VIDEHA — Issue 309 / अंक ३०९

Publication: VIDEHA · Issue: 309
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विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' ३०९ म अंक ०१ नवम्बर २०२० (वर्ष १३ मास १५५ अंक ३०९) ऐ अंकमे अछि:- १. गजेन्द्र ठाकुर- संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] २. गद्य २.१.योगेन्द्र पाठक वियोगी- नरक विजय (धारावाहिक बाल नाटक- दोसर खेप) २.२. रबीन्द्र नारायण मिश्र- धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर (९म खेप) २.३.जगदीश प्रसाद मण्डल- आमक गाछी- धारावाहिक उपन्यास (दोसर खेप) २.४.नन्द विलास राय- बीहनि कथा- एमेली साहैब २.५.जगदीशप्रसाद मण्डल- हुसैत लोक २.६.अमरेश कुमार लाभ- २ टा बीहनि कथा २.७.कुसुम ठाकुर-अलग राज्यक माँग कतेक सार्थक? २.८.डॉ. विनीत उत्पल-लघु कथा- नागा फकीर २.९.गजेन्द्र ठाकुर- मिथिलाक इतिहास भाग-२ २.१०.डॉ आभा झा-बौक २.११.कीर्तिनाथ झा-लघुकथा-नपुंसक २.१२.दीपा झा- धिया- पूता आ डिजिटल कैदखाना २.१३.उमेश मण्डल-लोक-नाट्य-वाद्य मण्डली- संकलन २.१४.प्रियंवदा तारा झा- वापसी २.१५.आशीष अनचिन्हार -सपना आ भ्रम २.१६.आनन्द कुमार झा-मैथिलीक वर्तमान रंगमंच , धर्मिता आ स्वतन्त्रता २.१७. मुन्नाजी- बीहनि कथा-- मानकीकरण ओ तुलनात्मक पक्ष २.१८.नारी शब्दक विवेचना- डॉ. अपर्णा २.१९.लालदासक ‘कौशल्या’-डॉ. अपर्णा २.२०.रमेश्वर चरित मिथिला रामायणमे पुष्कर काण्डक विशेषता-डॉ. अपर्णा २.२१.लालदासक रामायणमे विधि-व्यवहारक वर्णन- डॉ अपर्णा ३. पद्य ३.१.आशीष अनचिन्हार- २ टा गजल ३.२. ज्ञानवर्द्धन कण्ठ- ३ टा कविता ३.३.डॉ आभा झा-चेतना ३.४.नबोनारायण मिश्र- नवगीत गद्य पद्य भारती अनुक्रम गद्य अनुवाद विभिन्न भारतीय भाषाक गद्यसँ अंग्रेजीमे अनूदित साहित्यक गजेन्द्र ठाकुर द्वारा मैथिलीमे अनुवाद विभिन्न भारतीय भाषाक गद्यसँ अंग्रेजीमे अनूदित साहित्यक गजेन्द्र ठाकुर द्वारा मैथिलीमे अनुवाद विभिन्न भारतीय भाषाक गद्यसँ अंग्रेजीमे अनूदित साहित्यक अनुवादक लोकनि: • जयलक्ष्मी पोपुरी [तेलुगु] • के. पुरुषोत्तम [तेलुगु] • रामा राव वी वी बी [तेलुगु] • गोपा नायक [उड़िया] • हेमांग देसाई [गुजराती] • कमलाकर भट [कन्नड़] गद्य अनुक्रम १. सदा लेल मित्र: मूल तेलुगु उपन्यास : पेद्दिंति अशोक कुमार; तेलुगुसँ अंग्रेजी अनुवाद: पी. जयलक्ष्मी; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर २. २ टा दलित लघु कथा: [कोलकलुरी इनोच लिखित “कौआ” (तेलुगुमे काकी) आ विनोदिनी लिखित “कारी मसि” (ब्लैक इंक)]; मूल तेलुगुसँ अंग्रेजी अनुवाद: के. पुरुषोत्तम; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर। ३. आदिवि बापिराजूक मूल तेलुगु 'ध्वस्त मन्दिर' सँ अंग्रेजी अनुवाद जयलक्ष्मी पोपुरी द्वारा; अंग्रेजीसँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर। ४. वेंकट सुब्बैया वी.क मूल तेलुगु 'अनुवादक कला' (अंश) क अंग्रेजी अनुवाद जयलक्ष्मी पोपुरी द्वारा; अंग्रेजीसँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर। ५. करुणा टी.क मूल तेलुगु 'क्रूरता' क अंग्रेजी अनुवाद जयलक्ष्मी पोपुरी द्वारा; अंग्रेजीसँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर। ६. एन. गोपीक मूल तेलुगु 'नानीलु, द लिटिल वन्स' क अंग्रेजी अनुवाद जयलक्ष्मी पोपुरी द्वारा; अंग्रेजीसँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर। ७. खदीर बाबूक मूल तेलुगु “हमर चित्रकला गुरु” क अंग्रेजी अनुवाद: जयलक्ष्मी पोपुरी; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर। ८. वेम्पल्ले शरीफक मूल तेलुगु “जुम्मा” क अंग्रेजी अनुवाद: जयलक्ष्मी पोपुरी; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर। ९. रामा राव वी वी बीक मूल तेलुगु “अभिशप्त” क अंग्रेजी अनुवाद: लेखक द्वारा स्वयं; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर। १०. उड़ियामे सरोजिनी साहूक मूल कहानी "दुःख अप्रमिता"; अंग्रेजीमे गोपा नायक द्वारा अनूदित; अंग्रेजीसँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर। ११. सुन्दरमक २ टा गुजराती कथा: • “माताक कोरामे” मूल गुजराती: “सुन्दरम”; गुजरातीसँ अंग्रेजी: हेमांग देसाई आ अंग्रेजीसँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर। • सुन्दरमक मूल गुजराती कथा “माजा वेलोक निधन” अंग्रेजीमे हेमांग देसाई द्वारा अनूदित; अंग्रेजीसँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर। १२. दलपत चौहानक मूल गुजराती 'डर'; हेमांग देसाई द्वारा अंग्रेजीमे अनूदित; अंग्रेजीसँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर। १३. नजीर मंसूरीक दू टा गुजराती कथा: “समुद्री बाज” आ “हंगामा”; मूल गुजरातीसँ अंग्रेजी: हेमांग देसाई आ अंग्रेजीसँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर। १४. अशोक हेगड़ेक मूल कन्नड “अन्हार” क अंग्रेजी अनुवाद: कमलाकर भट्ट; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर। पद्य अनुवाद विभिन्न भारतीय भाषाक पद्यसँ अंग्रेजीमे अनूदित साहित्यक गजेन्द्र ठाकुर द्वारा मैथिलीमे अनुवाद विभिन्न भारतीय भाषाक पद्यसँ अंग्रेजीमे अनूदित साहित्यक अनुवादक लोकनि: पुरुषोत्तम के. [तेलुगु] रामा राव वी वी बी [तेलुगु] जयलक्ष्मी पोपुरी [तेलुगु] हेमांग देसाई [गुजराती] माला मारवाह [गुजराती] सैलेन राउत्रे [उड़िया] इप्सिता सारंगी [उड़िया] हरिकृष्ण दास [उड़िया] गजेन्द्र ठाकुर [भोजपुरी] एस.एल.सन्धु [कश्मीरी] पद्य अनुक्रम १ बोयी भीमन्नाक मूल तेलुगु कविता [मूल तेलुगु कविता अंग्रेजीमे पुरुषोत्तम के. द्वारा अनूदित; अंग्रेजीसँ मैथिली गजेन्द्र ठाकुर।] २ तेलुगु दलित महिला कविता [मूल तेलुगुसँ अंग्रेजी अनुवाद के. पुरुषोत्तम ; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर।] मूल तेलुगु: “जे. सुभद्रा” क “लोढ़ब”, “लाण्डा”, “साड़ीक कोर - -हमर छाती पर पहरा दऽ रहै लेल कपड़ा नै”, ““अव्वा - दुख जमा करैत दरबज्जापर बिछल चौखटि”। मूल तेलुगु: “चल्लपल्ल्ली स्वरूपरानी”क “मान्केनापुव्वु”; “माटि -भेल हाथ”, मूल तेलुगु: “दरिशे शशिनिर्मला” क “हमही छी जे सभ किछु हारि देलौं”, “हम रजस्वला कपड़ा ओढ़ि रहल छी”, “एक दलित स्त्री” मूल तेलुगु: “एम. गौरी” क “मेहदी लागल हाथ” मूल तेलुगु: “मद्दुरी विजयश्री” क “अलिसम्माक स्राप” ३ वी.वी.बी. रामा रावक किछु पद्य [तेलुगु सँ कवि द्वारा स्वयं अनुवादित] ४ एन. गोपीक मूल तेलुगु क अंग्रेजी अनुवाद जयलक्ष्मी पोपुरी द्वारा; अंग्रेजीसँ मैथिली गजेन्द्र ठाकुर। ५ अरुणा एन केर मूल तेलुगु क अंग्रेजी अनुवाद जयलक्ष्मी पोपुरी द्वारा; अंग्रेजीसँ मैथिली गजेन्द्र ठाकुर। ६ शीला सुभद्रा देवीक मूल तेलुगु क अंग्रेजी अनुवाद जयलक्ष्मी पोपुरी द्वारा; अंग्रेजीसँ मैथिली गजेन्द्र ठाकुर। ७ के. शिवा रेड्डीक मूल तेलुगु क अंग्रेजी अनुवाद जयलक्ष्मी पोपुरी द्वारा; अंग्रेजीसँ मैथिली गजेन्द्र ठाकुर। ८ अन्नवरम देवेन्द्रक तेलुगु पद्य [मूल तेलुगुसँ अंग्रेजी अनुवाद -जयलक्ष्मी पोपुरी; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर।] ९ नरसिंह मेहताक गुजराती कविता, गुजरातीसँ अंग्रेजी अनुवाद हेमांग देसाई; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर द्वारा। १० हेमांग देसाईक ५टा गुजराती कविता, गुजरातीसँ अंग्रेजी अनुवाद कवि द्वारा स्वयं; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर द्वारा। ११ राजेन्द्र पटेलक गुजराती कविता सभ, गुजरातीसँ अंग्रेजी अनुवाद हेमांग देसाई; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर द्वारा। १२ पीयूष ठक्करक गुजराती कविता सभ, गुजरातीसँ अंग्रेजी अनुवाद हेमांग देसाई; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर द्वारा। १३ पन्ना त्रिवेदीक कविता सभ, गुजरातीसँ अंग्रेजी अनुवाद हेमांग देसाई; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर द्वारा। १४ बाबू सुथारक कविता सभ, गुजरातीसँ अंग्रेजी अनुवाद हेमांग देसाई; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर द्वारा। १५ गुजराती दलित कविता [गुजरातीसँ अंग्रेजी अनुवाद हेमांग देसाई; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर द्वारा। अनीश गारंगेक "पोस्टर", राजेन्द्र वडेलक 'जीता' "सम्भोग", उमेश सोलंकीक "लोक, जमि जाए", "खरड़ाक डाँट सभ" १६ गुलाम मोहम्मद शेखक गुजराती कविता, गुजरातीसँ अंग्रेजी अनुवाद हेमांग देसाई/ माला मारवाह; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर द्वारा। १७ अजय सरवैयाक गुजराती कविता, गुजरातीसँ अंग्रेजी अनुवाद हेमांग देसाई; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर द्वारा। १८ गनी दहीवाला क गुजराती कविता, गुजरातीसँ अंग्रेजी अनुवाद हेमांग देसाई; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर द्वारा। १९ बासुदेव सुनानीक उड़िया कविता। उड़ियासँ अंग्रेजी अनुवाद सैलेन राउत्रे; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर २०. मूल उड़िया भरत माँझी (ओड़ियासँ अंग्रेजी अनुवाद सैलेन राउत्रे आ अंग्रेजीसँ मैथिली गजेन्द्र ठाकुर द्वारा) २१ इप्सिता सारंगीक उड़िया कविता। उड़ियासँ अंग्रेजी अनुवाद इप्सिता सारंगी द्वारा स्वयं; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर २२ इप्सिता सारंगीक उड़िया कविता। उड़ियासँ अंग्रेजी अनुवाद हरेकृष्ण दास; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर २३ भिखारी ठाकुरक भोजपुरी कविता गीतक मैथिली अनवाद गजेन्द्र ठाकुर द्वारा २४ रहमान राहीक कविताक मैथिली अनुवाद (कश्मीरीसँ अंग्रेजी एस.एल.सन्धु, साभार भारतीय ज्ञानपीठ आ अंग्रेजीसँ मैथिली गजेन्द्र ठाकुर) Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Books/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह पेटार View Videha googlegroups (since July 2008) view Videha Facebook Official Group (since January 2008)- for announcements १. गजेन्द्र ठाकुर ........................................................................................................................ ........................................................................................................................ [संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री] [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल सेहो] [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] [FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI ALSO] यू. पी. एस. सी. (मेन्स) २०२० ऑप्शनल: मैथिली साहित्य विषयक टेस्ट सीरीज यू.पी.एस.सी. क प्रिलिमिनरी परीक्षा २०२० सम्पन्न भऽ गेल अछि। जे परीक्षार्थी एहि परीक्षामे उत्तीर्ण करताह आ जँ मेन्समे हुनकर ऑप्शनल विषय मैथिली साहित्य हेतन्हि तँ ओ एहि टेस्ट-सीरीजमे सम्मिलित भऽ सकैत छथि। टेस्ट सीरीजक प्रारम्भ प्रिलिम्सक रिजल्टक तत्काल बाद होयत। टेस्ट-सीरीजक उत्तर विद्यार्थी स्कैन कऽ editorial.staff.videha@gmail.com पर पठा सकैत छथि, जँ मेलसँ पठेबामे असोकर्ज होइन्हि तँ ओ हमर ह्वाट्सएप नम्बर 9560960721 पर सेहो प्रश्नोत्तर पठा सकैत छथि। संगमे ओ अपन प्रिलिम्सक एडमिट कार्डक स्कैन कएल कॉपी सेहो वेरीफिकेशन लेल पठाबथि। परीक्षामे सभ प्रश्नक उत्तर नहि देमय पड़ैत छैक मुदा जँ टेस्ट सीरीजमे विद्यार्थी सभ प्रश्नक उत्तर देताह तँ हुनका लेल श्रेयस्कर रहतन्हि। विदेहक सभ स्कीम जेकाँ ईहो पूर्णतः निःशुल्क अछि।- गजेन्द्र ठाकुर संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा, २०२० मैथिली (ऐच्छिक) लेल टेस्ट सीरीज/ प्रश्न-पत्र- १ आ २ TEST SERIES-1 [एन.टी.ए.- यू.जी.सी.-नेट-मैथिली लेल/ FOR NTA-UGC-NET-MAITHILI] NTA_UGC_NET_MAITHILI_01 NTA_UGC_NET_MAITHILI_02 NTA_UGC_NET_MAITHILI_03 (श्री शम्भु कुमार सिंह द्वारा संकलित) Videha e-Learning MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) UPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS BPSC MAITHILI OPTIONAL SYLLABUS मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (ऐच्छिक) मैथिली प्रश्नपत्र- यू.पी.एस.सी. (अनिवार्य) मैथिली प्रश्नपत्र- बी.पी.एस.सी.(ऐच्छिक) मैथिलीक वर्तनी १ भाषापाक २ मैथिलीक वर्तनीमे पर्याप्त विविधता अछि। मुदा प्रश्नपत्र देखला उत्तर एकर वर्तनी इग्नू BMAF001 सँ प्रेरित बुझाइत अछि, से एकर एकरा एक उखड़ाहामे उनटा-पुनटा दियौ, ततबे धरि पर्याप्त अछि। यू.पी.एस.सी. क मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेल सेहो ई पर्याप्त अछि, से जे विद्यार्थी मैथिली (कम्पलसरी) पेपर लेने छथि से एकर एकटा आर फास्ट-रीडिंग दोसर-उखड़ाहामे करथि| IGNOU  इग्नू       BMAF-001 ........................................................................................................................ MAITHILI (OPTIONAL) TOPIC 1    [Place of Maithili in Indo-European Language Family/ Origin and development of Maithili language (Sanskrit, Prakrit, Avhatt, Maithili) भारोपीय भाषा परिवार मध्य मैथिलीक स्थान/ मैथिली भाषाक उद्भव ओ विकास (संस्कृत, प्राकृत, अवहट्ट, मैथिली)] TOPIC 2    (Criticism- Different Literary Forms in Modern Era/ test of critical ability of the candidates) TOPIC 3    (ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददास सिलेबसमे छथि आ रसमय कवि चतुर चतुरभुज विद्यापति कालीन कवि छथि। एतय समीक्षा शृंखलाक प्रारम्भ करबासँ पूर्व चारू गोटेक शब्दावली नव शब्दक पर्याय संग देल जा रहल अछि। नव आ पुरान शब्दावलीक ज्ञानसँ ज्योतिरीश्वर, विद्यापति आ गोविन्ददासक प्रश्नोत्तरमे धार आओत, संगहि शब्दकोष बढ़लासँ खाँटी मैथिलीमे प्रश्नोत्तर लिखबामे धाख आस्ते-आस्ते खतम होयत, लेखनीमे प्रवाह आयत आ सुच्चा भावक अभिव्यक्ति भय सकत।) TOPIC 4                (बद्रीनाथ झा शब्दावली आ मिथिलाक कृषि-मत्स्य शब्दावली) TOPIC 5                (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोरिक गाथामे समाज ओ संस्कृति) TOPIC 6                (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- विद्यापति) TOPIC 7                (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- पद्य समीक्षा- बानगी) TOPIC 8                (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- लोक गाथा नृत्य नाटक संगीत) TOPIC 9                (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- यात्री) TOPIC 10               (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली रामायण) TOPIC 11               (वैल्यू एडीशन- द्वितीय पत्र- मैथिली उपन्यास) TOPIC 12               (वैल्यू एडीशन- प्रथम पत्र- शब्द विचार) TOPIC 13               (तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास) TOPIC 14                 (आधुनिक नाटकमे चित्रित निर्धनताक समस्या- शम्भु कुमार सिंह)् TOPIC 15                 (स्वातंत्र्योत्तर मैथिली कथामे सामाजिक समरसता- अरुण कुमार सिंह) TOPIC 16                 (यू. पी.एस.सी. मैथिली प्रथम पत्रक परीक्षार्थी हेतु उपयोगी संकलन, मैथिलीक प्रमुख उपभाषाक क्षेत्र आ ओकर प्रमुख विशेषता, मैथिली साहित्यक आदिकाल, मैथिली साहित्यक काल-निर्धारण- शम्भु कुमार सिंह) TOPIC 17                (मैथिली आ दोसर पुबरिया भाषाक बीचमे सम्बन्ध (बांग्ला, असमिया आ ओड़िया) [यू.पी.एस.सी. सिलेबस, पत्र-१, भाग-“ए”, क्रम-५]) TOPIC 18                 [मैथिली आ हिन्दी/ बांग्ला/ भोजपुरी/ मगही/ संथाली- बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) केर सिविल सेवा परीक्षाक मैथिली (ऐच्छिक) विषय लेल] ........................................................................................................................ GENERAL STUDIES (PRELIMINARY & MAINS) GS (Pre) TOPIC 1 GS (Mains) NCERT-ENVIRONMENT CLASS XI-XII NCERT PDF I-XII TN BOARD PDF I-XII ALL INDIA RADIO ENGLISH NEWS ALL INDIA RADIO NEWS ARCHIVE ALL INDIA RADIO TALKS AND CURRENT AFFAIRS RAJYA SABHA TV NEWS DISCUSSIONS ........................................................................................................................ OTHER OPTIONALS ........................................................................................................................ IGNOU eGYANKOSH (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर २. गद्य २.१.योगेन्द्र पाठक वियोगी- नरक विजय (धारावाहिक बाल नाटक- दोसर खेप) २.२. रबीन्द्र नारायण मिश्र- धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर (९म खेप) २.३.जगदीश प्रसाद मण्डल- आमक गाछी- धारावाहिक उपन्यास (दोसर खेप) २.४.नन्द विलास राय- बीहनि कथा- एमेली साहैब २.५.जगदीशप्रसाद मण्डल- हुसैत लोक २.६.अमरेश कुमार लाभ- २ टा बीहनि कथा २.७.कुसुम ठाकुर-अलग राज्यक माँग कतेक सार्थक? २.८.डॉ. विनीत उत्पल-लघु कथा- नागा फकीर २.९.गजेन्द्र ठाकुर- मिथिलाक इतिहास भाग-२ २.१०.डॉ आभा झा-बौक २.११.कीर्तिनाथ झा-लघुकथा-नपुंसक २.१२.दीपा झा- धिया- पूता आ डिजिटल कैदखाना २.१३.उमेश मण्डल-लोक-नाट्य-वाद्य मण्डली- संकलन २.१४.प्रियंवदा तारा झा- वापसी २.१५.आशीष अनचिन्हार -सपना आ भ्रम २.१६.आनन्द कुमार झा-मैथिलीक वर्तमान रंगमंच , धर्मिता आ स्वतन्त्रता २.१७.  मुन्नाजी- बीहनि कथा-- मानकीकरण ओ तुलनात्मक पक्ष २.१८.नारी शब्दक विवेचना- डॉ. अपर्णा २.१९.लालदासक ‘कौशल्या’-डॉ. अपर्णा २.२०.रमेश्वर चरित मिथिला रामायणमे पुष्कर काण्डक विशेषता-डॉ. अपर्णा २.२१.लालदासक रामायणमे विधि-व्यवहारक वर्णन- डॉ अपर्णा योगेन्द्र पाठक वियोगी नरक विजय (एहि नाटकक एक संस्करण हमर पोथी ‘त्रिनाटकम्’ मे छपि गेल अछि। ओहि मे दृश्यक संख्या बहुत बेसी रहला सँ किछु निर्देशक लोकनि एकर मंचन पर प्रश्न चिन्ह लगौलनि। ओहि आलोचना कें ध्यान मे रखैत एकरा परिवर्धित कएल गेल। एकर बंगला अनुवाद श्री नवीन चौधरी केलनि अछि।- नाटककार) पात्र परिचय मानव पात्र — रमेश, सुरेश, अनुपम अमित (वैज्ञानिक) पौराणिक पात्र — ब्रह्मा, विष्णु, महेश, नारद, यमराज, चित्रगुप्त, दू यमदूत अंक 1 दृश्य 2 मंच सज्जा पछिले दृश्य सन, खाली शास्त्र-पुराणक पोथीक बदला मोटका विज्ञान पोथी, जर्नल आदि राखल। कुर्सी चारिटा। डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड पर लीखल छैक “'AI Laboratory (highly confidential)'। ई वैज्ञानिक अनुपमक प्रयोगशाला थिक। प्रकाश वैज्ञानिक पर फोकस होइत अछि। अपना प्रयोगशाला मे बैसल ओ लैपटॉप पर कोनो लेख देखि रहल छथि आ लेगो ब्लॉक सँ खेला रहल छथि। सामनेक टेबुल पर एकटा छोट आकारक डिजिटल घड़ी, किछु सीडी/डीभीडी, किछु कोटक बटन, लेजर टॉर्च, आर किछु यंत्रादि पसरल छैक। इलेक्ट्रोनिक्स बला टेबुल कने परिवर्तित आ सजाओल। एहि टेबुल पर छद्म वेश मे रमेश आ सुरेश खेलौना बला छोटका ड्रोन सँ किछु काज कऽ रहल छथि। मंचक उपर पर्दा सँ एकटा एलईडी बल्ब लटकि रहल छैक जाहि सँ किछु अन्तराल पर लाल रंगक प्रकाश मंच कें आलोकित करैत छैक। वैज्ञानिक लैपटॉप देखि चौंकैत छथि। वैज्ञानिक       ई की ? (फेर लैपटॉप कें देखऽ लगैत छथि) रमेश         की भेल सर ? वैज्ञानिक       एखनहि बूझि जेबैक, काज करैत रहू। जींस-कुर्ता पहिरने एकटा अपरिचित व्यक्तिक प्रवेश। हाथ मे गिटार सन बाजाक गिगबैग लटकल। एकदम वैज्ञानिकक सामने ठाढ़ भऽ जाइत छथि। प्रकाश पहिने आगन्तुक पर पड़ैत अछि तखन पूरा मंच आलोकित होइत अछि। वैज्ञानिक तरे तर मुसकिआइत छथि मुदा अकचकेबाक अभिनय करैत छथि। वैज्ञानिक      अहाँ के छी, एतए भीतर कोना घुसि गेलहुँ ? सुरक्षा अधिकारी अहाँ कें रोकलनि नहि ? आगन्तुक      (ठाढ़ भेल, कने दूर हटि कए स्वतः) हम तीनू लोक मे स्वच्छन्द विचरण करैत रहैत छी। हमरा के रोकत ?  (प्रकट, वैज्ञानिक लग जा कए) हम एतए आकाश मार्ग सँ एलहुँ। मुदा अहाँ घबराउ नहि, अहाँक सुरक्षा कें हमरा सँ कोनो खतरा नहि अछि। वैज्ञानिक      (आश्चर्यचकित हेबाक अभिनय करैत, कुर्सी आगू बढ़बैत) अच्छा, बैसू। बाजू अहाँ की चाहैत छी ? चाह, काफी किछु मँगाबी ? आगन्तुक      (कुर्सी पर बैसैत) चाह, काफी छोड़ू, काज सूनल जाओ। ओना तऽ हम संगीत सँ सम्बन्ध रखैत छी मुदा एखन अहाँ लग वैज्ञानिक आविष्कार सबहक जानकारी लेबा लेल आएल छी। वैज्ञानिक      सब आविष्कारक वर्णन इंटरनेट पर उपलब्ध छैक। आब इंटरनेट अपना ब्रह्मांड मे सबतरि उपलब्ध छैक आ कोनो ग्रहक बासी कतहु बैसल एकरा पढ़ि सकैत अछि। आगन्तुक      हम अहाँक मुहें सूनए चाहैत छी। वैज्ञानिक      (रमेश, सुरेश दिस इंगित करैत) हमर ओ दूनू सहकर्मी एतए काज करथि तऽ कोनो असुविधा नहि ने ? आगन्तुक      कोनो असुविधा नहि। अपने सुनाउ। वैज्ञानिक      बेस, हम किछु पुरान आविष्कारक जानकारी दऽ सकैत छी। जाहि विषय पर शोध चलिए रहल छैक तकरा बारे मे हम किछु नहि कहब। आगन्तुक      कोनो बात नहि, जतेक अहाँ बता सकैत छी से बताउ। (कागत पर लिखब शुरू करैत छथि।) वैज्ञानिक      (किछु सोचि आ घड़ीक आकारक अपन स्मार्टफोन बहार करैत) एकरा देखियौ, आब ई बड़ पुरान आविष्कार भऽ गेलैक, एकर अनेक नव रूप सेहो आबि गेलैक अछि मुदा हम एखनहुँ कखनो कए एकर व्यवहार कऽ लैत छी। एकरा स्मार्टफोन कहल जाइत छैक। आगन्तुक            (किछु लिखैत) ई की काज करैत छैक ? वैज्ञानिक      एना कहियौ — ई की नहि करैत छैक। साधारण दूरभाष सँ लऽ कए सिनेमा देखब, चित्रक आदान प्रदान करब आ रोबोट कें कोनो काजक लेल आदेश देब तऽ पुरान बात भऽ गेलैक, आब हम एतए बैसले बैसल विश्वक कोनो भाग मे बरखा सेहो करबा सकैत छी, कोनो अन्य भाग मे रातिओ मे कृत्रिम सूर्य उगा सकैत छी, कोनो अन्य ग्रह पर आक्रमण करबा सकैत छी, आरो बहुत किछु। आगन्तुक      (चिन्तित होइत) कृत्रिम सूर्यक निर्माण भऽ गेल। आश्चर्य ! अहाँ कोनो अन्य ग्रह पर आक्रमण करबा सकैत छी, ई तऽ विशेष चिन्ताक बात। (लाल प्रकाश हुनका मुह पर पड़ैत अछि, ओ विचलित होइत छथि) ई प्रकाश किएक ? वैज्ञानिक      एतुका सब गतिविधिक जानकारी केन्द्र कें पठाओल जा रहल छैक। असुविधाक लेल क्षमा चाही। (रमेश आ सुरेश अपना मोबाइल पर कोनो ट्यून लगबैत छथि आ नेपथ्य मे जोर सँ वर्षा आ बिहाड़ि एबाक आवाज होइत छैक। आगन्तुक ध्यान सँ सुनैत छथि) आगन्तुक      ई की भऽ रहल छैक ? वैज्ञानिक      कृत्रिम वर्षा लेल एकटा नव प्रयोगक तैयारी मे किछु जाँच कएल जा रहल छैक। चिन्ताक कोनो बात नहि। आगन्तुक      कृत्रिम वर्षा ! आश्चर्य। (लेगो ब्लॉक दिस देखबैत) ई की छिऐक ? वैज्ञानिक      ब्रह्माण्डक अन्य ग्रह पर बनऽ बला महल आदिक नमूना। सौरमंडलक सब ग्रह पर एहन भवन सब बनि गेल छैक। वायुमंडलक संरचनाक हिसाबें भवनक डिजाइन तैयार कएल जाइत छैक। आगन्तुक      किछु बुझबा मे नहि आएल, आगू कहियौ। वैज्ञानिक      (हाथ मे एकटा प्लास्टिक जकाँ कोनो पारदर्शी चीज उठबैत) एकरा देखियौ, ई अद्भुत वस्तु थिक। आगन्तुक      (किछु नहि देखैत) अहाँ हमरा बड़ बुड़िबक बुझैत छी की ? खाली हाथ देखा कए कहैत छी एकरा देखियौ। एना ठकू नहि। वैज्ञानिक      इएह तऽ एकर विशेषता छैक, हमरा हाथ मे अछि मुदा अहाँ देखि नहि सकैत छिऐक। ई अदृश्य पदार्थ छिऐक। एकर गुण सब सुनबैक तऽ ततेक आश्चर्य लागत जे अहाँ फेर कहब ठकैत छी। आगन्तुक            बेस, कहियौ। वैज्ञानिक      संक्षेप मे बूझि लिअऽ जे धरती पर जे कोनो प्राकृतिक धातु (metal) पदार्थ अछि तकर नीक सँ नीक गुण एकरा गुणक तुलना मे करोड़ो गुणा न्यून लागत। आ सबसँ महत्वपूर्ण बात जे एकरा पर तापक कोनो असरि होइते नहि छैक, कतेको सूर्यक सम्मिलित ताप कें ई सहि सकैत अछि। एकर वस्त्र जे कोनो वस्तु कें ओढ़ा देबैक ओ अदृश्य भऽ जाएत। ओकरा आगिक कोनो डरे नहि रहतै। आगन्तुक            (बेस आश्चर्यचकित होइत) सत्ते कहैत छी ? वैज्ञानिक      हम तऽ पहिनहि कहलहुँ जे अहाँ कें लागत हम झूठ बजैत छी। हमर काज छल सुना देब, विश्वास करी बा नहि से तऽ अहाँ जानी। आगन्तुक            (बेस चिन्तित होइत) ठीक छैक, किछु आर सुनाउ। वैज्ञानिक      एकर दोसर गुण छैक जे विशेष तरीका सँ एहि मे बिजलीक धारा बहाओल गेला सँ ई पारदर्शी नहि रहि जाइत छैक, एकरा सँ लेजर प्रकाश बहराइत छैक। आगन्तुक            (लिखबाक उपक्रम करैत) ई लेजर प्रकाश की होइत छैक ? वैज्ञानिक      कृत्रिम सूर्ये जकाँ पूर्णतः मानव निर्मित अजूबा। (एकटा लेजर टॉर्च उठा कए वैज्ञानिक ओकर प्रकाश चारू कात देखबऽ लगैत छथि, प्रकाश अनेक पुंज मे बँटैत छैक, एक दू बेर आगन्तुकक आँखि पर सेहो पड़ैत छनि, ओ हाथ सँ आँखि झँपैत छथि आ विस्मित होइत छथि) आगन्तुक      एहि सँ तऽ आँखि आन्हर भऽ जेतैक। वैज्ञानिक      ओ क्षणिक प्रभाव छैक, चिन्ताक बात नहि। आगन्तुक      बेस, मानि लैत छी। एकर आर की की गुण छैक ? वैज्ञानिक      सबटा विस्तार सँ कहऽ लागब तऽ एक दिन मे खतमो नहि होएत। संक्षेप मे बूझि लिअऽ जे लेजर प्रकाश धरती पर प्रायः सब क्षेत्र मे उपयोग भऽ रहलैक अछि आ सब लोक एकर गुण सँ परिचित अछि। एही प्रकाश द्वारा हम एतए बैसले बैसल कोनो ग्रह पर शत्रु कें नष्ट कऽ सकैत छी। आगन्तुक      एकर एकटा नमूना हमरा भेटि सकत की ? वैज्ञानिक      (एकटा पुरान छोट लेजर पेन हुनका दैत) ई राखि लेल जाओ। (सुरेश खेलौना बला ड्रोन कें उड़बैत छथि। नेपथ्य मे हवाइ जहाज उड़बाक आवाज होइत। आगन्तुक एहि खेला कें आश्चर्यचकित भावें देखैत छथि आ आबाज कें अकानैत छथि। ड्रोन मंच पर एम्हर ओम्हर उड़ैत रहैत छैक आ फेर एक क्षणक लेल आगन्तुक के माथ पर बैसि जाइत छैक। ओ अकचकाएल भावें छड़पि कए कुर्सी सँ उठि जाइत छथि। तखने ड्रोन हुनका माथ सँ उड़ि जाइत छैक। ओ असौकर्यक भाव देखबैत माथ हँसोथैत छथि। तकर बाद ओ ड्रोन वैज्ञानिक के सामने रुकि जाइत छैक।) रमेश        हमरा सबहिक प्रयोग सफल रहल सर। ई यान आब तैयार अछि। आब हमरा सबकें अनुमति भेटए। वैज्ञानिक      बहुत नीक। आब अहाँ दूनू गोटे अपन अभियान पर जा सकैत छी। हमर शुभकामना। (वैज्ञानिकक पैर छुबैत रमेश आ सुरेशक प्रस्थान) आगन्तुक            ई कोन चिड़ै छियैक जे एतेक जोर के आवाज करैत उड़ैत छैक ? वैज्ञानिक      चिड़ै नहि ई अन्तरिक्ष यान छिऐक जे अपना ब्रह्मांड मे कतहु जा सकैत अछि। एकर ओजन मात्र सौ ग्राम छैक मुदा ई एक हजार किलोग्रामक ओजन उठा कए उड़ि सकैत अछि। आगन्तुक            ई तऽ पुष्पक विमानक कान कटलक यौ। वैज्ञानिक      आब ककर कान कटलक आ ककर नाक कटलक तकर अन्दाज हमरा तऽ नहि अछि। अहाँ कोन काल्पनिक पुष्पक विमानक चर्चा करैत छी से तऽ अहीं जानी मुदा हमर टीम एकटा एहन यान पर शोध कऽ रहल अछि जे अन्य ब्रह्मांडक यात्रा सेहो कऽ सकत। एकर बारे मे हम एखन किछु नहि कहि सकब। आगन्तुक            मुदा अन्य ब्रह्मांड पर जेबा लेल अहाँ सब कें देवता सबहक संग युद्ध करऽ पड़त। वैज्ञानिक      (कने खिसिएबाक मुद्रा मे) ई तऽ अनर्गल बात भेल, देवता लोकनि अपने सबतरि बौआइत रहथि से नीक आ मानव अपन आविष्कारक बल पर कतहु जाए तऽ हुनका सँ युद्ध करऽ पड़त। ओना कोनो युद्ध लेल हम सब रोबोट सेना आ विभिन्न प्रकारक परमाणु बम तैयार कइए लेने छी। आगन्तुक            रोबोट सेना की भेलैक ? वैज्ञानिक      रोबोट माने भेल यंत्र मानव जे पूर्णतया मानव निर्मित अछि। छिऐक तऽ ई एक प्रकारक यंत्र मुदा प्रजनन छोड़ि बाँकी सब काज मनुक्खे जकाँ करैत अछि। सीमित मात्रा मे प्रजनन सेहो कऽ सकैत अछि, माने दोसर रोबोट कें बना सकैत अछि यदि अनुमति दऽ दियैक। आगन्तुक            (आश्चर्य सँ आँखि पसारैत) अद्भुत, एहि रोबोट सेनाक संहारक कोनो विधि ? वैज्ञानिक      ओ हम नहि कहि सकैत छी। एतेक बूझि लिअऽ जे अस्त्र शस्त्रक कोनो असरि नहि होइत छैक एकरा पर। आगन्तुक      आ परमाणु बम की भेलैक ? वैज्ञानिक      कने घुसकि आउ। (लैपटॉप पर एकटा छोट भिडियो हुनका देखेबाक उपक्रम) अपने जे देखलियैक ताहि सँ दस लाखक जनसंख्या बला शहर नष्ट भऽ गेल छलैक। एखन एहन शक्तिशाली बम सब छैक जे एकेटा सँ आर्यावर्त सदृश देश स्वाहा भऽ जाएत। आगन्तुक      (बहुत बेसी चिन्तित होइत) एतेक शक्तिशाली ! एहन अस्त्र तऽ महाभारत युद्ध मे सेहो नहि छलैक। बेस, आगू कहियौ। वैज्ञानिक      एकरा देखियौक (हाथ मे एकटा बटन सदृश वस्तु लैत) ई भेल हमर प्रतिरूप। हमर मस्तिष्कक सब ज्ञान एहि मे भरल छैक। एकरा साइबोर्ग (cyborg) अवस्था कहल जाइत छैक। हम आब एहि अवस्था मे अमर भऽ गेल छी। एकर एक प्रति राष्ट्रीय संग्रहालय मे सेहो राखल छैक। आब हमरा मृत्युक कोनो डर नहि अछि। आगन्तुक      (लिखब बन्द करैत आ कागत कें पॉकेट मे रखैत) बर बेस, एहि सँ बेसी हमरा दिमाग मे एखन नहि अँटत। की हमरा अपन अंतरिक्ष यानक एकटा नमूना दऽ सकैत छी ? वैज्ञानिक      (अस्वीकारक मुद्रा बनबैत) माफ करब मुदा एहि लेल उच्च स्तरीय अनुमतिक आवश्यकता छैक। संगहि अपनेक पूर्ण परिचय सेहो जरूरी होएत। आगन्तुक      (परिचयक नाम पर कने घबराइत) कोनो बात नहि। रहए दियौक। एतेक जानकारीक लेल बहुत धन्यवाद। चलैत छी। (प्रस्थान) वैज्ञानिक      (दर्शक कें सम्बोधित करैत) अहाँ सब चिन्हलिएनि ई के छलाह ? नहि ने ? अरे ओएह नारद बाबा, वेष बदलि कए आएल छलाह देवता सबहक दिस सँ धरती पर जासूसी करए लेल। हमरा खुफिया रिपोर्ट भेटि गेल छल तें विज्ञानक प्रगतिक बारे मे चुनि चुनि कए बात कहलिएनि। हमर बात सूनि कए केहन चिन्तित भऽ रहल छलाह से तऽ अपने सब देखिये लेलियैक। हमरा तऽ लागल जे बेसी खिस्सा कहबनि तऽ कतहु हॉर्ट अटैक ने भऽ जाइन। मुदा भागि गेलाह। देखियौ आगू की करैत छथि। वैज्ञानिक द्वारा लैपटॉप बन्द करबाक उपक्रम, प्रकाश शनैः शनैः बंद होइत अछि, नेपथ्य मे धड़-पकड़ के हल्ला, किछु लोक एम्हर ओम्हर दौड़ैत देखाइत अछि। दू बेर पिस्तौल चलबाक शब्द सूनऽ मे अबैत अछि। तखने घोषणा – घबराउ नहि, एहि गोली सँ दूनू बाहुबली रमेश आ सुरेशक अन्त भेल। पुलिस द्वारा घेरल जेबाक बाद पकड़ेबाक डर सँ दूनू बाहुबली रमेश आ सुरेश अपने गोली सँ आत्महत्या कऽ लेलक। करीब बीस बरखक बाद राज्य मे शान्ति बहाल होएत। चलू महावीर मंदिर मे लड्डू चढ़बै लेल। सब जा रहल अछि। (अगिला अंकमे जारी) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रबीन्द्र नारायण मिश्र- धारावाहिक उपन्यास-लजकोटर लजकोटर (प्रवासीक जीवनपर आधारित) (९म खेप) -9- माएक संगे हम अपन डेरा पहुँचलहुँ ।एकहि आङनमे एकपाँतिसँ दसटा कोठरी छल जाहिमे किरायेदारसभ रहैत छल । एकहिटा शौचालय-स्नानगृह छल जाहिमे बेराबेरी सभक काज चलैत छल । कोठलीसभक आगामे कनीटा खाली जगह रहैक जतए भानस बनैत छल । आङनमे लोकक मिस पड़ैत रहैथ छल। रच्छ ई छल जे लगीचेमे एकटा पार्क छल । जकरा ककरो मोन उबिआइत तँ ओहि पार्कमे चल जाइत छल । माएकेँ आबिगेलासँ हमरा मोन हल्लुक लगैतछल मुदा ओकरा सदरिकाल गुम्मे देखिऐक । कखनो किछु नहि कहैत मुदा मोनमे प्रशन्नता नहि रहैत छलैक । एहिबेर दिल्ली अएलाक बाद कारखानाबला काज छुटि गेल। बहुतरास कर्मचारीसभकेँ हटा देने रहैक। हम अपनाभरि बहुत प्रयास केलहुँ जे थोड़बो दिन काज करए दिअए मुदा मालिक नहि मानलक । तखन किछु तँ करबेक छल ।  हनुमानमंदिरक आगा पटरीपर चाह-पानक दोकान खोलि लेलहुँ ।  भोरसँ रातिधरि दोकानपर रहए पड़ैत छल । क्रमश:दोकानमे बिक्री बढ़ए लगलैक। मुदा स्थानीय गुंडा सभ हफ्ता लैत छल । जतेक कमाइ होइक तकेर आधासँ बेसीओकरेसभमे चल जाइत छल । पुलिसिआ आतंकसँ बचबाक हेतु हम विजयकेँ कै बेर फोन करिऐक मुदा ओ फोन काटि दिअए,कहिओ गप्पे नहि करए। बुझेबे नहि करए जे बात की छैक? पटरीपर दोकान करब एतेक मोसकिल काज थिक से हमरा नहि बूझल छल ।दोसर कोनो व्योंत नहि छल,तेँ सभ किछु बरदास करैत रहलहुँ । घरमे माएक हालत चिंताजनक भेल जाइत छल । ओकरा रहि-रहि कए गाम मोन पड़ैक,गामक मंदिर,व्रह्मस्थान,तिथि-त्योहार सभबातक चर्चा करैत रहैत । कोना-कोना  के-के झगड़ा केलक,कोना सोलहभेलैक, कोना के जहल चल गेल से सभ सुनबैत रहैत । असलमे दिन-राति ओकर माथमे गामे घुमैत रहैत छलैक,ओ करितै की? क्रमशः ओकर हालत खराबे होइत गेलैक । एकदिन तँ बैसले-बैसल माथा घुमि गेलैक आ धराम दए खसलि । हम दोकानपर रही । अगल-बगलक लोक फोन केलक । दोड़ल डेरा पहुँचलहुँ ।दहिना जाँघक हड्डी टुटि गेल रहैक । उठा-पुठा कए अस्पताल लए गेलहुँ । भरिदिन अस्पतालक चक्कर लगबैत रहलहुँ।डाक्टरसभ किओ किछु किओ किछु राय दैत रहल । शल्य चिकित्सा करेबाक हेतु ने ओ अपने तैयेार छल ने हमर मोन मानए मुदा डाक्टरक कहब जे शल्य चिकित्सा जरुरी छनि । हारि कए हम अपन सहमति दए देलिऐक ।शल्य चिकित्सामे की भेलैक की नहि ,ओकर हालत गड़बड़ाइते गेल आ दूदिनक बाद ओ अस्पतालेमे दम तोड़ि देलक। माएक एहि तरहेँ गुजरि गेलासँ हमरा तँ लकबा मारि गेल। बहुत अफशोच भेल जे बेकारे एकरा अपना संगे अनलिऐक । गाममे कष्टे सही ,जीबि तँ रहल छल ।मुदा आब की? जीवनभरिक हेतु एकटा अपराधबोध हमरा मोनमे होइत रहत जे हमरे दुराग्रहक कारण ओकर ई हाल भेल । भावी प्रवाल होइत छैक । आब तँ सभसँ पहिने ओकर अंतिम संस्कारकओरिआन करबाक छल । से सभ जोगार भए गेलैक । यमुनाकातमे माएक अंतिम संस्कारसंपन्न भेल। संस्कारक बाद श्राद्धक समस्या छल । दिल्लीमे कोनो व्यवस्था नहि छल । ओना गामोक हालत तँ सएह छल मुदा माए सभ दिन गामेमे रहलथि । तेँ सभक इएह विचार जे हुनकर श्राद्ध गामेमे हेबाक चाही । ट्रेनमे टिकटक ओरिआन करबामे विजय बहुत मदति केलाह । अस्तु, उतरी पहिरने गरीबरथसँ गाम बिदा भेलहुँ । गाम पहुँचलाक बाद सभसँ पहिने हमरकाका भेंटलाह। एतेक अपनत्वक कहिओ उमीद नहि छल । हमरा अएबासँ पहिनहि ओसारापर हमर रहबाक व्यवस्था कए देने रहथि । चारिम दिन छल । महापात्र अएलाह आ सभटा कृयाकर्म नियमपूर्वक प्रारंभ भेल ।साँझमे काका कहलाह – " कोनो चिंता नहि करिअह । सभटा भए जेतैक । कलमबला खेत तोरेसभक छह । ओहीसँ काज चलि जेतैक । लिखापढ़ी बादोमे भए जेतैक । घरक बात छैक ।कनीमनी घटतैक तँ बादोमे दए देबह ,भौजीक काज नीकसँ भए जानि । फेर देखल जेतैक ।" हम हुनकर बात सुनति रहि गेलहुँ । की जबाब दितिअनि? गामक लोकसभमे सबजाना भोजक प्रचार भए गेल । ओना आबलोककेँ भोजकप्रति पुरना जमाना जकाँ उत्साह नहि रहलैक।गाममे लोको नहि अछि । बेसी लोक बाहरे रहैत अछि।काका हमरा एकटा सादा कागजपर औंठा निसान लेलथि आ श्राद्धक चिंतासँ मुक्त कए देलाह।श्राद्ध नीकसँ संपन्न भए गेल । गामभरि एकादशा,द्वादशा दुनू दिनसबजाना भोज भेल। थैहि,थैहि भए गेल । तेरहम दिन माछ-भात भेल । तकरबाद भगवानक पूजा भेल । ओहीदिन काकाजी अपना ओहिठाम बजओलाह-" दिल्ली कहिआ जेबहक?" "अखन तँ ओहिविषयमे किछु नहि सोचलिऐक अछि ।" " कोनो बात नहि । पाँच-सात दिन बादे सही । असलमे तोहरबला घरारीमे मालजालक घर बनेबाक अछि । हमर ओलार बहुत फटकी छैक आ टुटिओ गेल छैक ।" "की कहलिऐक?' "एना अंठेलासँ काज चलतह?" "आब ई घरारी हमर भेल । सभबात पहिने भए चुकल अछि ।" " की गप्प करैत छी? हम तँ खेतक गप्प केने रही । " “खेतक दामसँ बेसी खर्चा कतए जेतैक, तूँही कहह?" हम बुझि गेलहुँ जे ओबैमानीपर अड़ल छथि  । हिनकासंगे गलथोथरी करब व्यर्थ अछि। गाममे आब किछु बाँचलनहि छल,करबाक हेतु किछु नहि छल । अस्तु, दिल्ली लौटि गेलहुँ ।संयोगसँ तत्कालमे टिकटक जोगार भए गेल । रस्तामे कोनो दिक्कति नहि भेल । ट्रेन बहुत खालिए रहैक । दोसरदिन भेने दिल्ली पहुँचलहुँ । अपन डेरापर गेलहुँ । ओहिठामसँ चोट्टे विजयसँ भेंट करए हुनकर डेरापर पहुँचलहुँ । ओ अपने तँ नहि रहथि मुदा मालती भेटि गेलि । हमरा देखितहि हँसए लागलि । "की बात छैक, माथपर केस कटल अछि?" "माए मरि गेलैक ।" "से केना की भेलैक?" "एहीठाम आएल छलि ।दुखित पड़ि गेल ।एतबा कहैत कहैत हमरा कनाए लागल । आगा नहि बाजि सकलहुँ ।" मालती जलखैक ओरिआनमे लागि गेलीह । ताबे हम ओतहि बैसले रही कि विजय सेहो आबि गेलाह। "गामसँ कहिआ अएलहुँ?" "काल्हिए अएलहुँ अछि ।" "ओ काज किछु चलि रहल अछि कि नहि? "कहाँ किछु कए रहल छी। "ठीक छैक, अहाँ काल्हिभोरे थानामे भेंट करू ।" विजयक गप्पसँ बहुत प्रशन्नता भेल । ताबे मालती जलखै लए कए आबि गेलीह ।जलखै,चाह-पान सभ भेलैक ।मुदा मालती अपना बारे मे किछु नहि बजलीह । हमहुँ किछु नहि पुछलिऐक । भेल जे कहीं विजय बिगड़ि गेलाह तँ होइतो काज बिगड़ि जाएत । ओहिठामसँ निकलि बसस्टैंडपर ठाढ़भेल बसक प्रतीक्षा करैत रही कि किशुन देखाएल। ओहो कतहु जा रहल छल । कनी-कनी झकाइत छल । हम ओकरा देखि आबाज देलिऐक-"किशुन!किशुन! मुदा ओनहि सुनलक आ दौड़कए बसमे चढ़ि गेल ।ओकरासँ भेंट होइत-होइत रहि गेल । कोनो बात नहि । एतबा संतोख भेल जे ओ जीबि रहल अछि आ ठीक-ठाक अछि।आब ओ मंदिरेपर रहैत अछि कि कतहु आनठाम चल गेल से पता नहि चलि सकल । कनीके कालमे बस अएलैक आ हमहुँ ओहिमे चढ़ि अपन डेरा दिस बिदा भेलहुँ। बसमे जबरदस्त धक्कम-धुक्का छलैक । कहुनाकए आगादिस ससरलहुँ । किछुकालमे एकटा सीट खाली भेलैक । हम ओतए बैसि गेलहुँ ।सटले दोसर सीटपर एकटा गोरनार, बेस चुहिलगर छौंड़ी बैसलि छलि । ओकर पैघ-पैघ आँखि,भरल-भरल देह बेस आकर्षक छल । मोबाइलफोनपर मैथिलिएमे ककरोसँ गप्प कए रहल छलि । ई जानि बहुत प्रशन्नता भेल जे इहो मैथिले छथि । बस चलैत रहलैक । यात्रीसभ चढ़ैत-उतरैत रहल ।हम ओकरादिस तकैत रहलहुँ । ओहो गाहे-बगाहे हमरा दिस घुरैत रहैत छलि। मुदा ततबे । हमरा किछु पुछबाक साहस नहि होअए आ ओ किछु बाजए नहि । मुदा ओ छलि बेस रमनगर । बस हमर डेरासँ एकस्टाप पहिनेधरि पहुँचि गेल छल ।भेल जे जँ आबो नहि बाजब तँ परिचयो नहि होएत ।आखिर अपना दिसक लोक छथि ,संयोगसँ भेटि गेल छथि तँ परिचय करबामे कोन हर्ज? सएह सोचि हम टोकारा देलिऐक-" अहाँक घर कतए अछि?" "मधुबनी " "हमहुँ ओमहरे क छी? " एहिठाम की करैत छी?" "किछु नहि । गाम चल गेल रही। माएक श्राद्ध कएक आबि रहल छी ।काज ताकि रहल छी । “ "ओ! केहन काज तकैत छी?" "जएह भेटि जाए । एहिमे हमर कोनो पसिंद की भए सकैत अछि?" "अहाँ काल्हि हमरा ओहिठाम आउ । हम अपन बाबूसँ गप्प करबनि ।" ओ अपन मोबाइल नंबर आ पता लिखा देलथि। हम बहुत खुश रही । एकरा एकटा चमत्कारे कहि सकैत छी जे दिल्लीसन जगहमे अपन लोक भेटि जाथि आ ओहो एहन मदतिगार होथि ।बसस्टापआबि गेल छल ।उतरैत , उतरैत हम ओकर नाम पुछलिऐक । ओ बजलीह –“लता”। हम बससँ उतरि गेलहुँ ।बससँ उतरैत काल पलटिकए देखलिऐक । ओहो हमरे दिस ताकि रहल छलि । हम बससँ उतरि अपन डेरा पहुँचलहुँ । डेरा पहुँचतहि माए मोन पड़ि गेल । तरह-तरहक बातसभ मोनमे घुमैत रहल  । बहुत मोसकिलसँ दूबजे रातिमे जा कए निन्न भेल। रबीन्द्र नारायण मिश्र, पिताक नाम : स्वर्गीय सूर्य नारायण मिश्र, माताक नाम : स्वर्गीया दयाकाशी देवी, बएस : ६६ बर्ख, पैतृक ग्राम : अड़ेर डीह, मातृक : सिन्घिआ ड्योढ़ी, वृति : भारत सरकारक उप सचिव (सेवा निवृत्त)/ स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, दिल्ली(सेवा निवृत्त), शिक्षा : चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालयसँ बी.एस-सी. भौतिक विज्ञानमे प्रतिष्ठा : दिल्ली विश्वविद्यालयसँ विधि स्नातक प्रकाशित कृति : मैथिलीमे:- १. ‘भोरसँ साँझ धरि’ (आत्म कथा), २. ‘प्रसंगवश’ (निवंध), ३. ‘स्वर्ग एतहि अछि’ (यात्रा प्रसंग), ४. ‘फसाद’ (कथा संग्रह) ५. `नमस्तस्यै’ (उपन्यास) ६. विविध प्रसंग (निवंध ) ७.महराज(उपन्यास) ८.लजकोटर(उपन्यास)९.सीमाक ओहि पार(उपन्यास)१०.समाधान(निवंध संग्रह) ११.मातृभूमि(उपन्यास)१२.स्वप्नलोक(उपन्यास)१३.शंखनाद(उपन्यास)१४.इएह थिक जीवन(संस्मरण) In English:- 1.The Lost House (Collection of short stories), 2.Life is an art हिन्दी में – १.न्याय की गुहार(उपन्यास) (उपरोक्त पोथीसभ pothi.com, amazon.com आओर www.flipkart.com पर सँ कीनल जा सकैत अछि) इमेल : mishrarn@gmail.com ब्लोग : mishrarn.blogspot.com  एमजोनक लेखक पृष्ठ : amazon.com/author/rnmishra ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। जगदीशप्रसाद मण्डल आमक गाछी (धारावाहिक उपन्यास- दोसर खेप) 2. धीरेन्द्रक डेरासँ निकैल जगमोही सड़कपर आबि बैट्री इंजनबला रिक्सा पकैड़अपन डेरा विदा भेल। ऐठामसँ दू किलोमीटरपर जगमोहीक डेरा छइ। जहिना मौसम उतरने धरतीमे पड़ल बीज एकाएक जीवन धारण करैले क्रियागत होइए तहिना ने मनुखोक जीवनमे अछि। विद्यार्थी जीवनक अन्तिम छोड़पर जहिना जगमोही पहुँच चुकल अछि तहिना ने धीरेन्द्रो पहुँचले अछि। साल भरिक पछाइत तँ दुनूकेँ नवजीवन[i]मे प्रवेश करबेक छइ। ओना, धीरेन्द्र अपन लक्ष्य निर्धारित कऽ चुकल अछि जे बी.ए. केला पछाइत अपना ढंगसँ अपन जीवन निर्माण करब मुदा जगमोही अखन अनिसचितताक स्थितिमे अछि। ओना, उमेरक हिसाबसँ जगमोही बालिग भऽ चुकल अछि। नबालिगे धरि ने बाल-बच्चाक पूर्ण भार माता-पिताकेँ रहै छैन मुदा जखन बेटा-बेटी बालिग भऽ जाइए तखन तँ विचारणीय प्रश्न बीचमे आबिये जाइए। रिक्सापर चढ़ि जगमोही धीरेन्द्रकेँ कहलक- “फेर भेँट हेतइ।” भेँटक घॉंट करैत धीरेन्द्र बाजल- “जरूर, जरूर भेँट हेतइ।” ओना, इंजिनबला रिक्साक लेल दू किलोमीटरक दूरी बहुत नहियेँ भेल, तँए जगमोहीक मनमे कोनो ओहन प्रश्ने ने उठल जे भविसक विचार करैत, मुदा मनमे अपन विरहाइत भविस तँ नाचिये रहल छेलइ। डेराक आगूमे रिक्सा लगिते रिक्साबलाकेँ भाड़ा दैत जगमोही अपन डेराक कोठरीमे पहुँच,किताब रखि बेसुध भऽ ओछाइनपर ओंघरा गेल। जहिना समुद्रमे जुआरि उठैए तहिना जगमोहीक मन रूपी समुद्रमे जिनगीक जुआरि उठए लगल। एकसंग अनेको विचार जगमोहीक मनमे उठए लगल। बी.ए.क तेसर वर्षमे चारि मास बीत गेल, मात्र आठ मासमे कौलेजसँ निकैल जाएब। उन्नैस-बीस बर्खक उमेरो भइये गेल अछि, जइसँ जहिना माएकेँ बिआहक चिन्ता पकड़ने छैन तहिना पितोजी सेहो चिन्तिते रहै छैथ। दहेजक जे रूप समाजमे बनि गेल अछि तइसँ पितोजी आ माइयो अपन मनोनुकूल परिवारमे बिआह करा पौता कि नहि। एकटा ऑफिसक किरानीक ओकातिये केते भऽ सकैए। माल-जाल जकाँ खरीद-विकरीक बेवहार मनुक्खोक बनि गेल अछि..! कोनो एक विषयक एक पहलूपर जगमोहीक निर्णय भइये ने पबैत कि धॉंइ-दे दोसर उठि जाइत रहइ।अन्तमे, अपन विचारकेँ ठामेपर रोकि जगमोही ओछाइनसँ उठि, माए लग पहुँचल। सुवासिनियोँ बजारसँ सामान कीनि डेरा पहुँचले छेली कि बेटीपर नजैर पड़लैन। जहिना गुम्हराएल मेघ देख लोक मौसम बदलैक सम्भावना बुझए लगैए तहिना जगमोहीकेँ देख सुवासिनीकेँ भेलैन। मुदा केहनो रोग देहमे किए ने हुअए ओ तँ बजला पछातिये नीकसँ बुझल जाएत। ओना, किछु बाहरी रोग देखलोसँ बुझल जाइते अछि मुदा भीतरिया रोगकेँतँ बुझेला पछातिये कियो बुझिसकैए। अधखिलल फूल जकाँ जगमोही खिलखिलाइत माएकेँ कहलक- “माए, मामागामक एकगोरे संगे-संग पढ़ै छैथ।” नैहरक नाओं सुनिते सुवासिनीक मनमे जेना जलधर भऽ गेलैनतहिना बिहुसैत बजली- “कद-काठी केहेन अछि?” ‘कद-काठी’क पुछैकमाने सुवासिनीक मनमे छेलैन जे अखियाइस कऽ लड़काक परिचय बुझब। किएक तँ गामक जे नवतुरिया अछि ओ तँ सुवासिनीकेँ नैहर छोड़ला पछाइत जन्म लेलक मुदा चेहरो-मोहरोसँ तँ अनुमानित भॉंज परिवारक लगिते अछि। मुदा लगले सुवासिनीक विचार बदैल आगू बढ़ि गेलैन। आगू बढ़िते सुवासिनी बजली- “नामो-ठेकान पुछलहक?” अपनाकेँ संयमित करैत जगमोही बाजल- “रस्ते-रस्ते भेँट भेला, तखन केना नाम-ठेकान पुछितिऐन! मुदा एते तँ बुझले अछि जे धीरेन्द्र नाम छिऐन।” ‘धीरेन्द्र’ सुनि सुवासिनी अपन नैहरक दियाद-वाद दिस नजैर खिड़बए लगली, मुदा केतौ थाह-पता नहि लगलैन। बजली- “किछु गपो-सप्प भेलह?” जगमोही- “बहुत गप-सप्प तँ नहि भेल मुदा एते तँ ओहो मने-मन बुझबे केलैन जे हमरे गामक धीकधी छी।” धीरेन्द्रक गाम–प्रेमनगर–सँ कोस भरि हटल जगमोहीक गाम–रामपुर–अछि। ओना, एक राज्य आ एक जिलाक गाम रहितो गाम-गाममे अन्तर सेहो अछिए। अन्तरक केतेको कारण अछि। जहिना दू गामक भौगोलिक बनाबट दू रंग रहने आर्थिक स्थितिमे अन्तर होइए तहिना राजनीतिक दृष्टिसँ सेहो होइते अछि। राजनीतिकविचारधारा सेहो भौगोलिके बनाबट जकाँ अनेको रंगक अछिए जइसँ समाजिक रूप-रेखा सेहो अलग होइते अछि। डेरा अबिते रामलखन कपड़ा बदैल टंकीमे हाथ-पएर धोइ अपन बैसार रूममे पहुँचला। तैबीच जगमोही चाह बना नेने छल। ओना, ऑफिससँ एला पछाइत रामलखन अपन डेरामे तत्खनात् चाहेटा पीबै छैथ, किएक तँ ऑफिस छोड़ला पछाइत ऑफिसेक केन्टिनमे जलखै कऽ लइ छैथ। तेकर कारण अछि जे ऑफिसक स्टाफकेँ सुविधानुसार जलखै-खेनाइ भेट जाइ छैन। आने दिन जकाँ पॉंचो गोरे माने- रामलखन, सुवासिनी आ तीनू बहिन जगमोही, संगे-संग चाह पीबए लगल। ऑफिससँ डेरा रामलखन अपन संगी- कन्हैयाक संग सभ दिन पएरे एबो करै छैथ आ जेबो करिते छैथ जइसँ रस्तामे अपन-अपन गाम-घरक संग अपन-अपन परिवारक सुख-दुखक गप-सप्प सेहो करिते छैथ...। ऑफिससँ निकलला पछाइत कन्हैया अपन परिवारक बात उठबैत बजला- “रामलखन भाय, दरमाहाक पाइसँ परिवार चलाएब बोझ बनि रहल अछि। समयपर दरमाहा नइ भेटने सभ दिन संगी सबहक कर्जखौक बनले रहै छी।” कन्हैयाक बात सुनि रामलखनोक मन ठमकलैन मुदा लगले मनमे उठि गेलैन जे सोझ-साझ बजने वा कनने थोड़े समस्या मेटाएत। तँए, जीवन दिस इशारा करैत रामलखन बजला- “कन्हैया भाय, ईहो ने देखबै जे एक्के रेंकक कुरसीपर अहूँ छी आ रामानन्दो अछि,दुनू गोरेक दरमहोएक्के रंग अछि।मुदा रामानन्द केना एतेक हाइ स्तरक रहन-सहन बना नेने अछि!” रामलखनक प्रश्नपर जाबे कन्हैया विचार करितैथ ताबे डेरा पहुँच गेला। होइतो अहिना छै जे सभ-दिनासंगीक बीच किछु प्रश्न जँ पछुआइयो गेल तँ ई आशा बनले रहैए जे औझुका छुटलाहा गप काल्हि पूरा लेब। ओना, गप-सप्पक क्रममे रामलखन परिवारिक जिनगीक बात उठा चुकल छला मुदा जखन अपन डेरा एला आ चाह हाथमे लेलैन तखन कन्हैयाक विचार अनायास मनमे उठलैन। उठिते जखन अपन परिवारक समस्या आ समाधानपर नजैर गेलैन तखन बुकौर लागए लगलैन। परिवारमे तीन-तीनटा बेटी अछि, दोसर कोनो ने आमदनी अछि आ ने कोनो आशा..! बेटा अछि नहि। गाममे जे पैत्रिक सम्पैत अछि ओ दू भॉंइक भैयारीक अछि। तहूमे सरकारी नोकरी रहने समाजोक नजैरमे किछु-ने-किछुइज्जत बनियेँ गेल अछि। अखनो गाम-घरमे बेटा-बेटीक बीच पढ़ाइ-लिखाइक दूरी बनले अछि। तैठाम जखन जेठ बेटीकेँ बी.ए. तक पेढ़ेलौंतखन छोट दुनू बेटीक अधिकार सेहो बनियेँ जाइए। जँ से नहि करब तखन परिवारो आ समाजोमे दोखी बनबे करब आ जँ से करब तखन जहिना अखन मास पुरैत-पुरैत हाथ खाली भऽ जाइए, जइसँ किछु-ने-किछु पैंच-उधार भइये जाइए, तहिना ने आगूओ चलत। तहूँमे आब आधासँ बेसी समय नोकरीक समाप्ते भऽ गेल। अखन तक मात्र परिवार चलैत रहल अछि। अगुआएल काजमे मात्र जेठ बेटीकेँ कौलेजमे आ छोट दुनू बेटीकेँ हाइ-स्कूलमे पढ़बै छी। सालभरिक पछाइत जगमोही कौलेजसँ निकलत आ दुनू छोट बेटी एकाएकी कौलेज पहुँचत। तैसंग एका-एकी बिआहोक समस्या सिरचढ़ हेबे करत...। परिवारक विचार रामलखनक मनकेँ तेना बोझिल बना देलकैन जे आन दिनक अपेक्षा मुँहक चुहचुही मन्हुआ गेलैन।मुदा सुवासिनीक मन ठीक विपरीत छल, नैहरक बात सुनितेहिनकर सुतल स्मृति जागि मुँहक चुहचुहीकेँ बढ़ा देलकैन जइसँ अपन नैहरक गप-सप्प करए चाहै छेली। अपन जगैत जिज्ञासा आ पतिक मन्हुआएल मनकेँ देख सुवासिनी बजली- “मन किए खसल देखै छी?” ओना, सुवासिनीक विचार रामलखनकेँ अनसोंहाँत लगलैन मुदा पत्नीकेँ अशिक्षित मानि अनसोंहाँतकेँ मनमे दाबि लेला। अनसोंहाँत ई लगलैन जे अपने परिवारक समस्याक समाधानक बाट जोहि रहल छी, जइसँ परिवार उठि कऽ ठाढ़ो हएत आ आगूओ बढ़त,मुदा तेकर ठीक विपरीत पत्नी बाजि रहल छैथ जे मन बड़ खसल देखै छी..! परिवारक बीच रामलखन आगूक कोनो बात-विचार करबकेँ अखन नीक नहि बुझि रहल छला।नइ बुझैक कारण मन गवाही दऽ रहल छेलैन जे जहिना अपने पत्नीक संग परिवारकेँ उठि कऽ दौड़ैक विचार कहियो ने कऽ पबै छी तहिना ने आनो-आन अछि। रहबो केना ने करत, अखन जे परिवार सबहक धार बनि गेल अछि ओ यएह ने जे नीक-सँ-नीक आ अधला-सँ-अधला वृत्ति अपनाकऽ पुरुख कमा आनैथ आ महिला घरक भीतर खाइ-पीबैक ओरियान करती। जइसँ पुरुख जहिना परिवारक भीतरक जानकारीसँ अनाड़ी बनल रहै छैथ तहिना उपार्जनमे भागीदारी नइ भेने महिलो अनाड़ीएबनल रहै छैथ। प्रश्न अछि पुरुख-नारीक संयोग-सहयोगसँ परिवारकेँ आगूक दिशा दिस बढ़ाएब। खाएर...। परिवारक बीच माने पति-पत्नीक बीचक जिनगीमे रामलखन जेतेक डुमकी लगबै छला तेतेक नव-नव विचारो जगै छेलैन आ दुनू परानीक बीचक जिनगीमे ओझरी सेहो लगि रहल छेलैन। जइसँ चेहराक रूप-रंग आरो बेदरंग बनल जा रहल छेलैन। रंगो तँ रंग छी किने जे बेदरंगो होइए, सदरंगो होइए आ कुदरंगो होइते अछि। लगले रामलखनक मनमे उठलैन जे परिवारकेँ जानब आ जनैत रस्तासँ आगू बढ़ब बाल-बोधक खेल नहि छी, तँए नीक हएत जे अपने किए ने असगरे पहिने ढुड़िया पसाइरपरिवारकेँ नीक जकाँ ढुढ़ि ली।तइले यएह ने नीक हएत जे परिवारक सभ सदस्यकेँ अपना-अपना दिस माने अपन-अपन जीवनानुकूल दिस विचार घुमा दिऐन आ अपनो अपना दिस घुमि कऽ विचारी। तँए, नीक हएत जे पत्नीकेँ कहिऐन- ‘अखन मन भारी लगैए तँए कनीकाल आराम करए दिअ, तैबीच अहूँ सभ अपन-अपन काज देखू।’ ..विचारैक क्रममे तँ रामलखन विचारि लेला मुदा आगू किछु बजैसँ पहिने दोसर विचार मुँहकेँ रोकि दइ छेलैन।  ‘बाजी की नइ बाजी, बाजी तँ की बाजी आकि नइ बाजी, अही बीच रामलखनक मनओझरा गेलैन। ओझरा ई गेलैन जे जँ बाजि दिऐ जे ‘मन भारी लगैए’आ जँ ओ सभ कोनो बिमारीक आगमन बुझि डॉक्टर-वैद करए लगत, तखन तँ अनेरे ने सभ अपना-अपनीकेँ तेतेक आहि-आलम करत जे जेहो कनी-मनी गुद्दी माथमे बँचल अछि सेहो नोचा जाएत। तइसँ नीक जे किए ने कनी झूठे बाजि ऑफिसेक काजक नाओं लगा बाजी जे तेहेन फाइल अछि जे की लिखब से फुरबे ने करैए..!रामलखनक मन मानि गेलैन जे एतेक झूठ बजलासँ बेड़ा पार भऽ सकैए। बजला- “तेहेन जुग-जमाना आबि गेल अछि जे ऑफिसक फाइल कि फाइल जकाँ रहल, ओ तँ फाइलोमे फाइल अछि। लगले अफसरक हुकुम अबैए जे पक्षमे लिखैक अछि आ प्राते भने आदेश बदैल विपक्षमे लिखैक भऽ जाइए। एके फाइलकेँ मास-मास दिन तक रगड़ैत रहै छी तैयो अधखिजुए रहैए..!” ऑफिसक नाओं सुनि जहिना सुवासिनी तहिना तीनू बेटी सेहो रामलखनकेँ आराम करैक मोहल्लत दऽ देलकैन। ओना, जहिना कोर्टमे कोनो जमानत हाकिम लगले दए दइ छैथ,आ कोनोकेँ मासक-मास रगड़ला पछाइत देबो करै छैथ आ नहियोँ दइ छैथ, तेना रामलखनकेँ नहि भेलैन। तेकर कारण रामलखनक अपन बिसवासू विचारसँ बेसी कारगर सुवासिनीक मनमे नैहरक जिज्ञासा आ जगमोहीक मनमे धीरेन्द्रक जिज्ञासा छल। खाएर जे छलसे छल मुदा रामलखनकेँ सोचै-विचारैले जमानत तँ भइये गेलैन। ओना, पितासँ नुका जगमोही माएसँबात करए चाहिते छल। तेकर कारण तेकठसँ बॉंचब रहइ। किएक तँ तेकठ विचार बेसी झंझटिया भेने काज नोकसान करबे करैए। गोटे-आधे काज सुधरैए नइ तँ बेसी दुरिये होइए। ऐठाम तेकठ भेल- पहिल सुवासिनीक नैहरक विचार, दोसर- जगमोहीक मातृकक विचार आ तेसर- रामलखनक सासुरक विचार।ओना, ऐठाम परिवारक विचार अछि मुदा से नहि, विचारोक रूपमे  बेकतीगतो एहेन विचार होइते अछि जे रंग-बिरंगक विचार मनमे उठने,माने दोकठ, तेकठ, चौकठ भेने केतौ कियो निर्णये ने कए पबैए तँ केतौ गलतीए निर्णय कए लैत अछि। आ से एहेन कोनो अदने[ii] लोकटा-केँ होइए सेहो बात नहियेँ अछि। अदनाक कोन बात जे पदनोकेँ[iii] होइते अछि, जइसँ अधलासँ बेसी अधला होइक सम्भावना बनिते अछि। द्वापर युगमे जखन महाभारत शुरू होइक सम्भावना बनल, जइमे बड़का-बड़का योद्धा सभ दुनू दिस छला, एक पक्षमे कृष्णो छला। जइ पक्षमे कृष्ण छला तइमे तीनटा सेसर[iv] योद्धा रहैथ- अर्जुन, अभिमन्यु आ बर्बरी। गम्भीर रूपसँ जखन कृष्ण विचार केलैन तखन अर्जुन आ अभिमन्यु तँ एक पटरीपर बुझि पड़ैन मुदा बर्बरी कुछप बुझि पड़लैन जइसँ मनमे शंका उठलैन जे हो-न-हो एक दिस दुनू पक्षक बीच, माने कौरब आ पाण्डवक बीच युद्ध शुरू हुअए आ दोसर दिस अपने पक्षमे–माने पाण्डव पक्षमे–वैचारिक लड़ाइ उठि जाए,तखन हार छोड़ि जीतक आशा करबे मुरुखपना हएत किने। मुदा से बर्बरी मानबो करत तखन ने, आ जँ नइ मानए तखन? ओना, मानबो-मानबक परिवेश बनिते अछि जइ परिवेशक हवा किछु-ने-किछु सभकेँ प्रभावितो करिते अछि। खाएर.., अन्तमेरणकौशल कमिटीमे विचार कए बर्बरीकेँ लड़ाइसँ दूर रहैक विचार देल गेल। मुदा अपन जान अर्पित केनिहार बर्बरी छलाहे, ओहोएक शर्त्त लगा रणक्षेत्रसँ अलग रहैक विचार मानलकैन। ओ शर्त्त छल जे युद्धभूमिमे बर्बरी शामिल नइ हएत मुदा देखत अपना आँखिसँ..! तखन बर्बरीकेँ गरदैनसँ ऊपर काटि रणभूमिक बगलमे जे पहाड़ छल ओइपर रखि देल गेल। जइसँ गरदैन कटल बर्बरीक आँखि महाभारतक सभ किछु देखलक। धीरेन्द्रक चर्च सुनने सुवासिनीक मनमे नैहरक अपन बालपन मोनपड़ए लगलैन,जइसँ जगमोहीए जकाँ रूप बनि गेलैन। जिनगीक रूपो तँ जिनगीमे मनोरंजन करिते अछि। केतौ जुआनीक बीच हारल जीतल जुआनीक मनोरंजन बनैए तँ केतौ अस्सी बर्खक वृद्ध आठ बर्खक बेदरा बनि माइक शासक बनि शासनो करिते अछि जे हमरा फल्लां बौस खाइले नइ देमे तँ हम घरसँ भागि देशक सिपाही बनि बन्दूक चलबैले सीमापर चलि जेबौ...। दस बर्खसँ सुवासिनी नैहर नइ गेल छेली तँए नैहरक जिज्ञासा बढ़ब सोभाविके छेलैन। धीरेन्द्रसँ आगूक गप-सप्प करैक भार जगमोहीकेँ सुमझबैत सुवासिनी बजली- “बुच्ची, बहुत दिन नैहर गेना भऽ गेल, माइयो-बाप नहियेँ रहला जे नैहर रहत, मुदा परिवारो आ गामोक समाज तँ नैहरेक भेला, तँए जाइक विचार मनमे होइए।” ओना, जहिना-जहिना समाजिक परिवेश बनैए आ बदलैएतहिना-तहिना ओ हवा सभकेँ लगबो करैए। आ से सिर्फ प्रभाविते बेकतीकेँ लगैए से बात नहि, सभकेँ लगैए। तँए, परिवारमे तीनू बेटीक पालन-पोषण, पढ़ाइ-लिखाइ आ बिआह-दान करैक समस्या जहिना रामलखनकेँ छैन तहिना सुवासिनियोँकेँ छैन्हे। ओना, आन स्त्रीगण जकाँ सुवासिनी नहियेँ छैथ जे दुरगमनियॉं कनियॉं बनि जखन नैहरसँ निकलए लगली आ स्त्रीगण सभ जे दुनू परानीकेँ राजा-रानी बना विदा केलकैन, से अखनो अपनाकेँ बुझिते छैथ। सुवासिनी समझदार औरत छैथ, बेटा नहि रहितो बेटी सभकेँ अपन जिनगी जीबै-जोकर चेतनशील बनबै पाछू सभ दिन प्रयत्नशील रहली। अपन परिवारिक आर्थिको स्थितिकेँ नीक जकाँ बुझिये रहल छैथ, मुदा जिनगीक आगूक बाटपर नमहर खाधि सेहो देखिये पड़ि रहल छैन। परिवेशक बहैत हवामे सुगन्धक संग दुर्गन्धो तँ अछिए। ओ अछि जे बेटीकेँ जेतेक पढ़ाएब तेतेक बेसी खर्च बिआहोमे हेबे करत। जे कोंढ़ बनि समाजक करेजकेँ खोखैर-खोखैर खाइते अछि। की एकरा झुठलौल जा सकैए जे जइ बेटीकेँ पढ़बैमे माए-बाप अपन जी-जान लगा, अपन जीवनकेँ पछुअबैत बेटीकेँ नीक-सँ-नीक शिक्षा दइ छैथ,मुदा ओकरे जखन बिआह करैले समाजमे डेग बढ़बै छैथ तखनपहाड़बनि दान-दहेज हुनकर रस्तारोकै छैन की नहि? की समाजक लोक ऐ बातकेँ नहि बुझि रहल छैथ जे पढ़ल-लिखल सक्षम मनुखक आगमन परिवारमे भऽ रहल अछि, ऐठाम दान-दहेज केतेक महत् रखैए।मुदा परिवेश एहेन दूषित बनल अछि की नहि? समाजक बीच बनल परिवेशकेँ समाजे बदैल सकैए, तँए ओहन समाज निरमा कऽ ओइ परिवेशकेँ रोकि कऽ सुधारए पड़त वा बदलए पड़त। ओहन समाज बनत केना? प्राय: सभ समाजक बीच एहेन एकोटा परिवार नहि अछि जे बेटा-बिआहे बेर राजा आ बेटी-बिआहे बेर अपनाकेँ भिखमंगा नहि कहै छैथ। ओना, बजैकाल बजबो करिते छैथ जे ‘दान-दहेज’ पाप छी। ऐ लेल जहिना माता-पिताकेँ संयुक्त मोर्चा–परिवारिक रूपमे–बनबैक खगता छैनतहिना फुटा-फुटा दुनूकेँ अलग-अलग मोर्चा–माने पुरुखक अलग आ महिलाक अलग–बना अपनाकेँ ठाढ़ करए पड़तैन। तहिना सभ जनबो करै छी आ बजितो छीहे जे युवाशक्ति देशक भाग्य निर्माता होइ छैथ। जे खुद एहेन परिवेशक शिकार बनि चुकल छैथ। बनियेँ नहि चुकल छैथ, अबैबला पीढ़ी सेहो बनबे करत। ओना, अविकसित समाज रहने पहिनहिसँ अनमेल बिआह–वैचारिक स्तरपर–होइत आबि रहल अछि, मुदा आब जखन समाज आगू बढ़ल,तखनो जँ वएह विचारधारा बहैत रहततखन समाज समस्या मुक्त केना हएत? एक-एक जन जखन समस्या मुक्त हेता तखने ने देशक गति तेज हएत आ स्वतंत्रताक वास्तविक रूप परगट हएत। धीरेन्द्रसँ गप-सप्प करैक अधिकार माइयक मुहसँ सुनिते रंग-रंगक रंगीन रोशनी जगमोहीक मनमे जागए लगल। ओना, सभ विचारकेँ मनेमे दाबि जगमोही दोसर दिनसँ कौलेजक रीडिंग रूममे एक घन्टा धीरेन्द्रक संग पढ़ैक विचार मनमे रोपि लेलक। जहिना मिथिलाक सभ गाम अछि तहिना प्रेमनगर सेहो अछिए। आने गाम जकाँ प्रेमनगरमे सेहो साइयो देवी-देवताक पूजो होइते आबि रहल अछि आ मनतो अछिए। तहिना दर्जनो रंगक जातियो आ जाइतिक बीच फूट-फूट देवी-देवता सेहो अछिए। जइसँ रंग-रंगक बेवहारो आ विधि-विधान सेहो अछिए। सभ किछु रहितो जहिना परिवार-परिवारक बीच अपन-अपन बेवहार रहने कोनो-कोनो परिवार नीको अछि आ नीकक माइनसेहो अछिए तहिना धीरेन्द्रक परिवारक अपन खास बेवहारो आ विचारो अछिए। धीरेन्द्रक पिता–जीबेन्द्र–क विचार अखनो छैन्हे जे एकटा बेटा अछि, जँ तेकरो बिआहमे दान-दहेज लऽ बेच लेब, तखन अन्तिम संस्कारमे मुखाग्नि केकरासँ दियाएब? तैसंग अनका जकाँजीबेन्द्र ईहो नहियेँ मानै छैथ जे बेटा निमित्ते बिआहमे जेतेक बेसी नगद-नारायण गनाएब तेतेक बेसी इज्जतदार बनब। ओना, समाजमे किछु लोकक बीच जहिना एक दिस दहेज नहि लेबकेँ प्रतिष्ठा बुझल जाइए तहिना जेतेक अधिक लेब तेतेक नमहर प्रतिष्ठित बनैक विचार सेहो अछिए। पिताक प्रभाव धीरेन्द्रपर सेहो भरपूर पड़ल अछिए। जइसँ बिआहमे दान-दहेजक विचारेधीरेन्द्रक मनसँ मेटा गेल अछि। जइ परिवारमे दान-दहेजक बेवहार अछि तइ परिवारक विचारो आ बेवहारोमे अन्तर ओइ परिवारसँ अछिए जइ परिवारमे दान-दहेजक चलैन नहिअछि। भलेँ एक-दोसरकेँ किए ने निच्चोँ देखबए आ नीच कहबो करए। पॉंच बजे तक कौलेजक रीडिंग रूम खुजल रहैए। अपन निर्धारित समय अनुकूल रहने धीरेन्द्र रीडिंग रूम पहुँच चुकल छल। किछुकालक पछाइत जगमोही सेहो पहुँचल। संजोग एहेन बनल जे रीडिंग रूममे दोसर कियो आन विद्यार्थी नहि छल। एक तँ सुनसान जगह, दोसर पहिल दिन जगमोहीक रहनेपूछ-आछ करैक सम्भावना सेहो बनियेँ गेल छेलइ। तहूमे टटके काल्हि भेँटो-घॉंट आ किछु गपो-सप्प भेले छेलै जइसँ विचारो तरगरे रहइ। धीरेन्द्र लग पहुँच जगमोही बाजल- “अहाँक चर्च माइयो लग केने छेलौं।” माइयक नाओं सुनिते धीरेन्द्र चौंकल। चौंकल ई जेजगमोहीसँ किछु गप-सप्प भेला पछाइत जे मनमे प्रेमासिक्त विचार अंकुरए लगल छल ओ मात्र संगी-साथीक बीचक नहि रहि परिवारिक रूपमे बदलैक बाट पकैड़ रहल अछि! ओना,  बेकतीगत विचार आ परिवारिक विचारमे किछु-किछु अन्तर सेहो रहिते अछि। मुदा जहिना केतौ-केतौ अन्तर अछि तहिना ईहो तँ निर्विवाद सत्य अछिए जे नद-नालाक पानि मिलि जहिना नदीक रूप बनैए तहिना परिवारोजनक विचार एकत्रित भेला पछातिये ने परिवारक विचारधारा बनैए। ओना, परिवारक जे रूप-रेखा अखन समाजमे बनि गेल अछि ओ एहेन विचारसँ दूर भइये गेल अछि, तेकर कारण सदियोसँ अबैत गुलामीक जंजीर अछिए। गुलामीक जंजीर एहेन सूत्रवत् बनि गेल अछि जे परिवार हुअ आकि समाज,सभठामबेकतीगत विचार ऊपर उठि गेल अछि आ सामुहिक विचार दबि कऽ निच्चाँ उतैर गेल अछि। प्रश्न अछि जे ओ–नीच-ऊँच–केना एकरस भऽ एकरसतासँ चलत? परिवार हुअ कि समाज आकि समाजक बीच जे परिवार अछि सेजाधैरएकरस भऽ एकरसता नहि धड़तताधैर जिनगी बेठेकान चलबे करत, जइसँ जिनगीक सभ सीढ़ी बेठेकान भइये जाएत। जखन जिनगीक ठेकानेनहि रहत तखन मनुखक जिनगी केहेन हेबा चाही एकर कल्पनो तक असम्भवे रहत किने। जगमोहीक बात सुनि धीरेन्द्र बाजल- “ओना, अखन हम नीक जकाँ नहि बुझि रहल छी मुदा...।” ‘मुदा’क पछाइत धीरेन्द्रक मनमे उठल जे जँ अखन जगमोहीक माएकेँ बहिनमानि सम्बोधित करब तखन जगमोही स्वत: निच्चाँक खाड़ीमे उतैर जाएत। जखने निच्चाँक खाड़ीमे उतरत तखने दुनू गोरेक बीचक जे एकरूपताअछि ओ बाधित हेबे करत। ‘मुदा’क पछाइत धीरेन्द्रक चुप्पी देख जगमोही अपनविचारक खोंरना चलबैत बाजल- “मुदा की?” ओना, साएसँ ऊपरेकुरसी-टेबुल सजल अध्ययन कक्ष अछि,तँए नमगर-चौड़गर-पेटगर अछिए। जइसँ दू गोरेक बीचक बातक ध्वनि हेराएले रहत, तहूमे मात्र दुइए बेकती अछि। बॉंकी जे तीन आदमी–पुस्तकालयक कर्मचारी–छैथोओ सभऑफिसेक काजमे लागल छैथ। जगमोहीक प्रश्न सूचक बात सुनि धीरेन्द्र अपनाकेँ चौकन करैत अपनमनक विचारकेँ बदैल बाजल- “अहाँक डेट ऑफ वर्थ की अछि?” जगमोही बाजल- “एगारह फरवरीकेँ बीस बर्ख पुरि गेल आ अहाँक?” जगमोहीक प्रश्न सुनि धीरेन्द्र मुस्की दैत बाजल- “हम हारलौं, अहाँ जीतलौं!” धीरेन्द्रक मुहसँ ‘हारि-जीत’ सुनि जगमोही चौंकल। चौंकिते मनमे उठलै- अखन तँ परीक्षाक घड़ी पछुआएले अछि तैबीच कोन परीक्षा भऽ गेल जे दुनू गोरेक बीच हारि-जीतक निर्णय भऽ गेल! धीरेन्द्र मनमे मुस्की भरैत जे विचारक सरोवरमे जगमोही वौआएल अछि। ओना, एकरा वौआएब नहि कहल जा सकैए। वौआइत तँ लोक ओतए अछि जेतए नाम-ठेकान रहितो जगह हेराएल रहैए। मुदा ऐठाम से नहि अछि। धीरेन्द्र जँ अपन जन्म तिथि खोलि निर्णय सुनौनेरहैत आ जगमोही नहि बुझैत तखन ने जगमोहीक वौआएब होइत, से तँ छिपा कऽ धीरेन्द्र अखन मनेमे रखने अछि।..जगमोही बाजल- “आपमौजी जहिना दुनियोँ अछि तहिना दुनियॉंक लोको तँ अछिए, अपन-अपन विचारे सभ दुनियोँ देखैए आ अपने-अपने विचारे बजबो करैए, जइसँ केतौ बजड़बो करैए आ केतौ बजाड़ितो अछिए।” जहिना अनठेकानल वाण धीरेन्द्र चलौने छल तहिना जगमोही सेहो चला धीरेन्द्रक करेजकेँ बेध देलक। अपन वेधाइत विचारसँ प्रभावित होइत उनटा चालि–पाछू मुहेँक डेग–पकैड़ धीरेन्द्र बाजल- “ऐबेर प्रेमनगरमे खूब आम फड़ल अछि, चलू सभकियो संगे आम खाइले।” ‘प्रेमनगरक आम’ सुनिते जगमोहीकेँएकाएक बारह बर्ख पहिलुका खेलहा आम मोन पड़लै,बाजल- “नानाक गाछीक ओहन सिनुरिया आम खेने छी जेकर खोंइछा पानोसँ पातर आ सुआद कपूरोसँ नीक रहइ।” धीरेन्द्रक आम जगमोहीक गुलाबखास भऽ गेल। धीरेन्द्र बाजल- “कहने जे छेलौं जे अहाँ जीत गेलौं आ हम हारि गेलौंसे बुझलिऐ?” जगमोही- “नइ!” धीरेन्द्र- “जहिना अहाँक जन्मतिथि एगारह फरबरी अछि तहिना हमर एगारह जनवरी अछि। अहाँसँ एक मास जेठ भेलौं ने?” बिच्चेमे जगमोही मुड़ी डोलबैत बाजल- “हँ से तँ भेबे केलौं।” जगमोहीक स्वीकृति सुनिते धीरेन्द्र धॉंइ-दे बाजल- “एक मास जेठ रहितो हमहूँ ओतइ ने छी जेतए अहाँ!” जगमोही- “की मतलब?” धीरेन्द्र- “मतलब यएह जे जेठ रहितो हमहूँ ओही क्लासमे पढ़ै छी किने। तँए कहलौं जे एकमास हमर हारल भेल अहाँक जीतल भेल।” जहिना ताशक गेम-गेम खेलमे नहलापर दहला आ बीबीपर बादशाह फेक मारल जाइए तहिना धीरेन्द्रपर अपन विचार फेकैत जगमोही बाजल- “एकर तँ दोसरो पक्ष अछिए किने। जहिना अहाँ अपनाकेँ हारल मानि रहल छी तहिना ने हमहूँ अहाँसँ एक मास हीनभेलौं आ अहाँहमरासँ श्रेष्ठ भेलौं।” जगमोहीक विचार सुनि धीरेन्द्र ठमकल। ठमकल ई जे जगमोहियोक कहब अनर्गल नहियेँ अछि। ताशोमे तँ अहिना होइते छै जे केतौ दहलाक नहला मारैए तँ केतौ बीबीक अभावमे बादशाह बेमौत मरैए। मुदा प्रश्न तँ बीचमे उठिये जाइए जे जँ दुनू पक्षक तर्क अकाट्य हुअए तखन निर्णयक रस्ता की हएत?अपन ओझराएल मनक विचारक बनमे धीरेन्द्रकेँ एकटा ओहन वृक्ष देखाए पड़लै जे नम्हरो आ पुरानो अछि। बाजल- “एकटा बात कहू ते जगमोही, अखन तकलोकक मनमे किए एहेन धारणा बनल अछि जे लड़का-लड़कीक वैवाहिक सम्बन्धमे लड़कीसँ बेसी उमेरगर लड़का हेबा चाही?देखै छी सालक-साल अधिक उमरदार लड़काक संग सम्बन्ध स्थापित होइत आबि रहल अछि। अहाँ एकरा की बुझै छी?” धीरेन्द्रक विचार जगमोही नीक जकाँ नहि बुझि पएल तँए प्रश्नकेँ सूत्रखोल करैत बाजल- “की मतलब?” अपन विचारकेँ स्पष्ट करैत धीरेन्द्र बाजल- “ओहुना गाम-समाजमे देखै छी जे कोनो परिवारमे पुरुख अधिक उमेर तक जीबै छैथ आ कोनो परिवारमे नारी अधिक उमेरगर भऽजीब रहल छैथ, तँए उमेरक हिसाबसँ दुनू एकरंगाहे भेल किने?” जगमोही- “हँ, से तँ भेबे कएल।” धीरेन्द्र- “तखन किए कम उमेरक लड़कीकेँ अधिक उमेरक लड़काक संग बिआह होइए?” धीरेन्द्रक विचारमे जगमोही हेरा लागल मुदा एक क्लासक संगी रहने मनमे थोड़ेक ग्लानि तँ जगबे केलै जे धीरेन्द्रक प्रश्नक उत्तर नइ दए पाबि रहल छी। मुदा लगले मन कलैश उठलै। कलैशते मनमे भेलै जे अखन दुइये गोरे ने छी, ओहुना दू गोरे जँ कोनो विचारक विनिमय इमानदारीसँ करए तँ निर्णयो इमनगर हेबे करत...। तैबीच धीरेन्द्रक मनमे सेहो उठलै जे अखन तक जहिना हम कोर्सक किताबमे अपन बुधिकेँ घेर रखने छी तहिना ने जगमोहीक सेहो घेराएले छइ। तैबीच एहेन चर्चे कोन अछि जेकरा जगमोहीक चूक मानल जाए? विचारक बीच सिमानपर अबिते धीरेन्द्रक मन बिहुसल,बिहुसिते धीरेन्द्रक मुँहपरमहसूस कएल मुस्कान छिटकए लगलै। धीरेन्द्रक मुस्की भरल मुस्कान देख जगमोही बाजल- “ऐबेर मातृकक आम खेबे करब।” धीरेन्द्र- “असगरे नहि, तीनू बहिनक संग मतो-पिताकेँ लऽ चलियौन।सभकियो संगे प्रेमनगरक आम खाइ, ई हमर विनम्रआग्रह।” [i]परिवारिक जीवन [ii]साधारण [iii]पद प्राप्तिबला लोक [iv]सिरगर ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। नन्द विलास राय एमेली साहैब बेरुका उखड़ाहा। समय लगधक दू-अढ़ाइ बजैत। थोलबा काकाकेँ दुखनी काकी कहलकैन- “अँइहै!बिरधापिलसीन केतेक दिनसँ नै भेटल गऽ। रानीगढ़ी परतीपर जे हाकिम सभ आएल छल गऽ आ ओकरा जे कागत-पत्तर देने रहिऐ तेकरो तीन माससँ ऊपरे भेल गऽ। जा कऽ मुखियाजी सँ पूछौ गऽ ने जे कहिया भेटतै बिरधा पिलसीन।” तैपर थोलबा काका बजला- “अच्छा! हम अखने जाइ छी मुखियाजी लग, पुछै छिऐन कहिया भेटत। मुखियोजी कि कोनो दूरमे छैथ, गामेक तँ छथिन मुखियाजी।” थोलबा कक्काक उमेर लगधक 75-76 बर्ख। तनाहिये दुखनी काकीक उमेर 70-71 बर्ख हएत। दुनू गोरेकेँ वृद्धावस्था पेंशन भेटैत छैन। छ: माससँ वृद्धावस्था पेंशनक भुगतान नै भेल हेन। सरकारी स्तरपर कागज-पत्तरक जाँचक लेल रानीगढ़ी परती- मझौराक पंचायत भवनपर शिविर लागल छल जइमे लाभुक सभसँ आधर कार्ड आ पासबुकक छाया प्रति मांगल गेल रहए। थोलबा काका आ दुखनी काकी दुनू परानी अपन-अपन आधार कार्ड आ बैंक-पासबुकक छायाप्रति शिविरमे पंचायत सचिवकेँ देने रहथिन। कागज-पत्तर देला चारि माससँ बेसी भऽ गेल मुदा अखन धरि पेंशनक भुगतान नै भेलैन। थोलबा काका पढ़ल-लिखलक नाओंपर सोलह दूना आठ। एकदम भोला-भला। छह-पाँच किछ ने बुझैत सुधंग लोक। हुनका घरसँ दसे घरक बाद मुखियाजीक घर। थोलबा काका मुखियाजीक दरबज्जा लग पहुँचला तँ दरबज्जाक आगाँ एकटा चरिचकिया गाड़ी लागल देखलखिन। दलानक भीतर किछु गोरेक बाजब सेहो सुनलखिन। ओ थकमका गेला। तखने मुखियाजीक बेटा अमित एकटा ट्रेमे पान-सुपारी, इलायची, जर्दा-पत्ती लऽ कऽ आँगनसँ निकलल। थोलबा काकाकेँ ठाढ़ देख बाजल- “मर्र!काका ठाढ़ किए छी। दलानपर चलू ने।” तैपर थोलबा काका बजला- “हौ बौआ, एहेन अगए-बगए लऽ कऽ दलानपर केना जाएब। चरिचकिया गाड़ी देखै छिऐ। केतए-कऽ पाहुनसभ छथुन?” अमित बाजल- “काका पहुन नै छैथ। विधायकजी छथिन।” थोलबा काका बजला- “विधायकजी?नै बुझलियह।” अमित कहलकैन- “विधायकजी नै बुझलिऐ,यौ एम.एल.ए. साहैब।” थोलबा काका- “अच्छा, एमेली साहैब!एमेली साहैब छथुन। हौ बौआ कहअ तँ भोँटक समय आबि गेल, कहिया छी भोँट?” अमित बाजल- “नै काका!अखन भोँटक समय नै आएल हेन।” थोलबा काका मने-मन सेाचए लगला। जखन भोँटक समय नै आएल अछि तखन एमेली साहैब केतए एला हेन? बजला- “अच्छा बौआ, अखन जाइ छिअ, पछाइत आएब।” ई कहैत थोलबा काका घरमुहाँभेला आ अमित पानक ट्रे लऽ दलानक भीतर गेल। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। जगदीशप्रसाद मण्डल हुसैत लोक दोनवारी हाटसँ पियाजक बीआ लऽ घुमल रही कि रंगलाल भायकेँ तीन-चारि गोरेक संग लछमीपुर गामक चौकपर चाह पीबैत देखलयैन। चारि-पाँच गोरे हमहूँ सभ टेम्पूमे बैसल अबैत रही, चारि लग्गा पाछुए रही कि रंगलाल भाय हमरो देख लेलैन। एक तँ सासुरमे घरपर रहने सारि-सरहोजिक धक्का, दोसर सार सबहक धक्का चौकपर लगिये रहल छेलैन, मुदा देखते, चाहक दोकानपर सँ उठि हाथमे चाहक गिलास नेने बीच रस्तापर ठाढ़ भऽ बामा हाथे डरेबरकेँ इशारा करए लगला जे गाड़ी रोकू। अपने टेम्पूक पैछला सीटपर बैसल अपन पाँच किलो पियाजक बीआक हिसाब मिलबैत रही जे अपना ऐठाम पचास रूपैये किलो बीआ बीक रहल अछि। पाँच किलोक दाम भेल अढ़ाइ साए रूपैआ, तीस रूपैये किलो दोनवारी हाटपर देलक, जेकरदाम डेढ़ साए भेल। साए रूपैआ अपना ऐठामसँ कम भेल। लगले मन उनैट कहलक जे भरि दिन समैयो तँ नहियेँ बरदाइत आ चौदह साए टेम्पू भाड़ामे जे पौने दू साए रूपैआ हिस्सा लगल सेहो नहि लगैत। तखन लाभ की भेल? फेर लगले मन, लगले मन ऐ दुआरे जे मन तेहेन पीछड़ाह अछि जे जहिना लगले पकड़मे अबैए तहिना लगले छिछैलियो जाइए। मनकेँ पकैड़ कऽ जखन रखबै कि तरे-तर तेना छिछैल कऽ निकैल जाइए जे बुझबो ने करबै। तही काल टेम्पू रूकि गेल तँ पुछलिऐ- “टेम्पू किए रूकल?” तैबीच रंगलाल भाइक नजैर सेहो पड़ि गेलैन आ अपनो जे आगू तकलौं तँ रंगलाल भायकेँ देखलयैन। रंगलाल भाय सभकेँ सामूहिके आग्रह करैत बजला- “सभ कियो उतैर कऽ चाह-पान कऽ लिअ, पछाइत जाएब।” सबहक संग अपनो टेम्पूसँ उतैर चाहक दोकानपर एलौं। जहिना अप्पन नजैर रंगलाल भायपर छल तहिना रंगलालो भाइक नजैर हमरापर छेलैन। मुदा जहिना रंगलाल भायसासुरक समाजक अगुआ छला, अगुआ ऐ मानेमे जे गौंआँ-घुरूआकेँ देखते, चिन्ह-पहचीन भइये जाइए तैठाम गाम-समाजक तँ सभ चौकेपर बैसल नहि रहै छैथ, मुदा अनगौंआँ कुटुमकेँ आगत-भागत नइ भेने गामक हँसारत होइते अछि। ओ हँसारत बँचेबाक उपाइये की अछि, तँए अपना गामक समाजक अगुआ सेहो भेबे केला, तँए हुनके जुतिये-भाँतिये ने चलए पड़त। सएह केलौं। चुपचाप चाहबलाक ब्रेंचपर मन मारि कऽ माने पछुआ बनि बैस रहलौं। तइ बीच अपन मन कनी कुदैक गेल। कुदैक ई गेल जे जे काज केने, माने पियाजक बीआकीनने जा रहल छी, ओइ काजमे अपनो हूसबे केलौं। पाँच किलो बीआ आठ धुर खेतमे रोपल जाएत। ओतबे पियाजक खेती अपने साले-साल करै छी। ओना, रकबामे आठे धुर चौमास अछि, मुदा तेते जोरगर बनौने छी जे आठे धुरमे पाँच मनसँ ऊपरे हएत जे कम नहि हएत, साले-साल पियाज होइते अछि। पियाजक उपजापर सँ नजैर ससैर अपन हूसल काजपर गेल। पाँच किलो बीआ कीनैमे जे भरि दिन बरदेबो केलौं आ तैपरसँ पचहत्तैर रूपैआ खरचो बेसी भेल, तैसंग अपने जे खेलौं-पीलौ से अलगे बेसी भेल। मुदा ई वेपारी सभ तँ दू-तीन क्वीन्टल करि कऽ बीआ कीनने अछि, जेकर प्रति किलोक हिसाबसँ बीस रूपैआक बचत होइ छै, दू क्वीन्टलमे चारि हाजरक लाभ होइ छै, ओकर जँ समयो बरदाएल तैयो लाभे भेल। अपने तँ घाटा भेबे कएल। तँए वेपारी (गौंआँ वेपारी) सबहक जीत आ अपन हार मन मानि रहल छल। यएह बात जँ पहिने मनमे आबि गेल रहैत तँ घाटा नहि होइत। मुदा आब तँ जे हेबाक छल ओ भइये गेल, तखन माथे धुनि कऽ की करब। शत-प्रतिशत मन कबुल कऽ लेलक जे जरूर हूसलौं। ओना, मनो तँ मन छी, लगले केना शत-प्रतिशत हारि मानि लेत। जँ हारए लागत तँ कनी करोटिया भऽ जाएत, सोल्होअना चीतसँ पट आकि पटेसँ चीत केना हएब मानि लेत। अपन हार-जीतक बीच मन दौड़-बरहा करए लगल। लगले मनमे दोसर विचार उठि कऽ ठाढ़ भेल। ठाढ़ ई भेल जे अपने किसान छी कि वेपारी? जे वेपारी अछि ओ पूजीकेँ हारि-जीतक खेलौना बना खेलैए, मुदा अपने तँ किसान छी, जँ से सोचि खेती करब तखन खेती कएल पार लगत। किसानक लाभ तँ ओ भेल जे अपन खेती अपना ढंगे नीक जकाँ भऽ जाए। खेतमे उपज की भेल आ केते भेल,से की सोल्होअना अपने हाथमे अछि। रौदी-दाही, पानि-पाथर, झाँट-बिहाड़ि सभ किछु ने बीचमे बाधक अछि। हँ, समैयक हिसाबसँ माने जइ पूजीवादी समाजक बीच छी, तइमे लाभ-हानिक हिसाब तँ जोड़ए पड़त, मुदा जखन खेत जीवनक आधार अछि आ खेती जीविका, जइ बले जीब रहल छी, तँखन तँ जिनगीक आधारपर ने हानि-लाभक हिसाब करब। साइयो रंगक खेतो अछि आ साइयो रंगक उपजो तँ अछिए। जइसँ कोनोमे जँ घट्टो भेल तँ कोनो मे लाभे तँ होइते अछि। तइमे खेतेक उपज से ने अपन सभ काजो चलैए। ई दीगर भेल जे नमहर बाधा भेने किसानक जिनगी संकटग्रस्त भइये गेल अछि,मुदा तइमे किसानक कोन दोख। देशेक ओहन अव्यवस्थित व्यवस्था खेतीक बनि गेल अछि जेकरा भरोसमंद नहियेँ कहि सकै छी। मुदा किछु अछि तैयो एते तँ अछिये जे देशक बहुसंख्य लोक खेतियेपर जीब रहला अछि। मन असथिर भऽ गेल। अपन पनचैती अपने कऽ लेलौं जे वेपारीक हिसाबसँ पिआजक बीआ कीनैमे घाटा भेल, मुदा किसानी जिनगीक हिसाबसँ घाटा नइ भेल। अपने किसान छी, वेपारी छी नहितखन हूसलौं केना। नइ हूसलौं। तैबीच सभ कियो चाह पीब पान सेहो खा लेलौं। ओना, रंगलाल भाय अपन समाजिकतो निमाहैत अपन नजैर गौंए सभपर रखने छला, मुदा बुझि पड़ल, मनक भीतरसँ किछु भितरिया बात करए चाहि रहला अछि। जे सबहक बीच सम्भव नहि अछि। अपनो मन ई जरूर छल, किए तँ बुझल अछि जे रंगलाल भाय थाना-पुलिसक (कानूनक) डरे गामसँ पड़ाएल छैथ, जे बात अपने टा बुझल अछि। तँए मनमे बनल अछि जे किछु उपराग रंगलाल भायकेँ देब जरूरी अछि। ओना, मनमे ईहो उठि रहल छल जे हारल वा मारलकेँ आरो ऊपरसँ हराएब वा मारब नीक नहि, मुदा समयपर छोड़बो तँ उचित नहियेँ हएत। पान खा जखन सभ टेम्पूमे बैसल आ अपने गाड़ीमे चढ़ए लगलौं कि पाछूसँ रंगलाल भाय कुरता पकैड़ इशारामे कहला- “गौरीकान्त, तोरासँ कनी काज अछि।” गाड़ीमे चढ़ैत रही, कहलयैन- “केहेन काज अछि, बाजू।” रंगलाल भाय बजला- “कनी फुटमे चलह। ऐठाम कहब नीक नहि हएत।” रंगलाल भाइक बात सुनि मनमे ठहैक गेल जे केसेक विषयमे किछु कहता। कहलयैन- “चलू, मुदा बेसी देरी नइ लगाएब।” रंगलाल भाय सोझ-सपट आदमी छैथ। ओना, एहेन लोक सभ गाममे प्राय: अधासँ बेसी रहै छैथ, मुदा समझदारीक अभावमे कोनो अपन विचार वा विचारधारा नहियेँ होइ छैन। केतौ परिवारिक सम्बन्धे तँ केतौ दियादीक सम्बन्धे, केतौ जातिक सम्बन्धे तँ केतौ टोलबैयाक सम्बन्धे किछु-ने-किछु गलती काजमे संग रहने सदिकाल हूसल काज करिते छैथ। ओना, रंगलाल भायकेँ एते बिसवास हमरापर जमले छैन जे गौरीकान्ते टा एहेन लोक समाजमे अछि जे मनसँ जँ चाहत तँ कुशक कलेप लगने बिना बँचा सकैए। दुनू गोरे सड़कसँ हटि लग्गा चारियेक हटल जे पूवारी कात आमक गाछ अछि, तइ निच्चाँमे बैसलौं। बैसते जे रंगलाल भाइक मुँहपर नजैर देलिऐन कि देख पड़ल जे दुनू आँखि नोरसँ ढबकल छैन, जइसँ बोली नहि फुटि रहल छैन। मन दहलए लगल। दहलाइत-दहलाइत ओइ जड़िमे पहुँच गेल जइ दुआरे रंगलाल भाय अपन सभ कारोबार छोड़ि गामसँ नुका कऽ पड़ाएल सासुर धेने छैथ।रंगलाल भाइक चेहराक कुम्हलाएल रूप देख अपन मनकेँ मारैत बजलौं- “भाय, वेपारी गौंआँ-घरूआक संग छी, गाड़ी भाड़ामे अछि, तइ संग कच्चा वेपारक सौदा छी, तँए बेसी समय नइ अछि। की कहै छी?” रंगलाल भाय बजला- “गौरी, तूँ छोट भाय छियऽ। अपन गलती जँ रहैत तँ तोरा कहितयऽ जे पचास जूता लोकक बीचमे मारह। मुदा..!” मनमे जे किछु विचार घुमि रहल छल ओ जेना एक्केबेर सभटा मनसँ उड़िया कऽ अकासमे चलि गेल, तहिना भेल। बजलौं- “रंगलाल भाय, चलू संगे गाम चलू।” थानाक डरसँ डेराएल रंगलाल भाइक मन थरथराए लगलैन। जइसँ सुपुट बोल बनि नहि रहल छेलैन जे किछु बजितैथ। थरथराइत रंगलाल भाइक मन देख हमहीं बजलौं- “भाय, अपना सभ किछु छिऐ तैयो पुरुखे छिऐ ने। पुरुख जे जहलसँ डर करत तखन जीब कए दिन सकैए।” हमर बात सुनि रंगलाल भाइक मनक मलिनता कनी कमलैन जइसँ हूबा जगलैन। बजला- “गौरी, तूँ जे कहबह से करैले तैयार छी।” रंगलाल भाइक बदलैत रूप देख कहलयैन- “अखन गौंओ सभ छैथ। जखने पाँच गोरेक बीच रहब तखने रस्तामे कियो किछु ने कहत। जखन गाम पहुँच जाएब तखन कोट-कचहरीक बात रहत, ओ बुझल जेतइ।” रंगलाल भाय उठि कऽ ठाढ़ होइत टेम्पू-डरेबरकेँ, ओतैसँ माने आमक गाछक निच्चेसँ जे चारि लग्गा पूबारि कात छल, कहलखिन- “डरेबर साहैब, जँए एतेकाल अँटकलौं तँए पाँच मिनट औरो अँटकू। हमहूँ चलब।” दुनू गोरे गाछ लगसँ उठि दोकानक आगूमे एलौं। रंगलाल भाय पुन: आग्रह करैत सभकेँ–माने टेम्पूमे बैसल गौंआँ सभकेँ–कहलखिन- “एकबेर आउरो चाह पीब लिअ।” टेम्पूमे बैसल सभ वेपारी हाथक इशारा दैत बजला- “नइ, अहीं जल्दी तैयार होउ।” रंगलाल भाय अपन जेठ सारकेँ कहलैन- “बौआ, अहाँ कनी घरपर सँ झोरा नेने आउ। हमहूँ गाम जाएब।” गौंआँ सभकेँ देख वा सात-आठ दिन भेने माने रंगलाल भाय सात-आठ दिनसँ सासुरमे छैथ, नाकुर-नुकर केने बिना सार झोरा आनि कऽ दऽ देलकैन। अपने लग पैछला सीटपर रंगलाल भायकेँ बैसौलिऐन। मन भेल जे सासुरमे रहैक गप-सप्प उठाबी, मुदा अपने मन रोकलक जे सभ रंगक लोक गाड़ीमे बैसल छैथतँए कोट-कचहारीक गप करब उचित नहि। गाड़ी आगू बढ़ल। अपन गामक सीमानमेअबिते बजलौं- “भाय, अखन अहाँ जाउ, कखनो निचेनमे आगूक गप करब।” रंगलाल भाय थकथका गेला। अपना ऐठाम जेबाक डेगे ने उठि रहल छेलैन। अपनो मनमे भेल जे गामे छी, रंग-बिरंगक लोक गाममे अछि। जँ देखते कोनो लौकिया जा कऽ चौकीदारकेँ जानकारी दऽ देतैन तँ अनेरे सभ काज बिगैड़ जाएत। जहिना खेतक पानिक बँचाउ लेल लोक माइटिक मछार बना रोकैए तहिना अपनो मनमे भेल जे नीक हएत पहिने थाना जा बड़ाबाबूसँ किछु समय माँगि लेब जे अमुख तारीख तक रंगलाल भाय कोर्टमे उपस्थित भऽ जेता, तँए बीचक समय देल जाए। बजलौं- “रंगलाल भाय, अहाँ ताबे एतै, हमरे ऐठाम रहू, अखन देखबे केलौं अछि जे एक तँ दस कोसक गाड़ी सफर भेल अछि तैपर भरि दिन दौड़-बरहा भेल अछि जइसँ मन असकताएलो अछि आ भरियाएलो अछिए। तँए पहिने नहा कऽकिछु खाएब, पछाइत बुझल जेतइ।” रंगलाल भाय मानि गेला। मुदा रहला हमरे ऐठाम। नहेलौं। सूर्यास्तक समय सेहो भऽ गेल छल। ओना, पाँचे किलो मीटरपर थाना अछि। तहूमे भरि दिन ने रंग-बिरंगक काजक धुमसाही थानामे रहैए मुदा ओ दिन बीतैत कमि सेहो जाइत अछि। थाना जाइसँ पहिने, मनमे भेल जे बिना कोनो चर्च-बर्च केनहि जँ थानासँ तत्काल बचाबक उपाय कऽ देबैन तखन तँ रंगलाल भाय जहिना बेर-बेर गलती करैत आबि रहला अछि तहिना फेर करता। तँए सभ बात जँ, माने गलती भेल काजकेँ, मुँहपर कहि अपना मुहेँ गलती मना लेब तखन भविसमे गलती हेबाक सम्भावना कमि जाएत। सएह केलौं। थाना डेग उठबैसँ पहिने बजलौं- “रंगलाल भाय, मोन अछि कि नहि जे भोँट लेलक कोइ आ अहूँ केसमे फँसि गेलौं?” रंगलाल भाय जेना बिसैर गेल छला, किए तँ पनरह बरखपैछला घटना छल। पाछू उनैट-उनैट मोन पाड़ए लगला। मुदा मोन नहि पड़लैन।भेल ई छल जे राजनीतिक दल चुनाव लड़ल अपन-अपन सिमबॉलपरमुदा गाम-गाममे बनि गेल जाइतिक पार्टी। अपन जाइतिक उम्मीदवार सेहो मैदानमे रहैन। रंगलाल भायकेँ जाइतिक तेहेन-तेहेन मंत्र कानमे पड़ि गेलैन जे पक्का कार्यकर्ता बनि गेला। दू बजे दिनमे,चुनाव दिन,दू जाइतिक बीच मारि भऽ गेल। केस भेल। किछु गोरे पकड़ा कऽ जहलो गेल मुदा तइमे रंगलाल भाय बँचल रहला। मुदा केसमे नाम आबिये गेलैन। चुनावक प्रक्रिया सम्पन्न भेल। मुदा मुद्दालहक पकड़-धकड़ चलिये रहल छल। थानाक बड़ाबाबू इमानदार लोक। कहब जे पाइ-कौड़ीक कारोबार नइ करै छला से हुनक भितरिया कारोबार जे रहल होइन, मुदा आदमी चिन्हैक अद्भुत क्षमता छेलैन। बिसवासु लोक बुझै छला। रंगलाल भाइक चेहरा देख अपने बजला जे एहेन लोक जरूर फँसौआ छैथ। केससँ नाम काटि देलखिन। बिना कोनो परेशानीसँ जान बँचि गेलैन। पैछला बात (केसक बात) मन नहि पड़ने रंगलाल भाइक नजैरमे अपने झूठा बनए लगलौं। मुदा एकेटा घटना थोड़े भेल अछि, तेसर घटना छी। पैछला केसक बात छोड़ि दोसर घटनाक चर्च करैत बजलौं- “भऽ सकैए भाय, हमहीं बिसरैत होइ। अच्छा ई कहू जे रधिया आ रधबाबला मोन अछि कि नहि?” रधिया आ रधबाक घटना ई अछि जे दुनू जनता कौलेजमे पढ़ै छल। दुनू दू जाइतिक। कौलेज कि हाइ स्कूलमे लड़का-लड़कीमे सम्बन्ध बढ़ैक हजारो कारणमे एकटा ईहो छी जे एक विषयक विद्यार्थी रहने सेहो सम्बन्ध बनैए। ओना, सम्बन्ध अनेको रंगक बनैए मुदा तइमे एकटा ईहो अछि जे दुनू गोरे संगी बनि जीवन बिताएब। ऐठाम संगीक माने पति-पत्नीक रूपसँ अछि, दोस्ती वा मैत्रीसँ नहि अछि। ओना, हाइये स्कूलसँ रधिया आ रधबाक बीच आकर्षण बनए लगल छल मुदा कौलेजमे अस्फुट रूप धारण कऽ लेलक। दुनू संगीत विषयक विद्यार्थी, एक गबै छलआदोसर ताल मिलबै छल, माने साज बजबै छल। एक-दोसराक बीच बिआह करैक विचार भेल। मुदा समाजिक बन्धनक डर, दुनूक बीच बाधा बनले छल। एक दिन दुनू गाम छोड़ि राता-राती पड़ा गेल। भोर होइत-होइत सौंसे गामक चर्चाक विषय दुनूक भागब बनि गेल। गोटी चलनिहार गाम-घरमे भरले अछि। अंगरेजी शासनक सम्बन्धमे कहल जाइए जे ‘फूट डालो शासन करो’क नीति ओकर छल। मुदा बात तेतबे नहि अछि। गाम-समाजक बीच एहेन विचार लोकक मनकेँ तेना पकड़ने अछि जे समाजकेँ सूत्रवद्ध हुऐ ने दऽ रहल अछि। कानून केहनो मोट-मोट किताबक किए ने हुअए जे ‘वयस्क भेला पछाइत माने अठारह बरख पुरला पछाइत, अपन-अपन विचारक मालिक सभ होइए, ऐ ले दोसरकेँ एतराज नइ हेबा चाही। मुदा की समाजोमे सएह अछि? दुनू जाइतिक बीच कहा-कहीसँ शुरू भेल आ मारि-पीट भऽ गेल। ओइ मारि-पीटमे रंगलाल भाय सेहो रहैथ। लाठी लगने कपार सेहो फुटल रहैन। तँए अखनो ओहिना मोन छैन। रंगलाल भाय बजला- “हँ, कि करितौं, घरक लोकसँ लऽ कऽ टोलबैया तक तेना कहए लगला जे जाइतिक पगड़ीक सबाल छी, एकरा नइ बँचाएब तखन जीविये कऽ की करब। तँए ओइमे चलि गेलौं।” कहलयैन- “महिना दिन जे माथमे पट्टी बन्हने रहलौं, से कियो बाँटि लेलक?” एक तँ अपन हूसल काजक, दोसर मास दिन धरिक दवाइ-दारू, पथ-परहेजमे सेहो लगले छेलैन, तइपर सँ मास दिन अपने किछु कऽ नहि सकला, जे पछाइत बुझलैन। तँए मन रहबे करैन। ओना, केस दुनू दिससँ भेल छेलै, माने दुनू जाइतिक बीच, तँए थानो थोड़े अनठा देलक। जइसँ पकड़-धकड़ नहि भेल रहैन। मुदा जमानत बेरमे पाँच दिन जहल (कसटडी) मे जरूर रहैथ। ओना, दुनू रधिया-रधबा कोर्टसँ बिआह कऽ लेलक मुदा तत्काल गाम नहि आएल। दुनूकेँ अपन हुनर रहबे करै, दू सालक पछाइत गाम आएल। ताबे गामक वातावरण सेहो शान्त भऽ गेल। रंगलाल भाय बजला- “गौरी, ओही बेर दुनू कान पकैड़ कऽ ऐँठ लेलौं जे एहेन-एहेन काजक भीर नइ जाएब।” अपन गलती जखन रंगलाल भाय कबुल लेलैन तखन आगू किछु कहबकेँ उचित नहि बुझि बजलौं- “ऐ बेर की केलिऐ?” ऐ बेरक घटना सेहो गामेक छी। आपराधिक वृत्तिक लोक छठूलाल अछि। आपराधिक वृत्ति दू रंगक होइए। एकटा होइए जे एके तरहक अपराध जाबे जीलौं ताबे केलौं। माने जँ चोरी करै छी तँ चोरिये टा केलौं, वा पॉकेटमारी करै छी तँ पॉकेटमारियेटा केलौं। जेकरा एकचलिया अपराधी कहल जाइए।आ दोसर होइए सघन अपराधी। सघन अपराधी ओ भेल जे अनेको रंगक अपराध वृत्तिसँ जुड़ल रहैए। छठूलाल सेहो बहुचलिया अपराधी छीहे। जहिना बहुचलिया नशेरी होइए तहिना बहुचलिया अपराधी सेहो होइए। बहुचलियो नशेरी ओ भेल जे सभ तरहक नशापान करैए आ एक तरहक नशापान केनिहार एकचलिया नशेरी भेल। ओना, गामक अधिकांश लोक छठूलालकेँ बुझै छैथ जे ओ (छठूलाल) समाजक अहितैशी लोक अछि मुदा छठूलालक चेहराक जे दोसर पक्ष अछि ओ अछि समाजक हितैशी लोकक, जे छठूलालक चेहराकेँ ओहिना झलमलेने अछि, जेनाविहारीलाल कहलैन-  ‘छीपौ छवीली मुँह लसै, नील अंचल चीर, मनो कलानिधि झलमलै, कालिन्दीकेँ नीर।’तइ संग छठूलालमे अपन देहोक बल माने शारीरिक तागत छइहे, जइसँ सभ बुझैए जे असगर-दुसगरकेँ के कहए जे पाँचो आदमीकेँ असगरे छठूलाल चटनी बना कऽ खा लेत। बजलौं- “छठूलालक जमानतदार कोर्टमे किए बनलिये जे ओ वारन्ट भेलो पछाइत कोर्टमे हाजिर होइते ने अछि, आ अहाँ-ऊपर अनेरे वारन्ट भऽ गेल अछि..!” कोर्ट-कचहरीक ओतबे बात रंगलाल बुझै छैथ, जेते बात केकरो मुहेँ जेतेक सुनने छैथ। तँए कानूनक मूल बातकेँ नहि बुझै छैथ। सोझमतिया लोक रंगलाल भाय छथिए जइसँ मन तँ पघिलए लगल मुदा गलतीक दण्ड मनसँ मेटाएल नहि छल, कनी तरैंग कऽ बजलौं- “अपने करनीसँ बिपैत बेसाहि लेलौं हेन आ आब पड़ाएल घुरै छी।” रंगलाल भाय बजला- “गौरी, धरमागती कहै छिअ जे अपन मन नइ छल जे छठूलालक पीठपोहू होइ, मुदा घरवाली तेना केली जे की करितौं..!” बजलौं- “अखन, अहाँसाती वएह जेल जेती?” रंगलाल भाय बजला- “बौआ गौरी, घरवालीक अपने पिसियौत भाए छठूलाल छिऐन, अपनो सारे भेल। तँए मन डोलि गेल। ऐ बेर कहुना कऽ बँचा दाए। तोरे सोझामे पचीस बेर कान पकैड़ कऽ उठब-बैसब जे जिनगीमे फेर एहेन काज नइ करब।” ओना, मनक बीख उतैर गेल छल मुदा ठोरपर तामस चढ़ले छल। बजा गेल- “जहल जाइले तैयार छी?” रंगलाल भाय बजला- “जान बँचैले जे करए पड़त, सभले तैयार छी।” बजलौं- “काल्हि संगे कोर्ट चलब।” अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। अमरेश कुमार लाभ २ टा बीहनि कथा १. लेबलीटिये बड्ड छन्हि ― केओ लड़िका नीक सन नै अछि नजरि मे, यौ ? ― से की ? आइ काल्हि लड़िका केँ के पुछै अइ, यौ ? लड़िका तँ ढ़ंगरिआएल अइ ? जे घर देखू , दू – चारि टा लड़िका अबस्से भेट जाएत l ― से तँ ठीके, मुदा ढ़ंग के भेटए तखन ने l ― लड़िका तँ एक सँ एक नजरि मे अछि l मुदा केहन लड़िका चाही, किनका लेल चाही, बाजबै किछ तखन ने, यौ l ― किनका लेल की, हमर अपने बच्चिया अछि l  रूप – रंग मे केओ काटै बला नै lM.A. पास केने अछि l काज – धाज मे सेहो निपुण l जोग्य लड़िका जदि भेट जाइ त’ पाइ सेहो गिनबै l ― एगो तँ बड्ड बेजोड़ लड़िका नजरि पड़ि रहल अछि, अहाँक बच्चिया जोग्य l एहि पोरकां साल नोकरी धरलक हेन, केंद्र सरकारक प्रथम वर्ग अधिकारी मे l पढ़ल – लिखल सेहो ओतबे l कोइ अवगुण नै l आउर तँ आउर माय – बाप केँ बड्ड आज्ञाकारी l ― से त ठीक अइ l घर – परिवार केहन छन्हि ? के – के संगे रहै छन्हि ? किछ जानकारी अछि की ? ― हँ, यौ l किएक नै रहत ! बड्ड भरल – पुरल परिवार छन्हि l माय – बाप तँ छथिन्हें l लड़िका भाई – बहिन मे दोसर नमबर पर l बड़का भाई नै किछु क’ पबिलै बियाह भ’ गेल छैक, दोसर नमबर पर लड़िका अपने भेल, तेसर बहिन भेलैक जे अखनि कुमारे छै, आ चौथा भाई अखनि नौकरी के तैयारी मे लागल अछि l हर दृष्टि सँ हमरा उपयुक्त लागि रहल अइ ई परिवार अहाँक कनियाँक बास्ते l कहियौ तँ बात चलबियै l ― की कहू ? लड़िका तँ हमरो बड्ड पसीन अछि l मुदा,लेबलीटिये (liabilities) बड्ड छन्हि ! २. बेटी बचाबू ―कनिको नीक नैं हेतै ओ सरधुआ केँ l डाक्टर अइ ओ, जरलाहा ? पाईयो ठगि लेलक आ सब उनटा l ― की भेलौक माय ? किएक एतेक तमसायल छें ? ― आँय रौ, तों एना पूछि रहल छें, जेना किछु जानिते नैं छें l ― कोनाक बुझबौ, किछु कहबें तखन ने ? ― बूझ त’, ओ कनियाँ केँ जीवने सँ ने खेलवार करलक ? ई तोहर तेसर संतान भेलौक l लोग बाग कहै जाय छैक कि बड़का आपरेसन सँ तीन सँ बेसी बच्चा नैं होइत छैक l अहि लेल ने कहने छलियौ जे पहिनहिंयें वो जाँच .... की कहै छै ......? जहिं मे बेटा हेतैक की बेटी पहिनहिंयें पता चलि जाय छैक करबा लेबा लेल l त’ आब तोहिं बाज ? की फायदा भेल ? पाईये ने ठगलक ओ ? कहलक होएत बेटा आ भ’ गेल बेटी l ― एहि में की नोकसान भ’गेलैक ? आइ काल्हि बेटा-बेटी में किछ फरक नैं l ― हमरा ज्यों पहिने पता चलि जतिएक जे बेटी हेतैक तखनि ............. ― एहि लेल त’ हम तोरा, बिनु जाँच करौने ओहिना कहि देने छलियौक l - अमरेश कुमार लाभ , हरनीचक, अनीसाबाद , पटना –८००००२ अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। कुसुम ठाकुर अलग राज्यक माँग कतेक सार्थक? ओना तs हमर स्वभाव अछि हम नहि लोक के उपदेश दैत छियैक आ नहि अपन मोनक भावना लोकक सोझां मे प्रकट होमय दैत छियैक । हम सुनय सबकेर छियैक मुदा हमरा मोन मे जे ठीक बुझाइत अछि ओतबा धरि करैत छियैक। एकर परिणाम इ होइत अछि जे हमरा सलाह देबय वाला केर कमी नहि छैक। सब के होइत छैन्ह जे ओ जे कहताह कहतिह से हम अवश्य मानि लेबैन्ह।अपन अपन भावना केर हमरा पर थोपय के कोशिश बहुत लोक करय छथि। परोपदेश देनाइयो आसान होइत छैक । मुदा हमर भलाई केर विषय मे के सोचि रहल छथि इ ज्ञान तs हमरा अछि । मुदा दोसराक विचार सुनालाक किछु फायदा सेहो छैक। लोकक विचार सुनि अपन विचार व्यक्त करय मे आसानी होइत छैक आ आत्म विशवास सेहो बढैत छैक। एकटा कहबी छैक "कोठा चढ़ी चढ़ी देखा सब घर एकहि लेखा " सब ठाम कमो बेसी एके स्थिति छैक, मुदा दोसरा केर विषय मे कम बुझय मे, आ देरी सs बुझय मे आबैत छैक, अपन तs लोक के सबटा बुझल रहैत छैक। पारिवारिक हो सामाजिक हो वा देशक, सब ठाम आपस मे विचार मे मतान्तर होइत रहैत छैक जे कि मनुष्य मात्र के लेल स्वाभाविक छैक आ हेबाक सेहो चाहि । जखैन्ह दस लोकक विचार होइत छैक तs ओहि मे किछु नीक किछु अधलाह सेहो विचार सोंझा मे आबैत छैक। मुदा आजु काल्हि सब ठाम स्वार्थ सर्वोपरि भs जाइत छैक । लोक के लेल देश समाज सs ऊपर अपन स्वार्थ भs गेल छैक। संस्था व न्यास केर स्थापना होइत छैक समाज आ संस्कृति केर उत्थानक लेल । मुदा संस्थाक स्थापना भेलैक नहि कि ओहि संस्थाक मुखिया पद आ कार्यकारणी मे सम्मिलित होयबाक लेल राजनीति शुरू भs जाइत छैक । एकटा संस्था मे कैयैक टा गुट बनि जाइत छैक । आ ओहि मे सदस्य ततेक नहि व्यस्त भs जाइत छथि कि हुनका लोकनि के सामाजिक कार्य आ संस्कृति के विषय मे सोचबाक फुर्सते कहाँ रहैत छैन्ह । आ ताहू सs जौं बेसी भेलैक आ बुझि जाय छथि जे आब हुनक ओहि ठाम चलय वाला नहि छैन्ह तs एक टा नव संस्था केर स्थापना कs लैत छथि। सामाजिक कार्य केर नाम पर साल मे एकटा वा दू टा सांस्कृतिक कार्यक्रम कs लैत छथि आ बुझैत छथि समाज केर उद्धार कs रहल छथि । ओहि कार्यक्रम मे पैघ पैघ हस्ती , नेता के बजा अपन डंका बजा लैत छथि।बाकि साल भरि गुट बाजी आ साबित करय मे बिता दैत छथि जे हुनक कार्यकाल मे कार्यक्रम बेसी नीक भेलैक। हम मानय छियैक जे कार्यक्रम अपन संस्कृति केर आइना होइत छैक, मुदा ओ तs स्थानीय कलाकार के मौक़ा दs कs सेहो करवायल जा सकैत छैक। इ कोन समाजक उत्थान भेलैक जे लोक सs मांगि कs कोष जमा कैल जाय आ मात्र कार्यक्रम मे खर्च कs देल जाय। बहुतो एहेन बच्चा शहर वा गाम मे छथि जे मेधावी रहितो पाई के अभाव मे आगू नहि पढि पाबय छथि। दवाई केर अभाव मे कतेक लोकक जान नहि बचा पाबय वाला परिवारक मददि केनाई समाजक उद्धार नहि भेलैक? आय काल्हि तs लाखक लाख खर्च करि कs एकटा कार्यक्रम कैल जाइत छैक। कहय लेल हम ओहि महान हस्ती केर पर्व मना रहल छी। कार्यक्रम करू मुदा कि अपन गाम शहर के भूखल के खाना खुआ तृप्त कs ओहि महान हस्ती के श्रद्धाँजलि नहि देल जा सकैत छैक। इ तs मात्र एक दू टा समाज के सहायतार्थ काज भेलैक ओहेन कैयैक टा सामाजिक काज छैक जे कैल जा सकय छैक । यदि सच मे लोक के अपन समाज आ संस्कृति सs लगाव छैन्ह तs जतेक कम संस्था रहतैक ततेक नीक काज आ समाजक उत्थान होयतैक। ओहि लेल मोन मे भावनाक काज छैक नहि कि दस टा संस्थाक । देश मे नित्य नव नव राज्यक माँग भs रहल अछि। ओहि मे मिथिलांचलक माँग सेहो छैक। हमरा सँ सेहो बहुत लोक पूछय छथि "अहाँ मिथिला राज्य अलग हेबाक के पक्ष मे छी कि नहि "? हम एकहि टा सवाल हुनका लोकनि सँ पूछय छियैंह "कि राज्य अलग भेला सँ मिथिलाक उत्थान भs जेतैक "? इ सुनतहि सब के होइत छैन्ह हम मैथिल आ मिथिलाक शुभ चिन्तक नहीं छी। बुझाई छैन्ह जे अलग राज्य बनि गेला सँ मिथिलांचलक काया पलट भs जेतैक । एक गोटे जे अपना के मिथिला के लेल समर्पित कहय छथि, साफ़ कहलाह "मैथिल के मोन मे मिथिला के लेल जे प्रेम हेतैक से दोसरा के नहि" । हमर हुनका सँ एकटा प्रश्न छल "कि पहिने बिहार मे मैथिल मुख्य मंत्री, मंत्री नहि भेल छथि "? जवाब भेंटल " ओ सब मैथिल छलथि मिथिलाक नहि"। अलग राज्य भेलाक बाद जे कीयो मुख्य मंत्री होयताह ओ मिथिलाक होयताह आ मात्र मिथिला के लेल सोचताह । हमरा इ बुझय मे नहि आबैत अछि जे लोकक मानसिकता के कोना बदलल जा सकैत छैक ? एखैंह ओ दरभंगा के छथि , ओ सहरसा के .....ओ मुंगेर के छथि ....कि अलग राज्य भेला सँ आदमी केर मानसिकता बदलि जेतैक .....कि दरभंगा , सहरसा आ कि मुंगेर वाला भेद भाव मोन मे नहि औतेक ? आ जौं इ भेद भावना रहतैक तs सम्पूर्ण राज्यक विकास कोनाक भs सकैत छैक ? कि मिथिलाक होइतो ओ सम्पूर्ण मिथिला केर विषय मे सोचताह ? छोट छोट राज्य नीक होइत छैक , ओकर पक्ष मे हमहू छी मुदा बिना राज्यक बंटवारा केने सेहो बहुत काज कैयल जा सकैत छैक, जौं करय चाहि तs । ओना सब अपन स्वार्थ सिद्धि मे लागल रहय छथि इ अलग गप्प छैक। कि नीक स्कूल कॉलेज कारखाना के लेल बिना राज्य अलग बनने प्रयास नहि कैयल जा सकैत छैक? कि मात्र मिथिला राज्य बनि गेला सँ मिथिलाक उद्धार भs जयतैक ? मिथिला राज्यक अलग हो ताहि आन्दोलन मे अनेको लोक सक्रीय छथि , मुदा हुनका लोकनि सs एकटा प्रश्न .......ओ सब आत्मा सs पुछथि कि ओ सब मात्र राज्य आ समाज के लेल सोचय छथि कि हुनका लोकनि के मोन मे लेस मात्र स्वार्थक भावना नहि छैन्ह ? कैयैक टा राज्य अलग भेलैक अछि मुदा बेसी केर स्थिति पहिने सs बेसी खराब भs गेल छैक, झारखण्ड ओकर उदाहरण अछि । खनिज संपदा सँ संपन्न राज्यक स्थिति बिहार सs अलग भेलाक बाद आओर खराब भs गेल छैक। एहि राज्य मे नौ साल के भीतर सात टा मुख्यमंत्री बनि चुकल छथि । लोक के उम्मीद छलैक जे १० साल के भीतर एहि राज्य केर उन्नति भs जयतैक। उन्नति भेलैक अछि, मुदा राज्य केर नहि नेता सब केर । चोर उचक्का खूनि सब नेता भs गेल छथि आ पैघ सs पैघ गाड़ी मे घुमि रहल छथि , देश आ जनता केर संपत्ति केर उपभोग कs रहल छथि इ कि उन्नति नहि छैक ?(विदेह पेटारसँ) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। डॉ विनीत उत्पल लघु कथा- नागा फकीर (डिस्क्लेमर: एहि खिस्साक सभटा पात्र आ तथ्य मनगढ़ंत अछि, समानता मात्र संयोग अछि-कथाकार) पता नहि जे कि फुरायल जे आइ ओकर पुरना फेसबुक पोस्ट पढ़य लगलौं- १४ नवम्बर: अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक संस्थाक युवा पुरस्कारक जूरी कोनो पोथीक मूल्यांकन नहि कऽ कय प्रतिभागीक उमरि देखैत अछि, जे अमुक लेखक केँ अगिला बरख पुरस्कार देल जा सकैत अछि वा नहि। ०२ अक्तूबर: ‘सगर राति दीप जरय’ जाहि दिन सँ सोलकन लग गेल, बभना आ रारी कायस्थ सभ गुरमौटी देने अछि, जे ई की भेल? ताहि देखादेखी ‘सगर दिन अन्हार रहय’ शुरू कयल गेल। ३१ अक्तूबर: मैथिलीक सम्मानित सबसँ युवा कथाकार आब ‘इस्स’ आ ‘भक्क’ नामसँ  खिस्साक पोथी लिखने छथि आ दुनू पोथी केँ दुनियाक ‘बेस्ट सेलर’क खिताब भेटल अछि आ दुनियाक चालीस भाषामे तकर अनुवाद भेल अछि। २६ जनवरी: बिहारमे मद्यपान निषेधक कारण ओतयसँ  सबसऽ बेसी साहित्यकार हर दू दिन पर कोनो ने कोनो कार्यक्रमक बहन्ने दिल्ली आबैत छथि आ सोमरसक पान राजधानीक बीयर बारमे करैत छथि। ३० जनवरी: मैथिली-अंगिका-वज्जिका-मगही-भोजपुरी अकादमीक उपाध्यक्षक आगू सभ भाषाक कतेक रास कवि अप्पन नाम लेल निहोरा करैत छथि, जे पिछला दू बरख सँ  हमरा कविता पाठ लेल नै बजेलहुँ। १५ अगस्त: घोर कलयुग, कतेक रास आपराधिक प्रवृत्तिक लोक आब साहित्यकार बनि गेल अछि आ राज्य आ केन्द्र सरकारक संग अंतरराष्ट्रीय संस्थाक बहुत रास समितिक सम्मानित सदस्य भऽ गेल अछि। बेसी पोस्ट तऽ ओकर फेसबुक वाल पर नहि छल, मुदा जे छल ओ साहित्यिक समाजक लेल बिख सँ  कम नहि छल। हमरा सँ  ओकर भेंट कहियो नहि छलै। ओकरा लऽ कऽ फेकुआ भाइ कहियो-कहियो हमरा लग चर्च करैत छला। ओ कहैत छला जे सत्ता आ साहित्यकेँ जँ बुझबाक अछि तँ ओकरासँ  गप करू। ओकर फेसबुक पोस्ट पढ़ू। ओ अजुका ‘राजकमल चौधरी’ छिऐ, अजुका। सोशल मीडियाक ‘नागार्जुन’। की कही, एक बेर ओकर फेसबुक वाल पर गेलो रही, मुदा ओकर पोस्ट हमरा पसीन नहि आयल, तें हम फेर दोबारा नहिये तँ ओकर फेसबुक वाल पर गेलहुँ आ नहिये ओकरा फेसबुकक मित्रताक निमंत्रण देलहुँ। हमरा लागैत छल जे फेकुआ भाइक गप जँ सत्य अछि, तँ ओ बड़ तार्किक हएत। सत्ताक समीकरण बुझैत हएत। साहित्यक समझ जँ ओकर नीक छै तँ फेर कोनो साहित्यकार ओकरा मोजर किए नहि देलाह। ओकरा मोजर तँ ओना हमहूँ नहि देलहुँ। एहि दिल्लीमे के केकरा पुछैत छै। रोज बिहार-यूपी सँ  अल्लू-प्याजक बोड़ा जेना लोक-बेद ट्रेन, बस आ फ्लाइटसँ  आबैत छथि। किछु लोक दिल्लीमे संघर्ष करैत छथि तऽ कियो नोएडा आ गुरुग्रामक कोनो फैक्ट्रीमे काज करैत-करैत अपन जिनगी गुजारि दैत छथि। ‘हाय पैसा-हाय पैसा’क चक्करमे साहित्य के पढ़त आ राजनीतिक गप के करत? ‘धौ महराज, अहाँकेँ कहबाक तँ नहि चाही, मुदा खिस्सा सुना रहल छी आकि फालतू गप? कथाक बाटसँ  नहि भटकू’। ‘चलू भाइ, जे गलती-सलती भेल से माफ़ करब। आगू सँ  हम एकर ख्याल राखब। एखन धरि जे गप कहलहुँ ओकरा बिसरि जाउ, माफ़ कऽ दिअ। एकरा सँ  बेसी हम की कऽ सकैत छी’। ‘भाइ, तऽ हम सब कतय रही’? हँ, ख्याल आयल। किछु दिन पहिने फेकुआ भाइ मधुबनीक मानकी पोथी भंडारक दोकान पर भेटल छल। हुनकर मन कनी सुस्त देखलियनि तँ पुछने रहियनि- ‘की भेल भाइ’? पहिने तऽ कनि अनमनैलक, फेर बजलाह- ‘ख्याल अछि अहाँकेँ? एकबेर हम दिल्लीमे एगो लोकक चर्च केने रही, सत्ता आ साहित्य पर जिनकर बड़ रुचि छनि आ ओ नीक जानकार छथि।’ ‘जी, जी’, हम बजलहुँ। ‘ओ पछिला कतेक माससँ  नपत्ता अछि। नहिये ओकर दिल्लीमे कत्तौ पता लागल आ नहिये गामेमे। पुलिस लग रिपोर्ट लिखेलहुँ मुदा हाथमे किछु नहि आयल।’ ‘सार’, जेहन नाम, तेहने करम।’ ‘फकीर रहय, फकीर। एकदम नागा’ ‘नहिये घरक चिंता, नहिये नौकरीक, बस चिंता तँ साहित्यक आ राजनीतिक। एना लागैत छल जे ओ नहिये तऽ ओ कोनो साहित्यकार अछि नहिये कोनो समीक्षक। बस महाभारतक अर्जुन जेना साहित्यक राजनीति पर ध्यान लगौने रहैत छल। ने कनियो टा इम्हर, ने उम्हर। ‘कहू तँें भाइ, एना कत्तो लोक होइत छै।’ सत्य कही तऽ आइ हमरा बड़ अफ़सोस भेल जे ओकरा सँ  भेंट कऽ लैेतिऐे तऽ की भऽ जैतिऐ। आब जतेक लोक, ओकर ओतेक खिस्सा। कियो कहय जे ओकरा दिल्लीमे रहय बला कोनो मौगीसँ  प्रेम भऽ गेल छलै आ ओ मौगी ओकरा छोड़ि देलकै तऽ ओ बताह भऽ गेल। कियो कहय जे दिल्लीक कियो गोटे अप्पन संस्था चलाबैक लेल मधुबनीक ‘अरेर’ मे दू बीघा जमीन ओकरा रजिस्ट्री कऽ देने छल। ओ दिल्लीकेँ छोडिकऽ ‘अरेर’ मे रहय लागल छल आ अंतिम बेर कोनो ‘राष्ट्रीय दल’क लोकल नेताक संग देर राति ‘नागिन डांस पार्टी’मे ’देखल गेल छल। लोक तऽ ईहो कहैत छल जे कियो गोटे सहरसाक चैनपुरमे पुस्तकालय चलाबैक जिम्मेवारी ओकरा देने छल आ ओहि दिन भोरे-भोर दरवाजाक आगकू पोखरिमे जे ओ डुमकी लगौैलक, आइ धरि ओकर लाश नपत्ता अछि। कियो कहलक जे ओ तऽ वयोवृद्ध हिन्दी कथाकार कृष्ण ठाकुरक संग पांडवनगरमे रहैत छल, कोनो कैसेट कंपनीमे काज करैत छल आ ‘लाल पाइन’ पीबैक लेल इंडिया हैबिटेट सेंटर जाइत छल। ताहिसँ  ओकर लीवर ख़राब भऽ गेल आ ओ सुरपुर धाम कहिया नहि चल गेल। ताज्जुब तऽ तखन भेल जखन कियो कहलक जे ओ जनउ तोड़िकऽ इस्लामी प्रसिद्ध विद्वान अकबरूदीन खानक संग रोजा राखैत छल आ पँाचो टाइम नमाज पढ़ैत छल। ‘सुब्हान्ल्लाहि वलहम्दु लिल्लाहि व ला इल्ललाहु वल्लाहु अकबर’’ केर जाप सेहो करैत छल। कियो तऽ बाजल जे ओ हिन्दू सँ  बौद्ध बनि गेल। हल्ला ईहो छल जे ओ नक्सली बनिकऽ छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश बॉर्डर पर स्थानीय पुलिसक हाथ लागल आ ढेर भऽ गेल। हल्ला तऽ छल जे ओ कश्मीर सेहो गेल आ ‘तैस-ए-मोहम्मद’ मे शामिल भऽ गेल छल आ सेनाक हाथ मारल गेल। पूरा खिस्सा तऽ मधेपुरा जिलाक बराही गामक प्रकांड संस्कृत पंडितजी अस्सी बरखक अरुणाभ बाबूसँ  पता लागल। जँ विश्वास करी तँें पंडितजी अरुणाभ सत्य गप कहने छलाह। ओहि दिन तऽ गाम आयल छल ओ। घड़ी-पावैन मे। गामक भगवती थान पर दू दिनक बड़का मेला लागल छल। एहि पावैनमे साँपक विषकेँ उतारैक लेल लोक सिद्धि प्राप्त करैत छल आ ओहि बेर ओ सेहो मंतरिया बनि गेल छल। नागा तऽ घुमिते छल। माथमे केस छलै, मुदा सबटा पाकल। आँंखि लग झुर्री सेहो लखाह दैत छल। ओहि समयमे ओ सदिखन महिषी बला राजकमल चौधरीक एकटा पाँति दोहराबैत छल, ‘समय एकटा आन्हर साँप/ समय एकटा आन्हर रस्ता/ आ व्यक्ति अजगरक पेटमे छटपटाइत पक्षी।’ मुदा लोककेँ बुझयमे नहि आबैत छल जे ओकर मनमे की डाकै छै। घड़ी मेलाक दू दिन बादक गप छिऐ। ओ उदाकिशुनगंज कोर्टसँ  घुरल छल। लोक कहैत छल जे जखन कहियो ओ गाम आबैत छल तऽ कोर्टमे मुक्तारीक काज सेहो करैत छल। साँझ खन दीप-बातीक काल ओ साइकिल पर चढ़ि कऽ घुरि रहल छल जे उदा पुल पर गामक रोहिता यादव भेट गेलै। ओ माल-जाल संग बाधसँ  घुरि रहल छल। एकटा महीसक पीठ पर बैसल तमाकू चुना रहल छल। ओ रोहिताकेँ टोकलक- ‘की रे रोहिता, की हाल?।’ ‘रे बभना, ठीक सँ  बोल। चिन्हय नै छेँ हमरा? ’ ‘हे रे सार, हम की कहलियौ तोरा, जे एत्ते बमकै छेँ।’ एतबी कालमे नम्हर सींग बला महीसकेँ रोहिता यादव ओकरा दिस हुलकाय देलक। ओ सौंसे देह साइकिलक संग नहर दिस गिरल। नहरमे राति पाइन छोड़ल गेल छल। एक मरदसँ  उपर पाइन छल। साइकिल तऽ एक दिस अटकि गेल मुदा ओ डूमय लागल। नहरक दुनु दिस लोक जमा भऽ गेल आ हो-हल्ला हुअए लागल। रोहिता भीड़ देखि अपन माल-जाल संग ठामसँ  भागल। नहरमे पाइनक धार एतेक तेज छल जे ओकरा सम्हरहि कऽ मौका नहि भेटलै। सौ हाथ पाइनमे बहैक बाद ओकर देह एकटा बाँसमे अटकि गेलै। गामक लोक बेहोशी हालतमे ओकरा नहरसँ  खींचि केँ बाहर निकाललक। कहुनो कऽ कय साइकिलकेँ सेहो निकालल गेल। ताधरि बभना टोल आ देवहैर टोलमे एहि लऽ कऽ हल्ला भऽ गेल छल जे रोहिता यादव कोनो बाभनकेँ नहरमे ठेल देने छै। बराही गाममे दू टोल छल। एकटा ‘ब्राहमण टोल’, जेकरा आन टोलक लोक ‘बभन टोली’ कहैत छल आ दोसर ‘देवहैर टोली’, जे असलमे ‘देवहर टोल’ छल। देवहैर टोलमे पुरना लोक अप्पन नामक पाछू ‘देवहर’ लिखैत छल। बादमे सभ अप्पन टाइटिल ‘देवहर’केँ बदलिकऽ ‘यादव’ राखि लेलक आ नाम कहैत काल अप्पन नामसँ  बेसी ‘यादव’ पर जोर दैत छल। तखन बाभन सभ ओहि टोलकेँ ‘ग्वरटोली’ कहिकऽ बजाबय लागल छल। (ई खिस्सा ओहि कालक अछि जखन पूरा देश मंडल आ कमंडलमे जरि रहल छल। चूँकि बराही आ पास-पड़ोसमे कोनो मुस्लिम बस्ती नहि छल, तें सांप्रदायिक सौहार्द्र ओतुक्का समाजक लेल कोनो गप नहि छल। मुदा बिहारमे लालू यादवक मुख्यमंत्री बनलाक बाद समाजक मुख्य धारासँ  फराक रहय बला लोक सजग भेल छल। फेर जाहि मंडल कमीशनक रिपोर्टकेँ विश्वनाथ प्रसाद सिंह लागू केने छल, ओहि मंडल कमीशनक अध्यक्ष बी. पी. मंडल मधेपुरा जिलाक छल।) ओहि साँझक बाद तऽ दुनू टोलक लोक एक-दोसरा केँ देखहि नहि चाहैत छल। ब्राहमण टोलक चिड़ियो-चुनमुन, कुकुरो-बिलाय ओम्हर नहि जाइत छल। मनुखसँ  बेसी वफादारी तऽ माल-जालमे पाओल जाइत अछि। तीन-चारि मास बीतल छल। ठार आबि गेल छल। एक राति दू-टा कुकुर मांगन भैयाक बँसबिट्टीमे आपसमे फरिआबय लागल। ओ दुनुटा जतेक जोरसँ  एक-दोसरा पर भुकलक जे द्वार पर चचरी पर सुतल बड़का बाबा केँ भलै जे अजुका राति आर-पारक राति होयत। अप्पन चचरीसँ  बौकू कक्का केँ शोर पारलखिन। अन्हरिया राति, हाथकेँ हाथ नहि सुझैत छल। मेघ चारू कातसँ  घेरने छल। शीतलहरी सेहो अलगे। मुदा कक्काक आवाज सुनि बौकू कक्का निन्दौसँ उठल आ तीर-फट्टा सीधे हाथमे लेने मांगन भैयाक बँंसबिट्टी दिस दौड़ल। बौकू कक्का एतेक जोरसँ  चिकरलक जे सौंसे बभनटोलीक लोक जागि गेल। मारि तिरपित जेकरा जे भेटल, हाथमे लेने ओहि दिस दौगल। बँसबिट्टीसँ  आठे-दस कदम बौकू भाय पाछू छलाह, तखने लोकक शोर सुनि, एक कऽ पाछाँ एक दुनु कुकुड़ हुनका बगलसँ  एना दौगल जे एकटा कुकुर बौकू कक्काक धोतीमे ओझरा गेल। कक्का धरफरीमे बुझि नहि सकल जे ई कोनो कुकुड़ छै आकि मनुख। बौकू कक्का सौंसे चिंतांग धरती पर गिर पड़लाह। गिरल देहसँ  दोसरो कुकुर भिर गेल। हुनकर मुँहसँ  एतेक जोरसँ  ‘बाप रौ बाप’ निकलल, लागल जे आइ ग्वरटोलीक यादव हुनको निशाना बना देलक। वातावरण किछु काल धरि स्तब्ध रहल। लोककेँ बुझयमे नहि आयल जे की भेल। ताधरि मांगन भैया सेहो बड़का टॉर्च लऽ कऽ आबि गेल। टॉर्चक इजोतमे पता लागल जे सबटा किरदानी कुकुरक छल। गाममे दुनू जातिक बीच मनमुटाव बरक़रार छल। आन लोक सेहो एकर फायदा उठा रहल छल। गामक लोक कहैत अछि जे ओ एहन विकराल समय छल जे कल्लू यादवक नामसँ  मधेपुराक धरती कांपैत छल। एक बेर एहन आयल जखन एक हफ्ता भरि कल्लू यादव गैंग मधेपुरामे लोकक देहकेँ उघारि-उघारि जनउ ताकैत छल आ जनउ पहिरय बला लोक केँ ‘गर्दनिया पासपोर्ट’ दऽ कऽ जुत्ता-चप्पल-लाठी सँ  धुनैत करुण यादव मुखियाकेँ बजौने छल। ओ पुछने छल जे बराही गामक बाभन केँ की करल जाय? अरुण मुखिया सीधे मुँह कहि देने छलाह कल्लू यादव केँ- ‘भाय, बराही पंचायतक मुखिया हम छी। हम सभ जाति सौ बरखसँ  बेसीसँ  संगे रहि रहल छी। दू भैयारीमे एहिना झगडा-झंझटि होइत रहैत छै। बाभन आ देवहैर एक्के छिऐ। ताहि सँ  हुनका सबकेँ तंग करैक आवश्यकता नहि’। भीड़सँ  कियो कहनो छल- ‘एक बेर कहो ने मुखियाजी, एखने राति भरि मंे सबटा बभनाकेँ घर जरा देते हैं।’ लोक अखनो कहैत अछि जे ओहि अन्हरिया ठार रातिमे मुखियाजी गांधीजी जेना खुट्टा गाड़िकेँ ठाढ़ रहल आ केकरो हिम्मत नहि भेल जे गामक बाभन टोल दिस एक्को डेग आगू दैतिऐ। एकरे फल छल जे करुण मुखिया चालीस बरख धरि बराही पंचायतक निर्विरोध मुखिया चुनल गेल आ राज केलक। मुखियाजी कल्लू यादवकेँ ओहि राति बुझा तऽ देलक आ गामक सीमान सँ  भगा तऽ देलक मुदा दुनू जातिमे विश्वास नहि आनि सकल। कतेक बेर भगवती थान पर पंचायत बजाओल गेल, मुदा वएह ढाकक तीन पात। एक साँझ कहानीक पात्र ‘ओकरा’ आ रोहिता यादवमे सीधा लड़ाइ भऽ गेल। रवि दिन छल। उदामे साप्ताहिक हटिया लागैत छल। ओकरा माछ खाइक मन छलै। एक तऽ ओ माछ खाइ नहि छल मुदा खाइ छल तँ सवा किलो सँ  एक कनमा कम माछ कीनैत नहि छल। संजोगसँ रेहू माछ एक्के गोटेक लग छलै, सेहो एक किलो पचास ग्राम। पचहत्तर ग्राम माछक कमी सँ  ओकरा तामस आबि गेलै। संजोग जे तखने रोहिता सेहो माछ लेल पहु्ँचल। ‘हे रे। एक किलो माछ तौल दही।’ ‘मालिक, आब तऽ ई माछ बिक गेल।’ ‘ओ की छियौ’। ‘नहि मालिक। सवा किलो मे पचहत्तर ग्राम कम अछि, तँे बहस भऽ रहल अछि। ई साहब कीन लेलक।’ ‘हे रे धीचोदा। हमारा देभी की नै। देखभँय तू। चिन्है छी की नै?’ ‘जी मालिक, चिन्हैत छी।।।’ ओकर गप ख़तमो नाहि भेल छल ताधरि रोहिता ओकरा दू थाप खींच देलक आ माछक टोकरी उठाकऽ चलि देलक। कहानीक पात्र ‘ओकरा’ ई बर्दास्त नहि भेल। ओ सेहो पाँजर कसलक आ रोहिताकेँ उठायकेँ पटकि देलक। उदा नहर बला घटना दिनसँ  रोहिताक खून खौलले छल। रोहिता माथे भरे जमीन पर खसल। संयोगे या दुर्योगे कही, जाहि ठाम रोहिता खसल, ओहि ठाम एकटा नोकी बला पाथर छल। शोणित ओकर माथसँ  बोकरय लागल। रोहिताक भीषणकाय देह जमीन पर गिरल, से गिरले रहि गेल। रोहिता यादवक प्राण जाइत देखि "ओ" भक्क भऽ गेल। ओकरा मुँहसँ  ‘इस्स’ टा निकलल। दू सेकेँडक लेल ओकरो देह स्टेच्यू बनि गेल छल। सम्पूर्ण हटियामे हो-हल्ला हुअए लागल। भीड़ ‘मारो मादरचो... बभना केँ।’ ‘हे रे बहिनचो... बभना, ग्वारक राजमे ग्वारकेँ मारि देभी।’ ‘के छिऐे रे... ’। जाधरि ओतय लोक जुटिकऽ ओकरा मारतिऐे, ताधरि ओ अचानकसँ  भीड़मे भीड़क हिस्सा बनि गेल। केकरो पता नहि चलल जे ओ कतय गेल। मुदा ओ माछ नहि छोड़लक। सभटा माछ लऽ कऽ भागि गेल। जखन पुलिस इन्क्वायरी लेल पहुँचल तऽ किशुनगंज थानाक इंस्पेक्टर रामबाबू सिंह एक-एक गोटासँ पूछताछ केलक। दूटा बाभन टोलक छौड़ा समरनत्था आ मुनितबाकेँ ओहि हटियामे पुलिस लाठी सँ  जतेक मारि मारलक, से कहि नहि सकैत छी। दुनू दू दिन पहिने दिल्लीसँ  गाम आयल छल। दुनू अपराधी तऽ नहि छल, मुदा गाम आबैत छल तऽ पंचायतमे छिटपुट मारि-पीट कऽ लैत छल। मुदा, ‘ओकरा’ नहिये तँ पुलिस पकड़ि सकलै आ नहिये ओकर कोनो थाह ककरो लागलै। ओहि साँझ एकटा आओर गप भेल। पुलिस इन्क्वायरीक बाद नहरक काते-कात माछबला जखन घर जा रहल छल तऽ कियो साइकिलबला छौड़ा अन्हारमे ओकरा एक-एक सौ टाकाक दूटा नोट देलक आ कहलक- ‘हे हौ। जे तोहर माछ लऽ कऽ भागले छल ने, वएह ई टाका देने छौ।’ एतबे कहि कऽ ओ साइकिल बला छौड़ा फिरंट भऽ गेल। गामक चार-चौहद्दीमे ‘ओकरा’ खोजल गेल। पुलिस आ सी.आइ.डी. लगातार ओकर घर पर ‘रेड’ केलक, मुदा ‘ओकर’ पता नहि लागल। बराही गामक ब्राहमण टोलक लोक बड चिंतित भेल, मुदा हाथमे शून्य। ओना अहि घटनाक बाद आ बाभन टोलक दुनू छौड़ाक पुलिसक लाठी लगलाक बाद एतबे टा भेल जे दुनू टोलक लोक मामिलाकेँ शांत करयमे लागि गेल। रोहिताक स्त्री सेहो कोनो मोकदमा दर्ज करहिसँ  मना कऽ देलक। लोक कहैत अछि जे रोहिताक स्त्री सेहो ओकरासँ  तंग आबि गेल छल। रोहिता सभ दिन कत्तोसँ  मारि-पीट कऽ आबैत छल। बिहारमे जहियासँ  मद्य प्रतिबंधित भेल, तहियासँ  ओ देशी ठर्रा या ताड़ी पीबिकेँ रातिमे घर घुरैत छल आ स्त्रीसँ  मारि-पीट करैत छल। दुनूक ब्याहक बरख भेल छलै आ अखैन धरि कोनो संतान नहि भेल छलै। पुलिस जखन रोहिताकेँ पकड़ि कऽ लऽ जाइत छल तऽ ओकर स्त्रीकेँ सेहो लऽ गेल। भरि राति रोहिता हाजतमे आ ओकर स्त्री प्राणक डरसँ ओइ पुलिसक सिपाहीक बाँहिमे बंद रहल। रोहिताक स्त्रीक नाक-नक्श, ओठ, मांसल देह आ सुडौल उन्नत वक्ष कोनो विश्वामित्रक तपस्या भंग करहि लेल काफी छल। भोर धरि ओकर देह टूटि गेलै आ तकर बाद थानाक सिपाही दुनू प्राणीकेँ छोड़ि देलक। ‘गोंद’ सँ  चिप-चिप करैत भरि नुआ पहिनने ओ रोहिताक संग गाम आयल। एहन तरहक गप कतेक दिन नुकाओल रहतिऐ। एक कानसँ  दोसर कान जाइत-जाइत भरि गाममे गप हुअए लागल जे हर दू दिन बाद पुलिस रोहिता केँ बिन कारणो किए पकड़ि कऽ लऽ जाइत छै। नशा रोहिताकँे एहन बना देने छल जे काज तऽ ओ सभटा करैत छल, मुदा स्त्रीक संग की भऽ रहल छलै, ओकरा एकर परवाहि नहि छलै। लोक कहैत अछि जे किछु दिनक गहमा-गहमीक बाद बराहीक दुनू टोलक वैमनस्यता ख़तम भऽ गेल। नहिये रोहिता यादव रहल आ नहिये कहानीक पात्र ‘ओकरा’। लोक कहैत अछि जे एहि घटनाक बादो पुलिसक सिपाही रोहिताक स्त्री केँ पूछताछक लेल बजाबैत छल आ भोर भेने पहुँचा दैत छल। रोहिताकँे मरलाक छह मास बाद ओकरा गर्भ सेहो रहि गेलै, जाहिसँ  तंग आबिकऽ एक राति थानामे ओ अपन इहलीला समाप्त कऽ लेलक। पुलिस बला सेहो ओकर लाशकेँ केकरो हाथ नहि लागय देलक आ हरैली धारमे एहन नपत्ता कऽ देलक जे आइ धरि ओकर लाशक कोनो थाह नहि लागल अछि। पिछला बेर जेखन अप्पन गाम गेलहुँ तखन गामक लोक सँ  मालूम भेल जे कहानीक पात्र ‘ओकरा’ बारे मे बीस बरख बादो पता नहि चलल। कियो कहैत अछि जे ओ कोलकाता गेल छल अप्पन केस सुलझाबय लेल। जज शत्रुघ्न झा लग। कियो कहैत अछि जे ओ दिल्ली गेल छल इलाजक लेल एम्सक डॉक्टर ईश्वरशंकर लग। किछु दिन ओतय कोनो ड्रामा कंपनीमे काज केलक आ थियेटर कंपनी स्थापित केलक। कियो कहैत अछि जे ओ मुंबइ सेहो गेल छल। एक बेर कियो कहलक जे ओ बेंगलुरुमे एकटा कंपनीमे मैनेजर बनि गेल छल आ कतेक कर्मचारीकेँ मैथिलीमे कविता लिखय लेल सिखा देलक। ओहिमे एकटा ऑफिसर आ ओकर कनियाक कविताक धूम सभ दिस मचल अछि। कियो कहैत अछि जे ओ पोथी प्रकाशनसँ सेहो जुडल आ ‘पुरनांत प्रकाशन’ खोलि कऽ प्रकाशन जगतमे धूम मचा देलक। एकर कतेक रास लेखककेँ साहित्यक नोबेल पुरस्कार कतेक बरख भेटल। जेना मैथिलीक प्रख्यात साहित्यकार जीवकांत नव लेखनक प्रसंगमे लिखने छलाह जे मैथिली नवलेखन बेकार युवक सभक ‘स्टेपिंग स्टोन’ थिक, ओ कोनो व्यक्तिक सम्पूर्ण जीवनक मिशन नहि थीक, ताहिना एहि कहानीक पात्र ‘ओकरा’ कँे सेहो गाममे रहबाक कोनो प्रयोजन नहि छलै। लोक कहैत अछि जे ओ घुमक्कड़ छल। पहिलुक बेर गाममे एहि तरहे समाजक रंगमे फँसल छल। ओहि दिन दिल्लीक मंडी हॉउस मे मैथिली नाटक ‘ओरिजनल कामशास्त्र’ देखिकऽ निकलले रही जे प्रकाश भाइसँ  भेंट भऽ गेल। वएह प्रकाश भाइ जे कहियो गाममे गीत गाबैत छल आ दिल्लीमे बड़का वकील भऽ गेल छल। कहानीक पात्र ‘ओकरा’ बारेमे चर्चा भेल तऽ ओ फेकुआ भाइक चर्च केलखिन। ‘भक्क’ सँ  हमर नीन टूटल। फेकुआ भाइ ई की कहैत छलथि जे जहिना नाम, तहिना करम, फकीर रहय, एकदम नागा। आब हमर दिमाग जागल। चूँकि हमरा ओकरामे कोनो दिलचस्पी नहि छल, तें हम फेकुआ भाइक गपकेँ सुनिकऽ कानमे तूर-तेल दऽ कऽ सुति जाइत छलहुँ। अहाँकेँ नै लागैत अछि जे कहानीक जे मुख्य पात्र अछि ओ देश-दुनियामे यात्री जेना भटकैत अछि, ओहिना जहिना मिथिलाक लोक देशक कोना-कोनामे भटकैत अछि। कखनो महाराष्ट्रसँ, कखनो गुजरातसँ, कखनो दिल्लीसँ भगाओल जाइत अछि। अहाँकेँ नहि लागैत अछि जे ओ नवयुवक आन कियो नहि, हम आ अहाँ छी, जे झट्ठोकेँ आन-शानमे केकरोसँ  लड़ैत छी आ ‘माछ’क भोज लेल छुछुआयल जेना केकरोसँ मांगि लैेत छी आ कियो खुआबैत अछि तऽ खा लैत छी, की? -डॉ विनीत उत्पल-सी-३२, मंडावली ऊँचे पर, आई. पी. एक्सटेंशन, नई दिल्ली-११००९२. अपन मंतव्य editorial।staff।videha@gmail।com पर पठाउ। गजेन्द्र ठाकुर मिथिलाक इतिहास भाग-२ १ मिथिलामे बाहरी लोकक आगमन आ मिथिलासँ दूर देशमे पलायन, ई दुनू घटना निरंतर होइत रहल अछि। मुदा आइ कालिक पलायन एहि अर्थें विकट रूप लऽ लेने अछि कारण विगत तीस सालक अवधिमे भेल पलायन मिथिला गामकेँ खाली कऽ देलक। 1981 ई. मे पटनापर बनल महात्मा गाँधी सेतु आ पटना दरभंगा डीलक्स कोच सभक पाँती मिथिलावासीक हेँजक–हेँज बाहर बहरएवामे योगदान केलक। तत्कालीन सरकार सभक राजनैतिक आर्थिक शैक्षिक सामाजिक आ सांस्कृतिक एहि सभ क्षेत्रमे विफलता एकटा आधार तँ बनबे कएल, स्वतंत्रताक बादक तीस साल बिहार स्थित मिथिला आ नेपाल स्थित मैथिली भाषी क्षेत्रक बीचमे एकटा विभाजक रेखा सेहो खींचि देलका। 1960 ई. मे बनल कमला बान्ह आ एखन धरि अपूर्ण कोसी परोयोजना मिथिलाक ग्रामीण आर्थिक आधारकेँ तोड़ि कऽ राखि देलक। प्राचीन कालक पलायन आ आइ काल्हिक पलायन मध्य एकटा मूल अंतर सेहो अछि। मिथिलाक मैथिल ब्राह्मण आ कर्ण काएस्थ अपन विद्वत्ताक प्रदर्शन, पठन पाठन आ दोसर राजाक दरबारमे जीविकोपार्जन निमित्त प्राचीन कालहि सँ जाइत छलाह, तँ गएर मैथिल ब्राह्मण–कर्ण कायस्थ जाति वाणिज्य, अंगरक्षक आदिक कार्य लेल दूर देशक यात्रा करैत छ्लाह। प्राचीन कालमे मोरंग आ पछाति भदोही मिथिलाक बोनिहारक श्रम किनबाक केन्द्र बनल, मुदा एहिमे मोरंग नेपालक मिथिलाञ्चलमे पड़ैत अछि मुदा एकरा प्रवास एहि लेल कहल जाए लागल कारण ओतुक्का शासक गएर मैथिल गोरखा भऽ गेल छलाह।

पलायनक विभिन्न स्वरूपः- पलायन एकटा ऐतिहासिक प्रक्रियाक अंग अछि। अहाँक क्षेत्रक भौगोलिक स्थिति कोन देशमे अहाँकेँ पटकि देने अछि ताहिपर सेहो। से मोरंग लग रहलोसँ भारतक मिथिलाञ्चलक वासीक लेल पछाति कम लोकप्रिय भेल कारण ओ दोसर देशमे अवस्थित भेलाक कारण विभिन्न कारणसँ पलायनक लेल अनुपयुक्त भऽ गेल। कोलकाता स्वतंत्रताक बाद निकटवर्त्ती मेट्रो नगर रहए से लोक ओहि नगरमे खूब पलायन केलन्हि मुदा जखन विभिन्न राजनैतिक–आर्थिक नीतिक संकीर्णताक कारणसँ बंगालक उद्योग–धंधा चौपट भऽ गेल, शैक्षिक केन्द्रक रूपमे ओकर महत्व कम भेल तखन पलायनक केन्द्र मुम्बइ आ दिल्ली भऽ गेल। बोनिहार आब भदोही आ मोरंग नञि वरन पंजाब–हरियाणा आ पश्चिमी उत्तरप्रदेश जाइत छथि आ बनिजार बाहरसँ मिथिलामे भरि गेल छथि। दरभंगा राजक गलत आर्थिक नीतिक कारण आरा छपराक लोक सभ भूमि आ कामतक अधिपति कोना भऽ गेलाह से जगदीश प्रसाद मण्डल जीक साहित्यमे पूर्ण रूपसँ देखार भेल अछि। 1936-37मे बर्मासँ सेहो भोजपुर बक्सरक लोक पूर्णियाँ, अररियामे भागि कऽ एलाह, डुमराँवक हरि बाबू हिनका सभकेँ बर्मामे बसेने छलाह आ बर्माक भारतसँ अलग भेलाक बाद ई लोकनि शरणार्थी बनि एहि क्षेत्रमे आबि गेलाह। कतेको बर्मा टोल एहि क्षेत्र सभमे अहाँकेँ भेटि जाएत। एहि क्षेत्रमे कृषि–वाणिज्यपर हिनको सभक दखल भेलन्हि। मिथिलामे भेल पलायनमे 1971 ई. मे बांग्लादेशक निर्माणक लगाति ओतुक्का हिन्दूक किशनगंजमे आ बादमे ओतुक्का मुस्लिमक पूर्णियाँ किशनगंजमे आगमन भेल। बाहर भेल पलायनक विरूद्ध भीतर आएल ई पलायन मिथिलाक बोली–वाणी सभ वस्तुकेँ प्रभावित कएलक। जाति–धर्म आधारित विवाह मुस्लिम, राजपूत आ भूमिहार मध्य मिथिलाक भौगोलिक परिधिसँ बाहर हुअए लागल ताहिसँ सेहो बोली–वाणीक अंतर दृष्टिगोचर भेल। 

पलायन नीक आकि अधलाहः- पलायन जे बाहर जाइ वला आ भीतर आबै वला दुनू तरहक अछि केँ अहाँ कोनो तरहेँ नहि रोकि सकै छी। मुदा एक खादी मध्य भेल ई विकट पलायन मूल मैथिल बोली–वाणीक पलायन विकट समस्याकेँ जन्म देलक। भुखमरी जे वादि-अकाल आनलक, तकरासँ तँ मुक्ति भेटल मुदा सांस्कृतिक अकाल सेहो ई आनलक। गामपर बोझ घटल, लोककेँ बटाइ लेल जमीन नै भेटै छलै, आब से बै छै, मुदा तकर विपरीत मिथिलाक भीतर शैक्षिक केन्द्रक पूर्ण समापन भऽ गेल, बाहरी बनिजार एतुक्का आर्थिक बाजारपर कब्जा कऽ लेलन्हि। विशालकाय सड़क परियोजना, आ सूचना प्रौद्योगिकी, टेलीविजन, अखबार, पत्रिका आदि ततेक पूँजी केन्द्रित भऽ गेल जे ई स्थानीय वणिकक औकातिक बाहरक वस्तु भऽ गेल। क्षेत्रक राज्य–सभा आ विधान परिषदमे जखन बाहरी पूँजीपति प्रवेश कऽ गेल छथि तखन आर कथूक चर्च की करी? 

पलायनक निदानः- हा पलायन केने काज नै चलत। जेना इस्रायलक प्रवासी ओकर शक्ति–सिद्ध भेल छथि तहिना मैथिल प्रवासी सेहो मिथिलाक लेल ओतुक्का भाषा–संस्कृति–साहित्य आ अर्थनीतिक लेल सहायक सिद्ध हेताह मिथिला राज्यक मांगमे बीचक स्थिति जेना बिहारक अंतर्गत मैथिली भाषी क्षेत्रमे प्राथमिक शिक्षाक माध्यम मैथिली हो, मैथिलीक रेडियो स्टेशन, टी.वी, चैनल लेल कम लाइसेंस फीस राखल जाए, इ मैथिली पत्र–पत्रिकाकेँ सरकारी विज्ञापन भेटए आदि मांग–आदि सेहो धोंसियेबाक चाही। राज्य जहिया भेटत तहिया भेटत उपरका 2-3 बिन्दु जे भेटि जाएत तँ एकटा उपलब्धि होएत आ लोकमे तखने जागृति आएत तखने ओ मिथिला राज्य एकर आर्थिक–शैक्षिक राजनैतिक स्थितिपर ओ विचार कऽ सकताह आ आंदोलनक भाग बनि सकताह। २ मिथिलाक धरती बाढ़िक विभीषिकासँ जुझैत रहल अछि। कुशेश्वरस्थान दिसुका क्षेत्र तँ बिन बाढ़िक, बरखाक समयमये डूमल रहैत अछि। मुदा ई स्थिति १९७८-७९ केर बादक छी। पहिने ओ क्षेत्र पूर्ण रूपसँ उपजाऊ छल, मुदा भारतमे तटबन्धक अनियन्त्रित निर्माणक संग पानिक जमाव ओतए शुरू भए गेल। मुदा ओहि क्षेत्रक बाढ़िक कोनो समाचार कहियो नहि अबैत अछि, कहियो अबितो रहए तँ मात्र ई दुष्प्रचार जे ई सभटा पानि नेपालसँ छोड़ल गेल पानिक जमाव अछि। कुशेश्वरस्थान दिसुका लोक एहि नव संकटसँ लड़बाक कला सीखि गेलाह। हमरा मोन अछि ओ दृश्य जखन कुशेश्वरस्थानसँ महिषी उग्रतारास्थान जएबाक लेल हमरा बाढ़िक समयमे अएबाक लेल कहल गेल छल कारण ओहि समयमे नाओसँ गेनाइ सरल अछि, ई कहल गेल। रुख समयमे खत्ता-चभच्चामे नाओ नहि चलि पबैत अछि आ सड़कक हाल तँ पुछू जुनि। फसिलक स्वरूपमे परिवर्तन भेल, मत्स्य-पालन जेना तेना कऽ कए ई क्षेत्र जबरदस्तीक एकटा जीवन-कला सिखलक। कौशिकी महारानीक २००८ ई.क प्रकोप ओहि दुष्प्रचारकेँ खतम कए पाओत आकि नहि से नहि जानि ! पहिने हमरा सभ ई देखी जे कोशी आ गंडकपर जे दू टा बैराज नेपालमे अछि ओकर नियन्त्रण ककरा लग अछि। ई नियन्त्रण अछि बिहार सरकारक जल संसाधन विभागक लग आ एतए बिहार सरकारक अभियन्तागणक नियन्त्रण छन्हि। पानि छोड़बाक निर्णय बिहार सरकारक जल संसाधन विभागक हाथमे अछि। नेपालक हाथमे पानि छोड़बाक अधिकार तखन अएत जखन ओतुक्का आन धार पर बान्ह/ छहर बनत, मुदा से ५० सालसँ ऊपर भेलाक बादो दुनू देशक बीचमे कोनो सहमतिक अछैत सम्भव नहि भए सकल। किएक? सामयिक घटनाक्रम- कोशीपर भीमनगर बैरेज, कुशहा, नेपालमे अछि। १९५८ मे बनल एहि छहरक जीवन ३० बरख निर्धारित छल, जे १९८८ मे बीति गेल। दुनू देशक बीचमे कोनो सहमति किएक नहि बनि पाओल ? छहरक बीचमे जे रेत जमा भए जाइत अछि, तकरा सभ साल हटाओल जाइत अछि। कारण ई नहि कएलासँ ओकर बीचमे ऊंचाई बढ़ैत जएत, तखन सभ साल बान्हक ऊँचाई बढ़ाबए पड़त। एहि साल ई कार्य समयसँ किएक नहि शुरू भेल? फेर शुरू भेल बरखा, १८ अगस्तकेँ कोशी बान्हमे २ मीटर दरारि आबि गेल। १९८७ ई.क बाढ़ि हम आँखिसँ देखने छी। झंझारपुर बान्ह लग पानि झझा देलक, ओवरफ्लो भए गेल एक ठामसँ, आ आँखिक सोझाँ हम देखलहुँ जे कोना तकर बाद १ मीटरक कटाव किलोमीटरमे बदलि जाइत अछि। २७-२८ अगस्त २००८ धरि भीमनगर बैरेजक ई कटाव २ किलोमीटर भए चुकल छल। आ ई कारण भेल कोशीक अपन मुख्य धारसँ हटि कए एकटा नव धार पकड़बाक आ नेपालक मिथिलांचलक संग बिहारक मिथिलांचलकेँ तहस नहस करबाक। नासाक ८ अगस्त २००८ आ २४ अगस्त २००८ केर चित्र कौशिकीक नव आ पुरान धारक बीच २०० किलोमीटरक दूरी देखा रहल छल। भीमनगर बैरेज आब कोशीक एकटा सहायक धारक ऊपर बनल बैरेज बनि गेल रहए। राष्ट्रीय आपदा: जाहि राज्यमे आपदा अबैत अछि, से केन्द्रसँ सहायताक आग्रह करैत अछि। केन्द्रीय मंत्रीक टीम ओहि राज्यक दौड़ा करैत अछि आ अपन रिपोर्ट दैत अछि जाहिपर केन्द्रीय मंत्रीक एकटा दोसर टीम निर्णय करैत अछि, आ ओ टीम निर्णय करैत अछि जे ई आपदा राष्ट्रीय आपदा अछि वा नहि। बिहारक राजनीतिज्ञ अपन पचास सालक विफलता बिसरि जखन एक दोसराक ऊपर आक्षेपमे लागल छलाह, मनमोहन सिंह मंत्रीक प्रधानक रूपमे दौड़ा कए एकरा राष्ट्रीय आपदा घोषित कएलन्हि। कारण ई लेवल-३ केर आपदा अछि आ ई सम्बन्धित राज्यक लेल असगरे - नहि तँ वित्तक लिहाजसँ आ नहिए राहतक व्यवस्थाक सक्षमताक हिसाबसँ- पार पाएब संभव नहि अछि। आब राष्ट्रीय आकस्मिक आपदा कोषसँ सहायता देल जा रहल अछि, किसानक ऋण-माफी सेहो सम्भव अछि। उपाय की होअए ? कुशेश्वर स्थानक आपदा सभ-साल अबैछ, से सभ ओकरा बिसरिए जेकाँ गेलाह। मुदा आब की होअए ? दामोदर घाटीक आ मयूरक्षी परियोजना जेकाँ कार्य कोशी, कमला, भुतही बलान, गंडक, बूढ़ी गंडक आ बागमतीपर किएक सम्भव नहि भेल ? विश्वेश्वरैय्याक वृन्दावन डैम किएक सफल अछि ? नेपाल सरकारपर दोषारोपण कए हमरा सभ कहिया धरि जनताकेँ ठकैत रहब ? एकर एकमात्र उपाए अछि बड़का यंत्रसँ कमला-बलान आदिक ऊपर जे माटिक बान्ह बान्हल गेल अछि तकरा तोड़ि कए हटाएब आ कच्चा नहरिक बदला पक्का नहरिक निर्माण। नेपाल सरकारसँ वार्ता आ त्वरित समाधन। आ जा धरि ई नहि होइत अछि तावत जे अल्पकालिक उपाय अछि से करब, जेना बरखा आबएसँ पहिने बान्हक बीचक रेतकेँ हटाएब, बरखाक अएबाक बाट तकबाक बदला किछु पहिनहि बान्हक मरम्मतिक कार्य करब, आ एहि सभमे राजनीतिक महत्वाकांक्षाकेँ दूर राखब। कोशीकेँ पुरान पथपर अनबाक हेतु कैकटा बान्ह बनाबए पड़त आ ओ सभ एकर समाधान कहिओ नहि बनि सकत। कमला धार नहरिसँ लाभ हानि- एक तँ कच्ची नहरि आ ताहूपर मूलभूत डिजाइनक समस्या, एकटा उदाहरण पर्याप्त होएत जेना-तेना बनाओल परियोजना सभक। कमलाक धारसँ निकालल पछबारी कातक मुख्य नहरि जयनगरसँ उमराँव- पूर्वसँ पछबारी दिशामे अछि। मुदा ओतए धरतीक ढ़लान उत्तरसँ दक्षिण दिशामे अछि। बरखाक समयमे एकर परिणाम की होएत आकि की होइत अछि ? ई बान्ह बनि जाइत अछि आ एकर उत्तरमे पानि थकमका जाइत अछि। सभ साल एहि नहर रूपी बान्हसँ पटौनी होअए वा नहि एकर उतरबरिया कातक फसिल निश्चित रूपेण डुमबे टा करैत अछि। फलना बाबूक जमीन नहरिमे नञि चलि जाए, से नहरिक दिशा बदलि देल जाइत अछि ! कमला नदीपर १९६० ई. मे जयनगरसँ झंझारपुर धरि छहरक निर्माण भेल आ एहिसँ सम्पूर्ण क्षेत्रक विनाशलीलाक प्रारम्भ सेहो भए गेल। झंझारपुरसँ आगाँक क्षेत्रक की हाल भेल से तँ हम कुशेश्वरक वर्णन कए दए चुकल छी। मधेपुर, घनश्यामपुर, सिंघिया एहि सभक खिस्सा कुशेश्वरसँ भिन्न नहि अछि। कमला-बलानक दुनू छहरक बीच जेना-जेना रेत भरैत गेल, ताहि कारणेँ एहि तटबन्धक निर्माणक बीस सालक भीतर सभ किछु तहस-नहस भए गेल। कमला धार जे बलानमे –पिपराघाट लग १९५४ मे- मिलि गेलीह, हिमालयसँ बहि कए कोनो पैघ लक्कड़क अवरोधक कारण। आब हाल ई अछि जे दस घण्टामे पानिक जलस्तर एहि धारमे २ मीटरसँ बेशी धरि बढ़ि जाइत अछि। १९६५ ई.सँ बान्ह/ छहरक बीचमे रेत एतेक भरि गेल जे एकर ऊँचाइ बढ़ेबाक आवश्यकता भए गेल आ ई माँग शुरू भए गेल जे बान्ह/ छहरकेँ तोड़ि देल जाए ! कोशी: कोशीक पानि माउन्ट एवेरेस्ट, कंचनजंघा आ गौरी-शंकर शिखर आ मकालू पर्वतश्रृंखलासँ अबैत अछि। नेपालमे सप्तकोशीमे, जाहिमे इन्द्रावती, सुनकोसी (भोट कोसी), तांबा कोसी, लिक्षु कोसी, दूध कोसी, अरुण कोसी आ तामर कोसी सम्मिलित अछि। एहिमे इन्द्रावती, सुनकोसी, तांबा कोसी, लिक्षु कोसी आ दूध कोसी मिलि कए सुनकोसीक निर्माण करैत अछि आ ई मोटा-मोटी पच्छिमसँ पूर्व दिशामे बहैत अछि, एकर शाखा सभ मोटा-मोटी उत्तरसँ दक्षिण दिशामे बहैत अछि। ई पाँचू धार गौरी शंकर शिखर आ मकालू पर्वतश्रृंखलाक पानि अनैत अछि। अरुणकोसी माउन्ट एवेरेस्ट (सगरमाथा) क्षेत्रसँ पानि ग्रहण करैत अछि। ई धार मोटा-मोटी उत्तर-दक्षिण दिशामे बहैत अछि। तामर कोसी मोटा-मोटी पूबसँ पच्छिम दिशामे बहैत अछि आ अपन पानि कंचनजंघा पर्वत श्रृंखलासँ पबैत अछि। आब ई तीनू शाखा सुनकोसी, अरुणकोसी आ तामरकोसी धनकुट्टा जिल्लाक त्रिवेणी स्थानपर मिलि सप्तकोसी बनि जाइत छथि। एतएसँ १० किलोमीटर बाद चतरा स्थान अबैत अछि जतए महाकोसी, सप्तकोसी वा कोसी मैदानी धरातलपर अबैत छथि। आब उत्तर दक्षिणमे चलैत प्रायः ५० किलोमीटर नेपालमे रहला उत्तर कोसी हनुमाननगर- भीमनगर लग भारतमे प्रवेश करैत छथि आ कनेक दक्षिण-पच्छिम रुखि केलाक बाद दक्षिण-पूर्व आ पच्छिम-पूर्व दिशा लैत अछि आ भारतमे लगभग १३० किमी. चललाक बाद कुरसेला लग गंगामे मिलि जाइत छथि। कोसीमे बागमती आ कमलाक धार सेहो सहरसा- दरभंगा- पूर्णिया जिलाक संगमपर मिलि जाइत अछि। कोसीपर पहिल बान्ह १२म शताब्दीमे लक्ष्मण द्वितीय द्वारा बनाओल वीर-बाँध छल जकर अवशेष भीमनगरक दक्षिणमे एखनो अछि। भीमनगर लग बैराजक निर्माणक संगे पूर्वी कोसी तटबन्ध सेहो बनि गेल आ पूर्वी कोसी नहरि सेहो। कुँअर सेन आयोग १९६६ ई. मे कोसी नियन्त्रणक लेल भीमनगरसँ २३ किमी. नीचाँ डगमारा बैराजक योजनाक प्रस्ताव देलक जे वाद-विवाद आ राजनीतिमे ओझरा गेल। एहि बैराजसँ दू फायदा छल। एक तँ भीमनगर बैरेजक जीवन-कालावधि समाप्त भेलापर ई बैरेज काज अबितए, दोसर एहिसँ उत्तर-प्रदेशसँ असम धरि जल परिवहन विकसित भऽ जाइत जाहिसँ उत्तर बिहारकेँ बड़ फाएदा होइतए। मुदा एहि बैरेज निर्माण लेल पाइ आवंटन केन्द्रीय सिंचाई मंत्री डॉ के.एल.राव नहि देलखिन्ह। पश्चिमी कोसी नहरि एकर विकल्प रूपमे जेना तेना मन्थर गति सँ शुरू भेल मुदा एखनो धरि ओहिमे काज भइये रहल अछि। कोसी लेल किछु नहि भऽ सकल। विचार आएल तँ योजना अस्वीकृत भए गेल। जतेक दिनमे कार्य पूरा हेबाक छल ततेक दिन विवाद होइत रहल, डगमारा बैराजक योजनाक बदलामे सस्ता योजनाकेँ स्वीकृति भेटल मुदा सेहो पूर्ण हेबाक बाटे ताकि रहल अछि ! विश्वेश्वरैय्या पड़ैत छथि मोन : हैदराबादसँ ८२ माइल दूर मूसी आ ईसी धारपर बान्ह बनाओल गेल आ नगरसँ ६.५ माइलक दूरीपर  मूसी धारक उपधारा बनाओल गेल। संगहि धारक दुनू दिस नगरमे तटबन्ध बनाओल गेल। कृष्णराज सागर बान्ह, हुनकर प्रस्तावित १३० फुट ऊँच बनेबाक योजना मैसूर राज्य द्वारा अंग्रेजकेँ पठाओल गेल तँ वायसराय हार्डिंज ओकरा घटा कए ८० फीट कए देलन्हि। विश्वेश्वरैय्या निचुलका भागक चौड़ाई बढ़ा कए ई कमी पूरा कए लेलन्हि। बीचेमे बाढ़ि आबि गेल तँ अतिरिक्त मजदूर लगा कए आ मलेरियाग्रस्त आ आन रोगग्रस्त मजदूरक इलाज लए डॉक्टर बहाली कए, रातिमे वाशिंगटन लैम्प लगा कए आ व्यक्तिगत निगरानी द्वारा समयक क्षतिपूर्ति केलन्हि। देशभक्त तेहन छलाह जे सीमेन्ट आयात नहि केलन्हि वरन् बालु, कैल्सियम, पाथर आ पाकल ईटाक बुकनी मिला कए निर्मित सुरखीसँ , एहि बान्हक निर्माण कएलन्हि। बान्ह निर्माणसँ पहिनहि द्विस्तरीय नहरिक निर्माण कए लेल गेल। दिल्ली अछि दूर एखनो ! : प्रधानमंत्री आपदा कोष आ मुख्यमंत्री आपदा कोषक अतिरिक्त स्वयंसेवी संगठन सभक कोषमे  सेहो दिल्लीवासी अपन अनुदान दए सकैत छथि। मुदा दीर्घ सूत्री काज होएत, निम्न बिन्दुपर दिल्लीमे केन्द्र सरकारपर दवाब बनाएब। १. स्कूल कॉलेजमे गर्मी तातिलक बदलामे बाढ़िक समए छुट्टी देबामे कोन हर्ज अछि, ई निर्णय कोन तरहेँ कठिन अछि? सी.बी एस.ई आ आइ.सी.एस.ई. तँ छोड़ू बिहार बोर्ड धरि ई नहि कए सकल अछि। दिल्लीवासी सी.बी एस.ई आ आइ.सी.एस.ई.सँ एहि तरहक कार्यान्वयन कराबथि तँ लाजे बिहार बोर्ड ओकरा लागू कए देत। २. भारतमे डगमारा बैराजक योजनाक प्रारम्भ कएल जाए, कारण भीमनगर बैरेज अपन जीवन-कालावधि पूर्ण कए लेने अछि। एहिमे फन्ड, रेलवे आ सड़क दुनू मंत्रालयसँ लेल जाए कारण एहिपर रेल आ सड़क सेहो बनि सकैछ/ आ बनबाक चाही। ३. बैरेज बनबाक कालवधियेमे पक्की नहरि धरातलक स्लोपक अनुसारे बनाओल जाए। ४. कच्ची बान्ह सभकेँ तोड़ि कए हटा देल जाए आ पक्की बान्हकेँ मोटोरेबल बनाओल जाए, बान्हक दुनू कात पर्याप्त गाछ-वृक्ष लगाओल जाए। ५. बिहारमे सड़क परियोजना जेना स्वप्नक सत्य होअए जेना देखा पड़ि रहल अछि, तहिना सभ विघ्न-बाधा हटा कए, युद्ध-स्तरपर एहि सभपर काज शुरू कएल जाए। उपरोक्त बिन्दु सभपर दिल्लीमे लॉबी बना कए केन्द्र सरकारपर/ मंत्रालयपर दवाब बनाएब तखने बिहार अपन नव छवि बना सकत। १२म शताब्दीमे शुरू कएल बान्ह तखने पूर्ण होएत आ धारसभ मनुक्खक सेविका बनि सकत। ३ सर्वहारा मैथिल संस्कृति एकटा विप्लवक दौरसँ चलि रहल अछि। माइग्रेशन एकटा नीक गप होइत अछि मुदा जाहि संस्कृतिमे एक पीढ़ीमे गामक गाम सुन्न भऽ गेल ओहिमे माइग्रेशन एकटा अभिशाप बनि आएल अछि। मैथिल संस्कृतिक बीस प्रतिशत भाग नेपालमे आ अस्सी प्रतिशत भाग भारतमे पड़ैत अछि। आ एहि माइग्रेसनसँ एतए आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक आ सांस्कृतिक संकट उत्पन्न भऽ गेल अछि। कारण: १९६७ ई. क अकाल आ तकर बादक कएक सालक शिथिल प्रशासन आ फेर १९८७ ई.क बाढ़ि आ तकर बादक कएक सालक शिथिल प्रशासन ई सभ मिलि कऽ एकटा आर्थिक संकट उत्पन्न कएल जाहिसँ माइग्रेशन अपन विकट रूपमे सोझाँ आएल आ एकटा सांस्कृतिक संकट उत्पन्न भेल। आर्थिक स्थिति खराप भेने जातिगत कट्टरता बढ़िते अछि।आ एहि संकट लेल आ एकरासँ निकलबाक लेल मिथिलाक संस्कृतिमे बहुत रास सहायक आ विरोधी तत्व सेहो उपलब्ध अछि। एतुक्का भाषाक कोमल आरोह-अवरोह, एतुक्का सर्वहारा वर्गक सर्वगुणसंपन्नता, संगहि एतुक्का रहन-सहन आ संस्कृतिक कट्टरता, ई सभटा मिथिलाक इतिहासक अंग अछि। एहिमे राजनीति, दिनचर्या, सामाजिक मान्यता, आर्थिक स्थिति, नैतिकता, धर्म, दर्शन आ साहित्य सेहो सम्मिलित अछि । एतए विद्यापति सन लोक भेलाह जे समाजक विभिन्न वर्गकेँ समेटि कऽ राखलन्हि तँ संगहि एतए कट्टर तत्व सेहो रहल। शिक्षा, जाति-पाति आ स्त्रीक दशा: जातिक भीतरक स्तरीकरण, दू जातिक बीचमे मतभेद, बहु-विवाह, बाल-विवाह, बिकौआ विवाह। बाल-विवाहक विरोध आ विधवा विवाहक पक्षमे कोनो सांकेतिक आन्दोलन धरि नहि भेल। शूद्र कवि ऐलूष वैदिक ऋचा लिखलन्हि तँ ओ समाज एतेक सुदृढ़ छल जे शुद्दक गण द्वारा एलेक्जेन्डरकेँ कड़गर विरोध सहए पड़लैक। मिथिलाक सन्दर्भमे सेहो जखन अपन शिल्पी लोकनि आ सभटा तथाकथित समाजक निम्न स्तरक लोक जखन सुदृढ़ छल तखन जनकक नामकरण जन सँ भेल आ फेर सिमरौनागढ़, पजेबागढ़, बलिराजपुर किला, असुरगढ़ किला, जयनगर किला, नन्दनगढ़, कटरागढ़, नौलागढ़, मंगलगढ़, कीचकगढ़, बेनूगढ़, वरिजनगढ़, आदिक एकटा शृंखला मिथिलाक स्थापत्य कलाक रूपमे उद्घाटित भेल। आ ई किला सभ शत्रुकेँ मथए बला मिथिलाक नामकरणक अनुरूप रहल। बौद्ध खोह, ताराक मूर्ति आदि शिल्पी कलाक अन्य रूपक चर्चक रूपमे सेहो उपस्थित अछि। मुदा जे ई कट्टरता बढ़ैत गेल तँ आइ मिथिलामे स्थापत्यक नामपर उपलब्धि सेहो शून्य भऽ गेल। आर्थिक स्थिति एहन भऽ गेल जे एक साँझ उपास रहए लागल। माइग्रेशन भुखमरी रोकलक मुदा किछु मूल्यपर। तहिना मैत्रेयीसन विदुषी सहस्राब्दी भरि विलुप्त रहलीह से जातिगत कट्टरता (जाति मध्य आन्तरिक अतरीकरण आ दू जाति मध्य- दुनु प्रकारक) कारणसँ। शिक्षाक ह्रास तँ तेहेन भेल जे षड दर्शनमे चारि टा दर्शन मिथिलासँ निकलल मुदा आइ गामक गाम मैट्रिक परीक्षामे पास नहि केनिहारसँ भरल अछि। बाढ़ि आ अर्थव्यवस्था: मिथिलाक धरती बाढ़िक विभीषिकासँ सेहो जुझैत रहल अछि। कुशेश्वरस्थान दिसुका क्षेत्र तँ बिन बाढ़िक, बरखाक समयमये डूमल रहैत अछि। मुदा ई स्थिति १९७८-७९ क बादक छी। पहिने ओ क्षेत्र पूर्ण रूपसँ उपजाऊ छल, मुदा भारतमे तटबन्धक अनियन्त्रित निर्माणक संग पानिक जमाव ओतए शुरू भऽ गेल। मुदा ओहि क्षेत्रक बाढ़िक कोनो समाचार कहियो नहि अबैत अछि, कहियो अबितो रहए तँ मात्र ई दुष्प्रचार जे ई सभटा पानि नेपालसँ छोड़ल गेल पानिक जमाव अछि। कुशेश्वरस्थान दिसुका लोक एहि नव संकटसँ लड़बाक कला सीखि गेलाह। हमरा मोन अछि ओ दृश्य जखन कुशेश्वरस्थानसँ महिषी उग्रतारास्थान जएबाक लेल हमरा बाढ़िक समयमे अएबाक लेल कहल गेल छल कारण ओहि समयमे नाओसँ गेनाइ सरल अछि, ई कहल गेल। रुख समयमे खत्ता-चभच्चामे नाओ नहि चलि पबैत अछि आ सड़कक हाल तँ पुछू जुनि। फसिलक स्वरूपमे परिवर्तन भेल, मत्स्य-पालन जेना तेना कऽ कए ई क्षेत्र जबरदस्तीक एकटा जीवन-कला सिखलक। कौशिकी महारानीक २००८ ई.क प्रकोप सोझाँ आएल। कोशी आ गंडकपर जे दू टा बैराज नेपालमे अछि ओकर नियन्त्रण बिहार सरकारक जल संसाधन विभागक लग अछि आ एतए बिहार सरकारक अभियन्तागणक नियन्त्रण छन्हि। पानि छोड़बाक निर्णय बिहार सरकारक जल संसाधन विभागक हाथमे अछि। नेपालक हाथमे पानि छोड़बाक अधिकार तखन अएत जखन ओतुक्का आन धार पर बान्ह/ छहर बनत, मुदा से ५० सालसँ ऊपर भेलाक बादो दुनू देशक बीचमे कोनो सहमतिक अछैत सम्भव नहि भए सकल। कोशीपर भीमनगर बैरेज कुशहा, नेपालमे अछि। १९५८ मे बनल एहि छहरक जीवन ३० बरख निर्धारित छल, जे १९८८ मे बीति गेल। दुनू देशक बीचमे कोनो सहमति किएक नहि बनि पाओल ? छहरक बीचमे जे रेत जमा भऽ जाइत अछि, तकरा सभ साल हटाओल जाइत अछि। कारण ई नहि कएलासँ ओकर बीचमे ऊंचाई बढ़ैत जाएत, तखन सभ साल बान्हक ऊँचाई बढ़ाबए पड़त। कोशी अपन मुख्य धारसँ हटि कए एकटा नव धार पकड़ैत अछि आ नेपालक मिथिलांचलक संग बिहारक मिथिलांचलकेँ तहस नहस करैत अछि।  मैथिली भाषा: मैथिल ब्राह्मण आ कर्ण कायस्थक आधारपर मैथिली सेवी संस्था सभ जे विद्यापति पर्व आ संस्थाक निर्माण, पुरस्कार वितरण कए रहल छथि ओहिमे गएर मैथिल ब्राह्मण आ कर्ण कायस्थक प्रवेश सीमित अछि मुदा एम्हर ओ बढ़ि रहल अछि। आ ई मैथिलीक लेल एकटा शुभ लक्षण अछि। साहित्यमे सेहो गएर मैथिल ब्राह्मण आ कर्ण कायस्थ लेखक आ पाठक बढ़ल छथि। मीडिया आ शिक्षा व्यवस्था एहि आधुनिक इन्फॉरमेशन सोसाइटीमे अपन हस्तक्षेपसँ मैथिली भाषा आ मैथिल संस्कृति लेल एकटा प्रहार सन अछि मुदा सौभाग्य मिथिला सन टी.वी. चैनल आ नेपालक कान्तिपुर एफ.एम., जानकी एफ.एम. आ रेडियो मिथिला सन रेडियो स्टेशन एहि प्रहारकेँ सीमित रूपमे रोकलक अछि। बाल साहित्यक निर्माण सेहो बढ़ल अछि। अन्तर्जाल सेहो एकभगाह मैथिली साहित्यमे हस्तक्षेप कएलक अछि। उपाय की होअए ? स्थानिक विशेषताक आधारपर स्त्री-शिक्षा, संगणक शिक्षा आ व्यवसाय आधारित शिक्षा देल जाए। प्राथमिक शिक्षाक माध्यम मिथिला भरिमे मैथिली भाषा द्वारा देल जाए। बाढिक समस्याक समाधान होअए। दामोदर घाटीक आ मयूरक्षी परियोजना जेकाँ कार्य कोशी, कमला, भुतही बलान, गंडक, बूढ़ी गंडक आ बागमतीपर किएक सम्भव नहि भेल ? विश्वेश्वरैय्याक वृन्दावन डैम किएक सफल अछि ? नेपाल सरकारपर दोषारोपण कए हमरा सभ कहिया धरि जनताकेँ ठकैत रहब ? एकर एकमात्र उपाए अछि बड़का यंत्रसँ कमला-बलान आदिक ऊपर जे माटिक बान्ह बान्हल गेल अछि तकरा तोड़ि कए हटाएब आ कच्चा नहरिक बदला पक्का नहरिक निर्माण। नेपाल सरकारसँ वार्ता आ त्वरित समाधन। आ जा धरि ई नहि होइत अछि तावत जे अल्पकालिक उपाय अछि से करब, जेना बरखा आबएसँ पहिने बान्हक बीचक रेतकेँ हटाएब, बरखाक अएबाक बाट तकबाक बदला किछु पहिनहि बान्हक मरम्मतिक कार्य करब, आ एहि सभमे राजनीतिक महत्वाकांक्षाकेँ दूर राखब। कमला नदीपर १९६० ई. मे जयनगरसँ झंझारपुर धरि छहरक निर्माण भेल आ एहिसँ सम्पूर्ण क्षेत्रक विनाशलीलाक प्रारम्भ सेहो भए गेल। झंझारपुरसँ आगाँक क्षेत्रक की हाल भेल से तँ हम कुशेश्वरक वर्णन कए दए चुकल छी। मधेपुर, घनश्यामपुर, सिंघिया एहि सभक खिस्सा कुशेश्वरसँ भिन्न नहि अछि। कमला-बलानक दुनू छहरक बीच जेना-जेना रेत भरैत गेल, ताहि कारणेँ एहि तटबन्धक निर्माणक बीस सालक भीतर सभ किछु तहस-नहस भऽ गेल। कमला धारक हाल ई अछि जे दस घण्टामे पानिक जलस्तर एहि धारमे २ मीटरसँ बेशी धरि बढ़ि जाइत अछि। १९६५ ई.सँ बान्ह/ छहरक बीचमे रेत एतेक भरि गेल जे एकर ऊँचाइ बढ़ेबाक आवश्यकता भए गेल आ ई माँग शुरू भए गेल जे बान्ह/ छहरकेँ तोड़ि देल जाए ! एतए विश्वेश्वरैय्या मोन पड़ैत छथि। हैदराबादसँ ८२ माइल दूर मूसी आ ईसी धारपर बान्ह बनाओल गेल आ नगरसँ ६.५ माइलक दूरीपर मूसी धारक उपधारा बनाओल गेल। संगहि धारक दुनू दिस नगरमे तटबन्ध बनाओल गेल। कृष्णराज सागर बान्ह, हुनकर प्रस्तावित १३० फुट ऊँच बनेबाक योजना मैसूर राज्य द्वारा अंग्रेजकेँ पठाओल गेल तँ वायसराय हार्डिंज ओकरा घटा कए ८० फीट कए देलन्हि। विश्वेश्वरैय्या निचुलका भागक चौड़ाई बढ़ा कए ई कमी पूरा कए लेलन्हि। बीचेमे बाढ़ि आबि गेल तँ अतिरिक्त मजदूर लगा कए आ मलेरियाग्रस्त आ आन रोगग्रस्त मजदूरक इलाज लए डॉक्टर बहाली कए, रातिमे वाशिंगटन लैम्प लगा कए आ व्यक्तिगत निगरानी द्वारा समयक क्षतिपूर्ति केलन्हि। देशभक्त तेहन छलाह जे सीमेन्ट आयात नहि केलन्हि वरन् बालु, कैल्सियम, पाथर आ पाकल ईटाक बुकनी मिला कए निर्मित सुरखीसँ , एहि बान्हक निर्माण कएलन्हि। बान्ह निर्माणसँ पहिनहि द्विस्तरीय नहरिक निर्माण कए लेल गेल। दिल्ली अछि दूर एखनो ! निम्न बिन्दुपर दिल्लीमे केन्द्र सरकारपर दवाब बनाएब। स्कूल कॉलेजमे गर्मी तातिलक बदलामे बाढ़िक समए छुट्टी देबामे कोन हर्ज अछि, ई निर्णय कोन तरहेँ कठिन अछि? सी.बी एस.ई आ आइ.सी.एस.ई. तँ छोड़ू बिहार बोर्ड धरि ई नहि कए सकल अछि। स्थानिक विशेषताक आधारपर स्त्री-शिक्षा, संगणक शिक्षा आ व्यवसाय आधारित शिक्षा आ प्राथमिक शिक्षाक माध्यम मिथिला भरिमे मैथिली भाषा द्वारा देल जाए। बैरेज बनबाक कालवधियेमे पक्की नहरि धरातलक स्लोपक अनुसारे बनाओल जाए। कच्ची बान्ह सभकेँ तोड़ि कए हटा देल जाए आ पक्की बान्हकेँ मोटोरेबल बनाओल जाए, बान्हक दुनू कात पर्याप्त गाछ-वृक्ष लगाओल जाए। बिहारमे सड़क परियोजना जेना स्वप्नक सत्य होअए जेना देखा पड़ि रहल अछि, तहिना सभ विघ्न-बाधा हटा कए, युद्ध-स्तरपर एहि सभपर काज शुरू कएल जाए। ४ विदेशी पूँजीक भारतमे सोझ निवेश दोसर देशक फर्मसँ मिलि कऽ वा ओकर सम्पत्ति वा ओकर स्टॉक कीनि कऽ होइत अछि। ओ ऐ लेल स्वॉट अनेलिसिस करै छथि आ अपन प्रवेशक लेल अपन कम दाममे उत्पादन आ सेहो तीव्र गतिसँ कएक तरहक उपाय द्वारा करबाक क्षमताकेँ देखैत करै छथि। कोन देशमे विदेशी पूँजी निवेश होएत से किछु गपपर निर्भर करैत अछि। चीनमे भारतक बनिस्पत बेशी विदेशी पूँजी आओत कारण भारतमे कार्य करबा लेल ढेर रास लोकतंत्रीय प्रक्रिया सभ छै जे उत्पाद केर दाम बढ़बैत छै। ई एना बूझि सकै छी जापान आ स्विटजरलैण्ड आदि देशमे विदेशी पूँजी कम आएल बनिस्पत स्पेनक। आ ऐ तरहेँ तुलना करी तँ नेपालमे भारतक अपेक्षा तुलनात्मक पूँजी निवेश बेशी आओत। मैथिली आ आन भाषामे विदेशी पूँजी निवेशक आगमनक सम्भावना देखी तँ तुलनात्मक रूपमे मैथिलीमे बेशी पूँजी आओत, नेपाली वा हिन्दीक तुलनामे। आ मैथिलीक सन्दर्भमे नेपालक मैथिलीक भविष्य भारतक मैथिलीक भविष्यक तुलनामे बेशी नीक बूझि पड़त जँ विदेशी पूँजीक गप आओत।

मुदा विदेशी पूँजी मात्र प्रबन्धन वा अर्थशास्त्रक उपरोक्त सैद्धांतिक प्रतिफल टा नै अछि। एतए हम राजनैतिक स्थिरता आ सामाजिक संकट दुनूकेँ सोझाँ पबै छी। भारतक भयंकर लाइसेंस फीस जेना सूचना आ प्रौद्योगिकीक क्षेत्रमे मैथिलीक दुर्दशाक लेल जिम्मेद्दारी लेलक से नेपालमे नै अछि। से ओतए रेडियो आ टी.वी.पर मैथिली नीक दशामे अछि। मुदा राजनैतिक अस्थिरता कखनो काल नेपालमे पूँजी निवेशमे बाधक भऽ जाइए। तहिना नेपालक मैथिलीक सामाजिक आधार विस्तृत अछि मुदा भारतक तेहन नै अछि। से भारतमे मैथिलीक लेल पूँजी निवेशक ई ऋणात्मक गुणक अछि। जेना ऊपर कहने छी जे कोनो विदेशी पूँजी निवेश होएत तँ पाइ लगेनहार पहिने स्वॉट एनेलिसिस करत।  मैथिलीक सन्दर्भमे स्वॉट एनेलिसिस:- मैथिलीक स्वॉट Strenghth- Weakness- Opportunity- Threat (SWOT) एनेलेसिस (हमर गुरुजी चमू कृष्ण शास्त्री जीक ऐमे बड़ पैघ योगदान छन्हि।)

मैनेजमेन्टमे एकटा विषए छैक स्वॉट अनेलिसिस। मैथिलीकेँ ऐ कसौटीपर कसै छी।

S- Strenghth- शक्ति, सामर्थ्य, बल – मैथिली लेल हृदएमे अग्नि छन्हि, से सभक हृदएमे, परस्पर एक दोसराक विरोधी किएक ने होथु। जनक बीचमे ऐ भाषाक आरोह, अवरोह आ भाषिक वैशिट्यकेँ लऽ कऽ आदर अछि आ ऐ मे मैथिली नै बजनिहार भाषाविद् सम्मिलित छथि। आध्यात्मिक आ सांस्कृतिक महत्वक कारण सेहो मैथिली महत्वपूर्ण अछि। ऐ भाषामे एकटा आन्तरिक शक्ति छै। बहुत रास संस्था, जइमे किछु जातिवादी आ सांप्रदायिक संस्था सेहो सम्मिलित अछि, एकर विकास लेल तत्पर अछि। ऐ भाषाक जननिहार भारत आ नेपाल दू देशमे तँ रहिते छथि आब आन-आन देश-प्रदेशमे सेहो पसरल छथि।

W- Weakness- न्यूनता, दुर्बलता, मूर्खता – प्रशंसा परम्परा जइमे दोसराक निन्दा सेहो ऐमे सम्मिलित अछि, एकरे अन्तर्गत अबैत अछि- माने आत्मप्रशंसाक। परस्पर प्रशंसा सेहो ऐमे शामिल अछि। सरकारपर आलम्बन, प्राथमिकताक अज्ञान- जकर कारणसँ महाकवि बनबा/ बनेबा लेल कवि समीक्षक जान अरोपने छथि- जखन भाषा मरि रहल अछि। कार्ययोजनाक स्पष्ट अभाव अछि आ जेना-तेना किछु मैथिली लेल कऽ देबा लेल सभ व्यग्र छथि, कऽ रहल छथि। स्वयं मैथिली नै बाजि बाल-बच्चाकेँ मैथिलीसँ दूर रखबाक जेना अभियान चलल अछि आ ऐमे मीडिया, कार्टून आ शिक्षा-प्रणालीक संग एक्के खाढ़ीमे भेल अत्यधिक प्रवास अपन योगदान देलक अछि। मैथिलीक कार्यकर्ता लोकनिक कएक ध्रुवमे बँटल रहबाक कारण समर्थनपरक लॉबिइंग कर्ताक अभाव अछि। मैथिलीकेँ ऐमे की लाभक बदला अपन/ अप्पन लोकक की लाभ ऐ लेल लोक बेशी चिन्तित छथि। मैथिली छात्रक संख्याक अभाव। उत्पाद उत्तम रहला उत्तर सेहो विक्रयकौशलक आवश्यकता होइत छै। मैथिलीमे उत्तम उत्पादक अभाव तँ अछिए, विक्रयकौशलक सेहो अभाव अछि।

O- Opportunity- अवसर, योग, अवकाश – विशिष्ट विषयक लेखनक अभाव, मात्र कथा-कविताक सम्बल। मैथिलीमे चित्र-शृंखला, चित्रकथा, विज्ञान, समाज विज्ञान, आध्यात्म, भौतिक, रसायन, जीव, स्वास्थ्य आदिक पोथीक अभाव अछि। ताड़ग्रन्थक संगणकक उपयोग कऽ प्रकाशन नै भऽ रहल अछि। छात्र शक्तिक प्रयोग न्यून अछि। संध्या विद्यालय आ चित्रकला-संगीतक माध्यमसँ शिक्षा नै देल जा रहल अछि। दूरस्थ शिक्षाक माध्यमसँ/ अन्तर्जालक माध्यमसँ मैथिलीक पढ़ाइक अत्यधिक आवश्यकता अछि। मैथिलीमे अनुवाद आ वर्तमान विषय सभपर पुस्तक लेखन आ अप्रकाशित ताड़ ग्रन्थ सभक प्रकाशनक आवश्यकता अछि। मैथिलीक माध्यमसँ प्रारम्भिक शिक्षाक आवश्यकता अछि। प्रवासी मैथिल लेल भाषा पाठन-लेखन-सम्पादन पाठ्यक्रमक आवश्यकता अछि।

T- Threat- भीषिका, समभाव्यविपद् – हताशा, आत्महीनता, शिक्षासँ निष्कासन, पारम्परिक पाठशालामे शिक्षाक माध्यमक रूपमे मैथिलीक अभाव, विरल शास्त्रज्ञ, ताड़पत्रक उपेक्षा आ विदेशमे बिक्री, भाषा शैथिल्य, सांस्कृतिक प्रदूषण आ परिणामस्वरूप भाषा प्रदूषण, मुख्यधारासँ दूर भेनाइ आ मात्र दू जातिक भाषा भेनाइ, शिक्षक मध्य ज्ञान स्तरक ह्रास, राजनैतिक स्वार्थवश मैथिलीक विरोध ई सभ विपदा हमरा सभक सोझाँ अछि।

ई सभटा ऊपरवर्णित बिन्दु प्रबन्धन-विज्ञानक कार्ययोजनाक विषय अछि आ भाषणक नै कार्यक आवश्यकता अछि। सम्भाषण, मैथिली माध्यमसँ पाठन, नव सर्वांगीन साहित्यक निर्माण लेल सभकेँ एकमुखी, एक स्तरीय आ एक यत्नसँ प्रयास करए पड़त। धनक अभाव तखने होइत अछि जखन सरकारी सहायतापर आस लगेने रहब। सार्वजनिक सहायताक अवलम्ब धरू, दाताक अभाव नै स्वीकारकर्ताक अभाव अछि।

यूनेस्को कहैत अछि जे भारत विश्वक ६ठम सभसँ पैघ पुस्तक प्रकाशक अछि जतए अंग्रेजी लगा कऽ २५ मान्यताप्राप्त भाषामे पोथी प्रकाशन होइ छै। अंग्रेजीक पोथी प्रकाशनमे भारत संयुक्त राज्य अमेरिका आ ग्रेट ब्रिटेनक बाद तेसर स्थानपर अछि। मुदा चौबीस मुख्य भाषामे सँ यूनेस्कोक अनुसार पुस्तक प्रकाशन लेल मात्र १८ भाषा महत्वपूर्ण अछि आ ऐ १८ भाषामे मैथिली नै अछि। मैथिली ऐ १८ मे नै अछि। फेडरेशन ऑफ इण्डियन पब्लिशर्सक अनुसार मोटामोटी भारतमे १६००० प्रकाशक छथि जे सालमे ७०००० पोथी प्रकाशित करै छथि। ऐमे २१,००० पोथी अंग्रेजीमे छपैए आ तहूसँ बेशी पोथी हिन्दीमे छपैए। भारतमे साक्षरताक स्थिति जेना-जेना नीक हेतै, तेना-तेना पोथी पढ़ैबलाक संख्यामे सेहो वृद्धि हेतैक। नेपालमे मुख्यतः नेपालीक पोथी छापल जाइत अछि। भारत आ नेपाल दुनू ठाम मैथिली पोथीक प्रकाशन गुण आ संख्या दुनूमे पछुआएल अछि। सरकारी संस्थाक संग विदेशी निवेशकक सहयोग: आब प्रकाशन उद्योगसँ आगाँ बढ़ी आ सूचना-प्रसार माध्यमक आन क्षेत्र जेना टी.वी., रेडियो आ ऑनलाइन भाषाइ उपकरणपर आउ। एतऽ विदेशी निवेशक हमरा सभ लेल डॉक्यूमेन्टरी, मनोरंजन आ भाषाइ उपकरणक निर्माणमे सहयोग दऽ सकै छथि। सरकार मान्यताप्राप्त भाषा लेल बिना बजारकेँ ध्यानमे रखने खास कऽ मैथिली सहित ओइ छह भाषाकेँ ध्यानमे राखैत काज करए तँ बजारक दृष्टिसँ जे सांस्कृतिक ह्रास सूचना-प्रौद्योगिकी मध्य देखबामे आबि रहल अछि से मैथिलीमे नै आओत। अरबी भाषाकेँ फंडक कोनो कमी नै छै मुदा ओ भाष किए मरि रहल अछि, जखन ओकरा पक्षमे सरकारी कामकाज छै, मस्जिद छै, शिक्षा पद्धति छै। लेबनान, जोर्डन आ इजिप्टक अतिरिक्त सउदी अरब आ आन गल्फ देशक एकरा संरक्षण छै। मुदा पाइ एकरा लेल आफत बनल छै। सभ शेख विदेशसँ पढ़ि कऽ अबैत छथि आ मिश्रित अरबी बजै छथि आ तकरा फैशन मानल जा रहल छै। जै अरबीमे कुराण लिखल गेल आ आइ काल्हिक शैक्षिक “आधुनिक मानकीकृत अरबी- मॉडर्न स्टैण्डर्ड अरेबिक- (एम.एस.ए.)” मे बड्ड पैघ भेद आबि गेल छै। ई “आधुनिक मानकीकृत अरबी” बाजै जाए बला अरबीसँ फराक भऽ गेल अछि आ एकर काज मात्र सभ अरब देशक बीच सूत्रबद्ध करबा धरि सीमित भऽ गेल छै, जइसँ सभ एक दोसराकेँ बुझि पाबए। मुदा यएह “आधुनिक मानकीकृत अरबी” दृश्य-श्रव्य-प्रिंटमे अछि जे ककरो मातृभाष नै छिऐ वरन व्याकरण पढ़ि कऽ सीखल जाइ छै। विदेशी निवेशककेँ जे सरकार मैथिली लेल मनोरंजक कार्यक्रमकेँ मैथिलीमे डब करबाक लेल सहायता करए तँ कार्टून चैनल सभक कार्यक्रम आ धारावाहिक सभ मैथिलीमे प्रसारित भऽ सकत भने ओकरा विज्ञापन भेटौ वा नै। आ एक बेर जे ई पहिया घुमत तँ मैथिली जीबि उठत। आ ई पहिया तखने घुमत जखन मधुबनी-दरभंगा-सहरसा-सुपौलक ब्राह्मण-कायस्थ-सवर्ण मैथिलीकेँ जीबि उठऽ देताह, अपन ऋणात्मक ऊर्जाकेँ विराम देताह, समाजक सभ वर्ग जे मैथिलीसँ जुड़ि रहल अछि ओइमे बाधा देबाक बदला सहयोग करताह। समाजक राक्षसी प्रतिभायुक्त ई सर्वहारा वर्ग मैथिलीक रक्षा लेल समर्पित हसेरी बनत तखने ई भाषा आब बचत। मुख्य विदेशी निवेशक: अखन धरि हार्पर कॉलिन्स, पेंगुइन, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, मैकमिलन, रैंडम हाउस, पिकाडोर, हैचेट आ रुटलेज हावर्ड बिजनेस पब्लिशिंग अपन शाखा वा भारतीय सहयोगीक माध्यमसँ भाषायी क्षेत्रमे निवेश केने अछि। मुदा से निवेश अंग्रेजी धरि सीमित भऽ गेल अछि। भारतमे प्रकाशन उद्योगमे विदेशी खिलाड़ी अएलाक बाद एकटा पेंगुइन हिन्दीकेँ छोड़ि देल जाए तँ विदेशी निवेश भारतीय भाषामे लगभग नगण्य अछि। एकर कारण सेहो स्पष्ट अछि। भारतीय भाषाक प्रकाशक सरकारी खरीदपर निर्भर छथि आ गएर सरकारी खरीदमे ओ टेक्स्टबुक छपाइपर जोर दै छथि। विदेशी निवेशक सरकारी खरीद आ टेक्स्टबुक छपाइक आधारपर अपन नीति निर्धारित नै करै छथि। मैथिलीक लेल ई वरदान होइतए मुदा जे भविष्यक साक्षरता वृद्धिक अनुमान लैयो कऽ चली तँ नव साक्षर मैथिली पढ़ताह तकर आशा वर्तमान शिक्षा प्रणालीमे मैथिलीक कतिआएल स्थितिकेँ देखैत असम्भवे बुझा पड़ैत अछि, आ मैथिलीमे ने सरकारी लाइब्रेरीक खरीदक आशा छै आ ने टेक्स्ट बुक छपाइक। पाठकक संख्या तखन इन्टरनेटपर बढ़ाबए पड़त, आ जे पाठक कहियो सरकारी शिक्षा प्रणालीमे मैथिली नै पढ़ि सकल छथि तिनका प्रारम्भमे मंगनीमे डाउनलोडक सुविधा देबऽ पड़त। मैथिलीसँ अंग्रेजी आ संस्कृत आ तकर माध्यमसँ आन भाषामे अनुवाद द्वारा सरकारी आ संस्थागत पुरस्कार पद्धति द्वारा कतिआएल पोथी सभकेँ सोझाँ आनए पड़त जइसँ मैथिली साहित्यक उत्कृष्टता विदेशी निवेशकक सोझाँ आबए। आ ओम्हर सरकारी स्कूलक अतिरिक्त पब्लिक स्कूल सभमे सेहो मैथिलीक पढाइ हुअए तइ लेल समर्पित हसेरी तैयार करए पड़त। एक दोसरापर प्रत्यारोप लगेलाक बदला (कायस्थ आ ब्राह्मण द्वारा एक दोसरापर, मधुबनी-सहरसा-मधेपुरा-समस्तीपुर-बेगुसराय, पूर्णियांक लोक द्वारा एक दोसरापर आरोप-प्रत्यारोप जे मैथिलीक दुर्दशा लेल हम नै ओ जिम्मेवार छथि- तइसँ हटि कऽ) एकमुखी, एक स्तरीय आ एक यत्नसँ प्रयास करए पड़त। आ जनताकेँ जोड़ए पड़त। हा पुरस्कार केलाक बदला जन साहित्यकारकेँ चिन्हबापर, जन नेताकेँ चिन्हबापर, जन विक्रेताकेँ चिन्हबापर अपन जान-जी लगाबऽ पड़त।  विदेशी निवेशसँ छोड़ू भारतीय प्रकाशक जे कहियो ऐ क्षेत्रमे आबऽ चाहलक वा सरकारी खरीदक मशीनरी जे कोनो मैथिलीक पोथी कीनऽ चाहलक वा अनुवाद लेल कोनो स्वयंसेवी संस्था मैथिली पोथी सभक चयन करऽ चाहलक तखनो मैथिली साहित्यक पुरोधा लोकनि द्वारा, जे सलाहकार बनलाह, द्वारा भ्रमित सूची देल गेल, कतेक रास मिथिलाक्षरक पाण्डुलिपि देशक बाहर टपा देल गेल आ मारते रास लोक द्वारा ढेर रास बखेरा ठाढ़ कएल गेल। से सभ कियो भागि गेलाह, बाहरियो आ मैथिली सेवी सेहो। सरकारी खरीद गुणक आधारपर नै भेल, पैरवी-पैगाम आ ढेर रास आन गुणकक आधारपर भेल। विदेशी निवेशकक लग ई सभ ऋणात्मक पक्ष लऽ कऽ हमरा सभ कोना जा सकब।

विदेशी निवेशसँ मैथिलीपर अप्रत्यक्ष प्रभाव: मैथिलीपर विदेशी निवेशक अप्रत्यक्ष प्रभावक रूपमे मैथिली बाजैबलाक संख्याक घटोत्तरी आ मैथिलीक शब्दावलीक ह्रासकेँ राखल जाइत अछि। ओना ई सभ भारत आ नेपालमे पैघ नग्रक अनियन्त्रित विकास आ छोट नग्रक बिना अपन आर्थिक आधारक मात्र जमीनक खरीद-बिक्रीक कारणसँ विस्तारक कारण बेसी भेल अछि। मैथिली भाषीक एके खाढ़ीमे जतेक पड़ाइन भेल अछि से आन वर्गमे तीन-चारि खाढ़ीमे भेल (जेना तमिल वा बांग्लाभाषीकेँ लऽ सकै छी।)। मुदा आनो भाषा-भाषीमे विदेश पड़ाइनसँ भाषाक लोप भेल अछि मुदा संस्कृतिक लोप नै तँ आन वर्गमे भेल अछि आ ने मैथिलीभाषी वर्गमे। मैथिली भाषीकेँ लऽ कऽ दिल्लीमे ई कहबी भऽ गेल अछि जे आन वर्ग पाँच साल दिल्लीमे रहलापर पंजाबी बाजऽ लगै छथि आ हुनकर घरक स्त्रीगण करवा-चौथ करऽ लगै छथि मुदा मैथिलीभाषी नै तँ पंजाबी सिखै छथि आ ने हुनकर घरक स्त्रीगण करवा-चौथ करै छथि। हँ जखन अहाँ पत्नीसँ मैथिलीमे नै बजबै आ बच्चाकेँ गामक दर्शनो नै करऽ देबै तँ ओ मैथिली बाजब छोड़बे करत। विदेशी निवेश जाइ तरहेँ हिन्दी आ अंग्रेजी कार्टून चैनलमे भेल अछि, ओइसँ मैथिलीटा नै पंजाबीपर सेहो संकट आबि गेल अछि। मुदा ई एकटा फेज छिऐ, आ ई फेज बीस बर्खमे खतम भऽ जाएत। जे परिवार ऐ बीस बर्खमे मैथिली बाजब छोड़ि देताह हुनका हम मैथिली दिस सोझ रूपमे नै घुरा सकब। मुदा सांस्कृतिक सन्निकटताक कारणसँ मैथिलीक परियोजना, अनुवाद, ऒडियो-वीडियो आ संचार परियोजनाकेँ ओ समर्थन करबे करताह, तकरा सम्मान देबे करताह। आ ई अप्रत्यक्ष रूपमे मैथिली लेल वरदान सिद्ध हएत। आ एकटा पुनर्जागरणक काल अखन चलि रहल अछि तकर पुनरावृत्ति बीस बर्ख बाद हएत। मैथिली युद्धसँ बहार भऽ जीवित निकलत आ सुदृढ़ हएत। विदेशी निवेशककेँ मैथिलीमे निवेश केलासँ लाभ: विदेशी निवेशक कल्याणकारी कार्य सेहो करै छथि। हुनका मैथिलीक विशेषता बुझाबए पड़त। विश्व प्रसिद्ध वायोलिन वादक स्व. येहुदी मेनुहिन मैथिलीकेँ संसारक सभसँ लयात्मक आ मधुर भाषा कहने छलाह। विदेशी निवेशकक किछु निवेश यूनेस्कोक भाषा सम्बन्धी नीतिक आधारपर सेहो करैत अछि। आ ई कल्याणकारी निवेश लाभपर आधारित नै होइत अछि, सरकारी खरीदपर आधारित नै होइत अछि, विज्ञापनपर आधारित नै होइत अछि। अन्तर्राष्ट्रीय सर्टिफिकेशनपर आधारित गएर सरकारी संस्था सभक माध्यमसँ मैथिलीमे शैक्षिक पोथी आ मनोरंजन आ स्वास्थ्य आधारित फिल्म डोक्यूमेन्टरीक मैथिली भाषी क्षेत्रमे ग्राम पंचायतक स्कूल सभक माध्यमसँ कएल जाए तँ मैथिली भाषी लोकक हीन भावनामे कमी आओत आ भाषायी क्रान्तिक संगे आर्थिक क्रान्ति सेहो आएत। (अनुवर्तते) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। डॉ आभा झा बौक किछु नञि बजै छथि जया, वाक् हरण भ' गेलनि।ई वैह जया छथि,जनिक उपस्थिति मात्र सॅं वातावरण उल्लसित भ' जाइत छल,सौंसे चहल-पहल भ' जाइत छल। केहनो गंभीर माहौल केॅं ओ अपन विनोदी स्वभाव सॅं हल्लुक बना दैत छलीह। मात्र घरहिं मे नञि,कालेजो मे अपन मेधा आ वाक्चातुर्य  सॅं सभहक प्रिय छलीह।निर्द्वन्द्व बाल्यकाल, निर्बन्ध युवावस्था, आॉंखि मे भविष्यक स्वर्णिम स्वप्न,ओहि स्वप्नकेॅं पूर्ण करबा लेल अनुरूप प्रयत्न! माता-पिताक स्नेह आ विश्वासक छत्रछाया मे जया बढ़ैत गेलीह,अपन व्यक्तित्व गढ़ैत रहलीह आ एही तरहें एकटा मल्टीनेशनल कंपनी में एक्जीक्यूटिव मैनेजरक पद पाबि कने थमलीह। साल दू साल बितला पर माता पिता दिस सॅं विवाहक लेल दबाव पड़' ' लगलनि-"क्यो पसिन्न अछि त' बाजू, नञि त' हम वर ताकै छी"। कने विचारलनि त' अपन मित्रमंडली मे क्यो एहन नञि बुझेलनि जे विवाह लेल गंभीर हो,अपन दिमाग पर विशेष जोर नञि द' ओ माता-पिताक पाला मे गेन फेकि देलखिन।एहि तरहेॅं कैप्टन अशोक हुनका जिनगी मे एलखिन। जीवन जेना आर रमणगर भ' गेलनि।क्षण-क्षण माधुर्यक वर्षा होमैत रहलै आ ज़रा ओहि मे भिजैत रहलीह।दू बरख मे अभिनव कोरा मे आबि गेलनि।आब त' दिन पांखि लगैत उड़' लगलनि।ओ त' रच्छ छलनि जे सासु आबि गेल छलखिन, तैं नोकरी करब पार लगै छलनि। मुदा विधाता केॅं हुनकर सुख नीक नञि लगलनि, जीवन भरि संग देबाक वचन द' हाथ पकड़' बला अशोक मात्र चारिए बरख मे संग छोड़ि देलखिन।अभिनवक मुंह देखि सहि लेलनि ई कठोर आघात जया। मुदा अशोकक जिनगी मे सासुर मे प्रिय रहलि जया अचानक अप्रिय भ' गेलीह!अनेक तरहक बंधन परिवार दिस सॅं थोपल जाइ लगलनि!हुनकर करेजक टुकड़ा अभिनव सेहो उपेक्षित होमय लगलनि! विधाताक कठोर डांग हिम्मत सॅं सहै बाली जया लोकक बदलैत नजरि देखि हतबुद्धि छलीह! कारण छल अशोकक ओ मकान आ सेना दिस सॅं भेटय बला फण्ड!किछु दिन जेना- तेना बर्दाश्त केलनि, मुदा विवश भय पुनः माता- पिताक देहरि पर आबि गेलीह! आर्थिक कष्ट त' नञि भेलनि कहियो,कारण अपन नीक नोकरी त' छलन्हिये,संगे माता -पिताक सभ संपतियोक ई एसकरि उत्तराधिकारिणी छलीह, मुदा संमंधक आधारहीनता हिनका हिला क' राखि देलकनि।बाजब- भूकब आब काजे धरि रहलनि, स्वभावक ओ जीवंतता तिरोहित भ' गेलनि।तैंयो जया जया छलीह,न अपन नोकरीक प्रतिबद्धता अनदेखार केलनि,न माता पिताक सेवा ,न अभिनवक पालन- पोषण मे कोनो तरहक त्रुटि! समय बितैत रहल,अभिनव आइ पूर्ण युवक छथि, शिक्षित, संस्कारी ! एकटा प्रतिष्ठित कंपनी मे कार्यरत छथि।विवाहक लेल ओ अपनहिं सहकर्मिणी पसिन्न केलनि। आब जया कने आश्वस्तिक सांस लेलनि,अपन कर्तव्यपूर्णताक अनुभूति भेलनि,भगवानक धन्यवाद केलनि,।सभ ठीक-ठाक जकाॅं बुझाइत छलनि कि अभिनव आ मधुक समंध खराप होइत होइत एत' धरि पहुंचि गेलनि कि एक दिन मधु दहेजक मांग आ प्रताड़नाक आरोप मे पति आ सासुक विरुद्ध  अभियोग दर्ज करा एलीह।एकर बादक न्यायालयीय कार्रवाई आ सामाजिक प्रताड़ना एतेक पैघ मानसिक आघात देलकनि जया केॅं कि ओ परास्त भ' गेलीह,सभटा जिजीविषा सूखि गेलनि,आब बांचल छथि मात्र एकटा सुखायल गाछ,शब्दहीन,भावहीन प्रेतक छाया! ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। कीर्तिनाथ झा लघुकथा-नपुंसक 1 नीकवा  बेजाय, गाममें लोक कें गप्प चाहियैक. मुदा, लोककें रस गप्पमें  नहिं अबैत छैक, रस अबैत छैक कुचेष्टामें. कारण, सब सुखी हो ताहिसँ मन शांत जरूर हयत, मुदा, शोणितमें जं हिमोग्लोबिन बढ़ेबाक अछि तं  गप्पमें रस लियअ, गप्प में  रस दिऔक. अनकरकुचेष्टा जकरा नीक नहिं लगनि से कीर्तन में जा कय बैसथु ! देखैत नहिं छियैक, शहरक देखाउस पर आप गामो सबमें बुढ़ा लोकनि योगासनक बाद अनेरे-अनेरे हँसबाक नाटक करै छथि.  कबै झाक कहब छनि, कुचेष्टासँ लोक के हंसबाक अवसर भेटैत छैक, देह में स्फूर्ति अबैत छैक.नहिं तं अपन काज आ बेगरतासँ ककरा फ़ुरसति. तें, फलां ठाकुरक घर में जखन पौत्रक जन्म भेलनि, तं, गाममेंघूड़ लग, ब्रह्मबाबाक स्थानपर, दछिनबारि टोलक मण्डपपर, पोखरिक मोहारपर लोक कें अनेरे मुसुकी छुटय लगलैक.प्रतिष्ठित लोकनि कुच्चड लोकनिकें कात-करोट ल’ जा कय कहथिन, ‘एहन गप्प बजबो जुनि करी’. मुदा कबै झा एहि अनुशासनसँ मुक्त छथि.महिसबारि आ अनुशासन, एक ईर आ दोसर बीर घाट ! कबैकेंजखन ई खबरि भेटलनि, तं, अकस्मात् हुनका मुंहसँ बहरा गेलनि, धन्यभाग! दोहाई हमर गाओं !! जं गौआंकएकबाल रहलैक तं एहि गाओंमें केओ नपुंसक निर्वंश नहिं रहत !महिसबार सब एहि पर पिहकारी मारलक: ‘भाई, एहि गाम में कबै झाक जोड़ा नहिं. गप्पी सबहक ई सरदार जं कर्णपुर छोडि देथि तं एतुका लोक  बौक भ’ जायत. कबै झा जे बाहबाही तकैत छलाह से तं भेटि गेलनि, मुदा, तमाकूक अमल जोर मारने रहनि. खौंझाइत कहलखिन, मर बहिं, फुसिएक थोपड़ी पाड़ैत रहबें,कि एक ज़ूम तमाकुओदेबही.  सरकार सब किछु पर टैक्स लगा देलक, गप्पहुसँ गेलहुं. आ महिसबार सब एकबेर फेर ठहक्का मारलक. कबै झागदगद भ गेलाह. आ महिसबार सब लोट-पोट भ गेल. 2 रामलखनएहि बेर बहुत दिनक बाद गाम अयलाह-ए.गाम में बहुतो किछु बदलल-बदलललगैत छनि. एहि गाम में ने आब कबै झा छथि आ ने आब रहरहाँ लोक एतय महिस पोसैत अछि.पहिनेगाय-महिसपोसलासँ अर्थ व्यवस्था पर जे असर होइत छल होइक, नेना-भुटका पर एकर दुष्प्रभाव ककरोसँ छिपल नहिं रहैक. दरबज्जा पर माल महिस रहतैक तं गरीब-गुरुबा-किसानक धिया पुता माल-महिस के सम्हारत, कि स्कूल जायत ! आब ताहि में परिवर्तन भेलैये. रामलखन ताहिसँ संतुष्ट छथि. रामलखन अपन जीवनक पहिल सोलह वर्ष एही गाम में बितौनेछथि. हुनका एतुका एक-एक गाछी कलम, बाध-बोन,आरि-धूर,पोखरि-झाँखरि, फील्ड, चौबटिया-चौक आ टोल-मोहल्ला सब किछु  हाथक तरहत्थीक रेखा-जकां चिन्हल छलनि. तें, आइ अहल भोरे रामलखन दलान  परसँभोरुका टहलान पर निकललाह. एहि टहलानमें ओ  गामकें अखियासैत अजुका गाम कें अपन स्मरण गाम सं मनहिं-मन मिलान क रहल छथि; आइ जखन गामक उत्तर,भरल नासीमें उज्जर-उज्जर, भकरार भेंटक फूलक गलीचा देखलनि तं हिनका विश्वास भ’ गेलनि,हं, ई अपने गाम थिक.  मोने छनि, मैट्रिक पास कय जहियारामलखनपढ़बाले पटनाचल गेल छलाहतखनेहिनक अनेक बाल-सखा सब स्कूल जायब छोडि गिरहस्ती सम्हारि नेने रहथिन. कतेको गोटे हर-फारआ हरक लागन ध’ नेने छल आ कतेको महाजनीसँ ल’ कय मोटा धरि उघबाले शहरक बाट ध’ नेने छल.आब गाम बदलि चुकल अछि. हर-फार कहिया ने निपत्ता भ’ गेल, भले जिद्दमें नथुनी कामति आ कारी राउत एक-एक टा बड़द राखि गाममेंभजैती शब्दकें जियाकय रखने छथि.यद्यपि,एतय आब बरहीक दरबज्जा पर ने भाथि छनि आ ने ओतय भोरुका पहर हर-फारक मरम्मतिले पसार  लगैतछैक. एतुका लोक आब हांसू-खुरपी-पिटबैलेवा चौकठि-केबाड़-खिड़की आ चौकी-तख्तपोश बनबैले, लकड़ी चिरबैले ठाकुरकद्वारि पर आयब बन्न क’ चुकल अछि. ठाकुरक पांच टा बेटा सेहो पांच ठाम पसरि गेल छथिन.टोल परहक इनार भत्थन भ’ चुकल अछि; हं, एहि बेरुका गर्मी में जखन गामक सब चापाकल सुखा गेल रहैक तं लोककें पंथक पाकडि, इनारसब, अवश्य मन पडलैक. गामकछोट-पैघ,गोड़पन्द्रहेक,पोखरिक गन्हाइत पानिमें आबमनुखक कोन कथा,लोक महिसोके नहिं नहबैत अछि. मुदा, खुशीक गप्प ईजे गाम में आब खढ़घरक स्थान पक्का घर ल’ लेने अछि. जतय कतहु खढ़क आफूसक घर बंचल छैहो, खढ़क चार पर कुम्हड़-कदीमाक लत्तीक बीच चकमक करैत टाटा-स्काई आ एयरटेलक टीवी ऐन्टेना रामलखनकेंगामकसमृद्धि आ जीवनमेंग्रामीण लोकनिक बदलैत प्राथमिकताकद्योतक बूझि पड़लनि.अस्तु,गामक सम्पन्नताकें देखि रामलखनकें संतोष सेहोहोइत छनि, आ ओ गामक जिजीविषासँ आश्वस्त सेहोहोइत छथि. एहिना भोरुका झलफलीमें रामलखन गामक प्रगति आ परिवर्तन कें अखियासैत आगू बढ़िते जाइत रहथि,कि हिनका दूरसँअबैत एक टा पुरुषकछवि पर नजरि पड़लनि. करीब छौ फीट नमती, पैघ पेट. बामाहाथकलाठीपर भर दैत नहु-नहु अबैत मध्यवयसाहुक छवि रामलखन कें चिन्हार-सन लगलनि. व्यक्ति जेना-जेना लग अबैत गेलाह, छविस्पष्ट होइत गेलैक आ रामलखनकें अपन चिरपरिचित बालसखाकें देखि सुखद आश्चर्य भेलनि. सोचलनि, एतेक दिनक पछातियो केओ अपन संगी तं भेटल. ओहो व्यक्ति दूरेसँ देखैत: - रामलखन? -के, रघुवीर?लग अबिते दुनू गोटे एक दोसराक हाथकेंअपन-अपन हाथमें लैत, एक दोसराकें भरि पांज कय पकड़लनि. मनहिं-मन रामलखनकें मन पड़य लगलनि कोना ई लोकनि दुर्गाक मन्दिरक आगूक पोखरिक मोहार पर, मंदिरकपाछूक नासी, आ लगक कलमबाग सबमे भरि-भरि दुपहरिया बौआइत रहथि. आमक पातकघिरनीकें तेजसँ घुमबैलेगर्मीमासक धुक्कड़ में निच्छोह दौगैत रहथि. एतेक दिनुक पछाति अनायास भेंट. दुनू गोटेकें प्रकृतिस्थ हेबामें कनेक समय लगलनि. सत्ते, रघुबीरकें देखि तुरते चिन्हबामेंपुरानो परिचित लोककेंकनेक समय अवश्य लगितैक.किन्तु, रामलखन लगभग ओहने छथि. केवलचानि परहक केश उडि गेलनि-ए आ आँखिपर चश्मा चढ़ि गेल छनि. मुदा, रामलखनरघुवीरकें देखि क्षुब्ध छलाह. -एना? -‘आब एहिना.’ तटस्थ भावें  अनायास रघुवीरकमुँहसँ बहरयलनि.संगहिं,विवशताकमुसुकीक  क्षीण रेखामुँहक एहि कोरसँ दोसर कोर धरि पसरि गेलनि. मुदा, रामलखनकें किछु बुझबामें नहिं अयलनि. असल में स्वस्थ सबल शरीर में जखन अनायास अवघात होइत छैक, तं, अचानक आकस्मिताक मारि पर लोककें अपनहुँ विश्वास नहिं होइत छैक. तकर उपर,पछाति, परिवार आ सर-समाजक निरंतर सहान्नुभूति आ सहाराक आग्रह मनुक्खक मनोबलकें फोकिला करय लगैत छैक. जे मनुक्ख अपन असक्तता भारसँ उबरय जनैत अछि, से देहक चोटकें फुर्तीसँ निजबैत जीवनक गतिकें पुनः पकडि लैत अछि. जकर चोट संघातिक होइत छैक वा जे चोटसँसहजहिं हारि मानि लैछ, बिछाओन ध’ लैत अछि. रघुवीर अपन असक्तताकें हरा चुकल छथि. मुदा, जखन दू टा सुपरिचित व्यक्तिक लम्बा अंतरालक बाद भेंट होइछ, एक दोसराक बदलल मनोवृत्तिकें बूझब सहज नहिं.  कारण, शरीर-जकां मनुखक मोन सेहो निरंतर बदलैत रहैत छैक.डाक्टरदीपक चोपड़ा-सन गुरु तं एतेक धरि  कहैत छथि, जे प्रति क्षण बहराइत शारीरिक उत्सर्जनक कारण परमाणुक दृष्टिऍ मनुक्खएक रहिते नहिं अछि ! ओ निरंतर बदलैत रहैत अछि. तथापि, रामलखन के रघुवीरकटेढ़, झुलैत दाहिना गट्टा हठात् विचलित क’ देलकनि. पूछि देलखिन, आ ई गट्टा ? परिचित लोक आ अपरिचित. दोस्तवा दुश्मन. नित्तह संगी वा अनेक वर्षक बाद भेंट. जंदुखाइत घाव पर ककरो हाथ पड़उक, मनुक्खक प्रतिक्रिया एके हेतैक: लोक हाथ छिपि लेत, कुहरि उठत वा अनायास रोष प्रकट भ जेतैक. आइओसएह भेलैक. -अहीं लोकनिक देनछी, डाक्टर साहेब ! किन्तु, स्वाभाविके, रामलखन कें बाल-सखाक ई पीड़ा जनित व्यंग -सोझे बुझबामें नहिं अयलनि. -माने? - छोडू. जे भेलैक से भेलैक. तखन पुछै छी तं सुनिए लियअ.आब तं पांच वर्ष भ’ गेलैक. छठिक भोरुका अर्घ्यकदिन.झलफल रहैक, पोखरिक घाटपर दाहिने हाथक भरे खसि पड़लहुँ. गट्टा शुद्ध क’ टूटि गेल. दरभंगागेलहुँ. डाक्टर पलस्तर केलनि.  दर्द कम भ’ गेल गाम चल एलहुँ. छौ हप्ताक बाद जखन पलस्तर कटल, तं, हमरा तं बुझू दांती लागि गेल. पहुंचा एक दिस आ गट्टासँ नीचा हाथ दोसर दिस. झुलैत! डाक्टरकें बड्ड गारि पढ़लिऐक. मोन तं भेल कपार फोडि दिऐक. मुदा, लाचार रही. पछाति कतेक गोटे कहलक दिल्ली जाउ. बेटा भोपालसँ आयल तं फज्झति करय लागल. कहलक, अहाँकें की लगैएदरभंगाकहियो बदलतैक ! आब अपनों बूझैत छियैक, हमर पहुंचाक दुनू हड्डी टूटल छल. आइ काल्हि हड्डीक भीतर लोहाक छड़ द’ कय हड्डी जोडि दैत छैक. मुदा, से तं डाक्टर हमरा कहैत, ने. हमरा टाका तं लगबे कयल. पहिने पूछै, गुरुकें कोदो द’ कय पढ़ने छह! हम की बुझय गेलिऐक, आब टाकाखर्चकय सेहो लोक डाक्टरीक डिग्री पबैए आ लोककें ठकि कय हमरे-जकां लहैब करैए. मुदा, हमरा भय भ’ गेल. देरी भ’ गेल रहै. हम दिल्ली नहिं गेलहुं. आब एहिना काज चलबैछी. रामलखन क्षुब्ध भ’ गेलाह.मुदा, ओहि दिन गप्प ओत्तहि ठमकि गेलैक. दोसर दिन रामलखन टहलय ले बहरयलाह तं रघुवीर फेर भेटि गेलखिन. दुनू गोटे टहलैत कमलाक कात धरि गेलाह आ वापसी में दुनू गोटे रघुवीरहिंक दरबज्जा पर बैसि गेलाह. रघुवीर कहय लगलखिन, जखन नौकरीमें रही, देह में एको रत्ती चर्बी नहिं छल. आब बैसल ठाम खाइत छी. वयस से बढ़ले जा रहल अछि. एहिकज्जी डांड ल’ कय ने धफडि क’ चलि सकैत छी आ ने टूटल हाथ ल’ कय योग क’ सकैत छी. तखन भोर-सांझ धीरे-धीरे भरि गाम घूमि अबैत छी. दस गोटेसँ भेंटो-घांट भ गेल आ देह में कनेक हवा-पानि सेहो लागि गेल.यौ, डाक्टर साहेब, गाम पर बैसल-बैसल तं भूखो बिला जाइछ. रामलखन सहमति में मूड़ी डोलौलनि. एतेक वर्षक अवधि आ ओतबे वर्षक बिचुका अपरिचय. लोक गप्पो की करतैक. बहुत दिन धरि जखन लोकक धिया-पुतासेहोदूर रहय लगैत छैक तं ओकरो सबसँ माय-बापक गप्प ‘ठीक  छी किने ?’ आ’ हं, सब ठीक’ धरि सीमित भ’जाइत  छैक. कारण, दूर-दूर में रहैत लोकक हालत ठीक रहौ, तं, आ बेजाय रहौ, तं, व्यवस्था तं अपनहिं करय पड़तैक.अस्तु, किछु कालक मौन केर बाद रामलखने पुछ्लखिन, ‘ अहाँक दरबज्जा पर आब लोकक अवर्यात नहिं देखैत छियैक ?’ -ककरा देखबैक ? माल-जाल, हर-फार सब उठि गेल. खेती बदलि गेल. बदलि की गेल, समाप्ते भ’ गेल. जकरा जतय द्वारा लगलैक, चल गेल. हमरो धिया-पुता सब बाहरे रहैए. भैयाकजेठका बेटा गामे में ग्रिल बनबैये. हम अपने गाम छोडबासँ पहिने स्कूल जाइत अबैत मैट्रिक तं पास भइए गेल रही. तखनहोम गार्ड केर ट्रेनिंग नेने रही. फल ई भेल जे पढ़ब लिखबतं सीखि लेलहुं, किन्तु,कमरसारि, हर-फार आ खेती-किसानी छूटि गेल छल. की करितहुँ? दू नाओ पर पयर देब ने भ’ सकल, ने तकर इच्छा छल. मुदा, बाबूमैट्रिकसँ आगू पढ़यबासँ पहिनहिहाथ झीकिचुकल छलाह. हुनका तं ओहुना हमरा पर सब दिन भेंडा-महिसिक कानिरहनि. हम तं कहियो किछु नहिं कहलियनि. मुदा, ओ हमरा देखय नहिं चाहथि.किएक से हुनकर धर्म बूझनु. ओईरहस्य तं अपन संगहिं नेने चल गेलाह. हं, तं कहैत जे रही. हम जहिया होम गार्डक ट्रेनिंग ल’ कयगाम आपस भेल रही,ओही बीचे टोल परसँ कतेक गोटे नागपुर जाइत छल. पुबारि टोलक देबू ठीकेदारक संग काज करैत रहथि. कहलनि, चलह. कोनो ने कोनो द्वारा लागिए जेतह. बाबूकें कहलियनि, तंगारिक तर क’ देलनि. कहय लगलाह, ‘बुझही आब. अपने केलहा. कोनो जोकरक नहिं रहलें. हमरा संगे जं किछु सिखने रहितें, तं, अपन दरबज्जा पर बैसल-बैसल काज करितें. लोगतोरेतकैत एत्तहि अबितौ. जो नागपुरमें बौआक ठीकेदारी में माथपर ईटा आ बालु उघिहें.’बाबूकेंअपन कमाई पर बड़ गौरव. चारि टोलक गाम में एकटा पसारी. अपना कमाईसँ पांच बीघा जमीन किनने रहथि. एक बीघामें आमक कलम रोपने रहथि. कहथिन, जे,‘एहि कलमे-गाछीक जं ताकुत करबें तं आम तं सब मिलि कय आम तं खेबे करबें,पांच भाईक बीचो नकदीओ ले’कहियोककरो आगू हाथ नहिं पसारय पड़तौक.’मुदा, हम मन बना नेने रही. हम पैर छुलियनि, ब्रह्म बाबा के गोड़ लगलहुँ आ सबहक संग लागिनागपुरक बाट धेलहुँ. बाबू कोनो बेजाय नहिं कहने छलाह. ओतय जा कयशुरूमें कतेक ने पापड़ बेलल. मुदा, बिनु परिश्रमे कोन काज होइत छैक. देह स्वस्थ छल. कोनोतेहन लुतुक नहिं रहय. ब्रह्म बाबाकएकबाल वर्षक भीतरे कोल इंडिया में सिक्योरिटी विभाग में भरती भ’ गेलहु’ कहैत रघुवीर दुनू हाथ जोड़ि उत्तर दिस तकैत दुनू हाथ माथमेंलगौलनि आएकटा दीर्घ निश्वास छोड़लनि. -वाह! - सबटा मैया आ ब्रह्मबाबाक कृपा. हमरा नोकरी लागि गेल आ सबहक जीवन बदलि गेलैक. रिटायर भ’ क गाम में छी. अहाँ लोकनिक दया सं पांच बीघा जमीन, घर, हाथ पर पेंशनक चारि गो टाका, आ सुरतियाक ई बोलेरो- अपन द्वारिक एक कात टटघरक गराजदिस आंगुर देखबैत- सबटा नोकरिए प्रताप छी. नहिं तं गाममेंपचास घर बाभनगिरहत आ हमरा लोकनि पांच भाई.फीघर जं वर्षमें एक-एक मन धान भेटबे करितैक, तं, आइ ककर गुज़र होइतैक. ताबते एकटा युवक एकटा थारी में दू कप चाह ल’ कय दुनू गोटेक आगू में राखि देलखिन आ रामलखन कें पयर छूबि प्रणाम केलखिन. - ई बालक ? - हमर पौत्र. भोपाल में काज करइए. रघुवीरक पौत्र सूरज, सॉफ्टवेयरइंजिनियर छथि. मुदा, दूनू बाल-सखाकेंगप्पमेंव्यस्त देखि चाह ओतय राखि सूरज आपस चल गेलाह आ दुनू मित्र पुनः गप्पक सूत्र पकडि लेलनि. -अहाँसमय पर सही बाट पकडि लेल. फल तं आँखिक सोझाँ अछिए. - हं. आब तं गाम में एहने केओ हयत जकर धियापुता स्कूल नहिं जाइत हेतैक. मुदा, दोसर इहो देखैत छियैकतहिया जेकेओ शहर धेलकतकरधिया-पुता अन्न-वस्त्र ले बेलल्ला नहिं भेलैक. सबहक देह पर कपड़ा छैक, माथ पर पक्का घर छैक. आब तं सरकारों बहुत काज केलकैए,तखन मनुखक जीवन में खगता आ खाहिसकएत्ता छै, कहैत रघुवीर उगैत सूर्य दिस ताकय लगलाह. कहलखिन, ‘इएह दिनकर दीनानाथ सबहक घर में इजोत करैत छथिन. ब्रह्मे बाबा गामक रक्षा करैत छथिन. हम पूरा नौकरीगढ़चिरौली, मध्य प्रदेश में कयल. पछातिछौंड़ा सब नागपुर में पढ़ैत छल; कनिया तं कहियो गाम नहिं छोड़लनि. धिया-पुता सब कहैत जाइ छल, ‘एत्तहिनागपुरमेंघर बना लितहुँ’.  मुदा, कमला माई आ गामक मोह एतय ल’ अनलक. नहिं तं अहूँसँ कहियो भेंट होइत. ओकरा सबकें हम कहलियैक, हमरा जतेक भेल, कय जाइत गेलियह. आब तं सब अपन-अपन डारि धरह, खोंताबान्हह, आ हम गाम आबि गेलहुँ.’ गप्पमें समय कोना बीतल जाइत छल, रामलखनकें अनुमानों नहिं भेलनि.  मुदा, हुनकर शंकाक समाधान एखनो बांकीए रहनि. कहलखिन, आइ आब हम चलब रघुवीर. कएक टा काज बांकी अछि. मुदा, एकटाजिज्ञासा रहिए गेल. अहांकहाथ तं टूटि गेल से तं बुझलियैक, मुदा, हाथक छड़ी. नंगराइत चलैत छह! एतय धरि रघुवीर अपनाकें नियंत्रणमें रखने छलाह. मुदा, रामलखनक ई प्रश्न एकाएक रघुवीरक ह्रदयक कपाट खोलि देलकनि. कहलखिन, ‘रामलखन आब पुछलहु, तं एक छन बैसिए जाउ.फेर कहिया भेंट हयत. आ हम ककरा ईगप्प कहबैक. अहाँ नेनपन संगी छी. नारायण पछिला वर्ष गुजरिए गेल, दुखिया बिछाओनधेने अछि’, आ रघुवीर शुरू भ’ गेलाह. -रामलखन अहाँ जखन गाम में रही तहियाककोनोगप्प अहाँसं छिपल नहिं. हं, अहाँ पहिने निकलि गेलहुँ. हमरा गामसँ बहरयबामें समय लागल. कहबे केलहुँ, लटैत-बुडइत हमहूँ मैट्रिक पास भेले रही.तकर बादक गप्प बुझबे केलियैक. जहिनाकोल इंडियाक सिक्योरिटी विभागक नौकरी हमरा ले भगवानक वरदान सं कम नहिं छल, तहिना ओएह नौकरी हमरा पैदार सेहो बना देलक. मुदा, प्रत्येकघटना-दुर्घटनामें सबटा खराबे नहिं होइत छैक. हमरो संगे तहिना भेल. ओही दुर्घटनासँ हमरा मुक्ति सेहो भेटि गेल !’ रघुवीरवाइ में तेना बजैत चल जाइत छलाह जे रामलखनकें  हुनका रोकबाक इच्छा नहिं भेलनि. रघुवीर फेर शुरू भ गेलाह. ‘ नौकरीकपन्द्रह वर्ष तं सब किछु खूब नीक जकां चलल. तखन एक राति एकाएक सब किछु बदलि गेलैक.’ कहैत रघुवीरक चेहरा एकाएकमोर्चापर तैनात सैनिक-जकां कठोर आ दृढ़ भ’ एलनि. ‘15 दिसम्बर 2001क राति. बज्र अन्हार. पानि पडैत रहैक, किआतंकी सब खदान तोडबाक  गोला-बारूद भंडार पर एकाएक धावा क’ देलकैक. हमड्यूटी पर रही. सब गोटे मीलि कय मोर्चा सम्हारि लेलियैक;हमगार्ड कमांडर रही. हम एक गोटेकें जखने भंडार दिस दौगैत देखलियैक, गोली चला देलियैक.ओ ओत्तहि ढेर भ’ गेलैक.ओम्हरोसँ फयरिंग शुरू भ’ गेलैक. मुदा, हम मोर्चा सम्हारि लेने रही.संयोगसँ आतंकवादी सबहकपहिल गोली हमरे जांघमें लागल. हम खसलहुँ, मुदा, अढ़ में रही. मोर्चा नहिं छोडलियैक. एकटाहमलावर तं पहिनहिढेर भइए गेल रहैक. सबहकप्रयाससँआतंकी हमलाविफल भ’ गेलैक. मुदा,केस-फौजदारीक लम्बा चक्कर चललैक. ओहि दिन ड्यूटी-इन्चार्ज तं हमही रहियैक.’एतय आबि कय एकाएक रघुवीर फेर एक बेर लम्बा निःश्वास छोडलनि आ हुनकर चेहरा पर एकाएक विजेता सैनिकक भाव आबि गेलनि आ  चेहरा चेहरा चमकि उठलनि, आ ओअकस्मात बाजि उठलाह, ‘ डाक्टर साहेब,मोने तं हयत, गौआं सब नपुंसक कहि कय हमर  केहनमखौल करैत छल ! हम से दाग धो देलियैक !! प्रशासनक सहयोग आ महावीर जीकएकबाल,हम बरी तं भेबे केलहुं, आबगाओं में हमरा सोझाँ ककरो नजरि उठेबाक हिम्मतो नहिं होइत छनि!अवाक्रामलखन, रघुवीरक चेहरापर आयल विजेताक भावकें अनेक क्षण धरि देखिते रहि गेलाह. तावत् सूर्य सेहो ऊपर आबि गेल छलाह. अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। दीपा झा धिया- पूता आ डिजिटल कैदखाना डिजिटल संसार, एहन संसार जतऽ  सभ  तरहक सुविधा एक क्लिक मे भेट जाइ छै। एहन तकनीक  जे बहुते काज आसान  आओर उत्तम तरीका सँ कऽ दइ छै।  की वास्तव मे ? की कोनो एहन  संसार जे चौकोर स्क्रीनमे समा जाइ छै , किन्तु  स्क्रीनक परे असीमित क्षितिज धरि पहुंचा दइ छै, सरिपहुँ उत्तम होइ छै ? ऑन-लाइन शिक्षण  एकटा एहने पद्धति छै जे बिद्यार्थी आ शिक्षककेँ एक -दोसरक निकट आनि दइ छै।  ई पद्धति जे सभक लेल  एकटा सुविधाजनक उपाय जकाँ प्रारंभ भेल छल से   कोविड  महामारी दुआरे अचानक सऽ शिक्षणक आवश्यक स्तम्भ  भऽ गेलै।  आइ सौंसे संसारमे बिद्यार्थी सभ ऑन-लाइन तरीका सँ औपचारिक शिक्षा प्राप्त कऽ रहल अछि। जइ  धिया -पूताकेँ स्कूल मे सम्हारनाइ कठिन भऽ जाइ    छलै , आइ ओ चंचल  नेना- भुटका सभ  डिजिटल उत्थान सँ  पूर्णतः वश मे आबि गेल अछि।  ओक्कर सभक किलकारी, शैतानी, हो-हल्ला - जे बढ़ऽ काल के सोभा -सुंंदर होइ छै , से ग़ुम भ गेल छै। ओहन हंसी , ओ मुहफट्ट भऽ गेेनाइ , ओ कक्षा मे नुका जेनाइ- एहन सभ टा लीला पर अनचोक्के रोक लागि  गेल छै। कतेक गोटाकेँ तँ निश्चिते कनेक्टिविटीक दिक्कत छै, आ ओइ  बिद्यार्थी सभ केँ  भागीदारीक मौका नहि भेट रहल छै। शिक्षाक अर्थ होइ छै वाद-विवाद, बात-विमर्श, आओर आपसी सौहार्द- जे ऑन-लाइन शिक्षा अप्पन सीमित क्षेत्रमे नहि उपलब्ध कऽ सकैत छै। ई प्रणाली एकटा मूक, आओर असमर्थ  पीढ़ी देखतै जे ने अपनाले किछु बाजि सकतै ने अप्पन कुशल-क्षेम सही तरह सँ बुझि सकतै। डिजिटल उपाय जाधरि उपाय भरि रहय सएह बढियाँ - ओक्कर नियम भऽ गेेनाइ नुकसानदायक हेतै। नीतू कुमारी- मैथिली चित्रकथा प्रीति ठाकुर-विद्यापतिक पुरुष परीक्षा प्रीति ठाकुर-मिथिलाक लोकदेवता प्रीति ठाकुर-गोनू झा आ आन मैथिली चित्रकथा प्रीति ठाकुर-मैथिली चित्रकथा देवांशु वत्स- नताशा मैथिलीक ढेर रास बाल साहित्य आ आन साहित्य, संगे मिथिला आ मैथिलीपर मैथिली आ अंग्रेजीमे ढेर रास पोथी फ्री डाउनलोड लेल नीचाँक लिंकपर उपलब्ध अछि। http://videha.co.in/new_page_15.htm https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। उमेश मण्डल लोक-नाट्य-वाद्य मण्डली- संकलन नाच पाटी- मि‍थि‍ला नाट्यकला परि‍षद- पकड़ि‍या कम्‍पनी- श्री राम लखन साहु पे. स्‍व. खुशीलाल साहु पता, गाम- पकड़ि‍या, पोस्‍ट- रतनसारा, अनुमंडल- फुलपरास (मधुबनी) मैनेजर- श्री ठकाई यादव पे. स्‍व. फुसन यादव पता, गाम- मुसहरनि‍याँ, पोस्‍ट- रतनसारा, अनुमंडल- फुलपरास (मधुबनी) नाच- (1) अल्‍हा रूदल (2) लछि‍या रानी (3) शीत वसंत (4) गुगली घटमा (5) राजा कुँवर वृजभान अभि‍नय कर्त्ताक नाओं/पता- श्री भाेगी लाल दास-           स्‍व- भायलाल दास            लछमि‍नि‍याँ (मधुबनी) श्री रामचन्‍द्र शर्मा-             श्री जंगल शर्मा               नेमुआ (मधुबनी) श्री नथुनी शर्मा-              श्री वनमाली शर्मा             नेमुआ (मधुबनी) श्री सुन्‍दर मुखि‍या-            श्री नागेश्वर मुखि‍या            हरि‍याही (सुपौल) श्री वासदेव सदाय-            स्‍व. कुजाय सदाय            सखुआ (ि‍नर्मली) श्री नारायण सदाय-            श्री गंगा सदाय               बेलही (सुपौल) मो. जाहि‍द उर्फ राजा          मो. डोमी नदाफ              सुदै द्वारम (मधुबनी) श्री रंजीत राम               श्री लखन राम               खुटौना (मधुबनी) वाद्य एवं वादक नाओं/पता- आर्गन-        श्री छेदी पंडि‍त         स्‍व. चन्‍द्र पंडि‍त        बरहारा (सुपौल) नाल-         श्री परमेश्वर भारती      स्‍व. जगरूप भारती      मुसहरनि‍याँ (मधुबनी) काँरनेट-       श्री चन्‍दर राम         श्री जीतन राम         लछमि‍नि‍याँ (मधुबनी) नङेरा-        श्री लाल राम          स्‍व. फुसन राम        लछमि‍नि‍याँ (मधुबनी) ढोलक-       श्री कलानंद राम        स्‍व. खट्टर राम        लछमि‍नि‍याँ (मधुबनी) ड्रमसेट-       श्री भोलट दास        श्री योगेन्‍द्र दास        ि‍नर्मली (सुपौल) आन सहयोगी- श्री याेगेन्‍द्र यादव        श्री ठकाई यादव        मुसहरनि‍याँ घुरन दास            श्री भायलाल दास (ताॅति)‍ लछमि‍नि‍याँ दि‍नेश राम            श्री सीताराम राम       लछमि‍नि‍याँ नाच पाटी- श्री श्री 108 श्री भगवती नाचपार्टी- सि‍मराहा सप्तरी कम्‍पनी- श्री रामचन्‍द्र मण्‍डल पे. श्री वृजलाल मण्‍डल पता, गाम- सि‍मराहा, पोस्‍ट- बरसाइन, जि‍ला- सप्‍तरी (नेपाल) मैनेजर- श्री राम सुन्‍दर राम पे. श्री सुवी राम पता, गाम- दउरी, पोस्‍ट- बरसाइन, जि‍ला- सप्‍तरी (नेपाल) नाच- (1) अल्‍हा रूदल (2) लछि‍या रानी अभि‍नय कर्त्ताक नाओं/पता- श्री शैनी पासवान             श्री दुखी पासवान            खड़कपुर (बरसाइन) श्री लक्ष्‍मण राम              श्री कैलू राम                दउरी (बरसाइन) श्री बेचू राम                श्री श्रीप्रसाद राम              दउरी (बरसाइन) श्री सत्‍य नारायण राम-         श्री नथुनी राम               दउरी (बरसाइन) श्री देव नारायण यादव-         श्री नथुनी यादव              दउरी (बरसाइन) श्री परमेश्वर मण्‍डल-            श्री तेजी मण्‍डल              सि‍मराहा (बरसाइन) श्री रघु मण्‍डल-                    स्‍व. थारू मण्‍डल             सि‍मराहा (बरसाइन) श्री चरि‍त्तर मण्‍डल-            स्‍व. कारी मण्‍डल             सि‍मराहा (बरसाइन) श्री जोगी मण्‍डल-             श्री बच्‍चाई मण्‍डल             सि‍मराहा (बरसाइन) श्री बेचू राम                श्री प्रसाद राम               दउरी (सप्‍तरी) वाद्य एवं वादक नाओं/पता- काँरनेट-       श्री देव नारायण राम     स्‍व. नाथो राम         दउरी (बरसाइन) काँरनेट-       श्री दुखी राम         स्‍व. कारी राम         खड़कपुर (बरसाइन) ढोलक-       श्री नशीवलाल राम      श्री कैलू राम          दउरी (बरसाइन) नङेरा-        श्री राम प्रसाद राम      श्री सुवी राम          दउरी (बरसाइन) हारमोनि‍यम-     श्री चरि‍त्तर मण्‍डल      श्री कारी मण्‍डल        दउरी (बरसाइन) आन सहयोगी- शि‍व नारायण दास      श्री ठकाइ दास        दउरी (बरसाइन) कोसी नाट्य कला परि‍षद- सि‍मराहा-सुपौल कम्‍पनी- श्री गया प्रसाद मण्‍डल पे. श्री राम नारायण मण्‍डल पता, गाम- सि‍मराहा, पोस्‍ट- नौआबाखैर, भाया- थरबि‍टि‍या, जि‍ला- सुपौल मैनेजर- श्री दया नन्‍द मण्‍डल पे. श्री राम लखन मण्‍डल पता, गाम- सि‍मराहा, पोस्‍ट- नौआबाखैर, भाया- थरबि‍टि‍या, जि‍ला- सुपौल। नाच- (1) अल्‍हा रूदल (2) सती लछि‍या अभि‍नय कर्त्ताक नाओं/पता- श्री अरूण कुमार मण्‍डल        श्री नथु मण्‍डल              सि‍मराहा (सुपौल) श्री रून्‍दी पासवान             स्‍व. बहादुर पासवान           परसा माधो (सुपौल) श्री राम प्रसाद शर्मा            स्‍व. बि‍लट शर्मा              परसाहा (सुपौल) श्री देवराज शर्मा              स्‍व. तपेश्वर शर्मा             सि‍मराहा (सुपौल) श्री चन्‍द्र नारायण मण्‍डल        स्‍व. रघुनाथ मण्‍डल           सि‍मराहा (सुपौल) श्री दुखी पासवान                   श्री बेचन पासवान             परसा माधो (सुपौल) श्री वि‍जय कुमार राय          श्री राम स्‍वरूप राय           सि‍मराहा (सुपौल) श्री बेचन शर्मा               स्‍व. रामसुन्‍दर शर्मा            परसाहा (सुपौल) वाद्य एवं वादक नाओं/पता- हारमोनि‍यम-     श्री सत्‍य नारायण मण्‍डल स्‍व. खुशीलाल मण्डल    सि‍मराहा (सुपौल) ढोलक-       श्री गणेश राम         श्री वि‍न्‍देश्वर राम        एकडारा, थरवि‍टि‍या (सुपौल) काँरनेट-       श्री शि‍व नारायण सदा    स्‍व. .............       एकडारा, थरवि‍टि‍या (सुपौल) नङेरा-डि‍ग्री-     श्री गुनेश्वर राम         श्री ...............        परसाहा, नाैआ बाखैर (सुपौल) झाइल-        श्री हरि‍नारायण पासवान   स्‍व. नकछेदी पासवान    सि‍मराहा (सुपौल) झाइल-        श्री तेज नारायण मण्‍डल स्‍व. खुशीलाल मण्‍डल    सि‍मराहा, नौआबाखैर (सुपौल) भड़ि‍या-        श्री लालदेव मण्‍डल      श्री बच्‍चा मण्‍डल        सि‍मराहा, नौआबाखैर (सुपौल) जोकर-        श्री सीताराम राम       ..................         परसाहा, नाैआ बाखैर (सुपौल) अन्‍य सहयोगी- श्री सुभाष कुमार राय   श्री कन्‍हैया लाल राय          बौराहा, थरवि‍टि‍या (सुपौल) रामलीला नाट्य कला परि‍षद- रसुआर जि‍ला-सुपौल कम्‍पनी- श्री झोटन मण्‍डल पे. स्‍व. नथुनी मण्‍डल पता, गाम- रसुआर, पोस्‍ट- मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, अनुमण्‍डल- ि‍नर्मली, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) मैनेजर- श्री त्रि‍लोक नाथ झा पे. स्‍व. रामेश्वर झा पता, गाम- रसुआर, पोस्‍ट- मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, अनुमण्‍डल- ि‍नर्मली, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) नाच- (1) अल्‍हा रूदल (2) सती लछि‍या (3) राजा सलहेश (4) वि‍द्यापति‍ (5) धुलक फूल (6) सुल्‍ताना डाकू (7) राजा हरि‍षचन्‍द्र (8) कृष्‍ण लीला (9) रामायण अभि‍नय कर्त्ताक नाओं/पता- श्री रामू मण्‍डल               स्‍व. गोपी मण्‍डल            रसुआर (सुपौल) स्‍व. राज कुमार ठाकुर         श्री रामजी ठाकुर             रसुआर (सुपौल) श्री धनि‍क लाल मण्‍डल         स्‍व. रामजी मण्‍डल            रसुआर (सुपौल) श्री देव नारायण मण्‍डल         स्‍व. बलदेव मण्‍डल            रसुआर (सुपौल) स्‍व. भोला झा               स्‍व. जयदेव झा              रसुआर (सुपौल) स्‍व. जि‍लेब मण्‍डल            स्‍व. नथुनी मण्‍डल            रसुआर (सुपौल) श्री शैनी मण्‍डल                    स्‍व. लालजी मण्‍डल           रसुआर (सुपौल) श्री सीताराम मण्‍डल            स्‍व. रूपलाल मण्‍डल           रसुआर (सुपौल) वाद्य एवं वादक नाओं/पता- हारमोनि‍यम-     श्री त्रि‍लोक नाथ झा पे.   स्‍व. रामेश्वर झा       रसुआर (सुपौल) ढोलक-       स्‍व. रामगुलाम मण्‍डल    स्‍व. संती मण्‍डल       रसुआर (सुपौल) नङेरा-डि‍ग्री-     श्री झड़ीलाल राम       स्‍व. हि‍या लाल राम     रसुआर (सुपौल) झाइल-        देवीलाल मण्‍डल        स्‍व. खुशीलाल मण्‍डल    रसुआर (सुपौल) झालड़        श्री कि‍शोरी मण्‍डल      स्‍व. नेवैत मण्‍डल       रसुआर (सुपौल) डि‍ग्री सदैबला-   स्‍व. रामकि‍शुन मण्‍डल    स्‍व. शक्‍ति‍ मण्‍डल      रसुआर (सुपौल) भड़ि‍या-        श्री नारायण मुखि‍या      स्‍व...............         रसुआर (सुपौल) जोकर-        श्री सीताराम राम       ..................         परसाहा, नाैआ बाखैर (सुपौल) डान्‍सर-       श्री छोटेलाल मण्‍डल     श्री बुधु मण्‍डल         रसुआर (सुपौल) जोकर-        श्री रामअधि‍न मण्‍डल     स्‍व. धनि‍क लाल मण्‍डल रसुआर (सुपौल) इटहरी नाच कला परि‍षद- इटहरी जि‍ला-सुपौल कम्‍पनी- श्री जगदीश साहु पे. स्‍व. गंगा प्रसाद साहु पता, गाम- इटहरी, पोस्‍ट- ि‍नर्मली, भाया- ि‍नर्मली, अनुमण्‍डल- ि‍नर्मली, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) मैनेजर- श्री रामवि‍लास साहु पे. स्‍व. भोला साहु पता, गाम- इटहरी, पोस्‍ट- ि‍नर्मली, भाया- ि‍नर्मली, अनुमण्‍डल- ि‍नर्मली, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) नाच- (1) कुमर वृजभान (2) राजा नल (3) राजा सलहेश (4) गुगली घटमा (5) शीत-वसंत अभि‍नय कर्त्ताक नाओं/पता- नायक-        रामवि‍लास साहु        स्‍व. भोला साहु             इटहरी (सुपौल) नारी पात्र-      बैजू सदाय           स्‍व. सोती सदाय             इटहरी (सुपौल) नारी पात्र-      अशोक सि‍ंह          श्री बलराम सि‍ंह              इटहरी (सुपौल) मुख्‍य खलनायक- दुखी मण्‍डल           स्‍व. श्रीलाल मण्डल            इटहरी (सुपौल) जोकर-        वि‍जय साहु           स्‍व. केसो साहु              इटहरी (सुपौल) नारी पात्र-      रघुनाथ सदाय         स्‍व. मोती सदाय              इटहरी (सुपौल) अभि‍नय-       सुकुमार मण्‍डल        ..................               मुसहरनि‍याँ-रतसारा (मधुबनी) अभि‍नय-       रामअधि‍न मण्‍डल       स्‍व. धनि‍कलाल मण्‍डल         मुंगराहा (सुपौल) अभि‍नय-       हरि‍ नारायण मण्‍डल     .....                      छजना (मधुबनी) अभि‍नय-       राम बहादुर मुखि‍या      स्‍व. बच्‍चा मुखि‍या             ननपट्टी फुलपरास (मधुबनी) अभि‍नय-       श्री साधु दास         स्‍व. ..............              पि‍पराही-वनगामा (मधुबनी) वाद्य एवं वादक नाओं/पता- हारमोनि‍यम-     श्री जगदीश साहु       स्‍व. गंगा प्रसाद साहु     इटहरी (सुपौल) ढोलक-       श्री जुगल साफी        स्‍व. दाहुर साफी       इटहरी (सुपौल) नङेरा-डि‍ग्री-     श्री रामकि‍सुन सदाय     स्‍व. सोती सदाय       इटहरी (सुपौल) झाइल-        श्री सुकदेव साफी       .....                इटहरी (सुपौल) झाइल-       श्री रामेश्वर साहु        स्‍व. मुकुन्‍द साहु       इटहरी (सुपौल) डि‍ग्री सदैबला-   श्री रामकि‍शुन सदाय     ...................         इटहरी (सुपौल) भड़ि‍या-        झड़ी लाल सदाय       श्री सरयुग सदाय       इटहरी (सुपौल) ढोलकि‍या-2     रामाशीष  यादव        ..............           ननपट्टी-फुलपरास  (मधुबनी) हारमोनि‍यम-2    श्री तनुकलाल मण्‍डल     ................          हरि‍याही-ि‍नर्मली (सुपौल) आदर्श वाल-कला नि‍केतन- ि‍नर्मली-पुनर्वास (जि‍ला-सुपौल) कम्‍पनी- श्री राम शरण कामत पे. स्‍व. शि‍वधर कामत पता, गाम- सुरयाही, भाया- मुजि‍यासी, अनुमण्‍डल- फुलपरास, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) मैनेजर- श्री अशोक सि‍ंह पे. स्‍व. वलराम सि‍ंह पता, गाम- इटहरी-पुरर्वास, पोस्‍ट- ि‍नर्मली, भाया- ि‍नर्मली, अनुमण्‍डल- ि‍नर्मली, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) मंचन- (1) काँच ताग (2) आन्‍हर कानून (3) लोहा सि‍ंह (4) माइक कलेजा (5) चुड़ी आ सि‍नूर अभि‍नय कर्त्ताक नाओं/पता- नायक-        हेम नारायण साहु             स्‍व. लक्ष्‍मी साहु             इटहरी (सुपौल) नारी पात्र-      राम वि‍लास साफी       स्‍व. शोभि‍त लाल साफी         इटहरी (सुपौल) नारी पात्र-      अशोक सि‍ंह          श्री बलराम सि‍ंह              इटहरी (सुपौल) नारी पात्र-      हरि‍ नारायण साहु       श्री मि‍श्री लाल साहु           इटहरी (सुपौल) नारी पात्र      हरि‍ नारायण साहु       श्री लक्ष्‍मी साहु               इटहरी (सुपौल) अभि‍नय-       राम सागर साफी       श्री शोभि‍त साफी             इटहरी (सुपौल) अभि‍नय-       सत्‍य नारायण साहु      श्री लक्ष्‍मी साहु               इटहरी (सुपौल) अभि‍नय-       जगत नारायण साहु      श्री लक्ष्‍मी साहु               इटहरी (सुपौल) अभि‍नय-       रोहि‍त साहु           श्री राम लखन साहु           इटहरी (सुपौल) अभि‍नय-       हीरा लाल साहु        स्‍व. सुकदेव साहु            इटहरी (सुपौल) अभि‍नय-       जि‍रा लाल  साहु       स्‍व. सुकदेव साहु             इटहरी (सुपौल) अभि‍नय-       रामावतार यादव        श्री नुजाइ यादव              इटहरी (सुपौल) अभि‍नय-       गंगा पासवान          स्‍व. कुसुमलाल पासवान         इटहरी (सुपौल) अभि‍नय-       रामचन्‍द्र यादव         स्‍व. सुखी यादव              इटहरी (सुपौल) अभि‍नय-       शत्रुध्‍न साहु           स्‍व.............                इटहरी (सुपौल) गायक-        मदन प्रसाद साहु        स्‍व. गंगा प्रसाद साहु           इटहरी (सुपौल) वाद्य एवं वादक नाओं/पता- हारमोनि‍यम-     जगत नारायण साहु      श्री लक्ष्‍मी साहु               इटहरी (सुपौल) ठेकैता-        राम वि‍लास साफी       स्‍व. शोभि‍त लाल साफी         इटहरी (सुपौल) ठेकैता-        श्री शि‍बू साफी         ...................               इटहरी (सुपौल) झाइल-        श्री राम नारायण साहु    स्‍व. बच्‍चा लाल साहु          लक्ष्‍मीपुर-धबही (मधुबनी) हारमोनि‍यम-2    अशोक सि‍ंह          श्री बलराम सि‍ंह              इटहरी (सुपौल) कला नि‍केतन नाचपाटी- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (जि‍ला-मधुबनी) (1945-1965) कम्‍पनी- श्री झमेली साहु पे. स्‍व. मंगल साहु पता, गाम- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, अनुमण्‍डल- फुलपरास, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) मैनेजर- स्‍व. महेश्वरी पाठक पे. स्‍व. कारी पाठक पता, गाम- मझोरा, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, अनुमण्‍डल- फुलपरास, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) नाचक मंचन- (1) जंगली वादशाह (2) वंश-उजारन (3) वि‍देशि‍या (4) शीत-वशंत (5) लोड़ि‍क मनि‍यार (6) राजा नल अभि‍नय कर्त्ताक नाओं/पता- नारी पात्र-      स्‍व. अचकी गोसाँइ            ....................             लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) नारी पात्र-      स्‍व. बहुरी मण्‍डल             स्‍व. सुनर मण्‍डल             लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) पुरुष पात्र-     श्री रामदास साफी             स्‍व. सुवंश साफी                   लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) पुरुष पात्र-     स्‍व. घौली साफी             स्‍व. सुनर साफी              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) पुरुष पात्र      स्‍व. वसुदेव ठाकुर(उर्फ बतहु ठाकुर)    स्‍व. कैलू ठाकुर              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) जोकर-        स्‍व. खट्टर मुखि‍या            .....................              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) अभि‍नय-       स्‍व. दुखाय साहु              .....................              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) नारी पात्र-      स्‍व. रतन मण्‍डल                   .....................              मझौरा (मधुबनी) अभि‍नय-       स्‍व. बि‍लम साफी             स्‍व. रूपा साफी              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) वाद्य एवं वादक नाओं/पता- हारमोनि‍यम-     स्‍व. तुलसी मण्‍डल      ....................              मझौरा (मधुबनी) ठेकैता-        स्‍व. रघुनाथ ठाकुर      ....................              छजना (मधुबनी) नागार्ची-       स्‍व. फुसन राम        स्‍व. कंचन राम              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) झाइल करताल-  स्‍व. बच्‍चा मण्‍डल       स्‍व. पंची मण्‍डल             लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) डि‍गरी सेद्दा-    स्‍व. अशर्फी गोसाँइ      ....................              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) भड़ि‍या-        स्‍व. अशर्फी गोसाँइ      ....................              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) अन्‍य सहयोगी- स्‍व. नेबाजी साहु       स्‍व. भैरव साहु         लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) (संकलन सहयोग- रामवि‍लास साहु, लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, मधुबनी) आदर्श नाचपाटी- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (जि‍ला-मधुबनी) (1968-1977) कम्‍पनी- स्‍व. गर्भू गोसाँइ पता, गाम- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, अनुमण्‍डल- फुलपरास, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) मैनेजर- स्‍व. नेबाजी साहु पे. स्‍व. भैरव साहु पता, गाम- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, अनुमण्‍डल- फुलपरास, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) नाचक मंचन- (1) बापक हत्‍या (2) दमाद वध (3) नि‍सााद वध (4) वंस-उजारन (5) गोपीचन (6) शंकर शोसि‍ला (7) उति‍म चन। अभि‍नय कर्त्ताक नाओं/पता- पुरुष पात्र-     स्‍व. बहुरी मण्‍डल             स्‍व. सुनर मण्‍डल            लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) पुरुष पात्र-     श्री राम अधि‍न दास           स्‍व. जहुरी दास              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) पुरुष पात्र-     स्‍व. झोली दास              स्‍व. धुत्तर दास              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) नारी पात्र-      श्री नथुनी दास               स्‍व. सोनाइ दास              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) नारी पात्र      स्‍व. रघुनी दास              स्‍व. सुनर दास              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) अभि‍नय-       श्री शि‍व नारायण मंडल         .....................              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) अभि‍नय-       स्‍व. डुब्‍बी मुखि‍या             .....................              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) वाद्य एवं वादक नाओं/पता- हारमोनि‍यम-     स्‍व. बहुरी मण्‍डल       स्‍व. सुनर मण्‍डल             लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) ठेकैता-        स्‍व. श्री लाल गोसाँइ     स्‍व. बुधु गोसाँइ              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) नागार्ची-       स्‍व. रामेश्वर राम        स्‍व. नेबी राम               मझौरा (मधुबनी) झाइल करताल-  स्‍व. बच्‍चा मण्‍डल       स्‍व. पंची मण्‍डल             लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) डि‍गरी सेद्दा-    स्‍व. चमकलाल गोसाँइ    ....................              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) भड़ि‍या-        स्‍व. सुनर दास        ....................              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) (संकलन सहयोग- रामवि‍लास साहु, लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, मधुबनी) लक्ष्‍मि‍नि‍याँ नाचपाटी- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (जि‍ला-मधुबनी) (1970-1982) कम्‍पनी- श्री राजेन्‍द्र प्रसाद साहु पे. स्‍व. सुन्‍दर लाल साहु पता, गाम- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, अनुमण्‍डल- फुलपरास, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) मैनेजर- स्‍व. बहुरी मण्‍डल पे. स्‍व. सुनर मण्‍डल पता, गाम- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, अनुमण्‍डल- फुलपरास, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) नाचक मंचन- (1) कुमर वृजभान (2) लछि‍या रानी (3) सुन्‍दर वनक सुन्‍दर फूल (4) अल्‍हा-रूदल (5) वि‍जय सि‍ंह (6) गुगली घटमा। अभि‍नय कर्त्ताक नाओं/पता- पुरुष पात्र-     श्री सीताराम राम             स्‍व. जंगल मोची             लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) पुरुष पात्र-     स्‍व. रसि‍क लाल गोसाँइ        स्‍व. बुधु गोसाँइ              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) पुरुष पात्र-     श्री गोसाँइ मुखि‍या             स्‍व. डुब्‍बी मुखि‍या             लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) नारी पात्र-      श्री मलभोगी दास             स्‍व. भायलाल दास            लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) नारी पात्र      श्री कल्‍लर राम              स्‍व. खट्टर राम              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) अभि‍नय-       श्री मूसन साहु               स्‍व. अशर्फी साहु             लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) नारी पात्र-      श्री राम खेलावन राम           स्‍व. फूसन राम              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) वाद्य एवं वादक नाओं/पता- हारमोनि‍यम-     श्री राम शरण साहु      स्‍व. हि‍रो साहु               लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) ठेकैता-        स्‍व. लक्ष्‍मण राम        स्‍व. जीतन राम              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) नागार्ची-       स्‍व. फूसन राम        स्‍व. कंचन राम              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) झाइल करताल-  श्री शि‍व नारायण मण्‍डल   (गामक भगि‍नमान)             लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) डि‍गरी सेद्दा-    कपि‍लेश्वर राम         स्‍व. सगम राम               करहरी, फूलपरास (मधुबनी) भड़ि‍या-        स्‍व. नि‍रसन राम       स्‍व. कंचन राम              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) काँरनेटि‍या-     श्री चन्‍दर राम         स्‍व. जीतन राम              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) (संकलन सहयोग- रामवि‍लास साहु, लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, मधुबनी) कला नाचपाटी- छजना (जि‍ला-मधुबनी) (1945-1980) कम्‍पनी- श्री लालदेव मण्‍डल पे. स्‍व. चतुरी मण्‍डल पता, गाम- छजना, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, अनुमण्‍डल- फुलपरास, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) मैनेजर- श्री राम प्रसाद राम पे. स्‍व. गंगाय राम पता, गाम- छजना, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, अनुमण्‍डल- फुलपरास, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) नाचक मंचन- (1) बि‍हुला शती (2) लछि‍या रानी (3) सुन्‍दर वनक सुन्‍दर फूल (4) पि‍ता हत्‍या (5) दमाद वध (6) वंश-उजारन (7) कुमर वृजभान (8) वि‍देशि‍या (9) जंगली वादसाह (10) रास लि‍ला। अभि‍नय कर्त्ताक नाओं/पता- नारी पात्र-      श्री कारी मण्‍डल              स्‍व. नंदी मण्‍डल             छजना (मधुबनी) नारी पात्र-      श्री हरि‍ मण्‍डल               स्‍व. नंदी मण्‍डल              छजना (मधुबनी) पुरुष पात्र-     श्री बच्‍ची लाल चौपाल          स्‍व. दसाँइ चौपाल            छजना (मधुबनी) नारी/पुरुष पात्र- श्री छुतहरू चौपाल            स्‍व. सुनर खतबे              छजना (मधुबनी) पुरुष पात्र      स्‍व. नथुनी मण्‍डल            स्‍व. रामफल मण्‍डल           छजना (मधुबनी) अभि‍नय-       श्री झोली चौपाल             स्‍व. ननधर चौपाल            छजना (मधुबनी) अभि‍नय-       श्री छोटकनि‍ चौपाल           स्‍व. बौकू चौपाल             छजना (मधुबनी) नारी/पुरुष पात्र- श्री रामजस राम              स्‍व. उचि‍त राम              छजना (मधुबनी) नारी पात्र-      श्री हरि‍हर राम               स्‍व. दसाँइ राम              छजना (मधुबनी) पुरुष पात्र-     श्री रामकि‍सुन मुखि‍या          स्‍व. सहदेव मुखि‍या            छजना (मधुबनी) पुरुष पात्र      श्री दुर्गा नंद ठाकुर            स्‍व. नेंगर ठाकुर              छजना (मधुबनी) अभि‍नय-       श्री मटन चौपाल              स्‍व. सेमु चौपाल              छजना (मधुबनी) नृत-          श्री शि‍व नारायण चौपाल        श्री छोटकनि‍ चौपाल           छजना (मधुबनी) वाद्य एवं वादक नाओं/पता- हारमोनि‍यम-     श्री राम प्रसाद चौपाल    स्‍व. बि‍हारी                 छजना (मधुबनी) ढोलकि‍या-      श्री जनकधारी चाैपाल    स्‍व. खुशीलाल चौपाल          छजना (मधुबनी) नागार्ची-       श्री छोटकनि‍ राम       स्‍व. सुनर राम               छजना (मधुबनी) झाइल करताल-  श्री नथुनी चौपाल       स्‍व. मधुकर चौपाल            छजना (मधुबनी) डि‍गरी सेद्दा-    स्‍व. रोगहा चौपाल      स्‍व. तेतर चौपाल             छजना (मधुबनी) भड़ि‍या-        श्री सुनर चौपाल        स्‍व. नथुनी चौपाल            छजना (मधुबनी) काँरनेटि‍या-     श्री राम प्रसाद राम      स्‍व. मंगल राम               लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) अन्‍य सहयोगी- श्री बालेश्वर ठाकुर                   स्‍व. लखन ठाकुर             छजना (मधुबनी) श्री रामवि‍लास मुखि‍या                स्‍व. बलदेव मुखि‍या            छजना (मधुबनी) श्री बि‍सो मण्‍डल                    स्‍व. अजोधी मण्‍डल           छजना (मधुबनी) (संकलन सहयोग- रामवि‍लास साहु, लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, मधुबनी) गि‍रधारी नाचपाटी- छजना (जि‍ला-मधुबनी) (1956-2008) कम्‍पनी- स्‍व. गि‍रधारी साहु वर्त्तमान कम्‍पनी- जलेश्वर दास पे. स्‍व. खटर दास पता, गाम- छजना, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, अनुमण्‍डल- फुलपरास, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) मैनेजर- जलेश्वर दास पे. स्‍व. खटर दास पता, गाम- छजना, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, अनुमण्‍डल- फुलपरास, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) नाचक मंचन- (1) बि‍हुला शती (2) गोपी चन्‍द (3) अल्‍हा-रूदल (4) गुगली घटमा (5) रूणा-झुणा (6) सामा-चकेबा (7) पि‍ता हत्‍या (8) दमाद वध (9) कबि‍र लि‍ला (10) कलयुग प्रेम (9अम एवं 10सम वर्त्तमानमे जारी) अभि‍नय कर्त्ताक नाओं/पता- नारी पात्र-      श्री गोसाँइ मण्‍डल             ...................              धबौली, वनगामा (मधुबनी) नारी पात्र-      श्री राजेश्वर यादव             स्‍व. तनुक लाल यादव         बेरयाही (मधुबनी) पुरुष पात्र-     श्री हरि‍हर चौपाल             स्‍व. मोहन चौपाल             छजना (मधुबनी) नारी/पुरुष पात्र- श्री रघुनाथ चौपाल            स्‍व. मुंगालाल चौपाल           छजना (मधुबनी) पुरुष पात्र      श्री कुसुमलाल चौपाल          स्‍व. नथुनी चौपाल            छजना (मधुबनी) अभि‍नय-       श्री शि‍वजी चौपाल            स्‍व. फुसि‍याही चौपाल          छजना (मधुबनी) नृत-          श्री राजेन्‍द्र चौपाल             स्‍व. धीरज चौपाल            बि‍क्रम शेर,अंधरामठ (मधुबनी) नारी/पुरुष पात्र- श्री नेहाली चौपाल             स्‍व. जहुरी चौपाल            छजना (मधुबनी) नारी पात्र-      श्री संतलाल  साहु            स्‍व. दसाँइ साहु              छजना (मधुबनी) अभि‍नय-       श्री कपि‍लेश्वर राम             स्‍व. नेबी राम               मझौरा (मधुबनी) अभि‍नय       स्‍व. राम प्रसाद चौपाल         स्‍व. बि‍हारी चौपाल            छजना (मधुबनी) अभि‍नय-       श्री धर्मी मण्‍डल              स्‍व. ................             रतन सारा (मधुबनी) अभि‍नय-       श्री यशोलाल यादव            ....................              बेरि‍याही (मधुबनी) वाद्य एवं वादक नाओं/पता- हारमोनि‍यम-     स्‍व. ठीठर मण्‍डल       स्‍व. ......                  रतनसारा (मधुबनी) ढोलकि‍या-      स्‍व. भुटाइ चाैपाल       स्‍व. फेकन चौपाल            छजना (मधुबनी) नागार्ची-       स्‍व. रामेश्वर राम        स्‍व. नेबी                   छजना (मधुबनी) झाइल करताल-  श्री नथुनी चौपाल       स्‍व. मधुकर चौपाल            छजना (मधुबनी) डि‍गरी सेद्दा-    स्‍व. रोगहु चौपाल       स्‍व. तेतर चौपाल             छजना (मधुबनी) भड़ि‍या-        स्‍व. नथुनी चौपाल      स्‍व. चुमन चौपाल             छजना (मधुबनी) काँरनेटि‍या-     श्री जालेश्वर दास       स्‍व. खट्टर  चौपाल            छजना (मधुबनी) अन्‍य सहयोगी- श्री गंगाय साहु                     स्‍व. दुखाय साहु              छजना (मधुबनी) स्‍व. गोवि‍न्‍द लाल साहु               स्‍व. झगरू साहु              छजना (मधुबनी) श्री लोदाय चौपाल                   स्‍व. गुणेश्वर चौपाल            छजना (मधुबनी) श्री भुगती चौपाल                   स्‍व. बलदेव चौपाल            छजना (मधुबनी) (संकलन सहयोग- रामवि‍लास साहु, लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, मधुबनी) मि‍थि‍लाक लोक संगीत/ लोक कला भगैत गबैया- (धर्मराज, ज्‍योति‍श महराज, अंदू मालि‍, उदय साहु, हरि‍या डोम, बेनी, शती अवला, कारूबाबा इत्‍यादि‍ भगैत नि‍म्नलि‍खि‍त ‘रसुआर-भगैत पार्टी’ 1980 ई.सँ गबै छथि‍।) श्री शम्‍भु प्रसाद मण्‍डल सुपुत्र स्‍व. लखन मण्‍डल भगैत गायन सह खजरी वादन उमेर- 42 साल 1980 ई.सँ भगैत गबै छथि‍। पता- गाम- बढि‍याघाट/रसुआर, पोस्‍ट- मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, जि‍ला- सुपौल। श्री गंगाराम मण्‍डल सुपुत्र श्री अशर्फी मण्‍डल-  झालि‍ वादक  उमेर- 40 1980 ई.सँ झालि‍ बजबै छथि‍। पता- गाम- बढि‍याघाट/रसुआर, पोस्‍ट- मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, जि‍ला- सुपौल। श्री जनक मण्‍डल सुपुत्र स्‍व. उचि‍त मण्‍डल उमेर- 60 रमझालि‍/ कठझालि‍/ करताल वादक 1975 ई.सँ रमझालि‍ बजबै छथि‍। पता- गाम- बढि‍याघाट/रसुआर, पोस्‍ट- मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, जि‍ला- सुपौल। श्री रवि‍न्‍द्र मण्‍डल सुपुत्र श्री खट्टर मण्‍डल उमेर- 32 नाल वादक पता- गाम- बढि‍याघाट/रसुआर, पोस्‍ट- मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, जि‍ला- सुपौल। श्री परमेश्वर मण्‍डल सुपुत्र स्‍व. बि‍हारी मण्‍डल उमेर- 41 ग्रुमबाजा/ गुमगुि‍मयाँ 1980 ई.सँ गुमगुि‍मयाँ बजबै छथि‍। पता- गाम- बढि‍याघाट/रसुआर, पोस्‍ट- मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, जि‍ला- सुपौल। श्री महेन्‍द्र प्रसाद मण्‍डल सुपुत्र स्‍व. छेदी मण्‍डल उमेर- 48 कठझालि‍ वादक बचपनसँ गेबो करै छथि‍ आ रमझालि‍/कठझालि‍ बजेबो करै छथि‍। पता- गाम- रसुआर, पोस्‍ट- मुंगराहा, भाया- नि‍र्मली, जि‍ला- सुपौल। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। प्रियंवदा तारा झा वापसी मानसी भोरेसऽ तैयारीमे लागल छथि। भानस भातसऽ फरागति पाबि घऽर  दिस ताकि स्वगते बजलीह, सब ठीके छैक ,आब कनी बिलमिकऽ तैयार भऽ जाइत छी। बहुत समयसऽ अही दिनक प्रतीक्षा छलैन्ह, आइ  मानस अप्पन परिवारक संग आबि रहल छथि। मानस हुनक अंश , जिनका शिक्षा-दीक्षाक लेल मानसी अप्पन ज़िनगी  होमकऽ देने छलीह। ओ ख्याति प्राप्त सफल डाक्टर आइ विदेशक सुख-सुविधा छाड़ि अप्पन धरतीपर घुरि रहल छथि। भावावेश सऽ भरि उठलीह मानसी। भरोस नै छलैन्ह जे बेटाके अहि गप्प लऽ तैयार कऽ सकब। ओतऽ पुतहुक समझदारी जे ई संभव भेल। सत्ते , मुक्ता बड्ड बुझनुक छथि। कतऽ हमरा ई चिन्ता छल‌ जे ओ बेटाके हमरा सऽ दूर करतीह , मुदा ओ‌ तऽ हमर निधिके हमरा लग आनि देलथि। भगवती , एहन पुतहु सबके देथुन्ह। मोन पड़ै  छैन्ह मानसीके अप्पन आशंका , पैघ घऽरक बेटी हमरा सन सामान्य परिवारमे कोना एडजस्ट करतीहॽ आब  घऽरोमे  अपमान सहऽ  पड़तैक ? भीतर सऽ बड्ड डेराइत-डेराइत बेटाके इच्छा देखैत तैयार भेल रहथि ओ विवाह लेल। आ जखन मानसके अमेरिका जयबाक मौका भेटलैन्हि तऽ हहरि गेल छलीह ओ। कतेक कहलखिन्ह , एत्तहु तऽ सब किछु छै , अही ठाम काज करू नऽ। बेर-बेर कहला सऽ खौंझा उठल छलाह मानव , तों  कियैक नै बूझै छही , हमर कैरियरके सवाल छै। तकर बाद चुप भऽ गेल छलीह मानसी। अमेरिका जयबासऽ किछु दिन पहिने मुक्ता रातिमे सासुके कहलखिन्ह , मां हम अहांक मनोस्थिति बूझि रहल छी। अहां चिन्ता नहिं करु , हम मानस के लऽ कऽ निश्चय वापस आयब , अहां बस अप्पन ध्यान राखब। आ भारी मोनसऽ विदा कऽ देने रहथिन्ह मानसी बेटा ,पुतहुके। कोना कऽ ई पांच वर्ष कटलैन्हि मानसी वैह जनैत छथि। अप्पन आशंका , ताहिपर सऽ लोक सबहक गप्प , भरि ज़िन्दगी बेटा छोड़िकऽ क्यो सुझलैन्हिनै , आब लियऽ ,असकरि छोड़िकऽ पड़ैलैन्ह विदेश। मानसी सब सुनियो कऽ अनठा दैत छलीह , की करितथि आर ? मानस , मुक्तासऽ गप्प होइन्ह तऽ  बेटासऽ बेशी आश्वस्ति भेटैन्ह , पुतहु बुझाबैन- अहां बस किछु दिन आर धैर्य राखू। मानसी अतीतके पन्ना सबमे ओझरायले छलीह कि मुकुल बाबू बाहरसऽ बजैत ऐलखिन्ह , धुर अहां आइयो अहिना बैसल रहब की ? जल्दी उठू , परिछू पुतहुके , अहांके बेटा संग अहांक पोतियोके वापस आनने छथि। हंहं , नेने अबैत छी , आइ हमर तपस्या पूर्ण भेल , बजैत हड़बड़ाइत बहरैली। एतेक दिनक बाद सबके देखि, आंखिसऽ गंगा जमुना बहऽ लगलैन्ह , मुदा आइ ई नोर छलैन्ह खुशीके। गदगद स्वरमे बजलीह , मुक्ता अहां मानसो सऽ बेशी प्रिय छी हमरा। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आशीष अनचिन्हार सपना आ भ्रम (ई लघुकथा हमर पहिल प्रकाशित लघुकथा अछि जे कि 2007मे विद्यापति सेवा संस्थानक स्मारिकामे प्रकाशित भेल छल। विदेहक पाठक एवं आन माध्यमक नव पाठक लेल हम एकरा एहिठाम दऽ रहल छी।- आशीष अनचिन्हार) घटनासँ पूर्वक गप्प : सपना देखैत लोक सावधान भऽ जाउ। बड्ड दिन धरि अहाँ सभ सपना देखलहुँ, किछु दिन बिनु स्वपन देखने रहू। "की कहलहुँ ? सपना देखबाक हिस्सक लागि गेल अछि हमरा सभकेँ। हँ से त' सत्ते कहलहुँ - अहाँ, आ से हमहूँ बूझि रहल छी।" "फेर की कहलहुँ। सपना देखब आवश्यक छैक जिनगीक लेल। ई के कहलक अहाँकेँ? बेस मानलहुँ हम जे सपना देखब आवश्यक छैक, मुदा कनेक ई अहाँ फरिछाउ -जे की केवल सपने देखब आवश्यक छैक ओकर क्रियान्व्यन किछु नहि।" "की भेल औ, चुप्प छी किएक किछु बाजू ने।" "ओह बुझाइत अछि जे फेर अहाँ सभ सूति रहलहुँ घोर निन्नमे सपना देखबाक लेल, खाली आ खाली सपना देखबाक लेल।" सूतब एक रंगक गप्प भेल। सपना देखब दोसर रंगक आ सपना देखि ओकरा क्रियान्व्यन करब तेसर रंगक गप्प भेल। मुदा ई तीनू एक दोसरसँ संबंधित अछि प्रजातंत्रक नेता जकाँ। एह कड़ी महँक जँ कोनो कड़ी टूटि गेल तँ सभटा खेल खतम आ पैसा हजम । “आ भ्रम की छैक।" "अच्छा, अच्छा उठि गेलहुँ की ?" "हँ कनेक आँखि लागि गेल छल" "हँ से तँ लगबे करत हिस्सक अछि ने। मुदा हम एहि प्रसंगकेँ छोड़ि अहाँक प्रश्नपर आबी से उत्तम। ओना अहाँक प्रश्नक उत्तर जतेक कठिन ततबे सरल। आब अहाँ ई उदाहरण नहि देब जे संसारे भ्रम थिक। ई गप्प हमरो बूझल अछि। मुदा एहि बाटे जाएब हमरा अभीष्ट नहि।" "हँ तँ अहाँ हमरासँ की पुछने छलहुँ, इएह ने जे भ्रम की थिक। अच्छा एकटा गप्प कहूँ, अहाँ सभ त निश्चित रूपँ मैथिली साहित्यक प्रेमी हएब। हएबे करब। जकरा पाबि कऽ अनेरे पुरस्कार ओ सम्मान भेटैत हो ओकरासँ प्रेम नहि करक तँ करबैक केकरासँ। हँ तँ जखन अहाँ लोकनि साहित्यक प्रेमी छी तँ किछु ने किछु कहबी जनिते हएबैक। आब अहाँ सभ मोने-मोन कहब जे ईहो कोनो पुछबाक गप्प छैक। मुदा हम जनैत छिऐक जे गप्प छैक। आब जखन गप्प कहबीपर एलैक अछि तखन अहाँ सभकेँ तँ एकटा कहबी मोने हएत ने औ? कोन, जनैत छियैक ? वएह जाहिमे कहल गेल छैक जे अपने सूतल छी आ विआह होइत अछि।" आब अहाँ सभ किछु-किछु बुझए लागल हएबैक। "की कहलहुँ, एखनो धरि नहि बुझलिअइ। ठीक छैक तखन हमरा दोसरो कहबी कहए पड़त।" "जेना" "जेना की ओ कहबी छैक-अपने नहाइत छी आ कीदन दहाइत अछि।" आबो बुझलिअइ यौ? की बजलहुँ, एखनो धरि बुझाएल ई गप्प। अरौ बाप रौ बाप। आब हम कोना बुझाएब अहाँ सभकेँ। अच्छा, कोनो गप्प नहि, एहि बेर हम तेरहम विद्याक प्रयोग कए रहल छी।" "अर्थात्।" “अर्थात् जे आब हम सोझे-सोझ गप्पकेँ खोलि कऽ कहब।" "कहू" "हँ, सुनल जाए। मनुख जा धरि सपना देखैत अछि ता धरि तँ ठीक आ आवश्यको छैक, मुदा जहाँसँ मनुख सपनामे क्रियान्वित काज के वास्तविक जीवनमे सत्त बूझि लैत छथिन्ह ओही ठामसँ भ्रम शुरू भए जाइत छैक। एकरे जँ दोसर तरहें एना कही जे-सपना देखब जरूरी छैक मुदा सपनामे भेल काज के वास्तविक जीवनमे बिनु हाथ-पएर डोलेने सत्त मानब भ्रम थिक। आब तँ बुझिए गेल हेएबैक जे सपना कि थिक आ भ्रम की।" "आबो बुझलिअइ औ" "की भेल औ" "ओह फेर सूति रहलिअइ की ? जाउ, सूतू ग।" घटनाक गप्प : पुरबा बहैए मच्छर कटैए निन्न नहि अबैए कनियाँ मोन पड़ैए... टेपसँ मधुर गीत बहार भए रहल छल आ एम्हर बाबू साहेब अपन मित्र दिलीपकेँ रातुक सपनाक संबंधमे सुना रहल छलाह। बाबू साहेब दिलीप के कहलखिन्ह-"बुझलह रातुक सपनामे तों हमरासँ प्रश्नपर प्रश्न करैत चल गेलह आ हम जबाबपर जबाब दैत।" दिलीप अविश्वासक भावसँ साहेब दिस तकलक आ पुछि देलकै-"कहक तँ जे हम तोरासँ की-की पुछलिअह आ तो हमरा की-की जबाब देलह। बाबू साहेब जाँघपर हाथ मारैत बजलाह-"एहीठाम तँ मारि खा गेलहुँ। एखन धरि मोन नहि पड़ल अछि। भोरेसँ मोन पाड़ि रहल छी। दिलीप हँसि देलथि। बाबू साहेब थोड़ेक रुष्ट होइत पुछलखिन्ह-की विश्वास नहि होइत छह ? दिलीप पूर्ववत भावसँ उत्तर देलखिन्ह "सपनों सभ कोनो विश्वास करबाक वस्तु होइत छैक। प्रत्येक दिन-रातिमे प्रत्येक मनुष्य नहि जानि कतेक सपना देखैत हेतैक। के गनती राखता हँ जँ ओ वास्तविक जीवनमे सत्त हुअए तखन ने ओकरा सत्त मानल जाए।" बाबू साहेबक मुँह अप्पन सन भए गेलन्हि, मदा कनेकबे देर धरि। किछु देर घरि ओ किछु बिचारत दिलीपसँ जिज्ञासा केलखिन्ह अच्छा मीत एकटा गप्प कहअ जे वस्तु सच का आकर छाँह? आ दिलीप अकबका गेलाह अनचोकेमे एहन प्रश्न सुनि कऽ। किछु ने फुरेलन्हि उत्तरमे। सोचमे डूबि गेलाह। मुदा कतेक देर धरि, किछु ने किछु त उत्तर देबहे पड़तनि। किछु विचारैत ओ गंभीर स्वरमे बजलाह-"दुनू सत्त।" बाबू साहेब फेर पुछलखिन्ह "कोना" दिलीप फरिछबैत कहलखिन्ह- "ई गप्प तँ निश्चित छैक जे वस्तु सच थिक आ वस्तुएसँ त छाँह होइत छैक, तँइ वस्तुक संगे-संग छाँहो सत्त।" बस आब की छल बाबू साहेब खुश होइत पुछि देलखिन्ह "अच्छा मुदा ई कहह जे वस्तु सत्त छैक तँइ ओकरासँ उत्पन्न छाँह सेहो सत्त भए गेल। मुदा तोरे कथनानुसार सपना फूसि आ ओकर सकार रूप सत्त, एहन दोहरा भाव किएक जखन की मूल प्रश्न एकै छैक। जेना वस्तु ओ ओकर छाँह एक दोसरसँ संबंधित छैक तेनाहिते संपना आ ओकर सकार रूप एक दोसरसँ संबंधित छैक।" दिलीपपर ई दोसर बेर बज्जर खसलैन्ह। ओ बिनु पपनी खसेने बाबू साहेब दिस देखए लगलाह आ बाबू साहेब दिलीपक आँखिमे। घटनाक पछातिक गप्प : एहि कथामे ने किछु सार छैक ने रस से हम मानैत छी। मुदा कनेक काल लेल हम अथवा अहीं जँ दिलीप भऽ जाइ तँ बाबू साहेब के हेताह ? के जोखिम उठा सकैत छथि बाबू साहेब बनबाक लेल ? ई प्रश्न जतबे अनिर्णायक छल ततबे एखनो अछि आ आँगा रहत की नहि रहत से हम नहि कहि सकी, कारण हम कोनो भविष्यवक्ता नहि छी। मुदा प्रश्न तँ सोझामे ठाढ़ अछि। जे व्यक्ति केकरो एक पक्ष के सत्त मानैत छथिन्ह त ओकर दोसर पक्ष के फूसि किएक ? जखन की दूनू पक्ष एक दोसरसँ संबंधित छैक। अविभाज्य छैक। प्रश्न तँ उठबे करतैक, आखिर किनको लेल ब्रह्म किएक सत्त आ माया किएक फूसि ? प्रश्न बहुत रास आबि सकैत अछि। बड़ जोरसँ रोकलाक पछातिओ। आ जे मायाकेँ सत्त मानत छथिन्ह से ब्रम्हकेँ फूसि किएक ? प्रश्नक काज छैक बढ़नाइ बढ़बे करतैक, खाली हम अहाँ एक दोसरक मुँह देखैत रहबैक। अच्छा ई कहू जे - प्रकृतिक उद्दीपन सत्त की आत्माक द्वन्द सत्त की इन्द्रियक दमन सत्त। सत्त की छैक। प्रश्न बढ़ले जा रहल अछि। राम सत्त की रावण ? केओ कहताह राम केओ रावण। मुदा की रामक बिनु रावणक आ रावणक बिनु रामक अस्तित्व संभव छैक। ई प्रश्न सभ भूतकालक थिक से अहाँ कहि सकैत छियै संगहि-संग अहाँ हमरा भूतजीवीक उपमा सेहो दए देब, तँइ आब हम वर्तमान कालमे प्रवेश करब। आब अहीं कहू जे एहि मेंसँ सत्त की छैक अमेरिकाक दादागीरी, पाकिस्तानक आतंकवादी, इरानक स्वाभिमान, चीनक कूटनीति की भारतक शान्ति। सत्त की छैक एहिमेसँ। अहाँ कहबे करब जे अमेरिकाक दादागिरी आ पाकिस्तानक आतंकवादी फूसि आ भारतक शान्ति सत्त। मुदा ई भावना भने अहाँक देश-प्रेमक परिचायक हुअए। मुदा एकरा निरपेक्ष नहि कहल जा सकैए। अंततः शान्ति की छै। आतंक एवं दादागिरीक दमनक पश्चात् जे आनंद बुझाइत छैक ओकरे नाम हम अहाँ शान्ति देने छियै ने। आब अहीं सभ सोचिऔ कनेक जे जँ आतंक नहि हेतैक तँ शान्तिक उत्स हेतैक कतएसँ आ जँ कहींसँ उत्स भइओ गेलैक तँ, हेतैक केकरा लेल। तँइ आतंको सत्त आ शान्तियो सत्त। "अपनेक कहक अभिप्राय ?" "अच्छा उठि गेलहुँ। बड्ड देरक पछाति निन्न टूटल अहाँक ?" "हँ, फेर कनेक आँखि लागि गेल छल!" "अच्छा " "हँ त हम अपनेक अभिप्राय पुछैत छलहुँ" "अभिप्राय ? हँ तँ हमर कहक अभिप्राय जे संसारमे सभ सत्त थिक" "अच्छा मानू जे सभ सत्त थिक तँ फूसि की थिक। की पृथ्वी फूसि विहीन अछि" "नहि-नहि, इहो कहब निरपेक्ष नहि हएत जे पृथ्वीविहीन अछि" "अँए की बजलहुँ, एखने कहैत छलियै जे पृथ्वीपर सभ सत्ते अछि आ एखने कहलिअइ जे पृथ्वी फूसिविहीन नहि छैक। एना दुचित्तापन किएक ?" "सरकार ई दुचित्तापन नहि थिक। हम जे पहिने कहलहुँ सेहो सत्त आ एखन जे कहलहुँ सेहो सत्त" "फेर अहाँ गप्पकेँ घुरछिया देलियै" "नहि सरकार गप्प तँ एकदम सोझ छैक, खाली हमर अहाँक मोन बौआ रहल अछि" "ई अहाँ की सभ बाजि रहल छी से नहि जानि" "जानए के प्रयासो तँ करियौ" "तखन अहीं कहू". "की" "इएह जे अहाँक दूनू गप्प कोना सत्त" "हम कहैत छलहुँ जे शान्तियो सत्त आ आतंको सत्त सएह ने" "हँ" "अच्छा आब एकटा गप्प सूनू मानू जे एकटा आतंकवादी आतंकक प्रसार कएलक आ नुका गेल। तकरा पछाति शासक ओकरा ताकि-हेरि कऽ समुचित दंड देलक। आब एहि गप्पकेँ नीक जकाँ बुझियौ आतंकवादी जे आतंक प्रसार कएलक ई भेल आतंकवादीक सत्त आ शासन ओकरा दंड देलक। ई भेल शासनक सत्त। मुदा की देखैत छिऐक हम-अहाँ सभ। आतंकवादी अपन सत्त देखा चल जाइत अछि आ शासन चुप्प रहैत अछि। इएह चुप्पी तँ फूसि थिक, भ्रम थिक। रावण सीताहरण कए लैत अछि आ आबक राम रामेश्वरक स्थापना कए घूरि अबैत छथि, इएह घूरि जेनाइ तँ फूसि थिक, भ्रम थिक। शासनक सत्त तखने रहतैक जखन की ओ आतंकीकेँ दंड देत। रामक सत्त तखने जखन की ओ रावण के परास्त कए सकथि। मुदा से नहि भए रहल आ ई जे नहि भए रहल सएह तँ फूसि आ भ्रम भेल। आ इएह फूसि इएह भ्रम चारू दिस पसरि रहल अछि। इएह आँगन, दुआरि, चौकठि, बड़ेरी, मोन, आत्मा सन के गछारने अछि। आ हम-अहाँ इएह फूसि इएह भ्रमक दुनियाँमे बौआ रहल छी, एहि छोड़सँ ओहि छोड़, एहि आरसँ ओहि पार धरि हाथमे एकटा टूटल छौकी लेने। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। आनन्द कुमार झा मैथिलीक वर्तमान रंगमंच , धर्मिता आ स्वतन्त्रता जखन हमर चिन्तन मैथिली रंगमंचक स्वतन्त्रता दिस जाइत अछि तॅ हम पबैत छी - बेसी नाटककार रंगमंचक पक्ष राखए लगैत छथि  । जखन की हुनका अपन नाट्य लेखन आ ताहिमे आबि रहल अवरोधक तत्वकेॅ उजागर करबाक चाहिअनि । से ओ जानि - बुझिकेॅ तकरा झाॅपैत रहैत छथि । से मात्र अहि दुआरे जे हुनक नाटक रंगमंच पर प्रदर्शन हुअएह । हुनका एकरती चिन्ता नहि रहलन्हि आकि रहैत छन्हि जे हम एक साहित्यकार छी । हमर सफलता नीक साहित्य लेखनमे अछि । हम पहिनहुॅ कहलहुॅ अछि जे रंगमंच स्वतन्त्र विधा छी । ओकरोमे जहिना साहित्यमे विभिन्न विधा नाटक , कथा , उपन्यास , कविता सभ अछि । तहिना रंगमंचोक अनेक विधा छैक , जेना - नाटक , नृत्य , गायन , बाजन , एकल अभिनय इत्यादि । आब एतए प्रश्न उठैत अछि आ चिन्तन करैक अछि । जे हमरा लोकनि मैथिली भाषामे जखन जखन रंगमंचक चर्चा करैत छी तॅ मात्र नाटकक विमर्श ठार कएल जाइत अछि । से किएक एना जानि बुझिकेॅ कएल जाइत अछि ? से अहि दुआरे जे ओहिमे साहित्य पक्षक लोकक बोलबाला रहैत अछि । रंगमंचीय विभिन्न विधाक विशेषज्ञ लोकनिकेॅ कतियाएल जाइत रहलाह अछि । ओ दहोदिसिआ जे साहित्योमे अपन स्थान सुरक्षित कएने रहए चाहैत छथि आ रंगमंचहुॅ पर सफलताक सिरही चढए चाहैत छथि । मुदा से सम्भव नहि छैक ओ कतहुॅ भएकेॅ नहि रहैत छथि । मुदा अहि खेलमे सभसॅ बेसी नुकसान जॅ ककरो होइत अछि तॅ ओ छी मैथिलीक रंगमंच । जतए नाटककार तॅ ओतबहि रहैत छथि मुदा कलाकार स्थापित नहि भए पबैत छथि । कलाकारक फेर बदल होइत रहैत अछि ओकरा अपनहि मंच पर कतियाएल जएबाक अनुभव अवश्य होइत रहैत हेतैक । अन्ततोगत्वा ओ निरीह कलाकार हारि - थाकिकेॅ रोटिओ जुड़बैक योग्य ओ नहि रहि पबैत छथि तहन विधा छोड़ि परा जाइत छथि । आहाॅ गौड़ कएकेॅ देखिऔक मैथिली रंगमंचक कलाकार ओतबहि गोटए सुरक्षित स्थान कए सकलाह अछि जे कोनो ने कोनो मंचसॅ जुड़ल छथि मैथिलीमे एखनधरि बहुत कमे आदर्श कलाकार बनि सकलाह अछि  ( हम तॅ कहब नहि बनि सकलाह अछि ।) जिनका सम्पूर्ण मिथिलाक लोक चिन्हैत हेतनि आकि स्वीकार करैत होएतनि । सम्पूर्ण मंच पर ओ अभिनय करताह से सपना सपनहि रहि जाइत छन्हि । अन्तमे जखन पीढ़ी परिवर्तन होइत अछि तॅ नाटकक कालजयी होएबाक चर्चा तॅ होइत अछि मुदा ओहिमे अपन खून-पसीना सुखेनिहार कलाकारक नामो - पता हरा दैत अछि । ई केहेन रंगमंचक स्वतंत्रता । विद्यापतिक नाटकक चर्चा तॅ गुमानसॅ करैत छी । फेर ओकर मंचन सभमे अभिनय केनिहार कलाकार लोकनिक नाम - गाम किएक बिला गेल । की एकर दायित्व रंगकर्मी,  रंगमंचीय सत्ता भोगनाहर लोकनिक नहि बनैत अछि । अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। मुन्नाजी बीहनि कथा-- मानकीकरण ओ तुलनात्मक पक्ष मैथिली कथा साहित्य मूलत: संस्कृत भाषा साहित्य सं अनुदित भ'अपन पएर पसारने छल।एकर बीजारोपन चन्दा झा द्वारा विद्यापतिक 'पुरूष परीक्षा' सं भेल छल।कालान्तर मे मैथिली कथाकार बाङला कथा माध्यमे पाश्चात्य कथासाहित्य सं परिचित भेला।तत्पश्चात मैथिली कथा लेखनक कथ्य,शिल्प आ विषय परिमार्जित भ' मैथिली कथा साहित्य के नव दृष्टि देलक आ ओ संस्कृतक शब्द ,कथा/गल्प नामे लिखाइत रहल।पछाति प्रो. रमानाथ झा सदृश्य विद्वान/आलोचक ,अंग्रेजीक प्रभावे एकरा अंग्रेजी मे Short Story आ ओकर अनुवाद ' लघुकथा कहि संबोधित केलनि।तहिया सं इ कथा/ गल्प ,रचना त' ओही नामे होइत रहल मुदा विधागत ' लघुकथा ' (Short Story) विधाक अन्तर्गत मूल्यांकित होइत रहल।आ ताहि परिणामे मैथिलीक सब संग्रह पर अंग्रेजी मे Collection of Short Story अनिवार्य रूपें लिखल भेटत। तकर पछाति मैथिली साहित्यक इतिहासकार लोकनि सेहो कथा/गल्प नामक रचना कें लघुकथा विधाक श्रेणी मे राखि व्याख्या . करैत रहलाह।" संप्रति गल्प वा लघुकथा,उपन्यास सं अधिक लोकप्रिय भेल जा रहल ऐछ।तकर प्रबल कारण पाठक वर्ग मे क्रय शक्तिक क्षीणता वा पलखतिक अभाव, से नै जानि।" --डॉ. जयकान्त मिश्र-मैथिली साहित्यक इतिहास(प्रकाशक- साहित्य अकादमी)ऐ फरिछओठक पछाति अंग्रेजी साहित्यक विधाक पृष्ठभूमि मे ओहि विधा परिवारक अंग भ'  स्थापित भेल। आगू ओकरा आओर फरिछबैत दुर्गानाथ झा श्रीश लिखै छथि--" आइ मैथिली साहित्यक एक मात्र उपलब्घि थिक लघुकथा(Short Story) पूर्वक कथाकार लोकनि गल्प आ उपन्यासक बीच शिल्पगत अन्तर नै बुझैत छलाह।मुदा आब इ स्पष्ट ऐछ।जाहि सं लघुकथा(कथा/गल्प नामे) विधागत स्वतंत्र परिचिति बना पओलक ऐछ।"--मैथिली साहित्यक इतिहास-दुर्गानाथ झा श्रीश।" हमरा मैथिली प्रतिष्ठा वर्गक छात्र रहने मैथिली साहित्यक इतिहासक अध्ययनक अनिवार्यता छल। एहि अध्ययनक क्रमे मैथिली कथा के विधागत ' लघुकथा( Short Story)बुझबाक अवगति भेल। हम आश्चर्य चकित रही अग्रज सबहक हिन्दी लघुकथा विधाक मैथिली अवतरणक रूपें अंधानुकरण पर, ई की ?पहिने सं जे विधा विद्यमान आ स्थापित ऐछ(कथा/गल्प नामे) ' लघुकथा(Short Story)।तहन ओइ विधाक दोहरीकरणक की खगता ?माने पिता आ पुत्रक एकहि नामे पुकार ! जहन की दुनूक चरित्र,प्रकृति आ क्रियाकलाप एक दोसराक विपरीत। फेर नकल वा मिझ्झरक अज्ञानता किएक ? ओही अज्ञानता वा अंधानुकरण सं पार पएबाक आ विधाक शुन्यता के भरवाक लेल अवतरित भेल बीहनि कथा विधा (1995)। सहयात्री मंच ,लोहना (मधुबनी)द्वारा भेल साहित्यिक बैसार मे सामूहिक रूपें सर्वसम्मति सं एहि विधाक अवतरण भेल छल। ऐ विधाक नाम की राखल जए ताहि पर बहसक पछाति श्री राज द्वारा ताकल नाम-" बीहनिकथा" पर  सर्व सम्मति सं स्वीकृति द'आगू बढ़ाओल गेल।आ तहिया सं मैथिली कथा साहित्यक दू गोट विधा-पहिल,लघुकथा(Short Story)आ दोसर " बीहनि कथा(Seed Story)चलन सारि मे रहि गेल। 25 बरख सं कछुआ चालि सं चलैत बीहनि कथा विधा साहित्यिक छद्म  खरहा सं टपि अपना के विजेता कहेबाक पात्रता आब हासिल क' लेने ऐछ।जन्मक पछाति ठेहुनिया मे कतेको के सैद्धांतिक पटकनिया दैत डेगा डेगी बढ़' लागल। तकर पछाति एकरा दबेवा/माटि मे गोड़बा लेल किछु तथाकथित/स्वघोषित विद्वान सक्रिय भ' गेला। फलत:एकर चालि बाधित होइत ठमकि सन गेल। सोझां मे ' एकला चलो रे'  के उघैत करीब एक दशकक यात्रा एकरा हेरेबा लेल वेश रहल।2010 मे पुन: इ कान्ह उठेलक।आ ताहि मे पछिला सं जेरगर समूह नव आँखि-पाँखिक संग अंगेज पुन: सोझां आनि थिर केलनि।' विदेह , इ पाक्षिक' बनल राजपथ आ सारथी  भेलाह संपादक-.गजेन्द्र ठाकुर आ सहायक संपादक-उमेश मण्डल। ऐ एक दशकक भीठ पड़ल साहित्यिक जमीन पर श्री राजक ' बीहनि कथाक साहित्यक बीराड़क बीहनि सं रोपनि भेल।तकरा हरियरी अनलनि गाम-घर, पत्रिकाक संपादक - शःरी रामभरोस कापड़ि भ्रमर।आ ऐ तरहें श्री राज भेलाह' वात्सल्य ' बीहनि कथा(2003)सं एकर पहिल प्रकाशनक स्वामी। बीहनि आ कथा शब्दक उत्पत्ति -------------------- -------------------- संस्कृतक ' ब्रीही ' शब्दक अर्थ होइछ बीज आ मैथिली मे बीहनि/बीहन/बीहैन सेहो ओही शब्दक मूलार्थ मे निहित।--प. भवनाथ झा कथा-संस्कृतक कथ् धातु सं बनल।जकर तात्पर्य होइछ- कहब   वा वर्णन करब। बीहनि कथाक अर्थ आ परिभाषा ---------------------------------------- बीज/बीजम संस्कृत शब्द थिक।यथा-यज बीजै:सहस्त्राक्ष -महाभारत कथा सेहो संस्कृत शब्द थिक।यथा-कथासरित्सागर । कथाक मूलत: छ तत्त्व संग निर्मित होइछ। 01-कथावस्तु-कथाक संरचनात्मक रूप कथानक अथवा कथावस्तु कहाइछ।एकरा मे चारि प्रमुख स्थिति होइछ-आरम्भ, आरोह,चरम आओर अवरोह। 02-चरित्र चित्रण-उपपस्थित पात्रक गुण-दोषक वर्णन।रिजर्व चित्रण कहाइछ। 03-संवाद-पात्रक मनोदशाक वर्णन में प्रयुक्त शब्द। 04-देश काल-स्थितिक वास्तविक विवेचना लेल तैयार वातावरण। 05-उद्देश्य-कथा सृजन में उदघाटित मूल वा सार्थक पक्ष। 06-शैली-प्रस्तुतिकरणक कलात्मक विश्लेषण। अर्थात् बीहनि कथा पूर्णत: संस्कृत शब्दक  उत्पत्ति थिक। जेना- लघुकथा मुदा साहित्यिक विधाक रूपें जाँची त' इ विधा मूलत:स्वतंत्र आ पूर्ण रूपे मैथिली साहित्य मात्रक विधा थिक।आयातित/ नकल नै। बीहनि माने बीज/बीया।जाहि मे विकास करबाक गुण निहित होइछ।मुदा ओ अविकसित रहैत ऐछ।समय अएला पर विकसित होइत ऐछ।ओकरा मे एक सं अनेक होएबाक गुण रहबाक चाही।बीहनि कथा-एहेन कथा,जे अनेक कथा(कथा/उपन्यास)के जन्म देबाक क्षमता राखए ओ बीहनि कथा भेल/हएत।अन्यथा नै। तें बीहनि कथा मे निष्कर्ष नै हेबाक चाही।---डॉ. भवनाथ झा बीहनि कथा विधाक नामकरण कर्ता श्री राजक मतानुसार-- बीहनि कथा,ओइ बीयाक समान ऐछ जकरा मे झमटगर/पूर्ण गाछक संभावना हो।मुदा ओ गाछ पीपर/पाकैड़ नै,पौध रूप मे हो।परञ्च बोनसाइ नै। पौध रूप सं तात्पर्य जे कथ्य/शिल्पें गसल मुदा शब्दक संख्ये सए सं डेढ़ सए धरि हुअए। मुदा बन्हन मे बान्हल नै। रचनान्त निकसगर ( निस्तार देने) नै हुअए। निष्कर्ष पाठक पर। बीहनि कथाक चर्चित आ लोक प्रिय कथाकार, संपादक आदरणीय घनश्याम घनेरो ऐ विधा के परिभाषित करैत कहै छथि--- कोना बुझबै जे इ रचना बीहनि कथा भेलै:-- (क)शब्दक मानक औसत सव सौ हो (ख) विषय मारक ,आ सोचबा पर विवश करैत हो। (ग) कथ्य एहेन,जेना लगैत हो कथा/उपन्यास वा कोनो गद्यक सार हो। (घ) कथा मे निष्कर्ष नै हो। कथा साहित्यक सशक्त हस्ताक्षर श्री राजकुमार मिश्र जीक विचारें--- (क) आकारगत छोट सं छोट हो (ख) कथ्ये फरिछएल आ गसल हो (ग) संपूर्ण गद्यक संभावना निहित हो (घ) ऐ सं इतर, अव्यवस्थित रचना फोंक हएत। ओ बीहनि कथा नै। बीहनि कथा विधाक मानकीकरणक आधारभूत इकाइ गद्य साहित्य, मूलत: कथा विधाक मानकता तयकरणक आधार अंग्रेजी साहित्य ऐछ।अंग्रेजी साहित्यक अनुसार विश्व भरिक कथा ,अंग्रेजीक Flash fictionक अन्तर्गत निहित ऐछ।इ फ्लैश फिक्सन छ: खण्ड मे विभाजित ऐछ जकर तेसर खण्ड टेलब्रा(Tellbra )क अन्तर्गत मैथिलीक बीहनि कथा विधाक नियामकता सन्निहित ऐछ। फ्लैश फिक्सन(टेलब्रा)पर आधारित बीहनि कथा मापनक महत्वपूर्ण बिन्दू :- 01-कथ्य/शिल्पें पुष्ट जाहि कथाक न्यूनतम शब्द स. 20 आ अधिकतम 150 हो। 02-कथा साहित्यिक मानकताट परिपालक  हो।यथा कोनो संस्मरण वा शब्द संग्रह मात्र बीहनि कथाक श्रेणी मे नै राखि सकैछ। 03-कथा,एकटा बीजक कथाक प्रतिदर्श हो।अर्थात एहेन कथा जाहि सं कथा/उपन्यास आदिक सर्जनाक संभावना प्रबल हो। 04कथा, निकस पर जा स्थिर नै हो। अन्त खूजल मुदा भावपूर्ण हो। 05-संपूर्ण कथा कोनो संदेशप्रद वा सकारात्म्क उद्देश्यक हो।शब्दक स्थूलकाय मात्र नै। उपरोक्त मानकता पर ठाढ़ रचना बीहनि कथा विधाक रचनाक रूपें अपन जग्गह पेबा मे सक्षम भ' पाओत।तकर पहिल मूल्यांकन लेखकक,पछाति संपादक ओ आलोचकक हाथ ऐछ। "कोनो नव सफलता हासिल करवा लेल पुरान मे पैस' पड़त।,खंघार'पड़त।तहन परिमार्जित फल सोझां आओत।जे भविष्यक नव बात गढ़ि मोकाम धरि ल' जएबा मे सक्षम बना पाओत।' एहि तरहें मैथिलीक लघुकथा विधा(कथा/गल्प)नामे लिखाइतक पछाइत बीहनि कथा विधा वैश्विक कथा मापदण्डें एकटा नव प्रतिमान गढ़ि,मैथिली साहित्य मे मैथिलीक अपन एक मात्र विधाक रूप मे स्थापित भेल।इ कोनो आन आयातित/नकल,विधाक विधान्तरण वा नामान्तरण नै।स्वयं मे मानक स्वतंत्र विधा हेबाक परिचिति कायम केलक। एहि प्रकारें मैथिली कथा साहित्यक दू टा स्वतंत्र विधा अपन अस्तित्व कायम क' रखने ऐछ।पहिल-लघुकथा (Short story)जे कथा/गल्प नामे लिखाइछ।ठीक ओहिना जेना कि अंग्रेजीक Poetry,मैथिली मे 'काव्य' नामक विधान्तर्गत-गीत,गजल,,कविता, हाइकु,क्षणिका आदि स्वतंत्र नामे/क्रियाकलापें/चारित्रिक गुणे अपन- अपन परिचिति बनौने ऐछ।मुदा विधागत सबटा काव्य परिवारक अंश वा अंग थिक। दोसर-बीहनि कथा(Seed Story) उपरोक्त दुनू विधा मध्यआओर कोनो वैध/अवैध विधाक लेल जग्गह वाँचल नै ऐछ। मुदा लघुकथा नामे बलधकेली मे हिन्दी लघुकथा विधाक नकल मैथिली अवतरण के घोसियेबाक असफल प्रयास ठाम ठीम क' मैथिली साहित्य के उकरू बनेबाक षडयंत्र जारी ऐछ।इ भ्रम वा द्वन्द ऐ द्वारे भेल जे किछु मैथिली रचनाकार लघु कथा माने आकारे छोट कथा बूझि नकल करैत रहलाह।ध्यातव्य महत्वपूर्ण बात जे लघुकथा एकटा शब्द मात्र नै,ओहि नामक एकटा स्वतंत्र विधा थिख।जे मैथिली मे अदौ काल सं कथा/गल्प नामे लीखाइत पहिने सं स्थापित ऐछ।आब तहन विचार करी मैथिली सं इतर हिन्दी भाषा साहित्यक अपन विधा " लघुकथा "क मैथिली अंधानुकरण पर। कोनो व्यक्ति,विषय,बौस्तक गुणक अनुसरण/अनुकरण बेजए नै।मुदा अंधानुकरण कतेक उचित ? मैथिली साहित्य मे विद्यमान " बीहनि कथा " विधा सं इतर सब विधा कोनो ने कोनो अन्य भाषाक विधा सं आयातित ऐछ।मुदा जत' सं आयातित भेल,ओइ मे आ मैथिली मे अपन मानकता वा प्रामाणिकता सिद्ध केने ऐछ। हिन्दीक लघुकथा विधा जे स्वयं मे आइयो मानक वा प्रामाणिक सिद्ध नै भ' पावि घड़ीक पेण्डूलम जकां डोलि रहल ऐछ।ओइ मे आइयो कते शब्दक वा कोन रचना ओइ विधाट रचना ऐछ की नै,तै पर मंथन चलिये रहल ऐछ।एते दशकक लेखनक पछातियो मूल्यांकन मे लघुकथाक जग्गह लघुकहानी सं जोइर व्याख्या होइछ।जतेक मुड़ी ततेक पीरी बला गप्प।एहेन अव्यवस्थित विषय/बौस्तक अंधानुकरण ,हास्यास्पद आ कि उठल्लूपन ? "अपने आँखिगर रहैत, अन्हरा के सहारे बाट ताकब कतेक उत्कीर्णा बला बात।" हिन्दी लघुकथा विधाक अंधानुकरणक प्रबल पक्ष रहल हएत,हमर सबहक सामान्य शिक्षाक हिन्दी माध्यम।हम सब एकेडमिक शिक्षा ग्रहण सामान्यतया हिन्दी भाषा माध्यमे केलहुँ।किताब,पत्र/पत्रिका क पाठनक भाषा हिन्दी रहलाक कारणे हिन्दी साहित्यक विषय-वस्तु पर निर्भर स्वाभाविक छल।तें हिन्दी साहित्यक संतान(विधा)कें पोसपूतक रूप मेअवैध रूपें अंगेज लेब अस्वाभाविक नै।ओही देखाँउसे वा नकल क'मैथिली मे लघुकथा संग्रह नामे 1972  मे आयल पहिल पोथी-" जे की ने से "--डॉ. हँसराजक।आ ,1975 मे तत्कालीन नवतुरिया कथाकार डॉ. अमरनाथक " क्षणिका "।दुनू पोथीक रचनाकार(आमुख मे)ऐ संग्रहक एको टा रचना ,कोनो पत्र/पत्रिका मे प्रकाशित नै हेबाट बात स्वीकारने छथि।ऐ सं इ स्प्ष्ट ऐछ जे मैथिली मे एकर कोनो अस्तित्व नै रहै।इ तहिया के घटना/बात छैक जहिया मैथिली सं इतर अन्य भाषा मे कथ्य/शिल्पें मजगूत मुदा आकारगत छोट रचनाक एकटा स्वतंत्र विधाकरूपें/नामे सृजन भ' रहल छलै।यथा-संस्कृत -लघ्वी,हिन्दी-लघुकथा,पंजाबी-मिन्नी कहाणी/कथावां,उर्दु-अफसांचे,ओड़िया-क्षुद्रकथा......आदि। मैथिली मे हिन्दी विधाक अंधानुकरण क शुभारंभ क' किछु मैथिली कथाकार स्वघोषित विद्वान हेबाक दंभ पोसलनि।तकर करीब पचीस बरख धरि अंधानुकरणित लेखन सेहो सुषुप्त वा शुन्य रहल।पुन: 1997 मे लघुकथा संग्रह नामे दू गोट पोथी,शिलालेख-तारानन्द वियोगी आ खण्ड-खण्ड जिनगी -प्रदीप बिहारीक आयल।से ताहि अवस्था मे जाहि सं दू वर्ष पहिने(1995 मे)मैथिलीक अपन एक मात्र विधा बीहनि कथा अवतरित भ' चूकल छल।ऐ विगत पचीस वर्षक नमहर अन्तराल मे अंधानुकरणित हिन्दी लघुकथा विधाक मैथिली अवतरण पर मैथिली मे कोनो मानकता तय नै भेल छल।(आइ एकैसम सदीक दोसर दशक धरि नै भेल)।जेना पहिने मिथिला मे सत्यनारायण भगवानक पूजन पर सुनता उपासक चलनि छल।तहिना मैथिली रचनाकार लघु कथा शब्द सुनि मात्र लघु कथा लिखबाक नकल करय लगलाह।जहन की हिन्दी मे लघु कथा शब्द मात्र नै,ओहि भाषाक एकटा स्वतंत्र विधा ऐछ।आ मैथिली मे कथा/गल्प नामे लिखाइत लघुकथा विधा पहिने सं विद्यमान छल।आब नकल क' लिखल जाइ बला रचना-जे बीस शब्द सं आठ सौ धरिक ऐछ।तखन प्रश्न उठैत जे कतेक लघु,ककरा सं लघु ?ऐ पर प्रकाशित कोनो तय मानकता नै छल(ऐछियो नै)जाहि सं इ सुनिश्चित कएल जए सकए जे कोन रचना लघुकथा विधान्तर्गत स्वीकार वा अस्वीकार कएल जा सकए।प्रसिद्ध कथाकार ओ इतिहासकार डॉ. मायानन्द मिश्र एकरा नकारैत लिखने छथि--" मैथिली मे लघुकथा नामे एक अन्य कथा लेखनक विकास भेल ऐछ जे समकालीन कथा/गल्प नै,अपितु चुटुक्काक निकट ऐछ।"--मैथिली कथाक विकास(संपादक- बासुकीनाथ झा)साहित्य अकादमी -2003 आधार हीन लेखने मठोमाठ हेबाक/कहेबाक परम्पराक निवहता मे किछु रचनाकार लीन रहलाह।जहन कि बेसुरा तान सं प्रसिद्धि पेनिहार गायक जकां बिना मानकताक लेखन मे लीन रहनिहार अपना के प्रयोगवादी आ प्रतिष्ठित बुझनिहारक रचना आ ओ तथाकथित विधा स्वय: खारिज ऐछ।ताहि लेल अदखोइ-वदखोइ आ माथा पच्चीक खगते कोन? हिन्दी विधाक मैथिली अवतरण लघुकथा नामक रचना आइ धरि बसात मे बौआइत ऐछ।जमीन पर अनबाक कहियो कोनो निश्तुकी प्रयास नै भेल।ओ तथाकथित विधा/रचना स्वत: खारिज होइत चेतना शुन्य भ' गेल।किएक त' जहन जमीन पर उतरबाक प्रयास केलक तहन आधारहीन हेबाक कारणे सूपक भाटा सन ओंघराइत रहल किएक त' स्थिरताक आधार पहिने सं नदारद!किछु स्वघोषित वा परपोषित विद्वान सब--" डाँरि पारि के ओकरा लक्ष्मण रेखा बुझ' लगलखिन,मुदा डाँरि सोझ भेल की वक्र तकरा सं दूर धरि सरोकार नै।"प्रसिद्ध रंगकर्मी श्री कुणाल ,कथा प्रसंग लिखल अपन आलेखक अन्तिम अनुच्छेद मे लिखै छथि--"आब मैथिली मे लघुकथा नामे किछु रचना सेहो देखाइछ,जे मैथिली साहित्य मे आधार हीन ऐछ।तें ओकर चर्च करब व्यर्थ सन।"--अंतिका-रजतजयन्ती अंक(2008)संपादक- अनलकान्त। लघुकथा नामित रचनाक भविष्य ? जेना अंग्रेज़ी मे पोएट्री,मैथिली मे " काव्य ' विधा ऐछ।आ ऐ काव्य विधान्तर्गत--गीत,कविता ,गजल,क्षणिका, हाइकु आदि स्वतंत्र नामे आ स्वतंत्र अस्तित्वे छैक।मुदा विधागत सब एकहि परिवार "काव्य "क अंग छै।तहिना अंग्रेजी क शॉर्ट स्टोरी विधा छै ,आ कथा/गल्प ओकर अंग। मैथिली मे लघुकथा सं इतर दोसर कथा विधा छै " बीहनि कथा "(Seed Story),हिन्दीक अंधानुकरणे लघुकथा नामे सृजित रचना बीहनि कथा विधान्तर्गत ग्राह्य ऐछ।परञ्च बीहनि कथाक तय मानकता पर ठाढ़ होइ बला रचना मात्र।से ओ लघु कथा नामे होइ वा बीहनि कथा नामे। बानगी स्वरूप देखल जए डॉ. सत्येन्द्र झा जीक लघुकथा नामे दू टा रचना- इसकूल-- ओहि गाम मे एकटा दोकान नै छलै।तीन किलोमीटर जाय पड़ै छलै छोटो छीन चीज किनबा लेल।जे कियो कहियो  दोकान फोलबाक साहस केलक ओकरा दोकान मे दोसरे -तेसरे राति चोरि भ' जाय आ तकर बाद दोकान बन्न भ' जाय।चोरवा गामक नाम सं परोपट्टा मे जानल जाइत छल ओ गाम।मुदा नरेशक साहस कहू वा दु:साहस ओ बाहर सं आबि दोकान फोललक ओहि गाम मे।घर मे पिता आ पत्नी विरोध कयलनि मुदा ओ ककरो नै सुनलक।दोकानक स्टाफक रूप मे सभ सँ सेसर चोर के रखलक।ओ चोर सेहो निश्चिंत छल जे जखने बेशी समान जमा होयत कि चोराक सभ किछु ल' जायब।।नरेश तीन सए टाका ओहि चोरकेँ दै छल।शहर सँ समान अनबाक हेतु नरेश ओही चोरबाकेँ पठबै छल। क्रमशः चोरवा कोन समान मे कते लाभ होइत छल सेहो धरि बुझय लागल। आइ ओहि दोकान मे समान भरल छल।आजुके राति चोरबा अपन संगी सभहक संग चोरिक योजना बनौलक।जखन दोकान बन्नक' नरेश चलि गेल तँ चोरबा अपन संगी सभहक संग दोकान मे घुसल।बोरा मे समान सब कसय लागल।एकटा संगी पुछलकै -" कते दामक समान हाथ लागल ?" दोसर चोर कहलकै-"पांच हजार सँ कम के नै हेतै।" "मुदा एहि पांच हजार मे तँ मालिक के पांच सयसँ बेशीक फयदा नै हेतै।साढ़े चारि हजार तँ मूलधन छै।"--चोरबा बाजल---फेर ओहिमे हमरो तीन सय के हिस्सा हेतै।" चोरबाक म़ोन तीत भ' गेलै।ओ अपन मित्र चोर सभके बुझबय लागल--चोरि त' तखने जायज होइछ जखन हमर हक छीनि क्यो अपन घर भरय,मुदा नरेश बाबू तँ ओतबे कमाइ छथि जतेक उचित अछि।ओ नाजायज लाभ कहाँ लै छथि ?" चोरबा चोरि करबाक विचार बदलि लेने छल।संगी सभ ओकर निर्णय पर सहमति व्यक्त कयलक।बोरा खोलि चोरबा सभ सामान केँ पहिने जकाँ सैंतय लागल।नरेश एकटा कोन मे ठाढ़ भ' ई सभ देखैत रहल।ओकरा बचझना गेलै जे ओ कोनो दोकान नहि,एकटा इसकूल खोलने हो। विश्लेषण--उपरोक्त रचना शब्द संख्ये नमहर ऐछ!माने टेलब्राक निर्धारित शब्द संख्या-150 सँ उपर। कथ्य-प्रेरक,पंचतंत्रक कथा समकक्ष।प्रारम्भिक लेखनक करीब बाझल। शैली- कथा बला,सेहो पूर्ण नै।छेंट सन। तें बीहनिकथाक परिधि सं बाहर ऐछ। दोसर बानगी ---------------- मौअति ओ ईमानदार छल।तेँ लोकसभ ओकरा मारय छल।लोकसभ कहलकै- तोरा कुकुरक मौअति मारबौ।ओ चुप्प छल,मुदा प्रसन्न।कारण- ओ मनुक्खक मौअति नहि मरय चाहैत छल। विश्लेषण-इ रचना निर्धारित शब्द संख्या मे बान्हल  ऐछ। मुदा कथ्य - भाषण वा आदेशक हिस्सा मात्र। शैलीगत-निष्कर्ष पर पहुँचा देल गेल छैक। तें इहो बीहनिकथाक हद मे नै रहि रहल। उपरोक्त दुनू रचना- सत्येन्द्र कुमार झाक लघुकथा संग्रह-अहींकेँ कहै छी(2007)।पृष्ठ- 30/31 सँ उद्धृत। आब अही लेखकक इ तेसर कथा क बानगी नीचाँ ऐछ जे हुनकर नवका संग्रह-"जँ अहाँ सुनितहुँ"(2020) सँ ऐछ । भेटब डूबब " अहाँक जीवन मे सभ सँ नीक की लगैत अछि ?" "अहाँके भेटब...." "आ अहू सँ नीक.....?" " हमरा हेरा जएब...?" उपरोक्त रचना लिखल त' गेल ऐछ लघुकथा नामे मुदा बीहनिकथाक मानकताक करीब ऐछ। यथा-निर्धारित शब्द संख्या(अधिकतम-150)क भीतर कथ्य आ शिल्पें गसल। निस्तार विहीन। तें इ रचना पूर्णत: बीहनि कथा विधाक अंग मानल जा सकैए।शेष निंघेस सदृश्य।ठीक ओहिना जेना कोनो एक कक्षा मे पढ़ैत सब विद्यार्थी परीक्षा समय समान प्रश्न हल करैछ।परिणाम मे न्यूनतम अंक 30% प्राप्ति बला विद्यार्थी मात्र सफल आ शेष असफल घोषित होइत ऐछ। आब एहने बानगी बीहनि कथा नामे लिखल रचना सँ.... डागदर साहेब-- मिथिलेश सिन्हा बड्ड दिन सँ पत्नी कहैत छलीह जे,हमरा पर किछु धियाने नै दैत छी।खाली मोबाइल मे खुटूर-पुटूर करैत कविता-कहानी रचैत रहैत छी.....जखन बेमारी बढ़त,पलंग पकड़ि लेब...तखन सबटा कविगिरि घुसरि जएत। एहेन धमकी पर के नहि डरतै यौ?पत्नी केँ होमियोपैथिक दवाई पर पूर्ण विश्वास छैन्ह।पिछला मंगल दिन शहरक बड्ड पुरान एगो बंगाली डागडर ठाम हुनका ल' गेलहुँ। सांझुक बेर,लगभग आठ-नौ गोट रोगी बैसल छलाह।डागदर साहेब बयस सँ लगभग अस्सी-पचासीक हेताह।एकटा रोगी पर आधा घंटा पूछताछ करैत,अपन डींग डांग सँ रोगी आओर परिजनकेँ अपन बड़प्पनक खिस्सा कहैत समय आगाँ खींचि रहल छलाह।हमर नम्बर दोसरे छल,मुदा घंटा भरि डागदर साहेब लागल रहलाह। अगल-बगल मे बैसल आन रोगी अकछय लागल।आब हमर नम्बर आएल। " किनको देखाना हाय ?" " जी,हमर पत्नी केँ...।" " हूँ,इधर आइए" " हम हरि बाबूक बालक थिकहुँ.." "ओहो,तुम इंजीनियर का बेटा है । ओ हमसे ही अपना इलाज कराता था..कैसा है ओ..?"--आन रोगी दीसन तकैत बजलाह। " जी,ओ मरि गेलाह..." " ओ गॉड...,तोमहारा माई कैसा है?" "जी,ओहो मरि गेलीह...।" हमर जवाब सुनि क' बेंच पर बैसल आन मरीज,बहन्ना बना ससरय लागल....।---डागडर साहेब,आश्चर्यचकित भाव सँ खन हमरा,खन रोगी सबकेँ ससरैत देखय लगलाह। विश्लेषण:- उपरोक्त रचना बीहनि कथाक मानक शब्द स. सँ बाहर ऐछ। कथा मे उप कथाक समावेश। कथ्य-शिल्पें कथाक छेंट सन लघु कथा। ----मिथिलांगन,अंक-38-39 निर्वहन--कल्पना झा --माय गे! दादी त' हाथे सँ लपे लप तिल-चाउर परसै छलीह,मुदा तों त' चम्मच सँ परसै छें ? --धुर्र ! ताहि सँ की हेतैक ? --नहि हेतैक की...?हमरो सबकेँ नीक रस्ता भेटल। --से की ? --"इएह जे ' निर्वहन 'मे सेहो 'चम्मच ' लगाओल जा सकैछ। मिथिलांगन---36-37 विश्लेषण:- इ रचना कथ्य-शिल्प आ शब्द स.मादे पूर्ण मुदा कथा सारक संग बन्न भेल।माने निकस पर कसैत।तें इहो कथा विधागत झूस ऐछ। बेटा निगम- घनश्याम घनेरो लावारिस लहास पुछलकै : -- बेटा! नगर निगम? -- हम तोहर बेटा नहि, कर्मचारी छी। -- हमरा लेखा तोहीं बेटा। -- ठिक्के! लोक केँ लोक सँ मतलब नहि रहलै तँ... -- पहिने हमरा घिसिएबह आ की कुकूर केँ? -- तोरा। -- पहिने हमरे किए? -- एत्तेक मनुक्खता अखन छैक, तैं! --  मनुक्खक लहास केँ बादमे आ कुकूर पहिने कहिया सँ घिसिएल जेतै? -- ई काज हमर अगिला पीढ़ी करत। घिसिया क' ठेलापर चढ़बैत काल लहासक आँखि कुकूर दिस छलैक। इ रचना ऐ विधाक सब मानकता यथा- निर्धारित शब्दक भीतर।फरीछएल कथ्य आ गसल शिल्प मे निस्तार रहित पूर्ण ऐछ! अन्तत:मैथिली साहित्यक दू भाग भेल -लघुकथा (SHORT STORY)आ बीहनि कथा ,(SEED STORY )इ दुनू निर्धारित रूपें निरन्तरता बनौने रहत।शेष फोंक मात्र। --"पहिने बीहनि कथा,सीढ़ी दर सीढ़ी चढ़ैत रहल। आ आब................पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ैत रहत। अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। नारी शब्दक विवेचना :: डॉ. अपर्णा नारी- नारी शब्द नृ अथवा नरसँ बनल अछि। (नृ+अस+दीप= नारी। यास्क नारीकेँ ‘नृतू’सँ मानलनि अछि। एहि विशेषणक आधारपर स्त्रीकेँ नारी कहल गेल अछि, मुदा ऋग्वेदमे ‘नृ’क प्रयोग वीरताक काज करब दान देब तथा नेतृत्व करबाक अर्थमे भेल अछि आ नर शब्दक प्रयोग सेहो वीर दाता तथा नेताक अर्थमे प्रयुक्त भेल अछि। स्त्रीक नारी नाम सेहो एहि विशेषताक कारण पड़ल होएत। ब्राह्मण ग्रन्थमे कतहु कतहु ‘नारी:’पाठ भेटैत अछि मुदा सायणृक मतसँ नारिक भाव नरक उपकारकसँ अछि।[i] वामा- स्त्री सौन्दर्यताक कारणेँ वाम कहबैत अछि। ‘वयति सौन्दर्यम’। प्रतिकूल बात कहलासँ सेहो ‘वामा’कहबैत अछि। जेना- हक बदल। नहीं, वामाक दुर्गनाम सेहो अछि।[ii] अवला-‘अवला शब्द नारीक शारीरिक संरचनाक ध्यानमे राखि प्रयोग कएल गेल अछि। कारण पुरुष जकॉं स्त्रीमे बल नहि होइत अछि। यद्यपति नारीक मानसिक उड़ानकेँ लोहा वैदिक ऋषि सेहो मानैत छलाह आ ओकरा वशमे करब असाध्य मानैत छलाह।[iii] सुन्दरी- सु+उन्द= गिल्लकरब+डीप= सौन्दर्यवती नारी एहि हेतु कहल जाइत अछि जे जकरा देखलासँ मात्र पुरुषक हृदय गिल्ल भऽजाइत अछि। चित्त द्रवित भऽ उठैत अछि अथवा ‘सुष्ठानुन्दयति इति नैरुक्ता:।[iv] वस्तुत: ‘सुन्दरी’शब्द ऋग्वेदक ‘सुनरी’शब्दक विकसित रूप प्रतीत होइत अछि। ऋग्वेदमे उमाक लेल ‘सूनरी’शब्दक प्रयोग भेल अछि।[v]‘सुनरी’क तात्पर्य-शोभाशाली सुन्दी। प्रमदा- प्रमदक भाव होइत अछि हर्षा ‘प्रमद समदौ हर्ष च।’अतवएब हर्षित, पुलकित स्वभाव होवाक कारणे सेहो स्त्रीकेँ ‘प्रमदा’कहल गेल अछि। अपन हाव-भावसँ पुरुषकेँ उत्तेजित कऽ देब नैसिर्गक विशेषता होएवाक कारणेँ ओ प्रमदा कहवैत अछि। ललना- ई शब्द सेहो स्त्रीक एक मनोवैज्ञानिक पक्षकेँ प्रकट करैत अछि। ओ मान करबाक प्रिय होइत छथि- रूसैत छथि। अतएव मानिनी छथि। मानिनीक एकगोट आरो पक्ष होइत अछि- ओ अछि स्वाभिमान आत्म-सम्मानक भावना। ओकर सौन्दर्य गुण, कार्य आदि कोनोक प्रतिकूल आलोचना ओकरा वाण जकॉं बेध दैत अछि तेँ ओ मानिनी भेल। महिला- पूज्या होएवाक कारणेँ स्त्रीक नाम महिला पड़ल। मह्+इलत+आ= महिला।मह्क अर्थ होइत अछि पूजा। उपर्युक्त शब्दक व्युत्पत्ति नारीक सामान्य स्वरूपक अभिव्यंजना करैत अछि। नारी सम्बन्ध विशेषक द्योतक शब्दक परिचय अधोलिखित अछि- दूहिता- यास्कक अनुसार दुहिता शब्दक व्युत्पत्ति- ‘दुहिता दुर्हिती, दूरेहिता’।[vi] दुर्गाचार्य एकरा स्पष्ट करैत लिखैत छथि दुहिता कारण ओ जतय कतहु देल जाइत छथि ओकर स्वागत नहि होइत अछि, ओ सर्वत्र दुत्कारल जाइत छथि।[vii] अथवा बेटीकेँ दूर चलि गेलापर पिताकेँ चैन भेटैत अछि। यास्क दुहिता शब्दकेँ ‘दूह’धातुसँ सेहो बनौलनि अछि आ पिताकेँ प्रसन्न कए सदिखन किछु ने किछु धन लैत रहैत छथि तेँ दुहिता भेला। वस्तुत: दुहितृ शब्द दुह्-दुहना धातुसँ बनल अछि, सम्भवत: प्राचीनकालमे कन्या अपन पिताक घर गाय दुहल करैत छलीह। फलत: हुनक नाम दुहिता पड़ल। जाया- स्त्री ‘पत्नी’रूपक लेल जाया शब्दक प्रयोग कएल गेल। ऐतरेय ब्रह्मणमे जायाक व्युत्पति एहि प्रकारेँ कयल गेल अछि ‘तंज्जया जाया भवति यदस्यां जायते पुन:’। जाया एहि हेतु अछि जे पुरुष स्वयं ओहिमे पुत्रक रूपमे जन्म लैत अछि। ऋग्वेदमे जायाक प्रति अत्यन्त मधुर उद्गार व्यक्त कयल गेल अछि। माता- वैयाकरण मातृ शब्दकेँ मान+तृणसँ बनवैत छथि। आ मातृ शब्दक अर्थ ‘आदरणीय’अछि। यास्कक मतसँ मातृक भाव ‘निर्मातृ’निर्माण करयवाला जननी सेहो अछि। मुदा ‘आदि युगसँ लय आइ धरि मानव जकरा असीम श्रद्धा प्रकट करैत अछि आ जाहिसँ अजस्त्र अक्षय स्नेह पबैत रहैत अछि, ओ मात्र जन्मदात्री नहि, ओ एहिसँ बहुत पैघ अछि। ओकर स्थान स्वर्गसँ सेहो उच्च आ गुरुसँ अधिक पूज्य होइत अछि। माय सदैव माय होइत अछि। वेदमे सेहो नारीक लेल कुलयानी, सम्राज्ञी कल्याणी पुरन्धि, कुलपा आदि शब्दक प्रचुर प्रयोग भेटैत अछि। इन्द्राणी, उषा, अदिति, इला, श्रद्धासिनी, वाली, भारती, पृश्नि, वरूणानि, आख्यानि वाक, दयावा पृथ्वी, राका आदि रूपमे वैदिक संहिताक नारीक दृष्टि पथमे अवतरित होइत छथि। स्त्रीक हेतु एक स्थानपर कहल गेल अछि। ‘शुद्धा:’पूसा योषितो यज्ञिया इमा:’तथा हुनका पुरुषक हेतु अश्व, गायक हेतु शिव होयवाक बात कहल गेल अछि। सहोत्तरंस्म पुरानारी, समनं चावगच्छति’अर्थात् पहिले स्त्री यज्ञ आयुद्धमे जाइत छलीह। हुनक पुत्र शत्रुहण छथि। एक गोट स्थानपर स्त्री कहैत छथि हमरासँ अधिक केओ सौभाग्यशालिनी नहि छथि वैदिक अक्ष सूक्तमे एकगोट जुआरीकेँ ओकर सासु डटैत अछि आ पत्नी रोकैत अछि। वेद कहैत अछि ‘अनवया पतिजुष्टेवनारी’अर्थात् सच्चरित्रस्त्री पतिकेँ प्रिय होइत छथि। अर्थवेद कहैत छथि ‘जायापत्नेमधुमतीवाचंवदति’। वेदमे स्त्रीकेँ ब्रह्म सेहो कहल गेल अछि। तेँ वरदा वेदमाताकेँ वेदमे स्तुति कयल गेल अछि। आचार्य प्रियव्रत तँ सरस्वतीकेँ शिक्षाविभागक मंत्री कहलनि अछि। संहितामे वर्णित नारीक एहि उत्कृष्ट रूपक छाया हमरा सहितेतर वैदिक साहित्य (ब्राह्मण एवं उपनिषद्) मे प्रचुरतासँ उपलब्ध अछि। ब्राह्मण साहित्यमे पत्नी तथा स्त्री विषयक अनेक सन्दर्भ प्राप्त होइत अछि जाहिसँ नारीलोकनिक गरिमा परिलक्षित होइत अछि। नारीकेँ सावित्रीक संज्ञासँ समलिंगीकृत कयल गेल अछि। स्त्री सावित्री (जैठव्रा., 4/27/17)। गृहपरिवारमे ओकर प्रधानताकेँ स्वीकार कयल गेल अछि। ऐतरेय ब्राह्मण जायाकेँ गाईपत्य अग्निकरुपमे स्वीकार करैत अछि- ‘जाया गार्हपत्योग्नि:’। (ए.ब्रा, 8/24) पत्नी पतिक अर्द्धांगिनी मानल गेल अछि। संहिता एवं ब्राह्मण साहित्यक विपरीत उपनिषदकालीन नारीलोकनिक समुन्नत अवस्थाक परिचय भेटैत अछि। केनोपनिषद् मे हेमवती उमाक आध्यात्मिक ज्ञान, ब्राह्मवादिनी, वाचकनवी गंर्गी आ मैत्रेयीक वर्णण ओकर आघ्यात्मिक ज्ञानक पराकाष्ठाकेँ सन्दर्भशित करैत अछि। मैत्रेयीक ई कथन जे ‘येनाहंनामृतास्याम किंकुर्याम्’हुनक ज्ञान पराकाष्ठाक दिग्दर्शन करैत अछि। एहि काल पिता सेहो पंडितापुत्रीक इच्छा करैत छलाह। उपनिषद् साहित्यमे स्त्रीलोकनिक मातृत्व पक्षकेँ सेहो चित्रित कयल गेल अछि। ऐतरेय उपनिषद् मे गर्भ धारण करयवाली स्त्री व्यावयित्री एवं भावियितव्या कहल गेल अछि। एहिकालमे स्त्रीकेँ यद्यपि छायाधिकारक स्पष्ट रूपसँ वर्णन नहि कयल गेल अछि, मुदा वृहदारण्यक उपनिषद् मे सन्यास गमन करैत याज्ञवल्कय द्वारा अपन भार्याकेँ वित्त विवरण करब हुनक पतिक सम्पतिमे अधिकार होयवाक प्रमाण प्रस्तुत करैत अछि। स्वैनिणी नारीक उदाहरण हमरा छन्दोग्यमे (4/42/2) देखल जाइत अछि। सूत्र साहित्यकेँ अवलोकन कयला पर एहि युगमे स्त्री लोकनिक स्थान प्रत्येक दृष्टिसँ समुन्नत अवस्थाकेँ प्राप्त दृष्टिगत होइत अछि। आ विद्या सम्पन्न होइत छलीह तथा विद्यालयमे उपाध्याय। आ आचार्यहुपर प्रतिष्ठित होइत छलीह। मैत्रेयी, बहवा, प्राचितेयी, गार्गी, वाचकनवी, सुलभा आदि ऋषिकाकेँ रूपमे उल्लिखित छथि। गोभिल गृहसूत्रमे स्त्रीलोकनिक उपनयन संस्कारक सेहो निर्देश अछि (2/1/19) एतएव सूत्रकालमे स्त्री शिक्षा सुव्यवस्थित रूपमे छल। - सम्पर्क- बालूघाट, बॉंध रोड, मुजफ्फरपुर [i]आचार्य सुरेन्द्र झा ‘सुमन’ कविनवतिका, मैथिली मन्दिर, राजकुमारगंज, दरंभंगा, 1984 [ii]कर्णामृत (जुलाई-सितम्बर, स्मृति विशेषांक), 2000, कोलकाता [iii]सम्पादक विजयनाथ ठाकुर, जयन्ती, पृ- 131, चेतना समिति, पटना, नवम्बर- 2004 [iv]तत्रैव [v]लालदास- रमेश्वर चरित मिथिला रामायण (बालकाण्ड), पृ- 4, पंचायत प्रेस, लहेरियासराय, दरभंगा, सम्वत 2011 [vi]लालदास, रमेश्वर चरित मिथिला रामायण (पुष्करकाण्ड), पृ- 437, साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली, 1999 [vii]डॉ. मुरलीधर झा- चन्दा झा ओ लालदास रामायण तुलनात्मक अध्ययन, पृ- 174, मिथिला रिसर्च सोसाइटी, लहेरियासराय, दरभंगा, 2006 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। लालदासक ‘कौशल्या’ :: डॉ. अपर्णा कौशल्या एक आदर्श राजमहिषी तथा जननीक रूपमे चित्रित भेल छथि। कौशल्या हेतु राम, लक्ष्मण, भरत तथा शत्रुघ्नमे कोनोटा अन्तर नहि बुझल जाइछ। राम हुनके पुत्र थिक। ओ सौतिनि लोकनिकेँ छोट बहिनिक दृष्टियेँ देखैत छथि। हिनक सर्वप्रथम उल्लेख वाल्मीकि रामायणमे पुत्र-प्रेमक आकांक्षिणीक रूपमे भेटैत अछि। वाल्मीकिक परम्परामे रचित काव्य एवं नाटक सभमे कौशल्या सर्वत्र अग्र महिषीक रूपमे चित्रित छथि, मात्र आनन्द रामायणमे दशरथ एवं कौशल्याक विवाहक वर्णन विस्तारसँ भेल अछि। गुण भद्रकृत उत्तर-पुराणमे कौशल्याक मायक नाम सुवाला तथा पुष्पदत्त ‘पड़मचरित’ मे कौशल्याक दोसर नाम अपराजिता देल गेल अछि। राम कथामे अवतारक प्रभावक फलस्वरूप पुराणमे कश्यप आ अदितिकेँ दशरथ आ कौशल्याक रूपमे अवतारक वर्णन भेल अछि।[i] लालदास रामक वन गमनक समयमे कौशल्याक मातृ हृदयक सफल चित्रण कयलनि अछि- हम नहि विपिन जाय सतदेव। अहा अपयश जग मे बरुलेव।। नृपतिक हाथ देव वरु प्राण। त्यागव नहि अहँ सन सन्तान।। मुदा रामक वन गमनक उपरान्त भरतकेँ अयोध्या पहुँचलापर कौशल्याक मतृत्व ओ पत्नीत्वमे अत्यधिक संघर्षक स्थिति देखि पड़ैत अछि। रामक वन गमनक काल कौशल्याक मातृत्व उमड़ि पड़ैछ। कौशल्या मूर्छित खसलीह। शोकाकुल कानय लगलीह।। व्याकुल पीटथि हृदय कपार। कहथि कतय छथि प्राणाधार।। एक बेरि सुतमुख देथु देखाय। तखन प्राण तन रहिओ कि जाय।।[ii] राम वनसँ आपस नहि अयलाह से समाचार सुनि कौशल्या शोकाकुल भऽ उठैछ। कौशल्या सुनलनि परिणाम। फिरि नहि अयला वन सौं राम।। लगली पीटय हृदय कपार। हाय वत्स की कयल विचार। हमरा त्यागल ककर भरोस। मरब आइ करितहि आक्रोश।। हायबध दैलहु बड़ धन्ध। कयल देल हमर दुहू दृग अन्ध। अह बिनु हमर रहत नहि प्राण। लगयिछ ऑंगन भवन भयान।। स्त्रीधर्मक रक्षा करैत कौशल्या राजा दशरथसँ कहि उठैत छथि जे रामक वन गमनमे विधिक विधान अछि अपनेक कोन दोष नहि। कविक शब्दमे- अछि चिन्ता सौं चित्त अचयन। तैं कहलहु हम अनुचित वचन।। चलयित कहलनि राम बुझाय। किछु जनि कही पिता का माय।। हमर सिनेहो अनुचित बात। कहब तँ बड़ दु:ख पओता तात।। एहि प्रकारक कहि बारम्बार। वनगेला रघुनाथ उदार।। से सुत ममते गेलहुँ भुलाय। कहलहुँ पति रूषि वचन बजाय।। कयो नहि हमर सनि अछि अधलाहि। पतिकॉ कटु कहयित नहि आहि।। सुन प्रणेश अहूँक नहि दोष। कयल विधाता ई सभ रोष। एहि प्रकारेँ देखैत छी जे लालदास कौशल्याक पत्नीत्वक मर्यादाकेँ संरक्षित कयलनि अदि मुदा हुनक विविध उत्कट वचन नारीत्वक मर्यादायक अनुकूल बुझना जाइछ। राजा दशरथक मृत्युक पश्चात कौशल्याक कारूणिक दशा द्रवित भऽ उठैछ- ‘पति संग हमहु अनल समाय। रहब सुखी भल सुरपुर जाय।। सुनिसुनि कौशल्याक विलाप। सभजनकेँ बाढ़ल बड़ताप।। मनमे सभकेँ भेल सन्देह। हिना प्राण रहत नहि देह।। अर्ते कौशल्या कॉ दुखित ओहि देखल सकल समाज। अन्त:पुर लय जाय पुनि बोधल कति ऋषि राज।।[iii] नारी जीवनक पैघ उद्देश्य कुशलकरय वाली आ कुशल मानावय वाली जाधरि नारी सभक कुशल करब, कुशलक कामनाभावना नहि नहि राखत ताधरि ओ पूर्ण नहि कहा सकैत अछि। कौशल्या सातो गुण प्रधान नारी छलीह। मातृत्वक गम्भीरता, विश्वासक अडिगता, ममता तथा कुशल भावनापर कोना बाधा नहि आवय देलनि। जखन कैकई रामकेँ वन पठेवाक आदेश कौशल्या सुनलनि तँ मातृत्व आ कल्याणक भावनाक संघर्षमे हुनक अवस्थाक वर्णन गौस्वामीजी मात्र एक पांतिमे सुन्दर ढंगसँ कयलनि अछि- ‘सुनि प्रसंग रहि मूक जिमि वरनि नही जाई।’ कौशल्याक अवस्था गीताक साम्ययोगकेँ स्मरण करबैत अछि। कौशल्याक व्यापक रूपक दर्शनक प्रसंग मानसकार लिखैत छथि- “व्यापक ब्रह्मा निरंजन निर्गुन विगत विनोद। सो अज प्रेम भगति वस, कौशल्या को गोद।।”[iv] प्रभुक व्यापक रूपक दर्शन होइत अछि साधककेँ- “देखरावा मातहि निज अद्भुत रूप अखंड। रोमरोम प्रतिलागे कोटि कोटि ब्रह्मांड।।”[v] एहि व्यापक रूपक दर्शन रामायणमे मात्र कौशल्याजीकेँ भेलनि। सम्पर्क- बालूघाट, बॉंध रोड, मुजफ्फरपुर [i]रामचरित मानस (अयोध्याकाण्ड) [ii]रमेश्वरचरित मिथिला रामायण (बालकाण्ड) [iii]रमेश्वरचरित मिथिला रामायण (सा.अ.) पृ.- 166 [iv]रमेश्वरचरित मिथिला रामायण (अयोध्याकाण्ड) [v]रमेश्वरचरित मिथिला रामायण (अरण्यकाण्ड) पृ.- 133 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। रमेश्वर चरित मिथिला रामायणमे पुष्कर काण्डक विशेषता :: डॉ. अपर्णा कविवर लालदासक प्रशस्तिमे आचार्य सुरेन्द्र झा ‘सुमन’कवि-नवतिकामे कहने छलाह- “रमा रहित रामक अयन नहि अशक्ति पुरुषत्व। लालदास रचि ‘रमेश्वरचरित’, बुझऔल तत्त्व।। ” आ दामोदर लाल ‘विशारद’लिखैत छथि- “लाल मधुप लखि लाल भव, किंशुक पर जनु मूल। वैदेही पद कमल मधु, सेव सकल सुख मूल।।”[i] रामायण रचनाक परम्परामे केओ एहन नहि होएत जे लालदासक नाम नहि जनैत हो वा रामायणक पद नहि सुनने हो। देवी कामाख्याक प्रेरणासँ महाशक्ति जाग्रत भूमिमे एकर लेखन ग्रन्थरत्नकेँ विशिष्ट अर्थवत्ता दैत अछि। फलत: रामेश्वर चरित मिथिला रामायणक रचनाक उद्देश्य अछि सीता-चरित्रक सर्वोत्तर्ष महालक्ष्मी, महासरस्वती आ महाकालीक समवेत रूपमे आदिशक्ति ध्वजोत्तोलन। महाकाली आ रणचण्डी दुर्गाक सीताक चरितक प्रतिष्ठापन ओज आ गर्वक प्रतीक नारी शक्तिक आह्वान। शक्ति-शक्तिमानक समरसेतुमे जीवनक चरितार्थ निहित अछि। बिनु शक्तिक योग ब्रह्मा, विष्णु महेश शव छथि, बुढ़ियाक फुसि थिकाह। एकर प्रतिपादन-सम्पादन रामायणक अन्तिम काण्ड पुष्पकरकाण्डसँ भए जाइत अछि। लालदासक सर्वश्रेष्ठ अवदान थिक जे नारीक अस्मिता-मनस्विता उद्वोधक अछि।[ii] वीरांगनाक रूपमे सीताक अवतरण पुष्करकाण्डक भेँट थिक। सीताक चरित्रक सर्वातिशयता पुष्करकाण्डक अग्रणी भूमिका अछि। रामक रामत्व सीताक बिना शून्य अछि। सीता-परित्यागक मार्मिक अंशकेँ छोड़ब लालदासक बुद्धिमता थिक। रमेश्वर चरित मिथिला रामायण रामक लोक नायत्वमे सीताक असीम सामर्थ्य आकलित करैत अछि। वैष्वमतपर शाक्त मतक उत्कर्ष प्रदर्शित करैत अछि। एतय सभ किछु शक्तिक दृष्टिए देखल गेल अछि। सीता साक्षात योगमाया थिकीह जनिक भू-भागपर सृष्टिक जय ओ क्षय नचैत अछि।[iii] मूल प्रकृति लक्ष्मी जनिक, सीता रूप प्रधान। तनिक नाम जपि पाबि नर, दुहु लोकक कल्याण।। पुष्करकाण्डमे देखाओल गेल अछि जे रामक पराक्रम ओ विजयक सभटा श्रेय सीताकेँ छलनि, राम तँ निमित्त मात्र छलाह। जहीिना महाभारतमे देखाओल गेल अछि जे अर्जुनक विजयक श्रेय कृष्णकेँ छलनि, कृष्ण विहीन होइते अर्जुनक सभटा शौर्य निष्प्रभ भए जाइत अछि। तहिना लालदास देखओलनि अछि जे सीताक सहाय्यसँ विहीन रहने सहस्त्रमुख रावणक सम्मुख प्रभावहीन भए गेल छलाह। हुनक समस्त सैन्य ओकर वयव्यस्त्रसँ उधिया गेल छल। मुदा सीताक हेतु ओकर बध करब कठिन नहि छल। पुष्करकाण्डक आरम्भमे रामक सिंहासनारोहणक पश्चात् एक दिन जखन ऋषि महर्षि लोकनि रामक अभिनन्दन करबाक क्रममे रामवण वधक प्रशंसा करैत छथि तँ सीताकेँ हँसी लागि जाइत छनि। ई देखि राम जखन जिज्ञासा करैत छथि तँ हुनका सीतासँ ज्ञात होइत छनि जे श्वेत द्वीपपर एखनहुँ सहस्त्रमुख रावण वर्त्तमान अछि। सीताक मुखसँ ई सन्दर्भ सुनि रामकेँ बड़ क्षोभ होइत छनि। तत्क्षण चारू भाई मिलि श्वेत द्वीप दिस प्रस्थान करैत छथि। मार्गमे वायुक तेहन प्रचण्ड प्रवाह बसि रहल छल जे ओकर झोंकमे चारू भाई उधियाइत-उधिआइत पुन: अवध फेका जाइत छथि। तदुपरान्त सीता हुनका लोकनिक संग पुष्पक विमानपर चढ़ि सैन्य सहित प्रस्थान करैत छथि। सीताक प्रभावसँ सभ केओ श्वेत द्वीप पहुँचैत छथि। युद्धमे राम सहित सभ सैन्य संज्ञाहीन भए जाइत छथि। वशिष्ठ मुनिक कहलाक पश्चात् सीताकेँ बड़ रोष होइत छनि तथा ओ अपन सामान्य स्वरूप त्यागि कालीक रूप धारण कए शत्रुक संहार करय लगैत छथि। थोड़बे कालमे सहस्त्रमुख रामवणकेँ वध कऽ दैत छथि मुदा हुनक उग्ररूप रामकथामे ‘सहस्त्र स्कन्ध रावणक वध-कथा उपलब्ध अछि। लालदास वैष्णव मतक प्रतिपादनक संगहि शाक्त सम्प्रदायक भावनाक अनुकूल वस्तु-विन्यास कयलनि अछि। भारतीय संस्कृतिक अनुरूप आदर्श पारिवारिक जीवन तथा भक्तिपक्षक अनुरूप आत्मनिवेदन ओ समर्पण भावक रामयण वस्तु-विधान दृष्टिगोचर होइछ।■ सम्पर्क- बालूघाट, बॉंध रोड, मुजफ्फरपुर [i]आचार्य सुरेन्द्र झा ‘सुमन’ कविनवतिका, मैथिली मन्दिर, राजकुमारगंज, दरभंगा, 1984 [ii]कर्णामृत (जुलाई-सितम्बर, स्मृति विशेषांक) 2000, कोलकाता [iii]सम्पादक विजयनाथ ठाकुर ‘जयन्ती’, पृ.- 131, चेतना समिति, पटना, नवम्बर- 2004 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। लालदासक रामायणमे विधि-व्यवहारक वर्णन :: डॉ. अपर्णा भावपक्षीकेँ कल्पनाक पॉंखि भेटलासँ साहित्यमे उड़वाक सामर्थ्य आबि जाइत छैक। कल्पनाक कमनीयता भावक सौन्दर्यकेँ अभिवृद्धि कए दैत अछि। इएह कारण अछि जे अभिव्यक्तिकेँ प्राणवान वोधगम्य चमत्कारी एवं अर्थसमृद्ध बनएवाक हेतु अन्य अनेक ‘साधन’क आवश्यकता पड़ैत छैक। भाव तत्व एवं विचार तत्वकेँ आकर प्रदान करएवला कल्पना तत्त्व होइत अछि। कल्पना सएह कोनो भाव एवं विचारकेँ अभिव्यजना दैत अछि।[1] रमेश्वर चरित मिथिला रामायणमे मिथिलाक विधिव्यवहारक वर्णनसँ तात्पर्य ई अछि जे एहि रामायणक रचनाक्रममे मिथिलाक जीवनक केहन वर्णन कएने छथि। वालकाण्डमे लक्ष्मी अवतारक वर्णनक क्रममे पावन देश मिथिलाक वर्णन करैत कविवर कहैत छथि- “सुरसरिधार उत्तरकूल सुरमुनिसेक्ति भूमि अतूल।। देवभूमि पर्वत हिमवान तेाहिसौं दक्षिण धर्म निधान।। मिथिला नामक पावन देश जहॉं राजर्षि क्ज्ञथि मिथिलेश।। जन्मभूमि नैहर सीताक जतय स्वयं शिव रूप पिनाक। शक्ति पीठ उत्तम असथान उग्रभूमि सभ भॉंति महान।। प्रियनिवास महि हरि लक्ष्मीक तपथि जनक ऋषि तह वाल्मीकि याज्ञवल्क्य गौतम हिमदाव सिद्ध भेला मिथिलाक प्रभाव शुक्राचार्य जनकक सतसंग सिखलनि ज्ञान जतय भलरंग।। मुनि मण्डलीक सुसिद्ध स्थान यज्ञभूमि दायक कल्याण।। सुरगन्धव यज्ञ समुदाय नरतन मिथिला वसथि सदाय।”[2] अभिप्राय जे वर्णाश्रम धर्मक प्रधानता छल सभ वर्ग धर्मावलम्बी छल। पुरुष वर्ग कर्त्तव्यनिष्ठ ओ महिला वर्ग सुशीला, सुलक्षणा ओ सुदृदय रहथि। सुख-सम्पदा ओ शान्ति सर्वत्र विद्यमान छल।[3] विधि-व्यवहार वर्णनक दृष्टिसँ लालदासक रामायण अन्य रामायणक अपेक्षा कृर्त विशद कहल जा सकैत अछि। रामक जन्म ओ विविध संस्कार एहन अवसर सभ अछि जकर नीक जकॉं वर्ण लालदास कएने छथि। रामक जन्मक अवसरपर सोहर, सीताक गिरिजा पूजन तथा वाम अंग फड़कला सँ शुभ सूचनाक रूढ़िक वर्णन मिथिलाक व्यवहार पक्षक अन्यनिर्दशन अछि। मिथिलाक लोकाचारक विषयक विविध पक्षक नियोजित ओ उत्कृष्ट वर्ण भेल अछि। खास कए कविवर सीता रामक विवाह क्रममे मिथिलाक लोक व्यवहार केँ अत्यन्त स्फुट कएलनि अछि। वरियाती-सरियाती, जनवास- परिछन, कुशलाचार (पएर धोएवाक) विधि, गोत्रादया अग्नि स्थापन पाणिग्रहण, गीत-नृत्यादिक वर्णन भेल अछि। कविवरक रामायणमे मैथिल विपटाक कला प्रदर्शनक वर्णन अत्यन्त मनोहर भेल अछि- “मैथिल विपटा लगवय ताल कहय कृपण वड़ अवध भुआल।। चारि वेरिरवैतहु जें भोज पवितहुहान होइत नरि ओज।। खर्चक डरे अवध महराज कयल एकहि वेरि चारू काज।। अपने लेताह चारि दहेज याचक नर्तक पुरलक भोज।।”[4] डहकन महुअक कोवर घरक उतरा-चौरी दहेज आदिक वर्णन सेहो हिनक लोक व्यवहार पक्षक ज्ञान तथा मैथिल रीति नीतिक प्रति गौरवमय आसक्तिक परिचय केलनि अछि। देखू एक गोट वर्णन- “कौतुक भवन गेला श्री राम। अभिलिह नगरक नागरि वाम।। कुच उत्तंग, अंगअभिराम वयस किशोर विवशकृत काम।।” परिधन भूषन-वसन लालाम। वुझि पड़ सभजनि अमरक वाम।। चन्द्रवदनि गजराज प्रचार सभ मातलि यौवन मदभार।। हास्य कला मय निपुण सुधीर वैसलिह सभ जनि रामक तीर।। लगलिह कहय कथापूत व्यंग्य रस वश पुलकि उठय सभ अंग।। विधिकरि लयलिह महुअक खीर देल परसि लेलनि रघुवीर।। जौं जौं भोजन रघुवर करथि सखि मिलि हँसि करथि कतुकहथि।। अहँक वंश केर अद्भुत कर्म सुनल पुरुष कै प्रेसवक धर्म।। पुनि सुनलहुँ पायसकेँ खाय लै अछि नारि पुत्र जनमाय।। राम अहॉं जनु पायस रवार वैदेहीक उपहास वचाउ।[5] एहि प्रकारेँ रमेश्वर चरित मिथिला रामायणमे विधि-वयवहारक वर्णन अप्रतीम भेल अछि। कविवर लाल दासकेँ जेना वर्णन करबमे मोननहि अधाइत छलनि। वर्णनक विन्यासमे लाल दास समस्त अवसरकेँ पूर्णतया उपयोग करबाक प्रयत्न कयलनि अछि।[6]एहिठाम हम सलीपुलक न्यायसँ किछु विवेचना कएल अछि। ■ सम्पर्क- बालूघाट, बॉंध रोड, मुजफ्फरपुर [1]जयनाथ नलिन विद्यापति एक तुलनात्मक समीक्षा पृ.- 233, रघुवीर शरण वंशल, 24 दरियागंज दिल्ली- 6, 1961 ई. [2]लालदास- रमेश्वर चरित मिथिला रामायण, वालकाण्ड, पंचायत प्रेस, लहेरियासराय, सम्वत 2011 [3]चेतना समिति पटना- जयन्ती पृ- 124, संसकरण 2004 [4]लाल दास- रमेश्वर चरित मिथिला रामायण, पृ.- 95 साहित्य अकादेमी नई दिल्ली, 1999 [5]लाल दास- रमेश्वर चरित मिथिला रामायण, वालकाण्ड, पंचायत प्रेस, लहेरियासराय, सम्वत 1911 [6]डॉ. मुरलीधर झा- चन्दा झा ओ लाल दास रामायण तुलनात्मक अध्ययन पृ.- 200, मिथिला रिसर्च सोसाइटी- लहेरियासराय, 2007 अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.आशीष अनचिन्हार- २ टा गजल ३.२. ज्ञानवर्द्धन कण्ठ- ३ टा कविता ३.३.डॉ आभा झा-चेतना ३.४.नबोनारायण मिश्र- नवगीत आशीष अनचिन्हार २ टा गजल १

चानन टिक्का आर मसुआइ अजगुत खेला भाइ रे भाइ

दुनियाँ माने अतबे बूझू झूर झमेला लाइ लपटाइ

ई सभ भेलै लेकिन फेरो की सभ हेतै दाइ गे दाइ

सुख के माने तिलबा हेतै दुख के माने लाइ चुड़लाइ

हुनके जकाँ हम हाथ जोड़ल हुनके जकाँ हमहूँ नितराइ

सभ पाँतिमे 22-22-22 मात्राक्रम अछि। दू अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि। ई बहरे मीर अछि। २

ईहो निकलत ओहो निकलत जहरो निकलत अमृतो निकलत

अइ रंग बिरंगक दुनियाँमे करियो निकलत उजरो निकलत

आँगनमे एहने फरमान बुढ़ियो निकलत बुढ़बो निकलत

कहियो आधुनिकताक लिस्टसँ गामो निकलत शहरो निकलत

कहियो ने कहियो पिंजड़ासँ सुग्गो निकलत मैनो निकलत

सभ पाँतिमे 22-22-22-22 मात्राक्रम अछि। दू अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि। ई बहरे मीर अछि। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ज्ञानवर्द्धन कण्ठ ३ टा कविता १ हमर मुनियाँ सुतैये टुनमुनियाँ हमर मुनियाँ सुतैये टुनमुनियाँ कि निनियाँ आबह ने! मेघ पर सवार भ' क' अबिहह हे निनियाँ मुनियाँ लय अनिहह तों नवकी झुनझुनियाँ कोरमे ल' क' मुनियाँकेँ निनियाँ तों झूला झुलाबह ने! मुनियें सँ शोभा आ मुनियें सँ शान छै मुनियें हमर जान-प्राण, राग-तान छै हमर मुनियाँकेँ कानेमे निनियाँ मधुर गीत गाबह ने! आसक जहाज सँ अकास उड़इ मुनियाँ तोरे संगे घूमइ सगर देश-दुनियाँ चान-तारा सँ साजल-सँवारल तों सपना सजाबह ने! २ भगवान अहाँ सँ की बाजी भगवान अहाँ सँ की बाजी, कोन बात अहाँ जे नहि जानी! सभ जैव-अजैव अहींक रचना, एहि सृष्टिक एक अहीं स्वामी! कण-कणमे व्याप अहीं केर छै, क्षण-क्षण हम जाप अहींक करी! धड़कनमे नाम अहींक प्रभु, प्रति श्वासमे वास अहींक मानी! जे किछु छी,जे किछु संग हमर, से सभटा देल अहीं केर छी! नहि हम्मर किछु,नहि हम किछु छी, एकमात्र अहीं अंतर्यामी! सभ भावमे अहींक प्रभाव प्रभु, नहि अहाँक अछैत अभाव कोनो! जिनगी देनिहार अहीं भगवन, जिनगी केर बादो अहीं जानी! ३ सम्हरिक' रस्ता चलिहह हौ! बटोही पग-पग भेटतह काँट सम्हरिक' रस्ता चलिहह हौ! रौदे घामेघाम त' कखनो जाड़े कँपतह गात हौ। अन्हड़ बरखा-बुन्नी कहियो पाथर खसतह माथ हौ। सभटा सहि-सहि चल' पड़तह छोड़िहह नहि तों आस, सम्हरिक' रस्ता चलिहह हौ! नहि केओ तोहर अपन एतय छह नहि केओ तोहर आन हौ। सभ केओ तोरे सनक मोसाफिर नहि केकरो इ गाम हौ। नहि किछु अरजल संगे जयतह जयबह खाली हाथ, सम्हरिक' रस्ता चलिहह हौ! लोभ क्रोध मत्सर माया सँ छाड़ल आँखिक पर्दा हौ। देखह कोना काया तोहर भेलह गर्दा-गर्दा हौ। कानह नहि, अपने तों अकानह कण-कण प्रभु केर वास, सम्हरिक' रस्ता चलिहह हौ! ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। डॉ आभा झा चेतना के अछि जड़ वा के चेतन अछि,स्थूल भेद वा सूक्ष्म चिन्तना केलहुॅं नञि साक्षात् तथ्य जॅं, नञि ओ,कहि जुनि करू वञ्चना। संभव अछि,जे हमर दृष्टि सॅं वञ्चित,ओ साकार सत्य हो हो अगम्य ,दुर्लभ ,परंच, ओ ईशक हो रमणीय सर्जना।। ज्ञानक अछि आकाश अनन्ते,स्वल्प समय,क्षमता से न्यूने किंतु करू चिंतन गभीर भय,की असली,की कविक कल्पना? पानिक लहरि चंचला,पाछां ओकर व्यर्थ श्रम ,मिथ्या लौल विद्यमान विद्युत् जे ओहि मे,प्राप्ति ओकर महनीय साधना।। तत्त्वक द्रष्टा ऋषिक कथन सुनि जे अदृश्य,ओहि जलधि डूम दिय' पैसि अतल,मुक्ता मणि अभिनव सॅं समृद्ध करू अपन चेतना।। ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। नबोनारायण मिश्र नवगीत सभ ठाम चोरे-चोर, ई मानि कऽ चलू नेता अफसर घुसखोर, ई मानि कऽ चलू

जिनगीक बाट मे कतेको काँट जे गड़ल सड़ल-गलल-निंघेस हमर फाँट मे पड़ल व्यर्थे बहैब नोर, ई मानि कऽ चलू नेता अफसर घुसखोर, ई मानि कऽ चलू

हम छी अपन समाज आ परिवार सँ हारल लटकल जेना बबूर पर केओ बेल के मारल बितैछ कलयुग घोर ई मानि कऽ चलू नेता अफसर घुसखोर, ई मानि कऽ चलू

महगी अकाश लोक उपासे मरैत छै गोदान मे गहूम उदामे सड़ैत छै हेतैक निश्चित भोर, ई मानि कऽ चलू नेता अफसर घुसखोर, ई मानि कऽ चलू (ई रचना मिथिला दर्शनक अंक Nov-Dec-2010 मे गजल कहि कऽ छपल अछि मुदा वस्तुतः ई गीत-नवगीतक श्रेणीमे अबैए।) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। ........................................................................................................................ संघ लोक सेवा आयोग/ बिहार लोक सेवा आयोगक परीक्षा लेल  मैथिली (अनिवार्य आ ऐच्छिक) आ आन ऐच्छिक विषय आ सामान्य ज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) हेतु सामिग्री [STUDY MATERIALS FOR UPSC (UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION) & BPSC (BIHAR PUBLIC SERVICE COMMISSION) EXAMS- MAITHILI (COMPULSORY & OPTIONAL) AND OTHER OPTIONALS AND GENERAL STUDIES (ENGLISH MEDIUM)] Videha e-Learning पेटार (रिसोर्स सेन्टर) शब्द-व्याकरण-इतिहास MAITHILI IDIOMS & PHRASES मैथिली मुहावरा एवम् लोकोक्ति प्रकाश- रमाकान्त मिश्र मिहिर (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) डॉ. ललिता झा- मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) मैथिली शब्द संचय MAITHILI DICTIONARY- RAMDEO JHA (खाँटी प्रवाहयुक्त मैथिली लिखबामे सहायक) ENGLISH MAITHILI COMPUTER DICTIONARY MAITHILI ENGLISH DICTIONARY अणिमा सिंह -Shishu_Geet_Khel_Anima_Singh डॉ. रमण झा मैथिली काव्यमे अलङ्कार    अलङ्कार-भास्कर आनन्द मिश्र (सौजन्य श्री रमानन्द झा "रमण")- मिथिला भाषाक सुबोध व्याकरण BHOLALAL DAS मैथिली सुबोध व्याकरण- भोला लाल दास राधाकृष्ण चौधरी- A Survey of Maithili Literature ........................................................................................................................ मूलपाठ तिरहुता लिपिक उद्भव ओ विकास (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) राजेश्वर झा- मिथिलाक्षरक उद्भव ओ विकास (मैथिली साहित्य संस्थान आर्काइव) Surendra Jha Suman दत्त-वती (मूल)- श्री सुरेन्द्र झा सुमन (यू.पी.एस.सी. सिलेबस) प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) CIIL SITE ........................................................................................................................ समीक्षा सुभाष चन्द्र यादव-राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ शिव कुमार झा "टिल्लू" अंशु-समालोचना डॉ बचेश्वर झा- B_JHA_Nibhand_Nikunj.pdf डॉ. देवशंकर नवीन- Adhunik_Sahityak_Paridrishya डॉ. रमण झा- भिन्न-अभिन्न प्रेमशंकर सिंह- मैथिली भाषा साहित्य:बीसम शताब्दी (आलोचना) डॉ. रमानन्द झा 'रमण' हिआओल अखियासल     CIIL SITE दुर्गानन्द मण्डल-चक्षु RAMDEO JHA दत्त-वतीक वस्तु कौशल- डॊ. श्रीरामदेवझा SHAILENDRA MOHAN JHA परिचय निचय- डॊ शैलेन्द्र मोहन झा ........................................................................................................................ अतिरिक्त पाठ पहिने मिथिला मैथिलीक सामान्य जानकारी लेल एहि पोथी केँ पढ़ू:- राधाकृष्ण चौधरी- मिथिलाक इतिहास फेर एहि मनलग्गू फाइल सभकेँ सेहो पढ़ू:- केदारनाथ चौधरी चमेलीरानी                         माहुर                          करार कुमार पवन पइठ (मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ कथा) (साभार अंतिका)       डायरीक खाली पन्ना (साभार अंतिका) याेगेन्द्र पाठक वियाेगी- विज्ञानक बतकही रामलोचन ठाकुर- मैथिली लोककथा SAHITYA AKADEMI http://sahitya-akademi.gov.in/publications/e-books.jsp http://sahitya-akademi.gov.in/general/Digitalbooks.jsp CIIL http://corpora.ciil.org/maisam.htm अखियासल (रमानन्द झा रमण) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI1.pdf जुआयल कनकनी- महेन्द्र http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI2.pdf प्रबन्ध संग्रह- रमानाथ झा (बी.पी.एस.सी. सिलेबस) http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI3.pdf सृजन केर दीप पर्व- सं केदार कानन आ अरविन्द ठाकुर http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI4.pdf मैथिली गद्य संग्रह- सं शैलेन्द्र मोहन झा http://corpora.ciil.org/pdf/maidhilipdf/MAI5.pdf JNU http://sanskrit.jnu.ac.in/maithili/index.jsp http://sanskrit.jnu.ac.in/student_projects/lexicon.jsp?lexicon=maithili ARCHIVE.ORG https://archive.org/details/%40vijay_deo_jha?&sort=-publicdate&page=2 VIDEHA MAITHILI BOOKS/ PICTURE-AUDIO-VIDEO ARCHIVE http://videha.co.in/new_page_15.htm https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ ALL INDIA RADIO DOORDARSHAN आकाशवाणी दूरदर्शन http://prasarbharati.gov.in/ http://newsonair.com/ https://doordarshan.gov.in/ आकाशवाणी मैथिली पोडकास्ट http://prasarbharati.gov.in/podcast.php?filterlang=Maithili&from=1947-08-15&fromwp=2020-08-29&to=2050-12-31&search=GO आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-1 http://newsonair.com/RNU-NSD-Audio-Archive-Search.aspx आकाशवाणी पटना/ दरभंगा मैथिली रेजनल न्यूज टेक्स्ट डाउनलोड-2 http://newsonair.com/Regional-Text.aspx आकाशवाणी दरभंगा http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=282 आकाशवाणी दरभंगा यू ट्यूब चैनल https://www.youtube.com/channel/UCGdNveEFmv4pPolWiTEMxVA आकाशवाणी भागलपुर http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=359 आकाशवाणी पूर्णियाँ http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=256 आकाशवाणी पटना http://prasarbharati.gov.in/playersource.php?channel=122 IGNCA http://ignca.nic.in/coilnet/mithila.htm http://ignca.nic.in/coilnet/kalyani.htm (MAITHILI ENGLISH DICTIONARY) http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/mithila.htm MITHILA DARSHAN https://mithiladarshan.com/ (online pdf of Maithili journal) I LOVE MITHILA https://www.ilovemithila.com/  (online maithili journal) मैथिली साहित्य संस्थान https://www.maithilisahityasansthan.org/ https://www.maithilisahityasansthan.org/resources (online pdf of Reasearch Papers/ books) ........................................................................................................................ VIDEHA e-LEARNING YOUTUBE CHANNEL https://www.youtube.com/channel/UC4abVKqMj2pDWIAkXiOHp7A (अनुवर्तते) -गजेन्द्र ठाकुर विदेहक किछु विशेषांक:- १) हाइकू विशेषांक १२ म अंक, १५ जून २००८ Videha_15_06_2008.pdf          Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf       12.pdf २) गजल विशेषांक २१ म अंक,  १ नवम्बर २००८ Videha_01_11_2008.pdf       Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf         21.pdf ३) विहनि कथा विशेषांक ६७ म अंक, १ अक्टूबर २०१० Videha_01_10_2010        Videha_01_10_2010_Tirhuta             67 ४) बाल साहित्य विशेषांक ७० म अंक, १५ नवम्बर २०१० Videha_15_11_2010        Videha_15_11_2010_Tirhuta             70 ५) नाटक विशेषांक ७२ म अंक १५ दिसम्बर२०१० Videha_15_12_2010        Videha_15_12_2010_Tirhuta           72 ६) नारी विशेषांक ७७म अंक ०१ मार्च २०११ Videha_01_03_2011        Videha_01_03_2011_Tirhuta           77 ७) अनुवाद विशेषांक (गद्य-पद्य भारती) ९७म अंक Videha_01_01_2012 Videha_01_01_2012_Tirhuta           97 ८) बाल गजल विशेषांक विदेहक अंक १११ म अंक, १ अगस्त २०१२ Videha_01_08_2012        Videha_01_08_2012_Tirhuta           111 ९) भक्ति गजल विशेषांक १२६ म अंक, १५ मार्च २०१३ Videha_15_03_2013        Videha_15_03_2013_Tirhuta           126 १०) गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक १४२ म, अंक १५ नवम्बर २०१३ Videha_15_11_2013        Videha_15_11_2013_Tirhuta           142 ११) काशीकांत मिश्र मधुप विशेषांक १६९ म अंक १ जनवरी २०१५ Videha_01_01_2015 १२) अरविन्द ठाकुर विशेषांक १८९ म अंक १ नवम्बर २०१५ Videha_01_11_2015 १३) जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल विशेषांक १९१ म अंक १ दिसम्बर २०१५ Videha_01_12_2015 १४) विदेह सम्मान विशेषा‍क- २००म अ‍क १५ अप्रैल २०१६/ २०५ म अ‍क १ जुलाई २०१६ Videha_15_04_2016 Videha_01_07_2016 १५) मैथिली सी.डी./ अल्बम गीत संगीत विशेषांक- २१७ म अंक ०१ जनवरी २०१७ Videha_01_01_2017 लेखकसं आमंत्रित रचनापर आम‍ंत्रित आलोचकक टिप्पणीक शृंखला १. कामिनीक पांच टा कविता आ ओइपर मधुकान्त झाक टिप्पणी विदेहक दू सए नौम अंक Videha_01_09_2016 एडिटर्स चोइस सीरीज एडिटर्स चोइस सीरीज-१ विदेहक १२३ म (०१ फरबरी २०१३) अंकमे बलात्कारपर मैथिलीमे पहिल कविता प्रकाशित भेल छल। ई दिसम्बर २०१२ क दिल्लीक निर्भया बलात्कार काण्डक बादक समय छल। ओना ई अनूदित रचना छल, तेलुगुमे पसुपुलेटी गीताक एहि कविताक हिन्दी अनुवाद केने छलीह आर. शांता सुन्दरी आ हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद केने छलाह विनीत उत्पल। हमर जानकारीमे एहिसँ बेशी सिहराबैबला कविता कोनो भाषामे नहि रचल गेल अछि। सात सालक बादो ई समस्या ओहने अछि। ई कविता सभकेँ पढ़बाक चाही, खास कऽ सभ बेटीक बापकेँ, सभ बहिनक भाएकेँ आ सभ पत्नीक पतिकेँ। आ विचारबाक चाही जे हम सभ अपना बच्चा सभ लेल केहन समाज बनेने छी। एडिटर्स चोइस सीरीज-१ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-२ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच ब्रेस्ट कैसरक समस्यापर विदेह मे मीना झा केर एकटा लघु कथा प्रकाशित भेल। ई मैथिलीक पहिल कथा छल जे ब्रेस्ट कैसर पर लिखल गेल। हिन्दीमे सेहो ताधरि एहि विषयपर कथा नहि लिखल गेल छल, कारण एहि कथाक ई-प्रकाशित भेलाक १-२ सालक बाद हिन्दीमे दू गोटेमे घोंघाउज भऽ रहल छल कि पहिल हम आकि हम, मुदा दुनूक तिथि मैथिलीक कथाक परवर्ती छल। बादमे ई विदेह लघु कथामे सेहो संकलित भेल। एडिटर्स चोइस सीरीज-२ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-३ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिलक किछु बाल कविता प्रकाशित भेल। बादमे हुनकर ३ टा बाल कविता विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल जाहिमे २ टा कविता बेबी चाइल्डपर छल। पढ़ू ई तीनू कविता, बादक दुनू बेबी चाइल्डपर लिखल कविता पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-३ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-४ विदेहक ५०-१०० म अंकक बीच जगदानन्द झा मनुक एकटा दीर्घ बाल कथा कहि लिअ बा उपन्यास प्रकाशित भेल, नाम छल चोनहा। बादमे ई रचना विदेह शिशु उत्सवमे संकलित भेल, ई रचना बाल मनोविज्ञानपर आधारित मैथिलीक पहिल रचना छी, मैथिली बाल साहित्य कोना लिखी तकर ट्रेनिंग कोर्समे एहि उपन्यासकेँ राखल जेबाक चाही। कोना मॊडर्न उपन्यास आगाँ बढ़ै छै, स्टेप बाइ स्टेप आ सेहो बाल उपन्यास। पढ़बे टा करू से आग्रह। एडिटर्स चोइस सीरीज-४ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-५ एडिटर्स चोइस ५ मे मैथिलीक "उसने कहा था" माने कुमार पवनक दीर्घकथा "पइठ" (साभार अंतिका) । हिन्दीक पाठक, जे "उसने कहा था" पढ़ने हेता, केँ बुझल छन्हि जे कोना अहि कथाकेँ रचि चन्द्रधर शर्मा ’गुलेरी’ अमर भऽ गेलाह। हम चर्चा कऽ रहल छी, कुमार पवनक "पइठ" दीर्घकथाक। एकरा पढ़लाक बाद अहाँकेँ एकटा विचित्र, सुखद आ मोन हौल करैबला अनुभव भेटत, जे सेक्सपीरिअन ट्रेजेडी सँ मिलितो लागत आ फराको। मुदा एहि रचनाकेँ पढ़लाक बाद तामस, घृणा सभपर नियंत्रणकेँ आ सामाजिक/ पारिवारिक दायित्वकेँ सेहो अहाँ आर गंभीरतासँ लेबै, से धरि पक्का अछि। मुदा एकर एकटा शर्त अछि जे एकरा समै निकालि कऽ एक्के उखड़ाहामे पढ़ि जाइ। एडिटर्स चोइस सीरीज-५ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-६ जगदीश प्रसाद मण्डलक लघुकथा "बिसाँढ़": १९४२-४३ क अकालमे बंगालमे १५ लाख लोक मुइला, मुदा अमर्त्य सेन लिखैत छथि जे हुनकर कोनो सर-सम्बन्धी एहि अकालमे नहि मरलन्हि। मिथिलोमे अकाल आएल १९६७ ई. मे आ इन्दिरा गाँधी जखन एहि क्षेत्र अएली तँ हुनका देखाओल गेल जे कोना मुसहर जातिक लोक बिसाँढ़ खा कऽ एहि अकालकेँ जीति लेलन्हि। मैथिलीमे लेखनक एकभगाह स्थिति विदेहक आगमनसँ पहिने छल। मैथिलीक लेखक लोकनि सेहो अमर्त्य सेन जेकाँ ओहि महाविभीषिकासँ प्रभावित नहि छला आ तेँ बिसाँढ़पर कथा नहि लिखि सकला। जगदीश प्रसाद मण्डल एहिपर कथा लिखलन्हि जे प्रकाशित भेल चेतना समितिक पत्रिकामे, मुदा कार्यकारी सम्पादक द्वारा वर्तनी परिवर्तनक कारण ओ मैथिलीमे नहि वरण् अवहट्ठमे लिखल बुझा पड़ल, आ ओतेक प्रभावी नहि भऽ सकल कारण विषय रहै खाँटी आ वर्तनी कृत्रिम। से एकर पुनः ई-प्रकाशन अपन असली रूपमे भेल विदेहमे आ ई संकलित भेल "गामक जिनगी" लघुकथा संग्रहमे। एहि पोथीपर जगदीश प्रसाद मण्डलकेँ टैगोर लिटरेचर अवार्ड भेटलनि। जगदीश प्रसाद मण्डलक लेखनी मैथिली कथाधाराकेँ एकभगाह हेबासँ बचा लेलक, आ मैथिलीक समानान्तर इतिहासमे मैथिली साहित्यकेँ दू कालखण्डमे बाँटि कऽ पढ़ए जाए लागल- जगदीश प्रसाद मण्डलसँ पूर्व आ जगदीश प्रसाद मण्डल आगमनक बाद। तँ प्रस्तुत अछि लघुकथा बिसाँढ़- अपन सुच्चा स्वरूपमे। एडिटर्स चोइस सीरीज-६ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-७ मैथिलीक पहिल आ एकमात्र दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफी। सन्दीप कुमार साफीक दलित आत्मकथा जे अहाँकेँ अपन लघु आकाराक अछैत हिलोड़ि देत आ अहाँक ई स्थिति कऽ देत जे समानान्तर मैथिली साहित्य कतबो पढ़ू अहाँकेँ अछौं नहि होयत। ई आत्मकथा विदेहमे ई-प्रकाशित भेलाक बाद लेखकक पोथी "बैशाखमे दलानपर"मे संकलित भेल आ ई मैथिलीक अखन धरिक एकमात्र दलित आत्मकथा थिक। तँ प्रस्तुत अछि मैथिलीक पहिल दलित आत्मकथा: सन्दीप कुमार साफीक कलमसँ। एडिटर्स चोइस सीरीज-७  (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-८ नेना भुटकाकेँ रातिमे सुनेबा लेल किछु लोककथा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-८ (डाउनलोड लिंक) एडिटर्स चोइस सीरीज-९ मैथिली गजलपर परिचर्चा (विदेह पेटारसँ)। एडिटर्स चोइस सीरीज-९ (डाउनलोड लिंक) जगदीश प्रसाद मण्डल जीक ६५ टा पोथीक नव संस्करण विदेहक २३३ सँ २५० धरिक अंकमे धारावाहिक प्रकाशन  नीचाँक लिंकपर पढ़ू:- Videha_15_05_2018 Videha_01_05_2018 Videha_15_04_2018 Videha_01_04_2018 Videha_15_03_2018 Videha_01_03_2018 Videha_15_02_2018 Videha_01_02_2018 Videha_15_01_2018 Videha_01_01_2018 Videha_15_12_2017 Videha_01_12_2017 Videha_15_11_2017 Videha_01_11_2017 Videha_15_10_2017 Videha_01_10_2017 Videha_15_09_2017 Videha_01_09_2017 विदेह ई-पत्रिकाक  बीछल रचनाक संग- मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ रचनाक एकटा समानान्तर संकलन: विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) देवनागरी विदेह: सदेह: १ (२००८-०९) तिरहुता विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) देवनागरी विदेह:सदेह:२ (मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:३ (मैथिली पद्य २००९-१०) तिरहुता विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०)देवनागरी विदेह:सदेह:४ (मैथिली कथा २००९-१०) तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]देवनागरी विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]  तिरहुता विदेह मैथिली विहनि कथा [ विदेह सदेह ५ ]- दोसर संस्करण देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ]देवनागरी विदेह मैथिली लघुकथा [ विदेह सदेह ६ ] तिरहुता विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]देवनागरी विदेह मैथिली पद्य [ विदेह सदेह ७ ]  तिरहुता विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ]देवनागरी विदेह मैथिली नाट्य उत्सव [ विदेह सदेह ८ ] तिरहुता विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ]देवनागरी विदेह मैथिली शिशु उत्सव [ विदेह सदेह ९ ] तिरहुता विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ]देवनागरी विदेह मैथिली प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना [ विदेह सदेह १० ] तिरहुता विदेह:सदेह ११ विदेह:सदेह १२ विदेह:सदेह १३ The readers of English translations of Maithili Novel "sahasrabadhani" and verse collection "sahasrabdik chaupar par" has intimated that the English translation has not been able to grasp the nuances of original Maithili. Therefore the Author has started translating his Maithili works in English himself. After these translations are complete these would be the official translations authorised by the Author of the original works.-Editor Maithili Books can be downloaded from: https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ विदेह सम्मान: सम्मान-सूची (समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार सहित) अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। सूचना/ घोषणा १ "विदेह सम्मान" समानान्तर साहित्य अकदेमी पुरस्कारक नामसँ प्रचलित अछि। "समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार" (मैथिली), जे साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक गएर सांवैधानिक काजक विरोधमे शुरु कएल छल, लेल अनुशंसा आमन्त्रित अछि। अनुशंसा २०१९ आ २०२० बर्ख लेल निम्न कोटि सभमे आमन्त्रित अछि: १) फेलो २)मूल पुरस्कार ३)बाल-साहित्य ४)युवा पुरस्कार आ ५) अनुवाद पुरस्कार। अपन अनुशंसा ३१ दिसम्बर २०२० धरि २०१९ पुरस्कारक लेल आ ३१ मार्च २०२१ धरि २०२०क पुरस्कारक लेल पठाबी। पुरस्कारक सभ क्राइटेरिया साहित्य अकादेमी, दिल्लीक समानान्तर पुरस्कारक समक्ष रहत, जे एहि लिंक sahitya-akademi.gov.in पर उपलब्ध अछि। अपन अनुशंसा editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ। २ “मिथिला मखान” फिल्म देखू मात्र १०१ टाकामे। Android App “BEJOD” download करू वा जाउ www.bejod.in पर, signup करू, एकटा ईमेल जायत, अपन ईमेल खोलू आ ओकरा क्लिक करू अहाँक अकाउंट एक्टीवेट भय जायत। आब मिथिला मखान रेण्ट पर लिअ, डेबिट कार्डसँ १०१ टाका अॉनलाइन पेमेंट करू आ फिल्म देखू। ३ विदेह अपन आगामी अंक (२०२१ क प्रारम्भमे) श्री रामलोचन ठाकुर पर विशेषांक निकालबाक नेयार केने अछि। हुनका सम्बन्धी रचना आमंत्रित अछि (संस्मरण, साक्षात्कार, समीक्षा आदि) जे ३१ दिसम्बर २०२० धरि editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाओल जा सकैत अछि। विदेह पेटारक अन्तर्गत (पोथी डाउनलोड साइट) मे http://www.videha.co.in/new_page_15.htm  हुनकर मौलिक, अनूदित आ सम्पादित रचना फ्री पी.डी.एफ. डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि। विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम्: VIDEHA: AN IDEA FACTORY (c)२००४-२०२०. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHAसम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम वि‍लास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि)editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत।  एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-2020 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। ५ जुलाई २००४ केँ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html “भालसरिक गाछ”- मैथिली जालवृत्तसँ प्रारम्भ इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका विदेह:मैथिली साहित्य आन्दोलन: मानुषीमिह संस्कृताम् 'विदेह' ३०९ म अंक ०१ नवम्बर २०२० (वर्ष १३ मास १५५ अंक ३०९)

मिथित्नाक sfaert भाग 2 गजेन्द्र ठाकुर 'ज्विस्टिशिस्न्वास्करू Sars a Stas i Wipe wt गये) ( i} oe है, is “ e : ix दी Sd दिदेट आर्काइव इप्िंट

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