी?” “ईहो नै बूझल अिछ, फलना दीदी मुÕयमंmीक फोटो िछयिह ई”। “मिर गेलिखह? किहया?” कनी काल तँ हमरा बुझबामे नै आएल आ जखन आयल तँ ततेक हँसी लागल जे गाड़ी चलेनाइ मुिÄकल। म› किनय› आ बेटाकÊ कहिलयिह जे ई िकताबमे पढ़ैए जे मुइलाक बाद बड़का फोटो आ मूित+ बनै छै से एकरा भेलै जे मिर गेलीह मुÕयमंmी आ कूलमे एÂो िदनक छु¸ी नै भेटल, आ हमरा संगे ओहो सभ पेट पकिड़ कऽ हँसऽ लगला। बेटी हतxभ सभकÊ देखैत रहल। ओ हमरा िदस इशारा कऽ कय टीयिरंगपर =यानदेबा लऽ कहलक तँ हम गाड़ीकÊ सड़कक कात लगा कऽ गाड़ी ठाढ़ कऽ लेलॱ। “सूतल छलॱ की, उठा देलॱ।”- फोन घनघनाइए आ ओइमेसँ अबाज बहराइए। “नै, एते जYदी कह› सूतै छी, िक कोनो जºरी गप अिछ की?”, दू बजे राित कऽ ऑिफसक हािकम िबना काजेक फोन िकए करत, से जकरा इंिटं$ट कहै छै तिहना पुछा गेल छल। “एgसक Åॉमा सेटर आिब सकै छी, आउ तँ फेर आग› गप हेतै”।

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

डेरा पहुँिच, कपड़ा पहीिर कऽ ऊबरकÊ बजबै छी, अपन गाड़ी लऽ जायब तँ पािक+ंग भेटत आिक नै से सोिच कऽ। गेटपर उतिर कऽ जखने Åॉमा सेटरक भीतर जाइ छी तँ अबाज अबैए- “सर, एgहर छी हम”। हमर इंपे$टर सहैब गालकÊ हाथसँ साटने हमरा शोर करै छिथ। “अहूँ एतै छी, हािकम बजेने अिछ, तÊ हम आयल छी”। “हमरे दुआरे बजेने छिथ, अटैक कऽ देलक गुyडा सभ”। “कतऽ, कोना?” ओ अपन गालपरसँ हाथ हटबै छिथ तँ गाल दू टुकड़ी दुनू िदस भेल देखाइत अिछ। “ह›, ह›”। ओ धड़फड़ा कऽ हाथसँ गालकÊ सािट लै छिथ। हम कहै िछएिह- “अिहना केने रहू, अह›कÊ अपन गाल देखा नै पिड़ रहल अिछ तÊ अह›कÊ पता नै अिछ जे ….”। चुप भऽ जाइ छी। कते कालसँ एतऽ छी। एक घyटासँ छी। जखन आइ.जी., डी.आइ.जी. सहैब सभ कनी काल पिहने एला तखनसँ कनी =यान देलकहÊ। ईहो सभ की करतै, देखै नै िछऐ भीड़। एकटा डॉ$टर हुनका बजाकÊ लऽ जाइ छिह एकटा कोठलीमे। ओइ कोठलीक बाहर सभ हािकम जमा छिथ, सभ गgभीर मु4ा बनेने छिथ। लोकल थाना बला सभ सेहो आिब गेल अिछ। थाना बला सभ सहिट कऽ हमरा लग आिब गेल। दरोगाजी हमरा अपन मोबाइल िनकािल एकटा वी.डी.ओ. देखबैत छिथ। “देखू ऐ गुyडा सभकÊ, हमरेपर पाथर फेिक रहल अिछ”।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् हवलदार सहैब िटपलिखह जे ओइ सारकÊ हुजूर जेल पठा देलिखन मुदा गजेरी-चरसी सभ छै। कोनो डरे- भर नै होइ छै। हुजूरे कऽ मोटरसाइिकल थानेपरसँ चोरा लेलकिह, ओकर अखिन धिर पते नै चलल छै। हम दरोगाजीसँ पुछिलयिह- “अह›कÊ की लगैए, की ई लॉ एyड ऑड+रक गप छै आिक ऑिफसक काजसँ एकर कोनो सgबध छै”? ओ कहै छिथ जे मािमलामे पÀच छै। तहकीकात तँ जबरदत ढंगसँ हेतै। मुदा ओ सेहो कहै छिथ जे मोटा- मोटी ई लॉ-ऑड+रेक समया िछऐ। मुदा देखू… गाल सीिब देल गेल छिह। इसपे$टर साहेब हमरा कहै छिथ जे गाल तँ दू टुकड़ी भऽ गेल छलै। सीलाक बाद डॉ$टर एना देखेने छलिह। सभ हािकम अपना-अपना घर िदस िबदा भेला। सरकारी गाड़ी इंपे$टर साहैब कऽ लऽ गेलिह आ हम ऊबरकÊ फोन लगेलॱ। ………………………………………………………………………………………………………… . अिगला िदन भोरे-भोर ऑिफस गेलॱ तँ अद+ली इशारामे कहलक जे एकटा इनफॉम+र आयल अिछ। हम कहिलऐ जे ककरोसँ भÊट िकए नै करा देिलऐ, एतेक गोटे ऑिफसमे अिछ तँ कहलक जे कहैए जे अहॴसँ भÊट करत, कहैए जे हमर इलाकाक हािकम छिथ, अनकापर ओकरा भरोस नै छै। “हमर इलाकाक छी, कतुÂा छी, नामो-गाम बता देलक की?” “नाम तँ नै बतेलक मुदा कहलक जे गामक नाम किह िदयौह हािकमकÊ, अपने बजा लेता। गामक नाम कहलक िविचmे…. िकदन तँ “गढ़ नािरकेल”!”

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मानुषीिमह सं ृ ताम् डॉ. ललन कुमार झा म.म. उमापित ओ शुि} िनण+य म. म. उमापित िवरिचत‘शुि} िनण+य’ मैिथल धम+शाm िनवध <थमे महवपूण+ थान रहैत अिछ। िवµान् लोकिनक µारा आदृत एिह <थमे वण\cम धम\नुसार जनन, मरणाशौच आओर ओकर शुि} सार ºपमे िन¼िपत कएल गेल अिछ। शाmमे ~यापक दृिÐसँ सकल देशाचारक अनुसारÊ ~यवथा देल जाइत अिछ जािहमे अपन देशक ~यवथाक अनुसारÊ आचरण करए इएह मय\दा अिछ। आन देशीय ~यवथा शाmानुकूल भेलोपर या¹य अिछ। एिह <थमे शाmानुकूल सेहो कनेको ~यवथा िमिथलाक ~यवहारक िव¼} अिछ जकर िट£पणी करणक चच\ सेहो कएलिह अिछ आओर समाधान सेहो िनकालल गेल अिछ। एिहसँ xकृत <थक उपयोिगता बिढ़ गेल अिछ। कतए अशौच होइत अिछ कतए निह होइत अिछ, कतेक समयमे आओर कोन िविधसँ ओकर शुि} होअए, एिह सgबधमे ई पुतक िनÒयत: xामािणक अिछ। एिहठाम अनेक धम+शाmक बचनक जालकÊ छोिड़ कऽ सार ºपसँ एक िनण+यक उपथापना कएल गेल अिछ आओर ओकरा िवषयमे अनेक िवषय सेहो सं9ेपमे कहल गेल अिछ। xकृत <थमे िनóिलिखत िवषयक xितपादन भेल अिछ- चातुव+yय\शौचम्, सिपyडािदल9णम्, अशौचसंकार, िवदेशयाशौचम्, बालापशौचम्, यशौचम्, गभ+|ावाशौचम्, मृयुिव शेषाशौचम्, सिपyडाWशौचम्, िनह\णाWशौचम्, अथािधकािरण:, अनिधकािरण:, उदाकानह\/, सयािसनाम् एकोिदÐ िवचार:।

चातुव+yय\शौचम् :-

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मानुषीिमह सं ृ ताम् सिपyड ÚÛणक मृयु भेलापर ÚाÛण दशशितमे शुि} xा£त करैत अिछ। एिह तरहÊ 9िmय बारह, वैÄय प4ह तथा शु4 एक मासमे शु} होइत अिछ। चाº वण+मे सकुYयक मरलापर तीन राित, कुलजक मरलापर पि9णी तथा गोmजक मरलापर नान माmसँ शुि} होइत अिछ।

सिपyडािदल9णम् :- ‘सिपyडा: स£तपु¼षाव=य: - एकर भाव पÐ करैत िट£पणीकार cी कृtण ठाकुर कहैत छिथ जे बीजी पु¼षसँ आरgभ कऽ स£तम पु¼ष पय+त सभ संतितवला तथा सतितक सिपyàय होइत अिछ। अपन वंशक स£तम पीढ़ीसँ बादवला दश पु¼ष धिर सकुYय कहबैत अिछ। ओकर पÒात् जम आओर नामक ;ान भेला धिर कुलज कहबैत अिछ। दश- पु¼षातर गोmज माm कहबैत अिछ। कुमािर कयाक सािपyàय िपताक संग तथा िववािहताक पितक संग होइत अिछ।

अशौचसंकार :- दस िदन पय+त अशौचक अविधमे पॉंचम िदन पय+त सजातीय दस िदवसीय अशौच आिब जाए तँ पूव+ अशौचक संग ओकर शुि} होइत अिछ। ओकर पÒात् नवम िदन धिर जँ इएह िथित आबए तँ िµतीय अशौचातक संग ओ यु$त भऽ जाइत अिछ। दसम िदन जँ पुन: सजातीय अशौच भऽ जाए तँ ओिह िदनक बाद दुइये िदनमे शुि} भऽ जाइत अिछ। दशम िदन राित शेष रहलापर अ¼णोदय बेला धिर जँ अशौच xा£त होअए तँ सूय×दयक पÒात् तीन राितक शुि} होइत अिछ। एिह तरहÊ 9िmयािदक अशौचापगमन होइत अिछ। जननाशौचक अतसँ जननाशौच समा£त होइत अिछ, भनिह अYपेिदनमे मरणाशौचात िकएक निह होअए।

िवदेशयाशौचम् :- िबनु बीतल अशौच कालाविधमे िवदेशथ ~यि$तक मृयुक सूचना xा£त भऽ जाए तँ जतेक िदन बँचल अिछ ओिहमे अशौचात भऽ जाएत। सgपूण\शौच कालक ~यतीत भऽ गेलापर छ: मासक भीतर सिपyडण मरणक सूचना भेटए तँ तीन राितमे शुि} होअए। नवम मास पय+त एक राित, ओकर बाद एक वष+ यावत् एक िदन-राित तथा वष\नतर नानोदक दान माmसँ अशौच समा£त भऽ जाइत अिछ। एक िदनमे जािह थानक समाचार xा£त निह होअए ओ िवदेश कहबैत अिछ। सािठ योजन (240 कोस)क दूरीवला देशातर कहबैत अिछ। सािठ योजनक अöयतर: सेहो भाषा, भेद-पहाड़, महानदी xभृित ~यवधान भेलापर देशातर कहाबए लगैत अिछ। ओिहठाम मृयु भेलापर सW: शौच होइत अिछ।

बालाWशौचम् :-

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् छ: मासक भीतर बालकक मृयु भेलापर सW: शौच होइत अिछ। स£तम मासक आरgभ भऽ गेलापर तथा दुइ वष+ धिर ÚाÛणमे अहोराm अशौच लगैत अिछ। उपनयनसँ पूव+ मृयु भेलापर तीन राित अशौचक लेल मानल जाइत अिछ। 9िmयमे सात माससँ दुइ वष+ धिर मृयु भेलापर तीन िदन, तीनसँ छ: वष+ धिर छ: िदन आओर एकर बाद बारह िदन पय+त अशौच होइत अिछ। वैÄयमे सात माससँ दुइ वष+ पय+त मरलापर तीन िदन ओकर वाद पॉंच वष+ धिर मृयु भेलापर नौ िदन आओर ओकर वाद प4ह िदन अशौच रहैत अिछ। शु4मे सात माससँ दुइ वष+ धिर पॉंच िदन ओकर बाद सोलह वष+ धिर अिववािहतक मृयु भेलापर बारह िदन, िववाह भऽ गेलापर आठमे वष+सँ मासाविध अशौच माय अिछ। एिह तरहÊ कयाशौचक ~यवथा देल गेल अिछ।

यशौचम् :- सम वण+मे दुइ वष+क कयाक मृयु भेलापर सW: शौच होइत अिछ। ओकर बाद िववाह पय+त एक अहोराm तथा पितक कुलमे सgपूण+ अशौच लगैत अिछ। वागद§ा कयाक मृयु भऽ गेलापर पित आओर िपता दुनू कुलमे िmराm अशौच होइत अिछ। म. म. उमापित िववािहताक िपतृ कुलमे मरब अथवा xसव कएलापर माता-िपताक लेल िmराm अशौच मानलिह अिछ जँ साgxितक मैिथल ~यवहारानुसार मातामह िपतामह कुलमे पड़एवला सभक लेल िmराmाशौच माय अिछ। एक पिरवारमे रहएवला सहोदर, वैमाmेय अथवा चाचाक पुmक लेल एक राmाशौचक नाम अिछ। िपताक आcमसँ िभ¤ रहएवला पुmक लेल अशौच निह मानलिह अिछ :- ‘िपतृिभ+¤ा cमवािसनi पुmादीनाम् अशौचं न भवित।’ कयाक गोm पािण<हक गोmे होइत अिछ। मुदा पािण<हण भऽ गेलापर जँ स£तपदी, अÄमारोहण समा£त भेलासँ पूवä कया वलात् दोसर µारा उपहरण कऽ लेल जाइत अिछ तँ वामीक गोm पािण<हणक गोm मानल जाएत। पािण<हण आिद वैवािहक कम+ समा£त भेलासँ पूवä बलाकारक µारा अपृत जाधिर ओकर xसव निह भऽ जाइत अिछ ताधिर िपतृ गोmे माय रहैत अिछ। xसबक पÒात् पूव+ कृत वामीक xसव मरणजय िmराmाशौच होइत अिछ।

गभ+|ावाशौचम् :- गभ+ mाव भऽ गेलापर सेहो ÚाÛणािद वण+क लेल अशौच कहल गेल अिछ। मुदा xितकूल साgxितक समयमे परgपराक pमश: लोप भेल जा रहल अिछ।

मृयुिवशेषाशौचम् :- साgxितक समयमे असमय मृयुक घटना घिट रहल अिछ, जकर अशौचात दशमे िदन होइत अिछ। मुदा उमापित एकरा िवषयमे िवशेष ~यवथा देलिह अिछ जकरा अनुसारÊ शौच आचमनािद काजमेवृ} जे

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् असा=य रोगसँ <त अिछ; मरणक इ:छासँ अिjन-जलािदमे xवेश कऽ मृयु xा£त कऽ जाइत अिछ, एहन सिपyडक मृयु भेलापर िmराm अशौच कहलिह अिछ। तकाल अिjन आिदमे xवेश कएलोपर मृयु निह भऽ कऽ बादमे मृयु भऽ जाइत अिछ तँ िmराm माmक अशौच कहल गेल अिछ। रोगािदक कारणÊ अथवा पुmािद शोकािमभूत भऽ जँ केओ जलमे xवेश कऽ मिर जाए तँ ओकर अिjनदाह तथा तजय अशौच सेहो िनिष} कहलिन अिछ। मुदा असावधानी अिjन, वÑजािदसँ मृयु भऽ जाए तँ सgपूण+ अशौच मानल जाएत। मुÂा- मुÂी, शm शूय झगड़ामे मृयु भऽ गेलापर सW: शौच कहलिह अिछ। एिह तरहÊ िनवधकार अनेक xकारक मृयुमे अशौच निह मानलिह अिछ। मुदा आजुक समयमे दशिदनमा शौचक ~यवथा देखाए पड़ैत अिछ।

सिपyडाअशौचम् :- शुि} िनण+यमे ‘सिपyडमरणे दशाहमशौचं’ ई धम+शाmीय तव सव+m आदृत अिछ, मुदा िस}ात माmसँ।सकुYयमरणे िmराmम्। ;ाितमरणे पि9णी। गोmजे मृते नानमाmम्- तँ वृ} मुखसँ सुनल दतकथा जेना लगैत अिछ। उमापित आचाय+ मरणे तसंकारक§ु+: िशtयय दशराmम्। यिद संकारं न करोित तदा िmराmम्। आचाय+ पîीमरणे तपुmमरणे गु¼कुलियतय िशtयय िmराmम्- सेहो धम+शाm <थो$त माm लगैत अिछ। वतुत: आइ आचाय+ होएब आओर केश वपन किठन िवषय अिछ। एिह लेल एहन िथितमे िवचार करब xासंिगक निह रिह गेल अिछ। मुदा उमापित आन जािह िबदुपर िवचार कएलिह अिछ ओिहपर =यान देब सामािजक ºपसँ आवÄयक अिछ। उदाहरणक लेल <थकार मातामहक मृयु भेलापर दौिहmक लेल िmराm मातामहीक मरलापर पि9णी, मामा, मौसी, मिमयौत, दौिहm, भािगन इयािदक मृयु भेलापर पि9णी अशौचक िवधान कएलिह अिछ। मुदा मातामहकÊ छोिड़ आनक िवषयमे जे प9 राखल गेल अिछ से आइ xचिलत निह अिछ।

िनह\णाWशौचम् :- धम+वृि}सँ अनाथ मृत ÚाÛणक शवकÊ उघब आ अयेिÐमे भाग लेलापर नान माmसँ शुि} कहल गेल अिछ, मुदा सgxित ईहो ~यावहािरक निह अिछ। एतए ÚाÛणािद कोनो वण+कÊ िmराm अशौच लगैत अिछ। ओना राजनीितक ~यि$तक मरलापर, शव उघव एवं संकारमे भाग लेलापर केश कत+नक ~यवथा िशिथल देखाए पड़ैत अिछ। दहािदक पÒात् मृत सgबधीक घरपर रहब तथा िस}ा¤ खएला पर िmराm अथवा दश िदनमे शु} होइत अिछ।

अथािधकािरण :-

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मानुषीिमह सं ृ ताम् मृत ~यि$तक तीन िpया होइत अिछ- पूव\, म=या आओर उ§र। दाह संकारसँ आरgभ कऽअशौचात धिर िपyडदानािद िpया पूव\ अिछ। अशौचातक पÒात् सिपyडीकरणक पय+त म=यमा िpया अिछ तथा ओकर पÒात् एpोिदÐािद िpया उ§रा कहबैत अिछ। एिहठाम xाचीन ~ यवहारानुसार तेरहो पुmक अिधकार कहल गेल अिछ। मुदा टीकाकार cी कृtण ठाकुर कहलिह अिछ एिह किलयुगमे औरस, पुिmकापुm, दे§क आओर कृिmमे पुmकÊ cा} करबाक अिधकार अिछ। एिह चाºक अितिर$त पुmक cा}ािधकार सgमत निह अिछ। शू4मे पौनभ+व (अयसँ िववािहताक पुm) पुmक सेहो अिधकार देखाओल गेल अिछ- “कलौ औरस- पुिmकापुm- द§क- कृिmमाणामेव- cा}ेऽिधकार:।” एत:चतुÐयिभ¤ा: पुmा ÚाÛणैन+ क§+~या: िनषेधात्। अm शू4य पौनभ+वपुmोऽ~यिधकारीित िवशेष:।। -शुि} िनण+य पृ.- 45 जे mी पिरय$त अिछ अथवा जकर पितक मृयु भऽ गेल अिछ अथवा वे:छासँ जे पित छोिड़ दोसर पु¼षक भाय\ बिन कऽ पुmोप¤ कएलक अिछ से पौनभ+व नामक पुm अिछ।

अनिधकािरण :- पितत, वेदक xामािणकताकÊ वीकार निह करएवला, अपन जाितसँ िभ¤, सgपि§ चोरी करएवला, समयातीत उपनयन करएवला, आलय वा अc}ासँ वकम+:युत, मW पीबएवला, अपन गभ+ तथा वामीसँ 4ोह कएिनहािर mी cा}िधकारी निह होइछ।

उदाकानह\ :- अकृत संकार, वेद िनिष} सयासी, मWपायी सयासी पुmािद मृतक िpयाक हेतु अयोjय होइत अिछ।

संयािसनाम् एकोिछÐ िवचार :- सयासीक पुmक µारा सiवसिरक एकोिदÐ पाव+ण आöयुदियक तीथ+ cा} क§+~य अिछ। एिह मतक अनेक िवरोधी वचन xा£त होइत अिछ। जेना- “एकोिछÐं न कुवॴतं संयािसनi चैव सव+दा। अहयेकादशे xा£ते पाव+णंतु िवधीयते।। एकोिछÐं यतेन\ित िmदyड <हणािदित। सिपyडीकरणाभावत् पाव+णcा}िमyयते।। संसास <हणादेव xेतवं नैव जायते।।”

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मानुषीिमह सं ृ ताम् - शुि} िनण+य पृ.- 49 एिह वचनसँ सयासी लोकिनक cा} सेहो होइत अिछ। मृितकार शातातप सयासी cा} सेहो िनिष} मानलिह अिछ। अत: िहनक एकोिदÐ सेहो समीचीन निह अिछ। द§ाmेयक सेहो इएह मत अिछ। एिहठाम िकछु गोटे एकोिदÐ करैत छिथ आ िकछु गोटे निहय करैत अिछ। शाmकार लोकिन ओकर एकोिदÐ सेहो सामाय ºपमे करवाक लेल कहलिह अिछ। मैिथल िनबधकार सिपyडीकरणािद क§+~यक िदस संकेत कएलिह अिछ, मुदाआन पाव+णक िनशेध तँ किरतिह छिथ। एिह तरहÊ करमहावंशीय म. म. उमापित धम+शाmानुमोिदत सामियक ~यवहारक वण+न कऽ िमिथलाक संकृितक उ:चता ओ xवणताक तरफ =यानाकृÐ कएलिह अिछ। <ाम+पोट- रहुआ थाना- सौर बाजार िजला सहरसा, 852127

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

अनुपम रैना

याmीक ~यि$तव ओ कृितव याmीक सामाय पिरचय :- किवशेखर ¹योितरीर आ महाकिव िवWापित युगसँ अिवि:छ¤ ºपÊ xवािहत मैिथली का~यधारामे मोड़ देिनहारमे मनबोध, चदा झा, सीताराम झा xभृित अनेक महाकिवलोकिनक नाम लेल जाइछ, मुदा ओकर गितकÊ तीवÑतम कऽ ओकरा आधुिनक युगक कोनो अय समृ} भाषाक का~य xवाहक समानातर लऽ अनबाक cेय जािह एक माm किवकÊ देल जाइछ, ओ िथकाह ‘याmी’क उपनामसँ सुिव=यात cी वैWनाथ िमc। िहनक लेखनीसँ िन:स(त मैिथली किवता अपन ओहेन सु:चा सुवाससँ सgपूण+ वातावरणकÊ महमहा देलक जकर सुगध लेबाक लेल दूर-दूरक लोक वत: आकृÐ भऽ गेल। वतुत: आकृÐ करऽवला िहनक ~यि$तवो अिछ। अपन गाम-घरक भारसँ अपनाकÊ सतत फराक रखबाक चेÐामे रत रहऽवला फÂड़ ~यि$तव; सतत Ìमणशील, समाज-संसारक रग-रगकÊ परखऽवला पारखी ~यि$तव; ºिढ़भंजक, cम-शि$तक पूजक, ~यवथाक

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् िव4ोही, नवीन पीढ़ीक xित आवेशी ~यि$तवक लोक छिथ याmीजी। अपन जीवने जकॉं मैिथली किवताकÊ ई संकीण+ छदक बधनसँ मु$त कऽ सव+हाराक xशत बाटपर उमु$त िवचरण करबाक हेतु छोिड़ देलिन। याmीजी आधुिनक मैिथली सािहय म=य एकटा एहन देिद~यमान न9क ºपमे अवतीण+ भेलाह जे सgपूण+ मैिथली सािहयेक धाराकÊ मोिड़ देलिन। मैिथली सािहयक आधुिनक जनक कवीर चदा झा जँ नव xयोग कऽ पूव+क ºिढ़क परgपराकÊ तोड़लिन तँ भुवनेर िसंह भुवन ओिहमे xगितवादक वीजारोपण कएलिह। मुदा याmीजी ने केवल भुवनजी µारा थािपत xगितवादकÊ एकटा वटवृ9 सदृश िवशालकाय वनपित ठाए ़ कएलिह अिपतु ओिहमे पािनढािर-ढािर ओकरा यथाथ+वादक सघन सुदर, आकष+क आ मनोरम वािटका बना देलिन। आधुिनक मैिथली सािहयमे वैWनाथ िमc याmीक िविशÐ थान छिन। ई मैिथली का~यगगनमे अपन असाधारण xितभा तथा का~यक सवÝगपूण+ xसाद-माधुय+यु$त किवतासँ अ9ुyण आभाक आभास निह दैत छिथ, अिपतु सािहय-मम+;कÊ रसावादन करयबामे सुÔमगितक xदश+क छिथ। जािह भावक वण+न आन-आन किवगण पैघ-पैघ छदमे कएने छिथ आ ओकर अिभ~यि$तक लेल =विन तथा अलंकारक बोझसँ दिब गेल छिथ, तकरा याmीजी <ामीण भाषाक मा=यमसँ छोटसँ छोट छदमे अिभ~य$त करबामे पूण+ सफल भेल छिथ। याmीजी अपन रचनासभमे मैिथली बोलीक ठÀठक ढाठ बहैत छिथ। मैिथलीक ठÀठ शwद सभपर िहनक पूण+ अिधकार छिन। िहनका xसंग डॉ. शैले4 मोहन झाक कहब छिन :- “याmीजीक किवतामे एक िविचm िविवधताक दश+न होयत। ºिढ़-जज+र एवं आमिवाससँ <िसत जीवन, शोषण उपीड़नक दाºण ¹वालामे दjध होइत जनताक दुख-दद+, समाजमे अतिन+िहत वग+संघष+क भावना, जीवनक सरल सािवक वण+न, xकृितक एकसँ एक रमनगर ºपक अितिर$त ‘xाचीन’, म=यकालीन आ आधुिनक िमिथलाक मािट-पािनकÊ-हर-जनकÊ- कोसी लिखमाकÊ निह िवसिर सकलाह अिछ।”[1] बहुमुखी xितभासँ सgप¤, सामािजक पिरवेशक िनपुण तथा अपन भाषा ~यवथाक कारणÊ वैWनाथ िमc ‘याmी’आधुिनक मैिथली सािहयमे अपन उपलिwधमे बहुचिच+त रचनाकार िथकाह। कवीर चदा झाक लोकवादी भावना ओ भाषा ~यवथा, महाकिव सीताराम झाक ~यंग शैली ओ ठÀठ भाषाक ठाठ तथा भुवनजीक xगितशीलताक नवोमेष याmीजीक का~य ~यि$तवमे एकाकार भऽ गेल अिछ। िहनक रचना सभमे िवशेष कए किवतामे देश xेमसँ उप¤ आमवेदना, साíा¹यवादक भयंकर वºपक िवº} काित, जनवादी परgपराकÊ संगिठत ºपसँ xकट करब समाजमे xचिलत कला ºपकÊ अपनायब आ जनभाषाक सरस, सरल वºप िदस झुकान देखैत छी। एतबे निह िहनक रचनामे मा$स+वादी xभाव देखबामे अबैत अिछ, जािहमे आिथ+क िवषमता, सिमिÐक भावना, भावक गहराइ, पलायनवादी xवृि§क अभाव, सिमिÐक चेतनापर बल आ िनó तरक जीवनपर xकाश भेटैत अिछ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् िमिथला म=य याmीक पिरचय एकटा फÂर, घुमÂर बाबाक ºपमे छिन मुदा इितहासकारलोकिन मैिथली सािहयक िहनक रचना आ ओकर भाषाकÊ परेिख करैत छिथ। आधुिनक मैिथली सािहय म=य दूटा महामानव एहन छिथ जिनक भाषा हुनक पिरचय दऽ दैत अिछ। ओिहमे एकटा छिथ xो. हिरमोहन झा जिनका आँगुरपर भाषा नचैत छल तँ दोसर महामानव छिथ वैWनाथ िमc याmी जिनक xयेक सािहयक रचनाक भाषा हुनक पिरचय वत: करा दैत अिछ। एिह xसंग दुग\नाथ झा cीशक अिभमत छिन :- “अिभ~यि$त शैलीमे तँ ई काित उपिथत कऽ देल। मैिथली सािहयमे िहनकिहटा भाषा यथाथ+ ºपमे लोकभाषा िथक। मुदा अपन xितभावक पश+सँ ओ <ाgय भाषाकÊ सािहयकता xदान कएल। िहनक रचनाकÊ जे सव\िधक मािम+कता xदान करैत अिछ से िथक यैह वाभािवक भाषाक xयोग ओ वpतापूण+ कहबाक रीित जािहमे ~यंगाथ+ बेस चमकऽकारक होइत अिछ।”[2] मैिथली सािहयक xयेक िवµान याmीजीकÊ अपना-अपना ढंगसँ पिरचय करबैत छिथ। िकयो हुनक भाषा-शैलीसँ तँ िकयो सु:चा ठÀठ बोलीक ठाठसँ। िकछु िवµान हुनका xगितवादसँ िचहैत छिथ तँ िकछु यथाथ+वादसँ। िकयो घुgकर-फÂर झोड़ा ढंगने सािहयकार बुझैत छिथ तँ िकयो मा$स+वादी िवचारधारक समथ+क। कतहुँ ई वौ} धम\वलgवीक ºपमे xÕयात छिथ तँ कतहु सव+हाराक िहमायती। एक ‘वैWनाथ िमc’कतोक उपनामसँ चिच+त पिरिचत छिथ। िकयो ‘याmी’कहैत छिन तँ िकयो ‘नागाजु+न’िकयो ‘िवWाãÑ;ी’कहैत छिन तँ िकयो ‘वैदेह’, जखन िक मैिथली सािहयक Õयाितनामा िवµान डॉ. जयकात िमc िहनक भाषा-शैलीकÊ पकिड़ िहनकासँ पिरिचत करबैत छिथ :- “Trhe change in the cdoms of these poems is remarkable. The poet does not use Sanskriticed words and rise a collo q uial style to the poetec level. Ingenions thought, epigrammatic and terse slyle, collo q uial diction, utiparalleled speed and tempo and obserration Characterise these poems.”[3]

याmीजीक जम थान :- याmीजीक जम ितिथ संदेहापद अिछ। ओ वयं अपन जम ितिथ 1911 ई.क ¹येØ पुिण+माकÊ मानैत छिथ तथा हुनक पुm सेहो हुनक जमक िवt;यमे उपयु+$त ितिथएकÊ वीकाय+ करैत छिथ, मुदा िकछु अय cोतसँ िवµान लोकिन िहनक जम 30 जून 1911 ई. शुpिद न मानैत छिथ। दुनू ितिथ िभ¤-िभ¤ भऽ जाइत अिछ कारण जँ ज¹येØ पुिण+मा 1911 ई.कÊ हुनक जम ितिथ मानी तँ ई 11 जून रिविदन पड़ैत अिछ। मुदा दुनू तक+मे माm िदनक अतर होइत अिछ वष+ 1911 ई. तँ िनिÒत अिछ।

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् सन 1998 ई.मे राजकमल xकाशन नयी िदYलीसँ xकािशत याmी सम<क अनुसार िहनक जम सन् 1911 ई.मे जेØ पूिणमाक िदन दरभंगा िजलाक तरौनी गाममे भेलिन। मुदा अय cोतक अनुसार उ$त ितिथकÊ याmीजीक जम हुनक मातृक मधुबनी िजलाक सतलखा गाममे भेल छलिन तथा तरौनी हुनक पैतृक गाम छलिन। िहनक िपताक नाम गोकुल िमc तथा माताक नाम उमा देवी छलिन। याmीजीक वचपनक नाम ‘ठÂनिमसर’ छलिन। [4] गोकुल िमc आ उमा देवीकÊ चािर गोट सतान भेलिह आ चाº लगातार असमय कालकविलत भऽ गेलिन। एिहसँ गोकुल िमc अित िनराशापूण+ जीवन जीबैत छलाह। अिशि9त वÑाÛण गोकुल िमc ईरक xित आथावान तँ छलाहे तथािप दुखक एिह समयमे अपन आरा=य देव भगवान शंकरक पूजा िकछु बेसीए करय लागल छलाह। ओ पुm लालसाक हेतु वैWनाथ धाम (देवघर) जा कए बाबा वैWनाथक ओ यथाशि$त उपासना कएलिह आ बादमे अपन गाममे आिब सेहो पूजा पाठमे समय िबतबय लगलाह। बाबा वैWनाथक आशीव\दसँ प›चम सतान भेलिह।

~यि$तवक पिरचय :- ~यि$तवकÊ अं<ेजीमे ‘Personality’कहल जाइत अिछ जे लैिटन भाषक ‘Persona’शwदसँ बनैत अिछ। ‘Persona’शwदक अथ+ लैिटन भाषामे होइत अिछ ‘मुखौटा’। <ीक कलाकार लोकिन रंगमंचपर अपन पहचान छुपेबाक हेतु ‘मुखौटा’केर xयोग करैत छलाह। बादमे Persona शwदक अथ+ बदिल गेल। मनुtय दोसरकÊ केहन देखाइत अिछ, एिह अथ+मे बादमे‘Persona’शwदक ºपातर ‘Personality’ अथ\त् ~यि$तवक ºपमे कएल जाए लागल। [5]~यि$तव शwद भाववाचक सं;ा िथक। ~यि$तक 9ेmमे जािह गुण अथवा िवशेषताक समावेश होइत अिछ, ओ सभ ~यि$तवक अतग+त अबैत अिछ। कहबाक तापय+ जे कोनो ~यि$तक महवपूण+ िवशेषता ओिह ~यि$तक ~यि$तव कहबैत अिछ। ~यि$तक एिह xकारक िवशेषता ओकरा सामायसँ पृथक करैत अिछ। अथ\त् कोनो ~यि$तक िवशेषताक समुदाय ओकर ~यि$तव कहबैत अिछ। [6] मानक िहदी शwदकोशक अनुसार ~यि$तव शwद शwदक युjमसँ बनैत अिछ, जकर अथ+ होइत अिछ- ~य$त हेबाक अवथा वा भाव। [7] कोनो लोकक िनज िविशÐ 9मता, गुण, xवृि§ आिद जे ओकर उçेÄय, काय+, ~यवहार, आिदमे xकट होइत अिछ आओर ओिहसँ ओिह लोकक सामािजक ºवºप िथर होइत अिछ। लोकक मनोभाव एवं िवचार ओकर काय+ तथा वािचक, आंिगक िpयासभमे, हाव-भावमे xकट होइत अिछ, लोकक मन सामािजक, सiकृितक पिरवेशसँ संकािरत होइत अिछ। ई संकार सेहो ओकर िpयकलाप, हाव-भावमे अनायास ~य$त होइत अिछ। ~यि$तव लोकक अतिन+िहत गुणमे xकािशत होइत अिछ तथा ओकरा अिभ~य$त करबाक 9मतेकÊ ~यि$तव कहल जाइत अिछ।

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् िहदी िवकोशमे वÑूि$तवक अवधारणा एिह xकारे देल गेल अिछ- “~यि$तव शwद कोनो ~यि$तक उçीपक मूYयक ºपमे xयोग कएल जाइत अिछ।”[8] एकर तापय+ ओिह सgपूण+ xभावसँ अिछ जे एक ~यि$तक दोसरपर पड़ैत अिछ उçीपकक ºपमे िpयाक xभाव सेहो सतत् पड़ैत अिछ, जकर ओ अय ~यि$तक बीच उपpम करैत अिछ। ई पिरणामामक शि$त एकटा एहन पिरवत+न उप¤ करैत अिछ जे ओकर अपन दोसर लोक आ पिरिथितकÊ xभािवत करैत अिछ। दोसर अथ+मे ई कहल जा सकैछ जे लोक आम परी9ण करैत अिछ तथा वाह)य जीवन, संगठन, एकता आओर िथरता उप¤ कए कऽ अपन अतव यि$तक वभावमे अपन आम धारणाक िवकास करैत अिछ। xयेक रचनाक ~यि$तमे xितभा महवपूण+ होइत अिछ। सािहियक कृितसभमे सािहयकार लोकिनक ~यि$तव xसंगत: िकछु अंशमे अनायास xितिविgबत होइत अिछ। रचनाकारक अहमक संकार ओकर आमािभ~यि$तक ºपमे ~य$त होइत अिछ। रचनाकारक ‘अहम्’समाजक सामूिहक अहमक संग तादाgय बना ओकर आनदक कारण कारण बनैत अिछ। रचनाकारक ~यि$तव युग पिरवेशसँ xभािवत होइत अिछ। उपयु+$त सभ िववरणपर िवमश+ कएलाक बाद ई कहल जा सकैछ जे िद~य xितभासँ उभिर कए कोनो सािहयकारक ~यि$तव िवकिसत होइत अिछ। कोनो लोकक िकछु वाá एवं आतिरक तवसँ ~यि$तवक िनम\ण होइत अिछ। एिह तव सभक िववेचन ~यि$तव िनºपणमे अतभू+त होइछ। सािहयकारक पिरवार, पिरवेश, वभाव xवि§युगीन वातारण जीवनमे भेटयबला अवसर, िकछु लगती, िकछु कमजोरी, चुकल अवसर िकछु 9मता, िकछु सबलता, जीवनक मूYय दृिÐ, आदश+क xभाव आिद अनुभवसँ बनल दृिÐकोणसँ सािहयकारक मानवीय ~यि$तवक िनम\ण होइत अिछ। ई ~यि$तव समाज आओर सािहयकारक दाियवमे, xितव} ओ सजग भऽ एकटा सािहयकारकÊ सज+क ~यि$तवक िनम\ण सेहो करैत अिछ। सं9े9मे सािहयकारक िनजी ~यि$तव हुनक ~यि$तवक सामंजयसँ बनल एकटा िवल9ण ~यि$तव होइत अिछ। याmीक सािहयपर िववेचन करबासँ पूव+ हुनक जीवन पिरवचय करब आवÄयक अिछ। मनमे ई आशंका रहिन जे पूव+क चािर सतानक भ›ित इहो ने ठिक कए चिल जाए तÊ प›चम संतानकÊ सभ ‘ठÂन’नामसँ पुकारय लागल। कतोक िदनक बाद एिह ठÂन नामक बालकक नामकरण भेल आओर बाबा वैWनाथक कृपा xसाद मािन एिह बालकक नाम ‘बैWनाथ िमc’राखल गेल। याmीक नामे xिस} भेलाह। आगू चिल कए इएह बालक मैिथली सािहय जगतमे याmी, िहदीमे ‘नागाजु+न’, लेखकगण, िमmमyडली एवं राजनीितमे ‘नागाबाबा’, संकृतमे ‘चाy$य’नामसँ xÕयात भेलाह। संगिह िहदी सािहय जगतमे ‘आधुिनक कबीर’क नामे िवभूिषत कएल गेलाह।

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् याmीक जम xसंग अWाविध िनिÒत िनध\रण निह भऽ सकल अिछ। डॉ. जयकात िमc अपन पोथी The History of Maithili literature मे िहनक जम सन् 1908 ई. मानैत छिथ। िहदी सािहय कोषमे िहनक जमक िवषयमे 1910 ई. िनध\िरत कएल गेल अिछ। डॉ. xकाशच4 भ¸ िहनक जम 1911 ई. मानैत छिथ। डॉ. ;ानेरद§ हिरत अपन शोध xबंध ‘नागाजु+न ~यि$तव और कृितवमे सन् 1911 ई. जेठ (जून) मासक कोनो ितिथ मानैत छिथ। [9] डॉ. xभाकर माचवÀ जेठ पूिण+मा सन् 1911 ई.[10] बाबू राम गु£त नागाजु+नक नानीक अनुसार जेठ मासक कोनो िदन 1911 ई. िहनक जम मानैत छिथ। [11 ] िमिथलाक िवµान लोकिनमे बहुसंÕयक सेहो जेठ (जून) पूिण+मा सन् 1911 ई. सहए िहनक जम ितिथ िनध\िरत कएलिह अिछ। याmीक जम िनó मैिथल वÑाÛण पिरवारमे भेल छलिन। िहनक जम थान मातृक ‘सतलखा’हेबापर कतोक िवµान मत िभ¤ता रखैत छिथ मुदा अिधकiश िवµान वÑाÛण मधुबनी िजलाक ‘सतलखा’कÊ थािपत करैत छिथ जे िमिथलाक एकटा भू खyडक अंग अिछ। िहनक पैतृक गाम तरौनी दरभंगा नगरसँ लगभग 13 िक.मी. दूरीपर िथत अिछ।

याmीक माता-िपता एवं वंश :- वैWनाथ िमc ‘याmी’क जम एकटा गरीब िनध+न पिरवारमे भेल छलिन। िहनक िपताक नाम गोकुल िमc एवं माताक नाम उमा देवी छलिन। जखन याmीजी माm छह वष+क छलाह तखनिह िहनक माताक देहात भऽ गेल छलिन। िहनक माता एकटा सुशील मिहला आ अपन नैहरसँ सÌात पिरवारसँ छलीह। कूल-मूलक दृिÐ ऍ ं याmीक पैतृक प9 उ:च छल। मातृ िवहीन छोट सन बालकक सgपूण+ पालन-पोषण एकटा एहन िपताक µारा भेल जे घुमÂर, भंगेरी, लापरवाह, ºिढ़वादी गरीब अिशि9त तथा कठोर वभावक ~यि$त छलाह। िहनक िपताक मृयु िसतgबर 1943 मे काशीक मिण किण+का घाटपर भेल छलिन। माता-िपताक वासYयसँ विचत बालक वैWनाथक िशशु मनपर पिहल छाप भिर जम अपन िपताकसँ अपमािनत माए आ िवधवा पितअिनक दु:खक जीवनसँ पड़ल। जकर xभाव िहनक िहदीमे रिचत उपयास- ‘रित नाथ की चाची’ तथा मैिथलीक दीघ+ किवता ‘िवधवा िवलाव’ मे देखल जाइत अिछ। याmीक माताक देहावसानक बाद िपता गोकुल नाथ याmीकÊ अपन काहपर बैसा कए गामे-गामे घुमबिथन। कारण हुनक वृ§ ‘पुरिहत-पाटी’ (पुरोिहत कम+) छलिन। गोकुल िमc एकटा कठोर आ घुमÂर वभावक ~यि$त छलाह। एिह xकारÊ याmीजीकÊ वाYयकालिहसँ िवरासतमे ‘यायावर’xवृित भेटल छलिन। उपयु+$त वातावरण आ पिरिथितसँ िनकलल एकटा अबोध बालक म› सरवतीक एहन बड़दपुm हैता से िकयो

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् निह जनैत छल। मुदा यथाथ+ इएह िथक। ईहो बात सय जे याmीक बाल मन पर जे उचाट बैसल तकर दंश ओ भिर जीवन झेलैत रहलाह, तकर xितिबgब हुनक xाय: सभ रचनामे देखल जा सकैत अिछ। याmीजी अपन वचपनकÊ किहयो निह जी सकलाह। एकटा मातृहीन बालकक सहारा िपता होइत अिछ आ जखन ओ िपता आिशि9त, अ;ानी, मूख+, नशेरी हो तँ ओ कोमल नÒछल बाल मनमकÊ कोना पिढ़ सकैछ। तÊ याmीजीक ~यवहार बादोमे सामाय लोकसँ िभ¤ होयब वाभािवक छल। िकgवदती आ जनcुितक अनुसार ‘गोकुल िमc’क िवधवा भाभी आ कुलानद िमcक पîीसँ वैWनाथ िमcक अबैध संबंध छलिन। [12 ] मुदा उपयु+$त तãय जे ‘नागाजु+न मेरे बाबूजी’मे विण+त अिछ एकर अितिर$त हमरा अयm कतहु निह भेटल अिछ तÊ एिह तãयकÊ हम पूण+त: िनराधार मानैत छी। याmीकÊ वाYयकालिहमे अपन भाए µारा ईमादारी, पिरcम, साहस, समृि} दृढ़ चिरm हेबाक िश9ा सहजिह भेिट गेल छल। हुनक माएक ~यि$तवक ई गुण हुनक कतोक रचनाक नारी पाm सभमे पिरलि9त होइत अिछ। यथाथ+मे याmी एकटा कम+शील चिरmवान ~यि$तवक लोक छलाह ई कहबामे हमरा किनय संकोच निह होइत अिछ। याmीजीक वंश पिरचय :- याmीजीक पूव+जलोकिन िबहारक दरभंगा िजलाक तरौनी गाम िथत वस गोmीय मैिथली वÑाÛण छलाह। िहनक कुलक पिलवाड़ मसौल शाखासँ ई पिरलि9त होइत अिछ जे करीब दू सौ वष+ पूव+ िहनक िपतामह छmमिण िमc ‘मसौल’गामक िनवासी छलाह। िहनक िपता गोकुल िमc तथा एिहसँ पूव+ तीन चािर पीढ़ीक पूव+ज लोकिन कम पढ़ल-िलखल छलाह। ओ लोकिन खेती-बारी करैत छला आ िवÑतान पदािधकारी लोकिनक देखभाल करैत छलाह। ओना िहनक पुव+जमे वाचपित (अिभनव) आ ºिचपित आिद कतोक महामहोपा=याय लोकिनक िववरण सेहो उपलwध अिछ मुदा से सा9ात निह भऽ गोmक शाखाक आधारपर अनुमािनत अिछ। “महामहोपा=याय परमेर झा िमिथलiचलक रî छिथ। गामक म=यमे हुनक मकानक भjनावेश अWाविध अविथत अिछ। एिह गाममे करीब 250 घर आ आबादी लगभग 3500 अिछ। उपजाऊ भूिमक रकबा गाममे बेसी निह अिछ। गामक आवादीमे उ:च वग+क आवादीमे माm वÑाÛण लोकिन िनवास करैत छिथ। गैर वÑाÛणमे यदुवंशी यादव लोकिन रहैत छिथ। तरौनी गाम िवWा µारा अिज+त बाहरी कमाइ पर अपन अितव बचा कए रखने अिछ। तरौनीक गैर वÑाÛण सेहो आब महानगर िदस आकिष+त भेलाह अिछ। वÑÛण आ गैर वÑाÛण िमलाकए माm प›च-सात गोट पिरवार अवेषणक pममे हमरा दृिÐगत भेल जे गरीब छिथ। शेष लोक अपन गुजर-वसर नीक जकॉं करैत छिथ। गामक िनó वग+क लोक तँ अपन cमशि$तक बदौलत mी-पु¼ष ठीक-ठाक कमा लैत छिथ मुदा उ:चवग+क लोक उ:च िÕश9ा पएबाक कारणÊ cम काय+ करबासँ परहेज करैत

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मानुषीिमह सं ृ ताम् छिथ। एकरा अपन xितØासँ जोड़ैत छिथ। मैिथलीक एकटा कहाबत तरौनी गामक लेल सटीक वैसैत अिछ- “छूछ गौरव छूटाइन ढेकार”अथ\त् xितØाक कारण अपन िवप¤ताकÊ निह उजागर करबाक मजबूरी। [13 ] याmीजीक पुm cी शोभाकात अपन पोथी ‘नागाजु+न मेरे बाबूजी’मे िलखैत छिथ- “हमर बाबा अथ\त् बाबूजी केर िपताजीकÊ अपन पूव+जसँ पैतृत सgपि§ बेसी तँ निह मुदा कामचलाऊ जºर xा£त भेल छलिन।” गोकुल िमcक िपताक नाम छmमिण िमc छलिन। छmमिण िमcकÊ तीन गोट पुm- परमानद िमc, कुलानद िमc आओर गोकुलानद िमc। िहनकालोकिनक मातृक सह रसा िजलाक मिहसी गाममे छल। मातृकक संपित सेहो िहनका तीनू गोटाकÊ xा£त भेल छलिन। आँगनमे तीन भाग एक-एकटा घर एक-एक माईक िहसामे पड़ल छलिन। पूविरया घर कुलानद िमcक िहसामे, उ§रवला परमानद िमcक िहसामे आ दि9णवला गोकुलानदक िजgमामे छलिन। घरक बनावट भीतक देवाल, व›स-काठक ठाठ तथा खढ़ (फूस)सँ छारल छल। पछविरया वासडीह खाली पड़ल छल। आँगनसँ पूब पोखिर पड़ैत छल जे अWाविध अविथत अिछ। आँगनसँ दि9ण एकटा बसिव¸ी छल जकर 9ीण अवशेष अखनहुँ िथत अिछ। गोकुल िमcक समयेमे परमानद बाबूक पिरवार मातृक ‘मिहसी’जा कए थायी ºपसँ बिस गेलाह आ हुनक उ§रािधकारी लोकिन तरौनीक अपन िहसा बेिच कए एिह गामसँ सदाक लेल नाता तोिड़ गेलाह। शेष दुनू भाई मातृकक सgपि§कÊ सेहो निह रािख सकलाह। [14 ] चौदहवी शताwदी अथ\त् 1310 ई.मे िमिथलाक महाराज हरिसंह देव µारा जे पंजी xथा चलाओल गेल छल ओकर मूल पंजीक वंश वृ9क आधारपर याmीजी ‘वसगोmीय’पिलवार समौल मूलक िनिव+वािदत मैिथल वÑÛण छलाह। याmीजीक पुm शोभाकातक अनुसार याmीक xिपतामहक नाम पारसमिण िमc छलिन तथा उ$त पोथीक आधारपर याmीजीकÊ छओ गोट संतान छलिन जािहमे चािर गोट पुm- शोभाकात, सुकात, cीकात तथा Äयामाकात तथा दू पुmी छलीह- उिम+ल आओर मंजू, मुदा उमे9ा वृि§ एवं िनध+नताक कारणÊ कोनो पुm अथवा पुmी उ:च िवWाभूिषत निह भऽ सकलाह। ओना िहनक दोसर पुm सुकात ‘सोम’ मैिथली सािहयक थािपत किव, कथाकार एवं पmकार छिथ। िहनक एकटा xिस} किवता सं<ह िनज सgवादाता µारा xकािशत अिछ। वत+मानमे सुकात सोम िहदीक xिस} दैिनक अखबार िहदुतानमे थानीय सgपादकक ºपमे काय+रत छिथ। उपलwध cोतक आधारपर याmीजीक वंशावली िनó सािरणीमे 4Ð~य अिछ- पारसमिण िमc (xिपतामह) छmमिण िमc

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् (िपतामह) परमानद िमc कुलानद िमc गोकुलानद िमc (चाचा) (चाचा) (िपता) शोभाकात सुकात cीकात Äयामाकात उिम+ल मंजू (पुm) (पुm) (पुm) (पुm) (पुmी) (पुmी)

याmीक िश9ा-दी9ा :- बालक बैWनाथक िपता cी गोकुलानद िमc ºिढ़गत अनपढ़ वÑाÛण छलाह। ओ वैWनाथकÊ अं<ेजी िश9ासँ अलग राखय चाहैत छलाह। कारण ओ बुझैत छलाह जे अं<ेजी पढ़िनहार लोक ‘िpÒयन’बिन जाइत अिछ। वैWनाथ िमcक xारंिभक िश9ा अपन मातृक सतलखासँ xारंभ होइत अिछ। एकरा िकछु िदन बाद हुनका तरौनी गामक पाठशालामे नामiकन कराओल गेल। एिहठाम िहनक संकृत िश9ा भेटलिन। गनौलीसँ ई ‘का~यतीथ+’क उपािध <हण कएने छिथ। आगूक िश9ाक लेल ई काशी तथा कलक§ा गेलाह। िहनका समयमे संकृत िश9ाक xचलन वÑाÛण पिरवारमे छल। एकर xभाव याmीजीपर सेहो पड़लिन। अपिठत दीन-हीन रहलाक बादो याmीजी अपन xितभा दृढ़ िवास आ संघष+क उ:च िश9ा अिज+त कएलिन। याmीजी घुमÂर लोक छलाह तÊ िमिथलाक बाहर अय xात सभमे सेहो जाइत छलाह। िज;ासु xवृितक वभाव रहबाक कारणÊ याmीजी जािह-जािह xातमे अपन Ìमणक pममे जाइत छलाह ओिह xात सभक भाषापर अपन अिधकार जमा लैत छलाह। याmीजी वहुभाषािवद् छलाह। संकृत, मैिथली, िहदी, बंगला, पाली, मराठी, ितwबती, िसधी, गुजराती, पंजाबी, तिमल, ºसी, चानी आिद भाषाक ;ाता छलाह। याmीजीकÊ xारgभमे तँ अं<ेजी भाषाक ;ान निह छलिन मुदा Ìमणक pममे ओ काम चलाऊ अं<ेजी सीिख लेलिन। याmीजी काशीमे रिह संकृत भाषाक गहन अ=यययन कएलिन। एिह xकारÊ याmीजी िकछु िदन गाम िकछु िदन मातृक सतलखा,िकछु िदन कलक§ा तथा िकछु िदन काशीमे संकृत सािहयक अ=ययन कएलिन। एकर बाद बौ} िभ9ु भऽगेलाह आ cीलंका चिल गेलाह। याmीजी अपन 14 वष+क उमेरमे संकृतसँ xथमा पास कएलिन। ओिह वरख तरौनीक xितिØत िवµान पिyडत अिनº} िमcक =यान िहनकापर पड़लिन। अिनº} बावू चािर-प›च िदन धिर िहनक िश9ा, बुि} आ xखरतापर =यान दैत रहलाह आ तकरा बाद िहनक िपंगल िश9ाक गुढ़ता बुझवय लगलाह। िकदु छदक

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् xारिgभक ;ान, पुन: वाYमीिक आ कालीदासक िकछु-िकछु xिस} पोथी सभकÊ लऽ कए छदक सामाय ;ान देलिन। पिहल ‘समया’ जे वैWनाथ िमc पूित+ कएने छलाह से छल- बलानi दरोदनम् बलम्...। संकृतसँ xथमाक बाद आगू पढ़बाक लेल बैWनाथ िमc जे अपन गाम-घर छोड़लिन आ आगू मुहÊ चलैत रहलाह तकर पिरणित ‘याmी’नामे देखार भेल। बैWनाथ िमcकÊ िवWाथ¦- वैदेह- याmी वा नागाजु+न धिरक िवशेषण लगबैमे 1925 ई.सँ 1937 ई. धिर पूरा एक युग यानी बारह वष+ लागल रहिह। xथमाक बाद गणौली- पंचगिछया रिह तीन वष+मे ‘म=यमा’फेर पढ़ाइ अथवा आन िकछु करी तकर इतह-िततहमे िकछु मास आ अतत: पढ़बाक लेल काशी गेलाह। काशीमे xÕयात मैिथलीक किव पिyडत सीताराम झा संकृत का~य िदस झुकैत बैWनाथकÊ मैिथली आ िहछी किव कम+ िदस घुमा देलिथन। किववर सीताराम झा अपन xेरणा आ xिश9ण दऽ संकृत आ िहदी-मैिथली का~य शाmक अतर आ अतरसंबंध नीक जकॉं पिरछा देने रहिथन। जािह समय भाषा-िशYप-िबgब आिदक xयोगसँ वा$य िवयासमे चमकार अनबाक रहय सीखैत रहिथ ओिह कालमे पिyडत बलदेब िमc बैWनाथकÊ सiकृितक परgपराक संग वत+मानकÊ बुझबाक हेतु xेिरत कैलिथन। दैिनक अखबार आ जनजीवनकÊ िनकट जा कए देखबाक िज;ास ओिह समयसँ िहनका अदर जागृत होमय लागल। पिyडत अिनº} िमर, किववर सीताराम झा आ पिyडत बलदेव िमc वैWनाथक जीवन िनम\णमे तीनटा सबल  टा जकॉं छिथ जािहपर पं. बैWनाथ िमc सन बहुभाषी िवµान आ का~य शाm मम+;, जनकिव नागाजु+न एवं युग पु¼ष याmीक िवशाल, िवल9ण तथा अिवमरणीय ~यि$तव ठाए ़ भेल आगू आिब कए। [15 ] याmीजी संकृत भाषामे ºिच रहबाक कारणÊ xथमा, म=यमा ओ ‘का~यतीथ+’क उपािध xा£त कएने रहिथ। काशीमे िहनका ¹योितषाचाय+ बलदेव िमc, िmलोचन झा, रायबहादुर cीनाथ िमर सन कितपय िवµानकसािन=यमे रिह कऽ संकृत भाषाक गहन अ=ययन कएलिन। एिह xकारÊ मनक अत: संघष+ कतेको तनाव, पािरवािरक बोझ, आिथ+क तंगी आिदकÊ रहैत वैWनाथ िमc जे िश9ा <हण कएने छिथ ओ अित दु:साहसु काय+ छल।

याmीक जीवन वृत एवं आजीिवका :- आधुिनक कालमे िवशेष ºपÊ वातं£यो§र कालमे िहदी एवं मैिथली कथा-सािहयमे याmीजीक िविशÐ थान छिन। उपयास सíाट मुंशी xेमचदक बाद िहदी सािहय म=य समाजक पीिड़त, शोिषत, िकसान, मजदूर वग+क जीवनक िचmण करयबला कथाकारमे नागाजु+न (याmी)क नाम उYलेखनीय अिछ। िहनक कथा सािहयमे सामािजक अयाचार आ xखर शोषणक िचm xतुत कएल गेल अिछ। xेमचदक समान याmी सेहो उमेि9तक प9धर छलाह। ई िहदी एवं मैिथलीक xखर कथाकार एवं जनवादी

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् चेतनाक काय+वाहक छिथ। िहनका कथाक के4-िबदुमे िकसान-मजदूर, दबल-कुचलल गाम घरक लोक रहैत अिछ तÊ ई अपन जनवादी चेतनाक अिभ~यि$तमे मुÕय ºपÊ ‘िकसान, मजदूरµ नारी समाज, दिलत एवं िनó वग+क लोकक लेल आथा रखैत छिथ। याmीजीक समत सािहय िहनक जीवनसँ अिभनन ºपÊ जुड़ल अिछ। िहनक जीवनक कथा वयं केर अनुभव, िवचार, समत मानवतासँ जुिड़ हुनक मने हुनक सािहय िथक। याmीजी अपन युग आ समत भारतीय समाज राजनीित, धम+, लोकतंm आ जनवाद आिदसँ सतत् जुड़ल रहलाह। ओना तँ याmीजी कथाकारक ºपमे Õयाित पाओने छिथ मुदा देखल जाए तँ ई मूलत: किव छिथ। िहनकामे कथाकार, उपयासकार, आलोचनक तथा एकटा सुिध िचतकक जकॉं अनेक िवशेषता िवWमान छलिन। अपन िविशÐ शैली, जनवादी िवचार, शोिषत एवं पीिड़तक दु:ख-दद+कÊ बुझयबला तथा शोषकक षडयंmकÊ उघारयबला िनडर, िनभ¦क सािहयकार छिथ। पीिड़त लोकसँ आमीयतारखबाक कारणÊ िहदी एवं मैिथली सािहय म=य िहनक एकटा िविशÐ थान छिन। आधुिनक सािहयकारलोकिन अपन युगीन िवशेषता- घात-xितघात, िवकृित, िवरोधाभाष, समया, िज;ासा िवषमता आिदकÊ िविभ¤ िवधा सभमे अिभ~य$त कएलिह अिछ। याmीजी सेहो उपयु+$त तãयसभकÊ अपन सािहयमे उठेलिह अिछ। याmीजी बाYयकालिहसँ एक थानसँ दोसर थानक याmा करैत छलाह। एहन लोकक जीवन यापन कोना होइत छैक ईहो एकटा िबडgबने अिछ। गुजर करबाक लेल किठन पिरcमक आवÄयकता होइत छैक, मुदा जे ~यि$त उपनयन संकारक बाद अपन गाम-घर यािग पड़ा जाए, साधु बिन जाए, बौ} िभ9ु बिन जीवन-यापन करैत हो ओहेन ~यि$त अपन जीवन-यापनक हेतु रोजगार कतए खोजत? जखन जीवनक बहुमूYय समय नव-यौवनमे धन कमयबाक छल तािह समय ओ कोलgबो, ितwबत आ वम\मे घुिम-घुिम िबतौलिन तखन रोजगार कतए भेटत। िहनक जम िमिथलाक एकटा साधारण पिरवारमे भेल छल। खेत-पथार ओहेन निह रहिन जािहसँ जीिवका चिल सकए। िपता कोनो तरहÊ पोिस कए युवक बनौलकिन। मुदा िहनक तँ जम भेल छल सािहय साधना करबाक लेल। तÊ ई अपन जीिवकोपाज+नक साधन एकमाm सािहय साधना बुझलिन। आ एिह 9ेmमे एकसँ एक नवीन अ=याय जोड़ैत गेलाह। ई बात सय जे भाjयहीन होयबाक बादो जँ मनुtय xितभा सgप¤ होइछ तँ ओकर िवकास होयब िनिÒत अिछ। कोनो xकारक संकट िकएक निह हो, जँ लÔय xा£त करबाक मनोभाव रहैछ तँ बेरा पार अवÄय लािग जाइत अिछ। सन 1932 ई.मे याmीजीक िववाह िमिथलiचलक सुदूर देहात मधुबनी िजलाक हिरपुर ढंगा गाममे अपरािजता देवीक संग भेलिन। दुई वष+क बाद दुरागमन सेहो भऽ गेलिन मुदा एहन सयासीकÊ एिह समयमे

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् एकर आवÄकता निह छल आ ओ पुन: अपन गाम घरकÊ छोिड़ पड़ा गेलाह। याmीकÊ किहयो धनक लालसा निह छल। एकटा x° सभक मनमे उठैत अिछ जे ओतेक xितभा सgप¤ याmी छलाह तखन नोकरी िकएक निह भेलिह? मुदा एक सटीक उ§र हुनक धम+ पîी अपरािजता देवी अपन एकटा सा9ाकारमे एिह xकारÊ देने छिथ- “हुनकर अपन खुशी जे नौकरी निह कएल अं<ेजक िवरोध करैत छलाह। ग›धीक संग रहैत छलाह। चािर बेर जेल गेल छिथ। सयासी भऽ गेलाह। सयाससँ लौटलाक बादो गृहथी बसेबाक लेल ओ तैºार निह भेलाह। हमरा अ¤-पािन नैहरसँ आिब जाइत छल। िकछु पाइ हुनक िलखल अखबारक रचनासँ आ िकछु जेलक भ§ासँ अबैत छल। जािहसँ हमर पािरवािरक गुजर-बसर कोनो तरहÊ चलैत छल।”[16] एिहसँ पÐ भऽ जाइछ जे याmीजी अपन आजीिवकाक कोनो थायी निह कऽ सकल छलाह। समय- समयपर अपन रचनाकÊ xकािशत भेलाक उपरात जे कठोर पिरcमक कमाई होइत छल ओिहसँ पािरवािरक भरण-पोषण होइत छलिन। मूलत: आजम याmीजीक जीिवकाक एक माm साधन इएह रहलिन ओना शोभाकात एवं सुकात दुनू बेटा वयं कमासुत भऽ गेलाक बाद ओते कÐ निह रहलिह। बादमे िबहार सरकार, उ§र xदेश सरकार, बंगाल सरकार ओ अनेक संगठन पुरकार वºप याmीजीकÊ अनेको बेर सहायता भेटलिन। जािहसँ िहनक गुजर-वसर चलैत रहलिह। पिरवारक बोझ िहनकापर निह रहलिह संगिह कोनो तरहक लालसा सेहो निह रहलिन। मुदा एकटा महान कथाकारक आिथ+क ~यथाक कथा हृदय अवÄयक िवदीण+ कऽ दैत अिछ।

याmीक िविभ¤ नाम एवं िभ9ु जीवन - याmीजी तीन नामसँ सािहय जगतमे सुिवÕयात छिथ। िहनक जम समय नाम पड़ल ‘ठÂन’। एकरा बाद िहनक नामकरण कएल गेल वैWनाथ जे कौिलक उपनामक कारणÊ ‘वैWनाथ िमc’नामसँ xिस} भेलाह। िहदी सािहयमे नागाजु+न तथा मैिथली आ संकृत सािहयमे ‘याmी’क नामे पिरिचत छिथ। अपन xितभा एवं पढ़ाकू xवृि§क कारणÊ गामक लोक िहनका ‘िवWाथ¦’किह सेहो सgबोिधत करैत छलाह। याmीक एकटा उपनाम ‘वैदेह’सेहो छिन। िपता गोकुल िमc आ माता उमा देवीकÊ ‘याmी’क जमसँ पूव+ चािरगोट संतान जम लैतिह काल कविलत भऽ गेल छलिन। दुनू िमc दgपि§ पुmक लेल अित िचितत रहैत छलाह। पुmक इ:छासँ दुनू

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् xाणी ‘बाबा वैWनाथ’ (देवघर) मे जा हुनक पूजा-अच+ना अित भि$त-भावसँ कएलिन। वैWनाथ बाबाक कृपासँ पुm जम लेलकिन। मुदा मनमे आशंका छिन जे अये पुm जकॉं ईहो ने ठिक कए चिल जाए। तÊ बालक याmीक जम होइतिह सभिकयो िहनका ‘ठÂन’कहए लगलिन। चूिम वैWनाथ बाबाक आशीव\द वºप िहनक जम भेल छलिन तÊ हुनकिह नामपर बादमे िहनक नाम ‘वैWनाथ िमc’राखल गेल। वैWनाथ िमc जखन मैिथली आ संकृितमे सािहय लेखन करैत छलाह तखन ओ ‘याmी’नामसँ िलखैत छलाह। चूिम िहनक जमिहसँ िहनक कुल-पिरवारक लोक xयाण कऽ जएबाक आशंकासँ िचितत छल, तÊ बादमे ‘याmी’क नामसँ किवता आ उपयास िलखय लगलाह। याmीजी एिह नामक xसंग वयं िलखैत छिथ :- “ओना पिहल सािहियक नाम याmी छल। संकृत आ मैिथलीमे ‘याmी’क नामसँ िलिख रहल छी। बहुत लोककÊ तÊ पतो निह छिन जे याmी आ नागाजु+न एके ~यि$त अिछ।”[17] याmीजी िविभ¤ पm-पिmका सभमे िलखैत छलाह आ याmी नामसँ लेखन करबासँ पूव+ वैWनाथ िमc ‘वैदेह’नामे िलखैत छलाह। िहनक नाम नागाजु+न कोना पड़ल तािह xसंगयाmीजी वयं िलखैत छिथ :- “मÈ राहुल जी के साथ याmा पर िनकल गया... िफर हम लंका गये। वह› मÈ बौ} िभ9ु हो गया। उसी थान पर मुझे नागाजु+न नाम िदया गया, जो चल रहा है।”[18] एिह xसंग बाबूराम गु£तक कहब छिन जे- भारतक िविभ¤ खेmक Ìमण करैत नागाजु+न सन् 1936 ई.क अतमे िसंहल िµप (cीलंका) चल गेल। ओतिह ओ गृहथ ºप छोिड़ ‘चीवर’ धारण कएलिन। ओिहठा ओ बौ} जगतक xÕयात, लंकाक xचीन िवWापीठ- िवWालंकार- पिरवेणमे पहुँिच कए बौ} धम+मे दी9ा xा£त कए बौ} िभ9ु बिन गेलाह। ओ xÕयात बौ} तववेताक दश+िनक <थ सभक अनुवाद करय चाहैत छलाह आ ओ वैWनाथ िमcक थानपर अपन नाम ‘िभ9ुनागाजु+न’ कऽ लेलिन। [19 ] याmीजी जखन लंकासँ भारत अएलाह तँ रामवृ9 बेनीपुरीजीसँ िमललिन। बेनीपुरीजी हुनका ‘नागाजु+न’नामसँ िलखबाक सलाह देलिखन। याmीजी हुनक सलाह मािन िहदी सािहयक लेखन नागाजु+नक नामसँ करय लगलाह। एही नामसँ िहदी जगत मे अपन पृथक ã;ान बना लेलिन। जखन वैWनाथ िमc संकृतमे िलखैत छलाह तँ ओिह समय ‘चाण$य’आ मैिथलीमे ‘याmी’नामसँ सुिव=यात भेलाह। एिह xकारÊ याmीक पृथक-पृथक नाम आ पृथक-पृथक नामसँ कएल गेल लेखन अWाविध उपलwध अिछ। िववाह एवं पािरवािरक जीवन :- 19 सम वष+क आयुमे सन 1930 ई.मे याmीजीक िववाह अठारह वष¦य अपरािजता देवीसँ भेलिन। याmीजीक मनमे सदैव अपन पîीक xित सहानुभूितक भावना रहलिन, मुदा ययावरी जीवनक कारणÊ उिचत नेह निह दऽ सकलाह। सन् 1938 ई.सँ 1941 ई. धिर घर छोिड़ Ìमण करैत रहलाह। एकरा बाद पुन:

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् गृहथीमे िनमjन रहलाह मुदा िहनक संबंधी एवं िमmलोकिनक कहब छिन जे एहन गृहथीसँ संयासीए रहब उिचत छल। याmीजी घुमÂर xवृि§क लोक छलाह। अपन िपताक xित ितरकारक भावना जे िहनका िपताक दु~य+वहार सन xवृितक कारण उप¤ भेल छल, ;ान xाि£तक िज;ासा एवं िपताकÊ दिyडत करबाक उçेÄयÊ ई घर यािग देने छलाह। मुदा पîीक xित िहनका सदैव नेह आ सहानुभूित रहैत छलिन। याmीजीक सgपूण+ जीवन आिथ+क संघष+क रहल ई िहनका िवषयमे उपलwध जे कोनो <थ अिछ ओिहसँ पÐत: xमािणत भऽ जाइत अिछ। xारgभमे जीवन िनव\हक लेल ‘बुढ़वर’ ‘िवलाप’ नामसँ आठ-आठ पेजक दू गोट पोथी छपबा कऽ वयं रेलगाड़ीक िडwबामे घुिम-घुिम बेचैत छलाह आ एिहसँ उप¤ आयसँ अपन गृहथी चलबैत छलाह। याmीजी िपताक आ<हपर िकछु िदन लुिघयानामे जैनमुिन उपा=याय आमारामजीक सािहय िनिम+त काज हेतु नौकरी सेहो कएलिन मुदा वेतनभोगी बनब िहनका वीकाय+ निह छलिन तÊ नौकरी छोिड़ देलिन। ई भिर जीवन अपन सािहय सृजनक xकाशनसँ xा£त रायYटी एवं िमिथलाक देहातमे अYपमाmामे खेती-बारीक आयपर िनभ+र रहलाह। िपताक मृयुक बाद याmीजी अनाथ भऽ गेलाह। पैतृक गामक घर-गृहथीक सभ भार पîी अपरािजताक ऊपर आिब गेलिन। अपरािजता देवी भू-वामी िकसानक बेटी छलीह। भूिमक महव ओ बुझैत छलीह। हुनका शहरक वातावरण कथमिप रास निह अबैत छलिन ओना याmीजीकÊ सेहो शहरक ताम-झाम पिस¤ निह छलिन मुदा सािहियक काय+क हेतु हुनका शहरसँ संबंध राखब आवÄयक बुझाइत छलिन। तÊ अपरािजता देवी ई िनण+य लेलिन जे ओ गामे धी कए रहतीह आ पितकÊ (याmीकÊ) जतए जेबाक होिन ओ जाथु। याmीजी अपन पिरवारक भरण-पोषणक िचता किहयो निह केलिन। ओ सतत् Ìमणशील रहलाह। एिह अöयंतर पîी अपरािजता देवी थोड़-बहुत खेत-पथार आ नैहरक बलÊ अपन बाल-ब:चाक उदर पोषण करैत रहलीह। मुदा एिह बातकÊ कथमिप निह नकारल जा सकैछ जे हुनका घरक िचता निह रहैत छलिन। ओ अपन पîी आ िधया-पुताक उदरपोषणक हेतु सेहो सिदखन िचितत रहैत छलाह। एिह कारणÊ ओ अपन Ìमणक pममे- पंजाब, िहमाचल, राजथान, किठयावाड़ िसंहल िµप, जतए-जतए गेलाह ओिहठामक xाकृितक ºप, लोकजीवन सािहय, भाषा, संकृित, धम+ आिद संबंधी ;ान xा£त कएलिन। सन् 1951 ई.मे राtÅभाषा xचार सिमित वध\मे ओ नौकरी कएलिन मुदा सेहो उपिजिवका चलेबाक हेतु। कखनहुँ किवता गािब कऽ बेचैत छलाह, कखनहुँ अनुवादकक ºपमे चाकरी कए कऽ सािहय लेखन करैत छलाह। कखनहुँ अ=यापकक ºपमे। एिह िविवध अथायी काय+ सभसँ जे िकछु उपाज+न होइत छलिन तािहसँ अपन खच+क अितिर$त जे बँचैत छलिन ओ पîीकÊ पठा दैत छलिथन। याmीजीकÊ अपन पîी आ घरक िचता सतत रहैत छलिन, मुÕय

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ºपसँ आिथ+क संकटक। जकर xमाण 7 अगत 1976 ई.क िलखल हुनक िनó पmमे दृिÐगत होइछ जे ओ अपन पîीक नामे िलखने छिथ- c/o राजकमल xकाशन 8 फैज बजार िदYली- 6 7-8-76 सोित िसरी अपरािजताजी, िनकÊ रहू। हम आइ भोरखन िदYली पहुँचल छी। एक मासक xो<ाम अिछ। कृtणाÐमीसँ पूवÊ टाका अह›कÊ पहुँिच जायत। बउआ झाकÊ कहबइक- प›च टाका जमा कऽ कऽ नेहरावला बंक मे अपन खाता खुजबा लेत। हम ओकरे नामे Ëाफ पठा देबइक। -ना. बी- 3/113 जनकपुरी नई िदYली- 58 वित! आइ टुनाइक िच ी आयल अिछ। ओ एिहठाम आिब रहल अिछ। अही ठाम रहत- काज ओकरा भेिटए जेतइ। बउआ झा कत’अिछ? दयानाथ एको बेर आयल छिथ की निह? मंजुिलयाक ननिकरबी िनकÊ रहइ छइ की निह? बेसी की िलखू? हमरा दgमा परेशान कऽ देने छल। आब िनकÊ भेल छी। -ना. उपयु+$त दुनू पm हमरा बुझने xया£त अिछ याmीजीक पािरवािरक पृØभूिमक िचmiकन करबाक हेतु। यथाथ+मेमैिथली सािहयक महामानव नागाजु+न आ मैिथली सािहयक का~य मनीषी याmीक एिह पmक कथामे जे ~यथाकÊ उकेड़ैत अिछ ओ हृदयकÊ 4िवत कऽ दैत अिछ। एतेक आिथ+क संकटसँ िवप¤ लोक सािहय सृजय कऽ सकैछ ई व§+मान समयमे कोनो कYपनासँ कम निह। मुदा सय तँ इएह िथक। याmी जे ने आिथ+क ºपÊ भिर जम संघष+ करैत रहलाह विYक दद+सँ सेहो जुझैत रहलाह जे दद+ हुनक उपयु+$त पmमे दृिÐगत होइत अिछ। याmीजी पंजाबमे ‘दीपक’ नामक मािसक पिmकाक सgपादनक काय+ सेहो कएलिन। अपन पोथीक xकाशनक हेतु ‘याmी’ नामक xकाशन सेहो खोललिन मुदा से अथ\भावक कारणÊ बद भऽ गेल। गुजरातमे जैन

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् मुिन ‘रामच4’ सँ िहनका भÊट भेलिन जे आगू पढ़बाक आदेश देलकिन। हुनक आ;ा मािन याmीजी ‘xाचीन भारतीय भाषा xाकृत, पाली, अपÌंशआिद भाषाक अ=ययन कएलिन। ओ पाली भाषाक अ=ययन कएलिह जािह pममे हुनका बु}क pाितकारी िवचार अित xभािवत कएलकिन। याmीजी cीलंकामे बौ} दश+नक अ=ययन कएलिन आओर ओतिह 1936 ई.मे बौ} धम+कÊ वीकार कएलिह। याmीजी अपन जीवन िनव\ह करबाक लेल िकछु िदन अ=यापन काय+ सेहो कएलिन। िसंघल xातमे xाचीन भाषाक अ=ययन सेहो कएलिन। cी लंकामे िहनका वामपंथी पाट¦ िदस झुकान भेलिन। याmीजीकÊ कुल छ: गोट संतान छिन जािहमे चािर गोट पुm- शोभाकत, सुकात, cीकात, Äयामाकात तथा दू गोट पुmी जिनक नाम छिन- उिम+ल आ मंजू। व§+मानमे पुm ‘सुकात’‘सुकात सोम’क माने मैिथली सािहयमे xिस} कथाकारक ºपमे Õयाित छिथ मुदा अय सतान आिथ+क िवप¤ताक कारणÊ ओतेक पिढ़- िलिख निह सकलाह।

याmी xितभा ओ ~यि$त :- जखन कोनो ~यि$तक मरण भऽ जाइत छैक तखन ओकर ~यि$तवकÊ संकरणामक ºपमे संजोिग कऽ रखबाक xयोजन पड़ैत अिछ। तÊ लोक अपन आमीय जनक संकरण िलिपब} कऽ लैत अिछ। मैिथली सािहय म=य याmीजी अपन अxितम xितभा लऽ अवतीण+ भेल छलाह। हुनक ई xितभा अिज+त निह नैसिग+क छलिन। एकर उपयोग ओ अपन जीवनक िवषम पिरिथितमे करबामे पूण+त: सफल रहलाह। एिह तãयक पिर;ान समाजकÊ हुनक मृयुक पÒात भेलैक। ई बात एिहसँ पÐ होइछ जखन याmीजी गीताक- “वधमä िनधनं cंय: परधम× भयावह:”क वचनक उYलंघन कए- “अिहवातक पािलतल फोिड़-फोिड़ हम जाय रहल छी आन ठाम।” िलिख नव िववािहता पîीकÊ mूािग बौ} िभ9ु भए गेल रहिथ। ओिह समय कम+काyडक xितØा रखिनहार तरौनी गामक ÚाÛण समाज िहनका माm कुल निह, समाजोक हेतु कलंिकत पुm मानने छलिन। मुदा अठासीम वष+ पूण+ कएलाक बाद हुनक मृत शरीरकÊ पूण+ तामझामक संग, पुtपमाYयसँ आ:छािदत कएने िबहार सरकारक xशासन िवभाग अयेिØ हेतु तरौनी गाम पहुँचल तँ सgपूण+ िमिथलावासी अcुजलसँ ितलiजिल दैत Äमशान भूिमकÊ दलमिलत कए देलक, तखन ई कुल-कमल तरौनी गामक गौरव ओ िमिथलाक िवभूितक ºपमे विदत-

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् अिभनिदत भेलाह। एहन सgमान सािहयकारक कोन कथा, राजपु¼षो लोकिनकÊ भेटब दुल+भ अिछ। ई सभ हुनक xकृित xद§ xितभेक xितफल िथक। याmीजी कोनो शाmीय गgभीर अ=ययन निह कएलिन। कतहु अपन पiिडयक xखर चमकार निह देखौलिन। कोनो िस}ात <थ निह िलखलिन। शोध काय+ कऽ कोनो नव तãयक उ  ाटन सेहो निह कएलिन। मुदा जािह नव-नव बाटपर अपन डेग उठौलिन तकर अितम छोड़ धिर पहुँिच गेलाह। ई हुनक असीम xितभाकÊ xदिश+त करैत अिछ, कारण कोनो ~यि$तक xितभा ~यि$तमे िनिहत रिहतो ~यि$तवसँ पृथक अपन अितव रखैत अिछ। याmीजी िवचारसँ यWपित घोर नाितक रहिथ। जनउ-तनउकÊ ओ पाखyड मानैत छलाह। तथािप बौ} धम+सँ पुन: सनातन धम+मे अएबाक हेतु पुन: अपन उपनयन कएने रहिथ। वाभावोि$त िहनक रचनाक अलंकार िथक आ दैनिदन जीवनक xयोगमे अबैत ठÀठ शwदावली शृंगार। पिyडताम भाषासँ ई अपनाकÊ दूरे राखब cेयकर मानैत छलाह जािह कारणÊ सामायो लोककÊ िहनक रचनाक आवादनसँ आनद भेटैत छलैक। िहनक जनउ-तनउ xसंगकÊ पाखyड कहब उि$त जे ऊपर विण+त अिछ तकर मूल xमाण पं. च4नाथ िमc ‘अमर’क िनóिलिखत संमरणसँ भेिट जाइत अिछ। एिह संमरणमे अमरजी िलखैत छिथ- “cी सुमनजीक बालक cी वÑजे4जीक उपनयन छलिन। पं. सहदेव झा, किववर सीताराम झा, मधुपजी, काशीनाथ ठाकुर ‘कलेश’क संग हम पिहने वYलीपुर पहुँिच गेल रही। नान जलपानािदसँ िनवृत होइत करीब एक बाजल, देखैत छी घामे-पसीने तरबतर याmीजी धुिरअयले पैरÊ धgम दए आिब बैिस गेलाह। िकयो पंखा हॱकय लगलिन, $यो पैर धोयबाले पािन अनलक। cी सुमनजीक अनुज भूपे4 बाबू कककरो शब+त आनय किह, िहनका पैर धोयबाक आ<ह करय लगलिथन। मुदा ने कुत\ बाहर कएलिन ने पैर धोलिन। कहलिथन- हम राित समतीपुर मुसािफर खानामे सूतल छलहुँ, भोरे उिठ कए िवदा भेलहुँ से एखन पहुँचलहु अिछ, बàड भूख लागल अिछ। भूपे4 बाबू कहलिथन- पैर धो लेब तँ ठंढ़ा जायब। जलखै चूड़ा- दही, सोहारी-तरकारी, दुनूमक ~यवथा छैक, जे इ:छा हो।याmीजी किह उठलिथन- ने दही-चूड़ा, ने सोहारी- तरकारी, हम गूड़क संग चूड़ा फ›कब। घरबैया असमंजसमे, पाहुन पड़क चिकत, <ामीण िविमत, मुदा याmीजी िजçपर अड़ल रहलाह। जे बाजल छलाह सैह कएलिन। चूड़ा फ›िक शब+त पीिब दीघ+ िनसास लए हमरा कानमे कहलिन- मामाजी, हम उपनयमे अयलहुँ अिछ, मुदा जनउ निह अिछ, तकर जोगार धराउ। तÊ कुत\ निह बाहर करैत छी, एिह घटनामे एक नाटकीयता सेहो छल।”[20]

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् याmीजी किवता, कथा, उपयास, िरपोत\ज आिद सभ िकछु िलखलिन, मुदा नाटक िदस दृिÐ निह उठौलिन, परतु अपन िpया-कलापसँ सव+ग नाटकीयता बनौने रहैत छलाह। अलबटाह बगय-बानी, बाणी सेहो पूण+त: फुट निहए छलिन तथािप भाव-भंिगमा ओ कलममे तेहन चुgबकव छलिन जे ~यि$तकÊ आकृÐ कए लेबाक अeुत 9मता रखैत छलिन। याmीजी गgभीर ~यि$तवक लोक कखनहुँ निह बुझाइत छलाह। जेहने भेष-भूषा तेहने वभाव। हँसी- चौल िहनक ~यि$तवक पय\य बनल छल। तÊ लोक िहनका हYलुक ~यि$त मानैत छलाह। जकर xमाण अमरजीक एिह संमरणमे देखबामे अबैछ- सुमनजीक बालकक उपनयमे जखन याmीजी बYलीपुर गेल रहिथ तँ ओिहठाम एकसँ एक महारथी लोकिन पहुँचल रहिथ। बYलीपुर ओहनहुँ जमीदारी ठाठ-बाठक लेल xिस} छल। ओिह उपनयनमे कतोक xिस} गायक सभ अपन गायन कऽ रहल छल। ओिहठाम राजदरभंगाक अनेक अिधकारी लोकिन जेना- पं. िगरी4 मोहन िमc, दुग\नद झा, xो. रमानाथ झा, आिदक कािफलसँ महिफल सजल छल। समाव§+न संकार चिल रहल छलैक। सgपूण+ आँगन गदमद भरल छल। एकटा गवैया शाmीय, कोनो रागमे मू:छ\नाक संग आलाप लेलिन। ओिह गgभीर वातावरणक गgभीरताकÊ भंग करैत याmीजी िचिचआइत उिठ कए ठाढ़ भए गेलाह। सुमनजीक अनय सखा cी नूनू बाबू दौड़ल लग जा पुछलिथन- ‘की भेल?’ याmीजी जोरसँ बािज उठलाह- ‘हमरा गाममे एकटा बकरी एिहना मेिमआइत-मेिमआइत मिर गेलैक।’ से कहैत दलान िदस चल गेलाह। [21 ] उपिथत जन समुदायमे ~या£त िवमय हायमे पिरवित+त भए गेल, िकछु गोटेमे pोध तँ िकछु गोटेमे खोभ सेहो पिरलि9त भेल। गायक लोकिन सेहो 9ुwध भऽ गेलाह। याmीजीक ~यि$तव एहने सदावहार छलिन। याmीजीक नाम िपता रखलिथन ‘ठÂन’तँ हुनको हेतु अपन नामकÊ साथ+क कएलिन। अपने उपनाम रखलिन याmी तँ तकरो साथ+क कएलिन। माm जे िकयो नाम रखलिथन ‘नागाजु+न’से नाम भने सभसँ बेसी xिस} पौने होिन, मुदा ओकरा साथ+क निह रािख सकलाह। तकर cेय िहनक धम+पîी अपरािजता देवीकÊ छिन जे तरौनीक घराड़ीकÊ आजीवन सेिव कए धयने रहलीह। जािह xसादÊ जािह िमिथलाकÊ अितम xणाम कए चल गेलाह, ताही िमिथलाक मािटमे िहनक शरीर पंचवमे िवलीन भए सकलिन।

याmीक जीवनक संि9£त याmा- िहनक मूलनाम बैWनाथ िमc याmी छलिन। जमक बाद पीसी µारा िहनक नाम ‘ठÂन’राखल गेल। सािहियक नामक ºपमे ई वैदेही, याmी, नागाजु+न नामे Õयाित पाओलिन। िपताक नाम गोकुल िमc तथा माताक नाम उमा देवी छलिन। िहनक जेÐ पूिण+या 11 जून 1911 ई.कÊ तरौनी, िजला दरभंगामे भेल छलिन

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् तथा मातृक मधुबनी िजलाक सतलखा गाममे भेल छलिन। याmीजीक िववाह अषाढ़ 1931 ई.मे cी कृtणकात झा उफ+ कंटीर बाबूक कया अपरािजता देवीक संग भेल छलिन तथा तकरा तीन वष+क बाद सन 1934 ई.मे दुरागमन भेल छलिन। याmीजी जखन ितwबतक याmापर छलाह तखन सन 1943 ई.मे िहनक िपताक देहात भेल छलिन। पîी अपरािजता देवीक अवसान 19 फरवरी 1997 ई.कÊ तथा िहनक देहावसान 5 नवgबर, 1998 ई.कÊ भेलिह। मातृहीन ठÂन पाटी आ गिबसक संग गामक लोअर xाइमरी कूलमे xवेश कएलिन। िपताक µारा अं<ेजी मा=यमक िवWालयमे xवेशसँ विज+त राखल गेल। िहनका पुरोिहत कम+ हेतु जीिवकोपाज+नक योjयता xा£त करबा लेल गामक टोल पाठशालामे xवेश कराओल गेल, जािह ठामसँ ई xथमाक परी9ा उ§ीण+ कएलिह। संकृत िवWालय गोनोलीसँ म=यमा xथम वष+, पंचगिछया संकृत िवWालयसँ शाmी xã;म खyड (1931), कलक§ा गवन+मÀट संकृत कॉलेज कलक§ासँ शाmी (िµतीय खyड, 1922) आ का~य तीथ+क िश9ा <हण कएलिह। याmीजीकÊ छओसँ बेसी भाषाक ;ान छलिन जािहमे मैिथली, संकृत, िहदी, बंगला, xाकृत, िसंहली आिद- आिद। याmीजी cी लंकाक िवWालंकार पिरवेण मठसँ सन् 1937 ई.मे नायकपद आनदसँ दी9ा लए ‘नागाजु+न’बनलाह। वामी के शवानदक अनुरोधपर सािहय सदन, अवोहरक पिmका ‘दीपक’क दू वष+ सgपादन कएलिन तथा लुिधयानाक जैन मिदर (1941-42) धिर एवं हैदराबाद व§+मानक पािकतानक िसध xातक सारवत ÚाÛण पाठशालामे अ=यायन कएलिन। िसंध राtÅभाषा xचार सिमित, हैदराबादक मुखपm ‘कौमी बोली’क संपादन सेहो िकछु िदन कएलिह। भारतीय ;ानपीठ काशीमे 1945 ई.म े नौकरी सेहो पकड़लिन। एकर अितिर$त राtÅभाषा xचार सिमित, वध\मे िकछु मास सन 1951 ई.मे नौकरी कएलिन। याmीजी िनरंतर पाठावथामे एक िवWालयसँ दोसर िवWालयमे याmा, एक ã;ानसँ दोसर थानक याmा, एक Äखहरसँ दोसर शहरक याmा करैत रहलाह। सन 1037 ई्मे केलेिनया (cीलंका) िवWालंकार पिरवेण मठ, cी लंकाक याmा, राहुल सiकृयायनक संग जून 1938 ई.मे अवथताक कारणÊ ितwबतक अपूण+ याmा, 1942-43 मे एकसरे थोिलंग महािवहार ितwबतक याmा कएलिन। महाकिव याmी मैिथली किवक ºपमे ºसक याmा अथ\त् जा धिर काया संग देलकिन ता धिर भिर जम िनरंतर Ìमणशील रहलाह। सहजानद सरवतीक िकसान आदोलनमे सिpय भेलाक कारणÊ 20 फरवरी 1930 ई.मे छपराक अमवारी जेलमे बदी बनाओल गेलाह। एिह pममे हजारीबाग आ भागलपुर जेलक याmा थानातरणक कारणÊ सेहो भेलिन। राtÅिपता महामा ग›धीक हयाक उपरात xकािशत किवता ‘शोिषण तप+ण’क कारणÊ सन 1948

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ई.मे सेहो जहल कटलिन। जे.पी. आदोलनमे 26 माच+ 1976 ई. के पटना हाइ कोट+क आदेशपर आराक जेलसँ मु$त भेलाह। तरौनीक पिyडत अिनº} िमcक xेरणासँ वाYयावथामे संकृतमे समया पूित+सँ का~य याmाक cी गणेश कएलिन। काशी अएलापर किववर सीताराम झाक सgपक+ आ xेरणासँ मैिथलीमे रचना xारंभ कएलिन। िहनक पिहल रचना मैिथलीक पिmका ‘िमिथला’मे सन् 1929 ई.मे xकािशत भेल। संकृत, मैिथलीक अितिर$त िहदी, बंगला आिद भाषामे का~यारंभ कएलिन। दरभंगाक महारानी लÔमीवती µारा उिदयमान बालकक हेतु थािपत संथा बालवध+नी सभ तथा काशी µारा का~य रचना हेतु याmीजी पुरकृत कएल गेलाह। एिह सभाक क§\धरता पिyडत बलदेव िमc छलाह। सन 1968 ई.मे पmहीन नjन गाछ पर सािहय अकादमी पुरकार, भारती उ§र xदेश, मैिथलीशरण गु£त सgमान म=यxदेश, राजेदिशखर सgमान िबहार, राहुल सiकृयायन सgमान, पिÒम बंगाल, सािहय अकादमीक मह§र सदय 1994 ई.मे तथा चेतना सिमित पटना µारा सन् 1977 ई.मे सgमािनत कएल गेलाह। चेतना सिमितक थापना, 18 जुलाई 1954 ई. कÊ महाकिव याmीजीक xेरणा आ माग+दश+नक कारणÊ संभव भऽ सकल। याmीक रचना संसार (कृितव ) किवशेखर ¹योितरीर- िवWापितसँ अिवि:छ¤ ºपÊ xवािहत मैिथली का~यधारामे महवपूण+ मोड़ अनिनहार किवलोकिनमे मनबोध, चदा झा, किववर सीताराम झा xभृत कतोक महाकिवलोकिनक नाम लेल जा सकैछ। मुदा ओकर गितकÊ तीवÑतम कऽ ओकरा आधुिनक युगक कोनो अय समृ} भाषाक का~य-xवाहक समानातर लऽ अनबाक cेय जािह एक माm किवकÊ देल जाइछ, ओ छिथ ‘याmी’क उपनासँ सुिव=यात ‘cी बैWनाथ िमc। याmीक xसंग डॉ. भीमनाथ झाक कथन छिन- “िहन लेखनीसँ िन:सृत मैिथली किवता अपन ओहेन सु:चा सुवाससँ वातावरणकÊ महमहा देलक जकर सुगध लेबाक लेल दूर-दूरक लोक वत: आकृÐ भऽ गेल। वतुत: आकृÐ करऽवला िहनक िवल9ण ~यि$तवो अिछ- अपन गाम-घरक भारसँ अपनाकÊ कात रखबाक चेÐामे रत रहऽ बला फÂड़ ~यि$तव; सतत Ìमनशील, समाज संसरक रग-रंगकÊ परखऽबला पारखी ~यि$तव; ºिढ़ भंजक, cम-शि$तक पूजक, ~यवथाक िव4ोही, नवीन पीढ़ीक xित आवेशी ~यि$तव। अपन जीवने जकॉं मैिथली किवताकÊ संकीण+ छदक बधनसँ मु$त कऽ सव+हाराक xत बाटपर उमु$त िवचरण करबाक हेतु छोिड़ देलिन।”[22] आधुिनक मैिथली सािहयमे याmीजीक नाम अिवमरणीय बिन गेल अिछ। गW (उपयास) एवं पW (का~य) दुनू 9ेmमे अपन रचनाक गुण-धम+, ओजिवता, जनगणमनक भावनाक सहज साधारणीकरण, भाषाक

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मानुषीिमह सं ृ ताम् भूगंध एवं जनसंदेदनाक मनोगंधक बलÊ मैिथली ओ िहदी दुनू सािहय जगतमे याmी ओ नागाजु+नक ºपमे िचरमरणीय बनल रहलाह। बैWनाथ िमc ‘याmी’आ नागाजु+नक ºपमे अनेक िवधामे रचना कएने छिथ, मुदा उपयास ओ किवता हुनक xमुख ओ िविशÐ 9ेm रहल अिछ। बङला ओ संकृतमे तँ माm का~ये रचना कएने छिथ। एहू दुनूमे किवक ºपमे िहनक देखब िवशेष ºपÊ उपयु$त लगैत अिछ। उपयास हो अथवा किवता दुनूमे ई जन सामायक प9धरताकÊ उजागर कएने छिथ, िवशेष शैलीमे िवशेष xभावी ओ लोक xचिलत भाषमे।

याmीक रचना :- याmीजीक रचनाकाल करीब स§िर वष+ रहल। एिह अविधमे िहदीमे तँ िहनक कतोक पोथी xकािशत भेल मुदा मैिथलीमे गािन-गुिथकऽ माm प›च गोट पोथी भेटैत अिछ जािहमे दू गोट किवता सं<ह आ तीन गोट उपयास छिन। मुदा मैिथली पm पिmकामे घनेरो आलेखािद िहनक छपल अिछ। याmीक अिधकiश रचना पूवäक िलखल छिन। जखन याmीजी िहदीमे िलखय लगलाह तँ मैिथलीक रचना किम गेलिन। बादमे तँ xाय: मैिथलीक रचना बदे भऽ गेलिन। तÊ िहनक रचना पिहलुके पm-पिmकामे संिचत अिछ। पुरान पm-पिmका हमरा एिह शोध-pममे उपलwध निह भऽ सकल तथािप जतबा धिर उपलwध भेल तािहमेसँ िबिछ-िबिन एिहठाम xतुत कऽ रहल छी। इहो सgभव जे जािह पm-पिmका सभक नाम एिहठाम हम उYलेख कएल अिछ ताहूमे सँ कतोक छुिट गेल हो। तÊ एिह सूचीमे पिरtकार करबाक संभावना आ अपे9ा मैिथलीक गgभीर िवµान लोकिनसँ सतत रहत।

याmीक मैिथली रचना :- p.सं. – पोथीक नाम – िवधा – xकाशन वष+ – लेखकक नाम – xकाशक 1. पारो उपयास 1946/1965 याmी - <थालय x. दरभंगा 2. नवतुिरया – उपयास- 1954/1965 याmी- िवWापित xकाशन दरभंगा 3. बलचनमा- उपयास 1966/1965 – याmी – िमिथला सiकृितक पिरषद कलक§ा 4. िचmा- किवता- 1949 – याmी – तीरभुि$त पिwलकेशन xयाग 5. पmहीन नjन गाछ- किवता 1967 – याmी – मैिथली एकेडमी, इलाहाबाद मैिथली पm-पिmकामे xकािशत रचना- 1. किवता िमिथले! – 1936 याmी- िमिथला िमिहर, दरभंगा, िमिथलiक

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् 2. एते िदनुका बाद- 25.09.1960- याmी- िमिथला िमिहर सा£तािहक, पटना 3. आधुिनक रािधका- 27.11.1960-याmी- िमिथला िमिहर सा£तािहक, पटना 4. देखल समपनामे- 11.08.1963-याmी- िमिथला िमिहर सा£तािहक, पटना 5. अितम दश+न (अमरनाथ झाक xित किवता)- 16.02.1964-याmी- िमिथला िमिहर सा£तािहक, पटना 6. दू टा रचना (नेह¼क महाxयाणक पÒात)-28.06.1964, िमिथला िमिहर (स£तािहक) पटना ठाम-ठाम, कनैत अिछ गुलाब-28.06.1964, िमिथला िमिहर (स£तािहक) पटना 7. दू टा किवता- िवहुँसै छी, सभागाछी-28.06.1964, िमिथला िमिहर (स£तािहक) पटना 8. ओम शाित: शाित: शाित: -08.11.1964, िमिथला िमिहर (स£तािहक) 9.दोहाइ हे िलबट¦ मैया- 19.12.1965, िमिथला िमिहर (स£तािहक) 10.आउ हे ऋतुराज- 13.03.1966,िमिथला िमिहर (स£तािहक) 11.अहँ, अहँ- 03.04.1966,िमिथला िमिहर (स£तािहक) 12.भेटल छल वरदान- 22.05.1966,िमिथला िमिहर (स£तािहक) 13.युगक चमकार- 22.05.1966,िमिथला िमिहर (स£तािहक) 14.कािलदास किवकुल गु¼- 17.12.1966,िमिथला िमिहर (स£तािहक) 15.रा¹य मंmी भेला उ§र- 01.04.1973,िमिथला िमिहर (स£तािहक) 16.एgहर जुिन अबै- 06.05.1973,िमिथला िमिहर (स£तािहक) 17.हऽ आब भेल वष\- 15.07.1973,िमिथला िमिहर (स£तािहक) 18.सुनल शwद िवमान पिरचािरकाक- 12.08.1973,िमिथला िमिहर (स£तािहक) 19.मामा आँिख मुिन लेलिथ- 23.09.1973,िमिथला िमिहर (स£तािहक) 20.वाह रे हमर नाित!- 28,10,1973,िमिथला िमिहर (स£तािहक) 21.एिह घर पर बैसल रहय िग}- 20.10.1974,िमिथला िमिहर (स£तािहक) 22.ग›धी- जनवरी, 1950, वैदेही (मािसक) दरभंगा 23.कोिरया- फरवरी 1951,वैदेही (मािसक) दरभंगा 24.गोिठिबछनी- िवशेषiक साल 1358, वैदेही (मािसक) दरभंगा 25.मु$तक- नवgबर 1952, वैदेही (मािसक) दरभंगा

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मानुषीिमह सं ृ ताम् 26.ग›धी- जनवरी 1852,वैदेही (मािसक) दरभंगा 27.अºणोदय- फरवरी 1953, वैदेही (मािसक) दरभंगा 28.अहार िजनगी- मई 1953, वैदेही (मािसक) दरभंगा 29.या िनशा सव+भूतानाम्- जुलाई 1953,वैदेही (मािसक) दरभंगा 30.हम 9ुwध छी- माच+ 1954,वैदेही (मािसक) दरभंगा 31.दूटा गीत- (I)जय जय भारत! जय िहद भूिम- जनवरी 1955, वैदेही (मािसक) दरभंगा (II) िनिखल िव िxय िनिखल भूिम िxय- जनवरी 1955,वैदेही (मािसक) दरभंगा 32.ओ तँ िथका दधीिचक हार- िसतgबर 1962,वैदेही (मािसक) दरभंगा 33.कोिचंग इटी:यूट- िसतgबर 1958,वैदेही (मािसक) दरभंगा 34.जम भूिम- अंक 10, 1973,िवभूित (मािसक) मुजòफरपुर 35. िमिथला-15.12.1952, िमिथला (सा£तािहक) दरभंगा 36. यु}गीत- 12.01.1953, िमिथला (सा£तािहक) दरभंगा 37. नेह¼- 09.02.1953, िमिथला (सा£तािहक) दरभंगा 38. नचारी (पुरान आ नवीन)-02.03.1952, िमिथला (सा£तािहक) दरभंगा 39. चीन- 09.03.1953, िमिथला (सा£तािहक) दरभंगा 40. हे अभागल देश- 16.03.1953, िमिथला (सा£तािहक) दरभंगा 41. िकसान- 30.03.1953, िमिथला (सा£तािहक) दरभंगा 42. कोिरया- 13.04.1953, िमिथला (सा£तािहक) दरभंगा 43. कi<ेसी कनवासर- 18.05.1953, िमिथला (सा£तािहक) दरभंगा 44. नेह¼क लंदन याmा- 01.06.1953, िमिथला (सा£तािहक) दरभंगा 45.िसनुिरया आम- 18.06.1953, िमिथला (सा£तािहक) दरभंगा 46.छठू बाबू- 15.06.1953, िमिथला (सा£तािहक) दरभंगा 47.बाबाक िवभूित-उदय- 1, िकरण- 3, 1930, िमिथला िमm 48.भगवान! हमर ई िमिथला सुख शाित केर घर हो- 1932 – िमिथला संदेश

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् 49.वदना- वष+- 1, अंक- 2, 1948- वदेश (मािसक) दरभंगा 50.ग›धी- वष+- 1, अंक- 2, 1948- वदेश (मािसक) दरभंगा 51.दीन बािलका- वष+- 1, अंक- 2, 1948- वदेश (मािसक) दरभंगा 52.सुjगा मैना इटी:यूट- 1954- चौपािड़ 53.तीवÑ िवषा$त िवल9ण गधी- 1954- चौपािड़ 54.पुिन-पुिन पसरओ- जून 1956- पYलव (मािसक) नेहरा 55.उपहार- जून 1956- पYलव (मािसक) नेहरा 56.आिह रे कम+!-अxैल 1968- मैिथली किवता (mैमािसक), कलक§ा 57. वागत हे िवलिgबत- वष+- 1, अंक- 6, 1969- सोना मािट (मािसक) पटना 58.हमहूँ सं=या तप+ण किरतहुँ भोरमे- वष+- 7, अंक- 1, 1979- िमिथला भारती (िµमािसक) पटना- अंक- 4, अxैल-मई 1981- मैिथली अकादमी पिmका (िµमािसक) पटना 59.चािर किवता 1. तोहर तानी हमर भरनी- 2. हुनका लकबा मारलकइिन- 3. खूब चटइ जो... 4. िमिन िमिथला- 60.किवता तीन- 1. शिन महराज- अगत 1983- मािट-पािन (मािसक) पटना 2. ब£प रे ब£प- 3. हुजूर, हँ हजूर- 61.िल£सा- िदसgबर 1983, मािट-पािन (मािसक) पटना 62.जम भूिम- अगत-िसतgबर 1986, िचनगी (याmी जयंती अंक) िµमािसक, दरभंगा 63.बाबाक िवभूित-अगत-िसतgबर 1986, िचनगी (याmी जयती अंक) 64.मु$तक- अगत-िसतgबर 1986, िचनगी (याmी जयती अंक) 65.सुjगा मैना इटी:युट- अगत-िसतgबर 1986, िचनगी (याmी जयती अंक) 66.हुनका लकबा मारलकइन-अगत-िसतgबर 1986, िचनगी (याmी जयती अंक)

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् 67.बाजिल सुखमा- अंक- 1, 1986- सि¤पात (अिनयिमतकािलक), पटना 68.याmीक िकछु किवता- 1. अिबतिहं, अही हमर वागत- अंक- 4, 1986- सि¤पात (अिनयिमतकािलक), पटना 2. निह, निह निह िक¤हु निह- अंक- 4, 1986- सि¤पात (अिनयिमतकािलक), पटना 3. मिणजी हमर झोरा नुका राखत-अंक- 4, 1986- सि¤पात (अिनयिमतकािलक), पटना 4. अतत: ओ अपनिह मूहÊ अ¼णोदय-अंक- 4, 1986- सि¤पात (अिनयिमतकािलक), पटना 69.िसनुिरआ आम- अंक- 4, 1986- सि¤पात (अिनयिमतकािलक), पटना 70.कारी-कारी- जनवरी-अxैल 1987, कोसी कुसुम (िµमािसक) सहरसा 71.रचू-रचू मधुरगीतम्- जनवरी-अxैल 1987- कोसी कुसुम (िµमािसक) सहरसा 72.मैिथल के? – वष+- 2, अंक- 1, 1987, अिखल भारतीय मैिथली सािहय पिरषदपिmका, दरभंगा 73.दूटा किवता- शारदीय 1994, कण\मृत (mैमािसक), कलक§ा 1. पूव\öयास- 2. कुिसयारक छाहिरमे- 74.हे हमर आW- नवgबर 1982, आरंभ, पटना 75.चािरटा एgह¼का किवता- जून, 1997, 1982, आरंभ, पटना 1. मोशहिरक भीतर/पौने नओ बजे राित- 2. शुº वैशाखमे गामसँ 3. भकड़ार मोछवला पÈतािलस बख+क- 4. तुलसी बाबा साथ रहइ तॲ- 76.अह› बàड फूिस बजइ छी- अंक- 4, अxैल 1994, संकYप, सुपौल 77.जरदगब- 15.09.1953, िमिथला िमिहर 78.ग£पक फोड़न- िदसgबर 1954, वैदेही, दरभंगा

िरपोजाज+ एवं शwदिचm : 79.बूढ़ बोको- जून 1950, वैदेही दरभंगा

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् 80.चािर अहोरािm आ एक िदन- जुलाई 1954, वैदेही दरभंगा 81.वैदेहीक नव ºप- जून 1871, वैदेही दरभंगा

िनबंध - 82.मैिथल महासभा मैिथलवक- वष+- 1, अंक- 12, 1937, िवभूित, मुजòफरपुर 83.पृãवे ते पाmम्- िसतgबर 1954, वैदेही दरभंगा 84.xवासक संमरण- अxैल 1957, वैदेही दरभंगा 85.लेिनन आ भारतीय सािहय- अंक- 2, 1986, सि¤पात (मूल िहदी)

तgभ - 86.यm-तm सव+m- मई, 1957, वैदेही, दरभंगा 87.यm-तm सव+m- जुलाई, 1957, वैदेही, दरभंगा 88.यm-तm सव+m- अगत, 1957, वैदेही, दरभंगा 89.यm-तm सव+m- अ$टूबर, 1957, वैदेही, दरभंगा 90.यm िकंिचत- जून, 1959, िमिथला दश+न 91.िचतन अनुिचतन- जन.-फरवरी 1959, िमिथला दश+न 92.ओना मासी धँ- 15 जनवरी, 1961, िमिथला िमिहर 93.ओना मासी धँ- 05 फरवरी, 1961, िमिथला िमिहर

सा9ाकार- 94.अनौपचािरक सािहय-वा§\- 06 जुलाई 1975, िमिथला िमिहर 95.टेमी के दाग?-अxैल 1987,1987, (दोसर प9)िमिथला िमिहर 96. िमिथला मैिथल िवभूित : बाबा cी बैWनाथ िमc ‘याmी’- शारदीय अंक 1987, कण\मृत, कलक§ा

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मानुषीिमह सं ृ ताम् 97.ग£प िकछु हमर जबाब हुनकर- वष+- 1, अंक-2, नवgबर 1993, अनुवाता 98.िखिसअयल ~यि$त निह िलखत- जून 1994, देस-कोस

अय - 99.शोक-c}Ýजिल (म.म. पं. मुरलीधर झाक xित)-वष+-1, अंक-9, साल- 1337, िमिथला 100.िवभागीय सभापितक भाषण : किवता िवभाग- 1956, xथम अिखल भारतीय मैिथली सािहय सgमेलन, दरभंगा 101.सgपादकीय- जनवरी 1973, िमिथला दश+न 102.याmीजीक पm लिलतक नाम- 29 मई 1983, िमिथला िमिहर 103.िव सgमािनक महाकिव िवWापित- िदसgबर 1985, हालचाल 104.संवेदना (मिणपâ c}iजिल अंक) जुलाई-िसतgबर, 1986, कण\मृत 105.याmीजीक एगारह पm िकसुनजीक नाम- िसतgबर 1986, िचनगी

पोथीमे सं<हीत रचना- 106.िवWापित के देश मे- (सं. जग¤ाथ xसाद, सुमन, अमर) मु$तक- 1955, संकलन 107.मैिथली पW सं<ह- (स. डॉ. उमेश िमc) 1. िमिथले, गोठिबछनी- 1962, संकलन 108.गलप सुधा- 1964, संकलन (स. डॉ. अशफ¦ झा, अमरेश आ cी रमानद), 109.मैिथली सािहय सं<ह- वंदना, कौिसकीक धार- 1964, संकलन (पWiश- सं. रमानाथ झा)- इजोत- 110.किवता कुसुम- सgपादक रमानाथ झा- 1964, संकलन 1. हम छी छुwध- 2. परमसयसँ-

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मानुषीिमह सं ृ ताम् 3. िहमिगरक उ§ुंगमे- 111.मैिथली नवीन गीत- सं. रमानाथ झा- 1965, संकलन 1. भावना- 2. िसनुिरआ आम 3. अहार िजनगी- 4. आधुिनक रािधका- 5. देखल सपनामे- 112.मैिथली गW सं<ह, (तृतीय भाग)-1964, संकलन (सं. रमानाथ झा, सुमन, ईशनाथ झा) 1. पृãवी ते पाmम- 113.किवता कलाप- 1970, संकलन 1. केहन िद~य- (सं. शंकर कुमार झा)- 114.किवता सं<ह- 1977, मैिथली अकादमी, पटना (सं. xो. आनद िमc, आर.सी. xसाद िसंह, अमरजी) 1. किवक व  , 2. िपतापुm संवाद 3. परम सय, 4. एिह घर पर बैसल रहय िग}- 115.का~य माधुरी- सं. xो. आनद िमc-1980, मैिथली अकादमी, पटना 1. म› िमिथले, 2. अंितम xणाम, 3. नव नचारी, 4. गोिठिबछनी- 116.मैिथली गW xसून- सं. बालगोिवद झा ~यिथत- 1980, मैिथली अकादमी, पटना 1. िपतापुm संवाद 117.कथा कुंज- सं. xो. परमानद शाmी- 1986, मैिथली अकादमी, पटना 1. चािर अहोरािm एक िदन 118.पW तािलका- (सं. माहेरी िसंह महेश- 1987, मैिथली अकादमी, पटना तथा डॉ. xेमशंकर िसंह)

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मानुषीिमह सं ृ ताम् 1. भावना, 2. आधुिनक रािधका, 3. नवतुिरआ आबओ आग›- 119.मैिथली कथा- का~य सं<ह- 1991, मैिथली अकादमी, पटना (सं. िशवशंकर झा कात, नवोनाथ झा) 1. िवलाप- 120.कमलदह- सं. नवीन च4 िमc, अमरनाथ झा- 1991, मैिथली अकादमी, पटना 1. भावना, 2. युगधम+, 3. तारक गाछ, 4. अहार िजनगी 121.मैिथली किवता सं<ह नेपाल- 1990, मैिथली अकादमी, पटना (सं. राम भरोस कापिड़ ‘Ìमर’, धीरे4 xेमिष+) 1. जगतारिन, 2. तीसीक तेल म=य-

अिभ नदन <थ - 122.सारवत सरमे हे मराल- (cी रमानाथ झा, अिभनदन <थ) 123.गोिवदाय नमो नम:-पं. गोिवद झा अच\ ओ चच\ (संकृत Äलोक)

पुतकक भूिमका इयािद - 124.कला (उपयास)-x. वष+- 1948, सgxित ले. चतुरारानन िमc 125.न9m (किवता सं<ह)- x. वष+- 1956, दुट£पी ले. cी राम चिरत पाyडेय अनु. 126.अनेरे (किवता सं<ह)- x. वष+- 1993, भूिमका ले. cी हंसराज 127.सभसँ पैघ िवजय (कथा सं<ह)- 1966, xतावना

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ले. आशा िमc- 128. मोहन लàडू (गीत सं<ह)-1947, दू आखर हमरो ले. ºप नारायण िमc नागाजु+नक नामसँ एकर अितिर$त याmीजी िहदीमे सेहो कतोक रचना कएलिह अिछ जकर िववरण िवधाक िहसाबÀ िनóिलिखत अिछ- उपयास : (िहदी) 1. रितनाथ की चाची- नागाजु+न- िµ. स. 1953, िकताब महल, इलाहाबाद 2.वलचनमा (िहदी संकरण)- नागाजु+न- िµ. स. 1967, िकताब महल, इलाहाबाद 3.दुखमोचन- नागाजु+न- चतुथ+ संकरण, 1966, िकताब महल, इलाहाबाद 4.वºण के वेटे- नागाजु+न- चतुथ+ संकरण, 1957, िकताब महल, इलाहाबाद 5.बाबाबटेसर नाथ- नागाजु+न- चतुथ+ संकरण, 1954, राजकमल xकाशन 6.कुgभीपाक- नागाजु+न- चतुथ+ संकरण, 1954, राजकमल xकाशन 7.चgपा- (कुgभी पाकक संि9£त संकरण)- नागाजु+न- चतुथ+ संकरण, 1954, जी.टी. रोड, शहादरा 8.उ<तारा-नागाजु+न- तृ. संकरण, 1970, राजपाल एyड सस 9.हीरक जयती- याmी, 1962, आमाराम एyड सस 10.इमरितया- याmी, 1968, आमाराम एyड सस 11.नई पौध- याmी, 1953, आमाराम एyड सस

का~य रचना- (िहदी) 12.युगधारा- नागाजु+न, 1953, जनसेवा xकाशन 13.सतरंगे पंखॲवाली- नागाजु+न, 1959, याmी xकाशन, कलक§ा 14.£यासी पथराई- नागाजु+न, 1962, याmी xकाशन, कलक§ा 15.खून और सोले- नागाजु+न, 1962, याmी xकाशन, कलक§ा 16.xेत का बयान- नागाजु+न, 1962, यतीन xेम, पटना

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् 17.चना जोर गरम- नागाजु+न, 1952, हंस- काय\लय, इलाहाबाद 18.शपथ- नागाजु+न, 1952, हंस- काय\लय, इलाहाबाद 19.अब तो बद करो हे देवी यह चुनाव का xहसन- नागाजु+न, 1952, Úजदुलार Åीट, कलक§ा 20.भमाकर- नागाजु+न, 1972, राजकमल xकाशन 21.तालाब की मछिलय›- नागाजु+न, 1974, अनािमका xकाशन (एिह सं<हमे- युगधारा, सतरंगे पंखॲवाली, £यासी पथराई आँखÀ का~य सं<हक बीछल चुनल कथा सभ सं<हीत अिछ) बाल सािहय - (िहदी) 22.वीर िवpम- नागाजु+न, पुतक भंडार, पटना 23.तुकॲ का खेल- नागाजु+न, बाल सखा, पटना 24.नदी बोल उठी- नागाजु+न, ऐजन 25.वानर कुमारी- नागाजु+न, ऐजन 26.xेमच4 की जीवनी- नागाजु+न, ऐजन

िनबंध - िहदी- 27. एक ~यि$त एक युग- नागाजु+न, पिरमल xकाशन, इलाहाबाद

उपयु$त तािलकामे सहजिह देखल जा सकैछ जे मैिथली सािहयमे ‘याmी’जीक तीन गोट उपयास, दू गोट किवता प›च गोट सा9ाकार, एक सौसँ बेसी िविभ¤ पm-पिmकामे xकािशत रचना, (किवता, आलेखािद) आिद अिछ। एकर अितिर$त मैिथलीक िविभ¤ पोथी सभमे जेना- मैिथली पW सं<ह, गYप सुधा, किवता कुसुम मैिथली गW सं<ह, मैिथली नवीन गीत, किवता सं<ह, किवता कलाप, का~य माधुरी, मैिथली गW xसून कथा कुंज, पW तािलका, मैिथली कथा कमलदह आिदमे िहनक रचना सं<हीत अिछ। याmीजीक रचना सभ अिभनदन <थ, िविभ¤ पोथी सभक भूिमका, पm-पिmका सभमे तgभ लेखनक ºपमे सेहो भेटैत अिछ। अिहना िहदी सािहयमे सेहो उपयास, का~य, वाल सािहय, िनवंध एवं अयाय िवधापर िहनक लेखनी चलल

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् अिछ। िहनक िविवध xकारक रचना देखलासँ ई वयं पिरभािषत भऽ जाइत अिछ जे याmीजी वहुमुखी xितभाक धनी छलाह। याmीक रचनाक िवÄलेषण :- ‘याmी’आ ‘नागाजु+न’ओना तँ दू ºपमे रचना कएने छिथ, मुदा उपयास ओ किवता हुनक xमुख ओ िविशÐ 9ेm रहल अिछ। बाङला आ संकृतमे तँ माm का~ये रचना कएने छिथ मुदा एहू दुनूमे किवक ºपमे िहनक देखब िवशेष ºपÊ उपयु$त लगैत अिछ। उपयास हो अथवा किवता दुनूमे ई जन सामायक प9धरताकÊ उजागर कएने छिथ। िहनक रचना िवशेष शैलीमे िवशेष xभावी ओ लोक xचिलत भाषामे देखल जा सकैछ। मैिथलीमे िहनक तीन गोट उपयास आ दू गोट किवता सं<ह xकािशत अिछ जे pमश: एिह xकारÊ- पारो (1946), िचmा (1949), नवतुिरया (1954), बलचनमा (1966)आ पmहीन नjन गाछ (1967)। एकर अितिर$त याmी सम<मे करीब 80 गोट किवता संकिलत अिछ। िहनक आधा दज+न कथा, तीन गोट तgभ लेखन सेहो संकिलत अिछ। एिहसँ पÐ भऽ जाइछ जे िहनक रचना िवधा कतेक ~यापक छल। याmीक xथम उपयास 1946मे xकािशत भेल। ता धिर भारत वष+ वतंm निह भेल छल। अवथा आकष+क छलिन। ओ समय राजनीितक ओ सामािजक ºपसँ संघष+क समय छल। ओिहसँ पिहलुक शताwदीमे िवक ि9ितजपर पव राजनीितक, आिथ+क, सामािजक चेतनाक उदय भए चुकल छल। पूँजीवादी अवधरणाकÊ =वत करबाक उçेÄयसँ मा$स+वादी दश+नक xभाव सgपूण+ िवमे पिर~या£त भऽ रहल छल। एकरा अतग+त शासक ओ शािसत, पूँजीपित ओ सव+हारा आिदक अवधरणा ओ शwदावली xचिलत-~यवहृत भऽ गेल छल। भारतवष+मे राजा राम मोहन राय, दयानद सरवती आिद नवीन िवचारक =वजवाहक बिन उभिर चुकल छलाह तथा सामािजक िचतन संबंधी हुनकलोकिनक अवधारणा xभाव देखायब xारंभ कऽ देने छल। सgपूण+ देशमे µµामक भौितकवाद अथवा सामािजक यथाथ+वादक अवधारणा पसिर गेल छल। भारतीय वतंmता सं<ाममे राtÅीय अवधारणाक संगिह समाजवादी िवचारधारा संग-संग चिल रहल छल। भारत वष+मे िकसान आदोलन सेहो सिpयता देखा रहल छल। एिह वैिक एवं भारतीय िचतन ओ िpयाशीलताक xवाहपूण+ युगमे याmीजी सािहय जगतमे नव िचतन-नव िवचारधाराक संग पदाप+ण कएलिन। िहनक उपयास पर दृिÐपात कएलासँ पÐ होइत अिछ जे तीनू उपयासमे तीन िवषय अिछ। ‘पारो’उपसासमे वयसमे अनमेल िववाह जय सामािजक समयाक मनोवै;ािनक प9क उ  ाटनक िदशामे सiकेितक डेग माm उठाओल गेल अिछ, मुदा मैिथली जगतमे इएह डेग आधुिनक ओ xगितशीलताक दृिÐसँ साहिसक डेग छल, कारण अWाविध विज+त 9ेm यौन-आकष+णक वण+न-िचmण करबाक साहस कएल गेल जकर दूरगामी xभाव समकालीन आ परवत¦ सािहयपर पड़ल।

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् िहनक ‘नवतुिरया’ (1954) उपयासक कथानक सेहो वैवािहक समयापर आधािरत अिछ मुदा ई ‘पारो (1946) सँ दू डेग आग› बिढ़ कए अिछ। एिह उपयासमे तकालीन समाजक गितिविध सेहो थान पाओलक अिछ। नवीन िवचार, िpयाशीलता, xाचीन-नवीनक संघष+कÊ सेहो एिहमे समेटबाक xयास भेल अिछ। एिहमे समाधानक िदशा संकेत, नारी जागरणक संग नारी शि$तक आवाहन ओ सहभािगताक संदेश देल गेल अिछ। नवयुवक वग+क आग› अएबाक कथावतु एिहमे लेल गेल अिछ। वैवािहक समयासँ संबंिधत रिहतहु एिह उपयासमे नवोमेषकÊ xcय देल गेल अिछ। याmीजीक मैिथलीक तेसर उपयास िथक ‘बलचनमा’ (1966)। एिह उपयासक िहदी संकरण पिहने xकािशत भेल छल आ एकर िहदी मूल सन 1966 ई.मे xकािशत भेल। एिहमे िहनक ‘पारो’आ ‘नवतुिरया’सँ िभ¤ कथावतु राखल गेल अिछ। एिहमे िहनक ‘पारो’आ ‘नवतुिरया’सँ िभ¤ कथावतु राखल गेल अिछ। एिहमे िकसान आदोलन, फलीभूत भावना, जागºकता, धनवानक उपीड़न आ िनध+न पीिड़त अवथा-भावनाकÊ xcय देल गेल अिछ। अथ\त् धनवान-िनध+नक संघष+, भूिमक xित धरती पुmक मोह ममव आिद समािवÐ कएल गेल अिछ। वातंmयो§र कालक पिरवित+त होइत समाजमे दिलत जागरणक संदेश सेहो एिहमे नीक जकॉं कएल गेल अिछ। xगितशील, यथाथ+वादी अथवा नवीनताक मूलमे नवीन अवधारणा सामािजक भावामक तरपर  ाइडक धारणा-वासना अथवा यौन भावना ई दुनू अवधारणा मुÕय ºपÊ सिpय रहल अिछ। एकरा रचनाकारलोकिन अपन कौशल ओ 9मतासँ िविभ¤ ºप दैत रहलाह अिछ। याmी सेहो ओिह कोिटमे राखल जा सकैत छिथ िकतु कथावतु एवं अिभ~यि$त िशYपक 9ेmमे ई ओिह दुनूसँ आग› बिढ़ जाइत छिथ। थानीय वैिशÐकÊ समािहत करैत नवीनताक वरण िहनक सािहियक गिरमाक cीवृि}मे आधारभूिमक काज करैत अिछ। ‘पारो’मे जतए  ायडीय अवधारणाक अनुसार समवयक ‘नारी-पु¼ष’क परपर आकष+ण भावनाकÊ थान भेटल अिछ तँ ‘नवतुिरया’मे नवजागरणक समाज सुधारक िवषमता िवनासक युवाशि$तक अवतरण ओ सिpय नेतृव 9मताक संकेत दैत माग+ xशत करैत अिछ। वातवमे तीनू उपयास वतंmता कालक पूव+वत¦ ओ िनकटवत¦ कालक पिरिथित भाव ओ सेघष+क िpयाशीलताकÊ कथावतुक आधार बनौलक अिछ। पारो ओ नवतुिरया दुनूमे नारीकÊ xधानता दए तानी-भरनी बुनल गेल अिछ जािहमे यथाथ+क िव4ुप वाभािवकताक संग थान पािब सकल अिछ। ओना बलचमामे सेहो बलचनमाक बिहनकÊ सेहो एही अवधारणासँ देखल जा सकैछ। तीनू उपयासमे चिरmकÊ नीक जकॉं ठाए ़ कएल गेल अिछ। शैलीक दृिÐएँ पारोमे xथम पु¼षमे कथा कहल गेल अिछ- िवरजू µारा। एिहमे चिरm िचतनरत अिछ। पारो एवं िवरजू दुनूक मनोगत भाव देखाओल गेल अिछ। कुyठा िकंवा pािन दुनू पाmक मनोगते रहैत अिछ वाá वा xकट ºपमे निह। नवतुिरयामे उपयासकार घिटत घटनाक िचmण करैत छिथ। पाmक संÕया आ घटनाक िpयाशीलताक माm

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ओिहमे रहैछ। बलचनमामे तँ आओरो अिधक गितिविध गामसँ शहर धिर पहुँचैत अिछ। धिनक िनध+नक िचm अिछ उपीड़न, संघष+, भूिम सgबधी अथवा <ाgय जीवन, राजनीितक चेतना आिदक समावेश ‘बलचनमा’क कथा वतुकÊ िवतार दैत अिछ। िशYपक दृिÐ ऍ ं पारोमे वत\लाप प}ित अपनाओल गेल अिछ। मुदा नवतुिरया ओ ‘बलचनमा’मे वण+नामक घटनाक िचmण प}ित अपनाओल गेल अिछ। ‘नवतुिरया’मे नवीन समािजक चेतनाक अनुकूल ‘गरम दल’क चच\ अिछ जािहमे अनेक नवयुवक माहे, बुलो, गोनउरा, टुनाई आिदकÊ थान दऽ साहसी पिरवत+नक आकi9ी युवा वग+कÊ ठाढ़ कए नव संदेश देल गेल अिछ। तिहना परgपरापोषंक ओ ºिढ़वादीलोकिनक ºपमे खोखाइ झा, मुिखया, चौधरी, मुटकी िमc फतूरी काका आिद नारी नवतुिरआक चिरm सेहो ठाढ़ कए सकत। संघष+ ओ पिरवत+नक भावकÊ िवसनीयता xदान कएल गेल अिछ। के4ीय समयाक समाधान हेतु अपनिह बीचसँ उपयु$त बरक ºपमे वाचपितकÊ ठाढ़ कएल गेल अिछ। एिह xकारÊ कोकनल ºिढ़भंजन ओ सामािजक पुनिन+माणक दृÐात बनल नवतुिरया। सहज, सरल फड़कैत भाषाक xयोग याmीजीक सभ उपयासमे बेछप अिछ। वातावरणक अनुकूल ठÊठ शwदावली, तसम, तeव देशी-िवदेशी, िवदेशीक <ाgय xयोग पाm ओ पिरिथित अनुसारÊ सटीक ºपÊ करब याmीक उपयासक वैिशtªय िथक। उपयासे जकॉं याmीक किवता सभमे सेहो समािजक यथाथ+वादकÊ xमुखतासँ थान देल गेल अिछ। िहनक xथम का~य सं<ह ‘िचmा’मे 1931 सँ 1949 धिरक चुनल किवताकÊ राखल गेल अिछ। xयेक किवता अपन पृथक वैिशÐसँ यु$त अिछ। जेना िवलापमे सामािजक कुxथा ओ नारी नैराÄयकÊ उजागर कएल गेल अिछ। ‘किवक व  ’मे xगितवादी उçेÄयक घोषणा कएल गेल अिछ। ‘अतरामाक भाव’िहमिगिरक उसंगमे िसनुिरया आम आिदमे संकार संकृित, िमिथला मातृभूिम सभ भावक किवता एिहमे थान पओलक अिछ। तिहना 1967 ई.मे xकािशत आ 1968 ई.मे सािहय अकादमी िदYलीसँ पुरकृत किवता सं<ह ‘पmहीन नjन गाछ’मे पारंपिरक सामािजक यथाथ+तासँ पिरपूण+, xतीक पूण+, xयोगपूण+ ओ वpोि$तपूण+ आधुिनक वातावरण न~यतम वºपमे िवWमान अिछ। एिहमे नव नचारी, अहार िजनगी, नवतुिरए आबओ आग›, आधुिनक रािधका आिदक संगिह xकृित वण+नसँ यु$त माघ, फागुन, चैत, वैशाख, अषाढ़, साओन, मेघवण+न आिद किवता अिछ। िहनक का~यमे मानवीयताक रचनामक xीितरोध सव+पश¦य संदेवदना, एकरे पिरिधमे, सामािजक कुरीित, एिह जालिमे फँसल, पछुआएल अपेि9त नारी ओ दिलत समाज तथा नव युगक संदेशवाहक, नवयुवकक प9धरता नीक जकॉं उजागर भेल अिछ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् याmीक का~यक xसंग डॉ. वासुकी नाथ झा िलखैत छिथ- “कãय, सय ओ यथाथ+क खर-खर धरातलपर आpोश ओ संवेदनाक मािम+कता याmीक का~यमे बेछप अिछ। ‘अगराही लगौ बº वô खसौ’ भावक उçीपन िमिथलाक नारी वग+क आजुक संदभ+मे िनtपि§ िदस अ<सर होइत पÐ दृिÐगोचार होइत अिछ। किवक युग4Ðा ओ युग|Ðा होएबाक िवशेष सदभ+मे एकरा देखल जा सकैत अिछ।”[23] याmीजीक किवता सामािजक, आिथ+क राजनीितक, धािम+क, मनोवै;ािनक िथित-पिरिथित ओ िव4ुपताक xित सचेत तँ किरतँिह अिछ, संगिह जागºकता आ सुधारक xेरणा सेहो दैत अिछ। िहनक का~यमे िवWमान वतु िथितक समाजशाmीय दृिÐसँ िववेचन अपेि9त अिछ। याmीजीक का~यक भाषा बेछप अिछ। सव+m ~यावहािरक लोक भाषाक सटीक xयोग सरलता-सहजतासँ पिरपूण+ ओ xवाहपूण+, ओजिवतापूण+, वत: सgxेषण स9म शwदावली ओ िशYप शैलीक पिरपूण+ता िवWमान अिछ। आधुिनक मैिथली किवतामे मु$त वृि§कÊ ~यापक ओ गिरमापूण+ बनेबाक cेय िहनका देल जाइत छिन। िहनक योगदानकÊ एिह xकारÊ रेखiिकत कएल जा सकैछ- मा$स+वादी ओ  ायडीय िस}ातक xभावपूण+ xयोग, सामािजक यथाथ+कÊ किवता आ उपयासमे सटीक ºपÊ xयोग, मु$त वृि§कÊ कलामक बनाय सव+वीकृत बनाएब, सामािजक यथाथ+कÊ ~यंगक मा=यमे का~यमे xभावी बनाय <ाgयिचmक शwदावलीक xयोगसँ भाषामे सरलता, सहजता, वाभािवक भाव बोध सहज xभाव सामाय पाठक धिरकÊ अिभभूत करबामे स9म होयब। व§+मानक सािहयकार जतए आई mी िवमश+क नारा दऽ रहल छिथ ओतए याmीजीक 20म शताwदीक चािरम दशकक किवता िवलाप, बूढ़वर, जगतारिन mीक वरकÊ, आत+नादकÊ तथा आ§+नादक अöयतर उeूत संिÄलÐ अतµ+µकÊ ओकर गाgभीय+कÊ जगिजयार कऽ चुकल छिथ। ई किवता सभ वातमे mी-िवमश+ सामािजक दृिÐसँ वतुत: भिवtय4Ðा िस} करैत अिछ जे आइ चिरताथ+ भए रहल अिछ।

-अनुपम रैना, शोधाथ¦, बी.आर.ए. िबहार िविवWालय, मुजòफरपुर

[1] पिरचाियका- डॉ. भीमनाथ झा, 107

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मानुषीिमह सं ृ ताम् [2] मैिथली सािहयक इितहास- पृ.- 206, डॉ. दुग\नाथ झा cीश [3] History of Maithili literature- page- 160, Dr. Jaikant Mishra. [4] याmी : मेमे बाबूजी, शोभाकनत, वाणी xकाशन, नई िदYली, xथम संकरण 1990, पृ.- 13 [5] िदनकर का ~यि$तव- पृ.- 8ए डॉ. xिमला [6] िदनकर का ~यि$तव- पृ.- 8ए डॉ. xिमला [7] मानक िहदी कोश- पृ.- 124ए पॉंचवा खyडए रामच4 वम\ [8] िहदी िवकोश- पृ.- 150ए xथम संकरण खyड [9] उपयासकार नागाजु+न- पृ.- 1, Äयाम xकाशन जयपुर, 3 1985, बाबू राम गु£त [10] आज के लोक िxय िहदी किव नागाजु+न- पृ.- 3 x. राजपाल एyड सस- 3, डॉ. xभाकर माचवÀ [11] उपयासकार नागाजु+न- पृ्.- 2, रामबाबू गु£त [12] नागाजु+न मेरे बाबूजी : पृ. सं. 58, शोभाकात [13] नागाजु+न मेरे बाबूजी : पृ. सं. 46, शोभाकात [14] नागाजु+न मेरे बाबूजी- पृ.- 53, शोभाकात [15] याmी सम< : ‘याmी सम<’क सदभ+मे- 2003, राजकमल xकाशन, नई िदYली। [16] नव भारत टाइgस : सा9ाकार, अपरािजता देवी, 29 जुलाई 1991, अंक- पटनासँ xकािशत [17] बाबा नागाजु+न- पृ.- 14, वाणी xकाशन नई िदYली, सं.- नरे4 कोहली [18] बाबा नागाजु+न- पृ.- 14 वाणी xकाशन नई िदYली, सं.- नरे4 कोहली [19] उपयासकार नागाजु+न- पृ.- 6, Äयाम xकाशन जयपुर, बाबूराम गु£त [20] याmी- (2000) पृ.- 20, चेतना सिमित पटना, सgपादक डॉ. cी हिरनारायण िमc

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् [21] याmी- (2000), पृ.- 20, चेतना सिमित पटना, सgपादक डॉ. cी हिरनारायण िमc।

[22] पिरचाियका- पृ.- 107, डॉ. भीमनाथ झा [23] याmी सािहयावलोकन- पृ.- 5, 2011, चेतना सिमित पटना, स. वासुकी नाथ झा

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् डॉ. ललन कुमार झा पं. कुशेर कुमर ओ पव+ िनण+य : एक समी9ण धम+शाmीय िनबध ‘पव+ िनण+य’पं. कुशेर कुमर µारा xणीत अिछ। िहनक नाम मैिथल िनबधकार लोकिनक बीच समादृत अिछ। ई ¹योितष शाmमे तीथ+ एवं आचाय+ छलाह संगिह का~य (तीथ+), धम+शाm, इितहास, पुराण एवं मीमiसा (कम+काyड)क सेहो उe¸ िवµान छलाह। ¹योितष आओर धम+शाm दुनूमे वैदुtय रहबाक कारणÊ ई दुनू शाmमे <थक xणयन कएलिह अिछ। िमिथला देशीय पंचागम् (1328-1338 साल पय+त), िविmभ लjन Ìमणम्, गोल xवेिशनी, पंचागदीिपका, ¹योितषरîावली, ¹योितष िशशुबोध, शुि} बोिधनी िहनक ¹योितष <थ अिछ। ई धम+शाmक ~यवहार मंजूषा कृय मंजरी, ~यवहार दीिपका, सदाचार चि4का आओर पव+ िनण+य <थक xणेता सेहो छिथ। पव+ शwदक ~यापक अथ+ अिछ। ओना वÑत पव+ समानाथ+क अिछ, मुदा तवत: पव+क अतग+त वÑत अबैत अिछ निह िक वÑतक अनतग+त पव+। एिह पव+क ितिथ िथर करबाक लेल ¹योितष शाmक सहारा लेबए पड़ैत अिछ। िमिथलामे पव+ िनण+यमे अनेक xकारक मतिभ¤ता रहैत आएल अिछ। एिह िवषयकÊ =यानमे रािख कऽ महान् धम+शाmी पं. कुशेर शम\ एिह सामािजक मतभेदकÊ दूर कऽ एक िनण+यामक <थक xणयनक िवचार कएलिह। पं. शम\ िभ¤-िभ¤ पव+क सgबधमे िनबध <थक अवलोकन कऽ समकािलक िवµान लोकिनक िवचार लऽ कऽ कोनो एक िनण+यपर पहुँचबाक िवचार कएलिह। एिह हेतु ओ िमिथलाक िवµान लोकिनसँ गामे-गाम घूिम कऽ सgपक+ कएलिह। सभ िवµान लोकिनक मतक सं<ह कऽ िविभ¤ पव+क हेतु ओ जे <थक xणयन कएलिह ओएह आइ ‘पव+ िनण+य’क ºपमे अिछ जािहमे िविभ¤ पव+क िनण+य हेतु सgपादक पं. कुशेर शम\ तेरासी िवµान् लोकिनक िनबधक संकलन कएलिह आओर सभ िवµान लोकिनक िनबधक त§पव+ िनण+य हेतु xतुत कएलिह। एिह तरहÊ cावण माससँ आरgभ कऽ चैm कृtण xितपदा धिरक िवमश+

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् कएल गेल अिछ। <थारgभक पूण+ िवषयानुpमिणका देल गेल अिछ, जािहमे िभ¤-िभ¤ पव+क िनण+य हेतु ओिह- ओिह िवµान लोकिनक नाम सेहो देल गेल अिछ। मुÕय पव+ आइयो िमिथलामे पूण+ c}ा भि$तसँ मनाओल जाइत अिछ आओर िकछु समा£त xाय। अिछ जेना िमिथलाक xाचीन पंचiग कहैत अिछ जे अशूयशयनवÑत जे भगवान िवtणुकÊ लÔय कऽ मनाओल जाइत छल से समाि£तक तरफ बढ़ल जाइत छल आओर आइ ओ अितवमे निह अिछ। mी आओर पु¼ष दुनू अपन शात संगक लेल एकरा मनबैत छल। सॉंपसँ र9ाक लेल मौना पंचमी आओर नागपंचमी पव+ आइयो pमश: cावण कृtण आओर शु$लप9मे मनाओल जाइत अिछ। िमिथलाक सुxिस} पव+ मधुcावणी cावण शु$ल तृतीयाकÊ नविववािहत कया आओर वरक µारा मनाओल जाइत अिछ। िववाहक xथमे वष+ एकरा उसाहक संग मनाओल जाइत अिछ। एिह पव+कÊ मनएवाक मुÕय उçेÄय अिछ सप+ जाितसँ कोनो xकारक 9ित निह होमए। cावण शु$ल पूिण+माकÊ र9ा बधन पव+ केवल िमिथले टामे निह लगभग सgपूण+ उ§र भारतमे मनाओल जाइत अिछ। मैिथल आचारानुसार भ4ा रिहत उदय गािमनी पूिण+माकÊ र9ा बधन पव+ मनाओल जाइत अिछ। भा4 कृtण चतुथ¦कÊ िबहुला पूजा आइयो xचिलत अिछ। िमिथलामे कृtण अÐमीकÊ कृtणाÐमी मनाओल जाइत अिछ, अयm िवशेषत: वैtणव सgxदायवला जयती वÑत करैत अिछ। भा4 मासीय अमावयाकÊ कुशोपाटनक िमिथलामे परgपरा अिछ। िपतृिवहीन लोक सभ जाितक, िवशेष ºपसँ िपतृकम+क लेल कुश अवÄय उखारैत अिछ, िकएक तँ िबनु कुशक कोनहुँ िpया निह होइत अिछ- “िबना दभäण या सधया िपंतृदेव िpयाÒ या:। सफला िवफला यमात् तमात् कुशयुतो भवेत्।।” - पव+ िनण+य- 64 हिरताली-हिरतािलका :- भा4 शु$ल तृतीया हिरताली या हिरतािलका वÑतक नामसँ xिस} अिछ जे mी लोकिनक लेल याव¹जीवन सुदर पित आओर सौभाjयक लेल अनुØेय अिछ। माली (सखी)क µारा þत भऽ जएबाक कारणÊ हिरताली नामसँ xिस} अिछ। mीक लेल तृतीया वÑतक बड़ पैघ महव अिछ। जेना cावण शु$ल तृतीया मधुcावणी, भा4 कृtणक कïली आओर शु$ल प9ीय हिरतािलका वÑत बड़ c}ाभावसँ mीलोकिन अनुØान करैत छिथ। बेशी काल ई चतुथ¦ संयु$ता <ाá अिछ- “सा च तृतीया परयुतैव <ाáा- रgभाÕया वज+ियवा तु तृतीया िµजस§म। अयेषु सव+कायäषु गुणयु$ता xशयते।।”

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् -पव+ िनण+य- पृ.- 68 चतुथ¦च4 (चौठच4) :- िमिथलामे एिह पव+क बेशी xचलन अिछ। चतुथ¦ च4क दश+न पं. जीवनाथ राय िनिष} मानलिह अिछ, मुदा धाmेियका वा$यक पाठ कऽ दश+न कएल जा सकैत अिछ। ÚÛ पुराणक अनुसारÊ- “नारायणोऽिभश£ततु िनशाकरमरीिचषु। िथतÒतुãय\मWािप मनुtयानापते:च स:।। अतÒतुãय\च4तु xमादाद् वीÔय मानव:। पठेद् धाmेियकावा$यं xाङमुखो वाऽ£युदङमुख:।।” -पव+ िनण+य- पृ.- 70 धाmेियका वा$य यमत कोपारधानमे एिह xकारÊ अिछ- “िसह: xसेनमवधीत् िसंहो जाgबवता हत:। सुकुमारक मा रोदीतव áेष यमतक:।।” अनत पूजा :- भा4 शु$ल चतुद+शीकÊ भगवान िवtणुक अनत ºपक पूजा कएल जाइत अिछ, जे पूिण+मायुता <ाá अिछ- “तृतीयैकादशी षØी शु$ल प9े चतुद+शी। पूव+िव}ा न क§+~या क§+~या परसंयुता।।” -पूव+ िनण+य- पृ.- 78 भा4 पूिण+मा ऋिष अगयक तप+णक लेल xिस} अिछ। िमिथलामे काश पुtप हाथमे लऽ कऽ तप+ण करबाक िवधान अिछ। आिन कृtणप9मे 9यितिथकÊ पाव+ण करबाक िवधान अिछ। कमसँ कम कम+ पव+ (अमावया)कÊ तँ अवÄये पाव+ण करबाक चाही। ओना पं. कुमर xितिदन िपतृप9मे cा} करबाक समथ+न कएलिह अिछ। ÚÛपुराणक अनुसारÊ जँ िपतृप9मे एको िदन cा} (पाव+ण) कऽ लेल जाए तँ वष+ पय+त िपतर तृ£त रहैत अिछ- “यो वै cा}ं नर: कुय\देकिम¤िप वासरे। तय संवmय यावत् संतृ£ता: िपतरो Ùुवम्।।” -पव+ िनण+य, पृ.- 84 जीिवत पुिmका :- मिहलालोकिनक सभसँ िxय वÑत जीिवत पुिmका आिन कृtण अÐमीकÊ मनाओल जाइत अिछ। मिहलालोकिन अपन सतान िवशेषत: पुmक कYयाणाथ+ एकर अनुØान c}ाभि$तसँ करैत छिथ। भिवtय

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् पुराणक अनुसारÊ आिन कृtणक जीमूतवाहन वÑत सौभाjय xदान कएिनहार अिछ। xदोष एकर मुÕय पूजाकाल अिछ। जािह xदोष कालमे अÐमी पड़ैत अिछ ओएह समय अनुØेय अिछ। स£तमी िव}ा अÐमी ~या»य मानल गेल अिछ। अÐमी ितिथ पय+त िनराहार तथा िबनु जलक उपवास कऽ नवमीमे पारण कएल जाइत अिछ, भनिह अÐमी दोसर िदन कतेको िवलgब तक िकएक निह रहए। ‘पारणातं वÑतं ;ेयम्’क अनुसारÊ नवमी ितिथकÊ पारण करबाक िवधान अिछ। कोनहुँ िथितमे अ¤ जलािदक सेवन िहतकारी निह होइत अिछ- “आिनयािसताऽÐgयi या: िmयोऽ¤ं च भु¹जते। मृतवसा भवेयुता िवधवा दुभ+गा Ùुवम्।।” -पव+ िनण+य, पृ.- 93 नवराm :- आिन शु$ल xितपदासँ नवमी पय+त शारदीय नवराm उ§र भारतक िहदूलोकिनक अयत महवपूण+ पव+ अिछ। िµतीया युता xितपदा माय अिछ- “यो मi पूजयते भ$या िµतीया िदगुणािवताम् xित:छारदॴ ;ावा सोऽ°ुते सुखम9यम्।।” -पव+ िनण+य, पृ.- 99 अमावया युता xितपदा िनदनीय मानल गेल अिछ- “यिद कुय\दमायु$ता xितपत् थापने मम। तमैशापायुतं दवा भमशेषं करोgयहम्।।” -पव+ िनण+य, पृ.- 99 कोजगरा :- आिन शु$ल पूिण+माकÊ कोजगरा पव+ ÚाÛणक लेल िविशÐ महव रखैत अिछ। देश भेदसँ ई च4ोदय ~यािपनी वा िनशीय ~यािपनी दुनू <ाá अिछ। ‘को जागित+ महीतले’ एिह ज;ासासँ लÔमी राितमे घुमैत अिछ। xदोष कालमे लÔमीक पूजाक िवधान अिछ। िदयावाती (सुखरािm , दीपावली) : - काित+क कृtण अमावयाकÊ Äयामापूजाक िनशीथ कालमे पूजाक िवधान अिछ। xदोषकालमे उYका Ìमणानतर लÔमीक पूजा आ गोसाउिनक घरक पूजाक िवशेष ºपसँ िवधान अिछ। िपतृप9क अितम िदन रहलासँ महालयाक अितम िदन मानल जाइत अिछ। सायंकाल उYकाÌमणसँ मय+लोकमे आएल िपतरकÊ हुनक पुmािद उYका दीपसँ वग+लोक पठा दैत छिथ। िदनमे चतुद+शी होअए तथा राितमे अमावया होअए ओिह िदन लÔमीक पूजा करबाक चाही इएह सुखरािm कहबैत अिछ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् काित+क शु$ल िµतीया (भातृ िµतीया) : - पं. कुशेर शम\ एिह िµतीयाक xसंगमे पं. बदरीनाथ झाक िनबधक आcय लेलिह अिछ। एिहमे अशूयशयन वÑत, यम यमुनाक पूजन, िचmगु£तक पूजा, भिगनी µारा भाएकÊ आदरपूव+क भोजन xदान तथा भाए µारा सेहो बिहनकÊ वm-भूषणािदसँ संतोष xदान करब ई चािरटा कृय कहल गेल अिछ। ई िµतीया पूव+ िव}ा आओर परिव}ादुनू समयानुसार xचिलत अिछ। षØी िनण+य :- वÑतानुØानमे षØीक बàड महव अिछ। ई बारह xकारक मानल गेल अिछ। स£तमी िवµा षØीए माय अिछ। पंचमी िव}ा गिह+त अिछ आओर एकरा कएिनहारक धन ओ सनतानक हरण होइत अिछ। अ9य नवमी :- ई युगारgभ ितिथक ºपमे माय अिछ। ई नवमी युगािद कृयक लेल दशमी िवµा <ाá अिछ। वाचपित िमc काित+क शु$ल नवमीकÊ अयत पुyयxद मानलिह अिछ- ‘काित+के शु$लप9े तु mेताऽथनवमेऽहिन।’ रिव वÑत िनण+य :- पं. कुशेर शम\ रिववÑत िनण+यक xसंगमे पं. वासुदेव झाक िनबधकÊ उ}ृत कएलिह अिछ। तदनुसार अ<हण, माघ,वैशाख आओर आषाढ़ शु$ल प9ीय रिवकÊ भगवानसूय+क वÑत करबाक लेल कहल गेल अिछ। िनण+यानुसार मेष शिशगत सूय+क रहलेपर रिववÑत करए, जँ वैशाखमे मलमास होअए तइयो। cी जानकी महोसव :- xाचीन मैिथल परgपरामे अ<हण शु$ल पंचमीकÊ cीसीताक जमोसव मनाओल जाइत अिछ। cी पंचमी (िसर पंचमी) : - माघ शु$ल पंचमी cी पंचमी वा िसर पंचमी कहबैत अिछ। ई चतुथ¦ युता <ाá अिछ। उपवासािदक अितिर$त सभ पंचमी पूव+ िव}ा <ाá अिछ। एिह िदन िशÐजन हल xवहण ओ ओकर पूजा करैत अिछ। माघ शु$ल स£तमी :- ई स£तमी नान माघ शु$लक करबाक xसंग उदय ~यािपनी <ाá अिछ, जे सूय+<हणक तुYय अिछ। सातटा आक, बैर आओर जौवक पातकÊ माथपर रािख नान करबाक चाही। पर िव}ा स£तमी कदािप अनुØेय निह अिछ। होिलकादहन :- होिलका दाह सायाम ~यािपनी भ4ा शुय फाYगुन पूिण+माकÊ करबाक चाही। एकर मुÕय काल xदोष अिछ-

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मानुषीिमह सं ृ ताम् “xदोष~यािपनी <ाáा फाYगुनी पूिण+मा सदा।” xितपदानमे होिलकाप+ण दोषावह होइत अिछ। होिलका दाहक पÒात् िदनमे फाYगुनी पूिण+माकÊ िसदूर pीड़ाक िवधान अिछ। रामनवमी वÑत :- काल माधवमे पुनव+सु न9m यु$त चैm शु$ल नवमी म=याÜ योग भेलासँ महापुyय xदान कएिनहार होइछ। नवमीमे उपवास कऽ दशमीमे पारण कहल गेल अिछ। बैशाख शु$ल तृतीया :- बैशाख शु$ल तृतीया अ9य तृतीयाक नामसँ xिस} अिछ। ई चतुथ¦ युता <ाá अिछ। वटसािवmी वÑतम् :- ¹येØ कृtण अमायाक िदन िमिथलामे मिहलालोकिन वटसािवmी वÑत करैत छिथ। चतुद+शी िव}ाअमावयाक अनुशंसा कएल गेल अिछ। ई अवै=यक कामनासँ कएल जाइत अिछ। xितपदा यु$त अमावया ‘गिह+त’ मानल गेल अिछ। पञचािjन वÑत :- ¹येØ शु$ल तृतीया रgभा तृतीया कहबैत अिछ। एिहमे मिहलालोकिन पýचािjन वÑत करिथ एहन शाmीय िवधान अिछ। ई तृतीया िµतीया युते करबाक चाही। गंगा दशहरा :- ¹योØ शु$ल दशमी गंगा दशहराक नामसँ जानल जाइत अिछ। एिह िदन गंगा नानसँ दशिवध पापक नाश होइत अिछ। एकादशी वÑत :- शु}ा एवं दशमी िव}ा नामसँ दुइ xकारक एकादशीक वण+न कएल गेल अिछ। अ¼णोदय कालमे जँ दशमी रहए तँ ओिह िदनक एकादशी पाप मूलक उपवास यु$त िव}ा एकादशी कहबैत अिछ। ई वÑत दुनू प9क एकादशी करए अथवा शु$ल प9क एकादशी वÑतकÊ करए। चतुद+शी वÑत :- चतुद+शी शु}ा आओर िव}ा नामसँ दुइ xकारक होइत अिछ। चतुद+शीमे उपवास कऽ चतुद+शीयएमे पारणा उ§म कहल गेल अिछ। िमिथलामे कृtण चतुद+शीएक Õयाित अिछ। पूिण+मा कृय :- ई पूिण+मा चतुद+शी िव}ा <ाá निह अिछ, पर िव}े <ाá अिछ। एिह ितिथमे अमावयाक तरहÊ िपतृ cा} आवÄयक अिछ, अयथा नरकभाक होबए पड़ैत अिछ। सोमवारी वÑत :-

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मानुषीिमह सं ृ ताम् mी लोकिनक हेतु िमिथलामे सोमवारी वÑत खूब xचिलत अिछ। अितचार :- दैव; बाधव <थमे कहल गेल अिछ जे वष+कÊ पूण+ निह भेलापर जँ वृहपित पूव+ शिशकÊ छोिड़ पर रािशगत भऽ जाइत अिछ तँ अितचारक xाि£त होइत अिछ। एिह अविधमे िववाहािद काय+ निह होइत अिछ। कुgभ पव+ िनण+य :- xाचीने कालसँ हिरµार, xयाग, उ¹जैन आओर नािसकमे कुgभ पव+क xचलन अिछ। जँ सूय+ मेष रािश तथा वृहपित कुgभ रािशमे होअए तँ हिरµारमे, सूय+ जखन मकर रािशमे होअए तथा वृहपित अजग (मेष रािश) मे होअए तखन xयागमे जखन वृहपित िसंह रािशगत होअए तखन उ¹जियनीमे आओर गु¼ कक+ रािशमे होअए तथा सूय+ च4मा सेहो कक+ रािशमे होअए तखन नािसकमे कुgभ योग होइत अिछ। दी9ा <हण :- िमिथलामे मंm <हणक अयिधक महव बताओल गेल अिछ। यावत् पय+त दी9ा निह <हण कएल जाइत अिछ तावत धिर बीज मmक उ:चारण निह कएल जाइत अिछ। मm <हणकसgबधमे कहल गेल अिछ जे िपता, मातामह, किनØ Ìाता तथा शmु प9ािcत ~यि$तसँ मm निह <हण करबाक चाही। पारgपिरक मैिथल िशÐाचारसँ दी9ा देबाक लेल माता सव+cेØ मानल गेल अिछ। एिह तरहÊ पव+ िनण+यक सgबधमे पं. कुशेर शम\ िविभ¤ िनबधक संकलन पव+ िनण+य सgबधी िज;ासाक शाितक लेल साथ+क xयास कएलिह अिछ।

<ाम+पोट- रहुआ थाना- सौर बाजार िजला सहरसा, 852127

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् गजे4 ठाकुर मैिथली आ िहदी/ बijला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली िबहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस .सी.) केर िसिवल सेवा परी9ाक मैिथली (ऐि:छक ) िवषय लेल १ मैिथली आ िहदी मैिथली िहदी हमरा सभक हमारा हमर मेरा ओकर उसका ई यह ओ वह ई सब ये ओ सब वे अिछ है छी हूँ देखनाइ देखना जीनाइ जीना गेनाइ जाना

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् पीनाइ पीना छूनाइ छूना सुतनाइ सोना पढ़नाइ पढ़ना जाउ जाइए जो जा राम गेल राम गया सीता गेिल सीता गई आननाइ लाना बजनाइ बोलना िबसरनाइ भूलना छह हो िलखैत अिछ िलखता है िलिख रहल अिछ िलख रहा है जायत जाएगा अयताह आएंगे राम जाइत अिछ राम जाता है सीता जाइत अिछ सीता जाती है

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मानुषीिमह सं ृ ताम् सीता जाइत छिथ सीता जाती हÈ राम खेनाइ खेलक राम ने खाना खाया राम सोहारी खेलक राम ने रोटी खाई त ई काज केने छह तूने यह काम िकया है राम िफYम देखने छल राम ने िफYम देखी थी राम िफYम देखने छला राम जी (आदर) ने िफYम देखी थी राम पाठ समा£त कऽ लेने होयत राम ने पाठ समा£त कर िलया होगा राम पाठ समा£त कऽ लेने हेता राम जी (आदर) ने पाठ समा£त कर िलया होगा राम सीताकÊ देखलक राम ने सीता को देखा राम सीताकÊ देखलिन राम जी (आदर) ने सीता को देखा

ऊपर अह›कÊ पÐ भऽ गेल होयत जे िहदीमे क§\ लेल “ने” xयु$त भेल मुदा मैिथलीमे ई िर$त रहल। कम+ लेल िहदीमे “को” आ मैिथलीमे “कÊ” xयु$त भेल। िहदी सेब एक सेब दू सेब दो सेबॲ मÀ मैिथली सेब एकटा सेब दूटा सेब दूटा सेबमे िहदी िसपाही एक िसपाही दो िसपाही दो िसपािहयॲ ने मैिथली िसपाही एकटा िसपाही दूटा िसपाही दूटा िसपाही िहदी साधु एक साधु दो साधु दो साधुओं को

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मानुषीिमह सं ृ ताम् मैिथली साधु एकटा साधु दूटा साधु दुनू साधुकÊ िह दी चमगादड़ एक चमगादड़ दो चमगादड़ दोनॲ चमगादड़ॲ पर मैिथली बादुर एकटा बादुर दूटा बादुर दुनू बादुर पर िहदी िचिड़या एक िचिड़या दो िचिड़या दो िचिड़याओं मैिथली िचड़ै एकटा िचड़ै दूटा िचड़ै दुनू िचड़ै एतय पÐ भऽ गेल जे बहुवचनमे िहदीमे शwदक ºप पिरवित+त भेल मुदा मैिथलीमे से निह भेल। एिहसँ पिहने िpयामे िकछु ठाम mीिलङमे िहदी सन पिरवत+न मैिथलीमे सेहो भेल (गेिल) मुदा बेसी ठाम (जाइत अिछ, छिथ) पिरवत+न निह भेल। आदरसूचक वा$यमे िहदीमे िpयामे पिरवत+न निह भेल मुदा मैिथलीमे भेल (देखलक/ देखलिन)। mीिलङक बहुवचनमे िहदीमे ºप पिरवित+त होइतािछ मुदा मैिथलीमे से निह होइत अिछ। कारक / िवभि$त (मैिथली) कारक / िवभि$त (िहदी) राम राम ने रामकÊ राम को गेदसँ, लाठीसँ, लाठी µारा गेद से, लाठी µारा रामकÊ, रामकलेल, राम हेतु राम को, राम के िलये, राम ह ेतु गाछसँ (िवलगाव) पेड़ से रामक घर, रामक पोथी, सीताक राम राम का घर, राम की िकत ाब, सीता के राम घर पर, खोतामे घर पर, घोसला मÀ

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मानुषीिमह सं ृ ताम् मैिथली आ बijला मैिथली बijला अपने आपिन नै (निह) नय छी आिछ/ िछ काज काज इनार इनार करै (करैत) छी कोरेिछ गेल छलॱ (छलहुँ) िगयेिछलाम बाजू नै बोलबेन ना राहल रा¤ा की िक संगे शंगे चाह चा दू टा दुटो ई सब एशब िसंघाड़ा िशङाड़ा कोन कोन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् हाथ हात अखन ऐखोन प›चटा प›चटा अ:छा आ:छा छिथ आछेन छी आिछ हुअय आछो कº कोºन चाही चाइ खोलै छी खुलिछ कोनो कोनो

बijला “अ” ओिड़या सन “ओ” उ:चिरत होइत अिछ। मैिथली सन इ/ ई आ उ/ऊ केर ÷व-दीघ+ उ:चारणमे भेद निह अिछ आ ऐ मैिथलीमे अ+इ आ बijलामे ओ+ई उ:चिरत होइत अिछ। औ बijलामे ओ+उ उ:चिरत होइत अिछ। “न” आ “ण” केर उ:चारण बijलामे एके रङ होइत अिछ। मैिथलीमे “ण” केर उ:चारण कखनो काल “ड़” होइत अिछ (गणेश=गड़ेस)। व/ ब एके रङ “ब” (मैिथली जक›) सन उ:चिरत होइत अिछ। आिन मैिथलीमे िलखलो आ बाजलो “आिसन” जाइत अिछ मुदा बijलामे िलखल आिन आ बाजल आिÄशन जाइत अिछ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् तिहना :- बijलामे एना िलखल जाइत अिछ बijलामे एना बाजल जाइत अिछ अवेषण अ¤ेशन ास शाश उ:úवास उ:छास अ9र अ$खोर पâ पçो िवमय िबÄशय उ¹जवल उ¹जल

फेर बijलामे एना िलखल आ फराकबाजल सेहो जाइत अिछ:- बijलामे एना िलखल जाइत अिछ बijलामे एना बाजल जाइत अिछ संहा शंथा हान थान सुå शुथो असुå अशुथो

बijलामे कोनो शwद पर िवशेष बल देबाकलेल –-तो जोड़ल जाइत अिछ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् बijलामे पूव+ िनिद+Ð वतु लेल xयु$त वतुवाचक सं;ा/ सव+नामक एकवचनमे –-टा –-िट आ बहुवचनमे –- गुलो, -गुिल जोड़ल जाइत अिछ। बijलामे संÕयावाचक शwदक संग –-टा, -िट, -टे, -टो जोड़ल जाइत अिछ मुदा –-गुलो, -गुिल केर xयोग निह होइत अिछ। बijलामे “संग” आ “लेल” सन अ~यय लेल सgबध िवभि$तक xयोग होइत अिछ जेना:- चायेर शंगे- चाहक संग आमार शंगे- हमरा संग आमार जो¤े- हमरा लेल बijलामे सव+नामक सgबधवाचक ºपबनेबा लेल सव+नामक ितय+क ºपमे –-देर जोड़ल जाइत अिछ। आमा-आमादेर-हमर आपना-आपनादेर-अह›क तोमा-तोमादेर- तोहर एना-एनादेर-िहनकर व§+मान काल आ;ाथ+कक बाद –-ना xयोग जोर देबा लेल कयल जाइत अिछ। देखू ने- देखुन ना कोनो शwद पर बल देबा लेल मैिथलीमे िµव+एकार केर xयोग होइत अिछ जेना- कgमे, एÂे। बijलामे ई xभाव –-इ यु$त भेलासँ अबैत अिछ जेना-कमइ। मैिथलीमे “अिछ” केर नकारामक “निह अिछ” xयु$त होइत अिछ मुदा बijलामे “आछे” केर नकारामक लेल माm “नेइ” xयु$त होइत अिछ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् अपूण+कािलक िpयाºप मे जँ धातु वरiत होइत अिछ तँ धातुक ितय+क ºपक संग कालवाची xयय –-:छ जोड़ल जाइत अिछ। जँ धातु ~यंजनात होइत अिछ तँ धातुक ितय+क ºपमे –-छ जोड़ल जाइत अिछ। कालवाचक xयय लगेलाक बाद पु¼षवाचक xयय जोड़ल जाइत अिछ। मैिथली बijला हम अबै छी आिम िफिरिछ हम जाइ छी आिम जाि:छ ओ सब आबै छिथ उिन िफरछेन अह› जाइ छी आपिन जा:छेन तूँ आबै छÊ तुिम िफरछो तूँ जाइ छÊ तुिम जा:छो ओ सब अबैत छिथ ितिन िफरछेन ओ सब जाइ छिथ ितिन जा:छेन ओ आबै छिथ शे िफरछे ओ जाइ छिथ शे जा:छे अह› अबैत छी आपिन िफरछेन अह› करैत छी आपिन कोरछेन

बijलामे एक xकारक असमािपका िpया होइत अिछ- िpयाक ितय+क ºपक। बादमे –-ते जोड़लासँ ई बनाओल जाइत अिछ। करय मे- कोरते (कोर+ते)

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मानुषीिमह सं ृ ताम् जाइ मे- जेते (जा+ते) आबय मे- आशते (आश+ते) मैिथली सन बijलामे सेहो दू शwद वा वा$यकÊ जोड़बा लेल ओ, आर, एबं (मैिथलीमे एवं/ एवम्) केर xयोग होइत अिछ। बijलामे “ओ” केर xयोग “संग” केर अथ+मे सेहो होइत अिछ। हमहूँ- आिम ओ धातुक पाछ› पु¼षवाचक xयय लगा कय िpयाक सामाय व§+मान कालक ºप बिन जाइत अिछ। कर+इ= कोिर कर+एन= करेन कर+ओ= करो कर+इश= कोिरश कर+ए= करे। ३ मैिथली आ भोजपुरी भोजपुरीमे केर बदला ई वण+ xयु$त होइत अिछ ण न ल र ष ख श स

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

भोजपुरीमे सहचर तीन xकारक अिछ, िवपरीताथ+क, समानाथ+क्, आनुxािसक आ िवशेषाथ+ बोधक सहचर। िवपरीताथ+क सहचर शwद िवपरीताथ+क सहचर हकासल िपयासल लरम गरम रकम पताई स›प गोजर

समानाथ+क सहचर शwद समानाथ+क सहचर लकड़ी काठी किनया बहिरया पुरखा पुरिनया िकन बेसाह िबआ बाल नेग चार

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मानुषीिमह सं ृ ताम् आनुxािसक सहचर शwद आनुxािसक सहचर अखोर बखोर हरवा हिथयार बोहनी ब¸ा पर पाहुन चासा बासा िचरई चु¼ंग

िवशेषाथ+ बोधक सहचर शwद िवशेषाथ+ बोधक सहचर सेवा खरचा अह जह तगड़ बगड़ अकट बहेर आउँज गाउँज

भोजपुरीक िकछु उपसग+ िन-िनदरदी

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मानुषीिमह सं ृ ताम् कु- कुअ¤ अध- अधम¼ भोजपुरीक िकछु xयय डाका- अइत- डकइत हार- चूड़ी- चूड़ीहार लकड़ी- लकड़ीहार हर-मुस- मुसहर बाप- बहर मामा- ममहर भोजपुरीमे सं;ासँ िवशेषण काितक- कितका आइन- धुँआ- धुआँइन भोजपुरीमे िवशेषणसँ सं;ा िपयर- िपअरी अई- थेथर- थेथरई अवती- बूढ़- बुढ़उती भोजपुरीमे सं;ासँ सं;ा अई- लिरकाई भोजपुरीमे िवशेषणसँ िवशेषण

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मानुषीिमह सं ृ ताम् लाल- ललछहूँ औठा- पिहल- पिहलौठा mी xयय आइन- िमिसर- िमसराइन आनी- देवर- देवरानी भोजपुरीमे वचन लइका (एकवचन)- लइकन (बहुवचन) हाथी (एकवचन)- हािथन/ हािथयन (बहुवचन) मैिथली भोजपुरी छिथ तारी खाइत अिछ खाता खुजैत अिछ खुलता निह खेलाइत छिथ खेलत नइखन निह अिछ नइखे निह जयताह ना जइहन निह खयताह ना खइहन जाइ छी जातार पढ़ैत छी पढ़ तानी

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मानुषीिमह सं ृ ताम् खाइ छिथ खा तारन अह› रउआ

भोजपुरीक सेहो िविभ¤ ºप अिछ, जेना 9ेmानुसार बा, बाटे, बीया, बड़वÊ, बटे/ बानी बाजल जाइत अिछ। ४ मैिथली आ मगही

भुव्अनेर शम\क मगही शwदकोषमे िकछु वण+ आ संयु$ता9र जेना ण, श, ष, ऋ, लृ, 9, m, ; हटा देल गेल अिछ। मैिथली सन मगहीमे सेहो “व” केर उ:चारण “ब” आ कतेक ठाम “य” केर उ:चारण “ज” होइत अिछ। मगही सेहो अपन उपि§ ८४ िस} आ नाथ सgxदायक नाथ सािहयसँ मानैत अिछ। मगही िpयामे एकटा आकारक माmा कम होइत अिछ जेना:- मैिथली मगही एनाइ अनई गेनाइ गनई धोनाइ धोनई

मगही लोकोि$त आ कहावत : अदरा गेल, तीन गेलन, सन, साठी, कपास- |दरा न9mमे वष\ निह भेने सन, साठी (धान) आ कपासक खेती बब\द भऽ जाइत अिछ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ओछा के xीत बालू के भीत- ओछ ~यि$तसँ दोितयारी ि9क होइत अिछ। wतातदेवल- खोराकी चलायल िसहरी फटल- अकश-ितकश खतम भेल। हहास कयल- दोसरकÊ आगू बढ़ैत देिख कऽ जरल। तुला रािश के भेल- बàड तमसायल कया रािश के भेल- काजसँ बेकार भेल। ओरहन देवल- िशकाइत कयल। पीढ़ा देवल- आदर देल। खोपसन देवल- उलहन देल। डॉ रामनरेश िमc “हंस” मगधक भाषा मागधीक िवकिसत ºपकÊ मगही कहलिन अिछ। मागधी xाकृतसँ असिमया, बijला, ओिड़या, मैिथली, भोजपुरी आिद भाषा सेहो बहार भेल अिछ। मगहीमे “र” लेल “ल” “ड़”, “ल” लेल “र” “ड़” केर xयोग होइत अिछ। मगहीमे सेहो िनर- लगा कऽ िनरइठ बनैत अिछ (अइठ/ िनरइठ)। मगही लोकगाथा आÁा, सोरठी वृजभार, लोरकाइन, रेसमा-चुहरमल, सारंगा-सदाबृज, छतरी-घुघुिलया, कुँवर िवजयी, राजा भरथरी, गोपीचद, सोभi नायक, सती िबहुला, नेटुआ दयाल िसंह, राजा ढोलन िसंह, मान गुजिरया, मामा- भिगना, िवpम, कद+ब-लीला, बनजारा, िहरनी-िबरनी, सहलेस, नूनाचार, राजा हिरचन, बाबा िचतामन, बकतौर, िबहुला-िवसहरी, बाबा लखदर िबहुला-िवषधर। मगही लोकनाªय , नाªय -गीत आ लोक -नृय -की§+न, जातरा, करमा भइया दूज, जीितया (नाियका ¼िस कऽ नैहर चिल गेल, धनरोपनीक बाद िकसान- मजदूर ई नाªय करैत छिथ।)

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् -फागू, चैता, सावनी, बारहमासा, रोपनी। -दूधवंशी (दुसाध), साफी (धोबी), :ह4वंशी (कहार), कोइरीक नाªय गीत। -जनी- जाितक- डोमकच, बीछामार, चुलहािरन, सीता-मीता, गेदुरी। -ओझा-डाइन। -सामा-चकेवा, बगुला-बगुली, जाट-जािटन, सास-पुतोह, -सगबेचनी, मछली बेचनी, जीराबुन, दही बेचनी। -नाच, नेटुआ-कसिबन, कठपुतली। आब िकछु मैिथली आ तकर मगही ºपक चच\ कयल जा रहल अिछ। मैिथली मगही खेलेलॱ (खेलेलहुँ) खेलली हएत होत अिछ हे छिथ हथ/ हथुन छी ही जायत जइतो एता अतथुन भेटत िमलतो

मगहीक ºप

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् पटनाक आसपास मारलुक (मारबौ) आिदक xयोग होइत अिछ जे कने दि9ण गेला पर हिथन/ छिथन आिदमे पिरवित+त भऽ जाइत अिछ। ५ मैिथली आ संथाली मैिथली संथाली िपता बा बाबी (बा) नुनुगो (बुडीगो) बाबा गोड़gबा नमते जोहारगी भेल हुयेना उसिर कऽ (जYदी) उसारा अिछ काना/ िगया छी काना आर आर सँ ते एखन लगाइत एहोबोक् लगीत देखाउ उदुगमे िवलgब िबलgब

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मानुषीिमह सं ृ ताम् िदऔ मे/ मÀ कº मा/ कामीयमे निह आलोम बनू िबनाक्आ बुरबक (बोका) बोका आउ हजु$मे =यान =यान द›त सभ डाटा लगा िलअ लगाव ताम स§ सरी खबिर खोबोर हमरा इञ खराप बड़ीच् मोन मोने लगा कऽ लगाव काज कातेक कÊ दो घास घास

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् आनू अगुकुम अह› सँ आमसiव जºर जºड़ थोर थोड़ा पंखा पंखा िबजली िबजली लैgप लैgप कागत-पÀिसल कागज-पÀिसल मना मना मािमला मामला समय समय धन धन मेहनित मेहनत अह› आम कुकुड़ (पु.) सीता कुकुड़ (mी.) सीता इंगा िपYला (कुकुड़क ब:चा) सीता होपोन बाछी बछी

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मानुषीिमह सं ृ ताम् बÀग रोटे पनही (जु§ा) पनाही करैल कारला घर (दलान) दुलान मचान मचान कड़छु कड़छु पिटया पटया चालिन चलनी सलाइ-काठी सलाई कठी सूत सुतम थारी-बाटी थरी-बटी लोटा लोटा बोरा बोरा गहूम गुहुम दही दाही थुथुन थुथना गाहिक (गहकी) गहकी अखबार खोबोर कागज

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मानुषीिमह सं ृ ताम् हिरयर हरयड़ खच\ खच\ साफ करब साफा बीछब बाछाव बनायब िबनाव नव करब नावा नेहोरा करब नेहोर िजरायब (िवcाम करब) िजराव थरथरी थारथाराक् आछी करब (छीकब) अछीम साटब साटाव

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मानुषीिमह सं ृ ताम् अनुपम रैना याmीजीक मैिथली रचनामे समसामियक जीवनक अिभ~यि$त बहुभाषा िव; वैWनाथ िमc ‘याmी’ मैिथलीक मुÕयतः दू उपयास आर किवता सं<ह िलिख समत िमिथलाक ताकािलन आिथ+क, सामािजक, भौगोिलक, धािम+क पिरदृÄयक िचmण pमशः िवÄलेिषत xाºपक सँग कएलिह अिछ । याmीजीक xा दु+भाव राजनीितक ºप सँ भारतीय उपिनवेशक पिरवत+नक काल छल । अं<ेजी हुकुमतक बब+र तानाशही एवं िÚिटश सर कार µारा माय जमॴदरी xथा समाज के ◌ँ शोषक वग+क हाथ मÀ कठपुतली बना रािख देने छल । सgÌात समाजक मु ी भिर लोक बहुसंÕयक गरीब xजाक ऊपर पाशिवक अयाचार, दमन, शोषण कए समाजक दुग+ित करबा मÀ लीन छल । भा रतीय अथ+~यवथाक रीढ़ खेती छल जे जमॴदारक हतगत छल । जमॴदारक अयाचार िकसानक मनोबल के तोिर देने छल । अं<ेजी िश9ाक xचार सँ सgपूण+ देश मे अ}+िशि9त वग+क संÕया बिढ़ गेल । बिYक िवभीिषका सँ महामारी दुिभ9 आिद सँ जान- मालक हािन चेचक, £लेग, हैजा अिद िबमारी महामारीक ºप अिखयार कएने छल । एहना पिरिथित मÀ सामािजक िवषम ता, अंधिवास वग+-भेद, वग+-उपवग+, छूत- अछूत, धािम+क पाखyड आिद समाजक म=य रोग जक› पसिर गेल छल जे किव याmी जी अपन रचना म=य ~य$त करबा सँ निह चुकलाह अिछः- मकडाक जाल सँ बेढल हुइ चुलहाक मुँह थरी-िगलास सब बेिच िबिकन खा गेलइ ऊँह

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मानुषीिमह सं ृ ताम् समाजक दुरावथाक दृtय कÊ एिह xकारे देख वैत किव याmीक उ$त पंि$त के देखल जायः- कÈचा जकरा से, खाए भात क रहल मौज से, जकरा छइ कोनी गतात दिर4ताक अिभशाप समत िमिथलiचल भोिगरहल छल । अ¤ पािन दवा दाºक कोनो युि$त निह छल । समाधानक उ ि$त ढूढ़वाक xयास मे किव याmी कहैत छिथ । निह रहलइ ककरो िक:छु माm तोहर भरोस । म›िटक महव कÊ चीिह लेलक ई देश-कोश । वतुतः भगवानक भरोसे जीवऽ बला ~यि$त कÊ साफ शwद मÀ कहऽ चाहैत छिथ जे अपन धरतीक भरोस कº, देह मे मiइट लगाउ, कम+ कº, मेहनत कº एही बदौलत समयाक समाधान भए सकत। निह िक माm देवताक भरोसे सब िकछु छोिर जीवन के बेकार बना देव । िमिथलाक पिरिथित सँ िख¤ याmी कोनो िवकYप निह देिख रहल छिथ । एहन पिरिथितमे किव अपन भाव के शwद दैत कहैत छिथः- अ¤ नेछै कÈचानै छै कौड़ी ने है गरीबक नेना कोना पढ़तैक रे? उठह किव, तो दहक ललकाय कने िगिर िशखा पर पिथक हल चातैक रे! किव अपनिह अपन आमबल कÊ मजबूत करैत कहैत दिथ अथ+हीन संसाधन िबिहन समाजक उथान करबा लड हमरे अथै कÊ आगु आबऽ पड़त । िनिÒत ºपÊ यिद संकYपक सँग जनिहत हेतु संघष+ कएल जायत तँ असgभव निहं जागृितक शंखना द भटका रहल माm कने xयासक आवÄयकता छैक, साहस क आवÄयकता छैक। कोनो पैW बात निह जयनाद जैहैत तऽ अवसे उँच से ऊँच पहाड़ कÊ पिथक सहज ºपÀ राता बना लैत अिछ। िजदगी भिर जे अमृत मंथन करल िजदगी भिर जे सुधा संिचत करए

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ओ िपआसÈ मिर रहल अिछ, ओकरे अमृत पीवा सँ जगत वंिचत करए ओकर मूल भूत अिधकारक हनन होइत छैक। ओकर उिचत िहसा निहं भेटैत छैक। एहन बब+र समाजक सामती सोच बलाक xित अिभजाय वग+क xित घोर घृणाभाव आpोश सँ भड़ल किव अपन मनोभाव के पुनः शwद दैत कहैत छिथ हमर वीणा =विन कने पहुँचैत जँ सटल पौजर बोिनहारक कान मÀ सफल होइत तखन ई वर साधना िचर उपेि9त जनक भौटव गान मÀ। अ¤ िबना सटल प›जर कुपोषणक बोिनहार अवÄय पिरवत+न आनत यिद िश9क अलख ओकर घर घिर पहुंच जेतैक । भा रत सव+शि$तमान सgप¤ ‘च4गु£त’ क रा¹यक अöयुदय भेल तिहना xेरणाcोत मा=यमक आवÄयकता छैक । परम मेघावी कतेबालक जत मूख+ रिह हा गाय चरवैत छिथ कते वाचपित कते उदयन जत हाय! बनगोइठा िवछैत िफरैत छिथ तानसेन कतेक रिववाम+ कते घास िछलिथ वाjमतीक कछेड़ मÀ कािलदास कतेजक िवWापित कते छिय हेड़ाएल मिहसवारक हेड़मे किव याmी एही सँ िचंतीत छिथ । के एकर माग+दश+न करत के सोचत गरीब िनिरहक हेतु तािह सँ मेधावी गरीब ब:चा अपन थान अपन अिधकार िनºिपत कऽ सकत । ओहने िथित िमिथलiचलक सुसंकृितक अपसंकृित मÀ बदिल देलक ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् वाथÝ भए परgपराक नाम पर कु~यवथा कÊ पिरपाटी बनालेलक किव एिह भयानक मनोवृि§क िचmण कए वातिवक जी वनक िथित सँ पिरचय करौलिन अिछ । समत भावनाकÊ दरिकनार करइत समाज मÀ पसरल दिभ+9 जक› mीक xित अयायपूण+ मानिसकता समाजक वीतव प र x°िचह लगवैत अिछ। धन एक माm उदेÄय बिन मनुtयक जीवन के नक+ बना दैत छैक। एहन िथित क बेटीक बाप शु भछन किह, बेटीक बापक उ§रदाियव कÊ नकारबक चेÐा करैत अिछ। जिहना माछ मखानक खेती अथ×पाज+नक साधन अिछ तिहना बेटीक जम एकरा ~यवथा सँ कम निह एिह सँ बेसी सोचबाक ककरो उçेÄय निह समय निहं। अहुिरया कटलक मललक हाथ बाबू भाभी माय झुकौलिन माथ हुनक अन टोटल बात एकिदश झरकल सन हमर अिहबात एकिदस करब की सब पी गेलऊँ घोिर कऽ चgपाक कली-फेकल गेलऊँ खॲिटकऽ समाज मÀ पसरल कु~यवथाक झiकी एखनहुँ अनवरत देखवा मÀ अवइयै।

पारो:- मैिथली मÀ पिहल उपयास ‘‘पारो’’ 1946 ई0 मÀ xकािशत भेलाक बाद उपयास जगत मे cी बैधनाथ िमc ‘‘याmी’’क नाम िवÕयात भए गेल। अपन पिहल कृित ‘‘पारो’’ सन सामािजक ओ मनोवैािनक उपयास िलिख ‘‘याmी’’ मैिथली उपयास मे एक नवीन xयोग कए देलैिह। गW- शैलक िवल9णता सेहो याmी सन किवमे अिछ एिह सँ पिहल बेर लोक पिरिचत भेल आ अपन एिह पिहल पिरचय मे याmी ते हन ने सामािजक ºढ़ परgपराक चचाप+ कएलैिह जे ओ िववादक िवषय बिन गेल। आÒय+ एिह बातक जे याmी कोनएहन अ पराध कए देलिन जकर िकछु िवµान लोकिन घोर िनदा कए देलैिह। परतु एतबा किह देब जे याmीक ई पिहल xयोग जे ओ गW ºप मे बएतैिह पूण+ सफल भेल अिछ। हुनक गW शैलीक िवल9ण xितभा सँ हमरा सभकÊ ‘‘पारो’’ µारा पिरचय भे ल अिछ। तÊ ई िनिव+वाद सय िधक जे याmीक ई ‘‘पारो’’ सामाय पारो निह अिपतु िमिथलक आइ धिरक जीवनक ई पिहल ओ अंितम पारो िथक। पारोक पिरचय ई अिछ-

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ‘‘पारो नािम रहय। चेहरो नामे रहैक। हाथ सीक सन-सन। देह लक-लक पातर। टाङ सठी सन-सन। कटगर ओकर आंिख जेहेन छलै तेहेन आन कोनो अंग कथी ले रहते।’’ याmीक एिह पारोक पूरा नाम छल पाव+ती । पारो एिह उपयासक मुÕय नाियका अिछ ।आ एकर मुÕय नायक Úजकात झा उफ+ िबरजू तेसर जे चिरm एिह मे अिछ ओ छिथ वैध~य सँ देदी£यमान ललाट वाली पीसी जिनक नाम xितभा मा अिछ । एिह उपयास मे चािरम सभ सँ महवपूण+ ~यि$त छिथ चैधरी जी । याmीक चैधरी जी सँ पिरचय कए लेल जाए- ‘‘वेश गोर नार । चेहरा नाम; मुहठान कटगर । नाल भरल। भॱहे सघन। कपार ने पैथ ने छोट । दिहना कान मे कनौसी । वाम कानक जिड़ मे, ऊपर िदस छोट छीन मसुिविध+।’’ मैिथल समाज मे आएल ºिढ़वादी परgपराक उ  ोष। िमिथलाक सöयता संकृित दश+न सेहो एिह मे याmी यm- तm करौने छिथ। ‘‘पारो’’क कथानक xसंग डा◌ॅ0 अमरेश पाठक अपन <थ मे केने छिथ मुदा जंएह कहने छिथ ओ बड़ महवक बात- ‘‘कथावतुक िवकास दृिÐएँ याmीक पारो महवपूण+ रचना अिछ। इहो उपयास वैवािहक समयाकेç लए िलखल गेल अ िछ। िनध+नताक कारणÀ पारोक िववाह एक अधवयसू चैधरी जीक संग होइत अिछ। पारोक हृदयक िवषाद कÊ पारोक िविभ ¤ उि$त µारा ~य$त करबाक चेÐा कएल गेल अिछ।

एकर कथानक िनम\ण मे औिचयक याग भेल अिछ। ई वण+न सामािजक वातावरणक, सािहियक आदश+क xितकूल अ िछ । उपयासक कथानक कÊ मानव जीवनक यथाथ+ सँ घिनØ ºपÀ सgब} होएब आवÄयक छैक ई सय िकतु ओिह स यक कुिसक ºपक िचmण सािहयक मयाद\क xितकूल अिछ। याmी जी नवतुिरया मे मैिथल समाजक पव+-योहर सभक सेहो चच\ केने छिथ जेना- जमाÐमी, दुग\पूजा, पौच4, दीपावली, आिदक सiकेितक चच\ देने छिथ, िपतृप9 सन मैिथल समाजक अपन संकृितक चच\ कए ओ एकर महव के देखाएबाक xयास कैने छिथ। िपतृप9 िमिथला साज मे खूब xचिलत अिछ। एिह मे लोक अप न अपन मृत माए, मातामही, िपतामही, सासु, xिपतामही आिद जलक अध+ दैछ आ एक- एक टा ÚाÛण के भोज करवैछ तकर चच\ एिह मे भेल, अिछ, जािह सँ िमिथला समाजक संकारक xतीित होइछ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् एिहना मैिथल समाज मे xचिलत िववाहक अनेकानेक साम<ी सभक नाम सेहो एिह मे अंिकत भल अिछ संगीह समाजक xच िलत िववाहक िविध सभक सेहो चच\ भेल अिछ, जािह सँ मैिथल समाजक संकृितक िचm भेटैत अिछ। मैिथला समाज मे िववाह मैिथल- िववह प}ितक अनुसारे होइछ आ दुव\9तसन काय+pम होइ तकरो चच\ कए याmी जी िमिथलाक गिरमा के बढ़ौने छिथ। याmी सँ एिह सामािजक उपयासक मा=यम सँ िमिथलाक ºिढ़वादी परgपरा पर वोट कैने छिथ, तँ अधिवास सँ आpात नौगिछआ गामक नवतुिरआक µारा वीनी चेतना सेहो जागृत कैने छिथ। एिह तरहे जनसाधारणक भाषा मे अपन भावना ~य$त करैत याmीजी मानव जीवनक सभसँ महवपूण+ िबदु िदश दृिÐपात कैने छिथ आ सािहय समाजक दप+ण अिह एिह बात कÊ नवतुिरआ िलिख कए साकार कए देने छिथ आ नवीन पीढ़ीक हेतु मा ग+ xशत कए देने छिथ जे आबधु नवतुिरआ, करथु मैिथल समाजक उ}ार । जे कहलैिह से याmी पूरा सेहो कएलैिह तरखने सँ िहनक उपयास नवतुिरआ एतेक महव पािब रहल अिछ आएकरा पािब कए याmी सन बौ} िभ9ु आ©ाला िदत भए रहल छिथ आ नवीन िमिथला कÊ उजागर होइत देखबाक लेल जीवन सँ सं<ाम कए रहल छिथ । बलचनमा - ‘‘बलचनमा’’ कÊ जँ याmीक xितिनिध उपयास कही तँ कोनेा अन+गल xलाप निह होएत कारण याmी एिह उपयास मा=यम सँ समाज कÊ ई देखएबाक xयास कएलैिह जे शोिषत वग+ कÊ बलचनमा सदृश मजबूत बिन कए वयं अपन अिधकारके र9ा करबाक होएत आ जÀ अपन अिधकार ओ शि$त के निह िचहूत, निह बुझत, आ िनरीह बनल रहल तखन ओकर शोषण हो एबा सँ कोनो निह बचा सकैछ आ निह कोनो बचबाक िवकYप रिह जाइछ । मोन पड़ैछ हिरमोहन बाबूक ओ पiती जािह मे ओ याmी के कहने छिथ- ‘छे टका लाखे जहi मैिथलीक कोषागार। तैत खेिदत होइछ मन इ देिख कै ~यवहार जाय ‘‘बलचनमा’’ एते तँ पािब के दुकार आर वागत होइ ओकर जाके xयागक हार।’’

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् बलचनमाक xसंग याmी जी अपन ‘‘आईने के सामने’’ नामक, लेख मे िलखने छिथ- ‘‘बलचनमा से डरता हूँ। मै अपने इस खेितहर हीरो से इन िदनॲ बहुत घबराता हूँ। वह चालीस से उपर का हो चुका है। ए क बार गiव का सरपंच भी चुना गया था। सात-सात बेटॲ का बाप है अब हमारा बलचनमा। अरे, बड़ा गुसैल है बलचनमा.......पीछे पड़ जाता है, तो िफर तबाह कर देता है........ यह मेरा मानस पुm ठहरा न? बलचनमाक xसंग डा0 cी Úजिकशोर वम\ ‘‘मिणपâ’’ अपन एकटा लेख ‘‘cी नागाजु+नक िचतन धारा’’ मे िलखने छिथ- ‘‘बलचनमा िव4ोही थीक । ओ सिpय आ सामािजक ºप थीक आ ओ कपार पर अनवरत हथौड़ा पीटेवाला लोक थीक । डा0 िदनेश कुमार झा ‘‘बलचनमा’’क xसंग अपन मत ~य$त करैत कहत छिथ- ‘‘बलचनमा’’ याmीक उपयास कलाक कीि»ततgभ अिछ । डा◌ॅ0 जयकान्त िमc ‘‘बलचनमा’’क xसंग अपन मत~य ‘‘मै िथली उपयास ओ सामािजक चेतना’’ नामक आलेख मे दैत कहैत छिथ- ‘‘अपने उपयास बलचनमा के मा=यम से नागाजु+न ने सव+xथम <ामीण जीवन और भूिम ~यवथा के साथ बनते- िबगड़ते सgबधॲ को उ  ािटत िकया है। याmी अपन मातृभूिम िमिथला धाम कÊ गामक कृषक गरीबी, ओकर दुद+शा, जमीदार लोकिनक µारा होइत ओकर शोषण, ओकरा पर कएल जाइत अयाचार सन सामािजक सम|ूा कÊ उजागर करबाक उçेÄय से एिह ‘‘बलचनमा’’ न सन उपया सक रचना कएलीन । ई पिहने अपन मातृभाषा मे सएह एकर रचना कएलैिह पÒात िहदी मे एकरा अनुवाद कैलिह । याmीक बलचनाम मे सgपूण+ िमिथलiचल समाजक िचm अंिकत भेल ओ िचm अिछ सव+हारा वध+क संघष+क, शोषण, अया चार, अमानवीयता, ओ समाज मे पसरल िबसंगितक िचm देखल जा सकैछ । समाजक मािलक कहाबए वला लोकक कु कुयकÊ। कोन तरहे एकटा जीव ओहो मे मनुtय तकरा पशहुओं सँ बद§र िथित मÀ बiिध कए मािर रहल अिछ । एिह तरहे गरीब लोकिनक आिथ+क शोषण एिह समाज मे होइत छल आ समाज मौनवÑत धारण कैने छल । पिरcमी cिमकक जीवन समाज मे केहन छल देखल जा सकैछ । ‘‘नीक सँ भगवान करबे करैत छिथ? धािर परानीक पिरवार छोिड़ कए हमर बाप मिर गेल, इहो भगवान ठीके एकलक। भूख मÀ मारे दाई ओ माए आमक गुठरीक गुçा चूिर-चूिर कए सकैत छल, इहो भगवान ठीके करैत छलाह आ मािलक लोकिन कनकजीर आ तुलसी फूलक गमकइत भात, राहिरक दािह, परोरक सीमन, घी,

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् दही, चटनी खइत छल, सएह अहो भगवानेक लीला छत। यौकोर दलम बागक तेल हुनका हमर दू क ा खेत पिहत छल आ हमरा अपन पौकोर पेटक लेल मु ी भिर दाना ।’’ -अनुपम रैना, शोधाथ¦, बी.आर.ए. िबहार िविवWालय, मुजòफरपुर अपन मंत~य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

डॉ. ललन कुमार झा पुm ओ िपतृकम+ िपता पुmक सgबध अनुकूल निह रहलासँ सामािजक ~यवथामे गितरोध उप¤ होएब वाभािवके अिछ। पुmक xित िपताक कत+~यकÊ नकारल निह जा सकैछ तँ पुmक क§+~यमे सेहो गु¼तर भारमे वृि} भऽ जाइत अिछ जे िपताक xित अनुकूल ~यवहार करए, िकएक तँ िपता तँ गु¼ओक गु¼ होइत अिछ। तÊ जीिवतावथामे पुmक क§+~य िवशेष महव रखैत अिछकारण हुनक ऋणसँ पुm मृयुपरात मु$त निह होइत अिछ। जीिवतावथामे पुm िपताक कहब मानए ओ मृयुपरात हुनका िनिम§ िपyडदान करए एिहमे ओकर पुmता अिछ, ई शाmीय वचन अिछ। ‘जीवतो वा$यकरणात् 9याहे भूिरभोजनात्। गयायi िपyडदाना:च िmिभ: पुmय पुmता।। ‘पुत्’ नामक नरकसँ मुि$त िदएवाक कारणÊ पुm कहबैत अिछ। एकरा सgबधमे मृितकार बौधायन कहने छिथ जे ‘पुत्’ शwद नरकक पय\य अिछ आओर दुख तँ नरक अिछए। एिह नरकसँ mाण िदआबएवला पुm होइत अिछ। तÊ िपता इहलोक ओ परलोक दुनूक लेल पुmक कामना करैत अिछ। ‘पुिदित नरकयारyया दु:खंच नरकं िवदु:। पुmmाणा§त: पुmिम:छित परm च।।’

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् एिह सgबधमे मनु सेहो कहलिह अिछ जे िपताकÊ पुत् नामक नरकसँ mाण िदअएबाक कारणिह सुत पुm सेहो कहबैत अिछ, एकरा सा9ात ÚÛा कहलिह अिछ। “पुंनाóो नरकाáमाmायते िपतरं सुत:। तमापुm इित xो$त: वयमेव वयंभुवा।।” मनुमृित- 9/138 पुm शु} ºप अिछ पुmक जकर xयोग पुm माm भऽ गेल अिछ। पुmहीन ~यि$तक लेल पुत् नामक नरक सुरि9त कएल गेल अिछ। ‘आमा वै जायते पुm’ एिह शाm वचनानुसार पित वयं अपन पîीक गभ+सँ पुनज+म लैत अिछ जािहमे हुनका असीम आनद होइत छिह। िपता सभ दुखकÊ िबसिर जाइत अिछ जखन हुनका पुmरî xा£त होइत छिह संगिह पुm िपताक सभ $लेशकÊ दूर कयिनहार होयबाक चाही। जिहना नाव अथाह सागरकÊ पार कराए दैत अिछ ओिहना पुm इहलोक ओ पारलौिकक दुनू लोकसँ मुि$त िदआए दैत अिछ। इएह कारण अिछ जे आनािदकालिहसँ एिहठाम पुm जमक कामना करैत देखल जाइत अिछ। कहल गेल अिछ जे- ‘अपुmय गितन+ित। भारतीय सनातन धम\नुसार िपतरक लेल xितिदन तप+ण करबाक चाही। एिह तप+णसँ िपतर मृयुक उपरात कोनो योिनमे िकएक निह होिथ हुनका सव+िवध तृि£त भेटैत छिह। िनय जल तप+णक कामना िपतर अपन सतानसँ करैत छिथ एवं बड़ xस¤तासँ ओकरा <हण करैत छिथ। पुmहीन िपतरकÊ जलक बड़ दुख होइत अिछ ओ अcुक ºपमे िपबैत छिथ। ‘अिभ;ान शाकुतलम्’मे महाकिव कािलदास राजा दुtयतक पुmहीनताक ~यथा ~य$त कएलिह अिछ। राजा दुtयत शापवशात् गभ+वती पîी शकुतलाक याग कऽ देने छलाह आ पुmहीनताक शंकासँ परम िख¤ छलाह। हमर िपतर सतानहीन xाणीक µारा देल गेल तप+णक जलकÊ नोरक ºपमे िपउताह। ‘अमापरं वत यथाcुितसंभृतािन को न: कुले िनवपनािन िनय:छतीित। नूनं xसूितिवकलेन मया xिस$तं धौताcुशेषमुदकं िपतर: िपबित।। अिभ;ान शाकुनतलम्- 6/25 एहने सन भाव महाकिव कािलदास रघुवंश महाका~यमे ~य$त कएलिह अिछ। राजा िदलीप विशØसँ इएह xाथ+ना करैत छिथ जे पुmहीन हमरा बाद िपतृ तप+ण जलकÊ दुल+भ बूिझ हमरासँ देल गेल तप+ण जलकÊ हमर िपतृ, िपतामहािद िपतरगण अपन-अपन iस-xाससँ ईषत् गरमकÊ िपबैत छिथ- ई सय अिछ िकएक तँ दुखी ~यि$तक नोर तथा iस दुनू गरम-गरम िनकलैत अिछ। “मपरं दुल+भं मवा नूनमाविज+त मया।

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् पय: पूवä: व िन:ासै: कवोØमुप भु¹यते।।” रघुवंश- 1/67 राजा िदलीप िनवेदन कएलिह जे पुmहीन हमरा बाद cा} िपyडक भावी लोप देखएवला हमर पूव+ज िपतृगण दुखी भेलासँ हमरा µारा xद§ वधा-वधात िपतृमयोसग+ िपतृभो¹य पदाथ+क सं<हमे तपर भेलापर सेहो पय\£त ºपसँ भोजन करएवला निह होइत छिथ। “नूनं म§: परंवÄया: िपyडिव:छेददिश+न:। न xकामभुज: cा}े वधा सं<हतपरा:।।” रघुवंश- 1/66 पुmक एिह मह§ापर िवचार करैत नारद इÔवाकुवंशीय पुm राजा हिरÒ4सँ गह+ãय मॲछ, दाढ़ी एवं तपयािदसँ वारण करैत केवल पुmक इ:छा करबाक कहलिह- ‘पुmं ÚÛण िम:छवं सव+लोकोऽवदादद।’ -हिरÒ4ोपाÕयान- अ=याय, 33/गाथा- 04 ऐतरेय ÚाÛणक एिह अ=यायमे नारद पुmक xाि£तकÊ अिनवाय+ मानलिह- “नापुmय लोकोऽतीित।”– गाथा, 09 एवं xकारÊ एिह जगतमे पुmक िविशÐता अिछ जे िपताकÊ इहलोक तथा परलोक दुनूसँ पार कराए दैत अिछ। तÊ िपता-पुmक xाि£तक लेल ~याकुल रहैत छिथ। कोनो िपता xाथिमक ºपसँ पुmेक कामना करैत छिथ। पुmी कतेको गुणवती िकएक निह होअए िपताकÊ पुm चाही। जतए अपुm ~यि$तक मृयुसँ पूव+ कत\ पुm बनबैत अिछ आओर मृयुक पÒात् ओ कत\ िनमंmण पmमे ‘मपुmवकर’ वा mीप9मे ‘मपुmवकरी’क xयोग करैत अिछ। एहन िविशÐ पुmकÊ धम+शाmी लोकिन अिधकारक संग कितपय क§+~य िनध\िरत कएलिह अिछ। डॉ. ललन कुमार झा, थायी पता- <ाम-पो-रहुआ, भाया-िसमरी बिÕतयारपुर, िजला- सहरसा 852127 - अ=य9, मैिथली िवभाग, यू.भी.के.कॉलेज करामा आलमनगर, पो- भागीपुर, िजला- मधेपुरा।

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

डॉ. िचmलेखा िमिथलाक पिरचय वेद-वेदात, पुराण, उपिनषद, धम+शाm आ तंm-मंm िवWा एवं संसारक मानव िचतनक इितहासमे ई अपन महवपूण+ भूिमकाक लेल सुिवÕयात अिछ। एतबे निह एक िदस जँ सामवेदक xथम मंm4Ðा आ ऋगवेदक मºसू$तक xणेता- ऋिष गौतम, शु$लवेदक xणेता- महिष+ या;वY$य, भीजल धोती आकाशमे सुखबएवला साधक-मदन उपा=याय, षàदश+न टीकाकार वृ} वाचपित िमc, भगवान जनिदनोकÊ चुनौती तक दऽदेबएवला उदयनाचाय+, आयाची- भवनाथ िमc, परमाचाय+वय+ मyडन िमc आिद लोकिनक अिवि:छ¤ परgपरा सभसँ िमिथला सदा अलंकृत रहल अिछ तँ दोसर िदस िमmऋिषक आमजा मैmेयी, ऋिषगग+ तनया गाग¦, भारµाजसुता कायाियनी, ऋिष अmी- कलm सती-अनुसूया, जनकनिदनी जानकी, भारती, भामती, लिखमा आिद मनिवनी- िवदुषी लोकिनसँ महनीय तथा वदनीय रहल अिछ। ई भूिमजा जग¹जननी जगदgबा लÔमीवºपा िवदेह निदनी वैदेहीक वसुधा रहल अिछ। 12वॴ शदीक बंगाली महाकिव कण+पुर पिरजातहरणमे cी कृtण- सयभामाक िवमानकÊ िमिथलामे xवेशक वण+नक pममे िलखैत छिथ जे-

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मानुषीिमह सं ृ ताम् “जानकी- जनन- भूिमरीÔयातामgबुजाि9 िमिथलेयम<त।। यm िव;वदनेt;ु दिप+ता नृयित xितगृहं सरवती।” जािहठाम xयेक घरमे सरवती सोYलास नृय करैत होिथ, ओिहठामक िवµत परgपरा अिनवाय+ ºपसँ अeुत हएत, संगिह जािह 9ेmक राजाकÊ ऐय+ आओर राज वैभवसँ असgपृ$त रिह कऽ वीतरागी िवदेहक योगथ कण+मीमiसकक दृÐात ºपमे आनदकद भगवान cी कृtण µारा अिभिहत कएल गेल हो। cीमeागवतमे 57 मैिथल जनकक नामक उYलेखक पÒात् कहल गेल अिछ जे एतेक जनक कम+योग िवWाक िवशारद भेलाह आओर योगीर- महिष+- गौतमक xभाव सँ घरमे रिहतहुँ ओ सुख आ दु:ख आिद µµ सभसँ िवमुख छलाह। अथ\त् घरेमे जीवनमु$त भऽ कऽ अतमे पÚÛमे लीन भऽ गेलाह। वेद, पुराण, उपिनषद्, मृित आिद <थमे िमिथलाकÊ मो9क नगरी कहल गेल अिछ। एिह सgबधमे शाm-पुराणक िनóिलिखत वचन 4Ð~य अिछ- “अयो=या, मुथुरा, माथ, काशी, काýची,अवितका। पुरी µारवती चैव स£तैता मो9 दाियका।” शाmक उपयु+$त वचनमे कहल गेल अिछ जे अयो=या, मथुरा, माया (िमिथला), काशी, काýची, अवितका आ µािरकापुरी ई सातटा मो9क धाम अिछ। अनािदकालिहसँ जग¹जननी मॉं जानकी जमभूिम आओर राजा जनकक रा¹य िमिथला तपोमय एवं तपोवन ºपमे सुिवÕयात अिछ। जतए वेदातक मूल ;ानकाyड एवं कम+काyड समिवत ºपसँ xचिलत अिछ। िमिथला महाgयक गूढ़ रहयक ;ान xा£त करबामे महाभारतक िनम\ता भगवान वेद~यासोकÊ तेना ने बुिझ पड़लिह जे हुनको िलखऽ पड़लिह जे- यिद दूरहुँ सँ िमिथलाकÊ नमन कऽ लेल जाए तँ मुि$त भेटत सुिनिÒते बूझू- एिहमे कोनो xकारक संशय निह- “िमिथला ये नमयित देशातरगता अिप। तेषi भुि$तÒ मुि$तÒ जायते, नाm संशय:।।” खास कऽ जग¹जननी जगदgबा जानकीक एिह िमिथलाक, पावन भूिम पर अवतिरत भेलसँ एकर महव आओरो बिढ़ गेल। वेद-वेदाé, धम+शाm उपिनषद्, मृित, पुराण, का~य आिद समत वा मयमे िभ¤-िभ¤ ढंगे एिह िमिथलाक मह§ाक xितपादन उपलwध होइत अिछ। संगिह xाचीनता, संकृित, धम\नुकूल आचरण, अ=याम ;ानक xमुखता आिदक दृिÐ ऍ ं एकर मह§ा वत: पÐ भऽ जाइत अिछ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् िमिथलाक भूिम एक िदस अपन विण+म संकृित, इितहास, आिलंपनकला, िवµता पुरातव, मनिवनी, नारी, यु}वीर पु¼ष लोकिन तथा िमिथलाक लोकदेवीसँ भरल पड़ल अिछ तँ दोसर िदस सारवत पुm लोकिन गौतम, या;वY$य, मदन उपा=याय, धीरे4 उपा=याय, कािलदास, भवभूित, वृ} वाचपित िमc, आयाची- भवनाथ िमc िमिथला िवभूित मyडन िमc, उदयनाचाय+ महाकिव िवWापित, कवीर चदा झाxभृित नरपुंगवर रîक सुरिभसँ मँह-मँह करैत अिछ तँ तेसर िदस piितकारी शहीदक याग बिलदानमे अ<गyय गणेशी, अकलू सूरजनारायणक जीवटतासँ चतुिद+क िमिथलाक भूिम िmवेणीक सदृश पूजनीय, वदनीय, अिभनदनीय ओ महनीय बनल अिछ। एिहठाम सनातन कालिहसँ एकिह संग शा$त, शैव ओ वैtणव आिद सभ पथक उपासक िनवास करैत आिब रहल छिथ। सभ गाममे <ामदेवता आ <ामदेवी xितिØत छिथ। लोकक आथा अिवकल-अिवचल ओिह देवतासँ जुड़ल अिछ। फलत: गाममे धािम+क तनावक अभाव देखल जाइत अिछ। एतबे निह एतए बहएवला धार आ पोखिर सभ सदानीरा रहल अिछ, जकरा पािनसँ गृहथ पटौनीक अितिर$त पान, मखान, माछ, आम आिदक उपादन कऽ अपन जीिवका ‘सादा जीवन उ:च िवचार’क आदश+क अतग+त जीबैत आिब रहल छिथ। एतुÂा लोकक लेल मॉंछ-भात तँ xिस} अिछए संगिह कतेको शाकाहारी छिथ। एिहठामक पारgपिरक वेष- भूषामे सॉंचीवला धोती-कुरता, पाग-डोपटा, चानन-ठोप आ मुँहमे गुलाबी िखYली पानक संगिह खान-पानमे मुÕय ºपसँ दही-चूड़ा-चीनी, अमोट, माढ़, मखान, तºआ, ितलकोड़, खgहाº, साग, अिरकॲच, ओल, अदौड़ी, वर- बड़ी, कुgहरौड़ी, अँचार, खिªम ी, ठकुआ, भुसबा, लाइ-चुड़लाइ, ितलबा, केहुिनयॉं खाजा आ मुङबाआिद पय\£त माmामे खएबाक तथा अितिथ लोकिनकÊ खुअएबाक xथा रहल अिछ। िमिथलाक बेसी लोक शि$तक उपासक छिथ तÊ कबुला-पाती आ पिरिथित िवशेष पर छागरक बिलxदानक xथा सेहो xचिलत अिछ। एिहठामक पाविन-ितहारमे दुग\पूजा, िदयाबाती, छिठ, ितलासंpाित, Ìािµितया, जूड़शीतल आिद बेसी xिस} अिछ। संगिह एकर अितिर$त अनेक पव+ िमिथलावासी लोकिनक जीवनक आã;ा-िवासकÊ सनातन धम+क xित दृढ़ता xदान करैत अिछ। िमिथलामे जे धािम+क सिहtणुता िवWमान अिछ से आनठाम देखबामे निह अबैछ। एत एक समुदायक लोक दोसर समुदायक पाविन-ितहारमे सिgमिलत होइत रहल अिछ। िमिथलामे अनेक िस}पीठ- तीथ+ ओ देवालय तथा ऋिष-मुिनक आcम वWमान अिछ, जािहमे जनकपुर, सीतामढ़ी, िशलानाथ, cीजलेर, cीकामदानाथ तथा cी दुग\ उ:चैठ, cी भैरव, cी यामुyडाथान, राजेरी, cीकिपलेर, अहYयाथान, भ4कािलका, भुवनेर, भुवनेरी, कुशेरथान, जयमंगला, उ<ता राथान, िसंहेरथान, मु$तेर थान, िछ¤मितका, िवदेरथान, एवं वाYमीकीआcम, डोकहर, गौतमाcम आिद xिस} अिछ।

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् एिहठाम अनेक वंशक शासन रहल अिछ। जािहमे जनक वंश, पाल वंश, सेन वंश, कण\ट वंश, ओइनबार वंश एवं खyडवाला वंश xमुख अिछ। गीतमे लोककथा गीत, लोकगीत, सोहर, समदाउिन, फागु भगैत िझिझया, नचारी महेशवाणी, पराती आिद वWाक वर लहरी सनातन कालिहसँ िमिथलामे अनेक पाविन-ितहार पर िननािदत होइत आिब रहल अिछ। उपयु+$त पृØभूिमसँ चमकैत-दमकैत हमर िमिथलासgपूण+ संसारक संकारक मुÕय |ोतावनी रहल अिछ। सgपक+- एसोिसएट xोफेसर मैिथली िवभाग यू.भी.के. कॉलेज, कड़ामा- आलमनगर बी.एन.मyडल िविवWालय, मधेपुरा

सदभ+ सूची- 1. वेदभूिम- िमिथला- संकृित दश+न- cी हिरदेव झा 2. िमिथला की धरोहर- पं. cी सहदेव झा 3. िमिथला माहाgय, दरभंगा 4. िमिथला के वेद वेदात- पं. cी सहदेव झा

अपन मंत~य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

डॉ. िचmलेखा िमिथलाक भाषा एवं सािहय िमिथलाक xयेक 9ेmक मैिथलीमे वरक दृिÐ ऍ ं रंच माmक अतर पÐ देखबामे अबैत अिछ। जखन अतर\tÅीय भाषामे एकºपता निह, राtÅीय तरक भाषामे िभ¤ता तँ अय भाषामे रंचमाmक िभ¤ताकÊ िभ¤ता निहयÊ कहल जा सकैत अिछ। शwदक उ:चारण ओ िpयाक अनतमे जोर दऽ देलासँ जे वरक उहापोह पिरलि9त होइत अिछ तकरा अतर निहयÊ कहल जा सकैत अिछ। ओहुना कहावत अिछ जे- “तीन कोसपर पािन बदलय पॉंच कोसपर भाषा िदYली हो बा Áासा।” वाभािवक बात िथक जे तीन कोसपर पािनक वादमे िकछु अतर होइछ तÊ िकतु अिछ तँ ओ आिखर पािनयÊ। तिहना शwदक उ:चारण-xयोग जे अगल-बगलसँ कनेक-मनेक xवािहत रहैत अिछ तािह आधारपर आएल अतरपर िवचार करैत डॉ. ि<यस+न cी गोिवद झा, डॉ. सुभ4 झा, डॉ. िदनेश कुमार झा आिद ठाम-ठामपर अपन अतर-िवचारक चच+ कएने छिथ। cी गोिवद झाजी पूिण+यॉं, भागलपुर ओ पूव¦ संथाल परग¤ाक बोलीकÊ पूव¦ मैिथली, मुंगेरक बोलीकÊ दि9णी मैिथली, मुजòफरपुर आ पूव¦ चgपारणक बोलीकÊ पिÒमी

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् मैिथली, नेपालक तराईक समत मैिथली 9ेmक बोलीकÊ उ§री मैिथली तँ म=य िमिथलाक ओ सभ 9ेm जािहठाम मैिथलीक अलावा ककरो िवशेष xभाव निहयÊ जकॉं छैक तकरा के4ीय मैिथली किह कऽ चच\ कएलिह अिछ। तिहना डॉ. िदनेश कुमार झा अपन xिस} <थ “मैिथली सािहयक आलोचनाक इितहास”म=य सेहो बोली ओ वरक उहापोहकÊ आधार बनबैत ओिह मैिथलीकÊ जे िमिथलाक हृदयथलीकÊ पश+ करैत अिछ अथ\त् िमिथलाक के4मे बाजल जाइत अिछ तकरो के4ीय मैिथली कहलिह अिछ, ओ के4 िथक उ§री दरभंगा ओ मधुबनीक 9ेm। के4ीय थान होएबाक कारणÊ एिह के4ीय मैिथलीकÊ ओ आदश+ मैिथली सेहो किह कऽ सgबोधन कएलिह अिछ। दि9णी दरभंगा, दरभंगा शहरी 9ेmक पूव¦ मुजòफरपुर, पिÒमी पूिण+यॉं धिरक 9ेmमे बाजल जाइबला मैिथलीकÊ दि9णी मैिथली कहने छिथ तिहना पूिण+यॉंक पूव¦ 9ेm एवं सgपूण+ बंगालक िदनाजपुर ओ िक मालदह 9ेmमे xचिलत मैिथलीकÊ पूव¦ मैिथली किह सgबोधन कएलिह अिछ। उ§री संथाल परग¤ा, दि9णी मुंगेर ओ भागलपुर दि9णी भागक मैिथलीकÊ िछका-िछकी मैिथली नाम देलिह अिछ। ताही xकारÊ पूव¦ चgपारण ओ पिÒमी मुजòफरपुरक xचिलत मैिथलीकÊ पिÒमी मैिथलीक नामे चच\ एकलिह अिछ। उ§री दरभंगा तथा मधुबनी 9ेmमे बसल मुसलमान सgxदायक बीच बाजल जाइबला मैिथलीकÊ जे रंच-माm पिरवत+न पिरलि9त करैत अिछ। तकरा जोलही मैिथली तथा जाितगत िहसाबÊ अतर भेल भाषाक आधारपर पूव¦ सोितपुराक 9ेmक बोलीकÊ के4ीय जनसाधारणक मैिथली किह- एकर 9ेm मधुबनी सबिडिवजन मानलिह अिछ। पÐ अिछ जे बोलीक उ:चरणक आधारपर मैिथलीक ºप िनध\िरत कएल गेल अिछ। सूÔमतासँ िवचारोपरात डॉ्. िदनेश कुमार झाक मैिथली सािहयक आलोचनामक इितहासमे चिच+त ºप ि<यस+नक µारा देल गेल िवचारसँ बहुत दूर धिर मेल खाइत अिछ। ि<यस+न मैिथली भाषाक िवभाषाक ºपमे तँ कतहु चच+ निह कएलिह अिछ िकतु बोलीमे वरक उहा-पोहक आधारपर आदश+ मैिथली, दि9णी मैिथली, पूव¦ मैिथली, िछका-िछकी मैिथली, पिÒमी मैिथली आ के4ीय जनभाषाक मैिथली किह कऽ चच+ अवÄयक कएलिह अिछ। वरक उ:चारणमे कनेक-मनेक 9ेिmयताक दृिÐए अतर पÐ अवÄय अिछ तेकर ई अथ+ निह जे मैिथली भाषा ओ सािहयमे कतहु अतर अिछ। नेपालक स£तरी, बारा, जनकपुर, सरलाही, िवराटनगर, सुनसरी, धरानअथवा धनकु¸ा 9ेmक मैिथली, एिह 9ेm सभक xयु$त होइत मैिथलीसँ िभ¤ निह। हँ, एतबा अवÄय जते राजनीित; भलÊ ही ओकरा अय देशमे बॉंिट क ऽ धऽ देने हो। मैिथली दुनू 9ेmकÊ अपन एकरंगक नेह दए एके संग एक दोसराक हृदयकÊ महने अिछ।

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् हँ, एखन िकछु राजनीित; अपन पेट ओ राजनीित चलएबाक हेतु संगि ह राजनीितक रोटी सेकबाक िनिम§ एकर अपनिह अंगकÊ अंिगका आ बि¹जका नाम दए एकर अंकÊ िवकलiग बनएबाक कुिसत xयासमे अवÄय लागल छिथ। यWिप हमरा जनैत ओ सुफल होमयबला निह छिथ, ओ भाषणे आ पोटर धिर समटा कऽ रिह जएताह। तथािप, ओ सभ अिथरताक जहर फैलएबासँ बाज निह आिब रहल छिथ तथा मैिथलीक खु¸ा एखन धिर डोलल निह अिछ तथािप एकर सुर9ा हेतु एकरो राजनैितक संर9णक िनतात आवÄयकता अिछ जािहसँ मैिथली अपन कतेको हजार वष+क अपन िकलाकÊ डोलय निह देअए। सदभ+ सूची :- 1. मैिथली सािहयक आलोचनामक इितहास- डॉ. िदनेश कुमार झा 2. िमिथला- डॉ. लÔमण झा 3. िमिथला भाषामय इितहास- मुकुद झा व$शी

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ३. पW ३.१.इरा मिYलक-३३ टा किवता आ गीत ३.२.इरा मिYलक- ५ टा शृंगार गजल ३.३. इरा मिYलक- २ टा बाल गजल ३.४.इरा मिYलक- ६ टा बाल गीत/ किवत ३.५.इरा मिYलक - ५ टा गजल आ तीन टा शेर ३.६.इरा मिYलक- ७ टा cृगार गीत ३.७.अशोक जे. दुलार- १ टा बाल-किवता ३.८. अशोक जे. दुलार- ७ टा किवता ३.९. िवtणु कात िमc- कुरसी ३.१०.आशीष अनिचहार- दू टा गजल ३.११. िxयंवदा तारा झा- उgमीदक आcय ३.१२.आनद दास- िचट◌्ठी ३.१३. कYपना झा- एकटा किवता ३.१४. डा िजयाउर रहमान जाफरी-आजाद ग़ज़ल

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् इरा मिYलक ३३ टा किवता आ गीत इरा मिYलक १ लÔय किठन निहं जीत हमर हेतय जनैत छलहुँ हम हािर निहं बैसब मोन मÀ ठनने छलहुं हम। एकाएक जे िबर× उठल िजनगी मÀ हमर। गm गm ~यिथत छल िकनका सं किहतॱ। पिरिथित एहन िकछ बाट निह भेटय अिह बाट जाउ आ िक ओिह बाट जाउ इत: तत: मÀ मन छल भगवान के भरोस छल cेØ जन के आशीव\द संग छलै पिरिथित बुझु सरल ते निहये छल; ओिह कiट कूश भरल

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मानुषीिमह सं ृ ताम् बाट संओ िनकलनाय। मोन मÀ अपन हम ठािन चुकल छलॱ निहं हारब थाकब सतत आगू ताकब अिछ किठन बाट एक मोन मÀ उचाट िवजयक xचंड वेग बढ़बैत डेग मोन मÀ अथाह भरल आमिवास क तेज सफलताक ताज मेहनत के राज िदन राित मÀ निहं ताकल िवभेद सुदृढ िवचार संयिमत ~यवहार। ओिह कंटकीण+ बाट पर चलैत रहलहु एक एक डेग बढ़ैत रहलहुं मंिजल दूर छल लÔय पेनाय सुगम निहं छल मुदा; एकटा दृढ़ आस छल अपन कम+ पर िवास छल जीत हमरे हेएत आइ निहं ते कािÁ

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मानुषीिमह सं ृ ताम् िवजेता हमही छी पहाड़ तोिड़ हम बाट बना लेब सुदर सन ओिह सुमाग+ पर चिल उ¤ित के िशखर छुअब ओ िवतृत अनत नीलाभ सgपूण+ आकाश हेएत हमर । कामयाबी के बाट बहुत आसान निहं िकतु ओतेक सेहो किठन निहं मोन मÀ जॱ एक बेर ठािन िलय ते िकछ दुग+म निहं। ओिह िवजयीभाव संओ सफलताक िशखर िनÒय भेटत। ई हमर िवास अिछ। जीवन के मूलमंm अिछ पिहने वंय के जय कº हौसला राखू! धैय+पूव+क, भए एका<िच§ अनास$त भाव सँओ कम+ करैत रहू। कम+ करैत रहू।

२ महानगरक माया

ई महानगर छै यौ भाइ! बàड भ~य! िवशाल! मनोरम! मायावी नगर!

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मानुषीिमह सं ृ ताम् एतय लोग बहुत ~यत भेटत नगर ~यत! सड़क ~यत! िदन-राितक कोनो भेद निहं। ~यत लोग, अपने मÀ मत लोग! निहं छैह िकनको आन िकनको संओ लेनाइ-देनाइ! अपाट+मÀटी ~यवथा छै भरपूर सुख सुिवधा छै। नgहर गाड़ी! चकाचक òलैट! òलैटक भीतर सजल -धजल एक सु¤र दुिनय›। सुंदर घरवाली सöय ब:च! मुदा! नेनपन संओ दूर! बाल सुलभ कौतुक निहं भेटत एतय। पड़ोसी एक- दोसर संओ अनिचहार। िजनगी मÀ भागम -भाग मचल छिन बड़का-बड़का मॉल , रेटोरÀट , िथएटर िजनगी संओ खुश हेबाक सब साधन तिहयो िकनको मुँह पर उफुYल आमीय खुशी कह› देखै िछयै! सब सँओ अपयiत ई शहरी लोग अपन डफली ,अपने राग

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मानुषीिमह सं ृ ताम् अपने सुर, अपने तान अलािप रहल छै! कÈचाक(पैसा के) रौद छै ओकर xचंड चकाचॱध छै पाइ के उपाज+न माm इयैह एकटा लÔय छै। सॱसे नगर भािग रहल अिछ ओिह गत~यक िदस! जीवन मÀ आगू बढ़बाक तीवÑ लालसा मÀ मनु$खक मानवता कतहु नÐ भs गेल छै एक -दोसर कँ धकेिल कs िछटिक मािर ,अपन िहत सािध लेबा मÀ किनको निहं िहचकै छै। भौितकवादी लोग! हृदयिविहन लोग! गरीबक एकटा िवशाल वग+ सेहो छै एतय शहरक बाहरी ताम-झाम आ चकमक िदन-राित देिख महानगरक महामाया सँओ िदक् -Ìिमत लोग! गाम -घरक खेती-पथारी बाड़ी-झाड़ी, डीह -डाबर आमक गाछी, पोखिर ,मiछ उ¹जर मखान!

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मानुषीिमह सं ृ ताम् िखलिखलाइत हँसी-खुशी सब िकछु यािग मायावी शहरक मोह-पाश संओ बहा गेल छैक-------बàड मजगूती सँओ! शहर मÀ बढ़ैत मजदछर वग+ दुनु सiझक बुतात (रोटी) के wयॲत मÀ ओझरायल जा रहल छै करेजा-तोड़ मेहनित करैत िदन -राित तिहयो ओकर ब:चा भूखे िबलिबलाइत भेटत! मंिदर मÀ, मूित+क दुjधािभषेक हेतै घैलक घैल दूध दुjधािभषेक के नाओं पर बहाओल जाइत छै। मिदरक बाहर गरीबक ब:चा भूखे - िपआसे िचिचयाबैत तािपत िपपािसत ओिह िशशुक कंठ तर एको बु¤ दूध नसीब निहं भूखे तड़पैत िशशुक लेल मानवताक! कºणाके एको बु¤ निहं भेटत शहर मÀ। बàड अजगुत देखल अिह संसार मÀ िकनको िजनगी मÀ सब िदन होली छै

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मानुषीिमह सं ृ ताम् आ सब राित िदवाली छै दोसर िदस, िकनको भाjय मÀ अहारे-अहार पसरल छै मनु$खक ई सीमा-रेखा किहया धिर! आिखर कखन धिर जीबैत रहतैक। िजनगीक ई दुनु रंग समय के चÂी मÀ िक अिहना िपसाइत रहतैक? गरीब आ धिनक, समृ} आ िवप¤ कारी उ¹जर बनल महानगरक ई सीमा - रेखाक भेद मरैत मानवता टुटैत सामािजक सरोकार िकनको ते िमटबैये पड़तैिह शहर वा गाम हमाज तँ समाजे छैक समाजक जन-जन मÀ सुखमय भोरक सेहता जगाबs पड़तैक कृtण बिन शंखनाद करs पड़तैक सुखी समाज!! खुशी समाज!! सवä भवतु सुिखन: सवä सतु िनरामया!!!!!

३ विण+म भोर क आस

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

(जीवन एक आस िथक! ई िजंदगी के हम आशावान बना जीबय के xयास करी! इयैह अिह किवताके मूलमंm अिछ! किवताके इयैह xाणतव छैक। पढ़ब अहi सब।)

घुिर आओत ओ िदन! ह› यौ! ओ शुभ िदन एक िदन, घुिर औतै जºर हमरा िवास अिछ मोन मÀ। सुख -दुख ते बुझू जीवनक अंग िथक। घबड़ाएब िकयैक! जिहना अमावया आ पूिण+मा िदन संग राित सबके अितव छै एखन दुख सँओ <िसत, दुिखत संसार अिछ। मुदा ओकरो अंत िनिÒत छैक। केहनो घु£प अहार राित होउक िक ओ रोिक सकै छै विण+म भोरक आगमन के। हम जनैत छी फेर आओत ओ िदन। खुशी सँओ उछाह सौँ भरल! िबसरत सब दुख जे एखन तक लोग

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् भोिग चुकल छैथ।! चूÁा मÀ आिग हेतइ खुशी के बसात हेतैक नीपल िचनबार पर बासन मÀ दािल आ बटलोही मÀ भात हेतैक ठिरया गेहारी के सुअदगर साग चार (छत) पर सँओ तोड़ल ितलकोरक पात । आइ तºआ लेल ितलकोरक पात चाउरक िपठारे संग सजता। ओह! तीमन तरकारी भात दािल गरम गरम! अिjन देवता की जय। जारैन गोइठा चूÁा ढेकी ज›त मÀ दररतै अगबे राहिर काकी मÈया जंतसार गेतैक आनद पसरतै गीतक धुन संओ वग+ उतरतै धरती पर नािच उठतै अंगना। बासन पािन तीमन तेल।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् िडिबया जरैत हरैत ितिमरक अितव पसरैत इजोत !चहुँओर। सुखक िदन औतय। मनु$खक िदन बदलतै। कोठी भरल अ¤ खुशी भरल म¤ दलानक आितãय देवता घर सं उठैत गोसाउिनक गीतक । गूंजायमान हेतैक धूप लोबान के सुगंिध संओ पिवm भ जेतै घर , झूिम उठतै खेत -खिलहान। आओत अगहन मास। जीवन मÀ तखन ओअतैक हास उYलास चहुंिदस पसरैत हँसी के वर लहरी चतरैत रहतै सबटा खुशी लतरैत रहतैक जीवन बेल। जी निहं हाº! मोन निहं माº िजनगी िमलल अिछ कम+ठता संओ संवाº! धैय+ संओ सgहाº! ४ मनु$ख

कोना चिल दैत छै लोग ओिह बाट पर

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् जे िटकल रहैत अिछ िनछ:छ झूठ,छल,xपंच फरेब के बुिनयाद पर। िजंदगी के दौड़ मÀ भनिह पाछू रही मुदा एहन शाट+ कट के बाट हमरा मंजूर निहं। हमर संकार के वीकार निहं। ककरो नोर पर हम खुशी के महल ठाढ़ निहं क सकै छी! दुिनया एहने भ गेल अिछ काजक बेर लोग दोसरा के बापो कÀ बाप बना लेत काज िनकिल गेल ते िनकािल देत कात। हम देखैत रहैत छी लोगक वाथ+परक संबंध xपंच रचैत पiिख लगा उड़ैत िल£सा लोलुपताक उडान िदस। आओर कतेक नीचा खसत नैितकता पैर तर कतेक धंगाइत रहत इमानदारी! भलमनसाहत! सोिच के मोन बहुत उदास अिछ। ह›! हम बहुत उदास छी!

५ इयैह कामना हमर (हमर ई किवता पढ़ैत छी कतेको बेर हम! मुदा मोन हमर, अिह रचना कÀ फेर फेर पढ़य लेल उसुक रहैत अिछ सिदखन!अहूँ सब पढ़ू हमर ई रचना!)

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

पसरल अिछ भीड़ चारॲ िदस अथाह,दूर तक। हम तािक रहल छी ओिह भीड़ भाड़ मÀ अपन िहत िमत कुटुgबीजन कÀ। मुदा िकयौ निह दूर दूर तक दृिÐगत होयत छैथ। हम हािर थािक के बैस चाहैत छी िकतु, इ की? हम ते ओिह भीड़ मÀ वंय हेरा चुकल छी! हम के छी? हमर िक पहचान अिछ! अपन ठेकान कोन अिछ, सोचय लगलहुँ। मोनेमोन ओझरा गेल छलहुं। अपन किह के हमरा लग ते िकछु निहं अिछ। ई तन के चोला, ओ मन सब हमर कहi अिछ। चलैत xवािहत सiस सं पूछिलयै ओहो कोनो िनÄतुÂी निहं दैत अिछ जवाब। शरीर सँ सेहो पूछिलयै हम कतेको बेर बहुत टोहकारिलयै ओकरा

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ते एÂे बेर खॱझा के बािज उठल हम शरीर छी! हम कोनो एक तव संओ बनल छी? पiचो पiच तव के मेल संओ हमर अितव अिछ। हम कोना के तोहर सवालक जवाब िदयउ। ि9ित,जल,पावक,गगन,समीर सबसंओ तोरा पूछिह पड़तौ अपन मोनक सवाल। हम छघुनता मÀ पिड़ गेलहुँ! शरीर अपन वश मÀ निहं कखन रहत निहं रहत साथ छोिड़ देत के कहलक अइ। आ हम ओिह मÀ अपन अितव तािक रहल छी! सिदखन मोनक अनुºप पिरिथित निहं होयत अिछ। अिछ चािर िदन के ई िजदगी अिह िजदगी सं कामना अिछ जावत जीवैत रही लोकिहत काज आिब सकी हमर एक एक सiस िकनको खुशी के कारण बनय। अिह जग मÀ , आओर राखल की छैक, मोह,माया,तृtणा!

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मानुषीिमह सं ृ ताम् अपूव+ मृगतृtणा!!!! ६ भोर िवभोर

भोर ! ओह!!! भोर हमरा िवभोर कs दैत अिछ! हमरा बàड नीक लगैत अिछ। अÞादभरल आतुर हमर मोन िनशिदन, भोर के बाट जोहैत अिछ। नैसिग+क सौदय+ संओ पूिरत, हे उषाकाल! उगैत सूय+ के रि$तम लाली! मुjध भ जायत छी हम अह›क अनुपम बाल अºणोदय ºप िनहािर। नव उज\ संओ ओत xोत लगैत अिछ भोºकवा पहर ! आकाशक कपाटपट खोिल हँसैत मुकैत ओ ललकी िकरण! नवकुसुिमत मुंह खोिल िखलिखलाइत पुtपबृद! हिरत पात पर चमकैत हीरक ओसकण! संगीत लहरी भरैत

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मानुषीिमह सं ृ ताम् चतुिद+क मधुर राग छेड़ैत मंद मंद िसहकैत पवन। पसरल चहुंिदस xकृितक िहलकोर झुमैत मदमत बयार। सोन सन झलकैत गहुँमक बािल। विण+म उषाकाल के नभiगनमÀ िकिरण फुटैत भोर लुटबैत चहुँओर िनµ+µ खुशहाली मनोरम xकृितक सुंदरता। खग िवहग के कलरव xाण - ओज संओ भरल तमयता फूित+ , जखन भरैत अिछ जन जन मÀ xकृितक सामी£य भेिट जायत अिछ मेटा जायत अिछ सब शोक संताप। जी उठैत छी हम पलभिर मÀ उफुYलताक संग एक नवशि$त सं xेिरत आमशि$त सं िसंिचत जीवन। जगैत संसार, अलसाएल नीद तोड़ैत, शीतल बयार। किठन मातृव के सुंदरता,

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मानुषीिमह सं ृ ताम् अलख जगबैत िबहसैत शैशव के िनÄछलता, व:छ नदी के कलकल छलछल पािन भरैत पिनहािरन। भोर होइ संओ पिहनिह काह पर हल धेने, दुनु बैल के आगू केने परातीक सुर दैत गीत गबैत, अपन कम+भूिम िदस जाएत कृषक, बाट मÀ कतेको बेर बारंबार जोर जोर संओ बैल के टोहकारैत जेना सबटा मोनक बात ओकर बैल बुझैत हो आिक बैलµय के बात बुझैत होय ओ िकसान। जगत के िनÄछलताक अपूव+ दश+न जीवामाक मौन संवाद वºप िकसान आ बरद; ओिह दुनु जीव के म=य िवलु£त होयत अतभäद आमा संग परमामाक एकाकार सहजिह ओिह भाव के अ=याम ºप पािब आम;ान भ जायत अिछ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् तपोभूिम मÀ cमाहूित दइ लेल तपर माथ मÀ पगड़ी बहने िकसान एकटा गमछा माm देह पर। ओ साधारण शरीर निहं अिछ सÕत कठोर भुजदंड िनरतर cमतप संओ तपल फौलादी मजगूत चाकर छाती। तपोभूिम मÀ अपन खून पसीना मÀ भीजल एक एक cम िबदु सँगे cमाहूित देताह। संग मÀ छैह हुनकर सहगािमनी सहधिम+णी सहचरी! भोर! अपना संग अनैत छैक जीवन के कतैको सुदरता िविवध ºप रंग छटा पिवmता ! दृिÐगत होयत अिछ जे संसार के पिरवत+न! आरंभ आ अत, xकृितक िनयम िथक। िदन आ राित, समय के मय\दा िथक। सुख क साथ दुखक आहट आ दुखक गभ+ मÀ सुखक आस हमेशा अंत+िनिहत होइत अिछ। इयैह जीवन - चp िथक

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मानुषीिमह सं ृ ताम् अटल! शात आ परम सय। ७ घुंघट के बदलैत वºप

ललना! आब निहं ओ घुंघट मÀ रहती जमाना के संग कदम िमला कए आगू पथ xशत ओ करती। तानल घुंघट के भीतर दबल िसकुड़ल छल हुनकर दुिनया घु£प अहिरया चहुँ िदस पसरल। कलुिसत कुंिठत जीवन छल, छल मौन शािपत िबखरैत xितपल। दुनु नयन के संपूण+ गगन ते बस ओिह घुंघट मÀ िसमटल छल। मोन मÀ उठैत िवचार बवंडर ºिढ़वादी समाजक विनिम+त कतेको तरहक वज+ना आ बेरी ऊँच -नीच के x° आ उ§र। आब ओ अपन अितव पिहचािन चुकल छैथ नेm अपन ओ खोिल चुकल छैथ जािन चुकल छैथ घुंघट के तक+ ओ शम+ हया नयन के ग£प िथक। पैघक िलहाज ,mी के लािलय ओकर कुिलन ~यवहार मÀ िनिहत िथक। जािन रहल छैथ ललना , आब! घुंघट निहं अिछ mी के गहना। घुंघट के ~यापक अथ+ अिछ गहरा घुंघट निहं आब लाजक पहरा।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् अपन xखर xितभा के दम पर अपन शि$त वºप साथ+क करती ~यापक जग असार पसरल छै उ¤ित पथ पर अ<सर होयती। मौका सबके दुिनया दैत छैक, फेर अितवहीन बिन िकयै ओ जीती। अपन आमिवास जगेलैन ललना, पाछू मुिड़ निहं एकबेर तकलैन सफलता क हरेक 9ेm मÀ कामयाबी के झंडा फहरौलैन! सािबत केलैह अपन अितव ओ, दुिनय› भिर सदेश पठौलैन! सफलता के बाट किठन होय केतबो, संघष+मय हो! कंटकीण+ हो! ललना किहयो िवचिलत निहं हेती! समाजक एहेन सड़ल गलल मानिसकता, किहयो ओ वीकार निहं करती। आब निहं ओ घुंघट मÀ रहती! आब निहं ओ घुंघट मÀ रहती! ८ सच छै

अह› के देह सँओ बिह कs अहॴ के नेह मÀ सिन क s हमर िजनगी बदलल हम!हम निहं रहलॱ अपन पहचान

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मानुषीिमह सं ृ ताम् सब बदलल! अपन वजूद ~यि$तव सब िकछु िबसिर चुकल छी हम। निहं हमरा मÀ हमर वव ब›चल आओर निहं अपन वातं»य सब िकछ मेटाकs अ£पन दुिनया अनुपम बसा नेने छी ओकर सुदर रंग छटा मÀ आकंठ हम डूबल छी। अप+ण ! समप+ण ! पूजा! ,अराधना! सब £यार मÀ समािहत अिछ अह›के। वयं समिप+त केला संओ िमलल जीवन के एक नवीन अथ+! अपूव+ अिछ ! सबसँ अलग; पसरल आब --- !समबधक िवतृत ि9ितज! सुदर !सgपूण+! सम<ता सँओ भरल। ई दू आमा दू शरीरक ग£प निह िथक ई िथक µैतक योग सौँ बनल

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मानुषीिमह सं ृ ताम् अµैत क िनम+ल अिवरल xवाह जखन निहं µैत ब›चय एकाकार भsजायत अिछ जेना िक , बू¤ ! सागर मÀ िवलीन भ एकव वºप xा£त भ जायत अिछ। िकछ एहने सन दशा अिछ हमर आ अह›क अितवक । एक दोसर के पूरक! हमर मोन किह उठैत अिछ िक अह› िक हम दुनू मÀ अतर कतय! एक आमा छी एक xाण बसल शरीरक कोन ग£प िथक ई ते नर छैक रहत आ िक निहं रहत सय इएह अिछ! हमरा अपन अिह ºप मÀ दश+न होयत अिछ सय िशव सुदर वºप के। हमशरीर माm अलग छी! मुदाअह› ; हमर आमा छी!!! हम अह›क अतत+म मÀ बसल अहॴक वºप धारण क लेने छी!

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मानुषीिमह सं ृ ताम् दू तन एक xाण छी! हमरा अह› मÀ ई िवभेद कतय! पवन संओ सुरिभ िवलग कतय! पवन संओ सुरिभ िवलग कतय!!!

९ जीवन -चp

ड›ढ झुकल अिछ नैन थाकल अिछ तिहयो हgमर म› क§ेक सुदर अिछ। चाम लटिक गेल केश उ¹जर छैह शुÌ इजोिरया सन हँसी िनम+ल छैह! उिमरक बाह सँओ के बाहत ममता जननी जग के सृजनहार छैथ। जीवनक िकछु एहने सन सय उिमरक चािरम xहर बड़ िनम+म कठोर भेल भाव xचंड इहो शwद बुढापा जज+र! ई थिकत नैन िकछ कहैत बैन िसकुड़ल अिछ चाम

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मानुषीिमह सं ृ ताम् िवतृत अिछ ;ान। अनुभव के ग£प सब मुिÄकल हमर होयत अिछ अंत ओकर कहल हर एक शwद हमरा लेल अिछ वेदजय उपमान िन:शwद कथन! िकछु िसखबैत अिछ हमरा! हुनक, बड गहन सघन केशक शुÌ व:छ इहो धवल रंग ई उिमरक सय अिछ संÕया के ढलन दुिनय›क चलन िक वयस ढरल उतरल उमंग! पिरप$व िचंतन सुखद मनन x;ा xणीत मौन िचंतन इहो छल एक -एक गुजरैत xहर xकृितक आगमन अनुभव अगाध

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मानुषीिमह सं ृ ताम् िवतृत नीलाभ नवसृजनक लेल छैथ ओजपूर्ण ! नबका पीढ़ी के ओ कYपतº। जीवनक अजm सब आिमक xमुिदत, अÞाद भरल! ई समयक चp चलैत रहत िनब\ध !अनवरत्। इयैह िथक इहलौिकक परम सय!

१० सgहाº िनज अितव क

जीवन- याmा सहज होयतो अनायास कखनो -कखनो असहज भsउठैत अिछ! बहुत बेर ! कतेको बेर, ई देखना गेल छैक जे बेकसूर होयतो कसूरबार ठहरा देल जायत छैथ लोग। ओहो अपन

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् वजन µारा! िवास के ध¹जी उड़ैत देिख आमा कलिप उठैत अिछ। ओ चोट के गहराई ~यि$तव के अतल तल तक हताहत करैत आमा तक उतिर जाएत अिछ। बड़ी आसानी आ सहजता संओ वभावक कोमलता , सहजता आ मृदुलता के बड़ी िनØुरता संओ मसिल के आमा के; िविदण+ क दैत छैथ िकछ लोग। अिह पिरिथित संग अपना के सgहारब बहुत किठन होयत छैक। अिह अवथा मÀ अिह पिरिथित मÀ अपन मोन के एकदम शातिच§,िथर राखब होयत छैक परम जºरी । वयं मÀ अपन आमशि$त कÀ जा<त करब जºरी। लोगक प9 के सुनबाक साहस राखब जºरी। लोगक आरोप xयारोप मÀ कतेक स:चाई छै

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मानुषीिमह सं ृ ताम् या ओ आरोपक पिरिध के ओ कुिटल मानिसकता के लोग अपना िहत मÀ कतेक ~यापक बनौने अिछ सब बात के अथ+ बुझब जºरी। जºरी निहं छैक जे हम देिख रहल छी ओ िनतात सय हो भ सकैत अिछ देखल ओिह पिरदृÄय के कोनो आओर अथ+ हो ओिह पिरदृÄय मÀ ओकर सच दिब रहल हो जे भी कारण हो यिद अहiके जबद+ती कसूरबार बनबय के xयास होय तखन ओिह लोग संओ, ओहन िवषम पिरवेश संओ डिट के सामना करी सौgय शात ~यि$तव मÀ मुखर xखर ºप धारण कº शात शीतल चदन वभाव के रगिड़ अिjन x¹विलत कº। देखा िदयऊ स›च हर अवथा मÀ सiच होयत छैक सiच के xमाणक आवÄयकता निहं सiच शि$तवान अिछ सiच के आंच निहं।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् आ िबना िवलgब केने शी वंय के ओिह िनषेधामक िवचारधारा संओ अपना के सव+था पृथक करी । एकरा पलायनवाद निहं बुझू। अपन बहुमूYय समय कÀ अपन उज\ कÀ शि$तवान बनाउ। स9म बनाउ। ~यि$तव मÀ िवतार िदयौ। अपन अितव के सgमान कº अपन ~यि$तव के आदरणीय रहय िदयौ अपना के सहेज क राखू। अहiक अपन समय,उज\,मय\दाक सgमान वंय करब उिचत! लोग के िक लगैत छैक! हुनका ते बस आिग लेिस हवा दैत धू धू जरैत ओिह आिगक पसािह मÀ हाथ सेकैत बàड आनद अबैत छै । मुदा! ई अटल सय छै िक जे िकयो अबुझ लोग अकाश के पाथर मारत

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ते ओ पाथर वापस ओकरे चोट पहुंचाएत िनिÒत। हरेक =विन के xित=विन होएत अिछ। तÈ जे हमर मूल वभाव अिछ एकटा िनय आमा अिछ ओिह मÀ आकाश सदृश ~यापकता के यथावत रहय दी! शुÌ! पिवm! जा¹¹~Yयमान्!

११

एहन िकयैक होयत छैक (अपन म› के इयािदमे)

म› हमर! म› ! अह› चिल गेलॱ। िकयैक! ि9ितज के ओिह पार! सब िकछ लगैत अिछ िर$त- ित$त अधूरा अधूरा। अह› िबन िकछ निहं लगैत अिछ अ£पन। सब िकछ लगैत अिछ वीरान सन अहi हमरा सिदखन जे

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मानुषीिमह सं ृ ताम् बजबैत रहैत छलॱ ! टोकैत छलौ !! कोनो बात पर हमरे नाम अह›क इयािद रहैत छल कतेक जोर सँ हमरा टोहकारैत छलहुँ। हम खॱजाएत अह› पर सबटा तामस अपन झारैत छलॱ आब िकयैक ओिह आवाज के सुनबाक लेल मोन हमर हिरदम ~य< होयत अिछ। ओ शwद !अह›क ! ओिहना एखन धिर हृदय मÀ बसेने छी म›। बजबैत शwद जे छल एखनो कान मÀ ओिहना गुंजैत अिछ चेहाय तकैत छी चारो िदस कतौ निहं पबैत छी अह›के। सिदखन हमर मोन पूछ चाहैत अिछ अह› सँओ कतेको सवाल। हमर मोन मÀ घुमरैत कतेको x° !उकंठा !उलझन ! अह› सुिनते सुलझा दैत छलॱ जे चुटकी मÀ। आबो हम अिहं सँ म›गय चाहैत छी ओ सब समाधान ~याकुल मोन mाण निहं पबैत अिछ। आंिख अपन बद कsलैत छी अहॴक वºप हम अपन पलक तर समेट लैत छी

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मानुषीिमह सं ृ ताम् पबैत छी हमरा िदस तकैत िनहारैत अहॴक दुनु सुदर नयन ठोर सँओ मधुर हंसी िनझ+र झहरैत पबैछी पबैत छी ठोर सँओ िनझ+र झहरैत मधुर हँसी अह› िदस िनहािरते , िबसिर जायत छी ओ सब सवाल जे पूछबाक छल अहॴ सँ अह› बुिझ जायत छी हमर परेशानी सgहारैत छी हमरा ;जेना लगैत अिछ अह› कहैत छी ! बेर बेर चेतवैत छी! हमरा जगबैत किह रहल छी; उठू! देखू! जतन कº।बचपना छोº पैघ बनू। शि$तमंत बनू। बुझबैत कहैत छलॱ अिह अगम अथाह संसार मÀ अह› सँओ बिढ अह›क शुभिचंतक $यो निहं! िक¤हु निहं! अपना पर िवास राखू। सिहtणुता आ धैय+ जºरी दुख के गहराई के समझू सुख के उँचाई जानू सब िकछु अिह दुिनया मÀ संभव छैक। सृिÐ सय ते ; िवनाश सेहो सय। कोनो भी काय+ के दुनू पहलू पर गौर कº सब िकछु िछतरायल छैक

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मानुषीिमह सं ृ ताम् अिह चराचर जगत मे। मुदा! दू टा पहलू जे अिछ xकृितक एकटा आिद अिछ तँ दोसर अंत। दुनू पहलू के =यान मÀ राखू जतय आिद छैक ओतय अत िनÒय! अहिरया राित अिछ ते िनिÒत फेर होयत विण+म भोर के उदय! विण+म भोर के उदय!!

१२ ब›चय िदयउ अितत

हँसैत नारी! िबहुँसैत नारी। जीवनगीत गबैत नारी। जीवनक रँग मÊ रंगैत नारी! चूÁा िचबार नीपैत नारी! भानस भात करैत नारी। गोलेगोल सोहारी पकाबैत नारी। ितमन तरकारी रहैत नारी। थारी मÊ खुशी परसैत नारी। भिर घरक िचँता करैत नारी। भोरे अँगना सँ दुख कÊ बहारैत नारी। िचÂन चुनमुन अँगना

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मानुषीिमह सं ृ ताम् नीपैत नारी। घोघतर लाजे लजाइत नारी। मातृ¼प सु¤र सजैत नारी। पितxेम मÊ भीजल शील िनमjन नारी। ºपगिव+ता वँयमुjधा मधुर नारी। सृिÐ सृजन के आधार नारी। अपन दुख अपने सहैत नारी। धरणीºप धरैत नारी। जीवन के साथ+क करैत नारी। करेज मÊ एक x° उठैत अिछ, जौँ नारी एतेक िवशेष छिथ. अितव हुनके िकयैक आइ शेष छिह? िकयैक स›स लेबs सँ पिहने, हुनक स›सक डोर तोिर देल जायत छैह? दुिनय› मÊ xवेश सँ पिहने, कया िकयैक नÐ क देल जाय छैथ। कया Ìूण हया एक गहन िवषय िथक। हे नारी! उठु! जागू! अपन शि$तºप जा<त कº! अह› सृिÐ के रचियता छी! सँपूण+ सृिÐ के िवनाशक गत+ सँ बचाऊ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् या देवी सव+भूतेशू शि$तºपेण संिथता।

१३ इयैह सच छै

िज़दगी हमरा कतेको सुख! खुशी! मान -सgमान संओ अनुगृिहत केलक अिछ। कतेको अनुकूल पिरिथित हमरा अपन बहुपाश मÀ अंजोरय लेल आतुर िमलल। मुदा; अपना-परायाक अपमान-घृणा! उपे9ा-अवहेलनाक दंश सहबाक िववशता संओ <िसत सेहो भेल छलॱ। सुर9ा ,भय, यश,अपयश, लोगक उलहन उपराग! सेहो िजंदगी मÀ आएल आ गेल! िनब\ध चलैत हम बाट िमलल अपार नेहिस$त ममता दुलार। लोगक नेह £यार के सॱदय+ सँओ

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मानुषीिमह सं ृ ताम् हम जीिवत छी। £यार ममता िबलहैत एलहुँ अिछ ! ओकरे शि$त संओ हमर जीवनीशि$त मजबूत बनैत अिछ। सबसँओ अनसgहार हम £यार ममता पबैत छी। जीवन इयैह िथकैक सबके संग जीब क देिखयौ िकनको घृणा ,अवहेलना के £यार मÀ बदिल देिखयौ। सोहनगर विण+म बिन जाएत अिछ ई चािर िदन के जीवन याmा। निहं कतहु राग अिछ अिह मÀ निहं कतहु पूव\<ह। सबसँओ अलग , एक अलख जगबैत अिछ िजंदगी। हमर िजंदगी के सब दुख सुख हमर अपन िथक। जिहना हम सुख के वागत करैत छी सहष+ ओिहना िजनगी मÀ आओल दुख, किठनाई,उपे9ा सबके ओिह तमयता सँओ आिलंगन करैके xयास करैत एलहुँ अिछ। हमरा लेल हमर िजदगी के अथ+ बहुत ~यापक अिछ। जखन लोगक देल ितरकार, अपमान के xितउ§र हम पूव\<हजिनत xितकार सँ निहं,

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मानुषीिमह सं ृ ताम् अिपतु, सgमान देबा उिचत बुझैत छी। बहुत सुदर अिछ ई दुिनय› बहुत सुंदर अिछ मानव संग मानव के ई मौसम। मनु$खक अिह िरÄता मनु$ख संग, कखनो! िठठुरैत पण+हीन अिछ ते िक, ओतिह िबहुँसैत बसत सेहो अिछ। नजिर खोिल देिखय उ िकछु निहं छै ई दुिनया मÀ सब माया अिछ िक ल क एलहु आिछ िक ल क जायब शात रिह जायत िसफ+ आ िसर्फ हमर अपन ~यवहार नíता उपकािरता सदाशयता दयालुता!!!!!!

१४ मi◌ँ

म› म› के कोर मÊ, बैसल िशशु,

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मानुषीिमह सं ृ ताम् मातृव धय करैत छैक। जननी अपन आँचर मÊ, दुिनय› समेट लैत छैथ। करेज सँओ सटल , िशशुक पश+, आलोिड़त करैत अिछ, जननी के मम+थल, िशशु मुख िनहारैत म›, डूिब जायत छैिथ , एक असीम सुख मÊ, िनःशwद, शात। भिर लैत छैथ अपन आँचर मÊ, फूल, अमृत, गँध! िबसिर जायत छैथ ओ , अपन पीड़ा, ~यथा, अतµ µ। मुँह पर छलिक जायत छैह, एकटा िनिÒत हँसी के िमत रेह! िथर खुशी के ठेह! भोरका वण+ िकरण सँ दी£त, दुख ितिमर हरैत xकाश पुँज!! दुख,पीड़.~यथा , सबके पाछू छोिड़. जननी बिढ़ जायत छैथ, उ¹¹वल भिवtय िदस।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् म›-िशशु क अतभäद के ओकर मम+ के , निहं बुिझ सकल िकयो! म› के कोरा मÊ िशशु, व§+मान के कोरा मÊ समािहत, भिवtय! अिह अभेW िरÄता के मम+ के, बुझनाय आसान निहँ , अँतहीन! अिह नेह तँतु के निहँ कतहु आिद छै ! निहं कतहु अंत!! ई एकटा अटूट बंधन छैक अंतहीन! पावन!! िवल9ण!!

१५ हgमर भौजी (ई किवता हमर मोनक बहुत करीब अिछ! )

लाल साड़ी पिहरने भौजी, िमिथला आँचर छिथ ओढ़ने, िचÂन चुनमुन गोर माथ पर, लाल िटकुली छिथ सटने । छनछन पएरक नेपुर बाजे, हाथक चूड़ी खनकए , भौजी शोभा छिथ ! हमर घर के। बाजब हुनकर मधुर मधुर छिह,

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मानुषीिमह सं ृ ताम् अधर रहै सिदखन मुसकैत , घर मे सबहक =यान रखै छिथ, थकैत निह छिथ ओ कौखन, घरक साज सँभार करैत, गृिहणी बिन मान बढ़ाबिथ, भौजी शोभा छिथ! हमर घर के! बाबीक छिथ िचm सु¤िर म›जीक शोभारानी, भोर िभनसर उिठ के भौजी पिहने, बाबी के चरण छुबै छिथ मiजी के नेह नेह लsभौजी िदन के शु¼आत करय छिथ हम छोट भाइ बिहन ले भौजी, जननी ºप धरै छिथ, भौजी शोभा छिथ !हमर घर के! वजन बधु औ सर कुटुंब मे ओ ते मैिथल संकार बेबहार िनभाबिथ, पािवन ितहारमे हमर भौजी, नीक नीक पकवान पकाबिथ, भाय\ ºप धए भौजी हमर , भैयाक मान बढ़ािबथ, घरमे xाण संचार करै छिथ भौजी ! शोभा छिथ हमर घरक!

१६ गीत ............ दद+ दद+ मÀ फक+ बहुत अिछ

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मानुषीिमह सं ृ ताम् हँसी हँसी केर अथ+ अलग अिछ | पीर गहनतम शात दद+ अिछ टीस पीर के मम+ बुझल अिछ | पीर सय िथक सुख 9िणक अिछ नुका सकब दृग नोर भरल अिछ | घॲिट सकब नीलकंठ बिन िवष िशवºप धरब कहु कह› सरल अिछ |

१७ लालसा

एक मु ी सुख क कामना! एक आंजुर xकाशमय भोर क लालसा ! जीवन सँ◌ँओ जुड़ल कतेको! असंÕय x° ? उ§र ! हम तकैत छी ितिमर अंधकारक बीच। निहं भेटैत अिछ कोनो बाट ! अंतहीन सवाल उगैत रहैत अिछ, x°क कiट बेिध रहल अिछ। तन- मन दुनू के , एक के बाद एक! िनरंतर! लगातार ! अ;ानक ओिह गहन अंधकार मÀ निहं सुझैत अिछ एकोिमिसया! 9ीणोमाm! xकाश क रेह!

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मानुषीिमह सं ृ ताम् निहं पबैत छी कोनो जवाब! टटोलैत छी हम अपना के िचहै चाहैत छी अ£पन अितव के! एक इ:छा पूण+ निहं भेल आिक पनिप जाइत अिछ दोसर इ:छा , बालहठ नेने, आ ठाढ़ भ जाइत अिछ सोझ मÀ । िकनको जीवन! िक िन+µंद छैक? ई य9x° ! हgमर सgमुख, सीना तािन ठाढ़ भ जाइत अिछ। नै त सुख शात छै, आ नै दु:ख िनरंतर! सब 9िणक ! xवंचना! छलनामिय !9णभंगुर छैक! िचरथाई िकछु निहं !! मनु$खक इ:छा! किहयो पूण+ निहं होइत छैक। हरेक इ:छा ,दोसर संभािवत इ:छा के, िनमंmण दैत! सब एक दोसर सँओ जुड़ल! जीवन पय+ंत ओझरायल! अंतहीन छै ई िल£सा! सुख के िनय,सुंदर , शात बनैबाक िपपासा मÀ, आकंठ डुबल रहबाक wयॲत मÀ, खुशी के ओिह मृग मरीिचका क पाछू अपय›त मनु$ख ! आमचेतन सॱ दूर,

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् िनरंतर ! समय नÐ करैत जाइत अिछ। िकंतु एक बु¤ आमचेतन सँओ जागृत िववेक, मनु$खक जीवन के संपूण+ बनेबाक सामãय+ रखैत अिछ। आम;ान मÀ सुख छै, आम;ान मÀ संतोषक भाव िनिहत छै। आम;ानक सम< xकाश पुंज के नपबाक कोनो कसौटी निहं छै। दानी दान करबा सँओ, ;ानी ;ान बiटै सँओ, मजदूर मेहनैित करै सँओ, जनिन वासYय xेम सँओ, नदी मीठ जल देबा सँओ, त¼वर छाया xदान करबा सँओ, जे सुख पबैत छैक ओिह अंतम+नक सुख मÀ, ओिह 9णक सुख मÀ अपार आनंद छै! ओिह असीम आनद क कोनो पराकाØा निहं छै। वएह सुख अनािद, अनंत अलौिकक छैक! ओिह शात सय मÀ ईर परमानंद छै!! अ£प दीपो भव!!!

१८

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् नारी ...........,.,,. हँसैत नारी! िबहुँसैत नारी। जीवनगीत गबैत नारी। जीवनक रँग मÊ रंगैत नारी! चूÁा िचबार नीपैत नारी! भानस भात करैत नारी। गोलेगोल सोहारी पकाबैत नारी। ितमन तरकारी रहैत नारी। थारी मÊ खुशी परसैत नारी। भिर घरक िचँता करैत नारी। भोरे अँगना सँ दुख कÊ बहारैत नारी। िचÂन चुनमुन अँगना नीपैत नारी। घोघतर लाजे लजाइत नारी। मातृ¼प सु¤र सजैत नारी। पितxेम मÊ भीजल शील िनमjन नारी। ºपगिव+ता वँयमुjधा मधुर नारी। सृिÐ सृजन के आधार नारी। अपन दुख अपने सहैत नारी। धरणीºप धरैत नारी। जीवन के साथ+क करैत नारी। करेज मÊ एक x° उठैत अिछ, जौँ नारी एतेक िवशेष छिथ.

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् अितव हुनके िकयैक आइ शेष छिह? िकयैक स›स लेबs सँ पिहने, हुनक स›सक डोर तोिर देल जायत छैह? दुिनय› मÊ xवेश सँ पिहने, कया िकयैक िनवेश होयत छैथ। कया Ìूण हया एक गहन िवषय िथक। हे नारी! उठु! जागू! अपन शि$तºप जा<त कº! अह› सृिÐ के रचियता छी! सँपूण+ सृिÐ के िवनाशक गत+ सँ बचाऊ। या देवी सव+भूतेशू शि$तºपेण संिथता। नमतयै नमतयै नमतयै नमो नमः।

१९ किवता म› के कोर मÊ, बैसल िशशु, मातृव धय करैत छैक। जननी अपन आँचर मÊ, दुिनय› समेट लैत छैथ। करेज सँओ सटल , िशशुक पश+, आलोिड़त करैत अिछ,

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मानुषीिमह सं ृ ताम् जननी के मम+थल, िशशु मुख िनहारैत म›, डूिब जायत छैिथ , एक असीम सुख मÊ, िनःशwद, शात। भिर लैत छैथ अपन आँचर मÊ, फूल, अमृत, गँध! िबसिर जायत छैथ ओ , अपन पीड़ा, ~यथा, अतµ µ। मुँह पर छलिक जायत छैह, िनिÒत हँसी के िमत रेह! भोरका वण+ िकरण सँ दी£त, दुख ितिमर हरैत xकाश पुँज! दुख,पीड़.~यथा पाछू छोिड़. जननी बिढ़ जायत छैथ, उ¹¹वल भिवtय िदस। म› के कोरा मÊ िशशु, व§+मान के कोरा मÊ समािहत, भिवtय! अिह अभेW िरÄता के मम+ के, बुझनाय आसान निहँ , एक अटूट बँधन छैक , अँतहीन! अिह नेह तँतु के

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मानुषीिमह सं ृ ताम् निहँ कतहु आिद छै निहं कतहु अँत!

२० होली के एक दूटा प›ित

रँगक हुड़दँग मचल िपया बसँती होरी मÊ, सबहक मोन मÊ उमँग भरल िपया बसँती होरी मÊ। छै भँगक तरँग मचल िपया बसँती होरी मÊ, बुढ़बो िदयर लागै िपया बसँती होरी मÊ! राधा छैथ जीवन आ मेहनैित छिथ Äयाम यौ, सब हाथ के काज िदयौ हेत जीवन आसान यौ। िहँसा आ µेष दँभक होिलका जरा िदयौ, कटुताकÊ छोिड़ रँग दोती मÊ रँगाउ यौ। नारी नारायणी िथिक , हुनका मान सgमान िदयौ, िजनका सँ ई सृिÐ छैक, हुनक शि$त जगाउ यौ।

२१ बेरोजगार केहन घर केहन दलान,

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मानुषीिमह सं ृ ताम् हम बेरोजगारक निहँ पहचान कतओ। शहर शहर हम भटैक रहल छी, निहँ िड<ी के मान सgमान कतओ। पैरवी भरल अिह दुिनय› मÊ, कोनो जनता राखौ ईजोतक आस कतओ। सब उमँग भ जाएत छै पत, िब<ल िश:छा तँm के नै उपचार कतओ। एक सँ एक घाघ बैसल छै अàडा जमाके, के कम बेसी से बुझेतै कतओ।

२२ किवता हमर अिह छोट छोट आँिख के, बàड पैघ पैघ सपना अिछ। अपन नािह नािहटा प›िख सँ, बàड ऊँच उड़ान भरै के कामना अिछ। सिदखन सजबैत रहैत छी, अपन इ कपोलकिYपत व  के, अिछ इ जागल आँिख के सपना, बैसल हम एकात श›त, िखड़की सँ देखल, दूर पसरल िवतृत आकाश के, िनलाभ अनत गगन छल! अपनिह मÊ पूण+ सँपूण+! निहँ कतहु ओर एकर,

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मानुषीिमह सं ृ ताम् निहँ छल कतहु छोर। लोगक अिह बित मÊ, भीड़ भाड़ आ, रेलम ठेलम मÊ, अपय›त भS जायत छी, पत भS जायत छी हम। लेिकन, हमहुँ तै िहसा छी अिह भीड़ के! ककरा सँ भागु? लोगक अिह भीड़ सँ, आिक, रोजमर\ के समया सँ! निहँ निहं, कोनो बाधा , हमर सजायल नयनक सपनाके, डगमगा निह सकैत अिछ। अिह भीढ़ मÊ हमरो, ~यत रहS के अिछ, भाjयवादी निह बिन, अपन कम+ठता सँ, सदाशयता आ िवास लगन सँ, जनमानस मÊ नवचेतना जगाबS के अिछ, जाित पाित के भेद मेटा कय, घर घर मÊ नारी िश:छा के अलख जगाबS के अिछ, हमरा ते एक नवीन िशि:छत, मैिथल समाजक , नविनम\ण करय के अिछ !

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

२३ बाट जाम होय िक, मगज िवकास ¼कबे करत. बेइमान हो नेता ते, देश के नैया डूबबे करत। पूँजीपित हो लालची, चोर धनबटोर सूदखोर, िवकराल मँहगाइ ते, आसमान छुबबे करत। भूख सँ िबलिबलाइत अिछ, बाल ब:चा वृ=दजन, देशक सरकार के थूका फजीहत हेबे करत। बढ़ैत जनसँÕया सँ mत अिछ, सौँसे सँसार आइ, बेरोजगारीक मािर सँ, दू चािर आब होए पड़त। जिह देश मÊ होय एकता, अखँडताक िद~यमँm, ओते सुख श›ित समृि=द के. िmवेणी बहबे करत!!!!

२४ जाड़क राित अिछ, थर थर तन क›पय, कँपकँपायत देह पर, गरम नरम, वेटर शाल ओिढ़ कय,

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मानुषीिमह सं ृ ताम् गीत जाड़ के गाबी, चलु चलु हम जाड़ भगाबी। गरमा गरम पकौरी के सँग , गरमागरम चाय बनाबी, मोनगर सोहनगर बात मगन भै सखावृद सँग खूब बितयाबी, चलु चलु आइ जाड़ भगाबी। लकड़ी काठी जोिड़ जोिड़ कय, धधरा के धधकाबी, घूरक तर के ग£प सरÂा, एकरो आनँद उठाबी, चलु चलु आइ जाड़ भगाबी। आिब गेल अिछ जाड़क िदन, वेटर रजाइ कोट के िदन, अमीरक ठाठ बाट के िदन, गरीबक गुदरी सुजनी के िदन, जतन करी, दुनू वग+क अिह सीमा रेखा के, सब िमलकय दूर हँटाबी, चलु चलु आइ जाड़ भगाबी!!!!!

२५ गीत हम हािर जाइ छी जखन, तखन इयाद करै छी तोरा। जीतै छी हम बाजी जखन, तखन इयाद करै छी तोरा। िबरह लै करोट जखन, तखन इयाद करै छी तोरा।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ~यिथत हो जौँ मोन जखन, तखन इयाद करै छी तोरा। xीत छेड़य राग जखन, तखन इयाद करै छी तोरा। मोन मयूर नाचै जखन, तखन इयाद करै छी तोरा। फाग मचाबै धूम जखन, तखन इयाद करै छी तोरा। साओन के कजरी जखन, तखन इयाद करै छी तोरा। बरखा के पड़य फुहार, तखन इयाद करै छी तोरा। िभजय पोरे पोर जखन, तखन इयाद करै छी तोरा। जाड़ मÊ क›पै गात जखन, तखन इयाद करै छी तोरा। शीतल बहै wयार जखन, तखन इयाद करै छी तोरा। कोयली कुहकै चहुँ ओर, तखन इयाद करै छी तोरा। बेला महकय चहुँ ओर, तखन इयाद करै छी तोरा। बैिरन हो बितया जखन, तखन इयाद करै छी तोरा। च›दनी हो रितया जखन, तखन इयाद करै छी तोरा। बिस िपया दुदäश जखन, तखन इयाद करै छी तोरा।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् पितय› नै सदेश जखन, तखन इयाद करै छी तोरा।

२६ जीवन

जीवन अिछ, आह, कराहक िसलिसला , पीड़ा आ दद+ के रंगीन, मनमोहक कथा! सब िकछ, Ìम, व  , िमãया, xवँचना! दुिनय›क सब िरÄता अिछ, ममताक मृगतृtणा! जीवन के , िसफ+ अपना लेल िजनाय. अपन लेल सोचनाय, हमर जीवन, बस हमरे लए? निहँ निहँ, एना सोचब तै. होयत वाथ+ हमर, िनतiत वाथ+ ! जीवन के िकछ अथ+ भेनाइ, ते ज¼री छैक,

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मानुषीिमह सं ृ ताम् जीवन के एक लúय भेनाइ, ते बेहद ज¼री छैक। ओ लúय, भए सकैत अिछ, िभ¤ िभ¤ । ककरा हम कहबै, सय. ककरा हम, असय ठहरा सकैत छी। िकतु एक सय , मानव जीवन मÊ, आिन सकैत अिछ, अथाह शाित. असीम आनद! ओिह सय के बुझबाक , हम xयास करैत छी िनरंतर! हमरा लए हमर जीवन मÊ, सबसे पैघ वैभव, ओ विग+क सुख अिछ, जे दैत अिछ अपूव+ सँतोष, मानव सेवा मÊ िछपल अिछ, हमर अँतम+न के ओ , अलौिकक सय! मानव सेवा आ परोपकार सँग, जी उठैत अिछ , हमर आमा, तृ£त भs जायत अिछ मोन,

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ओिह आिमक सुख के आगू, दुिनय› के सब सुख . बुझायत अिछ छोट , छोट, बहुत छोट!!! मानव सेवा आ परोपकार, यैह अनँत िनिध अिछ , यैह िनत›त सय अिछ, यैह एक लúय अिछ, हमर जीवन के!!

२७

िजनगी के राह मÊ, धूप छ›ह बहुत छैक। सँग अह›के, नेह अह›के पािब, मन मÊ हमर एहसास जागल, धूप हो या हो छ›ह, अह›क नेहक तपीस के सgमुख. धूप की? छ›ह की? ककरो िक िबसात छैक! रौद ते रौदे छै, भकभक तेज, लाले लाल, आिग उगलैत गरम गरम! कतहु mाण निहँ, िकँतु, अह›क नेह पािब, इ तेज रौद,

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मानुषीिमह सं ृ ताम् गँधपुtप मÊ बदिल जायत अिछ, हमर जीवन के राह मÊ, फूल बिन िबछ जायत अिछ, चानन शीतल छ›ह बिन, गम -गम करैत, सुरिभत बाट, गध सुवासक , नगर बिन जायत अिछ। अह›क नेहक डोर पकिड़ हम, सुगँिधत सुवािसत , ओिह नगर मÊ, घुमैत रहैत छी, बावरी, मतवािर बिन, अिह गली, ओिह गली! धूप छ›ह के इ खेल , हमरा नीक लगैत अिछ, एिह मÊ, अह›क आओर सामी£य पािब, िसमिट जायत छी, ओिह गेह मÊ, जतय अह›क मजबूत, दुनु ब›िह के घेरा अिछ, ओिह बहुपाश के घेर मÊ, हमर एक बàड सुँदर, घर बसल अिछ, जे हमर सुख चैन के, बसेरा अिछ!!!!!

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मानुषीिमह सं ृ ताम् २८ भोर भेलै, घरनी के तँ हाल बड़ा बेहाल छै, तिहयो ओ नेहाल छै। घरनी धुरी छैथ गृहथी के। आँिख िमरैत उिठ पुिठ भोरे, भनसाघर ओ दौड़ै छैथ, चाय बनाब के छैह हुनका, केतली चूÁा पर चढ़बै छैथ, नाता संग तैयार करै छैथ, िदनभिर के िदनचय\, घरनी धुरी छैथ गृहथी के। घर भिर कान मÊ तूर तेल लेने, एखनो िनसभिर सूतल छैथ, पितदेव आ नेना के, जगेनाय एखैन तँ ब›िक छै, ऑिफस आ कूल भेजवाक, सरंजाम केनाइ तँ ब›िकये छै, तिहयो भोरतरँगक खुिशय›, समेिट आँचर मÊ बाहै छिथ, घरनी धुरी छैथ गृहथी के। जीवनक अइ आपाधापी मÊ, खुशी के फूल लोढ़य छैथ, ओिह फूलक सुरिभत माला सँ, पिरवारक बिगया सजबै छिथ, जीवन के सृँगार बसल, सुँदर िहनक गृहथी मÊ, सँगीतक सुर तान बसल अिछ,

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मानुषीिमह सं ृ ताम् मनभावन िहनक गृहथी मÊ, घरनी धुरी छैथ गृहथी के!

२९ आँिख सुतल निहँ राितभिर, मोन भटकैत रहल िजनगी के, िबतल पल पर ,कखनो आइ पर! मोनक गित िविचm छैक, छन मÊ अिहठाम, पल मÊ ओइठाम, यािद अबैत अिछ ,अपन बचपन के, मधुर, सुँदर, सोहनगर बात, म› के लोरी,बाबी के £यार, दुलार भैया के,बिहनक नेह, किनय› पुतरा के wयाह, देर तक, दूर तक, बस खेलिह खेल, िनब\ध व:छँद!!!!! िकताबक बता, कूलक रता, सब यािद अिछ। बरसा के पािन, कागज के नाव, गरमीक रौद, आमक िटकोल, जाड़ के मास, थरथराइत गात, सबिकछ पाछू छुिट गेल। छुिट गेल ओ मेला ठेला, पावैन ितहारक अपनव रंग, बाग बगीचा, अँगना झूला,

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् सब िकछ अिछ ओिहना अंिकत, हमर मोन के कोना मÊ, िकँतु एकिह पल मÊ जी उठैछ, अंतम+नक िशशु आइ, मचिल उठल, आँिख मÊ भिर लैत छी, कतेको सुँदर रँग, आ समेट लैत छी, अपन आँिख मÊ, पलक मÊ बँद क दै छी, अपन बचपन! अपन नेनपन!!

३० बड़ी अजीब मँहगाई छै! आटा चाउर तेल शÂर, मँहगी के छूलक आसमान, गृिहणी भनसाघर मÊ देखु, कतेक भए गेिल परेशान, बड़ी अजीब मँहगाई छै! एतेक मोट तनखा के गàडी, मासiत पित घर अनै छिथ, दस िदन मÊ हालत गàडी के देखु, कतेक पातर दुwबर भs जाय छै, ब›िक मिहना के बीस िदन, कोना चलत, की करैथ उपाय, बड़ी अजीब मँहगाई छै! पनिपयाइ बेरहट के ~यँजन, सुनु! सब फीका फीका भ गेल,

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् भोर स›झ के चाय सँग िबसकुट, सेहो िगनती मÊ कम भेल, एतेक कतर ~य त मÊ घरनी, अितिथ के कोना करती सकार, बड़ी अजीब मँहगाई छै! पावैन ितहारक बात नै पूछू, घरनी कोना करती ओिरआन, कपड़ा िसयेती या उपहारमँगेती, कोना पकेती पुआ पकवान, बड़ी अजीब मँहगाई छै!!!

३१

लाल साड़ी पिहरने भौजी, िमिथला आँचर ओढ़ने, िचÂन चुनमुन गोर माथ पर, लाल िटकुली छैथ सटने। छनछन पएर के नेपुर बाजे, हाथ के चूड़ी खनकए , भौजी शोभा छैथ , हमर घर के। बाजब हुनकर मधुर मधुर छैह, अधर मुकैत सिदखन, घर मÊ सबके =यान रखै छैथ, थकैत निहँ छैथ कौखन, घर के साज सँभार करैत, गृिहणी बिन मान बढ़ावैथ, भौजी शोभा छैथ, हमर घर के।

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् बाबी के छैथ िचmसु¤ैर, म›जीक भ~यारानी, भोर िभनसर उिठ , भौजी पिहने, बाबी आ म› के, चरण छुबै छिथ. हमसब भाय बिहन ले भौजी, जननी¼प धरै छिथ, भौजी शोभा छैथ हमर घर के। वजन बधु सर कुटुँब मÊ भौजी, मैिथल बेबहार खूब िनभाबैथ, पावैन ितहार मÊ हgमर भौजी, नीक नीक पकवान पकावैथ, भाय\¼प मÊ ओत , भैया के मान बढ़ावैथ, घर मÊ xाण सँचार करै छैथ, भौजी शोभा छैथ हमर घर के।

३२ म›! बैसल दूर गाम मÊ हgमर म› जोिह रहल छैथ बाट अपन बेटी के। िदन िबतल बीतल हòता मास िबतल िबित गेल साल किनको िदन लेल अिबये जैतैथ सोचिथ बेटी लय िनशिदन म› भाjय सराहिथ िविधना मनावैथ

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् अपन सुता लय हgमर म› सोिच रहल छैथ अपन मोन मÊ धी जीवनक यथाथ+ सच म› लúमी ºप, ºप सरवती अ¤पूण\ अिछ हमर विनता सौँसे पिरवार के एक नेह डोर मÊ ब›िह रखने छिथ हमर सुता! सॱसे पिरवार के एक नेह डोर मÀ, ब›िह रखने छिथ हमर सुता!!

३३ हम mी छी

हम!!!! जखन थािक जाएत छी घर गृहथीक दैिनक िजgमेवारी मे आ ओझराएल रहय छी ओकर जाल कराल सँओ छोट पैघ िजgमेदारीक ओहह!!!! ई अनवरत याmा!

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मानुषीिमह सं ृ ताम् एकर आवÄयकता पूरा करैत करैत पलखैत निहं भेटैत अिछ xाण सiस उखैर जायत अिछ थसथसा जायत अिछ देह थकमका जायत अिछ डेग सूय+ िकरण उगै सँओ सूय+ अत तक के हमर अनवरत चलैत गृहथी क याmा कोना पूरा भsजायत अिछ िकछु निह बुझना जायत अिछ। एको घड़ी अपन सुिध लै के पलखैत निहं भेटैत अिछ। बसंत के खनक वसुधरा के cृंगार xकृितक मनोरम दृÄय xचंड रौद तामसे घोर अकाश धरती मे फाटैत दरािर

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मानुषीिमह सं ृ ताम् सूखल चास बास चैत बैसाखक कहर साओन के झूला बरखाक बू¤ उमरैत नदी xवाह उमगैत देहक धाह। पूस माघक जाड़ थरथराइत गात होलीके रंग पिरवार के संग सब मौसम जीबैत छी अपन काज राज के बीच सब संग जीब लैत छी सुख दुख के रंग अपन खुशहाल गृहथी मे ब›िट लैत छी ओिह wयत िदनचय\क बीच सुख आ खुशी। हम गृिहणी के गाह+ãय धम+ एक

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मानुषीिमह सं ृ ताम् साधना अिछ एक-एक िदन के तपया सँओ सजैत अिछ! बसैत अिछ ई खुशहाल गृहथी । िज़दगी मे आओर कोनो कामना शेष निहं बचैत अिछ! हम mी के दुिनया के इएह सय िथक । xेम सँओ पिरपूण+ हृदयक उæगार ममता मानवता सदाशयता परोपकार c}ा संकार आमगौरव अप+ण! समप+ण!

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मानुषीिमह सं ृ ताम् पूजा! पिवmी! सब अिह मे समािहत रहैत छैक आ ओिह मे समािहत होयत अिछ हमर गौरवमयी नािरव! एक संपूण+ सृिÐ के आधार!!!! रचनाकार:-इरा मिYलक, िरलायंस <ीस टाउनिशप जामनगर गुजरात।

ऐ रचनापर अपन मंत~य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् इरा मिYलक ५ टा शृंगार गजल मैिथलीक पिहल शृंगार गजल - भि$त गजल , बाल गजल आ सोझे गजल , तकरा बाद xतुत अिछ मैिथलीक िकछु “पिहल शृंगार गजल ” सभ , सरल वािण+क बहरमे- पिहल बेर िवदेहमे- सgपादक।

cृंगार गजल १ अिछ राित िबतै सँ रहब ब›िक िकछु बात अह› सँ कहब ब›िकl

कहै के अह› सँओ दू -चािर शबद कोना कहबै ओ बात गढ़ब ब›िकl

अह› संगे दूरी ब›चल जे िकछु अिछ बालू के भीत ढहब ब›िकl

जी भिरके बात अह› सँ करब छै नेह के तपन सहब ब›िकl

कहू xीतक डोर ई बाहू कोना अिछ लाज सँ आब मरब ब›िकl

िमलन सुख+ लाल गुलाब कली रसधार सुधा मÀ बहब ब›िकl

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मानुषीिमह सं ृ ताम् छोट डेग xेम पथ मÀ अपन जीवन भिर संग चलब ब›िक।

सरल वािण+क (वण+-१२)

२ गमाउ नै गोरी छन मधुराग भरैये हमर हृदय सँ फूल पराग झरैये।

देखु लाज सँ गालक गुलाब िखल गेल लोगक नैनाक क›ट बेिहसाब गरैये।

नैना िचतवन अÁड़पन देखैत छी कोना मुकी िमसिरया पर जान जरैये।

अधर कोमलकली छै रस सँ भरल मन भँवरा बौरायल से जािन परैये।

मोन फागुनी बयार बिन मत मगन िसनुर लाज सँ मुखरा गुलाल भरैये।

ºप चच\ पसैिर गेल गामिह गाम मÊ कोना चलतै लोग िदने मÊ बाट हेरैये। सरल वािण+क (आखर-१५)

३ जी के जंजाल बनल हमर हेयै कंगना खनक खन बािज उठै जािग गेलै अंगना ।

दौिड़ बिहय› पकिड़ िपया करै बरजोरी अरज न मानै केहन मचबै उधंगना ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

सासु पढ़ैथ गािर ननदी करै िठठोली तीख नैना गोतनीय›क लगै हड़कंपना ।

बैिरन भेल ननदी बैिर छोट देउरबा बैिर सजनजी कतेक करै तंगचंगना ।

आँचर सgहािर तँ बािज उठल कंगनी मोरा बािर बयस भेल बड़ा यै बेढ़ंगना ।

कतेक सासु मनाबी ननिदया पैँया लागी ककरा की कहबै जौँ पड़ल कूपै भंगना ।

xीत मीठ साजन के नीक हुनक संगना देिख मुकी इजोिरय› िसहकै अंग अंगना । वण+ - 16

४ गजल ( cृँगार .मÁार )

बरखा बरसै छै िदन राित अह›के इयाद सताबै ओिहपर कािर अहिरया राित अह› िबन चैन न आबै। अह›----

िघरलै कारी घटा घनघोर वन मÊ नाचै मोरनी मोर एसगर सू¤ भवन छै मोर िबजुिरया देिख डराबै। अह›----

बरसैत कजरा के धार हमरा इहो दैत उपराग xीतम µारजोहै छी बाट अह›के मोरा िहय हहराबै। अह› -----

िपया अह› बसु दूरदेश मेघ सँ भेजू अपन सँदेश करोट फेरैत कटै छै मोरा रितया नैना नीर बहाबै। अह›-----

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

बू¤े मोती सजल सब पात देिख िसहरै छै मोरा गात िभजै कजरा गजरा िबंिदया कोयिलयो के बोली सताबै। अह›----

िवलमनै किरयौमहाराज अिबयौ छोिड़ काम आ काज हमर कँगना पायल के झँकार रिह-रिह अहीँके बजाबै। अह›---

वण+ -21

५ गमाउ नै गोरी ई छन बाते बेबात मÊ हमर हृदय सँ फृल पराग झरैये।

देखु लाज सँ गालक गुलाब िखल गेल लोगक नैनाक क›ट बेिहसाब गरैये।

नैना िचतवन अÁड़पन देखैत छी कोना मुकी िमसिरया पर जान जरैये।

अधर कोमलकली छै रस सँ भरल मन भँवरा बौरायल से जािन परैये।

मोन फागुनी बयार बिन मत मगन िसनुर लाज सँ मुखरा गुलाल भरैये।

ºप चच\ पसैिर गेल गामिह गाम मÊ कोना चलतै लोग िदने मÊ बाट हेरैये। आखर-15

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

इरा मिYलक २ टा बाल गजल १ अिछ बàड िजçी बरसात कहल नै मानै एको बात। कहल-----

घटाटोप बादल आवारा ठुमिक के नाचै चा¼ कात।

कहल----- कखनोिटप-िटप कखनोझम-झम िभजलै धरती गाछे पात। कहल -----

भैया के िभजलै कापी बता जे नै कराबै मेघ बसात। कहल-----

सब मौसम छै आनी जानी बरसातक फरके बात।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् कहल------

सँग कजरी झूला साजल इ4धनुष के रँगे सात। कहल------

वण+-10

२ भिर रता कादो कीचड़ पसरल बाहर को¤ा जेबै हम कहा चिढ़ इसकूल जायलेल बाबू के कोना मनेबै हम।

मुसलाधार बरसै छै बदरा एÂोपल लेल थमतै नै इसकुल पहुँचै मÊ देरी हेतै िनÄतुÂी छै मािर खेबै हम।

गYली कु:ची अँगना डबरापोखैर भिर गेलै खेतक आिर पािनये चानी पीटल छै सबतिर नाव कोना चलेबै हम।

लकड़ी काठी जारैन चुÁा सब तीतलै बàड मोशिकल छै सेहोदेिख माथठोिक कहैछै म›जी भातो कोना पकेबै हम।

सँगी साथी सबघर मÊ घुसरल िकयो निहँ बहराबै छै इदरराजा ढोल बजाबै ढgम सँ के नचतै जे गेबै हम। वण+- 22

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मानुषीिमह सं ृ ताम् इरा मिYलक ६ टा बाल गीत/ किवता १ बाल किवता चल चYल रौ िमता! घूिम अिब कने सौँसे गाम। साल भिर जे बाट तकिलयै, तखन एलै गम¦ छु¸ी, हम िकताब बता सँ करबै, देखिह केहन नgहर कु¸ी, चल चYल रौ िमता। पोखिर झ›खिर गाछी िबरछी, एको ब›िक निहँ छोड़बै हम, जँगल मÊ खूब मँगल करबै, इहो छु¸ी पड़तै बड़ कम, चल चYल रौ िमता। भोरे उिठ पुिठ हुड़दँग मचेबै, पोखिर मÊ छपाक सँ कुदबै, दुपहिरया धिर, चुभकैत डुबकैत रहबै पोठी इचना माछ पकड़बै, लहकैत मटकैत अँगना एबै, किरया झुgमैर खेलैत दीिदया के, िछटिक मािर चारो िच§ खसेबै ,

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मानुषीिमह सं ृ ताम् एतै फेर ते बàड मजा, चल चYल रौ िमता! हÂा बÂा छिथ म› बाबुजी, देख बदमती अपन छौँड़ा के, मने मने सोिच रहल छिथ, छौँड़ा रहल निहँ कोरा के! चल चYल रौ िमता, आब बौआबी सौँसे गाम!! दुपहिरया धिर

२ मेघ बरसलै, धरती िबहूँसलै, भीजय गहे गह, धरती बनल छै रानी, राजा बनलै मेघ, ढमढम बाजै ढोल नगाड़ा! िबजली चमकलै, ÷दय हहरलै. सखी बसै दूर देश, नािच रहल छै , छमछम छमछम, वन मÊ मोरनी मोर, ढमढम बाजै ढोल नगाड़ा! िघर िघर आओल, कारी बदिरया, बरसै रस मेघ फुहार, देिख रहल छै इदर राजा, धरती अिछ रसे िवभोर,

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ढमढम बाजै ढोल नगाड़ा! ३ म› हमरो िकिन िदअ िखलौना! खेलब मोन भिर, निह उपात मचायब, निह पसारब आब, हम कोनो घेउना, म› हमरो िकिन िदअ िखलौना। ना ना निह कº, िजद अह› छोº, आिन िदअ किन सुँदर सुँदर, भालू, बदर, खग, मृग छौना, म› हमरो िकिन िदअ िखलौना। जाउ बजार अह› जYदी सँ, क¼ निह देर , हमरो सँग लS िलय, िरमोटवाSYला ओ मोटर गाड़ी, हवाइ जहाज िकनू, होय मँहग या भारी, बैटरीवाला मोटर-बोट हो, हाथी .घोड़ा,या गुिड़या छोट हो, ढोल, मजीरा,Ëम, कैिसयो, जे पसँद होय अह›के मैया, िकिन िदअ निह ताकु ¼पैया, म› हमरो िकिन िदअ िखलौना। लेिकन म›SS! निह चािह हमरा, बंदूक ,रायफल, तीर, कमान,

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् खेल खेल मÊ हम निह सीखी, िहँसा सनके पाप , हम छी भारतम› के सपूत, हमरा भरS के अिछ , बàड ऊँच उडान , जन जन के र:छा कS सकी, देश के कय सकी कYयान, देश मÊ आनी खुशहाली, बालपन के, खेल खेल मÊ. पूव\öयास एकर कS ली, म›! हमरो िकिन िदय िखलौना।

४ छम छम बरसा, छम छम पािन, चम चम िबजली, चमकै आइ, चम चम िबजली चमकै छै, िजयरा मÊ आिग लगावै छै। कारी कारी घटा िघर आओल, मन के मोर शोर मचाओल, िबजली चमकै िजयरा हहरै, कािर अहिरया राित भयाओन, िपया के सदेश सुना िदअ आइ, चम चम िबजली चमकै छै। सँग सहेली घर चिल गेिल, सून भवन मÊ छी हम अकेली, सनननन बड़ी जोर पवन अिछ, घन घमँड देखावै आइ,

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् चम चम िबजली चमकै छै। मन के मोर सुनु इक बैन, पाओत मोन कोना कहु चैन, िकछ ते जतन क¼ अह› इहो रैन, छोड़ू मचेनाय शोर िकलोल, पहुँ के सदेश सुना िदय मोर, चम चम िबजली चमकै छै। ५ मानवताक गीत। एक वर मÊ बािज उठल, मानवता के गीत। मानव छी , मानव सँग भेद! कदािप निहँ। ऊँच नीच के जाितभेद! कदािप निहँ। धनीक आ गरीबक वग+भेद! उिचत निहँ। नारी कए दुब+ल , पु¼ष के सबल, जतेबाक जºरित निहँ। समाज के, अिह कुिसत िवचार के दूर करबाक जºरित अिछ, एहेन भेदभाव कÊ, वाहा केनाय ज¼री अिछ। सब छी एक-एक-एक। मानव सँग मानव के नेह,

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् आब जोरनाय ज¼री छैक। नारी कय शि$त! पु¼षक िशवºप जा<त केनाइ, िनतiत जºरी छय। नारी जगाबथु अपन, सgमािनय, िशÐ आ वीर›गना ºप, पु¼ष अपन कम+ठता आ पु¼षाथ+ सँओ, िनम\ण क¼ नवसमाज के। आउ हमसब िमलकय, सgमान करी, ईर के अिह सुँदर रचना के, उथान करी अपन समाज के! ६ बाबी(दादी म›) िशशु हसन, जखन बाबी के, मुँह पर पसिर जाय, बाबी हमरा बड़ नीक लागय। कतेक कहानी गीत सुनाबय, फकरा ,कहबी के अँबार लगादय, चुपेचाप नचारी,कोबर ,सोहरके, बड़का बड़का बारहमासा के, मÁार, फागुन , चैता के, गीतक प›ित िसखाबय, अिरपन रँग िबरँग बनाके, हमरो सँ बनबावय। बाबी हमरा बड़ नीक लागय। पैघक आदर मान करेनाय,

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् छोट पर £यार दुलार बरसेनाय, धीरे हँसनाय,धीरे बजनाय, शील गुन के बात िसखेनाय, बाबी ओिहछन दुिनय› मÊ, सबसे सुँदर लागय, बाबी हमरा बड़ नीक लागय। ऐ रचनापर अपन मंत~य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।

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इरा मिYलक ५ टा गजल आ तीन टा शेर १ जमाना देलकै दरद बहुत िकनका कहबै करेजक भेल क§ेक टुकड़ी िकनका कहबै | िकछ बात एहेन जिह सँ हम अनजान छलॱ बड़ी भेद भरल बेदद+ लोग िकनका कहबै | उ£कार मÀ अ£कार तकै जग के रीत पुरान छै

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् हवन करैत जॱ हाथ जरल िकनका कहबै | मुँह आगू जैह मीठ बनै पीठ पाछू उपहासी मुखौटा लगेने लोक छै फरेबी िकनका कहबै | जे जेतबे नgहर चोर बात हुनके लgबा चौड़ा साधु बनल मुँहचोर र9क िकनका कहबै | स¹जन के नै ठौर कतौ दुिनय› चोर ठकैत के झू ा बनै पिवm एतै धम\मा िकनका कहबै | सरल वािण+क( वण+- १८)

२ िजनगी जिहना तिहना कटैत रहलॱ सुख दुख के जउँर ( रसी ) सँग बटैत रहलॱ | काह पर छलै घर िजgमेदारी क बोझ हँिस हँिसके ओ बोझ सब उघैत ( ढोऐत )रहलॱ | दुख एलै हम किहयो िनराश निहं भेलॱ सुख के मोती हम पािन सँ छटैत रहलॱ | रैन अहिरया छलैक तिहयो की भेलय सविण+म भोर के आस लए खटैत रहलॱ | बड़ अजगुत दुिनय› के चलन की कहू तकै नीको मÀ बेजाय सब सहैत रहलॱ | िपघलैत रहल रसेरस दुख के घड़ी मेहनैितये के मोजर छै जनैत रहलॱ | दुनु हाथक भरोस छै मेहनैित के जोर जीवन मÀ सुख के संगीत गबैत रहलॱ | सरल वािण+क- ( वण+ -१६ )

३ xीतके मीठे होय छै बोल सेहो हम जािन गेलॱ xीतके बोल बड़ा अमोल सेहो हम मािन गेलॱ |

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

इ4धनुष के सातॲ रंग सँ xीत सजल अिछ मनमा करै मोर िकलोल सेहो हम जािन गेलॱ|

xीतक निहं छै भाषा कोनो एकर कोनो नै बोली अनहद बाजै xीतक ढोल सेहो हम जािन गेलॱ|

पोथी पिढ बनलॱ हम ;ानी बहुत अिभमानी xीतके ढाई आखर बोल सेहो निहं जािन पेलॱ|

xीतक रीत िवरह के पीड़ा दा¼ण दुखदायी करेजा सालै छै अनघोल चु£पे हम कािन लेलॱ|

तरिस गेल दरस िबन नैना xीत िनरमोही मौन छै ~याकुल नैना बोल सेहो हम मािन गेलॱ| सरल वािण+क(वण+-१८)

हुनक नैन झरैत नोर हम देखने छी भरल आँिखक लाल कोर हम देखने छी |

नैन चुपचाप रहय बोल िकछ नै फुटै हुनकर िबजुकैत ठोर हम देखने छी |

उठैत करेजक दरद कहु के बुझतै सालैत अ◌ो टीस पोरे पोर हम देखने छी |

नेहमहल ओ सजेने छलैथ जतन सँ िबखरै महल खंड थोर हम देखने छी |

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मानुषीिमह सं ृ ताम् हुनका के बुझाबै इयैह िजनगी िथकैक कानबै कनैत चहुँ ओर हम देखने छी | (वण+ - 16)

५ जेतबेटा चादिर हो ओतबे पैर पसारल क¼, दुिनय› के इएह सत िथकैक नै िबसारल कº।

आमद होय कgम खच+ नgहर कोना गुजर जेतै, नािप तौिल अपन दुिनय› नीक सँ सgहारल क¼।

बूँदे बूँद सँ घ¸ भरै छै इहो ते सब जिनते छी, गागर मÊ सागर भिर िदयौ मन नै हारल क¼।

िमत~ययी बनब अह› जीवन अहीँक िशÐ हैत, जग मÊ झुठक चकाचौँध बहुत छै तारल क¼।

झूठक िजनगी चहटगर होय छै से जािन िलय, ऋिणय› बिन क अपन िजनगी नै गुजारल क¼। वण+-( 19)

३ टा शेर १ अह›के बाट िहयासल कतेक िदन सौँ। अिछ राित इ िपयासल कतेक िदन सौँ। माmा pमः 1222 1221 1121 212 २ xीतक मीठे होय छै बोल सेहो हम जािन गेलौँ। िबन बाजन बाजै इहो ढोल सेहो हम मािन गेलौँ। माmा pमः 2222 2122 1222 2122

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ३ पिढ़ िलिख बनल छलौँ हम कतेक jयानी बनल अिभमानी। xीतक ढाई आखरक मोल सेहो निहँ जािन पेलौँ। माmा pमः 2222 2122 1222 2122

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मानुषीिमह सं ृ ताम् इरा मिYलक ७ टा cृगार गीत १ लs चलु नदी के पार सिख, ओिह पार हमर िxयतम छैथ। हम केश सजेलौँ गजरा सँ, नयन लगेलौँ कजरा तँ, लै अधरकली के लाली सँ, भेल लाज सँ गाल गुलाबी तँ, अह› धº एखन पतवार सखी, लs चलु िxयतम के गाम सखी। सिज धिज के नयन िबछैने छलहुँ, नयनन मÊ सपन सजैने छलहुँ, तड़पैत अिछ आकुल ~याकुल मन, इहो पीर नै सहत हमर तन मन, अह› क¼ िकछ जतन उपाय सिख, लs चलु िxयतम के ठ›म सखी। िxयतम जोहै छैथ बाट हमर, बैिरन भेल रैन, नदी के लहर, तिरणी तट नौका बहल पड़ल, नािवक सुतल िनसभेर बनल. अह› क¼ निहँ एको छन देर सखी, नािवक के तुरत जगाउ सखी। लs चलु नदी के पार सखी,

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ओिह पार हमर िxयतम छैथ।

२ ओिह राित! ओिह राित ! सपन मÀ अयला सजना ! िबहुँसैत अधर भीजल नयना! ओिह राित! सपन मÀ अयला सजना! नहुँ नहुँ दीप जरय ओिह xीतमहल, हम बाती मधुर बनल सजना! ओिह राित ! सपन मÀ अयला सजना! िपपािसत छल मन! तन िथरिक रहल ! तकय चानक िदस चकोर नयना ! ओिह राित! सपन मÀ अयला सजना ! वन कानन मन िवरिहन पपीहा ! पीउ पुकािर रहल क›पय गगना ! ओिह राित! सपन मÀ अयला सजना ! xीतकुँज जखन कुहकल कोयली! आधे राित िबखिर गेल भोर जेना ! स›स उस›स सुरिभत सुरिभत ! महुआ मादक बौरायल मना ! ओिह राित ! सपन मÀ अयला सजना ! ओह!! ओिह राित सपन मÀ अयला सजना !!

३ अह› कहै छी , बैसू लग मÊ, नीक लगैये। नेह नयन िनहारब सजना, बड नीक लगैये।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् हाथ कÊ हाथ सँओ साथ िमलल, जखन पयलौँ नेह अह›के, जीवन डोर मÊ बािह िपया, सोहािगन बनलौँ अह›के, अह› हँसै छी सौँसे घर आब , िझलिमल च›द लगैये, नेह नयन िनहारब सजना, बड नीक लगैये। सुध बुिध निहँ अिछ अपन आब तÊ, मुखड़ा देिख अह›के, िसँगार अहीँ छी, साज अहीँ, िपया! £यार बसल अँगना मÊ, अकछ करै छी िपया हमरा , तिहयो बड नीक लगै छी, घर मÊ होली, दशमी, िदवाली, िनशिदन आब लगैये। अह› कहै छी, बैसु लग मÊ, बड नीक लगैये। नेह नयन िनहारब सजना, बड नीक लगैये। ४ स›च हमर मीत अिछ! स›च हमर मीत अिछ! िवपित कÐ हािन लाभ, सबके कसौटी मÊ, कसल हमर मीत अिछ, स›च हमर मीत अिछ!

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मानुषीिमह सं ृ ताम् जीवन के दू बाट मÊ, एक गली हार तँ, दोसर गली जीत अिछ, अिह दू गली मÊ देखु, जीत हमर मीत अिछ, स›च हमर मीत अिछ! निहँ वाथ+ निहँ लोभ, निहँ दंभ निहँ छोभ, अिह सबसे ओ बहुत दूर, xीतक रीत मÊ हुनक, निहँ ओर कोनो छोर छै स›च हमर मीत अिछ! सूय+ के िकरण सन, केसर के फूल सन, सुँदरता आ उtमा सौँ, पिरपूिरत हमर मीत अिछ, स›च हमर मीत अिछ! जीवन के अिह तपोवन मÊ, शात व:छ पण+कुटीर, $लात थिकत मन जतय, पावय सुख अनँत अिछ, स›च हमर मीत अिछ! मैmी अिछ अमूYय चीज, नैसिग+क जगत के, िवहुँसैत ठोर के, मधुर रसधार बनल, गान हमर मीत अिछ, स›चे कहैत छी ,

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मानुषीिमह सं ृ ताम् xाण हमर मीत अिछ, सुनु! स›च हमर मीत अिछ! स›च हमर मीत अिछ!!!!!

५ िपया के घर! सुँदर चौखट, फूलक बेल , सुँदर आँगन, मन के आँगन, हमर अित चँचल! िसँदूर भरल िसउथ, मÊहदी रचल हाथ, िसहकैत तन, लाज भरल, बàड मीठ मुकान! िमठास भरल घरभिर के £यार, अरमान नया, xीत नया, मीठ मनुहार! कजरारे नयन, सपन सुँदर, करोट लैत, िरÄता के बैन! िमलन के ¼त, सपना के सेज, मनभावन रैन,

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मानुषीिमह सं ृ ताम् चूड़ी के खनखन, मदमत पाजेब, गीत गबै ¼नझुन ¼नझुन! गजरा के ग£प, कजरा के ग£प, नेह भरल , शरारत £यारक ग£प, तनमन के ग£प, गुमशुम गुमशुम, भोर नया, शबनम शबनम! ६ गजब तोहर ºप गजब तोहर िसँगार गे छौँरी, तैपर ितरछी नजिरया मारै सौ सौ कटार गे छौँरी। एहन बािल छौ उिमिरया कोना लचकै छौ कमिरया, एना चलिभ बीच बजिरया मरतै सँसार गै छौँरी। छौ ठोर गुलाबी बसँती तोहर गाल गुलाबी बसँती, सुँदर बदन तोहर छौ गुलाब के भँडार गै छौँरी। गोिरया रँग तोहर बेजोड़ केहन मारै छौ इजोर, चकाचक चढ़ल जुआनी पर िमटौ सँसार गै छौँरी। ७ नभ के आँगन मÊ एखन, च›द के अबइया छै। नभ के------! िवतृत नभ नील वण¦, श›त िन:शwद भेल, िझलिमल तरेगण िमल, एकसँग िबहुँिस गेल,

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मानुषीिमह सं ृ ताम् वागत मÊ च›द के, च›द के अबइया छै, नभ के आँगन मÊ देखु, च›द के अबइया छै, नभ ------! िदवस िबतल , भेल स›झ, स›झ के कपाट खोिल, रîजिड़त साड़ी मÊ, सल¹ज च›द xगट भेल, सोलह कलासँ पूण+चँ4, अमृत बरसाबय छै, च›दनी धवल छट› सँ, िदगत हरसाबय छै, च›द के अबइया छै, नभ के आँगन मÊ एखन, च›द के अबइया छै, नभ -------!

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मानुषीिमह सं ृ ताम् अशोक जे. दुलार १ टा बाल -किवता

िxया रानी

िxया रानी गै! एते त ने हYला मचा; बुिढ़या जइसन बात बजै छैँ, छैँ तॲ एखन ब:चा। िxया रानी गै एते त ...... ॥ सूित-ऊिठ िनत लेिÅन जाही दतमिन करही अपने, मुँह-कान के धो-पोिछ कऽ नहा-सोना ले तखने; थोड़-थोड़ कऽ खाही ओतबे सकही जतबे पचा। िxया रानी गै एते त ..... ॥ अँगने मे घोिसयैल रहै छैँ बात नीक निह भेलै, संगी-साथी बाट जोहै छौ जाही आबो खेलै; खाली कानय बात ने मानय रािख देलैँ त नचनी नाच नचा। िxया रानी गै एते त ..... ॥

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मानुषीिमह सं ृ ताम् मुकी तोहर हुलकी मारौ झहरौ नयना नोर, संगी संगे गीत गाबै छािड़ दे आबो कोर; सुिन ले एखनो दकर ने कखनो, आम लताम क:चा । िxया रानी गै, एते तॲ.... ॥ सा ते भवतू सीख लेलैँ तू िगनती िसखही आब, पिहने पढ़ही तखन िलिखहÊ पूरा किरहैँ Õवाब; सिज-धिज कऽ इकुल जेबैँ बुधमिन हेबैँ स:चा। िxया रानी गै एते त .... ॥ गरहिल-ग›थिल िxया रानी बाजय बोल अनमोल, दु=दा द›त झलिक उठय 9ण आँिख घुमाबय गोल; िखलिखलाइत-खन ब›िह पसारय कहैते चचा-चचा। िxया रानी गै एते त ...... ॥

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

अशोक जे. दुलार ७ टा किवता १ मन काबू रख बाबू **************** मन काबू मे रख बाबू आगू पाछू लख बाबू। बोली मे गोली भरने ओल सनक निह भख बाबू। बेसी बुिधयारी कयने तीन िठया निह मख बाबू। दुिनयादारी घोर िबतै आँिख फुजल तूँ रख बाबू। गाल बजा निह काज करै बेसी निह चख चख बाबू। संबंध जुड़ल निह िहय मे केश कटा की नख बाबू। चािल चलन देखल िबगड़ल फूरै निह अक-बक बाबू। िबन बातक अनघोल मचै

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मानुषीिमह सं ृ ताम् छाती कर धक धक बाबू। भाव अभावे शान कह› निह रता भिरसक बाबू।

२ योग कº ने मीता ------------ सब शिमत रोग कº ने मीता भोग कम, योग कº ने मीता कम+रत अिह दुिनया मे रिहतहुँ अYप उपभोग कº ने मीता दुखिह डूबल निह रिह कय झामर िनत िनयम योग कº ने मीता अिछ बनल काल करोना जग भिर योग उपयोग कº ने मीता मानलक आब तऽ दुिनया सगरो योग मनयोग कº ने मीता जोिड़ सबके ल'क' संगिह चिल ली एहने wयॱत कº ने मीता आब संयोग सुखद सुंदर हो देश िहत =यान धº ने मीता अलहदे चीन भजै'ए गोटी तोिड़ मुह हाथ धº ने मीता

३ जाड़ कतेक पड़ै छै यौ ***************** बंकू बाबू डुjगू बाबू

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मानुषीिमह सं ृ ताम् औ जाड़ कतेक पड़ै छै यौ। सुटकल दुबकल रिहयौ घर धिर बड़ शीतलहिर लहरै छै यौ। वेटर पिहº टोपी पिहº से एिह सँ जाड़ टरै छै यौ। धोहॴ चादिर सु¼ज नुकेला उ फ़ !पछबा हाड़ गड़ै छै यौ। ह›,ह›,टोपी निह ने फेकू एना मे कान ठरै छै यौ। खॲता धेने चुनमुिनय› सब निह बकरी घास चरै छै यौ। कुकुर िबलैया कूँ कूँ gयाऊँ कंबल सीरक हेरै छै यौ। गामो घर मे बूढ़-पुरिनय› घूरे लग जाय अरै छै यौ। जाड़क अमिरत आिग कहाबय दुिखया संताप हरै छै यौ। जाड़ कसैया बड़ िनद या ओ ककरो ने छोड़ै छै यौ। ठहº ठहº थोड़िह िदन बस जाड़ोक उमेर ढरै छै यौ। नेना भुटका घर मे बैसल ई किवता याद करै छै यौ। ४ हमरा सबहक नेताजी ************ रगड़ा झगड़ा ठनने फीरिथ से हमरा सबहक नेताजी।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् पू¹य बनल रहता ओ कोना बेबात फसाद करेता जी। बतकु¸िन के खेती सनगर आ सॱसे आिग लगेता जी। xाण बसय हुनकर स§ा मे कुस¦ लय ग़दर मचेता जी। चािर बरस धिर िनमुआने सन पचमे आिब फुिसयेता जी। जाइत-पाइत धम\m बल मरछाउर छीिट सुतेता जी। आग› पाछ› मोटर पॲ पॲ औ अगबे धूिल फकेता जी। चलती हुनकर की देखै छी चलती देखबिथ चहेता जी। केहन अनबुझ बूझिथ सबके पढ़ने िबनु खूब पढ़ेता जी। ५

बेसी हमरा सँ के बुिधयार! <><> ¤¤¤¤ <><>***<> बेसी हमरा सँ के बुिधयार! फूट डािर कऽ राज करै छी, अपन ितजोरी खूब भरै छी, टीकमटीक ओझरायल रहौ बस, तेहने तेहन काज करै छी, केहेन-केहेन पािन भरै छिथ मानिथ हािर बड़-बड़ सुितहार। बेसी हमरा सँ के बुिधयार!! बुि}जीबी जे वग+ कहाबिथ,

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मानुषीिमह सं ृ ताम् उछलिथ कूदिथ गाल बजाविथ, रता हgमर वैह सोझराबिथ। अपन िबरादर आिखर अपने शान हुनक तऽ हमरे झपने, हुनकर िसदहा हमरे नपने, बािल बिन हम िकयैक ने गरजी, बढ़ले जाय हमर अिधकार! बेसी हमरा......!! जतय जे गऽर ऊँट बैसै बस गोटी तैखन सैह भजै छी, बहु¼िपया अिछ ºप हमर हरेक ºप मे बेश छजै छी, धम+-अफीम नशा केर पुिड़या तकरो बाना खूब जनै छी, पर उपदेश कुशल हम अपने xवचनो दऽ खूब गजै छी , चोरी टा सँ मोन भरय निह {पेट तऽ िबना चोइरोक भरैए } त›य डकैती पर उतरल छी तैँ की डकैत कहत संसार! बेसी हमरा सँ के बुिधयार!!

६ हम मजदूर िबहारी ¤******* ¤**** ¤ हम मजदूर िबहारी

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मानुषीिमह सं ृ ताम् भैया,हम मजदूर िबहारी घर छोड़ी लाचारी भैया,हम मजदूर िबहारी। हमरे बल पर नहर-छहर आ बनय महल अटारी, हमरा वेदे लहलहाइत फिसल, पंजाबक खेती-पथारी। भैया,हम मजदूर िबहारी।। आसेतु िहमालय पसरल सगरो, हमरा काज ने कोनो भारी; सोझमितया हम मारल जाइ छी, नòफा लूटय बिणक-~यापारी। भैया,हम मजदूर िबहारी॥ अखरा नोन आ िमच+ हिरयरका संग £याजु सोहारी, ¼$खा-सु$खा खा जीबै छी के कीनत महग तरकारी। भैया,हम मजदूर िबहारी॥ घर बनिबतो बेघर रही भेटय सगरो िटटकारी; कतहु 'भैया' 'बंदा'कतहु चलय करेजा आरी। भैया,हम मजदूर िबहारी॥ उपजाओल हमरे भोग ने हमरा, कखनो कऽ िबचारी; बैठल ठ›व जे बात बनाबय आग› ओकरे भिर थारी। भैया,हम मजदूर िबहारी॥

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मानुषीिमह सं ृ ताम् माया-जाल xपंच बनल ई योजना सब सरकारी; कोनो दल सरकार बनै छै लागै एÂे बेमारी। भैया,हम मजदूर िबहारी॥ बौआ-बु:ची िकताब ने क›पी, किनय› के ने िनgमन साड़ी; मेहनतकश के मोल ने एतबो समय केहेन ई भारी। भैया,हम मजदूर िबहारी॥ खन असोम तऽ खन मुंबई मे हमरे पर गोला-बारी; मिनआडर के आस मे पिरजन सुिन दै औनी-पथारी। भैया,हम मजदूर िबहारी॥

७ व  -परी ********** ऐ व  परी घड़ी दू घड़ी, िबलिम कनेको जाउ ने। तृिषत नयन िनहािर रहल, झलक देखा तरसाउ ने॥ काल कराल केर चp चलय अिछ, रस 9ण केर पीिब िलयऽ। जािन ने की अिछ अिगला पल मे, एिह पल के जीिब िलयऽ ॥ xबल xती9े पीिड़त छी, कय मन उमन भरमाउ ने!

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ऐ व  परी....... ॥ जन जीवन मे उ§ाप बढ़ल, सब िकछु बनल ~यापार अिछ। सब संबंध िशिथल पड़ल, ससिर रहल संसार अिछ ॥ त£त बनल जीवन-म¼थल, नेहामृत बिरसाउ ने! ऐ व  परी.... ॥ िखलल कमल-दल अिछ मुख-मyडल, मधुिरम हास सुशोिभत। मन भमरा भिम-भिम आबय, अधर सुधा-रस लोिभत ॥ दय ि<व-हार लवंग-लता भुज, कुंतल घटा घहराउ ने! ऐ व  परी.... ॥ ई मिदर नयन छलकाबय हाला, भरय िदयऽ थोड़ जीवन-£याला। यौवन रस केर धार ने बाहू, डूिब मरय िदयऽ आइ ने थाgहू। दु:ख दद+ केर शव पर नेहक िसँगरहार झहराउ ने! ऐ व  परी...... ॥ ई चंचळ िचतवन चोरी चोरी, उमादक ¹वािर उठाबय अिछ। ¼न-झुन खन-खन िखळ-िखळ हासे, मनक िसतार बजाबय अिछ ॥ कदिल थंभ पर केहिर किट ई, ता पर सुमे¼ उठाउ ने!

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ऐ व  परी...... ॥ सुंदर तन आ सुंदर मन अिछ, मंिदर हमर अहीँ छी। xाण अह› मे =यान अह› मे अहीँ आकाश मही छी॥ अटकी भटकी जीवन पथ पर, गÀठ कने सोझराउ ने! ऐ व  परी...... ॥

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

िवtणु कात िमc कुरसी

चोरा-नुÂी खेल खेलाइते , िनल+¹ज बिन आब टाल ठोकै छै। िpिमनल गÈगक सरदारबनै लेल, आन पाट¦क मेgबर फोड़ै छै ।। जन xितिनिध बनब सव×§म िबिजनेस िथक, अिहस ॅ जुिन केओ मुह मोड़ू । जखनिह कतहु पाइ -पोट भेटय , पिहलुका पाट¦क जिड़के कोड़ू ।। संिवधानक मूल भावना संग, सतत खेल खेलाइत रहू । xजातंmके कनगुिरया आ◌ॅगुरपर , िटकलीजका◌ॅ नचैल कº।। जितआरे -धािम+क उमाद लोकमे, सतत सूइ भॲिक जगैल करी । भÀड़ा -मिहिसक कािन समाजमे, जालजका◌ॅ पसािर चली ।। कुरसीक खाितर मिदर-मिजद, गु¼µारा-चच+क दोहाइ िदअ । िदग Ìिमत कº अिहना सबके, मु ीमे सभहक टीक िलअ ।। गा◌ॅधीक नाम सभ बेिच-बेिच क' ,

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मानुषीिमह सं ृ ताम् वग+हुमे हुनका अशात कº। करैत रहू उनटा काज सभ अिहना , गगनचुंबी मूित+क िनम\ण कº।। नाकस ॅ उपर पािन गेल छै , धÂा आब मारैटा पड़तै । xजातंmक चीरहरण किहयाधिर हेतै, कौरवक अत होएबे टा करतै ।। अपनिह घरक िकछु दुय×धन सभ , भारतके गुलाम बनाय रहल छिथ। आजादीक गुलामीक िवरोधाभासमे, 'िवtणु 'नjन सय उगिल रहल छिथ।। कुकुरके कारास ॅ मतलब , नiगिर डोलाय कारा खयलक । दोसर ठाम देिखतिह खाW वतु, ओतुका बाट पुन:फेर धयलक ।।

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

आशीष अनिचहार दू टा गजल १

घड़ी दू घड़ी जे िबता गेल भमरा बहुत बात हमरा िसखा गेल भमरा

गमक लीिख देबै मधुर रस परागो जदी गाछ फूलक पटा गेल भमरा

िनमाहब किठन छै हलाहल समाने अपन आन खाितर िबका गेल भमरा

हमर टीस लेलक अपन टीस देलक तकर बाद िकgहर नुका गेल भमरा

रहै दाग पुरना मुदा दद+ नवके हवन कुंड लग सकपका गेल भमरा

सभ प›ितमे 122-122-122-122 माmाpम अिछ (बहरे मुतकािरब मोसgमन (चािर सािलम वा बहरे मुतकािरब सािलम अठ¼  ी)। यिद=जिद केर उ:चारण ºप जदी लेल गेल अिछ। वत+नी ºपमे ‘यिद’ सही छै।

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

बाहर बाहर जोड़ल भतार िभतरे भीतर टूटल भतार

छै मृगतृtणा सन के िवकास इgहर उgहर दौड़ल भतार

इ:छा माने पूरा समान िकgहर जेतै पिरकल भतार

लेने हेतै सभटा िहसाब चु£पे रिह रिह कानल भतार

हमरा आने देलक समाद अपने लोकक दागल भतार

सभ प›ितमे 22-22-22-121 माmाpम अिछ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

िxयंवदा तारा झा उgमीदक आcय शwद नीरव , युि$त हारल ,थाकल मन xाण िवकास बािधत ,संचार थावर ,Ìिमत ;ान िव;ान भी¼मन , िशिथल तन , िवकल िव अनुखन ~योमचारी बनल बदी, भय <िसत सिदखन।

xगितक माग+ सब धूिमल भऽ रहल मायक कोरमे , िशशु भूखसऽ िबलिख रहल मनुtय सऽ मनुtय भयभीत भऽ रहल संवेदनापर ~यािध भय हावी भऽ रहल।।

िनÒय िवकट समयई ,अिछ परी9ाक घड़ी िव~यापी ~यािध जिनत आतंकक कड़ी दैय ,नैराÄयभाव अिछ भेल xबल अदृÄय शmुक भीित सबपर भारी पड़ल।।

िववश भेल मानव, बुि} हेरायल, ओझरायल तक+ 9ुwध भेल सोिच रहल, हम छी मानव अित िविशÐ िव जीतल , xकृित बाहल ,अिज+त नूतन आयाम

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मानुषीिमह सं ृ ताम् पु¼षाथ+क िनत नवीन पिरभाषा ,जीतल धरा ~योम।।

निहं वीकार करब पराजय , निहं छोड़ब उgमीदक आcय हम आयब , हम आयब, लय समाधान संसार बचायब।।

िxयgवदा १५ /५/२०२०

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

आनद दास िच  ी अहi कूल पहुंचते, तेसर लाइनमे बैिस जायब। मासेबके नज़िर अिछ, हमरे-अहi पर, अंया9रीमे, अहi गीत गाएब, हम बता बजायब। अहi हमरा काजर आ हम अहiके नजिर िलखब। िलखै छी हम िच  ी, अहूं जवाब िलखब। कूलक चारके तेसर ब§ीमे, खोइस जायब। नजिर झुका मुका देब, इशारा जािन, अहiक िच  ी हम दौिड़ ल' आयब। अहi हमरा जामुन आ हम अहiके गुलाब िलखब। िलखै छी हम िच  ी, अहूं जवाब िलखब।

टीसन पढ़ै लेल आयब, त' सीधे अंगना आिब जायब। बाहर, सखी सब अहiके िकिरया खुवायत, कहत भौजी छिथन, मुदा अहi नै ल जायब। अहi हमरा स§ु आ हम अहiके सतुआईन िलखब। िलखै छी हम िच  ी, अहूं जवाब िलखब।

(एकटा बात; अहi जखन xेममे होइ छी, दोसरे लोकमे रहै छी, दुिनयाके सब भेद-भाव, ऊंच-नीच, जाित- पाितसँ ऊपर बुझैत छीयै, xेमक अलावा सब चीज़, गैर-जºरी होइत अिछ।)

जुिन ड¼ लोक सब स'...,

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मानुषीिमह सं ृ ताम् xेमक पिवmताके ;ान नै केकरो, लोक त' अिगयाबताह भ' अनेरो नाचत। xेम त' होइत अिछ, जाित-पाित स' ऊपर, अपन xेम पिवm हेतै, पायल जकi छन-छन बाजत। अहi हमरा xाण िxये आ हम अहiके xाणेरी िलखब। िलखै छी हम िच  ी, अहूं जवाब िलखब। हे…, हम अहiक मोनक सबटा बात बुझै छी, ¹यादा नै बौआऊ, धरातलेपर रहु ; xेमक आनंद िलय, xेममे िजबु, उमु$त गगनमे घुमू। xेमक ई त' उमरे अिछ, xेम अनंत अिछ, xेमक अंत निह क¼, सावनक फुहारमे मोर बिन झुमु। अहi हमरा राधा आ हम अहiके कृtण िलखब। िलखै छी हम मोनमे िच  ी, अहूं मोनेमे जवाब बुझब। िलय … िलख देलॱ हम िच  ी, आब … अहूं जवाब िलखब।

- -आनद दास, "बाबाअंगना", नवानी, 25.04.2020

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

कYपना झा- एकटा किवता ने एतय छी , ने ओतय छी, हम कतैय छी? हम असोराक ओ रउद छी, जे छजाक लाइंघ खसैय छी, हम पाइनक ओ धार छी, ¹यॲ ¼कैत छी त मiटी मÀ लपटायल थाल छी, हम मरबाक ओ दाबा छी, जे नेहू नहू ढहय छी, हम देवालक ओ इंटेबा छी, जे नूनी लाइग खसैत छी, हम कोन सूरत मÀ गढल छी, जेकर निहं कोनो व¼प छी, हम ओ राहगीर छी, ¹यॲ ¼कैत छी त थकैत छी, हम चौखैट के भीतर घुटैत छी, मगर डेग बढाबैथ डरैय छी, संकार क छिव सं ओझरायल, हम कुिहर रहल छी, ने एतय छी,

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मानुषीिमह सं ृ ताम् ने ओतय छी, हम कतैय छी ? -कYपना झा, बोकारो

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

डा िजयाउर रहमान जाफरी आजाद ग़ज़ल ........ आँिख मे हमर नोर रहल देश मे लgपट चोर रहल

नोन, तेल आ कपड़ा ल§ा िजनगी भर ई जोर रहल

समय िकछु निह आिब सकल िबजुरी संग इंजोर रहल

सोचैत रहेत छी अबहू हम आँिख मे िकएक भोर रहल

कतइ िवकासक बात चलत िदYली दोसर छोर रहल

अह› त िकछु निह कहलहूँ मुदा ई कोना शोर रहल

हम ते ग़ज़ल सुनैत रहलहुँ अह› क की गठजोर रहल .................................. -डा िजयाउर रहमान जाफरी, हाई कूल माफ़ ी +2, वाया -अथावi, िजला -नालंदा 803107, िबहार

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

GAJENDRA THAKUR RAJDEO MANDAL - THE POET, THE NOVELIST / PARALLEL HISTORY OF MAITHILI LITERATURE Issue No. 88 (November – December 2019) of Muse India at http://museindia.com/Home/PastIssue displays Maithili

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मानुषीिमह सं ृ ताम् literature in a very poor light. Moreover, it wrongly claims to be a representative review of the entirety of Maithili Literature. In actuality it was a representation of the so-called “dried main-drain” of Maithili Literature, in line with the Sahitya Akademi, Delhi. It is expected that Muse India will correct itself by announcing an issue exclusively devoted to the parallel tradition of Maithili literature. *— * Editor

T.K. Oommen writes in the 'Linguistic Diversity' Chapter of 'Sociology’, 1988, page 291, National Law School of India University/Bar Council of India Trust: "... the Maithili region is found to be economically and culturally dominated by Brahmins and if a separate Maithili State is formed they may easily get entrenched as the political elite also. This may not be to the liking and advantage of several other castes, the traditionally entrenched or currently ascendant castes. Therefore, in all possibility the latter groups may oppose the formation of a separate Maithili state although they also belong to the Maithili speech community. This type of opposition adversely affects the development of several languages ."

T.K. Oomen further writes: “ … even when a language is pronounced to be distinct from Hindi, it may be treated as a dialect of Hindi. For example, both Grierson who undertook the classic linguistic survey of India and S. K. Chatter j ee, the national professor of linguistics, stated that Maithili is a distinct language. But yet it is treated as a dialect of Maithili”. (ibid, page 293)

1 RAJDEO MANDAL - THE POET, THE NOVELIST

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मानुषीिमह सं ृ ताम् The constant shedding of Tears -Maithili poem by Sh. Ra j deo Mandal - from his anthology of Maithili poems "Ambara" Out of the eyes of my beloved tears like a river always keep flowing and in that water of tears people plunge some feel cold and some feel hot some say wow! and some feel bad. but my blind-deaf accomplice does not care, her tears always keep flowing but from some time her tears have stopped coming out now perhaps she has emptied herself of tears or is she storing it !?

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मानुषीिमह सं ृ ताम् Verse is not apopular genre.it is appreciatedby a few. For a language like Sanskrit, the volunteers who are engaged in its popularisation, are using simple Sanskrit for it. They translate short stories and novels from other Indian languages into simple Sanskrit. But here translation of verse into Sanskrit is not done, because verse is read by none. A language, the number of whose speakers are so little that a need has been felt for organisation camps for its spoken form, translation from verse into that language is considered misuse of energy. In Maithili the situation has become so grave that if we envisage a situation where there are no villages left, the number of speakers of this language would become a small number. People would speak in Maithili only in seminars and sittings. Th j e need has already been felt for pronunciation and vocabulary enrichment classes even for the authors and singers of Maithili. Then what is the purpose of writing verse in this language, i.e., Maithili? What is the purpose and what is the need for it? People write verse due to paucity of time, as the other genres re q uire devotion of more time. The situation becomes even more grave when people gives the reason for writing verse in this way. In this situation the happenings of the neighbourhood, personal ambition, derogatory remarks on others and the travelogue, all these have become the sub j ect matter of verse. But why not use prose for these kind of sub j ects? The short stories are transformed into drama form for the purpose of staging it. But what is the purpose of converting prose into poem? The answer is both obvious and simple who know the so-called dried main- channel of Maithili literature. The readers of the converted poems are only the partisan-critiq ues. And writers of those great poems themselves throw eulogies

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मानुषीिमह सं ृ ताम् on themselves as they have understood the call for self-sufficiency in this way. Why to depend to others for it? They write long prefaces in prose and add it to their collection of verses, declare ther verse as great and path-breaking! Who will understand the value of creation of verse?The personal worldly experiences, if it is not allowed to percolate deep down, would not be able to become a great poem even though it may remain in rhythm. The spiritual and other-worldly thinking, howsoever non-concrete would still be not able to mesmerise, if that is not able to meet the worldly and make itself relevant, even though it may remain non-rhythmic and may even subscribe to a particular partisan-grouping or even with the use of crutches of ideology. The essential needs of man are food, clothes and housing. And after that the spiritual thinking and related needs. When Buddha asked that all those people wo were participating in the festivities know the eventuality of death and if they do how can they participate in those festivities? Likewise the modern Maithili poets, when they find the base of their language-culture and economics missing behind their feet even then they refuse to accept that truth and then they try to insert the –isms to the national-international happenings into their poems, they want to create a patronising literature for the depressed classes and the natives, they want to become benefactor and so it fails to have a cutting-edge. But when Ra j deo Mandal writes: From the percolating blood drops The earth has become freshly-bathed The bird then asks Asks from its heart In the incoming heavy and pitch-dark night

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मानुषीिमह सं ृ ताम् Would our species survive? , then it goes into our blood and the blood starts running fast. The species of the poetics of the poet or the species of that word? No partisan-critiq ues nod of self-obsessed preface is re q uired for this poem. No groupism or crutches of ideology is re q uired for this creation. So the poem needs excellence. It re q uires base of language and culture. It does not want imported plots and sub j ects, which is imported to do favours to the poem. It also does not need the imported emotion, which would be a superficial attempt for searching for the disappearing language, culture and dwindling economy, which has gone missing beneath its feet. Good poem can be written on any sub j ect, it can be written on the anxiety of Buddha regarding future of mankind, for consoling the heart also otherwise people will have to go to the pseudo-preachers. For the language, culture and economy base also, otherwise we will have to start camps for Maithili soon. The transmigration of imagery isalso re q uired, otherwise we will have to create an artificial atmosphere for the poet and for their poems we will have to arrange stage, a stage-camp will have to be organised for his artificial vocabulary and ideology. And people would have to be trained for it. The poets of the so-called mainline of dried-drain are j ust doing that. The rhythm and ups and downs of Maithili language, the cultural and professional superiority of its proletariat brimming with confidence having all kinds of professional and cultural skills, the superiority of its cooperative living style, cultural conservatism, polity, daily affairs, social values, morality, economic situation and adaptation in the flood ravaged economy, religion and philosophy all should be the sub j ect of Maithili literature. And if that does not happen it

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मानुषीिमह सं ृ ताम् would become one-sided, it will get entrenched after getting lopsided, would become dead fit to be framed and put onto the wall. To create poetry is a necessity, a literary urge for creation for fulfilling it. When the people of Mithila would go to the camps for learning Maithili language, then can only we start q uestioning the need of writing poems and creating all type of verse forms. Only then we should discuss the futility of writing poems in Maithili. And that day must not come, for that thew poets would have to remain alert. And so is Ra j deo Mandal and that is why “Ambara” a collection of poem written by him has become the best collection of its genre in the first decade of the 21 st Century. His collection of poems “Vasundhara” is the next step. The excellence of verse created by Ra j deo Mandal isbecause of its foundation, the foundation of language and culture. The excellence is because he does not and have not to import the contents of hissub j ects. He does not import emotions either, you will not find any of these. The expressions of his imagery lies in the rich vocabulary that he possess. To create poem is the only way left for Ra j deo Mandal. He has to create poem, it’s a literary hunger and essentiality of his literary existence. The emotions are poured out in spinning rhythm and becomes his poetry. “Rahab Ahink Sang”- (Will remain with you only)- From “Ambara” Crying, calling My throat dried The lips dried As if I was thirsty The corpses all around

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मानुषीिमह सं ृ ताम् Are laughing at me Nobody is listening to my voice Where has went My society It was necessary to break The conservatism Turning of direction For the future You all are yourself the greats Move forward and leave the s q uabbling No interruption will be able to stop it I have not done any big crime Hey respected you, come here Do not get angry I will not break any law henceforth I will not bother any of you now-on Keep your kingdom I donot want the headgear the throne I will not change my colour anymore

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मानुषीिमह सं ृ ताम् I will be with you all only peacefully.

RAJDEO MANDAL - THE FICTION WRITER “Paro” of Nagar j un-Yatri, notwithstanding the unanswered q uestion whether it was written originally in Maithili or was a translation from Hindi into Maithili by the author himself, did depict first hand account of Maithil Brahmin caste of his contemporary times. He did depict the socio-cultural situation of the period. The novel “Hamar Tol” (My q uarter of the village) by Ra j deo Mandal is a first hand account of “Dhanuk” caste of Mithila and has been written in thesetting of the socio-cultural situation that this caste is peculiarly placed in. He inserts everything in it, the belief, which are sometimes not rational, social reform, love, hate, hope as well as disappointment. There was a void after Lalit, the mainstream, as it is called, writers of Maithili language got themselves into a maze due to their chosen sub j ects. The dark enveloped the literary scene wherein they found the exit tough the going-on impossible. The “Hamar Tol” of Ra j deo Mandal purifies the account of the second-hand account or description of Lalit in “Prithviputra”; and as a result the parallel movement of the stream was able to take along the main course of literatureand moved it forward and relevant. The author, being a realistic writer, has been forced to make the ending a tragical one. He refuses to see some struggles, or is not able to see, or nobody is able to see it. But he gives details of those struggles too. “Everyone left in a hurry. There began a fight between the crow and the Myna. That fight remained unseen, only the tree saw it. And the tree saw many more things, but yet the tree remained silent”.

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मानुषीिमह सं ृ ताम् The complexity and perplexity of that silence refined and presented owing to the first hand experiences of those unseen things, this novel has secured its position in the literary history of Maithili literature. 2 A PARALLEL HISTORY OF MAITHILI LITERATURE 1 FESTIVAL OF LETTERS OR FESTIVAL OF SH AME SAHITYA AKADEMI AND the DOWNFALL OF INDIAN LANGUAGE S (IN SPECIAL CONTEXT OF MAITHILI LANGUAGE) When Maithili was recognised by the Sahitya Akademi (National Academy of Letters- of India) way back in 1965, Late Ramanath Jha stated that his Maithili language is saved now (Maithilik Vartman Samasya, Ramanath Jha). He was wrong on this on two counts. What he referred to was applicable, if it was applicable at all, only to the part of Maithili speaking area, geographically located in India. Maithili is spoken, natively, in India and Nepal both. After treaty of sugauli (ratified in 1816), which was in the aftermath of Anlo-Nepalese war of 1814-16, the hilly regions were incorporated in British India, including Nepalese speaking Dar j eeling Area. Similarly in 1816 and 1860, the Britishers ceded some Terai region to Nepal. As a result part of Maithili speaking Area, which were earlier ruled by Malla Kings (when Maithili was official language of the region), was ceded to Nepal. Even today some Maithili scholars (!!) refer to the golden period of Maithili in the period of “Nepali (!!)” Malla Kings (Ramanath Jha, Introduction to Maithili Sahityak Itihas by Dr. Durganath Jha “Shreesh”).

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मानुषीिमह सं ृ ताम् Ramanath Jha himself admits that during his visit to “Vir Library” of Nepal (Kathmandu) he came to know about the Nepal legacy (his monograph on kirtaniya natak, which he wrongly presents as Kirtaniya Nach) in respect of Maithili. So he cannot be blamed for his lack of knowledge in this respect. He was wrong on the second count also, and this second count was an artificial creation. He began a tradition of elitism and conservatism in Sahitya Akademi, as a first convener of Maithili language. The tradition which got stronger and stronger in the last 55 years of its Existence of Maithili in that Akademi. So he ensured that the liberal writers, like Sh. Harimohan Jha, attacking casteism and conservatism did not get the award, even though the year 1967 went unrewarded and the Ist award in 1966 was given to a non-literary book in Maithili (academic book of Philosophy!!!). He himself was casteist, conservative and confused. The inter-caste marriage in Pan j i was well known to him, and it was apparent that the great navya-nyaya philosopher Gangesh Upadhyaya married to a “Charmkarini” and was born five years after the death of his father. But he informed it to Sh. Dineshchandra Bhattacharya in a distorted way. Sh. Dineshchandra Bhattacharya writes in the “History of Navya-Nyaya in Mithila”- “The family which was inferior in social status is now extinct in Mithila … Gangesha’s family is completely ignored and we are not expected to know even his father’s name.”, and he writes further that all these information was given to him by Prof. R. Jha. So how would this casteist-conservative- confused would allow the award to be given to Sh. Harimohan Jha. So the Sahitya Akademi saved Maithili Language by recognizing it, as asserted by Prof. R. Jha, was wrong on those two counts. Now come to Nepal, the Pra j na Pratisthan and other organizations often recognize Indian Maithili writers, but Sahitya Akademi of India does not

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मानुषीिमह सं ृ ताम् recognize Nepalese Maithili writers, be it the Seminars or the poets meet, be it anthology of poems or prose published by the Akademi. Regarding treatment of Nepalese Maithili writers by Sahitya Akademi Sh. Ram Bharos Kapari “Bhramar” laments that there is demand in Nepal that they should also not award Indian Maithili writers/ publish them in their anthologies as reciprocity demands this. The narrow mindedness of the Maithili advisory board of the Indian Sahitya Akademi has its origin in the organizations that is recognized by Sahitya Akademi, the basis of which is extra-literary credentials. These are pseudo organizations running on paper, political organizations or casteist organizations pocket-run by a few. The complete list is: MAITHILI LITERARY ASSOCIATIONs (!!!) RECOGNI Z ED by SAHITYA AKADEMI 01. The Secretary, All India Maithili Sahitya Samiti, Tirbhukti, 1/1B, Sir P.C. Baner j ee Road Allahabad-211 002; 02. The General Secretary, Akhil Bharatiya Maithili Sahitya Parishad C/o Dr. Ganapati Mishra, Lalbag, Darbhanga-846 004; 03. The Secretary, Chetna Samity, Vidyapati Bhawan, Vidyapati Marg, Patna-800 001; 04. The Secretary, Mithila Sanskritik Parishad, 6 B, Kailash Saha Lane, Kolkata-700 007; 05. The Secretary, Vidyapati Seva Sansthan, Mithila Bhavan Parishar, Darbhanga-846 004; 06. The Secretary, Centre for the Study of Indian Traditions, Tantrabati Geeta Bhavan; Ranti House, Ranti, Madhubani-847 211 What is the literary credential of Centre for the Study of Indian Traditions? Chetna Samiti and Vidyapati Seva Sansthan are casteist political outfits, vehemently displaying casteist attire of a great ancient poet, whose caste is still uncertain (VIDYAPATI), but who was certainly not Br ahmin. All India Maithili

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् Sahitya Samiti became non-existent even during the lifetime of Late Jaykant Mishra, same is the case with Akhil Bhartiya Maithili Sahitya Parishad. Mithila Sanskritik Parishad has done a crime through an investiture ceremony of the great Vidyapati, they tried to convert Vidyapati and “Maithili” language as the language of only the Brahmins. When these non-existent organizations exercise voting powers granted by Sahitya Akademi and chose a convener, it is not a coincidence that for the successive times only conservative people among the Maithil Brahmin caste, are chosen. The complete list is: 1. Ramanath Jha, 2. Jaykant Mishra, 3. Surendra Jha Suman, 4. Sureshwar Jha, 5. Ramdeo Jha, 6. Chandranath Mishra Amar, 7. Vidyanath Jha Vidit, 8. Veena Thakur, 9.Prem Mohan Mishra and10. Ashok Avichal. The result is now for everybody to see. The complete list of Sahitya Akademi awards (till 2019) is: Total booty distribution- 50 times, Maithil Brahmins- 42 times, Kayasthas- 6 times, Ra j poots- 3 times; Others- 0 times !!! The result is not on the basis of q uality of the books but solely upon the caste based other considerations and the disease has its root in the faulty seedling that the Sahitya Akademi of India found through the faulty literary associations. What were the ob j ectives of setting of this Akademi. Sahitya Akademi was established (National Academy of Letters to be called Sahitya Akademi) by Government of India resolution No F-6-4/51G2(A) dated December 1952 “to set high literary standards, to foster and co-ordinate literary activities in all the Indian languages and to promote through them all the cultural unity of the country; to promote good taste and healthy reading habits, to keep alive the intimate dialogue among the various linguistic and literary

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् zones and groups through seminars, lectures, symposia, discussions, readings and performances, to increase the pace of mutual translations through workshops and individual assignments and to develop a serious literary culture through the publications of j ournals, monographs, individual creative works of every genre, anthologies, encyclopedias, dictionaries, bibliographies, who's who of writers and histories of literature.” The Akademi boasts of publishing “one book every thirty hours” and holding "at least thirty seminars every year” at regional, national and international levels, “ along with the workshops and literary gatherings-about 200 in number per year”. The Akademi recognises “ Besides the twenty two languages enumerated in the Constitution of India”, English and Ra j asthani as languages. 24 language Advisory Boards have been constituted by Sahitya Akademi “to render advice for implementing literary programmes in these 24 languages”. The Akademi gives prizes in 24 languages recognised by it for original and translated works. It gives “ special awards called Bhasha Samman to significant contribution to the languages not formally recognized by the Akademi as also for contribution to classical and medieval literature”; “It has also system of electing eminent writers as Fellows and Honorary Fellows and has also established fellowship in the names of Dr. Anand Coomaraswamy and Premchand”. FESTIVAL OF LETTERS (SHAME)!!!! In February every year, Sahitya Akademi “holds a week-long Festival of Letters; It begins with the ceremony to present the Akademi's Annual Awards for creative writing”.

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् In February every year there is need to examine whether Sahitya Akademi is fulfilling its ob j ective, whether Sahitya Akademi is aware of the rich cultural and linguistic variety prevalent in India. On scrutiny it is revealed that Sahitya Akademi believe in “forced standardisation of culture through a bulldozing of levels and attitudes” and it is not “conscious of the deep inner cultural, spiritual, historical and experiential links that unify India's diverse manifestations of literature”. The Akademi boasts of publishing “one book every thirty hours” and holding "at least thirty seminars every year” at regional, national and international levels, “along with the workshops and literary gatherings-about 200 in number per year”. If we see the data in respect of Maithili it comes out that every year around 12 books should have been published in Maithili and the Maithili writers might have attended 30 seminars every year at regional, national and international levels and might have participated in 8 literary gatherings every year. The number of Maithili books published by the Akademi is pathetically low, and when we see the assignments, through which these books get artificially prepared (be it translation, anthology or monograph), then the people getting these assignments are often related to the members of the advisory board (as the answer to RTI application by Sh. Vinit Utpal brings forth). The q uality suffers, as a result there is no readership. How this Akademi failed? And why this Akademi failed? And what action should be taken against the Akademi for its intentional failure? Firstly, Akademi is not the name of a man or woman. Akaemi or its member of advisory Board consists of persons, and if the group of persons is failing the Akademi, that language itself is to blamed! But again the language is not the

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् name of a man or woman. So, the people speaking that language are to be blamed for the failures of the Akademi. Really!! Even if it is partially true, the Sahitya Akademy cannot shirk from its responsibilities. How an advisory committee can be considered representative of Maithili speaking people (even that of India), when the Convener of that language is nominated by six organisations (recognised by the Sahitya Akademi for reasons best known to it), having no remote connection with literature. Sahitya Akademi sowed seeds of Acacia and expecting Mango fruit. Having said that it is also true that the Akademi or any organisation can transform itself, but only when the conservative people representing these find pressure from the literary fraternity, change themselves or are replaced. What is the solution? The literary fraternity has already taken initiative by establishing parallel Sahitya Akademi awards and parallel literary meets. It should be taken further. All legal means should be explored to take the Akademi to task. On all available forums, the fact be made clear that the literature being prepared by Sahitya Akademi through assignments, are not grammatically correct, that it is not upto mark and are of inferior q uality. On all available forums, it should be made clear that the thin, casteist looking ( q uantatively and q ualitatively) and pale Maithili literature, that is being shown by the Sahitya Akademi of India to the world, has no readership or respect in its native speaking area of India and Nepal. And that Maithili has moved itself not because of Sahitya Akademi but in spite of it. Demand The six organisations representing Maithili should be derecognized with immediate effect and an in q uiry initiated to ascertain its genuineness. A committee should be set up to scrutinize the work done by the Sahitya Akademi

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् (in respect of Maithili) in the last 55 years. The awards should be kept in abeyance till results of the in q uiry are made public and corrective steps are taken. 2 THECELEBRATION BEGINS Videha Ist Maithili Fortnightly International e-j ournal has e-published more than 300 issues till date. Meanwhile We will enumerate the problems faced and solutions found by us. The Journey began in the year 2000 at yahoo geocities- the first words on internet in Maithili was written by me on the yahoo geocities sites (now yahoo has discontinued geocities) towards the end of 2000 when I suffered a ma j or accident which kept me confined to cretches for nearly one and a half years. But that perhaps shaped my destiny. I could concentrate on my Maithili writings and on my research on Tirhuta Manuscripts. On 5th July 2004, the first blog in Maithili came (ga j endrathakur.blogspot.com) as "Bhalsarik Gachh", which was rechristened as Videha e j ournal from 1st January 2008. From Ist January 2008 it came to be published as a fortnightly j ournal. The 1st rechristened issue brought the story of life and creations of a forgotten Maithili poet Late Ram j i Choudhary (1878-1952). Till eighth issue of Videha the columns on Music, Mithila Painting, Children column, Learn samskrit through Maithili got strengthened. Moreover the pro j ects on digitalisation of Maithili Classics and Pan j i Manuscript-leafs got started. The searchable dictionary (Maithili-English_Maithili) was designed and strengthened. From eighth issue a latest unpublished Maithili Play of Nachiketa "No Entry Maa Pravish" began its e-publication in Videha. Nachiketa, the greatest dramatist of Maithili Literature was silent for the last 25 years, so far as drama was concerned.

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् Technology has two aspect, bad (its chances of misuse) and good (its good use). It is a great leveller, it challenges status q uoist forces. It is applicable in all areas of knowledge. So a school going children today has more clear understanding of the universe and atoms than the Aryabhata or Sir Issac Newton had. After mass scale use of printing education and literature expanded its wings, but only after the "Internet and electronic trasformation of tools of knowledge", it has became universal, it has j umped geographical boundaries. All shackles unfurled, the weak links of the chain were identified, the chain which tried to capture knowledge, which tried to thwart its expansion, started breaking down. And the greatest beneficiary became the Maithili Literature. What is Videha, nothing, its only its commitment to Maithili Language, that helped it expand its base, and Videha became the means that was able to bind together the Maithili speaking areas in both parts of the boundary (India & Nepal). Videha gave Maithili a batch of committed writers, a batch of committed readers. It challenged status q uoist and casteist forces. It challenged confused writers, who were using Maithili as a tool to ride the ladder of Hindi. The lack of criticism, the lack of teeth in criticism was the reason that some writers and dramatists were using Hindi-Mix Maithili for cheap popularity, they were using derogatory language for the so-called lower castes of their society (some were finding plea in Natyashastra- when even the modern-day Samskrit Drama is not using Prakrit etc.!!), and for their mimicry those castes started keeping distance with this kind of literature. And once the confusion of the confused thinned, a new type of awakened literature, stage and drama (top-class) became the norm. Videha is getting regularly some excellent brains. Since its inception Videha, the idea factory, is dependent upon them. So far as their versatile q ualities are concerned, people associated with Videha are different. All are known for their perseverance and resilience. All are known for their hard work. All are known for their q uality work. All are known for their discipline. And above all, all are

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् committed; committed to Maithili and to the Mithila. The cumulative force resulted in a natural revolution. A revolution in the field of Maithili Literature, art, music, craft, stage and drama. The only International e-j ournal in Maithili started this q uality movement in Maithili. Nothing less than world standard was acceptable. The awards were instituted to recognize the parallel field of Maithili Literature, art, music, craft, stage and drama. Only the best were selected, there was no scope for the second best. The participation of readers in the decision- making processes was encouraged. The readers got full access to the digitalised Maithili Literature. More than 500 Maithili books and around 11000 palm-leaf mithilakshar manuscripts were digitalised and were made available online under "Videha Archive" section of www.videha.co.in (and the number is increasing everyday). The audio-video-paintings-photographs were archieved, all these archieved "art and lifestyle" of people of Mithila were then placed online. The Videha Archive ( http://www.videha.co.in/new_page_15.htm ) is a uniq ue gift to the world. So what is the ideology of people associated with Videha. Is it a collective thinking? No, of course not. In Videha all are welcome. Here all are welcome to discuss their respective ideology. Having said this, it needs emphasis that there are some basic human principles where no compromise is possible. The casteists, those having genetic superiority complex (which is another name of inferiority complex), the practitioners of plagiarism, those who are unable to take part in a healthy discussion and persons who are not able to withstand criticism on their creation, Videha is not a platform for them. Ideology of people associated with Videha may have different tinge, it is not necessary that all should toe to the line taken by any member of the editorial board. Videha believes in individuality of ideas and the editorial board never imposes its ideology upon its members. At the same time it is being emphasized that each

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् member of the Videha editorial board has strong ideological leaning, the ideology of humanism is practiced by all. Videha-Maithili Literature Movement has its roots in year 2000 when I started making Maithili Websites on yahoo geocities. After Yahoo Closed geocities these sites were automatically deleted. However the early form of Videha "Bhalsari Gachh" was started on 5 July 2004, http://www.videha.com/2004/07/bhalsarik- gachh.html and it is the earliest presence of Maithili on the internet. Videha and its vibrant members did their utmost in translating lacs of words on wikipedia and they successfully opposed the nomenclature "Bihari Languages" http://ultimategerardm.blogspot.com/2011/05/bihari-wikipedia-is-actually-written-in.html (Gerard M accepted the role of Umesh Mandal, the co-editor of Videha, go to Grerad M's blog and click the Dasipat Aripan photo from Videha archive (Preeti Thakur) placed at his blog, you will reach http://videha.co.in/). In Google translate/ wikipedia localisation drive, in Tirhuta and Kaithi script research and in the localisation of Braille in consonance to Maithili Language, Videha shouldered the responsibility as a pioneer in technology viz-a-viz Maithili Language. It was pioneer in many respects. It started for the first time a Maithili Websites Aggregator at http://videha-aggregator.blogspot.com/, first braille site in Maithili, first mithilakshar site in Maithili among others (total list available at http://www.videha.co.in/new_page_15.htm and http://www.videha.co.in/feedback.htm ). Videha has organised several dozen Maithili book fairs till date. The 16th Videha Maithili book fair was held at Sagar Rati Deep Jaray, Patna on 10-11th December 2011 and the 17th Videha Maithili book fair was held at Guwahati, on 22-23 December next year at the Vidyapati Parv organised by Mithila Sanskritik Samanvay Samiti. The detailed list of all the venues (datewise) are available at http://esamaad.blogspot.com/2011/11/blog-post_4803.html. Videha also

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् organised a parallel Sahitya Akademi Kavi Sammelan, besides awarding parallel Sahitya Akademi prizes, as corrective measures, as the awards and Kavi Sammellans of Sahitya Akademi were awarded/ organised in a unilateral manner where merit took a beating. Videha has, thus, fulfilled its obligation by interfering into the murky affairs of government organisations. Videha cannot remain a silent spectator, be it plagiarism or copyright violations. So the authors like Panka j Parashar, Ashok Sahu, who were engaged in lifting others articles/ stories/ poems were banned after verifying the sources and target writings. Literature in translation is a ma j or issue with Videha. Lack of translation in America resulted in Americans lagging behind in q uality literature. We practise literature in translation in both directions- from Maithili into English and from other languages into Maithili. So far as translations from other languages into Maithili are concerned English, Nepali, Sanskrit and Hindi act as buffer languages in the process. Direct translations into Maithili are limited; and it is done directly only from English, Sanskrit, Hindi, Nepali and Bengali, although there are some exceptions. So far as q uestion of translations from Maithili into other languages is concerned, directed translations are again limited; and it is again done directly only into English, Hindi, Sanskrit, Bengali and Nepali, barring some exceptions. Videha contacted some notable personalities of class literature, took permission and translated those literature into Maithili. Most of the time English was used as a buffer language and translation work from English, Hindi, Konkani, Telugu, Gu j arati, Oriya, Kannada, Nepali and Telugu into Maithili was completed; and these works were regularly published in Videha. Maithili novels, poems and short stories, on the other hand, were translated from Maithili into English and were published on a regular basis in Videha. VIDEHA became a Maithili Literature movement? No, VIDEHA was from the day one a Maithili Literature movement. Many established misconceptions got cleared

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मानुषीिमह सं ृ ताम् through VIDEHA. The well known facts, the not so obvious plot of some people to kill Maithili through its twin institutions the Sahitya Akademi and the CIIL was unearthed. The Right to Information came in handy.Sri Vinit Utpal asked for information from Sahitya Akademi through his RTI application dated 23.09.2011 (file no. RTI-125) and sought information on "Assignment assigned by Maithili Advisory Board, Sahitya Akademi under the convenership of Sri Vidyanath Jha 'Vidit'”. The information included proposal received, proposal re j ected and proposal kept in abeyance." The statutory mandatory information supplied by the Sahitya Akademi unearthed a vicious circle of Maithili speaking so-called litterateurs, hell bent upon making Maithili a language- "of the Maithil Brahmin, for the Maithil Brahmin and by the Maithil Brahmin". More than 90 % of the assignments went to the friends, relatives and ac q uaintances of the 10 member Maithili Advisory Board. No assignment to Sh. Jagdish Prasad Mandal, Sh. Ra j deo Mandal, Sh. Bechan thakur (the greatest Short-story-novel writer of Maithili, the greatest Living poet of Maithili and the greatest living Maithili dramatist; respectively), Sh. Umesh Paswan, Sh. Umesh Mandal, Sh. Ramdev Prasad Mandal "Jharudar", Sh. Durganand Mandal,Sh. Sandeep Kumar Safi or to Sh. Anand Kumar Jha. When each and every member of the Maithili advisory board is hand in glove with the Sahitya Akademi to kill Maithili language then where lies the hope? The demand for Mithila state by these people will see that 10 Maithil Brahmin families would loot the Mithila state. Then where lies the hope? Here lies the hope. Sh. Bechan Thakur has created a parallel Maithili stage and theatre, a slap on the existing slapstick humouristic Maithili theatre. Sh. Umesh Paswan is a discovery of the Parallel Sahitya Akademi Poetry festival organised by Videha. Sh. Jagdish Prasad Mandal, Sh. Ra j deo Mandal, Sh. Jharudar, Sh. Sandeep Kumar Safi and Sh Umesh Mandal have pumped their energy, wealth and time for our Maithili Language. This language will live...proofs are given below:-

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् The Google translate http://www.google.com/transconsole/giyl/choosePro j ect then Wikipedia translate: http://translatewiki.net/wiki/Special:Translate?task=untranslated&group=core- mostused&limit=2000&language=mai http://translatewiki.net/wiki/Pro j ect:Translator http://translatewiki.net/wiki/Pro j ect:Translator http://meta.wikimedia.org/wiki/Re q uests_for_new_languages/Wikipedia_Maithili http://translatewiki.net/wiki/Special:Translate?task=untranslated&group=core- mostused&limit=2000&language=mai http://incubator.wikimedia.org/wiki/Wp/mai http://translatewiki.net/wiki/MediaWiki:Mainpage/mai http://ultimategerardm.blogspot.com/2011/05/bihari-wikipedia-is-actually-written- in.html ) [Monday, May 09, 2011 The # Bihari # Wikipedia is actually written in # Bho j puri This is the kind of article that has many people's eyes glaze over. It is about standards, scientific documents and it is about languages most of my readers have never heard about. For the people that do speak one of the languages that are considered Bihari it is extremely relevant and it has implications for Wikipedia. This is information provided by Umesh Mandal that explains about the "Bihari group of languages" in relation to the Maithili language:

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मानुषीिमह सं ृ ताम् Kellogg (1876/1893) and Hoernle (1880) regarded Maithili as a dialect of Eastern Hindi; Beames (1872/reprint 1966: 84-85), regarded Maithili as a dialect of Bengali, Grierson has done a great service to Maithili language, however, he erred when he gave a false notional term of "Bihari" language, after that western linguists started categorizing Maithili as a dialect of "Bihari" language; although there is nothing known as "Bihari Language" and both Maithili and Bho j puri are spoken in Bihar (of India) as well as in Nepal. Umesh is working on the localisation of MediaWiki for the Maithili language and as this language is currently in the Incubator, the language committee does its due diligence and tries to understand if Maithili can have a place in the Bihari Wikipedia. The information provided by Umesh makes it q uite clear: "no". This still leaves us with the misnomer that is the Bihari Wikipedia. Apparently the language used for the localisation and the articles is Bho j puri. Bho j puri has the ISO-639-3 code "bho". Are you still following all this? Ok, there is one q uestion I am not asking: How about the Kaithi script? Thanks, GerardM] Excerpt from a Maithili e-j ournal published as PDF (from Videha 2011: 22; Videha: A fortnightly Maithili e-j ournal. Issue 80 (April 15, 2011), Ga j endra Thakur [ed]. http://www.videha.co.in/ ."Ga j endra Thakur of New Delhi graciously met with me and corresponded at length about Maithili, offered valuable specimens of Maithili manuscripts, printed books, and other records, and provided feedback regarding re q uirements for the encoding of Maithili in the UCS."-Anshuman Pandey.] ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् TIRHUTA UNICODE See the final UNICODE Mithilakshara Application (May 5, 2011) by Sh. Anshuman pandey http://std.dkuug.dk/JTC1/SC2/WG2/docs/n4035.pdf at Page 23 the Videha 80th issue (Tirhuta version) is attached"Figure 11: Excerpt from a Maithili e-j ournal published as PDF (from Videha 2011: 22" and at Page 12 Videha is included in References Videha: A fortnightly Maithili e-j ournal. Issue 80 (April 15, 2011), Ga j endra Thakur [ed]. http://www.videha.co.in/. and role of Videha's editor is acknowledged on Page 12 "Ga j endra Thakur of New Delhi graciously met with me and corresponded at length about Maithili, offered valuable specimens of Maithili manuscripts, printed books, and other records, and provided feedback regarding re q uirements for the encoding of Maithili in the UCS." ] The Maithili Speaking area is shrinking. It is shrinking due to a conscious- subconscious policy of the Governments of India and that of Nepal; and the situation became critical due to invasion of Hindi and Nepali media and the biased educational system in Maithili speaking areas, and also due to the large scale migration that has happened in one single generation. The q uestion of Hindi saw to it that Va jj ika, Angika and now Thethi, Sur j apuri etc. languages should get the tacit support of supporters of Hindi, first in the name of religion and second in the name of caste . Through this they did not support Va jj ika, Angika, Thethi or Sur j apuri; but they tried to weaken Maithili, which ultimately resulted in the weakening of Va jj ika, Angika, Thethi and Sur j apuri. For all this, the Maithili speaking people, more so the officials (I will explain it later on), are also responsible, as they themselves tried to delimit Maithili within the two castes and four districts. All others people and areas, than these, were considered northern, southern, eastern and western deviations of so-called pure Maithili, that was fictitiously considered as being spoken by these Maithil Brahmins/ Karna Kayasthas of Madhubani, Darbhanga, Saharsa and Supaul districts. For the last 45 years the officials, yes I call them officials, the officials

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् of the Maithili Department of Sahitya Akademi, did not try to accommodate the people outside this fictitiously delimited domain. But the ma j or problem lies somewhere else. The slow poisoning was given in many disguises, be it the faulty top-heavy education system, which neglected primary and middle school education through the Mother Language Maithili, or be it through the concept of dialect, which initially conveniently declared languages like Maithili as dialects. The elementary education through Maithili was a non-started because the Maithili books published by the Bihar State Textbook Publishing Corporation Limited seemed to be in Avahatt, it was not fit for children. Further the authors and sub j ects selected for these books had the casteist bias. Maithili became a tool for caste based politics, as once Hindi had been a tool for religion based politics. Still these officials, of Maithili Department of Sahitya Akademi, are residing in their own built ghetto, bereft of any thinking or vision. Another reason for the present plight of Maithili is the policy undertaken by the tax- collectors of Mithila (permanent settlement Z amindars of Kornwallis), whom the sycophants call King or the great king (Ra j a/ Mahara j a) or Mithilesh (King of Mithila), actually these were mere tax collectors, the right for which were given to the highest bidders on a permanent basis; and there were not one such Mithilesh (tax collectors), but many within the borders of Mithila. These tax collectors employed mostly those two castes from four districts in their merchandise venture, and as the selection was based on sycophancy, so the work suffered. So they imported the lathiyals from outside Mithila region. The masses of Mithila suffered blow from the double-edged weapon. First, from their own people who did not consider them as their own and second they got looted from the outsiders. Now after sometime these outsiders, the non-Maithili speaking people, found it convenient to declare the masses (not belonging to the two castes from four districts) as non-Maithili speaking people, and the officials/ sycophants from those two castes from four districts tacitly agreed to it.

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् Now these outsiders, the non-Maithili speaking people, formed a ma j ority in many places of Mithila, and they led the rumour that Maithili, like Samskrit, is a upper-caste phenomenon, and thus they legitimized their anti-Maithili stance (all these facts have been brilliantly dealt with in the Maithili Novels of Sh. Jagdish Prasad Mandal) and they propagated the case of Hindi, first on the basis of religion and second on the basis of caste. But why our own people fell in their trap, why these tax-collector Mahara j as did not consider the masses of Mithila as their own, and imported the perpetrators to loot their own masses? The simple answer is that, merit took a downward leap in auction based tax collection rights allocation. We started from one and reached number three, then thirty and now three hundred!! and we are growing … ... and are 300 not out, and are creating a grand history. http://www.videha.co.in/ Videha Ist Maithili Fortnightly e Journal ISSN 2229-547X has e-published its 300th issue recently. When I began this venture in the year 2000 with a samsung TV net appliance, and when the existing http://www.videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html was posted on 5th of July 2004, I moved all alone. Then on 31st January 2007 I suddenly thought to include the public, as after some ground work I was ready for it. I decided to e-publish Videha, and did publish it, on a fortnightly basis, the first issue that came on 1st January 2008 tried to include all the previous posts. From all corners of this planet earth the people tried to change the destiny of Mithila and Maithili. Now Sh. Ashish Anchinhar, Sh. Munna j i (Mano j Kumar Karn), are part of our team; and together we are 300 not out now. With 300 plus issues, 30,000 pages of Maithili literature (100 lac words corpora) creation and 11000 Tirhuta manuscript transcription we maintained 50000 word Maithili- English vocabulary database. Now we are 350 strong, with 350 authors.

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् Videha has faced challenges and has withstood it. We never shirk from any q uestion and/ or problem. The q uestion of state of Mithila is one such q uestion which often comes calling. We are in favour of the states of Mithila within the sovereign borders of India and Nepal. We are in favour of Mithila. But which type of Mithila, that type that we had during the Z amindari Ra j , where means of sustenance and avenues of existence remained limited for a few castes? Or that culture that existed within "Aryavarta-Indian Nation newspaper" and other Industries during that Ra j . All of these got galloped by a dozen family of Mithila mostly from a single caste!! No, we are not in support of that Mithila, that Mithila where Maithili would be swallowed, as it is being swallowed by the Sahitya Akademi and the CIIL, swallowed by another dozen families. We are not in favour of that Mithila where the proceeding of the legislative assembly would be held in language other than Maithili. Till the misgivings of the people of Mithila is addressed, we cannot support any Mithila state movement. So the people striving hard for Mithila state should sit on protest before the advisory board members of the Sahitya Akademi/ CIIL and sing patriotic songs in front of their houses; and pressurise them to not to misuse government funds by unscrupulously awarding functions of Akademi outside Mithila and not to misuse the power of assigning translation and other rights to themselves and to those people who are hell-bent upon destroying our language. The RTI application by Sh. Vinit Utpal http://esamaad.blogspot.com/2011/11/vinit-utpals-rti-application- dated.html has thwarted an attempt to strangulate Maithili, but if the supplementary work is not done the sinister design would re-surface again. We re q uest the Maithili advisory board members of Sahitya Akademi to immediately return their assignments taken in their own name and in the name of the members of their family. Otherwise pressure should be mounted to force this 10 member Maithili Advisory Board members to voluntarily resign from their

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् membership in the larger interest of Maithili. So what is our answer viz-a-viz demand of Mithila state: its a categorical Yes. The technology centric venture called Videha became a success. The native speakers of Maithili reside in Bihar (of India) and in South-East Nepal. The net connectivity had been very poor in these areas. Then how the authors, new and old, started using unicode for writing for Videha. The Nepal Side of Mithila had been using Preeti, Kantipur, Himala etc. fonts, the Kolkata Maithils had been using the Marathi fonts and the rest had been using the fonts based on old remington keyboard. All these three types of fonts are ASCII fonts. We researched into these fonts and provided font converters to our Nepal based authors. We also provided phonetic and remington based unicode writers to all Maithili authors, who asked for it. We asked the authors that they may send their creations in any font, but at the same time we encouraged them to use unicode fonts. The technical support that we provided resulted in numerous receipt of typed entries from persons like Sh. Gangesh Gun j an, who in earlier stages had been sending their creations in their own handwritings. As Sh. Gangesh Gun j an was well versed in remington keyboard typing, so he made great use of the remington unicode typewriter. He sent that software to some of his friends too and he was courteous enough to intimate about this to us, although there was no need for that. Sh. Saketanand also used that software and sent his short-story कालरािmÒ दा¼णा in unicode, and it was published in one of the issues of Videha. The technology centric venture called Videha became a success because we made it simple and intelligible at a time when even the technologists were not sure about the future of this unicode. The virtual medium was being seen with anxiety by the literary fraternity, the copy-paste system of theft was rampant in those days. But we assured the authors that with Videha they may rest assured that the copyright thief's would not be spared, while at the same time we were firm, that only for fear of misuse of technology we

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् should not stop our venture midway. With internet and technology the geographic barrier became non-existing. The end of problem of distribution in Maithili literature became possible due to our technology-friendly attitude and it proved a boon for our Maithili language. And it made the technology centric venture called Videha a success.... It is success of the parallel Maithili literature movement.

अपन मंत~य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

संघ लोक सेवा आयोग / िबहार लोक सेवा आयोगक परी9ा लेल मैिथली (अिनवाय+ आ ऐि:छक ) आ आन ऐि:छक िवषय आ सामाय ;ान (अं<ेजी मा=यम ) हेतु सािम<ी [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COM MISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS - MAITHILI (COMPU LSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)]

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मानुषीिमह सं ृ ताम् पेटार (िरसोस+ सेटर )

शwद -~याकरण -इितहास

MAITHILI IDIOMS & PHRASES मैिथली मुहावरा एवम् लोकोि$त xकाश - रमाकात िमc िमिहर (ख›टी xवाहयु$त मैिथली िलखबामे सहायक) डॉ. लिलता झा- मैिथलीक भोजन सgबधी शwदावल ◌ी (ख›टी xवाहयु$त मैिथली िलखबामे सहायक) मैिथली शwद संचय MAI THILI DICTIONARY - RAMDEO JHA (ख›टी xवाहयु$त मैिथली िलखबामे सहायक) ENGLISH MAITHILI COMPUTER DICTIONARY MAITHILI ENGLISH DICTIONARY अिणमा िसंह -Shishu_Geet_ Khel_Anima_Singh डॉ. रमण झा मैिथली का~यमे अलõार अलõार-भाकर आनद िमc (सौजय cी रमानद झा "रमण") - िमिथ ला भाषाक सुबोध ~याकरण BHOLALAL DAS मैिथली सुबोध ~याकरण - भोला लाल दास राधाकृtण चौधरी- A Survey of Maithili Literature ......................................................... ...............................................................

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मानुषीिमह सं ृ ताम् मूलपाठ ितरहुता िलिपक उeव ओ िवकास (यू.पी.एस.सी. िसलेबस) राजेर झा- िमिथला9रक उeव ओ िवकास (मैिथली सािहय संथान आक\इव ) Surendra Jha Suman द§ -वती (मूल )- cी सुरे4 झा सुमन (यू.पी.एस .सी. िसलेबस ) xबध सं<ह - रमानाथ झा (बी.पी.एस .सी. िसलेबस ) CIIL SITE ........................................................................................................................

समी9ा सुभाष च4 यादव -राजकमल चौधरी: मोनो<ाफ िशव कुमार झा "िटYलू" अंशु-समालोचना डॉ बचेर झा- B_JHA_Nibhand_Nikun j .pdf डॉ. देवशंकर नवीन- Adhunik_Sahityak_Paridrishya डॉ. रमण झा- िभ¤ -अिभ¤ xेमशंकर िसंह - मैिथली भाषा सािहय :बीसम शताwदी (आलोचना) डॉ. रमानद झा 'रमण' िहआओल अिखयासल CIIL SITE दुग\नद मyडल -च9ु RAMDEO JHA द§ -वतीक वतु कौशल - ड ॊ . cीरामदेवझा

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मानुषीिमह सं ृ ताम् SHAILENDRA MOHAN JHA पिरचय िनचय - ड ॊ शैले4 मोहन झा ........................................................................................................................

अितिर$त पाठ

पिहने िमिथला मैिथलीक सामाय जानकारी लेल एिह पोथी कÊ पढ़ू:- राधाकृtण चौधरी- िमिथलाक इितहास फेर एिह मनलjगू फाइल सभकÊ सेहो पढ़ू:- केदारनाथ चौधरी चमेलीरानी माहुर करार कुमार पवन पइठ (मैिथलीक सव+cेØ कथा) (साभार अंितका) डायरीक खाली प¤ा (साभार अंितका) या◌ेगे4 पाठक िवया◌ेगी- िव;ानक बतकही रामलोचन ठाकुर - मैिथली लोककथा

SAHITYA AKADEMI http://sahitya -akademi.gov.in/publications/e -books. j sp http://sahitya -akademi.gov.in/general/Digitalbooks. j sp

CIIL

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मानुषीिमह सं ृ ताम् http://corpora.ciil.org/maisam.htm अिखयासल (रमानद झा रमण ) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI1.pdf जुआयल कनकनी- महे4 http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI2.pdf xबध सं<ह - रमानाथ झा (बी.पी.एस .सी. िसलेबस ) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI3.pdf सृजन केर दीप पव+- सं केदार कानन आ अरिवद ठाकुर http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/ MAI4.pdf मैिथली गW सं<ह - सं शैले4 मोहन झा http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI5.pdf

JNU http://sanskrit. j nu.ac.in /maithili/index. j sp http://sanskrit. j nu.ac.in/student_pro j ects/lexicon. j sp?lexicon=maithili

ARCHIVE.ORG https://archive.org/details/ % 40vij ay_deo_ j ha?&sort= -publicdate&page=2

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MITHILA DARSHAN https://mithiladarshan.com/ (online pdf of Maithili j ournal)

I LOVE MITHILA https://www.ilovemithila.com/ (online maithili j ournal)

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(अनुवत+ते) -गजे4 ठाकुर िवदेहक िकछु िवशेषiक :- १) हाइकू िवशेषiक १२ म अंक , १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf २) गजल िवशेषiक २१ म अंक , १ नवgब र २००८ Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf ३) िवहिन कथा िवशेषiक ६७ म अंक , १ अ$टूबर २०१० Videha_01_10_2010 Videha_01_10_2010_Tirhuta 67 ४) बाल सािहय िवशेषiक ७० म अंक , १५ नवgबर २०१० Videha_15_11_2010 Videha_15_11_2010_Tirhuta 70 ५) नाटक िवशेषiक ७२ म अंक १५ िदसgबर २०१० Videha_15_12_2010 Videha_15_12_2010_Tirhuta 72 ६) नारी िवशेषiक ७७ म अंक ०१ माच+ २०११ Videha_01_03_2011 Videha_01_03_2011_Tirhuta 77 ७) अनुवाद िवशेषiक (गW -पW भारती) ९७ म अंक

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मानुषीिमह सं ृ ताम् Videha_01_01_2012 Videha_01_01_2012_Tirhuta 97 ८) बाल गजल िवशेषiक िवदेहक अंक १११ म अंक , १ अगत २०१२ Videha_01_08_2012 Videha_01_08_2012_Tirhuta 11 1 ९) भि$त गजल िवशेषiक १२६ म अंक , १५ माच+ २०१३ Videha_15_03_2013 Videha_15_03_2013_Tirhuta 126 १० ) गजल आलोचना-समालोचना-समी9ा िवशेषiक १४२ म, अंक १५ नवgबर २०१३ Vid eha_15_11_2013 Videha_15_11_2013_Tirhuta 142 ११ ) काशीकiत िमc मधुप िवशेषiक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 १२) अरिवद ठाकुर िवशेषiक १८९ म अंक १ नवgबर २०१५ Videha_01_11_2015 १३) जगदीश च4 ठाकुर अिनल िवशेषiक १९१ म अंक १ िदसgबर २०१५ Videha_01_12_2015 १४ ) िवदेह सgमान िवशेषा क- २०० म अ क १५ अxैल २०१६ / २०५ म अ क १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् १५ ) मैिथली सी.डी./ अYबम गीत संगीत िवशेषiक - २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंिmत रचनापर आम ंिmत आलोचकक िट£पणीक शृंखला १. कािमनीक पiच टा किवता आ ओइपर मधुकात झाक िट£पणी िवदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 एिडटस+ चोइस सीरीज एिडटस+ चोइस सीरीज -१ िवदेहक १२३ म (०१ फरबरी २०१३) अंकमे बलाकारपर मैिथलीमे पिहल किवता xकािशत भेल छल। ई िदसgबर २०१२ क िदYलीक िनभ+या बलाकार काyडक बादक समय छल। ओना ई अनूिदत रचना छल, तेलुगुमे पसुपुलेटी गीताक एिह किवताक िहदी अनुवाद केने छलीह आर. शiता सुदरी आ िहदीसँ मैिथली अनुवाद केने छलाह िवनीत उपल। हमर जानकारीमे एिहसँ बेशी िसहराबैबला किवता कोनो भाषामे निह रचल गेल अिछ। सात सालक बादो ई समया ओहने अिछ। ई किवता सभकÊ पढ़बाक चाही, खास कऽ सभ बेटीक बापकÊ, सभ बिहनक भाएकÊ आ सभ पîीक पितकÊ। आ िवचारबाक चाही जे हम सभ अपना ब:चा सभ लेल केहन समाज बनेने छी। एिडटस+ चोइस सीरीज -१ (डाउनलोड िलंक) एिडटस+ चोइस सीरीज -२ िवदेहक ५०-१०० म अंकक बीच Úेट कैसरक समयापर िवदेह मे मीना झा केर एकटा लघु कथा xकािशत भेल। ई मैिथलीक पिहल कथा छल जे Úेट कैसर पर िलखल गेल। िहदीमे सेहो ताधिर एिह िवषयपर कथा निह िलखल गेल छल, कारण एिह कथाक ई-xकािशत भेलाक १-२ सालक बाद िहदीमे दू गोटेमे घॲघाउज भऽ रहल छल िक पिहल हम आिक हम, मुदा दुनूक ितिथ मैिथलीक कथाक परवत¦ छल। बादमे ई िवदेह लघु कथामे सेहो संकिलत भेल। एिडटस+ चोइस सीरीज -२ (डाउनलोड िलंक)

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् एिडटस+ चोइस सीरीज -३ िवदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदीश च4 ठाकुर अिनलक िकछु बाल किवता xकािशत भेल। बादमे हुनकर ३ टा बाल किवता िवदेह िशशु उसवमे संकिलत भेल जािहमे २ टा किवता बेबी चाइYडपर छल। पढ़ू ई तीनू किवता, बादक दुनू बेबी चाइYडपर िलखल किवता पढ़बे टा कº से आ<ह। एिडटस+ चोइस सीरीज -३ (डाउनलोड िलंक) एिडटस+ चोइस सीरीज -४ िवदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदानद झा मनुक एकटा दीघ+ बाल कथा किह िलअ बा उपयास xकािशत भेल, नाम छल चोनहा। बादमे ई रचना िवदेह िशशु उसवमे संकिलत भेल, ई रचना बाल मनोिव;ानपर आधािरत मैिथलीक पिहल रचना छी, मैिथली बाल सािहय कोना िलखी तकर Åेिनंग कोस+मे एिह उपयासकÊ राखल जेबाक चाही। कोना म ॊ डन+ उपयास आग› बढ़ै छै, टेप बाइ टेप आ सेहो बाल उपयास। पढ़बे टा कº से आ<ह। एिडटस+ चोइस सीरीज -४ (डाउनलोड िलंक)

एिडटस+ चोइस सीरीज -५ एिडटस+ चोइस ५ मे मैिथलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीघ+कथा "पइठ" (साभार अंितका) । िहदीक पाठक, जे "उसने कहा था" पढ़ने हेता, कÊ बुझल छिह जे कोना अिह कथाकÊ रिच च4धर शम\ ’गुलेरी’ अमर भऽ गेलाह। हम चच\ कऽ रहल छी, कुमार पवनक "पइठ" दीघ+कथाक। एकरा पढ़लाक बाद अह›कÊ एकटा िविचm, सुखद आ मोन हौल करैबला अनुभव भेटत, जे से$सपीिरअन Åेजेडी सँ िमिलतो लागत आ फराको। मुदा एिह रचनाकÊ पढ़लाक बाद तामस, घृणा सभपर िनयंmणकÊ आ सामािजक/ पािरवािरक दाियवकÊ सेहो अह› आर गंभीरतासँ लेबै, से धिर पÂा अिछ। मुदा एकर एकटा शत+ अिछ जे एकरा समै िनकािल कऽ एÂे उखड़ाहामे पिढ़ जाइ। एिडटस+ चोइस सीरीज -५ (डाउनलोड िलंक) एिडटस+ चोइस सीरीज -६

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् जगदीश xसाद मyडलक लघुकथा "िबस›ढ़": १९४२-४३ क अकालमे बंगालमे १५ लाख लोक मुइला, मुदा अमय+ सेन िलखैत छिथ जे हुनकर कोनो सर-सgबधी एिह अकालमे निह मरलिह। िमिथलोमे अकाल आएल १९६७ ई. मे आ इिदरा ग›धी जखन एिह 9ेm अएली तँ हुनका देखाओल गेल जे कोना मुसहर जाितक लोक िबस›ढ़ खा कऽ एिह अकालकÊ जीित लेलिह। मैिथलीमे लेखनक एकभगाह िथित िवदेहक आगमनसँ पिहने छल। मैिथलीक लेखक लोकिन सेहो अमय+ सेन जेक› ओिह महािवभीिषकासँ xभािवत निह छला आ तÊ िबस›ढ़पर कथा निह िलिख सकला। जगदीश xसाद मyडल एिहपर कथा िलखलिह जे xकािशत भेल चेतना सिमितक पिmकामे, मुदा काय+कारी सgपादक µारा वत+नी पिरवत+नक कारण ओ मैिथलीमे निह वरण् अवह मे िलखल बुझा पड़ल, आ ओतेक xभावी निह भऽ सकल कारण िवषय रहै ख›टी आ वत+नी कृिmम। से एकर पुनः ई-xकाशन अपन असली ºपमे भेल िवदेहमे आ ई संकिलत भेल "गामक िजनगी" लघुकथा सं<हमे। एिह पोथीपर जगदीश xसाद मyडलकÊ टैगोर िलटरेचर अवाड+ भेटलिन। जगदीश xसाद मyडलक लेखनी मैिथली कथाधाराकÊ एकभगाह हेबासँ बचा लेलक, आ मैिथलीक समानातर इितहासमे मैिथली सािहयकÊ दू कालखyडमे ब›िट कऽ पढ़ए जाए लागल- जगदीश xसाद मyडलसँ पूव+ आ जगदीश xसाद मyडल आगमनक बाद। तँ xतुत अिछ लघुकथा िबस›ढ़- अपन सु:चा वºपमे। एिडटस+ चोइस सीरीज -६ (डाउनलोड िलंक) एिडटस+ चोइस सीरीज -७ मैिथलीक पिहल आ एकमाm दिलत आमकथा: सदीप कुमार साफी। सदीप कुमार साफीक दिलत आमकथा जे अह›कÊ अपन लघु आकाराक अछैत िहलोिड़ देत आ अह›क ई िथित कऽ देत जे समानातर मैिथली सािहय कतबो पढ़ू अह›कÊ अछॱ निह होयत। ई आमकथा िवदेहमे ई-xकािशत भेलाक बाद लेखकक पोथी "बैशाखमे दलानपर"मे संकिलत भेल आ ई मैिथलीक अखन धिरक एकमाm दिलत आमकथा िथक। तँ xतुत अिछ मैिथलीक पिहल दिलत आमकथा: सदीप कुमार साफीक कलमसँ। एिडटस+ चोइस सीरीज -७ (डाउनलोड िलंक) एिडटस+ चोइस सीरीज -८ नेना भुटकाकÊ राितमे सुनेबा लेल िकछु लोककथा (िवदेह पेटारसँ)। एिडटस+ चोइस सीरीज -८ (डाउनलोड िलंक)

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् एिडटस+ चोइस सीरीज -९ मैिथली गजलपर पिरचच\ (िवदेह पेटारसँ)। एिडटस+ चोइस सीरीज -९ (डाउनलोड िलंक)

जगदीश xसाद मyडल जीक ६५ टा पोथीक नव संकरण िवदेह क २३३ सँ २५० धिरक अंकमे धारावािहक xकाशन नीच›क िलंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017

िवदेह ई -पिmकाक बीछल रचनाक संग - मैिथलीक सव+cेØ रचनाक एकटा समानातर संकलन : िव देह : सदेह : १ (२००८ -०९ ) देवनागरी िव देह : सदेह : १ (२००८ -०९ ) ितरहुता िवदेह :सदेह :२ (मैिथली xबध -िनबध -समालोचना २००९ -१० ) देवनागरी िवदेह :सदेह :२ (मैिथली xबध -िनबध -समालोचना २००९ -१० ) ितरहुता िवदेह :सदेह :३ (मैिथली पW २००९ -१० )देवनागरी िवदेह :सदेह :३ (मैिथली पW २००९ -१० ) ितरहुता िवदेह :सदेह :४ (मैिथली कथा २००९ -१० )देवनागरी िवदेह :सदेह :४ (मैिथली कथा २००९ -१० ) ितरहुता िवदेह मैिथली िवहिन कथा [ िवदेह सदेह ५ ]देवनागरी िवदेह मैिथली िवहिन कथा [ िवदेह सदेह ५ ] ितरहुता िवदेह मैिथली िवहिन कथा [ िवदेह सदेह ५ ]- दोसर संकरण देवनागरी

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   िवदेह:मैिथली सािहय आदोलन: मानुषीिमह संकृताम् 'िवदेह ' ३०८ म अंक १५ अ᭍टूबर २०२० (वषᭅ १३ मास १५४ अंक ३०८ ) िवदेह:मैिथली सािह᭜य आ᭠दोलन

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मानुषीिमह सं ृ ताम् िवदेह मैिथली लघुकथा [ िवदेह सदेह ६ ]देवनागरी िवदेह मैिथली लघुकथा [ िवदेह सदेह ६ ] ितरहुता िवदेह मैिथली पW [ िवदेह सदेह ७ ]देवनागरी िवदेह मैिथली पW [ िवदेह सदेह ७ ] ितरहुता िवदेह मैिथली नाªय उसव [ िवदेह सदेह ८ ]देवनागरी िवदेह मैिथली नाªय उसव [ िवदेह सदेह ८ ] ितरहुता िवदेह मैिथली िशशु उसव [ िवदेह सदेह ९ ]देवनागरी िवदेह मैिथली िशशु उसव [ िवदेह सदेह ९ ] ितरहुता िवदेह मैिथली xबध -िनबध -समालोचना [ िवदेह सदेह १० ]देवनागरी िवदेह मैिथली xबध -िनबध -समालोचना [ िवदेह सदेह १० ] ितरहुता िवदेह :सदेह ११ िवदेह :सदेह १२ िवदेह :सदेह १३

The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of the original works.-Editor

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मानुषीिमह सं ृ ताम् Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha -pothi/

िवदेह सgमान : सgमान -सूची (समानातर सािहय अकादेमी पुरकार सिहत)

अपन मंत~य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।

सूचना/ घोषणा १ "िवदेह सgमान" समानातर सािहय अकदेमी पुरकारक नामसँ xचिलत अिछ। "समानातर सािहय अकादेमी पुरकार" (मैिथली), जे सािहय अकादेमीक मैिथली िवभागक गएर सiवैधािनक काजक िवरोधमे शु¼ कएल छल, लेल अनुशंसा आमिmत अिछ। अनुशंसा २०१९ आ २०२० बख+ लेल िनó कोिट सभमे आमिmत अिछ: १) फेलो २)मूल पुरकार ३)बाल-सािहय ४)युवा पुरकार आ ५) अनुवाद पुरकार। अपन अनुशंसा ३१ िदसgबर २०२० धिर २०१९ पुरकारक लेल आ ३१ माच+ २०२१ धिर २०२०क पुरकारक लेल पठाबी।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् पुरकारक सभ pाइटेिरया सािहय अकादेमी, िदYलीक समानातर पुरकारक सम9 रहत, जे एिह िलंक sahitya-akademi.gov.in पर उपलwध अिछ। अपन अनुशंसा editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २ “िमिथला मखान” िफYम देखू माm १०१ टाकामे। Android App “BEJOD” download कº वा जाउ www.be j od.in पर, signup कº, एकटा ईमेल जायत, अपन ईमेल खोलू आ ओकरा ि$लक कº अह›क अकाउंट ए$टीवेट भय जायत। आब िमिथला मखान रेyट पर िलअ, डेिबट काड+सँ १०१ टाका अ◌ॉनलाइन पेमÀट कº आ िफYम देखू।

िवदेह :मैिथली सािहय आदोलन : मानुषीिमह संकृताम्: VIDEHA: AN IDEA FACTORY (c)२००४-२०२०. सव\िधकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अिछ ततऽ संपादकाधीन। िवदेह- xथम मैिथली पाि9क ई-पिmका ISSN 2229-547X VIDEHAसgपादक: गजे4 ठाकुर। सह-सgपादक: उमेश मंडल। सहायक सgपादक: राम िवलास साहु, नद िवलास राय, सदीप कुमार साफी आ मु¤ाजी (मनोज कुमार कण+)। सgपादक- नाटक-रंगमंच-चलिचm- बेचन ठाकुर। सgपादक- सूचना-सgपक+-समाद- पूनम मंडल।

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मानुषीिमह सं ृ ताम् रचनाकार अपन मौिलक आ अxकािशत रचना (जकर मौिलकताक संपूण+ उ§रदाियव लेखक गणक म=य छिह)editorial.staff.videha@gmail.com कÊ मेल अटैचमेyटक ºपमÊ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉमäटमे पठा सकै छिथ। एतऽ xकािशत रचना सभक कॉपीराइट लेखक/सं<हक§\ लोकिनक लगमे रहतिह, माm एकर xथम xकाशनक/ िxंट-वेब आक\इवक/ आक\इवक अनुवादक आ आक\इवक ई-xकाशन/ िxंट-xकाशनक अिधकार ऐ ई-पिmकाकÊ छै, आ से हािन-लाभ रिहत आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो र ॊ यYटीक/ पािरcिमकक xावधान नै छै। तÊ रॉयYटीक/ पािरcिमकक इ:छुक िवदेहसँ नै जुड़िथ, से आ<ह। रचनाक संग रचनाकार अपन संि9£त पिरचय आ अपन कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौिलक अिछ, आ पिहल xकाशनक हेतु िवदेह (पाि9क) ई पिmकाकÊ देल जा रहल अिछ। मेल xा£त होयबाक बाद यथासंभव शी ( सात िदनक भीतर) एकर xकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एिह ई पिmकाकÊ cीमित लÔमी ठाकुर µारा मासक ०१ आ १५ ितिथकÊ ई xकािशत कएल जाइत अिछ। (c) 2004-2020 सव\िधकार सुरि9त। िवदेहमे xकािशत सभटा रचना आ आक\इवक सव\िधकार रचनाकार आ सं<हक§\क लगमे छिह। ५ जुलाई २००४ कÊ http://ga j endrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसिरक गाछ”- मैिथली जालवृ§सँ xारgभ इंटरनेटपर मैिथलीक xथम उपिथितक याmा िवदेह- xथम मैिथली पाि9क ई पिmका धिर पहुँचल अिछ,जे http://www.videha.co.in/ पर ई xकािशत होइत अिछ। आब “भालसिरक गाछ” जालवृ§ 'िवदेह' ई-पिmकाक xव$ताक संग मैिथली भाषाक जालवृ§क ए<ीगेटरक ºपमे xयु$त भऽ रहल अिछ। िवदेह ई-पिmका ISSN 2229-547X VIDEHA

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मानुषीिमह सं ृ ताम्

TOPIC:13 (संघ लोक सेवा आयोगक मैिथली ऐिछक- प!-१, भाग -१, ६अम 'मक िसलेबसक लेल) ितरहुता िलिपक उ/व आ िवकास - गजे12 ठाकुर (िव4ाथ5 लोकिन लेल िनद8श : अनुल:नकमे देल ;ा<ीसँ ितरहुता धिरक िवकासक सभ अ?रक @ै िAटस करबाक आवCयकता निह अिछ। एक वा दू अ?रक अGयास पयHIत अिछ। अनुल:नक-५ पर Kयान देब बेशी जLरी अिछ। अिभलेख सभक िवNतृत िववरण आ ितरहुता िदस िलिपक झुकाव िवNतारमे देल गेल अिछ। अहR जािह िलिपक अनुल:नक-५ सँ अGयास करी ओतबे अपन नोटमे ओिह अिभलेखसँ सािमTी उठाबी। सUपूणV मोन रखनाइ निहये सUभव छैक निहये से जLरी छैक। ई आलेख साढ़े आठ हजार शZदक अिछ, अहR अपन सुिवधासँ एकर ६००- १००० शZदक नोट बना सकैत छी। ) िलिप ? आ िलिप छी की? िलिपक उ/व। एिजIटक लोक कहै छिथ जे हुनकर िलिपक आिव]कार टोथ देवता केलिन, मेसोपोटािमयाक लोक कहै छिथ जे हुनकर िलिप नीबो देलिन, Tीसक लोक Tीक िलिप क आिव]कारक हम5जक^ मानै छिथ आ भारतमे एकर _ेय ;<ाक^ जाइ छिन। पाषाणकालक लोक मारते रास िच! िलखलिन आ ओहीसँ िच!िलिपक @ेरणा भेटल। मुदा ई िच! सभ िच!िलिप निह छल, कारण एकिच!क सUब1ध दोसर सँ निह छल आ सभटा िच! फराक-फराक छल। मुदा ओिहसँ पाछR जा कऽ िच!िलिपक @ेरणा भेटले होएत। पिहल -िलिप : िच!िलिप एखन धिरक खोजबीनसँ पता चलैए जे िच!िलिपक िवकास भेल- ि टिTस-यूdेeसक कात- मेसोपोटािमया- (सुमेर, फेर बेबीलोन आ तखन असीिरयामे), नील नदीक कात (एिजIटमे) आ 'ीट (Tीस) मे। उपरका खोह आ धारक कातक पाथरपर िलखल िच! आ िच!िलिपमे अ 1तर िबकछेबाक खगता अिछ। अहR हमरासँ @ेम करै छी तँ हमर िच! िलख देलहुँ, कोनो िशकार करै छी तँ से िच! िलखलहुँ। से अहR भेलहुँ िलिखया। से भारतोमे बहुत ठाम छल, मुदा िलिखया िलिपकार चोfिह निह बिन जाएत। िलिपकार जे िच! बनेलक से कलकारी लेल निह वरण् खगता लेल। से एत ऽ सूयV बनेबाक लेल वृh बना िदयौ, पूरा िच! बनेबाक खगता एतऽ नै अिछ, फेर दूटा एहने िच!क सUब1 ध Nथािपत कL, दूसँ तीन.. आ िच! िलिप तैयार। से िच!कार िच! िलखलक, आ िलिपकार बनेलक। िलिपकारक^ िलिखया निह किह सकैत िछऐ। आ से भेल िटिTस-यूdेeसक कातक (असीिरया, बेबीलोन आ सुमेर मे), नील नदीक कातक (एिजIटमे) आ 'ीट (Tीस) मे ईिजयन आ िमनोअन सभयताक लोक। िच!िलिप : िच!ाkमक िच!िलिप आ िवचार / भावनाkमक िच!िलिप

बाहरसँ दुनू िच!िलिप अिछ मुदा िच!ाkमक िच!िलिप िच!क म ा! बोध करबैत अिछ जेना वृh सूयVक बोध करेलक। मुदा जखन एकर @योग गुमार लेल होमए लागल तँ ई भऽ गेल िवचार आिक भावनाक @तीक आ ओिह िलिपक नाम भेल िवचार/ भावनाkमक िच!िलिप। आब कलाकारीसँ बेशी खगता महkkवक भेल आ तािह लेल चे1हक आकार सेहो छोट भऽ गेल। आइयो चीन आ ज ापानमे िवचार/ भावनाkमक िच!िलिपक @योग होइत अिछ। मुदा पध-आधािरत िलिप चीनमे खतम भऽ गेल, मुदा जापानमे ओ आइयो @योगमे अिछ। िच! -Kविन िलिप भाषाक उ/व आ िवकास भेल। जेना ओतए Kविनसँ सUबि1धत शZद @वेश केलक तिहना िलिपमे सेहो भेल। आ िच!-Kविन िलिपक िवकास भेल। एिहमे िवचार-भावनाक संग Kविनक @वेश सेहो भेल आ पाछR जा कऽ ओ Kव1याkमक िलिप बनल।

Kव1याkमक िलिप Kव1याkमक िलिपमे Kविन आ वNतु-mयिAतक बीच सUब1ध Nथािपत करैत िच1ह बनल। Kव1याkमक िलिपमे Kविन वा Kविन-समूह लेल िच1ह बनल। Kव1याkमक िलिपमे पोलीफोन (एक िच1हक अनेकाथV वा Kविन) आ होमोफोन (अनेक िच1ह nारा एक Kविन वा अथV) िमला कऽ स ेहो अथV/ Kविन-िनणVय निह कऽ पबैत छल आ तािह लेल तेसर Kविन-िच1ह िडटरिमनेिटवक mयवNथा भेल आ फेर अथV वा Kविन िनणVय सUभव भेल। एिह िलिपसँ पद-आधािरत आ mयंजन-@धान िलिप बनल। Nथान -लाघव आ @यp लाघव एतए @यp-लाघवक चचV करब आवCयक अिछ। @यp लाघव लेल कम @य ाससँ अपेि?त पिरणामक @ािIत। माने भाषाक सUब1धमे कम शZदमे सुNपq िवचार mयAत करब, पैघ-Kविन लेल छोट सवVमा1य Kविनक @योग करब आ ओही िहसाबसँ िलिपक स1दभVमे पैघ चे1ह लेल छ ोट चे1हक @योग करब। ओिहना Nथान- लाघव िलिपमे Nथान-कटौती लेल @युAत होइत अिछ। टॊिपक १२ मे शZद िवचारमे िलिप-उचारण सUब1धी िवशेष जानकारी भेटत। से @यp लाघवसँ कखनो काल Kविन अनि च1हार भऽ जाइत अिछ, आ ओकर Lपा1तर िलिपमे @p-लाघव आ कखनो काल Nथान-लाtवक संग होइत अिछ। पद -आधािरत िलिप पद आधािरत िलिपमे @यp-लाघव आ Nथान-लाघव निह रहैत अिछ। एकरा एना बुझू जे तिमल िलिप अिछ िसलेबल आधािरत िलिप, रोमन िलिप अिछ अuफाबेट िलिप आ ितरहुता आ देवनागरी अिछ अuफा- िसलेिबक िलिप। माने जतऽ संयुAता?र निह अिछ से भेल अuफा बेट आधािरत िलिप। माने अंTेजी, जे रोमन िलिपमे िलखल जाइत अिछ, मे संयुAता?र निह होइत अिछ, मा! २६ टा अuफाबेट होइत अिछ, से ओ भेल अuफाबेट आधािरत िलिप। तिमलमे िसलेबल आधािरत िलिप अिछ। से ओ भेल िसलेबल आधािरत िलिप।

ितरहुता आ देवनागरी िलिपमे दुनू तkkव अिछ से ओ भेल अu फा-िसलेिबक िलिप। एिह तीनूक तुलना मोटा- मोटी वािणVक (अंTेजी), माि!क (तिमल) आ वािणVक आ माि!क (ितरहुता आ देवनागरी) छ1दसँ कएल जा सकैत अिछ। मुदा एतऽ एकटा पvच अिछ, अंTेजीमे वणVक गणनासँ जे मीटर िनमHण करब तँ लय निह बनत से ओतऽ िसलेबल आधािरत गणना करए पड़ैत अिछ, आ िकएक तँ K विनक सUब1ध मा! िसलेबलसँ छै, शZदक^ िसलेबलमे तोड़ल जाइत अिछ। जापानी िलिप पद-आधािरत अिछ से ओतऽ ई झमेल निह अिछ, आ ओतऽ Kविनक ईकाई लेल जे शZद @युAत होइत अिछ तकर अनुवाद मोटामोटी िसलेबलमे कएल जा सकैत अिछ आ ओही आधारपर हाइकूमे १७ टा Kविन पुरेबा लेल गणना होइत अिछ । ितरहुता, देवनागरी आ ;ा<ीमे जे बाजल जाइए सएह िलखल जाइए, आ एतऽ पािणनीपूवV आ पिणिनक परUपरामे Kविन आधािरत सि1धक िनअम बनल अिछ। कमVधारय समासक िवTह पदाkमक होइत अिछ, महादेव भेला महान् देव, आ जँ दूसँ बेशी पद अिछ तँ से भेल बहुवyीिह- जेना लUबोदर (नमगर िजनकर उदर से, माने गणेश)। अंTेजी (रोमन िलिप) मे बजबा काल सि1ध होइत अिछ मुदा िलखबा काल निह, मुदा ओतहुओ दीघV लेल डबल ए, डबल बी आिद @युAत होइते अिछ, पंकचुएशन सेहो ई काज करैत अिछ, हँ ओतऽ िzपल ए निह होइत अिछ, मुदा हमहूँ सभ तँ दीघVक बाद Iलुतक^ छोिड़ये देने छी। आ तही कारणसँ मैिथलीमे िवभिAत सटा कऽ िलखल जाइत अिछ। ितरहुता आ देवनागरी िलिपमे दुनू तkkव अिछ स े माि!क आ वािणVक दुनू छ1द एिहमे गणना कएल जा सकैत अिछ। टॊिपक १ मे पृ{ १८ सँ गणना (माि!क आ वािणVक) सUब1धी िवशेष जानकारी भेटत। िसलेबल जेना शZदसँ सUबि1धत अिछ पद तिहना समाससँ पिहलमे Kविन @मुख अिछ आ दोसरमे पद (अथV)। से वएह पद आधािरत िलिप Kव1याkमक िलिपक िवकास छ ल। जकर @माण ऐितहािसक Lपसँ उपलZध अिछ, आ जतऽ सँ िलिपक असली िववेचन सUभव अिछ। आ ि च!-िलिपक Lपमे जािह तीन गोट िलिपक चचV भेल माने िटिTस-यूdेeसक धारक कात (सुमेर, फेर बेबीलोन आ तखन असीिरयामे), नील धारक कात (एिजIटमे) आ 'ीट (Tीस) मे एिहमेसँ िटिTस-यूdेeसक धारक कातमे सुमेर, फेर बेबीलोन आ तखन असीिरयामे जे सGयता सभ 'मसँ आएल ओिहमे पिहने सुमेरमे AयूनीफॊमV िलिपक @ारUभ भेल ४००० शताZदी बी.सी.ई. (िबफोर कॊमन एरा)मे। बेबीलोन लोकिन सुमेरसँ ई िलिप िसखलिन आ हुनकासँ असीिरया लोकिन। मािटक सानल आ लोथ बनाएल पfीपर सुखेलासँ पिहनिहये नोकब ला Nटायलससँ, मोटा-मोटी ३५० टा अ?रसँ, ई AयूनीफॉमV िलिप िलखल जाइ छल जखन आ फेर रौदम े सुखाएल वा चूि€मे पकाएल जाइत छल। आधुिनक कालमे एकरा पढ़बाक_ेय एकटा अंTेज हेनरी रॊिल नसनक^ जाइ छिन। तेसर चरणक बाद धिर ई पद-आधािरत बिन गेल छल। एिजIटमे हायरो:लाइिफक (हायरोि:लिफक, हायरेिटक आ डेमोिटक) िलिप AयूनीफॉमV िलिपक समकालीन छल। एिहमे २४ टा िच1ह रहैक ज ािहमे सभटा mयंजन रहैक। Nवर रहबे निह करैक, से बहुत रास झमेल आ अNपqता आिब जाइ छलैक, से ओक र िनवारणलेल ओ लोकिन आर िवशेष चे1ह आ िच!क @योग करैत छलाह। ओ सभ लाल मोिश-कलमसँ पेप ीरस पातपर िलखैत छलाह, ओही पेपीरससँ पेपर बनल अिछ। AयूनीफॉमV आ हाइरो:लाइिफक ई द ुनू िलिप दिहनसँ वाम िदश िलखल जाइत छल। एिह दुनू िलिपक समकालीन िलिप छल चीनक िलिप से ऊपर सँ नीचR िलखल जाइत छल। पिहने एकटा शZद लेल एकटा िच1ह छल, मुदा फेर एकटा िवचार लेल एकटा शZदक @योग होमए लागल। चीनक िलिपमे कोनो अuफाबेट निह अिछ, ४०,००० िच1ह अिछ। एकर अलाबे एलमाइट सभ पिहने देशज रेखाkमक

आ िच!-@चुर अ?रक @योग केलिन मुदा फेर ओ लोकिन सेहो Aय ूनीफॉमV िलिप पकिड़ लेलिन मुदा ओतऽ ११३ चे1ह जािहमे ८०सँ बेशी पद-आधािरत चे1ह छल, केर @योग ओ केलिन। से एिजIटक बदला िलिपक आिव]कारक मेसोपोटािमया (सुमेर, बेबीलोन आ असीिरया) क लोक रहिथ, जे िलखबाक कलाक आिव]कतH छिथ। जेना ऊपर चचV भेल अिछ, ओ लोकिन पिहने िच! िलखलि1ह, आ िकएक तँ िच! बनेबामे बेसी समयक नोकशानी होइत छलि1ह से ओ लोकिन @यp-लाघव आ Nथान-लाघवसँ िच!क^ चे1ह बना देलि1ह, चे1हमे समानता आ समLपता आिन र ेखाkमक प‚ितक िलिप बनेलि1ह। फेर ई चे1ह Kविनक^ @दिशVत करए लागल, आ एिह तरहक मोटामोटी ३५० टा चे1ह बनल। सीिरया-साइ@स आ िफिलNतीनमे जे खRटी वणV आधािरत िलिप ब नल ताहूमे, फेर िमनोअन सGयतामे जे िलिप आिव]कृत भेल ओिहमे पद-आधािरत िलिपक @भाव पड़ल। पद-आधािरत िलिपक दूटा Lप चीनमे छल मुदा तकर @योग चीनमे ब1द भऽ गेल मुदा जापानमे ई @योगमे अिछ जकर िकछु चचV ऊपर आएल अिछ। mयंजन @धान िलिप एकरा वणVमाला वा वणV आधािरत िलिप सेहो किह सकैत छी। आन िलिप सभमे चे1ह सभक संƒया ततबा बिढ़ गेल जे िशशु लेल ओकर सीखब असUभव भऽ गेल। एिह िलिपक िवकासक कारण छल @यp लाघव। ए„े िलिपमे अनेक भाषा िलखब सUभव भऽ गेल। िटिTस-यूdेeसक कात- मेसोपोटािमया- (सुमेर, फेर बेबीलोन आ तखन असीिरयामे)क AयूनीफॉमV िलिप वणVमाला निह बिन सकल। एिह िलिपक सUब1ध सेमेिटक भाषासँ हेबाक @माण अिछ। िच!ाkमक फेर िवचाराkमक, फेर Kव1याkमक िलिप ई बिन सकल। मुदा Kव1याkमक िलिप सेहो सं…ा, सवVनाम, ि'या आ ि'या-िवशेषणक आवCयकताक^ िकछु सुधारक संग पूणV कऽ सकल। फेर ई पद-आधािरत बनल आ एतिह एकर िवकास खतम भऽ गेलैक। बादमे जा कऽ जु†‡ुqक अनुयायी लोकिन मेसोपोटािमयामे अपन िलिपक^ mयंजन @धान बनेलि1ह जकरा अ‚V-वणVमाला किह सकैत छी। मुदा ओिहमे कृि!म हेबाक @वृिh बढ़ल, आ ई @वृिh ;ा<ीमे सेहो भाषा-वै…ािनक लोकिनक^ देखा पड़ैत छि1ह। 'ीटमे सेहो िच!-@चुर रेखाकृितसँ आगR बिढ़ १३५ चे1हबला भावना-@धान आ Kविन-@धान िलिप बनेलि1ह। िहनकर िलखब वामसँ दिहन आ दिहनसँ वाम दुनू छल। उतरबिरया सेमेिटक वणVमाला सीिरया-साइ@स आ िफिलNतीनमे मूल वणVमालाक आिव]कार दोसर शताZदी बी.सी.ई. मे भेल जकर नाम उhरबिरया सेमेिटक वणVमाला छल। आ तकर बाद आनो-आन म ूल वणVमाला आिव]कृत भेल जेना आरामाइक, िफनीिशअन, Tीक आ ;ा<ी आ ई िलिप सभ अनचो„े आि व]कृत निह भेल होएत वरण ओतहु

वएह @ि'या भेल हएत जे मेसोपोटािमयाक िलिप संग भेल छल। मुदा एक Nतरक बाद मेसोपोटािमयाक AयूनीफॉमV िलिप पद-आधािरत िलिप बिन अपन िखNसा खतम केलक ई िलिप सभ पूणV वणVमाला बिन गेल।

भारतमे िलिप आ लेखनकला नागाजुVनकोˆडासँ @ाIत दोसर शताZदीक एकटा मूितVमे राजा शु‚ोधनक दरबारक दृCय अंिकत अिछ जािहमे तीनटा भिव]यवAता भगवान बु‚क माता रानी मायाक N व‰क mयाƒया कऽ रहल छिथ। िहनका सभक नीचR बैसल िलिपकार तकरा िलिपब‚ कऽ रहल छिथ। भारतमे ले खनकलाक ई आइ धिरक सभसँ पुरान िच! आधािरत @माण अिछ। एिहसँ अितिरAत पुरान @माण हड़Iपा संNकृित, अशोकक अिभलेख आिद तँ अिछये। अशोकक अिभलेख आ हड़Iपा संNकृितक बीचमे सेहो मारत े रास अिभलेख भेटलािछ जेना सोहगौराक ताम-प! अिभलेख, िपपरहबाक बौ‚-भीड़ अिभलेख, म हाNथान आ बल5क पाथर अिभलेख, आ भिf@ोलुक अिभलेख। भारतमे हड़Iपा सGयतामे पिहल बेर िलिपक @योग भेल मुदा ओ एखन धिर पढ़ल निह जा सकल अिछ। एकर अिभलेख सभ छोट-छोट छैक सभसँ पैघ अिभलेखमे २६ टा चे1ह छैक। धोलावीर (गुजरात) मे नTक nारपर एकटा साइनबोडV हेबाक @माण अिछ जािहमे ९ टा चे1ह छैक। ;ा<ी आ खरो{ी ;ा<ी वामसँ दिहन आ खरो{ी दिहनसँ वाम िदशामे िलखल जाइत अिछ। मुदा दुनू भारतक वणVमाला प‚ितक आधारपर िवकिसत भेल अिछ। अशोकक अिभलेख ;ा<ी आ खर ो{ी (मानसेहरा आ शाहबाजगढ़ी) दुनूमे भेटल अिछ आ एकरा एकटा अंTेज जेUस ि@ंसेप १८३७ सी.ई. मे ;ा<ी पढ़बामे स?म भेलाह। खरो{ी पढ़बाक _ेय सिUमिलत Lपसँ कनVल मसोन आ जेUस ि@ंसेप क^ दे ल जाइत अिछ। एिह अिभलेख सभमे अशोकक नाम िपयदNसी िलखल छैक आ िकछुमे असोक (अशोकक पाि ल-@ाकृत Lप) सेहो। अशोकक अिभलेखमे िलिपकरक चचV अिछ। ;ा<ी िलिप बहुत िदन धिर िवकिसत आ पिर]कृत/ पिरवि‚Vत होइत @योगमे रहलाअ एिहसँ भारतक आन िलिप सभक उkपिh भेल मुदा खरो{ी िलिप अपने संग खतम भ ऽ गेल। अशोकक अिभलेखक अितिरAत इˆडो-Tीक राजा सभ एकर @योग अपन मु2ापर केलि1ह जािहमे तर आ ऊपरमे Tीक आ ◌्खरो{ी िलिपमे राजाक नाम िलखल रहैत छल। नारद -Nमृितमे िलिपक^ उhम आँिख कहल गेल अिछ आ एकर सृजन ;<ा केलिन तकर चचV अिछ । बृहNपित Nमृितमे चचV अिछ जे छह मासक बाद Nमृित धोखा देमऽ लगैत अिछ से पातपर िलखल आखरक सृजन ;<ा केलिन।

चीनक िवŒकोष फा-व-शु-िलनमे सेहो चचV अिछ जे वामसँ दिहन िलखल जाएबला िलिपक सृजनकhH ;<ा छिथ। एिह िलिपक नाम ;<ी िलिप छल आ से पािणनी पूवV mयाकरणाच ायV nारा Nवीकृत छल, मुदा पािणनी mयाकरणक अनुLप ;<ी अशु‚ अिछ। से एिह िलिपक नाम ;ा<ी प ड़ल। पािणनी अqाKया आ अमिसंह अमरकोषमे िलिप आ िलिबक चचV करैत छिथ। पािणनी पूवV आचायV याNक अपन िन†Aतमे बहुत रास पूवV आ समकालीन mयाकरणाचायVक नाम गणबैत छिथ। वणVक गणना आधािरत छ1द आ mयाकरणाचयV सभक उपिNथित अपरो? Lपसँ लेखनकलाक उपिNथितक आभास करबैत अिछ। तीन हज ार वषV पूवV झेलम आ चेनाबक बीच गधार (अखन ओतऽ यूसुफजई पठान िनवास करैत छिथ) इलाकामे द?क संघराŽय छल, एिह इलाकामे काबुल धार पिछमसँ आिब कऽ िस1धु धारमे संगम करैत अिछ। ओिह संगमसँ चािर माइल उhर लहुर गाम, जे पािणनीक नानी गाम छल, मे पािणनीक ज1म भेल, ओइ गामक नाम ओइ कालमे शलातुर रहैक। चीनी या!ी ेनसग (युआन वग), सातम शताZदीमे. एिह गामक िव nान ;ाहमण mयाकरणाचायVक चचV केने छिथ। माने परUपरा आगR-पाछR काएम छल। जैनक भगवती सू! एिह ;ा<ी िलिपक^ नमNकार करैत अिछ। िलिपक आधार - अ?र , वणV आ मा!ा आ तकर साय ऋगवैिदक ऋचा वणVवृhमे अिछ, माि!क छ1दमे निह। वािणVक छ1दमे अ?रक गणना होइत अिछ। छा1दो:य उपिनषदमे अ?र शZद उuलेख अिछ दीघV Nवरक सेहो। तैhरीय उपिनषदमे वणV आ मा!ा दुनूक चचH अिछ। ऐतरेय आरˆयकमे Nवर आ mयंजन दुनूक चचH अिछ। पंचिवंश ;ा<णमे सभसँ छोट दि?णा १२ कृ]णल आ सभसँ पैघ दि? णा ३,९३,०१६ कृ]णल सुवणVक चचH अिछ। कौिटuयक अथVशाN! चूड़ाकमV संNकारक बाद िलिप आ अंकक @िश?ण क िनद8श करैत अिछ। राजाक^ मि1!पिरषदक संग प!ाचार आ गुIतचरक कूटिलिपमे संदे श पठेबाक चचV अिछ। अथVशाN! कहैत अिछ जे िलिपकार तेजीसँ िलखबामे िनपुण होिथ, साफ-साफ िलखिथ आ लेख पढ़बामे सेहो समथV होिथ। बौ‚ T1थ सुhंतमे अAखिरका 'ीड़ाक चचV अिछ, जािहमे अकासी अ?र बनेबाक NपधH रहैत अिछ। बौ‚ िभ?ु लेल एिह 'ीड़ाक िनषेध अिछ मुदा िवनय-िपटक लेख ल-कला िसखबाक अनुमित बौ‚-िभ?ुक^ दैत अिछ। कटाहक जातकमे जाली प! देखाक^ ठकबाक चचV अिछ तँ म हासुतसोम जातकमे त?िशलाक अKयापक अपन पुरान िश]यक^ प! िलखै छिथ। कˆह जातक अAखर (अ?रक पािल-@ाकृत Lप) क @योग करैत अिछ। महाव:गमे अंक-शZदक @िश?ण आ कटाहक जातकमे शीत लपाटीक चचH अिछ जािहपर िलखब

िसखाओल जाइत छल। लिलतिवNतर बु‚क िलिपशाला, हुनकर िश?क िवŒािम!, चाननक शीतलपाटी आ सोनाक लेखनीक चचH करैत अिछ, एतऽ ६४ टा िलिपक वणVन अिछ जतऽ राजनैितक सीमाक िहसाबसँ अंगक िलिप, मगधक िलिप वङक िलिपक चचV अिछ मुदा िवदेहक ि लिपक Nथानपर पूवV िवदेह िलिप िलखल अिछ। एकर कारण अिछ जे विŽज िवदेहपर अिधकार कऽ लेने छल आ विŽज आ िवदेहक िलिप संयुAत Lपसँ िवदेह िलिप छल। अजातश!ु तेसर शताZदीमे विŽजक^ जी ित मगधमे राजनैितक Lपसँ िमला लेलि1ह, मुदा सNकृितक Lपसँ ओ अपन अिNतkव बचेने रहल। लिलत िवN तर तेसर शताZदीक Tंथ िथक आ तािह nारे ओ मगध िलिपक संग पूवV िवदेह िलिपक वणVन करैत अिछ। ई @वृिh बादमे गुIतकालक तीरभुिAत (ितरहुत) @ा1तमे सुदृढ़ Lपसँ सोझR आएल आ पूवVिवदेह िलि पक नामकरण भेल ितरहुता। लिलतिवNतरमे बाल अवNथामे बु‚-िस‚ाथVक वणVमाला @िश?णक चचV अिछ आ ओिहमे वािणVक अ?रक कRित आ अलंकरणक योजनाक चचV अिछ जे ;ा<ी िलिपक अिछ। उतरबिरया सेमेिटक वणVमाला आ ;ा<ीक बीचमे अलेफ् आ अ, ब ेथ् आ ब्, िगमेल् आ ग, दालेथ् आ द, हे आ ह, वाव् आ व, जाइन् आ ज, चेथ् आ घ, थेथ् आ थ, योध् आ य, काफ् आ क, लामेध् आ ल, मेम् आ म, नुन आ न, सामेख आ स, आइन् आ ए, फे आ प, साधे आ च, कॉफ् आ ख मे अ/ुत समानता अिछ आ मानवक मिNत]क कोना दूर रहलोपर ए„े रङ अिछ तकर 4 ोतक अिछ। बूलरक^ ;म भेलि1ह जे ;ा<ी िलिप उतरबिरया सेमेिटक िलिपक अनुकरण केलक। ई ओ क ाल छल जखन हड़Iपा आ मोहनजोदाड़ोक^ सेहो मेसोपोटािमयाक आउटपोNट ताधिर मानल जाइत जाधिर भारतक आन भागमे उkखनन निह भऽ गेलै आ हड़Iपा संNकृितक देशज Lप @कट निह भऽ गेल ैक (हमVन कुuके आ दीतमार रोथरमˆड, अ िहNzी ऑफ इिˆडया, २००४, पृ. १९, मुदा ओ पृ.५४ पर अख नो ”ममे छिथ जे खरो{ी अरामेइक िलिपक आधारपर बनल जे तखन फारसक आिधकािरक िलिप छल। अरा माइकमे मा! २२ टा अ?र छैक, Nवरक अपूणVता अिछ, •Nव-दीघVक भेद निह अिछ, Nवरक मा!ाक सेहो अभाव अिछ से ओ भारतीय भाषा लेल अयो:य अिछ, खरो{ीमे ई सभ गुण अिछ, संगे दीघV-गुण-वृि‚ Kविन लेल भेदक िच1ह सेहो अिछ, @ाकृत अिभलेख लेल ई ;ा<ी सन स?म छल, मा! दिहन-वाम रहने ई िव देशी निह भऽ जाएत। खरो{ी दिहनसँ वाम िलखल जाइत अिछ मुदा एकर वणVमाला भारतीय अिछ, दिहनसँ वाम िलखल जएबाक कारण िकछु िवnान लोकिनक^ एिहमे फारसक @भाव देखाइ पड़ैत छिन, मुदा सkय तँ यएह अिछ जे ;ा<ी आ खरो{ी िलिपमे ए„े वणVमालाक @योग भेल अिछ।)। जेना सङीतमे भारतक सारेगाम ा क सात टा सुर आ पि–मी ऑAटेव (ओhहु साते टा छैक, ऑAटेव माने आठम सँ पुनः पुनरावृिhक मा! ई @तीक अिछ) ई िस‚ करैत अिछ जे भाषा कोनो हुअए कान वएह छैक मनुAखबला। ;ेल आ इˆटरनेशन ल फोनेिटक अuफाबेट Kविनक संग मिNत]क (;ेल) क सेहो सं@ेषण मोटामोटी ए„े हेबाक @माण द ैत अिछ (देखू अनुल:नक) से पिहने तँ िकछु िवnान एकरा बैAzो-पािल आ आिरयानो-पािल िवदेशी िलिप बु िझ कऽ कहलि1ह, किनंघम एकरा गधारी कहलि1ह, मुदा लिलतिवNतर आ चीनक िवŒकोष फा-व-शु-िलनक @माण अकाeय छल आ ओतऽ विणVत एकर नाम खरो{ी सवVमा1य भेल। चीनी साय ;ा<ीक उ/व ;<ा nारा आ खरो{ीक सर्जन ;ा<ण आचायV खरो{ nारा भेल मानलक अिछ। तेसर शताZदीक बाद अिभलेख संN कृतमे िलखल जाए लागल, @ाकृतक @योग ब1द भऽ गेल। @ाकृत लेल ;ा<ी आ खरो{ी दुनू स?म छल मुदा संNकृतक सि1धयुAत अलंकृत

िAलq शZद, पद आ समास लेल मा! ;ा<ी। से एक बेर जे एकर @योग ब1द भेल तँ @ाकृतसँ िनकलल भाषा सभ लेल सेहो ;ा<ीसँ िनकलल िलिपक @योग @ारUभ भऽ गेल। ;ा<ीक एरागुडीक अशोकक अिभलेख २६ पRतीमे अिछ। वाम दिहन लेखनक पूणV Lपसँ पालन निह भेल अिछ, ओना बेशी पRती वाम-दिहन अिछ। िकछु वाम-दिहन पRतीमे िकछु अ?र वाम-दिहन तँ िकिछ दिहन वाममे अंिकत अिछ, िकिछ ऊपर नीचR सेहो अिछ। ८ पRती दिहन -वाम अिछ। एक पRतीमे मा! एक अ?र अिछ। से दिहन वाम रहने िवदेशी @भाव िस‚ निह होइत अिछ। खरो{ी सन जापानी सेहो दिहन वाम िलखल जाइत अिछ। लिलतिवNतरक @संग सेहो इशारा करैत अिछ जे mयाकरणक िवशेष ताक^ पूणV करब ;ा<ीक उ˜ेCय छल, मुदा ई आTह ऋगवेदसँ अथVशाN! तक अिछ, आ भारतीय पिर @ेयमे ;ा<ी आ ओिहसँ िनकलल िलिप ओिह आTहक^ पूणV करैत अिछ, आ एकर पिर]कृत Lपक^ कृि!म न िह वरण् Nवाभािवक मानल जेबाक चाही। से िकछु िवnान ;ा<ीक mयाकरण सUब1धी आवCयकताक^ पूणV कर ए लेल भेल पिर]करणक^ िवदेशी अ?रक^ भारतीय @ाLपमे आनब कहलि1ह अिछ (बूलर, ऑन द ओिरिजन ऑफ द इिˆडयन ;ा<ी अuफाबेट, १८९८), मुदा किनंघम एकरा भरतीय चे1ह सभसँ बहार भेल मानलि1ह अि छ (किनंघम, कोरपस इ1सि'Iशनम इिˆडकेरम, खˆड-१)। ;ा<ी िलिपक अितिरAत ६३ टा आर िलिपक चचV लिलत िवNतरमे अिछ। सUपूणV यूरोपमे Tीस आ रिसयन कॉमनवेuथ छोिड़ कऽ (एिह दुनू ठाम अलग-अलग िलिप छ ैक) सUपूणV यूरोपमे रोमन िलिपक @योग होइत अिछ। से सUपूणV यूरोपमे आइ मा! तीनेटा िलिप छैक। जँ Lसक^ यूरोपसँ हटा दी तँ ओ भारतक बराबरे अिछ। भारतमे सभ @ा1तमे मोटामोटी अलग-अलग िलिप अिछ, मुदा तिमलक अितिरAत सभमे अuफा- िसलेिबक (अ?र आ संयुAता?रक) िनवVहण मोटामोटी एके रङ हो इत अिछ। एकर कारण छापाखानाक देरीसँ आगमन मा! अिछ। ;ा<ीक मानक Lप आ ओकर ?े!ीय शैली ;ा<ीक मानक Lप छल आ तकर @माण अिछ अशोकक अिभलेख। अशोक १४म @Nतर-अिभलेखमे कहै छिथ जे अिभलेख-आलेखनक गुण-दोष िलिपकरक िजUमा अिछ, आ सएह कारण छल जे अशोकक अिभलेखमे अ?र आ ओकर आकारमे समLपता अिछ आ ईहो @मािणत होइत अिछ जे अशोकक काल धिर ;ा<ीक मानक Lप आिब गेल छल। जे भेद अिछ से ?े! अनुसार, िलिपकरक लेखनक अनुसार आ लेखन उपकरणक िविवधताक अनुसार अिछ, आजुक िहसाब^ जँ असमतल पाथर, खोह आिदपर िलिपकार nारा पुरातन उपकरणसँ जतेक असमLपता आएल अिछ से मानक ;ा<ीक िNथित आर सुदृढ़ करैत अिछ। पंकचुएशन संNकृतमे रहबे निह करए से @ाकृतमे सएह परUपरा आगR बढ़ल। िवराम िच1हक mयाकरणगत आवCयकता ;ा<ीक िलिपकारक^ ओही कारणसँ आवCयक निह लगलि1ह। कुिटल िलिप

कुिटल िलिप ; उhर भारत ६अम शताZदी सी.ई. ; पिछम (शारदा) ; पूब (िकरRत, रšना, भुँिजमोल, ितरहुता, नेवारी, ितZबती, न1दीनागरी आ देवनागरी। कुिटल िलिपक िवशेषतासँ @ेिरत नामकरण- 1यूणकोण वणVमाला (बूलर, इिˆडयन पािलयोTाफी, प्.६८), नह शीषV वणVमाला (टॊड, एनuस ऒफ राजNथान, पृ. ७००), भा रयीय नाम िस‚ मातृका,काCमीर आ वाराणसीमे @चिलत (अल-बे†नी, भारत, पृ. १७३, सचाउ), द ेवल @शिNतमे एकरा लेल कुिटला?रणी @युAत भेल। आिदkयसेनक अफसड़ पाथर-अिभलेखमे एकर नाम िवकटा?रणी अिछ। िव'मकदेव चिरतमे कुिटल िलिपमे िस‚हNत कायNथ लोकिनक चचV अिछ। जेUस ि@ंसेप, जे १८३७ ई. मे अशोकक अिभलेखक^ पढ़ने छलाह, एकरा लेल कुिटल िलिपक नामकरणक अनुशंसा केलि1ह (जनVल ऒफ एिशयािटक सोशाइटी ऒफ बे1गाल, पाटV-५ पृ. ७७८)। कुिटल िलिपक िवकासक की कारण छल? पिहल तँ ई छल जे िलखब ाक करची-कलम आ मोिशक @योग संग नव उपकरण आ पुरान उपकरणक नव @योगसँ अलंकरणयुAत अिभलेख लेखनक इछा जागृत भेल, लटपटौआ िलखबाक आTह सेहो एिह लेल कारण बनल। एिहसँ उपरका भाग फन सन बिन गेल कारण मोिश ढबिक जाइ, पाछR नाङिर आ पद-िच1ह सेहो सुNपq भेल। अलंकरणक @वृिhसँ वणV वृhाकार आ िच„न NवLप लेबऽ लागल। अलंकारक कारणसँ एकर नाम पड़ल िस‚मातृका। कुिटल िलिपक अिभलेख भेटल अिछ, कौशाUबीक मािटक सदˆड सI तदीपक (ई मोन पाड़ैए मौयV कालक बौ‚ सIता?री (@िस‚ मं!) कूटा?रक), मंदसौरक यशोधमVन क अिभलेख, ईशानवमHक हरहा पाथर- अिभलेख, सवVवमVनक असीरगढ़ मोहर-अिभलेख, अन1तवमVनक बराब र आ नागाजुVनी खोह अिभलेख, ईŒर वमVनक जौनपुर पाथर-अिभलेख, शाहपुरक @ितमापर अिभलेख , म1दािगिर अिभलेख, जीिवतगुIत िnतीयक देववाणHकV NतUभ अिभलेख, हषVवधVनक मधुबन आ बRसखेड़ा ता प!-अिभलेख, हषVवधVनक सोनीपत मोहर- अिभलेख। ितरहुता ितरहुता िलिपक खोजमे आब भारतक पूब भागमे आउ। पूब भागक ;ा<ीक बाद िकरRत, रšना, भुँिजमोल, ितरहुता, नेवारी, ितZबती, न1दीनागरी आ देवनागरीक @योग भेटैए।

िकरRत िलिपमे िलUबू भाषा आिद िलखल गेल। ई सभ िलिप वाम सँ दिहन िदश िलखल जाइए मुदा रšना िलिप कूटा?रमे ऊपरसँ दि?ण िलखल जाइए। नागरीक Lप न1दीनागरीक @योग मुदा बेशी मKय द„न आ दि?ण भारतमे भेल आ माKवाचायVक nैत दशVनक संNकृतमे िलखल पाˆडुिलिप न1दीनागरीमे अिछ। िवदेह, अंग, विŽज आ नेपालक तराईमे संNकृत आ मैिथली दुन ू ितरहुतामे िलखल जाइ छल आ एिहमे सभ िवषय, जेना सािहkय, गिणत, धमV, दशVन िलखल जा इ छल आ पाता (सुख-दुख दुनुक) चलै छल आ िचžी-प!ी अहीमे होइ छल। कैथीक @योग िहसाब-िकताब, खाता-खितयान लेल होइ छल आ मुƒय Lपसँ कायNथ एकर @योग करै छला। मुदा िमिथलाक कणV-कायNथक पšी मा! ितरहुतामे िलखल गेल (मैिथल करण कायNथक पRिजक सव8?ण- मेजर िवनोद िबहारी वमH, १९७३ )। एकर िवपरीत मैिथल ;ा<णक पšीक िकछु फीuड-वकV आ प!चार कैथीमे भेल (अनुल:नक) मुदा एतह ु पšी मा! ितरहुतामे िलखल गेल। ई १४म शताZदी सी. ई. (कॊमन एरा) सँ शुL भऽ कऽ २०म शताZदी सी .ई. धिर रहल जखन देवनागरीमे पšी िलखब @ारUभ भऽ गेल। िकछु नव आिव]कृत िलिप िलिपक अनुकरणसँ साइन (इशारा) भाषा विधर लेल १८म शताZदी सी.ई. (कॊमन एरा) मे विधर Nकूलमे dसक चाuसV िमशेल देल एIपे nारा आिव]कृत भेल। ई एहेन िलिप अिछ जे कागतपर निह वरण् वायु माने वातावरणमे बनाओल जाइत अिछ। अ1ध-िदmयग लेल ;ेल िलिप १९म शताZदीमे dसक लुइ ;ेल आिव]कृत केलिन। २०म शताZदीमे रघुनाथ मुमूV संथाली भाषा लेल ओल-िचकी िलिपक आिव]कृत केलिन। ;ा<ी िलिपक पुबिरया @कारक मुƒय अिभलेख सभ अिछ- समु2गुIतक हिरषेन िलिखत @याग @शिNत जे अशोकक NतUभपर िलखल गेल छल, च12 गुIत-२ क उदयिगिर खोह लेख, Nक1दगुIतक कौहम NतUभ अिभलेख, च12गुIत-२ आ कुमारगुIत-१ क गढ़वा अिभलेख। ितरहुता िलिपक खोजमे हम सभ उhर आ दि?णमे सँ उhर भारत ीय आ फेर उhर भारतीयसँ उhर-पूब िदस बढ़ब। उhर आ दि?ण भारतक िलिपक जे अ1तर अिछ से “म” मे देखाइत अिछ। उhर भारतक दुनू @कार माने पूब आ पिछमक @कार श, ष, ल आ ह मे देखाइत अिछ। गुIत कालक अिभलेखक पूब @कारमे “ल” केर वाम अंग सोझे न ीचR िदस झुकैत अिछ (उदाहरण जौगड़क फराक अिभलेख)। “ष” केर आधार चे1ह गोल बनाओल गेल आ िबचुलका चे1हक माला सन बिन गेल। “ह” केर आधार चे1ह धिकया देल गेल आ एकर सुuफी उKवHधरसँ जोिड़ देल गेल। Nक1दगुIतक िभताड़ी NतUभ अिभलेखे, ओना तँ भारतक पूबमे अिछ, मुदा ओिहमे उhर भारतक पिछम @कारक िलिपक @योग भेल। कलाकार पिछमसँ आओल हेताह तािह कारण सँ ई भेल होयत। फेर ईहो भेल जे उhर भारतक ;ा<ीक पूब आ पिछम @कारक सीमा रेखा पिरवितVत होइत रहल। क¡ौजपर अिधकारक लेल रा]zकूट, गुजVर-@ितहार आ पाल राजवंशक बेच संघषV मोटामोटी ७५०-१२०० ई. क मKय भेल। एिह तरा-उपरी यु‚मे गुजVर-@ितहार जखन बीस पड़लिथ तँ पछबिरया कलाकारक कलाकारी पूब िदस

बढ़ल। तिहना पाल जखन बीस पड़लाह तखन पुबिरया कलाकार सभक^ बेसी पिछम धिर रोजगार भेटलि1ह। पछबिरया ;ा<ी नागरी बनल आ पुबिरया ;ा<ी ितरह ुता, असमी, ब:ला आ ओिड़या। पुबिरया @कारक पिछम आिर पाल सााŽय, मगध आ िवदेह+विŽज िनधHिरत भेल। दसम शताZदी धिर नागरीक पुबिरया आिर बनारस िनधHिरत भऽ गेल आ ओ पूणV Lपसँ पुबिरया ;ा<ीसँ फराक भऽ गेल। िघयासु˜ीन तुगलकक बाद िफरोजशाह तुगलक आ'मणसँ ितरहुत सािहkय आ कलाक ?े!मे पछुआ गेल आ ओकर िलिपक ब£ड भारी नोकसान भेलै। ितरहुता िलिपक िवकास ओतिह ठमिक गेलै। िमिथलाक कणHट वंशक। ŽयोितरीŒर ठाकुरक वणV-रpाकरमे हरिस ंहदेव नायक आिक राजा छलाह। १२९४ ई. मे ज1म आ १३०७ ई. मे राजिसंहासन। िघयासु˜ीन तुगलकसँ १३२४-२५ ई. मे हािरक बाद नेपाल पलायन केलि1ह। मुदा एिह हािरसँ पिहने िमिथलाक पšी-@ब1 धक Nथापनाक ओ @यास केने रहिथ, ;ा<ण, कायNथ आ ?ि!य मKय । आिधकािरक Nथापक िनयुAय भेलाह मैि थल ;ा<णक हेतु गुणाकर झा, कणV कायNथक लेल शंकरदh आ ?ि!यक हेतु िवजयदh। हरिसंहदेव ना1यदेवक वंशज छलाह, िम िथलाक पिˆडत लोकिन १३२६ ई. मे पšी-@ब1धक वतVमान NवLपक @ारUभक िनणVय कएलि1ह। ओना तँ ओिह समयमे हरिसंहदेव िमिथलासँ पलायन कऽ गेल रहिथ तैयो हुनका सकेितक Lपमे एकर संNथापक मानल गेल। ?ि!यक पšी तँ आब उपलZध निह अिछ मुदा ;ा<ण आ कणV कायNथ क जे पšी उपलZध अिछ तकर िलिप मा! ितरहुता अिछ आ २०म शताZदीक पšीक ितरहुता जे एिह पšी सभमे अिछ से १३२६ ई. (१४म शताZदीक) क पšीक ितरहुतासँ ए„ो िमिसया िभ¡ निह अ िछ। फॉˆट बनलाक एकर िवकासक सीमा िबना Lप पिरविhVत भेने असीम भऽ गेल अिछ आ ए„े खRचामे कलाकार अपन कलाकारी देखा कऽ कएक िडजाइनबला अ?र िनिमVत कय सकैत छिथ। से ;ा<ीक िवकास भेल उhरी आ दिAखनी @कारमे। उhरक @कार दू भागमे बँिट गेल, पुबिरया आ पछबिड़या। आ मोटा-मोटी १०म शताZदीमे पुबिरया िलिप पछबि रया िलिपसँ पूणV Lपसँ िभ¡ भय गेल। पुबिरया िलिपक सीमा मगध, अंग आ ितरहुत िनधHिरत भेलै आ नागरी जे पछबिरया ;ा<ीक Lपमे गुIत सााŽयक पतन धिर @यागोसँ पिछम धिर सीिमत छल ८म शताZ दीमे ई वाराणसी धिर पहुँिच गेल १२म शताZदीमे गंगाक दि?णमे मगधमे पछबिरया आ पुबिरया दुनू @कारक @योग होमय लागल। मुदा गंगाक दि?णमे मगधसँ पूब पुबिरया @कार मा! रहलै, आ गंगाक उhरमे ितरहुतमे सेहो पुबिरये @कार मा! रहलैक। मुिNलम आ'मणक बाद समNत मगधमे पछबिरया @कार पसिर गेलैक मुदा १ ४म शताZदी धिर (उदाहरण महाबोिध मि1दर गया) पुबिरया िलिपक @योग एतऽ पूणVLपसँ ब¡ भय गेलैक।। १३२६ ई. मे पšी िलखबाक @ारUभ भेल आ तिहयासँ २०म शताZदी धिर ई ितरहुतामे िबना पिरवितVत भेने िलखाइत रहल आ ओकर ओही Lपमे फॉˆट बिन गेलै (देखू गूगल बुAसपर िवदेह आकHइवक पšीक ११००० तालप!/ बसहा कागत अिभलेख, जे @ारUभसँ २०म शताZद ी धिरक अिछ, २०म शताZदीक अ1तमे पšी सेहो देवनागरीमे िलखल जाय लागल)। तँ ितरहुताक उ/व आ िवकासक सीमा रेखा १३२६ ई. भेल

जखन ितरहुताक अि1तम Lप िनधHिरत भय गेल। पšीकारक नीक-अ धलाह हNतिलिपक^ ितरहुता फॉˆटक िविभ¡ िडजाइन मा! मानल जा सकैत अिछ। एकर ई पिरणाम भेलै जे ितरहुतामे जे संNकृत Tंथ िलखल जाइ छल, वा पाता चलै छल सेहो अपिरवितVत Lपमे २०म शताZदी धिर चलल। तुगलक आ'मणसँ अिभ लेख िलखिनहारक रोजगार खतम भऽ गेलि1ह आ जे िकयो बचलाह से तालप! आ बसहा कागतपर िलखल अिभलेखसँ िभ¡ लेखबाक ?मतासँ रिहत भय गेलाह। छापाखानाक @योगक बाद आ यूनीकोडक अंकनक बाद आब िडजाइनक आपसमे िलिप पिरवतVन सन @योग सUभव भय गेल। मैिथलीक अqम सूचीमे गेलाक बाद संघ लोक सेवा आयोगक परी ?ा आ सरकारी कायVमे मैिथलीक @योग लेल के12 सरकार मा! देवनागरीक अनुमित देने अिछ। पिहने देवनागरी, ितरहुता, ब:ला, तिमल आिद िलिपमे संNकृत िलखाइत छलै, मुदा आब सरकार मा! देवनागरी मे संNकृत िलखबाक आदेश देलक अिछ। ओना िबहार-झारखˆड आिदमे अखनो सकेितक Lपमे Nकूल, कॉले जक परी?ामे आ िबहार लोक सेवा आयोगक परी?ामे मैिथली अहR देवनागरी वा ितरहुतामे िलिख सकै छी। के12 सरकार संघ लोक सेवा आयोगक परी?ा आ अ1य कायV लेल संNकृत, िह1दी, मैिथली, मर ाठी, कॲकणी, डोगरी, बोडो आ नेपाली क^ देवनागरीमे; संथालीक^ ओल-िचकी वा देवनागरीमे; िस1धीक^ अरबी वा देवनागरीमे; उदूV आ काCमीरीक^ फारसी िलिपमे; मिणपुरी आ ब:लाक^ ब:ला िलिपमे िलखबाक आदेश देने अिछ। असमी, गुजराती, क¡ड़, मलयालम, ओिड़या, तिमल, तेलुगु अपन-अपन अही नमक िलिपमे िलखल जायत आ पंजाबी भाषा गु†मुखी िलिपमे िलखल जायत। आब फेर ितरहुताक िवकास िदस घुमैत छी। गुIत सााŽयक पत न धिर पुबिरया िलिपक आिर-धूिर @यागक लग-पासक इलाका रहय जे आठम शताZदीमे काशी पहुँिच गेलैक। १२म शताZदीसँ-१४म शताZदी धिर मगधमे पुबिरयो @कारक @चलन रहलै, जकर बाद ओिह इलाकामे मा! नागरीक @चलन रहल। १४म शताZदीमे १३२६ मे पšी िलखेनाइ शुL भेल आ मुिNलम आ'मणक बाद ितरहुताक िवकास पूणV Lपसँ ठमिक गेल आ ओ ओिह कालमे जािह Lपमे रहय तही Lपमे २०म शताZदी धिर रहल। ितरहुता िलिपक १३२६ ई. धिर 'िमक िवकास आ अि1तम NवLपक @ािIत अशोकक @याग आ रामपुरवा, मिठआ, पहेिरया, िन:लीव, रािधय ा, सारनाथ NतUभ लेख सभमे एकLपता अिछ, एकरा ;ा<ीक उhरवत5 उhर-पूव5 @कार कहल जा सकैत अिछ। उhर-पूव5 @कारमे िकछु िवशेषता अिछ। “ख” केर नव Lप भेटबामे अबैत अिछ। बोधगयाक एकटा अिभलेखमे “ख” केर आधार ि!भुजक आकारक अिछ। नव-मौयV काल , जे अशोकक परवत5 कालक अिछ, मे “च” मे दू टा घुमघुमौआ आकृित लUबवत रेखाक दुहू िदस बनैत अिछ, मुदा दुनू घुमाव एक आकारक निह अिछ, छोट-पैघ अिछ आ तािह कारणसँ वृh निह बिन पबैत अिछ। महाबोिध मि1दरक रेिलंग- बु‚

पिर'मा- मे अिभलेख सभािछ जािह मे “य” आ “ज” उhर भारती य @कारक अिछ आ “ल” लटपटौआ अिछ। जौगड़क फराक पाथर-अिभलेखमे मुदा ब£ड लटपटाक^ लेखल गेल अिछ जे बादमे पूवV गुIत अिभलेख (४म-५म शताZदी) क पुबिरया @कारमे आर पुq भेल। जौगड़मे “ह” केर लटपटौआ @कार बादमे पुबिरया @कारमे देखल जाइत अिछ। उhर -मौयV कालक ;ा<ीक परवत5 अ?र @कार दशरथक नागाजुVनी खोह अिभलेख उhर-पूव5 @कारक अिछ आ तकर बाद महाबोिध मि1दरक रेिलंग (पिर'मा)क NतUभ सभपर अिभलेखमे ई सेहो देखाइत अिछ। नागाजुVनी खोह अिभलेखक लटपटौआ “ल” दशVनीय अिछ। “श” कलसी अिभलेखसँ मेल खाइए आ पुबिरया घुमौआ “श”क ई पूवV Lप अिछ (४म-५म शताZदी)। “स” सेहो पिरवितVत अिछ, उपरक नोकशी नमहर भऽ कनेक झुिक कऽ दोसर पRित सनबनैत अिछ। महाबोिध मि1दरक रेिलंग दशरथक नागाजुVनी खोहक५० बखV बादक अिछ। एिहमे “क” कटार सनािछ, “ग” दू @कारक अिछ- लटपटौआ आ कोणाकार, “प” मे बेस पिरवतVन अिछ आ दूटा समकोण Nपq देखाइ दैत अिछ। “म” सेहो दू तरहक अिछ, पिहल @कारमे वृh नीचR आ अधVवृh ओकर ऊपर अिछ, दोसर @कारमे ि!भुज नीचR आ समकोण ओकर ऊपर अिछ। “र” व' पRितक Lपमे अिछ। “व” मे नीचR िदस वृhक Nथान ि!भुज लऽ लेने अिछ। “स” दू @कारक अिछ, पिहल वामिदस कने व', िनचुलका नोकशी नीचR िदस आ दोसर मौयVकाल सन जतय िनचुलका नोकशी कने नUहर रहैत छल। “ह” ब£ड लटपटौआ अिछ जे उhर भारतक पूव5 भागक ;ा<ीक NवLप छल। सारानाथसँ @ाIत अिभलेख (०१ ई.पू. सँ ०१ ई. धिर ) उhर-पिछमक (०१ ई.पू.-०२ ई.पू.) @कारसँ कोनो अ1तर निह अिछ। लUब रेखा कने छोट भेल अिछ, व' रेखा सभ कलाकारीककारण कोणीय भेल अिछ। जँ Nवर शZदक बीचमे अबैत अिछ तँ मौयVकालक कोणीय @कार लटपटौआ NवLप लय लैत अिछ। कुषाण अिभलेख ;ा<ी िलिपक उhर भारतीय @कारक पूव5 @कार बोधगयाक महाबोिध गाछक नीचRमे राखल पाथरमे @ाIत होइत अिछ। “प” केर उKवHधर रेखा छोट भेल अिछ, “म” मे िनचुलका भागक ि!भुज आकार पूवV कुषाण NवLपसन अिछ। “श” कोणीय अिछ आ एिहमे ?ैितज रेखा वाम लUबवत पRितक^ छू निह सकल अिछ। साहेत-माहेत क बोिधसkkवक आकृितपर लटपटौआ “ह” अिछ आ आनठाम कोणीय “ह”। “स” मे पछुलका भाग चाकर अिछ। “य” कखनो-काल अधोिलिखत अिछ आ एिहमे तीन फRड़ अिछ। गुIत युगक @ारUभ (४म - ५म शताZदी)

पूवV @कार “ल”, “ह”, “ष” आ “स” मे Nपq अिछ। एिह कालक मुƒय अिभलेख सभ अिछ- समु2गुIतक @याग NतUभ @शिNत, च12गुIत-२ क उदयिगिर खोहािभलेख, च12गुIत-२ आ कुमारगुIत-१ क गढ़वा भगल अिभलेख, कुमारगुIत-१ क धनैदाहा अनुदान-प!, कुमारगुIत-१ क मानकुँवर अिभलेख, Nक1दगुIतक िबहार NतUभ अिभलेख, भीमवमVनक कोसम आकृित अिभलेख आ Nक1दगुIतक कौहम NतUभ अिभलेख। िलिपक @कारक अ1तर कोना पकड़ी? उhर भारतक @कार आ दि?ण भारतक @कार (नागरी सिहतमे) अ1तर “म” अ?रपर Kयान देलासँ आ उhर भारतक पूव5 आ पि–मी @कारमे “ष”, “ल” आ “ह” पर Kयान देलासँ िलिपक कलाकारीमे िभ¡ता पकड़ाइत अिछ। ितरहुताक NवLप एिह तरह^ पूव5 @कारसँ बहार भेल। “ल”-एकर वाम भाग सोझे-सोझ नीचR िदस खसैत अिछ। “ष” केर आधार कलाकार गोल बनेने छिथ आ कनिछयाह िबचुलका रेखासँ घुमाकय िमलेने छिथ। “ह” केर आधार थकुिच कऽ छोट कयल गेल अिछ आ ओकर नोकशी लUबवत रेखामे िमला कऽ वाम िदस घुमाओल गेल अिछ। “स” मे हरदम एकर वाम लUबवर रेखाक अ1तमे घुमाव रहैत अिछ, जे पिहने व' वा नोकशी सन रहैत छल। ई कुषाण कालक मथुरामे सेहो भेटल अिछ। समु2गुIतक @याग NतUभ @शिNत पूवVक @कारक मानक Lप अिछ। ितरहुता भारतीय िलिपक तं! िस‚त िब1दु, ि!कोण, वृh आ चतु]कोणक @योगसँ कलाकार तं!-मं! कय सकल होिथ से सUभव निह मुदा ितरहुताक अ?रक^ सु1दर बनेबामे ओ अवCय सफल भेलाह। ;ा<ीक उhरवत5 पूवV @कार (५५० ई. सँ ११०० ई.) बुहलर (बूलर) एिह कालक िलिपक^ िस‚मातृका कहैत छिथ। ५५० ई.-६५० ई. एिह कालक मुƒय अिभलेख सभ अिछ- न1दनक अमौना अनुदान अिभलेख, िशवराजक पिटयाकेला अनुदान अिभलेख, अन1तवमVनक बराबर खोह अिभलेख, अन1तवमVनक नागाजुVनी खोह अिभलेख। मुƒय पिरवतVन जे ितरहुता िदस भेल ओ अिछ: -तीन फ^ड़ बला “य”; -“घ”, “प”, “फ”, “ष”, “स” केर नीचR िदस समकोणीय @वृिh संगे एिह सभ चे1हमे दिहन िदस पुछी वा लUब जे पछबिरया @कारमे िवकिसतभेल तकर अभाव। ६५० ई. सँ ७०० ई.

-“अ” केर वाम अंगक उपरका भागक कनेक नमगर भय गेल कRटीक नोक (v अ?र) जकR, िनचुलका भाग व' बिन गेल आ माथपर बfम सन चे1ह अ‚Vिवराम सन “आ”- दोसर व'मे अ1तर अ‚Vिवराम सन, दिहन अंगक िनचुलका भागसँ जुड़ल “इ”- गुIत कालक िलिपक पि–म @कार जे िब1दु वा िनचुलका वृh सन छलै से पैघ व'मे िवकिसत भय गेल “उ”- िनचुलका भागक ?ैितज रेखा व'मे पिरवितVत भय गेल आ नमगर भय गेल आ अही Lपमे १०म शताZदी धिर रहल आ तखनजा कय अि1तम Lपसँ िवकिसत भेल “ओ”- नमगर अधVिवराम पRछा िदस चौरस भय गेल “क”- पिहल बेर वाम िदस सदैव घुमाव रहय लागल, ई घुमाव ११म शताZदीमे अधVवृh बिन गेल “ख”- अ?रक आधारमे ि!भुज आकृित बनल फेर ई सोझ रेखा बनल आ फेर घुिम गेल, ि!भुजक एक भुजा अधVवृh बिन गेल आ दोसर नमगर भय गेल आ वृhक दुनू चापक^ छूलक। “ग”- आधार रेखाक व'ता @ारिUभक गुIत कालिहसँ पुबिरया @ कारमे देखाइ पड़य लागल छल। ६अम शताZदीक यशोधमVन अिभलेखक आधार रेखा वामिदस घुिम गेल आ दिहन िदस टेढ़ भय गेल आ दिहन लUबसँ 1यून कोण बनेलक। “ङ”- िनचुला दिहन िदसुका कोण 1यूनकोण बिन गेल आ लUबवत सोझ रेखा गोलाइ लय लेलक “च”- गुIत कालक दुनू गोलाइ ि!भुज बिन गेल जे “वी” आका र ऊपरमे लेलक, आधार रेखा वा िनचुलका रेखा वाम िदस कने नमगर भय गेल। “छ”- कोनो अ1तर निह। “ज”- पुबिरया @कारमे िनचुलका @ारिUभक गुIत कालिहसँ ?ै ितज आकार Nपq छल आब लUबवत रेखामे सेहो Nपq Lपसँ गोलाइ देखाइ पड़य लागल। िबचुलका नव ?ैितज ओतबी घुिम गेल जतेक िनचुलका आधार रेखा छल। उपरका ?ैितज रेखाक दिहन िदस “वी” आकार जुिड़ गेल। “ञ”- कनेक लटपटौआ “ट”- पछबिरया @कारसँ बेस अ1तर आिब गेल। खुजल गोलाइ आ “वी” आकृित ओिह गोलाइक उपरका भाग पर ?ैितज Lपमे रािख देल गेल। “घ”- आधार रेखाक गोलाइ @ारिUभक गुIत कालक पुबिरया @का रमे देखाइ पड़य लागल छल, आब ई तीन फ^ड़बला “य” सन बिन गेल।

“ठ”- पूवVकालक मौयV @कार अखनो @युAत होइत रहल। “ड”- दूटा छोट गोलाइ बिन गेल। “ढ”- कोण गोलाइ लय लेलक। “ण”- आधार रेखा टेढ़ भय गेल आ ओ िनचुलका भागक दिहन िदस 1यून कोण बनेलक आ वाम नोकशी नमगर भय गेल। “त”- गुIत कालिहमे दिहन अंगक िनचुलका भाग नमगर भय गेल रहय, ई कने गोलाइ लय लेलक आ एकटा “वी” आकार ऊपरमे बिन गेल। “थ”- उपरका भाग चकराइ लय लेलक। “ध”- छोट चाप अ‚V-वृh मे बदिल गेल। “न”- @ारिUभक गुप कालक गोलाइ बला Lप बदिल कय आधुिनक न ागरी Lप लय लेलक। गोलाइ मुƒय भागसँ फराक भय गेल आ मुƒय भागसँ एकटा छोट ?ैितज रेखासँ िमिल गेल आ कने छोट सेहो भय गेल। “प”- कनेक आर बेशी लटपटौआ आकार लेलक आ 1यून कोण आर Nपq भय गेल। “ब”- “ब” केर Nथान “व” लय लेलक। “भ”- “भ” आ “ह” केर बीच अ1तर खतम भय गेल, पछबिरया @का र मे ई पिहनिहये भय गेल छल। “म”- 1यून कोण आर तीण भय गेल आ तकर पिरणाम भेल जे दिहना अंग नीचR िदस बिढ़ गेल। “य”- “य” दू @कारक, पिहल दू फ^ड़बला, एकर िनचुलका हीसम े 1यूनकोण बनैत अिछ आ दोसर @कारमे 1यूनकोण ओतेक Nपq निह अिछ मुदा दिहन भागक अंग नीचR िदस नमगर भऽ गेल अिछ। “र”- िनचुलका छोरपर “वी” वा तीरक आकृितक जे पिहलु„ा अ िभलेख सभक पछबिरया @कारमे सेहो छल। ई “ड” केर छोट Lपसँ िमलानी खाइत अिछ। “ल” दू @कारक अिछ। पिहल @कारमे वाम अंगक व' वा नोकशी नीचR िदस नमगर भेल अिछ आ सभसँ नीचR जा कय किनये बाहर िदस व' Lप लैत अिछ । दोसर @कारमे वाम अंगक व'पर नोकशी अिछ जे नमगर भऽ कऽ नीचR जेबाक बदला आ1तिरक आकार लैत अिछ। ई मोटा-मोटी आजुक ितरहुता आ देवनागरी सन भऽ जाइत अिछ।

“व”- एतय ओही तरहक पिरवतVन देखा पड़ैत अिछ जेना “ख” के र आधारमे ि!भुज बनैत अिछ। ि!भुजक दुनू भुजा व' बिन जाइत अिछ, तेसर नमगर भऽ जाइत अिछ। अ?र ऊपर “वी” आकार बनैत अिछ। “श”- अ?रक उपरका भाग पूवV गुIत कालमे व' छल, आब जा कऽ उपरका भाग व'क Lप लैत अिछ, िनचुलका दिहन अंग ऊपर िदस नमगर भेल अिछ। “ष”- ई तीन @कारक अिछ- पिहल @कारमे Lप वि'त अिछ, दोसर @कारमे व' फॲक “वी” आकृितक Lप लैत अिछ, तेसर @कारमे “वी” आकृितक उपरका भा ग फराक भऽ जाइत अिछ आ “वी” आकृित निह रिह जाइत अिछ (ई @कार भेटैत अिछ ६अम सँ ९अम शताZदीक उhर-पूव5 अिभलेख सभमे)। “ह”- अ?रक दिहन अंगमे व' आ नोकशीक नमगर होयब आ शीषVपर “वी” आकृित (ढबकल सन) आ अखिन धिरक ?ैितज आधार रेखा कने टेढ़ भऽ जाइत अिछ। आठम शताZदी एिह कालक मुƒय अिभलेख जािहमे ;ा<ीक उhरकालक पुबिरया Lप फराक होइत अिछ- जीिवतगुIत २ केर देव-बानHकV NतUभ लेख, धमVपालक खलीलपु र अनुदान प! आ धमVपालक समयक बोधगया आकृित अिभलेख। मुƒय िब1दु अिछ। Nवर- कोनो पिरवतVन निह भेल। क, ग, च, ज, ट, ठ, ड, द, ध, न, भ, म, य, ह- कोनो पिरवतVन निह भेल। ण- दिहन व' वा नोकशी नीचR िदस नमगर भेल। त- नीचR िदस नमगर भऽ गेल, िनचुलका छोरपर ब£ड छोट व'। “थ”- “वी” आकृितक छोरक नमगर भेलासँ उपरका भाग चकरगर भेल। “प” दू @कारक- पुरनका Lप जािहमे 1यूनकोण अखनो Nपq अिछ । नवका Lपमे 1यूनकोण उपिNथत तँ अिछ मुदा Nपq निह अिछ आ एकर Nथान नीचR िदसुका दिहन लUब रेखा लऽ लेने अिछ। “ल”- 1यूनकोण ब£ड छोट भऽ गेल अिछआ दिहन लUब रेखा नीचR िदस चल गेल अिछ। “श”- ई दू @कारक अिछ। पूवV Lप व' संग अिछ। बादक Lप ९अम शताZदीक िदघवा-दुभौली अनुदान सन अिछ।

“ष”- वाम अंगक िनचुलका भाग लटपटौआ अिछ आ वाम भागक लUब सँ आगR चिल जाइत अिछ। अफसड़ अिभलेखमे सभ ठाम द1त “स” केर @योग भेल अिछ।

धमVपालक बोधगया अिभलेख “श” तीन @कारक अिछ- पिहल @ाचीन Lप जािहमे उपरका भाग गोलाइ लेने अिछ। बादक Lप िबन डˆटाक अिछ। एकटा िबचुलका Lप अिछ जािहमे डˆटा सन आकृित छै, मुदा ओ 1यूनकोणक^ दि?ण उKवHधर रेखाक बदलामे नीचRमे छुबैत अिछ। “ज” मे उपरका ?ैितज रेखा िबला जाइत अिछ आ “वी”आकृित ओकर बदलामे आिब जाइत अिछ। िबचुलका ?ैितज रेखा एकटा व' अिछ। “न” दू @कारक- पुरनका @कार फानी सन छल। आब ई गुIत आ ितरहुताक बीचबला आकार लऽ लैत अिछ। “ण”- आधार रेखा िबला जाइत अिछ। “ह”- िनचुलका िदसुका 1यूणकोण बेसी Nपq भऽ जाइत अिछ। धमVपालक बाद देवपालक अ1तगVत ितरहुत @देश रहल। मुदा तकर बाद गुजVर-@ितहार साट ितरहुत छीिन लेलिन, िबTहपाल -१ आ नारायणपाल क शासनकालमे। ;ा<ीक परवत5 पुबिरया @कार (९अम शताZदी सी.ई.) एिह सभमे ई सभ मुƒय @कार अिछ: १.देवपालक मुंगेर अनुदान प! २.देवपालक समयक घोसरवा अिभलेख ३.नारायणपालक बादल NतUभ अिभलेख ४.नारायणपालक िव]णुपाद मि1दर अिभलेख ५.नारायणपालक भागलपुर अनुदानप! ६.महे12पालक िदघवा-दुभौली अनुदान-प!

७.महे12पालक रामा…ा अिभलेख

घोसरवा अिभलेख अ/आ- उपरका भाग अखनो पूणV Lपसँ िवकिसत निह भेल अिछ। इ- दूटा वृh वा िब1दु ऊपरमे आ काटबला व' नीचRमे। ई-समकोण ि!भुजक Lप लऽ लेने अिछ। ख- अखनो वाम अंगक नीचR िदस “वी” आकृित लेनिहये अिछ। च- चकराइ बिढ़ गेल। ज- पुरातन Lप- िबचुलका ?ैितज रेखा कने नीचR िदस टेढ़ भेल आ िनचुलका ?ैितज रेखा एकटा छोट व'मे खतम होइत अिछ। ट/ ठ केर दिहन अंग निह देखाइ पड़ैत अिछ। ण- आधार रेखा पूरा-पूरी खतम भऽ गेल। थ- उपरका भाग चाकर भऽ गेल। द/ ध- िनचुलका रेखा नीचR िदस व' भऽ गेल अिछ। न- फानी सन पूर गुIत काल आ ितरहुताक बीचक Lप। फानी अ?रक मुƒय अंगसँ िवलग भऽ गेल। प- पुरातनLप नीचा िदस कोनो व'ता निह। एकटा अिधक कोण आ एकटा नूनकोण बदलामे िनचुलका भागमे दूटा समकोण बिन जाइत अिछ। भ-नीचR िदस टेढ़ म- फानी अखनो निह बनल अिछ। य- 1यूनकोण चपा गेल अिछ आ ितरहुता NवLप @ाIत कऽ लेने अिछ। ल- आधाररेखा पूरा-पूरी दिब गेल अिछ। व- 1यूनकोणक बदलामे दिहन उKवHधर सोझ रेखाक नमगर Lप आिब गेल।

ष- उपरका रेखा टेढ़ भऽ गेल। स- आधार रेखा फेर ?ैितज भऽ गेल आ उपरका रेखा नीचR िदस टेढ़ भऽ गेल। ह- पुरातन Lप, 1यूनकोण अखनो दोसर िनचुलका रेखा निह बनल अिछ। िव]णुपद मि1दर अिभलेख “इ” दू @कारक- पिहल @कारमे दूटा वृh ऊपरमे आ एकटा कटाव नीचRमे। दोसर @कारमे ऊपरमे एकटा छोट ?ैितज रेखा आ दूटा वृh नीचRमे। “ख” ितरहुताक आकारक Lप लऽ लेने अिछ। “घ” अखनो नीचRमे 1यूनकोण बनेने अिछ। “ट”- दिहन िदसुका उKवHधर सोझ रेखा पूरा-पूरी िबला गेल। “ठ”- अखनो पुरने Lप अिछ। “प”- दू @कारक। पुरनका Lप जतऽ कोण अखनो अिछये। दोसर Lपमे ितरहुताक लटपटौआ Lप। “म”- आधार रेखा िवलुIत भऽ गेल। “श” आ “ष” क Lप फानीबला आ अखुनका Lपक बीचबला Lप लेने अिछ।

नारायणपालक भागलपुर अनुदान अ/ आ- पूरापूरी ितरहुता Lप, एतय धिर जे छोटका रेखा जे दिहना लUब रेखाक अ‚Vिवराम Lपी कटावसँ िमलैत अिछ, नीचR िदस टेढ़ भेल अिछ। “उ”- एिहमे एकटा उपरका रेखा बनैत अिछ आ लUबLपी रेखावाम िदस व' भऽ जाइत अिछ। “क” केर ि!भुज चाकर भऽ गेल अिछ। “ख” ितरहुता सन लटपटौआ भऽ गेल अिछ। “घ” मे 1यूनकोण खतम भऽ गेल आ ितरहुता केर आकार लऽ लेलक अिछ। “च”- उपरका भाग पातर भऽ गेल अिछ।

“ज”- िबचुलका ?ैितज भाग दू टा सोझ रेखामे बदिल गेल अिछ आ अिधककोण बनबैत अिछ। “ट”- उपरका रेखाक दिहन छोरसँ नीचR िदस छोटका रेखा जाइत अिछ। “ण”- ितरहुता @ाचीन Lप। दूटा छोट रेखा लUब सोझ रेखाक वाम िदस जा कऽ िमलैत अिछ। “त”- ई बदिल गेल अिछ, एिहमे एकटा उपरका रेखा आ एकटा लUब रेखा समकोण पर अिछ संगिह एकटा व' लUब रेखाक वाम िदस जुिड़ गेल अिछ, जेना नागरीमे अिछ। “थ”- ितरहुता सन उपरका व' खुिज गेल अिछ। “ध”- उपरा भाग खुिज गेल अिछ। “न”- पुरातन फानीबला Lप, फानी नीचR िदस झुकल। “प”- उपरका िदस पातर भेल। “फ”- उपरका कम चाकर भेल। “म”- सभLप फाने सन। “ल”- अि1तम Lपसँ आधार रेखा थकुचा गेल अिछ। “श”- सभ @कार फानी सन। “ष”- पुरातन Lप, उपरका आ िनचुलका भाग बराबर, दोसर मे उपरका भाग कम चाकर। @ितहार नरेश महे12पालक िदघवा-दुभौली अनुदान (गोपालगंज ) एिहमे पुबिरया @कारक िवशेषता भेटैत अिछ जेना च पतरा ग ेल, ज लटपटा गेल, थ- ितरहुताक पूवV Lप बुझाइत अिछ, फानीबला “म” अिछ, “श”मे फानी लUब रेखा सँ िमŽझर होइत अिछ, “ष” मे उपरका रेखा नीचR िदस टेढ़ होइत अिछ। ई अनुदान पूब आ पिछमक िमि_त Lप @Nतुत करैत अिछ। १०म शताZदीमे पैघ सााŽय सभ खतम होइत गेल आ त^ अिभलेख ो निहयेक बराबर अिछ। नाल1दा आकृित अिभलेख एिह कालक अिछ जािहमे “भ” केर पुरान Lप द ेखबामे अबैत अिछ। “श” केर परवत5 Lप देखाइत अिछ। बोधगया केर आकृित पर अिभलेखमे सेहो भ केर पुरान Lप भेटैत अिछ आ श केर परवत5 Lप सेहो। ख केर Lप ितरहुता सन अिछ। ितरहुता िलिपक िवकासक अि1तम चरण िकछु िलिप जे अखन धिर निह पढ़ जा सकल अिछ

(१)- हड़Iपा िलिप (२)- अलंकृत ;ा<ी, भारतकसभ भागमे छोट-छोट अिभलेख एिह िलिपमे अिछ, मोटा-मोटी नाम आ हNता?र लेल @युAत होइत छल। (३)- शंख िलिप- एकर अ?र सभ शंख सन अिछ त^ एकर ई नामकरण भेल। ई सेहो मोटा-मोटी नाम आ हNता?र लेल @युAत होइत छल। ( को€ुआ , मुज§फरपुरक अशोक NतUभ (बसाढ़ NतUभ ) मे जे तीनटा अिभलेख भेटल अिछ ओिह मे िकछु अ?र शंख िलिपक सेहो अिछ ।) (४)- ;ा<ी सन एकटा िलिप जे मािटक मोहर सभपर पूवV भारतक च12केतुगढ़ आ तामलुकसँ भेटल्;अ अिछ। (५)- खरो{ी सन दिहनसँ वाम िलखल जायवला एकटा िलिप जे अफगािनNतानसँ भेटल अिछ। ितरहुताक िवकासक अि1तम चरण िकछु अ?र पिहने ितरहुताक Lप लऽ लेलक तँ िकछु कने बाद। िकछु अिभलेखमे िकछु अ?रक @योगे निह भेल। अनुल:नक-५ मे ितरहुता Lपक 'िमक िNथित देखाओल गेल अिछ। कैथी, ितZबती आ देवनागरी िलिप अही तरह^ अपन वतVमान Lपमे आओल जे अनुल: नकमे देखाओल गेल अिछ। िकछु िवnान हषVव‚Vनक बादक समयमे ओकर ितरहुतक मं!ी अजुVन nारा क¡ौज क राजा बनब आ ितZबतक बौ‚ या!ी सभक^ तंग करबाक चचH केने छिथ आ @kयुhरमे ितरहुत पर ितZबतक कZजाक चचH करैत छिथ। आधुिनक िवnान ओिहपर शंका mयAत करैत छिथ। ितZबतक राजनैितक @भुkवपर तँ शंका अिछ मुदा सNकृितक Lपसँ िन¨ त©य ितZबतक वªयानक िमिथलामे उपिNथित देखबैत अिछ। बौ‚ देवी तारा, वारी, समNतीपुर, उTतारा मि1दर, मिहषी, सहरसा। मुसहरिनय डीह- अंधरा ठाढ़ीसँ ३ िकलोमीटर पि–म पNटन गाम लग एकटा ऊंच डीह अिछ। बु‚कालीन एकजिनयR कोठली, बौ‚कालीन मूिhV, पाइ, बhVनक टुकड़ी आ पजेबाक अवशेष एतए अिछ। बु‚कालीन एकजिनयR कोठली नाहर भगवतीपुर भुवनेŒरी मि1दर (मधुबनी) मे सेहो अिछ, @ायः बौ‚ िभ?ु लोकिनक ई तपNया Nथली होयत। फेर बौ‚ िस‚ सरहपाद ज े िलखै छिथ- िसि‚रkथु मइ पढ़मे पिढ़अउ, मˆड िपब1तॲ िबसरउ एमइउ। ओ िसि‚रNतु आ एिह िवचा र िक मRड़ पीने बुि‚ म1द होइत अिछ दुनूक चचV करैत छिथ जािहसँ हुनकर बौ‚ धमVक मैिथल होयब ाक @माण भेटैत अिछ, हुनकर जे फोटो ितZबतसँ भेटैत अिछ ओिहमे हुनकर फोटोक नीचRमे ितZबती िलिपमे वणVन अिछ। ७म शताZदी आ बादक िकछु ितरहुता अिभलेख अ1«ाठाढी अिभलेख (_ीधरदासक आं«ा-ठाढ़ी अिभलेख), मधुबनी, बु‚मूितV अिभलेख (कोथुV), िव]णुमूितV अिभलेख (लदहो), 19म शतीक ;<पुरा िशलालेखमे ितरहुताक आ दशV Lप, मधुबनी िजलाक जमथिर गाम आ ह­ठी बाली गामक बीचक गौरीशंकर Nथान, गौरी आ श®रक सिUमि लत मूिhV आ एिह पर िमिथला?रमे िलखल पालवंशीय अिभलेख, िबदेŒर-मधुबनी िजलामे लोहनारोड Nटेशन लग िNथत िशवधामक Nथापना महाराज माधविसंह कएलि1ह, तािह युगक ितरहुताक अिभलेख। मंदार पवV त-बका िNथत Nथलमे ितरहुताक गुIतवंशीय

७म् शताZदीक अिभलेख अिछ। पौरािणक कथामे समु2 मंथनक हेत ु मंदारक @योग भेल छल। िनकटमे बॱसीमे जैनक बारहम तीथVंकर वासुपूŽय नाथक दूटा मूिhV अिछ, पैघ मूितV लाल पाथरक अिछ तँ दोसर कRसाक जकर सोझR दूटा पदिच1ह अिछ। जैनक बारहम तीथVंकर व ासुपूŽय नाथक ज1म चUपानगरमे आ िनवHण एतिह भेल छलि1ह। बसैटी अिभलेख- पूिणयRमे _ीनगर (िजला अरिरया) लग ितरहुताक ई अिभलेख िमिथलाक पिहल मिहला शासक रानी इ2ावतीक राŽयकालक वणVन करैत अिछ। एकर आधार पर मदनेŒर िम_ ’एक छलीह महारानी ’ उप1यास सेहो िलखने छिथ। बाइसी-बसैटी, अरिरया ितरहुता ताप!- रानी इ12ावती (१७८४-१८०२) जे फूड-फॉर-वकV आ अ1य कuयाणकारी कायVक @ारUभ कएलि1ह केर िमिथला?र अिभलेख एतए एकटा मि1दरक ऊपरमे ता-प!पर कीिलत अिछ, जे कारी रंग सँ पvट कऽ देल गेल अिछ आ िशलालेख सन लगैत अिछ। जलज कुमार ितवारी आ एस. कृ]णामूितV २०१९ ई.मे @कािशत अपन आलेखमे िन¨ ितरहुता अिभलेख सभक वणVन दैत छिथ जे अखन धिर कोनो पोथीमे निह आयल छल। चेचर गाम (वैशाली) मे बु‚ मूितVपर अिभलेख भेटल अिछ जे ितरहुता िलिप आ संNकृतमे अिछ (९अम शताZदी)। तारा मूितV, जगतपुर ब†आरी (सुपौल) जे सहरसा Uयूिजयममे राखल अिछ, ितरहुता िलिप आ संNकृत भाषाक अिभलेख एततसँ भेटल अिछ (१० म शताZदीक)। तारा मूितV, दभैछा (वैशाली) मे ितरहु ता िलिप आ संNकृत भाषाक अिभलेख भेटल अिछ (१० म शताZदीक)। िपपरौिलया िव]णु आकृित (मूितV), दरभंगा, ितरहुता िलिप. संNकृत भाषा (१०म शताZदी)। गाम- भछी (बहेरी लगक िजला दरभंगा, मधुबनीक भछीसँ िभ¡ ), ितरहुता िलिप, संNकृत भाषा (१०म-११म शताZदी)। कˆदाहा (सहरसा) क पाथर अिभलेख, ओइनवार कालक राजा नरिसUहदेवक आदेशसँ वंशधर ;ा<ण nारा (ितरहुता १५मशताZदी, भाषा संNकृत)। मनसा आकृ ित (भैरवNथान, मुज§फरपुर)- ितरहुता िलिप आ संNकृत भाषामे िलखल अिभलेख (१५ म शताZदी)। बु‚ मूितV , कोथुV दरभंगा, ितरहुता िलिप, संNकृत भाषा (१०म शताZदी)। एकर अितिरAत ओ पिहल शताZदीक एकटा ;ा<ी अिभलेखक चचV सेहो करैत छिथ [गाम पखौली िजला वैशाली (NतUभ अिभलेख) (;ा<ी िलिप, पि हल शताZदी)]। तीनटा अशोक NतUभपर, जे को€ुआ (मुज§फरपुर)मे भेटल अिछ, बादमे िकयो अिभलेख खिच त केने छिथ। ओिहमे दूटा अिभलेख ७म शताZदीक अिछ जे नागरी िलिप आ संNकृत भाषामे अिछ आ तेसर ५म शताZदीक अिछ जे संNकृत भाषामे आ ;ा<ी िलिपमे अिछ। को€ुआ, मुज§फरपुरक अशोक NतUभ (बसा ढ़ NतUभ) मे जे तीनटा अिभलेख भेटल अिछ ओिह मे िकछु अ?र शंख िलिपक सेहो अिछ, जे अखन धिर न िह पढ़ल जा सकल अिछ। ( जलज कुमार ितवारी, एस. कृ]णामूितV, िमिथला भारती, भाग-६, अंक १-४, २०१९ ई.) मा1दा अिभलेख, कमौली दानप! (िव4ादेव कमौली @शिNत), गद ाधर मि1दर अिभलेख (गदाधर मठ गया), गंजम ताप!, लोकनाथक दानप!, भागलपुर, मुंगेर आ ना ल1दाक दानप!, बादल NतUभ अिभलेख, िवŒLप सेनक मदनपाद दानप!, अशोकाचलक बोधगया अिभलेख, वu लालसेनक नैहाटी अिभलेख, ढाका अिभलेख (ढाका मूितV अिभलेख), देवपारा @शिNत, अनुिलया आ सािहkय पिरषद दानप!, भुवनेŒर, सु1दरवन, वेलवा आ बोधगया अिभलेख 'मसँ देवनागरी आ ितरहुताक बीचमे फRक आिन देलक। उपसंहार

तेसर शताZदी ई.पू. मौयV, दोसर आ पिहल शताZदी ई. पू. श ुंग, पिहल सँ तेसर शताZदी शक/ कुषाण, चािरमसँ छअम शताZदी- गुIत, सातमसँ ९अम शताZदी िस‚मातृका आ तकर बाद ितरहुता, एिह 'ममे ितरहुताक िवकास हम देिख सकैत छी। तं!क योगदानसँ आ ितZब ती िलिपक @भावसँ ितरहुता अलंकृत भेल। िमिथला?रक उ/व आ िवकास मे राजेŒर झा जी िकछु पुर ातन त©यसँ अपनाक^ दूर निह कऽ सकला, जेना ओ निह फिरछा सकला जे ;<ी पूवV पािणनी mयाकरणाचाय V लोकिन nारा @युAत होइत छल आ पािणनीक mयाकरणमे ओ अशु‚ भऽ गेल आ तखनसँ एकर नाम ;ा<ी भऽ गेल। ओ ;ा<ण लोकिन nारा @युAत हेबाक कारणे ;<ी नाम भेलपर िजिदयायल छिथ। हुनकर अवधारणा जे वैदेही िलिपसँ ;ा<ी (जकरा ओ ;<ी िलखै छिथ) बहरायल सेहो ”ामक अिछ। िमिथलामे शंख िलिपमे सेहो छोट-छीन अिभलेख भेटल अिछ, जकर वणVन ऊपर कयल गेल अिछ, जे हड़Iपा िलिप जेकR पढ़ल निह जा सकल अिछ आ ;ा<ीमे सेहो अिभलेख भेटल अिछ, से हुनकर कथन जे सोझे हड़Iपासँ लोक िवदेह आयल िवद ेघ माथवक संग (शतपथ ;ा<ण) आ एतऽ वैदेही िलिप शुL कऽ देलक, से मा1य निह अिछ। से सगर भार तमे जे परUपरा छल जे ;ा<ीमे पैघ अिभलेख िलखल जाइत छल आ नाम आ हNता?र लेल शंख िलिपक @यो ग कएल जाइत छल से िमिथलोमे भेटल अिछ। राजेŒर झा तं!-िस‚त आ एकर ितरहुता िलिपपर @भावक सेहो जLरित सँ बेशी @भाव देखेने छिथ, जखन िक ओकर @भाव िकछु सोझे आ िकछु ितZबती िलिपक माKयमसँ पड़ल मुदा ओ ओिहसँ अलंकृत मा! भेल। हुनकर ई कथन जे शZदकuप2ुममे देल िलखबाक प‚ितसँ ब:ला िलिप निह वरन् मा! िमिथला?र (ितरहुता) िलखल जा सकैत अिछ, सेहो ”ामक अिछ। ब:ला वा िमिथला?र वा ितZबती वा देवनागरी सभ ;ा<ीपर आधािरत अिछ आ ई एिह तरह^ बूझल सा सकैत अिछ जे रोमन िलिपमे एकसँ एक फॉˆट छै जे कखनो अहRक^ अरबी सन बुझायत कखनो लटपटौआ, आ सभ एक दोसरामे पिरवतVनीय अिछ। शZदकuप2ुममे देल िविध ितरहुते निह ब:लो लेल उपयुAत छल, छापाखाना एलाक बाद जेना रोमन पूणV Lपसँ संयुAता?र खतम कऽ लेलक तिहना ब:ला बहुत रास संयुAता?रक^ खतम कऽ ल ेलक। आ ओिह नवका Lपक^ राजेŒर झा जी शZदकuप2ुमसँ जोड़बाक गलती केलि1ह। राजेŒर झाक^ ख रो{ी िलिपक सUब1धमे सेहो ”म छि1ह। खरो{ी दिहनसँ वाम िदस िलखल जाइत अिछ मुदा ई पूणV Lपसँ भारतीय िलिप छल, वएह Nवर mयंजन (कचटतप)। ;ा<ीसँ िकछु चे1ह कम भेलाक कारण, जखन अिभलेख @ाकृतसँ संNकृतमे िलखल जाय लागल, खरो{ी संNकृतक समासयुAत अिभलेखक लेखन लेल अनुपयु Aत भऽ गेल आ खतम भऽ गेल आ कोनो भारतीय िलप एिहसँ बहार निह भऽ सकल। आधुिनक ितरहुताक Lपक िवकास नारायणपालक भागलपुर दानप!, _ीच12 रामपालक दानप!, मिहपाल @थमक वनगढ़ दानप!, भोजवमVनक वेलवा दानप!, लमणसेनक तपV ण िनिध दानप! सँ िवकिसत होइत प?धर िम_ कृत िव]णुपुराण आ १३२६ ई. सँ @ाIत मैिथल ;ा< ण आ कणV कायNथक पšीमे आिब कऽ समाIत भऽ जाइत अिछ। जे िकछु छोट-मोट पिरवतVन लेखकक mयि Aतगत लेखनीक कारण छल से छापाखाना एलाक बाद खतम भेल। तकरा बाद कUIयूटर फॉˆटमे एकLपता आिब गेल आ से सUभव भेल देवनागरी यूनीकोड (मंगल), ब:ला यूनीकोड (वृ1दा) आ तखन ितरहुता यूनीकोडक^ आधार बनेलासँ। छापाखानामे िद„ित रहै, जे िकछु Lपक^ ओतय छोड़य पड़ैत छल ै, आ घॲघाउज होइत छल जे एिह ितरहुताक^ सीिख कऽ पाˆडुिलिप निह पढ़ल जा सकैए। कUIयू टरमे ए„े आधारपर िविभ¡ फॉˆटक िनमHण

भेलासँ िविभ¡ फॉˆट िविभ¡ तरहक लेखन Lपक^ अंिकत करैत अि छ आ ओ सभ आपसमे पिरवतVनीय होइत अिछ। से सभ १३२६ ई. क बादक सभ तरहक पिरवतVन (संयुAता?र सिहत), जे पिरवतVन निह वरन् लेखनक िविभ¡ Nटाइल छल, क समावेश आब सUभव भऽ गेल अिछ। अनुल:नक १: कैथी िलिपमे मैिथलीक िकछु उदाहरण (साभार जीनोम मैिपंग आ जीिनयोलोिजकल मैिपंग, िमिथलाक पšी @ब1ध भाग-१ आ २ , _ुित @काशन, २००८, २००९) अनुल:नक २: िमिथलाक कणV कायNथक ितरहुता िलिपमे िलखल िकछु पात (साभार मैिथल करण कायNथक पRिजक सव8?ण- मेजर िवनोद िबहारी वमH, १९७३) अनुल:नक ३: लनV िमिथला?र- गजे12 ठाकुर अनुल:नक ४: देवनागरी: ितZबती: ितरहुता अनुल:नक ५: ;ा<ीसँ ितरहुता धिर िलिपक िवकास [अनुल:नक एिह 'ममे देल अिछ , अनुल:नक -४ (एक प¡ा) फेर अनुल:नक -५ आ तकरा बाद अनुल:नक - १-२-३]

Learn Mithilakshara

Learn Mithilakshara

GAJENDRA THAKUR

/g257ुित /g262काशन िद/g298 ली

Ist edition 2009 of Learn Mithilakshara

author Gajendra Thakur

published by SHRUTI PUBLICATION 21/8, Ground Floor, New Rajendra Nagar, New Delhi-110008 Tel.: (011) 25889656-58 Fax: 011-25889657

ISBN : 978-93-80538-55-6

No part of this publication may be reproduced, stored in a retrieval system or transmitted in any form or by any means- photographic, electronic or mechanical including photo- copying, recording, taping or information storage-w ithout the prior permission in writing of the copyright ow ner or as expressly permitted by law . You must not circulate this book in any other binding or cover and you must impose this same condition on any acquirer.

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Mithilakshara

The following alphabets exist in MithilakShara (devanagari followe d by MithilakShara) Vo we l s Devanagari MithilakShara अ /dA आ /dAa इ /dI ई /dIi उ /dU ऊ /dUu ए /dE ऐ /dAi ओ /dO औ /dAu अं /dA/dAnusvara अः /dA/dVisarga अँ /dA/dCandrabindu ऋ /dVocalicR ॐ /dOm Co n s o n a n t s क /dKa

ख /dKha ग /dGa घ /dGha ङ /dNga च /dCa छ /dCha ज /dJa झ /dJha ञ /dNya ट /dTta ठ /dTtha ड /dDda ढ /dDdha ण /dNna त /dTa थ /dTha द /dDa ध /dDha न /dNa प /dPa फ /dPha ब /dBa भ /dBha

म /dMa य /dYa र /dRa ल /dLa व /dVa श /dSha ष /dSsa स /dSa ह /dHa /g्ॢैाज63 /dKss /g्ॢैाझ88 /dTRa /g्ॢैाज67 /dJny Nu k t a Co n s o n a n t s

य़ /bn_yya ड़ /Rra ढ़ /Rha

Co n s o n a n t s wi t h M a t r a

क /dKa का /dKa/dMatraAa

/g्ॢैा873क /dMatraI/dKa क/g्ॢैा566 /dKa/dMatraIi कु /dKMatraU कू /dKa/dMatraUu के /dKMatraE कै /dKMatraAi को /dKMatraO कौ /dKMatraAu कं /dKa /dAnusvara कः /dKa/dVisarga कँ /dKa /dCandrabindu कॉ /dKa◌ॉ कॅ /dKa◌ॅ कृ /dKMatraVocalicR /g्ॢैाझ73 /dKRa

SOME COMPLEX ALPHABETS in MithilakShara Devanagari Mithilakshara /g्ॢैाझ0ज/g्ॢैाझज6य /dKTYa /g्ॢैाझ0ज/g्ॢैाझ88 /dKTRa /g्ॢैाझज6क /dTKa /g्ॢैाझझ0य /dNYa /g्ॢैाझझ8व /dLVa

/g्ॢैाझ3जच /dShCa /g्ॢैाझ73 /dKRa /g्ॢैा303 /dShRa /g्ॢैाझ93 /dPRa /g्ॢैाझझ8व /dLVa क/g्ॢैाजज0 /dKa/dReph त् /dTa/dHalant /g्ॢैाझज6य /dTYa /g्ॢैाझज6/g्ॢैाझज6य /dTTYa /g्ॢैा6ज7/g्ॢैाझ0जय /dNgKYa /g्ॢैाझज6/g्ॢैाझज6व /dT.half/dTVa सु /dSMatraU यु /dYMatraU ग/g्ॢैाजज0 /dGaReph क/g्ॢैाजज0 /dKa/dReph /g्ॢैाझ3झट /dSsTta मु /ma_ukaar (/dMMatraU) हु /h_ukaar (/dHa/dMatraU) खु /dKha/dMatraU घु /dGha/dMatraU चु /dCa/dMatraU छु /dChMatraU टु /dTta/dMatraU

ठु /dTtha/dMatraU थु /dTha/dMatraU बु /dBa/dMatraU भु /dBhMatraU गु /dGMatraU जु /dJa/dMatraU दु /dDa/dMatraU नु /dNMatraU पु /dPMatraU भु /dBhMatraU यु /dYMatraU लु /dLMatraU शु /dShMatraU सु /dSMatraU कु /dKMatraU णु /dNnMatraU तु /dTMatraU धु /dDha/dMatraU /g्ॢैा5ज0 /dRMatraU षु /dSsMatraU हु /h_ukaar (/dHa/dMatraU) /g्ॢैाझ88ु /dTRa/dMatraU कू /dKa/dMatraUu

चू /dCa/dMatraUu जू /dJa/dMatraUu दू /dDa/dMatraUu तू /dTa/dMatraUu धू /dDha/dMatraUu भू /dBha/dMatraUu हू /dHMatraUu खृ /dKha /dMatraVocalicR गृ /dGa /dMatraVocalicR जृ /dJa/dMatraVocalicR पृ /dPa /dMatraVocalicR सृ /dSa /dMatraVocalicR कृ /dKMatraVocalicR तृ /dTMatraVocalicR /g्ॢैा507 /dDa /dMatraVocalicR बृ /dBa /dMatraVocalicR भृ /dBhMatraVocalicR /g्ॢैा5जझ /dHMatraVocalicR र /dRa र /asa_ra ब /dBa य /dYa य़ /bn_yya

/g्ॢैाझ0जक /dKKa /g्ॢैाझ0जख /dKKha /g्ॢैाझ0जत /dKTa /g्ॢैाझ0जन /dKNa /g्ॢैाझ0जम /dKMa /g्ॢैाझ0जय /dKYa /g्ॢैाझ73 /dKRa /g्ॢैाझ0जल /dKLa /g्ॢैाझ0जव /dKVa /g्ॢैाझ0जस /dKSa /g्ॢैाझ0झत /dKh.half/dTa /g्ॢैाझ0झय /dKhYa /g्ॢैाझ74 /dKhRa /g्ॢैाझ0झव /dKhVa /g्ॢैाझ03ग /dGGa /g्ॢैाझ03द /dGDa /g्ॢैाझ03ध /dGDha /g्ॢैाझ03न /dGNa /g्ॢैाझ03व /dGVa /g्ॢैाझ75 /dGRa /g्ॢैाझ03ल /dGLa /g्ॢैाझ03य /dGYa /g्ॢैाझ04घ /dGh.half/dGha

/g्ॢैाझ04न /dGhNa /g्ॢैाझ76 /dGhRa /g्ॢैाझ04य /dGhYa /g्ॢैा6ज7क /dNgKa /g्ॢैा6ज7ख /dNgKha /g्ॢैा6ज7ग /dNgGa /g्ॢैा6ज7घ /dNgGha /g्ॢैाझ06च /dCCa /g्ॢैाझ06छ /dCCha /g्ॢैाझ06य /dCYa /g्ॢैाझ06/g्ॢैाझ79 /dC.half/dChRa /g्ॢैाझ06छृ /dCCha/dMatraVocalicR /g्ॢैाझ06/g्ॢैाझ07व /dC.half/dChVa /g्ॢैाझ08ज /dJJa /g्ॢैाझ08झ /dJJha /g्ॢैाझ80 /dJRa /g्ॢैाझ08य /dJYa /g्ॢैाझ08व /dJVa /g्ॢैाझज0च /dNyCa /g्ॢैाझज0छ /dNyCha /g्ॢैाझज0ज /dNyJa /g्ॢैाझज0झ /dNyJha /g्ॢैा864 /dTtTta

/g्ॢैा6ज9य /dTtYa /g्ॢैाझ83 /dTtRa /g्ॢैा866 /dTth.half/dTtha /g्ॢैा6झ0य /dTthYa /g्ॢैा6झजग /dDdGa /g्ॢैा6झजड /dDdDda /g्ॢैाझ85 /dDdRa /g्ॢैा6झझय /dDdhYa /g्ॢैाझज5ट /dNnTta /g्ॢैाझज5ठ /dNnTtha /g्ॢैाझज5ड /dNnDda /g्ॢैाझज5ण /dNnNna /g्ॢैाझज5य /dNnYa /g्ॢैाझज5व /dNnVa /g्ॢैाझज6क /dTKa /g्ॢैाझज6ख /dTKha /g्ॢैाझज6न /dTNa /g्ॢैाझज6प /dTPa /g्ॢैाझज6म /dTMa /g्ॢैाझज6स /dTSa /g्ॢैाझज6त /dTTa /g्ॢैाझज6य /dTYa /g्ॢैाझ88 /dTRa

/g्ॢैाझज6व /dTVa /g्ॢैाझ89 /dThRa /g्ॢैाझज7य /dThYa /g्ॢैाझज7व /dThVa /g्ॢैा6झ3ग /dDGa /g्ॢैा4झ4 /dDDa /g्ॢैा4झ5 /dDDha /g्ॢैा4झ8 /dDBha /g्ॢैा4झ9 /dDMa /g्ॢैा6झ3य /dDYa /g्ॢैाझ90 /dDRa /g्ॢैा6झ3व /dDVa /g्ॢैाझज9य /dDhYa /g्ॢैाझ9ज /dDhRa /g्ॢैाझज9व /dDhVa /g्ॢैाझझ0त /dNTa /g्ॢैाझझ0द /dNDa /g्ॢैाझझ0ध /dNDha /g्ॢैाझझ0न /dNNa /g्ॢैाझझ0य /dNYa /g्ॢैाझझ0व /dNVa /g्ॢैाझझजत /dPTa /g्ॢैाझझजन /dPNa

/g्ॢैाझझजप /dPPa /g्ॢैाझझजय /dPYa /g्ॢैाझ93 /dPRa /g्ॢैाझझजल /dPLa /g्ॢैाझझजव /dPVa /g्ॢैाझझजस /dPSa /g्ॢैाझ94 /dPhRa /g्ॢैाझझझल /dPhLa /g्ॢैाझझ3ज /dBJa /g्ॢैाझझ3द /dBDa /g्ॢैाझझ3ध /dBDha /g्ॢैाझझ3य /dBYa /g्ॢैाझ95 /dBRa /g्ॢैाझझ4य /dBhYa /g्ॢैाझ96 /dBhRa /g्ॢैाझझ4व /dBhVa /g्ॢैाझझ5न /dMNa /g्ॢैाझझ5प /dMPa /g्ॢैाझझ5फ /dMPha /g्ॢैाझझ5ब /dMBa /g्ॢैाझझ5भ /dMBha /g्ॢैाझझ5म /dMMa /g्ॢैाझझ5य /dMYa

/g्ॢैाझ97 /dMRa /g्ॢैाझझ5ल /dMLa /g्ॢैाझझ5व /dMVa /g्ॢैाझझ6य /dYYa /g्ॢैाझझ6व /dYVa क/g्ॢैाजज0 /dKa/dReph ग/g्ॢैाजज0 /dGaReph /g्ॢैाझझ8य /dLYa /g्ॢैाझझ8व /dLVa /g्ॢैाझझ8क /dLKa /g्ॢैाझझ8प /dLPa /g्ॢैाझ30य /dVYa /g्ॢैा30झ /dVRa /g्ॢैाझ30व /dVVa /g्ॢैाझ30ल /dVLa /g्ॢैाझ3जच /dShCa /g्ॢैाझ3जछ /dShCha /g्ॢैाझ3जन /dShNa /g्ॢैाझ3जम /dShMa /g्ॢैाझ3जय /dShYa /g्ॢैा303 /dShRa /g्ॢैाझ3जल /dShLa /g्ॢैाझ3जव /dShVa

/g्ॢैाझ3जश /dShSha /g्ॢैाझ3झक /dSsKa /g्ॢैाझ3झट /dSsTta /g्ॢैाझ3झठ /dSsTtha /g्ॢैाझ3झण /dSsNna /g्ॢैाझ3झप /dSsPa /g्ॢैाझ3झम /dSsMa /g्ॢैाझ3झय /dSsYa /g्ॢैाझ3झव /dSsVa /g्ॢैाझ33क /dSKa /g्ॢैाझ33ख /dSKha /g्ॢैाझ33त /dSTa /g्ॢैाझ33थ /dSTha /g्ॢैाझ33य /dSYa /g्ॢैाझ33ल /dSLa /g्ॢैाझ34न /dHNa /g्ॢैाझ34म /dHMa /g्ॢैाझ34य /dHYa /g्ॢैा306 /dHRa /g्ॢैाझ34ल /dHLa /g्ॢैाझ34व /dHVa /g्ॢैाझ0ज/g्ॢैाझज6य /dKTYa /g्ॢैाझ0ज/g्ॢैाझ88 /dKTRa

/g्ॢैाझज6क /dTKa /g्ॢैा360य /dTR.half/dYa /g्ॢैाझज6/g्ॢैाझ73 /dT.half/dKRa /g्ॢैा6ज7/g्ॢैाझ73 /dNg.half/dKRa /g्ॢैा6ज7/g्ॢैाझ0ज/g्ॢैाझ88 /dNg.half/dKTRa /g्ॢैा6ज7/g्ॢैाझ88 /dNg.half/dTRa /g्ॢैा6ज7/g्ॢैाझ0जय /dNgKYa /g्ॢैा6ज7/g्ॢैाझ0झय /dNg.half/dKhYa /g्ॢैा6ज7/g्ॢैाझ03य /dNgGYa /g्ॢैा6ज7/g्ॢैाझ75 /dNg.half/dGRa /g्ॢैा6ज7/g्ॢैाझ76 /dNg.half/dGhRa /g्ॢैा6ज7/g्ॢैाझ04य /dNg.half/dGhYa /g्ॢैाझ06/g्ॢैाझ07य /dCChYa /g्ॢैाझ06/g्ॢैाझ79 /dC.half/dChRa /g्ॢैाझ06/g्ॢैाझ07व /dC.half/dChVa /g्ॢैाझज5/g्ॢैाझ85 /dNn.half/dDdRa /g्ॢैाझज5/g्ॢैा6झजय /dNnDdYa /g्ॢैाझज5/g्ॢैा6झजव /dNnDdVa /g्ॢैाझज6/g्ॢैाझझ5य /dTMYa /g्ॢैा360य /dTR.half/dYa /g्ॢैाझज6/g्ॢैाझज6य /dTTYa /g्ॢैा6झ3/g्ॢैाझज9य /dDDhYa /g्ॢैा6झ3/g्ॢैाझ9ज /dD.half/dDhRa

/g्ॢैा6झ3/g्ॢैाझझ4य /dDBhYa /g्ॢैा6झ3/g्ॢैाझ96 /dD.half/dBhRa /g्ॢैाझझ0/g्ॢैाझ88 /dN.half/dTRa /g्ॢैाझझ0/g्ॢैाझज6य /dNTYa /g्ॢैाझझ0/g्ॢैाझज6व /dN.half/dTVa /g्ॢैाझझ0/g्ॢैा6झ3य /dNDYa /g्ॢैाझझ0/g्ॢैाझज9य /dN.half/dDhYa /g्ॢैाझझ3/g्ॢैाझज9य /dBDhYa /g्ॢैाझझ3/g्ॢैाझज9व /dBDhVa /g्ॢैाझझ5/g्ॢैाझझ4य /dMBhYa /g्ॢैाझज6य/g्ॢैाजज0 /dTYa/dReph /g्ॢैाझ33/g्ॢैाझज6य /dS.half/dTYa /g्ॢैाझज6/g्ॢैाझ33य /dT.half/dSYa /g्ॢैाझ33/g्ॢैाझ88 /dS.half/dTRa /g्ॢैाझज6/g्ॢैाझ33न /dT.half/dSNa /g्ॢैाझ33/g्ॢैाझज7य /dSThYa /g्ॢैाझ0ज/g्ॢैा360य /dK.half/dTR.half/dYa /g्ॢैा6झ3/g्ॢैाजज0/g्ॢैाझज9व /dDDhVa/dReph /g्ॢैाझझ5/g्ॢैाझझ5य/g्ॢैाजज0 /dM.half/dMYa/dReph /g्ॢैाझ35ण /dKSs.half/dNna /g्ॢैाझ35म /dKSsMa /g्ॢैाझ35य /dKSsYa /g्ॢैाझ35व /dKSsVa

/g्ॢैाझ3ज/g्ॢैाझ06य /dSh.half/dCYa /g्ॢैाझ3झ/g्ॢैाझ93 /dSs.half/dPRa /g्ॢैाझ3झ/g्ॢैाझ83 /dSs.half/dTtRa /g्ॢैाझ3झ/g्ॢैा6झ0यू /dSs.half/dTthYa/dMatraUu मु /ma_ukaar (/dMMatraU) हु /h_ukaar (/dHa/dMatraU) ड़ /Rra /g्ॢैा875ड़ /ikaar/Rra ड़ी /Rra/iikaar ड़ै /aikaar/Rra ढ़ /Rha /g्ॢैा466ढ़

/ikaar/Rha ढ़/g्ॢैा548 /Rha/iikaar ढ़ै /aikaar/Rha कॉ /dKa◌ॉ डॉ /dDda◌ॉ ऋ /bn_ri ॠ /bn_rri ऌ /bn_li ॡ /bn_lli क़ /bn_ka/bn_nukta ख़ /bn_kha/bn_nukta

ग़ /bn_ga/bn_nukta ज़ /bn_ja /bn_nukta फ़ /bn_pha/bn_nukta

Co n j u n c t s

द + halant + द /g्ॢैा4झ4 द + halant + ध /g्ॢैा4झ5

द + halant + व /g्ॢैा6झ3व

द + halant + म /g्ॢैा4झ9

द + halant + य /g्ॢैा6झ3य

/dDa + h a l a n t + /dDa /dDDa /dDa + h a l a n t + /dDha /dDDha

/dDa + h a l a n t + /dVa /dDVa

/dDa + h a l a n t + /dMa /dDMa

/dDa + h a l a n t + /dYa

द + halant + ब /g्ॢैा6झ3ब

द + halant + न /g्ॢैा6झ3न

द + halant + ग /g्ॢैा6झ3ग

द + halant + घ /g्ॢैा6झ3घ ह + halant + म /g्ॢैाझ34म

ह + halant + ल /g्ॢैाझ34ल

ह + halant + व /g्ॢैाझ34व

ह + halant + न /g्ॢैाझ34न /dDYa /dDa + h a l a n t + /dBa /dDBa

/dDa + h a l a n t + /dNa /dD.half/dNa /dDa + h a l a n t + /dGa /dDGa /dDa + h a l a n t + /dGha /dDGha /dHa + h a l a n t + /dMa /dHMa

/dHa + h a l a n t + /dLa /dHLa

/dHa + h a l a n t + /dVa /dHVa

/dHa + h a l a n t + /dNa /dHNa

ह + halant + य /g्ॢैाझ34य

ष + halant + ट /g्ॢैाझ3झट

ष + halant + ठ /g्ॢैाझ3झठ

त + halant + त /g्ॢैाझज6त

क + halant + त /g्ॢैाझ0जत

श + halant + च /g्ॢैाझ3जच

श + halant + व /g्ॢैाझ3जव

श + halant + र /g्ॢैा303

/dHa + h a l a n t + /dYa /dHYa

/dSsa + h a l a n t + /dTta /dSsTta

/dSsa + h a l a n t + /dTtha /dSsTtha

/dTa + h a l a n t + /dTa /dTTa

/dKa + h a l a n t + /dTa /dKTa

/dSha + h a l a n t + /dCa /dShCa

/dSha + h a l a n t + /dVa /dShVa

/dSha + h a l a n t + /dRa /dShRa

ऽ (avagraha ) ॐ

/dAvagraha (a v a g r a h a ) /dOm

Punctuation/ Quotation Marks: The English symbols [ ] { } ( ) - + * / = /dDanda ; : . , " ? ! % \ ~ _ ` ' translate into the same symbols Marks.

PRACTISE AGAIN AND AGAIN: Vo we l : Devanagari followed by MithilakShara:- अ , आ , इ , ई , उ , ऊ , ऋ , ॠ , ऌ , ॡ , ए , ऐ , ओ , औ

/dA , /dAa , /dI , /dIi , /dU , /dUu , /ri , /rri , /li , /lli , /dE , /dAi , /dO , /dAu Co n s o n a n t s: Devanagari followed by MithilakShara:-

क , ख , ग , घ , ङ /dKa , /dKha , /dGa , /dGha , /dNga

च , छ, ज, झ, ञ /dCa , /dCha, /dJa, /dJha, /dNya

ट , ठ, ड, ढ, ण /dTta , /dTtha, /dDda, /dDdha, /dNna

त , थ, द, ध , न /dTa , /dTha, /dDa, /dDha , /dNa

प , फ , ब , भ , म /dPa , /dPha , /dBa , /dBha , /dMa

य , र, ल , व , श , ष , स , ह /dYa , /dRa, /dLa , /dVa , /dSha , /dSsa , /dSa , /dHa

क का /g्ॢैा873क क/g्ॢैा566 कु कू कृ कॄ /g्ॢैाझ0जलृ /g्ॢैाझ0जलॄ कॅ के कॆ कै

कॉ को कॊ कौ कं कः /dKa /dKa/dMatraAa /dMatraI/dKa /dKa/dMatraIi /dKMatraU /dKa/dMatraUu /dKMatraVocalicR /dKa ◌ॄ /dKLa/dMatraVocalicR /dKLa◌ॄ /dKa◌ॅ /dKMatraE /dKa ◌ॆ /dKMatraAi /dKa◌ॉ /dKMatraO /dKa ◌ॊ /dKMatraAu /dKa /dAnusvara /dKa/dVisarga

◌॒ a n u d a t t a ( ) ◌॑ u d a t t a ( ) ◌॓ s wa r i t a ( ) /base/dCandrabindu (chandrabindu) /base/dAnusvara (anusvara) /base/dVisarga (visarga) /dAvagraha (a v a g r a h a )/dOm(au m) /dShRa/dMatraIi ( shree) ◌़ ( n u k t a )

अ आ इ ई उ ऊ ए ऐ ओ औ अं अः अँ आँ ऋ ॠ ॡ ष स ह /g्ॢैाज63 /g्ॢैाज67 ड़ /dA /dAa /dI /dIi /dU /dUu /dE /dAi /dO /dAu /dA/dAnusvara /dA/dVisarga /dA/dCandrabindu /dAa/dCandrabindu /ri , /rri , /li , /lli /dSsa /dSa /dHa /dKss /dJny /dDda◌़

म् म मा /g्ॢैा87जम मी मु मू मे मै मो मौ मं मः /g्ॢैाझ97 /g्ॢैाझझ7 म म/g्ॢैाजज0 मॅ

मॉ मँ माँ मृ मॄ मॢ मॣ म॑ म॒ म॓ म॔ /g्ॢैाज9ज ळ

/dMa /dHalant /dMa /dMa/dMatraAa /dMatraI/dMa /dMa/dMatraIi /ma_ukaar (/dMMatraU) /dMa/dMatraUu /dMMatraE /dMMatraAi /dMMatraO /dMMatraAu /dMa /dAnusvara /dMa/dVisarga /dMRa /dRa /dHalant /dMa /dMa /dReph /dMa◌ॅ /dMa◌ॉ /dMa /dCandrabindu /dMa/dMatraAa /dCandrabindu /dMa /dMatraVocalicR /dMa ◌ॄ /dMa◌ॢ /dMa◌ॣ /dMa◌॑ /dMa◌॒ /dMa◌॓ /dMa◌॔ /dMa◌़ ळ

u d a a t t a ( ): ◌॒ ( a n u d a a t t a ): ◌॓ ( g r a v e ): ◌॔ (a c c u t e ): ◌़ ( n u k t a ) /dOm : /dShRa/dMatraIi /dA/dAvagraha ~ a v a g r a h a : ( ) ॰ a b r e v i at i o n : ( ) /dDanda a r d h a c h a r a n a k h a d a d a n d a : ( , ) /dDoubleDanda p o o r n a c h a r an : ( ) /dOne/dTwo/dThree/dFour/dFive/dSix/dSeven/dEight/dNine/dZero 1 2 3 4 5 6 7 8 9 0

REVISE:-

/g्ॢैाझ33वर अ: अ । आ । इ । ई | उ | ऊ | ए | ऐ | ओ | औ | अं | अ: | ऋ | ॠ | ऌ | ॡ | /dSVa/dRa

/dA: /dA /dDanda /dAa /dDanda /dI /dDanda /dIi | /dU | /dUu | /dE | /dAi | /dO | /dAu | /dA/dAnusvara | /dA: | /ri । /rri । /li । /lli

/g्ॢैाझ30यंजन /dVYa/dAnusvara/dJa/dNa क: क । का । /g्ॢैा873क । क/g्ॢैा566 । कु । कू | के | कै | को | कौ | कं | कः /dKa: /dKa /dDanda /dKa/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dKa /dDanda /dKa/dMatraIi /dDanda /dKMatraU /dDanda /dKa/dMatraUu | /dKMatraE | /dKMatraAi | /dKMatraO | /dKMatraAu | /dKa /dAnusvara | /dKa/dVisarga

ख: ख । खा । /g्ॢैा87झख । खी । खु । खू | खे | खै | खो | खौ | खं | खः /dKha: /dKha /dDanda /dKha/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dKha /dDanda /dKha/dMatraIi /dDanda /dKha/dMatraU /dDanda /dKha/dMatraUu | /dKhMatraE | /dKhMatraAi | /dKhMatraO | /dKhMatraAu | /dKha/dAnusvara | /dKha/dVisarga

ग: ग । गा । /g्ॢैा876ग । गी । गु । गू | गे | गै | गो | गौ | गं | गः /dGa: /dGa /dDanda /dGa/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dGa /dDanda /dGa/dMatraIi /dDanda /dGMatraU /dDanda /dGa/dMatraUu | /dGMatraE | /dGMatraAi | /dGMatraO | /dGMatraAu | /dGa/dAnusvara | /dGa/dVisarga

घ: घ । घा । /g्ॢैा470घ । घी । घु । घू | घे | घै | घो | घौ | घं | घः

/dGha: /dGha /dDanda /dGha/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dGha /dDanda /dGha/dMatraIi /dDanda /dGha/dMatraU /dDanda /dGha/dMatraUu | /dGhMatraE | /dGhMatraAi | /dGhMatraO | /dGhMatraAu | /dGha/dAnusvara | /dGha/dVisarga

ङ: ङ । ङा । /g्ॢैा875ङ । ङ/g्ॢैा548 । ङु । ङू | ङे | ङै |

ङो | ङौ | ङं | ङः /dNga: /dNga /dDanda /dNga/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dNga /dDanda /dNga/dMatraIi /dDanda /dNga/dMatraU /dDanda /dNga/dMatraUu | /dNgMatraE | /dNgMatraAi | /dNgMatraO | /dNgMatraAu | /dNga/dAnusvara | /dNga/dVisarga

च: च । चा । /g्ॢैा876च । ची । चु । चू | चे | चै | चो | चौ | चं | चः /dCa: /dCa /dDanda /dCa/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dCa /dDanda /dCa/dMatraIi /dDanda /dCa/dMatraU /dDanda /dCa/dMatraUu | /dCMatraE | /dCMatraAi | /dCMatraO | /dCMatraAu | /dCa/dAnusvara | /dCa/dVisarga

छ: छ । छा । /g्ॢैा470छ । छ/g्ॢैा549 । छु । छू | छे | छै | छो | छौ | छं | छः /dCha: /dCha /dDanda /dCha /dMatraAa /dDanda /dMatraI /dCha /dDanda /dCha /dMatraIi /dDanda /dChMatraU /dDanda /dCha /dMatraUu | /dChMatraE | /dChMatraAi | /dChMatraO | /dChMatraAu | /dCha /dAnusvara | /dCha/dVisarga

ज: ज । जा । िज । जी । जु । जू | जे | जै | जो | जौ | जं | जः /dJa: /dJa /dDanda /dJa/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dJa /dDanda /dJa/dMatraIi /dDanda /dJa/dMatraU /dDanda /dJa/dMatraUu | /dJMatraE | /dJMatraAi | /dJMatraO | /dJMatraAu | /dJa /dAnusvara | /dJa/dVisarga

झ: झ । झा । /g्ॢैा87झझ । झी । झु । झू | झे | झै | झो | झौ | झं | झः /dJha: /dJha /dDanda /dJha/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dJha /dDanda /dJha/dMatraIi /dDanda /dJha/dMatraU /dDanda /dJha/dMatraUu | /dJhMatraE | /dJhMatraAi | /dJhMatraO | /dJhMatraAu | /dJha/dAnusvara | /dJha/dVisarga

ञ: ञ । ञा । /g्ॢैा876ञ । ञी । ञु । ञू | ञे | ञै | ञो | ञौ | ञं | ञः

/dNya: /dNya /dDanda /dNya/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dNya /dDanda /dNya/dMatraIi /dDanda /dNya/dMatraU /dDanda /dNya/dMatraUu | /dNyMatraE | /dNyMatraAi | /dNyMatraO | /dNyMatraAu | /dNya/dAnusvara | /dNya/dVisarga

ट: ट । टा । /g्ॢैा466ट । ट/g्ॢैा548 । टु । टू | टे | टै | टो | टौ | टं | टः /dTta: /dTta /dDanda /dTta/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dTta /dDanda /dTta/dMatraIi /dDanda /dTta/dMatraU /dDanda /dTta/dMatraUu | /dTtMatraE | /dTtMatraAi | /ekaar/Ta/aakaar | /dTtMatraAu | /dTta /dAnusvara | /dTta/dVisarga

ठ: ठ । ठा । /g्ॢैा466ठ । ठ/g्ॢैा549 । ठु । ठू | ठे | ठै | ठो | ठौ | ठं | ठः /dTtha: /dTtha /dDanda /dTtha/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dTtha /dDanda /dTtha/dMatraIi /dDanda /dTtha/dMatraU /dDanda /dTtha/dMatraUu | /dTthMatraE | /dTthMatraAi | /dTthMatraO | /dTthMatraAu | /dTtha/dAnusvara | /dTtha/dVisarga

ड: ड । डा । /g्ॢैा875ड । डी । डु । डू | डे | डै | डो | डौ | डं | डः /dDda: /dDda /dDanda /dDda/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dDda /dDanda /dDda/dMatraIi /dDanda /dDda/dMatraU /dDanda /dDda/dMatraUu | /dDdMatraE | /dDdMatraAi | /dDdMatraO | /dDdMatraAu | /dDda /dAnusvara | /dDda/dVisarga

ढ: ढ । ढा । /g्ॢैा466ढ । ढ/g्ॢैा548 । ढु । ढू | ढे | ढै | ढो | ढौ | ढं | ढः /dDdha: /dDdha /dDanda /dDdha/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dDdha /dDanda /dDdha/dMatraIi /dDanda /dDdha/dMatraU /dDanda /dDdha/dMatraUu | /dDdhMatraE | /dDdhMatraAi | /dDdhMatraO | /dDdhMatraAu | /dDdha /dAnusvara | /dDdha/dVisarga

ण: ण । णा । /g्ॢैा87झण । णी । णु । णू | णे | णै |

णो | णौ | णं | णः /dNna: /dNna /dDanda /dNna/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dNna /dDanda /dNna/dMatraIi /dDanda /dNnMatraU /dDanda /dNna/dMatraUu | /dNnMatraE | /dNnMatraAi | /dNnMatraO | /dNnMatraAu | /dNna/dAnusvara | /dNna/dVisarga

त: त । ता । /g्ॢैा470त । ती । तु । तू | ते | तै | तो | तौ | तं | तः /dTa: /dTa /dDanda /dTa/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dTa /dDanda /dTa/dMatraIi /dDanda /dTMatraU /dDanda /dTa/dMatraUu | /dTMatraE | /dTMatraAi | /dTMatraO | /dTMatraAu | /dTa/dAnusvara | /dTa/dVisarga

थ: थ । था । /g्ॢैा876थ । थी । थु । थू | थे | थै | थो | थौ | थं | थः /dTha: /dTha /dDanda /dTha/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dTha /dDanda /dTha/dMatraIi /dDanda /dTha/dMatraU /dDanda /dTha/dMatraUu | /dThMatraE | /dThMatraAi | /dThMatraO | /dThMatraAu | /dTha/dAnusvara | /dTha/dVisarga

द: द । दा । /g्ॢैा466द । द/g्ॢैा548 । दु । दू | दे | दै | दो | दौ | दं | दः /dDa: /dDa /dDanda /dDa/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dDa /dDanda /dDa/dMatraIi /dDanda /dDa/dMatraU /dDanda /dDa/dMatraUu | /dDMatraE | /dDMatraAi | /dDMatraO | /dDMatraAu | /dDa/dAnusvara | /dDa/dVisarga

ध: ध । धा । /g्ॢैा876ध । धी । धु । धू | धे | धै | धो | धौ | धं | धः /dDha: /dDha /dDanda /dDha/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dDha /dDanda /dDha/dMatraIi /dDanda /dDha/dMatraU /dDanda /dDha/dMatraUu | /dDhMatraE | /dDhMatraAi | /dDhMatraO | /dDhMatraAu | /dDha /dAnusvara | /dDha/dVisarga

न: न । ना । /g्ॢैा470न । नी । नु । नू | ने | नै | नो | नौ | नं | नः

/dNa: /dNa /dDanda /dNa/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dNa /dDanda /dNa/dMatraIi /dDanda /dNMatraU /dDanda /dNa/dMatraUu | /dNMatraE | /dNMatraAi | /dNMatraO | /dNMatraAu | /dNa /dAnusvara | /dNa/dVisarga

प: प । पा । /g्ॢैा874प । पी । पु । पू | पे | पै | पो | पौ | पं | पः /dPa: /dPa /dDanda /dPa /dMatraAa /dDanda /dMatraI /dPa /dDanda /dPa /dMatraIi /dDanda /dPMatraU /dDanda /dPa /dMatraUu | /dPMatraE | /dPMatraAi | /dPMatraO | /dPMatraAu | /dPa /dAnusvara | /dPa/dVisarga

फ: फ । फा । /g्ॢैा873फ । फ/g्ॢैा566 । फु । फू | फे | फै | फो | फौ | फं | फः /dPha: /dPha /dDanda /dPha/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dPha /dDanda /dPha/dMatraIi /dDanda /dPha/dMatraU /dDanda /dPha/dMatraUu | /dPhMatraE | /dPhMatraAi | /dPhMatraO | /dPhMatraAu | /dPha/dAnusvara | /dPha/dVisarga

ब: ब । बा । /g्ॢैा467ब । बी । बु । बू | बे | बै | बो | बौ | बं | बः /dBa: /dBa /dDanda /dBa/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dBa /dDanda /dBa/dMatraIi /dDanda /dBa/dMatraU /dDanda /dBa/dMatraUu | /dBMatraE | /dBMatraAi | /dBMatraO | /dBMatraAu | /dBa /dAnusvara | /dBa/dVisarga

भ: भ । भा । /g्ॢैा87जभ । भी । भु । भू | भे | भै | भो | भौ | भं | भः /dBha: /dBha /dDanda /dBha/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dBha /dDanda /dBha /dMatraIi /dDanda /dBhMatraU /dDanda /dBha /dMatraUu | /dBhMatraE | /dBhMatraAi | /dBhMatraO | /dBhMatraAu | /dBha/dAnusvara | /dBha/dVisarga

म: म । मा । /g्ॢैा87जम । मी । मु । मू | मे | मै | मो | मौ | मं | मः

/dMa: /dMa /dDanda /dMa/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dMa /dDanda /dMa/dMatraIi /dDanda /ma_ukaar (/dMMatraU )/dDanda /dMa/dMatraUu | /dMMatraE | /dMMatraAi | /dMMatraO | /dMMatraAu | /dMa /dAnusvara | /dMa/dVisarga

य: य । या । /g्ॢैा470य । यी । यु । यू | ये | यै | यो | यौ | यं | यः /dYa: /dYa /dDanda /dYa/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dYa /dDanda /dYa/dMatraIi /dDanda /dYMatraU /dDanda /dYa/dMatraUu | /dYMatraE | /dYMatraAi | /dYMatraO | /dYMatraAu | /dYa/dAnusvara | /dYa/dVisarga

र: र । रा । /g्ॢैा465र । र/g्ॢैा548 । /g्ॢैा5ज0 । /g्ॢैा5जज | रे | रै | रो | रौ | रं | रः /dRa: /dRa /dDanda /dRa/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dRa /dDanda /dRa/dMatraIi /dDanda /dRMatraU /dDanda /dRMatraUu | /dRMatraE | /dRMatraAi | /dRMatraO | /dRMatraAu | /dRa /dAnusvara | /dRa/dVisarga

ल: ल । ला । /g्ॢैा87जल । ल/g्ॢैा548 । लु । लू | ले | लै | लो | लौ | लं | लः /dLa: /dLa /dDanda /dLa /dMatraAa /dDanda /dMatraI /dLa /dDanda /dLa /dMatraIi /dDanda /dLMatraU /dDanda /dLa /dMatraUu | /dLMatraE | /dLMatraAi | /dLMatraO | /dLMatraAu | /dLa /dAnusvara | /dLa/dVisarga

व: व । वा । /g्ॢैा874व । वी । वु । वू | वे | वै | वो | वौ | वं | वः /dVa: /dVa /dDanda /dVa/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dVa /dDanda /dVa/dMatraIi /dDanda /dVa/dMatraU /dDanda /dVa/dMatraUu | /dVMatraE | /dVMatraAi | /dVMatraO | /dVMatraAu | /dVa /dAnusvara | /dVa/dVisarga

स: स । सा । /g्ॢैा87जस । सी । सु । सू | से | सै | सो | सौ | सं | सः

/dSa: /dSa /dDanda /dSa/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dSa /dDanda /dSa/dMatraIi /dDanda /dSMatraU /dDanda /dSa/dMatraUu | /dSMatraE | /dSa /dMatraAi | /dSMatraO | /dSMatraAu | /dSa /dAnusvara | /dSa/dVisarga

ष: ष । षा । /g्ॢैा874ष । षी । षु । षू | षे | षै | षो | षौ | षं | षः /dSsa: /dSsa /dDanda /dSsa/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dSsa /dDanda /dSsa/dMatraIi /dDanda /dSsMatraU /dDanda /dSsa/dMatraUu | /dSsMatraE | /aikaarШ | /dSsMatraO | /dSsMatraAu | /dSsa/dAnusvara | /dSsa/dVisarga

श: श । शा । /g्ॢैा87जश । शी । शु । शू | शे | शै | शो | शौ | शं | शः /dSha: /dSha /dDanda /dSha /dMatraAa /dDanda /dMatraI /dSha /dDanda /dSha /dMatraIi /dDanda /dShMatraU /dDanda /dSha /dMatraUu | /dShMatraE | /aikaarш | /dShMatraO | /dShMatraAu | /dSha /dAnusvara | /dSha/dVisarga

ह: ह । हा । /g्ॢैा466ह । ह/g्ॢैा548 । हु । हू | हे | है | हो | हौ | हं | हः /dHa: /dHa /dDanda /dHa/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dHa /dDanda /dHa/dMatraIi /dDanda /h_ukaar (/dHa/dMatraU) /dDanda /dHMatraUu | /dHMatraE | /bn_aikaar.init/bn_ha | /dHMatraO | /dHMatraAu | /dHa /dAnusvara | /dHa/dVisarga

/g्ॢैाज63: /g्ॢैाज63 । /g्ॢैाज63ा । /g्ॢैा879/g्ॢैाज63 । /g्ॢैाज63ी । /g्ॢैाज63ु । /g्ॢैाज63ू | /g्ॢैाज63े | /g्ॢैाज63ै | /g्ॢैाज63ो | /g्ॢैाज63ौ | /g्ॢैाज63ं | /g्ॢैाज63ः /dKss: /dKss /dDanda /dKss/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dKss /dDanda /dKss/dMatraIi /dDanda /dKss/dMatraU /dDanda /dKss/dMatraUu | /dKssMatraE | /aikaar/k_Sha | /dKssMatraO | /dKssMatraAu | /dKss/dAnusvara | /dKss/dVisarga

/g्ॢैाझ88: /g्ॢैाझ88 । /g्ॢैाझ88ा । /g्ॢैा467/g्ॢैाझ88 । /g्ॢैाझ88ी । /g्ॢैाझ88ु । /g्ॢैाझ88ू | /g्ॢैाझ88े | /g्ॢैाझ88ै |

/g्ॢैाझ88ो | /g्ॢैाझ88ौ | /g्ॢैाझ88ं | /g्ॢैाझ88ः /dTRa: /dTRa /dDanda /dTRa/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dTRa /dDanda /dTRa/dMatraIi /dDanda /dTRa/dMatraU /dDanda /dTRa/dMatraUu | /dTRaMatraE | /aikaar/t_ra /ekaar/t_ra/aakaar | /ekaar/t_ra/auMark | /dTRa/dAnusvara | /dTRa/dVisarga

/g्ॢैाज67: /g्ॢैाज67 । /g्ॢैाज67ा । /g्ॢैा879/g्ॢैाज67 । /g्ॢैाज67ी । /g्ॢैाज67ु । /g्ॢैाज67ू | /g्ॢैाज67े | /g्ॢैाज67ै | /g्ॢैाज67ो | /g्ॢैाज67ौ | /g्ॢैाज67ं | /g्ॢैाज67ः

/dJny: /dJny /dDanda /dJny/dMatraAa /dDanda /dMatraI/dJny /dDanda /dJny/dMatraIi /dDanda /dJny/dMatraU /dDanda /dJny/dMatraUu | /ekaar/j_nya

| /aikaar/j_nya | /ekaar/j_nya/aakaar | /ekaar/j_nya/auMark | /dJny/dAnusvara | /dJny/dVisarga

सां/g्ॢैाझ0झय ० । १ । २ । ३ । ४ । ५ । ६ । ७ | ८ | ९ /dSa/dMatraAa /dAnusvara /dKhYa /dZero /dDanda /dOne /dDanda /dTwo /dDanda /dThree /dDanda /dFour /dDanda /dFive /dDanda /dSix /dDanda /dSeven | /dEight | /dNine

क का /g्ॢैा873क क/g्ॢैा566 कु कू कृ कॄ /g्ॢैाझ0जलृ /g्ॢैाझ0जलॄ कॅ के कॆ कै कॉ को कॊ कौ कं कः /dKa /dKa/dMatraAa /dMatraI/dKa /dKa/dMatraIi /dKMatraU /dKa/dMatraUu /dKMatraVocalicR /dKa ◌ॄ /dKLa/dMatraVocalicR /dKLa◌ॄ /dKa◌ॅ /dKMatraE /dKa ◌ॆ /dKMatraAi /dKa◌ॉ /dKMatraO /dKa ◌ॊ /dKMatraAu /dKa /dAnusvara /dKa/dVisarga

/dMatraI/dSa/dMatraI/dDDha/dRa/dSTa/dMatraU

Learn Braille through Mithilakshara

Learn Braille through Mithilakshara

GAJENDRA THAKUR

/g257ुित /g262काशन िदंg298 ली

Ist edition 2009 of Learn Braille through Mithilakshara

author Gajendra Thakur

published by SHRUTI PUBLICATION 21/8, Ground Floor, New Rajendra Nagar, New Delhi-110008 Tel.: (011) 25889656-58 Fax: 011-25889657 ISBN : 978-93-80538-56-3

No part of this publication may be reproduced, stored in a retrieval system or transmitted in any form or by any means- photographic, electronic or mechanical including photo- copying, recording, taping or information storage-w ithout the prior permission in writing of the copyright ow ner or as expressly permitted by law . You must not circulate this book in any other binding or cover and you must impose this same condition on any acquirer.

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Devanagari, Mithilakshara and Braille देवनागर/glyph548 , /glyph871म/glyph876थला/glyph163र आ /glyph295ेल /glyph871ल/glyph874प /dDMatraE/dVa/dNa/dMatraAa/dGa/dRa /dMatraIi , /dMatraI /dMa/dMatraI/dTha/dLa/dMatraAa/dKss /dRa /dAa /dBRaMatraE/dLa /dMatraI/dLa/dMatraI/dPa ⢹/9⢷uni28AA⢷uni28AB⢷uni28AC⢷uni28AD⢷uni28AE⢷uni28AF⢷uni28B0⢷uni28B1⣇⢽⢼⢻⢷⢴ , /5⢷uni2886⢷uni2887⢷uni2888⢷uni2889⢷uni288A⢷uni288B⢷uni288/70⢷uni2871⢷uni2872⢷uni2873⢷uni2874⢷uni2875⢷uni2876⢷uni28⣙/70⢷uni2871⢷uni2872⢷uni2873⢷uni2874⢷uni2875⢷uni2876⢷uni28/2855⢷uni2856⢷uni2857⢷uni2858⢷uni2859⢷uni285A⢷uni285B⢷uni285C⢷uni285D⢷uni285E⢷uni285F⢷uni2860⢷uni2861⢷uni2 ⢼⢿⢷ ⢼ /ni2830⢷uni2831⢷uni2832⢷uni2833⢷uni2834⢷uni2835⢷uni2836⢷uni2837⢷uni2838⢷uni2839⢷uni283A⢷uni283B⢷uni283C⢷uni283D⢷uni283 /62⢷uni2863⢷uni2864⢷uni2865⢷uni2866⢷uni2867⢷uni2868⢷uni28⢷/9⢷uni28AA⢷uni28AB⢷uni28AC⢷uni28AD⢷uni28AE⢷uni28AF⢷uni28B0⢷uni28B1/2855⢷uni2856⢷uni2857⢷uni2858⢷uni2859⢷uni285A⢷uni285B⢷uni285C⢷uni285D⢷uni285E⢷uni285F⢷uni2860⢷uni2861⢷uni2 /2855⢷uni2856⢷uni2857⢷uni2858⢷uni2859⢷uni285A⢷uni285B⢷uni285C⢷uni285D⢷uni285E⢷uni285F⢷uni2860⢷uni2861⢷uni2 /70⢷uni2871⢷uni2872⢷uni2873⢷uni2874⢷uni2875⢷uni2876⢷uni28/2895⢷uni2896⢷uni2897⢷uni2898⢷uni2899⢷uni289A⢷uni289B⢷uni289C⢷uni289D⢷uni289E⢷uni289F⢷uni28A0⢷uni28A1⢷uni2/70⢷uni2871⢷uni2872⢷uni2873⢷uni2874⢷uni2875⢷uni2876⢷uni28 ंg2ूटंgभूणसक लुइस ंgणट9ेल -अठारह सए नौ ई. मे जंg288म आ अठारह सए बावन ई .मे मृंg28णयु- जे अपने आंg288हर छलाह पंg288ंgणटूह बखंgभूउक अवंgभटणथामे ंgणट9ेल िलिपक आिवंgभटभकार आँिखसँ िवहीन लोकक लेल कएने रहिथ। एिह िलिपमे कागजपर िवशेष िंg2ू2ंटरसँ उठल -उठल िबंg288दुक मांg28ढ़यमसँ -जकरा हाथक ंgभटणपशंgभूउसँ अनुभव कएल जा सकए- भाषाक संंg2ू2ेषण होइत अिछ। एकरा दुनू हाथक ंgभटणपशंgभूउसँ पढ़ल जाइत अिछ। दिहना हाथ संदेशकंg2णभ ंg2ूतपांg288तिरत कए संंg2ू2ेिषत करैत अिछ आ वाम हाथ अिगला पंिंg2ढ़टतक ंg2ू2ारंg29णभक अनुभव करैत अिछ। एिह िलिपकंg2णभ सामांg288यतः डेढ़ सए शंg292द ंg2ू2ित िमनटक गितसँ पढ़ल जा सकैत अिछ जे आँिख ंgभ2तारा पढ़ल जाएबला सामांg288य शंg292द संंg2ढ़उया तीन सए शंg292द ंg2ू2ित िमनटक अदहा अिछ। एिह िलिपक आधार क/g243 सेल कहल जाइत अिछ। एकटा सेलक िन म/g365ण छह टा िब/g288द ुक संयो ज नसँ होइत अिछ। एिहसँ ितरसिठ /g262कारक िविभ/g382 व ण/g361क –अ/g252र -सं/g271या आ िवरा म -अ/g320/g361िवराम आि द चे /g288 ह - िन म/g365ण होइत अिछ।

/dPhRa/dMatraAa /dAnusvara /dSa/dKa /dLMatraU/dI/dSa /dBRaMatraE/dLa - /dA/dTtha/dMatraAa/dRa/dHa /dSa/dE /dNMatraAu /dIi . /dMMatraE /dJa/dNMa /dAa /dA/dTtha/dMatraAa/dRa/dHa /dSa/dE /dBa/dMatraAa/dVa/dNa /dIi ./dMMatraE /dMa/dMatraVocalicR/dTYa/dMatraU- /dJMatraE /dA/dPa/dNMatraE /dAa/dNHa/dRa /dCha/dLa/dMatraAa/dHa /dPa/dN.half/dDRa/dHa /dBa/dKha /dReph /dKa /dA/dVa/dSTha/dMatraAa/dMMatraE /dBRaMatraE/dLa /dMatraI/dLa/dMatraI/dPa/dKa /dAa/dMatraI/dVa/dSsKa/dMatraAa/dRa /dAa/dCandrabindu/dMatraI/dKha/dSa/dCandrabindu /dMatraI/dVa/dHa/dMatraIi/dNa /dLMatraO/dKa/dKa /dLMatraE/dLa /dKa/dE/dNMatraE /dRa/dHa/dMatraI/dTha/dDanda /dE/dMatraI/dHa /dMatraI/dLa/dMatraI/dPa/dMMatraE /dKa/dMatraAa/dGa/dJa/dPa/dRa /dMatraI/dVa/dShMatraE/dSsa /dMatraI/dPRa /dAnusvara /dTta/dRa/dSa/dCandrabindu /dU/dTtha/dLa-/dU/dTtha/dLa /dMatraI/dBa/dNDa/dMatraU/dKa /dMa/dMatraAa/dDhYa/dMa/dSa/dCandrabindu -/dJa/dKa/dRa/dMatraAa /dHa/dMatraAa/dTha/dKa /dSPa/dSha /dReph /dSa/dCandrabindu /dA/dNMatraU/dBha/dVa /dKa/dE/dLa /dJa/dMatraAa /dSa/dKa/dE - /dBha/dMatraAa/dSsa/dMatraAa/dKa /dSa /dAnusvara /dPRaMatraE/dSsa/dNna /dHMatraO/dI/dTa /dA/dMatraI/dCha/dDanda /dE/dKa/dRa/dMatraAa /dDa/dMatraU/dNa/dMatraUu /dHa/dMatraAa/dTha/dKa /dSPa/dSha /dReph /dSa/dCandrabindu /dPa ढ़/dLa /dJa/dMatraAa/dI/dTa /dA/dMatraI/dCha/dDanda /dDa/dMatraI/dHa/dNa/dMatraAa /dHa/dMatraAa/dTha /dSa /dAnusvara /dDMatraE/dSha/dKMatraE /dCandrabindu /dRMatraUu/dPa/dMatraAa/dNTa/dMatraI/dRa/dTa /dKa/dE /dSa /dAnusvara /dPRaMatraE/dMatraI/dSsa/dTa /dKa/dRMatraAi/dTa /dA/dMatraI/dCha /dAa /dVa/dMatraAa/dMa /dHa/dMatraAa/dTha /dA/dMatraI/dGa/dLa/dMatraAa /dPa /dAnusvara /dMatraI/dKTa/dKa /dPRa/dMatraAa/dRa/dMBha/dKa /dA/dNMatraU/dBha/dVa /dKa/dRMatraAi/dTa /dA/dMatraI/dCha/dDanda /dE/dMatraI/dHa /dMatraI/dLa/dMatraI/dPa/dKMatraE /dCandrabindu /dSa/dMatraAa/dMa/dMatraAa/dNYa/dTa/dVisarga /dDdMatraE ढ़ /dSa/dE /dSha/dBDa /dPRa/dMatraI/dTa /dMatraI/dMa/dNa/dTta/dKa /dGa/dMatraI/dTa/dSa/dCandrabindu /dPa ढ़/dLa /dJa/dMatraAa /dSa/dKMatraAi/dTa /dA/dMatraI/dCha /dJMatraE /dAa/dCandrabindu/dMatraI/dKha /dDVa/dMatraAa/dRa/dMatraAa /dPa ढ़/dLa /dJa/dMatraAa/dE/dBa/dLa/dMatraAa /dSa/dMatraAa/dMa/dMatraAa/dNYa /dSha/dBDa /dSa /dAnusvara /dKhYa/dMatraAa /dTa/dMatraIi/dNa /dSa/dE /dSha/dBDa /dPRa/dMatraI/dTa /dMatraI/dMa/dNa/dTta/dKa /dA/dDa/dHa/dMatraAa /dA/dMatraI/dCha/dDanda /dE/dMatraI/dHa /dMatraI/dLa/dMatraI/dPa/dKa /dAa/dDha/dMatraAa/dRa/dKMatraE /dCandrabindu /dSMatraE/dLa /dKa/dHa/dLa /dJa/dMatraAa/dI/dTa /dA/dMatraI/dCha/dDanda /dE/dKa/dTta/dMatraAa /dSMatraE/dLa/dKa /dMatraI/dNa/dMa/dMatraAa /dReph /dNna /dCha/dHa /dTta/dMatraAa /dMatraI/dBa/dNDa/dMatraU/dKa /dSa/dAnusvara/dYMatraO/dJa/dNa/dSa/dCandrabindu /dHMatraO/dI/dTa /dA/dMatraI/dCha/dDanda /dE/dMatraI/dHa/dSa/dCandrabindu /dMatraI/dTa/dRa/dSa/dMatraI/dTtha /dPRa/dKa/dMatraAa/dRa/dKa /dMatraI/dVa/dMatraI/dBha/dNNa /dVa/dNna /dReph /dKa –/dA/dKss/dRa -/dSa/dAnusvara/dKhYa/dMatraAa /dAa /dMatraI/dVa/dRa/dMatraAa/dMa - /dA/dDDha/dReph/dMatraI/dVa/dRa/dMatraAa/dMa /dAa/dMatraI/dDa /dCMatraE/dNHa - /dMatraI/dNa/dMa/dMatraAa /dReph /dNna /dHMatraO/dI/dTa /dA/dMatraI/dCha/dDanda

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Devanagari MithilakShara Braille 'अ ','आ ', ' इ', ' ई', ' उ', ' ऊ '

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one byte nukta varnas "क़" ," ख़" ," ग़" ," ज़" , "ड़" ," ढ़" ," फ़" ," य़" one -byte nukta varnas "/bn_ka/bn_nukta","/bn_kha/bn_nukta","/bn_ga/bn_nukta","/bn_ja /bn_nukta ", "/bn_rra","/bn_rha","/bn_pha/bn_nukta","/bn_yya" one -byte nukta varnas

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'च', 'छ', 'ज', 'झ', 'ञ'

'/dCa', ' /dCha', ' /dJa', ' /dJha', '/dNya'

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'ट', 'ठ', 'ड़', 'ड', 'ढ़', 'ढ', 'ण'

'/dTta', '/dTtha', ' ड़', '/dDda', 'ढ़', '/dDdha', '/dNna'

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० १ २ ३ ४ ५ ६ ७ ८ ९

/dZero /dOne /dTwo /dThree /dFour /dFive /dSix /dSeven /dEight /dNine 0 1 2 3 4 5 6 7 8 9

Learn International Phonetic Alphabet through Mithilakshara

Learn International Phonetic Alphabet through Mithilakshara

GAJENDRA THAKUR

/g257ुित /g262काशन िद/g298 ली

Ist edition 2009 of Learn International Phonetic Alphabet through Mithilakshara author Gajendra Thakur

published by SHRUTI PUBLICATION 21/8, Ground Floor, New Rajendra Nagar, New Delhi-110008 Tel.: (011) 25889656-58 Fax: 011-25889657 ISBN : 978-93-80538-57-0

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Devanagari, Mithilakshara and International Phonetic Alphabet Devanagari Mithilakshara International Phonetic Alphabet अ /dA ə आ /dAa ɑː इ /dI i ई /dIi iː उ /dU u ऊ /dUu u ː ए /dE e ː ऐ /dAi a ːi ओ /dO o ː औ /dAu a ːu ऋ /dVocalicR ɹ̩ ॠ /rri ɹ̩ː ऌ /li l̩ ॡ /lli l̩ː अं /dA/dAnusvara ⁿ अः /dA/dVisarga h क /dKa kə क़ /dKa◌़ q ə ख /dKha kə ख़ /dKha◌़ xə ग /dGa gə ग़ /dGa◌़ ɣə घ /dGha gə ङ /dNga ŋ ə च /dCa cə छ /dCha cə ज /dJa ɟə ज़ /dJa◌़ zə झ /dJha ɟʰə

ञ /dNya ɲə ट /dTta ʈə ठ /dTtha ʈʰə ड /Rra ɖə ड़ /dDda◌़ ɽə ढ /dDdha ɖʰə ढ़ /Rha ɽʰə ण /dNna ɳə त /dTa t̪ə थ /dTha t̪ə द /dDa d ̪ə ध /dDha d ̪ə न /dNa n ə प /dPa p ə फ /dPha p ə फ़ /dPha◌़ fə ब /dBa b ə भ /dBha b ə म /dMa m ə य /dYa jə र /dRa rə ल /dLa lə व /dVa və श /dSha ɕə ष /dSsa ʂə स /dSa sə ह /dHa ɦə /g252 /dKss kʃə /g255 /dTRa t̪ɾə /g253 /dJny gj ə /g257 /dShRa ɕcə ◌् /base/dHalant ◌् ◌ा /base/dMatraAa ɑː

ि◌ /dMatraI/base i ◌ी /base/dMatraIi iː ◌ु /base/dMatraU u ◌ू /base/dMatraUu u ː ◌ृ /base/dMatraVocalicR ɹ̩ ◌े /base/dMatraE e ː ◌ै /base/dMatraAi a ːi ◌ो /base/dMatraO o ː ◌ौ /base/dMatraAu a ːu ◌ं /base/dAnusvara ⁿ ◌ँ /base/dCandrabindu ⁿ ◌ं /base/dAnusvara ⁿ ◌ँ /base/dCandrabindu ⁿ ◌ः /base/dVisarga h

महाकिव िवापित ठाकुर 1350 - 1435 िवापित ठुरः 1350-1435 िवषएवार िबफी-कायप (राजा ि शविसंहक दरबारी) आ संकृत आ अवह( लेखक। कीित-लता, कीित-पताका, पु/ष परी0ा, गोर0िवजय, ि लखनावली आिद 4ंथ समेत िवपुल सं6यामे कालजयी रचना। िवापित (१३५०-१४५०)िवापितक ज=म १३७० ई.क लगाितमे िबफी गाममे भेलि=ह। िहनकर परवतB सभ आइ-कािD सौराठ गाममे रहैत छिथ। एकर Hमाण िनJ गप सभसँ लगैत अिछ। १३९४-९६ क बीच कएल पदक समप-ण िगयासौNीन आजमशाह आ नसरत शाहकO कएल गेल अिछ। देव िसंहक आदेश सँ १४०० ई.क लगाितमे ई “भू-पिरRमा िलखलि=ह। १४०२-०४ क बीच कीित-लताक रचना कीित- िसंहक राTयकालमे कएलि=ह। १४०९-१४१५ ई.क बीच कीित-पताकाक रचना। पूवUध- १४०९ क लगाितमे मे – हिर केिल अजु-न िसंहक कीित-गाथासँ सXबि=धत अिछ आ उZराध- १४१५ क लगाितमे िशविसंहक यु[ आ ितरोधानसँ सXबद्ध अिछ। िवापित जीक आदे शसँ १४१० ई. मे “का]य Hकाश िववेक”क Hितिलिप बनाओल गेल। १४१० ई.मे िशविसंहक राTयारोहण भेल आ एिह उप`यमे िवापितकO िबसपीक दानपa Hदान कएल गेल। िशविसंहक राTयकाल १४१०-१४ ई. धिर रहल आ एिह अविधमे गोर0 िवजय नाटक आ पु/ष-परी0ा अिधकcश भागक रचना भेल। १४१६ ई . क लगाित पुरािदdयक आदेशसँ िलखनावलीक िनमUण भेल। १४२८ ई. मे भागवत पुराणक िवापित िलिखत Hितिलिप पूण- भेल। १४२७- १४३९ ई. मे पf िसंहक महारानी िवgास देवी क आदेशसँ शैव सव-वसार, शैव सव-वसार Hमाण भूत सं4ह आ गंगा वाhयावलीक रचना, १४५३-६० ई.क लगाित राजा नरिसंह दप-नारायण आ रानी धीिरमितक समयमे िवभागसार, ]यािडभिhत तरंिगणी आ दानवाhयावलीक रचना भेल। १४५५ ई. क लगाित भैरव िसंहक अनुjासँ “दुगUभिhत तरंिगणी”क रचना भेल आ १४६१ ई. मे kी lपधर िहनकासँ छाa lपमे अmययन कएलि=ह। १४६५ ई.क आसपास िहनकर मृdयु भेल होएति=ह, जनkुित अिछ जे ई दीघUयु भेल छलाह आ सए बरखक आयु Hाoत कएने छलाह। िहनकर रचनामे एक बेर जगTजननी सीताक चरचा एिह lपमे आएल अिछ- I. इ=qयेव शची समुTजवलगुणा गौरीव गौरीपतेः कामयेव रितः वभावमधुरा सीतेव रामय या। िवrणोः kीिरव पfिसंहनृपतेरेषा परा Hेयसी िवg6यातनया िsजे=qतनया जागित- भूमtडले॥9॥ उपयु-hत प िवापितकृत शैवसव-वसारक HारXभक नवम लोक छी। एकर अथ- अिछ- उdकृw गुणवती, मधुर वभाववाली, xाyण-वंशजा, नीित-कौशलमे िवgिव6यातओ’ महारानी िवgासदेवी सXHित संसारमे सुशोिभत छिथ, जे पृ{वी-पित पfिसंहकO तिहना िHय छलीह जिहना इ=qक O शची, िशवकO गौरी, कामकO रित , रामकO सीता ओ’ िवrणुकO ल`मी॥9॥ च=दा झा (१८३१ - १९०७ ), मूलनाम च=qनाथ झा, 4ाम- िपtडा/छ, दरभंगा। कवीgर, किवच =q नामसँ िवभूिषत। ि4एस-नकO मैिथलीक Hसंगमे मु6य सहायता केिनहार। कृित- िमिथला भाषा रामायण, गीित-सुधा, महेशवाणी सं4ह, च=q पदावली, ल`मीgर िवलास, अिह}याचिरत आऽ िवापित रिचत संकृत पु/ष-परी0ाक ग-पमय अनुवाद।

रामलोच न शरण 1889-1971, सीतामढ़ीमे ज=म आ दरभंगामे मृdयु। "मैिथली रामिचरत मानस" सिहत तुलसीदासक समत रचनाक मैिथलीमे लेखन। िमिथला0रमे मैिथलीक Hकाशनक HारXभ केिनहार। Hकाशन- संथा "पुतक भtडार", लहेिरयासराय, पटनाक संथापक। महाकिव लालदास 1856 - 1921 िहनक जन्म खड़ौआ 4ाममे १८५६ ई. मे तथा मृdयु १९२१ ई. मे भेलि=ह । िहनक अनेक रचना उपल†ध होइत अिछ, यथा—रमेgर चिरत रामायाण,’ aी िश0ा,’ ’सािवaी-सdयवान,’ ’चtडी चिरत,’ ’िव/दावली,’ ’दुगU सoतशती,’ त=aोhत िमिथला माहाdXय’ आिद । मैिथलीक अितिरhत ई संकृत, िह=दी तथा फारसीक jाता छलाह । किवताक अितिरhत गमे सेहो ई रचना कएल । रमेgर चिरत रामायण िहनक सभसँ िविशw 4=थ अिछ । राम-कथाक उ}लेखमे सीताक मिहमाक महddव दए िमिथला तथा मैिथलीक Hित ई अपन k[ा तथा भिhतकO ]यhत कएल अिछ । म. म. परमेgर झा 1856-1924 ज=म 1856 ई. मे तरौनी 4ाम (दरभंगा) िजलामे भेल छलि=ह तथा िनधन 1924 ई. मे । संकृत ]याकरणक ई िदˆगज िवsान् छलाह तथा ‘वैयाकरण केशरी’ क उपािधसँ िवभूिषत छलाह । मैिथली सािहdयमे अपन कृित ‘िमिथलातddव िवमश-’ तथा ‘सीमंितनी आ6याियका’क कारणे महddवपूण- थान रखैत छिथ । ई महाराज रमेgर िसंहक दरवारमे राज-पंिडतक पदपर अनेको वष- धिर सुHितिŠत छलाह । मुकु=द झा “ब6शी” 1869-1936 ज=म हिरपुर ब6शी टोल 4ाम (मधुबनी िजला) मे 1869 ई. मे भेल तथा िहनक िनधन काशीमे 1937 ई. मे भेलि=ह । िहनक िलखल संकृत मे अनेक 4ंथ अिछ । मैिथलीमे िहनक महddवपूण- कृित अिछ ‘िमिथला भाषामय इितहास’ । एकर अितिरhत मैिथलीमे िहनक फुट िनब=ध सभ सेहो Hकािशत भेल । िमिथलाक ऐितहािसक वण-न सभसँ पिहने िहनके Hकािशत भेल । एिह इितहासमे िमिथलाक सव-तोमुखी पिरचय Hतुत कएल गेल अिछ । डॉ. सर गंगानाथ झा 1871-1941 ज=म मधुबनी िजलाक सिरसब-पाही 4ाममे 1871 ई. मे भेल तथ ा िनधन Hयागमे 1941 ई. मे । ई अपना समयक संकृतक Hकाtड िवsान म. म. िचaधर िमk, म. म. जयदेव िमk तथा म. म. िशवकुमार शाीसँ मीमcसा एवं दश-नक अmययन कएलि=ह तथा दश-नक िविभa दुlह 4ंथक अङरेजीमे अनुवाद कए पााdय संसारक mयान आकृw कएलि=ह । ई गवन-मे=ट संकृत कॉलेज बनारसमे 1917 सँ 1923 धिर िHिसपल छलाह तथा एलाहाबाद िवgिवालयक 1923 सँ 1932 पय-=त कुलपित रहलाह । मैिथलीमे िहनक सXपािदत च=दा झाक ‘महेशवाणी सं4ह’ तथा ‘गणनाथ-िव=mयनाथ पदावली’ Hकािशत अिछ । मैिथली सािहdय पिरषद्

sारा Hकािशत िहनक ‘वेदा=त दीपक’ (दश-न) िवषयक अपूव- 4ंथ अिछ । एिहसँ िभ िहनक िनबंध सभ सामियक मैिथली प-पिकामे Hकािशत अिछ । बलदेव िमk 1890-1975 िहनक जन्म सहरसा िजलाक वनग‘व 4ाममे 1890 ई. मे एवं िनधन फरवरी, 1975मे भेलि=ह । HारXभमे पं. गेनालाल चौधरीसँ Tयौितष पिढ़ ई काशीमे पं. सुधाकर िsवेदीजीक िशrय भेलाह । बहुत वष- धिर सरवती भवन (वाराणसी) मे हतिलिखत िवभागमे काय- कएल । पात् पटनाक काशीHसाद जयसवाल िरसच- संथानमे अनेक Hाचीन ित†बती हतिलिपकO देवनारीमे िलoय=तिरत कएल। ’िमिथलामोद’ Hकाशन एवं म.म. मुरलीधर झाक Hोdसाहनसँ Tयौितषीजी १९१० ई.सँ ’मोद’मे िलखए लगलाह। िहनक Hकािशत रचना अिछ—’रामायण िश0ा’, ’च=दा झा’, ’संकृित’, ’भारत िश0ा’, ’गoप-सoप िववेक’, ’समाज’ आिद । पिtडतजी यावत् धिर पटना रहलाह बराबिर ’िमिहर’मे िलखैत रहलाह । सीताराम झा 1891-1975 ज=म चौगामा 4ाममे १८९१ ई.मे तथा िनधन १९७५ ई. मे भेलि=ह । संकृतमे Tयोितष शाaक अनेक रचनाक .अितिरhत मैिथलीमे िहनक ’अXब चिरत’ (महाका]य), ’सूिhत सुधा,’ लोक ल0ण,’ ’पढ़ुआचिरत,’ ’पूवUपर ]यवहार,’ उनटा बसात,’ ’अलंकार दप-ण’, ’भूकXप वण-न’, ’का]य षट-रस’, ’मैिथली का]योपवन’, आिद 4=थ उपल†ध अिछ । िहनक गीताक मैिथली अनुवाद सेहो उपल†ध अिछ । िमिथला मोदक सXपादन १९२० ई.सँ १९२७ ई. धिर ई कएल । बqीनाथ झा 1893-1973 ज=म मधुबनी िजलाक सिरसव 4ाममे १८९३ ई. मे भेलि=ह तथा १९१४ ई. मे ई काशी लाभ कएिल=ह । बहुत िदन धिर ई मुज’फरपुरक धXम- समाज संकृत कॉलेजमे सािहdयक अmयापक छलाह । मैिथलीक िव6यात किव लोकिन यथा सुमनजी, मधुपजी, मोहनजी आिद िहनक िशrय छिथ=ह । संकृत सािहdयमे िहनक अनेक रचना अिछ । जािहमे राधा पिरणय’ (महाका]य) क थान िविशw अिछ । मैिथलीमे िहनक ’एकावली पिरणय’ (महाका]य) एक नवीन कीित-मान थािपत कएलक। कोनो अलंकारक दृwा=त तकबाक हेतु ’एकावली पिरणय’ पयUoत अिछ । उमेश िमk 1895-1967 ज=म मधुबनी िजलाक गजहरा 4ाममे 1895 ई. मे भेल छलि=ह । ई एकहतिर वष-क आयुमे १९६७ ई. मे Hयागमे वग-वासी भेलाह । ई अपन वनाम-ध=य िपता म. म. जयदेव िमk तथा म. म. डा. गंगानाथ झाक सािmयमे िवाज-न कएल। १९२३ सँ १९५९ धिर िमkजी एलाहाबाद िवgिवालयमे संकृतक Hाmयापक छलाह । दरभंगा ’िमिथला शोध संथान’क िनदेशक पदपर िकछु समय काय- कए १९६२ सँ ६५ धिर कामेgर िसंह संकृत िवgिवालयक कुलपित रहलाह ।म. म. मुरलीधर झासँ Hभािवत भए ’िमिथलामोद’मे ई िलखब HारXभ कएलि=ह तथा अपन िविवध Hकारक रचनासँ मैिथलीक गकO समृ[् कएलि=ह । मैिथलीमे

िहनक Hिस[ 4=थ अिछ—’कमला’ (शेhसपीयरक ’टेXपेट’क भावानुवाद), ’नलोपा6यान’, ‘मैिथली-संकृित’ तथा अनेक वण-नाdमक एवं आलोचनाdमक िनब=ध; मनबोधक कृrणज=मक सXपादन, िवापितक कीित-लता, कीित-पताका, गोर0 िवजय आिदक अनुवाद-सXपादन सेहो कएल। अमरनाथ झा 1897-1955 सिरसब पाहीटोल 4ाममे १८९७ ई. मे भेल । िहनक िनधन पटनामे जखन ई िबहार लोक सेवा आयोगक अmय0 छलाह, १९५५ मे भेलि=ह । ई एलाहाबाद िवgिवालयक नओ वष- धिर कुलपित रिह पात् िह=दू िवgिवालयक सेहो कुलपितक पदकO सुशोिभत कएलि=ह । ई अंगरेजीक Hकाtड िवsान् छलाह, तािह संग िह=दी, उदू-, फारसी, संकृत, बङला एवं मैिथलीक सेहो अ”ुत िवsान् छलाह ।मैिथलीमे िहनका sारा सXपािदत ‘हष-नाथ का]य 4=थावली’ तथा ‘गोिव=ददासक kृˆङारभजन’ महddवपूर्ण अिछ । एिहसँ िभ िहनक मैिथली सािहdय पिरषदक अmय0ीय भाषण तथा अ=य लेख Hकािशत अिछ । भोलालाल दास 1897-1977 िहनक ज=म दरभंगा िजलाक कसरौर मे भेलि=ह । सािहdय सज-नाक अितिरhत अपन संगठन 0मता तथा मैिथली सािहdयक सव-तोमुखी िवकासक हेतु सतत तdपर रहबाक कारणO भोला बाबू मैिथली संसारक एक तXभक lपमे रहलाह । िहनक िनधन 1977 ई. मे भेल । मैिथलीक Hचार-Hसारमे ई अपन जीवन समिपत कएने छलाह। पा•यRममे मैिथलीकO थान हो तािह हेतु ई बीड़ा उठओलि=ह । िवालय तरक अनेक पोथीक िनमUण कएल । मैिथली सािहdय पिरषदक ई संथापक मtडलक सदय छलाह । 1931 सँ 1940 ई. पय-=त ओकर Hधान म=ी रहलाह । िहनक मि=dवकालमे ’भारती’ नामक मािसक पक Hकाशन भेल । एिहसँ पूव- (१९२९-३१) कुशेgर कुमरजीक संग संयुhत सXपादनमे ’िमिथला’ नामक प चलाओल । ई नवीन एवं Hगितशील िवचारक लोक छलाह । ननव लेखककO Hोdसािहत करब, शैलीमे एकlपता आनब, नव Hकाशनसँ मैिथलीक सािहdय भंडारक पूिZ- करब िहनक कZ-]य बिन गेल छल । िहनक िलखल ‘मैिथली ]याकरण’ तथा िहनकिह sारा सXपािदत ‘गकुसुमcजिल बहुत िदन धिर िवालयमे पढ़ाओल जाइत रहल । िहनक िलखल अनेक िनब=ध समालोचना, किवता, संमरण, जीवनी-सािहdय मैिथलीक पa-पिकामे िछिड़आएल अिछ । कुमार गंगान=द िसंह 1898-1971 ज=म—बनैली राजपिरवारमे 24-9-1898, मृdयु:-kीनगर पूिण-ञ ा 17-1-1970 । भूतपूव- िश0ामंी, िबहार एबं कुलपित, कामेgर िसंह दरभंगा संकृत िवgिवालय ।रचना—अिगलही (उप=यास) तथा अनेक कथा एवं एकcकी । सािहdयकारक lपमे अिगलही लएकO िवशेष र]याित । युगक अनुlप सामािजक कुरीित आिदकO आधार बनाए सुधारवादी दृिwएँ कथा सभिहक रचना|

रमानाथ झा 1906-1971 ज=म दरभंगा िजलाक उजान (धम-पुर) 4ाममे 1906 ई. मे एवं िहनक िनधन दरभंगामे १९७१ ई. मे भेलि=ह । 1930 ई. मे अङरेजीमे एम. ए. कएलाक बाद ई कतोक वष- धिर मधेपुर उ™च िवालयक Hधानाmयापक छलाह, तकरा बाद दरभˆङा-राज-लाइxेरीक पुतकालयाmय0क lप मे 1936 सँ अि=तम समय धिर रहलाह । 1952 सँ 62 च=qधारी िमिथला कॉलेजमे Hो. झा अङरेजीक Hाmयापक lपO काजka पात् ओही कॉलेजमे मैिथली िवभागाmय0 बनाओल गेलाह । 1965 मे रमानाथ बाबू सािहdय अकादमीक मैिथलीक Hितिनिध िनवUिचत भेलाह जािह पद पर ओ जीवनक अ=त समय तक रहलाह । िहनक रचनाक 0े बहुत ]यापक छल । िहनक अनुसंधानाdमक िनबंक दू गोट सं4ह ‘िनब=धमाला’ तथा ‘Hबंध सं4ह’ Hकािशत अिछ । संकिलत सXपािदत पुतक सभमे ‘मैिथली प-सं4ह’, ‘मैिथली ग-सं4ह’, ‘Hाचीन गीत’, ‘कथा का]य’, ‘नवीन गीत’, ‘किवता कुसुम’, ‘कथा सं4ह’ आिद अिछ । ‘कथासिरdसागर’क आधार पर Hाœल ग शैलीमे िहनक ‘उदयन-कथा’ तथा ‘बर/िच-क था’ बेश 6याित पओलक । ]याकरणक ‘िमिथला भाषा Hकाश’, ‘अलhङारHवेश’ आिद अनेक 4=थ Hकािशत अिछ । ‘मैिथली सािहdय पa’ ैमािसक पिaकाक संपादक। काशीका=त िमk “मधुप ” 1906-1987 ’राधािवरह’ (महाका]य) पर सािहdय अकादेमी पुरकार Hाoत मैिथलीक Hशत किव आ मैिथलीक Hचार- Hसारक समिप-त काय-कतU ’झंकार’ किवतासँ Rाि=त गीतक आान कएलिन । Hकृित Hेमक िवल0ण किव । ’घसल अठी किवताक लेल क{य आ िश}प-संवेदना—दुहू तर पर च रम लोकिHयता भेटलिन। कcžचीनाथ झा “िकरण ” 1906-1988 ज=म थान-धम-पुर,लोहना रोड, दरभंगा िबहार । मैिथली भाष ा आंदोलनमे महdवपूण- भूिमका। ’पराशर’ महाका]य लेल सािहdय अकादमी ओ ’कथा िकरण’ लेल वैदेही पुरकारसँ सXमािनत । Hकािशत कृित: चंq4हण (उप=यास), वीर-Hसून (बालकथा), जय ज=मभूिम (एकcकी), िवजेता िवापित (नाटक), कथा-िकरण (कथा-सं4ह), िकरण-किवतावली, कतेक िदनक बाद (किवता-सं4ह) , पराशर (महाका]य) ओ िकरण-िनबंधावली (िनबंध-सं4ह) आिद। ईशनाथ झा 1907 - 1965 बहुमुखी Hितभाक किव । Hाचीन आ नवीन प[ितक का]य-रचनाक िवल0ण संयोग िहनकर किवतामे भेटैत अिछ । दिलत वग-, शोषणक समया, वदेश Hेमक यथाथ-वादी रचनाक संग संग ]यिhतिनŠ क}पनाक अनेक िविशw किवता मैिथलीमे िलखलिन । भुवनेgर िसंह ‘भुवन ’ 1907 - 1944

अपन खाढ़ीक बहुमुखी Hितभाक किव । Hाचीन आ नवीन रीितक किवताक रचना िवपुल सं6यामे कएलिन । ’भुवन भारती’ किवता संकलन Hकाशनसँ मैिथली ओज आ नव चेतनाक शंख फुकलिन। तंaनाथ झा 1909 - 1984 ज=म १९०९ ई मे दरभंगा िजलाक धम-पुर 4ाममे भेलि=ह मुdयु ४-५-’८४,च=qधारी िमिथला कॉलेजमे अथ-शाक Hाmयापक छलाह । अवकाश 4हण क का]य साधनामे लागल रहलाह । महाका]य, मुhतक, एकcकी सभ िवधामे ई िस[ हत छलाह । िहनक ’कीचक वंध’ महाका]य अङरेजीक ‘†लैhङ भस-’ (अिमा0र छ=द) म िलखल अिछ । मैिथलीमे ’सौनेट’ एवं †लैhङ भस-’क ई Hथम Hयोhता िथकाह । संकृत परXपरामे का]य रचना किरतहुँ पााdय शैलीक नवीनता िहनका रचनामे भेल । िहनक ’कीचक वध’ ओ ’कृrण चिरत’ महाका]य—‘मŸल-पžचािशका’ एवं ‘नमया’ मैिथली सािहdयमे अपन िविशw थान रखैछ । तकर अितिरhत मुhतक का]यमे िवषय वतुक ]यापकता एवं िश}प शैिलक Hचुरता अबैत अिछ । एक िदश यिद Hाचीन ढंगक ईबर व=दनाक रचना कएलि=ह तँ दोसर िदस ‘सौनेट’ (चतुद-शपदी) ‘बैलेड’ आिद िलखबामे पूण- सफलता Hाoत कएलि=ह ।‘कृrण चिरत’ महाका]य पर िहनका 1979 ई क सािहdयक अकादमी पुरकार भेटलि=ह । 1980 ई. मे िहनका अिभन=दन 4=थसमिप-त कएल गेलि=ह । सुरे=द्र झा ‘सुमन ’ 1910 - 2002 ज=म: 4ाम : ब}लीपुर, िजला-समतीपुर । Hकािशत कृित: Hितपदा, अच-ना,साओन-भादव,अंकावली, अ=तनUद, पयिवनी, उZरा आिद तीससँ अिधक मौिलक किवता-पुतक;पु/ष -परी0ा, अनुगीतcजिल, ऋतु kृंगार तथा वण-राकर, पािरजात-हरण, कृrणजन्म, आन=द-िवजय आिद कितप य 4=थक अनुवाद-संपादन; ’मैिथली का]य पर संकृतक Hभाव’ नामक समी0ा-4ंथ। ’पयिवनी’ लेल १९७१ मे सािहdय अकादेमी पुरकार तथा ’उZरा’ पर १९१८ मे मैिथली अकादेमीक िवापित पुरकार Hाoत । मैिथलीक Hथम दैिनक पa ’वदेश’क ल†धHितŠ सXपादक। उपे=q ठाकुर ‘मोहन ’ 1913 - 1980 ज=म १९१३ ई. मे दरभंगा िजलाक चतिरया 4ाममे भेलि=ह । मृdयु २४-५-१९८० । संकृत िश0ामे सािहdयाचाय- ओ बड़ौदा राजक िवsत्-परी0ासँ ‘सािहdय-र’क उपािधसँ िवभूिषत भेलाह । दैिनक आयUवत-मे आिदअिहसँ, पात् १९६० सँ िमिथला िमिहरक उप-सXपादक एवं सह-सXपादक lपO काय- करैत १९७७ मे सेवा िनवृत भेलाह ।मोहनजी करीब पचास वष- सािहdय साधनामे लागल रहलाह । िवजयान=द, कुंजरंजन, सुदश-न, पुtडरीक, शाी, बामन आिद छf नामसँ प-पिकाम े िविवध िवषयपर िहनक लेख सभ Hकािशत भेल अिछ ।मोहन जीक ‘बािज उठल मुरली’मे १०१ गोट किवताक संकलन अिछ जािहमे िहनक सुदीघ- का]य-आराधनाक िविभa िवचारधाराक ओ िविभa अनुभूितक साम4 ी उपल†ध अिछ । एिह पुतकपर मोहन’जीकO १९७८ मे सािहdय अकादम् पुरकार भेटलि=ह। एिहसँ बहुत पूव- िहनक ’फुलडाली’ नामक किवता सं4ह सेहो Hकािशत भेल छल |

उपे=q नाथ झा ‘]यास ’ 1917 - 2002 ज=म थान-हिरपुर वकशीटोल, मधुबनी, िबहार । ’दू-पa’ ले ल सािहdय अकादेमी पुरकारसँ सXमािनत । सािहdय अकादेमीक अनुवाद पुरकार Hाoत । Hकािशत कृित: कुमार, दू पa (उप=यास), िवडंबना, भजना भजले (कथा-सं4ह), पतन सं=यासी, Hतीक (का]य), महाभारत (पिहल दू पव-) आिद। xजिकशोर वमU ‘मिणपf ’ 1918 - 1986 ज=म थान-बहेड़ा, दरभंगा िबहार । नैका बिनजार (उप=यास) लेल सािहdय अकादेमी पुरकारसँ सXमािनत । उप=यासकार, कथाकार ओ किव । Hकािशत कृित: कोxागल-, कनकी, अ[-नारीgर, लोिरक िवजय, नैका- बिनजारा, लवहिर-कुशहिर, राय रणपाल, आिदम गुलाम आिद उप =यास ओ कंठहार (नाटक) आिद। बुि[धारी िसंह रमाकर 1919 - 1991 ज=म मधुबनीमे 1919 ई. मे भेल । अपन िपता व. 0ेमधारी िसंहसँ िविभa िवषयक िश0ा 4हण कएलि=ह । ई रामकृrण कॉलेज, मधुबनीक मैिथली िवभागाmय0 छलाह । जतएसँ अवकाश Hाoत कएलि=ह । बा}या- वथिहसँ ई किवकाय-मे लागल रहलाह अिछ । संकृत तथा मैिथली दुनू भाषामे िहनक रचना Hकािशत अिछ । यथा—मैिथलीमे ‘Hयास’ (कथा-सं4ह), ‘मधुमती’, ‘अमरबापू’ (किवता-सं4ह), ‘शरश¢या’ (खंड-का]य) ‘मृित साह£ी’ (महाका]य) आिद । गोिव=द झा 1923 - ज=मथान-इसहपुर, सनकोथु- सिरसब पाही, मधुबनी, िबहार । Hिस[कथाहार,उप=यासकार, नाटककार, भाषा वैjािनक ओ अनुवादक। सािहdय अकादेमी पुरकार, सािहdय अकादेमी अनुवाद पुरकारसँ सXमािनत। िबहार सरकारसँ कािमल बु}के पुरकार, ि4यस-न पुरकार आिदसँ सXमािनत । Hकािशत कृित: उप=यास, नाटक, कथा, किवता, भाषा िवjान आिद िविभ िवधामे अड़तीस टा पो थी Hकािशत । Hकाशन: सामाक पौती,नेपाली सािहdयक इितहास (अनु) आिद । Hबोध सXमान 2006 सँ सXमािनत। सुधcशु शेखर चौधरी 1922 - 1990 ज=म दरभंगाक िमkटोलामे 1922 ई. मे भेलि=ह तथा मृdयु 1990 ई. मे भेलि=ह । िकछु िदन िविभ जीिवकामे रिह पात् सािहdयकारक जीवन HारXभ कएल । िकछु िदन ‘बैदेही’क सXपादन kी सुमनजी एवं kी कृrणका=त िमkजीक संग कएल तdपात् 1060 ई. सँ 1982 ई. धिर पटनामे ‘िमिथला िमिहर’’क सफल सXपादन कएल ।िहनक दू गोट ना¤यकृित-‘भफाइत चाहक िजनगी’ , लेटाइत आँचर’, तथा ‘पिहल स‘झ’ िहनक नाटकक नीक ]यावहािरक अनुभवक पिरचायक अिछ ।छfनामस ँ िहनक दू गोट उप=यास िमिहर’ मे Hकािशत भेल अिछ । िहनक उप=यास ई वतहा संसार’ जे मैिथली अकादमी sारा Hकािशत भेल आ जािह पर 1980 क सािहdय अकादमीक पुरकार देल गेल | योगान=द झा 1923 - 1986

िहनक ज=म मधुबनी िजलाक कोइलख 4ाममे 1923 ई. मे भेलि=ह । मृdयु 1986 मे भेलिन । अ4ेजीमे एम. ए. कएलाक पात् ई िकछु िदन च=qधरी िमिथला कॉलेजमे Hाmयापक रहलाह । िबहार Hशासिनक सेवामे 1981 धिर िविभ पदपर काय- कएल । तdपाdमैिथली अकादमीक िनदेशक ’84 धिर ।योगान=द झाजी मैिथली सािहdयमे अपन उप=यास ‘भलमानुस’ एवं ‘पिवा’क हेतु 6यात छिथ । िहनक नाटक ‘मुिनक मित¥म’ एवं कथा सं4ह ‘उड़ैत वंशी’ यथेw HितŠा Hाoत कएने अिछ । एकर अितिरhत ई महाdमा गा=धीक आdमकथाक अनुवाद एवं ‘आमक जलखरी’ नामक एक कथा सं4हक सXपादन सेहो कएने छिथ | रामकृrण झा ‘िकसुन ’ 1923 - 1970 आधुिनक धाराक िविशw किव, कथाकार, िच=तक । Hकािशत कृित: आdमनेपद (किवता सं4ह), मैिथली नवकिवता (सXपादन)। मृतयुपरा=त ’िकसुन रचनावली’ तीन खtडमे Hकािशत । उमानाथ झा 1923 - ज=म:-1-1-1923: महरैल, भधुबनी ।भूतपूव- अङरेजी िवभागा mय0 एवं Hित-कुलपित िमिथला िवgिवालय, दरभंगा । रचना:-रेखािच, अतीत (कथा सं4ह); मैिथली नवीन सािहdय, इ=q धनुष, िवापित गीतशती (सXपादन)। Hबोध नारायण िसंह 1924 - 2005 िह=दी, संकृत, मैिथली, पाली एवं फारसीक िवsान्। िमिथला, मैिथल एवं मैिथलीक ई अन=य भhत छिथ । कलकZा रिह िमिथला दश-न’, मैिथली किवता’, मैिथली रंगमंच’ आिद पिकाक Hकाशनक माmयमसँ kी Hबोधजी मैिथलीक जे सेवा कएल अिछ तकर वण-न थोड़मे सXभव निह । अनेक बङला कृितक ई अनुवाद सेहो कएल अिछ ।िह=दीमे सेहो िहनक ‘किवता सं4ह’ Hकािशत अिछ ।कलकZा िवgिवालयमे िह=दीक पूव- अmय0। च=q नाथ िमk अमर 1925 - ज=म: खोजपुर, मधुबनी । विरŠ किव, कथाकार-उप=यासकार । हाय-]यंˆयक किवतामे बेजोड़। मैिथलीक लेल समिप-त ]यिhतdव । पcच दज-नसं बेसी कथा आ िवदागरी, वीरक=या (उप=यास) जल समािध (कथा सं4ह) Hकािशत । ’पaकािरताक इितहास’ लेल सािहत्य अकादमीसं सXमािनत। एम. एल. एकेडमी, लहेिरिरयासरायसं िश0कक lपमे अवकाश Hाoत। आशा िदशा, गुदगुदी, युगचR, उनटा पाल आिद किवता सं4ह Hकािशत। जयधारी िसंह 1929-2007 समी0क, किव । Hकाशन: बौ[गानमे तcिaक िस[cत, समी0ा शाaा अिद । रामकृrण कॉलेज, मधुबनीमै मैिथली िवभागक पूव- अmय0

गोपालजी झा ‘गोपेश ’ 1931 - 2008 ज=म मधुबनी िजलाक मेहथ गाममे १९३१ ई.मे भेलि=ह।िहनकर रिचत “सोन दाइक िच(ी”, “गुम भेल ठाढ़ छी”, “एलबम” “आब कहू मन केहन लगैए”, “मखानक पात” Hकािशत भेल जािहमे सोनदाइक िच(ी बेश लोकिHय भेल लिलत 1932-1983 ज=म थान बसैठ चानपुरा मधुबनी, िबहार । Hिस[ कथाकार ओ उप=यासकार । Hकािशत कृित: Hितिनिध, (कथा सं4ह), पृ{वी-पुa (उप=यास) आिद। धूमकेतु 1932-2000 ज=म थान कोइलख, मधुबनी, िबहार । Hिस[ कथाकार, उप=यासकार ओ किव । Hकािशत कृित : दू टा कथा सं4ह ओ एक टा उप=यास । राजमोहन झा 1934 - ज=म थान कुमरबािजतपुर, वैशाली, िबहार । H6यात कथाकार ओ संपादक । आइ कािD परसू (कथा- सं4ह) लेल सािहdय अकादेमीसँ सXमािनत । Hकािशत कृित : एक आिद एकcत, झूठ स‘च, एकटा तेसर, अनुलˆनक, आइ कािD परसू (कथा सं4ह), गलतीनामा, भनिह िवापित, टीoपणीdयािद (आलोचना)। ’आरXभ’ पिaकाक संपादन।Hबोध सXमान 2009 सँ सXमािनत। डॉ. धीरे=q 1934 - 2004 ज=म थान लोहन, सिरसब पाही, मधुबनी, िबहार । Hिस[ कथाकार,उप=यासकार ओ किव । Hकािशत कृित: कुहेस आ िकरण, पझाइत घूरक आिग, शतlपा ओ मनु अपन मि=दर (कथासं4ह) ह¦गरमे ट‘गल कोट, कािD ओ आइ (किवता सं4ह) सिहत कैक िवधामे िविभ पोथी। सोमदेव 1934 - उप=यासकार ओ किव । सािहdय अकादेमी पुरकारसँ सXमािनत । Hकािशत कृित: चानोदाइ, होटल अनारकली (उप=यास), काल mविन (किवता सं4ह), चरैवेित (गीित ना¤य) सोम सतसइ (दोहा)। रमान=द रेणु 1934 - ज=म थान उसमामठ, दरभंगा, िबहार । विरŠ किव, कथाकार ओ उप=यासकार। सािहdय अकादेमी पुरकारसँ सXमािनत। Hकािशत कृित: कचोट, िaकोण, अंतहीन आकाश (कथा-सं4ह), दूधफूल (उप=यास), अंतत:, ओकरे नाम (किवता-सं4ह)

रामभq , धनुषा, नेपाल १९३५ - २०२० सािहdय तथा अ=या=य 0ेaक कतोक सफल ]यिhतसभ अपन Hेरणा£ोत आ पथ-Hदश-क मानैत छिथ । मैिथली सािहdय-0ेaमे िहनक पिरचयक मादे एतबाए कहब पयUoत होएत जे मैिथलीक मू[-=य सािहdयकार डा. धीरे=q िहनका मैिथली सािहdयक सव-kेŠ कथाकार मानैत छिथ ।िहनक कथामे Hतीकाdमकताक अदभुत Hयोगिहटा निह, अिपतु एकटा आदश- कथाक समत वैिशwसभिवमान रहैत अिछ । कथाकारक अितिरhत ई उdकृw समालोचक, नाटककार आ किव सेहो छिथ । नेपालमे मैिथलीक पिहल मोनो§ामा िलखबाक kेय सेहो िहनका जाइत छिन ।सामािजक कुरीितसभकँ कुशलतासँ िचaण करबामे, िच=तनीय बनएबामे आ मन- मितrकपर अिमट छाप छोड़बामे रामभq िस[हत छिथ । धनुषा िजलाक कुथU गाममे जनमल रामभqक पूण- नाम रामभq कण- छिन । अˆङरेजी िवषयक अवकाशHाoत िश0क रामभq ]याकरण, पाठयपुतक आ सहायक पुतकसभ िलखबाक काजमे िनर=तर सिRय छिथ। केदारनाथ चौधरी 1936 - ज=म 3 जनवरी 1936 ई नेहरा, िजला दरभंगामे। 1958 ई.मे अथ-शाaमे नातकोZर, 1959 ई.मे लॉ। 1969 ई.मे कैिलफोिन-या िव.िव.सँ अथ-थाa मे नातकोZर, 1971 ई.मे सान¨cिसको िव.िव.सँ एम.बी.ए., 1978मे भारत आगमन। 1981-86क बीच तेहरान आ H¦कफुत-मे। फेर बXबई, पुणे होइत 2000 सँ लहेिरयासरायमे िनवास। मैिथली िफ}म ‘ममता गाबय गीत’क मदनमोहन दास आ उदयभानु िसंहक संग सह िनमUता। तीन टा उप=यास 2004 मे चमेली रानी, 2006 मे करार, 2008 मे माहुर। व . kी हिरमोहन झा (१९०८ - १९८४) ज=म १८ िसतXबर १९०८ ई. 4ाम+पो.- कुमर बािजतपुर , िजला - वैशाली, िबहार, भारत। िपता- वगBय पं. जनाद-न झा “जनसीदन” मैिथलीक अितिरhत िह=दीक ल†धHितŠ िsवेदीयुगीन किव-सािहdयकार। िश0ा- दश-नशाaमे एम.ए.- १९३२, िबहार-उड़ीसामे सवª™च थान ले ल वण-पदक Hाoत। सन् १९३३ सँ बी.एन.कॉलेज पटनामे ]या6याता, पटना कॉलेजमे १९४८ ई.सँ Hाmयापक, सन् १९५३ सँ पटना िवgिवालयमे Hोफेसर तथा िवभागाmय0 आऽ सन् १९७० सँ १९७५ धिर यू.जी.सी. िरसच- Hोफेसर रहलाह। िहनकर मैिथली कृित १९३३ मे “क=यादान” (उप=यास), १९४३ मे “िsरागमन”(उप=यास), १९४५ मे “HणXय देवता” (कथा-सं4ह), १९४९ मे “रंगशाला”(कथा-सं4ह), १९६० मे “चच-री”(कथा-सं4ह) आऽ १९४८ ई. मे “ख«र ककाक तरंग” (]यंˆय) अिछ। “एकादशी” (कथा-सं4ह)क दोसर संकरण १९८७ ए. मे आयल जािहमे 4ेजुअट पुतोहुक बदलाने “sादश िनदान” सिXमिलत कएल गेल जे पिहने “िमिथला िमिहर”मे छपल छल मुदा पिहलुका कोनो सं4हमे निह आएल छल।kी रमानथ झाक अनुरोधपर िलखल गेल “बाबाक संकार” सेहो एिह सं4हमे अिछ। आऽ हुनकर “ख«र काका” िह=दीमे सेहो १९७१ ई. मे पुतकाकार आएल। एकर अितिरhत िहनकक फुट Hकािशत-िलिखत पक सं4क “हिरमोहन झा रचनावली खtड ४ (किवता)” एिह नामसँ १९९९ ई.मे छपल आऽ िहनकर आdमचिरत “जीवन-याaा” १९८४ ई.मे छपल। हिरमोहन बाबूक “जीवन याaा” एकमाa पोथी छल जे मैिथली अकादमी sारा Hकािशत भेल छल आऽ एिह 4ंथपर िहनका सािहdय अकादमी पुरकार १९८५ ई. मे मृdयोपरा=त देल गेलि=ह। सािहdय अकादमीसँ १९९९ ई. मे “बीछल

कथा” नामसँ kी राजमोहन झा आऽ kी सुभाष च=q यादव sारा चयिनत िहनकर कथा सभक सं4ह Hकािशत कएल गेल, एिह सं4हमे िकछु कथा एहनो अिछ जे िहनकर एखन धिरक कोनो पुरान सं4हमे सिXमिलत निह छल। िहनकर अनेक रचना िह=दी, गुजराती, मराठी, कड़, तेलुगु आिद भाषामे अनुवािदत भेल। िह=दीमे “=याय दश-न”, “वैशेिषक दश-न”, “तक-शाa”(िनगमन), दZ-चटजBक “भारतीय दश-नक” अं4ेजीसँ िह=दी अनुवादक संग िहनकर सXपािदत “दाश-िनक िववेचनाएँ” आिद 4=थ Hकािशत अिछ। अं4ेजीमे िहनकर शोध 4ंथ अिछ- “¬े=­स ऑफ िलंिˆविटक एनेिलिसस इन इंिडयन िफलोस ोफी”। Hाचीन युगमे िवापित मैिथली का]यकO उdकष-क जािह उ™च िशखरपर आसीन कएलिन, हिरमोहन झा आधुिनक मैिथली गकO तािह थानपर पहुँचा देलिन। हाय ]यंˆयपूण-शैलीमे सामािजक-धािम-क lिढ़, अंधिवgास आऽ पाखtडपर चोट िहनकर लेखनक अ=यतम वैिशr¤य रहलिन। मैिथलीमे आइयो सवUिधक कीनल आऽ पढ़ल जायबला पीथी सभ िहनकिह छिन। हिरमोहन झा सम4 हिरमोहन झा जीक सम4 रचनाक एक बेर िसंहावलोकन कएल जाए। कथा-एकcकी १. १.अयाची िमk (एका¯ी) २. मंडन िमk (एका¯ी) ३. महाराज िवजय (एका¯ी)४. बौआक दाम (एका¯ी)५.रेलक झगड़ा (एका¯ी) ६. संगठनक समया- पa शैली ७. “रसमयी”क 4ाहक – पa-शैली ८.प‘च पa –पa-शैली ९. दलानपरक गoप१०.घूरपरक गoप११.पोखिड़परक गoप १२. चौपािड़परक गoप १३.धम-शाaाचाय- १४.Tयोितषाचाय- १५.पंिडतजी १६.किवजी १७.पिरवत-न १८.युगक धम- १९.महारानीक रहय २०.सात रंगक देवी २१.नौ लाखक गoप २२.रंगशाला २३.अँचारक पाितल २४.िचिकdसाक चR २५.रेशमी दोलाइ २६.धोखा २७.Hेसक लीला २८.देवीजीक संकार २९.एिह बाटे अबै छिथ सुरसिर धार ३०. क=याक जीवन ३१. रेलक अनुभव ३२. 4ामसेिवका ३३. मयUदाक भंग ३४. ितरहुताम ३५.टोटमा ३६.तीथ-याaा ३७.अलंकार-िश0ा ३८.बाबाक संकार ३९.sादश िनदान ४०.4ेजुएट पुतोहु ४१.xyाक शाप ४२.आदश- भोजन ४३.सासुरक िच=ह ४४.कालीबाड़ीक चोर ४५.कालाजारक उपचार४६.िविनमय ४७.दरोगाजीक मॲछ ४८.शाaाथ- ४९.िवकट पाहुन ५०.आदश- कुटुXब ५१.साझी आkम ५२.घरजमाय५३.भदेशक नमूना ५४.बीमाक एजे=ट ५५.अंगरेिजया बाबू प १.सनातनी बाबा ओ किलयुगी सुधारक २.क=याक नीलामी डाक ३.िमिथलाक िमिहर सँ ४.ढाला झा ५.टी. पाटB ६.बुचकुन झा ७.पंिडत लोकिन सँ ८.िनरसन मामा ९.आिग १०.अङरेिजया लड़कीक समदाउिन ११.गरीबनीक बारहमासा १२.kी याaीजीक Hित : मैिथलीक उिhत १३.सौराठ १४.अलगी १५.अशोक- वािटकामे १६.पटना-तोa १७.k[ेय अमरनाथ झाक Hित k[cजिल १८.िह=दी ओ मैिथली १९.बुचकुन बाबाक िच(ी २०.जगमग-जगमग दीप जराऊ २१.कलकZा गेला उZर २२.अकाल २३.कलकZा हमरा बड़ पस=द २४.सलगमक खtड २५.बूढ़ानाथ २६.नवकी पीढ़ीसँ २७.पंिडत ओ

मेम २८.पंिडत-िवलाप २९.गंगाक घाटपर ३०.समयक चR ३१.महगी-माहाdXय ३२.रस-िनम=aण ३३.अकिवताक Hित : किवताक उिhत ३४.हम पाहुन छी ३५.अनागत Hेयसीसँ ३६.मdय-तीथ- ३७.िमwा ३८.हे राजकमल ३९.घटक सॱ ४०.पंिडतजी सॱ ४१.किनय‘क समया ४२.मुhतक ४३.गजल ४४.मातृभूिम ४५.नारी-व=दना ४६.हे दुलही के माय ४७.माaूभूिम व=दना ४८.च=qमाक मृdयु ४९.िमिथला व=दना ५०.किव हे! आब कोदािर ध/ ५१.महगी ५२. नव पराती ५३.चािलस आ चौहZिर ५४.Hयोगवादी किवता ५५.व. लिलत नारायण िमkक मृितमे ५६.उ´गार ५७.अि=तम सdय ५८.मधुर भाषा मैिथली छी ५९.छगु=ता ६०.िवापित पव- महान हमर ६१.आठ संक}प ६२.घूटर काका ६३.वनगाम-मिहषी मृित ६४.मैिथली-व=दना ६५.हे मातृभूिम केर मािट ६६.कहू की औ बाबू ६७.कमीर हमर थीक ६८.मंगल Hभात ६९.बुचकुन बाबाक व¶ ७०.जय िवापित ७१.शुभcशसा ७२.पािरचािरका तोa ७३.मनचन बाबा ७४.एिह बेरक फगुआ ७५.परता/ जुिन ७६.हे मजूर! कw लिख अ ह‘क (किवजी: HणXय देवता) ७७.हे हे मजूर! (किवजी: HणXय देवता) ७८.अिब! अन=त कोमल क/णे! (किवजी: HणXय देवता) ७९.हे वीर! हलायुध धर ख­ग(किवजी: HणXय देवता) ८०.अिय! Hचंड चंिडके! (किवजी: HणXय देवता) ८१.झ‘सीक रानी(किवजी: HणXय देवता) ८२.हे Hगितशील मिहला समाज(किवजी: HणXय देवता) ८३.िHये! हम जाइत छी ओिह पार(किवजी: HणXय देवता) ८४.ध=य-ध=य मातृभूिम (अयाची िमk : चच-री) ८५.ध=य ई िमिथलेशक दरबार(अयाची िमk : चच-री) ८६.हे डीह! अमर कीित-क िनधान! (अयाची िमk : चच-री) ८७.हिरहर ज=म िकएक लेल (माछक महdव : ख«र ककाक तरंग) ८८.केहन भेल अ=हेर(ख«र ककाक टटका गoप : ख«र ककाक तरंग)

ख«र ककाक तरंग (कथा-]यंˆय) क=यादान (उप=यास) िsरागमन (उप=यास) जीवनयाaा (आdमकथा) क=यादानक समप-ण - जे समाज क=या क¦ जड़ पदाथ-वत् दान कय देबा मे कुंिठत निह होइत छिथ, जािह समाजक सूaधार लोकिन बालक क¦ पढ़ैबाक पाछ‘ हजारक हजार पािन मे बहबैत छिथ और क=याक हेतु चािर कैžचाक िसलेटो कीनब आवयक निह बुझैत छिथ, जािह समाजमे बी.ए. पास पितक जीवन-संिगनी ए

बी पय-=त निह जनैत छिथ=ह, जािह समाज क¦ दाXपdय-जीवनक गाड़ी मे सरकिसया घोड़ाक संग िनरीह बाछी क¦ जोतैत कनेको ममता निह लगैत छि=ह, ताही समाजक महारथी लोकिनक कर-कुिलश मे ई पुतक सिवनय, सानुरोध ओ सभय समिप-त। HणXय देवताक समप-ण - आइ सँ सात वष- पूव- जे काित-की पूिण-माक करार पर हमरा सँ प¦च लऽ गेलाह और तिहयासँ पुनः किहयो दश-न देबाक कृपा निह कैलि=ह, जिनक िचर-मरणीय कीित--कलाप Hथमे कथा मे िवशद lप सँ विण-त छै=ह, जे “HणXय देवता” क मmय सव-kेŠ आसन पर अिधकार जमा सकैत छिथ, जिनक व=दनीय ब=धुवग- ई पुतक देिख िवनु मङनिह अपन वdव थािपत कय लऽ सकैत छिथ, तेहन Hमुख चिरत-नायक, िवकट पाहुन भीमे=qनाथ क सुदृढ़ िवशाल मुिwमे ई िविचa-चिरa-पूण- पोथी िववशतापूव-क अिप-त छै=ह! ख«र ककाक तरंगक समप-ण - जे भंगक तरंगमे का]य-शाa-िवनोदक धारा बहा दैत छिथ; जि नक Hवाहमे थोड़ेक कालक हेतु वेद-पुराण, धम-शाa, सभटा भिसया जाइत अिछ; जे बात-बातमे अ”ुत रस ओ चमdकारक चाशनी घोिर दैत छिथ; जे मम-पषB ]यंˆय sारा लोकक अ=ततल मे पहुँिच गुदगुदी लगा दैत छिथ; तेहन िचर आन=दमूित-, पिरहास-िHय ख«र कका क¦- d]दीयं वतु िपतृ]य! तु·यमेव समिप-तम्। रंगशालाक समप-ण- जे अ0ययौवना नटी एिह अनािद अन=त रंगशालाक Hवित-का िथकीह, जे मनोहर वीणा- वािदनी सXपूण- चराचर िवgक¦ अपना आंगुरक अ4भाग पर नचा रहल छिथ, जे रहयमयी अपन मोिहनी लीलाक झलक देखाय ककरो पश- निह करय दैत छिथ=ह, जे क}पनाक रंगीन प‘िख पर आिब कलाकारक कलामे रसक संचार करैत छिथ=ह, तेहन आय-कािरणी िचरसु=दरी aैलोhय-िवजियनी माया देवी क¦। व . kी वैनाथ िमk “याaी” (१९११ - १९९८) रचना- िचaा (किवता सं4ह), पारो, नवतुिरआ, बलचनमा (उप=यास) व. kी वैनाथ िमk “याaी” केर ज=म १९११ ई. मे अपन माम ागाम सतलखामे भेलि=ह, जे हुनकर गाम तरौनीक समीपिहमे अिछ। याaी जी अपन गामक संकृत पाठशालामे पढ़ए लगलाह, फेर ओऽ पढ़बाक लेल वाराणसी आऽ कलकZा सेहो गेलाह आऽ संकृतमे “सािहdय आचाय-” केर उपािध Hाoत कएलि=ह। तकर बाद ओऽ कोलXबो लग कलिनआ थान गेलाह पाली आऽ बु[ धम-क अ mययनक लेल। ओतए ओऽ बु[धम-मे दीि0त भए गेलाह आऽ हुनकर नाम पड़लि=ह नागाजु-न। याaीजी माhस-वादसँ Hभािवत छलाह। १९२९ ई. क अि=तम मासमेमे मैिथली भाषामे प िलखब शुl कएलि=ह याaी जी। १९३५ ई.सँ िह=दीमे सेहो िलखए लगलाह। वामी सहजान=द सरवती आऽ राहुल सcकृdयायनक संग ओऽ िकसान आ=दोलनमे संलˆन रहलाह आऽ १९३९ सँ १९४१ धिर एिह Rममे िविभ जेलक याaा कएलि=ह। हुनकर बहुत रास रचना जे महाdमा ग‘धीक मृdयुक बाद िलखल गेल छल, Hितबि=धत कए देल गेल। भारत-चीन यु[मे कXयुिनट पाटB sारा चीनकO देल समथ-नक बाद याaीजीक मतभेद कXयुिनट पाटBसँ भए गेलि=ह। जे.पी. अ==दोलनमे भाग लेबाक कारण आपाdकालमे िहनका जेलमे ठूिस देल गेल। याaीजी िह=दीमे बाल सािहdय सेहो िलखलि=ह। िह=दी आऽ मैिथलीक अितिरhत बcˆला आऽ संकृतमे सेहो िहनकर लेखन आएल। मैिथलीक दोसर सािहdय अकादमी पुरकार १९६९ ई. मे याaीजीकO हुनकर किवता सं4ह “पaहीन नˆन गाछ”पर भेटलि=ह। १९९४ ई.मे

िहनका सािहdय अकादमीक फेलो िनयुhत कएल गेल। याaीजी जखन २० वष-क छलाह तखन १२ वष-क का=यासँ िहनकर िववाह भेल। िहनकर िपता गोकुल िमk अपन समाजमे अिशि0तक िगनतीमे छलाह, मुदा चिरaहीन छलाह। याaीजीक ब™चाक मृित छि=ह, जे हुनकर िपता कोना हुनकर अवथ आऽ ओछाओन धेने मायपर कुरहिड़ लए मारबाक लेल उठल छलाह, जखन ओऽ बेचारी हुनकासँ अपन चिरaहीनता छोड़बाक गुहािर कए रहल छलीह। याaीजी माa छ वष-क छलाह जखन हुनकर माए हुनका छोिड़ Hयाण कए गेलीह। याaीजीकO अपन िपताक ओऽ िचa सेहो रिह-रिह सतबैत रहलि=ह जािहमे हुनकासँ मातृवत Hेम करएबाली हुनकर िवधवा काकीक, हुनकर िपताक अवैध स=तानक गभ-पातमे, लगभग मृdयु भए गेल छलि=ह। के एहन पाठक होएत जे याaीजीक िह=दीमे िलखल “रितनाथ की चाची” पढ़बाक काल बेर-बेर निह कानल होएताह। िपता-पुaक ई घमासान एहन बढ़ल जे पुa अपन बाल-पीकO िपत ा लग छोिड़ वाराणसी Hयाण कए गेलाह। कम-क फल भोगथु बूढ़ बाप हम टा संतित, से हुनक पाप ई जािन ैि=ह जनु मनताप अनको िबसरक िथक हमर नाम म‘ िमिथले, ई अंितम Hणाम! (काशी/ नवंबर १९३६) काशीसँ kीलंका Hयाण “कम-क फल भोगथु बूढ़ बाप” ई किह याaीजी अपन िपताक Hित सभ उ´गार बाहर कए दैत छिथ। १९४१ ई. मे याaीजी पी, अपरािजता, लग आिब गेलिथ। १९४१ ई. मे याaीजी दू टा मैिथली किवता िलखलि=ह- “बूढ़ वर” आऽ िवलाप आऽ एकरा पाXफलेट lपमे छपबाए ¬ेनक याaी लोकिनकO बेचलि=ह।जीिवकाक तािकमे सौँसे भारत दुनू Hाणी घुमलाह। पीक जोर देलापर बीच-बीचमे तरौनी सेहो घुिम कए आबिथ। आऽ फेर अएल १९४९ ई. अपना संग लेने याaीजीक पिहल मैिथली किवता-सं4ह “िचaा”। १९५२ ई. धिर पी संगमे घुमैत रहलिथ=ह, फेर तरौनीमे रहए लगलीह। याaीजी बीच- बीचमे आबिथ। अपरािजतासँ याaीजीकO छह टा स=तान भेलि=ह, आऽ सभक सभ भार ओऽ अपना का=हपर लेने रहलीह। याaीजी दमासँ परेशान रहैत छलिथ। हम जखन दरभंगामे पढ़ैत रही तँ याaीजी 6वाजा सरायमे रहैत छलाह। हमरा मोन अिछ जे मैिथलीक कोनो काय-Rममे याaीजी आएल छलाह आऽ कXयुिनट पाटBबला सभ एजे=डा छीिन लेने छल। अिगले िदन याaीजी अपनाकO ओिह धोधा-धोखीमे गेल सभाक काय-वाहीसँ हटा लेलि =ह। एमज¹=सीमे जेल गेलाह तँ आर.एस.एस. केर काय-कतU लोकिनसँ जेलमे भOट भेलि=ह। आऽ जे.पी.क सXपूण- Rाि=तक िव/[ सेहो जेलसँ बाहर अएलाक बाद िलखलि=ह याaीजी। याaीजी मैिथलीमे बैनाथ िमk “याaी” आऽ िह=दीमे नागाजु-न केर नामसँ रचना िलखलि=ह। “पृ{वी ते पाaं” १९५४ ई. मे “वैदेही”मे Hकािशत भेल छल, हमरा सभक मैि¬कक िसलेबसमे छल। याaीजी िलखैत छिथ- “आन पाबिन ितहार तँ जे से। मुदा नबान िनभू-िम पिरवारकO देखार कए दैत छैक। से काितक अबैत देरी अपरािजता देवीक घोघ लटिक जाइि=ह। कचोटO पपिनयो निह उठा होइ=ह ककरो िदश! बेसाहल असँ कतउ नबान भेलइए”?

आऽ अ=तमे याaीजीक संकृत प:- वास=ती कनकHभा Hगुिणता पीता/ण¹ः प}लवैः हेमाXभोजिवलासिव¥मरता दूरे िsरेफाः ता यैशसtडलकेिलकानन कथा िवमिरता भूतले छायािव¥मतारतXयतरलाः तेऽमी “िचनार” qुमाः॥ बसंतक विण-म आभा िsगुिणत भऽ गेल अिछ पीयर-लाल कोपड़सँ। वण-काल ¥ममे भौरा सभ एकरासँ दूर- दूर रहैत अिछ। न=दनवनक िवहार जे पृ{वीपर िबसािर दैत छिथ, छाह िझलिमल घटैत-बढ़ैत िजनक डोलब अिछ चंचल आ तरल। ओही िचनारकO हम देखने छी अिडग भेल ठाढ़। kी आरसी Hसाद िसंह (१९११-१९९६), एरौत, समतीपुर। मैिथली आऽ िह=दीक गीतकार। मैिथलीमे मािटक दीप, पूजाक फूल, सूय-मुखी Hकािशत। सूय-मुखीपर १९८४क सािहdय अकादमी पुरकार। व . राजकमल (मणी=q नारायण चौधरी) (१९२९ - १९६७) , मिहषी, सहरसा। रचना:- आिद कथा, आ=दोलन, पाथर फूल (उप=यास), वरगंधा (किवता सं4ह), ललका पाग (कथा सं4ह), कथा पराग (कथा सं4ह सXपादन)। िह=दीमे अनेक उप=यास, किवताक रचना, चौरŸी (बङला उप=यासक िह=दी lपा=तर) अdय=त Hिस[। िमिथलcचलक मmय वग-क आिथ-क एवं सामािजक संघष-मे बाधक सभ तरहक संकार पर Hहार करब िहनक वैिशr¤य रहलि=ह अिछ। कथा, किवता, उप=यास सभ िवधामे ई नवीन िवचार धाराक छाप छोिड़ गेल छिथ। व . kी गोपालजी झा “गोपेश ” क ज=म मधुबनी िजलाक मेहथ गाममे १९३१ ई.मे भेलि=ह। गोपेशजी िबहार सरकारक राजभाषा िवभागसँ सेवािनवृZ भेल छलाह। गोपेशजी किवता, एकcकी आऽ लघुकथा िलखबामे अिभ/िच छलि=ह। ई िविभ िवधामे रचन कए मैिथलीक सेवा कए लि=ह। िहनकर रिचत चािर गोट किवता सं4ह “सोन दाइक िच(ी”, “गुम भेल ठाढ़ छी”, “एलबम” आऽ “आब कहू मन केहन लगैए” Hकािशत भेल जािहमे सोनदाइक िच(ी बेश लोकिHय भेल। वतुिथितक यथावत् वण-न करब िहनक का]य-रचनाक िवशेषता छि=ह। मायान=द िमk क िहनक ज=म १७ अगत १९३४ ई. कO सुपौल िजलाक बनैिनय‘ गाममे भेलिन। तdकालीन बनैिनय‘ कोसीक Hकोपसँ उजिड़ गेल। फलतः िहनक आरिXभक िश0ा अपन मामा व. रामकृrण झा “िकसुन” क सािmयमे सुपौलसँ भेलिन। उ™च िश0ाक हेतु ई दरभंगा चिल गेलाह आऽ ओतएसँ बी.ए. कएल। पात् िबहार िवgिवालय मुज’फरपुरसँ िह=दी एवं मैिथलीमे एम.ए. कएलिन। १९५६ ई. मे आकाशवाणी पटनामे मैिथली काय-Rमक लेल िनयुhत भेलाह। एिह अविधमे मायान=द बाबू १० गोट रेिडयो

नाटक िलखलिन जे अdय=त Hशंसनीय रहल। १९६१ ई.मे ओऽ ]या6याता, मैिथली िवभाग, सहरसा कॉलेज सहरसा, पदपर िनयुhत कएल गेलाह, जतए ई िवgिवालय आचाय- एवं मैिथली िवभागाmय0क पदकO सुशोिभत कएल तथा एक सफल िश0कक lपमे अगत १९९४ मे एही िवभागसँ अवकाश 4हण कएलिन। पिहने मायान=द जी किवता िलखलि=ह,पछाित जा कय िहनक Hितभा आलोचनाdमक िनबंध, उप=यास आ’ कथामे सेहो Hकट भेलि=ह। भा¯ लोटा, आिग मोम आ’ पाथर आओर च=q-िब=दु- िहनकर कथा सं4ह सभ छि=ह। िबहािड़ पात पाथर , मंa-पुa ,खोता आ’ िचडै आ’ सूय Uत िहनकर उप=यास सभ अिछ॥ िदशcतर िहनकर किवता सं4ह अिछ। एकर अितिरhत सोने की नै¢या माटी के लोग, Hथमं शैल पुaी च,मंaपुa, पुरोिहत आ’ aी-धन िहनकर िह=दीक कृित अिछ। मंaपुa िह=द ी आ’ मैिथली दुनू भाषामे Hकािशत भेल आ’ एकर मैिथली संकरणक हेतु िहनका सािहdय अकादमी पुरकारसँ सXमािनत कएल गेलि=ह। kी मायान=द िमk Hबोध सXमानसँ सेहो पुरकृत छिथ। पिहने मायान=द जी कोमल पदावलीक रचना करैत छलाह , पाछ‘ जा’ कय Hयोगवादी किवता सभ सेहो रचलि=ह। हुनकर ऐितहािसक िनब=ध सं4ह “भारतीय परXपराक भूिमका” Hेसमे अिछ।ओऽ अपन योगदान मैिथली पaकािरतामे मैिथली पिaका “अिभ]यœना” िनकािल आऽ सXपािदत कए देलि=ह। हुनका “मैिथली मंचक राजकुमार” आऽ मैिथली मंचक स»ाट”क उपािध Hाoत छि=ह। हुनकर मैिथली आ=दोलनपर िलखल पोथी “अकथ कथा” Hकािशत भए रहल अिछ। ओऽ िह=दीमे उप=यास आऽ कथा सेहो िलखलि=ह। “माटी के लोग सोने की नै¢या” मे ओऽ कोसी 0ेaक नािवकक जीवन-संघष-कO िचिaत करैत छिथ। ओऽ Hाचीन भारतपर उप=यासक शृंखला िलखने छिथ। ओिह kेणीमे Hथम अिछ “Hथमं शैलपुaी च” जे २०००० ई.पू.सँ १८०० ई.पू. क स·यताक सामािजक, आिथ-क आऽ सcकृितक वlप देखबैत अिछ। हुनकर गहन शोधक बाद िलखल िकछु ऐितहािसक िनब=ध “Hाचीन भारत म¼ पु/ओZर” भारतीय इितहास पिरषद, नई िद}ली sारा Hकािशत कएल जाऽ रहल अिछ। डॉ Hफु}ल कुमार िसंह ‘मौन ’ (१९३८- )- 4ाम+पोट- हसनपुर, िजला-समतीपुर। िपता व . वीरे=q नारायण िसँह, माता व. रामकली देवी। ज=मितिथ- २० जनवरी १९३८. एम.ए., िडप.एड., िवा-वािरिध(िड.िलट)। सेवाRम: नेपाल आऽ भारतमे Hाmयापन। १.म.मो.कॉलेज, िवराटनगर, नेपाल, १९६३-७३ ई.। २. Hधानाचाय-, रा.H. िसंह कॉलेज, महनार (वैशाली), १९७३-९१ ई.। ३. महािवालय िनरी0क, बी.आर. अXबेडकर िबहार िवgिवालय, मुज’फरपुर, १९९१-९८. मैिथलीक अितिरhत नेपाली अं4ेजी आऽ िह=दीक jाता। मैिथलीमे १.नेपालक मैिथली सािहdयक इितहास(िवराटनगर,१९७२ई.), २.xy4ाम(िरपोतUज दरभंगा १९७२ ई.), ३.’मैिथली’ aैमािसकक सXपादन (िवराटनगर,नेपाल १९७०-७३ई.), ४.मैिथलीक नेनागीत (पटना, १९८८ ई.), ५.नेपालक आधुिनक मैिथली सािहdय (पटना, १९९८ ई.), ६. Hेमच=द चयिनत कथा, भाग- १ आऽ २ (अनुवाद), ७. वा}मीिकक देशमे (महनार, २००५ ई.)। Hकाशनाधीन: “िवदापत” (लोकधमB ना¤य) एवं “िमिथलाक लोकसंकृित”। भूिमका लेखन: १. नेपालक िशलोdकीण- मैिथली गीत (डॉ रामदेव झा), २.धम-राज युिधिŠर (महाका]य Hो. ल`मण शाaी), ३.अनंग कुसुमा (महाका]य डॉ मिणपf), ४.जट- जिटन/ सामा-चकेबा/ अिनल पतंग), ५.जट- जिटन (रामभरोस कापिड़ ¥मर)।

अकादिमक अवदान: परामशB, सािहdय अकादमी, िद}ली। काय-कािरणी सदय, भारतीय नृdय कला मि=दर, पटना। सदय, भारतीय भाषा संथान, मैसूर। भारतीय jानपीठ , िद}ली। काय-कािरणी सदय, जनकपुर लिलत कला HितŠान, जनकपुरधाम, नेपाल। सXमान: मौन जीकO सािहdय अकादमी अनुवाद पुरकार, २००४ ई., िमिथला िवभूित सXमान, दरभंगा, रेणु सXमान, िवराटनगर, नेपाल, मैिथली इितहास सXमान, वीरगंज, नेपाल, लोक-संकृित सXमान, जनकपुरधाम,नेपाल, सलहेस िशखर सXमान, िसरहा नेपाल, पूवªZर मैिथल सXमान, गौहाटी, सरहपाद िशखर सXमान, रानी, बेगूसराय आऽ चेतना सिमित, पटनाक सXमान भेटल छि=ह। राr¬ीय-अंतरUr¬ीय संगोŠीमे सहभािगता- इXफाल (मिणपुर), गोहाटी (असम), कोलकाता (प. बंगाल), भोपाल (मmयHदेश), आगरा (उ.H.), भागलपुर, हजारीबाग, (झारखtड), सहरसा, मधुबनी, दरभंगा, मुज’फरपुर, वैशाली, पटना, काठमाtडू (नेपाल), जनकपुर (नेपाल)। मीिडया: भारत एवं नेपालक HितिŠत पa-पिaका सभमे सह£ािधक रचना Hकािशत। आकाशवाणी एवं दूरदश-नसँ Hायः साठ-सZर वातUिद Hसािरत। अHकािशत कृित सभ: १. िमिथलाक लोकसंकृित, २. िबहरैत बनजारा मन (िरपोतUज), ३.मैिथलीक गाथा- नायक, ४.कथा-लघु-कथा, ५.शोध-बोध (अनुस=धान परक आलेख)। ]यिhतdव-कृितdव मू}यcकन: Hो. Hफु}ल कुमार िसंह मौन: साधना और सािहdय, सXपादक डॉ.रामHवेश िसंह, डॉ. शेखर शंकर (मुज’फरपुर, १९९८ई.)। चिच-त िह=दी पुतक सभ: थाl लोकगीत (१९६८ ई.), सुनसरी (िरपोतUज, १९७७), िबहार के बौ[ संदभ- (१९९२), हमारे लोक देवी-देवता (१९९९ ई.), िबहार की जैन संकृित (२००४ ई.), मेरे रेिडयो नाटक (१९९१ ई.), सXपािदत- बु[, िवदेह और िमिथला (१९८५), बु [ और िवहार (१९८४ ई.), बु[ और अXबपाली (१९८७ ई.), राजा सलहेस: सािहdय और संकृित (२००२ ई.), िमिथला की लोक संकृित (२००६ ई.)। वत-मानमे मौनजी अपन गाममे सािहdय शोध आऽ रचनामे लीन छिथ। डॉ. Hेमशंकर िसंह (१९४२- ) 4ाम+पोट- जोिगयारा, थाना- जाले, िजला- दरभ ंगा। मैिथलीक विरŠ सृजनशील, मननशील आऽ अmययनशील Hितभाक धनी सािहdय-िच=तक, िदशा-बोधक, समालोचक, नाटक ओ रंगमंचक िनrणात गवेषक, मैिथली गकO नव-वlप देिनहार, कु शल अनुवादक, Hवीण सXपादक, मैिथली, िह=दी, संकृत सािहdयक Hखर िवsान् तथा बाङला एवं अं4ेजी सािहdयक अmययन-अ=वेषणमे िनरत Hोफेसर डॉ. Hेमशंकर िसंह ( २० जनवरी १९४२ )क िवल0ण लेखनीसँ एकपर एक अ0य कृित भेल अिछ िनःसृत। िहनक बहुमू}य गवेषणाdमक, मौिलक, अनूिदत आऽ सXपािदत कृित रहल अिछ अिवरल चिच-त-अिच-त। ओऽ अदXय उdसाह, धैय-, लगन आऽ संघष- कऽ त=मयताक संग मैिथलीक बहुमू}य धरोरािदक अ=वेषण कऽ देलिन पुतकाकार lप। िहनक अ=वेषण पूण- 4=थ आऽ Hब=धकार आलेखाि द ]यापक, िच=तन, मनन, मैिथल संकृितक आऽ परXपराक िथक धरोहर। िहनक सृजनशीलतासँ अनुHािणत भऽ चेतना सिमित, पटना िमिथला िवभूित सXमान (ता»-पa) एवं िमिथला-दप-ण, मुXबई विरŠ ले खक सXमानसँ कयलक अिछ अलंकृत। सXHित चािर दशक धिर भागलपुर िवgिवालयक Hोफेसर एवं मैिथली िवभागाmय0क गिरमापूण- पदसँ अवकाशोपरा=त

अनवरत मैिथली िवभागाmय0क गिरमापूण- पदसँ अवकाशोपरा=त अनवरत मैिथली सािहdयक भtडारकO अिभवि[-त करबाक िदशामे संलˆन छिथ, वत=a सारवत-साधनाम े। कृित- िलoया=तरण-१. अ¯ीयानाट, मनोज Hकाशन, भागलपुर, १९६७। सXपादन- १. गव}लरी, महेश Hकाशन, भागलपुर, १९६६, २. नव एकcकी, महेश Hकाशन, भागलपुर, १९६७, ३.पa-पुrप, महेश Hकाशन, भागलपुर, १९७०, ४.पदलितका, महेश Hकाशन, भागलपुर, १९८७, ५. अनिमल आखर, कण-गोŠी, कोलकाता, २००० ६.मिणकण, कण-गोŠी, कोलकाता २००३, ७.हुनकासँ भेट भेल छल, कण-गोŠी, कोलकाता २००४, ८. मैिथली लोकगाथाक इितहास, कण-गोŠी, कोलकाता २००३, ९. भारतीक िबलािड़, कण-गोŠी, कोलकाता २००३, १०.िचaा-िविचa ा, कण-गोŠी, कोलकाता २००३, ११. सािहdयकारक िदन, िमिथला सcकृितक पिरषद, कोलकाता, २००७. १२. वुआिड़भिhततरिŸणी, ऋचा Hकाशन, भागलपुर २००८, १३.मैिथली लोकोिhत कोश, भारतीय भाषा संथान, मैसूर, २००८, १४.lपा सोना हीरा, कण-गोŠी, कोलकाता, २००८। पिaका सXपादन- भूिमजा २००२ मौिलक मैिथली: १.मैिथली नाटक ओ रंगमंच,मैिथली अकादमी, पटना, १९७८ २.मैिथली नाटक पिरचय, मैिथली अकादमी, पटना, १९८१ ३.पु/षाथ- ओ िवापित, ऋचा Hकाशन, भागलपुर, १९८६ ४.िमिथलाक िवभूित जीवन झा, मैिथली अकादमी, पटना, १९८७५.ना¤या=वाचय, शेखर Hकाशन, पटना २००२ ६.आधुिनक मैिथली सािहdयमे हाय-]यंˆय, मैिथली अकादमी, पटना, २००४ ७.Hपािणका, कण-गोŠी, कोलकाता २००५, ८.ई0ण, ऋचा Hकाशन भागलपुर २००८ ९.युगसंिधक Hितमान, ऋचा Hकाशन, भागलपुर २००८ १०.चेतना सिमित ओ ना¤यमंच, चेतना सिमित, पटना २००८ मौिलक िह=दी: १.िवापित अनुशीलन और मू}यcकन, Hथमखtड, िबहार िह=दी 4=थ अकादमी, पटना १९७१ २.िवापित अनुशीलन और मू}यcकन, िsतीय खtड, िबहार िह=दी 4=थ अकादमी, पटना १९७२, ३.िह=दी नाटक कोश, नेशनल पि†लकेशन हाउस, िद}ली १९७६. अनुवाद: िह=दी एवं मैिथली- १.kीपादकृrण कोDटकर, सािहdय अकादमी, नई िद}ली १९८८, २.अरtय फिसल, सािहdय अकादेमी, नई िद}ली २००१ ३.पागल दुिनया, सािहdय अकादेमी, नई िद}ली २००१, ४.गोिव=ददास, सािहdय अकादेमी, नई िद}ली २००७ ५.रhतानल, ऋचा Hकाशन, भागलपुर २००८. kी िबलट पासवान “िवहंगम ” जीक ज=म मधुबनी िजलाक एकहdथा 4ाममे १९४० ई. मे भेलि=ह। छाaावथासँ राजनीित एवं सािहdय दुनूमे अिभ/िच रहलि=ह अिछ। िकछु अविधक हेतु ई िबहार राTयक उपमंaी पदकO सेहो सुशोिभत कएलि=ह आऽ िबहार िवधान सभाक सदय रहलाह। गाम घरक िचaण एवं दिलत वग-क वण-न िहनक रचनामे सव-a भेटत। kी डॉ. गंगेश गुंजन (१९४२- )। ज=म थान- िपलखबाड़, मधुबनी। एम.ए. (िह=दी), रेिडयो नाटक पर पी.एच.डी.। किव, कथाकार, नाटककार आ’ उप=यासकार।१९६४-६ ५ मे प‘च गोटे किव-लेखक “काल पु/ष”(कालपु/ष अथUत् आब वगBय Hभास कुमार चौधरी, kी गंगेश गु=जन, kी साकेतान=द, आब वगBय

kी बालेgर तथा गौरीका=त चौधरीका=त, आब वगBय) नामसँ सXपािदत करैत मैिथलीक Hथम नवलेखनक अिनयिमतकालीन पिaका “अनामा”-जकर ई नाम साकेतान=दजी sा रा देल गेल छल आऽ बाकी चाl गोटे sारा अिभिहत भेल छल- छपल छल। ओिह समयमे ई Hयास तािह समयक यथािथितवादी मैिथलीमे पैघ दुसाहस मानल गेलैक। फणीgरनाथ “रेणु” जी अनामाक लोकाप-ण करैत काल कहलि=ह, “ िकछु िछनार छौरा सभक ई सािहिdयक Hयास अनामा भावी मैिथली लेखनमे युगचेतनाक जlरी अनुभवक बाट खोलत आऽ आधुिनक बनाओत”। “िकछु िछनार छौरा सभक” रेणुजीक अपन अ=दाज छलि=ह बजबाक, जे हुनकर स=सग-मे रहल आऽ सुनने अिछ, तकरा एकर ]यœना आऽ रस बूझल हेतैक। ओना “अनामा”क कालपु/ष लोकिन कोनो lपमे सािहिdयक मा=य मयUदाक Hित अवहेलना वा ितरकार निह कएने रहिथ। एकाध िटoपणीमे मैिथलीक पुरानपंथी का]य/िचक Hित कितपय मुखर आिवrकारक वर अवय रहैक, जे सभ युगमे नव-पीढ़ीक वाभािवक ]यवहार होइछ। आओर जे पुरान पीढ़ीक ल ेखककO िHय निह लगैत छिन आऽ सेहो वभािवके। मुदा अनामा केर तीन अंक माa िनकिल सकलैक। सैह अनाXमा बादमे “कथािदशा”क नामसँ व.kी Hभास कुमार चौधरी आऽ kी गंगेश गुंजन दू गोटेक सXपादनमे -तकनीकी-]यवहािरक कारणसँ-छपैत रहल। कथा-िदशाक ऐितहािसक कथा िवशेषcक लोकक मानसमे एखनो ओिहना छि=ह। kी गंगेश गुंजन मैिथलीक Hथम चौबिटया नाटक बुिधबिधयाक लेखक छिथ आऽ िहनका उिचतवhता (कथा सं4ह) क लेल सािहdय अकादमी पुरकार भेटल छि=ह। एकर अितिरhZ मैिथलीमे हम एकटा िम{या पिरचय, लोक सुनू (किवता सं4ह), अ=हार- इजोत (कथा सं4ह), पिहल लोक (उप=यास), आइ भोर (नाटक)Hकािशत। िह=दीमे िमिथलcचल की लोक कथाएँ, मिणपfक नैका- बिनजाराक मैिथली सँ िह=दी अनुवाद आऽ श†द तैयार है (किवता सं4ह)। सुभाष च=q यादव , कथाकार, समी0क एवं अनुवादक, ज=म ०५ माच- १९४८, मातृक दीवानगंज, सुपौलमे। पैतृक थान: बलबा-मेनाही, सुपौल- मधुबनी। आरिXभक िश0ा दीवानगंज एवं सुपौलमे। पटना कॉलेज, पटनासँ बी.ए.। जवाहरलाल नेहl िवgिवालय, नई िद}लीसँ ि ह=दीमे एम.ए. तथा पी.एह.डी.। १९८२ सँ अmयापन। सXHित: अmय0, नातकोZर िह=दी िवभाग, भूपे=q नारायण मंडल िवgिवालय, पिमी पिरसर, सहरसा, िबहार। मैिथली, िह=दी, बंगला, संकृत, उदू-, अं4ेजी, पेिनश एवं ¨¼च भाषाक jान। Hकाशन: घरदेिखया (मैिथली कथा-सं4ह), मैिथली अकादमी, पटना, १९८३, हाली (अं4ेजीसँ मैिथली अनुवाद), सािहdय अकादमी, नई िद}ली, १९८८, बीछल कथा (हिरमोहन झाक कथाक चयन एवं भूिमका), सािहdय अकादमी, नई िद}ली, १९९९, िबहािड़ आउ (बंगला सँ मैिथली अनुवाद), िकसुन संक}प लोक, सुपौल, १९९५, भारत-िवभाजन और िह=दी उप=यास (िह=दी आलोचना), िबहार राr¬भाषा पिरषद्, पटना, २००१, राजकमल चौधरी का सफर (िह=दी जीवनी) सारcश Hकाशन, नई िद}ली, २००१, मैिथलीमे करीब सZिर टा कथा, तीस टा समी0ा आ िह=दी, बंगला तथा अं4ेजी मे अनेक अनुवाद Hकािशत।बनैत-िबगड़ैत (कथा सं4ह), रमता जोगी (याaा-वृZा=त)।भूतपूव- सदय: सािहdय अकादमी परामश- मंडल, मैिथली अकादमी काय-- सिमित, िबहार सरकारक सcकृितक नीित-िनधUरण सिमित।

Hोफेसर उदय नारायण िसंह ‘निचकेता’ ज=म-१९५१ ई. कलकZामे। िश0ा- बी. ए. (सXमान) भाषािवjान (Hथम ईशान कॉलर) कलकZा िवgिवालय, कलकZा एम.ए. भाषािवjान, पी-एचडी. भाषािवjान, िद}ली िवgिवाल य, िद}ली रचना संसार- मैिथली सािहdय मmय छf नाम ‘निचतकेता’क नामे, मैिथली आ बंगला सािहdयक किव आ नाटककारक lपमे H6यात kी िसंह एखन धिर चािर किवता सं4ह, एगारह गोट नाटक (मैिथलीमे), छओ सािहिdयक िनबंध आ दू टा किवता सं4ह (बcˆलामे), एकर अितिरhत एिह दुनू भाषामे आ अं4ेजीमे कतोक पुतकक अनुवाद क’ चुकल छिथ। १९६६ मे १५ वष-क उ»मे पिहल का]य सं4ह ‘कवयो वदि=त’। १९७१ ‘अमृतय पुaाः’ (किवता संकलन) आऽ ‘नायकक नाम जीवन’ (नाटक)| १९७४ मे ‘एक छल राजा’/ ’नाटकक लेल’ (नाटक)। १९७६-७७ ‘HdयावZ-न’/ ’रामलीला’(नाटक)। १९७८मे जनक आऽ अ=य एकcकी। १९८१ ‘अनुZरण’(किवता-संकलन)। १९८८ ‘िHयंवदा’ (नािटका)। १९९७-‘रवी=qनाथक बाल- सािहdय’(अनुवाद)। १९९८ ‘अनुकृित’- आधुिनक मैिथली किवताक बंगलामे अनुवाद, संगिह बंगलामे दूटा किवता संकलन। १९९९ ‘अkु ओ पिरहास’। २००२ ‘खाम खेयाली’। २००६मे ‘मmयमपु/ष एकवचन’(किवता सं4ह। २००८ ई. मे नाटक “नो एt¬ी: मा Hिवश” सXपूण- lपO “िवदेह” ई- पिaकामे धारावािहक lपO ई-Hकािशत भए एकटा कीित-मान बनेलक। भाषा -िवjानक 0ेaमे दसटा पोथी आऽ दू सयसँ बेशी शोध-पa Hकािशत। १४ टा पी.एच.डी. आऽ २९ टा एम.िफल. शोध-कम-क िदशा िनद¹श। आन सािहिdयक गितिविध- Hो. िसंह बcगलादेश, कॅरिबयन आयल¦ड, ¨cस, जम-नी, इटली, नेपाल, पािकतान, lस, िसंगापुर, वीडन, थायल¦ड आर अमेिरकामे िविवध िवषय पर अपन ]या6यान देने छिथ। इंडो-इटैिलयन क}चरल एhसच¼ज फॉर िRएिटव रायटस-क सदय(1999), िaिनदाद आर टॉबेगो मे कायUलयी Hितिनिधक सदय (2002), आ मॉरीशस (2005), ¨¦कफट- पुतक मेलामे आमंिaत किव, जतय ‘इंिडया गेट ऑफ ऑनर’ सँ सXमािनत भेलाह (2006), हालिहमे चीन मे संप एगारह लेखकक सcकृितक Hितिनिधक Hमुखक lपमे भाग नेने छलाह। काय-0ेa- महाराजा िसयाजी राव िवgिवालय,बड़ौदा,(1979-8 1), दि0णी गुजरात िवgिवालय (1981-85), िद}ली िवgिवालय,िद}ली (1985-87), हैदराबाद िवgिवालय , हैदराबाद,(1987-2000) मे भाषािवjानक Hोफेसर, ओ अितिथ Hोफेसरक lपमे इंिडयन इ=टी™यूट ऑफ एडवcस टडी, िशमला (1989) मे काज करैत वत-मानमे के=qीय भारतीय भाषा संथान, मैसूर मे िनदेशकक पद पर आसीन छिथ। kी रामभरोस कापिड़ “¥मर ” (१९५१- ) ज=म-बघचौरा, िजला धनुषा (नेपाल)। सXHित-जनक पुरधाम, नेपाल। िaभुवन िवgिवालयसँ एम.ए., पी.एच.डी. (मानद)। हाल: Hधान सXपादक: गामघर साoतािहक, जनकपुर एhसHेस दैिनक, आंजुर मािसक, आंगन अ[-वािष-क (Hकाशक नेपाल Hjा HितŠान, कमलादी)। मौिलक कृित: बकोठरी: औनाइत धुँआ (किवता सं4ह), निह, आब निह (दीघ- किवता), तोरा संगे जएबौ रे कुजबा (कथा सं4ह, मैिथली अकादमी पटना, १९८४), मोमक पघलैत अधर (गीत, गजल सं4ह, १९८३), अoपन अनिच=हार (किवता सं4ह, १९९० ई.), रानी च=qावती (नाटक), एकटा आओर बस=त (नाटक),

मिहषासुर मुदUबाद एवं अ=य नाटक (नाटक सं4ह), अ=ततः (कथा-सं4ह), मैिथली संकृित बीच रमाउंदा (सcकृितक िनब=ध सभक सं4ह), िबसरल-िबसरल सन (किवता-सं4ह), जनकपुर लोक िचa (िमिथला प¼िटŸस), लोक ना¤य: जट-जिटन (अनुस=धान)। नेपाली कृित: आजको धनुषा, जनकपुरधाम र यस 0ेaका सcकृितक सXपदाह/ (आलेख-सं4ह), ¥मरका उdकृw नाटकह/ (अनुवाद)। सXपादन: मैिथली प सं4ह (नेपाल राजकीय Hjा HितŠान), लाबाक धान (किवता सं4ह), माथुरजीक “िaशुली” खtडका]य (किव व. मथुरान=द चौधरी “माथुर”), नेपालमे मैिथली पaकािरता, मैिथली लोक नृdय: भाव, भंिगमा एवं वlप (आलेख सं4ह)। गामघर साoतािहकक २६ वष-सँ सXपादन-Hकाशन, “अच-ना” सािहिdयक सं4हक १५ वष- धिर सXपादन-Hकाशन। “आँजुर” मैिथली मािसकक सXपादन Hकाशन, “अंजुली” नेपाली मािसक/ पाि0कक सXपादन Hकाशन। अनुवाद: भयो, अब भयो (“निह आब निह”क मनु xाजाकीsारा कयल नेपाली अनुवाद) सXमान: नेपाल Hjा HितŠान sारा पिहल बेर १९९५ ई.मे घोिषत ५० हजार टाकाक मायादेवी Hjा पुरकारक पिहल HाoतकतU। Hधानमंaीsारा Hशितपa एवं पुरकार Hदान। िवापित सेवा संथान दिरभŸाsारा सXमािनत, मैिथली सािहdय पिरषद, वीरगंजsारा सXमािनत, “आकृित” जनकपुर sारा सXमािनत, दीघ- पaकािरता सेवाक लेल नेपाल पaकार महासंघ धनुषाsारा सXमािनत, िज}ला िवकास सिमित धनुषा sारा दीघ- पaकािरता सेवाक लेल पुरकृत एवं सXमािनत, नेपाली मैिथली सािहdय पिरषद sारा २०५९ सालक अ=तरUिr¬य मैिथली सXमेलन मुXवई sारा “िमिथला र” sारा सXमािनत, शेखर Hकाशन “पटना” sारा “शेखर सXमान”, मधुिरमा नेपाल (काठमाtडौ) sारा २०६३ सालक मधुिरमा सXमान Hाoत। काठमाtडूमे आयोिजत साक-तरीय किव गोŠीमे मैिथली भाषाक Hितिनिधdव। सामािजक सेवा : अmय0-तराई जनजाित अmययन HितŠान, जनकपुर, अmय0- जनकपुर लिलत कला HितŠान, जनकपुर, उपाmय0- मैिथली Hjा HितŠान, जनकपुर, उपकुलपित- मैिथली अकादमी, नेपाल, उपाmय0- नेपाल मैिथली थाई सcकृितक पिरषद, सिचव- दीनानाथ भगवती समाज क}याण गुठी, जनकपुर, सदय- िज}ला वाल क}याण सिमित, धनुषा, सदय- मैिथली िव कास कोष, धनुषा, राr¬ीय पाष-द- नेपाल पaकार महासंघ, धनुषा। डॉ महे=q नाराय ण राम (१९५८- ), मैिथलीमे एम.ए. आऽ पी.एच..डी., नीलकमल ना¤य कला पिरषद, खुटौनाक संथापक, दीपायतनक माटर ¬ेनर, सXपादन-“नव Tयोित” पिaका, “लोकशिhत” सामािजक मुख- पaक। लोकवृZ ताहूमे लोकगाथाक अmयेता। ओऽ अmय0 मैिथली अकादमी, िबहारक संग अनेक संथामे िविभ पदकO सुशोिभत कएलिन। िहनका िबहार 4ंथ अकादमी, पटना, राr¬भाषा पिरषद, पटना, लोक सािहिdयक मंच, पटना, सािहdयकार संसद, समतीपुर लोकभाषा सािहdय पुरकार सिहत िविभ संथासँ कितपय सािहिdयक सामािजक सXमान Hाoत छिन। िहनकर Hकाशनमे मैिथली लोकमहागाथा: कािरख पिजयार,

कािरख-गीतावली, कािरख लोकगाथा, जािग गेल छी, गहवर, सह लेस लोकगाथा, दीना भqी लोकगाथा, रमणजी: 4ामसभा से िवधानसभा तक(िह=दी) Hमुख अिछ। भालच=q झा, ए.टी.डी., बी.ए., (अथ-शाa), मुXबईसँ िथएटर कलामे िडoलोमा। मैिथलीक अितिरhत िह=दी, मराठी, अ4ेजी आऽ गुजरातीमे िनrणात। १९७४ ई.सँ मराठी आऽ िह=दी िथएटरमे िनदेशक। महाराr¬ राTय उपािध १९८६ आऽ १९९९ मे। िथएटर वक-शॉप पर अितथीय भाषण आऽ नामी संथानक नाटक Hितयोिगताक हेतु =यायाधीश। आइ.एन.टी. केर लेल नाटक “सीता” केर िनद¹शन। “वासुदेव संगित” आइ.एन.टी.क लोक कलाक शोध आऽ Hदश-नसँ जुड़ल छिथ आऽ ना¤यशालासँ जुड़ल छिथ िवकलcग बाल लेल िथएटरसँ। िनJ टी.वी. मीिडयामे रचनाdमक िनदेशक lपO काय-- आभलमया (मराठी दैिनक धारावािहक ६० एपीसोड), आकाश (िह=दी, जी.टी.वी.), जीवन संmया (मराठी), सफलता (रजथानी), पोिलसनामा (महाराr¬ शासनक लेल), मु=गी उदाली आकाशी (मराठी), जय गणेश (मराठी), क™ची-सौ=धी (िह=दी डी.डी.), याaा (मराठी), धनाजी नाना चौधरी (महाराr¬ शासनक लेल), kी पी.के अना पािटल (मराठी), वयXबर (मराठी), िफर नहॴ कभी नहॴ( नशा-सुधारपर), आहट (ए­सपर), ब¦गन राजा (ब™चाक लेल कठपुतली शो), मेरा देश महान (ब™चाक लेल कठपुतली शो), झूठा पालतू(ब™चाक लेल कठपुतली शो), टी.वी. नाटक- ब=दी (लेखक- राजीव जोशी), शतकवली (लेखक- व. उdपल दZ), िचaकाठी (लेखक- व. मनोहर वाकोडे), हृदयची गोता (लेखक- राजीव जोशी), हNापार (लेखक- एह.एम.मराठे), वालन (लेखक- अjात)। लेखन- बीछल बेरायल मराठी एकcकी, िसंहावलोकन (मराठी सािहdयक १५० वष-), आकाश (जी.टी.वी.क धारावािहकक ३० एपीसोड), जीवन स=mया( मराठी साoतािहक, डी.डी, मुXबई), धनाजी नाना चौधरी (मराठी), वयXबर (मराठी), िफर नहॴ कभी नहॴ( िह=दी), आहट (िह=दी), याaा ( मराठी सीरयल), मयूरप=ख ( मराठी बाल- धारावािहक), हे}थकेअर इन २०० ए.डी.) (डी.डी.)। िथएटर वक-शॉप- कला िवभाग, महाराr¬ सरकार, अिखल भारतीय मराठी ना¤य पिरषद, दि0ण-मmय 0ेa कला के=q, नागपुर, व. गजानन जहागीरदारक Hाmयापकdवमे च=qाक िफ}मक लेल अिभनय कूल, उताद अमजद अली खानक दू टा संगीत Hदश-न। kी भालच=q झा एखन ¿ी-ला=स लेखक-िनदेशकक lपमे काय-रत छ िथ। डॉ. देवशंकर नवीन (१९६२- ), ओ ना मा सी (ग-प िमिkत िह=दी-मैिथलीक Hा रिXभक सज-ना), चानन- काजर (मैिथली किवता सं4ह), आधुिनक (मैिथली) सािहdयक पिरदृय, गीितका]य के lप म¼ िवापित पदावली, राजकमल चौधरी का रचनाकम- (आलोचना), जमाना बदल गया, सोना बाबू का यार, पहचान (िह=दी कहानी), अिभधा (िह=दी किवता-सं4ह), हाथी चलए बजार (कथा-सं4ह)।

सXपादन: Hितिनिध कहािनय‘: राजकमल चौधरी, अिˆननान एवं अ=य उप=यास (राजकमल चौधरी), पdथर के नीचे दबे हुए हाथ (राजकमल की कहािनय‘), िविचaा (राजकमल चौधरी की अHकािशत किवताएँ), स‘झक गाछ (राजकमल चौधरी की मैिथली कहािनय‘), राजकमल चौधरी की चुनी हुई कहािनय‘, ब=द कमरे म¼ कxगाह (राजकमल की कहािनय‘), शवयाaा के बाद देहशुि[, ऑिडट िरपोट- (राजकमल चौधरी की किवताएँ), बफ- और सफेद कx पर एक फूल, उZर आधुिनकता कुछ िवचार, स”ाव िमशन (पिaका)क िकिछ अंकक सXपादन, उदाहरण (मैिथली कथा सं4ह संपादन)। सXHित नेशनल बुक ¬टमे सXपादक। तारान=द िवयोगी (१९६६- ), मिहषी, सहरसामे ज=म। मैिथलीक समथ- किव, कथाकार आऽ समालोचक। िपता kी बqी महतो, माता kीमित बदामी देवी। संकृत सािह dयमे आचाय-, एम.ए., पी.एच.डी. आिद कयलाक बाद के=qीय िवालयमे अmयापक भेलाह। सXHित िबहार Hाशासिनक सेवामे छिथ। १९७९ ई.मे पिहल रचना “िमिथला िमिहर”मे Hकािशत भेलि=ह। तािहसँ पिहने संगी लोकिन िहनकर एकटा किवता सं4ह छािप चुकल छलाह। पिहल पोथी अपन यु[क सा`य (गजल सं4ह) १९९१ मे Hकािशत। अ=य पुतक हत0ेप (किवता- सं4ह), अितRमण (कथा-सं4ह), िशलालेख(लघुकथा सं4ह), कम-धारय। रमेशक संग राजकमल चौधरीक कथाकृित एकटा चंपाकली एकटा िवषधर कऽ संपादन कयलिन। वात=ÀयोZर मैिथली कथा सं4ह देिसल बयनाक संपादन। किहयो काल िह=दीमे िलखैत छिथ। अपन िह=दी किवताक लेल वष- १९९५ मे “मुिhतबोध पुरकार”सँ सXमािनत। मैिथलीक kेŠ सािहdयकO राr¬ीय धरातलपर अनूिदत-Hसािरत करबामे िवशेष /िच। पं. गोिव=द झाक महdवपूण- उप=यास भनिह िवापित तथा मैिथली की Hितिनिध कहािनय‘ अनूिदत-संपािदत। एक संपािदत कृित राजकमल चौधरी: सृजन के आयाम। समय-समयप र मैिथली िह=दीमे कैक गोट पिaका/ संकलनक संपादन कयलिन। िकछु रचना बंगला, तेलुगु, अं4ेजीमे अनूिदत भेलिन अिछ। डॉ कैलास कुमार िमk (८ फरबरी १९६७- ) िद}ली िवgिवालयसँ एम.एस.सी., एम.िफल., “मैिथली फॉकलोर ¬hचर एtड कॊिˆनशन ऑफ द फॉकसcˆस ऑफ िमिथला: एन एनेिलिटकल टडी ऑफ ए=Âोपोलोजी ऑफ Xयुिजक” पर पी.एच.डी.। मानव अिधकार मे नातकोZर, ४०० सँ बेशी Hब=ध -अं4ेजी- िह=दी आऽ मैिथली भाषामे- फॉकलोर, ए=Âोपोलोजी, कला-इितह ास, याaावृZcत आऽ सािहdय िवषयपर जन-ल, पिaका, समाचारपa आऽ सXपािदत-4=थ सभमे Hकािशत। भारतक लगभग सभ सcकृितक 0ेaमे ¥मण, एखन उZर-पूव-मे मौिखक आऽ लोक संकृितक सवÃगीन प0पर गहन lपसँ काय-रत। यूिनविस-टी ऑफ नेxाका, यू.एस.ए. केर “फॉकलोर ऑफ इिtडया” िवषयक रेफ़ेरी। के=qीय िह=दी िनदेशालयक पुरकारक रेफरी सेहो। सय सँ ऊपर सेमीनार आऽ वक-शॉपक संचालन, बहु-िवषयक राr¬ीय आऽ अ=तरUr¬ीय संगोŠीमे सहभािगता। एम.िफल. आऽ पी. एच.डी. छाaकO िदशा-िनद¹शक संग कैलाशजी िविजिटंग फैक}टीक lपमे िवgिवालय आऽ उ™च-Hशित Hाoत संथानमे अmयापन सेहो करैत छिथ। मैिथलीक लोक गीत, मैिथलीक डहकन, िवापित-गीत, मधुपजीक गीत सभक अं4ेजीमे अनुवाद। मैिथलीक पुरोधा जयका=त िमk (1922-2009) -मैिथली सािहdयक एकटा बड़ पैघ िवsान डॉ. जयकcत िमk 1982 ई. मे इलाहाबाद िवgिवालयक अं4ेजी आ आधुिनक यूरोिपयन भाषा िवभागक Hोफेसर आ हेड पद सँ

सेवा िनवृZ भेल छलाह। तकरा बाद ओ िचaकूट 4ामोदय िवgिवालयमे भाषा आ समाज िवjानक डीन lपमे काय- कएलि=ह।व. िमk अिखल भारतीय मैिथली सािहdय सिमित, इलाहाबादक अmय0, गंगानाथ िरसच- इंटी¤यूट, इलाहाबादक अवैतिनक सिचव आ सXपादक, िह=दी सािहdय सXमेलन, Hयागक Hब=ध िवभागक संयोजक आ सािहdय अकादमी, नई िद}लीक मैिथली Hितिनिध आ भाषा सXपादक रहल छलाह।मैिथली सािहdयक इितहास, फोक िलटेरेचर ऑफ िमिथला, कीत-िनया §ामा सभक िRिटकल एडीशन, लेhचस- ऑन थॉमस हाडB, लेhचस- ऑन फोर पोए¤स आ द कॉXoलेhस टाइल इन एंगिलश पोए¬ी िहनक िलिखत िकछु 4ंथ अिछ।िहनकर वृहत मैिथली श†द कोष माa दू खtड Hकािशत भए सकल, जािहमे देवनागरीक संग िमिथला0र आ फोनेिटक अं4ेजीमे सेहो मैिथली श†दक नाम रहए। ई दुनू खtड मैिथली श†दकोष संकलक लोकिनक लेल सव-दा Hेरणापद रहत। ओ 1948 मे Hाचीन भारतीय इितहास आ संकृित िवषयमे एलाहाबाद िवgिवालयसँ सनाZकोZर उपािध कएलाक बाद कतेक बरख धिर िबहार सरकार आ पटना िवgालयसँ सXब[ रहलाह आ 1957 ई. सँ भारतीय पुराZdव िवभागमे काज कएलि=ह आ ओकर िशशुपालगढ़, कौशाXबी, वैशाली, हितनापुर, कुXहरार, पाटिलपुa, किरयन, सोनपुर, िबलावली, नाल=दा, राजगीर, च=qव}ली, आ हXपी खुदाइमे िविभना भूिमकामे भाग लेलि=ह। िहनकर िलखल-सXपािदत पोथी सभमे अिछ: 1.वैशाली,1950, 2.कुXहरार एhसकेवेशंस: 1950-1957, 3.पुरातdव की दृिwमे वैशाली, 4.नागेश भ«ाज पािरभाषे=दुशेखर, 5.िमिथला आट- एtड आिक-टेhचर (सXपािदत), 6.क}चरल हेिरटेज ऑफ िमिथला 7.kृंगार भजनावली- एक अmययन, 8.0ेa पुरातdविवjान , 9.पुरातdव श†दावली व . अिनलच=q ठाकुर जीक ज=म 13 िसतXबर 1954 ई.कO किटहार िजलाक समेली गाममे भेलि=ह। 1982 ई.मे िह=दी सािहdयमे नातकोZर केलाक बाद नवXबर ’93 सँ नवXबर ’94 धिर “सुबह” हतिलिखत पिaकाक सXपादन-Hकाशन कएलि=ह आ कोशी 0ेaीय 4ामीण ब¦कमे अिधकारी रहिथ। मैिथली, अंिगका, िह=दी आ अं4ेजीमे समानlपO लेखन। मृdयुक पूव- xेन ¤यूमरसँ बीमार चिल रहल छलाह। Hकािशत कृित: आब मािन जाउ(मैिथली उप=यास)- पिहने भारती-मंडन पिaकामे Hकािशत भेल, फेर मैलोरंग sारा पुतकाकार Hकािशत भेल। कच( अंिगकाक पिहल खtड का]य,1975) एक और राम (िह=दी नाटक,1981) एक घर सड़क पर (िह=दी उप=यास, 1982) द पपे¤स (अं4ेजी उप=यास, 1990) अनत कह‘ सुख पावै (िह=दी कहानी सं4ह,2007)

आब मािन जाउ(मैिथली उप=यास)- एिह उप=यासमे एक एहन युवतीक संघष--गाथा अंिकत अिछ जे अपन लगनसँ जीवन बदलैत अिछ। असं6य गामक ई कथा, कुलीनताक अधःपतनक कथा, संकारिवहीनताक उÅाटन आ भिवrयक पीढ़ीकO बचएबाक चेतौनी छी ई कथा। अिणमा िसंह (१९२४- )—समीि0का, अनुवािदका, सXपािदका।Hकाशन: मैिथली लोकगीत, वसवेgर (अनु.) आिद। लेडी xेबोन- कॉलेज, कलकZामे पूव- Hाmयािपका। िलली रे ज=म:२६ जनवरी, १९३३,िपता:भीमनाथ िमk,पित:डॉ. एच.एन्.रे, दुगUगंज, मैिथलीक िविशw कथाकार एवं उप=यासकार । मरीिचका उप=यासपर सािहdय अकादेमीक १९८२ ई. मे पुरकार।मैिथलीमे लगभग दू सय कथा आ प‘च टा उप=यास Hकािशत।िवपुल बाल सािहdयक सृजन। अनेक भारतीय भाषामे कथाक अनुवाद- Hकािशत। Hबोध सXमान Hाoत। शcित सुमन ज=म 15 िसतXबर 1942, कािसमपुर, सहरसा, िबहार, Hकािशत कृित, “ओ Hतीि0त, परछाई टूटती, सुलगते पसीने, पसीने के िरत, मौसम हुआ कबीर, समय चेतावनी नहॴ देता, तप रेहे कचनार, भीतर-भीतर आग, मेघ इ=qनील (मैिथली गीत सं4ह), शोध Hबंध: मmयवगBय चेतना और िह=दी का आधुिनक का]य, उप=यास: जल झुका िहरन। सXमान: सािहdय सेवा सXमान, किव र सXमान, महादेवी वमU सXमान। अmयापन काय-। शेफािलका वमU ज=म:९ अगत, १९४३,ज=म थान : बंगाली टोला, भागलपुर । िश0ा:एम., पी-एच.डी. (पटना िवgिवालय),सXHित: ए. एन. कालेज मे िह=दीक Hाmयािपका ।Hकािशत रचना:झहरैत नोर, िबजुकैत ठोर । नारी मनक 4ि=थकO खोिल:क/ण रससँ भरल अिधकतर रचना। Hकािशत कृित :िवHल†धा किवता सं4ह,मृित रेखा संमरण सं4ह,एकटा आकाश कथा सं4ह, यायावरी याaावृZा=त, भावाœिल का]यHगीत । ठहरे हुए पल िह=दीसं4ह । इलारानी िसंह ज=म 1 जुलाई, 1945, िनधन : 13 जून, 1993, िपता: Hो. Hबोध नारायण िसंह सXपािदका : िमिथला दश-न, िवशेष अmययन: मैिथली, िह=दी, बंगला, अं4ेजी, भाषा िवjान एवं लोक सािहdय। Hकािशत कृित: सलोमा (आकर वाइ}डक ¨¼च नाटकक अनुवाद 1965), Hेम एक किवता (1968) बंगला नाटकक

अनुवाद, िवषवृ0 (1968) बंगला नाटकक अनुवाद, िव=दंती (1972), वरिचत: मैिथली किवता सं4ह (1973), िह=दी सं4ह। नीरजा रेणु ज=म: ११ अhटूबर १९४५,नाम: कामा6या देवी,उपनाम:नीरजा रेणु,ज=म थान:नवटोल,सिरसबपाही ।िश0ा: बी.ए. (आनस-) एम.ए.,पी-एच.डी.,गृिहणी ।Hकािशत रचना:ओसकण (किवता िम.िम., १९६०) लेखन पर पािरवािरक, सcकृितक पिरवेशक Hभाव।मैिथली कथा धारा सािहdय अकादेमी नई िद}लीसँ वात=ÀयोZर मैिथली कथाक प=qह टा Hितिनिध कथाक सXपादन ।सृजन धार िपयासल कथा सं4ह,आगत 0ण ले किवता सं4ह, ऋतXभरा कथा सं4ह,Hित™छिव िह=दी कथा सं4ह,१९६० सँ आइधिर सएसँ अिधक कथा, किवता, शोधिनब=ध, लिलतिनब=ध,आिद अनेक पa-पिaका तथा अिभन=दन4= थमे Hकािशत ।मैिथलीक अितिरhत िकछु रचना िह=दी तथा अं4ेजीमे सेहो। उषािकरण खान ज=म:१४ अhटूबर १९४५,कथा एवं उप=यास लेखनमे H6यात।मैिथली तथा िह=दी दूनू भाषाक चिच-त लेिखका।Hकािशत कृित:अनुंZिरत HÆ, दूवU0त, हसीना मंिज़ल (उप=यास), नाटक, उप=यास। Hेमलता िमk ’Hेम ’ ज=म:१९४८,ज=मथान:रिहका,माता:kीमती वृ=दा देवी,िपता:पं. दीनानाथ झा,िश0ा:एम.ए., बी.एड.,Hिस[ अिभनेaी दू सयसँ बेशी नाटकमे भाग लेलिन ।भंिगमा (ना¤यमंच) क भूतपूव- उपाmय0ा, पिaकाक सXपादन, कथालेखन आिदमे कुशल । ’अिरपन’ आिद अनेक संथा sारा पुरकृत-सXम ािनत। आशा िमk ज=म:६-७-१९५० ई.,Hकािशत कथा मे मैिथकीक संग िह=दी मे स ेहो । सभसँ पैघ िवजय मैिथली कथा सं4ह। नीता झा ज=म : २१-०१-१९५३,]यवसाय:Hाmयािपका । लेखन पर समाजक परXपरा तथा आधुिनकताक संकार सँ होइत िवसंगितक Hभाव।Hकािशत कृित : फिर™छ, कथा सं4ह १९८४, कथानवनीत १९९०,सामािजक अस=तोष ओ मैिथली सािहdय शोध समी0ा। Tयोdना च=qम

मूल नाम: कुमारी Tयोdना ,उपनाम : Tयोdना आन=द ,ज=मितिथ: १५ िदसXबर, १९६३,ज=मथान : मlआरा, िसंिधया खुद-, समतीपुर,िपता: kी माक-tडेय Hवा सी,माता: kीमती सुशीला झा,काय-0ेa : अmययनाmयापन ।,रचना Hकािशत : िझिझरकोना (कथा-सं4ह), एसगर-एसगर (नाटक),बीतक संग संकलन एवं सXपादन।एकर अितिरhत दज-नािधक कथा ओ किवता िविभ पa-पि aका म¼ Hकािशत तथा आकाशवाणीक पटना, भागलपुर, दरभंगा के=qसँ Hसािरत।िश0ा : पटना िवgिवालयसँ िह=दी सािहdयमे एम.ए,। सुिमता पाठक ज=म:२५ फरवरी, १९६२,सुपौल, िबहार । पिरिचित किवता सं4ह Hकािशत । कथावाचक, कथासं4ह Hकाशनाधीन । राजनीित शाaमे एम.ए.। संगीत, प¼िटंगमे /िच । मैिथलीक पोथी पिaका पर अनेक रेखािचa Hकािशत । समकालीन जीवन, समय, आ तकर पंदनक कवियaी । अनेक भाषामे रचनाक अनुवाद Hकािशत। िवभा रानी (१९५९- )लेखक- एhटर- सामािजक काय-कतU-बहुआयामी Hितभाक धनी िवभा रानी राr¬ीय तरक िह=दी व मैिथलीक लेिखका, अनुवादक, िथएटर एhटर, पaकार छिथ, िजनक दज़-न भिर से बेसी िकताब Hकािशत छि=ह आ कएकटा रचना िह=दी आ मÈिथलीक कएकटा िकताबमे संकिलत छि=ह। मैिथली के 3 सािहdय अकादमी पुरकार िवजेता लेखकक 4 गोट िकताब “क=यादान” (हिरमोहन झा), “राजा पोखरे म¼ िकतनी मछिलयc” (Hभास कुमार चाऊधरी), “िबल टेलर की डायरी” व “पटा0ेप” (िलली रे) िह=दीमे अनूिदत छि=ह। समकालीन िवषय, िफ़}म, मिहला व बाल िवषय पर गंभीर लेखन िहनक Hकृित छि=ह। रेिडयोक वीकृत आवाज़क संग ई िफ़}Xस िडिवजन लेल डॉhयूम¼टरी िफ़}म, टीवी चैन}स लेल सीिरय}स िलखल व वॉयस ओवरक काज केलि=ह। िमिथलाक ‘लोक’ पर गहराई स काज करैत 2 गोट लोककथाक पुतक “िमिथला की लोक कथाएं” व “गोनू झा के िकसे” के Hकाशनक संगिह संग िमिथलाक रीित- िरवाज, लोक गीत, खान-पान आिदक वृहत खज़ाना िहनका लग अि छ। िह=दीमे िहनक 2 गोट कथा सं4ह “ब=द कमरे का कोरस” व “चल खुसरो घर आपने” तथा मैिथली म¼ एक गोट कथा सं4ह “खोह स’ िनकसइत” छि=ह। िहनक िलखल नाटक ‘दूसरा आदमी, दूसरी औरत’ राr¬ीय ना¤य िवालय, नई िद}ली के अ=तरUr¬ीय ना¤य समारोह भारंगममे Hतुत कएल जा चुकल अिछ। नाटक ‘पीर पराई’क मंचन, ‘िववेचना’, जबलपुर sारा देश भरमे भ रहल अिछ। अ=य नाटक ‘ऐ िHये तेरे िलए’ के मंचन मुंबई व ‘लाइफ़ इज नॉट अ §ीम’ के मंचन िफ़नल¦डमे भेलाक बाद मुंबई, रायपुरमे कएल गेल अिछ। ‘आओ तिनक Hेम कर¼’ के ‘मोहन राकेश सXमान’ से सXमािनत तथा मंचन kीराम स¼टर, नई िद}लीमे कएल गेल। “अगले जनम मोहे िबिटया ना कीजो” सेहो ‘मोहन राकेश सXमान’ से सXमािनत अिछ। दुनु नाटक पुतक lप म¼ Hकािशत सेहो अिछ। मैिथलीमे िलखल नाटक “भाग रौ” आ “मदद कl संतोषी मा ता” अिछ। िहनक नव मैिथली नाटक Hतुित छि=ह- बलच=दा। िवभा ‘दुलारीबाई’, ‘सावधान पु/रवा’, ‘पोटर’, ‘कसाईबा ड़ा’, सनक नाटक के संग-संग िफ़}म ‘धधक’ व टेली -िफ़}म ‘िच(ी’मे अिभनय केलि=ह अिछ। नाटक ‘िम. िजा’ व ‘लाइफ़ इज नॉट अ §ीम’ (एकपाaीय नाटक)

िहनक टटका Hतुित छि=ह। ‘एक बेहतर िवÉव– कल के िलए’ के पिरक}पनाक संगे िवभा ‘अिवतोको’ नामक बहुउNेयीय संथा संग जुड़ल छिथ, िजनक अटूट िवÉवास ‘िथएटर व आट-– सभी के िलए’ पर अिछ। ‘रंग जीवन’ के दश-नक साथ कला, रंगमंच, सािहdय व संकृित के माmयम से समाज के ‘िवशेष’ वग-, यथा, जेल- ब=दी, वृ´Êाkम, अनाथालय, ‘िवशेष’ ब™चा सभके बालगृहक संगिह संग समाजक मु6य धाराल लोकक बीच साथ-क हत0ेप करैत छिथ। एतय िहनकर िनयिमत lप से िथएटर व आट- वक-शॉप चलित छि=ह। अिह सभक अितिरhत कॉपªरेट जगत सिहत आम जीवनक सभटा लोक आओर लेल कला व रंगमंचक माmयम से िविवध िवकासाdमक Hिश0ण काय-Rम सेहो आयोिजत करैत छिथ। kीमित िवभारानी सXHित मुXबईमे रहैत छिथ। lपा धीl - ज=मथान-मयनाकडेरी, सoतरी, kीमती पूनम झा आ kी अlणकु मार झाक पुaी।थायी पता- अžचल- सगरमाथा, िज}ला- िसरहा। Hथम Hकािशत रचना-कोइली कानए, मािटसँ िसनेह (किवता),भगता बेङक देश-¥मण (कनक दीि0तक पुतकक धीरे=q Hेमिष-सँग मैिथलीमे सहअनुवाद,सŸीतसXब=धी कृित- रािr¬यगान, भोर, नेहक वएन, चेतना, िHयतम हमर कमौआ (पिहल मैिथली सीडी), Hेम भेल तरघुकीमे, सुरि0त मातृdव गीतमाला, सुखक सनेस। सXपादन-प}लव, मैिथली सािहिdयक मािसक पिaका, सXपादन- सहयोग,हमर मैिथली पोथी (क0ा १, २, ३, ४ आ ५ आ क0ा 9-10 क ऐि™छक मैिथली िवषय पा•यपुतकक भाषा सXपादन), प}लविमिथला, मैिथली इ=टरनेट पिaका,िव.सं. २०५९ माघ (सािहिdयक), सXपादन-सहयोग। डा. रमान=द झा ‘रमण’ ज=म: 02 जनबरी,1949, िश0ा-एम.ए., पीएच.डी., आजीिवका-भ ारतीय िरजव- ब¦क, पटना (सेवा िनवृZ)। Hकाशन: मौिलक- समी0ा 1. नवीन मैिथली किवता,1982, 2. मैिथली नऽव किवता,1993, 3. मैिथली सािहdय ओ राजनीित, 1994, 4. अिखयासल, 1995, 5. बेसाहल,2003, 6. भजारल, 2005., 7. िनयUत कैसे शुl कर¼? िह=दी- िरजव- ब¦क, पटनाक Hकाशन सXपािदत 8. मैिथलीक आरिXभक कथा, 1978 समी0ा, 9. यामान=द रचनावली, 1981, 10. जनाद-नझा‘ जनसीदनकृत िनद-यीसासु (1914) आ पुनिव-वाह (1926), 1984, 11. चेतनाथझाकृत kीजगाथपुरी याaा (1910), 1994, 12. तेजनाथ झाकृत सुरराजिवजय नाटक (1919), 1994, 13. रासिबहारीलाल दासकृत सुमित (1918), 1996, 14. जीबछ िमkकृत रामेgर (1916), 1996, 15. भेटघॉंट (भेटवातU), 1998, 16. lचय तँ सdय ने तँ फूिस, 1998, 17. पुtयान=द झाकृत िमिथला दप-ण (1925), 2003, 18. यदुवर रचनावली (1888-1934) 2003, 19. kीव}लभ झा (1905-1940) कृत िवापित िववरण, 2005, 20. मैिथली उप=यासमे िचिaत समाज, 2003, 21. पिtडत गोिव=द झाः अचU ओ चचU, 1997 Hब=ध सXपादक, 22. कवीgर चेतना, 2008, चेतना सिमित, पटना अनुवाद 23. मौिलयरक दू नाटक, 1991, सािहdय अकादमी, 24. छओ िबगहा आठ कटठा, 1999, सािहdय अकादमी, 25. मानवािधकार घोषणा Universal Declaration of Human Rights २००७( यूनेसको), 26. राजू आ’ टाकाक गाछ, 2008 िरजव- ब¼क -िवZीय िश0ा

योजना के अ=तग-त पिaका सXपादन-सह-सXपादन 1. Hयोजन, 19 93 (मािसक), 2. कोषा0र (िह=दी) 1982, 3. घर बाहर, aैमािसक, चेतना सिमित, पटना काय-शाला 1. National Workshop on Literary Translation,- Dec 20.1991 to January 12,02 ,1992, Sahitya Akademi, New Delhi2.Bonds Beyond the Borders (India-Nepal civil society interaction on Cross Border issues) -Consulate General of India, Birgunj , Nepal and B.P. Koirala India-Nepal Foundation-May 27-28, 20062.Preparation of Intensive Course in Maithili- ERLC, Bhubneswar जूरी 6th Inter National Maithili Drama Festival,1992 - Biratnagar, Nepal पुरकार- सXमान 1. जाज- ि4यस-न पुरकार, 1994-95, राजभाषा िवभाग,िबहा र सरकार, मैिथली नऽव किवता पुतक पर, 2. भाषा भारती सXमान, 2004-05 छओ िबगहा आठ कटठा, (अनुवाद) CIIL, मैसूर। राजे=q िवमल (1949- )। चामdकािरक लेखन-Hितभाक वामी राजे=q िवमल नेपालक मैिथली सािहdयक एक तXभ छिथ। मैिथली, नेपाली आ िह=दी भाषाक Hाj िवमल िश0ाक हकमे िवावािरिध (पी.एच.डी.)क उपािध Hाoत कएने छिथ। सुलिलत श†द चयन एवं भाषामे Hाœलता डा. िवमलक लेखनक िवशेषता रहलिन अिछ। अपन िस[हत लेखनसँ ई कोनहु पाठकक हृदयमे थान बना लैत छिथ। कथा आ समालोचनाक सŸिह मम-भेदी गीत गजल िलखबामे Hवीण डा. िवमलक िनब=ध, अनुवाद आिद सेहो िवल0ण होइत छिन। कXमो िलिखकऽ यथेw यश अरजिनहार डा. िवमलक लेखनीक Hशंसा मैिथलीक सŸसŸ नेपाली आ िह=दी सािहdयमे सेहो होइत रहलिन अिछ। खास कऽ मानवीय संवेदनाक अिभ]यिhतमे िहनक कलम बेजोड़ देखल जाइत अिछ। िaभुवन िवgिवालयअ=तग-त रा.रा.ब. कैXपस, जनकपुरधाममे Hाmयापन कएिनहार डा. िवमलक पूण- नाम राजे=q लाभ िछयिन। िहनक ज=म २६ जुलाई १९४९ ई. कऽ भेल अिछ। सािहdयकारक नव पीढ़ीकO िनर=तर उdHेिरत करबाक कारणे ई डा.धीरे=qक बाद जनकपुर-पिरसरक सािहिdयक गु/क lपमे थािपत भऽ गेल छिथ। जनकपुरधामक देवी चौक िथत िहनक घर सदित सािहdयक िजjासुसभकअखाड़ाजक‘बनलरहैतअिछ। वनामध=य िमिथला िचaकार व . ल`मीनाथ झा Hिस[ खोखा बाबू, 4ाम-सिरसब, पोट सिरसब-पाही, भाया- मनीगाछी, िजला-मधुबनी (भारत),

काशीका=त िमk “मधुप ” (1906 - 1987) ’राधािवरह’ (महाका]य) पर सािहdय अकादेमी पुरकार Hाoत मैिथलीक Hशत किव आ मैिथलीक Hचार- Hसारक समिप-त काय-कतU ’झंकार’ किवतासँ Rाि=त गीतक आान कएलिन । Hकृित Hेमक िवल0ण किव । ’घसल अठी किवताक लेल क{य आ िश}प-संवेदना—दुहू तर पर च रम लोकिHयता भेटलिन। महे=q मलंिगया मैिथलीक सुपिरिचत नाटककार, रंग िनद¹शक एवं मैलोरंगक संथापक अmय0 । लोक सािहdय पर गंभीर शोध आलेख । मैिथलीमे 13टा नाटक, 19टा एकcकी, 14टा नुड़ आ 10टा रेिडयो नाटक Hकािशत आ आकाशवाणी सँ Hसािरत । सीिनयर फेलोिशप (भारत सरकार), इंटरनेशनल िथएटर इंिट™यूट (नेपाल), Hबोध सािहdय सXमान आिद सँ सXमािनत । संHित Tयोितरीgर िलिखत मैिथलीक Hथम पुतक वण-राकर पर शोध

काय- । kी महे=q मलिगयाक ज=म २० जनबरी १९४६ मे मधुबनी िजलाक मलंिगया गाममे भेलि=ह। मलंिगयाजी मैिथली िह=दी, अं4ेजी आ नेपाली भाषाक जानकार आ िथयेटर िश0ण, पटकथा लेखन आ तdसXब=धी शोधक ¨ीला=स िश0क छिथ। सXमान, उपािध आ पुरकार: २००६(सीिनयर फ़ेलो, मानव ससाधन िवकास िवभाग, भारत सरकार), २००५ ई. मे मैिथली भाषाक सवUिधक HितिŠत Hबोध सXमान, उनाप सXमान, परवाहा (उवा ना¤य पिरषद, परवाहा), भानु कला पुरकार (कला जानकी संथान, जनकपुर), २००४- पाटिलपुa पुरकार ( Hcगन िथएटर, पटना), इoटा पुरकार (किटहार इoटा, किटहार), २००३- गोपीनाथ आय-ल पुरकार (इ=टरनेशनल िथएटर इ=टी¤यूट, नेपाल), याaी चेतना पुरकार (चेतना सिमित, पटना), बैनाथ िसयादेवी पुरकार (बी.एस.डी.पी. काठमाtडू), २०००- चेतना सिमित सXमान (चेतना सिमित, पटना), िजला िवकास धनुषा सािहdय पुरकार (िजला िवकास सिमित, जनकपुर), १९९९- िवापित सेवा संथान सXमान (िवापित सेवा संथान सXमान, दरभंगा), १९९८- रंग र उपािध (अ=तरUr¬ीय मैिथली सािहdय पिरषद, र‘ची), १९९७- सवªZम िनद¹शक पुरकार (सcकृितक संथान, काठमाtडू), १९९१- भानु कला पुरकार, िवराटनगर (भानु कला पिरषद, िबराटनगर), १९९०- सव-नाम पुरकार (सव-नाम सिमित, काठमाtडू), १९८५- आरोहण सXमान, काठमाtडू, १९८३- वैदेह ी पुरकार (िवापित मारक सिमित, र‘ची), शोध काय-: सलहेस: एकटा ऐितहािसक अmययन, िवरहा: िमिथलाक एकटा लोकlप, सामा चकेबा: लोकना¤यक एक अवलोकन, सलहेसक काल िनधUरण, िवापितक उगना, िशवक गण, मधुबनी एकटा नगर अिछ, हम जनकपुर छी, ई जनकपुर अिछ। िहनकर दू टा पोथी “ओकरा आँगनक बारहमासा” आ “काठक लोक” लिलत नारायण िमिथला िवgिवालय, दरभंगाक मैिथली पा•यRममे अिछ। िहनकर दू टा पोथी िaभुवन िवgिवालय, काठमाtडू केर एम.ए. पा•यRममे अिछ। िहनकर कैकटा आलेख आ िकताब सेकेtडरी आ हायर सेकेtडरी पा•यRममे अिछ। Hकािशत पोथी: नाटक: ओकरा आँगनक बारहमासा, जुआयल कंकनी, गाम निञ सुतय, काठक लोक, ओिरजनल काम, राजा सलहेस, कमला कातक राम, ल`मण आ सीता, ल`मण रेखा खिtडत, एक कमल नोरमे, पूष जाड़ िक माघ जाड़, िख™चिड़, छुतहा घैल, ओ खाली मुँह देखै छै। ई सभटा कैक बेर आ कैक ठाम खेलाएल गेल अिछ। एका¯ी: टूटल तागक एकटा ओर, लेवराह आ=हरमे एकटा इजोत, गोनूक गबाह, हमरो जे साXब भैया, “िबरजू, िबलटू आओर बाबू”, मामा सावधान, देहपर कोठी खसा िदअ, नसब=दी, आलूक बोरी, भूतहा घर, Hेत चाहे असौच, फोनक करामात, एकटा बतािह आयल छलय, मािलक सभ चल गेलाह, भाषणक दोकान, फगुआ आयोजन आ भाषण, भूत, एक टुकड़ा पाप, मुहक कात, Hाण बचाबह सीता राम, ओ खाली घैल फोड़य छै। ई सभटा मंिचत भऽ चुकल अिछ। २५ टा चौबिटया नाटक: चR]युह, लटर पटर अह‘ ब=द कl, बािढ़ फेर औतय, एक घर कानन एक घर गीत, सेर पर सवा सेर, ई गुर खेने कान छेदेने, आब कहू मन केहेन लगैए, नव घर, हमर बौआ कूल जेतए, बेचना गेलए बीतमोहना गबए गीत, मोड़ पर, ककर लाल आिद। ई सभटा चौबिटया वीथीपर खेलायल गेल अिछ। ११ टा रेिडयो नाटक: आलूक बोरी, ई जनम हम ]यथ- गमाओल, नाकक पूरा, फटफिटया काका आिद। ई सभटा टा पटना, दरभंगा आ नेपालक रेिडयो टेशनसँ Hसािरत भेल अिछ। सXपादन: मैिथली एका¯ी (सािहdय अकादमी, नई िद}ली), िवदेहक नगरीसँ (किवता सं4ह), मैिथली भाषा पुतक (सेकेtडरी कूल पोथी), लोकवेद (मैिथली पिaका)। कथा: Hóाद जिड़ गेल, धार, एक िदनक िजनगी, बनैया सुगा, बालूक भीत, बुलबु}ला आिद। लघुकथा: डपोरशंख,

मुहिचड़ा आिद। सदयता: अmय0, मैिथली लोक रंग, सदय काय-कारी बोड-, िमनाप, जनकपुर, याaी मधुबनी, िमिथला सcकृितक मंच, मधुबनी। राr¬ीय आ अ=तरUr¬ीय सेिमनार सभमे सहभािगता। मैिथलीपुa Hदीप kी मैिथली पुa Hदीप (१९३६- )। 4ाम- कथवार, दरभंगा। Hिशि0त एम.ए., सािहdय र, नवीन शाaी, पंचािˆन साधक। िहनकर रिचत “जगदXब अहॴ अवलXब हमर’ आ ’सभक सुिध अह‘ लए छी हे अXबे हमरा िकए िबसरै छी यै” िमिथलामे लेज¼ड भए गेलअिछ। अयोmयानाथ चौधरी धनुषा, नेपाल 1947- मूलत: किवक lपमे पिरिचत छिथ। नेपालक आधुिनक किवताक 0े aमे िहनक नाम उ}लेखनीय अिछ। kी चौधरीक लेखनमे मानवीय संवेदनाक HितिबXब पाओल जाइत अिछ। किवताक संग कथा आ िनब=धमे सेहो ई कलम चलबैत छिथ। फिड़छाएल लेखन िहनक िवशेषता िथकिन।धनुषा िजलाक दुहबी गामक रहिनहार kी चौधरीक ज=म ६अhटुबर १९४७कऽ भेल छिन। िहनक ि0ितजक ओिहपार नामसँ एक किवता-सं4ह Hकािशत छिन।– वृषेश च=q लाल ज=म 29 माच- 1955 ई. कO भेलि=ह। िपताः व. उिदतनारायण लाल,माताः kीमती भुवनेgरी देव। िहनकर छिठहारक नाम िवgेgर छि=ह। मूलतः राजनीितककमB । नेपालमे लोकत=aलेल िनर=तर संघष-क Rममे १७ बेर िगर’तार। लगभग ८ वष- जेल । सXHित तराई–मधेश लोकताि=aक पाटBक राr¬ी्य उपाmय0। मैिथलीमे िकछु कथा िविभ पaपिaकामे Hकािशत। आ=दोलन किवता सं4ह आ बी.पॴ कोइरालाक Hिस[ लघु उप=यास मोिदआइनक मैिथली /पा=तरण तथा नेपालीमे संघीय शासनितर न ामक पुतक Hकािशत। ओ िवgेgर Hसाद कोइरालाक Hितब[ राजनीित अनुयायी आ नेपालक Hजातcिaक आ=दोलनक सिRय यो[ा छिथ। नेपाली राजनीितपर बरोबिर िलखैत रहैत छिथ। धम¹=q िवल ज=म िवRम सXवत २०२३-१२-०४, बतीपुर िसरहा,िश0ा: एम ए (मै िथली/राजनीितशाa), िडoलोमा ईन डेभलपमे=ट जनUिलTम, Hकािशत कृित : एक समयक बात (िव स २०६१ मैिथली हाईकु सं4ह ), रता तकैत िजनगी (िव स २०५०/ किवता सं4ह ),एक सृिw एक किवता (२०५७/दीघ- किवता ),हमर मैिथली पोथी (क0ा 1 सं ५ धिरक पाठय पुतक),सXHित: सभापित, नेपाल पaकार महासंघ— धीरे=q Hेमिष- (१९६७- ) मैिथली भाषा, सािहdय, कला, संकृित आिद िविभ 0ेaक काजमे समान lपO िनर=तर सिRय ]यिhतक lपमे िच=हल जाइत छिथ धीरे=q Hेमिष-। िव.सं.२०२४ साल भादब १८ गते िसरहा िजलाक गोिव=दपुर-१, बतीपुर गाममे ज=म लेिनहार Hेमिष-क पूण- नाम धीरे=q झा िछयिन। सरल आ सुपw भाषा-शैलीमे िलखिनहार Hेमिष- कथा, किवताक अितिरhत लेख, िनब=ध, अनुवाद आ पaकािरताक माmयमसँ मैिथली आ नेपाली दुनू भाषाक 0ेaमे सुपिरिचत छिथ। नेपालक कूली क0ा १,२,३,४,९ आ १०क ऐि™छक मैिथली तथा १० क0ाक ऐि™छक िह=दी िवषयक पा•यपुतकक लेखन सेहो कएने छिथ। सािहिdयक 4=थमे िहनक एक सXपािदत आ एक अनूिदत कृित Hकािशत छिन। Hेमिष- लेखनक अितिरhत सŸीत, अिभनय आ समाचार-वाचन 0ेaसँ सेहो सXब[ छिथ। नेपालक पिहल मैिथली टेिलिफ}म िमिथलाक ]यथा आ ऐितहािसक मैिथली टेिलkृôला महाकिव

िवापित सिहत अनेक नाटकमे अिभनय आ िनद¹शन कऽ चुकल Hेमिष-कO नेपालसँ पिहलबेर मैिथली गीतक कैसेट किलयुगी दुिनया िनकालबाक kेय सेहो जाइत छिन। िहनक वर सŸीतमे आधा दज-नसँ अिधक कैसेट एलबम बाहर भऽ चुकल अिछ। काि=तपुरसँ हे}लो िमिथला काय-Rम Hतुत कतU जोड़ी lपा-धीरे=qक धीरे=qक अबाज गामक ब™चा-ब™चा िच=हैत अिछ। “प}लव” मैिथ ली सािहिdयक पिaका आ “समाज” मैिथली सामािजक पिaकाक—सXपारदक केदारनाथ चौधरी ज=म 3 जनवरी 1936 ई नेहरा, िजला दरभंगामे। 1958 ई.मे अथ-शाaमे नातकोZर, 1959 ई.मे लॉ। 1969 ई.मे कैिलफोिन-या िव.िव.सँ अथ-थाa मे नातकोZर, 1971 ई.मे सान¨cिसको िव.िव.सँ एम.बी.ए., 1978मे भारत आगमन। 1981-86क बीच तेहरान आ H¦कफुत-मे। फेर बXबई पुने होइत 2000सँ लहेिरयासरायमे िनवास। मैिथली िफ}म ममता गाबय गीतक मदनमोहन दास आ उदयभानु िसंहक संग सह िनमUता।तीन टा उप=यास 2004मे चमेली रानी, 2006मे करार, 2008 मे माहुर। कृrणमोहन झा (1968- ) ज=म मधेपुरा िजलाक जीतपुर गाममे। “िवजयदेव नारायण साही की का]यानुभूित की बनावट” िवषयपर जे.एन.यू. सँ एम.िफल आ ओतिहसँ “िनम-ल वमU के कथा सािहdय म¼ Hेम की पिरक}पना” िवषयपर पी.एच.डी.। िह=दीमे एकटा किवता सँ4ह “समय को चीरकर” आ मैिथलीमे “एकटा हेरायल दुिनया” Hकािशत। िह=दी किवता लेल “क=हैया मृित सXमान”(1998) आ “हेमंत मृित किवता पुरकार” (2003)। असम िवgिवालय, िस}चरक िह=दी िवभागमे अmयापन। कुमार मनोज कयप जन् म : १९६९ ई़ मे मधुबनी िजलcतग-त सलेमपुर गाम मे। कूली िश0ा गाममे आ उ™च िश0ा मधुबनी मे। बा}य काले सँ लेखनमे आभ/िच। कैक गोट रचना आकाशवाणी सँ Hसािरत आ िविभ पa-पिaका मे Hकािशत। सXHित क¼िqय सिचवालयमे अनुभाग अिधकारी पद पर पदथािपत।— िहमcशु चौधरी िपता : वगBय कामेÉवर चौधरी,माताः kीमती च=qावती चौधरी,ज=मः िव स २०२०/६/५ लहान, िसरहा,िश0ाः नातकोZर(नेपाली),पेशाः पaकािरता (सXHित : रािr¬य समाचार सिमित ),कृित : की भार सcठू ? (मैिथली किवता सं4ह), िवगत दू दशकसं नेपाली आ मैिथली लेखन तथा अिभयानमे िनर=तर िRयाशील आ िविभ संघ संथासं आब[। kी आाचरण झा (१९२०- )। मंगरौनी। संकृतक महान िवsान। मैिथलीमे िमिहर, बटुक, वैदेहीमे रचना Hकािशत। दरभंगा संकृत िव.िव. केर Hितकुलपित। राr¬पितसँ सXमान Hाoत। kी रामलोचन ठाकुर ज=म १८ माच- १९४९ ई.पिलमोहन, मधुबनीमे। विरŠ किव, रंगकमB, सXपादक, समी0क। भाषाई आ=दोलनमे सिRय भागीदारी। Hकािशत कृित- इितहासह=ता, मािटपािनक गीत, देशक नाम छल सोन िचड़ैया, अपूवU (किवता सं4ह), बेताल कथा (]यंˆय), मैिथली लोक कथा (लोककथा), Hितmविन (अनुिदत किवता), जा सकै

छी, िक=तु िकए जाउ(अनुिदत किवता), लाख HÆ अनुZिरत (किवता), जादूगर (अनुवाद), मृितक धोखरल रंग (संमरणाdमक िनब=ध), आंिख मुनने: आंिख खोलने (िनब=ध)।– Hोफेसर रेgर िमk (१९४५- ) पूव- अmय0, इितहास िवभाग, ल.ना.िमिथला िवgिवालय, दरभंगा। अनुवादक, िनब=धकार। Hकाशन: तिमल सािहdयक इितहास, भवभूित (दुनू अनुवाद)। डॉ शंभु कुमार िसंह ज=म: 18 अHील 1965 सहरसा िजलाक मिहषी Hखंडक लहुआर गाममे। आरंिभक िश0ा, गामिहसँ, आइ.ए., बी.ए. (मैिथली सXमान) एम.ए. मैिथली (वण-पदक Hाoत) ितलका म‘झी भागलपुर िवgिवालय, भागलपुर, िबहार सँ। BET [िबहार पाaता परी0ा (NET क समतु}य) ]या6याता हेतु उZीण-, 1995] “मैिथली नाटकक सामािजक िववZ-न” िवषय पर पी-एच.डी. वष- 2008, ि तलका म‘. भा.िवgिवालय, भागलपुर, िबहार सँ। मैिथलीक कतोक HितिŠत पa-पिaका सभमे किवता, कथा, िनबंध आिद समय-समय पर Hकािशत। वत-मानमे शैि0क सलाहकार (मैिथली) राr¬ीय अनुवाद िमशन, के=qीय भारतीय भाषा संथान, मैसूर-6 मे काय-रत। याम सु=दर शिश जनकपुरधाम, नेपाल। पेशा-पaकािरता। िश0ा: िaभुवन िवgिव ालयसँ, एम.ए. मैिथली, Hथम kेणीमे Hथम थान। मैिथलीक Hायः सभ िवधामे रचनारत। बहुत रास रचना िविभ पa-पिaकामे Hकािशत। िह=दी, नेपाली आ अं4ेजी भाषामे सेहो रचनारत आ बहुतरास रचना Hकािशत। सXHित- काि=तपुर Hवासक अरब †यूरोमे काय-रत।– kी बैकुtठ झा िपता-वगBय रामच=q झा, ज=म-२४-०७-१९५४ (4ाम-भरवाड़ा, ि जला-दरभंगा), िश0ा-नायतकोZर (अथ-शाa),पेशा- िश0क। मैिथली, िह=दी तथा अं4ेजी भाषा मे लगभग २०० गीत कऽ रचना। गोनू झा पर आधािरत नाटक ”हायिशरोमिण गोनू झा तथा अ=य कहानी कऽ लेखन। अिह के अलावा िह=दी मे लगभग १५ उप=यास तथा कहानीक लेखन। िवनीत उdपल (१९७८- )। आनंदपुरा, मधेपुरा। Hारंिभक िश0ासँ इंटर धिर मुंगेर िजला अंतग-त रणगcव आs तारापुरमे। ितलकामcझी भागलपुर, िवgिवालयसँ गिणतमे बीएससी (आनस-)। गुl जXभे gर िवgिवालयसँ जनसंचारमे माटर िड4ी। भारतीय िवा भवन, नई िद}लीसँ अंगरेजी पaकािरतामे नातकोZर िडoलोमा। जािमया िमि}लया इलािमया, नई िद}लीसँ जनसंचार आऽ रचनाdमक लेखनमे नातकोZर िडoलोमा। ने}सन मंडेला स¼टर फॉर पीस एंड कनि’लhट िरजो}यूशन, जािमया िमिलया इलािमयाक पिहल बैचक छाa भs सिट-िफकेट Hाoत। भारतीय िवा भवनक ¨¼च कोस-क छाa। आकाशवाणी भागलपुरसँ किवता पाठ, पिरचचU आिद Hसािरत। देशक HितिŠत पa-पिaका सभमे िविभ िवषयपर वतंa लेखन। पaकािरता कैिरयर- दैिनक भाकर, इंदौ र, रायपुर, िद}ली Hेस, दैिनक िहंदुतान, नई िद}ली, फरीदाबाद, अिकंचन भारत, आगरा, देशबंधु, िद}ली मे। एखन राr¬ीय सहारा, नोएडा मे विरw उपसंपादक।—

देवcशु वdस मैिथली िचa-kृंखला (कॉिमhस) ज=म- तुलाप«ी, सुपौल। मास कXयुिनकेशनमे एम.ए। िह=दी, अं4ेजी आ मैिथलीक िविभ पa-पिaकामे कथा, लघुकथा, िवjान-कथा, िचa-कथा, काटू-न, िचa-Hहेिलका इdय ािदक Hकाशन। िवशेष: गुजरात राTय शाला पा•य-पुतक मंडल sारा आठम क0ाक लेल िवjान कथा “जंग” Hका िशत (2004 ई.)- जीवका=त - पूण- नाम- जीवका=त झा, ज=म थान ­योढ़, घोघरडीहा, मधु बनी, िबहार । िविशw कथाकार, किव, उप=यासकार । ’तकैत अिछ िचड़ै’ (किवता) हेतु सािहdय अकादेमी पुरकारसँ सXमािनत । Hकािशत कृित: एकसिर ठािढ़ कदम तर रे, सूय- गिल रहल आिछ, वतु, करमी झील (कथा सं4ह), दू कुहेसक बाट, पीयर गुलाब छल, निह कतहु निह पिनपत, अिगनबान (उप=यास), नाचू हे पृ{वी, तकैत अिछ िचड़ै, ख‘ड़ो (किवतासं4ह)। िपता-गुणान=द झा, माता-महेgरी देवी, ज=म ितिथ-२५.०७.१ ९३६ थान अभुआढ़, िजला-सुपौल िश0ा-मैि¬क (१९५५ उ.िव.डेवढ़), आइ.एस.सी. (१९५७ आर.के.कॉलेज, मधुबनी), बी.ए. (१९६४ िबहार िव.िव.वतंa छाa), िडप.इन.एड.(१९६९ िमिथला िव.िव.) नौकरी-उ™च िवालयमे सहायक िश0क। िवjान िश0क (उ.िव.खजौ ली १९५७-८१), िह=दी िश0क (उ.िव.डेओढ़ एवं उ.िव.पोखराम १९८१-९८) पिहल रचना-इजोिड़या आ िटटही (किवता, जनवरी १९६५ िमिथला िमिहर) पिहल छपल पोथी- दू कुहेसक बाट (उप=यास १९६८) नवीनतम पोथी-िखिखरक बीअिर (२००७ बाल प कथा), अठी खसलइ वनमे (प-कथा सं4ह) आ पंजिर Hेम Hकािसया (जीवन-वृZक अंश) Hेसमे पुरकार-सािहdय अकादेमी (िद}ली १९९८), िकरण सXमान (१९९८), वैदेही सXमान (१९८५) Hकािशत पोथी- किवता सं4ह: नाचू हे पृ{वी (७१), धार निह होइछ मुhत (९१), तकैत अिछ िचड़ै (९५), ख‘ड़ो (१९९६), पािनमे जोगने अिछ बती (९८), फुनगी नीलाकाशमे (२०००), गाछ झूल-झूल (२००४), छाह सोहाओन (२००६), िखिखिरक बीअिर (२००७) कथा-सं4ह: एकसिर ठािढ़ कदम तर रे (७२), सूय- गिल रहल अिछ (७५), वतु (८३), करमी झील (९८) उप=यास: दू कुहेसक बाट(६८), पिनपत(७७), निह, कतहु निह (७६), पीयर गुलाब छल (७१), अिगनबान (८१) िह=दी अनुवाद- िनशा=त की िचिड़या (िह=दी अनुवाद-तकैत अ िछ िचड़ै, सािहdय अकादमी, िद}ली २००३) डॉ अमरेश पाठक 1936 -

िहनक ज=म सीतामढ़ी िजलाक अ=तग-त सामािर 4ाममे १९३६ मे भेलि=ह । १९५७ मे पटना िवgिवालयसँ मैिथलीक एम. ए. परी0ामे Hथम kेणीमे Hथमथान पाओल । १९५७ सँ १९६० धिर रामकृrण महािवालय, मधुबनीमे ]या6याता lपO तकरा बाद पटना िवgिवालयमे ]या 6याता lपमे काय- करए लगलाह । पटना िवgिवालयमे मैिथली िवभागाmय0 lपO । मैिथली उप=यासक आलोचनाdमक अmययन’ शोध Hब=धपर िहनका िबहार िवg-िवालय sारा िड. िल¤क उपािध भेटलि=ह । ई शो ध Hब=ध पुतकाकार lपO सेहो Hकािशत भेल अिछ िबहार राr¬भाषा पिरषदक िवापित 4=थावलीक सXपादक मtडलक सदय । िहनक अ=य Hकािशत रचना अिछ ’िनब=ध संकलन’ । एकरा छोिड़ िविभa प-पिकामे िहनक कतेको िनब=ध Hकािशत छि=ह । मैिथली अकादमी sारा Hकािशत कथा-सं4हक इहो एक सXपादक छिथ । ई अिधकतर उ™च तरीय आलोचनाdमक िनब=ध िलखैत छिथ । बलराम 1936 - 2008 ज=म थान पचही, मधुबनी, िबहार । िविशw कथाकार । Hकािशत कृित : दकचल देबाल (कथा-सं4ह)। रामदेव झा 1936 - कथाकर, समी0क, अनुवादक, 4ंथ सXपादक । सािहdय अकादेमीक मूल एवं अनुवाद पुरकार Hाoत कZU ल. ना. िमिथला िवgिवालय दरभंगाक मैिथली िवभागक पूव- Hाचाय- । Hकाशन: पिसझैत पाथर, (अनु.) आिद । रवी=q नाथ ठाकुर 1936 - ज=म पूिण-ञा िजलाक धमदाहा 4ाममे 1936 ई. मे भेलि=ह । नेने अवथासँ गीत गएबामे एवं किवता िलखबामे िवशेष /िच । कोनो मंच पर ठाढ़ भेला पर ई सहजिह kीताकO आóािदत करैत छिथ । िहनक सात गोट मैिथलीक गीत सं4ह, एक िमनी महाका]य, एक HयोगधमB का]य, एक उप=यास, एक नाटक ‘एक राित’ एवं एक िह=दी नाटक, Hकािशत भेल छि=ह । कीित-नारायण िमk 1937 - ज=म १७ जुलाई १९३७ ई. कO 4ाम शोकहारा (बरौनी), िजला बेगूसरायमे भेलि=ह। हुनकर Hकािशत कृित अिछ सीमा=त, हम तवन निह िलखब (किवता सं4ह)। आखर पिaकाक ल†धHितŠ सXपादक। कुलान=द िमk 1939 - कुलान=द िमk (१९४० - २०००), ज=म पकड़ी कोठी, सीतामढ़ी, िबहार। सुिव6यात किव,, संपादक, समालोचक। Hकािशत कृित- तावत एतबे, भोरक Hती0ामे (किवता सं4ह), भारतक भाषा सव¹0ण, पारो, राजकमल चौधरी की ˆयारह कहािनय‘ (अनुवाद)।

िबलट पासवान ‘िवहंगम ’ 1940 - ज=म मधुबनी िजलाक एकहdथा 4ाममे १९४० ई. मे भेलि=ह। Hभास कुमार चौधरी 1941 - 1998 गाम- िपंडा/छ, िजला- दरभंगा ।H6यात कथाकार ओ उप=यासकार । Hभासक कथा (कथा-सं4ह) लेल सािहdय अकादमी पुरकारसँ सXमािनत । Hकािशत कृित : कथा-Hभास, Hभासक कथा, नव घर उठय पुरान घर खसय, िददवल (कथासं4ह), अिभशoत, युगपु/ष, हमरा लग रहब, नवारXभ, राजा पोखिरमे कतेक मछरी (उप=यास) । िविभ महdवपूण- पिaकाक सXपादन । aैमािसक कथा गोŠी ‘सगर राित दीप जरय’ केर HारXभ साकेतान=द 1941- विरŠ कथाकार, गणनायक (कथा-सं4ह) लेल सािहdय अकादेमी पुरकारसँ सXमािनत। Hकािशत कृित: गणनायक (कथासं4ह), सव-वcत (उप=यास)। माक-tडेय H वासी 1942- ज=म 4ाम: ग/आर, िजला: समतीपुर । Hकािशत कृित: अगdयाियनी (महाका]य); एतदथ- (किवता सं4ह), अ0र चेतना (का]य सं4ह)। अिभयान, हम कािलदास (उप=यास)। ’अगdयाियनी’ लेल । १९८१मे सािहdय अकादेमी पुरकार Hाoत। मोहन भारsाज 1943- गाम- नवानी, िजला- मधुबनी । मैिथलीक Hखर समालोचक, Hबोध सXमान 2008 सँ सXमािनत भीमनाथ झा 1945- ज=म:कोइलख, मधुबनी, िबहार । Hखर किव, समालोचक, Hाmयापक । ’िविवधा’पुतक लेल सन् १९९२मे सिहdय अकादेमी पुरकारसँ सXमािनत । Hकािशत कृित: िaधारा, वीणा, की फुरैए की निह, नाम तँ िथक ओएह (किवता संकलन), पिरचाियका, सीताराम झा, किव चूड़ामिणक का]य साधना, िविवधा (िनबंध, आलोचना) आिद । डॉ रामदयाल राकेश , सलUही, नेपाल 1942- मैिथली मातृभाषा, िह=दीक Hाmयापक आ नेपालीक लेखक ई तीनू भाषा ’राकेश’क ]यिhतdवमे एना ने िमझराएल छैक जे कोनहुसँ िहनका िभ निह कएल जा सकैत अिछ । ई िवशेषत: नेपालीमे िलखैत छिथ, मुदा

लेखनक िवषय मूलत: मैिथलीए संकृित रहैत छिन । ओना मैिथली, िह=दी आ अˆङरेजीमे सेहो ई अनेक रचना कएने छिथ ।नेपालक राजकीय-Hjा-HितŠानक सदय ’राके श’ िद}ली िवgिवालयसँ पीएचडी आ अमेिरकािथत इिtडयाना यूिनभिस-टीसँ पोट डाhटरल िरसच- कएने छिथ । डा. ’राकेश’क ज=म २५ जुलाइ १९४२ ई. कऽ सलUही िजलाक िससौिटयामे भेल छिन । नेपाली, मैिथली, िह=दी आ अˆङरेजीमे मौिलक, सXपािदत आ अनूिदत कऽ करीब दू दज-न पोथी Hकािशत , दज-नभिर देशक ¥मण सेहो कएने छिथ । उपे=q दोषी 1943 - 2001 ज=म थान रामपुर-कोिरगामा, दरभंगा । किव-कथाकार, गीत-ग जलकार । Hकािशत कृित: यंaणाक 0णमे (किवता सं4ह)। िह=दीमे अनेक पोथी Hकािशत। ओिड़यासँ मैिथली अनुवाद हेतु मृdयुपरा=त सािहdय अकादेमीसँ पुरकृत। उदयच=q झा “िवनोद ” 1943 - गाम- रिहका, मधुबनी । ज=म-4ाम- दुलहा, मधुबनी । Hकािश त कृित: संRाि=त, मौसम अयला पर, एहना िथितमे, भिर देह गौरा (किवता-सं4ह), धूरी (सहयोगी किवता सं4ह); जcत (कथा सं4ह) ’मािट पािन’क वरेtय सXपादक। मंaेgर झा 1944 - ज=म ६ जनवरी १९४४ ई.4ाम-लालगंज, िजला-मधुबनीमे। Hकािशत कृित: खािध, अि=चनहार गाम, बहसल राितक इजोत (किवता सं4ह); एक बटे दू (कथा सं4ह), ओझा लेखे गाम बताह (लिलत िनब=ध)। मैिथली कथा सं4हक िह=दी अनुवाद “कुंडली” नामसँ Hकािशत। िद फू}स पैराडाइज (अं4ेजीमे लिलत िनब=ध), कतेक डािर पर (आdमकथा)। रेgर िमk 1945 - अनुवादक, िनबंधकार । Hकाशन: तिमल सािहdयक इितहास,भवभूित (दुनू अनुवाद)। वीरे=q मि}लक 1945 - किव, सXपादक, समी0क । आखर, अगिनपaक सXपादन शैले=q आन=द 1955 - ज=म थान िशवनगर मधुबनी, दू टा समी0ा, तीन टा कथा सं4ह, दू टा गीत-गजल सं4ह ओ चािर टा कथा-सं4ह Hकािशत।

िवजयका=त िमk इितहासकार 1927-1994 डॉ. िवजयकcत िमkक ज=म १० अगत १९२७ मंगरौनी गाम – जे न]य =याय आ तcिaक साधनाक ज=म- थली अिछ- (िजला मधुबनी) मे भेलि=ह। ओ 1948 मे Hाचीन भारतीय इितहास आ संकृित िवषयमे एलाहाबाद िवgिवालयसँ सनाZकोZर उपािध कएलाक बाद कतेक बरख धिर िबहार सरकार आ पटना िवgालयसँ सXब[ रहलाह आ 1957 ई. सँ भारतीय पुराZdव िवभागमे काज कएलि=ह आ ओकर िशशुपालगढ़, कौशाXबी, वैशाली, हितनापुर, कुXहरार, पाटिलपुa, किरयन, सोनपुर, िबलावली, नाल=दा, राजगीर, च=qव}ली, आ हXपी खुदाइमे िविभना भूिमकामे भाग लेलि=ह।िहनकर िलखल-सXपािदत पोथी सभमे अिछ: 1.वैशाली,1950 2.कुXहरार एhसकेवेशंस: 1950-1957 3.पुरातdव की दृिwमे वैशाली 4.नागेश भ«ाज पािरभाषे=दुशेखर 5.िमिथला आट- एtड आिक-टेhचर (सXपािदत) 6.क}चरल हेिरटेज ऑफ िमिथला 7.kृंगार भजनावली- एक अmययन 8.0ेa पुरातdविवjान- 9.पुरातdव श†दावली िवनोद िबहारी लाल 1953- ज=म थान पचही, मधुबनी, िबहार ।चिच-त कथाकार । सयसँ ऊपर कथा Hकािशत याम दिरहरे 1954- ज=म थान बरहा, बेनीप«ी मधुबनी, िबहार । किव, कथाकार । Hकािशत कृित : सिरसोमे भूत (कथा सं4ह) अनूिदत कृित : किनिHया (धम-वीर भारती Hोफेसर महे=q 1947- ज=म: भेलाही, सुपौल, िबहार । Hिस[ किव, कथाकार, आलोचक । वृिZ: भू.ना. िवgिवालयक नातकोZर के=q, सहरसामे मैिथली िवभागाmय0। Hकािशत कृित सािहdय अकादेमीसँ Hाकािशत मोनो4ाफ शैले=q मोहन झा । सहयोगी संकलन-संक}प । ’राजकमल जय=ती Hसंगक संपादन बैकुtठ झा 1954- kी बैकुtठ झा,िपता-वगBय रामच=q झा, ज=म-२४ – ०७ – १९ ५४ (4ाम-भरवाड़ा, िजला-दरभंगा),िश0ा- नाdकोZर (अथ-शाa),पेशा- िश0क। मैिथली, िह=दी तथा अं4ेजी भाषा मे लगभग २०० गीत कऽ रचना। गोनू झा पर आधािरत नाटक ”हायिशरोमिण गोनू झा तथा अ=य कहानी कऽ लेखन। अिह के अलावा िह=दी मे लगभग १५ उप=यास तथा कहानी के लेखन। महाHकाश 1946-

ज=म: बनगcव, सहरसा, िबहार । विरw किव ओ कथाकार। Hकािशत कृित: किवता संभवा, संग समय के (किवता सं4ह)। अयोmयानाथ चौधरी, धनुषा, नेपाल 1947- मूलत: किवक lपमे पिरिचत छिथ । नेपालक आधुिनक किवताक 0 ेaमे िहनक नाम उ}लेखनीय अिछ । kी चौधरीक लेखनमे मानवीय संवेदनाक HितिबXब पाओल जाइत अिछ । किवताक संग कथा आ िनब=धमे सेहो ई कलम चलबैत छिथ । फिड़छाएल लेखन िहनक िवशेषता िथकिन ।धनुषा िजलाक दुहबी गामक रहिनहार kी चौधरीक ज=म ६अhटुबर १९४७कऽ भेल छिन । िहनक ि0ितजक ओिहपार नामसँ एक किवता-सˆङHह Hकािशत छिन िसयाराम झा “सरस” 1948- ज=म थान म¼हथ, मधुबनी िबहार । Hिस[ गीतकार, बादमे कथा लेखन HारXभ केलिन । Hकािशत कृित आंजुर भिर िसंगरहार, शोिणताएल उगैत सूय-क धXमक (कथा सं4ह)। अिˆनपुrप 1948- ज=म: तरौनी, दरभंगा। मूलनाम : महे=q झा । मैिथलीमे सहaबाहु किवता सं4ह Hकािशत । मुिhत Hसंगक अनुवाद Hकािशत । वामपंथी आ=दोलनमे सिRय। िश0ा, सXवाद आिद पिaकाक सXपादन । वामपंथी िवचारधाराक सशhत किव। रामलोचन ठाकुर 1949- kी रामलचन ठाकुर, ज=म १८ माच- १९४९ ई.पिलमोहन, मधुबनीमे। विरŠ किव, रंगकमB, सXपादक, समी0क। भाषाई आ=दोलनमे सिRय भागीदारी। Hकािशत कृित- इितहासह=ता, मािटपािनक गीत, देशक नाम छल सोन िचड़ैया, अपूवU (किवता सं4ह), बेताल कथा (]यंˆय), मैिथली लोक कथा (लोककथा), Hितmविन (अनुिदत किवता), जा सकै छी, िक=तु िकए जाउ(अनुिदत किवता), लाख HÆ अनुZिरत (किवता), जादूगर (अनुवाद), मृितक धोखरल रंग (संमरणाdमक िनब=ध), आंिख मुनने: आंिख खोलने (िनब=ध)। राजे=q िवमल , जनकपुर, नेपाल 1949- राजे=q िवमल (1949- )। मैिथली, नेपाली आ िह=दी भाषाक Hाj िवमल िश0ाक हकमे िवावािरिध (पी.एच.डी.)क उपािध Hाoत कएने छिथ।कXमो िलिखकऽ यथेw यश अरजिनहार डा. िवमलक लेखनीक Hशंसा मैिथलीक सŸसŸ नेपाली आ िह=दी सािहdयमे सेहो होइत रहलिन अिछ। िaभुवन िवgिवालयअ=तग-त रा.रा.ब. कैXपस, जनकपुरधाममे Hाmयापन कएिनहार डा. िवमलक पूण- नाम राजे=q लाभ िछयिन। िहनक ज=म

२६ जुलाई १९४९ ई. कऽ भेल अिछ। सािहdयकारक नव पीढ़ीकO िनर=तर उdHेिरत करबाक कारणे ई डा.धीरे=qक बाद जनकपुर-पिरसरक सािहिdयक गु/क lपमे था िपत भऽ गेल छिथ। हरेकृrण झा 1950- ज=म १० जुलाई १९५० ई. गाम- कोइलखमे। अिभयंaणक अmययण छोिड़ माhस-वादी राजनीितमे सिRय। अनेक किवता आ आलोचनाdमक िनब=ध Hकािशत। अनुवाद एवं िवकास िवषयक शोध काय-मे /िच। वतंa लेखन। Hकृित एवं जीवनक तादाdXय बोधक अ4णी किव। “एना त’ निह जे” (किवता सं4ह)। िशवे=qलाल कण-, धनुषा, नेपाल 1951- लेखकसँ अिधक िश0कक lपमे पिरिचत आ HितिŠत छिथ । िaभुवन िवgिवालयअ=तग-तरा. रा. ब. कैXपस, जनकपुर-धामक सह-Hाmयापक kी कण-क ऐितहािसक िवषय-वतुपर िलखल कतोक लेख मैिथली, िह=दी आ अˆङरेजी भाषामे Hकािशत अिछ । वा=त-सुखाय ई किहयो कालकऽ किवता-कथा सेहो िलिख लैत छिथ । िहनक लेखन jानव[-क, जानकारीमूलक एवं सोझारएल रहै त अिछ । देखलापर बुझना जाइत अिछ जे ई िहनक गXभीर अmययनक पिरणित िथक ।सामािजक तथा सािहिdयक सø-संथासभमे सेहो सिRय Hाmयापक कण-क ज=म धनुषा िजलाक देवडीहा गाममे २ जनवरी १९५१ ई. कऽ भेल छिन । शैले=q कुमार झा 1952- ज=म थान हिरपुर, वकशी टोल, मधुबनी िबहार। Hकािशत कृित: आरोह अवरोह, दशम खु«ी (कथा सं4ह), इकोनोिमक िह¬ी ऑफ िमिथला (अं4ेजी) । िशवशंकर kीिनवास 1953- ज=म थान लोहना मधुबनी, िबहार । चिच-त कथाकार ओ आलोचक । गीत ओ किवता सेहो किहयो काल िलखैत छिथ । Hकािशत कृित : िaकोण, अदहन, गाछ-पात, गामक लोक (कथा सं4ह)। अशोक 1953 - ज=म थान लोहना, मधुबनी, िबहार। चिच-त कथाकार, किव ओ सXपादक । Hकािशत कृित : चR]यूह (किवता सं4ह) िaकोण (सहयोगी कथा सं4ह), ओिह राितक भोर (कथा-सं4ह), मातवर (कथा सं4ह)। िवभूित आन=द 1953- ज=म: िशवनगर, मधुबनी, िबहार। चिच-त किव, कथाकार, संपादक । Hकािशत कृित टूटा उप=यास टूटा समी0ा, तीन टा कथ सं4ह, टूटा गीत-गजल सं4ह ओ चािरटा कथा -सं4ह Hकािशत।

डॉ. शिश नाथ झा 1954- गाम-दीप, िजला- मधुबनी। मैिथली, बcˆला, नेवारी आ देवन ागरी पcडुिलिपक िवशेषj। ल}लन Hसाद ठाकुर 1951-1995 ज=म ५ फरबरी १९५१ मुंगेर मे kीमती सुभqा देवी आ kी हीरानंद ठाकुरक िsतीय बालक । िहनक 4ाम- समौल,िजला-मधुबनी। िसिवल इंजीिनयर, टाटा टीलमे चाकरी। Hकाश झाक िफ़}म “कथा माधोपुर की” मे मु6य भुिमका। नाटककार आ मंच अिभनेता। हुनक िलखल िकछु Hिस[ मैिथली नाटक छि=ह :बडका साहेब,िमटर िनलो काका, लॲिगया िमरचाई,बकलेल आिद वा अंत। सुकcत सोम 1950- ज=म दरभंगा िजलाक तरौनी गाममे 1950 ई. मे भेलि=ह । बी. ए. पास कए ई पटनाक दैिनक ‘जनशिhत’क सहायक सXपादक छलाह । फेर नव भारत टाइXस, पटनामे।बा}यवथासँ अपन पैतृक (िपता याीजी) गुण किवता करबाक तथा कथा िलखबामे सेहो यश अज-न कएलि=ह अिछ । वZ-मान राजनीित सामािजक िवषयसँ सXब[ ]यंˆयाdमक, सरल भाषामे िलखल नव किवता िहनक िवशेषता छि=ह । गामघरक पिरवेश तदनुकूल श†द एवं िबXब रचनामे Rमिह िस[ छिथ । पशुपितनाथ झा, महोZरी, नेपाल 1954- िहनक लेखन िववरणाdमक होइत अिछ आ सXब[ िवषयमे नीकजकॉ जानकारी दैत अिछ । िविभ पa- पिaकामे िहनक लेख-रचना बरोबिर देखबामे अबैत रहैछ ।रा. रा.ब. कैXपस, जनकपुरधाममे मैिथली िवषयक Hाmयापनमे संलˆन kी झा मैिथलीसXब=धी सˆङठनाdमक गितिविधसँ सेहो जुड़ल छिथ । मैिथली भाषाक लोपो=मुख अवथामे रहल अपन िलिप ितरहुतामे िवशेषjता रख िनहार kी झा एकर संर0ण-सXब[-नक िदशामे सेहो िRयाशील छिथ ।Hmयापक झा मैिथली महाका]यमे रस िनlपण िवषयपर िवावािरिध कएने छिथ आ िश0ा तथा कानून िवषयमे सेहो नातक छिथ । महोZरी िजलाक एकरिहया रहिनहार kी झाक ज=म ४ िदसXबर १९५४ कऽ भेलछिन । वृखेश च=q लाल , नेपाल 1955- ज=म 29 माच- 1955 ई. कO भेलि=ह। िपताः व. उिदतनारायण लाल,माताः kीमती भुवनेgरी देव। िहनकर छिठहारक नाम िवgेgर छि=ह। मूलतः राजनीितककमB । नेपालमे लोकत=aलेल िनर=तर संघष-क Rममे १७ बेर िगर’तार । लगभग ८ वष- जेल ।सXHित तराई–मधेश लोकताि=aक पाटBक राw «◌ीय उपाmय0 । मैिथलीमे िकछु कथा िविभ पaपिaकामे Hकािशत । आ=दोलन किवता सं4ह आ बी.पॴ कोइरालाक Hिस[ लघु उप=यास मोिदआइनक मैिथली /पा=तरण तथा नेपालीमे संघी य शासनितर नामक पुतक Hकािशत । ओ

िवgेgर Hसाद कोइरालाक Hितब[ राजनीित अनुयायी आ नेपालक Hजातcिaक आ=दोलनक सिRय यो[ा छिथ। नेपाली राजनीितपर बरोबिर िलखैत रहैत छिथ। नारायणजी 1956 - ज=म: घोघरडीहा (मधुबनी)। मैिथली भाषा-सािहdयमे एम. ए., पी-एच. डी. कामेgर लता संकृत िवालय, घोघरडीहामे अmयापन । Hकािशत कृित: ’घिर घुिर रहल छी’ (का]य-सं4ह)। केदार कानन 1959 - ज=म थान सुपौल, िबहार। चिच-त किव, कथाकार ओ संपादक। Hकािशत कृित : आकार लैत श†द (किवता सं4ह), अनूिदत कृित राजा राम मोहन राय, Hायित। सXपादन संक}प, भारती मंडन (पिaका)। मानेgर मनुज 1958 - ज=म गXहिरया (मानपौर, मधुबनी)मे, 1978सँ 1992 धिर नौसेनामे िविभ जहाजपर काय-रत, फेर याaी रेलमे। सXब=ध (कथा सं4ह) Hकािशत। महे=q नारायण राम 1958 - सXपादन-“नव Tयोित” पिaका, “लोकशिhत” सामािजक मुख-पaक। लोकवृZ ताहूमे लोकगाथाक अmयेता। तारान=द िवयोगी 1966 - मिहषी, सहरसामे ज=म।पिहल पोथी अपन यु[क सा`य (गजल सं4ह ) १९९१ मे Hकािशत। अ=य पुतक हत0ेप (किवता-सं4ह), अितRमण (कथा-सं4ह), िशलालेख(लघुकथा सं4ह), कम-धारय।राजकमल चौधरीक कथाकृित एकटा चंपाकली एकटा िवषधर संकलन-स पादन। भालच=q झा मैिथलीक अितिरhत िह=दी, मराठी, अ4ेजी आऽ गुजरातीमे िनrणात। १९७४ ई.सँ मराठी आऽ िह=दी िथएटरमे िनदेशक।बीछल बेरायल मराठी एकcकीक मैिथली अनुवाद। रमेश 1961 - ज=म थान म¼हथ, मधुबनी, िबहार। चिच-त कथाकार ओ किव । Hकािशत कृित: समcग, समानcतर (कथा सं4ह), नागफेनी (गजल सं4ह), संगोर, समवेत वरक आगू, कोसी धारक स·यता, पाथर पर दूिभ (का]य सं4ह), HितिRया (आलोचनाdमक िनबंध)।

Hदीप िबहारी 1963 - ज=म थान क=हौली मि}लक टोल, खजौली, मधुबनी, िबहार। चिच-त कथाकार, उप=यासकार ओ रंगकमB । Hकािशत कृित: गुमकी ओ िबहािड़, िवसूिवयस (उप=यास), औतीह कमला जयतीह कमला, खtड-खtड िजनगी, सरोकार (कथा सं4ह)। फूलच=q झा “Hवीण ” 1961 - गाम तुमौल दरभंगा, आयल नवल Hभात, पcगल गाछक छाहिर, हमरा मोनक खजन िचड़ैया, बसंतक बजिनञा (किवता सं4ह), भूत होइत भिवrय़ (कथा सं4ह)। िवान=द झा 1965 - बु[पूिण-मा, १९६५क¼ कैिथिनय‘, झंझारपुर मुधुबनीमे ज=म। पराती जक‘ (किवता सं4ह) Hकािशत । मूलतः किव, थोड़ कथा िलखलिन, जे अपन मािम-क अिभ]यिhतक कारण बेस चिच-त भेल । िवडXबनापूण- पिरिथितक पाछू िजXमेवार समाजािथ-क कारणक खोज िहनकर मूल सृजन Hेरणा िथक रमेश रंजन , परवाहा, नेपाल 1966 - परवाहा, नेपालमे ज=म । नेपालीय कथा-जगतक नवीन मुदा सX मािनत नाम । जनप0धर कथा-दृिw आ मोहक िश}प । थोड़ िलखलिन, मुदा बेर-बेर चिच-त रहलाह । धीरे=q Hेमिष-, िसरहा, नेपाल 1967 - िव.सं.२०२४ साल भादब १८ गते िसरहा िजलाक गोिव=दपुर-१, बतीपुर गाममे ज=म लेिनहार Hेमिष-क पूण- नाम धीरे=q झा िछयिन।काि=तपुरसँ हे}लो िमिथला काय-Rम Hतुत कतU जोड़ी lपा-धीरे=qक धीरे=qक अबाज गामक ब™चा-ब™चा िच=हैत अिछ। “प}लव” मैिथली सािहिdयक पिaका आ “समाज” मैिथली सामािजक पिaकाक सXपादन। याम सु=दर शिश , नेपाल याम सु=दर शिश, जनकपुरधाम, नेपाल। पेशा-पaकािरता। िश 0ा: िaभुवन िवgिवालयसँ,एम.ए. मैिथली, Hथम kेणीमे Hथम थान। मैिथलीक Hायः सभ िवधामे रचनारत। बहुत रास रचना िविभ पa-पिaकामे Hकािशत। िह=दी, नेपाली आऽ अं4ेजी भाषामे सेहो रचनारत आऽ बहुतरास रचना Hकािशत। सXHित- काि=तपुर Hवासक अरब †यूरोमे काय-रत। िहमcशु चौधरी, नेपाल

िपता : वगBय कामेÉवर चौधरी,माताः kीमती च=qावती चौधरी,ज=मः िव स २०२०/६/५ लहान, िसरहा,िश0ाः नातकोZर(नेपाली),पेशाः पaकािरता (सXHित : रािr¬य समाचार सिमित ),कृित : की भार सcठू ? (मैिथली किवता सं4ह ),िवगत दू दशकसं नेपाली आ मैिथली लेखन तथा अिभयानमे िनर=तर िRयाशील आ िविभ संघ संथासं आब[ । कृrण मोहन झा 1968 - ज=म मधेपुरा िजलाक जीतपुर गाममे। “िवजयदेव नारायण साही की का]यानुभूित की बनावट” िवषयपर जे.एन.यू. सँ एम.िफल आ ओतिहसँ “िनम-ल वमU के कथा सािहdय म¼ Hेम की पिरक}पना” िवषयपर पी.एच.डी.। िह=दीमे एकटा किवता सँ4ह “समय को चीरकर” आ मैिथलीमे “एकटा हेरायल दुिनया” Hकािशत। िह=दी किवता लेल “क=हैया मृित सXमान”(1998) आ “हेमंत मृित किवता पुरकार”(2003)। असम िवgिवालय, िस}चरक िह=दी िवभागमे अmयापन। सुनील कुमार मि}लक , गायक , जनकपुर , नेपाल 1968 - मैिथलीक गायक-सˆङीतकारक lपमे Hिस[ छिथ । मैिथली भाषाक गीतसभमे मौिलक तथा साथ-क सˆङीतक सृजनमे िहनक सिRयता Hशंसनीय छिन । सुनीलक गायन तथा सˆङीतमे कैसेट एलबमसभ सेहो बाहर भेल अिछ ।लेखनिदस िहनक सिRयता पिरमाणाdमक lपमे कम रिहतहुँ गुणाdमक दृिwएँ हृदयपशB मानल जाइत अिछ ।पेशासँ िवjान-िश0क छिथ । नीरज कण-, धनुषा, नेपाल 1970 - समाजशाaक छाa आ गिणत तथा िवjानक िश0क छिथ, मुदा मैिथ ली सािहdय आ संगठनक 0ेaमे सेहो िनर=तर सिRय छिथ । भाषा, ]याकरण आिदक म¼ही प0सभपर सेहो ई पूण- अिधकार रखैत छिथ । ज=म धनुषा िजलाक कुथU गाममे भेल छिन । िविभ पaपिaकामे िहनक कथा, किवता, लेख-रचनासभ मैिथली, नेपाली आ अˆङरेजी भाषामे Hकािशत होइत रहैत छिन । अनुवादक 0ेaमे सेहो िहनक नीक अिधकार छिन ।

राजेgर झा (१९२३-१९७७) ज=म- सहरसा िजलाक रसुआर गाम (आब सुपौल िजला)। कृित- िमिथला0रक उ”व ओ िवकास, अवह(: उ”व ओ िवकास, मैि थली सािहdयक आिदकाल, िवापितक संगीतमे विण-त नायक-नाियका भेद एवं राग-रािगनी वगBकरण। महाकिव िवापित नाटक, शाaाथ- नाटक, क=दपBघाट नाटक, एकादशी, िवाधर-कथा, उव-शी, धम-]याध- कथा, मेनका।

रबी=q नारायण िमk, िपताक नाम : वगBय सूय- नारायण िमk, माताक नाम : वगBया दयाकाशी देवी, बएस : ६६ बख-, पैतृक 4ाम : अड़ेर डीह, मातृक : िसि=घआ ­योढ़ी, वृित : भारत सरकारक उप सिचव (सेवा िनवृZ)/ पेशल मे¬ोपोिलटन मिज¬ेट, िद}ली(सेवा िनवृZ), िश0ा : च=qधारी िमिथला महािवालयसँ बी.एस-सी. भौितक िवjानमे HितŠा : िद}ली िवgिवालयसँ ि विध नातक Hकािशत कृित : मैिथलीमे:-१. ‘भोरसँ स‘झ धिर’ (आdम कथा), २. ‘Hसंगवश’ (िनवंध), ३. ‘वग- एतिह अिछ’ (याaा Hसंग), ४. ‘फसाद’ (कथा सं4ह) ५. `नमतयै’ (उप=यास) ६. िविवध Hसंग (िनवंध ) ७.महराज(उप=यास) ८.लजकोटर(उप=यास)९.सीमाक ओिह पार(उप=यास)१०.समाधान(िनवंध सं4ह) ११.मातृभूिम(उप=यास)१२.व¶लोक(उप=यास)१३.शंखनाद(उप=यास)१४.इएह िथक जीवन(संमरण) Rम नाम (उपनाम ) 1 अनंत िबहारी दास इंदु 2 आानाथ झा िनरंकुश 3 ईशनाथ झा सरस किव 4 उदय नारायण िसंह निचकेता 5 उदयचंq झा िवनोद 6 उपे=q ठाकुर मोहन 7 उपे=qनाथ झा ]यास 8 उपे=qलाल दास दोषी 9 काžचीनाथ झा िकरण 10 किपलदेव ठाकुर नेहलता 11 कमल नारायण झा कमलेश 12 काशीकcत िमk मधुप 13 कुलान=द झा कुलेश 14 0ेमधारी िसंह kीकर 15 गंगाधर झा जीबू 16 गोपालजी झा गोपेश 17 गौरीका=त चौधरी कcत 18 गौरीशंकर सोमदेव 19 च=qनाथ िमk अमर 20 छेदी झा िsजवर 21 जगदीप नारायण दीपक 22 जटेgर झा जिटल 23 जनाद-न झा जनसीदन

24 जय नारायण झा िवनीत 25 जयधारी िसंह Hभाकर 26 जयHकाश लाल महाHकाश 27 तारानंद महतो िवयोगी 28 िदनेgर लाल आनंद 29 दीनानाथ पाठक बंधु 30 दुगUनाथ झा kीश 31 धीरेgर झा धीरे=q 32 धीरे=q नारायण झा धीर 33 परमानंद दZ परमाथB 34 Hफु}ल कुमार िसंह मौन 35 Hभु नारायण झा मैिथली पुa Hदीप 36 फ़जलुर-हमान हाशमी 37 बालगोिवंद झा ]यिथत 38 बुि[धारी िसंह रमाकर 39 वैनाथ मि}लक िवधु 40 वैनाथ िमk याaी 41 xजिकशोर वमU मिणपf 42 भुवनेgर पाथेय 43 भुवनेgर िसंह भुवन 44 मंaनाथ झा हंसराज 45 मथुरान=द चौधरी माथुर 46 मणी=q नारायण चौधरी Hिस[ फूल बाबू Hिस[ राजकमल चौधरी 47 महावीर झा वीर 48 मह¼q झा मलंिगया 49 माक-tडेय झा Hवासी 50 यदुनाथ झा यदुवर 51 रमानंद रेणु 52 रमानाथ िमk िमिहर 53 रिवकcत झा नीरज 54 राजे=q झा वतंa 55 राधाकृrण झा बहेड़

56 राम कृपाल चौधरी राकेश 57 रामिकशोर झा िवभाकर 58 रामकृrण झा िकसून 59 रामचिरa पcडे अणु 60 रामभरोस कापिड़ ¥मर 61 lपनारायण झा राकेश 62 ल`मण चौधरी लिलत 63 लिलतेश िमk लिलत 64 िवजय नारायण िमk Hवासी सािहdयालंकार 65 िवानाथ झा िविदत 66 िवgनाथ झा िवषपायी 67 िशवशंकर झा का=त 68 सीतानाथ झा अिनल 69 सुधcशु शेखर चौधरी शेखर 70 सुरे=q झा सुमन 71 सुरे=q िसंह नेही 72 सूय-कcत िवमल 73 हिरनंदन ठाकुर सरोज 74 हिरंq झा हरीश

एन . ट ी . ए. य ू . ज ी . सी . ने ट २ ० २० आ आ ग  ले ल ट े  ट स ी र ी ज - १ व  त ु ि न  (१ ) ‘ कप ू रम " ज र ी ’ ि व भा ि ज त अि छ (क) क( ल ो ल म े (ख) ज बि न क ा म े (ग) आ न न म े (घ ) प ( लव म े (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(२ ) श च ी क 3 प र ा म श द े ल ि न (क) ल5 म ी (ख) का ल ी (ग) स र  व त ी (घ ) दु ग6 (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(३ ) ‘ र ि व सम द ी 8 त अ न ल सम दा ह क प ि व सम कि ठ न कठ ो र ’ कहल गे ल अि छ (क) सु भ: ा ह रण म े (ख) च ा ण< यम े (ग) एका व ली प ि रणयम े (घ ) कृ > ण च ि रत म े (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(४ ) ‘ उ A र ा म े : ौ प द ी क गु 8 त न ा म अि छ (क) सु लC ण (ख) ि व चCण ा (ग) ि व D म ले ख ा (घ ) सै र" F ी (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(५ ) ‘ न ा ◌े र’क I का शक अ ि छ (क) स ा ि हJ य अ का द े म ी (ख) च े त न ा सि म ि त (ग) म ै ि थल ी अ का द म ी (घ ) ने शन ल ब ु क L  ट (ङ) प (लवी I का शन , ि न र म ली

(६ ) ‘ O म शा न ’ शी ष क कि व त ा संगृ ही त अ ि छ (क) अ" तन6 द म े (ख) कथ ा यू ि थ क ा म े (ग) I ि तप द ा म े (घ ) अंका व ली म े (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(७ ) ‘ प ि हल स झ ’ ना ट क अ ि छ (क) स ा म ा ि ज क (ख) ध ा ि म क (ग) ऐि तहा ि स क (घ ) प ौ र ा ि णक (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(८ ) ‘ ब ु W च ी द ा इ’ प ा Y छ ि थ (क) म ध ु Z ा व णी म े (ख) प ु नि व व ा हम े (ग) क" य ा द ा न म े (घ ) ि न द य ी स ा सु म े (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(९ ) ‘ म र ी ि चक ा ’ I का ि शत अ ि छ (क) एक भा गम े (ख) द ू भ ा ग म े (ग) ती न भ ा गम े (घ ) च ा ि र भ ा ग म े (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(१ ०) ‘ कच ो ट ’ कथ ा क ले ख क छ ि थ (क) म ा य ा न " द ि म Z (ख) र म ा न " द र े ण ु (ग) नी रज ा र े णु (घ ) र ा ज म ो हन झ ा (ङ) कि प ले \ र र ा उ त

(१ १) ‘ को न म हल ना म र ा खबै एकर’ रचना ि छ य ि न (क) म ि णप ] ज ी क (ख) ि करणज ी क (ग) ि क सु न ज ी क (घ ) गो प े शज ी क (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(१ २) ‘ ि शश ु गी त’क संकल ि यता छ ि थ (क) ब ा लगो ि व " द झ ा ‘^ य ि थ त’ (ख) स ी ता ि म Z (ग) स ु न ी ि त झ ा (घ ) I फु ( ल कु म ा र ि स ंह ‘ म ौ न ’ (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(१ ३) ि व ` ा प ि तक आ य ु क अ व स ा न भ े ल ि न (क) स ा ओ न म े (ख) भ ा द व म े (ग) आि सन म े (घ ) क ा ि त कम े (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(१ ४) ‘ र म ण ी या थ : I ि तप ा द क: शc द : क ा ^ यम ् ’ उ ि < त छ ी (क) ि व \ न ा थ क (ख) भर (ग) म e म टक (घ ) ज गf ा थक (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(१ ५) ‘ I ा च ी न ज ी ण ज ग त ी क बी न म े बा ि ज रहल अ ि छ यु ग न वी न ’ ई प `h श ि लखने छ ि थ (क) i ज ि क शो र व म 6 ‘ म ि ण प ] ’ (ख) का श ी क ा " त ि म Z ‘ म ध ु प ’ (ग) त " Y न ा थ झ ा (घ ) सु र े " : झ ा ‘ सु म न ’ (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(१ ६) अन ु करण ि सj ा " तक I व k त क छ ि थ : (क) अर त ू (ख) अि भ न व ग ु 8 त (ग) भ l लो ( लट (घ ) शंकु क (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(१ ७) ‘ वा च  प ि त’प ा Y छ ि थ : (क) न व त ु ि रआ म े (ख) य ु ग प ु m ष म े (ग) ब लच न म ा म े (घ ) दू ध फू ल म े (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(१ ८) ‘ ि व म ल’ प ा Y छ ि थ: (क) फु ट प ा थ म े (ख) न वा रe भ म े (ग) कु म ा रम े (घ ) प ि न प तम े (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(१ ९) ‘ उ A र ा ’म े की चकक व ध के लि न (क) कंक (ख) n ंि थक (ग) त ं ि त क (घ ) ब ( ल व (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(२ ०) ‘ नि ह प त न एक ि द न ककर है त, प ृ o व ी क क ो रम े के नि ह ज ै त कहन े छ ि थ (क) य ा Y ी (ख) अम र (ग) ि करण (घ ) म ध ु प (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(२ १) ‘ रघ ु वंश’ म े ि स ंह ि द ली प क स ंव ा द अि छ (क) I थम सग म े (ख) ि p त ी य सग म े (ग) त ृ ती य सग म े (घ ) च त ु थ सग म े (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(२ २) ‘ प ु m ष प र ी C ा ’म े ‘ द ा न वी र कथा ’ उ ि ( ल ि ख त अ ि छ (क) I थम प ि रW छ े द म े (ख) ि p त ी य प ि रW छ े द म े (ग) त ृ ती य प ि रW छ े द म े (घ ) च त ु थ प ि रW छ े द म े (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(२ ३) ‘ दु > य " त ’क च ि रY व ि ण त भ े ल अ ि छ (क) ‘गंग ा ’म े (ख) ‘शकु " त ा ल ा ’म े (ग) ‘ उ J सग ’म े (घ ) ‘लि खम ा र ा न ी ’म े (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(२ ४) इ " : क प ला य न क प q ा त ् द े व त ा क र ा ज ा भ े ल ा (क) ब ृ ह प ि त (ख) अग  J य (ग) ि व \ ा ि म Y (घ ) न हु ष (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(२ ५) ‘ उ A र ा ’म े सग क संr य ा अ ि छ (क) छ ओ (ख) स ा त (ग) आ ठ (घ ) न ओ (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(२ ६) ‘ लो क ल C ण ’ ि लखने छ ि थ (क) स ी ता र ा म झ ा (ख) भ ो ल ा ला ल द ा स (ग) रघ ु न " द न दा स (घ ) भ ु व ने \ र ि संह ‘भु व न ’ (ङ) र ा ज दे व म sड ल

(२ ७) ‘ को स ी क ा तक र ा म ल5 म ण आ स ी त ा ’ क I णे ता छ ि थ (क) म हे " : ना र ा र ण र ा म (ख) व ी र े " : झ ा (ग) म हे " : म ल ंि ग य ा (घ ) र ा म भ र ो स क ा प ि ड़ ‘D म र’ (ङ) न "द ि व ला स र ा य

(२ ८) न े प ा ली य ना ट क छ ी (क) प ा व त ी प ि रण य (ख) म ु : ा र ा Cस (ग) श कु " त ल ा (घ ) हर गौ र ी ि व व ा ह (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(२ ९) ‘ का ि त क ध व ल Yयो द शी ’ संग ृ ही त अ ि छ (क) ‘वी णा ’म े (ख) ‘ना म त ँ ि थ क व ै ह’ म े (ग) ‘ ध ू र ी ’ म े (घ ) ‘ की फू र े ए क ी ने ’म े (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(३ ०) ‘ ग ( ती न ा म ा ’क ले खक छ ि थ (क) र ा ज म ो हन झ ा (ख) न र े " : झ ा (ग) म ो हन भ ा रp ा ज (घ ) ता र ा का " त झ ा (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(३ १) सु ध ा कर झ ा ‘ श ा  Y ी ’प र ि वि न ब " ध ि लख ने छ ि थ (क) अम र ना थ झ ा (ख) ि क श ो र ना थ झ ा (ग) दे वे " : झ ा (घ ) ज यध ा र ी ि संह (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(३ २) ‘ I वा स ज ी व न ’ अि छ (क) स ा C ा J क ा र (ख) य ा Y ा व ृ A ा " त (ग) आ J म कथ ा (घ ) ल ि ल त ि न ब " ध (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(३ ३) म ै ि थ ल ी उ प " या स सा ि हJ यप र आ लो च न ा J म क प ो थ ी I का ि श त छ ि " ह (क) ल ो खना थ ि म Z क (ख) अम र े श प ा ठ कक (ग) आ न " द ि म Z क (घ ) न वी न च" : ि म Z क (ङ) दु ग 6 न "द म sड ल

(३ ४) ‘ ि न ब " ध प ा ठ ’क ले खक छ ि थ (क) I े म शंकर ि संह (ख) श ि श ब ो ध ि म Z ‘शि श ’ (ग) के > कर ठ ा कु र (घ ) इ" : क ा " त झ ा (ङ) ज गदी श I स ा द म sड ल

(३ ५) ‘ म ो हन भ ा रp ा ज ’क प Yप ि Y का प र प ो थ ी I का ि श त छ ि " ह (क) एन . ब ी . ट ी . सँ (ख) म ै ि थ ल ी अ का द म ी सँ (ग) स ा ि हJ य अ क ा दे म ी सँ (घ ) च े तना स ि म ि तसँ (ङ) न व ा रeभ स ँ

(३ ६) य ा Y ा सा ि ह J य प र प ो थी ि लखन े छ ि थ (क) र ा म लो च न ठ ा क ु र (ख) सJ य ा न " द प ा ठ क (ग) बा स ु क ी ना थ झ ा (घ ) ज गदी श च" : झ ा (ङ) बे चन ठ ा कु र

(३ ७) ‘ अनु भव ’ क अनु व ा द क छ ि थ (क) ग ो ि व " द झ ा (ख) I फ ु ( ल कु म ा र ि स ंह ‘म ौ न ’ (ग) दे वे " : झ ा (घ ) म ु र ा ि र म ध ु सू द न ठ ा कु र (ङ) उ म े श म sड ल

(३ ८) ‘ ओ ज े कहलि न ’ ि ल खने छ ि थ (क) ^ य ि थ त (ख) ह ंस र ा ज (ग) ि व य ो ग ी (घ ) ध ू म के तु (ङ) ड ॉ ि शव क ु म ा र I सा द

(३ ९) ‘ ना ि र के रफल स ि e म त ’ का ^ य कहल ग े ल अि छ (क) ल ो च न क (ख) ग ो ि व " द द ा सक (ग) म न ब ो ध क (घ ) हष न ा थक (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(४ ०) ‘ का ^ य य ा J म ा w व ि न : ’ कहन े छ ि थ (क) भरत (ख) कु " त क (ग) आ न " द व j न (घ ) वा म न (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(४ १) ‘ ि झट ु क ी सँ फु ि ट ज ा इ छ घ ै ल ’ कहन े छ ि थ (क) ल ा ल द ा स (ख) भ ो ल ा ला ल द ा स (ग) स ा हे ब र ा म द ा स (घ ) च " दा झ ा (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(४ २) ‘ कि व प ि s ड त म ु r य ’ कहल ज ा इत अ ि छ (क) उ म ा प ि त (ख) र म ा प ि त (ग) न " द ी प ि त (घ ) ल5 म ी प ि त (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(४ ३) ‘ त र ौ न ी क ता लप Y’ छ ी (क) प द ा व ली क आ कर  Yो त (ख) ि ब  फ ी गा म क द ा न प Y (ग) ि व `ा प ि त क वं शा व ली (घ ) ि व `ा प ि तक nंथसू च ी (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(४ ४) ‘ दा न वा < य ा व ली ’ ि लख ने छ ि थ (क) र ा ज शे खर (ख) ि व `प ि त (ग) का ि लद ा स (घ ) उ म ा प ि त (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(४ ५) ‘ अZ ु कण ’ रचना ि छ य ि न (क) र म ा न " द र े ण ु क (ख) म न म ो हन झ ा क (ग) हंस र ा ज क (घ ) र ा म दे व झ ा क (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(४ ६) ‘ म ै ि थल ी प Y का ि र ता : द शा ओ ि द शा ’क सe प ा द क छ ि थ (क) व ी र े " : झ ा (ख) य ो ग ा न " द झ ा (ग) श र ि द " द ु च ौ ध र ी (घ ) म हे " : झ ा (ङ) न व े " द ु कु म ा र झ ा

(४ ७) ‘ I वा सज ी व न ’ ि ल खन े छ ि थ (क) सु भ: झ ा (ख) व ी र े " : म ि ( लक (ग) उ द य न ा र ा य ण ि संह ‘न ि चके ता ’ (घ ) दे व शं कर न वी न (ङ) उ म े श प ा सव ा न

(४ ८) ‘ हु न का सँ भ3 ट भ े ल छ ल’ ि ल खन े छ ि थ (क) म ि णप ] (ख) अम र (ग) स ु म न (घ ) म ध ु प (ङ) आ श ी ष अनि च" ह ा र

(४ ९) ि सj लो क ि न क संr य ा छ ल (क) एका स ी (ख) ि ब र ा स ी (ग) ि तर ा स ी (घ ) च ौ र ा सी (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(५ ०) शc द क ि व " य ा सी कहल गे ल अ ि छ (क) र ा म द ा स क3 (ख) ग ो ि व " द द ा सक 3 (ग) भ ो ल ा ल ा ल द ा सक 3 (घ ) ज ट ा श ंकर दा सक3 (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(५ १) ‘ भ ु ज ंग I या त ’ की छ ी (क) द ो ष (ख) w व ि न (ग) र ी ि त (घ ) छ " द (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(५ २) ‘ की ि द ^ य भ ू ि म ि म ि थल ा हम आि ब ग े ल ॱ ’ ि लखन े छ ि थ (क) ब ु ि j ध ा र ी ि स ंह ‘र म ा कर’ (ख) च" द ा झ ा (ग) ल 5 म ी न ा थ ग ो सा ◌ा ◌ँ इ (घ ) रघ ु न " द न द ा स (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(५ ३) ‘ I भा कर’ उ प न ा म ि छ य ि न (क) ब ु ि j ध ा र ी ि स ंह क (ख) ज य ध ा र ी ि संह क (ग) म ा हे \ र ी ि संहक (घ ) उ द य ना र ा य ण ि संहक (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(५ ४) ‘ ना यकक ना म ज ी व न ’क ना ट कक ा र छ ि थ (क) ल5 म ी प ि त ि स ंह (ख) इ ल ा र ा नी ि संह (ग) I बो ध न ा र ा य ण ि संह (घ ) उ द य ना र ा य ण ि संह (ङ) बे चन ठ ा कु र

(५ ५) ‘ त ा म स ’क म ै ि थल ी अनु वा द क छ ि थ (क) र ा म द े व झ ा (ख) र ा म लो च न ठ ा क ु र (ग) अम र े श प ा ठ क (घ ) खु शी ला ल झ ा (ङ) म ु fा ज ी (म नो ज कु म ा र कण )

(५ ६) र ी ि त व ा द क I व त क छ ि थ (क) C े म े " : (ख) कु " त क (ग) ि व \ न ा थ (घ ) वा म न (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(५ ७) ‘ य म क ’ कथी छ ी (क) अथ 6 लंक ा र (ख) शc द ा ल ंक ा र (ग) उ भय ा लंका र (घ ) उ < त को न ो अल ंक ा र न ै (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह

(५ ८) ‘ का ^ य म ा ध ु र ी ’क सe प ा द न के न े छ ि थ (क) म . म . ब लदे व ि म Z (ख) म या न " द ि म Z (ग) स ु भ: झ ा (घ ) रम ा ना थ झ ा (ङ) ऊप र म े सँ को न ो नि ह ि व ष यि न  (१ ) ‘ प ु m ष प र ी C ा ’ म े दा न वी रक कथा क ो न प ि रW छ े द म े उ ि ( ल ि ख त अ ि छ ? (२ ) ‘ म ो ह न भा रp ा ज ’क प Y ? प ि Y का प र I का ि शत प ो थ ी क न ा आ ं ◌े क ी अ ि छ ? (३ ) ‘ प ु m ष प र ी C ा ’ म े कएक ग ो ट प ि रW छ े द अि छ ? (४ ) ‘ न ो र’ क ले खक के छ ि थ? (५ ) म ै ि थली अ का द म ी क  थ ा प न ा क ि हय ा भ े ल? (६ ) ‘ न ो र’ को न ि व ध ा क प ो थ ी अ ि छ ? (७ ) अ" त न 6 द , कथा ? य ू ि थक ा , अंका व ली ऐ ती नू प ो थ ी क ि व ध ा आ र च न ा क ा रक क ी न ा आं◌े अि छ ? (८ ) ‘ रम ा कर ’ उ प न ा म ि कन क ि छ यि न ? (९ ) ‘ I वा स ज ी व न ’ ले खक के छ ि थ ? (१ ०) ‘ प ि हल सझ ’ प ो थी क ना टकक ा र के छ ि थ? (१ १) म ध ु Z ा व ण ी , प ु न ि व वा ह , क" या दा न तथ ा ि न द य ी सा सु प ो थ ी क र च ि य त ा त थ ा च ा z प ो थी क ि व ध ा त था सe भ व ह ो त ँ सब हक ना यक एवं ना ि यका क न ा आं ◌े से हो ब त ा एब ? (१ २) ‘ प ु m ष प र ी C ा ’क म ै ि थल ी अनु वा द के के न े छ ि थ ?

{म न ा म (उ प ना म ) 1 अनंत ि ब ह ा र ी द ा स इंद ु 2 आ `ा ना थ झ ा ि न र ंकु श 3 ईशन ा थ झ ा स रस कि व 4 उ द य ना र ा यण ि संह नि च के ता 5 उ द यच ं: झ ा ि व नो द 6 उ प े ": ठ ा कु र म ो ह न 7 उ प े ": न ा थ झ ा ^ य ा स 8 उ प े ": ल ा ल दा स दो ष ी 9 का … च ी न ा थ झ ा ि करण 1 0 कि प लदे व ठ ा कु र ने ह लत ा 1 1 कम ल ना र ा य ण झ ा कम ले श 1 2 का शी क h त ि म Z म ध ु प 1 3 कु ल ा न "द झ ा कु ले श 1 4 C े म ध ा र ी ि संह Z ी कर 1 5 ग ंगा ध र झ ा ज ी ब ू 1 6 ग ो प ा लज ी झ ा गो प े श 1 7 ग ौ र ी क ा " त च ौ ध र ी कh त 1 8 ग ौ र ी शं कर सो म द े व 1 9 च" : ना थ ि म Z अम र 2 0 छ े दी झ ा ि p ज व र 2 1 ज गद ी प ना र ा यण दी प क 2 2 ज ट े \ र झ ा ज ि टल 2 3 ज ना द न झ ा ज न स ी द न 2 4 ज य ना र ा यण झ ा ि व न ी त 2 5 ज यध ा र ी ि संह I भ ा कर 2 6 ज यI का श ला ल म हा I का श 2 7 ता र ा नंद म ह त ो ि व य ो ग ी 2 8 ि द ने \ र ल ा ल आ नंद 2 9 दी ना न ा थ प ा ठ क ब ंध ु 3 0 दु ग6 न ा थ झ ा Z ी श 3 1 ध ी र े \ र झ ा ध ी र े ": 3 2 ध ी र े ": ना र ा यण झ ा ध ी र 3 3 प रम ा नंद द A प रम ा थ‡ 3 4 I फु (ल कु म ा र ि संह म ौ न 3 5 I भु न ा र ा य ण झ ा म ै ि थल ी प ु Y I दी प 3 6 फ़ज लु र हम ा न ह ा शम ी 3 7 बा लग ो ि व ंद झ ा ^ य ि थ त 3 8 बु ि j ध ा र ी ि स ंह रम ा कर

3 9 वै ` न ा थ म ि (लक ि व ध ु 4 0 वै ` न ा थ ि म Z या Y ी 4 1 i ज ि कश ो र व म 6 म ि ण प ] 4 2 भु व ने \ र प ा थे य 4 3 भु व ने \ र ि संह भु व न 4 4 म ंY न ा थ झ ा हंस र ा ज 4 5 म थ ु र ा न "द च ौ ध र ी म ा थु र 4 6 म ण ी " : न ा र ा यण च ौ ध र ी I ि सj फू ल ब ा बू I ि स j र ा ज कम ल च ौ ध र ी 4 7 म हा व ी र झ ा वी र 4 8 म ह‰ : झ ा म लंि ग या 4 9 म ा क sड े य झ ा I वा स ी 5 0 य दु ना थ झ ा य दु व र 5 1 र म ा न ंद र े णु 5 2 र म ा न ा थ ि म Z ि म ि ह र 5 3 र ि व कh त झ ा नी रज 5 4 र ा ज े ": झ ा व तंY 5 5 र ा ध ा कृ >ण झ ा ब ह े ड़ 5 6 र ा म कृ प ा ल च ौ ध र ी र ा के श 5 7 र ा म ि कश ो र झ ा ि व भा कर 5 8 र ा म कृ >ण झ ा ि क सू न 5 9 र ा म च ि र Y प h ड े अणु 6 0 र ा म भर ो स का प ि ड़ D म र 6 1 zप न ा र ा य ण झ ा र ा के श 6 2 ल5 म ण च ौ ध र ी लि ल त 6 3 लि लते श ि म Z लि ल त 6 4 ि व ज य ना र ा य ण ि म Z I वा सी सा ि ह J य ा लंक ा र 6 5 ि व ` ा न ा थ झ ा ि व ि द त 6 6 ि व \ ना थ झ ा ि व ष प ा य ी 6 7 ि श व श ंकर झ ा का " त 6 8 सी ता ना थ झ ा अि न ल 6 9 सु ध h शु शे खर च ौ ध र ी शे खर 7 0 सु र े ": झ ा सु म न 7 1 सु र े ": ि संह न े ही 7 2 सू य कh त ि व म ल 7 3 हि रन ंद न ठ ा कु र स र ो ज 7 4 हि र q ं: झ ा हर ी श

िवदेह स᭥मान िवदेह समाना᭠तर सािह᭜य अकादेमी स᭥मान १.िवदेह समाना᭠तर सािह᭜य अकादेमी फ े लो पुर᭭कार २०१० -११ २०१० ᮰ी गोिव᭠द झा (समᮕ योगदान लेल) २०११ ᮰ी रमान᭠द रेणु (समᮕ योगदान लेल) २.िवदेह समाना᭠तर सािह᭜य अकादेमी पुर᭭कार २०११ -१२ २०११ मूल पुर᭭कार- ᮰ी जगदीश ᮧसाद म᭛डल ( गामक िजनग ◌ी, कथा संᮕह) २०११ बाल सािह᭜य पुर᭭कार- ले.क. मायानाथ झा (जकर नारी चतुर होइ, कथा संᮕह) २०११ युवा पुर᭭कार- आन᭠द क ु मार झा (कलह , नाटक) २०१२ अनुवाद पुर᭭कार- ᮰ी रामलोचन ठाक ु र- (प᳑ ानदीक माझ ◌ी, बां᭏ला- मािनक बं᳒ोपा᭟याय, उप᭠यास बां᭏लासँ मैिथली अनुवाद) िवदेह भाषा स᭥मान २०१२ -१३ (वैकि᭨पक सािह᭜य अकादेमी पुर᭭कारक ᱨ पमे ᮧ िस᳍ ) 1. िवदेह समाना᭠तर सािह᭜य अकादेमी फ े लो पुर᭭कार 2012 2012 ᮰ी राजन᭠दन लाल दास (समᮕ योगदान लेल) 2. िवदेह भाषा स᭥मान २०१२ -१३ (वैकि᭨पक सािह᭜य अकादेमी पुर᭭कारक ᱨ पमे ᮧ िस᳍ ) २०१२ बाल सािह᭜य पुर᭭कार - ᮰ी जगदीश ᮧसाद म᭛डल क े ँ “तरेगन ” बाल ᮧेरक िवहिन कथा संᮕह २०१२ मूल पुर᭭कार - ᮰ी राजदेव म᭛डलक े ँ "अ᭥बरा " (किवता संᮕह) लेल।

2012 युवा पुर᭭कार- ᮰ीमती ᭔योित सुनीत चौधरीक “ अᳶचस ” (किवता संᮕह) 2013 अनुवाद पुर᭭कार- ᮰ी नरेश क ुमार िवकल "ययाित" (मराठ ी उप᭠यास ᮰ी िव᭬णु सखाराम खा᭛डेकर) िवदेह भाषा स᭥मान २०१३ -१४ (वैकि᭨पक सािह᭜य अकादेमी पुर᭭कारक ᱨ पमे ᮧ िस᳍ ) २०१३ बाल सािह᭜य पुर᭭कार – ᮰ीमती ᭔योित सुनीत चौधरी- “ देवीजी ” (बाल िनब᭠ध संᮕह) लेल। २०१३ मूल पुर᭭कार - ᮰ी बेचन ठाक ु रक ेँ "बेटीक अपमान आ छीनरदेव ◌ी" (नाटक संᮕह) लेल। २०१३ युवा पुर᭭कार- ᮰ी उमेश म᭛डलक े ँ “िन᭫तुकᳱ ” (किवता संᮕह)लेल। २०१४ अनुवाद पुर᭭कार- ᮰ी िवनीत उ᭜पलक ेँ “मोहनदास ” (िह᭠दी उप᭠यास ᮰ी उदय ᮧकाश)क मैिथली अनुवाद लेल। िवदेह भाषा स᭥मान २०१४ -२०१५ (समाना᭠तर सािह᭜य अकादेमी स᭥मान ) २०१४ मूल पुर᭭कार- ᮰ी न᭠द िवलास राय ( सखारी पेटार ◌ी- लघु कथा संᮕह) २०१४ बाल पुर᭭कार- ᮰ी जगदीश ᮧसाद म᭛डल ( नै धारैए - बाल उप᭠यास) २०१४ युवा पुर᭭कार - ᮰ी आशीष अनिच᭠हार ( अनिच᭠हार आखर - गजल संᮕह) २०१५ अनुवाद पुर᭭कार - ᮰ी श᭥भु क ु मार ᳲसह ( पाखलो - तुकाराम रामा शेटक कᲂकणी उप᭠यासक मैिथली अनुवाद) नाटक , गीत , संगीत , नृ᭜य , मूᳶतकला , िश᭨प आ िचᮢ कला ᭃ ेᮢ मे िवदेह स᭥मान २०१२ अिभ नय - मु᭎ य अिभनय ,

सु᮰ी िश ᭨ पी क ु मारी, उ᮫- 17 िप ता ᮰ी ल᭯ मण झा ᮰ी शोभा का᭠ त महतो, उ᮫- 15 िप ता- ᮰ी रामअवतार महतो, हा᭭ य -अिभनय सु᮰ी िᮧ यंका क ु मारी, उ᮫- 16, िप ता- ᮰ी वै᳒नाथ साह ᮰ी दुगाᭅनंद ठाक ु र, उ᮫- 23, िप ता- ᭭ व. भरत ठाक ु र नृ᭜ य सु᮰ी सुलेखा क ु मारी, उ᮫- 16, िप ता- ᮰ी हरेराम यादव ᮰ी अमीत रंजन, उ᮫- 18, िप ता- नागे᳡र कामत िच ᮢ कला ᮰ी पनकलाल म᭛डल, उमेर- ३५, िपता- ᭭व. सु᭠दर म᭛डल, गाम छजना ᮰ी रमेश क ु मार भारती, उ᮫- 23, िप ता- ᮰ी मोती म᭛ डल संगीत (हारमोिनयम ) ᮰ी परमान᭠ द ठाक ु र, उ᮫- 30, िप ता- ᮰ी नथुनी ठाक ु र संगीत (ढोलक ) ᮰ी बुलन राउत, उ᮫- 45, िप ता- ᭭ व. िच ᭨ टू राउत संगीत (रसनचौकᳱ ) ᮰ी बहादुर राम, उ᮫- 55, िप ता- ᭭ व. सरजुग राम

िश᭨पी -व᭭तुकला ᮰ी जगदीश मि᭨लक,५० गाम- चनौरागंज मूᳶत -मृिᱫ का कला ᮰ी यदुनंदन पंिड त, उ᮫- 45, िप ता- अशफ᳹ पंिड त का᳧ -कला ᮰ी झमेली मुिखया,िपता ᭭व. मूंगालाल मुिखया, ५५, गाम- छजन ा ᳰकसानी -आ᭜मिनभᭅर सं᭭क ृ ित ᮰ी लछमी दास, उमेर- ५०, िपता ᭭व. ᮰ी फणी दास, गाम वेरमा िवदेह मैिथली पᮢ काᳯरता स᭥मान -२०१२ ᮰ी नवे᭠दु क ु मार झा नाटक , गीत , संगीत , नृ᭜य , मूᳶतकला , िश᭨प आ िचᮢ कला ᭃ ेᮢ मे िवदेह स᭥मान २०१३ मु᭎ य अिभनय - (1) सु᮰ ी आशा क ु मारी सुपुᮢ ी ᮰ ी रामावतार यादव , उमेर - १८ , पता- गाम+पो᭭ ट- चनौरागंज, भाया- तमुᳯर या, िज ला- मधुबनी (िब हार) (2) मो . समसाद आलम सुपुᮢ मो . ईषा आलम , पता- गाम+पो᭭ ट- चनौरागंज, भाया- तमुᳯर या, िज ला- मधुबनी (िब हार)

(3) सु᮰ ी अपणाᭅ क ु मारी सुपुᮢी ᮰ी मनोज क ु मार साᱟ, ज᭠ म ित िथ - १८-२-१९९८, पता- गाम- लि᭯ म िन याँ, पो᭭ ट- छजना, भाया- नरिह या, थाना- लौकही, िज ला- मधुबनी (िब हार) हा᭭ य –अिभनय - (1) ᮰ ी ᮩ ᳬ दवे पासवान उफ ᭅ रामजानी पासवान सुपुᮢ- ᭭ व. ल᭯ मी पासवान, पता- गाम+पो᭭ ट- औरहा, भाया- नरिह या, थाना- लौकही, िज ला- मधुबनी (िब हार) (2) टा◌ॅिस फ आलम सुपुᮢ मो . मु᭭ ता क आलम , पता- गाम+पो᭭ ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, िज ला- मधुबनी (िब हार) नाटक , गीत , संगीत , नृ᭜य , मूᳶतकला , िश᭨प आ िचᮢ कला ᭃ ेᮢ मे िवदेह स᭥मान (मांगिन खबास समᮕ योगदान स᭥मान ) शा᭭ ᮢ ी य संगीत सह तानपुरा : ᮰ ी रामवृᭃ िस ◌ ंह सुपुᮢ ᮰ ी अिन ᱨ ᳍ िस ◌ ंह, उमेर- ५६, गाम- फ ु लवᳯर या, पो᭭ ट- बाबूबरही, िज ला- मधुबनी (िब हार) मांगिन खबास स᭥ मा न: िमिथला लोक सं᭭क ृ ित संरᭃ ण : ᮰ ी राम लखन साᱟ पे. ᭭ व. खुशीलाल साᱟ, उमेर- ६५, पता, गाम- पकिड़ या, पो᭭ ट- रतनसारा, अनुमंडल- फ ु लपरास (मधुबनी) नाटक , गीत , संगीत , नृ᭜य , मूᳶतकला , िश᭨प आ िचᮢ कला ᭃ ेᮢ मे िवदेह स᭥मान (समᮕ योगदान स᭥मान ):

नृ᭜ य - (1) ᮰ ी हᳯर नारायण म᭛ ड ल सुपुᮢ- ᭭ व. न᭠ दी म᭛ डल, उमेर- ५८, पता- गाम+पो᭭ ट- छजना, भाया- नरिह या, िज ला- मधुबनी (िब हार) (2) सु᮰ ी संगीता क ुमारी सुपुᮢ ी ᮰ ी रामदेव पासवान , उमेर - १६ , पता- गाम+पो᭭ ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, िज ला- मधुबनी (िब हार) िच ᮢ कला - (1) जय ᮧ काश म᭛ ड ल सुपुᮢ- ᮰ी क ु शे᳡र म᭛ डल, उमेर- ३५, पता- गाम- सनपतहा, प ो᭭ ट– बौरहा, भाया- सरायगढ़, िज ला- सुपौल (िब हार) (2) ᮰ ी च᭠ द न क ु मार म᭛ ड ल सुपुᮢ ᮰ी भोला म᭛ डल, पता- गाम- खड़गपुर, पो᭭ ट- बेलही, भाया- नरिह या, थाना- लौकही, िज ला- मधुबनी (िब हार) संᮧित , छाᮢ ᭭ नातक अंित म वषᭅ, कला एवं िश ᭨ प महािव ᳒ालय- पटना। हᳯर मुिन याँ / हारमोिनयम (1) ᮰ ी महादेव साह सुपुᮢ रामदेव साह , उमेर - ५८ , गाम- बेलहा, वाडᭅ- नं. ०९, पो᭭ ट- छजना, भाया- नरिह या, िज ला- मधुबनी (िब हार)

(2) ᮰ ी जागे᳡ र ᮧ साद राउत सुपुᮢ ᭭ व. राम᭭ वᱨप राउत, उमेर ६ ०, पता- गाम+पो᭭ ट- बेरमा, भाया- तमुᳯर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) ढोलक / ठेक ै ता / ढोलᳰक या (1) ᮰ ी अनुप सदाय सुपुᮢ ᭭ व. , पता- गाम- तुलिस याही, पो᭭ ट- मनोहर पᲵी, थाना- मरौना, िज ला- सुपौल (िब हार) (2) ᮰ ी क᭨ ल र राम सुपुᮢ ᭭ व. खᲵर राम, उमेर- ५०, गाम- लि᭯ म िन याँ, पो᭭ ट- छजना, भाया- नरिह या, थाना- लौकही, िज ला- मधुबनी (िब हार) रसनचौकᳱ वादक - (1) वासुदेव राम सुपुᮢ ᭭ व. अनुप राम, गाम+पो᭭ ट- ि◌ नमᭅली, वाडᭅ न. ०७ , िज ला- सुपौल (िब हार) िश᭨पी -व᭭तुकला - (1) ᮰ ी बौ क ू मि᭨ ल क सुपुᮢ दरबारी मि᭨ ल क, उमेर- ७०, गाम- लि᭯ म िन याँ, पो᭭ ट- छजना, भाया- नरिह या, िज ला- मधुबनी (िब हार) (2) ᮰ ी राम िव लास धᳯर कार सुपुᮢ ᭭ व. ठोढ़ाइ धᳯर कार, उमेर- ४०, पता- गाम+पो᭭ ट- चनौरागंज, भाया- तमुᳯर या, िज ला- मधुबनी (िब हार) मूᳶतकला -मृᳶतकार कला -

(1) घूरन पंिड त सुपुᮢ - ᮰ी मोलᱠ पंिड त, पता- गाम+पो᭭ ट– बेरमा, भाया- तमुᳯर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी (िब हार) (2) ᮰ ी ᮧ भु पंिड त सुपुᮢ ᭭ व . , पता- गाम+पो᭭ ट- नरिह या, थाना- लौकही, िज ला- मधुबनी (िब हार) का᳧ -कला - (1) ᮰ ी जगदेव साᱟ सुपुᮢ शनीचर साᱟ, उमेर- ३६, गाम- ि◌ नमᭅली-पुरवाᭅस, िज ला- सुपौल (िब हार) (2) ᮰ ी योगे᭠ ᮤ ठाक ु र सुपुᮢ ᭭ व . बु᭞ धू ठाक ु र उमेर - ४५ , पता- गाम+पो᭭ ट- बेरमा, भाया- तमुᳯर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) ᳰकसानी - आ᭜मिनभᭅर सं᭭क ृ ित - (1) ᮰ ी राम अवतार राउत सुपुᮢ ᭭ व. सुबध राउत, उमेर- ६६, पता- गाम+पो᭭ ट- बेरमा, भाया- तमुᳯर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) (2) ᮰ ी रौशन यादव सुपुᮢ ᭭ व. किप ले᳡र यादव, उमेर- ३५, गाम+पो᭭ ट– बनगामा, भाया- नरिह या, थाना- लौकही, िज ला- मधुबनी (िब हार ) अ᭨हा /महराइ - (1) मो . जीबछ सुपुᮢ मो. िब लट मरᱠम, उमेर- ६५, पता- गाम- बसहा, पो᭭ ट- बड़हारा, भाया- अ᭠ धराठाढ़ी, िज ला- मधुबनी, िप न- ८४७४०१

जोिग रा - ᮰ ी ब᭒ च न म᭛ ड ल सुपुᮢ ᭭ व. सीताराम म᭛ डल, उमेर- ६०, पता- गाम+पो᭭ ट- बेरमा, भाया- तमुᳯर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) ᮰ ी रामदेव ठाक ु र सुपुᮢ ᭭ व . जागे᳡ र ठाक ु र , उमेर - ५० , पता- गाम+पो᭭ ट- बेरमा, भाया- तमुᳯर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) पराती (ᮧ भाती ) गौिन हार आ खजरी / खौजरी वादक - (1) ᮰ी सुकदेव साफᳱ सुपुᮢ ᮰ी , पता- गाम इटहरी, पो᭭ ट- बेलही, भाया- ि◌ नमᭅली, थाना- मरौना, िज ला- सुपौल (िब हार) पराती (ᮧ भाती ) गौिन हार - (अगहनसँ माघ-फागुन तक गाओल जाइत) (1) सुकदेव साफᳱ सुपुᮢ ᭭ व. बाबूनाथ साफᳱ, उमेर- ७५, पता- गाम इटहरी, पो᭭ ट- बेलही, भाया- ि◌ नमᭅली, थाना- मरौना, िज ला- सुपौल (िब हार) (2) ले᭨ᱟ दास सुपुᮢ ᭭ व. सनक म᭛ डल पता- गाम+पो᭭ ट- बेरमा, भाया- तमुᳯर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) झरनी -

(1) मो . गुल हसन सुपुᮢ अ᭣ दुल रसीद मरᱠम, पता- गाम+पो᭭ ट- बेरमा, भाया- तमुᳯर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) (2) मो . रहमान साहब सुपुᮢ...., उमेर- ५८, गाम- नरिह या, भाया- फ ु लपरास, िज ला- मधुबनी (िब हार) नाल वादक - (1) ᮰ ी जगत नारायण म᭛ ड ल सुपुᮢ ᭭ व. खुशीलाल म᭛ डल, उमेर- ४०, गाम+पो᭭ ट- ककरडोभ, भाया- नरिह या, थाना- लौकही, िज ला- मधुबनी (िब हार) (2) ᮰ ी देव नारायण यादव सुपुᮢ ᮰ी क ु शुमलाल यादव, पता- गाम- बनरझुला, पो᭭ ट- अमही, थाना- घोघड़डीहा, िज ला- मधुबनी (िब हार) गीतहाᳯर / लोक गीत - (1) ᮰ ीमती फ ु दनी देवी प᳀ी ᮰ी रामफल म᭛ डल, पता- गाम+पो᭭ ट- बेरमा, भाया- तमुᳯ र या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) (2) सु᮰ ी सुिव ता क ु मारी सुपुᮢी ᮰ी गंगाराम म᭛ डल, उमेर- १८, पता- गाम- मछधी, पो᭭ ट- बिल याᳯर , भाया- झंझारपुर, िज ला- मधुबनी (िब हार) खुरदक वादक -

(1) ᮰ ी सीताराम राम सुपुᮢ ᭭ व. जंगल राम, उमेर- ६२, पता- गाम- लि᭯ म िन याँ, पो᭭ ट- छजना, भाया- नरिह या, थाना- लौकही, िज ला- मधुबनी (िब हार) (2) ᮰ ी ल᭯ मी राम सुपुᮢ ᭭ व. पंचू मोची, उमेर- ७०, पता- गाम+पो᭭ ट- बेरमा, भाया- तमुᳯर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) काँरनेट - (1) ᮰ ी च᭠ द र राम सुपुᮢ- ᭭ व. जीतन राम, उमेर- ५०, पता- गाम- लि᭯ म िन याँ, पो᭭ ट- छजना, भाया- नरिह या, थाना- लौकही, िज ला- मधुबनी (िब हार) (2) मो . सुभान , उमेर- ५०, पता- गाम+पो᭭ ट- चनौरागंज, भाया- तमुᳯर या, िज ला- मधुबनी (िब हार) बे᭠ जू वादक - (1) ᮰ ी राज क ु मार महतो सुपुᮢ ᭭ व. ल᭯ मी महतो, उमेर- ४५, गाम- ि◌ नमᭅली वाडᭅ नं. ०४, िज ला- सुपौल (िब हार) (2) ᮰ ी घुरन राम , उमेर- ४३, गाम+पो᭭ ट- बनगामा, भाया- नरिह या, िज ला- मधुबनी (िब हार) भगैत गवैया - (1) ᮰ ी जीबछ यादव सुपुᮢ ᭭ व. ᱨपालाल यादव, उमेर- ८०, पता- गाम इटहरी, पो ᭭ ट- बेलही, भाया- ि◌ नमᭅली, थाना- मरौना, िज ला- सुपौल (िब हार)

(2) ᮰ ी श᭥ भु म᭛ ड ल सुपुᮢ ᭭ व. लखन म᭛ डल, पता- गाम- बᳰढ याघाट-रसुआर, पो᭭ ट– मुंगराहा, भाया- ि◌ नमᭅली, ि◌ जला- सुपौल (िब हार) िख ᭭ स कर - (िख ᭭ सा कहैबला )- (1) ᮰ ी छुतहᱨ यादव उफ ᭅ राजक ु मार , सुपुᮢ ᮰ी राम खेलावन यादव, गाम- घोघरिड हा, पो᭭ ट- मनोहर पᲵी, थाना- मरौना, िज ला- सुपौल, िप न- ८४७४५२ (2) बैजनाथ मुिख या उफ ᭅ टहल मुिख या - (2) सुपुᮢ ᭭ व. ढᲂगाइ मुिख या, पता- गाम+पो᭭ ट- औरहा, भाया- नरिह या, थाना- लौकही, िज ला- मधुबनी (िब हार) िमिथला िचᮢ कला - (1) सु᮰ ी िम िथ लेश क ु मारी सुपुᮢी ᮰ी रामदेव ᮧसाद म᭛ डल ‘झाᱨदार’ पता- गाम- रसुआर, पो᭭ ट-– मुंगराहा, भाया- ि◌ नमᭅली, ि◌ जला- सुपौल (िब हार) (2) ᮰ ीमती वीणा देवी प᳀ ी ᮰ ी ᳰद िल प झा , उमेर - ३५ , पता- गाम+पो᭭ ट- बेरमा, भाया- तमुᳯर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) खजरी / खौजरी वादक - (2) ᮰ ी ᳰक शोरी दास सुपुᮢ ᭭ व. नेबैत म᭛ डल, पता- गाम- रसुआर, पो᭭ ट-– मुंगराहा, भाया- ि◌ नमᭅली, ि◌ जला- सुपौल (िब हार)

तबला - ᮰ ी उपे᭠ ᮤ चौधरी सुपुᮢ ᭭ व. महावीर दास, उमेर- ५५, पता- गाम+पो᭭ ट- बेरमा, भाया- तमुᳯर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) ᮰ ी देवनाथ यादव सुपुᮢ ᭭ व. सवᭅजीत यादव, उमेर- ५०, गाम- झाँझपᲵी, पो᭭ ट- पीपराही, भाया- लदिन याँ, िज ला- मधुबनी (िब हार) सारंगी - (घुना -मुना ) (1) ᮰ी पंची ठाक ु र, गाम- िप पराही। झािल - (झिल बाह ) (1) ᮰ ी क ु ᭠ द न क ु मार कणᭅ सुपुᮢ ᮰ी इ᭠ ᮤ क ु मार कणᭅ पता- गाम- रेबाड़ी, पो᭭ ट- चौरामहरैल, थाना- झंझारपुर, िज ला- मधुबनी, िप न- ८४७४०४ (2) ᮰ ी राम खेलावन राउत सुपुᮢ ᭭ व. क ै लू राउत, उमेर- ६०, पता- गाम+पो᭭ ट- बेरमा, भाया- तमुᳯर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) बौसरी (बौसरी वादक ) ᮰ ी रामच᭠ ᮤ ᮧ साद म᭛ ड ल सुपुᮢ ᮰ी झोटन म᭛ डल, उमेर- ३०, बौसरी/बौसली/बासुरी बजबै छिथ । पता- गाम- रसुआर, पो᭭ ट- मुंगराहा, भाया- ि◌ नमᭅली, ि◌ जला- सुपौल (िब हार)

᮰ ी िव भूित झा सुपुᮢ ᭭ व. कनटीर झा, उमेर- ५०, पता- गाम+पो᭭ ट- कछ ु बी, भाया- तमुᳯर या, िज ला- मधुबनी (िब हार) लोक गाथा गायक ᮰ ी रिव ᭠ ᮤ यादव सुपुᮢ सीताराम यादव, पता- गाम- तुलिस याही, पो᭭ ट- मनोहर पᲵी, थाना- मरौना, िज ला- सुपौल (िब हार) ᮰ ी िप चक ु न सदाय सुपुᮢ ᭭ व. मेथर सदाय, उमेर- ५०, पता- गाम+पो᭭ ट- बेरमा, भाया- तमुᳯर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) मिज रा वादक (छोकटा झािल ...) ᮰ ी रामपित म᭛ ड ल सुपुᮢ ᭭ व. अजुᭅन म᭛ डल, पता- गाम- रसुआर, पो᭭ ट- मुंगराहा, भाया- ि◌ नमᭅली, ि◌ जला- सुपौल (िब हार) मृदंग वादक - (1) ᮰ ी किप ले᳡ र दास सुपुᮢ ᭭ व . सु᳖ र दास , उमेर- ७०, गाम- लि᭯ म िन याँ, पो᭭ ट- छजना, भाया- नरिह या, थाना- लौकही, िज ला- मधुबनी (िब हार) (2) ᮰ ी खखर सदाय सुपुᮢ ᭭ व. बंठा सदाय, उमेर- ६०, पता- गाम+पो᭭ ट- बेरमा, भाया- तमुᳯर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) तानपुरा सह भाव संगीत

(1) ᮰ ी रामिव लास यादव सुपुᮢ ᭭ व. दुखरन यादव, उमेर- ४८, गाम- िस मरा, पो᭭ ट- सांिग , भाया- घोघड़डीहा, थाना- फ ु लपरास, िज ला- मधुबनी (िब हार) तरसा / तासा - ᮰ ी जोगे᭠ ᮤ राम सुपुᮢ ᭭ व. िब ᭨ टू राम, उमेर- ५०, पता- गाम+पो᭭ ट- बेरमा, भाया- तमुᳯर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) ᮰ ी राजे᭠ ᮤ राम सुपुᮢ काले᳡र राम, उमेर- ५८, गाम- मझौरा, पा᭭ ट- छजना, भ ाया- नरिह या, िज ला- मधुबनी (िब हार) रमझािल / कठझािल / करताल वादक - ᮰ ी सैनी राम सुपुᮢ ᭭ व. लिल त राम, उमेर- ५०, पता- गाम+पो᭭ ट- बेरमा, भाया- तमुᳯर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) ᮰ ी जनक म᭛ ड ल सुपुᮢ ᭭ व. उिच त म᭛ डल, उमेर- ६०, रमझािल / कठझािल / करताल वादक, १९७५ ई.सँ रमझािल बजबै छिथ । पता- गाम- बᳰढ याघाट/रसुआर, पो᭭ ट- मुंगराहा, भाया- ि◌ नमᭅली, िज ला- सुपौल (िब हार) गुमगुिम याँ/ ᮕ ुम बाजा ᮰ ी परमे᳡ र म᭛ ड ल सुपुᮢ ᭭ व. िब हारी म᭛ डल उमेर- ४१, १९८० ई.सँ गुमगुि◌ मयाँ बजबै छिथ ।

᮰ ी जुगाय साफᳱ सुपुᮢ ᭭ व. ᮰ी ᮰ीच᭠ ᮤ साफᳱ, उमेर- ७५, पता- गाम+पो᭭ ट- बेरमा, भाया- तमुᳯर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) डंका / ढोल वादक ᮰ ी बदरी राम , उमेर- ५५, पता- गाम इटहरी, पो᭭ ट- बेलही, भाया- ि◌ नमᭅली, थाना- मरौना, िज ला- सुपौल (िब हार) ᮰ ी योगे᭠ ᮤ राम सुपुᮢ ᭭ व. िब ᭨ टू राम, उमेर- ५५, पता- गाम+पो᭭ ट- बेरमा, भाया- तमुᳯर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) डंफा (होलीमे बजाओल जाइत...) ᮰ ी जᮕ ना थ चौधरी उफ ᭅ िध यानी दास सुपुᮢ ᭭ व. महावीर दास, उमेर- ६५, पता- गाम+पो᭭ ट- बेरमा, भाया- तमुᳯर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार) ᮰ ी महे᭠ ᮤ पो᳎ ार , उमेर- ६५, पता- गाम+पो᭭ ट- चनौरागंज, भाया- तमुᳯर या, िज ला- मधुबनी (िब हार) नङेरा / िड गरी - ᮰ ी राम ᮧ साद राम सुपुᮢ ᭭ व . सरयुग मोची , उमेर - ५२ , पता- गाम+पो᭭ ट- बेरमा, भाया- तमुᳯर या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. िश िव र), िज ला- मधुबनी िप न- ८४७४१० (िब हार)

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